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रिमझिम ने मुस्कुराते हुए कहा..
रमन- तुम्हारे शैतानी मुस्कान देख कर लग रहा है कुछ खतरनाक hi सोचा है तुमने..
रिमझिम इस बात पर मुस्कुरा दी...
अपडेट 188
सरलपुर
अगली सुबह हो चुकी थी और ज़्यादातर घरवाले तो अभी सो hi रहे थे आखिर रात को म्हणत जो की थी जागकर, खैर घर की बहु होने के नाते चंचल हमेशा की तरह पहले उठी और फिर जल्दी hi रिमझिम भी और फिर दोनों ने घर का काम संभल लिए वहीं, बाकि सब भी धीरे धीरे उठने लगे सब छुट्टियों को पूरी तरह आनंद ले रहे थे कोई नहाने की जल्दी नहीं, आराम से सुस्ता सुस्ता के काम करो, खैर सुबह के चाय नाश्ता के बाद सबके ऊपर था कौन क्या करना चाहता है, चरण सिंह दोनों संधियों के बीच बैठ बहार चॉपर पर बैठ कर रह रह कर चंचल का भोग लगाने का मौका देख रहे थे और उसके साथ खेलने का मौका ढूंढ रहे थे वहीं तीनो जवान जोड़े रात के खेल के बाद आपस में पूरी तरह खुले हुए थे और इशारों में तो कहीं हलकी फुलकी छेड़खानी में बातें कर रहे थे,
मौका देख कर चेतन ने पूर्वी की छूछीयो को रसोई में कास कर दबाया तो रमन भी आते जाते हुए अपनी भाभी के बड़े बड़े चूतड़ों को मसलने का मौका नहीं छोड़ रहा था पंकज भी कभी रिम्मी तो कभी चंचल दोनों से मज़े ले रहे थे, चंचल रिम्मी और पूर्वी भी इस छेड़खानी का आनंद उठा रही थी...
तीनो संधनें भी साथ साथ थी और उनकी नयी नयी दोस्ती भी परवान चढ़ रही थी, तीनो hi सबसे छुपकर बिलकुल नयी नवेली जवान होती लड़कियों की तरह एक दुसरे से गंदे गंदे और अश्लील मज़ाक कर मज़े ले रही थी...
माधुरी- बिमला रानी क्या बात है आज तो बदली बदली सी लग रही हो,
सावित्री- अरे रात को बिमला रानी की अचे से ठुकाई हुई है इसलिए हैं न?
बिमला भी अब दोनों के साथ रह कर बोलना सीख रही थी- और क्या कहो तो तुम दोनों की भी करवाडुं.
सावित्री- हाय बिमला रानी करवा दो न,
सावित्री ने कामुक ढंग से कहा तो तीनो हंस पड़े...
इसी बीच चंचल और रिमझिम ने सबको नहाने का निर्देश दिया ताकि सब नहालें फिर खाना पीना खाया जाये और दोपहर का कुछ प्रोग्राम बने की क्या करना है,
लड़को ने तय किआ की वो लोग तो बहार तुबेल पर नहाएंगे बाकि औरतों ने घर के दोनों बाथरूम हथिया लिए, ऊपर के बाथरूम में पूर्वी घुस गयी तो नीचे वाले में माधुरी और सावित्री भी तैयार थी, चंचल और रिमझिम पहले hi नाहा चुके थे,
इधर जहाँ सब नहाने और दुसरे कामों में व्यस्त थे उसी बीच चरण सिंह अपने दोनों संधियों को नहाने के लिए कपडे लेन का बहाना बना कर उनसे अलग घर के अंदर गए और मौका देखने लगे चंचल को दबोचने का, इसी बीच उन्हें मौका मिला भी चंचल अपने अम्मा बाबा का बिस्तर ठीक करने के लिए उनके कमरे में घुसी तो चरण सिंह ने उसे जाते देख लिए और सब की नज़र बचते हुए पीछे से घुस गए और चंचल को पकड़ लिए,
पहले तो चंचल बिलकुल चौंक गयी फिर अपने ससुर को देख मन hi मन मुस्कुराने लगी, हालाँकि उसे चिंता भी थी की कहीं कोई देख न ले,
चंचल- अरे पापाजी तुम यहाँ क्या कर रहे हो कोई आ गया तो गड़बड़ हो जाएगी.
चरण सिंह- अरे बहु कोई नहीं आएगा, सच कह रहा हूँ अब और रहा नहीं जा रहा आजा अपने ससुर पर थोड़ा प्रेम बरसा दे,
चंचल- वो प्रेम नहीं हवस है पापाजी जो तुम मांग रहे हो,
चरण सिंह- जो कुछ है, बस अब और मत तड़पा,
ये कहकर चरण सिंह ने लपक कर चंचल को पकड़ लिए, वहीं चंचल भी अपने पति से हुई रात की बातों को सोचने लगी वैसे तो उसे कुछ आपत्ति नहीं थी अब अपने पति की स्वीकृति के बाद बस उसे किसी के द्वारा देखे जाने की चिंता थी,
चंचल- पापाजी समझो तो सही कोई आ गया तो गड़बड़ हो जाएगी,
चरण सिंह- कोई नहीं आएगा रुक.
यव कह चरण सिंह उससे अलग हुए और अंदर से दरवाज़ा लगा दिया, वहीं चंचल भी सोचने लगी की अभी किसी के आने की संभावना काम hi है,
चरण सिंह दरवाज़ा लगा कर बापिस आये और चंचल को पकड़ने की कोशिश की तो वो उनसे दूर होकर खिलखिलाते हुए बिस्तर पर चढ़ गयी,
चंचल- नहीं पापाजी.
चरण सिंह को ये अव्हा लगा उनकी बहु हंस कर उनसे भाग रही है और मज़ाक कर रही है इसी मज़ाक में शामिल होते हुए उसे पकड़ने बिस्तर पर कूद पड़े, और चंचल की बाहन पकड़ ली.
चंचल- छोडो न पापाजी कोई आ जायेगा,
चरण सिंह- अरे बहु दरवाज़ा बंद है कैसे आ जायेगा कोई..
चंचल- ाचा दरवाज़ा बंद करके अपनी बहु के साथ क्या करना चाहते हो पापाजी?
चरण सिंह- कुछ नहीं बस अपनी बहु को थोड़ा प्यार करना चाहता हूँ.
ये कहते हुए चरण सिंह ने चंचल को अपनी बाहों में भर लिए..
चंचल- धत्त्त कैसा प्यार करना चाहते हो सब समझती हूँ मैं.
ये कहकर चंचल अलग होकर घूम गयी.
चरण Singh-are बहु सब समझ hi रही है तो क्यों तड़पा रही है अपने पापाजी को.
ये कह कर चरण सिंह ने पीछे से चंचल को पकड़ लिए और खुद उससे पीछे से चिपक गए, चंचल को भी चूतड़ों के बीच ससुरजी का कड़क लुंड महसूस हुआ वहीं ससुरजी ने उसकी साड़ी का पल्लू उसके सीने से हटा नीचे गिरा दिया था..
चंचल- ओह्ह पापाजी...
चरण सिंह बहु की गर्दन को चूमते हुए उसके नंगे पेट को मसलने लगे वहीं चंचल भी मस्त होने लगी अपने ससुर के हाथों को बदन पर और उनके लुंड को अपनी गांड की दरार में...
वहीं चरण सिंह का तो जोश हर पल बढ़ता जा रहा था और उसी जोश में उनके हाथ बहु के कोमल पेट से ऊपर सरकते हुए उसके ब्लाउज के ऊपर चूचियों पर आ गए और दबाने लगे, चंचल भी अपनी चूचियों के मसले जाने से मस्त होने लगी...
दोनों ससुर बहु अपनी अपनी हवस एक दुसरे के सहारे शांत करने की कोशिश करने लगे, चरण सिंह को भी हालाँकि समय और स्थिति का ज्ञान था इसीलिए उन्हें भी पता था ज़्यादा समय लेना सही नहीं है, और उन्होंने आगे बढ़ने का निश्चय किआ, चरण सिंह ने चंचल को अपनी और घुमाया और उसके नाज़ुक कोमल होंठों पर अपने होंठ रख दिए और चूसने लगे, साथ hi उनके हाथ भी बहु के बदन पर चलते हुए उसकी साड़ी को पकड़ कर उतरने लगे और कामयाब भी हो गए, चंचल का विरोध भी अब न के बराबर रह गया था, और उसने सोचा ससुर जी ऐसे जाने नहीं देंगे तो इससे ाचा जल्दी से निपटाया जाये,
चरण सिंह ने साड़ी के बाद अगला हमला तुरंत पेटीकोट के नाड़े पर बोलै और अगले hi पल उसे खोल कर नीचे सरका दिया जिसे चंचल ने खुद अपने पैरों से निकल दिया, वहीं चंचल ने साथ देते हुए खुद से अपना ब्लाउज उतर कर अलग फ़ेंक दिया,
चरण सिंह के सामने उनकी बहु अब सिर्फ ब्रा पंतय में थी, सबके होते हुए अपनी बहु के साथ इस स्थिति में होने पर चरण सिंह को एक अलग hi रोमांच और उत्तेजना का अनुभव हो रहा था. चंचल का भरा हुआ गदराया बदन सिर्फ ब्रा पंतय में देख चरण सिंह का लुंड ठुमके मरने लगा, चरण सिंह बहु को देखते हुए अपने कपडे उतरने लगे, और जल्दी hi नंगे हो गए उधर चंचल ने भी अपनी ब्रा पंतय को भी तब तक अपने बदन से अलग कर दिया था और बिलकुल नंगी हो कर अपने ससुर के सामने लेट गयी,
चरण सिंह- अह्ह्ह बहु तुझे ऐसे देख कर तो मुर्दे में भी जान आ जाये,
चंचल- मुर्दे का पता नहीं पापाजी तुम अपनी जान दिखाओ न अब,
चरण सिंह ने भी देर करना उचित नहीं समझा और तुरंत चंचल की टैंगो के बीच जगह ली और फिर अपना फडकता हुआ लुंड पकड़ कर बहु की गरम छूट के मुहाने रखा और फिर उसकी आँखों में देख कर अंदर घुसा दिया, जिसके साथ hi चंचल के मुँह से एक हलकी सी आह निकल गयी.
चंचल- आह्ह्ह्हह पापाजी ओह्ह्ह.
चरण सिंह को तो यकीन नहीं हो रहा था की सबके घर में होते हुए वो अपनी बहु को छोड़ पाने में सफल हो रहे थे, वहीं चंचल को भी एक नया रोमांच मिल रहा था, चरण सिंह ने चंचल की कमर को थमा और फिर धक्के लगाना शुरू कर दिया और अपनी बहु की चुदाई शुरू कर दी,
चरण सिंह- आह्ह्ह्हह बहु ओह्ह्ह्हह्हह तेरी छूट में तो जन्नत का मज़ा है..
चंचल- अह्हह्ह्ह्ह हांण पापा जी लूट लो अपनी बहु की छूट का मज़ाआ आह्ह्ह्हह,
चरण सिंह- मन करता है तुझे छोड़ता hi रहूं, अह्ह्ह्हह क्या मस्त बदन है तेराआठ.
चरण सिंह ने चंचल की छूछीयो को मसलते हुए उसकी छूट में धक्के लगते हुए कहा,
चंचल- अह्ह्ह पापा जी तो छोड़ लिए करो नाआहहहहहहह अह्ह्ह्हह तुम्हारी बहु हूँ तुम्हारा तो हक़ बनता है...
