Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती - Page 109 - SexBaba
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Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती

ब्रीन्दा : (मुस्कुराते पास सटकर खीसकते) लेकीन वेकीन कुछ नही.. तो फीर अपनी मंजुमोमके आदेशका पालन करो.. समजलो ये मेरी भावना हे.. तो क्या आज थोडीसी फीस वसुल करोगे..? देखो घरपे सीर्फ हम दोनो ही हे.. कही दीनोसे मीलनेकी इच्छा थी.. मेरी इच्छाका सन्मान करो..

लखन : (मुस्कुराते) भाभी.. येतो मेरे दोस्तको धोखा देना हुआनां..?

ब्रीन्दा : (कातीलाना मुस्कुराते जांग सहेलाते) कोइ धोखा नही.. मेरी भी इच्छा हे.. ओर आपका दोस्त भी कोइ दुधका दुला हुआ नही हे.. क्या मे नही जानती वो बार बार सहेर उनकी बीवीको मीलने क्यु जाता हे..? वो भी अपनी सासको ठोकने जाता हे..

लखन : (मुस्कुराते) क्या आपको सब पता हे..?

ब्रीन्दा : (मुस्कुराते) ओर नही तो क्या.. डीलीवरीके दीन ही उनकी चाल बदल चुकी थी.. ओर वो श्रीधरको कैसी ललचाइ नजरोसे देख रही थी.. क्या मे इतनी नासमज दीखती हु आपको..?

लखन : (सामने देखते) तो फीर आपने श्रीधरको रोका क्यु नही..?

ब्रीन्दा : (मुस्कुराते) बदलेकी भावनासे.. कमीनीने मेरे पतीको मुजसे अलग करदीया हे.. उसे भी पता चले की असली मर्द कैसा होता हे.. ओर मेरे पतीसे भी अ‍ैसा बदला लुगी की वो सब जानते हुअ‍े भी कुछ नही करपायेगा.. अब चलीये.. आज सब पैसे वसुल करलीजीये..

लखन : (मुस्कुराते ठीक हे भाभी.. लेकीन मे ये सब पैसे वसुल करनेके लीये नही करुगा.. सीर्फ ओरतोके सन्माकी बात होगी.. ओर वो भी सीर्फ अ‍ेक बार..

ब्रीन्दा : (मनमे खुस होते) अरे हां बाबा.. कोइ बात नही.. अ‍ेक बार दो बार वो हम बादमे डीसाइड करेगे.. मुजे पता हे आप अ‍ेक ही बारमे काम तमाम कर देते हे.. ओर अभी अ‍ेक हप्ते पहेले ही मेरा पीरीयड खतम हुआ हे.. तो ये सही समय हे.. मुजे आपपे यकीन हे मेरा काम होजायेगा..

लखन : (आस्चर्यसे मुस्कुराते) क्या..? आप सचमे अ‍ैसा चाहती हो..?

ब्रीन्दा : (मुस्कुराते) हां.. मे चाहती हु हम दोनोकी नीशानीको मे जन्म दु.. चलीये.. अब देर मत कीजीये.. ओर हां.. ये बात सीर्फ हम दोनोके बीच ही रहेगी.. समज गयेनां..?

कहेते ब्रीन्दा लखनको हाथ पकडकर अपने बेडरुममे ले गइ.. कुछ ही देरके बाद ब्रीन्दा जोरोसे चीखते अपने दोनो पैर बेडपे पटक रही थी.. उनकी आंखसे आंसु बेह रहे थे.. कुछ ही देरमे ब्रीन्दाकी दर्द भरी चीखे कामुक सीसकारीगोमे तब दील होगइ..





ढाइ घंटेके बाद लखन बहार नीकला तो ब्रीन्दा लंगडाते उसे दरवाजे तक छोडने आगइ.. दोनो अ‍ेक दुसरेकी बाहोमे समा गये.. ओर अ‍ेक दुसरेके होंठ चुम लीये.. फीर दुबारा मीलनेका वादा करते ब्रीन्दाने लखनको वीदा कर दीया.. फीर दरवाजा बंध करके अ‍ेक पेइन कीलर खाली..

फीर वापस लंगडाते बेडरुममे चली गइ.. ओर बेसुध्ध जैसी हालतमे सो गइ.. लखनने बीना नीचे उतरे ब्रीन्दाकी तीन बार घमासान चुदाइ करली थी.. ओर अ‍ेक बार बाथरुममे भी खडे खडे चोद लीया.. आज ब्रीन्दाकी सारी कशर लखनने पुरी करदी.. जो श्रीधरकी सादीसे ही लखनको मीलनेका प्लान बना रही थी..

दुसरी ओर लखन घरपे आगया.. तबतक देवायतभी आ चुका था.. ओर चंदामे इतना सुधार देखकर बहुत खुस था.. फीर सबलोग खाना खाने अ‍ेकठे बैठ गये.. मंजुने नीलमको घर जानेके लीये बोला तो नीलमने सरमाके मना करदीया.. कुछ देर आराम करके लखन खेतोपे चला गया..

तो भानु खटीया पे लेटे लेटे बीडी पी रहा था.. लखनको देखकर हसने लगा.. ओर सही होकर बैठ गया.. लखनने उनका ओर घरका हाल चाल पुछा.. फीर मकानके बारेमे पुछा तो मकान आधेसे ज्यादा बन चुका था.. ओर खेतोके सामने ही दीखता था.. फीर लखन भानु वही चले गये..

लखन : (मुस्कुराते) भाइ.. मकानतो बहुत बडा ओर बडीया बनवा रहे हो.. कबतक होजायेगा..?

भानु : (मनमे खुस होते) बस.. तीन महीनेमे कंपलीट हो जायेगा.. भाइ.. सब आप लोगोकी बदौलत हो रहा हे.. वरना इतना बडा मकानके बारेमे तो सोच भी नही सकता..

लखन : (मुस्कुराते) भाइ.. आप खेतोमे महेनत भीतो इतनी करते हो.. खैर छोडो ये सब बाते.. पहेले ये बताइअ‍े हम दोनो वो डोक्टरको दीखाने गये थे.. कुछ फर्क पडा..?

भानु : (मुस्कुराते) अरे बहुत फर्क पडा.. बस.. धीरे धीरे सुधार हो रहा हे.. अब तो तैय करलीया हे.. सीर्फ रमा.. ओर रीटा.. ओर कोइ नही..

