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रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती
अध्याय - १०
दोनोही अपने गांव आगये देवायतने कारको सीधेही हवेलीमे लेली ओर आंगनमे खडी करदी.. कारकी आवाज सुनतेही मंजु जटसे हसती हुइ आने लगी.., उनको पताथा उनकी खास सहेली ओर अेक लौती मौसीजो आने वालीथी, तब चंदा कारसे उतरतेही हसती हुइ मंजुकी ओर दोड पडी ओर उसे जोरोसे गले लग गइ तब उनके पेटका खयाल रखा.. फीर दुर हटके दोनो हाथ मंजुके गालपे रखदीया ओर हसते उनकी ओर देखती रही....अब आगे
चंदा : (हसते) कीतनी प्यारी लगती हे.., देख..चहेरेपे कीतना नीखार आगया हे..हमारे जमाइको बहुत प्यार करती हे..? हें..हें..हें.. चल अंदर..ओर अब अेसे भागमपटी मत कर.. कही फीसल बीसल जाती तो..? मंजु अब बेडसे उतरना ही मत..बस सीर्फ आरामही करना हे..कीतना पेट नीकल आया हे.. हें..हें..हें..
मंजुला : (चंदाको हाथ पकडके अंदर लेजाते) मौसी..अबतो नीकलेगानां.. बस पंद्गह दीनहीतो बच्चे हे.. ओर आपकाभी तो चहेरा चमक रहा हे..(जोरोसे हसते) कही कीसीसे प्यार ब्यारतो नही हो गया..हें..हें..हें..
चंदा : (सरमसे हसते धीरेसे) चुप कर बेसरम.., (पीठमे मुका मारते) कुछभी बोलती हे.. इन्होने सुन लीया होतातो..? वो सब छोड.., क्या वो भावु भी फीरसे पेटसे होगइ हेनां..? उनको कीतने दीन हो गये..
मंजुला : (सरमाते हसते धीरेसे) हां..दोनो का साथ मेही हे..हें..हें..हें.., जब बापुजी गुजर गयेथे तब दोनो यही थे.., तब दोनो साथमे ही हुइ हे हें..हें..हें..
चंदा : (जोरोसे हसते) क्या..? साथमे. ही..हें..हें..हें.., कमीनी..कीतने बच्चे पैदा करेगी.., तबतो उनकोभी साथ लेजाना पडेगा..हें..हें..हें..
मंजुला : (हसते) हां मौसी.., रुटीन चेकअपमे हम साथही जाते हे.. डीलेवरीमेभी साथही लेजाना हे..अब उनकी फेमीली हमारी जीम्वेवारी हे..तो सब हमेही करना हे.., भानुभाइ बहोत अच्छे हे हमारी खेतीबाडीका सब कारोबार उन्होनेही सम्हाल लीया हे.., बस अब लखन पढाइ करले..फीरतो वोभी उनके साथ लग जायेगा..
चंदा : (हसते धीरेसे) मंजु.. सुना हे तुमने तेरे देवर लखनका रीस्ता भावुकी ननंदके साथ करलीया हे..? क्या अभी दोनोकी सगाइभी रखी हेनां..? वो देवायतजी केह रहे थे..
मंजुला : (हसते) अरे हां..मौसी क्या मस्त लडकी हे.. बस ज्यादा पढी लीखी नही हे.. लेकीन कामकी पकी हे.., अब आपभी धिरेनके लीये लडकी ढुंढना सुरु करदो.., मेरी भाभी घरमे आजायेगी..हें..हें..हें..
चंदा : (सरारतसे हसते) ढुंडली हे.., बस अेक बार धिरेनको पुछना हे.., हां कहेतेही उनकीभी सगाइ करदुगी..
मंजु : (थोडी नीरास होते फीकी स्माइलके साथ) अच्छा ढुंढली हे..? कोन हे..वो खुसनसीब..
दया : (चाइ ओर पानी लाते चंदाको देते) लीजीये मौसीजी..चाइ पानी पीजीये.. बातेतो होतीही रहेगी.., (मंजुको देते) लीजीये दीदी.. (पीछे देवायतकी ओर) लीजीये मालीक आपभी पीजीये थके होगे..
तब मंजु ओर चंदा तुरंत पीछे मुडके देखतीहे..तो देवायत उनके पीछेही खडाथा ओर हसते हुअे दोनोकी बाते सुन रहा था.., तो चंदा ओर मंजु दोनोका मुह खुलाही रेह गया ओर अेक नजरसे देवायतकी ओर देखती ही रही.. तब देवायत चाइ लेते जोरोसे हसने लगा.. फीर आगे आके मंजुके पास चीपकके बेठ गया..
मंजुला : (हसते) आप पीछे ही खडे थे..? कबसे..? हमनेतो देखा ही नही..
देवायत : (हसते) जबसे आप दोनो अंदर आइ.. फ्रेस होके सीधे यही आगया.. दोनोही बातोमे मशगुल थी..
चंदा : (सरारत मुस्कानसे) तो क्या..हमारी सारी बाते सुनली..?
देवायत : (हसते) तो फीर.., पीछेही खडाथा तो सुन रहाथा की मेरी बीवी मेरी क्या सीकायत कर रही हे..
मंजुला : (सरमाते हसते देवायतकी जांगोपे अेक चपत लगाते) कीतने कमीने हो.., अेसे कोइ ओरतोकी बात छुप छुपके सुनता हे..? मौसी अब ध्यान रखना पडेगा.. मौसी आप इनको वहा आपके साथ लेजाओ मार मारके सुधार देना.., बहुत सरारती होगये हे..हें..हें..हें..
चंदा : (मस्ती करते हसते) सोच लो.., जब लेजाउगी तो वापस नही करुगी.. हें..हें..हें..वही रखलुगी..
मंजुला : (चंदाको मुका मारते) ना बाबा नां..भलेही सरारत करे.. मुजे आपके साथ नही भेजना..हें..हें..हें.., सुनो देवु.. (हसते) मौसीने हमारे धिरेनके लीये कही रीस्ता ढुंढ लीया हे.. क्या आपको मालुम हे..?
देवायत : (हसते) हां..आते वक्त हमारी बात हुइ.., वो लडकी बहुत खुसनसीब हे जो मौसीके घरकी बहु बनेगी.., मेने देखी हे लडकी..बहुत खुबसुरत..ओर पढी लीखी हे.. अच्छे स्वभावकी.., हें..हें..हें..
मंजुला : (मुस्कानके साथ) अच्छा..? तुमभी जानतेहो उसे..? बताओनां कोन हे वो..?
देवायत : (सरारतसे हसते धीरेसे) हमारी पुनम..हें..हें..हें..
मंजुला : (खुसीसे चीलाते) क्या..? पुनम..? हमारी पुनम..? देवु तुम जुठ बोल रहे हो.. (खुसीसे आंसु आ गये ओर देवायतके कंधेपे सर रखदीया)
चंदा : (मंजुकी ओर खुसीसे हसते) हां मंजु.., हमारी पुनमही हे.., मुजे ये रीस्ता मंजुर हे.., बस अेक बार धिरेनसे पुछलु.. या फीर तु बात करलेना..तेरी बहुत सुनता हे ओर तुजे मानताभी हे..
कहातो मंजु खुसीके मारे देवायतके कंधेपे सर रखते आंसु बहाने लगी.. तब देवायत हसते हुअे उनकी पीठको सहेलाता रहा.., तब चंदाभी देवायतकी ओर देखते हसेही जा रही थी.. तभी देवायतने मंजुकी नजरसे बचते चंदाको अेक आंख मारदी तब चंदा सकपकाके सरमा गइ ओर मुह दुसरी ओर करते सरमके मारे हसती रही.. तब अचानक मंजुने कंधेसे सर हटालीया ओर देवायतकी जांगोपे मुके मारने लगी..
मंजुला : (हसते) कीतने कमीनेहो तुम.., दोनोने मुजे उल्लु बनाया.., मौसी आपभी कम नही हो.. इनके साथ मील गइ थी.., क्या दोनोके बीच बात तैय होगइ थीनां..? ओर उस दीनभी तो आप केह रहेथे हमारे जान पहेचान वाले हे.. तो क्या आपने पहेलेसे ही सब तैय करलीया था..? बोलोनां.. बोलते क्यु नही.. दोनो.. हें..हें..हें..
देवायत : (हसते) कीतना बोल गइ तु.. ओर हमे कहेती हेकी नही बोलते.. हां मंजु तुजे हम सरप्राइज देना चाहतेथे.. तेरे चहेरे की खुसी देखना चाहते थे..(चंदाकी ओर) देखा मौसी मंजु कीतनी खुस होगइ.. हें..हें..हें..
