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चोदामपुर
सूरज के साथ चोदामपुर वाले भी उठ गए थे और अपने अपने काम में लगे हुए थे, हमारे मित्र कर्मा उठे और उसके थोड़ी देर बाद hi अनुज भी, उठ कर आंगन में देखा तो सब वहीं चाय की चुस्कियां ले रहे थे,
नयी तै - अरे लो बच्चे भी उठ गए, आओ लल्ला बैठो बैठो.. बहु चाय दे दो बच्चों को.
उन्होंने सभ्य से कहा..
कर्मा और अनुज ने उन्हें एक बार देखा और फिर झूठे hi मुस्कुरा कर बैठ गए,
माँ ने आके दोनों को चाय दी, मौसी भी वहीं थी और अभी तो साधारण लग रही थी सबसे बात कर रही थी जवाब दे रही थी
तै- और भैया खेती कैसी हो रही है इस बार..
नीलेश- अछि है भाभी, अब कटाई होनी बाकि है.. ाचा है बच्चे आ गए तो सब काम हो जायेगा..
तै- चलो बढ़िया है और बगिया भी तो बड़ी अछि लगी हमको, खूब घनी है.
नीलेश- हाँ बगिया की योजना सभ्य की थी इनके ज़ोर देने पर लगाई थी और आज देखो सही मुनाफा देती है..
तै- अरे बड़ी होनहार है बहुरिया हमारी नज़र न लग जाये.
तै ने सभ्य की तारीफ करते हुए kaha.jis पर सभ्य बोली- क्या जीजी तुम भी कछु भी बोलती हो.
Tai-sahi तो बोल रहे हैं. अरे शालू चल रही हो का घूम आते हैं एक बार बढ़िया में..
शालू- हाँ जीजी चलो चल रहे हम.
इसके बाद दोनों घर से निकल जाती हैं जिनके जाते hi कर्मा और अनुज दोनों hi अपने माँ पापा सवाल लेकर चढ़ जाते हैं...
कर्मा - पापा आखिर हैं कौन ये तै पहले तो कभी नहीं देखा..
अनुज- हाँ अचानक कहाँ से पैदा हो गयी और यहाँ ा भी गयी.
Nilesh-Anuj ऐसे नहीं बोलते बीटा और ये एक बहुत पुराणी बात है.
कर्मा- तो बतादो न मुझे जानना है..
सभ्य - हाँ जी बता दीजिये बच्चे बड़े हो गए हैं अब समझ सकते हैं.
ये कहकर सभ्य चाय के बर्तन लेकर रसोई में चली गयी
नीलेश- ाचा सुनो ये सच में तुम्हारी तै है यानि हमारे बड़े भाई की पत्नी..
कर्मा- बड़े भाई पर आपके तो बड़े भाई hi नहीं हैं कोई.
अनुज- हाँ हमने तो आज तक नहीं सुना ताऊ के बारे में..
नीलेश- हाँ क्यूंकि तुम दोनों के पैदा होने से पहले hi हम लोग अलग हो गए और फिर हमने उनका जीकर कभी तुम्हारे सामने किया hi नहीं..
कर्मा- पापा ऐसे कुछ समझ नहीं आ रहा है
Anuj-haan पापा थोड़ा अचे से बताओ.
नीलेश- ाचा तो सुनो, हम दो भाई दो बहन थे. शशि के अलावा एक और बहन हैं हमारी.
अनुज- अरे तेरी ताऊ के साथ एक बुआ फ्री.
नीलेश- अनुज चुप.
कर्मा- पापा बताओ तुम...
नीलेश- तो सुनो तुम्हारे दादा स्वर्गीय भंवर सिंह फूल नगर के जाने मने व्यापारी थे गाओं के पास तुम्हारे दादाजी ने पहली चीनी की मिल खोली थी इसीलिए हर जगह प्रख्यात थे और आस पास के गाओं में खूब ख्याति थी तुम्हारे दादा की.. और उनकी पत्नी यानि हमारी माँ और तुम्हारी दादी स्वर्गीय गंगा देवी के चार संतानें थी,
हम चार भाई बहन थे सबसे छोटी साक्षी उससे बड़े हम, और हमसे बड़े सूरजभान सिंह और सबसे बड़ी बहन राजवती...
कर्मा- अरे पर हम तो सिर्फ शशि बुआ को hi जानते हैं बड़ी बुआ और ताऊजी को क्यों नहीं.
नीलेश- वही बताने जा रहा हूँ.. हमारी मौसी के कोई संतान नहीं थी और वो यहाँ चोदामपुर में ब्याही थी, बेचारी संतान न होने के कारन बहुत उदास रहती थी तो अपनी बहन का दुःख देखकर तुम्हारी दादी ने हमें और शशि को बचपन से hi यहाँ चोदामपुर में मौसी के यहाँ छोड़ दिया था...
तो हम और शशि बचपन से hi ज़्यादातर यहाँ चोदामपुर में hi रहे मौसी के पास.. वहीं बड़े भैया और जीजी माँ बाबा के पास,
लेकिन हमारे जवान होते होते पहले मौसा चल बेस और फिर मौसी भी साथ छोड़ गयी पर अपनी साडी जमीं जायदाद हमारे और शशि के नाम कर गयी...
पर मौसा मौसी के चले जाने के बाद हम लोग भी यहाँ से अपने गाओं फूल नगर hi चले गए और वहीं रहने लगे पूरे परिवार के साथ, बड़ी जीजी का ब्याह पहले hi हो चूका था और उसी बीच बड़े भैया का ब्याह भी हो गया, नयी भाभी का नाम था संतो देवी, जो की यही हैं तुम्हारी नयी तै..
Karma-acha ऐसे लगी ये हमारी तै.
अनुज- आगे बताओ न पापा..
नीलेश- हाँ और बड़े भैया के ब्याह के करीब साल भर बाद hi हमारा ब्याह भी तुम्हारी माँ से हो गया.. पर हमारे ब्याह के 3 महीने के अंदर hi तुम्हारे दादा और दादी दोनों चल बेस.. बाबा के जाने के बाद घर के मुखिया बड़े भैया यानि तुम्हारे ताऊजी सूरजभान सिंह बन गए मिल भी वही चलने लगे, वैसे तो वो बहुत अचे थे हम लोगो से बहुत प्यार करते थे किसी चीज़ की कमी नहीं होने देते थे पर एक hi चीज़ उनमें बुरी थी वो थी दारू की लत, साथ hi औरत.
नीलेश ये कहते कहते रुक गए
ये सुनकर कर्मा और अनुज थोड़ा सा हैरान हुए पर मन में जिज्ञासा भी थी..
नीलेश ने एक गहरी सांस ली और बोली - देखो हम जानते हैं की तुम अब इतने बड़े हो चुके हो की ये सब समझ सको तो जितना हो सके हम खुले शब्दों में तुम्हे समझायेंगे.
कर्मा- जी पापा,
नीलेश- हाँ तो हवस और शराब उनकी दो बहुत बड़ी कमिया थी, जिसकी वजह से काफी बदनामी होती थी, मिल में काम करने वाले मज़दूरों की औरतों से लेकर गाओं की औरतें तक उनकी हवस ने न जाने कितनी औरतों को अपना शिकार बनाया,
तब तक भी कोई बात नहीं थी हम उन्हें समझते थे वो हाँ हाँ कहते थे पर करते वही थे जो उनका मन होता था.. पर एक दिन तो बात हद्द से आगे बढ़ गयी..
नीलेश ये कहते हुए रुक गए..
कर्मा- क्या हुआ था पापा..
