अपडेट 101
जितना बबिता को भी छोड़ने में नहीं आता था बूत उसके लिए मुझे ये दवाई बनानी पड़ेगी इसलिए िएर दवाई मानाने पर ध्यान दे ये बोलकर िएर अंकल दवाई मानाने पर ध्यान देने लगता है....

अब आगे 
और इधर गोकुलधाम सोसाइटी में पोपटलाल बहुत खुस था क्युकी सोफ़िया ने उससे बात करनी स्टार्ट करदी थे और साथ में जल्दी hi वो पोपटलाल से शादी करने का बोल भी जिसको सुनकर पोपटलाल बावला सा हो गया था बूत उसको क्या पता था जिस कमुख की देवी के लिए वो इतना उतावला हो रहा है दरअसल वो रंडी है और वो भी जेठालाल की और वो जब मर्ज़ी तक उसको छोड़ता है दुसरो से भी छुड़वाता है.....
. उसके बाद सारा दिन ऐसी hi निकल जाता है और रात हो जाती है सभी Gent's भी अपने अपने काम से घर आजाते है और खाना खाकर सोसाइटी कंपाउंड में आने लगते है एक एक करके इधर इधर पालक दीदी ने दिंनिंग टेबल पर खाना लगा दिया था और हम सब मिलकर खाना खा रहे थे खाना कहते कहते में दीदी से बोलता हु....
- में- पालक दीदी माँ कब वापस आएगी....
- दीदी- अभी तो पता नहीं कब आएगी तू क्यों पूछ रहा है तुझे कोई काम था क्या माँ से....
मेरी बात सुनकर संजना फ़ौरन बोलती है...
- संजना- दीदी कर दिया होगा कोई काण्ड कॉलेज में और उन्होंने माँ को बुलाया होगा...
संजना की बात सुनकर मुझे गुस्सा आजाता है और में अपने मैं में बोलता हु.... साली आज कल बहुत बोलने लगती है तू जिस दिन मेरा ये लैंड तेरी गांड में जायेगा तेरी साली अकड़ निकल जाएगी... दरअसल ये बात मेने गुस्से में थोड़ी तीज बॉडी थे जिससे मेरी बात उर्वी सुन लेती है जो मेरे पास बैठ कर खाना खा रही थी मेरी बात सुनकर उर्वी मुझे आखे देखने लगती है और जब में उसकी तरफ देखता हु तो मुझे पक्का यकीन हो जाता है जरूर इसने मेरी बात सुनली है बूत फिर में सोचता हु ये किसी को नहीं बोलेगी ये सोचकर में खाना खाने लगता हु और खाना खाने के बाद में थोड़ी देर सोफे पर बैठ जाता हु और निचे गार्डन में चला जाता हु थोड़ा टहलने के लिए और थोड़ी देर टहलने के बाद मुझे टॉयलेट लगती है तो में घर की तरफ चल देता हु और जैसी hi सोसाइटी कंपाउंड में जाता हु वैसी hi सभी Gent's मुझे मिलते है जो अब्दुल की दूकान पर जा रहे थे सोडा पिने इधर जब मेहता जब मुझे सोसाइटी के अंदर आते देखता है तो मुझसे बोलता है....
- तारक- युवी तुम खा जा रहे हो आज सोडा पिने नहीं चलना क्या.....
- में- अंकल आप लोग चलो में टॉयलेट करके आता हु...
मेरी बात सुनकर वो सब चले जाते है और में अपने घर की तरफ चल देता हु और मैं गेट ओपन करके जैसी hi अपने रूम का गेट ओपन करके अंदर जाता हु तो अंदर का नजारा देख कर मेरा लैंड एक hi झटके में काढ़ा हो जाता है क्युकी अंदर उर्वी कपडे चेंज कर रही थी और
उसने अपनी ब्रा निकल दी थे और अपनी पंतय निकल रही थे झुक कर और इस टाइम पंतय उसके पैरो में थे और झुकने की वजह से उनकी मोती मोती चूचिया निचे को लटक रही थे और जैसी hi मेरी नज़र उर्वी के पिंक निप्पल्स पर जाती है एक बार तो मेरा मैं करता है अभी इनको मुँह me.lekar चूसने लग जाऊ बूत फिर में खुद से बोलता हु छुट्टिये क्या कर रहा है ये तेरी सबसे प्यारी बहन है इसके लिए कोई गन्दी फेल्लिंग नहीं ये सब मेरे दीमकार में आते hi में उर्वी से बोलता हु....