चंदा : (हसते) हां.. देख रहीहु..दोनोका प्यार..हें..हें..हें.., बस भगवान करे तुम दोनोके बीच अेसेही प्यार बरकरार रहे.. मेतो धन्य होगइ.. आपलोग जेसे समधी मील गये..हें..हें..हें.. अब बेठी रहोगी की हमारा मुहभी मीठा करवायेगी.. हें..हें..हें.. देवायत आपने इसे कुछ सीखाया नही हे क्या.. हें..हें..हें..
मंजुला : (चंदाको खडे होते मुका मारते) मौसी..अेक दुगी ना..(हसते) अभी लाइ.. मेरी पुनम सुनेगीतो खुस होजायेगी.. वोभीतो धिरेनको पहेचानती हे..हें..हें..हें..
कहेके कीचनमे चली गइ तब चंदा देवायतकी ओर कातील स्माइल करते मुस्कराने लगी.. ओर देवायतकी ओर अेक आंख मारदी फीर हसने लगी.., फीर धीरेसे करहा..
चंदा : आपको तो रातकोही मुह मीठा करवाउगी.. आजाना..रुममे अकेली सोउगी.. कुछ इन्तजाम करना..
देवायत : (धीरेसे हसते) करलीया हे.., बस रात होने दो.., दरवाजा खुला रखना..
मंजुला : (मीठाइकी थाली लाते) देवु..आपने पुनमसे बातकी..की नही..? वोतो सुनके पागल होजायेगी.. फीर देखना केसे सरमाती हे..हें..हें..हें.. लीजीये मौसी मुह खोलीये..हें..हें..हें..
चंदा : (हसते) अरे छोटा देना..मुं.... तु..भी..ले.. पागल..पुरा देदीया..
मंजुला : (हसते) मौसी आधा नही आपको पुराही दुगी.., चलीये देवुका मुह मीठा करवाइअे फीर मे लेती हु..
देवायत : (हसते) हां.. हमारी समधकातो मुह मीठा करवाना ही पडेगा ओर वोभी पुरा..हें..हें..हें..
चंदा : (मीठाइ खाते हसते) नां..नही..थोडा यार.. बहुत हो गया.. मु..मुं..बस..बस..ओर..नही..
देवायत : (हसते) अरे पुरा लीजीये..आधेसे हमारा काम नही चलेगा..(डबल मीनींग) हें..हें..हें..
तब चंदा सरमके मारे पानीपानी होजातीहे ओर देवायकी ओर कामुक नजरोसे हसते हुअे देखती रहेती हे..फीर वोभी मंजु ओर देवुका मुह पुरा पीस देके मीठा करवाती हे तभी रजीया पानी लेके आतीहे सबको पानी पीलाती हे तो मंजु रजीया ओर दयाको भी मीठाइ खीलाते उसे पुनमके रीस्तेकी बात करतीहे तो दोनोही खुस होजाती हे तभी धिरेनका फोन आता हेतो चंदा स्माइल करते थोडी दुर चली जातीहे ओर धीरेसे बात करती हे
चंदा : (हसते) हां बीटु पहोंच गया..? सब अच्छेसे जगाह मील गइ नां..
धिरेन : (हसते) क्या मम्मी..मे थोडी बच्चा हु.. सब जगाह मील गइ ओर खानाभी खा लीया..
चंदा : (हसते) चल ठीक हे ठीक हे.., सुन.. मे वो तेरी दीदीके यहा आइ हु.. उसे देखने.. तेरा छोटा भांजा या भांजी आने वाला हे.. ओर सुन.. मेने तेरी रीस्तेकी बात की हे हें..हें..हें.. तेरी दीदीकी ननंद.. पुनम..तुनेतो देखाही हे..हें..हें..हें.. पहेचनाताभी हे..
धिरेन : (सरमाते हसते) क्या मम्मी.., थोडा जल्दी नही हे..? मुजे सादीकी कोइ जल्दी नही हे..
चंदा : (धीरेसे हसते) तो क्या मना करदु..? हें..हें..हें.. अभी सीर्फ सगाइ करेगे.. तु आयेगा तब.. सोचले..
धिरेन : (सरमसे हसते) मोम.., जेसा आपको ठीक लगे.., मे क्या कहु.. रखता हु..फीर बात करुगा..
चंदा : (हसते) अरे सुन.. तुजे पसंदतो हेनां..? तेरी मंजुदीदीने खुद कहा हे.. ले बात कर..
मंजुला : (फोन लेते हसते) क्युजी जमाइराजा.. हें..हें..हें.. कब आरहे हो..हें..हें..हें..
धिरेन : (सरमाते हसते) क्या दीदी आपभी.., वहा आके आपकी खबर लुगा..हें..हें..हें..तुम ओर मोम क्या खीचडी पका रही हो..हें..हें..हें..
मंजुला : (हसते) अच्छा हम खीचडी पका रही हे..तो आजा खाने..हें..हें..हें.., सुन धिरेन.. पुनम पढती हे.. तुतो उनको अच्छेसे पहेचानता हे.. तु पसंद भी करता हे.. हें..हें..हें.. मुजे पता हे..हें..हें..हें..
धिरेन : (सरमाते हसते) क्या दीदी.. बस वोतो युही.. जेसा आपको ठीक लगे.. रखता हु..
मंजुला : (हसते) अरे सुन.. मे दुर खडी हु.. अब बता वो पसंदतो हेना.. हम तुजपे जबरदस्ती नही करेगे..
धिरेन : (सरमाते) दीदी क्या वाकइ सबसे दुर हो..?
मंजुला : (हसते धीरेसे) हां मेरे भाइ बोलदे अपने दीलकी बात..मे दुर हु..
धिरेन : (सरमाके हसते) मेरी अच्छी दीदी.., सुनो आप हां कहेदो.. मुजे पुनम पसंद हे..उनसे सादी करनी हे..
मंजुला : (सरारतसे) अच्छा बच्चु..सादी करनी हे.., चल ठीक हे आजा हम यहा वेइट करते हे..ओर सुन..मौसी अभी तीन चार दीन यही रहेगी तु सीधे अही आजाना..फीर तेरे जीजा तुम दोनोको छोड जायेगे..
धिरेन : (हसते) ठीक हे दीदी.. वही आजाउगा.., ओर सुनो मम्मी केह रहीथी.., आप मुजे भांजा दे रहीहो की भांजी..हें..हें..हें..
मंजुला : (हसते) कमीने.. तु इधर आ.. फीर बताती हु.. बदमास.. चल रखती हु.. मीलते हे..हें..हें..हें..
मंजुला : (फोन कट करते चंदाको देते) मौसी.. खुस होजाओ.. धिरेनने हां कहेदी.. वो खुद पुनमसे सादी करना चाहता हे उनको बहुत पसंद करता हे..हें..हें..हें..
चंदा : (खुसीसे हसते) देखा.. मुजसेतो सरमा रहाथा.. तेरे साथ उनकी बहुत जमती हे.. तुजे सब बता दीया..
मंजुला : (हसते) देवु.., आपने पुनमको बतादीया की नही..? गये तो थे..उधर..मीली थी..?
देवायत : (हसते) हां दोनोसे बात होगइ.. बस पुनमको ये नही बतायाकी तेरा रीस्ता हम कहा कर रहे हे.. उनको सरप्राइज देनी हे..हें..हे..हें..
मंजुला : (हसते) हे भगवान.. पता नही ये सरप्राइजका कहासे सीखके आगये हे..हें..हें..हें.., लखनकोतो पता हेनां..? की उनकोभी नही बताया..? मेरा भोला देवर..
देवायत : (हसते) हां सीर्फ उनको बताया.. वोतो सुनके खुस होगया..हें..हें..हें..
मंजुला : (हसते) मौसी.. आप सब इधरही चले आना हम चारोकी सगाइ इधरही रख देगे.. बहुत बडी जगाह हे यहा.., क्या कहेतेहो देवु..?
देवायत : अरे नेकी ओर पुछ पुछ.. हम यही करेगे.. मौसी आप अपने सब रीस्तेदारोको यही बुलालेना..
चंदा : (हसते) अरे मेरे रीस्तेदार हेही कीतने..सब मायके वालेही तो हे.., ओर अेक बडी दीदी.. बस..
मंजुला : मौसी यहाभी कोइ खास नही..बस सीर्फ गांववाले ओर थोडे रीस्तदार होगे.. बस भानुभाइका पता नही.. देवु उनका आपको पता हे..?
