Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती - Page 2 - SexBaba
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Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती

रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १०

दोनोही अपने गांव आगये देवायतने कारको सीधेही हवेलीमे लेली ओर आंगनमे खडी करदी.. कारकी आवाज सुनतेही मंजु जटसे हसती हुइ आने लगी.., उनको पताथा उनकी खास सहेली ओर अ‍ेक लौती मौसीजो आने वालीथी, तब चंदा कारसे उतरतेही हसती हुइ मंजुकी ओर दोड पडी ओर उसे जोरोसे गले लग गइ तब उनके पेटका खयाल रखा.. फीर दुर हटके दोनो हाथ मंजुके गालपे रखदीया ओर हसते उनकी ओर देखती रही....अब आगे

चंदा : (हसते) कीतनी प्यारी लगती हे.., देख..चहेरेपे कीतना नीखार आगया हे..हमारे जमाइको बहुत प्यार करती हे..? हें..हें..हें.. चल अंदर..ओर अब अ‍ेसे भागमपटी मत कर.. कही फीसल बीसल जाती तो..? मंजु अब बेडसे उतरना ही मत..बस सीर्फ आरामही करना हे..कीतना पेट नीकल आया हे.. हें..हें..हें..

मंजुला : (चंदाको हाथ पकडके अंदर लेजाते) मौसी..अबतो नीकलेगानां.. बस पंद्गह दीनहीतो बच्चे हे.. ओर आपकाभी तो चहेरा चमक रहा हे..(जोरोसे हसते) कही कीसीसे प्यार ब्यारतो नही हो गया..हें..हें..हें..

चंदा : (सरमसे हसते धीरेसे) चुप कर बेसरम.., (पीठमे मुका मारते) कुछभी बोलती हे.. इन्होने सुन लीया होतातो..? वो सब छोड.., क्या वो भावु भी फीरसे पेटसे होगइ हेनां..? उनको कीतने दीन हो गये..

मंजुला : (सरमाते हसते धीरेसे) हां..दोनो का साथ मेही हे..हें..हें..हें.., जब बापुजी गुजर गयेथे तब दोनो यही थे.., तब दोनो साथमे ही हुइ हे हें..हें..हें..

चंदा : (जोरोसे हसते) क्या..? साथमे. ही..हें..हें..हें.., कमीनी..कीतने बच्चे पैदा करेगी.., तबतो उनकोभी साथ लेजाना पडेगा..हें..हें..हें..

मंजुला : (हसते) हां मौसी.., रुटीन चेकअपमे हम साथही जाते हे.. डीलेवरीमेभी साथही लेजाना हे..अब उनकी फेमीली हमारी जीम्वेवारी हे..तो सब हमेही करना हे.., भानुभाइ बहोत अच्छे हे हमारी खेतीबाडीका सब कारोबार उन्होनेही सम्हाल लीया हे.., बस अब लखन पढाइ करले..फीरतो वोभी उनके साथ लग जायेगा..

चंदा : (हसते धीरेसे) मंजु.. सुना हे तुमने तेरे देवर लखनका रीस्ता भावुकी ननंदके साथ करलीया हे..? क्या अभी दोनोकी सगाइभी रखी हेनां..? वो देवायतजी केह रहे थे..

मंजुला : (हसते) अरे हां..मौसी क्या मस्त लडकी हे.. बस ज्यादा पढी लीखी नही हे.. लेकीन कामकी पकी हे.., अब आपभी धिरेनके लीये लडकी ढुंढना सुरु करदो.., मेरी भाभी घरमे आजायेगी..हें..हें..हें..

चंदा : (सरारतसे हसते) ढुंडली हे.., बस अ‍ेक बार धिरेनको पुछना हे.., हां कहेतेही उनकीभी सगाइ करदुगी..

मंजु : (थोडी नीरास होते फीकी स्माइलके साथ) अच्छा ढुंढली हे..? कोन हे..वो खुसनसीब..

दया : (चाइ ओर पानी लाते चंदाको देते) लीजीये मौसीजी..चाइ पानी पीजीये.. बातेतो होतीही रहेगी.., (मंजुको देते) लीजीये दीदी.. (पीछे देवायतकी ओर) लीजीये मालीक आपभी पीजीये थके होगे..

तब मंजु ओर चंदा तुरंत पीछे मुडके देखतीहे..तो देवायत उनके पीछेही खडाथा ओर हसते हुअ‍े दोनोकी बाते सुन रहा था.., तो चंदा ओर मंजु दोनोका मुह खुलाही रेह गया ओर अ‍ेक नजरसे देवायतकी ओर देखती ही रही.. तब देवायत चाइ लेते जोरोसे हसने लगा.. फीर आगे आके मंजुके पास चीपकके बेठ गया..

मंजुला : (हसते) आप पीछे ही खडे थे..? कबसे..? हमनेतो देखा ही नही..

देवायत : (हसते) जबसे आप दोनो अंदर आइ.. फ्रेस होके सीधे यही आगया.. दोनोही बातोमे मशगुल थी..

चंदा : (सरारत मुस्कानसे) तो क्या..हमारी सारी बाते सुनली..?

देवायत : (हसते) तो फीर.., पीछेही खडाथा तो सुन रहाथा की मेरी बीवी मेरी क्या सीकायत कर रही हे..

मंजुला : (सरमाते हसते देवायतकी जांगोपे अ‍ेक चपत लगाते) कीतने कमीने हो.., अ‍ेसे कोइ ओरतोकी बात छुप छुपके सुनता हे..? मौसी अब ध्यान रखना पडेगा.. मौसी आप इनको वहा आपके साथ लेजाओ मार मारके सुधार देना.., बहुत सरारती होगये हे..हें..हें..हें..

चंदा : (मस्ती करते हसते) सोच लो.., जब लेजाउगी तो वापस नही करुगी.. हें..हें..हें..वही रखलुगी..

मंजुला : (चंदाको मुका मारते) ना बाबा नां..भलेही सरारत करे.. मुजे आपके साथ नही भेजना..हें..हें..हें.., सुनो देवु.. (हसते) मौसीने हमारे धिरेनके लीये कही रीस्ता ढुंढ लीया हे.. क्या आपको मालुम हे..?

देवायत : (हसते) हां..आते वक्त हमारी बात हुइ.., वो लडकी बहुत खुसनसीब हे जो मौसीके घरकी बहु बनेगी.., मेने देखी हे लडकी..बहुत खुबसुरत..ओर पढी लीखी हे.. अच्छे स्वभावकी.., हें..हें..हें..

मंजुला : (मुस्कानके साथ) अच्छा..? तुमभी जानतेहो उसे..? बताओनां कोन हे वो..?

देवायत : (सरारतसे हसते धीरेसे) हमारी पुनम..हें..हें..हें..

मंजुला : (खुसीसे चीलाते) क्या..? पुनम..? हमारी पुनम..? देवु तुम जुठ बोल रहे हो.. (खुसीसे आंसु आ गये ओर देवायतके कंधेपे सर रखदीया)

चंदा : (मंजुकी ओर खुसीसे हसते) हां मंजु.., हमारी पुनमही हे.., मुजे ये रीस्ता मंजुर हे.., बस अ‍ेक बार धिरेनसे पुछलु.. या फीर तु बात करलेना..तेरी बहुत सुनता हे ओर तुजे मानताभी हे..

कहातो मंजु खुसीके मारे देवायतके कंधेपे सर रखते आंसु बहाने लगी.. तब देवायत हसते हुअ‍े उनकी पीठको सहेलाता रहा.., तब चंदाभी देवायतकी ओर देखते हसेही जा रही थी.. तभी देवायतने मंजुकी नजरसे बचते चंदाको अ‍ेक आंख मारदी तब चंदा सकपकाके सरमा गइ ओर मुह दुसरी ओर करते सरमके मारे हसती रही.. तब अचानक मंजुने कंधेसे सर हटालीया ओर देवायतकी जांगोपे मुके मारने लगी..

मंजुला : (हसते) कीतने कमीनेहो तुम.., दोनोने मुजे उल्लु बनाया.., मौसी आपभी कम नही हो.. इनके साथ मील गइ थी.., क्या दोनोके बीच बात तैय होगइ थीनां..? ओर उस दीनभी तो आप केह रहेथे हमारे जान पहेचान वाले हे.. तो क्या आपने पहेलेसे ही सब तैय करलीया था..? बोलोनां.. बोलते क्यु नही.. दोनो.. हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) कीतना बोल गइ तु.. ओर हमे कहेती हेकी नही बोलते.. हां मंजु तुजे हम सरप्राइज देना चाहतेथे.. तेरे चहेरे की खुसी देखना चाहते थे..(चंदाकी ओर) देखा मौसी मंजु कीतनी खुस होगइ.. हें..हें..हें..

चंदा : (हसते) हां.. देख रहीहु..दोनोका प्यार..हें..हें..हें.., बस भगवान करे तुम दोनोके बीच अ‍ेसेही प्यार बरकरार रहे.. मेतो धन्य होगइ.. आपलोग जेसे समधी मील गये..हें..हें..हें.. अब बेठी रहोगी की हमारा मुहभी मीठा करवायेगी.. हें..हें..हें.. देवायत आपने इसे कुछ सीखाया नही हे क्या.. हें..हें..हें..

मंजुला : (चंदाको खडे होते मुका मारते) मौसी..अ‍ेक दुगी ना..(हसते) अभी लाइ.. मेरी पुनम सुनेगीतो खुस होजायेगी.. वोभीतो धिरेनको पहेचानती हे..हें..हें..हें..

कहेके कीचनमे चली गइ तब चंदा देवायतकी ओर कातील स्माइल करते मुस्कराने लगी.. ओर देवायतकी ओर अ‍ेक आंख मारदी फीर हसने लगी.., फीर धीरेसे करहा..

चंदा : आपको तो रातकोही मुह मीठा करवाउगी.. आजाना..रुममे अकेली सोउगी.. कुछ इन्तजाम करना..

देवायत : (धीरेसे हसते) करलीया हे.., बस रात होने दो.., दरवाजा खुला रखना..

मंजुला : (मीठाइकी थाली लाते) देवु..आपने पुनमसे बातकी..की नही..? वोतो सुनके पागल होजायेगी.. फीर देखना केसे सरमाती हे..हें..हें..हें.. लीजीये मौसी मुह खोलीये..हें..हें..हें..

चंदा : (हसते) अरे छोटा देना..मुं.... तु..भी..ले.. पागल..पुरा देदीया..

मंजुला : (हसते) मौसी आधा नही आपको पुराही दुगी.., चलीये देवुका मुह मीठा करवाइअ‍े फीर मे लेती हु..

देवायत : (हसते) हां.. हमारी समधकातो मुह मीठा करवाना ही पडेगा ओर वोभी पुरा..हें..हें..हें..

चंदा : (मीठाइ खाते हसते) नां..नही..थोडा यार.. बहुत हो गया.. मु..मुं..बस..बस..ओर..नही..

देवायत : (हसते) अरे पुरा लीजीये..आधेसे हमारा काम नही चलेगा..(डबल मीनींग) हें..हें..हें..

तब चंदा सरमके मारे पानीपानी होजातीहे ओर देवायकी ओर कामुक नजरोसे हसते हुअ‍े देखती रहेती हे..फीर वोभी मंजु ओर देवुका मुह पुरा पीस देके मीठा करवाती हे तभी रजीया पानी लेके आतीहे सबको पानी पीलाती हे तो मंजु रजीया ओर दयाको भी मीठाइ खीलाते उसे पुनमके रीस्तेकी बात करतीहे तो दोनोही खुस होजाती हे तभी धिरेनका फोन आता हेतो चंदा स्माइल करते थोडी दुर चली जातीहे ओर धीरेसे बात करती हे

चंदा : (हसते) हां बीटु पहोंच गया..? सब अच्छेसे जगाह मील गइ नां..

धिरेन : (हसते) क्या मम्मी..मे थोडी बच्चा हु.. सब जगाह मील गइ ओर खानाभी खा लीया..

चंदा : (हसते) चल ठीक हे ठीक हे.., सुन.. मे वो तेरी दीदीके यहा आइ हु.. उसे देखने.. तेरा छोटा भांजा या भांजी आने वाला हे.. ओर सुन.. मेने तेरी रीस्तेकी बात की हे हें..हें..हें.. तेरी दीदीकी ननंद.. पुनम..तुनेतो देखाही हे..हें..हें..हें.. पहेचनाताभी हे..

धिरेन : (सरमाते हसते) क्या मम्मी.., थोडा जल्दी नही हे..? मुजे सादीकी कोइ जल्दी नही हे..

चंदा : (धीरेसे हसते) तो क्या मना करदु..? हें..हें..हें.. अभी सीर्फ सगाइ करेगे.. तु आयेगा तब.. सोचले..

धिरेन : (सरमसे हसते) मोम.., जेसा आपको ठीक लगे.., मे क्या कहु.. रखता हु..फीर बात करुगा..

चंदा : (हसते) अरे सुन.. तुजे पसंदतो हेनां..? तेरी मंजुदीदीने खुद कहा हे.. ले बात कर..

मंजुला : (फोन लेते हसते) क्युजी जमाइराजा.. हें..हें..हें.. कब आरहे हो..हें..हें..हें..

धिरेन : (सरमाते हसते) क्या दीदी आपभी.., वहा आके आपकी खबर लुगा..हें..हें..हें..तुम ओर मोम क्या खीचडी पका रही हो..हें..हें..हें..

मंजुला : (हसते) अच्छा हम खीचडी पका रही हे..तो आजा खाने..हें..हें..हें.., सुन धिरेन.. पुनम पढती हे.. तुतो उनको अच्छेसे पहेचानता हे.. तु पसंद भी करता हे.. हें..हें..हें.. मुजे पता हे..हें..हें..हें..

धिरेन : (सरमाते हसते) क्या दीदी.. बस वोतो युही.. जेसा आपको ठीक लगे.. रखता हु..

मंजुला : (हसते) अरे सुन.. मे दुर खडी हु.. अब बता वो पसंदतो हेना.. हम तुजपे जबरदस्ती नही करेगे..

धिरेन : (सरमाते) दीदी क्या वाकइ सबसे दुर हो..?

मंजुला : (हसते धीरेसे) हां मेरे भाइ बोलदे अपने दीलकी बात..मे दुर हु..

धिरेन : (सरमाके हसते) मेरी अच्छी दीदी.., सुनो आप हां कहेदो.. मुजे पुनम पसंद हे..उनसे सादी करनी हे..

मंजुला : (सरारतसे) अच्छा बच्चु..सादी करनी हे.., चल ठीक हे आजा हम यहा वेइट करते हे..ओर सुन..मौसी अभी तीन चार दीन यही रहेगी तु सीधे अही आजाना..फीर तेरे जीजा तुम दोनोको छोड जायेगे..

धिरेन : (हसते) ठीक हे दीदी.. वही आजाउगा.., ओर सुनो मम्मी केह रहीथी.., आप मुजे भांजा दे रहीहो की भांजी..हें..हें..हें..

मंजुला : (हसते) कमीने.. तु इधर आ.. फीर बताती हु.. बदमास.. चल रखती हु.. मीलते हे..हें..हें..हें..

मंजुला : (फोन कट करते चंदाको देते) मौसी.. खुस होजाओ.. धिरेनने हां कहेदी.. वो खुद पुनमसे सादी करना चाहता हे उनको बहुत पसंद करता हे..हें..हें..हें..

चंदा : (खुसीसे हसते) देखा.. मुजसेतो सरमा रहाथा.. तेरे साथ उनकी बहुत जमती हे.. तुजे सब बता दीया..

मंजुला : (हसते) देवु.., आपने पुनमको बतादीया की नही..? गये तो थे..उधर..मीली थी..?

देवायत : (हसते) हां दोनोसे बात होगइ.. बस पुनमको ये नही बतायाकी तेरा रीस्ता हम कहा कर रहे हे.. उनको सरप्राइज देनी हे..हें..हे..हें..

मंजुला : (हसते) हे भगवान.. पता नही ये सरप्राइजका कहासे सीखके आगये हे..हें..हें..हें.., लखनकोतो पता हेनां..? की उनकोभी नही बताया..? मेरा भोला देवर..

देवायत : (हसते) हां सीर्फ उनको बताया.. वोतो सुनके खुस होगया..हें..हें..हें..

मंजुला : (हसते) मौसी.. आप सब इधरही चले आना हम चारोकी सगाइ इधरही रख देगे.. बहुत बडी जगाह हे यहा.., क्या कहेतेहो देवु..?

देवायत : अरे नेकी ओर पुछ पुछ.. हम यही करेगे.. मौसी आप अपने सब रीस्तेदारोको यही बुलालेना..

चंदा : (हसते) अरे मेरे रीस्तेदार हेही कीतने..सब मायके वालेही तो हे.., ओर अ‍ेक बडी दीदी.. बस..

मंजुला : मौसी यहाभी कोइ खास नही..बस सीर्फ गांववाले ओर थोडे रीस्तदार होगे.. बस भानुभाइका पता नही.. देवु उनका आपको पता हे..?

देवायत : हां बस भानुके मामा लोग.. बाकी हमारे दोनोके ससुरतो अ‍ेकही हे हें..हें..हें.., मौसी आप पुनमके लीये कुछ मत लेना सब ले रखा हे.. आप हम अलग थोडीनां हे.. क्यु मंजु..

मंजुला : (हसते) हां मौसी.. देवु सही केह रहे हे..

चंदा : (हसते) अरे अ‍ैसा थोडी चलता हे.. मेने ले रखा हे..बस पुनमके कुछ कपडे लेने हे..क्या वो डे्रस पहेनती हे..? हमे कोइ अ‍ेतराज नही वो हमारे घर डे्रस पहेनना चाहे..मे वोही लुंगी..सारी सीर्फ सगुनकी लेनी हे..

दया : (आते) मालकीन सब बाते तैय होगइ हेतो खाना नीकालु..हें..हें..हें..

मंजुला : (जोरोसे हसते) हां.. नीकाल.. चल मेभी आती हु.. हें..हें..हें..

फीर सब खानेके लीये बेठ जाते हे ओर खाना खाते सगाइकी प्लानींग करते रहेते हे.. देवायतकी बाजुमे मंजु बेठ गइ ओर उनके सामनेकी चेरपे चंदा बेठीथी तब डाइनींगके नीचेसे देवायत चंदाके पैरको अपने पैरसे छुने लगता हे तब चंदा सरमसे पानीपानी होगइ वो डर गइ की कही मंजुकी नजरमे ना आजाये उसने फोरन अपने पैर मोडके पीछे लेलीये..ओर सर जुकाके जटसे खाने लगी..उनकी सांसे तेज चलने लगी..

तब इस गांवसे थोडी दुर आज भानुके घर सब खाना खाके बेठेथे तब मोहन रोने लगा तो भावनाने उसे गोदमे उठालीया ओर अपने रुममे चली गइ ओर जुलेमे डालके उसे सुलानेकी कोसीस करने लगी तब भानु ओर सरलाभी बहार आंगनमे खटीया डालके बेठे थे लता रसोइका सब काम समेट रहीथी उनको अ‍ेक डीबा उपर अलमारीमे रखनाथा पर रख नही पाइ भावनाका पेटभी मंजुकी तराह काफी बढ गयाथा

तो कीतने दीन होगये भानु भावनासे सेक्स नही करपाता था तो उनकी ठरक काफी बढ गइथी उनको अब कीसीभी तरह चुत चाहीये थी वो खेतमे कभी हीमत नही करपाया की कीसीभी मजदुरनको पकडले.. देवायतने उसे सब छुट दे रखीथी फीरभी हीमत नही करपाया.. यही सब सोचते बेठा था तब सरला ने देवायकी ओर देखा ओर लताके रीस्तेके बारेमे बात करने लगी..

सरला : बेटा.. अब बहुका वक्त नजदीक आगया हे.. हमे कभीभी उसे होस्पीटल लेजाना पडे, तु गाडी बाडीका इन्जाम करके रखना.., जब वोसब नीपट जायेगा तब हमे लताकी सगाइभी करनी हे..

भानु : मां कलही देवुसे अ‍ेक कार लेलुगा..वही भाभीकी डीलवरीभी तो होनी हे.. उनके पास दो कार ओर अ‍ेक खुली जीप हे.. अ‍ेकको लेआउगा.. वहाभी जीपतो मेरे पासही रहेती हे.., सहेरसे कुछभी लाना पडे.. वोही लेजाता हु..

सरला : भगवान उनको सुखी रखे.. तुजे धंधेमे साथमे लेलीया.. वरना दुकानमेतो मुस्कीलसे गुजारा होता था.. ओर अबतो हमारे समधीभी हो गये..मेरी लता बडेही नसीब वाली हे..

भानु : मां हमे उनकी सगाइके लीये खरीदी भीतो करनी हे..उनके कुछ कपडे बपडे.. फीर आप सब लोगोके लीयेभी तो लेना हे.., देखतेहे देवु कब सगाइ रखता हे..में उनसे बात करलुगा..

भावना : (बहार आते सरलाके पास बेठते) मांजी.. उनके घरभी वोही हाल हे.. मंजुदी ओर मेरी लगभग साथमेही डीलीवरी होगी.. वोभी कहा फ्री होगे.. तबतक वेकेशनभी लग जायेगा.. तभीतो वो लखन ओर पुनम आ सकेगे..,

सरला : (हसते) हमारे लीयेतो ठीक हे ये लताके लीयेतो बहुत कुछ लेना हे..हें..हें..हें..आज कलकी लडकीयोके बहुत नखरे होते हे..ये लो..वो लो..क्या कहेते हे वो..मेकअप का सामान हें..हें..हें..

भावना : (सरमाके हसते) क्या माजी..,आपके जमानेभीतो सब था..हें..हें..हें..मेरी मम्मीतो खुब करती थी..हें..हें..हें.., उधर पुनमके लीयेभीतो सब लेना होगा.. हम लताको उनके साथही भेजदेगे.. दोनोको जो लेना होगा लेलेगी..

भानु : (हसते) हां..येभी ठीक हे.. हम वोही करेगे.. हम घरकेही लोगतो हे.. अब इस हालतमे भावना कहा इनके साथ जायेगी.. पहेले पुनमकोतो आनेदो.. मे देवुसे बात करलुगा.. देखता हु क्या कहेता हे..

अ‍ेसीही बाते करते रहे तबतक लतानेभी सब काम खतम करलीया तब सब अपने कमरेमे सोनेके लीये चले गये भानु आतेही भावनासे पीछेसे चीपकके सोने लगा आधी रात हुइकी भावेशके रोनेकी आवाज आइ तो भावना उठ गइ ओर उनको सुलाने लगी फीरभी भावेश रोता रहा तब भावनाने भानुसे कहा..

भावना : (नींदमे) सुनीयेनां.., इनको लताके पास छोडके आइअ‍ेना.. सोनेभी नही देता.. जाओनां..

भानु : अरे उसेभी सोने दोना.. बेचारी सारा दीन काम करते थक गइ होगी.. वहाभीतो रोयेगा..

भावना : अरे जाइअ‍ेना.. उनके पास नही रोता.. सो जायेगा.. छोडके आइअ‍ेना..

भानु : (आधी नींदमे) चल जाता हु..तुभी सोने नही देती.. इनकी मां तु हेकी लता पताही नही चलता..

कहेते भानु उठके भावेशको कंधेपे उठा लेता हे ओर लताके रुमकी ओर बढ जाता हे उसने हलकेसे दरवाजेको धका मारातो दरवाजा धीरेसे खुल गया ओर वो लताके बेडकी ओर चला गया, हल्की नाइट लेम्पकी रोशनी छाइ हुइ थी जेसेही भावेशको उनके पास सुलानेको जुका तो देखते उनके होंस ही उड गये.. लता बीलकुल नंगी सोइ हुइथी उसने सीर्फ अपनी कमरपे अ‍ेक ट्रन्सपर्ट चुनीही डाली थी

वोभी अपनी कमर तक उचीथी ओर उनका अ‍ेक हाथ अपनी चुतपे था ओर वो करवट लेके गहेरी नींदमे सोइ थी उनके छोटे छोटे संतरे जेसे बुब्स रोशनीमे चमक रहे थे.. देवायततो उसे अ‍ेक नजरसे देखताही रहा.. तब उसने भावेशको उनके पास सुलाया तो भावेश रोने लगा तब..




लताने जटसे गभराके आंख खोलदी तो उनके सामने उनके भाइको भावेशको उनके पास सुलाते पाया तब उसे अपने नंगे होनेका अहेसास हुआ ओर वो जटसे चदर खीचते अपने उपर डालने लगी.. ओर सरमसे पानीपानी होने लगी.. तब भानुने उनकी ओर देखते कहा..

भानु : लता इनको तुम्हारे पास सुला.. वहा नही सोता.. सम्हाल अपने बेटेको..हें..हें..हें..

लता : (सरमसे) जी भैया.. अभी सोजायेगा.. आप जाइअ‍े..

भानु : (उनकी ओर हसते) चल ठीक हे.., दरवाजा बंध करके सोजा..

कहेके लताकी ओर मुस्कान करते बहारकी ओर अपने रुममे जाने लगा तब वो सरमसे पानीपानी होगइ.. फीर उठके अपने रुमका दरवाजा लोक करके भावेसको अपने सीनेसे चीपकाके सो गइ.. तब भावेसभी उनके बुब्सको अपने मुहमे लेनेकी कोसीस करने लगा तब लताने उनको अपने पास चीपका लीया ओर अ‍ेक बुब्सकी नीपल उनके मुहमे देदी तब भावेस सांत होते उनको चुसता रहा ओर सोने लगा..

उधर देवायत मंजु ओर लताभी खाना खाके काफी देर बेठे बाते करते रहे फीर सब सोनेके लीये जाने लगे तब चंदाको मंजुने अपने पास वाले रुममे ठहेराया तब देवायतने दयाकी ओर इसारा कीया तो दया सब समज गइ ओर उसने कीचनमे जाके दुधका ग्लास भरके उसमे अ‍ेक नींदकी गोली मीलादी.. वो अ‍ेसा कइ बार कर चुकी थी इनके बारेमे रजीयाकोभी नही पताथा जब देवायत इसारा करता तबही वो गोली डालके पीलाती

क्युकी वो कइ बार रातको दया ओर रजीयाको चोदनेके लीये जाता ताकी बीचमे मंजु जाग ना जाये.., जबसे मंजु प्रेगनेन्ट हुइथी तबसे दया उनको रोज दुधका ग्लास पीलाती थी वोभी गायका.. दया मंजुका बहुत खयाल रखती थी, तो आज दुध पीतेही थोडी देरमे मंजु गहेरी नींदमे चली गइ..

तब देर रात वो उपर दुसरी मंजीलपे चला गया, तब वहा अ‍ेक कमरेमे सीर्फ दयाही लेटी हुइ थी, देवायतको देखतेही उनसे लीपट गइ फीर दोनोही बेडपे चले गये तब दयाने सब कपडे नीकाल दीये ओर पैर फेलाके पीठके बल लेट गइ उसेतो बस अपने सरीरकी नीडको पुरी करनाथा तो देवायत पेन्ट नीचे सरकाके सीधेही उनके पैरके बीच बेठ गया ओर दयाकी चुतमे लंड घीसते अंदर धकेल दीया..

तब दयाकी आहे..नीकल गइ देवायतभी हाथके बल उनके उपर जुक गया ओर दयाको धनाधन चोदने लगा दयाभी मदहोस होते सीसकारीया करती रही ओर देवायतके हर धकेको अपनी चुतमे महेसुस करती रही तब बीचमे वो अ‍ेक बार जड चुकीथी जब देवायत उनसे चीपक गया तब दयाने उसे जोरोसे बाहोमे भीच लीया ओर देवायतका लावा उनकी चुतको भरने लगा तब दयाभी उनके साथ जड गइ.. ओर दोनो सांत होगये

दया भी पुरे पसीने पसीने हो चुकीथी उसने लेटतेही अपनी चुतको कपडेसे पोछदी ओर करवट लेके सोने लगी तब देवायत सीधाही नीचे चला गया ओर बाथरुममे लंडको पानीसे साफ करलीया फीर बहार आतेही चंदाके रुमकी ओर चला गया जब दरवाजेको धका मारा तब चंदा नाइट गाउन पहेनके देवायतका इन्तजार कर रहीथी जेसेही दरवाजा खुलनेकी आवाज आइ वो जटसे बेडसे उतर गइ ओर देवायतकी ओर दोड पडी तब देवायतने दरवाजा लोक करलीया था वो जातेही सीधी देवायतकी बाहोमे समा गइ..




चंदा : (बाहोमे भीचते) बहुत लेट करदी.., कबसे वेइट कर रही थी..

देवायत : बस बेबी..वो मंजुकाभी तो देखना हे.. चल आजा.. मेरी बीवीको बहोत प्यार करना हे..

तब चंदा बेडपे जाके लेट गइ ओर देवायतभी उनके पीछे चीपक गया तब दोनोही मस्तीया करने लगे ओर मदहोस होने लगे, उन दोनोको पताही नही चलाकी दोनोके वस्त्र कब उनसे अलग होगये दोनोही स्मुच करते रहे तभी देवायत साइडमे लेटके चंदाके बुब्सको चुसने लगा ओर अपने अ‍ेक हाथकी उंगली चंदाकी चुतमे घुसादी ओर उसे सहेलाने लगा तब चंदा बहुतही कामुक होके सीसकारीया करने लगी..




थोडीही देरमे वो चंदाकी चुतकी ओर चला गया ओर अपना मुह सीधेही चंदाकी चुतपे लगाके अपनी जीभसे चंदाकी चुतके दानेको टटोलने लगा तब चंदा आहे भरते अपनी कमर धीरे धीरे उछालने लगी..




आज चंदा पहेली बार अपने पतीके घर उनके साथ प्यारके सागरमे गोते लगा रहीथी.., देवायतका प्यार करनेका ओर उसे चोदनेका अंदाज.., दोनोही उनको बहोत पसंद था वो देवायतकी दीवानी हो चुकीथी.. देवायतको देखतेही पागल हो जातीथी तभी अचानक उनका सरीर अकडने लगा ओर वो कमरको जटके मारते जडने लगी ओर देवायतके बाल पकडते अपने उपर खीचने लगी तब देवायत मुह साफ करते उनके दोनो पैरके बीच बेठ गया ओर अपना लंड पकडके सीधेही चंदाकी चुतमे घीसने लगा..

चंदा : (धीरेसे) बाबु धीरेसे..डालना..सीइइइइइइइ..आइइइइ..बस..बस बस बस..मर गगगगइइइइइ... नही..नही.. मर जाउगीइइइ यायायाररररर.. बस..बस..बस.. जानु..सीइइइइइइइइ

तब देवायतमे पुरा लंड चुतमे उतार दीया ओर दोनोही धुआधार चुदाइमे मशगुल होगये देवायत कमर पकडके धीरे धीरे धके लगा रहाथा ओर लंड जड तक घुसाता था तब चंदाको हर धका अपनी बच्चेदानीपे टकराते हुअ‍े महेसुस होताथा जीसकी वजहसे उनकी हर धकेके साथ आहे.. नीकल जाती थी..




थोडीही देरमे चंदा अकडने लगी ओर उसने देवायतको जोरोसे बाहोमे भीचलीया ओर होंठ लीपलोक करलीये ओर अपनी कमरको जटके देने लगी तब देवायतको अपने लंडपे चंदाका गरम पानी महेसुस हुआ ओर वो अ‍ेकदम उतेजीत हो गया तब उसने चंदाकी गरदनमे हाथ डालके उसे अपने आपसे चीपका लीया ओर उनका सर चंदाकी गरदमे लगाके जोरोका चु्रबन लेलीया ओर उनका गरम लावा फुट पडा..

तभी चंदाकोभी अपने अंदर देवायतका गरम पानी महेसुस हुआ ओर उसने देवायतको कसके बाहोमे भीचलीया ओर जब दोनो सांत होगये तब देवायत चंदाके सीनेपे ढेर होगया ओर चंदा उनकी पीठ सहेलाती रही.. तब दोनोही पसीने पसीने हो चुके थे.. जब थोडी देरके बाद दोनो नोर्मल हुअ‍े तब चंदा देवायतके सरको सहेलाने लगी ओर उनका चहेरा पकडके होंठो को चुमते स्मुच करने लगी..

चंदा : (हसते) देवु आज धिरेनने हां कहेदी.. मे बहुत खुस हु.. आज पताही नही चलाकी मे मेरे पतीसे चुद रही हु की अपने समधीसे.., तुम कीतना मस्त चोदते थे.. अ‍ेक दम धीरे धीरे..आज बहुत मजा आगया..

देवायत : (होंठ चुमते) बस बेबी..अब मे तुजे अ‍ेसेही चोदुगा.. चल अ‍ेक बार ओर चोदना हे फीर जाउगा..

चंदा : (हसते) यही सो जाओनां.. अपनी इस बीवीके पास..

देवायत : ( हसते) चल तेरी तमना पुरी करता हु यही सोजाउगा.. फीर सुबह मंजुसे बात करलेना..

चंदा : (हसते पीठमे मुका मारते) कीतने कमीने हो.. में सुबह मंजुको क्या जवाब दुगी..हें..हें..हें..

अ‍ेसेही मस्ती मजाक करते दोनो फीरसे गरम होगये ओर अ‍ेक बार फीर प्यारका सागर उमडने लगा इस बार चंदाको देवायतने बहुतही कामुक तरीकेसे चोदलीया तब चंदा तृप्त हो चुकीथी..दोनोही पसीने पसीने हो गयेथे तब देवायत ओर चंदा साथमे नहाये ओर वहाभी देवायतने चंदाको खडे खडे चोद लीया फीर देवायत उनको कीस करके कपडे पहेनके अपने रुममे चला गया ओर चंदाभी नाइटगाउन पहेनके सो गइ....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - ११

अ‍ेसेही मस्ती मजाक करते दोनो फीरसे गरम होगये ओर अ‍ेक बार फीर प्यारका खेल होने लगा इस बार चंदाको देवायतने बहुतही कामुक तरीकेसे चोदलीया तब चंदा तृप्त हो चुकीथी..दोनोही पसीने पसीने हो गयेथे तब देवायत ओर चंदा साथमे नहाये ओर वहाभी देवायतने चंदाको खडे खडे चोद लीया फीर देवायत उनको कीस करके कपडे पहेनके अपने रुममे चला गया ओर चंदाभी नाइटगाउन पहेनके सो गइ....अब आगे

सुबह देवायत थोडी देरसे उठा तबतक चंदा ओर मंजु तैयार होके होलमे बेठीथी ओर बाते कर रहीथी.. तब देवायतभी आगया ओर सबने साथमे चाइ नास्ता कीया फीर देवायत मंजुसे कहेके अपनी कारमे अपने गोडाउनकी ओर चल पडा तब गांवके चोराहेपे कुछ लोगोकी भीड दीखी तो देवायतने उनके पास जाके अपनी कार रोकली तब अ‍ेक मजदुर आदमी नीचे जमीनपे अपना पैर पकडके बेठाथा.. ओर रो रहा था..

देवायत : (कारसे नीचे उतरते जोरोसे) अरे क्या हुआ..? ये क्यु चीला रह हे..?

ठाकुर देवायतकी आवाज सुनतेही लोग इधर उधर होने लगे तब रमेश दुकानसे बहार आगया ओर देवायतसे हाथ मीलाया तब देवायतने उनकी ओर सवालीया नजरोसे देखा..

रमेश : ठाकुरसाब अंदर दुकानमे आइअ‍े..आपको बताता हु..

देवायत : (दुकानमे जाते) हां रमेश बता क्या हुआ इसे..कीसका मजदुर हे..?

रमेश : (थोडा गभराते) माफ कीजीये ठाकुरसाब मेरा नाम ना आये.., इनको सरपंच (राघव)ने मारा हे..

देवायत : (थोडे उचेसे) लेकीन..क्यु..? क्या कीया हे इसने..? बेचारा..अभीभी रो रहा हे..लगताहे पेरमे कुछ हुआ हे..कही टुट बुटतो नही गया..? देखतो सही.. चल पहेले इनको होस्पीटल ले चलतेहे वहा बात करेगे..

कहेते देवायत जटसे बहार नीकल गया तब पीछे रमेशशभी उनके आदमीको कहेके बहार आगया तब ओर लोगभी मदद करने आगये ओर मजदुरको उठाके पीछे कारमे डाल दीया तब बेचारा बहुत चीलाया ओर देवायतने कार सीधी ही डोक्टरके पास जानेदी तब रमेश जटसे उतरके होस्पीटलके अंदर चला गया ओर थोडीही देरमे डोक्टरको बहार बुलाके आगया तब डोक्टरभी दोडके आगया ओर सीधेरी कारमे पीछे पडे आदमीके पैरको चेक करने लगा फीर देवायतके पास आके उनसे हाथ मीलाया ओर कहा..

