Incest Katha Chodampur Ki - Page 32 - SexBaba
  • From this section you can read all the hindi sex stories in hindi font. These are collected from the various sources which make your cock rock hard in the night. All are having the collections of like maa beta, devar bhabhi, indian aunty, college girl. All these are the amazing chudai stories for you guys in these forum.

    If You are unable to access the site then try to access the site via VPN Try these are vpn App Click Here

Incest Katha Chodampur Ki

रिमझिम ने मुस्कुराते हुए कहा..

रमन- तुम्हारे शैतानी मुस्कान देख कर लग रहा है कुछ खतरनाक hi सोचा है तुमने..

रिमझिम इस बात पर मुस्कुरा दी...

अपडेट 188

सरलपुर


अगली सुबह हो चुकी थी और ज़्यादातर घरवाले तो अभी सो hi रहे थे आखिर रात को म्हणत जो की थी जागकर, खैर घर की बहु होने के नाते चंचल हमेशा की तरह पहले उठी और फिर जल्दी hi रिमझिम भी और फिर दोनों ने घर का काम संभल लिए वहीं, बाकि सब भी धीरे धीरे उठने लगे सब छुट्टियों को पूरी तरह आनंद ले रहे थे कोई नहाने की जल्दी नहीं, आराम से सुस्ता सुस्ता के काम करो, खैर सुबह के चाय नाश्ता के बाद सबके ऊपर था कौन क्या करना चाहता है, चरण सिंह दोनों संधियों के बीच बैठ बहार चॉपर पर बैठ कर रह रह कर चंचल का भोग लगाने का मौका देख रहे थे और उसके साथ खेलने का मौका ढूंढ रहे थे वहीं तीनो जवान जोड़े रात के खेल के बाद आपस में पूरी तरह खुले हुए थे और इशारों में तो कहीं हलकी फुलकी छेड़खानी में बातें कर रहे थे,

मौका देख कर चेतन ने पूर्वी की छूछीयो को रसोई में कास कर दबाया तो रमन भी आते जाते हुए अपनी भाभी के बड़े बड़े चूतड़ों को मसलने का मौका नहीं छोड़ रहा था पंकज भी कभी रिम्मी तो कभी चंचल दोनों से मज़े ले रहे थे, चंचल रिम्मी और पूर्वी भी इस छेड़खानी का आनंद उठा रही थी...

तीनो संधनें भी साथ साथ थी और उनकी नयी नयी दोस्ती भी परवान चढ़ रही थी, तीनो hi सबसे छुपकर बिलकुल नयी नवेली जवान होती लड़कियों की तरह एक दुसरे से गंदे गंदे और अश्लील मज़ाक कर मज़े ले रही थी...

माधुरी- बिमला रानी क्या बात है आज तो बदली बदली सी लग रही हो,

सावित्री- अरे रात को बिमला रानी की अचे से ठुकाई हुई है इसलिए हैं न?

बिमला भी अब दोनों के साथ रह कर बोलना सीख रही थी- और क्या कहो तो तुम दोनों की भी करवाडुं.

सावित्री- हाय बिमला रानी करवा दो न,

सावित्री ने कामुक ढंग से कहा तो तीनो हंस पड़े...

इसी बीच चंचल और रिमझिम ने सबको नहाने का निर्देश दिया ताकि सब नहालें फिर खाना पीना खाया जाये और दोपहर का कुछ प्रोग्राम बने की क्या करना है,

लड़को ने तय किआ की वो लोग तो बहार तुबेल पर नहाएंगे बाकि औरतों ने घर के दोनों बाथरूम हथिया लिए, ऊपर के बाथरूम में पूर्वी घुस गयी तो नीचे वाले में माधुरी और सावित्री भी तैयार थी, चंचल और रिमझिम पहले hi नाहा चुके थे,

इधर जहाँ सब नहाने और दुसरे कामों में व्यस्त थे उसी बीच चरण सिंह अपने दोनों संधियों को नहाने के लिए कपडे लेन का बहाना बना कर उनसे अलग घर के अंदर गए और मौका देखने लगे चंचल को दबोचने का, इसी बीच उन्हें मौका मिला भी चंचल अपने अम्मा बाबा का बिस्तर ठीक करने के लिए उनके कमरे में घुसी तो चरण सिंह ने उसे जाते देख लिए और सब की नज़र बचते हुए पीछे से घुस गए और चंचल को पकड़ लिए,

पहले तो चंचल बिलकुल चौंक गयी फिर अपने ससुर को देख मन hi मन मुस्कुराने लगी, हालाँकि उसे चिंता भी थी की कहीं कोई देख न ले,

चंचल- अरे पापाजी तुम यहाँ क्या कर रहे हो कोई आ गया तो गड़बड़ हो जाएगी.

चरण सिंह- अरे बहु कोई नहीं आएगा, सच कह रहा हूँ अब और रहा नहीं जा रहा आजा अपने ससुर पर थोड़ा प्रेम बरसा दे,

चंचल- वो प्रेम नहीं हवस है पापाजी जो तुम मांग रहे हो,

चरण सिंह- जो कुछ है, बस अब और मत तड़पा,

ये कहकर चरण सिंह ने लपक कर चंचल को पकड़ लिए, वहीं चंचल भी अपने पति से हुई रात की बातों को सोचने लगी वैसे तो उसे कुछ आपत्ति नहीं थी अब अपने पति की स्वीकृति के बाद बस उसे किसी के द्वारा देखे जाने की चिंता थी,

चंचल- पापाजी समझो तो सही कोई आ गया तो गड़बड़ हो जाएगी,

चरण सिंह- कोई नहीं आएगा रुक.

यव कह चरण सिंह उससे अलग हुए और अंदर से दरवाज़ा लगा दिया, वहीं चंचल भी सोचने लगी की अभी किसी के आने की संभावना काम hi है,

चरण सिंह दरवाज़ा लगा कर बापिस आये और चंचल को पकड़ने की कोशिश की तो वो उनसे दूर होकर खिलखिलाते हुए बिस्तर पर चढ़ गयी,

चंचल- नहीं पापाजी.

चरण सिंह को ये अव्हा लगा उनकी बहु हंस कर उनसे भाग रही है और मज़ाक कर रही है इसी मज़ाक में शामिल होते हुए उसे पकड़ने बिस्तर पर कूद पड़े, और चंचल की बाहन पकड़ ली.

चंचल- छोडो न पापाजी कोई आ जायेगा,

चरण सिंह- अरे बहु दरवाज़ा बंद है कैसे आ जायेगा कोई..

चंचल- ाचा दरवाज़ा बंद करके अपनी बहु के साथ क्या करना चाहते हो पापाजी?

चरण सिंह- कुछ नहीं बस अपनी बहु को थोड़ा प्यार करना चाहता हूँ.

ये कहते हुए चरण सिंह ने चंचल को अपनी बाहों में भर लिए..

चंचल- धत्त्त कैसा प्यार करना चाहते हो सब समझती हूँ मैं.

ये कहकर चंचल अलग होकर घूम गयी.

चरण Singh-are बहु सब समझ hi रही है तो क्यों तड़पा रही है अपने पापाजी को.

ये कह कर चरण सिंह ने पीछे से चंचल को पकड़ लिए और खुद उससे पीछे से चिपक गए, चंचल को भी चूतड़ों के बीच ससुरजी का कड़क लुंड महसूस हुआ वहीं ससुरजी ने उसकी साड़ी का पल्लू उसके सीने से हटा नीचे गिरा दिया था..

चंचल- ओह्ह पापाजी...

चरण सिंह बहु की गर्दन को चूमते हुए उसके नंगे पेट को मसलने लगे वहीं चंचल भी मस्त होने लगी अपने ससुर के हाथों को बदन पर और उनके लुंड को अपनी गांड की दरार में...

वहीं चरण सिंह का तो जोश हर पल बढ़ता जा रहा था और उसी जोश में उनके हाथ बहु के कोमल पेट से ऊपर सरकते हुए उसके ब्लाउज के ऊपर चूचियों पर आ गए और दबाने लगे, चंचल भी अपनी चूचियों के मसले जाने से मस्त होने लगी...

दोनों ससुर बहु अपनी अपनी हवस एक दुसरे के सहारे शांत करने की कोशिश करने लगे, चरण सिंह को भी हालाँकि समय और स्थिति का ज्ञान था इसीलिए उन्हें भी पता था ज़्यादा समय लेना सही नहीं है, और उन्होंने आगे बढ़ने का निश्चय किआ, चरण सिंह ने चंचल को अपनी और घुमाया और उसके नाज़ुक कोमल होंठों पर अपने होंठ रख दिए और चूसने लगे, साथ hi उनके हाथ भी बहु के बदन पर चलते हुए उसकी साड़ी को पकड़ कर उतरने लगे और कामयाब भी हो गए, चंचल का विरोध भी अब न के बराबर रह गया था, और उसने सोचा ससुर जी ऐसे जाने नहीं देंगे तो इससे ाचा जल्दी से निपटाया जाये,

चरण सिंह ने साड़ी के बाद अगला हमला तुरंत पेटीकोट के नाड़े पर बोलै और अगले hi पल उसे खोल कर नीचे सरका दिया जिसे चंचल ने खुद अपने पैरों से निकल दिया, वहीं चंचल ने साथ देते हुए खुद से अपना ब्लाउज उतर कर अलग फ़ेंक दिया,

चरण सिंह के सामने उनकी बहु अब सिर्फ ब्रा पंतय में थी, सबके होते हुए अपनी बहु के साथ इस स्थिति में होने पर चरण सिंह को एक अलग hi रोमांच और उत्तेजना का अनुभव हो रहा था. चंचल का भरा हुआ गदराया बदन सिर्फ ब्रा पंतय में देख चरण सिंह का लुंड ठुमके मरने लगा, चरण सिंह बहु को देखते हुए अपने कपडे उतरने लगे, और जल्दी hi नंगे हो गए उधर चंचल ने भी अपनी ब्रा पंतय को भी तब तक अपने बदन से अलग कर दिया था और बिलकुल नंगी हो कर अपने ससुर के सामने लेट गयी,

चरण सिंह- अह्ह्ह बहु तुझे ऐसे देख कर तो मुर्दे में भी जान आ जाये,

चंचल- मुर्दे का पता नहीं पापाजी तुम अपनी जान दिखाओ न अब,

चरण सिंह ने भी देर करना उचित नहीं समझा और तुरंत चंचल की टैंगो के बीच जगह ली और फिर अपना फडकता हुआ लुंड पकड़ कर बहु की गरम छूट के मुहाने रखा और फिर उसकी आँखों में देख कर अंदर घुसा दिया, जिसके साथ hi चंचल के मुँह से एक हलकी सी आह निकल गयी.

चंचल- आह्ह्ह्हह पापाजी ओह्ह्ह.

चरण सिंह को तो यकीन नहीं हो रहा था की सबके घर में होते हुए वो अपनी बहु को छोड़ पाने में सफल हो रहे थे, वहीं चंचल को भी एक नया रोमांच मिल रहा था, चरण सिंह ने चंचल की कमर को थमा और फिर धक्के लगाना शुरू कर दिया और अपनी बहु की चुदाई शुरू कर दी,

चरण सिंह- आह्ह्ह्हह बहु ओह्ह्ह्हह्हह तेरी छूट में तो जन्नत का मज़ा है..

चंचल- अह्हह्ह्ह्ह हांण पापा जी लूट लो अपनी बहु की छूट का मज़ाआ आह्ह्ह्हह,

चरण सिंह- मन करता है तुझे छोड़ता hi रहूं, अह्ह्ह्हह क्या मस्त बदन है तेराआठ.

चरण सिंह ने चंचल की छूछीयो को मसलते हुए उसकी छूट में धक्के लगते हुए कहा,

चंचल- अह्ह्ह पापा जी तो छोड़ लिए करो नाआहहहहहहह अह्ह्ह्हह तुम्हारी बहु हूँ तुम्हारा तो हक़ बनता है...

चंचल जानकार अपने ससुर जी को उकसाने के लिए ऐसी बात कर रही थी ताकि वो उत्तेजित होकर जल्दी झड़ें, नहीं तो बेकार में पकड़े जाने का खतरा था,

चरण सिंह- हाँ सही कहा बहु बेटे के बाद आह्ह्ह्ह मेरा hi तो हक़ बनता है, जो चीज़ मेरी है वो उसकी है और जो उसकी है वो मेरी..

चंचल- हाँ पापाजी और आप तो उनकी चीज़ का भरपूर उपयोग कर भीईई अह्ह्ह्हह रहे हो,

चंचल ने अपनी टांगों को चरण सिंह के पिछवाड़े पर कस्ते हुए कहा, लेकिन तभी उसे एहसास हुआ जैसे दरवाज़ा के बगल वाली खिड़की के बीच से कोई झाँक रहा है, उसने गर्दन घुमा कर देखा तो उसे कोई नज़र नहीं आया साथ hi खिड़की भी बंद दिखी.. उसका ध्यान बापिस चुदाई पर आ गया,

चरण सिंह- अह्ह्ह्ह एयर क्याःह्ह्ह्हह्ह बहुउउउहाहहह जब चीज़ तेरे जैसीईई हो तो कौन छोड़ेगा..

चंचल- तोहाहहह अपने बेटे को क्याःह्ह्ह्हह्ह डोज तुम पापाजी उसकी बीवी की छूट के बदले में...

चरण सिंह- अरे उसे किस चीज़ की मन है सब उसी का तो है, साडी संपत्ति सब कुछ तुम लोगो का hi है,

चंचल- ये सब नहीं पापाजी, संपत्ति की बात नहीं है,

चरण सिंह- अह्ह्ह्ह फिर और क्या चाहिए मेरी रसीली बहु को अपने पति के लिए,

चरण सिंह ने धक्के लगते हुए उसकी छुच्छी को मुँह में भर के पीते हुए कहा..

चंचल- ओह्ह्ह्हह्हह ुहममम चुत के बदले छूट मिलनी चाहिए नाआहहहहहहह...

चरण सिंह थोड़े असमंजस में दिखे - पर बहु छूट के बदले में किसकी छूट दिला सकता हूँ उसे, किसी बाज़ारू औरत की?

चंचल- नहीं अह्ह्ह पापजीई अह्ह्ह्ह, बाज़ारू औरत की नहीं..

चरण सिंह- फिर किसकी ?

चंचल- मैं जिसकी कहूँगी उसके लिए तुम राज़ी हो जाओगे पापाजी?

चरण सिंह- हाँ अह्ह्ह बेटाःह्ह्ह्हह्ह पर बता तो पहले,

चंचल- बीवी के बदले बीवी..

चरण सिंह ये सुन बिलकुल हैरत में पद गए फिर असमंजस में बोले

चरण सिंह- मतलब मैं कुछ समझा नहीं..

चंचल- मतलब मम्मी जी की छूट,

ये सुन चरण सिंह बिलकुल चौंक गए और ज्यों के त्यों रुक गए,

चरण सिंह - बहु तू यह क्या कह रही है, कुछ सोच समझ तो रही है न,

चंचल- हाँ पापाजी बिलकुल सोच समझ कर बोल रही हूँ मैं चाहती हूँ की तुंहारा बीटा अपनी माँ यानि तुम्हारी बीवी को चोदे जैसे तुम उसकी बीवी को छोड़ रहे हो,

बस इतना सुन्ना था की चरण सिंह का लुंड चंचल की छूट में फूलने लगा और उसने पिचकारी छोड़ दी और अपनी बहु की छूट को रास से भर दिया.. अपनी छूट में ससुर का रास महसूस कर चंचल खिसक कर उठी और चरण सिंह का लुंड उसकी छूट से निकल गया, उठकर चंचल फटाफट कपडे पहनने लगी वहीं चरण सिंह जो अभी चंचल ने बोलै था उसी में खोये हुए थे,

चंचल साड़ी लपेटते हुए चरण सिंह से बोली- सोच लो पापा जी, शाम तक और सोच कर बता दो मुझे अगर हाँ है तो इनाम में पीछे की सैर भी मिल सकती है आज hi,

ये कह मुस्कुराते हुए चंचल दरवाज़ा खोल कर चली गयी वहीं चरण सिंह हैरान परेशां से उसके पीछे कमरे से बहार निकल गए,

वहीं जब ये ससुर और बहु अपनी हवस मिटने में लगे थे और चंचल को शंका हुई थी की कोई उन्हें देख रहा है, वो यूँ hi नहीं थी पर कौन था वो ये जानने के लिए चुनें थोड़ा सा पीछे जाना होगा,

नीचे वाले बाथरूम के बहार बिमला और सावित्री नहाने का इंतज़ार कर रही थी और माधुरी अंदर थी,

सावित्री - अरे ये भी कितनी देर लगा रही हैं अंदर,

बिमला - कोई बात नहीं जीजी, बहुत गरम है संधान थोड़ा ठंडा हो जाने दो,

ये कह दोनों हंसने लगे,

इतने में hi हल्का सा बाथरूम का दरवाज़ा खुला और उसमे से पानी निकला जो की सीधा बिमला के ऊपर गिरा, सावित्री एक और होने से बच गयी , माधुरी ने पानी फ़ेंक तुरंत दरवाज़ा बंद कर लिए और अंदर से hi बोली - बकड़े मज़े ले रही थी न दोनों बहार.

बिमला - बर्चोढी, अरे मज़े दोनों ले रही थी तो दोनों पर गिरती न हमें hi भीगा दिया,

सावित्री - अरे तो का हुआ नहाना hi तो है,

बिमला- अरे पर जो कपडे पहनने थे देखो ये भी भीगा दिए, निकलने दो बहार बताती हूँ

सावित्री - अरे छोडो न बिमला रानी जाओ दूसरी साड़ी ले आओ.

बिमला- हाँ ला रही हूँ पर संधान की गांड में मुसल डेल बिना मैं भी नहीं मानूंगी.

ये कह बिमला बापिस अपने कमरे की और आई जहाँ उसका सामान था पर दरवाज़े के पास आकर उसने देखा वो अंदर से बंद था, उसे समझ नहीं आया क्यूंकि वो तो उसे खोल कर गयी थी उसने खोलने के लिए जैसे hi हाथ आगे बढ़ाया उसे अंदर से आवाज सुनाई दी, उसका हाथ वहीं रुक गया उसने सोचा अंदर कौन हो सकता है एक पल को तो उसने सोचा आवाज़ लगा कर पूँछ लूँ, पर जिस तरह की उसे आवाज़ आई थी उसे सुन उसके मन में कुछ और hi बातें आर लगी,

वो इधर उधर देखने लगी ताकि अंदर देख सके, दरवाज़े के दूसरी और उसे खिड़की दिखी पर वो भी बंद थी, उसने खिड़की के पास जाकर देखा तो खिड़की जहाँ से बंद होती थी वहां कई दरारें ज़रूर थी जिनसे अंदर देखा जा सकता था,

बिमला ने बिना देरी के अपनी आँख एक दरार पर लगा दी और उसने जो अंदर देखा उसे देख उसका बदन कांप गया,,

अंदर बिस्तर पर उसकी बेटी बिलकुल नंगी लेती हुई थी और उसकी टैंगो के बीच बिमला के समधी, बेटी के ससुर थे जो अपनी hi बहु को सटासट छोड़ रहे थे, ये देख कर तो बिमला का खून सूख गया उसकी बेटी अपने hi ससुर के साथ, उसका सर चकराने लगा, साथ hi उसकी नज़र दोनों पर जैम सी गयी, उसका मन हुआ अभी अंदर जाकर अपनी बेटी के गाल पर दो तमाचे लगाए और उसके ससुर को भी खूब खरी खोटी सुनाये,

फिर उसके मन में आया नहीं बिमला ये मत करना भूल स्वे भी अगर किसी को खबर हो गयी तो बिटिया का जीवन बर्बाद हो जायेगा, चेतन जैसा पति उसे कहाँ मिलेगा, चेतन के बारे में सोचते hi बिमला के मन में कई ख्याल आने लगे, बेचारे दामाद जी कितने अचे हैं और ये उन्हें धोखा दे रही है, अगर दामाद जी को ये पता लगा तो क्या होगा की उनकी पत्नी उनके अपने पिता के साथ , हाय ढैय्या चंचल बिटिया ये तूने का किआ..

वहीं लगातार देखने से उसका तन जैसे अपने आप hi अपने hi दिमाग से काम करने लगा, उसकी छूट पनियाने लगी, उसे तो तब खबर हुई जब उसका एक हाथ साड़ी के ऊपर से उसकी छूट को मसलने लगा, जब उसे ये एहसास हुआ तो उसने तुरंत अपना हाथ झटक लिया और खुद को कोसने लगी,

छही छी का हो गया है मुझे अपनी hi बेटी और ससुर को देख मुझे उत्तेजना हो रही है, बेटी का गृहस्थ जीवन संकट में है और मुझे अपनी छूट की पड़ी है,

वो यह सब सोच hi रही थी की उसके कानो में एक आवाज़ पड़ी चंचल के नाम की,

वो तुरंत खिड़की से दूर हो गयी और कमरे के दूसरी और आकर देखा तो दामाद जी थे जो की चंचल को बुला रहे थे,

चेतन को चंचल को आवाज़ लगते देख बिमला का दिमाग फिर घूमने लगा- है ढैय्या दामाद जी तो बिटिया को hi बुला रहे हैं, और ये तो, कहीं दामाद जी ने उसे इस हालत में देख लिए तोह, नहीं नहीं ऐसा नहीं हो सकता.

ये सोच कर वो चेतन की और भागी और आंगन को फुर्ती में पार कर दूसरी और पहुंची.. जहाँ चेतन सिर्फ एक तौलिया लपेटे हुए गीला खड़ा था और चंचल को पुकार रहा था.

बिमला- का का हुआ दामाद जी कछु चाहिए का?

चेतन - नहीं अम्मा वो चंचल कहाँ है?

बिमला- चंचल वो चंचल तो हमारा कछु काम कर रही है.

चेतन- चलो छोडो फिर कोई बात नहीं,

बिमला- नहीं दामाद जी का हुआ बताओ तो.

चेतन - अरे अम्मा वो मेरे कपडे लेने थे अब ये चंचल को hi पता है कौनसे बैग में रखे हैं.

बिमला- अरे हम निकल देते हैं चलो.

चेतन- अरे कोई नहीं अम्मा तुम क्यों परेशां होती हो.

बिमला- अरे इसमें परेशानी कैसी आओ चलो..

चेतन- ठीक है चलो, पर ये तुम्हारी साड़ी कैसे भीग गयी.

चेतन ने बिमला के पीछे चलते हुए कहा..

बिमला- अरे ये तो तुम्हारी मम्मी की बदौलत है, देखो कैसा मज़ाक किआ है,

चेतन- हाहाहा सही है तुम तीनो लोगो की दोस्ती सही जैम रही है,

बिमला- अरे छोडो बस यही मज़ाक चलता रहता है.

इतने में दोनों चंचल और चेतन के कमरे में आ गए थे,

चेतन- यही तो ज़िन्दगी है अम्मा, दो पल हंस खेल लो परिवार के साथ,

चेतन एक और खड़ा हो गया और बिमला एक बैग खोल कर झुक कर उसमे देखने लगी, वहीं उसकी साड़ी और पेटीकोट गीले होने की वजह से उसके मोठे चूतड़ों से चिपके हुए थे जो की झुकने की वजह से और उभर कर सामने आ गए और उसी समय चेतन की नज़र अपनी सास के बड़े से और गोल मटोल नितम्बों पर पड़ी जो की गीली सारे और पेटीकोट में अपना पूरा आकार दिखा रहे थे,

ये देखते hi चेतन के दिमाग में चंचल की कही बातें आ गयी जो उसने अपनी माँ के बारे में कहीं थी और चेतन का लुंड तौलिया को उठता हुआ सर उठाने लगा, इधर बिमला ने अचे से बैग को देखा और फिर मुद कर चेतन से बोली- इसमें तो नहीं है दामाद जी,

और जैसे hi उसनर ये कहा उसकी नज़र अकस्मात् hi चेतन के उठे हुए तौलिये पर पद गयी और अगले hi पल बिमला की एहसास हुआ की तौलिया किस वजह से उठा है तो वो मन hi मन झेंप गयी,

बिमला मन hi मन सोचने लगी- हाय ढैय्या ये दामाद जी का लिंग खड़ा क्यों है अभी तक तो ठीक था, कहीं ये हमारे पिछवाड़े को देख नहीं रहे थे, हाय रे ये भी अपने बाप जैसे हैं, पर इसमें क्या गलती बेचारी की हमारी भी तो साड़ी पेटीकोट भीगा हुआ है बिलकुल चूतड़ से चिपका हुआ होगा, ये सब सोचते हुए बिमला की छूट पनियाने लगी..

चेतन- छोडो अम्मा मैं ढूंढ लूंगा, तुम जाओ नहालो जाकर कब तक ऐसे गीले कपड़ो में घूमोगी.

बिमला चेतन की आवाज़ से ख्यालों से बहार निकली और बोली- अरे कोई बात नहीं दामाद जी , अभी मिल जायेगा ये कह वो कमरे में नज़र दौड़ने लगी, वहीं चेतन अब उसके पूरे बदन का नाप लेने लगा, और जितना वो अपनी सास को देख रहा था उतना उसका लुंड और कड़क होकर ठुमके मार रहा था..

बिमला- उस थैले में हो सकती है,

ये कहते हुए उसने एक अलमारी में रखे थैले की और इशारा किआ, और आगे बढ़ उस थैले को अलमारी से उतर कर जैसे hi बिस्तर पर रखा उस थैले के ऊपर चिपकी हुई एक छिपकली डर से उछली और बिमला के सीने पर जाकर चिपक गयी, जिसके होते hi बिमला चिल्लाते हुए उछलने लगी और अपनी साड़ी को हटा कर उससे दूर करने की कोशिश करने लगी, इधर क्यूंकि बिमला की पीठ चेतन की और थी उसे समझ नहीं आया की अचानक क्या हुआ और वो घबरा कर बिमला की और लपका देखने के लिए और उसी लपकने में उसका तौलिया खुल कर नीचे गिर गया, वहीं बिमला ने तो अपनी साड़ी को पकड़ कर तब तक उतर कर नीचे फ़ेंक दिया था और छिपकली के लिए अपने बदन को देख रही थी, वहीं चेतन ने उसे पकड़ा और पुछा- क्या हुआ अम्मा..

बिमला- वह छिपकली..

चेतन- क्या छिपकली, तुम भी न अम्मा डरा hi दिया,

बिमला- अरे डरा hi क्या दिया हम खुद घबरा गए,

बिमला ने शांत होकर मुद कर चेतन की और देखकर कहा तो चौंक गयी क्यूंकि उसका दामाद बिलकुल नंगा उसके सामने खड़ा था जिसका लुंड कड़क होकर लहरा रहा था, कुछ पल तो बिमला की नज़र चेतन के लुंड पर hi जैम गयी पर फिट उसने खुद को संभाला और दूसरी और घूम गयी, वहीं ये देख चेतन को भी अपनी स्थिति का अंदाज़ा हुआ तो वो झेंप गया,

बिमला- दामाद जी दरवाज़ा लगा दो कोई ऐसे देख लिए तो...

बिमला ने दूसरी और चेहरा किये हुए hi कहा,

चेतन बेचारे के मुँह से सिर्फ हहहहहाँ निकला और वो दरवाज़े की और लपका और अंदर से कुण्डी लगाडी,

वहीं बिमला धड़कते मन के साथ थैले को खोल उसमे कपडे देखने लगी..

वहीं कुण्डी लगाने के बाद चेतन मुदा तो उसका दिमाग फर्ररी की गति से भी तेज़ दौड़ने लगा, कभी उसके मन में रात का खेल आता तो कभी उसके और चंचल की बातें तो कभी उसके पापा और चंचल के बीच जो हुआ उसका ख्याल, एक hi साथ बहुत से ख्यालों ने उसे घेर लिए, पर वहीं उसकी नज़र अपनी सास की गीले पारदर्शी पेटीकोट में चमकते हुए मोठे मोठे चूतड़ों पर थी जिन्हे देख साफ़ पता चल रहा था की पेटीकोट के नीचे उसकी सास ने चड्डी नहीं पहनी थी, फिर उसके दिमाग में आया की अम्मा ने मुझे दरवाज़ा बंद करने को क्यों बोलै, तौलिया उठाने को क्यों नहीं,

यही सोचते हुए और अपनी सास की गांड देखते हुए वो एक एक कदम से बिमला की और बढ़ने लगा जो की बैग से एक एक कपडा निकल कर देख रही थी,

वही चेतन का दिमाग अब भी चल रहा था, अगर कुछ दिन पहले की बात होती तो चेतन ऐसी स्तिथि मैं शर्म से तुरंत कमरे से निकल गया होता पर पिछले कुछ दिनों में जो हुआ था उसने चेतन के सोचने के ढंग को बिलकुल बदल कर रख दिया था, खासकर ये जानकार की उसकी पत्नी उसके पिता से चुद चुकी है वो अपनी सास को लेकर फैसला नहीं कर पा रहा था, वहीं पेटीकोट से झांकते बिमला के बड़े बड़े चूतड़ उसकी परेशानी और बढ़ा रहे थे,

चेतन बिमला के बिलकुल पीछे जाकर खड़ा हो गया उसका खड़ा लुंड बिमला के चूतड़ों से कुछ इंच hi दूर था,

चेतन- मिला क्या कुछ अम्मा?

चेतन ने पीछे से पूछा तो बिमला बिना उसकी तरफ देखे hi बोली- देख रही हूँ दामाद जी अभी मिल जायेगा,

बिमला ने ये बोलै hi था की चेतन ने कुछ ऐसा किआ जिससे वो बिलकुल हैरान रह गयी उसे अपनी नंगी कमर पर चेतन का हाथ महसूस हुआ, जिसे महसूस कर वो गंगना गयी,

चेतन ने अपनी सास की कमर पर हाथ रखते हुए सहलाते हुए बोलै- कोई बात नहीं अम्मा देख को आराम से...

बिमला- हम्म्म्म

से ज़्यादा नहीं बोल पाई और अपनी कमर पर अपने दामाद के हाथ को महसूस कर न चाहते हुए भी उत्तेजित होने लगी, तभी अचानक चेतन ने उसकी कमर सर हाथ हटा लिए और bola-amma हिलना मत, ऐसे hi रुको.

बिमला ने हैरान रहते हुए पुछा- क्या हुआ दामाद जी..

चेतन- अरे ये छिपकली अभी भी तुम्हारे पेटीकोट से चिपकी पड़ी है

बिमला- हाय ढैय्या रे. हटाओ इसे जल्दी.

चेतन- हिलना मत नहीं तो ऊपर चढ़ जाएगी.

बिमला- हाँ हाँ हटाओ दामाद जी..

बिमला बिलकुल जड़ होकर कड़ी हो गयी उसे कुछ पल बाद अपना गीला पेटीकोट नीचे से उठता हुआ महसूस हुआ, बिमला शर्म से और उत्तेजना से कंपनी लगी क्यूंकि अपने दामाद के सामने वो इस स्थिति में थी, पेटीकोट अब उसके घुटनो के भी ऊपर उठने लगा था,

बिमला- दद दामाद जी..

चेतन- ुहम्म अम्मा ऐसे hi रहो बस हटाने वाला हूँ,

वहीं चेतन का उत्तेजना से बुरा हाल था उसका लुंड ऐसा लग रहा था की फैट जायेगा, पेटीकोट उठाते हुए उसे अपनी सास की मोती केले के तने जैसी मांसल जांघें दिखने लगी थी और वो ये जनता था की पेटीकोट के अंदर उसकी सास ने चड्डी नहीं पहनी है तो हर इंच पेटीकोट उठने के साथ उसकी धड़कन बढाती जा रही थी,

बिमला- दामाद जी और कितनी देर?

चेतन - बस्सस एक मिनट और अम्मा तुम बस थोड़ा आगे झुक जाओ अपने हाथ बिस्तर पर टिका दो,

बिमला को ये बात बिलकुल अजीब लगी पर फिर भी न जाने क्यों उसने तुरंत अपने हाथ बिस्तर पर चेतन के कहे अनुसार टिका दिए,

इससे चेतन के सामने उसकी सास की गांड और उभर कर आ गयी, एक पल को तो चेतन को लगा वो झाड़ hi जायेगा पर उसने खुद पर काबू किआ अब पेटीकोट से सिर्फ बिमला के चूतड़ ढके हुए थे आगा थोड़ा सा भी ऊपर उठता तो वो अपनी सास की छूट और गांड देख सकता था,

चेतन ने एक गहरी सांस ली और कांपते हुए हाथों से पेटीकोट को और उठाया और धीरे धीरे उसके सामने अपनी सास की फूली हुई छूट और फिर गांड का भूरा कैसा हुआ छेड़ आ गया, चेतन तो बस कुछ पल यूँ hi देखता hi रह गया,

बिमला- का हुआ दामाद जी अब कितनी देर?

बिमला की आवाज़ से चेतन को होश आया..

वहीं बिमला झुकी हुई इंतज़ार कर रही थी उसे अपनी जांघों पर ठंडी हवा महसूस हो रही थी जो उसे और उत्तेजित कर रही थी, कुछ पल की ख़ामोशी के बाद उसे महसूस हुआ की दामाद जी कुछ हरकत कर रहे हैं पर क्या उसे समझ नहीं आया वो सोच रही थी की किस स्तिथि में है वो अपने दामाद के सामने अधनंगी कड़ी है, वही दामाद पूरा नंगा है, यहाँ आकर दो दिनों में hi न जाने क्या क्या बदल गया है,

इसी बीच उसे अपनी कमर पर फिर से चेतन का हाथ महसूस हुआ जिस पर उसने कुछ खास प्रतिक्रिया नहीं दी और अपने ख्यालों में खोई रही की अगले hi पल उसे अपनी छूट के होंठों पर एक गरम एहसास हुआ जिससे वो चौंक गयी और जब तक वो कुछ प्रतिक्रिया करती अगले hi पल उसके छूट के होंठ खुले और उसमे उसे कुछ अंदर समता हुआ महसूस हुआ, अब उसे ये समझते तो देर न लगी की ये क्या है, पर वो हैरान होकर सिर्फ इतना hi कह पाई- दामाआद जी एहहहहह क्याआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह.

वहीं दूसरी और चेतन से अपनी सास को ऐसे देख कर और काबू नहीं हुआ था तो उसने एक बड़ा निर्णय लेते हुए अपने लुंड को पकड़ा और उसे अपनी सास की छूट के मुहाने लगा उसकी छूट में सरका दिया और ये सब उसने इतना जल्दी किआ ताकि बिमला को सँभालने तक का समय न मिले.

बिमला- नाहीइ दामाद जी ये गलत है निकालू अह्ह्ह दामाद जी,

बिमला के अंदर जो संस्कार थे वो इसका विरोध करने लगे हालाँकि उसके बदन की और से कोई विरोध नहीं दिखा वो ज्यों की त्यों झुकी हुई कड़ी थी.

अपनी सास की गरम छूट में लुंड घुसकर चेतन को तो मानो जन्नत मिल गयी थी उसे एहसास हुआ की चंचल की कामुकता उसका बदन उसे उसकी माँ से hi मिला है , ये सोचते हुए चेतन ने अपनी सास की कमर को पकड़ कर एक धक्का और लगाया और अपने पूरे लुंड को जड़ तक अपनी सास की छूट में समां दिया...

बिमला- ओह्ह्ह्हह्हह अह्ह्ह्हह अम्मम्माह्ह्ह्हह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह दैयाआआह्ह्ह्हह्ह दामाद जीई अह्ह्ह.

चेतन- अह्ह्ह्ह अम्मम्माह्ह्ह्हह्ह कितनी गरम छूट है तुम्हारी आह्ह्ह्ह...

चेतन से ये सुन बिमला बिलकुल hi शर्मा गयी और कुछ नहीं बोली वही चेतन ने ये जान कर बोलै था वो चाहता था की बिमला उसके सामने खुले नहीं तो चुदाई के बाद भी वो उससे नज़रें चुराती हुई फिरेगी.

चेतन ने धीरे धीरे धक्के लगाना शुरू कर दिया साथ hi उसने हाथ आगे लेजाकर बिमला के ब्लाउज को भी खोल दिया और फिट उतर दिया फिर बिमला की ब्रा को और अंत में पेटीकोट का नाडा खोल उसे भी बिमला के सर की और से निकल कर उसे पूरा नंगा कर दिया, और कपडे उतरने में बिमला ने कोई विरोध नहीं किआ बल्कि साथ hi दिया जिससे चेतन की ख़ुशी और बढ़ गयी,

चेतन तो अब पूरी मस्ती में आकर अपनी सास की छूछीयो को मसलते हुए उसे छोड़ने लगा वही बिमला की बुइ उत्तेजना हर पल के साथ बढ़ती जा रही थी वो खुद के बदन में उठती तरंगो पर काबू करने की कोशिश कर रही थी पर नाकाम हो रही थी, साथ hi दामाद से छुड़वा कर वो इतनी उत्तेजित हो गयी थी जितनी आज तक नहीं हुई थी, उसकी छूट लगातार पानी बहा रही थी,

धीरे धीरे उसके मुँह से आनंद की सिसकियाँ निकलने लगी वहीं चेतन तो जैसे जन्नत में था..

चेतन- अह्ह्ह्ह ुहम्म्म्म आह्हः क्या छूट है अम्मा बिलकुल चंचल जैसी, दोनों माँ बेटी एक जैसी हो...

Bimla-uhmm ुहम्म अह्ह्ह्ह.

बिमला को भी उत्तेजना हुई ये सोचकर की उसका दामाद उसकी छूट की तुलना उसकी बेटी से कर रहा है,

चेतन- आह्ह्ह्हह कित्नाहहह मज़ा आएगा दोनों को साथ छोड़ने में आह्ह्ह्ह अम्मठ.

ये सुनकर तो बिमला का पानी hi छूट गया की उसकी बेटी और वो साथ साथ छुड़वाए तो कैसा नज़ारा होगा, कितना गलत पर कितना उत्तेजित करने वाला होगा, बिमला ये सब सोचते हुए अपने दामाद से छुड़वा रही थी...

वहीं चेतन को तो यकीन नहीं हो रहा था की रात को hi उसकी पत्नी ने उससे ऐसी इच्छा जताई थी और अभी वो उस इच्छा को पूरी कर रहा था,

चेतन खुश होते हुए नीचे देखने लगा जहाँ उसकी सास के बड़े बड़े चूतड़ों के बीच उसका लुंड अंदर बहार हो रहा था वहीं उसकी सास का भूरा छेड़ बिलकुल कैसा हुआ उसे बेहद लुवाभ्ने और आकर्षक लग रहा था, चेतन को उसे देख कुछ सूझा और उसने अपनी एक उंगली अपने थूक से गीली की और बिमला की गांड के छेड़ पर फिरने लगा, बिमला जो की पहले hi दामाद से छुड़वा कर उत्तेजना की लहार में गोते लगा रही थी अब उसके इस हमले से सिसकने लगी..

वहीं चेतन का ये हमला सिर्फ सहलाने तक नहीं रुका अगले hi पल बिमला को महसूस हुआ की चेतन की उंगली उसके गांड के छेड़ को कुरेद रही है और फिर एक गरम एहसास के साथ उसकी उंगली बिमला की गांड के छेड़ में प्रवेश कर गयी, जिससे बिमला के बदन में तो बिजली दौड़ गयी उसका पूरा बदन झटके खाने लगा, चेतन ने उसे कास के खुद से चिपका लिया और बिमला थरथराती रही और कुछ पल बाद शांत हुई चेतन का लुंड अब भी उसकी छूट में था पर उंगली गांड से निकल चुकी थी, चेतन ख़ुशी से फूला नहीं समां रहा था की उसने अपनी सास को स्खलित होने पर मज़बूर कर दिया है...

थोड़ी देर साँसे साधारण करने के बाद बिमला गर्दन घुमा कर चेतन की और देख कर बोली- ओह्ह्ह दामाद जी रुक कहे गए छोड़ो न अपनी अम्मा कोठ..

ये सुन चेतन के चेहरे पर एक बड़ी सी मुस्कान आ गयी और फिर उसने बिमला की कमर को थामे तेज़ी से छोड़ना शुरू किया, उसके धक्के हर पल के साथ तेज़ होते गए और कुछ hi पालो में इतनी तेज़ थे की अपनी सास की छूट का भुर्ता बना रहे थे, बिमला अपने मुँह को दबाये खुद को चीखने से रोक रही थी, चेतन इस बात से उत्तेजित की अपनी सास को छोड़ रहा है साडी उत्तेजना बिमला की छूट पर निकल रहा था और तब तक निकलता रहा जब तक उसका रास बिमला की छूट में नहीं निकल गया, बिमला इस दुमदार चुदाई से एक बार और झाड़ गयी,

झड़ने के बाद दोनों बिस्तर पर पसर गए कुछ पल बाद बिमला उठी और चेतन को भी उठाते हुए बोली - दामाद जी उठो कोई आ गया तो परेशानी हो जाएगी,

चेतन मुस्कुराते हुए उठा और फिर बिमला ने चंचल की hi साड़ी लेली पहनने को साथ hi चेतन ने भी अपने कपडे पहन लिए जो बिमला ने निकले और दोनों कमरे से बहार निकल गए,


चोदामपुर

कर्मा बाघ से लौट hi रहा था की उसका फ़ोन बजा उसने उठाया और बोलै- और भाई मेरे लौंडे क्या हाल हैं?..... ाचा,...... नहीं बाघ में हूँ,.... कहाँ?..... चल आता हूँ...

और फ़ोन जेब में रख लिए..

थोड़ी देर बाद वो और सरजू पेड़ की एक दाल पर बैठ कर पेप्सी पि रहे थे.

कर्मा- और बता लौंडे क्या बात है?

सरजू थोड़ा गंभीर मुद्रा में सोचते हुए बोलै- यार कैसे बताऊँ?

कर्मा - मुँह से बता न.

सरजू- यार बात थोड़ी वैसी है.

कर्मा- क्या हुआ लुंड खड़ा नहीं होता? अरे कोई बात नहीं एक बाबा को जनता हूँ मैं हो जायेगा ठीक.

सरजू- सेल हरामी.

कर्मा - हाहाहा अबे तो टट्टे सी शकल बना के बैठा बता तो.

सरजू- तुझे याद है पिछली बार की बात हमारे बीच की.

कर्मा- हाँ याद है ऐसे hi मस्त पेप्सी पिलाई थी मैंने तुझे.

सरजू - और?

कर्मा- और क्या? और तेरी माँ की गांड देख कर हिलाया था.

सरजू- हाँ पर थोड़ी इज़्ज़त से नहीं बोल सकता.

कर्मा- ज्ञान मत छोड़ बात क्या है वो बता.

सरजू- बात वही है यार उस दिन वाली मम्मी की... मम्मी की गांड..

कर्मा- मतलब.

सरजू- मतलब उस दिन से यार मम्मी की गांड को दिनाग से निकल hi नहीं प् रहा हूँ, घर में भी मम्मी को देखता हूँ तो कल्पना करने लगता हूँ नंगी कैसी दिखती होंगी, साला बुरा हाल हो गया है, पता नहीं कितनी बार मम्मी को सोचकर हिला लिए होगा पर शांति hi नहीं मिलती.

कर्मा- अच्छा तो ये परेशानी है, मादरचोद बनने के लक्षण हैं ये तो.

सरजू- अब तू ज्ञान मत छोड़ यार साला समझ नहीं आ रहा क्या करूँ और तूने ब्बि बताया था की मैं बताऊंगा पर कुछ बताया नहीं फिर.

कर्मा- ाचा हाँ थोड़ा काम में लग गया था,

सरजू- यार कुछ करवा सेल मम्मी के सामने आते hi लुंड खड़ा हो जाता है बड़ी मुश्किल से छुपता फिरता हूँ.

कर्मा- अरे यही तो गलत करता है सेल छुपता क्यों है.

सरजू- ाचा फिर और क्या करूँ दिखता फिरूं सबको? चूतिया है क्या? अब कल मैं मम्मी बिरजू पापा लड़ो सब बुआ के घर जा रहे हैं वहां पर किसी ने देख लिए तो क्या सोचेंगे,

कर्मा- अबे झंटू सबके सामने नहीं, सिर्फ जब तू और चची हो तब और ऐसे बर्ताव कर जैसे ये कोई बड़ी बात नहीं है, अगर लुंड खड़ा है तो काम में लगा रह, उन्हें देखने दे तू मत जाता उन्हें की तू उन्हें देख रहा है.

सरजू- और?

कर्मा- और क्या सोते हुए कच्चा पहन कर सो और जब चची आएं तो उन्हें अपना खड़ा लुंड दिखने की कोशिश कर...

कुल मिलकर उन्हें अपना लुंड दिखा पर ये नहीं लग्न चाहिए की तू जान बूझ कर दिखा रहा है.

सरजू- अच्छा ऐसी, समझ गया..

कर्मा- वैसे पूरा परिवार जा क्यों रहा है, बुआ के यहाँ? जानवरो को कौन देखेगा?

सरजू - अरे बुआ के लड़के का मुंडन है, और नीतू नहीं जा रही वो रुकेगी,

ये बात सुनकर कर्मा के कान खड़े हो गए,

कर्मा - ाचा चल कोई नई वैसे ले जाते उसे भी जानवरो की देख रेख हम कर लेते.

सरजू- अरे नहीं उसे पढाई वधाई करनी है ..

कर्मा - चल वो सही है पर जो मैंने बताया उस पर ध्यान देना,

सरजू- हाँ बिलकुल यार,

कर्मा- और कोशिश किआ कर उन्हें छूने की जैसे प्यार में गले लगा लिए, पेट पर हाथ फिरा दिया.

सरजू- अरे वो तो करूँ पर लुंड खड़ा रहता है वो चुभ जायेगा.

कर्मा- चुभने दे पर तू ऐसे दिखा जैसे सब बिलकुल साधारण है,

सरजू- सेल मार पद जाएगी.

कर्मा- नहीं पड़ेगी पर अगर छूट चाहिए तो थोड़ी तो हिम्मत दिखानी पड़ेगी.

सरजू- बात तो सही है.

कर्मा- चल फिर चलते हैं और आज से hi लगजा काम पर.

सरजू- जी गुरु देव,

हँसते हुए कहता है और दोनों मज़ाक करते हुए निकल जाते हैं...

जारी रहेगी
 
अपडेट 189

चोदामपुर

कर्मा ये सोच कर खुश होता हुआ घर आ गया की आखिर नीतू के साथ कुछ जुगाड़ हो सकता है,

घर आता है तब तक खाना पीना बन चूका था, खाने बैठे hi थे की ममता चची आती है.

ममता- अरे सही समय से आ गयी चलो सब खाने बैठे hi हो,

सभ्य- अरे का हो गया,

ममता- अरे वो पनीर की सब्ज़ी बनाई थी बनाते बनाते समय काग गया इसलिए बनते hi ले कर चली आई.

अनुज- अरे वाह चची मज़ा आएगा.

सभ्य- तुन भी न ममता रानी, बच्चो को बुला लिए होता,

ममता- अरे कोई बात नहीं जीजी, शालू ला कटोरी दे तो.

शालू कटोरी लती है फिर सबको पनीर की सब्ज़ी परोसी गयी,

एक दो निवाले खाने के बाद नीलेश बोले- वाह भाई ममता सब्ज़ी तो बहुत स्वादिष्ट बनाई है.

कर्मा- हाँ चची बहुत मस्त है.

सभ्य- हाँ ये बात तो है ममता के खाने की बराबरी कोई नहीं कर सकता,

शालू- सिर्फ खाने की hi नहीं किसी भी चीज़ में जीजी की कोई बराबरी नहीं है..

शालू ने ममता को बाहों में भरते हुए कहा,

ममता- बस बस अब सब मिलकर हमें चने के झाड़ पर न चढ़ाओ.

सभ्य- ाचा फिर किस पर चढ़ना है?

ममता सभ्य की दो अर्थी बात का मतलब समझ शर्मा गयी और सभ्य को बच्चों की और इशारा करने लगी.

ममता- चलो जीजी अब मैं चलती हूँ, पल्ली के पापा को भी खाना देना है.

सभ्य- लो बताओ तू भैया को ऐसे जी छोड़ यहाँ भागी चली आई, बिलकुल hi बौड़म है तू,

अनुज- उन्हें भी यही बुला लेते हैं न सब साथ में खाएंगे.

ममता- अरे नहीं लल्ला चूला जल रहा है वहां ऐसे खली छोड़ना सही नहीं है तुम लोग खाओ अब.

इसके बाद ममता चची चली गयी और सबने उनकी बनाई हुई पनीर की सब्ज़ी का लुत्फ़ उठाया, खाना पीना करने के बाद कर्मा ने अंजलि को hi का मश्ग किआ, साथ hi एक मश्ग नीतू को भी किआ.

कुछ hi देर में अंजलि का रिप्लाई भी आ गया, कर्मा के चेहरे पर मुस्कान आ गयी, वो छत पर जाकर उससे मश्ग में बात करने लगा, ऐसी hi नार्मल बातें करने लगे दोनों एक दुसरे की पसंद नापसंद को जानने की कोशिश करने लगे,

वहीं उससे कुछ घर दूर आज सरजू का दिमाग चल रहा था वो आज कर्मा की बताई हुई तरकीबों को आज से शुरू कर देना चाहता था, इसी लिए वो आंगन में पड़ी खत पर बैठ गया और अपनी मम्मी को जो की खाना बना रही थी उसे देखने लगा,

गर्मी से परेशां रज्जो ने अपने पल्लू को अपनी छाती से हटा कर कमर पर लपेट रखा था और उसी से सरजू को अपनी मम्मी की थैलियों का अचे से दर्शन हो रहा था जो ब्लाउज को फाड़ कर बहार आने को बेताब थे, और हों भी क्यों न रज्जो की छुछियां सभ्य, शालू ममता इन सब से बड़ी hi थी सिर्फ शशि और मंजू टक्कर में आती थी आकर के मामले में, अभी सरजू अपनी माँ की उन्ही चूचियों को देख कर आहें भर रहा था





सरजू के दिमाग में बस यही चल रहा था की कैसे कर्मा की बताई हुई तकनीक को प्रयोग में लाया जाये, उसने कुछ सोचा और देखा अभी उसकी मम्मी अकेली है आंगन में और उसके भाई बहन भी कमरे में टीवी देखने में व्यस्त थे,

मौके का फायदा उठा कर वो रसोई में जाकर अपनी माँ के पास खड़ा हो गया,

सरजू- वो मम्मी कल के लिए साडी तैयारियां हो गयी चलने की?

रज्जो - क्या hi तैयारियां करनी हैं, एक दिन के लिए, मुझे तो समझ नहीं आता पूरे परिवार के जाने की क्या जरुरत है..

सरजू जनता था उसकी मम्मी क्यों जाने के नाम से चिढ रही थी, उसकी मम्मी और बुआ की कभी नहीं बानी, छोटे से hi वो देखता आ रहा था जब बुआ का ब्याह भी नहीं हुआ था तबसे hi उन दोनों में खूब जाली कटी होती थी, और कई कई दिन दोनों एक दुसरे से बात नहीं करते थे, और वो मन के भेद ब्याह के बाद भी काम नहीं हुए थे क्यूंकि बुआ जब भी आती थी अपने ससुराल से उसकी मम्मी को तने मरने से नहीं चूकती थी,

फिर भी सरजू ने बात बदलते हुए कहा- अरे तो क्या हो गया मम्मी एक hi दिन की बात है झेल लेना.... बुआ को.

सरजू की इस बात पर रज्जो की भी हंसी छूट गयी.

रज्जो- चल रे कमीना ऐसे नहीं बोलते बुआ के बारे में.

सरजू- ाचा और तुम जो उन्हें भर भर के गलियां देती हो उनका क्या,

रज्जो- तुझे बड़ा पता है,

सरजू- अरे मम्मी हो मेरी मुझे नहीं पता होगा और किसे पता होगा,

ये कहकर सरजू ने हिम्मत दिखाई और अपनी मम्मी को पीछे से बाहों में भर लिए प्यार जताते हुए जो की रज्जो के लिए थोड़ा हैरान करने वाला था पर हर माँ को ख़ुशी होती है जब उसकी संतान उससे प्यार जताये तो रज्जो को भी मन hi मन ख़ुशी हुई.

रज्जो- अरे आज क्या हुआ बड़ा प्यार आ रहा है मम्मी पर, कुछ चाहिए होगा?

सरजू- नहीं मम्मी, मतलब तुमसे मैं तभी प्यार जाता सकता हूँ जब कोई काम हो वैसे नहीं?

रज्जो- ाचा वैसे तेरे पेअर घर में टिकते बड़े हैं हमेशा तो बहार hi रहता है.

सरजू- ाचा अब से घर पर रहा करूँगा मम्मी सिर्फ काम से बहार जाय करूँगा, बाकि समय तुम्हारे साथ.

ये कहकर सरजू ने हाथ नीचे सरकते हुए अपनी माँ की मांसल नंगी कमर पर रख लिए और रज्जो ने भी कोई विरोध नहीं किआ

रज्जो- हाँ जानती हूँ कितना रुकेगा तू, आज कोई लफंगा दोस्त नहीं मिला होगा इसलिए मुझे सत्ता रहा है,

सरजू- अरे मम्मी तुम भी न, मान hi नहीं रही हो बात,

सरजू ने बच्चो की तरह बोलते हुए अपने हाथ रज्जो की कमर से फिरते हुए उसके पेट पर कास लिए.

रज्जो - ाचा ाचा मान ली, ऐसे hi अछि आदतें दाल और सुन बीड़ी तो नहीं पीटा तू अब भी?

सरजू- कहाँ मम्मी वो तो मैंने कब की छोड़ दी, और मैं पिता थोड़े hi था बस एक दो बार ड्राइवर के साथ बस स्वाद के लिए पि थी...

सरजू बातें करते हुए बड़ी सावधानी से धीरे धीरे अपनी मम्मी के पेट पर हाथ फिरने लगा जिस पर रज्जो ने अभी तक तो कोई विरोध नहीं जताया था इसलिए सरजू मन hi मन खुश था हालाँकि मम्मी के इतने करीब होने से उसका लुंड पाजामे ने उठ कर खड़ा था पर उसने अपनी कमर को पीछे किआ हुआ था ताकि वो उसकी मम्मी को न छुए, अभी इससे आगे बढ़ने की न उसने सोचा था और न hi उसकी हिम्मत थी,

रज्जो- ऐसे hi चीज़ों का स्वाद लेना रह गया है न बस.

सरजू- अरे मम्मी मैं कह रहा हूँ न कभी नहीं पियूँगा आगे से.

रज्जो- सच्ची हमारी कसम.

सरजू- तुम्हारी कसम.

रज्जो- बस ऐसे hi ाचा इंसान बन, गंदे दोस्तों का साथ छोड़,

सरजू- हाँ मम्मी मैंने सरे गंदे दोस्तों का साथ छोड़ दिया है, और तुम hi कहती थी न की कर्मा के साथ रहा कर वो कितना मेहनती है तो अब मैं उसी के साथ रहता हूँ बस.

कर्मा का नाम सुनते hi रज्जो थोड़ा झेंप गयी और उसको वो सरे दृश्य याद आ गए जो कर्मा के साथ हुए थे, साथ hi उसे महसूस हुआ की उन्हें याद करके उसकी छूट में एक हलकी सी कुलबुलाहट हुई.

रज्जो- अच्छा .

सरजू- हाँ मम्मी और सुनो मैंने उसे बता दिया है की हम सब कल जा रहे हैं नीतू अकेली रहेगी तो जानवरों का ख्याल रखे और घर पर भी नज़र बनाये रखे.

नीतू और कर्मा का नाम एक साथ सुनते hi रज्जो का दिमाग चलने लगा,

रज्जो- हाय ढैय्या ये तो हमारे ध्यान से hi निकल गया की नीतू घर पर अकेली रहेगी ऊपर से जे बात कर्मा को भी पता चल गयी है, अब ये बिना कुछ किये मानेगा नहीं, हे मैया अब का करूँ.

सरजू- क्या हुआ मम्मी किस सोच में पद गयी,

रज्जो- हैं? कक्क कुछ नहीं, जा तू सबको बुला ला और हाथ पेअर धो के बैठ खाना लगाती हूँ,

सरजू के लिए आज जो हुआ पहले दिन के हिसाब से काफी था और वो इसे एक अछि प्रगति मानते हुए ख़ुशी ख़ुशी अपनी मम्मी के कहे अनुसार अपग होकर चला गया,

वहीं रज्जो के दिमाग में लगातार वही चल रहा था क्या करे वो कैसे इन दोनों को कुछ भी गलत करने से रोके, रज्जो समझ रही थी दोनों जवान खून हैं और इस उम्र में होश से नहीं बल्कि अक्सर जोश से काम लेते हैं बच्चे, साथ hi ये जवानी का एहसास बदन की गर्मी वो करने पर मजबूर कर देता है जो करना भी नहीं चाहते,

वैसे कर्मा भी दिल का बुरा नहीं है आजतक हमेशा सबके काम आया है, मेहनती है, बड़ो का सम्मान करता है फिर भी जवानी के जोश के चलते नीतू तो छोडो वो मेरे साथ भी बहक गया, और उस दिन वो काण्ड हो गया, और सिर्फ वह hi कहाँ बहका था, बहक तो मैं भी गयी थी, उसका लुंड देखकर, वैसे कुछ भी हो क्या मस्त लम्बा मोटा लुंड पाया है उसने, छूट को अचे से फैला दिया था, आह और छोड़ता भी अचे से है न चाहते हुए भी मुझे झड़ने पर मजबूर कर दिया था, अह्ह्ह्ह

ये सोचते हुए रज्जो की छूट पनियाने लगी और उसे पता hi नहीं चला की वो कब साड़ी के ऊपर से अपनी छूट को सहलाने लगी, वो तो पीछे से बच्चों की आवाज़ आई तो उसे होश आया और उसने खुद को संभाला...

हाय ढैय्या मैं ये क्या सोचने लगी, अभी तो ये सोचना है की इन दोनों को अलग अलग कैसे रखा जाये, इसके बाद वो खाना खिलने में लग गयी,

उधर उनसे भी कुछ घर आगे एक और घर में खाना पीना हो चूका था और इस समय पारिवारिक प्रेम का एक अनूठा उदहारण देखने को मिल रहा था.





बिस्तर के एक और प्रेमा नंगी हो एक करवट को लेती थी और उसकी टैंगो के बीच उसके पूज्यनीय ससुर जी थे जो अपना लुंड अपनी बहु की कासी हुई रसीली छूट में अंदर बहार कर रहे थे और बहु भी अपने ससुर की चुदाई से मस्त होकर आहें भर रही थी, वहीं उसके ससुर राजपाल अपनी बहु की छूट पकट जन्नत में थे, राजपाल के बगल में hi उनकी गदराई हुई पत्नी भी उन्ही की तरह बिलकुल नंगी थी हो कर लेती थी और अपने बेटे को अपनी टैंगो के बीच लेकर उससे अपनी छूट की कुटाई करवा रही थी, पूरे कमरे में थप थप की आवाज़ें आ रही थी जग्गू अपनी माँ की छूट को दनादन पेल रहा था और इसी तरह एक और शाम ये परिवार बिता रहा था..

काफी देर अंजलि से मश्ग में बात करने के बाद जब बात समाप्त हुई तो कर्मा नीचे उतर के आया और फिर सीधा माँ पापा के कमरे में गया, वहाब जाकर देखा की प्रोग्राम शुरू हो चूका है, उसकी माँ बिलकुल नंगी होकर बिस्तर के किनारे लेती थी और अनुज उसकी टैंगो के बीच अपना कड़क लुंड अपनी माँ की रसीली छूट में उनकी कमर को थामे अपना लम्बा लुंड पेल रहा है...





सभ्य भी अनुज के हर धक्के पर सिसकियाँ ले रही है और अपने बेटे की चुदाई का लुत्फ़ उठा रही थी, वहीं बिस्तर के दूसरी और उसके पति अपनी पीठ पर लेते थे और उनके ऊपर उनकी साली शालू 69 की अवस्था में थी और उनके बड़े से लुंड को गले तक भर कर चूस रही थी वहीं अपनी छूट को अपने जीजा के मुँह पर घिसते हुए अपनी छूट चुसवा रही थी...

