Incest Katha Chodampur Ki - Page 29 - SexBaba
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Incest Katha Chodampur Ki

इसके बाद रमन की तो हिम्मत नहीं थी की वो ख़ुशी को छुए भी वहीं रिमझिम ने भी सोचा की एक hi बार में ज़्यादा नहीं होना चाहिए जितना हुआ बहुत है. दोनों भाई बहन के लिए, हाँ पर रिमझिम ने एक बार और पति से अपनी चुदाई करवाई और फिर दोनों सो गए वहीं ख़ुशी भी आखिर थक हारकर सो गयी...

(सरलपुर अपडेट 165 बी से आगे)

अपडेट 168

(फ्रॉम राइटर)

अगली सुबह हो चुकी थी और नज़ारा कुछ इस तरह था की ख़ुशी के कमरे में ख़ुशी बिलकुल नंगी थी और अपनी प्यारी भाभी रिमझिम के चेहरे के ऊपर अपने चूतड़ों को रखकर बैठी हुई थी और नीचे से रिमझिम अपनी जीभ निकल कर अपनी ननद रानी के छूट रास को पिटे हुए चाट रही थी..

ख़ुशी- ahhhhhhhhhh चाटो भाभी यही सजा है तुम्हारी जो कुछ तुमने रात में किया उसकी इतना तदपि हूँ मैं रात भर तो अब तुम मेरी तड़प अपनी जीभ से मिटाओ अह्ह्ह

ख़ुशी रात भर तड़पने के बाद सुबह होते hi अपनी भाभी को अपने कमरे में सोते से जागकर खींच लाइ थी वही रमन गहरी नींद में सो रहा और उसकी बीवी उसकी बहन की छूट को अपनी जीभ से कुरेद कर उसे सुख दे रही थी... अभी ठीक से सुबह भी नहीं हुई थी और ये दोनों साडी दुनिया को भूल कर आपस में लगी हुई थी...

इधर सुबह होते hi घर की बड़ी बहु हमेशा की तरह सबसे पहले उठ गयी क्यूंकि घर की ज़िम्मेदारी बड़ी बहु होने के नाते उसी पर थी और वो hi पूरा घर चलती थी खैर अपने पति को बिस्तर पर सोता छोड़ चंचल उठी और नित क्रिया निपटा कर झाड़ू उठाई और हॉल में झाड़ू लगाने लगी झाड़ू लगते हुए जैसे hi वो अपनी ननद ख़ुशी के कमरे के बहार आई उसे अंदर से कुछ आवाज़ें सुनाई दी जिन्हे सुनकर उसके कान खड़े हो गए, उसको अजीब लगा की ख़ुशी के कमरे से इस वक़्त ऐसी आवाज़ें क्यों आ रही हैं उस्बे तुरंत दरवाज़े से अपना कान भिड़ा दिया आवाज़ें और तेज़ हो गयी चंचल को ख़ुशी को सिसकियाँ साफ़ सुनाई देने लगी,

सुनकर चंचल को एक अजीब सा एहसास होने लगा वो गरम होने लगी साथ hi उसके मन में अंदर देखने की लालसा होने लगी, चंचल अपनी ननद को उस स्तिथि में होने की कल्पना करने लगी, चंचल से जब नहीं रहा गया तो वो इधर उधर देखने लगी और तभी उसे दरवाज़े के ऊपर बने रोशनदान का ख्याल आया, चंचल का दिमाग चलने लगा वो तुरंत एक कुर्सी लेकर आई और उसे दरवाजे के सामने रख उस पर चढ़ गयी और चढ़ते hi उसने बिना वक़्त गंवाए सावधानी से रोशनदान के किनारे को थमते हुए अंदर झाँका तो अंदर का नज़ारा देखकर उसकी आँखें फटी की फटी रह गई क्यूंकि उसने तो सोचा था की ख़ुशी अपनर आप को खुश कर रही होगी पर यहाँ तो ख़ुशी पूरी नंगी है और एक और नंगी औरत के चेहरे पर बैठी है और चंचल ने ध्यान से देखा तो पाया की ख़ुशी अपनी छूट को दूसरी औरत के चेहरे पर घिस रही है..

ये सब देख कर तो चंचल की सांसें hi रुक गयी उसे समाज नहीं आ रहा था ये क्या हो रहा है. बेचारी चंचल गाओं की भोली भली लड़की थी उसकी तो पहली चुदाई भी उसके पति ने सुहागरात पर की थी उसने तो कभी ये सोचा भी नहीं था की दो औरतों के बीच भी ऐसा कुछ हो सकता है उसे लगता था की शारीरिक सुख तो आदमी और औरत एक दुसरे से hi भोगते हैं पर यहाँ उसकी नज़रों के सामने उसकी ननद उसे बिलकुल गलत साबित कर रही थी, हालाँकि नीचे वाली औरत का उसे चेहरा नज़र नहीं आ रहा था पर मन में चंचल को एक ख्याल ज़रूर था की घर में उसके और ख़ुशी के अलावा बस एक hi औरत थी पर वो चाहकर भी वो नाम अपने मन में नहीं लाना छह रही थी और जब तक चेहरा खुद न देखले तब तक तो बिलकुल नहीं..

वहीं जैसे उसके मन की बात ख़ुशी ने सुन ली और वो एक दबी हुई चीख के साथ थरथराते हुए औरत के चेहरे से बिस्तर पर गिर गयी और चंचल के सामने उसकी देवरानी रिमझिम का चेहरा आ गया, जिसे देखकर अंदाज़ा होते हुए भी चंचल बिलकुल हैरान रह गयी उसका दिल इतनी ज़ोर से धड़क रहा था मनो अभी सीने से निकल कर बहार आ जायेगा, रिमझिम का चेहरा ख़ुशी की छूट रास में पूरी तरह से भीगा हुआ रौशनी में चमक रहा था, अपनी देवरानी और ननद दोनों के नंगे बदन को देखकर चंचल को एक अलग एहसास होने लगा उसका हाथ खुद बा खुद साड़ी के ऊपर से उसकी छूट को सहलाने लगा जिसका उसे खुद भी अंदाज़ा नहीं था...

उसे दोनों के hi बदन देखकर एक उत्तेजना हो रही थी और न जाने क्यों एक जलन का भी एहसास हो रहा था, पर साथ hi उसकी उंगलिया साड़ी के ऊपर से hi उसकी छूट को कुरेद रही थी...

वो इन्ही सब में डूबी हुई थी की अचानक से उसे एक आवाज़ आई और वो हड़बड़ा गयी उसे अंदाज़ा हुआ की कोई दरवाज़ा खुलने वाला है इसलिए वो जल्दी से कुर्सी से उत्तरी और उतनी hi फुर्ती में उसने कुर्सी को उठाया और आंगन के कोने में लेजाकर राखी और तुरंत पलटी पर जल्दबाज़ी में उसकी साड़ी का पल्लू नीचे गिरकर कुर्सी के पाए के नीचे फंस गया वहीं उसके माननीय ससुर जी उसी वक़्त अपना दरवाज़ा खोलकर बहार निकले और जब उनकी नज़र अपनी बड़ी बहु पर पड़ी तो उनकी आँखें उसी पर जैम गयी.





बेचारी चंचल ससुर को सामने देख बिलकुल घबरा सा गयी और अपनी साड़ी ठीक करने लगी..

वहीं उसकर ससुर जी तो सब होश खोकर अपनी बड़ी बहु की जवानी देखकर मस्त हो गए बहु का सपाट गोरा पेट मखमली कमर पेट के बीच में खूबसूरत नाभि जिसे देखकर hi चरण सिंह के मुँह में पानी आ गया...

वहीं चंचल इतनी शर्मिन्दा हो गयी की उसे समझ नहीं आ रहा था की क्या करे वो बिलकुल बूत बानी एक जगह hi कड़ी थी उसे लग रहा था की उसके पेअर ज़मीन में गढ़ गए हैं...

दोनों hi एक जगह जैम से गए थे.. खैर कुछ पल बाद जब चरण को होश आया तो उन्होंने पाया की वो कैसे अपनी बहु को घूर रहे हैं चरण ने फिर थूक गटकते हुए poocha-kya हुआ बहु सब ठीक है न?

चंचल जिसे की एक बाद एक झटके मिल रहे थे उसे समझ नहीं आ रहा था की क्या करे क्या बोले उसने कुछ बोलै नहीं बस कुर्सी के पाऊँ के नीचे फंसे अपनी साड़ी के पल्लू को देखा चरण सिंह ने उसकी नज़रों का पीछा किआ और फिर खुद को और बहु को हैरान करते हुए चरण सिंह उसकी और बढ़ने लगे और चलकर उसके पास पहुँच गए चंचल बस अपने ससुर को देखे जा रही थी...

चरण सिंह उसके पास पहुंचे फिर नीचे झुककर कुर्सी क्र नीचे से बहु की साड़ी के पल्लू को निकला और हाथ उठाकर ऊपर देने को किआ पर चंचल जो की बिलकुल स्तब्ध थी उसने हाथ आगे बढाकर पकड़ा नहीं और उसी वजह से चरण सिंह का हाथ चंचल के कोमल नंगे पेट से छू गया और जिसके छूटे hi दोनों के बदन में करंट दौड़ गया और इस करंट का असर कुछ ऐसा हुआ की चंचल जो अब तक बूत बने कड़ी थी उसमे स्फूर्ति आ गयी और वो तुरंत वहां से भागी और भागते हुए अपने कमरे में घुस गयी... चरण सिंह उसे भागते हुए उसके उछालते चूतड़ों को देखते रहे और फिर जब वो कमरे में घुस गयी तो अनायास hi चरण सिंह के चेहरे पर मुस्कान आ गयी.

चोदामपुर

(अस कर्मा)

(अपडेट 167 से आगे)

हम सबने मुद कर आवाज़ की और देखा तो सब हैरान भी रह गए और खुश भी हो गए क्यूंकि दरवाज़े पर पापा के साथ मौसा जी खड़े थे जिन्हे देखकर हम सब खुश हो गए खास कर की मौसी जो अपने पति को देख फूले नहीं समां रही थी.

अंदर आते hi सबने उन्हें घेर लिया और बातों और सवालों की झड़ी लगा दी सब खुश थे फिर चाय नाश्ता दिया गया सबने ख़ुशी ख़ुशी किया,

माँ- ाचा हुआ भैया सही समय आ गए है अब दो दिन में पात पूजा भी है तो पूरा घर रहे तो और ाचा रहता है..

संतो तै- अरे हाँ हमने भी बड़ा सुना है चोदामपुर की पात पूजा के बारे में इस बार देख भी लेंगे.

ममता चची-- अरे जीजी बड़ा मज़ा आता है ाचा है तुम रहोगे इस बार.

पापा - चलो बच्चो अब मौसा जी थक कर आये होंगे उन्हें आराम करने दो हम लोग चलते हैं खेत पर और काम निपटा लेते हैं.

संतो Tai-chalo हम भी चलते हैं थोड़ा घूम आएंगे.

Anuj-are तै तुम कहाँ जाओगी थक जाओगी बक्सर में.

संतो तै- अरे बचुआ तेरी तै अभी इतनी बुद्धि नहीं हुई है.

इसपर सब हंसने लगा और फिर हम लोग खेत पर निकल गए ममता चची और परिवार भी निकलने को हुआ तो माँ बोली- चल ममता हम भी तेरे साथ चलते हैं बालों में खुजली सी हो रही है ज़रा देख दियो...

ममता- हाँ जीजी चलो न...

इसके बाद माँ और ममता चची का परिवार निकल गया राजन चाचा खेत की और निकल गए

पल्ली माँ और ममता चची उनके घर चले गए..

घर पर सिर्फ पति पत्नी यानि मौसा मौसी hi बचे थे, सबके जाते hi मौसी ने ख़ुशी से दरवाज़ा बंद किया और फिर शरमाते हुए पति की और देखा और फिर दौड़कर उनके सीने से लग गयी

मौसा- अरे इतनी तड़प...

अपनी पत्नी को गले लगा कर बोले.

मौसी- इतने दिनों के लिए अकेला छोड़ोगे तो तड़प तो रहेगी hi न..

मौसा- तड़प तुम रही हो तो प्यासा मैं भी हूँ जान पहले थोड़ी प्यास तो बुझाने दो

ये कहकर मौसा ने अपने होंठों को मौसी के होंठों पर रख दिए और दोनों प्रेमी एक गहरे चुम्बन में खो गए...

( अस 3रद पर्सन )

वहीं ममता के यहाँ आँगन में बैठ कर ममता सभ्य के साथ छेड़खानी करते हुए उसके बाल देख रही थी.. पल्ली अपने कमरे में पढाई कर रही थी..

ममता- कुछ भी कहो जीजी तुम्हारा बदन ऐसा है की बस देखते hi रहा नहीं जाता

ये कहकर ममता ने सभ्य के बालों को एक तरफ किआ और उसकी गर्दन को चूमने लगी.

सभ्य - आइए का कर रही है गुदगुदी हो रही है मुझे..

ममता- कुछ नहीं जीजी बस तुम्हारे सुन्दर बदन के मज़े ले रही हूँ.

सभ्य- क्यों रात में भैया ने सही से बही दिए मज़े..

सभ्य की बात सुनकर ममता को रात के दृश्य याद आ गए और मन hi मन बोली- अब तुम्हे क्या बताऊँ जीजी रात भर तुम्हारे पति और बेटे ने मिलकर कितना छोड़ा है.

ममता- अरे उनकी बात अलग है तुम्हारी अलग.. सच्ची जीजी अगर मैं मर्द होती तो तुम्हे खा जाती...

ये कहकर ममता ने हलके से सभ्य के गले पर काट लिया तो सभ्य उछलकर हँसते हुए कड़ी हो गयी..

सभ्य- हट कमीनी काट लिए मुझे तुझे ज़्यादा hi गर्मी चढ़ रही है तो चल तेरे भाई साब के पास शांत करवा देती हूँ.

ममता- मैंने कब मन किआ है तुम hi मेरी बात नहीं मान रही हो

ये कहते हुए ममता ने सभ्य को पीछे से बाहों में जकड लिए..

ममता की बात से सभ्य थोड़ा सोच में पढ़ गयी और इसी का फायदा उठाते हुए ममता ने सभ्य का पल्लू नीचे गिरा दिया और उसके नंगे मांसल पेट को हाथों से मसलने लगी...

सभ्य पर भी ममता की हरकतों का असर होने लगा था वैसर भी एक दो दिन से उसकी चुदाई नहीं हुई थी तो वैसे भी वो थोड़ा उत्तेजित थी..

सभ्य - आह्हः ममता छोड़ न क्या क्र रहे है

ममता - ऐसे कैसे छोड़ दूँ जीजी मौका मिला है तुम्हे अकेले घेरने का..

ममता लगातार सभ्य के बदन को मसलते हुए उसके गले और कन्धों को चूम रही थी...

धीरे धीरे ममता के हाथ ऊपर होकर सभ्य के ब्लाउज में क़ैद छूछीयो पर आ गए थे...

सभ्य- कितनी चुड़क्कड़ होती जा रही है तू मर्द तो दूर औरत को भी नहीं छोड़ती.

ममता- जब औरत तुम्हारे जैसी हो जीजी तो कौन छोड़ सकता है

ममता ने ब्लाउज के ऊपर से hi सभ्य की छूछीयो को मसलते हुए कहा

सभ्य को भी इस छेड़खानी में मज़ा आ रहा था

सभ्य - आह्ह्ह्ह ममता आराम से...

ममता- हाय जीजी तुम्हारे ये खरबूजे मन करता है खा जॉन इन्हे.

सभ्य- ाचा खरबूजे तो तेरे पास भी हैं और हमसे अचे..

ममता- नहीं जीजी तुम्हारे से अचे कहाँ हो सकते हैं ये तो बिलकुल मज़ेदार हैं..

ममता पूरे जोश में आकर सभ्य की छूछीयो को मसल रही थी..

तभी अचानक से सभ्य की नज़र सामने पड़ी तो वो चौंक गयी क्यूंकि सामने पल्ली कड़ी थी ..

सभ्य - यह पल्ली ममता पल्ली..

सभ्य ने घबराते हुए कहा पर ममता पर जैसे कोई असर hi नहीं हुआ उसने अपना काम जारी रखा..

पल्ली- अरे मम्मी तै क्या कर रहे हो..

सभ्य - अरे हम का कर रहे हैं तेरी मम्मी लछपं कर रही है हमारे साथ...

पल्ली- क्या लछपं क्या होता है तै.

सभ्य- अरे वही औरत औरत वाला..

पल्ली- हेहेहे तै वो लछपं नहीं लेस्बियन होता है..

सभ्य- अरे वही वही अब तू समझा इसे और हमें छुड़ा.

पल्ली- क्यों परेशां कर रही हो मम्मी तै को.

Mamta-are परेशां नहीं कर रही बिटिया मैं तो बस देख रही हूँ की तेरी तै के दूध अचे हैं या मेरे..

पल्ली- अरे वाह फिर किसके अचे हैं.

ममता- अभी तो पता hi नहीं चला तू hi बता.

Sabhya-tum दोनों माँ बेटी पगला गयी हो लगता है ये भी कोई देखने की चीज़ है.

पल्ली- अरे तै देखने दो न मज़ा आएगा.

सभ्य- है ढैय्या जैसी माँ वैसी बेटी.

ममता- चल पल्ली तू hi फैसला कर..

पल्ली- अरे ऐसे कैसे बता दूँ सिर्फ देखकर कई साडी चीज़ें करनी पड़ेगी तब पता चलेगा.

सभ्य - जैसे की?

पल्ली- जैसे की पहले नापना पड़ेगा .

ये कहकर वो आगे आई और अपने हाथों से सभ्य की छूछीयो को पकड़ कर उठा उठा कर देखने लगी मसलने लगी..

सभ्य- ahhhhhhhhhh पल्ली

सभ्य इन सब से उत्तेजित होती जा रही थी अभी तक माँ जिन छूछीयो को मसल रही थी अब बेटी मसल रही है... वहीं वो माँ बेटी के बीच में फांसी हुई उन दोनों को अपने बदन से खेलने दे रही है.

पल्ली चूचियों के साथ खेल रही थी तो ममता सभ्य के मांसल पेट और कमर के साथ...

Sabhya-ahhhhhhhhhh तुम दोनों बिलकुल पागल हो गई हो...

पल्ली- अरे मम्मी तुम पीछे से हटो तै के ऐसे मैं सही से समझ नहीं प् रही मुझे पीछे आर दो..

ये कहकर पल्ली सभ्य के पीछे आ गयी और पीछे हाथ आगे निकल कर बिलकुल अपनी मम्मी की तरह. सभ्य की छूछीयो को मसलने लगी...

सभ्य- पल्ली तू भी बिगड़ती जा रही है आह्ह्ह्ह बिलकुल अपनी माँ की तरह..

पल्ली - अरे तै बस थोड़ा सा टेस्ट hi तो हो रहा है.. चलो अब मम्मी तुम्हारी बरी इसके बाद पल्ली अपनी मम्मी के पीछे जाकर उनकी चूचियों को मसलने लगी .

सभ्य जो पहले hi उत्तेजित थी बेटी को माँ की छूछीयो को मसलते देख और होने लगी सभ्य को अपनी छूट गीली महसूस हो रही थी... साथ hi उसे अब इस खेल में मज़ा आ रहा था, सभ्य को न जाने क्यों मन हुआ और वो आगे होकर ममता के गोर पेट को मसलने लगी...

ममता- अह्ह्ह जीजी पल्ली मज़ा आ रहा है...

थोड़ी देर यही सिलसिला चला फिर पल्ली बोली- अब छू कर तो देख लिए पर अब बिना सामने से देखे कैसे बता सकती हूँ..

सभ्य- क्या मतलब.

ममता- अरे मतलब ये जीजी.

ये कहकर ममता ने एक बार फिर से सभ्य को पीछे से पकड़ लिए और हाथ लेजाकर उसके ब्लाउज के हुक खोलने लगी..

सभ्य- है ढैय्या ममता ये क्या कर रही है तू

पर बोलते हुए भी सभ्य ने ममता को रोकने कोई कोशिश नहीं की...

पल्ली- ओफ्फो तै ऐसे शर्मा रही हो तुम भी बस हम लोग hi तो हैं यहाँ...

इधर ममता ने इतनी देर में सरे हुक खोल दिए थे और अगले hi पल सभ्य का ब्लाउज उसके बदन से अलग हो चूका था.

ममता- हाय ढैय्या जीजी काली ब्रा में तो क़यामत ध रही हो.

पल्ली- सच में मम्मी कितनी मस्त लग रही हैं तै.

सभ्य- तुम दोनों बेशरम हो गयी हो बहुत देखो मुझे नंगा कर दिया.

ममता- अभी कहाँ जीजी नंगी हुई हो..

ये कहकर ममता ने सभ्य की ब्रा को पीछे से खोल दिया और तुरंत अगर से ब्रा पकड़ कर खींच दी और सभ्य दोनों माँ बेटी के सामने ऊपर से नंगी कड़ी थी और दोनों की नज़र सभ्य की सूंदर और बड़ी चूचियों पर थी..

पल्ली- सच में तै तुम्हारे दुद्दू बड़े अचे हैं मेरे भी ऐसे हो जाएं तो मज़ा आ जाये...

ममता- मैंने कहा था न जीजी तुम्हारे hi मस्त हैं.

सभ्य- ाचा कमीनी मुझे नंगा कर दिया और खुद ब्लाउज में कड़ी है पूरे कपडे पहन कर

पल्ली- इसमें क्या है तै अभी लो..

और पल्ली ने अपनी मम्मी की भी ब्लाउज और ब्रा निकल दी और अब दोनों बलखाती औरतें ऊपर से नंगी कड़ी थी अगर ऐसे कोई मर्द उन्हें देखले तो बिना लुंड का पानी गिराए न रुके...

पल्ली ने दोनों को अगल बगल खड़ा किया और फिर दोनों को ध्यान से देखने लगी .

सभ्य- तुम दोनों माँ बेटी भी न क्या क्या करम करवा रहे हो हमसे.

पल्ली- अरे तक रुको न मज़ा आ रहा है..

ममता- हाँ जीजी तुम भी थोड़ा मज़ा लो..

पल्ली- देखने में तो दोनों के hi बड़े बड़े और सुन्दर हैं समझ नहीं आ रहा की कौनसे अचे हैं..

सभ्य- तेरी माँ के अचे हैं हम कह तो रहे हैं.

पल्ली- एक और तरीका है पता लगाने का.

सभ्य- अरे अब भी कछु रह गया का?

ममता- क्या तरीका है बिटिया..

पल्ली- अभी पता चल जायेगा .

ये कहकर पल्ली सभ्य के करीब आई और फिर उसकी चुकी को देखते हुए झुकी और झुककर अचानक से सभ्य की एक चुकी को मुँह में भर लिए...

सभ्य- आह्ह्ह्हह बाछीइ का कर रही है तू..

पर सभ्य मन hi मन तड़प रही थी अपने बदन से खेले जाने को वो पल्ली के द्वारा उसकी छुच्छी मुँह में लेते hi तड़प उठी..

ममता भी ये नज़ारा देखकर गरम होने लगी... पल्ली तो जैसे सब भूलकर सभ्य की छुच्छी को चूसने ने लग गयी जिससे सभ्य तड़पने लगी...

सभ्य- अह्ह्ह्ह बाछीइ अह्ह्ह्ह आराम से ओह्ह्ह्ह.

सभ्य का हाथ अनायास hi पल्ली के सर के पीछे पहुंच गया, वही ममता कब तक बस यूँ hi कड़ी रहती उसने कुछ ऐसा किया की सभ्य के मुँह से एक सिसकी और निकल गयी.. ममता ने अपनी बेटी की तरह hi सभ्य की दूसरी छुच्छी को मुँह में भर लिया और चूसने लगी दोनों माँ बेटी एक साथ सभ्य की दोनों बड़ी बड़ी छुछियां चूस रही थी..

सभ्य भी दोनों माँ बेटी से एक साथ अपनी छुछियां चुसवा कर बेहद उत्तेजित हो गयी थी, और उसका विरोध बिलकुल ख़त्म हो चूका था..

सभ्य- ओह्ह्ह्ह हाँ चूसो दोनों ऐसे hi दोनों माँ बेटी चूसो.

दोनों माँ बेटी को कोई ऐतराज़ भी नहीं था तो पूरे जोश में चूसने लगी.. कुछ देर तक छूछीयो को चूसने के बाद पल्ली ने छुच्छी को छोड़ा और नीचे सभ्य के पेट को चूमते हुए नीचे जाने लगी और कुछ hi देर में उसकी जीभ उसकी तै की जीभ में थी सभ्य तो जैसे उसके इस हमले से थरथरा उठी... वहीं बेटी ने नीचे का सफर शुरू किआ तो माँ ने ऊपर का ममता चची ने चुकी को छोड़ा और ऊपर होते हुए सभ्य के गले और सीने को चूमने लगी..

सभ्य दोहरे हमले से एक अलग hi दुनिया में थी...

कुछ पल बाद ममता ने गले का सफर पूरा करते हुए सभ्य के होंठों तक पहुँच गए और कुछ पल बाद hi दोनों औरतों के होंठ आपस में मिल गए और पूरे जोश के साथ एक दुसरे के होंठों को चूसने लगी





दोनों कामुक औरतें एक दुसरे के होंठों को ऐसे चूस रही थी जैसे न जाने कब से प्यासी हैं... ऊपर जहाँ दोनों होंठों को चूसने में व्यस्त थी उसी का फायदा उठाते हुए पल्ली ने सभ्य की नाभि चूसते हुए धीरे धीरे उनकी साड़ी खोल दी और साड़ी एक तरफ ज़मीन पर फ़ेंक दी पर सभ्य को इसकी खबर hi कहाँ थी, वो तो ममता की जीभ को अपने मुँह में भर कर चूस रही थी...

पल्ली ने अगला डाव खेलते हुए सभ्य के पेटीकोट के नारे की गांठ को भी खोल दिया और सभ्य का पेटीकोट धीरे से सरकता हुआ नीचे उनके पैरों में गिर गया पल्ली के सामने सभ्य की रसीली गीली छूट थी, उसे छूट की नमी साफ़ दिख रही थी बस फिर क्या था पल्ली से रहा नहीं गया और उसने अपने होंठ सभ्य की छूट के होंठों पर बिधा दिया,

जिसके रखते hi सभ्य चौंक गयी और उनके होंठ ममता के होंठों से हैट गए सभ्य ने नीचे देखा तो हैरान रह गयी क्यूंकि वो पूरी नंगी थी और नीचे पल्ली उसकी छूट चाट रही थी.. पर अब सभ्य इतनी अगर आ चुकी थी की विरोध तो बिलकुल नहीं कर सकती थी..

बस फिर क्या था सभ्य का चेहरा मज़े में ऊपर उठ गया और वो अपनी छूट चटवाने का आनंद लेने लगी और पल्ली अपना सारा अनुभव दिखते हुए सभ्य को जन्नत दिखा रही थी.. ममता ने पीछे होकर अपने सरे कपडे उतरे और वो भी सभ्य की तरह बिलकुल नंगी हो गयी और उसने सभ्य और पल्ली को पकड़ कर अलग किआ तो दोनों की hi हालत ऐसे हो गयी जैसे उनसे न जाने क्या छीन लिए हो..

ममता- कमरे में चलो जीजी..

सभ्य- हम्म्म

तीनो कमरे में आये तो आते आते पल्ली भी बिलकुल नंगी हो गयी.. पर जब तक पल्ली कपडे उतर रही थी तब तक तो दोनों प्यासी औरतें शुरू हो चुकी थी ममता नीचे लेती और सभ्य को अपने चेहरे पर बैठने का निमंत्रण दिया जिसे सभ्य ने ख़ुशी से स्वीकार किया और ममता के चेहरे पर चूतड़ रख दिए जिसके रखते hi ममता ने सभ्य की छूट में अपनी जीभ घुसा दी और सभ्य को अपनी जीभ पर बिठाकर जन्नत की सैर करने लगी सभ्य ने भी आगे झुककर ममता को वही आनंद देनी की कोशिश की और ममता की रसीली छूट को चाटने लगी..

पल्ली ने नंगी होकर बिस्तर पर जब स्थिति को देखा और सभ्य तै के उठे हुए चूतड़ देखे तो तुरंत उनके बीच में अपना चेहरा घुसा दिया और अपनी जीभ निकल कर सभ्य की गांड चाटने लगी... सभ्य की एक घुटी हुई सिसकी ममता की छूट में निकली...





दोनों माँ बेटी सभ्य की छूट और गांड को चाटने में लगे हुए थे सभ्य के लिए भी ये पहला मौका था जब वो किसी माँ बेटी से एक साथ शारीरिक सुख भोग रही थी और वो भी ममता और पल्ली तो इससे से hi सभ्य की उत्तेजना उसके चरम पर थी, और उसी उत्तेजना के कारन हुआ ये की सभ्य की छूट ने अपना पानी ममता के मुँह में छोड़ दिया जिसे ममता जातक गयी..

सभ्य झड़ने के बाद थोड़ी ढीली पद गयी पर दोनों माँ बेटी का जोश अब भी बरक़रार था और उसी को देखते हुए सभ्य को पलटा और पल्ली जल्दी से चढ़कर सभ्य के मुँह पर अपनी छूट टीकाकार बैठ गयी, सभ्य जो बेचारी थोड़ा ढीली पड़ी हुई थी उसने सामने पल्ली की जवान छूट को देखा तो उसकी जीभ खुद बा खुद उसे चाटने के लिए बहार निकल गयी वहीं ममता ने एक बार फिर से सभ्य के पैरों के बीच चेहरा लगा दिया और छूट चाटने में व्यस्त हो गई..





एक बार फिर से छूट चूसै का सिलसिला चलने लगा.... और फिर पूरी दोपहर तक ये सिलसिला चला और तब तक नहीं थमा जब तक सभ्य ममता और पल्ली तीनो ने एक दुसरे के बदन के एक एक हिस्से को न चाट लिए हो..

वहीं घर पर शालू अपने घुटनो पर थी और उसके सामने उसके पति थे और शालू पति के लुंड को पूरे जोश में चूस रही थी जिसका असर शैलेश के चेहरे पर देखने को मिल रहा था.. और शालू के मुँह का जादू थोड़ा सा और चला तो शैलेश की उत्तेजना पिघल कर शालू के मुँह में बाह गयी... शालू बेचारी की छूट अब प्यासी होकर तड़प रही थी और अब पति के होने पर वो जल्द से जल्द उसकी खुजली मिटाना चाहती थी, पति के झड़ने के बाद भी शालू उनके लुंड को चूसती रही और फिर से तैयार कर दिया और फिर टंगे फैलाकर लेट हाई शैलेश भी जो न जाने कब से छूट के लिए तरस रहे थे उन्होंने अपनी जगह बनाई और लुंड को बीवी की छूट पर टिकाया hi था की दरवाज़े पर खटखटने की आवाज़ आई जिसे सुनकर दोनों का hi मूड ख़राब हो गया मन hi मन गली देते हुए शालू ने साड़ी ठीक की और दरवाजा खोला तो सामने संतो देवी थी

जिन्हे शालू ने मन भर के गलियां दी मन में खैर बेचारों का प्रोग्राम अभी के लिए कैंसिल हो गया था...

इसके आगे क्या हुआ अगली अपडेट में प्लीज कमैंट्स करके ज़रूर बताएं कैसी लगी अपडेट बहुत बहुत धन्यवाद्.
 
अपडेट 169
सरलपुर

दोनों ननद भाभी एक दुसरे के बगल में नंगी पड़ी हुई हांफ रही थी...

रिम- लगता है ज़्यादा hi तड़प रही थी मेरी ननद रानी.

ख़ुशी- अरे क्या बताऊँ भाभी पूछो hi मत..

रिम- वैसे ये प्यास अब ऐसे बुझने वाली नहीं है...

रिमझिम ने ख़ुशी की और करवट लेते हुए कहा...

ख़ुशी- तो फिर कैसे बुझेगी भाभी ख़ुशी ने रिमझिम की छुच्छी को मसलते हुए कहा...

रिम- अब ये तो तब hi बुझेगी जब तुम्हारी इस छोटी सी मुनिया में एक कड़क लुंड घुसकर इसे फैलाएगा तब hi.

रिमझिम ने खुदही की छूट को सहलाते हुए कहा...

ख़ुशी- धत्त भाभी कैसी बात करती हो..

रिम- ओह्हो नखरे तो देखो अभी भी नंगी लेती हो मुझसे छूट चटवा कर और अब संस्कारी बन रही हो.

ख़ुशी- अरे संस्कारी नहीं भाभी अब इसको तुमसर hi काम चलना पड़ेगा इसके लिए लुंड कहाँ से लाऊंगी..

रिम- रात दिखाया था न तुम्हारे भाई का डलवा लो.

ख़ुशी- हव्व भाभी क्या बोल रही हो भाई है वो मेरे रात को hi काम हुआ था क्या न बाबा न..

रिम- अरे मेरी रानी लुंड और छूट रिश्ते नहीं देखते बस प्यास देखते हैं.

रिमझिम ने ख़ुशी की एक चुकी को चूसकर कहा

Khushi-uhmmmm नहीं भाभी..

रिम- अपने भाई का लुंड नहीं लेना तो मैं अपने भाई को बुला लूँ? उसके लुंड से फड़वा लेना अपनी कुवारी छूट.

ख़ुशी- अरे बड़ी चालू हो, अपने भाई को मेरी कुंवारी छूट दिलवाना चाहती हो,

रिम- मैं तो तुम्हारे भले के लिए hi कह रही हूँ नहीं तो पहले तो तुम्हारे भाई का hi नाम बोलै था मैंने.

पर इससे पहले ख़ुशी कुछ बोलती बहार से आवाज़ आई..

रिम- अरे लगता है सब उठ गए पर तुमने मरवा दिया मेरे कपडे तो वहीं हैं..

ख़ुशी- अरे ब्रा पंतय तो यही हैं.

रिम- ाचा मैं यहाँ से ब्रा पंतय में जॉन अपनर कमरे में

Khushi-are भाभी तुम ब्रा पंतय पहनो मैं अभी लेकर आती हूँ.

दोनों बीएड से खड़े हुए ख़ुशी ने जल्दी से लोअर टीशर्ट पहना, और रिमझिम ब्रा पंतय पहनने लगी...

और फिर पहनने के बाद ड्रेसिंग टेबल के पास कड़ी होकर अपने बाल बनाने लगी...

तभी कुछ देर बाद दरवाज़ा खुला तो बालों को कंघे से बनाते हुए उसने मुद कर देखा तो उसके हाथ से एक पल को कंघा छूट गया क्यूंकि उसने सोचा था की ख़ुशी आई होगी पर सामने उसके जेठ जी चेतन थे, जो हाथ में फ़ोन लिए अपने भाई की पत्नी को देखते हुए बिलकुल जैम से गए थे..

खैर अपनी रिमझिम तो खेली खाई थी पर शर्माने का नाटक भी तो करना था तो तुरंत बिस्तर पर पड़ी चद्दर से खुद को धक् लिया तो जाकर चेतन को होश आया और वो बिना कुछ बोले पलट कर चला गया...

अपने कमरे में आकर चेतन उसी सब के बारे में सोच रहा था रिमझिम का गोरा बदन उसकी आँखों के सामने से हैट hi नाहक रहा था.. चेतन को एहसास हुआ की उसका लुंड बिलकुल कड़क हो चूका है इस पर उसे थोड़ी ग्लानि भी हुई की अपने छोटे भाई की पत्नी को लेकर वो क्या गलत शाळात सोच रहा है, पैट उसके दिमाग से रिमझिम का ब्रा पंतय में क़ैद बदन नहीं निकल रहा था.. उसने फिर भी किसी तरह खुद को आगे के काम में लगाया... इसी तरह बाकि लोगो ने भी..

वहीं उनसे काफी दूर एक गाओं के एक घर में एक अधेड़ उम्र का आदमी एक अधेड़ उम्र की औरत पर चढ़ा हुआ tha..aur धीरे धीरे धक्के लगते हुए उसे छोड़ रहा था हर धक्के के साथ औरत की पापीती की अकार की चूचियां आगे पीछे हो रही थी...





औरत- अह्ह्ह्ह ुह्ह्हह्ह अह्ह्ह भूरे ऐसे hi करते रहो..

भूरे- हाँ जीजिआहह लो आह्हः क्या गजब की बुर पाई है तुमने पूरा लौड़ा निचोड़े ले रही है..

औरत- अह्ह्ह्ह तुम्हारा लौड़ा निचोड़ने hi तो आती हूँ यहाँ..

भूरे- अरे जीजी बस तुम्हारा और तुम्हारी बुर का hi तो सहारा है हमें और हमारे लौड़े को..

सस्पेंस ख़तम करते हुए देखते हैं की ये दोनों हैं कौन.. अरे ये क्या ये तो हमारी रिमझिम की सास यानि माधुरी जी हैं जो गाओं अपने भाई से मिलने आई थी तो इसीलिए ये आती हैं भाई से मिलने..

चलिए आगे देखते हैं..

माधुरी - ऐसे क्यों बोलते हो हम बहन हैं तुम्हारी हम नहीं करेंगे तो कौन करेगा.

भूरे- और हम भेनचोद हैं जीजी,

भूरे ने अपनी सगी बहन की छूट में धक्के लगते हुए कहा.

माधुरी - बचपना नहीं गया अब्जी तुम्हारा.

भूरे- सही बताएं जीजी लज्जो के जाने के बाद अगर तुम हमें न संभालती तो न जाने हम क्या करते..

माधुरी- अब वो सब याद करना छोडो और हमारी छूट पर ध्यान दो, बड़ी खुजा रही है.