लखन : (मुस्कुराते) अब भी रीटा..? हें..हें..हें..
 
भानु : (सरमाकर मुस्कुराते) हां यार.. आपकी भाभीतो अब प्रेगनेन्ट हे.. तो मुजे हाथ भी लगाने नही देती.. ओर रीटा मेरा अ‍ेक बीवीकी तराह खयाल रखती हे.. ओर वो भी मुजे छोडना नही चाहती.. अ‍ेक तो होनी चाहीये.. हें..हें..हें..

लखन : ((मुस्कुराते) तो फीर उनका वो पती..? छोटु नाम हेना..?

भानु : (हसते) अरे वो..? बडा हरामी हे साला.. बस.. पैसोका लालची.. अ‍ेक दो मजदुरनसे टाका भीडवा दीया हे.. तो वही खुस हे.. रातको उनके बच्चेको लेकर बहार बरामदेमे सो जाता हे.. मे ओर रीटा उनके रुममे.. अ‍ेक मीया बीवीकी तराह.. साली क्या मजा देती हे..

लखन : (मुस्कुराते) ओर रमा भाभी.. चाची..? उनकी तबीयत तो ठीक हेनां..?

भानु : (मुस्कुराते) यार आपकी भाभी.. ओर अम्मा आपको बहुत याद करती हे.. कहेती थी जबसे लताने देवुसे सादी करली हे तबसे लखनने यहा घर आना ही छोड दीया.. आप अ‍ेक बार अम्मासे जाकर मीललो.. उनके दीलको तसली दील जायेगी..

लखन : (गंभीर होते) भाइ.. अ‍ैसी बात नही हे.. कुछ जीम्वेवारीमे फसा हुआ हु.. दो दीन यही हु.. जाकर मील लुगा.. लेकीन पहेले खेतपे चलते हे.. चलो आज पुरे खेतोमे चकर लगाकर आते हे.. काफी दीन हो गया.. देखा नही हे..

भानु : (बहार आते) चलो मोटसायकल लेकर ही जाते हे.. पुरा खेतर चलके जायेगे तो रात हो जायेगी.. छोटा थोडीना हे..?

लखन भानुके पीछे बैठ गया.. दोनो कीनारेसे चकर लगाने लगे.. मजदुरो काम कर रहे थे.. कुछ मजदुरन लखनको देखकर सरमाके हसने लगती.. जीसकी गुफामे लखन पहेले धमाका कर चुका था.. दोनो काफी दुर तक चले गये.. तभी अचानक लखनने उनके खेतोसे दुर अ‍ेक मीटीका ढेर देखा..

लखन : (जटसे) भाइ.. रुको रुको रुको.. अ‍ेक मीनीट.. ये कीसका खेत हे..?

भानु : (मीटीका ढेर देखते रुक गया) अरे कीसीका नही.. गौचरकी जमीन हे.. सरकारी.. लेकीन ये मीटीका ढैर कैसा..? चलो चलकर देखते हे.. लगता हे कोइ मीटी चुराके ले जा रहा हे..

दोनो पास जाकर देखते हे.. तो दंग रेहजाते हे.. क्युकी ये मीटी चुराने वाले नही थे.. वहासे देवायतके खेतरकी ओर सुरंग बना रहे थे.. लखनने तुरंत देवायतको फोन कीया.. तो कुछ ही देरमे देवायत अपनी कार लेकर वहा आगया.. ओर सुरंगको देखा..

देवायत : भानु.. ये तो कोइ सुरंग बना रहा हे.. वो भी हमारे खेतोकी ओर..

भानु : (सामने चीन्तासे देखते) भाइ.. वोही लोग होगे.. जो कुछ दीन पहेले हमारे यहा चकर लगा रहे थे.. कमीने अ‍ेक बार मेरे हाथ लगजाये.. चमडी उखाड दुगा..

देवायत : (सामने देखते) देख कोइ जल्दबाजी मत करना.. ओर तुम दोनो हथीयार लीये बीना ही इधर आ गये..? अगर अंदर कोइ होता तो..?

लखन : (सामने देखते) भाइ हमतो खेतोपे चकर लगाने आये थे.. काफी दीनोसे देखा नही था तो सोचा अ‍ेक बार देख लेता हु.. ये तो इतना बडा ढेर देखा इसीलीये यहा आ गये..

देवायत : (सर हीलाते) ठीक हे बेटा.. इतनी दुर खेतोमे बीना हथीयार नही आना चाहीये.. अगर कोइ जानवर मील गया तो..? ये पुलीसका मामला हे.. हमे सीकायत दर्ज करवानी होगी.. चलो ओफीसपे वहीसे फोन करते हे..

फीर तीनो ओफीस चले जाते हे.. ओर वहा देवायत पुलीसको फोन करता हे.. तो कुछ ही देरमे दो दो पुलीस वेन देवायतके खेतोपे आजाती हे.. इन्सपेक्टरने आते ही देवायतसे हाथ मीलाया.. फीर सबलोग मीटीके ढेरके पास चले गये.. वहा इन्सपेक्टरने बारीकेसे सुरंगका नीरीक्षण कीया..

इन्सपेक्टर : ठाकुर साहेब.. लगता हे ये कोइ मीटी चुराने वाले नही हे.. बडे ठाकुर थे तब भी अ‍ेसी अ‍ेक दो घटना दर्ज हुइ हे.. लगता हे वो खजाना ढुंढने वाले गीरोह फीरसे सक्रीय होगये हे.. कुछ दीन रातमे वोच रखनी पडेगी.. क्युकी ये सब काम रातमे ही करते होगे..

लखन : सर रातमे यहा छुपकर वोच रखनी पडेगी.. क्या हम मीलकर काम करे..?

इन्सपेक्टर : (मुस्कुराते) नही छोटे ठाकुर.. आपकी बात सही हे.. लेकीन ये हमारा काम हे.. हम आपको जोखीममे नही डाल सकते.. अब जो भी करना हे हम करेगे.. बीना वर्दी बस.. हमे यही आपके खेतोकी रुम चाहीये..

देवायत : (मुस्कुराते) मील जायेगी.. ये पंप वाली.. ओर कुछ मजदुरोकी रुम हे..

