Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती - Page 50 - SexBaba
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Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती

रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १९२

भुमीका नीचेसे ही जोरोसे आवाज लगाकर चंदाको कहेती हेकी हम अभी पडोसमे मीलकर आते हे.. ओर दोनो बहार नीकलकर फटाफट ओटो रीक्षा पकडकर दुर अ‍ेक लेडी डोक्टरके पास चली गइ.. तब उनको नही पता थाकी यही लेडी डोक्टर उनकी जींदगीमे भुचाल लायेगी.. क्युकी सृती जब मेडीकल कोलजमे थी तब इसी डोक्टरके पास वाले रुममे रहेती थी.. ओर तब भुमीका अक्सर सृतीको मीलने जाया करती थी....अब आगे

भुमीकाको ये नही पता था की वही डोक्टर उनकी बेटीके साथ पढाइ करती थी.. ओर सृतीकी दोस्त भी थी.. दोनो ही क्लीनीकपे चली गइ.. ओर अंदर जाकर बैठ गइ.. जब वहा उनकी बारी आइ तो दोनो ही अंदर चली गइ.. ओर भुमीकाने खुदको प्रेगनेन्ट होने की बात करी.. तब डोक्टरको थोडा आस्चर्य हुआ.. ओर उसने भुमीको सोनोग्राफी करके चेक करलीया.. तो भुमीकी प्रेगनन्सीके बारेमे जानकर थोडी हेरान रेह गइ.. ओर बहार आकर उसने भुमीको इस उमरमे बच्चा ना करनेकी सलाह दी..

डोक्टर : देखीये मेडम.. अभी तो कोइ दिकत नही हे.. सब नोर्मल हे.. लेकीन आपको इस उमरमे बच्चा नही करना चाहीये.. आगे जाकर आपको कोइ प्रोबलेम आ सकती हे.. आपके लीये ओर बच्चेके लीये बहुत ही जोखीम भरा हे.. फीर आपकी मरजी..

भुमीका : (थोडी परेसान होते) अरे नही नही.. मुजे बच्चा पैदा करनेमे कोइ अ‍ेतराज नही.. आप दवाइ दे दीजीये.. मुजे ये बच्चा चाहीये.. कीसी भी हालमे..

डोक्टर : (मुस्कुराते) अच्छा.. क्या आपको दुसरा कोइ बच्चा नही हे.. मतलब आप पहेली बार प्रेगनेन्ट हुइ हे..?

भुमीका : (जटसे) अरे हे.. लडकी.. नही.. नही.. मे पहेली बार प्रेगनेन्ट हुइ हु.. पचीस साल बाद..

डोक्टर : (जब भुमीका थोडी हकलाने लगी.. तो थोडी संकासे देखते) ठीक हे मेडम.. मुजे क्या अ‍ेतराज हे.. लीजीये मे दवाइ लीख देती हु.. आप टाइमपे खाइअ‍ेगा.. ओर कुछ उल्टीया जैसा लगे तो ये भी लीख देती हु.. बाकी सब ठीक हे..

कहेते दवाइ लीखने लगी.. फीर लीखकर भुमीकाको देते वो गौरसे उनकी ओर देखती रही.. तब उसे भुमीकाका चहेरा थोडा जाना पहेचाना लगा.. तभी उसे अचानक सृती याद आगइ.. जो उनकी मम्मी उनको अक्सर होस्टेलमे मीलनेके लीये आती थी.. ओर जीस तराह जवाब देते भुमीका गभरा रही थी.. तब डोक्टरको भुमीपे सक होने लगा.. ओर उसने फोन नंबर देखते भुमी ओर नीर्मलाकी छुपकेसे तसवीर लेली.. तभी..

नीर्मला : (खडी होते) डोक्टर मेडम.. आपकी फीस..

डोक्टर : (मुस्कुराते भुमीकी ओर गौरसे देखते) जी.. बहार काउन्टरपे दे दीजीयेगा..

भुमीका : (खडी होकर मुस्कुराते) थेन्कयु.. मेडम..

डोक्टर : (अचानक) अ‍ेक मीनीट.. सायद मेने आपको कही देखा हे.. क्या आप इसी सहेरमे ही रहेती हे..?

