MANAV or DANAV sex story - part 1 - Page 25 - SexBaba
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MANAV or DANAV sex story - part 1

हो सकता है दानव गुरु HI हो. उन्होंने अपनी चाहत पूरी करने के लिए HI त्रिकाल को दानव जैसा बना दिया है.

अच्छा लगा की कुछ और नए रीडर जुड़ रहे है.

पैर दुःख भी है की कुछ पुराने रीडर अब देखते भी नहीं...

उम्मीद करुगा की आप सभी ऐसे HI मेरा हौसला बढ़ाते रहेंगे और मैं इस स्टोरी को आगे बढ़ाता रहुगा............

थैंक यू फॉर लवली कमेंट एंड सपोर्ट......
 
थैंक यू फॉर लवली कमेंट एंड सपोर्ट......

नहीं बीआरओ साया केवल त्रिकाल की सड़ना पूरी होते देखना चाहता है. कियोकि त्रिकाल के पास बहुत जयादा पावर्स थी पहले जो उसने अल्पना की वजह से खो दी. अब यदि उसको वो पावर फिर मिल गयी तो वो अपने सपने को पूरा कर सकता है. और ये सपना भी उस साये ने HI उसे दिखाया है.

साये ने त्रिकाल को बचपन से HI अपने वश में किया हुआ है. और त्रिकाल ये कब और कैसे जानेगा ये तो वक्त HI बताएगा...

शम्भू क्या करेगा ये जल्दी HI आएगा. और संभु की हेल्प कोण करेगा ये भी........

ये साया इसलिए HI स्टोरी में लाया गया है कियोकि पब को सपोर्ट करने के लिए मणि और दयासुर है. पैर त्रिकाल अकेला पद रहा था. और जब विल्लन HI कमजोर पड़ने लगे तो स्टोरी में मज़ा काम हो जाता है.

अब पब के लिए चुनोतिया बरगी... देखते जाइये पब इस सब से कैसे निपटता है.
 
अपडेट 184

पब – ok… चलो अब सो जाओ… (और जाने लगता है)

माहि – आप भी मेरे साथ सोइये न…

पब (कुछ सोच कर) – हम्म ok…

मंजू जाने लगती है तो पब मंजू को भी अपने साथ खींच लेता है. और तीनो बिना किसी सररत के चिपक कर सो जाते है. पैर माहि की आखों में नीड नहीं थी. वो तो उस सपने के बारे में hi सोच रही थी. बार बार वो सपना उसकी आखों के सामने आ रहा था. सपने में शशि का कहा एक एक शब्द माहि को याद आ रहा था. उसके कहे शब्दों को याद करके वो उनका मतलब समझने की कोसिस करती है पैर उसको कुछ भी समाज नहीं आ रहा था. अपनी सोच में उलझी माहि को नीड बिलकुल नहीं आती. जब उसे बहुत देर हो जाती है सोचते सोचते तो वो टाइम देखती है की 5 बज चुके है. तो वो उन दोनों को भी ुधा कर रेडी होने को बोल देती है. कुछ hi देर मैं तीनो जान तैयार हो कर मणि के आश्रम टेलिपोर्ट हो कर पहुंच जाते है. उस टाइम आश्रम में प्रथा वंदना हो रही थी. ये तीनो भी वंदना के लिए खड़े हो जाते है.

अभी माहि, मंजू और पब एक रूम में बेथ कर मणि और दीनदयाल का वेट कर रहे थे. कुछ hi पालो में दीनदयाल और उसके साथ दोनों बच्चे आ जाते है. माहि उन सब से मिलती है. पब और मंजू भी बापू से पेअर छू कर आशीर्वाद लेते है. फिर मणि जी भी आ जाते है. पब सबसे पहले आशीर्वाद लेता है. फिर माहि पैर मंजू नजरे झुका कर कड़ी हुयी थी. मंजू की हिम्मत hi नहीं हो रही थी की वो मणि जी के पास भी जा सके. घर से ये सोच कर आयी थी की मणि जी से अपने गुन्हा की माफ़ी मांग लेगी. पैर मणि जी को सामने देख कर मंजू की हिम्मत जवाब दे रही थी. आखों में आशु लिए पलकों को झुकाये एक कोने में किसी अपरादि की तरह कड़ी थी. वो एक ऐसी ापरड़ी थी जिसको पता था की उसका गुन्हा क्या है. और उसे अपने ाप्रद की कोई भी सजा मंजूर थी. पैर बस नहीं थी तो इतनी हिम्मत नहीं थी की वो अपने मुँह से अपना गुन्हा काबुल कर माफ़ी या अपनी सजा मांग सके.

मणि जी अपने होंटो पैर मुस्कान लिए उसको hi देख रहे थे. एक बार पब ने मंजू की और हाथ बढ़ाया भी पैर मणि जी ने इशारे से मन कर diya.kuch देर तक सभी में खड़े उन गुरु शिष्य को देखते रहे. गुरु इस इन्तजार में था की शिष्य खुद हिम्मत करके अपना गुन्हा काबुल करे और शिष्य इस इन्जार में थी की गुरु उसे उसकी गलती की सजा दे उस पैर गुस्सा हो. जब कुछ देर तक कोई कुछ नहीं बोलता तो ये छुपी मणि जी hi तोड़ते है

मणि – मंजिमा अभी भी अपने गुरु से नाराज हो क्या???

मणि की ये बात मंजू के दिल को चिर केर रख देती है. इतने बड़े गुन्हा के बाद भी गुरु जी का इतने प्यार से बात करना. और सजा की जगह अभी भी गुरूजी का ये पूछना की अभी भी नाराज हो क्या… क्या कहे मंजू… उसके दिल का हाल ये था की …. जिस गुरु को उसमे सालो तक पूजा उस गुरु के प्रति बदले की भावना में उसको नुकशान पहुंचना चाहा. वो गुरु अभी भी उसकी नाराजगी दूर करने की बात कर रहा है. जिसको सजा देनी चाहिए वो अभी भी एक पिता के जैसे प्यार लुटा रहा है…

अब मंजू से बर्दाश न हुआ उसके आशु बहाने लगे. और वो मणि के पैरो में सर रख कर रोने लगी. अभी भी मंजू ने कुछ नहीं बोलै और न मणि जी ने दुबारा कुछ पूछा. मंजू के भाव और उसके आशु hi उसका हाल बता रहे थे. मणि जी ने कुछ देर मंजू को रोने दिया और फिर कंडे से पकड़ कर उड़ाया. और उसके आशु साफ़ करते हुए बोले – न बेटी और नहीं …

मंजू – नहीं गुरूजी मैं बहुत बुरी हु. आप मुझको सजा दीजिये. मेने वो ाप्रद किया है जिसको त्रिदेवो ने भी कभी माफ़ नहीं किया. मेरा गुन्हा माफ़ी के लायक नहीं है गुरूजी… अपने गुरु पैर अविश्वास से बड़ा कोई ाप्रद नहीं होता. और मेने वो hi कर दिया. गुरु का अपमान किया. गुरु से बदले की भावना राखी. नहीं गुरूजी मुझसे अब इस ाप्रद का वजन सहन नहीं होता. मुझको सजा दो गुरूजी….

मांईजी – मंजिमा सच में तुम्हारा ाप्रद बहुत बड़ा है. पैर पश्चाताप के आशु वो अमृत है जो बड़े से बड़े गुन्हा को भी धो देते है. और जो तुम्हारे साथ हुआ वो तुम्हारी नियति थी. जब तुम यहाँ से गयी थी मैं तब भी ये जनता था की तुम क्यों जा रही हो. और तुम्हारे मन में क्या है. पैर यदि मैं उस टाइम तुमको रोकता तो शायद तुम्हारा मेरे प्रति अविश्वास और बाद जाता. वक्त से साथ तुम लौट आओगी ये मेरा तुम पैर विस्वास था. और देखो आज तुमको तुम्हारी गलती का अहशास भी हो गया और तुम यहाँ पैर भी आ गयी.

मंजू – सच में गुरूजी आप बहुत अच्छे है जो इतनी बड़ी गलती को भी यु hi माफ़ कर दिया. पैर मेरा दिल खुद को माफ़ नहीं कर प् रहा है.

मणि जी – हम्म तो ये बात है तो सुनो तुम अपनी सजा.. देखो अब तुम इस लड़के की पत्नी भी हो. और पत्नी धर्म कहता है की जो काम पति का अधूरा हो उसे पूरा करना. तो तुम्हारी सजा भी यही है आज से तुम जान कल्याड के लिए काम करोगी. दस माँ ने जान कल्याड का काम इसको सपा था. पैर ये तो त्रिकाल के चाकर में hi फशा हुआ है. और जान कल्याण की जगह केवल गुनगारो को सजा दे रहा है. अब तुम करोगी जान कल्याण का काम. लोगो की दुःख में काम आओगी. भोको को खाना खिलाओगी. उन करने को hi ख़तम करना तुम्हारा मैं टारगेट होगा. जिसके चलते लोग पाप करने पैर मजबूर हो जाते है. पापियों का अंत दानव सेना करती रहेगी. पैर तुम्हारा काम दुनिया को पापी बनने से रोकना है.

मंजू – गुरूजी ये तो सजा नहीं है. ये तो मेरी hi वो चाहत है जिसके लिए मेने तंत्र मंत्र सीखा. आप मेरी चाहत पूरी करने को hi मेरी सजा बता रहे है. पैर अब मैं आपकी आज्ञा न मान कर एक और गुन्हा नहीं करना चाहती हु.

मांईजी – हाँ मंजू मैं ये जनता हु की तुम्हारी चाहत क्या थी. ये भी जनता हु की तुम सम्भोग किरिया करके जनकल्याण के काम की करने वाली थी. पैर अब तुम भी जान गयी होगी की मेने तुमको वो सब क्यों नहीं सिखाया. मैं जनता था की तुम्हारे मन में मेरे लिए करोड़ है. और मेने संभु के साथ हुयी तुम्हारी बातो को भी सुना और देखा था. मैं वो सब जनता था जो भी वह हुआ.

मणि जी की बात सुन कर पब तो बुरी तरह चौक गया. उसको उम्मीद नहीं थी की मणि जी hi उसको मरने के लिए जाने देंगे. मणि जी के सब जानने के बाद भी उन्होंने न तो पब को सचेत किया और न hi उसको या मंजू को रोका. वो मणि जी जिन्होंने पब के लिए आज तक न जाने क्या क्या किया. उन मणि जी ने hi पब को मूट के मुँह में जाने दिया?? क्यों??? ये सवाल सोचते हुए पब बोखला गया और मणि जी से बोलै

पब – क्या गुरूजी आपको सब पता था तब भी अपने मुझको कुछ नहीं बताया मेने आपसे पूछा भी था मंजू के बारे में तब भी अपने कुछ नहीं कहा. आखिर अपने केसा क्यों होने दिया गुरूजी???