नीलेश इधर उधर देखने लगे जैसे तरीका ढूंढ रहे हो बताने का..
अनुज- पापा बोलो हम समझेंगे..
नीलेश- हाँ बच्चों जनता हूँ..
हाँ एक दिन ये हुआ की वो शराब और हवस में इतने अंधे हो गए की बहार तो छोडो अपने घर के अंदर भी अपनी बुरी नियत दिखा दी...
एक रात को वो शराब के नशे में धुत्त होकर घर आये और तब तुम्हारी माँ रसोई में काम कर रही थी तुम्हारे ताऊ जी रसोई में जाकर तुम्हारी माँ के साथ जबरदस्ती करने लगे, जिसका विरोध करने के लिए तुम्हारी माँ चिल्लाई और उसका शोर सुनकर शशि दौड़कर रसोई में गयी और उसने अपने बड़े भाई का जब ये रूप देखा तो वो तो बिलकुल चौंक hi गयी..
फिर भी तुम्हारी माँ को बचने के लिए शशि उनकी मदद को आई और बड़े भैया को धक्का देकर हटा दिया और उन दोनों के बीच आ गयी...
और बड़े भैया पर चिल्लाने लगी पर बड़े भैया ने हद्द तो तब पार करदी जब वो शशि अपनी सगी छोटी बहन पर भी लपक पड़े, पर तब तक बड़ी भाभी भी आ चुकी थी किसी तरह तीनो औरतों ने उन्हें रोका और हम भी थोड़ी देर में घर पहुँच गए, और फिट जो हमने सुना उससे हमारा सर चक्र गया, जिस भाड़े भाई को हम पूजते थे इतना मानते थे उसकी ऐसी नीच हरकत देखकर हम बिलकुल पागल हो गए मन तो किआ भैया को ख़त्म कर दें पर भैया थे वो सेज नहीं कर सके..
वहीं तुम्हारी माँ और शशि का रो रोकर बुरा हाल था, बहुत बवाल हुआ अगले दिन बड़ी जीजी भी आई सबको समझने की बहुत कोशिश की गयी.. ये बोलै गया की बड़े भैया तुम्हारी माँ और शशि दोनों से माफ़ी मांग लेंगे..
और बड़ी जीजी और भाभी ने सभ्य कुर शशि को इसके लिए मन भी लिए पर भैया शशि से तो माफ़ी मांगने को तैयार थे पर तुम्हारी माँ से नहीं..
जिसके बाद हमने कुछ और नहीं सोचा और फूल नगर छोड़ने का फैसला कर लिए, शशि ने भी हमारा साथ चुना और हमारे साथ यहाँ चोदामपुर आ गयी..
उसकर बाद भी कई बार बड़ी जीजी और भाभी यहाँ हमें मानाने आई पर बड़े भैया जिनकी ये गलती थी वो कभी नहीं आये न hi बात करने की कोशिश की..
एक बार हमारे मन करने पर बड़ी जीजी उल्टा हमसे hi गुस्सा हो गयी की हम अपनी बीवी के प्यार में इतना अंधे हो गए हैं की अपने भाई और बहन से नाता तोड़ रहे हैं इस बात पर नाराज़ होकर वो भी ये कहकर की आज से समझ लेना तेरी एक hi बहन है ये कहकर चली गयी बस तबसे हम यहाँ के हो कर रह गए और फिर कोई भी किसी भी तरह का रिश्ता या मुलाकात हमारे बीच नहीं हुई.. तुम दोनों का जन्म हो गया फिर हम अपनी जिंदगी में व्यस्त हो गए... उन लोगो से कोई भी मतलब नहीं रहा, शशि का ब्याह भी हमने यहीं से करवा दिया... कोई मतलब कोई नाता नहीं रहा बस अभी परसो हमें ये भाभी बाघ के किनारे बैठी हुई मिली इसलिए घर ले आये, वैसे भी जो भी हुआ था उसमे इनकी कोई गलती नहीं थी.
कर्मा और अनुज दोनों hi अपने परिवार के बारे में सुन थोड़े हैरान थे, कहाँ उन्हें लगता था की पापा और बुआ hi हैं, पर आज पता चला की ताऊ और बड़ी बुआ भी हैं पर हैं भी तो कैसे जिन्होंने उनकी माँ के साथ hi ज़बरदस्ती की कोशिश की, ये सोचकर hi उन लोगो के लिए दोनों के मन में गुस्सा भर गया..
कर्मा- बहुत गलत किआ उन्होंने पापा, तुमने सही किआ उनसे रिश्ता तोड़कर.
अनुज- पर फिर ये तै यहाँ क्या करने आई हैं..
नीलेश- अनुज कर्मा चाहे जो भी हुआ हो पर हैं वो तुम्हारी तै hi, बड़ी हैं तुमसे और तुम्हारी माँ सामान हैं तो तुम दोनों उनसे पूरी इज़्ज़त और प्यार से पेश आओगे, और उन्हें पता नहीं चलना चाहिए की हमने तुम्हे उस सब के बारे में बता दिया है समझे?
कर्मा- ग पापा
नीलेश- अनुज खासकर तू.
अनुज- मैं ध्यान रखूँगा पापा...
नीलेश- बहुत अचे तो अब चलें कटाई करवानी है..
कर्मा - हाँ चलते हैं पापा..
इसके बाद तीनो लोग सभ्य को बोलकर खेत की और निकल गए..
वहीं जग्गू के घर में किसी बात को लेकर बहस हो रही थी..
मंजू- फिर काम से काम उसे ढूंढने की कोशिश तो करते.
राजपाल- हम उस नालायक की शकल तक नहीं देखना चाहते..
मंजू- बीटा है हमारा वो..
राजपाल- सब जानने के बाद भी तुम उसकी वकालत में लगी हो..
मंजू- अरे तो हम और जग्गू गए थे न लेकर आये हैं उसके लिए प्रशाद और बाबा के कहे मुताबिक वो ये खाकर ठीक हो जायेगा..
राजपाल - वो कुत्ते की दम है.
मंजू- अब जब ले आये हैं तो कोशिश कर लेने दो न पर उसके लिए वो मिले तो सही.
जग्गू- अरे तुम लोग लड़ो मत मैं जा रहा हूँ ढूंढने मिल जायेगा कहीं न कहीं.
मंजू- हाँ बीटा चल हम भी चलते हैं इन्हे करने दे जो करना है.
ये बोलकर वो भी जग्गू के साथ चल दी..
प्रेमा पास hi में कड़ी सब की बातें सुन रही थी...
इधर तीनो बाप बेटे बाघ के बगल वाले खेत में कटाई की तयारी कर रहे थे गेहूं का खेत धुप में सोने की तरह चमक रहा था,
नीलेश- कर्मा वो बिछाने के लिए पन्नी वगेरा ले आया है न..
कर्मा - हाँ पापा 5 मीटर की है बहुत है.
नीलेश- ठीक है और काटते?
अनुज- वो भी तैयार हैं.. बस ये मज़दूर कहाँ रह गए..
कर्मा- तूने उन्हें ध्यान से बोल तो दिया था न..
अनुज- अरे हाँ बोलकर आया हूँ..
इतने में पीछे से एक आवाज़ आई तो तीनो ने पलट कर देखा...
सामने ममता कड़ी थी,
नीलेश- अरे ममता बहु तुम यहाँ..
ममता- हाँ भाई साब ये तो बहार गए हैं और मुझे उपले ले जाने थे घर पर कुछ लाना भूल गयी तो कट्टा चाहिए था..
नीलेश- अरे हाँ ये कोई पूछने की बात है उठा लो वहां कितने पड़े हैं..