नीर्मला : (जटसे) अरे नही नही.. हम दोनो तो पासके ---गांवसे आइ हे.. सायद आपको कोइ गलत फेहमी हुइ हे..

डोक्टर : (मुस्कुराते) ओह.. सोरी सोरी.. सायद मुजे गलत फेहमी हुइ हे.. क्या हेना कोलेजमे मेरी अ‍ेक फ्रेन्ड थी.. सृती.. उनका रुम हमारे रुमके पास ही था.. तो उनकी मम्मी उनको मीलने आती थी.. जो हुबहु उनकी सकल आपसे मीलती हे.. लेकीन वोतो इसी सहेरमे रहेते थे.. ओर आप लोग तो गांवके हे.. हें..हें..हें..

नीर्मला : (मुस्कुराते) ठीक हे मेडम कभी गलत फहेमी होजाती हे.. चलो बाय..

कहेते नीर्मलाने बहार नीकलकर फटाफट फीस देदी.. ओर दोनो ओटो पकडकर धरपे आनेके लीये बैठ गइ.. तब भुमीका ओर नीर्मलाकी सकल देखने लायक थी.. आज दोनो ही बाल बाल बच गइ थी.. क्युकी ये डोक्टर भी सृतीकी जानी पहेचानी नीकली.. ओर सृती गलत केस.. यानी अवैध ओर नाजायज बच्चेका केस इनके पास ही भेज देती थी.. ओर ये मेडम इलीगल अबोर्सन करके तगडा माल कमाती थी.. आज भुमीकाको पता नही थाकी वो फस चुकी हे..

यहा आनेके लीये खुदको मन ही मन कोसने लगी.. ओर नीर्मला भुमीका घरपे आगइ.. दोनोही रुममे आकर लेट गइ.. ओर बाते करने लगी.. तब भी चंदा ओर देवायतकी चुदाइ जारी थी.. अब तक देवायत दो बार चंदाकी चुतको अपने पानीसे भर चुका था.. लेकीन आज चंदाने उसे अपने उपरसे उतरने नही दीया.. ओर देवायत चंदाकी तीसरी बार धमासान चुदाइ कर रहा था..





चंदा अभी हीलनेकी स्थीती मे भी नही थी.. वो मुह फाडकर बहुत ही कामुम नजरोसे देखते देवायतसे चुदवाती रही.. उसके सभी बाल बीखरके बैडपे फैल चुके थे.. जीनकी वजहसे चंदा बहुत ही सेक्सी ओर कामी ओरत लग रही थी.. तब चंदाको पता नही था की देवायतका बीज उनके गर्भमे स्थापीत हो चुका हे.. चंदाकी पुरी चुत देवायतके पानीसे लबालब भरी हुइ थी.. जीनकी वजहसे सोट लगतेही पानी बहार नीकल रहा था..





तीसरी बार चुदाइकी वजहसे चंदाकी हालत पतली होती जा रही थी.. लेकीन फीर भी वो देवायतका साथ दे रही थी.. ओर आखीर देवायतने तीसरी बार भी चंदाकी चुतको लबालब भर दीया.. तब चंदाकी चुतसे ढेर सारा काम रस बहार नीकलने लगा था.. तब चंदा लगभग बेहोस जैसी हो चुकी थी.. आज देवायतने चंदाको पुरी तराह संतुस्ट कर दीया था.. ओर आखीर चंदा भी देवायतसे प्रेगनेन्ट होगइ..





क्लीनीकपे भी आज पुनम ओर सृती लखनकी बातोसे उतेजीत होकर अ‍ेक दुसरेके साथ लेस्बीयन खेल खेलकर अ‍ेक दुसरेको संतुस्ट कर चुकी थी.. आज दोपहोरके बाद कोइ खास पेसन्ट नही थे.. तो सृती ओर पुनम दोनोही ओटो करके घरकी ओर नीकल गइ.. तबतक देवायत कंपलीट होकर नीचे आगया था.. तो चंदा थकानकी वजहसे अ‍ैसे ही नंगी नींदकी आगोसमे चली गइ..
 