मणि जी – तुम्हारी वजह से…

पब – क्या मैं समझा नहीं???

मणि जी – मेने और दयासुर जी ने तुम्हारे उप्पेर आज तक जो भी म्हणत की है तुमने वो सब बेकार कर दी पब.. मंजू से तो मैं 1% भी गुस्सा या नाराज नहीं था. कियोकि इसने जो किया उसमे इसकी गलती बहुत काम थी. पैर तुमने क्या किया????

पब – मेने …. मेने क्या किया गुरूजी???

मणि – ये hi तो बात है तुमने कुछ नहीं किया. आखिर क्यों??? क्या फायदा तुम्हारे पास उन शक्तियों का जब तुम सही वक्त पर उनको उसे hi न कर सको??? क्या फायदा उस विद्या का जो वक्त पैर काम hi न आये?? तुमको जब मेने तुम्हारी माँ के बारे में बताया था. तब hi बोलै था की अपनी भावनाओ को कण्ट्रोल करना सीखो… तुम्हारी जिंदगी हर टाइम जंग का मैदान है. और जंग दिल की भावनाओ से नहीं दिमाग से जीती जाती है. कितनी बार तुमको बताया की तुम्हारी माँ के साथ जो हुआ उसमे तुम्हारी नहीं संभु और त्रिकाल की गलती थी. पैर नहीं किसी ने कहा दिया तो तुम फिर अपने आप को दोषी मान कर मरने चल पड़े. भूल गए आज तुमसे कितनी जिन्दगिया जुडी है. भूल गए दस माँ ने तुमको क्या जिम्मेदारी सोपि है. सच में पब तुमने मुझको बहुत निराश किया है. शायद मेने hi गलत आदमी के हाथो में इतनी बड़ी जिम्मेदारी सूप दी…

मणि जी की दन्त सुन कर पब नजरे झुका बैठा रहा. वो आज अपने गुरु की एक परीक्षा में फ़ैल हो गया था. मणि जी को गुस्से में देख कर दीनदयाल जी भी चुप थे. और माहि को तो कुछ समाज में hi नहीं आ रहा था. कियोकि मंजू से साथ जो हुआ वो केवल गुरु और मंजू को hi पता था. बाकि किसी भी पत्नी कोई इसकी खबर नहीं थी. कुछ देर के में के बाद मंजू ने उस शांति को तोडा

मंजू – पैर गुरूजी ये कर भी क्या सकते थे. जब मेने hi कुछ भी बताने से और सम्भोग किरिया करने से मन कर दिया था तो ये कर भी क्या सकते थे. जबरदस्ती से या शक्ति के प्रयोग से सम्भोग किरिया तो पूरी नहीं होती. फिर ये क्या कर सकते थे???

मणि जी – (पब की और देख कर) अब तुम बताओ की तुमको क्या करना चाहिए था.

पब – मुझको माफ़ कर दे गुरूजी सच में मैं अपनी भावनाओ को काबू में नहीं रख पाया. नहीं तो केवल इतना करना था की मंजू के मंद को पड़ना था की वो क्यों मन कर रही है. मंद पड़ने से मुझको पता चल जाता की ये सब क्यों हो रहा है. और फिर बस मंजू के उन सवालो का पूरा जवाब देना था जो मंजू ने शादी की हाँ करने से पहले पूछे थे.

मंजू – क्या आप सच में मंद रीड कर सकते है???............... ारे हाँ दस माँ ने बताया था की अंकिता से आपको ये पावर मिली थी…

मणि – अब समाज में आया की जो काम इतनी अशनि से हो सकता था उसके लिए भी मुझको इसकी हेल्प के लिए गुरु को आभाष करना पड़ा की पब की जान खतरे में है. और फिर उसने दस माँ से प्राथना की तब जा कर दस माँ इसकी हेल्प के लिए वह पहुंची…

मंजू – पैर गुरु ये सब करने की क्या जरुरत थी. आप भी तो ये सब कर सकते थे??

मणि – नहीं मंजू, पहले तो मुझको इस पैर पूरा विस्वाश था की ये खुद hi बच सकता है. पैर जब मेने देखा की ये अपनी हार मान कर केवल रो रहा है. और तुम रुकने को तैयार नहीं हो. तब टाइम नहीं था. मेरे पास टेलिपोर्ट की पावर नहीं है. तो मैं तो पहुंच hi नहीं सकता था. और दस माँ मेरी प्राथना पैर वह जाती नहीं. कियोकि अब से इसको अपनी लड़ाई खुद hi लड़नी है. मैं, दयासुर जी या दस माँ बिच मैं नहीं आएंगे. ये इसकी और तुम सब की लड़ाई है और इसमें हम कुछ नहीं कर सकते. जितना सीखना था या जितनी हेल्प करनी थी कर दी. अब यदि ये किसी भी मुसीबत में होगा तो या तो तुम सब या फिर ये खुद hi अपनी हेल्प करेगा. नहीं तो उसका परिडाम भी खुद hi भुक्तेगा. गुरु का काम शिक्षा देना है. जीवन की चुनोतिये से तो खुद hi लड़ना होता है.

मणि जी की बाते जितनी कड़वी थी उतनी hi सच भी थी. पब के मन में अपने आप के लिए एक गुस्सा था. उसको अहसास हो चुक्का था की सच में उसने कितनी बड़ी गलती कर दी है. और फिर उसके मंद में आने लगा सच में आज तक जितनी भी वॉर त्रिकाल ने हमला किया है हर बार उसे त्रिकाल से मुँह की hi कहानी पड़ी है. हर बार कोई न कोई उसको बचता आया है. ऐसा कभी नहीं हुआ की वो अपने दम पैर त्रिकाल के हमले को फ़ैल कर पाया हो. मणि जी ने पब को सच का ऐसा आइना दिखाया जिससे उसे ज्ञात हुआ की वो कितने पानी में है. अभी पब के मन को जैसे hi न जाने कितने विचरो ने घेरा हुआ था. उप्पेर से एक दम शांत और चुप बैठा था. पैर उसके मन में विचारो का एक ऐसा तूफ़ान ुधा हुआ था जो शांत होने का नाम नहीं ले रहा था.
 
देखते है संभु की हेल्प कोण करता है.... बस कुछ HI अपडेट में ये क्लियर हो जायेगा...

भाई सब टूट जरूर गए है पैर इतने भी नहीं की कोई उपाए करना हो. जब भी कोई मूट को इतने करीब से देखता है तो वो टूटेगा HI. पैर ये सब तो पहले भी ाएसि इस्थिति को फेस कर चुके है.

यस मई भी ये गर्ल बेबी शशि हो. अभी माहि अपनी बात कर HI नहीं पायी है....

थैंक्स फॉर सपोर्ट एंड लवली कमेंट
 
अपडेट 185

मणि जी की बाते जितनी कड़वी थी उतनी hi सच भी थी. पब के मन में अपने आप के लिए एक गुस्सा था. उसको अहसास हो चुक्का था की सच में उसने कितनी बड़ी गलती कर दी है. और फिर उसके मंद में आने लगा सच में आज तक जितनी भी वॉर त्रिकाल ने हमला किया है हर बार उसे त्रिकाल से मुँह की hi कहानी पड़ी है. हर बार कोई न कोई उसको बचता आया है. ऐसा कभी नहीं हुआ की वो अपने दम पैर त्रिकाल के हमले को फ़ैल कर पाया हो. मणि जी ने पब को सच का ऐसा आइना दिखाया जिससे उसे ज्ञात हुआ की वो कितने पानी में है. अभी पब के मन को जैसे hi न जाने कितने विचरो ने घेरा हुआ था. उप्पेर से एक दम शांत और चुप बैठा था. पैर उसके मन में विचारो का एक ऐसा तूफ़ान ुधा हुआ था जो शांत होने का नाम नहीं ले रहा था.

मणि (प्यार से समजते हुए) – पब जो हो चुक्का है उसको भूल जाओ. उससे एक सबक लो. तुम खुद अपनी कमियों को देखो, देखो तुम कहा कहा गलत थे. खुद अपने आप से सवाल करो और खुद hi उस सवालों का जवाब भी बनो. हर इन्शान गलती करता है. पैर सच्चा योद्धा वही है जो अपनी पुराणी गलतियों से सबक ले और उनको भविष्य में दोराये न. आज तुम बहुत पॉवरफुल हो. पैर केवल पावर से युद्ध नहीं जीता जा सकता है. सही वक्त पैर उचित चल hi युद्ध का परिडाम तय करती है. और जब तक त्रिकाल जिन्दा है तब तक तुम्हारी जिंदगी का हर पल एक युद्ध के सामान है. त्रिकाल हार मैंने वालो में से नहीं है. और न hi तुम हार सकते हो. तो खुद को तैयार करो. अपनी चेतना को जगाओ.

मणि जी के चुप होते hi फिर एक बार शांति छ गयी. कोई भी बोलने की हालत में नहीं था. मणि जी के गुस्से और फिर प्यार भरे उपदेश को सुन किसी के भी बोलने की हिम्मत नहीं थी. कुछ देर के बाद मणि जी ने hi इस शांति को भांग किया.

मणि – मंजिमा क्या तुम अपने पति को अपने आशाराम की पुराणी यादो को नहीं बताओगी?? जाओ और इसके साथ आश्रम घूम कर आओ… (इसके साथ hi मणि जी ने मंजिमा को कुछ इशारा भी कर दिया. मंजिमा भी समाज गयी की उसको पब के अंदर के तूफान को शांत करके उसकी गलतियों को दुबारा न दुहराने के लिए संजना है.)

मंजू पब को ले कर आश्रम में घूमने को निकल गयी. उन दोनों के जाते hi माहि ने कुछ बोलना चाहा तो मणि जी बोल ुढे..

मणि – न माहि न… ये जरुरी था. वो तुम्हारा पति बाद में है. उससे पहले वो मेरा शिष्य है. और एक ऐसा शिष्य जिस पैर हम सबका फ्यूचर टिका है. उसको सही रास्ता दिखने के लिए डांटना बहुत जरुरी था.

माहि भी फिर कुछ नहीं बोल पति. और एक बार शांति हो गयी और इस बार ये शांति थोड़ी दीनदयाल ने.

दीनदयाल – माहि ये बता बीटा. तुम लोग इतनी सुबह सुबह??? और तुम कल तो कहा रही थी की आज पब की शादी नैना से होनी है तो फिर यहाँ?? और हाँ सबसे पहले ये बता की मॉल में क्या हुआ था कोण थे वो लोग ???

माहि – और कोण थे बापू वो संभु ने hi भेजा था. पैर मंजू और गुरु दीदी ने उनको नानी याद दिला दी. अब हमला करने की सोचेंगे भी नहीं..

