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चोदामपुर
चोदामपुर में एक और गर्मी की रात थी पर बहार की गर्मी से ज़्यादा यहाँ के लोग अंदर की गर्मी से परेशां थे और उससे छुटकारा पाने के लिए पूरी कोशिश करते रहते थे,
ऐसे hi कोशिशें कई जगह जारी थी, आइये थोड़ा ताका झांकी करते हैं..
पूरी दोपहर अचे से चुदाई करने के बाद प्रेमा अब बिलकुल संस्कारी बहु की तरह अपने घर पर थी और अपने काम निपटा रही थी,
एक आदर्श बहु वाले सरे गन हैं प्रेमा में बड़ों के सामने हमेशा झुक के रहना और वो बिलकुल ऐसा hi करती थी या करती क्या थी कर hi रही थी,
प्रेमा अपने ससुरजी राजपाल के आगे झुकी हुई थी और राजपाल पीछे से अपनी बहु को स्नेह दे रहे थे, राजपाल का प्रेम उनके लुंड से होता हुआ प्रेमा की संकरी गांड में भर रहा था...
प्रेमा बीएड के किनारे झुकी हुई थी साड़ी और पेटीकोट कमर पर इकठा थे ब्लाउज तो बदन पर था hi नहीं ब्रा थी उसमे से भी दोनों चूचियां बहार झूल रही थी और पीछे थे ससुर जी...
पीछे से राजपाल अपनी बहु की कासी हुई गांड मार रहे थे.. कुर हर धक्के के साथ आहें भर रहे थे .

प्रेमा जो भले hi पूरी दोपहर हवस का नंगा खेल खेली हो अपने ससुर जी की सेवा में कोई कमी नहीं छोड़ रही थी...
प्रेमा- ओह्ह्ह्हह अह्ह्ह्हह paaaaapaaajjiiiiiiiiii आराम से...
राजपाल - ओह्ह्ह्हह बहु क्याआअह्ह्ह गांड haiiiiiiiiiiiiiaaahhhhhh टेरिइइइइइ अह्ह्ह्हह्हह ाराअहमममम hi तो nahiiiiiiiiiiiiiiii होता..
प्रेमा- ओह्ह्ह्ह हम्म्म वैसी पापजीई गांड तो मम्मी जी की भीईई काम nahiiiiiiiiiiiiiiii है... लगता है बहुत्तत्त ahhhhhhhhhh म्हणत की haiiiiiiiiiiiiiaaahhhhhh अपनी...
राजपाल- हाँ बहुउउ बिलकुल जैसे अभी टर्रे पीछे कर रहा हुण्णं वैसी हीईई टेरिइइइइइइ सास के पीछे भी की हैईईई...
प्रेमा- ुहममम पापाजी इनकी कोई खबर हीी आपको...?
राजपाल- अह्ह्ह्ह उससस नालायक का नाम मत ले बहुउउउउ,
राजपाल ने गुस्से में प्रेमा की गांड में धक्का लगते हुए कहा..
प्रेमा- ahhhhhhhhhh पापजीई आराम से, उनका गुस्सा मेरिइइइइ गाआआद्द पर क्यों निकल रहे हो
राजपाल- हाँ उस हरामजादे का जो नाम भी लेगा उस घर में... हम उसकी माँ छोड़ देंगे...
प्रेमा- अह्ह्ह्हह पापजीई हमारी भी???
राजपाल- हाँ बहु तेरी तो छोड़ने का बड़ा मन है बड़ा गठीला माल हैं संधान जी...
प्रेमा- क्या पापा जीई बेटी को छोड़ रहे हो, और माँ की बात कर रहे हो....
प्रेमा ने साथ देते हुए कहा, आज प्रेमा अपने ससुर को पूरी तरह से खुश करने के मूड में थी और करे भी क्यों न क्यूंकि इसके बदले में उसने अपने ससुर से कुछ माँगा जो था और वो था की आज रात उसे ममता पल्ली के यहाँ सोना था इसलिए वो अपने ससुर को पूरी तरह से संतुष्ट करके जाना चाहती थी.. वहीं राजपाल ने भी बहु को स्वीकृति दे दी थी पर बदले में उसकी गांड को कुछ देर के लिए माँगा था जिसे प्रेमा ख़ुशी ख़ुशी देने को तैयार हो गयी थी..
वहीं दूसरी और नीलेश और बाकि सब की योजना थी आज रात को भी पूरी तरह से आनंद लेने की तभी तो प्रेमा को भी बुलाया गया था पर उनकी योजना में एक अड़चन आ गयी और वो थी पल्ली की माहवारी, पल्ली ने अपनी मम्मी को बताया तो फिर और कर भी क्या सकते थे.. ममता ने ये बात सबको बताई तो योजना को थोड़ा बदलना पड़ा वहीं पल्ली ने कहा वो थक गयी है तो आज रात सोना hi चाहेगी..
वहीं प्रेमा को भी तब तक ममता अपने साथ ले आई थी, सब खाना पीना खा चुके थे, फिर ये तय हुआ की रात में किसी घर को खली छोड़ना सही नहीं है इसलिए दोनों घरो में अलग अलग समूह में बाँट जायेंगे...
और इसी तरह करीब आधे घंटे बाद राजन के घर में ममता, पल्ली और विनीत थे, विनीत का वैसे तो मन था पहले से hi की रार भर ममता ममी और पल्ली दोनों माँ बेटी के खूब मज़े करेगा पर पल्ली की माहवारी से उसको अपनी प्यारी ममता ममी के साथ आनंद लेना था,
वहीं ममता के पति राजन, और विनीत की मम्मी शशि साथ hi प्रेमा और नीलेश ये चरों नीलेश के घर में रुकने वाले थे, शशि और प्रेमा की जोड़ी को दोनों अधेड़ उम्र के मर्दों को संतुष्ट करना था खैर अभी तो यहाँ सब बातों में लगे हुए थे और शशि प्रेमा के मायके के बारे में बात कर रही थी उससे वहीं राजन भी था और नीलेश जानवरों को बांधने गए थे,
वहीं ममता के घर में थोड़ा नज़ारा बदला हुआ था पल्ली अपने कमरे में सो रही थी वहीं विनीत से ममता ममी को देखकर ज़्यादा सबर नहीं हुआ और उसने ममता को दबोच लिए और कुछ पल बाद ममता के रसीले होंठों को चूसते हुए वो उसके चूतड़ों को साड़ी के ऊपर से hi मसल रहा था..
ममता- आह्हः बाबू थोड़ा रुक जाओ दरवाज़ा लगा आती हूँ..
Vineet-ruka hi तो नहीं जा रहा मामी, पल्ली वैसे भी नहीं है अब बस हम दोनों हैं आज रात अपनी ममी का पूरा ख्याल रखूँगा..
ममता- सोचा तो हमने भी ऐसा hi कुछ है बाबू की निचोड़ hi लेंगे तुमको..
ये कहकर ममता दरवाजा लगाने चली गयी और विनीत अपने कपडे उतारकर तयारी करने लगा...
वहीं दूसरी तरफ नज़ारा काफी बदल चूका था नीलेश के आते hi सब शुरू हो गए थे और अभी दृश्य बड़ा hi कामुक था,
राजन हमारी प्यारी शशि की बड़ी बड़ी छूछीयों के बीच अपने लुंड को फंसकर उन्हें छोड़ रहे थे वहीं उनके बगल में प्रेमा और नीलेश एक करवट पर लेते हुए थे और नीलेश का लुंड प्रेमा की छूट के अंदर बहार हो रहा था..

प्रेमा- अह्ह्ह ओह्ह्ह चाचाजी अह्ह्ह मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था की मैं कभी इतना छोडूंगी...
नीलेश- क्या हुआ बहु मज़ा nahiiiiiiiiiiiiiiii आ रहा क्याःह्ह्ह..
प्रेमा- ऐसी बात नाहीई है चचाजीइ बहुत मज़ाआ आ रहा हीी जितना मैं आज भर में चूड़ी हूँ उतना तो उस मादरचोद ने शादी से अब तक nahiiiiiiiiiiiiiiii छोड़ा होगा...
शशि- ुहममम बहु तू उसको छोड़ और अपनी ज़िन्दगी के मज़े ले,
राजन- और ऐसा बदन पाकर भी अगर उसका मज़ा खुद और दूसरो को न लेने दिया तो बेकार है..
Shashi-aur क्या तेरे आस पास देख कितने hi लुंड हैं जो तेरी छूट में घुसने को एक इशारे पर तैयार हैं तो मज़े ले उनके.
प्रेमा- अह्ह्ह ले रही हूँ बुआ उसका hi नतीजा है को अभी ससुर से गांड मरवा कर आ रही हूँ और अब चाचाजी से चुद रही हूँ..
सब प्रेमा की इस बात पर हंस पड़े... वहीं राजन ने शशि को उठाकर घुमा दिया और प्रेमा और नीलेश की और मुँह करके बिस्तर पर घोड़ी बना दिया और पीछे से फिर अपने लुंड को शशि की गरम छूट में घुसा दिया और धक्के लगाकर छोड़ने लगे..

दोनों औरतें एक दुसरे के बगल में चुद रही तह, नीलेश पीछे से प्रेमा को छोड़ते हुए उसकी चूचियों से खेल रहे थे तो वहीं प्रेमा अपने ऊपर लटक रही शशि की चूचियों को मुँह में लेकर चूस लेती..
राजन- ahhhhhhhhhh भैया सच में तुम्हारी भें छोड़ने जैसा मज़ा कहीं नहीं है...
राजन ने शशि को छोड़ते हुए हँसते हुए कहा..
नीलेश- हाँ साले जैसे तुम्हारी तो वो कुछ है hi nahiiiiiiiiiiiiiiii..
राजन- है हमारी बहन है और हम पक्के वाले भेनचोद हैं...
इस बात पर सबका ठहाका कमरे में गूँज गया...
वहीं दूसरी और बात अब इधर भी आगे बढ़ चुकी थी और सिर्फ आगे नहीं काफी आगे बढ़ चुकी थी..
दरवाज़ा बंद करके आके ममता को विनीत ने फुर्सत नहीं लेनी दी और उसके ब्लाउज और साड़ी को उतर फेंका और ममता की छूछीयों को चूसने लगा,
ममता- हेहर हे बाबू बड़ी हड़बड़ी में हो, हम कहीं भागी थोड़े hi जा रहे हैं..
विनीत- ुहहमममआ ओह्ह्ह मामी तुम्हारी चूचियों को देखकर न जाने हमने कितनी बार मुठिया है अब मौका मिला है..
ममता- तो चूस लो बाबू खली कार्डो ममी की छूछीयों को...
विनीत पूरे जोश से ममता की छूछीयों को चूस रहा था...
वहीं दुसरे घर में उसकी मम्मी मूतने के लिए बाथरूम में गयी हुई थी और प्रेमा बहु दोनों मर्दों के बीच अकेली पद गयी थी जिसमे एक तरफ से नीलेश उसकी छूट की सेवा कर रहे थे वहीं उसके मुँह में राजन का लुंड था...
पर प्रेमा पूरी म्हणत से दोनों को खुश करने की पूरी कोशिश कर रही थी.

