Romance Sex kahani - Ek Bhool 2 - Page 10 - SexBaba
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Romance Sex kahani - Ek Bhool 2

फ्रेंड्स पिछले कुछ दिन से ना hi अपडेट दे पा रहा हूँ और ना hi कोई post...Vajah ये है की एक्साम्स की सचेडूले पब्लिश हो गया है.

3 हफ्ते बाद है एग्जाम और 4तह वीक में कम्पलीट हो jaayega...Uske बाद बिलकुल फ्री हो जाऊँगा बहुत बड़ा मेन्टल स्ट्रेस से.

अभी अपडेट डिले होने का वजह मूड hai...3rd ईयर की पढ़ाई वो भी ऑनलाइन बहुत hi मुश्किल और इर्रिटेटिंग hai...Upar से 1सत और 2ंद ईयर दोनों का रेविसे भी करना पद रहा था एग्जाम की वजह se...Mood ऐसा हो गया था ना hi अपडेट लिखने का मन होता था और ना hi कोई एक्टिविटी.

इस बार चाहता हूँ की एग्जाम हो hi jaaye....Preparation बहुत अच्छा है और बहुत बड़ा रिलीफ भी मिल जाएगा.

फिर पहले की तरह hi लाइफ हो jaayega...Straightforward :D...Tab वही पहले की तरह 3 और 4 दिन की गैप्स में उपदटेस दूंगा.

नेक्स्ट अपडेट कल पोस्ट करने की कोशिश करूँगा और एक्साम्स तक 3 या 4 अपडेट पोस्ट कर dunga...Uske बाद रेगुलर स्टोरी एन्ड होने तक (सब कुछ नार्मल रहा तो).
 
अपडेट 68 [Recap]

क्या सोच रहे हो?

सुमित को लंच टाइम में अकेले देख मेघा ने पूछा.

सुमित:- Soch...Abb सिर्फ सोच hi तो बाकी है.

मुस्कुरा कर सुमित ने जवाब दिया.

मेघा:- आज लंच का कोई प्लान नहीं है?

सुमित:- Nahi...Tum jaao...Warna फिर लेट हो जाएगा.

मेघा:- आज कोई व्रत है?

सुमित:- Vrat...Haan कह सकती ho...Kabhi कभी...

सुमित इससे आगे कुछ बोलता उससे पहले.

विकाश:- मई ी ज्वाइन?

सुमित बस विकाश की तरफ देखता है लेकिन कुछ कहता नहीं है.

विकाश:- डिस्टर्ब तो नहीं कर दिया? कोई सीरियस बात चल रहा था क्या?

मेघा:- अरे नहीं.

विकाश:- या फिर कोई प्राइवेट बातें?

सुमित:- प्राइवेट बातें चार दीवारी के बिच होता hai...Naa की सबके सामने ऐसे खुले आसमान में.

विकाश:- ये भी सही है.

सुमित:- चल bata...Kya काम है? फ़ालतू के काम के लिए तो तेरे पास कोई फुर्सत मिलेगा तो नहीं.

विकाश:- हाँ काम तो है.

सुमित:- और वो काम पढ़ाई के अलावा होना चाहिए.

विकाश:- Afsosh...Padhai रिलेटेड hi काम है.

सुमित:- अब्ब तो बक्श दे yaar...Bahut मुश्किल से इसा 3 घंटे की घुटन से राहत मिला hai...Aur तू फिर उसी दलदल में धकेल रहा है.

विकाश:- अभी की बात नहीं कर रहा hun...Soch रहा था बाद में लिहरारी में साथ में पढ़ेंगे.

सुमित:- किस गृह का नाम लिया तूने अभी?

विकाश:- गृह

सुमित:- कुछ तो कह रहा tha...Kahi बैठ कर पढ़ना है?

विकाश:- Library...Lekin ये गृह कैसे?

सुमित:- जहा पर एलियन रहते है उस जगह को क्या कहना चाहिए?

दो बार hi लाइब्रेरी गया हूँ बुक्स lene...Waha का जो हालत देखा बता नहीं sakta...Jald hi रीलीज़ हो गया ये स्कीम मेरे लिए नहीं है. :ओहनो:

विकाश:- कुछ ज्यादा hi बुराई कर रहा है लाइब्रेरी ka...Har एक बुक मिल जाता hai...Padhne के लिए भी बहुत अच्छा एनवायरनमेंट hai...Har फैसिलिटी अवेलेबल है.

सुमित:- हाँ कमी है तो सिर्फ बीएड की? :हम्म:

विकाश:- क्या मतलब?

सुमित:- पढ़ाई के बाद जो गहरी नींद आता hai...Uss आनंद का बयान शब्दों में नहीं कर सकता hun...Aur बीएड ना होने की वजह से सारा मजा खिड़किडा हो जाता है.

इस बार विकाश कुछ नहीं बोलै.

सुमित:- इन शार्ट, ी ऍम नॉट लाइब्रेरी मटेरियल.

विकाश:- आउट मेघा, तुम?

उम्मीद भरी आवाज में विकाश ने पूछा.

मेघा:- सुमित से थोड़ा jyada...Alliens से बहुत काम. :lol1:

सुमित:- ऐसे दुसरो को भी पढ़ने के लिए मोटीवेट करेगा तो तेरा hi टोपर की कुर्शी खतरे में आ जाएगा.

विकाश:- टॉप करने से ज्यादा नॉलेज जरुरी है.

सुमित:- पहली बार समझदारी की बात किया है तूने.

विकाश:- आज तक पढ़ाई में कुछ कमी महसूस किया है तो ग्रुप डिस्कशन ki...Isse क्या मिस कर रहा हूँ और क्या गलत पढ़ रहा हूँ ये भी पता चलेगा और दोस्तों के साथ पढ़ने से पढ़ने में और भी मन लगा रहेगा.

सुमित:- तब तो गलत सर्किल ज्वाइन कर रहा है.

विकाश:- तुम दोनों पढ़ने में बहुत अच्छे ho...Fir कैसे गलत फ्रेंड सर्किल है ये?

सुमित:- आज पहली बार टोपर को बैक बेंचेर का तारीफ़ करते सुना है.

विकाश:- मार्क्स doesn't ऑलवेज रिफ्लेक्ट नॉलेज एंड टैलेंट...

विकाश अब्ब आगे कुछ बोलता उससे पहले hi.

सुमित:- वाह अब्ब इंग्लिश में भी तारीफ़ :तूहैप्पी: मेघा सच में तुम लकी हो मेरे liye...Aaj कॉलेज में सबसे पहले तुम्हे hi देखा था.

विकाश को समझ में नहीं आ रहा था सुमित उसकी बात को सीरियसली ले भी रहा है या नहीं.

विकाश:- क्या सोचा फिर?

सुमित:- चल ये भी तरय करके देखते hai...Topper का पढ़ने की तरीका और टाइम table...Try करने में क्या प्रॉब्लम है.

फिर सुमित मेघा की तरफ देखते हुए.

सुमित:- आज व्रत मेरा है तुम्हारा नहीं...10 मिनट बाकी hai...Jaldi चलो.

फिर तीनो कैंटीन की तरफ जाते है.

मेघा:- तुम भी?

सुमित:- हाँ कुछ काम याद आ गया.

मेघा और विकाश एक टेबल में बैठते hai...Sumit 5 टेबल आगे जा कर एक लड़के के सर में पीछे से मारता है और.

सुमित:- क्या हाल चाल है लोवेबिरदस? अपने में hi लगे रहते हो.

कीर्ति:- कुछ भी.

सुमित:- जो दिख रहा है वो बोल रहा hun...Evidence बेस्ड.

इस बार कीर्ति कुछ नहीं बोलती.

राज:- भैया आप यहाँ?

सुमित:- अब्ब ये मत बोलना की यहाँ भी डिस्टर्ब कर रहा हूँ.

राज:- अरे nahi...Kaisi बात कर रहे है आप?

सुमित:- सब पता है mujhe...Pehle प्राइवेसी के लिए रूम से निकलवा दिया और अब्ब यहाँ से भी भगा रहा है. :डी

राज:- Nahi...Aap गलत सोच...

सुमित:- कुछ ज्यादा hi सीरियस hai...Nahi सुधरेगा तू.

सुमित ने हँसते हुए कहा तो राज भी चुप हो गया.

राज:- एक बात पूछना था आपसे.

सुमित:- 100 बात puch...Lekin टाइम 5 मिनट hi बाकी है अब्ब.

राज:- जब आप मेरा लव मटर इतनी आसानी से सोल्वे कर सकते है तो अपना प्यार को मनाने के लिए इतना वक्त क्यों लग रहा है?

कीर्ति:- हाँ ये सवाल मेरा भी hai...Le चलो तुम्हारे कीर्ति के paas...Acche से समझा दूंगी.

सुमित:- कोई फायदा नहीं.

कीर्ति:- ऐसे कैसे कोई फायदा nahi...Kabhi कभी जरुरत होता है तो रेअलिज़तिओन ki...Jaise तुमने मुझे रीलीज़ करवाया की मई गलत hun...Aise hi कीर्ति को रीलीज़ होगा तो वो जरूर समझेगी.

सुमित:- अगर मई ये कहु की वो समझना hi नहीं चाहती तो?

कीर्ति:- साफ़ बोलो.

सुमित:- जब तुम दोनों को पहली बार देखा तो समझ गया की राज के पास ज्यादा ऑप्शन नहीं है तुम्हे समझाने की.

तुम्हे देखा तो पता चला बहुत नाराज हो तुम राज se...Ek उम्मीद तुम्हे भी था की राज सुधर jaaye...Aisa नहीं था की तुम राइ से बिलकुल भी प्यार नहीं करती और उससे कोई मौका नहीं देना चाहती.

लेकिन मेरा केस थोड़ा अलग hai...Jo नफरत ग़लतफहमी से सुरु हुआ था वो ग़लतफहमी अब्ब नहीं hai...Kirti भी जानती है की मैंने उससे धोखा नहीं दिया.

लेकिन अब्ब उससे मुझसे कोई प्यार भी नहीं hai...Jitna हो सके उतना अवॉयड कर रही hai...Realization भी किस बात की? उससे अच्छे से रीलीज़ है की वो मुझसे प्यार बिलकुल भी नहीं करती.

इस बात पर राज और कीर्ति भी कुछ नहीं बोले.

कुछ देर बाद.

कीर्ति:- तो तुम क्यों लगे हो उसके पीछे? उससे भूल जाओ और आगे badho...Tum उससे अच्छा hi डेसेर्वे करते हो.

सुमित:- कल मैंने 3 सिगरेट पीया था?

कीर्ति:- क्या मतलब?

सुमित:- और दारु 3 दिन पहले.

कीर्ति और राज दोनों की hi सर के ऊपर से जा रहा था सुमित की बात.

सुमित:- कुछ हफ्ते पहले तक दिन में 20 से 30 सिगरेट्स आराम से फंक लेता था.