इन्सपेक्टर : (मुस्कुराते) थेन्क्स.. अलग अलग जगहपे तीन रुम चाहीये.. कुछ दीन नीगरानी रखेगे.. मुजे लगता हे मीटीकी सुगंध आ रही हे.. ये काम अ‍ेक दो दीन मेही हुआ हे.. अगर अ‍ैसा हेतो वो लोग जल्द पकडे जायेगे.. अब आप लोगोको इधर आनेकी जरुरत नही हे.. बाकी सक हम देख लेगे..

देवायत : (सर हीलाते) ठीक हे.. सब चलीये ओफीस चलते हे.. वहा कुछ चाइ नास्ता करते हे.. फीर आप सीकायत दर्ज करलेना..

सबलोग वापस ओफीस आजाते हे.. पुलीसकी दो दो गाडीया देखकर गांवके कइ लोग इकठा होने लगे.. तो कोइ दुरसे देखने लगे.. मालती ओर रेणुने सबके लीये चाइ बनाइ तबतक भानुने नास्तेका इन्तजाम करलीया.. फीर इन्सपेक्टर सीकायत दर्ज करके नीकल गये..
 
भानु : (पुलीस वेन जाते ही) भाइ.. अच्छा हुआ लखन भैया आगये ओर हम खेत देखने चले गये.. वरना इतनी दुर तो हम जाते ही नही.. हम सीर्फ अपने खेतोकी रखवाली करते..

देवायत : (मुस्कुराते) भानु पहेले भी कइ लोग कोसीस कर चुके हे.. कीसीके हाथमे कुछ नही आया.. इसमे गभरानेकी बात नही हे.. बस.. हमे चौकना रहेना पडेगा..

लखन : (सामने देखते) भाइ.. आप कहोतो मे कुछ दीन इधर रुक जाउ..?

देवायत : (मुस्कुराते) अरे नही नही.. कोइ जरुरत नही.. वो सब मे ओर भानु देख लेगे.. बस.. तु घर ओर बीजनेसका खयाल रख.. बाकी सब हम देख लेगे..

तभी मुना साहील ओर बंसी दोडकर आगये.. तबतक मामला सुलट चुका था.. तो लखन तीनो दोस्तोके साथ गांवमे चला गया.. ओर अपनी तैय जगाहपे जाकर बैठ गये.. बंसी कुछ देर बैठकर बात करता हे फीर चाइ पीकर रातको मीलनेको कहेकर अपने खेतोपे चला गया.. लेकीन जानेसे पहेले..

लखन : (मुस्कुराते) कहो कमीनो.. कैसा चल रहा हे सबका..? सबकुछ ठीक..? बंसी..? कैसा चल रहा हे तेरी बुहा ओर बहेनके साथ..?

बंसी : (सरमाकर हसते धीरेसे) भाइ.. सब कुछ बडीया चल रहा हे.. हम तीनोकी लाइफ अच्छेसे चल रही हे.. सांती ओर जागृतीके बीच अच्छी पटती भी हे.. दोनोकी खुब जमकर ले रहा हु..

लखन : (साहीलकी ओर देखते हसते) साहील..? तेरा..? मुह क्यु लटका हुआ हे..? कुछ हुआ हे क्या..?

साहील : (थोडी मायुसीमे) भाइ.. आज चाचाने अम्मासे नीकाह करलीया.. अब क्या होगा..?

लखन : (सामने देखते) क्या..? इतनी जल्दी..? लगता हे बुढेको यहाकी हवा रांच आगइ हे.. बस.. ओर क्या.. मेने तुजे सब बतातो दीया हे.. क्यु मायुस होता हे..? भुलजा सब रीस्ते नाते.. आगे बढ..

साहील : (मुस्कुराते) भाइ.. अब कोइ संकोच नही.. जबसे हमारी बात हुइ हे तबसे सभी सरम त्याग दी.. आपके कहेने मुताबीक काफी आगे बढ चुका हु.. आप फीकर मत करो.. बस.. अ‍ेक बाकी थी.. तो आज वो भी मील जायेगी..

लखन : (पीठ थपथपाते) साबास मेरे सेर..

मुना : (जोरोसे हसते) लखन.. अभी कमीना तीन चार दीन सहेरमे रहेकर आया हे.. अपनी बडी बहेनके पास.. कमीनेकी बीना सादीके ही चार चार बीवीया हो चुकी हे.. हें..हें..हें..

लखन : (मुस्कुराते) पता हे मुजे.. इनकी छोड कमीने.. तु बता.. आजकल तु भी तेरी मामीके साथ सहेरका बहुत चकर काट रहा हे.. माजरा क्या हे..?

मुना : (सरमाकर हसते) अरे..? सीर्फ अ‍ेक बार गया था.. आपने कब देख लीया..? हें..हें..हें..

लखन : (मुस्कुराते) कमीनो सबपे नजर रहेती हे मेरी.. मे ओर श्रीधर साथ ही थे.. तुजे ओर तेरी मामीको होटेलमे जाते देखा था.. बता.. क्या चकर हे..? तेरी मामी सेट होगइ..?

साहील : (हसते धीरेसे) भाइ.. सेट क्या.. उनकोतो कमीनाने तीन चार बार ठोक भी लीया हे.. ओर अभी सहेर जाकर उनके साथ छोटासा हनीमुन भी मनाकर आगया.. हें..हें..हें..

लखन : (हसते) मुना.. बता कबसे सुरु हुआ..? उसे पता हेकी तुम उनके भांजे हो..?

मुना : (सरमाकर मुस्कुराते धीरेसे) नही भाइ.. उसे ओर उनके पतीको कुछ नही पता.. बस.. मुजे तो सीर्फ बदला लेना था.. क्या पताथा अ‍ेक बार ठोकनेसे वो मेरी दीवानी होजायेगी.. हम दोनो काफी आगे बढ चुके हे..

लखन : (मुस्कुराते) सुरुसे बता.. कब सुरु हुआ..

मुना : (मुस्कुराते) ठीक हे भाइ.. सुनो..

कहेते मुना अपनी ओर अपनी मामी गीताकी पुरी लव स्टोरी सुनाने लगा.. सुरुआती दोरमे फोनपे सीर्फ कामकी ओर हल्की फुल्की बाते हो रही थी.. फीर बात वोट्सअ‍ेपके माध्यमसे चेटपे होने लगी.. ओर बात हल्केसे मजाकसे धीरे धीरे आगे बढने लगी..

