MANAV or DANAV sex story - part 1 - Page 15 - SexBaba
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MANAV or DANAV sex story - part 1

भाई अल्पना के साथ इतना कुछ हुआ इसलिए HI तो पब को मांईजी इतने दिन से कुछ नहीं बता रहे थे. पहले बता देते तो पब हार्ट अटैक से HI मर जाता..... पैर अब मरेगा संभु की............

थैंक्स फ्रेंड फॉर सपोर्टिंग में

फ्रेंड्स फ्लैशबैक एन्ड हो गया है. यदि कोई भी सवाल हो तो जरूर बताये... कोई गलती हो तो भी बताये.........
 
अपडेट 115

जिस दिन पब को गाओं आना था उससे पहले वो सोनल के साथ गाओं पहुंच गयी और रात में खुद पैर और घर पैर पेट्रोल दाल कर आग लगा ली. उससे पहले hi अल्पना ने सोनल को बचने के लिए मणि को फ़ोन कर दिया था. और आग लगने से पहले एक लेटर लिख कर खिड़की से बहार फेक दिया. आग उसने सबसे पहले खुद को hi लगाई थी. आग में घर भी जलने लगा. और सोनल वह बेहोश हो गयी. तभी वह मणि पहुंच गया और उसने सोनल को बचा लिया और अपने साथ ले गया. गाओं वालो को सोनल के वह से बचने का पता नहीं चला.

ात प्रेजेंट

मणि की स्टोरी सुन कर सबकी आखों से गंगा यमुना बहा रही थी. जुली का भी बहुत बुरा हाल था. उसके मन से पब के लिए नफरत फिर से ख़तम हो चुकी थी. उसको पता चल चुक्का था की पब की इसमें कोई गलती नहीं है. जो भी हुआ उसके बारे में उसे पता तक नहीं था. उसे ये भी पता था की पब अवनि के लिए भी बिना पावर्स के भानु से लड़ने को तैयार था. चाहे उसमे वो जीत नहीं सकता था. तो वो अपनी माँ और बहिन के लिए तो क्या कुछ नहीं कर देता. लता और सोनल एक दूसरे को सहारा दे रहे थे दोनों का सच जान कर बहुत बुरा हाल था. जहा सोनल बहुत कुछ पहले से जानती थी. पैर फिर से वो सब सुन कर उसका वो दर्द फिर से बाद गया था. जो समय के साथ काम होने लगा था. लता, अंकिता और गुरु को अपने उन सभी सबलो का जवाब मिल चुक्का था. जो उस दिन पब और लता की स्टोरी सुन कर उनके मन में उड़े थे. सोनल को छोड़ कर अल्पना के दर्द की ये सब कल्पना भी नहीं कर प् रहे थे. जो दर्द अल्पना ने सही थे वो उनकी सोच से भी ज्यादा थे. सविता को तो यकीं hi नहीं हो रहा था की किसी के साथ इतना गलत हो सकता है. हर एक के दिल में एक दर्द था. एक ऐसा दर्द जिसका कोई इलाज भी नहीं था. सब अपने दर्द को काम करने के लिए रो रहे थे.

पैर पब की आखों में आशु नहीं थे. उसकी आखें आगरे बर्षा रही थी. उसके जावडे भींचे हुए थे. नाक तेज़ी से फूल और पिचक रही थी. हाथ की मुढ्ढिया जोर से बंद थी. पेअर कैंप रहे थे. जैसे वो अपने पैरो को रोक रहा हो. पर पेअर खुद कही जाना चाहते हो. उसका फेस एक दम लाल सुरक हो चुक्का था. वो अपने गुस्से को दबाने की बहुत कोसिस कर रहा था. पैर वो खुद को रोक नहीं प् रहा था. मणि केवल पब को hi देख रहा था. किसी और का तो डायन hi नहीं था पब की और. सब अपने hi गम में खोये थे. पब का दिल और दिमाग टुकड़ो में बात चुक्का था. वो सहा नहीं प् रहा था की उसकी माँ ने इतनी यातनाये सही है. केवल एक आदमी ने उसकी पूरी दुनिया hi तभा कर दी. और आज भी वो मज़े में है. वो त्रिकाल को मरना चाहा रहा था. त्रिकाल और संभु को उनके कर्मो की सजा देना चाहता था. पैर वो ये भी समाज रहा था की वो अभी उनका कुछ नहीं बिगड़ सकता. और इस गुस्से से यदि वो उनसे भीड़ भी गया तो वो तो नहीं मरेंगे पैर फिर उनको मरने का काम ादुरा रहा जायेगा. पैर वो अपने गुस्से को जब काबू नहीं कर पाया तो बहुत तेज़ आवाज में चीखा – त्रिकाएआललललल तू और तेरा चेला अब मुझसे नहीं बच सकते. मेरी जिंदगी का अब एक hi टारगेट है और वो है तुम दोनों की मूट.. चाहे उसके लिए मुझको कुछ भी करना पड़े मैं सब करुगा. पैर तुम दोनों को अब मैं नहीं छोड़ूगा.

पब की आवाज इतनी तेज़ थी की साउंड प्रूफ रूम होने के बाद भी पूरी हवेली में गूंज गयी थी. उस रूम में राखी हर चीज हिलने लगी थी. सभी लोग अपने -2 कानो पे हाथ रख कर गिरे पड़े थे. इनको तो सुनाई भी नहीं दिया की पब ने बोलै क्या है. बस एक आवाज सुनाई दी जो की उनके कान सहा नहीं प् रहे थे. 10 मं तक तो वो सब जमीन में पड़े हुए अपने कानो को hi सहलाते रहे. और पब अपने गुस्से को अपने अंदर दवाने में लगा रहा. पब तेज़ -2 सास ले रहा था. जिससे उसके मुँह से आवाजे निकल रही थी. उन आवाजों से ऐसा लग रहा था जैसे कोई किंगकोबरा फुंकार रहा हो. पब के इतनी तेज़ चीखने से घर के सभी लोग उड़ कर पब के रूम की और भागे. सब अभी सो रहे थे. उड़ने का टाइम अभी हुआ hi था की पब की आवाज से सब हड़बड़ा केर उड़े और जब उनको अहसास हुआ की ये पब की आवाज है तो भागे उसके रूम की और.

जब सोनल का डायन कानो से हैट का उन आवाजों पैर गया और उसने पब की और देखा. तब सोनल को अहसास हुआ की पब की इस टाइम क्या कंडीशन है. उसे याद आया की मणि जी ने उसे पब को सभालने को बुलाया था. पब का फेस देख कर उसका कलेजा मुँह में आ गया. और तुर्रंत उड़ कर पब के गले लग गयी. और उसको संत करने के लिए उसके सर पैर प्यार से हाथ फेरने लगी.

सोनल – संत हो जा भाई संत हो जा मेरे छोटू.. थूक दे इस गुस्से को, कुछ नहीं होता गुस्सा करने से केवल खुद का hi नुक्सान होता है. भूल जा सब कुछ और एक नाई जिंदगी सुरु कर…

पब भी अपनी बड़ी बहन के प्यार से संत होने लगा. पैर उसका गुस्सा ख़तम नहीं हुआ था. घर के सभी लोगो की नज़ारे इस टाइम इन दोनों भाई बहन पैर hi थी. पब के संत होने से उसका रोना सुरु हो गया. और वो रोटा रहा सोनल के कंडे पैर सर रख कर. सोनल ने भी उसे रोने दिया कुछ नहीं बोली बस प्यार से उसके सर पैर हाथ परती रही. कुछ देर बाद पब बोलै

पब – दीदी क्यों हुआ ये सब हमरे साथ hi. हम गरीब थे फिर भी खुश थे. हमारी माँ ने क्या पहले hi काम तकलीफ जेली थी जो उनको नर्क से भी बत्तर यातनाये साहनी पड़ी… बोलो दीदी क्या गलती थी माँ की… क्या गलती थी आपकी.. क्यों हमारे परिवार को hi ये सब सहना पड़ा… दीदी आप कहती है की मैं ये सब भूल जाऊ. कैसे भूल जाऊ की माँ पैर क्या बीती होगी. अपने भी अपने इस भाई के लिए पता नहीं कितना सहा होगा. इससे तो अच्छा होता की मुझको मर जाने दिया होता. मेरे लिए क्यों सहा अपने ये सब बोलो दीदी… क्यों….

सोनल – भाई है तू मेरा, तेरे लिए तो मैं कुछ भी कर सकती हु पागल. अब तो मैं ठीक हु न. तो क्यों याद करता है उन बातो को जो केवल तकलीफ देती है. भूल जा सब कुछ और अपनी बीबियो के साथ नयी जिंदगी की सुरुवात कर.

पब सोनल की बात से बादक जाता है और एक ड्यूमा लग हो कर बोलता है – किसी बात करती हो दीदी, मैं इन सबके साथ राहु और सब भूल जाऊ. क्या आप hi अपने भाई के लिए सब कुछ कर सकती है मैं कुछ नहीं कर सकता क्या अपनी बहन के लिए. क्या आप नहीं चाहती की त्रिकाल और संभु को उनके कर्मो की सजा मिले. क्या माँ को भूल जाऊ. भूल जाऊ उस माँ को जिसने अपने इस bête के लिए इतना कुछ सहा. हर रोज मरती रही केवल इस लिए की मुझको और आपको कुछ न हो. दीदी अब तो ये मुंकिन hi नहीं है की में सब भूल कर चुप बेथ जाऊ. त्रिकाल से तो मेरा युद्ध पहले से hi चल रहा है. अब तो मैं चाहा कर भी पीछे नहीं हैट सकता. और ये सब भी मुज से इस तरह hi जुड़ गयी है की चाहे या न चाहे मेरी पत्नियों को भी मेरा साथ हर हल में देना hi होगा. एक का पीछे हटने का मतलब सबकी मूट है.

सोनल पब की बात सुन कर अपने आशु पूछती है और फिर पब से बोलती है – यदि ऐसी बात है तो सुन माँ के आखरी सब्द जो मेरे को hi पता है. मेने आज तक किसी को नहीं बताये. माँ ने मरने से पहले तेरे लिए कुछ कहा था. जब माँ ने अपने उप्पेर और पुरे घर में पेट्रोल दाल दिया. तब माँ मुझसे बोली – “सोनल तू यहाँ से भाग जा बीटा, दुनिया को लगेगा की तू भी मेरे साथ जल कर मर गई पैर तू मणि जी के पास जाना और एक ने जिंदगी की सुरु करना. और छोटू से खुद कभी मत मिलना. यदि कभी छोटू तुजे मिल जाये और उसको सब पता चल जाये तो उससे कहना की सब भूल कर एक नयी जिंदगी सुरु करे. पैर मैं चाहती हु की मेरा बीटा मेरे साथ हुए अत्याचारों का बदला ले. जितना दर्द मेने सहा है उससे जयादा दर्द वो संभु को दे. जिस दिन मेरा बीटा संभु को मरेगा उस दिन मेरी आत्मा को सन्ति मिलेगी. और इसके लिए भी छोटू को मणि जी का सहारा लेना होगा. वो hi उसे सही मार्ग दिखा सकते है.” और ये कहा कर माँ ने खुद को आग लगा ली. और भाई में वह माँ को जिन्दा जलते हुए देखती रही और माँ मरते हुए भी मुझको वह से जाने को बोलती रही…. जब माँ की सासे रुक गयी और वो जमीन पैर गिर गयी तब मुझको होश आया की माँ मुझको जाने को बोल रही थी. आग चारो और फेल चुकी थी और इतनी देर से वह खड़े रहने से धुएं से मैं तोड़ा hi आगे जा कर बेहोश हो गयी.

पब – दीदी यदि मेरी माँ की यही आखरी इच्छा थी तो मैं वादा करता हु की उस संभु को मैं वैसे hi मरुँगा जैसे माँ चाहती थी. अब मेरा ये गुस्सा मेरे अंदर रहेगा हर टाइम. और मुझको याद दिलाते रहेगा की मुझको संभु को मरना है.

