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सरलपुर
रात को हुए घटनाक्रम के बाद सुबह शांत थी हालाँकि चेतन छुप छुपकर रिमझिम के बदन को नास्ता करते हुए निहार रहा था और आने वाले सुखद कल की कल्पना कर रहा था, वहीं रमन हमेशा की तरह छुप कर अपनी बहन को निहार रहा था, और कहीं न कहीं चंचल भी अपने देवर को देखकर कुछ कुछ मन hi मन ख्याल पका रही थी. वहीं उसे उसके ससुर तिरछी नज़रों से ताड़ रहे थे और साड़ी में झांकती उसकी कमर देख कर उत्तेजित हो रहे थे.
खैर नाश्ता हुआ और फिर चेतन रमन अपने काम पर और ख़ुशी कॉलेज निकल गयी, दोनों बहुएं घर के काम में और चरण सिंह हाल में बैठ कर टीवी देखने का बहाना करते हुए अपनी जवान बहुओं को देख नैन सुख भोग रहे थे...
काम के बाद दोनों बहुएं नहाने के लिए चली तो चरण सिंह अपने कमरे में आ गए इसका फायदा उठाते हुए दोनों एक hi बाथरूम में घुस गयीं और दोनों पानी बचते हुए साथ नहाने लगी...

नहाने का प्रोग्राम थोड़ा लम्बा चला क्यूंकि देवरानी जेठानी ने एक दुसरे के बदन को अचर से साफ़ किया खासकर छूट गांड और छूछीयो का विशेष ध्यान रखा गया जिन्हे दोनों ने hi चाट चाट कर साफ़ किया. एक दुसरे के होंठों और जीभ को भी खूब चूसा... खैर नहाना होने के बाद दोनों आराम करने लगी जो की रात भर की चुदाई और सुबह जल्दी उठने के कारण ज़रूरी भी हो जाता था, इसीलिए दोनों बहुएं अपने अपने कमरों में जाकर सो गयी...
उधर थोड़ी देर बाद चरण सिंह उठे तो उन्हें हर भारतीय आम इंसान की तरह चाय की तालाब लगने लगी, आंगन में आकर देखा कोई नज़र नहीं आया तो वहीं सोफे पर बैठ कर चंचल को पुकारा चंचल जो नींद में थी उसे कोई खबर hi नहीं थी, अगली आवाज़ रिमझिम को दी उसने भी नहीं सुना, कुछ देर में खुद खड़े हुए सोचा बहुएं कहाँ हैं जो सुन hi नहीं रही,
उठकर चेतन और चंचल के कमरे की और गए तो दरवाज़ा भिड़ा हुआ था थोड़ा धक्का लगाया तो खुल गया चरण सिंह ने दरवाज़ा खोलते हुए चंचल को पुकारा और अंदर झांक कर देखा और फिर जो देखा उसे देख थोड़ा ठिठक से गए.. अंदर बिस्तर पर बहु चंचल सो रही थी कपडे सोने की वजह से अस्त व्यस्त हो गए थे पल्लू नीचे गिर गया था जिस वजह से चरण सिंह को एक बेहद कामुक नज़ारा देखने को मिल रहा था.
चंचल का सपाट मगर गदराया हुआ पेट कामुक नाभि साड़ी और ब्लाउज के बीच नंगा देखकर चरण सिंह का मन ठहर सा गया.