कर्मा ने भी जल्दी से अपने कपड़ो से पीछा छुड़ाया और अपने लुंड को हिलाते हुए आगे बढ़ कर अपनी माँ के मुँह के सामने कर दिया जिसे सभ्य ने अपने एक बेटे से छुड़वाते हुए दुसरे बेटे के लुंड को अपने मुँह में भर लिए और चूसने लगी, इस तरह यहाँ भी चुदाई का एक सुहाना दृश्य चलने लगा जिसमे हर थोड़ी देर के बाद बदलाव देखे गए शालू को भी उसकी बहन की तरह टिहरी चुदाई करवाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ अपने जीजा और भांजे के लुँडो से..





सभ्य अपनी बहन को अपने पति और बेटों से चुड़ते देख अपनी छूट सहलाते हुए उनका हौसला बढ़ा रही थी.

सभ्य- aiseeeeeeeeee hi छोड़ो बच्चो अपनी मौसी को इतनी बुरी तरह छोड़ो की जब तुम्हारर मौसा आएं तब तक ये छेड़ फैले रहे और उन्हें पता चले की उनकी बीवी कितनी बड़ी रंडी है,

नीलेश- ुहम्म अह्ह्ह ये तो सही है रंडी तो बहुत बड़ी है तुम्हारी बहन, तुम्ही से सीख रही है.

नीलेश ने शालू की छूट में नीचे से धक्के लगते हुए कहा,

कर्मा- अह्हह्ह्ह्ह मौसी क्या मस्त गांड है तुम्हारी ओह्ह्ह्ह कितनी गरम आह्ह्ह्हह बिलकुल माँ की तरह,

अनुज- ओह्ह्ह्हह्हह मौसी क्या मस्त चूसती हो तुम आह्हः लगता है लुंड उखड लोगी...

शालू तो कुछ बोल नहीं सकती थी इसलिए उसका जवाब उसकी बहन दे रही थी.

सभ्य- हाँ बीटा मौसी का मुँह अचे से छोड़ो आह्हः काश भैया यहाँ होते और अपनी बीवी को ऐसे देख पाते,

नीलेश- ओह्ह्ह्ह हांण अपनी पत्नी की टिहरी चुदाई देख जोश से भर जाते,

अनुज- मज़ा आता मौसा भी साथ होते तोह,

सभ्य- हाँ देख पाते की उनकी पत्नी कितनी चुड़क्कड़ बनती जा रही है,

कर्मा- चुड़क्कड़ तो सब hi हैं माँ, आह्ह्ह्हह मौसी की गांड कितनी कास रही है छूट में पापा का लुंड होने की वजह से..

शालू का तो बुरा हाल था पहली बार तीन तीन लुंड एक साथ लेने के कारन साथ hi ऐसी उत्तेजित करने वाली बातें सुन सुन कर उसकी छूट कई बार पानी छोड़ चुकी थी पर ये बाप बेटे थे की उसे छोड़ने का नाम hi नहीं ले रहे थे और लगातार चोदे जा रहे थे, अंत में झाड़ कर वो बिलकुल बेजान सी होकर नीलेश पर गिर गयी तो जाकर सभ्य बोली- अरे रुक जाओ तुम लोग बिलकुल जान hi निकलोगे क्या मेरी बहन की?

ये सुनकर कर्मा ने मौसी की गांड से लुंड निकला फिर अनुज ने मुँह से और नीलेश ने उसे उठाकर बगल में लिटा दिया,

सभ्य ने अपनी बहन को तो बचा लिए पर उसके बदले उसे खुद की क़ुरबानी देनी पड़ी क्यूंकि तीनो फुँकारते लुंड उसके बिलो में जल्दी hi घुस गए और अब तड़पने की बरी उसकी थी..

अनुज नीचे लेता था और उसका लुंड उसकी माँ की छूट में था, कर्मा अपनी माँ के पीछे था और उनकी गांड में लुंड घुसाए हुए अंदर बहार कर अपनी माँ की मखमली गांड का आनंद उठा रहा था, नीलेश अपनी पत्नी के गले तक लुंड घुसते हुए उसे अपने दोनों बेटों से चुड़ते हुए देख एक गर्वान्वित पिता की तरह खड़े थे,





एक बार फिर से कमरे में एक जबरदस्त चुदाई का दौर चल निकला, शालू लेते लेटर hi आँखें खोल कर अपनी जीजी की दुमदार चुदाई होते देख रही थी, वहीं तीनो बाप बेटे मिलकर अपनी माँ को चुदाई का अद्भुत सुख प्रदान कर उसे संतुष्ट करने का हर संभव प्रयास कर रहे थे, करीब 15 मीन्स की चुदाई में सभ्य दो बार झाड़ चुकी थी और जब टीसी बार झड़ने को हुई तो उसके स्खलन का वेग इतना तेज़ था की अपने साथ साथ तीनो मर्दों को भी उनके चरम तक ले गया, नीलेश झड़ने को हुए तो उन्होंने अपना लुंड सभ्य के मुँह से निकला और लुंड को मुठियाते हुए उसका निशाना पत्नी के चेहरे की और किआ और फिर एक के बाद एक लुंड रास की पिचकारी उनके लुंड से निकल कर सभ्य के चेहरे को भीगने लगी नीलेश ने एक एक बूँद पत्नी के चेहरे पर छोड़ दी उसके बाद पीछे हैट कर बैठ गए,

अपने पापा को माँ के चेहरे पर झड़ते देख कर्मा ने उनकी गांड से लुंड निकला और अनुज ने भी उन्हें अपने ऊपर से उठा कर बिठा दिया और फिर दोनों hi माँ के दोनों और खड़े होकर अपने लुंड को मुठियाते हुए माँ के चेहरे पर निशाना साधने लगे पहला हमला अनुज ने किआ और पापा की तरह hi माँ के चेहरे को अपने रास से भरने लगा, सभ्य को भी अपने चेहरे पर अपने पति और बच्चों का रास लेकर एक अलग hi अनुभूति हो रही थी इसलिए वो भी अपना चेहरा आगे कर उन्हें उकसा रही थी, जल्दी hi अनुज ने अपना सारा रास माँ के चेहरे पर उढेल दिए, माँ का चेहरा पूरी तरह लुंड रास से भीगा हुआ था इसी के तुरंत बाद कर्मा ने भी अपनी लुंड पिचकारी की धार माँ के चेहरे पर मारनी शुरू कर दी, एक के बाद एक धार से माँ का पहले से hi भीगा हुआ चेहरा बिलकुल रास से सराबोर हो गया और अब तो रास उनके चेहरे से टपक कर नीचे गिरने लगा.





जल्दी hi कर्मा के रास की धार भी ख़तम हुई और वो पीछे हैट कर बैठ गया.

सबकी नज़र माँ के चेहरे की और थी, जो की सबको मुस्कुराते हुए देख रही थी,

शालू- हाय जीजी बड़ी सूंदर लग रही हो ऐसे रास में नहाकर.. मैं भी अगली बार करवाउंगी ऐसे hi

शालू ने बिस्तर से उठाते हुए कहा,

शालू- बिलकुल बन्नो,

नीलेश- ये बात तो है क्या मस्त और कामुक लग रही हो,

कर्मा - इतनी लुंड की क्रीम लगाई है सुन्दर तो लग्न hi था,

अनुज- हेहेहे अब और कोई क्रीम की ज़रुरत hi नहीं है,

इधर इतने में शालू अपनी बहन के पास पहुँच चुकी थी और उसके सामने बैठ कर अपना चेहरा आगे किआ और जीभ निकल कर सभ्य के चेहरे से रास को चाटने लगी, सभ्य भी उसका ये रंडपना देख खुश हो गयी वहीं तीनो मर्द भी मुस्कुराते हुए इस नज़ारे को देखने लगे,

नीलेश- दोनों बहनें hi एक जैसी हैं चुड़क्कड़, कोई किसी से काम नहीं हैं.

कर्मा - यही तो अछि बात है पापा, एक जैसी हैं तभी तो हमारे मज़े हैं.

अनुज- ओह्ह्ह्हह्हह देखो कैसे जीभ से एक दुसरे को रास खिला रही हैं, हाय ये देख कर मेरा लुंड दोबारा खड़ा होने लगा...

कर्मा- मेरा भी.

और हो भी क्यों न सामने का नज़ारा hi इतना कामुक था, शालू जीभ से सभ्य के चेहरे से रास चाटती फिर उसे सभ्य के मुँह में घुसकर सभ्य को चाटती, दोनों बहनें इसी तरह मिल बाँट कर सारा रास चाट गयी और फिर एक दुसरे के साथ एक लम्बे चुम्बन के साथ जिसमे दोनों ने एक दुसरे के होंठों और जीभ को खूब चूसा फिर अलग हुई, और अलग होकर देखा तो तीनो बाप बेटे उन्हें बड़ी बड़ी आँखों से देख रहे थे,

सभ्य- अब ऐसे देखने से कुवह नहीं होगा, हम थक गए हैं चुप चाप सो जाओ सब, सभ्य का कहना माना गया और फिर सब नंगे hi एक दुसरे से चिपक कर सो गए.

उधर रात को सोते हुए भी रज्जो के दिमाग में बस नीतू और कर्मा hi चल रहे थे, बीच बीच में उसका मन कर्मा के लुंड को याद करके बहक भी रहा था और आज उसका मन छोड़ने का हो रहा था, पर उसके पति तो छत पर सो रहे थे, और उसके खुद के बगल में लाडो सो रही थी इसलिए कुछ कर भी नहीं सकती थी, वो सोचने लगी की न जाने क्यों ये इतनी पनिया रही है, बेचैन करके रखा है, उंगली से भी नहीं कर सकती कहीं लाडो जाग गयी तो,

ऐसा नहीं था की उसके पति उसे छोड़ते नहीं थे, बल्कि वो तो टाक में रहते थे वो hi उन्हें ताल देती थी ये कहकर की बच्चे बड़े हो गए हैं अब इतना सही नहीं वगेरा वगेरा, पर जब से कर्मा का जवान लुंड उसकी छूट में गया था तबसे hi उसकी छूट में एक नयी प्यास उठने लगी थी, अगर समाज की और अपने घर परिवार के सम्मान की फ़िक़र न होती तो वो दोबारा खुद कर्मा के आगे टंगे फैलाकर लेट जाती, पर समाज और परिवार को भी तो देखना है, इसलिए खुद के मन को मार के बेचारी शांति से कोशिश करते हुए सो गयी.

कर्मा के यहाँ अगली सुबह सब थोड़ा देरी से उठे क्यूंकि रात को देरी से सोये थे, उठाते hi सब अपने अपने काम को भागे सभ्य ने कर्मा अनुज को भी जगा दिया, नीलेश भी समय देखकर चौंके और बाघ की और लपके, इधर अनुज भी जल्दी से उठके बाथरूम में घुस गया उसे स्कूल जाना था, कर्मा अपने पापा के पीछे पीछे बाघ पहुँच गया, और सुबह के जानवरों के काम निपटने लगा नीलेश भी बाकि के काम सँभालने लगे, जल्दी hi सारा काम निपट गया और जैसे hi चलने को हुए वहां अनुज और पल्ली स्कूल ड्रेस में आते दिखाई दिए जो की पापा को नमस्ते कह कर स्कूल चले गए,

और कर्मा और उसके पापा घर की और आगे बढ़ गए,

वहीं दूसरी और रज्जो के यहाँ पूरा परिवार तैयार हो रहा था वहीं रज्जो बस एक hi चिंता में थी की क्या करे नीतू और कर्मा का, उसका ये सोच सोच कर दिमाग ख़राब हो रहा था, एक दो बार उसने पति से बोलै भी की वो नहीं जाती तुम लोग hi चले जाओ पर पति ने ये कह दिया- की एक दिन की बात है कौन सा रोज़ रोज़ जाती हो...

खैर उँचाहे hi सही वो तैयार हुई और सब लोग घर से निकल पड़े, निकलने से पहले भी रज्जो ने कई बार नीतू को चेतावनी दे दी की कुछ गलत न करे,

पर वो जानती थी की जवान खून इतना hi सोचता तो क्या बात होती, उधर नीतू भी खुश थी उसने जानकार पहले hi पापा से पढाई का बहाना बना दिया था ताकि उसे न जाना पड़े, वो भी अपनी छूट की खुजली से परेशां थी और आज किसी तरह इसको शांत करना चाहती थी, उसने पहले सोचा की अंजलि को बुला ले पर वो जानकार नहीं बुलाई क्यूंकि आज वो अपनी छूट को शांत करवाना चाहती थी,

पूरा परिवार सिवाए नीतू के जा hi रहा था की सामने से कर्मा और उसके पापा आते हुए दिखे, कर्मा को देख रज्जो का दर एक बार फिर से पनपने लगा,

दीं दयाल - प्रणाम भाई साब,

नीलेश- प्रणाम दीनू, कहाँ चल दिए पूरे परिवार सुबह सुबह hi,

दीं दयाल - अरे वो सुधा के लड़के का मुंडन है न. तो वहीं जा रहे है.

नीलेश- अरे वाह पर कैसे जाओगे?

दीं दयाल - बस से,

नीलेश- धत्त बहु बच्चे सब जा रहे हैं इन्हे बस में परेशां करवाओगे, रुको...

उधर दोनों को बात करता देख सब रुक गए और सरजू कर्मा के पास आ गया और उससे बात करने लगा.

दीं दयाल - फिर और का करें,

नीलेश- रुको हम गाडी बुलवाते हैं उसमे जाना, शाम तक तुम्हारे साथ रहेगा और ले भी आएगा.

ये सुनकर बच्चे खुश हो गए.

लाडो- हाँ पापा ये सही रहेगा.

बिरजू - मंगदो ताऊजी.

रज्जो को भी बस की जगह गाड़ी का विकल्प hi ठीक लगा

नीलेश- अरे हम अभी फ़ोन कर रहे हैं अभी आ जायेगा 10 मिनट्स में.

ये कहकर नीलेश फ़ोन मिलाने लगे,

इधर कर्मा सरजू सबसे अलग होकर बात करने लगे

कर्मा- क्या बात है आज तो चमक रहा है,

सरजू- अबे वो सब छोड़, काम की बात सुन.

कर्मा- सुना

सरजू- तेरी तरकीब काम आ रही है.

कर्मा- मतलब?

सरजू- मतलब,

फिर सरजू उसे रात को जो हुआ वो साडी बात बताता है...

कर्मा- शाबाश मेरे शेर ऐसे hi धीरे धीरे कदम बढ़ाना है, और एक दिन तेरा सांप चची की गुफा में होगा ,

सरजू- हाय क्या बात कह दी यार मज़ा hi आ जायेगा, वैसे मम्मी जैसे तैयार हुई है मेरा तो लुंड खड़ा हो रहा है देख देख कर hi.

कर्मा ने भी रज्जो पर नज़र डाली





काली साड़ी में सच में कमाल की लग रही थी, सारी और ब्लाउज के बीच मांसल नंगी कमर और पेट, बीच में गोल गहरी नाभि और ऊपर ब्लाउज में क़ैद बड़ी बड़ी छुछियां,

एक पल को तो कर्मा का मन भी डोलने लगा पर उसे मन hi मन ख़ुशी थी की वो एक बार रज्जो चची की छूट का स्वाद चख चूका है,

खैर इसी तरह से बात चीत करते हुए 20 मिनट बीत गए, और इतने में गाडी वाला गाड़ी लेकर आ गया, सब एक एक करके बैठने लगे तो नीलेश ने ड्राइवर को समझा दिया की पैसो का हिसाब हमें आकर बताना हम करेंगे, सरजू बैठते हुए कर्मा से बोलै- कर्मा जानवरों को देख लिओ और नीतू घर पर अकेली है उसका ध्यान रखिओ.

कर्मा- हाँ अचे से ध्यान रखूँगा मैं नीतू का.

ये सुन कर तो रज्जो का जैसे दिमाग hi घूम गया, उसे समझ नहीं आ रहा था क्या करे कैसे करे उसे लगा आज उसकी बेटी के साथ कुछ न कुछ होकर रहेगा,

इसके बाद गाडी आगे बढ़ गयी और कर्मा नीलेश भी घर की और बढ़ गए, कर्मा का भी ध्यान अब नीतू का ध्यान रखने पर था और उसने अपना फ़ोन निकला पर फ़ोन निकलते hi उसके चेहरे पर मुस्कान आ गयी क्यूंकि पहले से hi उसके पास नीतू का मश्ग आया हुआ था जिसमें उसने उसे घर आने को कहा था.

कर्मा एक नयी छूट पाने की आशंका से खुश हो गया, और नीलेश से बोलै- पापा तुम चलो मैं आता हूँ थोड़ी देर में.

नीलेश- ठीक जल्दी ाइयो चाय भी नहीं पि है अभी.

कर्मा- हाँ पापा आता हूँ,

ये कहकर कर्मा फुर्ती में नीतू के घर की और निकल गया,

जल्दी hi कर्मा नीतू के घर के दरवाजे पर पहुंचा hi था और उसके दरवाज़ा खटखटाने से पहले hi नीतू ने दरवाज़ा खोल दिया जैसे वो इसी इंतज़ार में थी,

कर्मा अंदर आ गया तो उसके अंदर आते hi नीतू ने दरवाज़े पर कुण्डी लगा दी, और फिर मुस्कुराते हुए कर्मा को देखा दोनों ने एक दुसरे को देखा और फिर न जाने क्या हुआ दोनों एक दुसरे की और लपके और अगले hi पल दोनों के होंठ आपस में जुड़े हुए थे और दोनों hi पागलों की तरह एक दुसरे के होंठों को चूसने लगे, साथ hi कर्मा के हाथ नीतू के बदन पर फिसलने लगे,

करीब 10 मीन्स तक बस दोनों एक दुसरे के होंठों को hi पीते रहे और फिर अलग हुए तो हांफते हुए नीतू ने कहाँ कमरे में चलते हैं,

वहीं गाडी जैसे जैसे आगे बढ़ रही थी रज्जो का दिमाग ख़राब होता जा रहा था और उसे बार बार कर्मा के द्वारा कहे गए शब्द याद आ रहे थे, की मैं नीतू का अचे से ख्याल रखूँगा,

गाडी अपने गाओं की सड़क छोड़ कर मुख्या सड़क पर आ चुकी थी, रज्जो का मन बैठता जा रहा था, एक दो गाओं और पार किये तो रज्जो से रहा नहीं गया और बोली- भैया गाडी रोको,

दीं दयाल - क्या हुआ कुछ भूल गयी का?

रज्जो- नहीं वो उलटी सी हो रही है.

लाडो- अरे मैं तो भूल hi गयी मम्मी को गाडी में चक्कर आते हैं. उलटी होती है पिछली बार भी जब मां के यहाँ जा रहे थे तब भी तो हुआ था,

ड्राइवर ने गाडी रोक दी तो रज्जो उतर कर बहार आ गयी उसके पीछे दीं दयाल भी आ गए और बच्चे भी.

दीं दयाल- क्या हुआ ज़्यादा ख़राब लग रही है तबियत.

रज्जो को तो जैसे लाडो ने एक नया सुझाव दे दिया था और उसने उसे वैसे hi प्रयोग किया- अरे वो गाडी में चक्कर उलटी आते हैं न.

सरजू- अब क्या करें?

लाडो- तबियत ख़राब हो गयी तो वहां जाकर भी परेशानी hi होनी है,

दीं दयाल- ये तो समस्या हो गई.

रज्जो कुछ देर चुप रही और बोली- ऐ ग मैं तो कहती हूँ तुम और बच्चे चले जाओ मैं घर जाकर आराम कर लुंगी नीतू है hi ख्याल रखने के लिए.

दीं दयाल- पर सुधा फिर बोलेगी.

लाडो- अरे पापा बता देंगे न रस्ते में मम्मी की तबियत ख़राब हो गयी थी, अभी ज़बरदस्ती ले जाएँ और वहां जाकर परेशां हो तो इससे ाचा है यही रखकर आराम करें.

दीं दयाल- चलो ठीक है तुम्हे छोड़ देते हैं घर तक.

रज्जो- नहीं नहीं अब मेरा मन नहीं हो रहा गाडी में बैठने का, तुम लोग जाओ ज़्यादा दूर नहीं आये हैं मैं चली जाउंगी.

दीं दयाल- पगला गयी हो का अकेले छोड़ कर यहाँ चले जाएं.

रज्जो- अकेले का यहाँ पीछे hi मंदिर है वहां तक पैदल तो hi आतें हैं तो हम चले जायेंगे.

सरजू को थोड़ा बुरा लग रहा था उसने सोचा था की आज मम्मी से और नज़दीकियां बढ़ाएगा पर उसने सोच लिए की एक दिन की hi तो बात है.

खैर सब रज्जो को अचे से समझा कर गाडी में बैठ गए और फिर गाडी आगे बढ़ गयी, वहीं रज्जो बैठी हुई तब तक देखती रही जब तक गाडी उसकी आँखों से ओझल न हो गयी और फिर उठकर चलदी, घर करीब 2-3 किलोमीटर था यहाँ से तो हर कदम के साथ उसके मन में यही ख्याल आ रहे थे की उसने सही किआ अब जिसका दर था वो नहीं हो पायेगा, इधर उसके घर में वासना और उत्तेजना का तूफ़ान आया हुआ था, नीतू और कर्मा बिलकुल एक दुसरे को खाने ओर तुले हुए थे, दोनों के कपडे बदन से गायब थे और दोनों hi पसीने से नहाये हुए पागलों की तरह एक दुसरे के बदन को चूम चाट रहे थे,

कर्मा के सामने जबसे नीतू की संतरे जैसी चूचियां आई थी वो उन्हें छोड़ hi नहीं रहा था, और लगातार चूसने में लगा हुआ था, वहीं नीतू अपनी चूचियां चुसवाते हुए आहें भर रही थी, कर्मा चूचियों को चूसते हुए थोड़ा नीचे सरका और नीतू के सपाट पेट को भी वैसर hi चाटने लगा फिर उसकी नाभि में जीभ दाल कर चूसने लगा जिससे नीतू तड़प उठी, वहीं कर्मा का लुंड भी तड़प रहा था और ठुमके मार के अपनी बेकरारी बता रहा था,

कर्मा और नीचे सरका और उसके सामने नीतू की गीली गरम छूट आ गयी जिसे देखकर कर्मा के मुँह में पानी आ गया और उसने अपना मुँह उसकी छूट पर लगा दिया, और छूट को पूरी लगन से चाटने लगा, नीतू तो बिलकुल तड़पने लगी कर्मा इतने जोश में था की उसने नीतू के चूतड़ों की उठा लिया और उठाकर उसकी छूट चाटने लगा, नीतू तो इस अद्भुत मज़े से तड़पने लगी, वो अपनी चूचियों को मसलते हुए अपनी छूट से उठ रही तरंगो में बहने लगी.





कर्मा की अनुभवी जीभ का जादू बढ़चढ़ कर नीतू की छूट पर चल रहा था और उसका नतीजा ये हुआ की कुछ hi देर में नीतू की छूट ने पानी छोड़ दिया,

झड़ने के बाद लोग थोड़ा शांत होते हैं पर नीतू तो इसका उलट थी झड़ने के बाद तो उसमे जैसे और जोश आ गया और वो उठी और उठ कर कर्मा के होंठों को चूसने लगी जिसपर उसकी खुद की छूट का रास लगा हुआ था, कुछ पल होंठों को चूसने के बाद उसने कर्मा को धक्का देकर लिटा दिया और खुद उसके पैरों के बीच आकर उसके लुंड को देखने लगी,

कर्मा का बड़ा सा गरम लुंड देखकर hi नीतू की छूट दोबारा पनियाने लगी, उसने हाथ से कर्मा के लुंड को पकड़ लिए तो जैसे उसके लुंड को छूने से एक बिजली उसके पूरे बदन में दौड़ गयी,

नीतू कभी कर्मा के लुंड को देखती तो कभी उसकी आँखों में और फिर वो लुंड को पकड़ कर उसे अपने चेहरे पर रगड़ने लगी उसे अपने होंठों पर घिसते हुए उसे प्यार जताने लगी





कर्मा की तो आह्हः निकल गयी नीतू की इस हरकत से, वो तड़पने लगा, वहीं नीतू सख्त लुंड पाकर बिलकुल पागल सी हो गयी थी और फिर उसने अपने होंठ खोल कर लुंड के टोपे को मुँह में भर लिए जिससे कर्मा और सिसकने लगा,

वहीं नीतू पर तो आज वासना का ऐसा भूत सवार था जो उसे कुछ भी करने को बाध्य कर रहा था, नीतू कर्मा के लुंड को अपने मुँह में ज़्यादा से ज़्यादा भरने का प्रयास करने लगी, हालाँकि आधा लुंड hi उसके गले तक छूने लगा पर वो भी हार मैंने वालो में से नहीं थी और अपने मुँह को आगे पीछे कर खुद hi लुंड से मुँह को छोड़ने लगी, कर्मा भी नीतू की इस आक्रामकता से खुश था और उसकी हरकतों का मज़ा ले रहा था दोनों hi उत्तेजना के आसमान में उड़ रहे थे, इससे बेखबर की एक खतरे का बदल रज्जो के रूप में उनकी और लगातार बढ़ रहा था,

नीतू ने अचे से कर्मा के लुंड को चूस कर तर कर दिया वहीं उसकी छूट की कुलबुलाहट बढाती जा रही थी, वहीं कर्मा के लुंड को भी अब चुदाई चाहिए थी इसलिए कर्मा ने hi पहल करते हुए नीतू को उठाया और उसे पीठ पर लिटा दिया और खुद उसकी टैंगो के बीच आ गया, दोनों एक दुसरे को देख रहे थे कर्मा ने अपने लुंड को पकड़ कर नीतू की बहती छूट के ऊपर रखा तो नीतू सिसक पड़ी,

कर्मा- तेरी सील टूटी है?

नीतू - हाँ पर लुंड से नहीं गाजर मूली से...

इसपर दोनों hi हंस पड़े, कर्मा अपने लुंड को पकड़ कर नीतू की छूट पर आगे पीछे कमर कर घिसने लगा और नीतू की तड़पन बढ़ने लगी,





उधर रज्जो घर के बहार पहुँच चुकी थी उसने दरवाज़ा खटखटाने के लिए हाथ बढ़ाया hi था की रुक गया, वो कुछ सोचने लगी और फिर दरवाज़ा से हैट घर के पीछे भैंसों के बांधने वाली जगह की और आई, उसने सोचा था की अगर दरवाज़ा खटखटाया तो अगर कुछ गलत होगा भी तो वो रेंज हाथों नहीं पकड़ पाएगी, कहते हैं न शक इंसान से क्या क्या नही करवा देता वहां के लिए इंसान क्या क्या नहीं पार जार जाता..

खैर अभी तो रज्जो के सामने 5 फुट की मिटटी की दीवार थी जिसे उसे पार करना था अपने शक की पुष्टि के लिए,

रज्जो इधर उधर देखने लगी और उसने दीवार के बगल वाले अमरुद के पेड़ को देखा जो दीवार से बस 3 फुट दूर होगा उसने सोचा पेड़ का सहारा लेकर दीवार पर आसानी से चढ़ सकती हूँ,

ये सोच आगे बढ़ी और पेड़ की डाली पकड़ और दीवार का सहारा ले कर वो पेड़ के ऊपर चढ़ गयी अब उसे बस अब उसे दीवार पर पेअर चढ़ाते हुए दूसरी और उतरना था, ये कहना आसान था पर सारी पहनकर कर्मा थोड़ा सा मुश्किल, खैर रज्जो ने आगे पेअर फैलाकर दीवार पर टिकाया और पेड़ की ऊपर की डाली को सहारे के लिए पकड़ लिए, फिर सावधानी से दुसरे पेअर को भी रख लिए सब कुछ सही जा रहा था बस एक गड़बड़ हुई की पेड़ की एक डाली में उसकी सारी का एक सिरा उलझ गया था जिसका उसे अभी तक खुद भी अंदाज़ा नहीं था, जैसे hi उसने दीवार से नीचे उतरने के लिए आगे झुककर उतरने की कोशिश की तब उसे एहसास हुआ की उसे कुछ खींच रहा है और जब तक वो समझ पति उसका संतुलन बिगड़ता चला गया और वो नीचे फिसलती चली गयी, उसकी साड़ी ज्यों ज्यों खुलती चली वो वैसे hi धीरे धीरे नीचे होती चली गयी और ज़मीन पर गिर गयी पर क्यूंकि धीरे धीरे से गिरी तो चोट नहीं लगी पर साड़ी पूरी खुल गयी थी,

रज्जो ने उठ कर साड़ी को खींचने की कोशिश की पर वो पेड़ पर डालियों के बीच बुरी तरह उलझी थी ज़्यादा तेज़ खींचती तो पहात सकती थी और सिर्फ पेटीकोट में तो वो पेड़ पर दोबारा चढ़ कर निकलने से रही तो उसने साड़ी को वैसे hi छोड़ा और सिर्फ ब्लाउज पेटीकोट में hi भैंसों के छप्पर से होते हुए घर में प्रवेश कर गयी, म्हणत और गर्मी की वजह से उसका बदन पसीना पसीना हो रहा था.

ज्यों ज्यों उसके कदम अंदर की और बढ़ रहे थे न जाने क्यों उसका दिल ज़ोरों से धड़क रहा था, तभी उसे कोठरी के वागल वाले कमरे से हलकी हलकी आवाज़ सुनाई दी जिसे सुनकर उसका दिमाग घूमने लगा क्यूंकि उसे साफ़ साफ़ पता चल रहा था ये दो लोगों की आवाज़ है साथ hi जिस तरह की आवाज़ आ रही थी, उन्हें सुनते hi कोई भी समझ सकता था की क्या हो रहा होगा, उसका दिल ढोल की तरह बजने लगा जिस बात का उसे दर था उसे वो सच होती दिखाई दे रही थी, उसके कदम धीरे धीरे उस कमरे की और बढ़ने लगे, ये कमरा घर के सबसे अंदर था और इस के बहार hi अनाज की कोठरी और बोरियां राखी रहती थी,

रज्जो धड़कते दिल के साथ आगे बढ़ती है पर आगे जाकर देखती है दरवाज़ा लगा हुआ है, एक पल को सोचती है की अभी रेंज हाथ पकड़ कर ाचा सबक सिखाती हूँ, फिर उसके मन में न जाने क्यों ख्याल आता है एक बार देख के निश्चित तो करले.

यही सोच कर वो कुछ सोचने लगती है अंदर देखने का एक hi तरीका उसे समझ आता है और वो होता है, दरवाज़े के ऊपर बना रोशनदान पर समस्य ये थी की उस तक पहुंचा कैसे जाये,

वो बगल में पड़े पीड़ा को देखती है और उस पर चढ़ती है पर रोशन दान से काफी नीचे रहती है, वो कुछ और सोचने लगती है, और पीड़ा हटाकर बगल में रखे हुए गेहूं के बोर को गिरा लेती है और फिर थोड़ी जान लगाकर दूसरा बोरा भी उसके ऊपर सरका लेती है दोनों बोर एक दुसरे के ऊपर होने से काफी ऊपर हो जाते हैं और रज्जो तुरंत उसपर चढ़ कर देखती है थोड़े से पंजे उचकने के बाद उसे अंदर का नज़ारा दिखाई देने लगता है जिसे देखते hi रज्जो की आँखें चौड़ी हो जाती हैं.





अंदर बिस्तर पर नीतू बिलकुल नंगी टाँगे फैलाये लेती है और उसकी टैंगो के बीच बिलकुल नंगा कर्मा है जिसका लुंड नीतू की छूट से अंदर बहार हो रहा है,

ये दृश्य देख कर तो रज्जो के होश hi उड़ जाते हैं, उसका दिल ज़ोरों से धक् धक् करने लगता है मनो अभी सीना फाड़ कर बहार hi आ जायेगा, उसके दिमाग में कई तरह के ख्याल आने लगते हैं, उससे रहा नहीं जाता और वो तुरंत बोर से नीचे उतर आती है उसे समझ नहीं आ रहा होता की अब वो क्या करे, जिस बात का दर था वही हुआ, वो सोचती है अभी अंदर जाकर दोनों को ाचा सबक सिखाये, या इंतज़ार करे और दोनों के पापा को बताकर इनकी खाल उधड़वाड़े, फिर सोचती है नहीं नहीं किसी को पता चल गया तो कितनी बदनामी होगी, इसके पापा का तो गुस्सा वैसे भी कितना ख़राब है, क्या करू हाय ढैय्या ये कैसी मुसीबत में फंसा दिया इस करमजली ने फिर कुछ सोचती है और कमरे के दरवाज़े से हैट कर बहार मुख्या दरवाजे तक आती है और फिर अपने ब्लाउज से कीपैड वाला मोबाइल निकल कर फ़ोन लगाती है. वो ये भूल hi चुकी थी जैसे की उसकर बदन पर सिर्फ पेटीकोट और ब्लाउज है दिमाग में इतना सब चल रहा था की उसे कपड़ो का तो शायद ख्याल hi नहीं था...

रज्जो- Hello भाई साब, कहाँ हो?.... तुम जल्दी मेरे घर आओ हाँ बहुत ज़रूरी बात है. हाँ तुरंत आ जाओ,... और सुनो दरवाज़ा खुला हुआ है तो आराम से बिना आवाज़ किये कोठरी वाले कमरे की तरफ आ जाना.

फ़ोन काट कर और उसे वहीं आंगन में पड़ी खत पर रखकर रज्जो खुद भी बैठ जाती है फिर कुछ सोचने लगती है और कुछ पल कड़ी होती है और फिर से कोठरी वाले कमरे की और जाती है और फिर से बोर पर चढ़ अंदर झांकती है, अंदर चुदाई अब भी पूरे चरम पर थी और उसे अपनी बेटी को सिसकियाँ और कर्मा की अह्ह्ह्ह साफ़ साफ़ सुनाई दे रही होती है

कर्मा- अह्हह्ह्ह्ह नीतू कितनी गरम और मज़ेदार छूट है रे तेरी, कब से इस पल के इंतज़ार में था आज तो तूने दिन hi बन गया.

नीतू- ओह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्हह आअह्ह्ह्हह भैयाहहह मैं अह्ह्ह्ह मेरी चूऊऊऊह्ह्हहट्ट भी तो कबसे तुम्हारे मोठे लुंड क लिए प्यासी थी आह्हः आज जाकर इसकी खुजली मिट रही है.

दोनों की बातें रज्जो बिलकुल साफ़ साफ़ सुन पा रही थी आउट ये बातें उसके ऊपर कुछ अलग hi असर दाल रही थी, न चाहते हुए भी वो हलकी हलकी उत्तेजना महसूस कर रही थी,

कर्मा- आह्ह्ह्ह कितनी कासी हुई है और गरम भी अह्ह्ह्हह...

कर्मा नीतू की छूट में धक्के लगते हुए कहता है,

नीतू- कासी तो लगेगी hi अह्ह्ह्हह भैयाहहह इतना मोटा मूसल है तुम्हारा बिलकुल बेलन जैसाः इसपर मेरी तो क्या मेरी मम्मी की छूट भी कासी हुई hi लगेगी...

नीतू के मुँह से ये सुन कर्मा को तो हैरानी हुई hi पर उससे ज़्यादा रज्जो को हुई जो अपनी hi बेटी से अपनी छूट के बारे में सुन रही थी, और रज्जो को नीतू की बात से वो पल याद आ गया जब कर्मा का लुंड उसकी छूट में घुसा था और कैसे उसकी छूट को फैला दिया था, रज्जो अपनी बेटी की इस बात से बिलकुल सहमत होती दिख रही थी, और ये सब सोचते hi उसकी छूट नाम होने लगी थी. वहीं अंदर दोनों की चुदाई और बातें दोनों जारी थी.

कर्मा- अह्हह्ह्ह्ह नीतू क्याःह्ह्ह्हह्ह बोल दिया तूने, अह्ह्ह चची का नाम क्यों ले लिए...

नीतू- क्यों क्या हुआअह्ह्ह्ह.

रज्जो भी ध्यान से सुनने लगी की कर्मा ऐसा क्यों बोल रहा है,

कर्मा- यार सच कहूं बुरा तो नहीं मानेगी?

नीतू- हाँ बोलो न..

रज्जो ये सुन घबराने लगी वो सोचने लगी की कहीं ये नीतू को बताने वाला तो नहीं की इसने मेरे साथ किआ है.

कर्मा- चची को छोड़ने का सपना तो जाने मैं कबसे देखता हूँ, हाय क्या गदराया बदन है उनका, देखते hi लुंड तन जाता है,

रज्जो ये सब सुनकर उँचाहे भी शर्मा गयी मन hi मन और सोचने लगी क्या सच में ऐसा है. एक पल को तो रज्जो को अपनी बेटी से जलन होने लगी वो कल्पना काटने लगी की नीतू की जगह अगर मैं होती अभी वहां तो और ये सब सोचते हुए उसकी नज़र लगातार कर्मा के लुंड और नीतू की छूट पर hi तिकी हुई थी...

वहीं कर्मा जानकार नीतू को छोड़ते हुए उसकी माँ का जीकर कर रहा था, क्यूंकि वो देखना छह रहा था की नीतू कितना खुल सकती है उसके सामने, वो जनता था जितना खुलेगी उतना मज़ा देगी भी और दिलवाएगी भी..

नीतू- ओह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्हह आअह्ह्ह्हह भैयाहहह कितने बड़े चुड़क्कड़ हो, बेटी को छोड़ रहे हो और माँ को छोड़ने के सपने देख रहे हो अह्ह्ह्ह.

नीतू भी अपनी माँ के बारे में सुन और गरम हो रही थी.

वहीं रज्जो का तो दोनों की बातें सुन बुरा हाल था, उसके बदन में सरसराहट हो रही थी साथ hi उसकी छूट भी कुलबुलाने लगी थी. बहार खड़े खड़े गर्मी से उसका बदन पसीने में भीगने लगा था पर अभी अंदर की गर्मी बहार की गर्मी से कहीं ज़्यादा थी..

कर्मा- हाँ नीतू चुड़क्कड़ तो बहुत बड़ा हूँ मेराअहहह बस चले तो दोनों माँ बेटी को अगल बगल में नंगा कर के एक साथ छोडूं..

कर्मा ने ये बात नीतू को और उकसाने और उत्तेजित करने के लिए कही थी पर वो इस बात से बेखबर था की उसका तीर दो जगह लगा था, नीतू तो उत्तेजित हुई hi ये सुनकर पर ज़्यादा असर रज्जो पर हुआ जो सोचने लगी कैसा होगा यदि हम दोनों माँ बेटी एक hi बिस्तर पर नंगे हो और कर्मा दोनों को छोड़ रहा हो बरी बरी,

ये सोचते हुए उसके हाथ खुद बा खुद उसके पेटीकोट के ऊपर से उसकी छूट को मसलने लगे वहीं दूसरा हाथ उसकी चूचियों को सहलाने लगा, वो अभी अपने गुस्से को तो जैसे भूल hi गयी थी...

इधर रज्जो ने जिसे फ़ोन किआ था वो कोई और नहीं कर्मा के पिताजी नीलेश थे जो की हैरान परेशां घर से तुरंत निकल पड़े जैसे थे वैसे hi एक धोती और बनियान में, सभ्य और शालू छत पर कपडे सूखा रही थी उन्हें तो पता भी नहीं चला कब निकल गए, रस्ते में नीलेश यही सोचते जा रहे थे की क्या हो गया अचानक थोड़े समय पहले hi तो ये लोग निकले थे, कही कुछ दुर्घटना तो नहीं हो गयी, नहीं नहीं यार शुभ शुभ सोचो. कदम बढ़ाते हुए जल्दी hi नीलेश दीं दयाल के घर के बहार पहुँच गए दरवाज़ा खटखटाने से पहले रज्जो की कही बात याद आगयी और दरवाज़े को हलके से धकेला तो खुल गया अंदर आते hi दरवाज़े को बापिस वैसर hi सत्ता इधर उधर नज़र दौड़ाई तो आँगन बिलकुल शांत पड़ा हुआ था कोई नहीं दिख रहा था तो फिर रज्जो के कहे अनुसार कोठरी वाले कमरे की और चल दिए और जैसे hi कमरे के पास पहुंचे सामने का नज़ारा देख हैरान रह गए और बड़ी बड़ी आँखों से सामने का नज़ारा देखने लगे, सामने रज्जो बोरियों पर चढ़ कर रोशनदान से अंदर झांक रही थी सबसे बड़ी बात उसके बदन पर सिर्फ पेटीकोट और ब्लाउज थे, बदन पूरा पसीने में भीग कर चमक रहा था, पेटीकोट भी गीला होने के कारन उसके बड़े बड़े चूतड़ों से चिपक कर उनके अकार और कामुकता को और बढ़ा रहा था, नीलेश का तो लुंड ये देखकर hi सर उठाने लगा, वहीं उन्होंने थोड़ा आगे बढ़ कर देखा तो पाया की रज्जो का एक हाथ आगे उसके पेटीकोट के ऊपर चल रहा है,

नीलेश का दिमाग तेज़ी से दौड़ने लगा वो समझ गए की क्या हुआ है सुबह रज्जो का पूरा परिवार जा रहा था सिर्फ नीतू नहीं दिखी थी, वहीं इनके जाते hi कर्मा भी तुरंत चला गया था और कर्मा नीतू के बारे में रज्जो ने उन्हें पहले hi बताया था बाकि वो अपने बेटे कर्मा को भी अच्छे से जानते थे जो अपनी माँ को छोड़ने से पीछे नहीं हटा वो नीतू जैसी गदराई और सुन्दर लड़की को तो छोड़ने से रहा तो वो यहाँ नीतू को छोड़ रहा होगा और कैसे भी रज्जो बापिस आ गयी और उसने इन्हे चुदाई करते देखा तो हमें फ़ोन किआ पर फिर उनकी चुदाई देखते देखते खुद भी गरम हो गयी है, नीलेश सोचने लगे ऐसा मौका हाथ से नहीं जाना चाहिए, और हमें इसका पूरी तरह फायदा उठाना चाहिए,

नीलेश भी अपने बेटे की तरह hi पूरे चुड़क्कड़ थे या यूँ कहें की कर्मा को चुदाई के गन नीलेश से hi तो मिले थे,

उधर रज्जो इससे बेखबर की उसके पीछे खड़े हैं वो अंदर अपनी बेटी को चुड़ते हुए देख कर अपनी छूट मसल रही थी, अंदर दोनों की चुदाई भी पूरे चरम पर थी नीतू तो दो बार झाड़ चुकी थी पर कर्मा ने रात hi अपनी माँ और मौसी को खूब छोड़ा था तो उसे जल्दी नहीं थी फिर भी नीतू की छूट की कसावट उसे अपने जाल में फंसने की कोशिश कर रही थी तू उसने लुंड को आराम देने के लिए आसान बदल लिए था और अब नीतू के पीछे की और लेटकर उसे छोड़ रहा था, ये आसान रज्जो को भी भ रहा था क्यूंकि वो अब अचे से कर्मा के लुंड को अपनी बेटी की छूट में आते जाते देख प् रहे थी, उसकी हर झटके पर कूदती छुछियां देख रज्जो की छूट पनिया रही थी.





कर्मा और नीतू की चुदाई ने तो रज्जो पर जैसे सम्मोहन सा कर दिया था जिससे वो उन पर से नज़रें hi नहीं हटा प् रही थी,

इधर नीलेश ने कुछ सोचते हुए आगे कदम बढ़ाया और फिर बोरियों के बिलकुल पास जाकर खड़े हो गए उनके चेहरे के सामने रज्जो की पसीने से भीगी कमर और थोड़ा नीचे पेटीकोट में से झांकते हुए चूतड़ थे, नीलेश ने एक सांस भरी और हिम्मत जुटते हुए अपने हाथ बढ़ाये और रज्जो की कमर पर रख दिए हलके से,

रज्जो को जैसे hi ये एहसास हुआ उसने तुरंत चेहरा पीछे घुमाया और नीलेश को देख कर बिलकुल चौंक गयी, फिर उसे याद आया की वो भूल hi गयी की उसने भाई साब को बुलाया था, वो उत्तेजना और असहजता के बीच में फांसी हुई खुद को महसूस करने लगी उसे समझ नहीं आ रहा था क्या करे,

नीलेश ने hi आगे चेहरे कर फुसफुसाते हुए कहा- क्या हुआ रज्जो ऐसे अचानक से बुलाया सब ठीक है न और अंदर क्या झाँक रही हो,

ये कहते हुए भी नीलेश ने अपने हाथ रज्जो की कमर पर जमाये रखे, और रज्जो का तो जैसे ध्यान hi नहीं था, की वो किस हालत में है, वो कर्मा नीतू की चुदाई देख बेहद उत्तेजित हो चुकी थी,

नीलेश के प्रश्न का जवाब रज्जो क्या दे वो सोच नहीं प् रही थी इसलिए उसने बस कमरे की और इशारा कर दिया, बस इतना hi नीलेश को काफी था उन्होंने तुरंत एक पेअर उठाया और रज्जो की कमर को थामे उसका सहारा लेते हुए बोरियों के ऊपर चढ़ गए रज्जो के पीछे रज्जो ने अनजाने hi उन्हें सहारा देने के लिए दीवार को पकड़ लिया ताकि वो न गिरे साथ hi भाईसाब भी जो की उसकी कमर को थामे हुए थे,

नीलेश ऊपर चढ़ कर रज्जो के बिलकुल पीछे खड़े हो गए और फिर रज्जो के कान में फुसफुसाए- क्या हो रहा है अंदर?

ये कह बिना रज्जो के जवाब का इंतज़ार किये उन्होंने रज्जो के चेहरे के बिलकुल करीब अपना चेहरा लेकर रोशनदान में लगा दिया, वहीं क्यूंकि नीलेश रज्जो से लम्बे थे तो रोशनदान में से देखने के लिए उन्हें थोड़ा झुकना पड़ा और इस झुकने को भी नीलेश ने अपने फायदे के लिए प्रयोग किआ और अपने सर और गर्दन को झुकाने की जगह नीलेश ने अपनी टांगों को थोड़ा सा फैला या और रज्जो की टैंगो के दोनों और फैला कर रख दी जिससे उनकी लम्बाई अब करीब करीब रज्जो के बराबर हो गयी, इतना करने के बाद नीलेश ने अंदर झाँका और जैसा सोचा था वैसा hi दृश्य आँखों के सामने था, हाँ नीतू की नंगी जवानी देखकर नीलेश के मुँह में भी पानी आ गया पर उन्होंने खुद को समझाया की अभी माँ पर ध्यान देना ज़्यादा उचित होगा ये सोचते हुए नीलेश ने रज्जो की कमर से एक हाथ हटाया और नीचे ले जाकर अपने लुंड को अपने कच्चे से बहार निकल दिया साथ hi धोती के पतों के बीच से भी बहार काट दिया और फिर बापिस अपना हाथ रज्जो की कमर पर रख दिया और अंदर देखने लगे,

वहीं रज्जो के मन में उथल पुथल चल रही थी वो सोच रही थी की भाई साब की मैंने hi बुलाया पर अब क्या करूँ अब ये सब जान चुके हैं अंदर देख रहे हैं अब ये कहीं दोनों पर गुस्सा न करें और दोनों को अपनी चुदाई बंद करनी पड़े, न जाने क्यों उसका एक मन छह रहा था की नीतू कर्मा की चुदाई चलती रहे, इन्ही सब विचारों के बीच उसका ध्यान अपनी स्तिथि पर ज़रा भी नहीं था और न hi नीलेश और उसकी करीबी का, यहाँ तक नीलेश के उसकी कमर पर हाथ होना उसे बिलकुल साधारण सी बात लग रही थी,

नीलेश रज्जो के पीछे से अंदर झांकते हुए अपनी गरम सांसें रज्जो की गर्दन पर छोड़ते हुए फुसफुसाए- रज्जो यह क्या ये कर्मा तो तुम्हारी बेटी को छोड़ रहा है,

रज्जो पहले तो अपनी गर्दन पर नीलेश की सांसो से सिहर गयी वहीं उनकी बातों का असर भी रज्जो पर वैसा hi हुआ, नीलेश ने जानकार सीधे सीधे चुदाई शब्द का इस्तेमाल किआ, अनुभव से वो इतना जानते थे की गरम औरत को और गरम करने के लिए क्या क्या करना चाहिए और क्या बोलना चाहिए...

रज्जो उनकी बात के जवाब में कुछ नहीं कह पाई बस लम्बी लम्बी सांसें लेकर रह गयी, नीलेश ने कुछ पल की प्रतीक्षा की और अब वो समझ गए की रज्जो कितनी उत्तेजित है और फिर उन्होंने अगला कदम उठाया और अपने बदन को पीछे से उसके बदन से सत्ता दिया, उनका सीना रज्जो के पसीने से तर पीठ से लग गया तो वहीं उनका लुंड उसके गीले पेटीकोट के ऊपर से hi उसके चूतड़ों पर दस्तक देने लगा,

रज्जो को ये स्पर्श अच्छा लगा, उसका बदन छह रहा था की कोई उसके बदन को मसाले छुए खेले उसके साथ तो उसी समय एक मर्द का पीछे से स्पर्श पाकर रज्जो सिहर उठी और रही सही उत्तेजना उसके चूतड़ों पर दस्तक देते नीलेश के कड़क लुंड ने बढ़ा दी,

नीलेश ने एक बार फिर से कुछ पल का इंतज़ार किआ और कोई प्रतिरोध न पाकर आगे बढ़ने का निश्चय किआ, उनके हाथ जो की रज्जो की कमर पर अब तक शांत बैठे थे अब उन्होंने चलना शुरू किआ वो रज्जो के पेट को सहलाने लगे, हल्का हल्का उसके गदराये पेट को मसलने लगे, रज्जो की सांसें तेज़ होने लगी वहीं हलकी हलकी आहें नीलेश को उसके मुँह से निकलती हुई सुनाई दे रही थी, नीलेश समझ चुके थे अब गेंद उनके पीला में है इसलिए पूरा फायदा उठाते हुए वो अपने लुंड को उसकी गांड की दरार में पेटीकोट के ऊपर से hi घिसने लगे जिसका असर उन्हें रज्जो के बदन पर होता साफ़ दिख रहा था, रज्जो का बदन उन्हें मचलता हुआ महसूस हो रहा था वो अपनी टांगो को आपस में भींच रही थी साथ hi अपने चूतड़ों को थोड़ा पीछे की और उभर कर नीलेश के लुंड की घिसावट से अपनी छूट में उठती तरंगो को महसूस कर रही थी....

नीलेश अपने अनुभव से इतना समझ गए थे की रज्जो बेहद उत्तेजित है और ऐसे में कुछ भी और हुआ तो वो झाड़ सकती है इसलिए ज़्यादा खेल का समय नहीं है इसलिए उन्होंने उसके मादक गदराये पेट को मसलना जारी रखा पर पेट को मसलने के साथ साथ hi वो बड़ी सावधानी से रज्जो के पेटीकोट के नाड़े को खोलने लगे और जल्दी hi कामयाब भी हो गए, इधर रज्जो तो बस अंदर आँखें जमाये बहार से मिल रहे मज़े का आनंद ले रही थी उसे तनिक भी अंदाज़ा नहीं हुआ की उसके पेटीकोट का नारा भी खुल चूका है, इधर क्यूंकि पेटीकोट गीला था इसलिए नारा खुलने के बाद भी उसके चूतड़ों और जाँघों से चिपका रहा नीचे गिरा नहीं,

नीलेश ने भी ये महसूस किआ और वो समझ गए की पेटीकोट को रज्जो के उभरे चूतड़ों ने रोका हुआ है इसलिए नीलेश धीरे धीरे से पेट के साथ साथ कमर पर हाथ चलते हुए पेटीकोट को नीचे सरकने लगे और फिर हाथों को एक बार पीछे लाकर पेटीकोट का एक सिरा आराम से पकड़कर उसे रज्जो की गांड के उभारों को पार करते हुए, नीचे छोड़ दिया जिससे हुआ ये पेटीकोट पूरी तरह नीचे नहीं गिरा बल्कि रज्जो के घुटनों और जांघों पर चिपका रहा पर उसके चूतड़ और छूट बिलकुल नंगे हो गए क्यूंकि पंतय तो बिरला hi इस गाओं की औरतें पहनती होंगी,

नीलेश का नंगा लुंड अब रज्जो के मादक मांसल चूतड़ों पर घिसने लगा और नंगे लुंड का स्पर्श अपने बदन पर पाकर रज्जो सिहर उठी और उसकी आँखें बंद हो गयी उसका चेहरा पीछे आ कर नीलेश के कंधे पर टिक गया वहीं रज्जो के बदन का भर भी नीलेश को अपने सीने पर बढ़ता महसूस हुआ, नीलेश समझ गए की ये बहुत hi महत्वपूर्ण समय है और उन्होंने रज्जो को खुद से सताते हुए थोड़ा आगे की और झुकाया साथ hi अपने लुंड को एक हाथ से थम अपने अनुभव के हिसाब से उसे रज्जो के चूतड़ों के बीच घुसते हुए उसे उसकी छूट की दरार तक घुमाया जिससे रज्जो पागलों की तरह मचलने लगी और फिर वो कुछ समझ पति नीलेश ने लुंड को पकड़ कर रज्जो की गीली गरम छूट के मुहाने पर रखा और एक आराम से धक्का लगाया तो उनके लुंड का टोपा रज्जो की छूट की दीवारों को कौधते हुए रज्जो की गरम छूट में घुस गया,

जिससे रज्जो के तो होश hi उड़ गए वहीं नीलेश ने होश से काम लेते हुए ज़्यादा समय और कार्यों में न लगाकर सीधा लुंड रज्जो की छूट में घुसा दिया क्यूंकि वो जानते थे एक बार अगर लुंड छूट में घुस गया फिर कुछ भी हो सकता है..

रज्जो नीलेश का लुंड छूट में घुसते hi कंपनी लगी वही नीलेश ने उसके बदन को कास कर पकड़ लिए, और समय न गंवाते हुए अपनी कमर से झटके लगा कर पूरा लुंड रज्जो की छूट में घुसा दिया,

रज्जो नीलेश का लुंड पूरा घुसते hi उत्तेजना की चरम सीमा पर पहुँच गयी और झड़ने लगी, उसका बदन कंपनी लगा नीलेश ने उसे संभाले रखा साथ hi अपना लुंड उसकी छूट से निकलने नहीं दिया, कुछ देर बाद रज्जो थोड़ी शांत हुई उसकी सांसें सामान्य हुई तो उसका होश भी बापिस आने लगा उसे अपनी स्तिथि का आभास हुआ की कहाँ वो अपनी बेटी को चुदाई से रोकने आई थी और कहाँ खुद hi छुड़वा रही है, उसे पछतावा, गुस्सा, ग्लानि फिर से घेरने लगे,

उसने वैसे hi रुके हुए अपना चेहरा नीलेश की और पीछे घुमाकर कहा- भाई साब बहुत बड़ी गलती हो गयी है हमसे, हटो नीचे उतरो.

नीलेश को मालूम था की झड़ने के बाद रज्जो को ऐसा महसूस होगा इसीलिए उन्होंने उसके ये कहते hi उसकी कमर को थम कर उसकी छूट में धक्के लगाने शुरू कर दिए, अचानक धक्को से रज्जो भी हैरान रह गयी और सहारे के लिए उसने दीवार पर हाथ टिका लिए, वहीं नीलेश अब रुकने के मूड में बिलकुल नहीं थे, और सटासट रज्जो की चुदाई करने लगे, और नीलेश की तरकीब काम भी आ रही थी, रज्जो जो की झड़ने के बाद ग्लानि और दुःख से भर रही थी उसकी जगह नीलेश के लुंड से निकलती उत्तेजना की तरंगे लेने लगी,

रज्जो के मुँह से हलकी हलकी सिसकियाँ निकलने लगी, उसकी आँखें बंद हो गयी और वो चुदाई का आनंद लेने लगी, नीलेश ने इसका फायदा उठाते हुए उसके घुटनो पर अटके पेटीकोट को पूरी तरह निकल दिया और फिट उसके ब्लाउज के बटन खोल उसे भी उतर दिया जिसमे रज्जो ने पूरा साथ दिया और फिर अंत में ब्रा भी नीचे गिर पड़ी और नीलेश ने रज्जो के बड़े बड़े चूचियों को अपने हाथों में भर लिया और उन्हें मसलते हुए तेज़ी से छोड़ने लगे, इसी बीच उन्होंने अपने भी सरे कपडे बिना चुदाई रोके उतर दिए और बिलकुल नंगे हो कर रज्जो की चुदाई का आनंद लेने लगे,

अंदर कर्मा ने नीतू को घोड़ी बनाया हुआ था और दाना दान उसे छोड़ रहा था और नीतू की सिसकियाँ रज्जो और नीलेश दोनों को hi साफ़ साफ़ सुनाई दे रही थी...

नीलेश- अह्ह्ह अह्ह्ह रज्जो रानी क्या नज़ारा है अंदर बेटी चुद रही है बहार माँ... अह्ह्ह्ह

नीलेश की बात सुनकर रज्जो भी उत्तेजित होने लगी और सिसकियाँ लेते हुए बोली- अह्ह्ह्ह हॉँण्णन भाई साब अंदर बेटाःह्ह्ह्हह्ह बहार बाप दोनों hi एक जैसी होऊ,

नीलेश- हमारी तो पता नाहीइइइइइइइ अह्ह्ह पर तुम माँ बेटीईई बिलकुल एक जैसीई हो आह्ह्ह्हह्ह्ह्हह क्याझ्हह कामुक बदन हीी दोन्यू का. देल्हते hi लुंड खड़ा हो जाये,

नीलेश जानकार रज्जो से ऐसी बातें कर रहे थे ताकि उसकी उत्तेजना और बढे साथ hi उसका ध्यान सही गलत की और न भटके साथ hi जितना वो बात करेगी उतना खुलेगी..

रज्जो- ुहम्म्म्म बससससससस भाआईईईई साब तुममम ाः बस्स्स अभी माआहहह पारर hi ध्यान दो,

रज्जो को भी नीलेश की ऐसी बातें और उत्तेजित कर रही थी, और उसे मज़ा आ रहा था ऐसी बातों में हालाँकि वो खुल कर नहीं कह सकती थी, वहीं नीलेश का लुंड उसकी छूट के अंदर जाकर खलबली मचा रहा था, जिसकी उसकी छूट प्यासी थी,

पर तभी कुछ ऐसा हुआ जिसकी उम्मीद किसी ने भी नहीं की थी, जिन दो बोरियों पर नीलेश और रज्जो खड़े होकर चुदाई कर रहे थे, उनमे से ऊपर वाली अचानक आगे को लुढ़क गयी और जिसका असर ये हुआ की नीलेश और रज्जो दोनों आगे नीचे की और गिरने लगे, और आगे गिरने की वजह से दोनों के पेअर दरवाज़े पर लगे और दरवाज़ा खुल गया,

अब नज़ारा कुछ ऐसा था की बिस्तर पर नीतू नंगी घोड़ी बानी हुई थी उसकर पीछे नंगा कर्मा था जिसका लुंड नीतू की छूट में था,

वहीं दरवाज़े पर नीलेश भी नंगे नीचे गिरे हुए थे और उनके ऊपर रज्जो भी पूरी नंगी थी और रज्जो की छूट में नीलेश का लुंड था,

नीतू अपनी मम्मी और नीलेश ताऊजी को आँखें फाड़ फाड़ कर देख रही थी कर्मा भी दोनों को हैरानी से देख रहा था, वहीं नीलेश के चेहरे पर हलकी सी मुस्कराहट थी और रज्जो का तो शर्म से बुरा हाल था,

कुछ देर के सन्नाटे के बाद कर्मा के दिमाग ने काम करना शुरू किआ और वो बापिस नीतू की छूट में धक्के लगाने लगा साथ hi उसनर रज्जो से नज़र बचके नीलेश को आँख मार दी जिसका मतलब समझ वो भी रज्जो की कमर को थाम नीचे से उसकी छूट में धक्के लगाने लगे,

माँ बेटी दोनों hi शर्म से गाड़ी जा रही थी रज्जो का तो शर्म से बुरा हाल था पर दोनों के लिए ये भी सच था की दोनों hi चुदाई रोकना नहीं छह रही थी क्यूंकि अगर चाहती तो उठ सकती थी और अलग हो सकती थी पर किसी ने भी इसका प्रयास तक नहीं किआ था,

चुदाई चालू थी पर कमरे में अब भी सन्नाटा था जिसे कर्मा ने hi भेदना उचित समझा,

कर्मा- ओह्ह्ह्हह्हह अह्ह्ह्हह नीतू ओह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह कितना मज़ाआ आ रहा है तेरी गरम छूट मार कर..