भूरे- अभी मिटते हैं इसकी खुजली..

ये कहकर भूरे ने ताबड़तोड़ धक्के लगाने शुरू कर दिए...

चोदामपुर

शाम होते होते खेत की कटाई पूरी हो चुकी थी, साथ hi मशीन से अनाज भी साफ़ होने लगा था बाप और दोनों बेटे म्हणत में लगे हुए थे साथ hi राजन भी उनका साथ दे रहे थे.. शैलेश भी थोड़ा बहुत सोने के बाद खेत पर hi चले गए थे..

वहीं सबके साथ काम बांटने की कोशिश की तो नीलेश और बाकि सब ने साफ़ मन कर दिया... खैर अँधेरा होते होते अनाज भी निकल गया था कर्मा और अनुज उसे बोरियों में भरवाकर मज़दूरों से उठवा रहे थे,

वहीं तीनो बड़े मतलब हमारे कर्मा के राजन चाचा, पापा और मौसा जी काम देखते हुए आपस में बातें कर रहे थे.

राजन- और कहो शैलेश बाबू खली हाथ आये हो या कुछ लाये भी हो...

नीलेश- क्या लाना था?

शैलेश- हाँ भैया क्या मंगाए थे?

राजन- अरे दोनों hi बिलकुल भोले हो, अरे हम कह रहे थे की दिनभर काम किआ है तो थोड़ी थकावट उतरने की दवाई का जुगाड़ है का?

शैलेश उनकी बात सुन हंस पड़े.

Nilesh-are तुझे पीने के अलावा कुछ सूझता नहीं का,

राजन- सूझता है न

शैलेश- का?

राजन- चुदाई...

इस बात पर तीनो को तेज़ हंसी निकल गयी...

शैलेश- दवाई का तो जुगाड़ हो भी जाये पर दोनों भाभी और शालू को पता लगी न सब के लग जायेंगे... और हम आने वाले दिन hi झेलना नहीं चाहते शालू का गुस्सा.

राजन- अरे कुछ नहीं होगा हमारे यहाँ पी लेना और ममता को हमने बोतल में उतरा हुआ है वो कुछ नहीं कहती

शैलेश- ाचा और भाभी और शालू?

राजन- उन्हें पता hi नहीं चलेगा कौनसा बिलकुल भांड होक जाओगे घर, अरे हम और भैया कई बार लगा लेते हैं किसी को पता नहीं चलता पूछ लो भैया से.

शैलेश ने सवालिया नज़रों से नीलेश को देखा..

जिसके जवाब में नीलेश ने हाँ कर के स्वीकृति दी..

राजन- तो फिर क्या करें ले आते हैं फिर हम जाकर.

शैलेश- अरे लेन की ज़रुरत नहीं है हमारे बैग में है कपड़ो के बीच छुपकर रखा हुआ है.

Rajan-are वाह मतलब मन तुम्हारा भी था पर बोल नहीं रहे थे.

नीलेश- मन तो था पर बीवी का दर भी था.

राजन- अरे शैलेश बाबू दो पैक लेकर जाओगे तो बीवी को खुश कर डोज हम भी यही करते हैं..

सब हंस पड़े खैर इनका प्रोग्राम तो सेट हो चूका था, वहीं बेचारी शालू की तड़प और बढ़ गयी थी जबसे पति आये थे, सोच रही थी जल्दी रात हो और अपनी छूट की गर्मी को जल्दी से शांत करवाए...

खैर खेत का काम ख़त्म हुआ सब घर आ गए, आज भी ज़िद्द करके सारा खाना संतो देवी ने बनाया और सबने खाया सब खुश थे अनाज घर में आया था साथ hi शैलेश के बापिस आने से ख़ुशी और बढ़ गयी थी..

खाना खाने के बाद राजन शैलेश नीलेश अपने प्रोग्राम के अनुसार घर पर ये बोलकर की मज़दूरों का और मशीन वाले का हिसाब करना है थोड़ी बहुत देर में आ जायेंगे पर ये सुनकर जब कर्मा का माथा ठनका तो उसके पापा ने उसे बुलाया और समझने लगे...

तो कर्मा ने विरोध किआ की न पिएं क्या फायदा है बेकार में गलत चीज़ है ये.

नीलेश- अरे बीटा अब तेरे मौसा आज आये हैं और उनका भी मन है और थोड़ा थक भी गए हैं थोड़ा थोड़ा पी लेंगे.

कर्मा- माँ और मौसी को पता लगा तो?

नीलेश- तुझे बस ये hi ध्यान रखना है की अपनी माँ और मौसी को राजन के यहाँ मत आने देना..

कर्मा- मुझे और फंसा रहे हो बीच में.

नीलेश- अरे अब तू बीटा काम दोस्त ज़्यादा है समझ जा अपने पापा की परेशानी.

कर्मा- ठीक है जाओ जल्दी आ जाना नहीं तो सब पूछने लगेंगे.

ममता और पल्ली खाना खा कर पहले hi घर पहुँच चुके थे. इन तीनो की मंडली भी उनके पीछे पीछे पहुँच गयी और आंगन में अपने आसान जमा लिए, ममता पल्ली को प्रोग्राम की पहले hi जानकारी थी तो ममता उनके लिए प्याज़ वगेरा डालकर चने वगेरा बनाने लगी.. और चखने का जुगाड़ करने लगी...

पल्ली अपने कमरे में जाकर पढाई करने लगी.

शैलेश- भाई मान गए राजन भैया तुमने तो भाभी को ऐसा पटाया है की वो चखना तक बना रही हैं हमारे लिए...

राजन- अरे हम पहले hi तो बोले थे.

शैलेश- हमें भी बता दो इसका राज.

राजन- अरे बाबू तुम अभी तो बैठे हो बोतल खुलने दो राज भी खुल जायेंगे .

एक बार फिर आँगन में हंसी गूँज उठी...

राजन- अरे सुनती हो, ज़रा गिलास वगेरा तो ला दो और एक जग पानी...

राजन ने ममता को पुकारते हुए कहा.

ममता थोड़ी hi देर में गिलास वगेरा दे गयी और इन लोगो का प्रोग्राम शुरू हो गया.. पहला पेग गटकने के बाद राजन बोले- आह्हः महँगी वाली पीने का मज़ा hi अलग है..

शैलेश- और क्या भैया हमारा यही मन्ना है पियो तो महंगी नहीं तो नहीं पियो.

नीलेश- अरे बिलकुल रोज़ रोज़ पीने से ाचा है एक बार पियो अछि वाली...

इनकी बातें चल hi रही थी की ममता पकोड़ों से भरी प्लेट लेकर आई और बीच में रखदिया पर रखते हुए झुकने की वजह से उसका पल्लू कंधे से सरक गया और तीनो मर्दों के सामने उसका गोरा मांसल पेट गहरी नाभि और ब्लाउज से बहार झांकती छुछियां आ गयी...





जिन पर कुछ देर के लिए तीनो की hi नज़र पद गयी हालाँकि नीलेश और राजन जो लगभग रोज hi ममता के मांसल बदन को रगड़ते थे उन्हें ज़्यादा फ़र्क़ नहीं पड़ा पर हाँ लुंड उनका भी उठने लगा पर शैलेश का हाल ज़्यादा ख़राब हो गया क्यूंकि ये नज़ारा देखते hi उनका लुंड तुरंत पूरी तरह तन गया उन्हें समझ नहीं आ रहा था क्यों ऐसा हुआ क्यूंकि ममता को वक पहली बार नहीं देख रहे थे और शायद पहले भी कई बार पल्लू गिरा हुआ देखा होगा पर आज न जाने क्यों तुरंत उनका लुंड तन गया, सोचा ये सब दारू का असर है.

खैर ममता ने पल्लू उठाया और बापिस रसोई में चली गयी और बहार तीनो की बकैती जारी रही, पर शैलेश का ध्यान अब भी ममता के नज़ारे पर hi था और उसका लुंड बैठने का नाम नहीं ले रहा था ऊपर से एक एक पेग और जातक चुके थे तो अब तो खुद से काबू काम और होता जा रहा था..

खैर खुद का ध्यान भटकने के लिए शैलेश ने पुछा- राजन भैया अब तो बतादो कैसे मनाया ममता भाभी को इसके लिए.

राजन को भी अब ाचा खासा सुरूर हो चूका था.. वो मुस्कुराते हुए बोलै- अरे शैलेश बाबू एक बात बताते हैं तुम्हे ज्ञान की,

शैलेश- हाँ बताओ.

नीलेश भी हलके सुरूर के साथ दोनों की बातों का मज़ा ले रहे थे..

राजन- अगर औरत खुश होगी न बाबू तो जो तुम चाहोगी वो करेगी चाहे चखना बनाना हो या दारू पिलाना.

शैलेश- ये तो लाख रुपये की बात कही तुमने... पर समस्या है औरत को खुश करना. वो कैसे करें

राजन- हमें पता है औरत की ख़ुशी की तिजोरी की चाभी है हमारे पास.

शैलेश- ाचा ाचा हमें भी बताओ भैया कौनसी चाभी है.

राजन- वो चाबी है लुंड...

शैलेश- हाहाहा अरे भैया तुम भी .

नीलेश- यही है ज्ञान की बातें इसकी.

राजन- नहीं बाबू बिलकुल सही कह रहे हैं अगर औरत की जमकर चुदाई होती रहेगी तो वो बिलकुल खुश रहेगी और वो खुश तो तुम खुश... क्यों गलत कहा क्या..

शैलेश - अरे नहीं गलत तो नहीं कहा..

राजन- अरे औरत की गर्मी शांत करना बहुत ज़रूरी है अब तुम्हारी भाभी को hi ले लो इतनी गरम छूट वाली औरत है की पूछो मत..

राजन की बात सुनकर नीलेश तो काम पर शैलेश बिलकुल चौंक गए पर साथ hi ममता के बारे में और उसकी छूट के बारे में सुनकर शैलेश का पहले से खड़ा लुंड ठुमके मरने लगा...

शैलेश - कक्क क्या बोल रहे हो राजन भैया भाभी ने सुन लिया तो...

Rajan-are कुछ नहीं सुनेगी वो, जो हम चाहेंगे वो करेगी, हम लुंड वाले हैं हमें किस बात का दर. ज़्यादा कहेगी तो यही नंगा करके छोड़ दूंगा...

राजन का नशा बढ़ता जा रहा था जो उसकी बाइटों से पता चल रहा था..

शैलेश - भाई साब शांत कराओ इन्हे.

नीलेश - चिंता मत करो हप जायेगा पिके बड़बोला बन जाता है...

तभी इसी बीच राजन की नज़र शैलेश के पाजामे में बने तम्बू पर गयी... और खिलखिलाते हुए राजन बोलै- हाहाहा शैलेश बाबू तुम बड़े छुपा रुस्तम निकले खुद की पिस्टन टांग राखी है हमें शांत रहने को बोल रहे हो..

राजन की बात पर दोनों का ध्यान शैलेश के पाजामे पर गया,

तो नीलेश भी मुस्कुराने लगे पर बेचारे शैलेश शर्मशार हो गए...

शैलेश - अरे भैया पता नहीं ये कैसे..

राजन- अरे बाबू शरमाते क्यों हो मर्द हो लुंड तो खड़ा होगा hi.. क्यों भाई साब.

Nilesh-are बिलकुल लुंड होता hi खड़ा होने के लिए है. और सच कहें तो हमारा भी तन्नाया हुआ है. हाहाहा.

नीलेश ने शैलेश को ताली मरते हुए कहा.. शैलेश को थोड़ा दर भी था की कहीं कोई सुन न ले क्यों ममता पल्ली घर में hi थी. पर नशा भी उनको अलग बहका रहा था..

दोनों के मज़ाक से शैलेश को थोड़ा ाचा महसूस हुआ पर उनका लुंड अब भी बिलकुल तना हुआ था..

राजन- ाचा एक बात बताओ तुम्हारा ये हथियार तुम्हारी भाभी की चूचियों की घाटी देखकर तन गया है न..

राजन के ऐसे खुले शब्दों का सवाल सुनकर शैलेश के तो होश hi उड़ गए.. उन्हें लगा किसी ने उन्हें चोरी करते पकड़ लिए है..

घबरा कर उन्होंने नील्स को देखा जिन्होंने मुस्कुराते हुए उन्हें शांत रहने का इशारा किआ.

फिर भी घबराता हुए बोले- नननही भैया ये क्या बोल रहे हो ऐसा कुछ नहीं है..

राजन- अरे बाबू तुम शरमाते बहुत हो, अरे हम मर्द hi तो हैं यहाँ .

शैलेश सोच रहे थे की कहाँ फंस गया पति पूछ रहा है की तुम्हारा लुंड मेरी पत्नी कल देखकर खड़ा हुआ है या नहीं.

शैलेश- ारी नही भैया ऐसा ऐसा नहीं हैई

राजन- अरे शैलेश बाबू घबराओ मत और इसमें न करने की क्या बात है तुम्हारी भाभी का बदन hi ऐसा है की अचे ाचों का खड़ा करदे एक बार में और तुम्हारा तो हक़ बनता है.

शैलेश एक तरफ तो राजन की बातों से बिलकुल हैरान था वहीं नशे की वजह से या किसी भी वजह से उसे मज़ा भी आ रहा था कज किसी की पत्नी के बारे में उसके पति के सामने हो बात करने में.

शैलेश - हमारा हक़ कैसे..

शैलेश को खुद पर हैरानी हुई और शायद शराब का नशा नहीं होता तो वो कभी ये नहीं बोल पाते..

राजन- भाभी है तुम्हारी और भाभी पद पति के बाद देवर का hi हक़ बनता hai..kyun भाईसाब...

नीलेश- बिलकुल भाई भाभी देवर का तो रिश्ता hi ऐसा है...

शैलेश- हाँ ये तो सही बात कही भैया.

राजन- तो मान ली तुमने..

शैलेश- हाँ भैया भाभी का जो पल्लू गिरा उसी के बाद से तना हुआ है.

शैलेश ने गहरी सांस लेकर बोल hi दिया और शराब न होती तो शायद कभी नहीं बोल पाते.

राजन- हननननन क्यों भैया अब आये शैलेश बाबू लाइन पर... अरे इतना डरते हैं.

अब शैलेश भी थोड़ा खुल रहे थे और बोले - अरे भैया हम डरते नहीं है बस थोड़ा शर्म आती है.

Rajan-nahi बाबू तुम डरते हो.

शैलेश- नहीं भैया हम नहीं डरते ..

राजन- तो साबित करके दिखाओ

शैलेश - साबित कैसे करें...

राजन- हम बताते हैं...

नीलेश- बता हम भी सुनें और हमारे साडू हैं डरते नहीं किसी से क्यों शैलेश.

शैलेश - और क्या भाईसाब दर और हमें...

राजन- तो सुनो देखो पकोड़े ख़त्म हो गए हैं जाओ रसोई से अपनी भाभी से ले आओ..

शैलेश- बस इतना इसमें क्या डरना है.

राजन- अरे पूरा सुनो तो सही रसोई में जाना है और अपनी भाभी को पीछे से पकड़ना है..

शैलेश की तो ये सुन गांड फैट गयी - अरे ये क्या बोल रहे हो भैया.. भाई साब.

शैलेश ने नीलेश को देखकर कहा..

नीलेश- क्या बोल रहा है राजन तू भी.

राजन- क्यों दर गए शैलेश बाबू.

नीलेश- देख राजन हमारे शैलेश बाबू किसी से नहीं डरते.

Rajan-to फिर जो बोलै है वो करें. क्यों शैलेश बाबू कर पाओगे?

शैलेश को दर तो लग रहा था पर न जाने क्यों ये सुनकर उनके अंदर एक उत्तेजना हो रही थी ऊपर से ये सुनते hi उनका लुंड ठुमके मार रहा था साथ hi नशा ालूसे और बढ़ा रहा था.

Rajan-kya हुआ बाबू बस ख़त्म जोश.

शैलेश- जायेंगे हम और जो बोलै है करके दिखाएंगे.

राजन- सच्ची?

नीलेश - ये हुई ना बात.. और का हम बोले थे न डरते नहीं शैलेश बाबू..

खैर डरते डरते शैलेश खड़े हुए और पीछे देखते हुए रसोई के दरवाज़े तक पहुंचे. दिल बिलकुल किसी सुपरफास्ट ट्रैन की तरह धड़क रहा था,

खैर हिम्मत करते हुए रसोई में देखा तो पाया ममता सिंक के किनारे खड़े होकर काम कर रही थी...

शैलेश ने ममता को देखा साड़ी में से झांकती कमर चिकनी गोरी पीठ साड़ी में उभरे हुए चूतड़ जिन्हे देखकर शैलेश का लुंड और मन फड़फड़ाने लगा और जितनी उत्तेजना बढ़ रही थी उतना hi दर जाता जा रहा था.. शैलेश पर ममता के बदन का नशा चढ़ता जा रहा था शैलेश धीरे धीरे से रसोई के अंदर बढ़ने लगे हर कदम के साथ उत्तेजना और धड़कन बढ़ती जा रही थी, शैलेश ममता के बिलकुल पीछे जाकर खड़े हो गए, कुछ देर तक सोचने के बाद शैलेश ने फैसला लिए और फिर हलके से कंपते हुए हाथ बढ़ाया और फिर ममता की कमर पर रख diya...par रखते hi शैलेश का दिल बैठ सा गया उसे समझ नहीं आ रहा था की ममता न जाने कैसी प्रतिक्रिया देगी.. पर ममता ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी यहाँ तक की मुड़कर भी नहीं देखा...





वहीं ममता को लगा उसके पति या भाई साब hi होंगे तो उसने इसीलिए कोई प्रतिक्रिया नहीं दी ऊपर से उसकी छूट में भी जब से घर आई थी न जाने क्यों चीटियां रेंग रही थी वो भी सोच रही थी की जल्दी इनका प्रोग्राम ख़त्म हो और मेरी छूट को खुराक मिले...

इसलिए जैसे hi उसे अपनी कमर पर हाथ महसूस हुआ वो खुश हो गयी... वहीं उसके बदन में सिरहन होने लगी...

शैलेश ने जब देखा की कोई प्रतिक्रिया नहीं है तो उनका जोश और हिम्मत और बढ़ गया, और उन्होंने पीछे से चिपकते हुए अपना कड़क लुंड ममता के छुटड़ो में घुसा दिया जो ममता महसूस कर सिहर उठी. वहीं शैलेश के हाथ ममता के पेट को मसलने लगे...

ममता भी मदहोश होने लगी.. शैलेश कमर घुमा घुमा कर अपने लुंड को ममता के छुटड़ो में साड़ी के ऊपर से hi घिसने लगे..

वहीं शैलेश के अंदर जाते hi.. नीलेश और राजन आपस में फुसफुसाने लगे

राजन- क्या लगता है भैया कर पाएंगे?

नीलेश - कर लेंगे.

राजन- दर तो बहुत रहे थे..

नीलेश- शराब और छूट साडी हिम्मत ला देती है. तुझे बुरा तो नहीं लगेगा न.

राजन- नहीं भैया बल्कि हम तो बस इंतज़ार में है तुम्हारी योजना के सफल होने के. मज़ा hi आ जायेगा.

राजन ने लुंड खुजाते हुए कहा..

वहीं कमरे के अंदर पेट को मसलते हुए शैलेश ने हाथ ऊपर बढ़ाये और ब्लाउज में भरी बड़ी बड़ी चूचियों को मसलने लगे..

वहीं ममता ने भी आगे बढ़ाते हुए हाथ पीछे डाला और पीछे शैलेश क्र पाजामे के अंदर घुसा दिया और फिर उसके खड़े कड़क लुंड को पकड़ लिए .

लुंड पर हाथ लगते hi शैलेश क्र मुँह से सिसकी निकल गयी - अह्ह्ह्ह भाभी..

जिसे सुनते hi ममता पलट गयी- अरे भहैया तुम यहाँ... क्यों कैसे मुझे लगा ये हैं..

शैलेश जो अब तक मज़े में थे एक बार फिर से उनकी गांड फटने लगी..

शैलेश - वो भाभी हम वो हमें भैया ने हमें...

शैलेश को बोलने को शब्द नहीं मिल रहे थे.

ममता- क्या हम हम कर रहे हो सीधा बोलो.

शैलेश कुछ बोलते उससे पहले उनका ध्यान गया की ममता का हाथ अब भी उनके पाजामे के अंदर उनके लुंड पर है, शैलेश ने सोचा जो होगा देखा जायेगा और एक गहरी सांस ली और अपने हाथों से ममता के चेहरे को पकड़ा और अपने होंठों को उसके होंठो पर रख कर चूसने लगे..

ममता अचानक हुए हमले से हैरान हो गयी पर कुछ hi देर में संभल गयी और ममता कहाँ पीछे हटने वालों में से थी वो तो बल्कि साथ देने लगी हमारे शैलेश बाबू का बस उनके तो वेयर न्यारे हो गए कुछ देर होंठों को चूसने के बाद शैलेश ममता के बदन को पागलों की तरह चूमने चाटने लगे.. पहले गर्दन फिर सीना ाहर फिर मांसल मुलायम पेट...





ममता को शैलेश की हरकत से मज़ा आने लगा शैलेश ने ममता की नाभि में अपनी जीभ घुसड़ी तो ममता सिसकने लगी- आठ आह्हः भैया ओह्ह्ह्ह...

शैलेश अब पूरे जोश में आ चुके थे और ममता की नाभि को चूसते हुए अपने हाथ ऊपर लेकर ममता के ब्लाउज को खोलने लगे ... एक एक करकर जैसे hi आखिरी हुक खुला बहार से आई आवाज़ ने दोनों को चौंका दिया...

अरे ममता शैलेश बाबू पकोड़े नहीं लाये अभी..

इसके बाद शैलेश को जैसे होश आया और वो तुरंत ममता को छोड़ बहार की और भागे

लड़खड़ाते हुए बहार आये तो राजन ने पुछा- क्यों भाई तुम तो अकेले अकेले मलाई खाने लगे थे.

शैलेश के चेहरे पर एक बड़ी सी मुस्कान आ गयी - अरे कहाँ भैया वो तो बस तुमने hi तो बोलै था...

Rajan-humne तो बस जकड़ने को बोलै था तुम्हे देखकर तो कुछ और hi लग रहा है.

नीलेश- वो सब छोड़ तू ये बता की मन्नते है न हमारे शैलेश बाबू नहीं डरते..

राजन- हाँ भैया ये तो हम मान गए..

नीलेश- फिर इस बहादुरी का इनाम.

राजन- अरे इनाम तो वैसे ये लेकर hi आ रहे हैं... बाकि क्या इनाम देना है ये जाने और ममता जाने .

नीलेश- तो बुलाओ ममता को

राजन- ममता अरे ो ममता.

ममता अंदर से आई तो शैलेश ने उसे मुड़कर देखा और शैलेश एक बार फिर हैरान रह गया क्यूंकि ममता जिस रूप में बहार आई थी वो था hi कुछ ऐसा hi..

ममता ने साड़ी तो पहन राखी थी और पल्लू भी डाला हुआ था पर ब्लाउज नहीं था बल्कि उसकी एक बड़ी चुकी तो साड़ी से बहार पूरी दिख रही थी जिसे देखकर शैलेश का तो बुरा हाल हो गया...





राजन- अरे ममता शैलेश बाबू ने हमारी दी हुई एक चुनौती स्वीकार की और उसे पूरा भी किया.

ममता- ाचा ये तो बड़ी अछि बात है.

शैलेश सबके मुँह ऐसे देख रहे थे जैसे उन्होंने भूत देख लिया हो बल्कि बाकि सब ऐसे बात कर रहे थे जैसे कुछ हुआ hi न हो..

राजन- तो अब उन्हें इनाम भी तो मिलना चाहिए अब इनाम में क्या देना है उसका फैसला हमने तुमपर छोड़ा है क्या देना चाहिए.

ममता - अरे ये तो इनसे hi पूछ लेते हैं क्या चाहिए इनाम में शैलेश भैया.

शैलेश - अह्ह्ह हहनन वो मैं

शैलेश का तो मुँह सूखा जा रहा था,

नीलेश- लगता है शर्मा रहे हैं इनाम मांगने में ऐसा करो तुम hi दे दो.. जो ठीक लगे..

राजन- हाँ ये ठीक रहेगा तब तक हम लोग भैंस वगेरा बांध कर आते हैं तब तक अचे से इनाम देना.

राजन और नीलेश ये कहकर दरवाज़े की और बढ़ गए

ममता- हाँ जी बिलकुल

ये कहकर ममता ने अपना पल्लू नीचे सरका दिया और अब वो शैलेश के सामने ऊपर से बिलकुल नंगी कड़ी थी शैलेश की नज़र तो उसकी चूचियों से हैट hi नहीं रही थी...

और फिर शैलेश से काबू नहीं हुआ तो आगे बढ़ उन्होंने अपना चेहरा ममता की चूचियों में घुसा दिया और पागलों की तरह चूसने लगे. वहीं शैलेश का ध्यान भटकने का इंतज़ार कर रहे राजन और नीलेश चुपके से बापिस आये और चुपचाप hi पल्ली के कमरे में घुस गए जहाँ पल्ली दोनों की सेवा करने वाली थी. वहीं आंगन में शैलेश तो ममता पर ऐसे टूटे जैसे जन्मो के भूखे को खाना मिल गया हो..

अपने पापा मौसा और राजन चाचा के जाते hi कर्मा ने देखा की औरतें काम में लगी हुई हैं और अभी करने को कुछ है नहीं तो उसे कुछ याद आया और उसने फ़ोन निकला और फिर घर से निकल गया..

थोड़ी देर बाद कर्मा रज्जो चची के घर के बहार था और नीतू से बात कर रहा था. जो की अपने दरवाज़े पर कड़ी हुई थी..

नीतू- अगर कुछ जल्दी नहीं करोगे न तो तुम्हारी प्रेम कहानी यहीं ख़त्म हो जाएगी..

कर्मा- अरे तुझे तो पता है न सब कुछ और तू भी तो कुछ कर उससे बात कर मिलवा तभी तो कुछ होगा..

नीतू- अच्छा इतनी बार घर लेकर गयी हूँ और कैसे मिलवाऊं.

कर्मा- अरे घर में उसका खड़ूस बाप रहता है हमेशा कुछ बात hi नहीं हो पति..

नीतू- चलो उसका भी कुछ जुगाड़ लगाती हूँ.. वैसे एक खुशखबरी दूँ.

कर्मा- हाँ देना खुसखबरी hi तो चाहिए.

नीतू- वो तुम्हारे बारे में पूछ रही थी.

कर्मा- क्या सच्चीई मुछियई?

नीतू- हाँ

कर्मा ख़ुशी से उछालते हुए- क्या बोल रही थी बता न..

नीतू- वो नहीं बताउंगी.

कर्मा- अरे बताना ऐसे मत कर.

नीतू- मुझे क्या मिलेगा.

कर्मा- जो तू चाहे..

नीतू- फिल्म दिखाओगे..

कर्मा- जब तू चाहे.. अब बता न.

नीतू- अरे वो पूछ रही थी की... मैं नहीं बताउंगी.

ये कहकर नीतू अंदर की और भागी और साथ hi कर्मा उसके पीछे पीछे पर नीतू ने पीछे पड़ी खत को नहीं देखा और वो उससे टकरा कर खाटपर गिर पड़ी और कर्मा भी उसकर पीछे पीछे उसके ऊपर गिर पड़ा... दोनों बुरी तरह हंस रहे थे की तभी सीडी से रज्जो चची उतर के आई और उन्हें देखते hi कर्मा तुरंत उठ खड़ा हुआ..

पर नीतू के ऊपर गिरने और उसकर बदन से लगने से कर्मा का लुंड कड़क हो गया जिसकी खबर कर्मा को भी नहीं चली...

कर्मा - प्रणाम चची.

रज्जो चची - हाँ हाँ प्रणाम ऐ नीतू तुझे काम नहीं है कुवह दिन भर हंसी ठिठोली के अलावा.. इतना काम पड़ा है जा रसोई संभल जाकर..

ये कहते हुए रज्जो ने एक नज़र कर्मा के पाजामे में बने उभर पर भी डाली..

नीतू- हाँ मम्मी जा रही हूँ

नीतू ये कहकर मुस्कुराते हुए कर्मा को देखते हुए अंदर चली गयी..

कर्मा- मैं भी चलता हूँ चची घर आना माँ बुला रही थी तुम्हे..

रज्जो- ठीक है आउंगी...

ये सुनकर कर्मा तो चला गया पर रज्जो न जाने क्या वहीं खड़े खड़े सोचे जा श्री थी..

कर्मा घर जब बापिस आया तो देखा आंगन में कोई नहीं था, संतो अपने कमरे में थी, मौसी अपने और अनुज छत पर बैठा हुआ मोबाइल में गेम खेल रहा था...

कर्मा माँ को ढूंढता हुआ उनके कमरे में गया तो देखा माँ लेती हुई थी..

वहीं सभ्य थोड़ी देर पहले सरे काम निपटा कर अपने कमरे में आई तो न जाने क्यों उसको छूट में एक अलग तरह की hi खुजली हो रही थी शायद आज जो भी पल्ली और ममता के साथ हुआ उसकी वजह से है, खैर जल्दी कर्मा के पापा आएं और इसे शांत करें..

और इसी इंतज़ार में वो थोड़ी देर के लिए लेट गयी तो उसको हल्का हल्का नींद लग गयी..

खैर कर्मा नस अभी जब अपनी माँ को देखा तो देखते hi उस्का लुंड जो अभी आधा hi खड़ा था पूरा तन गया...





कर्मा जनता था की उसके माँ जैसे कामुक बदन वाली औरत उसकी जानकारी मेज तो नहीं है जिसके बदन को देखने भर से अचे ाचो के लुंड तन जाएं..

कर्मा ने अपनी माँ का मांसल पेट और नाभि देखि उसका लुंड बिलकुल तन कर सत्तर हो गया .

कर्मा ने हलके से दरवाज़े फेरा और माँ के पीछे बिस्तर पर आकर बैठ गया उसके सामने माँ के भरे हुए साड़ी में कैद चूतड़ थे...

जिन्हे देखते hi कर्मा के मुँह से पानी आने लगा

इसके आगे बहुत कुछ होने वाला है उसके लिए इंतज़ार करें अगले अपडेट का बहुत बहुत धन्यवाद्
 
कर्मा जनता था की उसके माँ जैसे कामुक बदन वाली औरत उसकी जानकारी मेज तो नहीं है जिसके बदन को देखने भर से अचे ाचो के लुंड तन जाएं..

कर्मा ने अपनी माँ का मांसल पेट और नाभि देखि उसका लुंड बिलकुल तन कर सत्तर हो गया .

कर्मा ने हलके से दरवाज़े फेरा और माँ के पीछे बिस्तर पर आकर बैठ गया उसके सामने माँ के भरे हुए साड़ी में कैद चूतड़ थे...

जिन्हे देखते hi कर्मा के मुँह से पानी आने लगा


अपडेट 170


बिस्तर पर बैठते हुए कर्मा को अपने बदन में एक अलग hi उत्तेजना का अनुभव हो रहा था ऐसा लग रहा था की उसके बदन में गर्मी बढ़ रही है, कर्मा ने अपनी टीशर्ट को उतर फेंका और फिर माँ को सोते हुए उनके चूतड़ देखने लगा, देखते देखते फिर उसने हाथ आगे बढाकर माँ के छुटड़ो पर रख दिया और साड़ी के ऊपर से hi सहलाने लगा.





क्यूंकि सभ्य थोड़ी नींद में थी तो उसे अभी तक कर्मा के होने का अंदाज़ा नहीं हुआ..

कर्मा तो बेचारा हर पल के साथ उत्तेजित होते जा रहा था उसका लुंड बिलकुल तन चूका था, वैसे माँ के साथ उसे उत्तेजना तो होती थी पर आज कुछ ज़्यादा hi हो रही थी न जाने क्यों...

वही घर में सिर्फ कर्मा hi उत्तेजित नहीं था अपने कमरे में लेती उसकी मौसी शालू का भी यही हाल था बेचारी बदन की गर्मी में तड़पते हुए अपनर पति के आने का इंतज़ार कर रही थी अब तो एक एक पल काटना उसके लिए मुश्किल होता जा रहा था पर उसके पति देव थे जो आने का नाम hi नहीं ले रहे थे..

वहीं बगल वाले कमरे में कर्मा की तड़प का और माँ के चूतड़ों को मसलने का ये नतीजा हुआ सभ्य की नींद खुल गयी और उसने पाया की कर्मा उसके चूतड़ों के साथ खेल रहा है..

सभ्य जो पहले से hi उत्तेजित थी उसे बेटे का स्पर्श ाचा लग रहा था पर फिर भी उसने उठते हुए कहा- कर्मा बीटा क्या कर रहा है जा सजा तू भी.

कर्मा माँ को जगता देख मुस्कुराया और bola-apani सुन्दर माँ को प्यार कर रहा हूँ..

माँ- अरे बीटा तेरे पापा अभी आते hi होंगे..

कर्मा- नहीं आएंगे माँ उनको देर होगी..

माँ- क्यों देर क्यों होगी.

कर्मा- आज उनका मौसा जी का और राजन चाचा का प्रोग्राम है बोतल खोलने का...

माँ- ये फिर शुरू हो गए लाख बार मन किआ है इन्हे की पीना वीणा सही नहीं है ऊपर से खुद तो पि रहे हैं तेरे मौसा आज hi आये हैं उन्हें भी लगा लिए साथ में..

जहाँ माँ बात कर रही थी वहीं कर्मा अपने काम में लगा हुआ था और उनके ब्लाउज के हुक खोल रहा था. और देखते देखते सरे हुक खोल भी दिए थे..

कर्मा - अरे माँ छोडो न कभी कभी तो पीते हैं पापा इतना तो चलता है. और सुनो तुम बताना मत उन्हें की मैंने तुम्हे बता दिया है.

माँ- अह्ह्ह ठीक है नहीं बताउंगी.

माँ ने सिसकते हुए कहा क्यूंकि कर्मा ने ब्लाउज खोलने के बाद ब्रा को नीचे कर माँ की दोनों चूचियों को बहार निकल लिए था और उन्हें मसल रहा था





Maa-ohhh आराम से बीटा...

कर्मा- अरे माँ तुम्हे देखकर आराम hi तो नहीं आता ..

ये कहकर उसने आगे सर करके माँ के होंठों को अपने होंठों मेज भर लिए और चूसने लगा..

सभ्य न चाहते हुए भी खुद को उत्तेजित होने से रोक नहीं प् रही थी और वो खुद भी कुछ पलों बाद बेटे का साथ देने लगी... दोनों माँ बेटे एक दुसरे के होंठों को पूरे जोश में चूसने लगे और कुछ hi देर में दोनों की जीभ एक दुसरे के मुँह में अटखेलियां कर रही थी... खैर दोनों हांफते हुए अलग हुए पर कर्मा तो जैसे उत्तेजना में पागल हो गया था वो होंठों को छोड़ माँ की छूछीयो पर टूट पड़ा और उन्हें बेतहाशा चूसने लगा..

वहीं बगल के कमरे में शालू से तड़प सही नहीं गयी तो उठ कड़ी हुई और कमरे से बहार जाकर देखा जैसे hi आँगन में आई तो अनुज को सीढ़ियों से उतरता पाया,

शालू- अनुज तेरे मौसा और पापा कहाँ है पता है कुछ?

Anuj-mujhe तो नहीं पता फ़ोन करूँ?

शालू- कोई फायदा नहीं दोनों लोगो का फ़ोन hi घर है पता नहीं कहाँ गए हैं. मज़दूरों का हिसाब करने तुझे पता है.

अनुज- मज़दूरों का हिसाब.. नहीं तो..

शालू- फिर किसे पता होगा..

अनुज- ाचा मौसी राजन चाचा भी थे साथ में?

शालू- हाँ.

Anuj-phir समझ गया की कौनसा हिसाब करने गए हैं.

Shalu-kaunsa हिसाब मतलब.

अनुज- अरे मौसी तुम भी भोली हो आज बोतल खुल रही होगी.

शालू - बोतल खुल रही होगी मतलब वो..

Anuj-haan वही.

शालू- रहने दे ऐसे hi कोई अंदाज़ा मत लगा.

अनुज - अरे शर्त के साथ कह सकता हूँ.

Shalu-in लोगो को भी चैन नहीं, तेरे मौसा को आये एक दिन नहीं हुआ और ये भी लग गए साथ.

अनुज- अरे मौसी कभी कभार तो करते हैं थोड़ा आनंद लेने दो..

शालू - आनंद तो मैं दूंगी इन्हे आज आने दे घर...

Anuj-are मौसी बेकार में गुस्सा कर रही हो पर सुनो किसी को बताना मत की मैंने तुम्हे बताया है नहीं तो बाद में मुझे पद जाएगी अकेले में.

शालू- ाचा ठीक है नहीं बताउंगी पर एक बात बता.

अनुज- क्या?

शालू- तुझे ये पक्का पता होगा के ये लोग पीते कहाँ हैं?

अनुज- वो हाँ क्यों.

शालू -कहाँ.

अनुज- मैं नहीं बताऊंगा बाद में मुझे मार पड़ेगी.

शालू- अरे नहीं पड़ेगी तू बता न.

अनुज- राजन चाचा के यहाँ..

शालू- क्या वहां कैसे ममता जीजी मन नहीं करती.

अनुज- अब वो तो वो लोग hi जानें.

शालू- चल मेरे साथ वहीं चलके देखते हैं.

अनुज- अरे रहने दो मौसी आ जायेंगे.

शालू- तू चल रहा है की नहीं.