मणि – नहीं माहि ये मत सोचना वो संभु है. और संभु 1 बार किसी के पीछे पद जाता है तो फिर छोड़ता नहीं है. तो तुम सबको सबदां रहना होगा.

माहि – जी गुरूजी… अब हम कभी भी अकेले नहीं जाएगी… और सबदां hi रहेगी…

दीनदयाल – हम्म बीटा अपना और अपनी सभी बहनो का डायन रखना…

बहन सबद सुनते hi माहि के मंद में फिर से शशि आ गयी और फिर वो सपना.. जिस कारन वो सब यहाँ आये थे. उसको तो माहि भूल hi गयी थी. क्या करे पति पैर दन्त पड़ने से वो अपनी प्रॉब्लम भूल गयी थी. पैर जैसे hi उसको वो याद आया फिर से वो बीचेन हो गयी और दीनदयाल के सीने से लग गयी. दीनदयाल भी चक्र गया एक दम से माहि के बदले वहवर से. पैर पहले वो माहि को शांत करता रहा और फिर कुछ देर बाद बोलै – क्या हुआ माहि इतनी बीचेन क्यों है??

माहि – मैं अच्छी बेटी नहीं हु न बापू?? मैं इतने दिनों से आपसे मिलने नहीं आयी और न hi अपने छोटे भाई बहन से??

दीनदयाल – ये क्या कहा रही है बेटी… शादी के बाद तो सुसराल hi लड़की की प्रत्मिक्ता होती है. और जो सब पब की लाइफ में हो रहा है उसको देखते हुए तो तुझको सांस लेने की भी फुर्शत नहीं होगी. और वैसे भी हम सब यहाँ बहुत खुश है. पता नहीं क्या क्या सोचती रहती है तू???..... किसी ने कुछ कहा क्या तुजसे??

दीनदयाल की बातो से माहि की बेचैनी कुछ काम हुयी. तो वो बोली – वो मेने आज एक सपना देखा था. शशि आयी थी सपने में…. (फिर माहि पूरा सपना सुना देती है.)

माहि का सपना सुन कर दीनदयाल और मणि दोनों मुश्कुराने लगते है. और माहि हैरानी भरी आखों से उनको देखती रहती है.

दीनदयाल – ारे पगली ये तो बहुत अच्छा सपना है. और तू परेशां हो रही hai….hahahahaha

माहि – अच्छा सपना मैं सामजी नहीं….

मणि – मैं समजता हु बेटी…. तुम्हारी बहिन ने तुमसे जो वादा किया था की वो फिर लूट कर आएगी. तो वो अपना वादा पूरा करने के लिए फिर से जनम ले रही है. यही है इस सपने का मतलब…..

माहि – क्या??????.... सच में (बहुत खुश हो कर) … ोू मेरी बहन फिर से मेरे पास होगी… आअह्ह्ह इससे अच्छी क्या बात है……… (कुछ सोच कर) पैर क्या वो हम्हारे पास आएगी?? और पता नहीं कहा जनम लेगी फिर मैं अपनी बहिन से कैसे मिलूगी??

दीनदयाल – तू सच में पागल है इतने वेद – शास्त्र पद लिए. इतना कुछ सिख लिया पैर दिमाग तो है hi नहीं… पागल है पूरी की puri….hahahahaha (ये एक प्यार भरी फटकार थी)

माहि भी जूता गुस्सा हो जाती है अपने बापू से – मैं पागल हु… मैं बात नहीं करुँगी अब आप से… कटती…. मेने तो सच hi कहा था की कैसे मिलूगी मैं अपनी बहन से जब मुझको पता hi नहीं होगा की मेरी बहन कहा जनम ले रही है??? batao…hhhuuuhhh गंदे बापू…

दिलदायल – ोुह्ह्ह मेरी बेटी तो गुस्सा हो गयी…

मणि – हहहहहहहहह… दिनु यार बंद कर नवटंकी…. क्यों परेशां कर रहा है बच्ची को… बीटा तुम खुद बताओ की शशि ने सपने में किसको माँ कहा था??

माहि – ऐडा को… तो पैर ऐडा तो शशि से भी छोटी है.. पता नहीं वो उसको माँ क्यों कहा …..(एक दम माहि बात पकड़ लेती है) ….ऊऊह्ह्ह मतलब की शशि ऐडा की होने वाली संतान होगी….. ोुह्ह्ह गॉड …. थैंक यू भगवन …. मेरी बहन मेरी बेटी बन जाएगी….. सच में बापू में आज बहुत कुश हु… (ये बोल कर माहि दीनदयान के गले लग गयी. और उसकी ाशों में ख़ुशी के आशु भी जलक गए)

दीनदयाल – अभी तो तू अपने बापू से गुस्सा थी और अब खुश है…. हाहाहाहा

माहि – बापू ….

मणि – ये ख़ुशी अपने तक hi रखोगी क्या अपने पति पब को नहीं बताओगी ये बात???

मणि की बात सुन कर माहि बच्चो के जैसे खुदती हुयी वह से निकल गयी. और बोलती गयी.. मैं अभी आयी बापू…. और दीनदयाल भी ख़ुशी के आशु बहता हुआ उसको देखता रहा. और मणि जनता था की इस टाइम पब को एक ख़ुशी की वजह की कितनी जरुरत है. और वो उस तक माहि के रूप में जा रही थी.

माहि ऐसे hi कूदती उछलती हुयी पब के पास पहुंच गयी और पब को भी सब बता दिया. मंजू जब तक पब को बहुत हद तक सभाल चुकी थी. और पब भी बात की गहराई को समाज चुक्का था. तभी माहि में वह पहुंच कर तो माहौल को बदल hi दिया. जहा कुछ देर पहले एक गम का, एक पश्चताप का, अपने आप से लड़ने का गंभीर माहौल था वही अब एक ख़ुशी का माहौल था. कुछ देर तक ये तीनो अपनी ख़ुशी में मस्त आशाराम में घूमते रहे. फिर दीनदयाल और मणि से मिल कर हवेली के लिए टेलिपोर्ट हो गए. कियोकि 10 बज चुके थे. और गुरु आज पब की शादी करने के पुरे मूड में थी और वो 2-3 बार पब से जल्दी आने को बोल चुकी थी.

जब ये तीनो वह पहुंचे तो सभी दिंनिंग टेबल पैर बैठे हुए बर्फ पैर इनका hi वेट कर रहे थे. कल शयाम की घटना के बाद सभी कुछ गंभीर थे. फिर भी अपने आप को नार्मल शो करने की कोसिस कर रहे थे. सभी शांत बैठे थे. कोई हाशि मजाक या बात चित नहीं हो रही थी. जैसा की रोज इस टेबल पैर एक रौनक होती थी वो आज नहीं थी. पैर कल रात जैसा माहौल भी नहीं था. दर और दुःख किसी की आखों में नहीं था. ये सब समाज चुके थे जैसे हमलो से यदि ये दुखी रहे तो फिर ये लोग कभी हैश hi नहीं पाएंगे. कियोकि जो जंग चल रही है उसमे रोज hi कुछ न कुछ होना hi है. तो अपने आप को नार्मल करते हुए आगे बढ़ने की कोसिस कर रहे थे. जो काफी हद तक कामियाब भी थी.
 
अपडेट 186

जब ये तीनो वह पहुंचे तो सभी दिंनिंग टेबल पैर बैठे हुए बर्फ पैर इनका hi वेट कर रहे थे. कल शयाम की घटना के बाद सभी कुछ गंभीर थे. फिर भी अपने आप को नार्मल शो करने की कोसिस कर रहे थे. सभी शांत बैठे थे. कोई हाशि मजाक या बात चित नहीं हो रही थी. जैसा की रोज इस टेबल पैर एक रौनक होती थी वो आज नहीं थी. पैर कल रात जैसा माहौल भी नहीं था. दर और दुःख किसी की आखों में नहीं था. ये सब समाज चुके थे जैसे हमलो से यदि ये दुखी रहे तो फिर ये लोग कभी हैश hi नहीं पाएंगे. कियोकि जो जंग चल रही है उसमे रोज hi कुछ न कुछ होना hi है. तो अपने आप को नार्मल करते हुए आगे बढ़ने की कोसिस कर रहे थे. जो काफी हद तक कामियाब भी थी.

जैसे hi पब ने टेबल पैर इतनी शांति देखि तो वो भी इसका कारन समाज गया. और इस शांति को ख़तम करने के लिए वो सिदा ऐडा के पास पहुंच गया. और उसका गाल सहलाते हुए बोलै – तुम सब जानते हो आज मैं बहुत खुश हु… जानते हो मेरी ख़ुशी का कारन……

सभी एक दुषरे का फेस देखने लगे. मंजू और माहि को छोड़ कर वो दोनों बस मुश्कुरा रही थी. सभी को ज्यादा परेशां न करते हुए पब फिर बोलै – ऐडा तुम हो मेरी इस ख़ुशी की वजह… और हमारी बेटी ….

ऐडा – क्यों जी ये किसने कहा की मुझको लड़की hi होगी??? और आज इस बात पैर इतनी ख़ुशी??? हुआ क्या है??/

पब – हमको लड़की होगी ये कहा गुरूजी ने. और वो लड़की होगी माहि की बहन शशि….

पब की बात किसी के कुछ समाज नहीं आयी तो माहि ने बोलै सुरु किया. और फिर अपने सपने से ले कर मणि जी और दीनदयाल जी की सभी बातो को बता दिया. ये सुन कर सब बहुत खुश थे. पैर अभी अपना हीरो तो किसी और काम में बिजी हो गया था. जहा इस बात को सुन कर टेबल पैर छायी एक ुदशी, एक शांति हैट चुकी थी वही अपना हीरो ऐडा के पीछे खड़े हो कर अवनि को घूरे जा रहा था. और उसका कारन था की आज अवनि अपने प्यूरीन लुक में थी. ऐडा की बात मानते हुए वो पब से फिर से बात करने से पहले पब पैर अपना जादू फिर से चलना चाहती थी. पैर घर के माहौल को देखते हुए अवनि अपने प्यूरीन लुक में तो आ गयी पैर उसको सेक्सी लुक का तड़का नहीं लगाया था. पैर पब तो पहले भी इस लुक पैर hi फ़िदा था. लुक क्या वो तो अवनि पैर hi फ़िदा था. पैर ये लुक उसको उन पुरारी यादो में ले जा रहा था जब वो अवनि के साथ जॉब करता था. अवनि को देखने के लिए वो ऐडा के पास वाली चेयर पैर बेथ कर hi बर्फ करने लगा. उसकी चेयर खली hi रही. और वो ऐडा के साथ बेथ कर ऐडा की प्लेट में hi बर्फ करता रहा. और अवनि को देखता रहा. और ये बात ऐडा और अवनि दोनों नोट करते रहे.