ममता- ठीक है कटाई शुरू हो गयी आज से. दोनों बच्चों को आते hi काम पर लगा दिया.
अनुज- चची काम करना हमें ाचा लगता है तुम्हे तो पता hi है..
अनुज की बात पर सबको हंसी आ गयी,
ममता- हाँ पता है तुझे कितना पसंद है काम करना..
अनुज- और क्या तुम्हे भी कोई काम हो तो बता देना चची मैं कर दूंगा तुम्हारा काम..
अनुज ने ये बोलकर अपने पापा की और तिरछी नज़र से देखा जैसे की बोल तो दिया पर कहीं पापा समझ न जाएं. पर उसने देखा की पापा सिर्फ मुस्कुरा रहे थे... तो चैन की साँस ली.
ममता- नहीं लल्ला पहले तुम ये hi निपटा लो फिर करना तुम हमारा काम..
ये कहकर ममता आगे बड़ी और पास पड़े कट्टों के ढेर से एक कट्टा उठा लिए पर उठाते वक़्त जानकार या अनजाने में उसकी साड़ी का पल्लू नीचे गिर गया.. जिसके गिरते hi तीनो बाप बेटों की नज़र उसी पर टिक गयी..
खैर ममता ने जल्दी से अपना पल्लू संभाला और कट्टा लेकर अपने मस्त चूतड़ों को मटकते हुए चली गयी चलते हुए उसे एहसास था की तीनो की नज़र उसकी गांड पर hi होगी साथ hi मन hi मन वो सोच रही थी की तीनो से hi वो चुद चुकी है, कितना अजीब सा एहसास है ये की बाप और बेटे दोनों से मैं चुद चुकी हैं ममता तो ये सोचते हुए आगे बढ़ गयी पर ये तीनो छुप छुप कर उसको नज़रों से ओझल होने तक देखते रहे..
खासकर कर्मा और अनुज क्यूंकि उन्हें काफी दिनों से ममता का बदन मिला जो नहीं था, ये बात नीलेश ने भी देखि की दोनों ममता को ताड़ रहे हैं जिसे देख कर उनके चेहरे पर मुस्कान आ गयी..
Nilesh-acha कर्मा अनुज, हमने तो तुम्हे अपना राज बता दिया, तुम्हारी तो कोई ऐसी बात नहीं है जो तुम हमें बता सको.
ये सुनकर दोनों hi चौंक गए,
कर्मा- नं नहीं पापा ऐसा तो कुछ नहीं है.
अनुज- हाँ ऐसा क्या होगा बताने लायक, कुछ भी तो नहीं..
दोनों को देख नीलेश मन hi मन मुस्कुराये, खैर आगे कुछ बात होती की उससे पहले hi मज़दूर आ गए और फिर सब काम में लग गए..
वही जग्गू के घर का दृश्य कुछ बदला हुआ था,
प्रेमा- पापाजी मान जाइये न कोई भी आ सकता है..
राजपाल- तभी तो कह रहा हूँ बहु, जल्दी से करने दे कोई आये उससे पहले hi हो जायेगा..
राजपाल ने पीछे से अपनी बहु को जकड रखा था और उसके मुलायम पेट को मसलते हुए उसके गोल मटोल चूतड़ों पर सारी के ऊपर से hi अपने खड़े लुंड को घिस रहे the.dono प्रेमा के कमरे में उसके बिस्तर के किनारे थे...
प्रेमा- पापाजी मुझे दर लग रहा है किसी ने देख लिए तो अनर्थ हो जायेगा...
राजपाल- अरे बहु चिंता क्यों करती है मैंने कुण्डी लगा दी है और तू hi देर कर रही है जल्दी से झुकजा तो जल्दी काम निपटेगा.
प्रेमा ने भी आगे विरोध नहीं किआ और अपने ससुर के आगे झुक गयी.
राजपाल- यहाँ नहीं बहु चल बिस्तर पर चढ़ जा यहाँ थक जाएगी...
ये कहकर राजपाल ने बहु को बिस्तर पर चढ़ा दिया और खुद जो ऊपर से पहले hi नंगे थे नीचे बंधी अपनी लुंगी भी उतर फेंकी और पूरे नंगे हो गए,
और फिर प्रेमा को बिस्तर पर घुटनो के बल झुका दिया, प्रेमा ने भी अपनी कोहनी का सहारा लेकर आगे झुककर अपनी गांड को ऊपर उठादिया,
राजपाल ने बहु की साड़ी को पकड़ कर ऊपर उसकी जांघों और फिर चूतड़ों को नंगा करते हुए उसकी कमर पर इकठा कर दिया और फिर बहु की गोरी गोल मटोल गांड के पीछे जगह ली और अपने लुंड को थूक से गीला करते हुए बहु की छूट पर रखा और अंदर सरका दिया..
प्रेमा- अह्ह्ह पापाजीइ.
राजपाल- देख कितना मन कर रही थी जबकि छूट तो कितनी गीली है तेरी,
राजपाल ने हलके हलके धक्के लगते हुए कहा..
प्रेमा- चुदाई की उत्सुकता में छूट तो गीली हो hi जाती है पापाजी.
कुछ hi देर में राजपाल ने एक ले पकड़ ली थी और अपनी बहु की गरम छूट के मज़े ले रहे थे

राजपाल - अह्ह्ह बहु टेरिइइइइइइ चूऊत्त में तो जन्नत का मज़ा है..
प्रेमा- आअह्ह्ह्ह ुहममम ऐसे होई पापाजीइ...
राजपाल - हाँ ले बहु अह्ह्ह ले अपने पापाजी का लुंदड़ अह्ह्ह्ह वैसे भी अब काम hi मौके मिलेंगे तुझे छोड़ने के..
प्रेमा- आअह्ह्ह्ह nahiiiiiiiiiiiiiiii मिलेंगे तो तुम निकल लोगे अह्ह्ह्ह जैसे अभी निकल लिए...
राजपाल- अह्ह्ह बहु निकलना तो पड़ेगा hi तेरी छूट की प्यास hi ऐसी है..
प्रेमा- पापाजी तुम्हे बुरा नहीं लगता की हम मम्मी जी और इनको धोखा दे रहे हैं..
राजपाल- अब क्या hi बुरा मानें बहु..
प्रेमा- क्यों अगर सोचो मम्मी जी भी किसी से छुडवालें तो तुम्हे कैसा लगेगा..
प्रेमा की ये बात सुनकर राजपाल एक पल को रुक गए पर फिर हल्का हल्का धक्का लगते हुए बोले- सच कहूं बहु तो पहले ऐसा सुनता भी तो न जाने मैं क्या करता पर अब जब तेरे साथ ये सब कर लिए है तो उसे भी नहीं रोकूंगा मैं, अगर मैं कर सकता हूँ तो वो भी..
प्रेमा- सच में पापाजी..
राजपाल- हाँ अजीब तो लगेगा बहुत पर जो सही है वो सही है...
यहाँ घर में ससुर बहु चुदाई करते हुए गुफ्तगू कर रहे थे वहीं एक खेत में भी चुदाई का तूफ़ान आया हुआ था,
अपने खेत के किनारे मेड पर मंजू तै पीठ के बल लेती हुई साड़ी कमर पर इकठा थी दोनों टांगें खुली हुई थी और टैंगो के बीच था उनका बीटा जग्गू जो अपनी माँ की छूट में अपना लुंड डालकर दनादन छोड़ रहा था

मंजू- ahhhhhhhhhh लाल्ल्लाहहह अब बस्सस कर हम तेरे भाई को ढूंढने निकले थे और तू है की हम पर चढ़ गया..