राजन- ahhhhhhhhhh कभी कभी सोचता हूँ ाचा hi हुआ जो भग्गू ऐसा निकला नहीं तो हमें प्रेमा जैसी बहु कभी छोड़ने को नहीं मिलती..
नीलेश- नहीं रे प्रेमा बहु जैसी गदराई बदन वाली औरत को संभालना अकेले मर्द की बस की नहीं है और खासकर भग्गू जैसे तो बिलकुल भी नहीं..
राजन- अगर भग्गू ाचा होता तो भी हमसे चुदवाती बहु..
नीलेश- चुदवाती हमसे नहीं तो किसी और से..
नीलेश ने प्रेमा की छूट में धक्का लगते हुए कहा...
दोनों प्रेमा को छोड़ते हुए उसके बारे में ऐसे बात कर रहे थे जैसे वो वहां पर है hi नहीं, वहीं प्रेमा उनकी बातों को सुनते हुए दोनों छोर से लुंड का मज़ा ले रही थी...
राजन- ahhhhhhhhhh बहु आईसीईईई hiiiiiiiiii चूस अपनी चाचआ का लुँड्ड़डडडड अह्ह्ह्ह क्याःह्ह्ह गरम मुँह है रे तेरा...
नीलेश- छूट तो बिलकुल भट्टी हैईईईई अह्ह्ह..
राजन- ahhhhhhhhhh ज़रूर बहु की माँ भी बड़ी गरम औरत होगीइइइइइइ अह्ह्ह.
इस बात पर प्रेमा ने उसका लुंड मुँह से निकला और बोली- आज सब मेरी माँ के पीछे hi क्यों पड़े हो...
नीलेश- सब? सब कौन?
प्रेमा- आज पापाजी भी बोल रहे थे ऐसा hi की संधान जी बड़ी सही माल हैं वगेरा वगेरा..
नीलेश- हाहाहा राजपाल भाईसाब भी न हर तरफ नज़र गदा के रखे हैं,
राजन- वैसे हमें तो लगता है सही कह रहे होंगे माल तो होगी बहु की माँ..
प्रेमा- ओह्हो चाचाजी यहाँ बेटी सामने नंगी पड़ी है तुम माँ के सपने देख रहे हो ..
शशि- यही तो इन मर्दों की फितरत होती है बहुरिया हमेशा एक छूट और के पीछे पड़े रहते हैं..
शशि ने कमरे के अंदर आते हुए कहा..
Prema-dekho न बुआजी मैं सामने हूँ नंगी और चाचाजी मेरी माँ की गांड मेइब घुसे जा रहे हैं..
राजन- अरे बहु कहाँ घुसा जा रहा हूँ एक बार मौका तो मिले..
इस बात पर प्रेमा भी हंसने से खुद को रोक नहीं पाई...
वहीं शशि ने आ जाने के बाद अपने लिए जगह बनाई तो आसान एक बार फिर बदल गए राजन और नीलेश दोनों अपनी पीठ पर लेट गए वहीं प्रेमा राजन के ऊपर आकर उसके लुंड पर सवार हो गयी और शशि अपने भैया के मोठे लुंड को छूट में भर के बैठ गयी.. और दोनों hi अपनी अपनी छूट में लुंड लेकर उसपर उछलने लगी..

प्रेमा- उह्ह्ह चचाजीइ वैसे आप निकले तो बड़े छुपे रुस्तम..
प्रेमा ने राजन से चुड़ते हुए नीलेश के सीने पर हाथ फिरते हुए कहा...
नीलेश- कैसे बहुउउउउ..
नीलेश ने अपनी बहन को छोड़ते हुए जवाब दिया..
प्रेमा- मैं तो कभी सोच भी नहीं सकती थी की तुम अपनी बहन को छोड़ते होंगे वो भी इतने सालो से..
राजन- ये बात तो सही कही तूने बहु.. बताओ हमें तो हर बात बताते थे हमें तक खबर नहीं होने दी..
राजन ने नीचे से धक्के लगते हुए प्रेमा की छूछीयों को दबाते हुए बोलै..
नीलेश- अरे तो का करते कैसे बताते की हम अपनी सगी बहन की गरम छूट को छोड़ते हैं.
शशि- अह्ह्ह्ह भैया आराम से.. वैसे सही बात है हर किसी के कुछ न कुछ राज़ ऐसे होते हैं जो किसी को नहीं पता होते..
प्रेमा- किसी के भी राज खोलने का सबसे बढ़िया तरीका है चुदाई..
राजन- सही कहा बहु, कितनी समझदार है तू..
Prema-kya बात है चाचाजी बड़ी तारीफ था कर रहे हो मेरी अब और क्या चाहिए..
राजन- तेरी गांड बहुरिया..
राजन ने हँसते हुए कहा..
प्रेमा- वो भी ले लो चाचा तुम्हारे लिए सरे दरवाज़े खुले हैं...
शशि और नीलेश दोनों की बातें सुन हँसते हुए चुदाई कर रहे थे..
पर प्रेमा और राजन अपनी बात को लेकर काफी गंभीर थे जिसके कारन कुछ पल बाद hi राजन ने प्रेमा की छूट से लुंड निकल कर उसकी गांड के द्वार पर रख दिया और जिस अंदर सरकने में प्रेमा ने उसकी मदद की और कुछ hi पलों में राजन का लुंड प्रेमा की गांड की गहराई नाप रहा था..

प्रेमा- ओह्ह्ह्हह चचाजीइ अह्हह्ह्ह्ह अब तो खुश हो नाहहहह..
राजन- ahhhhhhhhhh बहुउउ जिसका लुंड तेरी गांड में होगा उसके तो भाग hi खुल जायेंगे...
शशि- एते वाह राजू भैया बड़ी जल्दी गांड में घुस गए..
राजन- क्या करें शशि मन हुआ बहु की कासी हुई गांड की सैर करने का तो घुसा दिया...
शशि- हाय भगवन ऐसी बहुरिया सब को दे जो सबका इतना ख्याल रखे...
प्रेमा- चिन्ताः मत करो बुआअह्ह्ह विनीत के लिए ऐसी hi लड़की ढूंढूंगी..
शशि- अह्ह्ह हम्म्म बहु ऐसी hi चाहिए होगी जो हमारे घर के हालात को समझे और ख़ुशी ख़ुशी शामिल भी हो,
राजन- बिलकुल हमारी प्यारी बहु प्रेमा की तरह..
राजन ने प्रेमा की गांड मरते हुए कहा...
प्रेमा- अब तो गांड भी दे दी चचाजीइ अह्ह्ह्ह अब क्या चाहिए...
राजन- तेरी माँ की गांड बहुउउझ.
इस बात पर सब ज़ोर ज़ोर से हंसाने लगे...
वहीं दुसरे घर में अब काफी बदलाव आ चूका था ममता और विनीत दोनों hi पूरी तरह से नंगे थे और ममता नीचे बैठी हुई विनीत का लुंड चूस रही थी या यूँ कहें की विनीत ममता का मुँह छोड़ रहा था तो ज़्यादा सही होगा..
ममता के नूह से लगातार गगगगगगुणु ग्ग्ग्गू की आवाज़ें आ रही थी वहीं विनीत ममता के सर को पकड़े हुए अपने लुंड की ठोकर ममता के गले तक कर रहा था...
विनीत- ुहहमममआजमममी ahhhhhhhhhh चुसू आईसीईईई hiiiiiiiiii अह्ह्ह्हह सलीईई क्याआअह्ह्ह चुसतीई है तूऊऊऊह्ह्ह्हह्ह्ह्ह...
विनीत से आईसीईईई बातें सुनकर ममता की उत्तेजना और बढ़ रही थी.. वहीं विनीत का जोश तो पहले से hi बढ़ा हुआ था... कुछ देर और ममता के गले को छोड़ने के बाद विनीत ने अपना लुंड उसके मुँह से निकला और उसे बिस्तर पर लिटा दिया और खुद उसके पैरो को चौडाते हुए उनके बीच आ गया और फिर अपने मुँह को ममता की बहती हुई छूट पर लगा दिया और चाटने लगा..
ममता- आह्हः बाबू आईसीईईई hiiiiiiiiii आह्ह्हह्ह्ह्ह बहुत्तत्त ाची से सिखाया है तुम्हारीइइइइइइइ मम्मी ने..
एक तरफ जहाँ भांजे ममी का प्रेम उमड़ रहा था तो वहीं दूसरी तरफ भी प्रेम की कोई कमी नहीं थी...
प्रेमा और राजन के बाद नीलेश और शशि भी ज़्यादा देर तक उनसे पीछे नहीं रहे और शशि ने अपने भैया का लुंड अपनी छूट से निकल कर अपनी गांड में समां लिए था और उछाल उछाल कर अपने भैया के मोठे लुंड से गांड मरवा रही थी.

बगल में राजन नीचे से धक्के लगाकर प्रेमा की गांड को लगातार चौड़ा कर रहा था...
नीलेश- अह्ह्ह्हह शशि ओह्ह्ह्ह मज़ाआ आ रहा हीी...
शशि- मज़ा तो आयेगा hi भैयाहहहह अपनी बहन की गांड जो मार रहे हो...
राजन- एईई बायत ताऊ सही हैई अपनी बहन बेटी की गांड का मज़ाआ hi अलग हीी...
प्रेमा- अह्ह्ह चाचा मेरे में मज़ा nahiiiiiiiiiiiiiiii आ रहा क्या तुम्हे...
राजन- ारी बहु बहुतत्त आ रहा है और सच कहूं तेरी गांड भी बहुत मस्त haiiiiiiiiiiiiiaaahhhhhh... मैं बस उस रिश्ते की बात कर रहा था जो की उत्तेजना को और बढ़ा देता है...
प्रेमा- हहै चाचा मज़ाक कर रही थी मैं..
राजन- जनता हूँ बहुरिया, तू बहुत समझ दार है...
दोनों जोड़े एक दुसरे के बगल में हवस के खेल में लगे हुए थे जो शायद hi कहीं और खेला जा रहा होगा...
नीलेश- ahhhhhhhhhh समझ दार नहीं होती तो अभी तुझसे ऐसे गांड मरवा यही होती..
Rajan-is हिसाब से तो शशि सब्स्र ज़्यादा समझदार है...
शशि- वो तो मैं हूँ भैया... क्यों प्रेमा..
प्रेमा- सही कहा बाआ
और अपनी बात साबित करने के लिए प्रेमा ने आगे झुककर शशि के होंठों को चूम लिए जिसमे शशि ने भी पूरा साथ दिया उसके बाद न जाने दोनों औरतों में आँखों hi आँखों मेइब क्या बात हुई की दोनों hi एक दुसरे की और झुक गयी और दोनों ने hi अपनी अपनी गांड से लुंड निकल दिया और उससे पहले की दोनों मर्द कुछ समझ पते दोनों औरतों ने hi ेल दुसरे की गांड से निकले हुए लुंड को मुँह में भर लिए और चूसने लगी..

