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- Dec 5, 2013
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मणि – लता थोड़ा डेर्या रखो. तुमको तो अभी और भी बहुत कुछ सहना है. सायद अब वो वक्त आ गया है की वो सच तुम सबके सामने आ जाये जिसको छुपते हुए अल्पना और प्रतिक ने जान दे दी. लता मैं सब कुछ बताउगा पैर पब के होश में आने के बाद. पैर याद रहे केवल तुम और वो hi पब को अभी सभाल सकते हो. सच बहुत कड़वा है. तुमको सहन नहीं होगा. और पब तो पागल हो जायेगा. इसलिए तुमको वो सब सहन करना होगा. और पब को सभालना होगा. यदि तुम ये नहीं कर पायी तो सब ख़तम हो जायेगा.
लता – केसा क्या है जो सहन सकती के बहार है.
मणि – बहुत कुछ ऐसा है जो तुम दोनों की सहन सकती के बहार होगा. इसलिए मेने इस सच को छुपा कर रखा था. पैर अब सच को छुपना भी मिंकिन नहीं है. और तुम सब सुनो (मणि पब की सभी पत्नियों की और इसरा करते हुए) याद रहे कल कुछ भी हो पर तुम सबको एक हो कर पब को सभालना है. ये तो वक्त hi बताएगा की पब सच जान कर क्या करता है. पैर याद रहे ये सच उसकी जिंदगी को बदल देगा. अब तो कल का सूरज hi तय करेगा की ये सच कितनो की जिंदगी में बदलाब लता है.
फिर मणि जुली की और देख कर – अब तुम सुनो जुली, सायद तुमको कोई गलत फेमि हुई है. या फिर तुम पूरा सच नहीं जानती. नहीं तो किसी को की गलती का जिम्मेदार पब को न बोलती. पता नहीं किस किस से क्या क्या गलती हुई है. पैर हर वो इंसान जो इस सच से जुड़ा है को ये न सोचे की ये सब उससे हुआ है. कियोकि ये सब अपने हिसाब से सब सही hi कर रहे थे. पैर टाइम और त्रिकाल ने सब कुछ बदल दिया. न जाने कितनो की जिंदगी त्रिकाल के लिए या त्रिकाल की वजह से बर्बाद हो चुकी है और न जाने कितनी और हो रही है. (फिर मणि जी गुरु की और देखते है) गुरु मेरा मित्र दीनदयाल कहा है.
गुरु – गुरूजी वो दूसरे रूम में आराम कर रहे है. चलिए उनके पास, वो अपने मिलने के लिए hi रुके है, उनके घर पर उनके बच्चे अकेले है. एप क बार उनसे मिल कर उनको जाने की आज्ञा दे.
फिर मणि चल देता है दीनदयाल से मिलने. वो दीनदयाल से मिलकर बहुत खुश होता है. दोनों बहुत देर ताका पास में बाते करते रहते है. और दीनदयाल मिल मिलने का कहा कर अपने घर को चला जाता है. अंकिता ने उनको सैंडी के साथ भेज दिया था.
रात हो चुकी थी. पब को उसके रूम में बीएड पैर लिटा दिया था. मणि, लता, गुरु, जुली और सविता उसी रूम में थे. और सबको सोने के लिए भेज दिया था. कोई भी पब के पास से जाना नहीं चाहता था. पैर गुरु ने सबको भेज दिया था. कामिनी और ऐडा तो बहुत रोई थी. पब की उन बातो ने इन दोनों का दिल तोड़ दिया था. जिस आदमी को वो कबका भूल चुकी थी उसकी वजह से फिर आज उसको दर्द मिला था.