दोनों hi अभी तक समझने की कोशिश कर रहे थे सुमित की baat...Muskura कर सुमित ने कहना सुरु किया.

सुमित:- ये दारु और सिगरेट यूँही बदनाम hai...Asli नशा तो इश्क़ hai...Jo भुलाये नहीं bhulti...Vakt के साथ और भी गहरा हो जाता है.

सिगरेट और दारु तो आसानी से छूट रहा है लेकिन ये Ishq...Marte दम तक साथ नहीं छोड़ेगा.

राज:- लेकिन?

सुमित:- टाइम उप...5 मिनट ख़त्म आउट क्लास का वक्त शुरू.

इतना कह कर सुमित वह से क्लास के लिए निकल गया.

दूसरी तरफ सुमित के पापा स्कूल ख़त्म होते hi सीधे अपने भाई की घर की तरफ निकल जाते hai...Chehra का भाव साफ़ बता रहा था की कुछ ज्यादा hi जरुरी बातें करने जा रहे है.
 
अपडेट 69

इतने जल्दी अपने भैया के आने की तो एक्सपेक्ट नहीं कर रहे थे आरव के पापा.

ा. डैड:- भैया आप?

सुमित के पापा कुछ जवाब नहीं dete...Haaw भाव साफ़ दिखा रहा था की वो कुछ सोच रहे hai...Jo उनके भाई को थोड़ा हैरानी में दाल रहा था.

ा. डैड:- कुछ काम था?

स. डैड:- काम? बेहतर शब्द शायद फ़र्ज़ होगा?

ा. डैड:- मई नहीं समझा.

स. डैड:- बात यही hai...Tu या तो बात समझता hi नहीं है या फिर बहुत लेट से समझता है.

ा. डैड:- खुल कर बताइये?

दोनों के बिच हो रही गंभीर बातों ने पास में hi बैठे आरव और उसकी माँ का भी ध्यान आकर्षण किया.

स. डैड:- बात सुमित से रिलेटेड है.

ये सुनते hi आरव की पापा थोड़ा हंसने लगते है और साथ में आरव भी.

ा. डैड:- समझ सकता हु bhaiya...Aap की pareshaani...Jab बीटा नालायक हो तो बाप को परेशानी तो होता hi hai...Normal बात है ये.

स. डैड:- फिर भी गलत बात hi समझेगा. :डोह:

ा. डैड:- क्या मतलब? आप इंकार नहीं कर सकते है की सुमित नालायक है.

स. डैड:- अच्छा naalayak...Chal नालायक का मतलब बता.

ा. डैड:- सुमित को hi देख lijiye...Khud पता चल jaayega...Nikamma, लूज़र, बेवड़ा और एक गैर जिम्मेदार स्टूडेंट जो अगर डॉक्टर बन भी गया तो न जाने कितने मरीज की जिंदगी से खिलवाड़ करेगा.

और अफसोश की बात ये है भैया की आप सच्चाई देखते हुए भी नजर अंदाज कर देते hai...Bhuliye मत आँख बंद कर लेने से सूरज गायब नहीं हो जाता.

स. डैड:- अरे अरे इतना तारीफ़ भी मत कर.

ा. डैड:- पता नहीं आप किसी बात को सीरियसली लेंगे भी या नहीं? आज भी वही घमंड, वही jidd...Aur यही बात सुमित में भी देख रहा hun...Aisa लगता है इतिहास खुद को दोहरा रहा hai...Kal आप थे और आज सुमित? कल आपका घमंड टूटा था और अब्ब सुमित का टूट रहा hai...Galti से कल आपने कुछ नहीं सीखा था और ना सुमित सिख रहा है?

स. डैड:- (हँसते हुए) अब्ब मुझ में पहुँच gaya...Aur क्या कह रहा tha...Mera घमंड टूटा tha...Kis बात का? बुढ़ापे में शायद यादास्त कमजोर होने लगा hai...Jara याद दिला.

ा. डैड:- आपका सपना? जो कभी डॉक्टर बनने का हुआ करता tha...Bahut म्हणत करने के बाद पता चला की ये आपके औकात के बाहर hai...Aur वही सपना आज आप सुमित के जरिये पूरा करना चाहते hai...Galat नहीं होगा ये कहना की आप सुमित पर ये थोप रहे है.

स. डैड:- क्या कहा तूने? औकात? अगर मैंने तुझे तेरा hi औकात दिखा दिया तो? चल chhod...Ye काम फिर kabhi...Abhi कुछ और काम के लिए आया हूँ.

आरव:- बड़े Papa...Thoda तमीज से.

एक नजर सुमित के पापा आरव की और देखते है.

स. डैड:- बीटा मुझे याद नहीं आ रहा है मैंने तुझे आखिरी बार कब दांत लगाया था या फिर कब गुस्सा हुआ tha...Sumit और तुझ में ज्यादा फर्क नहीं समझता hun...Dono hi अभी बच्चे hi ho...Raasta से भटक गए तो प्यार से सही राष्ट पर लाऊंगा अगर फिर भी नहीं माने तो मजबूरन शख्त होना padega...Jiska दर्शन ना हो तो hi बेहतर है.

ज्यादा जाना है तो अपने पापा से puchna...Aur बड़ो का एक प्रबचन भी देता hu....Bado की बीच में छोटे को इस तरह बोलना सोभा नहीं देता.

ा. डैड:- आप कुछ बात करने आये थे? सुमित के बारे में?

स. डैड:- अरे haan...Baato के बिच में भूल hi गया.

अभी सुमित का हाल पहले जैसा नहीं hai...Thoda परेशां hai...Thoda टूटा hai...Koshish कर रहा हूँ एक ऐसे माहौल बनाने की जिसमें वो खुल कर पहले की तरह jiye...Bina किसी दवाब और परेशानी के अपने जिंदगी को जिस तरह जीना चाहते है खुल कर जिए.

रास्ता में हर मुशीबत और रुकावट के सामने दत्त कर खड़ा रहे ना सिर्फ आगे खड़ा रहे बल्कि आत्मविश्वाश के साथ आगे badhe...Aur साफ़ साफ़ कहा है मैंने उससे की अगर कोई काटा बन जाये तो उस काटे को कुचल कर आगे बढ़ने की.

ा. डैड:- आपका मतलब है की...

स. डैड:- सही सोच रहा है.

ा. डैड:- मतलब आप मेरे सामने गिड़गिड़ा रहे है की मई सुमित के सामने न aau...Warna वो परेशान हो jaayega...Itna लाचार तो कभी नहीं देखा था भैया आप को.

स. डैड:- गिड़गिड़ा नहीं रहा hu...Satark करने आया हूँ की बाद में मेरे सामने आ कर मत गिड़गिड़ाना की सुमित मेरा इज़्ज़त नहीं करता hai...Sabke सामने मुझे बेइज़्ज़त कर दिया वगैरह वगैरह.

गिव रेस्पेक्ट एंड टेक रेस्पेक्ट एंड लाइव योर लाइफ तो fullest...Yahi समझा कर आया हूँ सुमित को.

बाकी तेरा marji...Jab भी सुमित के पास जाना है तो जा और बुलाना है तो bulaa...Aakhir चाचा है उसका.

ा. डैड:- भैया अभी भी कहता हूँ आप सुमित को गलत राश्ते की और ले जा रहे है.

स. डैड:- वो तो मई देख lunga...Tu भी अपना dekh...Kahi दुसरो का परवरिश देखने के चक्कर में अपना hi मत भूल जाना.

इतना कह कर सुमित के पापा वह से निकल जाते hai...Raaste मई भी कुछ सोच उनके साथ hi चल रहा था की आगे क्या करना hai...Thoda संतुष्टि भी था की अभी तक सब कुछ ठीक hi चल रहा है और विश्वाश था की आगे सब ठीक हो जाएगा.

आफ्टर फ्यू डे

इतना डरे हुए क्यों हो?

सुमित के चेहरे का दर को अच्छे से भांप लिया था मेघा ने.

मेघा:- और यहाँ इस कोने में?

सुमित:- रिपोर्ट का वेट कर रहा हूँ.

थोड़ा दर था सुमित की आवाज में.

मेघा:- रिपोर्ट? किस चीज की?

सुमित:- कैंसर.

मेघा:- कैंसर? क्या मतलब?

इस बार मेघा की आवाज में भी दर था.

सुमित:- इतना सिगरेट फंक चूका हूँ की अब्ब दर सा लगने लगा hai...Aur cigarette...Lungs के अलावा भी बहुत से ऑर्गन में कैंसर का रिस्क बढ़ता hai...Bas यही दर है की रिपोर्ट पॉजिटिव न आ जाए.

मेघा:- (लाफिंग) इतना भी बड़ा नशेड़ी नहीं हो की 2-3 साल में hi कैंसर हो जाए.

सुमित:- मेरा जान निकला जा रहा hai...Aur तुम हो की मजाक कर रही हो.

मेघा:- ये तो पहले सोचना चाहिए था na...Jo कर्म किया है उसका फल तो मिलेगा hi. :lol1:

सुमित:- लेकिन इतना भी गलत कर्म नहीं किया है की कैंसर hi हो जाए.

मेघा:- ये तुम और nahi...Uparwala फैसला करेगा इस बात ka...Aur तुमने इतना गलत नहीं किया तो दर किस बात की?

सुमित कुछ नहीं बोलै इस baar...Bas रिपोर्ट जल्द आ जाए इस बात का इंतजार कर रहा था wo...Aur वो वक्त आ hi गया.

मेघा:- Jaao...Report ले कर आओ.

सुमित:- हिम्मत नहीं हो रहा है.

मेघा:- जाओ.

सुमित भी डरते हुए जाता है और वापस आते वक्त काफी खुश था.

मेघा:- अल्कोहल की वजह से सिर्फ फैटी लिवर डिजीज है ना?

सुमित:- (हैरानी से) तुम्हे कैसे पता?

मेघा:- दारु छोड़ दिया hai...Acchi बात hai...Abb थोड़ा एक्ससरसीसे वगैरह करो और वेट भी काम karo...Sab ठीक हो जाएगा.

सुमित:- अरे डॉक्टर Sahiba...Tumhe ये कैसे पता चला?

मेघा:- है कुछ Source...Accha तुम ये बताओ कब पार्टी दे रहे हो दारु और सिगरेट पूरी तरह छोड़ने की?

सुमित:- अभी अभी तो छूटा hai...Itni भी क्या जल्दी?

मेघा:- शुभ काम में देरी किस बात की?

सुमित:- चलो कैंटीन.

फिर दोनों कैंटीन की और जाते है.

सुमित:- इतना भी कौन मजाक करता है की जान hi निकल जाए?

मेघा:- तुम्हारे सांगत की hi असर hai...Yaad करो वो पुराने वाला सुमित जिसके हर जवाब में मजाक hi मजाक हो.