अनुज- ठीक पर अंदर नहीं आऊंगा नहीं तो सबको लगेगा मैं लाया हूँ तुम्हे और फिर मेरी शामत.

शालू- ठीक है चल..

जहाँ शालू और अनुज ममता के घर के लिए निकले वहीं कर्मा का लुंड भी निकल चूका था अपनी माँ के मुँह के लिए और इस समय माँ के गरम मुँह में था.. जिसे माँ चूस रही थी.





सभ्य के चूसने में उसका उतावला और उत्तेजना साफ़ झलक रही थी वहीं कर्मा अपनी आँखें बंद किये हुए अपनी माँ के गरम मुँह का आनंद ले रहा था

कर्मा- अह्ह्ह्ह माँ तुम्हारे मुँह जैसा एहसास इस दुनिया में कहीं नहीं है...

माँ- ुहममम ुहम्म

कर्मा- आह्हः माँ ऐसे hi चूसो कितना मज़ा आ रहा है कितना तड़प रहा था तुम्हारे लिए माँ न जाने क्यों तुमने मौसी की वजह से हमें और खुद को सजा दे रही हो... अह्ह्ह...

लुंड चूसते माँ भी बेहद उत्तेजित होती जा रही थी और लुंड के साथ साथ बेटे की गोलियों का भी पूरा ध्यान रख रही थी

पर दोनों की hi उत्तेजना इतनी थी और प्यास इतनी ज़्यादा थी की सिर्फ चूसै से hi शांत होने वाली नहीं थी..

जल्दी hi कर्मा ने अपनर लुंड को माँ के मुँह से निकल दिया क्योंकि वो बिना चुदाई के झड़ने में तो बिलकुल नहीं था और माँ भी इतनी गरम थी और यही चाहती थी..

कर्मा ने माँ को बिस्तर पर चौपाया बना दिया और फिर साड़ी और पेटीकोट को कमर तक उठा दिया और सामने माँ के नंगे चूतड़ों को देख मस्त हो गया,





इतना मस्त की वो एक हाथ से माँ की छूट और चूतड़ों को मसलने और सहलाने लगा..

कर्मा - आह्हः माँ तुम्हारे चूतड़ जब भी देखूं ऐसा लगता है पहली बार देख रहा हूँ..

माँ तो कर्मा की हथेली और उंगलियां जो उसकी प्यासी छूट के ऊपर घूम रही थी उन्ही के ध्यान में खोई हुई थी.

माँ- हाँ?? क्या कहा आह्ह्ह्ह तूने..

कर्मा- यही की माँ तुम्हारे चूतड़ बहुत सुन्दर हैं मन करता हैं इन्हे देखता रहूं और प्यार करता रहूं...

माँ- ुहममम हांण लाल्ल्लाहहह..

कर्मा- करलूं माँ?

माँ- क्याःह्ह्ह..

कर्मा- तुम्हारे चूतड़ों को और तुम्हारी छूट को गांड को प्यार...

माँ- ुहम्म्म्म बेताहहहह.

कर्मा- बोलो माँ..

कर्मा ने एक उंगली माँ की गीली गरम छूट में घुसते हुए कहा..

माँ- ओह्ह्ह्हह्ह लल्लाहहह अह्हह्ह्ह्ह करले अपनी माहहहह को प्यारर.

बस कर्मा को तो जैसे यही सुनने का इंतज़ार था उसने तुरंत माँ की छूट से उंगली निकली और अगले hi पल माँ के पीछे जगह लेकर अपने लुंड को एक हाथ से थामकर माँ की छूट के मुहाने पर लगाया तो माँ बेटे दोनों hi तड़प उठे,

माँ जो लुंड के लिए पहले से hi तड़प रही तभी बेटे के लुंड का एहसास छूट पर होते हु सिहर उठी..

माँ- ओह्ह्ह्ह लाल्ल्लाहहह अह्ह्ह..

कर्मा लुंड को छूट के ऊपर घूमने लगा..

माँ- ओह्ह्ह लल्लाहहह अब घुसेड़े तड़पा मत..

अब कर्मा अपनी माँ की बात कैसे न मंटा.. उस्बे तुरंत एक धक्का लगाया और अपने लुंड को माँ की छूट में सरका दिया जिसके साथ hi दोनों माँ बेटे के मुँह से सिसकी निकल गयी..

बस फिर क्या था तड़प दोनों तरफ थी लुंड और छूट दोनों hi प्यासे थे कर्मा ने ताबड़तोड़ माँ की चुदाई शुरू कर दी..





माँ भी अपनी सुन्दर गोल और बड़ी गांड उठाये अपनी छूट में बेटे के लुंड की मार सह रही थी, कमरे में थप थप थप की आवाज़ें आ रही थी..

कर्मा- ओह्ह्ह माँ माँ अह्ह्ह्हह...

जहाँ माँ बेटे की जोड़ी यहाँ चुदाई के मज़े लूट रही थी वहीं मौसी भांजे की जोड़ी ममता के घर पहुँच गयी थी पर अंदर जाने से अनुज ने साफ़ इंकार कर दिया था..

शालू- चल तू फिर यहीं रुक मैं इनको लेकर आती हूँ..

शालू ने दरवाज़े पर जाकर खटखटाया.. और इंतज़ार किआ पर कोई नहीं आया..

अनुज जो पीछे से खड़ा देख रहा था उसने भी ये देखा और फिर आगे आया और दरवाज़े के बीच बानी जगह में उंगली फंसा कर कुण्डी को अंदर से खोल दिया..

शालू- ऐसे कैसे खोला तूने.

अनुज- मौसी बचपन से आ जा रहा हूँ इन दरवाजों से बहार से अंदर से सब तरह से खोलने आते हैं अब तुम जाओ.

ये कहकर अनुज वहीं खड़ा हो गया और शालू अंदर चली गयी..

दरवाज़े के अंदर जाकर शालू ने देखा तो आंगन खली पड़ा था उसे न जाने क्यों कुछ अजीब सा एहसास हुआ पहले तो वो ममता को आवाज़ लगाने वाली थी पर फिर रुक गयी, वो कमरों की और बढ़ने लगी पल्ली का कमरा बंद था तो उसे छोड़ वो आगे बढ़ी और ममता के दरवाज़े के पास पहुँचते hi उसे कुछ आवाज़ें सुनाई देने लगी जिसे सुनते hi शालू समझ गयी की किसकी आवाज़ है..

धड़कते दिल के साथ शालू आगे बढ़ी और दरवाजे की ओट से हल्का सा झांककर देखा तो शालू की आँखें चौड़ी हो गयी.

अंदर ममता पूरी नंगी बिस्तर पर लेती हुई थी और उसके ऊपर एक मर्द था जो तेज़ तेज़ धक्कों से उसे छोड़ रहा था..





शालू को मर्द का चेहरा दिखाई नहीं दिया तो उसने सोचा राजन जीजा होंगे.. की तभी अचानक से मर्द ने अपना चेहरा पालक कर ममता की एक चुकी को पीने के लिए इस तरफ किआ तो शालू के पैरों की जमीन खिसकते खिसकते बची उसने देखा की ममता को छोड़ने वाला कोई और नहीं बल्कि उसके अपने पति हैं...

शालू कुछ देर तक बूत बानी अपने पति को दूसरी औरत को छोड़ते हुए देखती रही... और फिर वहां से हैट कर बहार आ गयी और फिर घर के बहार जहाँ अनुज बहार खड़ा हुआ था..

अनुज- क्या हुआ मौसी यही हैं न वो लोग..

शालू- हाँ एक काम कर जैसे दरवाजा बंद था वैसे hi करदे...

अनुज ने वैसा hi किआ .

शालू- चल अब घर.

Anuj-kya हुआ मौसा जी को नहीं लाइ..

शालू- नहीं तू घर चल मेरे साथ...

अनुज को थोड़ा अजीब तो लगा पर वो साथ घर आ गया.. घर आकर दरवाज़ा बंद किया शालू ने और अनुज का हाथ पकड़ कर अपने साथ ले चली.

अनुज को कुछ समझ तो नहीं आया पर उसने कोई सवाल भी नहीं किआ..

हालाँकि अनुज को हैरानी हुई जब शालू उसे लेकर अपने कमरे में न जाकर आगे बढ़ गयी और अंत में शालू ने जाकर सभ्य और नीलेश के कमरे का दरवाज़ा खोला और वो और अनुज अंदर घुसे तो उनके सामने का नज़ारा बड़ा hi दिलकश था





कर्मा बिस्तर पर पीठ के बल लेता हुआ था और माँ उसके लुंड को अपनी छूट में लेकर उछाल रही थी वहीं कर्मा माँ की साड़ी को कमर पर पकड़ रहा था ताकि माँ की गांड का पूरा मज़ा ले सके...

पर जैसे hi दरवाज़ा खुलने और किसी के अंदर आने का एहसास हुआ सभ्य ने मुद कर पीछे देखा और अनुज और शालू को देख तुरंत कर्मा के लुंड से उठ कड़ी हुई. एक पल को कर्मा भी घबरा गया...

( कर्मा की जुबानी)

अनुज और मौसी के अचानक आ जाने से मेरी तो एक पल को फैट hi गयी वहीं गुस्सा भी आया की इतने दिनों बाद मुश्किल से माँ को छोड़ने को मिला वो भी ये लोग आ गए...

माँ मौसी से कुछ बोलने hi वाली थी की मौसी आगे बढ़ी और हम सबको चौंकाते हुए उन्होंने माँ को बाहों में भरा और माँ के होंठों से अपने होंठ भिड़ा दिए और बुरी तरह से चूसने लगी, अनुज और मैं तो ये देख बुरी तरह हैरान हो गए वहीं माँ भी बिलकुल हैरान थी.. ऐसा नज़ारा देख मेरा लुंड जो पहले से खड़ा था, और कड़क हो गया, वही हाल अनुज का था पर अगले hi पल वो अपनर सरे कपडे उतर के नंगा हो गया और अपने लुंड को मुठियाते हुए माँ और मौसी का प्यार देख रहा था..

तभी मेरे ध्यान में कुछ आया और मैंने अपना कच्चा ऊपर चढ़ाते हुए बहार भगा और फिर आंगन में आकर संतो तै के कमरे में झाँका तो वो सो रही थी मैंने बहुत धीरे से दरवाज़े को बहार से फेरा और बहार से कुण्डी लगाडी.. क्यों रिस्क लेना इसके बाद भाग कर बापिस कमरे में आया यो देखा की...

शुरूआती हैरानी के बाद अब माँ भी अपनी बहन का पूरा साथ दे रही थी दोनों की जीभ एक दुसरे के साथ खेल रही थी... जीभ चूसते हुए hi मौसी माँ की बहार निकली चूचियों को हाथों से मसलने लगी जिससे माँ का चुम्बन और गहरा हो गया माँ के हाथ भी मौसी के बदन पर फिसल रहर थे माँ कभी मौसी के चूतड़ दबती तो कभी चूचियां..

थोड़ी देर बाद मौसी ने माँ के होंठों को छोड़ा और अपनी बहन की बड़ी खरबूजे जैसी चूचियों पर टूट पड़ी..

मेरा और अनुज का तो देख कर hi बुरा हाल हो रहा था और मैंने एक नज़र अनुज को देखा तो हैरान रह गया क्यूंकि मुझे पता hi नहीं चला की वो कब नंगा हो गया, वो बिलकुल नंगा होकर अपने लुंड को हिलाते हुए माँ और मौसी को देख रहा था..

मौसी माँ की छूछीयो को चूस रही थी और माँ उनके सर को अपनी चूचियों पर दबाते हुए सिसकियाँ भर रही थी, वहीं मौसी माँ की छूछीयो को चूसते हुए हाथ नीचे ले गयी और माँ की कमर में लिपटी साड़ी और पेटीकोट को खोल दिया और अगले hi पल दोनों नीचे पड़े थे और माँ नीचे से बिलकुल नंगी हो गयी उनके पूरे बदन पर अब सिर्फ खुला हुआ ब्लाउज और नीचे को सर्कि हुई ब्रा थी.. अनुज ने जब ये देखा तो उससे और नहीं रुका गया और वो फुर्ती में माँ के पीछे जाकर घुटनो पर बैठ गया और अपना चेहरा माँ के चूतड़ों के बीच घुसा दिया और माँ की गांड आउट छूट को चाटने लगा.. माँ जो पहले से hi उत्तेजना और मज़े के सफर में गोते लगा रही थी इस दोहरे हमले से तो उनका बदन थरथराने लगा..

अनुज की देखा देखि मैंने भी वही रास्ता अपनाया और मैं मौसी क्र पीछे गया और उनकी साड़ी और पेटीकोट उतर दिया और फिर बिलकुल अनुज की तरह hi मैं मौसी के चूतड़ों में घुस गया और उनकी गीली छूट और गांड नीचे बैठ के चाटने लगा दोनों कामुक भरे बदन की बहनें एक hi जैसी अवस्था में थी, दोनों hi नीचे से बिलकुल नंगी एक दुसरे की और झुकी हुई थी और दोनों के hi चूतड़ों में एक एक मुँह घुसा हुआ था, मौसी की छूट पर जीभ लगते hi मुझे एहसास हो गया की मौसी कितनी उत्तेजित हैं उनकी छूट बहे जा रही थी और मैंने उनकी छूट रास को चाट लिए...

मौसी ने ाव अपना चेहरा माँ की छूछीयो से हटा लिए और अब आँखें बंद करके अपनी छूट पर मेरी जीभ के एहसास का आनंद ले रही थी...

वहीं अनुज की जीभ से माँ की भी सिसकियाँ निकल रही थी..

माँ- शालू ये सब अचानक क्या हुआ कैसे?

मौसी - जीजी मुझे माफ़ कार्डो मैंने पिछले दिनों में तुम्हारे साथ बहुत बुरा बर्ताव किया.

माँ- हम तुझसे नाराज़ नहीं हैं ऋ बन्नो...

मौसी- पर मैंने किया तो गलत hi जीजी.. पहले साथ दिया फिर तुम लोगो को गलत बता दिया..

माँ- पर अभी अचानक क्या हुआ..

फिर मौसी ने हम सब को जो कुछ हुआ वो बात बताई.

माँ- ये तो होना hi था आखिर हैं तो वो भी मर्द hi ..

शालू- मुझे उनके लिए hi बुरा लगता था पछतावा था की मैं उनके साथ बुरा कर रही हूँ पर अब अगर वो इसमें hi खुश हैं तो मैं भी खुश.

माँ- तू भैया से नाराज़ तो नहीं है न?

शालू- नाराज़ तो नहीं पर उन्हें देखो तड़पती हुई बीवी को छोड़कर परै औरत को छोड़ रहे हैं..

में- अरे मौसी शराब के नशे में उन्हें ममता चची में तुम hi नज़र आ रही होगी..

मैंने उनके छुटड़ो से मुँह हटते हुए कहा.. तो सब हंस पड़े...

शालू- अब जो भी हो बहुत तड़पा लिया मैंने खुद को अब नहीं तड़पाऊंगी.. ये कहकर मौसी ने अपने हाथों से पकड़कर मेरा सर हटाया और घूम कर मेरे होंठों को चूसने लगी उन्हें बिलकुल hi अपनी छूट का स्वाद मेरे होंठों से मिला होगा, कुछ देर चूसने के बाद मौसी ने मुझे बिस्तर पर बिठा दिया वही माँ ने अनुज के साथ किया हम दोनों भाई अगल बगल में बैठ गए और दोनों बहनें हमारे सामने नीचे बैठ गयी और फिर झुककर मौसी ने मेरे लुंड को मुँह में ले लिया और माँ ने अनुज के और दोनों hi हम दोनों के लुंड चूसने लगी..





अह्ह्ह हम दोनों भाई तो जन्नत में थे जो भी कुछ पिछले दिनों हुआ मौसी के बीच उस वजह से हम सब hi कहीं न कहीं तड़पे ज़रूर थे और अब वो तड़प वो प्यास मिटने का मौका मिल रहा था ऊपर से ये जानकर ख़ुशी थी की अब सब ठीक हो गया है मौसी और माँ के बीच भी तो अब और मज़ा आ रहा था..

अनुज- आह्ह्ह्ह माँ कितना मस्त चूसती हो तुम आह्हः मैं तो तड़प रहा था इसके लिए hi.

में- हाँ लेकिन अब सब ठीक है अब मज़ा आएगा.

मौसी-- अह्ह्ह जीजी मुझसे तो अब रहा नहीं जा रहा मेरी छूट तो बस बहे जा रही है..

मौसी ने मेरा लुंड मुँह से निकलते हुए कहा..

माँ- तो देर क्यों कर रही है बन्नो सामने खड़ा लुंड है चढ़ जा और मितले अपनी खुजली...

मौसी ने अपनी बड़ी बहन का कहना मन और तुरंत ऊपर आ गयी अपने दोनों पैरों को मेरी दोनों तरफ रखा और फिर लुंड को छूट के मुँह पर लगाकर बैठ गयी और मेरा लुंड मौसी की छूट में सरकता चला गया..

मौसी- ahhhhhhhhhh कितना तड़प रही थी इस एहसास के लिए लुंड को छूट में लेने का एक अलग hi मज़ा है.

में - अह्ह्ह मौसी खुद भी तड़प रही थी और हमें भी तड़पा रही थी अह्ह्ह कितनी गरम छूट है तुम्हारी..

मौसी - अब नहीं तड़पाऊंगी बच्चा और तड़पने की सजा मेरी छूट को कूट कूट कर देना तुममममम

अनुज- माँ अब तुम भी ज़रा मेरे लुंड को अपनी छूट का स्वाद चखने दो..

माँ- हाय दिया हमारे लल्ला को भी माँ की छूट चाहिए ायजा मेरे लल्ला.. बता कैसे छोड़ेगा..

अनुज ने माँ को हमारे बगल में hi घुटनो पर झुका दिया और फिर उनके पीछे जगह बनाई और फिर अपने लुंड को पकड़ कर माँ की छूट के होंठों में फंसा कर एक धक्का लगाकर अंदर सरका दिया..

माँ- ुहममम अह्ह्ह लाल्ल्लाहहह.

अनुज- अह्ह्ह्ह अपनी माँ छोड़ने का मज़ा hi अलग है...

मौसी- बातें देखो इसकी..

अनुज- अभी तो बस मेरी चुदाई देखो मौसी.

माँ- अब कितना ाचा लग रहा है सब खुश हैं तो अब तक सब अजीब सा लगता था.

में- ये तो सही कहा माँ तुमने..

माँ- अनुज लल्ला अब बातें hi करेगा या आगे भी करेगा कुछ..

अनुज- हाँ माँ करूँगा न तुम्हारी चुदाई..

ये कहकर अनुज माँ की गरम छूट में धक्के लगाने लगा.. वहीं मौसी अपने भरी चूतड़ों को मेरे लुंड पर पटक रही थी.





कुल मिलकर कमरे में वासना का तूफ़ान आया हुआ था थप थप थप की आवाज़ें पूरे कमरे में गूँज रही थी,

मौसी- अह्ह्ह्ह जीजी कुवह भी कहो क्या बेटे निकालें हैं तुमने अपनी छूट से आह्हः क्या लुंड हैं इन दोनों के..

मौसी ने मेटे लुंड पर उछालते हुए कहा वहीं मैं सर आगे उठाकर उनकी चूचियों को पि रहा था.

माँ- ुहममम अह्ह्ह्ह सही कहा बन्नो और देख आज जिस छूट से निकले हैं उसे hi छोड़ रहे हैं..

अनुज से चुड़ते हुए माँ बोली...

में- अपने जन्म स्थान की सेवा करना तो हमारा धर्म है माँ...

मौसी- सही कहा बच्चा अह्हह्ह्ह्ह ऐसे hi हमारी सेवा करते रहना तुम दोनों अपने अपने लुन्डों से...

अनुज- ओह्ह्ह्ह ये भी कोई कहने की बात है मौसी... अह्ह्ह मुझे तो लगता है मैं झड़ने वाला हुन्न्न. अह्ह्ह भैया सुनो...

में- अह्ह्ह्ह हाँ ...

अनुज- अदला बदली कर लेते हैं अगर लगातार छोड़ता रहा तो मैं झाड़ जाऊंगा और इतनी जल्दी झड़ना नहीं चाहता.

मौसी- हाँ बच्चो ये सही रहेगा बस आज तुम्हे हम दोनों औरतों को शांत करके hi चैन लेने देंगे हम..

अनुज ने माँ की छूट से लुंड निकल और मौसी भी मेरे ऊपर से हैट गयी मैं खड़ा हुआ तो अनुज ने उसी जगह मौसी को लिटा दिया और खुद उनकी टैंगो के बीच आ गया और अपना लुंड मौसी की छूट पर रखकर घुसा दिया, और हलके हलके धक्कों से चुदाई शुरू कर दी.

मैं अनुज की जगह बिस्तर पर बैठ गया और फिर माँ मेरे ऊपर वैसे hi बैठ गयी जैसे मौसी बैठी थी और फिर माँ ने लुंड को अपनी छूट में लगाया और फिर ऊपर नीचे होने लगी.. एक बार फिर से कमरे में वही चुदाई का तूफ़ान आ गया.. माँ और मौसी दोनों hi काफी उत्तेजित थी माँ तो मेरे लुंड पर अपनी छूट को उछाल उछाल कर जिस तेज़ी से पटक रही थी उसी से उनकी उत्तेजना का अंदाज़ा लगाया जा सकता था...





मौसी अनुज से चुड़ते हुए अपने छूट के डेन को रगड़ कर अपने मज़े को और बढ़ा रही थी....

दोनों बहनें हम दोनों भाइयों से अपनी छूट की कुटाई करवा रही थी जिसमे हम दोनों को बेहद मज़ा आ रहा था...

माँ की छूट तो मेरे लुंड को ऐसे निचोड़ रही थी जैसे आज hi सारा रास पि जाना चाहती हो... वहीं अनुज अपना अब तक का पूरा अनुभव इस्तेमाल करके मौसी को आनंद की प्राप्ति करवा रहा था.. और उस आनंद की प्राप्ति का नतीजा ये हुआ की मौसी अनुज के लुंड पर एक बार झाड़ भी गयी और जिस रफ़्तार से माँ अपने चूतड़ों को मेरे लुंड पर मार रही थी माँ भी झड़ने के करीब hi लग रही थी.

यहाँ माँ मेरे लुंड पर कूद रही थी वहीं पापा यहाँ से कुछ hi दूर एक बंद कमरे में एक करवट पर लेते हुए थे और पल्ली के पीछे लेटकर उसकी तंग गांड मार रहे थे वहीं पल्ली के पापा को आज नशे में कुछ नया सूझा था वो अपनी बेटी से अपनी गांड चटवा रहे थे और पल्ली भी अपनी जीभ को अपने पापा की गांड में घुसा घुसा कर चाट रही थी...

घर के दुसरे कमरे में मौसा जी तो आज जैसे जन्नत में hi थे क्यूंकि एक तो ममता चची जैसी औरत उन्हें छोड़ने को मिली थी साथ hi पहले छूट का सुख मिलने के बाद चची ने अपनी गांड के दरवाज़े भी उनके लिए खोल दिए थे और इस समय वो चची को घोड़ी बनाये अपने लुंड को चची की गांड की सैर करवा रहे थे...

मौसा उधर चची की गांड की सैर कर रहे थे तो इधर उनकी बीवी की गांड में अनुज का लुंड अंदर बहार हो रहा था...





झड़ने के बाद मौसी ने इच्छा जताई थी की उनकी गांड में भी खुजली हो रही है बस फिट क्या था अनुज ने बिना इंतज़ार किये उनकी ये ीचा भी पूरी कर दी थी....

अनुज- ओह्ह्ह्ह मौसीईईई तुम्हारी चुत से तो कैसे भी बच गया पर लगता है गांड तो रास निचोड़ कर hi छोड़ेगी...

मौसी- हाँ बच्चा बहुत प्यासी है तेरे रास की आज इसकी प्यास मिटा देना मेरी गांड का सूखा ख़त्म कर देना ...

मौसी अनुज से गांड मरवाते हुए अपनी छूट को उंगलियों से मसलते हुए बोली

अनुज- हाँ बिलकुल मौसी ओह्ह्ह्हह्हह...

अब जब छोटी बहन गांड मरवा रही हो अपने भांजे से तो बड़ी कैसे पीछे रहती माँ भी झड़ने के बाद मेरे ऊपर से उठी पर फिर दूसरी और घूम कर मेरे पैरों की और चेहरा किआ और हाथ पीछे लेजाकर लुंड को पकड़ा और फिर अपनी गांड के कैसे हुए छेद पर लगाया और फिर धीरे धीरे से नीचे होने लगी. और मेरे लुंड को गांड में लेने लगी..





धीरे धीरे करके माँ ने मेरे लुंड को अपनी गांड में समां लिए.. आह्ह्ह्हह माँ की गरम मखमली गांड में मेरा लुंड होने पर जो एहसास मुझे हो रहा था वो जन्नत से काम नहीं था.. एक बेटे के लिए परं आनंद यही है जो मुझे प्राप्त हो रहा था अपनी माँ की गांड मरने का.. और जब माँ मेरी माँ जैसी हो तो क्या hi बात है.

मेरे बगल में अनुज मौसी की गांड की गहराई अपने लुंड से नाप रहा था...

में- आह्ह्ह्हह माहहहह ओह्ह्ह्ह बहुत मज़ा आ रहा है..

माँ- हमें भीईईई बेटाहः तेरा लुंड गांड में लेने में हमेशा hi एक मीठा सा दर्द होता है हमें ..

मौसी- हाँ जीजी क्यों इन दोनों के लुंड nahiiiiiiiiiiiiiiii मुसल हैं... अह्हह्ह्ह्ह अनुज का लुंड तो मेरी गांड को लगता है फाड़ hi देगा..

अनुज- मेरा तो तब भी भैया से थोड़ा छोटा है मौसी...

माँ- पर तेरा भी काम नहीं है रे अनुज अछि खासी औरत की चीखें निकल सकता है तू.

अनुज- जैसे अभी मौसी की निकल रही हैं हेहेहे.

मौसी- अपनी मौसी की गांड में लुंड घुसाए हुए भी इसे मज़ाक सूझ रहा है...

माँ- इसके मज़ाक और इसकी बातें कभी ख़त्म होते हैं क्या.. अह्ह्ह्ह

माँ ने धीरे धीरे मुझसे गांड मरवाते हुए कहा माँ मुझ पर पीछे की और होकर लेती हुई थी और मैं नीचे से धक्के लगते हुए अपनी माँ की गांड नार रहा था, और साथ hi माँ की छूट को भी सहला रहा था जिससे माँ की रह रहकर सिसकियाँ निकल रही थी.





वहीं बगल में अनुज अब तेज़ी से मौसी की गांड मार रहा था उसके हर धक्के पर मौसी की चूचियां नाच रही थी साथ hi उनके मुँह से लगातार सिसकियाँ निकलती जा रही थी..

मौसी- अह्ह्ह अह्ह्ह अह्ह्ह अह्ह्ह अह्ह्ह अह्ह्ह्हह्हह लल्लाहहह ओह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह हाआआअआनंनं ऐसे ीे हीईई.

अनुज क्र चेहरे से पता चल रहा था की वो स्खलन के कितने करीब है वो गुर्राता हुआ मौसी की गांड मारे जा रहा था...

और कुछ देर बाद एक दबी हुई आवाज़ के साथ अनुज ने मौसी की गांड में 4-5 धक्के लगाए और फिर ahhhhhhhhhh की सिसकी के साथ झड़ने लगा... उसके रास की पिचकारी ने मौसी की गांड को सींच दिया अनुज ने मौसी की गांड को अपने रास से भर दिया और फिर लुंड निकल कर बगल में बैठ कर हांफने लगा...

मौसी- हाय ढैय्या जीजी इसने तो हमारी जान hi निकल दी... और लुंड देखो इसका अब भी बिलकुल वैसर hi खड़ा है.

माँ- यही तो जवानी का जोश है banno..mmmfff.

माँ इसके आगे कुछ बोल पति की अनुज तब तक उठकर हमारे पास आ चूका था और उसने अपने रास से सना हुआ लुंड माँ के मुँह में घुसा दिया जिसे माँ चूसकर साफ़ करने लगी...

अनुज- ओह्ह्ह्ह माह आह चूसो आह्हः साफ़ कार्डो मेरे लुंड को इसपर मौसी की गांड का स्वाद भी मिल रहा होगा तुम्हे...

मैं नीचे से लगातार माँ की गांड मरे जा रहा था....

मौसी- ओह्ह जीजी अपने दोनों बेटों के लुन्डों को एक साथ संभालती हुई तुम बड़ी सुन्दर लगती हो...

माँ बेचारी क्या बोलती मुँह में लुंड जो घुसा हुआ था..

में- अरे मौसी माँ और तुम कुछ भी करो सुन्दर hi लगती हो...

मौसी- बड़ा मस्का लगा रहा है माँ और मौसी को कुछ चाहिए क्या..

मौसी ने हमारे पास आते हुए कहा..

में- हाँ तुम दोनों की गांड.

ये सुनकर सब हंसने लगे

मौसी- ऐ अनुज ज़रा हैट तो..

मौसी ने अनुज को माँ के आगे से हटाया और फिर मेरे और माँ के ऊपर आ कर कड़ी हो गयी और फिर माँ का चेहरा पकड़ कर अपनी गांड को उनके मुँह पर रख दिया...

मौसी- ओह्ह्ह जीजी मेरी गांड का स्वाद अनुज के लुंड से तो ले लिए अब सीधा मेरी गांड से भी ले लो...

माँ ने भी अपना मुँह खोल कर मौसी की गांड से लगा दिया जिसमे से अब भी रिस रिस कर अनुज का रास बहार आ रहा था जिसे माँ बड़े चौ से चाटने लगी और फिर अपनी जीभ को नुकीला करके मौसी की गांड में घुसा कर चाटने लगी..

ये नज़ारा देखकर तो मैं और उत्तेजित हो गया और माँ की छूट मसलते हुए नीचे से उनकी गांड मरने लगा..

अनुज ने मौसी को थोड़ा आगे झुककर अपना लुंड उनके मुँह के पास कर दिया जिसे मौसी चूसने लगी..

अब नज़ारा कुछ ऐसा था की मैं बिस्तर पर बैठा था माँ मेरी और पीठ करके मेरे लुंड को गांड में लेकर उछाल रही थी वहीं उनके मुँह पर मौसी की गांड थी जिसे माँ चाट रही थी और वहीं मौसी माँ से गांड मरवाते हुए आगे झुककर अनुज का लुंड चूस रही थी.

मैं भी अब काफी उत्तेजित हो गया था और तेज़ तेज़ धक्कों से माँ की गांड मार रहा था जिसका नतीजा ये हुआ की माँ कुछ hi पालो में मेरे लुंड पर झड़ने लगी..

माँ के झड़ने से उनका बदन अकड़ा साथ hi उनकी गांड मेरे लुंड पर और कास गयी जिसके बाद मैं भी खुद को रोक नहीं पाया और माँ की गांड में अपने रास की पिचकारी छोड़ने लगा.. वहीं माँ भी झड़ने के बाद मेटे ऊपर पीछे की और गिर गयी थी.. और उनका मुँह भी मौसी की गांड से हैट गया... जिसके बाद मौसी भी अपनी बहन के ऊपर से हैट गयी...

मेरा लुंड अब भी माँ की गांड में धंसा हुआ था और मैंने एक एक बूँद माँ की गांड में.. मैं और माँ आँखें बंद करके गहरी गहरी सांस लेने लगे उसके बाद मुझे महसूस हुआ की मेरा लुंड माँ की गांड से निकला और फिर एक गरम चिकना सा एहसास लुंड पर हुआ मैं समझ गया की मौसी ने मेरा लुंड अपने मुँह में लिए है,

अपनी बहन की गांड से निकले हुए लुंड को मौसी बड़े चौ से चाट और चूस रही थी..

मेरे लुंड को साफ़ करने के बाद मौसी ने माँ की गांड पर अपने होंठ भिड़ा दिए और अब तक जैसे माँ ने मौसी की गांड चाटकर अनुज का रास पिया था अब मौसी उसी का बदला माँ की गांड से मेरा रास चाट कर देने लगी... दो बहनों का इतना गहरा प्यार कहीं कहीं hi देखने को मिलता होगा और हम नसीब वाले थे की हमारे घर में ऐसा हो रहा था..

अनुज की तरह hi मेरा लुंड भी झड़ने के बाद ज्यों का त्यों था और हो भी क्यों न जब सामने माँ और मौसी जैसी कामुक औरतें नंगी हो तो लुंड सिर्फ एक बार झाड़ के तो बैठने से रहा...

मौसी ने जी भर के माँ की गांड को छाता और उसके बाद उनका ध्यान बापिस हम दोनों भाइयों पर गया या कहो हमारे लौडों पर गया, माँ तो बस आराम से वहीं लेट कर आराम करने लगी..

माँ के पास से हैट कर मौसी हमारे पास आई और मुझे बापिस बिस्तर पर बैठा कर बापिस मेरे ऊपर चढ़ गयी और मेरे लुंड को छूट में लेकर उछलने लगी.

मौसी- एक दो बार की चुदाई से मेरा कुछ नहीं होने वाला बच्चों आज तो तुम दोनों को निचोड़ के hi मानूंगी.

में- बिलकुल मौसी हम भी यही चाहते हैं की तुम हमें निचोड़ डालो.

अनुज ने मौसी को मेरे साथ देखा तो वो माँ के पास गया और अपने लुंड को उनके मुँह के सामने कर दिया माँ वैसे hi लेते लेते hi उसका लुंड चूसने लगी...

अनुज माँ से लुंड चूसते हुए मेरी और मौसी की चुदाई देख रहा था..

मौसी अपनी गांड को मेरे लुंड पर उछाल रही थी...

तभी लुंड चूसते हुय्र अनुज ने मुझे कुछ इशारा किआ मैं समझ गया वो क्या चाहता है और फिर मैंने मौसी को बाहों में जकड लिए और उन्हें खुद से चिपका लिए और नीचे से छोड़ने लगा.

मौसी- अह्ह्ह्हह्हह अह्ह्ह्हह्हह लल्लाहहह अह्हह्ह्ह्ह ऐसे hi मज़ाआ आ रहा है..

मैं मौसी को ऐसे लगातार छोड़ रहा था तो अनुज ने माँ के मुँह से लुंड निकला और माँ को देखने का इशारा किआ और चुप रहने का भी.. और वो मेरे और मौसी के पास आ गया, माँ भी सर उठाकर ध्यान से देखने लगी.. मौसी का सर मेरे कंधे पर था तो उन्हें अपने पीछे का कुछ नहीं दिख रहा था.. इसी का फायदा उठाते हुए अनुज ने मौसी के पीछे और मेरी टैंगो के बीच जगह ली... मैंने भी उसे तैयार देख मौसी के चूतड़ों को पकड़ कर फैला दिया साथ hi अपने धक्कों को थोड़ा हल्का कर लिए जिससे हम लोग ज़्यादा हिलें न..

अनुज ने फिर आगे बढ़ते हुए अपनर लुंड को पकड़ के मौसी की गांड के छेड़ पर टिकाया और इससे पहले मौसी कुछ समझती अंदर सरका दिया मैंने मौसी को होंठों को अपने होंठों में भर लिए नहीं तो पक्का उनकी चीख बहार तक जाती.. अनुज ने भी बिना देर किये हलके हलके धक्के लगाकर आधे से ज़्यादा लुंड मौसी की गांड में घुसा दिया था.. मैंने मौसी के होंठों को chhoda.maa बड़े ध्यान से अपनी बहन को दो लुंड एक साथ लेते हुए देख रही थी साथ hi अपनी छूट घिस रही थी..

मौसी- ओह्ह्ह आह्ह्ह्हह्ह्ह्हह तुम दोनों बहुत्तट्ठ कमीने हो ऐसे अच्छाआ अह्ह्ह अचानक से घुसआए दिया आह्ह्ह्हह जेईजीई देखलूओ अपने लाड़लूं कोउआह्ह्ह्ह.

मौसी की बात सुनकर माँ भी थोड़ा करीब आकर बैठ गयी..

माँ- तकलीफ हो रही है बन्नो तो बता बोलूं इन दोनों को निकलने से...

मौसी- nahiiiiiiiiiiiiiiii जीजी अह्ह्ह्ह बिलकुल भी नहीं निकालना नहीं है... अह्हह्ह्ह्ह ऐसा एहसास आज तक नहीं हुआ jeeejiiiiiiiiii ahhhhhhhhhh इतना भरा हुआ लग रहा है अह्ह्ह

मौसी की बात सुनकर मैंने और अनुज ने आगे की प्रक्रिया शुरू की और शुरुआत में धीरे धीरे धक्के लगाकर और एक लाया बनाकर मौसी के छेदों में लुंड अंदर बहार करने लगे...

मौसी की सिसकियाँ हर धक्के के साथ बढाती जा रही थी.

माँ- कैसा लग रहा है बन्नो दो दो लौड़े अपने अंदर लेकर

माँ इस नज़ारे को देखकर गरम होकर अपनी छूट सहलाते हुए बोली..

मौसी- ahhhhhhhhhh जीजी अह्ह्ह ऐसा एहसास कभी नहीं हुआ लग रहा है इस आनंद से मेरी जान hi न निकल जाये कहीं.

माँ- हाय इतना मज़ा आ रहा है तुझे...

मौसी- हाँ जीजी आह्हः मेरे बच्चों छोड़ो ऐसे ीे hi अपनी मौसी को..

मौसी की बात सुनकर हम दोनों की गति भी थोड़ी बढ़ गई और हम तेजी से मौसी को छोड़ने लगे





माँ बगल में बैठकर अपनी छूट सहलाते हुए अपनी बहन को अपने बेटों से चुड़ते हुए देख रही थी...