चंचल जानकार अपने ससुर जी को उकसाने के लिए ऐसी बात कर रही थी ताकि वो उत्तेजित होकर जल्दी झड़ें, नहीं तो बेकार में पकड़े जाने का खतरा था,
चरण सिंह- हाँ सही कहा बहु बेटे के बाद आह्ह्ह्ह मेरा hi तो हक़ बनता है, जो चीज़ मेरी है वो उसकी है और जो उसकी है वो मेरी..
चंचल- हाँ पापाजी और आप तो उनकी चीज़ का भरपूर उपयोग कर भीईई अह्ह्ह्हह रहे हो,
चंचल ने अपनी टांगों को चरण सिंह के पिछवाड़े पर कस्ते हुए कहा, लेकिन तभी उसे एहसास हुआ जैसे दरवाज़ा के बगल वाली खिड़की के बीच से कोई झाँक रहा है, उसने गर्दन घुमा कर देखा तो उसे कोई नज़र नहीं आया साथ hi खिड़की भी बंद दिखी.. उसका ध्यान बापिस चुदाई पर आ गया,
चरण सिंह- अह्ह्ह्ह एयर क्याःह्ह्ह्हह्ह बहुउउउहाहहह जब चीज़ तेरे जैसीईई हो तो कौन छोड़ेगा..
चंचल- तोहाहहह अपने बेटे को क्याःह्ह्ह्हह्ह डोज तुम पापाजी उसकी बीवी की छूट के बदले में...
चरण सिंह- अरे उसे किस चीज़ की मन है सब उसी का तो है, साडी संपत्ति सब कुछ तुम लोगो का hi है,
चंचल- ये सब नहीं पापाजी, संपत्ति की बात नहीं है,
चरण सिंह- अह्ह्ह्ह फिर और क्या चाहिए मेरी रसीली बहु को अपने पति के लिए,
चरण सिंह ने धक्के लगते हुए उसकी छुच्छी को मुँह में भर के पीते हुए कहा..
चंचल- ओह्ह्ह्हह्हह ुहममम चुत के बदले छूट मिलनी चाहिए नाआहहहहहहह...
चरण सिंह थोड़े असमंजस में दिखे - पर बहु छूट के बदले में किसकी छूट दिला सकता हूँ उसे, किसी बाज़ारू औरत की?
चंचल- नहीं अह्ह्ह पापजीई अह्ह्ह्ह, बाज़ारू औरत की नहीं..
चरण सिंह- फिर किसकी ?
चंचल- मैं जिसकी कहूँगी उसके लिए तुम राज़ी हो जाओगे पापाजी?
चरण सिंह- हाँ अह्ह्ह बेटाःह्ह्ह्हह्ह पर बता तो पहले,
चंचल- बीवी के बदले बीवी..
चरण सिंह ये सुन बिलकुल हैरत में पद गए फिर असमंजस में बोले
चरण सिंह- मतलब मैं कुछ समझा नहीं..
चंचल- मतलब मम्मी जी की छूट,
ये सुन चरण सिंह बिलकुल चौंक गए और ज्यों के त्यों रुक गए,
चरण सिंह - बहु तू यह क्या कह रही है, कुछ सोच समझ तो रही है न,
चंचल- हाँ पापाजी बिलकुल सोच समझ कर बोल रही हूँ मैं चाहती हूँ की तुंहारा बीटा अपनी माँ यानि तुम्हारी बीवी को चोदे जैसे तुम उसकी बीवी को छोड़ रहे हो,
बस इतना सुन्ना था की चरण सिंह का लुंड चंचल की छूट में फूलने लगा और उसने पिचकारी छोड़ दी और अपनी बहु की छूट को रास से भर दिया.. अपनी छूट में ससुर का रास महसूस कर चंचल खिसक कर उठी और चरण सिंह का लुंड उसकी छूट से निकल गया, उठकर चंचल फटाफट कपडे पहनने लगी वहीं चरण सिंह जो अभी चंचल ने बोलै था उसी में खोये हुए थे,
चंचल साड़ी लपेटते हुए चरण सिंह से बोली- सोच लो पापा जी, शाम तक और सोच कर बता दो मुझे अगर हाँ है तो इनाम में पीछे की सैर भी मिल सकती है आज hi,
ये कह मुस्कुराते हुए चंचल दरवाज़ा खोल कर चली गयी वहीं चरण सिंह हैरान परेशां से उसके पीछे कमरे से बहार निकल गए,
वहीं जब ये ससुर और बहु अपनी हवस मिटने में लगे थे और चंचल को शंका हुई थी की कोई उन्हें देख रहा है, वो यूँ hi नहीं थी पर कौन था वो ये जानने के लिए चुनें थोड़ा सा पीछे जाना होगा,
नीचे वाले बाथरूम के बहार बिमला और सावित्री नहाने का इंतज़ार कर रही थी और माधुरी अंदर थी,
सावित्री - अरे ये भी कितनी देर लगा रही हैं अंदर,
बिमला - कोई बात नहीं जीजी, बहुत गरम है संधान थोड़ा ठंडा हो जाने दो,
ये कह दोनों हंसने लगे,
इतने में hi हल्का सा बाथरूम का दरवाज़ा खुला और उसमे से पानी निकला जो की सीधा बिमला के ऊपर गिरा, सावित्री एक और होने से बच गयी , माधुरी ने पानी फ़ेंक तुरंत दरवाज़ा बंद कर लिए और अंदर से hi बोली - बकड़े मज़े ले रही थी न दोनों बहार.
बिमला - बर्चोढी, अरे मज़े दोनों ले रही थी तो दोनों पर गिरती न हमें hi भीगा दिया,
सावित्री - अरे तो का हुआ नहाना hi तो है,
बिमला- अरे पर जो कपडे पहनने थे देखो ये भी भीगा दिए, निकलने दो बहार बताती हूँ
सावित्री - अरे छोडो न बिमला रानी जाओ दूसरी साड़ी ले आओ.
बिमला- हाँ ला रही हूँ पर संधान की गांड में मुसल डेल बिना मैं भी नहीं मानूंगी.
ये कह बिमला बापिस अपने कमरे की और आई जहाँ उसका सामान था पर दरवाज़े के पास आकर उसने देखा वो अंदर से बंद था, उसे समझ नहीं आया क्यूंकि वो तो उसे खोल कर गयी थी उसने खोलने के लिए जैसे hi हाथ आगे बढ़ाया उसे अंदर से आवाज सुनाई दी, उसका हाथ वहीं रुक गया उसने सोचा अंदर कौन हो सकता है एक पल को तो उसने सोचा आवाज़ लगा कर पूँछ लूँ, पर जिस तरह की उसे आवाज़ आई थी उसे सुन उसके मन में कुछ और hi बातें आर लगी,
वो इधर उधर देखने लगी ताकि अंदर देख सके, दरवाज़े के दूसरी और उसे खिड़की दिखी पर वो भी बंद थी, उसने खिड़की के पास जाकर देखा तो खिड़की जहाँ से बंद होती थी वहां कई दरारें ज़रूर थी जिनसे अंदर देखा जा सकता था,
बिमला ने बिना देरी के अपनी आँख एक दरार पर लगा दी और उसने जो अंदर देखा उसे देख उसका बदन कांप गया,,
अंदर बिस्तर पर उसकी बेटी बिलकुल नंगी लेती हुई थी और उसकी टैंगो के बीच बिमला के समधी, बेटी के ससुर थे जो अपनी hi बहु को सटासट छोड़ रहे थे, ये देख कर तो बिमला का खून सूख गया उसकी बेटी अपने hi ससुर के साथ, उसका सर चकराने लगा, साथ hi उसकी नज़र दोनों पर जैम सी गयी, उसका मन हुआ अभी अंदर जाकर अपनी बेटी के गाल पर दो तमाचे लगाए और उसके ससुर को भी खूब खरी खोटी सुनाये,
फिर उसके मन में आया नहीं बिमला ये मत करना भूल स्वे भी अगर किसी को खबर हो गयी तो बिटिया का जीवन बर्बाद हो जायेगा, चेतन जैसा पति उसे कहाँ मिलेगा, चेतन के बारे में सोचते hi बिमला के मन में कई ख्याल आने लगे, बेचारे दामाद जी कितने अचे हैं और ये उन्हें धोखा दे रही है, अगर दामाद जी को ये पता लगा तो क्या होगा की उनकी पत्नी उनके अपने पिता के साथ , हाय ढैय्या चंचल बिटिया ये तूने का किआ..
वहीं लगातार देखने से उसका तन जैसे अपने आप hi अपने hi दिमाग से काम करने लगा, उसकी छूट पनियाने लगी, उसे तो तब खबर हुई जब उसका एक हाथ साड़ी के ऊपर से उसकी छूट को मसलने लगा, जब उसे ये एहसास हुआ तो उसने तुरंत अपना हाथ झटक लिया और खुद को कोसने लगी,
छही छी का हो गया है मुझे अपनी hi बेटी और ससुर को देख मुझे उत्तेजना हो रही है, बेटी का गृहस्थ जीवन संकट में है और मुझे अपनी छूट की पड़ी है,
वो यह सब सोच hi रही थी की उसके कानो में एक आवाज़ पड़ी चंचल के नाम की,
वो तुरंत खिड़की से दूर हो गयी और कमरे के दूसरी और आकर देखा तो दामाद जी थे जो की चंचल को बुला रहे थे,
चेतन को चंचल को आवाज़ लगते देख बिमला का दिमाग फिर घूमने लगा- है ढैय्या दामाद जी तो बिटिया को hi बुला रहे हैं, और ये तो, कहीं दामाद जी ने उसे इस हालत में देख लिए तोह, नहीं नहीं ऐसा नहीं हो सकता.
ये सोच कर वो चेतन की और भागी और आंगन को फुर्ती में पार कर दूसरी और पहुंची.. जहाँ चेतन सिर्फ एक तौलिया लपेटे हुए गीला खड़ा था और चंचल को पुकार रहा था.
बिमला- का का हुआ दामाद जी कछु चाहिए का?
चेतन - नहीं अम्मा वो चंचल कहाँ है?
बिमला- चंचल वो चंचल तो हमारा कछु काम कर रही है.
चेतन- चलो छोडो फिर कोई बात नहीं,
बिमला- नहीं दामाद जी का हुआ बताओ तो.
चेतन - अरे अम्मा वो मेरे कपडे लेने थे अब ये चंचल को hi पता है कौनसे बैग में रखे हैं.
बिमला- अरे हम निकल देते हैं चलो.
चेतन- अरे कोई नहीं अम्मा तुम क्यों परेशां होती हो.
बिमला- अरे इसमें परेशानी कैसी आओ चलो..
चेतन- ठीक है चलो, पर ये तुम्हारी साड़ी कैसे भीग गयी.
चेतन ने बिमला के पीछे चलते हुए कहा..
बिमला- अरे ये तो तुम्हारी मम्मी की बदौलत है, देखो कैसा मज़ाक किआ है,
चेतन- हाहाहा सही है तुम तीनो लोगो की दोस्ती सही जैम रही है,
बिमला- अरे छोडो बस यही मज़ाक चलता रहता है.