- में- यर उर्वी कमसे काम गेट तो लॉक कर लिया कर तेरी वजह से बादमे मुझे प्रॉब्लम होती है....
ये बोलकर में सीधा बाथरूम में चला जाता हु और इधर उर्वी अभी जो कुछ भी हुआ उसके बारे में सोच रही थे कैसे hi नंगी कढ़ी होकर इधर बाथरूम में सबसे पहले में टॉयलेट करता हु और फिर अपने लैंड पर ठंडा पानी डालकर शांत करता हु और उसकी बाद में टॉयलेट के अंदर से बोलता हु....
- में- उर्वी तूने कपडे पेहेन लिए हो तो में बहार आजौ....
मेरी बात सुनकर उर्वी अपनी सोच से बहार आती है और मुझसे बोलती है......
ये बोलकर उर्वी एक शॉर्ट्स और t-shirt पेहेन लेती है बिना ब्रा पंतय के ये पेहेन्ने के बाद उर्वी मुझे बहार आने का बोलती है और में टॉयलेट से बहार आजाता हु और बहार आकर में देखता हु उर्वी शर्मा रही थे उसको ऐसी देख कर में उर्वी से बोलता हु....
- में- अब शर्मा क्यों रही है उर्वी अभी जो कुछ भी हुआ वो सब अनजाने में हुआ और बचपन में तो हम दोनों एक साथ hi नहाते थे न वो भी बिना कपड़ो के....
मेरी बात सुनकर उर्वी के फेस पर स्माइल आजाती है और वो मुझसे बोलती है....
- उर्वी- चल भाई निचे चलते है....
उर्वी की बात सुनकर हम दोनों निचे आजाते है और में अब्दुल की दूकान की तरफ चला जाता हु और उनके पास जाकर बैठ जाता हु और अब्दुल मुझे सोडा देता है और तभी पोपटलाल बोलता है....
- पोपटलाल- और बता भिड़े तेरे टूशन कैसी चल रहे है....
पोपटलाल की बात सुनकर भिड़े चौक जाता है और फिर पोपटलाल से बोलता है.....
- भिड़े- पोपटलाल आज तुझे मेरे पढ़ने की चिंता कैसे होने लगी तुझे कोई काम है क्या...
- पोपटलाल- कुछ काम नहीं है भाई मेटो बीएस ऐसी hi पूछ रहा हु....
पोपटलाल की बात सुनकर सोढ़ी भिड़े से बोलता ही....
- सोढ़ी- भुडु तू ठीक बोल रहा है ये पोपटलाल बिना किसी मतलब के कुछ नहीं करता इसमें भी जरूर इसकी कोई बात छुपी हुई है....
- पोपटलाल- कुछ नहीं है भाई सोढ़ी...
इन सबकी बात सुनकर जेठालाल गुस्से में बोलता है....
- जेठालाल- तुम सब इस चुटिया के चक्कर में खा पद रहे हो छोडो इसको और अपने अपने सोधे का मजा लो.....
जेठालाल की बात सुनकर सब हांसे लगते है और साथ में अपना अपना सोढा पिने लगते है और सोढा ख़तम करके सब अपने अपने घर की तरफ चल देते है और जब में अपने घर की तरफ जा रहा था तो पूर्वी मुझे अपने पास बुलाती है और मुझसे बोलती है....
- पूर्वी- युवी कुछ पता चला केस के बारे में...
पूर्वी की बात सुनकर में झूट बोलते हुआ उससे बोलता हु....
- में- नहीं मम मेने इस बारे में बहुत लोगो से बात करि बूत मुझे कुछ पता नहीं चला
ये बात बोलते टाइम मेरी नज़र पूर्वी की
मोती मोती चूचियों पर पड़ती है जिनकी गोलाई अलग hi नज़र आती थे उसकी शर्ट्स के अंदर से ये देख कर मेरा लैंड पूरा का पूरा काढ़ा हो जाता है जो मेरे लोअर में अलग hi नज़र आने लगता है जिसको देख कर पूर्वी अपने मैं में सोचती है.... इसका लैंड तो बहुत hi बड़ा है अगर ये मेरी छूट में चला जाई तो मेरी साडी प्यास भुजा देगा ये सोच कर पूर्वी धीरे से अपनी छूट को मसल देता है जिसको में देख लेता हु और अपने मैं में सोच हु युवी येतो त्यार है छोड़ने के लिए बीएस तुझे थोड़ी हिम्मत करनी पड़ेगी इधर हम दोनों लगातार एक दूसरे के अंगो को देख रहे थी बूत तभी पूर्वी मुझसे बोलती है.....