कैसे हुए ब्लाउज में चंचल की चूचियों का उभर जो की हर सांस के साथ ऊपर नीचे हो रही थी...
चरण सिंह की नज़र तो बहु के मादक पेट और कामुक नाभि पर से हैट hi नहीं रही थी... दरवाज़ा खोले वो ऐसे कमरे में झाँक रहे थे कुछ देर के बाद उन्हें ख्याल आया की वो कहाँ खड़े हैं अगर किसी ने देख लिया तो जवाब देना मुश्किल हो जायेगा. इसलिए कुछ सोचते हुए दतवाज़े से पीछे हेट और भरी मन के साथ जाने लगे पर दो तीन कदम बढ़ाये थे की मन नहीं माना, अंदर की हवस ने सही गलत के बोध पर कब्ज़ा कर लिया और चलते कदम रुक गए, कुछ देर यूँ hi खड़े रहने के बाद चरण सिंह दोबारा कमरे की और घूम गए और उसके दरवाज़े के पास आये, फिर से दरवाज़े को धकेला और फिर घर में सब तरफ देखा खासकर रिमझिम के कमरे को तो वो बंद था फिर बड़ी सावधानी से दरवाज़ा खोलकर वो अंदर घुस गए और आराम से उसे बापिस भिड़ा दिया.
अब चरण सिंह की नज़र बापिस चंचल के गदराये बदन पर थी, उसकी हर सांस के साथ फूलती छुछियां उसका मांसल चिकना पेट, बीच में गहरी नाभि देखकर hi चरण सिंह का दिल तेज़ी से धड़कने लगा, उन्हें अपनी धोती के अंदर लुंड में हलचल साफ़ महसूस हो रही थी, कुछ देर यूँ hi नैन सुख लेने के बाद चरण सिंह के पेअर आगे को बढे और वो बिस्तर के पास पहुँच गए, चंचल के चेहरा देखा तो वो गहरी नींद में सो रही थी. चरण सिंह का दिल ज़ोरो से धड़क रहा था क्यूंकि अभी वो जिस अवस्था में थे अगर कोई देख लेता तो वो कोई भी सफाई देने में असमर्थ होते.. कोई और क्या अगर चंचल खुद भी जाग जाए तो वो क्या उत्तर देंगे उन्हें समझ नहीं आ रहा था.
पर कहते हैं न जब सर पर उत्तेजना का बुखार चढ़ जाता है तो कुछ और समझ नहीं आता वही हाल चरण सिंह का था, बेचारे अपनी हवस के आगे मजबूर थे..
चरण सिंह ने कांपते हुए हाथ धीरे धीरे आगे बढ़ाये और फिर उनके हाथ उनकी बहु के मांसल सपाट पेट से छू गए और छूटे hi चरण सिंह के बदन में करंट दौड़ गया और चरण सिंह ने अपना हाथ बापिस खींच लिया. उन्हें ऐसा लग रहा था की उनकी उँगलियों पर उसकी बहु के नरम पेट का एहसास अब भी था. चरण सिंह का मन फिर मचलने लगा उन्होंने चंचल के चेहरे को देखते हुए अपना हाथ हलके से फिर से उसके पेट पर रख दिया एक बार फिर से ये एहसास उनके बदन में करंट दौड़ा गया..
चंचल अब भी गहरी नींद में थी, चरण सिंह ने बहु के पेट पर धीरे धीरे हाथ चलना शुरू किया अह्ह्ह्ह इस एहसास से अपने हाथ पर बहु के नरम पेट को महसूस करके चरण सिंह का लुंड पूरी तरह से तन गया, उनकी उत्तेजना अब उनके सर पर चढ़ चुकी थी, चरण सिंह धीरे धीरे चंचल के पूरे पेट को सहलाने लगे और बीच में उसे हल्का सा मसल भी देते, नाभि को बीच में छेड़ रहे थे, चरण सिंह को बहुत मज़ा ा रहा था ऐसा उत्तेजित करने वाला एहसास उन्हें आज तक नहीं हुआ था, पेट और कमर को अचे से सहलाते हुए और चंचल के न जागने पर चरण सिंह की हिम्मत बढाती जा रही थी.. बहु को ऐसे देख उनका गाला सूख सा रहा था उनका मन हो रहा था की बहु के बदन को जी भर के चूमें चाटें.
पर साथ hi दर भी था, पर दर की उत्तेजना के आगे कहाँ चलती है, उन्होंने मन में सोचा की अब तक तो चंचल जाएगी नहीं लगता है गहरी नींद में है इसका फायदा उठाना चाहिए.. ये सोचते हुए चरण सिंह के पूरे बदन में सिरहन दौड़ गयी उनके हाथ अब भी बहु के नंगे पेट पर थे, उन्होंने चंचल के चेहरे को एक बार और देखा और उसे अब भी सोता पाया तो बस उन्होंने आगे बढ़ने का फैसला कर लिया.
चरण सिंह वहीं अचे से झुक कर बैठ गए और चंचल की कमर को दोनों हाथों से पकड़ कर आएगी झुकते हुए अपने चेहरे को धीरे धीरे से उसके पेट पर झुकाने लगे
और अगले hi पल चरण सिंह के होंठ चंचल के पेट से टकराये तो अपने होंठों पर बहु के बदन का स्वाद पाकर चरण सिंह बिलकुल पागल से हो गए और इस पल का पूरा फायदा उठाते हुए चंचल के पेट को चूमने चाटने लगे..
चंचल जो नींद में थी उसे उसे अपने बदन के साथ कुछ होने का एहसास हो रहा था, उसे नींद में hi ाचा एहसास हो रहा था, वो नींद में रिमझिम के साथ बिताये पल के सपने देख रही थी, पर चरण सिंह ने ज्यूँ hi उसके पेट को चेतना चूमना शुरू किया उसका बदन उस एहसास को महसूस करने लगा और प्रतिक्रिया देने लगा , अंदर hi अंदर उसकी नींद कमज़ोर होने लगी पर चरण सिंह इस समय सब भूल कर उसके बदन को चूमने चाटने में लगे हुए थे, चरण सिंह ने आगे बढ़ाते हुए अपनी जीभ बहु की नाभि में घुसड़ी और चूसने लगे.
इस एहसास को चंचल का बदन भी शांत रहकर सहन नहीं कर पाया और उसकी नींद खुल गयी चंचल ने हलके से आँखें खोल कर देखा तो एक पल को बिलकुल चौंक गयी और जब उसे समझ आया की क्या हो रहा है तो वो बिलकुल स्तब्ध रह गयी.. उसने देखा की उसके पिता सामान ससुर जी उसके बिस्तर पर बैठ कर उसकी कमर को थामे उसकी नाभि में जीभ घुसा कर ऐसे चूस रहे हैं जैसे अभी उसमे से रास फुट निकलेगा.
चंचल को तो बिलकुल समझ नहीं आ रहा था क्या करे एक पल को उसका मन हुआ उठे और धक्का देकर ससुर जी को उठादे और उन्हें अचे से इस बारे में सुनाये पर न जाने क्यों उसके बाद के हालत को झेलने के लिए वो खुद को तैयार नहीं कर प् रही थी वो नहीं चाहती थी की उसकी वजह से घर में कुछ भी कलेश हो, वहीं साथ साथ चंचल का बदन भी जैसे उसके कब्ज़े में से निकल रहा था उसके ससुरजी के चूमने चाटने से उसे ाचा लग रहा था पूरे बदन में एक सिरहन दौड़ रही थी, उसकी छूट गीली हो कर बाह रही थी, मन और मस्तिष्क के बीच बेचारी चंचल फांसी हुई थी उसकी नाभि में ससुर जी की जीभ उसके पूरे बदन पर जादू कर रही थी. वो छह कर भी कुछ नहीं कर पा रही थी.. तभी उसने देखा की ससुरजी अपना चेहरा उसकी और कर रहे हैं तो दर से उसने तुरंत आँखें बंद कर ली और सोने का नाटक करने लगी, चरण सिंह ये देख कर निश्चिंत हुए की बहु अब भी सो रही है.
चंचल मन hi मन सोच रही थी की ये पापाजी को क्या हुआ जो मेरे साथ ऐसा कर रहे हैं क्या सच में ये मुझे इन नज़रों से देखते हैं क्या होता जा रहा है सबको पहले रिमझिम ख़ुशी, फिर मेरे पति का रिम्मी का नाम लेना , फिर मेरा और रिम्मी का ऐसा रिश्ता बनना और फिर उसने बताया की देवर जी भी मेरे साथ करना चाहते हैं और अब पापाजी तो सबसे दो कदम आगे निकल गए, क्या करूँ मैं पर ये जानते हुए भी की सब गलत है फिर भी मुझे इतना ाचा क्यों लग रहा है, ओह्ह्ह्ह ये पापाजी की जीभ इतना मज़ाआ दे रही है, जो हो रहा है होने देती हूँ देखती हूँ पापाजी कहाँ तक जाते हैं, यही सोचकर चंचल अपने ससुरजी की हरकतों का मज़ा लेने लगी...
इधर चरण सिंह ने जी भर के अपनी बहु की नाभि को चूसा पर अब उनसे रुका नहीं जा रहा था उनका लुंड बिलकुल फटने को हो रहा था इसलिए खड़े होते हुए चरण सिंह ने पजामा और कच्चा नीचे सरकते हुए जल्दी से अपना लुंड बहार निकल लिया वहीं अपनर बदन पर हाथ या होंठ महसूस न कर चंचल को नान में आया की अचानक क्या हुआ पापाजी चले गए क्या इसलिए ुसंस बहुत सावधानी से अपनी आँखों को बिलकुल हल्का सा खोल के देखा तो एक बार फिर चौंक गयी क्यूंकि सामने ससुर जी का नंगा लुंड था उनके कड़क खड़े लुंड को देखकर न जाने क्यों चंचल का मुँह सूखने लगा वो आज पहली बार पति के अलावा किसी दुसरे मर्द का लुंड देख रही थी वो भी उसके ससुर का, चंचल के लिए ये पल बेहद मुश्किल होता जा रहा था उसकी छूट में उसे हज़ारों चीटियां रेंगती हुई महसूस हो रही थी और वो छूट को खुजाना छह रही थी वहीं उसका मन कर रहा था की ससुर जी का लुंड पकड़ के देख लूँ वहीं उसका मुँह सूखा जा रहा था, पर वो बेचारी कुछ नहीं कर सकती थी, सिवाए सोने के नाटक के.
वहीं चरण सिंह तो अब दर भूल चुके थे अपनी बहु के बगल में लुंड निकल कर खड़े थे ये जानते हुए की अगर बहु जाग गयी तो बवाल हो जायेगा फिर भी वो खुद को रोक नहीं पा रहे थे..
चंचल ने देखा ससुर जी उसकी और बढ़ रहे हैं तो उसने फिर से आँखें बंद कर ली कुछ देर तक उसे उसके बदन पर कोई एहसास नहीं हुआ फिर अपने पेट पर बापिस उसे एक गरम एहसास हुआ वो समझ गयी की बापिस ससुरजी उसे चूम रहे हैं पर कुछ देर बाद उसे कुछ अलग लगा ये होंठों का तो एहसास नहीं था इसी लिए एक बार फिर से उसने सावधानी से आँखें खोल कर देखा तो फिर से चौंक गयी उसके ससुर जी उसकी साइड में बैठकर अपने लुंड को उसके नंगे पेट पर रगड़ रहे थे, इस एहसास से hi चंचल की छूट और पनिया गयी, उसका पूरा बदन मनो ऐंठने लगा जिसे उसने किसी तरह से काबू में रखकर सोने का नाटक करती रही, वहीं चरण सिंह तो अपने लुंड को बहु के पेट पर रगड़ कर जन्नत में थे, उनका लुंड का टोपा रगड़ते हुए बहु की नाभि में घुसा तो उन्हें और मज़ा आ गया और वो उसे hi बहु की छूट समझकर हलके हलके धक्के लगाने लगा..
और चंचल को भी जैसे hi ये एहसास हुआ वो मचल उठी उसकी छूट में खुजली मचने लगी साथ hi तड़पने लगी अपनी नाभि में ससुरजी का लुंड महसूस कर एक पल को उसका मन हुआ की अभी पापाजी के लुंड को पकड़े और अपनी छूट में घुसवा ले पर इतनी हिम्मत वो नहीं दिखा पाई पर जो हिम्मत आज चरण सिंह ने दिखाई वो बकै काफी थी और उसी हिम्मत का रास उनकी गोलियां से बहता हुआ उनके लुंड में भर गया और फिर एक दबी आह के साथ उनका लुंड अपने रास से बहु की नाभि और पेट को भीगने लगा, चंचल को भी जैसे hi पेट पर ससुरजी के रास का गरम एहसास हुआ उसकी छूट पानी छोड़ने लगी..
जब चरण सिंह का झड़ना ख़त्म हुआ तो वो घबराने लगे उन्हें एहसास हुआ की उन्होंने क्या कर दिया है बहु के पेट को अपने रास से भीगा देखकर चरण सिंह हड़बड़ा गए सोचा की जल्दी से कपडे से पांच देता हूँ और उसके लिए जल्दी से पजामा ऊपर किया और कपडा उठाया hi था की घर की घंटी किसी ने बजे और चरण सिंह की गांड फटने लगी अभी उन्हें कुछ समाज नहीं आ रहा था तो जो सूझा वो किआ और पहात से कमरे से भाग निकले..
चंचल को दरवाजे के बंद होने की आवाज़ आई तो उसने आँखें खोल कर देखा, उसने जैसे hi देखा दरवाज़ा बंद है जल्दी से उसने अपनी सारे जांघों तक उठाई और गीली कच्ची को एक तरफ सरकाया और अपनी छूट में दो उंगलियां घुसा कर तेज़ी से अंदर बहार करने लगी साथ hi दूसरा हाथ उसके पेट पर था जिससे उंगलियों से वो ससुर का रास बटोरने लगी और फिर उंगलियों को अपने मुँह में लेजाकर चूसने लगती और ससुर के रास को चाट रही थी उसे ससुर के रास का स्वाद बहुत कुछ पति के रास जैसा hi लग रहा था
चंचल अभी जो कर रही थी उसके बारे में दो दिन पहले सोच भी नहीं सकती थी और अभी वो अपनी छूट में उंगलियां करते हुए अपने पेट से अपने ससुर का रास उठा उठाकर चख रही थी. चंचल पहले से hi इतनी उत्तेजित थी की जल्दी hi उसकी छूट ने रास छोड़ दिया पर तब तक वो पेट से सारा रास चाट चुकी थी झड़ने के बाद वो कुछ शांत हुई और जो हुआ उसके बारे में सोचने लगी और फिर उसके चेहरे पर एक मुस्कान आ गयी.. फिर वो उठी और कपडे लेकर बाथरूम में घुस गयी.
वही चरण सिंह चंचल के कमरे से निकले तो घर की घंटी बार बार बज रही थी खुद को थोड़ा शांत करके दरवाज़ा खोला तो सामने अपनी पत्नी को देखकर वैसे hi दर गए जैसे मम्मी के पर्स से चोरी करने के बाद बच्चा..
चरण सिंह- अरे तुम आ गयी.
माधुरी- हाँ कबसे घंटी बजा रही हूँ कोई खोल नहीं रहा कहाँ रहे तुम.
माधुरी ने अंदर आते हुए कहा.
चरण Singh-are वो वो मैं आराम कर रहा था.
माधुरी- और बहुएं?
चरण सिंह- बहु बहुएं भी सो रही हैं तुम तुम फ़ोन कर देती तो लेने आ जाता तुम्हे.
माधुरी - अरे तो क्या हुआ रिक्सा पकड़ के आ गयी.
इतने में रिमझिम भी बहार आ गयी और आकर सास के पेअर छुए और फिर चंचल भी आ गयी जिसे देखकर चरण सिंह घबरा गए पर बदली हुई साड़ी देखकर सोच में भी पद गए साथ hi चंचल का व्यवहार बिलकुल सामान्य लगा तो थोड़ा मन को तसल्ली हुई.
दोनों बहुएं सास की खातिरदारी में लग गयी ऐसे hi फिर समय निकल गया शाम को सब बापिस लौटे और फिर सब ख़ुशी ख़ुशी खाना खा रहे थे तभी रमन ने सही मौका समझा और बात राखी
रमन- अरे भैया हम लोग जाने वाले हैं तो क्यों न ख़ुशी को भी ले चलें.
ख़ुशी तो ये सुनकर खुश हो गयी वहीं चंचल और चेतन का प्लान बिगड़ता दिखा.
चेतन- पर उसकी पढाई.
ख़ुशी- अरे भैया एग्जाम हो चुके अब मैं फ्री हूँ मैं भी चलूंगी.
इसके आगे चेतन क्या बोलता
रमन- अरे मेरी विनीत से बात हुई तो मैंने उसे भी पूछ लिया है..
चरण सिंह को वैसे तो बहुओं का जाना ाचा नहीं लग रहा था फिर भी बोले- सही किआ जा रहे हो तो सरे बच्चे घूम आओ साथ में.
रिम- अगर मेरी मानो तो मैं कहूँगी की मुनमय पापाजी आप दोनों भी चलो सब फॅमिली चलते हैं घूमने तो मज़ा आएगा.
ये सुनकर तो चरण सिंह की बांछें खिल गयी वहीं चेतन रमन और चंचल तीनो का मूड बिगड़ गया.
रमन ने एक बार इशारा करके रिमझिम को रोकने की कोशिश भी की पर अब देर हो चुकी थी.
ख़ुशी - हैं ये सही रहेगा मम्मी पापा भी चलेंगे वैसे भी वो घुमते नहीं हैं.
माधुरी - अरे तुम बच्चे घूम आओ कहाँ हमें साथ लिए फिरोगे.
चरण सिंह- सही बात hai.waisw भी तुम लोग पहाड़ो में जा रहे हो वहां तुम्हारी मम्मी की तबियत ख़राब हो जाती है.
ख़ुशी- मेरे पास एक ाचा आईडिया है.
रमन- क्या?
ख़ुशी- क्यों न गाओं चलें सब मिलकर इसी बहाने नया घर भी देख आएंगे.
चेतन- हाँ आईडिया तो ाचा है गाओं घूमने भी नहीं गए कबसे.
चरण सिंह- हाँ भाई ये तो सही कहा जबसे नयी कोठी बनवाई है तबसे कहाँ गए हैं गाओं जायेंगे तो ाचा हो जायेगा.
रमन- ये आईडिया तो मुझे भी सही लग रहा है. गाओं hi चलते हैं कुछ दिन के लिए.
रिम- इसी बहाने मैं भी गाओं घूम आउंगी.
माधुरी- हाँ बहुएं भी देख आएँगी अपना गाओं, अरे मैं तो कहती हूँ की तेरी बहन जीजा और भाई विनीत तो आ hi रहे हैं न
रिम- हाँ मम्मी जी..
माधुरी- तो ऐसा कर संधान और समधी जी से भी बोल दे और चंचल तू भी अपनी मम्मी को बोल दे सब मिलकर चलेंगे.
रिम- क्या मम्मी पापा को?
चंचल- मम्मी को भी?
सब माधुरी की बात पर थोड़ा अचंभित थे पर सबको उनकी बात सही भी लग रही थी.
चरण सिंह- सही कह रही है तुम्हारी सास जब चलना hi है तो सब चलो वहां मज़ा भी आयेगा सब के ज़ात फिर कभी ऐसा मौका मिले न मिले
माधुरी- कल दिन में मैं खुद दोनों संधान से बात करुँगी और मन लुंगी अपने साथ के लिए..
रिमझिम और चंचल दोनों को hi अपनी योजना थोड़ी बदलती दिखी फिर भी अपने परिवार से मिलने की ख़ुशी में वो खुश थी. चेतन रमन दोनों भाइयों को अपनी योजना बदले जाने का दुःख था पर गाओं में जाने पर दोनों को hi कुछ होने की उम्मीद थी.
वहीं चरण सिंह भी खुश थे की बहुओं के साथ जा रहे थे ऊपर से आज की बात पर चंचल ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी थी..
खैर सरे फैसले हो चुके थे और फिर खा पि कर सब अपने अपने कमरों में थे, कुछ बातें कर रहे थे तो कुछ चुदाई पर साथ hi आने वाले समय की योजना बना रहे थे...
चोदामपुर
(कर्मा की ज़ुबानी)
माँ को छोड़ने के बाद मैं ाचा महसूस कर रहा था तो अपने कमरे में आकर लेट गया और फिर ख्याल आया और फ़ोन निकला और अंजलि को फोटो भेजने लगा साडी फोटो भेजने के बाद थोड़ा रुका की वो देखे कुछ देर में hi उसका रिप्लाई आ गया- थैंक्यू.
में- फोटो भेजने के लिए कैसा थैंक्यू
अंजलि- फोटो के लिए भी कुर आज दिन के लिए भी.
में- दिन के लिए मतलब.
अंजलि- तुम हमारे साथ गए पूरा दिन दिया उसके लिए.
में- अरे वो तो कुछ भी नहीं है थैंक्यू मत बोलो.
अंजलि- ाचा फिर क्या बोलूं?
में- कुछ मत बोलो बस कभी तुम मेरे साथ चल लेना..
अंजलि - ाचा जी बदला लोगे.
में- बदला नहीं बस ऐसे hi.
अंजलि- अरे समझ गयी कोई बात नहीं तुम बता देना मैं चलूंगी.
में- ये हुई न बात..
अंजलि- हाँ पर एक दो दिन पहले बताना मेरी तरह स्टैंड पर पहुँच कर मत बताना. हेहेहे.
में- ः अरे नहीं पहले hi बताऊंगा, वैसे तुम्हे हॉरर फिल्मो के अलावा और क्या पसंद है..
और इसी तरह करीब घंटे भर हम दोनों ने मश्ग में बात की और एक दुसरे को जाना फिर सो गए.
अगली सुबह चोदामपुर की आम सुबह थी सब अपने अपने काम में लगे हुए थे हमारे यहाँ सब नाश्ता कर रहे थे, तभी दरवाज़ा खटखटाने की आवाज़ आई अनुज दरवाज़ा खोल कर आया तो साथ में नीतू के पापा यानि दीं दयाल चाचा थे.
पापा- अरे दीनू आओ आओ बैठो. सुनो दीनू के लिए चाय लाओ.
चाचा एयर और पापा के बगल में बैठ गए. माँ ने उन्हें चाय दी.
दीं दयाल- अरे भैया हम का कह रहे थे की कल की पूरी तयारी है?
पापा- कल की ?
दीं दयाल- भूल गए पात पूजा है कल.
पापा- अरे हाँ हमारे तो ध्यान से hi निकल गया.
माँ- अरे मैं तो बच्चों को बोलने hi वाली थी की पत्ते इकठा कर लाएं आज.
शान्तो- अरे पर इस पात पूजा में हॉट का का है नाम सुना है हमने कभी देखि नहीं.
माँ- अरे जीजी का है की फसल कटती है तो उसी की ख़ुशी के लिए मानते हैं पात पूजा, सरे अनाज का ढेर इकठा कर के उन्हें पूजते हैं.. बहुत से पत्तों और फूलों को पीसकर उनका रास निकलते हैं और एक दुसरे को लगते हैं..
में- और भांग बनती है. जिसकी ज़िम्मेदारी दीनू चाचा की होती है हर बार.
पापा- और हमें पता है ये अभी उसी के लिए आये हैं.
इस पर सब हंसने लगे.
दीनू चाचा - अरे भैया तुम भी न उसके लिए कहाँ आइये हैं.
पापा- ाचा फिर किसके लिए?
दीनू चाचा - आये तो वैसे उसी के लिए थे हेहेहे.
ये सुनकर सब हंसने लगे.
Papa-are हम समझ गए आज तुम्हारा सारा कोटा ले आएंगे शहर से खुश.
दीनू चाचा - बस और का चाहिए.
माँ- थोड़ी हलकी बनाना इस बार भैया पिछली बार खुद hi दो दिन सोते रहे थे.
दीनू चाचा - का भाभी तुम भी मज़ाक करती हो.
ऐसे hi हंसी मज़ाक चलता रहा इसी बीच मैंने फ़ोन देखा तो अंजलि का गुड मॉर्निंग का मश्ग था जिसको ख़ुशी से मैंने भी रिप्लाई किया फिर मैं और अनुज चले गए बाघ में पत्ते इकठे करने थे, जग्गू भी आ गया फिर मिलकर फूल और पत्ते इकठे किये इसमें hi दोपहर हो गयी इसी बीच मेरा फ़ोन बजा उठाकर देखा तो प्रेमा भाभी का था.
में - हाँ भाभी.
प्रेमा भाभी - सुनो कर्मा भैया समय निकल के थोड़ी देर में घर आना मुझे ज़रूरी बात करनी है..
में- क्या हुआ कोई गड़बड़ है kya.jaggu भी मेरे साथ है बताओ
प्रेमा भाभी - आओ तभी बताती हूँ और जग्गू भैया को भी ले आना.
यव कहकर फ़ोन रख दिया. माइनर जग्गू से पुछा - तेरे घर कोई बात हुई है क्या? भाभी का फ़ोन था ऐसे ऐसे.
जग्गू- नहीं तो मुझे तो नहीं याद .
में- चल देखेंगे थोड़ी देर में..
फिर काम पूरा किया और पत्तों के गठर बनाकर पीसने को देकर आये और बापिस आकर बाघ में तुबेल पर नहाये तीनो फिर अनुज घर की और चला गया. मैं और जग्गू चले गए उसके घर दरवाज़ा भाभी ने खोला और फिर दरवाज़ा बंद करके हम दोनों को अपने कमरे में ले गयी..
घर पर ताऊ और भग्गू नहीं थे तै के नहाने की आवाज़ आ रही थी बाथरूम से.
में- भाभी क्या हुआ क्या बात है.
प्रेमा भाभी- वो भी पता चल जाएगी पहले कुछ और काम करते हैं ये बोलकर वो मेरे सामने नीचे बैठ गयी और पजामा नीचे खिसका कर लुंड निकल लिया..
में- भाभी क्या कर रही हो तै घर पे hi हैं पकड़ लेंगी.
प्रेमा भाभी- कुछ नहीं होगा
ये कहकर उन्होंने मेरा लुंड मुँह में भर लिया साथ hi जग्गू को अपने पास आने का इशारा किया.
जग्गू भी पास आते हुए बोलै- भाभी ये समय सही नहीं है मम्मी ने देख लिया तो सबकी कुटाई हो जाएगी.
पर प्रेमा भाभी ने उसकी बात का कोई जवाब नहीं दिया बल्कि उसका लुंड भी निकल लिया और मेरे से मुँह हटाकर चाटने लगी फिर बापिस मेरे लुंड को..
अब भले hi तै घर पर थी पर जब लुंड भाभी के गरम मुँह में हो तो मज़ा तो आने वाला hi था तो मैं मज़े से कराहने लगा वही हाल जग्गू का भी था हालाँकि उसकी साथ hi पहात भी रही थी पर मज़े को वो नकार भी नहीं सकता था,
इसी बीच मैंने भाभी का पल्लू एक तरफ सरका दिया और ब्लाउज के ऊपर से उनकी चूचियां दबाने लगा,
भाभी ने मुँह को लुंड से हटाया और कुछ देर के लिए कड़ी हुई और अपनी साड़ी को उतर फेंका और फिर अगले hi पल. अपना ब्लाउज खोलने लगी कुछ hi देर में ब्लाउज और फिर ब्रा भी नीचे पड़ी थी और भाभी सिर्फ पेटीकोट में हमारे सामने थी, साला दर भी लग रहे था समझ भी नहीं आ रहा था की क्या हो रहा है पर भाभी को ऐसे देख मन और लुंड दोनों खुश थे मैंने सोचा तै को छोड़ चूका हूँ ज़्यादा क्या hi होगा और भाभी की चूचियों पर झपट पड़ा मुझे देख जग्गू भाभी के पीछे गया और उनका पेटीकोट उठा अपना मुँह उनकी गांड में फंसा दिया..
भाभी की आँखें बंद हो गयी दोहरे मज़े से मैं चूचियां चूस रहा था और जग्गू गांड और छूट चाट रहा था, चूचियों को चूसने क्र बाद मैंने दोबारा से लुंड उनके मुँह में घुसा दिया, भाभी मज़े से चूसने लगी..
इधर जग्गू ने जब भाभी की छूट गांड को अचे से चाट लिया तो खड़ा हुआ और अपना लुंड लेकर भाभी के मुँह के सामने कर दिया भाभी ने मेरा लुंड से मुँह हटाया और उसका लुंड चाटने लगी, मैंने पीछे जगह खली देखि तो भाभी के पीछे गया पेटीकोट को कमर पर इकठा किया और लुंड को पकड़ कर टोपे को उनकी छूट के द्वार पर रख धक्का लगाया और लुंड सरकता हुआ भाभी की गरम छूट में घुस गया...
जिसके साथ hi भाभी की जग्गू के लुंड पर घुटी हुई सिसकी निकली.
मैं भाभी की कमर पकड़ कर उन्हें छोड़ने लगा और भाभी जग्गू का लुंड चूस रही थी

