Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती - Page 110 - SexBaba
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Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती

सलमा : (आंसु बहाते) जरीना.. लगता हे हमारा साहील मुजसे नाराज हो गया हे..

जरीना : (उनको सम्हालते) नही दीदी.. सांत होजाइअ‍े.. वो कोइ नाराज नही हे.. बस.. थोडा दुखी हे.. मे उसे सम्हाल लुगी..

सलमा : (जरीनाका हाथ थामते धीरेसे) जरीना.. प्लीज.. उसे सम्हाल लो.. वरना वो आज रात टुट जायेगा.. वो मुजे कीसी ओरके साथ सोते बरदास्त नही कर सकता..

जरीना : (फीरोजपे गुस्सा होते) इस कमीनेको भी इस उमरमे क्या सुजा जो आपसे सादी करली.. बुढेसे होता तो कुछ नही बस.. नइ बीवीके मजे लेने हे.. हमारे अच्छे खासे साहीलकी जींदगी खराब करदी.. आप दोनो कीतने खुस थे..

सलमा : (आस्चर्यसे देखते) जरीना.. ये तु क्या बोल रही हे..? अब वो हम दोनोके सौहर हे..

जरीना : (गुस्सेसे फुसफुसाते) सोहर..? अ‍ैसे होते हे सौहर..? पहेले तो महीना महीना गुजर जाता था फीर भी बीवीको हाथ तक नही लगाता था.. अब जनाबपे अचानक जवानी चडी हुइ हे.. अब तो हप्तेमे कमसे कम तीन बार चाहीये.. होतातो कुछ नही ओर नवाबो वाला सोख पालना हे.. दो बीवीया करेगे..

सलमा : (समजाते धीरेसे) जरीना.. सांत होजा.. अब कुछ नही हो सकता.. जो होना था हो गया.. अब आगे देख हमे क्या करना हे.. बस.. मुजे तो मेरे साहीलकी चीन्ता हे..

जरीना : (गुस्सेसे सामने देखते) दीदी पता हे..? जब मेने आप दोनोकी सादी रोकनेकी कोसीसकी तो उसने मुजे क्या कहा..?

सलमा : (सामने देखते) क्या..?

जरीना : (गुस्सेसे सामने देखते) कहा की तुम भाभीसे हमारे नीकाहकी बात करलो.. जब मेने आपती जताइ तो मुजे तलाक देनेकी धमकी देने लगे..

सलमा : (आस्चर्यसे देखते) क्या..? पागल होगये हे क्या..? दो दो बच्चोकी सादीया होगइ हे.. फीर भी..

जरीना : (आंसु बहाते) दीदी.. कैसे उस दोनो कमीनो भी हमे धोखा देकर चले गये.. मेरी सबुका सपना तोड गये.. येभी नही सोचा की इस फुल जैसी बच्चीका क्या होगा.. तब मेरे साहीलने आकर हम सबको सम्हाला.. ओर सबुका सपना पुरा कीया.. अगर मेरी ओर बच्चीया होती तोभी मे मेरे साहीलपे कुरबान कर देती.. हमारा साहील सबको सम्हालनेमे सक्षम हे..

सलमा : (सांत लहेजेमे धीरेसे) अब बस भी कर.. कीतना रोयेगी..? अब मेरे साहीलको सम्हालनेके लीये तु हेनां.. मुजे तुजपे पुरा यकीन हेकी तुम मेरे साहीलको सम्हाल लेगी.. तो मुजे कोइ चीन्ता नही..

जरीना : (मन मकम करते सख्त लहेजेमे) हां दीदी.. पहेले थोडा संकोत था.. लेकीन अब कोइ संकोच या सरम नही.. मे हमारे साहीलको सम्हाल लुगी.. वो भी हमेसा हमेसाके लीये.. दीदी.. आज इस घरमे अ‍ेक नही.. दो दो सुहागरात मनेगी.. अ‍ेक आपकी.. ओर अ‍ेक मेरी.. हमारे साहीलके साथ..

