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कामिनी ये कहा कर पब के रूम की और बाद जाती है. और उन तीनो को भी साथ आने का इस्सर कर देती है. सब लोग रूम में पहुंच जाती है. बहार गुरु थी. वो डायन लगाती है और मणि से बात करने लगती है.
गुरु – गुरूजी (मणि) अनर्ध हो गया है. पब के ऊपर डलासुर के दानव रूप का साया है. जो मेने और कामिनी के लिए प्रतिबंदित है.
मणि – ोूहः प्रभु, पैर तुम ये कैसे कहा सकती हो?? तुमने कैसे जाना की ये डलासुर महाराज के दानव रूप का साया hi है.
गुरु – मेने पानी का दरपद (मिरर) बनाया था. जैसे की अपने सिखाया था न. और जब उसमे मेने पब का फेस देख तो उसमे डलासुर के दानव रूप को देख. और आप जानते है की डलासुर का दानव रूप का साया केवल सम्भोग चाहता है. और ये केवल मेरे और कामिनी के लिए पागल हो रहे है. मेने इनकी और पत्नियों को भी नग्न (नुदे) करके इनके पास भेजा पैर फिर भी ये कामिनी के पीछे hi रहे. इसका मतलब तो ये hi है न की ये मेरे और कामिनी के लिए प्रतिबंदित है.
मणि – हम्म तो ये बात है, ये तो सच में बहुत hi बुरा हुआ. अब क्या करेंगे हम??
गुरु – आप hi बताइये क्या करना है. अभी तो किसी तरह से हम सब ने उनको रोका हुआ है. पैर ज्यादा देर तक रुक नहीं पाएंगे.
मणि – समस्या गंभीर है. त्रिकाल ने बहुत सोच समाज कर ये कदम उदय है. इसमें दस माँ भी मदत नहीं कर सकती है.
गुरु – कोई तो उपपाये होगा.
मणि – देखो डलासुर के दानव रूप को हर हाल में सम्भोग चाहिए, वैसे भी वो साया इस सब के लिए प्रतिबंदित है. तो यदि पब ने अभी किसी से सम्भोग नहीं किया तो वो मर जायेगा.
गुरु – और यदि किया तो भी सब मरेंगे न गुरूजी..
मणि – हाँ ये भी है, अब तो केवल एक उपाए है. की उसकी कोई कुवारी पत्नी उसके साथ सम्भोग करे.
गुरु – तो 3 कुवारी पत्नी है फिर क्या समस्या है.
मणि (गुस्से में) – तुम पागल हो गई हो क्या. तुमको नहीं पता वो क्रिया की वजह से कुवारी है. यदि अभी उनके साथ सम्भोग किया तो ये क्रिया यही पे पूरी हो जाएगी और पब को केवल 3 पावर के साथ hi त्रिकाल का सामना करना होगा.
गुरु – सॉरी गुरूजी, पैर अब कुवारी पैंटी तो है नहीं फिर क्या कर सकते है.
मणि – हम्म बात तो ठीक है. त्रिकाल ने एक बार फिर हम सबको मात दे दी. अब कुछ नहीं हो सकता. तुम सबका जीवन बचने के लिए अब इस क्रिया को यही पे रोकना होगा. तुम कुछ ऐसा करो की पब कामिनी और तुम्हारे धोके में उन तीनो के साथ सम्भोग करे. इससे डलासुर भी संत हो जायेगा, और तुम सब भी बच जाओगे. बस जिस टारगेट को पाने निकले थे वो हम नहीं प् सकेंगे.
गुरु – कोई और तरीका नहीं है??
मणि – गुरु तुम भी जानती हो अब कुछ नहीं हो सकता सब ख़तम हो चुक्का है. त्रिकाल ने बैठे -2 hi हम सब को हरा दिया. अब जाओ और सबकी जिंदगी बचाओ.
मणि ये कहा कर संपर्क तोड़ देता है. और ाखोनो में आशु लेकर चिलता है – हे दस माँ इस दिन के लिए hi अपने ये सब करने की आज्ञा दी थी. मैं हार गया माँ मैं हार गया……
ीदार गुरु भी बुरी तरह रोनी लगती है. – क्या करू मैं दस माँ, क्या करू कहा से लौ कुवारी पत्नी. कैसे बचाओ अपने पति को कैसे.. क्या करू की पति भी बच जाये और वो दुनिया को बचने के टारगेट को भी पूरा कर सके. एक hi पल में अपने सब ख़तम कर दिया माँ. कुछ तो रहा दिखाओ, कहा से लौ उनकी कुवारी पत्नी जो की इस दुनिया में है hi नहीं……..