सब बैठे -2 सो गए थे. सुबह के 5 ऍम को पब एक चीख के साथ उड़ता है. – मम्माआआआ
लता दूध कर पब को अपनी बहो में ले लेती है. और बोली – हाँ मेरे bête में कही पैर हु. तू सो जा मेरे लाल सो जा…
पब – nahiiiiiiiiii nahiiiiiiiiiiii मैं सो नहीं सकता, मेरी वजह से, उस भानु की वजह से, मेरी माँ ने जो दर्द सहा है. अब मैं सो नहीं सकता मुझको मरना है सबको मरना है…. सबको मार के मैं खुद भी मार जाउगा. यही मेरे पापो की सजा होगी. (पब का गुस्से धिरे -2 बाद रहा था. जैसे -2 उसे रात की बाते याद आ रही थी वैसे वैसे पब का गुस्सा बढ़ता जा रहा था)
मणि – क्या हुआ है bête. किसी बाते क्यों कर रहे हो. क्या तुम भूल गए तुम्हारा टारगेट दुनिया को मिटाना नहीं उसे बचाना है.
पब – भाड़ ने जाये टारगेट और भाड़ में जाये ये दुनिया. जब इस दुनिया ने hi मुझसे सब चीन लिया तो मैं क्यों इस दुनिया को बचाओ.
मणि – कियोकि तुम जिनके लिए रो रहे हो उनकी भी यही इच्छा थी. भूल गए उस लेटर को. जो तुम्हारी माँ ने तुम्हारे लिए छोड़ा था. तुम तो एक बार मर चुके हो न और ये जिंदगी तुमको दस माँ ने दी है. इस पैर तुम्हारा नहीं उनका हक़ है. और उन्होंने hi तुमको ये काम सपा है.
पब – मैं कुछ नहीं जनता, मुझको अपनी मरी हुई माँ और बहन की सोगन्द है में उनका बदला ले कर रहुगा. हर हाल में. मैं हर उस साक्ष को उतना hi दर्द दुगा जितना मेरी माँ और बहन ने सहा है. मार दुगा में सबको.. कोई नहीं बचेगा इस दुनिया में.
मणि – मेने कब कहा की तुम बदला मत लो अपनी माँ की मूट का. पैर किस्से लोगे बदला?? किसको मरना चाहते हो?? बोलो?? इन मासूमो को?? कामिनी को, पेय को या ऐडा को?? या इस गाओं के भोले लोगो को?? बोलो किसको मरोगे?? भूल गए ऐडा, कामिनी ने तुम्हारी जान बचने के लिए अपनी जान डाव पे लगा दी. यदि वोन ा होती तो तुम कबके मर चुके होते. उस पेय को मरोगे जिसने तुमको एक छोटी बहन का प्यार दिया. एक बहन की मात का बदला दूसरी बहन को मार कर लोगे???
पब मणि की बात सुन कर चुप रहा जाता है. उसके पास मणि की इन बातो का जवाब नहीं था. और मणि की हर एक बात उसका गुस्सा काम कर रही थी. पब को संत होता देख मणि फिर बोलने लगता है.
मणि – यदि तुम मरना hi चाहते हो तो उनको मारो जिनकी वजह से तुम्हारी पूरी जिंदगी बर्बाद हुई है. जिनकी वजह से तुम्हारी फॅमिली ने हर दुःख झेला है. तुम्हारे परिवार को दर्द देने वाले हर उस साक्ष को मारो. बोलो मार सकते को उन सब को जिन्होंने तुम्हारी hi नहीं न जाने कितने परिवारों की जिंदगी ख़राब की है.
पब – गुरु जी एक बार मुझको उसका नाम बात दो मैं उन सब को अभी मार दुगा. (ये बात पब ने बहुत गुस्से में दांतो को भीचते हुए बोली)
मणि – पहले संत हो जाओ. कियोकि गुस्से से कोई भी युद्ध नहीं जीता जाता. और धर्म युद्ध तो बिलकुल भी नहीं. अपने इस गुस्से को अपने अंदर दबा लो बीटा. अपने इस गुस्से को अपनी ताकत बनाओ न की कमजोरी.
मणि की बातो का पब पे आसार हो रहा था. वो खुद को संत करने की कोसिस कर रहा था. और जैसे -2 वो संत हो रहा था वैसे -2 उसके मन में सवालो की लाइन लग्न लगी थी.
माँ के साथ ऐसा क्या हुआ की उनको यहाँ आना पड़ा.?
ट्रेनिंग के बाद माँ कहा रही. उनके साथ और क्या -2 हुआ.?
जुली ने मुझको अपनी माँ की बर्बादी का जिमीडा क्यों बोलै?? जबकि मैं तो दिल्ली में था और मुझको कुछ भी नहीं पता??