जग्गू- ओह्ह्ह्ह मम्मी भाई को भी ढूंढ लेंगे पर तुम्हे देखकर रुका नहीं गया...
मंजू- बस्स्स तेराअहहहह ये हीईई haiiiiiiiiiiiiiaaahhhhhh अह्हह्ह्ह्ह.
जग्गू- ओह्ह्ह मम्मी तुम्हे मज़ा नहीं आ रहा क्या,
मंजू- मज़ा तो आ रहा है बीटा पर किसी ने देख लिए तो..
जग्गू- कोई नहीं देखेगा मम्मीय अह्ह्ह्ह नुझे तो बड़ा मज़ा आ रहा है खुले में तुम्हे छोड़ने में.
मंजू- ahhhhhhhhhh लाल्ल्लाहहह और तेज़ जल्दी कर ज़्यादा समय नहीं है हमारे पास.
जग्गू- ओह्ह्ह्ह मम्मी अह्ह्ह्हह ुहममम..
जग्गू तेज़ तेज़ धक्के लगते हुए सिसकियाँ ले रहा था वहीं मंजू ने भी अपने दोनों पेअर बेटे की कमर पर बांध लिए और उसे और तेज़ छोड़ने के लिए उकसाने लगी..
जिसका नतीजा ये हुआ की दोनों माँ बेटे जल्दी hi झाड़ गए एक साथ, जग्गू ने अपने रास से अपनी मम्मी की छूट को भर दिया... जिसके बाद दोनों ने जल्दी से कपडे ठीक किये और भग्गू को ढूंढने लगे चलते हुए मंजू को बेटे का रास छूट से बहकर जांघों पर रिस्ता हुआ महसूस हो रहा था जो उसे एक अलग hi एहसास दे रहा था..
सरलपुर
सरलपुर में दिन साधारण गुज़र रहा था, चरण सिंह न चाहते हुए भी हर मौके पर अपनी बहुओं को बदन को ताड़ने से खुद को रोक नहीं पा रहे थे, रिमझिम और ख़ुशी दोनों ननद भाभी के बीच जो भी कुछ रात को हुआ उसका असर उनके चेहरे पर साफ़ दिख रहा था दोनों hi खासकर ख़ुशी एक दुसरे को देखकर शर्मा रही थी और नए नए प्रेमियों की तरह एक दुसरे को पूरा दिन इशारों से चिढ़ा रही थी.. वहीं बेचारी भोली भली चंचल इन सब से अनजान काम में व्यस्त थी हालाँकि चेतन ने रात को उसकी जमकर चुदाई की थी जिस कारन वो भी खिली खिली हुई थी खैर शाम होते होते रिमझिम के पास रमन का फ़ोन आया और न जाने उसकी उससे क्या बात हुई की फ़ोन रखने के बाद रिमझिम के चेहरे पर एक शरारती मुस्कान आ गयी..
खैर उसके बाद रात का खाना हुआ जिस दौरान भी चरण सिंह ने अपनी बहुओं के बदन की गर्मी से अपनी आँखों को खूब सका, रसोई का सारा काम निपटा कर चंचल अपने कमरे में चली गयी जहाँ चेतन उसका बेसब्री से इंतज़ार कर रहा था और कुछ देर बाद hi दोनों बिलकुल नंगे होकर एक दुसरे की बाहों में समाये हुए थे...
वहीं ननद भाभी की जोड़ी भी रिमझिम के कमरे में घुस गयी, दोनों ने शरमाते हुए कल का कार्यक्रम फिर से शुरू किआ और जल्दी hi दोनों के होंठ आपस में चिपके हुए थे और दोनों hi एक दुसरे के होंठों के रास को पिए जा रही थी...
होंठों को चूसते हुए hi रिमझिम ने ख़ुशी का सूट पकड़ कर उठा दिया और फिर ख़ुशी ने उसे अपनर सर से निकल दिया, सूट निकलने के बाद रिमझिम ने अपनी ननद के गले छाती और पेट को चेतना शुरू कर दिया, ख़ुशी के बदन का जो हिस्सा कपडे से बहार था रिमझिम ने उसे चाट चाट कर गीला कर दिया और फिर बरी आई ख़ुशी की सलवार की जिसे रिमझिम ने इतर फेंका और अब उसकी ननद उसके सामने सिर्फ एक ब्रा पंतय में थी...
अपनी सलवार उतरने के बाद ख़ुशी भी खामोश नहीं रही और उसने बदला लेते हुए अपनी भाभी की साड़ी और ब्लाउज दोनों को खोल दिया , अब रिमझिम सिर्फ ब्रा और पेटीकोट में थी, और जिस जोश और लगन से रिमझिम ने उसका बदन छठा था ख़ुशी ने उससे भी ज़्यादा लगन से अपनी भाभी का बदन छठा,
और फिर अगला हमला किआ भाभी के पेटीकोट पर जो को धराशाई होकर रिमझिम के कदमो में गिर गया अब दोनों ननद भाभी ब्रा और पंतय में एक दुसरे के सामने थी, ख़ुशी ने रिमझिम को बिस्तर पर लिटा दिया और उसकी नाभि को चूसने लगी, रिमझिम के मुँह से सिसकियाँ सुनकर ख़ुशी और जोश से अपनी भाभी की नाभि को चूस रही थी... सिर्फ नाभि चूसने से hi रिमझिम की छूट काफी गीली हो गयी थी और उसका बदन भी बार बार ऐंठ रहा था, इसका जवाब देते हुए रिमझिम ने ख़ुशी को पलट दिया और अब खुद अपनी ननद की नाभि को चूसने लगी... जिससे ख़ुशी तो मज़े से दोहरी हो गयी.. ये सिलसिला चल hi रहा था की अचानक से रिमझिम का फ़ोन बजा, जिसे रिमझिम ने उठाया, हालाँकि ख़ुशी जो मज़े के सागर में तैर रही थी उसे बीच में रुकना ाचा नहीं लगा पर उसे पता था की अभी पूरी रात पड़ी है...
खैर रिमझिम फ़ोन पर बात करते हुए बिस्तर से उठी और हैंगर पर तंगी मैक्सी उतर कर पहनने लगी.
ख़ुशी ने उसे सवालिया नज़रों से देखते हुए इशारे में पुछा की हुआ, जिसका जवाब रिमझिम ने सिर्फ हाथ दिखाकर इशारा किआ की कुछ नहीं रुक एक मिनट में आई, ख़ुशी समझ गयी शायद उसकी भाभी पानी वगेरा लेने जा रही है...
और रिमझिम अगले hi पल दरवाज़ा खोल के और फिर बहार से ढँक कर चली गयी... ख़ुशी को ये सब सोच सोचकर hi एक अजीब सी शर्म महसूस होने लगी, अपने बदन को सिर्फ ब्रा पंतय में देखकर साथ hi अपनी भाभी के थूक से सना हुआ देखकर ख़ुशी मन hi मन शर्माने लगी और उसी शर्म के एहसास में उसने अपनर बदन को पास पड़ी चद्दर को ओढ़ कर धक् लिया और सिर्फ चेहरा बहार रखकर अपनी भाभी का इंतज़ार करने lagi...kuch hi देर में दरवाज़ा खुला और ख़ुशी ने जो देखा उससे तो उसके होश hi उड़ गए...