सलमा : (मनमे खुस होते) साबास जरीना.. आज तुमने मेरे मनका बोज हल्का करदीया..

जरीना : (सामने देखते आंसु पोछते) दीदी.. इस आदमीसे घीन आने लगी हे मुजे.. पता नही जब सबुको इस बारेमे पता चला तो क्या होगा..

सलका : (पीठ सहेलाते) तुम हमारी सबुकी चीन्ता मत कर.. उसे हमारा साहील समजा देगा..

जरीना : (सामने देखते) दीदी.. मैने अ‍ेक फैसला करलीया हे.. हमारी सबुके आते ही मे उनका नीकाह साहीलसे करवा दुगी.. बस.. आजकी रात आप सम्हाल लीजीये कलसे हम दोनो साहीलका बीस्तर साजा करेगी.. मुजे इस कमीने (फीरोज)को कैसे कंट्रल करना.. सब पता हे.. कलसे हमारे घरकी सभी औरतोको सम्हालनेकी जीम्वेवारी हमारे साहीलकी.. इस कुतेको तो मे अब अपनी उंगलीओपे नचाउगी..

सलमा : (सरमाकर मुस्कुराते) कमीनी गालीया तो मत दे अब हमारा सौहर हे.. लेकीन तुम कैसे कंट्रोल करोगी..?

जरीना : (कुटील मुस्कानसे धीरेसे) नींद की गोलीयोसे..

सलमा : (आस्चर्यसे देखते) नींदकी गोलीयोसे..? मगर कैसे..? तेरे पास नींदकी गोलीया कहासे आइ..?

जरीना : (मुस्कुराते) मेरे पास बहुत सारी पतीया पडी हे.. वो कमीनीके रुमको साफ करते बहुत सारी आइपीलकी गोलीया ओर नींदकी गोलीया मीली थी.. ओर उस कमीनेके रुमसे बहुत सारे कोन्डमके पेकेट भी मीले थे.. तब पता चला दोनो कमीने कइ महीनोसे हम सबको धोखा दे रहे थे..

सलमा : (मुहपे हाथ रखते धीरेसे) हाय.. र..बा.. वो तुम सबको नींदकी गोलीया देते थे..?

जरीना : (कुटील मुस्कानसे) हां.. क्युकी सबका खाना वो कमीनी ही बनाती थी.. उन दोनोके लीये अलग सब्जी नीकालकर सारी सब्जीमे गोलीया डालती थी.. फीर हमारे सोजानेके बाद कमीने दोनो भाइ बहेन अपने रुममे नंगा नाच करते थे.. हमे तो पता ही नही चला..

सलमा : (धीरेसे) तो फीर.. वो कादीर.. आपके साथ..

जरीना : (सरमाते नजरे चुराते धीरेसे) वो दीनमे.. तब वोभी पढता था.. सुबह तीनो पढने चले जाते.. ओर इनके अब्बा फेक्टरीपे.. तब वो कोलेजसे बंक मारके वापस घर आजाता.. ओर मेरे साथ अपनी हवस मीटाके चला जाता.. ओर मे नादान समजती थीकी वो मुजसे प्यार करता हे..

सलमा : (सामने देखते) इतना बडा धोखा..? जरीना.. उन्होने तुम्हारे जजबातोसे खेला..

जरीना : (आंसु बहाते सरको हांमे हीलाते) हां दीदी.. मे इस प्यारसे वंचीत थी.. तो भटक गइ थी.. उनका प्यार हमारे साहील जैसा पवीत्र नही था.. वो मेरे ओर सायराके तनके साथ खेलता रहा.. आज पता चला बाप बेटा दोनो ही हवसके पुजारी हे.. इनसे तो हमारा साहील लाख गुना अच्छा हे..

