Incest Katha Chodampur Ki - Page 28 - SexBaba
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Incest Katha Chodampur Ki

अपडेट 164


चोदामपुर

सूरज के साथ चोदामपुर वाले भी उठ गए थे और अपने अपने काम में लगे हुए थे, हमारे मित्र कर्मा उठे और उसके थोड़ी देर बाद hi अनुज भी, उठ कर आंगन में देखा तो सब वहीं चाय की चुस्कियां ले रहे थे,

नयी तै - अरे लो बच्चे भी उठ गए, आओ लल्ला बैठो बैठो.. बहु चाय दे दो बच्चों को.

उन्होंने सभ्य से कहा..

कर्मा और अनुज ने उन्हें एक बार देखा और फिर झूठे hi मुस्कुरा कर बैठ गए,

माँ ने आके दोनों को चाय दी, मौसी भी वहीं थी और अभी तो साधारण लग रही थी सबसे बात कर रही थी जवाब दे रही थी

तै- और भैया खेती कैसी हो रही है इस बार..

नीलेश- अछि है भाभी, अब कटाई होनी बाकि है.. ाचा है बच्चे आ गए तो सब काम हो जायेगा..

तै- चलो बढ़िया है और बगिया भी तो बड़ी अछि लगी हमको, खूब घनी है.

नीलेश- हाँ बगिया की योजना सभ्य की थी इनके ज़ोर देने पर लगाई थी और आज देखो सही मुनाफा देती है..

तै- अरे बड़ी होनहार है बहुरिया हमारी नज़र न लग जाये.

तै ने सभ्य की तारीफ करते हुए kaha.jis पर सभ्य बोली- क्या जीजी तुम भी कछु भी बोलती हो.

Tai-sahi तो बोल रहे हैं. अरे शालू चल रही हो का घूम आते हैं एक बार बढ़िया में..

शालू- हाँ जीजी चलो चल रहे हम.

इसके बाद दोनों घर से निकल जाती हैं जिनके जाते hi कर्मा और अनुज दोनों hi अपने माँ पापा सवाल लेकर चढ़ जाते हैं...

कर्मा - पापा आखिर हैं कौन ये तै पहले तो कभी नहीं देखा..

अनुज- हाँ अचानक कहाँ से पैदा हो गयी और यहाँ ा भी गयी.

Nilesh-Anuj ऐसे नहीं बोलते बीटा और ये एक बहुत पुराणी बात है.

कर्मा- तो बतादो न मुझे जानना है..

सभ्य - हाँ जी बता दीजिये बच्चे बड़े हो गए हैं अब समझ सकते हैं.

ये कहकर सभ्य चाय के बर्तन लेकर रसोई में चली गयी

नीलेश- ाचा सुनो ये सच में तुम्हारी तै है यानि हमारे बड़े भाई की पत्नी..

कर्मा- बड़े भाई पर आपके तो बड़े भाई hi नहीं हैं कोई.

अनुज- हाँ हमने तो आज तक नहीं सुना ताऊ के बारे में..

नीलेश- हाँ क्यूंकि तुम दोनों के पैदा होने से पहले hi हम लोग अलग हो गए और फिर हमने उनका जीकर कभी तुम्हारे सामने किया hi नहीं..

कर्मा- पापा ऐसे कुछ समझ नहीं आ रहा है

Anuj-haan पापा थोड़ा अचे से बताओ.

नीलेश- ाचा तो सुनो, हम दो भाई दो बहन थे. शशि के अलावा एक और बहन हैं हमारी.

अनुज- अरे तेरी ताऊ के साथ एक बुआ फ्री.

नीलेश- अनुज चुप.

कर्मा- पापा बताओ तुम...

नीलेश- तो सुनो तुम्हारे दादा स्वर्गीय भंवर सिंह फूल नगर के जाने मने व्यापारी थे गाओं के पास तुम्हारे दादाजी ने पहली चीनी की मिल खोली थी इसीलिए हर जगह प्रख्यात थे और आस पास के गाओं में खूब ख्याति थी तुम्हारे दादा की.. और उनकी पत्नी यानि हमारी माँ और तुम्हारी दादी स्वर्गीय गंगा देवी के चार संतानें थी,

हम चार भाई बहन थे सबसे छोटी साक्षी उससे बड़े हम, और हमसे बड़े सूरजभान सिंह और सबसे बड़ी बहन राजवती...

कर्मा- अरे पर हम तो सिर्फ शशि बुआ को hi जानते हैं बड़ी बुआ और ताऊजी को क्यों नहीं.

नीलेश- वही बताने जा रहा हूँ.. हमारी मौसी के कोई संतान नहीं थी और वो यहाँ चोदामपुर में ब्याही थी, बेचारी संतान न होने के कारन बहुत उदास रहती थी तो अपनी बहन का दुःख देखकर तुम्हारी दादी ने हमें और शशि को बचपन से hi यहाँ चोदामपुर में मौसी के यहाँ छोड़ दिया था...

तो हम और शशि बचपन से hi ज़्यादातर यहाँ चोदामपुर में hi रहे मौसी के पास.. वहीं बड़े भैया और जीजी माँ बाबा के पास,

लेकिन हमारे जवान होते होते पहले मौसा चल बेस और फिर मौसी भी साथ छोड़ गयी पर अपनी साडी जमीं जायदाद हमारे और शशि के नाम कर गयी...

पर मौसा मौसी के चले जाने के बाद हम लोग भी यहाँ से अपने गाओं फूल नगर hi चले गए और वहीं रहने लगे पूरे परिवार के साथ, बड़ी जीजी का ब्याह पहले hi हो चूका था और उसी बीच बड़े भैया का ब्याह भी हो गया, नयी भाभी का नाम था संतो देवी, जो की यही हैं तुम्हारी नयी तै..

Karma-acha ऐसे लगी ये हमारी तै.

अनुज- आगे बताओ न पापा..

नीलेश- हाँ और बड़े भैया के ब्याह के करीब साल भर बाद hi हमारा ब्याह भी तुम्हारी माँ से हो गया.. पर हमारे ब्याह के 3 महीने के अंदर hi तुम्हारे दादा और दादी दोनों चल बेस.. बाबा के जाने के बाद घर के मुखिया बड़े भैया यानि तुम्हारे ताऊजी सूरजभान सिंह बन गए मिल भी वही चलने लगे, वैसे तो वो बहुत अचे थे हम लोगो से बहुत प्यार करते थे किसी चीज़ की कमी नहीं होने देते थे पर एक hi चीज़ उनमें बुरी थी वो थी दारू की लत, साथ hi औरत.

नीलेश ये कहते कहते रुक गए

ये सुनकर कर्मा और अनुज थोड़ा सा हैरान हुए पर मन में जिज्ञासा भी थी..

नीलेश ने एक गहरी सांस ली और बोली - देखो हम जानते हैं की तुम अब इतने बड़े हो चुके हो की ये सब समझ सको तो जितना हो सके हम खुले शब्दों में तुम्हे समझायेंगे.

कर्मा- जी पापा,

नीलेश- हाँ तो हवस और शराब उनकी दो बहुत बड़ी कमिया थी, जिसकी वजह से काफी बदनामी होती थी, मिल में काम करने वाले मज़दूरों की औरतों से लेकर गाओं की औरतें तक उनकी हवस ने न जाने कितनी औरतों को अपना शिकार बनाया,

तब तक भी कोई बात नहीं थी हम उन्हें समझते थे वो हाँ हाँ कहते थे पर करते वही थे जो उनका मन होता था.. पर एक दिन तो बात हद्द से आगे बढ़ गयी..

नीलेश ये कहते हुए रुक गए..

कर्मा- क्या हुआ था पापा..

नीलेश इधर उधर देखने लगे जैसे तरीका ढूंढ रहे हो बताने का..

अनुज- पापा बोलो हम समझेंगे..

नीलेश- हाँ बच्चों जनता हूँ..

हाँ एक दिन ये हुआ की वो शराब और हवस में इतने अंधे हो गए की बहार तो छोडो अपने घर के अंदर भी अपनी बुरी नियत दिखा दी...

एक रात को वो शराब के नशे में धुत्त होकर घर आये और तब तुम्हारी माँ रसोई में काम कर रही थी तुम्हारे ताऊ जी रसोई में जाकर तुम्हारी माँ के साथ जबरदस्ती करने लगे, जिसका विरोध करने के लिए तुम्हारी माँ चिल्लाई और उसका शोर सुनकर शशि दौड़कर रसोई में गयी और उसने अपने बड़े भाई का जब ये रूप देखा तो वो तो बिलकुल चौंक hi गयी..

फिर भी तुम्हारी माँ को बचने के लिए शशि उनकी मदद को आई और बड़े भैया को धक्का देकर हटा दिया और उन दोनों के बीच आ गयी...

और बड़े भैया पर चिल्लाने लगी पर बड़े भैया ने हद्द तो तब पार करदी जब वो शशि अपनी सगी छोटी बहन पर भी लपक पड़े, पर तब तक बड़ी भाभी भी आ चुकी थी किसी तरह तीनो औरतों ने उन्हें रोका और हम भी थोड़ी देर में घर पहुँच गए, और फिट जो हमने सुना उससे हमारा सर चक्र गया, जिस भाड़े भाई को हम पूजते थे इतना मानते थे उसकी ऐसी नीच हरकत देखकर हम बिलकुल पागल हो गए मन तो किआ भैया को ख़त्म कर दें पर भैया थे वो सेज नहीं कर सके..

वहीं तुम्हारी माँ और शशि का रो रोकर बुरा हाल था, बहुत बवाल हुआ अगले दिन बड़ी जीजी भी आई सबको समझने की बहुत कोशिश की गयी.. ये बोलै गया की बड़े भैया तुम्हारी माँ और शशि दोनों से माफ़ी मांग लेंगे..

और बड़ी जीजी और भाभी ने सभ्य कुर शशि को इसके लिए मन भी लिए पर भैया शशि से तो माफ़ी मांगने को तैयार थे पर तुम्हारी माँ से नहीं..

जिसके बाद हमने कुछ और नहीं सोचा और फूल नगर छोड़ने का फैसला कर लिए, शशि ने भी हमारा साथ चुना और हमारे साथ यहाँ चोदामपुर आ गयी..

उसकर बाद भी कई बार बड़ी जीजी और भाभी यहाँ हमें मानाने आई पर बड़े भैया जिनकी ये गलती थी वो कभी नहीं आये न hi बात करने की कोशिश की..

एक बार हमारे मन करने पर बड़ी जीजी उल्टा हमसे hi गुस्सा हो गयी की हम अपनी बीवी के प्यार में इतना अंधे हो गए हैं की अपने भाई और बहन से नाता तोड़ रहे हैं इस बात पर नाराज़ होकर वो भी ये कहकर की आज से समझ लेना तेरी एक hi बहन है ये कहकर चली गयी बस तबसे हम यहाँ के हो कर रह गए और फिर कोई भी किसी भी तरह का रिश्ता या मुलाकात हमारे बीच नहीं हुई.. तुम दोनों का जन्म हो गया फिर हम अपनी जिंदगी में व्यस्त हो गए... उन लोगो से कोई भी मतलब नहीं रहा, शशि का ब्याह भी हमने यहीं से करवा दिया... कोई मतलब कोई नाता नहीं रहा बस अभी परसो हमें ये भाभी बाघ के किनारे बैठी हुई मिली इसलिए घर ले आये, वैसे भी जो भी हुआ था उसमे इनकी कोई गलती नहीं थी.

कर्मा और अनुज दोनों hi अपने परिवार के बारे में सुन थोड़े हैरान थे, कहाँ उन्हें लगता था की पापा और बुआ hi हैं, पर आज पता चला की ताऊ और बड़ी बुआ भी हैं पर हैं भी तो कैसे जिन्होंने उनकी माँ के साथ hi ज़बरदस्ती की कोशिश की, ये सोचकर hi उन लोगो के लिए दोनों के मन में गुस्सा भर गया..

कर्मा- बहुत गलत किआ उन्होंने पापा, तुमने सही किआ उनसे रिश्ता तोड़कर.

अनुज- पर फिर ये तै यहाँ क्या करने आई हैं..

नीलेश- अनुज कर्मा चाहे जो भी हुआ हो पर हैं वो तुम्हारी तै hi, बड़ी हैं तुमसे और तुम्हारी माँ सामान हैं तो तुम दोनों उनसे पूरी इज़्ज़त और प्यार से पेश आओगे, और उन्हें पता नहीं चलना चाहिए की हमने तुम्हे उस सब के बारे में बता दिया है समझे?

कर्मा- ग पापा

नीलेश- अनुज खासकर तू.

अनुज- मैं ध्यान रखूँगा पापा...

नीलेश- बहुत अचे तो अब चलें कटाई करवानी है..

कर्मा - हाँ चलते हैं पापा..

इसके बाद तीनो लोग सभ्य को बोलकर खेत की और निकल गए..

वहीं जग्गू के घर में किसी बात को लेकर बहस हो रही थी..

मंजू- फिर काम से काम उसे ढूंढने की कोशिश तो करते.

राजपाल- हम उस नालायक की शकल तक नहीं देखना चाहते..

मंजू- बीटा है हमारा वो..

राजपाल- सब जानने के बाद भी तुम उसकी वकालत में लगी हो..

मंजू- अरे तो हम और जग्गू गए थे न लेकर आये हैं उसके लिए प्रशाद और बाबा के कहे मुताबिक वो ये खाकर ठीक हो जायेगा..

राजपाल - वो कुत्ते की दम है.

मंजू- अब जब ले आये हैं तो कोशिश कर लेने दो न पर उसके लिए वो मिले तो सही.

जग्गू- अरे तुम लोग लड़ो मत मैं जा रहा हूँ ढूंढने मिल जायेगा कहीं न कहीं.

मंजू- हाँ बीटा चल हम भी चलते हैं इन्हे करने दे जो करना है.

ये बोलकर वो भी जग्गू के साथ चल दी..

प्रेमा पास hi में कड़ी सब की बातें सुन रही थी...

इधर तीनो बाप बेटे बाघ के बगल वाले खेत में कटाई की तयारी कर रहे थे गेहूं का खेत धुप में सोने की तरह चमक रहा था,

नीलेश- कर्मा वो बिछाने के लिए पन्नी वगेरा ले आया है न..

कर्मा - हाँ पापा 5 मीटर की है बहुत है.

नीलेश- ठीक है और काटते?

अनुज- वो भी तैयार हैं.. बस ये मज़दूर कहाँ रह गए..

कर्मा- तूने उन्हें ध्यान से बोल तो दिया था न..

अनुज- अरे हाँ बोलकर आया हूँ..

इतने में पीछे से एक आवाज़ आई तो तीनो ने पलट कर देखा...

सामने ममता कड़ी थी,

नीलेश- अरे ममता बहु तुम यहाँ..

ममता- हाँ भाई साब ये तो बहार गए हैं और मुझे उपले ले जाने थे घर पर कुछ लाना भूल गयी तो कट्टा चाहिए था..

नीलेश- अरे हाँ ये कोई पूछने की बात है उठा लो वहां कितने पड़े हैं..

ममता- ठीक है कटाई शुरू हो गयी आज से. दोनों बच्चों को आते hi काम पर लगा दिया.

अनुज- चची काम करना हमें ाचा लगता है तुम्हे तो पता hi है..

अनुज की बात पर सबको हंसी आ गयी,

ममता- हाँ पता है तुझे कितना पसंद है काम करना..

अनुज- और क्या तुम्हे भी कोई काम हो तो बता देना चची मैं कर दूंगा तुम्हारा काम..

अनुज ने ये बोलकर अपने पापा की और तिरछी नज़र से देखा जैसे की बोल तो दिया पर कहीं पापा समझ न जाएं. पर उसने देखा की पापा सिर्फ मुस्कुरा रहे थे... तो चैन की साँस ली.

ममता- नहीं लल्ला पहले तुम ये hi निपटा लो फिर करना तुम हमारा काम..

ये कहकर ममता आगे बड़ी और पास पड़े कट्टों के ढेर से एक कट्टा उठा लिए पर उठाते वक़्त जानकार या अनजाने में उसकी साड़ी का पल्लू नीचे गिर गया.. जिसके गिरते hi तीनो बाप बेटों की नज़र उसी पर टिक गयी..

खैर ममता ने जल्दी से अपना पल्लू संभाला और कट्टा लेकर अपने मस्त चूतड़ों को मटकते हुए चली गयी चलते हुए उसे एहसास था की तीनो की नज़र उसकी गांड पर hi होगी साथ hi मन hi मन वो सोच रही थी की तीनो से hi वो चुद चुकी है, कितना अजीब सा एहसास है ये की बाप और बेटे दोनों से मैं चुद चुकी हैं ममता तो ये सोचते हुए आगे बढ़ गयी पर ये तीनो छुप छुप कर उसको नज़रों से ओझल होने तक देखते रहे..

खासकर कर्मा और अनुज क्यूंकि उन्हें काफी दिनों से ममता का बदन मिला जो नहीं था, ये बात नीलेश ने भी देखि की दोनों ममता को ताड़ रहे हैं जिसे देख कर उनके चेहरे पर मुस्कान आ गयी..

Nilesh-acha कर्मा अनुज, हमने तो तुम्हे अपना राज बता दिया, तुम्हारी तो कोई ऐसी बात नहीं है जो तुम हमें बता सको.

ये सुनकर दोनों hi चौंक गए,

कर्मा- नं नहीं पापा ऐसा तो कुछ नहीं है.

अनुज- हाँ ऐसा क्या होगा बताने लायक, कुछ भी तो नहीं..

दोनों को देख नीलेश मन hi मन मुस्कुराये, खैर आगे कुछ बात होती की उससे पहले hi मज़दूर आ गए और फिर सब काम में लग गए..

वही जग्गू के घर का दृश्य कुछ बदला हुआ था,

प्रेमा- पापाजी मान जाइये न कोई भी आ सकता है..

राजपाल- तभी तो कह रहा हूँ बहु, जल्दी से करने दे कोई आये उससे पहले hi हो जायेगा..

राजपाल ने पीछे से अपनी बहु को जकड रखा था और उसके मुलायम पेट को मसलते हुए उसके गोल मटोल चूतड़ों पर सारी के ऊपर से hi अपने खड़े लुंड को घिस रहे the.dono प्रेमा के कमरे में उसके बिस्तर के किनारे थे...

प्रेमा- पापाजी मुझे दर लग रहा है किसी ने देख लिए तो अनर्थ हो जायेगा...

राजपाल- अरे बहु चिंता क्यों करती है मैंने कुण्डी लगा दी है और तू hi देर कर रही है जल्दी से झुकजा तो जल्दी काम निपटेगा.

प्रेमा ने भी आगे विरोध नहीं किआ और अपने ससुर के आगे झुक गयी.

राजपाल- यहाँ नहीं बहु चल बिस्तर पर चढ़ जा यहाँ थक जाएगी...

ये कहकर राजपाल ने बहु को बिस्तर पर चढ़ा दिया और खुद जो ऊपर से पहले hi नंगे थे नीचे बंधी अपनी लुंगी भी उतर फेंकी और पूरे नंगे हो गए,

और फिर प्रेमा को बिस्तर पर घुटनो के बल झुका दिया, प्रेमा ने भी अपनी कोहनी का सहारा लेकर आगे झुककर अपनी गांड को ऊपर उठादिया,

राजपाल ने बहु की साड़ी को पकड़ कर ऊपर उसकी जांघों और फिर चूतड़ों को नंगा करते हुए उसकी कमर पर इकठा कर दिया और फिर बहु की गोरी गोल मटोल गांड के पीछे जगह ली और अपने लुंड को थूक से गीला करते हुए बहु की छूट पर रखा और अंदर सरका दिया..

प्रेमा- अह्ह्ह पापाजीइ.

राजपाल- देख कितना मन कर रही थी जबकि छूट तो कितनी गीली है तेरी,

राजपाल ने हलके हलके धक्के लगते हुए कहा..

प्रेमा- चुदाई की उत्सुकता में छूट तो गीली हो hi जाती है पापाजी.