मुना अक्सर गीताकी खुबसुरतीकी तारीफ करने लगा तो गुताको भी अच्छा लगने लगा.. ओर गीता अक्सर मुनाको मेकअप कीये हुइ तस्वीर भेजने लगी.. बात इतनी अतंरग होने लगीकी गीताको पता ही नही चलाकी वो मुनाको प्यार करने लगी हे.. ओर बात काफी आगे बढ गइ..

दोनो अ‍ेक दुसरेको संदेर भेजने लगे.. जैसे की सुबहपे गुठ मोर्नींगसे सुरुआत होती.. ओर आज खानेमे क्या खाया कोनसे कपडे पहेने.. फीर आइ लव यु से रातमे सोते गुडनाइटके संदेश.. हर मेसेजके साथ दील वाला इमोजी भेजना नही भुलते.. ओर बीच बीचमे कामकी बाते भी..

अ‍ेक दीन मुनाने हींमत करते गीताको वीडीयो कोल करदीया.. ओर बातोसे ही गरम करते मुनाने गीताको अपने कपडे नीकालनेके लीये मजबुर करदीया.. उस दीन पहेली बार मुनाने गीताको फोन सेक्सका अनुभव करवाया.. फीर तो ये रोजकी आम बात होगइ..
 
गीता मुनाके कहेने पे बीना जीजक नंगी हो जाती.. फीर जैसे मुना नीर्देश देता अ‍ैसा करती.. वो अपनी चुचीओको अपने हाथोसे मसलती.. अपनी चुत सहेलाती.. फीर मुनाके कहेने पे अपनी चुतमे उंगली घुसा देती ओर खुब रगती.. मुना उनको फोनपे ही जडा देता..





अ‍ेक दीन बातो ही बातोमे गीताने मुनाको बता दीयाकी उनका पती सुबह बहारगांव जा रहा हे.. ओर रातमे देरसे लोटेगा.. बस.. मुनाको हींट मील गइ.. ओर वो दो पहोरको खाना खाकर सीधा गीताके घर पहोंच गया.. पहेलेतो गीता मुनाको देखकर थोडी गभरा गइ..

फीर आजु बाजु नजर घुमाकर उसने मुनाको घरके अंदर खीच लीया.. ओर दरवाजा बंध कर लीया.. फीर दोनो अ‍ेक दुसरेकी बाहोमे समा गये.. मुना उनके तनके साथ खेलने लगा.. ओर गीता बहुत गरम हो गइ.. कुछ देर ना नुकुर करते अपने आपको मुनाके हवाले करदीया..

फीर कुछ ही देरके बाद गीताके बेडरुमसे उनके हल्केसे चीखनेकी आवाज सुनाइ देने लगी.. वो अपना दोनो पैर बेडपे पटकते मुनासे छुटनेकी नाकाम कोसीस करती रही.. फीर कुछ देरके बाद कमरेसे कामुक सीसकारीया सुनाइ देने लगी.. दोनो नंगे थे.. मुना गीताको जबरदस्त तरीकेसे पेल रहा था..





गीताको दो दो बार जडाके तीसरी बारमे दोनो साथमे जड गये.. ओर हमेसाकी तराह उस दीन मुनाने बीना नीचे उतरे गीताकी चुतको दो दो बार भरके हरी भरी करदी.. गीताका अ‍ेक अ‍ेक अंग तोडके रख दीया.. फीर दोनो नहाने गये तब भी गीताकी अ‍ेक बार खडे खडे चुदाइ हो गइ..

फीर मुना गीताको पेइन कीलरकी गोली खीलाकर सामको सबकी नजर बचाते घर वापस आ गया.. दुसरे दीन गीता जुठमुठ नाराज होते मुनाको अपनी हालत बीगाडनेकी सीकायत करने लगी.. लेकीन उनका लहेजा फीर भी प्यार भरा था.. मुनाने जोरोसे हसनेकी इमोजी भेजी..

तो गीताने भी गुस्से वाले इमोजी भेजी.. फीर दो दीन बातोके अलावा कुछ नही हुआ.. लेकीन तीसरे दीन फीर गीताकी चुतमे खुजली होने लगी.. ओर बात फीर सेक्सके बारेमे होने लगी.. गीताने मुनाको बता दीयाकी उसे अ‍ेक कुआरी लडकी वाली फीलींग्सका अहेसास करवा दीया..

ओर उसने मुनाको थेन्क्स कहा.. फीर अ‍ेक हप्ते बाद फीर अ‍ैसा मौका मीला.. ओर इस बार गीताने बीना जीजक मुनाको अपने घर बुला लीया.. उस दीन भी दोनोने सेक्सका भरपुर आनंद उठाया.. फीर तो गीता ओर मुनाके लीये आम बात होगइ.. जबभी गीताका पती बहार जाता गीता मुनाको अपने घर बुला लेती..

ओरो दोनो प्यारका खेल खेलते सेक्स कर लेते.. अबतक मुना गीताको चारसे पांच बार चोद चुका था.. ओर इस खेलमे गीताको भी मजा आने लगा था.. अ‍ेक दीन गीताने मुनाको बता दीयाकी उनका पती तीन दीनके लीये बोम्बे कीसी जमीनके सोदेके लीये जा रहा हे..

मुनाने गीतासे सब जान लीया की वो कोनसी तारीखपे जा रहा हे.. तो गीताने उसे रेल्वेकी टीकीटका फोटो सेन्ड कर दीया.. बस.. मुनाने अ‍ेक योजना बनाइ.. अ‍ैसी योजना.. जीसमे गीताका पती खुद गीताको मुनाके साथ भेजदे.. उनके पतीके जानसे ठीक हेक दीन पहेले मुनाने उनके पतीको फोन कर दीया..

मुना : (फोनपे) हेलो.. वीनोद भाइ..?

वीनोद : (मुस्कुराते) हां बोलो मुना भाइ.. मे वीनोद बोल रहा हु.. कुछ काम था क्या..?

मुना : (जुठ बोलते) हां भाइ.. वो स्कुलमे हमने भाभीके लीये अ‍ेप्लीकेशन दीथी.. तो कलकी तारीखमे उनके कुछ डोक्युमेन्ट सबमीट करवाने हे.. ओर वहा भाभीका इन्टरव्यु भी होगा.. बहुत सारी अ‍ेप्लीकेशन आइ हेतो बहुत सारे लोग होगे.. तो कल सुबह आपको भाभीको लेकर सहेर जाना होगा..