शशि ने प्रेमा की गांड से निकले राजन के लुंड को मुँह में भर लिए और प्रेमा ने शशि की गांड से निकले शशि के भैया के लुंड को..
राजन- ahhhhhhhhhh भैया ये तो जन्नत है...
नीलेश- ahhhhhhhhhh ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह ुहममम हनननननन सहीई कहा तूने...
राजन- कशह्ह्ह अह्ह्ह्हह ये सब पहली शुरू हुआआ होताआ..
नीलेश- ahhhhhhhhhh कशह्ह्ह... पर अभी जितना मिल रहा है बटोर लो...
राजन- सहीई कहा भैयाहहहह..
इसके बाद दोनों hi औरतों ने बापिस लुन्डों पर कब्ज़ा कर लिए पर जहाँ प्रेमा ने राजन के लुंड को अपनी गांड में लिए वहीं शशि इस बार अपने भैया के और मुँह करके बैठी और उनका लुंड अपनी खुजलाती हुई छूट में lia..aur उछाल उछाल कर भैया के मोठे तगड़े लुंड से अपनी छूट की खुजली को मिटने लगी...
Shashi-ahhhh भैया ओह्ह्ह्ह मज़ाआ आ रहा है...
नीलेश- ahhhhhhhhhh ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह ुहममम मेरिइइइ गुडियाःठ्हहह बहन....
नीलेश को जब भी शशि पर बहुत प्यार आता था तो वो बचपन से उसे ऐसे hi पुकारता था और अभी भी वही हो रहा था बस प्यार लुंड के रूप में बहन के अंदर जा रहा था,
शशि- अह्ह्ह्ह भैया chodoooooooooooohjhhh अपणीइइइइइइ बहन कोऊ aahhhhhhhhhh ..
राजन और प्रेमा भी दोनों भाई बहन की उत्तेजना देखकर खुद भी उत्तेजित हो रहे थे वहीं शशि और नीलेश की जबरदस्त चुदाई चल रही थी..
जहाँ माँ अपने सेज भाई के लुंड पर कूद रही थी तो वहीं बेटे के लुंड पर भी एक गदराई औरत कूद रही थी.
ममता विनीत की पूरी खातिर कर रही थी और उसकी मेहमान नवाज़ी में कोई कमी नहीं छोड़ रही थी... और खातिरदारी के लिए ममता ने विनीत के सामने अपनी रसीली छूट को परोस रखा था जिसे विनीत का लुंड काफी ज़ोरों से चख रहा था

विनीत नीचे से धक्के लगा लगाकर ममता की छूट का काफी अचे से स्वाद ले रहा था ममता भी विनीत की चुदाई की रफ़्तार और जवान लुंड पाकर बहुत खुश थी...
ऐसा नहीं था की उसे अपने पति या नीलेश के साथ मज़ा नहीं आता था बल्कि बहुत आता था पर उसे ये बदलाव ाचा लगता था, जहाँ उसके पति और नीलेश यहाँ तक की उसके भाई की चुदाई में संयम होता था वहीं जवान लड़के जैसे कर्मा अनुज और विनीत में जवानी का जोश था एक जूनून सा होता था, और ममता को दोनों hi पसंद थे..
ममता- ahhhhhhhhhh बाबूउउउ बाबूउउउ अह्हह्ह्ह्ह बढ़िया ऐसी हीईई छोड़ते राहूऊ ..
विनीत- ahhhhhhhhhh ममी तुम्हारे जैसीई मामी होतो जिंदगी भर छोड़ता रहूं..
ममता- किसने रोका है फिर अह्ह्ह्ह अह्ह्ह दिखाओ हमें कितना दम है तुम्हारे लोडे निब बाबू...
विनीत- ahhhhhhhhhh ममी देख लो डुम्मम्मम्म तो इतना haiiiiiiiiiiiiiaaahhhhhh की तुम्हारी छूट को रुला के hi छोड़ुंगाःह्ह्हह्ह अह्ह्ह्हह्हह ले salliiiiiiiiiiiiiii..
विनीत ने उत्तेजित होकर और तेज़ धक्के लगते हुए कहा जिसका असत ममता पर भी वैसा hi हुआअह्ह्ह..
ममता- आह्हः दिखायःहहह अह्ह्ह्ह भेनचोद, मदरचूऊऊडड़डडडड चुसड़द्द वैसी हीईईई जैसीईए अपणीइइइइइइ रनडीई माँ को छोड़ता haiiiiiiiiiiiiiaaahhhhhh..
विनीत ममता की बातों से और जोश में आकर छोड़ने लगा,
विनीत- साली रंडी तो तुझे बना कर छोडूंगा आज मेंनननननननन
ममता- तो छोड़ड़ड़ड़ ना मदररररछोड़ड़ड़, दिखा क्याआआआ क्या सिखायाः तेरी रनडीई मा नई...
दोनों के hi बीच काफी घमासान चुदाई चल रही थी और साथ hi एक दुसरे की बातों से भी बहुत उत्तेजित होते जा रहे थे
यहाँ जितनी तेज़ बीटा छोड़ रहा था वहीं दुसरे घर में माँ उतनी hi आलरामकता से चुद रही थी, नीलेश ने शशि को आगे अपनी और झुका रखा था और उसको कसकर पकड़ कर नीचे से ताबड़तोड़ धक्के लगाकर अपनी बहन को छोड़ रहे थे...
वहीं शशि अपने भैया के सीने में अपने सर को झुकाये सिसकियाँ लेने के अलावा कुछ नहीं कर प् रही थी..
वहीं पीछे से राजन और प्रेमा दोनों भाई बहन को देखकर अपनी चुदाई का आनंद ले रहे थे इसी बीच प्रेमा राजन के लुंड से उठ गयी तो उसकी गांड से राजन का लुंड निकल गया, प्रेमा ने पलट कर उसे मुँह में भर लिए और अपनी गांड का स्वाद उस पर चखने लगी कुछ पल चूसने के बाद प्रेमा ने राजन को इशारा किआ और राजन ने समझते हुए हामी भरी और मुस्कुराया और आगे बढ़ा, वहीं नीलेश जिसके धक्के थोड़े से धीमे हुए थे सांस भरने के लिए उसने राजन को अपनी टैंगो के बीच जगह बनाते देखा तो वो भी समझ गया...
और धीरे हो गया वहीं शशि को आस पास की कोई खबर नहीं थी वो बस अपने भाई के सीने में सर को छुपाये हुए लम्बी लम्बी सांस भर रही थी..
पर अगले hi पल उसे अपने पीछे कुछ महसूस हुआ और फिर उसकी गांड में कुछ घुसा जिसके एहसास से वो एक पल को चौंकी ज़रूर पर अब वो इन सब की इतनी अभ्यस्त हो चुकी थी, इतनी चुद चुकी थी की तुरंत संभल गयी..

वहीं राजन ने भी बिना देरी किये ालने लुंड को पूरा शशि की गांड में उतर दिया... और हलके धक्कों से उसकी गांड मरने लगे...
शशि के लिए ये सब उसके परिवार में आम हो चूका था पर मज़ा उसे हर बार पिछली बार से ज़्यादा आता था जब दो लुंड एक साथ उसके अंदर जाते थे..
वहीं इससे सबसे ज़्यादा उत्तेजित नीलेश थे जो की पहली बार अपनी बहन को किसी के साथ बाँट रहे थे वो भी अपने दोस्त के साथ नीलेश का लुंड फूलता जा रहा था,
वहीं राजन को भी वैसा hi महसूस हो रहा था...
और इसी जोश में आकर दोनों की गति बढ़ने लगी... कुछ hi देर में शशि की गांड और छूट में तूफानी धक्के पढ़ने लगे, ममता प्रेमा और पल्ली को कई बार दोनों मिलकर छोड़ चुके थे तो एक दुसरे के साथ ले बनाने में समय नहीं लगा तो दोनों मिलकर शशि को टारे दिखा रहे थे..
वहीं प्रेमा बगल में बैठी इस मज़ेदार दृश्य का आनंद उठाते हुए स्पानी छूट सहला रही थी...
उसे तीनो के हाव् भाव और गति से इतना तो अंदाज़ा हो गया था की बिना झड़े तीनो में से कोई रुकने वाला नहीं है..
राजन को अपने लुंड पर जो की शशि की गांड में था नीलेश के लुंड का एहसास हो रहा था और राजन ये सोच सोचकर उत्तेजित हो रहा था की वो अपने सबसे अचे दोस्त की बहन को उसके साथ मिलकर छोड़ रहा है...
वहीं यही ख्याल नीलेश के मन में भी था, और ये सोचकर उनका जोश दुगना होता जा रहा था, शशि को भी इस बात का एहसास था ऊपर से दो मोठे मोठे लुंड उसके छेदों में अंदर बहार हो रहे थे ..
तीनो hi ज़्यादा देर तक अपने आप को रोक नहीं पाए और कुछ hi देर में तीनो स्खलित होने लगे,
राजन ने शशि की गांड को तो नीलेश ने अपनी बहन की छूट को अपने रास से भर दिया
झड़ने के बाद पहले राजन ने पीछे से अपना लुंड निकला और शशि नीलेश के लुंड से उठी तो प्रेमा जैसे इसी के लिए तैयार बैठी थी उसने तुरंत शशि को प्रेत के बल लिटा दिया और उसकी छूट और गांड से रास चूसने लगी..
शशि एक बार फिर से सिसकियाँ लेने लगी, अपनी गांड और छूट में प्रेमा की जीभ को महसूस करके वहीं दोनों मर्द बिस्तर के सिरहाने से टिक कर बैठ गए और हांफते हुए प्रेमा और शशि को देख रहे थे..
वहीं दुसरे घर में भी चुदाई का तूफ़ान आया हुआ था, विनीत ने ममता को झुका रखा था और पीछे से दनादन धक्के लगा लगा कर ममता को अपनी चुदाई का हुनर दिखा रहा था जो उसकी मम्मी ने उसे सिखाया था,
विनीत ममता की कमर को थामे सटासट उसे छोड़ रहा था

ममता भी विनीत के लुंड का पूरा आनंद उठा रही थी और मज़े से चुद रही थी..
ममता- अह्ह्ह्ह बबबबबू और तगड़े धक्के लगाओ अह्ह्ह्ह दिखाओ अपनी मम्मी के दूध का दम..
ममता जानबूझकर ऐसी बातें करके विनीत को उत्तेजित कर रही थी जिसका नतीजा उसे उसकी छूट में मिल रहा था..
हर धक्के के साथ ममता की भरी छुछियां लहरा रही थी....
विनीत- ले सआईईई रनडीईई आह्हः आअज टेरिइइइइइइ चूऊत्त का भोसड़ा बना दूंगाःह ..
ममता- आह्हः बाबू तुम क्या तुम्हारा बाप भी आ जाये और कोशिश करले...
दोनों ऐसे मज़ाक करते हुए चुदाई का पूरा मज़ा ले रहे थे... पर ममता और विनीत दोनों hi उत्तेजना के शिखर पर थे और कभी भी झाड़ सकते थे और सबसे पहले ममता का बांध टूटा और वो विनीत के लुंड पर झाड़ गयी... ममता के झड़ने के बाद विनीत ने उसकी छूट से लुंड निकला और ममता को घुमाकर अपने सामने बिठा दिया और अपना लुंड ममता के नूह में भर दिया और उसे छोड़ने लगा ममता भी उसका साथ देने लगी
और कुछ देर बाद hi विनीत ने ममता के मुँह को अपने रास से भर दिया जिसे ममता ख़ुशी ख़ुशी जातक गयी...
इसके बाद दोनों एक दुसरे से चिपक कर आराम करने लगे...
वहीं नीलेश के यहाँ दोनों औरतों का आपसी प्रेम काफी देर तक चलता रहा, प्रेमा ने शशि की छूट की छूट और गांड को अचे से छठा उसके बाद शशि ने भी प्रेमा बहु की छूट और गांड दोनों का स्वाद अचे से चखा फिर उसकी चूचियों का और फिर दोनों औरतें काफी देर तक एक दुसरे के होंठों और जीभ को चूसती रही...
उन दोनों को देखकर hi राजन और नीलेश के लुंड दोबारा से टैंकर फुंकारने लगे,
राजन- अरे वाह मज़ा hi आ गया तुम लोगो का प्यार देख कर..
शशि- हाँ भैया दिख रहा है तुम्हारा मज़ा देखो कैसे फुंकारें मार रहा है..
शशि ने राजन के लुंड को पकड़ते हुए कहा...
प्रेमा- सही कह रही बुआ बिलकुल तन गए हैं लोडे दोनों के..
प्रेमा ने नीलेश के लुंड को अपने मुँह में भरते हुए जवाब दिया...
शशि ने भी राजन के लुंड को मुँह में भर लिए तो दोनों मर्दों के मुँह से आह्ह्ह्ह निकल गयी...
शशि और प्रेमा दोनों hi अपनर अपने गरम मुँह का कमाल दिखने लगी और कुछ देर में hi दोनों लुंड थूक से चमक रहे थे..
आगे का प्रोग्राम बना और उसी अनुसार नीलेश बिस्तर पर पीठ के बल लेट गए तो प्रेमा नीलेश के ऊपर आई और फिर उनके लुंड को अपनी गांड पर टिका कर नीचे बैठ गयी वहीं नीलेश भी नीचे से धक्के लगाकर प्रेमा की गांड का मज़ा उठाने लगे, वहीं राजन प्रेमा के बगल में आकर खड़े हो गए और अपना लुंड प्रेमा के मुँह में भर दिया जिसे प्रेमा ख़ुशी ख़ुशी चूसने लगी इसके साथ hi शशि भी दूसरी और आकर प्रेमा की एक छुच्छी को चूसने लगी

