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माहि को भी याद आ गया की उसे भी वह जाना है. तो वो भी तैयार होने चली गयी उसे कुछ अच्छा नहीं लग रहा था. उसके मन में ये बात घर कर चुकी थी की उसके पति ने, उसके दोस्त ने सुहागरात पैर भी उसके साथ कुछ नहीं किया.
सुबह 7 बजे तक सभी रेडी हो कर घर से निकल चुके थे. काजल, जय, पेय, मूड, अवनि घर पैर थे और सभी जुली की टीम के साथ मंदिर को निकल चुके थे. पब, मणि, गुरु, दीनदयाल और सैंडी एक कार में थे. पब ने माहि को आवाज दे कर अपने पास बुलाया तो माहि गुस्से से मुँह फेर कर दूसरी कार की और बाद गयी. ये सब माहि को देखते hi रहा गए. पब ने तो इसलिए बोलै था कियोकि ये सब hi हवन में हिस्सा लेने वाले थे तो इनको सबरे पहले जा कर हवन की सुरुवात करनी थी. पैर माहि तो अपनी hi सोच ने पब से गुस्सा हो कर दूसरी कार में चली गयी जिसमे पहले से hi पारी, कामिनी (ड्राइविंग), सविता, एरिका बेटी हुयी थी. अंकिता के साथ साक्षी, गोपाल, रेनू और ऐडा जा रहे थे. ऐडा की साक्षी और रेनू से अच्छी जमने लगी थी.
पारी, माहि और एरिका पीछे bêthe थे. पारी ने जब माहि का उतरा हुआ फेस देखा तो उसे समाज नहीं आया की माहि किस बात से नाराज है. तो उसने माहि से पूछ hi लिया..
पारी – माहि क्या हुआ तुम उदास क्यों लग रही हो???
माहि – नहीं पारी मैं ठीक हु बस हवन को ले कर hi सोच में थी..
पारी को लगा की बात कुछ और है और माहि बता नहीं रही है. पैर पारी को माहि का ये उदास फेस भी अच्छा नहीं लग रहा था तो वो माहि को छेड़ने की सोचने लगी. जिससे माहि का मूड ठीक हो जाये…..
पारी – चल छोड़ सब ये बता की रात को क्या हुआ. रात को तो खूब मज़े किये होंगे न….
पारी ने गलती से माहि की दुखती नस पर hi हाथ रख दिया था. पैर माहि किसी को कुछ बताना नहीं चाहती थी तो चुप hi रही..
पारी – ारे बोल मेरी बन्नो, केसा लगा हमारे पति का वो…. कही छोटा तो नहीं लगा न…
पारी की बात सुन कर सभी हसने लगे, कियोकि सब जानते थे की पब का लुंड जान निकल देता है. पैर माहि को गुस्सा आने लगा. तो वो सर निचे कर के चुप रही
पारी – अब क्यों शर्मा रही है हम सब भी उसके मज़े ले चुके है. बड़ा मज़ा आता है.. पैर साला दुबारा नहीं मिला आज तक… आअह्ह्ह्ह जाने कब वो दिन आएगा जब दुबारा उनका वो मिलेगा….
एरिका – हाहाहाहाहा.. बड़ी आग लगी है पारी तेरे अंदर तो… सभाल कही तेरी जल न जाये… हाहाहाहाहा… पैर यार मन तो मेरा भी बहुत करता है. दुबारा करने का….
सविता – अरे तुम दोनों चुप होगी की नहीं.. या सबकी पंतय खराब करनी hai….hahaahahaha
कामिनी – कामिनियों तुम सब तो काम से काम 1 बार तो मज़े कर चुकी होय अहा तो 1 बार भी नशीब नहीं हुआ. क्यों बड़का रही हो मंदिर जाते हुए इन सोये अरमानो को….