माँ के यदि र स्की वजह से आत्महत्या नहीं की तो क्या वजह थी की माँ ने वो कदम उदय??
जब माँ और पिताजी इतने काबिल थे की उन्होंने रतन ग्रुप्स की नीव राखी तो उसको मजदूरी करके जीवन क्यों बिताना पड़ा??
क्यों माँ कभी लता माँ के पास नहीं गयी??
आईज और न जाने कितने सवाल थे जो उसके मन में उड़ रहे थे. वो अपनी hi सोच में गम था. सब उसी को देख रहे थे. पैर पब खुद से hi अपने आपसे बात करने में लगा था. पैर कोई भी बात या कोई भी जवाब उसके पास नहीं था. जब उसे कुछ समाज नहीं आया तो उसने मणि की और देखा. उसकी नजरो में एक सवाल था. एक चुंबन थी. जिसे देख कर मणि जी बोले.
मणि – बीटा मुझको पता है इस टाइम तुम्हारे मन में सवालो का मेला लगा है. और तुम उनके जवाब चाहते हो. जाओ और जा कर फ्रेश हो लो. जब तक तुम्हारे जवाब भी आ जायेगे. कोई है जिसको मेने बुलाया है. कुछ hi देर में वो आता होगा.
पब भी मणि की बात मान कर फ्रेश होने चला गया. वो एक दम संत लग रहा था. पैर उप्पेर से जितना संत था. मन में उतनी hi आग लगी हुई थी. उसके मन में केवल एक hi बात घूम रही थी की उसकी माँ और बहन को वो दर्द सहना पड़ा है जिस दर्द को एक नजान लड़की के लिए भी उससे बर्दाश नहीं था. उनको सेक्स ट्रेनिंग करनी पड़ी है. कोण है इस सब के पीछे? कैसे सहा होगा माँ ने वो सब. वो जनता था की इस ट्रेनिंग में क्या -2 होता है. कैसे -2 दर्द दिए जाते है. उसे वो सब याद आ रहे थे. और उसके दिल और दिमाग को हिला रहे थे. फिर भी उसने उप्पेर से अपने आप को संत किया हुआ था.
कुछ देर में सब फ्रेश हो चुके थे. और एक जगह बैठे हुए थे. हवेली के सभी लोग वह मौजूद थे केवल ऐडा, और अवनि को छोड़ कर. इतने लोगो के होते हुए भी वह पैर मूट का सा सन्नाटा था. सब लोगो को मणि जी के बोलने का इन्तजार था. और मणि को किसी और का इन्तजार था. कुछ hi देर में मणि जी का फ़ोन बजता है. तो वो उसे नैनपुर के बस स्टैंड तक पहुंच केर वही रुकने को बोलता है.
मणि – गुरु किसी को भेज कर उन दोनों को यहाँ तक ले आओ.
मणि की बात सुन कर अंकिता उड़ कर मणि जी से उनका no. मांगती है. और सैंडी को ले कर चल देती है. सैंडी की आखों में आशु थे. अंकिता समाज जाती है की ये भी अल्पना माँ को चाहती होगी. कुछ hi देर में दोनों उन दोनों को ले कर घर पैर पहुंच जाते है. इतनी देर में कामिनी और सविता ने सबके लिए ब्रैकफास्ट रेडी कर लिया था. अभी 9ऍम हो रहे थे. अंकिता के साथ एक 35-40 साल का साधु था. और एक अंकिता की जैसे खूबसूरत लड़की थी. दोनों आ कर पहले मणि के पेअर छूटे है. और फिर मणि के पास में hi बेथ जाते है. पब उस लड़की को बड़े घोर से देख रहा था. और वो लड़की भी पब को देख कर मुस्कुरा रही थी. पब को लग रहा था की ये कोई अपनी है इसको वो अच्छे से जनता है पैर पहचान नहीं प् रहा कुछ hi पल में उसके फेस पैर हेरात के भाव आ जाते है. सब लोगो की नज़ारे पब और उस लड़की पे hi तिकी हुयी थी. पब बड़ी मुश्किल से मणि से उस लड़की की और इसरा करके बोलता है
मणि – लता थोड़ा डेर्या रखो. तुमको तो अभी और भी बहुत कुछ सहना है. सायद अब वो वक्त आ गया है की वो सच तुम सबके सामने आ जाये जिसको छुपते हुए अल्पना और प्रतिक ने जान दे दी. लता मैं सब कुछ बताउगा पैर पब के होश में आने के बाद. पैर याद रहे केवल तुम और वो hi पब को अभी सभाल सकते हो. सच बहुत कड़वा है. तुमको सहन नहीं होगा. और पब तो पागल हो जायेगा. इसलिए तुमको वो सब सहन करना होगा. और पब को सभालना होगा. यदि तुम ये नहीं कर पायी तो सब ख़तम हो जायेगा.