भाभी के गरम छेदों के मज़े में हम तै नाम की टेंशन को भूल hi गए थे की तभी आवाज़ आई- हाय दिया ये क्या हो रहा है...
आवाज़ सुनकर हम तीनो hi चौंक गए और देखा तो तै सामने कड़ी थी कुछ पलों के लिए मेरी भी फटी पर फिर सोचा क्या hi होगा देखा जायेगा,
मंजू तै- हम पूछते हैं क्या हो रहा है ये... और तू छिनाल तुझे ये सब करते शर्म नहीं आई.
तै भाभी को गली देते हुए आगे बढ़ी.. की भाभी वहीं अपनी जगह कड़ी हो गयी और बोली - मम्मी जी जब तुम्हे नहीं आती तो मुझे क्यों आएगी..
हम दोनों बस खड़े खड़े मुँह टांक रहे थे.
मंजू तै- अरे करम तू करे रंडियों जैसे शर्म मुझे आएगी आज तेरी खैर नहीं.
ये कह तै गुस्से में आगे बढ़ी.
प्रेमा भाभी- तो मम्मी अपने बेटे से रात को रंडियों की तरह छोड़ना किसके करम हैं.
ये सुनते hi तै के पैरों से तो जमीन खिसक गयी वहीं जग्गू की भी पहात गयी मैं भी मुँह खोल के देखता रह गया और फिर जब समझ आया तो धीरे से जग्गू को बोलै- सेल हरामी मादरचोद बताया भी नहीं.
पर वो तो सुन्न खड़ा था और तै भी..
प्रेमा भाभी ने आगे बोलना शुरू किया- मम्मी जी जब तुम्हारी छूट में इतनी खुजली है की बेटे का लुंड भी खा गयी तो सोचो मेरे में कितनी होगी.
तै बिलकुल चुप थी.
प्रेमा भाभी- अब जैसे तुमने तरीका निकला है मिटने का मैंने भी निकला है और ये भी कहती हूँ की दोनों से मैं पहले से चुद रही हूँ.
इसके बाद प्रेमा भाभी आगे बढ़ी और मंजू तै के पास जाकर उनको कंधे से पकड़ लिया और पास कड़ी खत पर बैठा दिया मंजू तै को तो जैसे सांप सूंघ गया था.
प्रेमा भाभी- देखो मम्मी तुम्हारी बात मुझे पता है और मैंने तुम्हे अपनी बतादि है, और सच कहूं तो मुझे तुम्हारे और जग्गू से कोई दिक्कत नहीं है न hi मैं किसी को बताउंगी.
मंजू तै अपनी बहु को देख रही थी और उसकी बातें समझने की कोशिश कर रही थी,
वहीं हम दोनों ऐसे hi खड़े हुए देख रहे थे क्या हो रहा है.
प्रेमा भाभी- मम्मी देखो घुमा फिरा के कहने से ाचा है मैं सीढ़ी बात करूँ.
मंजू तै- कैसी सीढ़ी बात.
अब मंजू तै के मुँह से तब से कुछ निकला था.
प्रेमा भाभी- हमारे पास तीन रस्ते हैं.. उनमे से हम अभी कोई एक चुन सकते हैं.
मंजू Tai-kaise रस्ते .
प्रेमा भाभी- पहला तुम मुझे रोको और लड़ो मैं तुम्हारे और जग्गू के बारे में सबको बताऊँ और फिर यही बवाल.
मंजू तै- नहीं नहीं मुझे घर में कोई बवाल नहीं चाहिए. दूसरा रास्ता क्या है?
प्रेमा भाभी- जैसा चल रहा है वैसा चलने दो एक दुसरे के बारे में जानकार भी अनजान बने रहे.. और अपनी अपनी ज़रूरतें पूरी करते रहे.
ये सुन तै ने कुछ सोचा और फिर बोली मुझे ये सही लग रहा है जो हो गया है उसे बदल नहीं सकती तो मुझे ये मंजूर है.
ये कहकर तै उठने लगी फिर उठाते उठाते बोली- वैसे तूने तीन रस्ते बोले थे तीसरा क्या है?
ये सुन भाभी मुस्कुराई और उठ कर फिर से मेरे और जग्गू के पास आई और अपने दोनों हाथों में हमारे लुंड पकड़ के मुठियाते हुए बोली - तीसरा रास्ता है मम्मी जी की यहाँ काफी लुंड हैं हम मिल बाँट कर प्यार से खा सकते हैं.
तै ने ये सुना और फिर सोच में पद गयी जग्गू को अपनी भाभी की बात सुनकर हैरानी हुई की भाभी क्यों बानी बनाई बात बिगड़ रही है अभी ाचा खासा तो मम्मी मान गयी थी दुसरे रस्ते के लिए.
मुझे जहाँ तक है अंदाज़ा हो गया था की क्या होने वाला है या तो अभी या कुछ समय में..
तै कुछ देर तक कुछ नहीं बोली तो हमारे लुंड मुठियाते हुए भाभी बोली- क्या हुआ मम्मी जी?
इस पर तै ने ना में सर हिलाया और फिर कड़ी हुई और दरवाज़े की तरफ बढ़ने लगी उन्हें बढ़ता देख प्रेमा भाभी का मुँह थोड़ा उतरा शायद उन्होंने जैसा सोचा था वैसा नहीं हुआ...
वही तै के मन में क्या था कोई नहीं जनता था तै दरवाज़े तक गयी और फिर रुक गयी रुक कर दरवाज़ा बंद किया और फिर मुद कर मुस्कुराते हुए बोली- सावधानी से किया करो ये सब काम मेरी जगह कोई और देख लेता तो.
ये सुनकर सब के चेहरे खिल गए .
प्रेमा भाभी- अरे मम्मी तुम्हे दिखाना था तभी तो खुला छोड़ा था..
ये कहकर भाभी ने हमारे लुंड छोड़े और भाग कर गयी और अपनी सासु माँ से चिपक गयी...
तै ने भी उसे बाहें खोल कर सीने से चिपका लिया वो अपनी बहु की ख़ुशी और उत्साह देख कर मुस्कुरा रही थी हम दोनों लड़के भी अब खुश थे और मैंने जैसा सोचा था वैसा hi हुआ था, पर प्रेमा भाभी का उत्साह इतने में कहाँ थमने वाला था उन्होंने ख़ुशी जताते हुए तै के चेहरे को पकड़ा और अपने होंठ उनके होंठों से मिला दिए, तै तो एक पल को चौंक hi गयी क्यूंकि जीवन में पहली बार कोई औरत उन्हें इस तरह चूम रही थी वो भी उनकी बहु बस ये hi सोच तै हैरान थी पर वहीं प्रेमा भाभी का उत्साह एक अगल hi श्रेणी का था और इतना असरदार था की उनकी सासु माँ भी उसके असर से नहीं बच पाई और कुछ hi देर में उनका साथ देने लगी..
सास बहु दोनों की जीभ आपस में अटखेलियां कर रही थी जिसे देख हिम दोनों के hi लुंड ठुमके मार रहे थे..
भाभी ने फिर उन्हें चूमते हुए hi तै के कपड़ो को उतरना शुरू किया तै भी बहु के हाथों नंगी होने में उत्तेजित हो रही थी.
कुछ hi देर में तै और भाभी दोनों हमारे सामने नंगी कड़ी थी सास बहु को बिलकुल नंगा देख हम दोनों के hi लुंड फुंकार रहे थे इसके बाद भाभी ने हमसे बोलै- तुम लोग कब तक देखते रहोगे.
बस इससे ज़्यादा निमंत्रण की हमें ज़रूरत नहीं थी मैंने जानकर जग्गू को उसकी मम्मी के पास धकेला मैं उसे उसकी माँ के साथ देखना चाहता था और खुद भाभी के पीछे जगह ली

मैं अपना लुंड पीछे से भाभी की गांड में घिसते हुए उनके बदन से खेलने लगा वहीं जग्गू अपनी मम्मी के साथ ये hi कर रहा था. कभी चूचियां मसलता तो कभी भरा मांसल पेट..
आज जग्गू के घर में भी सब कुछ खुल चूका था सास बहु दोनों साथ में छोड़ने को तैयार थी.. अब बुआ और ममता चची के घर की तरह यहाँ भी उत्तेजना ने रिश्तों पर कब्ज़ा कर लिया था..
खैर ज्ञान बाद में छोडूंगा पहले सामने जो छूटें हैं उन्हें छोड़ा जाये...
अब समय आगे बढ़ने का था तो हम लोग भी आगे बढे मैंने भाभी को बिस्तर पर लिटा दिया और खुद उनकी टैंगो के बीच आ गया और अपना मुँह उनकी रसीली छूट से लगा दिया वहीं जग्गू ने तै को बिस्तर पर बैठाया और अपने लुंड को उनकी बड़ी चूचियों के बीच फंसकर उनकी चूचियों को छोड़ने लगा.

प्रेमा भाभी- अह्ह्ह्ह कर्मा भैयाआआह्ह्ह्हह अह्ह्ह्ह चातुओ aiseeeeeeeeee हीई .
मेरा तो मुँह बंद था क्या hi बोलता बस जवाब मैं उनकी छूट को कास के चूस दिया..
जग्गू - ओह्ह्ह्ह मम्मी आह्ह्ह्हह तुम्हारी छुछियां कितनी नरम है आह्हः मज़ा आ रहा है.
मंजू Tai-haan बच्चा बचपन में इन्ही को चूस चूस कर बड़ा हुआ है और आज अपना लुंड बड़ा करके उन्ही को छोड़ रहा है.
प्रेमा भाभी- अरे मुनमय अब तुमने hi दूध पीला कर बढ़ा किया है अब तुम्हारा क़र्ज़ तो उतरेंगे hi न देवर जी.
मंजू तै- हाँ बहु अचे से सेवा करवाउंगी अब अपने बदन की...
जग्गू और मैं दोनों की बातें सुन उत्तेजित हो रहे थे साथ hi जग्गू को एक ख़ुशी ये थी की चुदाई की वजह से hi सही काम से काम उसकी माँ और भाभी एक दुसरे झगड़ नहीं रही बल्कि साथ दे रही है...
इसी जोश में आकर जग्गू ने अपनी मम्मी की छूछीयो से लुंड निकला और उन्हें पीछे की तरफ लिटा दिया और खुद उनकी छूट में मुँह घुसा diya.wohin उसकी भाभी और मैं भी पीछे नहीं थे और हमने जगह बदल ली थी अब मैं बिस्तर पर बैठा हुआ था और भाभी नीचे बैठ कर मेरा लुंड चूस रही थी...

उधर जग्गू से अपनी छूट चुसवाते हुए तै अपनी भरी भरकम चूचियों से खेल रही थी.
मंजू तै- ahhhhhhhhhh बाछहुआअ का चूसता है तूऊऊऊह्ह्हह्ह अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह खा जा आज अपनी मम्मी की छूट को,
में- अह्ह्ह्हह्हह तै चूसती तो तुम्हारी बहु भी मस्त है देखो कैसे लुंड को गले तक फंसा कर चूस रही है..
मंजू Tai-haan बहु किसकी है चूसेगी hi मर्द को खुश करने की साड़ी कलाएं आती हैं मेरी बहु को.
इस बात पर भाभी ने मेरे लुंड से मुँह को हटाया और बोली- और जो नहीं आती वो तुम सीखा देना मम्मी जी...
और ये कहकर बापिस मेरा लुंड मुँह में भर लिया,
मंजू Tai-haan बहु बिलकुल अब तो तुझे सब सीखना है और तुझसे सीखना भी है.. वैसे अपने देवर को बड़ा ाचा सिखाया है तूने छूट चेतना अह्ह्ह्ह...
भाभी के मुँह में मेरा लुंड था तो उनकी तरफ से मैंने जवाब दिया- अरे तै जब सामने रसीली छूट हो तो बाँदा अचे से चाटता hi है और ये तो वो छूट है जिसमे से ये निकला था तो इसे तो अछि तरह चाटेगा hi.
मंजू तै- ahhhhhhhhhh बाछहुआअ सही बोल रहा है बरसो पहले इसी छूट से निकला था तू रे आज उसी में घुस रहा है.
जग्गू अपनी मम्मी की बातें सुन उत्तेजित हो रहा था और तेज़ी से उनकी छूट चूस रहा था इधर भाभी मेरा लुंड छोड़ मेरी गोलियों को मुँह में भर के चूस रही थी... जिससे मेरी आह्हः निकल रही थी... मुझसे अब रुकना मुश्किल हो रहा था इसलिए मैंने आगे बढ़ाते हुए भाभी को अपनी जगह झुका दिया और पीछे से उनकी कासी छूट में अपना लुंड घुसा दिया और उनकी कमर को थामे उन्हें छोड़ने लगा वहीं जग्गू भी अपनी मम्मी की छूट को चाट कर ऊपर को हुआ और अपना लुंड उनकी छूट में रखकर धक्का लगा कर अंदर घुसा दिया और छोड़ने लगा

कुछ hi पलों में सास बहु की दमदार चुदाई होने लगी भाभी को छोड़ते हुए मैं माँ बेटे की चुदाई देख रहा था साला ये जान कर बड़ी ख़ुशी हो रही थी की अकेला मैं hi नहीं मेरा दोस्त भी मादरचोद है.. पहले विनीत फिर अनुज और अब जग्गू मादरचोद बेटों की गिनती बढाती जा रही थी जो की मुझे जान कर ाचा लग रहा था..
तै हमारे सामने जग्गू से छोड़ने पारणे उत्तेजित हो रही थी
मंजू तै- अह्ह्ह्हह जग्गू बच्चा छोड़ अपनी मुनमय की छूट को आह्ह्ह्ह कर्मा को दिखा अपनी माँ को छोड़ कर ahhhhhhhhhh..
जग्गू- हानंन्न मम्मी लो अपने बेटे के लुंड को आह्ह्हह्ह्ह्ह और तुम भी भाभी को दिखाओ की तुम कितनी बड़ी रंडी हो जो अपने बेटे से चुद रही है.
मंजू Tai-haan लाल्ल्लाहहह हम रंडी हैं अह्ह्ह छोड़ अपनी रंडी माँ को madarchod..ahhh
प्रेमा भाभी- अह्ह्ह्ह रंडी माँ का मादरचोद बेटाहः और मैं रंडी सास की रंडी बहु..
तीनो hi एक दुसरे के सामने चुदाई स्व बेहद उत्साहित और उत्तेजित हो गए थे जिस कारन खुल कर अश्लील बातें कर रहे थे...
में- अह्ह्ह्हह्हह क्या जोड़ी है सास बहु की... ऊपर से भाभी क्या रसीली छूट है तुम्हारी.
प्रेमा भाभी- ओह्ह्ह भैया अह्ह्ह्हह तुम्हारा लुंड बहुत मज़ा दे रहा है..
जग्गू- अह्ह्ह मम्मी ओह्ह... कर्मा सिर्फ भाभी की hi नहीं मम्मी की छूट भी बहुत रसीली है...
कर्मा- हाँ जनता हूँ तै की छूट का स्वाद मैं पहले चख चूका हूँ..
इस पर भाभी और जग्गू दोनों हैरान हो गए.
जग्गू- कब ये कब हुआ मुझे तो पता hi नहीं...
में- तै से पूछ
जग्गू- बताओ न मम्मी.
मंजू Tai-haan बाछआहहह तेरा ये दोस्त बहुत बड़ा छोड़ू है एक बार तो ये हमें कनक जाने से पहले hi छोड़ चूका था और फिर कनक गाओं में तो दोनों भाइयों ने एक साथ छोड़ा तेरी माँ को...
जग्गू- सेल हरामी बताया नहीं तूने मुझे..
जग्गू ने गरियाते हुए कहा.
में- तूने बताया मुझे अपने मादरचोद बनने का राज़.
जग्गू- सेल अगर पहले बता देता तो मैं पहले hi छोड़ लेता अपनी मम्मी को अह्ह्ह्ह.
जग्गू ने अपनी माँ की छूट में धक्के लगते हुए कहा.
मंजू तै- अब कौनसा देर हो गयी है बचुआ वैसे भी जब से शुरू किया है कोई सा दिन जाने देता है तू बिना चोदे...
प्रेमा भाभी- ओह्ह्ह मम्मी जी भैया जाने दे न दें तुम खुद से नहीं जाने देती होगी तुम्हारी छूट काम प्यासी थोड़े hi है..
प्रेमा भाभी ने मुझसे चुड़ते हुए कहा साथ hi मैं उनकी छुछियां भी चूस रहा था...
मंजू तै- हाँ बहु ये तू तूने सहीईई कहा... यह आज ाचा लग रहा है नहीं तो हम दोनों झगड़ते रहते थे...
प्रेमा भाभी- हाँ मम्मी जी चुदाई से हम करीब आ गए
इतना कहकर भाभी मेरे लुंड से आगे होकर निकल गयी और बोली- मुझे अपनी मम्मी जी के पास छोड़ो कर्मा भैया..
में- ओह्हो इतना प्यार सासु माँ से..
मैंने उन्हें चिढ़ाया
मंजू तै- हाँ तो खबर दर किसी ने हमारी बिटिया को चिढ़ाया तो.
जग्गू- देख रहा है कर्मा बहु के मिलते hi बेटों को डांटने लगी..
में- चल इन्हे और करीब कस्र देते हैं..
ये कहकर जहाँ तै लेती थी मैं भाभी को वहीं ले गया और तै के मुँह पर भाभी की छूट रखकर बैठा दिया और भाभी को आगे की और झुका दिया जिससे दोनों सास बहु 69 की स्तिथि में आ गयी और फिर हम दोनों ने बापिस उनकी टैंगो में जगह ली और लुंड को दोबारा छूट में घुसा दिया और छोड़ने लगे
भाभी आगे झुकी तो सामने उनकी सास की छूट थी जिसमे से देवर का लुंड अंदर बहार हो रहा था भाभी को आगे कुछ बताने की ज़रुरत नहीं पड़ी और वो उनकी छूट के डेन को जीभ से छेड़ने लगी .