देवायत : हां बस भानुके मामा लोग.. बाकी हमारे दोनोके ससुरतो अेकही हे हें..हें..हें.., मौसी आप पुनमके लीये कुछ मत लेना सब ले रखा हे.. आप हम अलग थोडीनां हे.. क्यु मंजु..
मंजुला : (हसते) हां मौसी.. देवु सही केह रहे हे..
चंदा : (हसते) अरे अैसा थोडी चलता हे.. मेने ले रखा हे..बस पुनमके कुछ कपडे लेने हे..क्या वो डे्रस पहेनती हे..? हमे कोइ अेतराज नही वो हमारे घर डे्रस पहेनना चाहे..मे वोही लुंगी..सारी सीर्फ सगुनकी लेनी हे..
दया : (आते) मालकीन सब बाते तैय होगइ हेतो खाना नीकालु..हें..हें..हें..
मंजुला : (जोरोसे हसते) हां.. नीकाल.. चल मेभी आती हु.. हें..हें..हें..
फीर सब खानेके लीये बेठ जाते हे ओर खाना खाते सगाइकी प्लानींग करते रहेते हे.. देवायतकी बाजुमे मंजु बेठ गइ ओर उनके सामनेकी चेरपे चंदा बेठीथी तब डाइनींगके नीचेसे देवायत चंदाके पैरको अपने पैरसे छुने लगता हे तब चंदा सरमसे पानीपानी होगइ वो डर गइ की कही मंजुकी नजरमे ना आजाये उसने फोरन अपने पैर मोडके पीछे लेलीये..ओर सर जुकाके जटसे खाने लगी..उनकी सांसे तेज चलने लगी..
तब इस गांवसे थोडी दुर आज भानुके घर सब खाना खाके बेठेथे तब मोहन रोने लगा तो भावनाने उसे गोदमे उठालीया ओर अपने रुममे चली गइ ओर जुलेमे डालके उसे सुलानेकी कोसीस करने लगी तब भानु ओर सरलाभी बहार आंगनमे खटीया डालके बेठे थे लता रसोइका सब काम समेट रहीथी उनको अेक डीबा उपर अलमारीमे रखनाथा पर रख नही पाइ भावनाका पेटभी मंजुकी तराह काफी बढ गयाथा
तो कीतने दीन होगये भानु भावनासे सेक्स नही करपाता था तो उनकी ठरक काफी बढ गइथी उनको अब कीसीभी तरह चुत चाहीये थी वो खेतमे कभी हीमत नही करपाया की कीसीभी मजदुरनको पकडले.. देवायतने उसे सब छुट दे रखीथी फीरभी हीमत नही करपाया.. यही सब सोचते बेठा था तब सरला ने देवायकी ओर देखा ओर लताके रीस्तेके बारेमे बात करने लगी..
सरला : बेटा.. अब बहुका वक्त नजदीक आगया हे.. हमे कभीभी उसे होस्पीटल लेजाना पडे, तु गाडी बाडीका इन्जाम करके रखना.., जब वोसब नीपट जायेगा तब हमे लताकी सगाइभी करनी हे..
भानु : मां कलही देवुसे अेक कार लेलुगा..वही भाभीकी डीलवरीभी तो होनी हे.. उनके पास दो कार ओर अेक खुली जीप हे.. अेकको लेआउगा.. वहाभी जीपतो मेरे पासही रहेती हे.., सहेरसे कुछभी लाना पडे.. वोही लेजाता हु..
सरला : भगवान उनको सुखी रखे.. तुजे धंधेमे साथमे लेलीया.. वरना दुकानमेतो मुस्कीलसे गुजारा होता था.. ओर अबतो हमारे समधीभी हो गये..मेरी लता बडेही नसीब वाली हे..
भानु : मां हमे उनकी सगाइके लीये खरीदी भीतो करनी हे..उनके कुछ कपडे बपडे.. फीर आप सब लोगोके लीयेभी तो लेना हे.., देखतेहे देवु कब सगाइ रखता हे..में उनसे बात करलुगा..
भावना : (बहार आते सरलाके पास बेठते) मांजी.. उनके घरभी वोही हाल हे.. मंजुदी ओर मेरी लगभग साथमेही डीलीवरी होगी.. वोभी कहा फ्री होगे.. तबतक वेकेशनभी लग जायेगा.. तभीतो वो लखन ओर पुनम आ सकेगे..,
सरला : (हसते) हमारे लीयेतो ठीक हे ये लताके लीयेतो बहुत कुछ लेना हे..हें..हें..हें..आज कलकी लडकीयोके बहुत नखरे होते हे..ये लो..वो लो..क्या कहेते हे वो..मेकअप का सामान हें..हें..हें..
भावना : (सरमाके हसते) क्या माजी..,आपके जमानेभीतो सब था..हें..हें..हें..मेरी मम्मीतो खुब करती थी..हें..हें..हें.., उधर पुनमके लीयेभीतो सब लेना होगा.. हम लताको उनके साथही भेजदेगे.. दोनोको जो लेना होगा लेलेगी..
भानु : (हसते) हां..येभी ठीक हे.. हम वोही करेगे.. हम घरकेही लोगतो हे.. अब इस हालतमे भावना कहा इनके साथ जायेगी.. पहेले पुनमकोतो आनेदो.. मे देवुसे बात करलुगा.. देखता हु क्या कहेता हे..
अेसीही बाते करते रहे तबतक लतानेभी सब काम खतम करलीया तब सब अपने कमरेमे सोनेके लीये चले गये भानु आतेही भावनासे पीछेसे चीपकके सोने लगा आधी रात हुइकी भावेशके रोनेकी आवाज आइ तो भावना उठ गइ ओर उनको सुलाने लगी फीरभी भावेश रोता रहा तब भावनाने भानुसे कहा..
भावना : (नींदमे) सुनीयेनां.., इनको लताके पास छोडके आइअेना.. सोनेभी नही देता.. जाओनां..
भानु : अरे उसेभी सोने दोना.. बेचारी सारा दीन काम करते थक गइ होगी.. वहाभीतो रोयेगा..
भावना : अरे जाइअेना.. उनके पास नही रोता.. सो जायेगा.. छोडके आइअेना..
भानु : (आधी नींदमे) चल जाता हु..तुभी सोने नही देती.. इनकी मां तु हेकी लता पताही नही चलता..
कहेते भानु उठके भावेशको कंधेपे उठा लेता हे ओर लताके रुमकी ओर बढ जाता हे उसने हलकेसे दरवाजेको धका मारातो दरवाजा धीरेसे खुल गया ओर वो लताके बेडकी ओर चला गया, हल्की नाइट लेम्पकी रोशनी छाइ हुइ थी जेसेही भावेशको उनके पास सुलानेको जुका तो देखते उनके होंस ही उड गये.. लता बीलकुल नंगी सोइ हुइथी उसने सीर्फ अपनी कमरपे अेक ट्रन्सपर्ट चुनीही डाली थी
वोभी अपनी कमर तक उचीथी ओर उनका अेक हाथ अपनी चुतपे था ओर वो करवट लेके गहेरी नींदमे सोइ थी उनके छोटे छोटे संतरे जेसे बुब्स रोशनीमे चमक रहे थे.. देवायततो उसे अेक नजरसे देखताही रहा.. तब उसने भावेशको उनके पास सुलाया तो भावेश रोने लगा तब..

लताने जटसे गभराके आंख खोलदी तो उनके सामने उनके भाइको भावेशको उनके पास सुलाते पाया तब उसे अपने नंगे होनेका अहेसास हुआ ओर वो जटसे चदर खीचते अपने उपर डालने लगी.. ओर सरमसे पानीपानी होने लगी.. तब भानुने उनकी ओर देखते कहा..
भानु : लता इनको तुम्हारे पास सुला.. वहा नही सोता.. सम्हाल अपने बेटेको..हें..हें..हें..
लता : (सरमसे) जी भैया.. अभी सोजायेगा.. आप जाइअे..
भानु : (उनकी ओर हसते) चल ठीक हे.., दरवाजा बंध करके सोजा..
कहेके लताकी ओर मुस्कान करते बहारकी ओर अपने रुममे जाने लगा तब वो सरमसे पानीपानी होगइ.. फीर उठके अपने रुमका दरवाजा लोक करके भावेसको अपने सीनेसे चीपकाके सो गइ.. तब भावेसभी उनके बुब्सको अपने मुहमे लेनेकी कोसीस करने लगा तब लताने उनको अपने पास चीपका लीया ओर अेक बुब्सकी नीपल उनके मुहमे देदी तब भावेस सांत होते उनको चुसता रहा ओर सोने लगा..