- पूर्वी- ठीक है युवी तुम अब जाओ अगर मुझे कुछ काम होगा तो में तुमको कॉल कर लगी तुम अपना नंबर देदो.....
ये बोलकर वो अपना मोबाइल निकल लेती है और में इसको अपना मोबाइल नंबर देदेता हु और अपने घर आजाता हु और सोफे पर जाकर बैठ जाता हु और टीवी देखने लगता हु और इधर अंजलि का आज चुदाई का पूरा मैं था छोड़ने का इसलिए वो बिलकुल नंगी होकर तारक का वेट कर रही थे और जैसे hi उसको लगता है तारक घर आया है और room.ki तरफ आरहा है तो वो अपनी दोनों टंगे खोल कर बीएड पर लेट जाती है और फिर तारक से बोलती है....
- अंजलि- तारक आज मेरा बहुत मूड है चुदाई करने का इसलिए जल्दी से अपने कपडे उतरो और मेरी चुदाई करो और मेरी प्यास भुजाओ....
इधर अंजलि को नंगी देख कर तारक का लैंड काढ़ा हो जाता है और वो भी जल्दी से अपने सरे कपडे उतर देता है और फिर अंजलि से बोलता है.....
- तारक- चल अंजलि जल्दी से घोड़ी बंजा....
तारक की बात सुनकर अंजलि जल्दी से घोड़ी बन जाती है क्युकी उसके अंदर भी छोड़ने की बहुत गर्मी थी इधर जैसी hi अंजलि घोड़ी बनती है वैसी
hi तारक एक hi झटके में अपना पूरा लैंड अंजलि की छूट में दाल देता है और जैसे hi तारक का लैंड अंजलि की छूट में जाता है वैसी hi अंजलि के मुँह से एक अह्ह्ह्हह्हह तारक नाम की सिसकिया निकलती और इधर तारक बहुत hi धीरे धीरे आगे पीछे करने लगता है ताकि वो अंजलि को तड़पा सके जिससे अंजलि ज्यादा जोश में आयी और तारक को चुदाई में मजा आये इधर जब अंजलि को पता चलता है की तारक धक्के नहीं मर रहा है तो वो तारक से बोलती है.....
- अंजलि- अह्ह्ह्हह्हह क्या हुआ तारक तुम ऐसी धीरे धीरे धक्के क्यों मार रहे हो
अंजलि की बात सुनकर तारक भी अपने धक्को की स्पीड बढ़ा देता है क्युकी वो ये कहता था की अंजलि खिड़ उससे तीज ढ़ाके मरने को बोले इधर जैसी hi तारक तीज तीज ढ़ाके मरने लगता है वैसे hi अंजलि भी अपनी गांड को उसके लैंड पर मार्के धक्के का जवाब धक्के में देती है जिससे दोनों को चुदाई में मजा आने लगता है बूत अंजलि को चुदाई में उतना मजा नहीं ारः था क्युकी अब उसको अपनी छूट में मोठे लैंड लेने की आदत हो गयी थे जबसे उसने युवी से छुड़वाया था और इसी लियी उसने अब जेठालाल से छोड़ने का पक्का वडा कर दिया था संडे को.....
बूत फिर भी अंजलि तारक का पूरा साथ दे रही थे चुदाई में और साथ में बोल रही थे अह्ह्ह्हह्हह अह्ह्ह्हह्हह ऐसी हीईई टीज़ टीज़ धक्के मार्कीटे छोडोऊ मुझेईई अह्ह्ह्हह्हह तरक्की मुझे बहुत्तत्त होई ज्यादा मजाआआ आरहा हीी अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह तर्ककककक ऐसी हीईई......
इधर तारक अंजलि की बात सुनकर बोलता है अह्ह्ह्हह्हह अह्ह्ह्हह्हह अंजलि क्या छूट है तेरी डे बी डे तेरी छूट तो और मस्त और साथ में और ज्यादा गरम होती जाआ रहियी हैईईई अह्ह्ह्हह्हह अंजलीइइइइ मेरा पनीई निकलने वाला हीी अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह......
- अंजलि- अह्ह्ह्हह्हह अह्ह्ह्हह्हह तर्ककककक ऐसी हीईई टीज़ टीज़ धक्के मरूवू मेरा पनीईई भी निकलने वाला है अह्ह्ह्हह्हह अह्ह्ह्हह्हह ऐसी हीईई.....