माँ- तुम दोनों को देखकर लगता है बाहर बार अभ्यास किआ है तुमने इसका..

अनुज- और क्या माँ ममता चाची पल्ली पूर्वी दीदी प्रेमा भाभी यहाँ तक की बुआ और मंजू तै सबने अभ्यास करवाया है.

अनुज ने हँसते हुए जवाब दिया...

मौसी- हाँ बच्चो ाआज अपणाः सारा अनुभव दिखादो मुझ पर अह्ह्ह्ह

मौसी तो दोहरे हमले से बिलकुल पागल सी होती जा रही थी एक साथ दो दो लुंड लेकर उन्हें जो आनंद मिल रहा था वो पहले कभी नहीं मिला था..

और उसी के नतीजा ये हुआ की मौसी ज़्यादा देर खुद को संभल नहीं पाई और थरथराते हुए झड़ने लगी.. और उनके स्खलन की तीव्रता से पता चल रहा था की इस दोहरी चुदाई से उन्हें कितना मज़ा आया था एक पल को तो लगा वो कहीं बेहोश न हो जाएं, झड़ने के बाद मौसी बिलकुल बेजान सी होकर मेरे ऊपर गयी. ये देख अनुज ने उनकी गांड से लुंड निकला और मैंने मौसी को उठाकर एक तरफ आराम से लिटा दिया मैंने पलट कर देखा तो पाया अनुज माँ से लुंड चुसवा रहा था मैं भी माँ के पास आकर खड़ा हो गया और माँ हम दोनों भाइयों के लुंड बरी बरी से चूसने लगी...

कुछ देर चूसने के बाद माँ ने लुंड मुँह से निकले और मुझे बिस्तर पर बैठते हुए मेरे लुंड को अपनी छूट में लेकर बोली..

माँ- बच्चों जैसे मौसी को एक साथ छोड़ा माँ को नहीं छोड़ोगे..

अनुज- क्या माँ सच में तुम भी हमसे साथ में छुडवाओगी,

माँ- हाँ आखिर मुझे भी दिखाओ. कितना मज़ा आता है दो लुंड एक साथ लेने में..

में- हाँ माँ बिलकुल दिखाएंगे बहुत मज़ा आएगा, मैं तो कबसे इंतज़ार में था इसके.

अनुज- हाँ मैं भी सोचता था की माँ को कभी साथ में छोड़ने का मौका मिले आज मेरी इच्छा पूरी होने वाली है..

माँ- आजा फिर करले अपनी इच्छा पूरी बीटा...

माँ मेरा लुंड छूट में लिए हुए आगे हो गयी और मेरे होंठों को चूसने लगी, मैंने भी हाथ नीचे लेजाकर माँ के चूतड़ों को अनुज के लिए फैलाया..

अनुज ने माँ के पीछे जगह बनाई और अपने लुंड को माँ की गांड पर रखकर बोलै..

अनुज- माँ तैयार हो..

माँ ने मेरे होंठों को छोड़ा और बोली- इससे ज़्यादा कभी तैयार नहीं होउंगी लल्लाहहह..

अनुज ने माँ की बात को सुना और फिर एक धक्का लगाया और उसका लुंड माँ की गांड को फैलता हुआ अंदर घुस गया जिसका एहसास मुझे भी माँ की छूट में फंसे हुए लुंड पर हुआ...

माँ- ुहममम aaaaaahhhhhhhhhh ओह्ह्ह्हह्ह लल्लाहहह ओह्ह्ह्ह..

माँ दोनों लुंड घुसते hi तड़पने लगी...

मौसी भी सर उठाकर अपनी बहन को अपने दोनों बेटों के लुंड लेते हुए देख रही थी...

में- कैसा लग रहा है माँ..?

माँ- आह्ह्ह्हह लल्लाहहह पूछ hi मत्तत्त अह्ह्ह्ह अब्ब्ब शालू की हालत समझ पाहहह रही हूँ, ईईईई मठाआआंआ दर्द ahhhhhhhhhh...

मौसी- जीजी बस थोड़ा रुको फिर देखना मज़ाआ..

माँ- हांण अह्ह्ह बन्नो रुकी हूंणनहहहह इतना भरा एहसास आह्हः लड़ो देख मेरे दोनोंओओओओ बेटी आह्ह्ह्हह आज बापिस मुझमे समाये हुए हैं...

मौसी- हननननन jeeejiiiiiiiiii ले लो अपने बेटों को बापिस अपनर अंडररर आखिर तुंहारा हक़ बनता है..

माँ को सही देखकर मैंने और अनुज ने ले बनाकर धक्के लगाना शुरू किया... और माँ की दोहरी चुदाई करने लगे..

माँ- आह्ह्ह्हह लल्लाहहह बहुत्तट्ठ मज़ाआ आ रहा है आह्ह्ह्हह ohhhhhhhhhh माहहहह..

अनुज- ओह्ह्ह्ह मा मुझे भी बहुत मज़ा आ रहा है तुम्हे भैया के साथ छोड़कर..

में- हाँ माँ तुम्हारी छूट और कासी हुई है गांड में अनुज के लुंड की वजह से...

माँ तो दोहरी चुदाई से अलग hi दुनिया में थी उनकी उत्तेजना का अंदाज़ा उनकी सिसकियों से और उनके चेहरे के भावो से लगाया जा सकता था...

मौसी भी उठकर बगल में बैठ कर अपनी बहन की दोहरी चुदाई देखते हुए आहें भर रही थी..

माँ- आह्ह्ह्हह तुम दोनों क्या हलके हलके छोड़ रहे हो, और तेज़ छोड़ो अपनी रंडी माँ को दिखादो उसे अपने लौडों का दम अह्ह्ह..

माँ उत्तेजित होकर बड़बड़ा रही थी पर माँ की बात मन्ना hi बेटों का फ़र्ज़ है इसलिए हम दोनों ने जल्दी hi गति बाधादि एयर तेज़ी से माँ को छोड़ने लगे





माँ- आह्ह्ह्हह लल्लाहहह ओह्ह्ह्ह अनुज ahhhhhhhhhh ऐसी हीई...

माँ को एक साथ छोड़ने की वजह से हम दोनों भी बहुत उत्तेजित थे हर धक्के के साथ हमारी उत्तेजना बढाती जा रही थी...

माँ- ओह्ह्ह लाडो बन्नो देख अपनी रंडी बहन को अह्ह्ह्ह अपने दोनों बेटों से एक साथ चुद रही है ahhhhhhhhhh देख...

मौसी- हाँ जीजी हम दोनों बहनें रंडी हैं अपने दोनों बच्चों की आह्ह्ह्ह इनके लौडों की गुलाम हैं.

मौसी अपनी छूट को उंगलियों से छोड़ते हुए बोली...

माँ और मौसी की बातें सुनकर मैं और अनुज और उत्तेजित होते जा रहे थे... जिसका असर हमारी गति पर भी पद रहा था... और उटंर hi हम माँ को बुरी तरह छोड़ रहे थे...

और इस तूफानी चुदाई का नतीजा ये हुआ की माँ जल्दी hi अपने चरम शिखर पर पहुँच गयी और फिर उनका बदन अकड़ गया, पूरा बदन कांपने लगा, अगर हमें लगा था की मौसी का स्खलन काफी दुमदार था तो माँ को झड़ते देख तो मौसी का झड़ना भी काम लग रहा था...

माँ की आवाज़ जैसे गले में घुट सी गयी उनका पूरा बदन अकड़ते हुए थरथरा रहा था वो तो हम दोनों ने उन्हें पकड़ा हुआ था नहीं तो वो पक्का गिर जाती... और फिर मुझे मेरे लुंड पर दवाब महसूस हुआ तो मैंने माँ को हल्का सा उठाकर अपना लुंड उनकी छूट से निकला तो अचानक से माँ की कमर थरथराई और एक तेज़ धार माँ की छूट से निकली और मेरे चेहरे से होती हुई मेरे सीने और पेट पर गिरी, ये माँ का मूट था , .

मौसी- हाय ढैय्या तुम दोनों भाइयों ने छोड़ छोड़ कर अपनी माँ का मूट निकल दिया..

मौसी के इस बात से न जाने मुझे क्या हुआ की मैंने दोबारा लुंड माँ की छूट में घुसा दिया और फिर बहुत तेज़ी से धक्के लगाने लगा अनुज का भी यही हाल था और करीब एक मिनट बाद hi मैंने अपना रास माँ की छूट में छोड़ दिया और अनुज ने उनकी गांड में... और हम तीनो कुछ देर यूँ hi स्थिर पड़े रहे हम दोनों के लुंड अब भी माँ के अंदर थे. थोड़ी देर बाद अनुज ने अपना लुंड माँ की गांड से निकला और उन्हें उठाकर साइड में लिटा दिया पर तभी मौसी ंद कुछ ऐसा किया जिससे मैं हैरान रह गया..

मौसी मेरे पास आकर मेरे चेहरे और बदन से माँ के मूट को चाटने लगी.. मौसी अपनी बहन के मूट को मेरे ऊपर से चाट रही थी ये देखकर hi एक अलग एहसास हुआ ... माँ तो बेचारी बेसुध होकर पड़ी थी उनकी छूट और गांड से हम दोनों का रास बाह कर बहार आ रहा था जिसपर मेरे बदन के बाद मौसी टूट पड़ी और माँ की छूट और गांड को चाट के साफ़ करने लगी पर माँ तो बेचारी सो गयी थी उनके ऊपर मौसी के उनकी छूट गांड चाटने का कोई एहसास नहीं हुआ.. पहली बार दोहरी चुदाई हुई थी वो भी इतनी दुमदार मौसी भी थकी हुई लग रही थी मैं और अनुज एक बार और चुदाई के मन में थे पर फिर माँ और मौसी की हालत देखकर ख्याल जाने दिया और फिर हम सब वैसे hi एक दुसरे से चिपक के सो गए..

इसके बाद क्या हुआ अगली अपडेट में प्लीज कमैंट्स करके ज़रूर बताएं कैसी लगी अपडेट बहुत बहुत धन्यवाद्

..
 
सभी को 700 पेज पूरे होने पर बहुत बहुत बधाई एवं धन्यवाद
 
अपडेट 171
सरलपुर

(अपडेट 169 से आगे)

चेतन शोरूम के काउंटर पर बैठा हुआ था पर उसका मन आज शोरूम काम में लग hi नहीं रहा था, रह रह कर उसके दिमाग में रिमझिम का अधनंगा बदन आ रहा था, वो बार बार उसके ख्याल को दिमाग सर निकलने की कोशिश करता पर बार बार असफल हो जाता. वहीं उसका लुंड बस ख्याल मात्रा से खड़ा हो जाता जिसे शोरूम में छुपाना बड़ा मुश्किल हो रहा था..

पर चेतन को मन में ग्लानि हो रही थी की अपने भाई की पत्नी के बारे में उसके मन में ऐसे ख्याल आ रहर हैं..

अंत में उसने मौका निकला और अपने तने हुए लुंड को किसी तरह से पंत में छुपकर शोरूम के पीछे बने बाथरूम में घुस गया, और वहां पंत खोल कर कच्चे से लुंड निकल कर मुठियाने लगा उसने आँखें बंद की और अपनी पत्नी के बारे में सोचने की कोशिश की पर अगले hi पल उसकी आँखों के सामने फिर से वहीं रिमझिम का अधनंगा बदन था पर अब चेतन भी रुक नहीं सकता था तो उसने मुठ मरना जारी रखा और रिमझिम के बारे में सोचते हुए मुठियाने लगा...





अह्ह्ह्ह क्या चूचियां थी बिलकुल गोल गोल भरी हुई गोरा चिकना सपाट पेट गहरी गोल नाभि जिसे याद करते hi उसके मुँह में पानी आ गया और फिर नीचे कमर का फैलाव... अह्ह्ह मज़ा hi आ गया उसे देखकर.. अह्ह्ह नंगी तो और मस्त दिखती होगी उसकी छूछीयो को चूसने में क्या मज़ा आएगा, या उसके गुलाबी होंठों के बीच अपना लुंड फंसा कर चुसवाने में और ऐसे hi ख्याल सोचते सोचते कुछ hi पलों में उसके लुंड ने पिचकारी मार दी.. तब जाकर उसका लुंड थोड़ा शांत हुआ तो उसके मन को दोबारा ग्लानि के भाव ने घेर लिए.

उसने खुद का ध्यान काम पर लगाने की कोशिश की साथ हु ये भी सोचा की उसे कुछ करना होगा जिससे उसके मन से रिमझिम का ख्याल चला जाये.. वैसे भी उसकी अपनी पत्नी किसी से काम नहीं थी.. ये सोचकर उसने पूरा दिन निकला.. जहाँ चेतन दुकान पर रहकर परेशां था तो वहीं उसकी पत्नी दिन भर सुबह जो हुआ उसके बारे में सोच सोचकर. एक तो जो कुछ उसने ख़ुशी और रिमझिम के बीच देखा और फिर पापा जी ने उसे जिस हालत में देखा जिस वजह से वो पूरे दिन अपने ससुर से नज़र मिलाने और उनके सामने जाने में कटरा रही थी...

शाम को दोनों बहुएं रसोई में लगी हुई थी रिमझिम बिलकुल रोज़ की तरह हंस खेल कर बातें कर रही थी पर चंचल अपने hi सवालों में डूबी हुई थी उसका मन हो रहा था की अभी रिमझिम से जो उसने देखा उसके बारे में पूछ ले पर उसकी हिम्मत नहीं हो रही thi...use समझ नहीं आ रहा था क्या बोले क्या कहे फिर भी उससे रहा नहीं गया तो बात को शुरू करते हुए बोली..

चंचल- अरे रिम्मी, तू रात ख़ुशी के साथ सोइ थी क्या उसके कमरे में..

रिमझिम एक प्सल तो उसके सवाल से चौंकी फिर सँभालते हुए बोली - हहह हाँ जीजी वो कल रात तक ये आये नहीं थे तो मैं ख़ुशी के साथ सो गयी ये आये रात में लेट तो मैब फिर वहीं सोती रही..

चंचल- हाँ तुझसे अकेले कहाँ सोया जाता है, पति नहीं तो ननद hi सही..

चंचल ने बात को मज़ाक में घूमते हुए बोलै.

रिमझिम भी कहाँ काम थी- अब क्या करूँ जीजी ब्याह अकेले सोने के लिए थोड़े hi किया है..

चंचल को भी उसकी बात पर हंसी आ गयी फिर मज़ाक आगे बढ़ाते हुए बोली - तो क्या पति वाले सरे काम भी करवा लिए ख़ुशी से.

चंचल के ये कहने पर रिमझिम थोड़ी चौंकी ज़रूर और उसे शक हुआ कहीं जीजी ने उसे और ख़ुशी को देख तो नहीं लिया पर चंचल के चेहरे पर उस मज़ाक के भाव hi दिखे तो उसने ज़्यादा नहीं सोचा..

रिम - कहाँ जीजी ख़ुशी बेचारी के पास वो हथियार hi कहाँ जो हमारी प्यास मार सके..

चंचल- कितनी बिगड़ती जा रही है तू..

रिमझिम ने अपना काम छोड़ा और मज़ाक में पीछे से चंचल को बाहों में भर लिया और उसकी साड़ी में हाथ घुसा कर उसके पेट को सहलाते हुए बोली - तुम क्यों गुस्सा करती हो जीजी आज तुम्हारे साथ सो जाउंगी...

रिमझिम की हरकत से चंचल बिलकुल सिहर गयी साथ hi उसे ख़ुशी और रिमझिम का दृश्य याद आ गया जिसके साथ hi चंचल की छूट पनिया उठी...

चंचल- क्या कर रही है छोड़ काम पड़ा है इतना.

रिम- ाचा अगर भैया ऐसे पकड़ते हैं तो मन नहीं करती.

चंचल- तू बहुत शरारती होती जा रही है..

रिम- अभी शरारत तो की hi नहीं है जीजी

ये कहकर रिम ने चेहरा आगे कर चंचल के गाल को चूम लिया और फिर खिलखिलाकर हँसते हुए काम में लग गयी..

जहाँ रिमझिम तो मज़ाक कर के हैट गयी वहीं चंचल तो इस मज़ाक से अंदर तक सिहर गयी न जाने क्यों उसे लग रहा था की उसे अकेला छोड़ा जा रहा है, उसका मन न जाने क्यों छह रहा था की रिमझिम और ख़ुशी के बीच जितनी घनिश्ता है मेरे साथ क्यों नहीं, जबकि मैं इस घर में पहले आई हूँ तब भी ख़ुशी और रिमझिम इतने करीब हो गए एक दुसरे के वो सब करते हैं साथ में जिसके बारे में उसने कभी सोचा भी नहीं था..

चंचल के मन में एक अलग सा भाव आ रहा था उसे लग रहा था की वो अलग सी होती जा रही है.. फिर उसने खुद के सर को झटक कर अपना ध्यान काम पर लगाया पर बार बार वो रिमझिम को देखे जा रही थी उसे भी नहीं पता था क्यों..

खैर यहाँ ऐसे hi समय बीता खाना पीना बन कर तैयार हुआ तब तक सब घर आ चुके थे खाना कहते हुए और खिलते हुए औपचारिक बातों के अलावा सब के मन में उथल पुथल मची हुई थी, रमन नज़रें छुपा कर बात बार ख़ुशी को देख रहा था रात में जो हुआ और उसने अपनी बहन को जिस हालत में देखा वो उसे भुला नहीं पा रहा था, वहीं ख़ुशी भी अपने भाई से नज़रें चुरा रही थी, रिमझिम को न चाहते हुए भी चेतन देख रहा था और उसे साड़ी में ढंकी हुई रिमझिम को देखकर अब भी ब्रा पंतय में नज़र आ रही थी, रिमझिम जो थोड़ा शर्माने का नाटक ज़रूर कर रही थी पर उसे कोई ज़्यादा फ़र्क़ नहीं पद रहा था, वहीं उस पर सिर्फ चेतन की hi नज़र नहीं थी, उसकी जेठानी चंचल भी बार बार रिमझिम को कनखियों से निहारती तो कभी ख़ुशी को पर अभी दोनों hi बिलकुल मासूम और सामान्य लग रहे थे...

जहाँ चंचल की नज़र ख़ुशी और रिमझिम पर थी वहीं उस पर भी किसी की नज़रें तिकी हुई थी वो थी उसके ससुर जी क, चरण सिंह अपनी बहु के साथ हुए सुबह वाली घटना को भुला नहीं पा रहे थे और रह रह कर उसे याद करते हुए बड़ी बहु को छुप छुप कर निहार रहे थे.

बहार से पूरा परिवार बिलकुल साधारण परिवार की तरह खाना खा रहा था पर सबके मन में एक अलग hi द्वन्द चल रहा था...

खाना ख़त्म हुआ तो सब अपने अपने कमरे की और बढे और बहुएं रसोई का काम निपटने लगी.. और सारा काम निपटने के बाद वो भी अपने अपने कमरे की और बढ़ गयी..

जैसे hi चंचल अपने कमरे में घुसी चेतन ने दरवाज़े को बंद कर जल्दी से उसे पकड़ कर अपनी और खींच लिए..

चंचल- अरे अरे क्या हो गया तुमको बड़े बेसब्री हो रहे हो.

चेतन- बेसब्र तो होऊंगा hi तुम hi तो इतना टाइम लगा देती हो कामो में.. तबसे इंतज़ार कर रहा हूँ मैं.

चंचल- अब टाइम तो रोज़ hi लगता है पतिदेव वैसे आज क्या खास है जो इंतज़ार हो रहा था मेरा.

चेतन- है कुछ खास..

चंचल- ाचा सच्ची मुझे भी बताओ..

चेतन- रुको दिखते हैं..

चेतन ने जल्दी से एक और टेंगा हुआ अपना बैग उतरा और उसमे से एक पैकेट निकल कर चंचल को दिया..

चंचल - ये क्या है.

चेतन- खोल कर देखो..

चंचल ने पैकेट खोला तो उसमे कपडा था जिसे उसने पूरा खोल कर देखा तो उसमे एक झीनी से कपडे की निघ्त्य थी.

चंचल - हायर दिया ये क्या ले आये तुम तुम्हे तो पता है मैं मैक्सी पहनती नहीं और वो भी ऐसी इतनी छोटी और इतनी पतली.

चेतन - अरे मेरी भोली बीवी ये मैक्सी नहीं निघ्त्य है और ये सबके सामने पहनने के लिए नहीं बस खास टाइम के लिए होती है..

चंचल - खास टाइम कैसा खास टाइम?

चेतन- वो वाला खास टाइम.

चेतन ने इशारे करकर कहा तो चंचल समझते hi शर्मा गयी.

चंचल - तुम भी न नयी नयी चीज़ करते रहते हो..

Chetan-usi में तो मज़ा है अब तुम देर मत करो और जल्दी से जाओ और ये पहन कर आओ.

चंचल- क्या अभी?

चेतन- हाँ अभी और अब कोई सवाल नहीं वैसे भी देर हो चुकी है...

चेतन ने चंचल को बाथरूम तक खींचते हुए ले जाते हुए कहा.

और फिर जब चंचल अंदर चली गयी तो बिस्तर पर बैठ कर इंतज़ार करने लगा.

आज दिनभर उसे रिमझिम की ब्रा पंतय के ख्याल ने सताया था तो उसने अपने मन को उससे हटाने का सोचा और फिर उसने सोचा आज चंचल के साथ कुछ खास करता हूँ ..तो अपने दिमाग से रिमझिम का ख्याल हटाने के लिए चेतन ने ये तरीका अपनाया..

चेतन बीएड पर बैठ बेसब्री से इंतज़ार करने लगा और कुछ hi देर में उसका इंतज़ार ख़त्म हुआ और बाथरूम का दरवाज़ा खोल कर चंचल बहार निकली..

चंचल को देख चेतन का मुँह खुला रह गया, चंचल को भी ऐसे कपडे पहन कर एक अलग hi एहसास हो रहा था और वो उत्तेजना महसूस हो रही थी.. और उसी एक ाड़ाः के साथ वो चलते हुए चेतन के सामने आई और कड़ी हो गयी और अपना भरा हुआ बदन उस कामुक छोटी सी निघ्त्य में अपने पति के सामने पेश करते हुए मुस्कुराने लगी.





चेतन का तो अब भी वही हाल था, हमेशा साड़ी में लिपटी हुई उसकी पत्नी इस निघ्त्य में इतनी कामुक और सूंदर लग रही थी की उसने सोचा भी नहीं था, उसके भरे हुए बदन पर वो छोटी सी निघ्त्य कसके आ रही थी, और उसके बदन के हर उतर चढाव को अचर से प्रदर्शित कर रही थी.

चंचल - अब घूरते hi रहोगे या कुछ बोलोगे भी.

चेतन धीरे से खड़ा हुआ और चंचल को अपनी बाहों में भर लिया चंचल भी पति की बाहों में पिघल गयी..

चंचल कुछ दोबारा बोलने hi वाली थी की चेतन ने उसके होंठों को अपने होंठों में भर लिया और उसके शब्दों के साथ साथ उसके होंठों का रास पीने लगा..

दोनों पति पत्नी जो की किसी न किसी वजह से उत्तेजित थे एक दुसरे को पाकर अपनी अपनी उत्तेजना कक प्यास को शांत करने की कोशिश कर रहे थे.

दोनों के hi चुम्बन में वो आक्रामकता देखि जा सकती थी.. खैर काफी देर बाद दोनोहानफटे हुए अलग हुए पर तो चेतन के हाथ चंचल के पूरे बदन को नापने लगे





कभी पत्नी की बड़ी बड़ी छुछियां सहलाता तो कभी हाथ सरकते हुए नीचे उसके नितम्बो को सहलाता... चंचल को भी पति का इस तरह छूना बहुत भ रहा था, सुबह से hi उसके बदन में एक खुजली सी एक अकेलापन सा था पर अब उसे पति के स्पर्श से ाचा लग रहा था...

चंचल को कपड़ो के बीच से अपने बदन पर चेतन के खड़े लुंड का स्पर्श और पागल कर रहा था चेतन ने आगे बढ़ाते हुए निघ्त्य के एक छोर को पकड़ा और धीरे धीरे से ऊपर उठाने लगे और कुछ पलों बाद hi वो निघ्त्य बिस्तर पर पड़ी हुई थी अब चंचल सिर्फ ब्रा पंतय में थी उसे देखकर चेतन के मन में एक बार फिर रिमझिम का ख्याल आ गया वो भी ऐसव hi ब्रा पंतय में थी..

चेतन फिर से चंचल को मसलने लगा और अनायास hi वो मन hi मन चंचल और रिमझिम के बदन की आपस में तुलना करने लगा.. जहाँ रिमझिम का बदन बिलकुल कैसा हुआ था वहीं उसकी पत्नी का भरा हुआ पर एक बात थी की दोनों में से कोई भी किसी से काम नहीं थी.

ये सब सोचते हुए चेतन हर पल उत्तेजित होता जा रहा था और उसी उत्तेजना में उसने चंचल को घुमा कर पीछे से जकड लिए और पेट को मसलते हुए हाथ ऊपर लेजाकर चंचल की बड़ी बड़ी चूचियों को थम लिया आउट उन्हें मसलने लगा..





साथ hi अपने खड़े लुंड को उसने पत्नी के पिछवाड़े में धंसा दिया और उसके बड़े बड़े नितम्बो के बीच लुंड को रगड़ने लगा..

चंचल- अह्ह्ह्ह क्या बात है आज तो कुछ ज़्यादा hi मूड में हो..

चेतन- जिसकी बीवी ऐसी माल हो वो मूड म में hi होगा न हमेशा..

चंचल- ाचा हमेशा? फिर तो हमारी हालत ख़राब हो जाएगी.

चेतन- अब तुम्हे देखकर हमारी हालत ख़राब होती है तो तुम्हारी भी होगी..

जहाँ इस कमरे में चेतन और चंचल एक दुसरे की प्यास बुझा रहे थे वहीं उनके बगल वाले कमरे में चंचल के देवरानी और देवर भी कुछ ऐसे hi काम में लगे हुए थे और हमारे रमन बाबू अपनी पत्नी के ऊपर आकर उसे दाना दान छोड़ रहा था रिमझिम बिस्तर पर लेट कर टंगे फैलाये पति के लुंड के झटको को अपनी छूट में सहते हुए आहें भर रही थी..





रिमझिम की चूचियां हर धक्के के साथ उछाल कूद कर रही थी.. रमन का जोश और उत्तेजना पिछली रात को याद करके hi बड़ी हुई थी कल रात जो उसने देखा था और अपनी बहन के साथ किया था उससे वो बहुत उत्तेजित अब तक था और रिमझिम को छोड़ते हुए भी उसके मन में ख़ुशी का hi प्रतिबिम्ब था.. अपनी बहन के बारे में ऐसे ख्याल से hi उसका लुंड बिलकुल कड़क हो कर फूलनर लगता था, जो की रिमझिम को अपनी छूट में साफ़ महसूस हो रहा था..

वहीं बगल वाले कमरे में बात आगे बढ़ चुकी थी और दोनों पति पत्नी 69 की अवस्था में थे जिसमे चेतन नीचे लेट कर अपने मुँह पर राखी अपनी पत्नी की छूट को चाट रहा था तो चंचल अपनी छूट को पति की जीभ पर घूमती हुई पति के लुंड को गले तक घौंट रही थी, और कुछ देर यूँ hi चाटने चूसने का सिलसिला चला और फिर चेतन ने चंचल को नीचे लिटा कर उसके ऊपर आ गया और ऊपर आकर अपने नंगे लुंड को पत्नी की छूट पर घिसते हुए एक चुकी को मुँह में भर लिए और चूसने लगे





चंचल अपने पति के द्वारा छुच्छी चुसवाने के एहसास से सिसकियाँ ले रही थी चेतन किसी भूखे की तरह उसकी छुच्छी चूस रहा था साथ hi चेतन का लुंड बार बार उसकी गरम रसीली छूट से घिस कर तड़पा रहा था,

जब दोनों बेटे अपनी अपनी पत्नी के साथ अपनी प्यास बुझा रहे थे, तो बाप बेचारे अपने बिस्तर पर लेते हुए अपना लुंड हाथ में लिए उसे सहला रहे थे साथ hi उनकी आँखें बंद थी और बंद आँखों में अपनी बहुओं की छवि थी, कभी छोटी वाली को याद करते तो कभी बड़ी वाली को.. और इसी तरह सोचते सोचते उनके लुंड ने पानी गिरा दिया तब जाकर वो शांत हुए...

अब जब घर के सभी लोग hi काम वासना की आग में जल रहे थे तो घर की राजकुमारी ख़ुशी कैसे बचती वो भी अपने भैया भाभी के साथ बिताये हुए कल रात के लम्हो को याद करके अपनी छूट को सहला रही थी.





ख़ुशी छूट सहलाते हुए अपनी भाभी की बातों को साथ hi अपने भैया के नंगे लुंड को याद कर रही थी..

उसने भले hi भाभी को तब मन कर दिया हो जब रिमझिम ने उसे भैया से छुड़वाने के बारे में कहा था पर अभी वो भैया के लुंड की कल्पना करने से वो खुद को रोक नहीं पा रही थी यहाँ ताकि की उसके मुँह से अह्ह्ह्ह भैया के नाम की सिसकियाँ निकल रही थी, उसे पता था ये सब गलत था पर वो अपनी छूट की प्यास के सामने बिलकुल बेबस महसूस कर रही थी कभी तो उसका मन करता की अभी भैया के कमरे में जाकर उनका लुंड अपनी छूट में भर लूँ और खूब चुदुँ पर ये करने की भी हिम्मत उसमे नहीं थी...

पर जहाँ वो लुंड को छूट में लेने की कल्पना कर रही थी वहीं उसकी बड़ी भाभी उसके बड़े भैया का लुंड सच में छूट में लेकर अपनी छूट की खुजली मिटा रही थी , चंचल पीठ पर लेती हुई थी टंगे मोड़ कर ऊपर थी और जांघों के बीच पति देव थे जो बैठ कर अपने लुंड को तेज़ी से उसकी छूट में अंदर बहार कर रहे थे..





दोनों hi इस चुदाई की आनंद को भोग रहे थे, और वासना की नहर में गोते लगा रहे थे... चेतन के धक्के हर पल के साथ और तेज़ हो रहे थे और चंचल की छूछीयो का उछालना भी, तभी उत्तेजना में चेतन की आँखें बंद हो गयी और वो आँखें बंद करके धक्के लगाने लगे पर आँखें बंद करते hi चेतन के सामने एक बार फिर से रिमझिम का ख्याल आ गया और इस बार चेतन ने रिमझिम को सिर्फ ब्रा पंतय में नहीं देखा बल्कि उनका मन कल्पना करने लगा की वो रिमझिम को छोड़ रहे हैं.. और उसका ख्याल आते hi उनके मन बदन में एक करंट सा दौड़ गया और उसी ऊर्जा मैं चेतन ने कई तगड़े धक्के चंचल की छूट में लगाए और वो धक्के इतने प्रभावशाली थे की चंचल उनका प्रहार न सह पाई और झड़ने लगी.. और चंचल के झड़ने के बाद चेतन भी बिलकुल अपने चरम पर पहुँच गए और गुर्राने लगे.

चेतन- अह्ह्ह्हह्हह ुह्ह्ह्हह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ह्ह्हम्मम्मम्मम्मम अह्ह्ह्हह्हह

और इसी के साथ उनके लुंड ने चंचल की छूट में पिचकारी छोड़ी..

चेतन- ओह्ह्ह्हह्ह ररररीिम्झिइमममममम अह्ह्ह

एक के बाद एक पिचकारी छोड़ने के बाद जब रास की एक एक बूँद को पत्नी की छूट में छोड़ में दिया तो जाकर चेतन शांत हुए और फिर हांफते हुए बगल में लेट गए.

चेतन- अह्ह्ह्हह्हह आज तो मज़ा आ गया...

चंचल- हम्म्म

चंचल ने हम्म जवाब तो दिया पर उसके मन में एक नए तूफ़ान ने जन्म ले लिया था जिसकी खबर चेतन को नहीं थी..

चेतन आराम से लेते हुए थे वहीं चंचल भी लेती हुई थी पर उसका मन बहुत तेज़ दौड़ रहा था जिसकी वजह भी चेतन hi था

क्यूंकि झड़ते हुए चेतन के मुँह से रिमझिम का नाम निकला था जिसे सुनकर चंचल का दिमाग hi घूम गया था..

अब ये एक सिसकी में निकला हुआ नाम आगे क्या क्या तूफ़ान लेन वाला था ये देखने लायक होगा..

चोदामपुर

रात को चाहे ममता राजन का घर हो या कर्मा का दोनों जगह hi जबरदस्त चुदाई का खेल चला था, सभ्य और शालू दोनों बहनों ने जहाँ अनुज और कर्मा से अपने सरे छेदों की अचे से सफाई करवाई थी साथ hi जीवन में पहली बार दोनों hi बहनों ने दो लुंड एक साथ लेने का अनुभव प्राप्त. किया था वहीं. शैलेश बाबू ने भी ममता की छूट और गांड को अचे से भोगकर तृप्त हो कर चैन की नींद ली थी...

रात को देर तक जागने की वजह से सभ्य की नींद भी थोड़ी देर से खुली पर ज़्यादा देर नहीं हुई थी तो वो जल्दी से उठी और अपने कपडे पहनने लगी कपडे पहनते हुए वो बिस्तर पर तीनो बिलकुल नंगे सो रहे शालू अनुज और कर्मा को देख रही थी, सुबह की वजह से दोनों के लुंड hi छत की और इशारा कर रहे थे जिन्हे देखकर एक पल को उसका मन भी दोल रहा था पर उसने खुद को संभाला और फिर कपडे पहन शालू को भी जगा दिया और साथ hi कर्मा अनुज को भी बोलै की जल्दी कपडे पहन कर अपनर कमरे में जाकर सो जाएं पापा आते hi होंगे कर्मा अनुज भी नींद में जगे और फिर अपने बिस्तर पर जाकर सो गए...

वहीं नीलेश शैलेश और राजन उठे तो रात के नशे की वजह से सर भरी था शैलेश की आँख खुली तो खुद को बिस्तर में अकेला पाया और बिलकुल नंगा सर दबाते हुए उठे देखा तो कपडे बगल में पड़े थे और उन्हें देखते hi रात जो कुछ हुआ सब याद आ गया ममता की चुदाई से लेकर राजन की बातों तक शैलेश को समझ नहीं आ रहा था क्या करें कैसे सामना करेंगे सबका..

खैर धीरे से बहार निकले तो देखा राजन और नीलेश बहार आँगन में बैठे चाय पि रहे थे दोनों को देख शैलेश थोड़ा झेंप गए पर राजन ने उन्हें देख लिया..

राजन- अरे शैलेश बाबू आओ उठ गए बैठो.. ममता शैलेश बाबू को भी चाय दो..

शैलेश ने सबको थोड़ा सामान्य देखा तो खुद भी शांत हुए पल्ली उनके लिए चाय लेकर आई

चाय का घूँट जब अंदर गया तो दिमाग भी सही से थोड़ा खुला और आँखें भी..

राजन- और शैलेश बाबू कैसी रही रात.

ये सवाल सुनकर शैलेश थोड़ा असहज हो गए और होएं भी क्यों न एक पति पूछ रहा था की कैसी चुदाई हुई उसकी पत्नी के साथ..

Nilesh-are शैलेश बाबू अब शर्माना छोडो .

राजन- अरे तुम हमारे यारी हो अब तो शर्माना छोडो और खुल के मज़े लो और हमारे साथ रहोगे तो दिखाएंगे तुम्हे असली मज़े क्या कहते हो?

शैलेश - अरे भैया शर्मा नहीं रहे बस सब कुछ थोड़ा नया है न और ऐसे अचानक से ऐसा कभी सोचा भी नहीं था.

नीलेश- अरे बिलकुल थोड़ा समय लगेगा पर बहुत कुछ ऐसा होगा जो सोचा बजी नहीं होगा.

राजन- तो हमारी दोस्ती मंजूर.

शैलेश- बिलकुल मंजूर.

शैलेश मुस्कुराते हुए जवाब दिया

राजन- फिर तो बढ़िया है अब देखना शैलेश बाबू इस दोस्ती में क्या क्या आनंद मिलता है तुम्हे.

नीलेश - अरे अब आनंद बाद में चलो शैलेश घर चलते हैं बच्चों को भी मानना पड़ेगा रात भर बहार रहने के लिए

शैलेश- हाँ नहीं तो पता चले घर में hi न घुसने दें..

राजन-. फिर तो ज़रूर जाओ भाई नहीं तो शैलेश बाबू रोज़ रात को मेरी बीवी के साथ सोना चाहेंगे...

हेहेहे

ये सुनकर शरमाते हुय्र hi सही शैलेश भी हंस पड़े और इसके बाद दोनों निकल गए...

(कर्मा की जुबानी)

घर पहुंचे तो दोनों का स्वागत सवालों से हुआ कहाँ रह गए थे कहाँ थे पूरी रात वगेरा वगेरा..

दोनों ने hi सोचा की झूठ बोलने से कोई फायदा नहीं तो बता दिया की शराब पि थी और उसके बाद वहीं सो गए राजन के यहाँ .

इसके बाद साडी औरतों ने अछि अछि बातें सुनाई शराब के बारे में जिसे मुँह लटकाये दोनों लोग सुनते रहर कर्मा और अनुज ये देख हंस रहे थे.. खैर ये सिलसिला ख़तम हुआ तो मौसी जब कमरे में गयी तो मौसा भी मौका देखकर कमरे में घुस गए और दरवाजा भिड़ा पत्नी को बाहों में भर लिए..