सुमित:- अच्छा ये bataao...Tumhe मेरे बारे में इतना कैसे पता चला? स्मोकिंग और दारु छोड़ने की बात और रिपोर्ट?

मेघा:- बस ऐसे hi.
 
अपडेट 70


आफ्टर फ्यू डेज


तुम लोगो ने नया अनाउंसमेंट सुना?

मेघा की इस बात पर विकाश और सुमित दोनों hi सोचने लगे.

सुमित:- होगा कोई बोरिंग सा प्रेजेंटेशन की अनाउंसमेंट. :यौन:

मेघा:- स्पोर्ट्स वीक की अनाउंसमेंट है.

सुमित:- तो फिर ये पार्टिसिपेंट्स की सर दर्द है.

मेघा:- और तुम्हारे लिए?

सुमित:- किसी काम का नहीं...3, 4 साल पहले hi हमारा रिश्ता टूट चूका है.

मेघा:- वो तो दिख रहा hai...Pichle एक साल में तो और भी jyada...Aur ऐसा hi रहा तो मोटापा में गुब्बारा के साथ रिश्ता जुड़ जाएगा.

सुमित:- अच्छा मजाक tha...Lekin हंसी नहीं आया.

मेघा:- अपने ऊपर हुआ मजाक पर किसी को हंसी नहीं आता.

अच्छा ये बताओ कौन से गेम में पार्टिसिपेट कर रहे हो?

सुमित:- किसी भी गेम में नहीं...3,4 साल पहले hi हर खेल से रिटायरमेंट ले चूका हूँ.

मेघा:- रिक्वेस्ट नहीं आर्डर है ye...Tum पर बाद में आती hun...Vikash तुम?

विकाश:- Mai...Sports मेरे बस की बात नहीं hai...Kabhi टाइम मिला hi नहीं कुछ खेलने के लिए.

मेघा:- सुमित? डीडे कर लिया तुमने?

सुमित:- प्रॉब्लम शामे है मेरा और विकाश ka...Ye पढ़ाई में mast...Mai सोने mein...Sports से तो दूर दूर तक कोई रिश्ता नहीं है.

मेघा:- क्रिकेट अच्छा खेलते ho...Dekha है मैंने भी.

सुमित:- वो 3 साल पुरानी बात hai...Bacchon के साथ वो भी टेनिस बॉल से.

सबको अपना हड्डी प्यारा होता hai...Cricket बॉल से खेल कर तुड़वाने का कोई शौख नहीं है मुझे.

मेघा:- तुम और इतना डरपोक?

सुमित:- मई और dar...Iss में भी कोई रिश्ता नहीं है वो भी दूर दूर tak...Lekin बेवकूफ भी नहीं हूँ की कुलहरि पर जा कर पेअर मार दू. :अप्प्रोवे:

मेघा:- मतलब पार्टिसिपेट नहीं करोगे.

सुमित:- बिलकुल भी नहीं.

मेघा:- अच्छा ठीक hai...Formality था पूरा कर diya...Baad में मुझे कुछ मत कहना.

सुमित:- मुझे खुद स्पोर्ट्स से कोई मतलब nahi...Fit मई तुम्हे क्यों कुछ कहूंगा.

मेघा:- ये भी मत कहना की कीर्ति से मिलने का मौका नहीं दिया.

ये बात सुनते hi सुमित सोच में पड़ gaya...Lekin कॉलेज का स्पोर्ट्स वीक और Kirti...Kya लिंक है? सुमित बिलकुल भी समझ नहीं पाया.

सुमित का कन्फूसिओं देख मेघा खुद बोली.

मेघा:- इस स्पोर्ट्स वीक के बाद इंटरकॉलेज क्रिकेट कम्पटीशन hai...Uss कम्पटीशन का होस्ट कीर्ति का hi कॉलेज hai...Agar सेलेक्ट होना है तो यहाँ अपने hi कॉलेज में अपना टैलेंट प्रोवे करना पड़ेगा इसके लिए स्पोर्ट्स वीक में पार्टिसिपेट करना पड़ेगा.

अब्ब तुम्हे इंटरेस्ट नहीं है तो कोई बात नहीं.

सुमित:- किसने कहा मुझे क्रिकेट में इंटरेस्ट नहीं है?

कीर्ति से पहले एक hi तो सच्चा प्यार था क्रिकेट.

मेघा:- तो क्या सोचा है?

सुमित:- सोचना क्या है? कॉलेज ख़त्म होने के बाद सीधा जा कर अपना नाम लिखवाऊंगा.

मेघा:- और क्या कह रहे थे? हड्डी से बहुत प्यार है?

सुमित:- प्रोटेक्शन नाम का भी कोई चीज होता है.

मेघा अब्ब वह से जाने hi वाली थी की.

सुमित:- अगर कभी इंटरकॉलेज टेबल टेनिस कम्पटीशन हो तो बता देना ख़ास तौर पर उस कम्पेशन का होस्ट कीर्ति की कॉलेज होना चाहिए.

मेघा:- (लाफिंग) 1 स्पोर्ट्स काफी होगा सोचा tha...Lekin यहाँ तो एक में एक फ्री मिल रहा है.

सुमित:- अच्छा एक बात bataao...Tumhe इतना कैसे पता चला की कीर्ति की कॉलेज ये कम्पटीशन होस्ट कर रहा है?

मेघा:- पता लगाना पड़ता है...दोस्ती नाम की भी कोई चीज होती hai...Shayad तुम नहीं समझोगे.

इतना कह कर मेघा वह से चली गयी.

अभी भी सुमित का कीर्ति की नाम सुनते hi इतना एक्ससिटेड होना मेघा को हैरान कर रहा था.

मेघा:- (इन हेर मंद) ये प्यार भी अजीब है.


ात नाईट


स. डैड:- बहुत बदलाव नजर आ रहा है तुझ में नशा छोड़ने के बाद.

सुमित को गौर से देखते हुए उन्होंने कहा.

सुमित:- हाँ बहुत फ्रेश महसूस कर रहा हूँ.

जिंदगी को पहले की तरह जीने की कोशिश कर रहा हूँ.

स. डैड:- जो की तू जी नहीं पा रहा है.

सुमित अपने पापा की तरफ हैरानी से देखता है.

स. डैड:- सब पता है mujhe...Kya नाम था उस लड़की ka...Haan कीर्ति.

भुला नहीं पाया है न उससे?

उनकी इस बात पर सुमित के साथ साथ उसकी माँ और रश्मि का ध्यान भी आकर्षित होता है.

सुमित कुछ जवाब दे पाटा उससे पहले.

स. डैड:- और भूल भी नहीं पायेगा.
 
अपडेट 71

सुमित:- नहीं भुला पाया hun...Bas कोशिश कर रहा हूँ ये सब भूलने की.

स. डैड:- Shabash...Aur फिर हमे भूल जाना और आखिर में खुद को भी.

सुमित को बात बिलकुल भी समझ में नहीं आया.

स. डैड:- पता नहीं तू भूल जाने का दावा कर के खुद को झूठा दिलासा दे रहा है और अपने ना कामयाबी से भागना चाहता है.

सुमित:- शायद ना कामयाबी से hi पीछा छुड़ा रहा हूँ.

उसके पापा कुछ देर उससे यूँही देखते है.

सुमित:- क्या हुआ?

स. डैड:- देख रहा hun...Tu वही सुमित है ना जो कुछ साल पहले तक कहता था की तू कभी हार नहीं sakta...Agar हार भी जाए तो हार नहीं मान सकता और वही जिद्द तेरा उस हार को भी जीत में बदल देगा.

उस वक्त तो कुछ नहीं kaha...Tujh में खुद को देख कर बहुत खुश tha...Lekin aaj...Aaj तुझे सच में हारता हुआ देख रहा हूँ.

सुमित:- और ये haar...Shayad बहुत पहले hi मान लिया था.

स. डैड:- बहुत hi अस्थिर (फ्लुक्टुअटिन्ग) हो रहा है tu...Kabhi अपने जिद्द में सिगरेट, दारु छोड़ सकता है तो कभी ऐसी बातें करता है जैसे तुझ से कमजोर दिल किसी का नहीं.

सुमित:- अब्ब थक गया हूँ Papa...Sach में हार गया hun...Bahut कोशिश कर liya...Lekin हर बार नाकामी hi हाथ आता hai...Sabr टूट रहा है abb...Kab तक खुद से hi झूठ बोलता firu...Itna झूठ बोल चूका हूँ की अब्ब तो मुझे भी खुद पर विश्वाश नहीं हो रहा है.

स. डैड:- बहुत कोशिश किया है? अच्छा चल bata...Kitni बार?

सुमित:- गिना नहीं है.

स. डैड:- अंदाजा.

सुमित:- 20-25.

स. डैड:- और वो साइंटिस्ट? तूने hi तो एक्साम्प्ले दिया tha...Thomas Addison...Kitne एटेम्पट में उसने इलेक्ट्रिक बल्ब बनाया?

सुमित:- उतना तो सोच भी नहीं sakta...Mere बस की बात नहीं है.

स. डैड:- बस यही फर्क होता hai...Baat कहने में और कर के दिखाने mein...Bahut कहता था तू कभी झुकेगा nahi...Lekin इतनी जल्दी?

सुमित इस बार कोई जवाब नहीं दे पाया.

स. डैड:- कहते बहुत लोग है ये कर लूंगा वो कर के dikhaunga...Lekin करते वही है जिसका हौसला बुलंद ho...Jidd हो मर मिटने ki...Aur ये तभी पता चलता है जब हालात और साथ छोड़ de...Sab कुछ गलत होने लगे.

कामयाबी की कीमत इतना सस्ता तो नहीं है.

सुमित कुछ नहीं बोल पाया.

स. डैड:- तुझे कमजोर नहीं दिखा रहा hun...Duniya बहुत देखा है tujhse...Bahut से मुशीबत का सामना किया hai...Bas इस दर से आगे उठ कर dekh...Kaise लड़ना है क्या करना है सब समझ जाएगा.

सुमित:- लेकिन आगे कुछ दिखाई तो de...Andhera hi नजर आ रहा hai...Bas राष्ट मिल jaaye...Puri जोर लगा dunga...Aise अँधेरा में कब तक ठोकर खाता राहु.

स. डैड:- शायद तू अभी नहीं samjhega...Abhi कीर्ति के बारे में बता.

सुमित:- वो मांनना नहीं chaahti...Abb मई hi पीछे हटने का सोच रहा हूँ.

स. डैड:- और वो क्यों?

सुमित:- जब कुछ हासिल हो नहीं रहा है तो क्या faaidaa...Aapne भी तो बहुत बार समझाया है प्यार के चक्कर में नहीं पड़ने के लिए.

