MANAV or DANAV sex story - part 1 - Page 13 - SexBaba
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MANAV or DANAV sex story - part 1

अपडेट 99

सविता – दीदी हमारे तो समाज में hi नहीं आ रहा की क्या करे. कैसे अपने सुहाग की मदत करे कुछ समाज नहीं आ रहा.

गुरु – ये फ़ोन कब से बज रहा है काम से काम इसको तो उदा कर बात कर सकते थे न.

गुरु ये बोल कर पब के हाथ से मोबाइल निकलती है. तो देखती है की उसमे माहि की 6 मिस कॉल्स है. वो देख hi रही थी की फ़ोन फिर बज उड़ता है. तो गुरु फ़ोन को उड़ाती है.

गुरु – hello माहि मैं गुरु बोल रही हु.

माहि – नमस्ते दीदी, दीदी ये कहा है बात करते -2 चुप हो गए थे. और अब फ़ोन नहीं उदा रहे. ये ठीक तो है न.

गुरु – माहि अभी ये ठीक नहीं है. तुम बाद में बात करना.

ये कहा कर गुरु फ़ोन डिसकनेक्ट कर देती है और कामिनी और जय को हल्दी का पानी लेन को बोलती है. वह पेय, माउद और काजल भी थी. तो गुरु काजल और जय को इसरा करती है की इन दोनों को ले कर अंदर जाओ. गुरु अवनि और पारी को ऐडा के साथ अंदर भेज देती है. ऐडा का ख्याल रखने के लिए. खुद, अंकिता और सविता की मदत से पब के पापडे उतरने लगती है. एरिका भी इनकी मदत कर रही थी. एरिका को कुछ समाज नहीं आ रहा था. पैर ये तो वो भी समाज चुकी थी की पब की जान खतरे में है. सरीर अकड़ा होने की वजा से कपडे निकल नहीं प् रहे थे तो उनको पहाड़ कर निकल दिया जाता है. गुरु पब की बॉडी को देखते है तो उसके सीने पे चमज जयादा थी. पैर वो चमक पूरी बॉडी पे भी थी. पैर सीने की तुलना में काम थी. गुरु पब के सरीर को हल्दी के पानी से दोने लगती है. पब अभी भी सोफे पे hi था. पब के सरीर से वो चमक निकल कर सोफे में जाने लगती है. ये लोग बड़ी मुश्किल से पब को हिल्ला प् रहे थे. वो तो सविता थी जो पब को हिल्ला प् रही थी. पब की बॉडी से चमक के पाउडर को निकलने के लिए उसको पलटा और हिलना पद रहा था. पब का सरीर मिटटी के पुतले के जैसा हो गया था. जैसे मूर्ति का हाथ, पेअर जैसे हो वैसे hi रहते है वैसे hi पब के सरीर का हाल था. मूर्ति की तरह उसको घुमा कर उसकी पूरी बॉडी को साफ़ किया जा रहा था.

अभी पब की सफाई चल hi रही थी की फिर से पब का फ़ोन बजने लगा. गुरु को फ़ोन बजने पे गुस्सा आया. पैर फिर भी वो फ़ोन को रेसवे करने गयी अंकिता और सविता सफाई कर रही थी. और एरिका और कामिनी हल्दी का पानी बना कर उनको दे रही थी. गुरु ने देखा तो माहि का hi फ़ोन था. तो गुरु को और भी गुस्सा आया. उसने फ़ोन उड़ाते hi गुस्से में बोलै.

गुरु – माहि कहा न की इनकी तबियत ठीक नहीं है. बाद में बात करना. समाज नहीं आ रहा है क्या.

दीनदयाल – जी मैं दीनदयाल बोल रहा हु. माहि बहुत देर से रो रही है. पंकज जी को क्या हो गया है. और आप कोण बोल रही है?

गुरु अपने गुस्से को कण्ट्रोल करके – जी मैं गुरुपित पंकज जी की पत्नी बोल रही हु. अभी इनकी तबियत ठीक नहीं है. दीनदयाल जी माहि को समझाइये की रोने से कुछ नहीं होगा. वैसे hi हमारे समाज नहीं आ रहा की क्या और कैसे करे.

दीनदयाल – जी आप तो मणि जी की शिष्य है न. तो मणि जी से क्यों नहीं पूछती उनके पास हल बीमारी का इलाज है. और यदि मणि जी से बात हो तो उनको मेरा प्रदम कहना.

गुरु – आप गुरूजी को कैसे जानते है. मेने गुरूजी से पूछा था वो आ रहे है. पैर उनके पास भी इस प्रॉब्लम का सलूशन नहीं है.

दीनदयाल चोकते हुए – क्या कहा रही हो मणि जी को सभी आयुर्वेद का गायन गुरु सत्यानंद जी ने दिया है. उनको जितना ज्ञान प्राप्त है उससे वो हर रोगी को ठीक कर सकते है. फिर पंकज जी को ऐसा क्या हो गया है की मणि जी के पास उसका इलाज नहीं है.

गुरु – ोूहः हाँ याद आया अपने और गुरु जी ने एक साथ गुरु सत्यानंद जी से दीक्षा ली है न. मुझको पब ने बताया था. सॉरी मेने आपसे गुस्से में बात की.

दीनदयाल – कोई बात नहीं मैं जनता हु तुम बहुत परेशां हो. पैर मुझको बताओ तो पंकज जी को हुआ क्या है.

गुरु – गुरूजी ने बताया है की इन पैर स्थिलासँ का प्रयोग किया गया है.

दीनदयाल चोकते हुए – क्या कहा स्थिलासँ? पैर ये तो दानवो की क्रिया है. पंकज पैर इसे किसने कर दी.

गुरु – त्रिकाल ने

दीनदयाल – ओह्ह तो त्रिकाल इस हद तक गिर चुक्का है की प्रतिबंदित क्रियाओ का भी प्रयोग कर रहा है. पैर मणि जी तो इसका तोड़ जानते है. गुरु जी ने हम 6 लड़को को hi ये क्रिया सिखाई थी की यदि कोई दानव कभी किसी मानव पे किसका गलत इस्तेमाल करे तो उसे कैसे तोडा जाता है.

गुरु – तो क्या आप भी जानते है इसका तोड़?? वो क्या है गुरु जी को आने में समय लगेगा और गुरूजी ने बताया है की यदि 6 हॉर्स में इसको नहीं ख़त्म किया गया तो ये मर जायेगे. (ये कहा कर गुरु रोने लगती है. जो अभी तक अपने आप को सभले हुई थी. और सबको भी सभाल रही थी. किसी को बिना कुछ बताये पब के मूट के दर को अकेले hi सहा रही थी. दीनदयाल को सहारे के रूप में देख कर गुरु को रोना आ जाता है)

दीनदयाल – प्लीज आप रोइये मत. मैं जनता तो था. पैर मुझको पूरी तरह याद नहीं है. पैर यदि मणि जी मुझको गाइड करे तो में कर सकता हु.

गुरु – पैर गुरूजी तो बोले थे की इसके लिए एक स्पाइकल पत्ते के पाउडर की जरुरत होती है.

दीनदयाल – हाँ ये तो मुझको भी पता है. वो पाउडर तो मेरे पास है पैर मुझको मंत्र पूरीतरह याद नहीं है. और न hi मैं सरीर से ठीक हु की वो सब कर सकू.

गुरु – आप उन सब की चिंता मत करिये. वो सब तो मैं देख लगी. मंत्रो के लिए मणि जी फ़ोन पे आपको सब बट्टे जायेगे. और जो भी फिजिकल करना होगा उसके लिए हम सब है. बस आप जल्दी से वो पाउडर ले कर ाजैये. आपका हम सब पैर बहुत बड़ा एहसान होगा.

दीनदयाल – किसी बात करती हो. वो मेरे लिए भी सब कुछ है उसके कारन hi आज मेरे घर में ख़ुशी है. वो मेरी बेटी की जिंदगी है. और मेरी बेटी मेरी. तो कोई अपनी जिंदगी बचा कर भी किसी पे एहसान करता है क्या. आप चिंता मत कीजिये में जल्द से जल्द पहुंचने की कोसिस करता हु. मैं माहि को साथ ले कर आ रहा हु.

गुरु – ठीक है आप जल्दी आओ. पैर आप कैसे आएंगे??

दीनदयाल – जी बस से..

गुरु – ठीक है आप वह से बस से निकालिये मैं यहाँ से कार बजती हु. आप अपनी बस का नंबर दे देना. आपको कार रस्ते में hi पिक कर लेगी.

दीनदयाल – जी ठीक है मैं भी निकलता हु.

दीनदयाल माहि को अपना पुराण संदूक लेन को बोलते है. उसमे से वो उस पाउडर को निकल कर माहि के साथ चल देते है. वैसे तो उनकी कंडीशन अभी चलने लायक नहीं थी. पैर फिर भी वो तेज़ी से चलते हुए हाइवे पे आ कर बस में बेथ जाते है. माहि बस का No. पब के फ़ोन पैर भेज देती है.

ीदार गुरु ने भी फ़ोन को डिसकनेक्ट होते hi अंकिता को सैंडी के साथ माहि के घर की और भगा दिया. गुरु ने अंकिता से बस इतना कहा था की यदि पब को जिन्दा देखना है तो माहि और उसके पिता जी को जल्दी से जल्दी ले कर आये. अंकिता ये सुन कर सैंडी को साथ में एक ले कर फुल स्पीड से कार डोढ़ा देती है.