थोड़ी देरर चुदाई के बाद दोनों एक साथ झाड़ जाती है और बीएड पर लेट कर हाफने लगते है और जब दोनों की ससे कण्ट्रोल होती है तो तारक अंजलि से बोलता है....
- तारक- अंजलि आज तो चुदाई में मजा आज्ञा तुम्हारी छूट दो डे बी डे और ज्यादा मस्त होती जा रही है ऐसा क्या करती हो तुम जिससे ये इतनी मस्त हो रही है...
तारक की बात सुनकर अंजलि अपने मैं में बोलती है तारक मेरी छूट इतनी मस्त इसलिए होती जा रही है क्युकी अब में इसमें तुमसे मोटा और लम्बा लैंड जो ले रही हु जैसे hi अंजलि ये बात सोचती है वैसी hi अंजलि की छूट और ज्यादा पानी छोड़ती है और फिर अंजलि उठकर टॉयलेट चली जाती है....
. और इधर जेठालाल के घर पर दया
जेठालाल के लैंड पर बैठ कर उछाल रही होती है और साथ में बोल रही होती है अह्ह्ह्हह्हह अह्ह्ह्हह्हह टप्पू के पापा अह्ह्ह्हह्हह अह्ह्ह्हह्हह अआप भी नीची सीए धक्के मरु आह्ह्ह्ह मुझे बहुत्त hi ज्यादाआआ मजाआआ आरहा हीी अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह क्याआ लंदड़ लंदड़ है अपकाआ अंदर तक टकककर मरता है जिससे मेरा अंग्ग अनगगग तृप्त हो जाता है.....
. इधर बबिता पास में बैठ कर ये सब देख रही थे और दया की बाते सुन रही थी और साथ में धीरे धीरे अपनी छूट को भी सेहला रही थे और अपनीई चुदाई का वेट कर रही थे जिसको देख कर जेठालाल भी निचे से टीज़ टीज़ धक्के मरने लगता है जिससे दया झाड़ जाती है और जेठालाल के ऊपर गिरकर हफनी लगती है....
इधर दया को हफ्ते देख कर जेठालाल उसको सीडी में लिटा देता है और फिर काढ़ा होकर बबिता के पास जाता है और उससे बोलता हीी....
- जेठालाल- चलाऊ बबिता डार्लिंग अब घोड़ी बन जाओ आज तुम्हारी ऐसी चुदाई करोगी तुमको बहुत्तत्त होई ज्यादा मजाआआ ाएगाआ......
जेठालाल की बात सुनकर बबिता फ़ौरन घोड़ी बन जाती है और अपने हाथो से अपनी छूट को खोल कर जेठालाल को देखती है जिसको देख कर जेठालाल अपने लैंड को बबिता की
छूट पर सेट करता है और धीरे से एक धक्का मरता है जिससे उसका पूरा लैंड बबिता की छूट में चला जाता है और इधर जैसी hi जेठालाल का पूरा लैंड बबिता की छूट में जाता है वैसी hi बबिता के मुँह से एकक अह्ह्ह्हह्हह जेठाजीइ नमी की सिसकिया निकलती है जिसको सुनकर जेठालाल एक थप्पड़ बबिता की गांड पर मरता है और उससे बोलता है....
- जेठालाल- अह्ह्ह्हह्हह बबिता डार्लिंग क्याआ छूट है तुम्हारी ऐसा लग रहा है जैसी मेने किसी गरम भट्टी के अंदर अपना लैंड दाल रखा हो...
ये बोलकर जेठालाल बबिता की एक चुकी को अपने हाथ से पकड़ लेता है और दुअरी हाथ की एक ऊँगली उसकी गांड में दाल देता है जिससे बबिता को एक झटका सा लगता है बूत मजा भी आता है और साथ में वो अपनी गांड को आगे पीछे करने लगती है जिससे जेठालाल का लैंड और ऊँगली बबिता की छूट और गण्ड में अंदर बहार होने लगती है जिससे बबिता को मजा आने लगता है और वो अपने मैं में सोचती है..... अह्ह्ह्हह्हह बबिता अगर लैंड के साथ में एक ऊँगली लेनी में इतना मजाआआ आरहा हीी तो दो लैंड लेनी में कितना मजाआआ आएगा ये सोच कर बबिता के अंदर एक अलग hi जोश आजाता है और वो अपनी गांड को टीज़ टीज़ आगे पीछे करने लगती है जिसको देख कर जेठालाल सोचता है बबिता जी को क्या हो गया है जो अपनी गांड को इतनी तीज तीज मेरे लैंड पर मार रही है बूत फिर पता नहीं जेठालाल को क्या होता है वो अपनी ऊँगली को बबिता की गांड में से निकलती है और साथ मई बबिता की कमर पकड़ कर टीज़ टीज़ धक्के मरने लगता है और जैसी hi जेठालाल टीज़ टीज़ धक्के मरता है वैसी hi बबिता जेठालाल से बोलती है......