डो.सुधीर : देवायतजी लगता हे इनके पैरकी हडी टुट गइ हे.., क्या हुआ इसे..?

देवायत : (सीरीयस होते) सुधीरजी..क्य होगा..हमारे गांवमे अ‍ेकही कमीना आदमी हे.., वो सरपंच..बेचारेको उन्हीने मारा हे.., अब क्या करु..? यहा इलाज होजायेगा..?

डो.सुधीर : अरे नही.. वहा अ‍ेसी सुवीधा कहा.. में चीठी लीख देता हु.. इसे वो हमारे नजदीक सहेर ---हे वही होस्पीटल लेजाइअ‍े..इनमे प्लास्टर आयेगा.., देवायतजी अ‍ेक बात कहु..अब आपही सरपंच होजाइअ‍े.., ताकी इस गांवके लोगोको इस जंजटसे छुटकारा मील जाये..

रमेश : (हसते) ठीक कहा आपने डाक्टर साहब.., अब आपही कुछ कहीये..हमारी कहा सुनते हे..हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) अरे मेरे धंधेसेही फुरसत नही मीलती.. इसीलीयेतो इस कमीनेको सरपंच बनाया था..अब आगे देखते हे..कुछ ओर सोचना पडेगा..चलीये सुक्रिया..इनको सहेरभीतो लेजाना पडेगा.. आपकी फीस..?

डो.सुधीर : (हसते) अरे आप इनको जानते नही फीरभी इनकी सेवा करते हे तो काहेकी फीस..हें..हें..हें..

देवायत : ठीक हे..सुक्रिया..(रमेशकी ओर देखते) चलो रमेश..अब तुजेभीतो आना पडेगा इनको सहेरही ले चलते हे..चलो..

फीर दोनोही सहेरकी ओर नीकल जाते हे तब पीछे मजदुर अपने दोनो हाथसे सख्तीसे अपने पैर पकडके बेठाथा ओर उनके पास उनका छोटा लडकाभी बेठा था जो बडाही मासुम ओर डरा हुआ लगता था..

देवायत : (कार चलाते पीछे देखते) अरे सुनो..क्या नाम हे तेरा..कहा काम करता हे..?

छोटु (मजदुर) : मालीक मुजे सब छोटु कहेते हे..वो अभी अ‍ेक हप्ते पहेले भानुभाइके खेतमेही कामपे लगा हु.. बस वही जा रहाथा.. इधर मेरा सामान लेने आयाथा तो सरपंचने मारा..(रोने लगता हे)

देवायत : (चोंकते) क्या..भानुके वहा..मतलब हमारे यहा काम करता हे..? तुजे कभी देखातो नही..

छोटु : (रोते) जी..अ‍ेक हप्ते पहेलेही आयाहु.., पहेले सरपंचके यहाही काम करता था.. मे खेतमे काम करताथा ओर मेरी बीवी उनके घरमे.., हमे अ‍ेकही पगार देताथा..

देवायत : (आगे देखते) तो फीर तुने वहा नोकरी क्यु छोडदी..?

छोटु : (हीचकीचाते) जी..वो..वो..

रमेश : अरे बोलनां..सब घरकेही हे.. तु इनके यहाही काम करता हे भानुभाइ ओर ठाकुरसाब अ‍ेकही हे..

छोटु : (धीरेसे) जी..वो..वो..मेरी बीवीने सरपंचसे कुछ उधार पैसे लीये थे..तो नही चुका पाइ..बस इन्ही बातोका सरपंच फायदा उठाने लगा.. तो छोडके आगये..सामानभी नही दीया..लेने गयेथे तो मारा..

देवायत : (गुसा होते) मादर--, अब इनका कुछ इलाज करना पडेगा.. पानी सरसे उपर चला गया..

रमेश : ठाकुरसाहब माफ कीजीये सीर्फ ये छोटुही नही हे..हमारे गांवकी कीतनी ओरते ओर लडकीया हे..जो इन्हीकी तराह उधार पैसे देकर फायदा उठाता रहेता हे.., बस बात आप तक नही पहोचती..

देवायत : (कुछ सोचते) रमेश.. तु मेरा दोस्तभी हे.., ओर बनीयाभी हे.. तो अगर तुजे इस मुसीबतको हटाना होता तो क्या करता..? मुजे पताहे तु इनके साथ जगडा करनेतो कभी नही जागेगा..तो केसे हेन्डल करता..?

रमेश : (हसते) फसादीयाने..मुजे..हें..हें..हें.., ठाकुरसाहब हम दुसरी तराह मारते सापभी मर जाये ओर लाठी भी ना टुटे..हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) हां..बस वोही.., भाइ हम अकेलेमे मीलेगे सीर्फ हम दोनो, तबतक कुछ सोचके रख..अ‍ेसा सोचकी कमीना खटीयाही पकडले हम कल मीलेगे मेरे गोडाउनमे आजाना हम वही बात करेगे..

फीर वो सहेरमे आगये ओर छोटुका अ‍ेक्सरे वगेरे सबकुछ कीया ओर पावमे प्लास्टर लगवाके वापस आने लगे..तब रास्तेमे सबने खानाभी खाया ओर बच्चेको नास्ताभी दीलवाया तब जाके उनके चहेरेपे डरका भाव चला गया.. फीर सब वापस आनेके लीये कारमे बेठेही थे तभी भानुका फोन आगया..

भानु : (फोन उठाते) अबे कहा हे तु.., सुन वो सरपंचने हमारे अ‍ेक मजदुरको मारा हे..

देवायत : (हसते) अरे सांत होजा.., बस उनके इलाजके लीये सहेरही गये थे आ रहे हे.. अभी आधे घंटेमे पहोच जायेगे फीर आकर मीलता हु.. कुछ बातभी करनी हे.. चल रखता हु..

फीर वो सब वापस गांवमे आजाते हे वही रमेश उतर जाता हे फीर देवा मजदुरको लेके अपने खेतमे चला जाता हे वही रामुकाकाने उसे अ‍ेक रुम दे रखीथी वही उनको उतारता हे तब उनकी बीवीभी दोडके आ गइ ओर छोटुको देखके रोने लगी तब रामुकाका ओर देवायत उसे सांत करते हे तबतक भानुभी आगया ओर सब पुछताछ करने लगा तब देवायतने उनको कुछ नही पुछनेको इसारा कीया ओर कुछ पैसे देकर दोनो गोडाउनमे आके बेठ गये तब भानु उनकी ओर प्रस्नार्थ भरी नजरोसे देखने लगा..

देवायत : भानु अब इस सरपंचका कुछ इलाज करना पडेगा..बस इनकी बीवीको पैसे देके उनकी मजबुरीका लाभ उठाता हे.. बेचारोका सामानभी रख लीयाथा लेने गया तो बेचारेकी टांग तोडदी..

भानु : (गुसेसे) मादर--, भाइ क्या करना हे बतादो..रातको उठाले..? सालेको ठीकाने लगा देगे..कीसीको कानोकान खबरभी नही होगी.. बस आप बोलो..

देवायत : यार इस बार जगडा नही करना, हमने कुछ ओर सोचलीया हे बस कल तक राह देखले..फीर कुछ करते हे.., इस बार अ‍ेसे मारेगे.. कमीना हमारे बारेमे सोचभी नही सकता.. इस बार हम उसे बुध्धीसे मारेगे.. फीर उनकी बीवीको उन मादर--के सामनेही चोदुगा.., दुसरेकी बीवीया चोदनेका बहोत सोक हेना..? अब देख.. सालेको..मेने दुसरे सरपंचकाभी सोच लीया हे..

भानु : यार वो सबतो ठीक हे..अब भाभी ओर भावनाका वक्त नजदीक आ गया हे..कुछ सोचा हे..? दोनोको कभीभी लेजाना पडे.. बस १० १२ दीन बचे हे..फीरभी सही टाइमका अंदाजा नही लगा सकते..

देवायत : भानु अब तु अ‍ेक कार लेजा.. तेरे पासही रख.. मेरे पासतो हेही.. इस खटारा कारमे कहा लेजायेगा.. मेरी टेन्शनतो मेरी मौसीजीने लेली.. वोही मंजुके साथ होस्पीटल आयेगी.., अरे सुन भानु..हमने हमारी पुनमका रीस्ता धिरेनके साथ तैय करलीया हे.., आजही सब कंन्फर्म हुआ.. पहेले तुजे बता रहा हु..

भानु : (खुस होते) यार क्या खबर सुनाइहे तुने..हें..हें..हें..चल सब टेन्शन खतम..इसी खुसीमे अ‍ेक अ‍ेक पेग हो जाये..हें..हें..हें.., देखना सीर्फ अ‍ेक पेग.. वरना कोइ मजदुरन गइ कामसे हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) नही यार..अब कोइ मजदुरन नही..तो फीर क्या फर्क रेह जाता हे उस सरपंच मे ओर हममे.., बस जीतनी अपनी मरजीसे आतीहे वोही हमारे लीये काफी हे.. तु सही था हमे मजबुरीका फायदा नही उठाना.. बस मेरे लीयेतो मेरी जमीला दया रजीया ओर ये सरपंचकी बीवीही सही हे..

भानु : (हसते) भाइ क्या वो सरपंचकी बीवीको लाइनमे लेलीया..?

देवायत : (हसते) हां..बहुत चाइ पानीका केह रहीथी.. अ‍ेक बार मोका मील गया.. सरपंच दो दीन नही था..सहेर गया था..तब काम तमाम करके आगया..साली क्या गदराया माल हे.. मेरीतो दीवानी हो गइ..मेरे लीये सरपंचको छोडनेको केह रही थी..कमीनीको बडी मुस्कीलसे समजाया.., यार अ‍ेक उलजन मे हु..

भानु : (हसते) अब कोनसी उलजन हे.. कुछ हुआ क्या..?

देवायत : (सीरीयस होते) भानु.. तुजेतो पता हे वो बांज हे.. मुजे बच्चेके लीये फोर्स करती हे..क्या करु..?

भानु : (हसते) यार कोइ खतरा नही हेतो देदो.., कीसीको क्या पता चलेगा.. बस वो कीसीको बोलनी नही चाहीये.. बाकीतो ये पुन्यका काम हे हें..हें..हें.., ओर मुजे नही लगता ये गलत काम हे..

देवायत : (हसते) तु बहोत कमीना हे हें..हें..हें.., लगता हे तुने अ‍ैसा कोइ पुन्यका काम कीया हे.. हें..हें..हें.. बता कीसका कीया हे.., तभीतो अ‍ैसी बोल रहा हे..

भानु : (सरमाते हसते) क्या यार..तुभी बात कहा लेजाता हे..हें..हें..हें..अ‍ेसा कुछ नही हे यार..(सरमाते)

देवायत : (हसते) कमीने.., सरमातो बहुत रहा हे.. बता वो कोन हे..वरना कसमभी दे सकता हु..

भानु : (हसते) क्यु पीछे पडा हे यार तुजे पता हेना मे कसम नही तोड सकता..कुछ राज राजही रहेने दे यार..

देवायत : भानु..क्या हमने कभी अ‍ेक दुसरेका राज छीपाया हे..? ओर कभी कीसीको बताया हे..? तो फीर तुने इतना बडा राज केसे छुपा लीया.. क्या मुजपे विस्वास नही रहा..? लानत हे अ‍ेसी दोस्तीपे यार..

भानु : यार तु समज कीसीकी इजतका सवाल हे..? चल ठीक हे यार..अब कुछभी नही छीपाउगा बस.., दोस्तीपे सक मत कर यार.., बस ये बात हम दोनोके बीचकी हे कीसीको नही पता..मुजसे बहुत प्यार करती हे..ओर हमारा अ‍ेक बच्चाभी हे..उनको नही हो रहाथा तो मुजसे करलीया..तबसे सब चल रहा हे..

देवायत : (सरारतसे हसते) अच्छा..कोन हे वो खुसनसीब जीनका दील मेरे यारपे आ गया..

भानु : (सरमाते हसते) वो..मेरी बडी मामी.., मेने खुब पेला हे यार.. ओर अभीभी पेल रहा हु.. उनकी लडकी.. हमारीही लडकी हे..अबतो १२ सालकी हो गइ..पढ रही हे..ओर मामी आजभी मुजसे प्यार करती हे..





देवायत : (हसते) कमीने..इसका मतलब तेरी सादीसे पहेलेही सबकुछ चल रहा हे ओर मुजेही नही पता..

भानु : सोरी यार..तुमसे सब छुपाया.., तुजेतो पता हे जब मामाका अ‍ेक्सीडन्ट हुआ तबसेही वो कामके नही रहे.. ओर तब मेही वहा उनके पास था..तब हम नजदीक आगये..ओर अ‍ेक रात नानी मामाके पास होस्पीटल रुक गइ ओर मे मामीको लेकर घर आगया..बस उसी रात हम मील गये, ओर सबकुछ करलीया.. तबसे वो मेरी दीवानी होगइ ओर मुजे पती मानके मुजसे अपनी मांग भरवाके मेरी बीवीकी तराह ही पेस आती हे..




देवायत : (हसते) साले..उनकी मांग भरीहेतो उनको अच्छेसे नीभाना.. तु जानताभी हेना अ‍ेक बार ओरत कीसीको पती मानलेतो उनपे जानभी छीडकने नही हीचकीचाती..तु उनका खयाल रखना..

भानु : (आंख गीली करते) थेन्क्स भाइ.., अब उनकी हर जरुरत पुरी करुगा..

देवायत : (हसते) क्या नाम हे तेरी बेटी का..उनको सहेर भेजदे पढनेके लीये..पैसेकी चीन्ता मत कर..

भानु : अब कीतना मेरे लीये करेगा..? यार अ‍ेसे पैसे लेना अच्छा नही लगता.., उनका नाम नीलम हे..ओर मामीकोतो तुम जानतेही हो रमा..मुजे दीलोजानसे चाहती हे अ‍ेक पत्नीकी तराह.. हमारी सादीमे बहुत काम कीया.. जबतक मेरे घर रही हर रात हमने साथ गुजारी पती पत्नीकी तराह..

देवायत : (सीरीयस होते) देख भानु मेने तुजे कभी अपना यार नही माना..तुजे हमेसा भाइही माना हे..क्या मेरा छोटा भाइ होतातो मे उनके लीये नही करता..? यही समजले तु मेरा छोटा भाइही हे.. तो केसी उलजन..

भानु : (हसते) चल ठीक हे इस साल दाखला करवा दुगा..अबतो खुस..चल यार बोटल नीकाल..

तब भानु हसते हुअ‍े टेबलके खानेसे बोटल ओर दो ग्लास नीकालता हे ओर दोनोका पेग भरता हे तब देवायत हरीयाके कहेके चखना मंगवा लेता हे तब थोडीही देरमे हरीयाकी बीवी मालती चखना देने आतीहे ओर देवायतको कातील स्माइल देते चखना देतीहे तब देवायतभी उनकी ओर हस देता हे ओर वो चली जाती हे.. तब दोनोही सगाइकी बाते करते आगेकी प्लानींग करते रहेते हे..

भानु : भाइ वो सगाइके लीये कपडे पबडेभी लेने जाना पडेगा.. सब कब करना हे..?

देवायत : (अ‍ेक घुट लगाते) भानु..अभीतो लखन ओर पुनमकी परीक्षा चल रही हे..जब वो खतम होयी तब उनको लेने सहेर जाना हे तब सब खरीदी करके आयेगे.. तु लताकोभी साथ लेले उनकी पसंदका सब आजायेगा.. अब इस हालतमे भावना ओर मंजुतो नही आ सकती..देखता हु कीसको लेजाये.. वो धिरेनकोभी लेजाना हे.. देखतेहे मौसी आतीहेकी नही..वहा लखन पुनमकीभी सब खरीदी होजायेगी.. क्या कहेते हो..?

भानु : भाइ तुम लता कोही लेजाना.. जाना हो तब भेज दुगा.. वहा पुनमतो हेही..वो दोनोही सब लेलेगी.. फीर सबको लेके आजाना.. फीर ये दोनोकी डीलेवरी होजाये.. फीर सगाइका सोचेगे..

देवायत : हां यार..वही ठीक रहेगा हम अ‍ेसाही करेगे..तुजे जीतने लोग बुलाना हे बुला लेना..तेरी भाभी केह रहीथी.. चारोकी सगाइ साथमेही रखेगे हमारी हवेलीपे.. बहुत जगा हे.. मौसीकातो कोइ नही हे..

भानु : (थोडे नसेमे) भाइ मौसी ओर भाभी सहेलीही हे दोनोकी उम्रमे ज्यादा कुछ फर्कभी नही सीर्फ चार पांच सालकाही फर्क हे.., बेचारी जवानीमेही विधवा हो गइ.., साला ये गांवका रीवाजभी अजीब हे इससेतो अच्छा सहेर वाले होते हे..वो अ‍ेसी कीसीभी बातको नही मानते.. बेचारीका घरतो बस जाता.., साला अकेलापन.. दीमककी तराह होता हे..,बस अंदरही अंदर आदमीको खाये जाते हे.., यार इसमे तुम कुछ नही कर सकते..?

देवायत : (नसेमे) भानु..तुजेतो पता हे.. बाबाने क्या कहा हे.. बस कुछ वक्त इन्तजार करले फीर हमने सोचाभी नही होगा अ‍ेसा दीखनेको मीलेगा.., बहेन--, कोइ रीस्ताही नही बचेगा.., तुजे पता हे खुद --वान का अंस हमारे घरमे पैदा होगे.., बस वोही सब करेगा.., पता नही तब हम होगेकी नही..

भानु : (लडखडाती आवाजमे) होगे..भा..इइइ.क्यु..नननहीइइइ. होगे..हम.. सब..दे..खेगे..

देवायत : (बोटल अंदर रखते) बस कर यार बहोत हो गइ.. अबतो धरभी नही जा सकते..मंजु सुनायेगी..

भानु : भाइ..भा..भी..अच्छी हे.., ओर ये..कमीनी..भावना..उसे..रोज..लंड चाहीये.. अरे आदमी..चोदेगाभी तो कीतना.. सालीको संतोषही नही..हो..ता.. बस पुरी रात..लंड डा..लके..हीक..हीक.. पडा..रहो..हीक..

देवायत : चल यार इधरही सोजा.. रातको चले जाना.. चल पहेले कुछ खा लेते हे..(जोरोसे) हरीया..

हरीया ओर उनकी बीवी मालती जो कबीलेमे रहेते हे ओर देवायतके खेतोमे भी काम करता हे जब काम नही होता तब कबीलेमे चले जाते हे इस गांवसे आधे घंटेकी दुरी परही हे मालती भी देवायतकी दीवानी हे जो हर वक्त देवायतके नीचे लेटनेको तैयार रहेती हे.. जबभी देवायत दारु पीता हे तब वोहीतो देवायतको सम्हालती हे जीसे हरीयाकोभी कोइ अ‍ेतराज नहीथा क्युकी कबीलेके लोगोमे ये सब आम बात थी..

हरीया : (दोडके आते) जी ठाकुरसाब..

देवायत : यार..वो खाना बाना लगा.. फीर इनको अंदर दुसरे रुममे सुला देना..

हरीया : जी..अभी मालतीको भेजताहु खीला देगी..

कहेके वो मालतीके हाथ दोनोका खाना भेज देताहे तबब दोनो खा लेते हे..भानुकोतो होसही नही था जेसे तेसे करते दोनो खा लेतेहे फीर मालती भानुको सहारा देके दुसरे रुममे सुला देतीहे ओर वापस आके सब बरतन समेटने लगती हे तब देवायत उनका हाथ पकड लेता हे तो मालती हसते हुअ‍े कहेती हे..

मालती : (हसते) मालीक पहेले इनकोतो सब रखने दीजीये..आप जाइअ‍े अपने रुममे..सब समेटके आती हु..

तब देवायत लडखडाते अपने रुममे चला जाता हे थोडीही देरमे मालतीभ आजाती हे ओर दरवाजा बंध करते अपने सब कपडे नीकालने लगती हे फीर नंगी होके देवायतकी बगलमे बेठते देवायतकेभी कपडे नीकालने लगती हे जेसे तेसे करते उनकी पेन्ट ओर चडी नीकाल लेती हे तब देवायतका लंड फडफडाते जटके मारने लगता हे जेसे वो मालतीकी चुतको भलीभांती जानता हो.., तब मालती पीठके बल लेट जाती हे..

तब देवायत उनको भाहोमे भरते अ‍ेक टांग उची करते कमरपे डालते उनके उपर चडके लेट जाता हे ओर मालतीभी देवायतके लंडको देखके कामुक होजाती हे ओर उनकी चुत गीली होजातीहे तो देवायतके लंडकोभी जेसे अपने बीलमे जानेकी जल्दी हो वो मालतीकी चुतपे जोरोसे ठोकरे मारते अपना रास्ता ढुंढते मालतीकी चुतमे चला जाता हे जेसे उनको इस चुतमे घुसनेकी जल्दी हो..

तभी देवायत हाथके बल उचाहोते मालतीको जोरोसे सोट मारते चोदने लगता हे तब मालतीथी कमर उछालते देवायतका साथ देने लगी वो चुदवाते हुअ‍े लगातार देवायतकी आंखोमे देखे ही जा रहीथी.. थोडीही देरकी घमासान चुदाइके बाद मालती अकडने लगती हे ओर आंखे नसीली करते आधी चडाते जडने लगती हे ओर कमरको पटकते दोनो हाथोसे चदरको कसके पकड लेती हे.. फीर सांत होजाती हे..

तब देवायत लंड नीकालके साइडमे हो जाता हे ओर मालतीको पकडके घोडी बनाके लंडको पीछेसे उनकी चुतमे उतार देता हे तब मालतीकी हल्की चीख नीकल जाती हे ओर वो बरदास्त नही करपाती तब देवायत अ‍ेक हाथसे उनकी गरदन पकडके उसे धनाधन चोदने लगता हे तब मालती चुदवाते चुदवाते बेडपे गीरती हे ओर देवायत उनकी कमरको पकडते जोरोसे चोदने लगता हे तभी थोडीही देरमे अपना सारा माल मालतीकी चुतमे डालते चुतको पुरी भरदेता हे ओर उनकी पीठमे लेटके ढेर हो जाता हे..





तब मालतीकी हालत खराब हो जातीहे ओर वोभी अ‍ेसेही पडी रहेती हे, लंड चुतमे होनेके बावजुदभी मालतीकी चुतसे दोनोका कामरस अपना रास्ता बनाते मालतीकी चुतसे बहार गीरने लगता हे.., जब दोनो नोर्मल हो गये तब देवायत साइडमे होकर लुढकके सोने लगता हे ओर मालती धीरे धीरे बेडसे उतरके खडी हो जातीहे ओर अपनी चुतको कपडेसे साफ करके अपने कपडे पहेनने लगतीहे फीर धीरे धीरे लंगडाती चालसे बहारकी ओर जाने लगती हे आज वाकइ देवायतने उनकी हालत खराब करदीथी.. वो दरवाजा बंध करके अपने रुममे जाके अपनी खटीयामे गीर जातीहे ओर बेहोस जेसी हालतमे सो जाती हे..

सामको देवायत बहुत देरसे ६ बजे उठा, देखातो भानु अभीभी सो रहाथा वो अभीभी थोडे नसेमे था तो उनको जगाया तो रातमे यही सोनेको कहेके वापस सोने लगा, तब देवायतने हरीयाकी मददसे उनको देवायतकी गाडी मे पीछे डाला ओर उनको छोडने उनके गांवकी ओर चल पडा देवायत भानुको अ‍ेसे कइ बार छोडने जाता हे, तो उनके घरवालेको भी पता होताहे की भानुने आज ज्यादा दारु पीली होगी.. ओर उनको सुलाके वापस आजाता..

वहा पहोचके उनको सहारा देते उनके रुमकी ओर चल पडातो भावना देवायतको देखतेही खुस होगइ तो उनकी सास सरलाभी भानुको देखते कातीलाना हसने लगी, ओर लतातो उनको देखतेही सरमाके भावेशको लेके रुममे चली गइ आखीर देवायत उनके जेठजो थे.. तब भावनाभी दुसरी ओर भानुका हाथ पकडके देवायतके साथ रुममे छोडने साथमे जाने लगी ओर भानुको सहारा देनेके बहाने देवायतके हाथको छुने लगी..तब अ‍ेक बार हाथको दबाभी दीया तो देवायत हसने लगा तब वो बहुत सरमाइ ओर हसने लगी..

भावना : (भानुको बेडपे सुलाते) जीजु..क्या बहुत पीली हे..? कीस खुसीमे पार्टी कर रहे थे..हें..हें..हें..

देवायत : कुछ नही भावु..बस पुनम धिरेनके रीस्तेके बारेमे सुनके खुस हो गया..?

भावना : (खुस होते) क्या..? दोनोका रीस्ता तैय होगया..? सगाइ कब रखी हे..?

देवायत : (हसते) बस कलही बात तैय हुइहे वो मौसी आइहे घर.., पहेले आपको बताया.. अब इस हालतमे तुम धर केसे आओगी.. नहीतो तुजे ले चलता..

भावना : (धीरेसे) जीजु कभी अकेले मीलोना.. कुछ बात करनी हे.. सीर्फ आपको.. मंजुदीको मत कहेना..

देवायत : (सामने देखते) क्या बात हे भावु..? कुछ परेसानीतो नही..? तो बता.. कुछ पैसे बैसे चाहीये..?

भावना : (धीरेसे) अरे नही..नही..? कुछ ओर बात हे..? आपके ओर मेरे बीचकी बात.. समज गये..

देवायत : (आसचर्यसे) हम दोनोके बीचकी बात..? क्या बात हे..? कुछ सीरीयस मेटरतो नही..? मतलब मुजे दारु पीनेके बाद होस नही रहेता..तो..मेने तेरे साथ कुछ गलततो नही करदीया..?

भावना : (सरमाके हसते) नही..वो बात नही..अ‍ेसा कुछ नही हुआ..बस..कुछ ओर बात हे..जो बादमे हमे अकेले मीलनेका मोका मीलेगा तब बता दुगी..मेरी सादीके पहेलेकी बात हे..आप टेन्शन मत लेना..

देवायत : ठीक हे भावु हम मीलेगे तब बता देना..जरुर कोइ सीक्रेट बात होगी.. अब चलो बहार वरना तेरी सासु सक करेगी की सालीको छेडते होगे..हें..हें..हें..

भावना : (सरमके मारे हसते मुका मारते) वेरी फनी.. जीजु आप बहोत बदमास हो..चलीये..(सरारतसे धीरेसे) वेसेभी सालीभीतो आधी घरवाली होती हे.. आपका छेडनेका पुरा हक हे.. हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) हां.. तो तैयार रहेना.. अब मौका मीलातो जरुर छेडुगा.. हें..हें..हें..

तब भानु गहेरी नींदमे सोयाथा ओर देवायत भावना बाते करते बहार आगये तब भावना रसोइमे चली गइ ओर देवायतके लीये चाइ बनाने लगी तब देवायत सरलाके पास जाके बेठ गया तब वो रसोइकी ओर देखते सरमाके बोली..

सरला : (हसते) आइअ‍े समधीजी..हें..हें..हें.. अंदर बहोत देर करदी.. कही सालीपेतो दील नही आ गया..?

देवायत : (धीरेसे हसते) अगर आप जेसी हसीना हेतो मुजे सालीकी क्या जरुरत हे.. कहो.. आप कब अकेली होगी..? आजाउगा..

सरला : (सरमाके हसते धीरेसे) क्या इतनी पसंद हु.., अबतो बुढी होने लगी हु..तो फीर आता क्यु नही..? तुम अ‍ेक काम कर सगाइकी खरीदी करने भानुको भेजदे मे तेरे गोडाउनमे चली आउगी.. फीर खुब मजे करेगे.. क्या दमदार हथीयार हे तेरा.. जो अ‍ेक बार देखलेगी.. तेरीतो दीवानी हो जायेगी..

भावना : (चाइपानी लाते) माजी..हमारी पुनम ओर मौसीके लडके धिरेनका रीस्ता तैय हो गया हे..

सरला : (हसते) क्या..? तुमने तो बताया नही.., रीस्ता कब कीया..?

देवायत : (चाइ पीते) बस कलही तैय कीया.. चारोकी साथमे सगाइ करेगे हमारी हवेलीपे.. तैयारी सुरु करदो.., आप सबको उधरही आना हे आपके सब रीस्तेदारको बुलाना..

सरला : अब कहा हे रीस्तेदार..बस आप ओर भानुके ससुर ओर भानुके मामा लोगही हे.. वहासे रमा ओर नीलमही आयेगे.. उनका मामा तो कही दारु पीके पडा होगा.. वो कहा आता हे.. दोनो मा बेटीको भेजते हे

भावना : जीजु भानु केह रहेथे इन बच्चोके लीये खरीदी करने जाना हे..आप लताको लेजाना..हम भेज देगे.. अब ब्याह करके उसे उधर हीतो आना हे थोडी सबके साथ घुल मील जायेगी..

सरला : (गहेरी सांस लेते) हां..भाइ..अब जमाना बदल गया हे.. अच्छाहे आपतो घरकेही लोग हे.. वरना मेरी सगाइतो इतनी ज्लदी करदी मुजे लडकेका मुहभी देखनेको नसीब नही हुआ.. बस सादीके बाद इस घरमे आइ तबही तेरे काका का मुह देख पाइ.. कास हमारे जमानेभी आजके जेसा होता..

भावना : (हसते) क्या माजी.. बापुजीभी तो अच्छे थे.. मेने सुना हे..हें..हें..हें..

देवायत : (खडा होते) चलो काकी चलता हु.. सुबहसे घरभी नही गया.. आपकी बहु डाटेगी.. हें..हें..हें..

सरला : (हसते) चल जुठा.. मेरी मंजु बहुत अच्छी हे मेरी भावुकी तराह.. दोनो बहेने बहुत संस्कारी हे..

फीर देवायत अपनी कार लेके हवेलीपे आजाता हे तब मंजु ओर चंदा दोनोही बाते करती हे.. देवायतको आते देखतेही दोनोके चहेरे पे खुसीसे हसी आजाती हे तब देवायत सीधेही बाथरुममे नहाने घुस जाता हे तब चंदा उनकी ओर देखते मंजुसे कहेती हे..

चंदा : मंजु सारा दीन कहा रहेते हे..? खाना खानेभी नही आये.. कीतनी महेनत करते हे..

मंजुला : मौसी..अब हामारा कारोबारभीतो इतना बडा हे..वहा रामुकाका हरीया उनकी बीवी सब हेना..जब ज्यादा काम होता हे वोही खाना बना देते हे तो वही खा लेते हे.. अच्छा हुआ भानुभाइ आगये..

चंदा : मंजु कीतना अच्छा हे.., तुजे.. साम होतेही पतीकी याद आती हे..उनका वेइट करती हे.. कीतना अच्छा लगगता हे.. (नीरास होते) बस मुजे सीर्फ अपनाही देखना हे.. ना कीसीका वेइट.. नाही..

मंजुला : (बीचमेही चंदाका हाथ दबाते) मौसी प्लीज.., अ‍ेसे दुखी मत हो.. आपकी बात मे समज सकती हु.., मुजे पता हे हम ओरतोकी कुछ नीड होती हे.., कमीना ये रीवाज कहासे आगया.. वरना आपकी उमरही क्या हे..? मौस्ी मेने ओर देवुनेतो डीसाइड

करलीया हे हम अ‍ेसे कीसीभी रीवाजको नही मानेगे.., भाडमे जाये दुनीया.., ओर बाबानेभी हमे बहुत कुछ कहा हे.. अब देखते हे आगे क्या होता हे.. कास इनमे मे आपकी कोइ मदद कर सकती.. (मनमे - मौसी कास मे आपकी जरुरतको मेरे देवुसेही कहेके पुरी करवाती)

चंदा : मंजु..मुजेभी अ‍ेक बार वो बाबासे मीलना हे.. देवायतभी कुछ बात कर रहे थे बस ज्यादा नही बोले..

तब मंजुला चंदाको इनसोर्ट सब बता देती हे की आने वाले वक्तमे हमारे घर रीस्तोकी कोइ अहेमीयत नही रहेगी.. मेरा पोता कोन होगा वगैरे.. तब सुनके चंदा सोक्ट होते मनही मन खुस होने लगती हे ओर उसे आशाकी अ‍ेक कीरण नजर आने लगती हे.. वो अपने आपको इस हवेलीमे देवायतकी बीवीके रुपमे इमेजींग करने लगती हे तब देवायत नहाके बहार आगया ओर सीधे अपने रुममे चला गया तब मंजु उठके उनके पास चली जातीहे ओर उनके कपडे देके वही बेडपे बेठ जातती हे ओर देवायतसे पुछती हे..

मंजुला : जानु कहाथे? पुरे दीन नही आये..भुख बुख नही लगीथी क्या..?

देवायत : (कपडे पहेनते) अरे वो मालतीने खाना बना दीयाथा ओर अ‍ेक लफडेमे फसे थे हमारे मजदुरकी वो सरपंचने टांगे तोडदी बस उसी चकरमे फसे थे..

मंजुला : देवु वो सरपंचतो बडा हरामी हे.., हमारी रजीया ओर दयापे भी बुरी नजर रखता हे..

देवायत : क्या..? बस अब उनका इलाज कर लेगे तु टेन्शन मत ले, चल खाना नीकाल तुम लोगोने खा लीया..? मौसीको यहा अच्छातो लगता हेना..?

मंजुला : (हसते) अरे अच्छा..? वोतो यहा बहुत खुस लग रही हे..अ‍ेसे काम करतीहे की वो यहा महेमान नही इस बरकी बहु हो.. हें..हें..हें..

देवायत : (मनमे) मंजु अब तुजे क्या बताउ.. वो इस घरकी बहु ही हे.. तेरी सैतन..

मंजु : (हसते) अरे क्या सोचमे पड गये.., चलो हमनेभी नही खाया कीतनी देर करदी..

देवायत : (बाहोमे भरते) बेबी..आप लोगोको तो खाना खालीया करो.. मे देरसे आता तो..

मंजु : (गालपे चुमते) बस.. बाबु अब खा लेगे..चलो मौसी अकेली बेठी हे..

उस रातभी खाना खाके सब अपने अपने रुममे सो जातेहे आजभी देर रात १२ बजे देवायत चंदाके पास चला जाता हे ओर दोनो सुबह ४ बजे तक प्यारकी आगोसमे गोते लगाते रहेते हे इस रात देवायत चंदाकी चुतमे दो बार छलक गया ओर चंदाकी चुतको हरी भरी करदी.. दोनोने साथमे नहातेभी अ‍ेक बार खडे खडे ही चुदाइ करली फीर देवायत मंजुके पास आके सो गया..तब मंजु गहेरी नींद ले रही थी....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १२

उस रातभी खाना खाके सब अपने अपने रुममे सो जातेहे आजभी देर रात १२ बजे देवायत चंदाके पास चला जाता हे ओर दोनो सुबह ४ बजे तक प्यारकी आगोसमे गोते लगाते रहेते हे इस रात देवायत चंदाकी चुतमे दो बार छलक गया ओर चंदाकी चुतको हरी भरी करदी.. दोनोने साथमे नहातेभी अ‍ेक बार खडे खडेही चुदाइ करली फीर देवायत मंजुके पास आके सो गया..तब मंजु गहेरी नींद ले रही थी....अब आगे

दुसरे दीन देवायत ७ बजे उठ गया बहारकी ओर चंदा कंपलीट तैयार होके बेठीथी तब मंजु कपडे देनेके बहाने देवायतके पास चली गइ वहा दोनोने अ‍ेक दुसरेकी बाहोमे अ‍ेक दुसरेके होंठ चुमते उपर उपरसे ही प्यार कीया.. फीर दोनोही बहार आगये सबने साथमे चाइ नास्ता करलीया ओर कुछ सगाइकी प्लानींगकी बाते करली तब मंजुने बात छेडदी.. जो चंदाने सोचाभी नही था.. तो सुनके सरमाइ..

मंजुला : देवु..बच्चोके कपडे लेने हे धिरेनके लीयेभी हमारी ओरसे कुछ लेना हे.., ओर जरुरी सामन गहनेभी लेने हे तो इस हालतमेतो मे ओर भावु नही आसकती..तो आप मौसीकोही लेजाओ.. तब धिरेनभी आ चुका होगा.. दोनो मां बेटेको साथमे लेजाना पुरे दीन सब नीपटाके वापस आजाना..क्या कहेते हो..?