गुरु मणि जी को फ़ोन करती है और दीनदयाल जी की साडी बाते बता देती है. मणि दीनदयाल का नाम सुन कर खुश हो जाता है. कियोकि दीनदयाल एक अच्छा स्टूडेंट था गुरुकुल के दिनों में. और मणि जी के दोस्तों में से एक था. आज वो दोस्ती वो साथी hi काम आने वाला था. गुरु ने मणि जी से बात करके सविता, कामिनी और एरिका को भी दीनदयाल के बारे में बता दिया था. एरिका को बस इतना hi समाज आया की कोई पब को बचने के लिए आ रहा है.

अंकिता को घर से निकले 15 मं hi हुए थे. की गुरु ने उसको फ़ोन कर दिया.

गुरु – अंकिता मिल गए दीनदयाल जी??

अंकिता – दीदी तोड़ा सब्र करिये. मैं कार में हु. और कार से दीनदयाल जी के घर तक पहुंचने में 2.5-3 हॉर्स लगते है.

गुरु – क्या इतनी दूर घर है उनका??

अंकिता – हाँ दीदी, और फ़ोन रखती हु. कार फुल स्पीड में है. बात करते हुए चलने में प्रॉब्लम हो रही है. ok bye

फिर अंकिता फ़ोन कट कर कार की स्पीड बड़ा देती है.
 
अपडेट 100

अंकिता – दीदी तोड़ा सब्र करिये. मैं कार में हु. और कार से दीनदयाल जी के घर तक पहुंचने में 2.5-3 हॉर्स लगते है.

गुरु – क्या इतनी दूर घर है उनका??

अंकिता – हाँ दीदी, और फ़ोन रखती हु. कार फुल स्पीड में है. बात करते हुए चलने में प्रॉब्लम हो रही है. ok bye

फिर अंकिता फ़ोन कट कर कार की स्पीड बड़ा देती है. कहा गुरु की आखों से लगता पानी बाह रहा था. पब के फेस पे दर्द दिखाई पद रहा था. गुरु को रोटी हुए याद आया की पब ने उससे मान में बात की थी. तो वो अपने आप को संत करके पब के पास पहुंची और मन में पब को आवाज देने लगी.

गुरु – क्या हो रहा है आपको??

पब – गुरु मुझको बहुत दर्द हो रहा है और पूरा सरीर अकड़ गया है. और सरीर के अंदर के बॉडी पार्ट्स ग्राउंड की और खींच रहे है. सरीर के अंदर पूरी बॉडी में खिचाव महसूस हो रहा है. और दर्द तो बर्दाश hi नहीं हो रहा. कुछ करो गुरु बहुत दर्द है….

पब की मन की आवाज में भी दर्द और दुख साफ़ पता चल रहा था. गुरु को अपने उप्पेर गुस्सा आ रहा था. की वो कुछ भी नहीं कर सकती. वो बेबसी से अपने हथेलियों को मॉल रही थी. अपनी बेबसी में उसने दीनदयाल को फ़ोन मिला दिया.

गुरु – दीनदयाल जी आप कहा तक पहुंचे??

दीनदयाल – मैं बस में बेथ चुक्का हु. लो माहि से बात करो

गुरु – hello माहि

माहि – दीदी वो कैसे है.

गुरु – माहि उनकी कंडीशन बहुत ख़राब है जल्दी से आ जा. मुझसे देखा नहीं जा रहा है. अब तो बस दीनदयाल जी का hi सहारा है. तुम लोग जल्दी से आ जाओ

माहि – दीदी से बस वह बहुत धिरे बस चला रहा है. क्या करू. मेरा दिल भी बैठा जा रहा है.

गुरु – बस में कंडक्टर होगा उससे मेरी बात करवा.

माहि – एक मं दीदी… (फिर कंडक्टर से) भैया एक मं मेरी दीदी से बात करेंगे..

कंडक्टर – मैं अपनी सवारियों को देखु या फ़ोन पैर बात करू…

माहि – भाई बस एक मं बात कर लो…

कंडक्टर – क्या मुसीबत है लाओ…. (फ़ोन पे ) hello बोलिये क्या बात है??

गुरु – देखो मेरी पति बहुत बीमार है. और इस बस में जो बैठे है उनके पास दवा है मेरे पति के लिए तो आप बस को तेज़ चलाइये..

कंडक्टर – मैडम यदि ज्यादा जल्दी है तो कार बुक करके जाना था है. गोवत बस में क्यों चढ़ गए??

गुरु – ये जहा से चले है वह पवत कार नहीं थी. आप बोलो अपनी बस को बुक करने का कितना लोगे??

कंडक्टर – टिकट तो 5000-7000 की hi बिकती है. बाकि हमको भी 15क तो चाहिए.

गुरु – मैं 1 लाख दूगी. पैर इनको लेने के लिए मेने एक कार भेजी है no है ********* . इस कार में इन दोनों को बिठा दो और 1 लाख कमा लो. पैर बस को फुल स्पीड से साफल्य चलना तुम्हारी जिम्मेदारी है.

कंडक्टर का तो मुँह hi खुला रहा गया. वो बोलै – मजाक तो नहीं है न??

गुरु – मेरी बहन को फ़ोन दो . ( फ़ोन माहि को दे देता है)

माहि – हाँ दीदी…

गुरु – माहि अभी तुम्हारे पास कितने रस. है.

माहि – दीदी 1-2क है क्यों??

गुरु – कुछ सोना पहना है??

माहि – हाँ इन्होने 1 चैन दी थी. वो पहनी है. काया बात है दीदी??

गुरु – वो चैन ड्राइव को दे दो और बोलो की स्पीड से चले…

माहि भी गुरु की बात समाज गयी. माहि को बहुत दुःख था. पब का गिफ्ट driver/conductor को देते हुए. पैर पब की जान से कीमती वो चैन नहीं थी. माहि ने तुरंत वो चेयर उसे दे दी. अब ड्राइवर ने बस की स्पीड बड़ा दी. ीदार अंकिता फुल स्पीड में आ रही थी. और ीदार बस फुल स्पीड में थी. अंकिता ने सैंडी को माहि का no. दे कर बस no जान लिया था. गुरु ने अंकिता के फ़ोन पैर सैंडी को उस डील के बारे में बता दिया. अंकिता ने सैंडी को लगा दिया की बस की और डायन दे. इन no की बस से माहि और दीनदयाल को लेना है. ीदार हवेली में सबकी हालत ख़राब थी. अंकिता ड्राइवर कर रही थी की उसका फ़ोन बज उदा जो सैंडी के पास था. सैंडी ने देखा तो स्क्रीन पे स्वीट माँ लिखा आ रहा था. अंकिता ने कार की सपेद कुछ काम करके अपने आप को सभालते हुए फ़ोन पिक किया.

लता – hello बीटा किसी है.

अंकिता – माँ में ठीक हु. आप किसी है??

लता – अपनी बेटी की आवाज सुन कर एक दम ठीक हो गयी हु. कहा है तू..

अंकिता – माँ में ड्राइव कर रही हु कुछ देर में बात करती हु.

लता – अच्छा क्लिनिक जा रही है.. तू एक काम कर तू होटल आ जा मैं वह कुछ देर में पहुंचने वाली हु. मुझको तुझको देखने का मन हो रहा है. पता नहीं क्यों सुबह से मन में ulde-shide ख्याल आ रहे है. तुझको देख लगी तो मेने मान को चेन मिल जायेगा.

लता की बात सुन कर अंकिता रोने लगती है. एक माँ को अपनी बेटी की परेशानी का पता बिना बताये चल गया. और अंकिता माँ की बात सुन कर खुद को रोने से रोक नहीं पायी.

लता – क्या हुआ लड्डू, तू रो क्यों रही है. मुझको बता. पंकज ने कुछ कहा है क्या?? सब ठीक तो है न वह पे??

अंकिता – माँ यहाँ कुछ भी ठीक नहीं है. सब कुछ ख़तम होने की कगार पे है. इनको पता नहीं क्या हो गया है. गुरु दीदी कहती है की ये मरने वाले है. यदि इनको बचाना है तो जल्दी से दीनदयाल जी को ले कर आओ. उनको hi लेने जा रही हु में. माँ मेरा दिल बहुत गहरा रहा है. यदि इनको कुछ हो गया तो सब ख़तम हो जायेगा माँ.

लता – क्या कहा रही है तू… चल रो मत हिम्मत रख में भी सिदा हवेली पैर पहुँचती हु. और तू हिम्मत से काम ले और जल्दी से वह आ जा.

अंकिता – हाँ माँ मैं दीनदयाल जी को ले कर तुर्रंत आती हु. आप हवेली पहुँचो….

फिर फ़ोन कट कर अंकिता कार की स्पीड बड़ा देती है. लता भी हवेली की और चलने को अपने ड्राइवर से बोल देती है.

ीदार गुरु पब को दिलासा दे रही थी. की वो जल्दी ठीक हो जायेगा. तभी पब का फ़ोन बजने लगता है. गुरु देखती है तो जुली का फ़ोन था. गुरु be-man से फ़ोन उड़ाती है.

गुरु- hello जुली

जुली – hello कोण, ठाकुर साहब है क्या???

गुरु – जुली मैं गुरु बोल रही हु, इनकी अभी तबियत ठीक नहीं है. बाद में बात करना.