प्रेमा तो इस तिहरे हमले के आनंद से दोहरी होने लगी..
गांड में लुंड, मुँह में दूसरा लुंड और छुच्छी पर मुँह और क्या चाहिए था...
नीलेश- ahhhhhhhhhh बहुउउ टेरिइइइइइइ गंडड,
राजन- ahhhhhhhhhh भैया सिर्फ गांड hi nahiiiiiiiiiiiiiiii मुँह भी बहुत गरम ही...
शशि- पूरा बदन hi एक दम माखन है बहुरिया kaaah..uhhmmaaa
शशि ने उसकी छुच्छी को मुँह से निकलर हुए कहा..
प्रेमा बेचारी क्या बोलती मुँह में लुंड जो घुसा हुआ था वो तो बस बाकि तीनो के लिए एक स्वादिष्ट भोग की तरह थी जिसको तीनो hi अपने अपने तरीसे से चख रहे थे..
प्रेमा इसी सब के बीच सोचने लगी की कुछ दिन पहले तक कैसी थी उसकी ज़िन्दगी, रूखी, दुःख से भरी हुई, पति की नाराजगी सास के तने, कुछ भी ाचा नहीं था और सबसे ख़राब होती थी रात जब अकेले बिस्तर पर वो न जाने कितनी देर या तो तड़पती रहती थी या रोटी थी अपने पति की वजह से और आज देखो कहाँ वो एक के प्रेम के लिए तरसती थी आज तीन तीन लोग एक साथ उसके बदन से खेल रहे हैं..
तभी नीलेश ने एक ज़ोर का झटका उसकी गांड में लगाया तो जाकर उसका ध्यान बापिस आया...
वहीं राजन ने भी उसके मुँह से लुंड निकल लिए था नीलेश ने नीचे से hi उसकी दोनों टैंगो को पकड़ के फैलाया तो प्रेमा समझ गयी की आगे क्या होने वाला है, पहले भी कई बार नीलेश और राजन उसकी दोहरी चुदाई कर चुके थे और शशि की होती देख उसे ये तो अंदाज़ा हो गया था की थोड़ी hi देर में उसके अंदर भी दो लुंड होंगे और हुआ भी ऐसा hi ..
पेअर फैलते hi राजन उसकी टैंगो के बीच आ गया और फिर बिना किसी इंतज़ार के उसने अपना काम पूरा कर लिए और अगले hi पल प्रेमा जी की छूट में राजन का लुंड था और प्रेमा दो दो लुन्डों से एक साथ चुद रही थी, उसको ये भरा भरा एहसास पसंद था और दोहरे हमले से वो पागल सी हो रही थी की उसकी उत्तेजना और आनंद को बढ़ने के लिए शशि ने भी हाँथ बंटाया और उसकी छूट के डेन को सहलाने लगी .. साथ hi उसके होंठों को चूम कर उसका उत्साह बढ़ा रही थी...

प्रेमा तो जैसे उत्तेजना और मज़े से पागल हो गयी उसके मुँह से लगातार सिसकियाँ और आहें निकल रही थी..
प्रेमा- अहह आईसीईईई hiiiiiiiiii छोड़ूऊओ mujheeeeeeaaahhhhhhhhhhh
राजन चाहहहछा आईसीईईई hiiiiiiiiii और तेज़ज़्ज़ज़्ज़ज़्ज़ छोड़ूऊओ आअह्ह्ह्ह
राजन- ahhhhhhhhhh ुहम्म्म्म बहुउउउउ..
प्रेमा- मेरी गांड मारो चाचाजी अह्ह्ह्हह मारो मेरी छूट अह्ह्ह्हह ओह्ह्ह्ह मारो सालूविझ आईसीईईई हीइइइइइइइ छोडोऊ तुमसीई अपणीइइइइइइ मा भीईई छुडवाआ लूंग़ीीीु..
प्रेमा मज़े से दोहरी होती हुई ये सब बड़बड़ा रही थी... और बड़बड़ाये क्यों न इतना मज़ा जो मिल रहा था उसे..
और इसी मज़े का नतीजा ये हुआ की वो ज़्यादा देर तक टिक नहीं पाई और स्खलित हो गयी ..
और उसके स्खलन का वेग इतना तेज़ था की वो बिलकुल बेहोश सी हो गयी... नीलेश ने उसे अपने ऊपर से हटाकर बगल में लिटा दिया... जहाँ वो ज्यों की त्यों लेट गयी..
वहीं दुसरे घर में चुदाई का दूसरा दौर चल चूका था और इस समय काफी उफान पर था, ममता बिस्तर पर एक बार फिर से चौपाया बानी हुई थी और अपने बड़े बड़े चूतड़ों को हवा में उठाया हुआ था जिनके ऊपर विनीत चढ़ा हुआ था और विनीत का लुंड ममता की गांड के अंदर बहार हो रहा था...

ममता ने भी विनीत की खातिर दरी के लिए अपनी गांड की ऊंचा उठाकर उसके लिए परोस रखा था और उसके गांड का मखमली गरम स्वाद विनीत का लुंड ले रहा था..
Vineet-ahhhhhhhhhh ममी बड़ी चिकनी और मक्खन जैसी गांड है तुम्हारी...
ममता- तुम्हारा लोढ़ा भी माखन में चाकू के जैसे वार कर रहा है बाबू बहुत्तत्त गरम है...
विनीत - जब तुम्हारी भट्टी जैसी गांड में तपेगा तो गरम तो होगाआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह हीई मामी..
ममता- तो इसमेटी अपना रास भरररर के ठन्डागः कार्डो बाबूउउउउ ..
विनीत- करूंगा ममी अह्ह्ह्ह पूरी गंडड को अपनी रस से भर दूंगाःह्ह्ह्ह... ओह्ह्ह्हह्ह ममी तुम मेरे साथ मेरे गाओं चालुहह..
ममता- क्यों बाबू
विनीत - अह्ह्ह्हह पापा और ताऊजी बहुत खुश होंगे तुमसे मिलकर...
ममता- आह्हः खुश होंगे या हमें भी तुम्हारी तरह घोड़ी बनाकर ठोकते रहेंगे...
Vineet-uhhmmmaaaammmiii ठोकने में hi तो माज़ाअह है तुम चीज़ hi हो ठोकने लायक....
ममता- आएंगे हम बाबू सब आएंगे फिर मिलकर चुदाई करनाआ...
यहाँ ममी भांजे की चुदाई और आगे की योजना बन रही थी वहीं दूसरी और शशि का बुरा हाल हो रहा था
प्रेमा के झड़ने के बाद वो तो ठक्कर चूर हो गयी थी पर दोनों मर्दों के लुंड फिर भी खड़े हुए झूल रहे थे बस फिर क्या था दोनों टूट पड़े शशि पर और अभी नज़ारा बड़ा दिलचस्प था... प्रेमा जो की अब बापिस से जोश में आ चुकी थी वो राजन के लुंड को चूस चूसकर और गीला कर रही थी वहीं नीलेश पीठ के बल लेते थे और शशि उनके पैरों की और चेहरा किये अपने भैया भैया का लुंड गांड में लिए उछाल रही थी..
प्रेमा ने कुछ देर और राजन के लुंड को चूसा और फिर छोड़ दिया जिसके बाद राजन तुरंत नीलेश और शशि की टैंगो के बीच आ गया जिसका स्वागत नीलेश और शशि दोनों hi अपनी टंगे फैलाकर किया और फिर राजन ने अपने लुंड शशि जी की छूट में घुसा दिया...

शशि एक बार फिर से दो दो लुन्डों से छोड़ने का मज़ा लेने लगी..
शशि- अह्ह्ह छोड़ूऊओ भेंचोड़ड़ूऊऊ ahhhhhhhhhh अपनी बहन को एक सअअअअअतःहःहः आह्ह्ह्हह..
शशि की बातों से उत्तेजित होकर नीलेश और राजन और तूफानी धक्कों से शशि को छोड़ने लगे..
शशि तो मज़े और आनंद के सागर में गोते लगा रही थी दोनों आँखें बंद थी
बदन मज़े से अकड़ रहा था पूरे बदन में जैसे खून की जगह वासना बाह रही थी और महसूस हो रहे थे बस दो लुंड जो उसकी छूट और गांड से अंदर बहार हो रहे थे...
प्रेमा बगल में बैठी हुई इस घनघोर चुदाई का मज़ा लेते हुए अपनी छूछीयो को मसल रही थी...
कमरे में जैसे वासना का तूफ़ान सा आया हुआ था जो हर पल के साथ बढ़ता जा रहा था शशि के मुँह से सिसकियाँ और चीखें निकल रही थी वहीं नीलेध और राजन पसीने में नहाये गुर्रा रहे थे..
प्रेमा को तो दर लग रहा था की अगर ऐसी चुदाई उसकी हो तो वो तो बेहोश hi हो जाएगी..
और फिर चुदाई का तूफ़ान बिलकुल अपने शिखर पर पहुँच गया शशि का बदन पूरा अकड़ गया और वो थरथराने लगी जिससे नीलेश और राजन उसे संभल नहीं पाए और वो बगल में नीचे लेट गयी..
पर नीलेश और राजन तो जैसे अधूरे में अटक गए पर उसी वक़्त प्रेमा उनकी मदद के लिए आगे आई और दोनों के लुंड बरी बरी चूसते हुए मुठियाने लगी और फिर जल्दी hi दोनों ने hi अपना अपना रास छोड़ दिया नीलेश ने पहले प्रेमा का मुँह भरा और फिर राजन ने जिसे वो ख़ुशी ख़ुशी जातक गयी...
शशि तो आँखें मूंदे बड़ी बड़ी सांसें भर रही थी, बाकि तीनो भी बिस्तर पर गिर गए अब किसी में कुछ और करने की ताकत नहीं बची थी...
जल्दी hi तीनो नींद के आगोश में खो गए थे दूसरी और विनीत भी ममता की गांड में झड़ने के बाद उससे चिपक कर सो गया...
सरलपुर
एक आम सुबह थी और सब अपने अपने काम में लगे हुए थे, रिमझिम की सास को आज मायके जाना था उसी की तयारी चल रही थी, वहीं रमन को भी दो दिन के लिए काम के सिलसिले से बहार जाना पद रहा था जिस वजह से रिमझिम थोड़ी उदास थी पति से दूर रहने का दुःख ऊपर से दो दिन सूखा hi सोना पड़ेगा, चुदाई की ऐसी लत लगी थी की बिना छूट की खुजली मिटाये नींद hi नहीं आती थी इसी लिए रसोई में काम करते हुए थोड़ी झुंझलाई हुई थी और इस बात को रमन भी अचे से समझ रहे थे... खैर तय ये हुआ था की रमन अपनी अम्मा को बस अड्डे छोड़कर दुसरे शहर निकल जायेगा... इसी चहल पहल से घर भरा हुआ था.
इसके आगे क्या हुआ अगली अपडेट में प्लीज कमैंट्स करके ज़रूर बताएं कैसी लगी अपडेट बहुत बहुत धन्यवाद्
चोदामपुर
चोदामपुर में एक और गर्मी की रात थी पर बहार की गर्मी से ज़्यादा यहाँ के लोग अंदर की गर्मी से परेशां थे और उससे छुटकारा पाने के लिए पूरी कोशिश करते रहते थे,
ऐसे hi कोशिशें कई जगह जारी थी, आइये थोड़ा ताका झांकी करते हैं..
पूरी दोपहर अचे से चुदाई करने के बाद प्रेमा अब बिलकुल संस्कारी बहु की तरह अपने घर पर थी और अपने काम निपटा रही थी,
एक आदर्श बहु वाले सरे गन हैं प्रेमा में बड़ों के सामने हमेशा झुक के रहना और वो बिलकुल ऐसा hi करती थी या करती क्या थी कर hi रही थी,
प्रेमा अपने ससुरजी राजपाल के आगे झुकी हुई थी और राजपाल पीछे से अपनी बहु को स्नेह दे रहे थे, राजपाल का प्रेम उनके लुंड से होता हुआ प्रेमा की संकरी गांड में भर रहा था...
प्रेमा बीएड के किनारे झुकी हुई थी साड़ी और पेटीकोट कमर पर इकठा थे ब्लाउज तो बदन पर था hi नहीं ब्रा थी उसमे से भी दोनों चूचियां बहार झूल रही थी और पीछे थे ससुर जी...
पीछे से राजपाल अपनी बहु की कासी हुई गांड मार रहे थे.. कुर हर धक्के के साथ आहें भर रहे थे .