देवायत : (मनमे खुस होते) हां वोही ठीक रहेगा.., मौसी पुनमका फोन आतेही हम नीकल जायेगे..

चंदा : (सरमाते हीचकीचाते) मे..? पर.. मे केसे आसकती हु.. मंजु.. तुभी..

मंजुला : (हसते) मौसी हमारी समधीतो आप बादमे हे.. पहेले आप मेरी मौसी हे ओर मेरी सहेली भी.. ओर हम घरकेही लोग हे..तो फीर जानेमे क्या हर्ज.., आप होगी तो सगाइकी सब खरीदी अच्छेसे होजायेगी.. ओर धिरेनभीतो साथमे होगा.., ओर तुम्हे मेरे देवुके साथ कोइ खतरा नही.., हें..हें..हें..

चंदा : (अ‍ेकदम सरमाते हसते) मंजु.. कुछभी.. तुमभीनां.. इनकीतो सरम कर..

देवायत : (हसते) मौसी..अबतो हमभी मंजुकी मस्तीके आदी होगये हे.. इन्होनेतो हमारा घरका माहोलही बदल दीया.., ओर मुजेभी.. हें..हें..हें.. बस बा बापुजी थे तब सब कंट्रोलमे थे.. अबतो..हें..हें..हें..

मंजुला : (खुस होते हसते) तो फीर..मौसी तुमतो जानती हो.. मेतो अ‍ैसी ही हु..बीन्दास..हें..हें..हें..

देवायत : (टेबलसे उठते) चलो मे चलता हु..

मंजुला : देवु..आजतो खानाके लीये आओगेना..? आजाना बाबु.. कुछ कामभीतो हे.. हम बादमे बात करेगे

देवायत : ठीकहे..लेकीन कुछ देर होगी.., तुम दोनो टाइमपे खा लेना मे आजाउगा..चलो बाय..

कहेते देवायत कार लेके बहार नीकल गया ओर सीधेही अपने गोडाउनमे आगया तब भानु अभी तक नही आया था, वो अभी आके बेठाही थाकी बहार बुलेटकी आवाज आइ..तो देवायत अपनी खुरसीपे बेठते बहारकी ओर देखने लगा तभी अंदर रमेश आता दीखाइ दीयातो देवायतके चहेरेपे स्माइल आगइ..ओर रमेशनेभी आकर हाथ मीलाया ओर सामनेकी खुरशीपे बेठ गया.. तब देवायतने रामु काकाको आवाज लगाइ

रामुकाका : (अंदर आते) काका वो मालतीसे कहेके दो कप चाइ भेजदो ओर पानीभी मंगवालो..ओर सुनो.. कोइ आयेतो थोडी देर बहारही बीठाना..

रमेश : (हसते) ठाकुरसाहब अब उस लडकेकी तबीयत केसी हे..?

देवायत : रमेश..अबतो बेचारेको आरामही करना हे कहा चल सकता हे.. कमीनेने टांगजो तोडदी हे.. यार उनके बारेके कुछ सोचा.. मादर-- अ‍ेक बार हाथ लगजाये..वही जमीनमे गाड दुगा..(गुसेसे)

रमेश : (हसते) ठाकुरसाब आपने मुजे अपना दोस्त माना हे..लीजीये..ये दारुकी बोटल..उन तक पहोंचा दीजीये.. बस ये कीसीको नही पता चलना चाहीये मेने आपको दी हे.., आपका काम हो जायेगा..

देवायत : (जटसे टेबलके खानेमे अलग रखते) रमेश क्याहे ये..तु ओर दारु..? तुमतो कभी हाथभी नही लगाते.. अंदर दारु ही हेना..? की कुछ ओरही हे.., खुस्बुतो दारुकी आ रही हे..

मालती : (अंदर चाइ पानी लाते टेबलपे रखते) लीजीये ठाकुरसाब.. मे बादमे लेजाउगी..

रमेश : (जब मालती चली गइ तब पानी पीते) हां ठाकुरसाब..मे नही पीता.. लेकीन घरमे कभी महेमानके लीये रखता हु.. तो घरपेही पडी थी..अ‍ेसे काममे कीसीसे मंगवाना ठीक नही सक होजाता हे..

देवायत : (चाइका कप लेते) ले पहेले चाइ ले..

रमेश : (चाइ पीते धीरेसे) ठाकुरसाब वो सरपंच रोज सामको वो पंचायतका मुनीम हेना उनके घर जाता हे.., वो दारुका बहोत सौकीन हे.. कभी सरपंचके पास दारु आताहेतो लेके वहा चला जाता हे ओर मुनीमके पास आता हेतो वो सरंपको बुला लेता हे फीर दोनो साथमे बेठके पीते हे.. दोनो खास दोस्त जो हे हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) काहेका दोस्त.., यार मेने सुना हे मुनीमकी बीवी चंपाको सरपंच ठोकता हे.. हें..हें..हें..

रमेश : (हसते) बस दारुतो अ‍ेक बहाना हे.. मुनीमको दो पेग ज्यादा पीलादो उसे होस ही नही रहेता.., फीर सरपंच उनकी बीवी चंपाको चोदने अंदर चला जाता हे ओर दोनो खुब चुदाइ करते रहेते हे.., इसके लीये सरपंचकी बीवी रश्मीभाभी चंपा ओर मुनीमके साथ जगडे करके भी आइ हे.., रश्मीभाभीकोभी पता हे उनका पती चंपाको चोदनेही इधर जाता हे, हें..हें..हें.. बस कीसीभी तराह ये बोटल मुनीम तक पहोंचादो.. आपका काम होजायेगा.. ओर मेराभी.. मादर--, साला.., मेरी बेटीपे बुरी नजर रखता हे..(गुसा करते)

देवायत : रमेश अब तु भुलभी जा तुने मुजे कुछ दीया हे.., लेकीन इसमे हे क्या..?

रमेश : (हसते) भाइ कुछ राज राजही रहेने दो.., आपकोतो पता हे मेरे बापु वैद थे.., भाइ इससेतो आप सरपंच होतेतो अच्छा था.. आपने बंदरके हाथ सता सोंपदी..

देवायत : चलो ठीक हे.., रमेश.. अब तु सरपंचके लीये तैयार होजा.. इनके बाद तुजेही सरपंच बनना हे..

रमेश : (हसते) भाइ मेरा काम नही..मे व्यापार करुगाकी लोगोकी सेवा..

देवायत : (हसते) यार तु व्यापारके साथ सेवाभीतो करता हे.., अब सब लीगल करले.. क्या फर्क पडता हे.. कमसे कम गांववालोको अ‍ेक इमानदार ओर सेवाभावी सेवकतो मीलेगा बाकी मे तेरे साथ हु.. जबभी कोइ जरुरत पडे केह देना.. दोनो मीलके करेगे..

फीर कुछ ओर बाते करके रमेश चला गया तब भानु जीप लेके आगया फीर खेतोपे कुछ कामका जायजा लेके वोभी देवायतके पास आगया ओर उनके साथ बेठ गया तब भानु उनकी ओर देखके हसने लगा..

भानु : (हसते) भाइ कल थोडी ज्यादा होगइ थी..सुबह सुबह ही सास बहुकी खुब खरी खोटी सुनके आया हु हें..हें..हें.., वो भावु कुछ केह रहीथी, आपही खरीदी करने ओर लखन पुनमको लेने जा रहे हो.. तो फीर लताको भी साथमे लेकर जाना.. मे मेरे साथ ही उनको लेकर इधर आजाउगा..

देवायत : भानु वो सब छोड वोतो पुनमका फोन आयेगा तभी जाना हे.., तु अ‍ेक काम कर..(दारुकी बोटल नीकालके अ‍ेक केरी बेगमे डालते) ये..ले.., इसे तु मुनीम तक पहोचा दे.. तुम खुद मत जाना कीसी अन्जान आदमी जो मुनीम उनको पहेचानता हो उनके हाथ भेज देना.. समज गया..

भानु : (बेग लेते) यार क्या बात हे.., तु उनको पुरी बोतल दे रहा हे..?

देवायत : (हसते) अरे सुन.., तुम इनमेसे अ‍ेक बुंदभी मत चखना ये हमारे सरपंचके लीये हे.., समज गया..

फीर देवायत उसे सारी बात रमेशका नाम लीये बीनाही बता देता हे तब सुनके भावु खुस होगया..

भानु : (हसते) अच्छा.., समज गया.., मतलब तुने पुरा इन्तजाम करलीया हे.. ठीक हे पहोंचा दुगा..

देवायत : (धीरेसे) भानु सुन.., ना सरपंचको ओर नाही मुनीमको.., कीसीको पता नही चलना चाहीयेकी ये बोतल हमने भीजवाइ हे समज गया.. ये काम बडीही सावधानीसे करना हे..ओर आज ही..

भानु : (हसते बहार जाते) यार तो नेक काममे देरही क्यु.., अभी अ‍ेक आदमीको देके आता हु.. मुनीमके घरके पासही रहेता हे मेरा दोस्त हे.., उसे आधे दाममेही बेचेगा तो मुनीम फटसे लेलेगा..चल मे देके आता हु..

कहेके भानु फटाफट बुलेट लेकर चला गया ओर मुनीमके घरके पास उनके दोस्तके वहा चला गया तो उनका दोस्त जीवा बहारही खटीयापे बेठे बीडी पी रहा था जो भानुके देखते खुस हो गया..

जीवा : अरे भानुभाइ इधरका रास्ता केसे भुल गये.. कुछ इधर काम था क्या..

भानु : अरे जीवा..सुन मुजे अ‍ेक आदमी मीलाथा आधे से कम दाममेही बोटल दे गया हे लेकीन मेरे पास हे.. तुजेतो पता हे मे कभी कभार ही पीता हु तो मुजे नही चाहीये.. कीसीको चाहीयेतो बोलना.. इपोर्टेड हे..

जीवा : (हसते) क्या भानुभाइ.. साला सबसे बडा कस्टमरतो मेरे पासही रहेता हे..कमीना वो ओर सरपंच रोज इधर दारु पीते हे ओर सरपंच दारु पीके रोज मुनीमकी बीवी चंपाको ठोकता हे.. कमीनेने सारा महोला खराब करके रखा हे.., देदो उनकोही बेच दुगा मुजेभी कुछ पैसे मील जायेगे..

भानु : सुन..जीवा..इनके सीवा कीसी ओरको मत देना ओर मेरा नामतो कतइ मत लेना.. समज गया.., इनमे तुजे जीतना कमाना हो कमा लेना ओर कम पडेतो मुजसे कहेना पर देना मुनीमकोही हे.. समज गया..

जीवा : समज गया भाइ कीसीभी तराह ये बोतल मुनीमको देनी हे.. बस यहीना..दे दुगा..ओर आपने क्या कम मददकी हे मेरी.. मेरी बीवीकी डीलेवरीमे आप साथही थे सारा खर्चा आपनेही तो दीयाथा.. आप फीकर मत करो काम हो जायेगा.. आइअ‍ेना चाइपानी पीके जाना..मेरी बीवी आपको देखते खुस हो जायेगी..

भानु : यार तु मेरा यारभी तो हे.., यारीमे ये सब चलता हे.., ओर भाभीको कहेना फीर कभी चाइ पीने आउगा.. चल मे चलता हु.. सहेरभी जाना हे खाद लेने.. तु चलेगा..?

जीवा : नही भाइ आज आपही होकर आओ.. मुजे गाडीका (टेम्पो) काम कराना हे.. चलो बाय..

तब भानु मनमे खुस होते वापस आजाते हे ओर सीधेही देवायतके पास जाके बेठ जाता हे ओर हसने लगता हे.. तो देवायतभी समज जाता हे भानु काम करके आ गया.. तो प्रस्नार्थ नजरसे उसे देखता हे..

भानु : (हसते) यार काम हो गया..वो जीवा मील गया.. हमारे यहा ज्यादा माल होताहे तब टेम्पो लेके नही आता..? उनके ही पास रहेता हे.. उनको सब समजाके आगया..

देवायत : (हसते) साले देखना.., कही तेरा नाम ना बकदे.. खतराभीतो हे..

भानु : (कुटील मुस्कानसे) नही लेगा भाइ.. उनकी बीवीको डीलेवरीमे होस्पीटल लेके गया था.. हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) तो इसमे हसनेकी क्या बातथ हे.., कुछ गडबड लगती हे हें..हें..हें..

भानु : (जोरोसे हसते) क्या यार.., बस सब खर्चा मेने दे दीयाथा.. तो मेरा अहेसान मानता हे.., पर.., हें..हें..हें..

देवायत : (जोरोसे हसते) कमीने अब बताभी दे..हकीकत क्या हे, हें..हें..हें..

भानु : भाइ.. अब तुमसे क्या छीपाउ.., जीवातो गाडी लेके दुसरे सहेरमे घुमताही रहेता हे..बस उनकी बीवीको पैसेकी जरुरत होतीतो मुजे फोन करके कहेता.. तब मे पहोचा देता.. ओर कामभी करदेता था.. इस सीलसीलेमे उनके साथ बहोत मुलाकात होतीथी.. बस..टाका भीड गया.., मीलने लगे.. मेरा ही बच्चा था.. हें..हें..हें..

देवायत : (जोरोसे हसते) कीतने कमीने हो.. पता नही कहा कहा बच्चा देके आया हे, हें..हें..हें..

अ‍ेसीही बाते करते दोपहर होजाती हे..इसी बीच देवायत कुछ सौदा करते बीजनेसभी करलेता हे ओर खानेके टाइम हवेली पहोच जाता हे.. इसी बीच मुनीमभी घर खानेके लीये आता हे तब उसे जीवा बहारही मील जाता हे ओर इन्पोर्टेड दारुकी बात करता हेतो मुनीम लाळ टपकाने लगताहे तब जीवाके साथ हा..ना.. करते कीमत तैय करता हे ओर जीवा उसे बोतल पकडा देता हे..

तब मुनीमभी खुस होजाता हेकी चलो आधे दाममे अच्छा माल मील गया ओर जीवाभी खुस होताहे क्युकी उसेभी ३०० रुपीये ज्यादा मील गये थे.. दोनोही खुस होते घरमे चले गये..तब मुनीमने खाना खाया.. फीर सीधाही सरपंचको फोन करके बतादीयाकी वीदेसी माल आगया हे सामको चले आना.. तब सरपंचभी खुस हो जाता हे ओर वोभी घर जाते रास्तेसे कोन्डमके पेकेट लेजाता हे..

उसेतो दारुसे ज्यादा चंपाको चोदनेमे मजा आता था.. ओर चंपा भी सरपंचके लंडकी आदी हो चुकी थी.., लेकीन अबवो सरपंचको बीना कोन्डम नही चोदने देतीथी क्युकी वो.. सरपंचसे अ‍ेक बार प्रेगनेन्ट हो चुकीथी.., बडी मुस्कीलसे दोनो बच्चेका नीकाल करके आये थे.. तबसे बीना कोन्डम नही चुदवाती थी.. उधर सरपंचभी खाना खाके सोने लगा..तब उनकी बीवी रश्मी इनके पास आती हे ओर कहेती हे..

रश्मी : सुनीयेजी.., आप सहेर जाओतो मुजेभी साथ लेजाओनां.. दोनो चेक करवा लेते हे..कमी कीसमे हे..

सरपंच : (गुसा करते) कोइ जरुरत नही जब देखो बच्चा..बच्चा.. रट लगाती रहेती हे.., कमीनी कमी मुजमे होगी तो क्या दुसरोसे चुदवायेगी..? बात करती हे.. चल जा सोने दे..दीमाग खराब करदीया..

रश्मी : (थोडा गुसा करते) तो भडकते क्यु हो..जब देखो जगडाही करते हो.., मेने कब कहा दुसरोसे चुदवा लुगी.., सरमभी नही आइ.., आपसे अच्छेतो वो ठाकुर हे..देखीये केसे अपनी बीवीके साथ पेस आते हे.. कभी उची आवाजमे बातभी नही करते..ओर अ‍ेक आप हो..

सरपंच : (देवायतका नाम सुनतेही गुसा सातवे आसमानपे चला गया) मादर--, जा उनसेही चुदवाले.., खबरदारजो उस कमीनेका नामभी लीया.. इनकोतो मे देख लुगा.. बस अ‍ेक बार मोका मीलने दे.. उनकी गांड मारताहु की नही.., कमीनी.. सारा दीन उनके नामकी ही माला जपती हे.. मादर---..,

तब रश्मी आंसु बहाते रुमकी बहार चली जाती हे.., आज उसे देवायतसे संबंध रखनेका कोइ दुख नही हुआ ओर नाही लगाकी मेरे पतीको धोखा दे रही हु.. आज इनको सरपंचपे बहोत गुसा आगया.. अ‍ेक पलतो लगाकी कुतेको अभीके अभी डीवोर्स देदु.., ओर सारी जींदगी देवायतसे चुदवाती रहु.. लेकीन वो.. गुसेको पी गइ.. ओर दुसरे रुममे जाके बेडपे लेटते आंसु बहाती रही ओर अपनी कीस्मतको कोसती रही..

इधर देवायत आगया तो चंदा ओर मंजु उसे देखतेही खुस होगइ फीर सब साथमे मीलके खाना खाते बाते करने लगे.. तब चंदा देवायतको उनके बीजनेसके बारेमे बाते करने लगीकी क्या करते हो.. फीर इस गांवकीभी बाते होने लगी तब चंदा सबकुछ पुछती रही.. बस उनके दीमागमे अ‍ेक खास मकसद चल रहाथा जो धीरे धीरे करते उनपे बाते करते अमल कर रहीती थी उसेतो अब देवायतसे नजदीक रहेना था..

चंदा : (हसते) देवायतजी इस गांवमे कीतना मजा आता हे..यहा सब मीलने आतेहे.. वहातो अकेली बोर होजाती हु..हें..हें..हें.., मेने कभी खेतो ओर आपका बीजनेसभी नही देखा.. कभी घुमाने तो लेजाओ..

मंजुला : (हसते) लोजी..इसमे कोनसी बडी बात हे..? मौसी मेरी मानो वहा सब बेचके आप इधरही गांवमे रहेने आजाओ..मेतो कहेतीहु हमारी हवेली बहोत बडी हे यहाही रहेलो.. मुजेभी कंपनी मीलेगी.., ओर रही खेतोकी बाद तो खानेके बाद कुछ ये आराम करेगे फीर जायेगे तब उनके साथही चली जाओ.. सब देखके साथही वापस आजाना.. क्यु देवु..?

देवायत : (हसते) हा..हा.. क्यो नही.., वेसेभी आज कोइ खास कामभी नही हे..सब खेतो दीखा दुगा..

चंदा : (हसते) वेसे कीतनी जमीन हे आपके पास..? सब खेतोका केह रहे हो..

मंजुला : (हसते) सब मीलाके तकरीबन..२०० अ‍ेकर.., देवु इतनीतो होगीनां..?

चंदा : (आस्चर्यसे) २०० अ‍ेकर..? इतनी बडी..?

देवायत : (हसते) मौसी हमारे पुर्खो यहा राज करतेथे.. तब बहोत जमीन होगी.. पता नही क्या हुआ.., सोनाभी इतना था.. पुरा बडा संदुक भरा हुआथा..वो पुराने जमानेमे बडे बडे नही हुआ करताथा वोही.. सब कहा गया पताही नही चला.. बापुजी कहेतेथे आजभी हे..पर अता पता नही हे..

चंदा : वाव.., तबतो आपको ढुंढना चाहीये..हें..हें..हें.. पता नही आपको मील जाये.. हें..हें..हें.., तबतो देखनी पडेगी आपकी जमीन.., मंजु मे सोचतीहु सब बेचके इधरही रहेने आजाउ..यहा छोटा मोटा घर बना लगे..

मंजुला : बेसक सब बेचदो..पर घर नही बनाना..यहा हमारे साथही रहेने आजाना.हें..हें..हें..

चंदा : (सरमाते हसते) नही..लोग क्या कहेगे.. समधीको साथमे रखा हे..हें..हें..हें.., फीर वो धिरेनको भीतो पुछना पडेगा.. देखतीहु क्या कहेता हे वो..

फीर सब खाना खालेते हे तब सब अपने रुममे अ‍ेक घंटे आराम करते हे तब रुममे जातेही मंजु लेटती हे ओर देवायतको खीचके अपने पास लीटा देती हे ओर उसे होठोपे कीस करने लगती हे..





मंजुला : देवु अब ये बच्चा आजायेतो अच्छा हे..कीतने दीन होगये हमने प्यार नही कीया.., बाबा बहोत मुस्कील लगता हे आपके इस लंडके बीना.., आदतजो पड गइ हे.. रोज इसे अंदर चाहीये..

देवायत : (हसते) बीलकुल पागल हो.. तो फीर सोच मौसीकी क्या हालत होती होगी..बेचारी..

मंजुला : (सरमाके हसते धीरेसे) देवु सुन.., बेचारी अपनी उंगलीसे काम चलाती हे.., अब कुछ करतो नही सकती.., इजतका सवाल हे.. बेचारी रो रही थी.. अगर ये रीवाज नही होता तो वो दुसरी सादी करलेती.. आज मुजे बता रहीथी.. तबतो धिरेनभी छोटा था.. अब कुछ नही होसकता.. क्या हम इनके लीये कुछ नही कर सकते..?

देवायत : मंजु सायद इसीलीये पुराने जमानेमे दो दो तीन तीन बीवीया रखनेकी परंपरा थी.. जो अब कानुनन खत्म होगइ.. वरना तब देवरभी अपने बडे भाइकी मोतके बाद अपनी भाभीको पत्नी बनाके अपना लेता था.. सब परंपरा खत्म होगइ पता नही ये विधवा सादी नही कर सकती ये रीवाज केसे आगया..

मंजुला : (देवुके सीनेपे सर रखते) बाबु कुछभी हो..हम ये पुराने रीवाज नही मानेगे..जीसमे जीनेकी चाह ही खतम हो जाये.., भले ही दो तीन सादीया करना पडे वो अच्छा था.., देवु अ‍ेक बात कहु..आप मौसीसे सादी करलो..हें..हें..हें..(जोरोसे हसते)

देवायत : (हसते) अच्छा मजाक करलेती हो.. अब हमारी समधन होगइ हे.. सुनेगी तो यहासे भाग जायेगी..

मंजुला : (हसते) अरे बाबा मजाक कर रही हु.., कास अ‍ेसा हो पाता..देवु पता हे..तो मे अ‍ेतराज नही करती..

देवायत : चल अब सोजा बहोत मजाक करलीया.., पता नही उन लोगोकी परीक्षा कब खतम होगी.., क्या लखन या पुनमका फोन आया था..?

मंजुला : (हसते) हां..आपकी लाडलीका फोन आया था.., वो लडकेके बारेमे पुछ रहीथी तो मेने कहा तेरे भाइको ही पुछले.., तो कहेतीथी उसे नही पुछना बस..अभीतो परीक्षा चल रही हे..

फीर दोनोकी बाते करते आंख लग गइ ओर मंजुने मुजे चार बजे उठादीया तो फ्रेस होके बहार आगया मंजु ओर चंदा दोनोही मेरा वेइट करते बेठी थी आज चंदा अच्छेसे तैयार होगइथी मेरे साथ जो आने वालीथी फीर हमने चाइ नास्ता कीया ओर हम चलने लगे..तब चंदा सरमाते मेरे साथ कारमे बेठ गइ तब मंजु बहोत खुस होते हस रहीथी ओर चंदा उसे देखते सरमसे पानीपानी होते मुस्कराती रही.. ओर हम चल पडे..

चंदा : (मेरी ओर सरारतसे हसते) तो आखीर बीवीको लेकर घुमाने नीकलही गये..हें..हें..हें..

देवायत : चंदा..बस तु खुस रहे.., ओर तेरा इधर रहेनेका आइडीया मस्त हे.. सब बेचके आजा.. मेरे साथ रानी बनाके रखुगा.., मंजुभी राजी हे.. हें..हें..हें.. देख तुजे मेरे साथ भेजते केसे खुस हो रही थी

चंदा : (सीरीयस होते) नही देवु..वो अपनी मौसीको रखने राजी हे..सौतनको नही..

देवायत : अरे उसे कहा पता तु उनकी मौसी बनके रहेती हेकी मेरी बीवी.. हम मेनेज करलेगे..

चंदा : (देवुकी ओर देखते) देवु..आर..यु सीरीयस.., क्या वाकइ तुम चाहते हो मे इधर आजाउ..?

देवायत : हां चंदा अब तेरे बीना रहेना बहुत मुस्कील लगता हे.. अभीतो ये डीलीवरी फीर बच्चे छोटे होने तकतो ठीक हे बादमे मुजे मुस्कील हो जायेगी.. तब मे तेरे बीना क्या करुगा..

चंदा : देवु..आइ लव यु..सो..मच.., मुजे नही पताथा तुम मुजे इतना चाहोगे.., मेरीभी हालत कुछ आपके जैसीही हे.. पता नही अब मेभी आपके बीना केसे रेह पाउगी..,इसके लीये मुजे धिरेनको तैयार करना पडेगा..

देवायत : चंदा सब होजायेगा.., बस अ‍ेक बार तु हां कहेदे.., फीर देख मे कुछना कुछ जुगाड करलुगा.. बस अ‍ेक बार बाबाको मीलने जाना हे.. देखता हु वो क्या कहेते हे..वेसेभी उनको सब पता चलही जाता हे..

अ‍ेसीही बाते करते दोनो पहोच जातेहे तब देवातत रामुकाका को चंदाका परीचय करवाते हे ओर काका को अपने पीताके खास दोस्त कहेके परीचय करवाता हे तब चंदा उनके पाव छुती हे तब रामुकाका खुसीसे गदगद होजाते हे.. फीर देवायत उनको पुरा खेतर अपनी खुली जीपमे बीठाते दीखाता हे.. तब चंदा सब देखते दंग ही रेह जाती हे फीर दोनो अपने गाडाउनमे ओफीसमे आके बेठते हे.. तब चंदाको वहाभी सब दीखाता हे..

देवायत : ओर ये मेरा पर्सनल रुम..जब सीजन होती हे तब मे यही आराम करते सोता हु.. सादीसे पहेले यही पडा रहेता था तीन तीन चार चार दीन घरही नही जाता था..हें..हें..हें..

चंदा : (हसते) अच्छा इसीलीये यहा फ्रिज ब्रीज टीवी सब रखा हे.. हें..हें..हें.. ओर बेडभी मस्त हे..

देवायत : (कमरसे पकडके खीचते) चल आजा आज इसकाभी उद्घाटन करही देते हे..हें..हें..हें..

चंदा : (सरमाते हसते छुटनेकी कोसीस करते धीरेसे) पागल हो गयेहो क्या..? कोइ देख लेगा..छोड..

देवायत : नही बेबी यहा कीसीकोभी आनेकी परमीसन नही जब मे आवाज देके बुलाउ तभी सब आते हे..

चंदा : नही देवु मेरे कपडे खराब हो जायेगे..वो मंजु देखेगी..तो.. सक करेगी.. प्लीज..मेरा अच्छा बेबी.. हम रातमे करेगेना.. तब मेरे बेबीको खुब प्यार करने दुगी..बस.. देखो दरवाजाभी खुला हे..

देवायत : (दरवाजा बंध करने जाते) बेबी अभी बंध करता हु..ओर सुन ये मेरा पर्सनल रुम हे यहा कोइ नही आता..,चल बीना कपडे नीकालकेही करेगे.. यहा जुकके खडी होजा..

तब चंदा बहुतही सरमाइ उनको पता था देवायत उनको चोदे बीना नही मानने वाला, तब वो हसते हुअ‍े खडीथी तभी देवायत उनके पीछे चला गया ओर पीछेसे चंदाको बाहोमे भरते उनकी गरदन चुमते उनकी सारी नीकालने लगा तब चंदा मदहोस होने लगी ओर सब कपडे नीकालके बडीही सावधानीसे अ‍ेक जगह कपडे रख दीये तभी देवायतभी कपडे नीकालके उसे पीछेसे बाहोमे भरते उनकी गरदनको चुमने लगा तब चंदा मदहोस होते बेडपे हाथ टीकाके खडी होगइ ओर सरमाते हसने लगी..




तब देवायतका लंड हवामे लेहराते चंदाकी चुतको देखते जटके मारने लगा तब चंदाने पीछे मुह करते देखलीया..लंडको देखतेही वो सरमसे पानीपानी होगइ ओर सर जुकाके खडी रही, तब देवायतने उनकी कमर दोनो हाथसे पकडली ओर लंडको पकडके पीछे चुतपे लगा दीया तब चंदाकी चुत पानी बहाते काफी गीली हो गइथी ओर देवायतने अ‍ेकही जटका मारा.. पुरा लंड चंदाकी चुतमे समा गया तब चंदाकी हल्की चीख नीकल गइ ओर उनकी आंख नसीली होने लगी वो देवायतकी ओर पीछे मुह करते कामुक नजरसे देखने लगी..




तब देवायत कमरको आगे पीछे करते जटके मारने लगा तब हर धकेके साथ चंदाकी आहे नीकलने लगी ओर जोरोसे सीसकारीया करती रही तब थोडीही देरमे वोभी कमरको पीछे धकेलते देवायतका साथ देने लगी ओर दोनोके बीच घमासान चुदाइ होने लगी.. तब चंदा अचानक बेडपे सर रखके जुक गइ ओर हाथको नीचे लेजाते अपनी चुतको सहेलाने लगी ओर जोरोसे सीसकारीया करते अकडते जडने लगी..

तबभी देवायत उसे जोरोसे पीछेसे चोदेही जा रहाथा तब वो अ‍ेक बार फीरसे कामुक होते हाथके बल बेडसे खडी होगइ ओर अ‍ेक हाथसे अपना बुब्स खुद मसलती रही तब देवायतने स्पीड बढादी ओर चंदाकी चुतमे जोरोसे जटके मारने लगा ओर उसने लंडको चुतमे जड तक घुसा दीया..ओर अपने गरम लावासे चंदाकी चुतको भरने लगा.. तब चंदाभी अ‍ेक बार फीरसे साथमे जड गइ..




तब वो जटसे खडी होते सीधी होगइ तो देवायतका लंड फच..आवाजके साथ बहार नीकल गया तब दोनोका काम रस चंदाकी चुतसे नीकलते उनके पैरसे नीचेकी ओर सरकने लगा तब चंदा जटसे अ‍ेक हाथसे अपने रुमालसे अपनी चुतको साफ करने लगी..

तभी देवायत उसे अंदर बाथरुममे लेगया जहा चंदाने अच्छेसे चुतको पानीसे साफ कीया ओर देवायतके लंडको पानीसे साफ करदीया फीर दोनोही फ्रेस होके बहार आने लगे तब चंदा कातील ओर कामुक मुस्कान करते देवायतकी ओर तीरछी नजरसे देखते मुस्कराती रही ओर दोनो दरवाजा खोलके बहार ओफीसमे आगये ओर दोनोही सोफेपे ीाथमे बेठ गये तब बेठते चंदाने कहा..

चंदा : (हसते) आप बहोत बदमास हो..आखीर अपने मनकी करही ली.. क्या मेरी भांजीके साथभी अ‍ैसा करते हो..?

देवायत : (जोरोसे हसते) नही..तेरी भांजी मेरे साथ अ‍ेसा करती हे..हें..हें..हें..

चंदा : (जोरोसे हसते) तुम बहोत कमीने हो..मेरी भांजी अ‍ैसी नही हे..मे उसे अच्छी तराह जानती हु..

देवायत : हां बेबी वोभी तुम्हारी तराह ही हे.. मुजसे बहोत प्यार करती हे.., तभीतो अपने पापासे बगावत पे उतर गइ थी.. फीर हमारी सगाइ करदी गइ.. क्या तुजे कभी नही बताया..? तेरीतो सहेली भी हे..

चंदा : (सरमाते) जी..मुजे सब पता हे..इन्फेक्ट मेनेही उसे कहाथाकी जीजुसे खुलके बात करले.. हें..हें..हें.., जानु तुम बाबाके बारेमे कुछ केह रहेथे मुजे सब जाना हे..अभी.., हमारे पास टाइम हे..ओर हम अकेले भी हे..

देवायत : हां बताता हु..पहेले ये बताओ क्या पीओगी.. चाइ या ठंडा..

चंदा : (सरारतसे नसीली नजरसे मुस्कराते) कुछ नही..अभीतो तुमने ज्युस पीलाया नीचे.. हें..हें..हें..




देवायत : (गाल चुमते हसते) वेरी फनी.., बोलाना..

चंदा : अरे मेरा बेबी सरमाताभी हे हें..हें..हें.., चाइही मंगवालो..हें..हें..हें..

तब देवायत हरीयाको आवाज देते चाइके लीये बोलता हेतो हरीया चला जाता हे तब देवायत कहेता हे

देवायत : चंदा.. क्या तुम वो मंदिरके बारेमे जानती हो..? जो हिमाचलमे हे प्रसीध्ध वहांका मंदिर जीनके दीनमे कइ कलर चेन्ज होते हे.., क्या वो मंदिर कभी देखा हे..?

चंदा : हां..देखा हे.., हम सादी करके हनीमुनके लीये वहीतो गये थे तब देखके आयेथे.. वहाके कीसी राजाने बनवाया था.. उनकी कइ रानीयाथी जो उनके खुदकी सगी बहेने ओर चाची उनकी दादीभी उनकी राानी थी.. उसने वहा अ‍ेक सादीकी परंपराभी सुरु कीथी.., जो आज तक चली आ रही हे.., तो उससे क्या..?

देवायत : बस वोही राजा.., बाबा केह रहेथे मेरा पोता होगा वो इश्वरका अंस होगा.. वोही राजा जन्म लेके मेरे पोतेके रुपमे आने वाला हे.., मुजे ज्यादा नही पता पर बाबा केह रहेथे वही यहा आके बहोत बडा बदलाव करेगा.., यहाभी वो अ‍ेसे कइ रीस्तेको नीभायेगा.. तब हमारे यहा कोइ रीस्ताही नही बचेगा.. वो सब प्रकृती को मानने वाले होगे.. बस इतनाही पता हे.. मुजे बाबासे बहोत कुछ जानना हे..

चंदा : (सीरीयस होते) क्या बाबा की बाते सच होती हे..? तुम सब मानते हो अ‍ेसी बातेको..?

देवायत : पता नही..अ‍ेसी बाते सच होतीभी हे या नही.., पर अ‍ेक बात हे..उसने जोभी हमारे बारेमे अबतक कहा वो सब बाते सच होती हे.., मेने मेरी ओर मंजुकी सादीके बारेमे पुछाथा तो कहा होजायेगी.. ओर मेरीभी तीन सादीकी बात कीथी.. तो अ‍ेक डरसा लगता हे.., मे मेरी मंजुको ओर तुमको धोखा देना नही चाहता..

चंदा : (गंभीर होते) देवु..तबतो तुम्हारी दो सादीतो होगइ.. दुसरी मेरे साथ.., हमने मंदिरमे फेरे लीये..मंगलसुत्र पहेनाया..मेरी मांग सींदुरसे भरी.. यहीतो सादी हे.. जो मेने तुमको उसी पल अपने आपको समर्पीत करदीया था.. तो क्या अ‍ेक सादी ओरभी बाकी हे..? कीससे.., देवु मुजे बाबासे मीलना हे..

देवायत : बेबी अ‍ेक दीन हम जायेगे.. सीर्फ हम दोनो.. मे ये बात मंजुसे छुपाना चाहता हु.. क्युकी वो मेरी तीन सादीकी बात सुनके दुखी होजायेगी.. मे तुम दोनोसे बहोत प्यार करता हु..

मालती : (अंदर चाइ लेके आते) लीजीये मेमसाब चाइ पीजीये फीर बरतन बादमे लेजाउगी..

फीर मालती चाइ रखके चली गइ ओर देवायतने चंदाको पानी पीलाया फीर दोनोने अ‍ेक अ‍ेक उठालीया ओर चाइकी चुस्की मारते बाते करते रहे तब चंदाने फीरसे बातोका दोर सम्हाल लीया..

चंदा : जानु.. मुजे उनकी बातचीतसे लगता हे वो सबकुछ जानती हे.., वो बहुतही स्ट्रोंग हे.., अभी परसो साम धिरेन आयेगा तब उनको लेने जाना हे तो मुजे लगताहे तब हम बाबाको मील सकते हे हम दोपहर खाना खाके सीधेही बाबाके पास चले जायेगे.. फीर वापसीमे धिरेनको लेके आजायेगे..क्या कहेते हो..?

देवायत : क्या धिरेनका फोन आया था..?