तै को तो जैसे hi महसूस हुआ वो सिसकने लगी... वहीं उन्हें वैसे भी उत्तेजना हो रही थी सामने बहु की छूट थी और उसमे से मेरा लुंड अंदर बहार हो रहा था जिसे तै बड़े ध्यान से देख रही थी पर उनका ध्यान छूट में चल रहा बेटे का लुंड और बहु की जीभ भटका रहे थे.
मंजू तै- ahhhhhhhhhh तुम सब बच्चे मिलकर ये क्या कर रही हो आह्ह्ह्हह हमारे साथ आअह्ह्ह्ह ...
जग्गू- क्या हुआ मम्मी
मंजू तै- अह्ह्ह्हह ऐसा मज़ाआहहह आज तक नहीं आया अह्ह्ह्हह बहु टेरिइइइइ जीभ...
तै पहले तो हिचक रही थी पर उत्तेजित होने पर उन्होंने भी सामने बहु की छूट पर जीभ लगाडी और वो क्स्टने लगी जो उनकी बहु उनके साथ कर रही थी प्रेमा भाभी पहले भी ये सुख पल्ली ममता चची और शशि बुआ से ले चुकी थी पर अभी अपनी सास से छूट चटवाने का मज़ा अलग hi था.
हम दोनों लड़के भी अब पूरे जोश में थे और तेज़ी से दोनों को छोड़ रहे थे

जहाँ हम दोनों लुन्डों से छोड़ छोड़ कर दोनों सास बहु को खुश कर रहे थे वहीं वो दोनों भी एक दुसरे की छूट के साथ छेड़ छड़ कर रही थी जिसका नतीजा ये था की पूड़ा कमरा सिसकियों से भरा हुआ था साथ hi थप थप थप की आवाज़ गूँज रही थी...
मंजू तै के लिए ये सब नया था तो वो ज़्यादा देर तक सह नहीं पाई और अपनी बहु के नीचे दबे दबे वो झड़ने लगी उनका शरीर कंपनी लगा... अपनी माँ को झाड़ता देख और उनकी छूट को लुंड पर कसता हुआ महसूस कर जग्गू भी शिखर पर पहुँच गया और झड़ने लगा.. अपनी माँ की छूट को रास से भरने लगा... भाभी ने जब सामने माँ की छूट को बेटे के रास से भरता देखा तो वो भी इतनी उत्तेजित हुई की झड़ने लगी भाभी को झाड़ता देख मैंने भी कॉकस कर उनकी छूट में तगड़े धक्के लगाए और अपना रास उनकी छूट में छोड़ दिया...
जग्गू ने अपना रास तै की छूट में भरने के बाद लुंड निकल तो तुरंत भाभी ने छूट को मुँह में भर लिए और मैंने इधर उनकी छूट से लुंड निकला तो लुंड निकलते hi मेरे रास की धार तै के चेहरे पर गिरी साथ hi और रास बहकर बहार आने लगा तो तै ने भी अपना मुँह बहु की छूट से लगा दिया और उसका स्वाद लेने लगी... हम दोनों झड़ने के बाद साइड बैठकर हांफ रहे थे.. और दोनों को एक दुसरे की छूट में जीभ अंदर बहार करते हुए देख रहे थे...
जग्गू- मज़ा आ गया यार.
में- हाँ यार मज़ा तो आ गया सेल पहले hi बता देता तू की तू तै को छोड़ता है.
जग्गू- यार बताना तो छह रहा था पर डरता था.
में- अबे मुझसे कैसा दर.. देख बात सामने आई तो मज़ा hi आया न.
जग्गू- हाँ ये तो है वैसे बताया तूने भी नहीं की तूने मम्मी को छोड़ा था.
में - वही बात के डरता था की न जाने तू क्या सोचेगा..
जग्गू- अबे इतने अचे से जनता है तू मुझे फिर भी.. ाचा एक बात पूछूं...
में- हाँ पूछ .
जग्गू- तूने कनक गाओं में चची को सबके सामने छोड़ा था तो तेरा तबसे दोबारा मन नहीं हुआ कभी चची को छोड़ने का. क्यूंकि तुझे और चची को देखकर hi मेरे मन में मम्मी को छोड़ने की भावना जगक थी.
जग्गू के इस प्रश्न से मैं थोड़ा सोच में पद गया की क्या करूँ क्या सच बताऊँ या नहीं क्यूंकि अभी मैं अनुज मौसी और माँ के अलावा ये बात किसी को नहीं पता थी पर मुझे उससे झूठ बोलना भी ाचा नहीं लग रहा था मैं कुछ बोलता उससे पहले hi भाभी और तै उठ कर हमारे पास आ कर बैठ गयी...
मंजू तै- हाय आज तो तुम बच्चों ने हमारी जान hi निकल दी.
तै ने मेरे बगल में बैठते हुए कहा मैंने भी उन्हें खुद से चिपका लिया
प्रेमा भाभी- नहीं मम्मी अब तो नयी जान भरी है अब देखना तुम्हे कितने मज़े करवाती हूँ मैं..
भाभी जग्गू की गॉड में बैठ गयी..
मंजू तै- ाचा अब भी कोई बात है जो हमें नहीं पता.
जग्गू- अरे मम्मी बहुत सी बातें हैं...
प्रेमा भाभी- सबसे पहले तो मैं सबको कुछ बताउंगी जो किसी को नहीं पता.
मंजू तै- ाचा ऐसी का बात हाउ बहुरिया.
प्रेमा भाभी- यही की मैं और पापाजी भी चुदाई करते हैं.
ये बात सुन तै और जग्गू दोनों चौंक गए.
मंजू तै- हे भगवन तू अपने ससुर के साथ भी..
जग्गू- ये कब हुआ भाभी.
मंजू तै- सारा घर hi चुदाई में लगा पड़ा है हमारा तो, कब से चल रहा है ये सब बहुरिया.
प्रेमा भाभी- जब तुम सब लोग कनक गाओं गए थे तभी शुरू हुआ.
मंजू तै- हमको पता था तेरे ससुर को कुछ दिन छूट नहीं मिलेगी तो वो कुछ न काण्ड कुछ ज़रूर करेंगे, और हमारा शक सही निकला अपनी बहु को hi छोड़ बैठे.
जग्गू- भाभी अचे से बताओ कैसे क्या हुआ .
फिर भाभी ने सबको पूरी बात बताई... भग्गू के उन्हें नंगा निकलने से लेकर ताऊ द्वारा चुदाई तक और कैसे अब भी रात को वो एक बार छोड़ते हैं छुप कर...
मंजू तै- हाय कितना नालायक है भग्गू ऐसे कोई करता है का अपनी बीवी के साथ खैर बहुरिया जो हुआ ाचा हुआ हमें तुझसे कोई शिकायत नहीं है.
ये कहकर तै ने भाभी को गले से लगा लिया.
जग्गू- अब ये जान गयी हो तो और भी चीज़ें जान लो मम्मी.
इसके बाद जग्गू ने हम सब और ममता चची पल्ली इन सब के बारे में भी बताया जिसे तै आँखें फाड़ फाड़ कर सुन रही थी इसके बाद प्रेमा भाभी ने एक और बूम फोड़ा वो था मेरे पापा और राजन चाचा के साथ शामिल होने का कैसे शशि बुआ आई और क्या क्या हुआ सब कुछ हालाँकि ये साडी बातें मुझे पता थी क्युकी पापा ने खुद बताई थी. पर जग्गू और तै के तो होश उड़े हुए थे.
मंजू तै- हाय ढैय्या ये का हो गया है गाओं को सब के सब लगे हुए हैं.
जग्गू- बताओ नीलेश चाचा शशि बुआ के साथ और राजन चाचा अपनी बेटी पल्ली के साथ... कर्मा तुझे पता था ये सब?
मैंने हाँ में सर हिलाया और बोलै- हाँ बुआ और पापा का तो पहले से पता था बाकि जो अभी भाभी ने बताया वो कुछ दिन पहले hi पता चला..
प्रेमा भाभी- ममता चची ने बताया होगा.
में- हाँ उन्होंने भी और
जग्गू- और?
में- पापा ने.
इस पर सब चौंक गए
प्रेमा Bhabhi-kya ये बात चाचा ने तुम्हे बताई भैया?
में- हाँ
फिर मैंने सबको मेरे और झुमरी के बीच जो हुआ उसके बाद पापा के द्वारा पकड़े जाने से लेकर अंत तक सब बता दिया..
सब हैरान थे .
जग्गू- साला इतना कुछ तो हमें पता hi नहीं था.
प्रेमा भाभी- हाँ हालाँकि ज़्यादातर मुझे पता था बस ये चाचा और तुम्हारी वाली बात छोड़के.
मंजू तै- हाय ढैय्या ये सुन सुनकर मेरी तो छूट hi पानी छोड़ रही है इतना सब हो रहा है गाओं में...
ये कहकर तै उठी और तुरंत मेरे लुंड को छूट में लेकर बैठ गयी..
उधर जग्गू ने भी भाभी की छूट में वहीं लिटाकर लुंड घुसा दिया
भाभी मेरी और तै की टैंगो के बीच थी तो उन्होंने अपना सर थोड़ा सा घुमाया और मेरे लुंड को अपनी सास की छूट में आता जाता देखने लगी फिर अगले hi पल उन्होंने अपनी जीभ निकली और तै के गांड के छेड़ पर फिरने लगी..

मंजू Tai-ahhhhhhhhhh बहूऊऊऊरिय्याहहह अह्ह्ह का कर रही है तू हमारे साथ ाः..
भाभी तो जवाब नहीं दे प् रही थी पर जग्गू कुछ ज़्यादा hi उत्तेजित हो रहा था...
जग्गू- अह्हह्ह्ह्ह भाभी आह्हः मम्मी तुम्हे कर्मा से चुड़ते देख बड़ा अलग सा महसूस हो रहा है लग रहा है लुंड फूल गया है ..
जग्गू भाभी को तेज़ी से छोड़ते हुए बोलै और साथ hi उनकी चूचियों को दबा रहा था....
मंजू तै- ahhhhhhhhhh बाछहुआअ हमें भी आह्हः देख तेरी माँ तेरा दोस्त छोड़ रहा है आह्ह्ह्ह देख कैसे लुंड घुसा घुसा कर छोड़ रहा है...
मंजू तै ऐसे hi बातें कर खुद भी उत्तेजित हो रही थी और जग्गू को भी कस्र रही थी...
जग्गू- हाब मम्मी तुम भी तो रंडियों की तरह उसके लुंड पर उछाल रही हो .. ahhhhhhhhhh.
मंजू तै- ahhhhhhhhhh बाछहुआअ हम हैं रंडी आह्हः और अब जब सब जान गए हैं तो खुल के मज़े लेंगे आज तो कर्मा से चुद रहे हैं इसके बाप से भी छोड़ेंगे तो तब भी तू देखेगा.
जग्गू- हाँ मम्मी मैं तुम्हे सबसे चुड़ते हुए देखना चाहता हूँ..
मंजू तै- ahhhhhhhhhh हमार बाछहुआअ..
इधर सास की गांड अचे से चाटने के बाद भाभी ने सर घुमा कर जग्गू की और देखा और इशारा किया जग्गू भी भाभी का इशारा समझ गया और उसने तुरंत अपना लुंड उनकी छूट से निकल लिया जिसके बाद भाभी वहां से हटी और बगल में आ कर तै के चूतड़ों को फैलाया साथ hi जग्गू के लुंड मुँह में भर कर गीला कर दिया.
जब भाभी ने तै के चूतड़ों को फैलाया तो तै को लगा की वो फिर से उनकी गांड को चाटने वाली है और उन्हें तभी अपने गांड के छेड़ पर कुछ गरम सा महसूस हुआ तै को लगा की बहु की जीभ है पर अगले hi पल उनका भ्रम टूट गया क्यूंकि जग्गू का लुंड उनकी गांड के छेड़ को फैलता हुआ घुस गया
मंजू Tai-ahhhhhhhhhh हाय ढैय्या मार डाला...
भाभी उनके बगल में आई और उनको सहलाते हुए बोली - बस मम्मी हो गया अब दो दो लुन्डों से छोड़ने का मज़ा लो..
मंजू तै- ahhhhhhhhhh शैतान बता कर नहीं डलवा सकती थी हमारी हालत ख़राब कर दी.
में- बता कर डालता तो ये भाव कहाँ देखने को मिलता तै...
जग्गू- अह्हह्ह्ह्ह अब तो तुम्हारी गांड और कासी कासी लग रही है मम्मी.
प्रेमा भाभी- लगेगी hi दोनों तरफ से लोडे जो घुसे हैं मम्मी के अंदर. हेहेहे.
मंजू तै- तुझे बड़ी हंसी आ रही है कमीनी अभी एहि दो लोडे तेरे अंदर घुसवाऊँगी.
प्रेमा भाभी- इसी का तो इंतज़ार है मुझे मम्मी जी, तुम्हारे बाद मेरी बारी...
भाभी ने ये कहकर तै के होंठो को चूम लिया. तो तै मुस्कुराते हुए बोली - रंडी कहीं की...
इतने में हम दोनों ने भी अछि ले बना ली थी और अब अछि गति से तै के दोनों छेदों को सुख दे रहे थे.

भाभी पीछे से अपनी छूट घिसते हुए अपनी सास का हौसला बढ़ा रही थी..
मुझे जग्गू के साथ मिलकर उसकी माँ को छोड़ने में बहुत मज़ा आ रहा था, एक अजीब hi एहसास था की मैं बेटे के साथ मिलकर उसकी माँ को छोड़ रहा हूँ पर अब ये एहसास मुझे खूब मिलने वाला था ये पता था साथ hi ये भी सोचना था जो भी आज घटित हुआ और जो राज़ की बातें खुली उनका आने वाले समय पर क्या प्रभाव पड़ने वाला था...
खैर उसे छोड़ मैंने तै की चुदाई पर ध्यान दिया जिसमे तै लगातार सिसकियाँ भर भर के दोनों छेदों में लुंड ले रही थी पर वो इस मज़े को ज़्यादा नहीं सह पाई और जल्दी hi झाड़ गयी अपनी सास की जगह भाभी ने ली पर जगह में अदला बदली थी अब मैं भाभी की गांड मार रहा था और जग्गू छूट, भाभी पूरे उत्साह के साथ दोनों छेदों की चुदाई का मज़ा लेने लगी वहीं तै बगल में हांफते हुए अपनी बहु को चुड़ते देख रही थी और आने वाले समय के बारे में सोचते हुए अपनी चूचियों से खेल रही थी...
( अस 3रद पर्सन)
जहाँ कर्मा जग्गू के घर में व्यस्त था वहीं अनुज कुछ न कर रहा हो ऐसा कैसे हो सकता था, अनुज अभी ममता चची के यहाँ उनके कमरे में था और बिलकुल नंगा था और बिस्तर के किनारे खड़ा होकर चौपाया बानी पल्ली की कमर को थामे उसे छोड़ रहा था और पल्ली आगे झुककर अपनी नंगी मम्मी की छूट को चाट रही थी...

अनुज दोनों माँ बेटी की सेवा में लगा हुआ था..
ममता- अनुज ऐसी हीई छोड़ इसे वैसे भी अब तू काम hi आता है घर पर
अनुज- नहीं चची मुझे तो जैसे hi मौका मिलता है छोड़ता हूँ तुम्हे...
पल्ली का मुँह बंद था उसकी मम्मी की छूट से..
ममता- ाचा मुझे लगा तू अपनी माँ की छूट में घुसा रहता है इसलिए काम आता है..
अनुज चची को बात सुन एक पल को चौंका फिर मज़ाक करते हुए बोलै- क्या चची तुम भी... मेटे सामने दो दो छूट हमेशा हैं फिर क्या ज़रुरत.
ममता - अरे बचुआ तुझे अपनी माँ की छूट के बारे में नहीं पता देख लेगा तो बिना चोदे नहीं छोड़ेगा इतनी रसीली है.
अनुज- ाचा बोल तो ऐसे रही हो जैसे अभी देखि हो.
ममता- देखि है बचुआ और चखी भी है..
अनुज- कुछ भी.
ममता- अरे बचुआ सच में
इसके बाद ममता चची ने अनुज को ुंक्व पल्ली और माँ के बीच जो हुआ वो बता नाता कर अनुज को उत्तेजित कर अपनी और तगड़ी चुदाई कराइ. हालाँकि अनुज को इस बारे में माँ से पहले hi पता लग चूका था पर वो फिर भी अनजान बनने का नाटक कर मज़े लेता रहा और दोनों को भरपूर छोड़ने के बाद माँ बेटी को संतुष्ट करने के बाद जाकर शांत हुआ..
इसके आगे क्या हुआ अगली अपडेट में प्लीज कमैंट्स करके ज़रूर बताएं कैसी लगी अपडेट बहुत बहुत धन्यवाद्
सरलपुर
रात को हुए घटनाक्रम के बाद सुबह शांत थी हालाँकि चेतन छुप छुपकर रिमझिम के बदन को नास्ता करते हुए निहार रहा था और आने वाले सुखद कल की कल्पना कर रहा था, वहीं रमन हमेशा की तरह छुप कर अपनी बहन को निहार रहा था, और कहीं न कहीं चंचल भी अपने देवर को देखकर कुछ कुछ मन hi मन ख्याल पका रही थी. वहीं उसे उसके ससुर तिरछी नज़रों से ताड़ रहे थे और साड़ी में झांकती उसकी कमर देख कर उत्तेजित हो रहे थे.
खैर नाश्ता हुआ और फिर चेतन रमन अपने काम पर और ख़ुशी कॉलेज निकल गयी, दोनों बहुएं घर के काम में और चरण सिंह हाल में बैठ कर टीवी देखने का बहाना करते हुए अपनी जवान बहुओं को देख नैन सुख भोग रहे थे...
काम के बाद दोनों बहुएं नहाने के लिए चली तो चरण सिंह अपने कमरे में आ गए इसका फायदा उठाते हुए दोनों एक hi बाथरूम में घुस गयीं और दोनों पानी बचते हुए साथ नहाने लगी...