ये कहा कर गुरु फ़ोन कट कर देती है. जुली को बड़ा अटपटा सा लगता है. कहा तो गुरु हमेश उससे प्यार से बात करती थी. और आज बिना बात किये hi फ़ोन कट कर दिया. उसने सोचा हो सकता है की ठाकुर साहब की तबियत के चलते ऐसा किया हो. पैर हुआ क्या है ठाकुर साहब को?? चलो आज की ट्रेनिंग पूरी करके आज हवेली चलती हु. वैसे भी बहुत दिन से मिली भी नहीं हु किसी से. जब से यहाँ जंगल में आये है. हवेली जाना होता hi नहीं है. आज सब से मिल भी ाउगि और ठाकुर साहब से रस भी ले ाउगि.
 
अपडेट 101

गुरु – जुली मैं गुरु बोल रही हु, इनकी अभी तबियत ठीक नहीं है. बाद में बात करना.

ये कहा कर गुरु फ़ोन कट कर देती है. जुली को बड़ा अटपटा सा लगता है. कहा तो गुरु हमेश उससे प्यार से बात करती थी. और आज बिना बात किये hi फ़ोन कट कर दिया. उसने सोचा हो सकता है की ठाकुर साहब की तबियत के चलते ऐसा किया हो. पैर हुआ क्या है ठाकुर साहब को?? चलो आज की ट्रेनिंग पूरी करके आज हवेली चलती हु. वैसे भी बहुत दिन से मिली भी नहीं हु किसी से. जब से यहाँ जंगल में आये है. हवेली जाना होता hi नहीं है. आज सब से मिल भी ाउगि और ठाकुर साहब से रस भी ले ाउगि.

बात ये थी की जुली जब से जंगल में ट्रेनिंग कैंप लगा कर वह गयी थी. तब से वो हवेली आयी hi नहीं थी. 6-7 वीक हो चुके थे. पहले तो पब खुद जाता सहता था. पैर ऐडा के हॉस्पिटल में एडमिट होने के कारन पब भी इस बिच 1 बार hi गया था. और जुली को आज तक रस. मांगने की जरुरत नहीं पारी थी पब खुद hi दे आता था. पैर 2 वीक से पब का सारा सिस्टम hi बिगड़ा पड़ा था. उसने ऐडा को छोड़ कर किसी पैर डायन नाह दिया था. तो आज जुली को र स्की जरुरत पद गयी थी. उसने फ़ोन किया तो भी पब से बात नहीं हुयी तब उसने हवेली जा कर पब से मिलने का सोचा. जुली को पता नहीं था की ऐडा के साथ क्या हुआ. या पब के साथ अभी क्या हो रहा है. जो जुली की टीम मेंबर ट्रेनिंग देने आती थी उसको भी कुछ पता नहीं चला था. वैसे भी जुली की टीम को पता था की किसी की पर्सनल लाइफ में उनकी कोई जगह नहीं है.

कुछ hi देर में लता हवेली पहुंच चुकी थी. लता को इस टाइम देख कर गुरु को समाज नहीं आया की कैसे रियेक्ट करे. पब नंगा अकड़ा पड़ा था. ये सब वह बैठा कर और रहे थे. और सब के दिमाग तो बंद ो चुके थे. बस एक गुरु hi थी जो खुद को सबले हुए थी. पब की आखों से भी आशु बहा रहे थे. उसका दर्द बाद रहा था.

लता जब अंदर आयी तो वह के हाल देख कर हिल गयी सभी लड़किया पब के चारो और बैठी रो रही थी. ऐसा लग रहा था की कोई लाश राखी हो और उसके चारो और बेथ कर औरते रो रही हो. एक दम मातम का माहौल था. गुरु लता को पब के रूम में ले गयी और शार्ट में बता दिया की क्या हुआ है और अंकिता क्यों दीनदयाल जी को लेने गयी है. लता भी रोने लगी थी. उससे न रहा गया तो उसने भी मणि जी को फ़ोन मिला दिया.

लता – नमस्ते गुरूजी.

मणि – जीती रहो लता.. बोलो कैसे याद किया.

लता – गुरूजी में अंकिता के पास हवेली पे हु. और यहाँ पे सब बेहाल है. कुछ तो करिये गुरु जी.

मणि –(बहुत hi दुखी आवाज में) लता में कुछ नहीं कर प् रहा हु. मैं भी वह से निकल चुक्का हु. पैर मुझको पहुंचने में टाइम लगेगा. और वैसे भी दीनदयाल तो पास में hi है. अभी वो hi इस संकट से बचा सकता है. कियोकि वो पाउडर भी है उसके पास जो सबसे जरुरी है.

लता – पैर जब तक क्या करे. पब दर्द से तड़प रहा है.

मणि – दर्द के लिए तो कड़ा दो उसको. क्या अभी तक दर्द काम करने का कड़ा भी नहीं दिया क्या??

लता – गुरु जी ये तो गुरुपित जी को hi पता होगा.

मणि – मेरी बात करवाओ उससे..

गुरु – जी गुरु जी..

मणि – गुरु तुमने कड़ा नहीं दिया क्या??

गुरु – पैर अपने कब बोलै कड़ा देने को??

मणि – गुरु मुझको तुमसे ऐसी उम्मीद नहीं थी. की तुम अपने पति को दर्द में देख कर भी उसको दवा नहीं डौगी. उसको कड़ा या कोई और दर्द की दवा हो तो वो दो उसको. पता नहीं उसने कैसे सहा होगा ये दर्द. बड़े से बड़ा दानव भी इस दर्द को सहा नहीं पता और स्थिलासँ क्रिया पूरी होने से पहले hi दम तोड़ देता है. और ये दर्द वो बच्चा सहा रहा hai..ek मानव हो कर भी हार नहीं मन रहा. गुरु तुम खुद अपने पति की दुसमन बन गयी हो.

गुरु तो मणि की बातो से पागल सी हो गयी. आगे वो सुन न सकीय और फ़ोन हाथ से गिर गया और भगति हुई हॉल में पहुंची. और जब पब के पास गयी तो देखा की पब के मुँह, कान और आखों से खून निकल रहा है. गुरु ये देख कर और दर जाती है. वो सविता को पब को पेनकिलर देना का बोल कर खुद कामिनी के साथ भगा जाती है जंगल की और. सविता तुर्रंत पब को 2 टेबलेट पानी में खोल कर उसके मुँह में दाल देती है. गुरु और कामिनी भी जल्दी से कड़ा बना लेती है. वो भी पब को पिता देती है. कुछ देर में hi पब को कुछ आराम मिलने लगता है. और इंतजार की घडिया ख़त्म हो जाती है. अंकिता दीनदयाल के साथ वह पहुंच जाती है. और लता को देख कर उससे चिपक कर रोने लगती है. माहि पब की कंडीशन देख कर एक कोने में कड़ी रोने लगती है. वो जैसी को अभी बी फेस नहीं जानती थी. गुरु माहि को रोटा देख माहि को अपने पास बुला कर हिम्मत देती है वैसे तो गुरु की भी हिम्मत जवाब दे रही थी. फिर भी वो सब को सभाल रही थी.

दीनदयाल गुरु से एक पूजा की तैयारी करने को बोलता है. गुरु भी स्पीड से सब कर देती है. फिर दीनदयाल की बात मणि जी से करवाती है. कियोकि दीनदयाल को सब कुछ याद नहीं आ रहा था. तो दीनदयाल मणि जी से बात करके एक बार मणि जी से सब समाज लेते है और पूजा पे बेथ जाते है. और पूजा सुरु होने से पहले घर की सभी लाइट ऑफ कर देते है अब वह पैर डार्क अंदर था. केवल हवन कुंड की आग को बंद खिड़कियों से थोड़ी बहुत hi रौशनी आ रही थी. पूजा सुरु होते hi दीनदयाल जी की बॉडी में भी पैन सुरु हो जाता है. माहि उनको सहारा देती है. पारी जा कर दीनदयाल जी की पीठ के पीछे पिलो का ढेर लगा देती है. ताकि उनकी कमर को आराम मिलता रहे. दीनदयाल अपनी चिंता छोड़ कर मंत्रो का ूचरड करता रहता है. और उस दिव्या पाउडर को मंत्रो से अभिमंत्रित कर के बोलता है.

दीनदयाल – इनकी पहली पत्नी कोण है??

गुरु – मैं हु.. पैर इन्होने आज तक मुझको छुआ भी नहीं है. सम्भोग के हिसाब से सविता इनकी पहली पत्नी है.

दीनदयाल – हम्म ठीक है तो तुम दोनों अपने कपडे उतर कर ये पाउडर पब के सरीर पे मालो. डायन रहे ये तुम दोनों के सरीर पे न लगे. नहीं तो जलन होगी. और हाँ तुम्हारे हाथो की जलन का में कुछ नहीं कर रक्त वो तुम दोनों को सहना hi होगा. वैसे तो ये काम भी पूजा करने वाले का होता है. पैर यदि पूजा करने वाला न कर सके तो उसका पटनेर ये काम कर सकता है. और जितनी ताकत से इस पाउडर को पब की सरीर पे रगडोगी ये उतना hi असर करेगा. याद रहे ये इतना hi पाउडर है. यदि इससे hi पूरा सरीर कवर नहीं हुआ तो इसको बचाना मुश्किल हो जायेगा. और तुम सब लोग कमरे में जहा से भी रौशनी आ रही है उन सब पैर कुछ लगा दो ताकि इसका असर जल्दी हो. डेरे में ये पाउडर चमकता है. और सरीर पे लगने से इससे गर्मी निकलती है. तो तुम दोनों को गर्मी भी लगेगी. इस लिए रूम का एक फुल कर दो. और यदि पसीना आये तो इनमे से किसी से साफ़ करवा लेना. पशीने की एक बून्द भी पब के सरीर पे कहर ढायेगी. तुम दोनों सुरु करो और में साथ में मंत्रो का उच्चारद करता रहुगा ताकि असर ज्यादा हो.