उधर देवायत मंजु ओर लताभी खाना खाके काफी देर बेठे बाते करते रहे फीर सब सोनेके लीये जाने लगे तब चंदाको मंजुने अपने पास वाले रुममे ठहेराया तब देवायतने दयाकी ओर इसारा कीया तो दया सब समज गइ ओर उसने कीचनमे जाके दुधका ग्लास भरके उसमे अेक नींदकी गोली मीलादी.. वो अेसा कइ बार कर चुकी थी इनके बारेमे रजीयाकोभी नही पताथा जब देवायत इसारा करता तबही वो गोली डालके पीलाती
क्युकी वो कइ बार रातको दया ओर रजीयाको चोदनेके लीये जाता ताकी बीचमे मंजु जाग ना जाये.., जबसे मंजु प्रेगनेन्ट हुइथी तबसे दया उनको रोज दुधका ग्लास पीलाती थी वोभी गायका.. दया मंजुका बहुत खयाल रखती थी, तो आज दुध पीतेही थोडी देरमे मंजु गहेरी नींदमे चली गइ..
तब देर रात वो उपर दुसरी मंजीलपे चला गया, तब वहा अेक कमरेमे सीर्फ दयाही लेटी हुइ थी, देवायतको देखतेही उनसे लीपट गइ फीर दोनोही बेडपे चले गये तब दयाने सब कपडे नीकाल दीये ओर पैर फेलाके पीठके बल लेट गइ उसेतो बस अपने सरीरकी नीडको पुरी करनाथा तो देवायत पेन्ट नीचे सरकाके सीधेही उनके पैरके बीच बेठ गया ओर दयाकी चुतमे लंड घीसते अंदर धकेल दीया..
तब दयाकी आहे..नीकल गइ देवायतभी हाथके बल उनके उपर जुक गया ओर दयाको धनाधन चोदने लगा दयाभी मदहोस होते सीसकारीया करती रही ओर देवायतके हर धकेको अपनी चुतमे महेसुस करती रही तब बीचमे वो अेक बार जड चुकीथी जब देवायत उनसे चीपक गया तब दयाने उसे जोरोसे बाहोमे भीच लीया ओर देवायतका लावा उनकी चुतको भरने लगा तब दयाभी उनके साथ जड गइ.. ओर दोनो सांत होगये
दया भी पुरे पसीने पसीने हो चुकीथी उसने लेटतेही अपनी चुतको कपडेसे पोछदी ओर करवट लेके सोने लगी तब देवायत सीधाही नीचे चला गया ओर बाथरुममे लंडको पानीसे साफ करलीया फीर बहार आतेही चंदाके रुमकी ओर चला गया जब दरवाजेको धका मारा तब चंदा नाइट गाउन पहेनके देवायतका इन्तजार कर रहीथी जेसेही दरवाजा खुलनेकी आवाज आइ वो जटसे बेडसे उतर गइ ओर देवायतकी ओर दोड पडी तब देवायतने दरवाजा लोक करलीया था वो जातेही सीधी देवायतकी बाहोमे समा गइ..

चंदा : (बाहोमे भीचते) बहुत लेट करदी.., कबसे वेइट कर रही थी..
देवायत : बस बेबी..वो मंजुकाभी तो देखना हे.. चल आजा.. मेरी बीवीको बहोत प्यार करना हे..
तब चंदा बेडपे जाके लेट गइ ओर देवायतभी उनके पीछे चीपक गया तब दोनोही मस्तीया करने लगे ओर मदहोस होने लगे, उन दोनोको पताही नही चलाकी दोनोके वस्त्र कब उनसे अलग होगये दोनोही स्मुच करते रहे तभी देवायत साइडमे लेटके चंदाके बुब्सको चुसने लगा ओर अपने अेक हाथकी उंगली चंदाकी चुतमे घुसादी ओर उसे सहेलाने लगा तब चंदा बहुतही कामुक होके सीसकारीया करने लगी..

थोडीही देरमे वो चंदाकी चुतकी ओर चला गया ओर अपना मुह सीधेही चंदाकी चुतपे लगाके अपनी जीभसे चंदाकी चुतके दानेको टटोलने लगा तब चंदा आहे भरते अपनी कमर धीरे धीरे उछालने लगी..

आज चंदा पहेली बार अपने पतीके घर उनके साथ प्यारके सागरमे गोते लगा रहीथी.., देवायतका प्यार करनेका ओर उसे चोदनेका अंदाज.., दोनोही उनको बहोत पसंद था वो देवायतकी दीवानी हो चुकीथी.. देवायतको देखतेही पागल हो जातीथी तभी अचानक उनका सरीर अकडने लगा ओर वो कमरको जटके मारते जडने लगी ओर देवायतके बाल पकडते अपने उपर खीचने लगी तब देवायत मुह साफ करते उनके दोनो पैरके बीच बेठ गया ओर अपना लंड पकडके सीधेही चंदाकी चुतमे घीसने लगा..
चंदा : (धीरेसे) बाबु धीरेसे..डालना..सीइइइइइइइ..आइइइइ..बस..बस बस बस..मर गगगगइइइइइ... नही..नही.. मर जाउगीइइइ यायायाररररर.. बस..बस..बस.. जानु..सीइइइइइइइइ
तब देवायतमे पुरा लंड चुतमे उतार दीया ओर दोनोही धुआधार चुदाइमे मशगुल होगये देवायत कमर पकडके धीरे धीरे धके लगा रहाथा ओर लंड जड तक घुसाता था तब चंदाको हर धका अपनी बच्चेदानीपे टकराते हुअे महेसुस होताथा जीसकी वजहसे उनकी हर धकेके साथ आहे.. नीकल जाती थी..

थोडीही देरमे चंदा अकडने लगी ओर उसने देवायतको जोरोसे बाहोमे भीचलीया ओर होंठ लीपलोक करलीये ओर अपनी कमरको जटके देने लगी तब देवायतको अपने लंडपे चंदाका गरम पानी महेसुस हुआ ओर वो अेकदम उतेजीत हो गया तब उसने चंदाकी गरदनमे हाथ डालके उसे अपने आपसे चीपका लीया ओर उनका सर चंदाकी गरदमे लगाके जोरोका चु्रबन लेलीया ओर उनका गरम लावा फुट पडा..
तभी चंदाकोभी अपने अंदर देवायतका गरम पानी महेसुस हुआ ओर उसने देवायतको कसके बाहोमे भीचलीया ओर जब दोनो सांत होगये तब देवायत चंदाके सीनेपे ढेर होगया ओर चंदा उनकी पीठ सहेलाती रही.. तब दोनोही पसीने पसीने हो चुके थे.. जब थोडी देरके बाद दोनो नोर्मल हुअे तब चंदा देवायतके सरको सहेलाने लगी ओर उनका चहेरा पकडके होंठो को चुमते स्मुच करने लगी..
चंदा : (हसते) देवु आज धिरेनने हां कहेदी.. मे बहुत खुस हु.. आज पताही नही चलाकी मे मेरे पतीसे चुद रही हु की अपने समधीसे.., तुम कीतना मस्त चोदते थे.. अेक दम धीरे धीरे..आज बहुत मजा आगया..
देवायत : (होंठ चुमते) बस बेबी..अब मे तुजे अेसेही चोदुगा.. चल अेक बार ओर चोदना हे फीर जाउगा..
चंदा : (हसते) यही सो जाओनां.. अपनी इस बीवीके पास..
देवायत : ( हसते) चल तेरी तमना पुरी करता हु यही सोजाउगा.. फीर सुबह मंजुसे बात करलेना..
चंदा : (हसते पीठमे मुका मारते) कीतने कमीने हो.. में सुबह मंजुको क्या जवाब दुगी..हें..हें..हें..
अेसेही मस्ती मजाक करते दोनो फीरसे गरम होगये ओर अेक बार फीर प्यारका सागर उमडने लगा इस बार चंदाको देवायतने बहुतही कामुक तरीकेसे चोदलीया तब चंदा तृप्त हो चुकीथी..दोनोही पसीने पसीने हो गयेथे तब देवायत ओर चंदा साथमे नहाये ओर वहाभी देवायतने चंदाको खडे खडे चोद लीया फीर देवायत उनको कीस करके कपडे पहेनके अपने रुममे चला गया ओर चंदाभी नाइटगाउन पहेनके सो गइ....