मौसी- छोडो मुझे तुम न जाकर दारू की बोतल को hi गले लगाओ..

Mausa-are मेरी रानी माफ़ भी कार्डो न रोज़ रोज़ थोड़े hi पीते हैं अब दांत भी खली.

Mausi-to क्या हुआ यहाँ रात भर मैं इंतज़ार में थी और तुम वहां न जाने क्या क्या कर रहे थे.

मौसी ने मौसा और ममता चची की चुदाई को याद करते हुए कहा..

मौसा- क्या क्या कर रहे थे कुछ भी तो नहीं कर रहे थे कुछ भी नहीं.

मौसा घबराते हुए बोले

मौसा को इस तरह से झूट बोलता देख मौसी मन hi मन मुस्कुरा रही थी पर ऊपर से गुस्सा दिखा रही थी.

मौसी- हमें का पता क्या क्या किआ होगा तुमने वहां.

मौसा- अरे कुछ नहीं किया मेरी रानी ये कहकर और मौसी का ध्यान हटाने के लिए मौसा ने मौसी की साड़ी को पेटीकोट सहित ऊपर उठा लिया और नंगे चूतड़ हाथ में लेकर मसलने लगे.

Mausa-are ये का कच्ची नहीं पहनी तुमने.

मौसी- तुम्हे इससे का तुम रहो रात रात भर बहार.

मौसा इस बात पर कुछ नहीं बोले और नीचे बैठ गए और अपना मुँह मौसी की छूट में लगा दिया और चाटने लगे . मौसी भी छूट चटवाने से गरम हो गयी और मौसा ने मौसी को उत्तेजित किया फिर वहीं बिस्तर पर घोड़ी बना पीछे से लुंड दाल दिया और छोड़ने लगे... एक तगड़ी चुदाई के बाद दोनों शांत हुए..

Mausa-ab तो माफ़ किया न मेरी रानी.

मौसी- कोशिश अछि थी इसलिए माफ़ किया पर आगे से नहीं होना चाहिए अगर जाना है तो बता कर जाओ.

इस बात पर तो मौसा फूले नहीं समाये और ख़ुशी से मौसी को बाहों में भर लिया.

इधर पापा को तो माँ को मानाने का एक hi तरीका आता था और वो वही अपना रहे थे..

माँ नहाने गयी तो पीछे पीछे घुस गए थे चुपके बाथरूम में और वहीं माँ के नंगे गीले बदन को चूमते हुए माँ को छोड़ रहे the.aur काफी देर तक माँ को मानाने के बाद दोनों नहाकर बहार निकले पर माँ मान गयी थी...

मैं भी नाहा कर तैयार हुआ hi था की मेरा फ़ोन बजा कोई नंबर था

मैंने उठाया तो उधर से लड़की की आवाज़ आई जिसे सुनते hi मैं पहचान गया...

में- hello बोल क्या हुआ.

नीतू- कहाँ हो तुम?

में - घर पर.

नीतू- कुछ करते नहीं रहे आज कुछ काम तो नहीं है.

में- नहीं ऐसा कुछ खास तो नहीं है तू बता क्या हुआ..

नीतू- तो एक काम करो बस अड्डे पर आओ गैंदपुर के मोटरसाइकिल लेकर आना.

में- अभी?

नीतू- हाँ अभी सुनाई नहीं देता क्या और अच्छे से कपडे पहन कर आना.

फुसफुसाते हुए बोली...

इतना कहकर फ़ोन काट दिया, मैं भी तैयार हुआ मस्त टीशर्ट जीन्स पहनी वैसे भी गैंदपुर नाम सुनकर hi मैं जोश में आ गया था,

तैयार होकर बहार निकला तो मौसी बोली - ोये हीरो बांके कहाँ जा रहा है.

में- हीरोइन से मिलने.

मौसी- सच्ची. ाचा बता तो कौन है तेरी हीरोइन..

में- अरे नहीं मौसी वो नीतू को थोड़ा काम है तो उसी के लिए जा रहा हूँ.

शान्तो- वही तो हीरोइन नहीं है.

में- नहीं तै वो कहाँ... मेरी हीरोइन तो तुम हो.

शान्तो - धत्त बेशरम.

ये सुनकर मौसी और माँ भी हंसने लगी और मैं मोटरसाइकिल लेकर निकल गया.

4-5 मिन्ट्स में गैंदपुर बस अड्डे पर पहुंच गया और मोटरसाइकिल रोक कर देखा तो नीतू कड़ी थी मैं मोटरसाइकिल से उतरा और पुछा- क्या हुआ अब बता.

नीतू- क्या बात है बिलकुल हीरो लग रहे हो..

में- वो तो मैं हूँ तू बता पहले.

नीतू- सब बताती हूँ पहले तुम्हारी हीरोइन को तो आ जाने दो..

नीतू ने एक और इशारा करके कहा तो मैंने उस और देखा.. और फिर देखता hi रह गया सामने के खोखे की तरफ से अंजलि हाथ में पानी की बोतल लिए चली आ रही थी हमारी तरफ..

वैसे तो ये सब फिल्मो में hi होता था की हीरोइन के दिखती थी तो सब खूबसूरत लगने लगता है सब धीरे धीरे हो जाता है और वैसा hi मेरे साथ हो रहा था,

सामने से वो धीरे धीरे बढ़ रही थी और मेरी धड़कन बढ़ती जा रही थी हलके नीले रंग के सूट में नीलमपुरी जैसी लग रही थी. अभी तक तो हम एक दुसरे को ठीक से जानते भी नहीं थे पर न जाने क्यों इतने दिनों बाद उसे देखकर एक अलग hi ख़ुशी हो रही थी लग रहा था की ज़िन्दगी कितनी हसीं है कोई गम hi नहीं है..

और ये सब मैंने सिर्फ उसके खोखे से हमारे करीब आने तक में hi सोच लिया.

इतने में करीब आकर कड़ी हो गयी और मैं उसे बस मुँह खोले देखे जा रहा था अपनी hi दुनिया में खोकर... उसने मुझे ऐसे देखा और फिर मुस्कुरा कर नीतू की और देखा इशारे से पुछा.. नीतू ने फिर मुझे कंधे से पकड़ कर हिलाया

नीतू- ओह्हो दिन में hi सपने देख रहे हो.. खड़े खड़े.

मैं जैसे सच में सपने से जाएगा...

में- हाँ क्या हुआ.

अंजलि- कैसे हो बहुत दिनों बाद दिखे.

में- मम मैं बहुत बढ़िया हूँ, तुम कैसी हो. हाँ थोड़ा बहार गया हुआ था.

अंजलि - हाँ बताया था नीतू ने मुझे.

नीतू- ओह्हो ये रिश्तेदारों वाली बातें बंद करो और मेरी बात सुनो...

में- हाँ बता न क्या बात है.

नीतू- देखो हम दोनों किताबें लेने निकले थे शहर के लिए पर यहाँ आधे घंटे से खड़े हैं और बस का कोई नमो निशान नहीं है भैया से फ़ोन करके पुछा तो उन्होंने बताया की कोई पुलिया टूट गयी है पीछे इसलिए अब तुम बताओ हमें ले चलोगे..

अंजलि- मैंने तो इससे बोलै की तुम्हे क्यों परेशां कर रही है हम बाद में कभी ले आते.

में- अरे इसमें परेशानी की क्या बात है आज मैं खली hi था और इसके काम तो मैं बचपन से करता आ रहा हूँ.

नीतू- ाचा ये कहें तो परेशानी कैसी अगर अभी मैं अकेली होती तो बहाना मार्के भाग जाते कहीं.

उसकी बात पर हम दोनों हंसने लगे.

में- अरे ऐसा भी कभी हो सकता है तेरी आज्ञा तो मेरे लिए सब कुछ है.

नीतू- तो फिर अब चलें देर हो रही है.

में- हाँ हाँ चलो.

अंजलि- पर तीन लोग सही रहेगा जाना एक मोटरसाइकिल पर

में- अरे कोई दिक्कत नहीं है ये गाओं है अपना..

ये कहकर मैं मोटरसाइकिल पर बैठा और स्टार्ट की.. और उन दोनों को बैठने का इशारा किआ.

नीतू- अरे अंजलि सुन तू आगे बैठ न मुझे घुटन होती है ऊपर से ये भरी सा सूट पहना है मैंने..

अंजलि- अरे तू hi बैठ जा न.

नीतू- नहीं तू बैठ मैं तेरे पीछे बैठूंगी.

अंजलि उसकी बात मान कर थोड़ा असहज होते हुए आगे बढ़ी फिर बड़े आराम से मेरे कंधे को पकड़ा हाय उसके छूने भर से ऐसा लगा एक अलग hi सिरहन दौड़ गयी पूरे शरीर में. वो बैठ गयी तो उसे आगे सरका कर नीतू उसके पीछे पर नीतू के बैठते hi वो पीछे से बिलकुल सात गयी... उसके दोनों हाथ मेरी पीठ से लग गए हाय इतना ाचा लग रहा था सोचा ज़िन्दगी में अगर ये hi ख़ुशी हमेशा रहे तो कितना ाचा हो. मैं यूँ hi रुका रहा तो नीतू बोली- अब चलोगे भी या एक दो और को बिठाना है.

में- है हाँ चलता हूँ अम्मा तू तो सुनाने hi लग जाती है.

अंजलि हमारी खिटपिट सुन मुस्कुरा रही थी... खैर मैंने गाडी आगे बढ़ा दी न जाने अब तक कितनी बार मैं शहर गया होऊंगा पर आज का ये सफर सबसे ज़्यादा सुन्दर लग रहा था... सोच रहा था की कभी ख़त्म hi न हो.. पीछे से नीतू बातें किये जा रही थी बातें करते करते hi मैंने उसे किसी बात पर चिढ़ाया तो उसने आगे होकर मेरे मारा जिससे हुआ ये अंजलि भी आगे हुई और धक्के की वजह से पूरी तरह से मुझसे चिपक गयी और मुझे ऐसा एहसास हुआ जैसे मेरी पीठ पर पीछे से दो संतरे किसी ने दबा दिए हो उसके चिपकते hi मेरा पूरा बदन में जैसे बिजली सी दौड़ गयी अगर वो बिजली में मोटरसाइकिल में लगा पता तो मोटरसाइकिल भी उड़ने लगती..

हाय ऐसा मज़ा नीतू के लिए मन में प्यार और बढ़ गया आखिर उसकी वजह से hi तो हुआ ये सब.

अंजलि- ठीक से बैठ नीतू देख अभी गिर जाते..

में- चिंता मत करो गिरने नहीं दूंगा..

अंजलि- अरे फिर भी एक्सीडेंट हो जाये गलती से तो.

नीतू- तो कुछ नहीं फिर लेट के किताबें पढ़ लेना.

तीनो hi इस बात पर तेज़ी से हंसने लगे.

खैर ऐसे hi हम शहर पहुंचे और फिर कॉलेज जाकर उनकी किताबें ली..

नीतू- चलो काम पूरा हुआ.

अंजलि- हाँ अब अचे से तयारी हो सकती है.

में- फिर अब ?

अंजलि- चलते हैं.

नीतू- अरे अभी कहाँ चलते हैं कभी कभी तो आते हैं थोड़ा घुमते हैं.

अंजलि- अरे नहीं इन्हे लेट होगा.

Neetu-are वो ड्राइवर हैं मालकिन ने बोल दिया तो वो क्या बोलेंगे. क्यों ड्राइवर.

में- ग मालकिन बिलकुल.

मेरी बात सुनकर अंजलि भी मुस्कुराने लगी.

Anjali-par करेंगे क्या?

नीतू- पहले तो मैं कुछ मस्त मस्त चीज़ें खाउंगी भैया पिज़्ज़ा खिलाओ

में- पिज़्ज़ा?

नीतू- हाँ.

अंजलि- नहीं पिज़्ज़ा नहीं कुछ और कहते हैं.

Neetu-nahi पिज़्ज़ा.

में- ाचा ठीक है चलते हैं जिसे जो खबा हो वहीं माँगा लेना अब्जी क्या बहस करना.

नीतू- देखा अंजलि हमारे साथ रखकर ड्राइवर समझदार हो गया है.

में- मालकिन ज़्यादा बोलोगी न तो ड्राइवर तुम्हे गिरा भी सकता है.

ये सुनकर अंजलि और हंसने लगी.

खैर हम रेस्टुरेंट पहुंचे जहाँ नीतू ने पिज़्ज़ा मंगाया तो हमारी अंजलि ने नूडल्स विथ मंचूरियन. अब खाया तो मैंने कभी नहीं था पर हमने भी वही आर्डर कर दिया जो हमारी जान ने किया.

रेस्टुरेंट में बैठे दुसरे लोग खासकर लड़के मुझे देख देख कर जल रहे थे क्यूंकि साथ दो लड़कियां थी और दोनों hi बेहद सुन्दर सुन्दर अब कहते हैं न जो जले उन्हें खूब जलाओ तो मैं भी वही कर रहा था.. हंसी मज़ाक करते हुए खाया इसी बीच मेरी और अंजलि की थोड़ी बातचीत भी हुई... खाने के बाद अंजलि बोली- अब खा लिए तो चलें क्या?

नीतू- चल अभी नहीं अरे यही सामने मॉल है वहां चलते हैं घूमने..

अंजलि - अब मॉल भी जाएगी?

नीतू- हाँ. क्यों ड्राइवर क्या कहते हो.

में- जो मालकिन की मर्ज़ी..

अंजलि - नीतू बस कर ऐसे मत बोल.

नीतू- ओह्हो बड़ी फ़िक़र हो रही है क्या बात है दोस्त मेरी और फ़िक़र इनकी.

अंजलि- चल चल तू भी न.

में- ाचा चलो अब मॉल चलते हैं.

कुछ देर बाद हम तीनो मॉल में थे इधर उधर घूमे आइसक्रीम खाई तो मॉल के अंदर बने मल्टीप्लेक्स के सामने पहुँच गए.

जहाँ पहुँचते hi नीतू बोल पड़ी- चलो न फिल्म देखते हैं

Anjali-pagal है क्या फिल्म देखेंगे तो 3 घंटे लगेंगे और..

नीतू- तो क्या हुआ अभी 12:30 hi हुए हैं आराम से पहुँच जायेंगे घर ..फ़ोन कर के बोल देते हैं.

अंजलि- अरे यार टाइम लग जायेगा.

नीतू- अरे कौन सा रोज़ रोज़ आते हैं.

में- अब ये इतना कह रही है तो देख लेते हैं.

मैंने अंजलि से कहा. अंजलि ने मेरी बात सुनी कुछ सोचा फिर बोली- ठीक है.

नीतू- मेरी बात पर मन कर रही थी उनके बोलते hi मान गयी .देख रही हूँ तुझे.

अंजलि- अब ज़्यादा मत बोल नहीं तो मैं अभी मन कर दूंगी

नीतू- फिल्म तो मेरी पसंद की hi देखेंगे.

में- जैसे अब तक सब कुछ हम अपनी पसंद से कर रहे हैं न.

ये सुनकर अंजलि हंसने लगी और उसे देख मैं.

खैर दो तीन फिल्में लगी थी एक फुल एक्शन मार धाड़ वाली एक प्यार वयर वाली और एक भूत की कोई डरावनी अंग्रेजी फिल्म और सबको चौंकाते हुए नीतू बोली मुझे तो भूत की फिल्म देखनी है...

Anjali-pagal है क्या ये रोमांटिक वाली देखते हैं न.

Neetu-kyun तुझे दर लगता है इसलिए.

अंजली - मुझे किसी से दर नहीं लगता समझी

नीतू- चल झूठी.

अंजलि- सच्चीई.

नीतू- तो फिर फिल्म देख न भूत वाली नाना क्यूब कर रही है. क्यों भैया ये सही है न .

में- अब जो तुम लोग चाहो मैं तो सब में खुश हूँ ..

फिल्म का फैसला हो चूका था तो अब फिल्म और बाकि ज़िन्दगी में क्या होने वाला था ये देखने के लिए इंतज़ार करें अगले अपडेट का तब तक के लिए धन्यवाद
 
अपडेट 172

सरलपुर

एक नयी सुबह थी पूरा घर सुबह के कामो में लगा हुआ था दोनों बहुएं रसोई में थी, रिमझिम पर देख रही थी की चंचल आज और दिनों की तुलना में गंभीर दिख रही थी और कुछ बोल नहीं रही थी, रिमझिम ने शुरू में तो ज़्यादा ध्यान नहीं दिया पर जब सुबह का खाना हो गया सभी अपने अपने काम पर निकल गए और घर पर सिर्फ चंचल और रिमझिम रह गए क्यूंकि आज चरण सिंह भी दुकान गए थे और ख़ुशी कॉलेज..

चंचल कपडे धो रही थी तो रिमझिम भी बाथरूम में आई और चंचल को अभी भी उसी गंभीर अवस्था में देखा तो उसका ध्यान खींचने के लिए उसे एक शरारत सूझी, क्यूंकि चंचल बाथरूम में बैठकर कपडे धो रही थी तो रिमझिम ने चुपके से अचानक से फव्वारा चला दिया और भरभरा के पानी चंचल पर गिरने लगा.

वहीं रिमझिम हँसते हुए बच्चों की तरह कूदने लगी, पर इस मज़ाक का असर जैसा रिमझिम ने सोचा था वैसा तो नहीं हुआ बल्कि चंचल बिलकुल गुस्से से आग बबूला हो गयी.

चंचल- रिमझिम ये क्या बदतमीज़ी है, पूरा भीगा दिया मुझे और खड़े खड़े हंस रही है.

रिमझिम तो चंचल का ये रूप देखकर दर hi गयी- जीजी वो मैं बस.

चंचल- क्या मैं वो बस तू अभी बच्ची नहीं है जो ये सब शरारतें करती फिर घर की बहु है कुछ ज़िम्मेदारी समझ.

रिमझिम - जीजी बस मज़ाक hi तो किआ है क्यों गुस्सा हो रही हो अगर तुम चाहो तो तुम पानी दाल लो मुझपर.

चंचल- मुझे कोई ज़रुरत नहीं है और तू तो रहने hi दे मुझसे बात hi मत कर..

ये कहकर चंचल बाथरूम से गुस्से में निकल गयी और रिमझिम बिलकुल हैरान कड़ी रह गयी क्यूंकि जबसे वो घर में ब्याह कर आई थी तबसे उसने हमेशा चंचल को हँसते मुस्कुराते hi देखा था ऊपर से उसनर रिमझिम को हमेशा अपनी छोटी बहन की तरह प्यार किया था पर आज उसका ये रूप देखकर तो रिमझिम बिलकुल हैरान रह गयी थी..

रिमझिम सोच में पद गयी की आखिर ये अचानक जीजी को हुआ क्या, रिमझिम पढ़ी लिखी थी वो इंसान को समझती थी उसे सोचने पर ये तो समझ गया की चंचल का गुस्सा शरारत की वजह से नहीं है बल्कि बात तो कुछ और है और उसे बात जननी होगी नहीं तो जीजी ऐसे hi गुस्से में रहेंगी.

इतना सोच के रिमझिम चंचल के कमरे में गयी तो देखा चंचल ने गीले कपडे उतर दिए थे और अभी दुसरे सूखे कपडे पहन रही थी अभी पेटीकोट और ब्लाउज में थी और ब्लाउज के हुक लगा रही थी... चंचल ने रिमझिम को आते देखा पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी.

रिम- वो जीजी मुझे

पर अब भी चंचल ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी बल्कि साड़ी उठाकर पहनने लगी.

रिमझिम ने जब ये देखा तो आगे आई और चंचल को वैसे hi पकड़ कर बिस्तर पर बैठा दिया.

चंचल- रिमझिम छोड़ मुझे..

रिम- नहीं जीजी पहले तुम मेरी बात सुनो गई

ये कहते हुए रिमझिम ने चंचल के हाथों से साड़ी लेकर अलग फ़ेंक दी...

चंचल- मुझे नहीं सुन्ना कुछ

रिम- क्या हुआ है क्यों गुस्से में हो इतनी.

Chanchal-tujhe नहीं पता तूने hi भिगाया मुझे अभी.

रिम- तुम उस पर गुस्सा नहीं हो, जीजी तुम्हे अपनी बड़ी बहन मानती हूँ मैं और तुम्हे समझती हूँ इतनी सी बात पर तुम मुझसे इतना गुस्सा तो नहीं हो सकती..

चंचल चुप रही..

रिम- जीजी अगर तुम भी मुझे कुछ अपना मानती हो तो बताओ क्या ये सच नहीं है.

चंचल अब क्या कहती और मन hi मन उसे भी बुरा लग रहा था रिमझिम पर गुस्सा करना और रिमझिम ने सही कहा था वो उसे सच में अपनी छोटी बहन मानती थी.

रिम- बताओ जीजी क्या सच में तुम उसी बात पर गुस्सा हो.

चंचल- नहीं मैं तुझपे गुस्सा नहीं हूँ.

चंचल ने नीचे देखते हुए कहा.

रिम- फिर क्या बात है जीजी कोई परेशानी है क्या?

चंचल- नहीं कोई परेशानी नहीं है.

रिम- जीजी ऐसे मत करो अब तुम मुझसे अपनी छोटी बहन से भी छिपाओगी.

चंचल- अरे कुछ नहीं है रिम्मी वो तेरे मतलब की बात नहीं है.

रिम- जो भी बात तुम्हे परेशां करे वो मेरे मतलब की है, अब बताओ.

चंचल- रहने दे न रिम्मी समझा कर.

रिम- ठीक है समझ गयी तुम मुझे अपना मानती hi नहीं हो, ठीक है.

ये कहकर रिमझिम उठकर जाने लगी, तो चंचल ने उसका हाथ पकड़ लिए.

चंचल- ऐसा नहीं है रिम्मी तुझे सच में अपनी बहन से बढ़कर मानती हूँ.

Rim-to फिर बटर में क्या दिक्कत हैक

चंचल- अरे वो बात hi ऐसी है समझ नहीं आ रहा .

रिम- जो भी बात है भरोसा करो और बताओ मुझे. भैया और तुम्हारे बारे में है.

चंचल- हम्म.

रिम- तो बताओ न जीजी बताओगी तभी तो कुछ समझ आएगा.

चंचल- पता नहीं बताना सही है भी की नहीं. और अगर तुझे पता चलेग तो तुझे भी बहुत अजीब लगेगा

रिम- छुपाना सही नहीं hai.batana सही है. और मुझे बताओ तो सही तभी तो जानूँगी की कैसा लगेगा मुझे.

चंचल- वो कल तेरे भैया और मैं वो कर रहे थे.

रिम- क्या कर रहे थे?

चंचल- अरे वही साथ में.

रिम- साथ में क्या.

Chanchal-pati पत्नी क्या करते हैं रात में.

रिम- चुदाई?

चंचल- बेशरम है तू बिलकुल.

रिम- अरे जीजी यहाँ तुम्हारे मेरे अलावा कोई और है नहीं तो किस्से शर्मा रही हो.

Chanchal-phir भी.

रिम- ाचा आगे बताओ

चंचल- हाँ तो करते हुए जब उनका पानी निकलने वाला था तो उन्होंने मेरी जगह किसी और औरत का नाम कहा.

रिम- ाचा बस इस बात से परेशां हो तुम.

रिमझिम ने मुस्कुराते हुए कहा.

चंचल- तुझे ये इतनी सी बात लगती है मेरा घर ख़राब हो रहा है.

रिम- अरे जीजी कुछ नहीं हो रहा शांत रहो तुम बेकार में इतना सोच रही हो..

चंचल- तुझे ये बात काम लग रही है क्या?

रिम- अरे जीजी इंसानो की आदत होती है ऐसी तुम बहुत भोली हो .

Chanchal-kya आदत होती है.

Rim-dekho दुनिया में कितने तरह की स्वादिष्ट स्वादिष्ट मिठाई और पकवान है तो भले hi इंसान एक को खाये पर उसका मन दूसरी मिठाई की और ललचाता hi है. तो ये आम बात है.

चंचल- ाचा आम बात है पर वो मिठाई हैं और यहाँ बात इंसानो की हो रही है.

रिम- ाचा पहले ये बताओ भैया ने नाम किसका लिया..

चंचल- वो मैं तुझे नहीं बता सकती.

रिम- क्यों नहीं बता सकती.

चंचल- नहीं वो सही नहीं होगा.

रिम- नाम तो बताना पड़ेगा जीजी पर उससे पहले तुम्हारी पहली परेशानी दूर करती हूँ.

चंचल- कैसे.

रिम- तुम्हारे देवर भी मुझे छोड़ते हुए अलग अलग औरतो के बारे में सोचते हैं.

चंचल- झूठ मत बोल देवर जी ऐसे नहीं हैं.

रिम- झूठ क्यों बोलूंगी मैं जीजी सच में तुम्हारी कसम.

चंचल- तो तुझे बुरा नहीं लगता ये गलत नहीं है.

रिम- नहीं बिलकुल बुरा नहीं लगता बल्कि मैं तो उनका साथ देती हूँ .

चंचल- कैसा साथ.

रिम- जिसके बारे में वो सोचते हैं मैं वो बनकर उनसे चुदवाती हूँ..

चंचल- क्या बोल रही है तू मुझे तो समझ नहीं आ रहा.

रिम- अरे जीजी सब समझ आ रहा है तुम्हे बस समझना नहीं छह रही.

चंचल- पर ऐसा क्यों क्या फायदा है इस सब का.

रिम- मैंने मिठाई वाली बात बताई न वही और जब मैं उनका साथ देती हूँ न तो जीजी और तगड़ी चुदाई करते हैं खुश कर देते हैं बिलकुल.

चंचल- पर ये तो गलत है न...

रिम- अरे जीजी गलत सही कुछ नहीं है सही है की पति को खुश रखना और पति को खुश तभी रख पाओगी जब वो तुम्हारे सामने खुला होगा.

चंचल- हाँ.

रिम- हाँ फिर तभी तो अगर पति की इच्छाओं को सही गलत में बाँटोगी तो कुछ hi दिनों में वो तुमसु खुलने की जगह बातें छुपाने लगेंगे और चिढ़ने ब्बि लगेगा.

चंचल- सही में.

रिम- और क्या इसलिए पत्नी की जगह एक अछि दोस्त बनो जिससे पति हर प्रकार की बात तुमसे खुल कर कह सके.. जैसे मुझसे ये कहते हैं.

चंचल- हाँ ये तो तू सही कह रही है. दोस्त बनना ज़रूरी है.

रिम- अब सही पकड़ी हो.

चंचल- हाँ मैं कोशिश करुँगी तेरे भैया की दोस्त बनने की.

रिम- तो अब बताओ भैया किसका नाम ले रहे थे तुम्हे छोड़ते हुए.

रिमझिम ने चंचल का हाथ पकड़ते हुए कहा..

चंचल- नहीं वो मैं नहीं बता सकती अजीब लगता है.

रिम- ओह्हो जीजी ये नहीं करो अब बतादो तुम्हे मेरी कसम.

चंचल- अरे तू समझती नहीं है बेकार में तू गलत सोचेगी.

रिम- अरे भरोसा करो जीजी मैं क्यों गलत सोचने लगी अब तुम बताओ.

चंचल- ओफ्फो तो सुन वो मेरे साथ करते हुए तेरा नाम ले रहे थे.

रिम- क्या सही में?

रिमझिम ने खिलखिलाते हुए कहा

चंचल- तुझे अजीब नहीं लग रहा.

रिम- नहीं अरे जीजी बिलकुल बुरा नहीं लग रहा.

चंचल- तू इनके बारे में गलत नहीं सोचेगी.

रिम- अरे नहीं जीजी और अब जब तुमने सच बताया है तो मैं भी बताऊँ की तुम्हारे देवर भी मुझे न जाने कितनी बार तुम्हे यानि अपनी भाभी बना कर छोड़ चुके हैं.

चंचल- क्याआ नहीं तू झूठ बोल रही hai.itne साल हो गए मुझे इस घर में पर आज तक उनकी कोई गलत नज़र नहीं देखि मैंने फिट ये कैसे.

रिम- जीजी ऐसे तो भैया की नज़र मैंने भी नहीं देखि फिर भी सोचते हैं न. तो इसमें गलत कुछ नहीं है, मन है मन में ख्याल तो आएंगे hi और सच कहूं तो तुम्हारा बदन hi ऐसा है की देखकर तुम्हारे देवर क्या ससुरजी भी तुम पर चढ़ जाएं.

ये कहकर रिम ने चंचल की कमर को दबा दिया.

Chanchal-hattt तू भी न कुछ भी बोलती है चंचल ने प्रतिक्रिया तो ये दी पर उसके सामने कल ससुरजी के साथ हुआ दृश्य याद आ गया और उसी बदन में सरसरी दौड़ गयी...

रिम- सही कह रही हूँ जीजी एक बार तुम्हारा बदन तो देखो कई बार औरत होकर मेरा इमां दोल जाता है तुम पर.

रिमझिम ने चंचल के गले में बाहें डालते हुए कहा.

चंचल- ाचा इस हिसाब से तो मुझसे पहले सब तुझे को.. मतलब तेरे साथ करना चाहेंगे. क्यूंकि तू मुझसे भी कहीं ज़्यादा सुन्दर है.

रिम- नहीं जीजी तुम ज़्यादा सुन्दर हो मर्दो को भरा हुआ बदन पसंद होता है जो की तुम्हारा है और जीजी यही तो बात है तुम्हारी खुद को रोकती बहुत हो थोड़ा खुलेगी तभी मज़ा आएगा.

चंचल- मैंने कहाँ रोका खुद को.

रिम- ाचा अभी छोड़ना बोलते बोलते रुक गयी.

चंचल- अरे वो सब गंदे बोल हैं ाचा नहीं लगता बोलना

रिम- हाय ढैय्या जीजी अगर ऐसी hi बन कर रहोगी तो अभी तो भैया नाम hi लेते हैं किसी और का फिर छोड़ के भी आ जायेंगे तुम ऐसे hi गन्दा गन्दा करती रहना.

चंचल- छी ये सब क्या बोल रही है तू.

रिम- सही बोल रही हु. जीजी मर्द को वही औरत खुश करती है जो हर तरह से खुल कर उसका साथ दे बिस्तर पर तो और ज़्यादा अगर वहां मर्द खुल गया तो तुमसे कभी कुछ नहीं छुपायेगा.

चंचल- शायद तू सही कह रही है पर कैसे खुलून मैं तेरे भैया के आगे.

रिम- भैया के आगे खुलने से पहले तुम्हे खुद के आगे खुलना होगा शर्म हाय को थोड़ा हटाना होगा.

Chanchal-khud के आगे पर कैसे?

रिम- ाचा जो मैं पूछूं उसका जवाब गंदे से गंदे शब्दों में देना ठीक है.

चंचल- ज़रूरी है क्या.

रिम- रहने दो जीजी तुम फिर

चंचल- ाचा ठीक है कोशिश करती हूँ तू पूछ.

रिम- तुम और भैया रात को क्या करते हो.

Chanchal-ahh हम्म सम्भोग.

रिम- जीजी गन्दा बोलना है

चंचल- छू चुदाई.

चंचल ने बोलकर मुँह छुपा लिया.

रिम- लो नयी दुल्हन मैं हूँ शर्मा तुम रही हो.

चंचल- तू तो बेशरम है,

रिम- तुम भी बन हो जीजी बड़ा मज़ा आता है.

चंचल- अब बना तो रही है तू.

Rim-are हाँ अब बताओ चुदाई कैसे होती है.

चंचल- ये तो तुझे पता है न वो उसमे डालकर.

रिम- नहीं गंदे शब्दों में.

चंचल ने एक गहरी साँस ली और बोली- जब च छूट में लुंदड़ दाल कर अंदर बहार करते हैं तो होती है चुदाई. अब ठीक है

रिम- हाँ जीजी ये हुई न बात शाबाश मन कर रहा है तुम्हें चूम लें

रिमझिम ने चंचल से चिपकते हुए उसे बाहों में लेते हुए कहा.

चंचल- धत्त्त नालायक.. बहुत हो गया मज़ाक .

रिम- ाचा जीजी जब पीछे से करते हैं तो उसे क्या कहते हैं.

चंचल- तू भी न अब शर्म आ रही है मुझे.

रिम- ाचा जब ये इतने बड़े बड़े गोल मटोल चूतड़ निकल के घूमती हो तब नहीं आयति शर्म.

रिमझिम ने चंचल को खड़ा करके उसके पेटीकोट के ऊपर से चूतड़ों को दबाते हुए बोलै.

चंचल- छोड़ न रिमझिम क्या कर रही है.

रिम- इन्हे क्या कहते हैं.

चंचल- इन्हे वो गांड.

रिम- भैया ने मरी है कभी तुम्हारी गांड.

रिमझिम ने पीछे से चंचल से चिपकते हुए कहा साथ hi अपने हाथों से उसके मांसल सपाट पेट को मसलने लगी...

चंचल- ओह्ह हाँ वो तो शादी के कुछ दिन बाद hi मार ली थी बड़े वो हैं तेरे भैया.

रिम- अरे इसमें वो क्या हैं जीजी जब गांड ऐसी होगी तो कोई मरे बिना छोड़ देगा.

रिमझिम लगातार चंचल के पेट को मसले जा रही थी साथ hi पीछे से अपनी छूट को चंचल के चूतड़ों पर घिस रही थी और उसकी इन हरकतों का असर अब चंचल के बदन पर भी पद रहा था उसे न जाने क्यों रिमझिम का यूँ छूना ाचा लग रहा था एक सिरहन उसके पूरे बदन में हो रही थी.

चंचल- ुहममम क्या बोलती है तू रिम्मी अब छोड़ मुझे..

रिम- छोड़ दूंगी जीजी पहले तुम्हे ठीक से खुलना तो सीखा दूँ

ये कहकर रिमझिम चंचल के कंधे को चूमने लगी.

चंचल- ओह्ह रिम्मी बससससस.

पर रिमझिम लगातार उसके कंधे और गले को चूमे जा रही थी साथ hi उसका हाथ लगातार उसके पेट और अब एक ब्लाउज के ऊपर छूछीयो पर भी आ गया था वहां चल रहे थे.

चंचल का तो अब होश खोने लगा था उसे ये सब गलत होक भी सही लग रहा था, उसका मन संस्कार कह रहे थे की गलत है पर उसका तन अलग hi भाषा बोल रहा था. व

वहीं रिमझिम तो भूखी शेरनी की तरह चंचल के बदन पर टूट पड़ी थी और बेतहाशा उसे चाट चूम रही थी कभी कंधे पर तो कभी गले पर और चूमते चूमते hi उसने चंचल को अपनी और घुमा लिया था और अब आगे उसके सीने को चूम रही थी जो भी हिस्सा ब्लाउज से बहार था रिमझिम उसे अपनी जीभ से चाटकर उसका स्वाद चख रही थी तो चंचल हर पल के साथ जैसे अपने आप को खोटी जा रही थी और अपने बदन को आँखें बंद किये रिमझिम को सौंपती जा रही थी..

चंचल को ऐसा एहसास कभी नहीं हुआ था एक औरत कभी इस तरह से उसके करीब नहीं आई थी उसके अनुसार तो औरत औरत तो ऐसा कुछ करते hi नहीं थे पर अभी रिमझिम कस होंठों को अपने सीने पर महसूस कर उसके सरे पिछले भ्रम टूट से रहे थे तभी उसे अचानक से एक खालीपन का एहसास हुआ उसने पाया की रिमझिम ने उसके सीने से अपने होंठों को हटा लिया है ये पल भर का खालीपन भी चंचल को ाचा नहीं लगा और वो आँखें खोलने hi वाली थी की अचानक उसे अपनर होंठों पर एक कोमल मीठा रसीला एहसास हुआ और अगले hi पल उस एहसास ने उसके होंठों को अपनर में समां लिया. जब तक चंचल समझती क्या हो रहा है तब तक तो रिमझिम उसके होंठों को चूसने भी लगी थी पर चंचल के लिए सबसे हैरानी की बात ये थी की विरोध करना तो छोडो वो उतनी hi आक्रामकता और जोश के साथ रिमझिम का साथ दे रही थी उसके होंठों को चूस रही थी..





दोनों बहुएं एक दुसरे के होंठों का रास पीने में लगी हुई थी, अगर कोई देखता तो कहता बहुएं हो तो ऐसी देवरानी जेठानी का प्यार अनोखा था.

चंचल खुद को भुला चुकी थी जैसे अब तक जीवन में जो उसने समाज के अनुसार अछि बातें सीखी थी वो इस कुछ पलों के चुम्बन के साथ उसके मन से मिटटी जा रही थी.. रिमझिम भी अब पूरे जोश में आ चुकी थी वैसे भी अपनी बहन जैसी जेठानी पर तो न जाने कब से उसका मन था आज उसके मन की इच्छा भी पूरी हो रही थी. इसी बीच आगे बढ़ाते हुए रिमझिम ने अपनी जीभ को भी चंचल के मुँह की सैर के लिए घुसा दिया.. पर अब चंचल तो जैसे बिलकुल खो चुकी थी उसे सब मंजूर था.

दोनों बहुएं आपस में जीभ लड़ा रही थी वहीं उनके होंठ आपस में गुथम गुथी कर रहे थे... चंचल के सुध खोने का फायदा रिमझिम पूरी तरह उठा रही थी और उसने चंचल के ब्लाउज के हुक खोलने शुरू कर दिए थे, और कुछ hi पलों में ब्लाउज के दोनों पैट अलग अलग थे, जिनके अलग होते hi रिमझिम ने बड़ी hi सावधानी से चंचल की ब्रा के दोनों कप जिन्होंने उसके नायब खजाने जैसी चूचियों को ढँक रखा था रिमझिम ने उन्हें नीचे कर दिया और दोनों छूछीयो को हाथों में भर लिया पर एक पल के लिए भी उसने अपने होंठों को चंचल के होंठों से अलग नहीं होने दिया...