कर्मा की ये बात सुनकर नीतू और रज्जो दोनों hi हैरान थी की अपने पापा के सामने वो ऐसे बोल रहा है, पर सोचने की बात ये थी जब बाप के सामने चुदाई कर रहा था तो बोलने में क्या हर्ज़ थी..

खैर बेटे की तरकीब नीलेश ने तुरंत भांप ली और आहें भरते हुए बोले- अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्ह बीटा मज़ा तो तेरी छाछी की छूट में भी बहुत आ रहा है बड़ी गरम है....

दोनों माँ बेटी हैरान थी की दोनों बाप बेटे कैसे उनकी छूटों के बारे में खुले आम बात कर रहे थे और ये सोच सोचकर hi दोनों को उत्तेजना बढ़ रही थी,

कर्मा- होगयीईइ hi पापा अह्ह्ह्हह नीतू भी तो उसी छूट की दें है और जब फसल इतनी अछि है तो खेत तो मस्त होगा hi..

नीलेश- हॉँण्णन आजजज इस खेत की जुताई करने को मिल गयी आह्हः भाग hi खुल गए... अह्ह्ह

ऐसी बातें सुनकर दोनों माँ बेटी का hi बुरा हाल हो गया था, नीतू के लिए तो पहली चुदाई थी और उसमें भी अपनी माँ के सामने छुड़वा रही थी तो उससे तो खुद को रोकना मुश्किल हो गया और वो उत्तेजित होते हुए बोल पड़ी- अह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्हह हाँ ताऊजी अह्ह्ह्हह ाची से जोतू मेरिइइइइइइइइ मम्मी के खेत कूऊओह्ह्ह्ह आआह्ह्ह्ह जैसे भैया मेरा खेत जोट रहे हैं अह्हह्ह्ह्ह.

रज्जो अपनी बेटी के मुँह से ये सुन हैरान रह गयी, उसे समझ नहीं आ रहा था की आज एक hi दिन में क्या क्या हो रहा है...

कर्मा- हाँ नीतू अह्ह्ह पापा अच्छे से छोड़ेंगे तेरी मम्मी की गरम छूट को जैसे मैं तेरी छोड़ रहा हूँ, अह्ह्ह्ह तुझे देखना है? अपनी मम्मी की चुदाई करीब से?

नीतू तो ये सुन कर hi बिलबिला उठी और बोली- हाँ हाँ हैं अह्ह्ह देखनी है मुझे अपनी मम्मी की चुदाई, उनकी छूट में ताऊजी का लुंड अंदर बहार होते हुए,

रज्जो अपनी बेटी के मुँह से निकलते शब्दों से जितनी हैरान हो रही थी, उतनी hi उत्तेजित,

कर्मा- पापाः नीतू की इच्छा पूरी करो ना, और दोनों लोग बिस्तर पर आ जाओ नीचे ठीक से छोड़ भी नहीं प् रहे होंगे चची को,

दोनों बाप बेटे खुल के गंदे शब्दों का प्रयोग कर रहे थे और माँ बेटी को उत्तेजित कर रहे थे,

कर्मा की बात सुनते hi नीलेश उठने लगे पर उन्होंने अपने लुंड को रज्जो की छूट में घुसाए रखा, इधर रज्जो से तो कुछ कहते hi नहीं बन रहा था उसे शर्म भी आ रही थी की उसे उसकी बेटी के पास लेजाकर उसकी चुदाई दिखाना चाहते हैं, वहीं इतना उत्तेजित वो जीवन में कभी नहीं हुई थी,

नीलेश ने रज्जो को बिस्तर पर लेजाकर पीठ के बल लिटा दिया और उसकी टंगे बिस्तर के बहार रहने दी, वहीं खुद उसकी टैंगो के बीच आकर बापिस उसकी छूट में लुंड घुसा दिया और छोड़ने लगे, वहीं बगल में नीतू खुद चुड़ते हुए अपनी मम्मी को चुड़ते हुए देखने लगी,

हर धक्के पर रज्जो की पापीती के अकार की चूचियों को नाचता देख नीतू को मज़ा आ रहा था, पर कर्मा सिर्फ इतने पर hi रुक जाये तो उसका नाम कर्मा कहाँ है,

कर्मा ने नीतू को उठाया और उसे खिसका कर रज्जो के ऊपर झुका दिया

कर्मा- अहह ले अब अचे से देख पायेगी नीतू...

अब आसान कुछ ऐसा हो गया था की नीलेश बिस्तर के नीचे थे, और पीठ पर लेती रज्जो को छोड़ रहे थे पर कर्मा ने नीतू को ऐसी जगह रखा जिससे घोड़ी बने हुए hi उसका चेहरा उसकी माँ की छूट के बिलकुल ऊपर आ गया वहीं उसकी खुद की छूट रज्जो के चेहरे के सामने आ गयी,

नीतू को ये बड़ा आकर्षक और अव्हा लगा वो बिलकुल पास से नीलेश के लुंड को अपनज मम्मी की छूट में अंदर बहार होता देख रही थी, वहीं रज्जो के लिए भी वही दृश्य था उसकी आँखों के सामने उसकी बेटी की जवान कासी छूट थी जिसे कर्मा का लुंड फैलते हुए अंदर बहार हो रहा था,

दोनों बाप बेटे एक दुसरे को इशारा कर समझा रहे थे की अब दोनों hi पूरी तरह उनके कब्ज़े में हैं.

नीतू ध्यान से नीलेश क्र लम्बे लुंड को रज्जो की छूट में आता जाता देख रही थी, नीलेश ने जब ये देखा तो उन्होंने अपने लुंड को रज्जो की छूट से निकल लिए और उसे उसकी छूट पर थपथपाने लगे, नीतू की नज़र तो हैट hi नहीं रही थी इसका फायदा उठाते हुए नीलेश ने अपने लुंड को पकड़ा और उसके होंठों के पास कर दिया जिस पर नीतू ने एक बार आँख उठा कर नीलेश के चेहरे की और देखा और फिर मुँह खोल कर लुंड को मुँह में भर लिए,

उसे यकीन नहीं हुआ की वो एक साथ बाप और बेटे दो लुंड एक साथ लिए हुए है और जो लुंड मुँह में है वो अभी अभी उसकी मम्मी की छूट से निकला है इसी का एहसास होते hi वो खुद को संभल नहीं पाई... और एक बार फिर से झड़ने लगी पर इस बार का झड़ना कुक्सह ज़्यादा hi ज़ोरदार था क्यूंकि उसका बदन थरथराने लगा जिससे कर्मा का लुंड उसकी छूट से निकल गया पर कर्मा ने उसकी कमर को थमलिआ कास के और उसे स्थिर कर लिए रज्जो नीचे से सब कुछ साफ़ देख रही थी और जैसे hi नीतू की छूट से कर्मा का लुंड निकला उसकी छूट ने दो तीन बार झटके लिए और फिर भरभरा कर पानी उसकी छूट से गिरने लगा, जो की सीधा रज्जो के चेहरे पर गिरा, और रज्जो को न जाने क्या हुआ की उसका मुँह खुद बा खुद खुल गया और नीतू की छूट से निकलता मूट उसके मुँह में भी गिरने लगा, अपनी hi बेटी का मूट चख कर रज्जो का तो मनो बुरा हाल हो गया बस रज्जो के लिए यही उत्तेजना की सीमा हो गयी वो अब सब भूल गयी और उसने अपना चेहरा उठा कर बेटी की छूट से मुँह लगा दिया और निकल रहे मूट को गटकने लगी, इधर कर्मा ये देख कर खुश हो गया, वहीं नीतू को भी जब ये एहसास हुआ की उसकी मम्मी उसकी छूट चाट रही है वो फूली नहीं समय और उसने भी अपना मुँह नीचे अपनी मम्मी की छूट में लगा दिया...

दोनों माँ बेटी एक दुसरे की छूट को पागलों की तरह चाटने लगी वही कर्मा और नीलेश एक दुसरे को तो कभी दोनों माँ बेटी को देख मुस्कुरा रहे थे, अगले 10 मिनट्स तक दोनों एक दुसरे की छूट चाटती रही और फिर जाकर नीतू थक कर अपनी मम्मी के ऊपर से हैट कर बगल में लेट गयी, पर रज्जो चची खेली खाई गदराई औरत थी उनका जोश अभी बाकि था तो पापा न्र फिर से उनकी छूट में लुंड दाल दिया वहीं कर्मा ने क्यूंकि नीतू तो आराम कर रही थी अपना लुंड रज्जो के मुँह के आगे कर दिया जिसे रज्जो ने तुरंत बिना कुछ सोचे समझे अपने मुँह में भर लिए, ऐसा लग रहा था की आज की चुदाई ने एक नयी रज्जो को बहार निकल दिया था जो अब चुदाई में पीछे रहने वाली नहीं थी,

कर्मा- अह्हह्ह्ह्ह चेचीईई ओहहहबक aiseeeeeeeeee hi चूसती रहो.

नीलेश- अह्ह्ह्हह क्या मस्त छूट है रज्जो ऐसा लग रहा है लुंड निचोड़ रही है, खैर अब नीलेश और कर्मा के लिए भी उत्तेजना काफी हो गयी थी और वो भी अपनर चरम के करीब थे रज्जो की छूट में लग रहे धक्के बता. राहु रहे की किसी भी पल नीलेश झाड़ जायेंगे, और हुआ भी ऐसा hi रज्जो को कसकर पकड़ते हुए नीलेश गुर्राए और फिर अपना रास रज्जो की छूट में छोड़ दिया,

वहीं रज्जो नीलेश के साथ साथ एक बार और झड़ने लगी वहीं कर्मा ने रज्जो के मुँह से लुंड निकला और बगल में लेती नीतू की छूट में डबरा घुसा दिया और दनादन छोड़ने लगा, नीतू के मुँह से आहें निकलने लगी और जल्दी hi कर्मा ने नीतू की छूट को अपने रास से भर दिया, और फिर चरों hi थक कर लेट गए.

जारी रहेगी
 
थैंक्यू सो मच कीप पोस्टिंग योर फीडबैक
 
झड़ने के बाद दोनों बिस्तर पर पसर गए कुछ पल बाद बिमला उठी और चेतन को भी उठाते हुए बोली - दामाद जी उठो कोई आ गया तो परेशानी हो जाएगी,

चेतन मुस्कुराते हुए उठा और फिर बिमला ने चंचल की hi साड़ी लेली पहनने को साथ hi चेतन ने भी अपने कपडे पहन लिए जो बिमला ने निकले और दोनों कमरे से बहार निकल गए.. आगे..

अपडेट 190

सरलपुर

एक तरफ जहाँ सास और दामाद दोनों hi जो हुआ उसे सोच दांग थे, बिमला को तो यकीन नहीं हो रहा था की इतना बड़ा कांड वो कर चुकी थी अपने hi दामाद से छुड़वा लिए था, पहली बार उसने अपने पति के अलावा किसी के सामने अपनी छूट खोली थी और वो भी अपनी बेटी के पति के सामने, अपनी hi बेटी के लुंड पर डाका दाल दिया मैंने, तो क्या हुआ, ये हुआ तो उसीकी वजह से वो अगर अपने ससुर के साथ ये सब नहीं कर रही होती तो ये भी नहीं होता, मुझे चंचल से बात करनी पड़ेगी कही ऐसे वो अपना घर न उजाड़ ले,

उधर चंचल को न जाने क्या हो गया था आज कल वो पूरे दिन उत्तेजित hi रहती थी, और कुछ उसके साथ ऐसे समीकरण hi बन रहे थे. खैर अभी तो चंचल आंगन में अपनी प्यारी देवरानी से बातें कर रही थी,

रिम- जीजी तैयार हो न? कहीं शर्माने लगो,

चंचल- इतना सब करने और देखने के बाद शरण रही hi नहीं हैं ऋ.

रिम - चलो फिर 5 मीन्स बाद आ जाना ठीक है?

चंचल- हाँ आती हूँ,

ये कहकर रिमझिम चली जाती है अपने कमरे में जहाँ उसकी प्यारी ननद्रानी ख़ुशी उसका इंतज़ार कर रही होती है,

ख़ुशी - क्या भाभी बड़ी देर लगाडी कबसे इतनेज़र कर रही हूँ तुम्हारा,

रिम- ाचा जी, हमारी ख़ुशी रानी हमारा इंतज़ार कर रही थी, क्यों भला?

ख़ुशी भी उसके मज़ाक ने शामिल होते हुए- क्या करें भाभी भाई बहन दोनों का ख्याल तुम hi तो रखती हो,

ख़ुशी ने रिमझिम को बाहों में भरते हुए कहा,

रिम- अरे हम कहाँ, अब तो अपने भैया का ख्याल तुम खुद hi रख लेती हो,

ख़ुशी- पर रखना तो तुमने hi सिखाया है मेरी प्यारी भाभी

ये कहकर ख़ुशी ने अपने होंठों को रिमझिम के होंठों पर रखा hi था की दरवाज़ा खुला और दोनों झट्ट से अलग हो गए एक दुसरे से, दरवाज़े से अंदर आते हुए चंचल बोली - अरे ऐसा क्या कर रहे थे तुम दोनों, जो मुझे देखते hi यूँ दूर दूर हो गए,

रिमझिम नकली में डरते हुए और बात को सँभालते हुए बोली- अरे जीजी कुछ नहीं बस ऐसे hi बात कर रहे थे,

चंचल- हाँ हाँ देखती हूँ तुम दोनों आपस में लगी रहती हो, मुझसे तो कोई बात hi नहीं करता,

ख़ुशी- नहीं भाभी ऐसी बात नहीं है,

चंचल- रहने दे ख़ुशी तू सारा प्यार अपनी नयी भाभी पर hi दिखती है, मेरे लिए तो समय hi नहीं हैं तेरे पास,

ख़ुशी- अरे भाभी कैसी बात कर रही हो तुम, तुम hi तो मेरी सबसे पहली प्यारी भाभी हो,

ख़ुशी ने चंचल को मानते हुए उसे बाहों में भरते हुए कहा,

चंचल- ाचा ऐसा है तो बताओ अभी क्या कर रहे थे तुम दोनों जो मेरे आते hi अलग हो गए,

ख़ुशी- वो भाभी, हम तो बस ऐसे hi..

चंचल - ऐसे hi क्या बता न..

रिम- ख़ुशी मुझे लगता है जो बात तुम मेरे साथ कर रही थी वो जीजी से भी करके बताओ जीजी तभी मानेगी.

रिमझिम की बात सुनकर ख़ुशी चौंक गयी पर साथ hi गरम भी होने लगी ये सोचकर वैसे भी जबसे वो अपने सेज भाई से छुड़वा चुकी थी तबसे उसकी झिझक और शर्म बहुत हद तक खुल चुकी थी.

ख़ुशी- नहीं भाभी मैं कैसे,

चंचल- देखा मैंने कहा न तू मुझसे अब प्यार hi नहीं करती तभी तो उससे कर रही थी मुझसे नहीं करना चाहती वही बात.

ख़ुशी अब फँस चुकी थी उसने मदद के लिए रिमझिम की और देखा तो उसने मुस्कुराते हुए आगे बढ़ने का इशारा किआ,

ख़ुशी ने एक लम्बी सांस ली और धड़कते हुए दिल के साथ चंचल के चेहरे को पकड़ अपने होंठ उसके होंठों पर टिका दिए.. ऐसा होते hi उसे अपनी छूट में गीलापन महसूस हुआ वहीं चंचल तो जैसे इसी का इंतज़ार कर रही थी, ख़ुशी के होंठ उसके होंठों पर लगते hi चंचल ख़ुशी के होंठों को चूसने लगी और ये देख ख़ुशी पहले तो हैरान हुई पर फिर पूरी लगन से अपनी भाभी के होंठो को चूसने में लग गयी, उसके हाथ चंचल के बदन पर घूमने लगे, उसने चंचल का पल्लू भी उसके सीने से नीचे गिरा दिया.. पर साथ hi उसने चंचल के होंठों को चूसना नहीं छोड़ा,

करीब 5 मीन्स की गहरी चूसै के बाद दोनों ननद भाभी हांफते हुए अलग हुए, और दोनों की नज़र आपस में मिली फिर रिमझिम से जो की दोनों को देख मुस्कुरा रही थी,

रिमझिम आगे बढ़ी और इस बार बिना बोले उसने भी चंचल के होंठों को अपने होंठों में भर लिए और चूसने लगी चंचल उसका उतनी hi गर्म जोशी से साथ देने लगी, अब देखने की बारी ख़ुशी की थी जो अपनी दोनों भाभियों को इतने आक्रामक और कामुक चुम्बन में लिप्त देख आहें भर रही थी,

रिमझिम तो ख़ुशी से दो कदम आगे निकली और उसने चंचल की सारे को hi खोलकर नीचे गिरा दिया उसके होंठ चूमते हुए, खैर करीब उतने hi समय में रिमझिम और चंचल भी अलग हुए, अलग होकर रिमझिम ने ख़ुशी की और मुस्कुरा कर देखा, और फिर चंचल को ऐसे hi बिस्तर पर गिरा दिया, और खुद बिस्तर पर चढ़ चंचल के बदन से खेलने लगी वहीं रिमझिम की देखा देखि ख़ुशी भी अपनी बड़ी भाभी के बदन से खेलने लगी,





चंचल तो जैसे अपनी ननद और देवरानी का साथ पाकर जन्नत में थी, वहीं ख़ुशी की ख़ुशी का ठिकाना नहीं था की उसे आज अपनी बड़ी भाभी के साथ भी खेलने का मौका मिलेगा,

पर चंचल ज़्यादा देर शांत रहने वालो में से कहाँ थी... वो तुरंत उठी और उसने रिमझिम पर धावा बोल दिया उसे चूमते हुए बिस्तर के नीचे ले गयी और उसकी साड़ी उतरने लगी, ख़ुशी बिस्तर के बगल में बैठ दोनों भाभियों की काम लीला देखने लगी,

रिमझिम की साड़ी कुछ hi पलों में ज़मीन पर पड़ी थी, अपनी साड़ी खुलते hi रिमझिम ने फिर से चंचल को पीछे से पकड़ लिया और उसकी चूचियों को ब्लाउज के ऊपर से दबाने लगी,

वहीं ख़ुशी से भी चंचल भाभी का गदराया कोमल पेट देख रहा नहीं गया तो उसने चेहरा आगे बढ़ाया और चंचल के पेट को चूमते हुए उस्क्स बदन पर हाथ फिरने लगी, चंचल अपनी ननद और देवरानी के बीच झूलने लगी,





ख़ुशी ने तो अपनी जीभ चंचल की नाभि में hi घुसड़ी जिसके साथ hi चंचल सिसक पड़ी वहीं रिमझिम लगातार उसकी चूचियों को मसल रही थी, ख़ुशी की लगातार नाभि में चलती जीभ के जादू से चंचल का पूरा बदन सिहरने लगा, वो सीसीएनए लगी, वहीं ख़ुशी को तो जैसे अपनी भाभी की नाभि से रास निकलता हुआ महसूस हो रहा था,

रिम- हाय भाभी क्या बदन है तुम्हारत, अह्ह्ह देखो तो ख़ुशी कैसे तुंहारी नाभि का सारा रास पि रही है,

चंचल- ुहम्म्म्म बससससससस अह्ह्ह्हह तोहह तुम दोनों ये सब करती थी अकेले में,

ख़ुशी ने चंचल की नाभि से मुँह हटाया और बोली- ुहममम भाभी अब तुम्हारे साथ hi करेंगे अह्ह्ह कितना मस्त और रासलीला बदन है तुम्हारा,

चंचल - रसीली तो तुम काम नहीं हो ननद रानी,

ये कहते हुए चंचल ने ख़ुशी को ऊपर उठा खड़ा कर लिया और उसके होंठों को चूमते हुए उसे अपनी गॉड में लिए हुए बिस्तर पर बैठ गयी,

इधर रिमझिम भी ख़ुशी के बदन से खेलने लगी, अब ख़ुशी अपनी दोनों भाभियों के बीच थी और दोनों hi उसके जवान खूबसूरत बदन के साथ खेलने लगी





ख़ुशी अपनी दोनों भाभियों की गॉड में मचलने लगी, उसकी छूट पूरी तरह से गीली हो चुकी थी, वैसे यही हाल रिमझिम और चंचल का भी था जिनकी छूटें भी नाम हो कर पानी बहा रही थी,

ख़ुशी- ुहम्म्म्म भाभी अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्हह भाभी ुहममम

चंचल- हाय रिम्मी देख तो ननद रानी को कैसे हमारे बीच में मचल रही है,

रिम- हाँ जीजी ऐसे मचल रही है जैसे दो भूखी शेरनियों के बीच एक मादक कोमल हिरणी फंस गयी हो,

चंचल- ये तो सही कहा तूने बदन देख इसका ये कोमल हिरणी hi तो है और हम दो भूखी शेरनियां,

रिम- तो क्या कहती हो जीजी चख कर देखें इस हिरणी को?

चंचल- हाँ ऋ मैं तो कब से तरस रही हूँ इसका बदन चखने के लिए,

ख़ुशी अपनी दोनों भाभियों की बात सुन मुस्कुरा रही थी, साथ hi आगे होने वाले हमलो के लिए खुद को तैयार भी कर रही थी आखिर दो दो शेरनियां उस पर टूटने की तयारी कर रही थी, चंचल ने उसे बिस्तर पर पीठ पर किता दिया और खुद उसकी टैंगो की और आ गयी और उसकी टैंगो को चूमने लगी वहीं रिमझिम ने ख़ुशी के होंठों और गर्दन पर हमला शुरू कर दिया..

चंचल ने अपना हाथ आगे बढ़ाते हुए, ख़ुशी की फ्रॉक को पकड़ कर उसकी टैंगो के नीचे सरका दिया और उसे पूरी तरह से निकल कर अलग फ़ेंक दिया वहीं उसकी टैंगो को चूमते हुए आगे बढ़ने लगी, तभी उसकी नज़र ख़ुशी के चिकने पेट और उसके बीच गोल नाभि पर पड़ी जिसे देख चंचल के मुँह से पानी आने लगा और वो खुद को रोक नहीं पाई और उसने अपना चेहरा आगे किआ और जीभ निकल कर ख़ुशी की नाभि को चाटने लगी





ख़ुशी तो चंचल के इस कदम से तड़पने hi लगी, उसे समझ नहीं आ रहा था वो क्या करे, वो मचलने लगी.. पर बेचारी सिसकियाँ भी नहीं ले पा रही थी क्यूंकि मुँह रिमझिम ने अपने होंठों से बंद कर रखा था और हाथों से ख़ुशी की संतरे जैसी चूचियां दबा रही थी,

चंचल ने अचे से ख़ुशी की नाभि को चूसा और साथ hi उसके पेट को भी हर जगह जीभ से चाट लिए, उधर रिमझिम ने ख़ुशी को हल्का सा उठाया और उसका टॉप सर से उतर दिया और ख़ुशी सिर्फ पंतय और ब्रा में रह गयी, जिसके तुरंत बाद ख़ुशी तुरंत कड़ी हुई और बोली- क्या भाभी मेरे कपडे उतरे जा रही hi और खुद दोनों कपडे पहनने हो अपने भी उतरो,

रिम- क्यों ननद रानी अकेले नंगे होने में शर्म आ रही है,

चंचल- अरे आ रही है तो क्या हुआ, हमारी प्यारी ननद है अगर चाहती है अपनी भाभियों को नंगा देखना तो क्या हुआ दिखा देते हैं.

रिम- बिलकुल भाभी

ये कहकर रिमझिम कड़ी हो गयी और चंचल ने पकड़ कर उसकी साड़ी उतर दी, साड़ी के बाद चंचल ने रिमझिम के पेटीकोट के नारे की भी गांठ खोल दी और ख़ुशी ने पेटीकोट को पकड़ कर नीचे खींच कर रिमझिम के बदन से अलग कर दिय,





चंचल ने फिर रिमझिम के ब्लाउज को पकड़ा और उसके हुक खोलते हुए उसे भी उतर दिया, अब रिमझिम भी ख़ुशी की तरह ब्रा पंतय में आ गयी, चंचल ने अगले hi पल रिमझिम की ब्रा को खोल दिया और उसी समय ख़ुशी ने रिमझिम की पंतय उतरी और रिमझिम अपनी देवरानी और ननद के सामने बिलकुल नंगी थी,

खैर नंगे होते hi रिमझिम ने अपनी जेठानी की और ध्यान लगाया और उसके कपडे खोलने लगी जिसमे ख़ुशी ने भी उत्साहित होकर मदद की क्यूंकि वो पहली बार अपनी बड़ी भाभी को नंगा देखने वाली थी, और कुछ hi पलों में चंचल दोनों के सामने बिलकुल नंगी कड़ी थी, ख़ुशी तो उसकी बड़ी बड़ी छुछियां और उसका बदन देख मुँह hi फाड़े रह गयी और फिर उसपर कूद पड़ी, ख़ुशी चंचल को बिस्तर पर गिरते हुए उसके ऊपर आ गयी और अपने मुँह में चंचल की एक छुच्छी को भर लिए तो दूसरी को मसलने लगी, वहीं रिमझिम ने ये देखा तो वो भी चंचल के ऊपर आ गयी पर उसने उसके मुँह को चुना और अपनी छूट उसके मुँह पर रख कर बैठ गयी, चंचल के लिए कुछ नया नहीं था उसने मुँह पर देवरानी की छूट पाते hi अपनी जीभ से उसे चेतना शुरू कर दिया,

पर ख़ुशी के लिए ये नया था क्यूंकि उसकी बड़ी भाभी छोटी भाभी की छूट चाट रही थी, वो और जोश में आकर चंचल की छूछीयो को चूसने लगी साथ hi उसका एक हाथ चंचल के पेट से फिसलते हुए चंचल की गीली छूट को सहलाने लगा,

चंचल के लिए तो खुद को संभालना मुश्किल हो गया, छूछीयो पर ख़ुशी की जीभ और मुँह छूट पर उसकी उंगलियां थी पर फिर भी उसने ध्यान रिमझिम की छूट में रखा और उससे लगातार चाटती रही पूरी लगन से, जिसके कारन hi रिमझिम की लगातार सिसकियाँ निकल रही थी,

वहीं दूसरी और ख़ुशी ने कुछ देर तक चंचल की छूछीयो को चूसा और फिर खुद उसकी टैंगो के बीच आ गयी और सामने उसकी भाभी की गीली छूट को देखने लगी और फिर बिना किसी झिझक के अपना मुँह चंचल की छूट से भिड़ा दिया और पूरे जोश से चाटने लगी, चंचल का बदन तो मज़े से हवा में उड़ने लगा जैसे, वो अपनी ननद से छूट चटवा रही थी और खुद देवरानी की छूट चाट रही थी, तीनो एक दुसरे जुडी हुई एक दुसरे को सुख देने का पूरा प्रयास कर रही थी, चंचल से ये दोहरा हमला सहा नहीं गया और वो झड़ने लगी, ख़ुशी को अपनी जीभ पर चंचल के रास का आभास हुआ तो वो खुद hi उसे और जोश से चाटने लगी, वहीं रिमझिम ने चंचल को झड़ते देखा तो वो उसके ऊपर से हैट गयी, पर ख़ुशी अंत तक उसकी छूट चाटती रही यहाँ तक की चंचल को खुद उसका सर पकड़ के अपनी छूट से हटाना पड़ा और इनाम में उसे एक मस्त स्सा चुम्बन देना पड़ा, ख़ुशी के होंठों से उसे अपनी छूट का स्वाद ाचा लगा, चंचल ने तुरंत hi ख़ुशी को पलटा और उसे अपने ऊपर बिठा लिया और उसकी छूट को अपने मुँह पर लेकर अपनी ननद की छूट को बेझिझक चाटने लगी,

जिससे ख़ुशी तो बिलकुल हैरान रह गयी पर चंचल की जीभ उसकी छूट पर अपना कमाल दिखने लगी, रिमझिम ख़ुशी के चूतड़ों को सहलाते हुए चंचल द्वारा उसकी छूट चटाई देखने लगी कितना प्यारा लग रहा था जब चंचल की जीभ ख़ुशी की छूट में अंदर बहार हो रही थी, उसके ठीक ऊपर ख़ुशी का छोटा सा भूरा प्यारा गांड का छेड़ देख रिमझिम को लालसा जागने लगी, उसने अपनी एक उंगली की थूक से भिगोया और फिर उससे ख़ुशी की गांड के छेड़ को कुरेदने लगी, ख़ुशी तो इस दोहरे हमले से सिहर उठी,

रिम - कैसा लग रहा है मेरी प्यारी ननद रानी,

ख़ुशी- ुहम्म्म्म भभीीीीुइआह्ह्ह्हह shhhhhhhhhhhhh...

रिम- ऐसे hi चाटो जीजी अपनी प्यारी एक लौटी ननद की छूट को, आखिर हुनर पतियों की एक लौटी बहन है,

चंचल के मुँह पर तो छूट थी इसलिए उसने जवाब ख़ुशी के भगनशे की चूसते हुए दिया, वहीं रिमझिम ने उंगली से ख़ुशी की गांड पर प्रहार जारी रखते हुए उसकी गांड के छेड़ पर थूका और कुछ देर के लिए उस पर जीभ फिरा कर उसे चिकना किया और फिर बड़ी सावधानी से उंगली को उसकी गांड में घुसा दिया, उंगली जाते hi ख़ुशी का बदन अकड़ने लगा, उसे ऐसा महसूस हो रहा था जैसे उसकी जान ले लेगी उसकी दोनों भाभियाँ मिलकर,

रिम- ओह्ह्ह्ह जीजी हमारी ननद रानी इतनी बड़ी चुड़क्कड़ है की जिस छूट को तुम चाट रही हो इस छूट में अपने एक भाई का लुंड ले कर खूब चुदाई करवा चुकी है,

ख़ुशी तो ये सुनकर बिलकुल चौंक hi गयी उसे पता नहीं था की रिमझिम इस बारे में चंचल को बता देगी, वहीं रिमझिम की उंगली उसकी गांड में अंदर बहार होकर उसे मस्त कर रही थी वहीं छूट में चंचल की जीभ,

रिम- अपने रमन भैया का लुंड इसी छूट में लेकर घोंट चुकी है हमारी प्यारी ननद, अपनी छूट का द्वार अपने भैया के लुंड से खुलवाया है,

रिमझिम के ये शब्द ख़ुशी की उत्तेजना बढ़ाते जा रहे थे, उसे यकीन नहीं हो रहा था की उसकी चुदाई का राज़ उसकी बड़ी ब्बेभी के सामने खुल चूका है न जाने क्या सोचेगी मेरे बारे में की अपने भाई से hi छुड़वा लिया, पर क्या सोचेगी देखो कैसे लापर लापर करके मेरी छूट चाट रही है क्या hi सोचेंगी,

और सही भी था चंचल रिमझिम की बातों को सुन उत्तेजित हो रही थी वहीं जितनी उत्तेजित हो रही थी उतनी hi आक्रामकता से छूट चाट रही थी, उधर रिमझिम अपनी उंगली से ख़ुशी की गांड छोड़ रही थी,

रिम- अह्ह्ह देखो तो एक भाई से छोड़कर hi कितनी छूट खुश है चुदड़ो की, अभी तो बड़े भाई का लुंड लेना बाकि है,

रिमझिम की ये बात सुनकर तो ख़ुशी के बदन में बिजली दौड़ गयी रमन से छोड़ने के बाद भी उसने चेतन के बारे में नहीं सोचा था क्यूंकि वो बड़ा था उसका बहुत सम्मान करती थी वो और थोड़ा डर्टी भी थी पर अभी रिमझिम से उससे छोड़ने का सुन ख़ुशी की तो साँसे hi रुक गयी, उसने मन hi मन सोचा क्यों नहीं,

वही चंचल को भी अपने पति के लिए एक नयी छूट का जुगाड़ होते दिखा तो वो खुश हो गयी,

वहीं रिमझिम की छूट भी खुजा रही थी तो उसने चंचल के पैरो के बीच जगह बनाई पर ख़ुशी की गांड को उंगली से छोड़ते हुए और अपनी छूट को अपनी जेठानी की छूट से घिसने लगी जिससे दोनों को hi मज़े आने लगे साथ hi ख़ुशी की गांड में उंगली भी लगातार चल रही थी,

रिम- ओह्ह्ह्हह्हह जीजी क्या गरम हो रही है तुम्हारी छूट लगता है, आज सुबह ससुरजी ने ठीक से शांत नहीं की?

अब बरी चंचल के चौंकने की थी और ख़ुशी तो बिलकुल हक्का बक्का रह गयी उसे यकीन नहीं हुआ की उसकी भाभी और पापा क्व बीच कुछ ऐसा हो सकता है,

वहीं चंचल थोड़ा हैरान हुई पर उसने सोचा क्या hi फ़र्क़ पड़ता है आज नहीं कल पता चलना hi था ऊपर से वो तो अब किसी तरह ख़ुशी को चेतन से छुड़वाने की योजना बना रही थी इसमें रिमझिम के शब्द उसे और उत्साहित कर रहे थे,

ख़ुशी तो बिलकुल hi हैरान थी उसे कुछ पल के लिए तो लगा रिमझिम झूठ बोल रही है तो उसने चंचल की आँखों में देखा और उसकी आँखों में देखकर hi ख़ुशी समझ गयी की ये सच है,

ख़ुशी- मेरी रंडी भाभी,

ये कहकर ख़ुशी ने चंचल के बाल पकड़ कर उस्क्स चेहरा अपनी छूट में और अंदर दबा दिया,

दोनों देवरानी जेठानी थोड़ी हैरान थी ख़ुशी से रंडी सुन पर उन्हें मज़ा आया और वो समझ गयी की लड़की सही राह पर है,

रिम- हाँ रंडी तो है hi जीजी तभी तो अपने ससुर और देवर से चुदवाती है, छूट में इतनी खुजली है की एक लुंड से काम hi नहीं चलता,

ख़ुशी- क्याझ्हह भैया से भीई अह्ह्ह्ह क्या रंडी हो भाभी तुम, पर रिम्मीईई भाभी तुम भी काम नहीं हो अपने पति को सबमें बांटती फिरती हो,

रिम - हाँ ननद रानी, मैं भी काम नहीं हूँ, तुम्हारी दोनों भाभियाँ रंडी हैं मैं भी जेठ जी के लोडे को अपनी मुनिया में लेकर छुड़वा चुकी हूँ, और अपने जीजा के लुंड को भी,

ख़ुशी के लिए तो जैसे हर पल एक के बाद एक चौंकाने वाला रहस्य सामने आ रहा था और हर बात से उसकी उत्तेजना और बढ़ रही थी,

ख़ुशी- ुहम्म्म्म भभीीीीुइआह्ह्ह्हह रनडीईईईई हो दोनोंओओओओ.

रिम- हम तो रंडी हैं hi पर तुमममम बताओ छोटे भैया को तो छूट दे चुकी बड़े भैया को कब डौगी,

ख़ुशी बड़े भैया से छोड़ने की बात सुन गंगना गयी पर उसकी उत्तेजना भी इस ख्याल से बढ़ गयी,

ख़ुशी- ओह्ह्ह भभीीीीुइआह्ह्ह्हह मैं तो अभी चुद जॉन अगर भैया इशारा करें तो अभी उनके लुंड को अपनी छूट में लेकर उछलने लागूं...

चंचल ये सुन बहुत खुश हुई और ख़ुशी की छूट के अंदर जितना जीभ घुसा सकती थी घुसा दी,

वहीं रिमझिम ने ख़ुशी की गांड पर प्रहार जारी रखा साथ hi अपनी बातें भी जो सबसे अलग प्रहार कर तीनो को उत्तेजित कर रही थी.

रिम- आह्ह्ह्ह ईहहह हुई न बात चुदड़ो ननद रानी पर छोटे भाई को कुंवारी छूट का तोहफा दिया और बड़े भाई को खुली हुई ये तो गलत होगा न,

ख़ुशी- ुहम्म्म्म भाभी क्या करुण छूट के द्वार एक hi बार खुलते हैं वो खुल चुके अब कुंवारी छूट बड़े भैया को कैसे दूँ.

रिम- ओह्ह्ह ननद रानी अगर भैया से इतना hi प्यार है तो मेरे पास एक उपाय है..

ख़ुशी- ुहम्म्म्म क्या आईडिया है भाभी?

रिम - छोटे भाई को कुंवारी छूट दी तो बड़े भाई को कुंवारी गांड दे दू..

रिमझिम ने उसकी गांड में उंगली को हिलाते हुए बोलै...

ख़ुशी चेतन भैया से गांड मरवाने के ख्याल से hi बिलकुल पागल होने लगी उसके बदन में बिजली दौड़ने लगी,

ख़ुशी- ुहम्म्म्म हॉँण्णन भाभी मैं अपनी गांड चेतन भैया के लुंड से मरवाउंगी उनका hi मोटा लुंड घुसेगा मेरी छोटी सी गांड में और इसे चीयर के रख देगा,

चंचल भी कल्पना कर कर के खुश हो रही थी,

रिम- हाय मेरी रंडी ननद तुमसु ऐसी hi उम्मीद थी, दोनों भाइयों का अपनी छूट और गांड से ख्याल रखोगी.

ख़ुशी - हाँ भाभी हाँ दोनों भाइयों से खूब छोडूंगी और एक रैंड बहन बन कर रहूंगी दोनों की.

रिम- ुहम्म्म्म हैं जल्दी जल्दी दोनों भाइयों से छुड़वा लो फिर ये छूट गांड अपने पापा को भी तो देना है अछि चुदड़ो बेटी बनकर उनका लुंड भी तो लेना है...

अपनर पापा से छोड़ने का सुनकर ख़ुशी बिलकुल होश खो बैठी उसका बदन अकड़ने लगा उसकी कमर थरथराने लगी और उसकी छूट से रास के साथ के साथ साथ मूट भी निकलने लगा जो चंचल के मुँह में भरने लगा चंचल उसे गटकने की कोशिश करने लगी, पर मूट की धार और वेग ऐसा था की चंचल छह कर भी सारा नहीं पि पाई और बाकि उसके चेहरे को भीगने लगा, जल्दी hi उसका चेहरा बाल गर्दन यहाँ तक की उसका सीना भी उसकी ननद के मूट से नहाये हुए थे,

रिमझिम भी इस नज़ारे को देख हैरान और गरम दोनों थी और अपनी छूट को चंचल की छूट से तेज़ी से घिसने लगी..

ख़ुशी तो झड़ने के साथ बिलकुल बेजान सी होकर बगल में लुढ़क गयी वहीं चंचल को तो यकीन नहीं हो रहा था की उसने अपनी ननद का मूट पि लिए था और उसे पसंद भी आया था,

वहीं उसकी खुद की छूट रिमझिम की छूट घिसाई से झड़ने की कगार पर hi थी और कुछ hi पालो में झाड़ भी गयी, झड़ने के बाद थोड़ा शांत होकर आँखें मूड कर लेती hi थी की उसे अपने सीने पर वजन महसूस हुआ और उसने आँखें खोल देखा तो रिमझिम उसके सीने पर बैठी थी और फिर उसके मूट से भीगे बालों को पकड़ चेहरा थोड़ा ऊपर उठाया उसे समझ नहीं आया की रिमझिम क्या करना चाहती है पर अगले hi पल रिमझिम की छूट से एक मूट की धार छूती जो उसकर चेहरे पर लगी और खुद hi उसका मुँह खुल गया और रिमझिम उसकर मुँह में मूतने लगी,

रिम- अब ननद का मूट पि लिए है तो देवरानी का भी पि कर देखो मेरी रंडी जीजी,

रिमझिम के मूट की धार लगातार चंचल के मुँह में पद रही थी और जितना वो पि सकती थी पि रही थी बाकि सब उसके सीने पर और गर्दन पर और फिर बिस्तर पर गिर रहा था ख़ुशी बगल में लेते हुए आँखें खोल इस अद्भुत दृश्य को देख रही थी, कुछ पल बाद रिमझिम का मूतना बंद हुआ और वो चंचल के ऊपर से उठी और चंचल हुए बिस्तर की हालर देखि चंचल का आधा बदन मूट से नहाया हुआ था, यहाँ तक की उसकी नाभि में भी मूट भरा हुआ था, जिसे देख रिमझिम से नहीं रहा गया और चंचल की नाभि में मुँह लगा उसे पि गयी और उसे पसंद आया,

चंचल यूँ hi लेती सोच रही थी की कुछ hi दिनों में उसकी ज़िन्दगी कितनी बदल गयी थी अभी वो मूट में नाहा कर नंगी लेती है और सबसे बड़ी बात उसे ये सब पसंद आ रहा था वो ये सोच hi रही थी की ख़ुशी उठी और उसे उठाने लगी, चंचल ख़ुशी कहे अनुसार उठ गयी और फिर ख़ुशी ने उसे अपने चेहरे पर बैठा लिए और बोली - भाभी मूतो मेरे मुँह में..

ख़ुशी से ये सुन चंचल हैरान रह गयी यहाँ तक की ख़ुशी खुद हैरान थी अपनी इच्छा पर, वहीं रिमझिम समझ गयी अब दोनों को रोकने वाला कोई नहीं है,

ख़ुशी- मूतो न भाभी अपनी ननद को अपना मूट पिलाओ न.

ख़ुशी के यव शब्द सुनकर चंचल की आँखें बंद हो गयी और अगले hi पल उसकी छूट से धार निकली जो ख़ुशी के खुले मुँह में गिरने लगी, ख़ुशी भी जितना हो सकता था उसे गटकने लगी उसकी भाभी के गरम मूट का स्वाद उसे भ रहा था वही बचा हुआ मूट उसके चेहरे गर्दन और चूचियों को भीगा रहा था,

रिमझिम ये देख अपनी छूट मसल रही थी,

चंचल को यकीन नहीं हो रहा था की वो अपनी नामद के मुँह में मूट रही है और उसकी ननद उसे ख़ुशी से पि रही है,

खैर चंचल का मूतना होने के बाद वो ख़ुशी के ऊपर से उठी और मूट से साणे बिस्तर पर ख़ुशी के बगल में लेट गयी,

रिमझिम ने उन्हें देखा और मुँह बनाते हुए बोली- छही कितना बदबू मार रही हो दोनों छी छे

ख़ुशी- ाचा अभी बताती हूँ.

रिम- अरे रुको तुम्हे साफ़ तो करना पड़ेगा न.

य्ये कहकर रिमझिम दोनों के चेहरों को जीभ से चाटने लगी और उससे मूट का स्वाद लेने लगी, इसके बाद जब तीनो ने एक दुसरे के होंठों को चूमा फिर गंदे बिस्तर को उठाया और उसे लेकर तीनो बाथरूम में घुस गयी और साथ में नहाकर साफ़ होकर बहार निकली और बहार चली गयीं.

चोदामपुर

वहीं रज्जो नीलेश के साथ साथ एक बार और झड़ने लगी वहीं कर्मा ने रज्जो के मुँह से लुंड निकला और बगल में लेती नीतू की छूट में डबरा घुसा दिया और दनादन छोड़ने लगा, नीतू के मुँह से आहें निकलने लगी और जल्दी hi कर्मा ने नीतू की छूट को अपने रास से भर दिया, और फिर चरों hi थक कर लेट गए. आगे...

रज्जो को अब झड़ने के बाद फिर से कुछ होश आ रहा था और वो जो अभी हुआ वो सोचने लगी थी, क्या ये सही था?, क्या अब मेरा परिवार पहले जैसा hi रह पायेगा, उसने आँखें खोल कर देखा नीतू कर्मा की बाहों में आँखें मूंदें लेते थी, कितनी प्यारी लग रही थी, उसे देखकर रज्जो फिर से सोचने लगी, मेरी बेटी पहली बार चूड़ी वो भी मेरे सामने पर अब मुझे ये सही लग रहा है , अकेले में किसी से चुदती उससे तो ाचा hi हुआ, वैसे ये भी ाचा hi है की कर्मा से चूड़ी काम से काम पहली hi चुदाई में चुदाई का असली सुख तो मिला उसे, कुछ भी हो कर्मा चुदाई में नंबर ओने है, हाय क्या हो रहा है मुझे ये सब कितना गलत है फिर भी मुझे गलत नहीं लग रहा, कोई ऐसे देखे हमें तो न जाने क्या हो जायेगा, वो यही सोच रही थी तभी पीछे से हाथ आगे ले जाकर नीलेश उसकी छूछीयो को दबाने लगे,

नीलेश- क्या सोच रही हो रज्जो.

रज्जो- कुछ नहीं भाई साब बस यही जो हुआ वो कितना गलत हुआ.

नीलेश उससे पीछे से चिपक गए उनका लुंड रज्जो की चूतड़ों की दरार में घुस गया और उसके पेट और छूछीयो को सहलाते हुए बोले- ऐसा कुछ नहीं है रज्जो अगर ाचा लगा तो गलत कैसा,

रज्जो ने अपने चूतड़ों में नीलेश के लुंड को घिसते हुए महसूस किया और बोली- अहम पर मैं अपनी hi बेटी के सामने उसके साथ ये सब कैसे कर सकती हूँ.

नीलेश- तुम इसे थोड़ा गलत तरीके से देख रही हो, ाचा तुम अब तक का अपने और नीतू का रिश्ता देख लेना और अब सोचो तुम कितनी करीब हो गयी हो बेटी के, कैसा नया रिश्ता बन गया है तुम्हारे उसके बीच, जो शायद कभी नहीं बन पाटा,

रज्जो- वो तो है पर वो अब मेरे बारे में न जाने क्या सोचेगी, मेरा सम्मान भी करेगी या नहीं,

नीलेश- ऐसा कुछ नहीं होने वाला उसकी ख़ुशी देख कर लग रहा है तुम्हे वो कुछ गलत सोचेगी, और हमारे बच्चे समझ दर हैं सिर्फ इसकी वजह से ऐसा थोड़े hi है की वो सम्मान नहीं करेंगे और सच कहूं तो इससे पहले भी हमने कर्मा के साथ मिलकर खेत की मज़दूरन को छोड़ा है पर देखो कुछ नहीं हुआ वो उतना hi सम्मान करता है हमारा और एक नया रिश्ता बन गया हाउ हम दोनों के बीच एक दुसरे को अचे से जान गए हैं..

नीलेश रज्जो की छूछीयो को मसलते हुए उसे समझा रहे थे वहीं रज्जो की गांड की गर्मी से फिर से कड़क हो गया,

रज्जो ध्यान से नीलेश की बातों को सुनते हुए बोली- हाँ तुम सही कह रहे हो भाई साब, और तुम्हारा ये तो फिर से कड़क हो गया,

रज्जो ने उनके लुंड की और इशारा करते हुए कहा,

नीलेश- अब तुम्हारे जैसी औरत बगल में नंगी लेती होगी तो ये तो कड़क होगा hi,

रज्जो ये सुनकर थोड़ा शरमाई तो नीलेश ने उसका चेहरा पकड़ अपनी तरफ घुमा लिए और फिर उसके होंठों पर अपने होंठ रख चूसने लगे,

रज्जो चाहे कितना भी सोच रही थी की ये गलत है वगेरा वगेरा पर वो खुद भी जानती थी जो हो रहा था उसे बहुत पसंद आ रहा था, उसे लग रहा था जैसे वो फिर से अपनी जवानी में पहुँच गयी है, नीलेश के साथ यूँ बातें करना यूँ लेटना उसे बहुत ाचा लग रहा था वहीं ये जानते हुए की उसकी बेटी और उनका बीटा वहीं बगल में पड़े सुस्ता रहे हैं,

साथ hi ऐसा आक्रामक और रोमांचित करने वाला चुम्बन बहुत दिनों बाद उसने महसूस किआ था, उसके पति भी उसे खूब प्यार करते थे छोड़ते थे पर इतने सैलून बाद एक नीरसता सी आ गयी थी, पर अभी नीलेश के साथ कर्मा के साथ एक रोमांच मिल रहा था लग रहा था की ये hi असली चुदाई का सुख है,

रज्जो भी नीलेश का चुम्बन में पूरा साथ देते हुए उनके ऊपर आ गयी उसे अपनी जांघ पर नीलेश का कड़क लुंड चुभता हुआ महसूस हुआ जिसे उसने हाथ नीचे लेजाकर थम लिया, और फिर बिना चुम्बन तोड़े खुद को उसके ऊपर व्यवस्थित कर लुंड के टोपे को अपनी छूट के द्वार से लगाया और कमर का दवाब दे उसे अपनी छूट में घुसा लिए,

जिसके घुसते hi उसे अपने मुँह में नीलेश की घुटी हुई सिसकी महसूस हुई,

रज्जो अपने चूतड़ों को ऊपर नीचे कर नीलेश के लुंड से छोड़ने लगी वहीं रह रह कर वो एक दुसरे के होंठों को चूसे जा रहे थे, होंठों के बाद नीलेश ने अपना ध्यान उसकी छूछीयो पर लगाया और उसे आगे की और झुककर चूचियों को चूसने लगे वहीं रज्जो अपनी कमर हिलाकर लगातार चुदती जा रही थी एक बार फिर से सब भूलकर वो चुदाई के सुखमयी आनंद में खोने लगी, उसके मुँह से फिर से सिसकियाँ निकलने लगी,

इन्ही सिसकियों को सुनकर कर्मा की आँख खुली उसने आँखें खोल कर देखा तो सामने का नज़ारा देख उसके चेहरे पर मुस्कान और लुंड में तनाव आ गया और आये भी क्यों न नज़ारा hi ऐसा था





रज्जो चची उसके पापा के लुंड पर नंगी हो कर उछाल कूद कर रही थी उनके बड़े बड़े चूतड़ों के बीच उसके पापा का लुंड चची की छूट को बार बार चीयर रहा था, ये देख कर्मा ने नीतू के ऊपर से सावधानी से बाहें हटाई ताकि उसकी नींद न खुले और पीछे से हैट गया, और रज्जो चची और अपने पापा की चुदाई देखते हुए अपने कड़क लुंड को मुठियाने लगा, वो दोनों तो चुदाई में इतने मगन थे उन्हें पता भी नहीं था की कर्मा उठ चूका है, कुछ देर तो कर्मा ने देखा पर फिर उससे रहा नहीं गया और उसने एक नज़र नीतू पर डाली जो अब भी सो रही थी और अपनी जगह से उठ गया और फिर दोनों के पास जाकर उनके बगल में घुटनो के बल बैठ गया और अपना लुंड रज्जो के मुँह के आगे कर दिया, जिसे रज्जो ने इस बार बिना झिझक के मुँह खोल मर अपने मुँह में भर लिए और चूसने लगी,

एक साथ बाप बेटे दोनों को रज्जो सुख देने लगी वहीं बेटी अपनी पहली चुदाई की थकान के कारन सुस्ता रही थी,

कर्मा- अह्ह्ह्ह क्या लुंड चूसती हैं रज्जो चची पापाठ.

कर्मा रज्जो के मुँह में हलके हलके धक्के लगते हुए बोलै,

नीलेश- हाँ बीटा और क्या गरम छूट पाई है रज्जो आह्हः मज़ेदार..

कर्मा- अह्हह्ह्ह्ह मैं तो न जाने कबसे रज्जो चची को छोड़ना चाहता था, जब मुठ मरना शुरू किआ था तबसे hi... इनकी बड़ी बड़ी चूचियों के तो सरे लड़के दीवाने थे,

रज्जो बाप बेटे को छूट और मुँह से सुख देते हुए दोनों की उसके बारे में बातें सुन और उत्तेजित हो रही थी,

नीलेश- अरे मैं तो जबसे दीनू इसे ब्याह के लाया था और जब पहली बार इसके बदन को बारिश में भीगे हुए देखा था कसम से पाजामे में लुंड खड़ा हो गया था,

रज्जो दोनों की बातें सुनकर जोश में आकर कर्मा के लुंड को गले तक भरके चूस रही थी, वहीं नीलेश के धक्के नीचे से लगातार उसकी छूट की कुटाई कर रहे थे,

थोड़ी देर की इसी तरह की चुदाई के बाद कर्मा बोलै- पापा थोड़ा मुझे भी मज़ा लेने दो न चेचीईई की छूट का...

अब बेटे की इच्छा को नीलेश कैसे मन कर सकते थे, कर्मा ने अपने पापा का इशारा पाकर रज्जो के मुँह लुंड निकला और उसे पीठ पर लिटा दिया और फिर अपनी रज्जो चची की टैंगो के बीच आकर अपना लुंड उनकी छूट में घुसा दिया और छोड़ने लगा, वहीं नीलेश ने अपना लुंड रज्जो के मुँह के आगे कर दिया जिसे उसने चूसने में बिलकुल देर नहीं लगाई और अपनी छूट का स्वाद भी लुंड से चख लिए,

उसे बाप बेटे से ऐसे छुड़वाते हुए मज़ा आ रहा था रोमांचक लग रहा था, कैसे दोनों अपने सुख के लिए उसके बदन का इस्तेमाल कर रहे थे अपनी मर्ज़ी से, कभी बाप छोड़ रहा था तो कभी बीटा, ये सब रज्जो को उत्तेजित कर रहा था, क्यूंकि इसमें असली सुख तप उसी को छूट को और बदन को मिल रहा था न,

खैर कर्मा रज्जो की रसीली छूट छोड़ते हुए उसकी उछलती छूछीयो को थमते हुए बोलै- है इन्ही छूछीयो ने पागल किआ हुआ था मुझे और सरे लड़कों का चची,

रज्जो मुँह में लुंड की वजह से पर अपनी तारीफ सुनकर वो खुश बहुत हो रही थी,

नीलेश- हम्म्म पूरा बदन hi क़यामत है रज्जो का बीटा...

इधर चुदाई की थप थप की आवाज़ से नीतू की भी आँखें खुल गयी और उसने सामने देखा वो देख कर तो उसकी आँखें पूरी तरह खुल गयी, उसे फिर सारा कुछ याद आ गया और अभी अपनी मम्मी को बाप बेटे से चुड़ते देख उसके चेहरे पर मुस्कान आ गयी, उसकी छूट अपनी माँ की चुदाई देख फिर से पनियाने लगी, कुछ देर दर्शक बने रहने के बाद नीतू से रहा नहीं गया और वो उठी और जाकर तीनो के बगल में बैठ गयी, और अपनी मम्मी की छूट में आते जाते कर्मा के लुंड को ध्यान से देखने लगी,

कर्मा और बाकि दोनों ने भी नीतू की उपस्थिति को महसूस किआ तो बाप बेटे के चेहरे पर मुस्कान आ गयी वहीं रज्जो थोड़ा सकुचाई पर फिर उसने खुद को समझा लिए और चुदाई पर ध्यान लगाया,

कर्मा ने उसका चेहरा पकड़ उसे अपनी और खींच कर उसके होंठों को चूसने लगा वहीं नीलेश भी हाथ बढाकर नीतू के कैसे हुए चूतड़ सहलाने लगे, नीतू कर्मा के होंठों को उतनी hi लगन से चूसने लगी, खैर कुछ देर के गहरे चुम्बन के बाद दोनों अलग हुए तो नीतू ने अपने अगले कदम से दोनों को चौंका दिया और अपने होंठ नीलेश के होंठों पर रख दिए और उसे भी कर्मा की तरह चुम्बन दिया, जिससे नीलेश की तो बांछें खिल गयी, नीलेश के होंठों को चूसने के बाद नीतू ने अपना अगला शिकार अपनी मम्मी की उछलती चूचियों को बनाया और एक छुच्छी को थम कर दूसरी को मुँह में भर लिए और चूसने लगी,

इधर नीलेश ने नीतू की उठी हुई गांड देखि तो अपनर हाथ से उसके चूतड़ों को सहलाते हुए उसकी छूट को ऊपर से नीचे घिसने लगे, जिस पर नीतू सिसक पड़ी और रज्जो की चुकी से मुँह हटाकर बोली- अह्ह्ह्हह नहीं ताऊजी पहली बार चुदाई हुई है न तो दर्द हो रहा है,

नीलेश ने ये सुन प्यार से उसके चेहरे पर हाथ फेरा और कहा- कोई बात नहीं बीटा तू आराम करले फिर अभी.

नीतू- हाँ बदन भी थका थका लग रहा है, मैं लेट कर देखती हूँ तुम दोनों लोग मम्मी को अच्छे से छोड़ो,

ये सुनकर रज्जो ने अपने मुँह से नीलेश का लुंड निकला और बोली- हाय बड़ी फ़िक़र है मेरी बिटिया को मेरी.

नीतू ने उसके जवाब में कुछ नहीं बोलै पर कुछ ऐसा किआ जिससे रज्जो हैरान रह गयी,

नीतू ने अपने होंठ अपनी मम्मी के होंठों से लगा दिए और उनके होंठों को चूसने लगी, रज्जो भी शुरूआती हिचकिचाहट के बाद अपनी बेटी के नरम होंठों को चूसते हुए उसका साथ देने लगी, उधर कर्मा माँ बेटी के कामुक चुम्बन को देखते हुए रज्जो की छूट को लगातार छोड़ रहा था नीलेश अपना लुंड मुठियाते हुए दोनों को देख रहे थे,

दोनों माँ बेटी सब भूलकर चुम्बन में खोये हुए थे और जब सांस फूलने लगी तब जाकर अलग हुए, फिर भी नीतू अपनी मम्मी के चेहरे को चूमने लगी इधर नीलेश से रहा नहीं गया तो उन्होंने दोनों के चेहरे के बीच अपना लुंड दोबारा घुसा दिया और जिसे माँ बेटी दोनों hi बिना झिझक के चाटने चूसने लगी, नीलेश को ये देख ख़ुशी हुई को एक hi दिन में माँ बेटी दोनों इतना खुल रही थी,

कुछ देर लुंड को अपनी मम्मी के साथ बांटने के बाद नीतू उठी और नीलेश के लुंड को अपनी मम्मी के चेहरे से हटाकर खुद अपनी छूट को अपनी मम्मी के मुँह के ऊपर रख कर बैठ गयी

नीतू- ओह्ह्ह मम्मी मेरी छूट को प्यार करो न देखो कितना दर्द कर रही है कर्मा भैया के लुंड की कुटाई से,

रज्जो समझ गयी क्या करना था और बड़े प्यार से अपनी जीभ से नीतू की छूट को चाटने लगी, अपनी hi बेटी की छूट चाटने का एहसास खास कर जब एक लम्बा लुंड छूट से अंदर बहार हो रहा हो एक अलग hi मज़ा दे रहा था, वहीं रज्जो का मुँह घिरने से नीलेश बेचारे खली रह गए प ज़्यादा देर के लिए नहीं क्यूंकि नीतू ने उनका लुंड पकड़ कर अपने मुँह के पास कर लिए और चूसने लगी एक बार फिर से दोनों माँ बेटी के मुँह बंद हो गए और दोनों बाप बेटे आहें भरने लगे,

इतनी उत्तेजना ऊपर से अपनी मम्मी से छूट चाटने का रोमांच नीतू ज़्यादा देर नहीं सह पाई और उसने अपनी मम्मी के मुँह में झड़ते हुए अपना रास छोड़ दिया जिसे रज्जो बड़े चाव से जातक गयी,

नीतू एक बार और झड़ने के बाद तो बिलकुल बेहाल सी हो गयी और फिर उठकर बापिस अपनी जगह जाकर लेट गयी, एक बार फिर से बाप बेटे के बीच रज्जो थी, कर्मा ने अपने पापा का ख्याल रखते हुए अपना लुंड रज्जो की छूट से निकला और उन्हें मौका दिया जिस पर नीलेश अपने बेटे पर बड़े प्रसन्न हुए और फिर रज्जो को घोड़ी बनाकर उसकी छूट में लुंड घुसा छोड़ने लगे, वहीं कर्मा ने रज्जो के सामने फिर से लुंड कर दिया जिसे रज्जो चूसने लगी, कुछ देर लुंड चूसने के बाद कर्मा ने उसके मुँह में अपनी गोलियां डालदी जिन्हे रज्जो प्यार से चूसने लगी, उधर नीलेश के तगड़े धक्के उसकी छूट में लग रहे थे जिनका असर ये हुआ की रज्जो एक बार फिर झाड़ गयी और आगे को होकर गिर गयी,

जिससे नीलेश का लुंड उसकी छूट से निकल गया, उधर कर्मा ने रज्जो के थूक से साणे हुए लुंड को पकड़ा और रज्जो को दोबारा पीठ पर लिटा दिया और खुद उसकी टैंगो के बीच आ गया और एक दो बार लुंड को उसकी छूट से ऊपर नीचे घिसने लगा जिसे रज्जो दोबारा से सीसीएनए लगी, फिट कर्मा लुंड को उसकी छूट से लेकर गांड के छेड़ तक फिरने लगा और हर बार ऐसा करने पर रज्जो आठ आठ करने लगी,

कर्मा ने फिर कुछ सोचा और रज्जो के दोनों पैरों को एक साथ कर ऊपर की और उठा लिया जिससे उसकी छूट और गांड और उभर कर आ गयी और फिर अपने लुंड को थम कर उस पर थूका और फिर बिना देरी के लुंड को रज्जो की गांड के छेड़ पर रख अंदर घुसा diya..jiske घुसते hi रज्जो आह्ह्ह्ह आह्ह्ह्ह करने लगी,

रज्जो- आह्हः कमीने कर्मा गांड मारनी थी तो बता के hi घुसा देताहहहहहहहहह इतना मोटा टोपा घुसा दिया गांड में आह्हः फैल गयी है,

कर्मा- अरे चची पहली बार मरवा रही हो क्या?