इतने में दोनों चंचल और चेतन के कमरे में आ गए थे,
चेतन- यही तो ज़िन्दगी है अम्मा, दो पल हंस खेल लो परिवार के साथ,
चेतन एक और खड़ा हो गया और बिमला एक बैग खोल कर झुक कर उसमे देखने लगी, वहीं उसकी साड़ी और पेटीकोट गीले होने की वजह से उसके मोठे चूतड़ों से चिपके हुए थे जो की झुकने की वजह से और उभर कर सामने आ गए और उसी समय चेतन की नज़र अपनी सास के बड़े से और गोल मटोल नितम्बों पर पड़ी जो की गीली सारे और पेटीकोट में अपना पूरा आकार दिखा रहे थे,
ये देखते hi चेतन के दिमाग में चंचल की कही बातें आ गयी जो उसने अपनी माँ के बारे में कहीं थी और चेतन का लुंड तौलिया को उठता हुआ सर उठाने लगा, इधर बिमला ने अचे से बैग को देखा और फिर मुद कर चेतन से बोली- इसमें तो नहीं है दामाद जी,
और जैसे hi उसनर ये कहा उसकी नज़र अकस्मात् hi चेतन के उठे हुए तौलिये पर पद गयी और अगले hi पल बिमला की एहसास हुआ की तौलिया किस वजह से उठा है तो वो मन hi मन झेंप गयी,
बिमला मन hi मन सोचने लगी- हाय ढैय्या ये दामाद जी का लिंग खड़ा क्यों है अभी तक तो ठीक था, कहीं ये हमारे पिछवाड़े को देख नहीं रहे थे, हाय रे ये भी अपने बाप जैसे हैं, पर इसमें क्या गलती बेचारी की हमारी भी तो साड़ी पेटीकोट भीगा हुआ है बिलकुल चूतड़ से चिपका हुआ होगा, ये सब सोचते हुए बिमला की छूट पनियाने लगी..
चेतन- छोडो अम्मा मैं ढूंढ लूंगा, तुम जाओ नहालो जाकर कब तक ऐसे गीले कपड़ो में घूमोगी.
बिमला चेतन की आवाज़ से ख्यालों से बहार निकली और बोली- अरे कोई बात नहीं दामाद जी , अभी मिल जायेगा ये कह वो कमरे में नज़र दौड़ने लगी, वहीं चेतन अब उसके पूरे बदन का नाप लेने लगा, और जितना वो अपनी सास को देख रहा था उतना उसका लुंड और कड़क होकर ठुमके मार रहा था..
बिमला- उस थैले में हो सकती है,
ये कहते हुए उसने एक अलमारी में रखे थैले की और इशारा किआ, और आगे बढ़ उस थैले को अलमारी से उतर कर जैसे hi बिस्तर पर रखा उस थैले के ऊपर चिपकी हुई एक छिपकली डर से उछली और बिमला के सीने पर जाकर चिपक गयी, जिसके होते hi बिमला चिल्लाते हुए उछलने लगी और अपनी साड़ी को हटा कर उससे दूर करने की कोशिश करने लगी, इधर क्यूंकि बिमला की पीठ चेतन की और थी उसे समझ नहीं आया की अचानक क्या हुआ और वो घबरा कर बिमला की और लपका देखने के लिए और उसी लपकने में उसका तौलिया खुल कर नीचे गिर गया, वहीं बिमला ने तो अपनी साड़ी को पकड़ कर तब तक उतर कर नीचे फ़ेंक दिया था और छिपकली के लिए अपने बदन को देख रही थी, वहीं चेतन ने उसे पकड़ा और पुछा- क्या हुआ अम्मा..
बिमला- वह छिपकली..
चेतन- क्या छिपकली, तुम भी न अम्मा डरा hi दिया,
बिमला- अरे डरा hi क्या दिया हम खुद घबरा गए,
बिमला ने शांत होकर मुद कर चेतन की और देखकर कहा तो चौंक गयी क्यूंकि उसका दामाद बिलकुल नंगा उसके सामने खड़ा था जिसका लुंड कड़क होकर लहरा रहा था, कुछ पल तो बिमला की नज़र चेतन के लुंड पर hi जैम गयी पर फिट उसने खुद को संभाला और दूसरी और घूम गयी, वहीं ये देख चेतन को भी अपनी स्थिति का अंदाज़ा हुआ तो वो झेंप गया,
बिमला- दामाद जी दरवाज़ा लगा दो कोई ऐसे देख लिए तो...
बिमला ने दूसरी और चेहरा किये हुए hi कहा,
चेतन बेचारे के मुँह से सिर्फ हहहहहाँ निकला और वो दरवाज़े की और लपका और अंदर से कुण्डी लगाडी,
वहीं बिमला धड़कते मन के साथ थैले को खोल उसमे कपडे देखने लगी..
वहीं कुण्डी लगाने के बाद चेतन मुदा तो उसका दिमाग फर्ररी की गति से भी तेज़ दौड़ने लगा, कभी उसके मन में रात का खेल आता तो कभी उसके और चंचल की बातें तो कभी उसके पापा और चंचल के बीच जो हुआ उसका ख्याल, एक hi साथ बहुत से ख्यालों ने उसे घेर लिए, पर वहीं उसकी नज़र अपनी सास की गीले पारदर्शी पेटीकोट में चमकते हुए मोठे मोठे चूतड़ों पर थी जिन्हे देख साफ़ पता चल रहा था की पेटीकोट के नीचे उसकी सास ने चड्डी नहीं पहनी थी, फिर उसके दिमाग में आया की अम्मा ने मुझे दरवाज़ा बंद करने को क्यों बोलै, तौलिया उठाने को क्यों नहीं,
यही सोचते हुए और अपनी सास की गांड देखते हुए वो एक एक कदम से बिमला की और बढ़ने लगा जो की बैग से एक एक कपडा निकल कर देख रही थी,
वही चेतन का दिमाग अब भी चल रहा था, अगर कुछ दिन पहले की बात होती तो चेतन ऐसी स्तिथि मैं शर्म से तुरंत कमरे से निकल गया होता पर पिछले कुछ दिनों में जो हुआ था उसने चेतन के सोचने के ढंग को बिलकुल बदल कर रख दिया था, खासकर ये जानकार की उसकी पत्नी उसके पिता से चुद चुकी है वो अपनी सास को लेकर फैसला नहीं कर पा रहा था, वहीं पेटीकोट से झांकते बिमला के बड़े बड़े चूतड़ उसकी परेशानी और बढ़ा रहे थे,
चेतन बिमला के बिलकुल पीछे जाकर खड़ा हो गया उसका खड़ा लुंड बिमला के चूतड़ों से कुछ इंच hi दूर था,
चेतन- मिला क्या कुछ अम्मा?
चेतन ने पीछे से पूछा तो बिमला बिना उसकी तरफ देखे hi बोली- देख रही हूँ दामाद जी अभी मिल जायेगा,
बिमला ने ये बोलै hi था की चेतन ने कुछ ऐसा किआ जिससे वो बिलकुल हैरान रह गयी उसे अपनी नंगी कमर पर चेतन का हाथ महसूस हुआ, जिसे महसूस कर वो गंगना गयी,
चेतन ने अपनी सास की कमर पर हाथ रखते हुए सहलाते हुए बोलै- कोई बात नहीं अम्मा देख को आराम से...
बिमला- हम्म्म्म
से ज़्यादा नहीं बोल पाई और अपनी कमर पर अपने दामाद के हाथ को महसूस कर न चाहते हुए भी उत्तेजित होने लगी, तभी अचानक चेतन ने उसकी कमर सर हाथ हटा लिए और bola-amma हिलना मत, ऐसे hi रुको.
बिमला ने हैरान रहते हुए पुछा- क्या हुआ दामाद जी..
चेतन- अरे ये छिपकली अभी भी तुम्हारे पेटीकोट से चिपकी पड़ी है
बिमला- हाय ढैय्या रे. हटाओ इसे जल्दी.
चेतन- हिलना मत नहीं तो ऊपर चढ़ जाएगी.
बिमला- हाँ हाँ हटाओ दामाद जी..
बिमला बिलकुल जड़ होकर कड़ी हो गयी उसे कुछ पल बाद अपना गीला पेटीकोट नीचे से उठता हुआ महसूस हुआ, बिमला शर्म से और उत्तेजना से कंपनी लगी क्यूंकि अपने दामाद के सामने वो इस स्थिति में थी, पेटीकोट अब उसके घुटनो के भी ऊपर उठने लगा था,
बिमला- दद दामाद जी..
चेतन- ुहम्म अम्मा ऐसे hi रहो बस हटाने वाला हूँ,
वहीं चेतन का उत्तेजना से बुरा हाल था उसका लुंड ऐसा लग रहा था की फैट जायेगा, पेटीकोट उठाते हुए उसे अपनी सास की मोती केले के तने जैसी मांसल जांघें दिखने लगी थी और वो ये जनता था की पेटीकोट के अंदर उसकी सास ने चड्डी नहीं पहनी है तो हर इंच पेटीकोट उठने के साथ उसकी धड़कन बढाती जा रही थी,
बिमला- दामाद जी और कितनी देर?
चेतन - बस्सस एक मिनट और अम्मा तुम बस थोड़ा आगे झुक जाओ अपने हाथ बिस्तर पर टिका दो,
बिमला को ये बात बिलकुल अजीब लगी पर फिर भी न जाने क्यों उसने तुरंत अपने हाथ बिस्तर पर चेतन के कहे अनुसार टिका दिए,
इससे चेतन के सामने उसकी सास की गांड और उभर कर आ गयी, एक पल को तो चेतन को लगा वो झाड़ hi जायेगा पर उसने खुद पर काबू किआ अब पेटीकोट से सिर्फ बिमला के चूतड़ ढके हुए थे आगा थोड़ा सा भी ऊपर उठता तो वो अपनी सास की छूट और गांड देख सकता था,
चेतन ने एक गहरी सांस ली और कांपते हुए हाथों से पेटीकोट को और उठाया और धीरे धीरे उसके सामने अपनी सास की फूली हुई छूट और फिर गांड का भूरा कैसा हुआ छेड़ आ गया, चेतन तो बस कुछ पल यूँ hi देखता hi रह गया,
बिमला- का हुआ दामाद जी अब कितनी देर?
बिमला की आवाज़ से चेतन को होश आया..
वहीं बिमला झुकी हुई इंतज़ार कर रही थी उसे अपनी जांघों पर ठंडी हवा महसूस हो रही थी जो उसे और उत्तेजित कर रही थी, कुछ पल की ख़ामोशी के बाद उसे महसूस हुआ की दामाद जी कुछ हरकत कर रहे हैं पर क्या उसे समझ नहीं आया वो सोच रही थी की किस स्तिथि में है वो अपने दामाद के सामने अधनंगी कड़ी है, वही दामाद पूरा नंगा है, यहाँ आकर दो दिनों में hi न जाने क्या क्या बदल गया है,
इसी बीच उसे अपनी कमर पर फिर से चेतन का हाथ महसूस हुआ जिस पर उसने कुछ खास प्रतिक्रिया नहीं दी और अपने ख्यालों में खोई रही की अगले hi पल उसे अपनी छूट के होंठों पर एक गरम एहसास हुआ जिससे वो चौंक गयी और जब तक वो कुछ प्रतिक्रिया करती अगले hi पल उसके छूट के होंठ खुले और उसमे उसे कुछ अंदर समता हुआ महसूस हुआ, अब उसे ये समझते तो देर न लगी की ये क्या है, पर वो हैरान होकर सिर्फ इतना hi कह पाई- दामाआद जी एहहहहह क्याआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह.
वहीं दूसरी और चेतन से अपनी सास को ऐसे देख कर और काबू नहीं हुआ था तो उसने एक बड़ा निर्णय लेते हुए अपने लुंड को पकड़ा और उसे अपनी सास की छूट के मुहाने लगा उसकी छूट में सरका दिया और ये सब उसने इतना जल्दी किआ ताकि बिमला को सँभालने तक का समय न मिले.
बिमला- नाहीइ दामाद जी ये गलत है निकालू अह्ह्ह दामाद जी,
बिमला के अंदर जो संस्कार थे वो इसका विरोध करने लगे हालाँकि उसके बदन की और से कोई विरोध नहीं दिखा वो ज्यों की त्यों झुकी हुई कड़ी थी.