स. डैड:- जबर्ज़स्ती के प्यार के चक्कर में ना पड़ने के लिए कहा hai...Bas नाम की बॉयफ्रेंड girlfriend...Tera प्यार मई भी महसूस कर सकता hun...Saccha वाला प्यार hai...Bhulaaye भूल नहीं सकता.

सुमित:- तो क्या करू? भुला ही नहीं पा रहा हूँ और समझा भी नहीं पा रहा हूँ.

स. डैड:- टूट कर प्यार kar...Itna प्यार कर की कीर्ति भी सोच में पड़ जाए इतने नफरत के बावजूद.

सुमित:- सीरियसली?

स. डैड:- मजाक के मूड में मई बिलकुल भी नहीं हूँ.

स. माँ:- ये आप क्या सीखा रहे है उससे? भूलने की कोशिश कर रहा है wo...Aur आप है की और प्यार में पड़ने की सलाह दे रहे है.

स. डैड:- तुम्हे क्या लगता है ये भूल पायेगा कीर्ति को?

स. माँ:- कोशिश तो कर रहा है ना.

स. डैड:- कोशिश तो मैंने भी किया था ये सोचने की लोग कैसे अमर हो सकते है.

कोशिश भी इसी चीज का होना chahiye...Jo संभव ho...Sach को टालने से वो झूठ नहीं हो jaata...Agar सुमित उससे भूलने का सोचेगा तो ऐसा लगेगा जैसे वो आँख बंद कर के सोचेगा की सूरज गायब हो गया है.

2-4 दिन झूठी तसल्ली देने के बाद सच्चाई फिर सामने aayega...Frustration के अलावा कुछ हासिल नहीं होगा.

अभी का सुमित dekho...Kitna बदलाव आ गया hai...Daaru, सिगरेट की लत और इतना काम confidence...Kuch और देर से पता चलता हमें तो ये खुद को hi खो बैठता.

प्यार चीज है hi aisa...Mil जाए तो धरती hi स्वर्ग बन जाता है और ना मिले तो इंसान खुद को hi बर्बाद कर लेता है.

इस बार सुमित की माँ कुछ नहीं kehti...Lekin पूरी तरह से कन्विंस्ड वो भी नजर नहीं आ रही थी.

सुमित:- बहुत मुश्किल से अपने इमोशंस पर कण्ट्रोल कर रहा hun...Fir से उसी प्यार की तरफ चला जाओ तो पैट अनहै आगे क्या होगा.

स. डैड:- इंसान है tu...Koi मशीन नहीं hai...Har तरह के जिम्मेदारी होता है इंसान ka...Pyaar भी kar...Apna पढ़ाई bhi...Bete का, भाई का और दोस्त के साथ हर एक रिश्ता अच्छे से निभा.

जो भी करेगा दिल लगा कर kar...Dekhna बहुत बदलाव आएगा.

तू प्यार करता था चुप kar...Ye सोच कर की पापा क्या सोचेंगे, माँ को कैसा lagega...Aur इसी में छुप कर अधूरा काम करता आया hai...Issi से हर जिम्मेदारी से पीछे छूट रहा hai...Ye फ़्रस्ट्रेशन, लौ कॉन्फिडेंस सब इसी के नतीजा है.

सुमित:- अब्ब कोशिश करूँगा तो कीर्ति मान जायेगी?

स. डैड:- तुझ पर देपेंद करता hai...Saccha प्यार के साथ इतना बुरा तो नहीं होना chahiye...Aur हाँ ऐसे लौ कॉन्फिडेंस में उसके सामने जाना भी mat...Aur फ़ालतू की सेंस ऑफ़ हुमूर तो तरय भी मत कर.

तूने hi तो कहा था कीर्ति तुझे से पहले प्यार करती thi...Kitna कॉंफिडेंट था उस वक्त tu...Peraonality भी alag...Aur जब से वो तुझसे ना पसंद करने लगी है तो कितना लौ कॉंफिडेंट का हो गया hai...Aur वो क्यों पसंद करेगी तुझे?

कुछ कर के dikha...Kuch काबिल ban...Aatmavishwash से bhara....Usse भी तो लगे तेरे बिना उअका कोई वजूद nahi...Har हाल में तू उसका साथ dega...Tabhi तो वो भी तुझे प्यार karegi...Warna ऐसा लगेगा की तू बस अपने प्यार का भीख मांग रहा है.

इतना प्यार कर उससे की वो लौट कर वापस आ hi jaaye...Aur अगर ना आये तो भी उसके दिमाग में ये चाप बैठ जाए की कोई था जो उससे बहुत प्यार करता था.

प्यार जरुरी hai...Saath में बाकी और चीज भी.

सुमित:- कोशिश करता हूँ.

स. डैड:- कोशिश nahi...Karke दिखा.

सुमित:- जरूर.

इस बार सुमित की आवाज आत्मावावश से भरा था.

स. डैड:- और भूल mat...Tu जो भी करेगा उसमें मई और तेरी माँ दोनों साथ hai...Iss विश्वाश के साथ की तू कभी गलत और अनैतिक काम नहीं करेगा.

जो करना है kar...Hum साथ है.

सुमित बिना कुछ बोले अपने पापा के गले लग जाता hai...Aur फिर.

सुमित:- थैंक यू Papa...Socha नहीं था इतना सपोर्ट करेंगे आप.

स. डैड:- अब्ब तो तेरे ख़ुशी में hi तो हमारा ख़ुशी hai...Tujhe खुश देखना है अब्ब to...Kirti में hi तेरा ख़ुशी hai...To वो hi सही.

3 डेज लेटर.

क्रिकेट का ground...Sabhi खिलाड़ी अपनी अपनी तयारी के साथ अपनी अपनी जगह पर लग गए thhe...Darshak भी ठीक ठाक थे.

सुमित आज थोड़ा अलग महसूस कर रहा tha...Na जाने कितने साल हो गए थे उससे क्रिकेट के जर्सी पहने hue...Bat को जमीन में पटकते hi उसका नहर सामने मेघा पर gaya...Jo बाउंड्री के बाहर से उसको चीयर कर रही थी.

मैच का पहला बॉल.

बहुत दिन के बाद भी सुमित के कॉन्फिडेंस में कोई कमी नहीं था.

एक फ़ास्ट बॉल फुल लेंथ ों Stump...Sumit शायद hi इससे अच्छा बॉल का उम्मीद कर सकता tha...Jawab में एक स्ट्रैट ड्राइव और एक शानदार चौका (4).

इस शॉट के साथ hi सुमित का ध्यान फिर से मेघा पर gaya...Megha की मुस्कान में इस बार कुछ बात तो था की सुमित का ध्यान मेघा से हट hi नहीं रहा था.

वो भी बस मेघा को hi देखे जा रहा tha...Bas ऐसा लग रहा था जैसे ये मुस्कान कभी ख़त्म हो hi ना.
 
अपडेट 72

बॉलर बाउल ले कर तैयार tha...Fir भी सुमित का ध्यान मेघा पर hi था.

सुमित्तत.

एक गुस्से से भरी आवाज कप्तान का जो non-striker एन्ड से बैटिंग कर रहा था.

ये सुनने के बाद hi सुमित का ध्यान मैच की तरफ वापस आया.

बॉलर के रन उप के साथ सुमित का ध्यान कभी बॉलर पर पड़ता तो कभी मेघा par...Megha से सुमित का ध्यान हैट hi नहीं रहा था.

दूसरा बाउल पर सुमित ने शॉट के लिए बात चलने hi वाला था की एक तेज बाउंसर उसके सर पर आ कर laga...Wo तो हेलमेट था जिसने उसके सर को बचाया वर्ण हड्डी का कहा और कितना फ्रैक्चर होता इसका अनुमान लगाना भी मुश्किल होता.

हेलमेट पर लगते hi वो बैलेंस बिगड़ने से निचे गिरा.

सुमित को ऐसे देख ग्राउंड के प्लेयर्स के साथ दर्शक भी घबरा gaye...Megha भी डरते हुए ग्राउंड में आ gayi...Dhire धीरे करके सुमित खुद hi उठा और मेघा को अपनी तरफ आते देख इशारा से खुद को ठीक होने का बता कर वापस जाने को कहा.

मन में दर के साथ मेघा वापस चली गयी.

फर्स्ट अिध टीम को भी उसने मन कर दिया.

पूरी तरह से उठने के बाद थोड़ा सा चक्कर आने laga...Aur उस चक्कर में भी जब उसका नजर मेघा पर पड़ा तो हर तरफ मेघा hi दिखने lagi...Ek अलग सा मुस्कान उसके होंठो पर आ गया जो शायद वो hi समझ सकता था.

सुमित...

नॉन स्ट्राइकर एन्ड से कप्तान का आवाज.

अगर फिट नहीं है तो रिटायर्ड हर्ट ले कर आराम कर.

पानी.

बस इतना hi जवाब दिया सुमित ने.

थोड़ा पानी पीने के बाद और थोड़ा मुंह पोंछने के बाद फिर से हेलमेट लगा कर सुमित रेडी हो गया.

दर्द थोड़ा सा tha...Concentrate भी पूरा नहीं कर पा रहा था.

कंसन्ट्रेट Sumit...Concentrate.

खुद को मोटीवेट कर के सुमित ने अपना बैटिंग पोजीशन लिया.

और नेक्स्ट बॉल उससे भी तेज bouncer...Lekin इस बार सुमित रेडी tha...Perfect टाइमिंग के साथ एक पॉवरफुल pull...Aur ball...Wo सभी की नजर से दूर स्टेडियम से भी बाहर.

इस शॉट के साथ सभी दर्शक में फिर से शोर शराबा सुरु हो gaye...Kuch दोस्त thhe...Jo सुमित का नाम ले कर चीयर कर रहे thhe...Lekin उनकी आवाज भी फींका पद गया मेघा के aawaj...Wo ख़ुशी के मारे सुमित के नाम ले कर चिल्लाने लगी.

सुमित भी ये देख काफी खुश tha...Wohi muskaan...Abhi भी सुमित के होंठो में tha...Andar से hi उससे बहुत अच्छा लग रहा था और अब्ब जा कर खेल में उसका मन लगने लगा.

फिर क्या tha...Har शॉट के बाद मेघा को खुश देख कर वो और भी शॉट मारने लग gaya...Captain दूसरी तरफ से बार बार मना कर रहा था लेकिन सुमित उससे hi मन कर के अपने मन मर्जी से खेलने लगा.

चौका और चक्का की तो बारिश hi होने लगा ग्राउंड mein...Aur ये सिलसिला तब तक चलता रहा जब तक सुमित आउट न हुआ.

8 चक्का और 5 चौका के साथ सुमित आखिरकार 32 बॉल में 78 रन्स बना कर एक और चक्का की प्रयास में आउट हो hi गया.

ग्राउंड से वापस आते hi मेघा ने सुमित को गले लगा liya...Sumit को न जाने क्यों ये भी अच्छा लग रहा tha...Bahut सुकून महसूस कर रहा था वो.