दोनोही बाते करते काम समेटती रही.. जब फीरोज आया तो जरीनाने सलमाको हल्कासा मेकअप कर दीया.. फीर अपने कमरेमे उसे बेडपे बीठाकर वापस बहार आगइ.. तो फीरोजने उसे अपनी बाहोमे भरके प्यार देनेकी कोसीसकी.. तो जरीनाने गुस्सेसे उनको धका देदीया..
 
जरीना : (गुस्सेसे देखते) दुर रहो मुजसे.. जाओ.. अपनी नइ बीजीके पास.. अब वोही आपको प्यार देगी.. आजके बाद मुजे हाथ भी मत लगाना..

फीरोज : (मुस्कुराते) अरे.. नाराज क्यु होती हो.. अब तो नीकाह होगया.. सीर्फ आजकी रात.. आज तुम सलमाके कमरेमे सो जाओ.. कलसे तीनो साथ सोयेगे..

जरीना : (गुस्से देखते धीरेसे) कोइ जरुरत नही.. सीर्फ आजकी रात नही.. अब तो आप अपनी नइ बीवीके साथ ही सोना.. मे हमेसाके लीये दीदीके रुममे सोउगी.. कुछ दीन मजे करलो.. फीर देखती हु.. कैसे कुतोकी तराह अपनी पुछ पटपटाते मेरे पास आते होकी नही..

ओर बाहोसे छुटकर फीरोजको गुस्सेसे घुरने लगी.. फीरोज थोडा सहम गया.. ओर जरीनाकी ओर गुस्सेसे देखते रुममे चला गया.. उसने दरवाजा बंध कर दीया.. अंदर सलमाके दीलकी धडकन तेज होगइ.. ओर फीरोज उनके पास जाकर बैठ गया..

जैसे ही फीरोजने दरवाजा बंध कीया जरीना सरमाके मुस्कुराने लगी.. ओर जटसे सलमाके रुममे चली गइ.. फीर नहाके उसने दुसरा ड्रेस पहेन लीया.. ओर खुले बालोके साथ हल्केसा मेकअप करते अपने आपको सवारने लगी.. जब कंपलीट होगइ तो बहार नजर घुमाते देखने लगी..





बहार घोर अंधेरा ओर सनाटा छाया हुआ था.. फीरोजके कमरेमे फुसफुसाहट सुनाइ दे रही थी.. जरीना सलमाके रुमका दरवाजा धीरेसे बंध करके दबे पाव साहीलके कमरेकी ओर चली गइ.. अंदर जाकर देखा तो अभी साहील नही आया था.. वो अपने दोस्तोके साथ था.. जरीना दरवाजा बंध करके साहीलके बेडपे जाकर लेट गइ..

दुसरी ओर लखन श्रीधरके साथ मुना साहील ओर बंसी.. पांचो दोस्तोकी पुरी टीम चौराहेपे बैठी हुइ थी.. सब खुलकर अ‍ेक दुसरेके अनुभव ओर गांवके दुसरेके अफैर साजा कर रहे थे.. चाइ नास्तेका दौर चला.. सब देर रात तक बैठे रहे.. फीर सब अपने अपने घरकी ओर चलने लगे..

इस रात बंसीने ब्रीन्दाको नही छुआ.. वो बहुत ही गहेरी नींदमे सो चुकी थी.. बंसी उनसे चीपकके सो गया.. मुना घरपे गया तो बरखा लेटे अपनी बच्चीको दुध पीला रही थी.. ओर बसंती अपने मोबाइलमे स्क्रोल करते वीडोयो देखते मुनाका इन्तजार कर रही थी..

मुना चेन्ज करके बेडपे आगया.. ओर सरारत करते उसने बरखाके दुसरे दुधुपे मुह लगा दीया ओर बुब्सको चुसते दुध पीने लगा.. तो बरखा उनके बालोमे हाथ घुकाते हसने लथी.. ओर बसंती भी जोरोसे हसने लगी.. फीर बसंतीने मुनाको हाथ पकडकर अपने उपर खीच लीया..





