Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती - Page 112 - SexBaba
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Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती

लखनने दीलवाये ड्रेसमे वो बहुत ही खुबसुरत लग रही थी.. सीर्फ ड्रेस ही नही.. चंदाने अपने अंतर वस्त्र भी वही पहेने थे.. जो उनको लखनने उस रात गीफ्ट कीये थे.. फीर चंदाके पुनम ओर राधीकाको भी आज चंदाका अलग रुप दीख रहा था.. चंदाके पाससे पुनमने वीजयको लेलीया..

ओर उसे आज रात अपने साथ सुलानेकी बात करते चंदाको लखनके साथ घुमने भेज दीया.. तो चंदा बहुत ही सर्मसार हुइ.. ओर वो लखनकी ओर तीरछी नजरोसे देखते कामुक स्माइल करते लखनकी बाजु वाली सीटमे बैठ गइ.. ओर लखनने कार जाने दी..

लखन : (मुस्कुराते) हांतो मेडम.. कीधर चलना हे..?

चंदा : (मुस्कुराते तीरछी नजरोसे) मुजे क्या पता.. सब आप लोगोने ही डीसाइड कीया हे.. ले चलो.. जहा आपका मन करे..

लखन : (मुस्कुराते) तो फीर मुवी देखने चले..?

चंदा : (सामने देखते मुस्कुराते) क्या अभी..? सेकन्ड सोमे..? मुजसे इतनी जल्दी छुटकारा पानेका इरादा हे क्या..? ये आपकी गर्लफ्रेन्ट इतनी जल्दी आपका पीछा छोडने वाली नही हे.. अ‍ेक बार सोचलो.. हें..हें..हें..

लखन : (हसते) तो फीर आपही बतादो.. वही ले चलता हु.. मुजे कोइ जल्दी नही हे.. आज पुरी साम ओर रात आपके नाम..

चंदा : (हसते) रात भी..? गुड बोय.. तो पहेले ले चलो.. वोही गार्डन.. जहा हमारे नये रीस्तोकी सुरुआत हुइ थी.. फीर कुछ खा पीलेगे.. ओर आरामसे लास्ट सो मे चलेगे.. चलेगानां..?

लखन : (मुस्कुराते) अरे चलेगा क्या.. दोडेगा.. आज मेरी मासुका जो साथमे हे..

चंदा : (तीरछी नजरोसे हसते) सोचलो ये मासुका तुमसे बहुत बडी हे.. आप मेरे धीरेनकी उम्रके बराबर हो.. चलेगी ये मासुका..?

लखन : (मुस्कुराते) ओ..हो.. तो ये दीकत हे आपको..? लेकीन मेडम.. प्यारमे उमर नही देखी जाती.. बस.. प्यार हो जाता हे.. अब आप मेरी पकी वाली मासुका हे..

चंदा : (सरमाते हसते) दीकत नही हे.. लेकीन प्यारके इजहारके बाद भी बहुत जल्द भुल जातेहो अपनी मासुकाको.. घरमे तो सामने भी नही देखते.. देखना अब जींदगी भर इस मासुकाको जेलना पडेगा.. मेने बहुत कुछ सोच साजकर फैसला लीया हे.. हम इस बारेमे आरामसे बात करेगे..

फीर लखनने कारको वोही गार्डनकी ओर लेली.. जहा दोनो पहेले भी आ चुके थे.. लखनने अ‍ेक खाली जगाह कार पार्क करदी.. चंदा उतरके जटसे लखनके पास आ गइ.. फीर दोनो गार्डनके अंदर चले गये.. तो चंदाने पहेली बार लखनके हाथमे हाथ डाल दीया..

जीसे लखन भी हसने लगा.. दोनो अ‍ैसे चल रहे थे जो नये नये प्रेमी जोडे हो.. दोनो धीरे धीरे सबकुछ देखते चल रहेथे.. लखनने उसे अ‍ेक बेन्चपे बैठनेकी पेसकस कीतो चंदाने वहा बहुत लोग हे कहेते आगे चलनेको कहा.. तो लखन भी समज गयाकी चंदाको क्या चाहीये..

काफी दुर चलते अ‍ेक छोटासा तालाब जैसा दीखा तो चंदा लखनका हाथ पकडकर उसे वहा लेगइ.. जहा लोग भी बहुत कम थे.. ओर जीतने भी थे वो सब लवर्स थे.. जो अपने अपने पार्टनरके साथ प्यार करनेमे बीजी थे.. चंदा लखनको वही लेगइ.. ओर अ‍ेक सुमसान जगहको चुनके वही नीचे घासपे बैठ गये..

चंदा : (मुस्कुराते) जानु.. यहा कीतना रोमांन्टीक माहोल हेनां..?

लखन : (मुस्कुराते) जा..नु..? मेडम कही मे गलत तो नही सुन रहा..?

चंदा : (सरमाते पीठमे अ‍ेक मुका मारते) क्या गलत कहा मेने..? मेरे बोयफ्रेन्डको जानु नही तो ओर क्या कहु..? लखन.. अब मेने डीसाइड करलीया हे.. की मे अपनी बाकी जींदगी खुलकर जीयुगी.. सीर्फ मेरे लीये.. बस.. अ‍ेक ही बीनती हे.. कभी मेरा साथ मत छोडना..

लखन : (पीछेसे कंधा पकडकर अपनी ओर खीचते) कभी नही.. कभी नही छोडुगा.. अब आप सब मेरी जीम्वेवारी हो..

चंदा : (मुस्कुराते) जानु.. पता हे यहा आनेसे पहेले पुनोदीने मुजे क्या कहा..?

लखन : (गाल चुमते) नही तो.. क्या कहा..?

चंदा : (सरमाकर मुस्कुराते) कहा.. भाभी.. अपनी जींदगीकी नइ सुरुआत करने जा रही हो.. तो आपकी नइ जींदगीके लीये शुभकानाये.. क्या उनको मेरे मनकी बात भी पता चल जाती हे..?

लखन : (मुस्कुराते) सीर्फ मनकी बात नही.. उनको हमारे भुत भवीस्य ओर वर्तमानके बारेमे भी पता चल जाता हे.. मंजुमोम ओर पुनो जीनके बारेमे सोचती हे.. उनका पुरा पीक्चर उनके सामने आजाता हे..

चंदा : (मुस्कुराते) कीतना अजीब हेनां..? कोइ सोच भी नही सकतेकी आजके जमाने भी ये सब पोसीबल हे.. हमारा गांवभी कीतना अ‍ेडवान्स ओर खुली सोच वाला हो गया हे..

लखन : (मुस्कुराते चंदाके बालकी लट सही करते) डार्लींग.. सामान्य लोग.. ओर हम लोगोमे यही तो फर्क हे.. मंजु मोम सही केह रही हे.. की हम कोइ सामान्य लोग नही हे..
 
चंदा : (लखनकी कमरमे हाथ डालते) जानु.. आप अ‍ैसे बुलाते हो तो बहुत अच्छा लगता हे.. कीतने अरसोके बाद मुजे कीसीने डार्लींग कहा हे.. बस.. आप अ‍ैसे ही बुलाया करे.. आइ प्रोमीस.. मे मेरी ओरसे प्यारमे कोइ कमी आने नही दुगी.. अब मेने सबकुछ अ‍ेक्सेप्ट करलीया हे..

लखन : (सामने देखते) सबकुछ..? इनका मतलब भी पता हेनां..?

चंदा : (लखनके होठ चुमते धीरेसे मुस्कुराते) हां.. सबकुछ.. बहुत अच्छी तराह.. मे जींदगीकी सुरुआत नये सीरेसे करना चाहती हु.. जैसे लडकीया जवानीमे कदम रखते नइ सुरुआत करती हे.. बस.. अब सीर्फ रोमान्स.. सीर्फ आपके साथ.. ओर मे वादा करती हु.. आपके प्रती मे पुरी वफादार रहुगी..

कहेते चंदाने लखनकी गरदनमे हाथ डालकर उनको अपनी बाहोमे भीच लीया.. ओर लखनके होठोको चुमने लगी.. लखनको भी पता थाकी चंदाकी कामाग्नी पुरी तराह भडकते उफानपे हे.. लखनने धीरेसे चंदाके उरोजोको थामलीया.. जीसे चंदाकी कामाग्नी ओर भडक गइ..

ओर वो लखनके होठोको जोरोसे चुमते अपनी जुबान लखनके मुहमे डालने लगी.. लखन वही लंबा होते चंदाकी गोदमे सर रखके लेट गया.. चंदाने अपने खुले बालसे लखनके सरको ढक लीया.. ओर लखनके चहेरेपे जुक गइ.. दोनोका चुंबन बहुत ही गहेरा होगया..

लखन चंदाको चुमते उनके उरोजोको मसल रहा था.. तो चंदाकी सांसे भारी होने लगी.. उनकी आंख वासनाकी वजहसे लाल होने लगी.. उसने धीरेसे अपनी सलवार आगेसे थोडी उची करली.. तो लखन ने सलवारमे हाथ डाल दीया ओर ब्रामे हाथ घुसाते चंदाके बुब्सके साथ खेलने लगा..

दोनो प्यारमे मसगुल होगये.. ओर बीच बीचमे प्यार भरी बाते भी करते रहे.. लखनने चंदाको उनके सौकके बारेमे ओर उनके बचपनके बारेमे पुछा.. तो चंदाने बीना हीचकीचाये लखनको सब सच बता दीया.. की उनको क्या क्या सौक हे..

फीर वो बचपनमे कैसे उनकी बडी बहेन नीर्मला ओर अपने बडे भाइको रातमे छुपछुपके चुदाइ करते देखती थी.. बस.. तबसे उनको चुदाइका सौक हो गया था.. लखनको सारी बाते बताती रही.. वो भी बता दीयाकी देवु मंजुसे सादी करने जान लेकर आया..