रज्जो- आह्हः पहली बार नहीं है तेरे चाचा ने मरी है कई बार पर तू अपना टोपा देख न अह्ह्ह ऐसा है जैसे मूसल हो उसे अचानक से गांड में घुसायेगा तो जान तो निकलेगी hi न,

नीलेश अपने बेटे की शरारत देख मुस्कुरा रहे थे और उम्मीद कर रहे थे की उन्हें भी रज्जो की गांड का स्वाद मिलेगा.

खैर कर्मा ने धीरे धीरे लुंड रज्जो की गांड में घुसना शुरू किआ जिसपर रज्जो हर धक्के पर अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह्हह कर रही थी,

कर्मा- ओह्ह्ह चची आज सपना पिआरा हुआ है मेरा तुम्हारी गांड मरने का,

रज्जो- कमीने तेरे सपने के चक्कर ने मेरी तो फैट गयी है न, ऐसा लग रहा है बांस ले रखा है अपने अंदर,

रज्जो कुछ इससे ज़्यादा बोलती पर उससे पहले hi नीलेश ने उसके मुँह में लुंड घुसा दिया, कर्मा ने देखा अब लगभग पूरा लुंड अंदर पहुँच चूका है तो वो अब अपनी गति बढ़ा कर अचे से रज्जो की गांड मरने लगा आहें भरते हुए, शुरुवाती तकलीफ के बाद रज्जो को भी मज़ा आने लगा गांड मरवाने में और वो भी आहें भरने लगी पर उसकी आहें नीलेश के लुंड पर घुट रही थी... कर्मा अब बिना किसी रहम के रज्जो की गांड मरने लगा तो नीलेश उसका मुँह छोड़ रहे थे.





रज्जो की गांड की गर्मी कर्मा के लुंड पर कमाल कर रही थी और कर्मा को भी रज्जो की गांड मरने में असीम आनंद प्राप्त हो रहा था, और इस आनंद का hi असर ये हुआ की जल्दी hi कर्मा की गति तूफानी हो गयी और रज्जो की गांड की ज़बरदस्त चुदाई होने लगी और कुछ hi देर में कर्मा ने उसकी गांड में अपनी पिचकारी छोड़ दी और उसकी गांड को अपने रास से भर दिया पर अकेला वो hi नहीं झाड़ा बल्कि रज्जो एक बार फिर से पानी छोड़ चुकी थी,

कर्मा झड़ने के नाद पीछे सिरहाने से टिक कर बैठ गया और आराम करने लगा, वहीं नीलेश ने तुरंत अपने बेटे की जगह ली और रज्जो की रास भरी हुई गांड में अपना लुंड घुसा दिया और वो भी उसकी गांड को तेज़ी से मरने लगे, और फिर ऐसे hi तेज़ तेज़ गांड छोड़ते हुए वो भी रज्जो की गांड में झाड़ गए, रज्जो तो अब पास्ट हो चुकी थी, उसे याद भी नहीं था की इतना वो एक hi दिन में कब चूड़ी थी या शायद एक महीने में भी नहीं झड़ी होगी जितना आज झड़ी थी, कुछ देर सब यूँ hi सुस्ताते रहे फिर नीलेश उठे और बोले- अब तुम लोग आराम करो हम चलते हैं, कर्मा तू भी आ जाना जल्दी, अब चची को आराम करने दे,

ये कह नीलेश अपने कपडे पहन कर चले गए, वहीं कर्मा भी धीरे धीरे उठा और अपने कपडे पहनने लगा रज्जो उसे प्यार से देख रही थी,

कर्मा- क्या देख रही हो चची?

रज्जो- कुछ नहीं तू जा अभी पर आज रात तू हमारे यहाँ रुकेगा भाई साब से बोल दियो.

कर्मा उनकी बात सुनकर मुस्कुराया फिर सर हिलाकर हाँ किआ,

रज्जो- अब खड़ा खड़ा मुस्कुराते hi रहेगा जा मुझे आराम करने दे बाप बेटे ने मिलकर इतना छोड़ा है.

कर्मा- जा रहा हूँ कोई बात हो तो फ़ोन करना.

Rajjo-theek है,

इतना कहकर कर्मा भी निकल गया ये सोचते की एक परिवार और उनके बीच में उनके जैसा बनने की और बढ़ चल था...

जारी रहेगी
 
य्ये कहकर रिमझिम दोनों के चेहरों को जीभ से चाटने लगी और उससे मूट का स्वाद लेने लगी, इसके बाद जब तीनो ने एक दुसरे के होंठों को चूमा फिर गंदे बिस्तर को उठाया और उसे लेकर तीनो बाथरूम में घुस गयी और साथ में नहाकर साफ़ होकर बहार निकली और बहार चली गयीं. आगे...

अपडेट 191

सरलपुर

खाना पीना हो चूका था आज धुप नहीं निकली थी आस्मां में बादल थे तो कुल मिलकर मौसम सुहाना था ऐसे में दोनों संधनें छत पर टहलते हुए लहलहाते खेतों को देख रही थी,

माधुरी- कितना ाचा मौसम है न, ये बिमला को पता नहीं क्या हुआ जो नहीं आई,

सावित्री - हाँ बोल रही थी थकावट हो रही है, सुस्ताऊँगी थोड़ा..

हालाँकि दोनों इस बात से अनजान थी की बिमला ने अपने दामाद से छोड़ने के बाद अपने दिमाग को शांत रखने और खुद को समय देने के लिए ये बहाना बनाया था वो नहीं चाहती थी की बातों में hi कुछ उसके मुँह से गलत निकल गया तो गड़बड़ हो जाएगी.

माधुरी - हाय ऐसे मौसम में तो बस मन करता है की..

सावित्री - क्या मन करता है खुल कर बोलो.

माधुरी थोड़ा उसके करीब आई और उसके कान में फुसफुसाते हुए बोली- यही की कोई अचे से मसल मसल कर चोदे,

सावित्री- ओह्हो सच्ची, क्यों समधी जी ने रात अचे से मसला नहीं का?

सावित्री ने अपनी संधान के चूतड़ों पर हाथ मरते हुए कहा,

माधुरी- अरे मसला और छोड़ा भी अचे से पर अभी भी कुछ आस बाकि है बदन में रह रह कर उठती है.

सावित्री - ओह्ह वो ाएस, तो बन्नो वो आस तो पति से छोड़कर मिटने से रही उसके लिए अलग hi लुंड चाहिए,

माधुरी- धत्त्त कमीनी, अब मेरे पास तुम्हारी तरह देवर का लुंड नहीं है न जो जब चाहे ले लिए..

सावित्री- अरे तुम जैसी गदराई औरत को भी लुंड की कमी होने लगी तो हो गया काम तुम बस इशारा तो करो,

माधुरी- हाय कर तो रही हूँ इशारा पर यहाँ है कौन इशारे समझने वाला.

सावित्री - अरे इशारा समझने वाला, यहाँ तो एक इशारे पर तुमहस घोड़ी बनाकर तुम्हारी मुनिया का पानी निकलने वाले भी हैं.

माधुरी- बातें न घुमाओ. सीधा सीधा बोलो.

सावित्री - सीधा ये की छोड़ना चाहती हो?

माधुरी- अरे..

सावित्री - हाँ या न?

माधुरी- हाँ, पर किस्से?

सावित्री - जवान लुंड से, बिलकुल जवानी के जोश से भरपूर जो तुम्हारी छूट को अचे से संतुष्ट कर दे.

माधुरी- हाँ ऋ पर जवान लुंड इस बुद्धि की छूट में क्यों जायेगा?

सावित्री- तुम बस हाँ करो बाकि सब पर मुझपर छोड़ दो.

माधुरी- हाँ देखती हूँ तुम्हारा भी इंतज़ाम.

सावित्री- बिलकुल पर एक चीज़ अब हाँ कर दिया है तो बाद में पीछे नहीं हटना.

माधुरी- लुंड लेने से पीछे क्यों हटने लगी मैं.

सावित्री- ठीक फिर तैयार रहना कभी भी बुलावा आ सकता है हमारा.

माधुरी- चड्डी तक नहीं पहनी और कैसे तैयार हूँ ..

दोनों इस बात पर खिल खिला पड़ी...

वहीं आंगन में अभी सभी जवान लोग जमावड़ा लगा कर बैठे थे,

ख़ुशी- अरे यार कितना मस्त मौसम है बहार चलते हैं न.

चंचल- दो दिन अचे से बहार घूमे hi है न मेरा तो मन नहीं कर रहा,

रमन- हाँ कहीं बहार जाना बेकार है,

चेतन- पर मौसम ाचा है ऐसे में घर पर बैठ कर क्या फायदा मैं तो सोच रहा हूँ खेतों में घूम आऊं.

ख़ुशी- भैया मैं भी चलूंगी.

चेतन- हाँ ठीक है चल, और कौन चलेगा,

ख़ुशी- पर भैया ऐसे hi चलोगे क्या?

ख़ुशी ने चेतन के कपड़ो की और इशारा करते हुए कहा उसने पूरा गाओं का रुप अपना लिए था और धोती और कुर्ते में घूम रहा था.

चेतन- अरे क्या बुराई है इनमे यहाँ तो सब ये hi पहनते हैं न.

पंकज- हाँ और क्या जैसा देश वैसा भेष.

चेतन- बिलकुल सही तो तुम चल रहे हो पंकज.

पंकज- नहीं भाई हमारा तो प्लान है रिम्मी और चंचल भाभी से लूडो में दो दो हाथ करने का,

रिम्मी- दो दो हाथ करने का नहीं जीजा, हरने का,

रमन- मैं और पूर्वी शतरंज खेलने वाले हैं, विनीत को ले जाओ विनीत कहाँ है?

चंचल- वो तो सो रहा है मस्त. रत भर ये लोग फ़ोन में लगे रहते हैं दिन में सोते हैं.

इसके बाद चेतन और ख़ुशी बहार चले गए खेतों की और बाकि सब अपने काम में लग गए, इधर तीनो समधी आज अमरुद की बघिया में हुक्का लगा कर बैठे थे और अपनी अपनी रात की दास्ताँ एक दुसरे को सुना रहे थे,

रिम के पापा- मतलब कहानी आगे बढ़ रही है?

उदयवीर( चंचल के पापा)- हाँ भाई साहब कल पहली बार चंचल की अम्मा का ये रूप देखा मैंने खुद से पूरी नंगी होकर आई और गांड मरवाई हाय लुंड तन गया सोच कर hi,

रिम के पापा- हमारा भी तन रहा है,

चंचल के पापा- तुम्हारे तो वैसे भी मज़े हैं, अपने भाई की पत्नी को भी पेल लेते हो,

रिम के पापा- अरे उदयवीर भाई साब छूट गांड से किसका मन भरता है जितनी मिल जाएं उतनी काम हैं.

चंचल के पापा- अरे पर येचारण सिंह भाई साब इतने शांत कैसे हैं लगता है रात मिली नहीं, हाहाहा.

चरण सिंह- अरे नहीं नहीं ऐसी बात नहीं है बस ऐसे hi, वैस्व रात तो मेरी वाली के भी जलवे अलग hi थे जो कूड़े की है उसने लुंड पर मज़ा hi आ गया,

चरण सिंह की परेशानी की वजह उदयवीर की बेटी hi थी उनकी बहु चंचल जिसने ऐसी शर्त राखी थी जिस्व सोच सोच कर चरम सिंह का दिमाग घूम रहा था और लुंड फूल रहा था, एक बेटे से माँ को कैसे छुड़वा दूँ मैं वो भी अपनी बीवी को अपनेबेटे से,.

फिर ये कल्पना करते hi उनका लुंड फूलने लगता उन्हें सकझ नहीं आ रहा था क्या करें.

रिम के पापा- ये तो अछि बात है न हमारी पत्नियां खुल रही हैं जितना खुलेगी उतना हमारे लिए ाचा है,

इधर इनकी बातें चल रही थी, उधर ख़ुशी और चेतन दोनों खेतों में घूम रहे थे..

ख़ुशी- हाय कितना ाचा मौसम है न भैया इतना फ्रेश लग रहा है.

चेतन- हाँ पेड़ों के बीच hi मिलती है फ्रेश फ्रेश हवा,

ख़ुशी- मुझे याद है जब हम छोटे पर यहाँ खेलते थे तो रमन भैया अपने लिए अमरुद और आम तोड़ लेते थे और मुझे नहीं देते थे,

चेतन- हाँ और फिर तू कितनी तेज़ चीख चीख कर रोटी थी,

ख़ुशी- अरे वो तो ऐसे hi पर तुम मुझे चुप कराकर अपनी गॉड में बिठाकर फिर खिलते थे, वो दिन भी कितने सुहाने थे न भैया,

ख़ुशी ने चेतन की ब्याह को पकड़ कर उस पर झूलते हुए कहा,

चेतन- हाँ सुहाने भी थे और खुश भी.

ख़ुशी- काश वो दिन फिर से बापिस आ जाते.

चेतन- क्यों तुझे फिर से चीख कर रोना है क्या? हाहाहाहा.

ख़ुशी- हाहाहा नहीं भैया, छोटे पर ऐसा होता है न की हम सब कुछ बता पते हैं, प्यार अचे से जताते हैं बड़े होकर काम होता जाता है.

चेतन- ाचा वो कैसे,

ख़ुशी- बचपन में तुम मुझे गॉड में बैठा कर कभी आम तो कभी अमरुद और कभी गणना खिलते थे अब नहीं.

चेतन- ाचा इसमें क्या दिक्कत है ये तो अभी भी खिला सकता हूँ.

ख़ुशी- ाचा अब भी गॉड में बिठाओगे मुझे,

चेतन- हाँ क्यों नहीं..

बातें करते हुए दोनों खेतों के बीच पहुँच गए थे जहाँ गैंडा का पति पुत्तन सोता था खेतों की रखवाली के लिए जानवरों आदि से तो उसकी खाट और बिस्तर वहीं पड़ा हुआ था,

ख़ुशी- अरे खेत के बीचों बीच बिस्तर..

चेतन- पुत्तन का होगा न रात को वो यही सोता है.

ख़ुशी- अच्छा हाँ,

चेतन- अब बता तुझे गणना खाना है.

ख़ुशी- गॉड में बैठकर खिलाओगे.

चेतन- हाहाहा तू भी न.

ये कहकर चेतन बगल के गन्ने के खेत में घुस गया और एक ाचा सा गणना तोड़ कर उसे साफ़ कर लाया उधर ख़ुशी खत पर बैठ उसका इंतज़ार कर रही थी..

चेतन ने उसे गणना दिया और खुद भी उसके बगल में खत पर बैठ गया, पर ख़ुशी ऐसे मैंने वाली कहाँ थी उसने गणना लिए और तुरंत कड़ी हुई और चेतन की गॉड में बैठ गयी,

चेतन- हाहाहा तेरा बचपना अभी गया नई ये कहते हुए चेतन ने ख़ुशी को अपने ऊपर बाहें खोल कर बैठा लिए और प्यार से उसकी पीठ सहलाने लगा.

ख़ुशी- बात hi ये हुई थी भैया,

चेतन- कोई बात नहीं खले आराम से.

इधर चेतन ने बोल दिया और प्यार से ख़ुशी की पीठ सहलाने लगा वहीं उसके बहन की बदन की खुशबु से, कुछ उसकी खूबसूरती से और कुछ उसकी भरी हुई गांड के उसके ऊपर ठीके होने से चेतन के मन में उत्तेजना आने लगी उसका लुंड सर उठाने लगा, एक पल को उसनर खुद को कोसा और इस परिस्थिति से बहार निकलने की सोचने लगे पर ज्यों ज्यों ख़ुशी के बदन की खुशबु उसके बदन में समां रही थी उसका विरोध उतना काम हो गया, और उसे पीछले दिनों जो भी हुआ और फिर अभी कुछ देर पहले अपनी सास के साथ जो हुआ वो याद आ गया कुर चंचल को किआ वादा भी की मौका मिला तो पीछे नहीं हटूंगा,

वैसे ख़ुशी कोई मौका नहीं दे रही थी बस उसकी गॉड में बैठ गणना चूस रही थी वहीं उस्क्स गुदगुदे चूतड़ों के बीच चेतन अपना गणना दबाये हुए बैठा था, चेतन ने सोचा ख़ुशी पढ़ी लिखी है समझदार है उसे कुछ गलत लगेगा तो खुद hi उठ जाएगी,

उधर ख़ुशी को अपने चूतड़ों के नीचे बड़े भैया का लुंड सख्त होते महसूस हुआ तो ख़ुशी का वादन सिहरने लगा, अपने छोटे भैया से छोड़ने के बाद उसके अंदर एक नया विश्वास जाग गया था, और वो उसी एटीएम विश्वास और जोश के साथ अपने बड़े भैया के साथ मज़े ले रही थी...

ख़ुशी जान कर हिल हिल कर गणना खा रही थी और अपने चूतड़ों के बीच अपने भैया के लुंड को दबा रही थी, चेतन ने शुरू में तो इसे ख़ुशी की नादानी और मासूमियत समझा फिर ध्यान दिया तो पाया की ख़ुशी के चूतड़ कुछ ज़्यादा hi हिल रहे हैं जितना तो उसका बदन नहीं हिल रहा.

चेतन के मन में एक बार फिर से कामोत्तेजना उठने लगी उसके मन hi मन एक द्वन्द चलने लगा,

मन- क्या ख़ुशी ये जान कर रही है, क्यूंकि मेरा लुंड तो पूरी तरह अकड़ा हुआ है और उसे महसूस भी हो रहा होगा तो फिर ये ऐसा क्यों कर रही है क्या ये उत्तेजित हो रही है, क्या ख़ुशी भी सबकी तरह रिश्तों में काम सुख चाहती है, अगर ऐसा है तो मैं पीछे क्यों हतुं

बुद्धि- नहीं, ये क्या सोच रहा है चेतन ख़ुशी तेरी सगी बहन है बचपन में गॉड में खेली है, तुझे ऐसा नहीं सोचना चाहिए..

मन- पर उसकी हरकतों से लग रहा है की वो खुद भी यही छह रही है.

बुद्धि- अगर वो छह रही है तो चाहने दे उसे तुझे बड़े होने के नाते समझना चाहिए और खुद को और उसे इस पाप से बचना चाहिए.

मन- अब क्या पाप पुण्य करना, इतना सब करने के बाद भी, अपने छोटे भाई की बीवी छोड़ली, अपनी बीवी को दूसरो से चुड़ते देखा दूसरो की बीवी छोड़ी, अपनी बीवी अपने hi पिता से छड़वाई, अपनी सास को छोड़ लिए तो अब इसमें क्या पाप पुण्य देख रहा है मज़े कर, कितना मस्त बदन है बहन का.

बुद्धि- वो सब अलग बात थी पर ये सगी बहन है किसी को खबर लगी तो समाज ठु ठु करेगा,

मन- बहन है पर जवान है इसका बदन देख जवानी का रास बाह रहा है, और अगर ये अपने सेज भाई को ऐसे अपने बदन का आकर्षण दिखा कर लुभा सकती है तो सोच कितनी कामोत्तेजना भरी होगी इसमें, चेतन अगर तू मौका छोड़ेगा तो कोई और पकड़ लेगा और फिर ज़्यादा बदनामी होगी.

बुद्धि- पर अपनी hi बहन के साथ छी छी,

मन- अरे तभी तो घर की बात घर में कोई बदनामी का दर नहीं होगा और छी छी करने से पहले ज़रा एक नज़र बहन के रसीले होंठों पर दाल क्या इन्हे देख कर छी छी आटा है मन में.

चेतन ने चेहरा थोड़ा आगे कर ख़ुशी के होंठों को देखा जिनके बीच गणना था उसके होंठों पर रास लगा हुआ था जो गन्ने का था या उसकी जवानी का पर ख़ुशी के होंठ देखते hi चेतन के मन के सरे द्वन्द तुरंत समाप्त हो गए, उसका मन दिमाग सब बिलकुल निश्चित हो गया की उसे क्या चाहिए,

चेतन ने अपना एक हाथ ख़ुशी की गदराई जांघो पर रखा और दूसरा उसकी कमर पर और बोलै- कैसा है गणना ख़ुशी?

ख़ुशी- बहुत मीठा है भैया.. मज़ा आ रहा है चूसने में.

चेतन- तुझे गणना चूसना पसंद है?

ख़ुशी- हाँ भैया मुझे गणना चूसना बहुत पसंद है एक मोटा रास भरा गणना जब मुँह में जाता है तो मज़ा आ जाता है.

भाई बहन दोनों जानकार दो अर्थी बातें करने लगे जिनका मतलब दोनों hi अचे से समझ रहे थे,

चेतन- ाचा फिर तो तुझे एक मोटा और रास से भरा हुआ लम्बा गणना चुसवाऊँगा, चूसेगी न भैया का दिया हुआ गणना?

ख़ुशी- हाँ भैया ये भी कोई पूछने की बात है तुम्हारा गणना तो मैं पूरा चूस जाउंगी और पूरा रास पि जाउंगी,

ख़ुशी से ये सुनकर तो चेतन सिहर गया,

चेतन- अरे ख़ुशी आराम से बैठ न गॉड में ऐसे तू भी थक जाएगी और मैं भी,

ये कहकर चेतन ने ख़ुशी को उठाकर फिर से अपने ऊपर बैठा लिए और इस तरह बैठाया की अब उसका खड़ा लुंड सींचा ख़ुशी की कासी हुई पजामी के अंदर उसके चूतड़ों की दरार और उसकी रास से भरी छूट के ऊपर टिक गया, अब तो ख़ुशी का बदन मचलने लगा भैया का लुंड अपनी छूट के इतनी पास पाकर. चेतन का भी वही हाल था ख़ुशी की छूट की गर्मी उसे लुंड पर महसूस हो रही थी

दोनों भाई बहन खुले आसमान के नीचे खेत के बीच में एक दुसरे के ऊपर बैठ के उत्तेजना की आग में जलते हुए नाटक कर रहे थे, क्यूंकि चरण सिंह के खेतों की चकबंदी हुई थी इसीलिए यहाँ किसी और का आना मुश्किल hi था सिर्फ पुत्तन hi रात को रखवाली के लिए आता था इसीलिए चेतन भी निश्चिन्त था,

चेतन- ख़ुशी ाचा लग रहा है?

ख़ुशी जो हर पल मदहोश हो रही थी एक बार hi चूड़ी थी वो भी अपने भाई से अब दुसरे भाई के साथ इस स्तिथि में पाकर उससे खुद के बदन को संभालना मुश्किल हो रहा था, नीचे से चेतन का कड़क लुंड उसकी छूट को और तड़पा रहा था,

ख़ुशी- ुहम्म्म्म भैयाहहह ाचा लग रहा है,

चेतन उसकी जांघ पर और कमर पर सूट के ऊपर से hi हाथ फिरने लगा,

ख़ुशी के मुँह से हलकी हलकी सिसकियाँ निकलने लगी... जिन्हे सुनकर चेतन समझ गया अब ख़ुशी बेहद गर्म है और इसका फायदा थेटे हुए वो सूट के ऊपर से hi उसके बदन को मसलने लगा,

ख़ुशी और उत्तेजित होने लगी, वो बदन की गर्मी में तपने लगी और उसकी गर्मी इतनी थी की चेतन भी तप रहा था, चेतन ने सोचा ख़ुशी अब गरम है तो यही समय है कुछ आगे बढ़ने का और उसने हिम्मत करते हुए चेहरा आगे कर अपने होंठ ख़ुशी की गर्दन पर रख दिए, उसके होंठ गर्दन से छूटे hi ख़ुशी के बदन में बिजली सी दौड़ने लगी उसकी सांसें तेज़ चलने लगी और उत्तेजना से वो पीछे की और हो गयी और अपनी पीठ चेतन के बदन से चिपका दी, चेतन के लिए इतना इशारा काफी था और वो भी उत्तेजित होकर पागलों की तरह ख़ुशी की गर्दन को चूमने लगा और साथ hi उसके हाथ सूट के ऊपर से hi ख़ुशी की नारंगियों को मसलने लगे अब दोनों के बीच कुछ कहने सुनने को नहीं रह गया था दोनों जानते थे की दोनों hi क्या चाहते हैं.

चेतन ने गर्दन को चूमते हुए आगे चेहरा किआ और अब वो बहन के रसीले होंठों की और बढ़ने लगा, जैसे hi होंठों को छूटा अचानक से भर भरा के बारिश पड़ने लगी, बारिश की तेज़ बूँदें दोनों को भिगो कर उनके अंदर की गर्मी को शांत करने की कोशिश करने लगी..

बारिश से जैसे ख़ुशी को होश आया और वो उठ कड़ी हुई,

ख़ुशी- भैया क्या करें भीग जायेंगे चलो चलते हैं.

चेतन को ख़ुशी थी की ख़ुशी ने सिर्फ बारिश को बात की मतलब अभी जो हो रहा था उससे उसे कोई परेशानी नहीं है

चेतन- अरे कहाँ जायेंगे यहाँ छुपने की कोई जगह दिख रही है तुझे इसलिए आराम से मज़े ले बारिश के.

ख़ुशी- सच्ची मज़ा आयेगा.

चेतन- भीग तो गए hi हैं..

चेतन ख़ुशी के बदन की और देखते हुए बोलै क्यूंकि ख़ुशी का सूट भीग कर उसके बदन से चिपक कर उसके बदन को और कामुक बना रहा था...

ख़ुशी- चलो न भैया पेड़ों के नीचे चलते हैं,

ख़ुशी ने चेतन के हाथ को पकड़ कर खींचते हुए कहा.. पेड़ खेत को पार कर के थे...

चेतन अपनी छोटी प्यारी बहन को कैसे मन कर सकता था, इसलिए उसके साथ साथ भीगते हुए दौड़ने लगा ख़ुशी मेड पर बलखाते हुए भाग रही थी और चेतन हर कदम पर उसके थिरकते हुए चूतड़ों को,

खैर खेत पार कर जैसे hi पेड़ के पास पहुँचने को हुए वहां की मिटटी बहाव के कारन चिकनी हो गयी थी इसलिए उस पर पेअर पड़ते hi खुशिका पेअर फिसला और वो गिरने को हुई रो चेतन उसे सँभालने के लिए आगे बढ़ा पर उसका भी पेअर फिसला और दोनों भाई बहन धड़ाम से नीचे गिर गए हालाँकि मिटटी में गिरने की वजह से किसी को नहीं लगी, नीचे चेतन और ऊपर ख़ुशी पर गिरने की वजह से ऐसा हुआ की दोनों के चेहरे बिलकुल एक दुसरे के सामने आ गए, चेतन ख़ुशी के भीगे होंठों को देख होश खोने लगा वहीं ख़ुशी का भी बुरा हाल था, इसी पल चेतन ने सोचा की अभी नहीं तो कभी नहीं और ये सोचकर उसने अपने होठ अपनी छोटी बहन के रसीले नरम होंठों पर लगा दिए, उसके होंठों को छूटे hi चेतन को लगा जैसे उसके मुँह में एक बेहद रसीले फल की कोई फांक घुल गयी हो वहीं ख़ुशी तो चेतन के कदम से हैरान भी रह गयी और खुश भी हुई उसे लगा ाचा हुआ भैया ने बेकार में टाइम नहीं गंवाया, फिर भी भाई के होंठ अपने होंठों पर होने का एहसास उसके लिए अनूठा था वो ज्यों की त्यों रही और आँखें बंद किये हुए इस पल का मज़ा लेने लगी,

चेतन ने कुछ पल रुक कर कर प्रतीक्षा की और देखा की ख़ुशी ने अपने होंठ पीछे नहीं किये तो वो समझ गया की जो उसके मन में है वही ख़ुशी के, उसने ख़ुशी के होंठों को चूसना शुरू कर दिया या कहें की उसके होंठो के रास को पीने लगा, ख़ुशी भी शुरुआत में सिर्फ अपने भैया को जो चाहे वो करने देने के बाद खुद को अधिक देर रोक नहीं पाई और भैया का साथ देने लगी, दोनों भाई बहन उत्तेजना वस् पागलों की तरह एक दुसरे को चूम रहे थे साथ hi कीचड में लोट पॉट हो रहे थे कभी चेतन ऊपर होता तो कभी ख़ुशी, दोनों के कपडे कीचड और पानी से ख़राब हो चुके थे पर किसे परवाह थी, काफी देर बाद दोनों के होंठ अलग हुए तो दोनों के चेहरे पर एक अलग मुस्कान और प्यास थी, चेतन ने उठ कर अपना कुरता उतर दिया और सिर्फ धोती में आज्ञा तो वही ख़ुशी अपने भैया के गीले कसरती बदन को देख मचलने लगी,

चेतन अपने कपडे उतर कर ख़ुशी के बदन पर हाथ फिरत्र हुए बोलै- देख तेरे बदन पर तो कीचड लग गया है,





चेतन अपनी बहन के बदन के उतर चढ़ावों को अपने हाथों से नापते हुए सहलाते हुए बोलै, भैया का ऐसा स्पर्श ख़ुशी के बदन में बारिश में भी आग लगा रहा था..

ख़ुशी- ुहम्म्म्म हॉँण्णन भैयाजी देखो न पूरा कुरता गन्दा हो गया,

चेतन- तो उतर दे न गन्दा हो गया है तो देख मैंने तो उतर दिया..

ख़ुशी- ुहम्म्म्म नहीं भैया तुम्हारे सामने कैसे,

ख़ुशी ने जानकार नाटक करते हुए बोलै..

Chetan-are अभी तो मेरी गॉड में खेल रही थी तो मुझसे कैसी शर्म, और मैंने तुझे बचपन में कितनी बार नहलाया है न..

ख़ुशी- हाँ भैया नहलाया तो है पर बचपन में तो मेरे कपडे तुम खुद उतारते थे न...

ये सुनकर तो चेतन की ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा

चेतन- बस इतनी सी बात ले आज भी मैं उतर देता हूँ, देखूं तो अचे से मेरी गुड़िया कितनी बड़ी हो गयी है.

ये कहकर चेतन ने ख़ुशी का कुरता पकड़ा और उसे ऊपर उठाने लगे ख़ुशी ने भी अपने भैया का साथ देते हुए हाथ ऊपर कर लिए





जल्दी hi चेतन ने ख़ुशी का कुरता उसके सर और बाजुओं से निकल कर नीचे फ़ेंक दिया उसके बाद उसकी नज़रें अपनी बहन के बदन पर टिक गयी,

उसका गोरा बदन सिर्फ ब्रा में क़ैद उसके सामने था गोरा कोमल पेट जिस पर पानी की बूँदें फिसल रही थी, जिसे देख कर चेतन के मुँह में पानी आने लगा वो बस उसे इस हालत में देखे जा रहा था,

ख़ुशी- ुहम्म्म्म भैयाहहह ऐसे क्या देख रहे हो, पजामी नहीं उतरनी क्या?

ये सुनकर चेतन होश में आया और फिर जब उसे समझ आया की ख़ुशी ने क्या बोलै है उसके होश दोबारा खोने लगे,

चेतन- हुन्न्न? हनन हनन पजामी, उतरता हूँ रुक..

ये कहकर चेतन ने हाथ आगे बढ़ाये और ख़ुशी की कोमल कमर पर फिरते हुए उसकी पजामी की लास्टिक में दोनों हाथ की उँगलियों को फंसा लिए और फिर उसे नीचे खिसकने लगा पाजामे ज्यों ज्यों नीचे आ रही थी वैसे वैसे ख़ुशी का और गोरा बदन सामने आ रहा था उसकी छोटी सी गोल नाभि देख कर चेतन के मुँह में पानी आ गया और थोड़ा नीचे करने पर उसकी काळा रंग की कच्ची देख चेतन का लुंड ठुमके मरने लगा,

चेतन के मन में विचार कोंढा की समय की नजाकत को समझ चेतन अभी इतना समय नहीं है अगर एक बार ये रिश्ता बन गया तो आराम से बाद में कितने भी मज़े ले सकता है, ये सोचते हुए चेतन ने ख़ुशी की पजामी को भी उसके पैरों से उतर दिया,





चेतन की आँखें अब और बढ़ी हो गयी क्यूंकि उसकी सगी छोटी गदराई हुई बहन अब उसके सामने सिर्फ ब्रा पंतय में थी, चेतन न चाहते हुए भी रुक कर अपनी बहन के बदन की खूबसूरती और कामुकता को बिना निहारे नहीं रह सका,

ख़ुशी को भी अव्हा लग रहा था कैसे उसके भैया उसे निहार रहे थे जैसे खा hi जायेंगे उसकी नज़र रह रह कर भैया की धोती में बने तम्बू पर जा रही थी,

चेतन ने खुद को होश दिलाया की देखता hi रहेगा की आगे भी बढ़ेगा चेतन से रहा नहीं गया वो ख़ुशी के बदन पर चढ़ने लगा, वहीं ख़ुशी भैया को आगे बढ़ता देख पीछे लेट कर पलट गयी,





चेतन ने आगे झुक कर अपने होंठ ख़ुशी की पीठ से लगा दिए और उसकी पीठ को चूमते हुए उसके पेट और छूछीयो को हाथ से सहलाने लगा.

वहीं ख़ुशी सिसकियाँ लेती हुई अपनी गरम आहों से चेतन को और उकसा रही थी,

ख़ुशी के पेट से होते हुए चेतन के साथ जल्द hi ख़ुशी की छूछीयो के ऊपर पहुँच गए और उसने उन्हें ब्रा के ऊपर से मसलना भी शुरू कर दिया,

ख़ुशी- अह्हह्ह्ह्ह भैयाहहह ओह्ह्ह्हह्हह..

चेतन- ुहममम ख़ुशी सच में मेरी गुड़िया तू पहले से कितनी बड़ी हो गयी है,

चेतन ने ख़ुशी की भरी छूछीयो को मसलते हुए कहा,

ख़ुशी- ुहम्म्म्म हॉँण्णन भैयाहहह देख लूओ अह्ह्ह्ह..

चेतन- देख रहा हूँ मेरी गुडईयहहह कहते हुए चेतन लगातार ख़ुशी की छूछीयो को मसलते हुए उसकी पीठ और गर्दन को चूम रहा था,

ख़ुशी- ओह्ह भैया मेरी पजामी ुताहहहहर दी पर अपनी धोती तो अब भी पहने हो,

ख़ुशी ने शिकायत भरे शब्दों में कहा..

चेतन- अरे बस इतनी सी बात ले मैंने तेरे कपडे उतरे तू मेरे उतर दे,

ये कह चेतन वहीं पीठ पर लेट गया और ख़ुशी अपने भाई के बदन को देखते हुए उसके बदन पर हाथ फेरते हुए बोली- सच में मैं उतरूं?





चेतन- हाँ गुड़िया मैंने भी तो तेरे उतरे न,

ख़ुशी- ठीक है भैयाहहह

ये कहकर ख़ुशी ने चेतन की धोती को खोल दिया अब उसके सामने चेतन सिर्फ एक गीले कच्चे में था जिसमे उसका लुंड बहार आने को बेताब था, खैर अभी ख़ुशी इतने पर hi रुक गयी और आगे झुक कर अपने भैया के सीने पर चूमने लगी, और फिर ऊपर उठ कर होंठों को..

एक लम्बे चुम्बन के बाद दोनों अलग हुए तो चेतन ने आगे की स्थिति संभाली और कुछ सोचते हुए ख़ुशी को खड़ा किआ और खुद उसके सामने घुटनो पर बैठा और बिना देरी किये अपना मुँह उसके पेट पर रख उसे चाटने लगा,





ख़ुशी तो चेतन के इस प्रहार से मचलने लगी वहीं चेतन अपनी बहन के पेट को पागलों की तरह चूमने चाटने लगा,

ख़ुशी- ओह्ह्ह्ह भैयाह शहहहहह

चेतन ने अपना प्रहार जारी रखा और अपनी जीभ ख़ुशी की सूंदर सी नाभि में दाल उसे चूसने लगा,

ख़ुशी पागल होने लगी, चेतन ख़ुशी की नाभि चूसते हुए अपने हाथों को ख़ुशी की पीठ पर ले गया और उसकी ब्रा को पीछे से खोल दिया और फिर आगे से भी उसके सीने से हटा दिया और फिर सर उठाकर ख़ुशी की नंगी चूचियों को देखा, हाय क्या सुंदरता न ज़्यादा बड़ी न ज़्यादा छोटी लग रहा था दो सफ़ेद अनार हैं और बीच में किशमिश के डेन जैसे निप्पल, चेतन चूचियों पर टूट पड़ा और एक को दबाते हुए दूसरी को चूसने लगा, कभी सिर्फ निप्पल को चूसता तो कभी पूरी छुच्छी को मुँह में भरने की कोशिश करता ख़ुशी को अपने भैया का जोश और उसके बदन के लिए पागल पैन भ रहा था,

ख़ुशी- ओह्ह्ह्ह भैयाह अह्ह्ह्हह्हह चूसो खा जाओ इन्हे

ख़ुशी अपनी चूचियों को अपने भैया से चुसवाते हुए सिसकियाँ लेते हुए उसे उकसा रही थी, नीचे भाई बहन अपनी अपनी बदन की गर्मी मिटा रहे थे ऊपर से बारिश उन्हें भीगकर बाहरी गर्मी से शांति दे रही थी,

दोनों चूचियों को अचे से चूसने के बाद चेतन ने आगे का सोचा और बिना छूछीयो को छोड़े hi एक हाथ नीचे लेकर ख़ुशी की कच्ची की लास्टिक में फंसाया और उसे नीचे खिसकने लगा, ख़ुशी की धड़कन तेज़ होने लगी और उसनर आने वाले पल के लिए खुद को संभाला,

धीरे धीरे चेतन ने ख़ुशी की कच्ची उसके चूतड़ों और फिर जाँघों से नीचे सरका दी और फिर उसके घुटनो से भी. नीचे तब जाकर उसने अपना मुँह ख़ुशी की छूछीयो से हटाया और नज़र भर के देखने लगा सामने उसकी बहन बिलकुल नंगी उसके सामने कड़ी थी जिसे देखकर hi चेतन का रोम रोम सिहर रहा था, कितनी मदमस्त जवानी से भरी हुई उसकी बहन उसके सामने बिलकुल नंगी थी,

चेतन को कुछ सूझा और वो ज़मीन पर पीठ पर लेट गया और ख़ुशी को इशारा किआ ख़ुशी भी इशारे को जैसे तुरंत भांप गयी और तुरंत अपने भैया के सर के दोनों और पेअर करके कड़ी हो गयी तो चेतन के सामने बहन की सुन्दर कासी हुई छूट आ गयी, ख़ुशी धीरे धीरे नीचे होने लगी तो उसकी छूट चेतन के करीब आने लगी जिसे देख कर चेतन के मुँह में पानी आर लगा, ऐसी कासी हुई रसीली छूट थी उसकी बहन की, दोनों होंठ आपस में चिपके हुए थे, और लग रहा था उन्हें खोलने के लिए पहले छूट को काफी पुचकारकके मानना पड़ेगा..

ख़ुशी जल्दी hi अपने भैया के चेहरे पर बैठ गयी और चेतन ने अपना मुँह खोल कर ख़ुशी की छूट पर लगा दिया, इसके साथ hi ख़ुशी के मुँह से अह्ह्ह्हह्हह निकल गयी जो तेज़ बारिश की आवाज़ में खो गयी, इधर चेतन ने अपनी बहन की छूट में अपनज जीभ घुसा दी और उस्क्स रास पीते हुए चाटने लगा, अपनी सगी बहन की छूट का स्वाद कितना मीठा होता है उसे आज पता चल रहा था,

बहुत शिद्दत से वो ख़ुशी की छूट चाटने पर लगा हुआ था, ख़ुशी तो सर इधर उधर पटक रही थी उत्तेजना में उसके भाई की जीभ उसकी छूट में ऐसे तारों को छेड़ रही थी जो उसके पूरे बदन पर जादू कर रहे थे, इस जादू को और छूट से उठ रही तरंगो को ख़ुशी ज़्यादा देर सह नहीं पाई और अपनर बड़े भैया के मुँह में झड़ने लगी,

चेतन अपनी बहन का रास अपने मुँह में पाकर बड़ा खुश हुआ और उसे शहद की तरह चाट गया, ये सोचकर की उसने अपनी बहन की छूट चाटकर उसे झाड़ा दिया है, उत्तेजना से उसका लुंड फटने को हो गया, और उसने अपना कच्चा एक हाथ लेकर नीचे सरकाया और उतर दिया और ख़ुशी की तरह hi पूरा नंगा हो गया, और ख़ुशी की छूट चाटते हुए hi अपने लुंड को मुठियाने लगा,





ख़ुशी को अभी तक अपने भाई के लुंड के बहार होने का आभास hi नहीं था वो एक बार झड़ने के बाद दोबारा अपने भाई की जीभ की कला से उत्तेजित हो रही थी, वहीं चेतन जब अपनी बहन की छूट का रास पीकर संतुष्ट हो गया तो उसने उसे उठाया और खुद उठ कर बैठ गया, उठाते hi ख़ुशी की नज़र भैया के मोठे काळा लुंड पर गयी जिसे देखकर वो गंगना गयी उसकी छूट कुलबुलाने लगी,

वो खुद बा खुद नीचे उसकी और झुकती चली गयी और उसने चेतन के लुंड को बड़े हलके से अपने हाथ में पकड़ लिए और उसके कड़कपन को महसूस कर मस्त होने लगी उसकी मुठी चेतन के लुंड पर कास गयी और ऊपर नीचे होने लगी.

चेतन- आह्ह्ह्हह कितना ाचा लग रहा है तेरे हाथ का स्पर्श, ohhhhhhhhhhhhhhhh.

ख़ुशी अपनी जीभ से होंठों को पोंछते हुए बोली - कितना मोटा है भैया तुम्हारा ये.. अह्ह्ह कितना कड़क भी .

चेतन- मेटा क्या गुड़िया तुझे इसका नाम पता है,

ख़ुशी के चेहरे पर शरारती मुस्कान आ गयी जिसे चेतन बचपन से पहचानता था.

ख़ुशी- हाँ पता है.

चेतन- ुहम्म क्या है.

ख़ुशी- ुहममम लल्ल ललूंड़द्द.

चेतन को अपनी मासूम सी दिखने वाली बहन के मुँह से लुंड सुनकर एक अजीब सा एहसास हुआ, और उत्तेजना भी हुई, वहीं उत्तेजना तो ख़ुशी को पागल कर रही थी उसके हाथ में उसके भैया का लुंड था और उससे अब और सहा नहीं जा रहा था, उसने कदम आगे बढ़ाया और फिर दोनों पेअर चेतन की कमर के दोनों और किये और उसके नीचे होते हुए उसके लुंड को अपनी छूट के होंठों पर ज्यों hi स्पर्श कराया दोनों के मुँह से एक तेज़ आह्ह्ह्ह निकल पड़ी, दोनों के छूट और लुंड बारिश में भी बिलकुल गरम हो रखे थे,

ख़ुशी चेतन की आँखों में देख रही थी साथ hi अपनी कमर को थोड़ा आगे पीछे हो कर लुंड के टोपे को अपनी छूट के द्वार पर घिस रही थी, ख़ुशी की आँखों ने चेतन से कुछ पुछा जिस पर चेतन ने सिर्फ पालक झपकते हुए जवाब दिया और जवाब मिलने के बाद ख़ुशी, लुंड के टोपे को छूट में फंसकर नीचे होने लगी और चेतन का लुंड ख़ुशी की छूट के होंठों को फैलते हुए अंदर घुसने लगा,

क्यूंकि ख़ुशी सिर्फ एक hi बार चूड़ी थी उसे लुंड लेने में थोड़ी तकलीफ हो रही थी, पर जज्बा इतना था की वो पीछे तो हटने वालो में से नहीं थी, वहीं चेतन कक तो यकीन नहीं हो रहा था की उसका लुंड उसकी सगी बहन की छूट में घुसता जा रहा है.

धीरे धीरे ख़ुशी आहें भर्त्र हुए नीचे होने लगी, अपने आप को सँभालते हुए उसने आखिर अंत में लक्ष्य हासिल कर hi लिया और चेतन का लुंड पूरा छूट में ले लिया और फिर आहें भरते हुए चेतन क्र बिलकुल करीब होकर बोली- भैयाहहह छोड़ो अपनी बहन को.

चेतन के लिए इतना सुन्ना काफी था और वो अपने हाथ ख़ुशी के बदन पर फिरते हुए उसके चूतड़ों को उठाकर अपनर लुंड पर ऊपर नीचे करने लगे और बहन की कासी छूट का आनंद लेने लगे,





हर पल के साथ गति बढ़ाते हुए चेतन अपनी बहन की कासी हुई छूट को छोड़ कर फैलाने लगे,

ख़ुशी- ओह्ह्ह भैयाह ahhhhhhhhhh अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ुहम्म्म्म.

चेतन- ुहम्म्म्म आह्ह्ह्हह्ह यकीं नहीं हो रहा मैं अपनी बहन छोड़ रहा हूँ.

ख़ुशी - चोदूहह भैया और तेज़ छोड़ो आह्ह्ह्हह.

चेतन- ुघ्हहह अह्हह्ह्ह्ह बहन की छूट सा मज़ा किसी में नाहीइइइइइइइ अह्ह्ह्हह..

चेतन ख़ुशी की छूट को अब अचे से छोड़ते हुए बोले...

वहीं ख़ुशी का तो बुरा हाल था और वो देखने से लग रहा था जल्दी hi झड़ने वाली है और हुआ भी ऐसा hi ख़ुशी अपनर भैया के लुंड पर झड़ने लगी, जिसका एहसास चेतन को भी हुआ और उसका फायदा उन्होंने यूँ उठाया और ख़ुशी को पलट कर खुद ऊपर आ गए और दनादन ख़ुशी की गरम छूट में दनादन धक्के मरने लगे. ख़ुशी भी भाई के लुंड की चुदाई से लगातार झाड़ रही थी,

वहीं चेतन तो लगातार ख़ुशी की गरम छूट को आँखें बंद करके दनादन छोड़ कर बहन छोड़ बनाने का सुख प्राप्त कर रहा था.

ख़ुशी- अह्हह्ह्ह्ह भैयाहहह ओह्ह्ह्हह्हह bhaiyaaaaaaaaaaaa ओह्ह्ह्ह भैयाह...

ख़ुशी की ऐसी आहें चेतन का जोश और बढ़ा रही थी और जल्द hi ये जोश उसकद लुंड से होते हुए रास के रूप में निकलने लगा और ख़ुशी की छूट को भरने लगा, ख़ुशी ने भी अपनी छूट में भैया का रास भरता हुआ महसूस किया और एक बार और पानी छोड़ दिया...

खैर झड़ने के बाद दोनों हांफते हुए अलग हुए....

चेतन पूरी तरह संतुष्ट था तो ख़ुशी भी संतुष्ट भी और खुश भी आखिर अपने दोनों भाइयों से वो छुड़वा चुकी थी,

चेतन ने मुस्कुराते हुए ख़ुशी के चेहरे की और देखा और पुछा- कैसा लगा गुडईयहहह,

जिस पर ख़ुशी के जवाब ने उसे चौंका दिया

ख़ुशी- बहुत ाचा भैयाहहह मैंने दोनों भाइयों को भेनचोद बना लिए,

चेतन- क्या कैसे क्या बोल रही है तू बता..

ख़ुशी- बताउंगी भैया सब बताउंगी पर चलो अभी कपडे पहनो किसी ने साथ देख लिए हमें ऐसे तो गड़बड़ हो जाएगी बारिश भी रुक गयी है.

चेतन को भी यही सही लगा और अपने गीले कपडे hi पहनने लगा और ख़ुशी भी अपने गंदे कपडे पहनमे लगी.

चेतन- पर बता तो सही.

ख़ुशी- हाँ चलो न रस्ते में बताती हूँ....

ये कहकर ख़ुशी और चेतन घर की और चल दिए..

जारी रहेगी
 
रज्जो- अब खड़ा खड़ा मुस्कुराते hi रहेगा जा मुझे आराम करने दे बाप बेटे ने मिलकर इतना छोड़ा है.

कर्मा- जा रहा हूँ कोई बात हो तो फ़ोन करना.

Rajjo-theek है,

इतना कहकर कर्मा भी निकल गया ये सोचते की एक परिवार और उनके बीच में उनके जैसा बनने की और बढ़ चला था… आगे


अपडेट 192

चोदामपुर

वहीं जब कर्मा और नीलेश रज्जो और नीतू के छेदों को चौड़ा करने का प्रयास कर रहे थे वहीं घर पर सभ्य और शालू दोनों गदराई बहनें काम में लगी थी, शालू नहाकर निकली थी और धुले हुए कपड़ों से भरी बाल्टी लेकर छत पर चली गयी वहीं सभ्य का आज घर सफाई करने का मन बना हुआ था और वो स्टूल पर चढ़ कर पंखे साफ़ कर रही थी, इसी दौरान राजन नीलेश को ढूंढते हुए उनके घर की तरफ चले आ रहे थे, और घर के बहार पहुँच कर देखा की दरवाज़ा खुला है तो दनदनाते हुए अंदर घुसगये वैसे भी दोनों परिवारों में इतनी घनिष्ठता थी की ऐसे आना जाना लगा रहता था,

राजन ने अंदर जाकर देखा तो आंगन खली पड़ा था कमरे से कुछ आवाज़ आ रही थी तो वो उस और बढ़ गए और कमरे के दरवाज़े पर पहुँच कर देखा तो सामने सभ्य भाभी स्टूल पर चढ़ी हुई पंखे पर झाड़ू मार रही हैं






वैसे तो इसमें कुछ खास बात नहीं थी, पर राजन की नज़र जब सभ्य के बदन पर पड़ी तो उसका मन हलचल करने लगा, सभ्य भाभी का गदराया पेट, कमर में पड़ती सिलवटें और ब्लाउज में बंद भरी चूचियों को देख राजन के मुँह में पानी आने लगा और उन्हें वो पल याद आने लगे जब उन्होंने भांग के नशे में hi सही सभ्य भाभी को नंगा देखा था हाय तेल में सना हुआ उनका बदन क्या लग रहा था, राजन की आँखों के सामने पैट पूजा के दिन के दृश्य घूमने लगे, हाय क्या नज़ारा था वो भी जब सभ्य भाभी बिलकुल नंगी होकर तेल में पूरी तरह से नहीं हुई, भैया से चुद रही थी हाय कितनी कामुक लग रही थी, लुंड के हर एक झटके पर उनकी चूचियां और बदन कितनी कामुकता से हिल रहा था…





राजन उन कामुक दृश्यों में खो गए उनका लुंड तुनक कर खड़ा हो गया और सभ्य को नंगा याद करते हुए उनके मुँह में पानी आने लगा,

वो तो ाचा हुआ की सभ्य की नज़र उन पर पद गयी और उसने hi पहले बोल दिया जिससे राजन बाबू सपनो की कामुक दुनिया से बहार निकले,

सभ्य- अरे भैया तुम कब आये?

राजन- वो वो हम तो अभी आये भाभी, भैया कहाँ हैं?

सभ्य- पता नहीं, थोड़ी देर पहले घर hi थे हम छत पर गए बापिस आये तो देखा गायब पता नहीं कहाँ निकल गए,

राजन – अच्छा चलो कोई बात नहीं हम ढूंढ लेंगे,

सभ्य- अरे भैया अगर जल्दी में न हो तो थोड़ा स्टूल पकड़ लो ये पंखे के ऊपर भी बहुत धुल हो रही है.

राजन- हाँ भाभी बिलकुल, अभी पकड़ते हैं…

ये कहकर राजन ने आगे आकर स्टूल पकड़ लिया और उनकी नज़र सभ्य के नंगे घुटने पर थी जो की साड़ी को ऊपर करने के कारन नंगा था,

सभ्य पंजो के सहारे ऊंचा होकर साफ़ करने लगी, राजन की नज़र अब घुटने के बाद सभ्य के पेट और आधी छलकती नाभि पर आ गयी जिसे देखकर राजन का मुँह सूखने लगा उनका मन तो किआ की भाभी की नाभि को चाट लें पर खुद को किसी तरह रोका,

तभी सभ्य का अचानक से संतुलन बिगड़ा और वो नीचे की और गिरने लगी जिसे देख राजन ने उसे सँभालने की कोशिश की पर सभ्य कोई हलकी फुलकी तो थी नहीं गदरायी हुई थी इसलिए गिरी तो राजन भी उसके साथ hi नीचे थे, हालाँकि दोनों में से किसी को चोट नहीं आई राजन अपनी पीठ पर ज़मीन पर लेते हुई अवस्था में थे और सभ्य उनके ऊपर थी, राजन का एक हाथ सभ्य की मांसल कमर पर था और दूसरा उसकी पीठ पर,

सभ्य लेते हुए hi खिलखिलाते हुए बोली – हाय ढैय्या भैया तुम्हे लगी तो नहीं?

राजन- नहीं भाभी हम ठीक हैं तुम्हे तो नहीं लगी?

राजन ने बापिस पूछा पर साथ hi राजन का हाथ अनजाने hi सभ्य की कमर को सहलाने लगा.

सभ्य ने भी ये महसूस किआ पर उस पर ध्यान न देते हुए बोली- अरे मैं तो तुम्हारे ऊपर गिरी भैया मुझे क्या लगेगी,

राजन- हहह हाँ भाभी पर हमें भी नहीं लगी,

राजन बात कर रहे थे और उनका हाथ सभ्य की कमर को सहला रहा था… जबकि दूसरा हाथ सभ्य की पीठ पर था और उसे खुद से सताए हुए था,

सभ्य के बदन से चिपकने के एहसास से hi राजन का लुंड सख्त होने लगा था और जो की सभ्य की जाँघों पर लग रहा था,

सभ्य जो की अब तक गिरने की बातों में hi लगी थी उसने उठने की कोशिश की तो पाया राजन ने उसे जकड़ा हुआ है तब जाकर उसने ध्यान दिया की राजन का एक हाथ उसकी कमर को मसल रहा है वहीं उसे अपनी जांघ पर राजन का लुंड भी चुभता हुआ महसूस हुआ. सभ्य समझ गयी राजन का हालत और सोचने लगी सभी मर्दों की यही आदत होती है औरत के बदन की खुशबु तक आई नहीं की इनका झंडा खड़ा हो जाता है, पर अब मैं क्या करूँ, मैं नहीं चाहती कुछ अटपटा हो,

सभ्य ये सब सोच रही थी वहीं राजन की उत्तेजना हर बढ़ते पल के साथ बढ़ती जा रही थी, उसका हाथ अब सभ्य भाभी के मांसल पेट और कमर को मसल रहा था, उनका लुंड पूरा तन के सभ्य की जांघ पर अपना सर मार रहा था, राजन की हिम्मत भी बढ़ती जा रही थी क्यूंकि सभ्य ने उन्हें अब तक रोका जो नहीं था और न hi उठने को बोलै था,

दूसरी और सभ्य को राजन की हरकतें उत्तेजित भी कर रही थी और वो इस परिस्थिति से निकलने के उपाय भी सोच रही थी,

वहीं राजन की हिम्मत और बढ़ी तो उनका दूसरा हाथ भाई सभ्य की पीठ पर फिरने लगा, उनकी पीठ को सहलाने लगा, पीठ को सहलाते हुए राजन ने सोचा की आज का दिन ाचा है भाभी तो रोक hi नहीं रही हैं फायदा उठा ले बीटा जितना उठा सकता है, ये hi सोच कर उसने अपना पीठ वाला हाथ सभ्य के मदमस्त चूतड़ों पर रखने का सोचा और धीरे धीरे सहलाते हुए राजन का हाथ नीचे की और सरकने लगा और जल्दी hi सभ्य के चूतड़ों तक पहुँच गया और जैसे hi राजन ने सभ्य भाभी के चूतड़ों का एहसास करने के लिए हाथ रखा तभी बहार से शालू की अचानक आवाज़ आई जीजी…

जिसे सुनकर राजन और सभ्य दोनों hi चौंक गए और सभ्य तुरंत उठ कड़ी हुई और राजन भी उठ गए इतने में शालू भी अंदर आ गयी…

शालू- अरे जीजा तुम कब आये?

राजन- बस थोड़ी देर पहले,

सभ्य- हाँ और आते hi मैंने भैया को स्टूल पकड़ने के काम पर लगा दिया और तुझे पता है बेचारे स्टूल पकड़े हुए थे और हम इन पर धम्म से गिर भी पड़े, हाहाहाहा.

सभ्य ने खिलखिलाते हुए बताया तो शालू और राजन दोनों हंस पड़े,

शालू- जीजा ठीक तो हो न कोई हड्डी वड्डी तो नहीं चटकी.

राजन- नहीं, इतने में कैसे हड्डी चटक जाएगी वैसे भी भाभी में वजन hi कितना है.

सभ्य- और का हलकी फुलकी सी तो हूँ मैं.

शालू- हाँ जीजी तुम तो जीजा को हलकी सी लगोगी hi, रोज़ ममता जीजी को उठाकर कसरत जो करते हैं जीजा.

सभ्य- धत्तत्त क्यों सत्ता रही है उन्हें,

राजन- कहो तो तुम्हे उठाकर करें कसरत शालू?

शालू- न बाबा न, ममता जीजी hi ठीक हैं तुम्हारे लिए.

इतने में पीछे से आवाज़ आई- अरे कौन किसे उठाकर कसरत कर रहा है..

ये आवाज़ नीलेश की थी.. जिन पर सब का ध्यान गया.

सभ्य- अरे तुम कहाँ गायब हो गए थे अचानक.

नीलेश- अरे कुछ काम आ गया था,

राजन- अरे भैया तुम्हे hi ढूंढ रहा हूँ तबसे धान में पानी नहीं लगाना है का?

नीलेश- अरे हाँ हाँ चल चल हमारे ध्यान से उतर गया था..

राजन- हाँ चलो,

सभ्य- अरे खाना खा कर hi जाते वहां कितना टाइम लग जाये का पता..

नीलेश- तभी तो जितना जल्दी जायेंगे तो शाम तक हो जायेगा काम नहीं तो फिर पूरी रात ख़राब होगी,

राजन- और खाना ममता दे जाएगी बोल दिया है.

इसके बाद दोनों घर से निकल गए वहीं सभ्य और शालू भी अपने अपने काम पर लग गयी, सभ्य ने जो राजन के साथ हुआ उसे खास तवज्जो नहीं दी और दिमाग से निकल दिया…

खैर काम ख़तम कर करा के करीब दो घंटे बाद दोनों बहनें आराम फार्मा रही थी की तभी ममता आ धमक पड़ी

ममता- अरे जीजी कर्मा घर का?

सभ्य – नहीं तो क्यों का हुआ?

ममता- अरे वो खेत पर खाना भिजवाना था न भाईसाब और इनका, अनुज और पल्ली तो स्कूल से नहीं आये अभी तक…

सभ्य- तो इसमें इतना भन्ना क्यों रही है?