चंदा : हां..सुबही आयाथा..केह रहाथा परसो सामको आजाउगा.. जीजुको लेने भेज देना..हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) हां.. अब वोभीतो मेरा जीजु होजायेगा..हें..हें..हें..

चंदा : (सरमाते हसते) हां.. साला भी.., जीजा भी..ओर..बेटा भी..

देवायत : चंदा अ‍ेक बात पुछु..? अगर धिरेनके सामने तुजे अपनाना पडेतो तु क्या करेगी..?

चंदा : (हसते) इम्पोसीबल..अ‍ेसा कभी होने वाला नही.. फीरभी अपनाना पडेतो मे धिरेनकी परमीशन चाहुगी..जो वो कभी नही देगा..भीरभी परमीशन देदी तो फीर मे खुसी खुसी तुमको अपना लुगी.. आइ प्रोमीस.., फीर आपके लीये सबकुछ करुगी.., इनफेक्ट हमारा बच्चा भी.., अगर तुम चाहोतो..

देवायत : बस तेरे मुहसे यही सुनना चाहता था.., चंदा मेरा दील केह रहा हे अ‍ेक दीन सबकुछ होगा जो अभी तुमने बोला हे.. पता नही मेरी अंतरआत्माकी आवाज आ रही हे..

चंदा : (सरमाते) तबतो आपके मुहमे घी सकर..कास अ‍ैसा सब होपाता.., पर अगले जन्मके लीये आपकी बुकींग पकी हे..हें..हें..हें.. हम दोनोही मौसी भांजी आपको छोडने वाली नही हे..हें..हें..हें..

अ‍ेसेही बाते करते दोनोको पताही नही चला साम ढलनेको आइ हे फीर दोनोही अचानक खडे हो जातेहे ओर हवेलीकी ओर नीकल जातेहे तब दोनोही रास्तेमे मस्ती मजाक करते पहोंच जातेहे तब मंजु उनको देखके खुस हो जातीहे.. फीर दोनो फ्रेस होके अंदर आजाते हे ओर होलमे सोफेपे बेठ जातेहे तब मंजु देवायतसे चीपकके बेठ गइ ओर उनकी कमरमे हाथ डालके देवायतके गाल चुमलीये तब चंदा हसने लगी..

चंदा : (हसते मजाक करते) देखले.., तेरे पतीको सही सलामत सोंप रही हुं हें..हें..हें..

मंजुला : (वोभी हसते मजाकमे) मौसी मुजे कोइ गम या अ‍ेतराज नही, बस मेरे लीयेतो यही काफी हे आप सही सलामत वापस लोट आइ..हें..हें..हें..

तब चंदा सरमसे पानीपानी होगइ ओर दांत पीसते हसते चंदाको मुका मारदीया.. तब तीनोही हसने लगे..,तभी दुसरी ओर सरपंच सामको उठतेही फ्रेस होगया तो रश्मीने सरपंचपे गुसेसे चाइ नही बनाइ थी तो सरपंच उनपे भडक गया ओर रश्मीको दो चांटा जड दीया तब रश्मी सोक्ट होगइ ओर रोने लगी..,तो सरपंच अपनी जीप लेके मुनीमके घरकी ओर चला गया..उसे आज चाइकी तलप हुइ.. जब वो वहा पहोच गया तब मुनीम उनका बेसब्रीसे इन्तजार कर रहाथा तो सरपंचको देखतेही अंदर लेगया....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १३

तब चंदा सरमसे पानीपानी होगइ ओर दांत पीसते हसते चंदाको मुका मारदीया.. तब तीनोही हसने लगे..,तभी दुसरी ओर सरपंच सामको उठतेही फ्रेस होगया तो रश्मीने सरपंचपे गुसेसे चाइ नही बनाइ थी तो सरपंच उनपे भडक गया ओर रश्मीको दो चांटा जड दीया तब रश्मी सोक्ट होगइ ओर रोने लगी..,तो सरपंच अपनी जीप लेके मुनीमके घरकी ओर चला गया..उसे आज चाइकी तलप हुइ.. जब वो वहा पहोच गया तब मुनीम उनका बेसब्रीसे इन्तजार कर रहाथा तो सरपंचको देखतेही अंदर लेगया....अब आगे

सरपंच : अरे यार पहेले भाभीसे कहेके अ‍ेक कप चाइ पीलादे.., सालीने दीमागका दही करदीया..

मुनीम : (हसते) अरी..ओ..चंपा..देख कोन आया हे.., राघवजीके लीये जरा अ‍ेक कप चाइ तो बनादे..

चंपा : (राघवका नाम सुनतेही खुसीसे बहार आते) जी..आगये आप..? आइअ‍े.. अभी बनाके लाइ..

कहेते खुसी खुसी चाइ बनाने लगी..उनकी चुत राघवको देखतेही फडफडाने लगीथी.. चाइ बनाके अपने यार राघवको देके सीधेही बहार आंगनमे चली गइ ओर दरवाजा अच्छेसे लोक करके अंदर आगइ फीर होलकाभी दरवाजा अच्छेसे बंध करदीया ओर अपने रुममे जाके बेडकी चदर सही करके वहा कुछ छोटे कपडेके टुकडेको रखदीया ताकी अपनी चुतको अच्छेसे साफ कर सके.. फीर आइनेके सामने बेठते अपने आपको सवारने लगी बालमे कंगी लगाके हल्कीसी लीपस्टीक करके गालोपे हल्कासा मेकअप करने लगी

फीर बाथरुममे जाके सारी उची करली ओर अपनी पेन्टी नीकालके वही खुटेपे रखदी.., यानी चुदाइकी पुरी तैयारीया करने लगी, बस अब इन्तजार थातो अपने पतीके लुढकनेका.., उसे पताथा उनके पती ज्यादा दारु बरदास्त नही कर पाता ओर बेहोसीकी हालतमे चला जाता हे तब सरपंच उनको वही सुलाके रुममे आजाते हे फीर दोनोकी चुदाइकी रासलीला सुरु होजाती हे.., जबसे राघव सरपंच हुआहे तबसे चंपा लगभग हरदीन राघवसे चुदाइ करवाती रहेती हे.., क्युकी मुनीम अब उमरकी वजहसे उसे ठीकसे चोद नही पाता..

राघव : (चाइ पीते) मुनीम.., तेरे पास विदेसी माल कहासे आ गया..?

मुनीम : (हसते जुठ बोलते) हे.. मेरा अ‍ेक दोस्त.., जो सहेर गयाथा वहीसे लेके आया हे दो लाया था अ‍ेक मुजे देदी ओर दुसरी खुदने रखली.., क्या मस्त माल दीखता हे.., बस आपहीका वेइट कर रहा था..

सरपंच : (कप रखते) अच्छा इतना बढीया माल हे..? तबतो आज दो तीन पेग लगाना पडेगा..चल नीकाल.. कीतने दीन होगये अच्छा माल नही पीया.., वेसेभी आज रश्मीने दीमाग खराब करदीया हे..

तब मुनीम हसते हुअ‍े दोनोका पेग भरता हे तब चंपा चखनेकी डीस लेकर आतीहे ओर सरपंचकी ओर कामुक स्माइल करते डीस रख देतीहे ओर अंदर जाते मुनीमसे छुपके सरपंचको अंदर आनेका इसारा करते चली जाती हे फीर दोनोही बाते करते दारुकी चुस्की मारने लगतेहे तो मुनीम दो तीन शीप मेही उनका ग्लास खाली कर देता हे ओर फीरसे दारु ग्लासमे डालते सरपंचको पुछने लगता हे..

मुनीम : राघवजी अ‍ेक बात समजमे नही आइ.., खुद ठाकुरने आपको सरपंच बनाया हे फीरभी इनसे आपकी क्या दुस्मनी हे.., जो मुजसे इतने सारी जमीनके कागजात नीकलवा लीये.. क्या कोइ पुरानी रंजीस..

राघव : (दारु पीते) मुनीम वो बात तेरे पले नही पडेगी.., बात सीर्फ जमीनके कागजातकी नही.. कुछ ओरही हे.., तु इस लफडेमे मत पड.., मुजे जो चाहीये बस अ‍ेक बार मेरे हाथ लग जाये..

मुनीम : (दारु खतम करते) राघवजी..बुरा मत मानना.., जबतक मुजे पुरी बातका पता नही चलेगा तबतक मे आपकी मदद केसे कर सकता हु.. मुजेभी पता होना चाहीये कोनसा कागज आपके काममे आने वाला हे

राघव : (ग्लास भरते) बाततो तेरी सही हे.., सुन..मुजे ठाकुरकी वो जमीन चाहीये जीसमे उनके पुर्खोने धनका पीटारा गाडके रखा हे.., तेरी ओर मेरी दोनोकी पीढीया अ‍ेस करेगी.., ओर खबरदार जो ये बातका जीक्र कीसीके सामने कीया तो.., यही तेरे ही घरमे जींदा गाड दुगा..

मुनीम : (दारु भरते) मेरी क्या सामत आइहे जो कीसीको कहुगा.., इनमे मेराभीतो फायदा हे.., हें..हें..हें..

राघव : (हसते) हां.. अब समजा.., समजमे नही आता ये बात कोन जानता हे.., साला मीलेतो वही चमडी उखाडके पुछ लेता.., खुद देवाभी नही जानता.., वरना कबका नीकाल चुका होता..

मुनीम : राघवजी.., तबतो इन कागजके टुकडोको ढुंढना छोड ही दीजीये.., आप कोइ अ‍ेसे इन्सानको पकडीये जो हवेलीसे तालुकात रखता हो.., ओर पुराना हो.., वोही सब बाते जानते होगे..

राघव : (दारु पीते मुनीमके साामने देखते) साला.. बाततो तेरी सही हे.., तीन पेग पेटमे जातेही तेरा दिमाग काम करने लगा हे.. ले..अ‍ेक पेग ओर लगा.., ओर मेराभी भरदे.. पुरा पटीयाला..हें..हें..हें.., अ‍ेसा आदमी कहा ढुंढु जो वहाकी खबर रखता हो.., ओर जो जानतीथी वोतो चली गइ.., वही काम करतीथी..

मुनीम : (दोनो ग्लास पुरा भरते) अच्छा कोनथी वो.., आप कीसकी बात कर रहे हे.. वहातो आपकी माताजीभी काम करती थी.. कही.. वो..तो..

राघव (सर जुकाते) हां.. वहीतो थी.. जो आधी बातही कहेके चली गइ.. वोभी मेरे बापुको बता रहीथी तो मेने सुनलीया था.., वरना मुजेभी कहा पता था.., बापुजीभी चले गये.. पता नही उनको क्या हुआथा अच्छे भलेतो थे.. बस रातको मांके साथ जगडा हुआ.. ओर अ‍ेक दीन सुबह उठेही नही..

मुनीम : (मनमे) मादर--, तुजे क्या मालुम तेरी मां कोन थी.., वो देवायतके बापकी रखैल थी.. पता नही तुभी इनकी ओलाद हो.., तेरा बापतो साला नामर्द था तभीतो तेरी मा देवाके बापसे चुदती थी.., ये बात तेरे बापको पता चल गइ ओर तेरी मांनेही तेरे बापका काटा नीकाल दीया.., ओर भोसडीके तुभी यही नीकला.. तभीतो तेरी बीवी अब देवायतसे चुदवाने लगी हे..

राधव : ओ मुनीमके बच्चे.. क्या सोच रहा हे.. ग्लास भरलीयेतो देनां.., ओर तु क्या केह रहा था..?

मुनीम : (बातोका दोर सम्हालते) राधवजी.. वो राजाथे..उनकी तीन पीढीया चली गइ हे.., बडे ठाकुरकोभी नही पता होगा.. वरना कोइतो इसका जीक्र करता.., ओर पीढीयोके लीये बच्चे पैदा करना जरुरी हे.. जो तुम्हारे पासभी नही हे ओर मेरे पासभी नही हे.. अ‍ैस क्या खाक करेगे.. अगर मीलभी जायेतो हम दोनो क्या उखाड लेगे..? हमारे पास वारीस भीतो होना चाहीये.. आपकी बात अलग हे.. मेतो साला कुछ करभी नही सकता..

राघव : (दारु अ‍ेकही बारमे खाली करते) मादर--, साला.. मुह खोलताहे तो कडवी बातेही नीकलती हे.., बहेन--, इसी बातकातो आज रश्मीके साथ जगडा हुआ.., उनकोभी बच्चा चाहीये.., अब नही होरहा हेतो क्या करु..? लंड काटके फेंकदु.., कहेतीहे सहेर जाके चेक करवालो..

मुनीम : (लडखाती आवाजमे) या..र..माफ..करना.. भाभी..सही..के..रही..हेहेहे.., अ‍ेक बार..चेक..करवालो..

राघव : (गुसेसे) भोसडीके..अब..तु..भी..भासण..म..त..जाड.., क्या हम नामर्द हे? बात करता हे.., यार नसाही उतार दीया चल दोनोका पेग भर.. आजतो पुरी बोतल खाली करनी हे.., भेण--, भरनां..

तब दोनोकोही होस नही रहेता फीरभी महा मुस्कीलसे मुनीम दोनोका पुरा ग्लास भरता हे.. तब दोनोही पीने लगते हे.., तब दुसरी ओर चंपा अपने बेडपे पुरी नंगी होके लेटे हुअ‍े अपनी चुतमे उंगली अंदर बहार करते अपने आपको सरपंचसे चुदवानेके लीये तैयार कर रहीथी..




फीर थोडी देरके बाद चंपा बहार आके दरवाजेके पास खडी रहेते सरपंचको ओर दारु ना पीनेको इसारा करतीहे ताकी वो होसमे रेह सके ओर उनकी चुदाइ अच्छेसे कर सके.., लेकीन आज राघवका मुड खराब था..मुनीम ग्लास खतम होतेही वही लुढक गया..तब चंपा बहार आगइ ओर राघवका हाथ पकडते उसे अपने बेडरुममे लेजाने लगी.. तो राधवभी उनके साथ लडखडाते कदमोके साथ जाने लगा..

चंपा : (धीरेसे) समजतेही नही.., इतनी दारु क्यु..पीली.. होसभी नही हे.., अब क्या खाक करोगे..

राघव : (लडखडाती आवाजमे) अरे डार्लींग.., तुतो कर सकती हेना.. चल सुरु होजा.. क्या मस्त..चुसती..हे..

चंपा : (बेटपे सुलाते) हां.., अबतो सब मुजेही करना पडेगा.., चलो लेट जाओ.. कपडेभी नीकालना पडेगा..

कहेते चंपा राघवके सर्टके बटन खोलने लगती हे.. फीर सर्ट हटाके पेन्टकी क्लीप खोलके पेन्टको थोडा नीचे सरका देती हे..ओर राघवकी चडीका नाडा खीचके उसेभी नीचे करलेती हे तब राघवका मुरजाया लंड बहार आजाता हे तब चंपा उसे हाथमे पकडके सहेलाने लगती हे.., जब थोडा सख्त हुआ तब वो उनकी कमरके पास जुकके लंडको मुहमे भरलेती हे ओर लंडको अंदर बहार करते मुहसेही चोदने लगतीहे..




तब बहारकी ओर आज बहोत ज्यादा दारुकी वजहसे मुनीम बेहोसीकी हालतमे चला जाता हे ओर ये वो दारुथा जो रमेशने उसमे अ‍ेक देसी दवाइ मीलाके दीयाथा.. जीनकी वजहसे दवाने अपना काम करना सुरु करदीया था.. दोनोके खुनमे रक्तचाप बढने लगा.., तब राघवकाभी अ‍ेकदम रक्तचाप बढ गया ओर लंडमे अचानक तनाव बढ गया.., तो चंपाने मुहसे लंड नीकाल दीया ओर उनकी कमरपे पैर फेलाके बेठ गइ..

फीर अपनी कमरको थोडा उचा करते राघवके लंडको पकडलीया ओर अपनी चुतपे सेट करते धीरे धीरे बेठने लगी ओर पुरा लंटको चुतमे लेलीया फीर हल्का हल्का उछलते लंडको चुतमे अंदर बहार करने लगी ओर आनी आंख आधी चडाके राघवको खुदही गांडको गोल गोल घुमाते चोदने लगी..




थोडीही देरकी चुदाइके बाद वो उछलते उछलते थकने लगी तब राघवके उपर जुकुके पैर सीधे करलीये ओर उनके उपर सते सोतेही कमर हीलाके सोट मारने लगी तो थोडीही देरमे अकडके जडने लगी.. तब राघवके लंडसे पीचकारीया नीकलने लगी.. तब राधव जडनेकछी वजहसे बेहोसीकी हालत मे चला गया..

तब राधवका खुन उनके सरीरमे दोडने लगा ओर सरमे नस फुलने लगी तो राघवको बेहोसीमे ही दोरा पडा उनके मुहसे जाग नीकलने लगे.. तब चंपाने सर उचा करते देखलीया ओर वो गभरा गइ तब फटाफट नीचे उतर गइ ओर अपनी चुतको साफ करके खुदके कपडे पहेनने लगी फीर राघवके लंडको कपडेसे साफ कीया ओर उनके कपडेभी फटाफट सही करदीया.. फीर उनके मुहको पोछने लगी.. फीर बहार चली गइ..

देखातो उनका पतीभी अ‍ेसेही हालतमे पडा था उनके मुहसेभी जाग नीकल रहेथे.. ओर उनका सरीर जटके मार रहाथा..तब चंपा अ‍ेकदम गभरा गइ उनको समजमेही नही आरहा थाकी क्या करे.. कीसीको बुलाके मदद मागे.., लेकीन कोइ मददके लीये आयेगातो राघवको उनके बेडपे देखेगा तो बदनामी होगी.. इसी डरसे वो फटाफट अंदर चली गइ ओर राघवको उठानेकी कोसीस करने लगी तब राघवके हाथ पैर मुडने लगे..

वो जेसे तेसे करते राघवको खीचने लगी ओर बेडसे नीचे धकेल दीया तब राघवका सर जमीनपे टकरा गया.. ओर वो जेसे तेसे राघवको खीचते बहार तक लेआइ ओर दिवालके सहारे बीठानेकी कोसीस करने लगी तो राघवके नाक ओर कानसे खुन बहेने लगा.. तो वो फटाकसे दरवाजा खोलते बहार दोड पडी ओर अडोस पडोसमे दो तीन मर्द थे उसे बुलाके लाइ तो सब भागके मुनीमके घर आने लगे तो दोनोकी हालत देखके सब गभरा गये.. तब कीसीने देवायतको फोन करके सब जानकारी देदी..

तब देवायत कार लेके जटसे नीकल गया.. तो रास्तेमे उसे भानु घरकी ओर जाते मीला तो उसने भानुकोभी साथ लेलीया जब वहा जाके देखातो चंपा रो रहीथी ओर लोग मुनीम ओर सरपंचको मुनीमके घरकी बहार जोलीमे लेके नीकलते नजर आये.. तो देवायतने उनको फटाफट अपनी जीपमे डालनेको कहा.. जब लोगोने दोनोको जीपमे डाला तब देवायत ओर भानु दोनोको देखने लगे.., तो दोनोही कुछ देरके लीये गभरा गये.., उसेभी अंदाजा नही थाकी सरपंच ओर मुनीमकी अ‍ैसी हालत होगी..

तभी चंपाभी जीपमे बेठ जाती हे ओर भानुभी देवायतके पासवाली सीटमे बेठ जाता हे देवायतने चीप सहेरकी ओर भगादी.. आधे घंटेमेही अ‍ेक सरकारी बडी होस्पीटलमे पहोच गये वहा भानुने दोनोका केस नीकलवाया तब इमरजन्सीमे दोनोका इलास सुरु होगया तब चंपा अभीभी रो रहीथी.. डाक्टर ओर तीन नर्स दोनोके खुनके सेम्पल लीये ओर कुछ ओर टेस्ट करने लगे तबतक डोक्टर उन दोनोको इन्जेक्शन देने लगा..

देवायत : (चंपाको) भाभीजी ये सब केसे हुआ.., क्या कर रहेथे दोनो.. (हालाकी देवायत सब जानता था)

चंपा : (रोते हुअ‍े) क्या करेगे.. इनकातो रोजका हुआ.., दोनोही दारु पी रहेथे.. पता नही आज कोनसी दारु पीली.., दोनोही आज कुछ ज्यादा पी गयेथे पुरी बोतल खाली करदी.. हें..भगवान.. बचाले इनको..

देवायत : भाभी रोइअ‍े मत सब ठीक होजायेगा.., डोक्टर देख रहेहेनां.. सांत होजाइअ‍े..

चंपा : (रोते) देखा.. दोनोही तुम्हारे दुस्मन हे.. ओर आज तुमही इनको बचाने आ गये.., भगवानने इनको इनकी सजा देदी.., देवरजी हो सकेतो इनको माफ करदो.. सायद भगवान आपकी सुनले..

भानु : (केस नीकलवाके आते) देवा क्या कहेते हे डोक्टर.. येलो.. दोनोके केस..

देवायत : इनका हम क्या करेगे.. जा डोक्टरको देके आ..

डोक्टर : (पास आते) ये दोनोके रीस्तेदार कोन हे..? (देवायतकी ओर देखते) क्या आप हो..?

देवायत : जी..ये रही इनकी पत्नी.. कहीये डोक्टर क्या हुआ हे..?

डोक्टर : देखीये ज्यादा दारु पीली हे सायद जहेरीली हे.. दोनको दीमागका दोरा पडा हे अ‍ेम आर आइ करना पडेगा फीर कुछ केह सकतेहे अभीतो दोनोको अ‍ेकमीट कर रहे हे आप साइन कर दीजीये..

चंपा : देवरजी आपही करदो.. मे अभागन कहा पढी लीखी हु..

देवायत : लाइअ‍े डोक्टर मे दोनोकी साइन कर देता हु.. ये हमारे गांवके सरपंच हे..

डोक्टर : कमालहे..सरपंचही अ‍ेसा करता हे तो दुसरे लोगोको क्या कहे.. लीजीये..कर दीजीये..

तभी देवायत दोनो कागजपे साइन करता हे तभी अ‍ेक आदमी अपनी मोटरसाकीलपे राघवकी बीवी रश्मीको लेके आता हे तब रश्मी दोडके आइ ओर राघवकी हालत देखके रोने लगी तब बडी मुस्कीलसे चंपा ओर भानुने उसे सम्हाला.. देवायत डोक्टरके पास था फीर दोनोको अ‍ेक सेमी स्पेसीयल रुममे सीफ्ट करदीया तब वो तीनोभी रुममे चले गये ओर बेठ गये तभी दो नर्स उनको ट्रीप लगाने लगी..

रश्मी : (चोर नजरसे देवायतकी ओर देखते) भानुभाइ क्या हुआ था इन दोनोको..?

भानु : कुछ नही भाभी..बस रोजका..दोनो सराब पी रहेथे..लगता हे आज जहेरीली सराब आगइ होगी..

रश्मी : (गुस्से से) अच्छा हुआ.., बहोत पाप कीये हे इन्होने.. कीसीभी बहु बेटीको नही छोडा.. तो भगवानने ही सजा देदी.. अब भुगतने दो..

भानु : भाभी अ‍ेसा नही कहेते.., अपतीहे आपका.. गुसा थुकदो..

रश्मी : क्या खाक गुसा थुक दु.., पता हे.. कल मुजे कीतना मारा.. मेरी गलती क्या थी.. बस ये ठाकुर साहबके घर जातीहु इनकी बीवीको मीलने.. बस मुजपे सक करतेहे.. की देवायतजीके साथ मेरा.. छी..

चंपा : (कंधेपे हाथ रखते) छोडीयेना..दीदी.., ये पुरुष लोग होतेहे अ‍ैसे, इससेतो अच्छे ये ठाकुर साहब सरपंच थे वोही अच्छा था.., पता नही इनसे क्या दुस्मनी हे.. फीरभी इनको बचाने लेआये..

भानु : भाइ आप लोग बेठीये.. मे इन दोनो भाभीओका खाना बाना लेकर आता हु.. खायाभी नही होगा..

थोडी देरके बाद स्टाफ वाले अ‍ेक अ‍ेक को लेकर अ‍ेम.आइ.आर करने ले गये तबतक भानुभी दोनोका खाना लेकर आगया तब हमने दोनोको जबरदस्तीसे खीलाया तब डोक्टर सब रीपोट लेके आगये..

डोक्टर : आप ठाकुरसाब हेना..? अभी हमारे पास आपकी सीफारीस आइ हे.. मेने दोनोकी रीपोर्ट देखी.. ये.. दोनोकी दीमागकी नसे फट गइ हे.. हम इलाज कर रहे हे ३६ घंटे हम कुछ नही केह सकते.. इनके लीये बहुत भारी हे.. बाय चान्स बचभी गये.. तोभी हमेसाके लीये बीस्तरमेही रहेगे.. सब सुन ओर देख तो सकेते लेकीन अपने आप हाथभी नही हीला सकते अ‍ेसी पोजीसन होगी..

देवायत : देखीये डोक्टर.. कोइ स्पेसीलीस्टको बुलाना हे बुला लीजीये चार्ज मे देदुगा.. ये बचना चाहीये..

डोक्टर : ठाकुरसाब हम पुरी कोसीस कर रहे हे.. इनका दीमागही डेमेज हो गया हे.. आपतो समज सकते हे.. बाकी हम आपको परसोही बता सकते हेकी कीतनी प्रोग्रेस हुइ हे.. मुजे नही लगता कोइ चान्स हे..

इतना कहेके देवायतके कंधेपे हाथ रखके डोक्टर चले गये तब चंपा फीरसे आंसु बहाने लगी इस बार उनको रश्मीने सम्हाला.. लेकीन इस बातपे रश्मीको कोइ फर्क नही पडा बस वोतो देवायतकी ओर अ‍ेक आस.. भरी नजरोसे देखतीही रहेती थी.. उनको अब सरपंचसे नफरत होने लगीथी जबसे देवायतके संपर्कमे आइथी तबसे देवायतकोही अपना सब कुछ मानने लगी थी.. ओर उसने तैयभी करलीया थाकी अब जींदगी भर देवायतकी रखैल बनकेही क्युना रहेना पडे.. वो इन सबके लीये मन बना चुकी थी..

तभी रातमे देर होजानेकी वजहसे मंजुका देवायतके फोनपे फोन आता हे..तब देवायत उनको सारी बात बता देता हे.. ओर मंजुको देर लगनेकी बात करते कहेता हे

देवायत : मंजु हमे आनेमे देर लगेगी दोनो खाना खाके सोजाना मे रातमे आके सोजाउगा..

मंजुला : लेकीन आपने खानाभीतो नही खाया..

देवायत : अरे वो टेबलपे ढकके रख देना.. मे आके खा लुगा.. वो दया ओर रजीयाभी बेचारी थक गइ होगी.. तु मेरी चीन्ता मत कर.. हमे देर होजायेगी.. भानुभी साथ हे..

मंजुला : चलो तबतो ठीक हे.. रखतीहु फोन.. (फोन काट दीया तब देवायत रश्मीकी ओर देखते)

देवायत : भाभीजी अब आप दोनोभी आराम कीजीये इनकी देखभालके लीये नर्स हे.. अब हम चलते हे..

रश्मी : ठाकुरसाब आपका बहोत बहोत सुक्रिया.., वाकइ आप देवता हो..

चंपा : हां देवरजी अगर जींदगीमे हम कभी आपके काम आ सके तो याद कीजीयेगा..

देवायत : अरे ये आप क्या केह रही हे.. आप दोनोतो हमारे अपने हे.. आपको कोइ तकलीफ नही होने दुगा लीजीये.. ये कुछ पैसे रख लीजीये काम आयेगे.. फीर मे परसो डोक्टरको मीलने आता हु.. तबतक दोनो अपना खयाल रखना.. ओर जरुरत पडे तो कल साम भानु चकर लगाने आजायेगा..

रश्मी : ठाकुरसाब पैसेकी जरुरत नही हे मे लेके आइ हु.. चंपाभाभी को चाहीये तोभी मेरे पास हे..

फीर देवायत ओर भानु दोनो वापस गांवकी ओर चलते हे.. तब भानु देवायतसे बात करता हे..

भानु : भाइ मुजे लगता हे कुछ ज्यादाही हो गया.., इतना सबकुछ होगा अंदाजा नही था..

देवायत : भानु भुलजा सब.. इन मादर--की यही सजा हे.., तुजे पता हे ये सरपंत रमेशकी बीवी ओर उनकी लडकीको भी छेड चुका हे.., ओर रमेशकी लडकीतो बेचारी कोलेजमे पढ रही हे.. ओर घरपे ट्युशन कराती हे.. कीतनी मासुम हे.. भडवा इनके उपर नजर

गडाये बेठा था.. बाकी रही इन दोनो भाभीओकी बात इनको हम सम्हाल लेगे.. वेसेभी हमे हमारे बच्चे सम्हालनेके लीये कोइतो चाहीये था इनको नोकरीपे रख लेगे..

भानु : (हसते) हां.. दोनो काम होजायेगा बच्चेभी सम्हालेगी ओर बच्चेके बापको भी.. हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) कीतना कमीना हे तु.., वेसेभी मुजेतो कबसे सम्हालही रही हे.. क्या फर्क पडता हे.. तुजे पता हे आज सरपंचने रश्मीको बहोत मारा था.. मेने उनके चहेरेपे नीशान देखे.. कीतना हेवान था वो..

भानु : भाइ तबतो इनको अपने पतीसे छुटकारा मील जायेगा.. ओर मील जायेतो अच्छा हे.., भाइ कुछतो होगा.. जो ये दोनो आपके पीछे पडे थे.. आप थोडा डीपमे जाओ..मतलब तहेकीकात करो..

देवायत : (हसते) ठीक हे.. आगे देखते हे.. क्या होता हे.. अभीतो खरीदी करने जाना हे..इनके बारेमे सोच..

भानु : भाइ सोचना क्या हे..जब जाना हो.. केह देना मे लताको तुम्हारे साथ भेजदुगा..

अ‍ेसीही बाते करते दोनो गांव आजाते हे तब भानु अपनी जीप लेके चला जाता हे ओर देवायत कार लेके घर आजाता हे तब रातके ११ बज चुकेथे.. सब सो चुके थे तो देवायत धीरेसे आवाज ना करते अपने रुमका दरवाजा खोलके देखता हे.., मंजु गहेरी नींदमे सो चुकीथी तो धीरेसे दरवाजा बंध करके चंदाके रुमकी ओर बढता हे वहाभी धीरेसे दरवाजा खोलके देखता हे तब चंदाभी अपने सरपे हाथ रखके लेटी हुइथी

तो वहाभी दरवाजा धीरेसे बंध करके डाइनींग टेबलपे आके बेठ जाता हे.. तभी पीछे कीसीका होनेका आभास हुआ.. पीछे मुडके देखातो चंदा उनके पीछे खडीथी.. वो अ‍ेसेही जागते देवायतका वेइट कर रहीथी जब दरवाजेकी आहट हुइ तब उसने देवायतको देख लीया था तो उठके पीछे आगइ.. ओर देवायतके पासकी चेरपे बेठ गइ.. ओर देवायतको खाना परोसने लगी.. फीर अपने हाथोसे देवायतको खीलाने लगी.. तो देवायतभी चंदाको अपने हाथोसे खीलाता रहा दोनो अ‍ेक दुसरेको खीलाते रहे..

देवायत : (धीरेसे) क्या अभी तक जाग रही हो..?

चंदा : (धीरेसे खाना खीलाते) हां जब तक मेरा पती नही आता नींद कहा आती हे.., बहोत देर करदी..?

देवायत : नही चंदा अ‍ेक होस्पीटलके काम गया था इसीलीये देर होगइ.., क्या मंजुने खाना खा लीया..?

चंदा : हां खीला दीया.., आज कल मेरी बहोत चीन्ता करती हे.. हें..हें..हें..

देवायत : केसी चीन्ता..? क्या आपको कोइ प्रोबलेम हे..?

चंदा : नही नही.., कहेती थी मौसी आप सादी करलो भाडमे जाये दुनीया ओर ये रीवाज.., कहेतीथी धिरेनको मे समजा दुगी.., आप पुरी जींदगी अकेले केसे काटोगी..? कहोतो मेरी सैतन बनादु.. हें..हें..हें.. पता नही क्या क्या कहेती थी.. मुजेतो बहोत सरम आइ.. कैसा मजाक करती थी..

देवायत :(हसते) अच्छा अ‍ैसा कहा..? तो फीर आजा.. करले मुजसे सादी.. हे..हें..हें..

चंदा : (सरमाके हसते) अब आपभी मजाक करो.., अरे बाबा हमने सादीतो करली हे.. बेचारी.., देवु मुजे आज उनको धोखा देना बहोत बुरा लगा.. कास मेरी भांजी ना होके मेरी सगी बहेन होती..

अ‍ेसीही प्यार भरी बाते करते दोनो खा लेते हे फीर चंदा उसे हाथ पकडके अपने रुममे लेजाती हे.. तब अ‍ेक रुममे खीडकीसे दोनोको अ‍ेसे अ‍ेक दुसरेको खाना खीलाते बाते करते देख रहीथी जो उनकी बाते साफ रातके सनाटेमे सुन रहीथी, वो आंखे उन दोनोका प्यार देखके खुसीके मारे गीली होगइ, वोथी मंजुला.. जो देवायतको देखने खीडकीके पास आइथी की देवायत आगया की नही..

तब बहार डाइनींगपे चंदा ओर देवायतको अ‍ेक दुसरेको खीलाते वही खडी रहेके देखती रही.. आज उसे अपने पतीको सम्हालनेके लीये सौतन मील गइथी फीर अपने बेडपे जाके लेट गइ ओर दोनोके बारेमे सोचती रही.. उनको देवायतकी दुसरी सादीसे कोइ अ‍ेतराज नही था.. वो मनही मन खुस होते चंदाको अपनी सौतन बनानेका मन बना चुकीथी लेकीन अभी ये बात दोनोके सामने जाहीर होने देना नही चाहती थी..

तब बाजुके रुममे आज चंदा ओर देवायत दो जीस्म अ‍ेक जान होगये थे दोनोही प्यारके आगोसमे गोते लगा रहेथे तब चंदा देवायतके नीचे लेटके मदहोसीमे देवायतके हर धक्केको आह.. की आवाजके साथ बरदास्त कर रहीथी.. दोनोही कामुक होके अ‍ेक दुसरेमे समा जानेकी कोसीस कर रहेथे.. चंदा देवायतकी पत्नी होनेका हर सुख देवायतसे बटोर रही थी.. अब उसे धिरेनको पता चलनेका डर कम हो गयाथा..




तब दुसरी ओर भानुके गांवभी आज कामदेव अपने फुलोके बान लेके लताके रुममे बीराजमान थे.. जब भानु घर पहोचा तब भावना ओर सरला सो चुकीथी लेकीन लता कामाग्नीमे जलती जाग रहीथी वो पुरी तराह नंगी होकर बेडपे भावेसको लेकर लेटी हुइथी.. भावेशको उनके बगलमे लीटाके अ‍ेक हाथ नीचे लेजाते ओर आधी आंख चडाके चुतको सहेला रहीथी..




लता आंख बंध करते लखनके साथ सुहागरातको इमेजींग करते जोरोसे सीसकारीया कर रही थी.. तब उनको पता नही थाकी भानु अंदर आ चुका हे.., ओर सीसकारीयोकी आवाज सुनके उनके रुमकी खीडकी के पास खडा रहेके उनकी सारी रासलीला अपनी आंखोसे देख रहा हे.. तब लताने अ‍ेक उंगली अपनी चुतमे घुसादी ओर जोरोसे अंदर बहार करने लगी

तब देवायतका लंडभी खडा होने लगा.. ओर लंडको नीकालके हाथसे सहेलाते हीलाने लगा.. उनको आज रुममे अपनी बहेन लता नही कामदेवकी मुरत रती नजर आ रहीथी.. भानु अपना सब होस खो चुकाथा.. वो अंदर जाने लगा..

जेसेही लताने दरवाजा खुलनेकी आवाज आइ वो चोकनी होगइ ओर दरवाजेकी ओर देखती रही तब भानु अपना लंड हीलाते जटसे लताके बेडकी ओर आगया ओर बेडके कोनेपे बेठ गया तब लताने जटसे गभराते हुअ‍े आनन फाननमे चदरको अपने उपर डालदी फीरभी उनके बुब्स बहार नजर आ रहेथे तब देवायत ने जोरोसे मुठ मारते अपना अ‍ेक हाथ लताके बुब्सपे रख दीया.. ओर जोरोसे मसलने लगा..

लता : (गभराते दुर खीसकते) भैया..ये आप क्या कर रहेहे..? ये गलत हे.. मे आपकी बहेन हु..