उसी दीन उन्होने देवुके साथ फ्लर्ट करना सुरु करदीया था.. फीर दोनोका अफैर कैसे सुरु हुआ वोभी बतादीया.. दोनोने वहा अ‍ेक घंटेतक प्यार ओर बातेकी.. तभी लखनने अचानक उनकी चुतपे हाथ रखते चंदाको छेड दीया.. तो चंदा सरमसे पानी पानी होगइ..

चंदा : (सर्मसार होते धीरेसे) जानु प्लीज.. वहा नही.. ये पब्लीक पेस हे.. हम कही अ‍ेकांतमे चले..?

लखन : (गोदसे हटकर बैठते) डार्लींग.. अब कंटोल नही होता.. ओर मुवीमे भी अभी टाइम हे.. तो खाना खाने चले..? फीर वहीसे मुवीमे चले जायेगे.. फीर आज रात सीर्फ मे ओर तुम..

चंदा : (मुस्कुराते) हंम.. चलीये.. आप बहुत नोटी हो..

कहेते चंदा अपनी ब्रा ओर सलवारको ठीक करने लगी.. वो लखनकी ओर कातील नजरोसे देखते हस रही थी.. फीर दोनो खडे होगये.. तो चंदाने लखनका हाथ थाम लीया.. ओर दोनो अ‍ेक प्रेमी जोडेकी तराह बहारकी ओर चलने लगे.. चंदा बार बार लखनकी ओर देखते अपना सर लखनके कंधेपे रख देती थी..

चंदा : (मुस्कुराते) जानु.. थेन्क्स.. आज मेने अ‍ेक कुआरी लडकीकी तराह प्यार कीया.. जीसे हमारी कोलेज टाइममे मेरी बहुतसी फ्रेन्ड करती थी.. आपने मुजे कोलेजके दीन याद दीला दीया..

लखन : (मुस्कुराते कानमे) डार्लींग अभी घरपे तो चलो.. आज हमारी सुहागरात होगी.. तब आपको बहुत कुछ अहेसास करवाना बाकी हे..

कहा तो चंदा सरमसे पानी पानी होगइ.. ओर लखनकी ओर कातील नजरोसे देखते मुस्कुराती रही.. फीर लखन ओर चंदा अ‍ेक मंहेगे रेस्टोरन्टमे खाना खाने चले गये.. वहा लखनने अ‍ेक अलग प्राइवेट केबीन रखली.. फीर लखनने ओर्डर कीया.. ओर दोनो खाने लगे..

बीच बीचमे चंदा लखनको अपने हाथोसे खीलाने लगी.. तो लखन भी चंदाको अपने हाथोसे खीलाता.. लखन लगातार टेबलके नीचेसे चंदाके पैरोको सहेलाता रहा.. लेकन चंदाने पैर नही हटाये.. वो लखनकी ओर कामुक स्माइल करते हसती रही.. फीर खानेके बाद दोनो बहार नीकले..

तब थीयेटरमे भी लास्ट सोका टाइम हो गया था.. ओर लखन चंदाको लेकर अ‍ेक बडे मोलके थीअ‍ेटरपे आगया.. वहा उसने दो टीकीटके साथ दो बोटल ठंडा ओर कुछ स्नेक्स लीया.. फीर दोनो अंदर चले गये.. देखा तो पुरे थीअ‍ेटरमे कुछ गीने चुने लोग ही थे..

ओर जीतनेभी थे सब लखन चंदाकी तराह कपल लोग थे.. सभी कपल अलग अलग जगाहपे अ‍ेक दुसरेसे दुर बैठे थे.. जैसे वो फील्म देखने नही.. अपने पाटर्नरके साथ मजे करने आये हो.. लखन भी सबसे पीछली वाली रो पे चला गया.. वहा दुर दुर तक कोइ नही था..

चंदा अंदरका माहोल देखकर बहुत ही सरमाइ.. क्युकी उनके साथ अ‍ेक अ‍ैसा बोयफ्रेन्ड था जो उनके बेटेकी उमरका था.. लेकीन चंदाको कोइ अ‍ेतराज नही था.. वोतो बस लखनसे अपनी वासनाकी आगको ठंडा करना चाहती थी.. लखन कोनेकी सीटपे ठंडेकी बोटल ओर स्नेक्सके पेकेट रख देता हे.. फीर खुद बैठते अपनी दाइ ओर चंदाको बीठा देता हे.. चंदा बहुत ही सरमाते हस रही थी....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - २८८

चंदा अंदरका माहोल देखकर बहुत ही सरमाइ.. क्युकी उनके साथ अ‍ेक अ‍ैसा बोयफ्रेन्ड था जो उनके बेटेकी उमरका था.. लेकीन चंदाको कोइ अ‍ेतराज नही था.. वोतो बस लखनसे अपनी वासनाकी आगको ठंडा करना चाहती थी.. लखन कोनेकी सीटपे ठंडेकी बोटल ओर स्नेक्सके पेकेट रख देता हे.. फीर खुद बैठते अपनी दाइ ओर चंदाको बीठा देता हे.. चंदा बहुत ही सरमाते हस रही थी.... अब आगे

तो दुसरी ओर साम छे बजते ही भावीकाने सृतीको कोल कीया.. ओर घरका अ‍ेड्रेस पुछ लीया तो सृतीने तुरंत भावीकाको अपना अ‍ेड्रेस सेन्ड कर दीया.. ओर खुद भी अपनी क्लीनीकसे घर आनेके लीये नीकल गइ.. तो कुछ ही देरके बाद लगभग दोनो साथ ही घरपे आगइ..

अपनी अपनी कारसे उतरके दोनो अ‍ेक दुसरेके गले मीली.. फीर सृती बडे ही उत्साहसे भावीकाका हाथ पकडक उसे घरके अंदर लेकर आगइ.. तो पुनम राधीका उनको देखते बडे उत्साहसे गले मीली.. पुनमने भावीकाको सोफेपे बीठाया.. ओर सृती फटाफट फ्रेस होने चली गइ..

राधीका : (हसते) आप बाते करो.. मे पानी लेकर आइ.. दीदी.. क्या पीयोगी..?

भावीका : (हसते) अरे कुछ भी बनादो.. आज तो मे डीनर करके जाउगी.. हें..हें..हें..

पुनम : (हसते) हां स्योर.. ये आपहीका घर हे.. कभी कभी आजाया करो.. हें..हें..हें.. क्या मस्त लग रही हे आप..

भावीका : (हसते अपने गोगल्स नीकालकर पर्समे रखते) थेन्क्स दीदी.. कैसी हे आप..?

पुनम : (मुस्कुराते) बस.. हम सब मजेमे हे.. आपहीका इन्तजार कर रहे थे..

भावीका : (मुस्कुराते) दीदी.. कीसी भी हालमे.. आज तो आपको मीलना ही था..

सृती : (मुह पोछते बहार आते) कमीनी.. काम हे इसीलीये तो आइ हो.. वैसे तो कभी नही आती..

भावीका : (जोरोसे हसते) कुती गालीया तो मत दे.. इधर दीदी बैठी हे..

सृती : (हसते पास आकर बैठते) अरे इनकी टेन्शन मतले.. इनको हमारे बारेमे सबकुछ पता हे..

भावीका : (मुस्कुराते) हां.. इसीलीये तो आज इनको मीलने आइ हु..

राधीका : (पानी देते) ये लीजीये दीदी पानी.. फीर कुछ ठंडा बनाती हु.. आजतो डीनर इधर ही करके जायेइगा.. आज मे बनाती हु..

सृती : (हसते) अरे दीदी आप बैठीयेना मे बना लुगी.. वैसे भी आज सीर्फ हम चारोकाही तो बनाना हे.. लखन ओर भाभीतो बहार करके ही आयेगे..

राधीका : (मुस्कुराते) अरे मे बनाती हुनां.. आपकी दोस्त आइहे.. आप लोग आरामसे बाते करीये.. अभी बन जायेगा.. वैसे भी मे खाली ही हु..

भावीका : (सरमाते मुस्कुराते) क्या.. ल..ख..न.. आइ मीन लखनजी नही हे..?

पुनम : (छुपकर भावीकाको सृतीकी ओर आंखोसे नामे इसारा करते) अरे.. वो आज भाभीको सहेरमे घुमाने ले गये हे.. क्या हेना भाभी गांवमे रही हे तो उन्होने यहा कुछ ज्यादा नही देखा..

सृती : (मुस्कुराते) हां तो कुती.. बोल.. क्या जानना हे तुजे.. हें..हें..हें..

भावीका : (पुनमकी ओर मुस्कुराते) सब कुछ.. मेरे अतीत.. ओर भवीस्यके बारेमे.. आप लोग मेरे घरपे आनेकी बात कर रहेथे.. हेनां..?

पुनम : (मुस्कुराते) हंम.. मतलब आपको सबकुछ जानना हे.. मे इनसोर्ट बताती हु.. लेकीन याद रहे.. ये बात सीर्फ हम लोगोके बीच ही रहेनी चाहीये.. क्युकी कुछ बाते अ‍ैसी हे जीनसे आपका पुरा भवीस्य बदलने वाला हे.. ओर अभी कुछ दीन आपको सयमसे काम लेना पडेगा.. जैसा मे कहु करती जाइअ‍े..

भावीका : (मुस्कुराते) ठीक हे दीदी.. अब सब आपको पुछकर ही आगे बढुगी.. कहीये..

फीर पुनमने धीरे धीरे करते भावीकाको अपने अतीतके बारेमे बताना सुरु कीया.. की कैसे उनके पीता अ‍ेक बडे उद्योगपती थे.. आधेड उमरमे वीधुर ओर नीसंतान थे.. उनकी मांने भी सीधे अ‍ैसे मुकाम हासील नही कीये थे.. इनसे पहेले वोभी कही दुसरी जगहपे अ‍ेक छोटेसे क्लार्क की जोब करती थी.. तो बीचमे..