लता – केसा क्या है जो सहन सकती के बहार है.
मणि – बहुत कुछ ऐसा है जो तुम दोनों की सहन सकती के बहार होगा. इसलिए मेने इस सच को छुपा कर रखा था. पैर अब सच को छुपना भी मिंकिन नहीं है. और तुम सब सुनो (मणि पब की सभी पत्नियों की और इसरा करते हुए) याद रहे कल कुछ भी हो पर तुम सबको एक हो कर पब को सभालना है. ये तो वक्त hi बताएगा की पब सच जान कर क्या करता है. पैर याद रहे ये सच उसकी जिंदगी को बदल देगा. अब तो कल का सूरज hi तय करेगा की ये सच कितनो की जिंदगी में बदलाब लता है.
फिर मणि जुली की और देख कर – अब तुम सुनो जुली, सायद तुमको कोई गलत फेमि हुई है. या फिर तुम पूरा सच नहीं जानती. नहीं तो किसी को की गलती का जिम्मेदार पब को न बोलती. पता नहीं किस किस से क्या क्या गलती हुई है. पैर हर वो इंसान जो इस सच से जुड़ा है को ये न सोचे की ये सब उससे हुआ है. कियोकि ये सब अपने हिसाब से सब सही hi कर रहे थे. पैर टाइम और त्रिकाल ने सब कुछ बदल दिया. न जाने कितनो की जिंदगी त्रिकाल के लिए या त्रिकाल की वजह से बर्बाद हो चुकी है और न जाने कितनी और हो रही है. (फिर मणि जी गुरु की और देखते है) गुरु मेरा मित्र दीनदयाल कहा है.
गुरु – गुरूजी वो दूसरे रूम में आराम कर रहे है. चलिए उनके पास, वो अपने मिलने के लिए hi रुके है, उनके घर पर उनके बच्चे अकेले है. एप क बार उनसे मिल कर उनको जाने की आज्ञा दे.
फिर मणि चल देता है दीनदयाल से मिलने. वो दीनदयाल से मिलकर बहुत खुश होता है. दोनों बहुत देर ताका पास में बाते करते रहते है. और दीनदयाल मिल मिलने का कहा कर अपने घर को चला जाता है. अंकिता ने उनको सैंडी के साथ भेज दिया था.
रात हो चुकी थी. पब को उसके रूम में बीएड पैर लिटा दिया था. मणि, लता, गुरु, जुली और सविता उसी रूम में थे. और सबको सोने के लिए भेज दिया था. कोई भी पब के पास से जाना नहीं चाहता था. पैर गुरु ने सबको भेज दिया था. कामिनी और ऐडा तो बहुत रोई थी. पब की उन बातो ने इन दोनों का दिल तोड़ दिया था. जिस आदमी को वो कबका भूल चुकी थी उसकी वजह से फिर आज उसको दर्द मिला था.
सब बैठे -2 सो गए थे. सुबह के 5 ऍम को पब एक चीख के साथ उड़ता है. – मम्माआआआ
लता दूध कर पब को अपनी बहो में ले लेती है. और बोली – हाँ मेरे bête में कही पैर हु. तू सो जा मेरे लाल सो जा…
पब – nahiiiiiiiiii nahiiiiiiiiiiii मैं सो नहीं सकता, मेरी वजह से, उस भानु की वजह से, मेरी माँ ने जो दर्द सहा है. अब मैं सो नहीं सकता मुझको मरना है सबको मरना है…. सबको मार के मैं खुद भी मार जाउगा. यही मेरे पापो की सजा होगी. (पब का गुस्से धिरे -2 बाद रहा था. जैसे -2 उसे रात की बाते याद आ रही थी वैसे वैसे पब का गुस्सा बढ़ता जा रहा था)
मणि – क्या हुआ है bête. किसी बाते क्यों कर रहे हो. क्या तुम भूल गए तुम्हारा टारगेट दुनिया को मिटाना नहीं उसे बचाना है.