मेघा:- ये kya...Century बना कर आते.

सुमित:- इतना मारने के बाद भी सेंचुरी?

मेघा:- इतना अच्छा हो तुम की एक्सपेक्टेशन वैसे भी ज्यादा रहता है.

सुमित जवाब में सिर्फ मुस्कुराया.

मेघा:- स्टेडियम के बहार सिक्स कौन मारता है? इतना ताकत आया कहा से.

सुमित:- बस एक पागलपन tha...Ek जूनून.

मेघा:- किस चीज की? कीर्ति से मिलने के लिए?

सुमित:- Nahi...Match के दौरान एक बार भी कीर्ति का याद नहीं आया.

मेघा:- हो hi नहीं सकता ये.

सुमित:- क्रिकेट मेरा पहला प्यार hai...Kirti से भी बहुत पहले ki...Abb तक का सभी फ़्रस्ट्रेशन निकालने का मौका जो मिला tha...Aur शायद कुछ और भी था...

सुमित इससे आगे कुछ नहीं बोल paaya...Aakhiri वक्त में खुद को रोक लिया.

मेघा:- कुछ और ? क्या ?

सुमित:- कुछ ख़ास नहीं.

मेघा:- मई तो भूल hi gayi...Chot ज्यादा तो नहीं लगा.

मेघा फिर सुमित के सर सहलाने लगी.

सुमित:- Nahi...Bas वाइब्रेशन था थोड़ा हेलमेट ki...Balance बिगड़ने से गिर गया था.

सुमित का कॉन्फिडेंस देख मेघा को कन्फूसिओं में भी मानना पड़ा.

मेघा:- बहुत अच्छा लगा तुम्हे ऐसा खेलते देख.

मुस्कुराते हुए सुमित वह से निकल gaya...Megha से दूर जाते जाते उसके मुस्कान में बहुत से बदलाव भी आने लगा.

ात नाईट.


रात के 9 बजे डिनर के बाद सुमित के रूम में नॉक हुआ.

गेट खोलने पर सामने रश्मि थी.

सुमित:- तू ? इस वक्त ?

रश्मि:- कुछ बात करनी है.

सुमित:- हाँ बोल.

रूम के अंदर आने के बाद.

रश्मि:- आपको कीर्ति में ऐसा क्या दिखा?

थोड़ा गुस्सा और थोड़ा शिकायत था रश्मि की आवाज में.

सुमित:- बहुत साड़ी खूबसूरती और दौलत.

रश्मि:- मजाक मत कीजिये.

सुमित:- अरे are...Rashmi तो गुस्सा हो gayi...Abb कौन सा चॉकलेट ला कर दूँ.

रश्मि:- भैया प्लीज.

रश्मि को सीरियस देख सुमित भी मजाक के मूड से बाहर आया.

सुमित:- Pyaar...Ye होने के लिए क्या chahiye...Bas दिल से एक aawaj...I लव हेर एंड ी विल ऑलवेज बे हैप्पी विथ her...Wohi मेरे लिए सही है.

रश्मि:- पता nahi...Aisa आपको कैसे लग गया.

सुमित:- क्यों? वो तो तेरी बेस्ट फ्रेंड थी.

रश्मि:- कभी nahi...Sirf फ्रेंड thi..Itna ऐटिटूड और घमंड है उसमे की कई बार उससे इग्नोर करती thi...Wo hi आ कर जब बात करती तो मई भी बात कर लेती थी.

सुमित:- वैसे कीर्ति में ऐटिटूड सूट करता है. :डी

रश्मि:- आप और आपकी चॉइस. :युक:

सुमित:- मान या ना maan...Bhabhi तो तेरी वो hi है. :lol1:

रश्मि:- किस्मत hi ख़राब hai...Bhaiya के रूप में आप मिले और भाभी के रूप में वो चुड़ैल. :डोह:

सुमित:- चुड़ैल तू है जो उस मासूम को चुड़ैल कह रही है. :माध:

रश्मि:- ये मेघा कौन है?

सुमित:- मेरी दोस्त.

रश्मि:- सिर्फ दोस्त? :हिंतहिंट:

सुमित:- हाँ. :डेड:

रश्मि:- लेकिन आप दोनों के फब चाट तो कुछ और कहते है.

अब्ब सुमित एकदम से सीरियस हो गया.

सुमित:- Chat...Kab पढ़ा तूने.

रश्मि:- गलती से एक बार आपके मैसेज नोटिफिकेशन में क्लिक हो gaya...Kuch मेस्सगेस tha...Padha नहीं hai...Bas स्क्रॉल किया tha...Uski बहुत सी मेस्सगेस थे और आपका 2 लाइन का आंसर और कभी कभी तो बिलकुल भी नहीं.

सुमित ने कोई जवाब नहीं दिया.

मेघा:- भैया बताइये न? कौन है वो?

ऐसा लग रहा है बहुत अच्छी है wo...Aapko बहुत चाहती है.

सुमित कुछ देर तो रश्मि को देखता रहा.

सुमित:- Nahi...Ye सच नहीं है.

इतना कह कर सुमित ने सर घुमा लिया.

रश्मि:- खुल कर बताइये.

सुमित:- क्या करेगी जान kar...Papa को भी नहीं बताया है उसके बारे में.

रश्मि:- लेकिन क्यों? पापा तो खुल कर आपका सपोर्ट कर रहे hai...Fir भी आप छुपा रहे है उनसे?

सुमित:- कब तक अपना गलती hi बताता rahu...Abb बस अपना बदलाव और सुधार की बात hi करना चाहता हूँ unse...Agar मेघा के बारे में उनसे बात किया तो फिर भी वो कुछ नहीं kahenge...Lekin अपनी गलती की hi बात कब तक करता राहु.

रश्मि:- कुछ समझ में नहीं आ रहा hai...Khul कर bataiye...Please.

मेघा का नाम सुनते hi अलग अलग तरह के ख्याल आ रहे थे सुमित के दिमाग में.

आखिर कार सुमित को जवाब देना hi पड़ा.

सुमित:- मेरी "एक भूल"
 
फ्रेंड्स अपडेट 72 पोस्ट कर दिया hai...Padh कर अपना फ़ीडबैक्स जरूर dijiye...Aur देरी के लिए सॉरी.

अभी इमरजेंसी में पोस्टिंग hai...Din भर बिजी रहता हूँ और रात में थकान के बाद की नींद की वजह से लिख नहीं पा रहा tha...Ye अपडेट भी पिछले 2 दिन के प्रयास के बाद सफल raha...Ummeed है नेक्स्ट वीक से थोड़ा रिलीफ मिलेगा.
 
अपडेट 73

रश्मि:- भैया गलती तो सच में आप का hi है.

पूरी कहानी सुनने के बाद रश्मि ने कहा.

सुमित:- बहुत बड़ी गलती hai...Itna की भले hi वो मुझे माफ़ कर de...Mai खुद को माफ़ नहीं कर सकता.

रश्मि:- आपने सच्चे दिल से माफ़ी मांग लिया है na...Wo माफ़ कर देगी.

सुमित:- माफ़ कर चुकी है wo...Lekin ऐसे माफ़ किया है जो मेरे लिए पचा पाना भी मुश्किल है.

रश्मि:- कुछ समझ में नहीं आया.

सुमित:- समझ तो मुझे भी नहीं आ रहा hai...Kya से क्या हो रहा है.

रश्मि अभी भी सवालिया नजरो से सुमित को देख रही थी.

सुमित:- तूने पूछा था न की क्या वो मुझसे प्यार करती है? जवाब है हाँ.

4 बार रिलेशनशिप में रहा hun...Bhale hi बस नाम का hi प्यार ho...Kaafi एक्सपीरियंस है.

ना खुश आवाज में सुमित ने कहा.

सुमित:- ऐसे में मेघा के फीलिंग से कैसे अनजान रह सकता hun...Har पल मेरे पास है wo...Uski हर बातों में मुझे उसका प्यार महसूस होता hai...Har पल मुझे आगे बढ़ने की हालातों से लड़ने की हौसला देती hai...Har पल मुझे खुश रखने की कोशिश में रहती hai...Bhale hi उससे मेरा इग्नोर करना कितना भी बुरा लगता ho...Fir भी मेरे लिए कुछ भी कर गुजरने के लिए तैयार रहती है.

इतना pyaar...Kaise महसूस नहीं होगा?

आँख बंद करते हुए सुमित ने कहा.

रश्मि:- फिर आप उसके साथ hi क्यों आगे नहीं बढ़ जाते? क्यों उस कीर्ति के hi पीछे पड़े है?

सुमित:- क्यों की मई उस लायक नहीं समझता खुद को.

मेघा मुझसे इतना प्यार करती hai...Fir भी मई उसके सामने बहुत उनकंफर्टबले फील करता hun...Wo इतनी अच्छी है की उसके सामने जाते hi मुझे एहसास होता है मई कितना गलत हूँ.

रश्मि:- माफ़ तो कर चुकी है न wo...Abb जो भी गलती हो चूका है उससे भुला कर आगे badhiye...Uss गलती को अच्छाई से बदल दीजिये.

सुमित:- विश्वाश तोडा है uska...Abb भले hi उससे जोड़ भी du...Jab भी देखूंगा यही दिखेगा की कहा कहा से तोडा hai...Aur कहा कहा से जोड़ रहा हूँ.

गलती से भी दर्दनाक उस का पश्चाताप hai...Shayad डेसेर्वे भी करता हूँ.

ये पश्चाताप की आग किसी तरह सेह रहा hun...Agar मेघा से प्यार करने का भूल कर बैठा तो शायद ये आग कही मुझे जला न दे.

रश्मि:- क्या मतलब?

सुमित:- मई इस प्यार के लिए बिलकुल भी तैयार नहीं hun...Aur मेघा का प्यार भी ऐसा है जो कर किसी का सपना होता hai...Koi तो हो जो हमे टूट कर प्यार kare...Aur यही सब सोच कर मेघा का प्यार अपना भी लू तो मेघा के साथ ना इंसाफ़ी होगा.

मई उससे कभी वो प्यार नहीं दे पाऊंगा जो वो डेसेर्वे करती hai...Mai तो ऐसा कन्फ्यूज्ड इंसान बन जाऊँगा और यही सोचता रहूँगा की मैंने कीर्ति के साथ गलत किया या मेघा के साथ?

आज कीर्ति से मेघा अच्छी लग रही hai...Kal मेघा के साथ किसी बात पर बहस हो गया और कोई और अच्छी लगने लगी तो मेघा को भी कही छोड़ ना du...Galat एक्साम्प्ले है ye...Bahut गलत.

कीर्ति से बड़े बड़े वाडे किया hai...Uska क्या मोल रह जाएगा?

समस्या से दूर भागना समस्या का हल नहीं hai...Ye तो ऐसा है जैसे आँख बंद कर लेने से ये सोच लेना की सूरज गायब हो गया hai...Uska कोई अस्तित्वा अब्ब है hi नहीं.