प्रेमा जो भले hi पूरी दोपहर हवस का नंगा खेल खेली हो अपने ससुर जी की सेवा में कोई कमी नहीं छोड़ रही थी...
प्रेमा- ओह्ह्ह्हह अह्ह्ह्हह paaaaapaaajjiiiiiiiiii आराम से...
राजपाल - ओह्ह्ह्हह बहु क्याआअह्ह्ह गांड haiiiiiiiiiiiiiaaahhhhhh टेरिइइइइइ अह्ह्ह्हह्हह ाराअहमममम hi तो nahiiiiiiiiiiiiiiii होता..
प्रेमा- ओह्ह्ह्ह हम्म्म वैसी पापजीई गांड तो मम्मी जी की भीईई काम nahiiiiiiiiiiiiiiii है... लगता है बहुत्तत्त ahhhhhhhhhh म्हणत की haiiiiiiiiiiiiiaaahhhhhh अपनी...
राजपाल- हाँ बहुउउ बिलकुल जैसे अभी टर्रे पीछे कर रहा हुण्णं वैसी हीईई टेरिइइइइइइ सास के पीछे भी की हैईईई...
प्रेमा- ुहममम पापाजी इनकी कोई खबर हीी आपको...?
राजपाल- अह्ह्ह्ह उससस नालायक का नाम मत ले बहुउउउउ,
राजपाल ने गुस्से में प्रेमा की गांड में धक्का लगते हुए कहा..
प्रेमा- ahhhhhhhhhh पापजीई आराम से, उनका गुस्सा मेरिइइइइ गाआआद्द पर क्यों निकल रहे हो
राजपाल- हाँ उस हरामजादे का जो नाम भी लेगा उस घर में... हम उसकी माँ छोड़ देंगे...
प्रेमा- अह्ह्ह्हह पापजीई हमारी भी???
राजपाल- हाँ बहु तेरी तो छोड़ने का बड़ा मन है बड़ा गठीला माल हैं संधान जी...
प्रेमा- क्या पापा जीई बेटी को छोड़ रहे हो, और माँ की बात कर रहे हो....
प्रेमा ने साथ देते हुए कहा, आज प्रेमा अपने ससुर को पूरी तरह से खुश करने के मूड में थी और करे भी क्यों न क्यूंकि इसके बदले में उसने अपने ससुर से कुछ माँगा जो था और वो था की आज रात उसे ममता पल्ली के यहाँ सोना था इसलिए वो अपने ससुर को पूरी तरह से संतुष्ट करके जाना चाहती थी.. वहीं राजपाल ने भी बहु को स्वीकृति दे दी थी पर बदले में उसकी गांड को कुछ देर के लिए माँगा था जिसे प्रेमा ख़ुशी ख़ुशी देने को तैयार हो गयी थी..
वहीं दूसरी और नीलेश और बाकि सब की योजना थी आज रात को भी पूरी तरह से आनंद लेने की तभी तो प्रेमा को भी बुलाया गया था पर उनकी योजना में एक अड़चन आ गयी और वो थी पल्ली की माहवारी, पल्ली ने अपनी मम्मी को बताया तो फिर और कर भी क्या सकते थे.. ममता ने ये बात सबको बताई तो योजना को थोड़ा बदलना पड़ा वहीं पल्ली ने कहा वो थक गयी है तो आज रात सोना hi चाहेगी..
वहीं प्रेमा को भी तब तक ममता अपने साथ ले आई थी, सब खाना पीना खा चुके थे, फिर ये तय हुआ की रात में किसी घर को खली छोड़ना सही नहीं है इसलिए दोनों घरो में अलग अलग समूह में बाँट जायेंगे...
और इसी तरह करीब आधे घंटे बाद राजन के घर में ममता, पल्ली और विनीत थे, विनीत का वैसे तो मन था पहले से hi की रार भर ममता ममी और पल्ली दोनों माँ बेटी के खूब मज़े करेगा पर पल्ली की माहवारी से उसको अपनी प्यारी ममता ममी के साथ आनंद लेना था,
वहीं ममता के पति राजन, और विनीत की मम्मी शशि साथ hi प्रेमा और नीलेश ये चरों नीलेश के घर में रुकने वाले थे, शशि और प्रेमा की जोड़ी को दोनों अधेड़ उम्र के मर्दों को संतुष्ट करना था खैर अभी तो यहाँ सब बातों में लगे हुए थे और शशि प्रेमा के मायके के बारे में बात कर रही थी उससे वहीं राजन भी था और नीलेश जानवरों को बांधने गए थे,
वहीं ममता के घर में थोड़ा नज़ारा बदला हुआ था पल्ली अपने कमरे में सो रही थी वहीं विनीत से ममता ममी को देखकर ज़्यादा सबर नहीं हुआ और उसने ममता को दबोच लिए और कुछ पल बाद ममता के रसीले होंठों को चूसते हुए वो उसके चूतड़ों को साड़ी के ऊपर से hi मसल रहा था..
ममता- आह्हः बाबू थोड़ा रुक जाओ दरवाज़ा लगा आती हूँ..
Vineet-ruka hi तो नहीं जा रहा मामी, पल्ली वैसे भी नहीं है अब बस हम दोनों हैं आज रात अपनी ममी का पूरा ख्याल रखूँगा..
ममता- सोचा तो हमने भी ऐसा hi कुछ है बाबू की निचोड़ hi लेंगे तुमको..
ये कहकर ममता दरवाजा लगाने चली गयी और विनीत अपने कपडे उतारकर तयारी करने लगा...
वहीं दूसरी तरफ नज़ारा काफी बदल चूका था नीलेश के आते hi सब शुरू हो गए थे और अभी दृश्य बड़ा hi कामुक था,
राजन हमारी प्यारी शशि की बड़ी बड़ी छूछीयों के बीच अपने लुंड को फंसकर उन्हें छोड़ रहे थे वहीं उनके बगल में प्रेमा और नीलेश एक करवट पर लेते हुए थे और नीलेश का लुंड प्रेमा की छूट के अंदर बहार हो रहा था..

प्रेमा- अह्ह्ह ओह्ह्ह चाचाजी अह्ह्ह मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था की मैं कभी इतना छोडूंगी...
नीलेश- क्या हुआ बहु मज़ा nahiiiiiiiiiiiiiiii आ रहा क्याःह्ह्ह..
प्रेमा- ऐसी बात नाहीई है चचाजीइ बहुत मज़ाआ आ रहा हीी जितना मैं आज भर में चूड़ी हूँ उतना तो उस मादरचोद ने शादी से अब तक nahiiiiiiiiiiiiiiii छोड़ा होगा...
शशि- ुहममम बहु तू उसको छोड़ और अपनी ज़िन्दगी के मज़े ले,
राजन- और ऐसा बदन पाकर भी अगर उसका मज़ा खुद और दूसरो को न लेने दिया तो बेकार है..
Shashi-aur क्या तेरे आस पास देख कितने hi लुंड हैं जो तेरी छूट में घुसने को एक इशारे पर तैयार हैं तो मज़े ले उनके.
प्रेमा- अह्ह्ह ले रही हूँ बुआ उसका hi नतीजा है को अभी ससुर से गांड मरवा कर आ रही हूँ और अब चाचाजी से चुद रही हूँ..
सब प्रेमा की इस बात पर हंस पड़े... वहीं राजन ने शशि को उठाकर घुमा दिया और प्रेमा और नीलेश की और मुँह करके बिस्तर पर घोड़ी बना दिया और पीछे से फिर अपने लुंड को शशि की गरम छूट में घुसा दिया और धक्के लगाकर छोड़ने लगे..

दोनों औरतें एक दुसरे के बगल में चुद रही तह, नीलेश पीछे से प्रेमा को छोड़ते हुए उसकी चूचियों से खेल रहे थे तो वहीं प्रेमा अपने ऊपर लटक रही शशि की चूचियों को मुँह में लेकर चूस लेती..
राजन- ahhhhhhhhhh भैया सच में तुम्हारी भें छोड़ने जैसा मज़ा कहीं नहीं है...
राजन ने शशि को छोड़ते हुए हँसते हुए कहा..
नीलेश- हाँ साले जैसे तुम्हारी तो वो कुछ है hi nahiiiiiiiiiiiiiiii..
राजन- है हमारी बहन है और हम पक्के वाले भेनचोद हैं...
इस बात पर सबका ठहाका कमरे में गूँज गया...
वहीं दूसरी और बात अब इधर भी आगे बढ़ चुकी थी और सिर्फ आगे नहीं काफी आगे बढ़ चुकी थी..
दरवाज़ा बंद करके आके ममता को विनीत ने फुर्सत नहीं लेनी दी और उसके ब्लाउज और साड़ी को उतर फेंका और ममता की छूछीयों को चूसने लगा,
ममता- हेहर हे बाबू बड़ी हड़बड़ी में हो, हम कहीं भागी थोड़े hi जा रहे हैं..
विनीत- ुहहमममआ ओह्ह्ह मामी तुम्हारी चूचियों को देखकर न जाने हमने कितनी बार मुठिया है अब मौका मिला है..
ममता- तो चूस लो बाबू खली कार्डो ममी की छूछीयों को...
विनीत पूरे जोश से ममता की छूछीयों को चूस रहा था...
वहीं दुसरे घर में उसकी मम्मी मूतने के लिए बाथरूम में गयी हुई थी और प्रेमा बहु दोनों मर्दों के बीच अकेली पद गयी थी जिसमे एक तरफ से नीलेश उसकी छूट की सेवा कर रहे थे वहीं उसके मुँह में राजन का लुंड था...
पर प्रेमा पूरी म्हणत से दोनों को खुश करने की पूरी कोशिश कर रही थी.