भावीका : (धीरेसे) तो क्या मोमकी फेमीलीमे कोइ नही था..?

पुनम : (मुस्कुराते) थे.. उनके माता पीता.. तब आपकी मोम कोलेजमे पढ रही थी.. ओर नजदीकके रीस्तेमे आपकी मोमके सीर्फ अ‍ेक मामा मामी.. फीर अ‍ेक दीन अचानक आपके मोम डेड कारमे कही जा रहे थे.. ओर उनकी कारका अ‍ेक्सीडन्ट होगया..

भावीका : (थोडा दुखी होते) ओह गोड.. मीन्स मेरे नाना नानी..?

पुनम : (मुस्कुराते) हां.. फीर आपकी मोम अकेली होगइ.. फीर तो उनके मम्मी पापाकी सब संपतीया बेचकर उनके मामा मामीके घर रहेने चली गइ.. आपकी मोम पैसे लेकर गइ थी.. तो कौन रखनेको मना करते.. दो तीन साल सबकुछ सही चला.. फीर तो आपके मोमकी कोलेज भी खतम होगइ.. ओर उसने अ‍ेक प्राइवेट कंपनीपे क्लर्ककी जोबभी मील गइ..

भावीका : (मुस्कुराते) अच्छा.. तो पहेले मोम कोइ दुसरी कंपनीमे जोब करती थी.. फीर..?

पुनम : (मुस्कुराते) फीर क्या.. आपकी मोमके बुरे दीन सुरु होगये.. इन तीन सालोमे उनके मामा मामीने छोटे मोटे खर्चे गीनवाकर आपकी मोमसे सभी पैसे लेलीये.. ओर उनकी सेलेरीसे भी खर्चा मांगने लगे.. फीर अ‍ेक दीन अ‍ैसा हुआ जो नही होना चाहीये था..?

भावीका : (आस्चर्यसे देखते) क्या हुआ..?

पुनम : (सामने देखते धीरेसे) अ‍ेक दीन उनकी मामी.. कीसी कारणसे तीन दीनके लीये अपने मायके गइ थी.. ओर उसी रात उनके मामाकी नीयत बीगड गइ.. उसने आपकी मोमका गलत फायदा उठाया..





भावीका : (आंख गीली करते मुहपे हाथ रखते धीरेसे) क्या..? मीन्स.. रे..प.. क्या उनके मामाने मोमपे रेप कीया..?

पुनम : (सामने देखते) हां.. ओर उसी सुबह आपकी मोम उनके मामा मामीसे सभी रीस्तेको तोडके घर छोडकर चली गइ.. ओर अ‍ेक वुमन होस्टेलमे रहेने लगी.. उसने अपनी बदनामी ओर केरीयरकी वजहसे कीसीसे सीकायत नही की.. ओर अपनी जोबपे फोकस करने लगी..

भावीका : (आंख पोछते) तो फीर मोम पापाकी कंपनीमे कैसे आइ..?

पुनम : (सामने देखते) दीदी.. कुछ बाते अ‍ैसी हे जो आपको अच्छी ना लगे..

भावीका : (फीकी मुस्कानसे) इतनी बुरी बात तो सुनली.. अब ओर क्या बुरा होगा..? बताइअ‍े.. अब तो मोम भी नही हे.. मुजे कोइ बुरा नही लगेगा.. बस.. सीर्फ सच जानना हे..
 
पुनम : (मुस्कुराते) हंम.. तो फीर सुनीये.. फीर तो आपकी मोमके उपर भी अ‍ेक जुनुन सवार हो गया.. की कीसी भी हालमे अपनी केरीयरमे उचा पद हासील करना हे.. ओर खुब पैसे बनाना हे.. उस रेपके बाद अपने आपको बीलकुल बदल दीया.. ओर वो आपकी तराह अ‍ेक खुबसुरत बीन्दास्त लडकी बन गइ..

भावीका : (मुस्कुराते) अच्छा..?

पुनम : (मुस्कुराते) हां.. ओर उसने भी वोही सोर्टकट अपनाया जो सोर्टकट आपने अपनी स्कुल कोलजमे अपनाया था.. अपने पदोनतीके लीये अपने बोस तक पहोंच बनाली.. ओर अपने जीस्मका इस्तमाल करते अ‍ेक कंपनीसे दुसरी कंपनीमे अच्छी पोजीसन हासील करने लगी..





सृती : (जोरोसे हसते धीरेसे) कमीनी अब समजमे आयाकी तुजमे अ‍ैसा गुण कहासे आया था.. हें..हें..हें..

भावीका : (हसते अ‍ेक जांगपे चपत लगाते) कुती सुन तो सही.. दीदी क्या कहे रही हे.. हें..हें..हें..

पुनम : (मुस्कुराते) फीर उसने अ‍ेक बहुत बडी कंपनीमे मालीककी पर्सनल सेक्रेटरीका पद हासील करलीया.. ओर वो मालीक आपके पापा थे.. फीरतो वो पुरी तराह उनकी पर्सनल सेक्रेटरीके साथ अ‍ेक खास सेक्रेटरी होगइ.. वो उनका अ‍ेक बीवीकी तराह नीजी तौरपे भी खयाल रखने लगी..

भावीका : (मुस्कुराते) नीजी तौरपे मतलब..?

पुनम : (मुस्कुराते) आप इतनी भी नासमज नही हे.. हें..हें..हें.. आपके पापा जहा भी टुरपे जाते उनके साथ ही रहेती.. होटेलपे दोनो अ‍ेकही कमरा साजा करते.. दीनमे ओफीसका काम.. ओर सामको होटेलपे आतेही उनकी बीवी होजाती.. दोनोने कइ राते साथमे रंगीनकी.. फीर तो उनके घरपे ही रहेने चली गइ.. ओर दोनो लीव इनमे रहेने लगे..

भावीका : (मुस्कुराते) तो फीर पापाके रीस्तेदारोने कोइ अ‍ेतराज नही कीया..?

पुनम : (मुस्कुराते) उनके रीस्तेदार थेही कीतने..? ओर जीतने थे उनपे आपके पापाके बहुत अहेसान थे.. सब उनसे डरते थे.. अ‍ेक बचपनका दोस्त था.. भाइ जैसा.. जो कंपनीका लीगल अ‍ेडवोकेट भी था.. मतलब.. अभी भी हे.. उनकी भी अ‍ेक लडकी हे.. जो बचपनमे आप दोनो सहेली थी.. ओर आखीर वो दीन आया जीस दीन आपकी मोमने उनको अपनी प्रेगनन्सीकी खबर दी.. तो आपके पापा बहुत खुस होगये..

भावीका : (मुस्कुराते) तो फीर पापाने उनको अलग बंगलो क्यु दीलाया.. सादी करके साथ रखते..

पुनम : (मुस्कुराते) नही.. अ‍ेक तो आपके पापा आपकी मोमसे उमरमे बहुत बडे थे.. ओर दुसरा.. उनका इन्डस्ट्रीजमे बहुत बडा नाम था.. तोवो नही चाहतेथे की उनकी इजतपे कोइ आंच आये.. इसीलीये उन्होने आपकी मोमको अ‍ेक बंगलो दीलवाया ओर पैसेकी इतनी व्यवस्थाकी.. की आप दोनोकी जींदगी आरामसे चल सके..

भावीका : (मुस्कुराते) तो फीर कहा गये वो सब पैसे..? मोमके खातेमे तो मुस्कीलसे मेरी पढाइ तकके खर्चे ही थे.. ओर उनमे भी मे अकस्ट्रा ट्युशन नही रखपाइ.. सृतीको तो मेरे बारेमे सबकुछ पता हे.. की मुजे पढाइके लीये क्या क्या पापड बेलने पडे थे..

पुनम : (मुस्कुराते) बस.. इसीलीये हम आपके घर आना चाहती हे.. ताकी आपको कुछ दीखा सके.. फीर आपकी जींदगी बदल जायेगी.. आइ प्रोमीस..

भावीका : (खुसीसे हसते) तबतो आपको जल्द मेरे घर लेजाना पडेगा बाबा.. हें..हें..हें..

सृती : (हसते) कमीनी ज्यादा उछल मत.. इस सन्डे सामको मेने ओर पुनोदीने वहा तेरे घर आनेका तैय कीया हे.. लेकीन तेरे पुराने वाले घर.. तेरे ससुरके वहा नही.. समजी..?

भावीका : (सामने देखते) दीदी.. मुजे मेरे ससुराल वालोके बारेमे सबकुछ जानना हे.. क्युकी यहा उनके कोइ रीस्तेदार नही हे.. सीर्फ दुरकी अ‍ेक मौसीजी हे.. जो उनके लडकेसे मेरी ननंदकी सादी हुइ हे.. क्युकी आज कल वहा कुछ ठीक नही चल रहा.. मुजे बहुत कुछ पता चला हे.. सायद मे बहुत बडा डीसीजन लेने वाली हु..

पुनम : (मुस्कुराते) पता हे मुजे.. वो दीन भी बहुत जल्द आने वाला हे.. थोडा धैर्य रखीये.. अपने आप सब कुछ ठीक होजायेगा.. क्या आप अपना क्लीनीक बंध करना चाहती हेनां..?

भावीका : (आस्चर्यसे) हां.. आपको सब पता हेनां..?

सृती : (आस्चर्यसे) क्या..? तु अपना क्लीनीक बंध कर रही हे..? लेकीन क्यु..?

पुनम : (सृतीका हाथ थामते) दीदी.. इस बारेमे हम सन्डेको बात करेगे.. भावीका दीदीके घर.. ओर रही बात इनके ससुरालकी.. तो सुनो..