गुरु और सविता मं से पहले नंगी हो गयी. अभी सरम नाम की कोई चीज नहीं थी. वह पे वैसे भी माहि, अंकिता, कामिनी और दीनदयाल hi थे. अंकिता और कामिनी ने रूम में एक दम गुप् अंदर कर दिया था केवल हवन कुंड की आग की रौशनी से hi कुछ दिख रहा था. गुरु और सविता ने एक दूसरे की आखों में देख और सुरु करने को पूछा दोनों ने हाँ में गार्डन गुमा दी. दोनों ने पब को गीले सोफे से उदा कर जमीन पे लेता दिया. पैर पब का सरीर वैसा hi था ऐसे अभी भी वो सोफे पे हो. पैर अब उसके मुड़े हुए पेअर हवा में थे. और पथ जमीन पैर थी फिर दोनों ने तोडा सा पाउडर हाथो में लिया. तो पहले तो उनको बहुत अच्छा लगा. एक ठंडक सी पैदा हो गयी हाथो में. फिर वो तदंदक इतनी बाद गयी की हाथ सुन होने लगे और हाथो में जलन होना सुरु हो गया. (ये प्रॉपर्टी पेपरमिंट आयल की होती है. जो भाई पेपरमिंट के बरी में जानते होंगे उनको पता होगा) अपनी जलन को नजर अंदाज करके दोनों वो पाउडर पूरी ताकत से पब के सरीर पे झगड़ने लगी. सविता से असर ज्यादा हो रहा था. उसके पैर पावर्स थी. तो उसकी ताकत ज्यादा थी और असर भी ज्यादा था. कुछ देर में गर्मी होने लगी जहा भी ये पाउडर पब के सरीर पे लग रहा था. वह से गर्मी निकल रही थी. तोड़ी देर में दोनों को एक फुल होने पैर भी पसीना आने लगा और लोगो को भी आ रहा था पैर गुरु को सविता तो पसीने से नाहा चुकी थी. और सीडी कड़ी थी. पैर अब पब के पेअर सीडी हो चुके थे. पशीने से बालो ने परेशां करना सुरु किया तो गुरु ने अपने बालो को कानो के पीछे कर दिया. और बस इसके साथ hi गुरु की चिकने की आवाजे रूम में गुज गयी. जलन से गुरु का बुरा हाल था. गुरु पीछे हो कर जमीन पे बेथ गयी. अंकिता ने देखा तो गुरु के कान और माथे पैर 2-3 लाल निशान थे. सविता ने कामिनी को बुला कर अपने पसीने साफ़ करने को बोलै. और बालो में क्लिप लगवा ली. और सविता में गुरु से मन कर दिया दुवारा करने को. सविता पूरी टक्कट से पब की बॉडी को रगड़ती रही. और किमिनी सविता के पशीनो को साफ़ करती रही. एक बार कामिनी का डायन नहीं गया की पशीने की एक ड्राप हाथ से होती होई पब तक पहुंच गयी. और वह से सफ़ीद (वाइट) धुआँ उड़ गया और पब का फेस लाल हो गया. ये देख कर अंकिता भी सविता के पसीने साफ़ करने को कड़ी हो गयी. सविता के हाथो में आग लगी थी. पैर वो सब कुछ भूल कर पब की सरीर की मालिश कर रही थी. और इसका आसार भी हो रहा था. अब पब की बॉडी के बहुत से पार्ट्स में मोनेंट्स आ चुकी थी. और थोड़ी hi देर में पब एक दम ठीक हो गया. मतलब उसकी फुल बॉडी मोमेंट करने लगी. पैर सविता के हाथो का बुरा हाल था वो जलन से तड़फ रही थी. पब के खड़े होते hi सविता दूसरे सोफे पे लेट गयी. पब की बॉडी में पैन अभी भी था. पैर खतरा ताल चुक्का था. तो पब की बॉडी जल्दी hi रिकवर हो रही थी.
 
अपडेट 102

पब ने सविता के सर को अपनी गोद रख कर उसी सोफे पैर बेथ गया था. और उसके और अपने नंगे बदन पे चादर धक् दी थी. अंकिता गुरु को कपडे पहना चुकी थी. हवन पूजा पूरी करके दीनदयाल लम्बे हो गए थे. उनका पैन भी बाद गया था. माहि उनको देख कर दुखी थी. तो माहि के मन ने पब के लिए ख़ुशी थी. गुरु का तो ख़ुशी का ठिकाना नहीं था. हाथो की जलन भी इस ख़ुशी को काम नहीं कर प् रही थी. सविता भी खुश थी पैर उसकी जलन बहुत जयादा थी. और अब तो दर्द भी होने लगा था. कामिनी पे सविता का दुःख देखा नहीं गया तो वो दीनदयाल जी के पास जा कर बोली

कामिनी – पंडितजी सविता की जलन को भी कोई उपाए बताइये.

दीनदयाल – बीटा इसका इलाज तो डॉ. hi करेगा. या फिर जड़ी बूटियों से इलाज हो सकता है. मैं वो जड़ी बूटी जनता तो हु. पैर अभी में यहाँ से हिलने की भी कंडीशन में नहीं हु.

गुरु – आप बता दीजिये कोण सी जड़ी बूटी से ये ठीक होंगे. मुझको भी ज्ञान है जड़ी बूटियों का पैर मेरे समाज में नहीं आ रहा की ये किस तरह ठीक होंगे.

फिर दीनदयाल गुरु को बताते है. तो गुरु अंकिता को साथ में ले कर जंगल की और चल देती है. और यहाँ पैर कामिनी और पब मिल कर सविता को कपडे पहना देते है. और पब दिन दयाल जी से पच कर एक हॉट शावर ले कर फ्रेश हो कर बहार आ जाता है और फिर पब सबको बहार बुला लेता है. सब एक -2 करके पब से गले मिलते है. सब खुस थे पब को ठीक देख कर. कामिनी ने तब तक पूजा कर सारा सामान हटा दिया था. पब फिर से सविता के पास hi जा कर बेथ जाता है और उसका सर अपनी गोद के रख कर प्यार से उसके बालो में हाथ पेरने लगता है. गुरु उसके पास में बैठी थी. एरिका की आखों में ख़ुशी के आशु थे. तो माहि का मन खुश भी था पब के लिए तो दुखी भी थी अपने बापू के लिए. पब अंकिता को बोलता है की वो अपने फ्रेंड डॉ, अजय को यहाँ पे बुला ले. अंकिता अपने फ्रेंड को फ़ोन कर देती है. उसने गुरु के साथ लायी हुयी जड़ी बूटी कामिनी को दे दी थी. कामिनी उनसे लैप बना रही थी. पारी और काजल भी साथ थी. माउद और पेय तो रूम में खेल रही थी. उनको कुछ भी पता नहीं था. ऐडा भी पब के पास एक बार आयी थी अवनि का सहारा ले कर, पब को ठीक देख कर फिर अपने रूम में चली गयी. अब ऐडा का भी दर्द ख़तम हो चुक्का था. पैर सरीर की ताकत ख़तम हो चुकी थी. वो तो पब का सरीर ता जो उस दर्द को झेल गया. पैर ये नाजुक सी लड़की कहा उस दर्द को झेल पति. दर्द ने उसके साडी बड़ी की ताकत hi ख़तम कर दी थी. उसको अब उदा भी नहीं जा रहा था. अवनि तो वैसे भी पब के आगे नहीं आना चाहती थी तो वो ऐडा के साथ उसके रूम में थी.

कामिनी ने सविता और गुरु दोनों के हाथो पे लैप लगा दिया था. और सभी लोग हॉल में hi बैठे थे. लता भी वह मौजूद थी. एरिका को तो सब कुछ अलग लग रहा था. उसने पहली बार किसी फॅमिली को इतने पास से देखा था. जिसमे सब एक दूसरे को प्यार करते हो. डॉ. अजय भी दीनदयाल को दवा दे कर जा चुक्का था.

पब – बापू कुछ बाते है जो की मेरे समाज में नहीं आयी..

दीनदयाल – किस बारे मैं बात कर रहे हो?

पब – बापू अभी जो हुआ है उसी के बारे में कहा रहा हु. मेरे ये समाज नहीं आया की इन दोनों के हाथ में इतनी जलन है पैर मुझको जरा भी जलन नहीं है. ऐसा क्यों. जबकि वो पाउडर मेरी बॉडी पे hi लगा है.

दीनदयाल – बीटा बात ये है की तुम्हारी बॉडी पैर पहले से एक पाउडर लगा था. और वो बुरी ताकतों से प्रभाभित था. और ये पाउडर अच्छी ताकतों से. जब इसको इन दोनों ने अपने हाथ में लिया तो उसका असर इन पैर हुआ. पैर तुम्हारी बॉडी पैर उसका असर उस चमकीले पाउडर पे हुआ. जिसकी वजह से वो उस चमकीले पाउडर का असर ख़तम हो गया.

पब – और अपने इनको बिना कपडे के पाउडर लगाने को क्यों कहा?? ये उस पाउडर को कपडे पहन कर भी तो लगा सकती थी.