बर्फ करने के बाद पब गुरु और नैना के साथ आज रात की शादी के बारे में बात करके ऐडा के रूम में पहुंच गया. माहि तो पहले से hi वह थी. अवनि ने भी पब को ऐडा के रूम में एते देख लिए तो वो भी अपने इस लुक को थोड़ा सा सेक्सी लुक में बदल कर ऐडा के रूम में पहुंच गयी. अवनि ने अपनी शर्ट के 2 बटन खोल दिए थे. तो उसके मोठे चुचो का ऊपरी हिस्सा दिखने लगा था. और उसने अपनी जीन को थोड़ा निचे कर लिया. फिर एक डार्क रेड लिपिस्टिप लगा कर कुछ और हल्का सा मेक उप करके ऐडा के रूम में पहुंच गयी. उस टाइम ऐडा, पब, माहि, पेय, माउद, पारी वह हाशि मजाक करने में लग रहे थे. इस एक खबर ने इनको उस हादसे से निकलने में बहुत मदद की थी. पारी पेय और मोड़ के साथ बच्चा बन गई थी सुबह से उनको इस गम से निकलने के लिए. अवनि भी इनके साथ शामिल हो गयी. और ऐडा को इशारा करके बोलने लगी की मिलने के लिए कोई जुगाड़ करवा. ऐडा ने भी ok का इशारा कर दिया.

कुछ देर बाद ऐडा ने अपनी ऐडा दिखते हुए पब के कान में बोलै – प्लीज आज शयाम को अकेले में मेरे साथ इस रूम में ….. प्लीज

ऐडा की आवाज में एक काशक थी जिसके कारन पब उसको मन नै कर पाया और उसने भी हाँ बोल दिया. फिर सब यु hi मस्ती करते रहे पैर पब अवनि के इस लुक से घायल कर दिया था. पब बार बार चोर नज़रो से अवनि को hi देख रहा था और अवनि भी उसको सत्ता रही थी. कभी पब को देखते टाइम होंटो पैर जीब फिरती तो कभी पब के सामने झुक कर अपनी घाटी के दर्शन करवाती. पैर शो कैशा कर रही थी की वो सब अनजाने में हो रहा है. उसे पब से कोई मतलब hi न हो. और जब पब की नजरो को अपने उप्पेर पकड़ लेती तो कभी सिमले करके उसको ुक्षती तो कभी स्माइल करते हुए उसे आखें दिखा देती. पब झेप जाता पैर पब की आखें आज पब के बस में नहीं थी वो तो अवनि का दीदार करने से रुक hi नहीं रही थी. और ऐडा भी अवनि के साथ दे रही थी कुश hi देर में पारी को भी ये सब समाज आने लगा तो उसने भी अपना जलवा दिखाना सुरु कर दिया. पैर माहि इन सब से अनजान केबल बातो में लगी थी. कुछ देर में जब पब से नहीं रहा गया और वो इन तीनो के हुसैन से गरम होने लगा तो उसने वह से जाने ने hi अपनी भलाई सामजी. और जैसे hi वो जाने को ुधा तो अवनि भी ुधा गयी और ऐडा से जाने का बोलते हुए एक कामुक अंगड़ाई लेती हुयी निकल गयी पैर पब के खून की राफ्तेर कुछ पल में hi दुगनी हो गयी. कियोकि अगड़े लेने से अवनि की नाभि और छूट के उप्पेर का हिस्सा उसकी आँखों के सामने था. कुछ पालो के इस स्कीन ने पब के लुंड को टाइट कर दिया. तो वो भी निकलने लगा. पैर जैसे hi पारी के पास से निकला, पारी ने पब की आग में घी दाल दिया. उसने पब को आखँ मरी और चुपके से एक बार लुंड को मशाल दिया. पब भी अपने आप को कण्ट्रोल करता हुआ गुरु के पास पंहुचा तो गुरु, कामिनी और सविता अपने कामो में बिजी थी.

अपने को शांत करके फ्रेश हो कर पब दानव सेना के बेस में चला गया. वह सभी अपनी ट्रेनिंग में लगे हुए थे. बस बेबी ट्रेनिंग देने की जगह आराम कर रही थी. तो पब एक बार बेबी से मिला और उसे एक और बार वारं कर के बेस में देकने लगा. और जुली से सभी के हाल चल लेने लगा. जय भी अब पूरी ईमानदारी से बेस के कामो को करता नजर आया. उसको देख कर पब को बहुत ख़ुशी हुयी. पब ने जुली को हवेली की सेफ्टी और दयासुर जी के बताये हुए प्लान पैर भी बात की. जुली भी दयासुर जी की बात से खुश हो गयी. उसने कहा की वो कल से hi लड़कियों को डायन लगाने और योग करने के लिए कहती हु. दयासुर जी के प्लान के लिए कहती है की वो तो किसी रेपोटर को नहीं जानती. तो पब बोलता है इसका इंतजाम वो कवि देगा. जुली बताती है की अभी तक उन छोटे मोठे सप्लायर से भी उनको 40-50 लड़किया और मिली है. और ये सब दुनिया के लिए मर चुकी है. तो पब उन लड़कियों को भी दानव सेना में रखने के लिए बोल देता है. जो फाइटिंग के लिए ठीक हो उनकी ट्रेनिंग सुरु करने को बोलता है बाकि लड़किया बेस में उनको सपोर्ट करने के लिए बोल देता है. फिर जुली ने भी पब को उन 4 लड़कियों के बारे में बताया जो रात से उन हमला करने वालो को दूँ रही थी. पब जुली से बात करके वह से जा hi रहा था की रस्ते में हमक मिल गया.

हमक – कैसे है सर…

पब – एक दम भेड़िया.. तुम सुनाओ क्या प्रोग्रेस है??

हमक – प्रोग्रेस हो बहुत hi अच्छी है. ये सभी लड़किया फाइटिंग में तो बहुत अच्छी है. इनको न तो दूर लगता है और न दर्द होता है. मेरे हिसाब से ये सब अच्छी फाइटिंग बनेगी.

पब – हाँ वो तो है बात ये है की जुली ने तुम सब की ने से पहले इनको केबल फिगिंग की hi ट्रेनिंग दी थी.

हमक – बूत सर एक बात कहु. बुरा मत मानियेगा….

पब – हाँ बोलो..

हमक – ये सब केवल फाइटिंग में hi अच्छी है. बाकि में इनको बहुत म्हणत की पड़ेगी. और इनमे से जयादातर तो वो सब सायद कभी सिख hi न पाए…

पब – हाँ जनता हु.. कियोकि इन सब पैर जो बीती है उसके बाद यदि ये सब फाइटिंग भी कर प् रही है तो केवल जुली के कारन.. नहीं तो इनकी जिंदगी तो लगभग ख़तम hi हो चुकी थी…

हमक – हाँ सुना था मेने इनके साथ क्या -2 हुआ है. और आज ये सब यदि कुछ है तो वो आपके और जुली के कारन hi है… … वो सर आपसे कुछ कहना था…

पब – हम्म बोलो…

हमक – वो सर आज से इवेंट सुरु हो चुक्का है. और मेने मास्टर से बात कर ली है. और आपकी फाइटिंग के लिए परमिशन भी ले ली है. और आपकी 1सत फाइट परसो है. तो आपको कल सुबह hi यहाँ से जाना होगा. ताकि आप टाइम पैर वह पहुंच जाये….

पब – ोुह्ह्ह अच्छा हुआ तुमने बता दिया. मैं तो भूल hi गया था इस बात को… चिंता मत करो मैं टाइम पैर वह होगा. और नेक्स्ट डे तक बापिस आ जाउगा…

हमक – नहीं सर वो तो पॉसिबल नहीं होगा. आपको ततल 8 फाइट जितनी होगी. लास्ट फाइट में hi आप ेबेचा से फाइट करके उसको हरा पाएंगे. और इसमें टोटल 5 दिन का टाइम लग्न है. इस इवेंट में मास्टर 2 ग्रुप में फाइट करवाते है. 1सत ग्रुप – बॉयज एंड 2ंद ग्रुप – गर्ल्स.. और दोनों ग्रुप के हर पार्टिसिपेट की पैर डे 2 फाइट होगी 3 डे तक. और दोनों ग्रुप के 2 लोग फाइनल तक जाते है. 4तह डे ग्रुप फाइनल होगा. बॉयज का विनर और गर्ल्स का विनर नेक्स्ट डे फाइनल फाइट करते है. उसमे जो विनर होगा वो hi बेस्ट फाइटर ऑफ़ थे ईयर बनता है. और उसको मास्टर ये हंबा एक सोर्ड गिफ्ट करते है.

पब – ओह्ह ये 5 दिन का टाइम लेगी?? यार ऐसा नहीं हो सकता की 1 दिन में hi मैं सरे मैच जीत कर आ जाऊ. कोई जुग्गड़ करो न..

हमक – नहीं सर ऐसा नहीं हो सकता. वैसे भी तुम्हको इवेंट में पार्टिसिपेट करवाने के लिए hi मास्टर से बहुत रिक्वेस्ट करनी पड़ी है. वो केवल इस बात पर मने है की मेने कहा है की तुम एक अच्छे फाइटर हो. नहीं तो जब तक वो खुद किसी को फाइट करते हुए खुद नहीं देख लेते. वो इवेंट में पार्टिसिपेट करने नहीं देते है. तुमको वह के सभी रूल्स को फॉलो करना होगा.

पब – हम्म्म्म … अच्छा फिर रूल भी बता दो…

हमक – फाइटिंग के लिए आप कोई भी एक वेपन चॉइस कर सकते हो. हर नेक्स्ट फाइट में वेपन चेंज किया जा सकता है. बूत फाइट के टाइम नहीं. स्कूल में यदि तुम किसी भी तरह का नशा करते हुए या नशा करके फाइट करते हुए पकडे गए तो तुमको तुर्रंत डिसक्वालिफाई कर दिया जायेगा. इवेंट के इन 5 डेज में स्कूल से बहार जाने की परमिशन नहीं होती. कैम्प्स में एक कैंटीन है वह आपको सब कुछ मिल जायेगा. और जो नहीं मिले वो सामान कैंटीन वाला पार्टिसिपटस के लिए मांगा देता है. फाइटिंग में वेपन कोई भी चुनो पैर डायन ये रखना होता है की कोई मरे न. अपने कॉम्पेरटीटोर को हारने के लिए उसको गिरा कर हर मैंने पैर मजबूर करना होता है. या उसको ब्लॉक करके उसकी गर्दन पैर वेपन रखना होता है.

पब – ारे बस भाई ये सब तो मुझको वह भी पता चल जायेगा. पैर ये बता की मेरे साथ कोई वह जा सकता है या नहीं.