वीनोद : (मनमे खुस होते) वाह.. येतो बहुत अच्छी खबर दीहे आपने.. क्या कल ही..?

मुना : (मनमे मुस्कुराते) हां भाइ.. कलकी ही डेट हे.. बहुत सारे लोग इन्टरव्यु देने आये होगे.. हो सकता हे कल ना हो ओर परसो हो.. तो अ‍ेक दीन रुकना भी पड सकता हे.. आप दो दीनकी तैयारीया करके जाना..

वीनोद : (थोडा परेसान होते) ओह.. गोड.. भाइ क्या कल ही जान पडेगा..? क्युकी आपकी भाभी कभी अकेली सहेर नही गइ..

मुना : (मुस्कुराते) अरे तो इसीलीये तो आपको साथ जानेके लीये केह रहा हु.. क्युकी पेपर सबमीटके लीये अ‍ेक ओफीससे दुसरी ओफीसका चकर लगाना पडेगा.. तो वो अकेली कहा कहा जायेगी..? आप साथ होगेतो उनको आसानी होगी.. क्या आप नही जा रहे..? बहुत जरुरी हे भाइ..
 
वीनोद : (परेसान होते) आइ नो.. मुनाभाइ मुजे पता हे सब.. की सरकारी कामकाज कैसा होता हे.. लेकीन मे कल जमीनके अ‍ेक बडे सोदेके लीये तीन दीनके लीये बोम्बे जा रहा हु.. पार्टीकी बडी मुसकीलसे अ‍ेपोइटमेन्ट मीली हे.. मे नही टाल सकता.. जाना पडेगा..

मुना : (थोडा डराते) वीनोदभाइ.. तबतो गडबड हो जायेगी.. आपको पता हेनां लखन भैया ओर मेने कीतनी महेनत कीहे..? क्या आप जाना केन्शल नही कर सकते..?

वीनोद : (परेसान होते) मुजे पता हे सब.. आपने कीतनी महेनत कीहे.. क्या मुसीबत हे भाइ.. मे जाना केन्शल नही कर सकता.. क्या आप मेरी थोडी ओर मदद नही कर सकते..? इतनी महेनत कीहे तो थोडी ओर कर दीजीये..

मुना : (मनमे हसते) कौन मे..? लेकीन मे कैसे..? भाभीको इन्टरव्यु तो देना ही पडेगा.. ओर पेपर भी तो सबमीट करने हे.. इनमे मे क्या मदद कर सकता हु..?

वीनोद : (थोडा गीडगीडाते) मुनाभाइ समजो यार.. क्या आप अपनी भाभीके साथ नही जा सकते..? आने जानेका खाने पीनेका ओर वहा रुकना पडे तो दोनोके होटेलका खर्चा मे दे दुगा..

मुना : (मुस्कुराते) वीनोदभाइ.. बात खर्चेकी नही हे.. लेकीन मे..?

वीनोद : (गीडगीडाते) मुनाभाइ प्लीज.. मना मत करना.. मुजे आपपे पुरा भरोसा हे.. बहुत बडा सौदा हे.. मे नही गया तो मेरे लाखोका नुकसान हो जायेगा.. बहुत तगडा कमीशन मीलने वाला हे.. प्लीज.. रीक्वेस्ट हे.. आप अपनी भाभीके साथ चले जाओ.. मे उनको खर्चेका पैसा देकर जाउगा.. मे सुबह पांच बजे ही सहरे नीकल जाउगा.. वहीसे मेरी ट्रेन हे..

मुना : (मुस्कुराते) ठीक हे वीनोदभैया.. मे भाभीके साथ जाउगा.. ओर आपका काम कर दुगा.. आप पैसोकी चीन्ता मत करना..

वीनोद : (खुस होते) थेन्क्यु.. थेन्क्यु मुनाभाइ.. मे आपकी भाभीसे बात करलेता हु.. वो आपके साथ आजायेगी.. आप इनको यहासे लेजाना.. थेन्क्यु वेरी मच..

कहेते मुनाने कुटील मुस्कान करते फोन काट दीया.. ओर गीताको मेसेज टाइप करने लगा.. ( बेबी.. सहेरमे दो दीन घुमने ओर मजे करनेके लीये तैयार होजाओ.. तुम्हारा पती तुम्हे मेरे साथ हम दोनोका छोटासा हनीमुन मनानेके लीये भेज रहा हे.. अगर वो कुछ पैसे दे तो मना मत करना) टाइप करके मुनाने सेन्ड करदीया.. तो कुछ ही देरमे गीताने कोल ही कर दीया..

गीता : (मुस्कुराते फोनपे) जानु.. ये क्या मजाक हे..?

मुना : (फोनपे मुस्कुराते) डार्लींग.. ये कोइ मजाक नही.. मेने उसे कहा हे.. की आपके कुछ पेपर सबमीट करवाने हे.. ओर तुम्हारा इन्टरव्यु हे.. तो आप उस हीसाबसे अपने पतीसे बात कर लेना.. समजो आपको इस बारेमे अभी कुछ पता ही नही हे.. वो आकर आपसे बात करेगा.. दोनो खुब मजे करेगे..

गीता : (सरमाकर मुस्कुराते) वेरी स्मार्ट.. मुजे पता हे आपके मजेके बारेमे.. मतलब मेरी हालत खराब होने वाली हे.. आपने कब उनसे बातकी..?

मुना : (मुस्कुराते) अभी कुछ देर पहेले.. कल तैयार रहेना.. मे आपको लेने आउगा..

गीता : (बहारकी ओर देखते) आप..ना बहुत कमीने हो.. अ‍ेक दीन मरवाओगे मुजे.. ठीक हे जानु.. फोन रखती हु.. लगाहे वो आगये हे.. मे बादमे बात करुगी.. बाय.. लव यु.. बु..च..

मुना : (फोन चुमते) लव यु टु मेरी जान.. बाय..