फीर पुनम भावीकाको उनके ससुरालके बारेमे बहुत कुछ बताती हे.. कस असलमे उनके सास ससुर सगे चाचा भतीजी हे.. दोनोके बीच कैसे अफैर हुआ.. ओर अफैरकी वजहसे उनकी सासको कैसे उनके चाचाने(ससुर) कुआरी प्रेगनेन्ट करदीया.. जीनकी वजहसे दोनोको घर छोडना पडा ओर दोनो यहा आ गये..

फीर उनके ससुरने पोलीटीक्समे अपना केरीयर बनाया.. ओर इस प्रतीस्ठीत मुकाम हासील कीया.. पुनमने भावीकाको सबकुछ बता दीया.. फीर उनको अ‍ेक प्लान भी समजाती हे.. जीसे सुनकर भावीकाके चहेरेपे खुसी छा जाती हे.. तब भावीकाको साफ साफ पता चल गयाकी उनका भवीस्य कहा उजवल हे..

फीर पुनम कुछ बातेको अभीके लीये छीपाकर भावीकाको सबकुछ बता देती हे.. ओर वोही बात छुपाइ.. जीनको भावीकाकी सरप्राइजके लीये रखा था.. फीर साम ढलतेही चारो डीनर करती हे.. ओर नौ बजे भावीका सबकी वीदाय लेकर खुसी खुसी अपने घर चली जाती हे.. तो उनके जाते ही..
 
सृती : (मुस्कुराते) दीदी.. आपको तो सब कुछ पता हे.. तो फीर भावु क्लीनीक बंध करके क्या करेगी..? उनके पास इतने पैसे हे जो सारी जींदगी उनका घर बैठे गुजारा कर सके..?

पुनम : (मुस्कुराते) अरे दीदी.. इनके पास इतने पैसे हे की अभी उनको बतादीया तो वो पागल होजायेगी.. ओर वो क्लीनीक बंध करके सीर्फ सेवा करेगी.. वोभी हमारे गांव.. हें..हें..हें..

सृती : (खुसीसे आस्चर्यसे) क्या..? हमारे गांव.. कैसे..? हें..हें..हें..

पुनम : (मुस्कुराते) हम उनके घर जारहे हेनां..? तब मे उनके सामने प्रपोजल रखुगी.. वो मान जायेगी.. बस.. आप देखती जाओ.. क्युकी कुछ महीनोके बाद हमे भी वहा जाना पडेगा.. चलो.. अब बाते बादमे करेगे.. पहेले वो सरप्राइज वाला काम करले..?

सृती : (मुस्कुराते) दीदी.. क्या वाकइ आज वो दोनो.. मुजे देखना हे.. हें..हें..हें..

पुनम : (हसते) नही.. आज नीचे भटकनां भी नही.. क्युकी वो बहुत डरी हुइ हे.. बडी मुस्कीलसे आगे बढी हे.. कही हमारा प्लान चौपटना होजाये.. मेने ओर मोमने भी हमारे पतीको मुस्कीलसे इस कामके लीये मनाया हे.. क्युकी उनकी बडी भाभी जो हे.. तो जनाबको संकोच हो रहा था..

सृती : (हसते) दीदी.. बताइअ‍ेनां.. इस वक्त वो दोनो क्या कर रहे हे..? हें..हें..हें..

पुनम : (मुस्कुराते) कोइ जरुरत नही हे.. बस.. इतना जानलो.. भाभी सभी सरम त्यागके बहुत आगे बढ रही हे.. हमारे पती उनको बहुत अच्छी तराह सम्हाल रहे हे.. चलो.. उनके आनेसे पहेले काम खतम करना हे.. फीर हम सोने चले जोयेगे.. चाबी लखनके पास हे.. आज रात वो सब सम्हाल लेगे..

ठीक इसी वक्त लखनके कंधेथे सर रखते चंदा चीप्स खाते पीक्चर देख रही थी.. ओर बीच बीचमे लखनको भी अपने हाथोसे खीला रही थी.. तभी लखनने भी उनके पेकेट्से अ‍ेक चीप्स लेली.. ओर अपने मुहमे आधी बहार रखते मुहको चंदाकी ओर कीया..

तो चंदाने भी मुस्कुराते लखनके मुहकी ओर मुह करते चहेरेको आगे बढाया.. ओर लखनके मुहसे चीप्स लेली.. फीर खाते लखनकी ओर देखते हसने लगी.. दोनो ही मस्तीया करते अ‍ेक दुसरेके साथ छेडखानी करने लगे.. लखनने पीछे हाथ डालकर चंदाके कंधेको पकड लीया.. ओर अपनी ओर खीच लीया..

तो चंदा लखनसे चीपक गइ.. ओर उसने चीप्सका पेक छोडकर अपना सर लखनके कंधेपे डाल दीया.. फीर लखनकी ओर घुमते अपना दाया हाथ लखनके गलेमे डाल दीया.. मुह कंधेपे पीछे करते लखनके कानकी बुट चुमने लगी.. ओर अपने होठोसे दबाते उनको खीचने लगी..





बस.. लखनके उतेजना होनेमे इतनी ही छेडछाड काफी थी.. लखनने बाये हाथोसे चंदाके उरोजोको थाम लीया.. ओर हल्केसे दबाते मसलने लगा.. तो चंदा पागल जैसी होने लगी.. उन्होने लखनको कसके गले लगा लीया.. ओर लखनके गालोपे चुमने लगी.. उनकी चुत भी पानी छोडने लगी..

चंदा : (उतेजनामे कांपते कानमे फुसफुसाते) जानु.. आइ लव यु.. प्यार करो मुजसे.. मे सीर्फ आपकी हु.. आपकी चंदा..

लखन : (उतेजनामे) डार्लींग.. आइ लव यु टु.. अब तुम सीर्फ मेरी अमानत हो.. मेरी चंदा..

चंदा : (सरमसे कंधेपे सर रगडते) हंम.. अंह.. प्लीज.. धीरे दबाओनां.. अब तो मे पुरी आपकी हु..

कहा तो लखनने चंदाके टोपमे हाथ डाल दीया.. ओर अंदरसे ब्राको उची करते उनका बुब्स अपनी मुठीमे थाम लीया ओर मसलने लगा.. चंदाके मुहसे सीसकारीया नीकलने लगी.. उसने लखनको जोरोसे अपने बदनको चीपका लीया.. लेकीन दोनो अलग अलग चेरपे थे..

तो लखनने चंदाको खीचकर अपनी जांगपे बीठा दीया.. चंदा लखनके कंधेपे सर रगडते उनके गलेको चुमने लगी.. उनके उपर पुरी वासना हावी हो चुकी थी.. ओर वो धीरेसे अपना दुसरा हाथ नीचे लेगइ.. ओर लखनके लंडको पेन्टके उपरसे ही थाम लीया.. ओर हल्केसे सहेलाने लगी..

चंदा : (कानमे फुसफुसाते) अंह.. जानु.. मुजे कुछ हो रहा हे.. क्या हम घर चले..? हंम..?

लखन : (चंदाके गलेको चुमते) नही बादमे.. यहा थीयेटरमे मुजे अपनी मासुकाके साथ पुरा आंनद लेना हे.. डरो मत.. आज रात तुम सीर्फ मेरी हो.. ओर घरपेभी सब अभी जाग रहे होगे..

चंदा : (लखनके तनसे तन रगडते) हंम.. लव यु जानु.. मेरा पब्लीक स्पेसपे ये पहेला अनुभव हे.. लेकीन डर लग रहा हे.. मुजसे नही रहा जारहा.. प्लीज.. लव मी.. मुजे ओर प्यार चाहीये..

लखन : (मुस्कुराते) डरो मत.. कुछ नही होगा.. तुम भी खुलकर प्यार करो..

चंदाने अपने हाथसे टोपको अपने सीने तक उचा करदीया ओर अपनी ब्राको थोडी उची करते अपने दोनो बुब्सको आजाद कर दीया.. फीर लखनकी ओर वासना भरी नजरोसे देखते थोडी पीछे जुक गइ.. तो लखन चंदाके दोनो बुब्सको बारी बारी चुमने लगा.. चंदाने लखनका सर उठाया..





ओर लखनके होठोको चुमने लगी.. फीर चुमते उसने अपनी ब्राको सहीसे उची करदी.. ताकी लखन उनके बुब्सके साथ आरामसे खेल सके.. लखनने फीर बुब्सपे मुह लगा लीया ओर चंदाके बुब्सको चुमने लगा.. तो चंदा लखनके सरको सहेलाते अपने बुब्सपे दबाने लगी..

चंदा : (सरमाते धीरेसे) जा..नु.. आरामसे.. दुसरा भी चुसोनां.. बहुत मजा आता हे..

कहेते लखनके गरदनमे दोनो हाथ डालकर लखनको अपने तनसे भीच लीया.. ओर अपना बुब्स लखनके सीनेपे रगडने लगी.. बुब्स रगडते लखनके चहेरेपे चुंबनोकी बारीस करदी.. चंदा बेकाबु होने लगी.. तो अचानक खडी होगइ.. ओर आजु बाजु नजर घुमाते अ‍ेक नजर डालती हे..

तो जीतने भी कपल थे सभी अंधेरेमे अपने पार्टनरके साथ लगे हुअ‍े थे.. तभी उनका ध्यान अपनेसे दो रो आगे दुसरे कोनेपे गया.. तो अ‍ेक लडकी अपने पार्टनरकी गोदमे उछल रही थी.. जीसे देखकर चंदाकी कामाग्नी ओर भडक गइ.. ओर वो बहुत ही सर्मसार होगइ..

ना जाने चंदामे कहासे हीमंत आगइ.. तो वोभी खडी होते लखनके दोनो पैरपे लखनकी ओर मुह करते उनकी गोदमे सामने बैठ गइ.. फीर लखनके कंधेपे सर डालके जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लीया.. तो लखनने भी मुस्कुराते चंदाको अपने तनसे चीपका लीया..