हमक – हाँ आप 1 या 2 लोगो को अपने साथ ले कर जा सकते हो

पब – हम्म ok मैं जाने की तैयारी करता हु. बूत यार ये बात मेरे आज भी समाज नहीं आयी की तुम ये सब क्यों करवा रहे हो. जबकि मेरे जीतने से कोई तुमको जीता हुआ तो नहीं मान सकता न…

हमक – मेने आपको बताया तो था की मैं बस उस ेबेचा को हारता हुआ देखना चाहता हु. हमारी पहले hi डील हुयी थी. आप इसको थोड़ नहीं सकते.

पब – नहीं यार थोड़ नहीं रहा हु. पैर तुमने 5 दिन के लिए मुझको पैसा दिया है. पैर कोई नहीं जब वचन दिया है तो निभाना तो है hi. Ok… मैं तैयारी करता हु जाने की…

हमक – ok bye बेस्ट ऑफ़ लक …. और यदि वह कोई भी प्रॉब्लम हो तो मुझको फ़ोन कर लेना या मेरे फ्रेंड नील से मिल लेना वो हेल्प कर देगा.

पब – ok bye.. थैंक्स.. (और फिर पब जुली के पास चला जाता है)

यहाँ हमक मन में – सॉरी सर मेने जान कर आपके साथ ये डील की थी. अब मेरी लाइफ का कांटा हमेशा के लिए निकल जायेगा. बस ेबेचा अपनी प्रतिज्ञा पर कायम रहे…..
 
अपडेट 187

एक नजर त्रिकाल पैर

सुबह संभु त्रिकाल के अड्डे पैर रोज की तरह hi पहुंच गया था. और अपने गुरु की सेवा में लगा हुआ था. उनके सभी कामो को पुरे मन से कर रहा था. और त्रिकाल भी अपने डेली के काम निपटा रहा था. पैर उसके मन में साये की बाते घूम रही थी. कुछ देर में जब दोनों फ्री हुए तब त्रिकाल संभु से बोलै

त्रिकाल – संभु अब अगले 70 डेज की सड़ना मुझको अकेले hi करनी है. इसमें मैं किसी की भी हेल्प नहीं ले सकता. तो तुमको उसकी तैयारी करनी होगी. इतने दिन का राशन, पूजा का सभी सामान, 33 लड़किया और वाकई सभी जरुरत का सामान तुमको इस घर में रख कर जाना होगा. उसके बाद हमारी मुलाकात सड़ना पूरी होने के बाद hi होगी.

संभु – यी एई क्या कहा रहे है आप गुरूजी… मैं इतने दिन बिना आपके ??? आपके दर्शन के बिना तो मेरा दिन hi नहीं होता फिर इतने दिन?? मैं आपकी साडी तैयारी कर दुगा. हर वो इंतजाम हो जायेगा जिससे आपको अपनी सड़ना पूरी करने में कोई प्रॉब्लम न हो. पैर प्लीज ऐसा मत कहिये की मैं आपके दर्शन के लिए भी नहीं आ सकता.

त्रिकाल – समझने की कोसिस करो संभु. इतने सालो की म्हणत को सफल करने के लिए कुछ दिन तो दूर रहना hi होगा. और फिर जब एक बार मेरी शक्तिया मेरे पास होगी. तो हम पुरे मजे से साथ में इस दुनिया पैर राज करेंगे.

संभु – ठीक है गुरूजी आपकी आज्ञा को तो नहीं ताल सकता. पैर ये दिन में कैसे काटूगा ये मैं hi जनता हु.

त्रिकाल – इसलिए हम तुमको एक काम दे रहे है जो तुमको बिना मेरी हेल्प के करना है.

संभु – आज्ञा करे गुरूजी…

तरकाल – संभु इतने दिन में तुमको पब की फॅमिली और पब दोनों को ख़तम करना है. तुम सब जानते हो उसकी कमजोरी भी और उसकी पावर्स भी. तो तुम लग जाओ इस काम पैर…..

संभु (दन्त पीष्टे हुए)– ठीक है गुरूजी… अब मेरा केवल एक hi लक्ष्य होगा पब के परिवार की मूट…

त्रिकाल – संभु मुझको तुमसे ये hi उम्मीद थी. तो आज और कल में तुम पहले मेरे लिए सरे अरेंजमेंट करो और फिर अपने लाक्षा की और लग जाना…

फिर कुछ देर संभु और त्रिकाल ारेंगमेट के बारे में बात करते रहते है और फिर संभु त्रिकाल को सड़ना पैर छोड़ कर बहार आ जाता है. और जैसे hi जंगल की वो बढ़ता है तो उसकी कार के आगे एक बूढ़ा साधु आ जाता है. संभु तुर्रंत कार को रोक देता है और उस साधु को देख कर उसके पेअर पकड़ लेता है.

संभु – महाराज आप, इतने दिन बाद अपने दर्शन दिए है. आप ने तो पहले भी मुझको थैंक्स बोलने का मौका भी नहीं दिया था. आप hi है जिनके बताये रस्ते पैर चल कर मैं अपने गुरूजी को कोमा से बहार ला पाया. आपके बातये रिश्ते से hi मेवों सब कर पाया. मैं आपका किस सब्दो में दन्यबाद करू ये मेरी समाज के बहार है.

साधु – उधो संभु.. यदि त्रिकाल तुम्हारा गुरु है तो मेरा भी कुछ है. तुम दोनों को सही मार्ग दिखाना hi मेरा कर्म है. और आज भी मैं तुम्हारे लिए एक लसखाया ले कर आया हु..

संभु – आज्ञा करे महाराज..

साधु – तुम्हारा टारगेट है पब और उसके परिवार की मूट..

संभु – वो तो मुझको गुरूजी ने पहले hi बोल दिया है…

साधु – हम्म अच्छा तो सुनो उसको पाने के लिए मैं तुम्हारी हेल्प करने आया हु.. मैं बताउगा की तुम वो सब कैसे कर सकते हो…

संभु – मैं आपके इस उपकार का सदा आभारी रहुगा…

साधु कुछ देर मंत्रो का जप करता है तो वह पैर 4 दानव प्रकट हो जाते है.

साधु – सभु ये वो 4 शक्तिया है जो तुमको तुम्हारा टारगेट पाने में मदत करेगी.

  • अगनासुर – ये अग्नि से पल भर में कुछ भी जला सकता है.
  • परसुर – ये किसी भी मानव की परछाई को अपने वश में करके उसे मार भी सकता है और उससे कुछ भी करवा सकता है.
  • अंधकासुर – ये कभी भी डेरा पेला सकता है. रौशनी को निगल जाता है. और उस रौशनी के साथ hi सामने वाले की साडी शक्ति को भी खींच लेता है. ये जिसको चाहे उसको कुछ hi मं. में शक्तिहीन कर देता है और फिर वो मर जाता है. बड़े से बड़े देवता भी इसके सामने आने से डरते है.
  • मोहिनी – ये वो दानव कन्या है जो किसी को भी अपनी और आकर्षित कर सकती है. और अपना गुलाम बना लेती है. एक बार इसकी मोहिनी शक्ति में आया व्यक्ति सदा के लिए इसका हो जाता है.
संभु – ये तो सच में बहुत बलशाली है. इनको तो पब भी नहीं हरा पायेगा…

साधु – तुम फिर मूर्खता करने की सोचने लगे. पब का ये 4रो मिल कर भी कुछ नहीं बिगड़ सकते. दानवरानी के वरदानो के चलते ये उसका कुछ भी बिगड़ने में सफल नहीं होंगे. पैर उसकी पत्निया इन 4रो का कुछ भी नहीं कर सकती.

संभु – हम्म यानि की इसको उनकी पत्नियों के पीछे लगाना है. तो कल hi मैं सही टाइम देख कर उनकी पत्नियों पैर अटैक कर देता हु.

साधु – फिर जल्दवाजी… तुम दोनों सयम से काम क्यों नहीं करते?? पब कुछ दिन में दानव राज के देव रूप को छुड़वाने के लिए उस चक्रवेव में जायेगा. तब उसके पीछे से तुम इन 4रो की हेल्प से उसकी पत्नियों को मार देना. वो चाहा कर भी अपनी पत्नियों की हेल्प के लिए नहीं आ पायेगा. और यहाँ उसकी एक भी पत्नी मरी वह वो अपने आप मर जायेगा. उस चक्रवेव के अंतिम सिरे को छोड़ कर किसी भी भाग से भहर नहीं आ सकते. और अंतिम सिरे की खाशियत तो तुम पहले से hi जानते हो. एक बार जिसने वह पेअर रखा उसको वासना का ऐसा बुखार चढ़ता है की उसका मंद hi उसके कण्ट्रोल से बहार हो जाता है. और बाकि के हमले उसको मूट के घाट उतरने में कुछ hi पल लगते है. तो जब वो वह होगा तब तुम यहाँ वॉर करना.

संभु – सच में आपका प्लान तो बहुत अच्छा है. तो फिर मैं तब तक शांत रहता हु.

साधु – नहीं ऐसा भूल से भी मत करना. नहीं तो दुश्मन चल को भाप सकता है. छोटे बड़े हमले करवाते रहो. दुश्मन को सोचने का मौका hi मत दो. हो सकता है कोई छोटा सा हमला hi कामियाब हो जाये. और नहीं भी हुआ तो उसकी आध में इस बड़े हमले की तैयारी करो.

संभु – सच में आप महँ है. युद्ध निति में आप बेस्ट है.

साधु – हहहहहहहह.. बच्चे तुम मेरी अश्लियत नहीं जानते न इसलिए ये कहा रहे हो नहीं तो मेरी पहचान hi है युद्धनीति बनाना.
 
अपडेट 188

संभु सच में उसके वेयर में कुछ नहीं जनता था. और न hi वो जानना चाहता था. आज तक उसने हइशा संभु की मदद hi की थी. त्रिकाल को उस दशा से निकलने में ये hi था जो त्रिकाल को बचने का उपाय संभु को बताता था. और आप भाई लोगो को बता दू की ये hi वो साया है जो त्रिकाल से मिला था. पैर इसका असली फेस दोनों में से को नहीं जनता था.

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यहाँ हवेली में पब जुली और सब से मिल कर आ गया था. और अभी लंच टाइम में सभी लंच कर रहे थे और रात की शादी को ले कर बात चित कर रहे थे. अंकिता, पारी, मंजू, एरिका नैना को छेद रही थी तो ऐडा और अवनि अपनी दुनिया में मस्त पब पैर हमले कर रही थी. फिर से पब को भड़का रही थी. गुरु, सविता और माहि अपने काम में बिजी थे. काजल की तबियत थोड़ी ठीक नहीं थी तो जय और कामिनी उसके रूम में थे. इन दिनों में होने वाली छोटी सी परेशानी थी. तो कामिनी उसे सभाल रही थी. लंच होने के बाद ऐडा ने जाते हुए पब को इशारा करके एक बार फिर अकेले मिलने के लिए बोल दिया था.