नहाने का प्रोग्राम थोड़ा लम्बा चला क्यूंकि देवरानी जेठानी ने एक दुसरे के बदन को अचर से साफ़ किया खासकर छूट गांड और छूछीयो का विशेष ध्यान रखा गया जिन्हे दोनों ने hi चाट चाट कर साफ़ किया. एक दुसरे के होंठों और जीभ को भी खूब चूसा... खैर नहाना होने के बाद दोनों आराम करने लगी जो की रात भर की चुदाई और सुबह जल्दी उठने के कारण ज़रूरी भी हो जाता था, इसीलिए दोनों बहुएं अपने अपने कमरों में जाकर सो गयी...
उधर थोड़ी देर बाद चरण सिंह उठे तो उन्हें हर भारतीय आम इंसान की तरह चाय की तालाब लगने लगी, आंगन में आकर देखा कोई नज़र नहीं आया तो वहीं सोफे पर बैठ कर चंचल को पुकारा चंचल जो नींद में थी उसे कोई खबर hi नहीं थी, अगली आवाज़ रिमझिम को दी उसने भी नहीं सुना, कुछ देर में खुद खड़े हुए सोचा बहुएं कहाँ हैं जो सुन hi नहीं रही,
उठकर चेतन और चंचल के कमरे की और गए तो दरवाज़ा भिड़ा हुआ था थोड़ा धक्का लगाया तो खुल गया चरण सिंह ने दरवाज़ा खोलते हुए चंचल को पुकारा और अंदर झांक कर देखा और फिर जो देखा उसे देख थोड़ा ठिठक से गए.. अंदर बिस्तर पर बहु चंचल सो रही थी कपडे सोने की वजह से अस्त व्यस्त हो गए थे पल्लू नीचे गिर गया था जिस वजह से चरण सिंह को एक बेहद कामुक नज़ारा देखने को मिल रहा था.
चंचल का सपाट मगर गदराया हुआ पेट कामुक नाभि साड़ी और ब्लाउज के बीच नंगा देखकर चरण सिंह का मन ठहर सा गया.