कुछ hi देर में राजपाल ने एक ले पकड़ ली थी और अपनी बहु की गरम छूट के मज़े ले रहे थे





राजपाल - अह्ह्ह बहु टेरिइइइइइइ चूऊत्त में तो जन्नत का मज़ा है..

प्रेमा- आअह्ह्ह्ह ुहममम ऐसे होई पापाजीइ...

राजपाल - हाँ ले बहु अह्ह्ह ले अपने पापाजी का लुंदड़ अह्ह्ह्ह वैसे भी अब काम hi मौके मिलेंगे तुझे छोड़ने के..

प्रेमा- आअह्ह्ह्ह nahiiiiiiiiiiiiiiii मिलेंगे तो तुम निकल लोगे अह्ह्ह्ह जैसे अभी निकल लिए...

राजपाल- अह्ह्ह बहु निकलना तो पड़ेगा hi तेरी छूट की प्यास hi ऐसी है..

प्रेमा- पापाजी तुम्हे बुरा नहीं लगता की हम मम्मी जी और इनको धोखा दे रहे हैं..

राजपाल- अब क्या hi बुरा मानें बहु..

प्रेमा- क्यों अगर सोचो मम्मी जी भी किसी से छुडवालें तो तुम्हे कैसा लगेगा..

प्रेमा की ये बात सुनकर राजपाल एक पल को रुक गए पर फिर हल्का हल्का धक्का लगते हुए बोले- सच कहूं बहु तो पहले ऐसा सुनता भी तो न जाने मैं क्या करता पर अब जब तेरे साथ ये सब कर लिए है तो उसे भी नहीं रोकूंगा मैं, अगर मैं कर सकता हूँ तो वो भी..

प्रेमा- सच में पापाजी..

राजपाल- हाँ अजीब तो लगेगा बहुत पर जो सही है वो सही है...

यहाँ घर में ससुर बहु चुदाई करते हुए गुफ्तगू कर रहे थे वहीं एक खेत में भी चुदाई का तूफ़ान आया हुआ था,

अपने खेत के किनारे मेड पर मंजू तै पीठ के बल लेती हुई साड़ी कमर पर इकठा थी दोनों टांगें खुली हुई थी और टैंगो के बीच था उनका बीटा जग्गू जो अपनी माँ की छूट में अपना लुंड डालकर दनादन छोड़ रहा था





मंजू- ahhhhhhhhhh लाल्ल्लाहहह अब बस्सस कर हम तेरे भाई को ढूंढने निकले थे और तू है की हम पर चढ़ गया..

जग्गू- ओह्ह्ह्ह मम्मी भाई को भी ढूंढ लेंगे पर तुम्हे देखकर रुका नहीं गया...

मंजू- बस्स्स तेराअहहहह ये हीईई haiiiiiiiiiiiiiaaahhhhhh अह्हह्ह्ह्ह.

जग्गू- ओह्ह्ह मम्मी तुम्हे मज़ा नहीं आ रहा क्या,

मंजू- मज़ा तो आ रहा है बीटा पर किसी ने देख लिए तो..

जग्गू- कोई नहीं देखेगा मम्मीय अह्ह्ह्ह नुझे तो बड़ा मज़ा आ रहा है खुले में तुम्हे छोड़ने में.

मंजू- ahhhhhhhhhh लाल्ल्लाहहह और तेज़ जल्दी कर ज़्यादा समय नहीं है हमारे पास.

जग्गू- ओह्ह्ह्ह मम्मी अह्ह्ह्हह ुहममम..

जग्गू तेज़ तेज़ धक्के लगते हुए सिसकियाँ ले रहा था वहीं मंजू ने भी अपने दोनों पेअर बेटे की कमर पर बांध लिए और उसे और तेज़ छोड़ने के लिए उकसाने लगी..

जिसका नतीजा ये हुआ की दोनों माँ बेटे जल्दी hi झाड़ गए एक साथ, जग्गू ने अपने रास से अपनी मम्मी की छूट को भर दिया... जिसके बाद दोनों ने जल्दी से कपडे ठीक किये और भग्गू को ढूंढने लगे चलते हुए मंजू को बेटे का रास छूट से बहकर जांघों पर रिस्ता हुआ महसूस हो रहा था जो उसे एक अलग hi एहसास दे रहा था..

सरलपुर

सरलपुर में दिन साधारण गुज़र रहा था, चरण सिंह न चाहते हुए भी हर मौके पर अपनी बहुओं को बदन को ताड़ने से खुद को रोक नहीं पा रहे थे, रिमझिम और ख़ुशी दोनों ननद भाभी के बीच जो भी कुछ रात को हुआ उसका असर उनके चेहरे पर साफ़ दिख रहा था दोनों hi खासकर ख़ुशी एक दुसरे को देखकर शर्मा रही थी और नए नए प्रेमियों की तरह एक दुसरे को पूरा दिन इशारों से चिढ़ा रही थी.. वहीं बेचारी भोली भली चंचल इन सब से अनजान काम में व्यस्त थी हालाँकि चेतन ने रात को उसकी जमकर चुदाई की थी जिस कारन वो भी खिली खिली हुई थी खैर शाम होते होते रिमझिम के पास रमन का फ़ोन आया और न जाने उसकी उससे क्या बात हुई की फ़ोन रखने के बाद रिमझिम के चेहरे पर एक शरारती मुस्कान आ गयी..

खैर उसके बाद रात का खाना हुआ जिस दौरान भी चरण सिंह ने अपनी बहुओं के बदन की गर्मी से अपनी आँखों को खूब सका, रसोई का सारा काम निपटा कर चंचल अपने कमरे में चली गयी जहाँ चेतन उसका बेसब्री से इंतज़ार कर रहा था और कुछ देर बाद hi दोनों बिलकुल नंगे होकर एक दुसरे की बाहों में समाये हुए थे...

वहीं ननद भाभी की जोड़ी भी रिमझिम के कमरे में घुस गयी, दोनों ने शरमाते हुए कल का कार्यक्रम फिर से शुरू किआ और जल्दी hi दोनों के होंठ आपस में चिपके हुए थे और दोनों hi एक दुसरे के होंठों के रास को पिए जा रही थी...

होंठों को चूसते हुए hi रिमझिम ने ख़ुशी का सूट पकड़ कर उठा दिया और फिर ख़ुशी ने उसे अपनर सर से निकल दिया, सूट निकलने के बाद रिमझिम ने अपनी ननद के गले छाती और पेट को चेतना शुरू कर दिया, ख़ुशी के बदन का जो हिस्सा कपडे से बहार था रिमझिम ने उसे चाट चाट कर गीला कर दिया और फिर बरी आई ख़ुशी की सलवार की जिसे रिमझिम ने इतर फेंका और अब उसकी ननद उसके सामने सिर्फ एक ब्रा पंतय में थी...

अपनी सलवार उतरने के बाद ख़ुशी भी खामोश नहीं रही और उसने बदला लेते हुए अपनी भाभी की साड़ी और ब्लाउज दोनों को खोल दिया , अब रिमझिम सिर्फ ब्रा और पेटीकोट में थी, और जिस जोश और लगन से रिमझिम ने उसका बदन छठा था ख़ुशी ने उससे भी ज़्यादा लगन से अपनी भाभी का बदन छठा,

और फिर अगला हमला किआ भाभी के पेटीकोट पर जो को धराशाई होकर रिमझिम के कदमो में गिर गया अब दोनों ननद भाभी ब्रा और पंतय में एक दुसरे के सामने थी, ख़ुशी ने रिमझिम को बिस्तर पर लिटा दिया और उसकी नाभि को चूसने लगी, रिमझिम के मुँह से सिसकियाँ सुनकर ख़ुशी और जोश से अपनी भाभी की नाभि को चूस रही थी... सिर्फ नाभि चूसने से hi रिमझिम की छूट काफी गीली हो गयी थी और उसका बदन भी बार बार ऐंठ रहा था, इसका जवाब देते हुए रिमझिम ने ख़ुशी को पलट दिया और अब खुद अपनी ननद की नाभि को चूसने लगी... जिससे ख़ुशी तो मज़े से दोहरी हो गयी.. ये सिलसिला चल hi रहा था की अचानक से रिमझिम का फ़ोन बजा, जिसे रिमझिम ने उठाया, हालाँकि ख़ुशी जो मज़े के सागर में तैर रही थी उसे बीच में रुकना ाचा नहीं लगा पर उसे पता था की अभी पूरी रात पड़ी है...

खैर रिमझिम फ़ोन पर बात करते हुए बिस्तर से उठी और हैंगर पर तंगी मैक्सी उतर कर पहनने लगी.

ख़ुशी ने उसे सवालिया नज़रों से देखते हुए इशारे में पुछा की हुआ, जिसका जवाब रिमझिम ने सिर्फ हाथ दिखाकर इशारा किआ की कुछ नहीं रुक एक मिनट में आई, ख़ुशी समझ गयी शायद उसकी भाभी पानी वगेरा लेने जा रही है...

और रिमझिम अगले hi पल दरवाज़ा खोल के और फिर बहार से ढँक कर चली गयी... ख़ुशी को ये सब सोच सोचकर hi एक अजीब सी शर्म महसूस होने लगी, अपने बदन को सिर्फ ब्रा पंतय में देखकर साथ hi अपनी भाभी के थूक से सना हुआ देखकर ख़ुशी मन hi मन शर्माने लगी और उसी शर्म के एहसास में उसने अपनर बदन को पास पड़ी चद्दर को ओढ़ कर धक् लिया और सिर्फ चेहरा बहार रखकर अपनी भाभी का इंतज़ार करने lagi...kuch hi देर में दरवाज़ा खुला और ख़ुशी ने जो देखा उससे तो उसके होश hi उड़ गए...

इसके आगे क्या हुआ अगली अपडेट में प्लीज कमैंट्स करके ज़रूर बताएं कैसी लगी अपडेट बहुत बहुत धन्यवाद्
 
विल अपडेट टुनाइट और मय्बे टुमारो
 
अपडेट 165 ा


चोदामपुर

पूरा दिन ढूंढने के बाद आखिर जग्गू और मंजू को सफलता मिली और भग्गू गाओं के बहार पुलिया के नीचे धुत्त पड़ा हुआ मिला, जग्गू और मंजू उसे खींच कर लाये घर जहाँ उसे देखकर राजपाल ने मुँह बनाया और घर से निकल गए फिर तीनो ने मिलकर उसे ठन्डे पानी से नहलाया और कपडे बदलवा कर उसका हुलिया थोड़ा ठीक किआ...

प्रेमा को समझ नहीं आ रहा था की वो क्या करे अपने पति के मिलनर से उसे ख़ुशी भी थी पर थोड़ा अजीब भी लग रहा था, खैर जहाँ इनका पूरा दिन ऐसे गया वहीं कर्मा और साथियों यानि अनुज और पापा का खेत की कटाई करवाते करवाते hi बीता... पर अभी भी काफी काम बाकि था और अँधेरा होने को था,

इसलिए नीलेश ने सब मजदूरों को छुट्टी दी और कर्मा और अनुज को भी बोलै की कल ख़त्म कर लेंगे.. फसल अछि हुई थी तो मुनाफा भी काफी ाचा होना था... पर एक समस्या थी क्यूंकि कटा हुआ सारा अनाज अभी खेत पर hi पड़ा था और वो तब hi जा सकता था जब मशीन आ कर अनाज साफ़ हो जाये पर क्यूंकि अभी आधा खेत काटने को पड़ा था तो मशीन लेन का कोई मतलब hi नहीं था, अब अनाज को ऐसे खुला छोड़ भी नहीं सकते थे इसलिए रात भर किसी को खेत में hi रहना था..

वहीं मर्द सरे बहार काम में व्यस्त थे तो सभ्य ने घर का काम छेड़ दिया इतने दिनों से बहार थी घर की अचे से सफाई नहीं हुई थी इसलिए जैसे hi सब घर से निकले तो सबसे पहले उसने रसोई को चुना और उसे साफ़ करने लगी..

कुछ देर में hi नयी तै यानि शान्तो देवी भी और शालू लौट आई और सभ्य को सफाई करता पाकर शान्तो भी उसके साथ लगने लगी पर सभ्य ने उन्हें काम करने से मन कर दिया.. पर फिर भी शान्तो देवी नहीं मणि और हलके फुल्के काम करने लगी, वहीं शालू वैसे तो जीजी से बोल नहीं रही थी पर उन्हें सफाई करता देख वो भी लग गयी जहाँ सभ्य रसोई कर रही थी तो शालू ने आंगन पकड़ लिए शान्तो देवी सभ्य की रसोई में मदद कर रही थी....

दोपहर के बाद जब सफाई ख़तम हो चुकी थी और शान्तो देवी सुस्ता रही थी और शालू नहाने गयी थी तभी ममता आई...

ममता- अरे वाह जीजी आते hi घर चमका दिया तुमने तो.

सभ्य- अरे इतने दिन से ठीक से हुआ नहीं था सोचा कर hi लें..

ममता- एक दिन भी आराम नहीं किया जाता तुमसे और हमें बुला लेती हम भी करवा देते.

सभ्य- अरे हमने अकेले थोड़े hi किआ है शालू और जीजी ने भी किया है..

ममता - ाचा कुछ खाने को बनाएं का..

सभ्य - हाँ पर अभी रुकजा शालू को नाहा लेने दे फिर हम भी नाहा लें तब तक जीजी भी उठ जाएँगी फिर सबसे पूछ कर बना लेंगे..

सभ्य ने अलमारी से अपने कपडे निकलते हुए कहा...

सभ्य मन hi मन ममता के बारे में ये भी सोच रही थी की बताओ कर्मा अनुज इसे भी छोड़ते हैं साथ hi पल्ली को भी, कैसे छुड़वा लेती होगी ये अपनी बेटी के सामने उसके साथ... फिर सोचा की मैंने भी तो छुड़वाया है अपने hi बेटों से वो भी अपनी सगी बहन के साथ हम दोनों hi एक कश्ती के मुसाफिर हैं.

ममता- क्या सोचने लगी जीजी नहाना नहीं है का?

सभ्य- अरे कुछ नहीं तुम बैठ जाओ न क्यों कड़ी हो..

ममता- अरे जीजी लो बैठ गए..

वहीं सभ्य अपनी साड़ी उतरने लगी नहाने के लिए.. ममता उसके बदन को hi देख रही थी..

सभ्य- और बताओ तुम घर का सारा काम हो गया..

सभ्य ने अपने ब्लाउज के हुक खोलते हुए कहा, और फिर अपना ब्लाउज भी उतर दिया.. ममता सभ्य के कामुक बदन को सिर्फ ब्रा और पेटीकोट में देखती रह गयी...

सभ्य- क्या हुआ अब तू कहाँ खो गयी.

ममता- हम कहाँ खोएंगे जीजी ऐसे जलवे दिखाओगी तो मन तो बहकेगा hi न..

सभ्य- जलवे कैसे जलवे..

ममता- यही अपने हुस्न के जलवे..

Sabhya-dhattt तू भी न..

ममता- सच कहें जीजी तुम बड़ी सुन्दर हो इस हालत में भाई साब देख लेते होंगे तो बिना पेले नहीं छोड़ते होंगे...

सभ्य- हाय ढैय्या कैसी बेशर्मो सी बात कर रही है..

ममता- हम तो सच कह रहे हैं .

सभ्य- बड़ी आई सच कहने वाली.

ममता- ाचा सच नहीं कह रहे तो बताओ रात को भाई साब ने मसला की नहीं इस भरे हुए बदन को..

ममता ने हाथ पकड़ कर सभ्य को बिस्तर पर बिठाते हुए कहा..

सभ्य- अरे क्या हो गया तुझे कैसी बातें कर रही है..

ममता- तुम बताओ न कितनी बार पिलवाई.

सभ्य- दो बार..

सभ्य ने शरमाते हुए जवाब दिया और फिर दोनों हंसने लगी,

ममता- हमें पता था जीजी काम से काम दो बार तो पेलेंगे hi भाई साब..

सभ्य- तुझे बड़ा पता है भाई साब के बारे में कहीं हमारे न रहने पर तूने सेवा तो नहीं करदी भाई साब की..

सभ्य की इस बात पर एक पल को तो ममता सकपका गयी फिर खुद को सँभालते हुए बोली..

ममता- है ढैय्या जीजी कैसी बातें कर रही हो.

सभ्य- क्यों इसमें इतना चौंक क्यों रही है..

ममता- चौंकने वाली बात hi कर रही हो.. और हम भाई साब की सेवा कर दिए होते तो तुम इतने प्यार से बैठी होती हमें मार न देती...

सभ्य- धत्त्त हम क्यों मरेंगे तुझे..

ममता- क्यों हम तुम्हारे खूंटे पर अपनी बछिया बांधते इसलिए.

सभ्य- नहीं ऋ तू हमारे खूंटे पर अपनी बछिया बांध या तू खुद बांध हमें कोई परेशानी नहीं है तू तो अपनी है..

ममता- तुम भी न जीजी कैसी बातें कर रही हो.

सभ्य- अरे सही कह रही हूँ, मैं तो सोच मैं हूँ की ये इतने दिन रह कैसे लिए, बिना चुदाई के तो इनसे एक रात नहीं रुका जाता.. ज़रूर कुछ काण्ड किया होगा इन्होने..

ममता- अरे जीजी वो तो तुम सामने होती हो इसलिए नहीं रुका जाता न अकेले में क्या hi करेंगे...

सभ्य- अरे तू समझ नहीं रही एक बार हम मायके चले गए थे तेते भाई साब दुसरे hi दिन पहुँच गए और मायके में भी रात को छत पर घोड़ी बना दिया था...

ममता- है साछहयई मज़ा आ गया होगा जीजी तुम्हे तो..

ममता ने सभ्य को बाहों में भरते हुए कहा..

सभ्य- हाँ री मज़ा तो आया था वैसे तुझे बड़ा मज़ा आ रहा है सुनने में कहे तो दिलों वही मज़ा तुझे भी..

सभ्य ने ममता को बाहों में भरते हुए कहा, दोनों गदराई औरतें आपस में मज़ाक करते हुए एक दुसरे को छेड़ रही थी...

Mamta-tum भी न घूम फिर कर हमारे ऊपर hi आ जाती हो. वैसे भी भाई साब बद्र शरीफ हैं.

ममता ने नीलेश के साथ अपनी चुदाई को याद करते हुए कहा...

सभ्य- अरे हाँ बड़े शरीफ हैं तू एक बार अपनी इन बड़ी बड़ी छूछीयों की झलक दिखा कर तो देख न तुझ पर चढ़ जाएं तो कहना..

ये कहते हुए hi अचानक से सभ्य के दिमाग में एक विचार कौंधा, क्या ये जो मज़ाक में हो रहा है वो सही क्यों नहीं हो सकता, अगर ममता कर्मा और अनुज से छुड़वा सकती है तो अगर सही तरह से बात की जाये तो...

ममता- अरे जीजी बस भी न तुम तो भाई साब और हमारे पीछे पद गयी..

ममता ने झूठ मूठ की नाराज़गी जताते हुए अपने आप को सभ्य से दूर खिसकते हुए कहा..

हालाँकि ममता को इन बातों में मज़ा आ रहा था उसे बस ये hi ग्लानि थी की वो अपनी बड़ी बहन जैसी सभ्य को अँधेरे में रखकर धोखा दे रही है पर अभी इस मज़ाक के जरिये उसके मन में कई विचार कोंध रहे थे..

सभ्य - अरे बन्नो गुस्सा क्यों होती है, और सही तो बोल रही हूँ इतना गदराया और सुन्दर बदन है तेरा, जिसे देखकर किसी का भी लुंड खड़ा हो जाये और तेरे भाई साब भी तो मर्द हैं.

सभ्य के खुले शब्द सुनकर ममता को एक अजीब सा एहसास हुआ साथ hi वो शरमाई भी...

ममता- अरे वैसे बड़ा शर्माती हो आज खुद hi लुंड छूट कर रही हो लगता है भाई साब ने रात को अचे से पेल दी तुम्हारी मुनिया..