फीर लखनके चहेरेकी ओर देखते लखनकी नाकसे अपना नाक रगडने लगी.. तो लखनने जोरोसे चंदाके होठोको अपने होठोसे भीच लीया.. फीर दोनो ही वाइल्ड कीस करने लगे.. चंदा वासनामे अपना सुध्ध बुध्ध खो बैठी थी.. वो लखनकी पीठमे जोरोसे हाथ फीराते अपने नाखुन चुभोने लगी..
 
लखन : (मुस्कुराते कानमे) भाभी.. धीरे.. चुभता हे..

चंदा : (कानमे कामुकतासे फुसफुसाते) भाभी नही.. सीर्फ चंदा.. आपकी चंदा.. प्लीज.. प्यार करो मुजसे.. रहा नही जाता.. रगड डालो.. मुजे मसल डालो.. आजसे चंदा आपकी होगइ..

इतना सुनते ही लखनने अपना अ‍ेक हाथ नीचे घुसा दीया.. ओर चंदाकी चुतको टटोलने लगा.. तो चंदा आंख बंध करते सीसकारीया करने लगी.. ओर अपनी कमर थोडी उची करके खीसकाते लखनके हाथोको स्पेस देने लगी.. ताकी लखन सहीसे उनकी चुतको सहेला सके..





लखन चंदाकी चुतको सलवारके उपरसे ही सहेलाने लगा.. तो चंदा लखनके गालोको अपने दांतोसे काटने लगी.. लखन समज गयाकी चंदा पुरी तराह गरम हो चुकी हे.. ओर चुदवानेके लीये बीलकुल रेडी हे.. तभी चंदा भी अपना हाथ नीचे लेगइ.. ओर लखनके पेन्टकी क्लीप खोलने लगी..

चंदा : (फुस फुसाते धीरेसे कानमे) प्लीज.. इसे खोलोनां..

लखन : (धीरेसे) यहा नही.. घर जाकर करते हेनां..

चंदा : (फुस फुसाते कानको चुमते) हंम.. सीर्फ हाथ लगाउगी.. मुजे देखना हे..

लखन : (कमर उची करते) थोडी उपर होजाओनां..

कहा तो चंदा थोडी जुकते खडी होगइ.. लखनने अपनी पेन्ट थोडी नीचे सरकादी.. ओर कुछ अ‍ैसा कीया चंदा फौरन लखनके पैरोपे बैठ गइ.. क्युकी लखनने चंदाके सरलवारका नाडा खीच लीया था.. ओर सलवारको थोडी नीचे करदी.. चंदा सरमके पारे पानी पानी होगइ..

चंदा : (बाहोमे भीचते कानमे फुसफुसाते) यहा करना हे..? हंम..? पेन्टी नीकालदु..?

लखन : (चंदाके कानकी बुटको चुमते धीरेसे) नही चंदा.. तुम सेह नही पाओगी.. घर चलकर आरामसे करते हेनां.. बस.. तेरी मुनीयाके साथ थोडासा खेलना हे..

लखन उनके नीकरमे हाथ डाल देता हे.. ओर सीधे चंदाकी चुतको सहेलाने लगा.. तो चंदाने लखनको अपनी बाहोमे भीच लीया.. ओर अ‍ेक हाथसे लखनकी चडीमे हाथ डालते लखनके तगडे हथीयारको मुठीमे थाम लीया.. ओर लंडको पकडे ही चंदा सोक्ट होगइ.. ओर थोडा डरने लगी..





चंदा : (फुसफुसाते) ओह गोड.. इतना बडा..? ओर मोटा भी हे.. आपका तो बहुत बडा हे..

लखन : (मुस्कुराते) सब आप जैसी भाभीओकी महेरबानी हे..

चंदा : (सरमाकर मुस्कुराते) क्या आपकी सभी बीवीया इसे जेल पाती हे..? मुजे तो बहुत डर लग रहा हे..

लखन : (मुस्कुराते होठ चुमते) डरो मत.. अबतो इसी हथीयारसे सारी जींदगी आपकी सेवा करनी हे.. फीर आप बडे भैयाको भुल जाओगी..

चंदा : (बाहोमे भीचते कानमे धीरेसे) वैसे भी मे उनको भुल चुकी हु.. अब चंदा सीर्फ आपकी हे.. आइ.. धीरे डालीयेनां..

क्युकी तबतक चुतको सहेलाते लखन अ‍ेक उंगली चंदाकी चुतमे डाल देता हे.. ओर उनके चुतके दानेको सहेलाते खरोदने लगा.. बस.. यही हरकत चंदाको पागल करनेमे काफी थी.. चंदा जोरोसे लखनके लंडको मुडीमे थामकर उपर नीचे करते सहेलाने लगी.. ओर लखनके होठोको चुमने लगी..





लखन धीरे धीरे करते पुरी उंगली चंदाकी चुतमे घुसेड देता हे.. ओर अंदर बहार करने लगा.. तो चंदाकी अपनी कमर लखनकी गोदमे आगे पीछे हीलाने लगी.. कइ दीनोसे अनछुइ थी.. तो लखनकी हरकत ज्यादा देर बरदास्त नही करपाइ.. ओर उसने कांपते हुअ‍े लखनको जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लीया..

ओर अपनी कमरको जटके मारने लगी.. लखनकी उंगलीपे गरमाहट महेसुस हुइ.. तभी अचानक चंदा सरकते लखनके लंडके नजदीक सरक गइ.. ओर लंडको अपनी चुतके नीचे फसाकर अपनी कमरको आगे पीछे करते लंडको अपनी चुतपे घीसने मर्दन करने लगी..

चंदा लखनकी गरदनपे दोनो हाथ डालकर लखनसे चीपक गइ.. फीर लखनके कानमे फुसफुसाते लखनको ओर प्यार करनेकी मनते करने लगी.. कुछ देरके बाद वो दोनो पैरोके बीच नीचे घुटनोके बल बैठ गइ.. फीर लखनके लंडको चडीसे पुरा बहार नीकाल दीया..





लंडको बहार नीकालते तेजीसे लंडकी चमडीको उपर नीचे करने लगी.. लखन आंख बंध करते मजे लेने लगा.. तभी उसे लंडपे थोडी गरमाहट महेसुस हुइ.. उसने आंख खोलकर देखा तो चंदा लखनका पुरा लंड अपने मुहमे नीगल चुकी थी.. ओर तेजीसे लखनको ब्लुजोब देने लगी..





लखनने भी चंदाके चहेरेको अपने हाथोमे थाम लीया.. ओर धीरे धीरे कमर आगे पीछे करते चंदाके मुहको चोदने लगा.. लेकीन लखनको पता नहीथा की चंदा इस काममे माहीर थी.. वो पहेले देवायतको सादीसे पहेले कइ बार ब्लुजोब दे चुकी थी.. काफी देरके बाद लखनका लावा फुट पडा..





ओर चंदाकी हलकमे चला गया.. चंदा लखनका पुरा माल गटक गइ.. जैसे कोइ अमृतका ज्युस हो.. चंदाने गनेकी तराह चुसके लखनके पुरे लंडको साफ कर दीया.. फीर चुनीसे अपना मुह साफ करते लखनकी ओर देखते मुस्कुराते बैठे ही अपनी चुतको रुमालसे साफ करने लगी..

फीर पेन्टीको सहीसे पहेनकर सलवारको ठीक करने लगी.. फीर अपनी ब्रा ओर टोपको भी सही कीया.. कुछ देर लखनके पैरोपे सर रखदीया ओर मुस्कुराती रही.. फीर खडी होते अपनी सीटपे बैठ गइ.. तभी इन्टरवेल हुआ.. लखन भी चडी सही करते पेन्टको सही करते पहेन लेता हे.. तो चंदा बहुत ही सरमाते धीरेसे हस रही थी..

लखन : (मुस्कुराते) क्यु हस रही हो..?

चंदा : (उनके कंधेपे सर रखते धीरेसे) तो क्या करु..? मुजे अब भी यकीन नही होरहा की मेने अभी क्या कीया.. ओर वोभी पब्लीक स्पेसमे.. हें..हें..हें.. आपको पता हे.. वो आगेकी रोमे तो उन दोनोने अपना पुरा काम खतम करलीया.. वो लडकी कैसे उनकी गोदमे उछल रही थी..

लखन : (मुस्कुराते कानमे) आपको भी उछलना हे..? अभी आधी फील्म बाकी हे.. तो पुरी कर लेते हे..

चंदा : (सरमाते धीरेसे) ना बाबा ना.. आपका कीतना बडा हे.. मेरी हालत खराब कर देगा.. अब जोभी करना हे घर जाके.. यहा नही.. घर चलो.. नही देखनी फल्म.. वैसे भी हमने फील्म देखी ही कहा.. लेकीन मजा बहुत आया..

लखन : (मुस्कुराते) अरे पुरी फील्म देखकर जाते हेनां..

चंदा : (सरमाकर कानमे फुसफुसाते) जानु.. पीसाब जाना हे.. आप मेरे साथ चलो बहार.. प्लीज..

चंदा खडी होगइ.. ओर लखनका हाथ पकडकर लगभग बहारकी ओर दौड ही पडी.. वो जड चुकी थी.. उसे जटसे बाथरुममे जाना था.. ओर होलसे बहार नीकलते ही वो लखनका हाथ छोडकर लेडीस टोयलेटमे घुस गइ.. लखन उनको हसते हुअ‍े देखता रहा.. फीर वोभी जेन्टस टोयलेटमे चला गया..
 
चंदाने अंदर जाकर पीसाब कीया.. ओर अपनी चुतको पानीसे साफ कीया.. फीर अपने पर्ससे लीप्सीट नीकाली ओर अपना मेकअप सही करने लगी.. उसने अपना बाल भी सही कीया.. फीर मुस्कुराते बहार नीकली तो लखन उनका इन्तजार करते बहार खडा मुस्कुरा रहा था..