पिछले 2-3 सालिन में यही महसूस किया है की प्यार किया नहीं जाता है हो जाता hai...Jabardasti मेघा से प्यार करने का कोशिश भी तो नहीं कर सकता हूँ.

रश्मि:- फिर मेघा का क्या होगा?

सुमित:- वो तो मेरे समझ के भी परे hai...Abb तक तो उसको मुझसे इर्रिटेट हो जाना चाहिए tha...Uske दिल में अपने लिए नफरत भरने की एक नाकाम कोशिश भी कर चूका hun...Abb वो भी कोशिश नहीं कर सकता.

खैर आज नहीं तो कल उसका मेरे लिए प्यार ख़त्म हो jaayega...Yahi उम्मीद कर सकता हूँ अब्ब.

उसके लिए भी यही सही hai...Kab तक झूठी उम्मीद ले कर baithegi.Jab उम्मीद टूटता है बहुत दर्द होता hai...Mujhse ज्यादा कौन महसूस कर सकता है इस बात को.

रश्मि:- आपकी बात गलत नहीं hai...Fir भी ऐसा लग रहा है जैसे कुछ तो गलत होने जा रहा है.

सुमित:- अब्ब जो भी ho...Jyada फर्क नहीं padta...Papa की ये बात सही लग रहा hai...Kuch सवाल के जवाब वक्त के पास होता है.

बस अब्ब ये वक्त जहा ले chale...Kirti का इंतजार तो rahega...Lekin अब्ब उससे परेशान भी नहीं करना chaahta...Jo होगा उससे hi किस्मत मान lunga...Waise भी अब्ब ये प्यार का पागलपन वक्त के साथ काम होता जा रहा hai...Shayad बर्दास्त करना सिख लिया है.

बेफिक्र आवाज में सुमित ने कहा.

रश्मि:- भैया एक बात पुछु? मेघा अउ Kirti...Aapke बिचार में कौन सही है.

ऐसे hi रश्मि को ये ख्याल आया.

सुमित:- आज तक जज तो नहीं kiya...Kismein क्या अच्छाई है और क्या buraai...Aur कौन अच्छी है.

कीर्ति मेरी प्यार hai...Acchi तो वैसे भी वो लगेगी hi.

लेकिन Megha...Bahut अच्छी dost...Wo दोस्त जो शायद hi मई डेसेर्वे करती hun...Bahut काम लोगो में से है वो जिसके लिए दिल से रेस्पेक्ट आता है.

कीर्ति का प्यार मई डेसेर्वे करता हूँ लेकिन मेघा का दोस्ती? ये हमेशा से सवाल हो रहा hai...Mere लिए भी.

आँखें बंद कर के सुमित ने जो भी महसूस kiya...Wo बातों के जरिये कह diya...Ye जवाब रश्मि के साथ साथ खुद के लिए भी था.

आफ्टर 3 इयर्स

हैप्पी मकर संक्रांति
 
अपडेट 74

डॉ. साहब उठ गए आप?

सुमित की पापा सुमित की तरफ ने मुस्कुराते हुए पूछा.

सुमित:- जब से इंटर्नशिप में आया हूँ नींद हराम हो चूका hai...Raat रात भर duty...Thak गया हूँ. :सिघ2:

स. डैड:- अब्ब और कितना बाकी है?

सुमित:- 1 मंथ और झेलना है यह सब kuch...Wo तो अच्छा है की सर्जरी में पोस्टिंग है abhi...Warna रात रात भर ड्यूटी में लगे रहो.

स. डैड:- क्यों तुझे सर्जरी करने नहीं आता?

सुमित:- थ्योरी तो सब आता hai...Bas प्रैक्टिकल nahi...Aur किसी सर्जन में इतना हिम्मत भी तो नहीं है.

स. डैड:- किस चीज की हिम्मत?

सुमित:- रिस्पांसिबिलिटी ka...Agar पेशेंट को कुछ हो गया to...Bewkoof hi होंगे वो जो कॉम्प्लिकेटेड सर्जरी मब्ब्स लेवल के डॉक्टर को देंगे.

बस उनको सर्जरी करते देख सिख रहा hun...Ye भी बहुत है इस लेवल में.

रश्मि:- अपना ना कामयाबी छुपाना कोई इनसे sikhe...Sidhe कह दीजिये कुछ नहीं आता आपको.

सुमित:- अभी भी थोड़ा बहुत नींद के नशा में hun...Kuch कह दूंगा तो पापा पापा कर के रोना मत.

रश्मि:- आप और आप का एक्सक्यूसेस.

सुमित:- अच्छा मेरा सर्जरी का स्किल तब पता chalega...Jab तुझ पर तरय karunga...Fir बताना.

अगर इन् में से कोई भी बीमारी हो जाए तो बताना... अप्पेंदिसिटिस, पैंक्रिअटिटिस, चोलएसिटिटिस...

रश्मि:- बस bas....Papa देखिये naa...Na जाने क्या क्या बीमारी लग जाने की दुआ कर रहे hai...Apna सर्जरी का स्किल प्रोवे करने के लिए.

स. डैड:- उकसाने का काम भी तो तू hi कर रही है.

रही:- क्या पापा? आप हमेशा भैया का hi सपोर्ट करते है.

सुमित:- इस लिए कहता hun...Soch समझ कर पन्गा ले.

फिर ऐसे hi हंसी मजाक में दिन बीत जाता है.

फ्यू डेज लेटर

Congrats...Aaj तुम्हारा हाफ सेंचुरी कम्पलीट हुआ.

मेघा की ये बात सुमित को समझ में नहीं आया.

सुमित:- किस बात की हाफ सेंचुरी?

मेघा:- कीर्ति को भूलने ki...Pichle 50 दिन से एक बार भी तुम्हारे मुंह से कीर्ति के बारे में नहीं सुना.

सुमित:- (इन हिज मंद) वो तो मेरे कण कण (पार्टिकल) में मौजूद hai...Bhulna और भुला पाना असंभव है.

लेकिन सामने से सुमित ने मेघा को कोई जवाब नहीं दिया.

मेघा:- मजाक कर रही thi...Lekin तुम इतना खामोश क्यों हो आज kal...Aur कोई कोशिश भी नहीं कर रहे हो?

इस बार गंभीर आवाज में मेघा ने पूछा.

सुमित:- अब्ब उसको और परेशान करने का दिल नहीं karta...Jitna कोशिश करना था कर चूका हूँ.

मेघा:- फिर कीर्ति को कैसे मनाओगे?

सुमित:- अब्ब nahi...Agar उससे मेरे प्यार का एहसास होगा तो वो खुद aayegi...Warna किस्मत की मर्जी.

इतना कह कर सुमित वह से थोड़ा दूर हैट गया और सामने हो रही सर्जरी की और देखने लगा.

मेघा से इस बारे में वो और बात करना नहीं चाहता था.

नेहा:- ये तो अच्छी बात है ना वो कीर्ति से दूर हो रहा hai...Tere लिए तो अच्छी बात hai...Fir बार बार क्यों तू उससे कीर्ति की याद दिला रही है?

थोड़ा गुस्से में नेहा ने मेघा से पूछा.

मेघा:- ऐसे अगर सुमित मुझे मिल भी जाए तो भी मंजूर nahi...Aur ये कैसा प्यार है की उससे पाने के लिए उसको ऐसा दुखी होता देख इस में अपना ख़ुशी धुंडु.

और यकीं के साथ कह सकती हूँ अगर सुमित कीर्ति से सच में हमेशा के लिए दूर हो गया तो उसका प्यार से विश्वाश उठ jaayega...Naa hi उससे कभी मुझसे प्यार होगा और ना hi किसी और se...Achha ये hi है की उससे उसका प्यार मिल जाए.

नेहा:- फिर तेरा क्या होगा?

मेघा:- कुछ nahi...Jab से सच में सुमित से प्यार का एहसास हुआ था तब से hi पता था सुमित मेरा कभी नहीं hoga...Aur अगर हो भी गया तो उससे hi ये एहसास होना चाहिए.

तभी ओट. में राज आता है.

भैया!!!!

सुमित के पास आ कर राज बोलै.

सुमित:- इतना डरा हुआ क्यों है? कोई बात है क्या? बोल मई देख लूंगा.

राज:- बात आप से hi रिलेटेड है.

सुमित:- मुझसे?

राज:- कीर्ति से रिलेटेड.

सुमित:- मेरी कीर्ति या तेरी?

राज:- आपकी.

बात तो दोनों की बहुत धीरे से चल रहा था ताकि सर्जरी में किसी को डिस्टर्ब ना ho...Sumit कोने में चला आया.

सुमित:- बता.

राज:- कीर्ति की इंगेजमेंट फिक्स्ड हो गया है.

सुमित:- एक तेज दर्द सुमित के सीने में उठा जैसे किसी ने चाक़ू भोंक दिया ho...Aaknkhein बंद कर के उस दर्द को सेहन करने की कोशिश किया लेकिन शायद कामयाब नहीं हो पाया.

एक पल बिना रुके वो ओट रूम से निकल gaya...Sumit को ऐसे जाते देख मेघा भी उसका पीछा करने लगी.

सुमित सीधे हॉस्पिटल की छत की तरफ जाने laga...Chhat में पहुँच कर एक कोने में चला गया...5 फ्लोर निचे जमीन की तरफ देखने लगा.

मेघा जब वह पहुंची तो सुमित को देख वो भी दर gayi...Wo कुछ कहती इससे पहले hi सुमित निचे बैठ गया.

मेघा अब्ब सुमित के पास गयी.

मेघा:- Sumit...Ye सब क्या है?

सुमित:- वो कीर्ति...

दर्द में इतना hi बोल पाया सुमित.

मेघा:- हाँ सुना मैंने भी.

सुमित अब्ब आगे कुछ नहीं बोलै.

कुछ देर चुप रहने के बाद.

सुमित:- प्लीज तुम जाओ यहाँ se...Akela छोड़ दो मुझे.

लेकिन मेघा सुमित को ऐसे अकेला छोड़ने को तैयार नहीं थी.

फिर निचे देखते हुए सुमित.

सुमित:- इतना हिम्मत नहीं है अब्ब mujhme...Suicide का ख्याल बहुत पहले आता tha...Wo भी सिर्फ ख्याल.

बस अभी अकेला रहना चाहता hun...Iss लिए यहाँ छत में आ गया.

मेघा:- कब तक ऐसे hi अकेले तड़पते rahoge...Pichle कुछ महीने से तुम खुद को सभी से दूर करते आ रहे ho...Dekho क्या हालत बना रकः है? दर्द बाटने से काम होता hai...Naa की उसको अपने अंदर दफनाने से.

सुमित:- लेकिन दर्द ऐसा है जो बांटा भी नहीं जा सकता और ना hi बांटना चाहता हूँ.