सबकी ऐसी गरम बाते सुन कर माहि को बर्दाश नहीं हो रहा था. उसे रात का सपना बार -2 याद आ रहा था. (पैर वो हकीकत है). और मन में गुस्सा और बाद रहा था…
माहि (चीखते हुए) – प्लीज स्टॉप आईटी…. प्लीज …. मैं ये सब नहीं सुन सकती… (माहि का फेस गुस्से से लाल हो गया था)
कामिनी – क्या हुआ माहि हम सब तो मजाक कर रहे है. तुम ठीक तो हो न?? किसी ने कुछ कहा क्या??? या उन्होंने कुछ कहा??
माहि – नहीं दीदी किसी ने कुछ नहीं कहा. उन्होंने कुछ भी नहीं कहा .. इस बात का hi तो दुःख है किन ा तो उन्होंने कुछ कहा और न hi कुछ किया….
कामिनी – क्या मतलब क्या नहीं किया उन्होंने ???? रात को कुछ गलत हुआ क्या??
माहि – दीदी गलत और सही तो तब होता न जब कुछ होता जब कुछ हुआ hi नहीं तो क्या गलत और क्या सही.. पता नहीं मेरे साथ ऐसा क्यों हुआ की मेरी सुहागरात पैर भी कुछ नहीं हुआ….
कामिनी ये सुन कर सॉकेड हो गयी. उसके समाज hi नहीं आया की माहि क्या कहना चाहती है. कियोकि कामिनी जानती थी की यदि माहि चूड़ी नहीं होती तो अभी तक सब ख़तम हो चुक्का होता. फिर माहि किस बारे में बात कर रही है?? कामिनी कार को एक साइड में लगा कर बोली
कामिनी – तुम सब कुछ बताओ क्या हुआ. कुछ मत छुपना. रात को वो तुम्हारे पास गए थे उसके बाद से सुबह तक का सब बताओ क्या -2 हुआ… (कामिनी ने ये बात एक दम सीरियस हो कर बोली थी. और माहि भी गुस्से में सब बताती गयी की रात को क्या हुआ. और फिर बोली – जब मैं सुबह उडी तब पता चला की वो तो एक सपना था. हकीकत में ऐसा कुछ हुआ hi नहीं है. मेरा वो सपना, सपना बन कर hi रहा गया जो मेने अपनी 1सत नाईट के लिए देखा था.
कामिनी – तुम कैसे कह सकती हो की रात को कुछ नहीं हुआ?? और वो सपना था हकीकत नहीं???
माहि – उसका साबुत ये है की मैं अभी भी कुवारी हु. और मेने जो देखा था की मैं वैसे गन्दी hi सो गयी पैर सुबह में वैसी hi साफ़ थी और मेरी वो भी एक दम पहले जैसी थी. जबकि कुछ हुआ होता तो वो वैसी नहीं रहती…
माहि की ये बात सुन कर एरिका, पारी और सविता पागलो की तरह हसने लगी. कामिनी को भी नहीं समाज आया की ये तीनो इतनी सीरियस बात पैर पागलो की तरह क्यों है रही है.. कही ये पागल तो नहीं हो गयी. सविता ने हस्ते हुए कामिनी को कार चलने का इसरा कर दिया तो कामिनी ने भी कार रोड कर भगा दी. कियोकि वो और लेट नहीं होना चाहती थी. और गुरु से मिलना भी चाहती थी. कुछ देर हसने के बाद सविता बोली
सविता – कामिनी यदि तुम ये बात किसी को न बोलो तो एक बात बताऊ, तुमको भी हसी आएगी और माहि को भी पता चल जायेगा की वो सब सच में हुआ था… और माहि तुमको भी ये बात किसी को नहीं बतानी है…
कामिनी – हाँ बोलो क्या कहना है तुमको… वैसे भी हम सब किसी भी बात को किसी को से कहा hi नहीं सकते.
सविता – तुमको पता है की उनके साथ 1 रात बिताने के बाद भी हम सब भी अभी तक कुवारी है…
कामिनी – क्या क्या कहा … क्या मतलब है इस बात का???