कैसे हुए ब्लाउज में चंचल की चूचियों का उभर जो की हर सांस के साथ ऊपर नीचे हो रही थी...
चरण सिंह की नज़र तो बहु के मादक पेट और कामुक नाभि पर से हैट hi नहीं रही थी... दरवाज़ा खोले वो ऐसे कमरे में झाँक रहे थे कुछ देर के बाद उन्हें ख्याल आया की वो कहाँ खड़े हैं अगर किसी ने देख लिया तो जवाब देना मुश्किल हो जायेगा. इसलिए कुछ सोचते हुए दतवाज़े से पीछे हेट और भरी मन के साथ जाने लगे पर दो तीन कदम बढ़ाये थे की मन नहीं माना, अंदर की हवस ने सही गलत के बोध पर कब्ज़ा कर लिया और चलते कदम रुक गए, कुछ देर यूँ hi खड़े रहने के बाद चरण सिंह दोबारा कमरे की और घूम गए और उसके दरवाज़े के पास आये, फिर से दरवाज़े को धकेला और फिर घर में सब तरफ देखा खासकर रिमझिम के कमरे को तो वो बंद था फिर बड़ी सावधानी से दरवाज़ा खोलकर वो अंदर घुस गए और आराम से उसे बापिस भिड़ा दिया.
अब चरण सिंह की नज़र बापिस चंचल के गदराये बदन पर थी, उसकी हर सांस के साथ फूलती छुछियां उसका मांसल चिकना पेट, बीच में गहरी नाभि देखकर hi चरण सिंह का दिल तेज़ी से धड़कने लगा, उन्हें अपनी धोती के अंदर लुंड में हलचल साफ़ महसूस हो रही थी, कुछ देर यूँ hi नैन सुख लेने के बाद चरण सिंह के पेअर आगे को बढे और वो बिस्तर के पास पहुँच गए, चंचल के चेहरा देखा तो वो गहरी नींद में सो रही थी. चरण सिंह का दिल ज़ोरो से धड़क रहा था क्यूंकि अभी वो जिस अवस्था में थे अगर कोई देख लेता तो वो कोई भी सफाई देने में असमर्थ होते.. कोई और क्या अगर चंचल खुद भी जाग जाए तो वो क्या उत्तर देंगे उन्हें समझ नहीं आ रहा था.
पर कहते हैं न जब सर पर उत्तेजना का बुखार चढ़ जाता है तो कुछ और समझ नहीं आता वही हाल चरण सिंह का था, बेचारे अपनी हवस के आगे मजबूर थे..
चरण सिंह ने कांपते हुए हाथ धीरे धीरे आगे बढ़ाये और फिर उनके हाथ उनकी बहु के मांसल सपाट पेट से छू गए और छूटे hi चरण सिंह के बदन में करंट दौड़ गया और चरण सिंह ने अपना हाथ बापिस खींच लिया. उन्हें ऐसा लग रहा था की उनकी उँगलियों पर उसकी बहु के नरम पेट का एहसास अब भी था. चरण सिंह का मन फिर मचलने लगा उन्होंने चंचल के चेहरे को देखते हुए अपना हाथ हलके से फिर से उसके पेट पर रख दिया एक बार फिर से ये एहसास उनके बदन में करंट दौड़ा गया..
चंचल अब भी गहरी नींद में थी, चरण सिंह ने बहु के पेट पर धीरे धीरे हाथ चलना शुरू किया अह्ह्ह्ह इस एहसास से अपने हाथ पर बहु के नरम पेट को महसूस करके चरण सिंह का लुंड पूरी तरह से तन गया, उनकी उत्तेजना अब उनके सर पर चढ़ चुकी थी, चरण सिंह धीरे धीरे चंचल के पूरे पेट को सहलाने लगे और बीच में उसे हल्का सा मसल भी देते, नाभि को बीच में छेड़ रहे थे, चरण सिंह को बहुत मज़ा ा रहा था ऐसा उत्तेजित करने वाला एहसास उन्हें आज तक नहीं हुआ था, पेट और कमर को अचे से सहलाते हुए और चंचल के न जागने पर चरण सिंह की हिम्मत बढाती जा रही थी.. बहु को ऐसे देख उनका गाला सूख सा रहा था उनका मन हो रहा था की बहु के बदन को जी भर के चूमें चाटें.
पर साथ hi दर भी था, पर दर की उत्तेजना के आगे कहाँ चलती है, उन्होंने मन में सोचा की अब तक तो चंचल जाएगी नहीं लगता है गहरी नींद में है इसका फायदा उठाना चाहिए.. ये सोचते हुए चरण सिंह के पूरे बदन में सिरहन दौड़ गयी उनके हाथ अब भी बहु के नंगे पेट पर थे, उन्होंने चंचल के चेहरे को एक बार और देखा और उसे अब भी सोता पाया तो बस उन्होंने आगे बढ़ने का फैसला कर लिया.
चरण सिंह वहीं अचे से झुक कर बैठ गए और चंचल की कमर को दोनों हाथों से पकड़ कर आएगी झुकते हुए अपने चेहरे को धीरे धीरे से उसके पेट पर झुकाने लगे
और अगले hi पल चरण सिंह के होंठ चंचल के पेट से टकराये तो अपने होंठों पर बहु के बदन का स्वाद पाकर चरण सिंह बिलकुल पागल से हो गए और इस पल का पूरा फायदा उठाते हुए चंचल के पेट को चूमने चाटने लगे..
चंचल जो नींद में थी उसे उसे अपने बदन के साथ कुछ होने का एहसास हो रहा था, उसे नींद में hi ाचा एहसास हो रहा था, वो नींद में रिमझिम के साथ बिताये पल के सपने देख रही थी, पर चरण सिंह ने ज्यूँ hi उसके पेट को चेतना चूमना शुरू किया उसका बदन उस एहसास को महसूस करने लगा और प्रतिक्रिया देने लगा , अंदर hi अंदर उसकी नींद कमज़ोर होने लगी पर चरण सिंह इस समय सब भूल कर उसके बदन को चूमने चाटने में लगे हुए थे, चरण सिंह ने आगे बढ़ाते हुए अपनी जीभ बहु की नाभि में घुसड़ी और चूसने लगे.
इस एहसास को चंचल का बदन भी शांत रहकर सहन नहीं कर पाया और उसकी नींद खुल गयी चंचल ने हलके से आँखें खोल कर देखा तो एक पल को बिलकुल चौंक गयी और जब उसे समझ आया की क्या हो रहा है तो वो बिलकुल स्तब्ध रह गयी.. उसने देखा की उसके पिता सामान ससुर जी उसके बिस्तर पर बैठ कर उसकी कमर को थामे उसकी नाभि में जीभ घुसा कर ऐसे चूस रहे हैं जैसे अभी उसमे से रास फुट निकलेगा.
चंचल को तो बिलकुल समझ नहीं आ रहा था क्या करे एक पल को उसका मन हुआ उठे और धक्का देकर ससुर जी को उठादे और उन्हें अचे से इस बारे में सुनाये पर न जाने क्यों उसके बाद के हालत को झेलने के लिए वो खुद को तैयार नहीं कर प् रही थी वो नहीं चाहती थी की उसकी वजह से घर में कुछ भी कलेश हो, वहीं साथ साथ चंचल का बदन भी जैसे उसके कब्ज़े में से निकल रहा था उसके ससुरजी के चूमने चाटने से उसे ाचा लग रहा था पूरे बदन में एक सिरहन दौड़ रही थी, उसकी छूट गीली हो कर बाह रही थी, मन और मस्तिष्क के बीच बेचारी चंचल फांसी हुई थी उसकी नाभि में ससुर जी की जीभ उसके पूरे बदन पर जादू कर रही थी. वो छह कर भी कुछ नहीं कर पा रही थी.. तभी उसने देखा की ससुरजी अपना चेहरा उसकी और कर रहे हैं तो दर से उसने तुरंत आँखें बंद कर ली और सोने का नाटक करने लगी, चरण सिंह ये देख कर निश्चिंत हुए की बहु अब भी सो रही है.
चंचल मन hi मन सोच रही थी की ये पापाजी को क्या हुआ जो मेरे साथ ऐसा कर रहे हैं क्या सच में ये मुझे इन नज़रों से देखते हैं क्या होता जा रहा है सबको पहले रिमझिम ख़ुशी, फिर मेरे पति का रिम्मी का नाम लेना , फिर मेरा और रिम्मी का ऐसा रिश्ता बनना और फिर उसने बताया की देवर जी भी मेरे साथ करना चाहते हैं और अब पापाजी तो सबसे दो कदम आगे निकल गए, क्या करूँ मैं पर ये जानते हुए भी की सब गलत है फिर भी मुझे इतना ाचा क्यों लग रहा है, ओह्ह्ह्ह ये पापाजी की जीभ इतना मज़ाआ दे रही है, जो हो रहा है होने देती हूँ देखती हूँ पापाजी कहाँ तक जाते हैं, यही सोचकर चंचल अपने ससुरजी की हरकतों का मज़ा लेने लगी...
इधर चरण सिंह ने जी भर के अपनी बहु की नाभि को चूसा पर अब उनसे रुका नहीं जा रहा था उनका लुंड बिलकुल फटने को हो रहा था इसलिए खड़े होते हुए चरण सिंह ने पजामा और कच्चा नीचे सरकते हुए जल्दी से अपना लुंड बहार निकल लिया वहीं अपनर बदन पर हाथ या होंठ महसूस न कर चंचल को नान में आया की अचानक क्या हुआ पापाजी चले गए क्या इसलिए ुसंस बहुत सावधानी से अपनी आँखों को बिलकुल हल्का सा खोल के देखा तो एक बार फिर चौंक गयी क्यूंकि सामने ससुर जी का नंगा लुंड था उनके कड़क खड़े लुंड को देखकर न जाने क्यों चंचल का मुँह सूखने लगा वो आज पहली बार पति के अलावा किसी दुसरे मर्द का लुंड देख रही थी वो भी उसके ससुर का, चंचल के लिए ये पल बेहद मुश्किल होता जा रहा था उसकी छूट में उसे हज़ारों चीटियां रेंगती हुई महसूस हो रही थी और वो छूट को खुजाना छह रही थी वहीं उसका मन कर रहा था की ससुर जी का लुंड पकड़ के देख लूँ वहीं उसका मुँह सूखा जा रहा था, पर वो बेचारी कुछ नहीं कर सकती थी, सिवाए सोने के नाटक के.
वहीं चरण सिंह तो अब दर भूल चुके थे अपनी बहु के बगल में लुंड निकल कर खड़े थे ये जानते हुए की अगर बहु जाग गयी तो बवाल हो जायेगा फिर भी वो खुद को रोक नहीं पा रहे थे..
चंचल ने देखा ससुर जी उसकी और बढ़ रहे हैं तो उसने फिर से आँखें बंद कर ली कुछ देर तक उसे उसके बदन पर कोई एहसास नहीं हुआ फिर अपने पेट पर बापिस उसे एक गरम एहसास हुआ वो समझ गयी की बापिस ससुरजी उसे चूम रहे हैं पर कुछ देर बाद उसे कुछ अलग लगा ये होंठों का तो एहसास नहीं था इसी लिए एक बार फिर से उसने सावधानी से आँखें खोल कर देखा तो फिर से चौंक गयी उसके ससुर जी उसकी साइड में बैठकर अपने लुंड को उसके नंगे पेट पर रगड़ रहे थे, इस एहसास से hi चंचल की छूट और पनिया गयी, उसका पूरा बदन मनो ऐंठने लगा जिसे उसने किसी तरह से काबू में रखकर सोने का नाटक करती रही, वहीं चरण सिंह तो अपने लुंड को बहु के पेट पर रगड़ कर जन्नत में थे, उनका लुंड का टोपा रगड़ते हुए बहु की नाभि में घुसा तो उन्हें और मज़ा आ गया और वो उसे hi बहु की छूट समझकर हलके हलके धक्के लगाने लगा..
और चंचल को भी जैसे hi ये एहसास हुआ वो मचल उठी उसकी छूट में खुजली मचने लगी साथ hi तड़पने लगी अपनी नाभि में ससुरजी का लुंड महसूस कर एक पल को उसका मन हुआ की अभी पापाजी के लुंड को पकड़े और अपनी छूट में घुसवा ले पर इतनी हिम्मत वो नहीं दिखा पाई पर जो हिम्मत आज चरण सिंह ने दिखाई वो बकै काफी थी और उसी हिम्मत का रास उनकी गोलियां से बहता हुआ उनके लुंड में भर गया और फिर एक दबी आह के साथ उनका लुंड अपने रास से बहु की नाभि और पेट को भीगने लगा, चंचल को भी जैसे hi पेट पर ससुरजी के रास का गरम एहसास हुआ उसकी छूट पानी छोड़ने लगी..
जब चरण सिंह का झड़ना ख़त्म हुआ तो वो घबराने लगे उन्हें एहसास हुआ की उन्होंने क्या कर दिया है बहु के पेट को अपने रास से भीगा देखकर चरण सिंह हड़बड़ा गए सोचा की जल्दी से कपडे से पांच देता हूँ और उसके लिए जल्दी से पजामा ऊपर किया और कपडा उठाया hi था की घर की घंटी किसी ने बजे और चरण सिंह की गांड फटने लगी अभी उन्हें कुछ समाज नहीं आ रहा था तो जो सूझा वो किआ और पहात से कमरे से भाग निकले..
चंचल को दरवाजे के बंद होने की आवाज़ आई तो उसने आँखें खोल कर देखा, उसने जैसे hi देखा दरवाज़ा बंद है जल्दी से उसने अपनी सारे जांघों तक उठाई और गीली कच्ची को एक तरफ सरकाया और अपनी छूट में दो उंगलियां घुसा कर तेज़ी से अंदर बहार करने लगी साथ hi दूसरा हाथ उसके पेट पर था जिससे उंगलियों से वो ससुर का रास बटोरने लगी और फिर उंगलियों को अपने मुँह में लेजाकर चूसने लगती और ससुर के रास को चाट रही थी उसे ससुर के रास का स्वाद बहुत कुछ पति के रास जैसा hi लग रहा था
चंचल अभी जो कर रही थी उसके बारे में दो दिन पहले सोच भी नहीं सकती थी और अभी वो अपनी छूट में उंगलियां करते हुए अपने पेट से अपने ससुर का रास उठा उठाकर चख रही थी. चंचल पहले से hi इतनी उत्तेजित थी की जल्दी hi उसकी छूट ने रास छोड़ दिया पर तब तक वो पेट से सारा रास चाट चुकी थी झड़ने के बाद वो कुछ शांत हुई और जो हुआ उसके बारे में सोचने लगी और फिर उसके चेहरे पर एक मुस्कान आ गयी.. फिर वो उठी और कपडे लेकर बाथरूम में घुस गयी.
वही चरण सिंह चंचल के कमरे से निकले तो घर की घंटी बार बार बज रही थी खुद को थोड़ा शांत करके दरवाज़ा खोला तो सामने अपनी पत्नी को देखकर वैसे hi दर गए जैसे मम्मी के पर्स से चोरी करने के बाद बच्चा..
चरण सिंह- अरे तुम आ गयी.
माधुरी- हाँ कबसे घंटी बजा रही हूँ कोई खोल नहीं रहा कहाँ रहे तुम.
माधुरी ने अंदर आते हुए कहा.
चरण Singh-are वो वो मैं आराम कर रहा था.
माधुरी- और बहुएं?
चरण सिंह- बहु बहुएं भी सो रही हैं तुम तुम फ़ोन कर देती तो लेने आ जाता तुम्हे.
माधुरी - अरे तो क्या हुआ रिक्सा पकड़ के आ गयी.
इतने में रिमझिम भी बहार आ गयी और आकर सास के पेअर छुए और फिर चंचल भी आ गयी जिसे देखकर चरण सिंह घबरा गए पर बदली हुई साड़ी देखकर सोच में भी पद गए साथ hi चंचल का व्यवहार बिलकुल सामान्य लगा तो थोड़ा मन को तसल्ली हुई.
दोनों बहुएं सास की खातिरदारी में लग गयी ऐसे hi फिर समय निकल गया शाम को सब बापिस लौटे और फिर सब ख़ुशी ख़ुशी खाना खा रहे थे तभी रमन ने सही मौका समझा और बात राखी
रमन- अरे भैया हम लोग जाने वाले हैं तो क्यों न ख़ुशी को भी ले चलें.
ख़ुशी तो ये सुनकर खुश हो गयी वहीं चंचल और चेतन का प्लान बिगड़ता दिखा.
चेतन- पर उसकी पढाई.
ख़ुशी- अरे भैया एग्जाम हो चुके अब मैं फ्री हूँ मैं भी चलूंगी.
इसके आगे चेतन क्या बोलता
रमन- अरे मेरी विनीत से बात हुई तो मैंने उसे भी पूछ लिया है..
चरण सिंह को वैसे तो बहुओं का जाना ाचा नहीं लग रहा था फिर भी बोले- सही किआ जा रहे हो तो सरे बच्चे घूम आओ साथ में.
रिम- अगर मेरी मानो तो मैं कहूँगी की मुनमय पापाजी आप दोनों भी चलो सब फॅमिली चलते हैं घूमने तो मज़ा आएगा.
ये सुनकर तो चरण सिंह की बांछें खिल गयी वहीं चेतन रमन और चंचल तीनो का मूड बिगड़ गया.
रमन ने एक बार इशारा करके रिमझिम को रोकने की कोशिश भी की पर अब देर हो चुकी थी.
ख़ुशी - हैं ये सही रहेगा मम्मी पापा भी चलेंगे वैसे भी वो घुमते नहीं हैं.
माधुरी - अरे तुम बच्चे घूम आओ कहाँ हमें साथ लिए फिरोगे.
चरण सिंह- सही बात hai.waisw भी तुम लोग पहाड़ो में जा रहे हो वहां तुम्हारी मम्मी की तबियत ख़राब हो जाती है.
ख़ुशी- मेरे पास एक ाचा आईडिया है.
रमन- क्या?
ख़ुशी- क्यों न गाओं चलें सब मिलकर इसी बहाने नया घर भी देख आएंगे.
चेतन- हाँ आईडिया तो ाचा है गाओं घूमने भी नहीं गए कबसे.
चरण सिंह- हाँ भाई ये तो सही कहा जबसे नयी कोठी बनवाई है तबसे कहाँ गए हैं गाओं जायेंगे तो ाचा हो जायेगा.
रमन- ये आईडिया तो मुझे भी सही लग रहा है. गाओं hi चलते हैं कुछ दिन के लिए.
रिम- इसी बहाने मैं भी गाओं घूम आउंगी.
माधुरी- हाँ बहुएं भी देख आएँगी अपना गाओं, अरे मैं तो कहती हूँ की तेरी बहन जीजा और भाई विनीत तो आ hi रहे हैं न
रिम- हाँ मम्मी जी..
माधुरी- तो ऐसा कर संधान और समधी जी से भी बोल दे और चंचल तू भी अपनी मम्मी को बोल दे सब मिलकर चलेंगे.
रिम- क्या मम्मी पापा को?
चंचल- मम्मी को भी?
सब माधुरी की बात पर थोड़ा अचंभित थे पर सबको उनकी बात सही भी लग रही थी.
चरण सिंह- सही कह रही है तुम्हारी सास जब चलना hi है तो सब चलो वहां मज़ा भी आयेगा सब के ज़ात फिर कभी ऐसा मौका मिले न मिले
माधुरी- कल दिन में मैं खुद दोनों संधान से बात करुँगी और मन लुंगी अपने साथ के लिए..
रिमझिम और चंचल दोनों को hi अपनी योजना थोड़ी बदलती दिखी फिर भी अपने परिवार से मिलने की ख़ुशी में वो खुश थी. चेतन रमन दोनों भाइयों को अपनी योजना बदले जाने का दुःख था पर गाओं में जाने पर दोनों को hi कुछ होने की उम्मीद थी.
वहीं चरण सिंह भी खुश थे की बहुओं के साथ जा रहे थे ऊपर से आज की बात पर चंचल ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी थी..
खैर सरे फैसले हो चुके थे और फिर खा पि कर सब अपने अपने कमरों में थे, कुछ बातें कर रहे थे तो कुछ चुदाई पर साथ hi आने वाले समय की योजना बना रहे थे...
चोदामपुर
(कर्मा की ज़ुबानी)
माँ को छोड़ने के बाद मैं ाचा महसूस कर रहा था तो अपने कमरे में आकर लेट गया और फिर ख्याल आया और फ़ोन निकला और अंजलि को फोटो भेजने लगा साडी फोटो भेजने के बाद थोड़ा रुका की वो देखे कुछ देर में hi उसका रिप्लाई आ गया- थैंक्यू.
में- फोटो भेजने के लिए कैसा थैंक्यू
अंजलि- फोटो के लिए भी कुर आज दिन के लिए भी.
में- दिन के लिए मतलब.
अंजलि- तुम हमारे साथ गए पूरा दिन दिया उसके लिए.
में- अरे वो तो कुछ भी नहीं है थैंक्यू मत बोलो.
अंजलि- ाचा फिर क्या बोलूं?
में- कुछ मत बोलो बस कभी तुम मेरे साथ चल लेना..
अंजलि - ाचा जी बदला लोगे.
में- बदला नहीं बस ऐसे hi.
अंजलि- अरे समझ गयी कोई बात नहीं तुम बता देना मैं चलूंगी.
में- ये हुई न बात..
अंजलि- हाँ पर एक दो दिन पहले बताना मेरी तरह स्टैंड पर पहुँच कर मत बताना. हेहेहे.
में- ः अरे नहीं पहले hi बताऊंगा, वैसे तुम्हे हॉरर फिल्मो के अलावा और क्या पसंद है..
और इसी तरह करीब घंटे भर हम दोनों ने मश्ग में बात की और एक दुसरे को जाना फिर सो गए.
अगली सुबह चोदामपुर की आम सुबह थी सब अपने अपने काम में लगे हुए थे हमारे यहाँ सब नाश्ता कर रहे थे, तभी दरवाज़ा खटखटाने की आवाज़ आई अनुज दरवाज़ा खोल कर आया तो साथ में नीतू के पापा यानि दीं दयाल चाचा थे.
पापा- अरे दीनू आओ आओ बैठो. सुनो दीनू के लिए चाय लाओ.
चाचा एयर और पापा के बगल में बैठ गए. माँ ने उन्हें चाय दी.
दीं दयाल- अरे भैया हम का कह रहे थे की कल की पूरी तयारी है?
पापा- कल की ?
दीं दयाल- भूल गए पात पूजा है कल.
पापा- अरे हाँ हमारे तो ध्यान से hi निकल गया.
माँ- अरे मैं तो बच्चों को बोलने hi वाली थी की पत्ते इकठा कर लाएं आज.
शान्तो- अरे पर इस पात पूजा में हॉट का का है नाम सुना है हमने कभी देखि नहीं.
माँ- अरे जीजी का है की फसल कटती है तो उसी की ख़ुशी के लिए मानते हैं पात पूजा, सरे अनाज का ढेर इकठा कर के उन्हें पूजते हैं.. बहुत से पत्तों और फूलों को पीसकर उनका रास निकलते हैं और एक दुसरे को लगते हैं..
में- और भांग बनती है. जिसकी ज़िम्मेदारी दीनू चाचा की होती है हर बार.
पापा- और हमें पता है ये अभी उसी के लिए आये हैं.
इस पर सब हंसने लगे.
दीनू चाचा - अरे भैया तुम भी न उसके लिए कहाँ आइये हैं.
पापा- ाचा फिर किसके लिए?
दीनू चाचा - आये तो वैसे उसी के लिए थे हेहेहे.
ये सुनकर सब हंसने लगे.
Papa-are हम समझ गए आज तुम्हारा सारा कोटा ले आएंगे शहर से खुश.
दीनू चाचा - बस और का चाहिए.
माँ- थोड़ी हलकी बनाना इस बार भैया पिछली बार खुद hi दो दिन सोते रहे थे.
दीनू चाचा - का भाभी तुम भी मज़ाक करती हो.
ऐसे hi हंसी मज़ाक चलता रहा इसी बीच मैंने फ़ोन देखा तो अंजलि का गुड मॉर्निंग का मश्ग था जिसको ख़ुशी से मैंने भी रिप्लाई किया फिर मैं और अनुज चले गए बाघ में पत्ते इकठे करने थे, जग्गू भी आ गया फिर मिलकर फूल और पत्ते इकठे किये इसमें hi दोपहर हो गयी इसी बीच मेरा फ़ोन बजा उठाकर देखा तो प्रेमा भाभी का था.
में - हाँ भाभी.
प्रेमा भाभी - सुनो कर्मा भैया समय निकल के थोड़ी देर में घर आना मुझे ज़रूरी बात करनी है..
में- क्या हुआ कोई गड़बड़ है kya.jaggu भी मेरे साथ है बताओ
प्रेमा भाभी - आओ तभी बताती हूँ और जग्गू भैया को भी ले आना.
यव कहकर फ़ोन रख दिया. माइनर जग्गू से पुछा - तेरे घर कोई बात हुई है क्या? भाभी का फ़ोन था ऐसे ऐसे.
जग्गू- नहीं तो मुझे तो नहीं याद .
में- चल देखेंगे थोड़ी देर में..
फिर काम पूरा किया और पत्तों के गठर बनाकर पीसने को देकर आये और बापिस आकर बाघ में तुबेल पर नहाये तीनो फिर अनुज घर की और चला गया. मैं और जग्गू चले गए उसके घर दरवाज़ा भाभी ने खोला और फिर दरवाज़ा बंद करके हम दोनों को अपने कमरे में ले गयी..
घर पर ताऊ और भग्गू नहीं थे तै के नहाने की आवाज़ आ रही थी बाथरूम से.
में- भाभी क्या हुआ क्या बात है.
प्रेमा भाभी- वो भी पता चल जाएगी पहले कुछ और काम करते हैं ये बोलकर वो मेरे सामने नीचे बैठ गयी और पजामा नीचे खिसका कर लुंड निकल लिया..
में- भाभी क्या कर रही हो तै घर पे hi हैं पकड़ लेंगी.
प्रेमा भाभी- कुछ नहीं होगा
ये कहकर उन्होंने मेरा लुंड मुँह में भर लिया साथ hi जग्गू को अपने पास आने का इशारा किया.
जग्गू भी पास आते हुए बोलै- भाभी ये समय सही नहीं है मम्मी ने देख लिया तो सबकी कुटाई हो जाएगी.
पर प्रेमा भाभी ने उसकी बात का कोई जवाब नहीं दिया बल्कि उसका लुंड भी निकल लिया और मेरे से मुँह हटाकर चाटने लगी फिर बापिस मेरे लुंड को..
अब भले hi तै घर पर थी पर जब लुंड भाभी के गरम मुँह में हो तो मज़ा तो आने वाला hi था तो मैं मज़े से कराहने लगा वही हाल जग्गू का भी था हालाँकि उसकी साथ hi पहात भी रही थी पर मज़े को वो नकार भी नहीं सकता था,
इसी बीच मैंने भाभी का पल्लू एक तरफ सरका दिया और ब्लाउज के ऊपर से उनकी चूचियां दबाने लगा,
भाभी ने मुँह को लुंड से हटाया और कुछ देर के लिए कड़ी हुई और अपनी साड़ी को उतर फेंका और फिर अगले hi पल. अपना ब्लाउज खोलने लगी कुछ hi देर में ब्लाउज और फिर ब्रा भी नीचे पड़ी थी और भाभी सिर्फ पेटीकोट में हमारे सामने थी, साला दर भी लग रहे था समझ भी नहीं आ रहा था की क्या हो रहा है पर भाभी को ऐसे देख मन और लुंड दोनों खुश थे मैंने सोचा तै को छोड़ चूका हूँ ज़्यादा क्या hi होगा और भाभी की चूचियों पर झपट पड़ा मुझे देख जग्गू भाभी के पीछे गया और उनका पेटीकोट उठा अपना मुँह उनकी गांड में फंसा दिया..
भाभी की आँखें बंद हो गयी दोहरे मज़े से मैं चूचियां चूस रहा था और जग्गू गांड और छूट चाट रहा था, चूचियों को चूसने क्र बाद मैंने दोबारा से लुंड उनके मुँह में घुसा दिया, भाभी मज़े से चूसने लगी..
इधर जग्गू ने जब भाभी की छूट गांड को अचे से चाट लिया तो खड़ा हुआ और अपना लुंड लेकर भाभी के मुँह के सामने कर दिया भाभी ने मेरा लुंड से मुँह हटाया और उसका लुंड चाटने लगी, मैंने पीछे जगह खली देखि तो भाभी के पीछे गया पेटीकोट को कमर पर इकठा किया और लुंड को पकड़ कर टोपे को उनकी छूट के द्वार पर रख धक्का लगाया और लुंड सरकता हुआ भाभी की गरम छूट में घुस गया...
जिसके साथ hi भाभी की जग्गू के लुंड पर घुटी हुई सिसकी निकली.
मैं भाभी की कमर पकड़ कर उन्हें छोड़ने लगा और भाभी जग्गू का लुंड चूस रही थी