सोनल – हाँ भाई दबा ले अपने गुस्से को अपने अंदर. और लग जा माँ की इच्छा पूरी करने पैर. यदि सच में तुझको अपनी माँ और इस बहन से प्यार है. तो तू आज से वो hi करेगा जो मणि जी तुजसे कहेगे. तुझको हर हाल में ये युद्ध जीतना है. तू अपनी बहन का चेहरा भी अब तब hi देख पायेगा जिस दिन तेरे हाथ में संभु का सर होगा. (सोनल ने ये बात अपने अंदर दबे दर्द, गुस्से और प्रतिशोद में एक -2 सब्द को चबा कर कही थी. ऐसा लगा था की सोनल के मुँह से सब्द नहीं उसके गुस्से की आग निकली हो. जो न जाने कब से उसके सीने में दबी हुयी थी)

सोनल को ऐसा बोलता देख कर वह खड़े हर इंसान के रोंगटे खड़े हो हाय. दिल में एक हुक सी उडी. लता ने ये सब सुन सोनल के पास जा कर उसको अपने सीने में छुपा लिया. और पब को मणि जी ने अपने गले से लगा लिया. पब सोनल की बातो को सुन कर भी कुछ नहीं बोल पाया. उसके दिल में दर्द का एक सागर हिलोरे मार रहा था. वो अपनी बहन को ये भी नहीं कहा पाया की वो उसकी इस इच्छा को जरूर पूरी करेगा. हर कोई सोनल के दर्द को महसूस कर रहा था. उसकी इन बातो में छुपी तड़प को समझना चाहा रहा था. और ये तड़प हर किसी के दिल में बदले की आग भड़का रही थी. पब के दिल में तो ये आग ज्वालामुखी का रूप ले चुकी थी. सब एक दम चुप थे आवाजे आ रही थी तो सिसकियों की जो लगभग सभी के मुँह से निकल रही थी. वो लोग भी सोनल के दर्द और तड़फ को महसूस कर रहे थे जिनको नहीं पता था की सोनल और अल्पना के साथ क्या हुआ है. हालत को ठीक करने के लिए इस वॉर मणि ने बोलना सुरु किया.
 
सही कहा भाई.... पब की माँ के साथ में इतना बुरा हुआ है की सायद की किसी के साथ हो. बूत भाई ऐसा होता है, कई बार मेने न्यूज़ पेपर में पड़ा है की किसी लड़की को कैद कर के रखा गया और उसका दिन रात रपे किया गया.....

ये हो रहा है हमारे hi देश में........ और ये सबसे गलत है.........

थैंक यू फ्रेंड फॉर योर सपोर्ट
 
अपडेट 116

सोनल को ऐसा बोलता देख कर वह खड़े हर इंसान के रोंगटे खड़े हो हाय. दिल में एक हुक सी उडी. लता ने ये सब सुन सोनल के पास जा कर उसको अपने सीने में छुपा लिया. और पब को मणि जी ने अपने गले से लगा लिया. पब सोनल की बातो को सुन कर भी कुछ नहीं बोल पाया. उसके दिल में दर्द का एक सागर हिलोरे मार रहा था. वो अपनी बहन को ये भी नहीं कहा पाया की वो उसकी इस इच्छा को जरूर पूरी करेगा. हर कोई सोनल के दर्द को महसूस कर रहा था. उसकी इन बातो में छुपी तड़प को समझना चाहा रहा था. और ये तड़प हर किसी के दिल में बदले की आग भड़का रही थी. पब के दिल में तो ये आग ज्वालामुखी का रूप ले चुकी थी. सब एक दम चुप थे आवाजे आ रही थी तो सिसकियों की जो लगभग सभी के मुँह से निकल रही थी. वो लोग भी सोनल के दर्द और तड़फ को महसूस कर रहे थे जिनको नहीं पता था की सोनल और अल्पना के साथ क्या हुआ है. हालत को ठीक करने के लिए इस वॉर मणि ने बोलना सुरु किया.

मणि – बीटा केवल आशु बहाने से कुछ हासिल नहीं होगा. भूल जाओ की अल्पना के साथ क्या हुआ है. तुमको अभी केवल अपने टारगेट की और बढ़ना है. जिस दिन तुम अपनी पावर्स को प् कर अपने 1सत टारगेट को प् लोगे. तब तुम संभु और त्रिकाल की मूट के भी बहुत नजदीक पहुंच जाओगे. सबसे पहले तुमको अपनी सभी पावर्स को प् कर डलासुर के देव रूप को उस कैद से आज़ाद करवाना है. कियोकि डलासुर का देव रूप hi उनके दानव रूप को कण्ट्रोल कर सकता है. और यदि तुमने उसे आज़ाद करवाने में देर कर दी तो डलासुर के दानव रूप से त्रिकाल अपनी सभी पावर प् कर फिर से बहुत पावर फूल हो जायेगा. और यदि उसके बाद उसने डलासुर के दानव रूप को अपना गुलाम बना लिया और वो रूप त्रिकाल में समां गया. तो त्रिकाल को मरना महादेव को छोड़ कर किसी के बस में नहीं होगा.

पब – आज से आप जो भी कहेगी गुरूजी में बस वो hi करुगा.

मणि – तो सबसे पहले माहि से शादी करके अपनी 6तह पावर को प्राप्त करो. और फिर तुमको हवेली छोड़ कर कही जाना है.

पब – ठीक है गुरूजी मैं आज hi माहि से शादी करने को बोलता हु.

िड्नी देर से चुप कड़ी कामिनी को नहीं पता था की रात में क्या हुआ है. उसको नहीं पता था की अभी इन सबके दिल में कितना दर्द और तड़प है. वो उस दर्द और तड़प को महसूस तो कर रही थी. पैर उसकी गहराई को नहीं समाज सकीय. और फिर उसे दर भी था अपनी कुलदेवी के नाराज होने का इसलिए उसने मणि जी से डेरे रे बोलै

कामिनी – गुरूजी क्या मैं कुछ कहा सकती हु.

मणि – हाँ बोलो…

कामिनी – जी गुरूजी बात ये है की ठाकुरो के रिवाज के हिसाब से ऐडा की सुहागरात के बाद पहले हमको ठाकुरो की कुलदेवी के मंदिर जाना होता है. नहीं तो कुलदेवी गुस्सा हो जाती है. इसलिए क्या पहले वह जाये फिर ये माहि से शादी करे.

मणि – हम्म ठीक कहा रही हो. अस्तिका देवी को नाराज करना नहीं चाहिए. पब तुमको पहले उनके दर्शन करके माहि से शादी करनी चाहिए. पैर उसमे ज्यादा लेट मत करना. कियोकि तुम्हारे पास अब केवल 4 मंथ है. यदि तुमने इन 4 मंथ के अंदर डलासुर के देव रूप को कैद से मुक्त नहीं करवाया तो तुम कभी नहीं करवा पाओगे.

पब – जैसा आप कहे गुरूजी, हम कल hi जायेगे देवी दर्शन को, और उसके अगले दिन hi मैं माहि से सधी करुगा. पैर ये 4 मंथ में hi क्यों करना है पहले तो अपने ऐसा नहीं बोलै था??

मणि – कियोकि पहले मुझको भी नहीं पता था की त्रिकाल अपनी सड़ना में इतना आगे निकल चुक्का है 4 मंथ में वो अपनी सभी पावर्स को फिर से प् लेगा. फिर तुम उसको हरा नहीं पाओगे. वो अभी कमजोर है वो वह आ कर तुमको नहीं रोक सकता. पैर बाद में वो तुमको उस जगह तक जाने hi नहीं देगा.

पब – हम्म ok गुरूजी जैसा आप कहे. पैर मेरे एक बात समाज नहीं आयी की त्रिकाल अभी कमजोर है फिर भी वो मुज पैर अटैक कर रहा है. तो उसके पास ये पावर्स कहा से आ रही है. और हर अटैक के बाद कुछ दिन रुक जाता है ऐसा क्यों??

मणि – वो इसलिए कियोकि अभी उसके पास मन्त्र तो बहुत है और उसको ये भी पता है की किस मन्त्र से क्या होता है. पैर उन मंत्रो ने जो पावर्स मिलती है वो नहीं है. जब भी वो तुम पैर अटैक करता है तो पहले अपने मंत्रो को सिद्ध करता है और उनसे पावर्स पता है. फिर उन पावर्स से तुम्हारे उप्पेर अटैक करता है. इसलिए hi उसको टाइम लग रहा है. यदि वो तुम्हारे सामने आ गया तब तुम उसके सामने कुछ भी नहीं हो. कुछ hi मं. में वो तुमको ख़तम कर देगा. इसलिए hi कहा रहा हु उसकी puja(Sadhna) पूरी होने से पहले डलासुर के देव रूप को आज़ाद करवा दो. ताकि तुम देव रूप की मदत से दानव रूप को कमजोर करके त्रिकाल को मार सको.

पब – और एक बात गुरूजी, जब से हॉस्पिटल में ऐडा को डिस्चार्ज करुवने गया तब मुझको लगा की कोई मुजके टकराया है. और मुझको लगता है की उसने hi मेरे उप्पेर वो चमकीला पाउडर डाला था. पैर वह मुझको कोई दिखा नहीं था. केसा कैसे हुआ??

मणि – कियोकि वो त्रिकाल की मदत से आदर्शया (इनविजिबल) होगा. त्रिकाल ने ये सिद्धि बहुत पहले hi प् राखी है. और ये मेरे पास भी नहीं है.

पब को मणि की बात से एक जतका लगा. पब को एहसास हुआ की त्रिकाल सच में कितना पावरफुल है. पता नहीं और क्या -2 पावर्स है उसके पास… ये सोचते हुए उसके मुँह से खुद hi निकल गया.

पब – सच में त्रिकाल तो बहुत खतरनाक है….

मणि जी बहार की और चले जाते है. तो फिर गुरु पब के पास आती है और उसको गले लगा लेती है. और एक-2 करके सभी उसको गले लगा कर अपना प्यार दिखते है. पैर सोनल नहीं आती. तो पब उसके पास चला जाता है.

पब – दीदी आप मुझसे नाराज है.??

सोनल – नहीं भाई, ऐसा तो बिलकुल भी नहीं है.

पब – तो आप मुझको हुग नहीं करेगी??

सोनल – देख छोटू, तुझको तेरी इस बहिन का प्यार अब जब hi नशीब होगा जब तू संभु को मर देगा. और वैसे जैसे माँ की इच्छा थी. मैं कुछ hi देर में आश्रम जा रही हु.

तभी मणि अंदर आता है और बोलै – और मैं भी जा रहा हु..

लता – गुरु जी क्या सोनल को में अपने साथ ले जा सकती हु. मैं पूरी उम्र बेटी के साथ के लिए तदपि हु. क्या अब मैं अपनी इस बेटी को अपने साथ रख सकती हु. मेरी ये बेटी (अंकिता की और इशारा करके) तो परै हो गयी. पैर ये तो मेरे साथ रहा सकती है न..

मणि – यदि सोनल आपके साथ जाना चाहती है तो जा सकती है.

सोनल – हाँ मैं भी माँ के साथ रहूगी..

मणि – ठीक है फिर मैं चलता हु…

गुरु – गुरूजी पैर आप कैसे जा सकते है. जब ये माहि से सधी करने वाले है तो फिर उसके बाद पहाड़ो के देवता की पूजा भी करनी है. उसमे अपना होना जरुरी है.

मणि – हाँ तुमने ठीक कहा. मेरी दिनु से बात करवाओ. मैं और वो इस पूजा की तैयारी करते है. और तुम सब माहि और पब की तैयारी करो.

फिर पब दीनदयाल को फ़ोन करता है. पैर फ़ोन नहीं उड़ता. तो पब माहि को कॉल करता है. माहि फ़ोन उदा लेती है. पैर वो रो रही थी.
 
अपडेट 117

मणि – हाँ तुमने ठीक कहा. मेरी दिनु से बात करवाओ. मैं और वो इस पूजा की तैयारी करते है. और तुम सब माहि और पब की तैयारी करो.

फिर पब दीनदयाल को फ़ोन करता है. पैर फ़ोन नहीं उड़ता. तो पब माहि को कॉल करता है. माहि फ़ोन उदा लेती है. पैर वो रो रही थी.