कन्टीन्यु
अध्याय - १०
दोनोही अपने गांव आगये देवायतने कारको सीधेही हवेलीमे लेली ओर आंगनमे खडी करदी.. कारकी आवाज सुनतेही मंजु जटसे हसती हुइ आने लगी.., उनको पताथा उनकी खास सहेली ओर अेक लौती मौसीजो आने वालीथी, तब चंदा कारसे उतरतेही हसती हुइ मंजुकी ओर दोड पडी ओर उसे जोरोसे गले लग गइ तब उनके पेटका खयाल रखा.. फीर दुर हटके दोनो हाथ मंजुके गालपे रखदीया ओर हसते उनकी ओर देखती रही....अब आगे
चंदा : (हसते) कीतनी प्यारी लगती हे.., देख..चहेरेपे कीतना नीखार आगया हे..हमारे जमाइको बहुत प्यार करती हे..? हें..हें..हें.. चल अंदर..ओर अब अेसे भागमपटी मत कर.. कही फीसल बीसल जाती तो..? मंजु अब बेडसे उतरना ही मत..बस सीर्फ आरामही करना हे..कीतना पेट नीकल आया हे.. हें..हें..हें..
मंजुला : (चंदाको हाथ पकडके अंदर लेजाते) मौसी..अबतो नीकलेगानां.. बस पंद्गह दीनहीतो बच्चे हे.. ओर आपकाभी तो चहेरा चमक रहा हे..(जोरोसे हसते) कही कीसीसे प्यार ब्यारतो नही हो गया..हें..हें..हें..
चंदा : (सरमसे हसते धीरेसे) चुप कर बेसरम.., (पीठमे मुका मारते) कुछभी बोलती हे.. इन्होने सुन लीया होतातो..? वो सब छोड.., क्या वो भावु भी फीरसे पेटसे होगइ हेनां..? उनको कीतने दीन हो गये..
मंजुला : (सरमाते हसते धीरेसे) हां..दोनो का साथ मेही हे..हें..हें..हें.., जब बापुजी गुजर गयेथे तब दोनो यही थे.., तब दोनो साथमे ही हुइ हे हें..हें..हें..
चंदा : (जोरोसे हसते) क्या..? साथमे. ही..हें..हें..हें.., कमीनी..कीतने बच्चे पैदा करेगी.., तबतो उनकोभी साथ लेजाना पडेगा..हें..हें..हें..
मंजुला : (हसते) हां मौसी.., रुटीन चेकअपमे हम साथही जाते हे.. डीलेवरीमेभी साथही लेजाना हे..अब उनकी फेमीली हमारी जीम्वेवारी हे..तो सब हमेही करना हे.., भानुभाइ बहोत अच्छे हे हमारी खेतीबाडीका सब कारोबार उन्होनेही सम्हाल लीया हे.., बस अब लखन पढाइ करले..फीरतो वोभी उनके साथ लग जायेगा..
चंदा : (हसते धीरेसे) मंजु.. सुना हे तुमने तेरे देवर लखनका रीस्ता भावुकी ननंदके साथ करलीया हे..? क्या अभी दोनोकी सगाइभी रखी हेनां..? वो देवायतजी केह रहे थे..
मंजुला : (हसते) अरे हां..मौसी क्या मस्त लडकी हे.. बस ज्यादा पढी लीखी नही हे.. लेकीन कामकी पकी हे.., अब आपभी धिरेनके लीये लडकी ढुंढना सुरु करदो.., मेरी भाभी घरमे आजायेगी..हें..हें..हें..
चंदा : (सरारतसे हसते) ढुंडली हे.., बस अेक बार धिरेनको पुछना हे.., हां कहेतेही उनकीभी सगाइ करदुगी..
मंजु : (थोडी नीरास होते फीकी स्माइलके साथ) अच्छा ढुंढली हे..? कोन हे..वो खुसनसीब..
दया : (चाइ ओर पानी लाते चंदाको देते) लीजीये मौसीजी..चाइ पानी पीजीये.. बातेतो होतीही रहेगी.., (मंजुको देते) लीजीये दीदी.. (पीछे देवायतकी ओर) लीजीये मालीक आपभी पीजीये थके होगे..
तब मंजु ओर चंदा तुरंत पीछे मुडके देखतीहे..तो देवायत उनके पीछेही खडाथा ओर हसते हुअे दोनोकी बाते सुन रहा था.., तो चंदा ओर मंजु दोनोका मुह खुलाही रेह गया ओर अेक नजरसे देवायतकी ओर देखती ही रही.. तब देवायत चाइ लेते जोरोसे हसने लगा.. फीर आगे आके मंजुके पास चीपकके बेठ गया..
मंजुला : (हसते) आप पीछे ही खडे थे..? कबसे..? हमनेतो देखा ही नही..
देवायत : (हसते) जबसे आप दोनो अंदर आइ.. फ्रेस होके सीधे यही आगया.. दोनोही बातोमे मशगुल थी..
चंदा : (सरारत मुस्कानसे) तो क्या..हमारी सारी बाते सुनली..?
देवायत : (हसते) तो फीर.., पीछेही खडाथा तो सुन रहाथा की मेरी बीवी मेरी क्या सीकायत कर रही हे..
मंजुला : (सरमाते हसते देवायतकी जांगोपे अेक चपत लगाते) कीतने कमीने हो.., अेसे कोइ ओरतोकी बात छुप छुपके सुनता हे..? मौसी अब ध्यान रखना पडेगा.. मौसी आप इनको वहा आपके साथ लेजाओ मार मारके सुधार देना.., बहुत सरारती होगये हे..हें..हें..हें..
चंदा : (मस्ती करते हसते) सोच लो.., जब लेजाउगी तो वापस नही करुगी.. हें..हें..हें..वही रखलुगी..
मंजुला : (चंदाको मुका मारते) ना बाबा नां..भलेही सरारत करे.. मुजे आपके साथ नही भेजना..हें..हें..हें.., सुनो देवु.. (हसते) मौसीने हमारे धिरेनके लीये कही रीस्ता ढुंढ लीया हे.. क्या आपको मालुम हे..?
देवायत : (हसते) हां..आते वक्त हमारी बात हुइ.., वो लडकी बहुत खुसनसीब हे जो मौसीके घरकी बहु बनेगी.., मेने देखी हे लडकी..बहुत खुबसुरत..ओर पढी लीखी हे.. अच्छे स्वभावकी.., हें..हें..हें..
मंजुला : (मुस्कानके साथ) अच्छा..? तुमभी जानतेहो उसे..? बताओनां कोन हे वो..?
देवायत : (सरारतसे हसते धीरेसे) हमारी पुनम..हें..हें..हें..
मंजुला : (खुसीसे चीलाते) क्या..? पुनम..? हमारी पुनम..? देवु तुम जुठ बोल रहे हो.. (खुसीसे आंसु आ गये ओर देवायतके कंधेपे सर रखदीया)
चंदा : (मंजुकी ओर खुसीसे हसते) हां मंजु.., हमारी पुनमही हे.., मुजे ये रीस्ता मंजुर हे.., बस अेक बार धिरेनसे पुछलु.. या फीर तु बात करलेना..तेरी बहुत सुनता हे ओर तुजे मानताभी हे..
कहातो मंजु खुसीके मारे देवायतके कंधेपे सर रखते आंसु बहाने लगी.. तब देवायत हसते हुअे उनकी पीठको सहेलाता रहा.., तब चंदाभी देवायतकी ओर देखते हसेही जा रही थी.. तभी देवायतने मंजुकी नजरसे बचते चंदाको अेक आंख मारदी तब चंदा सकपकाके सरमा गइ ओर मुह दुसरी ओर करते सरमके मारे हसती रही.. तब अचानक मंजुने कंधेसे सर हटालीया ओर देवायतकी जांगोपे मुके मारने लगी..
मंजुला : (हसते) कीतने कमीनेहो तुम.., दोनोने मुजे उल्लु बनाया.., मौसी आपभी कम नही हो.. इनके साथ मील गइ थी.., क्या दोनोके बीच बात तैय होगइ थीनां..? ओर उस दीनभी तो आप केह रहेथे हमारे जान पहेचान वाले हे.. तो क्या आपने पहेलेसे ही सब तैय करलीया था..? बोलोनां.. बोलते क्यु नही.. दोनो.. हें..हें..हें..
देवायत : (हसते) कीतना बोल गइ तु.. ओर हमे कहेती हेकी नही बोलते.. हां मंजु तुजे हम सरप्राइज देना चाहतेथे.. तेरे चहेरे की खुसी देखना चाहते थे..(चंदाकी ओर) देखा मौसी मंजु कीतनी खुस होगइ.. हें..हें..हें..