सविता – यही मतलब है की हम सब अभी तक सील पैक है. और ये सब इसलिए है कियोकि इस किरिया में सील फिर से लग जाती है. और वो जब टूटेगी जब ये किरिया पूरी करने के लिए वो हम सबको एक साथ भोगेंगे..
सविता की ये बात सुन कर एरिका को भी शॉक लगा. सबको एक साथ छोड़ने वाली बात उसको भी नहीं पता थी. माहि और कामिनी तो इस बात को हजम hi नहीं कर प् रही थी.
पारी – अब सामजी मेरी बुलबुल वो सपना नहीं हकीकत था. सोच जरा यदि वो सपना होता तो क्या तुम सुबह बिना कपड़ो के होती. और वो अपनी सब बीबियो की बहुत केयर करते है तो मेरे हिस्सा से उन्होंने hi तुम्हारी उसको साफ़ किया होगा. और तुमको चादर से कवर भी किया होगा….
पारी की बात सुन कर अब माहि का सारा गुस्सा, सारा वहां ख़तम हो चुक्का था. उसके होंटो केर एक मुस्कान आ गयी थी. पैर वो ये भूल गयी की इन सब चक्करो में उसने अपनी सुहागरात की पूरी कहानी इन सब को बता दी थी. अब माहि का क्या होगा कालिया…… वही होगा जो मंजूरी पारी होगा…… हाहाहाःहाहा
अब क्या था पारी को माहि को छेड़ने का फुल मौका मिल चुक्का था. पारी – वैसे माहि तुम कबसे ऐसे सपने देख रही थी??
माहि – कोनसे सपने…
पारी (धिरे से उसके कान में) – यही की पब ने तुमको ऐसे छोड़ा है… कबसे आ रहे है तुमको ये सपने जो तुम्हारा सपना, सपना hi रहा गया था??? यार मुझको तो सपनो में भी नहीं करते ये……
अब माहि मरे श्रम के कुछ नहीं बोल पायी और फिर तो सब सुरु हो गए और सबने माहि को खूब परेशां किया. ये सब लोग सबसे लास्ट में मंदिर पहुंचे थे. पब हवन पैर बेथ चुक्का था. पब के सामने दीनदयाल और हवन कुंड के एक और मणि बैठे थे. और पब के पास में एक जगह खली थी जो की माहि के लिए थी. मणि जी ने इस हवन पैर पब के साथ माहि को बैठने को बोलै था. इस हवन को करने के लिए जो मंत्र थे. वो एक ग्रन्थ के रूप में दीनदयाल के पास थे. दीनदयाल वो ग्रांट पब को देता है. पैर पब को इसकी जरुरत नहीं थी. फिर भी वो उस ग्रन्थ को माथे से लगा कर अपने सामने रख लेता है.
माहि भी जा कर पब के पास बेथ चुकी थी. माहि ने पहले भी उस ग्रन्थ को पड़ने की कोसिस की थी पैर वो सफल नहीं हुयी थी. दीनदयाल हवन सुरु करने को बोलता है. तो सबसे पहले पब शुद्धिकरण के मंत्रो को पड़ता है फिर हवन को पूरा करने का संकल्प लेता है माहि हारक ऍम में पब के साथ थी. पब अपनी आखें बंद करके पहाड़ो के देवता को याद करके उनसे प्राथना करता है और फिर हवन सुरु करता है. पब के मुँह से सभी मंत्र एक दम साफ़ और तेज़ आवाज में, सुर के साथ निकल रहे थे. वह मौजूद सभी लोगो के मन और दिमाग को मंत्रो से बहुत शांति मिल रही थी. मणि, दीनदयाल और माहि हवन कुंड में आहुतिया दे रहे थे. मणि और दीनदयाल दोनों hi जानते थे किस मंत्र के बाद किस प्रकार की आहुति देनी है.