- बबिता- अह्ह्ह्हह्हह अह्ह्ह्हह्हह जेठाजीइ ऐसी हीईई टीज़ टीज़ धक्के मरूवू अह्ह्ह्हह्हह मुझेईई बहुत्त hi ज्यादाआआ मजाआआ आरहा हीी अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह
बबिता की बात सुनकर जेठालाल अपने धक्को की स्पीड बढ़ा देता है और अब धक्को की स्पीड इतनीई टीज़ हो गयीईइ थी की पूरी रोऊं में पाछह पछहः कोई अवाजी आरहीइ थीई..... और िधेरर बबिता का सरीर अकड़ने लगता है जिससे जेठालाल समझ जाता है की बबिता झड़ने वाली है तो वो भी अपने धक्को की स्पीड बढ़ा देता है जिसको देख कर बबिता जेठालाल से बोलती है.....
- बबिता- अह्ह्ह्हह्हह अह्ह्ह्हह्हह जेठाजीइ ऐसी हीईई टीज़ टीज़ धक्के मरूवू मेरा पनीईई निकलने वाला हीी अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह...
ये बोलकर बबिता अपना पानी झाड़ जाती है और थोड़ी देर बाद जेठालाल भी झाड़ जाता है और फिर तीनो ऐसी हीईई नंगे सो जाती है....
और इधर में और उर्वी बीएड पर लेते थे बूत दोनों में से किसी को भी नींद नहीं आरही थे इसलिए हम दोनों ऊपर चाट को देखे जा रहे थे जिसको देख कर में उर्वी से बोलता हु....
- में- उर्वी नींद नहीं आरही है क्या....
- उर्वी- है... भाई अगर तू बुरा न मने तो में तुझसे एक बात पुछु...
- में- अब तुझे मुझसे कुछ बोलने के लिया पूछने कबसे पड़ने लगाए....
मेरी बात सुनकर उर्वी कुछ देर सोचती है और फिर मुझसे बोलती है...
- उर्वी- तूने डिनर करते टाइम संजू को क्या बोलता था...
उर्वी की बात सुनकर में अपने मैं में सोचता हु की युवी बेटा अबतो फस्स गया है तू ये सोच कर में उर्वी से बोलता हु...
- में- उर्वी वोटो गुस्से में निकल गया था.....
- उर्वी- इसका मतलब तू संजू के साथ सेक्स करना कहता है क्युकी हम गुस्से में वही बोलते है जो उसके दिल में होता है.....
- में- उर्वी ऐसी बात नहीं है बीएस मुझे बहुत hi ज्यादा गुस्सा आज्ञा इसलिए वो सब मेरे मुँह से निकल गया....
मेरी बात सुनकर उर्वी कुछ देर तक कुछ सोचती है और फिर मुझसे बोलती है.....
- उर्वी- देख भाई में तुझे हमेशा खुश देखना कहती हु इसलिए में तेरी खुसी के लिए कुछ भी कर सकती हु अगर तुझे मेरी कोई हेल्प चाहिए तो बता देना मुझसे जो हो सकेगा में करुँगी बूत मुझसे कुछ गन्दी हरकत करने को मत बोलना....
उर्वी की बात सुनकर में कन्फ्यूज्ड हो जाता है और सोचने लगता हु ये उर्वी क्या बोल रही है बूत फिर में सोचता हु ये हमेशा मुझे सपोर्ट करती है और शायद अब भी मेरी खुसी के लिए ये सब बोल रही है इसलिए में उर्वी से बोलता हु....
- में- उर्वी तुझे पता भी है तू ये सब क्या बोल रही है....
- उर्वी- है पता है जभी तो मेने बोलै है और ये सब मेने बहुत सोच समझ कर बोलै है जो भी बोलै है.... ाचा चल अब ये बता तूने आज तक यह किस किस के साथ सेक्स किया है सच सच बताना तुझे मेरी कसम.....
उर्वी की कसम की बात सुनकर में फस्स गया था क्युकी अबतो मुझे उसको सच बताना पड़ेगा बूत फिर में अपने मैं में सोचता हु बूत अब ये प्रॉब्लम है की में उर्वी को क्या बताऊ और क्या झूट बोलू....
तो बे कंटिन्यू