ममता- अरे भन्ना इसलिए रहे हैं की घाम में इतनी दूर जाना पड़ेगा अकेले.

सभ्य- अकेले क्यों जाएगी हम भी चलते हैं तेरे साथ.

ममता- हाँ सच्ची फिर चलो….

सभ्य- चल शालू अनुज पल्ली आ जाएं तो उन्हें खाना खिला दियो हम दोनों आते हैं.

शालू- हाँ जीजी ऐसे बोल रही जैसे न बोलोगी तो भूखा मार दूंगी दोनों को, हाहाहाहा.

ममता- हाँ वही तो,

सभ्य- चल अब वही वही तो मैं लगी है,

इसके बाद दोनों खाना लेकर खेत की और निकल गए जहाँ नीलेश और राजन पानी लगा रहे थे,

दोनों बतियाते हुए खेत पर पहुँच गए जहाँ दोनों के पति म्हणत कर रहे थे,

खेत के एक कोने में पेड़ के नीचे मेड पर बैठकर ममता ने आवाज़ लगाई दोनों को- अरे सुनो भाईसाब खाना खा लो,

दोनों hi कुछ hi देर में आ गए और मेड में बहते पानी में हाथ धोया और बैठ गए तब तक ममता ने खाना निकल दिया था और फिर दोनों लोग कड़ी मेहनत के बाद खाने का मज़ा उठाने लगे,

इतने में खाने के बीच में hi राजन बोले- अरे ये लो क्यारी टूट गयी,

सबने देखा तो मेड में एक और पानी ने मिटटी काट दी थी और दुसरे खेत में पानी जाने लगा था,

राजन उठने को हुए इतने में सभ्य बोली – अरे भैया तुम खाओ हम कर देंगे ठीक.

ममता- सही में जीजी.

सभ्य- और का बहुत पानी लगवाया है हमने भी,

राजन- जे बात भाभी..

सभ्य उठी और अपनी साड़ी को घुटनो से ऊपर उठा कर ठूंस लिए और जहाँ से मिटटी कटी थी वहां जाकर फावड़े से मिटटी दाल डालकर दोबारा से मेड को बापिस बंद कर दिया.

ममता भी पीछे पीछे आई देखने, वहीं दोनों मर्द मुस्कुराते हुए देख रहे था खाना कहते हुए.

ममता- अरे वाह जीजी सही में कर दिया तुमने,

सभ्य- तुझे का लगा हम मज़ाक कर रहे हैं…

राजन- बहुत बढ़िया भाभी, कुछ ममता को भी सीखा दो.

सभ्य- अरे भैया इसे का सिखाएं ये सब सीखी सिखाई है… पानी लगाना और लगवाना भी..

सभ्य ने हँसते हुए ममता को छेड़ते हुए कहा, फावड़ा एक और रख बापिस आने लगी, वहीं दोनों मर्द भी दो अर्थी बात का मतलब समझ कर हंसने लगे, वहीं ममता ने पलटवार करते हुए कहा

ममता- अरे तुम्हे तो हमसे ज़्यादा आता है जीजी देखो कितने अचे से करके दिखाया..

सभ्य- अरे ये तो खेत का पानी है हम तो किसी और पानी की बात कर रहे थे,

सभ्य ने ममता के पास जाकर धीरे से फुसफुसाते हुए कहा,

ममता ने जब बात को समझा तो बोली- हाय जीजी कितनी दुष्ट हो तुम…

और ये कहकर उसने सभ्य को धक्का दिया मज़ाक में जिसके लगते hi सभ्य का पेअर मेड से फिसला और वो घुटनो के बल मेड के बीच पानी वाले रस्ते में गिर गयी जिससे उसकी कमर से नीचे का बदन तुरंत पानी में भीग गया,

ये देख कर ममता को अपनी गलती का एहसास हुआ, वहीं राजन और नीलेश हंसने लगे,

ममता- अरे जीजी गलती से लग गया माफ़ कार्डो, आ जाओ उठ जाओ…

ये कहकर ममता ने सभ्य को उठाने के लिए हाथ बढ़ाया जिसे सभ्य ने पकड़ा पर खुद उठने की जगह उसने ममता को पकड़ कर नीचे खींच लिए जिससे ममता तो सीधे छपाक से पानी में hi गिरी, और पूरी भीग गयी,

ये देख नीलेश बोले- अरे तुम भी न क्यों गिरा दिया उसे, तुम भी न बच्चो की तरह करती हो.

नीलेश सभ्य को डाँटते हुए बोले.

राजन- अरे भैया वो उन दोनों सहेलियों का मज़ाक है तुम क्यों बीच में बोलते हो अभी दोनों तुम्हारी खाट कड़ी कर देंगी मिलकर.

नीलेश ये सुन चुप होकर मुस्कुराने लगे,.

ममता ने अपना चेहरा पानी से बहार निकला और मुँह से पानी हटते हुए बोली- जीजी अब तुम गयी…

ये कहकर वो सभ्य के ऊपर कूद पड़ी, और दोनों गदराई औरतें पानी में कुश्ती करने लगी दोनों के hi पति इस नज़ारे को देख हंस रहे थे,

अब मज़ाक हो और ममता कुछ उल्टा न करे ये होना लगभग असंभव था तो कुश्ती करते हुए ममता सभ्य की छूछीयो को ब्लाउज के ऊपर से hi मसलने लगी पर सभ्य भी काम नहीं थी और वो तो ममता से भी एक कदम आगे निकली और ममता के चूतड़ों को थपथपाने लगी, दोनों hi पानी में कामुक कुश्ती कर रही थी और दोनों मर्द उन्हें देख कर गरम हो रहे थे,

कुछ देर बाद ममता बोली- ाचा जीजी अब बाबत हो गया दोनों भीग गए चलो उठते हैं.

सभ्य ने उसकी बात मानी और ममता को छोड़ दिया और कड़ी हो गयी, पर सभ्य इस बात से अनजान थी की इसमें भी ममता की शरारत थी और जैसे hi सभ्य अपनी भीगी हुई सारी को सँभालते हुए आगे बढ़ी, ममता ने सभ्य की सारी का छोर पकड़ा और उसे पकड़ कर खींचने लगी जिससे सभ्य का संतुलन फिर से बिगड़ा और वो बापिस से पानी में गिरने लगी वहीं ममता ने उसकी साड़ी पूरी तरह पकड़ कर खींच ली और सभ्य सिर्फ पेटीकोट आउट ब्लाउज में पानी में पड़ी थी,

ये देख राजन बोले- ऐ ममता का कर रही हो अब बहुत हो गया मज़ाक..

नीलेश- अभी हमें सलाह दे रहा था की उनके बीच में मत बोलो तो अब क्यों बोल रहा है, करने दे मज़ाक…

ऐसा नहीं था राजन को ाचा नहीं लगा था उसे तो बहुत ाचा लग रहा था सभ्य भाभी को गीले पेटीकोट में देखकर पर उसने मान रखने के लिए ममता को डांटने का नाटक किआ था,

इधर सभ्य को गिराकर उसकी साड़ी खोलने के बाद ममता बहुत खिलखिलाते हुए हंसी वहीं सभ्य संभाली और उठ कर ममता को पकड़ने के लिए उसकी और लपकी, वहीं ममता खुद को बचने के लिए, अब असली मज़े तो मर्दों के थे जो दो गदराई औरतों के भीगे हुए बदन को उछालते कूद देख रहे थे और इस नज़ारे का असर उनके कच्छों में भी पद रहा था, राजन की नज़र तो सभ्य के भीगे पेटीकोट और उसमें से झलकते चूतड़ों पर hi थी जो हर कदम के साथ ऊपर नीचे हो रहे थे, ये देख कर hi राजन का लुंड बिलकुल तन गया था वहीं नीलेश का भी यही हाल था,

राजन ने एक नज़र नीलेश को देखा और फिर अपने लुंड को हाथ से कच्चे के ऊपर से hi सहलाते हुए बोले – भैया हमने सब किआ है बस एक दुसरे के सामने अपनी अपनी बीवियों को नहीं छोड़ा,

नीलेश ने उसकी बात सुनी फिर मुस्कुराये और बोले- की तो थी भांग के नशे में भूल गया क्या?

राजन- वही तो नशे में की थी मज़ा आया था, इसीलिए तो बोल रहा हूँ…

नीलेश- समझ गया तेरी बात, अभी कोशिश करते हैं यही.

राजन- यही पर खुले में.

नीलेश- हाँ तो कौन आ रहा है यहाँ न hi कोई देख पता है यहाँ…

राजन- सच में फिर करते हैं न कोशिश..

राजन ने दांत दिखते हुए कहा, की तभी एक चीख से बापिस उनका ध्यान खेत में गया जहाँ सभ्य ने बदला लेते हुए ममता की साड़ी खोल कर अलग फ़ेंक दी थी और अब बढ़त बनाते हुए उसके ब्लाउज के बटन भी खोलने की कोशिश कर रही थी,

वहीं ममता भी कैसे पीछे रहती वो भी सभ्य के पेटीकोट के नाड़े के साथ उलझी हुई थी,

राजन नीलेश खाना खा चुके थे तो उठ कर वो भी उन दोनों के पास जाने लगे जहाँ दोनों खेत में एक दुसरे से कुश्ती कर रही थी पर कोई भी एक दुसरे से गुस्सा नहीं थी बस खिलखिलाते हुए मज़ाक कर रही थी, इसी बीच सभ्य ने अपने काम में जीत हासिल की और ममता के ब्लाउज के हुक खोल उसे उसकी बाजुओं से भी निकल दिया जिसमे थोड़ी बहुत मदद खुद ममता ने भी की, पर सभ्य ममता का ब्लाउज उतर कर बेहद खुश हुई और उसका ब्लाउज हाथ में पकड़ कर उठी और ब्लाउज को झूलते हुए ममता से दूर भागी पर सभ्य को एक बात का एहसास तक नहीं हुआ की ममता ने उसके पेटीकोट का नाडा खोल दिया था और जैसे hi सभ्य भागी उसने एक छोर पकड़ लिया जिससे पेटीकोट सभ्य की कमर से जाँघों पर होते हुए नीचे खिसकता चला गया और इस बात का एहसास ज्यों hi सभ्य को हुआ उसनर तुरंत पेटीकोट को पकड़ने के लिए हाथ बढ़ाया पर तब तक देर हो चुकी थी और पेटीकोट उसकी पकड़ से दूर और घुटनो के नीचे जा चूका था,

अब नज़ारा कुछ ऐसा था की हमारे कर्मा की माँ और नीलेश की पत्नी जो की सरे गाओं में एक आदर्श संस्कारी ग्रहणी मानी जाती थी अभी खेत के बीचों बीच अपने पति और राजन के सामने नीचे से बिलकुल नंगी हो कर कड़ी थी, क्यूंकि पंतय तो चोदामपुर की शायद कोई hi औरत पहनती होगी.. ये देखकर राजन और नीलेश के पाऊँ जैम गए, नीलेश अपनी पत्नी को यौम खुले में नंगा देख रहे थे वो भी राजन के सामने वहीं राजन का तो बुरा हाल हो गया अपनी गदराई सभ्य भाभी की छूट और चूतड़ों को नंगा देख कर जिसकी मन hi मन वो कितनी hi कामना करते थे,

नीलेश ने नज़र इधर उधर दौड़ाई ये देखने के लिए की कोई और तो नहीं है आस पास पर किसी और का होना मुश्किल hi था क्यूंकि नीलेश के और राजन के खेत अगल बगल थे साथ hi राजन का ये खेत नीलेश के खेतों से घिरा हुआ था और नीलेश के खेतों के चरों और तार लगे हुए थे, और चरों और बड़ी बड़ी लम्बी लहलहाती सरसों थी तो किसी के द्वारा देखे जाने की संभावना न के बराबर थी,

नीलेश ने ये सुनिश्चित किआ और फिर बापिस सभ्य और ममता की और देखने लगे उनकी धोती में उनका लुंड फुँफनाने लगा,

सभ्य जो की एक अजीब hi स्तिथि में थी पर अब बेटों और पति से एक साथ छोड़ने के बाद साथ hi सबके बारे में पता होने के बाद वो भी खुल गयी थी और उसी अनुसार उसने सोचा यहाँ जो भी हैं सबने हमें एक न एक बार नंगा देखा hi है, यहाँ तक की राजन भैया ने भी तो शर्मा कर क्या फायदा यही सोच कर सभ्य ने पेटीकोट जो उसके पैरों में लिप्त हुआ था उसे पैरों से पूरी तरह निकल दिया और नीचे से पूरी तरह नंगी हो गयी और पलट कर ममता की और देखते हुए बोली – अब तू गयी कुटिया कहीं की…

ममता ने सभ्य को अपनी और बढ़ाते देख उठने की कोशिश की पर तब तक तो सभ्य ने उसे दबोच लिए था और उसके चेहरे को नीचे दबाते हुए अपने बड़े बड़े चूतड़ उसके चेहरे पर टिका दिए और बोली- अब तुझे मज़ा चखती हूँ बहुत मज़ाक करती है न…

ये कह सभ्य अपनी चूतड़ों को हिलाते हुए अपनी छूट ममता के मुँह पर घिसने लगी, अपने मुँह के सामने सभ्य की छूट पाकर ममता का मुँह अपने आप खुल गया और उसने अपनी जीभ सभ्य की छूट से भिड़ा दी जिसके लगते hi सभ्य के मुँह से एक आअह्ह्ह्ह निकल गयी,

और एक दबी हुई आह राजन और नीलेश के मुँह से भी निकली, राजन का लुंड फटने को हो रहा था सभ्य भाभी के नंगे चूतड़ों को अपनी पत्नी के चेहरे पर घिसते हुए देखकर, राजन का हाथ अपने लुंड पर आगे पीछे हो रहा था, वहीं सभ्य सिर्फ अपनी छूट चटवा कर मैंने वाली नहीं थी उसने सबसे पहले तो ममता की ब्रा को उतरा और फिर आगे झुक कर ममता के पेटीकोट के नाड़े को भी खोलने लगी, वहीं सभ्य के आगे झुकने से उसके चूतड़ और फैले और पीछे खड़े राजन और नीलेश को उसके चूतड़ों का और ममता की जीभ जो उसकी छूट पर चल रही थी इस दृश्य का अचे से दर्शन होने लगा, राजन तो सभ्य भाभी की गांड का छेड़ देख पागल सा होने लगा..

वहीं तब तक सभ्य ने ममता के पेटीकोट के नाड़े की गांठ खोल दी थी और अब उसे नीचे सरका रही थी जिसमे कुछ मदद अपनी भरी गांड उठा कर खुद ममता ने की जो की अपना सारा ध्यान और लगन सभ्य की छूट चाटने में लगा रही थी, हालाँकि दोनों hi ये छूट चटाई का खेल पहले भी खेल चुकी थी पर आज बात कुछ और थी क्यूंकि दोनों के hi पति भी वहीं थे, इस बात की उत्तेजना भी दोनों को थी,

सभ्य ने ममता का पेटीकोट पूरी तरह से उतर दिया और अब ममता खेत के बीचों बीच बिलकुल नंगी लेती हुई सभ्य की छूट चाट रही थी, वहीं पेटीकोट उतरने के बाद सभ्य के सामने ममता की रास भरी छूट आ गयी जिसे देख सभ्य भी खुद को रोक नहीं पाई और उसने झुक कर अपना मुँह ममता की छूट में लगा दिया, जिसके लगते hi ममता की जीभ का ज़ोर सभ्य की छूट पर और बढ़ गया, और दोनों देवरानी जेठानी 69 के आसान में एक दुसरे की रसभरी छूटों का सेवन करने लगी,

वहीं ये सब देखकर दोनों के hi पतियों की हालत ख़राब हो रही थी, नीलेश से तो रुकना मुश्किल हो गया और उन्होंने आगे बढ़ कर अपनी पत्नी के चूतड़ों के पीछे जगह ली और अपने लुंड के टोपे पर थूक लगाया और उसे सभ्य की गांड के छेड़ पर टिका दिया और इसका सबसे ाचा नज़ारा ममता को दिख रहा था जिसकी आँखों के बिलकुल करीब नीलेश का लुंड सभ्य की गांड के छेड़ को कुरेद रहा था, नीलेश ने बिना देरी किये थोड़ा ज़ोर लगाकर अपने लुंड को पत्नी की गांड में सरका दिया, जिसके अंदर घुसते hi सभ्य ने ममता की छूट से मुँह हटाकर पीछे मुद कर देखा और अपनी गांड में पति का लुंड पाकर उसने एक मुस्कान दी और फिर बापिस ममता की छूट में मुँह घुसा दिया और आँखें बंद कर इस अद्भुत पल का आनंद लेते हुए ममता की छूट चाटने लगी,

वहीं नीलेश ने भी बिना देरी किये अपना लुंड सभ्य की गांड में जल्दी hi पूरा उतर दिया जिसके साथ hi ममता के माथे पर नीलेश के ाँद आ कर टिक गए… खैर अब इंतज़ार की ज़रुरत थी नहीं तो नीलेश सभ्य की कमर थम हलके हलके मगर लम्बे धक्के लगाकर अपनी पत्नी की गांड मरने लगे,






ये नज़ारा राजन ने खड़े खड़े देखा और भाभी की गांड में भैया का लुंड जाते देख उनसे नहीं रहा गया और राजन ने भी नीलेश की देखा देखि अपनी पत्नी की टैंगो के नीच जगह ली और उसकी टैंगो को फैलाकर उठाया जिससे ममता की गांड और छूट और खुल कर उभर आई और फिर राजन ने सही जगह लेते हुए अपने लुंड को पकड़ा और ममता की गांड के छेड़ पर रखा जिसके कुछ सेंटीमीटर ऊपर hi सभ्य की जीभ ममता की छूट पर चल रही थी, तभी अचानक से सभ्य ने आँखें खोली तो ठीक सामने राजन का कड़क लुंड पाया जो की ममता की गांड के द्वार में घुसा हुआ था, राजन के लुंड को अपने से इतना पास पाकर सभ्य को एक अलग hi एहसास हुआ वही राजन ने ये देखा की सभ्य उसके लुंड को hi देख रही है, सभ्य के लिए अभी बेहद उत्तेजित करने वाली परिस्थिति थी, गांड में लुंड आगे पीछे हो रहा था, छूट में जीभ, उसकी जीभ भी छूट में और उसकी आँखों के सामने लुंड,

खैर उत्तेजित तो राजन भी थे इसलिए और देर नहीं रुका गया और अपना लुंड ममता की गांड में घुसा दिया जिससे ममता की एक सिसकी निकली जो सभ्य की छूट में hi घुट गयी इसके बाद राजन ने भी ममता की गांड छोड़नी शुरू कर दी पर साथ hi उनकी आँखें सभ्य की जीभ और ममता की छूट पर hi जमी हुई थी,

वहीं नीलेश को अपनी पत्नी की गरम गांड की गर्मी पाकर आराम मिला तो धक्के लगते हुए बोले- अह्हह्ह्ह्ह तुममम लोग अच्छा आये पानी लगवाने अब हमारा पानी निकलवा कर जाओगे…

राजन- हाँ भैयाहहह अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह पर जो भी कहो मज़ा आ रहा है ऐसे खुले में करने में अह्ह्ह.

राजन नीलेश की बात का जवाब देते हुए बोले, वहीं दोनों औरतों के मुँह छूट से बंद थे तो कुछ नहीं बोल सकती थी,

नीलेश- अह्ह्ह चुदाई में कब मज़ा नहीं आता यार, और खासकर जब ऐसी बीवियां हो टूउठ्ह.

राजन- हाँ भैयाह बिलकुल सही कह रहे हो, पर साथ में चुदाई की भी बात hi कुछ और है,

नीलेश- हाँ एक साथ नंगे होकर चुदाई करना और करते हुए देखना मज़ेदार होता है, अरे तुमने ये ब्लाउज अब भी क्यों पहना है,

नीलेश सभ्य को ऊपर उठाते हुए बोले, जिससे सभ्य का मुँह ममता की छूट से हैट गया, वहीं सभ्य अब ममता के मुँह पर बैठी हुई hi थोड़ी सीढ़ी सी हो गयी, नीलेश हाथ आगे लेजाकर सभ्य का ब्लाउज खोलने की कोशिश करने लगे, पर साथ hi उनके धक्के गांड में लगातार लग रहे थे, जिससे सभ्य को संतुलन बनाना मुश्किल पद रहा था,

इधर राजन ये देख खुश हुए क्यूंकि अब उन्हें सभ्य भाभी की भरी भरकम छूछीयो को देखने की उम्मीद भी नज़र आने लगी थी, इधर नीलेश सभ्य के ब्लाउज के हुक से उलझ रहे थे साथ hi तेज़ी से उसकी गांड में धक्के भी लगा रहे थे,

सभ्य- अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह अम्मम्माह्ह्ह्हह्ह आराम से खोलो जीअहहहहह,

तभी नीलेश ने एक और तगड़ा धक्का सभ्य की गांड में दिया जिससे खुद को गिरने से बचने के लिए सभ्य ने अपना एक हाथ राजन की नंगी छाती पर टिका दिया जिससे उसे तो सहारा मिल गया वहीं राजन मन hi मन खुश होने लगे,

वहीं नीलेश ने बड़ी मुश्किल से एक हुक खोल पाया क्यूंकि एक तो दिखाई नहीं दे रहा था साथ hi वो गांड मरना रोकना भी नहीं चाहते थे, इसलिए फिर से सभ्य की कमर थमते हुए वो बोले- अह्हह्ह्ह्ह हम से नहीं खुलल रहा अह्ह्ह ऐ अपनी भाभी का ब्लाउज खोलियो ज़रा,

इतना सुन्ना था की ममता को अपनी गांड में राजन का लुंड फूलता हुआ महसूस हुआ वहीं राजन भी फूले नहीं समाये उनकी तो जैसे मन मांगी मुराद पूरी हो गयी थी,

राजन- हम हैं ? खोल खोलते हैंन,

ये कहकर राजन ने सभ्य को देखा जो की नशीली आँखों से उसे hi देख रही थी, राजन ने थोड़ा हिचकिचाते हुए अपने हाथ आगे बढ़ाये तो सभ्य ने भी अपना सीना थोड़ा आगे कर लिए साथ hi सभ्य ने अपना दूसरा हाथ भी राजन के कंधे पर रख लिया जिससे राजन तो खुश हो गए खैर हिचकते हुए hi सही वो सभ्य के ब्लाउज के हुक खोलने लगे पूरी लगन और एकाग्रता के साथ काम में लग गए उनके लुंड के धक्के भी ममता की गांड में इस वजह से थोड़े हलके पद गए थे, थोड़ी देर की एकाग्र म्हणत के बाद राजन को सफलता मिली और उन्होंने एक एक करके सभ्य के ब्लाउज के सरे हुक खोल दिए, और ब्लाउज सामने से खुल गया जिसके खुलते hi सभ्य की काली ब्रा में क़ैद छुछियां राजन के सामने आ गयी, वहीं ब्लाउज खुलते hi बाकि का काम नीलेश ने कर दिया और उसे सभ्य की बाजुओं से निकल कर अलग फ़ेंक दिया, ये करने में नीलेश को भी एक अलग उत्तेजना हो रही थी वो अपनी पत्नी को राजन के आगे नंगा कर रहे थे ये सोचकर hi उनका लुंड सभ्य की गांड में फूल रहा था, ब्लाउज के बाद उन्होंने अगले hi पल पीछे से ब्रा भी खोल दी और सभ्य की बाजुओं से उसे भी निकल कर सभ्य को पूरी तरह से नंगा कर दिया,

ब्रा के हटते hi राजन की नज़रें जैसे सभ्य की छूछीयो पर जैम सी गयी साथ hi हर धक्के के साथ आगे पीछे झूलती चूचियों ने जैसे उसे सम्मोहित कर लिए, नीलेश अपने हाथ आगे लेजाकर सभ्य की छूछीयो को मसलते हुए उसकी गांड मरने लगे वहीं राजन ममता की गांड मरते हुए ये सब देख रहे थे, वहीं नीलेश की चुदाई और दुमदार होती जा रही थी, उनके धक्के तेज़ हो रहे थे वहीं उनके द्वारा छूछीयो के मसले जाने से सभ्य के मुँह से कामुक सिसकियाँ निकल रही थी साथ उसके चेहरे पर बेहद कामुक भाव आ रहे थे जिन्हे देख राजन का बुरा हाल हो रहा था, वहीं नीलेश के धक्को का वेग अपनी गांड में सहते हुए सभ्य ने अपना सर आगे झुककर राजन के कंधे पर टिका दिया,

राजन सभ्य को इतने करीब पाकर तो बिलकुल hi मचलने लगे उनके धक्के ममता की गांड में तेज़ हो गए, वहीं राजन ने भी सोचा की ऐसा मौका न जाने कब मिले इसलिए उसने भी सभ्य को सँभालने के बहाने हाथ आगे कर दोनों हाथों से उसकी कमर को थम लिए, और नीलेश और सभ्य की और से किसी प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा करने लगे पर दोनों की और से hi कुछ न होने पर राजन की हिम्मत और ख़ुशी दोनों बढ़ गयी,

वहीं नीलेश अब अलग hi चुदाई की गति पकड़ चुके थे और दनादन सभ्य की गांड मार रहे थे उनकी जांघों और सभ्य की चूतड़ों की मिलने की आवाज़ एक ले में बज रही थी साथ hi उनके ाँद ममता के माथे से लगातार टकरा रहे थे, ममता को कुछ कुछ अंदेशा हो रहा था की ऊपर क्या हो रहा है पर अभी वो सिर्फ सभ्य की छूट पर ध्यान दे रही थी,

वहीं सभ्य के लिए परिस्थिति सबसे ज़्यादा कठिन हो रही थी, नीलेश इतनी दुमदार तरीके से उसकी गांड मार रहे थे वहीं ममता उसकी छूट को चूस रही थी इससे सभ्य की उत्तेजना हर पल के साथ बढ़ती जा रही थी,

इस समय सबसे खुश राजन थे जो की अपनी बीवी की गांड मरते हुए सभ्य भाभी को नंगा देख hi नहीं रहे थे बल्कि उनके बदन को महसूस भी कर रहे थे, हर धक्के पर उनके हाथ सभ्य की कमर और पीठ को सहला रहे थे, वहीं उनके कंधे पर सर रखकर सभ्य जो सिसकियाँ ले रही थी उससे उनकी उत्तेजना और बढ़ रही थी, तभी राजन के लिए एक और अछि चीज़ हुई की नीलेश ने सभ्य की चूचियों से हाथ हटा लिए और बापिस चूतड़ों पर रख लिए जिससे सभ्य की चूचियां फिर से राजन के सामने झूलने लगी, पर इस बार राजन ने थोड़ी हिम्मत दिखाई और सभ्य की कमर से हाथ सहलाते हुए उसके पेट और फिर धीरे धीरे ऊपर लेकर उसकी चूचियों पर रख लिया और फिर थम लिए, अपने हाथ में सभ्य की चूचियों को महसूस कर राजन तो जैसे बिलकुल मचलने hi लगे किसी तरह उन्होंने खुद पर काबू किया और धीरे धीरे से सभ्य की चूचियों को दबाने लगे,

जैसे hi राजन ने सभ्य की चूचियों को दबाना शुरू किआ वैसे hi उनके कान में एक सभ्य की हलकी सी सिसकी पड़ी – ओह्ह्ह्हह्हह आअह्ह्ह्हह भैयाहहह,

जिसे सुन राजन झूम उठे और सोचने लगे मतलब भाभी पूरे होश में मुझसे छुच्छी दबवा रही हैं और कितने कामुक तरीके से ओह्ह्ह भैयाह बोलै उन्होंने ये सोच कर राजन की हिम्मत बढाती जा रही थी,

इधर नीलेश ने सभ्य की गांड मरते हुए अचानक से अपना लुंड उसकी गांड से निकला और नीचे कर ममता के मुँह की और कर दिया जिसे ममता ने तुरंत सभ्य की छूट से मुँह हटा कर मुँह में भर लिए और चूसने लगी, लुंड पर लगे सभ्य की गांड का रास चाटने लगी, वहीं सभ्य की गांड में लुंड नहीं था तो वो अभी स्थिर हो गयी और राजन उसकी छूछीयो को दबाने में मगन थे, साथ hi सभ्य के चेहरे का अपने चेहरे के इतने पास होने का एहसास भी राजन को पागल कर रहा था,

राजन हमेशा से hi सभ्य भाभी के गदराये और कामुक बदन के लिए पागल रहे थे और बहुत बार hi सपने में भाभी के साथ न जाने क्या क्या कर चुके थे और सभ्य जैसे बदन वाली औरत का दीवाना अगर कोई न हो तो वो मर्द hi नहीं होगा शायद, खैर वो सभ्य के जितने दीवाने थे उससे कहीं ज़्यादा उनका सम्मान करते थे और उससे भी ज़्यादा अपने और नीलेश के रिश्ते को महत्त्व देते थे तो कभी उन्होंने ऐसा कुछ नहीं किआ जिससे दोनों परिवारों के बीच कुछ भी खटास आये पर अगर आज सबकी मर्ज़ी से सबके होते हुए उन्हें अपनी कुछ इच्छाएं पूरी करने का मौका मिल रहा था आज वो किसी भी तरह पीछे रहकर मौका नहीं गंवाना चाहते थे बल्कि मौका और बनाने की कोशिश में थे,

ऐसा hi एक मौका उन्होंने बनाने की कोशिश की और सभ्य की उत्तेजना को भी जांचने की भी और छूछीयो को दबाते हुए hi राजन ने अपना चेहरा सभ्य के चेहरे की और किआ और उसके गाल पर अपने होंठ रख दिए और फिर धीरे धीरे चूमने लगे कभी गाल तो कभी गर्दन के पास और उनकी ख़ुशी के लिए इसका भी सभ्य ने कोई विरोध नहीं किआ, अब बरी अगले कदम की थी जिसके लिए राजन ने अपने होंठ हिम्मत करके सभ्य के खुले होंठों से भिड़ा दिए और रुक गए और फिर कुछ पल बाद सभ्य के होंठ को धीरे से चूसने लगे जिसपर सभ्य ने न hi अपने होंठ हटाए पर न hi उनके चुम्बन में साथ दिया,

दूसरी और नीलेश ने अपना लुंड अचे से ममता से चटवा कर दोबारा सभ्य की गांड के छेड़ पर रख अंदर सरका दिया जिसके अंदर घुसते hi, सभ्य के होंठ भी राजन के होंठो पर कास गए और वो भी राजन का इस कामुक चुम्बन में साथ देने लगी, राजन की ख़ुशी का तो ठिकाना hi नहीं था वहीं नीलेश भी अपनी पत्नी के साथ राजन को मज़े लेते देख एक अलग hi एहसास महसूस कर रहे थे जो उनकी उत्तेजना को और बढ़ा रहा था,

राजन की उत्तेजना तो जैसे चरम पर hi घूम रही थी और हो भी क्यों न लुंड ममता की गांड में था हाथ में सभ्य भाभी की चूचियां थी होंठों में उनके रसीले होंठ थे, सभ्य के लिए भी बेहद उत्तेजना भरा समय था क्यूंकि पति से गांड मरवाते हुए गैर मर्द के साथ चुम्बन कर रही हूँ ये सोच सोच कर उसकी उत्तेजना भी अपने चरम पर पहुँच रही थी, और इसका नतीजा ये हुआ की सभ्य इतने हमले एक साथ संभल नहीं पाई और झड़ने लगी, उसकी छूट से रास निकल कर ममता के मुँह में भरने लगा जिसे ममता प्यार से चाटने लगी, वहीं नीलेश को भी सभटा की गांड अपने लुंड पर सिकुड़ती हुई महसूस हुई, सभ्य ने राजन के होंठों को कास के अपने होंठों में भर लिए और फिर बापिस छोड़ कर उसके होंठों से अलग हो गयी और थोड़ा पीछे हो कर बापिस ममता के ऊपर 69 के आसान में लेट गयी,

सभ्य के हटने से राजन के हाथ से उसकी छुछियां और होंठ निकल गए पर जितना मिला उतना राजन के लिए बहुत आनंद देने वाला था, सभ्य के झड़ने के बाद भी चुदाई नहीं रुकी नीलेश बिना रुके उसकी गांड मरते रहे वहीं ममता भी उसकी छूट चाटने से नहीं रुकी वहीं राजन भी लगातार ममता की गांड मरते रहे, गांड मरै और छूट चूसै का असर ये हुआ की सभ्य फिर से गरम होने लगी, और हो भी क्यों न ममता ने इस बार एक नहीं दो हमले जो उसकी छूट पर किये थे, ममता सभ्य की छूट के डेन को मुँह में लेकर चूसते हुए अपनी दो उंगलियां सभ्य की छूट में घुसा अंदर बहार करने लगी वहीं नीलेश का लुंड उसकी गांड के अंदर बहार हो रहा था, जिससे सभ्य दोबारा उत्तेजित हो कर उसी स्टार पर पहुँच गयी, उसके मुँह से दोबारा सिसकियाँ निकलने लगी उसका चेहरा अब भी ममता की छूट के ऊपर था उसकी आँखों के सामने hi राजन का लुंड ममता की गांड में अंदर बहार हो रहा था, वो दोबारा से ममता की छूट पर जीभ रख कर चाटने लगी,

कुछ पल यूँ hi चला की तभी ममता ने कुछ अलग किआ और सभ्य की छूट को उँगलियों से छोड़ते हुए उसकी छूट के डेन को अपने दांत से हल्का सा चबाने लगी जिससे सभ्य तो बिलकुल मचलने hi लगी उसका मुँह खुल गया और एक बड़ी आअह्ह्ह्हह उसके मुँह से निकली इसी बीच ममता के थोड़ा हिलने से राजन का लुंड बापिस जाते हुए ममता की गांड से निकल गया और जैसे hi राजन ने बापिस कमर आगे की सभ्य के खुले मुँह में घुस गया, अपने मुँह में लुंड पाकर सभ्य ने कुछ और नहीं सोचा और चूसने लगी इधर राजन ने जब ये देखा तो उसे तो यकीन नहीं हुआ की उसका लुंड सभ्य भाभी के मुँह में है,

ये नज़ारा नीलेश ने भी देखा तो उत्तेजित होकर और तेज़ धक्के लगाकर सभ्य की गांड मरने लगे..

उधर ममता ने सभ्य की छूट के डेन को छोड़ा तो सभ्य अब अचे से राजन के लुंड को चूसने लगी जो की अभी अभी ममता की गांड से निकला था…

नीलेश- कैसा लग रहा आह्ह्ह्हह है रे अपनी भाभी से लुंड चुसवा कर….

नीलेश न्र उत्तेजित होते हुए राजन से पुछा…

राजन- ओह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह भैयाहहह भाभी के मुँह में तो जन्नत है आह्ह्ह्हह्ह्ह्हह,

नीलेश- फिर ले ले अपनी भाभी की जन्नत का मज़ा,

इधर ममता की गांड अभी खली थी और वो काफी देर से नीचे लेती थी इसलिए वो सभ्य के नीचे से खिसकते हुए बहार आ गयी और सभ्य को दो लुंड एक साथ लेते हुए देखने लगी जिसमे पति का गांड में था और देवर का मुँह में… दोनों और से सभ्य की चुदाई हो रही थी…







राजन- ओह्ह्ह भभीीीीुइआह्ह्ह्हह shhhhhhhhhhhhh अह्हह्ह्ह्ह भैयाहहह.

नीलेश- हमारे सामने हमारी बीवी से मज़े ले रहा है जन्नत तो मिलेगी hi,

बस नीलेश के इतना कहते hi राजन से और नहीं रुका गया और वो गुर्राते हुए सभ्य के मुँह में झड़ने लगे, ममता बगल में बैठ अपनी छूट खुजाते हुए अपने पति को सभ्य जीजी के मुँह में पहली बार झड़ते देख रही थी, सभ्य भी राजन के लुंड से निकलते हुए रास को एक अछि भाभी की तरह गटकने लगी, झड़ने के बाद राजन थोड़ा शांत हुए पर उनका लुंड अभी भी वैसे hi अकड़ा हुआ था, जिसे सभ्य ने चाट कर अपने थूक से चिकना कर बहार निकला तो धुप में चमक रहा था,

सभ्य- ओह्ह्ह्हह्हह कर्मा के पापा अब रुको थोड़ा झुके झुके थक गयी हूँ मैं,

ये सुनकर नीलेश ने अपना लुंड उसकी गांड से निकला तो सभ्य वहीं बगल में लेट गयी पर सभ्य के हटते hi ममता दोनों के बीच में आ गयी

ममता- जीजी की गांड बहुत मरली भाईसाब थोड़ा मेरी गांड पर भी ध्यान दो..

ये कहकर ममता ने नीलेश को पीछे लिटा दिया और खुद उनके ऊपर आ कर उनका लुंड अपनी गांड में लेकर बैठ गयी,

उसने राजन को खली देखा तो बोली- अरे तुम का अकेले खड़े हो जीजी से चुसवा लिए तो हम से नहीं चुसवाओगे का?

ये सुन राजन मुस्कुराते हुए आगे बढे और अपनी पत्नी के मुँह में लुंड घुसा उसका मुँह छोड़ने लगे, ममता का गदराया बदन दोनों तरफ से छुड़ता हुआ बेहद कामुक लग रहा था






सभ्य अपनी कमर सीढ़ी करती हुई तीनो को देख रही थी, और साथ hi अपनी चूचियों को भी मसल रही थी,

राजन- अह्हह्ह्ह्ह चूस साली अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह क्या मस्त चूसती है…

नीलेश- ओह्ह्ह्हह्हह उससे भी ज़्यादा मस्त गांड मरवाती है ममता रानी, अह्ह्ह्हह देख कैसे पटक रही है लुंड पर,

राजन- ओह्ह्ह हाँ जनता हु भैया शादी के बाद से अब तक इसकी गांड की खुजली hi मिटने की कोशिशःह्ह करता आ रहा हूँ,

सभ्य- इसकी गांड की खुजली कभी नहीं मिटने वाली चाहे कितनी भी मार लो..

सभ्य भी पीछे से उनकी बातों में शामिल होते हुए बोली और बोलने के बाद वो उठ कड़ी हुई और बापिस जहाँ खाना खा रहे थे उस तरफ जाने लगी धुप से परेशां होकर साथ hi जाते हुए अपनी और ममता के कपडे भी उठा लिए और फिर उन्हें पेड़ के नीचे जाकर मेड पर बिछा कर उनपर लेटते हुए तीनो की चुदाई देखने लगी,

ममता से लुंड चुसवाते हुए भी राजन की नज़र सभ्य पर hi थी और जब उसे जाते देखा तो राजन सोचने लगे की भाभी कहाँ चल दी? फिर उन्हें अपनी बात का जवाब मिल गया जब सभ्य मेड पर कपडे बिछा कर लेट गयी,

पर ये तीनो लोग अभी भी धुप में hi लगे हुए थे ममता अपनी गांड को नीलेश के लुंड पर उछाल रही थी और राजन ममता का मुँह छोड़ रहे थे,

कुछ देर बाद राजन बोले- भैया आ जाओ छांव में चलो यहाँ घाम तेज़ है ये कहकर राजन ने ममता के मुँह से लुंड निकला और पेड़ के नीचे की और बढ़ गए जहाँ सभ्य लेती थी,

राजन को जाते देख ममता धीरे से नीलेश को बोली – देख रहे हो भाईसाब इन्हे घाम वाम कहीं नहीं लग रही ये अपनी भाभी की बुर सूंघते हुए गए हैं..

नीलेश ये सुनकर हंसने लगे और बोले- हमें पता है, जो पूरे दिन घाम में खेत में काम कर लेता है उसे ये घाम तेज़ लगेगी,

ममता- वही तो पर अब बहुत मज़ा आएगा जीजी भी हमारे साथ शामिल हो जाएं तो.

नीलेश- बस देखती जा आगे आगे,

नीलेश नीचे से उसकी गांड मरते हुए उसकी छूछीयो को मसलते हुए बोले…

इधर राजन सभ्य के पास पहुंचे तो सभ्य ने बोलै- का हुआ भैया मन भर गया का चुदाई से?

राजन पहली बार सभ्य के मुँह से ये सुनकर थोड़ा चौंके और फिर बोले

राजन- ंन्न नहीं नहीं भाभी वो घाम तेज़ है इसलिए छांव में आ गए,

सभ्य ये सुनकर मुस्कुरा दी और बापिस ममता और निकेश को देखने लगी,

वहीं राजन बेसब्री से सभ्य को उन्हें समझ नहीं आ रहा था क्या करे कैसे शुरुआत करें? मन hi मन सोचने लगे क्या करें क्या करें, वहीं मन में ख्याल आया की कितना बड़ा चूतिया है तू यहाँ तेरे सामने भाभी पूरी नंगी लेती हैं और तू ये सोच रहा है क्या करें, उन्होंने तेरा लुंड चूसा है तेरा रास तक पि लिया है तो शर्माना छोड़ और लग जा काम पर..

इतना सोच राजन सभ्य के पैरों के बीच में आये और उसकी टैंगो को पकड़ कर फैलाया जिस पर सभ्य ने भी उनके अनुसार टंगे खोल दी, राजन के सामने अब सभ्य की रसीली छूट थी जिसे देख राजन को कुछ और नहीं सूझा और वो अपना मुँह सभ्य की छूट में घुसा कर अपनी जीभ से उसे चाटने लगे.

सभ्य- अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्ह भैयाह ुहम्म्म्म

सभ्य अपनी छूछीयो को मसलते हुए सीसियते हुए बोली, वहीं राजन को उसकी सिसकी और जोश दिलाने लगी राजन पूरी लगन से और जोश से सभ्य की छूट चाटने में लग गए और सभ्य की कामुक सिसकियाँ उनका जोश और बढ़ा रही थी,

वहीं दूसरी और नीलेश और ममता भी उठ कर उनकी और आ रहे थे और पास आकर नीलेश ने ममता को एक करवट पर लिटा दिया और खुद पीछे लेटकर एक बार फिर से उसकी गांड में लुंड घुसा कर तेज़ी से मरने लगे जगह बदलकर उनकी गति भी और बढ़ गयी थी और ममता की सिसकियाँ तेज़ हो गयी , वहीं वो गांड मरने से इतनी उत्तेजित हो रही थी की अपनी छूट में उंगली करने लगी और छूट को उंगली से कुरेदने लगी और दुसरे हाथ से अपनी एक छुच्छी को मसलते हुए आहें भरते हुए गांड मरवा रही थी..







वहीं नीलेश उसके पेअर थामे सटासट उसकी गांड मरने में लगे हुए थे,

राजन के कानो में भी अपनी पत्नी की सिसकियाँ पद रही थी पर अभी उनका सारा ध्यान भाई साब की पत्नी की छूट पर था, और उसे बेतहाशा जोश में चाट चूम रहे थे और उनके जोश का असर सभ्य के बदन और उसकी आहों पर दिखाई दे रहा था जो की हर पल के साथ कभी अकड़ रहा था तो कभी मचल रहा था, उसके मुँह से लगातार सिसकियाँ निकल रही थी, सभ्य के हाथ राजन के सर पर थे और उसे अपनी छूट पर दबा रहे थे वहीं राजन ने अपने हाथ ऊपर लेजाकर सभ्य की छूछीयो को थम लिया था और उन्हें मसलते हुए सभ्य की छूट के झरने से अपनी प्यास बुझे रहे थे,

ममता- ओह्ह्ह्ह भैयाह ुहम्म्म्म हॉँण्णन मर gayiiiiiiiiii…

नीलेश जो की अपनी पत्नी को पहली बार किसी और के साथ बांटते हुए देख उत्तेजना में थे और उनकी उत्तेजना ममता की गांड पर निकल रही थी,

नीलेश- ओह्ह्ह्हह्हह आअह्ह्ह्हह ममता देख तेरा पति कैसे मेरी पत्नी की छूट चाट रहा है अह्ह्ह्ह कितना प्यासा है अपनी भाभी की छूट के लिए.

ममता- अह्ह्ह्हह अम्मम्माह्ह्ह्हह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह दैयाआआह्ह्ह्हह्ह हाँ भैयाहहह प्यासे तो होंगे hi जब अभह. भभीीीीुइआह्ह्ह्हह ऐसी मस्त गदराई हो तो देवर कैसे छोड़ देगा.

सभ्य- हॉँण्णन देखो नाआहहहहहहह अह्ह्ह्हह भैयाहहह कैसे मेरी छूट चाट रहे हैंण्ण्ण्ण्न अह्ह्ह्ह खा जाओ भैयाह अपनी भाभी की छूट को आह्ह्ह्हह.

सभ्य भी गरम होते हुए उनकी बातों में शामिल होते हुए कहा पर उसकी बातों का सबसे ज़्यादा असर उसपर खुद पर और राजन पर हुआ जो की सभ्य से ये सुनकर उसकी छूट में अंदर तक जीभ घुसा कर उसे चाटने लगे साथी सभ्य की छूट के डेन को अपनी नाक से घिसने लगे जो की सभ्य जो की पहले hi इतनी उत्तेजित थी और नहीं सह पाई और झड़ने लगी, उसकी छूट एक बार फिर से रास छोड़ने लगी जो की राजन के लिए शहद था और वो उसे तुरंत सारा चाट गए और फिर जाकर राजन ने सभ्य की छूट से मुँह हटाया तो उनका पूरा मुँह सभ्य के रास से सना हुआ था,

वहीं सभ्य झड़ने के बाद तेज़ी से हांफने लगी उसकी चूचियां ऊपर नीचे हो रही थी, जिन्हे देख कर राजन का लुंड ठुमके मार रहा था अब राजन से और खुद पर काबू नहीं हो रहा था इसीलिए राजन ने अपने लुंड को पकड़ा और उसे सभ्य की छूट के ऊपर टिका दिया सभ्य की छूट की गर्मी अपने लुंड पर महसूस करके राजन गंगना गए वहीं सभ्य ने भी जब छूट पर राजन का सख्त गरम लुंड महसूस किआ तो वो भी सिसक उठी, राजन अब समय बिलकुल नहीं गंवाना चाहते थे और उन्होंने लुंड के टोपे को सभ्य की रसीली छूट के द्वार पर रखा और नज़र उठा कर सभ्य को देखा जो प्यासी नज़रों से मुस्कुराते हुए ुनहु hi देख रही थी, फिर राजन ने चेहरा घुमाकर अपनी पत्नी और नीलेश की और देखा जो की अपनी चुदाई को थोड़ा धीरे कर उन्हें hi देख रहे थे ममता अपने पति की और देख ख़ुशी से मुस्कुरा रही थी, वहीं नीलेश ने भी मुस्कुराकर सर हिलाकर राजन को अपनी पत्नी की छूट के लिए सहमति दी.. बस इतना राजन के लिए बहुत था उन्होंने बापिस चेहरा आगे किआ और कमर का ज़ोर लगते हुए अपने लुंड को सभ्य की गरम छूट में घुसा दिया और घुसते hi उनके मुँह से एक गरम आअह्ह्ह्हह निकल गयी..

वहीं सभ्य भी पहली बार अपनी छूट में अपने पति और बेटों के अलावा किसी और का लुंड महसूस कर गंगना उठी,

राजन उतना hi लुंड घुसा कर रुक गए और सभ्य की छूट को अपने लुंड पर महसूस कर उसका आनंद लेने लगे,

ममता – अब रुके hi रहोगे क्या, छोड़ो अपनी भाभी की छूट जमकर और दिखाओ अपने लुंड का दम,

ये सुन सभ्य भी मुस्कुराते हुए बोली – छोड़ो न भैया अब तो तुंहारी मालकिन ने भी बोल दिया,

राजन – हं हाँ भाभी ओह्ह्ह.

ये कहते हुए राजन ने सभ्य की कमर को थम धक्के लगाने शुरू किये और पूरा लुंड सभ्य की छूट में घुसा दिया और फिर उनकी कमर खुद hi चलने लगी और सभ्य की छूट में उनका लुंड अंदर बहार होने लगा,

सभ्य – आह्ह्ह्हह भैया अह्ह्ह्हहममम..

राजन- ओह्ह्ह भभीीीीुइआह्ह्ह्हह shhhhhhhhhhhhh अह्हह्ह्ह्ह कितनी मस्त गरम छूट है तुम्हारीयी अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह

उधर नीलेश और ममता ने भी अपनी चुदाई शुरू कर दी थी और दोबारा से नीलेश का लुंड ममता की गांड के अंदर बहार हो रहा था,

नीलेश- ओह्ह्ह्हह्हह आअह्ह्ह्हह राजनननन आज तूने मेरी पत्नी को छोड़ hi लिआ अह्हह्ह्ह्ह कैसा लग रहा है,

राजन- अह्ह्ह्ह भैयाहहह अह्ह्ह्हह जन्नत है भाभी की छूट में बस एक दुःख है की पहले क्यों नाहीइइइइइइइ मिलीई अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह्हह.

ममता- अब मिल गयी नाहहहह तो साडी कसार निकल लो जीजी की छूट पर आह्हः देखूआघ भाईसाब कैसीईए मेरी गांड पर कसार निकल रहे हैं.

सभ्य- हाँ भैयाहहह सरे बीते समय की कसार पूरी करलो अपनी भाभी की छूट पर अह्हह्ह्ह्ह माआहहह ओह्ह्ह्हह्ह…

राजन सबकी बातें सुन हर पलके साथ उत्तेजित होते जा रहे थे और सभ्य को तेज़ तेज़ धक्के लगाकर छोड़ने लगे,






राजन- हाँ ब्बेभी कितना hi तड़पा हूँ तुम्हारी इस मस्त छूट के लिए अह्ह्ह्हह आज जाकर मिली है अह्ह्ह,

सभ्य- अह्हह्ह्ह्ह वचाहह कबसे तरसे हो भैयाहहह,

राजन- जबसे भैया ब्याह के लाये थे अह्ह्ह्हह अम्मम्माह्ह्ह्हह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह और फिर कर्मा अनुज के बाद जब तुम्हारा बदन भर गया न तो तबसे तो बिलकुल hi दीवाने हो गए हम तुम्हारे बदन के…

नीलेश- ओह्ह्ह्हह्हह आअज निकल रही हैं मन की बातें अह्ह्ह्हह्हह सही है बेताआहःहः..

राजन- का करें भैयाहहह भाभी का बदन hi ऐसा है की कौन न दीवाना हो इनका, आह्ह्ह्हह…

ममता- एहहहहह तो सही बात है मैं तो औरत होकर भी जीजी के बदन को देख लार टपकने लगती हूँ.

सभ्य- आह्ह्ह्हह कर्मा के पापा देखो राजन भैया कैसे तुम्हारी बीवी की छूट छोड़ रहे हैं अह्ह्ह्ह.

नीलेश- हाँ मेरी रानी आह्ह्ह्हह यही टूउठ्ह असली दोस्ती हैईईई अह्ह्ह्ह मिल बाँट कर खानआठ,

राजन- हॉँण्णन भैयाहहह अबसे मिल बाँट कर hi खाएंगे खूब ओह्ह्ह्ह…

ममता- हॉँण्णन बस कर्मा अनुज नाहहहह जाने क्या सोचेंगे अपनीई माँ की चुदाई का पता चला तोहह…

नीलेश- ओह्ह्ह्हह्हह ममता राजन यही तो तुम थोड़े पीछे रह गए, हमारे बच्चे हमसे भी आगे हैंण्ण्ण्न.

राजन- मतलब..

सभ्य- मतलब भैयाहहह जिस छूट को तुम छोड़ रहे हो, कर्मा अनुज जा जाने कितनी बार उसे छोड़ चुके हैं,

ये बात तो राजन और ममता के लिए चौंकाने वाली थी,

राजन- क्या मतलब अनुज कर्मा तुम्हे मतलब अपनी माँ को छोड़ चुके हैं?

सभ्य- हॉँण्णन भैयाहहह.

बस इतना सुनने के साथ hi राजन अपने चरम पर पहुँच गए और उनके लुंड ने सभ्य की छूट में पिचकारी मरना शुरू कर दिया वो गुर्राते हुए सभ्य की छूट में झड़ने लगे,

वहीं ममता भी अपने पति की तरह ये खबर बर्दाश्त नहीं कर पाई और झड़ने लगी, नीलेश ने भी ममता को झाड़ता महसूस किआ तो खुद का रास भी दो चार तगड़े धक्के लगाकर ममता की गांड में अपना रास भर दिया…

राजन झड़ने के बाद सभ्य की छूट से लुंड निकल कर बगल में लेट गए, वहीं ममता की गांड में रास भरने के बाद नीलेश ने भी लुंड उसकी गांड से निकल लिए और सीधे होकर लेट गए, कुछ देर यूँ hi ख़ामोशी रही, फिर राजन सर उठाकर बोले- ये बच्चों का और तुम्हारा कब शुरू हुआ भाभी?

नीलेश- वो हम तुझे बता देंगे अब चल पानी लगाने पर ध्यान देते हैं.

सभ्य- हाँ ममता हम भी घर चलते हैं और रस्ते में मैं तुझे भी सब बता दूंगी देर हो रही है.

राजन- ठीक है भैया.

इसके बाद सब अपने अपने कपडे पहनने लगे ममता और सभ्य के कपडे धुप की वजह से थोड़े सूख गए थे तो उन्होंने वो hi पहन लिए और घर की और चल दी जहाँ रस्ते भर में सभ्य ने ममता को सब सच सच बता दिया… जिसे सुनकर ममता की ख़ुशी का ठिकाना नहीं था..

जारी रहेगी….
 
ख़ुशी- बताउंगी भैया सब बताउंगी पर चलो अभी कपडे पहनो किसी ने साथ देख लिए हमें ऐसे तो गड़बड़ हो जाएगी बारिश भी रुक गयी है.

चेतन को भी यही सही लगा और अपने गीले कपडे hi पहनने लगा और ख़ुशी भी अपने गंदे कपडे पहनमे लगी.

चेतन- पर बता तो सही.

ख़ुशी- हाँ चलो न रस्ते में बताती हूँ....

ये कहकर ख़ुशी और चेतन घर की और चल दिए..

अपडेट 193

सरलपुर

इधर जहाँ ख़ुशी और चेतन में एक नया रिश्ता बन गया था और ख़ुशी चेतन को अपने और रमन के बारे में भी बता रही थी वहीं उनकी माँ के मन में उथल पुथल मची हुई थी,

माधुरी अपने कमरे में इधर से उधर चलते हुए सोच रही थी- ये संधान जी से बोल तो दिया पर अब घबराहट हो रही है, कहीं कुछ गड़बड़ न हो जाये, न जाने कौन होगा उनके दिमाग में, समझ नहीं आ रहा क्या करूँ, किसी को पता चल गया तो मुँह दिखने लायक नहीं रहूंगी,

माधुरी यही सब सोचते हुए परेशां हो रही थी, की उसके कमरे का दरवाज़ा खुला और सावित्री अंदर आई,

सावित्री – तैयार हो मेरी रानी? आज रात तो तुम्हारी मुनिया की खैर नहीं

माधुरी- अरे वो कुछ समझ नहीं आ रहा, हमें अब घबराहट सी हो रही है,

सावित्री- अरे घबराहट कैसी, तुम कुंवारी थोड़े hi न हो जो पहली बार लुंड लेने से दर रही हो,

सावित्री ने मज़ाक करते हुए कहा,

माधुरी- तुम भी अरे हमारा मतलब कुछ गड़बड़ हो गयी तो कितनी बदनामी हो जाएगी ये सोच सोच कर दर लग रहा हाउ,

Savitri-are तुम भी न बन्नो, दुनिया दरी को छोडो और अपनी मुनिया की सोचो जब इसमें लुंड घुसेगा कड़क तो कैसा महसूस करेगी, कब तक बेकार की बातें सोच कर घबराओगी.

माधुरी भी चुदाई के बारे में सोचने लगी तो उसकी छूट भी कुलबुलाने लगी,

माधुरी- कुछ गड़बड़ तो नहीं होगी न,

सावित्री – अरे बिलकुल नहीं तुम बस ख़ुशी से जी भर के छुड़वाना और अभी मौका भी सही है सब नीचे हैं इससे ाचा मौका नहीं मिलेगा…

माधुरी- ठीक है पर रात में कैसे होगा, ख़ुशी के पापा ..

सावित्री- नहीं होंगे, मेरी इनसे बात हुई है तीनो समधी आह खेत पर ताड़ी पिएंगे और बाघ में hi सोयेंगे,

माधुरी – पर मुझे अभी भी घबराहट हो रही है. तुम भी रहना न मेरे साथ.

सावित्री- मैं, अरे नहीं मैं तुम्हे चुड़ते देख खुद को रोक नहीं पाई तो.

माधुरी- तो क्या हुआ मिल बाँट कर खा लेंगे, पर तुम रहना..

सावित्री- ठीक है रहूंगी, पर लुंड बाँटना पड़ेगा…

माधुरी के चेहरे पर ये सुन मुस्कान आ गयी, वहीं सावित्री उसे और रात की योजना के बारे में समझने लगी,

वहीं उथल पुथल तो बिमला के मन में चल रही थी आखिर अपने दामाद से छुड़वा जो लिए था मन में अनेक ख्याल आ रहे थे पर अब उन पलों को याद कर उसकी छूट फिर से गीली होने लगी थी- हाय दिया ये क्या हो रहा है हमें, एक तो ऐसा पाप कर बैठे और फिर भी हमारा बदन मुआ हमारे hi खिलाफ हो रहा है, पर जो मज़ा आज आया वैसा मज़ा भी कभी नहीं मिला, ऐसा लग रहा है जितना ये सब गलत है उतना hi ज़्यादा मज़ेदार भी, कुछ तो करना पड़ेगा बिमला… वहीं दोनों संधियों से घिरे चरण सिंह के दिमाग में बहु की कही हुई बात उथल पुथल मचा रही थी,

वहीं रस्ते भर में ख़ुशी ने अपने और रमन के बारे में साथ hi रिमझिम और आखिर में चंचल के बारे में चेतन को सब बता दिया और ये भी कैसे चंचल और रिमझिम दोनों भाभियों की वजह से hi वो चेतन से छोड़ने में कामयाब हुई, ऐसे hi बातों में वो घर आ गए और घर आकर नहाकर कपडे बदले और कुछ देर बाद चेतन और ख़ुशी को रिम्मी ने चाय दी और रमन भी वहीं मौजूद था,

चेतन- तो अब जाकर समझ आई साडी बात मुझे, क्यों बे रमन तूने भी नहीं बताया मुझे.

रमन- अरे भैया थोड़ी घबराहट थी इसलिए चाहता था की ख़ुशी hi सब बताये तुम्हे,

ख़ुशी- हाँ भैया पर अब तो सरे सीक्रेट और राज़ खुल चुके हैं,

रिम्मी- तुम्हारी छूट की तरह ननद रानी,

रिम्मी ने ख़ुशी को छेड़ते हुए कहा..

ख़ुशी- धत्त्त भाभी तुम भी न..

चेतन- पर एक राज है जो नहीं खुला

रमन- कौनसा राज भैया?

चेतन- अरे आज कुछ अजीब सा हुआ है,

रिम- क्या हुआ भैया बताओ न

चेतन- वो हुआ ऐसा की…

इसके बाद चेतन उन तीनो को अपने और अपनी सास बिमला के बीच हुई चुदाई के बारे में बताता है जिसे सुन सब हैरान रह जाते हैं..

रिम- हाय भैया, क्या बात है अपनी hi सासु माँ को छोड़ लिए तुमने तो..

ख़ुशी- क्या बड़ी बात है भाभी, जब बहन को छोड़ सकते हैं तो सासु माँ को क्यों नहीं,

रिम- वो तो है, वैसे भैया ये बात जीजी को बताई है तुमने?

चेतन- नहीं चंचल को अभी नहीं पता पर जल्दी hi बता दूंगा, पता नहीं वो कैसी प्रतिक्रिया देगी?

ख़ुशी- मुझे नहीं लगता भाभी कुछ ज़्यादा बुरा मानेगी.

रमन- हाँ मानना तो नहीं चाहिए.

चेतन- हाँ बुरा क्यों मानेगी बस उसकी माँ hi तो छोड़ी है मैंने..

इस बात पर सब हंसने लगे..