दीनदयाल – नहीं ऐसा नहीं हो सकता था. कियोकि यदि इन्होने कपडे पहने होते हो उनमे आग लग जाती. ये दोनों अलग -2 पावर्स के पाउडर थे. जब दोनों एक दूसरे को ख़तम करते है तो बहुत एनर्जी पैदा होती है. और वो गर्मी इतनी होती है की आग भी लग सकती है. तुमने देखा नहीं सविता को कितनी गर्मी लग रही थी. और अभी भी उसके सरीर को ऐसा फील हो रहा होगा की आग से जुलस गया है. एक जलन होगी पुरे सरीर में.

पब ने सविता की और देखा तो उसने हाँ में सर हिला दिया. पब की आखों से आशु बहने लगे.

पब – सविता तुमने मेरे लिए कितना सहा है. सच में मैं बहुत लकी हु वो तुम जैसी वाइफ मिली.

और ये कहा कर पब सविता के गाल को चुम लेता है. सविता भी पब के आशुओ को साफ़ करके उसके गालो को चुम लेती है. वो दोनों अपने प्यार में खो गए थे. सभी लोग पब और सविता को देख कर मुस्कुरा रहे थे. तभी लता खास्ती है और उनको हकीकत की दुनिया में लती है.

लता – अरे भाई तुम दोनों को सरम – बरम है की नहीं सबके सामने hi सुरु हो गए..

ये सुन कर सविता मरे सरम केअपना फेस पब की गोदी में छुपा लेती है. और पब भी नजरे चुराने लगता है. ये देख कर सब हसने लगते है.

पब – माँ आप गन्दी हो.

लता – अच्छा जी माँ के सामने बेशर्मो वाला काम तुम करो. और गन्दी माँ को कहा रहे हो.

दीनदयाल – क्या आप पब की माँ है??

लता – नहीं भाईसाहब में इसकी पत्नी अंकिता की माँ हु. और ये मेरा बीटा और दामाद है.

दीनदयाल – ोुह्ह्ह अच्छा तो आप रतन सिंह जी की पत्नी लता सिंह है.

लता – जी हां. पैर मेने आपको पहचाना नहीं और आप ये सब कैसे जानते है. पैर जो भी हो मैं आज आपकी बहुत आभारी हु जो अपने मेरी जिंदगी बचा ली..

दीनदयाल – मेने तो बस अपना फर्ज निभाया है. अपने गुरु सत्यानंद जी की दिए हुए ज्ञान को एक नेक काम में लगा कर. और वैसे भी ये केवल आपकी hi नहीं मेरी भी जिंदगी है.

लता – क्या कहा अपने आप गुरु सत्यानंद जी के चेले है. तो फिर आप मणि जी को भी जानते होंगे. वो मेरे गुरु है.

दीनदयाल – हाँ हमने साथ में hi शिक्षा ली है. शिक्षा पूरी होने पैर मणि जी में गुरुकुल का भर सभाल लिया तो मैं अपने पुस्तैनी मंदिर में सेवा करने लगा.

लता ये सुन कर उड़ कर आती है और दीनदयाल के पेअर छू कर उससे आशिर्बाद लेती है. ये देख कर वह कड़ी सभी लड़किया भी दीनदयाल के पेअर छूटे है. वैसे भी सबके मन में दीनदयान के प्रति बहुत सामान भाव था. उसने आज उन सबकी जिंदगी जो बचाई थी. पब भी पेअर चुने को होता है तो दीनदयाल ये कहा कर मन कर देता है की दामाद के पेअर छुए जाते है उससे पेअर चलवाते नहीं है.

दीनदयाल – बीटा मुझको एक बात समाज नहीं आयी की तुम पर ये स्थिलासँ हुआ कैसे.

पब – मुझको लगता है की आज हॉस्पिटल में मुझसे कोई टकराया था. मुझको लगा भी की कोई टकराया है पैर वह कोई नहीं दिखा तो मैं इग्नोर करके आगे बाद गया. सायद तब hi किसी ने ये चमकीला पाउडर मेने उप्पेर दाल दिखा था.

दीनदयाल – पैर बीटा इसके लिए भी किसी मानव में दानव का अंश होना चाहिए. या दानव होना चाहिए. तुम तो पुरे मानव हो फिर ये तुम पैर असर कैसे कर गया.

पब – जी मेने अंदर दस माँ की सकतिया है और उनका और डलासुर जी का अंश भी है उनकी पावर्स के रूप में. इणलिए मैं मानव और दानव दोनों हु.

दीनदयाल – हम्म याद आया तुमने बताया था की दस माँ ने तुमको गुरुपित से कैसे बचाया था.

फिर ये लोग वह बैठे ीदार उदार की बाटे करने लगते है.
 
अपडेट 103

पब – जी मेने अंदर दस माँ की सकतिया है और उनका और डलासुर जी का अंश भी है उनकी पावर्स के रूप में. इणलिए मैं मानव और दानव दोनों हु.

दीनदयाल – हम्म याद आया तुमने बताया था की दस माँ ने तुमको गुरुपित से कैसे बचाया था.

फिर ये लोग वह बैठे ीदार उदार की बाटे करने लगते है. चलिए जब टेक क बार त्रिकाल का हाल भी देख लेते है.

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त्रिकाल – संभु क्या खबर है पब मारा गया??

संभु – नहीं गुरूजी, वो फिर बच गया. फिर बच गे वो हरामजादा. सेल की किस्मत बहुत तेज़ है जो हर वॉर से बच रहा है.

त्रिकाल – पैर कैसे ये हुआ कैसे. ये तो संभव hi नहीं था. इस संसार में 5-6 लोग hi है जो की इसका तोड़ जानते है और उनने से एक मैं हु एक मणि है जो की वक्त रहते वह पहुंच hi नहीं सकता. और सबसे बड़ी बात वो पाउडर भी उसके पास नहीं है. और न hi उस पाउडर को इतनी जल्दी लाया जासकता है. बचे हुए 3-4 लोगो का तो किसी को नहीं पता की वो कहा है तो कोण है जिसने उसे बचा लिया.

संभु – पता नहीं गुरूजी कोई दीनदयाल नाम का आदमी है. और वो पाउडर भी था उसके पास उसने hi उसको बचाया है. पता नहीं कहा से आ गया वो पब को बचने के लिए.

त्रिकाल – क्या नाम बताया तुमने उसका दीनदयाल. पैर दीनदयाल उसको कैसे मिल गया. कमीने दिनऊउउउ (ये त्रिकाल बहुत तेज़ आवाज में गुस्से से चिलता है) सेल तूने शिक्षा के टाइम भी कभी मेरा साथ नहीं दिया. और फिर शिक्षा पूरी होते hi गायब हो गया. और आज फिर से उस मणि से जा मिला. छोड़ूगा नहीं तुझको मैं. मार डालूगा… अब पब से पहले तू मरेगा.

त्रिकाल को अपनी ये हार बरदास नहीं हो रही थी और इसके लिए वो दीनदयाल को मरने की सोच लेता है. वो गुस्से में बड़बड़ाये जा रहा था.

त्रिकाल – संभु जा और पहले इन दीनदयाल की कुलदली तैयार कर. अभी हमारा टारगेट ये है फिर पब.

संभु – जो आज्ञा गुरूजी..

और संभु निकल पड़ता है त्रिकाल के दिए हुए काम को अंजाम देने के लिए.

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ीदार हवेली में एक ख़ुशी का माहौल बना हुआ था. पब, सविता, गुरु, कामिनी, पारी, अंकिता, लता, दीनदयाल, माहि, काजल, जय, एरिका ये सभी हॉल में बैठे हाशि मजाक कर रहे थे. एक पायरा सा परिवार लग रहा था. पैर किसी को नै पता था की एक बहुत बड़ा तूफान आ रहा है. जो सब कुछ तभा कर सकता है.

और उस तूफान का नाम था- जुली………..
 
ये सभी लोग हाशि मजाक में लगे थे. कामिनी ने पब से बोलै

कामिनी – सुनो हमारे यहाँ पैर रिवाज है की जब भी किसी कुवारी लड़की की शादी होती है तो उसको उसके पति के साथ हमारी कुलदेवी की पूजा के लिए जाना होता है.

पब – पैर कामिनी तुम तो कुवारी नहीं हो न. और शादी किये हुए दिन भी बहुत हो गए. तो फिर क्यों…

कामिनी – अरे, मैं अपनी नहीं ऐडा के लिए बोल रही हु. ऐडा और आपको जाना चाहिए कुलदेवी की पूजा के लिए. कुल देवी का मंदिर यहाँ से 100 कम दूर फहड़ो पे है. वह का नजारा बहुत hi खूबसूरत होता है.

दीनदयाल – हाँ बीटा यदि रिवाज है तो जाना चाहिए. अपने kuldevi-devta को कभी भी नाराज नहीं करते. उनके आशीर्वाद से hi हमेशा कृषि आती है.

लता – मैं भी कामिनी की बात से सहमत हु.

पब – तो फिर ठीक है, पैर मैं अपनी सभी पत्नियों को ले कर जाउगा. केवल ऐडा को hi क्यों लेकर जाऊ. सबका हक़ है देवी के दर्शन पैर.

कामिनी – ये तो बहुत अच्छी बात है.

गुरु – कामिनी कब जाना है??

कामिनी – दीदी कभी भी जा सकते है. मेरे हिसाब से 2-3 दिन बाद चलते है.

पब – ठीक है, तुम जाने की और पूजा की सब तैयारियां करलो. फिर 3 दिन बाद चलते है. क्यों न माहि को भी ले चले?

दीनदयाल – मुझको कोई प्रॉब्लम नहीं है.