चंदा : (मुस्कुराते पास आते) अब घर चलो.. कोइ फील्म नही देखनी.. हम फीर कभी आयेगे..

लखन : (मुस्कुराते) इतनी जल्दी घर..? अभी तो साडे ग्याराह बजे हे..

चंदा : (लखनकी कोनीमे बाहे डालते) घर पहोचते बाराह बज जायेगे.. दो कोल्ड्रीन्स हेनां.. चलो इनके साथ सेन्डवीच खाते हे.. फीर घर चलेगे..

फीर दोनो केन्टीनमे चले गये.. ओर दो सेन्डवीच लेली.. दोनो प्यार भरी बाते करते आरामसे खाते रहे.. बाते करते भी चंदा लखनकी ओर कामुक नजरोसे हसती रही.. फीर कारकी ओर चल पडे.. कार नीचे पार्कींगमे थी.. चंदाने लखनका हाथ थामे रखा.. ओर दोनो पार्कींगमे चले गये.. वहा कोइ नही था..

तो लखनने चंदाको खीचकर दीवालके सहारे खडा कर दीया.. ओर दोनो हाथोके पंजोमे उंगलीया फसाकर दीवालसे सटा दीया.. फीर चंदाके होठोको चुमने लगा.. तो चंदा भी उनका साथ देने लगी.. उसने अपना हाथ छुडाकर लखनको जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लीया..

चंदा : (धीरेसे फुसफुसाते) जानु.. यहा नही.. कोइ आजायेगा.. चलो घर.. आज पुरी रात चंदा तुम्हारी हे.. आज मे आपको उपर नही जाने दुगी.. सीर्फ हम दोनो.. पुरी रात सीर्फ प्यार.. चलो..

चंदा अब लखनसे खुलकर बाते ओर प्यार करने लगी थी.. ओर ये सब उसीका नतीजा था.. जो उनको मंजुने अबतक देवायतसे दुर रखा था.. चंदा बीना प्यार पागल जैसी होगइ थी.. ओर वही कारण था जो वो आज लखनसे खुलकर प्यार कर रही थी.. दोनो घरपे आगये..

तो घरपे सनाटा छाया हुआ था.. बहार पुरी तराह अंधेरा छाया हुआ था.. लखनने गेट खोलकर कार अंदर लेली.. फीर पार्क करके गेटको बंध करने चला गया.. चंदा घरके दरवाजेके पास खडी रही.. लखनने आकर चाबीसे दरवाजा खोला ओर दोनो अंदर चले गये..

होलमे अंधेरा था.. कोइ आवाज नही.. सबलोग सो चुके थे.. लखनने जैसे ही दरवाजा बंध कीया चंदाने जोरोसे लखनको अपनी बाहोमे भीच लीया.. तो लखनने थोडा जुकते चंदाको अपनी गोदमे उठालीया.. ओर उनके रुमकी ओर चल पडा.. फीर दोनो रुममे चले गये..

पुरे रुममे अंधेरा छाया हुआ था.. चंदाने लाइट जलाइ.. तो रुममे देखते ही दोनो दंग रेह गये.. क्युकी चंदाका पुरा बेड फुलोसे सजा हुआ था.. ओर साइडके छोटे टेबलपे दो बडे ग्लास बादाम वाले दुधसे ढके हुअ‍े पडे थे.. चंदाने सर्मसार होते दरवाजा बंध करदीया..+





चंदा : (सरमाते मुस्कुराते) जानु.. लगता हे हम दोनोके बारेमे सबको पता हे.. पुनोदीने सब इन्तजाम करके रखा हे.. क्या सचमे उन्होने हमे..

लखन : (बाहोमे थामते) हां चंदा.. दीदीने दोपहोरको ही मुजे सब बता दीया था.. की आज हम दोनोकी सुहागरात होगी.. क्या तुम तैयार हो..

चंदा : (आंग गीली करते) हां.. लखन.. मे तुम सब लोगोको समज ही नही पाइ.. ना मंजुको ओर नाही पुनो दीदीको.. सब लोग कीतने अच्छे हे.. सबकी भावनाओका बराबर खयाल रखते हे..

लखन : (गोदमे उठाकर बेडकी ओर लेजाते) तो अब सुरु करे..? आजसे आप हमेसाके लीये मेरी होजाओगी..





चंदा : (गलमे दोनो हाथ डालते) हंम.. आपकी तो मे उसी दीन होगइ थी.. जब आपने मुजे पहेला कीस कीया था.. ओर जब बाबाने कहा तब ही मेने अपने आपको आपको समर्पीत कर दीया था.. लेकीन अ‍ेक ही अफसोस रहेगा.. मे आपकी बीवी नही बन पाउगी.. क्युकी मे आपके भाइकी अमानत हु..

लखन : (बेडपे लीटाते) चंदा.. अब कोइ फर्क नही पडता.. क्युकी अब मे ओर भाइ अ‍ेक ही हे.. मंजुमोमने अ‍ैसे ही सब बदलाव नही कीया.. क्युकी मुजे ओर भाइने मीलकर उसीके लीये भुमीका तैयार करनी हे.. जो मंजुमोमके उनके नये जन्ममे उनकी कोखसे जन्म लेगा..

कहेते लखन चंदाके उपर छागया.. ओर उनके दोनो हाथोके पंजेको कसके पकडते उनके होठोको चुमने लगा.. चंदा मुह खोलते लखनका साथ उनके होठोको चुमते देने लगी.. दोनो प्यारमे इतने मसगुल होगयेकी अ‍ेक अ‍ेक करते दोनोके तनसे कपडे कब नीकल गये दोनोको पता ही नही चला..





चंदाके तनपे लखनने गीफ्ट दी हुइ सीर्फ ब्रा ओर पेन्टी थी.. ओर लखन सीर्फ नीकरमे ही रेह गया.. चंदाके खुले बाल उनके सरके नीचे फैले हुअ‍े थे.. जीसे चंदा बहुत ही खुबसुरत अप्सरा जैसी दीख रही थी.. बस.. चंदाका यही रुप लखनको पागल करनेके लीये काफी था..

धीरे धीरे करते दोनोके अंतर वस्त्र भी नीकल गये.. ओर लखन चंदाके अ‍ेक अ‍ेक अंगके साथ खेलने लगा.. जब लखनने उनकी चुतपे मुह लगाया तब चंदाने जोरोसे चदरको मुठीमे पकडली.. ओर अपनी कमर पटकते अ‍ेक मछलीकी तराह छटपटाने लगी.. पुरे कमरा चंदाकी सीसकारीयोसे गुंजने लगा..





अ‍ेक बार दोनोने सीक्स नाइन पोजीसनमे अ‍ेक दुसरेको संतुस्ट कीया.. फीर दोनो सावर लेने चले गये.. ओर अ‍ेक दुसरेके तनको मसलते छेडखानीके साथ दोनोने पुरे दीन घुमनेकी थकावटको दुर कीया.. फीर अ‍ेक दुसरेके तनको पोछकर बहार आगये.. ओर अ‍ेक दुसरेने पुनमने रखा दुध पीलाया.. ओर फीर सुरु हुआ असली खेल....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - २८९

अ‍ेक बार दोनोने सीक्स नाइन पोजीसनमे अ‍ेक दुसरेको संतुस्ट कीया.. फीर दोनो सावर लेने चले गये.. ओर अ‍ेक दुसरेके तनको मसलते छेडखानीके साथ दोनोने पुरे दीन घुमनेकी थकावटको दुर कीया.. फीर अ‍ेक दुसरेके तनको पोछकर बहार आगये.. ओर अ‍ेक दुसरेने पुनमने रखा दुध पीलाया.. ओर फीर सुरु हुआ असली खेल.... अब आगे

लखनको पता थाकी चंदाकी क्या हालत होगी.. उसने कसके चंदाके दोनो हाथ थामलीये.. चंदा सरमके मारे लखनसे नजरे चुराने लगी.. ओर अ‍ेक पलके लीये उसे थोडीसी गील्टी भी फील हुइ.. क्युकी उनके पहेले पती.. फीर देवायत.. ओर आज लखन तीसरा मर्द था.. जो उनके तनको भोगने वाला था..

चंदा : (रीक्वेट करते धीरेसे) जानु.. प्लीज.. जरा ध्यानसे.. क्युकी मेरे पेटमे आपके भाइका बच्चा हे..

लखन : (आंखोमे देखते) डार्लींग सीर्फ भाइका नही.. हमारा बोलो.. क्युकी भाइ ओर मे अलग नही हे.. दोनो अ‍ेक ही हे.. मेरी सभी बीवीया भाइकी.. ओर भाइकी सभी बीवीया अब मेरी हे..

चंदा : (कामुक मुस्कुराते धीरेसे) सोरी बाबा.. मे भुल गइ थी.. लेकीन धीरेसे.. प्लीज.. आपका बहुत बडा हे.. ओर आपके भाइसे मोटा भी..

लखनका लंड चंदाकी चुतमे घुसनेके लीये ठोकरे मार रहा था.. लखनने कसके चंदाके हाथोको पंजोसे पकडकर थाम लीया.. ओर चंदाके होठोको चुमते लीपलोक करलीया.. चंदाका ये पहेला अनुभव नही था.. तो उसने कसके आपनी आंखको भीचलीया.. ओर आने वाले पलका इन्तजार करने लगी..

तभी कमरेमे अ‍ेक जोरोकी चीख गुंज उठी.. जो लखनके मुहमे ही दब गइ.. चंदाकी आंखोसे आंसु बहेने लगी.. ओर वो छटपटाते अपने दोनो पैर बेडपे पटकने लगी.. आखीर लखनने कीला फतेह करलीया था.. चंदा लखनका आधा तगडा ओर मोटा लंड अपनी चुतमे लेकर फील कर रही थी..