रमन- अरे भैया मज़े hi आ गए होंगे तुम्हारे तो, हाय क्या मस्त बदन है बिमला चची का यार मुझे भी छोड़ने को मिल जाये तो मज़ा आ जाये.

रिम- मिल जाये क्या मिल सकती है..

इस लार सब रिमझिम की और देखने लगे,

रमन- कैसे?

Chetan-haan भाई कैसे?

ख़ुशी- भाभी चची ऐसे एक बार हालत की वजह से चुद गयी पर और किसी के लिए कभी नहीं मानेगी…

रिम- अरे मेरी बन्नो सब मानेगी और दूसरी बात मानना hi कहाँ है मेरे पास एक मस्त योजना है…

और रिम बाकि तीनो को अपनी योजना समझने लगी,

उधर चंचल के मन में अपनी अलग योजनाएं चल रही थी, वो किसी भी तरह अपने पति और अपनी सास के बीच चुदाई का रिश्ता बनवाना चाहती थी और उसी लिए वो हर प्रयास करने में जुटी थी,

इतनी साडी योजनाओं और उथल पुथल के बीच शाम हो चली थी, बारिश की वजह से बिजली आई नहीं थी और इन्वर्टर भी बोल पड़ा था इसलिए जल्दी hi काम निपटने थे तो सब खाने पीने के प्रोग्राम में व्यस्त थे, बिमला चेतन से नज़रें छुपाये इधर उधर घूम रही थी, पर एक जगह चेतन ने उसे अकेले में पकड़ लिए और रात को उसके कमरे में आने को बोलै और कहा की वो अकेला होगा चंचल ाँ रिमझिम और ख़ुशी के साथ सोने वाली है…

बिमला ने कोई जवाब नहीं दिया और वहां से चली गयी, वहीं दूसरी और सावित्री ने पूरी योजना माधुरी को समझा दी थी, और माधुरी रात होने का इंतज़ार कर रही थी, वहीं अब सावित्री विनीत और पंकज को क्या करना है वो समझा रही थी..

विनीत – पर तै जी वो अकेले के लिए तो राज़ी हैं दोनों के लिए नहीं मणि तो..

पंकज- हाँ तै जी सही कह रहा है ये..

सावित्री – अरे मैं जानती हूँ संधान को, एक बार लुंड उसके अंदर घुस गया न तो वो सब करेगी, और मैं भी तो रहूंगी न वहां सब संभल लुंगी..

तो ये योजना थी सावित्री की जिसमे वो माधुरी को विनीत और पंकज से छुड़वा कर दोहरा मज़ा देना चाहती थी, योजना बिलकुल सीढ़ी थी पहले विनीत शुरू माधुरी और उसके साथ करेगा और फिर पंकज बीच में उन्हें पकड़ उनके साथ शामिल हो जायेगा…

उधर खाना खिलते समय चंचल ने अपने ससुर जी को इशारों hi इशारों में पूछा जिसका जवाब चरण सिंह ने तभी तो नहीं दिया और फिर जब हाथ धोने गए तो चंचल से फुफुसा कर कहा की वो राज़ी हैं, जिस पर चंचल ने कहा की आज रात वो अकेली सोयेगी आ जाना, ये सुनकर चरण सिंह अपनी बहु की तंग गांड के बारे में सोचते हुए मुस्कुराते हुए चले गए..

खाना पीना होने के बाद तीनो संधियों का आज बारिश के मौसम में ताड़ी पीने का प्रोग्राम था तो इसलिए वो लोग जाने लगे, घर की औरतें साफ़ सफाई में लग गयी और बर्तन वगेरा निपटने लगी, इसी बीच चेतन ने चंचल को अकेले पकड़ लिए और उसे आज के बारे में बताया कैसे उसके और ख़ुशी के बीच जो कुछ हुआ जिसे सुनकर चंचल बहुत खुश हुई, वहीं चेतन ने थोड़ा हिचकिचाते हुए अपने और उसकी माँ बिमला के साथ की कहानी भी बताई तो ये सुनकर चंचल को तो यकीन नहीं हुआ की उसकी अम्मा ने अपने दामाद से छुड़वा लिया पर साथ hi वो खुश भी बहुत हुई और उत्तेजित भी, वो दोनों बातें कर hi रहे थे की रमन रिम्मी और ख़ुशी भी वहां आ गए, और पोयच्ने लगे क्या बातें चल रही हैं तो चेतन ने बताया की उसने सब चंचल को बता दिया है जिससे सब खुश हुए क्यूंकि चंचल खुश नज़र आ रही थी,

फिर रमन ने पूछा फिर सोने का क्या प्लान है जिस पर रिम्मी ने जवाब दिया- प्लान क्या है, तुम बिमला चची के साथ घुस जाना,

चंचल- अम्मा के साथ??

फिर सबने चंचल को इस बारे में बताया तो वो भी राजी हो गयी क्यूंकि वो जानती थी अम्मा को खोलने के लिए ये ज़रूरी था,

रिमझिम ने आगे बताया- तो तुम बिमला चची के साथ, ख़ुशी और भैया तो आज साथ hi रहेंगे क्यूंकि ख़ुशी को अपना पिछले दरवाज़े जो खुलवाना है बड़े भैया से,

ये सुन ख़ुशी शर्मा गयी, वहीं बाकि सब हंसने लगे,

चंचल- अगर रमन भैया अम्मा के साथ होंगे तो बाबा को शक नहीं होगा उन्हें कैसे संभालेंगे.

रिम- अरे जीजी सब सोच रखा है तुम घबराओ मत.

चंचल- और तू?

रिम- मैं जीजाजी और पूर्वी के साथ रहूंगी आज रात.

चेतन- चलो ठीक है फिर सब लोग चलो अपनी अपनी जगह.

चंचल- हाँ तुम्हे तो जल्दी जाना hi होगा बहन की कुंवारी गांड जो मिल रही है.

ख़ुशी- भाभीईईई .

चंचल- अब शर्मा मत और सुनो आराम से पहली बार है मेरी ननद को बिलकुल दर्द नहीं होना चाहिए.

चेतन- हाँ बाबा मेरी भी बहन है वो, उसे दर्द नहीं होने दूंगा,

ऐसे hi बातचीत के बाद सब अपने अपनी जगह चले गए, वहीं इस समय सबसे ज़्यादा मुश्किल बिमला के लिए हो रही थी, उसे समझ नहीं आ रहा था क्या करे, दामाद जी ने फिर से बुलाया था क्या करूँ जॉन या नहीं, नहीं नहीं ये पाप है एक बार हो गया सो हो गया दोबारा नहीं, पर फिर उसे सुबह की चुदाई याद आने लगती जो की उसका पूरा मन बदल रही थी, उसने सोचा एक चीज़ अछि है की चंचल के बाबा नहीं हैं एक काम करती हूँ जल्दी होकर और दामाद जी को समझा कर की ये सब गलत है ये सब समझा कर आ जाउंगी,

ये hi सोच कर वो निकली पूरे घर में अँधेरा फैला हुआ था, अपने कीपैड वाले फ़ोन को जलाकर वो सावधानी से आगे बढ़ते हुए चंचल और दंड जी के कमरे में पहुँच गयी पर दरवाज़ा खोल कर देखा तो अंदर कोई नहीं दिखा, उसनर एक दो बार पुकारा भी तो कोई जवाब नहीं आया , वो समझ गयी अभी वहां कोई नहीं है इसलिए आगे बढ़ कर वो टटोलते हुए बिस्तर को ढूंढ कर बैठ गयी और पीछे होमर लेट गयी, और सोचने लगी, सोचते हुए ऊसर याद आया इसी बिस्तर पर तो आज दामाद जी ने उसे छोड़ा था और ये सोच उसकी छूट कुलबुलाने लगी, वो सोचने लगी आई तो दामाद जी को समझने हूँ पर अगर वो चाहेंगे तो एक बार और करने दूंगी साथ hi ये भी समझा दूंगी की ये आगे से नहीं होगा. हाँ ये hi सही रहेगा, वो सोच में hi व्यस्त थी की तभी दरवाज़ा एक वार फिर से खुला और उसका दिल धड़कने लगा, उसने देखा की दरवाज़े से अंदर एक साया आया है और दरवाज़ा दोबारा बंद हुआ है, उसकी धड़कन तेज़ हो गयी उसका दिल ढोल की तरह बजने लगा,

कुछ पल बाद उसने पाया की कोई बिस्तर पर आ गया है वो मन hi मन घबराने लगी, सोचने लगी क्या बोलूं, दामाद जी को मन करूँ? या नहीं या सब होने के बाद बोलूं?

वो ये सब सोच रही थी की उसे अपने पेट पर एक हाथ महसूस हुआ और उसकी साडी सोच बिलकुल रुक गयी, हाय ढैय्या ये क्या हो रहा है, सास और दामाद का ऐसा मिलान और वो भी हमें ाचा लग रहा है… क्या हो गया है हमें बदन की हवस के आगे साडी मर्यादा बौनी होती जा रही है, पर अभी तक जीवन भर मर्यादा hi तो निभाई है मैंने, सिर्फ एक बार मर्यादा छूती तो ऐसा महसूस हुआ जैसा कभी नहीं हुआ, एक रात और भी अगर वही आनंद महसूस कर लूँ तो क्या हर्ज़ है फिर जीवन भर मर्यादा में hi रहूंगी,

ये सोच बिमला ने अपने मन को मज़बूत कर लिया और उस पल का आनंद लेने लगी, वहीं जो हाथ उसके पेट पर था वो अब पेट को मसल रहा था कभी उंगलियां उसकी गदराई कमर को मसलती तो कभी इसकी गहरी नाभि को कुरेदती, दामाद जी की हर हरकत पर बिमला का बदन सिहर रहा था, फिर दामाद जी के हाथ अब उसके पेट से ऊपर छूछीयो तक आ गए थे और ब्लाउज के ऊपर से hi उसकी भरी हुई चूचियों को मसल रहे थे, जिससे बिमला सब भूल कर सिर्फ उस एहसास को महसूस कर सिहर रही थी पर तभी उसे महसूस हुआ की दामाद जी उसके ऊपर आ गए हैं और अगले hi पल उसे अपनी नाभि पर जीभ महसूस हुई जिसके साथ hi उसके मन की साडी शंका गायब हो गयी,

वहीं मन में शंका तो दुसरे कमरे में माधुरी को भी थी सावित्री की इस योजना को लेकर पर उसकी छूट उसे कुछ और hi कह रही थी, माधुरी के मन में बहुत से विचार चल रहे थे, क्या करने जा रही हूँ मैं भी आज, इतनी घबराहट हो रही है पर साथ hi इतनी उत्तेजना भी, और ये सावित्री पता नहीं कहाँ रह गयी बोली थी साथ रहूंगी, पता नहीं कौन होगा कैसे सामना करुँगी मैं, एक काम करती हूँ अँधेरा कर देती हूँ, ये सोच कर उसने दिया बुझा दिया और अँधेरे कमरे में बिस्तर पर लेट गयी, अब लेटने के बाद भी माधुरी का मन फिर भी शांत नहीं था, है ढैय्या कहाँ फंस गयी तू छूट के चक्कर में, बस आज ये जल्दी जल्दी हो, और इस घबराहट से छुट्टी मिले, बस जो भी आये ज़्यादा समय न लगाए जल्दी से छूट में ठूंस दे लुंड और ताबड़तोड़ चुदाई करे, कहीं चुम्मा छाती में न लग जाये,

हाँ ये तो सोचा hi नहीं मैंने कहीं वो पूरी सुहागरात मानाने में लग गया तो, कुछ सोचना पड़ेगा, एक उपाय है पर क्या ये करना सही होगा, अरे मैं भी छोड़ने को तैयार हूँ और सही गलत सोच रही हूँ, ये सोच कर वो उठी और अपनी साड़ी उतरने लगी और जल्दी hi पूरी नंगी होकर बापिस लेट गयी और सोचने लगी- अब ठीक है, काम से काम कपडे खोलने में तो समय नहीं लगाएगा और मुझे नंगा पाकर हो सकता है सीधा चढ़ाई कर दे, वो ये hi सोच रही थी की दरवाज़ा धीरे से खुला तो उसके दिल की धड़कन बढ़ गयी, आखिर वो वक़्त आ hi गया था जिसका उसे इंतज़ार था, दरवाज़े से उसे एक साया अंदर आता हुआ महसूस हुआ, वो उत्तेजना और और रोमांच से थोड़ी सिहरने लगी, उसे अगले hi पल बिस्तर पर भर बढ़ता हुआ महसूस हुआ तो उसने खुद के मन को आने वाले समय के लिए मजबूत कर लिए साथ hi उसकी छूट भी बेसब्री में बहने लगी,

अगले hi पल एक हाथ उसके बदन से टकराया तो उसके बदन में बिजली सी दौड़ गयी, हाथ उसके कंधे पर पड़ा और फिट धीरे धीरे इधर उधर सरकने लगा, हाथ ज्यों hi उसके सीने की और बढ़ा और नंगी चूचियों पर आ गया तो हाथ ने टटोल कर कई बार देखा, माधुरी समझ गयी की जो भी है वो भी हैरान है उसे नंगा पाकर, माधुरी समझ गयी अब समझ आ गया है की वो अपनी छूट की खुजली को शांत कराये और इसके लिए उसे hi खुद पहल करनी होगी… ये सोच वो उस इंसान की और पलट गयी उसके मन में उत्तेजना और रोमांच से भूचाल आया हुआ था, वो सोच रही थी की मैं बिलकुल नंगी एक मर्द के साथ बिस्तर पर हूँ और मुझे पता भी नहीं वो मर्द कौन है,

इधर उस मर्द का भी बुरा हाल था माधुरी को नंगा पाकर क्यूंकि उसके हाथ माधुरी के नंगे बदन पर लगातार चल कर उसके बदन का माप लेने की कोशिश कर रहे थे, वहीं माधुरी के भी हाथ खली कब तक रहते वो भी अपने अनजान साथी के बदन पर हाथ फिरने लगी और उसके बदन का अनुमान लगाने लगी, तभी अचानक से वो मर्द माधुरी से दूर हो गया तो माधुरी हैरान हो गयी की अचानक ये क्या हुआ, कुछ गड़बड़ तो नहीं हो गयी?

फिर तभी वो मर्द बापिस उससे चिपक गया और माधुरी को पहले से भी ज़्यादा ख़ुशी हुई उससे चिपक कर क्यूंकि वो भी बिलकुल नंगा हो चूका था और अब उसके बदन पर टूट पड़ा था वो जगह जगह उसके बदन को चूम रहा था तो माधुरी भी किसी तरह अपनी सिसकियाँ थामे उसके आक्रामक प्यार का आनंद ले रही थी, पर कोशिश के बाद भी उसकी सिसकी निकल hi गयी क्यूंकि उसे अपनी छूट पर अचानक से मर्द का हाथ महसूस हुआ और वो अगले hi पल उसकी बहती हुई छूट को अपनी हथेली में भर मसलने लगा, माधुरी का तो पूरा बदन hi अकड़ गया, वो सिहरने लगी वहीं अगले hi पल उसे अपनी छूट में उंगलियां घुसती हुई महसूस हुई तो उसने खुद के मुँह पर हाथ रख खुदको चीखने से रोका, छूट में उंगलियां जाते hi माधुरी के बदन में बिजली दौड़ने लगी वो उत्तेजना से पागल होने लगी, उसके हाथ मर्द के बदन पर चलने लगे और उसने जल्दी hi जिसकी उसे तलाश थी उसे ढूंढ लिए अगले hi पल माधुरी के हाथ में एक कड़क मोटा लुंड था जिसे महसूस कर माधुरी की छूट और पानी छोड़ने लगी.

माधुरी को लुंड को महसूस कर उसके नाप का भी अंदाज़ा हो गया और उसे समझ आ गया की ये उसकी छूट में जाकर हलचल मचने वाला है, खैर अभी तो उंगलियां उसकी छूट में हलचल मचा रही थी और वो उस लुंड को मुठिया रही थी, खैर कुछ पल बाद उंगलियां उसकी छूट से निकली तो वो थोड़ा शांत हुई पर अगले hi पल उसे अपने होंठों पर होंठ महसूस हुए जो उसके होंठों को चूसने लगे, माधुरी ने सोचा नहीं था पर कुछ पल बाद वो भी चुम्बन में साथ देने लगी, और ज्यों ज्यों उसके पाप निकल रहे थे होंठों की चूसै और आक्रामक होती जा रही थी और अब तो दोनों की जीभ भी आपस में कुश्ती कर रही थी, हालाँकि माधुरी ने सोचा था की चुम्मा छाती में समय बर्बाद नहीं करेगी पर अगर चुम्मा छाती ऎसी हो तो उसे कोई दिक्कत नहीं है,

खैर काफी देर बाद दोनों के होंठ अलग हुए तो माधुरी की तो सांस hi फूल रही थी उसने किसी तरह से खुद की साँसे सँभालने की कोशिश की hi थी की अगले hi पल लुंड उसके होंठों को फैलता हुआ मुँह में घुस गया, वो बिलकुल हैरान रह गयी उसने सोचा नहीं था की अचानक ऐसा होगा पर साथ hi उसकी उत्तेजना भी बढ़ गयी माधुरी को हमेशा hi बिस्तर पर आक्रामकता पसंद आती थी उसे ाचा लगता था की उसके बदन को मर्द अपने सुख के लिए प्रयोग करे उसे नाजुक काली न समझे बल्कि उसके बदन को मसल मसल कर चोदे…

खैर अभी तो उसे अपने सर के पीछे उस मर्द के हाथ महसूस हुए, मर्द उसके सर को पकड़ अपना लुंड उसके मुँह के अंदर बहार करने लगा, और उसके मुँह को छोड़ने लगा, माधुरी को ये बड़ा hi अलग और उत्तेजना वाला लगा वो जैसा चाहती थी ते मर्द वैसे hi उसे इस्तेमाल कर रहा था, छूट से पहले उसके मुँह को छोड़ रहा था माधुरी के मुँह से थूक रिस रिस कर बहार लटक रहा था और उसके होंठों से लटकते हुए उसकी छूछीयो पर गिर रहा था, वहीं हर झटके के साथ लुंड उसके मुँह में और अंदर तक जा रहा था और उसे अपने गले तक लुंड का टोपा महसूस हो रहा था,

वहीं दुसरे कमरे में माधुरी की संधान बिमला भी अब पूरी तरह नंगी थी और अभी उसके मुँह में भी लुंड था जिसे वो बड़े चौ से चूस रही थी, आअज की रात वो अचे तरह से आनंद लेना चाहती थी और वही कर रही थी,

इधर माधुरी की लुंड गले तक होने के कारन सांस फूल रही थी तो उसने किसी तरह से लुंड को मुँह से निकला और हांफने लगी, वहीं मर्द ने भी माधुरी के सर को छोड़ दिया फिर अगले hi पल माधुरी को अपनी टांगें फैलानी पड़ी क्यूंकि मर्द उसकी टांगो को फैला कर अलग कर रहा था, माधुरी ने सोचा चलो इसे रहम आया अब छूट चाट कर मुझे खुश करेगा, पर उसका ये भ्रम तब टूटा जब उसे अपनी छूट में कड़क गर्म लुंड का टोपा घुसता हुआ महसूस हुआ,

माधुरी के मुँह से न चाहते हुए भी आह्हः निकल गयी वहीं मर्द एक पल को रुका फिर एक धक्का लगाकर पूरा लुंड उसकी छूट में घुसा दिया, माधुरी तो बिलकुल सिहर गयी, और अगले hi पल उसकी छूट में दनादन धक्के लगने लगे और माधुरी उन धक्कों का आनंद लेने लगी, हर धक्के के साथ उसका मुँह थोड़ा खुल जाता, सख्त गरम लुंड की पिटाई पाकर उसकी छूट मस्तियाने लगी, माधुरी को अब अपना फैसला सही लग रहा था और वो मन hi मन सावित्री का आभार करने लगी क्यूंकि उसी के कारन आज वो एक जवान लुंड से छोड़ने का सुखभोग रही थी,

इधर आंगन में सावित्री और पूर्वी को रिमझिम ने रोक रखा था और उसे अपनी योजना के बारे में बता रही थी की कैसे आज बिमला मौसी की चुदाई का प्लान बना है और इसलिए उन्हें चंचल के पापा का ध्यान रखना होगा की उन्हें शक न हो, और ये ज़िम्मेदारी दोनों को मिली उधर सावित्री ने भी बताया की माधुरी की चुदाई तो शुरू भी हो गयी होगी विपिन और पंकज से तो तेरे ससुर का भी कुछ करना होगा, वहीं छत पर कड़ी चंचल बेसब्री से अपने ससुर का इंतज़ार कर रही थी आज की रात खास थी आज पहली बार वो अपने ससुर से गांड मरवाने वाली थी साथ hi अपनी सास को उनके hi बेटे से छुड़वाने की सहमति भी मिलने वाली थी, इसलिए उसने सोचा था जैसे hi पापाजी आएंगे अँधेरे का फायदा उठा कर उन्हें अपने कमरे में खींच लाएगी, इधर एक और कमरे में बिमला अब टंगे फैलाये बिस्तर पर लेती सोच रही थी की आज दामाद जी कितने शांत हैं, तभी उसे अपनी छूट में दामाद जी का लुंड घुसता हुआ महसूस हुआ, और उसके मन से सरे ख्याल निकल गए और सारा ध्यान छूट में लुंड की गर्मी पर आ गया अगले hi पल दामाद जी के हाथ उसे अपनी कमर पर महसूस हुए और फिर चुदाई का सिलसिला शुरू हो गया,

वहीं घर के सबसे अंदर वाले कमरे में एक दिया जल रहा था कमरा अंदर से बंद था और दिए की रौशनी में दो बदन बिलकुल नंगे थे , चेतन और ख़ुशी दोनों भाई बहन इस बंद कमरे में एक अलग hi रिश्ता बना रहे थे चेतन अभी पूरे सबर के साथ अपनी बहन के कामुक अप्सरा जैसे बदन को भोग रहा था, ख़ुशी के बदन का ऐसा कोई हिस्सा नहीं बचा था जहाँ चेतन ने अपने होंठों से चूमा न हो वहीं ख़ुशी भी अपने भैया की हर हरकत का पूरा मज़ा ले रही थी, अभी वो अपने घुटनों और हाथों पर थी और उसकी आँखें बंद थी क्यूंकि उसके पीछे चेतन था जिसका मुँह इस समय ख़ुशी के कामुक तरबूज़ जैसे चूतड़ों के बीच था और उसकी जीभ ख़ुशी के सबसे अनछुए छेड़ को कुरेद रही थी और उसके अंदर घुसने की कोशिश कर रही थी,

चेतन का लुंड तो फटने जैसा हो रहा था बस इसी ख्याल से की वो आज अपनी सगी बहन की कुंवारी गांड मरने वाला है और अभी अपने लुंड के लिए hi अपनी बहन की गांड के छेड़ को छत कर आने वाले पलों के लिए तैयार कर रहा था, खैर जी भर के उसकी गांड चाटने के बाद चेतन ने बगल में राखी तेल की कटोरी उठाई और उसमे से तेल ख़ुशी की कुंवारी गांड पर उड़ेलने लगा, ख़ुशी को भी अपने छेड़ पर तेल का एहसास अलग लगा चेतन ने अचे से उसके चूतड़ों को फैलाकर तेल को उसके कैसे हुए छेड़ में जाने का पूरा समय दिया इसके बाद उसने अपने लुंड पर भी तेल उढेल लिए और उसे अचे से चुपड़ कर लुंड को चिकना कर लिए.

चेतन- तैयार है गुडईयहहह?

ख़ुशी- ुहम्म्म्म हॉँण्णन भैया, मारो अपनी बहन की कुंवारी गांड,

ख़ुशी ने रोमांच उत्तेजना और थोड़ी सी घबराहट के साथ कहा, चेतन ने उसके पीछे जगह ली और अपने लुंड के टोपे को उसकी गांड के छेड़ पर रखा तो ख़ुशी लुंड के गरम एहसास से सिसक पड़ी, एक पल को उसे थोड़ा दर भी लग रहा था पर उसने अपने इरादे मज़बूत किये और चेतन को आगे बढ़ने की सहमति दी, चेतन ने भी हल्का हल्का दबाव बनाना शुरू किआ तो पहले तो छेड़ थोड़ा अंदर की और हुआ पर खुला नहीं पर फिर और दबाव पढ़ते hi ख़ुशी की गांड के छेड़ ने अपने भैया के लुंड को जगह देना शुरू किआ और छेड़ धीरे धीरे खुलने लगा वहीं ख़ुशी की जान निकलने लगी, एक तीखा दर्द उसकी गांड में होने लगा जिसे वो दांत पीस कर सहन करने लगी, उसका दर्द सहन करना रंग भी लाया क्यूंकि उसके छेड़ ने चेतन के लुंड के टोपे को अपने अंदर समां लिए था, ये देख चेतन को लगा जैसे उसने दुनिया hi जीत ली है, वो कुछ पल के लिए वहीं रुक गया, जो ख़ुशी के लिए भी ाचा था..

छत पर चंचल इंतज़ार में थी और उसका इंतज़ार जल्दी hi ख़तम हुआ जब उसे तीन साये घर की और आते दिखे वो समझ गयी ये तीनो संधियों की जोड़ी है, उसने तीनो को दरवाज़े तक आते देखा और फिर अपने फ़ोन की टोर्च जला कर नीचे की और भागी, और फिर सीढ़ियों के कोने पर छुप कर टोर्च बंद कर खड़े होकर इंतज़ार करने लगी, पहले एक साया निकला वो समझ गयी की ये उसके बाबा हैं, उनके जाते hi दूसरा साया जैसे hi सीढ़ियों के बगल से निकला चंचल ने उसे पकड़ कर अपनी और खींच लिए और हाथ पकड़ कर ऊपर की और ले जाने लगी, सीढ़ियों पर गुप्प अँधेरा था इसलिए वो टटोलते हुए ऊपर चढ़ने लगी साथ hi अपने ससुर जी को भी अपने साथ ले चली,

इधर चरण सिंह को भी अजीब लगा क्यूंकि जैसे hi वो दरवाज़े से अंदर hi घुसे थे की उन्हें पकड़ कर सीधा एक कमरे में घुसा दिया गया वो समझ गए ये कोई नहीं बल्कि उनकी बहु चंचल है वैसे भी ताड़ी के नशे से उनका मूड तो बना हुआ hi था तो अपनी बहु की इस हरकत से उन्हें उसपर बड़ा प्यार आया, और उसकी उत्सुकता देख खुश होने लगे, जल्दी hi उन्हें अपनी धोती उतरती हुई महसूस हुई तो वो खुद hi अपना कुरता उतरने लगे जब तक उनकी बहु उन्हें नीचे से नंगा करती वो खुद ऊपर से नंगे हो गए, नंगे होते hi बहु ने उन्हें टटोलते हुए बिस्तर पर बैठा दिया और खुद उनके पैरों के बीच बैठ उनके लुंड को अपने मुँह में भर कर चूसने लगी जिससे कुछ hi पलों में उनका लुंड बिलकुल तन गया,

इधर चंचल के बाबा अपने कमरे में घुसे हालाँकि उन्हें भी हल्का हल्का सुरूर हो रहा था ताड़ी के कारन इसलिए कमरे में घुसकर दरवाज़ा फेरा फिर टटोलते हुए अंदर आये और बिस्तर पर बैठ गए, बिस्तर पर हाथ फिराया तो नंगे बदन से टकराया तो हैरान हो गए ये क्या बिमला आज ऐसे सो रही है लगता है हमारा इंतज़ार कर रही थी, इसलिए जल्दी से खड़े होकर अपने सरे कपडे उतर फेंके और बापिस बिस्तर पर चढ़ गए, उनका लुंड ये सोच कर hi कड़क होने लगा था और जब तक. लेटते तब तक तो पूरा तन चूका था, उन्होंने पत्नी के बदन को टटोलते हुए उसके पैरों के बीच में जगह ली साथ hi अपने लुंड को पकड़ कर उसकी छूट के द्वार पर टिका कर धक्का लगा कर अंदर कर दिया और आहें भरते हुए छोड़ने लगे,

सावित्री अकेले आंगन में इधर उधर पूर्वी को ढूंढ रही थी क्यूंकि उसने कहा था की तै तुम मेरे साथ रहना हम चंचल जीजी के बाबा को रोकेंगे पर अब उसे न समधी जी दिख रहे थे और न hi पूर्वी, खैर उसे एक कमरे से रौशनी आती दिखाई दी दरवाज़े के नीचे से उसने सोचा शायद इसी कमरे में है पूर्वी और वो उस कमरे की और बढ़ गयी, उसने दरवाज़े के पास जाकर देखा तो उसे अंदर से कुछ आवाज़ आती सुनाई दी उसकी उत्सुकता बढ़ गयी जानने के लिए की अंदर क्या हो रहा है, उसने हलके से दरवाज़े को धक्का दिया तो दरवाज़ा खुल गया और दिए की रौशनी में जो नज़ारा उसके सामने था उसे देख उसकी आँखें चौड़ी हो गयी,

वहीं सीढ़ियों से ऊपर पहुँचते hi चंचल के ससुरजी उसकी छूछीयो को पीछे से दबाने लगे, चंचल समझ गयी ताड़ी के नशे से पापाजी का मूड पहले से बना हुआ है वो भी अपना हाथ पीछे कर उनके लुंड को धोती के ऊपर से मसलने लगी जो की पूरी तरह सख्त हो कर खड़ा था, इधर उसके ससुर जी आज ज़्यादा hi बेसब्री में लग रहे थे और उसका ब्लाउज खोलने लगे चंचल भी आज पूरे मूड में थी और खुल कर उनका साथ दे रही थी, कुछ hi पलों में उसका ब्लाउज और फिर ब्रा उसके बदन से अलग हो नीचे गिर पड़ी, और उसकी चूचियों को उसके ससुर जी के हाथ मसलने लगे, अब चंचल भी कैसे पीछे रहती उसने भी हाथों का जादू दिखाया और बिना मुड़े hi ससुरजी की धोती को और फिर उनके कच्चे के नाड़े को भी खोल दिया और ससुरजी ने भी उन्हें अपनी टांगों से दूर कर दिया, अब चंचल के हाथ में उसके ससुरजी का नंगा लुंड था जो आज उसे पहले से ज़्यादा मोटा लग रहा था, इधर उसके ससुरजी ने ब्लाउज और ब्रा के बाद उसकी साड़ी पर हमला बोलै और उसे भी उतर कर फ़ेंक दिया अब वो सिर्फ एक पेटीकोट में थी जिसे ससुरजी ने उतरा तो नहीं बल्कि नीचे से उठा कर उसकी कमर पर इक्कठा कर दिया और फिर खुद पीछे से चंचल से चिपक कर उसके मोठे चूतड़ों के बीच अपना लुंड घिसने लगे जिससे चंचल की छूट और गीली होकर बहने लगी, कुछ पल ऐसे hi घिसने के बाद उसके ससुर जी ने अपने लुंड को पकड़ा और उसे चंचल की छूट के द्वार पर रख कर अंदर धकेल दिया तो चंचल भी इस एहसास से सिहरने लगी उसने आगे झुक कर सीढ़ियों की दीवार को पकड़ लिए और अपने ससुर से छत पर छुड़वाने लगी,

इधर माधुरी आज जवान लुंड की चुदाई से मस्त होकर उत्तेजना की लहार में तैर रही थी, और अभी लुंड पर सवार होकर उछाल उछाल कर अपनी छूट मरवा रही थी की तभी हलके से दरवाज़ा खुला जिसपर उसका और उसके रहस्यमयी साथी का भी ध्यान गया, वो एक पल को चौंकी फिर उसे लगा शायद सावित्री hi होगी अब आई है इसलिए वो शांत हो बापिस से चुदाई के मज़े लेने लगी, वैसे भी अभी उसे सिर्फ चुदाई से मतलब था वो किसी भी कीमत पर रुकना नहीं चाहती थी, उसे कुछ hi पलों में बिस्तर पर भर बढ़ता हुआ महसूस हुआ और फिर उसे अपने पैरों पर हाथ महसूस हुआ वो समझ गयी सावित्री टटोल टटोल कर महसूस कर रही है, और देखना छह रही है मैं हूँ की नहीं, करने दो मैं कुछ बोलूंगी नहीं, कुछ पल बाद उसे अपने चूतड़ों पर हाथ महसूस हुआ पर उसने लुंड पर अपनी कमर घूमना जारी रखा, कुछ पल बाद दूसरा हाथ भी उसके चूतड़ों को मसलने लगा जो की माधुरी को ाचा भी लग रहा था की छूट में लुंड है और कोई उसके चूतड़ों को मसल रहा है ये उसकी उत्तेजना और मस्ती और बढ़ने लगे, पर अगले hi पल कुछ ऐसा हुआ जिससे वो हैरान रह गयी सावित्री ने उसके गांड क्र छेड़ को कुरेदते हुए एक उंगली उसकी गांड में घुसा दी, जिसके एहसास से वो सिहरने लगी छूट में लुंड और गांड में उंगली ऐसा उसके साथ पहली बार हो रहा था, और वो मज़े से पागल होने लगी सावित्री उसकी गांड में उंगली अंदर बहार करने लगी तो उसकी कमर थम गयी और वो बस इस पल के अपने दोनों छेदों के भरे होने के एहसास का आनंद लेने लगी, कुछ पल बाद सावित्री ने अपनी उंगली उसकी गांड से निकली तो माधुरी को ाचा नहीं लगा वो सोचने लगी की ये क्या कर रही है कितना ाचा लग रहा था इसने उंगली क्यों निकल ली,

तभी बापिस उसे अपनी गांड पर कुछ महसूस हुआ तो वो खुश हो गयी की सावित्री ने बापिस उसकी गांड पर ध्यान दिया है, पर उसकी ख़ुशी अगले ही पल हैरानी में बदल गयी क्यूंकि उसकी गांड इस बार फैलती hi चली गयी और उंगली की जगह लुंड का टोपा उसकी गांड में घुसा था, माधुरी ने हैरानी में अपना हाथ पीछे लेजाकर देखा तो सच में ये तो लुंड hi था तो उसने और पीछे इंसान को टटोला तो पाया की ये सावित्री नहीं बल्कि और कोई मर्द है ये सोचते hi उसके बदन में करंट सा दौड़ने लगा उसका दिमाग भी सुन्न सा हो गया उसे समझ नहीं आ रहा था क्या करे उसके दोनों छेदों में एक एक लुंड था और उसे नहीं पता किसके थे कौन है ये दोनों मर्द hi, खैर वो इन सब सोच में hi थी की पीछे वाले मर्द ने उसकी गांड में लुंड चलना शुरू कर दिया और फिर उसका साथ देते हुए नीचे वाला भी झटके मरने लगा, माधुरी एक साथ दो दो लुंड से छोड़ने लगी और दो लुन्डों की चुदाई के आनंद से एक बार फिर से वो सही गलत भूल कर इस परम सुख के मज़े लेने लगी, ऐसा एहसास उसे जीवन में पहली बार मिला था लुंड के दोहरे हमले से वो झड़ने लगी पर दोनों hi लुंड नहीं रुके..

वहीं छत पर चंचल की दुमदार चुदाई हो रही थी वो किसी तरह से अपनी आवाज़ को दबाये हुए चुद रही थी, की तभी उसे नीचे से कोई आवाज़ आई उसे लगा की नीचे से कोई आ रहा है तो फुसफुसाई कोई आ रहा है, कमरे ने चलो, दोनों फुर्ती में पास वाले कमरे में घुस गए, और घुसते hi अंदर से दरवाज़ा बंद कर hi पाई थी की चंचल की छूट में दोबारा लुंड घुस गया जिस पर वो मन hi मन मुस्कुराने लगी की उसके ससुर जी उसकी छूट के कितने दीवाने हो गए हैं, वहीं उसकी माँ बिमला जो आराम से छुड़वा रही थी अचानक से कमरे के दरवाज़े के खुलने से चौंक गयी और बिलकुल चुप हो गयी साथ hi उसने पाया दामाद जी भी रुक गए हैं दरवाज़े से उन्हें दो साये अंदर घुसते हुए महसूस हुए पर फिर दरवाज़ा बंद हो गया अब बिमला बिलकुल परेशां हो गयी की कौन हो सकता है, वो और दामाद जी बिलकुल चुप हो कर स्थिर होकर सुनने की कोशिश करने लगे तो उन्हें थापों की आवाज़ और सिसकियाँ सुनाई देने लगी, दोनों समझ गए की क्या हो रहा है पर कौन हैं ये समझ नहीं आ रहा था खैर उनकी चुदाई सुन बिमला ने महसूस किआ दामाद जी भी हलके हलके उसे बापिस छोड़ने लगे हैं और ये उसे भी पसंद आ रहा था, किसी और की उपस्थिति में चुदाई करने के ख्याल से उसकी छूट और जकड़ने लगी अपने दामाद के लुंड को..

खैर पूरा घर चुदाई के बुखार में डूबा हुआ था छिप चिप कर हर कमरे में चुदाई चल रही थी की तभी कुछ ऐसा हुआ जिसकी किसी ने भी नहीं सोचा था….

जारी रहेगी..
 
खैर पूरा घर चुदाई के बुखार में डूबा हुआ था छिप चिप कर हर कमरे में चुदाई चल रही थी की तभी कुछ ऐसा हुआ जिसकी किसी ने भी नहीं सोचा था….



अपडेट 194


Achanak kuch aisa hua jiski kalpana bhi kisi ne nahi ki thi, kuch aisa jisse sab ki aankhein chaundhiya gayi, aur sach mein chaundhiya gayi kyunki Kisi ne nahi socha tha ki barish ke baad light aa jayegi par hua aisa hi aur sare kamre roshni se jagmaga uthe par jaise hi kamro mein roshni hui waise hi bahut logo ki aankhein chaudhi ho gayi kuch roshani ki wajah se to kuch jo kuch samne tha use dekh kar bilkul sunn pad gaye, sabse pahle andar wale kamre ki or chalte Hain

Savitri ne jyon hi darwaza khol kar dekha to samne ka nazara dekh wo bilkul chaunk gayi kyunki samne dekha to paya ki Chetan aur Khushi bilkul nange hain aur khushi chetan ke upar baithi hai apane bhaiya ke lund ko gand mein liye huye, darwaza khulne se un dono ka dhyan bhi darwaze par hi tha aur samne Savitri ko dekhkar dono ka hi halak sookh gaya, aur sookhe bhi kyun na koi bhai ko bahan ki gand mart pakad le to us bhai bahan ki kya haalat hogi, khushi ki haalat to bilkul rone wali ho gayi thi, par Savitri ke man mein kuch aur hi chal raha tha use to khushi hui bhai bahan ko aise paakar, usne Khushi aur chetan ke chehre ko dekha jo chah kar bhi kuch nahi bol pa rahe the, balki sunn hokar jyon ke tyon baithe the, agale hi pal savitri ne mud kar andar se darwaza band kar diya aur unke paas aa gayi bistar par aur aate huye boli- bachha darwaza to band kar lia karo, ye sun dono hi hairan rah gaye, Khushi ki to kuch samajh nahi aa raha tha wo kya kare aur Chetan savitri ki baaton ka matalab samajhne ki koshish kar Raha tha,

Savitri paas aakar bistar par baith gayi aur dono ko dekhte huye boli- are ruke kyun ho karte raho na, mujhe bhi dikhao bhai bahan ka pyar,

Dono bhai bahan hi asamanjas mein ek doosre ki or dekh rahe the, Savitri ne bhi dono ki man stithi ko samjha wo samajh gayi dono ko uske samne kholne ke liye use pahal karni hogi,

Savitri- are dekho tumhare ruke rahne se bade damad ji ka lund bhi sookh gaya ab takleef dega khushi bitiya ko,

Savitri se itne khule shabd sunkar dono chaunk gaye, par usse bhi zyada chaunke jo savitri ne kia use dekh kar, savitri aage ko jhuki aur aage jhukar usne Chetan ke lund ko pakda aur khushi ki gand se nikal lia aur nikalte hi turant apane muh Mein bhar lia aur choosne chatne lagi,

Chetan to bilkul chaunk gaya kyunki uske bhai ki saas uska lund choos rahi hai wo bhi jo turant uski bahan ki gand se nikla hai, utni hi hairan khushi bhi thi ye sochkar ki uski gand se nikla lund uske bhai ki saas chat rahi hai par ye sab hote dekh wo uttezit bhi hone lagi wohin chetan ka lund bhi savitri ke muh mein phoolne laga, kuch der savitri ne lund choosa aur phir muh se nikal kar bapis khushi ke aadhe khule gand ke cchhed par laga diya jise swatah hi Chetan ne dhakka dekhar andar sarka diya, iske baad Savitri ne dono ko dekh kar muskuraya to Chetan aur khushi ke chhehre par bhi muskan aa gayi, Chetan ki kamar khud ba khud neeche se jhatke lene lagi aur bahan ki gand mein lund andar bahar hone laga, idhar savitri khadi hui aur apane kapde utarne lagi…

Savitri – hum bhi tumhare sath thoda aram kar lein bachha bura to nahi manoge?

Khushi – nahi chachi, bilkul nahi, aa jao na,

Itne mein Savitri apane kapde utar chuki thi Khushi aur chetan dono ki aankhein Savitri ke bhare badan ko dekh kar fail gayi, savitri bistar par chadh gayi aur bina kisi hichkichahat ke Chetan ke sir ke dono or pair kar ke baith gayi aur apani choot Chetan ke muh par tika di jiske aate hi, Chetan ne apana muh khol Diya aur Savitri ki geeli choot ko chatne laga sath hi Khushi ki kasi gand mein lund bhi chalane laga,

Savitri- ahhhhh badi garam jeebh hai betaaahhhhhhh, ahhh khushi bitiya ab tu bata ye sab shuru kaise hua, aur dekho sab sach sach batana…

Khushi- mausi baat aisi hai ki…

Chanchal ke Papa ka kamra..

Chanchal ke papa ki aankhein aur nasha dono hi light aate hi poori tarah khul gayi kyunki jiske upar chadh kar wo chudai kar rahe the uske chehre par Nazar padi to khoon sookh gaya kyunnki Samne Poorvi thi,

Chanchal ke papa jaise the waise hi ruk gaye Khushi ki tange unki kamar par bandhi thi nahi to bechare uth bhi jate,

Chanchal ke papa- Bb bitya tu?

Unke muh se sirf itna hi nikla bechare ka dimag bilkul ghoomne laga, wohin Poorvi ne bhi natak karte huye kaha- chacha ji tum?

Udayveer ke to hosh hi ud gaye beti ke sasural mein aisa kaam ho gaya tha unse apani beti samaan Poorvi ko chod diya tha haaye ab kya hoga ye baat jab bahar pata chalegi to beti ka ghar toot jayega aur muh dikhane layak nahi rahunga kahin poora samaaj thookega mere parivar par, haaye kya paap ho gaya mujhse.. ye sochte huye turant Poorvi se door ho kar uth kar baith gaye aur apani dhoti uthakar apane upar daal li,

Udayveer - tu tu yahan is bistar par kaise aa gayi??

Poorvi – pata nahi chachaji andhera ho raha tha to main yahan aakar hi so gayi,

Udayveer – bahut bada paap ho gaya humse beti unjane mein, humein laga Teri Chachi hain, mujhe maaf kar de beti,

Udayveer ne gudgudate huye kaha..

Poorvi- are nahi chachaji tum aise mat kaho galti to meri hi hai jo aise bistar par aakar so gayi bina kapdon ke…

Poorvi ne ye kahte huye khud ke badan ko dhakne ka koi prayas nahi kia..

Udayveer – galti kisi ki bhi ho par paap to hua hai na bitiya,

Poorvi – paap nahi chachaji bas ek galat fahmi hui hai, waise bhi isme galti meri hai, main hi tumhare bistar mein bilkul nangi hokar leti thi ab nangi aurat ko pakar ek mard aur kya karega..

Poorvi ne nangi hone par zyada zor dete huye kaha, wohin udayveer the to insan hi jahan ek taraf man mein sharam aur ghabrahat thi wohin doosri or halki si uttezna bhi sir uthane lagi, Poorvi ke baar baar nange shabd ka prayog karne se unke man mein ek baar phir se Poorvi ke nange badan ko dekhne ki kasak hone lagi,

Udayveer- nahi bitiya teri koi galti nahi hai,

Udayveer ne Poorvi ki or ghoomte huye is prakar kaha jaise wo Poorvi ko santwana dena chahate ho, aur phir se unki nazar Poorvi ke nange badan par padi to uska kamuk badan dekh kar unke man ke sahi galat ka bodh aur ghabrahat ki jagah uttezna aur vasna lene lagi, Waise bhi Poorvi ko nanga dekh murdon ke bhi lund khade ho jaayein, Udayveer to hatte katte kisan the to unka bhi wohi haal hua jo har mard ka hota, Poorvi ke badan ki sundarta aur kamukta ki garmi ke aage Udayveer ki sharm aur sanskar pighalne lage aur unki jagah hawas aur uttezna sir uthane lagi, Udayveer ke man mein ye soch kar gudgudi hone lagi ki maine aise badan wali ladki ko chod lia hai, haaye ise bas dobara bhogne ka avsar mil jaye wo bhi roshni mein to maza hi aa jaye,

Poorvi jo ki mardon ki manodasha kya hoti hai use aise dekh kar ache se samajhti thi isliye akhiri chaal chalte huye wo boli- chachaji mujhe maaf kar deejiye…

Aur ye kah kar wo nangi hi Udayveer ke seene se lag gayi bas itna kafi tha Udayveer ko bahkane ke liye, Udayveer ke hath Poorvi ki nangi peeth aur mansal chutadon par aa gaye

Udayveer – are bitiya teri koi galti nahi hai hum hi tera badan Mahsoos kar bahak gaye the,

Udayveer ne Poorvi ke badan par hath phirate huye kaha, unka lund dobara poori tarah tan chuka tha aur Poorvi ke pet par lag raha tha,

Poorvi – chachaji, tum mera man rakhne ke liye kah rahe ho,

Udayveer – are sach beta, aur sahi batayein to humein mauka mila to dobara bhi bahakna chahenge, tu itni sundar jo hai,

Udayveer ne thoda ghabrate huye kah diya jiske jawab mein Poorvi Udayveer ki or dekh muskurai aur boli- acha diya mauka chachaji agar sach bol rahe ho to bahak jao phir se,

Aise jawab ki Udayveer ko asha to nahi thi par aisa nimantran koi thukra de to koi bevkoof hi hoga, jo ki Udayveer nahi the, wo turant Poorvi par toot pade aur use bapis lita kar uska badan pagalon ki tarah choomne lage,

Ye dekh kar Poorvi ke chhehre par muskan fail gayi aur usne man hi man socha chachaji to clean bowled ho gaye,...

Wohin doosre kamre mein light aane se pahle charan Singh poore nange hokar apani bahu ko ghodi banakar peechhe de chod rahe the sath hi kyunki aaj gand ka waada bhi tha isliye unki ek ungali bahu ki gand mein ghusi hui thi aur choot ko chodte huye wo gand ko bhi taiyar kar rahe the, light aane par kuch pal to sab waisa hi chalta raha par achanak se unki nazar bahu ke chhehre par gayi to kamar achanak se bilkul ruk gayi aur lund bhi choot se nikal gaya wohin charan Singh ke chehre ke bhaw bhi badal gaye aur unke muh se hadbadate huye nikla - Rimmi bahuuu...

Rimmi ne chehre ghuma kar charan singh ko dekha aur boli- kya hua papaji? Ruk kyun gaye?

Charan Singh - ttt tu yahan?

Rim- kyun papaji aap sirf chanchal Jeeji ko hi pyar karte hain.. main apki seva nahi kar sakti?

Ye sunkar charan Singh to mano khushi se pagal ho gaye wo to kabse Rimmi ki jawani bhogne ke chakkar mein the aur aaj wo khud apana jawan badan paros rahi hai to Charan Singh jaisa tharki sasur kaise mana karta, phir bhi thoda maan badhane ke liye bole - wo bahu main kaise achanak ye sab,

Ye sun Rimmi ne hath peechhe lakar apane Sasur ke lund ko pakda aur uske tope ko apani gand ke chhed par rakha aur boli- ye hi marne aaye the na papaji?

Charan Singh jo bahu ko nangi pakar uske kamuk badan ko dekhkar pahle se hi hairan the Rimmi ki is baat se to unke vaare nyare ho gaye aur Charan Singh ne Rimmi ki kamar ko thaam aage zor lagaya to lund ka topa chhoti bahu ki gand ke chhed ko phailata hua andar ghus gaya, Charan Singh to khushi se pagal ho gaye kahan ek bahu ka socha tha ab dono bahuyein chodne ko mil gayi, Rimmi ki garam kasi hui gand pakar to charan Singh jannat mein the aur apani kamar chalakar uski makhmali garam gand mein lund utarne lage..

Upar wale kamre mein bhi ek dhamaka hua tha light aate hi, aur light aate hi sirf kuch shabd kamre mein har koi bol paya.

Bimla- Vineet tu? Chanchal aur bhaiyaaa????

Vineet - bimla chachi tum yahan? Tauji chanchaj jiji?

Sujan Singh- Chanchal bitiya tu mere sath? Vineet tu Bimla bhabhi ke sath?

Chanchal - amma, vineet chachaji?

Ye hote hi Bimla Vineet ko dhakka dekar uth gayi aur apane badan ko chadar se dhak liya, wohin chanchal to hairani aur achambhe se jyon ki tyon khadi thi, par Sujan Singh ka tharakpan jari raha aur wo lagatar Chanchal ki choot mein halke halke dhakke laga rahe the waise lagayein bhi kyun na ab lund chanchal jaisi kamuk gadrai aurat ki choot mein ho to kaun khud ko rok sakta hai,

Idhar bimla ne thoda hosh sambhala aur matha peetate huye boli- hey bhagwan ye ho kya raha hai yahan, itni Besharmi itna paap.. aur chanchal tu ye hi sanskar diye the tujhe humne, are pahle apane hi sasur ke sath aur ab Sujan bhai saab ke sath, aur bhai saab door hato ab usse.

Bimla ne gusse mein bola,

Chanchal- nahi chachaji chodte raho,

Chanchal se ye sunkar sab hairan rah gaye aur Sujan Singh khushi se uski choot mein dhakke lagane lage,

Chanchal- amma apani kyun nahi kahti pahle apane hi damaad se chudwa li aur ab bete jaisa Vineet,

Bimla ye sun hairan rah gayi ki chanchal ko uske aur damad ji ke bare mein pata hai,

Bimla - wo wo teri wajah se hi mere aur damad ji ke beech wo sab hua kyunki tu apane sasur ke sath lagi hui thi tujhe bachane ke liye mujhe karna pada,

Chanchal Sujan Singh ko lekar bistar par aai aur bistar par ghodi ban kar chudne lagi aur boli - acha phir abhi Vineet se kiske liye chudwa rahi thi, mere liye...

Chanchal se aise khule shabd sun bimla hairan ho rahi thi wohin beti ko samne chudte dekh uske andar hi andar uttezna bhadak rahi thi,

Bimla - mujhe to pata hi nahi tha ki ye Vineet hai mujhe laga tha ki damad ji hain...

Chanchal- to phir bhi damad ji se hi sahi aai to chudne hi thi na?

Chanchal ki is baat ka Bimla ke paas koi jawab nahi tha,

Chanchal- Vineet amma ke muh ke paas apana lund kar,

Vineet turant chanchal ke kahe anusar Bimla ke muh ke samne lund karke khada ho gaya, ye sab Sujan Singh bade romanch ke sath Chanchal ko chodte huye dekh rahe the,

Chanchal- amma ab dekhlo tumhe kya karna hai, kadak jawan lund tumhare paas hai ab aage kya karna hai tum dekho...

Chanchal ne itna kah diya aur khud Sujan Singh ke lund se chudne ke maze lene lagi, idhar Bimla kuch pal yun hi shant rahi aur phir dheere se bistar se uth gayi to Vineet ka to muh hi ban gaya usne udas hokar Chanchal ke chehre ki or dekha jo ki khud apani amma ko uthta dekh rahi thi, chanchal ki nazar Vineet se mili to usne ishare se use shant rahne ko kaha.. sath hi use ishare se apane paas bula lia, Vineet bhi khushi se aage chanchal ke samne ghutno par khada hua to agale hi pal chanchal ne uske lund ko jo ab tak uski amma ki choot mein tha muh mein bhar lia aur choosne lagi...

Bimla chadar lapete huye bistar se uth khadi hui aur phir darwaze tak gayi, ek baar usne mud kar peeche dekha to sab bistar par aapas mein lage huye the, wo wohin khadi hokar kuch sochnr lagi peeche se teeno ki aahhhein uske kano mein pad rahi thi, khaskar uski beti ki ghuti hui siskiyan..

Idhar Tau Bhateeja Chanchal ko pakar bahut khush the,

Sujan Singh - ahhh chanchal bitiya aah kya badan hai teraaaahh mazaa aa gaya, ohhh..

Unhone Chanchal ko peechhe se chodte huye kaha,

Vineet- haan tauji, socha nahi tha chanchal jeeji ke sath bhi karne ka mauka mil jayega ahhhh kya garam muh hai ohhh jeeji...

Vineet aankhein band karke Chanchal ke garam muh aur jeebh ka anand le raha tha ki tabhi use achanak se dhakka laga aur wo bistar par peeche ki or gir gaya usne aankhein khol dekha to Bimla samne thi vineet ye dekh hairan bhi hua aur khush bhi aur yahi haal Chanchal aur Sujaan Singh ka hua dono hi bimla ke bapis aane se khush huye, Bimla ne muskurate huye apani bitiya ko dekha to Chanchal ke chehre par apani amma se bhi badi muskan aa gayi, apani bitiya ki aankhon mein dekhte huye bimla jhuki aur jhukkar Vineet ke lund ko muh mein le lia,

Apani amma ko ye karte dekh Chanchal ke muh se bas ohhhh ammmmaaahhhhhh nikal paya aur wo Sujan Singh ke lund par jhadne lagi, idhar Bimla ne Vineet ke lund ko poori lagan se choosna shuru kar diya, charo samajh gaye the ki raat ab lambi hone wali hai,

Raat lambi aur chaunkane wali neeche ke ek kamre mein bhi thi, Madhuri maze se ek sath dohri chudai ka anand le rahi thi, ek mard neeche se uski choot chod raha tha to doosra peeche se uski kasi hui gand ke maze le raha tha, ki tabhi achanak se bijli aa gayi aur Madhuri ki nazar jaise hi apane neeche mard par padi jiska lund uski Choot mein tha Madhuri behosh hone se bachi, wohi haal us mard ka bhi hua jo ki madhuri ko neeche se chod raha tha, madhuri ke muh se sirf itna nikal paya - haaye daiyya...

Wohin Neeche lete mard ke muh se nikla- mummyyyyyyyy.....

Madhuri ke neeche aur koi nahi balki uska khud ka beta Raman tha jiska lund uske janmsthan mein jad tak ghusa hua tha wohin Madhuri ki gand mein Poorvi ke pati Pankaj ka lund tha,

Raman ko jaise hi ye ehsas hua ki uska lund uski maa ki choot mein hai wo sare hosh kho baitha sath hi uska lund maa ki choot mein hi pichkariyan chhodne laga... Madhuri ko bhi Apane bete ka ras apani choot mein bharta hua mahsus hua to wo bhi jhadne lagi, wohin Pankaj ko tab jakar ahsas hua ki unke sath Vineet nahi Raman hai jab unhone uski awaaz suni aur unhe jab ye ehsaas ho gaya ki Madhuri ne apanr hi bete se chudwa lia hai to wo bhi khud ko jhadne se rok nahi paye, kuch der kamre mein bilkul sannata raha koi kuch nahi bola kuch pal baad Pankaj ne Madhuri ki gand se lund nikala to madhuri bhi apane bete ke lund se hatkar bagal mein let gayi koi kisi se nazarein nahi mila raha tha, Raman to ab bhi bilkul hairan tha jo hua wo soch soch kar, par uska lund jhadne ke Baad bhi bilkul tan kar khada tha,

Khair is sannate ko Pankaj ne toda aur bola- ab jo ho gaya so ho gaya use badla nahi ja sakta, zyada soch kar bhi kya fayda,

Ye kahkar Pankaj ne dono ki or dekha dono hi maa bete bilkul nange ek doosre ki bagal mein let kar chhat ko ek tak nihare ja rahe the, aur uski baat ka kisi ne koi jawab nahi diya....

Madhuri ki choot se bete ka ras bahkar bahar aa raha tha to gand se Pankaj ka,

Raman ko yakeen nahi ho raha tha ki usne apane saadu ke sath milkar apani maa ko chod diya... Halanki bahan ke sath wo chudai kar chuka tha par maa ke sath to shayad usne socha bhi nahi tha, usne apna ras wohin giraya jahan se ek din wo nikla tha, Raman yahi sab soch raha tha aur uska lund utna hi kadak hota ja raha tha, idhar Madhuri to bilkul sunn thi use samajh nahi aa raha tha kya kare kya kahe kaise in halat ko sambhale,

Kuch der baad Raman uth kar baitha aur chehra mod kar apani nangi maa ko bagal mein lete dekha jo ki ab bhi lagatar chhat ko tak taki laga kar nihar rahi thi, Raman ko na jane kya soojha ki wo palat kar apani maa ke upar aaya aur agale hi pal uska lund ek baar phir se uski maa ki choot mein tha, aur wo bina ruke danadan apani maa ki choot mein dhakke lagane laga..

Madhuri Raman ki is harkat se bilkul hairan rah gayi usne socha nahi tha ki Raman aisa kuch karega par bete ke lund ka ehsaas use garam karne laga, ab jab wo janti thi ki uska beta use chod raha hai wo bahut uttezit hone lagi, wo apane bhai se chudwa chuki thi to rishton mein chudai uske liye paap nahi tha par bete se chudai phir bhi ek khas ehsaas tha jise pakar uske muh se siskiyan nikalne lagi par ye siskiyan zyada der nahi nikal paai kyunki Pankaj ne jab dekha ki maa beta phir se shuru ho gaye hain to wo khud shamil hone se mahi rok paya aur Madhuri ke bagal mein jakar uske muh mein apana lund ghusa diya jise Madhuri maze se choosne lagi...

Raman ke liye ek ehsaas tha apani maa ko chodna sath hi doosra ehsaas ye bhi tha ki apani maa ko kisi ke sath bantna aur phir usse apani maa ko chudte dekhna ye sab mahsoos kar wo behad uttejit hone laga, aur behad tez dhakkon se apani maa ko chodne laga, savitri bhi apane bete ke is akramak andaz ko pasand kar rahi thi jo apani maa ko randi ki tarah chod raha tha, ki tabhi Madhuri ko ehsas hua ki Raman ne apana lund uski choot se nikal lia hai Madhuri jo uttezna ki lahar par sawar thi bete ki is harkat se hairan rah gayi par jab tak wo kuch bol pati ya kar pati agale hi pal use bete ka lund apani gand mein ghusta mahsoos hua aur phir andar jad tak sama gaya,

Raman ne apani maa ke pairon ko apane kandhe par chadhaya aur phir apani maa ki gand marne ka adbhut anand lene laga, wohin Madhuri ko bhi bete se gand marwane ka ek alag hi ahsas hua to wo aur ache se Pankaj ka lund choosne lagi, wohin uski gand mein bete ka lund satasat andar bahar ho raha tha...

Andar wale kamre mein drishya thoda badal gaya tha aur abhi Chetan ka lund ghodi bani hui Savitri ki gand mein andar bahar ho raha tha jo ki aage jhuk kar apane samne leti hui khushi ki choot chat rahi thi,

Chetan- ahhhhh Chachi kya maska gand hai Tumhari pata hota ki tum taiyar ho to kab ka chod lia hota.

Khushi- uhmmmm haannnnn bhaiyaahhh kitna mast chaat rahi hain chachiiiiii aahhhhhhh mera to moot hi nikal jayega lagta hai,

Chetan- Ahhhhh ohhhhhhhhh ..

Khushi- ab pata chala ki Rimmi bhabhi ki garmi kahan se aai hai.

Khushi ne Savitri ka sir apani choot par dabate huye kaha..