पब – भाड़ ने जाये टारगेट और भाड़ में जाये ये दुनिया. जब इस दुनिया ने hi मुझसे सब चीन लिया तो मैं क्यों इस दुनिया को बचाओ.
मणि – कियोकि तुम जिनके लिए रो रहे हो उनकी भी यही इच्छा थी. भूल गए उस लेटर को. जो तुम्हारी माँ ने तुम्हारे लिए छोड़ा था. तुम तो एक बार मर चुके हो न और ये जिंदगी तुमको दस माँ ने दी है. इस पैर तुम्हारा नहीं उनका हक़ है. और उन्होंने hi तुमको ये काम सपा है.
पब – मैं कुछ नहीं जनता, मुझको अपनी मरी हुई माँ और बहन की सोगन्द है में उनका बदला ले कर रहुगा. हर हाल में. मैं हर उस साक्ष को उतना hi दर्द दुगा जितना मेरी माँ और बहन ने सहा है. मार दुगा में सबको.. कोई नहीं बचेगा इस दुनिया में.
मणि – मेने कब कहा की तुम बदला मत लो अपनी माँ की मूट का. पैर किस्से लोगे बदला?? किसको मरना चाहते हो?? बोलो?? इन मासूमो को?? कामिनी को, पेय को या ऐडा को?? या इस गाओं के भोले लोगो को?? बोलो किसको मरोगे?? भूल गए ऐडा, कामिनी ने तुम्हारी जान बचने के लिए अपनी जान डाव पे लगा दी. यदि वोन ा होती तो तुम कबके मर चुके होते. उस पेय को मरोगे जिसने तुमको एक छोटी बहन का प्यार दिया. एक बहन की मात का बदला दूसरी बहन को मार कर लोगे???
पब मणि की बात सुन कर चुप रहा जाता है. उसके पास मणि की इन बातो का जवाब नहीं था. और मणि की हर एक बात उसका गुस्सा काम कर रही थी. पब को संत होता देख मणि फिर बोलने लगता है.
मणि – यदि तुम मरना hi चाहते हो तो उनको मारो जिनकी वजह से तुम्हारी पूरी जिंदगी बर्बाद हुई है. जिनकी वजह से तुम्हारी फॅमिली ने हर दुःख झेला है. तुम्हारे परिवार को दर्द देने वाले हर उस साक्ष को मारो. बोलो मार सकते को उन सब को जिन्होंने तुम्हारी hi नहीं न जाने कितने परिवारों की जिंदगी ख़राब की है.
पब – गुरु जी एक बार मुझको उसका नाम बात दो मैं उन सब को अभी मार दुगा. (ये बात पब ने बहुत गुस्से में दांतो को भीचते हुए बोली)
मणि – पहले संत हो जाओ. कियोकि गुस्से से कोई भी युद्ध नहीं जीता जाता. और धर्म युद्ध तो बिलकुल भी नहीं. अपने इस गुस्से को अपने अंदर दबा लो बीटा. अपने इस गुस्से को अपनी ताकत बनाओ न की कमजोरी.
मणि की बातो का पब पे आसार हो रहा था. वो खुद को संत करने की कोसिस कर रहा था. और जैसे -2 वो संत हो रहा था वैसे -2 उसके मन में सवालो की लाइन लग्न लगी थी.
माँ के साथ ऐसा क्या हुआ की उनको यहाँ आना पड़ा.?
ट्रेनिंग के बाद माँ कहा रही. उनके साथ और क्या -2 हुआ.?
जुली ने मुझको अपनी माँ की बर्बादी का जिमीडा क्यों बोलै?? जबकि मैं तो दिल्ली में था और मुझको कुछ भी नहीं पता??