चंदा : (हसते) हां.. देख रहीहु..दोनोका प्यार..हें..हें..हें.., बस भगवान करे तुम दोनोके बीच अेसेही प्यार बरकरार रहे.. मेतो धन्य होगइ.. आपलोग जेसे समधी मील गये..हें..हें..हें.. अब बेठी रहोगी की हमारा मुहभी मीठा करवायेगी.. हें..हें..हें.. देवायत आपने इसे कुछ सीखाया नही हे क्या.. हें..हें..हें..
मंजुला : (चंदाको खडे होते मुका मारते) मौसी..अेक दुगी ना..(हसते) अभी लाइ.. मेरी पुनम सुनेगीतो खुस होजायेगी.. वोभीतो धिरेनको पहेचानती हे..हें..हें..हें..
कहेके कीचनमे चली गइ तब चंदा देवायतकी ओर कातील स्माइल करते मुस्कराने लगी.. ओर देवायतकी ओर अेक आंख मारदी फीर हसने लगी.., फीर धीरेसे करहा..
चंदा : आपको तो रातकोही मुह मीठा करवाउगी.. आजाना..रुममे अकेली सोउगी.. कुछ इन्तजाम करना..
देवायत : (धीरेसे हसते) करलीया हे.., बस रात होने दो.., दरवाजा खुला रखना..
मंजुला : (मीठाइकी थाली लाते) देवु..आपने पुनमसे बातकी..की नही..? वोतो सुनके पागल होजायेगी.. फीर देखना केसे सरमाती हे..हें..हें..हें.. लीजीये मौसी मुह खोलीये..हें..हें..हें..
चंदा : (हसते) अरे छोटा देना..मुं.... तु..भी..ले.. पागल..पुरा देदीया..
मंजुला : (हसते) मौसी आधा नही आपको पुराही दुगी.., चलीये देवुका मुह मीठा करवाइअे फीर मे लेती हु..
देवायत : (हसते) हां.. हमारी समधकातो मुह मीठा करवाना ही पडेगा ओर वोभी पुरा..हें..हें..हें..
चंदा : (मीठाइ खाते हसते) नां..नही..थोडा यार.. बहुत हो गया.. मु..मुं..बस..बस..ओर..नही..
देवायत : (हसते) अरे पुरा लीजीये..आधेसे हमारा काम नही चलेगा..(डबल मीनींग) हें..हें..हें..
तब चंदा सरमके मारे पानीपानी होजातीहे ओर देवायकी ओर कामुक नजरोसे हसते हुअे देखती रहेती हे..फीर वोभी मंजु ओर देवुका मुह पुरा पीस देके मीठा करवाती हे तभी रजीया पानी लेके आतीहे सबको पानी पीलाती हे तो मंजु रजीया ओर दयाको भी मीठाइ खीलाते उसे पुनमके रीस्तेकी बात करतीहे तो दोनोही खुस होजाती हे तभी धिरेनका फोन आता हेतो चंदा स्माइल करते थोडी दुर चली जातीहे ओर धीरेसे बात करती हे
चंदा : (हसते) हां बीटु पहोंच गया..? सब अच्छेसे जगाह मील गइ नां..
धिरेन : (हसते) क्या मम्मी..मे थोडी बच्चा हु.. सब जगाह मील गइ ओर खानाभी खा लीया..
चंदा : (हसते) चल ठीक हे ठीक हे.., सुन.. मे वो तेरी दीदीके यहा आइ हु.. उसे देखने.. तेरा छोटा भांजा या भांजी आने वाला हे.. ओर सुन.. मेने तेरी रीस्तेकी बात की हे हें..हें..हें.. तेरी दीदीकी ननंद.. पुनम..तुनेतो देखाही हे..हें..हें..हें.. पहेचनाताभी हे..
धिरेन : (सरमाते हसते) क्या मम्मी.., थोडा जल्दी नही हे..? मुजे सादीकी कोइ जल्दी नही हे..
चंदा : (धीरेसे हसते) तो क्या मना करदु..? हें..हें..हें.. अभी सीर्फ सगाइ करेगे.. तु आयेगा तब.. सोचले..
धिरेन : (सरमसे हसते) मोम.., जेसा आपको ठीक लगे.., मे क्या कहु.. रखता हु..फीर बात करुगा..
चंदा : (हसते) अरे सुन.. तुजे पसंदतो हेनां..? तेरी मंजुदीदीने खुद कहा हे.. ले बात कर..
मंजुला : (फोन लेते हसते) क्युजी जमाइराजा.. हें..हें..हें.. कब आरहे हो..हें..हें..हें..
धिरेन : (सरमाते हसते) क्या दीदी आपभी.., वहा आके आपकी खबर लुगा..हें..हें..हें..तुम ओर मोम क्या खीचडी पका रही हो..हें..हें..हें..
मंजुला : (हसते) अच्छा हम खीचडी पका रही हे..तो आजा खाने..हें..हें..हें.., सुन धिरेन.. पुनम पढती हे.. तुतो उनको अच्छेसे पहेचानता हे.. तु पसंद भी करता हे.. हें..हें..हें.. मुजे पता हे..हें..हें..हें..
धिरेन : (सरमाते हसते) क्या दीदी.. बस वोतो युही.. जेसा आपको ठीक लगे.. रखता हु..
मंजुला : (हसते) अरे सुन.. मे दुर खडी हु.. अब बता वो पसंदतो हेना.. हम तुजपे जबरदस्ती नही करेगे..
धिरेन : (सरमाते) दीदी क्या वाकइ सबसे दुर हो..?
मंजुला : (हसते धीरेसे) हां मेरे भाइ बोलदे अपने दीलकी बात..मे दुर हु..
धिरेन : (सरमाके हसते) मेरी अच्छी दीदी.., सुनो आप हां कहेदो.. मुजे पुनम पसंद हे..उनसे सादी करनी हे..
मंजुला : (सरारतसे) अच्छा बच्चु..सादी करनी हे.., चल ठीक हे आजा हम यहा वेइट करते हे..ओर सुन..मौसी अभी तीन चार दीन यही रहेगी तु सीधे अही आजाना..फीर तेरे जीजा तुम दोनोको छोड जायेगे..
धिरेन : (हसते) ठीक हे दीदी.. वही आजाउगा.., ओर सुनो मम्मी केह रहीथी.., आप मुजे भांजा दे रहीहो की भांजी..हें..हें..हें..
मंजुला : (हसते) कमीने.. तु इधर आ.. फीर बताती हु.. बदमास.. चल रखती हु.. मीलते हे..हें..हें..हें..
मंजुला : (फोन कट करते चंदाको देते) मौसी.. खुस होजाओ.. धिरेनने हां कहेदी.. वो खुद पुनमसे सादी करना चाहता हे उनको बहुत पसंद करता हे..हें..हें..हें..
चंदा : (खुसीसे हसते) देखा.. मुजसेतो सरमा रहाथा.. तेरे साथ उनकी बहुत जमती हे.. तुजे सब बता दीया..
मंजुला : (हसते) देवु.., आपने पुनमको बतादीया की नही..? गये तो थे..उधर..मीली थी..?
देवायत : (हसते) हां दोनोसे बात होगइ.. बस पुनमको ये नही बतायाकी तेरा रीस्ता हम कहा कर रहे हे.. उनको सरप्राइज देनी हे..हें..हे..हें..
मंजुला : (हसते) हे भगवान.. पता नही ये सरप्राइजका कहासे सीखके आगये हे..हें..हें..हें.., लखनकोतो पता हेनां..? की उनकोभी नही बताया..? मेरा भोला देवर..
देवायत : (हसते) हां सीर्फ उनको बताया.. वोतो सुनके खुस होगया..हें..हें..हें..
मंजुला : (हसते) मौसी.. आप सब इधरही चले आना हम चारोकी सगाइ इधरही रख देगे.. बहुत बडी जगाह हे यहा.., क्या कहेतेहो देवु..?
देवायत : अरे नेकी ओर पुछ पुछ.. हम यही करेगे.. मौसी आप अपने सब रीस्तेदारोको यही बुलालेना..
चंदा : (हसते) अरे मेरे रीस्तेदार हेही कीतने..सब मायके वालेही तो हे.., ओर अेक बडी दीदी.. बस..
मंजुला : मौसी यहाभी कोइ खास नही..बस सीर्फ गांववाले ओर थोडे रीस्तदार होगे.. बस भानुभाइका पता नही.. देवु उनका आपको पता हे..?