जैसेही देवायत नीचे आया तब नीर्मला ओर भुमीका नीचे होलमे कंपलीट तैयार होकर बैठी थी.. तो देवायतको देखते ही दोनो उनपे भडक गइ.. ओर देवायतको मुके मारने लगी.. क्युकी आज उनके पास देवायतको मीलनेका बहुत अच्छा मौका था.. लेकीन चंदाकी वजहसे वो दोनोको नही मील सका.. क्युकी चंदाको अभी तक भुमीका ओर देवायतके रीलेशनके बारेमे नही पता था..

नीर्मला : (सरमाकर मुस्कुराते) देवु.. आपको जरासी भी सरम नही आती..? हम दोनोने आपको कीतना इसारा कीया.. आज हमे मीलनेका कीतना अच्छा मौका था..? इसीलीये तो हम आराम करनेके बहाने यहा रुके थे..

देवायत : (मुस्कुराते) यार तुम दोनो समजती ही नही.. अभी तक चंदाको हमारे रीस्तेके बारेमे नही पता.. ओर आज मंजुने भी उनका काम करनेको कहा था.. बेचारीकी आज हालत पतली होगइ हे.. हें..हें..हें..

भुमीका : (जोरोसे पीठमे मुका मारते सरमाते धीरेसे ) हां हम दोनो उपर देखने आइ थी.. आपतो बीना रहेम खाये बेचारीकी धमाकेदार चुदाइ कर रहे थे.. कोइ अपनी बीवीको इतनी बेहरहेमीसे चोदता हे क्या..?

देवायत : (हसते धीरेसे) तुम दोनोको पता नही.. वो खुद कीतनी चुदाइ करवाने की सौकीन हे.. हम दोनोने हमारी सादीसे पहेले पुरी पुरी रात प्यार कीया हे.. ओर आज तो उनका काम भी करना था..

नीर्मला : (हसते आस्चर्यसे देखते धीरेसे) देवु.. कौनसा काम..?

देवायत : (मुस्कुराते बाहोमे भरते) अरे मेरी भोली डार्लींग.. आज उनको प्रेगनेन्ट कर दीया हे.. हें..हें..हें..

नीर्मला : (खुसीसे हसते) क्या..? क्या सचमे चंदाको प्रेगनेन्ट कर दीया..? ओ..ह.. गो..ड..

भुमीका : (खुसीसे हसते धीरेसे) नीमु.. तुजेतो पता हे सब.. हमारी मंजुको सब पता चल जाता हे.. ओर ये सब हमारे पतीने उसीके कहेनेपे तो कीया हे.. हें..हें..हें.. (सरमाते हसते) नीमु.. मुजे भी इसी तराह प्रेगनेन्ट कीया हे..

नीर्मला : (सरमाते धीरेसे होंठ चुमते) देवु.. कास.. मे भी आपका बच्चा पैदा कर सकती.. सबकी बाते सुनकर बहुत इच्छा होती हे.. क्या मुजे प्रेगनेन्ट नही कर सकते..? जानु.. कोसीस करोनां..

देवायत : (आंख गीली करते) नीमु.. सोरी यार.. लेकीन मंजुने जो भी मुजसे कहा हे.. आइ प्रोमीस.. अगले जन्ममे सबसे पहेले तुही मेरी बीवी होगी ओर सबसे पहेले तुही प्रेगनेन्ट होगी.. आइ लव यु..

भुमीका ओर नीर्मला : (दोनो बाहोमे समाते) जानु.. आइ लव यु टु..

नीर्मला : (मुस्कुराते होंठ चुमकर) जानु.. अब चंदाको हमारे रीस्तोके बारेमे बतादोनां.. हम उनकी हाजरी मे आपको मील भी नही सकती..

देवायत : (मुस्कुराते) नही नीमु.. अगर बताना होता तो अबतक उसे मंजुने बता दीया होता.. वो सब काम मेरा नही हे.. वो सीर्फ मंजु ही बता सकती हे..