राजन- ahhhhhhhhhh कभी कभी सोचता हूँ ाचा hi हुआ जो भग्गू ऐसा निकला नहीं तो हमें प्रेमा जैसी बहु कभी छोड़ने को नहीं मिलती..
नीलेश- नहीं रे प्रेमा बहु जैसी गदराई बदन वाली औरत को संभालना अकेले मर्द की बस की नहीं है और खासकर भग्गू जैसे तो बिलकुल भी नहीं..
राजन- अगर भग्गू ाचा होता तो भी हमसे चुदवाती बहु..
नीलेश- चुदवाती हमसे नहीं तो किसी और से..
नीलेश ने प्रेमा की छूट में धक्का लगते हुए कहा...
दोनों प्रेमा को छोड़ते हुए उसके बारे में ऐसे बात कर रहे थे जैसे वो वहां पर है hi नहीं, वहीं प्रेमा उनकी बातों को सुनते हुए दोनों छोर से लुंड का मज़ा ले रही थी...
राजन- ahhhhhhhhhh बहु आईसीईईई hiiiiiiiiii चूस अपनी चाचआ का लुँड्ड़डडडड अह्ह्ह्ह क्याःह्ह्ह गरम मुँह है रे तेरा...
नीलेश- छूट तो बिलकुल भट्टी हैईईईई अह्ह्ह..
राजन- ahhhhhhhhhh ज़रूर बहु की माँ भी बड़ी गरम औरत होगीइइइइइइ अह्ह्ह.
इस बात पर प्रेमा ने उसका लुंड मुँह से निकला और बोली- आज सब मेरी माँ के पीछे hi क्यों पड़े हो...
नीलेश- सब? सब कौन?
प्रेमा- आज पापाजी भी बोल रहे थे ऐसा hi की संधान जी बड़ी सही माल हैं वगेरा वगेरा..
नीलेश- हाहाहा राजपाल भाईसाब भी न हर तरफ नज़र गदा के रखे हैं,
राजन- वैसे हमें तो लगता है सही कह रहे होंगे माल तो होगी बहु की माँ..
प्रेमा- ओह्हो चाचाजी यहाँ बेटी सामने नंगी पड़ी है तुम माँ के सपने देख रहे हो ..
शशि- यही तो इन मर्दों की फितरत होती है बहुरिया हमेशा एक छूट और के पीछे पड़े रहते हैं..
शशि ने कमरे के अंदर आते हुए कहा..
Prema-dekho न बुआजी मैं सामने हूँ नंगी और चाचाजी मेरी माँ की गांड मेइब घुसे जा रहे हैं..
राजन- अरे बहु कहाँ घुसा जा रहा हूँ एक बार मौका तो मिले..
इस बात पर प्रेमा भी हंसने से खुद को रोक नहीं पाई...
वहीं शशि ने आ जाने के बाद अपने लिए जगह बनाई तो आसान एक बार फिर बदल गए राजन और नीलेश दोनों अपनी पीठ पर लेट गए वहीं प्रेमा राजन के ऊपर आकर उसके लुंड पर सवार हो गयी और शशि अपने भैया के मोठे लुंड को छूट में भर के बैठ गयी.. और दोनों hi अपनी अपनी छूट में लुंड लेकर उसपर उछलने लगी..

प्रेमा- उह्ह्ह चचाजीइ वैसे आप निकले तो बड़े छुपे रुस्तम..
प्रेमा ने राजन से चुड़ते हुए नीलेश के सीने पर हाथ फिरते हुए कहा...
नीलेश- कैसे बहुउउउउ..
नीलेश ने अपनी बहन को छोड़ते हुए जवाब दिया..
प्रेमा- मैं तो कभी सोच भी नहीं सकती थी की तुम अपनी बहन को छोड़ते होंगे वो भी इतने सालो से..
राजन- ये बात तो सही कही तूने बहु.. बताओ हमें तो हर बात बताते थे हमें तक खबर नहीं होने दी..
राजन ने नीचे से धक्के लगते हुए प्रेमा की छूछीयों को दबाते हुए बोलै..
नीलेश- अरे तो का करते कैसे बताते की हम अपनी सगी बहन की गरम छूट को छोड़ते हैं.
शशि- अह्ह्ह्ह भैया आराम से.. वैसे सही बात है हर किसी के कुछ न कुछ राज़ ऐसे होते हैं जो किसी को नहीं पता होते..
प्रेमा- किसी के भी राज खोलने का सबसे बढ़िया तरीका है चुदाई..
राजन- सही कहा बहु, कितनी समझदार है तू..
Prema-kya बात है चाचाजी बड़ी तारीफ था कर रहे हो मेरी अब और क्या चाहिए..
राजन- तेरी गांड बहुरिया..
राजन ने हँसते हुए कहा..
प्रेमा- वो भी ले लो चाचा तुम्हारे लिए सरे दरवाज़े खुले हैं...
शशि और नीलेश दोनों की बातें सुन हँसते हुए चुदाई कर रहे थे..
पर प्रेमा और राजन अपनी बात को लेकर काफी गंभीर थे जिसके कारन कुछ पल बाद hi राजन ने प्रेमा की छूट से लुंड निकल कर उसकी गांड के द्वार पर रख दिया और जिस अंदर सरकने में प्रेमा ने उसकी मदद की और कुछ hi पलों में राजन का लुंड प्रेमा की गांड की गहराई नाप रहा था..

प्रेमा- ओह्ह्ह्हह चचाजीइ अह्हह्ह्ह्ह अब तो खुश हो नाहहहह..
राजन- ahhhhhhhhhh बहुउउ जिसका लुंड तेरी गांड में होगा उसके तो भाग hi खुल जायेंगे...
शशि- एते वाह राजू भैया बड़ी जल्दी गांड में घुस गए..
राजन- क्या करें शशि मन हुआ बहु की कासी हुई गांड की सैर करने का तो घुसा दिया...
शशि- हाय भगवन ऐसी बहुरिया सब को दे जो सबका इतना ख्याल रखे...
प्रेमा- चिन्ताः मत करो बुआअह्ह्ह विनीत के लिए ऐसी hi लड़की ढूंढूंगी..
शशि- अह्ह्ह हम्म्म बहु ऐसी hi चाहिए होगी जो हमारे घर के हालात को समझे और ख़ुशी ख़ुशी शामिल भी हो,
राजन- बिलकुल हमारी प्यारी बहु प्रेमा की तरह..
राजन ने प्रेमा की गांड मरते हुए कहा...
प्रेमा- अब तो गांड भी दे दी चचाजीइ अह्ह्ह्ह अब क्या चाहिए...
राजन- तेरी माँ की गांड बहुउउझ.
इस बात पर सब ज़ोर ज़ोर से हंसाने लगे...
वहीं दुसरे घर में अब काफी बदलाव आ चूका था ममता और विनीत दोनों hi पूरी तरह से नंगे थे और ममता नीचे बैठी हुई विनीत का लुंड चूस रही थी या यूँ कहें की विनीत ममता का मुँह छोड़ रहा था तो ज़्यादा सही होगा..
ममता के नूह से लगातार गगगगगगुणु ग्ग्ग्गू की आवाज़ें आ रही थी वहीं विनीत ममता के सर को पकड़े हुए अपने लुंड की ठोकर ममता के गले तक कर रहा था...
विनीत- ुहहमममआजमममी ahhhhhhhhhh चुसू आईसीईईई hiiiiiiiiii अह्ह्ह्हह सलीईई क्याआअह्ह्ह चुसतीई है तूऊऊऊह्ह्ह्हह्ह्ह्ह...
विनीत से आईसीईईई बातें सुनकर ममता की उत्तेजना और बढ़ रही थी.. वहीं विनीत का जोश तो पहले से hi बढ़ा हुआ था... कुछ देर और ममता के गले को छोड़ने के बाद विनीत ने अपना लुंड उसके मुँह से निकला और उसे बिस्तर पर लिटा दिया और खुद उसके पैरो को चौडाते हुए उनके बीच आ गया और फिर अपने मुँह को ममता की बहती हुई छूट पर लगा दिया और चाटने लगा..
ममता- आह्हः बाबू आईसीईईई hiiiiiiiiii आह्ह्हह्ह्ह्ह बहुत्तत्त ाची से सिखाया है तुम्हारीइइइइइइइ मम्मी ने..
एक तरफ जहाँ भांजे ममी का प्रेम उमड़ रहा था तो वहीं दूसरी तरफ भी प्रेम की कोई कमी नहीं थी...
प्रेमा और राजन के बाद नीलेश और शशि भी ज़्यादा देर तक उनसे पीछे नहीं रहे और शशि ने अपने भैया का लुंड अपनी छूट से निकल कर अपनी गांड में समां लिए था और उछाल उछाल कर अपने भैया के मोठे लुंड से गांड मरवा रही थी.

बगल में राजन नीचे से धक्के लगाकर प्रेमा की गांड को लगातार चौड़ा कर रहा था...
नीलेश- अह्ह्ह्हह शशि ओह्ह्ह्ह मज़ाआ आ रहा हीी...
शशि- मज़ा तो आयेगा hi भैयाहहहह अपनी बहन की गांड जो मार रहे हो...
राजन- एईई बायत ताऊ सही हैई अपनी बहन बेटी की गांड का मज़ाआ hi अलग हीी...
प्रेमा- अह्ह्ह चाचा मेरे में मज़ा nahiiiiiiiiiiiiiiii आ रहा क्या तुम्हे...
राजन- ारी बहु बहुतत्त आ रहा है और सच कहूं तेरी गांड भी बहुत मस्त haiiiiiiiiiiiiiaaahhhhhh... मैं बस उस रिश्ते की बात कर रहा था जो की उत्तेजना को और बढ़ा देता है...
प्रेमा- हहै चाचा मज़ाक कर रही थी मैं..
राजन- जनता हूँ बहुरिया, तू बहुत समझ दार है...
दोनों जोड़े एक दुसरे के बगल में हवस के खेल में लगे हुए थे जो शायद hi कहीं और खेला जा रहा होगा...
नीलेश- ahhhhhhhhhh समझ दार नहीं होती तो अभी तुझसे ऐसे गांड मरवा यही होती..
Rajan-is हिसाब से तो शशि सब्स्र ज़्यादा समझदार है...
शशि- वो तो मैं हूँ भैया... क्यों प्रेमा..
प्रेमा- सही कहा बाआ
और अपनी बात साबित करने के लिए प्रेमा ने आगे झुककर शशि के होंठों को चूम लिए जिसमे शशि ने भी पूरा साथ दिया उसके बाद न जाने दोनों औरतों में आँखों hi आँखों मेइब क्या बात हुई की दोनों hi एक दुसरे की और झुक गयी और दोनों ने hi अपनी अपनी गांड से लुंड निकल दिया और उससे पहले की दोनों मर्द कुछ समझ पते दोनों औरतों ने hi ेल दुसरे की गांड से निकले हुए लुंड को मुँह में भर लिए और चूसने लगी..