कुछ ही देरमे पुरे कमरा बसंतीकी कामुक आवाजे ओर सीसकारीयोसे गुंजने लगा.. मुना बसंतीके दोनो पैर अपने कंधे पे रखते जोरोसे कम हीलाते बसंतीको चोद रहा था.. ओर बरखा दोनोकी ओर कामुक नजरोसे अपनी चुत ओर बुब्स सहेलाती रही..

इधर बंसी जब घर गयातो सांती सो गइ थी.. उनका पेट भी काफी दीख रहा था.. ओर जागृती मोबाइलपे अपनी ओर बंसीकी सादीकी तसवीरे देखते बंसीका इन्तजार कर रहीथी.. जैसे ही बंसी आया वो उनकी ओर देखते मुस्कुराने लगी.. अब वो बंसीसे खुलकर प्यार करने लगी थी..

कुछ ही देरमे बंसी बेडपे बीठके बल लेटा हुआ था.. ओर जागृती बंसीकी कमरपे दोनो पैर पसारते उनका तगडा लंड अपनी चुतमे घुसाते उछल उछलके सवारी कर रही थी.. इस रात बंसीने बीना लंड बहार नीकाले जागृतीको तीन तीन बार चोद लीया.. ओर अ‍ेक बार बाथरुमे सावर लेते भी जागृतीको खडे खडे चोद लीया..





तो साहील जब घर पहोंचा तो पुरे घरपे अंधेरा छाया हुआ था.. साहीलने अ‍ेक नजर फीरोजके कमरेकी ओर डाली.. ओर उसे पहेली बार वहा ताक जाक करनेकी इच्छा हुइ.. वो चारो ओर देखकर दबे पांव फीरोजके कमरेके पास चला गया.. ओर दरवाजेपे कान लगाकर अंदरकी बाते सुननेकी कोसीस करने लगा..

तो अंदर सलमा ओर फीरोजकी फुस फुसाहटके साथ बीच बीचमे सलमाकी कामुक सीसकारीया सुनाइ दे रही थी.. साहीलको सुनकर गुस्सा आगया.. ओर वो जटसे अपने कमरेकी ओर बढ गया.. दरवाजा खोलकर अंदर गया.. ओर लाइट जलाइ.. देखा तो उनके बेडपे जरीना दुल्हनकी तराह सजकर लेटी हुइ थी..

साहीलने जटसे वापस साइट ओफ करदी.. उनको वो सब पल याद आने लगे.. जब उसने कल जरीनाको अपनी बाहोमे भीच लीया था.. ओर उनके होठोको चुम लीया था.. तब जरीनाने उसे आज रात मीलनेका वादा कीया था.. जीसे सोचकर साहीलका हथीयार ठुमकी मारते खडे होने लगा..

वो धीरेसे दरवाजा लोक करता हे.. ओर अपने सभी कपडे नीकालकर धीरेसे जरीनाकी बगलमे जाकर लेट गया.. जरीनाकी आंख लग गइ थी.. साहील थोडी देर उनकी बगलमे लेटते जरीनाके मासुम चहेरेको देखने लगा.. ये वही मासुम चहेरा था.. जीसका फायदा उनके बडे बेटेने खुब उठाया था..

साहीलने मुस्कुराते धीरेसे जरीनाके होठोको चुम लीया.. तो जरीनाने जटसे आंख खोलदी.. ओर साहीलको उनके बगलमे मुस्कुराते लेटे हुअ‍े पाया.. तो जरीनाके दीलकी धडकन बढ गइ.. उसने जटसे मुस्कुराते साहीलको अपनी बाहोमे भर लीया.. ओर साहीलके होठोको चुमने लगी..
 