ममता ने पेटीकोट के ऊपर से hi सभ्य की छूट पर हाथ मरकर कहा..

सभ्य- अह्ह्ह्ह कामिनी अभी बताती हूँ तुझे...

ये कहकर सभ्य ने ममता को बिस्तर पर गिरा दिया और खुद उसके ऊपर चढ़ गयी... और उसका पल्लू हटा कर ब्लाउज के ऊपर से hi ममता की छूछीयों को मसलने लगी..

ममता- अह्ह्ह्ह जीजी छोडो ना..

ममता खिलखिलाते हुए सभ्य को रोकने की कोशिश कर रही थी..

सभ्य- क्यों छोडो बड़ी मस्ती छ रही है न तुझे, रुक तो..

ये कहकर सभ्य ममता के ब्लाउज के हुक खोलने लगी, ममता सिर्फ खिलखिलाते हुए और मुँह से hi सभ्य को मन कर रही थी वैसे उसने कोई विरोध नहीं जताया और कुछ hi पालो में सभ्य ने ममता का ब्लाउज खोल दिया.....

ममता- ाचा जीजी अब ज़्यादा हो रहा है अब तुम बचो..

ये कहकर ममता ने जान लगाई और सभ्य को पलट कर उसके ऊपर आ गयी अब सभ्य नीचे बिस्तर पर थी और ममता उसके ऊपर चढ़कर बैठी थी उसे दबाये हुए... इसी बीच ममता ने अपना अधखुला ब्लाउज भी बदन से अलग कर दिया और अब दोनों औरतें कमर से ऊपर सिर्फ ब्रा में थी और दोनों की hi ब्रा उनकी बड़ी बड़ी चूचियों को छिपाने में कामयाब नहीं हो रही थी...

सभ्य- है दिया बड़ी जान आ रही है तुझमे किसका लुंड ले रही है..

सभ्य ने उसे चिढ़ाते हुए कहा...

ममता- वो तो पता नहीं जीजी पर अगर मेरे पास लुंड होता न तो अब तक तुम्हारी इस मुनिया में घुसकर तुम्हे छोड़ रही होती..

ये कहते हुए ममता ने एक बार फिर से पेटीकोट के ऊपर से hi सभ्य की छूट को पकड़ लिया.. जिसके साथ hi सभ्य बिलबिला पड़ी..

सभ्य- अह्ह्ह्ह कामिनी छोड़... .

और सभ्य छूटने का साथ hi ममता को पलटने का प्रयास करने लगी..

वहीं सभ्य को दबाये रखने के लिए ममता उसके ऊपर अपना वजन डालकर लेट गयी.. ताकि सभ्य उठ न पाए जिसका नतीजा ये हुआ की दोनों की बड़ी बड़ी छुछियां आपस में डाब गयी...

इधर ममता के ऊपर लेटने की वजह से सभ्य उठ तो नहीं प् रही थी तो उसने अपने हाथ ममता की पीठ पर लेजाकर उसकी ब्रा को पीछे से खोल दिया...

जिसका एहसास होते hi ममता भी बिलबिलाई..

ममता- है दिया जीजी कितनी चालू हो तुम..

ममता ने हैरान होते हुए सभ्य के चेहरे की और अपना चेहरा करके कहा... क्यूंकि एक दुसरे के ऊपर नीचे होने से दोनों के hi चेहरे बिलकुल एक दुसरे के पास आ गए..

सभ्य- ाचा और जो तू मुझे दबाये बैठी है..

ममता- ाचा और तुमने जो हमारी ब्रा खोल दी तो ..

सभ्य- तो क्या हिसाब बराबर..

ममता- नहीं हिसाब बराबर कैसे, हिसाब तो अब बराबर होगा, .

ममता सभ्य की पीठ के नीचे हाथ डालने की कोशिश करने लगी ताकि उसकी ब्रा खोल सके...

पर इसी कोशिश में अचानक से दोनों के होंठ आपस में टकरा गए, जिसका एहसास होते hi दोनों रुक गए और दोनों ने hi झिझकते हुए अपने होंठ बापिस कर लिए...

पर दोनों hi इस अकस्मात् हुए चुम्बन के बाद बिलकुल शांत हो गए.. ममता सभ्य के ऊपर से उठने लगी पर फिर उसके मन में न जाने क्या आया की उसने अपने होंठ बापिस सभ्य के होंठों से जोड़ दिए...

सभ्य ममता की इस हरकत से बिलकुल हैरान रह गयी पर ममता के होंठों का स्पर्श उसे ाचा लगा साथ hi ममता के साथ हुई इस पूरी घटना से वो उत्तेजित भी हो गयी थी... तो कुछ पल बाद hi उसके होंठ भी खुल गए और ममता के होंठों को अपने में समां लिए...

दोनों hi औरतों के लिए ये पहला मौका नहीं था जब उनके होंठ किसी औरत के होंठों में हो, ममता ने तो अपनी बेटी, फिर प्रेमा और यहाँ तक की ससि के साथ भी औरत का सुख बंटोरे था वहीं सभ्य ने भी अपनी बहन के साथ इसका अनुभव लिए था..

खैर ममता ने सभ्य के होंठों को चूसना शुरू कर दिया और कुछ पल बाद hi सभ्य को साथ देता देख तो उसका जोश और बढ़ गया, दोनों hi औरतें पूरी शिद्दत से एक दुसरे के होंठों को चूसने लगी... दोनों hi सब कुछ भूलकर बस एक दुसरे के होंठों में खोने लगी... की तभी एक आवाज़ आई जो की बाथरूम का दरवाज़ा खुलने की थी जिसे सुनते hi दोनों बिजली की रफ़्तार से अलग होकर कड़ी हो गयी... ममता तुरंत अपना ब्लाउज ढूंढने लगी... वहीं सभ्य ने भी अपनी छाती को साड़ी से धक् लिए पर फिर कुछ ध्यान आया तो साधारण हो गयी... दोनों की hi साँसे ऊपर नीचे हो रही थी... अचानक से hi दोनों एक दुसरे से नज़रें मिलाने से कटरा रही थी...

वहीं शालू बाथरूम से निकल कर अपने कमरे में चली गयी... वहीं ममता ने भी तब तक अपने कपडे ठीक कर लिए थे और बोली- ाचा जीजी हम चलते हैं.

ये उसने बिना सभ्य से नज़रें मिलाये हुए कहा और मुद कर जाने लगी..

तभी सभ्य के दिमाग में कुछ कौंधा और उसने तुरंत उठकर ममता को रोका साथ hi कमरे के दरवाजे को भी फेर दिया... और ममता को पकड़ कर बोली - ममता रुक..

ममता- क्या हुआ जीजी? ममता ने घूमकर पर बिना उससे नज़रें मिलाये पुछा....

सभ्य ने एक कदम आगे बढ़ाया और इस बार ममता को हैरान करते हुए ममता के होंठों को चूसने लगी, ममता भी शुरूआती हिचक के बाद उसका साथ देने लगी, पर समय की नज़ाकत के अनुसार ये होंठों की कुश्ती का सिलसिला कुछ देर में ख़त्म हो गया और होंठ अलग हुए, कुछ देर की ख़ामोशी के बाद सभ्य धीरे से बोली

सभ्य- बता ममता, तू करेगी ये..

ममता- क्या करेगी..

और फिर जैसे उसके खुद hi समझ आ गया हो तो उसके चेहरे पर एक मुस्कान आ गयी..

ममता- सच्ची में?

सभ्य ने सर हिलाकर जवाब दिया..

ममता- कोशिश करुँगी लेकिन अगर ऐसा होता है तो मेरी एक शर्त है...

सभ्य- कैसी शर्त..

इस पर ममता ने अपना चेहरा आगे बढ़ाया और फिर सभ्य के कान में कुछ फुसफुसाया...

जिसे सुनकर सभ्य की तो आँखें hi बड़ी हो गयी, इसके बाद ममता बोली- अब सोचो जीजी जैसा हो मुझे बता देना,

ये कहकर वो चली गयी...

वहीं सभ्य कड़ी कड़ी कुछ देर तक बस सोचती रही फिर नहाने का ध्यान आया तो नहाने चली गयी....

सरलपुर

ख़ुशी को ये सब सोच सोचकर hi एक अजीब सी शर्म महसूस होने लगी, अपने बदन को सिर्फ ब्रा पंतय में देखकर साथ hi अपनी भाभी के थूक से सना हुआ देखकर ख़ुशी मन hi मन शर्माने लगी और उसी शर्म के एहसास में उसने अपनर बदन को पास पड़ी चद्दर को ओढ़ कर धक् लिया और सिर्फ चेहरा बहार रखकर अपनी भाभी का इंतज़ार करने lagi...kuch hi देर में दरवाज़ा खुला और ख़ुशी ने जो देखा उससे तो उसके होश hi उड़ गए....

ख़ुशी ने देखा की उसकी भाभी के पीछे पीछे उसका भाई रमन भी कमरे में आ रहा है ये देखकर ख़ुशी का तो सर चक्र गया, उसका मन बुलेट ट्रैन की गति से दौड़ने लगा और पल में उसे बस इतना सूझा की उसने अपनी आँखें बंद कर्ली और सोने का नाटक करने लगी..

वहीं रमन की नज़र जब बिस्तर पर पड़ी और ख़ुशी को सोते देखा तो वो रिमझिम से बोलै- अरे ख़ुशी यहाँ..

रिम- हाँ तुम नहीं थे तो ये मैं ख़ुशी दीदी के साथ hi सो रही थी,

रमन- पर अब कैसे अब तो मैं आ गया न.. इसे जागकर अपने कमरे में भेज दो..

रिम - हाँ पर अब सो गयी है बेचारी सोने दो न..

रिमझिम ने रमन को देखकर मुस्कुराते हुए कहा...

रमन- फिर हम लोग कैसे करेंगे मेरा मतलग सोयेंगे..

ख़ुशी बेचारी पड़ी पड़ी सोने का नाटक करते हुए उन दोनों की बातें सुन रही थी उसे दर तो इस बात का था की भैया भाभी के कमरे में है ऊपर से सिर्फ ब्रा और पंतय में अगर भैया को पता चल गया तो क्या जवाब देगी वो.. कहाँ फंसा दिया भाभी ने...

वहीं रमन थोड़ा असमंजस में था कहाँ वो सोच के आया था की घर जाकर अपनी बीवी की जमकर चुदाई करेगा पर यहाँ ख़ुशी के रहते कुछ कैसे हो पायेगा, तभी रिमझिम उसके करीब आई और उसके कान में फुसफुसाई..

रिम - तुम hi तो चाहते थे की तुम्हारी बहन और तुम एक hi बिस्तर पर हो साथ रात गुज़ारो, अब मौका मिल रहा है..

रिमझिम की ये बात सुनकर रमन झेंप गया पर साथ hi इस ख्याल से hi उसका लुंड तन गया, और वो मुस्कुरा कर बोलै- तुम भी न.. मैंने ऐसा थोड़े hi कहा था..

रिम- जो कहा था क्या पता उसकी शुरुआत यहीं से हो..

उधर ख़ुशी मन hi मन सोच रही थी न जाने इन दोनों की क्या खुसर पुसार चल रही है, मैं कैसे निकलूं यहाँ से...

रिम- चलो तुम कपडे बदल लो .मैं खाना लगाती हूँ..

रिम की ये बात सुनकर ख़ुशी की उम्मीद जगी की भैया खाना खाने जायेंगे तो मैं कपडे पहन काट कर निकल जाउंगी...

रमन- अरे नहीं निकलते हुए मैं खा कर hi निकला था .अभी भूख नहीं है..

रिम- ाचा ठीक है कपडे तो बदल लो..

रमन ने एक बार ख़ुशी को देखा और पाया सो रही है तो फिर रिमझिम को तुरंत बाहों में जकड़के बोलै- कपडे क्या बदलने कपडे तो उतरने hi हैं..

ये सुनकर ख़ुशी की उम्मीद धुआं हो गयी वहीं भाई से ऐसे शब्द सुनकर उसे थोड़ा अजीब सा एहसास भी हुआ..

रिम- धत्त्त ख़ुशी यही हैं और तुम ऐसे बोल रहे हो...

रमन - ख़ुशी तो सो रही है... आओ हम अपना काम करते हैं..

ये कहकर रमन ने अपनी पत्नी की मैक्सी को उसके सर के ऊपर से निकल कर बगल में दाल दिया.. अब रिमझिम सिर्फ ब्रा और पंतय में थी..

रमन- हाय मेरी जान क्या बदन है तुम्हारा जितनी बार देखता हूँ मन करता है खा जॉन..

रमन को ख़ुशी के उसके कमरे में होने से एक अलग hi उत्तेजना मिल रही थी जिसका वो भरपूर मज़ा उठा रहा था,

साथ hi अपनी पत्नी की मैक्सी के साथ उसने अपने कपडे उतर दिए अब सिर्फ एक चड्डी में था..

रिम - तो खा जाओ न..

बस उसका इतना कहना था की रमन ने उसे अपनी बाहों में भर लिए और रिमझिम के रसीले होंठों को चूसने लगा...





वहीं ख़ुशी आँखें बंद किये हुए अंदाज़ा लगा रही थी की अभी क्या हो रहा होगा...

रमन का लुंड पूरी तरह से चड्डी में तना हुआ था और रिमझिम के पेट में चुभ रहा था, रमन उसके होंठों को चूसते हुए उस्क्स पूरे बदन पर हाथ फिरा रहा था .. रमन ने होंठों को बीवी के होंठों से अलग किया और फिर गर्दन और सीने को चाटते हुए नीचे उसके पूरे बदन को चाटने चूमने लगे...





बदन को चूमते हुए रिमझिम को घुमाकर उसकी नाभि में अपनी जीभ को घुसा दिया..

जिसके साथ hi रिमझिम की एक तेज़ आअह्ह्ह्ह निकल गयी वहीं इस आह्हः से ख़ुशी के दिल की धड़कने बढ़ गयी उसको क्या हो रहा है ये देखने की लालसा बढ़ने लगी पर वो दर रही थी की कहीं उसके भैया को पता न चल जाये की वो जाग रही है...

बेचारी बिस्तर पर पड़ी अंदर hi अंदर तड़प रही थी वहीं बिस्तर के बगल में खड़े होकर दोनों मिया बीवी लगे हुए थे..

रिमझिम के पूरे बदन को चाटने के बाद रमन ने उसे दूसरी और घुमाया और फिर उसकी पीठ पर से ब्रा को खोल दिया





अगले hi पल रिमझिम की दोनों सुन्दर बड़ी बड़ी मौसमी जैसी चूचियां नंगी हो गयी, ब्रा उतरने के बाद hi रमन ने उसे अपनी और घुमा लिए और अगले hi पल उसकी एक चुकी को मुँह में भर लिए और दूसरी को चूसने लगा..

ख़ुशी का उत्तेजना दर और लालसा से बुरा हाल हो रहा था, उसकी भाभी की सिसकियाँ उसके कानो में पद कर उसे बहका रही थी उसका मन कर रहा था अभी आँखें खोलकर इस कामुक दृश्य को देख लूँ... वहीं पकडे जाने का दर भी था, ख़ुशी ये तो समझ गयी थी की उसकी भाभी ने जानकार फंसाया है नहीं तो वो चाहती तो उसे पहले hi भेज सकती thi..usne मन hi मन सोचा इसका बदला भाभी से ज़रूर लूंगी.. पर अभी खुद तो बचूं इस बाला से. ख़ुशी पड़ी हुई सोच रही थी..

वहीं बिस्तर के बगल में दृश्य बदल गया था और ज़्यादा hi कामुक हो गया था, रमन ने उसकी पत्नी की पंतय उतारकर उसे पूरा नंगा कर दिया था, और फिर रिमझिम को आगे बिस्तर पाए पर झुका दिया और पीछे बैठकर अपना चेहरे रिमझिम के गदराये चूतड़ों के बीच में घुसाया हुआ था और उसकी छूट और गांड चाट रहा था..

रिमझिम के पेअर बिस्तर. के बगल में ज़मीन पर थे वहीं उसका ऊपरी बदन बिस्तर पर था,

ख़ुशी को भी एहसास हुआ बिस्तर पर हलचल का वहीं उसकर दिल की धड़कन और बढ़ गयी, वहीं उसके मन की लालसा भी देखने की... वहीं दर भी था की जय करती उसे समझ नहीं आ रहा था पर उसकी लालसा और उत्तेजना इतनी बढ़ गयी की उसके दर पर भरी पद गयी,

ख़ुशी ने एक योजना बनाई और उसी के अनुसार उसने नींद में होने का नाटक करते हुए अपने हाथों को अपने चेहरे पर रख लिए जिससे उसका चेहरा कोहनी से धक् गया.. वहीं हाथ और कोहनी के बीच उसे जगह भी मिल गयी की वो अपनी आँखें खोल कर देख सके उसने धीरे धीरे से आँखें खोल कर देखा और हलके से अपनी कोहनी और हाथों के बीच से झाँका तो समनर का नज़ारा देखकर उसकी आँखें बड़ी हो गयी..

उसके भैया उसकी भाभी की छूट और गांड चाट रहे थे... भाभी पूरी नंगी थी...

वैसे अगर ख़ुशी उन्हें सामने से देखे तो भी शायद उन दोनों को फ़र्क़ नहीं पड़ता दोनों hi इतने व्यस्त थे एक दूजे में...



इसके आगे की कहानी अगली इसी अपडेट के अगले भाग में जो जल्दी hi मिलेगा... प्लीज कमैंट्स करके ज़रूर बताएं कैसी लगी अपडेट बहुत बहुत धन्यवाद्
 
ख़ुशी के भैया उसकी भाभी की छूट और गांड चाट रहे थे... भाभी पूरी नंगी थी...

वैसे अगर ख़ुशी उन्हें सामने से देखे तो भी शायद उन दोनों को फ़र्क़ नहीं पड़ता दोनों hi इतने व्यस्त थे एक दूजे में...



अपडेट 165 बी


ख़ुशी की छूट तो इस नज़ारे को देखकर पानी बहाने लगी उसकी पंतय आगे से गीली हो गयी...

वहीं रिमझिम और रमन तो जैसे ये भूल hi गए थे की ख़ुशी भी वहीं है उनके बिस्तर पर, साथ hi दोनों और आरामदायक स्थिति में आ गए रिमझिम बिस्तर पर पीठ के बल लेट गयी और अपनी टांगें अपने पति के सामने फैला दी वहीं रमन तुरंत अपनी बीवी की खुली टैंगो के बीच आये उसकी रसीली छूट में अपने होंठ भिड़ा दिए जिसके साथ hi रिमझिम की एक सिसकी और ख़ुशी को सुनाई दी..

अपने भैया और भाभी के खेल को देखकर ख़ुशी का हाल बुरा हो रहा था उसे साफ़ दिख रहा था की उसके भाई की जीभ कैसे उसकी भाभी की छूट पर कभी घूम रही है तो कभी अंदर बहार हो रही है, जिसे देखकर ख़ुशी की छूट में हज़ार चींटियां रेंग रही थी, उसके मन में अचानक से अपनी भाभी से जलन होने लगी और फिर उसके मन में आया काश उसका भाई अभी ऐसे उसकी छूट चाट रहा होता... ये ख्याल आते hi ख़ुशी का पूरा बदन सिहर गया और मुश्किल से उसने खुद को रोका.. वो कल्पना करने लगी कैसा लगेगा अगर उसका भाई ऐसे hi उसकी छूट चाटेगा तो, ये सोचकर hi उसका पूरा बदन उत्तेजना की गर्मी में तपने लगा, चद्दर के अंदर उसका पूरा बदन पसीने से भीग चूका था और उसकी पंतय उसकी छूट के रास से..

वहीं बीएड के दूसरी और भी गर्मी काम नहीं थी, रिमझिम ने अपने पति के बालों को पकड़ कर अपनी छूट में उसके चेहरे को दबा दिया और फिर उसकी जीभ पर अपना पानी छोड़ते हुए झाड़ गयी, खुद के झड़ने के बाद रिमझिम ने हांफते हुए अपने पति को उसके काम का इनाम देने के लिए अपनी जगह लिटा दिया..