माहि – पंकज हमको बचा लो. घर के बहार कुछ लोग बापू को मर रहे है प्लीज हमको बचा लो…. (और फिर तेज़ रोने लगती है)

पब को कुछ समाज नहीं आता की कोई क्यों दीनदयाल को मार रहा है. पैर वो इन सब बातो में समय ख़राब न करते हुए. तुर्रंत माहि के घर पैर टेलिपोर्ट हो जाता है. हवेली में जैसी को पता hi नहीं था की पब एक दम से कहा गया. पब सिदा माहि के घर के बहार पहुँचता है. तो देखता है की 8-10 लोग दीनदयाल को मर रहे है. कोई डंडे से तो कोई हाथो से तो कोई लातो से. पब बैग कर उनके बिच में पहुंच जाता है. और सबको दीनदयाल से देर कर देता है. फिर दीनदयाल को ले कर टेलिपोर्ट हो जाता है. बहार गुंडे देखते hi रहा जाते है. की ये दोनों कहा गायब हो गए. पब घर के अंदर पहुँचता है और घर में 4रो बहन भाई एक दूसरे से छुपे हुए रो रहे थे. और बहार देखा रहे थे. वो लोग भी पब को एक दम वह देख कर चौक जाते है और फिर पब को दीनदयाल के साथ गायब होते hi तो उनका मुँह hi खुला रहा गया. रोना बंद हो चुक्का था. पब दूर से hi उस सब को देख रहा था और पीछे से माहि को हिलता है. माहि उसके हाथ को जातक देती है वो बहार अपने बापू और प्रेमी को डरने की कोसिस कर रही थी. जबकि वो दाना hi उसके पीछे खड़े थे. दीनदयाल तो बेहोश था. उसके सरीर के कई जगह से खून निकल रहा था. और वो पब की बांहो ने था. पब जब देखता है की माहि उसकी और देख hi नहीं रही तो वो माहि के कान पैर होंठ रख कर बोलता है. “ जान तेरा डायन किदार है ये तेरा हीरो ीदार है”

माहि और उन तीनो का डायन पब की आवाज से उसकी और जाता है. वो सब दीनदयाल की हालत देख कर रोने लगते है. पब सबको अपने से छुपा लेता है और टेलिपोर्ट हो कर हवेली पहुँचता है. वह सब जाने दीनदयाल की ये हालत देख कर चीख पड़ते है. गुरु और अंकिता भाग कर दीनदयाल को चक करने लगती है. और पब दीनदयाल को बीएड पैर लिटा कर फिर से माहि के घर के बहार होता है. और जाते hi उन गुंडों की पिटाई सुरु कर देता है. 5 मं में hi सब जमीन पैर पड़े धूल चाट रहे थे. पब एक गुंडे को उदा कर पूछता है की क्यों मार रहे थे तुम दीनदयाल को तो वो बोलता है की हमको दीनदयाल को तड़पा-2 कर मरने की सुपारी मिली थी. पैर हम नहीं जानते की सुपारी देने वाला कोण था. पब उसकी आखों में देखंता है और उसके मंद को रीड करने लगता है तब उसको यकीं हो जाता है की ये सच बोल रहा है. इनको फ़ोन पैर hi सुपारी मिली है.

पब उनको उसी हालत में छोड़ कर हवेली पहुंच जाता है और पुलिस स्टेशन में फ़ोन करके बता देता है की माहि के घर के बहार इस सहर का मोस्ट वांटेड जख्मी हालत में पड़ा है. फिर पब दीनदयाल की और देखता है तो उसका इलाज गुरु और अंकिता कर रही थी. और वो 4रो खड़े दीनदयाल को देख कर रो रहे थे. कुछ hi देर में दीनदयाल की मलहम पट्टी हो जाती है. पब 4रो को समजा भुजा कर चुप करवाता है. 2-3 हॉर्स में दीनदयाल को होश आ जाता है. अभी सब लोग वह से अपनी ट्रेनिंग के लिए जा चुके थे केवल मणि, लता, सोनल और माहि के भाई बहन hi थे वह.

मणि – दिनु मेरे भाई अब केसा है…

दीनदयाल – ठीक हु दोस्त, पब में वक्त पैर आ कर बचा लिया. नहीं तो वो लोग आज मर hi जाते. फिर मेरे बच्चो का क्या होता….. (दीनदयाल ये कहा कर अपनी बांहे फैला देता है और उन तीनो को अपने सीने से लगा लेता है. माहि को पब ने ट्रेनिंग के लिए एरिका के साथ भेज दिया था)

मणि – उप्पेर वही के होते हुए जैसा कभी नहीं होगा मेरे यार, ये बता की हुआ क्या था…??

दीनदयाल – करीब 8-10 लोग मुझको पूछते हुए मेरे घर आये और जैसे hi मेने उनको बताया की मैं hi दीनदयाल हु मरना सुरु कर दिया. मैं तो उनको जनता भी नहीं हु कोण थे वो लोग…

मणि – मुझको लगता है की उन सब लोगो को संभु ने भेजा होगा. कियोकि तूने पब को बचा कर त्रिकाल का एक और प्लान बेकार कर दिया तो गुस्से में संभु ने hi ऐसा किया होगा.

दीनदयाल ये सुन कर तोड़ा दर जाता है और चिंता काने लगता है की यदि त्रिकाल उसके पीछे पद गया तो उसको बचाएगा कोण??

दीनदयाल – फिर तो त्रिकाल या सभु फिर से हमला करवा सकते है??

मणि – हाँ यदि इस हमले के पीछे उनका हाथ है तो पक्का फिर से हमला होगा. और इस बार पहले से भी बड़ा होगा.

दीनदयाल – फिर अब मैं क्या करू??

मणि – एक तो अपने उस ज्ञान से अपनी ताकत बड़ा जो तूने गुरु सत्यानंद जी से पायी है. कियोकि अब तू भी इस धर्म युद्ध का हिस्सा बन चुक्का है. और तुझको याद होगा गुरु जी ने कहा था की अपने धर्म की और इंसानियत की रक्षा के लिए hi में तुम सब को ये ज्ञान दे रहा हु. वो अब वो वक्त आ चुक्का है जब हमको अपने गुरु का कर्ज चुकाना है.

दीनदयाल – ये तो मेरा भाग्य है की उस टाइम भी गुरूजी ने मुज जैसे पैर यकीं कर वो ज्ञान मुझको दिया और आज फिर भाग्य समुज्को इस युद्ध का हिस्सा बनने का मौका मिल रहा है. पैर मैं तो पहले से hi पहाड़ी देवता के करोड़ से जल रहा हु. इस कंडीशन में मैं क्या कर सकता हु.

मणि – अरे हाँ तुम इसकी चिंता मत कर पब परसो माहि से शादी कर रहा है. फिर तू पहाड़ी रसम के हिसाब से बता की वो हवन कब करना है. हवन होते hi तू भी ठीक हो जायेगा. और अब से तुम सब भी इस हवेली में hi रहोगे. और इस हवेली की सुरक्षा दिनु तेरे कंदो पैर होगी. कियोकि पब को माहि से शादी करने के बाद कही और जाना है..

दीनदयाल – ठीक है जो तुम कहो. (कुछ देर सोचने के बाद) मेरे हिसाब से 2 दिन बाद का टाइम इस हवन के लिए बेस्ट है.

मणि – यानि की शादी के अगले दिन hi हवन??

दीनदयाल – हाँ और यदि इस दिन नहीं तो फिर 10 दिन बाद hi हो पायेगा.

मणि – ठीक है मैं हवन की तैयारी करता हु. और तुम दोनों (सोनल और लता की और देख कर) कहा से जाने की तैयारी करो.

लता – जी .. (मणि ने उनको जाने के लिए एक दम आदेश दिया था इसलिए वो दोनों hi कुछ बोल नहीं पायी)

सभी लोग ब्रैकफास्ट कर रहे थे. इसके बाद लता और सोनल को जाना था. पब के मन में बहन से फिर जुड़ा होने का दुःख था. पैर फेस को उसने सख्त बना लिया था. उसके फेस को देख कर अब कोई नहीं बता सकता था की पब के मन में क्या चल रहा है.

पब कामिनी की और देख कर बोलै – कामिनी कल कुलदेवी (अस्तिका) के दर्शन के लिए चलेंगे. तुम सब तैयारी कर लेना. (जय की और देख कर) जय तुम भी चलोगे क्या हमारे साथ??

जय – नहीं भाई, लखन ने खेतो पैर बुलाया है कोई प्रॉब्लम है..

मणि – ठीक है जय, काजल और अवनि को मेरे पास छोड़ जाओ. मुझको हवन की तैयारी करनी है. ये सब मेरी उसमे मदत करेंगे.

पब – ठीक है गुरूजी..

पब – माहि हमारी शादी परसो होगी.

माहि ये सुन कर सरम से नजरे जुका लेती है. तो पास में बैठी रेनू और साक्षी उसको छेड़ने लगती है. पब का डायन उस और नहीं था. वो दीनदयाल से बोलता है.

पब – बापू अभी कंडीशन ऐसी है की यदि गाओं में दम डैम से शादी की तो कुछ भी हो सकता है. तो क्या हम वैसे hi शादी करे जैसे की मैं अभी तक करता आया हु.

दीनदयाल – ठीक है बीटा जैसी तुम्हारी मर्जी.. मुझको भी नहीं लगता अभी कोई भी रिस्क लेना चाहिए.

पब – थैंक यू बापू मुझको समझने केलिए.

मणि – बीटा तुम्हारी शादी के नेक्स्ट डे पहाड़ो के देवता का हवन है. और तुमको वह के लिए सेफ्टी का डायन भी रखना होगा. हो सकता है संभु फिर से दीनदयाल पैर अटैक करने के लिए आदमी भेजे…

पब – जी गुरूजी, हम जुली की टीम को भी अपने साथ ले चलते है.

फिर पुरे दिन कुछ खास नहीं हुआ, सभी लोग कल की तैयारी कर रहे थे, गुरु पब की शादी की तैयारी में बिजी थी. माहि, ऐडा, अवनि सैंडी के साथ मार्किट चली गयी थी. कामिनी, सविता, अंकिता मंदिर जाने की तैयारी कर रहे थे. एरिका और काजल भी इनका साथ दे रही थी. साक्षी, रेनू, गोपाल ये तीनो पेय और माउद से घुल मिल गए थे और उनके साथ hi खेल रहे थे. लता और सोनल के जाने के बाद पब अपने रूम में अकेला लेता हुआ पता नहीं किस सोच में था. दीनदयाल और मणि उस हवन की तैयारी में लग चुके थे. दिन ऐसे hi बिट गया.
 
अपडेट 118

फिर पुरे दिन कुछ खास नहीं हुआ, सभी लोग कल की तैयारी कर रहे थे, गुरु पब की शादी की तैयारी में बिजी थी. माहि, ऐडा, अवनि सैंडी के साथ मार्किट चली गयी थी. कामिनी, सविता, अंकिता मंदिर जाने की तैयारी कर रहे थे. एरिका और काजल भी इनका साथ दे रही थी. साक्षी, रेनू, गोपाल ये तीनो पेय और माउद से घुल मिल गए थे और उनके साथ hi खेल रहे थे. लता और सोनल के जाने के बाद पब अपने रूम में अकेला लेता हुआ पता नहीं किस सोच में था. दीनदयाल और मणि उस हवन की तैयारी में लग चुके थे. दिन ऐसे hi बिट गया.

सब लोग बेथ कर डिनर कर रहे थे. मणि जी बोले – कामिनी कल की पूजा की सब तैयारी हो गयी है न.

कामिनी – जी गुरु जी हो गयी. (और फिर कामिनी अपनी तैयारी के बारे में बताने लगी. मणि में उसमे कुछ और भी पूजा विदी को बताया जो की कामिनी को पता hi नहीं थी. कामिनी ने उस पूजा विदी के लिए भी तैयारी करने का बोल दिया. मणि ने उस पूजा विदी के मंत्र गुरु को बताने को बोल दिया डिनर के बाद)

ये सब देख कर पब सोच में पद गया की मणि जी को ये सब कैसे पता.

पब – गुरूजी आप कैसे जानते है. ये तो ठाकुरो की कुलदेवी है न.

मणि जी– पहली बात तो ये की तुम भूल गए मेने इस का ज्ञान गुरु सत्यानंद जी से लिया है. और वो सभी देवी –देवता की पूजा विदी मुझको सीखा कर गए है. और दूसरी बात ये की देवी अस्तिका की पूजा ठाकुर करते नहीं करवाते आये है और मैं उसी कुल से हु जो की सदियों से माँ अस्तिका की पूजा करते आये है.

पब – ोुह्ह्ह अच्छा तो ये बात है. फिर तो आप उन देवी के बारे में सब जानते होंगे.

मणि – हाँ, उनका नाम है अस्तिका देवी, कियोकि उनके 8 रूप है. और सभी रूप उन्होंने नारी हिट के लिए hi लिए है. वो नारी हिट के लिए hi प्रकट हुयी थी. जब समाज में नारियो पैर जुल्म आदिक होने लगा तब वो नारी हिट के लिए प्रकट हुयी और उन्होंने नारियो को समाज में एक सम्माजनक दर्जा दिलवाया.