अपनी सास की गरम छूट में लुंड घुसकर चेतन को तो मानो जन्नत मिल गयी थी उसे एहसास हुआ की चंचल की कामुकता उसका बदन उसे उसकी माँ से hi मिला है , ये सोचते हुए चेतन ने अपनी सास की कमर को पकड़ कर एक धक्का और लगाया और अपने पूरे लुंड को जड़ तक अपनी सास की छूट में समां दिया...
बिमला- ओह्ह्ह्हह्हह अह्ह्ह्हह अम्मम्माह्ह्ह्हह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह दैयाआआह्ह्ह्हह्ह दामाद जीई अह्ह्ह.
चेतन- अह्ह्ह्ह अम्मम्माह्ह्ह्हह्ह कितनी गरम छूट है तुम्हारी आह्ह्ह्ह...
चेतन से ये सुन बिमला बिलकुल hi शर्मा गयी और कुछ नहीं बोली वही चेतन ने ये जान कर बोलै था वो चाहता था की बिमला उसके सामने खुले नहीं तो चुदाई के बाद भी वो उससे नज़रें चुराती हुई फिरेगी.
चेतन ने धीरे धीरे धक्के लगाना शुरू कर दिया साथ hi उसने हाथ आगे लेजाकर बिमला के ब्लाउज को भी खोल दिया और फिट उतर दिया फिर बिमला की ब्रा को और अंत में पेटीकोट का नाडा खोल उसे भी बिमला के सर की और से निकल कर उसे पूरा नंगा कर दिया, और कपडे उतरने में बिमला ने कोई विरोध नहीं किआ बल्कि साथ hi दिया जिससे चेतन की ख़ुशी और बढ़ गयी,
चेतन तो अब पूरी मस्ती में आकर अपनी सास की छूछीयो को मसलते हुए उसे छोड़ने लगा वही बिमला की बुइ उत्तेजना हर पल के साथ बढ़ती जा रही थी वो खुद के बदन में उठती तरंगो पर काबू करने की कोशिश कर रही थी पर नाकाम हो रही थी, साथ hi दामाद से छुड़वा कर वो इतनी उत्तेजित हो गयी थी जितनी आज तक नहीं हुई थी, उसकी छूट लगातार पानी बहा रही थी,
धीरे धीरे उसके मुँह से आनंद की सिसकियाँ निकलने लगी वहीं चेतन तो जैसे जन्नत में था..
चेतन- अह्ह्ह्ह ुहम्म्म्म आह्हः क्या छूट है अम्मा बिलकुल चंचल जैसी, दोनों माँ बेटी एक जैसी हो...
Bimla-uhmm ुहम्म अह्ह्ह्ह.
बिमला को भी उत्तेजना हुई ये सोचकर की उसका दामाद उसकी छूट की तुलना उसकी बेटी से कर रहा है,
चेतन- आह्ह्ह्हह कित्नाहहह मज़ा आएगा दोनों को साथ छोड़ने में आह्ह्ह्ह अम्मठ.
ये सुनकर तो बिमला का पानी hi छूट गया की उसकी बेटी और वो साथ साथ छुड़वाए तो कैसा नज़ारा होगा, कितना गलत पर कितना उत्तेजित करने वाला होगा, बिमला ये सब सोचते हुए अपने दामाद से छुड़वा रही थी...
वहीं चेतन को तो यकीन नहीं हो रहा था की रात को hi उसकी पत्नी ने उससे ऐसी इच्छा जताई थी और अभी वो उस इच्छा को पूरी कर रहा था,
चेतन खुश होते हुए नीचे देखने लगा जहाँ उसकी सास के बड़े बड़े चूतड़ों के बीच उसका लुंड अंदर बहार हो रहा था वहीं उसकी सास का भूरा छेड़ बिलकुल कैसा हुआ उसे बेहद लुवाभ्ने और आकर्षक लग रहा था, चेतन को उसे देख कुछ सूझा और उसने अपनी एक उंगली अपने थूक से गीली की और बिमला की गांड के छेड़ पर फिरने लगा, बिमला जो की पहले hi दामाद से छुड़वा कर उत्तेजना की लहार में गोते लगा रही थी अब उसके इस हमले से सिसकने लगी..
वहीं चेतन का ये हमला सिर्फ सहलाने तक नहीं रुका अगले hi पल बिमला को महसूस हुआ की चेतन की उंगली उसके गांड के छेड़ को कुरेद रही है और फिर एक गरम एहसास के साथ उसकी उंगली बिमला की गांड के छेड़ में प्रवेश कर गयी, जिससे बिमला के बदन में तो बिजली दौड़ गयी उसका पूरा बदन झटके खाने लगा, चेतन ने उसे कास के खुद से चिपका लिया और बिमला थरथराती रही और कुछ पल बाद शांत हुई चेतन का लुंड अब भी उसकी छूट में था पर उंगली गांड से निकल चुकी थी, चेतन ख़ुशी से फूला नहीं समां रहा था की उसने अपनी सास को स्खलित होने पर मज़बूर कर दिया है...
थोड़ी देर साँसे साधारण करने के बाद बिमला गर्दन घुमा कर चेतन की और देख कर बोली- ओह्ह्ह दामाद जी रुक कहे गए छोड़ो न अपनी अम्मा कोठ..
ये सुन चेतन के चेहरे पर एक बड़ी सी मुस्कान आ गयी और फिर उसने बिमला की कमर को थामे तेज़ी से छोड़ना शुरू किया, उसके धक्के हर पल के साथ तेज़ होते गए और कुछ hi पालो में इतनी तेज़ थे की अपनी सास की छूट का भुर्ता बना रहे थे, बिमला अपने मुँह को दबाये खुद को चीखने से रोक रही थी, चेतन इस बात से उत्तेजित की अपनी सास को छोड़ रहा है साडी उत्तेजना बिमला की छूट पर निकल रहा था और तब तक निकलता रहा जब तक उसका रास बिमला की छूट में नहीं निकल गया, बिमला इस दुमदार चुदाई से एक बार और झाड़ गयी,
झड़ने के बाद दोनों बिस्तर पर पसर गए कुछ पल बाद बिमला उठी और चेतन को भी उठाते हुए बोली - दामाद जी उठो कोई आ गया तो परेशानी हो जाएगी,
चेतन मुस्कुराते हुए उठा और फिर बिमला ने चंचल की hi साड़ी लेली पहनने को साथ hi चेतन ने भी अपने कपडे पहन लिए जो बिमला ने निकले और दोनों कमरे से बहार निकल गए,
चोदामपुर
कर्मा बाघ से लौट hi रहा था की उसका फ़ोन बजा उसने उठाया और बोलै- और भाई मेरे लौंडे क्या हाल हैं?..... ाचा,...... नहीं बाघ में हूँ,.... कहाँ?..... चल आता हूँ...
और फ़ोन जेब में रख लिए..
थोड़ी देर बाद वो और सरजू पेड़ की एक दाल पर बैठ कर पेप्सी पि रहे थे.
कर्मा- और बता लौंडे क्या बात है?
सरजू थोड़ा गंभीर मुद्रा में सोचते हुए बोलै- यार कैसे बताऊँ?
कर्मा - मुँह से बता न.
सरजू- यार बात थोड़ी वैसी है.
कर्मा- क्या हुआ लुंड खड़ा नहीं होता? अरे कोई बात नहीं एक बाबा को जनता हूँ मैं हो जायेगा ठीक.
सरजू- सेल हरामी.
कर्मा - हाहाहा अबे तो टट्टे सी शकल बना के बैठा बता तो.
सरजू- तुझे याद है पिछली बार की बात हमारे बीच की.
कर्मा- हाँ याद है ऐसे hi मस्त पेप्सी पिलाई थी मैंने तुझे.
सरजू - और?
कर्मा- और क्या? और तेरी माँ की गांड देख कर हिलाया था.
सरजू- हाँ पर थोड़ी इज़्ज़त से नहीं बोल सकता.
कर्मा- ज्ञान मत छोड़ बात क्या है वो बता.
सरजू- बात वही है यार उस दिन वाली मम्मी की... मम्मी की गांड..
कर्मा- मतलब.
सरजू- मतलब उस दिन से यार मम्मी की गांड को दिनाग से निकल hi नहीं प् रहा हूँ, घर में भी मम्मी को देखता हूँ तो कल्पना करने लगता हूँ नंगी कैसी दिखती होंगी, साला बुरा हाल हो गया है, पता नहीं कितनी बार मम्मी को सोचकर हिला लिए होगा पर शांति hi नहीं मिलती.
कर्मा- अच्छा तो ये परेशानी है, मादरचोद बनने के लक्षण हैं ये तो.
सरजू- अब तू ज्ञान मत छोड़ यार साला समझ नहीं आ रहा क्या करूँ और तूने ब्बि बताया था की मैं बताऊंगा पर कुछ बताया नहीं फिर.
कर्मा- ाचा हाँ थोड़ा काम में लग गया था,
सरजू- यार कुछ करवा सेल मम्मी के सामने आते hi लुंड खड़ा हो जाता है बड़ी मुश्किल से छुपता फिरता हूँ.
कर्मा- अरे यही तो गलत करता है सेल छुपता क्यों है.
सरजू- ाचा फिर और क्या करूँ दिखता फिरूं सबको? चूतिया है क्या? अब कल मैं मम्मी बिरजू पापा लड़ो सब बुआ के घर जा रहे हैं वहां पर किसी ने देख लिए तो क्या सोचेंगे,
कर्मा- अबे झंटू सबके सामने नहीं, सिर्फ जब तू और चची हो तब और ऐसे बर्ताव कर जैसे ये कोई बड़ी बात नहीं है, अगर लुंड खड़ा है तो काम में लगा रह, उन्हें देखने दे तू मत जाता उन्हें की तू उन्हें देख रहा है.
सरजू- और?
कर्मा- और क्या सोते हुए कच्चा पहन कर सो और जब चची आएं तो उन्हें अपना खड़ा लुंड दिखने की कोशिश कर...
कुल मिलकर उन्हें अपना लुंड दिखा पर ये नहीं लग्न चाहिए की तू जान बूझ कर दिखा रहा है.
सरजू- अच्छा ऐसी, समझ गया..
कर्मा- वैसे पूरा परिवार जा क्यों रहा है, बुआ के यहाँ? जानवरो को कौन देखेगा?
सरजू - अरे बुआ के लड़के का मुंडन है, और नीतू नहीं जा रही वो रुकेगी,
ये बात सुनकर कर्मा के कान खड़े हो गए,
कर्मा - ाचा चल कोई नई वैसे ले जाते उसे भी जानवरो की देख रेख हम कर लेते.
सरजू- अरे नहीं उसे पढाई वधाई करनी है ..
कर्मा - चल वो सही है पर जो मैंने बताया उस पर ध्यान देना,
सरजू- हाँ बिलकुल यार,
कर्मा- और कोशिश किआ कर उन्हें छूने की जैसे प्यार में गले लगा लिए, पेट पर हाथ फिरा दिया.
सरजू- अरे वो तो करूँ पर लुंड खड़ा रहता है वो चुभ जायेगा.
कर्मा- चुभने दे पर तू ऐसे दिखा जैसे सब बिलकुल साधारण है,
सरजू- सेल मार पद जाएगी.
कर्मा- नहीं पड़ेगी पर अगर छूट चाहिए तो थोड़ी तो हिम्मत दिखानी पड़ेगी.
सरजू- बात तो सही है.
कर्मा- चल फिर चलते हैं और आज से hi लगजा काम पर.
सरजू- जी गुरु देव,
हँसते हुए कहता है और दोनों मज़ाक करते हुए निकल जाते हैं...