अब रमन पीठ के बल बिस्तर पर लेता हुआ था और रिमझिम ने रमन के पैरों के बीच में जगह ली.. ख़ुशी भी चोरी छिपे इस नज़ारे को देखकर गरम हो रही थी रिम्झिन ने आगे बढ़ाते हुए अपने पति की कमर पर हाथ लेजाकर उसकी चड्डी को पकड़कर नीचे खिसकना शुरू किआ और उसी के साथ ख़ुशी की सांसें ऊपर नीचे होने लगी, कुछ पल बाद hi रमन की चड्डी को रिमझिम ने जांघों तक सरका दिया और उसी के साथ रमन का लुंड उसकी चड्डी से स्प्रिंग की तरह निकल कर झूलने लगा, जिसे देखकर ख़ुशी का मुँह सूख गया, उसकी नज़र उसके भाई के कड़क लुंड पर जैम गयी, उसे खुद भी समझ नहीं आ रहा था की उसे क्या हुआ है वो अगर चाहती भी तो अपने भाई के लुंड से नज़र नहीं हटा पति...

भाई का बिलकुल कड़क लुंड बार बार ठुमके मार रहा था जिससे ख़ुशी की छूट हर ठुमके पर पानी बहा रही थी, तभी उसने ध्यान दिया की भाई के लुंड के टोपे पर एक बूँद उसके रास की उभर आई... जिसे देखकर hi ख़ुशी के मुँह में पानी आ गया, उसने कभी लुंड छुआ तक नहीं था पर अपने भाई के लुंड को देखकर उसका मन हुआ की अभी लपक कर भाई के लुंड के टोपे पर उभरी जीभ को चाट ले और जी भर के उसके कड़क लुंड को चूमे कहते और चूसे... पर किसी तरह उसने खुद को संभाला, वहीं तब तक रिमझिम ने रमन की चड्डी को टैंगो से निकल कर अलग फ़ेंक दिया और फिर ख़ुशी की बेताबी को बढ़ाते हुए रमन के लुंड को हाथ में पकड़ा और फिर हौले से अपनी जीभ निकल कर रमन के लुंड के टोपे पर फिरै...

जिसे देखकर ख़ुशी के तनबदन में आग सी लग गयी, साथ hi अगले hi पल उसे रिमझिम की नज़र अपने ऊपर hi महसूस हुई और एक पल के लिए hi दोनों की आँखें मिली... रिमझिम के चेहरे पर एक मुस्कराहट थी तो ख़ुशी के तड़प हालाँकि ख़ुशी का चेहरा ढाका होने से किसी को कुछ दिखा नहीं...

वहीं रिमझिम ने आगे की प्रक्रिया शुरू कर दी थी और पति के लुंड को मुँह में भर कर पूरी शिद्दत से चूस रही थी..

वहीं ख़ुशी सोच रही थी कैसा लगता होगा कड़क लुंड को मुँह में भर के चूसना.. कैसा स्वाद होता होगा लुंड का, कैसी गंध होगी उसकी, ख़ुशी ये सब सोचते हुए अपनी भाभी को अपने भैया का लुंड चूसते हुए देख रही थी





रिमझिम भी अपने पति को उससे ज़्यादा सुख देने की कोशिश कर रही थी जितना अभी उसके पति ने अपनी ज़ुबान से उसे दिया था, और इन दोनों पति पत्नी के चक्कर में बेचारी ख़ुशी तड़प रही थी...

रमन का लुंड कुछ ज़्यादा hi फूला हुआ था ये सोच सोचकर की वो अपनी बहन के बगल में बिलकुल नंगा लेट कर अपनी पत्नी से अपना लुंड चुसवा रहा है.

कुछ देर लुंड चूसने के बाद खुद रिमझिम से अपनी छूट की खुजली बर्दाश्त नहीं हुई और वो ऊपर उठकर रमन की कमर के इर्द गिर्द दोनों पैरों को रखकर नीचे बैठ गयी नीचे होकर उसने एक हाथ में रमन का अपने थूक से सना हुआ लुंड पकड़ा और उसे अपनी छूट पर लगा कर घिसने लगी इसके साथ hi दोनों पति पत्नी के मुँह से सिसकारी निकल गयी वहीं ख़ुशी की तो ऐसा नज़ारा देखकर hi जान निकलने को हो रही थी, रिमझिम ने कुछ देर तक अपनी छूट को यूँ hi सताया, ख़ुशी भी सोच में थी की उसकी भाभी ये क्या कर रही है अगर लुंड उसकर हाथ में होता तो अब तक उसे अपनी छूट में समां लिए होता, पर ये भाभी न जाने कैसे खेल कर रही है, ख़ुशी चुपचाप देखत्व हुए सोच रही थी कभी लुंड और छूट को घिसते हुए देखती तो कभी रिमझिम के चेहरे पर बदलते भावों को, उसी बीच कुछ देर बाद रिमझिम रुक गयी तो ख़ुशी ने उसके चेहरे की और देखा और ख़ुशी को हैरानी हुई की रिमझिम की नज़र ख़ुशी की और hi है, और फिर एक हलकी सी मुस्कराहट के साथ रिमझिम ने उसकी और आँख मरी और फिर लुंड पर बैठते हुए उसे अपनी छूट में घुसा लिया, ख़ुशी अपनी भाभी की इस हरकत से और गरम हो गयी साथ hi उसे अपने भैया का लुंड भाभी की छूट में घुसता हुआ साफ़ दिख रहा था, ख़ुशी की छूट ये नज़ारा देखते हुए जैसे मचलने लगी एक पल को तो उसका मन हिअ की अभी उठकर भाभी को हटाकर खुद लुंड पर बैठ जॉन और पूरा छूट में समां लूँ, फिर सोचने लगी क्या हो गया है मुझे अपने hi भाई के साथ ये सब सोच रही हूँ... वहीं रिमझिम ने तो अपने पति के लुंड पर उछालना भी शुरू कर दिया था..

रमन भी रिमझिम की कोमल कमर को थामे उसे अपने ऊपर उछलने लगा, रमन खुद को बहुत भाग्यशाली मंटा था की उसे रिमझिम जैसी सुन्दर बीवी मिली थी जो की सुन्दर होने के साथ साथ बेहद कामुक भी थी जो की हर रूप हर तरीके से उसे संतुष्ट करती थी, साथ hi उसे ये मालूम था की वो अपनी बहन के बारे में क्या सोचता है फिर भी नाराज़ होने की जगह वो उसका साथ देती थी और उसी का शायद ये नतीजा था की वो आज एक hi बिस्तर पर अपनी बहन के बगल में नंगा चुदाई कर रहा था...

इधर पति पत्नी की चुदाई देखकर ख़ुशी की छूट झरने की तरह बाह रही थी.

कुछ देर तक रमन के लुंड पर उछलने के बाद रिमझिम उसके ऊपर से उतर गयी और बगल में घोड़ी बन गयी, पर इस तरह से घोड़ी बानी की उसका चेहरा बिलकुल रिमझिम के करीब पहुंच गया, रमन ने भी अपनी घोड़ी बीवी को ज़्यादा देर इंतज़ार नहीं करने दिया और पीछे से उसके ऊपर चढ़ गया और एक बार फिर से चुदाई शुरू हो गयी हर धक्के के साथ रिमझिम के मुँह से सिसकी निकल रही थी. ख़ुशी की धड़कनें और तेज़ हो गयी थी क्यूंकि अब उसकी भाभी बिलकुल उसके पास थी यहाँ तक की बीच बीच में रिमझिम की सांसें ताल उसकर चेहरे पर महसूस हो रही थी...

ख़ुशी ने रिमझिम को देखा तो वो उसे hi देख रही थी, रिमझिम ख़ुशी को देखकर मुस्कुराई तो ख़ुशी के चेहरे पर भी मुस्कान आ गयी रिमझिम ने उसकी और चूमने का इशारा किआ, तो ख़ुशी शर्मा गयी और मन hi मन सोचने लगी मेरी भाभी भी कितनी ख़राब हैं पति से चुड़ते हुए मुझसे इशारा कर रही हैं, साथ hi रिमझिम की झूलती छुछियां ख़ुशी को बड़ी प्यारी लग रही थी जो उसके भैया के हर धक्के पर झूल रही थी...

तभी ख़ुशी को कुछ महसूस हुआ और वो दर गयी उसने पाया की उसके बदन पर पड़ी चद्दर धीरे धीरे नीचे खिसक रही है उसने बिना हिले जितना देख सकती थी उतना देखकर पाया की उसकी भाभी रिमझिम ने चद्दर को पकड़ा हुआ था और हर झटकर के साथ हल्का हल्का चद्दर को नीचे सरका रही थी..

ख़ुशी की तो जान hi हलक में अटक गयी, उसने आँखों hi आँखों में भाभी को मन किया पर रिमझिम कहाँ सुनाने वाली थी और चद्दर तब तक उसके सीने तक पहुँच चुकी थी, ख़ुशी बेचारी बुरी तरह फंस चुकी थी, वो खुद से चद्दर को पकड़ती तो उसके भैया को पता चल जाता की वो जाग रही है इसलिए उसकी समझ नहीं आ रहा था क्या करे..

और इसका पूरा फायदा रिमझिम उठा रही थी, ख़ुशी मन मरकर वैसे hi लेती रही और सोने का नाटक करती रही... वहीं रिमझिम ने उसकी चद्दर को अब और नीचे उसके पेट तक कर दिया था,

उसी समय रमन की नज़र भी ख़ुशी पर पड़ी और ख़ुशी को सिर्फ ब्रा में देखकर उसकी आँखें चौड़ी हो गयी... अपनी बहन का गोरा चिकना चमकता बदन देखकर एक पल को तो वो सुन्न हो गया, ब्रा में कैद संतरो जैसी चूचियां जो ब्रा में पूरी तरह समां भी नहीं रही थी..

ख़ुशी किसी तरह अपनी साँसों को साधारण किये हुए थी उसे अंदाज़ा था की उसका भाई उसके बदन को देख रहा होगा और ये सोचकर hi वो बेहद उत्तेजित होती जा रही थी

उसके नीचे उसका गोरा कोमल नंगा पेट और कमर और उसके पेट के बीच सुन्दर नाभि ये सब देखकर hi रमन तो पागल सा हो गया और रिमझिम की कमर थामे वहीं का वहीं रुक गया,

रिमझिम ने चेहरा घुमाकर उसकी तरफ देखा तो पाया उसका पति अपनी बहन के बदन में खोया हुआ है, रिमझिम ने मुस्कुराते हुए अपनी गांड को हिलाकर रमन का ध्यान अपनी और खींचा तो रमन जैसे होश में आया,.

रिमझिम ने इशारे से poocha-kya हुआ..

रमन ने जवाब में सिर्फ ख़ुशी की और इशारा कर दिया..

रिमझिम उसकी हालत समझ रही थी इसलिए चिढ़ाते हुए ख़ुशी के बदन को चाटने का नाटक करके उसे चिढ़ाने लगी जिससे रमन और जोश में आ गया पर साथ hi उसे दर भी था की कहीं ख़ुशी जाग न जाये इसलिए उसने रिमझिम कक रोका और मन किआ..

पर रिमझिम ने उसे इशारा किआ की सो रही है तुम अपना काम शुरू करो..

रमन अब तो और जोश में आ गया और अपनी बहन के अधनंगे बदन को निहारते हुए अपनी पत्नी को छोड़ने लगा,

रिमझिम को भी पति का लुंड छूट में फूलता हुआ महसूस हो रहा था... और रिमझिम जान गयी की बहुत जल्दी hi उसके पति के लुंड से पिचकारी छुटने वाली है, और कुछ पल जैसे hi उसे एहसास हुआ की रमन झड़ने वाला है रिमझिम ने तुरंत आगे होकर उसके लुंड को छूट से निकल दिया और बड़ी फुर्ती में उसके सामने से हैट गयी और इससे पहले रमन कुक्सह समझ या कर पता उसके लुंड ने पिचकारी छोड़नी शुरू कर दी और पहली hi धार उसके लुंड से निकल कर हवा में तैरती हुई नीचे ख़ुशी के पेट पर गिरी,

अपने बदन पर रास का गरम एहसास होते hi ख़ुशी का तो जैसे रोम रोम बहक उठा उसे ये एहसास हुआ की उसके पेट पर उसके भाई का वीर्य है वो खुद को संभल नहीं पाई और झड़ने लगी उसका बदन थरथराने लगा, रिमझिम ये देखकर थोड़ा चिंता में आई की कहीं रमन ख़ुशी को देख तो नहीं रहा पर रमन की और देखा तो पाया की वो तो सर ऊपर उठाये आँखें मूंदें चरम सुख के नशे में तैर रहा था,

ख़ुशी का थरथराना शांत हुआ तो डरते हुए उसने अपने भैया भाभी को देखा तो रिमझिम ने उसे जल्दी से इशारे से सोते रहने को कहा और ख़ुशी तुरंत सोने का नाटक करने लगी तभी रमन भी झड़ने के बाद शांत हुआ और धीरे से उसने आँखें खोलकर सामने देखा तो चौंक गया एक पल को तो उसकी फैट hi गयी..

उसने देखा की सामने उसकी बहन का पेट और सीना गर्दन सब उसके रास से सना हुआ है डरकर तुरंत उसकी नज़र ख़ुशी के चेहरे पर गयी तो उसे थोड़ी रहत मिली जब उसने ख़ुशी को सोता हुआ पाया... रमन ने घबराते हुए रिमझिम की और देखा... रिमझिम तुरंत उसके पास आई और कान में फुसफुसाई - शांत हो जाओ अभी सो रही है वो बस हमें जल्दी से ये साफ़ करना होगा..

रमन ने उसकी बात समझते हुए सर हिलाया...

वहीं बेचारी ख़ुशी एक बार झड़ने के बाद वो थोड़ी शांत ज़रूर हुई थी पर अब भी उसे अपने बदन पर भाई का वीर्य साफ़ महसूस हो रहा था, रास का गरम एहसास फिर से उसके बदन को गरम कर रहा था, उसे यकीन नहीं हो रहा था की उसके बदन पर उसके भाई का रास है..

रमन उम्मीद लगाए रिमझिम को देखता तो कभी ख़ुशी के बदन को हालाँकि अपनी बहन को अपने रास में सना हुआ देख उसका लुंड एक बार फिर से तन गया था...

रिमझिम ने रमन से फुसफुसाया की मैं कुछ करती हूँ,

रमन अपनी बीवी को ध्यान से देखने लगा, रिमझिम आगे झुकी और अपने चेहरे को रिमझिम के पेट पर जहाँ सबसे ज़्यादा रास था उसके पास ले गयी रमन देख रहा था की उसकी पत्नी अब क्या करती है वहीं ख़ुशी को भी अपने पवत पर भाभी की गरम सांसें महसूस हो रही थी..

रिमझिम ने जो आगे किया उससे दोनों भाई बहन चौंक गए, रिमझिम ने अपनी जीभ निकली और ख़ुशी के पेट पर पड़े रास को चाटने लगी, जिसे देखकर रमन की आँखें चौड़ी हो गयी और उसका लुंड ठुमके लगाने लगा वहीं उससे भी बुरा हाल ख़ुशी का हो गया क्यूंकि उसकी भाभी उसके बदन को चाट रही थी और वो बेचारी न हिल सकती थी और न hi ाआहें भर सकती थी,

रमन कभी रिमझिम को देखता तो कभी ख़ुशी के चेहरे को ये देखने के लिए की वो जाग तो नहीं रही..

वहीं ख़ुशी किसी तरह सोने का नाटक कर रही थी.

ऐसे hi ख़ुशी के पूरे पेट और सीने को रिमझिम ने चाट चाट कर साफ़ कर दिया पर इस दौरान ख़ुशी की जो हालत हुई वो ख़ुशी hi जानती है...

वहीं दूसरी तरफ रमन का भी बुरा हाल हो गया था वो अपनव लुंड को मुठियाते हुए रिमझिम को देख रहा था... अपनी बहन का बदन चाटते हुए..

और चाटने के बाद रिमझिम ने शरारती मुस्कान के साथ रमन को देखा तो रमन को भी हंसी आ गयी उसने तुरंत रिमझिम को बाहों में भर लिया और फुसफुसाया आज तो फंस hi गए थे,

रिम- अरे फंसे कहाँ मुझे तो मज़ा आया बड़ा मीठा बदन है तुंहारी बहन का ऊपर से तुम्हारा रास में मिलकर तो पूछो hi मत..

रमन ने आगे होकर रिमझिम के होंठों को चूम लिए और जब अलग हुआ तो रिमझिम बोली- ाचा जी अपनी बहन के बदन का स्वाद लेना छह रहे हो मेरे होंठो से.

रमन- अब क्या करें सीधे न सही ऐसे hi..

वो भी फुसफुसाते हुए बोलै...

रिम- सीधा भी ले सकते हो.

रमन- धत्त पागल हो क्या सीधा कैसे ले सकता हूँ.

रिम- जैसे मैंने लिया था..

रमन- नहीं ये ज़्यादा रिस्की हो जायेगा जाग गयी तो गड़बड़ हो जाएगी.

रिम- तुम मन कर रहे हो पर ये छोटू रमन तो कुछ और hi कह रहा है.

रिमझिम ने रमन के लुंड को मसलते हुए कहा...

रमन- वो जो कह रहा है वो नहीं हो सकता न.

Rim-are क्यों नहीं हो सकता मैंने भी तो छठा था अभी.

Raman-are नहीं तुम्हारी बात और है.

Rim-are डरो मत वो सो रही है चाहो तो चाट लो कुछ पता नहीं चलेगा गहरी नींद में है..

Raman-nahi यार वो जाग जाएगी.

Rim-dekhlo इससे ाचा मौका नहीं मिलेगा अब बाकि तुम्हारे ऊपर है..

रमन ने कुछ देर सोचा और फिर रिमझिम की और देखा और बोलै- पर शुरू कैसे करूँ.

Rim-ye हुई न बात कहीं से भी कार्डो शुरू, बस जल्दी करो..

पत्नी की बात सुनकर और सामने ख़ुशी का मखमली बदन देखकर रमन के मुँह में पानी आने लगा,

पर उसके अंदर दर भी था की अगर ख़ुशी जाग गयी तो क्या होगा, वहीं ख़ुशी भी आगे जो होने वाला था उसे सोच सोच कर तड़प भी रही थी और घबरा भी रही थी...

रिमझिम ने रमन का हौसला बढ़ाते हुए कहा,- जल्दी करो न नहीं जागेगी वो..

साथ hi बहन का बदन देखकर रमन से भी नहीं रुका गया और उसने हलके से अपने होंठ ख़ुशी के पेट पर रख दिए,

अपने पेट पर भाई के गरम होंठों का स्पर्श पते hi ख़ुशी के पूरे बदन में सनसनी दौड़ गयी उसको लगा की उसके मुँह से सिसकी निकल जाएगी जिसे उसने किसी तरह से संभाला.

रमन दर से कुछ देर तक यूँ hi रुका रहा, रिमझिम वहीं नंगी बैठी हुई दोनों भाई बहन की काम लीला देख रही थी साथ hi अपनी चूचियों को मसल रही थी...

शुरूआती हिचकिचाहट के बाद रमन का दर भी खुलता गया साथ hi ख़ुशी का मखमली बदन उसे बहकाने लगा, रमन धीरे धीरे से अपनी बहन के पेट को चूमने चाटने लगा जो की उसे अभी भी उसकी पत्नी के थूक और उसके खुद के रास से गीला लग रहा था, ख़ुशी बेचारी अंदर hi अंदर तड़प रही थी उसकव लिए अब और सहना मुश्किल होता जा रहा था.. बेचारी बुरी फांसी थी उसके बदन को उसका सागा भाई बिलकुल नंगा होकर चूम रहा था चाट रहा था और वो हिल तक नहीं सकती थी...