इसके आगे क्या हुआ अगली अपडेट में प्लीज कमैंट्स करके ज़रूर बताएं कैसी लगी अपडेट बहुत बहुत धन्यवाद्
चोदामपुर
सूरज के साथ चोदामपुर वाले भी उठ गए थे और अपने अपने काम में लगे हुए थे, हमारे मित्र कर्मा उठे और उसके थोड़ी देर बाद hi अनुज भी, उठ कर आंगन में देखा तो सब वहीं चाय की चुस्कियां ले रहे थे,
नयी तै - अरे लो बच्चे भी उठ गए, आओ लल्ला बैठो बैठो.. बहु चाय दे दो बच्चों को.
उन्होंने सभ्य से कहा..
कर्मा और अनुज ने उन्हें एक बार देखा और फिर झूठे hi मुस्कुरा कर बैठ गए,
माँ ने आके दोनों को चाय दी, मौसी भी वहीं थी और अभी तो साधारण लग रही थी सबसे बात कर रही थी जवाब दे रही थी
तै- और भैया खेती कैसी हो रही है इस बार..
नीलेश- अछि है भाभी, अब कटाई होनी बाकि है.. ाचा है बच्चे आ गए तो सब काम हो जायेगा..
तै- चलो बढ़िया है और बगिया भी तो बड़ी अछि लगी हमको, खूब घनी है.
नीलेश- हाँ बगिया की योजना सभ्य की थी इनके ज़ोर देने पर लगाई थी और आज देखो सही मुनाफा देती है..
तै- अरे बड़ी होनहार है बहुरिया हमारी नज़र न लग जाये.
तै ने सभ्य की तारीफ करते हुए kaha.jis पर सभ्य बोली- क्या जीजी तुम भी कछु भी बोलती हो.
Tai-sahi तो बोल रहे हैं. अरे शालू चल रही हो का घूम आते हैं एक बार बढ़िया में..
शालू- हाँ जीजी चलो चल रहे हम.
इसके बाद दोनों घर से निकल जाती हैं जिनके जाते hi कर्मा और अनुज दोनों hi अपने माँ पापा सवाल लेकर चढ़ जाते हैं...
कर्मा - पापा आखिर हैं कौन ये तै पहले तो कभी नहीं देखा..
अनुज- हाँ अचानक कहाँ से पैदा हो गयी और यहाँ ा भी गयी.
Nilesh-Anuj ऐसे नहीं बोलते बीटा और ये एक बहुत पुराणी बात है.
कर्मा- तो बतादो न मुझे जानना है..
सभ्य - हाँ जी बता दीजिये बच्चे बड़े हो गए हैं अब समझ सकते हैं.
ये कहकर सभ्य चाय के बर्तन लेकर रसोई में चली गयी
नीलेश- ाचा सुनो ये सच में तुम्हारी तै है यानि हमारे बड़े भाई की पत्नी..
कर्मा- बड़े भाई पर आपके तो बड़े भाई hi नहीं हैं कोई.
अनुज- हाँ हमने तो आज तक नहीं सुना ताऊ के बारे में..
नीलेश- हाँ क्यूंकि तुम दोनों के पैदा होने से पहले hi हम लोग अलग हो गए और फिर हमने उनका जीकर कभी तुम्हारे सामने किया hi नहीं..
कर्मा- पापा ऐसे कुछ समझ नहीं आ रहा है
Anuj-haan पापा थोड़ा अचे से बताओ.
नीलेश- ाचा तो सुनो, हम दो भाई दो बहन थे. शशि के अलावा एक और बहन हैं हमारी.
अनुज- अरे तेरी ताऊ के साथ एक बुआ फ्री.
नीलेश- अनुज चुप.
कर्मा- पापा बताओ तुम...
नीलेश- तो सुनो तुम्हारे दादा स्वर्गीय भंवर सिंह फूल नगर के जाने मने व्यापारी थे गाओं के पास तुम्हारे दादाजी ने पहली चीनी की मिल खोली थी इसीलिए हर जगह प्रख्यात थे और आस पास के गाओं में खूब ख्याति थी तुम्हारे दादा की.. और उनकी पत्नी यानि हमारी माँ और तुम्हारी दादी स्वर्गीय गंगा देवी के चार संतानें थी,
हम चार भाई बहन थे सबसे छोटी साक्षी उससे बड़े हम, और हमसे बड़े सूरजभान सिंह और सबसे बड़ी बहन राजवती...
कर्मा- अरे पर हम तो सिर्फ शशि बुआ को hi जानते हैं बड़ी बुआ और ताऊजी को क्यों नहीं.
नीलेश- वही बताने जा रहा हूँ.. हमारी मौसी के कोई संतान नहीं थी और वो यहाँ चोदामपुर में ब्याही थी, बेचारी संतान न होने के कारन बहुत उदास रहती थी तो अपनी बहन का दुःख देखकर तुम्हारी दादी ने हमें और शशि को बचपन से hi यहाँ चोदामपुर में मौसी के यहाँ छोड़ दिया था...
तो हम और शशि बचपन से hi ज़्यादातर यहाँ चोदामपुर में hi रहे मौसी के पास.. वहीं बड़े भैया और जीजी माँ बाबा के पास,
लेकिन हमारे जवान होते होते पहले मौसा चल बेस और फिर मौसी भी साथ छोड़ गयी पर अपनी साडी जमीं जायदाद हमारे और शशि के नाम कर गयी...
पर मौसा मौसी के चले जाने के बाद हम लोग भी यहाँ से अपने गाओं फूल नगर hi चले गए और वहीं रहने लगे पूरे परिवार के साथ, बड़ी जीजी का ब्याह पहले hi हो चूका था और उसी बीच बड़े भैया का ब्याह भी हो गया, नयी भाभी का नाम था संतो देवी, जो की यही हैं तुम्हारी नयी तै..
Karma-acha ऐसे लगी ये हमारी तै.
अनुज- आगे बताओ न पापा..
नीलेश- हाँ और बड़े भैया के ब्याह के करीब साल भर बाद hi हमारा ब्याह भी तुम्हारी माँ से हो गया.. पर हमारे ब्याह के 3 महीने के अंदर hi तुम्हारे दादा और दादी दोनों चल बेस.. बाबा के जाने के बाद घर के मुखिया बड़े भैया यानि तुम्हारे ताऊजी सूरजभान सिंह बन गए मिल भी वही चलने लगे, वैसे तो वो बहुत अचे थे हम लोगो से बहुत प्यार करते थे किसी चीज़ की कमी नहीं होने देते थे पर एक hi चीज़ उनमें बुरी थी वो थी दारू की लत, साथ hi औरत.
नीलेश ये कहते कहते रुक गए
ये सुनकर कर्मा और अनुज थोड़ा सा हैरान हुए पर मन में जिज्ञासा भी थी..
नीलेश ने एक गहरी सांस ली और बोली - देखो हम जानते हैं की तुम अब इतने बड़े हो चुके हो की ये सब समझ सको तो जितना हो सके हम खुले शब्दों में तुम्हे समझायेंगे.
कर्मा- जी पापा,
नीलेश- हाँ तो हवस और शराब उनकी दो बहुत बड़ी कमिया थी, जिसकी वजह से काफी बदनामी होती थी, मिल में काम करने वाले मज़दूरों की औरतों से लेकर गाओं की औरतें तक उनकी हवस ने न जाने कितनी औरतों को अपना शिकार बनाया,
तब तक भी कोई बात नहीं थी हम उन्हें समझते थे वो हाँ हाँ कहते थे पर करते वही थे जो उनका मन होता था.. पर एक दिन तो बात हद्द से आगे बढ़ गयी..
नीलेश ये कहते हुए रुक गए..
कर्मा- क्या हुआ था पापा..