पब – हम्म ये तो बहुत hi अच्छी देवी है, जो नारी हिट के लिए प्रकट हुयी.

फिर सभी लोग अपनी तैयारी पूरी करके सो गए. अगले दिन सुबह जल्दी hi ये सब लोग देवी दर्शन के लिए निकल गए. जाने वालो में – पब, गुरु, कामिनी, ऐडा, सविता, अंकिता, पारी, एरिका, माहि, माउद, पेय और गोपाल थे. साक्षी और रेनू अपने बापू की मदत के लिए हवेली में hi रुक गयी थी. इन्होने सैंडी को भी अपने साथ ले लिया था. 3 ऑवर के सफर के बाद ये लोग 2 कार्स से मंदिर पहुंच गए. ऐडा पुरे नयी दुल्हन के गेटउप में थी.

कामिनी, ऐडा, गुरु और पब पूजा करने लगे बाकि सब वह खड़े इनको देख रहे थे. एक वह का पंडित भी इनके साथ में पूजा करवा रहा था. जब गुरु ने मणि के बताये मंत्रो का उच्चारद करना सुरु किया तो वो पंडित मुँह खोले गुरु को देखता रहा गया. एक 18 साल की लड़की उन मंत्रो का जप कर रही थी. जनको वो लोग भी ठीक से नहीं जानते थे. वो तो पीछे हो गया. और आगे की पूजा गुरु और पब, ऐडा ने hi पूरी की. जैसे जैसे पूजा आगे बाद रही थी वैसे -2 मोषम भी चेंज हो रहा था. पूजा पूरी होते हुए बहुत hi खुशनुमा मौसम हो चुक्का था.

पब अभी भी आखें बंद किये अस्तिका देवी का नाम जप रहा था. एक दम उसके कान में आवाज आयी – आखें खोलो पुत्र.. मैं तुम्हारी पूजा से खुश हु. बहुत समय के बाद किसी ने पुरे विदी विद्वान से मेरी पूजा की है. और तुमने जो भानु को मर कर उन लड़कियों को बचाया है मैं उससे तो तुमसे बहुत खुश हु.

पब ने जब आखें खोली तो सामने देवी की मूर्ति जीवित हो चुकी थी. और वो hi बोल रही थी. जब उसने चारो और देख तो सब ऐसे हो गए थे की किसी ने सबको मूर्ति बना दिया हो. जो मूर्ति थी वो बोल रही थी और जो इंसान थे वो मूर्ति जैसे हो गए थे. ये देख कर पब तोड़ा गहरा गया. उसकी मनो दशा देख कर देवी बोली – चिंता मत करो पुत्र से सब कुछ देर के लिए है ये सब फिर से ठीक हो जायेगे. तुम चिंता मत करो.

पब – मैं आज दांया हो गया जो एक देवी के दर्शन मुझको मिल गए.

देवी – मैं तुमसे बहुत खुश हु और तुमको वरदान में 2 सकतिया देना चाहती हु. परन्तु उससे पहले तुमको कुछ करना होगा.

पब – देवी माँ मैं तो आपके दर्शन से hi दांया हो गया हु. फिर भी आप यदि कुछ देना चाहती है और मुझको अपनी सेवा का मौका देना चाहती है तो ये भी मेरे लिए ख़ुशी की बात होगी. बताई माँ क्या आदेश है मेरे लिए…

देवी – तुम यदि वो 2 सकतिया पाना चाहते हो तो तुमको 21 कुवारी लड़कियों की बलि देनी होगी. वैसे भी तुम्हारे पास में तो बहुत साडी लड़किया है. ये तुम आराम से कर सकते हो.

देवी की बात सुन कर पब को गुस्सा आ गया. फिर भी वो आराम से बोलै

पब – किसी बात करती है आप, एप क देवी हो कर लड़कियों की बलि चाहती है. मैं ये कैसे कर सकता हु. वैसे तो आप भी नारी हिट के लिए प्रकट हुयी थी. और आज आप खुद hi नारी की बलि चाहती है.

देवी – हाँ तुम सच बोल रहे हो. मैं नारी हिट के लिए hi आयी हु इस दुनिया में. और नारी hi मेरी सकती है. तुम जिन लड़कियों की बलि डोज उनसे मुझको बल मिलेगा. और उस ताकत से hi मैं तुमको वो सकतिया दे पाउगी.

पब – यदि ये बात है तो मुझको कोई भी शक्ति नहीं चाहिए. मुझको कोई भी पावर नहीं चाहिए. आप जा सकती है. पैर मैं किसी भी लड़की की बलि नहीं दे सकता. मेने उन लड़कियों को इसलिए नहीं बचाया था की मैं उनकी बलि दे सकू. उनके सरीर पैर एक खरोच भी नहीं देख सकता मैं. आप उनको मरने की बात कर रही है. मैं नहीं मंटा की आप कोई देवी भी है.

देवी (गुस्से से)– तुम हमारा अपमान कर रहे हो पुत्र. तुम जानते नहीं इसका क्या परिडाम हो सकता है.

पब – मेरा आपका अपमान करने का कोई उदेशय नहीं था. मैं तो खुद hi आपकी पूजा करने आया था. पैर आप जो कहा रही है वो मेरे लिए सम्भब नहीं है. मैं पावर पाने के लिए किसी नारी को मरना तो दूर उसका दिल भी नहीं दुखाना चाहता हु. ये तो मेरी मज़बूरी है की मैं अपनी पत्नियों को खुश नहीं कर प् रहा. नहीं तो इन सबकी ख़ुशी के लिए मैं कुछ भी कर सकता हु.
 
अपडेट 119 (मेगा अपडेट)

पब – मेरा आपका अपमान करने का कोई उदेशय नहीं था. मैं तो खुद hi आपकी पूजा करने आया था. पैर आप जो कहा रही है वो मेरे लिए सम्भब नहीं है. मैं पावर पाने के लिए किसी नारी को मरना तो दूर उसका दिल भी नहीं दुखाना चाहता हु. ये तो मेरी मज़बूरी है की मैं अपनी पत्नियों को खुश नहीं कर प् रहा. नहीं तो इन सबकी ख़ुशी के लिए मैं कुछ भी कर सकता हु.

देवी (एक दम मुस्कुराते हुए) – तुम सच में मेरी शक्तियों के हकदार हो. तुम मेरी परीक्षा में पास हो गए. अब मैं तुमको वो सकतिया दूगी जो तुम्हारे इस युद्ध में तुम्हारे बहुत काम आएगी.

पब – क्या कहा अपने?? अब मेरा टेस्ट ले रही थी. पैर क्यों??

देवी – वो इसलिए कियोकि मुझको लगा की तुम भी नारी जाती का इस्तेमाल कर रहे हो अपनी पावर्स पाने के लिए. जैसे की भानु पैसे के लिए किसी भी हद तक जा सकता था. वैसे हो सकता था की तुम भी ताकत पाने के लिए नारी जाती का इस्तमाल कर रहे होते. पैर तुम्हारे दिल में नारी जाती के लिए प्रेम है, सामान है तुम उसकी रक्षा करना जानते हो. तुम एक सच्चे और अच्छे मर्द हो.

पब – और यदि मैं बलि के लिए हाँ कहता तो आप क्या करती??

देवी – उसी पल तुमको मार देती. पैर तुमने ऐसा कुछ नहीं किया. तुम मानव कल्याण के लिए बने हो. रानी दक्षसूरी ने तुमको रही चुना है इस काम के लिए. तुम hi अब समाज के उप्पेर आ रहे कतरे को ताल सकते हो. तुम दांया हो. तुम्हारी माँ दांया है जिन्होंने तुम जैसे पुत्र को जनम दिया है. मैं तुमको अपनी सकती देती हु. तुम अब किसी का भी रूप प् सकते हो. या अपनी किसी भी पत्नी के रूप को बदल सकते हो.

इसके बाद एक रौशनी देवी के हाथो से पब के सरीर में समां गयी. और फिर देवी बोली – मैं तुमको ये अद्भुत शक्ति भी देती हु जो की मुझे महादेव से मिली है. इसका वार बहुत शक्तिशाली है.

फिर से एक रौशनी पब के सरीर में चली गयी. पब को अपने सरीर में बहुत एनर्जी फील हो रही थी. फिर देवी बोली – तुमको जब भी अपना रूप बदलना हो तुम उस रूप के बारे में सोच कर मेरा नाम अपने मन मैं लेना. तुम्हारा रूप बदल जायेगा. और महादेव को याद करके जब अपने हाट को आगे करोगे तो एक रौशनी तुम्हारे हाथ से निकल कर तुम्हारे दुसमन को नष्ट कर देगी.

ये बोल कर देवी की मूर्ति फिर से मूर्ति बन गयी और सभी फिर से पूजा करने लगे. किसी को पता नहीं था की देवी आयी और उन्होंने पब को पावर दी. पब ने पूजा पूरी होने पर मूर्ति के सामने लेट कर उनको प्रदम किया और सभी के साथ बहार आ गया. कुछ देर में सभी एक रेस्टोरेंट में बैठे लंच कर रहे थे. सुबह से सब खुखे थे तो सब खाने में बिजी थे. पब अपना खाना खा कर गुरु को इसारे से बुला कर अपने साथ उस रेस्ट्रोरेंट के पीछे ले गया. वह उसने गुरु को वो सब बताया गुरु बहुत खुश हो गयी. और बोली की इसके बारे मैं तुम किसी को मत बताना. फिर पब ने गुरु के सामने मणि का रूप ले लिया. और फिर गुरु को अवनि का रूप दिया. वो से सब आराम से कर प् रहा था. फिर अपने रूप में आ कर ये दोनों भी सबके पास आ गए. और सब चल दिए घर की और….

घर पहुंच कर सब थकन के कारन सो गए. और यहाँ घर पैर मणि और दीनदयाल ने काजल, जय और अवनि की हेल्प से हवन की पूरी तैयारी कर ली थी. नेक्स्ट डे माहि की जिंदगी का सबसे खास दिन था. माहि को उसके सपनो का राजा मिलने वाला था. देसरी तरफ पब भी अपनी सबसे अच्छी दोस्त को अपनी पत्नी के रूप में प् कर खुश था. पैर जैसे पब के फेस पैर ख़ुशी का नामोनिशान नहीं था. अभी भी उसके मंद में उसकी माँ के साथ लुए जुर्म hi थे. और उसका वो गुस्सा उसके दिल को जला रहा था.

सब अपने कामो में बिजी थे. और पब अपनी सोच में अपने रूम में था. एरिका फील कर रही थी की पब बहुत दुखी है. अभी तक पब की माँ के बारे में सबको पता चल चुक्का था. जुली तो सर्मिंदगी से पब के सामने hi नहीं आयी थी अभी तक. माहि को गुरु ने अवनि, साक्षी और सैंडी के साथ ब्यूटी पार्लर भेज दिया था. और वो अपनी तैयारी में बिजी थी.

जब एरिका को पब का दुःख देखा नहीं गया तब उसने इसे थोड़ा काम करने का सोचा. तो वो पब के पास जा कर बेथ गयी. और उससे प्यार भरी बाते करने लगी. पब को भी एरिका के प्यार के मलहम से आराम मिलने लगा. कुछ देर मैं ऐडा और पारी भी वह आ गए. और पारी को तो आप जानते है पब के लिए कुछ भी करने को हर टाइम पागल रहती है. तो उसने पब के साथ मस्ती करना सुरु कर दिया. एरिका को थोड़ा अजीब लग रहा था पैर वो भी जानती थी की ये सब तो अब होगा hi. सब की सब एक आदमी की पत्निया जो थी.

पारी ने मस्ती करते हुए पब का लुंड पेण्ट के उप्पेर से hi पकड़ लिया और बोली – आज तो ये एक और नया सीकर करने वाला है. एक और काली को मसल कर फूल बालने बाला है.

पब जो की इन सबकी प्यार भरी बातो से कुछ रिलैक्स हो चुक्का था तो वो भी पारी की इस हरकत का मज़ा लेने लगा. और पारी की स्कर्ट में हाथ दाल कर उसकी छूट को मुट्ठी में भींच कर बोलै – क्यों तेरी छूट में आग हो रही है क्या. कहे तो इसका पानी निकल दू.