माहि को भी याद आ गया की उसे भी वह जाना है. तो वो भी तैयार होने चली गयी उसे कुछ अच्छा नहीं लग रहा था. उसके मन में ये बात घर कर चुकी थी की उसके पति ने, उसके दोस्त ने सुहागरात पैर भी उसके साथ कुछ नहीं किया.
सुबह 7 बजे तक सभी रेडी हो कर घर से निकल चुके थे. काजल, जय, पेय, मूड, अवनि घर पैर थे और सभी जुली की टीम के साथ मंदिर को निकल चुके थे. पब, मणि, गुरु, दीनदयाल और सैंडी एक कार में थे. पब ने माहि को आवाज दे कर अपने पास बुलाया तो माहि गुस्से से मुँह फेर कर दूसरी कार की और बाद गयी. ये सब माहि को देखते hi रहा गए. पब ने तो इसलिए बोलै था कियोकि ये सब hi हवन में हिस्सा लेने वाले थे तो इनको सबरे पहले जा कर हवन की सुरुवात करनी थी. पैर माहि तो अपनी hi सोच ने पब से गुस्सा हो कर दूसरी कार में चली गयी जिसमे पहले से hi पारी, कामिनी (ड्राइविंग), सविता, एरिका बेटी हुयी थी. अंकिता के साथ साक्षी, गोपाल, रेनू और ऐडा जा रहे थे. ऐडा की साक्षी और रेनू से अच्छी जमने लगी थी.
पारी, माहि और एरिका पीछे bêthe थे. पारी ने जब माहि का उतरा हुआ फेस देखा तो उसे समाज नहीं आया की माहि किस बात से नाराज है. तो उसने माहि से पूछ hi लिया..
पारी – माहि क्या हुआ तुम उदास क्यों लग रही हो???
माहि – नहीं पारी मैं ठीक हु बस हवन को ले कर hi सोच में थी..
पारी को लगा की बात कुछ और है और माहि बता नहीं रही है. पैर पारी को माहि का ये उदास फेस भी अच्छा नहीं लग रहा था तो वो माहि को छेड़ने की सोचने लगी. जिससे माहि का मूड ठीक हो जाये…..
पारी – चल छोड़ सब ये बता की रात को क्या हुआ. रात को तो खूब मज़े किये होंगे न….
पारी ने गलती से माहि की दुखती नस पर hi हाथ रख दिया था. पैर माहि किसी को कुछ बताना नहीं चाहती थी तो चुप hi रही..
पारी – ारे बोल मेरी बन्नो, केसा लगा हमारे पति का वो…. कही छोटा तो नहीं लगा न…
पारी की बात सुन कर सभी हसने लगे, कियोकि सब जानते थे की पब का लुंड जान निकल देता है. पैर माहि को गुस्सा आने लगा. तो वो सर निचे कर के चुप रही
पारी – अब क्यों शर्मा रही है हम सब भी उसके मज़े ले चुके है. बड़ा मज़ा आता है.. पैर साला दुबारा नहीं मिला आज तक… आअह्ह्ह्ह जाने कब वो दिन आएगा जब दुबारा उनका वो मिलेगा….
एरिका – हाहाहाहाहा.. बड़ी आग लगी है पारी तेरे अंदर तो… सभाल कही तेरी जल न जाये… हाहाहाहाहा… पैर यार मन तो मेरा भी बहुत करता है. दुबारा करने का….
सविता – अरे तुम दोनों चुप होगी की नहीं.. या सबकी पंतय खराब करनी hai….hahaahahaha
कामिनी – कामिनियों तुम सब तो काम से काम 1 बार तो मज़े कर चुकी होय अहा तो 1 बार भी नशीब नहीं हुआ. क्यों बड़का रही हो मंदिर जाते हुए इन सोये अरमानो को….