शशि ने प्रेमा की गांड से निकले राजन के लुंड को मुँह में भर लिए और प्रेमा ने शशि की गांड से निकले शशि के भैया के लुंड को..
राजन- ahhhhhhhhhh भैया ये तो जन्नत है...
नीलेश- ahhhhhhhhhh ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह ुहममम हनननननन सहीई कहा तूने...
राजन- कशह्ह्ह अह्ह्ह्हह ये सब पहली शुरू हुआआ होताआ..
नीलेश- ahhhhhhhhhh कशह्ह्ह... पर अभी जितना मिल रहा है बटोर लो...
राजन- सहीई कहा भैयाहहहह..
इसके बाद दोनों hi औरतों ने बापिस लुन्डों पर कब्ज़ा कर लिए पर जहाँ प्रेमा ने राजन के लुंड को अपनी गांड में लिए वहीं शशि इस बार अपने भैया के और मुँह करके बैठी और उनका लुंड अपनी खुजलाती हुई छूट में lia..aur उछाल उछाल कर भैया के मोठे तगड़े लुंड से अपनी छूट की खुजली को मिटने लगी...
Shashi-ahhhh भैया ओह्ह्ह्ह मज़ाआ आ रहा है...
नीलेश- ahhhhhhhhhh ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह ुहममम मेरिइइइ गुडियाःठ्हहह बहन....
नीलेश को जब भी शशि पर बहुत प्यार आता था तो वो बचपन से उसे ऐसे hi पुकारता था और अभी भी वही हो रहा था बस प्यार लुंड के रूप में बहन के अंदर जा रहा था,
शशि- अह्ह्ह्ह भैया chodoooooooooooohjhhh अपणीइइइइइइ बहन कोऊ aahhhhhhhhhh ..
राजन और प्रेमा भी दोनों भाई बहन की उत्तेजना देखकर खुद भी उत्तेजित हो रहे थे वहीं शशि और नीलेश की जबरदस्त चुदाई चल रही थी..
जहाँ माँ अपने सेज भाई के लुंड पर कूद रही थी तो वहीं बेटे के लुंड पर भी एक गदराई औरत कूद रही थी.
ममता विनीत की पूरी खातिर कर रही थी और उसकी मेहमान नवाज़ी में कोई कमी नहीं छोड़ रही थी... और खातिरदारी के लिए ममता ने विनीत के सामने अपनी रसीली छूट को परोस रखा था जिसे विनीत का लुंड काफी ज़ोरों से चख रहा था

विनीत नीचे से धक्के लगा लगाकर ममता की छूट का काफी अचे से स्वाद ले रहा था ममता भी विनीत की चुदाई की रफ़्तार और जवान लुंड पाकर बहुत खुश थी...
ऐसा नहीं था की उसे अपने पति या नीलेश के साथ मज़ा नहीं आता था बल्कि बहुत आता था पर उसे ये बदलाव ाचा लगता था, जहाँ उसके पति और नीलेश यहाँ तक की उसके भाई की चुदाई में संयम होता था वहीं जवान लड़के जैसे कर्मा अनुज और विनीत में जवानी का जोश था एक जूनून सा होता था, और ममता को दोनों hi पसंद थे..
ममता- ahhhhhhhhhh बाबूउउउ बाबूउउउ अह्हह्ह्ह्ह बढ़िया ऐसी हीईई छोड़ते राहूऊ ..
विनीत- ahhhhhhhhhh ममी तुम्हारे जैसीई मामी होतो जिंदगी भर छोड़ता रहूं..
ममता- किसने रोका है फिर अह्ह्ह्ह अह्ह्ह दिखाओ हमें कितना दम है तुम्हारे लोडे निब बाबू...
विनीत- ahhhhhhhhhh ममी देख लो डुम्मम्मम्म तो इतना haiiiiiiiiiiiiiaaahhhhhh की तुम्हारी छूट को रुला के hi छोड़ुंगाःह्ह्हह्ह अह्ह्ह्हह्हह ले salliiiiiiiiiiiiiii..
विनीत ने उत्तेजित होकर और तेज़ धक्के लगते हुए कहा जिसका असत ममता पर भी वैसा hi हुआअह्ह्ह..
ममता- आह्हः दिखायःहहह अह्ह्ह्ह भेनचोद, मदरचूऊऊडड़डडडड चुसड़द्द वैसी हीईईई जैसीईए अपणीइइइइइइ रनडीई माँ को छोड़ता haiiiiiiiiiiiiiaaahhhhhh..
विनीत ममता की बातों से और जोश में आकर छोड़ने लगा,
विनीत- साली रंडी तो तुझे बना कर छोडूंगा आज मेंनननननननन
ममता- तो छोड़ड़ड़ड़ ना मदररररछोड़ड़ड़, दिखा क्याआआआ क्या सिखायाः तेरी रनडीई मा नई...
दोनों के hi बीच काफी घमासान चुदाई चल रही थी और साथ hi एक दुसरे की बातों से भी बहुत उत्तेजित होते जा रहे थे
यहाँ जितनी तेज़ बीटा छोड़ रहा था वहीं दुसरे घर में माँ उतनी hi आलरामकता से चुद रही थी, नीलेश ने शशि को आगे अपनी और झुका रखा था और उसको कसकर पकड़ कर नीचे से ताबड़तोड़ धक्के लगाकर अपनी बहन को छोड़ रहे थे...
वहीं शशि अपने भैया के सीने में अपने सर को झुकाये सिसकियाँ लेने के अलावा कुछ नहीं कर प् रही थी..
वहीं पीछे से राजन और प्रेमा दोनों भाई बहन को देखकर अपनी चुदाई का आनंद ले रहे थे इसी बीच प्रेमा राजन के लुंड से उठ गयी तो उसकी गांड से राजन का लुंड निकल गया, प्रेमा ने पलट कर उसे मुँह में भर लिए और अपनी गांड का स्वाद उस पर चखने लगी कुछ पल चूसने के बाद प्रेमा ने राजन को इशारा किआ और राजन ने समझते हुए हामी भरी और मुस्कुराया और आगे बढ़ा, वहीं नीलेश जिसके धक्के थोड़े से धीमे हुए थे सांस भरने के लिए उसने राजन को अपनी टैंगो के बीच जगह बनाते देखा तो वो भी समझ गया...
और धीरे हो गया वहीं शशि को आस पास की कोई खबर नहीं थी वो बस अपने भाई के सीने में सर को छुपाये हुए लम्बी लम्बी सांस भर रही थी..
पर अगले hi पल उसे अपने पीछे कुछ महसूस हुआ और फिर उसकी गांड में कुछ घुसा जिसके एहसास से वो एक पल को चौंकी ज़रूर पर अब वो इन सब की इतनी अभ्यस्त हो चुकी थी, इतनी चुद चुकी थी की तुरंत संभल गयी..

वहीं राजन ने भी बिना देरी किये ालने लुंड को पूरा शशि की गांड में उतर दिया... और हलके धक्कों से उसकी गांड मरने लगे...
शशि के लिए ये सब उसके परिवार में आम हो चूका था पर मज़ा उसे हर बार पिछली बार से ज़्यादा आता था जब दो लुंड एक साथ उसके अंदर जाते थे..
वहीं इससे सबसे ज़्यादा उत्तेजित नीलेश थे जो की पहली बार अपनी बहन को किसी के साथ बाँट रहे थे वो भी अपने दोस्त के साथ नीलेश का लुंड फूलता जा रहा था,
वहीं राजन को भी वैसा hi महसूस हो रहा था...
और इसी जोश में आकर दोनों की गति बढ़ने लगी... कुछ hi देर में शशि की गांड और छूट में तूफानी धक्के पढ़ने लगे, ममता प्रेमा और पल्ली को कई बार दोनों मिलकर छोड़ चुके थे तो एक दुसरे के साथ ले बनाने में समय नहीं लगा तो दोनों मिलकर शशि को टारे दिखा रहे थे..
वहीं प्रेमा बगल में बैठी इस मज़ेदार दृश्य का आनंद उठाते हुए स्पानी छूट सहला रही थी...
उसे तीनो के हाव् भाव और गति से इतना तो अंदाज़ा हो गया था की बिना झड़े तीनो में से कोई रुकने वाला नहीं है..
राजन को अपने लुंड पर जो की शशि की गांड में था नीलेश के लुंड का एहसास हो रहा था और राजन ये सोच सोचकर उत्तेजित हो रहा था की वो अपने सबसे अचे दोस्त की बहन को उसके साथ मिलकर छोड़ रहा है...
वहीं यही ख्याल नीलेश के मन में भी था, और ये सोचकर उनका जोश दुगना होता जा रहा था, शशि को भी इस बात का एहसास था ऊपर से दो मोठे मोठे लुंड उसके छेदों में अंदर बहार हो रहे थे ..
तीनो hi ज़्यादा देर तक अपने आप को रोक नहीं पाए और कुछ hi देर में तीनो स्खलित होने लगे,
राजन ने शशि की गांड को तो नीलेश ने अपनी बहन की छूट को अपने रास से भर दिया
झड़ने के बाद पहले राजन ने पीछे से अपना लुंड निकला और शशि नीलेश के लुंड से उठी तो प्रेमा जैसे इसी के लिए तैयार बैठी थी उसने तुरंत शशि को प्रेत के बल लिटा दिया और उसकी छूट और गांड से रास चूसने लगी..
शशि एक बार फिर से सिसकियाँ लेने लगी, अपनी गांड और छूट में प्रेमा की जीभ को महसूस करके वहीं दोनों मर्द बिस्तर के सिरहाने से टिक कर बैठ गए और हांफते हुए प्रेमा और शशि को देख रहे थे..
वहीं दुसरे घर में भी चुदाई का तूफ़ान आया हुआ था, विनीत ने ममता को झुका रखा था और पीछे से दनादन धक्के लगा लगा कर ममता को अपनी चुदाई का हुनर दिखा रहा था जो उसकी मम्मी ने उसे सिखाया था,
विनीत ममता की कमर को थामे सटासट उसे छोड़ रहा था

ममता भी विनीत के लुंड का पूरा आनंद उठा रही थी और मज़े से चुद रही थी..
ममता- अह्ह्ह्ह बबबबबू और तगड़े धक्के लगाओ अह्ह्ह्ह दिखाओ अपनी मम्मी के दूध का दम..
ममता जानबूझकर ऐसी बातें करके विनीत को उत्तेजित कर रही थी जिसका नतीजा उसे उसकी छूट में मिल रहा था..
हर धक्के के साथ ममता की भरी छुछियां लहरा रही थी....
विनीत- ले सआईईई रनडीईई आह्हः आअज टेरिइइइइइइ चूऊत्त का भोसड़ा बना दूंगाःह ..
ममता- आह्हः बाबू तुम क्या तुम्हारा बाप भी आ जाये और कोशिश करले...
दोनों ऐसे मज़ाक करते हुए चुदाई का पूरा मज़ा ले रहे थे... पर ममता और विनीत दोनों hi उत्तेजना के शिखर पर थे और कभी भी झाड़ सकते थे और सबसे पहले ममता का बांध टूटा और वो विनीत के लुंड पर झाड़ गयी... ममता के झड़ने के बाद विनीत ने उसकी छूट से लुंड निकला और ममता को घुमाकर अपने सामने बिठा दिया और अपना लुंड ममता के नूह में भर दिया और उसे छोड़ने लगा ममता भी उसका साथ देने लगी
और कुछ देर बाद hi विनीत ने ममता के मुँह को अपने रास से भर दिया जिसे ममता ख़ुशी ख़ुशी जातक गयी...
इसके बाद दोनों एक दुसरे से चिपक कर आराम करने लगे...
वहीं नीलेश के यहाँ दोनों औरतों का आपसी प्रेम काफी देर तक चलता रहा, प्रेमा ने शशि की छूट की छूट और गांड को अचे से छठा उसके बाद शशि ने भी प्रेमा बहु की छूट और गांड दोनों का स्वाद अचे से चखा फिर उसकी चूचियों का और फिर दोनों औरतें काफी देर तक एक दुसरे के होंठों और जीभ को चूसती रही...
उन दोनों को देखकर hi राजन और नीलेश के लुंड दोबारा से टैंकर फुंकारने लगे,
राजन- अरे वाह मज़ा hi आ गया तुम लोगो का प्यार देख कर..
शशि- हाँ भैया दिख रहा है तुम्हारा मज़ा देखो कैसे फुंकारें मार रहा है..
शशि ने राजन के लुंड को पकड़ते हुए कहा...
प्रेमा- सही कह रही बुआ बिलकुल तन गए हैं लोडे दोनों के..
प्रेमा ने नीलेश के लुंड को अपने मुँह में भरते हुए जवाब दिया...
शशि ने भी राजन के लुंड को मुँह में भर लिए तो दोनों मर्दों के मुँह से आह्ह्ह्ह निकल गयी...
शशि और प्रेमा दोनों hi अपनर अपने गरम मुँह का कमाल दिखने लगी और कुछ देर में hi दोनों लुंड थूक से चमक रहे थे..
आगे का प्रोग्राम बना और उसी अनुसार नीलेश बिस्तर पर पीठ के बल लेट गए तो प्रेमा नीलेश के ऊपर आई और फिर उनके लुंड को अपनी गांड पर टिका कर नीचे बैठ गयी वहीं नीलेश भी नीचे से धक्के लगाकर प्रेमा की गांड का मज़ा उठाने लगे, वहीं राजन प्रेमा के बगल में आकर खड़े हो गए और अपना लुंड प्रेमा के मुँह में भर दिया जिसे प्रेमा ख़ुशी ख़ुशी चूसने लगी इसके साथ hi शशि भी दूसरी और आकर प्रेमा की एक छुच्छी को चूसने लगी