पब – कामिनी क्या पेय, काजल, जय और माउद भी जा सकती है??

कामिनी – हाँ क्यों नहीं कोई भी जा सकता है. वह पे कुछ होटल्स भी है तो मैं सब कुछ अर्रेंज कर लगी. मंदिर में एक पुजारी जी से जान पहचान भी है तो वो अच्छे से पूजा करवाड़ेगे.

पब – ठीक है पहले दर्शन और फिर बचे हुए टाइम में फॅमिली पिकनिक… क्यों केसा लगा आईडिया…

पारी – बहुत hi मस्त आईडिया है सर ji…..what ान आईडिया सर जी…

अंकिता – फिर तो मज़ा आएगा वैसे भी हम कभी भी साथ में घूमने नहीं गए…

अभी ये लोग इस टॉपिक पे hi बात कर रहे थे की कैसे जाना है, क्या -2 करना है. कोण -2 कार्स ले जनि है. की तभी वह पैर जुली आ जाती है. और सबको गुड इवनिंग विश करके पब की और देखने लगती है.

पब – बैठो जुली कड़ी क्यों हो. और बताओ क्या काम है. वह सब ठीक तो है न? पेसो की जरुरत हो तो बताओ..

पब को पता था की जुली बिना काम के हवेली में नहीं आती है. तो वो समाज गया था की किसी काम से hi आयी होगी. जुली भी पब की बात सुन कर एक खली चेयर पे बेथ जाती है.

जुली – वो बात ये थी की गुरु दीदी ने कहा था की आपकी तबियत ठीक नहीं है तो देखने चली आयी. और वो कुछ पैसे भी चाहिए थे. (पेसो वाली बात बहुत डेरे बोली थी. जुली को पैसा मांगते हुए सरम आ रही थी. वो पब की और न देख कर ीदार उदार नजरे चला रही थी सरम के कारन. तभी उसकी नजर पब के माँ बाप की फोटो पे पद गयी. जो की लता ने बनवा कर दी थी. उस पैर माला छड़ी हुयी थी. जुली एक तक उसको देखती रही. जैसे की पहचानने की कोसिस कर रही हो. देकते देखते hi वो एक दम बोल पड़ी

जुली – अरे ये इस रंडी की फोटो यहाँ पैर??? इसके साथ में कोण है ये.. और इसकी एक बेटी भी तो थी?? अरे पैर इस कुत्तिया की फोटो पे माला क्यों दाल राखी है. क्या ये मार गयी??? चलो अच्छा हुआ इस रंडी, हरामजादी को उस नर्क से छुटकारा मिल गया. नहीं तो अभी तक अपनी छूट पाटवा रही होती. पता नहीं…….

जुली इतना hi बोल पायी थी की उसकी आवाज बंद हो गयी. कियोकि पब ने उसको गार्डन से पकड़ कर हवा में तंग दिया था. पब की आखें गुस्से में लाल हो चुकी थी. उसके मुँह से ह्ह्ह्हुउउउ ह्ह्हह्हह्हुउउ की आवाजे निकल रही थी. पब का फेस भी गुस्से से एक दम लाल था.
 
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जुली – अरे ये इस रंडी की फोटो यहाँ पैर??? इसके साथ में कोण है ये.. और इसकी एक बेटी भी तो थी?? अरे पैर इस कुत्तिया की फोटो पे माला क्यों दाल राखी है. क्या ये मार गयी??? चलो अच्छा हुआ इस रंडी, हरामजादी को उस नर्क से छुटकारा मिल गया. नहीं तो अभी तक अपनी छूट पाटवा रही होती. पता नहीं…….

जुली इतना hi बोल पायी थी की उसकी आवाज बंद हो गयी. कियोकि पब ने उसको गार्डन से पकड़ कर हवा में तंग दिया था. पब की आखें गुस्से में लाल हो चुकी थी. उसके मुँह से ह्ह्ह्हुउउउ ह्ह्हह्हह्हुउउ की आवाजे निकल रही थी. पब का फेस भी गुस्से से एक दम लाल था. ये देख कर सबकी फैट गयी थी. किसी के कुछ समाज नहीं आए रहा था. गुस्से में तो सब थे. आखिर पब की माँ को गली दी थी. जुली अपने आप को छुड़ाने के लिए हाथ पेअर चला रही थी. पैर ये पब का हाथ था इससे छूटना मुंकिन नहीं था. समाज तो जुली को भी नहीं आ रहा था की ये लोग ऐसे रियेक्ट क्यों कर रहे है. वो नहीं जानती थी की ये पब की माँ है. लता की तो गुस्से से हालत ख़राब थी.

लता एक दम चीखते हुए बोली – मार दाल इस लड़की को. इसने मेरी बहन मेरी दोस्त को गली दी है वो भी इतनी घटिया. मार दाल बीटा तोड़ दे इसकी गार्डन…

लता की आवाज पे पब जुली की गार्डन तोड़ता उससे पहले hi गुरु की आवाज आयी

गुरु – रुक जाओ पब. पहले इससे ये पूछो की इसकी हिम्मत कैसे हुई गाली देने की. इसने ऐसा क्यों कहा की मर कर उनको नर्क से छुटकारा मिल गया. इसको मरना 1 मं का काम है. और ये हम सब के रहते भाग भी नहीं सकती. पैर यदि ये मर गयी तो तू कभी नहीं जान पाओगे की इसने ऐसा क्यों किया.

गुरु की बात सुन कर पब रुक जाता है. उसकी बात में दम था. वो अपने गुस्से को पी कर उसे एक और फेक देता है. तो जुली एक वाल से टकरा जाती है. और उसके सर से खून निकलने लगता है. जुली गुरते hi बुरी तरह खस्ने लगती है. उसकी साँसे अटक गयी थी. यदि 1-2 मं और पब उसे न छोड़ता तो वो मर चुकी होती. पब एक दम से चीख कर बोलै

पब – बोल बहिन की लोदी… बोल तेरी हिम्मत कैसे हुई मेरी माँ को गली देने की. क्यों बोलै ये सब. बोल नहीं तो जान ले लगा तेरी.

कुछ देर तक तो जुली पे बोलै hi नहीं जा रहा था. पैर जब बोलने लायक हुयी तब

जुली – क्या कहा …. ये तेरी माँ है… … …. अरे क्या नाम था इसका……. हाँ याद आया अल्पना… तू है अल्पना का बीटा… क्या ये सच है तू अल्पना का बीटा है… और क्या नाम था हाँ … सोनल … तू सोनल का छोटा भाई है. तू hi है वो….??? बोल तू है अल्पना का बीटा… प्लीज् ठाकुर साहब बोल दो की ये झूट है .. तुम इसके bête नहीं हो सकते … बोल दो प्लीज…

जुली की बाते सबको हैरान कर रही थी. पहले तो जुली ने पब से तू कर के बात की जबकि ऐसा आज से पहले हुआ hi नहीं था. और फिर जब इज्जत से बात की तो अल्पना का बीटा न होने को कहने लगी. किसी के कुछ समाज नहीं आ रहा था की हो क्या रहा है. अब सबके फेस पे गुस्से के साथ -2 हैरानी के भाव भी थे. पब कुछ देर तो जुली को देखता रहा और सोचता रहा की ये बोल क्या रही है.

पब – जुली क्या बक रही है तू.. तेरा दिमाग ख़राब हो गया है. आज तू मेरे हाथ से hi मारेगी कुत्तिया. मैं जो पूछ रहा हु उसका जवाब देने की जगह कहा रही है की मैं अपनी माँ को माँ न कहु. तो क्या कहु…. यही है वो जिन्होंने मुझको जनम दिया यही है वो जिन्होंने मुझको दुनिया की साडी खुसिया दी. देवी है मेरी माँ. मई पूजता हु उनको देवी की तरह… और आज तूने उनको गाली दे कर गलती कर दी जुली.. बोल क्यों किया तूने ये सब…

ये सुन कर जुली रोने लगी. उसके माथे से खून बह रहा था पैर उसको कोई चिटा नहीं थी. वो कुछ देर तक रोटी रही. उसके फेस पे बहुत से भाव आते रहे और जाते रहे. पैर वो चुप नहीं हुयी. और फिर एक दम से चुप हो गयी उसका फेस एक दम कड़ोर हो गया. और फिर बोली

जुली – मारना चाहता है न तू मुझको तो मार दे मार दे मुझे.. बोल कैसे मरेगा. तड़पा -2 के का एक बार में hi. मार मुझको मार दे मुझे.. (उसने पब के हाथो को पकड़ कर अपनी गार्डन पे रख दिया) … दवा दे इस गले को ख़तम कर दे मुझे… तू देवी बोलता है न अल्पना को.. सच में थी वो एक देवी…. केवल तेरे लिए hi नहीं हम सबके लिए हम 17ो के लिए वो एक देवी थी, तेरी बहन सोनल के लिए भी वो एक देवी थी. उसकी पूजा आज भी करती हु मैं. दिल से मानती हु की वो hi है जिसने हमको इंसान होने का एहसास दिलाया. उसने बदल दी थी हम सब की सोच, हम सब की जिंदगी. ……… मार मुझको मार अब ये जान कर में सायद तेरी बफादार न रहा सकू की तू hi उस देवी का बीटा है. मार दे….