चंचल उत्तेजना के सागर में बाह कर इतनी आगे आ चुकी थी की अब हर और उसे बस वासना का समुन्दर hi नज़र आ रहा था और कुछ नहीं, रिमझिम ने कुछ देर बाद चंचल के होंठों को छोड़ा तो चंचल बुरी तरह से हांफ रही थी रिमझिम ने उसे हांफता छोड़ा और अपने होंठों को चंचल की एक बड़ी सी छुच्छी पर रख दिया और चूसने लगी.

चंचल जिसकी सांसें थम hi पाई थी की एक बार फिर से उसकी आँखें बंद हो गयी सीना अकड़ गया... स्वतः hi चंचल के हाथ रिमझिम के सर पर आ गए और वो उसे अपनी चूचियों पर दबाने लगी रिमझिम भी पूरा मुँह खोल कर जितना हो सके उतना चंचल की छूछीयो को चूसने लगी...





चंचल- ओह्ह्ह्ह हांण ुहममम रिम्मी.

पहली बार किसी औरत के द्वारा ऐसा किये जाने का एहसास चंचल को पागल कर रहा था और वो औरत भी उसकी देवरानी थी...

रिमझिम चंचल की चूचियों के अकार और उनकी सुंदरता में डूब गयी थी और उन्हें पूरी लगन से चूस रही थी और उतना hi मज़ा चंचल को आ रहा था...

रिमझिम ने आगे चाल चली और चंचल की कमर पर बंधे उसके पेटीकोट के नाड़े की गाँठ खोल दी जिसके खुलते hi नाडा ढीला हो गया, रिमझिम धीरे धीरे बिना चंचल को एहसास दिलाये उसके पेटीकोट को नीचे सहलाने लगी सहलाते हुए उसे जैसे hi ये एहसास हुआ की चंचल ने अंदर कच्ची नहीं पहनी रिमझिम खुश हो गयी..

और चंचल का पेटीकोट उसने उसके घुटने तक सरका दिया अब चंचल लगभग नंगी थी, ब्लाउज खुला हुआ था चूचियां बहार थी पेटीकोट घुटनो से नीचे था ..

रिमझिम ने थोड़ी देर और छूछीयो को चूसा और फिर अपना चेहरा हटाया तो जैसे चंचल को ाचा नहीं लगा वो छह रही थी ये सिलसिला यूँ hi चलता रहे और रिमझिम उसकी चूचियां चूसती रहे...

इसीलिए जैसे hi रिमझिम ने उसकी चूचियों को छोड़ा उसकी आँखें खुल गयी और आँखें खोल कर देखा तो पाया की रिमझिम उसे hi देख रही थी उसके ऐसे देखने से चंचल शर्मा गयी..

उसने देखा रिमझिम अब धीरे धीरे नीचे की और बढ़ रही है पर लगातार उसकी आँखों में देख रही है पेट के ऊपर पहुँच कर बिना आँखों को हटाए रिमझिम ने जीभ निकली और चंचल की नाभि के ऊपर फिरै तो चंचल तो जैसे उछाल hi पड़ी पर रिमझिम शांत थी और लगातार उसकी आँखों में देख रही थी रिमझिम नाभि को चूमने के बाद और नीचे खिसकने लगी और उसके साथ hi चंचल की धड़कने बढ़ने लगी उसने देखा की उसकी कमर से पेटीकोट गायब है उसे पता भी नहीं चला, और वो नंगी है अपनी देवरानी के सामने आज से पहले पति के अलावा उसे इस हालत में किसी ने नहीं देखा था, और आज उसकी देवरानी देख भी रही थी और उसके बदन को भोग भी रही थी. चंचल इस ख्याल से hi बहुत उत्तेजित थी की उसकी छूट को उसकी देवरानी सामने से देख रही है इतने करीब से.

रिमझिम भी चंचल की छूट का गीलापन देख रही थी साथ hi एक नशीली गंध उसकी छूट से आ रही थी.

चंचल की नज़र रिमझिम से हैट नहीं रही थी की तभी रिमझिम ने कुछ ऐसा किया जिसकी उम्मीद चंचल को नहीं थी रिमझिम ने अपना चेहरा झुकाया और अपने होंठ चंचल की छूट से चिपका दिए इसके एहसास से hi चंचल के पूरा बदन में बिजली दौड़ गयी उसका बदन कंपनी लगा थरथराने लगा रिमझिम ने उसकी जांघों को कास के दबा लिया तब भी वो बुरी तरह से थरथरा रही थी..

रिमझिम को अपनी जीभ पर चंचल के रास का स्वाद महसूस हुआ चंचल झाड़ रही थी... रिमझिम अपनी जेठानी के रास को ख़ुशी ख़ुशी जातक रही थी.

चंचल को तो होश hi नहीं था की वो कहाँ है थोड़ी देर बाद वो शांत हुई उसे ऐसा लग रहा था जैसे उसके बदन में जान hi नहीं बची है बदन बिलकुल हल्का सा हो गया था... हलके से आँखें खोल कर देखा तो रिमझिम अब भी उसकी छूट चाट रही थी, चंचल को अपनी छूट में फिर से उत्तेजना का एहसास होने लगा उसकी प्यास अचानक फिर से बापिस आ गयी, पर इस बार वो होश में थी और उस एहसास को महसूस कर प् रही थी, उसके हाथ रिमझिम के सर के पीछे चले गए वो अब उसके सर को अपनी छूट में दबाते हुए अपनी छूट को उसके होंठों पर घिसने लगी.





ऐसी उत्तेजना ऐसा एहसास उसे आज तक नहीं हुआ था ऐसा आनंद उसने आज तक नहीं भोगा था जो रिमझिम उस दे रही थी... रिमझिम भी अपनी जेठानी की सेवा में कोई कमी नहीं छोड़ रही थी.. और अपना सारा अनुभव और लगन उसकी छूट चाटने पर लगा रही थी. जिसका फल और उस फल का रास भी रिमझिम को मिल रहा था जो की चंचल की छूट से रास बनकर उसके मुँह में जा रहा था जिसे वो ख़ुशी ख़ुशी जातक रही थी. चंचल एक बार और रिमझिम के मुँह में झड़ी तो जाकर रिमझिम ने उसकी छूट से मुँह हटाया, चंचल के चेहरे पर संतुष्टि के भाव थे.

चंचल ने आँख खोल कर देखा तो पाया रिमझिम उसे hi देख रही थी और एक बड़ी सी मुस्कान के साथ, चेहरा पूरा रास से भीगा हुआ, चंचल को अपनी देवरानी पर बड़ा प्यार आया तो उसने उसे हाथ पकड़कर अपने पास खींच लिया और बेतहाशा उसके होंठों और चेहरे को चुमने लगी और तब तक चूमा जब तक चेहरा चाट कर साफ़ नहीं कर दिया. और फिर बड़े प्यार से उसे अपनी बाहों में लिटा लिए.

चंचल- ये सब क्या किआ तूने मेरे साथ रिम्मी लग रहा था आज मर hi जाउंगी.

रिम- अरे जीजी बस तुम्हे दिखा रही थी की सही गलत को छोड़के देखोगी तो कैसे कैसे मज़े हैं दुनिया में.

चंचल- हाँ रिइइइ ऐसा तो मुझे आज तक नहीं हुआ, मैंने तो कभी ये भी नहीं सोचा था की दो औरतें भी ऐसा कुछ करती होंगी वो तो तुझे और खुशी को..

इतना बोलते बोलते चंचल रुक गयी.

रिम- हम्म मुझे लगा hi था.

चंचल- क्या लगा था?

चंचल ने अनजान बनते हुय्र कहा.

रिम- यही की तुमने मुझे और ख़ुशी को साथ देख लिया है..

चंचल- अब तुझे पता है तो छुपा के क्या फायदा हाँ कल सुबह hi देखा था. वैसे कबसे चल रहा है ये सब.

रिम- ज़्यादा टाइम नहीं हुआ है जीजी बेचारी प्यासी है तुम्हारी ननद तो सोचा थोड़ा शांत कर दूँ.

चंचल- ाचा बहुत सोचती है तू सबके बारे में.

रिम- और क्या तुम्हारे बारे में सोचा तभी तो ये हुआ.

चंचल- रिम्मी तू बड़ी गन्दी है

Rim-kyun जीजी मैंने क्या किया.

चंचल- मुझे बिलकुल नंगा लिटा रखा है और खुद.

रिम- अरे बस इतनी सी बात.

ये कहकर रिमझिम उठी और अपने कपडे उतरने लगी चंचल उसे hi देखे जा रही थी ज्यों ज्यों रिमझिम नंगी हो रही थी त्यों त्यों चंचल की आँखें चौड़ी होती जा रही थी, रिमझिम के बदन को देख चंचल मन hi मन उसपर मोहित सी होने लगी उसके कामुक बदन का जादू चंचल पर भी चल रहा था, चंचल मन hi मन तारीफ करने से खुद को न रोक सकीय की सच में उसकी देवरानी का बदन ऐसा है की अचे अचे उसे देखकर अपने होश खो बैठें.

रिमझिम नंगी होकर फिर से चंचल की बाहों में आके लेट गयी चंचल के हाथ खुद बा खुद रिमझिम के बदन पर चलने लगे, उसको रिमझिम का बदन बहुत ाचा और कामुक लग रहा था पर फिर भी पहली बार की वजह से उसके मन में झिझक थी जिसे रिमझिम ने भांप लिया,

रिम- जीजी खुल के छुओ तुम्हारी देवरानी का hi बदन है..

रिमझिम से प्रोत्साहन मिलने पर चंचल को थोड़ा और हिम्मत मिली और वो हलके से रिमझिम की छूछीयो को पकड़ कर सहलाने लगी ..

हालाँकि रिमझिम की चूचियां उससे छोटी थी पर वैसे छोटी नहीं थी या हूँ कहें बिलकुल सही आकर की थी जैसे ाष्पका खरबूजा, ऊपर से कोमल पर सख्त छूने में ऐसा लग रहा था जैसे माखन को हाथ लगा रही हो...

चंचल का ये किसी औरत के बदन के साथ पहला अनुभव था उसके लिए सब नया नया hi था पर अछि बात ये थी की इस विषय की एक बड़ी अछि शिक्षिका उसे रिमझिम के रूप में मिली थी जो उसे सब कुछ सीखा कर hi मानेगी..

रिमझिम को अपनी चूचियों पर चंचल के हाथ का एहसास ाचा लग रहा था..

रिम- जीजी.

रिमझिम ने चंचल की आँखों में देखते हुए कहा.

चंचल- हम्म.

रिम- चूमो मुझे.

और चंचल तो जैसे इसी का इंतज़ार कर रही थी और तुरंत अपने होंठों को उसके होंठों से मिला दिया और पुराने प्रेमियों की तरह एक दुसरे को चूमने लगे.

चंचल का हाथ जो पहले हलके से रिमझिम की छूछीयो को सहला रहा था अब मसलने लगा.. हर बीतते पल के साथ चंचल की आक्रामकता भी बढ़ती जा रही थी... रिमझिम भी यही चाहती थी.. चंचल चूमते हुए पालक कर रिमझिम के ऊपर आ गयी और फिर उसके होंठों को छोड़ा और बदन को चूमने लगी सीने से होते हुए जल्दी hi चूचियों पर पहुंची और उन्हें चूसने लगी जिससे रिमझिम खुद को सिसकने से न रोक सकीय. छुछियां चूसते हुए चंचल खुद भी उत्तेजित होने लगी उसने कभी सोचा नहीं था की वो खुद किसी औरत के बदन को यूँ चूमेगी.. पर वो ऐसा कर रही थी और उसे ाचा लग रहा था... पर रिमझिम नीचे लेट कर भी खामोश रहने वाली कहाँ थी क्यूंकि चंचल रिमझिम के ऊपर बैठकर उसकी चुकी चूस रही थी तो उनकी छूट एक दुसरे के ऊपर hi थी इसी का फायदा उठाकर रिमझिम नीचे से कमर घुमा घुमा के अपनी छूट उसककी छूट पर घिस रही थी

ये एहसास चंचल को भी बड़ा भाया कुछ देर छूछीयो को अचे से चूसने के बाद चंचल भी अपनी कमर हिलाकर रिमझिम की छूट पर घिसने लगी... ये देखकर रिमझिम को ख़ुशी भी हुई साथ hi आनंद की प्राप्ति भी होने लगी.

चंचल का आत्मविश्वास हर पल के साथ बढ़ता जा रहा था और वो इस नयी दुनिया जिसके द्वार रिमझिम ने आज खोले थे उसके सरे सुख लेने का मन बना चुकी थी.. अपनी कमर हिलाते हुए वो अपनी छूट पर रिमझिम की छूट की रगड़ को महसूस कर पागल हुए जा रही थी.





वही हाल मज़े से रिमझिम का था... अब तो जैसे दोनों देवरानी जेठानी में गुथम गुथी होने लगी थी.. दोनों hi हार मानने वालो में से नहीं थी और एक कामुक कुश्ती दोनों hi बहुओं में हो रही थी...

छूट घिसाई का असर ये हुआ की दोनों ने एक बार फिर से पानी छोड़ दिया जहाँ नीचे के होंठ मिल कर पानी बहा रहे थे तो ऊपर के होंठ मिलकर एक दुसरे का रास पि रहे थे.

चंचल को तो जैसे आज एक नया जीवन मिल गया हो उसकी हालत ऐसी थी जैसे खिलोने की दुकान में एक बच्चे की उसकी देवरानी रिमझिम आज उसे कॉमर्स के ऐसे ऐसे स्वाद से से अवगत करा रही थी जिससे वो अब तक वंचित थी, झड़ने के बाद चंचल थोड़ी शांत हुई तो रिमझिम ने उसे कुछ देर बाद फिर से बाहों में भर लिया और इस बार पीछे से आगे हाथ लेजाकर उसकी छूट मसलने लगी, चंचल भी कुछ देर में दोबारा गरम हो गयी तो अपनी छूट को देवरानी से मसलवटे हुए उसकी जांघ पर घिसने लगी..





इस घिसैं घिसाई का एक बार फिर वही नतीजा हुआ और चंचल के छूट ने फिर से पानी छोड़ दिया उसे समझ नहीं आ रहा था की न जाने क्या जादू था रिमझिम में जो उसके छूने से चंचल की छूट झरने की तरह बार बार बहे जा रही थी...

खैर चंचल थक कर चूर हो चुकी थी पर इतनी नहीं की अपनी देवरानी की सेवा का क़र्ज़ न उतर सके इसलिए उसने रिमझिम को पीठ के बल लिटा दिया और अपना मुँह घुसा दिया उसकी टैंगो के बीच में सामने रिमझिम की सुन्दर रसीली छूट देखकर चंचल के मुँह में अपने आप पानी आ गया और उसने अपना मुँह उसकी छूट में घुसा दिया, वैसे तो वो समझ गयी थी क्या करना है बाकि कुछ टिप्पणियां रिमझिम ने देकर उसे छूट चाटने की कला सीखने में सहायता की साथ hi अभ्यास अपनी छूट पर करवा रही थी.

जो थोड़ी बहुत कमी अनुभव की थी वो चंचल अपने जोश से पूरा कर रही थी.. और रिमझिम की आँखों में देखते हुए उसकी छूट चाट रही थी





चंचल की जीभ का कमाल थोड़ी देर बाद hi दिखा जब रिमझिम का बदन कंपनी लगा और उसनर चंचल के सर को अपनी छूट पर दबाकर बिस्तर को मुठी में कास लिया और अपनी छूट का पानी अपनी जेठानी के मुँह में छोड़ दिया.

अब जाकर दोनों शांत हुई दोनों कुछ देर एक दुसरे से चिपक कर लेती रही, पर फिर दोपहर हो चुकी थी ख़ुशी के आने का समय हो गया था इसलिए उठकर तैयार हुई... दोनों hi जानती थी की आज के बाद दोनों का रिश्ता हमेशा हमेशा के लिए बदल गया था...

चोदामपुर

जहाँ सरल पुर में रिश्ते बदल रहे थे तो वहीं चोदामपुर में नए रिश्ते बनाने का प्रयास हो रहा था, आगे की कहानी आपके दोस्त कर्मा की ज़ुबानी.

डरावनी फिल्म की तीन टिकट लेली और हम घुस गए थिएटर में, अब एक तो डरावनी फिल्म ऊपर से छुट्टी का दिन था नहीं तो कुछ गिने चुने लोग hi थे उनमे से आधे तो हम जैसे hi थे तो फिल्म का बहाना कर भाभी चची या सहेली के साथ आये थे मज़े करने के लिए, अब हॉल खली था और हमारे साथ कड़ी दोनों सुन्दर अप्सराओं को एक नज़र देख कर टिकट काउंटर वाले भाई साब ने अपने दिमाग के समीकरण लगा कर हमें एक कोने वाली तीन टिकट बिना बोले hi दे दी थी, मन hi मन उनको दुआएं दी, और फिर हम तीनो अपनी सीट पर पहुंचे तो मेरी प्यारी नीतू ने एक और एहसान कर दिया मुझ पर की मुझे बीच में बिठा एक तरफ खुद बैठ गयी और एक तरफ तुम्हारी भाभी और हमारी जान अंजलि को बिठा दिया... परदे पर प्रचार आने शुरू हुए और मैंने साडी सीटों पर नज़र दौड़ाई तो पाया हमारी लाइन तो पूरी खली hi थी आगे पीछे कुछ लोग थे.

Neetu-Anjali डरेगी तो नहीं?

अंजलि- न तू अपना देख,

नीतू- और भैया तुम?

में- तेरे होते हुए मुझे किसी भूत से दर लग सकता है.

इस पर अंजलि की हंसी छूट गयी.

नीतू- ाचा मैं भूत हूँ.

में- मैंने ऐसा थोड़े hi कहा मैंने तो तुझे अपना बल बताया अपनी ताकत. अब जैसा जो समझे.

नीतू- तुझे बड़ी हंसी आ रही है अंजलि मेरे और भैया के बीच लड़ाई लगवाना चाहती है.

अंजलि- अरे मुझे कोई शौक नहीं तेरे और तेरे भैया के बीच लड़ाई लगाने का.

नीतू- हैं तो हैं मेरे भैया तेरे थोड़े hi हैं

अंजलि- हाँ मैं भी तो कह रही हूँ तेरे भैया हैं.

नीतू- फिर तेरे क्या हैं..

अंजलि- फिल्म चालू हो गयी है फिल्म देख बड़ा शौक़ था न डरावनी फिल्म देखने का..

नीतू- हाँ तो देख रही हूँ.

उनकी ऐसी मीठी नोकझोक देखकर ाचा लग रहा था.

खैर फिल्म शुरू हुई.. आधे पौने घंटे तो कुछ खास नहीं हुआ साला वही कहानी hi दिखते रहे और हम देखते रहे उसके बाद धीरे धीरे फिल्म डरावनी होनी शुरू हुई और मेरे बगल में बैठी दोनों सुंदरियों की सांसें तेज़ होने लगी...

अब बन तो दोनों hi बहादुर रही थी पर सच्चाई अब पता चलने वाली thi...kuch सन आये जो लगभग हर डरावनी फिल्म में होते हैं, चर्चारता दरवाज़ा, 12 बजते hi उल्लू निकलने वाली घडी और रात को नहाने का शौक़ रखने वाली एक अधनंगी कामुक सी स्त्री. पर उसके बाद तो फिल्म ने कुछ ऐसी दिशा पकड़ी जो की मैंने सोची नहीं थी मतलब फिल्म अच्छी थी एक डरावनी फिल्म का काम है लोगो को डरते हुए मनोरंजन करना और यही ये फिल्म कर रही थी पर फिल्म का तो ठीक था पर मेरे बगल में बैठी दोनों सुंदरियों की सांसें मुझे महसूस हो रही थी की तभी अचानक से फिल्म में एक चीख की आवाज़ आई और मेरे दोनों बाजुओं को दो दो हाथों ने कास लिया..

सीधा हाथ अंजलि ने कास के पकड़ा हुआ था और उल्टा नीतू ने..

मैं तो असमंजस में पद गया की ये क्या हुआ अब मैं क्या करूँ... खैर इतना hi हुआ था की आगे कुछ सोचता इंटरवल हो गया और लाइट जल गयी जिसके जलते hi अंजलि ने तो तुरंत मेरा हाथ छोड़ा और सीढ़ी होकर बैठ गयी पर बेचारी नीतू अब भी काँप रही थी मैंने उसे प्यार से आराम से पुछा तू ठीक है न तो बोली हाँ, पर दर बेचारी के चेहरे पर साफ़ दिखाई दे रहा था.

मैंने दोनों से पुछा कुछ खायेगी क्या तो दोनों ने hi मन कर दिया पर फिर भी मैं जाकर कोल्डड्रिंक ले आया और बापिस अपनी जगह पर बैठ गया,

अब तक नीतू भी बिलकुल सामान्य हो गयी थी पर एक चीज़ मुझे समझ आ गयी थी की बेचारी ने मेरे लिए कितना बड़ा बलिदान दिया था क्यूंकि उसे डरावनी फिल्मो से बहुत दर लगता था पर मेरे लिए बेचारी देख रही थी, मैंने सोचा इसका क़र्ज़ मैं ज़रूर चुकाऊंगा.

खैर कुछ देर बाद फिल्म शुरू हुई और डरावने दृश्यों का सिलसिला शुरू हो गया, नीतू ने तो पहले hi सावधानी बरतते हुए सीट के बेच में लगा डंडा ऊपर कर दिया था और मुझसे चिपक गयी थी.. और कुछ दृश्यों के बाद मेरी दूसरी तरफ भी यही हुआ अंजलि ने भी डंडा ऊपर कर दिया था पर वैसे चिपकी नहीं जैसे नीतू चिपकी थी पर हाँ मेरा बाजू कास के पकड़ा हुआ था,

मैंने मन में सोचा हाय ये है ज़िन्दगी दोनों हाथो में परियों जैसी सुन्दर लड़कियां... बस ये फिल्म यूँ चलती रहे...

हर डरावने दृश्य के बाद दोनों मुझसे और चिपक रही थी... अंजलि तो खिड़ को थोड़ा बहुत रोक भी रही थी पर नीतू तो बिलकुल मुझपर चढ़ी हुई hi थी मैंने उसको सहायता के लिए हाथ उसकी पथ से निकल कर पीछे को रख लिया था पर उसने वो अपनी कमर के पास लेकर एक हाथ से पकड़ लिया था, अंजलि अब भी मेरे एक हाथ पर चिपकी हुई thi...ab इटंर सही समय में बस एक hi चीज़ गलत थी वो ये हुआ था की दो दो सुंदरियों के इतनी करीब से सुगंध पाकर मेरा सांप फन उठा चूका था और पूरा तन के खड़ा था पर एक दिक्कत ये भी हुई की पहनी मैंने जीन्स थी जो की कासी होने के कारन मेरे सांप का फन दबा हुआ था और दर्द मुझे हो रहा था ऊपर से दोनों सुंदरियाँ चिपक रही थी तो लुंड और कड़क हो रहा था.

क्यूंकि डरावनी फिल्म थी तो स्क्रीन पर ज़्यादा तर अँधेरा hi था रात का दृश्य चल रहा था अब मुझे नहीं पता की दोनों एक दुसरे को देख प् रही थी की नहीं क्यूंकि मुझे भी थोड़ा बहुत hi नज़र आ रहा था..

नीतू तो हर दृश्य के बाद अपना चेहरा मेरे कंधे में छुपा लेती थी और मुझे उसकी गरम सांसें अपने कान और गले पर महसूस होती थी जिसका सीधा असर मेरी जीन्स के अंदर होता था... उसका एक हाथ उसकी कमर पर मेरे हाथ को पकडे था और दूसरा मेरे पेट पर था और हर डरावने दृस्य पर वो मेरी t-shirt को कसके पकड़ लेती थी...

वहीं अंजलि की चूचियों का एहसास भी मुझे अपनी बाजू पर हो रहा था, जो की आग में घी का काम कर रहा था, मेरा दर्द बढ़ता जा रहा था.. मन तो नहीं था की दो सुंदरियों को छोड़ के जॉन पर सोचा टॉयलेट जाने का बहाना करके लुंड को एडजस्ट कर आऊंगा, यही सोचकर मैंने सोचा की नीतू से बोलता हूँ तो मैंने नीतू के कान में कहने के लिए अपना चेहरा उसकी और किया और उसी वक़्त उसने डरके अपना चेहरे फिर से मेरी और घुमाया और हुआ ये की हम दोनों के होंठ आपस में टकरा गए उसके होंठों का एहसास पाते hi मेरे बदन में बिजली सी दौड़ गयी बिलकुल मुलायम रसीले होंठ जैसे रसमलाई.. अब जितनी हैरानी की बात ये मेरे लिए थी उतनी hi नीतू के लिए भी थी, खैर लगा की सब वहीं रुक गया है मुझे भी नहीं पता की क्यों मैं वहीं वैसे hi जैम गया और वो भी जैम सी गयी, हम दोनों के होंठ वैसे hi चिपके रहे कुछ देर फिर मेरे अंदर जी की ठरक जागने लगी पर अंदर एक ख्याल आया की बीटा जो दूसरी और बैठी है उसे तुम चाहते हो अगर उसने देख लिया या उसे खबर भी हुई तो चाहना तो दूर शकक तक नहीं देखेगी तुम्हारी.. पर दूसरी तरफ थी ठरक की इतने सुन्दर प्यारे होंठ सामने हैं ऐसे hi जाने दिया तो बेकार है ज़िन्दगी पर मुझे फिर भी समझ नहीं आ रहा था की नीतू क्यों रुकी हुई थी वो अपने होंठों को पीछे क्यों नहीं कर रही थी...

खैर अपने मन के द्वन्द पर आते हैं समझ नहीं आ रहा था क्या करें, फिर फैसला वही सोचकर लिया जो आज तक सरे लिए थे जो होगा देखा जायेगा और मैंने हलके से अपने होंठों से नीतू के होंठों को दबा के छोड़ दिया और फिर मैंने अपने होंठ पीछे खींच लिए और तुरंत चेहरा घुमाकर अंजलि की और देखा की कहीं उसने तो नहीं देखा पर नज़र भी आया और जैसे उसने मुझे पकड़ा हुआ था वैसे यही समझ आया की उसका ध्यान फिल्म पर hi है, पर मेरा ध्यान भाग रहा था कभी नीतू कभी अंजलि कभी अपनद लुंड के दर्द पर..

फिर सोचा ये सही नहीं किया कर्मा तूने नीतू न जाने क्या सोच रही होगी वो बेचारी मेरी प्रेम कहानी बनवाने के लिए इतनी म्हणत कर रही है और मैंने उसी पर ठरक दिखा दी भैया कहती है वो बेचारी को दर लगता है फिर भी डरावनी फिल्म देखि मेरे लिए नहीं कर्मा ये सही नहीं किया तूने मैंने सोचा नीतू से माफ़ी मांग लेता हूँ वो अछि है माफ़ कर देगी तो बात यहीं के यहीं ख़तम हो जाएगी...

मैंने बापिस नीतू की तरफ चेहरा किया और हलके से फुसफुसाया- नीतू संमंमं...

इतना कह पाया की मेरे होंठों को नीतू के होंठों ने जकड लिया और चूसने लगी मैं हैरान रह गया की ये अचानक हुआ क्या, नीतू लगातार मुझे चूमने लगी कुछ hi पालो में मैं भी स्वाभाविक है उसका साथ देने लगा उसके रसीले नरम होंठों को पीने लगा...

फिर अचानक मुझे और शायद उसे भी अंजलि का ख्याल आया और हम अलग हुए मैंने तुरंत पलट कर अंजलि की और देखा तो वो वैसे hi बैठी थी अब लग तो यही रहा था की उसने कुछ नहीं देखा, और उम्मीद भी यही थी की न देखा हो,

पर नीतू को न जाने क्या हुआ था मैंने चेहरा इधर कर लिया तो वो मेरे गले को चूमने लगी साथ hi उसका हाथ जो पेट पर था वो मेरे पेट और सीने पर घूमने लगा, वो लगातार मेरे गले और कान के पास के हिस्से को चूमने लगी और इधर मेरी हालत ख़राब होने लगी...

मेरे लुंड का दर्द से बुरा हाल था, की तभी उसका हाथ जो अब तक पेट और सीने पर था वो जांघ पर भी घूमा और लुंड के उभर से जा टकराया जिसके टकराते hi नीतू ने हाथ तुरंत बापिस हटा लिया, मैं तो अब सब छोड़ चूका था सोचा जब कुछ अपने वश में न हो तो फड़फड़ाने से ाचा है शांत रहना...

कुछ पल बाद नीतू का मेरे गले को चूमना दोबारा शुरू हुआ और इस बार हाथ भी सीधा लुंड से hi जा टकराया और हलके से वो पंत के ऊपर से hi उस पर हाथ फिरने लगी मैं तो मज़े से पागल सा होने लगा... मन किया की अभी लुंड बहार निकल कर इन दोनों को यहीं छोड़ने लागूं पर मन की बातें कभी न सुन्ना बाबू मन कभी कभी गांड फड़वा देता है. इसलिए मन को दबाया और बैठा रहा, फिल्म पर तो मेरा जरा भी ध्यान नहीं था, क्यूंकि अपनी फिल्म ज़्यादा दिलचस्प थी.

की तभी फ़ोन बजा किसी का और नीतू का हाथ लुंड से और होंठ गले से हैट गए ये उसी का फ़ोन था जो घर से आ रहा था फ़ोन देखकर बोली- घर से आ रहा है उनसे ये तो नहीं बोल सकती फिल्म देख रही हूँ क्या करूँ.

अंजलि- तो बहार जाकर बात करले न यहाँ तो आवाज़ आएगी

नीतू- चल मैं अकेले बहार नहीं जाने वाली भैया तुम चलो.

अंजलि- ाचा मैं यहाँ अकेली बैठूं फिर. तू जा न अकेले पहले तो बड़ी बहादुर बन रही थी.

में- ाचा ऐसा करते हैं तीनो चलते हैं.

अंजलि- हाँ सही है चलो.

हम तीनो निकल कर बहार आये आईआर नीतू ने बापिस अपनर घर फ़ोन किया और एक तरफ जाकर बात कार्नर लगी मैं और अंजलि एक जगह खड़े हो गए.

मैंने नीतू को देखा फ़ोन पर बात लरते हुए बिलकुल सामान्य लग रही थी क्यूंकि मैं अब भी उसकी हरकतों से हैरान था फिर बापिस अंजलि को देखा तो पाया की वो मुझे देख कर थोड़ा मुस्कुरा रही है.

मुझे समझ नहीं आया तो मैंने पुछा- क्या हुआ?

अंजलि- कुछ नहीं.

उसने मुस्कुराते हुए जवाब दिया.

में- नहीं कुछ बात तो है बताओ न.

Anjali-kuch नहीं

इटंर में नीतू भी आ गयी तो

अंजलि बोली - चल नीतू बाथरूम जाना है.

फिर मेरी और देख कर बोली- तुम भी बाथरूम चले जाओ तब तक.

इतना बोलकर वो और नीतू पलट कर जाने लगे पर पलटते हुए उसने पल भर के भी एक छोटे से हिस्से जितने समय के लिए अपनी नज़र नीचे करके देखा और चली गयी.

मैं कुछ देर यूँ hi बेवकूफों की तरह खड़ा सोचता रहा की साला ये लड़कियां बोलती क्या हैं चाहती क्या हैं समझ नहीं आता एक तो नीतू ने दिमाग घुमा दिय अब अंजलि पता नहीं क्यों मुस्कुरा रही थी और नीचे क्या देख कर गयी फिर नीचे नज़र डाली तो सब समझ आ गया साला पहली बार मिलने आये थे और उसमे ब्बि अपनी बेइज़्ज़ती करवा बैठे.

अंजलि का इशारा मेरे लुंड की और था जो उसने जीन्स में ठांस हुआ देखा hoga.jsne क्या सोच रही होगी मेरे बारे में.

मैं भी बाथरूम की तरफ जाते हुए ये सब सोच रहा था... कहाँ सोचा था लड़की पतियेंगे अब लड़की बेइज़्ज़ती और मारेगी.

खैर आगे क्या होता है ये सब अगली अपडेट में प्लीज कमैंट्स करके ज़रूर बताएं कैसी लगी अपडेट बहुत बहुत धन्यवाद्.
 




होली कैसी बीती मित्रो?
 
मैं कुछ देर यूँ hi बेवकूफों की तरह खड़ा सोचता रहा की साला ये लड़कियां बोलती क्या हैं चाहती क्या हैं समझ नहीं आता एक तो नीतू ने दिमाग घुमा दिय अब अंजलि पता नहीं क्यों मुस्कुरा रही थी और नीचे क्या देख कर गयी फिर नीचे नज़र डाली तो सब समझ आ गया साला पहली बार मिलने आये थे और उसमे ब्बि अपनी बेइज़्ज़ती करवा बैठे.

अंजलि का इशारा मेरे लुंड की और था जो उसने जीन्स में ठांस हुआ देखा hoga.jsne क्या सोच रही होगी मेरे बारे में.

मैं भी बाथरूम की तरफ जाते हुए ये सब सोच रहा था... कहाँ सोचा था लड़की पतियेंगे अब लड़की बेइज़्ज़ती और मारेगी.

अपडेट 173

चोदामपुर

अपने मन hi मन में ग्लानि भाव लिए मैं दोनों के आने तक मैं मूट कर आ गया था, जब आई तो जो हमेशा लड़कियां करती हैं वही करती हुई आ रही थी खुसर पुसार और साथ hi हंस रही थी मेरी और देखकर तो साला मेरे मन का वहां और बढ़ा दिया की दोनों मेरे बारे में बात कर कर के hi हंस रही हैं...

नीतू- चलें ड्राइवर अब घर..

नीतू ने बिलकुल साधारण तरीके से अपनी तरह hi बोलै लग hi नहीं रहा था की हमारे बीच जो कुछ थोड़ी देर पहले हुआ उसका उसपर कोई असर भी था...

खैर मैंने ख्यालों को सर से झटका और बोलै- हाँ हाँ मालकिन चलते हैं.

अंजलि- अरे अब बस भी करो ये मालकिन और ड्राइवर का नाटक, और नीतू बड़ी गन्दी है तू एक तो वो हमारे लिए आये और तू उन्हें बार बार ड्राइवर बोल रही है.

नीतू- ओह्हो तुझे बड़ा बुरा लग रहा है एक फिल्म में hi इतनी नज़दीकियां.

अंजलि शरमाते हुए- चल कुछ भी बोलती hai.ab चल घर

नीतू- ऐसे कैसे इतनी दूर आये और बिना फोटो खिंचाए कैसे चले जाएं. भैया हमारी फोटो खींचो न ..

में- हाँ रुक.

मैं अपना फ़ोन निकल कर दोनों की फोटो खींचने लगा. कुछ फोटो के बाद अंजलि बोली अब तुम आ जाओ मैं तुम दोनों की खींच देती हूँ...

फिर अंजलि ने मेरे हाथ से फ़ोन लिया और मैंने नीतू के बगल में उसकी जगह और हम दोनों की कई फोटो निकली, कुछ फोटो तो नीतू ने इतना चिपक कर करवाई की कोई देखे तो न जाने क्या hi सोच ले.. फिर नीतू ने बोलै की मैं तुम दोनों की खींचती हूँ और अंजलि से फ़ोन ले लिए और अंजलि थोड़ी हिचकिचाती हुई मेरे बगल में आ कड़ी हुई .

मैं बड़ा खुश था की इसी बहाने ये पल फोटो में क़ैद हो जायेंगे और मैं जब चाहे देख पाउँगा. एक दो फोटो लेने के बाद नीतू बोली- अरे क्या अंजानो की तरह दूर दूर खड़े हो थोड़ा पास आओ फोटो अछि भी नहीं आ रही..

ये सुनकर हम दोनों hi एक दुसरे की और खिसके पर हिचकिचाते हुए थोड़ा पास आकर रुक गए और नीतू की और देखा.

नीतू- तुम दोनों भी न अभी बड़े शर्मा रहे हो फिल्म देखते टाइम तो बड़ा चिपक कर बैठे थे...

ये सुनकर हम दोनों hi शर्मा गए..

अंजलि- नीतू चुप कर..

ये कहते हुए अंजलि मेरे पास और खिसकी और जैसे फिल्म देखते हुए उसने मुझे पकड़ा हुआ था वैसे hi मेरे बाजू को पकड़ लिए.

अंजलि- अब ठीक है?

नीतू- हाँ ये हुई न बात..

अंजलि के ऐसे पकड़ना मुझे बड़ी ख़ुशी दे रहा था, एक अपनापन सा लग रहा था और उसी अपनेपन में मैंने सोचा भी नहीं और मेरा हाथ उसकी कमर पर रख गया,

जब ध्यान आया तो मुझे थोड़ा दर सा लगा की कहीं बुरा न लग जाये पर उसने ऐसा कुछ कहा नहीं तो मैं भी फिर साधारण हो गया...

ऐसे hi नीतू ने हमारे कई फोटो खींचे और फिर बोली- चलो अब एक सेल्फी लेते हैं और फिर चलते हैं.

ये कहते हुए वो हमारे पास आई दोनों लड़कियों ने तिरछे तिरछे मुँह बनाये मैं बस फ़ोन की और देखता रहा,

नीतू- भैया तुम्हारा चेहरा काट रहा है थोड़ा आगे आओ एक तो इतने लम्बे हो.