जारी रहेगी
रमन- तुम्हारे शैतानी मुस्कान देख कर लग रहा है कुछ खतरनाक hi सोचा है तुमने..
रिमझिम इस बात पर मुस्कुरा दी...
अपडेट 188
सरलपुर
अगली सुबह हो चुकी थी और ज़्यादातर घरवाले तो अभी सो hi रहे थे आखिर रात को म्हणत जो की थी जागकर, खैर घर की बहु होने के नाते चंचल हमेशा की तरह पहले उठी और फिर जल्दी hi रिमझिम भी और फिर दोनों ने घर का काम संभल लिए वहीं, बाकि सब भी धीरे धीरे उठने लगे सब छुट्टियों को पूरी तरह आनंद ले रहे थे कोई नहाने की जल्दी नहीं, आराम से सुस्ता सुस्ता के काम करो, खैर सुबह के चाय नाश्ता के बाद सबके ऊपर था कौन क्या करना चाहता है, चरण सिंह दोनों संधियों के बीच बैठ बहार चॉपर पर बैठ कर रह रह कर चंचल का भोग लगाने का मौका देख रहे थे और उसके साथ खेलने का मौका ढूंढ रहे थे वहीं तीनो जवान जोड़े रात के खेल के बाद आपस में पूरी तरह खुले हुए थे और इशारों में तो कहीं हलकी फुलकी छेड़खानी में बातें कर रहे थे,
मौका देख कर चेतन ने पूर्वी की छूछीयो को रसोई में कास कर दबाया तो रमन भी आते जाते हुए अपनी भाभी के बड़े बड़े चूतड़ों को मसलने का मौका नहीं छोड़ रहा था पंकज भी कभी रिम्मी तो कभी चंचल दोनों से मज़े ले रहे थे, चंचल रिम्मी और पूर्वी भी इस छेड़खानी का आनंद उठा रही थी...
तीनो संधनें भी साथ साथ थी और उनकी नयी नयी दोस्ती भी परवान चढ़ रही थी, तीनो hi सबसे छुपकर बिलकुल नयी नवेली जवान होती लड़कियों की तरह एक दुसरे से गंदे गंदे और अश्लील मज़ाक कर मज़े ले रही थी...
माधुरी- बिमला रानी क्या बात है आज तो बदली बदली सी लग रही हो,
सावित्री- अरे रात को बिमला रानी की अचे से ठुकाई हुई है इसलिए हैं न?
बिमला भी अब दोनों के साथ रह कर बोलना सीख रही थी- और क्या कहो तो तुम दोनों की भी करवाडुं.
सावित्री- हाय बिमला रानी करवा दो न,
सावित्री ने कामुक ढंग से कहा तो तीनो हंस पड़े...
इसी बीच चंचल और रिमझिम ने सबको नहाने का निर्देश दिया ताकि सब नहालें फिर खाना पीना खाया जाये और दोपहर का कुछ प्रोग्राम बने की क्या करना है,
लड़को ने तय किआ की वो लोग तो बहार तुबेल पर नहाएंगे बाकि औरतों ने घर के दोनों बाथरूम हथिया लिए, ऊपर के बाथरूम में पूर्वी घुस गयी तो नीचे वाले में माधुरी और सावित्री भी तैयार थी, चंचल और रिमझिम पहले hi नाहा चुके थे,
इधर जहाँ सब नहाने और दुसरे कामों में व्यस्त थे उसी बीच चरण सिंह अपने दोनों संधियों को नहाने के लिए कपडे लेन का बहाना बना कर उनसे अलग घर के अंदर गए और मौका देखने लगे चंचल को दबोचने का, इसी बीच उन्हें मौका मिला भी चंचल अपने अम्मा बाबा का बिस्तर ठीक करने के लिए उनके कमरे में घुसी तो चरण सिंह ने उसे जाते देख लिए और सब की नज़र बचते हुए पीछे से घुस गए और चंचल को पकड़ लिए,
पहले तो चंचल बिलकुल चौंक गयी फिर अपने ससुर को देख मन hi मन मुस्कुराने लगी, हालाँकि उसे चिंता भी थी की कहीं कोई देख न ले,
चंचल- अरे पापाजी तुम यहाँ क्या कर रहे हो कोई आ गया तो गड़बड़ हो जाएगी.
चरण सिंह- अरे बहु कोई नहीं आएगा, सच कह रहा हूँ अब और रहा नहीं जा रहा आजा अपने ससुर पर थोड़ा प्रेम बरसा दे,
चंचल- वो प्रेम नहीं हवस है पापाजी जो तुम मांग रहे हो,
चरण सिंह- जो कुछ है, बस अब और मत तड़पा,
ये कहकर चरण सिंह ने लपक कर चंचल को पकड़ लिए, वहीं चंचल भी अपने पति से हुई रात की बातों को सोचने लगी वैसे तो उसे कुछ आपत्ति नहीं थी अब अपने पति की स्वीकृति के बाद बस उसे किसी के द्वारा देखे जाने की चिंता थी,
चंचल- पापाजी समझो तो सही कोई आ गया तो गड़बड़ हो जाएगी,
चरण सिंह- कोई नहीं आएगा रुक.
यव कह चरण सिंह उससे अलग हुए और अंदर से दरवाज़ा लगा दिया, वहीं चंचल भी सोचने लगी की अभी किसी के आने की संभावना काम hi है,
चरण सिंह दरवाज़ा लगा कर बापिस आये और चंचल को पकड़ने की कोशिश की तो वो उनसे दूर होकर खिलखिलाते हुए बिस्तर पर चढ़ गयी,
चंचल- नहीं पापाजी.
चरण सिंह को ये अव्हा लगा उनकी बहु हंस कर उनसे भाग रही है और मज़ाक कर रही है इसी मज़ाक में शामिल होते हुए उसे पकड़ने बिस्तर पर कूद पड़े, और चंचल की बाहन पकड़ ली.
चंचल- छोडो न पापाजी कोई आ जायेगा,
चरण सिंह- अरे बहु दरवाज़ा बंद है कैसे आ जायेगा कोई..
चंचल- ाचा दरवाज़ा बंद करके अपनी बहु के साथ क्या करना चाहते हो पापाजी?
चरण सिंह- कुछ नहीं बस अपनी बहु को थोड़ा प्यार करना चाहता हूँ.
ये कहते हुए चरण सिंह ने चंचल को अपनी बाहों में भर लिए..
चंचल- धत्त्त कैसा प्यार करना चाहते हो सब समझती हूँ मैं.
ये कहकर चंचल अलग होकर घूम गयी.
चरण Singh-are बहु सब समझ hi रही है तो क्यों तड़पा रही है अपने पापाजी को.
ये कह कर चरण सिंह ने पीछे से चंचल को पकड़ लिए और खुद उससे पीछे से चिपक गए, चंचल को भी चूतड़ों के बीच ससुरजी का कड़क लुंड महसूस हुआ वहीं ससुरजी ने उसकी साड़ी का पल्लू उसके सीने से हटा नीचे गिरा दिया था..
चंचल- ओह्ह पापाजी...
चरण सिंह बहु की गर्दन को चूमते हुए उसके नंगे पेट को मसलने लगे वहीं चंचल भी मस्त होने लगी अपने ससुर के हाथों को बदन पर और उनके लुंड को अपनी गांड की दरार में...
वहीं चरण सिंह का तो जोश हर पल बढ़ता जा रहा था और उसी जोश में उनके हाथ बहु के कोमल पेट से ऊपर सरकते हुए उसके ब्लाउज के ऊपर चूचियों पर आ गए और दबाने लगे, चंचल भी अपनी चूचियों के मसले जाने से मस्त होने लगी...
दोनों ससुर बहु अपनी अपनी हवस एक दुसरे के सहारे शांत करने की कोशिश करने लगे, चरण सिंह को भी हालाँकि समय और स्थिति का ज्ञान था इसीलिए उन्हें भी पता था ज़्यादा समय लेना सही नहीं है, और उन्होंने आगे बढ़ने का निश्चय किआ, चरण सिंह ने चंचल को अपनी और घुमाया और उसके नाज़ुक कोमल होंठों पर अपने होंठ रख दिए और चूसने लगे, साथ hi उनके हाथ भी बहु के बदन पर चलते हुए उसकी साड़ी को पकड़ कर उतरने लगे और कामयाब भी हो गए, चंचल का विरोध भी अब न के बराबर रह गया था, और उसने सोचा ससुर जी ऐसे जाने नहीं देंगे तो इससे ाचा जल्दी से निपटाया जाये,
चरण सिंह ने साड़ी के बाद अगला हमला तुरंत पेटीकोट के नाड़े पर बोलै और अगले hi पल उसे खोल कर नीचे सरका दिया जिसे चंचल ने खुद अपने पैरों से निकल दिया, वहीं चंचल ने साथ देते हुए खुद से अपना ब्लाउज उतर कर अलग फ़ेंक दिया,
चरण सिंह के सामने उनकी बहु अब सिर्फ ब्रा पंतय में थी, सबके होते हुए अपनी बहु के साथ इस स्थिति में होने पर चरण सिंह को एक अलग hi रोमांच और उत्तेजना का अनुभव हो रहा था. चंचल का भरा हुआ गदराया बदन सिर्फ ब्रा पंतय में देख चरण सिंह का लुंड ठुमके मरने लगा, चरण सिंह बहु को देखते हुए अपने कपडे उतरने लगे, और जल्दी hi नंगे हो गए उधर चंचल ने भी अपनी ब्रा पंतय को भी तब तक अपने बदन से अलग कर दिया था और बिलकुल नंगी हो कर अपने ससुर के सामने लेट गयी,
चरण सिंह- अह्ह्ह बहु तुझे ऐसे देख कर तो मुर्दे में भी जान आ जाये,
चंचल- मुर्दे का पता नहीं पापाजी तुम अपनी जान दिखाओ न अब,
चरण सिंह ने भी देर करना उचित नहीं समझा और तुरंत चंचल की टैंगो के बीच जगह ली और फिर अपना फडकता हुआ लुंड पकड़ कर बहु की गरम छूट के मुहाने रखा और फिर उसकी आँखों में देख कर अंदर घुसा दिया, जिसके साथ hi चंचल के मुँह से एक हलकी सी आह निकल गयी.
चंचल- आह्ह्ह्हह पापाजी ओह्ह्ह.
चरण सिंह को तो यकीन नहीं हो रहा था की सबके घर में होते हुए वो अपनी बहु को छोड़ पाने में सफल हो रहे थे, वहीं चंचल को भी एक नया रोमांच मिल रहा था, चरण सिंह ने चंचल की कमर को थमा और फिर धक्के लगाना शुरू कर दिया और अपनी बहु की चुदाई शुरू कर दी,
चरण सिंह- आह्ह्ह्हह बहु ओह्ह्ह्हह्हह तेरी छूट में तो जन्नत का मज़ा है..
चंचल- अह्हह्ह्ह्ह हांण पापा जी लूट लो अपनी बहु की छूट का मज़ाआ आह्ह्ह्हह,
चरण सिंह- मन करता है तुझे छोड़ता hi रहूं, अह्ह्ह्हह क्या मस्त बदन है तेराआठ.
चरण सिंह ने चंचल की छूछीयो को मसलते हुए उसकी छूट में धक्के लगते हुए कहा,
चंचल- अह्ह्ह पापा जी तो छोड़ लिए करो नाआहहहहहहह अह्ह्ह्हह तुम्हारी बहु हूँ तुम्हारा तो हक़ बनता है...
चंचल जानकार अपने ससुर जी को उकसाने के लिए ऐसी बात कर रही थी ताकि वो उत्तेजित होकर जल्दी झड़ें, नहीं तो बेकार में पकड़े जाने का खतरा था,
चरण सिंह- हाँ सही कहा बहु बेटे के बाद आह्ह्ह्ह मेरा hi तो हक़ बनता है, जो चीज़ मेरी है वो उसकी है और जो उसकी है वो मेरी..