पारी – आआह्ह्ह्ह रोका किसने है मैं तो कब से अपना पानी निकलने के लिए तड़प रही हु.

पब ने पारी की छूट को छोड़ कर, एक हाथ एरिका की छूट को जेन्स के उप्पेर से hi पकड़ लिया और दूसरे हाथ से ऐडा की फ्रॉक में हाथ दाल दिया. तो पब को पता चला ऐडा ने पंतय नहीं पहनी है. हाथ सीधा उसकी छूट पे जा लगा. और उसकी भाप छोड़ती छूट को सहलाने लगा और बोलै – तुम दोनों की छूटो के क्या हाल है. तुमको भी निकलवाना है क्या अपना पानी…

एरिका – आअह्ह्ह ऐसा मत करो, फिर तुम छोड़ोगे भी नहीं तो मेरी तड़फ बाद जाएगी.

ऐडा तो पब से लिपट गयी और एक दर्द और मज़े से भरी सिसकी मुँह से निकली – ोुह्ह्ह्ह आअह्ह्ह्ह क्या कर रहे है आप दर्द होता है. पैर अच्छा भी लग रहा है अपनी उस पैर आपका हाथ..

पब – मुझको लगता है तुम तीनो का आज पानी निकलना hi होगा. आ जो मेरी रानियों और ये कपडे निकल दो.

ये सुनते hi पारी ने सबसे पहले अपने कपडे निकले. तो पब ने उसे अपनी गॉड में बिठा लिया. और उसको अपने कपडे निकलने को इसरा किया. ऐडा और एरिका को थोड़ी जीजाक हो रही थी. फिर भी एरिका भी नंगी हो गयी. और एरिका की गुलाबी छूट को देखते hi पब ने उस पैर हाथ रख कर सहलाने लगा. ऐडा जब नंगी हुयी तो पब ने उसके एक चुके को मसल दिया. पारी ने इतनी देर में पब के कपडे भी निकल दिए. और वो पब के सीने पैर किश करने लगी. और पब इन दोनों के जिस्म से खेलने लगा. सभी के मुँह से सिसकिया निकल रही थी. पब का लुंड फुल हार्ड हो कर पारी की गांड की दरार पैर रगड़ रहा था. पारी भी हिल-2 कर उसको रगड़ रही थी. कुछ देर में पब ने एरिका और ऐडा को बीएड के किनारे पैर लिटा दिया. और पब ने ऐडा की छूट पैर अपने होंठ रख दिए और ऐडा की छूट को चाटने लगा. और एक हाथ से एरिका की छूट को रगड़ने लगा. पारी तीनो को देख रही थी. पब ने उसको दूसरे हाथ से खींच कर निचे बिठा दिया और लुंड चूसने का इसरा किया. पारी खिशी से पब का लुंड मुँह में ले कर चूसने लगी. अभी हाल ये था की ऐडा बीएड के किनारे पैर लेती हुयी अपनी छूट चुसवा रही थी और पब जमीन पैर खड़ा जुक कर ऐडा की छूट में घुसा हुआ था तो उसका एक हाथ एरिका की छूट पैर था. और अपनी एक ऊँगली से उसकी छूट को चुद रहा था. पारी बीएड के किनारे जमीन पैर पब के निचे बैठी हुयी उसके लुंड को चूस रही थी. वैसे भी पारी इस काम में एक्सपर्ट थी. ऐडा और एरिका के मुँह से लगातार सिसकिया निकल रही थी. पब भी अपने लुंड को पारी के मुँह में पेल रहा था. पब अपना मुँह ऐडा की छूट से एरिका की छूट पैर रख देता. और फिर एरिका की छूट को चुस्त और ऐडा की छूट में फिंगर करने लगता है. थोड़ी hi देर मैं ये दोनों झाड़ जाती है. पब भी झड़ने के करीब था पैर वो खुद को रोक लेता है. और ऐडा और एरिका के उप्पेर से हैट कर पारी को गॉड में ले कर खड़ा हो जाता है. दोनों इस टाइम नंगे थे. पब पारी की आखों में देखते हुए उसके होंटो पैर अपने होंठ रख कर उनको चूस लेता है. और फिर पारी को उप्पेर उडाता है और उसकी छूट को मुँह के सामने ला कर उस कर 2-3 किश कर देता है. पारी की भी आठ निकल जाती है. आज पहले बार किसी मर्द ने पारी की छूट को चूमा था. पारी अभी अपनी छूट केर की गयी किस्सेस में खोई थी की पब एक दम उसको छोड़ देता है. पारी गिरने को होती है तो पब उसके पैरो को पकड़ कर उसे उल्टा कर देता है. ये सब इतनी जल्दी हुआ की पारी को पता hi नहीं चला की वो कैसे पब की बांहो से निकल कर उसके हैंतो में उलटी लटकी हुई है. पारी के मुँह से चीख निकल गयी. जो ऐडा और एरिका के कानो में गयी. जब इन दोनों ने देखा तो पारी पब के हाथो में उलटी लटकी है. पब के हाथो में पारी की दोनों टंगे है और पारी का फेस पब के घुटनो के पास है और उसके बाल जमीन पैर लहरा रहे है. पब ने पारी के छूट को इस कंडीशन में hi अपने मुँह के पास किया और उसको चूसने लगा. पारी पब के लिए किसी खिलोने की डॉल जितनी hi भरी थी. और पब जनता था की पारी को ऐसे उलटे साइड कामो में मज़ा आता है. इसलिए उसने एक दम से पारी को उल्टा कर दिया था. और उसकी छूट को चूसने लगा. पारी अपनी छूट पैर पब के होंटो को फील कर रही थी और आअह्ह्हेयी बार रही थी. पब ने पारी को लुंड चूसने का बोलै और फिर से उसकी छूट के छेद में अपनी जीब घुसा दी. और उसको जीब से छोड़ने लगा. पारी ने भी उलटे लटके हुए अपने आप को एडजेस्ट कर के अपने मुँह में पब के लुंड को ले hi लिया. और उसको चूसने लगी. पब पारी की छूट में इतना खो गया की उसको याद hi नहीं रहा की पारी को उल्टा लटकने में प्रॉब्लम हो रही होगी. पारी भी अपनी छूट चूसै का मज़ा ले रही थी. थोड़ी hi देर में पारी भी झाड़ गयी. और पब ने उसको निचे उतर दिया और तीनो को अपने लुंड के पास बैठा कर उसने मुँह पैर झड़ने लगा. तीनो पब के पानी को चाट -2 कर पिने लगी. और पूरा पानी पी गयी. फिर चारो फ्रेश हो कर बीएड पैर नंगे hi लेट गए. और प्यार भरी बाते करने लगे. अब पब के मन से वो गुस्सा वो दर्द कुछ काम हो चुक्का था. वैसे भी वो गुस्सा अब ख़तम तो हो hi नहीं सकता था. बस उस पैर प्यार की चादर डाली जा सकती थी.

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संभु किसी से मिल कर त्रिकाल के पास पंहुचा था. पहले उसके पेअर छूटा है फिर बोलता है

संभु – गुरूजी प्रदम, अभी -2 मुझको पता चला है की पब आज एक और शादी करने वाला है. पैर ये नहीं पता चला की किस्से करेगा. बस अनुमान है की दीनदयाल की बड़ी बेटी से कर रहा है.

त्रिकाल – वो किस्से शादी करता है इससे हमे कोई मतलब नहीं है, ये पता करो की कोण सी पावर वो लेने वाला है. और दीनदयाल का क्या हुआ. मारा या नहीं ??

संभु का सर सरम से झुक जाता है. संभु के फेस को देख कर hi त्रिकाल समाज जाता है की वो बच गया है.

त्रिकाल – किसने बचाया और अभी कहा है??

संभु – उसी पंकज ने hi बचाया था. और उसके पुरे परिवार को अपने साथ ले गया हवेली और अभी वह पैर मणि भी है. ये भी पता चला है की मणि ने पब को सब कुछ बता दिया है.

त्रिकाल – हम्म पैर ये मणि अभी तक वह क्यों है?? वो आश्रम को छोड़ का हवेली में क्यों रहा रहा है.

संभु – वो लोग कोई हवन करने वाले है. दीनदयाल के गाओं के मंदिर में. वो उस हवन को करके चला जायेगा. बेकार हवन है गुरुदेव, उस हवन से कुछ नहीं मिलने वाला उनको.

त्रिकाल संभु की बात सुन कर चौक जाता है. कियोकि जिस हवन में खुद मणि हिस्सा ले वो बेकार नहीं हो सकता. तो त्रिकाल अपनी आखें बंद करके अपनी पावर्स से पता करने लगता है की कोण सा और किसा हवन है. जब त्रिकाल आखें खोलता है तो वो गुस्सा होता है. जा कर एक चपत संभु के सर पर चिपका देता है.

त्रिकाल – मुर्ख वो हवन बेकार का नहीं है. अच्छे से अच्छा ज्ञानी भी उस हवन को करने की नहीं सोच सकता. और अभी जो उस मंदिर के हाल है (देवता का क्रेडिट होना) इस कंडीशन में तो केवल 2 लोग hi उस हवन को कर सकते है एक मैं और एक वो मणि. पहाड़ी देवता गुस्से में है तो हवन के दौरान बहुत परेशानी आएगी. मणि के सरीर को तोड़ देगा पहाड़ी देवता. और यदि मणि इस हवन में सफल हो गया तो पहाड़ी देवता उसको वरदान जरूर देगा.

संभु – सॉरी गुरूजी, मुझको लगा की ऐसा hi कोई हवन है.

त्रिकाल – नहीं ये हवन दीनदयान के गाओं में फिर से खुशहाली, प्रेम और अच्छी लाएगा. उस गाओं में जो गलत काम हो रहे है न वो सब देवता की नाराजगी के कारन है. पैर मुझको इससे कोई मतलब नहीं है. पैर अपने फायदे की बात ये है की यदि उस हवन के बिच में hi हम अटैक कर दे तो मणि को मरना ाशन होगा. उस टाइम वो एक दम कमजोर हो चुक्का होगा. और यदि हम किसी को मर भी नहीं पाए बस हवन को खंडित भी कर दिया तो भी मणि उस देवता के दिए हुए कस्तो से जिंदगी भर तड़पेगा. जैसे अभी दीनदयाल तड़प रहा है.

संभु – अटैक तो हम कर देंगे पैर वो पंकज?? जब मणि हवन पैर होगा तो पंकज उसकी सुरक्षा में होगा. उसके रहते हम कैसे सफल हो पाएंगे??

त्रिकाल – हम्म ये बात सही है. पैर अभी पंकज पैर लड़ना नहीं आता. और अभी उसके पास केवल फिजिकल पावर है. जिससे वो इंसानो को आराम से मार देता है. हाँ उसको कोई हरा नहीं सकता तो क्या हुआ रोक तो सकता है न. एक काम करो सबसे पहले उस मला रवि को बोलो की वो 400-500 आदमियों को ले कर वह पहुंच जाये पब को मरने के लिए. उसमे hi अपने कुछ 20-25 त्रिनेड फाइटर भी भेजो.

संभु – हो जायेगा गुरूजी..

त्रिकाल – अपनी सेना में अभी कोई है यौ ो सेना ख़तम हो चुकी है. (त्रिकाल ने अपनी पावर्स से एक सेना बनायीं थी 25 साल पहले. जिसने – जीन, वोल्फ्स, ड्रैगन, दानव और भी बहुत तरह के प्रादि थे. जो बहुत खतरनाक थे.)

संभु – गुरूजी वो सेना तो आपके बेहोश होते hi लुप्त हो गयी थी. पैर फिर मेने कुछ सिद्धि कई और आदमख़ाँ दानवो को अपने वश में कर लिया. 12 आदमखोर दानव है अपने पास.

त्रिकाल – बहुत अच्छे.. अच्छा काम किया है तुमने संभु. उन सभी को मानव रूप में उनके साथ hi भेज दो. पब फिजिकल पावर से उनको कभी नहीं मार सकता. वो किसी भी तरह के मानवो के वर को झेल सकते है. मानव उनका कुछ नहीं बिगड़ सकता. और पब के पास कोई तांत्रिक पावर है नहीं. अब आएगा मज़ा. देखता हु पब कैसे इतने आदमियों से अकेला लड़ पता है. और इस दानवो को किसे रोक पता है. इनको रोकने के लिए मणि को अपनी पावर्स उसे करनी होगी. और यदि वो हवन से उदा तो पहाड़ो के देवता नाराज हो जायेगे और यदि नहीं उदा तो भी इतने आदमियों की भीड़ hi सबको मार देगी….. हहहहहहह

संभु – जी गुरूजी ऐसा hi होगा. अबकी बार हम जरूर कामियाब होंगे.