नीलेश इधर उधर देखने लगे जैसे तरीका ढूंढ रहे हो बताने का..
अनुज- पापा बोलो हम समझेंगे..
नीलेश- हाँ बच्चों जनता हूँ..
हाँ एक दिन ये हुआ की वो शराब और हवस में इतने अंधे हो गए की बहार तो छोडो अपने घर के अंदर भी अपनी बुरी नियत दिखा दी...
एक रात को वो शराब के नशे में धुत्त होकर घर आये और तब तुम्हारी माँ रसोई में काम कर रही थी तुम्हारे ताऊ जी रसोई में जाकर तुम्हारी माँ के साथ जबरदस्ती करने लगे, जिसका विरोध करने के लिए तुम्हारी माँ चिल्लाई और उसका शोर सुनकर शशि दौड़कर रसोई में गयी और उसने अपने बड़े भाई का जब ये रूप देखा तो वो तो बिलकुल चौंक hi गयी..
फिर भी तुम्हारी माँ को बचने के लिए शशि उनकी मदद को आई और बड़े भैया को धक्का देकर हटा दिया और उन दोनों के बीच आ गयी...
और बड़े भैया पर चिल्लाने लगी पर बड़े भैया ने हद्द तो तब पार करदी जब वो शशि अपनी सगी छोटी बहन पर भी लपक पड़े, पर तब तक बड़ी भाभी भी आ चुकी थी किसी तरह तीनो औरतों ने उन्हें रोका और हम भी थोड़ी देर में घर पहुँच गए, और फिट जो हमने सुना उससे हमारा सर चक्र गया, जिस भाड़े भाई को हम पूजते थे इतना मानते थे उसकी ऐसी नीच हरकत देखकर हम बिलकुल पागल हो गए मन तो किआ भैया को ख़त्म कर दें पर भैया थे वो सेज नहीं कर सके..
वहीं तुम्हारी माँ और शशि का रो रोकर बुरा हाल था, बहुत बवाल हुआ अगले दिन बड़ी जीजी भी आई सबको समझने की बहुत कोशिश की गयी.. ये बोलै गया की बड़े भैया तुम्हारी माँ और शशि दोनों से माफ़ी मांग लेंगे..
और बड़ी जीजी और भाभी ने सभ्य कुर शशि को इसके लिए मन भी लिए पर भैया शशि से तो माफ़ी मांगने को तैयार थे पर तुम्हारी माँ से नहीं..
जिसके बाद हमने कुछ और नहीं सोचा और फूल नगर छोड़ने का फैसला कर लिए, शशि ने भी हमारा साथ चुना और हमारे साथ यहाँ चोदामपुर आ गयी..
उसकर बाद भी कई बार बड़ी जीजी और भाभी यहाँ हमें मानाने आई पर बड़े भैया जिनकी ये गलती थी वो कभी नहीं आये न hi बात करने की कोशिश की..
एक बार हमारे मन करने पर बड़ी जीजी उल्टा हमसे hi गुस्सा हो गयी की हम अपनी बीवी के प्यार में इतना अंधे हो गए हैं की अपने भाई और बहन से नाता तोड़ रहे हैं इस बात पर नाराज़ होकर वो भी ये कहकर की आज से समझ लेना तेरी एक hi बहन है ये कहकर चली गयी बस तबसे हम यहाँ के हो कर रह गए और फिर कोई भी किसी भी तरह का रिश्ता या मुलाकात हमारे बीच नहीं हुई.. तुम दोनों का जन्म हो गया फिर हम अपनी जिंदगी में व्यस्त हो गए... उन लोगो से कोई भी मतलब नहीं रहा, शशि का ब्याह भी हमने यहीं से करवा दिया... कोई मतलब कोई नाता नहीं रहा बस अभी परसो हमें ये भाभी बाघ के किनारे बैठी हुई मिली इसलिए घर ले आये, वैसे भी जो भी हुआ था उसमे इनकी कोई गलती नहीं थी.
कर्मा और अनुज दोनों hi अपने परिवार के बारे में सुन थोड़े हैरान थे, कहाँ उन्हें लगता था की पापा और बुआ hi हैं, पर आज पता चला की ताऊ और बड़ी बुआ भी हैं पर हैं भी तो कैसे जिन्होंने उनकी माँ के साथ hi ज़बरदस्ती की कोशिश की, ये सोचकर hi उन लोगो के लिए दोनों के मन में गुस्सा भर गया..
कर्मा- बहुत गलत किआ उन्होंने पापा, तुमने सही किआ उनसे रिश्ता तोड़कर.
अनुज- पर फिर ये तै यहाँ क्या करने आई हैं..
नीलेश- अनुज कर्मा चाहे जो भी हुआ हो पर हैं वो तुम्हारी तै hi, बड़ी हैं तुमसे और तुम्हारी माँ सामान हैं तो तुम दोनों उनसे पूरी इज़्ज़त और प्यार से पेश आओगे, और उन्हें पता नहीं चलना चाहिए की हमने तुम्हे उस सब के बारे में बता दिया है समझे?
कर्मा- ग पापा
नीलेश- अनुज खासकर तू.
अनुज- मैं ध्यान रखूँगा पापा...
नीलेश- बहुत अचे तो अब चलें कटाई करवानी है..
कर्मा - हाँ चलते हैं पापा..
इसके बाद तीनो लोग सभ्य को बोलकर खेत की और निकल गए..
वहीं जग्गू के घर में किसी बात को लेकर बहस हो रही थी..
मंजू- फिर काम से काम उसे ढूंढने की कोशिश तो करते.
राजपाल- हम उस नालायक की शकल तक नहीं देखना चाहते..
मंजू- बीटा है हमारा वो..
राजपाल- सब जानने के बाद भी तुम उसकी वकालत में लगी हो..
मंजू- अरे तो हम और जग्गू गए थे न लेकर आये हैं उसके लिए प्रशाद और बाबा के कहे मुताबिक वो ये खाकर ठीक हो जायेगा..
राजपाल - वो कुत्ते की दम है.
मंजू- अब जब ले आये हैं तो कोशिश कर लेने दो न पर उसके लिए वो मिले तो सही.
जग्गू- अरे तुम लोग लड़ो मत मैं जा रहा हूँ ढूंढने मिल जायेगा कहीं न कहीं.
मंजू- हाँ बीटा चल हम भी चलते हैं इन्हे करने दे जो करना है.
ये बोलकर वो भी जग्गू के साथ चल दी..
प्रेमा पास hi में कड़ी सब की बातें सुन रही थी...
इधर तीनो बाप बेटे बाघ के बगल वाले खेत में कटाई की तयारी कर रहे थे गेहूं का खेत धुप में सोने की तरह चमक रहा था,
नीलेश- कर्मा वो बिछाने के लिए पन्नी वगेरा ले आया है न..
कर्मा - हाँ पापा 5 मीटर की है बहुत है.
नीलेश- ठीक है और काटते?
अनुज- वो भी तैयार हैं.. बस ये मज़दूर कहाँ रह गए..
कर्मा- तूने उन्हें ध्यान से बोल तो दिया था न..
अनुज- अरे हाँ बोलकर आया हूँ..
इतने में पीछे से एक आवाज़ आई तो तीनो ने पलट कर देखा...
सामने ममता कड़ी थी,
नीलेश- अरे ममता बहु तुम यहाँ..
ममता- हाँ भाई साब ये तो बहार गए हैं और मुझे उपले ले जाने थे घर पर कुछ लाना भूल गयी तो कट्टा चाहिए था..
नीलेश- अरे हाँ ये कोई पूछने की बात है उठा लो वहां कितने पड़े हैं..