सबकी ऐसी गरम बाते सुन कर माहि को बर्दाश नहीं हो रहा था. उसे रात का सपना बार -2 याद आ रहा था. (पैर वो हकीकत है). और मन में गुस्सा और बाद रहा था…
माहि (चीखते हुए) – प्लीज स्टॉप आईटी…. प्लीज …. मैं ये सब नहीं सुन सकती… (माहि का फेस गुस्से से लाल हो गया था)
कामिनी – क्या हुआ माहि हम सब तो मजाक कर रहे है. तुम ठीक तो हो न?? किसी ने कुछ कहा क्या??? या उन्होंने कुछ कहा??
माहि – नहीं दीदी किसी ने कुछ नहीं कहा. उन्होंने कुछ भी नहीं कहा .. इस बात का hi तो दुःख है किन ा तो उन्होंने कुछ कहा और न hi कुछ किया….
कामिनी – क्या मतलब क्या नहीं किया उन्होंने ???? रात को कुछ गलत हुआ क्या??
माहि – दीदी गलत और सही तो तब होता न जब कुछ होता जब कुछ हुआ hi नहीं तो क्या गलत और क्या सही.. पता नहीं मेरे साथ ऐसा क्यों हुआ की मेरी सुहागरात पैर भी कुछ नहीं हुआ….
कामिनी ये सुन कर सॉकेड हो गयी. उसके समाज hi नहीं आया की माहि क्या कहना चाहती है. कियोकि कामिनी जानती थी की यदि माहि चूड़ी नहीं होती तो अभी तक सब ख़तम हो चुक्का होता. फिर माहि किस बारे में बात कर रही है?? कामिनी कार को एक साइड में लगा कर बोली
कामिनी – तुम सब कुछ बताओ क्या हुआ. कुछ मत छुपना. रात को वो तुम्हारे पास गए थे उसके बाद से सुबह तक का सब बताओ क्या -2 हुआ… (कामिनी ने ये बात एक दम सीरियस हो कर बोली थी. और माहि भी गुस्से में सब बताती गयी की रात को क्या हुआ. और फिर बोली – जब मैं सुबह उडी तब पता चला की वो तो एक सपना था. हकीकत में ऐसा कुछ हुआ hi नहीं है. मेरा वो सपना, सपना बन कर hi रहा गया जो मेने अपनी 1सत नाईट के लिए देखा था.
कामिनी – तुम कैसे कह सकती हो की रात को कुछ नहीं हुआ?? और वो सपना था हकीकत नहीं???
माहि – उसका साबुत ये है की मैं अभी भी कुवारी हु. और मेने जो देखा था की मैं वैसे गन्दी hi सो गयी पैर सुबह में वैसी hi साफ़ थी और मेरी वो भी एक दम पहले जैसी थी. जबकि कुछ हुआ होता तो वो वैसी नहीं रहती…
माहि की ये बात सुन कर एरिका, पारी और सविता पागलो की तरह हसने लगी. कामिनी को भी नहीं समाज आया की ये तीनो इतनी सीरियस बात पैर पागलो की तरह क्यों है रही है.. कही ये पागल तो नहीं हो गयी. सविता ने हस्ते हुए कामिनी को कार चलने का इसरा कर दिया तो कामिनी ने भी कार रोड कर भगा दी. कियोकि वो और लेट नहीं होना चाहती थी. और गुरु से मिलना भी चाहती थी. कुछ देर हसने के बाद सविता बोली
सविता – कामिनी यदि तुम ये बात किसी को न बोलो तो एक बात बताऊ, तुमको भी हसी आएगी और माहि को भी पता चल जायेगा की वो सब सच में हुआ था… और माहि तुमको भी ये बात किसी को नहीं बतानी है…
कामिनी – हाँ बोलो क्या कहना है तुमको… वैसे भी हम सब किसी भी बात को किसी को से कहा hi नहीं सकते.
सविता – तुमको पता है की उनके साथ 1 रात बिताने के बाद भी हम सब भी अभी तक कुवारी है…
कामिनी – क्या क्या कहा … क्या मतलब है इस बात का???