जुली की बात से सबके दिमाग घूम गए थे. कहा अभी वो अल्पना को अभी गन्दी -2 गालिया दे रही थी कहा अभी उसे देवी बोल रही है. कहा अभी बचने के लिए हाथ पेअर मर रही थी कहा अब खुद मरने को बोल रही है. कहा वो पब की इतनी इज्जत करती थी. उसकी एक आवाज पे जान देने को भी तैयार थी. कहा आज वो पब के साथ काम नाह करना चाहती थी. सबके दिमाग ख़राब हो चुके थे. जब कोई कुछ यही बोलै तो कामिनी आगे आ कर जुली से बोली

कामिनी – जुली तुमको हो क्या गया है, किसी बिना सर पेअर की बाते कर रही हो. कभी कुछ कहती हो कभी कुछ… क्यों मरना चाहती हो. और यदि माँ को देवी मानती हो तो गाली क्यों दी…

जुली – पता है मैं क्यों मरना चाहती हु. कियोकि मेने पुरे जीवन में 2 लोगो ने प्यार किया. उनको इस दिल में भगवन से उप्पेर का दर्जा दिया. वो मेरी जिंदगी का सब कुछ थे. और 2 hi लोगो ऐसे है जिनसे मेने नफरत की है. ुका फेस देखना भी मुझको पसंद नहीं.

कामिनी – कोण है वो लोग..

जुली – मेने आज तक केवल देवी अल्पना और ठाकुर पब से प्यार किया है. यही है वो दोनों जिनके लिए मैं कुछ भी कर सकती हु. और ठाकुर भानु और अल्पना के bête से मुझे नफरत है. मुझको नहीं पता था की ठाकुर पंकज hi अल्पना का बीटा है. वो बीटा जिसकी वजह से अल्पना को एक देवी से रंडी बनना पड़ा. वो बीटा जिसके लिए अल्पना ने नर्क की जिंदगी को हस्ते हुए गले लगा लिया. अच्छा हुआ वो रंडी मर गयी. नहीं तो इस bête और अपनी बेटी के लिए उसे और कितने दिन रोज मरना पड़ता. पैर उसके bête ने कभी नहीं देखा की उसकी माँ किस हाल में है. उसे पैसा कामना था. वो भूल गया की माँ और बहन के लिए भी उसका कुछ फर्ज है. अब तुम hi बताओ में कैसे जिन्दा राहु जिससे में सबसे ज्यादा नफरत करती हु वो hi मेरा मालिक मेरा भगवन हो तो केसेजी सकती हु में. इससे अच्छा है की वो भगवन hi मुझको मार दे.

जुली की बातो का पब के बहुत गहरा असर पड़ा पब सोफे पे दम से गिर पड़ा. आखें खुली थी. उनमे से आशु बह रहे थे. पर सरीर में और कोई मोमेंट नहीं थी. जुली की हर बात उसके उप्पेर बम की तरह हमला कर रही थी. उसके मंद में दमके हो रहे थे. ऐसे पड़े हुए उसके मंद में कुछ आया तो और एक दम उदा और जुली के पैरो को पकड़ कर बोलै

पब – जुली प्लीज मुझको बताओ क्या हुआ था मेरी माँ और बहन के साथ. तुम कैसे जानती हो उन दोनों को. मैं तो उनको सूरज कुंड गाओं में छोड़ कर आया था. और लास्ट टाइम में भी उनको वह पे hi देख गया था. और मेने उनसे जब भी फ़ोन पैर बात की कभी ऐसा नहीं लगा की वो कही और हो. मैं मंटा हु जुली मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गयी जो उनसे मिलने भी नहीं आया. मैं उस टाइम पैसा कामना चाहता था. मैं अपनी माँ को अपनी बहन को हर वो ख़ुशी देना चाहता था. जो कभी उनको नहीं मिली. मेने बचपन से ी अपने माँ बाप को मजदूरी करते देखा. एक-2 पैसा बचा कर, खुद आधा पेट खा कर हम भाई बहिन को पालते देखा. हम दोनों के लिए मेरे माँ बाप ने बहुत दुख झेले थे जुली. मैं तो बस उनको कुछ खुशिया देना चाहता था. इसलिए कमाता रहा और रस जोड़ता रहा.
 
भाई लता के हिसाब से पब के जनम से पहले अल्पना लता के साथ थी. और पब के हिसाब से उसके जनम से अल्पना की मूट था वो पब के साथ कुरज कुंड गाओं में थी.

और जुली को ठाकुर भानु दूसरे देश से खरीद कर लाया है.........

थैंक्स फ्रेंड फॉर रिप्लाई .......... लवली कमेंट....

वेट करो भाई... सभी जवाब मिलेंगे.............
 
*ll शुभ दीपावलीll*

आपको ओर आपके परिवार को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाओ के साथ "प्रकाश व प्रसन्नता के पर्व दीपावली पर बहुत बहुत मंगलकामनाएं। धन, वैभव, यश, ऐश्वर्य के साथ दीपावली पर माँ महालक्ष्मी आपकी सुख सम्पन्नता स्वास्थ्य व हर्षोल्लास में वृद्धि करें, इन्हीं शुभेच्छाओं के साथ।"

*ll शुभ दीपावली ll*
 
अपडेट 105

पब – जुली प्लीज मुझको बताओ क्या हुआ था मेरी माँ और बहन के साथ. तुम कैसे जानती हो उन दोनों को. मैं तो उनको सुरक कुंड गाओं में छोड़ कर आया था. और लास्ट टाइम में भी उनको वह पे hi देख गया था. और मेने उनसे जब भी फ़ोन पैर बात की कभी ऐसा नहीं लगा की वो कही और हो. मैं मंटा हु जुली मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गयी जो उनसे मिलने भी नहीं आया. मैं उस टाइम पैसा कामना चाहता था. मैं अपनी माँ को अपनी बहन को हर वो ख़ुशी देना चाहता था. जो कभी उनको नहीं मिली. मेने बचपन से ी अपने माँ बाप को मजदूरी करते देखा. एक-2 पैसा बचा कर, खुद आधा पेट खा कर हम भाई बहिन को पालते देखा. हम दोनों के लिए मेरे माँ बाप ने बहुत दुख झेले थे जुली. मैं तो बस उनको कुछ खुशिया देना चाहता था. इसलिए कमाता रहा और रस जोड़ता रहा.

जुली – तुम कभी अपनी माँ बाप को समाज hi नहीं पाए. वो तो बिना पैसे के भी खुस थे तुम दोनों के साथ. लता – हाँ बीटा ये ठीक कहा रही है. अल्पना और प्रतिक को यदि पैसे की चाहा होती तो वो आज करोड़पति होते. तुम नहीं जानते तुम्हारे पैदा होने से पहले वो क्या थे. बस तुम इतना समाज लो की तुम जो ये रतन ग्रुप्स ऑफ़ कंपनी को देख रहे हो न. और जो हमारे पास पैसा है उसकी नीव तुम्हारे माँ बाप ने hi राखी थी. उन दोनों की (अल्पना और प्रतिक) और हम दोनों की (रतन और लता) म्हणत ने ये सब खड़ा किया था. जानते हो मैं आज क्यों आयी हु. मुझको थोड़ी न पता था की तुम बीमार होने वाले हो जो में तुमको देखने चले आती.

पब के साथ सभी के मन में ये सवाल उदा की सच में किसी ने लता से पूछा hi नहीं की वो किस काम से आयी है.

अंकिता – मेने तो सोचा की माँ आप मुझसे मिलने आयी हो.

लता – बीटा वो भी एक वजह है की मुझको तेरी याद आ रही थी. और अपने bête की भी. पंकज तुम कभी नहीं समाज पाओगे की तुम हमारे लिए क्या हो. कियोकि तुम्हारी माँ और बाप के हम पति पत्नी के इतने एहसान है की अपनी साडी दौलत दे कर भी नहीं चुक्का सकते.

फिर लता अपने बैग को लेन को बोलती है. अंकिता लता का बैग ला कर देती है. लता उसमे से कुछ पेपर निकलती है. और वो पब को देती है.

लता – ये देखो, देखो इन पेपर्स को ये 26 साल प्यूरीन पेपर्स है. और ये नए पेपर जो मैं तुमको देने आयी हु.

पब (पेपर्स को देखते हुए) – माँ किस चीज के पेपर है?? ारे के तो मेरी माँ और पिताजी के सिग्न है. और नाम भी उनका है. (फिर पब पूरा पेपर पड़ता है) ये तो आपकी कंपनी के 2000 शेयर के पेपर है. जिनकी कीमत उस टाइम 22000 रस थी. और ये आपकी प्रॉपर्टी का 5% आप दोनों ने सोनल दीदी के नाम किया हुआ है उसके पेपर है. जो उनको 18 इयर्स की आगे पैर मिलने थे. पैर ये दोनों तो डुप्लीकेट पेपर्स है. ओर्जिनल कॉपी नहीं है.

लता – हाँ कियोकि ओर्जिनल तुम्हारी माँ के पास थे. वो चाहती तो एक मं में अपना हक़ ले सकती थी. तुम जानते हो आज इन शेयर की कॉस्ट 20कर. रस है. और ये देखो मेने सोनल की प्रॉपर्टी अब तुम्हारे नाम कर दी है. और ये पुरे 15000 कर. की है.

15000 कर. का नाम सुनते hi सबके मुँह खुले के खुले रहा गए. 5 मं तक तो किसी को समाज hi नहीं आया की क्या बोले और क्या नहीं. अंकिता और लता ये दोनों नार्मल थे. कियोकि अंकिता भी जानती थी की उसके बाप की प्रॉपर्टी का 5% का मतलब 15000 कर. है. फिर पब नए पेपर देखता है जिसमे ये सब पब के नाम किया हुआ था.