वक्त भी ऐसा है की हमेशा ख़ुशी बाटने वाला सुमित के हिस्से में आज बाटने के लिए अगर कुछ है तो भी ये दर्द. :सिघ2:

मेघा:- कुछ तो bolo...Dard हल्का हो jaayega..Tumhe ऐसा देख....

सुमित:- हल्का hoga...Khatm नहीं.

और वैसे भी कहने के लिए बहुत कुछ tha...Bahut अरमान tha...Vaada....Pyaar...Aur न जाने क्या kya...Lekin अब्ब सब कुछ भूलता जा रहा hun...Aakhir बताओ भी तो किसे? जो मुझसे दूर जा रही है? जिसकी जिंदगी में मेरा कोई अहमियत नहीं है.

प्लीज चली जाओ tum...Mujhse और बर्दास्त नहीं हो रहा है.

आखिरी लाइन सुमित ने मेघा को देख कर कहा.

मेघा:- नहीं आज तुम्हे बोलना hi hoga...Aise ख़ामोशी से एक बार फिर दर्द का घूंट पीने नहीं दूंगी.

अब्ब सुमित से भी और कण्ट्रोल नहीं हो रहा tha...Dhire धीरे आँखों से आंसू की धार बहना सुरु हो गया.

सुमित:- पता नहीं कैसा प्यार है ये? आज भी कीर्ति को गलत नहीं मान पा रहा hu...Aur उसकी भी क्या गलती? मई hi पड़ा था उसके पीछे उसके लाख मन करने के baawjud...Ummeed...Shayad यही एक चीज मुझे ले डूबा.

आज नहीं तो क ये होना hi था.

मेघा:- अभी हिम्मत rakho...Hum बात करेंगे कीर्ति से.

मेघा ने ये कह तो diya...Lekin उससे भी पता था कीर्ति से बात करने का कोई फायदा नहीं.

सुमित:- Nahi...Abb उससे और परेशान नहीं karunga...Wo अब्ब अपने जिंदगी में खुश रहे यही सही है.

और mai...Kab तक ऐसे hi आशिक़ की रारह अपना जिंदगी गुजारता rahunga...Bhula दूंगा usse...Bhula दूंगा.

भले hi सुमित की आवाज में दर्द था लेकिन आखिरी की बात में दृढ निश्चय tha...Aur ये कहने के बाद चेहरे में एक बार फिर दर्द भरे निशान आ गए.
 
अपडेट 75

तो ये बात है? इतने दिनों से ये सब चल रहा था और मुझे आज पता चल रहा है.

थोड़ा गुस्से के साथ कीर्ति के पापा बोले.

क. डैड:- और Kirti...Tumne मुझे बताया भी नहीं?

कीर्ति:- इग्नोर कर रही थी isse...Picchle कुछ साल बिलकुल शांत हो गया tha...Pata नहीं आज इससे क्या हो गया?

सुमित की और देख गुस्से से बोली Kirti...Kirti की नफरत देख सुमित और भी टूट ता जा रहा था.

क. डैड:- ये सब जाने के बाद भी तू यहाँ इसके साथ आ gaya...Samjhaana चाहिए था isse...Lekin तू भी अपने बीटा के मोह में अँधा हो गया है.

नाराजगी भरी आवाज में कीर्ति के पापा ने सुमित के पापा से कहा.

स. डैड:- मई इसके साथ नहीं खुद मई इससे यहाँ ले कर आया हूँ.

इस बात से कीर्ति के सभी घर वाले हैरान हो गए.

क. डैड:- क्या? समझाने की जगह तू इससे और बढ़ावा दे रहा है?

स. डैड:- अगर गलती करता तो जरूर रोकता.

क. डैड:- तो क्या ये सही है?

स. डैड:- सही भी नहीं है.

क. डैड:- तो फिर?

स. डैड:- सच्चा प्यार करता hai...Teri बेटी के लिए अच्छा hi चाहता hai...Fir गलत कैसे हो गया?

लेकिन किस्से प्यार करना chahiye...Ye इससे समझ में नहीं aaya...Bas ये सही नहीं किया.

इस बात पर कीर्ति और उसके पापा दोनों hi उन्हें गुस्से से देखते है.

क. डैड:- Accha...Choice ख़राब hai...To इस ख़राब चॉइस को भूल जाने के लिए क्यों नहीं समझाया?

स. डैड:- मई कौन होता हूँ इसको चॉइस भूल जाने के लिए कहने वाला? बस इसके चॉइस पर सलाह दे सकता हूँ की क्या करना चाहिए और क्या नहीं.

इससे यही सलाह दिया था की सच्चा प्यार करता है तो करता reh...Aise डरपोक बन कर बिच में hi भूल जाने की झूठा दिलाशा मत दे खुद ko...Kyu की एक बार इंसान खुद को हारा हुआ मानने लगता है तो जिंदगी भर हारता hi रहता hai...Bahut वक्त लग जाता है खुद को संभालने में.

मई हमेशा अपने बेटे को एक फाइटर के रूप में देखना चाहता hun...Sirf जीतने वाला nahi...Agar सामने हार hi है फिर भी आखिरी पल तक लड़ता rahe...Aise में हार भी गया तो भी मुझे अपने बीटा पर गर्व होगा.

अपने पापा की इस बात सुनने पर सुमित को hi अपने पापा पर गर्व महसूस hua...Unke बीटा होने का.

स. डैड:- मौका दे रहा था इससे अपने प्यार साबित करने के liye...Agar इसका प्यार सफल हो जाता तो जिंदगी भर इससे खुद पर गर्व होता की एक असंभव सा दिखने वाली चीज संभव कर के दिखाया hai...Aur इससे अपने प्यार का कीमत पता चलता की प्यार कितना अनमोल होता है और इससे पाने के लिए न जाने कितने हालातों से गुजरना पड़ता है.

और इसका प्यार असफल हो जाता है तो इससे अपना गलती dikhega...Kaha कहा पर गलतियां किया है और क्या गलतियां किया hai...Issi सिख से ये आगे बढ़ेगा.

लोग कहते है किसी का भी सबसे बड़ा शिक्षक (टीचर) उसके माँ बाप और स्कूल कॉलेज की टीचर होते hai...Sahi भी hai...Lekin मैंने अपने जिंदगी के अनुभव से सीखा है की जिंदगी खुद सबसे बड़ा शिक्षक hai...Jindagi के ऐसे पहलु होते है जिससे हम बहुत कुछ सिख सकते है ख़ुशी के पल से भी और ग़म से भी.

इतना कह कर सुमित के पापा ने थोड़ा सांस लिया और फिर.

स. डैड:- तुम गलत चॉइस हो ये नहीं कह रहा hun...Tum खुद में बहुत अच्छी ho...Aur तुम्हारा पूरा अधिकार है अपने डिसिशन लेने ka...Tum सुमित के लिए गलत ho...Aur सुमित तुम्हारे लिए गलत hai...Shayad ये बात अब्ब सुमित भी समझ गया होगा.

क. डैड:- वाह क्या बात hai...Math का टीचर आज जिंदगी का ज्ञान देता फिर रहा है.

इस मजाक उड़ाने वाली हंसी पर सुमित से रहा नहीं gaya...Lekin वो कुछ बोलता उससे पहले उसके पापा उसका हाथ पकड़ लेता है.

स. डैड:- Jindagi...Iss विषय का शिक्षक तो अभी भी बन नहीं पाया hun...Ek विद्यार्थी हूँ और जो भी खुद सीखा है वो बता रहा हूँ.

और jindagi...Ye ऐसा शिक्षक है जो तेरा इस अहंकार वाली हंसी को आसानी से पाचताप वाली आंसू में बदल सकता hai...Bas वक्त की देरी है.

क. डैड:- सपना देखता reh...Waise भी सपना hi तो देखता आया है आज tak...Jo कभी पूरा नहीं हो सका.

स. डैड:- और तू भी वैसा का वैसा hi रह gaya...Bas दुसरो के बारे में अपना ओपिनियन बना लेता है और उससे में अदा रहता है भले hi वो सही है या गलत.

जरुरी तो नहीं है कहना लेकिन फिर भी तेरे जानकारी के लिए कह hi देता hun...Aaj वो सपना निकाल कर फेंक दिया hai...Vakt के साथ खुश हूँ और जिंदगी भी सही चल रहा hai...Abb बस अपना बीटा और बेटी की कुछ जिम्मेदारियां है.

कीर्ति के पापा इस बात पर कोई जवाब नहीं देते है.

ऐसे hi कुछ देर सुमित को देखने के बाद.

क. डैड:- तुम्हे तो मई बहुत शरीफ समझता था.

सुमित कोई जवाब नहीं देता.

क. डैड:- लेकिन आज कल तो शरीफ दिखने वाले लड़के hi छुपा ृष्टं निकलते है.

सुमित फिर भी कोई जवाब नहीं देता.

क. डैड:- वैसे एक बात bataao...Tumhe मई अपना दामाद बनाऊ क्यों?

कीर्ति:- पापा?

क. डैड:- मई सुमित से बात कर रहा हूँ.

क. डैड:- अच्छा तो सुमित bataao...Tum में ऐसा क्या ख़ास है की मई कीर्ति का हाथ तुम्हारे हाथ में दू.

इस बार कीर्ति की पापा की आवाज थोड़ा धीमा tha...Sumit को भी लगा इस बार कुछ जवाब देना chahiye...Lekin अगले hi पल.

क. डैड:- यही की तुम पढाई काम आवारापन ज्यादा कर रहे ho...College काम बार में ज्यादा समय रहते ho...Exam में पास होना भी किसी चमत्कार से काम नहीं.

अरे कोई पेशेंट तुम जैसे डॉक्टर से इलाज करने के लिए राजी नहीं होगा अगर असलियत जान ले तो फिर मई सब कुछ जानते हुए अपने बेटी का शादी तुम से करवौ.

अगर कीर्ति भी राजी होती फिर भी मई इस शादी का खिलाफ hi hoti...Garv है मुझे अपने बेटी पर जो कॉलेज जाती है तो सिर्फ पढ़ाई करने के liye...Naa की तुम जैसे आवारा के मीठी मीठी बातों में आयी जो पढाई के अलावा लड़की फ़साने में ज्यादा ध्यान देते है.

सुमित hi जानता था की कैसे उसने खुद को संभाला.

स. डैड:- सुमित की इतनी taarifein...Tujhe कहा से पता चला?

क. डैड:- सच कड़वा होता hai...Bhale hi कितना भी बुरा क्यों न lage...Mahesh याद hai...Party में एक दिन सभी के बारे में बातें चल रही thi...To इसका प्रोग्रेस रिपोर्ट भी पता चल गया.

सुमित टैलेंटेड तो hai...Bas लड़की की चक्कर छोड़ दे.

स. डैड:- और तू बहुत मजे से सुन रहा था.