भाभी के गरम छेदों के मज़े में हम तै नाम की टेंशन को भूल hi गए थे की तभी आवाज़ आई- हाय दिया ये क्या हो रहा है...
आवाज़ सुनकर हम तीनो hi चौंक गए और देखा तो तै सामने कड़ी थी कुछ पलों के लिए मेरी भी फटी पर फिर सोचा क्या hi होगा देखा जायेगा,
मंजू तै- हम पूछते हैं क्या हो रहा है ये... और तू छिनाल तुझे ये सब करते शर्म नहीं आई.
तै भाभी को गली देते हुए आगे बढ़ी.. की भाभी वहीं अपनी जगह कड़ी हो गयी और बोली - मम्मी जी जब तुम्हे नहीं आती तो मुझे क्यों आएगी..
हम दोनों बस खड़े खड़े मुँह टांक रहे थे.
मंजू तै- अरे करम तू करे रंडियों जैसे शर्म मुझे आएगी आज तेरी खैर नहीं.
ये कह तै गुस्से में आगे बढ़ी.
प्रेमा भाभी- तो मम्मी अपने बेटे से रात को रंडियों की तरह छोड़ना किसके करम हैं.
ये सुनते hi तै के पैरों से तो जमीन खिसक गयी वहीं जग्गू की भी पहात गयी मैं भी मुँह खोल के देखता रह गया और फिर जब समझ आया तो धीरे से जग्गू को बोलै- सेल हरामी मादरचोद बताया भी नहीं.
पर वो तो सुन्न खड़ा था और तै भी..
प्रेमा भाभी ने आगे बोलना शुरू किया- मम्मी जी जब तुम्हारी छूट में इतनी खुजली है की बेटे का लुंड भी खा गयी तो सोचो मेरे में कितनी होगी.
तै बिलकुल चुप थी.
प्रेमा भाभी- अब जैसे तुमने तरीका निकला है मिटने का मैंने भी निकला है और ये भी कहती हूँ की दोनों से मैं पहले से चुद रही हूँ.
इसके बाद प्रेमा भाभी आगे बढ़ी और मंजू तै के पास जाकर उनको कंधे से पकड़ लिया और पास कड़ी खत पर बैठा दिया मंजू तै को तो जैसे सांप सूंघ गया था.
प्रेमा भाभी- देखो मम्मी तुम्हारी बात मुझे पता है और मैंने तुम्हे अपनी बतादि है, और सच कहूं तो मुझे तुम्हारे और जग्गू से कोई दिक्कत नहीं है न hi मैं किसी को बताउंगी.
मंजू तै अपनी बहु को देख रही थी और उसकी बातें समझने की कोशिश कर रही थी,
वहीं हम दोनों ऐसे hi खड़े हुए देख रहे थे क्या हो रहा है.
प्रेमा भाभी- मम्मी देखो घुमा फिरा के कहने से ाचा है मैं सीढ़ी बात करूँ.
मंजू तै- कैसी सीढ़ी बात.
अब मंजू तै के मुँह से तब से कुछ निकला था.
प्रेमा भाभी- हमारे पास तीन रस्ते हैं.. उनमे से हम अभी कोई एक चुन सकते हैं.
मंजू Tai-kaise रस्ते .
प्रेमा भाभी- पहला तुम मुझे रोको और लड़ो मैं तुम्हारे और जग्गू के बारे में सबको बताऊँ और फिर यही बवाल.
मंजू तै- नहीं नहीं मुझे घर में कोई बवाल नहीं चाहिए. दूसरा रास्ता क्या है?
प्रेमा भाभी- जैसा चल रहा है वैसा चलने दो एक दुसरे के बारे में जानकार भी अनजान बने रहे.. और अपनी अपनी ज़रूरतें पूरी करते रहे.
ये सुन तै ने कुछ सोचा और फिर बोली मुझे ये सही लग रहा है जो हो गया है उसे बदल नहीं सकती तो मुझे ये मंजूर है.
ये कहकर तै उठने लगी फिर उठाते उठाते बोली- वैसे तूने तीन रस्ते बोले थे तीसरा क्या है?
ये सुन भाभी मुस्कुराई और उठ कर फिर से मेरे और जग्गू के पास आई और अपने दोनों हाथों में हमारे लुंड पकड़ के मुठियाते हुए बोली - तीसरा रास्ता है मम्मी जी की यहाँ काफी लुंड हैं हम मिल बाँट कर प्यार से खा सकते हैं.
तै ने ये सुना और फिर सोच में पद गयी जग्गू को अपनी भाभी की बात सुनकर हैरानी हुई की भाभी क्यों बानी बनाई बात बिगड़ रही है अभी ाचा खासा तो मम्मी मान गयी थी दुसरे रस्ते के लिए.
मुझे जहाँ तक है अंदाज़ा हो गया था की क्या होने वाला है या तो अभी या कुछ समय में..
तै कुछ देर तक कुछ नहीं बोली तो हमारे लुंड मुठियाते हुए भाभी बोली- क्या हुआ मम्मी जी?
इस पर तै ने ना में सर हिलाया और फिर कड़ी हुई और दरवाज़े की तरफ बढ़ने लगी उन्हें बढ़ता देख प्रेमा भाभी का मुँह थोड़ा उतरा शायद उन्होंने जैसा सोचा था वैसा नहीं हुआ...
वही तै के मन में क्या था कोई नहीं जनता था तै दरवाज़े तक गयी और फिर रुक गयी रुक कर दरवाज़ा बंद किया और फिर मुद कर मुस्कुराते हुए बोली- सावधानी से किया करो ये सब काम मेरी जगह कोई और देख लेता तो.
ये सुनकर सब के चेहरे खिल गए .
प्रेमा भाभी- अरे मम्मी तुम्हे दिखाना था तभी तो खुला छोड़ा था..
ये कहकर भाभी ने हमारे लुंड छोड़े और भाग कर गयी और अपनी सासु माँ से चिपक गयी...
तै ने भी उसे बाहें खोल कर सीने से चिपका लिया वो अपनी बहु की ख़ुशी और उत्साह देख कर मुस्कुरा रही थी हम दोनों लड़के भी अब खुश थे और मैंने जैसा सोचा था वैसा hi हुआ था, पर प्रेमा भाभी का उत्साह इतने में कहाँ थमने वाला था उन्होंने ख़ुशी जताते हुए तै के चेहरे को पकड़ा और अपने होंठ उनके होंठों से मिला दिए, तै तो एक पल को चौंक hi गयी क्यूंकि जीवन में पहली बार कोई औरत उन्हें इस तरह चूम रही थी वो भी उनकी बहु बस ये hi सोच तै हैरान थी पर वहीं प्रेमा भाभी का उत्साह एक अगल hi श्रेणी का था और इतना असरदार था की उनकी सासु माँ भी उसके असर से नहीं बच पाई और कुछ hi देर में उनका साथ देने लगी..
सास बहु दोनों की जीभ आपस में अटखेलियां कर रही थी जिसे देख हिम दोनों के hi लुंड ठुमके मार रहे थे..
भाभी ने फिर उन्हें चूमते हुए hi तै के कपड़ो को उतरना शुरू किया तै भी बहु के हाथों नंगी होने में उत्तेजित हो रही थी.
कुछ hi देर में तै और भाभी दोनों हमारे सामने नंगी कड़ी थी सास बहु को बिलकुल नंगा देख हम दोनों के hi लुंड फुंकार रहे थे इसके बाद भाभी ने हमसे बोलै- तुम लोग कब तक देखते रहोगे.
बस इससे ज़्यादा निमंत्रण की हमें ज़रूरत नहीं थी मैंने जानकर जग्गू को उसकी मम्मी के पास धकेला मैं उसे उसकी माँ के साथ देखना चाहता था और खुद भाभी के पीछे जगह ली

मैं अपना लुंड पीछे से भाभी की गांड में घिसते हुए उनके बदन से खेलने लगा वहीं जग्गू अपनी मम्मी के साथ ये hi कर रहा था. कभी चूचियां मसलता तो कभी भरा मांसल पेट..
आज जग्गू के घर में भी सब कुछ खुल चूका था सास बहु दोनों साथ में छोड़ने को तैयार थी.. अब बुआ और ममता चची के घर की तरह यहाँ भी उत्तेजना ने रिश्तों पर कब्ज़ा कर लिया था..
खैर ज्ञान बाद में छोडूंगा पहले सामने जो छूटें हैं उन्हें छोड़ा जाये...
अब समय आगे बढ़ने का था तो हम लोग भी आगे बढे मैंने भाभी को बिस्तर पर लिटा दिया और खुद उनकी टैंगो के बीच आ गया और अपना मुँह उनकी रसीली छूट से लगा दिया वहीं जग्गू ने तै को बिस्तर पर बैठाया और अपने लुंड को उनकी बड़ी चूचियों के बीच फंसकर उनकी चूचियों को छोड़ने लगा.

प्रेमा भाभी- अह्ह्ह्ह कर्मा भैयाआआह्ह्ह्हह अह्ह्ह्ह चातुओ aiseeeeeeeeee हीई .
मेरा तो मुँह बंद था क्या hi बोलता बस जवाब मैं उनकी छूट को कास के चूस दिया..
जग्गू - ओह्ह्ह्ह मम्मी आह्ह्ह्हह तुम्हारी छुछियां कितनी नरम है आह्हः मज़ा आ रहा है.
मंजू Tai-haan बच्चा बचपन में इन्ही को चूस चूस कर बड़ा हुआ है और आज अपना लुंड बड़ा करके उन्ही को छोड़ रहा है.
प्रेमा भाभी- अरे मुनमय अब तुमने hi दूध पीला कर बढ़ा किया है अब तुम्हारा क़र्ज़ तो उतरेंगे hi न देवर जी.
मंजू तै- हाँ बहु अचे से सेवा करवाउंगी अब अपने बदन की...
जग्गू और मैं दोनों की बातें सुन उत्तेजित हो रहे थे साथ hi जग्गू को एक ख़ुशी ये थी की चुदाई की वजह से hi सही काम से काम उसकी माँ और भाभी एक दुसरे झगड़ नहीं रही बल्कि साथ दे रही है...
इसी जोश में आकर जग्गू ने अपनी मम्मी की छूछीयो से लुंड निकला और उन्हें पीछे की तरफ लिटा दिया और खुद उनकी छूट में मुँह घुसा diya.wohin उसकी भाभी और मैं भी पीछे नहीं थे और हमने जगह बदल ली थी अब मैं बिस्तर पर बैठा हुआ था और भाभी नीचे बैठ कर मेरा लुंड चूस रही थी...

उधर जग्गू से अपनी छूट चुसवाते हुए तै अपनी भरी भरकम चूचियों से खेल रही थी.
मंजू तै- ahhhhhhhhhh बाछहुआअ का चूसता है तूऊऊऊह्ह्हह्ह अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह खा जा आज अपनी मम्मी की छूट को,
में- अह्ह्ह्हह्हह तै चूसती तो तुम्हारी बहु भी मस्त है देखो कैसे लुंड को गले तक फंसा कर चूस रही है..
मंजू Tai-haan बहु किसकी है चूसेगी hi मर्द को खुश करने की साड़ी कलाएं आती हैं मेरी बहु को.
इस बात पर भाभी ने मेरे लुंड से मुँह को हटाया और बोली- और जो नहीं आती वो तुम सीखा देना मम्मी जी...
और ये कहकर बापिस मेरा लुंड मुँह में भर लिया,
मंजू Tai-haan बहु बिलकुल अब तो तुझे सब सीखना है और तुझसे सीखना भी है.. वैसे अपने देवर को बड़ा ाचा सिखाया है तूने छूट चेतना अह्ह्ह्ह...
भाभी के मुँह में मेरा लुंड था तो उनकी तरफ से मैंने जवाब दिया- अरे तै जब सामने रसीली छूट हो तो बाँदा अचे से चाटता hi है और ये तो वो छूट है जिसमे से ये निकला था तो इसे तो अछि तरह चाटेगा hi.
मंजू तै- ahhhhhhhhhh बाछहुआअ सही बोल रहा है बरसो पहले इसी छूट से निकला था तू रे आज उसी में घुस रहा है.
जग्गू अपनी मम्मी की बातें सुन उत्तेजित हो रहा था और तेज़ी से उनकी छूट चूस रहा था इधर भाभी मेरा लुंड छोड़ मेरी गोलियों को मुँह में भर के चूस रही थी... जिससे मेरी आह्हः निकल रही थी... मुझसे अब रुकना मुश्किल हो रहा था इसलिए मैंने आगे बढ़ाते हुए भाभी को अपनी जगह झुका दिया और पीछे से उनकी कासी छूट में अपना लुंड घुसा दिया और उनकी कमर को थामे उन्हें छोड़ने लगा वहीं जग्गू भी अपनी मम्मी की छूट को चाट कर ऊपर को हुआ और अपना लुंड उनकी छूट में रखकर धक्का लगा कर अंदर घुसा दिया और छोड़ने लगा

कुछ hi पलों में सास बहु की दमदार चुदाई होने लगी भाभी को छोड़ते हुए मैं माँ बेटे की चुदाई देख रहा था साला ये जान कर बड़ी ख़ुशी हो रही थी की अकेला मैं hi नहीं मेरा दोस्त भी मादरचोद है.. पहले विनीत फिर अनुज और अब जग्गू मादरचोद बेटों की गिनती बढाती जा रही थी जो की मुझे जान कर ाचा लग रहा था..
तै हमारे सामने जग्गू से छोड़ने पारणे उत्तेजित हो रही थी
मंजू तै- अह्ह्ह्हह जग्गू बच्चा छोड़ अपनी मुनमय की छूट को आह्ह्ह्ह कर्मा को दिखा अपनी माँ को छोड़ कर ahhhhhhhhhh..
जग्गू- हानंन्न मम्मी लो अपने बेटे के लुंड को आह्ह्हह्ह्ह्ह और तुम भी भाभी को दिखाओ की तुम कितनी बड़ी रंडी हो जो अपने बेटे से चुद रही है.
मंजू Tai-haan लाल्ल्लाहहह हम रंडी हैं अह्ह्ह छोड़ अपनी रंडी माँ को madarchod..ahhh
प्रेमा भाभी- अह्ह्ह्ह रंडी माँ का मादरचोद बेटाहः और मैं रंडी सास की रंडी बहु..
तीनो hi एक दुसरे के सामने चुदाई स्व बेहद उत्साहित और उत्तेजित हो गए थे जिस कारन खुल कर अश्लील बातें कर रहे थे...
में- अह्ह्ह्हह्हह क्या जोड़ी है सास बहु की... ऊपर से भाभी क्या रसीली छूट है तुम्हारी.
प्रेमा भाभी- ओह्ह्ह भैया अह्ह्ह्हह तुम्हारा लुंड बहुत मज़ा दे रहा है..
जग्गू- अह्ह्ह मम्मी ओह्ह... कर्मा सिर्फ भाभी की hi नहीं मम्मी की छूट भी बहुत रसीली है...
कर्मा- हाँ जनता हूँ तै की छूट का स्वाद मैं पहले चख चूका हूँ..
इस पर भाभी और जग्गू दोनों हैरान हो गए.
जग्गू- कब ये कब हुआ मुझे तो पता hi नहीं...
में- तै से पूछ
जग्गू- बताओ न मम्मी.
मंजू Tai-haan बाछआहहह तेरा ये दोस्त बहुत बड़ा छोड़ू है एक बार तो ये हमें कनक जाने से पहले hi छोड़ चूका था और फिर कनक गाओं में तो दोनों भाइयों ने एक साथ छोड़ा तेरी माँ को...
जग्गू- सेल हरामी बताया नहीं तूने मुझे..
जग्गू ने गरियाते हुए कहा.
में- तूने बताया मुझे अपने मादरचोद बनने का राज़.
जग्गू- सेल अगर पहले बता देता तो मैं पहले hi छोड़ लेता अपनी मम्मी को अह्ह्ह्ह.
जग्गू ने अपनी माँ की छूट में धक्के लगते हुए कहा.
मंजू तै- अब कौनसा देर हो गयी है बचुआ वैसे भी जब से शुरू किया है कोई सा दिन जाने देता है तू बिना चोदे...
प्रेमा भाभी- ओह्ह्ह मम्मी जी भैया जाने दे न दें तुम खुद से नहीं जाने देती होगी तुम्हारी छूट काम प्यासी थोड़े hi है..
प्रेमा भाभी ने मुझसे चुड़ते हुए कहा साथ hi मैं उनकी छुछियां भी चूस रहा था...
मंजू तै- हाँ बहु ये तू तूने सहीईई कहा... यह आज ाचा लग रहा है नहीं तो हम दोनों झगड़ते रहते थे...
प्रेमा भाभी- हाँ मम्मी जी चुदाई से हम करीब आ गए
इतना कहकर भाभी मेरे लुंड से आगे होकर निकल गयी और बोली- मुझे अपनी मम्मी जी के पास छोड़ो कर्मा भैया..
में- ओह्हो इतना प्यार सासु माँ से..
मैंने उन्हें चिढ़ाया
मंजू तै- हाँ तो खबर दर किसी ने हमारी बिटिया को चिढ़ाया तो.
जग्गू- देख रहा है कर्मा बहु के मिलते hi बेटों को डांटने लगी..
में- चल इन्हे और करीब कस्र देते हैं..
ये कहकर जहाँ तै लेती थी मैं भाभी को वहीं ले गया और तै के मुँह पर भाभी की छूट रखकर बैठा दिया और भाभी को आगे की और झुका दिया जिससे दोनों सास बहु 69 की स्तिथि में आ गयी और फिर हम दोनों ने बापिस उनकी टैंगो में जगह ली और लुंड को दोबारा छूट में घुसा दिया और छोड़ने लगे
भाभी आगे झुकी तो सामने उनकी सास की छूट थी जिसमे से देवर का लुंड अंदर बहार हो रहा था भाभी को आगे कुछ बताने की ज़रुरत नहीं पड़ी और वो उनकी छूट के डेन को जीभ से छेड़ने लगी .