जीरना : (मुस्कराते धीरेसे सरमाते) साहील.. देखो.. मेने अपना वादा पुरा कीया.. आजसे ये चाची आपकी हे.. लेलो सलमा दीदीका बदला.. मे अुंह तक नही करु्गी..

साहील : (मुस्कुराते गाल सहेलाते) नही चाची.. मे आपको बदलेके रुपमे हाथ नही लगाउगा.. अगर बदलेके लीये आइ होतो चली जाओ.. मुजे अ‍ैसा प्यार नही चाहीये..

जरीना : (मुस्कुराते गाल चुमते) नही साहील.. कोइ बदला नही.. मे सचमे तुमसे मीलना चाहती थी.. क्या तुजे भी मेरे अतीतके बारेमे पता हेनां..? सलमा दीदीने बताया मुजे..

साहील : (सामने देखते धीरेसे) हां चाची.. कादीर भाइने आपके साथ बहुत गलत कीया..

जरीना : (सामने देखते थोडी सख्तीसे) नाम नालो उस हराम जादेका.. बाप बेटा दोनो अ‍ेक ही हे.. येभी यहा आकर हवसके पुजारी हो गये हे.. प्यार क्या होता हे इनको तो पता ही नही.. यहा आकर मेने देखा तुम्हारा ओर सलमा दीदीका प्यार.. दोनो कैसे अ‍ेक दुसरेके लीये तडप रहे थे.. ओर आंसु बहा रहे थे..

साहील : (आंख गीली करते) चाची.. आपको तो हमारे बारेमे सब पता ही हे.. मे अम्मासे सादी करना चाहता था.. वो बच्चा हमारा हे.. मे अम्मासे बहुत प्यार करता हु.. ओर अम्मा भी मुजे..

जीरना : (मुस्कुराते) जानती हु मे.. मेरी सबुतो आपका प्यार पाकर धन्य होगइ.. अगर आप ना होते तो उनका सपना सपना ही रेह जाता.. अ‍ैसी दस सबु आपके उपर कुरबान हे..

साहील : (सामने देखते धीरेसे) चाची.. मेरे ओर अम्माके बारेमे जानते हुअ‍े भी आप सबुका हाथ मुजे दे रहे हो..? आपको बुरा नही लगा क्या..? क्युकी मे दोनोसे प्यार करता हु..

जरीना : (मुस्कुराते) नही.. क्युकी जो लडका बीना प्यार ही मेरी सबुका सपना पुरा कर सकता हे.. वो सादीके बाद मेरी सबुके लीये कुछ भी करेगा.. आज सबु सलमा दीदीके साथ मेभी आपपे फीदा हो गइ हु.. ओर रही बात सलमा दीदीकी.. तो अ‍ेक ओरतकी तकलीफ सीर्फ ओरत ही जानती हे.. तभी तो मे कादीरके बहेकावेमे आगइ..

साहील : (मुस्कुराते) क्या आप दोनोमे प्यार होगया था..?

जरीना : (साहीलको बाहोमे भीचते) नही.. मुजे नही पता था.. भावनाओमे बहेकते मुजसे अ‍ेक गलती होगइ थी.. तो कमीनेने उसी बातका फायदा उठाकर पहेली बार मेरे साथ जबरदस्ती की.. लेकीन उस दीन पता चला.. की मेने कादीरसे वो सुख पालीया था.. जो कभी तेरे चाचा नही दे पाये..

साहील : (मुस्कुराते जरीनाके बाल सहेलाते) फीर..?

जरीना : (सरमाकर मुस्कुराते) फीर क्या..? फीर तो कमीना आये दीन मेरी इजत लुटता रहा.. फीर तो मुजे भी उनकी आदत होगइ.. ओर मन ही मन उनको प्यार करने लगी.. लेकीन उनको तो बस मेरे तनसे प्यार था.. ओर वो आये दीज अपनी हजस मेरे साथ मीटाने लगा.. तबतक.. जबतक दोनो भाइ बहेन पकडे नही गये..