क. डैड:- मुझे क्या पड़ी है किसी के बारे में इतना सोचने ki...Bas जो भी पता था वो कह दिया.

स. डैड:- लेकिन बातों से तो ऐसा लग नहीं रहा था.

क. डैड:- फिर भी सच तो ये hi है.

स. डैड:- तूने सुमित से पूछा था ये सवाल की सुमित में तेरा दामाद बनने की क्या खासियत है? सवाल सुमित से पूछा है तो जवाब मई नहीं दूंगा.

बस 5 saal...Fir भी सुमित जवाब नहीं dega...Agar हमारी दोस्ती तब तक रहा तो देख लेना सुमित में क्या खासियत hai...Jawaab तेरा आँखें खुद तुझे देगा.

क. डैड:- कमाल hai...Apne बीटा का इस हरकत पर भी साथ दे रहा hai...Maar पीट कर समझाना चाहिए था ताकि अकाल ठिकाने आ जाये.

अगर मुझे पहले पता चलता की मेरी बेटी के पीछे पड़ा है तो हाथ पेअर तोड़ कर रख देता.

स. डैड:- नहीं कर पाटा.

क. डैड:- क्या?

स. डैड:- हाथ पेअर तोड़ने की बात कर रहा hai...Chhuu भी नहीं सकता है.

इस बार उनकी आवाज में थोड़ा गुस्सा भी था जिससे कीर्ति के पापा भी कुछ नहीं बोल पाए.

क. डैड:- सही hai...Tera घमंड उस वक्त तुझे ले डूबा tha...Abb तेरा बीटा को ले डूबेगा.

इसके बाद कुछ देर कोई बात नहीं होता.

कीर्ति:- Sumit...Tumse कुछ बात करनी है.

पहली बार ऐसा हुआ की कीर्ति ने बुलाया था और सुमित को कोई ख़ुशी नहीं हुआ.

सुमित:- कहो.

कीर्ति:- अकेले में.

कीर्ति अपनी पापा की और देखते hai...Wo परमिशन देते है.

दोनों फिर रूम से बाहर जाते है.

कीर्ति:- क्या बात है? इतना शांत क्यों हो?

सुमित:- बोलने के लिए अब्ब शब्द बाकी नहीं है.

कीर्ति अब्ब हसने लगती hai...Kirti की ये हंसी सीधा सुमित के दिल पर वार कर रहा था.

कीर्ति:- न जाने इतने साल में इतना बोल लिया तुमने की अब्ब तुम्हारे पास बोलने के लिए शब्द hi नहीं hai...Kamaal है.

ये कह कर कीर्ति और हसने लगती है.

कीर्ति:- इतना परेशान कर दिया था तुमने मुझे की आज तुम्हे परेशान देख बहुत ख़ुशी मिल रहा है.

सुमित की तरफ देख कर.

कीर्ति:- वैसे मुझे किसी को दुखी देखना अच्छा नहीं लगता पर पता नहीं क्यों तुम्हे दुखी देख कर बहुत अच्छा लग रहा है.

जैसे को taisa...Ye कहावत आज सही साबित हो gaya...Tumne मुझे जितना परेशान किया hai...Abb तुम भी उतना hi परेशान हो.

तुम तो कुछ बोल hi नहीं रहे हो.

सुमित:- आज तुम बोलो.

कीर्ति:- Haan...Aaj मई बोलूंगी और तुम sunoge...Kuch ऐसा बोलूंगी की आज के बाद कुछ सुन्ना भी नहीं चाहोगे तुम.

सुमित:- (इन हिज मंद) मंजूर है.

कीर्ति:- ऐसा नहीं है की मुझे तुम्हारे प्यार का एहसास नहीं tha...Jaanti हूँ तुम्हारा प्यार सच्चा hai...Lekin mai...Mujhe भी तो पसंद आना चाहिए तुम्हारा प्यार.

जब से एक बार तुम गलत लगने लगे तब से तुम से बिलकुल hi नफरत होने laga...Bhale hi तुम्हारा प्यार कितना भी सच्चा ho...Tumhara बातें, तुम्हारा चेहरा और tum...Sab से नफरत होने लगी.

जितना मई तुम्हे अवॉयड करती थी उतना hi तुम मेरे पास आते थे उससे मेरा नफरत और भी बढ़ gaya...Besharmi की भी हद्द होती है.

आज तुम्हारा जो हाल है वजह तुम खुद ho...Bahut पहले ठुकरा दिया था tumhe...Tum hi मेरे पीछे पड़े थे और आज ये हाल hai...Aur सच कहु तो तुम्हारा ये हाल मेरे लिए किसी सुकून से काम नहीं है.

इतना कहने के बाद कीर्ति एक नजर सुमित को देखती है और हँसते हुए कहती है.

कीर्ति:- क्या कहते थे तुम विवेक को? विचित्र praani...Khud देख लो तुमसे विचित्र कौन होगा?

तुम मेरे पीछे 8 साल से पड़े हो...8 साल यानी की 96 mahine...Aur मेरे पास तुम्हारे लिए 96 मिनट भी नहीं hai...Yahi है तुम्हारा औकात.

ये बात सुमित के दिल को चुभ gaya...Aur साथ hi उसके होंठो में दर्द भरी मुस्कान छा गया.

कीर्ति:- अभी भी बेशर्मी के साथ खड़े हो.

नफरत भरी आवाज में कीर्ति ने कहा.

सुमित:- अगर तुम्हारा इजाजत हो तो ये बेशर्मी दो बार और दिखाना चाहता हूँ.

कीर्ति:- क्यों और कब?

हैरानी से कीर्ति की मुंह से निकला.

सुमित:- तुम्हारा इंगेजमेंट और शादी के दिन.

कीर्ति को विश्वाश नहीं हो रहा था और खुद सुमित को भी.

कीर्ति:- अब्ब तुम खुद hi कुल्हाड़ी पर पेअर मारना चाहते हो तो मई क्या kahu...Accha hi hai...Tumhara शकल देखने लायक होगी.

सुमित:- थैंक यू.

फिर कीर्ति वह से चली गयी.

पहली बार ऐसा था की सुमित को कीर्ति के पीछे मुड़ने की और मुस्कुराने की उम्मीद नहीं tha...Wo बस मुश्कुराते हुए कीर्ति को जाते देखता रहा.

सुमित:- बस 2 मुलाक़ात aur...Fir तुम्हे भुला dunga...Bhulaana hi पड़ेगा.

आखिरी लाइन कहते हुए सुमित रोने hi वाला था की हालात और जगह देख रू भी नहीं पाया.

वो दुखी मन वापस आ गया.

स. डैड:- (तो कीर्ति) तुमने hi कहा था सुमित पिछले 3 साल से तुमसे नहीं मिला hai...Lekin सामने न आ कर भी तुम्हे अपने प्यार का एहसास दिलाने का हजार कोशिश कर चूका है.

अगर तुम राजी होती तो मई इसके (क. डैड) परवाह किये बिना तुम दोनों की शादी करा deta...Lekin तुम hi तैयार नहीं ho...Khair तुम्हारा डिसिशन hai...Sahi hi होगा तुम्हारे liye...Khush रहना तुम.

स. डैड:- (तो क. डैड) तू तो बचपन का दोस्त है और तुझसे वैसे भी ज्यादा नाराज नहीं रह sakta...Agar दोस्त का जरुरत पड़े तो आगे भी कुछ कहने के लिए मत हिचकना.

इतना कह कर वो सुमित को अपने साथ ले कर वह से निकल गए.

स. डैड:- यहाँ आने का मकशद यही था की तुझे जिंदगी के ऐसे पल भी हो सकते है ये समझाना चाहता tha...Agar कीर्ति मान जाती तो बहुत ख़ुशी होता मुझे bhi...Lekin ये एक ऐसा मुश्किल पल है जिसको अगर झेल लिया तो देखना आगे का जिंदगी और भी खुशनुमा हो जायेगा.

सुमित:- कीर्ति से अलग हो कर कैसी ख़ुशी?

स. डैड:- अभी नहीं samjhega...Vakt आने दे.

सुमित:- पापा अभी बहुत टूटा हुआ महसूस कर रहा hun...Ho सकता है कुछ दिन तक आप निराश हो जाए मुझे ऐसे देख kar...Lekin पापा विश्वाश कीजिये फिर से उठ कर खड़ा हो jaaunga...Bas थोड़ा वक्त dijiye...Aapne मेरे बारे में जो सोचा है उससे भी बड़ा बन कर दिखाऊंगा.

सुमित की आवाज में आत्मविश्वाश तो था लेकिन इस बात में भी दर्द hi हावी था.

स. डैड:- जितना चाहे उतना वक्त le...Mujhe विश्वाश है तुझ par...Mujhe हमेशा जीतने वाला बीटा नहीं chahiye...Haar के सामने भी ना झुकने वाला बीटा चाहिए भले hi वो हार उससे कितना भी तोड़ दे.

सुमित:- आज के लिए सॉरी Papa...Waha कुछ बोल नहीं paaya...Aisa लगता है मैंने खुद के साथ वह आप को भी हरा दिया.

स. डैड:- किसने कह दिया की तू वह हार गया था?

सुमित अपने पापा को हैरानी से देखता है.

ा. डैड:- अपने भावना से जीता है tune...Itna गुस्सा और दर्द के बावजूद अपने दिल पर काबू tha...Yeh देख मई सच में खुश हु.

उम्र और हालात ऐसे है की कीर्ति के पापा पर तेरा कभी भी हाथ उठ सकता था जैसे वो तुझे उक्षा रहा tha...Aur कीर्ति से प्यार की भीख में गिड़गिड़ाता तो वो भी कोई हैरानी की बात नहीं होती.

लेकिन तूने अपने भावना पर काबू रखा hai...Bahut बड़ी बात है ye...Bas बीटा कुछ वक्त aur...Dekhna जिंदगी में जो भी दर्द झेले है तूने ये सभी खुशियां बन कर सामने aayenge...Bas तू ऐसे hi मजबूती से आगे बढ़.

इतना समझ hi गया होगा दिल की बात हमेशा सुनने पर ठोकर hi लगता hai...Thoda दिमाग से भी सोच और ाही फैसले le....Ye नहीं कहूंगा की प्यार मत kar...Jindagi में प्यार का भी अलग hi जरुरत hai...Bas सही लड़की से प्यार कर.

सुमित:- अब्ब किसी और से प्यार? ऐसी हालात में?

स. डैड:- बिलकुल nahi...Aur प्यार करते नहीं प्यार हो जाता hai...Abb तो तेरा उम्र भी हो चूका है शादी के liye...Abb तो अपनी बीवी से hi प्यार करना :D...Fir galat...Pyaar किया नहीं जाता प्यार हो जाता है ये बात समझ लेना.

आखिरी की बात सुमित के पापा ने ऐसे कहा था की सुमित को भी हंसी आ गया.
 
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