तै को तो जैसे hi महसूस हुआ वो सिसकने लगी... वहीं उन्हें वैसे भी उत्तेजना हो रही थी सामने बहु की छूट थी और उसमे से मेरा लुंड अंदर बहार हो रहा था जिसे तै बड़े ध्यान से देख रही थी पर उनका ध्यान छूट में चल रहा बेटे का लुंड और बहु की जीभ भटका रहे थे.
मंजू तै- ahhhhhhhhhh तुम सब बच्चे मिलकर ये क्या कर रही हो आह्ह्ह्हह हमारे साथ आअह्ह्ह्ह ...
जग्गू- क्या हुआ मम्मी
मंजू तै- अह्ह्ह्हह ऐसा मज़ाआहहह आज तक नहीं आया अह्ह्ह्हह बहु टेरिइइइइ जीभ...
तै पहले तो हिचक रही थी पर उत्तेजित होने पर उन्होंने भी सामने बहु की छूट पर जीभ लगाडी और वो क्स्टने लगी जो उनकी बहु उनके साथ कर रही थी प्रेमा भाभी पहले भी ये सुख पल्ली ममता चची और शशि बुआ से ले चुकी थी पर अभी अपनी सास से छूट चटवाने का मज़ा अलग hi था.
हम दोनों लड़के भी अब पूरे जोश में थे और तेज़ी से दोनों को छोड़ रहे थे

जहाँ हम दोनों लुन्डों से छोड़ छोड़ कर दोनों सास बहु को खुश कर रहे थे वहीं वो दोनों भी एक दुसरे की छूट के साथ छेड़ छड़ कर रही थी जिसका नतीजा ये था की पूड़ा कमरा सिसकियों से भरा हुआ था साथ hi थप थप थप की आवाज़ गूँज रही थी...
मंजू तै के लिए ये सब नया था तो वो ज़्यादा देर तक सह नहीं पाई और अपनी बहु के नीचे दबे दबे वो झड़ने लगी उनका शरीर कंपनी लगा... अपनी माँ को झाड़ता देख और उनकी छूट को लुंड पर कसता हुआ महसूस कर जग्गू भी शिखर पर पहुँच गया और झड़ने लगा.. अपनी माँ की छूट को रास से भरने लगा... भाभी ने जब सामने माँ की छूट को बेटे के रास से भरता देखा तो वो भी इतनी उत्तेजित हुई की झड़ने लगी भाभी को झाड़ता देख मैंने भी कॉकस कर उनकी छूट में तगड़े धक्के लगाए और अपना रास उनकी छूट में छोड़ दिया...
जग्गू ने अपना रास तै की छूट में भरने के बाद लुंड निकल तो तुरंत भाभी ने छूट को मुँह में भर लिए और मैंने इधर उनकी छूट से लुंड निकला तो लुंड निकलते hi मेरे रास की धार तै के चेहरे पर गिरी साथ hi और रास बहकर बहार आने लगा तो तै ने भी अपना मुँह बहु की छूट से लगा दिया और उसका स्वाद लेने लगी... हम दोनों झड़ने के बाद साइड बैठकर हांफ रहे थे.. और दोनों को एक दुसरे की छूट में जीभ अंदर बहार करते हुए देख रहे थे...
जग्गू- मज़ा आ गया यार.
में- हाँ यार मज़ा तो आ गया सेल पहले hi बता देता तू की तू तै को छोड़ता है.
जग्गू- यार बताना तो छह रहा था पर डरता था.
में- अबे मुझसे कैसा दर.. देख बात सामने आई तो मज़ा hi आया न.
जग्गू- हाँ ये तो है वैसे बताया तूने भी नहीं की तूने मम्मी को छोड़ा था.
में - वही बात के डरता था की न जाने तू क्या सोचेगा..
जग्गू- अबे इतने अचे से जनता है तू मुझे फिर भी.. ाचा एक बात पूछूं...
में- हाँ पूछ .
जग्गू- तूने कनक गाओं में चची को सबके सामने छोड़ा था तो तेरा तबसे दोबारा मन नहीं हुआ कभी चची को छोड़ने का. क्यूंकि तुझे और चची को देखकर hi मेरे मन में मम्मी को छोड़ने की भावना जगक थी.
जग्गू के इस प्रश्न से मैं थोड़ा सोच में पद गया की क्या करूँ क्या सच बताऊँ या नहीं क्यूंकि अभी मैं अनुज मौसी और माँ के अलावा ये बात किसी को नहीं पता थी पर मुझे उससे झूठ बोलना भी ाचा नहीं लग रहा था मैं कुछ बोलता उससे पहले hi भाभी और तै उठ कर हमारे पास आ कर बैठ गयी...
मंजू तै- हाय आज तो तुम बच्चों ने हमारी जान hi निकल दी.
तै ने मेरे बगल में बैठते हुए कहा मैंने भी उन्हें खुद से चिपका लिया
प्रेमा भाभी- नहीं मम्मी अब तो नयी जान भरी है अब देखना तुम्हे कितने मज़े करवाती हूँ मैं..
भाभी जग्गू की गॉड में बैठ गयी..
मंजू तै- ाचा अब भी कोई बात है जो हमें नहीं पता.
जग्गू- अरे मम्मी बहुत सी बातें हैं...
प्रेमा भाभी- सबसे पहले तो मैं सबको कुछ बताउंगी जो किसी को नहीं पता.
मंजू तै- ाचा ऐसी का बात हाउ बहुरिया.
प्रेमा भाभी- यही की मैं और पापाजी भी चुदाई करते हैं.
ये बात सुन तै और जग्गू दोनों चौंक गए.
मंजू तै- हे भगवन तू अपने ससुर के साथ भी..
जग्गू- ये कब हुआ भाभी.
मंजू तै- सारा घर hi चुदाई में लगा पड़ा है हमारा तो, कब से चल रहा है ये सब बहुरिया.
प्रेमा भाभी- जब तुम सब लोग कनक गाओं गए थे तभी शुरू हुआ.
मंजू तै- हमको पता था तेरे ससुर को कुछ दिन छूट नहीं मिलेगी तो वो कुछ न काण्ड कुछ ज़रूर करेंगे, और हमारा शक सही निकला अपनी बहु को hi छोड़ बैठे.
जग्गू- भाभी अचे से बताओ कैसे क्या हुआ .
फिर भाभी ने सबको पूरी बात बताई... भग्गू के उन्हें नंगा निकलने से लेकर ताऊ द्वारा चुदाई तक और कैसे अब भी रात को वो एक बार छोड़ते हैं छुप कर...
मंजू तै- हाय कितना नालायक है भग्गू ऐसे कोई करता है का अपनी बीवी के साथ खैर बहुरिया जो हुआ ाचा हुआ हमें तुझसे कोई शिकायत नहीं है.
ये कहकर तै ने भाभी को गले से लगा लिया.
जग्गू- अब ये जान गयी हो तो और भी चीज़ें जान लो मम्मी.
इसके बाद जग्गू ने हम सब और ममता चची पल्ली इन सब के बारे में भी बताया जिसे तै आँखें फाड़ फाड़ कर सुन रही थी इसके बाद प्रेमा भाभी ने एक और बूम फोड़ा वो था मेरे पापा और राजन चाचा के साथ शामिल होने का कैसे शशि बुआ आई और क्या क्या हुआ सब कुछ हालाँकि ये साडी बातें मुझे पता थी क्युकी पापा ने खुद बताई थी. पर जग्गू और तै के तो होश उड़े हुए थे.
मंजू तै- हाय ढैय्या ये का हो गया है गाओं को सब के सब लगे हुए हैं.
जग्गू- बताओ नीलेश चाचा शशि बुआ के साथ और राजन चाचा अपनी बेटी पल्ली के साथ... कर्मा तुझे पता था ये सब?
मैंने हाँ में सर हिलाया और बोलै- हाँ बुआ और पापा का तो पहले से पता था बाकि जो अभी भाभी ने बताया वो कुछ दिन पहले hi पता चला..
प्रेमा भाभी- ममता चची ने बताया होगा.
में- हाँ उन्होंने भी और
जग्गू- और?
में- पापा ने.
इस पर सब चौंक गए
प्रेमा Bhabhi-kya ये बात चाचा ने तुम्हे बताई भैया?
में- हाँ
फिर मैंने सबको मेरे और झुमरी के बीच जो हुआ उसके बाद पापा के द्वारा पकड़े जाने से लेकर अंत तक सब बता दिया..
सब हैरान थे .
जग्गू- साला इतना कुछ तो हमें पता hi नहीं था.
प्रेमा भाभी- हाँ हालाँकि ज़्यादातर मुझे पता था बस ये चाचा और तुम्हारी वाली बात छोड़के.
मंजू तै- हाय ढैय्या ये सुन सुनकर मेरी तो छूट hi पानी छोड़ रही है इतना सब हो रहा है गाओं में...
ये कहकर तै उठी और तुरंत मेरे लुंड को छूट में लेकर बैठ गयी..
उधर जग्गू ने भी भाभी की छूट में वहीं लिटाकर लुंड घुसा दिया
भाभी मेरी और तै की टैंगो के बीच थी तो उन्होंने अपना सर थोड़ा सा घुमाया और मेरे लुंड को अपनी सास की छूट में आता जाता देखने लगी फिर अगले hi पल उन्होंने अपनी जीभ निकली और तै के गांड के छेड़ पर फिरने लगी..

मंजू Tai-ahhhhhhhhhh बहूऊऊऊरिय्याहहह अह्ह्ह का कर रही है तू हमारे साथ ाः..
भाभी तो जवाब नहीं दे प् रही थी पर जग्गू कुछ ज़्यादा hi उत्तेजित हो रहा था...
जग्गू- अह्हह्ह्ह्ह भाभी आह्हः मम्मी तुम्हे कर्मा से चुड़ते देख बड़ा अलग सा महसूस हो रहा है लग रहा है लुंड फूल गया है ..
जग्गू भाभी को तेज़ी से छोड़ते हुए बोलै और साथ hi उनकी चूचियों को दबा रहा था....
मंजू तै- ahhhhhhhhhh बाछहुआअ हमें भी आह्हः देख तेरी माँ तेरा दोस्त छोड़ रहा है आह्ह्ह्ह देख कैसे लुंड घुसा घुसा कर छोड़ रहा है...
मंजू तै ऐसे hi बातें कर खुद भी उत्तेजित हो रही थी और जग्गू को भी कस्र रही थी...
जग्गू- हाब मम्मी तुम भी तो रंडियों की तरह उसके लुंड पर उछाल रही हो .. ahhhhhhhhhh.
मंजू तै- ahhhhhhhhhh बाछहुआअ हम हैं रंडी आह्हः और अब जब सब जान गए हैं तो खुल के मज़े लेंगे आज तो कर्मा से चुद रहे हैं इसके बाप से भी छोड़ेंगे तो तब भी तू देखेगा.
जग्गू- हाँ मम्मी मैं तुम्हे सबसे चुड़ते हुए देखना चाहता हूँ..
मंजू तै- ahhhhhhhhhh हमार बाछहुआअ..
इधर सास की गांड अचे से चाटने के बाद भाभी ने सर घुमा कर जग्गू की और देखा और इशारा किया जग्गू भी भाभी का इशारा समझ गया और उसने तुरंत अपना लुंड उनकी छूट से निकल लिया जिसके बाद भाभी वहां से हटी और बगल में आ कर तै के चूतड़ों को फैलाया साथ hi जग्गू के लुंड मुँह में भर कर गीला कर दिया.
जब भाभी ने तै के चूतड़ों को फैलाया तो तै को लगा की वो फिर से उनकी गांड को चाटने वाली है और उन्हें तभी अपने गांड के छेड़ पर कुछ गरम सा महसूस हुआ तै को लगा की बहु की जीभ है पर अगले hi पल उनका भ्रम टूट गया क्यूंकि जग्गू का लुंड उनकी गांड के छेड़ को फैलता हुआ घुस गया
मंजू Tai-ahhhhhhhhhh हाय ढैय्या मार डाला...
भाभी उनके बगल में आई और उनको सहलाते हुए बोली - बस मम्मी हो गया अब दो दो लुन्डों से छोड़ने का मज़ा लो..
मंजू तै- ahhhhhhhhhh शैतान बता कर नहीं डलवा सकती थी हमारी हालत ख़राब कर दी.
में- बता कर डालता तो ये भाव कहाँ देखने को मिलता तै...
जग्गू- अह्हह्ह्ह्ह अब तो तुम्हारी गांड और कासी कासी लग रही है मम्मी.
प्रेमा भाभी- लगेगी hi दोनों तरफ से लोडे जो घुसे हैं मम्मी के अंदर. हेहेहे.
मंजू तै- तुझे बड़ी हंसी आ रही है कमीनी अभी एहि दो लोडे तेरे अंदर घुसवाऊँगी.
प्रेमा भाभी- इसी का तो इंतज़ार है मुझे मम्मी जी, तुम्हारे बाद मेरी बारी...
भाभी ने ये कहकर तै के होंठो को चूम लिया. तो तै मुस्कुराते हुए बोली - रंडी कहीं की...
इतने में हम दोनों ने भी अछि ले बना ली थी और अब अछि गति से तै के दोनों छेदों को सुख दे रहे थे.

भाभी पीछे से अपनी छूट घिसते हुए अपनी सास का हौसला बढ़ा रही थी..
मुझे जग्गू के साथ मिलकर उसकी माँ को छोड़ने में बहुत मज़ा आ रहा था, एक अजीब hi एहसास था की मैं बेटे के साथ मिलकर उसकी माँ को छोड़ रहा हूँ पर अब ये एहसास मुझे खूब मिलने वाला था ये पता था साथ hi ये भी सोचना था जो भी आज घटित हुआ और जो राज़ की बातें खुली उनका आने वाले समय पर क्या प्रभाव पड़ने वाला था...
खैर उसे छोड़ मैंने तै की चुदाई पर ध्यान दिया जिसमे तै लगातार सिसकियाँ भर भर के दोनों छेदों में लुंड ले रही थी पर वो इस मज़े को ज़्यादा नहीं सह पाई और जल्दी hi झाड़ गयी अपनी सास की जगह भाभी ने ली पर जगह में अदला बदली थी अब मैं भाभी की गांड मार रहा था और जग्गू छूट, भाभी पूरे उत्साह के साथ दोनों छेदों की चुदाई का मज़ा लेने लगी वहीं तै बगल में हांफते हुए अपनी बहु को चुड़ते देख रही थी और आने वाले समय के बारे में सोचते हुए अपनी चूचियों से खेल रही थी...
( अस 3रद पर्सन)
जहाँ कर्मा जग्गू के घर में व्यस्त था वहीं अनुज कुछ न कर रहा हो ऐसा कैसे हो सकता था, अनुज अभी ममता चची के यहाँ उनके कमरे में था और बिलकुल नंगा था और बिस्तर के किनारे खड़ा होकर चौपाया बानी पल्ली की कमर को थामे उसे छोड़ रहा था और पल्ली आगे झुककर अपनी नंगी मम्मी की छूट को चाट रही थी...

अनुज दोनों माँ बेटी की सेवा में लगा हुआ था..
ममता- अनुज ऐसी हीई छोड़ इसे वैसे भी अब तू काम hi आता है घर पर
अनुज- नहीं चची मुझे तो जैसे hi मौका मिलता है छोड़ता हूँ तुम्हे...
पल्ली का मुँह बंद था उसकी मम्मी की छूट से..
ममता- ाचा मुझे लगा तू अपनी माँ की छूट में घुसा रहता है इसलिए काम आता है..
अनुज चची को बात सुन एक पल को चौंका फिर मज़ाक करते हुए बोलै- क्या चची तुम भी... मेटे सामने दो दो छूट हमेशा हैं फिर क्या ज़रुरत.
ममता - अरे बचुआ तुझे अपनी माँ की छूट के बारे में नहीं पता देख लेगा तो बिना चोदे नहीं छोड़ेगा इतनी रसीली है.
अनुज- ाचा बोल तो ऐसे रही हो जैसे अभी देखि हो.
ममता- देखि है बचुआ और चखी भी है..
अनुज- कुछ भी.
ममता- अरे बचुआ सच में
इसके बाद ममता चची ने अनुज को ुंक्व पल्ली और माँ के बीच जो हुआ वो बता नाता कर अनुज को उत्तेजित कर अपनी और तगड़ी चुदाई कराइ. हालाँकि अनुज को इस बारे में माँ से पहले hi पता लग चूका था पर वो फिर भी अनजान बनने का नाटक कर मज़े लेता रहा और दोनों को भरपूर छोड़ने के बाद माँ बेटी को संतुष्ट करने के बाद जाकर शांत हुआ..
इसके आगे क्या हुआ अगली अपडेट में प्लीज कमैंट्स करके ज़रूर बताएं कैसी लगी अपडेट बहुत बहुत धन्यवाद्