साहील : (मुस्कुराते) क्या आपको मेरे ओर अम्माके बारेमे पता था..?

जरीना : (मुस्कुराते) पहेले नही पता था.. लेकीन यहा आये तो सलमा दीदीने मुजे सबकुछ बता दीया.. ओर आपका प्यार सच्चा हे.. बस.. आजसे सलमा दीदी ओर सबुके जैसा प्यार मुजे भी चाहीये.. मे इस प्यारसे बहुत वंचीत रही हु.. आजसे आपकी ये चाचीको भी यही प्यारमे सामील करलो.. मेरा तन धन मन सबकुछ आपको सौपती हु.. ओर जरुरत पडी तो मे आपसे नीकाह करनेके लीये भी तैयार हु..

साहील : (आस्चर्यसे देखते धीरेसे) क्या..? सबके सामने..? इतनी हींमत..?

जरीना : (मुस्कुराते) अरे नही.. सबके सामने नही.. ओर ध्यान रहे.. इस बारेमे सबुको भी पता ना चले.. ये राज सीर्फ हम तीनोके बीच रहेगा.. मे.. आप.. ओर सलमा दीदी.. मेने दीदीको वादा कीया हे.. की मे हमारे साहीलको सम्हाल लुगी.. आज भले ही वो दोनो अपनी सुहागरात मनाये.. लेकीन आज यहा भी सुहागरात मनेगी.. हमारी सुहागरात..

कहेते जरीना साहीलके चहेरेको पागलोकी तराह चुमने लगी.. साहीलतो पहेलेसे ही अपने कपडे उतार चुका था.. ओर धीरे धीरे प्यार करते करते जरीनाके तनसे भी कपडे दुर होते गये.. जीरनाने पहेली बार साहीलका हथीयार देखा.. वो देखते ही दंग रेह गइ..





जब पहेली बार साहीलका लंड अपनी चुतमे लीया साहीलने जरीनाको अ‍ेक कुआरी लडकी जैसा अहेसास करवा दीया.. उनकी चीखे साहीलके मुहमे ही दब गइ.. आंखोसे आंसु बहेते रहे.. जरीना साहीलका बडा लंड अपनस चुतपे लेकर अपने दोनो पैर बेडपे पटकते साहीलसे छुटनेकी नाकाम कोसीस करती रही..





कुछ ही देरके बाद कमरा सांत होगया.. जैसे तुफानके पहेले सनाटा छा जाता हे.. फीर तो पुरा कमरा जरीनाकी कामुक सीसकारीयोसे गुंजने लगा.. ओर चुदाइका अ‍ैसा दौर चला.. जैसे प्यारका भवंडर कमरेमे तबाही मचा रहा हो.. ना जाने अबतक जरीना कीतनी बार जड चुकी थी..





साहीलने बीना नीचे उतरे ओर बीना लंड बहार नीकाले ही जरीनाको तीन तीन बार चोद लीया.. साहील भी नइ चुत मीलनेकी वजहसे बहुत जोसमे था.. फीर साहील जरीनाको गोदमे उठाकर बातरुममे लेगया.. वहा भी सावर लेते दोनो उतेजीत होगये.. ओर साहीलने वहा भी जरीनाको खडे खडे अ‍ेक बार चोद लीया..





फीर दो धंटे आराम करते फीरसे अ‍ेक चुदाइका दौर चला.. आज साहीलने पहेली बारमे ही जरीनाकी सारी तम्मना पुरी करदी.. जैसे दोनोकी सुहागरात हो.. फीर सुबह होनेसे पहेले साहील जरीनाको गोदमे उठाकर सलमाके कमरेमे छोडकर आगया.. ओर सो गया.. तब फीरोज ओर सलमा भी अ‍ेक दुसरेसे चीपकके सो चुके थे..
 