वहीं रिमझिम इस नज़ारे को देख देख कर दूर से hi गरम हो रही thi...aur अपनी छूट को सहला रही थी..

रमन धीरे धीरे से ख़ुशी के पूरे पेट और कमर को चाट रहा था अब उसके मन से सारा दर निकल चूका था अब वो भूल चूका था की ख़ुशी जाग भी सकती थी उसके मन में तो बस बहन का मखमली बदन छाया हुआ था जिसका वो स्वाद ले रहा था..

ख़ुशी बहुत कोशिश कर रही थी की वो सोने का नाटक जारी रखे पर उसके लिए मुश्किल होता जा रहा था, और तभी रमन ने अपनी जीभ उसकी नाभि में घुसा दी और न चाहते हुए भी ख़ुशी के मुँह से आह्हः निकल गयी जिसके सुनते hi रमन की गांड फैट गयी उसने तुरंत मुँह पीछे कर लिया रिमझिम भी एक पल को हैरान हो गयी पर ख़ुशी भी क्या करती उससे रुका नहीं गया रमन की नज़र ख़ुशी के चेहरे पर hi थी पर ख़ुशी ने सिसकी के बाद अपना नाटक जारी रखा और फिर दूसरी और करवट लेकर लेट गयी और रिमझिम और रमन की और पीठ कर्ली...

ख़ुशी का दिल ज़ोरो से धड़क रहा था जो भी अभी हुआ उसे सोच सोच कर, वहीं ख़ुशी के पलटने पर रमन ने चैन की सांस ली, उसे लगा आज to.bach hi गए...

इसके बाद रमन की तो हिम्मत नहीं थी की वो ख़ुशी को छुए भी वहीं रिमझिम ने भी सोचा की एक hi बार में ज़्यादा नहीं होना चाहिए जितना हुआ बहुत है. दोनों भाई बहन के लिए, हाँ पर रिमझिम ने एक बार और पति से अपनी चुदाई करवाई और फिर दोनों सो गए वहीं ख़ुशी भी आखिर थक हारकर सो गयी...

चोदामपुर

खैर शाम हुई सब थके हरे घर आये, सभ्य से ज़िद्द करके कर्मा की नयी तै यानि संतो देवी ने खाना बनाने की ज़िम्मेदारी खुद ली थी साथ hi ये वचन भी लिए था की अब से जब तक वो यहाँ पर हैं शाम का खाना वही बनाया करेंगी..

खैर शान्तो देवी ने खाना बनाया साथ hi ममता राजन और पल्ली को भी बुलाया गया सबने पेट भर खाया और संतो देवी की तारीफ भी हुई,

खैर अब पेट तो सबका भर गया था पर अब ये फैसला होना था की खेत पर कौन सोयेगा, जिसके लिए सबसे पहले कर्मा ने हामी भरी पर नीलेश ने मन किया की हमारे होते हुए बच्चे क्यों सोयेंगे खेत पर, हम hi सोयेंगे..

खैर वहां सोने के पीछे नीलेश के मन में कुछ और योजना चल रही थी उन्होंने सोचा ये सही मौका है ममता को खेत पर बुला लूंगा और पूरी रात मज़े लूंगा...

यही सोच कर नीलेश ने सबसे थोड़ा अलग होकर राजन को फ़ोन किआ और अपनी योजना के बारे में बताया

जिस पर राजन ने कहा वो भी चलता है वहीं सो जायेगा पर पल्ली को घर में अकेला कैसे छोड़ सकते थे रात भर इसलिए अंत में यही फैसला हुआ की ममता रात भर खेत में नीलेश के पास रहेगी और सुबह जल्दी hi आ जाएगी.. वहीं राजन ने कहा क्या हुआ पल्ली को छोड़ नहीं सकते तो, मेरी बिटिया का मुँह hi बहुत है मेरे लिए..

खैर रात की पूरी योजना बनाकर नीलेश सबके साथ जाकर बैठ गए, नीलेश को अभी से अपना लुंड कड़क होता महसूस हो रहा था.. और कुछ देर में बिलकुल कड़क भी हो गया था नीलेश खुद हैरान जो गए की आज बहुत बेसब्र हो रहा है ये...

इधर सभ्य ने कर्मा से कहा की तब तक खेत पर बिस्तर लगा आये पापा के लिए ये सुनकर कर्मा खत और बिस्तर लेकर चला गया,

वहीं तब तक सभ्य ने सबके लिए दूध निकल दिया और फिर सबको देने लगी, दूध देते हुए hi सभ्य की नज़र पति के पाजामे में बने तम्बू पर पड़ी..

खैर उसने सबको आगे दूध दिया और फिर नीलेश से बोली- सुनो वो मोटा वाला कम्बल उतर दो अलमारी के ऊपर से वही लेकर जाना रात को मौसम ठंडा हो जाता है.

नीलेश- ठीक है अलमारी के ऊपर है न..

सभ्य- हाँ..

ये सुनकर सुनकर नीलेश उठे और अपने कमरे में आ गए सभ्य भी उनके पीछे पीछे आई और आते हुए दरवाज़ा भी भिड़ा दिया कमरे का..

इधर जैसे hi नीलेश ने अलमारी से कम्बल उतरने के लिए अपने हाथ ऊपर बढ़ाये तभी उनका पजामा उनकी कमर से नीचे सरकता हुआ महसूस हुआ जिसे पकड़ने के लिए तुरंत उनके हाथ बापिस आ गए,

और तुरंत उन्होंने नीचे देखा तो चौंक गए क्यूंकि नीचे उनकी पत्नी घुटनो पर बैठी थी और अब तक उसने उनका लुंड निकल कर अपने हाथ में पकड़ लिया था..

नीलेश- अरे टुम ये क्या कर रही हो .. सब बहार हैं कोई आ जायेगा

नीलेश ने खुश होकर थोड़ा हैरानी जताते हुए कहा..

सभ्य- इसे ऐसे लेकर जाते सोने तो ये सोने देता तुमको... और हमने दरवाज़ा भिड़ा दिया है.

ये कहकर सभ्य ने नीलेश के लुंड के टोपे पर अपनी जीभ फिरै...

नीलेश- ahhhhhhhhhh ुहममम कह तो तुम ठीक रही हो पर क्या करते... पर तुमने कैसे जान लिया

सभ्य- जब दूध देने गयी थी तब देखा, पाजामे में इतना बड़ा तम्बू बनाकर घूमोगे तो कौन नहीं देखेगा.. ाचा हुआ हमने देख लिए घर में किसी और की नज़र पद जाती तो.

ये कहकर सभ्य ने पति के लुंड को बापिस मुँह में भर लिया और चूसने लगी वैसे तो वो ये अपने पति को शांत करने के लिए कर रही थी पर न जाने क्यों पति का खड़ा लुंड देख कर वो खुद को रोक नहीं पाई थी और उसकी छूट पनियाने लगी थी पर वो जानती थी की अभी छूट की प्यास बुझाना तो संभव नहीं पर कंस काम पति को तो शांत कर सकती है.. न जाने क्यों वो आज ज़्यादा hi उत्तेजित महसूस कर रही थी शायद जो कुछ बीते दिनों हुआ और फिर आज ममता के साथ भी.

वहीं नीलेश मस्ती से अपनी बीवी के गरम मुँह और जीभ का स्वाद ले रहे the..aur पत्नी को पूरी लगन से उनका लुंड चूसते हुए देख रहे थे





वहीं अंदर पति पत्नी का खेल चल रहा था तो आंगन में शालू और संतो देवी बतिया रही थी.

संतो - का बताएं लल्ली उम्र का असर पढ़ने लगा है अब .

शालू- अभी कहाँ जीजी अभी तो तुम जवान हो,

संतो- धत्त अब कहाँ जवान बच्चे बड़े हो गए है अब तो बस बुढ़ापा hi है.

शालू- अरे नहीं जीजी अभी भी मस्त हो तुम जीजाजी छोड़ते नहीं होंगे..

शालू ने उसे छेड़ते हुए कहा...

संतो - अरे रे बिलकुल ब्यौरा हो गयी हो कैसी बात करती हो बच्चे सुन लेंगे अभी तो..

संतो ने झूठा गुस्सा दिखते हुए कहा..

शालू को बच्चो का नाम सुनकर जैसे पिछले कुछ दिन याद आ गए की वही बच्चे क्या क्या कर सकते हैं.

संतो- अरे लल्ली एक चीज़ तो हम भूल hi गए

शालू- का हुआ जीजी.

संतो- अरे धुले कपडे रखे थे उन्हें डाला तो है नहीं.. बदबू मार जायेंगे.

शालू- अरे जीजी तुम भी ऐसे बोल रही हो जैसे जाने क्या गजब हो गया हम दाल देते हैं अभी.

Santo-haan गुड़िया फैला आ जरा छत पर.

शालू - कहाँ रखे हैं जीजी कौनसे बाथरूम में.

Santo-are बन्नो के कमरे वाला उसी में बाल्टी में रखे हैं..

शालू तुरंत उठकर बाथरूम में चली गयी कपडे उठाने, और कपड़ो की बाल्टी उठाकर वो घूमी hi थी की उसकी नज़र एक जगह पड़ी और वहीं रुक गयी..

बाथरूम का दूसरा दरवाज़ा जो सभ्य नीलेश के कमरे के अंदर खुलता था वो हल्का खुला हुआ था और शालू को जो अंदर का नज़ारा दिखा उसे देखकर वो ठिठक गयी.

उसने देखा की उसकी जीजी नीचे बैठकर जीजाजी का लुंड चूस रही है और जीजाजी आँखें बंद किये हुए इसका मज़ा ले रहे हैं. वैसे तो ये कोई बड़ी बात नहीं थी.

पर उसने मन में सोचा इन लोगो को भी चैन नहीं अभी घर में सब जाग रहे हैं और ये शुरू हो गए पर सोचा ाचा हाँ जीजाजी आज खेत पर सोयेंगे न शायद इसलिए.. पर ये सब सोचते हुए hi वो जीजाजी के लुंड को जीजी के मुँह में अंदर बहार होता हुआ देखे जा रही थी और उसे पता भी नहीं चला की अब उसका हाथ उसकी चूचियों को मसलने लगा. उसकी छूट उसे पनियति हुई महसूस हो रही थी, शालू का ध्यान जब इस पर आया तो उसने खुद को संभाला पर अंदर देखा तो जीजाजी जीजी के सर को पकड़े हुए अपने लुंड पर दबाये आहें भर रहे थे शालू समझ गयी की जीजाजी ने अपना रास जीजी को पीला दिया है, ये देखने के तुरंत बाद शालू वहां से निकल गयी..

पर न चाहते हुए भी वो उत्तेजित हो गयी थी और उसकी छूट में खुजली उसे साफ़ महसूस हो रही थी.

खैर उसने खुद का मन भटकने का सोचा और कपडे लेकर छत पर चली गयी.

छत पर कपडे फैलते हुए भी शालू के दिमाग में वही सब चल रहा था की क्या उसने सही किया है जीजी और बच्चों से गुस्सा होकर पर उसे कितना मज़ा आया था कर्मा अनुज यहाँ तक की जीजीई के साथ भी उसने ऐसा कभी महसूस नहीं किया था इतनी उत्तेजना इतना मज़ा... अह्ह्ह शायद यही वजह थी की वो दर गयी थी ये सब इतना गलत होते हुए भी उसे इतना ाचा क्यों लगा था..

शालू कपडे फैलते हुए यही सोच रही थी की उसे अचानक अपनी कमर पर पीछे से दोनों हाथ महसूस हुए और फिर पीछे से hi किसी ने उसे बाहों में भर लिए..

शालू पहले तो चौंकी फिर चेहरा घुमाकर देखा तो शांत हो गयी.

अनुज- क्या कर रही हो मौसी.

अनुज ने प्यार से पीछे से उसे गले लगते हुए कहा.

Shalu-kapde सूखा रही हूँ.

शालू ने बिना किसी भाव के जवाब दिया.

अनुज ने अपना सर उसके कंधे पर रख लिया और बोलै- मुझसे गुस्सा हो अब भी मौसी.

अनुज ने मासूम सा चेहरा बनाते हुए कहा..

शालू को उसकी मासूम सी आवाज़ सुनकर न चाहते हुए भी मुस्कराहट आ गयी वो चाहकर भी इन बच्चों से गुस्सा नहीं हो सकती थी वो दोनों को hi बहुत प्यार करती थी और उनसे गुस्सा रहना उसके लिए बहुत मुश्किल था और यही उसकी जीजी के लिए भी था गुस्से में उसने उन्हें कुछ भी कह दिया हो पर उसकी जीजी में उसकी जान बस्ती थी...

शालू ने अनुज के जवाब में कुछ नहीं कहा बस अपना एक हाथ उठाकर प्यार से उसका गाल सहला दिया..

अनुज मौसी की इस प्रतिक्रिया से खुश हो गया उसने सोचा मौसी अब मान गयी हैं और नाराज़ नहीं है...

इसी ख़ुशी में उसने खुश होते हुए मौसी को पीछे से जकड कर ऊपर उठा लिया और ख़ुशी से उसे घूमने लगा..

शालू दर से चीखने लगी..

शालू- अह्ह्ह्हह्हह अनुज ुताआर mujheeeeeeaaahhhhhhhhhhh चक्क्करररर आए जाएंगीीाह्ह्ह्ह..

अनुज सुनकर भी उसे घूमता रहा,

शालू - अह्ह्ह्हह्हह उतार कमीने अभी बताती हूँ tujhe...aahhh अनुज..

फिर अनुज ने जाकर छोड़ा तो शालू हांफ रही थी शांत होकर उसने तुरंत अनुज का कान पकड़ लिए.

शालू- बहुत मस्ती कर रहा है कमीने अभी गिर जाती मैं..

अनुज- आउउउच मौसी छोडो दर्द हो रहा है आह्हः छोडो..

Shalu-ab बता करेगा...

अनुज- नन्ना नहीं करूँगा पक्का वादा..

तब जाकर शालू ने उसका कान छोड़ा और अनुज को चैन आया..

शालू- अब आया मज़ा

शालू हँसते हुए बापिस कपडे फ़ैलाने लगी तो अनुज ने पीछे से बापिस उसे पकड़ लिया..

शालू- तू फिर शुरू हो गया दोबारा कान खींचू?

Anuj-ab वो थोड़े hi कर रहा हूँ... अब तो मैं ये करूँगा..

ये कहकर अनुज ने शालू की गर्दन को पीछे से चूम लिया साथ hi उसका पल्लू गिरा दिया और उसके पेट को मसलने लगा..

अनुज के ये करते hi शालू के बदन में सनसनी फ़ैल गयी वो बहकने lagi..wohin अनुज ने पीछे से अपना लुंड मौसी की बड़ी गांड में धंसा दिया और शालू को भी उसका लुंड कड़क उसकी गांड में चुभता हुआ महसूस हुआ.

शालू- अह्ह्ह्हह्हह अनुज..

अनुज- ुहममम मौसी

ये कहकर अनुज उसकी गर्दन और गालों को चूमने लगा.. साथ hi उसके नरम मुलायम पेट को भी मसल रहा था...

शालू को ऐसा लग रहा था जैसे उसका बदन उसके काबू में hi नहीं है वो अनुज के हाथों में बहकती जा रही थी और सबसे बड़ी बात की उसे ये सब ाचा लग रहा था..

अनुज का लुंड भी अब पूरी तरह औकात में आ चूका था और शालू को अपनी साड़ी के ऊपर hi चुभ रहा था.. अनुज ने मौसी को विरोध न करते देख आगे बढ़ने का सोचा और एक हाथ ऊपर लेकर मौसी के चेहरे को अपनी और घुमाया और अपने होंठ मौसी के होंठों पर रखे hi थे की नीचे से आवाज़ आई, अनुज के नाम की जिसको सुनते hi शालू को जैसे होश आया और उसने अनुज को धक्का देकर खुद से दूर कर दिया और कपडे फ़ैलाने लगी. वहीं अनुज मन hi मन बुदबुदाते हुए नीचे आ गया..

नीलेश अपनी पत्नी को अपना रास पिलाकर ख़ुशी ख़ुशी घर से निकले और खेत की और बढ़ गए, और जल्दी hi खेत पर पहुँच गए... वहां जाकर उन्होंने देखा की कर्मा ने उनकी खत पहले hi बिछा राखी थी बिस्तर लगा हुआ था पर कर्मा कहीं नहीं दिख रहा था..

उन्होंने सोचा कर्मा रस्ते में भी नहीं मिला और यहाँ भी नहीं है फिर गया कहाँ...

ये hi सोचकर वो इधर उधर देखने लगे फिर सोचा शायद खेत के दूसरी और होगा ये सोचकर खेत के दूसरी और गए पर वहां भी नहीं दिखा बापिस आ hi रहे थे की उन्हें जहाँ कटा अनाज इकठा रखा हुआ था उसके बीच से कुछ हरकत महसूस हुई उन्होंने सोचा कोई जानवर तो नहीं घुस गया उसे भागने के लिए वो आगे बढे और फिर करीब जाकर और घूमकर सामने से देखा तो सामने का दृश्य देखकर उनकी आँखें फटी की फटी रह गयी..

इसके आगे क्या हुआ अगली अपडेट में प्लीज कमैंट्स करके ज़रूर बताएं कैसी लगी अपडेट बहुत बहुत धन्यवाद्
 
यहाँ भी नहीं है फिर गया कहाँ...

ये hi सोचकर वो इधर उधर देखने लगे फिर सोचा शायद खेत के दूसरी और होगा ये सोचकर खेत के दूसरी और गए पर वहां भी नहीं दिखा बापिस आ hi रहे थे की उन्हें जहाँ कटा अनाज इकठा रखा हुआ था उसके बीच से कुछ हरकत महसूस हुई उन्होंने सोचा कोई जानवर तो नहीं घुस गया उसे भागने के लिए वो आगे बढे और फिर करीब जाकर और घूमकर सामने से देखा तो सामने का दृश्य देखकर उनकी आँखें फटी की फटी रह गयी..



अपडेट 166


नीलेश सामने का नज़ारा देखकर हैरान हो गए, चांदनी रात होने की वजह से उन्हें अधिकतर साफ़ दिख रहा था,

नीलेश ने देखा की अनाज के ढेर के बीच कर्मा खड़ा हुआ है उसका पजामा घुटनो पर है और उसके आगे एक औरत घोड़ी बानी हुई है जिसे वो दनादन छोड़ रहा है वहीं हैरानी की बात ये भी थी की उस औरत के सामने एक और कोई लड़का है जिसका झुक कर वो लुंड चूस रही है, उस लड़के के सामने होने की वजह से hi नीलेश को उस औरत का चेहरा नहीं दिख रहा था और न hi उस लड़के का..

नीलेश सोचने लगे की ये कौन हो सकती है क्यूंकि औरत की कद काठी साथ hi चाँद की चांदनी में उसका बदन देखकर ये तो समझ गए थे की ये ममता नहीं थी क्यूंकि ममता काफी गोरी और साफ़ रंग की है वहीं जो औरत सामने थी वो थोडीकली थी. वहीं पहले तो नीलेश को लगा था की कर्मा और अनुज होंगे पर लड़का भी अनुज नहीं था, हैरानी के साथ साथ नीलेश ये नज़ारा देखकर उत्तेजित भी हो रहे थे उनका आधा सोया लुंड फिर से जागने लगा था, साथ hi अपने बेटे को अपने सामने चुदाई करता देख वो थोड़ा अलग hi महसूस कर रहे थे..

पर साथ hi नीलेश के मन में ये सवाल भी घूम रहा था की आखिर ये औरत और लड़का है कौन.. नीलेश ने ये देखने के लिए दिमाग लगाया और धीते से पीछे होकर ढेर के दूसरी तरफ घूम कर गए और फिर किसी तरह जगह बनाकर झाँक कर देखा तो हैरान रह गए क्यूंकि कर्मा जिसे छोड़ रहा था उसका चेहरा तो नहीं दिखा क्यूंकि और का चेहरा उस लड़के के लुंड पर झुका हुआ और ढाका हुआ था पर उस लड़के को पहचान कर नीलेश ज़रूर हैरान हो गए क्यूंकि वो लड़का आज जो मज़दूर कटाई के लिए आये थे उनमे से hi एक था...