सविता – यही मतलब है की हम सब अभी तक सील पैक है. और ये सब इसलिए है कियोकि इस किरिया में सील फिर से लग जाती है. और वो जब टूटेगी जब ये किरिया पूरी करने के लिए वो हम सबको एक साथ भोगेंगे..
सविता की ये बात सुन कर एरिका को भी शॉक लगा. सबको एक साथ छोड़ने वाली बात उसको भी नहीं पता थी. माहि और कामिनी तो इस बात को हजम hi नहीं कर प् रही थी.
पारी – अब सामजी मेरी बुलबुल वो सपना नहीं हकीकत था. सोच जरा यदि वो सपना होता तो क्या तुम सुबह बिना कपड़ो के होती. और वो अपनी सब बीबियो की बहुत केयर करते है तो मेरे हिस्सा से उन्होंने hi तुम्हारी उसको साफ़ किया होगा. और तुमको चादर से कवर भी किया होगा….
पारी की बात सुन कर अब माहि का सारा गुस्सा, सारा वहां ख़तम हो चुक्का था. उसके होंटो केर एक मुस्कान आ गयी थी. पैर वो ये भूल गयी की इन सब चक्करो में उसने अपनी सुहागरात की पूरी कहानी इन सब को बता दी थी. अब माहि का क्या होगा कालिया…… वही होगा जो मंजूरी पारी होगा…… हाहाहाःहाहा
अब क्या था पारी को माहि को छेड़ने का फुल मौका मिल चुक्का था. पारी – वैसे माहि तुम कबसे ऐसे सपने देख रही थी??
माहि – कोनसे सपने…
पारी (धिरे से उसके कान में) – यही की पब ने तुमको ऐसे छोड़ा है… कबसे आ रहे है तुमको ये सपने जो तुम्हारा सपना, सपना hi रहा गया था??? यार मुझको तो सपनो में भी नहीं करते ये……
अब माहि मरे श्रम के कुछ नहीं बोल पायी और फिर तो सब सुरु हो गए और सबने माहि को खूब परेशां किया. ये सब लोग सबसे लास्ट में मंदिर पहुंचे थे. पब हवन पैर बेथ चुक्का था. पब के सामने दीनदयाल और हवन कुंड के एक और मणि बैठे थे. और पब के पास में एक जगह खली थी जो की माहि के लिए थी. मणि जी ने इस हवन पैर पब के साथ माहि को बैठने को बोलै था. इस हवन को करने के लिए जो मंत्र थे. वो एक ग्रन्थ के रूप में दीनदयाल के पास थे. दीनदयाल वो ग्रांट पब को देता है. पैर पब को इसकी जरुरत नहीं थी. फिर भी वो उस ग्रन्थ को माथे से लगा कर अपने सामने रख लेता है.
माहि भी जा कर पब के पास बेथ चुकी थी. माहि ने पहले भी उस ग्रन्थ को पड़ने की कोसिस की थी पैर वो सफल नहीं हुयी थी. दीनदयाल हवन सुरु करने को बोलता है. तो सबसे पहले पब शुद्धिकरण के मंत्रो को पड़ता है फिर हवन को पूरा करने का संकल्प लेता है माहि हारक ऍम में पब के साथ थी. पब अपनी आखें बंद करके पहाड़ो के देवता को याद करके उनसे प्राथना करता है और फिर हवन सुरु करता है. पब के मुँह से सभी मंत्र एक दम साफ़ और तेज़ आवाज में, सुर के साथ निकल रहे थे. वह मौजूद सभी लोगो के मन और दिमाग को मंत्रो से बहुत शांति मिल रही थी. मणि, दीनदयाल और माहि हवन कुंड में आहुतिया दे रहे थे. मणि और दीनदयाल दोनों hi जानते थे किस मंत्र के बाद किस प्रकार की आहुति देनी है.