ममता- ठीक है कटाई शुरू हो गयी आज से. दोनों बच्चों को आते hi काम पर लगा दिया.
अनुज- चची काम करना हमें ाचा लगता है तुम्हे तो पता hi है..
अनुज की बात पर सबको हंसी आ गयी,
ममता- हाँ पता है तुझे कितना पसंद है काम करना..
अनुज- और क्या तुम्हे भी कोई काम हो तो बता देना चची मैं कर दूंगा तुम्हारा काम..
अनुज ने ये बोलकर अपने पापा की और तिरछी नज़र से देखा जैसे की बोल तो दिया पर कहीं पापा समझ न जाएं. पर उसने देखा की पापा सिर्फ मुस्कुरा रहे थे... तो चैन की साँस ली.
ममता- नहीं लल्ला पहले तुम ये hi निपटा लो फिर करना तुम हमारा काम..
ये कहकर ममता आगे बड़ी और पास पड़े कट्टों के ढेर से एक कट्टा उठा लिए पर उठाते वक़्त जानकार या अनजाने में उसकी साड़ी का पल्लू नीचे गिर गया.. जिसके गिरते hi तीनो बाप बेटों की नज़र उसी पर टिक गयी..
खैर ममता ने जल्दी से अपना पल्लू संभाला और कट्टा लेकर अपने मस्त चूतड़ों को मटकते हुए चली गयी चलते हुए उसे एहसास था की तीनो की नज़र उसकी गांड पर hi होगी साथ hi मन hi मन वो सोच रही थी की तीनो से hi वो चुद चुकी है, कितना अजीब सा एहसास है ये की बाप और बेटे दोनों से मैं चुद चुकी हैं ममता तो ये सोचते हुए आगे बढ़ गयी पर ये तीनो छुप छुप कर उसको नज़रों से ओझल होने तक देखते रहे..
खासकर कर्मा और अनुज क्यूंकि उन्हें काफी दिनों से ममता का बदन मिला जो नहीं था, ये बात नीलेश ने भी देखि की दोनों ममता को ताड़ रहे हैं जिसे देख कर उनके चेहरे पर मुस्कान आ गयी..
Nilesh-acha कर्मा अनुज, हमने तो तुम्हे अपना राज बता दिया, तुम्हारी तो कोई ऐसी बात नहीं है जो तुम हमें बता सको.
ये सुनकर दोनों hi चौंक गए,
कर्मा- नं नहीं पापा ऐसा तो कुछ नहीं है.
अनुज- हाँ ऐसा क्या होगा बताने लायक, कुछ भी तो नहीं..
दोनों को देख नीलेश मन hi मन मुस्कुराये, खैर आगे कुछ बात होती की उससे पहले hi मज़दूर आ गए और फिर सब काम में लग गए..
वही जग्गू के घर का दृश्य कुछ बदला हुआ था,
प्रेमा- पापाजी मान जाइये न कोई भी आ सकता है..
राजपाल- तभी तो कह रहा हूँ बहु, जल्दी से करने दे कोई आये उससे पहले hi हो जायेगा..
राजपाल ने पीछे से अपनी बहु को जकड रखा था और उसके मुलायम पेट को मसलते हुए उसके गोल मटोल चूतड़ों पर सारी के ऊपर से hi अपने खड़े लुंड को घिस रहे the.dono प्रेमा के कमरे में उसके बिस्तर के किनारे थे...
प्रेमा- पापाजी मुझे दर लग रहा है किसी ने देख लिए तो अनर्थ हो जायेगा...
राजपाल- अरे बहु चिंता क्यों करती है मैंने कुण्डी लगा दी है और तू hi देर कर रही है जल्दी से झुकजा तो जल्दी काम निपटेगा.
प्रेमा ने भी आगे विरोध नहीं किआ और अपने ससुर के आगे झुक गयी.
राजपाल- यहाँ नहीं बहु चल बिस्तर पर चढ़ जा यहाँ थक जाएगी...
ये कहकर राजपाल ने बहु को बिस्तर पर चढ़ा दिया और खुद जो ऊपर से पहले hi नंगे थे नीचे बंधी अपनी लुंगी भी उतर फेंकी और पूरे नंगे हो गए,
और फिर प्रेमा को बिस्तर पर घुटनो के बल झुका दिया, प्रेमा ने भी अपनी कोहनी का सहारा लेकर आगे झुककर अपनी गांड को ऊपर उठादिया,
राजपाल ने बहु की साड़ी को पकड़ कर ऊपर उसकी जांघों और फिर चूतड़ों को नंगा करते हुए उसकी कमर पर इकठा कर दिया और फिर बहु की गोरी गोल मटोल गांड के पीछे जगह ली और अपने लुंड को थूक से गीला करते हुए बहु की छूट पर रखा और अंदर सरका दिया..
प्रेमा- अह्ह्ह पापाजीइ.
राजपाल- देख कितना मन कर रही थी जबकि छूट तो कितनी गीली है तेरी,
राजपाल ने हलके हलके धक्के लगते हुए कहा..
प्रेमा- चुदाई की उत्सुकता में छूट तो गीली हो hi जाती है पापाजी.
कुछ hi देर में राजपाल ने एक ले पकड़ ली थी और अपनी बहु की गरम छूट के मज़े ले रहे थे

राजपाल - अह्ह्ह बहु टेरिइइइइइइ चूऊत्त में तो जन्नत का मज़ा है..
प्रेमा- आअह्ह्ह्ह ुहममम ऐसे होई पापाजीइ...
राजपाल - हाँ ले बहु अह्ह्ह ले अपने पापाजी का लुंदड़ अह्ह्ह्ह वैसे भी अब काम hi मौके मिलेंगे तुझे छोड़ने के..
प्रेमा- आअह्ह्ह्ह nahiiiiiiiiiiiiiiii मिलेंगे तो तुम निकल लोगे अह्ह्ह्ह जैसे अभी निकल लिए...
राजपाल- अह्ह्ह बहु निकलना तो पड़ेगा hi तेरी छूट की प्यास hi ऐसी है..
प्रेमा- पापाजी तुम्हे बुरा नहीं लगता की हम मम्मी जी और इनको धोखा दे रहे हैं..
राजपाल- अब क्या hi बुरा मानें बहु..
प्रेमा- क्यों अगर सोचो मम्मी जी भी किसी से छुडवालें तो तुम्हे कैसा लगेगा..
प्रेमा की ये बात सुनकर राजपाल एक पल को रुक गए पर फिर हल्का हल्का धक्का लगते हुए बोले- सच कहूं बहु तो पहले ऐसा सुनता भी तो न जाने मैं क्या करता पर अब जब तेरे साथ ये सब कर लिए है तो उसे भी नहीं रोकूंगा मैं, अगर मैं कर सकता हूँ तो वो भी..
प्रेमा- सच में पापाजी..
राजपाल- हाँ अजीब तो लगेगा बहुत पर जो सही है वो सही है...
यहाँ घर में ससुर बहु चुदाई करते हुए गुफ्तगू कर रहे थे वहीं एक खेत में भी चुदाई का तूफ़ान आया हुआ था,
अपने खेत के किनारे मेड पर मंजू तै पीठ के बल लेती हुई साड़ी कमर पर इकठा थी दोनों टांगें खुली हुई थी और टैंगो के बीच था उनका बीटा जग्गू जो अपनी माँ की छूट में अपना लुंड डालकर दनादन छोड़ रहा था

मंजू- ahhhhhhhhhh लाल्ल्लाहहह अब बस्सस कर हम तेरे भाई को ढूंढने निकले थे और तू है की हम पर चढ़ गया..