नीलेश की उत्तेजना हर पल बढाती जा रही थी साथ hi उन्हें समझ नहीं आ रहा था क्या करें उनका लुंड धोती में बिलकुल कड़क हो चूका था, नीलेश को रोज़ से ज़्यादा उत्तेजना हो रही थी उन्हें खुद को काबू करना मुश्किल हो रहा था,

वहीं दूसरी और चुदाई लगातार जारी थी.. नीलेश ने कुछ देर तक सोचा क्या करना चाहिए क्या नहीं और कुछ देर सोचने के बाद वो एक नतीजे पर पहुंचे और फिर एक गहरी सांस ली और धीरे धीरे कदम बढ़ाते हुए ढेर के अंदर चल दिए और फिर थोड़ा अंदर जाकर बोले- क्या हो रहा है ये सब?

ये सुनते hi कर्मा और बाकि दोनों की गांड पहात गयी.. और तीनो अलग हो गए...

जब तीनो अलग हुए तो नीलेश ने उस औरत को देखा और उसे देखकर नीलेश और हैरान हो गए..

कर्मा भी अपने पापा के दर की वजह से जल्दी से अपना पजामा ऊपर खींच कर सर झुकाये खड़ा था वहीं दोनों के हाल बेहाल थे. औरत किसी तरह अपने हाथों से अपनी छूट और छूछीयो की छुपाने की नाकाम कोशिश कर रही थी..





नीलेश- बोलेगा कोई क्या चल रहा था यहाँ..?

ये कहते हुए नीलेश की नज़र औरत के बदन पर hi थी वो काली ज़रूर थी पर उसका भरा बदन बड़ी बड़ी छुछियां देखकर नीलेश का लुंड धोती के अंदर ठुमके मार रहा था..

नीलेश ने थोड़ा कठोर शब्दों में बोलै तो वो लड़का बोलै- मालिक माफ़ कर दीजिये मालिक...

ये कहकर वो लड़का गिड़गिड़ाने लगा..

नीलेश - तू मुन्ना है न...

मुन्ना - ग ग मालिक.

नीलेश - और तू झुमरी..

हहहाँ मालिक औरत ने हकलाते हुए बोलै..

नीलेश- एक मिनट झुमरी मुन्ना तो तेरा लड़का है न, तू अपने लड़के के साथ hi मुँह कला कर रही थी इतनी आग लगी थी तेरे अंदर.. अपने बेटे से hi छुड़वा रही थी..

नीलेश ने ये बोलने के साथ hi अपने लुंड से रास की एक बूँद निकलती महसूस की, ये ख्याल से hi की माँ बेटे से चुद रही थी नीलेश का पूरा बदन सिहर गया...

नीलेश के ये बोलने पर झुमरी रोने लगी...

Nilesh-bass ये रोने धोने का नाटक मेरे सामने मत कर... कर्मा तू क्या कर रहा था इन लोगो के साथ कबसे चल रहा है ये..

कर्मा अपने पापा की झाड़ सुनकर थोड़ा दर गया और फिर बोलै- ये ये पहली बार हुआ है पापा पहले से कभी नहीं हुआ..

nilesh-kya हुआ है पूरी बात बता .

कर्मा- वो वो जब मैं बिस्तर लगाने आया और बिस्तर लगाने के बाद मुझे कुछ आवाज़ सुनाई दी वागल वाले खेत से तो मैंने देखा की मुन्ना झुमरी चची को घोड़ी बनाकर छोड़ रहा था मतलब ये दोनों लगे हुए थे...

कर्मा ने हकलाते हुए अपनी बात को बदला.

दोनों माँ बेटे नज़रें झुकाये कर्मा की बात सुन रहे थे और बीच बीच में नीलेश की और देख रहे थे...

नीलेश को मन hi मन उसकी बात पर हंसी आ गयी पर दबाते हुए बोले- फिर क्या हुआ..

कर्मा- मैंने इन्हे पकड़ लिए और बोलै ये सब क्या है.. तो ये लोग दर गए फिर झुमरी चची बोली की मैं भी इनके साथ कर सकता हूँ बस मैं किसी से बताऊँ न इनके बारे में, झुमरी चची के बदन को देखकर मुझे न जाने क्या हुआ मैं मान गया और फिर इन्हे यहाँ ढेर के बीच ले आया ताकि हमें कोई देख न सके...

और फिर हम तीनो लोग एक साथ करने लगे..

नीलेश ने एक ठहराव के बाद झुमरी की और देखा और बोले- क्या ये सच है झुमरी.

झुमरी बहुत डरते हुए और रट हुए बोली- ग ग मालिक, मालिक माफ़ कार्डो अब से हम ऐसा कभी नहीं करेंगे, गलती हो गयी मालिक माफ़ कार्डो, तुम चाहो तो हमारी मज़दूरी भी मत देना पर माफ़ कार्डो ये सब किसी को पता लग गया तो हमारा जीवन बर्बाद हो जायेगा.

नीलेश- बस रोना बंद कर झुमरी, और ये सब अपने बेटे के साथ चुदाई कारण से पहले क्यों नहीं सोचा..

झुमरी- माफ़ कर दीजिये मालिक आगे से कभी ऐसी गलती नहीं होगी..

ये कहते हुए झुमरी आगे आकर नीलेश के पेअर पकड़ कर रोने लगी,

नीलेश जिसकी हालत पहले से hi ख़राब थी ऊपर से झुमरी बिलकुल नंगी उनके पैरों को पकड़ रो रही थी, उसके झुके होने की वजह से चांदनी रत में उसका भरा हुआ सांवला बदन उसके बड़े बड़े चूतड़ चमक कर नीलेश को नज़र आ रहे थे.

नीलेश - अरे बस बस ये सब मत कर.. देख झुमरी मुन्ना और कर्मा बच्चे हैं जवानी के जोश में सही गलत भूल सकते हैं पर तुझे तो दुनियादारी की समझ है सही गलत का ज्ञान है.

झुमरी- जी मालिक, हम बहक गए थे मालिक आगे से ऐसी गलती नहीं होगी इस बार माफ़ कर दीजिये.

कर्मा का लुंड भी अब दोबारा खड़ा होकर उस तंग कर रहा था पर वो अपने पापा और झुमरी की बातों पर ध्यान लगाए हुए था..

नीलेश- गलती हुई है तो उसका नतीजा भी झेलना पड़ेगा और तुझे अकेले को hi नहीं मुन्ना को भी..

झुमरी- नहीं मालिक इसमें मुन्ना की कोई गलती नहीं है सब हमारी hi है, माफ़ कर दो मालिक..

नीलेश- एक मिनट..

ये कहकर नीलेश पीछे एक ढेर पर जाकर बैठ गए और बोले- झुमरी और मुन्ना दोनों आगे इधर आओ..

दोनों माँ बेटे डरते हुए आगे नीलेश के कहे अनुसार आये..

नीलेश- झुमरी नीचे बैठ यहाँ

नीलेश ने झुमरी की बाहन पकड़ कर उसे अपने सामने बिठा लिया घुटनो पर. और फिर बोले- मुन्ना अब तू हमें बताएगा की ये सब शुरू कैसे हुआ कबसे तू अपनी माँ को छोड़ रहा है. सब कुछ. समझा??

मुन्ना ने एक बार डरते हुए अपनी माँ को देखा और फिर बोलै- जी मालिक.

नीलेश- बढ़िया, अब झुमरी ये है तेरी सज़ा.

ये कहकर नीलेश ने जो किआ उससे सब की आँखें चौड़ी हो गयी..

नीलेश ने अपनी धोती के दोनों पैट अलग किये और अपने खड़े लुंड को बहार निकल लिए..

झुमरी मुन्ना और कर्मा तीनो इस हरकत से चौंक गए..

नीलेश- देख क्या रही है झुमरी तू हमारा लुंड चूसेगी तब तक मुन्ना हमें सब कुछ बताएगा.

झुमरी- नहीं मालिक हमें माफ़ कर दीजिये हमें जाने दीजिये.

नीलेश- क्यों कर्मा को तो तूने यही प्रस्ताव दिया था न तो हमारे लिए क्यों नहीं.. क्यों मुन्ना तू hi समझा अपनी माँ को..

मुन्ना ने एक बार अपनी माँ को देखा और फिर दोनों माँ बेटे की आँखें मिली..

नीलेश- झुमरी जल्दी कर नहीं करना तो बता मैं चला ये कहकर नीलेश उठने को हुए..

की इतने में hi झुमरी ने लपक कर उनके लुंड को मुँह में भर लिए और चूसने लगी..

ये सब देखकर कर्मा का लुंड तो बिलकुल कड़क हो गया उसने सोचा नहीं था उसके पापा ऐसे करेंगे...

झुमरी को अपना लुंड चूसते देख नीलेश आराम से बैठ गए और झुमरी के सर पर प्यार से हाथ फिरते हुए बोले - अह्ह्ह बहुत बढ़िया झुमरी, मुन्ना देख तेरी माँ ने तो अपना काम शुरू भी क्र दिया अब तू भी शुरू हो जा...

मुन्ना ने अपनी माँ को लुंड चूसते हुए देखते हुए बोलना शुरू किया उसका लुंड एक बार फिर से तन गया था...

वहीं कर्मा का भी यही हाल था..

मुन्ना- ुहममम मालिक वो पहले तो हम अम्मा के बारे में ऐसा कभी सोचते भी नहीं थे...

मुन्ना अपनी अम्मा को नीलेश का लुंड चूसते हुए देखकर बोलता जा रहा पर साथ hi उसका लुंड एक बार फिर से पूरी तरह तन चूका था वो किसी तरह से खुद को अपने लुंड को पकड़ने से रोके हुए था,

खैर मुन्ना ने तो रोका हुआ था पर कर्मा से नहीं रोका गया, उसका लुंड बहार था और वो अपने बाप की रास लीला देखते हुए उसे मुठिया रहा था, वैसर कर्मा को ज़्यादा हैरानी नहीं हो रही थी क्यूंकि वो जनता था उसके पिता कितने रंगीले मिजाज़ के हैं और जब उन्होंने अपनी बहन को नहीं छोड़ा तो ये तो मज़दूर है.

नीलेश से भी मुन्ना की बातों पर ध्यान देना मुश्किल हो रहा था क्यूंकि झुमरी का गरम मुँह लुंड पर कमाल कर रहा था.

मुन्ना- वो तो सब गाओं के लड़कों की वजह से ये सब हुआ..

nilesh-uhhm लड़को की वजह से वो कैसे..

मुन्ना- वो सब मुझे चिढ़ाते थे की तेरी अम्मा की छुच्छी कितनी बड़ी हैं , चूतड़ कितने बड़े हैं, तेरे बाप के तो मज़े hi मज़े हैं, फिर बोलते थे पर इसका बाप तो दारू के नशे में डूबा रहता है वो क्या कर पता होगा, मुन्ना तू hi अब अपनी अम्मा को अपने गन्ने का पानी पीला दे नहीं तो तेरी अम्मा का खेत कोई और जोट के चला जायेगा..

रोज़ रोज़ मुझे ऐसी बातों से चिढ़ाते थे पर न जाने क्यों उनकी बातें मेरे दिमाग में भी घूमने लगी थी.. मैं न चाहते हुए भी अम्मा के बदन को उनकी चूचियों को देखने लगा और मेरा लुंड भी अम्मा को देखकर खड़ा हो जाता..

नीलेश- फिर

नीलेश ने झुमरी के सर को अपने लुंड पर दबाते हुए पुछा पर मुन्ना का कोई जवाब नहीं आया तो नीलेश ने मुन्ना की और देखा तो पाया मुन्ना का ध्यान अपनी माँ के नंगे बदन पर है और वो एक हाथ से अपने लुंड को मुठियाते हुए देख रहा है...

नीलेश- मुन्ना, मुन्ना?

मुन्ना जैसे होश में आता है और बोलता है- जी मालिक.

नीलेश- लगता है तुझसे सहा नहीं जा रहा पर इसमें तेरा कोई दोष नहीं तेरी अम्मा चीज़ hi ऐसी है.. एक काम कर इधर आ मेरे सामने .

मुन्ना नीलेश के कहे अनुसार सामने आ कर खड़ा हो गया,

नीलेश- झुमरी देख तेरा बीटा कितना परेशां है उधर घूम जा और अपने इस गरम मुँह के जादू से उसे शांत कर..

झुमरी ये सुनके थोड़ा हिचकिचाई

झुमरी- मालिक नहीं.. मैं नहीं.

नीलेश- जैसा कहा है वैसा कर झुमरी देख नहीं रही तेरा बीटा, तेरा मुन्ना कितनी तकलीफ में है... क्यों मुन्ना तू नहीं चाहता तेरी अम्मा तेरी मदद करें.

मुन्ना - गग ग मालिक चाहता हूँ..

nilesh-dekh सुन लिए न झुमरी अब चल घूम जा..

इधर ये सब होता देख कर्मा से भी नहीं रहा गया और वो भी बोल पड़ा- पापा मुझसे भी नहीं रहा जा रहा..

नीलेश- झुमरी देख कर्मा भी तेरे बेटे जैसा है उसे भी शांत कर .

ये कहकर नीलेश ने कर्मा को भी इशारा किआ तो वो भी फुर्ती में नीलेश के सामने जाकर खड़ा हो गया, झुमरी ने आगे कुछ नहीं बोलै और नीलेश के सामने से घूम कर कर्मा और मुन्ना की और घूम गयी और फिर झुककर कर्मा का लुंड मुँह में ले लिए और अपने बेटे का हाथ में और फिर अगले hi पल बदल कर बेटे का मुँह में और कर्मा का हाथ में..

झुमरी के घूमने से उसके बड़े बड़े चूतड़ नीलेश के सामने आ गए जिन्हे देखकर hi नीलेश का लुंड फूलने लगा और नीलेश ने भी बिना किसी देरी किये झुमरी के पीछे जाकर जगह ली और अपने लुंड को पकड़ कर झुमरी की छूट के द्वार पर लगा दिया, झुमरी के झुके होने की वजह से नीलेश को और आसानी हो गयी और अगले hi पल झुमरी का मुँह कर्मा के लुंड से हैट गया और उसके मुँह से एक आह्हः निकली जिसके साथ hi नीलेश का लुंड उसकी गरम रसीली छूट में समां गया...

मुन्ना ने जब ये देखा तो उसके मुँह से भी एक आह निकल गयी वहीं कर्मा भी खुश था की अंत में उसे भी शामिल होने का मौका मिल रहा था..

नीलेश- मुन्ना अब आगे तो बता..

नीलेश ने झुमरी की कमर पकड़कर उसे छोड़ते हुए उसके बेटे से कहा.

मुन्ना- हं ग ग मालिक उह्ह्ह.. वो फिर मेरा मन भी करने लगा अम्मा के साथ वो सब करने का उन्हें नंगी देखने का..

ऐसे hi रोज़ मैं अम्मा को नंगी छुपकर नहाते देखता और मुठियाता था...

मैं ये भी देखता की अम्मा और बापू चुदाई करते हैं की नहीं पर बापू तो रोज़ दारू पि के बेहोश हो जाता था,

जिससे मुझे और आसानी हो गयी... एक रात को अम्मा एक करवट पर सो रही थी पर अम्मा की साड़ी और पेटीकोट कमर तक उठ गए थे जिससे उनके नंगे चूतड़ मेरे सामने आ गए थे अम्मा को उस हालत में देखकर मुझसे नहीं रहा गया और मैंने जल्दी से लुंड पर खूब सारा तेल लगाया और अम्मा के पीछे नंगा लेट गया और अपना लुंड पीछे से लगाकर एक्ज़ोर का धक्का देकर घुसा दिया...

इसके साथ hi झुमरी ने उसका लुंड मुँह से निकला और मुन्ना की बात को बीव्ह में काटते हुए बोली- और मालिक इस मुये ने ये भी नहीं देखा की इसका लुंड कहाँ घुस रहा है छूट में घुसाने की जगह सीधा गांड में घुसा दिया था, मेरी तो एक पल को जान ही निकल गयी थी... पर ये धक्के पर धक्के लगाने लगा.. पहले तो सोचा इसे खूब पीतून चिल्लाऊं की अपनी माँ के साथ ये सब क्यों कर रहा है पर इतने दिनों की पति ने प्यासा छोड़ा हुआ था साथ hi इसका लुंड गांड से सही अंदर बहार हो रहा था उसकी गर्मी से मैं बहक गयी और खुद को समझा लिया की अब लुंड जब अंदर घुस hi चूका है तो एक बार घुसे या चार बार क्या फ़र्क़ पड़ता है. और फिर तबसे hi ये सब चल रहा है...

नीलेश- भाई तुम दोनों की कहानी ने तो हमारा मूड hi बना दिया..

नीलेश ने दो तीन करारे झटके झुमरी की छूट में लगते हुए कहा..

कर्मा- हाँ पापा और मुन्ना तो बड़ा तेज़ निकला पहली बार में hi अपनी अम्मा की गांड मारली...

मुन्ना- वो ग मालिक ऐसा कुछ नहीं है..

नीलेश - अब शर्माना छोड़ और इधर लेट जा यहाँ पीठ के बल और झुमरी चढ्ज्या अपने बेटे के मुसल पर हम भी तो देखें माँ बेटे की चुदाई..

नीलेश की बात सुनकर और पहले से hi उत्तेजित माँ बेटे ने देर नहीं की और तुरंत मुन्ना लेट गया और झुमरी ने उसके ऊपर आकर उसके लुंड को अपनी छूट में ले लिए और अपने भरी चूतड़ों को उस पर पटकने लगी..

नीलेश और कर्मा दोनों hi इस कामुक माँ बेटे की चुदाई को देखते हुए अपने लुंड मुठिया रहे थे..

उधर दोनों माँ बेटे एक बार फिर से मस्त होकर चुदाई का आनंद लेने लगे..

पर दोनों बाप बेटे से ज़्यादा देर रुका नहीं गया और नीलेश ने पहल की और मुन्ना और झुमरी की टैंगो के बीच में जाकर जगह बनाई.. वहीं कर्मा ने अपने पापा की देखा देखि आगे कदम बढ़ाया और अपना लुंड झुमरी के चेहरे के आगे कर दिया जिसे झुमरी ने तुरंत मुँह में भर लिए वहीं मुन्ना नीचे से अपनी मम्मी को जकड़कर सटासट छोड़ रहा था....

नीलेश ने झुमरी के दोनों फैले हुए चूतड़ देखे और फिर अपने लुंड पर थूक लगाया और आगे होकर अपने लुंड को झुमरी की गांड के छेड़ पर टिका कर एक धक्का मारा और टोपे को अंदर घुसा दिया...

झुमरी ने कर्मा का लुंड मुँह से निकला और बोली - ahhhhhhhhhh maaaahhhhhhhhhhhh मालिक अह्ह्ह...

नीलेश- अह्ह्ह क्या कासी गांड है रे तेरी झुमरी... अह्ह्ह्ह मुन्ना आजा साथ में छोड़ते हैं तेरी अम्माह को .

मुन्ना- गग मालिक

मुन्ना ने भी जोश में आते हुए कहा..

नीलेश ने धीरे धीरे करके पूरा लुंड झुमरी की गांड में घुसा दिया और उसके बेटे के साथ ले बनाकर उसकी दोहरी चुदाई करने लगे.





वहीं कर्मा ने भी अपना लुंड दोबारा झुमरी के मुँह में फंसा दिया और झुमरी के तीनो छेड़ एक साथ बंद कर दिए...

नीलेश- ahhhhhhhhhh ुहम्म मज़ाआ आ रहा है Jhumri..ahhh एक बेटे के साथ मिलकर उसकी माँ छोड़ने का एहसास hi अलग है अह्ह्ह्ह झुमरी...

कर्मा- हाँ पापा झुमरी चची ने तो आज मज़ा hi करवा दिया.