चंचल- हाँ पापाजी और आप तो उनकी चीज़ का भरपूर उपयोग कर भीईई अह्ह्ह्हह रहे हो,
चंचल ने अपनी टांगों को चरण सिंह के पिछवाड़े पर कस्ते हुए कहा, लेकिन तभी उसे एहसास हुआ जैसे दरवाज़ा के बगल वाली खिड़की के बीच से कोई झाँक रहा है, उसने गर्दन घुमा कर देखा तो उसे कोई नज़र नहीं आया साथ hi खिड़की भी बंद दिखी.. उसका ध्यान बापिस चुदाई पर आ गया,
चरण सिंह- अह्ह्ह्ह एयर क्याःह्ह्ह्हह्ह बहुउउउहाहहह जब चीज़ तेरे जैसीईई हो तो कौन छोड़ेगा..
चंचल- तोहाहहह अपने बेटे को क्याःह्ह्ह्हह्ह डोज तुम पापाजी उसकी बीवी की छूट के बदले में...
चरण सिंह- अरे उसे किस चीज़ की मन है सब उसी का तो है, साडी संपत्ति सब कुछ तुम लोगो का hi है,
चंचल- ये सब नहीं पापाजी, संपत्ति की बात नहीं है,
चरण सिंह- अह्ह्ह्ह फिर और क्या चाहिए मेरी रसीली बहु को अपने पति के लिए,
चरण सिंह ने धक्के लगते हुए उसकी छुच्छी को मुँह में भर के पीते हुए कहा..
चंचल- ओह्ह्ह्हह्हह ुहममम चुत के बदले छूट मिलनी चाहिए नाआहहहहहहह...
चरण सिंह थोड़े असमंजस में दिखे - पर बहु छूट के बदले में किसकी छूट दिला सकता हूँ उसे, किसी बाज़ारू औरत की?
चंचल- नहीं अह्ह्ह पापजीई अह्ह्ह्ह, बाज़ारू औरत की नहीं..
चरण सिंह- फिर किसकी ?
चंचल- मैं जिसकी कहूँगी उसके लिए तुम राज़ी हो जाओगे पापाजी?
चरण सिंह- हाँ अह्ह्ह बेटाःह्ह्ह्हह्ह पर बता तो पहले,
चंचल- बीवी के बदले बीवी..
चरण सिंह ये सुन बिलकुल हैरत में पद गए फिर असमंजस में बोले
चरण सिंह- मतलब मैं कुछ समझा नहीं..
चंचल- मतलब मम्मी जी की छूट,
ये सुन चरण सिंह बिलकुल चौंक गए और ज्यों के त्यों रुक गए,
चरण सिंह - बहु तू यह क्या कह रही है, कुछ सोच समझ तो रही है न,
चंचल- हाँ पापाजी बिलकुल सोच समझ कर बोल रही हूँ मैं चाहती हूँ की तुंहारा बीटा अपनी माँ यानि तुम्हारी बीवी को चोदे जैसे तुम उसकी बीवी को छोड़ रहे हो,
बस इतना सुन्ना था की चरण सिंह का लुंड चंचल की छूट में फूलने लगा और उसने पिचकारी छोड़ दी और अपनी बहु की छूट को रास से भर दिया.. अपनी छूट में ससुर का रास महसूस कर चंचल खिसक कर उठी और चरण सिंह का लुंड उसकी छूट से निकल गया, उठकर चंचल फटाफट कपडे पहनने लगी वहीं चरण सिंह जो अभी चंचल ने बोलै था उसी में खोये हुए थे,
चंचल साड़ी लपेटते हुए चरण सिंह से बोली- सोच लो पापा जी, शाम तक और सोच कर बता दो मुझे अगर हाँ है तो इनाम में पीछे की सैर भी मिल सकती है आज hi,
ये कह मुस्कुराते हुए चंचल दरवाज़ा खोल कर चली गयी वहीं चरण सिंह हैरान परेशां से उसके पीछे कमरे से बहार निकल गए,
वहीं जब ये ससुर और बहु अपनी हवस मिटने में लगे थे और चंचल को शंका हुई थी की कोई उन्हें देख रहा है, वो यूँ hi नहीं थी पर कौन था वो ये जानने के लिए चुनें थोड़ा सा पीछे जाना होगा,
नीचे वाले बाथरूम के बहार बिमला और सावित्री नहाने का इंतज़ार कर रही थी और माधुरी अंदर थी,
सावित्री - अरे ये भी कितनी देर लगा रही हैं अंदर,
बिमला - कोई बात नहीं जीजी, बहुत गरम है संधान थोड़ा ठंडा हो जाने दो,
ये कह दोनों हंसने लगे,
इतने में hi हल्का सा बाथरूम का दरवाज़ा खुला और उसमे से पानी निकला जो की सीधा बिमला के ऊपर गिरा, सावित्री एक और होने से बच गयी , माधुरी ने पानी फ़ेंक तुरंत दरवाज़ा बंद कर लिए और अंदर से hi बोली - बकड़े मज़े ले रही थी न दोनों बहार.
बिमला - बर्चोढी, अरे मज़े दोनों ले रही थी तो दोनों पर गिरती न हमें hi भीगा दिया,
सावित्री - अरे तो का हुआ नहाना hi तो है,
बिमला- अरे पर जो कपडे पहनने थे देखो ये भी भीगा दिए, निकलने दो बहार बताती हूँ
सावित्री - अरे छोडो न बिमला रानी जाओ दूसरी साड़ी ले आओ.
बिमला- हाँ ला रही हूँ पर संधान की गांड में मुसल डेल बिना मैं भी नहीं मानूंगी.
ये कह बिमला बापिस अपने कमरे की और आई जहाँ उसका सामान था पर दरवाज़े के पास आकर उसने देखा वो अंदर से बंद था, उसे समझ नहीं आया क्यूंकि वो तो उसे खोल कर गयी थी उसने खोलने के लिए जैसे hi हाथ आगे बढ़ाया उसे अंदर से आवाज सुनाई दी, उसका हाथ वहीं रुक गया उसने सोचा अंदर कौन हो सकता है एक पल को तो उसने सोचा आवाज़ लगा कर पूँछ लूँ, पर जिस तरह की उसे आवाज़ आई थी उसे सुन उसके मन में कुछ और hi बातें आर लगी,
वो इधर उधर देखने लगी ताकि अंदर देख सके, दरवाज़े के दूसरी और उसे खिड़की दिखी पर वो भी बंद थी, उसने खिड़की के पास जाकर देखा तो खिड़की जहाँ से बंद होती थी वहां कई दरारें ज़रूर थी जिनसे अंदर देखा जा सकता था,
बिमला ने बिना देरी के अपनी आँख एक दरार पर लगा दी और उसने जो अंदर देखा उसे देख उसका बदन कांप गया,,
अंदर बिस्तर पर उसकी बेटी बिलकुल नंगी लेती हुई थी और उसकी टैंगो के बीच बिमला के समधी, बेटी के ससुर थे जो अपनी hi बहु को सटासट छोड़ रहे थे, ये देख कर तो बिमला का खून सूख गया उसकी बेटी अपने hi ससुर के साथ, उसका सर चकराने लगा, साथ hi उसकी नज़र दोनों पर जैम सी गयी, उसका मन हुआ अभी अंदर जाकर अपनी बेटी के गाल पर दो तमाचे लगाए और उसके ससुर को भी खूब खरी खोटी सुनाये,
फिर उसके मन में आया नहीं बिमला ये मत करना भूल स्वे भी अगर किसी को खबर हो गयी तो बिटिया का जीवन बर्बाद हो जायेगा, चेतन जैसा पति उसे कहाँ मिलेगा, चेतन के बारे में सोचते hi बिमला के मन में कई ख्याल आने लगे, बेचारे दामाद जी कितने अचे हैं और ये उन्हें धोखा दे रही है, अगर दामाद जी को ये पता लगा तो क्या होगा की उनकी पत्नी उनके अपने पिता के साथ , हाय ढैय्या चंचल बिटिया ये तूने का किआ..
वहीं लगातार देखने से उसका तन जैसे अपने आप hi अपने hi दिमाग से काम करने लगा, उसकी छूट पनियाने लगी, उसे तो तब खबर हुई जब उसका एक हाथ साड़ी के ऊपर से उसकी छूट को मसलने लगा, जब उसे ये एहसास हुआ तो उसने तुरंत अपना हाथ झटक लिया और खुद को कोसने लगी,
छही छी का हो गया है मुझे अपनी hi बेटी और ससुर को देख मुझे उत्तेजना हो रही है, बेटी का गृहस्थ जीवन संकट में है और मुझे अपनी छूट की पड़ी है,
वो यह सब सोच hi रही थी की उसके कानो में एक आवाज़ पड़ी चंचल के नाम की,
वो तुरंत खिड़की से दूर हो गयी और कमरे के दूसरी और आकर देखा तो दामाद जी थे जो की चंचल को बुला रहे थे,
चेतन को चंचल को आवाज़ लगते देख बिमला का दिमाग फिर घूमने लगा- है ढैय्या दामाद जी तो बिटिया को hi बुला रहे हैं, और ये तो, कहीं दामाद जी ने उसे इस हालत में देख लिए तोह, नहीं नहीं ऐसा नहीं हो सकता.
ये सोच कर वो चेतन की और भागी और आंगन को फुर्ती में पार कर दूसरी और पहुंची.. जहाँ चेतन सिर्फ एक तौलिया लपेटे हुए गीला खड़ा था और चंचल को पुकार रहा था.
बिमला- का का हुआ दामाद जी कछु चाहिए का?
चेतन - नहीं अम्मा वो चंचल कहाँ है?
बिमला- चंचल वो चंचल तो हमारा कछु काम कर रही है.
चेतन- चलो छोडो फिर कोई बात नहीं,
बिमला- नहीं दामाद जी का हुआ बताओ तो.
चेतन - अरे अम्मा वो मेरे कपडे लेने थे अब ये चंचल को hi पता है कौनसे बैग में रखे हैं.
बिमला- अरे हम निकल देते हैं चलो.
चेतन- अरे कोई नहीं अम्मा तुम क्यों परेशां होती हो.
बिमला- अरे इसमें परेशानी कैसी आओ चलो..
चेतन- ठीक है चलो, पर ये तुम्हारी साड़ी कैसे भीग गयी.
चेतन ने बिमला के पीछे चलते हुए कहा..
बिमला- अरे ये तो तुम्हारी मम्मी की बदौलत है, देखो कैसा मज़ाक किआ है,
चेतन- हाहाहा सही है तुम तीनो लोगो की दोस्ती सही जैम रही है,
बिमला- अरे छोडो बस यही मज़ाक चलता रहता है.