कामिनी ये कहा कर पब के रूम की और बाद जाती है. और उन तीनो को भी साथ आने का इस्सर कर देती है. सब लोग रूम में पहुंच जाती है. बहार गुरु थी. वो डायन लगाती है और मणि से बात करने लगती है.
गुरु – गुरूजी (मणि) अनर्ध हो गया है. पब के ऊपर डलासुर के दानव रूप का साया है. जो मेने और कामिनी के लिए प्रतिबंदित है.
मणि – ोूहः प्रभु, पैर तुम ये कैसे कहा सकती हो?? तुमने कैसे जाना की ये डलासुर महाराज के दानव रूप का साया hi है.
गुरु – मेने पानी का दरपद (मिरर) बनाया था. जैसे की अपने सिखाया था न. और जब उसमे मेने पब का फेस देख तो उसमे डलासुर के दानव रूप को देख. और आप जानते है की डलासुर का दानव रूप का साया केवल सम्भोग चाहता है. और ये केवल मेरे और कामिनी के लिए पागल हो रहे है. मेने इनकी और पत्नियों को भी नग्न (नुदे) करके इनके पास भेजा पैर फिर भी ये कामिनी के पीछे hi रहे. इसका मतलब तो ये hi है न की ये मेरे और कामिनी के लिए प्रतिबंदित है.
मणि – हम्म तो ये बात है, ये तो सच में बहुत hi बुरा हुआ. अब क्या करेंगे हम??
गुरु – आप hi बताइये क्या करना है. अभी तो किसी तरह से हम सब ने उनको रोका हुआ है. पैर ज्यादा देर तक रुक नहीं पाएंगे.
मणि – समस्या गंभीर है. त्रिकाल ने बहुत सोच समाज कर ये कदम उदय है. इसमें दस माँ भी मदत नहीं कर सकती है.
गुरु – कोई तो उपपाये होगा.
मणि – देखो डलासुर के दानव रूप को हर हाल में सम्भोग चाहिए, वैसे भी वो साया इस सब के लिए प्रतिबंदित है. तो यदि पब ने अभी किसी से सम्भोग नहीं किया तो वो मर जायेगा.
गुरु – और यदि किया तो भी सब मरेंगे न गुरूजी..
मणि – हाँ ये भी है, अब तो केवल एक उपाए है. की उसकी कोई कुवारी पत्नी उसके साथ सम्भोग करे.
गुरु – तो 3 कुवारी पत्नी है फिर क्या समस्या है.
मणि (गुस्से में) – तुम पागल हो गई हो क्या. तुमको नहीं पता वो क्रिया की वजह से कुवारी है. यदि अभी उनके साथ सम्भोग किया तो ये क्रिया यही पे पूरी हो जाएगी और पब को केवल 3 पावर के साथ hi त्रिकाल का सामना करना होगा.
गुरु – सॉरी गुरूजी, पैर अब कुवारी पैंटी तो है नहीं फिर क्या कर सकते है.
मणि – हम्म बात तो ठीक है. त्रिकाल ने एक बार फिर हम सबको मात दे दी. अब कुछ नहीं हो सकता. तुम सबका जीवन बचने के लिए अब इस क्रिया को यही पे रोकना होगा. तुम कुछ ऐसा करो की पब कामिनी और तुम्हारे धोके में उन तीनो के साथ सम्भोग करे. इससे डलासुर भी संत हो जायेगा, और तुम सब भी बच जाओगे. बस जिस टारगेट को पाने निकले थे वो हम नहीं प् सकेंगे.
गुरु – कोई और तरीका नहीं है??
मणि – गुरु तुम भी जानती हो अब कुछ नहीं हो सकता सब ख़तम हो चुक्का है. त्रिकाल ने बैठे -2 hi हम सब को हरा दिया. अब जाओ और सबकी जिंदगी बचाओ.
मणि ये कहा कर संपर्क तोड़ देता है. और ाखोनो में आशु लेकर चिलता है – हे दस माँ इस दिन के लिए hi अपने ये सब करने की आज्ञा दी थी. मैं हार गया माँ मैं हार गया……
ीदार गुरु भी बुरी तरह रोनी लगती है. – क्या करू मैं दस माँ, क्या करू कहा से लौ कुवारी पत्नी. कैसे बचाओ अपने पति को कैसे.. क्या करू की पति भी बच जाये और वो दुनिया को बचने के टारगेट को भी पूरा कर सके. एक hi पल में अपने सब ख़तम कर दिया माँ. कुछ तो रहा दिखाओ, कहा से लौ उनकी कुवारी पत्नी जो की इस दुनिया में है hi नहीं……..