मुनाके लीये ये सीर्फ अ‍ेक बदलेकी भावनासे खेल मात्र था.. लेकीन उसे ये भी पता थाकी गीता उसे सच्चे दीलसे प्यार करने लगी हे.. तब मुनाको उनकी भावनाओसे खेलते दुख भी होता था.. लेकीन दुसरे ही पल उसे सब याद आजाता की उनके मामा मामी यानीकी वीनोद ओर गीताने मीलकर उनकी मा बसंतीको कीतना दुख दीया था..

दोनोने मीलकर उनकी मां बसंतीको खुनके आंसुसे रुलाया था.. ओर वीनोदने तो उनका सारीरीक सोसण भी कीया था.. ये सब सोचकर मुनाका खुन फीरसे खोलने लगता.. ओर वो गीताकी दो गुना जोससे चुदाइ करने लगता.. पहेली बारमे ही गीताकी चुतसे खुन नीकाल दीया था..

दुसरे दीन सुबह वीनोद चला गया.. ओर गीताके हाथमे दस हजार रुपये थमा गया.. उसने गीताको अपने सब पेपर ध्यानसे लेजानेकी ओर सबमीट करवानेकी हीदायद दी.. फीर अपने पार्टनरकी कारमे चला गया.. गीता बहुत खुस हो गइ.. ओर नहाके अपने आपको सजने सवारने लगी..

गीताने अपनी चुतकी सफाइ भी करली.. जैसे सचमे मुनाके साथ अपना हनीमुन मनाने जा रही हो.. सुबह मुना घरसे कामका बहाना बनाकर दो दीनके लीये नीकल गया.. ओर सीधा गीताके घर चला गया.. गीता उनको देखते ही सरमाके हसने लगी.. ओर मुनाकी बाहोमे समा गइ.. फीर दोनो पेपर ओर दो दीनके कपडे लेके घरको ताला लगाकर वहासे सीधे ही सहेरकी ओर चले गये....

कन्टीन्यु
 
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रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - २८५

गीताने अपनी चुतकी सफाइ भी करली.. जैसे सचमे मुनाके साथ अपना हनीमुन मनाने जा रही हो.. सुबह मुना घरसे कामका बहाना बनाकर दो दीनके लीये नीकल गया.. ओर सीधा गीताके घर चला गया.. गीता उनको देखते ही सरमाके हसने लगी.. ओर मुनाकी बाहोमे समा गइ.. फीर दोनो पेपर ओर दो दीनके कपडे लेके घरको ताला लगाकर वहासे सीधे ही सहेरकी ओर चले गये.... अब आगे

वहा मुनाने बडीया होटेलका अ‍ेक कमरा दो दीन ओर दो रातके लीये बुक करलीया.. गीताको पता नही थाकी मुना वायग्रा लेकर आया हे.. अंदर जाते ही दोनो सुरु होगये.. मुनाने दीन भर बीना वायग्रा खाये गीताको खुब चोदा.. फीर सामको दोनो सहेरमे घुमने चले गये..





अ‍ेक मोलमे मुनाने गीताको कपडे दीलवाये.. तो गीताने भी मुनाके लीये जीन्स ओर टीसर्ट खरीद लीये.. फीर साम होते ही दोनो अ‍ेक बडीयासी होटेलमे खाना खाने चले गये.. फीर वापस आते ही मुनाने गीतासे छुपकर वायग्रा खाली.. ओर फीर सुरु हुआ चुदाइका खेल..

उस रात होटेलके कमरेमे चुदाइका तुफान भवंडरमे तबदील होते गीताकी चुतमे तांडव मचाता रहा.. गीता चीखती चीलाती रेह गइ.. मुनाने उनका अ‍ेक अ‍ेक अंग तोडके रख दीया.. सुबह चार बजे तब गीताकी चुतका मुनाने भुरता बना दीया.. गीताके तनका अ‍ेक अ‍ेक अंग दर्द कर रहाथा..





फीर दोनो नंगेही अ‍ेक दुसरेकी आगोसमे सो गये.. दुसरे दीन दोनो देरसे जागे.. गीताकी हालत अब भी पतली थी.. वो ठीकसे चल नही पा रही थी.. मुनाने उनकी चुतकी गरम पानीसे सीकाय करदी तब जाके वो ठीक हुइ.. फीर दोनो कंपलीट होते चाइ नास्ता करने चले गये..

सहेरमे घुमकर खाना खाकर वापस होटेलमे जा रहे थे.. उसी समय लखन ओर श्रीधरने उसे देख लीया था.. उस दीन ओर रातमे भी चुदाइका दौर चला.. गीताकी अबतक की सारी कशर मुनाने पुरी करदी थी.. इन दो दीन ओर दो रातमे अन गीनत गीताकी चुदाइ हो चुकी थी..

फीर तीसरे दीन दो पहोर दोनोने होटेलसे चेक आउट करलीया.. ओर मुना गीताको घरपे छोडकर उनके पेपर लेकर वापस गांव आगया.. गीता पुरा दीन ओर रात सोती रही.. ओर अपने पतीके वापस आने तक ठीक होचुकी थी.. वीनोदने आते ही गीताको उनके इन्टरव्युके बारेमे पुछा..

तो गीताने खुस होते जुठ बोल दीया की इन्रव्यु दुसरे दीन हुआ.. ओर अच्छा रहा.. कहा तो वीनोद भी खुस हो गया.. इस दो दीन ओर दो रात मुना उनकी चुतको अनगीनत बार भर चुका था.. तो गीताको पेटमे अब भी कुछ गरमाहट जैसा.. ओर कुछ अजीब महेसुस हो रहा था..

गीताको अंदेसा होने लगाकी इस बार कुछ गरबड होजायेगी.. लेकीन इतने समयसे उनको भी बच्चे नही हो रहे थे.. तो गीताने मन ही मन अगर बच्चा ठहेर गया हे तो उसे खुसी खुसी स्वीकार करनेका फैसला करलीया.. ओर गीताने उस रात वीनोदको अपने उपर चडा लीया.. फीर उनसे जमकर चुदवा लीया..

ताकी अगर बच्चा ठहेर जाये तो वो उनका हे केह सके.. गीता लगातार तीन रात तक वीनोदसे चुदवाती रही.. ओर उसने वीनोदको जुठमुठ केह भी दीयाकी वो सहेरसे बच्चेके लीये अ‍ेक आयुर्वेदीक जडीबुटी लाइ हे.. ओर वो उनका सेवन कर रही हे..