लंच के बाद पब अपने रूम में रेस्ट करने को आ गया. रात भर जागना था तो दिन तो थोड़ी देर के लिए पब आराम कर रहा था. और शयाम के 5 बजे वो फ्रेश हो कर ऐडा के रूम की तरफ चल दिया. पैर ऐडा और अवनि को इसका पता नहीं था की पब इतनी जल्दी आ जायेगा. फिर पब तो ऐडा से मिलने जा रहा था तो उसके साथ तो वो सबके सामने भी कुछ भी कर सकता था तो अकेले मैं रूम में तो दिन हो या रात क्या फरक पड़ना था. पैर ऐडा और अवनि अभी तक अपने प्लान के हिसाब से तैयार नहीं थी.

जैसे hi पब ऐडा के रूम में पंहुचा तो उसने देखा की रूम का गेट खुला है और ऐडा अपनी अलमारी से झुक कर कुछ निकल रही है. और इस टाइम एक शार्ट जीन्स नेकर और शार्ट जीन्स शर्ट में है. शर्ट भी स्लीवलेस थी. और निकर इतना छोटा की पूरी जांघ नंगी hi थी. झुकने की वजह से बहार को निकली गांड और नंगे गोर पेअर, निकर के निचे होने से क्रेक का स्टार्ट पॉइंट का दिखना और नंगी कमर, ये नजारा देख कर एक बार फिर पब के दिल में आग लग गयी. तो वो भी दबे पाइओ ऐडा के पीछे जा कर अपना आधा खड़ा लुंड सेदे गांड से भिड़ा दिया और हाथ आगे ले जा कर उसके बूब्स मशाल दिए….

पब – क्या बात है आज मेरे बच्चे की माँ को बहुत मस्ती सूज रही है. कब से आग लगाने पैर है. चल अब पहले तेरी साथ कुछ मस्ती hi कर लू….

पब की बात, गांड पैर लुंड का अहसास और बूब्स का इतनी तेज़ी से मशलने से एक सिसकी की आवाज गूंज गयी. पैर पब के हाथ और लुंड अपनी जगह पैर रहे. 1-2 मं में hi वो लड़की पब को ढकेल कर पीछे मुड़ी तो पब की तो गांड hi पैट गयी. ये ऐडा नहीं अवनि थी. पब ने आज पहली बार अवनि को इस रूप में देखा था. ऐडा तो ऐसे छोटे कपडे पहनती hi थी. पैर आज अवनि का लुक बहुत धषु था. एक तो अवनि का लुक

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और दूसरा अभी हुयी हरकत दोनों ने hi पब के मुँह पैर लॉक लगा दिया. और अवनि भी उस हरकत से हिल गयी थी. आज तक किसी ने भी उसके बूब्स को हाथ तक नहीं लगाया था. पब की हरकत को वो अभी भी अपने जिस्म पैर महसूस कर रही थी. और दोनों एक दूसरे को देख रहे थे. पैर अवनि जल्दी सभाल गयी. और बहार को जाने लगी. अवनि को जाता देख कर पब की और पत्नी लगी. उसे लगा की अवनि फिर से और ज्यादा नाराज हो जाएगी. इसलिए वो हड़वड़ा कर बोलै…

पब – रुको… सोररीयय… वो.. मैं.. वो … मैं… सॉरी ऐडा… नहीं सॉरी… नहीं… अवनि.. वो… मैं…

पब को यु हड़बड़ाता देख अवनि को पब की हालत का अंदाजा हो गया. पैर अब उसको पब से नजरे मिलाने में शर्म आ रही थी. तो वो बोली – मैं अभी ऐडा को बजती हु… और फिर भाग गयी. पब को लगा की एक बार फिर उसने अवनि को नाराज कर दिया. तो कुछ hi पल में उसकी साडी उत्तेजना चली गयी और उसकी जगह एक दुःख आ गया और वो दुःख था अपने पहले प्यार को खो देने का दुःख. चाहे पब इस सब से प्यार करता था. पैर अवनि थी तो उसका पहला प्यार न. और आज कीघटना के बाद तो पब को लगने लगा की अब वो अवनि को इस बारे में कभी समजा hi नहीं पायेगा. और हमेशा के लिए अवनि को खो देगा. और वैसे भी आज उसकी 9तह शादी थी. इसके बाद उसको केवल 1 और शादी करनी थी. कियोकि 11तह शादी कब और किसके साथ करनी है ये तो मणि जी ने hi बताना था. और टाइम उसके पास बचा नहीं था. 5 दिन के लिए तो उसको बहार hi जाना था और फिर जल्दी से जल्दी एक और शादी करके डलासुर जी से देव रूप के लिए जाना था ताकि त्रिकाल के शक्ति पाने से पहले hi वो ये सब कर सके. और इतने काम टाइम में अवनि को मानना उसको अशंभब लग रहा था. पैर वो नहीं जनता था की अवनि तो खुद मरी जा रही है पब से शादी करने के लिए. ऐडा को रूम में आने में 10-15मं लग गए पैर इतनी hi देर में पब के दिल में पता नहीं क्या -2 आ कर चला गया. ये तो बस वो hi जनता था.

वो हुआ कुछ ऐसा था की ऐडा आज अवनि को खुद तैयार कर रही थी अवनि के रूम में. ताकि जब पब अवनि को देखे तो पागल हो जाये और पुराणी सभी बातो को भुला कर बिना किसी न नुकुर के अवनि को हाँ कहा दे. तो ऐडा ने hi अवनि को वो कपडे पहनाये थे. और फिर जब मेक उप करने लगी तो अवनि क ेके पास कुछ सामान काम था. वैसे तो अवनि खुद मेक उप की दीवानी थी. मेक उप करना भी बहुत अच्छे से जानती थी. पैर जैसा की आप सब जानते है की लड़कियों का मेक उप बॉक्स कभी फुल हो hi नहीं सकता चाहे वो कितना भी ले आये. बस वो hi अवनि के साथ हुआ. तो वो ऐडा के रूम में वो सामान लेने hi पहुंची थी और उसे ऐडा की अलमारी में धुन रही थी. की पीछे से पब ने उसको दबोच लिया.

और जब अवनि भाग कर ऐडा के पास अपने रूम में पहुंची तो उसकी सासे चढ़ गयी थी. अवनि की छूट ने भी 2 बून्द आशु उसकी पंतय को दे दिए थे. उस अहसास से hi ये हो चुक्का था. और बार बार उसे अपने जिस्म पैर पब के जिस्म का अहसास हो रहा था. और उसकी सासे भी तेज़ हो रही थी. अवनि को हप्ता हुआ देख कर ऐडा ने पूछा

ऐडा – ारे क्या हुआ अवनि… तू कहा से भाग कर आ रही है. और वो सामान कहा है जो तू लेने गयी थी.

ऐडा की बात सुन कर भी अवनि कोई जवाब नहीं दे पायी. सामान तो वो ले hi नहीं थी. कुछ 1-2 मं ताका डा उससे पूछती रही और अवनि अपनी सासो को संभालती रही और फिर बोली

अवनि – वो .. वो… ऐडा… तू अपने रूम में जा.. वो .. यार तू जा न..

ऐडा – अरे हुआ क्या ये तो बात क्या करके आये है. तैयार नहीं होना क्या. वो आते hi होंगे. नहीं मिलना है उनसे..

अवनि – आते होंगे नहीं वो तेरे रूम में hi है.. और अभी मुझको पकड़ लिया ऐडा समाज कर…

ऐडा – क्या तुझको पकड़ लिया तो फिर तू यहाँ कैसे?? तू भाग क्यों आयी??? तू तो मिलना चाहती थी na..fir??

अवनि जो अब तक संभल चुकी थी बस कुछ शर्मा रही थी. तो बोली – वो यार हुआ ये की.. (फिर अवनि ने पूरी बात बताई)…. और फिर शर्माने लगी…

ऐडा – साली कमीनी मेरे हिस्से का प्यार ले लिया.. हाहाहाहा.. पैर यार तुझको भाग कर नहीं आना चाहिए था. पता नहीं क्या सोच रहे होंगे वो…. तू रुक यहाँ मैं देख कर आती हु…

फिर ऐडा पब के पास अपने रूम में पहुंच गयी. और रूम में गुस्ते hi ऐडा ने पब के फेस पैर परेशानी को पद लिया. और वो समाज गयी की अभी जो हुआ है ये उसकी वजह से hi है. इस लिए बोली – आप बेटीये बस 1 मं में आयी…

ऐडा फिर से अवनि के रूम में पहुंच गयी. और अवनि से बोली – अवनि तू उनकी पत्नी बनना चाहती है या नहीं.

एक दम फिर से ऐडा को देख कर और उसकी सख्त आवाज सुन कर अवनि हड़बड़ा गयी और बलि – हाँ… यार… पैर क्यों हुआ??

ऐडा – देख अभी जो हुआ उसके लिए वो दुखी है. तुझको अच्छा लगा पैर तू बिना कुछ बोले आ गयी तो मेरे हिस्सा से वो सोच रहे होंगे की उन्हने तुझको फिर से नाराज कर दिया है. अब तू साथ चल नहीं तो तेरा फिर कुछ नहीं हो पायेगा. वो तुजसे और भी दुरी बना लगे.
 
अपडेट 189

अवनि ऐडा की बातो से घबरा गयी. वो तो पब के नजदीक जाना चाहती थी. और यदि उसने फिर और दूरिया बना ली तो फिर तो ये दूरिया कभी ख़तम होगी hi नहीं… इसलिए अवनि तुर्रंत ऐडा के साथ चल दी. ऐडा अवनि को रूम के बहार रुकने का बोल कर पब के पास पहुंच गयी. जो अवनि को अपने पहले प्यार को खोने के गम में एक साद सा फेस बना कर बैठा था. ऐडा भी सब जानती थी तो वो सीधा जा कर पब की गॉड में hi बेथ गयी और बोली – क्या हुआ आपको.. परेशां क्यों है??

पब (अपने दुःख को छुपाते हुए) – नहीं ऐडा केसा कुछ नहीं है. तुम बताओ मुझको क्यों बुलाया था. और कहा थी तुम?? मैं कबसे तुम्हारा वेट कर रहा हु.

ऐडा – आप झूट मत बोलिये मैं जानती हु की आप परेशां है. और ये भी की क्यों परेशां है. एक बार बोलिये तो मैं आपकी प्रॉब्लम अभी दूर कर दूगी.

पब – नहीं जान तुम गलत सोच रही हो ऐसा कुछ नहीं है…….