त्रिकाल – हाँ संभु, चाहे पुरे न हो, पैर कुछ कामियाबी तो मिलेगी hi. देख अभी अपने 3 दुसमन है. और तीनो hi वह होंगे. रवि के आदमियों का फोकस पब होगा. तुम अपने फाइटर और दानवो का फोकस हवन को रोकने और दीनदयाल या मणि को मरने के लिए रखना. पब अकेला इतने आदमियों को मरे उससे पहले तुम्हारी सेना को ये तीनो काम करने होंगे. चाहे पब न मारे पैर यदि तुम इन तीनो कामो को कर सके तो भी ये हमारे लिए बड़ी कामियाबी होगी. मणि के मरने के बाद पब कुछ भी नहीं कर पायेगा. और फिर उसका भी कहे ख़तम hi संजो….. हाहाहाहाहा

संभु लग जाता है त्रिकाल के कहे अनुसार अपने काम में.

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ीदार इन सब से अनजान गुरु शादी की तैयारी में लगी थी. आज पब की माहि से शादी थी. सयम का टाइम हो गया था. पैर अभी तक माहि वापिस नहीं आयी थी. कामिनी ने जब अवनि को फ़ोन किया तो अवनि ने बताया की वो सब 1 हॉर्स में वह पहुंच जायेगे. गुरु की तैयारी पूरी हो चुकी थी. तो गुरु पब के रूम में चली गयी उसे तैयार होने के लिए बोलने. जब गुरु रूम में पहुंची तो सामने का सीन देख कर उसके होंटो पैर मुस्कान आ गयी.
 
अपडेट 120

ीदार इन सब से अनजान गुरु शादी की तैयारी में लगी थी. आज पब की माहि से शादी थी. सयम का टाइम हो गया था. पैर अभी तक माहि वापिस नहीं आयी थी. कामिनी ने जब अवनि को फ़ोन किया तो अवनि ने बताया की वो सब 1 हॉर्स में वह पहुंच जायेगे. गुरु की तैयारी पूरी हो चुकी थी. तो गुरु पब के रूम में चली गयी उसे तैयार होने के लिए बोलने. जब गुरु रूम में पहुंची तो सामने का सीन देख कर उसके होंटो पैर मुस्कान आ गयी. अभी भी चोरो नंगे hi सो रहे थे. और एक दूसरे से लिपटे हुए थे. बीएड के किनारे पैर एरिका फिर पब, उसके दूसरी और पारी और पारी के लगभग उप्पेर ऐडा सो रही थी. गुरु बीएड के पास जा कर पब को देकने लगी. इस टाइम उसके फेस एक मासूम बच्चे के जैसा दिख रहा था. फेस पैर एक सुकून था. एक मासूमियत थी. कुछ देर तक तो गुरु उसको यु hi देखती रही. फिर उसने पब को बड़े प्यार से उदय. पब ने जब अपनी आखें खोली तो उसके सामने गुरु का मुस्कुराता हुआ सुन्दर सा चेहरा था. पब ने उसके फेस को पकड़ कर अपने उप्पेर झुका लिया और उसके होंटो को चूसने लगा. गुरु भी सब भूल कर पब का साथ देने लगी. और किश करते हुए गुरु ने अपने हाथो को निचे रखा तो वो एरिका के बूब्स के उप्पेर ठीक गया. गुरु को होश hi नहीं था की उसके हाथ के निचे एरिका का चुका डाब रहा है. एरिका अपने चुके पैर दबाब फील करने से जग गयी और देखने लगी की गुरु और पब किश कर रहे है तो उसने भी अपने फेस के उप्पेर झूल रहे गुरु के चुचो को कपडे के उप्पेर से hi अपने मुँह में ले लिया और चूसने लगी. गुरु का डायन जब उस और गया तो उसने भी एरिका के चुके को मसल दिया. पैर अपनी किश नहीं थोड़ी. पैर जब दोनों की सासे उखाड़ने लगी तो दोनों को अलग होना hi पड़ा. पब ने अपनी सासो को जल्दी से ठीक करके गुरु को अपनी और खींचा तो गुरु उन सबके उप्पेर गिर गयी. पारी और ऐडा भी गुरु के गिरने से हड़बड़ा केर उड़ कर बेथ गयी. गुरु ने भी खुद को पब से छुड़ा कर कड़ी हो गयी.

गुरु – जनाब आज बहुत मस्ती सूज रही है. इस मस्ती को माहि के लिए बचा कर रखो. और जल्दी से तैयार हो कर निचे आ जाओ. माहि भी आने वाली है. फिर तुम दोनों की शादी होगी. आज रात को अपनी साडी मस्ती माहि के साथ करना अभी जल्दी से ऊधो लेट हो रहा है.

और ये कहा कर गुरु भाग गयी. कियोकि पब उसे फिर से पकड़ने वाला था. उसके जाने के बाद ये तीनो लड़किया भी अपने कपडे पहन कर अपने -2 रूम में चली गयी. और पब भी तैयार होने लगा.

जब पब हॉल में पंहुचा तो वह पैर सब मौजूद थे. पब की सभी पत्निया पब को दूल्हे के रूप में देख कर अपनी अपनी शादी को याद काने लगी. पब जा कर हवन खुद के पास बेथ गया. उसके बैठते hi मणि जी भी वह बेथ गए. दीनदयाल के कहने पैर ये शादी मणि जी करवाने वाले थे. पब भी उनको वह बैठता देख कर hi समाज गया की आज शादी मणि जी करवाएंगे. शादी के मंत्र सुरु हुए. फिर साक्षी अपनी बहिन को लेने चली गयी. जब माहि वह आयी तो पब तो उसको एक बार पहचान hi नहीं पाया. माहि को देख कर मेरा मुँह खुला का खुला रहा गया. माहि आज बहुत सुन्दर लग रही थी. शादी के लाल जोड़े में वो एक पारी लग रही थी. उसके सावले रंग को मेकअप ने कवर कर दिया था. फेस कटाई तो पहले से hi अच्छी थी. और वो जो खुद hi अपने आप को बदसूरत बनाना के लिए करती थी और सब भी हैट चुक्का था. आज साक्षी भी क़यामत ध रही थी. माहि जितनी तो नहीं फिर भी अच्छी लग रही थी. पैर पब का डायन तो माहि पैर hi था. माहि कब उसके पास आ कर बेथ गयी उसे पता hi नहीं चला वो तो अभी भी माहि को hi घर रहा था. माहि भी दिल hi दिल खुस थी. और सरम भी उसे बहुत आ रही थी वह सबके सामने उसका पति उसे ऐसे घर रहा था की अभी खा hi जायेगा.

माहि साक्षी के साथ आयी थी तो साक्षी ने माहि को वह बिठा कर पब के फेस की आगे चुटकी बाजकी और बोली – मुँह बंद करो जीजू नहीं तो माखी घुस जाएगी.

पब भी साक्षी की हरकत से हड़बड़ा गया. जिसे देख कर सब हसने लगे. और पब सरम ने नजरे झुका कर बेथ गया. फिर सुरु हुयी वो किरिया जिससे माहि और पब की शादी भी होनी थी और पब को एक वरदान भी मिलना था. जब सब हो गया तो पब और माहि का खून भी हवन खुद में डाला गया. फिर सब लोग डिनर करने बेथ गए. पैर मणि और दीनदयाल सैंडी और गुरु के साथ माहि के गाओं के मंदिर पहुंच गए. वह भी कुछ तैयारी करनी थी. गुरु जाने से पहले पब और माहि को सब समजा गयी थी. और पब को बता गयी की क्या वर मग्न है.

“‘हे डलासुर और दक्षसूरी माँ, मेरे को संसार के सभी ग्रांटों का, सभी प्रकार के तंत्र और मंत्रो का ज्ञान दो. मेरे पास हर प्रकार का ज्ञान हो.”

गुरु, दीनदयान और मणि के जाने के बाद तो सब खुल कर मस्ती करने लगे. साक्षी और रेनू ने तो पब को बहुत परेशां कर रखा था. ऐडा और पारी भी इनका साथ दे रही थी. पब भी अपनी सलियो के साथ हाशि मजाक करके बहुत खुश था. सभी लोगो का डिनर हो चुक्का था. सविता ने माहि को पब के रूम में पंहुचा दिया था. और पब की सलिया उसे जाने नहीं दे रही थी. बड़ी मुश्किल से अपनी जान बचा कर पब अपने रूम में आया था. और जैसे hi वो रूम का गेट बंद करने को हुआ. पब के पीछे पटखौ की आवाज आने लगी. ये काम गोपाल का था जो उसने साक्षी के कहने पैर किया था. पब पटाखों की आवाज से एक दम बहार को भगा. और बहार सब खड़े है रहे थे. सविता भी इनका साथ दे रही थी. काजल और जय भी पब को परेशां कर रहे थे. माहि बीएड पैर बैठी अपने साजन का इन्तजार कर रही थी. न जाने कितने सालो के इन्तजार का फल आज उसे मिला था. जब सबको पब को छेड़ते हुए बहुत देर हो गयी तो सविता और कामिनी ने hi सबको संत किया और पब को रूम में भेज दिया.

पब भी जल्दी से रूम में आ गया और एक दम से रूम लॉक कर लिया. उसे दर था की कही फिर से सब सुरु न हो जाये. जब रूम लॉक कर लिया तो वही खड़ा गहरी -2 सास लेने लगा जैसे की बहुत भाग कर आया हो. फिर उसने अपने आप को ठीक किया और बीएड की और बाद गया
 
भाई त्रिकाल पहले अपनी दिव्या दृष्टि से पब पैर नजर रखता था. पैर मणि ने हवेली पैर शील्ड बना कर त्रिकाल को रोक लिया. अब घर के बहार hi त्रिकाल पब पैर नजर रख पता है. पैर पब कब बहार है और कब नहीं ये भी एक बड़ी प्रॉब्लम है उसके लिए.

इसलिए संभु ने पब के घर के आस पास अपने आदमी लगा रखे है. जो इन दोनों को इनफार्मेशन देते है. ऐसे hi मणि ने भी लगा रखे है तभी तो मणि को पता चला की 120 दिन में त्रिकाल की सड़ना पूरी हो जाएगी. और जिस टाइम देवी प्रकट हुयी थी उस टाइम उन्होंने टाइम को रोक दिया था. जैसे की मेने बताया वह सब फ्रीज हो गए थे.

गुरु ने भी इसलिए hi मन किया है कियोकि गुरु और मणि दोनों जानते है त्रिकाल उन पैर नजर रखता है.

देखिये फ्यूचर में क्या होता है. पैर सबसे बड़ी बात है की त्रिकाल ने भी प्लानिंग उलटी की है कियोकि हवन पैर पब को बैठना है न की मणि को...

थैंक यू सो मच बीआरओ फॉर योर सुपर रिव्यु.... ी रियली वैरी हैप्पी तो सी ुर कमैंट्स.....
 
अपडेट 121

पब भी जल्दी से रूम में आ गया और एक दम से रूम लॉक कर लिया. उसे दर था की कही फिर से सब सुरु न हो जाये. जब रूम लॉक कर लिया तो वही खड़ा गहरी -2 सास लेने लगा जैसे की बहुत भाग कर आया हो. फिर उसने अपने आप को ठीक किया और बीएड की और बाद गया. माहि तो पब के कदमो की आहत सुन कर और भी सुकड़ने लगी. उसे बहुत सरम आ रही थी. सायद माहि पब की सबसे ज्यादा शर्मीली पत्नी थी. पब भी माहि के पास जा कर बेथ गया. पब के बैठते hi माहि उडी और पब के पेअर चुने लगी तो पब ने उसे अपनी बांहो में बार लिया. माहि तो मरे सरम के पब से लिपट गयी. और चेहरा पब के सीने में छुपा लिया. दोनों पास में बैठे एक दूसरे की बांहो में थे. माहि ने लाल साडी पहनी थी. उसके ब्लाउज का पीछे का हिस्सा बहुत छोटा था. और गाला भी बड़ा था. अवनि और साक्षी के कारन hi उसने इसे पहन लिया था. नहीं तो वो कभी ऐसे कपडे नहीं पहनती थी. पैर उसने अपने ब्लाउज को अपनी साड़ी से अच्छे से कवर किया हुआ था. पब उसे बांहो में लिए बैठा था. और उसके हाथ उसकी पथ पैर चल रहे थे. पब ने साड़ी को एक साइड कर दिया था. और उसकी नंगी पथ पैर हाथ फेर रहा था. माहि तो इतने से hi शर्मा रही थी. और उसने आखें बंद कर राखी थी. उसका फेस अभी भी पब के सीने पैर था. माहि की गरम सासे पब के सीने में आग लगा रही थी. पब ने माहि के फेस को पकड़ कर उप्पेर करना चाहा तो माहि ने आखें और जोर से भींच ली. पब ने अपने होंटो को माहि के होंटो की और बड़ा दिया. तो माहि ने ये महसूस करते hi अपने फेस को दूसरी तरफ कर दिया. उसकी सरम उसे कुछ भी करने नहीं दे रही थी. वो भी चाहती थी की वो अपने पति, अपने साजन के साथ प्यार करे पैर वो अपनी सरम को ख़तम नहीं कर प् रही थी.