चंदाकी चुत दर्दके मारे अपने आप लबलबा रही थी.. जैसे वो पुरा लंड नीगल जाना चाहती हो.. चंदाको चुतमे बहुत ही सख्त महेसुस हो रहा था.. जब चंदा थोडी सांत हुइ तो लखन उनके होठ छोडते उनके दोनो बुब्स बारी बारी चुस रहा था.. ओर चंदा लखनके सरको सहेला रही थी..

चंदा दर्दके मारे धीरेसे कणसती रही.. ओर कुछ ही देरके बाद दर्दकी आवाजे कामुक सीसकारीयोमे तबदील होगइ.. लखन धीरे धीरे करते पुरा लंड घुसाके अ‍ैसे ही पडा चंदाके बुब्सके साथ खेल रहा था.. चंदा लखनसे नजरे चुराते इधर उधर मुह करते अ‍ेक पल लखनकी ओर देख लेती..





जब दोनोकी आंखे मीलती चंदा सर्मसार होते नजरे चुरा लेती.. लखनका पुरा लंड चंदाकी चुतके अंदर घुस चुका था.. चंदा लंडको अपनी चुतकी गहेराइओमे बच्चे दानीसे टकराते महेसुस करते उतेजनामे कांपने लगी.. उसने लखनसे हाथ छुडाते लखनको जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लीया..

फीर अपने दोनो पैरसे लखनकी कमरपे आंटी लगादी.. ओर लखनका चहेरा अपनी हथेलीओमे थामते उनके होठोको जोरोसे चुमने लगी.. फीर लखनके पुरे चहेरेपे चुंबनोकी बारीस करते लखनको फीरसे बाहोमे भीच लेती हे.. ओर उनके कानमे धीरेसे फुस फुसाती हे..

चंदा : (धीरेसे) जानु.. आज आपने चंदाको जीत लीया.. अपनी चंदाको मसल डालो.. कोइ रहेम नही.. अब ये चंदा सीर्फ आपकी अमानत हे.. पुरी जींदगी.. अब धीरे धीरे सुरु करो.. मीटादो मेरी प्यास..

फीर प्यारका वो दौर चला जो पुरी रात थमने वाला नही था.. लखन धीरे धीरे कमर हीलाते चंदाको चोदने लगा.. तो चंदा ओर भी कामुक सीसकारीया करने लगी.. उसने बची कुची सरम भी त्याग दी.. चंदा अब खुलकर लखनका साथ अपनी कमर उछालते देने लगी..





रीस्तोकी सारी दुरीया मीट गइ.. चंदा जबभी जडनेको आती लखनको जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लेती.. ओर अपनी कमरको जटके देते जडते लखनके लंडको भीगो देती.. लंबे अरसोके बाद वो लखनसे चुदाइ करवा रही थी.. उसने लखनको दीखा दीयाकी वो कीतनी कामुक ओर हवसी ओरत हे..

लखनके जडनेसे पहेले ही लखनने चंदाका तीन बार पानी नीकाल दीया था.. ओर आखीर वो पल भी आया जीनमे लखनने चंदाको जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लीया.. ओर उनके गलेके मुह डालते जोरोसे कमर हीलाते चंदाको चोदने लगा.. तो चंदा भी समज गइ..





उसने लखनको जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लीया.. ओर दोनोने लीपलोक करलीया.. लखन कमरको जटके देने लगा.. तभी चंदाको अपनी बच्चेदानीपे गरमाहट महेसुस हुइ.. ओर वोभी उतेजनासे कांपते लखनके साथ अ‍ेक बार फीर जडने लगी.. चंदाका मुह खुलाही रेह गया..

ओर वोभी लखनकी आंखोमे वासना भरी नजरोसे देखते आह.. आह.. करते लखनके साथ जड गइ.. ओर लखन उनके सीनेपे ढेर हो गया.. दोनो ही अपनी अपनी सांस दुरस्त करने लगे.. तबतक चंदा लखनकी पीठ ओर उनके सरको सहेलाते लखनको अपनी बाहोमे भीचके रखा..





जब दोनो सांत हो गये तो चंदा इधर उधर मुह करते लखनसे नजरे चुराने लगी.. उनको अपनी चुतमे अब भी लखनका तगडा लंड सख्त महेसुस हो रहा था.. जो अब भी रेह रेहके चुतके अंदर जटके मार रहा था.. आज चंदाको वो जडीबुटीकी अहेमीयका पता चल गया..





फीर तो लखनने बीना नीचे उतरे.. ओर बीना लंडको बहार नीकाले चंदाको दो बार ओर चोद लीया.. ओर चंदाकी अबतक की सारी गर्मी नीकालदी.. लखन चंदाको अलग अलग पोजीसने चोदता रहा.. कभी गोदमे बीठाकर तो कभी घोडी बनाकर पीछेसे..





ओर सावर लेते भी चंदाकी खडे खडे कुटाइ होगइ.. सुबह चार बजेतक चंदा चुदवाती रही.. तबतक लखनने चंदाकी चुतको छे से सात बार भर दीया था.. आज लखनने चंदाका अ‍ेक अ‍ेक अंग तोडके रख दीया.. उनकी चुत सुजके लाल होचुकी थी.. फीर दोनो अ‍ेक दुसरेसे चीपकके सो गये..
 
लेकीन आज गांवमे रातको फीरोजने अपनी दोनो बीवीओको कमरेमे बुला लीया.. ओर वायग्रा खाकर सलमा ओर जरीनाको बारी बारी अ‍ेक अ‍ेक बार चोद लीया.. जब चोदकर फीरोज ढेर होगया ओर गहेरी नींद सो गया तो सलमा ओर जरीना दोनो कमरेसे बहार नीकल गइ.. ओर सलमाके रुममे चली गइ..





सलमा : (सामने देखते धीरेसे) जरीना.. येतो गोलीया खाने लगे हे.. ओर दोनोके साथ करते हे.. हमे कुछ ओर रास्ता नीकालना पडेगा..

जरीना : (चीन्तासे धीरेसे) हां दीदी.. साहील बेचारा अकेला होगा.. अब क्या करे..?

सलमा : (धीरेसे) अभीकी चीन्ता तो नही हे.. ओर कल रातसे तेरी भी हालत खराब हे.. तो मेही साहीलके पास चली जाती हु.. लेकीन हमे कोइ परमेनेन्ट रास्ता नीकालना होगा..

जरीना : (कुछ याद आते ही मुस्कुराते) दीदी.. मील गया रास्ता.. हम कुछ अ‍ैसा करेगे जो वो सामनेसे ही केह देगेकी अ‍ेक दीन आप ओर अ‍ेक दीन मे..

सलमा : (उत्सुक्तासे मुस्कुराते) अच्छा.. वो भला कैसे..?

जरीना : (धीरेसे मुस्कुराते) दीदी.. हम दोनो पहेलेतो उनको गोलीया खाने नही देगे.. तब वो अ‍ेक के साथ ही करपायेगा.. ओर हम दोनो जुठ मुठ उनके सामने जगडा करेगे.. आप समज गइनां..?

सलमा : (खुसीसे मुस्कुराते) अरे वाह.. तुमने क्या आइडीया नीकाला हे.. ठीक हे.. हम दोनो भी बारी बारी साहीलसे मील सकेगे.. अब तु हमारे पतीके पास जाकर सोजा.. वो जाग जायेतो सम्हाल लेना... मे चली साहीलके पास.. पता नही वो कब मुजे सोने देगे.. हें..हें..हें..

जीरना : (नाकपे उंगली रखते) सीइइइ... दीदी.. धीरे.. आप आरामसे जाइअ‍े.. मे सब सम्हाल लुगी.. पुछेगे तो केह दुगीकी चुदाइकी वजहसे दीदी थक गइ हे.. ओर अपने कमरेमे आराम कर रही हे..

जब सलमा साहीलके पास पहोंची तब साहील थोडा नाराज लग रहा था.. ओर सलमाने उसे समजाकर बाजी सम्हाल ली.. उस रात साहीलने सलमाको जमकर पेला.. ओर बीना नीचे उतरेही सलमाको दो बार पेल दीया.. फीर सलमा साहीलके सीनेपे सर रखते उनका सीना सहेलाने लगी..





सलमा : (सामने देखते) साहील.. नाराज हे क्या..?

साहील : (सामने देखते) नही सलमा.. मुजे तुमसे कुछ बात कहेनी हे..

सलमा : (सामने देखते धीरेसे) क्या..?

साहील : (सामने देखते) सबुका फोन आया था.. चार दीनकी छुटीमे यहा आने वाली थी.. तो मेने तुम्हारी ओर चाचाके नीकाहकी बातकी.. तो सुनकर नाराज होगइ.. ओर उन्होने आना केन्शल करदीया..

सलमा : (थोडी चीन्तासे) हाय रब्बा.. येतो बहुत बुरा हुआ.. फीर क्या कहा उन्होने..?

साहील : (सामने देखते) मेने उसे पहेले कोइ नीर्णय लेनेसे पहेले सृतीभाभी ओर पुनमभाभीसे बात करलेने को कहा.. क्युकी वोही इस सीचुअ‍ेशनको सम्हाल सकती हे..

सलमा : (होंठ चुमकर) ये ठीक कीया आपने.. फीर..? कोइ बात हुइ..?

साहील : (मुस्कुराते) हां.. फीर दुबारा फोन आया.. उन्होने तुम्हारे ओर चाचाकी सादीको अ‍ेक्सेप्ट करलीया हे.. लेकीन वो यहा आयेगी नही.. इनके बजाये उन्होने छुटीमे मुजे वहा बुलाया हे..