भानु : (जोरोसे मुठ मारते कामुक आवाजमे) लता.. सीइइ कुछ..मत.. बो..ल..मु..जे.. करने..दे..

लता : (गभराते धीरेसे) लेकीन भाइ मे आपकी बहेन हु.., ये गलत हे..

तब भानु पुरी तराह अपना होस खो चुका था वो जटसे खडा होगया ओर भावेशको जटसे जुलेमे डाल दीया.., तब लता उसे देखतीही रहीकी भाइ क्या कर रहा हे.. तब अचानक भानु बेडपे चड गया ओर लता कुछ समजे इसे पहेले उनको खीचके सरके पास बेठ गया ओर लताके सरको पकडके अपना लंड सीधेही उनके मुहमे घुसा दीया.. ओर धनाधन लंडको अंदर बहार करते लताके मुहमे चोदने लगा..तब लताकी हालत पतली होने लगी.. ओर उनकी आंख बडी होने लगी, उनको कुछ समजमे आये इसे पहेलेही भानुके लंडने मुहमे ही विर्यकी पीचकारीया मारनी सुरु करदी.. तब लताका पुरा मुह भर गया.. उनकी आंखमे आसु आ गये..




जब भानु पुरी तराह जड गया तब उनको होस आयाकी मेने क्या करदीया.., उसने फोरन अपना लंड लताके मुहसे नीकाल दीया.. तब लता ने वही जुकके सब माल मुहसे थुकते बेडसे उतरने लगी ओर बहारके बाथरुममे भाग गइ वहा उल्टीया करने लगी तब भानु जटसे पेन्ट सही करते अपने रुममे चला गया ओर भावनाके पास लेट गया.. तभी लताके खासने ओर उल्टीकी आवाज सुनके सरला जटसे जाग गइ ओर उठके बहार देखने लगी तब उसे बाथरुमसे लताके उल्टोयोकी आवाज आ रहीथी.. तो उसने बहारसेही पुछा..

सरला : बेटा क्या हुआ.., क्यु उल्टीया कर रही हे तबीयत ठीक नही हे क्या..?

लता : (गभराते मुह साफ करते) नही मां.. बस उल्टी जेसा लग रहा हे.. बल वो सेन्डवीच खाइथीना.., (लताने जुठ बोला वो अभी भानु ओर उनके बीचकी बात छुपाना चाहती थी)

सरला : मना कीयाथा क्यु सडी हुइ वासी सेन्डवीच खा रहीथी.. क्या भानुको उठादु.. ज्यादा तबीयत खराब हेतो डोक्टरके पास लेजायेगा..

लता : (जटसे) नही नही.. मां अभी उल्टीया हो गइ हे, ठीक हो जाउगी.. आप सो जाओ..

वो मुह धोते मनमे सोचती रहीकी तेरे भानुकी वजहसेही ये सब माजरा हुआ हे.. वो ये बात कीसीको कहेना नही चाहती थी.. क्युकी मनके अ‍ेक कोनेमे उनकोभी अच्छा लगाथा की उनकी महेनतके बगैरही आज भाइने उनकी मुहमेही कुटाइ करदीथी.. फीरभी इनको भानुकी इस हरकतको बरदास्त नही करनेका फैसला करलीया.. लताको भानुकी इस हरकतपे घीन आने लगी.. फीर बहार आके सीधेही अपने रुममे चली गइ..

ओर बेडपे लेटते सोचने लगी.. आज भाइको क्या होगया वो अंदर केसे आ गये? मेरी ही गलती हे मे कभी दरवाजा लोक करते नही सोती.. तब वो उठके दरवाजा लोक करके आ गइ ओर फीरसे बेडपे लेटते सोचने लगी की आज भाइने जोभी कीया सब गलत था उनको भानुपे गुसा आने लगा उनको लगने लगाकी अबतो जटसे इस घरसे छुटकारा मील जायेतो ही बहेतर हे.. वो अब लखनको मीलनेके लीये बेताब होने लगी

तब दुसरी ओर भानुभी गभराके सोच रहाथाकी कही लता कीसीको बता नादे उनकीही गलती हे.. लता अब जवान हो गइ हे तो ये सब करना जाहीरसी बात हे अब लताकी जल्द से जल्द सादी करदेनी चाहीये.. मे सगाइके दीनही सादीका तैय करलुगा अब मुजे ओर रीस्क नही उठाना कही लताके कदम गलत रास्ते चले गयेतो हमारी इजत मीटीमे मील जायेगी यही सब सोचते उसे पताही नही चला कब नींद आ गइ..

उधर देवायतभी चंदाके साथ दो बार जबरदस्त चुदाइ करके अपने रुममे आगया ओर मंजुलाको पीछेसे बाहोमे भरके सोने लगा तब मंजुलाभी करवट लेके देवायतमे सामने मुह करके पलट गइ ओर देवायतके सीनेमे सर छुपाके उसे होंठोपे कीस करते बाहोमे भरके सो गइ.., तब देवायतभी हसते उनके सरको सहेलाता कब सो गया उसे पताही नही चला....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १४

उधर देवायतभी चंदाके साथ दो बार जबरदस्त चुदाइ करके अपने रुममे आगया ओर मंजुलाको पीछेसे बाहोमे भरके सोने लगा तब मंजुलाभी करवट लेके देवायतमे सामने मुह करके पलट गइ ओर देवायतके सीनेमे सर छुपाके उसे होंठोपे कीस करते बाहोमे भरके सो गइ.., तब देवायतभी हसते उनके सरको सहेलाता कब सो गया उसे पताही नही चला....अब आगे

सुबह सब देरसे उठे तबतक दया ओर रजीया उठ चुकीथी ओर नहाधोके घरके सब काम नीपटानेमे लगी थी तो आज चंदाकोभी कलकी जबरदस्त चुदाइकी वजहसे चुतमे जलन हो रहीथी वो धीरेसे उठके बाथरुममे जाने लगी तब थोडा लंगडाके चल रहीथी जीसे चंदा सरमसे पानीपानी होगइ उनको चीन्ता होने लगीकी मे इस हालतमे मंजुके सामने केसे जाउगी कमीनी फोरन पहेचान जायेगी.. मे बाथरुमसे फीलनेका केह दुगी.. यही सोचते वो बाथरुममे चली गइ..

तो मंजुभी उठके तैयार होजाती हे फीर देवायतको जगाती हे तो वोभी उठके बाथरुममे चला जाता हे फीर नहाके तैयार होजाता हे फीर सब साथमे बेठके चाइ नास्ता करतेहे तब मंजुने पुछही लीया तब चंदाने बाथरुममे फीसलनेकी बात की..तो मंजु चंदाके जुठ पे मंद मंद मु्सकराने लगी.. उसे पताथा आज रात वो अपने पती देवायतसे पुरी रात चुदवाके आइ हे.. लेकीन वो बात अपने चहेरे पे जाहीर होने देना नही चाहती..

तब भानुके घर आज सब उठके चाइ नास्ता कर रहेथे तब भानु जागके भी सोता रहा.. क्युकी वो लताको फेइस करना नही चाहता था उनको नही पताथाकी लताने सबको बता दीया होगा की नही वो डरके मारे अ‍ेसेही बेडपे पडा रहा तब भावना अंदर आ गइ ओर भानुको जगाते कहेने लगी..

भावना : अरे भानु उठो.. कब तक सोते रहोगे..? कल रातभी देरसे आये.. कहा गये थे..?

भानु : (जागनेकी अ‍ेक्टींग करते) अरे कही नही.., वो सरपंच ओर मुनीमको लेके मे ओर देवा सहर होस्पीटल लेके गये थे तो देर होगइ..

भावना : (वोभी सरपंचको जानतीथी) अब उस मुअ‍े को क्या हुआ..? जो होस्पीटल ले गये थे..

फीर भानु उसे सबकुछ बता देता हे जीसे सुनके भावनाभी भानुपे गर्व करने लगती हेकी चलो उनके पती अ‍ेक नेक काम करके आये हे.. फीर वो भानुसे कोइ सवाल जवाब नही करती तब भानु बहार बाथरुममे नहाने चला जाता हे तब बहार लता ओर सरला चाइ नास्ता कर रहेथे जेसेही भानु रुमके बहार नीकला लताने उनकी तरफ देख लीया दोनोकी नजर मीलतेही लताने गुसेसे मुह फेर लीया तब भानुकी गांड फटने लगी..

फीर नहाके बहार आगया ओर रुममे जाके तैयार होगया जब बहार आयातो लता उठके अपने रुममे चली गइ, तब भावना उसे चाइ नास्ता देने लगी तब सरला बहार खटीयापे बेठीथी तो भानुको कहेने लगी..

सरला : भानु बेटा देख कल रात लताकी तबीयत बीगड गइथी उसे अबभी अच्छा ना होतो डाक्टरके पास लेजा..

लता : (अंदरसे बात सुनतेही जोरोसे बोली) नही बा..कोइ जरुरत नही मे ठीक हु.. मुजे दवाइ नही लेनी..

सरला : ठीक हे बाबा नही लेनी तो मत ले इसपे इतना चीलाती क्यु हे..

तब भानु राहतकी सांस लेता हेकी चलो लताने कीसीको नही बताया तब वो फटाफट चाइ नास्ता करके अपनी जीप लेके नीकल जाता हे ओर सीधेही अपने खेतोपे जाके खटीयापे बेठ जाता हे उसे कलके लताके साथ बर्तावके बारेमे बहुत पछतावा हो रहा था वो इस बारेमे लतासे मीलके माफी मांग लेना चाहता था.. तभी देवायतभी आके उनके पास बेठ जाता हे तब भानुका उदास चहेरा देखके पुछही लेता हे..

देवायत : क्युबे आज चहेरे पे बाराह केसे बजे हे.., कही मेरी सालीने देरसे आनेसे तेरी कुटाइतो नही करदी हें..हें..हें.., बता क्या बात हे..

भानु : नही यार.. तुतो जानता हे ये नइ नइ जवानी जब चडती हेतो लडके लडकीकी क्या हालत होती हे.. बस.. वोही.. लता आजकल ज्यादा ही अपने रुममेही रहेती हे, भावना केह रहीथी जीजुसे कहेके दोनोकी सादी जल्दी करवादो.. आजकल लता बहोत अपने रुममे उलटी सीधी हरकते कर रही हे.. यार अ‍ेसी बात तुजे नही कहुगातो कीससे कहुगा तुभीतो समज सकता हे..

देवायत : हां यार.. ये सब ओरतोकी बाते हे.., तो क्या पुनमभीतो अ‍ेसा करती होगी.. अब ये साली परीक्षा जल्दी खतम होजाये तो अच्छा हे..तु ठीक कहेता हे.. हम चारोकी सादी जल्दी कर देगे.. आजकलके बच्चे.. कही हमारी इजत मीटीमे ना मीलादे.. भलेही जीनके साथ सगाइ हुइ हो इनसे..

भानु : बस यार.. तु सब समज गयाने मे क्या कहेना चाहता हु.. बस सगाइ होतेही हम सादीका मुहुर्त नीकलवा देगे.. वेसेभी लडकी टाइमपे अपने घर चली जाये येही अच्छा हे..

देवायत : चल ठीक हे हम वोही करेगे बस.. अबतो मुड ठीक करले.. चल चाइ पीते हे हरीयाको बोल..

भानु : (जोरोसे आवाज करते) हरीया.. अरे ओ हरीया.. जरा मालतीको कहेके दो कप चाइतो भेजदे..

हरीया : जी मालीक अभी कहेता हु..

भानु : यार.. आज साम सहेर हलस्पीटलभी जाना पडेगा देखता हु दोनोकी क्या हालत हे..

देवायत : भानु अब मे सोच रहा हु.. रमेशको सरपंच बनादु.. वेसेभी मस्त आदमी हे हमारी इतनी सारी मदद की हमारे रास्तेका काटा अ‍ेसेही नीकाल दीया.. तु कीसीको कहेना मत.. उनकी लडकीभी कोलेनमे पढती हे वोभी होसीयार हे सोचता हु मुनीमका काम उसेही दे देते हे.. क्या कहेते हो..?

भानु : भाइ राजनीती मेरे पले नही पडती आपको सही लगेतो करदो.. लेकीन दोनोही अ‍ेकही परीवारके हे सोचलो.. बहुत कुछ हो सकता हे..आदमी का क्या भरोसा.. वेसे रश्मीभाभी भी पढी लीखी हे उसेही मुनीमकी नोकरी देदो.. उनको आमदानीभी होजायेगी.. वेसेभी चंपाभाभीको आप हवेलीपेतो रखही रहे हो..

देवायत : कमीना कहीका.. कीसने कहा तेरा दीमाग नही चलता.. कुते. चल हम वही करेगे.. तेरी बात सोला आनी सच हे.. हमे सीधे कीसीभी आदमीपे विस्वास नही करना चाहीये.. ओर मे सोचता हु रमेशकी बेटीको यहा स्कुलमेही नोकरीपे रखलु वेसेभी वो सबको ट्युशनतो देती ही हे..

भानु : हां यार ये तुने सही सोचा हे..

मालती : लीजीये साब चाइ आज सुबह सुबह ही चाइ.. लगताहे भाभीओने ठीकसे चाइ नही पीलाइ..हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) हां.. नही पीलाइ इसीलीयेतो तेरे हाथकी चाइ पी रहे हे चल आजा.. हमे ठीकसे पीला..

मालती : (चाइ देके जाते हुअ‍े हसते) ना बाबा ना आपही पीलो मुजे बहोत काम पडा हे..हें..हें..हें..

दोनो चाइ पीते हसने लगते हे तभी देवायतके फोनकी रींग बजतीहे तो रश्मीभाभीका फोन था तब देवायत उनसे बाते करने लगा ओर उनके चहेरेके भाव बदलने लगे फीर फोन रख दीया तब भानु उनकी ओर प्रस्नार्थ भरी नजरोसे देखता रहा.. तब देवायत खटीयासे खडा होके कहेने लगा..

देवायत : चल जीप नीकाल.. हमे सहेर जाना होगा..

भानु : लेकीन.. हुआ क्या..? येतो बता..

देवायत : यार वो मुनीम नही रहा.., सुबह गुजर गया.. चंपाभाभी बहोत रो रही हे वहा कोइ नही हे चल..

तब भानु फटाफट जीप नीकालके ड्राइवींगकी सीटमे बेठ जाता हे ओर देवायत उनकी बाजुमे बेठते घरपे मंजुको फोन करता हे ओर उनको सारी बात बता देता हे.., तब भानुने स्पीडसे जीपको सहेरकी ओर जाने दी तब देवायत बीच बीच मे रमेश.. ओर दुसरे लोगोसे बाते करते सब बताने लगता हे.. दोनोही २५ मीनीटमे सहेर पहोच जाते हे ओर अंदर जाते हे तब चंपाभाभी उनको देखतेही देवायतसे लीपट जाती हे..




चपांभाभी : (जोरोसे रोते) देवरजी वो नही रहे..आपके भाइ हमे छोडके चले गये..

देवायत : (उसे कसके बाहोमे भीचते) बस भाभी.. रोइअ‍े मत.. इनमे हमारी चलती हे क्या..?

चपांभाभी : (रोते हुअ‍े) देवरजी मेरा तो जीनेका जरीयाही यही थे अब मे क्या करुगी.. मेभी मर जाउगी..

देवायत : बस भाभी सांत होजाइअ‍े.. मे हुना..? आपको कोइ तकलीफ नही होने दुगा.. मेरी हवेलीपे आजाइअ‍ेगा.. वही रहीयेगा..

इतना सुनतेही चंपाने रोते हुअ‍े राहतकी सांसली की चलो इनकी देखभालके लीये कोइ तो हे तब उसे महेसुस हुआ की देवायतने उसे कसके बाहोमे भीचके रखा हे.. तब उनको अपनी चुतपे देवायतका लंड ठोकर मारते महेसुस हुआ तो वो नजर नीचे करते देखने लगी जब पेन्टका उभार देखा तो इतना बडा उभार देखते सरमसे पानीपानी होगइ ओर दुर हटके अपने आंसु पोछने लगी..

देवायत : भाभी आप बीलकुल चीन्ता मत करो मे हुनां..? सब ठीक हो जायेगा.. आप हवेलीमे मेरे साथ रहेगी वहा.. मंजु दया रजीया सब हे.. उनके साथ रेह लेना..

चंपाभाभी : (सरमसे आंसु पोछते) ठीक हेदेवरजी.. अब क्या करना हे..?

देवायत : भानु तु डोक्टरको मीलके आ ओर सारी फोर्मालीटी पुरी करदे हमे इसे घर लेजाना हे.. (रश्मीकी ओर देखते) भाभी अब राघवजीकी तबीयत केसी हे..

रश्मी : बस अ‍ेसेही पडे हे.. अभी तक होसही नही आया..पता नही कब ठीक होगे.. डोक्टर भीतो कुछ नही कहेते.. आपही पुछलोनां.. सायद आपको कुछ कहे..

देवायत : ठीक हे मे अभी मील लेता हु.. क्या डोक्टर चेक करके गये..?

रश्मी : नही अभी तक कोइ नही आया..

तभी डोक्टरकी टीम आती हे ओर सरपंचको चेक करने लगती हे फीर चेक करके दुसरे मरीजको चेक करतेहे फीर बहार नीकलते हेकी देवायतको देखतेहे तब उसके कंधेपे हाथ रखके उसे बहार लेजाते हे..

डोक्टर : ठाकुरसाहेब.. अच्छा हुआ आप आगये.. सरपंचकी तबीयतमे कुछ ज्यादा सुधार नही हो रहा.. इनको दो दीन ओर रखते हे वरना तबीयतमे कोइ सुधार नही दीखातो उसे घर लेजाइअ‍े ओर उनकी सेवा कीजीये.. ये ज्यादासे ज्यादा छे महीने नीकालेगे.. तबतक अ‍ेसेही रहेगे

देवायत : डोक्टरसाब कुछतो कीजीये कमसे कम इनको होस आये इतना तो कर दीजीये..

डोक्टर : ठाकुरसाहेब ये होसमेही हे.. हमारी सब बाते सुन सकते हे.. सब देख सकते हे सब महेसुस कर सकते हे बस अपने आप हील नही सकते.. अभीतो इनकी टड्ढीप लगी हेतो बेहोसीमे सोये रहेते हे फीर वो आंख खोलके सबको देख सकते हे.. बाकी इनके पेपर अभी कर देता हु फीर बोडी आप घर लेजा सकते हे..

तब भानुभी डोक्टरके साथ चला गया तब रश्मी चंपाभाभीको सम्हालके बेठी थी तो देवायत अंदर चला गयातो रश्मी उसे सब पुछने लगी तब देवायतने उसे बहार ले गया फीर हीमत करके सब बता दी, तो रश्मीभी आंसु बहाने लगी तब देवायत उसे धीरेसे बात करने लगा..

देवायत : देख रश्मी हीमतसे काम लेना.. इस कमीनेने तुजे हेरान करनेमे कोइ कसर नही रखी तो इनको इनकी सजा मील गइ.. बाकी तु फीकर मत करना मे हुना वहा आता जाता रहुगा.. तेरी हर जरुरत पुरी करुगा ओर तुजे इस मुनीमकी नोकरीभी दुगा अबतो इस कमीनेके सामनेही तुजे चोदुगा..

रश्मी : (धीरेसे आंसु पोछते सरमाते) ठाकुरसाब येतो दुनीयाको दीखाना पडता हे.. वरना ये कमीना मर जायेतोभी कोइ गम नही हे बस.. अबतो मुजे सीर्फ आपसेही मतलब हे फीर चाहे मुजे आपकी रखैल बनके रहेना पडे वोभी मंजुर हे.. कमीनेने मुजे बहोत मारा हे.. अब इस भडवेको दीखा दुगी..

देवायत : बस तु सीर्फ तेरे घरमेही रहेना मे वहा आता जाता रहुगा.. तुजे रखेल नही मेरी बीवी बनाके रखुगा.. बस ये बात दुनीया वालोको पता नही चलनी चाहीये..

रश्मी : ठीक हे.. सुक्रिया..आपने मेरे बारेमे इतना सोचा बस अ‍ेक महेरबानी कीजीयेगा.. मेरी अ‍ेक बार कोख भर दीजीयेगा.. मे सबको केह दुगीकी जब गुजर गये तब मे पेटसे थी.. आपका नाम कभी नही लुगी..

देवायत : (हसते) ठीकहे अबतो इस कमीनेके सामनेही हमारी सुहागरात होगी ओर वही आपकी कोख भरदुगा.. बस परसो हम इसे घर लेजायेगे..

भानु : (पासमे आते) भाइ सब होगया..डोक्टरने सर्टीफीकेट देदीया हे अब इस हम घर लेजा सकते हे..

देवायत : रश्मीभाभी आप खयाल रखीयेगा हम आपको परसो लेने आयेगे.. अब हम चलते हे..

चंपा : रश्मीबहेन हम चलतेहे आपका खयाल रखना.. इनकी मजाने हमारी जींदगी बरबाद करदी..

रश्मी : (गले लगते) बस..सांत रहीये.. कमसे कम अब हम दोनो खुलके जी तो सकेगी.. अब इनको छुटी मीलतेही आपके पास आजाउगी अपने आपको अकेली मत समजना..

फीर तीनो मुनीमकी बोडी अ‍ेम्ब्युलन्समे घर लेके नीकल जाते हे देवायत चंपाको अपने साथ जीपमे बीठा देता हे ओर आगे वो लोग चलते हे आधे घंटेके बाद सब लोग मुनीमके घर आजाते हे तब सारा गाव मुनीमके घर जमा होगया था फीर सब गांववाले उनकी स्मसानयात्राकी तैयारीया करने लगे तब आस पडोस की सभी ओरते चंपाभाभीके पास बेठके उसे आस्वासन देती रही.. ओर सब तैयारीया पुरी होगइ..

फीर सब लोग मुनीमको लेके स्मसान चले गये ओर वहा अग्नी संस्कार करके वापस आगये.. ओर साम ढल गइ तब पडोसकी ओरतने चंपाभाभीको खाना खीलाया ओर दो तीन ओरत वही रुक गइ ओर बाकी सब अपने अपने घरकी ओर नीकल गये.. तब भानुभी सीधा अपने घर चला गया ओर मेभी हवेलीपे आ गया तब मंजुने मुजे बहारही बीठाके मेरे उपर पानी डालदीया.. फीर अंदर जाके नहाया..

फीर बहार आके तैयार होगया ओर हम सब होलमे बेठ गये.. तब मेने सारी बात सबको बतादी.. तभी दया ओर रजीयाभी हमारे पास खडी रहेके गौरसे सुन रहीथी जेसेही सरपंचकी हालत बताइ तब रजीया ओर दया बहोत खुस होगइ ओर जोसमे आके बोलने लगी..

रजीया : अच्छा हुआ मुआ..ने खटीया पकडली.. बडाही हरामी आदमी था..

मंजुला : (जोरोसे हसते) कमीनी उसे गालीयातो मत दे हें..हें..हें.. क्या बीगाडा हे तेरा..

दया : दीदी रजु ठीक केह रही हे.. वोतो हमही जानती हे कीतना कमीना थावो..मुआ.. मर क्यु नही गया..

चंदा : (जोरोसे हसते) लगता हे दोनो इनकी चपेटमे आ गइ हे.. हें..हें..हें..

रजीया : दीदी चपेटमेतो नही आइ लेकीन आते आते बच गइ.. हरामीने गांवकी कीतनी ओरते ओर लडकीयोकी जींदगी खराब करदी हे.. देखना आज गांवमे सब मीठाइआ बाटेगी..

इस बातपे हम सब ठहाका मारके हसने लगे दोनोने अपना गुसा नीकाल दीया फीर अपना काम करने कीचनमे चली गइ ओर रातका खाना बनाने लगी तभी धिरेनका फोन आगया तो चंदा उनसे बात करते दुर चली गइ तब मंजु मेरे कंधेपे सर रखके अ‍ेक हाथसे मेरे सरको सहेलाते हसती रही.. फीर धीरेसे कहा..

मंजुला : जानु अ‍ेक बात कहु.. पता नही केसे कहु.., अगर तुम नाराज होगयेतो..? नही.. अभी नही करनी..

देवायत : (मंजुका सर सहेलाते) अरे बेबी कहोना..नही हुगा नाराज.. बता.. क्या बात हे..

मंजुला : (धीरेसे) अभी नही.. मौसी आ रही हे हमोर रुममे कहुगी..

चंदा : मंजु धिरेन कल सुबह नीकल रहा हे.. उसे सहेर कोलेजसे लेने जाना पडेगा.. गयाथा दोस्तके साथ..

मंजुला : (अपनी चाल चलते हसते) तो क्या हुआ.., कल चले जायेगा आपके जमाइके साथ..वोभीतो सहेर जा रहे हे क्यु जानु..

देवायत : मंजु मुजे कल वाकइ सहेर जाना हे दो पहोरको खाना खाके नीकलना हे.. धिरेन कब आ रहा हे..?

चंदा : कल सामका केह रहाथा.. कोइ बात नही.. आप अपना काम नीपटा लीजीयगा फीर कोलेज चले जायेगे.. वहा कीतनी देर लगेगी..?

देवायत : बस अ‍ेक वकीलको मीलना हे आधे घंटेका काम हे.. चलेगाना..?

मंजुला : (हसते) अरे दोडेगा.., मौसीको वहा कुछ आइसक्रिम बाइसक्रिम खीला देना.. बेठी रहेगी.. हें..हें..हें..

चंदा : (हसते मंजुको मुका मारते) मे कोइ बच्ची हु..जो आइसक्रिम खाती बेठी रहुगी.. तुतो जा नही सकती वरना तुजेही भेज देती.. धिरेनभी खुस हो जाता..

देवायत : मौसी ये अ‍ेक्जाम खतम होतेही मे चारोकी सगाइ कर देना चाहता हु.. फीर डीलेवरीके बाद हम सादीका सोचेगे.. क्या कहेती हो मंजु..?

चंदा : इतनी जल्दी..? क्यु कोइ खास वजह..?

देवायत : बस वजहतो कोइ खास नही.. वो काकीको बडी जल्दी हे.. कहेतीथी लडकीया जीतनी जल्दी घर चली जाये उतनाही अच्छा हे.. वो भानु मुजे आज बता रहा था.. बस वोही बाते कर रहेथे ओर होस्पीटलसे रश्मीभाभीका फोन आ गया..

मंजुला : (कुछ सोचते) मौसी देवु ठीक केह रहा हे.. आपके घरमेभी जल्दी बहु आजायेगी.. तो घर स्माल लेगी.. फीर आप फ्रि..हें..हें..हें..

देवायत : मंजु.. लेकीन पुनम कुछ कोलेजका केह रहीथी.. कहेतीथी घर रहेकेही कोलेज करना हे..

चंदा : हां तो क्या हुआ.. मे पढाउगी उसे.. उनको जीतनी मरजी आये पढे.. उनकेही काम आयेगी..

मंजुला : (हसते) देखा.. घरके लोगमे यही फायदा हे.. वरना पता नही पुनमको कैसा ससुराल मीलता..

देवायत : (हसते) मौसी मेने सुना हे मंजुकी तराह आपनेभी कोलेज बोलेज कीया हे.. कहा तक पढी हो..

चंदा : (सरमाते हसते) बस ज्यादा नही.. मास्टर कीया हे..अ‍ेम. बी. अ‍े. हें..हें..हें..

देवायत : (चोंकते) क्या..? अ‍े.बी.अ‍े..? तो फीर घरपे क्या कर रही हो..?

चंदा : (हसते) आपको नही पता मेरे पतीको जोब बोब करना अच्छा नही लगता था ओर मेरे ससुराल वालेभी पुराने खयालके थे.. तभीतो..मेरी सादी..(आंखमे आसु बहेने लगे)

तब मंजु खडे होके उनके पास बेठ गइ ओर बेठे बेठेही चंदाको हग करलीया तब चंदा उनके कंधेपे सर रखके आंसु बहाने लगी तबतक मंजु उनका सर सहेलाती रही फीर मंजुने उनके आंसु पोछ दीये..

मंजुला : मौसी भाडमे जाये दुनीया अबतो आपके ससुरवालेभी नही रहे.. मेरी मानो अभीभी कुछ नही बीगडा आप सादी करलो.. अकेले कैसे जींदगी काटोगी.. क्या कहेतेहो देवु..?

देवायत : हां मौसी मेरे खयालसे मंजु ठीक केह रही हे.. आपको सादी करलेनी चाहीये..

चंदा : (देवायतकी ओर देखते) ये आप क्या केह रहे हे.. अ‍ैसा नही हो सकता.. अबतो धिरेनभी बडा हो गया हे.. अब इस उमरमे सादी..

मंजुला : मौसी इतनीभी उमर नही हुइ हेकी आप सादी ना कर सको.. मे धिरनसे बात करुगी..

चंदा : मजु प्लीज.. उसे कुछ मत कहेना.. अब नही करनी सादी.. जो होना था हो चुका..

मंजु : मौसी जोभी हो मे सादी करवाके ही रहुगी.., अरे बाबा कब तक अकेले घुट घुटके छुपकेसे आंसु बहाती रहोगी.. अगर कीसीने कुछ कहातो मे उसे जवाब दे दुगी..

चंदा : (सरमाके हसते) अरे बाबा क्यु मेरे पीछे पडी हो नही करनी सादी.. ओर वेसे मेभी कीसीसे डरती नही हु.. लेकीन मेरी कुछ मजबुरी हे.. पहेले कहेती तो कुछ सोचती.. अब नही कर सकती.. समजी..?

मंजुला : सब बहाना हे.. अब क्यु नही कर सकती..? कही कीसीसे प्यार प्यारतो नही हो गया हें..हें..हें..

चंदा : (सरमसे हसते मुका मारते) कमीनी..कुछभी बोलती हे.. चल छोड ये सब बाते..

तब तीनोकोही पताथा की चंदाकी क्या मजबुरी हे तीनोको पता था चंदा सादीके लीये क्यु मना कर रही हे बस अ‍ेक दुसरेके सामने जाहीर करना नही चाहते थे, तो दुसरी तरफ मंजुनेभी तैय करलीया थाकी चंदाकी सादी देवायतसे करवाकेही रहेगी.. क्युकी उसे पता चल गयाथा की देवायत ओर चंदा अ‍ेक दुसरेसे प्यार करते हे ओर दोनोने प्यारकी सारी हदे पार करली हे.. इस रीस्तेसे मंजुकोभी कोइ अ‍ेतराज नही था.. क्युकी इसका रीजन सीर्फ मंजुकोही पता था..

अ‍ेसेही साम ढल गइ ओर सबने खाना खा लीया फीर कुछ देर बेठनेके बाद सब अपने अपने रुममे चले गये तब चंदा बेडपे लेटतेही रोमांचसे हसने लगी उनको आज मंजुकी बाते बहोत अच्छी लगती थी.. वोभी मनसे देवायतसे सादी करके इस घरमे बसना चाहती थी बस अ‍ेकही उलजनथी वो था धिरेन.., हालाकी धिरेन इस मामलेमे खुले विचारोका था इस बारेमे चंदाकोभी नही पता था बस ये बात सीर्फ मंजु जानतीथी की धिरेनकी सोच केसी हे, तब इनके बारेमेभी मंजुने भी कुछ सोच लीया था वोभी देवायतके सीनेमे सर रखके लेटे लेटे सोचमे डुबी हुइ थी.. तब..

देवायत : (सरको सरहेलाते) बेबी क्या सोचमे डुबी हे.. ज्यादा मत सोच हमारे बेबीपे असर होगा..

मंजुला : जानु मेने कहाथाना आपसे अ‍ेक बात करनी हे.., आप नाराजतो नही होगे..?

देवायत : (उनके सरको चुमते) बेबी मे कभी तुजसे नाराज हुआ हु क्या..? आइ लव यु बेबी.. बोल क्या कहेना हे.. नही हुगा नाराज.. जरुर कोइ सीरीयस बात हे तभीतो अ‍ेसा केह रही हो..बोल क्या कहेना हे..?




मंजुला : (धीरेसे देवायतकी आंखोमे देखेत) जानु मे चाहतीहु मौसीसे आप सादी करलो..

देवायत : (चोकते) क्या..? क्या कहा तुने.., बेबी पागलतो नही होगइ हो..? तुजे पताभी हे तु क्या केह रही हे..? तु अपनीही सौतन लानेकी बात कर रही हे.. बेबी मे तुमसे बहोत प्यार करता हु..

मंजुला : आइ नो.. जानु मुजे पता हे आप मुजे बहोत चाहते हे.. लेकीन मे आपको सोच समजकेही बात कर रही हु.. मुजे कोइ अ‍ेतराज नही की मौसी मेरी सौतन बनके आये.. प्लीज.. आप हां कहेदो..

देवायत : नही मंजु अ‍ैसा कभी नही हो सकता.. माना की मेरे कइ ओरतोके साथ नाजायज रीस्ते रहेते थे इसका मतलब ये नहीकी मे तुजे इस मामलेमे धोखा देदु.. नही कर सकता यार.. ओर मुजे तेरा प्यार मील गया हे.. जो मुजे अपनी जानसेभी ज्यादा चाहती हो.. आइ लव यु बेबी आइ लव यु सो मच..

मंजुला : (आंखमे आसुके साथ) आइ लव यु टु जानु.. मे बहोत खुस हु आप मुजे इतना चाहते हे.. लेकीन मेरी बात मान लीजीये प्लीज.. आपको आपकी मंजुकी कसम..

देवायत : (आंसु बहेने लगे) बेबी ये तुने क्या केह दीया क्यु कसम देदी.. अ‍ेसी क्या मजबुरी हे तेरी.., जो मुजे कसम देती हे.., बेबी कही तुम मुजसे कुछ छुपातो नही रही..?

मंजुला : (गभराते) अरे नही नही.., मे तुमसे क्यु छुपाउगी..? मेतो बस अ‍ेसेही.. केह रहीथी.. चलो सो जाओ बहुत देर हो चुकी हे.. नींदभी आ रही हे..

तब देवायतभी कुछ नही बोलता उसे इस बारेमे बहेस करना अभी उचीत नही लगा उनके मनमे कुछ आसंकाये आने लगी.. की मंजु ये सादीके लीये इतनी जीद क्यु कर रही हे.. वो मुजसे क्या छुपा रही हे.. यही सब सोचते उनकी आंख लग गइ तब मंजु उनके सीनेपेही सर रखके नींदमे चली गइ तब उसने देवायतको कसके पकडाथा तो देवायत उठके चंदाके पासभी नही जा सकताथा ओर दोनोही नींदमे चले गये..

तभी देर रात चंदा उठके मंजुके रुमके पास आइ ओर खीडकीसे जांकने लगी तो देखा मंजु देवायतको कसके पकेडके उनकी बाहोमे सोइ हुइ थी तब वो समज गइ देवायत मंजुकी नींद खराब करना नही चाहता तब वो वापस आके अपने बेडपे सो गइ लेकीन आज चंदाकी आंखोसे नींद कोसो दुर थी वो करवटे बदलते सीर्फ देवायतके बारेमे ही सोचती रही ओर उसे कब नींद आगइ पताही नही चला....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १५

तभी देर रात चंदा उठके मंजुके रुमके पास आइ ओर खीडकीसे जांकने लगी तो देखा मंजु देवायतको कसके पकेडके उनकी बाहोमे सोइ हुइ थी तब वो समज गइ देवायत मंजुकी नींद खराब करना नही चाहता तब वो वापस आके अपने बेडपे सो गइ लेकीन आज चंदाकी आंखोसे नींद कोसो दुर थी वो करवटे बदलते सीर्फ देवायतके बारेमे ही सोचती रही ओर उसे कब नींद आगइ पताही नही चला....अब आगे

सुबह मंजु जल्दी उठ गइ ओर नहाके कंपलीट होगइ फीर देवायतके पास बेठ गइ ओर उसे प्यारसे देखने लगी तो देवायत सोते हुअ‍े बहुतही मासुम लग रहा था तब वो देवायतके कंधेपे हाथ रखके उनको पलटते जगाती हे ओर उनके होंठ चुम लेती हे.. तब देवायत इनको अपने पास खीचके साथमे सुला देता हे तो मंजुभी उनके सीनेमे सर रखते लेट जाती हे तब देवायत दोनोके उपर चदर डालके उनके होंठ चुमने लगता हे








मंजु : जानु उठ जाओ.. देखो सुबह होगइ हे.. आप अपना सब काम नीपटालो.. फीर टाइमपे खाना खाने आजाना.. वो धिरेनको लेने जाना हे..

देवायत : हां बेबी सुबह सुबह मेरी खुबसुरत बीवीका दीदार होगया.. चल नहाते हे..