जग्गू- ओह्ह्ह्ह मम्मी भाई को भी ढूंढ लेंगे पर तुम्हे देखकर रुका नहीं गया...
मंजू- बस्स्स तेराअहहहह ये हीईई haiiiiiiiiiiiiiaaahhhhhh अह्हह्ह्ह्ह.
जग्गू- ओह्ह्ह मम्मी तुम्हे मज़ा नहीं आ रहा क्या,
मंजू- मज़ा तो आ रहा है बीटा पर किसी ने देख लिए तो..
जग्गू- कोई नहीं देखेगा मम्मीय अह्ह्ह्ह नुझे तो बड़ा मज़ा आ रहा है खुले में तुम्हे छोड़ने में.
मंजू- ahhhhhhhhhh लाल्ल्लाहहह और तेज़ जल्दी कर ज़्यादा समय नहीं है हमारे पास.
जग्गू- ओह्ह्ह्ह मम्मी अह्ह्ह्हह ुहममम..
जग्गू तेज़ तेज़ धक्के लगते हुए सिसकियाँ ले रहा था वहीं मंजू ने भी अपने दोनों पेअर बेटे की कमर पर बांध लिए और उसे और तेज़ छोड़ने के लिए उकसाने लगी..
जिसका नतीजा ये हुआ की दोनों माँ बेटे जल्दी hi झाड़ गए एक साथ, जग्गू ने अपने रास से अपनी मम्मी की छूट को भर दिया... जिसके बाद दोनों ने जल्दी से कपडे ठीक किये और भग्गू को ढूंढने लगे चलते हुए मंजू को बेटे का रास छूट से बहकर जांघों पर रिस्ता हुआ महसूस हो रहा था जो उसे एक अलग hi एहसास दे रहा था..
सरलपुर
सरलपुर में दिन साधारण गुज़र रहा था, चरण सिंह न चाहते हुए भी हर मौके पर अपनी बहुओं को बदन को ताड़ने से खुद को रोक नहीं पा रहे थे, रिमझिम और ख़ुशी दोनों ननद भाभी के बीच जो भी कुछ रात को हुआ उसका असर उनके चेहरे पर साफ़ दिख रहा था दोनों hi खासकर ख़ुशी एक दुसरे को देखकर शर्मा रही थी और नए नए प्रेमियों की तरह एक दुसरे को पूरा दिन इशारों से चिढ़ा रही थी.. वहीं बेचारी भोली भली चंचल इन सब से अनजान काम में व्यस्त थी हालाँकि चेतन ने रात को उसकी जमकर चुदाई की थी जिस कारन वो भी खिली खिली हुई थी खैर शाम होते होते रिमझिम के पास रमन का फ़ोन आया और न जाने उसकी उससे क्या बात हुई की फ़ोन रखने के बाद रिमझिम के चेहरे पर एक शरारती मुस्कान आ गयी..
खैर उसके बाद रात का खाना हुआ जिस दौरान भी चरण सिंह ने अपनी बहुओं के बदन की गर्मी से अपनी आँखों को खूब सका, रसोई का सारा काम निपटा कर चंचल अपने कमरे में चली गयी जहाँ चेतन उसका बेसब्री से इंतज़ार कर रहा था और कुछ देर बाद hi दोनों बिलकुल नंगे होकर एक दुसरे की बाहों में समाये हुए थे...
वहीं ननद भाभी की जोड़ी भी रिमझिम के कमरे में घुस गयी, दोनों ने शरमाते हुए कल का कार्यक्रम फिर से शुरू किआ और जल्दी hi दोनों के होंठ आपस में चिपके हुए थे और दोनों hi एक दुसरे के होंठों के रास को पिए जा रही थी...
होंठों को चूसते हुए hi रिमझिम ने ख़ुशी का सूट पकड़ कर उठा दिया और फिर ख़ुशी ने उसे अपनर सर से निकल दिया, सूट निकलने के बाद रिमझिम ने अपनी ननद के गले छाती और पेट को चेतना शुरू कर दिया, ख़ुशी के बदन का जो हिस्सा कपडे से बहार था रिमझिम ने उसे चाट चाट कर गीला कर दिया और फिर बरी आई ख़ुशी की सलवार की जिसे रिमझिम ने इतर फेंका और अब उसकी ननद उसके सामने सिर्फ एक ब्रा पंतय में थी...
अपनी सलवार उतरने के बाद ख़ुशी भी खामोश नहीं रही और उसने बदला लेते हुए अपनी भाभी की साड़ी और ब्लाउज दोनों को खोल दिया , अब रिमझिम सिर्फ ब्रा और पेटीकोट में थी, और जिस जोश और लगन से रिमझिम ने उसका बदन छठा था ख़ुशी ने उससे भी ज़्यादा लगन से अपनी भाभी का बदन छठा,
और फिर अगला हमला किआ भाभी के पेटीकोट पर जो को धराशाई होकर रिमझिम के कदमो में गिर गया अब दोनों ननद भाभी ब्रा और पंतय में एक दुसरे के सामने थी, ख़ुशी ने रिमझिम को बिस्तर पर लिटा दिया और उसकी नाभि को चूसने लगी, रिमझिम के मुँह से सिसकियाँ सुनकर ख़ुशी और जोश से अपनी भाभी की नाभि को चूस रही थी... सिर्फ नाभि चूसने से hi रिमझिम की छूट काफी गीली हो गयी थी और उसका बदन भी बार बार ऐंठ रहा था, इसका जवाब देते हुए रिमझिम ने ख़ुशी को पलट दिया और अब खुद अपनी ननद की नाभि को चूसने लगी... जिससे ख़ुशी तो मज़े से दोहरी हो गयी.. ये सिलसिला चल hi रहा था की अचानक से रिमझिम का फ़ोन बजा, जिसे रिमझिम ने उठाया, हालाँकि ख़ुशी जो मज़े के सागर में तैर रही थी उसे बीच में रुकना ाचा नहीं लगा पर उसे पता था की अभी पूरी रात पड़ी है...
खैर रिमझिम फ़ोन पर बात करते हुए बिस्तर से उठी और हैंगर पर तंगी मैक्सी उतर कर पहनने लगी.
ख़ुशी ने उसे सवालिया नज़रों से देखते हुए इशारे में पुछा की हुआ, जिसका जवाब रिमझिम ने सिर्फ हाथ दिखाकर इशारा किआ की कुछ नहीं रुक एक मिनट में आई, ख़ुशी समझ गयी शायद उसकी भाभी पानी वगेरा लेने जा रही है...
और रिमझिम अगले hi पल दरवाज़ा खोल के और फिर बहार से ढँक कर चली गयी... ख़ुशी को ये सब सोच सोचकर hi एक अजीब सी शर्म महसूस होने लगी, अपने बदन को सिर्फ ब्रा पंतय में देखकर साथ hi अपनी भाभी के थूक से सना हुआ देखकर ख़ुशी मन hi मन शर्माने लगी और उसी शर्म के एहसास में उसने अपनर बदन को पास पड़ी चद्दर को ओढ़ कर धक् लिया और सिर्फ चेहरा बहार रखकर अपनी भाभी का इंतज़ार करने lagi...kuch hi देर में दरवाज़ा खुला और ख़ुशी ने जो देखा उससे तो उसके होश hi उड़ गए...
इसके आगे क्या हुआ अगली अपडेट में प्लीज कमैंट्स करके ज़रूर बताएं कैसी लगी अपडेट बहुत बहुत धन्यवाद्