इधर लखन जब देरसे हवेलीपे पहोचा तो ज्यादातर लोग सो चुके थे.. होलमे सीर्फ मंजु ओर पुनम ही बैठे बाते कर रहे थे.. पुनम मंजुको लखनके बारेमे पुरा ब्योरा दे रही थी.. पुनमकी बच्ची भी उनकी गोदमे थी.. जैसे ही लखन आया दोनो मुस्कुराने लगी..

ओर लखन बच्चीको प्यार देते वही सोफेपे मंजुकी गोदमे सर रखके लेट गया.. तो मंजु हसते उनके सरमे हाथ घुमाने लगी.. पुनम प्यारसे लखनकी ओर देखते हस रही थी.. जब बच्ची रोने लगी तो पुनम ब्लाउस उचा करते अपनी बच्चीको दुध पीलाने लगी.. तभी..

लखन : (मुस्कुराते) मोम.. आपकी बहु मेरे बारेमे क्या चुगली कर रही थी..

मंजुला : (जोरोसे हसते) हें.. हें.. हें.. पता चल गया तुजे..?

पुनम : (हसते) मे कोइ चुगली नही कर रही थी.. काफी होशीयार होगये हे.. मेतो आपके बारेमे बता रही थी.. की सब मुजे पुछकर जाते हे.. ओर अभी भी गील्टी फील कर रहे हे..

लखन : (सरमाते हसते) येस मोम.. मेने पुनोसे वादा कीया हे.. लेकीन ये सब अजीब भी लग रहा हे.. कभी कभी तो सोचता हु की ये सब जीम्वेवारी मुजे ही क्यु..? कही मे कीसीको धोखातो नही दे रहा..

मंजुला : (सामने देखते मुस्कुराते) लखन.. अ‍ेक बातका जवाबदे मुजे.. क्या तुमने आज तक कीसीको फसाया..? फीर चाहे वो हमारे घरकी ओरत हो या फीर बहारकी..

लखन : (सरमाकर मुस्कुराते) नही मोम.. सबने सामनेसे मुजे रीलेशनमे आनेको कहा था..

मंजुला : (मुस्कुराते) तो फीर तुमने कीसको धोखा दीया..? सब सामनेसे तो आइ हे.. ओर तुम्हारा काम हे सभीकी भावनाओका सन्मान करना.. वो वक्त भी बहुत जल्द आयेगा जब देवु इन सभी रीलेशनसे उब जायेगा.. तब उनकी सभी बीवीया कहा जायेगी..? क्या तुम चाहते होकी उनकी सभी बीवीया बहार इधर उधर मुह मारती फीरती रहे..?

लखन : (सामने सीरीयस होते देखते) नही मोम.. मे सब समज गया.. मोम.. वो चंदा भाभी भी..

मंजुला : (मुस्कुराते) पता हे मुजे.. वो देवुसे मनसे कइ दीनोसे दुर हो चुकी हे.. ओर कल रात ही वो तुमसे मनसे अपने आपको समर्पीत कर चुकी हे.. बस.. इसी तराह सबका सन्मान करो.. ओर आगे बढो.. क्युकी जबतक मेरा वीजय बडा नही होजाता.. तबतक तुम ही अ‍ेक इस खानदानमे अकेला मर्द होगे.. जीनपे घरकी सभी ओरतोकी जीम्वेवारी होगी.. तो कुछ उल्टा सीधा मत सोचो..

पुनम : (मुस्कुराते) मोम.. मे इनको यही तो समजा रही हु.. फीर भी मुजसे बार बार पुछने चले आते हे..

मंजुला : (मुस्कुराते) पुनो.. यही तो उनका तेरे प्रती सच्चा प्यार हे.. वो तुजे कभी धोखेमे रखना नही चाहता.. तुमसे बहुत प्यार करता हे.. कास मेने धीरेन वाली गलती ना की होती..