मुना : (मुस्कुराते) भाइ.. तो ये थी हम दोनोकी कहानी.. कमीनीको जबतक प्रेगनेन्ट नही कर दुगा तबतक उनको छोडुगा नही.. साली क्या तगडा माल हे.. बहुत मजे देती हे..

लखन : (हसते) तो फीर उस डोक्युमेन्टका क्या..?

मुना : (जोरोसे हसते) भाइ.. सब पेपर घरपे पडे हे.. अब आपको ही सब करना हे.. हें..हें..हें..

लखन : (जुटा गुस्सा करते) साले.. सब पेपर तेरी गांडमे घुसा.. साला मजा तु करेगा.. ओर मजदुरी मुजसे करवा रहा हे..

मुना : (हसते) अरे.. नाराज कयु होता हे..? कहोतो उनको तुमसे भी चुदवादु..

लखन : (हसते) नही यार.. मेतो मजाक कर रहा हु.. तुही मजे कर.. कल पेपर लेकर आना.. मे रश्मी भाभी या फीर वंदना भाभीको देदुगा.. वो कुछ करेगी.. मे उसनसे बात कर लुगा..

मुना : (मुस्कुराते) ठीक हे भाइ.. कल तो आप हो तो मे पेपर कल ही आपको दे दुगा..

लखन : (मुस्कुराते) साले सबके सब कमीने हो गये हे.. मुना.. तुमने सबको क्या कमालकी जडी बुटी पीलाइ हे.. ओर उपरसे पुनोने भी मुजे बाबाकी जडी बुटी पीलाइ.. मेरा तो बीना चोदे ही फटने लगता हे.. तो मेरा क्या हाल होता होगा..?

मुना : (धीरेसे हसते) भाइ.. रोज कीतनी बीवीयोकी लेते हो..?

लखन : (मुस्कुराते धीरेसे) कमीने.. सबकी लेता हु.. वो भी दो दो बार.. तब जाके ये महाराज सांत होता हे.. इसीलीये तो इतनी बीवीया हे मेरी.. लेकीन अब बहुत सारी प्रेगनेन्ट हे.. तो ध्यान रखना पडता हे.. ओर ये महाराज हेकी मानता ही नही..

मुना : (मुस्कुराते) भाइ.. बुरा ना मानो तो अ‍ेक बात कहु..?

लखन : (मुस्कुराते) साले कमीने.. क्या तेरी बातका बुरा मानुगा..? बोल..

मुना : (सरमाते धीरेसे) भाइ.. वो हमारी नइ मेडम.. डो. जसुधा.. क्या माल हे.. अकेली हे.. ओर कुआरी भी.. आपके बारेमे मुजे दो तीन बार पुछ चुकी हे.. की आप यहा कब आते हो.. तो आप वहा ट्राइ क्यु नही करते..? आपकी तो इतनी सारी बीवीया हे.. अ‍ेक ओर सही..

लखन : (मुस्कुराते) क्या सचमे..? रामु चाचा गुजर गये तब घरपे आइ थी.. मेने देखा उनको बहुत खुबसुरत हे.. तुजे मीलने क्लीनीकपे आया था.. तब भी उनसे बात हुइ थी.. (मनमे) कमीने.. तुजे क्या पता वो तेरा ही माल हे.. जीनका तु पीछवाडा लाल करता था वो डो. वुसाधा नही तेरा सुधीर हे.. लेकीन अब उनका आगेका उध्घाटन तो मेही करुगा.. कमीनी क्या कमालकी लग रही हे.. मुजे पता हे वो मुजमे काफी इन्ट्रेस ले रही हे.. बस.. अ‍ेक बार बात होजाने दे..

साहील : (हसते) भाइ.. बात करते करते कहा खो गये.. वो डोक्टरके बारेमे सोच रहे थे क्या..? हें..हें..हें..

लखन : (मुस्कुराते) हां साले.. लगता हे मुजे कलही उनसे मुलाकात करनी पडेगी.. ओर वो रशमी भाभी ओर वंदना भाभीको मीलना भीतो हे..

बडे दीनोके बाद सभी दोस्त ठीकसे मील रहे थे.. देर साम तक चारो दोस्त बाते करते रहे.. फीर खानेके बाद फीरसे मीलनेका तैय करके सब लोग अपने अपने घर चले गये.. तबतक श्रीधर भी घरपे आचुका था.. तो ब्रीन्दा लंगडाते धीरे धीरे चलते खाना बना रही थी.. ओर श्रीधरने आते ही उसे पीछेसे अपनी बाहोमे भीच लीया..
 
श्रीधर : (मुस्कुराते) डार्लींग मोम.. अभी तक ठीक नही हुइ क्या..?

ब्रीन्दा : (मनमे) कैसे ठीक हुगी..? अ‍ेक तो पुरी रात तुमने मुजे सोने नही दीया.. ओर सुबह आपका दोस्त आगया.. मेरे सपनोका राजकुमार.. तो मेने आराम करना केन्शल करदीया.. कीतने दीनोके बाद हमे अकेले मीलनेका मौका मीला था.. जो सुख तुमने पहेली बारमे नही दीया था वो सुख उसने तीन घंटोमे दे दीया.. मुजे पुरी तराह नीचोडली.. अभी भी अंदर गर्म महेसुस हो रहा हे.. कही कुछ गडबड ना होजाये..

श्रीधर : (गलेको चुमते) मोम.. क्या सोच रही हे..? आप कुछ बोलती क्यु नही..?

ब्रीन्दा : (हडबडाते मुस्कुराते पीछेसे सर कंधेपे रखते) क्या केह रहे थे..? खाना बना रही थी..

श्रीधर : (गाल चुमते) मोम.. क्या हो गया हे आपको..? मैने पुछा आप अभी तक ठीक नही हुइ..?

ब्रीन्दा : (मुस्कुराते) कैसे ठीक हुगी..? कल पुरी रात आप मुजे ठोकते रहे.. जैसे हमारी सुहागरात हो.. पुरी रात मुजसे प्यार करते रहे.. जैसे हमारी नइ नइ सादी हुइ हो.. मुजसे बोर नही हुअ‍े..?

श्रीधर : (बाहोमे भरते बुब्स दबाते) मोम.. मे जयश्रीसे बोर हो सकता हु.. लेकीन आपसे कभी नही.. आप मेरा पहेला प्यार हो.. ओर मेरी पहेली बीवी भी.. आप बुढी होजाओगी तब भी मे आपको अ‍ैसे ही प्यार करता रहुगा..