मुन्ना- अरे कर्माह भैया मेरी अम्मा चीज़ hi ऐसी है

मुन्ना ने जोश में आते हुए अपनी माँ को छोड़ते हुए कहा...

झुमरी बेचारी क्या कहती वो तो बस तीनो तरफ से लुंड की मार झेल रही थी...

जहाँ उसका बीटा उसकी छूट और नीलेश उसकी गांड को बेरहमी से छोड़ रहे थे वहीं कर्मा उसके मुँह को उतने hi जोश के साथ छोड़ रहा था..





कर्मा झुमरी के सर को अपने हाथ से थम कर अपने लुंड जो उसके गले तक दाल कर अंदर बहार कर रहा था झुमरी भी पहली बार ऐसा कुछ महसूस कर रही थी जब एक साथ उसके अंदर तीन तीन लुंड अंदर बहार हो रहे थे...

और सिर्फ झुमरी के लिए hi नहीं मुन्ना के लिए भी ये एक बहुत hi अनोखा अनुभव था अपनी अम्मा को किसी और के साथ मिलकर छोड़ने से उसे एक अलग hi रोमांच मिल रहा था... उसी रोमांच से उसका लुंड माँ की छूट में. फूलता जा रहा था...

खैर टिहरी चुदाई झुमरी ज़्यादा देर तक नहीं सह पाई और कुछ hi देर में थरथराने लगी और झड़ने लगी.. अपनी अम्मा को झड़ते महसूस कर मुन्ना भी अपना काबू खोने लगा और बोलै- अह्ह्ह्ह अम्मा मेरा निकलने वाला है अह्ह्ह्ह..

नीलेश ने ये सुनते hi झुमरी की गांड से लुंड निकला और उठ खड़े हुए और झुमरी को भी मुन्ना के लुंड से पकड़ कर उठा लिया... कर्मा का लुंड भी उसके मुँह से निकल गया

नीलेश- मुन्ना अपनी अम्मा को अपना पानी पीला.

मुन्ना फुर्ती में उठा और अपना लुंड अपनी अम्मा के मुँह में घुसा दिया और एक लम्बी ahhhhhhhhhh के बाद गुर्राते हुए अपनी अम्मा के मुँह में अपनी पिचकारी छोड़ने लगा जिसे उसकी अम्मा जातक गयी... झड़ने के बाद मुन्ना पीछे होकर ढेर के सहारे बैठ गया वहीं झुमरी नीचे लेट कर हांफ रही थी...

कर्मा ने झुमरी को उठाया और अनाज के एक ढेर पर लेजाकर लिटा दिया और झुमरी को एक तरफ करवट लेकर लिटाकर खुद उसके पीछे जाकर लेट गया और अपना लुंड झुमरी की गांड में पीछे से घुसा जार उसकी गांड मरने लगा... वहीं जब बीटा शुरू हो गया तो बाप कैसे पीछे रहता नीलेश भी आगे आये और झुमरी के सर को अपनी गॉड में रखकर बैठ गए बाकि का काम झुमरी समझ गयी और नीलेश के कड़क लुंड को मुँह में भर लिया,

एक बार फिर से बाप बेटे मिलकर झुमरी के गरम छेदों का आनंद लेने लगे.. झुमरी बाप बेटे से छोड़ने के एहसास से एक बार फिर से उत्तेजित हो गयी और अपनी छूट को अपने हाथ से सहलाने लगी साथ hi उसकी गांड में कर्मा का लुंड अंदर बहार हो रहा था..





मुन्ना बैठा हुआ अपनी अम्मा को बाप बेटे को एक साथ खुश करते हुए देख रहा था

कर्मा- ahhhhhhhhhh झुमरीईईई चचईई अह्हह्ह्ह्ह क्या गंडड है तुम्हारी कर्मा पीछे से झुमरी की गांड मरते हुए बोलै..

झुमरी क्या जवाब देती बेचारी के गले तक कर्मा के बाप का लुंड घुसा हुआ था तो सिर्फ एक ुहम्म्म्म की आवाज़ निकल दी.

कर्मा ने आगे हाथ लेकर झुमरी के बड़े बड़े तरबूज़ जैसी चूचियां को पकड़ लिया और उन्हें मसलने लगा साथ hi उस्क्स लुंड तो झुमरी की गांड का मेहमान बना hi हुआ था.

नीलेश- ahhhhhhhhhh सच में झुमरी क्या मस्त बदन है तेरा तुझे देखकर तो हम खुद को रोक नहीं पाए.

सामने बैठा मुन्ना अपनी अम्मा की तारीफ और चुदाई देखते हुए अपने लुंड को फिर से सहला रहा था...

कर्मा- ओह्ह्ह अह्ह्ह्ह चचईई.

नीलेश- अरे कर्मा ज़रा झुमरी को अपने ऊपर ले हमें भी इसकी गरम छूट का मज़ा लेने दे.

कर्मा ने नीलेश के कहे अनुसार तुरंत झुमरी को पकड़ कर सीधा हो गया और झुमरी उसके ऊपर आ गयी जिसके होते hi नीलेश तुरंत झुमरी और कर्मा की टैंगो के बीच आये और फिर झुमरी की टैंगो को ऊपर उठाकर अपने लुंड को पकड़ा और झुमरी की गरम छूट में पेल दिया.

और कुछ hi पालो में दोनों बाप बेटों ने ले पकड़ ली और झुमरी को छोड़ने लगे...





बाप का लुंड छूट में और बेटे का गांड में पाकर और उनके घर्षण के एहसास से झुमरी तो पागल सी होने लगी..

वहीं कर्मा और नीलेश के लिए भी यर एक बेहद उत्तेजित करने वाला एहसास था की दोनों बाप बेटे मिलकर एक साथ एक औरत की चुदाई कर रहे हैं.. नीलेश को एक बहुत hi ाचा और गर्वान्वित एहसास हो रहा था. वहीं कर्मा को भी ऐसा लग रहा था की वो अपनर पापा के करीब आ गया है.

नीलेश जानते थे की इसके बाद उनके और कर्मा के रिश्ते के बीच एक नया अध्याय जुड़ जायेगा....

इसी उत्तेजना और रोमांचक एहसास ने दोनों को जल्दी hi शिखर पर पहुंचा दिया और दोनों ने hi एक साथ गुर्राते हुए झुमरी के छेदों को अपने अपने पानी से भर दिया.. झड़ने के बाद पहले नीलेश उठे फिर झुमरी और कर्मा.. मुन्ना ने आकर अपनी अम्मा को संभाला...

नीलेश- भाई आज तो हमें मज़ा hi आ गया, झुमरी तुम्हारी बात को हम छुपा कर hi रखेंगे पशर ध्यान रखो की ऐसे खुले में न किआ करो कोई भी देख लेगा.

झुमरी- ग मालिक मैं ध्यान रखूंगी पर आप नाराज़ तो नहीं हैं न.

नीलेश- नहीं नहीं बिलकुल नहीं नाराज़ तो बिलकुल नहीं है और कर्मा इन दोनों को कल अकेले में हज़ार हज़ार रुपये भेंट के रूप में कल दे देना, पर सबके सामने नहीं अकेले में.

नीलेश ने अपने कपडे पहनते हुए कहा..

कर्मा- ग पापा.

ये बात सुनकर झुमरी और मुन्ना दोनों खुश हो गए.

झुमरी- बहुत बहुत धन्यवाद् मालिक. आप माहि बाप हो.

झुमरी ने अब तक साड़ी ब्लाउज लपेट लिया था.

मुन्ना- धन्यवाद् मालिक.

नीलेश - अरे बस अब जाओ तुम दोनों.

मुन्ना- अरे अम्मा वो अपनी खास चीज़ करके दिखाओ न मालिक को वो खुश हो जाएंगे.

झुमरी- धत्त्त यहाँ कैसे.

नीलेश- क्या चीज़ है मुन्ना.

मुन्ना - आप कहें तो करके दिखाएं मालिक.

नीलेश- हाँ दिखाओ न.

झुमरी- अरे मुन्ना यहाँ नहीं. कपडे ख़राब हो जायेंगे.

Munna-are घर जाकर तो वैसे भी बदलोगी hi और अम्मा मालिक ने हमें भेंट देने का वडा किआ तो हमें भी उन्हें देना चाहिए न.

ये कहकर मुन्ना ने अपनी अम्मा को बाहन से पकड़ा और अनाज के ढेर से बहार खेत के कोने पर ले गया.

मुन्ना- आओ मालिक

और फिर वहां लेजाकर अपनी अम्मा को नीचे घुटनो पर बैठा दिया. और फिर धोती से अपना लुंड बहार निकला.

कर्मा और नीलेश दोनों hi ध्यान से दोनों माँ बेटे को देख रहे थे की क्या करने वाले हैं.

मुन्ना ने अपनी जगह अम्मा के आगे लेकर एक बार नीलेश और कर्मा को देखा और फिर अगले hi पल उसके लुंड से मूट की धार निकलने लगी जो जाकर सीधा उसकी अम्मा के बदन से टकराई और उसे भिगोने लगी..

बेटे को माँ पर मोटे हुए देखकर कर्मा और नीलेश दोनों hi हैरान हो गए साथ hi इस नज़ारे ने उन्हें उत्तेजित भी कर दिया. मुन्ना की मूट की धार झुमरी क्र बदन को पूरी तरह भीगा रही थी उसके कपडे बेटे के मूट में भीग कर उसके बदन से चिपक गए थे.

कुछ hi देर में मुन्ना का मूतना बंद हुआ तो झुमरी आधे से ज़्यादा भीगी हुई थी और मुन्ना के चेहरे पर एक बड़ी सी मुस्कान थी..

मुन्ना के हटने पर नीलेश और कर्मा आगे बढे बिना कुछ बोले नीलेश ने अपने लुंड को एक बार फिर धोती से बहार निकका और हाथ से पकड़ कर उसका निशाना झुमरी की और किया और अगले hi पल उनके लुंड से भी मूट की धार निकल कर झुमरी को भिगोने लगी.. मुन्ना बगल में खड़ा होकर अपनी अम्मा को किसी और के मूट से नहाते हुए देख रहा था, झुमरी तो अपने बदन पर गरम पेशाब के एहसास से hi गंगना रही थी.

नीलेश ने अपना निशाना झुमरी के चेहरे की और बनाया हुआ था, और उनके पेशाब की धार झुमरी के चेहरे को भीगा रही थी कर्मा ने भी अपने पापा की देखा देखि लुंड बहार निकल लिए और अपने पापा की hi तरह उनकी धार से धार मिलकर झुमरी के चेहरे पर मूतने लगा, नीलेश ने ये देख कर्मा की और देखा और मुस्कुराये पर अब नीलेश का मूट हल्का हो गया तो कर्मा ने भी मूतना बंद किआ और एक कदम आगे बढ़ा कर अपने लुंड को पकड़ा और झुमरी के हो होंठों पर टोपे को घिसने लगा जिससे झुमरी ने तुरंत hi मुँह खोल कर कर्मा के लुंड को मुँह में भर लिए...

कर्मा ने झुमरी के मुँह में लुंड घुसाया और फिर गहरी सांस ली जिसके बाद झुमरी के मुँह से अजीब सी आवाज़ आई और उसके गाल फूलने लगे और कुछ hi पलों में उसके मुँह से कर्मा के लुंड के इर्दगिर्द से कर्मा का पेशाब बहार आकर गिरने लगा कर्मा झुमरी के मुँह में मूट रहा था जिसे झुमरी जितना जातक सकती थी जातक रही थी पर पेशाब इतना ज़्यादा था की उससे गतका नहीं जा रहा था कर्मा ने थोड़ा और झटका देकर गले तक अपना लुंड घुसा दिया पेशाब की एक एक बूँद झुमरी के मुँह में निचोड़ने के बाद लुंड बहार निकला तो चमक रहा था वहीं झुमरी लुंड निकलते hi खस्ने लगी...

मुन्ना- कर्मा भैया ऐसा तो हमने कभी नहीं किया, हम भी करेंगे.

नीलेश- सच कर्मा बड़ा आगे निकल गया है तू.

कर्मा ने पापा की बात सुनकर सर झुका लिए और मुस्कुराने लगा.

नीलेश- मुन्ना अब अपनी अम्मा को घर लेकर जा और सुन कर्मा कल इन्हे हज़ार हज़ार नहीं बल्कि दोनों को ढाई ढाई हजार रुपये देना, ये सुनते hi दोनों खुश हो गए

झुमरी- हमारे तो भाग खुल गए मालिक

मुन्ना- आपकी कृपा है मालिक.

नीलेश- अब जाओ जल्दी सुबह आ जाना समय से.

झुमरी- जी मालिक

ये कहकर मुन्ना अपनी अम्मा को सहारा देकर खेत खेत के रस्ते निकल गया... दोनों को जाते देख नीलेश मुस्कुराये और बोले- खुश हो गए दोनों.

कर्मा- ग पापा...

नीलेश और कर्मा बापिस जहाँ बिस्तर लगा था उसकी और आने लगे.

नीलेश- तो मेरा बीटा बढ़ा हो गया है..

कर्मा- ऐसा नहीं है पापा.

नीलेश- ऐसा hi है बीटा, एक बाप के लिए सबसे गर्व की बात होती है की उसका बीटा हर काम में उसके कदम से कदम मिलकर चले पर उससे भी ज़्यादा गर्व की बात होती है बीटा उससे भी दो कदम आगे हो और तेरे लिए मैं ये कह सकता हूँ की हर बात में तू मुझसे दो कदम आगे है.

कर्मा- क्या पापा ये भी कोई चीज़ है आगे होने वाली.. मैं तुंहरे जितना मेहनती नहीं हूँ समझदार नहीं हूँ.

नीलेश- किसने कहा मेहनती नहीं है, और समझदारी अनुभव के साथ आती है पर अब भी तू बाबत समझदार है, और दूसरी बात फल पेड़ से दूर नहीं गिरता.

कर्मा - मतलब,

नीलेश- मतलब की ये सब हवस वासना और तूने अभी तक जो भी किआ है कहीं न कहीं मरी वजह से hi है,

कर्मा - समझ नहीं आ रहा पापा.

नीलेश- सीधे शब्दों में कहूं तो ठरकी और चुड़क्कड़ बाप का ठरकी और चुड़क्कड़ बीटा.

कर्मा ये सुनकर हंसने लगा और बोलै- क्या पापा वो तो हालात hi ऐसे बन गए थे झुमरी चची नंगी बेटे से चुदाई कर रही थी इसलिए.

नीलेश- ाचा झुमरी के लिए हालात ऐसे बन गए थे फिर ममता के साथ कैसे हालात बन गए थे या पल्ली के साथ या फिर तेरी शशि बुआ के साथ या उसके पूरे परिवार के साथ, या प्रेमा बहु के साथ..

कर्मा तो बिलकुल hi हैरान था उसका तो दिल तेज़ी से धड़कने लगा..

कर्मा- ये क्या बोल रहे हो तुम पापा...

नीलेश- चल अब नाटक मत कर सब पता है हमें

कर्मा- मुझे समझ नहीं आ रहा क्या हो रहा है तुम्हे सब पता है तो क्या गुस्सा नहीं हो तुम मुझसे.?

नीलेश - नाराज़ होते तो ो झुमरी को तेरे साथ छोड़ते?

कर्मा- अरे पापा..

नीलेश - ाचा तुझे हमारे और शशि के बारे में पता है.. हैं न?

कर्मा- हाँ,

नीलेश- तो तुम हमसे नाराज़ है उस बात को लेकर.

कर्मा- नहीं बिलकुल नहीं..

नीलेश- तो हम तुझसे क्यों होंगे और हम तुझसे उस बात के लिए क्यों नाराज़ होंगे जो हम खुद करते हो..

कर्मा- सच में बिलकुल भी नहीं हो.

नीलेश- नहीं बिलकुल नहीं और देख हमने भी तेरी तरह hi बहुत सी ऐसे काम किये हैं और कुछ करना चाहते थे जो नहीं कर पाए, बल्कि हमें तो ख़ुशी है की तू वो सब भी कर रहा है जो हम नहीं कर पाए.

कर्मा- जैसे की?

नीलेश- पूर्वी को छोड़ना..

फिर दोनों हंसने लगे..

कर्मा- पर पापा ये सब तुम्हे पता कैसे चला?

बातें करते हुए दोनों बिस्तर तक आ गए और सामने देखा तो दोनों चौंक गए खासकर के कर्मा. क्यूंकि सामने बिस्तर पर ममता चची बैठी थी.

कर्मा- अरे चची तुम यहाँ इस समय कैसे. और कब आई.

ममता- क्यों आई ये तो थोड़ी देर में पता चल जायेगा तुझे बच्चा और तब आई जब दोनों बाप बेटे उस मज़दूरन के अंदर घुसे हुए थे.

ये सुनकर दोनों hi मुस्कुराने लगे.

कर्मा- अरे वो तो बस अपने आप हो गया..

ममता- हाँ अपने आप तेरा लुंड उसकी गांड में धंस गया न.

कर्मा- चाची.

कर्मा ने पापा की और इशारा करते हुए कहा की क्या बोल रही हो.

ममता- सच में बताओ मज़दूरन तक को नहीं छोड़ा तुम लोगो ने.

नीलेश - अरे ममता उस मज़दूरन की वजह से hi आज हम बाप बेटे के बीच एक नया रिश्ता बन गया है.

ममता- ाचा कैसा रिश्ता..

कर्मा- चची पापा को हमारे बारे में पता है.

ममता- हँसते हुए बोली- बीटा पापा को तो तेरे बारे में पता है पर तुझे अपनर पापा के बारे में नहीं पता क्यों भाई साहब.

नीलेश - अरे नहीं पता तो क्या हुआ आज सब बता देंगे हम. पर उससे पहले आज तू एक साथ हम बाप बेटों के लुंड पर अपने मुँह का जादू चला...

कर्मा पापा के मुँह से ये सुनकर बिलकुल हैरान रह गया.

ममता ने उसकी हैरानी देखि और बोली- कहा था न बहुत सी बातें नहीं पता..

नीलेश ने कर्मा को बिस्तर पर बैठा दिया और खुद भी बगल में आकर बैठ गए.. इसके बाद ममता दोनों बाप बेटों के बीच बैठ गयी और दोनों के लुंड निकल कर बरी बरी से चूसने लगी जिससे कर्मा थोड़ा शांत हुआ.

और फिर नीलेश ने उसके सामने एक एक करके सरे परदे गिराने शुरू किये...

अपने ममता, पल्ली, राजन, प्रेमा, उसके ससुर, फिर शशि और विनीत का आना, और उनके सब राज़ खोलना फिर यहाँ हुई चुदाई सिवाए पूल वाले घर के सब बात कर्मा को नीलेश ने बतादि..

कर्मा अब भी अपने और माँ के बारे में बताने के लिए हिम्मत नहीं जूता प् रहा था, फिर भी उसने मंजू तै के बारे में ज़रूर बता दिया. जिसपर नीलेश ने मंजू को जल्दी hi छोड़ने का प्राण लिया.. फिर ममता ने उनका ध्यान अपनी और खींचा और दोनों बाप बेटे वैसे भी काफी उत्तेजित हो गए थे तो दोनों hi ममता के मखमली बदन पर टूट पड़े और ममता को दोनों ने रगड़ के हर तरफ से और हर कोण से जमकर छोड़ा





ममता भी दोनों बाप बेटे से एक साथ छोड़ने से काफी उत्तेजित और रोमांचित थी.





बाप बेटे दोनों ने ममता के हर छेड़ की गहराई अपने लम्बे लम्बे लौडों से खूब नापी..





इतनी तगड़ी और घमासान चुदाई के बाद तीनो hi थक कर सो गए..

इसके बाद क्या हुआ अगली अपडेट में प्लीज कमैंट्स करके ज़रूर बताएं कैसी लगी अपडेट बहुत बहुत धन्यवाद्
 
अपडेट 167
जहाँ कर्मा और नीलेश की रात पहले झुमरी और फिर ममता के साथ बड़ी हसीं गुज़री वहीं उनके घर पर क्या माहौल रहा वो भी देख लेते हैं,

रसोई का काम निपटा कर सभ्य ने अनुज को सीढ़ियों से नीचे आते देखा और कहा...