प्रेमा तो इस तिहरे हमले के आनंद से दोहरी होने लगी..
गांड में लुंड, मुँह में दूसरा लुंड और छुच्छी पर मुँह और क्या चाहिए था...
नीलेश- ahhhhhhhhhh बहुउउ टेरिइइइइइइ गंडड,
राजन- ahhhhhhhhhh भैया सिर्फ गांड hi nahiiiiiiiiiiiiiiii मुँह भी बहुत गरम ही...
शशि- पूरा बदन hi एक दम माखन है बहुरिया kaaah..uhhmmaaa
शशि ने उसकी छुच्छी को मुँह से निकलर हुए कहा..
प्रेमा बेचारी क्या बोलती मुँह में लुंड जो घुसा हुआ था वो तो बस बाकि तीनो के लिए एक स्वादिष्ट भोग की तरह थी जिसको तीनो hi अपने अपने तरीसे से चख रहे थे..
प्रेमा इसी सब के बीच सोचने लगी की कुछ दिन पहले तक कैसी थी उसकी ज़िन्दगी, रूखी, दुःख से भरी हुई, पति की नाराजगी सास के तने, कुछ भी ाचा नहीं था और सबसे ख़राब होती थी रात जब अकेले बिस्तर पर वो न जाने कितनी देर या तो तड़पती रहती थी या रोटी थी अपने पति की वजह से और आज देखो कहाँ वो एक के प्रेम के लिए तरसती थी आज तीन तीन लोग एक साथ उसके बदन से खेल रहे हैं..
तभी नीलेश ने एक ज़ोर का झटका उसकी गांड में लगाया तो जाकर उसका ध्यान बापिस आया...
वहीं राजन ने भी उसके मुँह से लुंड निकल लिए था नीलेश ने नीचे से hi उसकी दोनों टैंगो को पकड़ के फैलाया तो प्रेमा समझ गयी की आगे क्या होने वाला है, पहले भी कई बार नीलेश और राजन उसकी दोहरी चुदाई कर चुके थे और शशि की होती देख उसे ये तो अंदाज़ा हो गया था की थोड़ी hi देर में उसके अंदर भी दो लुंड होंगे और हुआ भी ऐसा hi ..
पेअर फैलते hi राजन उसकी टैंगो के बीच आ गया और फिर बिना किसी इंतज़ार के उसने अपना काम पूरा कर लिए और अगले hi पल प्रेमा जी की छूट में राजन का लुंड था और प्रेमा दो दो लुन्डों से एक साथ चुद रही थी, उसको ये भरा भरा एहसास पसंद था और दोहरे हमले से वो पागल सी हो रही थी की उसकी उत्तेजना और आनंद को बढ़ने के लिए शशि ने भी हाँथ बंटाया और उसकी छूट के डेन को सहलाने लगी .. साथ hi उसके होंठों को चूम कर उसका उत्साह बढ़ा रही थी...

प्रेमा तो जैसे उत्तेजना और मज़े से पागल हो गयी उसके मुँह से लगातार सिसकियाँ और आहें निकल रही थी..
प्रेमा- अहह आईसीईईई hiiiiiiiiii छोड़ूऊओ mujheeeeeeaaahhhhhhhhhhh
राजन चाहहहछा आईसीईईई hiiiiiiiiii और तेज़ज़्ज़ज़्ज़ज़्ज़ छोड़ूऊओ आअह्ह्ह्ह
राजन- ahhhhhhhhhh ुहम्म्म्म बहुउउउउ..
प्रेमा- मेरी गांड मारो चाचाजी अह्ह्ह्हह मारो मेरी छूट अह्ह्ह्हह ओह्ह्ह्ह मारो सालूविझ आईसीईईई हीइइइइइइइ छोडोऊ तुमसीई अपणीइइइइइइ मा भीईई छुडवाआ लूंग़ीीीु..
प्रेमा मज़े से दोहरी होती हुई ये सब बड़बड़ा रही थी... और बड़बड़ाये क्यों न इतना मज़ा जो मिल रहा था उसे..
और इसी मज़े का नतीजा ये हुआ की वो ज़्यादा देर तक टिक नहीं पाई और स्खलित हो गयी ..
और उसके स्खलन का वेग इतना तेज़ था की वो बिलकुल बेहोश सी हो गयी... नीलेश ने उसे अपने ऊपर से हटाकर बगल में लिटा दिया... जहाँ वो ज्यों की त्यों लेट गयी..
वहीं दुसरे घर में चुदाई का दूसरा दौर चल चूका था और इस समय काफी उफान पर था, ममता बिस्तर पर एक बार फिर से चौपाया बानी हुई थी और अपने बड़े बड़े चूतड़ों को हवा में उठाया हुआ था जिनके ऊपर विनीत चढ़ा हुआ था और विनीत का लुंड ममता की गांड के अंदर बहार हो रहा था...

ममता ने भी विनीत की खातिर दरी के लिए अपनी गांड की ऊंचा उठाकर उसके लिए परोस रखा था और उसके गांड का मखमली गरम स्वाद विनीत का लुंड ले रहा था..
Vineet-ahhhhhhhhhh ममी बड़ी चिकनी और मक्खन जैसी गांड है तुम्हारी...
ममता- तुम्हारा लोढ़ा भी माखन में चाकू के जैसे वार कर रहा है बाबू बहुत्तत्त गरम है...
विनीत - जब तुम्हारी भट्टी जैसी गांड में तपेगा तो गरम तो होगाआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह हीई मामी..
ममता- तो इसमेटी अपना रास भरररर के ठन्डागः कार्डो बाबूउउउउ ..
विनीत- करूंगा ममी अह्ह्ह्ह पूरी गंडड को अपनी रस से भर दूंगाःह्ह्ह्ह... ओह्ह्ह्हह्ह ममी तुम मेरे साथ मेरे गाओं चालुहह..
ममता- क्यों बाबू
विनीत - अह्ह्ह्हह पापा और ताऊजी बहुत खुश होंगे तुमसे मिलकर...
ममता- आह्हः खुश होंगे या हमें भी तुम्हारी तरह घोड़ी बनाकर ठोकते रहेंगे...
Vineet-uhhmmmaaaammmiii ठोकने में hi तो माज़ाअह है तुम चीज़ hi हो ठोकने लायक....
ममता- आएंगे हम बाबू सब आएंगे फिर मिलकर चुदाई करनाआ...
यहाँ ममी भांजे की चुदाई और आगे की योजना बन रही थी वहीं दूसरी और शशि का बुरा हाल हो रहा था
प्रेमा के झड़ने के बाद वो तो ठक्कर चूर हो गयी थी पर दोनों मर्दों के लुंड फिर भी खड़े हुए झूल रहे थे बस फिर क्या था दोनों टूट पड़े शशि पर और अभी नज़ारा बड़ा दिलचस्प था... प्रेमा जो की अब बापिस से जोश में आ चुकी थी वो राजन के लुंड को चूस चूसकर और गीला कर रही थी वहीं नीलेश पीठ के बल लेते थे और शशि उनके पैरों की और चेहरा किये अपने भैया भैया का लुंड गांड में लिए उछाल रही थी..
प्रेमा ने कुछ देर और राजन के लुंड को चूसा और फिर छोड़ दिया जिसके बाद राजन तुरंत नीलेश और शशि की टैंगो के बीच आ गया जिसका स्वागत नीलेश और शशि दोनों hi अपनी टंगे फैलाकर किया और फिर राजन ने अपने लुंड शशि जी की छूट में घुसा दिया...

शशि एक बार फिर से दो दो लुन्डों से छोड़ने का मज़ा लेने लगी..
शशि- अह्ह्ह छोड़ूऊओ भेंचोड़ड़ूऊऊ ahhhhhhhhhh अपनी बहन को एक सअअअअअतःहःहः आह्ह्ह्हह..
शशि की बातों से उत्तेजित होकर नीलेश और राजन और तूफानी धक्कों से शशि को छोड़ने लगे..
शशि तो मज़े और आनंद के सागर में गोते लगा रही थी दोनों आँखें बंद थी
बदन मज़े से अकड़ रहा था पूरे बदन में जैसे खून की जगह वासना बाह रही थी और महसूस हो रहे थे बस दो लुंड जो उसकी छूट और गांड से अंदर बहार हो रहे थे...
प्रेमा बगल में बैठी हुई इस घनघोर चुदाई का मज़ा लेते हुए अपनी छूछीयो को मसल रही थी...
कमरे में जैसे वासना का तूफ़ान सा आया हुआ था जो हर पल के साथ बढ़ता जा रहा था शशि के मुँह से सिसकियाँ और चीखें निकल रही थी वहीं नीलेध और राजन पसीने में नहाये गुर्रा रहे थे..
प्रेमा को तो दर लग रहा था की अगर ऐसी चुदाई उसकी हो तो वो तो बेहोश hi हो जाएगी..
और फिर चुदाई का तूफ़ान बिलकुल अपने शिखर पर पहुँच गया शशि का बदन पूरा अकड़ गया और वो थरथराने लगी जिससे नीलेश और राजन उसे संभल नहीं पाए और वो बगल में नीचे लेट गयी..
पर नीलेश और राजन तो जैसे अधूरे में अटक गए पर उसी वक़्त प्रेमा उनकी मदद के लिए आगे आई और दोनों के लुंड बरी बरी चूसते हुए मुठियाने लगी और फिर जल्दी hi दोनों ने hi अपना अपना रास छोड़ दिया नीलेश ने पहले प्रेमा का मुँह भरा और फिर राजन ने जिसे वो ख़ुशी ख़ुशी जातक गयी...
शशि तो आँखें मूंदे बड़ी बड़ी सांसें भर रही थी, बाकि तीनो भी बिस्तर पर गिर गए अब किसी में कुछ और करने की ताकत नहीं बची थी...
जल्दी hi तीनो नींद के आगोश में खो गए थे दूसरी और विनीत भी ममता की गांड में झड़ने के बाद उससे चिपक कर सो गया...
सरलपुर
एक आम सुबह थी और सब अपने अपने काम में लगे हुए थे, रिमझिम की सास को आज मायके जाना था उसी की तयारी चल रही थी, वहीं रमन को भी दो दिन के लिए काम के सिलसिले से बहार जाना पद रहा था जिस वजह से रिमझिम थोड़ी उदास थी पति से दूर रहने का दुःख ऊपर से दो दिन सूखा hi सोना पड़ेगा, चुदाई की ऐसी लत लगी थी की बिना छूट की खुजली मिटाये नींद hi नहीं आती थी इसी लिए रसोई में काम करते हुए थोड़ी झुंझलाई हुई थी और इस बात को रमन भी अचे से समझ रहे थे... खैर तय ये हुआ था की रमन अपनी अम्मा को बस अड्डे छोड़कर दुसरे शहर निकल जायेगा... इसी चहल पहल से घर भरा हुआ था.
इसके आगे क्या हुआ अगली अपडेट में प्लीज कमैंट्स करके ज़रूर बताएं कैसी लगी अपडेट बहुत बहुत धन्यवाद्



