मैं थोड़ा आगे होकर झुक गया तो वो दोनों हटी और मेरे दोनों और आ गयी बीच में मैं, नीतू सेल्फी लेने लगी और हम दोनों पोज़ देने लगे और न जाने क्यों मैंने अंजलि का हाथ पकड़ लिया और सबसे अजीब बात उसने भी मेरा हाथ पकड़ लिया...

खैर फोटो की क्रिया पूरी होते होते hi अंजलि का फ़ोन बजा और हमारे हाथ छूट गए उसके घर से फ़ोन था और काटते hi बोली की अब चलते हैं ..

हम लोग अलग हुए और फिर मॉल से बहार आये सच में पता hi नहीं चला की दिन ढल चूका था हम लोग मोटरसाइकिल पर बैठ कर घर की और निकल पड़े रस्ते में ये तय हुआ की पहले अंजलि को उसके घर छोड़ देंगे फिर नीतू और मैं घर आ जायेंगे, हम लोग थोड़ी देर में गैंदपुर के अंदर घुस गए तो अंजलि बोली- कर्मा जो भी हमारी फोटो हैं मुझे सब भेज देना सुबह जिस नंबर से फ़ोन आया था न वो मेरा hi है.

मेरे लिए तो ये दिन इतनी खुशियां लेकर आया था जिसमे एक और जुड़ गयी बिन मांगे उसका नंबर भी मिल गया था...

नीतू- अरे मिल जाएँगी तुझे फोटो सबर कर

में- हाँ भेज दूंगा साडी. तुम टेंशन मत लो.

मेरी बात पर अंजलि मुस्कुराई.

खैर थोड़ी hi देर में मैंने उसे घर के सामने उतर दिया और उसे जाता देख मैंने मुस्कुरा कर bye किया और फिर हम लोग बापिस घर की और चल दिए. गैंडा पुर से बहार आकर मैंने सोचा की क्या रोड से जाना अंदर खेतों के बीच से रास्ता था जो सीधा मेरे बाघ में निकलता था, मैंने उसी पर मोटरसाइकिल मोड़ दी और चल दिया

नीतू- भैया क्या बात है एक hi दिन में फिल्म देखली नंबर मिल गया और क्या चाहिए.

में- सब तेरी कृपा है जो हुआ सब तेरी वजह से है.

नीतू- फिर मुझे क्या मिलेगा इस सब के बदले.

में- क्या चाहिए बता तू तेरे लिए तो सब कुछ है,

नीतू- अभी तो इतना चाहिए की तुम मोटरसाइकिल रोको मुझे सुसु जाना है.

में- अरे अभी ले

मैंने तुरंत मोटरसाइकिल रोकी अब तक हम हमारे खेतों के बीच आए चुके थे रस्ते के एक तरफ हमारे खेत थे दूसरी तरफ राजन चाचा के,

नीतू उतरी और फिर दोनों तरफ देखकर हमारे सरसो वाले खेत में घुस गयी अब सरसो के खेत जिसने देखे होंगे वो जनता होगा की घने होते हैं और एक लड़की की लम्बाई जितने होते हैं इसलिए आराम से वो सुसु कर सकती थी वो खेत में गयी तो मैंने झट से फ़ोन निकला और सुबह जिस नंबर से फ़ोन आया था उसे जल्दी से सेव किया, और फिर व्हाट्सप्प खोल करके देखा तो अंजलि के नंबर पर उसकी एक सुन्दर सी फोटो लगी थी जिसे ज़ूम कर कर के मैंने ध्यान से देख रहा था, की तभी मुझे अचानक से आवाज़ आई जो की नीतू की थी मैं हड़बड़ा गया की क्या हुआ मैं झट से खेत के अंदर की और भगा और थोड़ा सरसो के पौधों को हटते हुए अंदर की और बढ़ा तो एक जगह जहाँ पेड़ काम थे मुझे वहां बैठी हुई नीतू दिखी जो बिलकुल सुन्न हो कर बैठी थी और काँप रही थी मैंने थोड़ा बढ़ कर देखा तो पाया उसके सामने एक लोमड़ी थी जिससे डरके वो वहां बैठी हुई थी.. अक्सर अँधेरे में जंगल के जानवर खेतो में घुड़ आते थे..

मैंने जल्दी से जूता उतर के उसकी तरफ फेंका तो वो दर के भाग गयी. मैं नीतू के पास पहुंचा जो बेचारी दर से हांफ रही थी.

में- चल अब दर मत भाग गयी वो.

नीतू- ुहंम भैया मैं तो दर hi गयी थी...

में- चल अब उठ जा.

मैंने उसे उठाने के लिए हाथ आगे बढ़ाया तो उसने हाथ पकड़ा और सहारे से उठ कड़ी हुई.. पर खड़े होते hi उसकी सलवार अचानक से नीचे सरक गयी और उसके पैरों में गिर गयी. शायद लोमड़ी के दर से उस टाइम बांध नहीं पाई होगी सलवार गिरते hi उसकी गोरी नंगी टाँगें जांघों तक मेरे सामने आ गयी उसके ऊपर सूट से ढंकी हुई थी,

मैं जो अब तक अंजलि के साथ बीते ख़ुशी के पालो के बीच जो कुछ नीतू के साथ फिल्म के दौरान वो भूल सा गया था वो सब याद आ गया और उसे देखकर मन में एक अजीब सी उत्तेजना होने लगी, सलवार नीचे गिरते hi नीतू ने भी गिरी सलवार को देखा और फिर मुझे और उसे पता नहीं क्या हुआ वो ऐसे hi कड़ी रह गयी.

मेरा तो लुंड सर उठाने लगा, हम दोनों की hi आँखें एक दुसरे से मिली हुई थी और मैं नहीं जनता की दोनों की आँखों में न जाने क्या बातें हुई की मैं एक कदम आगे बढ़ा और वो भी थोड़ा मेरी और को झुकी और अगले hi पल हम दोनों एक दुसरे के होंठों को चूस रहे थे. उसके नरम रसीले होंठों को चूसने में बड़ा मज़ा आ रहा था, और वो भी उसी जोश के साथ मेरे होंठों को चूस रही थी.





पता नहीं ये क्यों हो रहा था पर इसमें मज़ा आ रहा था, उसके होंठ बिलकुल मीठे रास से भरे लग रहे थे जिनका रास मेरे मुँह में घुल रहा था, और करंट पूरे बदन में दौड़ रहा था, मैं उत्तेजित होने लगा, मेरे हाथ उसके बदन पर घूमने लगे कभी सूट के ऊपर से उसकी पीठ सहलाता तो कभी कमर साथ hi मैंने उसे खुद से बिलकुल चिपका लिया, जिस वजह से मेरा खड़ा लुंड उसके पेट में चुभ रहा था. पर हमारा चुम्बन जारी था और अब तो दोनों की जीभ भी उसमे शामिल थी.

मेरे हाथ भी काम नहीं थे घुमते घुमते उसके उठे हुए चूतड़ों तक पहुँच गए और फिर उसके सूट के ऊपर से चूतड़ों को सहलाया तो एहसास हुआ की सलवार तो है hi नहीं फिर क्या अगले hi पल सूट को उठा दोनों हाथ उसकी कच्ची में फंसे हुए दोनों चूतड़ों को मसल रहे थे और उसी मसलने का परिणाम नीतू के चुम्बन में दिख रहा था जो गहरा और आक्रामक होता जा रहा था.

मेरी जीभ को वो किसी कुल्फी की तरह चूस रही थी वहीं मेरा लुंड फिर से जीन्स में दर्द करने लगा तो मैंने मौके का फायदा उठाया और उसका हाथ पकड़ कर जीन्स के ऊपर hi लुंड पर रख दिया... उसनर एक दो बार टटोल कर देखा की क्या है और उसे जब एहसास हुआ तो वो जीन्स के ऊपर से hi उसे सहलाने लगी....

मेरे हाथ अब उसके चूतड़ों पर अगर बढ़ रहे थे मैंने उसकी चड्डी के कपडे को चूतड़ों की दरार में इकठा कर दिया था और उसके नंगे चूतड़ों को गूंथने लगा, नरम आटे के गोले जैसे थे उसके चूतड़... हम दोनों hi बेहद गरम होते जा रहे थे, सांस लेने के लिए पल भर होंठ अलग होते और फिर बापिस जुड़ जाते, मैंने चूतड़ों को मसलते हुए हाथ ऊपर की और लाया और उसकी कच्ची की लास्टिक में फंसा कर नीचे की और सरका दिया जिससे उसकी कच्ची जांघों पर अटक गयी और उसकर चूतड़ नंगे हो गए जिन्हे अगले hi पल मेरे हाथों ने घेर लिया और उनको गूंथने लगे और गूंथते हुए hi मैंने उंगलियां उसकी गांड की दरार में घुसनी शुरू कर दी जिससे वो मचलने लगी मैंने उंगलियां नीचे की और बधाई और उसकी छूट पर फिरै तो पाया वो कितनी गीली हो चुकी थी वहीं छूट पर उंगली फिरने का नतीजा ये हुआ की वो अकड़ने सा लगी उसके होंठ भी अलग हो गए आँखें बंद हो गयी, मैंने झट से अगला कदम बढ़ाया और उसके सामने बैठ गया घुटनो पर और उसका सूट ऊपर उठा दिया जिससे उसकी छूट हलके अँधेरे में मेरे सामने थी और छूट को देखते hi मैं खुद को रोक नहीं पाया और मैंने अपने होंठ उसकी छूट पर लगा दिए और चूसने लगा मेरे इस प्रहार से तो वो बिलकुल पागल सी हो गयी एक बार तो उसकी चीख भी निकल गयी, पर अगले hi पल उसने अपना मुँह हाथ से दबा लिया और मैंने उसकी छूट का मुँह अपने मुँह से, उसकी गीली छूट का रास मैं चाटने लगा अपनी जीभ को छूट की फैंको पर ऊपर नीचे फिराया तो उसके हाथ मेरे सर पर आ गया और सर को छूट में दबाने लगे मैंने चेतना जारी रखा और फिर जीभ को नुकीला कर उसकी छूट के छेड़ में घुसाने की कोशिश करने लगा कोशिश थोड़ी सी hi सफल हुई थी की उसका फल या कहूं रास मिल गया और वो कंपनी लगी उसकी छूट का रास मेरी जीभ से होते हुए मुँह में भरने लगा. जिसे मैं गटकता जा रहा था वो थरथराते हुए झाड़ रही थी टंगे काँप रही थी कुछ देर तक तो मैंने उसे पकड़ के संभाले रखा पर झड़ना हल्का हुआ तो वो पीछे की और खेत में लेट गयी इसके आगे मैं कुछ कहता उससे पहले उसका फ़ोन बजा जो उसके घर से था तो वो तुरंत उठ कड़ी हुई सलवार ऊपर की और बोली भैया चलो जल्दी मम्मी चिल्लायेगी बहुत.

मैं क्या करता खड़े लुंड को एडजस्ट किया और खेत से बहार आकर मोटरसाइकिल पर उसे बैठाया और उसके घर के सामने जा रोका पर रोकते hi दरवाज़ा खुला और रज्जो चची सामने थी.

रज्जो- कहाँ थी तू, अँधेरा हो गया कोई लाज शर्म है की नहीं.

नीतू- मम्मी बताया तो था किताब लेने गयी थी.

रज्जो- इतना समय लगता है और किताब कहाँ है.

नीतू- वो अंजलि के पास हैं,

रज्जो- किताब तेरी और हैं उसके पास, चल अंदर..

ये सुनकर नीतू सर झुककर अंदर चली गई तो रज्जो छाछ की नज़र मुझ पर पड़ी.

रज्जो- कर्मा तू भी समझदार है इतना समझ की इतनी देर तक दोनों ऐसे घूमोगे तो गाओं वाले बातें करने लगेंगे,

कर्मा- नहीं चची वो किताब लेने में देर हो गई. भीड़ ज़्यादा थी फिर इसकी सहेली को भी छोड़ने गए.

रज्जो- वो सब ठीक है पर ध्यान रखो कहीं कुछ गलत न हो जाये.

मैंने मन में सोचा तुम्हारी बेटी की छूट चूसने से ज़्यादा कुछ नहीं हुआ hai.par इस ख्याल से hi लुंड ठुमकने लगा..

में- नहीं चची कुछ गलत नहीं होगा. चलता हूँ.

ये कहकर मैं जल्दी से वहां से निकला और घर आया, आते hi स्वागत मौसी ने किया की कहाँ था सुबह से वगेरा वगेरा. और मैं उनके और बाकि सबके सवालों का जवाब देने में लग गया...

(अस 3रद पर्सन)

जहाँ कर्मा का तो पूरा दिन अंजलि और नीतू जैसी मस्त सुंदरियों के बीच बीता तो वहीं चोदामपुर में कुछ न हुआ हो ऐसा कैसे हो सकता है दोपहर दोनों बहनें रसोई में काम कर रही थी शान्तो नहाने गयी थी अनुज का पता नहीं था और मर्द लोग बहार थे, काम करते हुए शालू गीत गुनगुना रही थी.

सभ्य- क्या बात है बन्नो बड़ी चहक रही है,

शालू- अब जीजी तुम्हे तो सब पता hi है.

सभ्य- नहीं हमें नहीं पता तू बता.

शालू मुस्कुराते हुए अपनी जीजी के पास आई और पीछे से उन्हें बाहों में जकड लिया और बोली- चहकने की वजह तुम हो.

सभ्य- हम? हम कैसे ?

सभ्य ने प्यार से उसके गाल को सहलाते हुए पुछा,

शालू- तुम hi हो तुम्ही ने तो अपनी इस छूट से दो घोड़े जैसे बेटे पैदा किये हैं जिनके तगड़े मुसलो ने कूट कूट कर छूट को खुश कर दिया.

शालू ने अपनी जीजी की छूट को साड़ी के ऊपर से मसलते हुए कहा..

सभ्य- अह्ह्ह्ह बड़ी बेशरम होती जा रही है तू.

शालू- ाचा रात को तो अपने दोनों बेटों के लुंड एक साथ अपनी छूट और गांड में ले रही थी, और अभी शर्म सूझ रही है तुम्हे..

सभ्य- क्या हो गया तुझे पैट ाचा लग रहा है तुझे ऐसे खुश देखकर...

Shalu-mujhe भी जीजी, मुझे बड़ा बुरा लग रहा था उस टाइम जब मैंने तुमसे और बच्चों पर गुस्सा किया था पर अब सब ठीक है.

सभ्य- हाँ और हूँ सब खुश हैं.

शालू- खुश हैं क्यूंकि तुमने मुझे माफ़ कर दिया

सभ्य- तुझसे हम नाराज़ hi नहीं थी तो माफ़ क्या करना.

शालू - पर मुझे तो माफ़ी मांगने दो.

सभ्य- अरे जब हम नाराज़ hi नहीं फिर कैसी माफ़ी.

शालू- नहीं मैं तो माफ़ी मांगूंगी वो भी अपने अंदाज़ में.

सभ्य- ाचा ऐसा क्या अंदाज़ है तेरा..

Shalu-abhi बताती हूँ.

ये कहकर शालू सभ्य के पीछे hi बैठ गयी और अपनी जीजी की साड़ी को ऊपर उठाने लगी और उठाकर कमर तक कर दिया जिससे उसके सामने उसकी जीजी के नंगे चूतड़ आ गए.

सभ्य- ये क्या कर रही है शालू हैट कोई आ जायेगा.

शालू- माफ़ी मांग रही हूँ जीजी.

सभ्य- aiseeeeeeeeee ओह्ह्ह्हह्ह्ह्ह

सभ्य इतना hi बोल पाई की शालू ने अपना मुँह अपनी जीजी के चूतड़ों के बीच घुसेड़ दिया और जीभ का निशाना सीधा गांड के छेड़ पर साधा...

सभ्य भी बहन की जीभ के हमले से मस्त हो गयी और सिंक पकड़ कर आगे झुक गयी और अपनी टैंगो और गांड को अपनी बहन के लिए और खोल दिया.

सभ्य- आअह्ह्ह्ह बन्नो चाट ले ऐसी होई.

शालू पूरी लगन से माफ़ी मांगने लगी अपनी बड़ी बहन से कभी छूट चाटती तो कभी गांड, सभ्य उत्तेजित होकर अपनी बड़ी बड़ी छुछियां मसल रही थी ब्लाउज के ऊपर से hi..

शालू की जीभ ने कुछ hi देर में ऐसा जादू दिखाया की उसकी बहन की छूट का रास कुछ hi देर में उसके मुँह के अंदर था.

झड़ने के बाद सभ्य ने हांफते हुए शालू को उठाया और उसके होंठों को चूमा जिसपर उसकी छूट का स्वाद भी उसे मिला..

सभ्य- ऐसी माफ़ी तो तू मांगती रहा कर.

शालू- जीजी अब तो बिना मांगे एक भी दिन नहीं जाने दूँगी.

सभ्य - खुश कर दिया तूने तो.

शालू- जीजी अब जब सब खुल गया है तो मैं खुल के जीना चाहती हूँ सरे मज़े लेना चाहती हूँ.

सभ्य- ाचा और भैया का क्या?

शालू- उनका क्या वो भी मज़े लें जिसे चाहें छोड़ें मैं नहीं रोकूंगी.

सभ्य- ये सही है और तू क्या करेगी.

शालू- ज़्यादा तो नहीं सोचा पर अभी के लिए तुम्हे बुरा न लगे तो एक बात पूछूं?

सभ्य- हाँ पूछ न.

शालू- जीजा से छुड़वाने का मन है मेरा, तुम्हे बुरा तो नहीं लगेगा.

सभ्य- हैं सच्ची, बिलकुल छुड़वा बल्कि हम तो तुझे उनसे चुड़ते हुए देखना चाहते हैं

शालू- सच्ची जीजी. पर जीजा को मानों कैसे, वो छोड़ेंगे मुझे.

Sabhya-are वो इतने बड़े छोड़ू हैं अपनी बहन को नहीं छोड़े हमारी बहन को क्या छोड़ेंगे...

दोनों बहनें ये कह हंसने लगी...

शालू- और क्या इनको तो ममता जीजी की छूट मिल hi गयी है तो मैं भी जीजा का लुंड ले लूँ.

सभ्य - अरे सुन ममता से याद आया कल क्या हुआ...

Shalu-kya हुआ?

फिर सभ्य जो कुछ उसके ममता और पल्ली के बीच हुआ उसे बताती है..

शालू- अरे वाह जीजी ये माँ बेटी तो बड़ी तेज निकली. सब का स्वाद चख लिया हैं इन दोनों ने.

सभ्य - हाँ कर्मा अनुज का पता hi है कल तूने भैया को भी देख लिया और कल मेरे साथ भी.

शालू- अरे जीजी तुम्हे क्या लगता है जीजा ने ममता जीजी को छोड़ा होगा.

सभ्य - हाँ ऋ ये तो मैंने सोचा hi नहीं, जब भैया को आये एक दिन नहीं हुआ और वो तक ममता की टैंगो में घुस चुके तो ये तो यहीं रहते हैं ऐसा हो hi नहीं सकता की इनके बीच कुछ न हुआ हो.

शालू- वही तो जीजी हम लोग बेकार में फ़िक़र कर रहे थे,

सभ्य- कोई नहीं अब तू जल्दी से अपने जीजा के साथ की सोच और हमें भी देखने दियो.

शालू- मैं तो कहती हूँ साथ में छुडवाएंगी दोनों बहनें.

सभ्य- साथ में.

शालू- हाँ मज़ा आएगा जीजा खुश हो जायेंगे.

सभ्य- पर ये होगा कैसे?

शालू- सोचते हैं कुछ.

जहाँ दोनों बहनें योजना बनाने में व्यस्त थी वहीं उन्हें ध्यान भी नहीं था की उनके घर में होते हुए क्या हो रहा है.

थोड़ी देर पहले अनुज तौलिया लेकर छत से उठाए रहा था और बाथरूम में जाने के लिए दरवाज़ा खोला तो अंदर पाया की उसकी प्यारी तै पेटीकोट और ब्लाउज में बैठी हुई थी.

अनुज- अरे तै तुम नाहा रही हो.

शान्तो - हाँ बचुआ का तू भी नहाने आया था?

अनुज- हाँ आया तो था नहालो तुम पहले फिर नाहा लूंगा.

संतो- अरे फिर क्यों आजा हम नहला देते हैं तुझे बचुआ.

अनुज- अरे नहीं तै अब मैं बच्चा नहीं रहा. नाहा लूंगा तुम नहालो.

संतो- हमारे लिए तो बच्चा hi है आ जल्दी

ये कहकर संतो देवी अपने ब्लाउज के हुक खोलने लगी अनुज वैसे तो मन करता पर ब्लाउज में से झांकती बड़ी बड़ी छुछियां देखकर अनुज का मन बदलने लगा.

अनुज- ठीक है तै आता हूँ.

अनुज अंदर घुस गया और दरवाज़ा बंद कर लिया अनुज ने तौलिया एक तरफ तंग दिया तब तक तै अपना ब्लाउज खोल चुकी थी और उन्होंने अपने पेटीकोट को थोड़ा ऊपर कर के चूचियों पर बांध लिया था मतलब पूरे बदन पर बस एक hi कपडा था वो पेटीकोट.

अनुज का लुंड तै के भरे बदन को ऐसे देख सर उठाने लगा, अनुज सिर्फ कच्चे में था

संतो ने अनुज को खड़ा किया अपने पास और उसके बदन पर पानी डालने लगी.

संतो- देखा बचुआ कितना भी बड़ा हो जा हमारे लिए बच्चा hi रहेगा, अब बचपन में तो तुझे नहला नई पाए अब hi नहला लेते हैं.

ये कहकर वो अनुज को पानी से भीगने लगी फिर पूरा भीगने के बाद संतो ने साबुन लिया और फिर अनुज के बदन पर लगाने लगी सीना पेट पीठ जांघ और पेअर पर लगाने के बाद बोली- अनुज बचुआ कच्चा भी उतर वहां भी साफ़ करदूँ.

अनुज इस बात से चौंक गया पर अब तक वो इतनी सबदै कर चूका था की उसे ये मामला किस और जा सकता था समझ आ रहा था.

उसने बिना किसी हिचकिचाहट के कच्चे को नीचे सरका दिया जिसके सरकते hi अनुज का कठोर लुंड संतो देवी के सामने आ गया जिसे देखकर उनकी आँखों में चमक आ गयी...

संतो देवी न ज़्यादा प्रतिक्रिया न देते हुए अनुज की जांघों, उसके चूतड़ों पर साबुन लगा और फिर अंत में लुंड को एक हाथ से पकड़ कर साबुन लगाने लगी जिसके साथी अनुज का लुंड उनके हाथ में आते hi बिलकुल तन गया, संतो देवी ऐसे दिखा रही थी जैसे ये बिलकुल साधारण सी बात हो पर अनुज के लुंड की कठोरता और लम्बाई को साबुन लगाने के बहाने महसूस अचे से कर रही थी...

अचे लुंड और गांड पर साबुन लगाने के बाद संतो देवी ने उसके लुंड को छोड़ा और फिर पानी डालने लगी और पूरे शरीर को मॉल मॉल के पानी से धो दिया,

संतो देवी- ले बचुआ हो गया तू साफ़ अब जा पांच ले.

अनुज- अभी क्यों तुम्हे भी तो नहाना है अब मैं अपनी प्यारी तै को नहलाऊंगा.

संतो देवी- अरे हेहेहे अब हमर बचुआ हमें नहलायेगा...

अनुज- हाँ अब तुम बैठो मैं साबुन लगता हूँ...

ये कहकर अनुज ने उन्हें पतली पर बिठा दिया और खुद हाथ में साबुन लेकर संतो देवी के भरे पूरे शरीर पर मलने लगा हाथ और कंधे होने के बाद अनुज बोलै- तै अब पेटीकोट है यहाँ से नीचे कैसे लगाऊं..

संतो देवी- तू भी न जाने कौनसा शौक़ चढ़ा है तुझे हमें नहलाने का..

ये कहकर उन्होंने अपनी चूचियों से पेटीकोट की गांठ खोल दी और वो नीचे कमर तक सरक गया अनुज के सामने संतो देवी की गुब्बारे जैसी चूचियां आ गयी जिन्हे देखकर अनुज का लुंड ठुमके मरने लगा,

अनुज ने साबुन हाथों में माला और फिर संतो देवी की बड़ी बड़ी छूछीयों में मलने लगा उन्हें मलने के बहाने मसलने लगा. बड़ी बड़ी चूचियों को मसलने में अनुज को बड़ा मज़ा आ रहा था उसका लुंड बिलकुल तना हुआ शान्तो देवी की पीठ पर लग रहा था...

संतो देवी अभी तक तो कुछ प्रतिक्रिया नहीं दे रही थी हाँ छुछियां मलने से उनकी आँखें बंद हो रही थी और मुँह से हलकी हलकी सिसकियाँ निकल रही थी, चूचियों को काफी देर मलने के बाद अनुज बे अपने हाथ नीचे बढ़ाये और उनके गदराये पेट को मलने लगा उनकी गहरी नाभि में उंगली चला कर मज़े लेने लगा... पर साथ hi उसकी उत्तेजना बढाती जा रही थी. ऊपर से संतो देवी का कोई विरोध न करना उसकी हिम्मत बढ़ा रहा था,

अनुज- ताई उठो अब नीचे भी लगाना है साबुन.

संतो- अब उठा न बचुआ पैरों में दर्द है.

अनुज- तो एक काम करते हैं.

तुम आराम से यहाँ आगे की और लेट जाओ मैं साबुन लगा देता हूँ.

Santo-yahan लेट जाएं हैट पागल.

अनुज- तै गीली hi तो हो लेट जाओ आराम से.

संतो- ाचा ले तू भी न जाने क्या क्या करवा कर मानेगा.

ये कहकर संतो आगे हो गयी और अनुज ने उन्हें सहारा देकर लिटा दिया साथ hi लिटाते hi अनुज ने पेटीकोट को नीचे पकड़ कर खिसका कर उतर दिया...

अब अनुज के सामने संतो देवी पेट के बल नंगी लेती थी और उनकी बड़ी गांड देखकर अनुज से रहा नहीं जा रहा था.

अनुज ने साबुन लिया और संतो देवी के चूतड़ों के नीचे बैठ गया और उनकी पीठ पर साबुन लगाने लगा साथ hi साबुन लगते हुए अपने लडक लुंड को संतो देवी के चूतड़ों के बीच घिसने लगा.

संतो Devi-aahhhhh बच्चा आराम से.

अनुज के लुंड की घिसावट से संतो देवी की सिसकियाँ निकल रही थी.. वहीं अनुज जान कर लुंड को साबुन लगाने के बहाने ज़्यादा से ज़्यादा घिस रहा था, ऊपर होने के बाद अनुज ने ध्यान नीचे लगाया और उनके चूतड़ों को रगड़ रगड़कर साबुन मलने लगा, साथ hi मोती गदराई जांघों पर भी खूब माला...

उसके बाद अनुज दोबारा टैंगो के बीच आकर अपने लुंड को फंसा कर गांड की दरार में घिसने लगा... और इस बार वो दिखने को भी कोशिश नहीं कर रहा था बस मज़े ले रहा था. वहीं संतो देवी भी सिसकियाँ लिए जा रही थी.





उसका लुंड साबुन के गीलेपन की वजह से संतो देवी की गांड की दरार में अचे से ऊपर से नीचे तक घिस रहा था...

संतो देवी भी अनुज के लुंड के एहसास से बड़ी उत्तेजित हो रही थी

संतो Devi-ahhh अह्ह्ह अह्ह्ह्हह्हह बाछहुआअ अह्ह्ह बससससस

अनुज- ओह्ह्ह ताई ुहममममम नहाने में मज़ाआहहह आ रहा है.

ये hi करते हुए अनुज ने आगे झुककर संतो देवी की छूछीयो को भी थाम लिया और तेज़ी से लुंड चूतड़ों के बीच घिसने लगा... इसी घिसने के दौरान साबुन से लुंड वैसे hi चिकना था तो एक झटके से संतो देवी की छूट के द्वार पर लगा और सरकता हुआ अंदर घुस गया जिससे दोनों की आह्ह्ह्ह निकल गयी.

अनुज का लुंड पूरा संतो देवी की छूट में था. संतो देवी - आह्ह्ह्हह अनुज लल्लाहहह ये का किया अह्ह्ह्ह.

अनुज- मैंने कुछ नहीं किया तै अपने आप घुस गया तुम्हारी छूट में. अब क्या करूँ?

अनुज जानकार गंदे शब्दों का प्रयोग करने लगा.

संतो देवी- अब घुस hi गया है तो छोड़ले बच्चा नहीं तो बेकार में दोनों परेशां होंगे. पहले किसी को छोड़ा है?

अनुज- हाँ तै स्कूली की लड़की है एक उसे.

संतो देवी- बहुत बढ़िया बड़ा तेज़ है रे तू चल अब वैसे hi अचे से छोड़ अपनी तै को.

अनुज को और क्या चाहिए था उसने धीरे धीरे धक्के लगाने शुरू कर दिए और संतो देवी की छूट को अपने लुंड से भरने लगा.





शुरूआती धीमी गति के बाद अनुज ने जल्दी hi अछि गति पकड़ ली. उसे यकीन नहीं हो रहा था की उसने अपनी तै को भी छोड़ लिया है अपनी किस्मत पर वो विचार कर रहा था की अपने जानने में ज़्यादातर औरतों को वो छोड़ चूका था जिनमे उसकी माँ और मौसी भी थी और अब ये नयी नवेली तै भी उसके लुंड की शिकार बन गयी थी.

इसी जोश में आकर अनुज और तेजी से तै को छोड़ने लगा तै भी अनुज का लुंड पाकर मस्त हो गयी थी और अनुज की गति भी ऐसी थी की पूरे बदन में करंट दौड़ रहा था.. इसी बीच बहार दोनों को कुछ आवाज़ें सुनाई दी तो दोनों hi थोड़ा हिचकिचाए.

संतो देवी- अनुज बहार कोई हैं जल्दी कर.

अनुज का वैसे भी होने hi वाला था अनुज ने दांत मिस कर कुछ झटके तै की छूट में लगाए और फिर झड़ने लगा झड़ते हुए उसनर लुंड बहार निकला और उसकी गांड पर अपना रास गिरा दिया..

संतो देवी पड़ी पड़ी बुरी तरह हांफ रही थी, अनुज ने जल्दी से खुद को पौंछा और तौलिया लपेट कर धीरे से दरवाज़ा खोल कर बहार देखा और बहार निकल गया, अनुज के जाने के बाद संतो देवी उठी और उठ कर बैठ गयी साथ hi अपने हाथ से अपनी छूट को सहला कर देखा और फिर दरवाज़े की और देखकर उनके चेहरे पर एक मुस्कान थी अब इस मुस्कान के पीछे क्या वजह थी ये तो वही जानती थी पर हमारे अनुज भैया तो नयी छूट मरकर खुश थे..

इसके बाद क्या हुआ अगली अपडेट में प्लीज कमैंट्स करके ज़रूर बताएं कैसी लगी अपडेट बहुत बहुत धन्यवाद्
 
अपडेट 174

सरलपुर

दोपहर में अपनी प्यास एक दुसरे के बदन से बुझाने के बाद दोनों बहुएं मस्त थी और चहक रही थी शाम के खाने पर भी दोनों के बीच आँखों hi आँखों में इशारे हो रहे थे, चंचल तो बिलकुल नयी दुल्हन की तरह शर्मा रही थी, वहीं रिमझिम को भी इस खेल में जेठानी के साथ मज़ा आ रहा था,

चंचल के मन में भी बहुत साडी बातें आ रही थी आज जो कुछ रिमझिम के साथ हुआ वो गलत था पर उसे बहुत अच्छा लगा, साथ hi जिस तरह रिमझिम ने उसके साथ खुल कर बात की उसको सुना, वो कितना सही था, कहाँ सुबह तक वो सोच रही थी उसका घर बर्बाद हो रहा है कहाँ अभी ये सब, सच में कहीं मैं इस सही के चक्कर में अछि बनने के चक्कर में खुद को और इनको पूरी तरह खुश नहीं कर प् रही हूँ, मुझे भी रिमझिम की तरह hi खुलना होगा ताकि सब मुझसे भी रिमझिम की तरह hi आकर्षित रहे.

खैर रसोई का काम निपटा कर साथ hi एक दुसरे के साथ सबकी नज़र बचा कर मस्ती करने के बाद दोनों बहुएं अपने अपने पति के पास कमरे में थी, चंचल आज बिलकुल पहले से तैयार थी और उसने सोचा क्यों न आज इनको खुश किया जाये, चेतन बीएड पर सिरहाने से ठीके हुए फ़ोन चलने में व्यस्त थे, चंचल बीएड पर चढ़ी और चेतन की और देखा जिसका ध्यान फ़ोन पर था तो चंचल ने अपने दोनों पेअर अपने पति के कमर के दोनों तरफ रखे और पैरों की और झुकते हुए अपनी साड़ी को कमर तक उठा कर अपने दोनों नंगे चूतड़ों को अपनी पति के चेहरे के सामने कर दिया.

चेतन चंचल की इस हरकत से बिलकुल चौंक गया उसने फ़ोन से नज़र उठा कर देखा तो हैरान रह गया सामने का नज़ारा hi कुछ ऐसा था





चंचल को ऐसे देखकर चेतन बिलकुल हैरान रह गहा शादी के बाद से अब तक चंचल ने कुछ ऐसा नहीं किया था.. उसे समझ नहीं आ रहा था की ये अचानक उसकी पत्नी को हुआ क्या है.

चेतन- ये सब क्या है?

चंचल- ओह्हो तुम्हारे सामने खाना पड़ा है तुम सवालों में लगे हो.

चेतन ने सोचा ये बात भी सही है आज अगर ये मूड में है तो मज़े किये जाएं..

चेतन फुर्ती से उठा और अपना चेहरा बीवी के चूतड़ों के बीच घुसा दिया और उसके चूतड़ों, गांड और छूट को चाटने लगा. चेतन की जीभ के प्रहार से चंचल आहें भरने लगी जैसे hi चेतन की जीभ उसकी गांड के छेड़ पर पड़ती वो सिसक उठती.. उसने याद किया दोपहर में कैसे रिमझिम उसकी गांड को जीभ घुसा कर छोड़ रही थी तो कितना मज़ा आ रहा था.. तो चंचल ने भी आगे बढ़ाते हुए अपने दोनों हाथ पीछे की और किये और अपने दोनों चूतड़ों को फैलाया और बोली- सुनो जी अपनी जीभ गांड में घुसा कर छतो न...

चेतन तो ये सुनकर बिलकुल hi चौंक गया उसकी बीवी जिसके मुँह से बड़ी मुश्किल से वो गांड और छूट कहलवा पता था... लुंड बोलने में जो शर्माती थी छूट चाटने को बोलता तो न नुकर कहती थी आज उसे गांड में जीभ घुसाने को कह रही थी उसे समझ नहीं आ रहा था इस पर क्या प्रतिक्रिया दे साथ hi वो बेहद उत्तेजित भी होता जा रहा था. उसने सोचा क्या हुआ है वो बाद में पूछ लूंगा अभी जो हो रहा है उसके मज़े लूँ. और ये सोचकर उसने अपनी जीभ नुकीली की और चंचल की गांड के कैसे हुए छेड़ में घुसाने की कोशिश करने लगा जिससे चंचल की सिसकियाँ भी निकलने लगी. कुछ hi देर में चेतन की जीभ उसकी पत्नी की गांड के छेड़ में अंदर बहार हो रही थी..

चंचल- ahhhhhhhhhh ohhhhhhhhhh ahhhhhhhhhh जेईई ahhhhhhhhhh aiseeeeeeeeee हीईई मज़ाआहहह आ रहा है.

चेतन उसकी सिसकियों से और जोश में आता जा रहा था साथ hi उसका लुंड भी फूलता जा रहा था.. चंचल अपने चूतड़ों को पीछे की और धकेल कर उसकी जीभ को और अंदर धकेलने की कोशिश कर रही थी...

चेतन का लुंड पर उत्तेजना से फूलकर दर्द कर रहा था तो चंचल की गांड से जीभ निकल कर वो बोलै- अरे लुंड का भी कुछ ख्याल करो फटने को हो रहा है.

चंचल- दोनों छेड़ तुम्हारे सामने फैला रखे हैं फिर भी परेशां हो रहे हो.

चेतन चंचल के आज के रवैये से हैरान भी था साथ hi उसे मज़ा भी आ रहा था,

चेतन- ये भी सही कहा तुमने..

चेतन उठा और फुर्ती से चंचल के पीछे जगह ली और लुंड को पकड़ कर टोपे को छूट पर टिकाया hi था की चंचल ने हाथ पीछे करके उसके लुंड को पकड़ लिया और खिसका कर टोपे को छूट से हटा गांड के छेड़ पर रख दिया.. जिसे देख चेतन एक बार फिर हैरान रह गया .

चंचल- आज पीछे के दरवाज़े से अंदर आओ.

चेतन सोचने लगा की कहाँ गांड मरने के लिए उसे कई दिन तक मानना पड़ता था तब जाकर मरने को मिलती थी आज खुद से hi बोल रही है जो भी है मज़ा आ रहा है.

चंचल- रुके क्यों हो जी घुसाओ न अपना लोढ़ा मेरी गांड में..

चंचल के ऐसे बोलने से वो और जोश में आ गया और उसने बिना देरी के अपने लुंड पर दबाव डाला तो उसका लुंड चंचल की गांड को फैलता हुआ अंदर सरकने लगा.

चंचल को हमेशा की तरह तकलीफ तो हुई पर उसने दांत पीस कर उसे सहते हुए पति के लुंड को अपनी गांड में जगह दी..