Chetan- hahahah haan sahi kaha gudiyahhh

Savitri Bhai bahan ki baatein sun bhi rahi thi par sath hi apane kaam mein bhi lagi hui thi aur khushi ki choot ko jhadne par majboor kar rahi thi... Chetan ki khushi ka thikana nahi tha badal badal kar kabhi khushi to kabhi Savitri dono ko hi jee bhar ke chod raha tha sath hi teeno apani chudai ke kisse bhi sanjha kar rahe the..

Wohin Udayveer bhi ek tarah se jannat mein hi the kyun khud peeth par let kar Poorvi ko apane lund par uchhalte huye dekh rahe the, Poorvi ne Udayveer ko ek aur tohfa diya tha aur unka lund apani gand mein lekar uchhal rahi thi...

Udayveer Poorvi ke gol matol chutadon ko uchhalte aur thirakte huye dekh sammohit se ho rahe the wohin apane lund ko uski kasi hui gand mein andar bahar hota hua dekh khud ko dunia ka sabse khushkismat insan maan rahe the...

Khushkismat to Charan Singh bhi kam nahi the jo ki apani dono bahuon ko chod chuke the aur abhi Rimjhim ko leta kar uske upar chadh kar 69 ke aasan mein uski choot chatate huye usse lund chuswa. Rahe the....

Wohin unki doosri bahu apani Amma ko apane sare kartab dikhane ke mood mein thi aur abhi Vineet aur Sujan Singh dono ke lund ko ek sath lekar chud rahi thi Vineet ka lund Chanchal ki gand mein tha to Sujan Singh Neeche let uski choot baja rahe the,

Bagal mein baith kar Bimla apani beti ko do lund jhelte huye dekh apani choot mein ungali kar rahi thi...

Kuch hi der mein Chanchal dohri chudai ke karan jhhad gayi aur dono tau bhateeja ne use utar kar neeche lita diya aur apana dhyan Bimla ki or kia jis par bimla thodi ghabrai to par uttezna us par hawi pad gayi..

Sujan Singh let gaye aur Bimla ne thoda hichkichate huye Sujan Singh ke lund ko pakad kar apani choot par rakha aur neeche baithne lagi aur Sujan Singh ka lund uski choot nigalne lagi, sujan Singh ne hath aage badhakar uski bhari chuchhiyo ko masalte huye kaha- kaisa lag raha hai Bhabhi ji?

Bimla - ahhhh aaaj ye teesra lund hai jo meri choot mein ja raha hai isse pahle sirf Chanchal ke baba se chudi thi, ab khud sochlo kitna mazaa aa raha hoga...

Sujan Singh - kuch naye anubhav hi to jeene ka maza dete hain bhabhi ji.

Sujan Singh neeche se uski choot mein dhakke lagate huye bole.. wohin Bimla ki siskiyan nikalne lagi par agale hi pal Vineet ne lund uske muh mein ghusa band kar di...

Bimla do lund ke beech thi ek uski choot mein tha ek uske muh mein wo soch rahi ki isse achha kya ho sakta hai, ki tabhi kuch aisa hua jisse uska poora badan sihar gaya use apani gand ke chhed par ek garam ehsaas hua usne turant vineet ka lund muh se nikal kar peeche dekha to hairan rah gayi, uski beti uski gand ka chhed apani jeebh se chat rahi thi, ye dekh to Bimla uttezna se pagal si hone lagi, par chanchal ne apana kaam jari rakha, aur maa ki gand ko chatati rahi wohin bimla is ahsaas se pagal si hoti ja rahi thi, khair kuch der baad Chanchal ne apani amma ki gand ki chhed se jeebh hatai aur jaise hi jeebh hati Vineet savitri ke muh se aake taiyar khada tha... Chanchal ne khud vineet ka lund pakda aur use chaat kar geela kia aur phir use apani maa ki gand ke chhed par rakh diya aur vineet kk ishara kia to Vineet ne ek dhakka lagakar apana lund uski gand mein ghusa diya jiske sath hi bimla ki cheekh nikali par jise Sujan Singh ne apane Honthon se band kar dia tha aur uske raseele Honthon ko choos rahe the...

Kuch hi der mein tau bhateeja ne apani practise ke anusar jaldi hi Bimla ki gand aur choot ko lay badh tareeke se chodne lage. ... Bimla to jaise aanand se pagal si hone lagi, usne jeewab mein kabhi kuch bhi aisa mahsoos nahi kia tha, lund se bhare hone ka ehsaas dono chhedon se ek sath uthti tarange uske liye bilkul naya aur anootha anubhav tha uske muh se lagatar siskiyan aur aahein nikal rahi thi wohin Chanchal apani maa ko aise dekh muskura rahi thi, aur aage kya kya hone wala hai use soch kar apani choot masal rahi thi..

Neeche wale kamre mein Madhuri ke paas to kuch masalne tak ki gunjaish nahi thi, do lund uskr andar bhi ghuse huye the aur danadan use chod rahe the Pankaj let kar neeche se uski choot maar raha tha to Wohin Raman apani maa ko apane sadu ke sath bantate huye uski gand maar raha tha..

Raman- ahhhhhh ohhhh mummy mazedaar gand hai tumhari ohhh....

Madhuri- ahhhhhh beta kabhi socha nahi tha tujhse ye sunne ko milegaahh ahhh ahhh ohhhhhhhhhhhhhhhh

Pankaj- haan ahhhhh sach mein chachi Tumhari choot ka bhi koi jawaab nahi hai, aur ye badi chuchhiyan ahhh man karta hai chooste rahein...

Pankaj ne Madhuri ki badi chuchhiyan ko dabate huye kaha,

Raman- kaisa lag raha hai Pankaj Bhaiya meri mummy koaahhh mere sath chod kar,

Pankaj- ahhhh jannat ka maza mil raha hai, ab lag raha hai jaldi hi apani maa ko bhi chodna padega,

Madhuri- ahhhhhh Pankaj ahhh tum bhi madarchod banna chahte ho ahhh..

Pankaj- haan chachii ahhhh

Madhuri- ohhh kitna badhiya ho jayega dono maa agal bagal mein apane bete se chudwayein to...

Raman- ohhh ahhhhhh haan mummy Ahhhhh.

Pankaj- ohhhhhhh ahhhhh chachiiiiii main to kab se apani maa ko chodna chahta hun par safal nahi huaaahhhh...

Raman- ohhh ahhhhhh main bada kismat wala hun Jo mujhe apani maa chodnr ka mauka mil gaya,

Madhuri- are betaaahhhhhhh agar pata hota ki bete se ahhhhhh ohhhh ahhhhh chudne mein itna maza aata hai to na jane kab ka chudwa leti,

Raman- haaye kya mazedaar hota mummy school jane se pahle tumse lund chuswata aakar tumhe chodta,

Madhuri- ohhhhhh ek maaaahhh ko aur kya chahiye,

Teeno ki baaton se hi lag raha tha ki teeno kitne uttezit hain, aur us uttezna ka parinam ye hua ki Pankaj aur Raman ne ek baar phir se Madhuri ke dono chhedon ko apane apane ras se bhar diya wohin Madhuri to is chudai ke dauran kitni baar jhadi thi use khud pata nahi tha,

Aur dono ke jhadte jhadte wo ek baar phir se jhad gayi, aur teeno hi ek doosre ke bagal mein dher ho gaye bistar par…

Teeno soch rahe the khaskar Raman aur Madhuri ki jo aaj hua usse unka jeewan aage kya kya mod lega,

Chodampur

Mamta aur Sabhya ke jane ke baad Nilesh aur Rajan kaam par lage huye the, thodi hi der mein wahan Karma bhi apane papa aur chachaji ki madad ke liye pahunch gaya to pahunchte hi Rajan ne uske kaan marod diye aur bola- beta tu itna bada ho gaya ki humse chhupaye rakha sab kuch,

Uske baad Nilesh aur Rajan ne use bataya ki ab Rajan aur Mamta ko bhi sab kuch pata hai, jise jankar karma bhi khush hua ki chalo ab aapas mein to kisi se kuchh nahi chhupana padega,

Iske baad teeno kaam mein lag gaye aur sham tak kaam mein hi lage rahe, aur uske baad wohin naha dho kar ghar aa gaye, ghar pahunchte pahunchte andhera ho chukaa tha, Mamta Palli bhi karma ke yahan hi maujood thi to Rajan bhi Nilesh Karma ke sath wohin pahunch gaya, pahunchte hi sabke liye chai bani aur chai ki chuskiyan lee jane lagi,

Rajan- kyun be tu humari god mein moootte mootte itna bada ho gaya ki humse hi baatein chhupane laga,

Rajan ne Anuj ko chhedte huye kaha,

Anuj- are chacha main to kab se batana chahta tha,

Rajan- to bataya kyun nahi.

Anuj- dar lagta tha, waise bhi ab acha hai kuch bhi chhupana nahi padega.

Mamta – are koi nahi Anuj tere chacha teri tang kheench rahe hain..

Karma- aur kheencho chacha ek Tang badi kardo iski..

Palli- haan bhaiya tabhi phir langda ke chalega, maza aayega hahaha.

Anuj- chhup kar Palli ki bachhi nahi to teri gardan chhoti kar dunga.

Sabhya – lo phir shuru ho gaye ye dono,

Shalu- in dono ko to bas mauka chahiye ladne ka.

Mamta- ek hi time par nahi jhagadte ye..

Nilesh – haan chudai karte huye..

Is baat par sab hans pade,

Shalu- ae Karma waise ye sach hai ki tune neetu aur rajjo jeeji ko bhi daboch lia..

Nilesh – are bilkul sach hai Karma ki badaulat humein bhi Rajjo mil gayi chodne ko..

Anuj Palli dono ke muh se ek sath nikla- kya Rajjo Chachi…

Sabhya – dekho to kaise dono ki zuban bhi ek sath khulti hai.

Rajan- are Karma yaar Rajjo bhabi ka jugad humare liye bhi laga uski badi chuchhiyan aur gand dekh kar hi khada ho jata hai,

Shalu- bas jeeja kabu rakho apane armaano par।

Karma- koi nahi chacha aaj raat bhi bulaya hai Rajjo Chachi ne jaldi hii itna khol dunga ki tumhare samne bhi tange khol dengi।

Rajan- ye hai humara raja beta,

Mamta- dekho to inhe choot dilade wo inkaa Raja beta...

Anuj- lalchi chacha hain humare..

Palli- acha tu nahi hai jaise lalchi.

Anuj- nahi main nahi hun,

Palli- iska matlab tu agar mauka mile to bhi Rajjo chachi aur Neetu jeeji ke sath kuch nahi karega.

Anuj- are maine aisa to nahi kaha.

Is par sab zor se hans pade…

Shalu- fans gaya betaa.

Anuj- are main to kah raha tha ki..

Tabhi Karma ka phone baja to Anuj ki baat adhuri rah gayi,

Karma- are dekho Jiski baat ho rahi thi unka hi hai Rajjo chachi.

Mamta- tadap rahi hai lund ke liye.

Karma ne sabko shamt karate huye phone uthaya- haan chachi…… acha.. abhi?....... Chalo theek hai koi baat nahiiii…

Ye kah kar Karma ne phone rakh diya,

Karma- lo sari yojna dhari ki dhari rah gayi.

Rajan- kyun kya ho gaya?

Karma- are Deenu chacha aur sab bapis laut aaye hain.

Sabhya – itti jaldi kaise?

Karma – papa ne gadi karwa di thi na isliye kaam nipta kar laut aaye to aaj raat ka plan khatam.

Nilesh – koi nahi baad mein bahut mauke milenge.

Rajan- haan aur kya kab tak bachegi Rajjo Rani..

Is par sab hans pade..

Anuj- are koi meri to sunlo..

Sabhya – haan tu bol are sab mere Lala ki bhi sunlo

Rajan- haan bhai Anuj ko bolne do sab.

Shalu- haan Anuj bol tu sab sunenge..

Anuj- are yaar sab maze lene lage,

Palli- tu hai hi maze lene wali cheez,

Rajan- ae Palli kam se kam bolne to de bechare ko .. Bol Anuj.

Anuj- are main bol raha tha ki jab sabko sab pata hi chal gaya hai aur sab isse khush bhi hain to…

Sabhya – toh?

Anuj- to tum sab ne sare kapde kyun pahan rakhe hain ab to khul ke rah sakte hain bina kapdo ke ghar mein.

Sabhya – dhattt, sab pata hai iska matlab ye thode hi hai ki nange hi ghoomein ghar mein..

Mamta- aur kya ghar ke aur kaam bhi hote hain lalla.

Shalu- aur kya ab chalo khana bhi banana hai.

Rajan- waise isme burai kya hai.

Mamta- tum bhi shuru ho gaye.

Nilesh – nahi baat to sahi hai ab dekho garmi hai, aur tum auraton ki humesha yahi shikayat rahti hai ki itne kapde pahan kar garmi lagti hai,

Anuj- aur kya isse garmi se bhi rahar milegi.

Karma- haan ye nahi kah rahe ki Poore nange hi raho jise jo jitna sahi lage utna pahno na man kare na pahno.

Shalu- chalo wo to theek hai par abhi khana bana lein phir sochenge is bare mein.

Palli- are mausi khana banane mein hi to garmi lagti hai agar utarne hi hain to pahle utaro,

Sabhya – ye bhi sahi hai..

Anuj- hain na, main to utar raha hun.

Ye kah kar anuj ne apane kapde utar diye aur poora nanga ho gaya…

Palli- brsharam…

Rajan- hum bhi Anuj ke sath hain bhai..

Ye kah kar Rajan ne bhi kapde utare aur sirf ek dhoti kamar se lapet li.

Nilesh – ye sahi jugad hai yaar hum bhi dhoti lapet letr hain khula khula lagega..

Ye kah Nilesh ne bhi sare kapde utar diye aur sirf ek dhoti kamar se lapet li…

Palli- Anuj ke sath sath papa aur tauji bhi brsharam ho gaye.

Mamta- chal badi aai sharam wali, waise jeeji kya kahti ho humein to ye sahi lag raha hai.

Mamta ne apani saare utarte huye kaha,

Shalu- kahna kya tumne utar diya hai to faisla ho hi gaya hai,

Karma- jab sab razi hain to main bhi taiyar hun… ye kah karma ne bhi papa aur chacha ki tarah dhoti lapet li.

Ab sirf auratein rah gayi thi..

Sabhya- chalo sab taiyar hain to kya dikkat hai, waise khana banane mein garmi to lagti hi hai,

Shalu- chalo jeeji sahi hai to shuru ho jao..

Sabhya- haan aati hun utar kar.

Mamta- utar kar aati hun matlab.

Sabhya- tu bhi na bilkul baudam ho jati hai kabhi kabhi… are utarke kapde almari mein rakh denge toh gande bhi nahi honge ..

Mamta- ye to sahi kaha..

Iske baad sari auratein kamre mein ghus gayi.

Rajan- in auraton ka bhi kuch nahi ho sakta, batao kapde utarne ke liye bhi andar gayi hain.

Nilesh- ye hi to auratein mardon se alag hoti hain sochne ka tareeka hi bilkul alag hota hai,

Anuj- kapde pahanne bhi andar jati hain aur utarne bhi bahar.

Sab hansne lage ki tabhi dheere dheere ek ek karke sab bahar aain to sabki aankhein chaudhi ho gayi..

Sabse pahle Palli aai jiske badan par sirf ek kachhi aur bra thi par sabke samne usne wo dono bhi nikal di aur poori nangi ho gayiuski santari akar ki chuchhiyan aur badan sabke samne aa gaya

Phir Mamta nikli jiske badan par sirf ek peticoat tha uska badi chuchhiyan aur gora pet gahri nabhi sabke samne thi..

Phir Shalu nikli jisne bra aur ek kachhi pahani hui thi par uski kachhi itni chhoti thi ki jisme uske bade chutad bilkul nange hi lag rahe the peeche se to kachhi uske chutadon ki darar mein poori tarah se gayab ho gayi thi.

Akhiri mein sabhya nikli jisko dekhkar sabko hairani bhi hui aur aankhein bhi badi hui kyunki Sabhya ke badan par upar blouse tha aur blouse ke neeche Wo bilkul nangi thi, Sabhya ki choot gand sab kuch sabke samne tha…

Anuj- are waah maa sabse zyada mast to tum lag rahi ho…

Karma- waise sahi bhi hai agar mazri se pahan sakte ho to kuch bhi pahano…

Rajan- humara to lund uthne laga sabko dekh kar.

Mamta- par tum baithe raho abhi khana banana hai..

Sabhya- haan bhai chalo phir der hogi bekar mein..

Iske baad Palli ko chhodkar sari auratein rasoi ke kaam mein lag gayin… Palli bhi Karma aur Nilesh ke beech khat par baith gayi to dono hi uske badan par hath phirane se khud ko nahi rok paye, wohin Baatein bhi lagatar jari thi, kuch hi der mein Palli ke muh mein Nilesh ka lund tha… aur wo unke lund ko poori lagan se choos rahi thi doosri Nilesh lund chuswate huye Rajan se baaton mein lage the…

Thodi der mein Rajan uthe aur bole- main ek baar dekh ke aata hun kya ban raha hai aaj kuch acha khane ka man hai…

Wo rasoi mein chale gaye aur angan mein unki beti Palli apane pyare tauji ko apani chuchhiyan pila rahi thi, Anuj Palli ke peechhe baith kar uski gand chatne mein laga tha to Karma sabko dekhte huye Anjali ko msg kar raha tha,

राजन रसोई में पहुंचे तो सामने का दृश्य देख खुश हो गए क्यूंकि सामने सभ्य के नंगे चूतड़ थे जो की काम करते हुए हिल रहे थे,

राजन का लुंड तो ये नज़ारा देखते hi पूरी तरह कड़क हो गया, राजन आगे बढे और पीछे से जाकर सभ्य से चिपक गए, उनका नंगा लुंड सभ्य के नंगे चूतड़ों की दरार में सेट हो गया वहीं राजन के हाथ सभ्य के पेट को सहलाने लगे..

राजन - क्या बना रही हो भाभी?

सभ्य- अरे भैया गोभी आलू बना रहे हैं, सभ्य ने राजन के लुंड को अपने चूतड़ों पर महसूस करते हुए कहा,

राजन - अरे ये दोनों कहाँ गयी, खाना बनाने को तो सब बोल रहे थे,

राजन ने अपने लुंड को सभ्य भाभी की गांड की दरार में घिसते हुए कहा,

सभ्य- ुहममम ममता मूतने गयी है और शालू छत से कपडे उतरने, पर तुम क्या कर रहे हो भैया रसोई में..

राजन- अरे हम, हम तो कुछ खाने खाये थे,

सभ्य- पर अभी खाना तो बना hi नहीं भैया,..

राजन - अरे भाभी खाने के अलावा भी कई चीज़ हैं यहाँ खाने वाली, तुम कहो तो खा लूँ.

सभ्य- हाँ बिलकुल खा लो किसने रोका है,

सभ्य ने ये कहा तो राजन उससे दूर हो गए पर अगले hi पल सभ्य को अपने चूतड़ों पर हाथ महसूस हुए जिन्होंने उसके चूतड़ों को फैलाया और फिर उसे अपनी गांड के छेड़ पर एक गरम चिकना एहसास हुआ जो को राजन की जीभ थी...

राजन अपनी जीभ सभ्य भाभी के गांड के छेड़ पर चलते हुए उसे कुरेदने लगे.

sabhya-ahhhhhh भैयाहहह ओह्ह्ह्हह्हह ऐसे खाना कैसे बनेगाःह्ह्ह्ह...

पर राजन अभी जवाब देने के मूड में नहीं थे बल्कि राजन तो अपनी जीभ नुकीली करके उसे सभ्य की गांड में घुसकर जीभ से hi छोड़ने की कोशिश करने लगे...

जारी रहेगी....
 
तीनो की बातों से hi लग रहा था की तीनो कितने उत्तेजित हैं, और उस उत्तेजना का परिणाम ये हुआ की पंकज और रमन ने एक बार फिर से माधुरी के दोनों छेदों को अपने अपने रास से भर दिया वहीं माधुरी तो इस चुदाई के दौरान कितनी बार झड़ी थी उसे खुद पता नहीं था,

और दोनों के झड़ते झड़ते वो एक बार फिर से झाड़ गयी, और तीनो hi एक दुसरे के बगल में ढेर हो गए बिस्तर पर…

तीनो सोच रहे थे खासकर रमन और माधुरी की जो आज हुआ उससे उनका जीवन आगे क्या क्या मोड़ लेगा, अब आगे


अपडेट 195

रात भर पूरे घर में चुदाई की धूम मची थी हर कोई किसी न किसी के साथ व्यस्त था और पूरे घर पर वासना का उत्तेजना का नशा रात भर रहा जिसके कारन कई रिश्ते बदले तो कई राज़ खुले तो कई लोग करीब आये.

खैर अगली सुबह का सूरज उग चूका था अभी सब लोग बिलकुल साधारण और आदर्शवादी दिख रहे थे जितना दिख सकते थे.
मौसम का मिजाज़ फिर से बिगड़ा हुआ था और सुबह से hi हलकी हलकी बारिश हो रही थी, जो की फसल के लिए अछि थी...

घर में आंगन में बैठ कर तीनो समधी चाय की चुस्कियां ले रहे थे, तीनो के hi चेहरे पर आज एक अलग ख़ुशी नज़र आ रही थी और तीनो की वजह अपनी अपनी थी.. चरण सिंह खुश थे अपनी छोटी बहु और सुजान सिंह की बेटी के साथ हम बिस्तर होकर, वहीं उदयवीर की ख़ुशी थी पूर्वी के बदन का आनंद जो उन्होंने रात भर लिए था, वहीं सुजान सिंह की ख़ुशी थी उदयवीर की बेटी और बीवी दोनों की जबरदस्त चुदाई.

तीनो hi अपनी ख़ुशी चाहकर भी साँझा नहीं कर सकते थे, और इधर उधर की बातें कर रहे थे, वहीं चेतन रमन पंकज विनीत भी ऊपर वाले कमरे में बातों में लगे थे और आज क्या कर सकते हैं उसकी योजना बना रहे थे, रमन और पंकज ने मिलकर चेतन को उन दोनों और माधुरी के बीच हुई घटना बताई थी तो चेतन का सारा ध्यान तबसे अपनी माँ की चुदाई की बात पर hi था, इधर विनीत ने भी बता दिया था की रत में उसने और ताऊजी ने चंचल जीजी और बिमला चची को खूब छोड़ा था,

रमन- मतलब हर कोई किसी न किसी के साथ व्यस्त था रात भर,

पंकज- हाँ, और वो भी अपनी पत्नियों के आलावा.

चेतन- ये साला हो क्या रहा है, भाई बहन, माँ बीटा, सास दामाद, बहु ससुर. इतनी हवस भरी है क्या हम सबमें.

पंकज- हाँ चेतन भैया भरी तो है सब में होती है बस यहाँ लोग उसे निकल प् रहे हैं.

रमन- जो भी हो मज़ा आ रहा है..

पंकज- मादरचोद बन कर हाहाहा.

इस पर सब हंसने लगे.

रमन- हाँ भाई सच कहूं तो ऐसा एहसास कभी नहीं हुआ जो मम्मी के साथ मिला.

पंकज- तो चेतन भैया तुम कब बन रहे हो मादरचोद.

चेतन इस सवाल से थोड़ा झिझक पर सोचा रात को बहन को छोड़ा है और अब इन लोगो से क्या शर्माना - भाई ख्याल से hi लुंड खड़ा हो रहा है मम्मी को छोड़ने के, बस जितनी जल्दी मिल जाये उतनी जल्दी छोड़ दूंगा.

इतने में रिम्मी चंचल पूर्वी और ख़ुशी भी चाय नाश्ता लेकर आ गयी सबके लिए .

रिम- क्या बातें हो रही हैं सब में, चलो नाश्ता करलो..

चेतन- बस सब जो हो रहा है उसके बारे में बात कर रहे थे..

चंचल - क्या हो रहा है?

रिम- चुदाई. पर अभी नाश्ता..

रिम्मी ने ऐसे कहा तो सब हंसाने लगे..

चंचल - तो फिर इसके बारे में क्या बात?

रमन- यही भाभी की आगे क्या करना है?

पंकज- चेतन भैया का तो पक्का है अपनी मम्मी को छोड़ना.

रिम- तो फिर चंचल जीजी तुम भी अपने बाबा का लुंड चख कर देख लो.

चंचल - धत्त्त ऐसे कैसे.

पूर्वी- अरे सही में जीजी मस्त छोड़ते हैं चाचाजी पूरी रत छोड़ा है.

चंचल- सही में? लुंड कैसा है बाबा का?

पूर्वी- खुद खाओ खुद जान जाओ..

इस पर दोबारा ठहाके गूँज पड़े,

रिम- वैसे एक बात तो है हैं सरे लोग hi ठरकी हम तो हम हमारे बढे भी.

ख़ुशी- और नहीं तो क्या मुझे तो यकीन नहीं हो रहा मम्मी ने भैया से छुड़वा भी लिए,

चेतन- सावित्री चची ने मुझसे... और सासु माँ भी दो लुंड चख चुकी.

रमन- पापा लोग भी काम नहीं हैं.

चंचल- रिम्मी तेरे पापा ने भी खूब छोड़ा है मुझे और अम्मा को विनीत के साथ मिलकर.

रिम- हाँ जीजी और हमारे ससुर जी तो रात भर मेरी गांड hi मरते रहे,

पंकज- अरे ख़ुशी सारा प्यार भाइयों पर hi लिटा दिया या हमारे लिए कुछ बचा है...

चंचल- अरे क्यों नहीं बचा होगा तुम भी भैया hi हो उसके,

पूर्वी- पर उसके भाइयों से पूछलो वो अपनी बहन की छूट बाँटेंगे.

रमन- अरे पंकज भैया रात अपनी माँ छोड़ी तुम्हारे साथ मिलकर अब भी हमारी नियत पर शक है क्या?

चेतन- और क्या चाहिए बताओ.

पंकज- ख़ुशी तू hi बता? अरे...

सबने ख़ुशी की और देखा तो हैरान रह गए क्यूंकि सामने ख़ुशी और विनीत एक दुसरे के होंठों को चूसने में लगे हुए थे...

रिम- लो जीजा तुम पूछते hi रह गए और विनीत मोर्चा मार गया..

चंचल- अरे करने दो वैसे भी हर भाई की तमन्ना होती है अपनी बहन की ननद को छोड़ने की...

रिम- फिर तो बराबरी भी हो जाएगी.

चेतन- कैसे?

रिम- तुम लोग उसकी बहन छोड़ते हो वो तुम्हारी छोड़ेगा अब. हाहाहाहा.

चंचल- अरे इससे मुझे सूझा है क्यों न इन दोनों की शादी करा दें?

रिम- अरे हाँ जीजी क्या बात कही है. क्यों जी क्या कहते हो.

रमन- मुझे भी सही लग रहा है ऐसे में शादी के बाद भी हम दोनों भाई अपनी बहन के साथ चुदाई जार पाएंगे.

चंचल- देखा अपना फायदा पहले सोच लिया.

चेतन- अरे भाई जिन्हे करनी है उनसे तो पूछलो. क्यों भाई तुम दोनों का क्या कहना है?

ख़ुशी और विनीत के होंठ अलग हुए और दोनों ने hi एक दुसरे की और देखा फिर इस ख्याल से hi मुस्कुरा पड़े,

रिम- अरे बताओ भी, शर्मा रहे हो बेकार में.

विनीत- मुझे कोई दिक्कत नहीं है,

पंकज- तुझे क्या दिक्कत होगी ख़ुशी जैसी लड़की बीवी के रूप में मिले तो.. ख़ुशी तू बता.

ख़ुशी- मुझे मंज़ूर है, यह अचे भी है और मुझे पसंद भी हैं..

इस पर सब खुश हो गए,

रिम- अरे सुनो अभी तुम लोगो ने सुना ख़ुशी ने क्या बोलै?

चंचल- क्या?

रिम- यह बहुत अचे हैं.. अभी से पत्नी धरम शुरू.

ख़ुशी- भाभीईई.

पंकज- चलो भाई ये बढ़िया हो गया ,

चेतन- मैं बढ़ो से बात करूँगा इस बारे में.

चंचल- ख़ुशी चल देख तो ले पति का लुंड कैसा होगा.

चंचल की बात सुनकर ख़ुशी ने विनीत का पजामा खिसका कर लुंड बहार निकला तो लुंड सामने पाकर वो संतुष्ट थी..

रिम- चला लोगी ननद रानी इससे काम?

ख़ुशी- पहले तरय तो कर लूँ..

ये कह उसनर विनीत के लुंड को मुँह में भर लिया वहीं सब उसकी हरकत पर तेजी से हंसने लगे.

चेतन- रिम्मी दरवाज़ा बंद कर दे कोई बहार से न देखले..

रिम्मी ने उठ कर दरवाज़ा बंद किआ..

चेतन- अब अपने भाई की शादी पक्की होने की ख़ुशी में ज़रा मेरा लुंड चुस्दे.

रिम- बिलकुल भैया ये भी पूछने की बात है, भाई का रिश्ता होने की ख़ुशी में मुँह मीठा तो बनता है.

पंकज- चंचल भाभी तुम भी अपनी ननद के रिश्ते की ख़ुशी मनाओ और मेरे लुंड से मुँह मीठा करो..

पंकज ने अपना लुंड निकलते हुए कहा.

चंचल- नेकी और पूछ पूछ..

रमन- साली साहिबा लगता है हम दो hi बचे हैं मुँह मीठा करने के लिए.

पूर्वी- तो करवाओ मेरा मुँह मीठा जीजा जी..

कमरे में चार जगह लुंड चूसै होने लगी, ख़ुशी अपने होने वाले पति के रूप में विनीत को देख रही थी और उसके लुंड पर उसे प्यार आ रहा था जिसे वो पूरी तरह दिखा भी रही थी कभी चूस कर तो कभी पूरा मुँह में लेकर.

वही बाकि सब भी ऐसी hi हालत में थे रिमझिम अपने जेठ के लुंड को खूब गले तक लेकर चूस रही थी तो चंचल पंकज की गोलियों को जीभ से चाट कर पंकज को गुड़ गुदा रही थी, पूर्वी और रमन 69 के आसान में एक दुसरे को भरपूर सुख दे रहे थे... दरवाज़ा बंद था और सरे बड़े नीचे थे इसलिए थोड़ा समय था hi..

चेतन ने रिमझिम से लुंड चुसवाते हुए अपनी बहन की और देखा जहाँ पर अब थोड़ा बदला हुआ नज़ारा था,





विनीत ने ख़ुशी के मुँह से लुंड निकल कर उसे पीछे की और लिटा दिया था और उसकी t-shirt को ऊपर कर उसके नंगे खूबसूरत पेट और चूचियों से खेलते हुए ख़ुशी के रसीले होंठों को चूस रहा था, वहीं उसका हाथ ख़ुशी के निक्कर को भी खोल चूका था...

अपनी बहन को किसी और के साथ देख चेतन के मन में मिले जुले भाव आ रहे थे,

उसे यकीन नहीं हो रहा था की उसकी गुड़िया जैसी बहन कितनी बड़ी हो गयी थी, समय कितनी जल्दी बीत जाता है, ऐसा लगता है कुछ दिन पहले की hi बात है जब वो साथ में स्कूल जाते थे और चेतन उसका बस्ता खुद उठाकर ले जाता था उसके लंच बॉक्स से लेकर पानी की बोतल तक की ज़िम्मेदारी चेतन की होती थी, और आज उसकी वही बहन इतनी बड़ी हो गयी है की उसकी शादी की बात हो रही है, बड़ी तो वो हो गयी है तभी तो उसने अपने भैया को ऐसा तोहफा दिया जो शायद hi कोई बहन अपने भाई को देगी, अपने बदन का तोहफा, हाय कितना भाग्यवान हूँ मैं, जो ख़ुशी ने अपने भाइयों को अपने लिए चुना, जहाँ लड़कियां आज कल बॉयफ्रेंड बना बना कर अपना कौमार्य भांग कर लेती हैं वहीं उसकी बहन ने ये सौभाग्य अपने भाइयों को दिया,

उसी तरह वो अपने पति होने का सौभाग्य विनीत को देना छह रही है तो इसमें बुराई क्या है, ये सोचते हुए चेतन की नज़र विनीत पर पड़ी जो अब ख़ुशी का निक्कर नीचे खिसका कर उसकी छूट को जीभ से चाट रहा था और ख़ुशी लगातार आहें भर रही थी..





ख़ुशी -ओह्ह्ह्ह अहम्म्म्म ऐसी हीईईई ahhhhhhhhhhh...

ख़ुशी अपने हाथो को विनीत के सर में घूमते हुए उसका उत्साह बढ़ा रही थी,

चेतन ने ये देखा और तभी अचानक उसे कुछ ऐसा महसूस हुआ जिससे वो बिलकुल चौंक गया, रिम्मी उसका लुंड चूसते हुए एक उंगली से उसकी गांड का छेड़ कुरेदने लगी, और चेतन के लिए ये बहुत था अगले hi पल चेतन गुर्राते हुए अपना रास रिम्मी के मुँह में छोड़ने आगा जिसे रास की प्यासी रिम्मी सारा जातक गयी झड़ने के बाद चेतन हफ्ते हुए बैठे hi थे की उन्हें पंकज की सक गहरी आठ सुनाई दी और चेतन ने पंकज को देखा तो पाया की वो भी अपना रास चेतन की बीवी के मुँह में भर रहे हैं जिसे देख चेतन मुस्कुरा दिया...

पंकज और चंचल भी चेतन और रिम्मी की तरह एक तरफ बैठ कर आराम करने लगे और बिस्तर की और देखने लगे,

पंकज - आज दोनों सुहागरात मन कर hi मानेंगे..

चेतन- हाँ लग रहा है कोई होश hi नहीं है दोनों को...

चंचल - तो क्या हुआ मन लेने दो न तुमने तो मनाली न अपनी बहन के आठ अब उसे भी तुम्हारी बहन के साथ मानाने दो..

रिम- हाँ मैं तो कहती हूँ ऐसे hi रिश्ता पक्का किआ जाये चुदाई के साथ.

पूर्वी - ोहहणममममम

अचानक से पूर्वी की एक आह निकली जो की रमन के ऊपर झाड़ रही थी रमन ने भी अपना रास पूर्वी के मुँह में जमा करा दिया था...

और अब वो दोनों भी ख़ुशी और विनीत को देख रहे थे,

रिम- ख़ुशी, अगर तुम्हे विनीत पति के रूप में स्वीकार है तो उसके लुंड को अपनी कासी हुई छूट की सैर करवाओ.

ख़ुशी- भाभी तुम भी न, वैसे सही भी है एक बार तरय कर लेना चाहिए..

ख़ुशी ने हँसते हुए विनीत का लुंड मुठियाते हुए कहा,

पंकज - हाँ भाई पहले इस्तेमाल करें फिर विश्वास करें.

विनीत भी नीचे लेट कर हंस रहा था सबकी बातें सुनकर,

ख़ुशी ने विनीत के ऊपर जगह ली और उसके लुंड को पकड़ कर सीधा किआ फिर कमरे में सबको देख कर बोली - सब तैयार हैं?

सबने हाँ के और हंसी के साथ जवाब दिया, फिर ख़ुशी ने विनीत के चेहरे की और देखा और बोली- तुम तैयार हो मेरे लिए?

विनीत- हमेशा..

बस फिर क्या था ख़ुशी ने विनीत के लुंड को छूट पर सेट किआ और फिर नीचे होती गयी और विनीत का लुंड उसकी छूट को चीरता हुआ अंदर घुस गया, जिसके साथ hi सब तालियों से ख़ुशी मानाने लगे...

ख़ुशी ने कुछ पल विनीत के लुंड को अंदर महसूस किआ और फिर धीरे धीरे उसके लुंड पर ऊपर नीचे होने लगी





दोनों भाई अपनी बहन को किसी और से चुड़ते हुए पहली बार देख रहे थे,

रमन- समय कितनी जल्दी निकल जाता है न? अभी कल तक लगता था ख़ुशी अभी बच्ची hi तो है और अब देखो...

रिम- ाचा बड़ी भी तो उसे तुमने hi किआ है अपना लुंड उसकी कुंवारी छूट में पहली बार डालकर.

रमन - हाँ और मुझे बहुत ख़ुशी है की वो मैं था..

चेतन- वही मैं थोड़ी देर पहले सोच रहा था की कितनी जल्दी समय बीत गया. कल तक ख़ुशी बाछहि hi तो थी हमारे लिए.

ख़ुशी- ओह्ह्ह अह्ह्ह्ह भैयाहहह मैं तो अब भी बाछहियी hi हूँ तुम्हारे लिए और हमेशा रहूंगी...

चंचल - नहीं बीटा अब तुम बच्ची नहीं रही अब औरत हो गयी हो, वैसे औरत बनने के भी फायदे हैं अपने...

पूर्वी -कौनसे फायदे जीजी?

चंचल- सबसे बड़ा फायदा तो यही है जो अभी ले रही है, चुदाई का.. देखो तो सही कितने अचे लग रहे हैं दोनों विनीत का लुंड बिलकुल फिट जा रहा है ख़ुशी की छूट में...





विनीत नीचे से धक्के लगाकर ख़ुशी को तेज़ी से छोड़ रहा था, सबकी बातें सुनकर धक्के लगते हुए उसने अपने हाथों से ख़ुशी के दोनों चूतड़ों को फैलाकर सबको उसके लुंड और ख़ुशी की छूट का ाचा चित्र दिखाया...

विनीत- ahhhhhhhhhhh जीजा बड़ी गरम छूट है तुम्हारी बहन की अह्ह्ह मज़ा आ रहा है...

चंचल- कोई नई विनीत अब तू भी इनका जीजा बनने वाला है दोनों एक दुसरे की बहन छोड़ा करोगे...

चेतन- इसीलिए तो ये शादी और भी ज़रूरी है क्यूंकि जिस तरह का रिश्ता हम भाई बहन के बीच बन गया है, अगर ख़ुशी की शादी कहीं और होती है तो वो चल नहीं पायेगा..

रमन- बिलकुल सही कहा भैया और अब बिना अपनी प्यारी बहन को चोदे मैं नहीं रह सकता.

चेतन- मैं भी नहीं...

रिम- देखो तो भाइयों का प्यार बहन की छूट के लिए... वैसे तुम लोग पहले भाई होंगे जो अपनी बहन की सुहागरात का सीधा प्रसारण देख रहे हो..

पूर्वी - ये सुहागरात थोड़े hi है, ये तो बात पक्की हो रही है लड़की लड़का एक दुसरे से परिचित हो रहे हैं.

Chanchal-phir सुहागरात में क्या होगा..

पूर्वी- हमारे परिवार को देखते हुए तो यही लगता है की सुहागरात पर ख़ुशी चुड़ते चुड़ते थक जाएगी, दोनों ससुर भी बहु की छूट में घुसना चाहेंगे और एक दो देवर भी हैं तो समझ लो की ख़ुशी का कोई छेड़ खली नहीं रहेगा...

रिम - लड़के के जीजा तो यहीं बैठे हैं ये भी कहाँ छोड़ने वाले है सलहज को ये तो लग नहीं रहा ज़्यादा देर रुकेंगे...

पंकज - अब ख़ुशी को देख कर कोई रुक सकता है क्या ....

चंचल - फिर तो तुम दोनों भाई खूब छोड़ो ख़ुशी को ताकि उसे ऐसी चुदाई का अनुभव हो जाये,

इधर विनीत ने ख़ुशी को झुका कर घोड़ी बना लिए था और पीछे से दनादन छोड़ते हुए आहें भर रहा था,





विनीत के चेहरे से hi लग रहा था की वो झड़ने के बेहद करीब है पर वो झड़े उससे पहले hi ख़ुशी की एक अह्ह्ह निकली और वो स्काक्खलित होने लगी ख़ुशी के झड़ने का पता चलते hi विनीत ने भी खुद को ढीला छोड़ दिया और अपनी होने वाली पत्नी की छूट को अपने रास से भर दिया,

सबने इस पर भी ताली मार कर दोनों का स्वागत किआ..

विनीत ने ख़ुशी की छूट से लुंड निकला और बगल में लेट गया, ख़ुशी भी पड़े पड़े हांफ रही थी, दोनों की नज़रें मिली तो दोनों मुस्कुरा रहे थे, विनीत ने चेहरा आगे कर ख़ुशी को चूम लिए...

चंचल- अरे चलो अब नीचे नहीं तो बेकार में सब पूछने लगेंगे.

पूर्वी- हाँ चलो.. चलो.

चंचल- तुम दोनों यही रुको एक दुसरे के साथ समय बिताओ..

पंकज- और क्या ये सही भी है..

रिम- बस दरवाज़ा लगा लेना हमारे अलावा किसी और ने देख लिए तो गड़बड़ हो जाएगी.

ख़ुशी- जी भाभी...

सब एक एक करके बहार निकल जाते हैं.

ख़ुशी- दरवाज़ा लगा दो पतिदेव.

विनीत से मज़ाक करती हुई कहती है.

विनीत- तुम भी अभी से?

हँसता हुआ उठ कर दरवाज़ा लगता है और बापिस बिस्तर पर जाकर ख़ुशी को बाहों में भर कर लेट जाता है.

नीचे तीनो संधनें भी खूब चहक रही थी, बिमला भी आज खुल कर मज़ाक कर रही थी वजह थी रात की दोहरी चुदाई वो भी बेटी के साथ अब वो पूरी तरह खुल चुकी थी... माधुरी भी दोहरी चुदाई का सुख पाकर वो भी अपने बेटे से बहुत खुश थी उसकी ख़ुशी चेहरे पर झलक रही थी...

इतने में सब लोग नीचे आ गए और सरे लोग आंगन में जमा हो गए...

चरण सिंह - तो बच्चों आज का क्या प्रोग्राम बनाया है?

चरण सिंह ने अपनी दोनों बहुओं को देखकर कहा.

पंकज- क्या प्रोग्राम बनाया जाये चाचाजी बारिश hi हुए जा रही है लगातार.

उदयवीर - हाँ बारिश तो हो hi रही है.

उदयवीर ने बोलै पर थोड़ा सकुचाते हुए ये सोचकर की पंकज की पत्नी को मैं रात भर छोड़ता रहा...

रिम- घर पर hi कुछ मज़ेदार करते हैं...

चंचल- मज़ेदार पर क्या?

रिम- वही तो सोचना है.

माधुरी - अरे ख़ुशी नहीं दिख रही?

चंचल - वो सो रही है मम्मी जी.

सूजन सिंह- विनीत भी गायब है?

चेतन- वो भी सो रहा है अरे ये बच्चे रात में देर तक फ़ोन चलते रहते हैं फिर लेट तक सोते हैं.

चरण सिंह - अरे कोई नहीं सोने दो यहाँ छुट्टियां मानाने आये हैं आराम करने तो करने दो, वैसे भी बारिश में क्या hi करेंगे.

पंकज- तो फिर क्या किआ जाये आज सोचो सब लोग..

बिमला- बिजली भी नहीं है जो टीवी वगेरा देख कर टाइम काट लें...

चंचल- हाँ अम्मा कुछ और hi सोचना पड़ेगा.. ऐ रिम्मी कुछ सोच न.

रिम- सोच रही हूँ जीजी पर मैं क्या सबब सोचो न... ऐ जी तुम hi सर्च करो न मोबाइल पर कुछ मिल जाये तो...

रमन- एक काम कर सकते हैं...

चोदामपुर

चोदामपुर में शाम का वक़्त था और जैसा की आपने पिछली अपडेट में पढ़ा की मर्दों के ज़ोर डालने पर कैसे औरतें घर में काम कपडे पहनने को सहमत हुईं, और फिर खाना बनाने चली गयी, कुछ देर बाद राजन भी खाने की तयारी देखने चले गए,

आगे की कहानी, कर्मा की ज़ुबानी...

आंगन में बैठा हुआ मैं अंजलि से मैसेज में बातें कर रहा था, पापा मेरे सामने वाली खत पर बैठे थे वहीं उसी खत पर अनुज पल्ली को लेता कर छोड़ रहा था और पापा बीच बीच में पल्ली की चूचियों से खेल रहे थे... खैर तभी अंजलि ने बोलै की फ्री हो तो फ़ोन करलो मश्ग में ठीक से बात नहीं हो पति, मैं भी खुश हो गया, और तुरंत छत की और भगा यहाँ रहता तो आह्हः अह्ह्ह की बातें समझाना मुश्किल हो जाता.

छत पर जाकर मैंने उसे फ़ोन लगाया और उसने भी तुरंत hi उठा लिया.. उसकी मीठी सी आवाज़ में Hello सुनकर मन में तरंगे उठने लगी,

खैर ऐसे hi बातें शुरू हो गयी, मैं उसकी पसंद नापसंद पूछने लगा वो बताने लगी,

उससे बात कर के पता चल रहा था की उसे साधारण चीज़ें बहुत पसंद थी, कोई ज़्यादा बड़ी ख्वाहिशें नहीं छोटी छोटी चीज़ों से खुश होने वाली इंसान थी, अपने बारे में बताने के बाद उसने मेरी पसंद नापसंद के बारे में पूछा लेकिन जैसे hi मैंने बताना शुरू किआ न जाने कहाँ से उसका खड़ूस बाप आ गया और उसने बोलै पापा बुला रहे हैं बाद में बात करती हूँ, ये कहकर फ़ोन रख दिया खैर मैं भी छत से नीचे आया और जैसे hi आंगन में देखा तो हैरान रह गया, यहाँ सारा नज़ारा hi बदला हुआ था...

मैंने देखा सामने एक खत पर राजन चाचा अपने पेअर नीचे लटका के लेते हुए थे और उनके ऊपर उनका लुंड अपनी छूट में लिए हुए माँ ऊपर नीचे हो रही थी,






माँ के बदन पर सिर्फ जो ब्लाउज था वो खुला हुआ था और उनकी चूचियां उनके साथ ऊपर नीचे झूल रही थी.

ये देख कर मेरा पूरा दिमाग hi हिल गया, हालाँकि मैं जनता था की राजन चाचा भी अब सब जानते हैं और हमारे साथ शामिल हो चुके हैं पर फिर भी पर फिर भी पहली बार माँ को किसी और के साथ देख बदन में झटका सा लगा, एक मिनट को मैं ज्यों का त्यों रुक गया, और सोचने लगा तो अहसास हुआ की मुझे कोई जलन या किसी भी प्रकार का कोई बुरा ख्याल नहीं आ रहा था न hi चाचा को लेकर बल्कि ये जो अचंभित हुआ मैं वो बस एक तो अचानक देखने से और साथ hi उत्तेजना से भी था, मेरा लुंड तुरंत पूरी तरह से तन गया था अगले hi पल मेरा दिमाग बिलकुल सामान्य हो गया था..

मैंने आंगन में नज़र घुमा कर देखा तो पाया अनुज अभी भी पल्ली को बुरी तरह से छोड़ रहा था शायद चाचा और माँ की चुदाई देखकर उसपर भी कुछ असर हुआ था...





पल्ली की सिसकिया लगातार पूरे घर में फ़ैल रही थी वही अब उसके साथ माँ की सिसकिया भी थी,

इसी बीच रायण चाचा ने मुझे खड़े हुए देखा तो बोले- कर्मा बीटा इधर aa...ahhh भाभीइइइइइइइओह्ह्ह्ह

मैं उनके और माँ के पास जाकर खड़ा हो गया

में- हाँ चाचा

राजन- ुह्मन आह्ह्ह्ह मेरे साथ मिलकर अपनीइ माँ को नहीं छोड़ेगा, चल भाभी के मुँह में अपना लुंड दे, भाभी चूसोगी न अपने बेटे का लुंड?

माँ- ओह्ह्ह्ह भैया बेटे के लुंड के लिए कोई माहहह मन कर सकती है क्या?

माँ ने इतना कहा तो मैंने अपना लुंड उनके मुँह के सामने कर दिया जिसे माँ ने तुरंत मुँह में भर लिया, इसे देख चाचा आहें भरने लगे

राजन- ओह्ह्ह भाभी ऐसे hi चूसो अपने बेटे का लुंड मेरे लुंड पर उछालते हुए..

मैं समझ गया चाचा मेरे साथ माँ को छोड़ने के एहसास से बहुत उत्तेजित हो रहे थे, इधर माँ के गरम मुँह का जादू मेरे लुंड पर भी चलने लगा मेरे मुँह से भी ओह्ह्ह्ह माहहह की सिसकिया निकलने लगी...

राजन- अह्ह्ह्हह्हह भाभी क्या चूऊऊत है तुम्हारीइइइइइइइ ahhhhhhhhhhh चूसो अपने बेटे का लुंड ..

माँ तो कुछ जवाब नहीं दे सकती थी क्यूंकि उनके मुँह में मेरा लुंड था इसलिए मैं hi बोलै...

में- हाँ चाचा माँ की छूट बिलकुल माखन जैसी है आह्ह्ह्हह गरम और छोड़ो अह्ह्ह माहहह...

मुझसे ये सुन तो चाचा और गरम हो गए और हो भी क्यों न ऐसा कब सुनने को मिलता है जिसमे बीटा माँ को छोड़ने के लिए उत्साहित कर रहा हो

राजन चाचा की उत्तेजना ऐसे देखि जा सकती थी की अगले तीन चार धक्कों के बाद hi उनका लुंड झड़ने के करीब आ गया उन्होंने तुरंत माँ की छूट से लुंड निकला और उन्हें अपने ऊपर से हटा दिया जिससे मेरा लुंड भी माँ के मुँह से निकल गया, चाचा ने माँ को अपनी और घुमा कर अपना लुंड जल्दी से माँ के मुँह में घुसा दिया और फिर एक गहरी गुर्राती हुई आवाज़ के साथ झड़ने लगे और माँ के मुँह में अपनी पिचकारी छोड़ने लगे... माँ भी रास की हमेशा प्यासी रहती थी तो वो भी तुरंत उनका रास गटकने लगी, तभी मुझे अचानक याद आया .

में- अरे पापा कहाँ गए?

चाचा- रसोई में खाना बनवा रहे हैं,

चाचा ने हांफते हुए कहा...

इधर चाचा की पिचकारी जब खली हो गयी तो उन्होंने माँ के मुँह से लुंड निकला और फिर सामने वाली खत पर बैठ गए.. और बोले- कर्मा अब तू छोड़ भाभी को, माँ बेटे की चुदाई देखने का बड़ा मन ही..

अब ऐसी फरमाइश पर मुझे और माँ को क्या दिक्कत हो सकती थी.. मैं तुरंत बिलकुल उन्ही की तरह जैसे वो अभी माँ को छोड़ रहे थे उसी आसान में खत पर पेअर लटका कर लेट गया

में- आओ माँ अपने बेटे के लुंड को अपनी गरम छूट में ले लो..

मैंने चाचा की उत्तेजना को और बढ़ाते हुए बोलै तो माँ कहाँ पीछे रहने वाली थी..

माँ- ोहहं मेरे लल्ला को अपनी माँ की छूट चाहिए? आह आजा लल्ला तेरे ग़रक़म लुंड को अपनी छूट में लेकर शांत करती हूँ...

माँ ने मेरे ऊपर आकर मेरे लुंड को अपनी छूट में लेते हुए मेरे ऊपर बैठकर कहा..

माँ की बात सुनकर चाचा का लुंड जो अभी शांत hi हुआ था फिर से उठने लगा...

में- अह्ह्ह्ह मा ओह्ह्ह्हह्ह..

माँ की गरम छूट महसूस कर मेरी आह्ह्ह्हह निकल गयी...

वहीं माँ ने अपनी कमर को मेरे लुंड पर घूमना शुरू कर दिया...

माँ- अह्ह्ह बेताहहह दिखा अब अपने चाचा को की तू कितना मादरचोद है ahhhhhhhhhhh

माँ के मुँह से ये सुनकर मेरे तो बादाम में फुर्ती आ गयी और मैंने माँ की कमर को थमा और नीचे से दनादन उनकी छूट में धक्के लगाने लगा





माँ- अह्ह्ह अह्ह्ह्ह ahhhhhhhhhhh बेताहहह

माँ अपनी चूचियों को थामे हुए सिसकने लगी वहीं इस नज़ारे का सबसे ाचा दृश्य चाचा को दिख रहा था जो मेरे लुंड को माँ की छूट में आता जाता साफ़ देख प् रहे थे.... और अपने पूरे कड़क हो चुके लुंड को मुठिया रहे थे...

चाचा - हाँ ऐसे हीई छोड़ बेटा अपनी माँ को आह्ह्ह्हह कूट दे छूट को..

में - हाँ चाचा आह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह.

माँ- अह्ह्ह बेताहहह आह्ह्ह्हह भैयाहहह तुम्हारा मेरी छूट से अह्ह्ह्ह क्या बैर है जो इसे कुतवा रहे हो मेरे hi बेटे सीए अह्ह्ह?

चाचा- ओह्ह्ह भाभी तुम नहीं जानती कितना तड़पाया है मुझे तुम्हारिई छूट ने, आह्हः न जाने कब से तुम्हे ऐसे बुरी तरह छोड़ना चाहता था...

माँ- ahhhhhhhhhhh भैयाहहह तो छोड़ लेते नाआहहह

चाचा- तुम्हारे संस्कार देखकर डरता था भाभीइइइइइइइओह्ह्ह्ह... पर आज तुम्हे खुद छोड़ कर और बेटे से छुड़वाता देखकर बड़ा सुकून मिल रहा है...

माँ- ahhhhhhhhhhh अह्ह्ह्हह्हह ओह्ह्ह ...

मेरी लगातार दुमदात चुदाई और चाचा की गरम बातों का असर माँ पर ये हुआ की वो झड़ने लगी मेरे लुंड पर और कुछ पल बाद झाड़ कर पीछे मेरे ऊपर गिर गयी और फिर मेरे बगल में खत पर लेट गयी...

चाचा- ले बीटा तूने अपनी माँ को तो थका दिया..

में- हाँ मैंने और तुमने मिलकर चाचा...

चाचा- ले ये दोनों भी लुढ़के हुए हैं, चाचा ने पीछे खत की और इशारा किआ जहाँ अनुज और पल्ली एक दुसरे की बाहों में सुस्ता रहे थे,

में- हाँ काफी देर म्हणत की हैं दोनों ने...

Maa-are रसोई में जाकर देखलो अब तक खाना बना नहीं?

माँ ने लेते लेते hi कहा...

चाचा- हाँ चल चल देखते हैं.

मैं और चाचा रसोई में आये तो यहाँ का नज़ारा भी अलग नहीं था

यहाँ खाने की जगह कुछ और hi बन रहा था, पहले तो हमने देखा की रसोई के दरवाज़े पर hi मौसी कड़ी हैं और अपने बदन से खेल रही हैं रसोई में देखते हुए.





मौसी ब्रा पंतय में hi थी और एक हाथ से अपनी चूचियों को ब्रा के ऊपर से hi दबा रही थी, जबकि उनका दूसरा हाथ कच्ची के ऊपर से उनकी छूट को सहला रहा था, ये देख मैंने और चाचा ने एक दुसरे को देखा की मौसी ऐसा क्या देख रही हैं,

चाचा और मैं आगे बढ़ मौसी के बगल में पहुंचे और रसोई के अंदर नज़र मार कर देखा तो नज़ारा कुछ नया नहीं था पर था कामुक hi.. अंदर पापा और ममता चची चुदाई में लगे हुए थे,

देखते हुए मैंने और चाचा ने नौसी के हाथों को आराम दिया और मैं उनकी छूट को छेड़ने लगा तो चाचा मौसी की चूचियों को दबाने लगे..

पापा ने ममता चची को झुका रखा था उनका पेटीकोट कमर से ऊपर था और पापा पीछे से ममता चची को दनादन छोड़ रहे थे





पापा- ओह्ह्ह्ह ममता रानी अह्ह्ह साली तेरी छूट कितनी भी छोड़ लें मन नहीं भरता... अह्ह्ह्हह

ममता- मैं तो चाहती हु भाई साब मन कभी न भरे,

पापा- कभी भरेगा भी नहीं अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह..

ममता- अह्ह्ह्ह बहार ये जीजी को छोड़ रहे हैं और तुम मुझे यहाँ, अह्ह्ह कितना मस्त लग रहा है...

Papa-yahi तो दोस्ती है अपना सब कुछ बांटते हैं हम, बीवी की अदला बदली का अपना अलग मज़ा है..

इतनी सुनने के बाद हम भी रसोई में अंदर बढ़ गए,

चाचा- ये बात तो सही कही भैया तुमने...

पापा- अरे तुम लोग यहाँ मन भर गया क्या अपनी भाभी की छूट से?

चाचा- अरे नहीं भैया हमने और कर्मा न्र मिलकर भाभी को थका दिया तो वो आराम कर रही हैं,

पापा- पर तुम लोग तो थके नहीं हो, तो शुरू करो प्रोग्राम...

जारी रहेगी..
 
इतनी सुनने के बाद हम भी रसोई में अंदर बढ़ गए,

चाचा- ये बात तो सही कही भैया तुमने...

पापा- अरे तुम लोग यहाँ मन भर गया क्या अपनी भाभी की छूट से?

चाचा- अरे नहीं भैया हमने और कर्मा न्र मिलकर भाभी को थका दिया तो वो आराम कर रही हैं,

पापा- पर तुम लोग तो थके नहीं हो, तो शुरू करो प्रोग्राम...

अब आगे.

अपडेट 196

चोदामपुर

चाचा- हाँ क्यों नहीं.. क्यों साली साहिबा तैयार हो,

चाचा ने मौसी को बाहों में भरते हुए कहा..

मौसी- बिलकुल जीजा पर अब तुम लोग खाना बनाने नहीं दे रहे तो कमरे में hi चलो आराम से hi कर लेना.

ममता- हाँ खाना तो ऐसे बन गया, तो पहले आराम से चुदाई hi कर लेते हैं, चलो भाई साब कमरे में...

पापा- जैसी तुम सब की मर्ज़ी..

इसके बाद हम सब लोग रसोई से निकल कर बहार आये तो अनुज पल्ली और माँ भी उठ चुके थे.

पल्ली- क्या हुआ मौसी?

शालू- होना क्या था, खाना तो कोई बनाने नहीं दे रहा.

माँ- पता था ये नंगे होकर तो बन गया खाना...

चची- तभी तो कमरे में जाकर अचे से चुदाई hi कर लेते हैं फिर खाने पर ध्यान देंगे...

अनुज - मैं भी चलता हूँ.

पल्ली- मैं भी,

में- हाँ चलो माँ...

माँ- अरे तुम लोग चलो खाना बना लेती हूँ

पापा- अरे छोडो न क्या अकेली लगी रहोगी.

मौसी - और क्या जीजी... बाद में बन जायेगा

चची- हाँ तो मिल कर बना लेंगे जल्दी जल्दी,

माँ- अरे तुम लोग भी न, सुनते नहीं हो हम मन नहीं कर रहे, हम कह रहे हैं की तुम चलो शुरू करो, हम सब्ज़ी चढ़ा आते हैं जब तक हमारा एक बार होगा बन जाएगी..

चाचा- हाँ ये तो सही बात कही.

मौसी- हमारी दीदी सबसे समझदार, इस पर सब हंसने लगे.

माँ- चलो तुम लोग आती हूँ मैं..

हम सब कमरे में आ गए और सबसे पहले सबने अपने बदन पर जो कुछ बचे हुए कपडे तबे वो उतर फेंके और फिर चाचा ने मौसी को पकड़ा और बोले- इधर आओ शालू तुम बची हो अभी तक हमसे...

चाचा ने नौसी को अपने स्व चिपकते हुए कहा,

मौसी- हम बचे नहीं हैं जीजा तुमने hi बचाया हुआ है हमें,

मौसी ने मौसा जे कड़क लुंड को अपनी मुठी में भरते हुए कहा...

चाचा- अहह तो अब नहीं बचोगी, न तुम और न hi तुम्हारी रसीली छूट..

च च ने आगे मुँह कर अपने होंठ मौसी के होंठों से मिला दिए.. और दोनों एक दुसरे के होंठों को चूसने लगे..

चची- लो भाई ये जीजा साली तो लग गए एक दुसरे के साथ.

पापा - तो तू हमारे साथ आजा bahu,rasoi में हमारी चुदाई अधूरी छूट गयी थी.. आ पहले चूस दे थोड़ा.