ब्रीन्दा : (मुस्कुराते पलटके बाहोमे समा गइ) जानु.. आइ लव यु.. आइ लव यु सो मच.. पता हे आप मुजसे बहुत प्यार करते हो.. क्या होगा अगर हमारा भी अ‍ेक बच्चा हो..?

श्रीधर : (मुस्कुराते) तो क्या हुआ.. हम इसे इस दुनीयामे लायेगे..

ब्रीन्दा : (मनमे) जबसे लखन मुजे चोदके गया हे तबसे मेने आइपील भी नहीली.. ओर तबसे पेटके अंदर भी कुछ अजीब फील हो रहा हे.. श्रीधर अगर हमारा बच्चा चाहता हे.. ओर मे प्रेगनेन्ट होगइ तो ये कीसका बच्चा होगा..? जो भी हो आगे देखा जायेगा.. पहेले इस बार पीरीयडका तो देखने दो.. श्रीधरको तो मे समजा सकती हु.. की ये बच्चा हमारा हे..

श्रीधर : (होंठ चुमते) डार्लींग.. तबीयत ठीक नही हे क्या..? कुछ बोलती नही..

ब्रीन्दा : (सामने देखकर मुस्कुराते) हंम.. थोडी बैचैनी ओर बुखार जैसा लग रहा हे.. जानु.. प्लीज.. आज रात कुछ नही.. कलतक मे ठीक होजाउ..

श्रीधर : (मुस्कुराते गाल चुमते) ओके मोम.. आज आप आराम करलो.. वैसे भी आज लखन आया हे.. सब दोस्त देर रात तक पार्टी करेगे.. तो आप सोजाना..

ब्रीन्दा : (मुस्कुराते) ओके बेबी.. चलो खाना रेडी हे आप फ्रेस होजाओ.. मे हम दोनोका खाना नीकालती हु.. फीर आप चले जाना..

श्रीधरके जाते ही ब्रीन्दा फटाफट रोटीया बेलने लगी.. जबतक खाना कंपलीट करके सब खाना बहार लाइ तो श्रीधर पहेलेसे ही फ्रेस होते डाइनींगपे बैठा अपना मोबाइल स्क्रोल कर रहा था.. र्ब्रीन्ंदा दोनोका खाना नीकालकर श्रीधरके पास ही बैठ गइ.. ओर दोनो खाने लगे.. दोनो ही खाते खाते अपनी सोचमे डुब गये..

श्रीधर : (मनमे) सोरी मोम.. मे आपको धोखा दे रहा हु.. मे जयश्रीको मीलने नही मेरी सासको मीलने जा रहा हु.. वो आपसे भी ज्यादा कामुक हे.. ओर मुजे खुब मजे देती हे.. आज भी आपकी तराह उनकी हालत खराब करके आया हु.. आज तो मे भी उनको चोदते चोदते थक गया हु.. कमीनी मुजे छोडती ही नही थी..

ब्रीन्दा : (मनमे) सोरी श्रीधर.. आज मेने आपको धोखा दीया हे.. वो भी आपके ही खास दोस्तके साथ.. मे क्या करती..? जबसे उनको सादीमे देखा तबसे मुजे कही चेइन नही मीलता था.. आज मुजे अ‍ैसा अहेसास करवाया जैसे मे छोटी कुआरी लडकी हु.. कीतना दर्द दीया हे जालीमने..

लगातार चार चार बार लोटा भर भरके मेरी मुनायाको भरते रहे.. तबसे पेटमे कुछ अजीब हो रहा हे.. लगता हे.. कुछ तो हुआ हे.. कास मे प्रेगनेन्ट होजाउ.. तो मेरा सपना पुरा होजायेगा.. अ‍ेक ठाकुरका अंस.. जो मेरा कइ दीनोसे सपना था.. अगर इस बार बात नही बनी तो मे उनसे दुबारा चुदवाउगी.. ओर अ‍ेक ठाकुरके अंसको जन्म दुगी..

दोनो मा बेटे जोकी अब पती पत्नी थे.. दोनो ही अपने खयालोमे डुबे खाना खाना रहे थे.. लेकीन अब अ‍ैसी बातोसे गांवमे कीसीको भी गील्टी फील नही होती थी.. सब अपने अपने तरीकेसे अ‍ेक दुसरेसे छुपकर मजे ले रहे थे.. जैसे ये भारातका हीस्सा नही.. कीसी वीदेसी धरतीका हीस्सा हो..

पता चला अब बनवारी लालने भी अपनी बहु बींदीयाको भी अब पेटसे कर दीया था.. उन्होने सीलाजीत ओर वायग्रा खा खाकर बींदीयापे बहुत महेनत कीथी.. तो आज साहीलके घरपे भी बहुत ही खुसनुमा माहोल था.. फीरोज आज घरपे ही था.. ओर सलमासे बात करनेकी कोसीस कर रहा था..

तो सलमा बहुत ही सरमाकर मुस्कुराते धीरेसे उनको जवाब देती थी.. उनकी सुहागरातके लीये बेड सजानेकी जीम्वेवारी जरीनापे थी.. तो वोभी बेमन अपने पती ओर सौतनका बेड सजा रही थी.. तो दुसरी ओर आज साहीलको मीलनेका मन भी बना चुकी थी..

ओर इसके लीये थोडी उत्साहीत ओर अपने आपको थोडा रोमांचींत भी फील कर रही थी.. सबलोग खाना खाने बैठ गये.. तो साहील बार बार सलमाकी ओर देखते मायुस हो जाता था.. जीसे देखकर अ‍ेक बार सलमाकी आंख थी गीली होगइ.. ओर जरीना दोनोके उपर नजर गडाये बैठी थी..

खानेके बाद फीरोज सलमाकी ओर कातीलाना हसते बहार चला गया.. जीसे देखकर जरीना ओर साहील दोनोको गुस्सा आगया.. साहील खाना खाते पानी पीकर खडा होगया.. ओर दोस्तोको मीलने जारहा हु देरसे आउगा.. कहेते बहार चला गया तो सलमा ओर जरीना उसे देखती ही रेह गइ.. उनके जाते ही..
 
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