चेतन तो आज जन्नत में था पत्नी की कासी हुई गांड मरते हुए,

चंचल- ओह्ह्ह्हह्ह आह्ह्ह्हह्ह्ह्हह कितना मोटा है जी तुम्हारा लोदाहहह देखो कैसे मेरी गांड को फैला रहा है.

चेतन पत्नी की ऐसी बातें सुन उत्तेजित से और उत्तेजित होता जा रहा था

चेतन- तुम्हारी गांड hi इतनी कासी हुई है मेरी रानी.

चंचल- ahhhhhhhhhh तो मर मर कर मेरी गांड की कसावट खोल दो... अपने लुंड का साँचा बना दो मेरी गांड में.

चेतन- हाँ मेरी रआआह्ह्ह्हहन्न्नीई ..

चंचल- ahhhhhhhhhh ohhhhhhhhhh ahhhhhhhhhh रानी nahiiiiiiiiiiiiiiii रंडी बना कर छोड़ो अपनी

चेतन चंचल की बातों से इतना जोश और उत्तेजना में आ गया की अब उसके लुंड और कमर जैसे खुद बा खुद तेज़ी से चलने लगे और वो बुरी तरह से चंचल की गांड मरने लगा.





चंचल भी ऐसे पहली बार खुल कर गांड मरवा रही थी और उसे पहली बार ऐसा मज़ाआ आ रहा था जिसका नतीजा ये हुआ की वो गांड मरवाते मरवाते hi झड़ने लगी ुस्जा बदन अकड़ने लगा उसकी गांड चेतन के लुंड पर कास गयी जिससे चेतन जो बिलकुल किनारे पर था वो भी अपने चरम पर पहुँच गया और अपने लुंड की पिचकारी पत्नी की गांड में भरने लगा...

थोड़ी देर तक दोनों बुरी तरह हांफते रहे फिर जब शांत हुए तो चेतन ने चंचल की गांड से लुंड निकला और लेट गया चंचल भी उससे चिपक कर लेट गयी उसे अपनी गांड से चेतन का रास बहार बहता हुआ महसूस हो रहा था पर उसे ये एहसास ाचा लग रहा था.

चेतन- आज क्या हुआ है तुम्हे? ये रूप तो कभी नहीं देखा तुम्हारा?

चंचल- क्यों पसंद नहीं आया क्या?

चेतन- अरे पसंद बहुत पसंद आया पर मन में सवाल उठ रहा है की अचानक से ऐसा कैसे.

चंचल- बस ऐसे hi मैंने सोचा अब खुल के जीना चाहिए, तुम्हे पसंद आएगा.

चेतन- बिलकुल पसंद आएगा क्या पसंद आ रहा है,

चंचल- हाँ मैंने सुना है पति अपनी पत्नी से बहुत खुश रहते हैं जब वो बिस्तर पर उनके साथ पूरी तरह से खुली हो.

चेतन- कहाँ सुना तुमने पर बिलकुल सही सुना है... और खुश तो हम तुमसे अब तक भी बहुत थे पर ये रोऊ भी बहुत पसंद आ रहा है.

चंचल- हैं न तो अब से मेरी यही कोशिश रहेगी की ज़्यादा से ज़्यादा खुल कर रहूं तुम्हारे साथ सही है?

चेतन- बिलकुल सही है हम तो यही चाहते हैं.

चंचल- पर तुम्हे भी हमसे खुलना होगा अपनी हर इच्छा हर चीज़ बतानी होगी.

चेतन- बिलकुल बताएँगे कटूं नहीं बताएँगे.

चंचल- पक्का न?

चेतन- ऐसे गांड मरवाओगी तो सब बताएँगे.

चंचल- ये तो जब चाहे मार्लो बस उससे पहले थोड़ी चाट लिया करो.

Chetan-bilkul ये भी कहने की बात है.

चंचल चेतन के हाथ पर सर रख कर लेट गई और उसके अध् खड़े हुए लुंड को पकड़ कर बोली- ाचा तुमसे एक बात पूछूं?

चेतन- हाँ पूछो.

Chanchal-tumhe अगर मेरे अलावा किसी को छोड़ने का मौका मिले तो किसे छोड़ना चाहोगे?

चंचल के इस सवाल से चेतन घबरा गया उसे लगा ये क्या पूछ रही है फिर भी वो सँभालते हुए बोलै- अरे किसी और को क्यों मैं तो बस तुम्हे hi छोडूंगा इतनी मस्त बीवी है मेरी.

चंचल- अभी खुलने की बात हुई है अरे डरो मत मैं बुरा नहीं मानूंगी हाँ छुपाओगे तो मानूंगी बताओ न.

चेतन- क्या बताऊँ.

चंचल- देखो हर मर्द की ख्वाहिश होती है अपनी पत्नी के अलावा किसी और को छोड़ने की चाहे बीवी कितनी भी मस्त हो तो ये बात मैं समझती हूँ तो वही पूछ रही हूँ.

चेतन- अरे यार तुमने तो फंसा दिया.

Chanchal-are फंसा क्या दिया अभी बात हुई थी पूरी तरह से खुलने की तुम मुझे कुछ भी बता सकते हो मैं तुम्हे.

चेतन- पर वो सब गलत है न.

चंचल- देखो है तो गांड मरना भी गलत पर तुम्हे मरते हुए मज़ा आता है न तो बिस्तर पर सही गलत मत सोचो बस वो सोचो जिसमे मज़ा आता है..

चंचल अब रिमझिम की बोली बोल रही थी और चेतन की बोलती बंद होती जा रही थी.

चेतन- हाँ कह तो सही रही हो.

चंचल- तो फिर बताओ.

चेतन- तुम्हे बुरा लगेगा.

चंचल- नहीं मुझे ाचा लगेगा की तुम मेरे साथ खुल रहे हो.

चेतन- आज न जाने तुम्हे क्या हो गया है.

चंचल ने सोचा ये खुद से नहीं बोलेगा और बात को ज़्यादा न खींचना hi समझदारी है.

चंचल- ाचा अगर मौका मिले तो तुम रिमझिम को छोड़ोगे?

चंचल ने ये बोलै और उसके बाद उसे हाथ में चेतन का लुंड हरकत करता महसूस हुआ पर चेतन इसके बिलकुल उलट प्रतिक्रिया दे रहा था

चेतन- क्या ये क्या कह रही हो तुम वो तुम्हारी देवरानी है, मेरे छोटे भाई की पत्नी उसके बारे में मैं ऐसे नहीं सोच सकता. छही छहिए.

चेतन के इस जवाब पर चंचल मुस्कुराई तो चेतन को थोड़ा अजीब लगा हालाँकि मन hi मन ये सुनकर वो उत्तेजित महसूस हो रहा था,

Chetan-kya हुआ मुस्कुरा काहे रही हो.

चंचल- नाटक करोगे तो मुस्कुराऊँगी नहीं.

चेतन- नाटक कैसा नाटक.

चंचल- ाचा मुँह से कैसे मन कर रहे हो जबकि रिमझिम का नाम सुनते hi ये देखो लुंड कैसे तुरंत तन गया तुम्हारा..

चंचल ने उसके लुंड पर उंगलियां चलते हुए दिखाया तो चेतन चौंक गया फिर हड़बड़ाते हुए बोलै- वो तो तुम सहला रही हो इसलिए हुआ है.

चंचल- ाचा और कल रात जो मुझे छोड़ते हुए रिमझिम का नाम ले रहे थे वो कैसे हुआ था.

इस बात से तो चेतन का चेहरा hi फीका पद गया .

चेतन- कब क्या मैंने कब रिमझिम का नाम लिए तुमने गलत सुना होगा.

चंचल- देख लो मैंने तो अपनी बात रख दी अब तुम्हे नहीं खुलना तो तुम्हारा hi नुकसान है मुझे कोई परेशानी नहीं है.

चेतन समझ गया की अब बिना बात के लड़कर कोई फायदा नहीं है वो हार चूका है तो उसनर हर मानते हुए पत्नी के आगे घुटने तक दिए एयर बोलै- ाचा ठीक है हाँ रिमझिम का ख्याल आता है कभी कभी और कल ज़्यादा hi था क्यूंकि.

चंचल- क्यूंकि.

चेतन ने फिर उसे कल का पूरा किस्सा बताया की कैसे उसनर रिमझिम को ख़ुशी के कमरे में बस ब्रा पंतय में dekha,.uske पहले की बात चंचल समझ गयी की कब और कैसे देखा होगा..

चंचल- ये हुई न बात ये hi तो मैं जह रही हूँ अपने मन की बात रखने को.

चेतन- तुम्हे बुरा नहीं लग रहा.

चंचल- बिलकुल नहीं, पर तुम अभी अपनी बताओ रिमझिम को छोड़ना चाहोगे?

चेतन ने एक बड़ी मुस्कान देते हुए कहा - मौका मिले तो क्यों नहीं.

चंचल- तो आज सोचलो यही मौका है बस 5 मिंट रुको...

चेतन- मतलब क्या समझा नहीं मैं..

चंचल- यहीं रुको 5-10 मिंट थोड़ा सबर करो.

ये कहकर चंचल उठी और बाथरूम में चली गयी चेतन का तो दिमाग hi नहीं चल रहा था उसे समझ नहीं आ रहा था क्या हो रहा है आज उसकी बीवी रिमझिम का नाम लिए जाने पर गुस्सा नहीं हुई और अब ये 5 मिंट क्यों रोक कर गयी है, चेतन के लिए 5 मिंट 5 घंटे से भी ज़्यादा हो गए थे खैर काफी देर इंतज़ार के बाद बाथरूम का दरवाज़ा खुला और चेतन की आँखें चौड़ी हो गयी..

चेतन देखता रह गया चंचल ने रिमझिम की साड़ी पहन राखी थी शायद ब्लाउज भी रिमझिम का hi था क्यूंकि बिलकुल कास के आ रहा था लग रहा था छुछियां अभी ब्लाउज फाड़कर बहार आ जाएँगी





चंचल ने साड़ी को ऐसे कामुक तरीके से पहना था की साड़ी ढके काम और दिखाए ज़्यादा.

चेतन का लुंड फिर से ठुमके मरने लगा.

चंचल इठलाते हुए बिस्तर के पास आई और चेतन से बोली- भैया जीजी ने बोलै है तुम्हारा ध्यान रखने को, तो बताओ न कोई सेवा हो तो.

चंचल ने थोड़ा आवाज़ बदल कर कहा जिससे चेतन भी समझ गया की क्या हो रहा है, उसकी बीवी अभी रिमझिम होने का नाटक कर रही थी जिसे वो रिमझिम समझ कर छोड़ सके... इस ख्याल से चेतन को एक अलग hi उत्तेजना हुई क्यूंकि इससे पहले उसने ऐसा कुछ नहीं किया था और इतना hi नया ये चंचल के लिए था पर उसे भी य्ये सब करने में बहुत मज़ा आ रहा था.

चेतन- ओह्ह हाँ रिम्मी सेवा तो कुछ नहीं है पर तुम्हारी जीजी की याद में मेरा ये खड़ा हो गया है इसे शांत कर सकती हो.

चेतन ने नाटक में शामिल होते हुए चंचल को अपना खड़ा लुंड दिखते हुए कहा .

चंचल- हाँ भैया मैं छोटी बहु हूँ और मेरा तो फ़र्ज़ है तुम्हारी सेवा करना..

ये कहकर चंचल चेतन की टैंगो के बीच बैठ गयी और हलके से हाथ बढाकर चेतन की आँखों में देखते हुए उसके लुंड को पकड़ लिया और बोली- ओह्ह भैया कितना सख्त है आपका ये तो... और कितना गरम भी?

चेतन- ये क्या रिम्मी नाम लेकर बताओ.

चंचल- नहीं भैया मुझे शर्म आती है..

चंचल ने चेतन के लुंड को मुठियाते हुए कहा.

चेतन- इसमें शर्माना कैसा बहु तुम्हारी जीजी भी तो बोलती है.

चंचल- ाचा जीजी भी बोलती हैं तो बोलदेति हूँ इसे लुंड कहते हैं..

चेतन- बिलकुल सही ाचा अब जो जो तुम्हारी जीजी करती हैं वो तुम भी करोगी.

Chanchal-haan भैया बताओ न करुँगी.

Chetan-to मेरे लुंड को अपने मुँह में भर कर प्यार करो..

चंचल- जीजी आपके लुंड को मुँह में भरके प्यार करती हैं?

चेतन- हाँ बहुत अचर से चूस चूस कर, तुम भी करोगी बहु रानी?

चंचल- हाँ भैया करुँगी आपकी सेवा के लिए hi तो आई हूँ..

ये कहकर चंचल ने चेतन के लुंड को मुँह में भर लिया जिससे चेतन की आह निकल गयी और उसकी आँखें बंद हो गयी वो ये सोचकर मज़े लेने लगा की ये उसकी पत्नी नहीं बल्कि छोटे भाई की पत्नी है जो अभी उसका लुंड चूस रही है.....

जहाँ एक कमरे में एक भाई अपने छोटे भाई की पत्नी से लुंड चुसवाने के मज़े लेने की कोशिश कर रहा था तो दूसरा भाई भी पीछे नहीं था इस कमरे में भी चुदाई की आंधी आई हुई थी...

रमन - ओह्ह्ह्हह हाँणनल ली ख़ुशी आह्ह्हह्ह्ह्ह मेरी रांड बहन सारा रास निचोड़ ले मेरा अपनी कासी हुई छूट में...

रमन बिस्तर के किनारे खड़े होकर रिमझिम की दोनों टैंगो के बीच था और उसकी जांघों को पकड़ तूफानी धक्कों के साथ छूट में धक्के लगा रहा था पर रिमझिम को छोड़ते हुए उसके ख्यालों में उसकी कमसिन बहन ख़ुशी थी जिसकी रसीली छूट को वो छोड़ रहा था.





वहीं रिमझिम भी रमन का पूरा साथ देते हुए ख़ुशी होने का नाटक कर रही थी और उसका हौसला बढ़ा रही थी

रिम- ahhhhhhhhhh भैया ओह्ह्ह्ह aiseeeeeeeeee hi छोड़ो अपने मोटी से लुंड से अपनी बहन की छोटी छूट को आअह्ह्ह्ह भैया भेनचोद बनने का पूरा सुख ले लो भैया.

रमन - अह्ह्ह्ह ले रहा हूँ बहना तेरे पूरे बदन के मज़े,

रिम- अह्ह्ह्हह भैया आईसीईए hi छोड़ो अपनीईई रैंड बहन को ..

दोनों hi पूरे जोश में थे और अपने चरम पर रहे . पति के द्वारा ऐसी तगड़ी चुदाई लो रिमझिम ज़्यादा नहीं सह पाई और झड़ने लगी रिमझिम के झड़ते hi रमन ने भी अपनी धार छोड़ दी पत्नी की छूट में और कुछ देर बाद दोनों एक दुसरे की बाहों में लेते हुए थे.

रिम- आज तो ख़ुशी के बारे में सोच तुम ज़्यादा hi जोश में आ गए थे.

रमन- हाँ यार ज़्यादा hi बहक गया था.

रिम- पर कब तक मुझे ख़ुशी बना कर छोड़ते रहोगे कभी उसकी छूट को भी इस लुंड का सुख दो

रिमझिम ने रमन के लुंड को पकड़ते हुए कहा.

रमन- अरे यार चाहता तो हूँ पर कैसे तुम hi कुछ करवाओ. तुम भी तो कुछ नहीं करा रही हो.

रिम- ाचा उस दिन उसके बदन पर झड़े थे वो किसने करवाया था.

रमन- हाँ पर उसके आगे भी तो कहानी बढे मेरी रानी.

रमन ने रिमझिम की गांड के छेड़ को कुरेदते हुए कहा.

रिम- अरे वो अभी एक तो कुंवारी है ऊपर से पहली बार hi अपने भाई से छोड़ने को तैयार नहीं होगी बात घुमाकर करती भी हूँ तो बदल देती है.

रमन- तो फिर कैसे होगा.

रिम- उसे ये एहसास दिलाना होगा की सच में ऐसा होता है भाई बहन के beech.kisi भाई बहन की चुदाई दिखानी होगी.

रमन- तुम तो बिलकुल hi असंभव बात कर रही हो. ऐसा कहाँ से दिखा देंगे हम भाई बहन की चुदाई.

रिम- अरे चाहो तो क्या कुछ नहीं हो सकता.

Raman-mai. तो चाहता हूँ पर कुछ हो कहाँ रहा है.

rim-yahi तो बात है ाचा तुम कितना चाहते हो अपनी प्यारी बहन की छूट को,

रमन- अब ये कैसे बताऊँ पर हाँ उसकी छूट का ख्याल हमेशा रहता है मेरे दिमाग पर..

रिम- हन्नन हमेशा रहता है, तो किस हद तक जा सकते हो उसकी छूट पाने के लिए.

रमन- साडी हद पार कर सकता हूँ बस उसकी छूट में मेरा लुंड जाना चाहिए.

रिम- और उसके बदले कीमत चुकानी पड़े तो?

रमन- कैसी कीमत वैस्व अगर मेरे बस में हुआ तो हर कीमत चूका सकता हूँ.

रिम- अगर बहन की छूट की कीमत पत्नी की छूट से चुकानी पड़े तो..

रमन- मतलब पत्नी की मतलब तुम्हारी न पर कैसे तुम क्या कह रही हो समझ नहीं आ रहा.

रिम- ख़ुशी को छोड़ने के बदले अगर तुम्हे मुझे किसी से छुड़वाना पड़े तो छुडवाओगे.

रमन रिमझिम के इस सवाल से कुछ देर के लिए बिलकुल शांत हो गया

रिम- क्या हुआ?

रमन - कुछ नहीं

रिम- तो जवाब दो.

रमन- देखो अगर सिर्फ मेरी बात हो तो मैं ये कीमत दे सकता हूँ पर मैं ये कभी नहीं चाहूंगा की तुम मेरे लिए किसी से छुड़वाओ. मैं ये भी समझता हूँ की अगर मैं ख़ुशी को छोड़ सकता हूँ तो तुम्हे भी पूरा हक़ है मेरे अलावा किसी चुद सकने का पर वो फैसला तुम्हारा हो तुम्हारी पसंद पर हो न की इसलिए की तुम मेरी वजह से या कीमत की वजह से किसी से चुद जाओ.

रमन की बात सुन अब रिमझिम शांत हो गयी और फिर बोली - हाय कितना प्यारा पति है मेरा.

रमन - समझा नहीं.

रिम- बस यही समझो की मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूँ, और तुम बहुत अचे हो.

रमन- मैं भी तुमसर बहुत प्यार करता हूँ जान तुम्हारे बिना मेरी शायद hi किसी से बनती.

रिम- हाँ कोई और तुम्हे तुम्हारी बहन छोड़ने में मदद जो नहीं करती.

रिमझिम ने छेड़ते हुए कहा..

रमन- और न hi बहन बन कर चुदती.

रमन ने उसे खुद से चिपकते हुए हंसकर कहा.

रिम- ाचा अब सुनो मेरा प्लान.

रमन - सुनाओ

रिम- अगर तुम तैयार हो तो भाई बहन की चुदाई ख़ुशी को दिखा सकते हैं.

रमन- मैं तो तैयार हूँ पर कैसे.

रिम- मैं अगर अपने भाई से छुडवां तो और वो ख़ुशी देखले तो.

रिमझिम ने थोड़ा हिचकते हुए कहा.. जिसे सुनकर रमन थोड़ा शांत हुआ पर अगले hi पल उसके होंठों को चूम लिए और बोलै- ये तो मैंने कभी सोचा hi नहीं इससे हम दोनों बराबर भी हो जायेंगे. पर.

रिम- पर क्या?

रमन- क्या तुम सच में विनीत से छोड़ना चाहती हो या सिर्फ मेरे और ख़ुशी के लिए चुड़ोगी.

रिम- सच कहूं तो तुम्हारी और ख़ुशी की चुदाई के बारे में सोच सोचकर मुझे भी विनीत के बारे में ख्याल आने लगे हैं.

रिमझिम ने बड़ी सावधानी से अपने मइके के रहस्यों को छुपाते हुए अपनी बात राखी थी.

रमन- मुझे तो कोई दिक्कत नहीं hogi,balki मुझे तो देखना है तुम्हे अपने भाई से चुड़ते हुए.

रिम- सच्ची.

रमन- हाँ पर ये होगा कैसे?

रिम- मैं क्या सोच रही हूँ की कैसे भी करके विनीत और ख़ुशी को भी घूमने के लिए साथ ले चलते हैं सबके. क्या कहते हो.

रमन- सोचा तो सही है. वहां हमें कुछ भी करने के मौके ज़्यादा मिल सकते हैं.

रिम- वही तो पर अब ख़ुशी को मानाने और बाकि सब को दोनों को लेजाने की ज़िम्मेदारी तुम्हारी है विनीत को मैं बुला लुंगी.

रमन - पर तुम विनीत को कैसे पटाओगी वो सोचा है.

रिम- अरे वो इतना मुश्किल नहीं होगा वो बहुत बड़ा छोड़ू है कितनी hi बार मैंने उसे मुठ मरते हुए पकड़ा है.

Raman-sachhii

रिम- हाँ. कई बार.

रमन- तो इससे पहले कभी कुछ मन नहीं हुआ तुम्हारा उसके साथ कुछ करने का.

रिम- उसका लुंड देखकर होता था पर फिर खुद को दांत कर चुप करा देती थी..

रिमझिम बड़ी चालाकी से बातें बना रही थी ताकि रमन के सामने कुछ गलत न कह दे अब बेचारे रमन को कहाँ पता था की उसकी बीवी भाई तो क्या अपने पापा और चाचा से भी चुद चुकी है और वही क्या उसके घर की हर औरत का यही हाल है.

रमन- चलो कल से hi मैं इस काम में लग जाता हूँ.

रिम- मैं भी विनीत से और घर पर बात कर लुंगी.

रमन- वो तो कल पर अभी तो मुझे तुम्हारी ये गांड चाहिए.

रिम- चाहिए तो ले लो बिना मरे तुम मानोगे नहीं.. पर उससे पहले अचे से चाटो.

ये कह कर रिमझिम ने अपनी गांड फैलादी और रमन ने अपना चेहरा उसके चूतड़ों में घुसा दिया.

वहीं दुसरे कमरे में दोनों पति पत्नी पड़े पड़े हांफ रहे थे.

चंचल- मैंने रिमझिम बनने का नाटक क्या किया तुमने तो अपनी पूरी हवस निकल दी मुझपर आह्हः क्या रगड़ रगड़ के छोड़ा है.

चेतन- हाँ यार ऐसा मज़ा कभी नहीं आया, आज तो खुश कर दिया मन.

चंचल- इतने में इतना खुश हो तो किसी दिन सच में रिमझिम ने छुड़वा लिया तो क्या करोगे.

चेतन- पता नहीं मई उस दिन क्या करूँगा.. तुम्हारा कर्ज़दार बन जाऊंगा.

चंचल- कर्ज़दार क्या बनना मैं देवर जी को अपने पास बुला लुंगी.

चेतन ये सुनते hi थोड़ा चौंका और फिर बोलै- आज तो तुम झटके पर झटके दे रही हो.

चंचल- क्यों तुम्हे ाचा नहीं लगेगा कोई और मुझे चोदे.

चेतन- अरे वो बात नहीं मैं तो सोच रहा हूँ कितना ाचा होगा दोनों भाई एक दुसरे के सामने एक दुसरे की बीवियों को छोड़ें तो.

चंचल- वैसे चाहो तो हो भी सकता है.

चेतन- चाहता तो हूँ पर होगा कैसे.

चंचल- खुद कुछ सोचो रिमझिम को पटाने की ज़िम्मेदारी मेरी तुम्हारे लिए.

चेतन- सच में.

चंचल- हाँ बिलकुल सच.

चेतन- तो अभी जब घूमने जाने वाले हैं न तभी करते है. कुछ सोच समझ कर.

चंचल- हाँ सोच समझ कर hi करना होगा.

चेतन- वैसे आज आज में hi तुमने तो मेरी ज़िन्दगी hi बदल दी.

चंचल- हमारी बदली है जी अब बस मज़े hi मज़े करने हैं..

ऐसे hi बातें करते हुए दोनों एक दुसरे से चिपक कर आने वाले समय के आपने सजाते हुए सो जाते हैं...

यहाँ ये लोग सोये थे तो वहीं दूर गाओं में चेतन की माँ यानि हमारी रिम्मी की सास माधुरी अपने भैया के लुंड को अपनी गांड में फंसा कर उछाल रही थी..

माधुरी- अह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्ह आह्हः ढैय्या फाड़ दो मेरी गांड.

वहीं उनका भाई भूरे भी तेज़ी से उनकी गांड मार रहा था.

भूरे- अह्ह्ह जीजी मार लेने दो आज आअह्ह्ह कल तू वैसे भी चली जाएगी फिर न जाने कितना इंतज़ार करना पड़ेगा तेरी इस गांड के स्वाद लेने के लिए..

माधुरी- अह्ह्ह्ह तो मार ना फिर अपनी जीजी की गांड अह्ह्ह्ह और चिंता क्यों करता है मैं बीच बीच में आती रहूंगी और एक दो बार तू भी घूम जइयो.

Bhoore-aa तो जॉन जीजी पर वहां कुछ हो hi नहीं पता है अब तो दूसरी बहु भी आ गयी है तो मौका hi नहीं मिलता.

भूरे ने जीजी की कासी गांड में धक्के लगते हुए कहा

माधुरी- हाँ वो तो है पर कोई बात नहीं कुछ न कुछ तरीका निकल hi लेंगे.

भूरे- वैसे जीजी तुंहारी दोनों बहुएं hi एक से बढ़कर एक माल हैं एक बार मिल जाएं तो मज़ा आ जाये

माधुरी- ज़्यादा न उड़ समझा बहन की गांड छूट मिल रही है वो काम है क्या भेनचोद काम से काम बहुओं को तो छोड़ दे.

भूरे- हेहेहे जीजी जब हमने अपनी जीजी को नहीं छोड़ा तो उन्हें कैसे छोड़ देंगे.

भूरे ने हाथ आगे लेजाकर अपनी जीजी की बड़ी चूचियों को मसलते हुए कहा.

माधुरी- अह्ह्ह्ह किसी दिन तेरे जीजा को पता चल गया न तो वो हम दोनों को नहीं छोड़ेंगे ज़िंदा जला देंगे..

भूरे- तुम्हारी गांड के बदले अगर जलना भी पड़े तो मंज़ूर है जीजी.

इस बात से माधुरी की भी हंसी निकल पड़ी -कमीना..

चोदामपुर

(अस कर्मा )

सभ्य- ahhhhhhhhhh लाल्ल्लाहहह जल्दी कर कोई आ गया तो गड़बड़ हो जाएगी.

में- बस माँ थोड़ी देर और बस निकलने वाला है.

सभ्य- न जाने दिन भर कहाँ था जो लुंड खड़ा करके लेकर आया है की सबर hi नहीं हो राह तुझे अह्ह्ह्हह माँ...

में- अरे माँ ओह्ह्ह्ह कितना मज़ा है तुम्हारी छूट में..

यहाँ मैं अपनी रसोई में माँ को सिंक के किनारे झुककर उनकी साड़ी कमर तक उठा कर पीछे से दनादन छोड़ रहा था.





दिन भर जो नीतू और अंजलि की वजह से लुंड का बुरा हाल हुआ था उसकी सजा बेचारी माँ की छूट को भुगतनी पद रही थी..

Maa-ohhh लल्लाहहह अह्हह्ह्ह्ह जल्दी कर कहीं कोई आ न जाये..

में- अरे माँ पापा खेत पर गए हैं एक दो घंटे से पहले आएंगे नहीं, मौसा मौसी के साथ कमरे में हैं तै भी कमरे में हैं अनुज और मौसी का दर नहीं है.

माँ- फिर भी क्यों खतरा मोल लेना.

में- बस होने वाला है माँ अह्ह्ह्ह रास पियोगी..

माँ- हाँ तेरे रास के लिए कभी मन किया है ...

ये कहकर माँ पलटकर घुटनो पर बैठ गयी और लुंड मुँह में भर लिया मैंने भी माँ का चेहरा पकड़ा और कमर हिलाते हुए उनका मुँह छोड़ने लगा और कुछ पल बाद मैंने अपना रास भी माँ के मुँह में छोड़ दिया जिसे माँ पूरा का पूरा जातक गयी..

(अस राइटर)

यहाँ एक माँ बेटे का जोड़ा अलग हुआ तो वहीं कुछ घर दूर एक और माँ बेटे का जोड़ा लगा हुआ था मेरे दोस्त जग्गू ने अपनी मम्मी और हमारी मंजू तै को नंगा कर बिस्तर पर झुकाया हुआ था और पीछे से उनके चूतड़ों के बीच अपने लुंड को अंदर बहार कर रहा था,





आज जग्गू के पापा किसी रिश्तेदार के शादी होने के कारन बहार गए हुए थे जिसका दोनों माँ बेटे पूरा फायदा उठा रहे थे.

जग्गू- ओह्ह्ह्ह मम्मी तुम्हे कितना भी छोड़ लूँ हर बार ज़्यादा मज़ा आता है..

जग्गू ने मम्मी के थिरकते हुए चूतड़ों को मसलते हुए कहा..

मंजू तै- ओह्ह्ह्ह बाछहुआअ aiseeeeeeeeee hi अह्ह्ह्ह अब तो तेरे लुंड के बिना हमको भी चैन नहीं मिलता है...

जग्गू- तुम्हे चैन दिलाने के लिए तुम्हारे बेटे का लुंड है मुनमययययय अह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्ह.

मंजू तै- आराम से बहु सुन लेगी..

जग्गू - अह्ह्ह्हह्हह सो गयी होगी भाभी अब तक तो..

वहीं प्रेमा भाभी बेचारी उसे कहाँ नींद आ रही थी, दिन में जग्गू से चुदती थी और रात को ससुर जी कैसे भी करके रात को मौका निकल कर उसे एक बार ज़रूर छोड़ देते थे पर आज उनके न होने से बेचारी अकेले तड़प रही थी.. जब कोशिश करने के बाद भी नींद नहीं आई तो वो बिस्तर से उठी और उसे अपने देवर जग्गू का ख्याल आया, उसनर सोचा ससुर न सही देवर तो है hi तो वो जग्गू के कमरे की और गयी और झांक कर देखा तो जग्गू वहां नहीं था, वो सोचने लगी की इस समय जग्गू कहाँ गया होगा, फिर उसने आगे बढ़ाते हुए आंगन में देखा और अंत में अपने सास ससुर के कमरे में पर दरवाज़ा अंदर से बंद था पर आवाज़ें आ रही थी, और आवाज़ें कैसी थी ये समझने में उसे देर नहीं लगी, उसका दिल धड़कने लगा और वो कमरे के अंदर देखने के तरीके सोचने लगी तभी दरवाज़े के ऊपर बने रोशनदान का उसे खाया आया वो झट से एक स्टूल लेकर आई और उस पर चढ़ गयी और अंदर झाँक कर देखा तो उसकी आँखें चौड़ी हो गयी अंदर उसकी सास बिस्तर पर नंगी होकर झुकी हुई थी और उसका देवर अपनी माँ की कमर को थामे पीछे से लुंड अपनी माँ की छूट में अंदर बहार कर रहा था. प्रेमा ये देख हैरान रह गयी की उसके घर में उसके अपने घर में ये सब हो रहा है उसकी सास और देवर के बीच पर कर्मा और बाकि सब के साथ चुदाई के बाद वो इतनी तो खुल चुकी थी की उसे ये सब होता है पता था खासकर विनीत और शशि बुआ को भी आपस में छुड़वाते देखा था, राजन चाचा अपनी बेटी को छोड़ते थे तो उसे कुछ अजीब या पाप नहीं लगा बस उसने अपनी सैस और देवर के ऐसे रिश्ते की कल्पना नहीं की थी..

पर अब जब वो सामने से देख रही थी तो खुद को उत्तेजित होने से नहीं रोक पाई और देखते हुए साड़ी के ऊपर से अपनी छूट मसलने लगी. और सोचने लगी सही भी है मैं बेकार में अपने और पापाजी के रिश्ते को लेकर पछतावा करती थी अब तो सब बराबर हैं... तभी उसने देखा की जग्गू ने गुर्राते हुए अपने लुंड का पानी मुनमय के चूतड़ों पर छोड़ दिया है तो खेल ख़त्म होता देख वो भी स्टूल से उतरी और उसे अपनी जगह रख कर अपने कमरे में आकर बिस्तर पर लेट गयी और जो कुछ उसनर देखा उसे सोच कर उसके चेहरे पर एक शरारती मुस्कान फ़ैल गयी...

वहीं कर्मा के घर में उसके बगल वाले कमरे में पति पत्नी का मिलान जारी था आज हमारे मौसा अपनी पत्नी की साडी शिकायतों को दूर करते हुए उसे छोड़ रहे थे मौसी भी पति से छुड़वा कर मस्त हो रही ठु.





शैलेश - अह्ह्ह्हह्हह साली ले आअज तेरी छूट की साडी खुजली मिटा दूंगा रंडी साली...

शालू- अह्ह्ह्हह हाँ मिटा दो न अपनी रैंड की खुजली और मेरी छूट को शांत कर दो.

दोनों पति पत्नी अक्सर चुदाई के वक़्त ऐसे hi गालियों और गन्दी बातें करते हुए उत्तेजित होते थे और चुदाई का मज़ा लेते थे...

शैलेश - आह्ह्ह्ह साली कितनी प्यासी छूट है तेरी.

शालू- तो प्यास बुझा दो न इसकी अपने लुंड का पानी पिलाकर...

शैलेश- पिलाऊंगा साली आज तेरी छूट hi भर दूंगा..

यहाँ पति पत्नी का मिलान ज़ोरों से चल रहा था तो बिना किसी को खबर किये और शायद किसी का ध्यान भी नहीं था इसका फायदा अनुज उठा रहा था और दोपहर में शुरू कियस गए काम को आगे बढ़ा रहा था.

खाना खाने के बाद वो जब सब अपने अपने कमरों की और जा रहे थे तो वो भी चुपके से अपनी नै तै संतो देवी के कमरे में घुस गया था और दरवाज़ा भिड़ा कर उनके बदन के साथ खेल खेलने लगा था और वो खेल अब उस पड़ाव पर पहुँच चूका था जहाँ अनुज संतो देवी के पीछे लेट कर उनको अपनी बाँहों में कास कर उनके भरे हुए चूतड़ों के बीच अपने लुंड को उनकी छूट से अंदर बहार कर रहा था





संतो देवी भी अनुज के लुंड की मार से मस्त होती जा रही थी और उसके जवान कड़क लुंड का मज़ा ले रही थी.

वहीं अनुज भी तै के भरे पूरे बदन को छोड़ छोड़ कर पूरा आनंद उठा रहा था.

उसके मन में एक ख़ुशी ये भी थी की अब तक उसने जितनी भी चुत छोड़ी थी वो उसके भाई ने उसे दिलवाई थी तै को वो खुद से छोड़ रहा था तो इसे वो अपनी उपलब्धि में गईं रहा था हालाँकि उसने सोच लिए था की कल hi वो भैया को इस बाटे में बता देगा और फिर दोनों मिलके तै के गदराये बदन का मज़ा लेंगे.

पर अभी उसका ध्यान तै को छोड़ने पर था साथ hi उसने ठान लिया था की सोने से पहले एक बार अपने लुंड को तै की गांड की भी सैर ज़रूर करवाएगा.

अब सब लोग जब चुदाई में लगे हो तो अपने शैलेश बाबू कैसे पीछे रह सकते हैं तो आज खेत पर hi रास लीला चालु थी, राजन भी साथ थे, और इस समय खेत के बगल में बानी झोपडी में पड़ी खत पर नीचे लेते हुए थे और उनके ऊपर भरे बदन वाली मज़दूरन झुमरी उनके लुंड को अपनी छूट में लिए हुए बैठी थी वहीं राजन और झुमरी की टैंगो के बीच नीलेश थे जो की अपना लुंड झुमरी के बड़े बड़े चूतड़ों के बीच उसके गांड के छेड़ में फंसा कर अंदर बहार कर रहे थे.

वहीं झुमरी का चेहरा एक तरफ को झुका हुआ था जिसे उसके बेटे मुन्ना ने पकड़ा हुआ था और अपना लुंड अपनी माँ के मुँह में घुसा कर चुसवा रहा था साथ hi माँ को दो दो लुन्डों से एक साथ छुड़ता हुआ देख रहा था, झुमरी के तीनो छेड़ भरे हुए थे और वो तीन तीन लुंड एक साथ शांत कर रहक थी जिनमे से एक उसके बेटे का भी था.





मुन्ना के लिए तो ये बहुत उत्तेजित होने वाला दृश्य था अपनी माँ को एक साथ दो दो लुंड से चुड़ते हुए देखना. और इसका असर उसके लुंड पर भी था जो फूला हुआ था और वो कमर हिला हिला कर अपनी माँ का मुँह छोड़ रहा था .

झुमरी को पता था की जब तक तीनो लुंड शांत नहीं हो जाते उसकी खैर नहीं और हुआ भी ऐसा hi अगले घंटे भर उसकी दमदार चुदाई हुई और तीनो लुन्डों ने उसके छेदों को अपने अपने पानी से भर दिया तब जाकर छोड़ा.. इसके बाद नीलेश और राजन घर की और चल पड़े और उन दोनों माँ बेटे को वहीं खेत की देखभाल के लिए छोड़ दिया...

इसके आगे क्या हुआ अगली अपडेट में प्लीज कमैंट्स करके ज़रूर बताएं कैसी लगी अपडेट बहुत बहुत धन्यवाद्
 
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