मंजुला : (हसते) बाबु मे नहा चुकी हु आप फटाफट नहालो.. पता नही वो महारानी उठी हेकी नही..

देवायत : कोन..?

मंजुला : (हसते) अरे वो आपकी मौसी.. चलो.. फटाफट नहाके आजाओ उनको जगाती हु फीर चाइ नासता करते हे.. (हसते) बेचारी रातमे ठीकसे सोइ नही होगी.. हें..हें..हें..

देवायत : (बेडसे उतरते) कहासे सोयेगी.. तुने उनको सादीका डोज जो दे दीया हे हें..हें..हें..

मंजुला : देवु प्लीज.. मेने जो कहा हे उनके बारेमे सोचना.. वो बहोत अच्छी हे..

देवायत : (बाथरुमकी ओर जाते) मंजु.. तु फीर सुबह सुबह सुरु होगइ.. चल नहाने दे..

कहेके देवायत बाथरुममे घुस गया ओर ब्रस करते चंदाके बारेमे सोचने लगा.. तब उनका लंड तनके उपरकी ओर जाने लगा जेसे कीसी रोकेटको लोन्च कर रहा हो.. तब दुसरी ओर मंजु चंदाको जगाती हे ओर गुडमोर्नींग वीस करती हे तब चंदा उठके मंजुको हग करलेगी हे फीर उनके सरको चुमके सीधेही बाथरुममे घुस जाती हे.. तबभी उनके मनमे देवायतका दमदार लंड घुम रहा था

तब उनकी चुतभी फडफडा रहीथी ओर अपने आप हरकत करते गीली होने लगीथी तब चंदा आइनेके सामने नंगी होगइ ओर अपना सौन्दर्य देखने लगी फीर खुदही सरमाते हसने लगी फीर नहाते उनके बुब्स साफ करते उतेजीत होने लगी ओर अपनी चुतमे उंगली डालके आंख बंध करली ओर जोरोसे हीलाने लगी तब कुछही देरमे वो जड गइ तब खुब सरमाइ फीर नाहाके बहार आगइ.. ओर तैयार होने लगी..

मंजुला : (तब बेडपेही बेठी थी) मौसी अच्छेसे तैयार होना.. आप पतीके साथ जा रही हो.. आइ मीन मेरे पतीके साथ.. हें..हें..हें..

चंदा : (चोंकते सरमाते) मंजु.. तुम भीना.., कुछ भी बोलती हे.., कुछतो सरम कर..

मंजुला : मौसी.. मुहसे अ‍ेसेही नीकल गया..क्या आपको बुरा लगा.. तो सोरी.. (सर नीचा करते)

चंदा : (उनके पास बेठते हग करलीया) नही बेबी..सोरी मत बोल.. तुतो मेरी भांजी नही मेरी बहेन हे.. ओर बहेनोके बीच अ‍ेसे सोरी माफी कोइ सब्द नही होते.. मुजे अच्छा लगा तुम मेरे बारेमे इतना सोचती हो मेरी केर करती हो.. अरे पगली तेरे जेसी बहेन मुजे कहा मीलेगी.. लेकीन जो तु कहेना चाहती हे वो मे नही कर सकती.. बस मेरी कुछ मजबुरीया हे.. वरना तेरी बात जरुर मानती..

मंजुला : मौसी मुजे पता हे आपकी मजबुरी.. मे उन उलजन को खतम कर दुगी..

कहेके मंजु बहार जाने लगी तब चंदा उसे अ‍ेक नजरसे जाते हुअ‍े देखती रही.., आज उसे मंजुने इस वीसयको छेडके जंजोर दीयाथा ओर उनकी बातोपे सोचनेके लीये मजबुर करदीया था लेकीन वो कीस मुहसे कहेकी मेने तेरे पतीके साथही सादी करली हे.. वो बडीही कस्मकसमे थी, फीर भारी मनसे तैयार होगइ ओर बहार आगइ तब मंजु अकेले सोफेपे बेठी सोचमे डुबी हुइ थी.. तब चंदा उनके पास बेठ गइ..

चंदा : (उनका सर सहेलाते) क्या सोच रहीहे मेरी बहेन..

मंजुला : (चंदाके सामने देखते सर ना मे हीलाते) कुछ नही मौसी ये जींदगीभी बडी अजीब हेनां..?

चंदा : (हसते) हां.. मे इस बारेमे ज्यादा नही सोचती, भगवानने जो हमारी कीस्मतमे लीखा हे वो होकरही रहेता हे.. फीर चाहे मे ओर तुम मानो या ना मानो..

मंजु : ठीक हे मौसी जेसी आपकी मरजी.. चलो चाइनास्ता नही करना..देवुभी नही आया..

देवायत : (आते) आ गया बेबी..चलो चलो.. मुजे जाना भी हे भानु आगया होगा..

फीर तीनो चाइनास्ता करने लगतेहे तब चंदा बार बार चोर नजरसे देवायतको देखती रही तब मंजु बरोबर उनकी नजरका पीछा करते तीरछी नजरोसे देखती रही.. तब मंजुने कहा..

मंजुला : जानु.. आप कीतने बजे नीकलने वाले हो..

देवायत : मंजु तीन बजे वकीलको मीलना फीर आघा अ‍ेक घंटा लग जायेगा.. बस खाना खाके ही नीकलना हे.. पता नही धिरेन कब आने वाला हे..

चंदा : मुजेभी टाइम नही बताया सायद चार पांच बजे आजायेगा..

मंजुला : कोइ बात नही आप लोग उनका वेइट करलेना.. ओर सीधे अहीपे लेआना..

चंदा : नही मंजु अब मे घर जाउगीनां.. इधरभी तीन चार दीन होगये.. फीर तेरी डीलीवरीके टाइम आजाउगी

मंजुला : मौसी वहाभी क्या काम हे.. वेसेभी धिरेनकी छुटीया चल रही हेनां..? वोभी इधर आजायेगा तबतक लखन ओर पुनमभी आजायेगे तो सब बच्चो साथमे रहेगे तो आपसमे मील जुल लेगे.. क्यु देवु..?

देवायत : (हाथ धोते) हां मौसी.. मंजु ठीक केह रही हे.. ओर उन लोगोको लेने जाना हे तब खरीदीभी तो करनी हे तो धिरेनभी साथ चलेगा..उनकी पसंदका सब आजायेगा.. मे दोनोको इधरही ले आउगा..

चंदा : (हसते) अरे मे आजाउगीनां.. क्यु जीद कर रहे हो..?

मंजुला : नही मौसी मेरे पतीने केह दीया सो केह दीया.. देवु वरना जबरदस्ती इनका अपहरण करके लेआना, हें..हें..हें..

तब देवायत हसने लगा तो चंदाभी सरमके मारे सर नीचा करते हसती रही.. अ‍ेसेही मजाक करते सबने चाइ नास्ता फीनीस कीया.. तो देवायत दोनोको हग करके नीकल गया वो गोडाउन गया वहा सब काम देखके मुनीमके घरकी ओर नीकल गया तब वहा बेठनेके लीये कोइ नही था बस उनकी दो पडोसन बेठीथी देवायतको देखतेही नमस्ते करके वापस घर चली गइ तब घरमे सीर्फ देवायत ओर चंपाही थे..

तब चंपाने उसे बेठनेके लीये कहा ओर पानी लेने चली गइ फीर देवायतको पानी पीलाया ओर वही खडी रही.. आज उनके चहेरेपे गम काफी कम दीख रहा था.. उनको अब सीर्फ देवायतपेही उमीद थी..

देवायत : भाभी सब अच्छेसे करना पैसोकी चीन्ता मत करना.. (जेबसे पांच हजार नीकालके देते) ये लीजीये.. इनको रख लीजीये.. जब यहाका कार्य पुरा होजाये तब आप हवेलीपे आजायेगा.. वही काम करीयेगा.. मंजुकोभी कंपनी मील जायेगी..

चंपा : देवरजी क्या उनकीभी डीलेवरीका टाइम होगया हेनां..? होस्पीटल कब जाना हे..?

देवायत : बस अ‍ेक हप्तेके बादकी डेट हे.. मेरी मौसीजी आने वाली हे.. तबतक इधरभी सब कार्य सम्पन हो जायेगा फीर आजाना..

चंपा : आपने मुजपे बडी महेरबानीकी इतनातो कोइ सगे वालेभी नही करते.. देवरजव अब मुनीमजी के कुछ कागजात पडे हे मेरेतो कोइ कामके नही.. अब आपही लेजाइयेगा.. क्या पता कीसी गांवके वहीवटके कामके हो.. पता नही पंचायतका कागज घरपे क्यु रखा हे.. वहा उतनी बडी ओफीस तो हे..

देवायत : भाभी ये कागज आप अभी आपके पासही रखीये अ‍ेक दो दीनमे फ्रि होजाउगा तब लेकर जाउगा.. ओर इनका जीकर कीसीसे मत करना.., भाभी अब मे सोच रहा हु.. रश्मीभाभी को मुनीमकी जगाह रखलु..

चंपा : हां वो अच्छी हे पढीलीखी भी हे.. पता नही ये सरपंचके पले केसे पड गइ.., वेसे क्या हुआ उनका..

देवायत : बस कुछ नही.. अब तो जबतक जींदा रहेगे अ‍ेसेही बीस्तमे रहेगे जेसे होस्पीटलमे थे..

चंपा : चलो अच्छा हुआ.. कभीना.., कभीतो पापका घडा भरेगाही.. जो इनकी सजा मील गइ दोनो को..

देवायत : दोनो को..? इसमे मुनीमजीकी क्या गलती हे..?

चंपा : (दरवाजा बंध करके आइ) देवरजी सारी फसातकी जड आपके भाइसाबही थे.. इन्होनेही सब कागजात सरपंचको नीकालके दीये हे.. तब मेने रुमसे सुना वो आपकी जमीन ओर कुछ खजानेकी बात कर रहेथे.. मे ठीकसे सुन नही पाइ.. इसीलीयेतो सब कागजात आपको दे रही हु.. बस मेरा खयाल रखीयेगा..

कहेते सरमाते देवायतके पास बगलमे सर जुकाके बेठ गइ तब देवायत समज गया ओर उनके हाथपे अपना हाथ रख दीया ओर धीरेसे दबा दीया तब चंपा सरमसे पानीपानी होगइ ओर तीरछी नजरसे देवायतकी ओर देखती हसती रही उसने अपना हाथ हटानेकी कोइ कोसीस नहीकी तब अचानक देवायत उनको बेठे बेठेही बाहोमे कसके भरलेता हे तब चंपा खुब सरमाइ ओर मुस्कराते देवायतकी बाहोमे समा गइ..

अपना अ‍ेक हाथ देवायतके सीनेपे रखके सहेलाने लगी तो देवायतने उनका चहेरा अपनी ओर कीया ओर दोनोके होंठ मील गये ओर स्मुच करने लगे.. तभी देवायतने अ‍ेक हाथ कीस करतेही उनके उरोजोपे रख दीया ओर हल्केसे दबाके मसलने लगा तब चंपाके मुहसे सीसकारीया नीकलने लगी ओर देवायतका पुरा साथ देने लगी.. देवायतभी कल चंदाके पास नही जा सका इसलीये उनको कलसे ठरक चडी हुइ थी..

चंपा : (धिरेसे सरमाते) देवरजी इधर कोइ भी आ सकता हे.. अंदर चलीयेनां..

तब देवायत अलग हो जाते हे ओर चंपा उसे अपने बेडरुममे लेजाती हे ओर पीठके बल लेटतेही अपनी सारीको कमर तक उची करके अपने ब्लाउसके बटन खोलने लगती हे.. तब देवायतने देर ना करते अपने पेन्टकी क्लीप खोलदी फीर पेन्ट ओर नीकर नीचे करलीया तब चंपाकी चुतको देखतेही देवायतका लंड जटके मारने लगा तो देवायत उनके पैरके बीच बेठने लगा तब चंपाने अपने दोनो पैर फैला दीये..

देवायत : (चंपाकी चुतपे लंड घीसते) सरपंचके साथ कीतनी बार चुदी हो..?

चंपा : (सरमाते मुह दुसरी ओर करते) वो मुआ इधर कहा दारु पीने आताथा.. बस मेरे पतीको तीन चार पेग पीलादो उनको कोइ होसही नही रहेता फीर सरपंच अंदर आजाता, वो यहा मेरे साथ मजे करनेही आता था

देवायत : (उतेजनामे आके लंड घुसाते) अब मेरे साथ चुदेगीना.. मे तुजे रोज चोदुगा..

चंपा : देवरजी अबतो सीर्फ आपहीका सहारा हे अब आपके सीवा मेरी प्यास कोन बुजायेगा..? मे अ‍ेसे वेसी ओरत नही हु.. ओर अबतो आपसेही चुदवाउगी.. आपका हथीयारभीतो सबसे बडा हे ओर मोटाभी हे..

तब देवायत चंपाकी चुतमे लंड फसाके उनपे जुक जाता हे ओर होंठ चुमते कमरको अ‍ेक जोरका जटका मारता हे तब लंड चंपाकी चुतको चीरते अंदर घुस जाता हे तो चंदाकी हल्कीसी चीख नीकल गइ ओर आंसुभी टपक गये तब उसने अपने मुहपे हाथ रखदीया ओर छटपटाने लगी ओर देवायतको रुकनेको कहेने लगी.. तब देवायत लंबे लंबे सोट मारते चंपाको चोदने लगा..

चंपा : उउउउउइइइइइ मांमामाआआआ मममररर गगगगइइइइइ मोमोमोटाटाटाट हेहेहेहे.. रुकीयेयेये.. नही नही नही..सीसीसीसइइइइइइइ बस..बस..बस.. कीजीये...रुकीये...जलन हो..ती.. हेहेहेहे..सीसीसीइइइइइ




लेकीन देवायत कहा रुकने वालाथा, चंपाकी हालत दर्दके मारे खराब होने लगी ओर वो देवायतके सीनेमे दोनो हाथसे धका मारते उनको अपने उपरसे हटानेकी कोसीस करने लगी..तभी थोडीही देरके बाद उनकी दर्द भरी चीखे कामुक आवाजमे बदलने लगी ओर वो आधी आंख चडाते मदहोसीकी हालतमे चली गइ फीरतो वोभी कमर हीलाके देवायतका साथ देने लगी तब अचानक देवायतको बाहोमे भीच लीया..

ओर उनकी चुतने जवाब देदीया.. फीरभी देवायत उसे चोदेही जा रहा था तब थोडी देर वो सीथील होके पडी रही ओर देवायत उसे जटके मारते चोदता रहा तब उनके बुब्स देवायतके हर धकेके साथ उछल रहेथे, चंपाको आज असली मर्द मील गयाथा जो वो जड गइ उनके बावजुद चुद रही थी.. अ‍ेसा सुख ना उसे मुनीमसे पायाथा ओर नाही सरपंचसे पाया था.. वो आज बहुत खुस होगइ.. तब देवायतने स्पीड बढादी.. ओर लंडको जड तक घुसाते जोरोसे लंबे लंबे सोट मारते काफी देर तक चंपाकी चुदाइ करता रहा.. तब चंपाकी हर धकेके साथ आहे नीकलती रही.. तो बीच बीचमे देवायत उनके होंठ ओर उनके दोनो बुब्स चुमता रहा..




तो चंपा फीरसे गरम होगइ ओर देवायतको बाहोमे भीचलीया ओर अपनी कमर आडी टेडी करके हीलाने लगी तब देवायतके सरीरमे हलचल तेज हो गइ ओर उसने चंपाको चीपकते जोरोसे बाहोमे भीच लीया तब चंपानेभी देवायतको कसके बाहोमे भरलीया ओर देवायत चंपाकी गरदनमे चुमते उनको होठोको भीचके लीपलोक करलीया तब चंपाकी आंखभी बडी होगइ ओर उसको अपने गर्भासयपे देवायतका गरम विर्य महेसुस होने लगा तब देवायत जटके मारते जड रहाथा तो चंपा अ‍ेक बार फीसे उतेजीत होके साथमे जडने लगी..

ओर देवायत चंपाके सीनेपे ढेर होगया दोनोही पसीने पसीने होगये ओर अपनी सांसे दुरस्त करते रहे तबतक चंपा देवायतकी पीठ सहेलाती रही जब दोनोही सांत हुअ‍े तब चंपा देवायतसे नजर नही मीला पा रहीथी उनका कारण देवायतकी दमदार चुदाइ थी चंपाने अ‍ेसी दमदार चुदाइ कभी नही करवाइ थी.. तभी देवायत उनके चहेरेको दोनो हाथसे पकडके अपनी ओर कर लेता हे तब चंपा उनकी ओर नजर करते सरमके मारे अपनी नजरे नीचे करलेती हे तो देवायत उनके होंठ चुमने लगता हे..

देवायत : चंपा अब मुजे जाना चाहीये.. सहेरभीतो जाना हे..

चंपा : (धीरेसे सरमाते) देवरजी आते रहीयेगा.. आज ये चंपा आपकी अमानत होगइ.. अब मे सीर्फ आपसेही चुदवाउगी मेरा खयाल रखीयेगा.. ओर मे रहुगी इधरही.. सीर्फ कामके लीये वहा आउगी.. ताकी हम यहा मील सके.. ओर हो सकेतो हमारी बातका जीक्र कीसीसे नही करीयेगा..

देवायत : (गाल चुमते) ठीक हे चंपा डार्लींग.. चलो मुजे जाना हे..

कहेके देवायत चंपाके उपरसे उतर गया तब लंडसे फच..की आवाज आइ जीसे सुनके चंपा सरमसे पानीपानी हो गइ तब उनकी चुतसे दोनोका काम रस चुतसे बहेने लगा तब चंपा कपडेसे अपनी चुतको साफ करने लगी उनको हीलनेकीभी ताकात नही थी वो वेसेही पडी रही तब देवायत बाथरुममे लंड साफ करने चला गया फीर बहार आगया तबभी चंपा अ‍ेसेही पडीथी तब देवायतने उनकी मदद करनेको कहा तो मना करदीया..

फीर देवायत दरवाजा खोलके बहार आगया ओर अपनी कार लेके गोडाउनपे आगया.. उनको चंपाको चोदनेमे कोइ मुस्कील नही लगा क्युकी उनको मालुम था चंपा बहुतही कामुक ओरत हे ओर हमेसा सरपंचसे चुदती हे इसीलीयेतो चंपा कोइ ना नुकुर करे बगैरही देवायतसे चुदवानेको तैयार होगइ.. देवायत आके बेठाही थाकी भानु आगया.. ओर उनके पास बेठ गया..

भानु : भाइ वो रश्मीभाभीका फोन आयाथा कल उनको छुटी दे रहे हे उसे लेने जाना पडेगा..

देवायत : ठीक हे कल लेके आजायेगे.. वेसेभी अब उनको घरपे हीतो रखना हे.., ओर सुन मे सहेर जा रहा हु.. वो धिरेन आ रहा हे ओर वो वकीलकोभी मीलना हे..

भानु : भाइ जीनका केश चल रहा हे वोतो खटीयामे पडा हे.. आप तारीखही लेलो..अबतो जबतक गुजर नही जाता अ‍ेसेही तारीख लेना हे.. फीर कुछ करते हे.. हम रश्मीभाभीको कहेके सारे कागजात नीकलवा लेगे..

देवायत : चल ठीक हे देखतेहे वकील क्या कहेता हे.. वो हरीयाको चाइकातो कहेदे फीर नीकलनाभी हे..

तभी भानु हरीयाको आवाज लगाता हे फीर दोनो चाइ पीतेहे ओर कुछ बाते करते देवायत नीकल जाता हे जब हवेलीपे पहोचतेहे तब चंदा बीलकुल तैयार होके बेठीथी आज वो कयामत लग रहीथी मंजुने उनके कपडे जबरदस्तीसे बदलवा दीये थे तो देवायत उसे देखता ही रहातो मंजु उनको देखते जोरोसे हसने लगी तब चंदाभी हसते सरमसे पानीपानी हो रहीथी.. तब मंजुने मजाक करते कहा..

मंजुला : (हसते) कंट्रोल पती देव कंट्रोल..आपकी मौसीजी हे अ‍ेसे ताडीये मत.. हें..हें..हें..

चंदा : (जुठे गुसेसे) मंजु.. बस यार कुछ तो सरम कर.. कुजभी बोलती हे..

देवायत : (जेंपते अंदर आते) मंजु तुभीनां.., वेसे मौसीजी सच कहु.. इस कपडेमे आप कयामत लग रही हे.. आप नीकलोगीतो हम नेसे नौजवानोकी लाइन लग जायेगी हें..हें..हें..

चंदा : (अ‍ेकदम सरमाते हसते) क्या देवुजी आपभी.. दोनोके दोनो पती पत्नी अ‍ेक जेसेही हो.. मुजे नही आना बहोत सरम आ रही हे.. मे ये कपडे चेन्ज करती हु..

मंजुला : (जटसे) नही नही नही..मौसी अब हम मस्ती नही करेगे बस..? आइअ‍े खाना रेडी हे देवु आप फ्रेस होके आइअ‍े तबतक खाना नीकलवाती हे फीर दोनोको जानाभी हे..

चंदा : (हसते खडे होते) तुजे हमे भगानेकी बडी जल्दी हे.. तेरा इरादातो नेक हेना..? हें..हें..हें..

मंजुला : अरे मौसी फीकर मत करो मेरे पतीको भगाके लेजाओ तोभी गम नही हे हें..हें..हें..

तब चंदा उसे सरमाते हसते अ‍ेक पीठमे मुका मारदेती हे फीर दोनो खानेपे चली जातीहे तबतक देवायतभी आगया ओर वोभी मंजुके पास बेठ गया तब चंदा बार बार देवुकी ओर देखते सरमा रहीथी फीर हल्की मुस्कानके साथ नजरे जुका लेती थी तब मंजु चंदाकी हर हरकतको नोटीस कर रहीथी ओर मनही मन खुस हो रहीथी उनका नीसाना बीलकुल सही लग रहाथा फीर तीनोने मजाक मस्ती करते खाना फीनीस कीया तो दया सब बरतन उठाके ले गइ ओर तीनो सोफेपे आके बेठ गये तबतक १ बज चुकाथा..

देवायत : तो मौसी हम चले..? सहेरभीतो यहासे दुर हे..

चंदा : (सरमाके हसते) जी.. चलीये..

तब मंजु थोडी मायुस होगइ देवायत उनके चहेरेका भाव फौरन पहेचान गया तीनोही खडे हो गये तब देवायत मंजुके पास चला गया ओर उनकी आंखोमे प्यार भरी नजरोसे देखता रहा ओर बहारकी जानेके लीये नेसेही मुडा तब मंजुने हीमत करके फोरन देवायतका चहेरा अपने हाथोमे लेलीया ओर उनको अ‍ेक होठोपे चुंबन जड दीया तब चंदाभी मुह घुमाते सरमसे पानीपानी होते हसने लगी फीर मंजुके सामने देखके सरारतसे नैन नचाने लथी तब मंजु खुब सरमाइ ओर मुहको दुसरी ओर करते हसने लगी




फीर देवायत ओर चंदा दोनोही कारमे बेठ गये ओर मंजुको बाय करते हवेलीके बहार नीकल गये तब कार सीधी गांवके रास्तेसे जंगलमे होकर सहेरकी ओर दोड पडी तब चंदा देवायतके सामने देखके हसती रही आज चंदा कारमे बेठते कयामत लग रहीथी ओर बार बार अपने बालोको कानके पीछे लेजा रही थी.. तब देवुभी इनकी ओर हसता रहेता था वो अ‍ेक हाथसे कार चलाता रहा ओर दुसरा हाथ चंदाके हाथोपे रख दीया तब दोनोने अपने हाथोकी उंगलीया आपसमे फसाली..




चंदा कुछ इस तराह दीखती थी, आखीर देवायतने अपनी चुपकी तोडी..





देवायत : बेबी देखा तेरी सौतननेही हमे भेजदीया.. क्या तुमसे उन्होने कोइ बात की हे..?

चंदा : (सरमाके हसते) हां.. बहोत पीछे पड गइ हे..की सादी करलो सादी करलो.. अब उसे केसे कहुकी मेने तेरेही पतीसे सादी करली हे.. मुजेतो बहोत सरम आरही थी.. ओर देवु पता हे अ‍ेक बार क्या कहा.. कहेतीथी अगर मेरी सौतन बननाहे तोभी मुजे कोइ अ‍ेतराज नही हे.. देवु मुजे लगताहे उनको हम पर सक होगया हे..

देवायत : (सीरीयस होते) नही चंदा.., मुजे लगताहे मामला कुछ ओर ही हे.. कल रातमे भी मुजे यही केह रही थी.. की आप मौसीसे सादी करलो मुजे कोइ अ‍ेतराज नही.. उसनेतो अपनी कसम तक देदी.. इतना फोर्स करतीथी मुजसे.. जरुर कोइ ओर बात हे.. क्या बातो बातोमे तुजे कुछ नही बताया..?

चंदा : (आस्चर्यसे सीरीयस होते) नही जानु.. मुजे कुछभी नही बताया.. अगर प्रोबलेम होती तो कमसे कम मुजेतो बतातीही हे.. हम दोनो सब बाते अ‍ेक दुसरेसे सैर करते हे..

देवायत : बेबी मेरातो जी गभरा रहा हे.. मुजे लगता हे वो हमसे कुछतो छीपाती ही हे..

चंदा : (याद आते) हेय..हेय.. जानु अ‍ेक मीनीट..मुजे कुछ याद आया.. धिरेन केह रहाथा.., कुछ.. याद हे.. हमने सादी की तब हमने दो दीन सुहागरात ओर दीन मनायेथे.. तब धिरेन मंजु भावु सब बडी दीदीके घर थे.. तब धिरेन केह रहाथा वो मंजु दीदीके साथ सहेर गया था.. कुछ तबीयत खराब लग रहीथी अ‍ेसा केह रहाथा.. सायद धिरेनको पता होगा मे छुपकेसे उनसे बात करलुगी..

देवायत : चंदा कुछतो हे तभीतो बार बार मुजे तुमसे सादी करलेनेको केह रहीथी.. अपनी कसम तक देदी..

चंदा : (सीरीयस होते) जानु आप टेन्शन मत लो मे सब जान लुगी.. अगर होस्पीटल गइथी तो इनके पेपर घरपेही कही छुपाके रखे होगे.. आप उसे ढुंढना..

देवायत : (गभराते) हे..भगवान फीर कोइ नइ मुसीबत ना आजाये.. कास हमारा सक जुठा नीकले..

चंदा : (तब चंदा कारमे बेठेही देवुको हग करके उनके कंधेपे सर रख देती हे) जानु मे हुनां जरुरत पडीतो मे वहा आजाउगी.. मुजे धिरेनकी कोइ परवा नही.. वो अब बडा होगया हे अच्छा बुरा सब समजता हे.. मे आपको अ‍ेसे तकलीफ या चीन्तामे नही देख सकती.. ओर जो हमे मालुम ही नही उनके बारेमे गलत क्यु सोचना.. बाबु स्माइल करो.. आपके साथ इतनी खुबसुरत बीवी घुमने आ रही हे, हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) हं.., सही केह रही हो.., बेबी तुम घर आजाओ.. मुजे आप दोनोसे बहोत बहोत प्यार करना हे.. अब मे आपके बीना नही रेह सकता.. हो सकेतो धिरेनसे बात करलो..

चंदा : नही नही.. अभी नही.. पहेले उनकी सादी होजानेदो वो अपनी बीवीमे बीजी होजायेगा तब हम बात करेगे.. तब हमारी बात समज भी सकेगा ओर मानभी लेगा..

देवायत : तो फीर जल्दी सादी करवादो.. अब भानुकी मां को नही मुजे जल्दी हे.. हें..हें..हें..

चंदा : (सरमाके हसते बाजुमे मुका मारते) नोटी..बोय.. अरे बाबा जीतनी जल्दी आपको हे उतनीही मुजेभी हे.. जानु कुछ दीन इन्तजार करलो.. प्लीज.. मेरे अच्छे बच्चे.. हें..हें..हें..

तब चंदा सरमाते तीरछी नजरसे देवातको देखती रहेती हे.. दोनोही घने जंगलसे गुजर रहेथे तब देवायतने अचानक कारको जंगलकी ओर मोड दी तब चंदा हसते देवायतकी ओर देखने लगी ओर सरमसे पानीपानी होने लगी, उनको पता था देवायतने कार क्यु जंगलमे लेली.. तब नजरे जुकाते सरमाने लगी ओर मंद मंद मुस्कराती रही फीर तीरछी कातील नजरोसे धीरेसे पुछा..

चंदा : (सरमाते) आपने कारको इधर जंगलमे क्यो लेली..? जनाबका इरादातो नेक नही लगता..

देवायत : (पेन्टमे लंडको अ‍ेडजेस्ट करते मजाकमे) बेबी आपतो बहुत समजदार हो.. हें..हें..हें.., (सीरीयस होते) नही हम बाबाके पास जा रहे हे..

चंदा : जानु लेकीन आपको वकीलको मीलना था..

देवायत : नही उनसे सीर्फ तारीख लेनी हे.. वो फोनपे बात होजायेगी.. वेसे आपको भी बाबाको मीलना थाने..?

चंदा : हां लेकीन इतनी जल्दी मुलाकात.. क्या वो हमारे बारेमे सबकुछ जानते हे..?

देवायत : हां.. तुम चलतो रही हो.. खुद देख लेना.. ओर बाबासे सब जानभी लेना..

तब दोनोही अ‍ेक आश्रमके पास रुक जाते हे ओर नीचे उतरने लगते हे तब चंदा तो देखतीही रही.. की इतने घने जंगलमे इतना बडा आश्रम.. वो कुछ घबरासी गइ ओर देवायतके पास जाके उनका हाथ पकडलीया.. तब देवायत समज जाता हे ओर उनके हाथको थाम लेता हे फीर दोनोही अंदरकी ओर चलने लगतेहे तब चंदा यंत्रवत उनके साथ कदम मीलाते चलने लगती हे तब देवायत उनसे सब बताने लगता हे..

देवायत : चंदा तु अपने सरको पलुसे ढकले.. ये हमारे कुलगुरु हे.. पता नही इनकी उमर कीतनी हे.. हमारे परदादाके टाइमसे यही हे.. कहेते मे अ‍ेक मक्सदसे आया हु.. पर हमे बताते नही..

चंदा : हां तबतो कोइ महान संतही होगे.. आज दर्शन करनेका मौका मील गया..

दोनोही बाते करते अंदर जाने लगे तब वहा बहोत सारे सेवक काम कर रहे थे सभी देवायतको देखते नमस्ते ठाकुरसाब.. कहेते अभीवादन करते रहे.. ओर आखीर दोनो अ‍ेक होलमे चले जातेहे वहा सामने अ‍ेक सीहासन जेसी गादीपे बाबा बेठे थे.. तो दोनोको देखतेही मुस्कराने लगे.. तब देवायत ओर चंदा उनके पैर छुने लगे तब बाबाने दोनोके सरपे हाथ रख दीया ओर चंदाकी ओर मुस्कराते कहा....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १६

दोनोही बाते करते अंदर जाने लगे तब वहा बहोत सारे सेवक काम कर रहे थे सभी देवायतको देखते नमस्ते ठाकुरसाब.. कहेते अभीवादन करते रहे.. ओर आखीर दोनो अ‍ेक होलमे चले जातेहे वहा सामने अ‍ेक सीहासन जेसी गादीपे बाबा बेठे थे.. तो दोनोको देखतेही मुस्कराने लगे.. तब देवायत ओर चंदा उनके पैर छुने लगे तब बाबाने दोनोके सरपे हाथ रख दीया ओर चंदाकी ओर मुस्कराते कहा....अब आगे

बाबा : अखंड सौभाग्यवती भव: बेटी आखीर अपने पतीके साथ आही गइ.. क्या यहा पहेली बार आइ होनां?

चंदा : (सरपे पलु ओर हाथ जोडते) जी..बाबा.. आपके दर्शन करनेथे कबसे आनेका सोच रहीथी आज मौका मील गया..

बाबा : (हसते) मुजे पता हे इस वक्त तेरे मनमे बहोत सारे सवाल हे.. इसीलीये दोनो टाइम लेके आये हो.. हें..हें..हें.., कोइ बात नही.. तु बहोत स्ट्रोंग हे येतो दुख सहेन ही नही कर सकता बहोत इमोस्नल हे..

देवायत : (समज गया मनमे चोसते) बाबा मुजे कुछ कहेने वाले नही.. इसीलीये चंदाको स्ट्रंोग कहा.., इसका मतलब वो चंदाको कुछ खुलके बात कहेनेवाले हे जो मेरी हाजरीमे नही केह सकते तो मुजे दोनोको अकेला छोड देना चाहीये..

देवायत : बाबा आप दोनो बाते कीजीये मे जरा आश्रममे सबको मीलके ओर देखके आता हु..

बाबा : (हसते) हां.. काफी समजदार हो तुम.. हें..हें..हें.., जाओ.. ओर वो सेवकको चाइका कहेते जाना..

तब देवायत उठके चला गया तो चंदा ओर बाबा उनके सामने हसते ही देखते रहे.. फीर चंदाने बाबाकी ओर हसते हुअ‍े देखा तब बाबाने कहा..

बाबा : हां बेटी बोल.. क्या कहेना चाहती हे..? क्या इनसे सादी करली..?

चंदा : (सरमाते हसते) हां बाबा.. दोनोमे प्यार होगया.. ओर मे विधवा थी.. तो फीर करली सादी..

बाबा : बेटी तु जानती नही.. तेरी जींदगी इनके साथही गुजरने वाली हे तो सादीतो होनी ही थी..

चंदा : लेकीन बाबा मेरा अ‍ेक बेटा भी हे.. जो इनकी बहेनके साथ ही रीस्ता तैय कीया हे..

बाबा : (हसते) कौन..? वो पुनम बीटीया.. अच्छी लडकी हे.. तु इनकी टेन्शन मत ले.. बस तुजे बहोत कुछ देखना हे जो तु सोचभी नही सकती.. बस कुछ बाते जानके विचलीत मत होना.. क्युकी इनके घर बहोत बडा बदलाव आने वाला हे.. बस अभी इतना कहेना हे आने वाले समयमे तुजेही सब सम्हालना हे.. जबभी तुजे कोइ सम्या लगे मेरे पास चली आना.. तुम नही जानती देवायत कोन हे.. तुम कोन हो.. सब समयपे छोडदे..

चंदा : (सीरीयस होते) बाबा अ‍ेक उलजन हे.. इनकी बीवी मेरी भांजी हे.. आज कल मुजसे दुसरी सादीके लीये फोर्स कर रही हे अब इनको हमारे बारेमे कुछ नही पता.. फीर इनकोभी मुजसे सादीके लीये केह रहे थे..

बाबा : (सीरीयस होते) बेटी.. सीर्फ तुजेही बता रहा हु.. वरना येतो टुटही जायेगा.. सुन.. इनकी पत्नीकी बहुत कम आयु हे.. वो जानती हे.. इसीलीये तेरी इनके साथ सादी करवाना चाहती हे तुजेभी इसीलीये दुसरी सादीका केह रही हे.. ताकी इनके पतीको ओर बच्चेको सम्हाल सको..

चंदा : (चोंकते) लेकीन बाबा उसे हुआ हे क्या..? जो अ‍ेसी बाते कर रही हे..

बाबा : बेटी ये सीर्फ तेरे लीये ही हे.. उनके खुनमे कुछ खराबी हे.. जब बच्चा होगा तब थोडी कमजोर होगी तब उस बीमारी उनपे हावी होजायेगी ओर धीरे धीरे मोतकी ओर धकेल देगी.. ओर ये बात वोभी जानती हे..

चंदा : उनको ये बात पता थीतो फीर ये बच्चा कीया ही क्यु..?

बाबा : बेटा वो देवायतको खुब प्यार करती हे.. ओर चाहती हे इनका वारीस इनकी कोखसेही आये..

चंदा : (परेसाान होते) हे भगवान.. बीलकुल पागल हे.. बाबा इनमे आप कुछ नही कर सकते..?

बाबा : नही.. जो विधीका विधान लीखा हे वोही सब हो रहा हे.. कुछ साल बाद तेरे कोखसेभी अ‍ेक --अंस पैदा होगी.. तो वो तेरी सौतनके पोतेकी जो वोभी ---अंस होगा उनकी बीवी होगी.. तु सब देख सकेगी तब उनके साथभी तेरा रीलेशन क्या होगा वो मे तुजे अभी नही बता सकता.. क्युकी तब वो कीसीभी रीस्तेको नही मानते होगे.. सब पकृतीके हीसाबसे जीने वाले लोग होगे..