पुनम : (सरमाके मुस्कुराते) आइ नो मोम.. मुजे पता हे ये मुजे कभी धोखा नही देगे.. मुजे क्या बल्की कीसीको भी धोखा देना नही चाहते.. इतना भरोसा तो हे मुजे.. तो फीर मुजसे पुछनेकी भी जरुरत नही हे.. क्युकी जोभी इनके साथ रीलेशन रखेगी.. वो सामनेसे ही आइ होगी..

लखन : (सामने देखते धीरेसे) मोम.. आप ठीक तो हेनां..? मुजे आपकी बहुत चीन्ता हो रही हे..

मंजुला : (मुस्कुराते सरको सहेलाते) मेरा बच्चा.. मेरी कीतनी चीन्ता करता हे..? बेटा तुजे सब मेरे बारेमे पता तो हे.. तो फीर क्यु चीन्ता करता हे..? मे हमेसाके लीये थोडीना जा रही हु.. फीर अ‍ेक नया सरीर लेकर वापस भीतो आना हे.. मेरी भावुकी कोखसे.. वो अभी प्रेटनेन्ट हेनां..?

लखन : (मुस्कुराते) येस मोम..

मंजुला : (मुस्कुराते) बस.. उनके गर्भमे जो बच्ची पल रही हे.. वो ही मे हु.. जब उनका पुर्ण सरीर वीकसीत होजायेगा.. तब मे वहा चली जाउगी.. इसी तराह सबको जाकर वापस आना हे.. फीर मुजे भी अपनी गोदमे खीलाना..

लखन : (हसते) मोम.. आपने अपने बारेमे तो बताया लेकीन बडे भैया ओर पुनोके बारेमे तो आपने कभी नही बताया..

मंजुला : (मुस्कुराते) पुनोको सब पता हे.. कभी फुरसतमे उनसे पुछ लेना..

लखन : (पुनमकी ओर देखते) कोन ये..? येतो मुजे कुछ भी नही बताती.. बस हमेसा बातको टालती रहेती हे.. जीतना पुछो इतना ही बताती हे..

पुनम : (जोरोसे हसते) अरे..? मेने कब बातको टाली..? आपने कभी पुछा ही नही.. ओर जीनके बारेमे पुछा उनके बारेमे तो सब बता दीया मेने..

लखन : (मुस्कुराते) ठीक हे.. लेकीन अब मुजे सबके बारेमे जानना हे.. जीनके बारेमे पुछु उनके बारेमे ओर जीनके बारेमे ना पुछु उके बारेमे भी.. अब देखता हु तुम बताती हो या नही..

मंजुला : (मुस्कुराते) अरे बाबा बता देगी.. जगडा मत करो दोनो.. अब सोना नही हे क्या..? देखो रात कीतनी होगइ हे..

फीर तीनो सोने चले गये.. पुनम लखनकी ओर कुछ आंखोसे इसारा करते बात करलेती हे.. ओर वो बच्चीको लेकर अपने रुममे चली जाती हे.. तो लखन उपर अपने पुराने वाले रुममे चला गया.. देखा तो बडे बेडपे राधीका ओर सृती बाते करते लखनके इन्तजारमे लेटी हुइ थी..

सृती अपने हादसेके बाद ढाइ तीन महीना लखनसे दुर रही थी.. फीर लखनको भी भावीकासे परमीशन मील चुकी थी.. ओर इस रात लखनने राधीकाको दो दो बार ठंडी करते सुला दीया.. फीर सृती ओर लखन कइ दीनोके बाद मीले.. इस रात सृतीको फीरसे अपनी सुहागरातकी फीलींग्स आइ.. लखन बडी ही सावधानीसे सृतीको सुबह चार बजे तक चोदता रहा.. ओर सृतीको पुरी तरह तृप्त करदीया.. फीर दोनो नंगे ही अ‍ेक दुसरेसे चीपकके सोगये....

कन्टीन्यु
 
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