लता – सोचो पब यदि तुम्हारी माँ को पेसो की जरुरत होती तो वो एक बार में hi ये सब ले सकती थी. उसे पेसो के लिए जान देने की जरुरत नहीं थी. यही वो वजह थी की मैं तुमको गलत समाज बैठी. और सायद जुली को भी आज कुछ ऐसा hi हुआ है. जुली पब की इसमें कोई गलती नहीं थी. वो भी अपनी माँ और बहन की ख़ुशी के लिए hi पैसा कमा रहा था.

जुली एक दम चीखते हुए – पैसा पैसा पैसा ….. साला ये पैसा hi है जिसकी वजा से दुनिया की हर ख़ुशी चीन जाती है. इस पैसे की वजा से hi मेरी जिंदगी में सब गलत हुआ. क्यों …. क्यों पागल है इंसान पैसे के लिए.. अपना घर, अपनी बीबी, अपने बच्चो, अपने दोस्तों से भी मुँह मोड़ लेते है. क्या फायदा ऐसे पैसे का जब कोई अपना hi साथ न हो. मानती हु पैसा जरुरी है जीने के लिए पैर पैसे के लिए सब कुछ छोड़ देना कहा की समझदारी है. इस पैसे की वजह से hi मेरे कबीले में हम सब को ठाकुर भानु को बेच दिया. फिर भानु ने पैसे के लिए न जाने कितनी लड़कियों की जिंदगी बर्बाद कर दी. भानु ने पैसे के लिए hi अल्पना जैसे देवी को रंडी बना दिया. पब में तुमसे पूछती हु आज तो तुम्हारे पास बहुत पैसा है न तो ले आओ अपनी माँ को बापिस लोटा दो उसे वो 6 साल जो उसने टिल टिल करके गुजरे है. हर रोज मरी है वो इन 6 सालो में. बताओ बदल सकते हो वो सब……………. .. तुम मुजके पूछ रहे थे न की मैं तुम्हारी माँ को कैसे जानती हु. कहा मिली में उससे… तो सुनो वही इसी गाओं में इसी हवेली में रही है वो मेरे साथ पुरे 3 मंथ. तुम तड़प उड़े थे न जब तुमने उस अनजान लड़कियों को वो ट्रेनिंग करते हुए देखा. तुम्हारी रूह काँप गयी थी न उन पर हुए जुर्म को देख कर. इसलिए तुमने उनकी जिंदगी सुंदरने का टेका लिया था न की वो सब तुम पैर देखा तक नहीं गया. तो सुनो वो सब सहा है तुम्हारी माँ और बहन ने. मेरे ढाये है उस दोनों पैर भी वो जुर्म जो तुम्हे देखे नहीं गए. पुरे 3 मंथ की ट्रेनिंग दी है उस दोनों को मेने. मेने hi उनको रंडी बनाया. मेने किया वो सब जिससे भानु पैसा कमा सके…….

जुली के ये सब्द पब के लिए बम से भी जयादा खतरनाक थे. पब की मान के चिथड़े-2 हो गए थे. उसका मंद में गुस्से की टॉप सीमा को भी पार कर चुक्का था. उसका जिस्म कैंप रहा था. गुस्से में उसका पूरा सरीर लाल हो चुक्का था. वो जनता था की ट्रेनिंग में क्या क्या सहना पड़ता है. वाओ ो दर्द वो जुर्म उसकी माँ एप उसकी बहन पे हुए है ये सोच -2 कर उसकी अंतरात्मा उसे दुत्कार रही थी. किट ेरे होते हुए भी यदि तेरे अपनों को वो सब सहना पड़ा तो क्या फायदा तेरे होने का. पब पागल हो रहा था. आखों से चिंगारी निकल रही थी. जबड़े कास चुके थे. वो एक दम चीख उडाता है.

पब – nahhhhhhhhhhhhiiiiiiiii ये सच नहीं हो सकता मेरी माँ को ये सब सहना पड़ा …….. ये नहीं हो सकता मैं आआगगगग लगा दुगा इस दुनिया को. इस गाओं को इस गाओं में मेरी माँ के साथ ये सब हुआ. सबसे पहले इस हवेली को ागगग लगाऊगा. क्यों मार दिया उस भरु को मेने इतनी आसानी से उसे तो तड़प -2 के मरना चाहिए था. साले कुत्ते ने मेरी माँ के साथ ये सब किया. मेरी बहन को भी नहीं छोड़ा.. मैं भानु की पूरी नस्ल को hi ख़तम कर दुगा… (एक दम पब कामिनी की और बाद गया. और उसका गाला पकड़ कर उप्पेर उदा दिया) … कुत्तिया तू hi थी न उस हरामजादे की बीबी. आज तुजे में मार दुगा. कहा है भानु की बेतिया… निकालो बहार दोनों को बहार लाओ मैं आज दोनों को मार दुगा. मैं सबको मार दुगा. आग लगा दुगा इस दुनिया को…

कामिनी की हालत ख़राब हो चुकी थी. पैर पब उसे छोड़ hi नहीं रहा था. गुरु बुरी तरह गवरा रही थी. उसे समाज आ चुक्का था की पब बे काबू हो चुक्का है वो इस टाइम किसी को भी मार सकता है. गुरु सविता को इशारा करती है. और गुरु पब के पचे तो सविता कामिनी के पीछे थी. गुरु अपनी पूरी ताकत से पब की एक नाश दवा देती है. और कोई होता तो एक सेक्. में उस नाश के इतनी तेज़ दबने से बेहोश हो जाता. पैर पब को बेहोश होने में पुरे 2 मं लग गए. बेहोश होते hi कामिनी को सविता ने तो पब को गुरु ने सभाल लिया. और दोनों को जमीन पर लिटा दिया. कामिनी भी बेहोश हो चुकी थी. अंकिता ने उसे चक किया और पानी के चीते मार के उसे उदय. कामिनी खासते हुए बेथ गयी. जुली भी पास में जमीन पे बैठी सब देख रही थी. जुली को पब का ये रूप देख कर और पब के साथ बिताये पालो को याद करके लगने लगा की उसकी सोच गलत थी अल्पना की बर्बादी में पब का हाथ नहीं हो सकता. पैर वो फिर सोचती है की तो फिर अल्पना ने हर बार ये क्यों कहा की मैं ये सब अपने bête के लिए सहा रही हु. और जब करीब 1 साल पहले में उससे त्रिकाल के घर में मिली थी तब भी उसने कहा की अब ये सब सहन नहीं होता, bête के खातिर गुरूजी की बात भी नहीं मानी. काश वो उस दिन हम दोनों को बचा लेते. और फिर जब मेने उसको बताया की कल उसकी बेटी के साथ भी वो सब होने वाला है तब भी उसने कहा था की मैं अपनी बेटी की जिंदगी बर्बाद नहीं होने दूगी चाहे फिर bête मारे या जिए. मेने उसके लिए बहुत सहन कर लिया. और वो पैसा कमाने में अपनी माँ और बहन को भूल चुक्का है. पैर मेरी बेटी को कोई छुए भी तो मैं भी ये भूल जोगी की कोई मेरा बीटा भी था.

यहाँ जुली अपनी सोच में बिजी थी वह पैर गुरु पब को बेहोश करके मणि जी से बात करने लगती है. और उनको सब बता देती है. की अभी कुछ देर में hi कितना बड़ा तूफ़ान आया है. और और सब कुछ बर्बाद कर रहा है. मणि जी ये सब सुन कर बोलते है

मणि – गुरु सायद इस तूफ़ान को वो hi रोक सकती है. मुझको उसी को बुलाना होगा. नहीं तो सब ख़तम हो जायेगा.

गुरु – कोण गुरूजी आप किसकी बात कर रहे है. कण है जो पब को इन हालातो में रोक सकती है.

मणि – अभी कुछ hi घंटो में वो तुम्हारे सामने होगी जब तुम खुद देख लेना. बस तुम सुबह तक पब को होश मत आने देना. किसी भी तरह उसे बेहोश hi रखना. मैं तो 1 ऑवर में वह पहुंच जाउगा. पैर उसे आने में टाइम लगेगा. चलो मैं तुमसे बाद में बात करता हु. तुम जुली को भी कही जाने मत देना. उसका होना भी बहुत जरुरी है.

घर में फिर से एक दर और दहसत का माहौल था. जहा सुबह पब की जान जाने का दर था वही अब पब से जान बचने का दर था. आज का दिन hi ख़राब था इन सबके लिए. एक मुसीबत ताली नहीं की दूसरी ने डेरा दाल लिया था. कुछ hi देर में मणि हवेली पैर आ जाता है. मणि को देख कर सब उसके पेअर छूटे है. फिर लता की साबरा का ब्नद टॉट जाता है. वो मणि जी से रट हुए कहती है.

लता – गुरूजी क्या हो रहा है ये सब. और ये लड़की क्या कहा रही है. मेरी बहन को वो दर्द क्यों झेलना पड़ा. वो दर्द जिसको जलने से अच्छा मरना है. क्यों वो उस दर्द के साये में आयी. और क्यों उसने किसी से मदत नहीं ली. वो इतनी तकलीफो को झेलती रही पैर मुझको एक बार भी मिलने की कोसिस भी नहीं की. क्या हुआ था उसके साथ जो उसने अपनी बेटी के साथ खुद को मार लिया. मुझे आज सब जानना है गुरूजी. अब मैं जी नहीं सकती बिना सच के.
 
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