चंदा : (आस्चर्यसे चोंकते) क्या..? बाबा मुजे क्या क्या देखनेको मीलेगा.., मेतो सोचतेही पागल होगइ हु.. मेरे साथ रीलेशन मतलब क्या..? मेतो तब इनकी दादी हुगी

बाबा : (हसते) बेटा वो जीस जमानेमे राजा था वहाभी उन्होने अपनी दादीसेही सादी करके उनको अपनी रानी बनाया था, इसीलीये केह रहाथा तु विचलीत हो सकती हे.. बाकी तुजे मे सब समयपे कहेता रहुगा जबभी उलजन हो तब मेरे पास आजाना.. ओर अ‍ेक बात.., तु पीछले जन्ममे इनके साथ रीलेशनमे थी ओर तुनेही इनको हर जन्ममे पानेकी कामना कीथी तभीतो तु इनको मीलेगी..

चंदा : (आस्चर्यसे) क्या मे..? उनको मीलीथी..? तो फीरर मुजे इस जन्ममे ज्ञात क्यु नही हे..?

बाबा : (हसते) बस अभी कुछ नही केह सकता ओर तुजे ज्ञातभी होगा.. लेकीन कब वो मे तुजे नही बता सकता.. क्युकी मेरीभी कुछ मर्यादाये हे.. ये सब बाते अपने तक सीमीत रखना ये देवायतकोभी मत बताना..

चंदा : बाबा मेरी मंजुका क्या होगा.. वो ठीक नही हो सकती..? उनके पास कीतना टाइम हे..?

बाबा : बेटा अभीतो बच्चेके बाद कुछ दो साल जीयेगी.. तुजे अ‍ेक खुसखबरभी देता हु.. क्युकी उनका जाना अनीवार्य हे.. वरना वो वापस कैसे आयेगी..? तेरी दुसरी भांजीकी कोखसे.. वोही तो हे जो सबकी मां हे.. जो मंजुके बेटेसे सादी करके उस --अंसको जन्म देगी..

चंदा : (खुसीसे) क्या..? जो मेरी मंजुही होगी..? लेकीन बाबा मेनेतो सुनाथा वो राजाकी यानी वो अंसकी बीवी बनकेही आती हे तो फीर क्या.. देवु.. उनका वोही अंस हे..?

बाबा : (हसते) देखा थोडी हीन्ट देदीतो तेरा दीमाग केसे चलने लगा.. क्या सब आजही उगलवा लेगी..? कुछ बाकीके लीयेभी रख.., हें..हें..हें.., हमारी बहुत सारी मुलाकाते होती रहेगी.. ओर सुन.. तेरे बेटेकी सादी करदे.. उनके बारेमे तुजे अभी नही बता सकता..

चंदा : जी बाबा.. जेसे आप कहे.., रास्तेमे देवुभी यही केह रहा था.. ठीक हे बाबा अब मे आपको मीलती रहुगी.. आजतो आपने मुजे कीतने जटके देदीये हें..हें..हें..

बाबा : (हसते) ले चाइ आगइ कहा गया वो.., फीर तुजे जानाभी हे.. बेटाको लेने जा रहे होनां..?

देवायत : (अंदर आते) जी बाबा वही जा रहेथे सोचा आपको मीलके जाये चंदाकोभी आपको मीलना था..

बाबा : (हसते) ठीक हे चाइ पीले फीर दोनो नीकलो वो दो घंटेमे पहोच जायेगा.. ओर सुन अब वो सबकी सादी करदे.. जरुरी हे.. ओर बेटी इधर आते रहेना.. तेरी भांजीको लेकर आ.. उनसेभी बाते करनी हे..

चंदा : (देवुकी ओर हसते) जी.. हम तीनोही आयेगे..

फीर देवायत ओर चंदा बाबाको दक्षीणा देके नीकल गये तब देवायत कारमे बेठतेही पुछने लगा की बाबासे क्या बाते हुइ तब चंदाने बडीही सीफततासे बातको घुमा दीया ओर देवायके जांगपे हाथ फेरते कातील मुस्कान करती रही तब देवायतसे कंट्रोल करना मुस्कील हो गया तो वो चंदाके बुब्सको पकडते मसलने लगा तब चंदा ने जोरोसे हसते बडी मुस्कीलसे छुडवाया तब उनकी पेन्टकी ओर देखते कहा..

चंदा : (पेन्टके उभारकी ओर इसारा करते) क्या ये हमेसा अ‍ेसेही रहेता हे.. हें..हें..हें..

देवायत : हां जब तुम जेसी हसीनाये साथमे होतो..

तब चंदा सरमसे नजर जुकाके हसने लगती हे अ‍ेसी बाते करते वोभी गरम होने लगीथी उनकी चुत लगातार पानी छोडते गीली होने लगीथी.. वोभी जटसे देवायतका दमदार लंड अपनी चुतमे लेना चाहती थी तभी देवायतने जंगलमेही अ‍ेक खंडहर जेसी जगाहपे कार रोकदी वहा सनाटा छाया हुआ था तब चंदा समज गइकी देवायतने यहा कार क्यु रोकी हे.. तब वो सरमसे पानीपानी होने लगी फीर सरमाते धीरेसे कहा..

चंदा : जानु.. देखना मेरे कपडे खराब ना होजाये.. तुम समज गयेनां..? अगर कीसीने देखलीया तो समज जायेगा.. खास करके धिरेन.. आजकल अ‍ेसी फील्मे बहोत देखता हे.. पता नही अ‍ेसी गंदी फील्म कहासे लाता हे अ‍ेब बार मेने उनका मोबाइल चेक कीयाथा.. तो बहुत सारी फील्मे थी..

देवायत : अरे बाबा देखने दोनांं लडका जवान हो गया हे.. इस उमरमे नही देखेगातो कब देखेगा..

चंदा : (जुठा गुसा करते) अब आपभी उनकी तरफदारी मत करो..

तभी देवायत ओर चंदा दोनो उतर जातेहे फीर आजु बाजु सब नजर घुमाके देखते हे.. तब देवायत कारकी पीछली सीटका आसन उठा लेता हे ओर चंदाका हाथ पकडके खंढरहकी ओर चलने लगता हे तब चंदा देखके डर रही थी.. ओर दोनो अंदर आगये.. जब चंदाने अंदर देखातो खंढहर पुरा साफ सुथरा दीखाइ दे रहा था तब उनको बडा आस्चर्य हुआ..

चंदा : जानु बहारसे तो खंढहर हे लेकीन अंदर इतना साफ सुथरा केसे..? क्या यहा कोइ रहेता हे..?

देवायत : नही बेबी.. ये कबीलेके लोगोके लीये हे.. इनकीभी अ‍ेक दीलचस्प कहानी हे.. लेकीन बादमे सुनाउगा चल अभीतो मेरी बीवीको प्यार करना हे चल तेरे सब कपडे नीकाल दे हम अ‍ेक रुममे चले जाते हे यहा बहोत सारे कमरे हे.. ये लोग इनको हमेसा साफही रखते हे.. क्युकी उन लोगोका ये हनीमुन स्युट हे हें..हें..हें..

चंदा : (जोरोसे हसते) क्या हनीमुन स्युट..? देवु मुजे इनकी बाते जाननी हे मुजे बताओना प्लीज..

देवायत : अरे अभी नही हमे जानाभी हे.. फीर वो धिरेनभी आजायेगा हम रास्तेमे बात करेगे.. ओके..

कहेते देवायतने सीटका आसन बीछा दीया तब चंदा सरमाती वही खडी रही जब आसन बीछाके चंदाके सामने देखातो चंदा सरमसे पानीपानी होने लगी ओर सरमाके नजरे जुकाली..




तभी देवायत उनके पीछे चला गया ओर पीछेसे चंदाको बाहोमे भरलीया फीर उनकी गरदनपे अपने होंठ रखदीया ओर चुमने लगा फीर चुमते चुमतेही उनकी सारीके पलुको नीचे गीरा दीया..




वहा हर रुममे कील लगी हुइथी ताकी सब अपने कपडे वही रख सके तब देवायतने चंदाके सब कपडे नीकाल दीये अब चंदा सीर्फ टु पीसमे रेह गइ तब देवायतने खुदके कपडेभी नीकालके सब कपडे अच्छेसे टांग दीया.. फीर आके चंदाको बाहोमे भरलीया तो चंदाने भी अपने दोनो हाथ देवायतकी गरदनमे डाल दीये ओर उनके होंठ देवायके होठोसे मीलादीया दोनोही मदहोस होके स्मुच करने लगे तब चंदा बीलुकल कामुक होगइ..




दोनोही अपनी जीब(टंग)को अ‍ेक दुसरेके मुहमे घुसानेकी कोसीस करने लगे तब चंदा पुरी तराह मदहोसीमे छा चुकीथी.. तभी देवायतने चंदाको बाहोमे उठालीया ओर बीछानेकी ओर चल पडा तब चंदा देवायतको कामु नजरसे देखती रही ओर देवायतने उसे बीछानेपे पीठके बल सुला दीया ओर खुदभी उनके पास लेट गया तो चंदाने उसे बाहोमे भरके अपने उपर खीच लीया तो देवायत उनके उपर चडतेही उनकी गरदनको चुमने लगा तब चंदा सीसकारीया करते मदहोसीमे छागइ ओर अपना होस खोने लगी..




चंदा : सीइइइ आहहह..इइइइइ देदेवुवुवु.. प्ली..जजज डा..ललल..दोददो उउउउससससआआइइइइइ

कहेते उसने हाथ नीचे लेजाके देवुका लंड मुठीमे पकड लीया ओर अपनी पेन्टीके उपरसेही देवुका लंड चुतपे घीसने लगी.. उनकी आधी आंख चड गइ थी देवायतभी पुरी तराह कामातुर हो गयाथा अब उनसेभी रहेना मुस्कील होने लगा तब वो चंदाको बाहोमे भरके पलट गया ओर उनकी ब्राको खोलने लगा तो चंदानेभी फटाफट अपनी ब्रा नीकलदी ओर उसने देवायतको बाहोमे भरके फीरसे पलट गइ ओर अपनी टांगे मोडके खुदने अपनी पेन्टी नीकाल दी ओर दोनो पैर फेला दीये तब देवायत उनके पैरके बीच बैठ गया..

ओर अपना मुह चंदाकी चुतपे लगा दीया तो चंदाकी सीसकारीया नीकल गइ ओर उसने अपनी आंखे आधी चडाली तब देवायत चंदाके दोनो हाथ पकडके उनकी चुतके दानेको अपने दांतोसे दबाने लगा..तो चंदाकी हालत रोने जेसी हो गइ ओर वो इस हालतको बरदास्त नही कर पाइे

चंदा : नही..नही..नही.. मर गइइइइ नो..नो.. दे..वु.. पली..ज.. मत करो.. यार.. अब डालभी.. दो..सीइइइइ चोदलो.. मुजे..सीसीसीइइइइ हंहंहंमममममउउउउइइइइइ ससससस देदेदेवुवुवुवु.. डाआआअललललदोदोदो..

वो देवायतके सरके बालोको पकडके अपने उपर खीचने लगी तब देवायतकोभी लगाकी अब देर करना सही नही हे वो उनके पैरके बीच बेठ गया ओर लंड पकडके धीरेसे चंदाकी चुतमे धकेलने लगा.. तब चंदाकी आहे नीकल गइ..लंड डालतेही देवायत चंदाके उपर चीपकके लेट गया तब चंदाने उनकी गरदनमे दोनो हाथ डालके उसे जोरोसे भीचलीया ओर सीसकारीया करने लगी..




तभी देवायत धीरे धीरे अपनी कमर चंदाकी चुतमे दबाते लंडको चंदाकी चुतमे धकेलने लगा जेसेही चंदाने अपनी चुतके अंदर देवायतके लंडको महेसुस कीया उनकी मदहोसीमे अ‍ेक आहे नीकल गइ.. ओर उनको अ‍ेसी सांती मीली मानो वो स्वर्गमे चली गइ हो.. तभी देवायत धीरे धीरे कमरको जटके मारने लगा ओर चंदाकी चुदाइ करने लगा, चंदा पुरी तराह कामातुर होगइ थी उसे कोइ होंस नही था वोतो बस आधी आंख चडाके चुदाइका मजा लेने लगी ओर नाजाने क्या क्या बडबडाने लगी.. तब देवायतभी उसे चोदते चोदते मदहोसीमे जाने लगा ओर बडबडा रहा था..

चंदा : सीसीसीसीइइइइइ देदेदेवुवुवुवु... आहह.. आहह..आह.. उमंमंमंसीइइइ चो..दो मुेजे.. फा..ड दोदोइइ चुत.. मे..री.. देदेदे..दोदोदोदो.. बच्चा.. तुम्हारा.. फफफककककमीमीमी.. देदेदे..वुवुवु..सीसीसीइइइइइ

देवायत : मुमुमुजजसेसेसे.. रोजजजज.. चुचुदेदेगीगीगी..हं..हां..बोल..नां..चंचंचं..दादादा..

चंदा : हां..हां.. चोद..ले..ना.. उमंमममसीसीइइइइआहहहहहह सीसीसीइइइइ

देवायत : मे..रा.. बबबबच्चाचाचाचा.. पैदा..क..रे..गी..हं..सीइइ हां.. बोलनां.. चंदादादाआइइइ

चंदा : (मदहोसीमे) हां..हाहाहा.. करुगी.. आप..काकाका.. बबबबच्चाचाचाआआ देदो..सीइइ आहइइइ

दोनोही कामाग्नीमे जलते नाजाने क्या क्या बडबडा रहेथे तब दोनोकोही होस नही था.. देवायत ने दोनो हाथ चंदाकी गरदनमे डाल दीयेथे ओर उनका सर उचा करते अपने सरसे लगाके बस चंदाको चोदेही जा रहा था तब चंदाभी उनकी कमरपे हाथ रखते देवायतको अपनी चुतकी ओर धके लगानेमे साथ दे रहीथी..




तभी अचानक चंदाने देवायतको खीचके अपने आपसे चीपका लीया ओर उनको जोरोसे बाहोमे भीच लीया ओर अपनी कमरको उछालते जटके मारने लगी.. तब देवायतको अपने लंडपे गरम गरम महेसुस होने लगा तो समज गयाकी चंदा जड गइ हे तबभी देवायतने चुदाइ जारी रखी पुरे खंढहरमे सनाटा छाया हुआ था बस आवाज आ रहीथी तो दोनोके चुदाइकी.. पुरे कमरेमे फच..फच.. ओर थप..थप.. की आवाजे गुंज रही थी.. आज कामदेव ओर रती पुरी तराह देवायत ओर चंदापे हावी थे.. जेसे अपने अंसको चंदाके गर्भमे स्थापीत करनेकी कोसीस कर रहे थे.. लेकीन इनके लीये उनको कुछ ओर साल इन्तजार करना था..

तभी देवायत जोरोसे चोदने लगा ओर फीर अ‍ेकही जटकेमे लंडको चंदाकी चुतमे जड तक घुसा दीया ओर चंदाको जोरोसे बाहोमे भीचलीया तब चंदा समज गइ ओर उसने देवायतके होठोपे जोरोसे चुंबन लेलीया ओर आंख बडी करते उनकी आंखोमे देखती रही तभी देवायतने रेह रेहके कमरको जटके मारे.. तभी चंदाको अपने गर्भासयपे देवायतका गरम विर्य महेसुस हुआ ओर वो उतेजीत होके अ‍ेक बार फीर जडने लगी..

तभी देवायत उनके सीनेपे देर होगया दोनोही पसीनेसे भीग चुके थे ओर अपनी अपनी सांसोको दुरस्त करते रहे तभी चंदाने देवायतका चहेरा पकड लीया ओर उनके गालको सहेलाते उनकी आंखोमे देखती रही.. आज वो पुरी तराह संतुस्ट हो चुकीथी इनकी इतनी जबरदस्त चुदाइ होचुकी थी मानो आज इनकी सुहागरात हो.. वो चुदाइके पलको याद करते सरमाने लगी ओर देवायतका सर अपने सीनेपे भीच लीया..




दोनोही थोडी देर अ‍ेसेही पडे रहे तब चंदाकी चुतसे दोनोका पानी अपनी जगाह बनाते बहारकी ओर बहेने लगा तो चंदाने देवायतको अपने उपरसे हटानेकी कोसीस की तब देवायत उतर गया तो उनका लंड फच..की आवाज करते चंदाकी चुतसे नीकल गया तब चंदा सरमसे पानीपानी होगइ ओर नजर चुराते मुह दुसरी ओर करलीया.. फीर दोनोही खडे होगये ओर अपने अपने लंड ओर चुतको साफ करने लगे..

तभी देवायत चंदाका हाथ पकडके दुसरे कमरेमे लेगया वहा मटकेमे पानी भराथा तो चंदाके मुहपे स्माइल आगइ ओर दोनोने अपने चहेरेको ओर पसीनेको साफ कीया वहा उनको कंगी देखी तब चंदाने मुस्कराते उसे उठालीया ओर अपने बालोमे फीराते बालको सही करलीया तब दोनोही नंगे थे..

चंदा : (हसते) लगता हे आप इस जगाहसे काफी वाकीफ हो.. आपको सब पता हे.. हें..हें..हें..

देवायत : हां.. वो कबीलेके लोग यहा हनीमुनमे आतेहे तो सब रखते हे..

चंदा : (कंगी घुमाते हसते) अगर हम यहा हे ओर कोइ कबीलेके लोग आगये होते तो..?

देवायत : (हसते) नही आ सकते क्युकी अ‍ेकतो वो लोग मेरी कारको पहेचानते हे ओर दुसरा उनका अ‍ेक सीस्टम हे जीनकी वजहसे कोइ अंदर नही आता.. वो बादमे बताता हु चलो पहेले देर होगइ हे..

चंदा : (दोनो बहारकी ओर चलते) उछलते उछलते प्यार कर रहे थे तबतो देर नही हुइ थी.. नोटी बोय..

फीर बहार आते दोनोही अपने कपडे पहेनने लगे जब तैयार होगये तब दोनोही कारके पास चले गये तब चंदाने अंदरसे अ‍ेक पर्स नीकाला ओर उनमेसे अपने मेकअप का सामान नीकालते हल्कासा मेकअप करने लगी फीर कारके मीररमे देखते लीपस्टीक करने लगी तो देवायतने हसते हुअ‍े कहा..

देवायत : (हसते कारमे बेठते) अरे ये सामनभी लाइ हो..? कब रखा था..

चंदा : (कारमे बेठते) मुजे पता था जनाब प्यार(चुदाइ) करके बगैर मानेगे नही.., ओर मेरी हालत खराब करेगे.. तब मेने लेलीयाथा.. ताकी कीसीको पता ना चले.. तो मजनुजी.. चले.. हें..हें..हें..

तब देवायतने कारको जंगलसे बहारकी ओर जाने दी तभी चंदाने देवातयकी ओर देखते उनके कंधेपे सर रखदीया ओर कहा..

चंदा : जानु.. अब मुजे उन कबीलेके लोगोके बारेमे बताइअ‍े.. की केसे यहा हनीमुन मनाते हे..

देवायत : डार्लींग उन लोगोमे अ‍ेक सीस्टम होती हे.. वहा अ‍ेरेन्ज मेरेज कभी नही होता.. आये दीन रातका उत्सव ओर मेला जेसा करतेहे बीचमे फायर करते सब लोग सज सवरके नाचगान करतेहे तब अ‍ेक दुसरेको देखतेहे ओर उनमेसे लडकी या ओरत पसंद कर लेते हे..

चंदा : (आस्चर्यसे) ओरत भी..? क्या वो सादीसुधा होती हे..?

देवायत : (हसते) हां.. वो सादीसुधाभी होती हे जब दो लोगोकी आंख मील जातीहे तब इसारोमे बाते होजातीहे.. ओर दुसरे तीसरे दीन दोनो मीलके सब बाते तैय कर लेते हे ओर धरसे भाग जाते हे फीर यही खंडहरमे आके रहेने लगते हे.. ओर तबतक नही जाते जबतक ओरत या लडकी गर्भवती नही होजाती..

चंदा : (हसते) ओ..गोड.., फीर उनके घर वाले उनको ढुंढते नही..? आइ मीन उस ओरतको.. उनका पती कुछ नही कहेता..?

देवायत : नही चंदा वो दुसरोके साथ भाग गइ इसका मतलब वो अब उस आदमीके साथ रहेना नही चाहती.. ओर यहा आके दोनोही अ‍ेक कमरेमे ठहेरतेहे ओर अपना अ‍ेक अ‍ेक वस्त्र बहारकी ओर कीलपे टांग देते हे.. बाय चान्स कोइ इनको ढुंढके इधर आभी गया तो दोनोके वस्त्र देखके समज जातेहे दोनो अंदर हे ओर हनीमुन मना रहे हे.. आइ मीन चुदाइ कर रहे हे तब वो वापस लोट जाते हे जब ओरत या लडकी प्रेगनेन्ट हो जातीहे तब दोनो वापस कबीलेमे लोट जाते हे ओर दोनोके रीस्तेको कबुल करलीया जाता हे..

चंदा : ओर हमने वो मंदिरमे सादी कीथी वो..?

देवायत : हां..पहेले भागके वही जातेहे फीर सादी करके इधर आजातेहे अगर लडका लडकी कुआरे होतेहे तब दोनोके घर वाले उनको जुठमुठ ढुंढनेकी कोसीस करतेहे फीर यहा आके देखतेही दोनो अंदर हे तब दोनोके परीवार वापस चले जाते हे.. जब लडका लडकीको प्रेगनेन्ट करके धर लेजाता हे तब वहा उत्सव होता हे..

चंदा : (खुस होके जोरोसे देवायतकी बाजुको भीचते) वाव.. कीतना मस्त रीवाज हेनां..? हमसे ज्यादातो ये आदसवासी लोग फोरर्वड हे.. कास हमारे समाजमेभी कुछ परंपराये होती.. कमसे कम हम सही लडकेको चुनती.. तो मे आपको लेके भागजाती ओर यही आजाते.. हें..हें..हें..

देवायत : अरे तुम आइथीना हमारे खेतपे.. वहा वो हरीयाथाना जीनकी बीवी मालतीने हमे चाइ पीलाइ थी..

चंदा : (हसते) हां.. देखा हे मेने दोनोको.. इनका क्या..?

देवायत : हीरया इनमेसे अ‍ेक कबीलेका सरदार हे.. ओर दुसरे कबीलेके सरदरकी बीवीको आयेदीन इधर लाके ठोकता हे.. क्युकी वो ओरतको संतान नही हो रहीथी तो हरीयासे नैन लडा बेठी ओर दोनो आयेदीन जंगलमे मीलते हे.. देखना कुछही दीनमे हरीयासे वो पेटसे होजायेगी तब वो हरीयाकी रानी बनके उनके साथ आजायेगी.. इन लोगोमे ये सब आम बात हे.. ओर सेक्सके मामलेमे कीसीको कोइ अ‍ेतराज नही..

अ‍ेसीही बाते करते दोनो सहेरमे पहोच गये तब चंदाने देवायतको कोलेजका रास्ता दीखाया ओर दोनोही केम्पसमे जाके रुक गये तब वहा बहोत सारे लोग अपने बच्चोको लेने आयेथे अभी तक बस नही आइथी तो चंदा ओर देवायत कारमेही बेठे रहे तब देवायतने फोन करके वकीलसे बात करली ओर अपनी तारीख आगे बढानेको केह दीया.. तभी तीन बसे आती नजर आइ तो चंदा जटसे कारसे उतर गइ..

वो नही चाहतीथी धिरेन उनको देवायतके पास बेठे देखले.. तब देवायतभी सब सीचुअ‍ेशन समज गया.. ओर वोभी कारसे उतर गया.. तब थोडीही देरमे उसे धिरेन बससे उतरते नजर आया.. जो उनके कंधेपे बडा बेग रखाथा.. बससे उतरतेही वो इधर उधर नजर घुमाने लगा तब चंदाने हसते अपना अ‍ेक हाथ उठाके उचा करलीया तो धिरेनकी नजर अपनी मम्मीपे पड गइ तो स्माइल करते उनकी ओर आने लगा..

तो आतेही अपनी मम्मीके पैर छुके उनसे गले लग गया तब उनकी देवायतकी ओर नजर गइ तो खुसीसे जीजु कहेते चीला पडा.. ओर दोडके उनके गले लग गया तब देवायतभी हसने लगा..

धिरेन : क्या आप दोनो अकेलेही आये हो मंजुदी नही आइ..?

चंदा : (हसते) अरे.. वो इस हालतमे कहा आयेगी बेटे.. चल तेरा बहोत वेइट कर रही हे.. तेरे जीजुको इधर वकीलको मीलना था तो इनके साथही आगइ.. वेसे तेरी तबीयत तो ठीक हेनां..?

धिरेन : (बेगको पीछली सीटमे डालते) अरे मोम.. अ‍ेकदम मस्त.. बहुत मजा आया.. मे अगले सालभी जाउगा..

चंदा : (कारमे पीछे बेठते) हां अगले साल जाना अपनी बीवीके साथ.. हें..हें..हें..

धिरेन : (देवायतके पास बेठते सरमाते) क्या मोम.. मजाक करनेकी आदत नही गइ.. दीदीको कहेना पडेगा..

कहातो तीनो हसने लगे.. तब देवायतने कार जाने दी.. ओर थोडी ही दुर बहार नीकलते अ‍ेक आइसक्रिम पार्लरपे कार रोकदी तो चंदा ओर धिरेन देवायतकी ओर देखने लगे..

देवायत : (हसते) अरे दोनो चलो.. आइसक्रिम नही खानी क्या.. मेरा साला ओर जीजा आया हे तो आइसक्रिम तो बनती ही हे.. क्यु साले साब..

धिरेन : (कारसे उतरते) जीजु जोभी हो.. आप मुजे साला ही कहेगे.. हम हमारा रीस्ता चेन्ज नही करेंगे वरना मंजुदीदी मुजे कच्चाही खा जायेगी.. हें..हें..हें..

चंदा : (हसते) बीलकुल अपनी दीदीकी तराह पागल हे.. चल अंदर..

फीर तीनो अंदर पार्लरमे चले जातेहे तो अ‍ेक प्राइवेट केबीनमे जाके बेठ जातेहे वहा वेइटर पानी लेके आगया ओर तीन कपका ओर्डर लेके चला गया तभी धिरेनके मोबाइलकी रींग बजी तो स्क्रीनमे देखते फोन उठाके बात करने लगा.. तो देवायत ओर चंदा हसने लगे उन दोनोको धिरेनकी बात साफ सुनाइ दे रहीथी तो दोनोही समज गये कीसका फोन आया हे..

सामने : जनाब पहोच गयेकी नही..? तेरे जीजु ओर मौसी आगये..?

धिरेन : (धीरेसे) हां दीदी पहोच गया.. मोम..ओर जीजु लेने आयेहे.. सुनो.. आप केह रहीथी.. कुछ शोपींग के लीये जानाहे तब मेभी वहा आजाउगा.. चलो रखता हु हम बादमे मीलके बात करेगे मोम..जीजु.. यही हे.. बाय..

चंदा : (धिरेन फोन कट करता हे) कीसका फोन था..? जो छुपकेसे बात कर रहाथा लगताहे तेरी सादी जल्द करवादेनी पडेगी.. हें..हें..हें..

धिरेन : (सरमाके चीडते) मोम.. आपभी नां.., मंजुदीका फोन था. कोइ लडकीका नही समजी.. जीजु इधर बेठेहे कुछतो खयाल करो..

देवायत : (हसते) अरे मेने पुनमको अभी तक नही कहा हे.. उनको सरप्राइज जो देनी हे.. ओर अब सरमाना केसा तुम दोनोकी सगाइ होने वाली हे.. वो तेरी बीवी होने वाली हे.. तो बात करलीया कर.. हें..हें..हें..

धिरेन : (सरमाके हसते) क्या जीजु..

चंदा : (आइसकिंम आगइ) चल ठीक हे ठीक हे.. आइसक्रिम खा..

फीर तीनोने वहा आइसक्रिम खाइ तब बीचमे धिरेन अपनी टुरकी बाते करता रहा.. फीर बहार देवायतने बील पे कीया ओर तीनो कारमे बेठ गये ओर अपने गांवकी ओर चल पडे.. तब पुरे रास्ते चंदा पीछे बेठते कारके सेन्ट्रल मीररसे देवायतके चहेरेको देखती रही ओर देवायतभी चंदाको मीरर से देखता रहा.. जब धिरेनका ध्यान बहारकी ओर होता तो दोनोही अ‍ेक दुसरेके सामने आंख मारके हसने लगते.. दोनोकाही सफर अ‍ेक दुसरेके दीदार करनेमे खतम होगया ओर बीच बीचमे धिरनकी टांग खीचाइ करते रहे आखीर तीनो हवेलीपे आगये....

कन्टीन्यु
 
Bhai Muje or logoki bhi koment chahiye agar mere koe bhi pathako ko stori achhi lage to jarur koment kijiye
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १७

फीर तीनोने वहा आइसक्रिम खाइ तब बीचमे धिरेन अपनी टुरकी बाते करता रहा.. फीर बहार देवायतने बील पेकीया ओर तीनो कारमे बेठ गये ओर अपने गांवकी ओर चल दीये.. तब पुरे रास्ते चंदा पीछे बेठते कारके सेन्ट्रल मीररसे देवायतके चहेरेको देखती रही ओर देवायतभी चंदाको मीररसे देखता रहा.. जब धिरेनका ध्यान बहारकी ओर होता तो दोनोही अ‍ेक दुसरेके सामने आंख मारके हसने लगते.. दोनोका ही सफर अ‍ेक दुसरेके दीदार करनेमे खतम होगया ओर बीच बीचमे धिरनकी टांग खीचाइ करते रहे आखीर हवेलीपे आगये....अब आगे

कारकी आवाज सुनतेही मंजु जटसे हसती हुइ बहार आने लगी तब धिरेन उनको देखतेही उनके पास दोड पडा ओर धीरेसे उनका खयाल रखते उनके गले लग गया तब मंजुने उनका सर चुमलीया.. ओर उसे देखतीही रही.. तब देवायत ओर चंदा कारसे उतरके उन दोनो भाइ बहेनका प्यार देखते रहे.. तभी मंजु धिरुनका हाथ पकडके उसे सोफेकी ओर ले गइ फीर धिरेनको बीठाके खुद उनके पास बेठ गइ ओर उनके चहेरेको पकडके उनके गाल सहेलाती रही.. तब दोनोका प्यार देखके देवायतकोभी थोडी ज्वेलेसी फील हुइ..

देवायत : (धीरेसे अंदर आते) देखा चंदा भाइ मील गयातो पतीकोभी भुल गइ.. हें..हें..हें..

चंदा : (सरारतसे हसते) कोइ बात नही पत्नीका प्यार उनके भाइकी मां दे देगी.. हें..हें..हें..

तब दोनोही हस पडे ओर अंदर आके दोनोके साथ बेठ गये तब दया सबके लीये पानी लेके आइ तब देवायतको पानी देते उनके सामने कातील स्माल करने लगी.. फीर ग्लास लेके चली गइ..

मंजुला : (हसते) भाइ अब जबतक तेरी सादी ना करवादु तबतक तुजे ओर मौसीको यही रहेना हे अभीसे केह देती हु..

धिरेन : लेकीन दीदी मुजे कोलेजभीतो जाना पडेगा रीजल्ट लेने..

मंजुला : कोइ बहाना नही चलेगा.. रीजल्ट लाना हेतो यहासे कार लेके लेआना.. वेसेभी तुजे कार चलानातो आताही हे.. अरे बाबा मौसी मेरे साथ होस्पीटल भीतो आयेगी.. वहा अकेला क्या करेगा..? फीर लखन पुनम भीतो आजायेगे.. तेरा टाइम नीकल जायेगा.. हें..हें..हें..

धिरेन (सरमाते) हां अब आपभी मेरी टांग खीचो.. पुरे रास्ते मोम ओर जीजुनेतो परेसान कीया हे..

मंजुला : (गालको सहेलाते जोरोसे हसते) अलेले..मेरे भाइको परेसान कीया.. देख लुगी दोनो को..

चंदा : बेटा.. सफरसे थक गया होगा जा पहेले नहाले.. तेरा रुम उपरही हे.. जा.. फीर कुछ खा पीले..

तब धिरेन उपर चला जाता हे वो यहा कइ बार आचुका था तबही उन्होने पुनमको इधर देखाथा, तबसे ही वो पुनमको पसंद करने लगाथा उनको क्या पताथा की पुनम अपने भाइको अपना ड्रिमबोय मानती थी.. जबसे समजदार हुइ ओर दुनीयादारीका ज्ञान हुआ तबसेही अपने भाइमे अपने पतीको देखती थी जबसे उनके भाइने उसे मोबाइल दीलवाया था तब होस्टेलमे फ्रि टाइम अ‍ेसी कामुक कहानीया पढती रहेतीथी तभी इनकी अ‍ेसे इन्सेस्ट रीस्तोमे दीलचस्पी बढने लगी थी ओर अपने भाइ देवायतका गठीला बदन देखके उनकी ओर पहेलेसे ज्यादा आकर्सीत होगइ थी..,

लेकीन भाइकी सादीभी होगइ ओर दुनीया अ‍ेसे रीस्तेको पसंद नही करती.., कमसे कम गांवमेतो अ‍ेसे रीस्तेको कभी स्वीकृती नही मीलती तब पुनमने अपना मन मारलीया ओर भाइ कहे वहा सादी करनेका सोच लीयाथा.. जब भाइने उनके रीस्तेकी बातकी तब उसे नही पताथाकी उनके भाइने उनका रीस्ता तैय करलीया हे जबसे उनके भाइने उनके रीस्तेकी बातकी तबसे उनकी जवानी नीखरने लगी ओर हर रात अपने भाइको इमेजींग करते अपने आपको सांत करने लगीथी..

जब धिरेन नहाके कंपलीट होगया तब नीचे आगया ओर सब डीनर करने बेठ गये तबभी खाना खाते धिरेन अपनी टुरकीही बाते करता रहा.. फीर सबने डीनर फीनीस कीया ओर होलमे आके बेठ गये.. धिरेन काफी थका हुआ लगता था तो चंदाने उसे सोनेके लीये उपर भेज दीया फीर सब उठ गये ओर अपने अपने रुममे सोने चले गये.. तब जाते वक्त चंदा देवायतकी ओर ना मे गरदन हीलाके अंदर चली गइ

क्युकी आज देवायतने उनकी जबरदस्त चुदाइ करडाली थी जीनकी वजहसे उनको अभीभी चुतमे जलन महेसुस हो रहीथी.. तो देवायतभी मुस्कराते मंजुको लेके रुममे चला गया.. अंदर जातेही दोनोने चेन्ज करलीया ओर बेडपे आगये तब मंजु देवायतके सीनेपे सर रखके सीना सहेलाने लगी.. ओर लगातार उनकी आंखोमे प्यार भरी नजरोसे देखती रही.. तो देवायतने उनकी ओर देखते कहा..

देवायत : बेबी क्या हुआ..? अ‍ेसे क्यु देख रही हो.. कोइ परेसानी..?

मंजुला : (हसते गरदन ना मे हीलाते) नही जानु.. कोइ परेसानी नही हे.. जानु अब वो पुनम लखनको कब लेने जाना हे..? उनका फोन बोन आया था..?

देवायत : (हसते) हं.. समज गया.. तुजे बडी जल्दीहे उनकी सगाइ करनेकी.. हें..हें..हें..

मंजुला : (सरमाके हसते) हां.. जल्दीतो होगीना.. मेरी अ‍ेकलोती ननंद ओर भाइ हे.. हें..हें..हें..

देवायत : चलो ठीक हे वो आतेही हम सगाइ कर देगे.. इनसे पहेले उसे लेनेभी जाना हे तब सब खरीदी भी करके आयेगे देखते हे पुनमका कब फोन आता हे.. वो लताको भी साथ लेजाना हे..

मंजुला : (हसते) चलो ठीक हे अब सोजाओ.. हें..हें..हें..

देवायत : बस..अ‍ेसेही सोजाना हे..? बेबी मुजे तुमको प्यार करना हे.. चल आजा..

मंजुला : (प्यारसे) देवु.. इस हालतमे प्यार करोगे..? चलो कोइ बात नही आज मेरे बाबुको अ‍ेसेही ठंडा करदुगी नीकालो कपडे.. हें..हें..हें.. जानु मेरा गाउनभी नीकालदो आज दोनो पुरी रात अ‍ेसेही सोयेगे..