इतने में दोनों चंचल और चेतन के कमरे में आ गए थे,
चेतन- यही तो ज़िन्दगी है अम्मा, दो पल हंस खेल लो परिवार के साथ,
चेतन एक और खड़ा हो गया और बिमला एक बैग खोल कर झुक कर उसमे देखने लगी, वहीं उसकी साड़ी और पेटीकोट गीले होने की वजह से उसके मोठे चूतड़ों से चिपके हुए थे जो की झुकने की वजह से और उभर कर सामने आ गए और उसी समय चेतन की नज़र अपनी सास के बड़े से और गोल मटोल नितम्बों पर पड़ी जो की गीली सारे और पेटीकोट में अपना पूरा आकार दिखा रहे थे,
ये देखते hi चेतन के दिमाग में चंचल की कही बातें आ गयी जो उसने अपनी माँ के बारे में कहीं थी और चेतन का लुंड तौलिया को उठता हुआ सर उठाने लगा, इधर बिमला ने अचे से बैग को देखा और फिर मुद कर चेतन से बोली- इसमें तो नहीं है दामाद जी,
और जैसे hi उसनर ये कहा उसकी नज़र अकस्मात् hi चेतन के उठे हुए तौलिये पर पद गयी और अगले hi पल बिमला की एहसास हुआ की तौलिया किस वजह से उठा है तो वो मन hi मन झेंप गयी,
बिमला मन hi मन सोचने लगी- हाय ढैय्या ये दामाद जी का लिंग खड़ा क्यों है अभी तक तो ठीक था, कहीं ये हमारे पिछवाड़े को देख नहीं रहे थे, हाय रे ये भी अपने बाप जैसे हैं, पर इसमें क्या गलती बेचारी की हमारी भी तो साड़ी पेटीकोट भीगा हुआ है बिलकुल चूतड़ से चिपका हुआ होगा, ये सब सोचते हुए बिमला की छूट पनियाने लगी..
चेतन- छोडो अम्मा मैं ढूंढ लूंगा, तुम जाओ नहालो जाकर कब तक ऐसे गीले कपड़ो में घूमोगी.
बिमला चेतन की आवाज़ से ख्यालों से बहार निकली और बोली- अरे कोई बात नहीं दामाद जी , अभी मिल जायेगा ये कह वो कमरे में नज़र दौड़ने लगी, वहीं चेतन अब उसके पूरे बदन का नाप लेने लगा, और जितना वो अपनी सास को देख रहा था उतना उसका लुंड और कड़क होकर ठुमके मार रहा था..
बिमला- उस थैले में हो सकती है,
ये कहते हुए उसने एक अलमारी में रखे थैले की और इशारा किआ, और आगे बढ़ उस थैले को अलमारी से उतर कर जैसे hi बिस्तर पर रखा उस थैले के ऊपर चिपकी हुई एक छिपकली डर से उछली और बिमला के सीने पर जाकर चिपक गयी, जिसके होते hi बिमला चिल्लाते हुए उछलने लगी और अपनी साड़ी को हटा कर उससे दूर करने की कोशिश करने लगी, इधर क्यूंकि बिमला की पीठ चेतन की और थी उसे समझ नहीं आया की अचानक क्या हुआ और वो घबरा कर बिमला की और लपका देखने के लिए और उसी लपकने में उसका तौलिया खुल कर नीचे गिर गया, वहीं बिमला ने तो अपनी साड़ी को पकड़ कर तब तक उतर कर नीचे फ़ेंक दिया था और छिपकली के लिए अपने बदन को देख रही थी, वहीं चेतन ने उसे पकड़ा और पुछा- क्या हुआ अम्मा..
बिमला- वह छिपकली..
चेतन- क्या छिपकली, तुम भी न अम्मा डरा hi दिया,
बिमला- अरे डरा hi क्या दिया हम खुद घबरा गए,
बिमला ने शांत होकर मुद कर चेतन की और देखकर कहा तो चौंक गयी क्यूंकि उसका दामाद बिलकुल नंगा उसके सामने खड़ा था जिसका लुंड कड़क होकर लहरा रहा था, कुछ पल तो बिमला की नज़र चेतन के लुंड पर hi जैम गयी पर फिट उसने खुद को संभाला और दूसरी और घूम गयी, वहीं ये देख चेतन को भी अपनी स्थिति का अंदाज़ा हुआ तो वो झेंप गया,
बिमला- दामाद जी दरवाज़ा लगा दो कोई ऐसे देख लिए तो...
बिमला ने दूसरी और चेहरा किये हुए hi कहा,
चेतन बेचारे के मुँह से सिर्फ हहहहहाँ निकला और वो दरवाज़े की और लपका और अंदर से कुण्डी लगाडी,
वहीं बिमला धड़कते मन के साथ थैले को खोल उसमे कपडे देखने लगी..
वहीं कुण्डी लगाने के बाद चेतन मुदा तो उसका दिमाग फर्ररी की गति से भी तेज़ दौड़ने लगा, कभी उसके मन में रात का खेल आता तो कभी उसके और चंचल की बातें तो कभी उसके पापा और चंचल के बीच जो हुआ उसका ख्याल, एक hi साथ बहुत से ख्यालों ने उसे घेर लिए, पर वहीं उसकी नज़र अपनी सास की गीले पारदर्शी पेटीकोट में चमकते हुए मोठे मोठे चूतड़ों पर थी जिन्हे देख साफ़ पता चल रहा था की पेटीकोट के नीचे उसकी सास ने चड्डी नहीं पहनी थी, फिर उसके दिमाग में आया की अम्मा ने मुझे दरवाज़ा बंद करने को क्यों बोलै, तौलिया उठाने को क्यों नहीं,
यही सोचते हुए और अपनी सास की गांड देखते हुए वो एक एक कदम से बिमला की और बढ़ने लगा जो की बैग से एक एक कपडा निकल कर देख रही थी,
वही चेतन का दिमाग अब भी चल रहा था, अगर कुछ दिन पहले की बात होती तो चेतन ऐसी स्तिथि मैं शर्म से तुरंत कमरे से निकल गया होता पर पिछले कुछ दिनों में जो हुआ था उसने चेतन के सोचने के ढंग को बिलकुल बदल कर रख दिया था, खासकर ये जानकार की उसकी पत्नी उसके पिता से चुद चुकी है वो अपनी सास को लेकर फैसला नहीं कर पा रहा था, वहीं पेटीकोट से झांकते बिमला के बड़े बड़े चूतड़ उसकी परेशानी और बढ़ा रहे थे,
चेतन बिमला के बिलकुल पीछे जाकर खड़ा हो गया उसका खड़ा लुंड बिमला के चूतड़ों से कुछ इंच hi दूर था,
चेतन- मिला क्या कुछ अम्मा?
चेतन ने पीछे से पूछा तो बिमला बिना उसकी तरफ देखे hi बोली- देख रही हूँ दामाद जी अभी मिल जायेगा,
बिमला ने ये बोलै hi था की चेतन ने कुछ ऐसा किआ जिससे वो बिलकुल हैरान रह गयी उसे अपनी नंगी कमर पर चेतन का हाथ महसूस हुआ, जिसे महसूस कर वो गंगना गयी,
चेतन ने अपनी सास की कमर पर हाथ रखते हुए सहलाते हुए बोलै- कोई बात नहीं अम्मा देख को आराम से...
बिमला- हम्म्म्म
से ज़्यादा नहीं बोल पाई और अपनी कमर पर अपने दामाद के हाथ को महसूस कर न चाहते हुए भी उत्तेजित होने लगी, तभी अचानक चेतन ने उसकी कमर सर हाथ हटा लिए और bola-amma हिलना मत, ऐसे hi रुको.
बिमला ने हैरान रहते हुए पुछा- क्या हुआ दामाद जी..
चेतन- अरे ये छिपकली अभी भी तुम्हारे पेटीकोट से चिपकी पड़ी है
बिमला- हाय ढैय्या रे. हटाओ इसे जल्दी.
चेतन- हिलना मत नहीं तो ऊपर चढ़ जाएगी.
बिमला- हाँ हाँ हटाओ दामाद जी..
बिमला बिलकुल जड़ होकर कड़ी हो गयी उसे कुछ पल बाद अपना गीला पेटीकोट नीचे से उठता हुआ महसूस हुआ, बिमला शर्म से और उत्तेजना से कंपनी लगी क्यूंकि अपने दामाद के सामने वो इस स्थिति में थी, पेटीकोट अब उसके घुटनो के भी ऊपर उठने लगा था,
बिमला- दद दामाद जी..
चेतन- ुहम्म अम्मा ऐसे hi रहो बस हटाने वाला हूँ,
वहीं चेतन का उत्तेजना से बुरा हाल था उसका लुंड ऐसा लग रहा था की फैट जायेगा, पेटीकोट उठाते हुए उसे अपनी सास की मोती केले के तने जैसी मांसल जांघें दिखने लगी थी और वो ये जनता था की पेटीकोट के अंदर उसकी सास ने चड्डी नहीं पहनी है तो हर इंच पेटीकोट उठने के साथ उसकी धड़कन बढाती जा रही थी,
बिमला- दामाद जी और कितनी देर?
चेतन - बस्सस एक मिनट और अम्मा तुम बस थोड़ा आगे झुक जाओ अपने हाथ बिस्तर पर टिका दो,
बिमला को ये बात बिलकुल अजीब लगी पर फिर भी न जाने क्यों उसने तुरंत अपने हाथ बिस्तर पर चेतन के कहे अनुसार टिका दिए,
इससे चेतन के सामने उसकी सास की गांड और उभर कर आ गयी, एक पल को तो चेतन को लगा वो झाड़ hi जायेगा पर उसने खुद पर काबू किआ अब पेटीकोट से सिर्फ बिमला के चूतड़ ढके हुए थे आगा थोड़ा सा भी ऊपर उठता तो वो अपनी सास की छूट और गांड देख सकता था,
चेतन ने एक गहरी सांस ली और कांपते हुए हाथों से पेटीकोट को और उठाया और धीरे धीरे उसके सामने अपनी सास की फूली हुई छूट और फिर गांड का भूरा कैसा हुआ छेड़ आ गया, चेतन तो बस कुछ पल यूँ hi देखता hi रह गया,
बिमला- का हुआ दामाद जी अब कितनी देर?
बिमला की आवाज़ से चेतन को होश आया..
वहीं बिमला झुकी हुई इंतज़ार कर रही थी उसे अपनी जांघों पर ठंडी हवा महसूस हो रही थी जो उसे और उत्तेजित कर रही थी, कुछ पल की ख़ामोशी के बाद उसे महसूस हुआ की दामाद जी कुछ हरकत कर रहे हैं पर क्या उसे समझ नहीं आया वो सोच रही थी की किस स्तिथि में है वो अपने दामाद के सामने अधनंगी कड़ी है, वही दामाद पूरा नंगा है, यहाँ आकर दो दिनों में hi न जाने क्या क्या बदल गया है,
इसी बीच उसे अपनी कमर पर फिर से चेतन का हाथ महसूस हुआ जिस पर उसने कुछ खास प्रतिक्रिया नहीं दी और अपने ख्यालों में खोई रही की अगले hi पल उसे अपनी छूट के होंठों पर एक गरम एहसास हुआ जिससे वो चौंक गयी और जब तक वो कुछ प्रतिक्रिया करती अगले hi पल उसके छूट के होंठ खुले और उसमे उसे कुछ अंदर समता हुआ महसूस हुआ, अब उसे ये समझते तो देर न लगी की ये क्या है, पर वो हैरान होकर सिर्फ इतना hi कह पाई- दामाआद जी एहहहहह क्याआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह.
वहीं दूसरी और चेतन से अपनी सास को ऐसे देख कर और काबू नहीं हुआ था तो उसने एक बड़ा निर्णय लेते हुए अपने लुंड को पकड़ा और उसे अपनी सास की छूट के मुहाने लगा उसकी छूट में सरका दिया और ये सब उसने इतना जल्दी किआ ताकि बिमला को सँभालने तक का समय न मिले.
बिमला- नाहीइ दामाद जी ये गलत है निकालू अह्ह्ह दामाद जी,
बिमला के अंदर जो संस्कार थे वो इसका विरोध करने लगे हालाँकि उसके बदन की और से कोई विरोध नहीं दिखा वो ज्यों की त्यों झुकी हुई कड़ी थी.