सभ्य- लल्ला ज़रा अपने भैया को फ़ोन लगा अभी तक आया hi नहीं, बिस्तर लगाने गया है या बनवाने.

अनुज- अरे नहीं माँ भैया का मश्ग आया था वो पापा के साथ hi सोयेंगे, घर नहीं आएंगे..

सभ्य- हमें पता था वो मुआ ऐसा hi कुछ करेगा, जा तू कुण्डी लगा आ दरवाज़े की और सोने जा.

अनुज जो मौसी के साथ कुछ न हो पाने की वजह से हताश था उसे कुछ कुछ उम्मीद दिखाई दी तो वो भाग कर गया कुण्डी लगाने...

और कुण्डी लगाकर बापस आया जल्दी से और देखने लगा सब कहाँ हैं, उसने देखा की नै तै तो अपने कमरे में जाकर लेट गयी हैं, वहीं मौसी उसे कहीं नज़र नहीं आ रही थी मौका देख कर अनुज जल्दी से रसोई की और लपका और देखा की माँ रसोई में दूध दाल रही थी सबके लिए

अनुज ने यही मौका सही समझा और पीछे से जाकर पकड़ लिया अपनी माँ को.. जिससे सभ्य थोड़ा चौंक गयी, पर फिर देखा अनुज है तो बोली- अनुज, क्या कर रहा है लल्ला अभी दूध गिर जाता,.

अनुज- ऐसे कैसे गिर जाता माँ लाओ मैं पकड़ लेता हूँ.

सभ्य- नहीं रहने दे मैं पकड़ लुंगी तू अब छोड़ हमें.

अनुज- ऐसे कैसे छोड़ दूँ इतने टाइम बाद तो मौका मिला है अपनी प्यारी माँ से प्यार करने का. ये कहकर अनुज ने अपने हाथों को अपनी माँ के पल्लू के अंदर घुसा कर उसकर पेट पर कास लिया..

सभ्य- अभी इसी प्यारी माँ के हाथ से प्यारे प्यारे थप्पड़ खायेगा तू, चल छोड़ मुझे.

अनुज- मैं nahiiiiiiiiiiiiiiii वैसे भी इतनी मुश्किल से मौका मिला है अब नहीं छोडूंगा..

ये कहकर अनुज ने माँ को रसोई की स्लिप से थोड़ा पीछे खींच लिए और उसके पल्लू को नीचे गिरा दिया और अपने हाथों से माँ के मांसल और मुलायम पेट को मसलने लगा,





साथ hi अनुज लगातार माँ की गर्दन और कंधे को चूमे जा रहा था, अनुज के लगातार प्रयास का असर सभ्य पर भी होने लगा था वो भी उत्तेजित हो रही थी और छह कर भी वो अनुज को रोक नहीं प् रही थी ऐसा लग रहा था जैसे उसके बदन पर उसका काबू hi नहीं है, सभ्य को अनुज का कठोर लुंड अपनी गांड पर साड़ी के ऊपर से चुभता हुआ महसूस हो रहा था जो उसकी उत्तेजना को और बढ़ा रहा था, वहीं अनुज को तो अपनी माँ के बदन को पाकर बड़ा मज़ा आ रहा था उसका लुंड जो पहले से hi कड़क था वो उसे अपनी माँ के बड़े बड़े चूतड़ों के बीच साड़ी के ऊपर से hi घिस रहा था..

सभ्य- अह्ह्ह्ह लाल्ल्लाहहह छोड़ड़ड़ कोई देख लेगा..

अनुज- ुहममम मा कोई नहीं देख रहा...

अनुज ने माँ की नाभि को छेड़ते हुए कहा..

सभ्य- सबको दूध देना है बीटा ठंडा हो जायेगा...

अनुज- मुझे तो ये दूध पीना है माँ..

अनुज ने ब्लाउज के ऊपर से hi माँ की बड़ी छुच्छी को हाथ में भरते हुए कहा..

सभ्य- अह्ह्ह्ह लाल्ल्लाहहह ज़िद्द मत कर अब छोड़ न...

सभ्य अनुज से हटने को बोल रही थी पर अनुज पर कोई असर नहीं हो रहा था ऊपर से वो अपना लुंड साड़ी के ऊपर से hi दोनों चूतड़ों के बीच रखकर ठोकर मार रहा था, जो की सभ्य को अपनी छूट पर महसूस हो रहा था.

की तभी सामने वाले बाथरूम का दरवाज़ा खुलने की आवाज़ आई और उसमे से शालू निकली जिसे देखते hi दोनों थोड़ा ठिठक गए और सभ्य ने अनुज से खुद को छुड़ाया और दूध लेकर चलती बानी वहीं अनुज बेचारा फिर से खड़ा लुंड दबाते हुए रह गया, पर उसने सोचा कोई नहीं अभी दूध देकर तो माँ अपने कमरे में आएँगी hi सोने तो फिर नहीं छोडूंगा और आज रात माँ को जी भर के छोडूंगा.. यही सोचकर वो खुश हो गया और अपने कमरे में जाकर सबके सोने का इंतज़ार करने लगा...

वहीं सभ्य दूध लेकर अपनी जेठानी शान्तो देवी के कमरे में गयी और उन्हें दूध दिया पीने को साथ hi उनके बिस्तर पर बैठकर उनके पेअर दबाने लगी.

शान्तो देवी - अरे बहुरिया ये सब क्या कर रही है रहने दे.

सभ्य- नहीं जीजी ये तो हमारा फ़र्ज़ है, तुम बड़ी हो हमसे,.

शान्तो देवी - सच कहें तो बहुत नसीब वाले हैं लल्ला जो तेरे जैसी बहुरिया पाए हैं, भाग hi खुल गए.

Sabhya-tum भी न जीजी बेकार की तारीफ कर रही हो.

शान्तो देवी - सही कह रहे हैं बहुरिया, अगर सब सही होता तो कितना ाचा होता हम सब साथ रहते तू लल्ला बच्चे और हम सब एक साथ, पर..

सभ्य- जीजी जो हुआ वो छोडो अभी पहले की बात याद करके क्या फायदा,

शान्तो देवी- सही कह रही है बहुरिया और अब तू भी थक गयी होगी सो जा तू भी.

सभ्य- हाँ बस जा hi रहे हैं जीजी.

शान्तो- एक काम कर आज लल्ला तो खेत पर सो रहे हैं तो अकेली क्या सोयेगी तू यहीं सो जा हमारे पास

सभ्य- तुम्हारे पास जीजी?

शान्तो- क्यों लल्ला के सिवा किसी और के पास नींद नहीं आएगी का?

सभ्य - धत्त जीजी कैसी बात करती हो. हम तो इसलिए बोल रहे थे की तुम्हे कोई परेशानी न हो..

शान्तो- हमें क्या परेशां करेगी तू, वैसे हम तो चाहते हैं परेशां करे कोई बिस्तर पर रात में..

Sabhya-haay ढैय्या जीजी बिलकुल hi तुम तो..

दोनों जेठानी देवरानी ऐसे hi मीठी मीठी नोकझोंक करते हुए लेट गयी और सोने लगी...

कुछ समय बीतने के बाद अनुज उठा और चुपचाप अपने कमरे से निकला और दबे पाऊँ माँ पापा के कमरे में पहुंचा पर वहां उसने देखा की कमरा खली था और कोई नहीं था वो हैरान हो गया की इस समय माँ कहाँ गयी...

उसने बाथरूम में देखा तो वो भी खली था वो बहार आकर सब तरफ देखने लगा आँगन खली था रसोई खली थी, उसने फिर एक एक कमरे में नज़र मारनी शुरू की तो पहले कमरे में देखा तो मौसी अकेली सो रही थी, वो अगले कमरे की और बढ़ा और शान्तो देवी के कमरे में झाँका तो उसका मुँह बन गया क्यूंकि उसकी माँ वहीं नै तै के बगल में सो रही थी...

अनुज को गुस्सा आने लगा की माँ को क्या ज़रुरत थी यहाँ सोने की हवन नहीं तो, मुझे तो रसोई में hi एक बार कर लेना चाहिए था ाचा खासा मौका छोड़ दिया, पर क्या करता मौसी बीच में आ गयी थी..

फिर मौसी का ख्याल आते hi अनुज ने सोचा की मेरी नींद उड़ाके मौसी खुद सो रही हैं.. ये सोचकर अनुज बापिस मौसी के कमरे की और चल दिया और फिर धीरे से उनके कमरे में घुस गया जहाँ शालू को हलकी हलकी सी नींद आई hi थी..

अनुज हौले से बिस्तर पर चढ़ गया शालू अपनी पीठ पर लेती हुई थी और अनुज को मौसी का चिकना पेट और सुन्दर नाभि नज़र आ रही थी जिसे देखकर अनुज का इरादा और मज़बूत हो गया, अनुज शालू के बगल में जाकर लेट गया और एक हाथ उसने शालू के पेट पर रख लिए साथ hi उससे बिलकुल सात कर लेट गया और फिर धीरे धीरे पेट पर हाथ फिरने लगा, साथ hi अपना चेहरा आगे बढ़ा कर वो मौसी के गले और गाल को चूमने लगा, शालू जो की कच्ची नींद में hi थी उसकी नींद कुछ hi पालो में खुल गयी, उसने आँखें खोलकर देखा तो अनुज था उसके बगल में, शालू ने एक हाथ उसके कंधे से निकलते हुए उसके सर पर फिरकर प्यार से पुछा- क्या हुआ लल्ला नींद नहीं आ रही..

अनुज- ुहममम मौसी नहीं नींद नहीं आ रही..

अनुज को भी सही लगा की मौसी जाग गयी तो ाचा है अब जो होगा अचे से होगा..

शालू - आ मैं सुलाती हूँ तुझे .

ये कहकर शालू ने अनुज को अपने से चिपका लिए और उसे बच्चों की तरह सुलाने लगी, पर अनुज को सोना कहाँ मंज़ूर था उसे तो शालू मौसी के बदन के साथ खेलना था, अनुज ने शालू को जगह जगह चूमना शुरू कर दिया पहले तो काफी हलके हलके जिसका शालू ने कोई विरोध नहीं किया पर हर बढ़ते पल के साथ अनुज के चुम्बन और हरकतें आक्रामक होने लगी वहीं शालू भी अब अनुज से रुकने को कहने लगी...

साथ hi अनुज के ऐसा करने से शालू के बदन में उत्तेजना का संचार होने लगा.. उसका दिमाग अनुज को रोक रहा था वहीं तन साथ दे रहा था..

अनुज आक्रामक तरीके से चूमते हुए नीचे की और खिसकने लगा और मौसी के नरम पेट को चूमने चाटने लगा..





अनुज की हर हरकत का असर शालू के बदन पर हो रहा था, वो न चाहकर भी बहकती जा रही थी, उसकी टैंगो के बीच की दरार में नमी उसे साफ़ महसूस हो रही थी, उसके ऊपर से अनुज उसके बदन को चाटते हुए मसल रहा था..

शालू का विरोध बहुत कमज़ोर पड़ता जा रहा था और अनुज की उत्तेजना शालू पर हावी पड़ती जा रही थी, अनुज की हिम्मत हर पल के साथ और बढाती जा रही थी, और उसी जोश में आकर अनुज ने शालू की साड़ी को ऊपर खिसकना शुरू किया और धीरे धीरे ऊपर खींचने लगा पर साथ hi उसने मौसी के पेट को चेतना एक पल को भी बंद नहीं किया..

कुछ hi पालो में शालू की साड़ी और पेटीकोट उसकी जांघों तक आ चुके थे और इसी के बाद अनुज ने एक और बड़ा कदम बढ़ाया और अपना हाथ सीधे मौसी की छूट के ऊपर रख दिया जिसके रखते hi शालू के बदन में तो जैसे करंट सा दौड़ गया और न जाने क्या हुआ की वो अनुज को धक्का देकर बिस्तर से उठ कड़ी हुई...

अनुज उसकी इस हरकत से बिलकुल अचंभित रह गया..

शालू- अनुज अगर तू चाहता है मैं तुझसे नाराज़ न होऊं तो अभी यहाँ से चला जा.

अनुज को तो समझ hi नहीं ा रहा था की अचानक से हुआ क्या खैर अनुज ने शालू की बात सुनी और मुँह बनाकर बिना कुछ कहे उसके कमरे से चला गया वहीं शालू बिस्तर के बगल में खड़े होकर लम्बी लम्बी सांसें लेते हुए खुद को शांत कर रही थी, उसे अनुज के लिए बुरा भी लग रहा था पर उसे खुद समझ नहीं आ रहा था वो क्या करे,

वहीं उसके बदन में एक अजीब सी प्यास अनुज जागकर चला गया था जो उसे तड़पने लगी, शालू दरवाज़े तक आई और अंदर से कुण्डी लगाडी और फिर बिस्तर के पास जाकर अपने कपडे उतरने लगी और बिलकुल नंगी हो गई और फिर नंगी बिस्तर पर लेट गई उसका एक हाथ उसकी टैंगो के बीच में पहुंच गया और दुसरे हाथ ने उसकी भरी भरकम छूछीयो का भर थम लिया और वो खुद के बदन से खेलते हुए खुद को शांत करने की कोशिश करने लगी, उस प्यास को मिटने की कोशिश करने लगी जो की अनुज लगा कर गया था,

अनुज बेचारे का दिन hi ख़राब था सो वो सीधा कमरे में गया और मन मार के सो गया...

वहीं गाओं के दुसरे घर में बेचारी एक बहु थी जो फांसी हुई थी, अपने देवर और ससुर दोनों को संतुष्ट कर पाना और संभालना उसके लिए मुश्किल होता जा रहा था वही हाल जग्गू का था वो अपनी माँ और भाभी की प्यास को बुझाने का पूरा प्रयत्न कर रहा था..

एक माँ थी जो बेटे और पति दोनों के लुंड को शांत करना छह रही थी और एक ससुर था जो की बहु और पत्नी दोनों के बदन को भरपूर भोगना चाहता था कुल मिलकर जग्गू के घर का माहौल यूँ था की सबके मन में कुल मिलकर एक hi जैसी भावना थी बस बयां नहीं हो प् रही थी...

मंजू ने पति से बहाना किया था की वो आज रात आँगन में सोयेगी क्यूंकि अंदर उसका मन नहीं हो रहा था उसका दम घुटता था और अभी मंजू की साड़ी पेटीकोट कमर तक उठे हुए थे और उसके बड़े बड़े चूतड़ चांदनी रात में नंगे थे और उन चूतड़ों को फैलते हुए उनके बेटे जग्गू का लुंड मंजू की गांड के संकरे छेड़ में से अंदर बहार हो रहा था... जग्गू ने जबसे अपनी मम्मी को छोड़ना शुरू किया है तबसे hi बिना अपनी मम्मी की गांड मरे हुए उसे नींद नहीं आती थी.. और मंजू भी भले hi जताती नहीं थी और ऐसे दिखती थी की वो ये सब जग्गू के लिए करती हो पर बेटे के लुंड से छुड़वाने में उसे भी एक अलग hi प्रकार का मज़ा मिलता था.

वहीं कमरे में राजपाल ने प्रेमा को पूरा नंगा किया हुआ था और प्रेमा मादरजात नंगी होकर बिस्तर पर पीठ के बल टांगें फैलाये लेती हुई थी और उसकी छूट के बीच उसके ससुर का लुंड अंदर बहार हो रहा था...

वहीं बेचारा प्रेमा का पति इन सब से अनजान चैन की नींद सो रहा था उसे ये भी नहीं पता था की उसका सागा बाप उसकी पत्नी को बिलकुल नंगी करके छोड़ रहा है...

खैर अगली सुबह हुई तो ममता अँधेरे में hi खेत से निकल गयी और दोनों बाप बेटे को सोता छोड़.. कर्मा की नींद तो तब खुली जब धुप उसकी आँखों में पड़ने लगी.. उठ कर देखा तो पाया की वो अकेला सो रहा है और आस पास अनाज है फिर धीरे धीरे रात की साड़ी चीज़ें याद आई की कैसे उसके और पापा के बीच का रिश्ता hi बदल गया है पर पापा हैं कहाँ उठकर इधर उधर देखा तो कहीं नहीं दिखे, कर्मा ने सोचा शायद घर चले गए होंगे इसलिए बिस्तर इकठा कर कर्मा भी घर की और चल दिया..

रस्ते में उसे आते हुए अचानक से पीछे से आवाज़ आई- लगता है तै ने घर से निकल दिया जो बोरिया बिस्तर लेकर घूमना पद रहा है..

कर्मा ने मुद कर देखा तो पाया की नीतू सामने कड़ी थी और उसके पीछे रज्जो चची थी... दोनों शायद खेत से निकल रहे थे...

कर्मा- हाँ निकल दिया तू रखेगी अपने यहाँ.. प्रणाम चची..

नीतू- रख तो लेंगे पर घर सारा काम झाड़ू पौंछा बर्तन ये सब करना पड़ेगा..

रज्जो चची - हैट मुई अभी बताती हूँ तुझे... बर्तन धुलवायेगी हमर बच्चा से.

रज्जो चची ने नीतू को डाँटते हुए कहा..

कर्मा- देखलो न चची क्या क्या बोल रही है.

नीतू- हाँ हाँ अब चची भतीजा एक हो जाओ

कर्मा- हाँ तो हैं हम एक तुझे क्यों जलन हो रही है..

नीतू- ाचा बीटा कोई नई अकेले में मिलना फिर बताती हूँ तुम्हे तो.

रज्जो चची- क्या करेगी अकेले में हैं क्या बोल रही है.

कर्मा- देखलो चची धमका रही है तुम्हारे सामने hi.

नीतू - अरे मम्मी तुम भी न मज़ाक कर रही थी मैं.

रज्जो चची - चल हो गया हो मज़ाक तो घर चल सारा काम पड़ा है.

नीतू- हाँ चलो, और तुम बंजारे मिलना मुझसे कुछ बात करनी है.

कर्मा- ठीक है, मिलता हूँ. प्रणाम चची

ये कहकर कर्मा आगे बढ़ गया और वहीं बाद में मिलने वाली बात पर रज्जो का थोड़ा माथा ठनका पर उसने फिर जाने दिया और वो लोग भी आगे बढ़ गए.

घर पहुंच कर बिस्तर रख कर कर्मा आँगन में बैठ गया .

sabhya-aa गया बीटा रुक अभी चाय लती हूँ..

ये कहकर सभ्य रसोई में चली गयी वहीं शान्तो कर्मा के पास आकर बैठ गयी..

शान्तो- लल्ला नहीं आये बीटा तेरे संग?

कर्मा- क्या पापा अभी तक नहीं आये

सभ्य- नहीं वो कहाँ आये अभी. क्यों निकल गए थे क्या.

कर्मा - पता नहीं जब मैं उठा तब पापा वहां नहीं थे तो मुझे लगा घर चले फाये होंगे.

सभ्य- फ़ोन लगा कर देख कहाँ हैं?

तभी पीछे से आवाज़ aai-kise कहाँ फ़ोन लगाया जा रहा है..

आवाज़ की तरफ देखा तो सब हैरान रह गए..

इसके आगे क्या हुआ अगली अपडेट में प्लीज कमैंट्स करके ज़रूर बताएं कैसी लगी अपडेट बहुत बहुत धन्यवाद्
 
सॉरी तो कीप एवरीवन वेटिंग बूत लाइफ में बहुत कुछ एक साथ चल रहा है तो टाइम निकलना थोड़ा मुश्किल हो रहा है एंड आप लोग समझते भी होंगे की अपडेट लिखने के लिए एक पर्सनल स्पेस एंड टाइम चाहिए वो नहीं मिल प् रहा है फिर भी ी ऍम ट्राइंग हार्ड एंड सून उपदटेस एंड स्टोरी विल बे रेगुलर.

थैंक्यू सो मच
 
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