माँ के यदि र स्की वजह से आत्महत्या नहीं की तो क्या वजह थी की माँ ने वो कदम उदय??
जब माँ और पिताजी इतने काबिल थे की उन्होंने रतन ग्रुप्स की नीव राखी तो उसको मजदूरी करके जीवन क्यों बिताना पड़ा??
क्यों माँ कभी लता माँ के पास नहीं गयी??
आईज और न जाने कितने सवाल थे जो उसके मन में उड़ रहे थे. वो अपनी hi सोच में गम था. सब उसी को देख रहे थे. पैर पब खुद से hi अपने आपसे बात करने में लगा था. पैर कोई भी बात या कोई भी जवाब उसके पास नहीं था. जब उसे कुछ समाज नहीं आया तो उसने मणि की और देखा. उसकी नजरो में एक सवाल था. एक चुंबन थी. जिसे देख कर मणि जी बोले.
मणि – बीटा मुझको पता है इस टाइम तुम्हारे मन में सवालो का मेला लगा है. और तुम उनके जवाब चाहते हो. जाओ और जा कर फ्रेश हो लो. जब तक तुम्हारे जवाब भी आ जायेगे. कोई है जिसको मेने बुलाया है. कुछ hi देर में वो आता होगा.
पब भी मणि की बात मान कर फ्रेश होने चला गया. वो एक दम संत लग रहा था. पैर उप्पेर से जितना संत था. मन में उतनी hi आग लगी हुई थी. उसके मन में केवल एक hi बात घूम रही थी की उसकी माँ और बहन को वो दर्द सहना पड़ा है जिस दर्द को एक नजान लड़की के लिए भी उससे बर्दाश नहीं था. उनको सेक्स ट्रेनिंग करनी पड़ी है. कोण है इस सब के पीछे? कैसे सहा होगा माँ ने वो सब. वो जनता था की इस ट्रेनिंग में क्या -2 होता है. कैसे -2 दर्द दिए जाते है. उसे वो सब याद आ रहे थे. और उसके दिल और दिमाग को हिला रहे थे. फिर भी उसने उप्पेर से अपने आप को संत किया हुआ था.
कुछ देर में सब फ्रेश हो चुके थे. और एक जगह बैठे हुए थे. हवेली के सभी लोग वह मौजूद थे केवल ऐडा, और अवनि को छोड़ कर. इतने लोगो के होते हुए भी वह पैर मूट का सा सन्नाटा था. सब लोगो को मणि जी के बोलने का इन्तजार था. और मणि को किसी और का इन्तजार था. कुछ hi देर में मणि जी का फ़ोन बजता है. तो वो उसे नैनपुर के बस स्टैंड तक पहुंच केर वही रुकने को बोलता है.
मणि – गुरु किसी को भेज कर उन दोनों को यहाँ तक ले आओ.
मणि की बात सुन कर अंकिता उड़ कर मणि जी से उनका no. मांगती है. और सैंडी को ले कर चल देती है. सैंडी की आखों में आशु थे. अंकिता समाज जाती है की ये भी अल्पना माँ को चाहती होगी. कुछ hi देर में दोनों उन दोनों को ले कर घर पैर पहुंच जाते है. इतनी देर में कामिनी और सविता ने सबके लिए ब्रैकफास्ट रेडी कर लिया था. अभी 9ऍम हो रहे थे. अंकिता के साथ एक 35-40 साल का साधु था. और एक अंकिता की जैसे खूबसूरत लड़की थी. दोनों आ कर पहले मणि के पेअर छूटे है. और फिर मणि के पास में hi बेथ जाते है. पब उस लड़की को बड़े घोर से देख रहा था. और वो लड़की भी पब को देख कर मुस्कुरा रही थी. पब को लग रहा था की ये कोई अपनी है इसको वो अच्छे से जनता है पैर पहचान नहीं प् रहा कुछ hi पल में उसके फेस पैर हेरात के भाव आ जाते है. सब लोगो की नज़ारे पब और उस लड़की पे hi तिकी हुयी थी. पब बड़ी मुश्किल से मणि से उस लड़की की और इसरा करके बोलता है