पब ने जब ये देखा की माहि ने अपना फेस दूसरी और कर लिया है. तो उसके फेस को पकड़ कर गुमने लगा. पैर माहि ऐसा होने नहीं दे रही थी. तो पब ने एक दम से उसे छोड़ दिया. और उससे अलग हो कर बेथ गया. जैसे hi पब में माहि को छोड़ा माहि तो जैसे आसमान से जमीन पैर hi गिर गयी. वो समाज गयी की उसका पति उससे नाराज हो गया है. उसने तुर्रंत आखें खोली और पब की और देखा तो वो बीएड का सहारा ले कर एक साइड बैठा हुआ उसे देख रहा था. और उसके फेस पैर नाराजगी की जगह प्यार चालक रहा था. उस प्यार को देख कर माहि की आखों में 2 आशु आ गए. उसे लगा की पब नाराज होगा उसने हरकत hi ऐसी की थी. पैर ये तो अभी भी प्यार से उसकी और देख रहा है ये सोच कर hi माहि की आखें जलक गयी.

पब – क्या हुआ माहि रो क्यों रही हो??

माहि (अपना सर निचे करते हुए) – मैं बहुत बुरी हु न. जो आपका साथ नहीं दे प् रही हु.

पब – नहीं माहि तुम बहुत अच्छी हो. और तुमने हमेश hi मेरा साथ दिया है. और आज भी डौगी ये मैं जनता हु. देखो मेरी आखों में…

माहि में पब के कहने पैर अपनी नजरे उदा कर देखा दोनों की नजरे मिल गयी. और दोनों ऐसे hi कुछ देर बैठे रहे. फिर ये छुपी पब ने hi थोड़ी.

पब – माहि तुम इतना क्यों शर्मा रही हो. हम आज पहली बार तो साथ में नहीं है. न जाने कितनी बार तुमने मुझको बीमारी में अपनी गाओं में सुलाया है. और हम बहुत बार पूरी पूरी रात पड़ते हुए साथ में रहे है तो आज क्यों शर्मा रही हो.

माहि – तब की बात और थी. तब आप मेरे दोस्त थे. और मुझको आप पर यकीं था की आप मेरे साथ कुछ भी नहीं करेंगे. पैर आज आप मेरे पति है और ये हमारी सुहागरात है तो मुझको भी पता है की क्या होना है और मैं भी वो सब करना चाहती हु पैर मुझको बहुत शर्म आ रही है. और सरम के मरे में कुछ कर नहीं प् रही…

पब – नहीं माहि ऐसा नहीं है मैं आज भी तुम्हारा वही दोस्त हु. और यकीन करो तुम्हारी मर्जी के बिना मैं कुछ भी नहीं करुगा. और कर भी नहीं सकता. तुम भूल जाओ की हम अब पति पत्नी है. हम पहले भी दोस्त थे और आगे भी दोस्तों की तरह hi रहेंगे.

माहि – सच में हम आगे भी दोस्त की तरह hi रहेंगे??

पब – हाँ मेरी माहि, तुम hi तो होए क जो मेरी दोस्त हो. मैं अपनी पैरी दोस्त को कैसे खो सकता हु. ….. आज नहीं सुलाओगी मुझको अपनी गोदी में पहले की तरह…

माहि पब की बात से खुश हो गयी और बीएड के दूसरे किनारे पर बेथ गयी और पब को अपनी गोद में सुला हिय. पब ने उसकी गॉड में लेट कर उसकी आखों में डेगते हुए प्यार से उसके गालो को सहला दिया. तो माहि उसकी उप्पेर जुक गयी पब ने उसके फेस को पकड़ कर अपनी और किया और उसके माथे को चुम लिया. ये चुम्बन माहि को एक नयी अनुभूति दे गया. फिर दोनों एक दूसरे को देखने लगे. अब पब ने माहि की पथ कर अपना हाथ चलना सुरु कर दिया. माहि के बूब्स उसकी गॉड में लेते होने पैर बहुत बड़े-2 लग रहे थे. पब ने उसकी आखों में देखते हुए पथ पर हाथ चलना जारी रखा. और धिरे से उसकी ब्लाउज की डोरी को खोल दिया. और उसके ब्लौसे कोप ेथ से हटा दिया. उसका ब्लाउज उसके कंडे पैर झूल रहा था. अब पथ पैर केवल ब्रा की स्ट्रिप थी. जो पब में हाथो में आ रही थी. माहि की सासे गरम होने लगी थी. उसे सरम तो आ रही थी पैर वो फिर से पब को नाराज नहीं करना चाहती थी. और उसे मज़ा भी आ रहा था. पब ने भी जब देखा की माहि ब्लाउज खोलने पैर शांत है तो उसने उसकी ब्रा का हुक भी खोल दिया अभी उसकी पथ पूरी नंगी थी और पब का हाथ उसकी नंगी पथ को सहला रहा था. माहि को जब अपनी पूरी नागि पथ पैर पब का हाथ बहुत अच्छा फील हो रहा था. उसकी आखें बंद हो चुकी थी. उसकी छूट से 2 बून्द पानी उसकी पंतय में समां चुक्का था. पब ने माहि के पेट की और कार्बेट ले कर उसके पेट पैर अपने होंठ रख दिए. और हाथ को उसके साइड से बूब्स की साइड तक ले जाने लगा. अपनी पेट पैर पब के होंठ और गरम साँसों को और हाथ को फील करके माहि आखें बंद किये कहरा उडी थी. पब उसके पेट को चाटने लगा और उप्पेर की और बढ़ने लगा. उसका मुँह अब बूब के निचले हिस्से पर था. जो ब्लाउज से डाका हुआ था. पब ने उसे थोड़ा उप्पेर को कर दिया तो माहि के दोनों संतरे जैसे बूब्स नंगे हो कर उसकी आखों के सामने थे. पब ने एक बूब्स को अपने हाथो में पकता कर सहलाने लगा तो दूसरे बूब्स पैर निचे से उसके निप्पल तक चाटने लगा. माहि तो आह्हः आअह्ह्ह करती रही और पब उसके बूब्स से खेलता रहा. जब उसका मान उसके बूब्स से भर गया तो वो उसकी गोद से उदा और उसको बीएड पैर लिटा दिया. माहि की आखें अभी भी बंद थी. उसकी छूट में भूचाल आया हुआ था. सरम अभी भी बाकि थी. पब अब अपने काम में लगा हुआ था.

माहि को लिटाते hi पब ने अपने कपडे उतर दिए. और केवल अंडरवियर में माहि के पास लेट गया. और उसके बूब्स को सहलाने लगा. फिर उसने धिरे से उसके ब्लाउज और ब्रा को उसके हाथो से निकल कर रख दिया. अब माहि उप्पेर से नंगी गले में गोल्ड सेट पहने लेती थी. उसके पुरे गहने अभी भी उसके सरीर पैर थे. केवल उसके सरीर से उप्पेर के कपडे हेट थे. पब ने माहि को अपने से चुपके लिया और उसकी गांड पैर हाथ फेरने लगा. माहि गरम होने लगी थी. पब ने उसकी गांड को सहलाते हुए उसके होंटो को अपने मुँह में भर लिया और उनको चूसने लगा. माहि भी अब उसका साथ देने लगी. माहि का तो ये पहला किश था तो इस किश को फील करके उसकी मुनिया ने आशु बहाना शुरू कर दिया. माहि के बूब्स पब के सीने में दबे पड़े थे. जो पब के हिलने से उसके सीने पैर रगड़ रहे थे. पब को भी उसके चुचो का अहसास पागल कर रहा था. तो पब किश तोड़ कर उसके चुचो पैर आ गया. और उसके निप्पल को मुँह में ले कर लेते -2 चूसने लगा. इससे माहि के सरीर में एक सिरहन सी दूध गयी. और वो पब के सर को अपने चुचो पैर दबाने लगी. अभी तक पब का हाथ उसकी साड़ी को पेटीकोट को उप्पेर उदा चुक्का था. तो पब ने उसके पेटीकोट में हाथ गुसा दिया और सीडी उसकी पंतय के उप्पेर से उसकी छूट पैर रख दिया. पब का हाथ अपनी छूट पैर फील करते hi माहि का साबरा टूट गया और वो झड़ने लगी. उसकी टंगे जोर से भींच गयी और ुमने पब का हाथ दबा रहा गया.

जब माहि झाड़ कर नार्मल हुयी तब उसने अपने बदन को ढीला किया तो पब ने उसकी पंतय को साइड में कर उसकी छूट की लाइन पैर ऊँगली फिर दी. माहि की तो फिर से आह्हः निकल गयी. अब पब पैर भी साबरा नहीं हो रहा था तो उसने माहि के कहा

पब – माहि अब हमको मंत्र पद लेना चाहिए.

माहि ने भी हाँ में सर हिला दिया. और मंत्र पड़ने लगी तो पब ने उसे रोका और बोलै – मैडम जैसे नहीं पहले पूरी नंगी हो जब मंत्र पदों नहीं तो ये किरिया पूरी नहीं होगी.

पब की बात सुन कर फिर से माहि की नजरे सरम से झुक गयी. और वो कड़ी हो गयी. पैर वो अपने कपडे नहीं उत्तर प् रही थी उसे सरम बहुत आ रही थी. पब उसे उप्पेर से नंगी देख कर अपने लुंड को मसल रहा था. और उसने एक hi जटके में अपना अंडरवियर निकल दिया. माहि की हो नजरे अभी भी निचे थी. उसको पता hi नहीं था की पब नंगा हो चुक्का है.

पब – माहि जल्दी करो क्यों तड़पा रही हो.

माहि पब की आवाज सुन कर उसकी और देखा तो उसका लुंड देख कर दर गयी और एक दम से पलट गयी. और बोली – ये क्या है.??

पब – क्यों तुमको नहीं पता??? आज ये hi तुमको जन्नत की सेर करवाएगा.

माहि – पैर ये तो बहुत बड़ा है और मेरी तो बहुत छोटी है ये उसने कैसे जायेगा.

पब – उसकी तुम चिंता मत करो. वो सब में देख लगा तुम अभी अपने कपडे उत्तरो…

पब ये कहता हुआ उसके पास पहुंच गया. और पीछे से उससे चिपक गया. उसका लुंड माहि की गांड में घुस रहा था और हाथ उसके चुचो पर थे. चुचो को दबाता हुआ. उसके कान की लुओ को चाट रहा था. और बोलै – उत्तरो न अपने कपडे. मुझको देखना है मेरी माहि कितनी सुन्दर है.

माहि – ये मुज पैर नहीं होगा आप hi कर दो न…

पब माहि की बात सुन कर उसकी साड़ी को खींचता है. तो माहि के गोल -2 घूमते हुए उसकी साड़ी उसके बदन से हैट जाती है. फिर पब अपना हाथ बड़ा कर उसके पेटीकोट के नारे को खींच देता है. नारा खुलते hi पब के हाथ एक इसारे से hi पेटीकोट माहि के पैरो में पड़ा था. पब थोड़ा पीछे हो कर माहि को घूरने लगता है. और अपनी आखों को माहि के नंगे बदन से सुकून पहुँचता है. माहि ये पब को घूरता देख पब से चिपक जाती है. तो पब उसके नंगे जिस्म पैर हाथ फेरने लगता है. पब का लुंड माहि के पेट ने छेद करने की कोसिस करने लगता है. उसकी चुंबन माहि को फिर से गरम कर रही थी. पब हाथ फेरते हुए माहि के लास्ट कपडे उसकी पंतय को भी खिसका देता है. और अपना हाथ उसकी छूट पैर रख कर सहलाने लगता है. माहि आह्हः ाःह करने लगती है. तो पब उसकी छूट को मसल देता है माहि की चिक निकल जाती है. और छूट से फिर पानी आ जाता है. माहि पब ने नजरे नहीं मिला प् रही थी. उसे सरम और वासना दोनों ने बुरी तरह जकड़ा हुआ था.