चची- जी भाई साब

पापा के कहते hi चची झुक कर पापा का लुंड चूसने लगी...

पल्ली- कर्मा भैया बहुत दिन हो गए तुमने मेरी छूट नहीं छाती...

में- आजा अब चाट देता हूँ..

पल्ली- आओ खा जाओ मेरी छूट...

पल्ली बिस्तर पर टंगे फैलाकर लेट गयी और मैंने उसकी टैंगो के बीच अपना मुँह घुसा दिया... और उसकी स्वादिष्ट छूट चाटने लगा...

अनुज ने देखा की माँ अभी आई नहीं और तीनो औरतें तो बाकि ने घेरली इसलिए उसने चची का उठा हुआ पिछवाड़ा देखा जो की पापा के लुंड को झुक कर चूसने के कारन था बस अनुज ने जल्दी से चची के पीछे जगह ली और अपना लुंड पीछे से उनकी गांड के छेड़ पर टिकाया और फिर धक्का लगा के अंदर सरका दिया..

चची की अह्ह्ह्ह पापा के लुंड पर भी घुट कर रह गयी और अनुज ने बिना देरी किये गांड मरना शुरू कर दिया..

पापा- बता कर डाला कर न देख चची को तकलीफ हुई..

अनुज- नहीं पापा चची को ऐसे मज़ा आता है, हैं न चची...?

Chachi-hunnmm हूँम्म्म.

चची ने बिना पापा के लुंड को मुँह से निकले जवाब दिया...

इतने में hi अचानक से पापा का फ़ोन बजा बहार से,

पापा- अरे चलो मैं देख लूँ कौन है आता हूँ...

पापा चची के मुँह से लुंड निकल कर बहार चले गए..

चची- अनुज कमीने मैंने कब बोलै ऐसा तुझे की बिना बताये मेरी गांड मरने पर मुझे मज़ा आता है?

इस पर सबकी हंसी छूट गयी...

अनुज- वो चची मुझे लगा आता होगा.

चाचा- हहहह बहुत शैतान है ये...

चाचा ने मौसी की चुकी को मुँह से निकलते हुए कहा और फिर दोबारा से छुच्छी को मुँह में भर लिया..

वहीं उनका एक हाथ मौसी की छूट को मसल रहा था मौसी भी अपनी चूचियां चुसवाते हुए चाचा का लुंड मुठिया रही थी...

मैं अब भी पल्ली की छूट में जीभ घुसा कर अंदर तक चाट रहा था, आउट पल्ली तेज़ तेज़ सिसकिया ले रही थी...

इतने में पापा भी बापिस आ गए और एक बार कमरे में नज़र मरी तो अनुज को चची की गांड मरते देखा और मुझे पल्ली की टैंगो के बीच देखा तो जल्दी से वो मौसी और चाचा के पास गए और मौसी को पलकटकर चाचा का हाथ उनकी छूट से हटाया और अपना लुंड मौसी की छूट में घुसा दिया चाचा बेचारे देखते रह गए..

चाचा- अरे ये क्या बात हुई भाई साब?

Papa-kya हुआ?

चाचा- हम माहौल बना रहे थे शालू के साथ और तुम आये हड़बड़ी में और लुंड घुसा दिया..

इस पर सब हंसने लगे,

चची- और बनाते रहो माहौल हेहेहे..

पल्ली- पापा के साथ कलपद हो गया हेहही.

इस पर और तेज़ हंसी गूंजी..

मौसी- अरे क्या हुआ जीजा मेरा मुँह तो खली है लाओ चूसने तो दो काम से काम.

मौसी की बात सुनकर तुरंत चाचा ने अपना लुंड मौसी के मुँह के आगे कर दिया जिसे मौसी तुरंत चूसने लगी...

चाचा- अह्ह्ह्हह शैली ऐसी हीई.

मौसी के पीछे से पापा उनकी कमर थामे थापें मार रहे थे और चाचा मौसी का मुँह छोड़ रहे थे..





चाचा- अह्ह्ह्हह ओह्ह्ह्ह शालू क्याहहह गरम मुँह है तुम्हारा... भैया वैसे एक बात तो है...

पापा- अह्ह्ह्ह क्याहहह...

चाचा- दुसरे की बीवी छोड़ने में आता मज़ा है...

अनुज- मुझे भी...

चाचा- अभी बताता हूँ तुझे कमीने...

चची- क्यों बताते हो उसने भी तो सही बोलै..

चची ने अनुज से अपनी गांड मरवाते हुए कहा..

की तभी अचानक से बहार से किसी बर्तन के गिरने की आवाज़ आई और फिर माँ के चीखने की...

हम सब लोग चौंक गए और बहार की और भागे किसी ने ये तक नहीं सोचा की बदन पर एक कपडा तक नहीं है बहार जाकर आंगन में तो कोई नहीं दिखा फिर रसोई की और भागे और रसोई में जाकर जो देखा तो हम सब की आँखें फटी की फटी रह गयी, सामने का दृश्य hi कुछ ऐसा था जिसकी मैंने या हम में से किसी ने भी कल्पना भी नहीं की थी..

सब के सब आँखें फाड़े बस रसोई की और देखे जा रहे थे,

सामने माँ अब भी उसी खुले ब्लाउज में नीचे से बिलकुल नंगी थी और कमर से झुकी हुई थी उनके गोल मटोल चूतड़ झुके होने के कारन खुल के बहार की और उभरे हुए थे और उन दोनों चूतड़ों के बीच उनकी छूट में से एक लुंड अंदर बहार हो रहा था और वो लुंड किसी और का नहीं बल्कि मौसा जी का था जो बिलकुल नंगे होकर माँ को छोड़ रहे थे,





हम सब मौसा जी को देख कर बिलकुल हैरान थे और हम सबसे ज़्यादा मौसी थी जो बिलकुल नंगी होकर अपने पति को अपनी बड़ी बहन को छोड़ते देख रही थी, मौसा जी के ऐसे अचानक आने की ह

हमें तो बिलकुल उम्मीद नहीं थी... मौसा जी के ऐसे अचानक लौटने की और फिर ऐसे अचानक माँ के साथ चुदाई करते हुए देख हम में से सभी हैरान थे,

चाचा- अरे शैलेश बाबू?

चाचा ने सबसे पहले बोलै तो जैसे औरों के मुँह में भी जुबान आई..

मौसी - यी सब क्या है जी? कब आये कुछ बताया नहीं..

हम सब के मन में यही सब सवाल उठ रहे थे इधर मौसा माँ की छूट में धक्के लगाए जा रहे थे और माँ भी आहें भर रही थी

मौसा- अह्ह्ह्ह अगर बताते तो अह्ह्ह तुम सब को ऐसे झटका कैसे दे पाते? अह्ह्ह्ह भाभी क्या गरम छूट है तुम्हारी आह्ह्ह्ह मज़ा आ रहा है...

चची - पर भैया ये सब अचानक कुछ बताओ तो सही.

में- हाँ मौसा कुछ बताओ तो सही..

मैं मौसा के लुंड को माँ की छूट से अंदर बहार होते देख रहा था और आज hi के दिन ये दूसरा लुंड था जो मेरी माँ की छूट में घुसा था ये सब देख मुझे एक अलग सा एहसास हो रहा था...

मौसा- अह्ह्ह्ह ुहममम चलो बताते हैं आराम से बैठ कर बात करते हैं आराम से... अह्ह्ह्ह चलो भाभी...

मौसा ने माँ को जो झुकी हुई थी उन्हें सीधा किआ और उन्हें खरा कर के छोड़ते हुए आगे चलने लगे





धीरे धीरे चुदाई के साथ कदम बढ़ाते हुए माँ और मौसा चलने लगे और हम भी उन के साथ चलने लगे, पल्ली ने चूल्हा बंद कर दिया, मौसा माँ को आंगन में पड़ी खत तक ले गए और वहां बैठ गए,

मौसा ने माँ को अपनी तरफ चेहरा कर के बैठा लिए और माँ उनकी गॉड में उनका लुंड अपनी छूट में लेकर बैठ गयी और ऊपर नीचे हो कर छोड़ने लगी वहीं मौसा माँ की उसभलती हुई चूचियों को देख खुद को रोक नहीं पाए और उन्हें दबाने लगे ये सब होते हुए बेचारी मौसी तो इतनी घबरा गयी थी की उनकी आँखों से आंसू निकलने लगे थे, मेरी नज़र मौसी के चेहरे पर गयी तो मैंने उनसे शांत रहने को कहा, मौसा ने भी ये देखा और bole-shalu क्या हुआ रो क्यों रही हो, हमारा आना ाचा नहीं लगा क्या?

मौसी- नहीं ऐसी बात नहीं है हमें बुरा लग रहा है की हम खुद से तुम्हे नहीं बताये...

मौसा- ाचा इधर आओ ज़रा.. अपने आंसू पोंछ लो.

मौसी उनके पास गयी अपने आंसुओं को पोंछते हुए,

मौसा -अब हमारे पैरों के बीच बैठो नीचे...

सब लोग मौसा की बातों को ध्यान से सुन रहे थे और मौसी को भी देख रहे थे, मौसी मौसा के कहे अनुसार बैठ गयी,

मौसा- अब देखो सामने, अपनी जीजी के मोठे मोठे चूतड़ दिख रहे हैं?

मौसी ने हाँ में सर हिलाया

मौसा- उनके बीच देखो हमारा लुंड तुम्हारी जीजी की छूट में अंदर बहार हो रहा है?

मौसी- हाँ..

मौसा- ठीक से देखो, भाभी अपने चूतड़ फैला कर दिखाओ न अपनी बहन को कैसे हमारा लुंड तुम्हारी छूट में अंदर बहार हो रहा है,

माँ ने तुरंत मौसा के कहे अनुसार वैसा hi किया और अपने चूतड़ फैला कर मौसी को और सबको एक ाचा सा दृश्य दिया





माँ की छूट में मौसा का लुंड अंदर बहार हो रहा था उसके ऊपर माँ की गांड का छेड़ बेहद कामुक लग रहा था..

मौसा- अब बताओ कैसा लग रहा है देखकर.. मुझे तुम्हारी बहन छोड़ते हुए..

अब तक मौसी भी थोड़ी शांत हो गयी थी और बोली- ाचा लग रहा है... बहुत ाचा..

मौसा- तो फिर तुम नहीं चाहती की मैं भी तुम सब के साथ मिलकर चुदाई करूँ?

मौसी- चाहती हूँ.

मौसी ने खुश होते हुए कहा, मौसा की इस बात पर हम सब भी खुश हो गए की मौसा भी हमारे साथ जुड़ गए हैं.

मौसा- तो फिर सोचना छोडो, और तुम्हारी बहन छोड़ने दो बड़ी मस्त है...

इस पर सब के चेहरे पर मुस्कान आ गयी..

चाचा- अरे शैलेश बाबू तुमने तो सब को डरा hi दिया...

अनुज- हाँ मौसा ऐसे अचानक कौन एंट्री लेता है.

में- कुछ भी हो मौसा ने सबको हैरान कर दिया.

पल्ली- आये कैसे मौसा तुम चोरो की तरह.

चची- पर ये सब हुआ कैसे हमें भी बताओ..

मौसा- आह्ह्ह्हह ुहममम मुझे भाभी की चुदाई करने दो अह्ह्ह न जाने कब से इन्हे छोड़ने की तमन्ना थी, अह्ह्ह्ह तुम्हारे जो भी सवाल हैं भाईसाहब से पूछो उन्ही को योजना थी साडी...

मौसा ने पापा की और इशारा करते हुए कहा तो हम सब हैरानी से उनकी और देखने लगे जो बैठे बैठे मुस्कुरा रहे थे...

चची- भैया क्या बोल रहे हैं ये तुम्हारी योजना थी?

चाचा- हाँ कुछ समझे नहीं हम?

मौसी- हाँ जीजा क्या योजना थी बताओ अभी.

पापा - बताते हैं पर अपनी बीवी को चुड़ते देख हमारा लुंड खड़ा हो रहा है आजा इसे शांत तो कर दे.. साथ में बताते भी रहेंगे.

पापा ने हँसते हुए कहा. तो मौसी तुरंत पापा के पैरों में लपकी और उनका लुंड मुँह में भर लिया इधर मौसा और माँ की चुदाई लगातार चल रही थी और मौसा की आहों से पता चल रहा था की वो माँ की छूट पाकर कितने आनंदित थे,

लुंड तो मेरा भी खड़ा था पर पापा की बात भी सुन्ना चाहता था इसलिए पल्ली को मैंने अपने ऊपर बिठा लिया और अपना लुंड उसकी गांड में धीरे धीरे सेट कर दिया तो वो भी हल्का हल्का उसभलते हुए गांड मरवाते हुए पापा की बातें सुनने लगी,

अनुज ने चची को फिर से झुका लिया था और उनकी गांड मरने लगा था, इधर चाचा ने मौसी के पीछे जगह लेकर उनकी छूट में लुंड घुसा दिया और उन्हें छोड़ने लगे एक बार फिर से चुदाई का खेल शुरू हो चूका था..

इधर पापा ने बोलना शुरू किया तो उधर मौसा ने जगह बदली और पहले तो माँ के बदन से खुला हुआ ब्लाउज उतर कर उन्हें बिलकुल नंगा कर दिया फिर माँ को खत पर पीठ पर लिटा कर खुद उनकी टैंगो के बीच आये माँ की टांगें फैला कर लुंड उनकी छूट में घुसा दिया और आगे झुक कर माँ के होंठों को चूमते हुए उन्हें छोड़ने लगे





मैं जहाँ बैठा था वहां से मुझे माँ की छूट में लुंड घुसता हुआ साफ़ नज़र आ रहा था...

पापा- अरे हमारे दिमाग में तो ये काफी समय से चल रहा था, की सब को पता है सब मज़े ले रहे हैं और शालू भी ग्लानि महसूस करती थी हम सब के साथ ुसेड लगता था की वो अपने पति को धोखा दे रही है, ये बात हमने सभ्य से कही तो उसने भी बोलै की उसे भी ऐसा लगता है, तो हम दोनों ने फैसला किआ की कुछ तो करना पड़ेगा इस बारे में, तो हमने समय देखकर और काफी सोच समझकर शैलेश को फ़ोन किआ इनसे पूछा की कब तक आ रहे हो, फिर बातों बातों में हमने इनके मन की बात जान्ने की कोशिश की ममता और पल्ली को ये चपड़ hi चुके थे, तो हमने इनसे पूछा की क्या शालू को चुड़ते हुए देख पाओगे,

मौसा- ये सुनकर तो एक पल को हमारा दिमाग hi घूम गया और लुंड तन गया,

पापा- तभी तो हमें तीन बार hello hello बोलकर पूछना पड़ा की सुन रहे हो या नहीं, तब जाकर इनका जवाब आया, खैर किसी तरह से इन्होने बोलै की वो जानते हैं आज नहीं तो कल ये सवाल उनसे पूछा hi जायेगा

मौसा- तो हमने यही कहा की हम तैयार हैं पर शालू को कैसे मानना है ये समझ नहीं जानते..

मौसा ने माँ की आँखों में देखते हुए माँ की छूट में धक्के लगते हुए कहा..





माँ- ahhhhhhhhhhh भैयाहहह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ऐसी हीईईई ahhhhhhhhhhh...

पापा- हमने इनसे कहा की शालू की फ़िक़र मत करो वो मानी पड़ी है, इन्हे पहले यकीन नहीं हुआ फिर कैसे भी करके ये मने पर थोड़े दुखी लगे ये जानकर की उनकी पत्नी उनसे छिपकर छुड़वा चुकी है..

ये सुनकर मौसी ने पापा का लुंड मुँह से निकला और मौसा की और देखकर बोली- इसी का तो हमें दर था.

पापा- ने बापिस उनके मुँह में लुंड घुसा दिया और बोले- आगे तो सुन तेरे पतिदेव कितने ठरकी हैं..

चाचा- बहुत ठरकी हैं ये तो हम भी जानते हैं...

चाचा मौसी की छूट में धक्के लगते हुए बोले....

पापा- अरे सुन तो सही ये थोड़े परेशां दिखे और कुछ बोल नहीं रहे थे हमें लगा की गलती तो नहीं करदी ये बता कर.. अगले hi पल तेरी भाभी ने हमसे फ़ोन लिए और बोली- भैया अपनी बड़ी साली को छोड़ने का मौका भी मिल सकता है...

बस अगले hi पल शैलेश बाबू की आवाज़ आई- हम तैयार हैं भाभी यहाँ का काम निपटा कर जल्दी से जल्दी पहुँचते हैं.. फिर हमने कहा अभी पूरी बात तो सुनलो इतना उत्साहित होने से पहले... इसके बाद इन्हे हमने साडी बात बताई बच्चों के साथ वाली और जितनी भी थी हर तरफ की बता दी.

मौसा- यही तो अब हमें भाभी की छूट छोड़ने का मौका मिलने की बात के आगे कुछ और चाहिए hi नहीं था हम तैयार थे बिलकुल...

इस पर सब हंसने लगे..

माँ- और अब मौका मिल भी गया न भैया देखो तुम्हारा लुंड हमारी छूट में है, वो भी हमारे पति के सामने बेटों के सामने आठ, देखो बेटों के सामने तुम उनकी माँ छोड़ रहे हो... ahhhhhhhhhhh भैयाहहह..

बस माँ का इतना कहना था की मौसा माँ की कामुक बातों से इतने उत्तेजित हुए की अगले दो तीन झटको में hi उनका लुंड माँ की छूट में पिचकारी छोड़ने लगा...

मौसा- ुहममम ahhhhhhhhhhh भाभीइइइइइइइओह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह्हह..

गुर्राते हुए उन्होंने अपना सारा रास माँ की छूट में उढेल दिया... और माँ के ऊपर हांफते हुए गिर गए...

माँ भी चुदाई के बाद हांफ रही थी...

मौसा माँ के ऊपर से हैट कर उनके बगल में लेट गए पर माँ को उन्होंने अपने से चिपकाये रखा और माँ के बदन पर हाथ फिरा रहे थे वहीं उनकी नज़र अपनी पत्नी पर थी जो की चाचा और पापा के लुंड को एक साथ चूस रही थी...





दोनों के लम्बे लुंड को एक साथ मुँह में भरने की कोशिश कर रही गहि, मौसा अपनी पत्नी की ऐसी उत्तेजना और गरमी देख उत्तेजित होने लगे,

माँ- देखो भैया तुम्हारी बीवी को क्या कभी ऐसे देखा है?

मौसा- नहीं भाभी देखा तो नहीं, पर काश देखा होता अगर पता होता तो ये सब कबका करवा लिए होता,

माँ- अब भी देर नहीं हुई है भैया खुल के मज़े करने की.

मौसा- अब तो एक पल भी ख़राब नहीं जाने दूंगा..

ये कहकर मौसा माँ को चूमने लगे...

इधर मैंने पल्ली को अपने ऊपर से हटा कर साइड में लिटा लिए था और उसके पीछे लेटकर उसकी गांड मार रहा था, अनुज चची की गांड मार रहा था घोड़ी बनाकर... दोनों माँ बेटी बड़ी ख़ुशी से सिसकिया लेती हुई अपनी गांड मरवा रही थी.....

इधर चाचा मौसी और पापा ने जगह बदली थी और अब चाचा अपनी पीठ पर लेट गए मौसी ने उनके लुंड को अपनी गांड के छेड़ पर टिकाया और नीचे होकर उसे अपनी गांड में घुसा लिए,

चाचा- अह्ह्ह्हह क्या गांड है शालू अह्ह्ह्ह मज़ा आ रहा है..

चाचा नीचे से धक्के लगाकर मौसी की गांड मरने लगे, मौसी अह्ह्ह्हह अह्ह्ह करके चाचा के लुंड को अपनी गांड में लेकर ऊपर नीचे होने लगी,

पापा- अरे जगह बनाओ हमारे लिए,

पापा ने मौसी और चाचा की टैंगो के बीच आते हुए कहा तो चाचा ने अपनी टांगें खोल दी साथ hi मौसी भी पीछे होकर लेट गयी, और अपने पाई फैला लिए, पापा ने जगह ली और मौसी की छूट पर लुंड का टोपा रखकर अंदर घुसा दिया, मौसी दो दो लुंड से छोड़ने लगी, और आहें भरने लगी,

मौसा इधर अपनी पत्नी को दो मर्दों से एक साथ चुड़ते देख गरम हो रहे थे जो माँ ने भी महसूस किआ..

माँ- देखो भैया तुम्हारी बीवी एक साथ दो दो लुंड अपने अंदर लेकर चुद रही है...

माँ ने हाथ बढ़ा कर मौसा के आधे कड़क लुंड को हाथ से सहलाने लगी..

मौसा- हाँ भाभी अहंमम कभी सोचा नहीं था ऐसा देखने को मिलेगा..

मौसा ने मौसी की छूट और गांड दोनों से लुंड अंदर बहार होते देख कहा.





चाचा का लुंड मौसी की गांड में नीचे से अंदर बहार हो रहा था तो पापा ऊपर से छोड़ रहे थे..

और अपनी बीवी की दोहरी चुदाई देख मौसा तड़प रहे थे..

इधर मैंने और अनुज ने अदला बदली की थी और अभी मैं चची को और अनुज पल्ली को छोड़ रहा था,

में- अह्ह्ह्ह चची तुम्हारी गांड तो कस्ती hi जा रही है,

चची- तुम सब कसने कहाँ देते हो, मार मार के ढीली कर देते हो...

पल्ली- ओह्ह्ह झूठी मम्मी, पता है भैया मम्मी कोई तेल लगाती है आयुर्वेदिक जिससे छूट और गांड कासी रहे.

चची- धत्त्त चुप कर.

में- तेल ाचा काम कर रहा है चची...

इधर मौसा हर पल गरम और उत्तेजित हुए जा रहे थे साथ hi माँ भी उन्हें उत्तेजित करने में कोई कसार नहीं छोड़ रही थी ..

मौसा से ज़्यादा देर नहीं रुका गया और वो तुरंत बिस्तर से उठे और माँ को बिस्तर पर hi घोड़ी बनाते हुए बोले- अह्ह्ह भाभी अब रुका नहीं जा रहा..

और ये कह मौसा ने माँ के चूतड़ों को फैलाया और झुककर अपना चेहरा माँ के चूतड़ों के बीच लेकर अपनी जीभ निकली और माँ की गांड के छेड़ पर चलने लगे..





माँ- ahhhhhhhhhhh भैयाहहह ओह्ह्ह्हह...

मौसा ने माँ की गांड से जीभ हटाई और बोले- अह्ह्ह्ह भाभी क्या स्वादिष्ट गांड हसि तुम्हारी मन करता है चूसता hi रहूं

माँ- अह्ह्ह्ह तो चाटते रहो न भैया जैसे ये और भैया मिलकर शालू को छोड़ रहे हो दोनों तरफ से,

मौसा ने बापिस अपना मुँह माँ की गांड पर लगा दिया और फिर से माँ की छूट से लेकर गांड तक जीभ फिरने लगे..

मैंने और अनुज ने एक नया खेल बनाया हुआ था और माँ बेटी को 69 के आसान में रखा जिससे वो एक दुसरे की छूट चाट रही थी और मैं और अनुज दोनों छोर से उनकी गांड मार रहे थे, मैं पल्ली की गांड में दो चार झटके लगता फिर लुंड निकल के चची के मुँह में घुसा देता, चची भी बड़ी उत्सुकता से अपनी बेटी की गांड का स्वाद मेरे लुंड से ले रही थी, दुसरे छोर पर यही अनुज कर रहा था और पल्ली को उसकी मम्मी की गांड का स्वाद अपने लुंड से दे रहा था..

चाचा और पापा इस एहसास से की मौसी के पति सामने हैं मौसी को और दुमदार तरीके से छोड़ रहे थे.. मौसी भी अब खुल के मज़े ले रही थी, पति से छुपकर चुदाई की जो ग्लानि उन्हें होती थी अब वो भी नहीं थी और अपने दोनों जीजा से दोहरी चुदाई का पूरा आनंद ले रही थी...

चाचा- अह्ह्ह्हह ओह्ह्ह्ह शालू ुहम्म्म्म क्या गांड है ुहममम इतनी गरम ahhhhhhhhhhh...

शालू- ahhhhhhhhhhh जीजा ओह्ह्ह्हह्ह मरुवाह्ह्ह अपने लुंड सीए मेरिइइइ गाआआआंददददद अह्हह्ह्ह्ह...

पापा- दोनों बहानोऊ आह्ह्हह्ह्ह्ह दोनों बहनो की छूट और गाआआआंददददद अह्हह्ह्ह्ह एक जैसी हीी बिलकुल आह्ह्हह्ह्ह्ह वही एहसास जैसा तेरी बहन की गांड में होता है...

मौसा- फिर तो मुझे भी देखना पड़ेगा भाई साब...

ये सुनकर दुसरे बिस्तर से मौसा बोले जिन्होने माँ को बिस्तर पर घोड़ी बनाया हुआ था और चाट चाट कर माँ के चूतड़ गीले कर दिए थे...

मौसा सीधे हुए और अपने लुंड को मुठियाते हुए बोले- क्यों भाभी ले लूँ तुम्हारी गरम गांड का स्वाद...

माँ- अह्ह्ह भैया बिलकुल तभी तो तुम्हारे सामने परोसी हुई है...

माँ ने अपने हाथ पीछे ले जाकर अपने दोनों चूतड़ों को फैलते हुए अपनी गांड को मौसा के सामने परोस दिया..

मौसा ने भी और समय नहीं गंवाया और अपने लुंड के टोपे को माँ की गांड के छेड़ पर रखा और धीरे से अंदर घुसा दिया.





माँ- ahhhhhhhhhhh भैयाहहह...

मौसा- ओह्ह्ह्हह्ह्ह्ह bhaaaaaaaaaabbhii ahhhhhhhhhhh क्या गरम एहसास है..

माँ- ahhhhhhhhhhh भैयाहहह पूरा घुसाड़ूऊऊ अह्ह्ह्ह.

माँ की बात मानते हुए मौसा ने पूरा लुंड माँ की गांड में घुसा दिया और..

मौसा- अह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह आह्ह्हह्ह्ह्ह माहाहहहह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्ह bhaaaaaaaaaabbhii ahhhhhhhhhhh कब से सोचा था इस गाआआआंददददद को मरने काअह्ह्ह आअज्झहह उतना hi मज़ाआहहह आए रहा हैई...

माँ- ahhhhhhhhhhh भैयाहहह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ऐसी हीईईई ahhhhhhhhhhh भैयाहहह करलो अपनी इच्छा पूरी...

मौसा- ahhhhhhhhhhh भाईसाहब, शालू देखो मैं भाभीइइइइइइइओह्ह्ह्ह की गांड मार रहा हूँ... कर्मा अनुज तुम्हारी माँ की गांड में मेरा लुंड है आह्ह्ह्हह.

मौसा की ख़ुशी और उत्साह देखकर हम सब hi हंसने लगे...

मौसी- अब ahhhhhhhhhhh सबको बताते hi रहोगे या छोड़ोगे भी अह्ह्ह्ह देखो ये दोनों जीजा मिलकर कैसे मेरे छेदों की कुटाई कर रहे हैं ..

Mausa-ahhhhhhhhhhh हाँ हाँ मरूंगा ओह्ह्ह .

मौसा माँ की गांड में धक्के लगाने लगे..

इधर मौसी काफी देर से दोनों के बीच दबी हुई थी, तो पापा और मौसा ने आसान बदला और अब मौसी को बिस्तर पर लेता कर उनके पिछवाड़े को बिस्तर के बहार की और किआ खुद दोनों खत से नीचे खड़े होकर मौसी के दोनों छेदों में अपने अपने लुंड घुसा दिए....

चाचा अब भी मौसी की गांड में थे और पापा ने मौसी की छूट को चुना... और कुछ hi देर में दोनों एक बार फिर से ले बना कर छोड़ने लगे...





मौसी- ओह्ह्ह अह्ह्ह्हह्हह देखो जी ये दोनों लोग तुम्हारी बीवी की छूट और गांड फाड़ रहे हैं.

मौसी ने मौसा को पुकारते हुए कहा..

मौसा- हम्म्म तुम्हारे hi जीजा हैं दोनों अब तुम hi झेलो...

मौसी- ahhhhhhhhhhh कैसा पति मिला है अह्ह्ह साली की गांड क्या मिली बीवी की कोई फ़िक़र hi नहीं है...

चाचा- यही होता है शालू दुसरे की बीवी छोड़ने को मिल जाये तो आदमी अपनी अपनी को भूल जाता है..

चची- तुम हिम्मत तो कर के दिखाओ हमें भूलने की....

इस पर सब हंसने लगे....

मौसा- नहीं भाई हम भूले नहीं और न hi भूलेंगे हम तो बोल रहे हैं मज़े लो और मज़े दो सब अपने hi तो हैं. जैसे भाभी हमें दे रही हैं..

मौसा ने माँ की गांड मरते हुए कहा..

माँ- देख रही हूँ ahhhhhhhhhhh बड़ी बड़ी बातें बना रहे हो भैयाहहह.

अनुज- अगर नहीं बनाते तो मौसी मौसा को बना देती बाद में,

मौसा- हाँ भाई हर चीज़ का ख्याल रखना पड़ता है... साली के साथ घरवाली का भी...

मौसा माँ की गांड गहरे लम्बे धक्कों से मरते हुए बोले..





माँ- अह्ह्ह्ह ahhhhhhhhhhh भैयाहहह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्ह घरवाली का ख़यायल आअज्झहह बाद में रखना अभी साली की गांड का रखो...

मौसा- ुहममम ahhhhhhhhhhh भाभीइइइइइइइओह्ह्ह्ह तुम्हारी गांड का ख्याल तो अपनी शादी हुई तबसे है,

चाचा - बड़े पुराने आशिक़ हो भाभी की गांड के, पर हमसे पुराने नहीं हो...

मौसा- अरे भैया जबसे पहली बार देखि तबसे hi आशिक़ हैं हम तो...

माँ- अचछहहह अह्हह्ह्ह्ह आज पता लग रहा है...

चाचा- भाभी हम भी तभी से हैं बाबू पर जबसे कर्मा पैदा तबसे तुम्हारी गांड और फैल गयी तबसे तो पूछो hi मत कितना चाहने लगे हम...

माँ- अह्ह्ह्ह आज चाहत पूरी कर ली भैया तुमने...

मौसा- हाय बिलकुल सही कहा भैया तुमने, पुराने दिन याद दिला दिए,

शालू- ahhhhhhhhhhh जीजा ओह्ह्ह्हह्ह देखो दोनों काआअह्ह्ह तुम्हारी बीवी के आशिक़ हैं दोनों....

पापा- ुहममम पता है मुझे शालू इसीलिए पहले hi दोनों की बीवियों को छोड़ लिए मैंने...

चाचा - अरे भाभी का आशिक़ तो पूरा गाओं है, न जाने कितने लोग लुंड हिलाते हैब भाभी की गांड देखकर.

माँ- ahhhhhhhhhhh भैयाहहह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्ह तुम्हे कैसे पता...

चाचा- हम भी उनमे से एक हैं भाभीइइइइइइइओह्ह्ह्ह.....

Mausa-mard मर्द के मन की बात जनता है,

मौसी- ओह्ह्ह्ह माहहह ahhhhhhhhhhh जीजा ahhhhhhhhhhh ुहम्म... काम बाआआत करूऊओ अह्ह्ह्हह और चुदाई पर ध्याअन दोऊ.

मौसी की चीख सुन कर पापा और चाचा ने अपना सारा ध्यान उनकी चुदाई पर लगा दिया और उन्हें ले बना कर दुमदार चुदाई करने लगे,





मौसी दोहरी चुदाई को सह नहीं पाई और चीखते हुए झाड़ गयी और झड़ती भी कैसे नहीं पापा और चाचा मिलकर उनकी तगड़ी छड़ी जो कर रहे थे... मौसी तो झड़ने के बाद बिलकुल पास्ट हो कर पापा के ऊपर गिर गयी...

पर पापा और चाचा ने उनकी चुदाई लगातार जारी राखी..

इधर अपनी पत्नी को झाड़ता देख और माँ की गांड की गर्मी के आगे मौसा भी नहीं टिक पाए और एक बार फिर से उनके लुंड ने पिचकारी छोड़ दी पर इस बार उनका रास माँ की गांड में भर गया.. माँ की गांड में अपना रास भरने के बाद मौसा ने अपना लुंड उनकी गांड से निकला और बगल में पसर गए, ..

इधर चाचा और पापा बेजान से मौसी के बदन को लगातार चोदे जा रहे थे और तब तक छोड़ते रहे जब तक उनके लुंड ने मौसी के छेदों को अपने रास से भर दिया...

और फिर चाचा ने मौसी की गांड से लुंड निकला और फिर मौसी पापा के ऊपर से हैट कर बगल में लेट गयी... मौसी तो जैसे बेहोश सी हो गयी...

तो पापा और चाचा उठ कर माँ और मौसा वाली खत पर आ गए जहाँ माँ ने तुरंत उठकर दोनों के लुंड को अपनी बहन की गांड के स्वाद से चाटकर साफ़ किआ इसके बाद माँ ने मौसा के लुंड को भी चाटकर साफ़ किआ...

इसी बीच अनुज के झटको का भी वहीं अंत हुआ और उसने अपना रास चची की गांड में छोड़ दिया... उसी वक़्त मैंने भी पल्ली की गांड में दो चार धक्के लगाए और गांड में hi झड़ने लगा पर पल्ली भी मेरे साथ झड़ने लगी पर उसके झड़ने का वेग इतना तेज़ था की एक चीख के साथ उसकी छूट से मूट भी निकलने लगा जो की चची के मुँह में भरने लगा, चची इस अचानक आई धार से हैरान रह गयी और जितना हो सके पीने की कोशिश करने लगी पर पल्ली पूरे वेग के साथ मूट रही थी जो की चची से संभाला नहीं गया और उनके चेहरे बदन के साथ साथ बिस्तर पर गिरने लगा...

पल्ली की चीख के कारन सबका ध्यान उसी पर था और जब सबने पल्ली को अपनी माँ की छूट में मोटे देखा तो सबको एक अलग एहसास हो रहा था, पल्ली की गांड से मैंने लुंड निकला तो पल्ली बिलकुल मूतने के आसान में बैठ गयी और अपनी मम्मी के खुले मुँह में मूत्ति रही और फिर जब उसका मूट ख़तम हुआ तो अपनी मम्मी के ऊपर से हैट गयी,

उसके हटते hi देखा चची की हालत बड़ी कामुक थी, चेहरा सर और छाती बेटी के मूट में भीगे हुए थे और चची उठ कर बैठी तो उनके चेहरे से मूट टपक रहा था,

चची को सब आँखें फाड़े देख रहे थे तो चची मुस्कुरा कर बोली- क्यों भाई क्या हुआ सब ऐसे क्यों देख रहे हो और किसी को भी मूट आ रहा है क्या..

चची से ये सुन सब हैरान रह गए खासकर चाचा जो की अपनी बीवी का रंडपना देख हैरान और उत्तेजित दोनों थे,

चची के जवाब में मौसा ने बोलै- भाभी हमें मूतना है,

किसी के मुँह में पेशाब करने की बात मौसा के लिए बिलकुल नयी थी और ममता चची खुद से बोल रही थी तो वो उत्सुकता में या उत्तेजना वस् ये मौका जाने नहीं देना चाहते थे इसलिए जल्दी से बोल पड़े..

और उठ कर तुरंत उनके पास आ गए चची भी मुँह खोल कर उनके सामने बैठ गयी, सब ध्यान से देखने लगे चाचा का लुंड तो बिलकुल कड़क था अपनी पत्नी के मुँह में किसी को मोटे हुए देखने के लिए,

कुछ hi पालो में मौसा के लुंड से मूट की एक धार छूती और चची के चेहरे पर पड़ी मौसा ने कुछ पल चची के चेहरे को भिगोया फिर निशाना चची के खुले मुँह को बनाया और धार सीढ़ी उनके मुँह में मरने लगे, चची जितना पि सकती थी पीने लगी बाकि उनके मुँह से नीचे बहकर उनके बदन को और भीगने लगा..

अनुज- हाय कितनी मस्त लग रही हैं न चची..

पल्ली- मुझे भी अपनी मम्मी जैसी hi बनना है..

चाचा- बीटा तेरी मम्मी जैसी रैंड बहुत काम होंगी दुनिया में..

चाचा ने अपनी बीवी को दुसरे का मूट पीते हुए देख कर कहा...

पापा- हाय तभी तो मज़े हैं हम सब के...

मौसा- अह्ह्ह्हह भभीीीीुइआह्ह्ह्हह आज तक ऐसा एहसास कभी नहीं हुआ..

मौसा ने अपने मूट की आखिरी बूँदें चची के ऊपर टपकते हुए कहा,

चची पूरी मूट में भीगी हुई मुस्कुरा रही थी उनके आस पास पूरी ज़मीन भी मूट से भीगी हुई थी,

मौसा भी उनके पास hi नीचे बैठ गए,

चची- क्यों भैया कैसा लगा?

मौसा- अरे भाभी ऐसा कुछ कभी महसूस नहीं किआ सोचने में कितनी घिन आती है पर करने में बिलकुल अलग hi मज़ा है.

चची- तुम भी स्वाद चखना चाहोगे.

चची के सवाल के जवाब में मौसा ने बस इतना कहा- अब हम चोदामपुर में किसी भी चीज़ के लिए मन नहीं करने वाले और ये कह कर वहीं ज़मीन पर लेट गए और चची को अपने ऊपर आने का इशारा किया,

चची भी तुरंत उठी और मौसा के सीने पर बैठ गयी मौसा ने भी अपना मुँह खोल दिया, मौसी उठ कर अपने पति को मूट पीते देखने के लिए आ गई...

अगले hi पल एक सीटी के साथ चची की छूट से मूट की एक धार निकली और मौसा के चेहरे को भीगते हुए उनके मुँह में जा गिरी, मौसा के चेहरे के भाव कुछ बदले फिर अगले hi पल बड़े चौ से पीने लगे, हालाँकि सारा पीना उनके लिए भी संभव नहीं था पर जितना उनसे पिया गया उन्होंने पिया और बाकि का उनके चेहरे को भीगता रहा..

चची की धार ख़तम हुई तो उन्होंने अपनी कमर आगे कर छूट को मौसा के मुँह पर घिसा और फिर उनके ऊपर से हैट गयी..

मौसी- क्यों जी कैसा लगा मूट का शरबत..

मौसा- हाय ऐसा कभी महसूस नहीं किया अब तो ये हमेशा करूँगा...

मौसा ने चची के बगल में लेटते हुए कहा... दोनों मूट में भीगे हुए एक दुसरे को बाहों में भर कर लेट गए,

पापा- तुम लोगो को देख हमें भी मूट आने लगा,

पापा ने इतना hi बोलै था पल्ली तुरंत नीचे जाकर बैठ गयी और बोली- ताऊजी मेरे ऊपर करो..

चाचा- देखलो बेटी भी तुमसे काम नहीं है.

माँ- आज सबको हो क्या गया है, सब मूतने के लिए तैयार हैं देखो आंगन का क्या हाल हुआ है..

चची- अरे जीजी हो जायेगा साफ़ अभी मज़े लो.. भाई साब प्यास बुझाओ अपनी भतीजी की.

चाचा- क्यों भाई साहब कहीं मिलेगी ऐसी माँ बेटी की जोड़ी..

चाचा ने अपने लुंड को सहलाते हुए कहा.

पापा- नहीं ये सौभाग्य बस कुछ लोगो को मिलता है...

पापा ने अपने लुंड का निशाना पल्ली के चेहरे को बनाते हुए कहा,

और कुछ hi पलों में उनके लुंड से पेशाब की धार पल्ली के सुन्दर से चेहरे को अपने मूट से भीगने लगे.

पल्ली अपनी छूट सहलाते हुए, मुँह खोल कर पापा का मूट अपने मुँह में लेने लगी और पीने लगी, चची की तरह hi उससे भी सारा तो नहीं पिया जा रहा था बाकि उसके मुँह से बहकर उसके पूरे बदन को भीगा रहा रहा.

चची- हाय कितनी सुन्दर लग रही है मेरी बेटी...

चची ने मौसा से चिपके हुए पल्ली को देखते हुए कहा,

पापा का मूट ख़तम होने के बाद पल्ली ने चेहरा आगे किआ और पापा के लुंड को चूसा आखिरी बूँदें निचोड़ने के लिए और फिर छोड़ दिया और अब वो भी अपनी मम्मी और मौसा से चिपक कर बैठ गयी,

पापा बापिस बैठने hi वाले थे की मौसी ने उन्हें रोका और पूछा?

मौसी- जीजा तुम्हे भी प्यास लगी है क्या,?

पापा- अगर पिलाओगी तो मन नहीं करेंगे हम.

बस इतना सुनते hi मौसी उठ कर आई तो पापा ज़मीन पर लेट गए और मौसी ने उनके ऊपर जगह ली उनके सीने के दोनों तरफ टांगें करके बैठ गयी और पापा ने मुँह खोल लिए,

मौसी की छूट से भी एक सीटी के साथ धार निकली और पापा के चहरे को भागने लगी पापा ने अपना चेहरा धार के हिसाब से सही जगह पर किआ और मौसी के मूट को मुँह में लेने लगे, मौसी बड़ी कामुकता से कमर हिला हिला कर पापा के चेहरे और बदन को अपने मूट से भीगने रही थी, उधर मौसा अपनी पत्नी का ऐसा रुप देख कर हैरान उत्तेजित और खुश तीनो थे,

जल्दी hi मौसी के मूट की टंकी खली हुई पर तब तक पापा भी लगभग मूट से भीग चुके थे, और मौसी जब उनके ऊपर से हटी तो वो भी मौसा चची और पल्ली के साथ जाकर बैठ गए,

इधर मौसी वहां से उठी नहीं और वहीं बैठी रही और अपनी छूट के डेन से खेलती रही, इतने में बिना कुछ कहे चाचा उनके सामने जाकर खड़े हुए तो मौसी ने उन्हें देख मुस्कुरा कर मुँह खोल दिया चाचा ने भी मौसी को मुस्कुरा कर देखा और फिर अगले hi पल चाचा के लुंड से मूट की धार निकली जो की सीढ़ी मौसी के चेहरे से टकराई और फिर चाचा ने मूट की धार को मौसी के मुँह में मोड़ दिया, जिससे मौसी का मुँह चाचा के मूट से भरने लगा, इधर मौसा अपनी पत्नी को मूट पीटा हुआ आँखें फाड़े देख रहे थे और अपना लुंड सहला रहे थे, उनकी उत्तेजना बिलकुल चरम पर थी,

इधर चाचा का मूट मौसी जितना हो सके जातक रही थी बाकि आपने मुँह में भर कर बदन पर उढेल दे रही थी, कुछ पल बाद मौसी ने हाथ बढ़ा कर चाचा का लुंड पकड़ा और उसका निशाना अपनी चूचियों पर लगाया और अपनी चूचियों को मूट से भीगने लगी, उनकी चूचियों और पेट गीला करते करते चाचा का मूट भी ख़तम हो गया, चाचा का मूट ख़तम होते hi अगले पल मौसी उठी और सीधा मौसा के पास गयी और उनके लुंड को पकड़ कर अपनी गांड पर टिकाया और नीचे होकर उसे अपनी गांड में ले लिया , मौसा अपनी पत्नी की हरकत से थोड़ा हैरान हुए पर उत्तेजित भी दोनों पति पत्नी मूट में भीग कर चुदाई करने लगे, दोनों का hi बदन लाइट में चमक रहा था इधर चाचा का लुंड भी बिलकुल कड़क था तो उन्होंने माँ की और रुख किआ और माँ के पास जाकर बोले- भाभी तुम्हारी गांड अभी भी हमसे बची हुई है,

ये सुन माँ मुस्कुराई और बोली- तो अब क्या चाहते हो भैयाहहह?

इसके जवाब में चाचा ने माँ को उठाकर बगल में पड़े स्टूल पर ऐसे बिठा दिया जिससे सिर्फ उनका पिछवाड़ा स्टूल से बहार रहे और माँ की गांड बहार की और खुल के आ जाये.. फिर चाचा ने अपने लुंड को पकड़ कर माँ की गांड के छेड़ पर लगाया और ज़ोर देकर अंदर घुसा दिया..





माँ- अह्हह्ह्ह्ह भैयाहहह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह.

चाचा- अह्हह्ह्ह्ह bhaaaabbhhiiiiiiiiii क्या गांड है अभी शैलेश बाजबु ने मारी फिर भी इतनी कासी हुई....

अनुज- एहि तो जादू है माँ की गांड में चाचा कितनी भी मारो कासी हुई hi रहती है.

पल्ली- मुझे भी तै जैसी गांड चाहिए...

में- तुझे सब चाहिए है न पल्ली?

अनुज- हाँ भैया लालची है ये...

इधर मौसी अपनी गांड अपने पति के लुंड पर पटक रही थी, दोनों बहनें अपनी अपनी गांड मरवा रही थी बस फ़र्क़ इतना था एक पति से मरवा रही थी तो दूसरी देवर से, एक सूखी तहज तो एक मूट में नहीं हुई, बाकि सब आराम करते हुए दोनों जोड़ो को देख रहे थे,

चाचा भी माँ की गांड पूरे जोश में मार रहे थे और उन्हें स्टूल से उठा कर बिस्तर पर तिरछा लिटा दिया पर अपना लुंड उनकी गांड से बहार नहीं निकलने दिया और लगातार मरते जा रहे थे,





चाचा- ओह्ह्ह भाभी इस गांड को मरने के न जाने कितने सपने देखे हैं...

माँ- अह्हह्ह्ह्ह तो मारो न भैया अपनी भभीीीीुइआह्ह्ह्हह की गरम गांड आह्ह्ह्ह पूरे करलूउहाहहहह..

चाचा- ओह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह हम्म्म्म bhaaaabbhhiiiiiiiiii..

दूसरी और मौसी आज ज़्यादा hi उत्तेजित हो रही थी और मौसा के लुंड पे तेज़ी से कूद रही थी,

मौसी- अह्ह्ह्हह जीजाआआह्ह्ह्हह हॉँण्णन मारो मेरी बहन की गांड अह्ह्ह्हह्हह और टीज़ज़्ज़ज़्ज़ मारूऊओ अह्हह्ह्ह्ह फ़ायद दोऊ अपनी लुंड सीईईई..

चाचा- हॉँण्णन अह्ह्ह्ह शालू तेरी बहन की गांड अह्ह्ह्हह्हह ली अह्ह्ह्हह आह्हः

नीचे से मौसा मौसी की गांड में धक्का लगा रहे थे,

मौसा- अह्हह्ह्ह्ह माआहहह आराम से मेरी रैंड बीवी लगता है आज लुंड तोड़ देगी मेरा आह्ह्ह्ह...

माँ- अह्हह्ह्ह्ह शाळूउउउउ आह्ह्ह्ह ाजजजजज दिखाआते हैं सबको आह्ह्ह्हह्ह्ह्हह दोनोंओओओओ बहाणूओं की गर्मीीी अह्हह्ह्ह्ह...

माँ ने ये कहा और उठ कर चाचा को नीचे कर खुद उनके ऊपर आ गयी और उनका लुंड अपनी गांड में ले लिए, और नीचे से चाचा माँ की गांड में धक्के लगंर लगे, अब दोनों बहनें एक hi आसान में अपनी अपनी गांड मरवा रही थी...

मौसी- अह्ह्ह्हह हैं जीईजीईईई ओह्ह्ह्ह

मौसी पागलों की तरह अपनी गांड मौसा के लुंड पर पटकने लगी और मौसा को देखकर लग रहा था की वो अब गए तब गए...

इधर माँ भी पूरे जोश में आ गयी थी और चाचा को और तेज़ गांड मरने के लिए उकसा रही थी,

माँ- अह्ह्ह्ह और टीज़ज़्ज़ज़्ज़ अह्हह्ह्ह्ह और टीज़ज़्ज़ज़्ज़ भैयाहहह अपनी गांड का पूरा दम दिखाआदूऊ अह्ह्ह्ह...

चाचा- हॉँण्णन भभीीीीुइआह्ह्ह्हह अह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह

माँ- और तेज़ मादरचोद, चुड़ड़ड़ड़ दिखाओ कितना दम हीी तुंहारी गांड में ahhhhhhhhhh और टीज़ज़्ज़ज़्ज़ भोस्डिके..

माँ के मुँह से गली सुन कर चाचा और जोश में आ गए और नीचे से ताबड़तोड़ धक्के लगाकर माँ की गांड मरने लगे...





इधर मौसा तो बिलकुल झड़ने की दहलीज पर hi थे और जैसे hi मौसा ने माँ के मुँह से गाली सुनी वो खुद को रोक नहीं पाए और उनके लुंड ने मौसी की गांड में धार छोड़ दी, इधर मौसी को भी जैसे hi गांड में धार का एहसास हुआ वो भी खुद को रोक नहीं पाई और अपने पति के साथ hi झड़ने लगी...

दोनों अह्ह्ह ुघ्हहह और गुर्राते हुए थरथराते हुए झड़ने लगे और फिर शांत हो गए,

इधर माँ का जोश अपने चरम पर था

माँ- अह्ह्ह्ह और टीज़ज़्ज़ज़्ज़ अह्हह्ह्ह्ह मादरचोद, मेरी गांड चाःइये thiiiiiiiiiii न तुम्हे अह्हह्ह्ह्ह अब लोओओओओओ अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह और तेज़ नहीं तो मुँह में मूट दूंगी सेल और तेज़...

बस चाचा के लिए इतना बहुत था और अगले hi पल उनका लुंड अपना रास छोड़ने लगा माँ की गांड में...

चाचा- अह्ह्ह्हह bhaaaabbhhiiiiiiiiii ओह्ह्ह्हह्ह माआदरचुड़ड़ड़ड़ड़ अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्ह...

कुछ hi पालो में चाचा के रास की साडी बूँदें माँ की गांड में निचुड़ गयी जिसका एहसास माँ को भी हुआ तो उन्होंने तुरंत उठ कर चाचा के लुंड को अपनी गांड से निकल दिया और बहुत फुर्ती में मेरे और अनुज के पास आई और अनुज को धक्का देकर उसके लुंड को अपनी छूट में लेकर बैठ गयी और चेहरा मोड़ कर मुझे देखा और बोली- अह्ह्ह लल्ला अपनी माँ की गांड मार,

माँ को इतना उत्तेजित और गरम देख सब हैरान थे, हम दोनों भाई तो माँ के सेवा के लिए बिलकुल तैयार थे अनुज माँ के बैठते hi नीचे से उनकी छूट में धक्के लगाने लगा इधर मैंने भी बिना देरी के माँ के और अनुज के पैरों में जगह ली और अपना लुंड माँ की गांड में घुसा दिया, और दोनों भाई मिलकर ले बनाकर माँ की गांड और छूट मरने लगे,





हम दोनों को तालमेल बैठने में ज़्यादा समय नहीं लगा और माँ के डुबो रसीले छेदों को हमारे कड़क लुंड छोड़ने लगे...

माँ- अह्ह्ह्ह बच्चों अह्हह्ह्ह्ह aiseeeeeeeeee hi छोड़ो अपनी मा को, दिखा दोऊ सबको तुम कितने बड़े मादरचोद हो... अह्हह्ह्ह्ह...

में- हाँ माँ लो अपने दोनों बेटों के लुंड अपनी छूट और गांड में अह्ह्ह्हह मेरी चुड़क्कड़ प्यासी माँ...

अनुज- ओह्ह्ह्हह्हह माआहहह अह्ह्ह्हह..

इधर सब लोग हम तीनो माँ बेटों पर नज़रें गड़ाए हुए थे,

मौसा- अह्ह्ह पहली बार माँ बेटों की चुदाई देख रहा हूँ अह्ह्ह्हह क्या नज़ारा है,

मौसी- हाँ जी नज़ारा तो होगा hi मस्त आखिर छोड़ने वाली मेरी बहन और छोड़ने वाले मेरे भांजे हैं..

चची- माँ बेटों का तालमेल देखो हाय सही में जीजी बड़ी भाग वाली हैं जो ऐसे लम्बे लुंड वाले बेटे मिले जो हर तरह से सेवा कर सकें.

मौसा- भाग्यशाली तो कर्मा अनुज भी काम नहीं हैं भाभी जो भाभी जैसी माँ मिली और फिर अपनी माँ को छोड़ने का मौका भी मिला...

ये सब बातें सुन पापा बड़े गर्व से अपनी पत्नी को अपने दोनों बेटों से चुड़ते हुए देख रहे थे,

मौसी- सबसे भाग्यशाली तो जीजा हैं जो ऐसा परिवार मिला उन्हें..

पापा- हमारा परिवार सिर्फ ये तीनो hi नहीं तुम सब भी हो, हम सब एक परिवार हैं रिश्ते अलग अलग हैं पर परिवार एक है.

Mausa-bilkul सही भाईसाब.

पापा- हाँ परिवार थोड़ा अलग है जहाँ चुदाई होती है सबके बीच पर यही चुदाई हमें एक दुसरे के कितने करीब ले कर आई है इतने करीब के शायद hi साधारण परिवार हों...

इधर परिवार प्यार की बातें चल रही थी दूसरी और हम माँ बेटे लगातार सिसकियाँ लगते हुए चुदाई में मगन थे, मैंने आउट अनुज ने नयी ले पकड़ ली थी पहले जब मैं माँ की गांड में लुंड घुसता तो अनुज अपना लुंड उनकी छूट से निकलता पर अभी हम दोनों साथ में लुंड घुसा रहे थे और साथ में निकल रहे थे जिससे माँ को बहुत मज़ा आ रहा था...





माँ- अह्हह्ह्ह्ह बच्चों हानंन्न मेरे मादरचोद बेतुओं aiseeeeeeeeee hi अह्हह्ह्ह्ह माआहहह...

में- ोह्ह्म्मण नाआहहहहहहह अह्ह्ह लोओओओओओ.

अनुज- ओह्ह्ह्हह्हह माआहहह ओह्ह्ह्हह्ह अह्ह्ह माहहह ..

सब लोग बातें करते हुए लगातार हम पर नज़र बनाये हुए थे...

अनुज- ओह्ह्ह्हह भैया मुझे माँ की गांड चाहिए..

में- आह्ह्ह्ह बस अभी ले आह्ह्ह्ह..

ये कहकर मैंने माँ की गांड से लुंड निकला और हम दोनों भाइयों ने माँ को गुड़िया की तरह घुमा कर लिटा दिया अब माँ की पीठ अनुज की और हो गयी और अनुज ने नीचे से माँ की गांड में लुंड घुसा दिया और मैंने माँ की छूट में और फिर कुछ hi पालो में दोबारा माँ को ले बना कर छोड़ने लगे..





चाचा- देखो तो कैसे भाभी दोनों के बीच गुड़िया जैसी लग रही हैं..

मौसा- हाँ दोनों घुमा घुमा कर छोड़ रहे हैं... हाय अब तो अपनी माँ को याद आने लगी.

चाचा- सही कह रहे हो बाबू, इन्हे देख लगता है काश हम भी अपनी अम्मा को छोड़ पाते...

मौसी- अरे कोई नहीं तुम दोनों लोग हमें अपनी अम्मा बनाकर छोड़ लेना...

चची- और हमें अपनी बहन...

पल्ली- धत्त मम्मी तुम पापा की बहन बनोगी बीवी होकर.

चची- अरे बहन बनूँ या बीवी या माँ.. इन्हे तो बस छोड़ना hi है... हाहाहा.

इस पर सब हंस पड़े सिवाए हम तीनो के क्यूंकि हम तीनो का ध्यान बातों पर था hi नहीं सिर्फ लुंड छूट और गांड की बातें जो चल रही थी उस पर था...

मैंने अनुज को और तेज़ करने का इशारा किआ तो उसने हाँ करके माँ को बाहों में कास लिए और फिर हम ताबड़तोड़ माँ को तेज़ी से छोड़ने लगे...

माँ के मुँह से लगातार सिसकियाँ निकलने लगी तेज़ तेज़, हम दोनों समझ गए की माँ भी अब ज़्यादा दूर नहीं हैं इसीलिए गति बनाये रखते हुए हम भी अपने अपने उत्तेजना के सज्जीखार पर पहुंचने लगे कुछ hi धक्को में माँ एक चीख के साथ थरथराने लगी, उनका बदन कंपनी लगे अनुज ने उन्हें कसके दबाये रखा नहीं तो पक्का वो उसके ऊपर से फिसल जाती खैर कुछ पल बाद माँ का झड़ना बंद हुआ और वो शांत हुई पर अब हम दोनों भाई अपने चरम पर थे मुझे जैसे hi मेरा रास मेरे लुंड में भरता हुआ महसूस हुआ उसी समय अनुज ने मुझे उठने को कहा तो मैंने माँ को छूट से लुंड निकला और अनुज ने उनकी गांड से माँ वैसे hi बिस्तर पर लेट गयी, अनुज ने अपना लुंड माँ के मुँह में घुसा दिया और उनका मुँह छोड़ने लगा और कुछ hi पलों में माँ के मुँह में गुर्राते हुए झड़ने लगा, उसने अपना सारा रास माँ के मुँह में उढेल दिया तो लुंड निकला जिसके बाद मैंने तुरंत माँ के मुँह में लुंड घुसा दिया और लुंड ने माँ के मुँह में घुसते hi धार छोड़ दी और मैं अपने रास से माँ के मुँह को भरने लगा..

माँ भी अनुज और मेरा रास एक साथ नहीं जातक पाई और उनके होंठों के बहार रास टपकने लगा,

खैर मैंने भी पूरा रास मका के मुँह में उढेल दिया और शांत हुआ..

अब माँ भी थोड़ी शांत हो गयी थी और हम दोनों का रास गटकने के बाद उठ कर बैठ गयी और कपङे होंठों और चेहरे पर लगे रास को उँगलियों से समेत कर चाटने लगी.. मैं और अनुज उनके बगल में बैठ गए..

मौसी- कैसा लगा जीजी?

माँ- अह्ह्ह्ह मज़ा आ गया बदन की साडी गर्मी निकल गयी.

चची- जीजी शांत भी ऐसे hi होती हैं ये दोनों hi कर पते हैं अपनी माँ के छेदों को शांत....

चाचा- चलो भाई यह सब शांत हो गए तो अब खाने आने का प्रोग्राम भी देखा जाये भूख लगी है...

चची- पहले नाहा तो लो ऐसे मूट में नहाये हुए खाएंगे का..

सब उठाने hi लगे थे की मुझे कुछ सूझा और मैं खड़ा हुआ और माँ के मुँह में दोबारा लुंड घुसा दिया और फिर मेरे लुंड से मूट की धार निकल कर माँ के मुँह में भरने लगी, माँ पहले तो थोड़ा हैरान हुई फिर मेरा मूट पीने लगी पर सारा तो नहीं पि सकती थी इसलिए उनके होंठों और मेरे लुंड से होते हुए मूट उनके बदन पर गिर कर उन्हें भीगने लगा...

ये सबने देखा तो आँखें फाड़े देखते रह गए, पर मैं लगातार माँ के मुँह में मोटा रहा और माँ जितना हो सके उतना पि गयी बाकि सरे मूट ने उनके छुछियां और पेट को भजग दिया मेरा मूट ख़तम होने के बाद मैंने माँ के मुँह से लुंड निकला और पीछे हो कर माँ को देखने लगा जो बेटे के मूट में भीगी हुई बहुत कामुक लग रही थी...

मैं पीछे हटा hi था की एक और धार माँ को भीगने लगी जो की अनुज के लुंड से निकल रही थी... अनुज लुंड हिला हिला कर माँ के पूरे बदन को भीगा रहा था और अंत में उसने अपना लुंड माँ के मुँह में घुसा कर बचा हुआ मूट उन्हें पीला दिया और फिर वो भी हैट कर खड़ा हो गया, माँ हम दोनों के मूट में नहाकर बड़ी कामुक लग रही थी और सब उनकी तरफ देख रहे थे.

माँ- क्या हुआ ऐसे क्यों देख रहे हो सब, कभी बेटों के मूट में नहीं हुई माँ नहीं देखि?

इस पर सब हंसने लगे और फिर उठकर नहाने की तयारी करने लगे...

जारी रहेगी....
 
Back
Top