अपनी सास की गरम छूट में लुंड घुसकर चेतन को तो मानो जन्नत मिल गयी थी उसे एहसास हुआ की चंचल की कामुकता उसका बदन उसे उसकी माँ से hi मिला है , ये सोचते हुए चेतन ने अपनी सास की कमर को पकड़ कर एक धक्का और लगाया और अपने पूरे लुंड को जड़ तक अपनी सास की छूट में समां दिया...
बिमला- ओह्ह्ह्हह्हह अह्ह्ह्हह अम्मम्माह्ह्ह्हह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह दैयाआआह्ह्ह्हह्ह दामाद जीई अह्ह्ह.
चेतन- अह्ह्ह्ह अम्मम्माह्ह्ह्हह्ह कितनी गरम छूट है तुम्हारी आह्ह्ह्ह...
चेतन से ये सुन बिमला बिलकुल hi शर्मा गयी और कुछ नहीं बोली वही चेतन ने ये जान कर बोलै था वो चाहता था की बिमला उसके सामने खुले नहीं तो चुदाई के बाद भी वो उससे नज़रें चुराती हुई फिरेगी.
चेतन ने धीरे धीरे धक्के लगाना शुरू कर दिया साथ hi उसने हाथ आगे लेजाकर बिमला के ब्लाउज को भी खोल दिया और फिट उतर दिया फिर बिमला की ब्रा को और अंत में पेटीकोट का नाडा खोल उसे भी बिमला के सर की और से निकल कर उसे पूरा नंगा कर दिया, और कपडे उतरने में बिमला ने कोई विरोध नहीं किआ बल्कि साथ hi दिया जिससे चेतन की ख़ुशी और बढ़ गयी,
चेतन तो अब पूरी मस्ती में आकर अपनी सास की छूछीयो को मसलते हुए उसे छोड़ने लगा वही बिमला की बुइ उत्तेजना हर पल के साथ बढ़ती जा रही थी वो खुद के बदन में उठती तरंगो पर काबू करने की कोशिश कर रही थी पर नाकाम हो रही थी, साथ hi दामाद से छुड़वा कर वो इतनी उत्तेजित हो गयी थी जितनी आज तक नहीं हुई थी, उसकी छूट लगातार पानी बहा रही थी,
धीरे धीरे उसके मुँह से आनंद की सिसकियाँ निकलने लगी वहीं चेतन तो जैसे जन्नत में था..
चेतन- अह्ह्ह्ह ुहम्म्म्म आह्हः क्या छूट है अम्मा बिलकुल चंचल जैसी, दोनों माँ बेटी एक जैसी हो...
Bimla-uhmm ुहम्म अह्ह्ह्ह.
बिमला को भी उत्तेजना हुई ये सोचकर की उसका दामाद उसकी छूट की तुलना उसकी बेटी से कर रहा है,
चेतन- आह्ह्ह्हह कित्नाहहह मज़ा आएगा दोनों को साथ छोड़ने में आह्ह्ह्ह अम्मठ.
ये सुनकर तो बिमला का पानी hi छूट गया की उसकी बेटी और वो साथ साथ छुड़वाए तो कैसा नज़ारा होगा, कितना गलत पर कितना उत्तेजित करने वाला होगा, बिमला ये सब सोचते हुए अपने दामाद से छुड़वा रही थी...
वहीं चेतन को तो यकीन नहीं हो रहा था की रात को hi उसकी पत्नी ने उससे ऐसी इच्छा जताई थी और अभी वो उस इच्छा को पूरी कर रहा था,
चेतन खुश होते हुए नीचे देखने लगा जहाँ उसकी सास के बड़े बड़े चूतड़ों के बीच उसका लुंड अंदर बहार हो रहा था वहीं उसकी सास का भूरा छेड़ बिलकुल कैसा हुआ उसे बेहद लुवाभ्ने और आकर्षक लग रहा था, चेतन को उसे देख कुछ सूझा और उसने अपनी एक उंगली अपने थूक से गीली की और बिमला की गांड के छेड़ पर फिरने लगा, बिमला जो की पहले hi दामाद से छुड़वा कर उत्तेजना की लहार में गोते लगा रही थी अब उसके इस हमले से सिसकने लगी..
वहीं चेतन का ये हमला सिर्फ सहलाने तक नहीं रुका अगले hi पल बिमला को महसूस हुआ की चेतन की उंगली उसके गांड के छेड़ को कुरेद रही है और फिर एक गरम एहसास के साथ उसकी उंगली बिमला की गांड के छेड़ में प्रवेश कर गयी, जिससे बिमला के बदन में तो बिजली दौड़ गयी उसका पूरा बदन झटके खाने लगा, चेतन ने उसे कास के खुद से चिपका लिया और बिमला थरथराती रही और कुछ पल बाद शांत हुई चेतन का लुंड अब भी उसकी छूट में था पर उंगली गांड से निकल चुकी थी, चेतन ख़ुशी से फूला नहीं समां रहा था की उसने अपनी सास को स्खलित होने पर मज़बूर कर दिया है...
थोड़ी देर साँसे साधारण करने के बाद बिमला गर्दन घुमा कर चेतन की और देख कर बोली- ओह्ह्ह दामाद जी रुक कहे गए छोड़ो न अपनी अम्मा कोठ..
ये सुन चेतन के चेहरे पर एक बड़ी सी मुस्कान आ गयी और फिर उसने बिमला की कमर को थामे तेज़ी से छोड़ना शुरू किया, उसके धक्के हर पल के साथ तेज़ होते गए और कुछ hi पालो में इतनी तेज़ थे की अपनी सास की छूट का भुर्ता बना रहे थे, बिमला अपने मुँह को दबाये खुद को चीखने से रोक रही थी, चेतन इस बात से उत्तेजित की अपनी सास को छोड़ रहा है साडी उत्तेजना बिमला की छूट पर निकल रहा था और तब तक निकलता रहा जब तक उसका रास बिमला की छूट में नहीं निकल गया, बिमला इस दुमदार चुदाई से एक बार और झाड़ गयी,
झड़ने के बाद दोनों बिस्तर पर पसर गए कुछ पल बाद बिमला उठी और चेतन को भी उठाते हुए बोली - दामाद जी उठो कोई आ गया तो परेशानी हो जाएगी,
चेतन मुस्कुराते हुए उठा और फिर बिमला ने चंचल की hi साड़ी लेली पहनने को साथ hi चेतन ने भी अपने कपडे पहन लिए जो बिमला ने निकले और दोनों कमरे से बहार निकल गए,
चोदामपुर
कर्मा बाघ से लौट hi रहा था की उसका फ़ोन बजा उसने उठाया और बोलै- और भाई मेरे लौंडे क्या हाल हैं?..... ाचा,...... नहीं बाघ में हूँ,.... कहाँ?..... चल आता हूँ...
और फ़ोन जेब में रख लिए..
थोड़ी देर बाद वो और सरजू पेड़ की एक दाल पर बैठ कर पेप्सी पि रहे थे.
कर्मा- और बता लौंडे क्या बात है?
सरजू थोड़ा गंभीर मुद्रा में सोचते हुए बोलै- यार कैसे बताऊँ?
कर्मा - मुँह से बता न.
सरजू- यार बात थोड़ी वैसी है.
कर्मा- क्या हुआ लुंड खड़ा नहीं होता? अरे कोई बात नहीं एक बाबा को जनता हूँ मैं हो जायेगा ठीक.
सरजू- सेल हरामी.
कर्मा - हाहाहा अबे तो टट्टे सी शकल बना के बैठा बता तो.
सरजू- तुझे याद है पिछली बार की बात हमारे बीच की.
कर्मा- हाँ याद है ऐसे hi मस्त पेप्सी पिलाई थी मैंने तुझे.
सरजू - और?
कर्मा- और क्या? और तेरी माँ की गांड देख कर हिलाया था.
सरजू- हाँ पर थोड़ी इज़्ज़त से नहीं बोल सकता.
कर्मा- ज्ञान मत छोड़ बात क्या है वो बता.
सरजू- बात वही है यार उस दिन वाली मम्मी की... मम्मी की गांड..
कर्मा- मतलब.
सरजू- मतलब उस दिन से यार मम्मी की गांड को दिनाग से निकल hi नहीं प् रहा हूँ, घर में भी मम्मी को देखता हूँ तो कल्पना करने लगता हूँ नंगी कैसी दिखती होंगी, साला बुरा हाल हो गया है, पता नहीं कितनी बार मम्मी को सोचकर हिला लिए होगा पर शांति hi नहीं मिलती.
कर्मा- अच्छा तो ये परेशानी है, मादरचोद बनने के लक्षण हैं ये तो.
सरजू- अब तू ज्ञान मत छोड़ यार साला समझ नहीं आ रहा क्या करूँ और तूने ब्बि बताया था की मैं बताऊंगा पर कुछ बताया नहीं फिर.
कर्मा- ाचा हाँ थोड़ा काम में लग गया था,
सरजू- यार कुछ करवा सेल मम्मी के सामने आते hi लुंड खड़ा हो जाता है बड़ी मुश्किल से छुपता फिरता हूँ.
कर्मा- अरे यही तो गलत करता है सेल छुपता क्यों है.
सरजू- ाचा फिर और क्या करूँ दिखता फिरूं सबको? चूतिया है क्या? अब कल मैं मम्मी बिरजू पापा लड़ो सब बुआ के घर जा रहे हैं वहां पर किसी ने देख लिए तो क्या सोचेंगे,
कर्मा- अबे झंटू सबके सामने नहीं, सिर्फ जब तू और चची हो तब और ऐसे बर्ताव कर जैसे ये कोई बड़ी बात नहीं है, अगर लुंड खड़ा है तो काम में लगा रह, उन्हें देखने दे तू मत जाता उन्हें की तू उन्हें देख रहा है.
सरजू- और?
कर्मा- और क्या सोते हुए कच्चा पहन कर सो और जब चची आएं तो उन्हें अपना खड़ा लुंड दिखने की कोशिश कर...
कुल मिलकर उन्हें अपना लुंड दिखा पर ये नहीं लग्न चाहिए की तू जान बूझ कर दिखा रहा है.
सरजू- अच्छा ऐसी, समझ गया..
कर्मा- वैसे पूरा परिवार जा क्यों रहा है, बुआ के यहाँ? जानवरो को कौन देखेगा?
सरजू - अरे बुआ के लड़के का मुंडन है, और नीतू नहीं जा रही वो रुकेगी,
ये बात सुनकर कर्मा के कान खड़े हो गए,
कर्मा - ाचा चल कोई नई वैसे ले जाते उसे भी जानवरो की देख रेख हम कर लेते.
सरजू- अरे नहीं उसे पढाई वधाई करनी है ..
कर्मा - चल वो सही है पर जो मैंने बताया उस पर ध्यान देना,
सरजू- हाँ बिलकुल यार,
कर्मा- और कोशिश किआ कर उन्हें छूने की जैसे प्यार में गले लगा लिए, पेट पर हाथ फिरा दिया.
सरजू- अरे वो तो करूँ पर लुंड खड़ा रहता है वो चुभ जायेगा.
कर्मा- चुभने दे पर तू ऐसे दिखा जैसे सब बिलकुल साधारण है,
सरजू- सेल मार पद जाएगी.
कर्मा- नहीं पड़ेगी पर अगर छूट चाहिए तो थोड़ी तो हिम्मत दिखानी पड़ेगी.
सरजू- बात तो सही है.
कर्मा- चल फिर चलते हैं और आज से hi लगजा काम पर.
सरजू- जी गुरु देव,
हँसते हुए कहता है और दोनों मज़ाक करते हुए निकल जाते हैं...
जारी रहेगी






























