ऐडा – मतलब आप अपनी पत्नी से भी अपनी परेशानी नहीं बताना चाहते… (रूठते हुए मुँह दूसरी और कर लेती है)… जाइये मैं भी आपसे बात नहीं करती… गंदे…

पब ऐडा की ऐडा देख कर मुश्कुरा दिया – अरे सच में जान कुछ नहीं है. पैर ऐसे तुम लग बड़ी पायरी रही हो…

ऐडा – देखो मैं आपसे बात नहीं कर रही. मेने कहा न मैं जानती हु आप क्यों परेशां है बस एक बार बोलिये तो… नहीं तो हमारी तुम्हारी कत्त्तईईईई…

पब – हाहाहाहाहा… तू न अब माँ बनने वाली है पैर अभी तू खुद एक बच्ची hai…wo भी जिद्दी बच्ची…. सुन न… (पैर ऐडा उसकी और नहीं देखती और मन hi मन हस्ती रहती है) … अच्छा बाबा तो सुन … वो हुआ क्या न की अभी जब मैं रूम में आया to..(fir पब ने भी वो सब ऐडा को बता दिया) फिर वो भाग गयी. यार मैं तो समजा की तू है. अब वो फिर से मुझको गलत समझेगी… पता नहीं जब भी मुझको लगता की मेरी और अवनि के बीच की दूरिया काम हो रही है तभी फिर से कुछ ऐसा हो जाता है की वो फिर से मुझसे दूर हो जाती है. (ये सब कहते हुए पब की आवाज में एक दर्द था. अपने पहले प्यार को खोने का दर्द)

ऐडा – हम्म तो जनाब अवनि के लिए परेशां है. इरादे क्या है जानव के??

पब – इरादे तो नेक hi है. तू तो जानती है. बल्कि तू hi है जो ये जानती है की मैं अवनि को कितना चाहता हु. पैर वो ये समझती hi नहीं. मेने सोचा था की नैना से शादी करके एक बार उससे बात करुगा. शायद वो मान जाये. और मैं उसको अपनी बनाना चाहता था. पैर अब नहीं लगता की वो कभी मेरी होगी bhi….(ye बोलते hi पब की आखों में आशु आ गए)

बहार कड़ी अवनि पब की हार बात बड़े डायन से सुन रही थी. वो भी उस दर्द को महसूस कर रही थी. उसका दिल भी पब के प्यार के लिए तड़फ रहा था. उसके भी आशु निकल गए थे.

पैर अंदर पब ऐडा को बांहो में भर कर अपने आशु रोकने की कोसिस कर रहा था और बोलै – ऐडा क्यों हो रहा है मेरे साथ ऐसा. तुम सब हो मेरे साथ. फिर भी उसकी चाहत दिल से काम नहीं होती. और एक वो है जो कभी मुझको समझती hi नहीं. क्यों ऐडा … मुझको तुम सबसे प्यार है फिर भी क्यों एक कसक रहती है उसके लिए.. क्यों… क्या सच मैं मुझको लड़कियों की भूख होती जा रही है ??? क्यों उसको देख कर दिल को एक राहत सी मिलती है. कभी -2 तो उसकी आखों से मुझको भी ागता है की वो मुझको चाहती है. पैर फिर कुछ बोलती क्यों नहीं… मैं तो उसको प्रोपोज़ भी कर चुक्का हु. ऐडा मुझको ऐसा क्यों लगता है की वो भी चाहती है मुझको. पैर हमेशा मन hi कर देती है. देखो न ऐडा जिंदगी भी क्या रंग लती है. जिसको आप सबसे ज्यादा चाहते है वो hi आपका नहीं होता. कोई नहीं ऐडा आज मेने भी सोच लिया है. अब भूल जाउगा उसको मैं… तुम सबके साथ खुश रहुगा हमेशा. और अब तो मैं बाप भी बनने वाला हु. और फिर वैसे भी मेरा जीवन किसी के लिए नहीं रुक सकता जो लक्ष्य मुझको पाना है उसके लिए मुझको अवनि की यादो को भी अपने दिल में दफ़न करना होगा जैसे की मेने अपनी माँ, पापा और दीदी की यादो को दबा दिया hai….(PB के आशु बहा रहे थे. और ऐडा भी उसको अपने गले लगाए रोने दे रही थी. इस दर्द को बहार निकल कर वो ख़तम कर देना चाहती थी. कियोकि वो जानती थी गेट पैर कड़ी अवनि सब सुन रही है. और कुछ hi पालो में ये दर्द हमेशा के लिए ख़तम होना hi है तो दर्द को दबाने की जगह आशुओ के रूप में बहने दे रही थी. और एक बात थी और वो ये थी की वो ये चाहती थी की आज वो इन दोनों प्रेमियों के बिच में न बोले. अवनि खुद अपने प्रेमी के आशु पोंछे और वो खुद hi अपने प्यार का इजहार करे. कियोकि पब तो पहले भी ये कर hi चुक्का tha.or अवनि ने hi उसको हर बार मन किया था)

और ऐडा की चाहत भी रंग लगी. और अवनि पब के प्यार की गहराई को फील करके अपने आप को और बहार नहीं रोक पायी. वो पब को रट हुए और न देख पायी. तो एक दम से पब के पैरो में बेथ गयी और रट हुए बोली – प्लीज पंकज मुझको माफ़ कर दो. मेने सच में बहुत गलती की है. तुमने हमेशा मुज पैर प्यार लुटाया. पैर मैं तुमको चाहते हुए भी तुमसे प्यार न कर पायी. जाने अनजाने मेने तुमको सिर्फ दुःख दिया और तुमने मुझको उस दुःख और दर्द के बदले हमेशा प्यार और सम्मान दिया. मेने लिए दुनिया से भी लड़ गए. सच में पंकज मेने बहुत गलत किया है. प्लीज मुझको माफ़ कर दो प्लीज….

एक दम से रूम में अवनि की ा जाने से और फिर इस तरह माफ़ी मांगने से पब भोचका रहा गया. जबकि ऐडा अवनि को देख कर मुस्कुराने लगी. जैसे की वो इस सब का hi वेट कर रही हो. ऐडा पब की गोद से ुधा कर बहार चली गयी और बोल गयी – आज आप दोनों अपने सरे गीले सिक्वे दूर कर लो. मैं जा रही हु. और हाँ आज यदि आप दोनों में से किसी ने भी अपने दिल की बात को दिल में रहने दिया तो ये जिंदगी शायद ऐसा मौका फिर न दे. Ok bye….. ी विल वेट फॉर ा गुड news……or ये बोल कर अपने रूम से बहार हो कर गेट बंद कर दिया और गेट पैर hi कान लगा कर कड़ी हो गयी. ताकि यदि फिर से ये दोनों कोई गड़बड़ करे भी तो वो संभल सके.

ऐडा के जाने के बाद अपने पैरो के पास बैठी अवनि को देखता hi रहा गया. दोनों के नयन मिल चुके थे. और पब भी अवनि के पास hi जमीन में बेथ चुक्का था पैर दोनों hi खामोश एक दुषरे को केवल देख रहे थे. आशु थम चुके थे. दिल दिल से बात कर रहा था. आखों की भाषा में आँखें hi जवाब दे रही थी. कुछ देर बाद अवनि ने फिर से कुछ कहने को मुँह खोला – पंकज प्लीज… पैर इसके आगे बोल नहीं पायी. पब ने उसके होंटो पैर ऊँगली रख कर न में गर्दन हिला दी थी. अवनि भी चुप हो गयी. तो फिर पब ने उसका हाथ पकड़ कर उसको अपनी और खींचा तो अवनि भी कटी पतंग की तरह पब के उप्पेर लुडक्ति चली गयी. और पब की गोद में बेथ कर उससे किसी लता की तरह चुपक गयी. दोनों ख़ामोशी से एक दुषरे को फील कर रहे थे. इतने दिनों की जो तड़फ थी उसको काम करने की कोसिस कर रहे थे. कुछ देर बाद पब धिरे से बोलै – अवनि..

अवनि – हम्म

पब – अवनि मुझसे शादी करोगी??

अवनि – हम्म

पब (खुश हो कर) – क्या सच में

अवनि - हाँ जी सच में… और ये बोल कर अपना फेस पब के सीने में छुपा लिया. और पब ने भी अपनी भंहो का सिकंजा और टाइट कर दिया… फिर कुछ देर बाद बोलै – अवनि ये खवाब तो नहीं न अब तुम मेरी हो न…

अवनि अपना फेस उप्पेर करके पब की आखों में देखती है. जहा केवल प्यार था. तो एक दम से वो पब के होंटो पैर छोटा सा किश कर देती है – अब यकीं हुआ…

पब भी किश का जवाब किश से देता है. पैर ये किश छोटी नहीं थी. दोनों पूरी सिद्दत से एक दूसरे के होंठ चूस रहे थे. पैर इसमें वासना नहीं केवल प्यार था. जो वो एक दूसरे को देखना चाहते थे. बहार कड़ी ऐडा ये स्कीन देख कर खुश हो गयी और नीचे निकल गयी. पैर ये दोनों अपने आप में hi लगे रहे पूरी दुनिया को भूल कर.

समय बीतता रहा रात के 8 बज चुके थे पैर ये दोनों बहार नहीं निकले. ऐडा कई बार इनको देख कर जा चुकी थी. ये दोनों अपने प्रेम में मग्न थे. दुनिया से मतलब hi ख़तम हो चुक्का था. पैर गुरु की तैयारी पूरी हो चुकी थी नैना को भी एक बैटिकाएँ सजा कर जा चुकी थी. पैर गुरु को पब का पता नहीं था. और जब उसने गौर किया तो सविता उसको किचन में दिखाई दी. और माहि उसके साथ थी. बाकि कोई भी नहीं दिखा. गुरु ये देख कर परेशां हो गयी की आखिर सब कहा चले गए. पैर तभी उसे उप्पेर से आती पारी दिखाई दी. जो बहुत खुश लग रही थी. गुरु ने पारी से सबका पूछा तो पारी ने उसको भी अपने साथ आने का बोल दिया और पानी पी कर वो फिर से उप्पेर जाने लगी. सविता और माहि का डायन भी पारी और गुरु पैर चला गया. तो वो भी उनके साथ हो लिए. पहले अंकिता का रूम पड़ा तो उनको बहा अंकिता और नैना दिखाई दे गए. अंकिता नैना को आज के बारे में hi समझा रही थी. पैर पारी वह रुकी नहीं और सीधा अदा के रूम के बहार पहुंच गयी. जहा पब की बाकि पत्निया अंदर झाकने की कोसिस कर रही थी. उनमे ऐडा भी थी. गुरु तो चक्र hi गयी. ऐडा खुद अपने hi रूम में चोरो की तरह क्यों देख रही है. तो एक दम बोली – हो क्या रहा है यहाँ….