देवायत : हां बस भानुके मामा लोग.. बाकी हमारे दोनोके ससुरतो अेकही हे हें..हें..हें.., मौसी आप पुनमके लीये कुछ मत लेना सब ले रखा हे.. आप हम अलग थोडीनां हे.. क्यु मंजु..
मंजुला : (हसते) हां मौसी.. देवु सही केह रहे हे..
चंदा : (हसते) अरे अैसा थोडी चलता हे.. मेने ले रखा हे..बस पुनमके कुछ कपडे लेने हे..क्या वो डे्रस पहेनती हे..? हमे कोइ अेतराज नही वो हमारे घर डे्रस पहेनना चाहे..मे वोही लुंगी..सारी सीर्फ सगुनकी लेनी हे..
दया : (आते) मालकीन सब बाते तैय होगइ हेतो खाना नीकालु..हें..हें..हें..
मंजुला : (जोरोसे हसते) हां.. नीकाल.. चल मेभी आती हु.. हें..हें..हें..
फीर सब खानेके लीये बेठ जाते हे ओर खाना खाते सगाइकी प्लानींग करते रहेते हे.. देवायतकी बाजुमे मंजु बेठ गइ ओर उनके सामनेकी चेरपे चंदा बेठीथी तब डाइनींगके नीचेसे देवायत चंदाके पैरको अपने पैरसे छुने लगता हे तब चंदा सरमसे पानीपानी होगइ वो डर गइ की कही मंजुकी नजरमे ना आजाये उसने फोरन अपने पैर मोडके पीछे लेलीये..ओर सर जुकाके जटसे खाने लगी..उनकी सांसे तेज चलने लगी..
तब इस गांवसे थोडी दुर आज भानुके घर सब खाना खाके बेठेथे तब मोहन रोने लगा तो भावनाने उसे गोदमे उठालीया ओर अपने रुममे चली गइ ओर जुलेमे डालके उसे सुलानेकी कोसीस करने लगी तब भानु ओर सरलाभी बहार आंगनमे खटीया डालके बेठे थे लता रसोइका सब काम समेट रहीथी उनको अेक डीबा उपर अलमारीमे रखनाथा पर रख नही पाइ भावनाका पेटभी मंजुकी तराह काफी बढ गयाथा
तो कीतने दीन होगये भानु भावनासे सेक्स नही करपाता था तो उनकी ठरक काफी बढ गइथी उनको अब कीसीभी तरह चुत चाहीये थी वो खेतमे कभी हीमत नही करपाया की कीसीभी मजदुरनको पकडले.. देवायतने उसे सब छुट दे रखीथी फीरभी हीमत नही करपाया.. यही सब सोचते बेठा था तब सरला ने देवायकी ओर देखा ओर लताके रीस्तेके बारेमे बात करने लगी..
सरला : बेटा.. अब बहुका वक्त नजदीक आगया हे.. हमे कभीभी उसे होस्पीटल लेजाना पडे, तु गाडी बाडीका इन्जाम करके रखना.., जब वोसब नीपट जायेगा तब हमे लताकी सगाइभी करनी हे..
भानु : मां कलही देवुसे अेक कार लेलुगा..वही भाभीकी डीलवरीभी तो होनी हे.. उनके पास दो कार ओर अेक खुली जीप हे.. अेकको लेआउगा.. वहाभी जीपतो मेरे पासही रहेती हे.., सहेरसे कुछभी लाना पडे.. वोही लेजाता हु..
सरला : भगवान उनको सुखी रखे.. तुजे धंधेमे साथमे लेलीया.. वरना दुकानमेतो मुस्कीलसे गुजारा होता था.. ओर अबतो हमारे समधीभी हो गये..मेरी लता बडेही नसीब वाली हे..
भानु : मां हमे उनकी सगाइके लीये खरीदी भीतो करनी हे..उनके कुछ कपडे बपडे.. फीर आप सब लोगोके लीयेभी तो लेना हे.., देखतेहे देवु कब सगाइ रखता हे..में उनसे बात करलुगा..
भावना : (बहार आते सरलाके पास बेठते) मांजी.. उनके घरभी वोही हाल हे.. मंजुदी ओर मेरी लगभग साथमेही डीलीवरी होगी.. वोभी कहा फ्री होगे.. तबतक वेकेशनभी लग जायेगा.. तभीतो वो लखन ओर पुनम आ सकेगे..,
सरला : (हसते) हमारे लीयेतो ठीक हे ये लताके लीयेतो बहुत कुछ लेना हे..हें..हें..हें..आज कलकी लडकीयोके बहुत नखरे होते हे..ये लो..वो लो..क्या कहेते हे वो..मेकअप का सामान हें..हें..हें..
भावना : (सरमाके हसते) क्या माजी..,आपके जमानेभीतो सब था..हें..हें..हें..मेरी मम्मीतो खुब करती थी..हें..हें..हें.., उधर पुनमके लीयेभीतो सब लेना होगा.. हम लताको उनके साथही भेजदेगे.. दोनोको जो लेना होगा लेलेगी..
भानु : (हसते) हां..येभी ठीक हे.. हम वोही करेगे.. हम घरकेही लोगतो हे.. अब इस हालतमे भावना कहा इनके साथ जायेगी.. पहेले पुनमकोतो आनेदो.. मे देवुसे बात करलुगा.. देखता हु क्या कहेता हे..
अेसीही बाते करते रहे तबतक लतानेभी सब काम खतम करलीया तब सब अपने कमरेमे सोनेके लीये चले गये भानु आतेही भावनासे पीछेसे चीपकके सोने लगा आधी रात हुइकी भावेशके रोनेकी आवाज आइ तो भावना उठ गइ ओर उनको सुलाने लगी फीरभी भावेश रोता रहा तब भावनाने भानुसे कहा..
भावना : (नींदमे) सुनीयेनां.., इनको लताके पास छोडके आइअेना.. सोनेभी नही देता.. जाओनां..
भानु : अरे उसेभी सोने दोना.. बेचारी सारा दीन काम करते थक गइ होगी.. वहाभीतो रोयेगा..
भावना : अरे जाइअेना.. उनके पास नही रोता.. सो जायेगा.. छोडके आइअेना..
भानु : (आधी नींदमे) चल जाता हु..तुभी सोने नही देती.. इनकी मां तु हेकी लता पताही नही चलता..
कहेते भानु उठके भावेशको कंधेपे उठा लेता हे ओर लताके रुमकी ओर बढ जाता हे उसने हलकेसे दरवाजेको धका मारातो दरवाजा धीरेसे खुल गया ओर वो लताके बेडकी ओर चला गया, हल्की नाइट लेम्पकी रोशनी छाइ हुइ थी जेसेही भावेशको उनके पास सुलानेको जुका तो देखते उनके होंस ही उड गये.. लता बीलकुल नंगी सोइ हुइथी उसने सीर्फ अपनी कमरपे अेक ट्रन्सपर्ट चुनीही डाली थी
वोभी अपनी कमर तक उचीथी ओर उनका अेक हाथ अपनी चुतपे था ओर वो करवट लेके गहेरी नींदमे सोइ थी उनके छोटे छोटे संतरे जेसे बुब्स रोशनीमे चमक रहे थे.. देवायततो उसे अेक नजरसे देखताही रहा.. तब उसने भावेशको उनके पास सुलाया तो भावेश रोने लगा तब..

लताने जटसे गभराके आंख खोलदी तो उनके सामने उनके भाइको भावेशको उनके पास सुलाते पाया तब उसे अपने नंगे होनेका अहेसास हुआ ओर वो जटसे चदर खीचते अपने उपर डालने लगी.. ओर सरमसे पानीपानी होने लगी.. तब भानुने उनकी ओर देखते कहा..
भानु : लता इनको तुम्हारे पास सुला.. वहा नही सोता.. सम्हाल अपने बेटेको..हें..हें..हें..
लता : (सरमसे) जी भैया.. अभी सोजायेगा.. आप जाइअे..
भानु : (उनकी ओर हसते) चल ठीक हे.., दरवाजा बंध करके सोजा..
कहेके लताकी ओर मुस्कान करते बहारकी ओर अपने रुममे जाने लगा तब वो सरमसे पानीपानी होगइ.. फीर उठके अपने रुमका दरवाजा लोक करके भावेसको अपने सीनेसे चीपकाके सो गइ.. तब भावेसभी उनके बुब्सको अपने मुहमे लेनेकी कोसीस करने लगा तब लताने उनको अपने पास चीपका लीया ओर अेक बुब्सकी नीपल उनके मुहमे देदी तब भावेस सांत होते उनको चुसता रहा ओर सोने लगा..