तब देवायत खुदके फीर मंजुकेभी कपडे नीकाल देता हे तभी मंजु देवायतको धका देते उसे पीठके बल सुला देती हे उनके पैरके पास बेठ जातीहे फीर लंडको मुठीमे पकडते हीलाने लगी तो देवायत आंख बंध करते सीकारीया करने लगता हे.. तभी मंजु थोडा जुकके अपनी जीब(टंग) नीकालते देवायतके लंड को चाटने लगती हे ताकी लंड गीला हो जाये ओर आसानीसे अपने मुहमे लेसके..




जब लंड गीला होगया तब आसानीसे लंडको मुहमे लेलीया ओर लंडको मुहमे अंदर बहार करने लगी तब देवायत बहुतही उतेजीत होगया ओर आंख बंध करते मुह चोदनका मजा लेने लगा तब थोडीही देरमे लंडसे तेज बहाव महेसुस करते मंजुके मुहमे अपने गरम लावेकी पीचकारीया छोडने लगा तो मंजुका पुरा मुह भर गया जीसे मंजुने अपनी हलकमे उतर लीया ओर कामुक नजरसे देवायतकी ओर देखते लंडको चाटके साफ करने लगी फीर बाथरुममे जाके मुहको साफ करके वापस देवायतके पास लेट गइ




तभी देवायत उनपे जुक गया ओर उनके बुब्सको अपने मुहमे लेके चुसने लगा तो मंजुने अपना अ‍ेक पैर मोडके थोडा उपर करलीया तभी देवायतने हाथकी अ‍ेक उंगली मंजुकी चुतमे घुसादी ओर हीलाके अंदर बहार करने लगा तब मंजु जोरोसे सीकारीया करते कामातुर होगइ वो दोनो तरफसे ज्यादा हमला बरदास्त नही करपाइ ओर थोडीही देरमे उनकी चुतसे पानी नीकल गया ओर वो सांत होगइ फीर दोनो नंगेही सोने लगे तब मंजुभी देवायतके सीनेमे सर रखके लेइट गइ ओर दोनोही नींदकी आगोसमे चले गये..




देर रात देवायतको पानीकी प्यास लगी तब वो धीरेसे मंजुको साइडमे सुलाके धीरेसे बीना आवाज कीये कीचनमे चला गया ओर ओर फ्रिजसे पानी नीकालके बोटलही मुहपे लगादीया फीर पानी पीके जेसेही पलटा उनके सामने चंदा खडी थी जब दोनोकी नजर मीली तब चंदा दोडके देवायतकी बाहोमे समा गइ फीर उनके चहेरेको पकडके पुरे चहेरेको पागलोकी तराह चुमने लगी तब दोनोही बहेकने लगे..





तब थोडीही देरमे दोनोके जीस्मसे कपडे अलग होगये तभी देवायतने चंदाको पीछेसे बाहोमे भरलीया ओर उनके उरोजोपे हाथ घुमाते मसलने लगा तब दोनोही कामातुर होने लगे रातके अंधेरेमे दोनोही अ‍ेक दुसरेके अंदर समाजानेको बेकरार होगये तब दंवायतने चंदाका पेटीकोट ओर ब्लाउसभी नीकाल दीया ओर चंदाको दिवालके सहारे दोनो हाथके पंजेमें उंगलीया फसाके सटा दीया ओर उनसे चीपकके खडा होगया..




तभी चंदाको अपनी चुतपे देवायतका लंड ठोकर मारते महेसुस हुआ तभी दोनोकेही होंठ मील गये ओर अ‍ेक दुसरेमे समा जानेको बेकरार होगये तब चंदाने हाथ नीचे लेजाते देवायतका लंड पकढ लीया ओर अ‍ेक पैर उचा करते अपनी चुतपे दो तीन बार घीसलीया ओर लंडका टोपा अपनी चुतके लव होलमे फसा दीया फीर देवायतके नीतंबपे दोनो हाथसे उनकी कमरको दबा दीया तो लंड थोडा अंदर चुतमे घुस गया तो चंदाकी आहे नीकल गइ ओर देवायतके कंधेपे दोनो हाथ रखके उसे बाहोमे भरके चीपक गइ तब देवातने खडे खडेही अ‍ेक जटका मार दीया तो लंड पुरा चंदाकी चुतमे उतर गया ओर देवायत धीरे धीरे जटके मारने लगा तब हर जटके के साथ चंदाकी आहे नीकलने लगी..




दोनोही खडे खडे चुदाइमे मसगुल होगये ओर धमाकेदार चुदाइ सुरु होगइ चंदा सीसकारीया करते आहे भरती रही दोनोमेसे कोइ कुछ नही बोल रहाथा चंदाने पुरी रात देवायतका वेइट कीया.. अब चंदाको देवायतके बीना रात काटना मुस्कील होने लगा तभीतो बार बार वो बहार नीकलके देखती रही ओर आखीर देवायतको कीचनमे जाते देखलीया ओर वो छुपकेसे बीना आवाज कीये उनके पीछे आगइ




ओर दोनोका मीलन होगया देवायतसे खडे खडेही चुदाइ करवाने लगी तभी दोनोही अकडने लगे ओर अ‍ेक साथ दोनोने अ‍ेक दुसरेको बाहोमे भीचलीया ओर लीपलोक करलीया तभी दोनोके लावा अ‍ेक साथ फुट पडे ओर जडने लगे.. तब देवायत अलग होगया ओर चंदाकी चुतसे दोनोका कामरस बहेते उनके पेरपे उतरने लगा

तब चंदाने वहीसे अ‍ेक कपडा लेलीया ओर अपना पैर ओर चुतको साफ करने लगी फीर देवायतका लंड भी अपने हाथोसे साफ करदीया फीर दोनोने अपने कपडे पहेन लीये तब चंदा अ‍ेक बार फीर देवायत के सीनेपे सर रखते उनकी बाहोमे समा गइ.. तब देवायतने उनका सर चुम लीया..




चंदा : (धीरेसे) जानु अब आपके बीना राते काटना बहुतही मुस्कील हे.. आप कुछभी जुगाड करलो मे आपके साथ रहेना चाहती हुे.. धिरेनको केसे समजाना हे वो आप देखलो..

देवायत : बेबी बस थोडे दीन वेइट करले हम कुछना कुछ सोचते हे.. चल अब हम कल बात करेगे..

चंदा : हां.. आप जाओ.. अगर इस बार मंजु मेरी सादीकी बात करेतो हां केह देना.. जाओ..

फीर दोनो अ‍ेक बार फीर अ‍ेक दुसरेकी बाहोमे समा जातेहे ओर दोनोके होंठ मील जातेहे फीर दोनोही जटसे अपने अपने कमरेमे चले जातेहे तब मंजु गहेरी नींदमे सोइ हुइ थी देवायत धीरेसे उनको पीछेसे बाहोमे भरते सो जातेहे तब मंजुभी सरकते देवायके साथ चीपक जाती हे.. ओर दोनो सो जाते हे..




अ‍ेसेही सुबह होगइ सब उठ गये बस धिरेन ओर देवायत कुछ देर सोते रहे.. फीर वोभी नहाके कंपलीट होके नीचे आगये ओर सब चाइनास्ता करने बेठ गये.. आज चंदा देवायतको देखते कुछ ज्यादाही सरमा रहीथी.. वो देवायतके सामने देखती रही जब दोनोकी नैन मीलते तो चंदा धिरेनकी ओर देखके आंखसे ही इसारा करती रही तब देवायतभी समज गयाकी चंदा क्या कहेना चाहती हे..

देवायत : मंजु.. आज वो सरपंचको लेने होस्पीटल जाना हे सायद देर होजायेगी.. आप सब लोग खाना खा लेना.. वरना मे धिरेनको खेतो पे ले जाता..

मंजुला : नही.. धिरेन आज भलेही घरपे रहेता आज आरामभी करलेगा.. फीर सामको लेजाना..

धिरेन : दीदी.. वहा भानुजीजु भी होगेनां..?

देवायत : धिरेन हम दोनोही जा रहे हे.. तभीतो केह रहा हु.., सामको ही चलना..

धिरेन : (हसते) ठीक हे जीजु.. तबतो दीदीसे बातेभी हो जायेगी.. बहोत दीन होगये.. बाते नही की..

मंजुला : (हसते) हां.. मुजेभी तुमसे बहोत सारी बाते करनी हे.. चल चाइ नास्ता करले.. फीर हम इधर ही घुमेगे.. (देवायतकी ओर देखते) देवु आप फ्रि होके पुनमसे बात कर लेना सायद आज कलमे उनकी अ‍ेक्जाम खतम हो रही हे..

देवायत : (हसते) हां बाबा.. करलुगा.. वेसे तुमभीतो उनसे बात कर सकती हो.. उसे बताभी देना.. की हमने तेरा रीस्ता कहा तैय कीया हे..

मंजुला : (हसते) नही.. वो जब आप लोग उसे लेने ओर खरीदी करने जाओ तबही कहेना.. उसे सरप्राइज मील जायेगी फीर देखना केसे सरमाती हे हें..हें..हें..

चंदा : (जोरोसे हसते) अरे बाबा मेरी बहुपे अ‍ेसा जुल्म मत करो.. हें..हें..हें..

धिरेन : (सरमाके हसते धीरेसे) तो क्या.. आप लोगोने उसे अभी तक नही बताया..?

मंजुला : (हसते) नही.. तेरे जीजु उनको सरप्राइज जो देना चाहते थे.. तु टेन्शन मत ले..हें..हें..हें..

धिरेन : (सरमते हसते) क्या..दीदी.. आपभी.. मे कहा टेन्शन लेता हु.. (हसते) तबतो मेभी देखुगा.. उनकी सकल कैसे होजाती हे.. हें..हें..हें..

तो सभी हसने लगते हे फीर देवायत सबको बाय कहेके नीकल जाता हे ओर सीधा खेतोपे ही गोडाउन था वही चला जाता हे.. तब वहा भानु पहेलेसे ही बेठा देवायतका वेइट कर रहा हे.. फीर दोनो बेठते हे तब.. देवायतके फोनपे पुनमका फोन आता हे तो देवायके चहेरेपे मुस्कान आजाती हे ओर वो फोन उठाके टहेलता भानुसे थोडी दुर जाके धीमी आवाजमे बात करने लगता हे तब..

पुनम : (फोनपे) हेलो भैया.. केसे हो..? भाभी केसी हे..?

देवायत : अरे सब मस्त हे तु बता होगइ अ‍ेक्जाम खतम..?

पुनम : नही भैया.. आज हम दोनोका लास्ट पेपर हे.. फीर सामको मे भाइके साथ युनीर्वसीटी जाउगी.. देखतेहे.. वहा ओपन युनीर्वसीटीमे अ‍ेडमीशन कब मीलेगा.. पुछके आयेगे.. तो आप हमे लेने कब आ रहे हो..?

देवायत : अरे सुन.. कल हम सुबह ही चले आयेगे.. सबकी सगाइकी खरीदारी जो करनी हे..

पुनम : (धीरेसे) भाइ सबकी.. मतलब.. आपने मेरा रीस्ताभी..

देवायत : (हसते धीरेसे) हां.. छुटकी.. तुजे सरप्राइज देना चाहता था.. कल तेरी नइ भाभी ओर वो लडकाभी आ रहा हे.. पहेले देखले.. तुजे पसंद नही हेतो.. कहे देना.. लेकीन तु उसे पसंद करलेगी मुजे पता हे.. तुम उसे कइ बार मील चुकी हो.. ओर वोभी तुजे पसंद करता हे.. हें..हें..हें..

पुनम : (सरमाके उत्सुक्तासे) भाइ.. प्लीज.. मुजे बता सकते हो..? पली..ज.. वो.. कोन.. हे..

देवायत : अरे बेबी.. वोहीतो सरप्राइज हे मुजेभी पता हे मेरी स्वीटी.. बहेन..को वो पसंद आजायेगा.. कल आ रहे हे तब देख लेना..

पुनम : (आखीर सरमाके हींमत करते केह देती हे) भाइ.. जोभी हो.. मे आपको छोडके दुर नही जाउगी.. आप मेरे प्यारे स्वीट भाइ हो.. मुजे आपके साथ रहेना हे..

देवायत : (हसते) अरे मेरी स्वीटी इतना प्यार करती हे मुजसे.. चल ठीक हे इतना बता सकता हु.. वो पासके गांव केही हे.. ओर तु उसे जानती हे.. बस.. ओर कुछ मत पुछना.. हें..हें..हें..

पुनम : (हसते) भाइ वो सब आप जानो.. मुजेतो आपके साथ रहेना हे.. बस.., ओर आप कल कब आ रहे हो..? लताभाभीभी आ रही हेना..?

देवायत : हां तुम चारके कुछ कपडे बपडेभी तो लेने हे फीर सगुनकी सारीया.. वो सबभीतो लेना हे..

पुनम : भाइ तो क्या भाभीभी आ रही हे..? इस हालमे..? क्युकी वो सबतो आपको नही पता होगा..

देवायत : अरे नही.. वो ओर भावु नही आ सकती.. कोइ ओर आ रही हे.. हें..हें..हें.. तु देखलेना.. हें..हें..हें..

पुनम : (जोरसे हसते) क्या भाइ कोइ ओर..? कही आपने मेरी दुसरी भाभीतो नही ढुंढली..? हें..हें..हें..

देवायत : (सरमाते धीरेसे हसते) चल.. हट.. पगली.. कुछभी बोलती हे.., सुन.. कीसीको कहेना मत.. तेरी भाभीको भी नही.. ये तेरे ओर मेरेही बीचकी बात हे.. वो तु जब यहा आयेगी तब बताउगा..

पुनम : (हसते) क्या भाइ अभी तक हमने कीतनी बाते सेर कीहे क्या मेने कीसीको बताया हे..? ओर मेभीतो आपको मेरी सब बाते बताती हु.. वहा मेरा हेही कोन.. मेतो आपकोही अपना भाइ ओर अपनी सहेली मानती थी.. अबतो भाभी आगइ.. अब वोही मेरी सहेली हे.. वेसे भाभी मस्त हे.. मुजसे हर बात सेर करती हे..

देवायत : चल अब रखता हु.. बहोत बाते होगइ.. अपने भाइको इतना प्यार करतीहे तो तबतो फोन करती..

पुनम : क्या भाइ.. मेतो करती हु फोन.. अब अ‍ेक्जाम चल रहीथी तो केसे करती..? चलो रखती हु नही करनी बात मुजे.. (जुठ मुठ नाराज होते)

देवायत : अरे सुन.. नाराज होगइ..? चल अब नही कहुगा.. बोल क्या चाहीये तुजे..?

पुनम : (खुस होते) भाइ जोभी हो.. मे हमेसाकी तराह आपके चोइसके कपडे लुगी केह देती हु.. आपकी चोइस मस्त होती हे.. तो परसोभी आपकी चोइस के कपडे लुगी..

देवायत : (हसते) चल जुठी.. कभी पहेनतीतो नही.. मेने कभी नही देखा..

पुनम : (सरमाते धीरेसे) क्या भाइ.. मे यहा होस्टेलमे हु.. तो कहासे देखोगे..? मे पहेनती हु.. (सरमाते) अबतो वही आजाउगी आपके पास.. तब देखते रहेना.. सब दीखाउगी.. मीन्स कपडे.. हें..हें..हें..

देवायत : चल रखता हु अब मुजे सहेरभी जाना हे.. बाय..

पुनम : (हीमत करते पहेली बार) भाइ.. आइ लव यु.., आइ लव यु सो मच..

देवायत : (सोकट होके हसते) अरे..? चल ठीक हे आइ लव यु टु.. माइ स्वीट अ‍ेन्जल.. अपना खयाल रखना.. कल आके मीलता हु.. ओके..? बाय.. (कहेते देवायतने फोन काट दीया ओर भानुके पास आते हसने लगा)

देवायत : (मनमे सोचमे लगा..) मेरी बहेन पुनम मुजे कीतना प्यार करती हे.. उनकी सब बाते मुजसे बीन्दास्त सेर करती हे.. वो सुरुसेही लखनसे ज्यादा मुजे मानती हे.. ओर दीखने मेभी कीसी हीरोइन से कम नही लगती उनके घुटने तक लंबे बालही मुजे पागल कर देते हे कास वो मेरी बहेन ना होती.. तो मे उनसेही सादी कर लेता.. ओर वोभीतो मुजे बहुत चाहती हे.. अगर मेरे पोतेकी परंपरा मेरेसे ही सुरु होजाती तो मेही पुनमसे सादी करलेता.. वही सब सोचते उनकी पेन्टमे तंबु होने लगा तब वो सरमाके लंडको अ‍ेडजेस्ट करने लगा तभी भानुकी आवाजने उसे तंद्गासे जगा दीया..

भानु : भाइ.. वो कल रातभी रश्मी भाभीका फोन आयाथा.. क्या.. हम चले..?

देवायत : अरे हां यार उसे लेनेभी जाना हे.. चल चलते हे.. अगर सहेरका कुछ काम होतो साथमे नीपटा लेना.. अ‍ेक साथ दोनो काम हो जायेगा..

भानु : हां भाइ.. बस कुछ खेतोमे छीडकनेकी दवाइ लेनी हे वो सब आप फोर्मालीटी पुरी करदेना तब तक लेके आजाउगा फीर नीकल जायेगे..

फीर दोनोही अपनी कार लेके सहेरकी ओर नीकल जाते हे तब उधर हवेलीपे मंजु चंदा ओर धिरेन होलमे बेठे बाते कर रहेथे.. तब चंदा मंजुके बारेमे सोचमे डुबी हुइ हेकी मंजु को क्या होगया हे.. क्या बीमारी हे जो बाबा उनकी अल्प आयुके बारेमे बता रहेथे.. तो क्या मंजु कुछ महीनोकी ही महेमान हे.. अ‍ेसी क्या बीमारी हे..? मुजे क्यु नही बताया.. यही सब सोचते बेठी रहीकी अब मंजुसे केसे जब जाने..

तब दुसरी ओर मंजु ओर धिरेन हस हसके बाते कर रहेथे तभी धिरेनने उसे कहाकी मुजे पासके सहेरमे बेंकमे अ‍ेक जोब ओफर हुआ हे.. तो जोइन करना चाहीयेकी नही यही सब मंजुकी राय ले रहाथा तब मंजु उसे जोब स्वीकार करनेकी सलाह देती हे ओर मनही मन खुस होने लगती हे.. तब वो चंदाके सामने देखते कहेती हे..

मंजुला : मौसी सुना धिरेन क्या केह रहा हे..? उसे बेंकमे जोब मील रही हे.. क्या कहेती हो आप..?

चंदा : (हसते) अरे येतो अच्छी बात हे.. अबतो धिरेनकोही देखना हे वो क्या करना चाहता हे..

धिरेन : मोम.. सोरी.. मेने आपको पुछे बगैरही अ‍ेप्लाइ करदीया हे.. तो आजकल मेही लेटर आजायेगा..

मंजुला : अरे तो हां कहेदेनां.. (हसते) देखा.. मेरी ननंद के पांव कीतना लकी हे..हें..हें..हें.. अभीतो रीस्तेकी बात हुइ की जोब लग गइ हें..हें..हें..

धिरेन : (सरमाके हसते) दीदी.. मेरीभी तो महेनत हे.. हें..हें..हें.. (चंदाकी ओर देखते) मोम.. सारा दीन क्या सोचती रहेती हो.. कुछ परेसानी हे क्या..?

चंदा : (जेंपते) अरे..नही नही.., बस अ‍ेसेही बेठी हु.. अच्छा हे तेरी जोब लग जायेगी.. फीर तो तु चला जायेगा तो मेतो अकेले की अकेले ही रहुगी..

मंजुला : (जोरोसे हसते) मौसी अकेली क्यु.. अबतो आपके साथ आपकी बहुभी तो होगी.. हें..हें..हें..

चंदा : (हसते) मंजु.. पता नही.. अभीतो देवायतने उनसे बात भीतो नही की.. ओर जबरदस्तीका रीस्ता नही करना.. क्यु बेटे..

धिरेन : हां दीदी मोम सही केह रही हे.. आप उसे बात करलो..

मंजुला : (परेसान होते) अरे.. आपलोग क्यु टुन्शन लेते हो.. तेरे जीजुने उसे हीन्टतो देदी होगी.. वो समजदार हे.. ओर वेसेही तुजे देखेगीतो उनकी सकल देखके तुजेतो सब पतातो चलही जायेगा..

धिरेन : (हसते) ये जीजु भीनां.. सरप्राइजके चकरमे सबको टेन्शनमे रखा हे.. दीदी तु कुछ कहेती क्यु नही..? तुम्हारीभी यही आदत हे तुमभीतो हमे सरप्राइछ देती रहेती हो.. कही जीजुको तुमने तो नही सीखाया..हें..हें..हें..

तभी चंदाके दीमागकी बती जलने लगती हे.. ओर वो मंजुकी आदतके बारेमे सोचती हे ओर उसे रास्ता मील जाता हे.. उनको मंजुकी अ‍ेब आदतके बारेमे पताथा वो अपनी हर चीज कहा जुपाके रखती हे.. तभी उसमे अमल करनेका सोचने लगी ओर उनको रास्ता मील गया.. क्युकी मंजु बीमारथी तो उसने कहीना कहीतो उनके पेपर कही छुपाया होगा.. ओर वो कहा छुपा सकती हे वो सीर्फ चंदाकोही पता हे..

वो अपने प्लानको अमल करना चाहती थी क्युकी यही वक्त उचीत था तब दुसरी ओर मंजुभी अपना अ‍ेक प्लान लेकर बेठीथी अब उसे उनपे अमलही करना था वो धीरे धीरे धिरेनको बातोसे क्न्वीन्स करवाना चाहतीथी की उनकी मम्मीकी सादी होजाये.. ओर उसके दीमागमे पुरा प्लान तैयार था.. वो धिरेनसे अकेलेमे बात करना चाहती थी तो वो चंदासे..

मंजुला : मोसी यहातो अ‍ेकेले बोर होजायेगे मे ओर धिरेन इधरही घुमने जाते हे..

चंदा : हां.. जाओ.. वेसेभी मेरे सरमे थोडा दर्द हे तो थोडी देर सोजाती हुं..

मंजुला : तो क्या आपको सर दर्दकी गोली देदु..?

चंदा : अरे नही नही.. तुम लोग आरामसे जाओ अभी सोजाउगी तो दर्द ठीक हो जायेगा..

तब चंदा उठके अपने रुमकी ओर जाने लगती हे तो धिरेन उसे थोडी चीन्तासे देखते रहेता हे तब मंजु धिरेनका हाथ पकडके खीचती हे ओर उसे बहारकी ओर लेजाती हे दोनोही धीरे धीरे चलने लगे तब..

धिरेन : दीदी क्या आपको नही लगता.. आज कल मम्मी कुछ ज्यादा चीन्तामे रहेने लगी हे..

मंजुला : (जेसे उनकोतो बाते करनेका दौर मील गया) हां मेभी कही दीनोसे देख रही हु..

धिरेन : (सोचते हीचकीचाते) दीदी अ‍ेक बात कहु.. सायद मम्मीके बारेमे कुछ बाते हो रहीहे.. मेरे खयालसे उनको ये बातका पता चल गया लगता हे.. तभीतो परेसान होती होगी..

मंजुला : (चोंकते) केसी बाते..? कीस तराह की बाते..? क्या मुजे बता सकता हे..?

धिरेन : नही दीदी सोरी नही बता सकता.. सायद सुनके आपको बुरा लगे..

मंजुला : अरे बताओना.. क्या तुने तेरी दीदीको इतना कमजोर समज रखा हे.. बता क्या बात हे.. नही लगेगा बुरा.. सायद उनके केरेक्टरके बारेमे होगा.. बता..

धिरेन : दीदी वहा मम्मी सरपंच हे.. ओर अब दुसरा आदमी वहा सरपंच बनना चाहता हे.. तो उसीने बातोको फेलाया हे.. मुजेभी पता हे सब बाते जुठी हे.. अब मम्मीका उस गांवमे रहेनेका मन नही लग रहा..

मंजुला : अरे बतातो सही वो कमीनेने कीस तराकी बाते फैलाइ हे..

धिरेन : (हीचकीचाते) दीदी.. वहा.., वहा लोग मम्मी का कीसी दुसरे आदमीके बारेमे गलत बाते कर रहे हे..

मंजुला : (धिरेनकी ओर देखते) तो क्या तु ये बाते सच मानता हे..?

धिरेन : नही दीदी.. मुजे पता हे.. मम्मी अ‍ेकदम भोलीभाली ओर सीधी हे.. वोतो बहार तक नही नीकलती..

मंजुला : (दोनो चलते) धिरेन.. तुजे नही पता अ‍ेक विधवाके लीये जींदगी काटना कीतना मुस्कील हे.. वोभी इतनी छोटी उमरमे.. मौसीकी अभी उमरही क्या हे.. लोग अ‍ेसी ओरतोको अ‍ेक भेडीयेकी नजरसे देखते हे..

धिरेन : हां दीदी मेनेभी ये बात कइबार नोटीस कीया हे.. लेकीन पापा गुजर गये तब मेतो छोटा था तो मम्मीने दुसरी सादी क्यु नही करली..?

मंजुला : अ‍ेक तो तेरी वजहसे.. तु इतनाभी छोटा नही थाकी सब समज ना सके.. ओर दुसरा तेरे घर वाले बहोत पुराने खयाल वालेथे तब तेरी दादी ओर दादा जीन्दा थे तो विधवा दुसरी सादी नही कर सकती ये कहेके मना करदीया था.. तो तेरी मम्मी कहासे सादी करती..?

धिरेन : (थोडा गुसेसे) भाडमे जाये दुनीया.. मे ये सब चीजोमे नही मानता..

मंजुला : भाइ हमभी अ‍ेसे रीवाजोको नही मानते.. तुजेतो पता हे तेरे जीजाजीके पुर्खोतो यहा राजा थे फीरभी तेरे जीजाजी इन चीजोको नही मानते.. ओर तुजे क्या पता ओरतोको इस उमरमे विधवाकी जींदगी जीना कीतना मुस्कील होता हे.. उनके भी कुछ अरमान होते हे.. वो तु नही समजेगा..

धिरेन : (सरमाते) दीदी.. मे कोलेजमे पढ चुका हु.. मेभी इन सब चीचोको समजता हु.. मेतो कहेता हु मम्मी अभी भी सादी करना चाहे तो मुजे कोइ अ‍ेतराज नही.. लेकीन अब मम्मी ही नही मानेगी क्युकी वक्त नीकल चुका हे ओर वेसेभी अबतो दादा दादीभी नही हे.. बस यही चीन्ता हेकी लोग क्या कहेगे..

मंजुला : (गुसेसे) भाडमे जाये लोग.. धिरेन तुजसे अ‍ेक बात करनी हे.. कसम खा ये बात सीर्फ हम दोनोके बीच ही रहेगी.. अगर तु कसम खाता हे तोही बताउगी..

धिरेन : (अ‍ेक नजरसे देखते) दीदी अ‍ेसी क्या बात हे.. जो मुजे आप कसम खीलवा रही हे..

मंजुला : हे धिरेन.. हे अ‍ेक बात जो मुजे अंदरही अंदर खाये जा रही हे.. ये बात मेने मौसीकोभी नही बताइ.. तुजे अपना बेस्ट भाइ मानती हु.. अगर तु चाहेतो तुम्ही मेरी ओर तेरी मम्मीकी समस्याका समाधान नीकाल सकते हो..

धिरेन : (कुछ सोचते) ठीक हे दीदी इस दुनीयामे सीर्फ दो लोगही हे जो मे उसे अपनी जानसेभी ज्यादा मानता हु.. अ‍ेक मोम.. ओर दुसरी आप.. मे दोनोकी कसम खाता हुकी बात हम दोनोके बीचही रहेगी.. कहो

मंजुला : धिरेन तुजे पता हे.. जब मे सादीके बाद मम्मीके घर गइ थी.. तब तुम आयेथे.. ओर हम दोनो अकेले कीसीको कहे बगैर सहेर गये थे..?

धिरेन : हां दीदी मेरी बाइकमे ही लेके गया था आपको.. वो लेडी डोक्टरको दीखाना था आपको..

मंजुला : नही धिरेन.. वो मेरी बेस्ट फ्रेन्ड हे.. डो. सृती.. उनको मेरी रीपोर्ट दीखाने गइ थी..

धिरेन : लेकीन वोतो लेडीस डोक्टर हेनां..?

मंजुला : हां.. लेकीन अ‍ेक हप्ते पहेले मेने कही ओर रीपोर्ट करवाइ थी.. केन्शर होस्पीटलमे..

धिरेन : (चोंकते) क्या.. केन्शर होस्पीटल..? लेकीन क्यु..? क्या प्रबलेम हे आपको..?

मंजुला : बस.. यही दीखाने गइ थी.. क्युकी मेरी सादीसे पहेले मुजे तीन चार बार खुनकी उलटीया हुइ थी तब हमारे गावके डो. ने मुजे वही रीपोर्ट करवानेको कहा..

धिरेन : तो क्या आपको..

मंजुला : अरे नही नही..मुजे केन्शरतो नही हे लेकीन गर्भासयमे अ‍ेक गांठ हे.. सायद इनकी वजहसे उल्टीया हुइ होगी.. जो जन्मसे हे अ‍ेसा डो. का कहेना था.. तो मेरी फ्रेन्डको दीखाने गयेथे हम..

धिरेन : (प्रस्नार्थ नजरसे) तो फीर..? क्या कहा आपकी उस डोक्टर फ्रेन्ड ने..?

मंजुला : (हसते) क्या कहेगी.. कहेती हे जीन्दा रहेना हेतो मे बच्चा पैदा नही कर सकती.. अगर करलीया तो दो तीन सालमेही मेरा कार्यक्रम खतम.. हें..हें..हें..

धिरेन : (चोंकत) व्होट..? लेकीन दीदी.. आपतो.. तो फीर क्यु..?

मंजुला : धिरेन तुमतो जानते हो..मे तेरे जीजुको ओर वो मुजे.. दोनोही अ‍ेक दुसरेको जीजानसे चाहते हे.. तो मे तेरे जीजुको अपनी कोखसे वारीस देना चाहती हु.. भलेही मेरी जान चली जाये..

धिरेन : (दुखी होते) पर दीदी येतो गलत हे.. आपने सीर्फ वारीस का सोचा फीर जीजाजीका क्या होगा ये नही सोचा..? आप जानतीभी हो आपके जानेके बाद उनका क्या होगा वो अकेले केसे जी पायेगे..?

मंजुला : हां.. सोचा हे तभीतो तुमसे बात करने इधर लेआइ हु.. अब तुही मेरी मदद कर सकता हे..

धिरेन : (आस्चर्यसे) में..? इनमे मे क्या आपकी मदद कर सकता हु..

मंजुला : (हसते) हां.. तुम.., तुही मेरी मदद कर सकता हे.. मेने सोच लीया हे.. जबतक जीन्दा हु.. तेरे जीजुका पुरा खयाल रखुगी ओर मेरे जानेके बादभी उनका खयाल रखनेके लीये उनकी दुसरी सादी मेरी मोजुदगी मेही करवा दुगी.. ताकी मे चेइनसे इस दुनीयासे जा सकु..

धिरेन : (आंख गीली करते) दीदी ये आप क्या बोल रही हे प्लीज.. आप जानेकी बात मत कीजीये..

मंजुला : (हसते) भाइ सबको अ‍ेकना अ‍ेक दीनतो जानाही हे.. तो डरना क्या.. क्या पता फीर वापस यहा जन्म लेके तेरेही घर आउ.. हें..हें..हें..

धिरेन : (गीली आंखसे हस देता हे) दीदी आप भीना.. अ‍ेसी बातोमे भी आपको मजाक सुजता हे..

मंजुला : धिरेन.. इसके बारेमे मेने बहुत कुछ सोचके रखा हे.. बस सही रहा तो सब अच्छा हो जायेगा..

धिरेन : (धीरेसे) तो.. क्या.. जीजु दुसरी सादीके लीये मान जायेगे..

मंजुला : (हसते) पता नही.. बस इनके लीये मुजे तेरी मददकी जरुरत हे.. फीर उस लडकीसेभी तो बात करनी हे.. उनको भीतो मनाना हे..

धिरेन : (धेरेसे) तो.. इसका मतलब आपने सब तैय करलीया हे.. मतलब जीजुकी सादी कीससे करवानी हे..

मंजुला : (हसते) हां भाइ.. लेकीन उन लडकीकी भी अ‍ेक मजबुरी हे.. पता नही केसे बात करु..

धिरेन : (कुछ आसंकाये के साथ) दीदी.. क्या मे जान सकता हु वो लडकी कोन हे..? सायद मे जो सोच रहा हु.., कही.. वोतो नही.., नही नही.. आपही बता दो..

मंजुला : (धिरेनकी ओर देखते) भाइ बताओना.. तुमने कीसके बारेमे सोचा.. तुम्हारे दीमागमे कोन चल रही हे.. बताओना.. फीर मे बताती हु..

धिरेन : (सरमाते धिरेसे) दीदी.. कही आप.. मोम के बारेमे तो.. नही सोच रही..?

मंजुला : (सरमाके हसते) हां.., हां मेरे भाइ तुने सही सोचा हे.. मौसीकी जींदगीभी सवर जायेगी ओर मेरे देवुकी जींदगी सम्हल जायेगी.. बस अ‍ेक तेरी परमीशन लेनी हे.. इसके बारेमे मेने मौसीको अभी तक कुछ नही बताया.. मेने सोचा पहेले तेरी राय जानलु.. तु जो कहेगा वोही मे करुगी.. बोल क्या कहेता हे..

धिरेन : (सोचते मुस्कराते) दीदी.. आपनेतो उलजनमे फसा दीया.. अब मे क्या कहु.. उनकी लाइफ हे.. उनको डीसीजन लेना हे.. जहा तक मेरी बात हे.. उनकी दुसरी सादीसे मुजे कोइ अ‍ेतराज नही.. बस इतना केह सकता हु..

मंजुला : ( दोनो अ‍ेक सुमसान जगह पैडके नीचे बेठते) भाइ मुजे तेरी सीर्फ सहमतीही नही चाहीये.. इनमे मुजे तेरी मदद भी चाहीये..

धिरेन : दीदी इनमे मे क्या मदद कर सकता हु..

मंजुला : कुछ नही जब मे तेरी मम्मीसे बात करु तब तु तेरी राय बता देना.. बाकी मे सब सम्हाल लुगी..

धिरेन : (सोचते) दीदी लेकीन मेरीभी अ‍ेक उलजन हे.., सायद मोम हां भी कहेदे ओर वो सादीभी करले.. फीरभी मोम मुजसे नजर नही मीला पायेगी.. ओर मेभी मोमके साथ नही रेह पाउगा.. तो सोच रहा हु.. मे मेरी सादीके बाद मेरे घरमेही रहुगा..

मंजुला : (प्रस्नार्थ नजरसे) तो क्या तुम तेरी मोमोसे सब रीस्ता तोड देगा..?

धिरेन : (जटसे) अरे.. नही नही.., आप गलत सोच रही हे.., मतलब मे यहा आता जाता रहुगा कोइ रीस्ता नही तोडना.. बस सीर्फ अलग रहुगा ताकी मोमभी अपनी लाइफ खुलके जी सके.. ओर मुजे देखते समींदगी महेसुस ना कर सके.., बस इसीलीये केह रहा था..

मंजुला : (धिरेनको हग करते उनके गाल चुमते) ओ..भाइ थेन्कयु वेरी मच.. तुम अपनी मोमके बारेमे कीतना कुछ सोचते हो.. आइ अ‍ेम प्राउड फोर यु.. कास हर मोमको तेरे जेसा बेटा मीले..




फीर दोनोही कुछ प्लानींग करते वापस घरकी ओर चल देते हे.. आज मंजुने धिरेनसे सब बाते खुलके बतादी थी.. अब उसे सीर्फ चंदासे इस बारेमे बात करनी थी.., दोनोही जब गयेथे तब उनके जातेही चंदा मंजुके रुममे सबसे छुपके चली गइ, तब दया ओर रजीया दोनोही उपरकी मंजीलमे घरके काममे लगी हुइ थी.. तो चंदाने अंदर जातेही दरवाजा बंध करलीया ओर जटसे मंजुके कपडे अलमारीमे रखेथे उसे खंगालने लगी....

कन्टीन्यु
 
दोस्तो मेरी पहेली कहानी ये केसी अनुभुती आप लोगोने मुजे उत्साहीत करके जो प्यार दीया यही समजलो रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती ये कहानीका दुसरा पार्ट हे आशा हे आप लोग मुजे कोमेन्ट करते उत्साहीत करके वोही प्यार देगे
 
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