पब छूट मसल कर उससे अलग होता है और मंत्र पड़ने को बोलता है. तो दोनों लोग मंत्र पड़ते है. मंत्र पड़ने के कुछ hi पालो में माहि छोड़ने के लिए ुट्टावली हो जाती है. अभी उसकी सरम कहा थी उसे भी नहीं पता था. वो आगे आ कर पब का लुंड पकड़ लेती है और उसे हिलनी लगती है. और पब के सरीर पैर किश करने लगती है. पब भी उसके बदन पैर हाथ पैर रहा था. उसे मसल रहा था. दोनों hi एक दूसरे के बदन से खेल रहे थे. पब एक दम से माहि को गोद में उदा लेता है और उसे बीएड पैर लिटा देता है. और उसके उप्पेर चढ़ जाता है. पब उसके चुचो को मुँह में भर कर चूसते लगता है. तो कभी दन्त गदा देता है. माहि की सिसकिया तेज़ होती जा रही थी. पब चुचो से खेलने के बाद उसकी छूट की और बढ़ता है और उस पैर एक किश कर देता है. उसकी छूट ने गरम भाप निकल रही थी. जो पब को अपने होंटो पैर फील होती है. पब उस भाप और उसकी खुसबू से मगडमड हो कर छूट को चाटने लगता है. माहि की तो जैसे जान hi गले में अटक गयी हो. वो तेज़ -2 सासे ले रही थी. और जल बिन मछली की तरह तड़प रही थी. जब उससे रहा नहीं जाता तो बोलती है – क्यों तड़पा रहे हो कुछ करो न अब नहीं रहा जा रहा है. आआअह्ह्ह्हह कुछःह तो करूऊ जीईई…. Yu..tadpaaa क्यूँउउ रहे हो …..

अब माहि की छूट से पानी आने लगा था. माहि की छूट के पानी को चाट कर पब को अब देर करना सही नहीं लगा. तो वो उड़ कर उसके उप्पेर आ गया. और उसकी दोनों टैंगो को छोड़ा कर अपना लुंड माहि की छूट पैर रख दिया. और बोलै – तैयार हो माहि अब हम सदा के लिए एक होने वाले है. तुमको थोड़ा दर्द भी होगा. पैर फिर अच्छा भी लगेगा..

माहि ने हाँ में गार्डन हिला दी और उसके मुँह से हम्म्म hi निकला. वैसे hi पब का लुंड उसकी छूट पैर रगड़ रहा था. और पब को बहुत ज्यादा उत्तेजना फील हो रही थी. पैर उसने अपनी पावर से खोद को कण्ट्रोल किया हुआ था. माहि के हम्म कहते hi पब ने अपने लुंड को उसके छेद पैर दबा दिया. तो उसका टोपा उसकी छूट में घुस गया. माहि की एक चीखा निकल गयी. ुंचुड़ी छोटी सी छूट में मोटा सूपड़ा गुसु हुआ था तो चीख तो निकालनी hi थी. पब ने उसे संत करने के लिए उसके चुचो को सहलाना सुरु कर दिया. और धिरे -2 अपने लुंड पैर दबाब भेदने लगा. पैर लुंड अंदर नहीं जा प् रहा था. वो किसी से टकरा कर रोक रहा था. पब समाज गया ये माहि की झिल्ली है. जिसको वो आज फाड़कर उसे अपनी बनाएगा. और फिर एक बार और उसे ये करने का मौका मिलेगा. जो केवल उसके नशीब में था.

पब ने लुंड को थोड़ा सा पीछे खींच कर एक जोर का दक्का लगा दिया. उसका लुंड उसकी छूट को चीरता हुआ अंदर घुसने लगा. अंदर की गर्मी में उसे लुंड पैर गर्म कुछ बहता हुआ फील हुआ. वो समाज चुक्का था की ये माहि का खून है. माहि तो चीखे जा रही थी. उसकी आखों में दर्द के आशु थे. उसके हाथ पब के कंडे पैर थे और माहि ने उसके कंडे पैर नाख़ून गदा रखे थे. पैर पब को केवल हलकी सी चुभा हो रही थी कंदो पैर. पब माहि को संत करने के लिए उसके होंटो को चूसते हुए उसकी चूचियों को मसल रहा था. थोड़ी hi देर में माहि कुछ संत हुयी तो पब ने एक और जोर का दक्का मार दिया. इस बार पूरा लुंड माहि की छूट में था जो की उसकी बच्चे दानी से टकरा रहा था. पब दक्का मर कर रुक गया. और फिर से माहि के जिस्म से खेलने लगा. माहि की छूट कुछ देर में पब के लुंड के लिए फिट हो गयी और माहि का दर्द भी काम हो गया तो माहि ने पब के गाल को सहलाम सुरु कर दिया. पब ने जब माहि के इसारे को समजा तो उसने लुंड को इन आउट करना सुरु कर दिया. और उसे धिरे धिरे छोड़ने लगा. माहि के मुँह से भी सिसकिया निकन रही थी. पब को भी माहि का नंगे बदन पैर ज्वेलरी बहुत उकसा रही थी. उसके हर दकके के साथ माहि की ज्वेलरी भी हिलती और फिर से उसके बदन से टकराती. चूड़ियों और पायल तो बहुत hi मदुर आवाज निकल रही थी. अब पब ने अपनी स्पीड भी तेज़ कर दी. और माहि भी उसका पूरा साथ दे रही थी. माहि निचे से अपनी गांड हिलती और उप्पेर से पब अपना लुंड अंदर बहार करता. दोनों का ताल मेल अच्छा हो गया. था. माहि के मुँह से लगातार सिसकिया निकल रही थी. करीब 30 मं तक पब माहि के उप्पेर पड़ा माहि को छोड़ता रहा और माहि भी उसके लुंड को अपनी छूट में ले कर स्वर्ग की सेर करती रही. ये उसका पहला अनुभव था और इस अनुभव ने उसे स्वर्ग की सेर करवा दी थी. कुछ hi देर में पब का लुंड माहि की छूट में फैट पड़ा को लम्बी -2 पिचकारियां मरने लगा. माहि तो पहले भी 1 बार झाड़ चुकी थी. पब कैग एआरएम वीर्य को अपनेअंदर फील करते hi उसका रास भी निकल गया. दोनों निढाल हो कर पद गए. दोनों की आखें बंद हो चुकी थी. पब माहि के उप्पेर पड़ा था. लुंड अभी भी छूट में था. जब तक दोनों में अपनी सासो को सालभला तब टेक क तेज़ रौशनी से वोग हिरे रहे और फिर वो रौशनी गायब हो गयी. कुछ देर बाद पब माहि के उप्पेर से उड़ गया. और उसके पास में लेट गया. माहि भी पब की और करवट कर के लेट गयी. उसकी छूट में दर्द हो रहा था. वो सूजी हई थी. दोनों का मिला जुला पानी जंगो पैर आ रहा था. खून के चीते भी उसकी छूट के पास थे. पैर माहि से उदा नहीं जा रहा था. वो पब को देखते हुए सोच रह थी की थोड़ी देर में उड़ कर अपने अपनों साफ़ करेगी. पैर कुछ hi देर में दोनों नीड की वादियों में खो गए. दोनों को होश hi नहीं था की अपने आप को साफ़ भी करना है तकन और दर्द के कारन माहि कब सोइ उसे पता hi नहीं चला. और जब उसकी आखें खुली तो 6 बज चुके थे. पब उसके पास नहीं था. पब मणि और दीनदयाल के पास जा चुक्का था. आज हवन जो करना था.

पब की आखें 4 ऍम को खोल गयी. उसकी नजर सबसे पहले माहि पर पड़ी जो अभी भी नंगी सो रही थी. पब को याद आया की ये लड़की रात को कितना शर्मा रही थी और अब नंगी hi सो रही है ये सोच कर उसके फेस पैर एक स्माइल आ गयी. फिर उसकी नजर उसकी छूट पर पड़ी. तो छूट तो पहले जैसी हो चुकी थी पर अभी भी उस पर खून और पानी लगा था जो की सुख चुक्का था पब ये देख कर एक टॉवल को गर्म पानी से गिला कर के लगा और उसे हलके हाथो से साफ़ करने लगा. जब साफ़ सफाई हो गयी तब उसका डायन गया उसको मिली नई पावर पर. उसने अपने आप को संत करके सोचना सुरु किया तो उसे लगने लगा की अब वो सभी मंत्र जनता है. उसके मंद में बहुत सारे मंत्र आ रहे थे. पैर उसको पता नहीं लग रहा था की कोण सा कमंत्र किस चीज का है. फिर उसे याद आया की आज तो उसे हवन भी करना है. तो उसने पहाड़ो के देवता को याद करते हुए उनके मंत्रो को याद करने लगा तो जैसे एक पूरा ग्रांट hi उसके मंद से गुजरे लगा. ये सब देख कर वो संतुष्ट हो गया. अभी उसको अपना मंद बहुत हल्का लग रहा था. और फेस पैर एक तीखी मुस्कान थी. ये मुस्कान ठीक वैसी थी जैसी की किसी महँ साधु के फेस पैर हमेशा होती है. जिसके पास ज्ञान होते हुए भी किसी चीज से मोह नहीं होता. आज पब का फेस उस साधु की तरह hi दमक रहा था.

पब फ्रेश हो कर बाथरूम से बहार आया और मणि के लाये हुए कुर्ते पाजामे पहन कर मणि और दीनदयाल के पास चल दिया. गुरु, साक्षी, कामिनी और सविता भी वह पहुंच चुकी थी आज ट्रेनिंग नहीं होनी थी. तो और सब लोग भी मंदिर जाने के लिए तैयार हो रहे थे. गुरु ने जुली को बोल दिया था की आज उसको और उसकी टीम को भी साथ चलना है. वो लोग भी आज जंगल से आ चुके थे और वो सब लड़कियों को आज रेस्ट दे दिया गया था. और वो सब हवेली में निचे आ चुकी थी. एक लम्बे टाइम के बाद को उस कैद खाने में थी. जहा उन्होंने बहुत कुछ रहा था.

जब माहि की आखँ खुली तो 6 बज चुके थे. सबसे पहले उसकी नजर अपने नंगे बदन पैर गयी जो चादर से डाका था. पब भी उसे कवर करके गया था. अपने आप को नंगा देख कर उसे रात में हुआ सब याद आ गया. तो उसके फेस पैर सरम और ख़ुशी के मिले जुले भाव आ गए. उसे फील हुआ की उसे टॉयलेट आयी है तो वो उड़ कर निघ्त्य पहन कर बाथरूम में घुस गयी और टॉयलेट करने बेथ गयी. जब उसकी नजर टॉयलेट करते हुए अपनी छूट पैर गयी तो हेरात से उसका मुँह खुला का खुला रहा गया. उसकी छूट उसे आज भी वैसी hi लग रही थी जैसे की कल तक थी. फिर उसे याद आया की रात को वो बिना सफाई के hi सो गयी थी. पैर अभी तो छूट एक दम साफ़ दिख रही थी. उसे लगने लगा की कही उसने रात में सपना तो नहीं देखा की पब ने उसके साथ वो सब किया है. कियोकि उसे लग hi नहीं रहा था की वो पब से चूड़ी भी है. हलाकि उसे फील हो रहा थी की उसका बदन उसे हल्का -2 फील हो रहा है. पैर जो सच सामने था उसे देख कर उसे लगा की रात को कुछ नहीं हुआ वो बस एक सपना था. ये सोच कर वो उदास हो गयी. और फ्रेश हो कर बहार आ गयी वह पैर सभी लोग हवन की तैयारी में लगे हुए थे. माहि को भी याद आ गया की उसे भी वह जाना है. तो वो भी तैयार होने चली गयी उसे कुछ अच्छा नहीं लग रहा था. उसके मन में ये बात घर कर चुकी थी की उसके पति ने, उसके दोस्त ने सुहागरात पैर भी उसके साथ कुछ नहीं किया.
 
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