उधर देवायत मंजु ओर लताभी खाना खाके काफी देर बेठे बाते करते रहे फीर सब सोनेके लीये जाने लगे तब चंदाको मंजुने अपने पास वाले रुममे ठहेराया तब देवायतने दयाकी ओर इसारा कीया तो दया सब समज गइ ओर उसने कीचनमे जाके दुधका ग्लास भरके उसमे अेक नींदकी गोली मीलादी.. वो अेसा कइ बार कर चुकी थी इनके बारेमे रजीयाकोभी नही पताथा जब देवायत इसारा करता तबही वो गोली डालके पीलाती
क्युकी वो कइ बार रातको दया ओर रजीयाको चोदनेके लीये जाता ताकी बीचमे मंजु जाग ना जाये.., जबसे मंजु प्रेगनेन्ट हुइथी तबसे दया उनको रोज दुधका ग्लास पीलाती थी वोभी गायका.. दया मंजुका बहुत खयाल रखती थी, तो आज दुध पीतेही थोडी देरमे मंजु गहेरी नींदमे चली गइ..
तब देर रात वो उपर दुसरी मंजीलपे चला गया, तब वहा अेक कमरेमे सीर्फ दयाही लेटी हुइ थी, देवायतको देखतेही उनसे लीपट गइ फीर दोनोही बेडपे चले गये तब दयाने सब कपडे नीकाल दीये ओर पैर फेलाके पीठके बल लेट गइ उसेतो बस अपने सरीरकी नीडको पुरी करनाथा तो देवायत पेन्ट नीचे सरकाके सीधेही उनके पैरके बीच बेठ गया ओर दयाकी चुतमे लंड घीसते अंदर धकेल दीया..
तब दयाकी आहे..नीकल गइ देवायतभी हाथके बल उनके उपर जुक गया ओर दयाको धनाधन चोदने लगा दयाभी मदहोस होते सीसकारीया करती रही ओर देवायतके हर धकेको अपनी चुतमे महेसुस करती रही तब बीचमे वो अेक बार जड चुकीथी जब देवायत उनसे चीपक गया तब दयाने उसे जोरोसे बाहोमे भीच लीया ओर देवायतका लावा उनकी चुतको भरने लगा तब दयाभी उनके साथ जड गइ.. ओर दोनो सांत होगये
दया भी पुरे पसीने पसीने हो चुकीथी उसने लेटतेही अपनी चुतको कपडेसे पोछदी ओर करवट लेके सोने लगी तब देवायत सीधाही नीचे चला गया ओर बाथरुममे लंडको पानीसे साफ करलीया फीर बहार आतेही चंदाके रुमकी ओर चला गया जब दरवाजेको धका मारा तब चंदा नाइट गाउन पहेनके देवायतका इन्तजार कर रहीथी जेसेही दरवाजा खुलनेकी आवाज आइ वो जटसे बेडसे उतर गइ ओर देवायतकी ओर दोड पडी तब देवायतने दरवाजा लोक करलीया था वो जातेही सीधी देवायतकी बाहोमे समा गइ..

चंदा : (बाहोमे भीचते) बहुत लेट करदी.., कबसे वेइट कर रही थी..
देवायत : बस बेबी..वो मंजुकाभी तो देखना हे.. चल आजा.. मेरी बीवीको बहोत प्यार करना हे..
तब चंदा बेडपे जाके लेट गइ ओर देवायतभी उनके पीछे चीपक गया तब दोनोही मस्तीया करने लगे ओर मदहोस होने लगे, उन दोनोको पताही नही चलाकी दोनोके वस्त्र कब उनसे अलग होगये दोनोही स्मुच करते रहे तभी देवायत साइडमे लेटके चंदाके बुब्सको चुसने लगा ओर अपने अेक हाथकी उंगली चंदाकी चुतमे घुसादी ओर उसे सहेलाने लगा तब चंदा बहुतही कामुक होके सीसकारीया करने लगी..

थोडीही देरमे वो चंदाकी चुतकी ओर चला गया ओर अपना मुह सीधेही चंदाकी चुतपे लगाके अपनी जीभसे चंदाकी चुतके दानेको टटोलने लगा तब चंदा आहे भरते अपनी कमर धीरे धीरे उछालने लगी..

आज चंदा पहेली बार अपने पतीके घर उनके साथ प्यारके सागरमे गोते लगा रहीथी.., देवायतका प्यार करनेका ओर उसे चोदनेका अंदाज.., दोनोही उनको बहोत पसंद था वो देवायतकी दीवानी हो चुकीथी.. देवायतको देखतेही पागल हो जातीथी तभी अचानक उनका सरीर अकडने लगा ओर वो कमरको जटके मारते जडने लगी ओर देवायतके बाल पकडते अपने उपर खीचने लगी तब देवायत मुह साफ करते उनके दोनो पैरके बीच बेठ गया ओर अपना लंड पकडके सीधेही चंदाकी चुतमे घीसने लगा..
चंदा : (धीरेसे) बाबु धीरेसे..डालना..सीइइइइइइइ..आइइइइ..बस..बस बस बस..मर गगगगइइइइइ... नही..नही.. मर जाउगीइइइ यायायाररररर.. बस..बस..बस.. जानु..सीइइइइइइइइ
तब देवायतमे पुरा लंड चुतमे उतार दीया ओर दोनोही धुआधार चुदाइमे मशगुल होगये देवायत कमर पकडके धीरे धीरे धके लगा रहाथा ओर लंड जड तक घुसाता था तब चंदाको हर धका अपनी बच्चेदानीपे टकराते हुअे महेसुस होताथा जीसकी वजहसे उनकी हर धकेके साथ आहे.. नीकल जाती थी..

थोडीही देरमे चंदा अकडने लगी ओर उसने देवायतको जोरोसे बाहोमे भीचलीया ओर होंठ लीपलोक करलीये ओर अपनी कमरको जटके देने लगी तब देवायतको अपने लंडपे चंदाका गरम पानी महेसुस हुआ ओर वो अेकदम उतेजीत हो गया तब उसने चंदाकी गरदनमे हाथ डालके उसे अपने आपसे चीपका लीया ओर उनका सर चंदाकी गरदमे लगाके जोरोका चु्रबन लेलीया ओर उनका गरम लावा फुट पडा..
तभी चंदाकोभी अपने अंदर देवायतका गरम पानी महेसुस हुआ ओर उसने देवायतको कसके बाहोमे भीचलीया ओर जब दोनो सांत होगये तब देवायत चंदाके सीनेपे ढेर होगया ओर चंदा उनकी पीठ सहेलाती रही.. तब दोनोही पसीने पसीने हो चुके थे.. जब थोडी देरके बाद दोनो नोर्मल हुअे तब चंदा देवायतके सरको सहेलाने लगी ओर उनका चहेरा पकडके होंठो को चुमते स्मुच करने लगी..
चंदा : (हसते) देवु आज धिरेनने हां कहेदी.. मे बहुत खुस हु.. आज पताही नही चलाकी मे मेरे पतीसे चुद रही हु की अपने समधीसे.., तुम कीतना मस्त चोदते थे.. अेक दम धीरे धीरे..आज बहुत मजा आगया..
देवायत : (होंठ चुमते) बस बेबी..अब मे तुजे अेसेही चोदुगा.. चल अेक बार ओर चोदना हे फीर जाउगा..
चंदा : (हसते) यही सो जाओनां.. अपनी इस बीवीके पास..
देवायत : ( हसते) चल तेरी तमना पुरी करता हु यही सोजाउगा.. फीर सुबह मंजुसे बात करलेना..
चंदा : (हसते पीठमे मुका मारते) कीतने कमीने हो.. में सुबह मंजुको क्या जवाब दुगी..हें..हें..हें..
अेसेही मस्ती मजाक करते दोनो फीरसे गरम होगये ओर अेक बार फीर प्यारका सागर उमडने लगा इस बार चंदाको देवायतने बहुतही कामुक तरीकेसे चोदलीया तब चंदा तृप्त हो चुकीथी..दोनोही पसीने पसीने हो गयेथे तब देवायत ओर चंदा साथमे नहाये ओर वहाभी देवायतने चंदाको खडे खडे चोद लीया फीर देवायत उनको कीस करके कपडे पहेनके अपने रुममे चला गया ओर चंदाभी नाइटगाउन पहेनके सो गइ....
कन्टीन्यु







