गुरु की आवाज थोड़ी तेज़ थी जिसको सुन कर उन प्रेमियों का धयान भी टूट गया और वो हकीकत की दुनिया में आ गए. तो पब का डायन घडी की तरफ गया टाइम देख कर वो चौक गया. 8 से उप्पेर का समय हो चुक्का था. यानि की इतनी देर से वो दोनों एक दूसरे में खोये हुए थे. उनको पता hi न चला. टाइम देख कर अवनि भी थोड़ा सा शर्मा गयी. और फिर ये दोनों बहार आ गए. बहार का नज़ारा देख कर पब और अवनि शर्मा गए. पब का तो तब भी ठीक था पैर अवनि का तो शर्म से बुरा हाल था. घर की सभी लेडीज और उसकी माँ भी रूम के बहार खड़े थे. और वो अंदर इश्क़ फार्मा रही थी. अवनि तो शर्म से भाग गयी और अपने रूम में जा कर रूम लॉक कर लिया. और पब अपनी पत्नियों के बिच में पाश गया.

पारी (थोड़े गुस्से वाली आवाज में) – क्या हो रहा था अंदर???

पब – वो.. वो… (पारी की नाराजगी भरी आवाज से थोड़ा गहरा गया था)

पारी (शामे टोन में) – मैं पूछती हु हो क्या रहा था अंदर इतनी पत्नियों के होते हुए भी किसी और के साथ इतनी देर से एक बंद रूम में आखिर चल क्या रहा था अंदर…

पारी किसी झगड़ालू पत्नी की तरह बात कर रही थी और पब के मुँह से आवाज नहीं निकल रही थी. उसकी साडी देविया जो कड़ी थी. नाराज हो जाती तो उसकी तो लग जनि थी na…hahahaha

पब पारी का कोई जवाब दे hi नहीं प् रहा था क्या बोले उसके कुछ समाज नहीं आ रहा था. उसके फेस पैर 12 बज गए थे. पब का ऐसा फेस देख कर ऐडा अपनी हाशि नहीं रोक पायी और जोर -2 से हसने लगी. पब भी उसको आखें फाड़े देखने लगा. ऐडा की देखा देखि सभी हसने लगी. तब पब को समाज आया की उसका पोपपात हो गया. तो वो चीखा पारी की बच्ची रुक तुझको बताता हु. पैर वो तो भाग गयी. फिर सब यु hi हसी मजाक करते रही. एक दम बहुत देर से चुप कड़ी सविता बोली – आखिर अपने मेरी बेटी को भी फसा hi लिया न…

पब – क्यों सविता तुमको अच्छा नहीं लगा??? (थोड़ी सीरियस हो कर)

सविता – यदि आपके लिए वो हाँ नहीं कहती तो बुरा जरूर लगता. आप hi उसके लिए परपेक्ट हो ये मैं अच्छे से जानती हु. जो उसकी जान बच्चन के लिए भानु जैसे दरिंदे से भी लड़ने को तैयार था उससे अच्छा लड़का उसके लिए हो hi नहीं सकता…
 
अपडेट 190

ये बोल कर सविता पब के गले लग गयी. माहौल फिर से थोड़ा गंभीर सा हो गया. तो माहौल को ठीक करने के लिए पब सविता से बोलै – सोच ले सविता तुझको और तेरी बेटी को एक साथ एक hi बीएड पैर छोड़ूगा. फिर मत कहना की बुरा लग रह है.

पब की बात पैर सभी जोर से हसने लगे तो सविता शर्मा कर पब के सीने में चुप गयी. कुछ देर और हंसी मजाक होता रहा फिर गुरु बोली

गुरु – अब बहुत हुआ, आप चलो अब. नैना कब से आपका वेट कर रही है. तैयारी भी पूरी है. जल्दी चलो.

गुरु की बात सुन कर सब चल देते है और फिर गुरु नैना की शादी पब के करवा देती है सभी लोग खुश थे. जैसे hi पब अपना अगूढ़ा कट करके नैना की मांग भरता है सब ताली बजने लगते है. फिर सभी लोग डिनर के लिए बेथ जाते है. नैना के तो दिल की दध्कन बहुत तेज़ हो रही थी. खाने का भी मन नहीं था. न जाने कितनी बार वो चुड़ते चुड़ते बची थी. कितने hi लोगो ने उसे हवस की नज़रो से देखा था. न जाने कितने दरिंदो से वो बच कर आयी थी. और आज वो ये सब खुद अपने पति ये साथ खुद करना चाहती थी. पैर दिल में एक दर सा था. सेक्स को लेकर आज तक उसने यातनाये hi झेली थी. कभी प्यार तो किसी का मिला नहीं. तो उसके मन में सेक्स दुःख देने वाला hi काम था. सब जानते हुए भी दिल में दुःख और दर का माहौल था. दिमाग कहा रहा था की अब तुझ पैर केवल तेरे पति का hi हक़ है सौंप दे खुद को उनको पैर बाईट दिनों का दर्द उसे ये करने से रोक रहा था. तो पब के साथ बीतये ख़ुशी के लम्हे उसे उसके साथ रहने पैर उसे मजबूर कर रहे थे. वो पब का प्यार भी चाहती थी और किसी को अपने करीब सोच कर भी उसको एक दर सा लगने लगता. नैना अपने दर और प्यार के बिच झूल रही थी.

दिंनिंग टेबल पैर बैठे हुए नैना ये सब सोच रही थी तो सब हंसी मजाक करते हुए सभी लोग डिनर का लुफ्त ुधा रहे थे. तब पब ने बोलै

पब – मेने हमक से वादा किया है तो मुझको अक्षम के समुराई स्कूल ऑफ़ मार्टिकल आर्ट्स की एनुअल इवेंट ने पार्टिसिपेट करने जाना है.

कामिनी – क्या?? इतनी दूर?? कब जायेगे??

एरिका – कितने दिनों के लिए??

पब – केवल 5 दिन की बात है.

अंकिता – क्या 5 दिन ??? इतने दिन आपके बिना हम सब यहाँ अकेले..

माहि – आप जानते है अभी हम सब पैर हमला हो कर चुक्का है और फिर हो सकता है. ऐसे में आप भी नहीं होंगे तब फिर हमको कोण संभालेगा.

पब – देखो अब कुछ दिनों के लिए तुमको अकेले hi रहना होगा. वैसे भी मुझको अपने लक्ष्य के लिए जाना है. तुम सबको अपनी रक्षा खुद करनी होगी. ये hi समय है हम सब की परीक्षा का.

गुरु – हाँ आप ठीक कहा रहे है. सभी को मिल कर hi रहना होगा.

ऐडा – पैर अपने अवनि का तो सबको बताया hi नहीं (और फिर हसने लगी) अवनि ने उसको आखें दिखा दी.

पब – ोुह्ह्ह हाँ, सविता मेने सोचा है की वह से आ कर अवनि के साथ शादी करुगा. और फिर तो गुरूजी (मणि) hi बतायेगे की किसके साथ लास्ट शादी करनी है. और फिर मुझको जाना भी है. तो बस उस इवेंट को जीत औ फिर ये सब देखूगा.

सविता – हम्म मुझको तो कोई प्रॉब्लम नहीं है. अवनि आपकी पत्नी बने ये तो में भी चाहती हु. क्यों बीटा (अवनि की और देख कर) तुझको तो कोई प्रॉब्लम नहीं है न…

अवनि (शर्मा कर) – क्या माँ… जैसा आप कहो..

जय – क्या अवनि की शादी भाई से हो रही है और किसी ने मुझको बताया भी नहीं???

काजल – माँ ये तो गलत है. मेरी नन्द की शादी और मुझको भी नहीं पता …(काजल अभी भी जय से बात नहीं कर रही थी. पैर और सभी के साथ नार्मल होने लगी थी. समाज तो वो भी रही थी की जय की इतनी कमी नहीं है जितनी उस बेबी की है. कियोकि यदि जय की गलती होती तो पब कभी भी उसे बिना किसी पनिशमेंट के नहीं छोड़ता. और जय की भी अभी भी काजल से बात करने की हिम्मत नहीं हो रही थी. जय कभी अकेले में कोसिस करता भी तो काजल उसे आखें दिखा देती और वो चुप रहा जाता. काजल भी ये सब इसलिए कर रही थी की फिर से ये सब न हो)

पेय – हाँ माँ, दीदी की शादी है और मुझको भी नहीं पता…

कामिनी – ारे बच्चो शांत तो हो. ये हमको भी नहीं पता था. इन्होने अभी तुम्हारे सामने hi बताया है. और इन दोनों का झगड़ा भी आज hi ख़तम हुआ है.

जय – हम्म तब ठीक है. पैर भाई मैं कुछ कहु??

पब – हाँ हाँ जय बोलो…

जय – भाई मैं ये चाहता हु की अवनि की शादी ऐसे न हो. मतलब शादी आप लोग कैसे भी करे. पैर मैं चाहता हु की इस शादी की एक बरी पार्टी हो. गाओं के सभी लोगो को इन्विते किया जाये. वैसे भी बहुत टाइम से घर में कोई पार्टी नहीं हुयी. और आपकी भी ये लास्ट शादी है. या आपको और भी करनी है??

पब – नहीं इसके बाद एक और है पैर वो गुरूजी के कहे अनुशार होगी. गुरूजी ने 1सत डे hi मुझको बोलै था की 10 शादी के लिए लड़की तुमको खोजनी है. लास्ट शादी कब और कहा करनी है ये वो hi बतायेगे. और हाँ उसके बाद मैं और कोई शादी नहीं करुगा. इतनी hi बहुत है.

जय – हाहाहाहाहा न न भाई अभी और 2-4 कर लो. मुज पैर तो 1 नहीं संभालती. आप के पास तो लाइन है…

अंकिता – क्या कहा जय???

काजल – क्या कहा अपने???

पब (धिरे से जय से) – अरे पागल हो गया है. कहा क्या बोलना है ये भी नहीं सोचता. खुद भी पिटेगा और मुझको भी पिटवायेगा…

कामिनी – ये सब छोडो, आप ये बताओ जय की पार्टी वाली बात का क्या सोचा??

सविता – पैर कामिनी इन हालातो में पार्टी करना ठीक होगा. वैसे hi हमले हो रहे है..

पब – मेरे को तो कोई प्रॉब्लम नहीं है. और सविता कब और कैसे कोण हमको मरना चाहे ये तो कोई भी नहीं जनता. पार्टी होने या न होने से कोई फरक नहीं है. केवल हमको हर टाइम एक्टिव रहना होगा. और जिंदगी के मजे भी लेने होंगे, ऐसे दर कर तो ये जिंदगी दर में hi ख़तम हो जाएगी…

गुरु – सही बात. तो फिर अवनि और पब की शादी के दिन एक अच्छी पार्टी होगी. पार्टी आज से 8 दिन बाद होगी. यानि की इनके लौटने के 2 दिन बाद. ताकि ये भी पार्टी की तैयारी देख ले और रिलेक्स भी हो ले.

पब – हम्म ok…
 
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