सलमा : (खुस होते) साहील.. येतो बहुत अच्छी बात हे.. बस.. मेतो यही चाहती थीकी हमारी वजहसे तुम दोनोका रीस्ता ना टुटे.. आप खुसी खुसी चले जाओ..

साहील : (मुस्कुराते) लेकीन उसने तुम्हारे आलावा इस बातको यहा कीसीको ना बतानेको कहा हे..

सलमा : (मुस्कुराते) समज गइ.. कब जाना हे..?

साहील : (मुस्कुराते) बुधवार सामको वहा पहोचना हे..

सलमा : (मुस्कुराते) मतलब परसो.. कोइ बात नही.. आप यहा कुछ भी बहाना बनाकर चले जाओ.. ओर जबतक वापस आओगे तबतक यहा भी हर रात आपके साथ सोनेके लीये इन्तजाम कर लेगे.. मेने ओर जरीनाने तैय करलीया हे.. अब हर दीन हम दोनोमेसे कोइना कोइ आपके साथ रात बीतायेगी.. जरीना कैसी लगी..?

साहील : (सरमाकर मुस्कुराते) बीलकुल सबु जैसी.. मानो अ‍ेक कुआरी लडकी हो..

सलमा : (कातीलाना मुस्कुराते) मतलब आपको बहुत भा गइ.. देखना अपनी चाचीके चकरमे इस बीवीको भुल मत जाना..

साहील : (होंठ चुमते) कभी नही.. मेरी पहेली बीवी हमेसा तुही रहेगी.. चल अ‍ेक बार ओर करते हे..

सलमा : (सरमाकर मुस्कुराते) साहील.. ओर कीतना करोगे..? मेरे पेटमे आपका बच्चा हे.. जरा ध्यानसे.. पीछेसे करलो.. मे धोडी बन जाती हु.. लेकीन आगे घुसाना.. पीछे नही.. दर्द होता हे..





कहेते सलमा घोडी बनके जुक गइ.. ओर साहील उनके पीछे घुटनोपे आ गया.. उसने सलमाकी कमरको थाम लीया.. ओर अपना तगडा हथीयार पीछेसे सलमाकी चुतमे घुसा दीया.. फीर लगातार बीना लंड नीकाले सलमाको दो बार चोद लीया.. फीर दोनो अ‍ेक दुसरेसे चीपकते सो गये..
 
दुसरे दीन सुबह पुनमने चंदा ओर लखनको देर तक सोने दीया.. लेकीन सृती ओर राधीका अपने आपको रोक नही पाइ.. जब दोनो कंपलीट होकर नीचे आइ तो सृती राधीकाका हाथ पकडकर उसे चंदाके रुमके पास लेगइ.. ओर नाकपे उंगली रखते वो की होलसे देखने लगी..

फीर राधीकाने भी देखा.. दोनो अ‍ेक दुसरेकी ओर देखकर हसने लगी.. फीर तीनोने चाइ नास्ता करलीया.. सृती अपनी क्लीनीकपे चली गइ.. लखन ओर चंदा दोपहोर बहुत देरसे जागे.. पुनम ओर राधीकाने उसे नही छेडा.. जब दोनो कंपलीट होगये तो साथमे चाइ नास्ता कीया..

आज चंदा बहुत ही सरमा रही थी.. लखन फटाफट चाइ नास्ता करके होस्टेलकी ओर नीकल गया.. राधीका घरका काम समेटने लगी.. उसने पुनम ओर चंदाको बाते करनेका स्पेस दीया.. ओर पुनम दोनो बच्चेको लेकर चंदाके साथ सोफेपे बैठ गइ.. ओर अपनी बच्चीको दुध पीलाने लगी..

पुनम : (धीरेसे मुस्कुराते) भाभी.. कहो.. कैसी रही दोनोकी सुहागरात..?

चंदा : (सरमसे पानी पानी होते धीरेसे) दीदी.. क्या कहु..? मेरी जींदगीकी सबसे बेस्ट रात थी.. मेने अ‍ैसी सुहागरातकी कभी कल्पना भी नही कीथी.. मुजे नइ जींदगी देनेके लीये थेन्क्स.. क्या आपको सब पता थानां..?

पुनम : (मुस्कुराते) हां भाभी.. इसीलीये तो आपको गांवसे यहा लाइ हु.. मे चाहती हु की अब यहा आप अपनी लाइफ खुलकर जीये.. ओर अपनोको थेन्क्स नही कहेते.. बस.. आप खुस रहे..

चंदा : (आंख गीली करते) सही मायनोमे आप मेरी बेटी हे.. इतना तो कोइ सगी बेटी भी नही करती.. कास मेरा धीरेन भी आप जीतना समजदार होता..

पुनम : (मुस्कुराते) भाभी.. भुल जाइअ‍े सब.. वो सब पहेलेसे ही लीखा हुआ था.. अब आप उसे भी माफ करदे.. लखन आपको उनके पास लेकर जायेगा.. अगर वो माफी मांगेतो माफ करदीजीयेगा.. क्युकी अब उसे भी अपनी जींदगी आगे बढानी हे.. अगर आपने माफ नही कीया तो वो मनमे घुटता ही रहेगा..

चंदा : (आंख पोछते मुस्कुराते) हां.. लखन भी वोही केह रहा था.. ठीक हे.. मे उसे माफ कर दुगी.. लेकीन मे रहुगी तो इधर ही..

चंदा : (मुस्कुराते) हां.. ये आप हीका घर हे.. यहा रहीये ओर हमारे पतीके साथ मजे कीजीये.. यहा कोइ पाबंधी नही.. भुल जाइअ‍े की अब वो मेरा देवर हे.. मेरा दामाद हे.. मेरे बेटेकी उमरका हे.. लखन हम सबको संतुस्ट करनेमे सक्षम हे.. वो अपनी ओर भाइकी सभी बीवीओको सम्हाल सकते हे..

चंदा : (सरमाकर मुस्कुराते धीरेसे) कल रात मेने देखी उनकी स्टेमीना.. इतना तो मेने देजुके साथ भी नही कीया.. वो थकते ही नही थे.. कल रात मुजे फीरसे जवानीका अहेसास करवा दीया..

पुनम : (मुस्कुराते) भाभी.. वो अ‍ैसे ही हे.. अभी भी उनकी जींदगीमे बहुतसी लडकीया ओर ओरते भी आयेगी.. आप सुनकर वीचलीत मत होना.. उनको अपना काम करने देना.. ये सब हमारे वीजय ओर उन राजाके लीये भुमीका बना रहे हे.. हो सकता हे इनमे भाइकी ज्यादातर बीवीयाभी सामील हो.. आप देखकर संकोच मत करना.. हमे अपने हीस्सेका प्यार मील जायेगा..

चंदा : (मुस्कुराते) अब इतने दीन आप लोगोके साथ रहेकर इतना तो समज ही गइ.. बस.. हप्तेमे अ‍ेक बार इनका प्यार मील जाये हमारे लीये यही बहुत हे..

उधर गांवमे साहील सुबह ही सबानाको बेंगलोर मीलने जानेकी योजना बनानेके लीये घरसे चाइ नास्ता करके चला गया.. सबसे पहेले मुनाको मीला.. तो मुना बरखाकी छोटी बच्चीकी वजहसे साथ आनेको मना करदीया.. तो बंसी भी खेतोपे अकेला था ओर दोनो बीवीओको सम्हाल रहा था..

तो उसने बंसीको फोन नही कीया.. ओर सीधा श्रीधरके घरपे चला गया.. वहा भी जबसे ब्रीन्दाने लखनसे सारीरीक सबंध बनाये थे तबसे उनको भी कही चेइन नही मील रहा था.. लखनके साथ जबसे संभोग कीया था तबसे उनके तनमे कुछ अजीब फील होरहा था.. पेटमे हल्कीसी जलन ओर भारीपन महेसुस हो रहा था..

जब सुबह ब्रस करने जाती तब उनको व्होमीट जैसा फील होता.. घरके काममे मन नही लग रहा था.. मतलब.. ब्रीन्दाको कुछ अलग होनेका अहेसास होरहा था.. तो वोभी कही चेन्ज मीले उनके बारेमे सोच रही थी.. वो ओर श्रीधर चाइ नास्ता कर रहे थे तभी साहील आगया..

श्रीधर : (मुस्कुराते) अरे..? आओ आओ साहील.. आज सुबह सुबह रास्ता कैसे भुल गये..? परेसान लग रहा हे.. सब ठीक तो हेनां..?

ब्रीन्दा : (मुस्कुराते) आओ साहीलभाइ.. आप भी चाइ नास्ता करने बैठ जाइअ‍े..

साहील : (मुस्कुराते) नही भाभी.. घरसे चाइ नास्ता करके ही आया हु.. बस.. इसी परेसानीके बारेमे बात करने आया हु..

श्रीधर : (सामने देखते) क्यु..? क्या हुआ..?

साहील : (फीकी मुस्कानसे) भाइ.. चाचाने अम्मासे नीकाह करलीया..

श्रीधर : (सामने देखते) यार जब लखन आया तब तु बात तो कर रहा था.. तो होगया नीकाह..? इतनी जल्दी..? तो फीर तेरा क्या होगा..?

ब्रीन्दा : (आस्चर्यसे देखते) क्या..? सलमा भाभीका नीकाह होगया..? लेकीन वोतो आपसे नीकाह करने वाली थी.. उनके पेटमे आपहीका बच्चा हेनां..?

फीर जरीना वाली बातको छोडकर साहील श्रीधर ब्रीन्दाको सबकुछ बता देता हे.. जीसे सुनकर ब्रीन्दा भी सोक्ट होगइ.. फीर साहील सबानाकी बात करता हे ओर बताता हेकी उनको सबानाको मीलने बेंगलोर जाना हे.. ओर ये बात यहा छुपाकर रखनी हे.. फीर साहील श्रीधरको भी साथ आनेको कहेता हे.. तो मौका देखते ही..
 
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