तभी बहाकी ओर दरवाजा खुलनेकी आवाज आइ.. तो देवायत नीर्मला ओर भुमीकाको छोडकर उनसे थोडा दुर जाकर बैठ गया.. तभी पुनम ओर सृती घरपे आगइ.. तब नीर्मला भुमीका ओर देवायत बाते करने लगे.. तभी सृतीने चंदाके बारेमे पुछा तो नीर्मला ओर भुमीका दोनो ही सरमा गइ.. ओर उपरकी तरफ इसारा करते हसने लगी.. तो सृती ओर पुनम दोनो समज गइ की आज दो पहोरको चंदाकी कुटाइ होगइ हे.. ओर दोनो मुस्कुराते उपरकी मंजीलपे चली गइ.. तो वहा चंदा अभी भी नंगी लेटे नींदकी आगोसमे थी..

तभी सृतीने उसे जगाया.. तो चंदा दोनोको देखके हडबडा गइ.. अपने आपको पुरी तराह नंगी देखकर सरमके मारे जल्दीसे बेडपे बैठ गइ ओर मुस्कुराते अपने कपडे लेकर जल्दीसे बाथरुममे घुस गइ.. ओर नहाते अपने आपको सही करने लगी.. फीर कुछ देरके बाद कपडे पहेनकर बहार आइ.. तब सृती ओर पुनम उनकी ओर देखकर जोरोसे हसने लगी.. तब चंदा भी सरमाइ ओर मुस्कुराते सृतीको पीठमे मुका मारने लगी..

चंदा : (सर्मसार होते मुस्कुराते) कमीनी.. हस क्यु रही हे..? तु भी तो हमारे पतीको अ‍ैसे ही मीलती हे..

सृती : (हसते) हां दीदी.. लेकीन आपके तो मजे हे.. हें..हें..हें.. हो गइ कुटाइ..? दोनोने कीतनी बार कीया..?

चंदा : (सर्मसार होते हसते) तु बहुत कमीनी हे.. कैसी सौतन हे मेरी..? पुछकर मजे ले रही हे.. तुजे तो सब पता तो हे.. की हम अकेले उनसे मीलती हे तो क्या होता हे.. दो बारसे पहेले वो कहा हमे छोडते हे.. हें..हें..हें.. सृती.. अभी पुनम इधर हेतो मे क्या कहु..? आज तो उसने मुजे लुट ही लीया.. लगातार तीन बार मेरी कुटाइ हो गइ.. हें..हें..हें..

पुनम : (हसते) भाभी.. आज आपका काम हो गया हे.. देखना कुछ महीनोके बाद आप भी मुजे अ‍ेक प्यारीसी भतीजी देगी.. आज मे बहुत खुस हु..

चंदा : (बहुत ही सर्मसार होते मुस्कुराते) पुनो दीदी.. क्या आपको भी तो सब पता चल जाता हे.. तो क्या सचमे देवुने मुजे प्रेगनेन्ट करदीया हे..? तब तो आपके मुहमे घी सकर.. क्युकी मेरी तो कबकी तमना थी.. की मे आपके भाइके बच्चेकी मां बनु..

पुनम : (मुस्कुराते) हां भाभी.. ये सच हे.. ओर हमसे सरमाइअ‍े मत.. मुजे भी सब पता हे.. की भाइ खाना खाते ही आपको लेकर उरप आगये थे.. बस.. हमे आनेमे थोडी देर होगइ.. वरना हम दोनो भी आपका लाइव सो देखती.. हें..हें..हें..

चंदा : (हसते पुनमको मुका मारते) देखा सृती.. हमे कैसी ननंद मीली हे..? मस्ती करनेका अ‍ेक भी मौका नही छोडती.. अब चलो.. चलना नही हे क्या..? दीदीके सामने बहुत सरम आयेगी..

पुनम : (हसते) भाभी.. इसीलीये तो हम आपको जगाने आये हे.. चलीये नीचे सब हमारा इन्तजार कर रहे हे.. अभी चाइ नास्ता भी बनाना हे.. फीर आरामसे घर चलते हे.. वहा जाकर सादीमे भी जाना होगा..

नीचे आकर सृती ओर पुनमने चाइ नास्ता बना लीया.. ओर सबने साथमे बैठकर चाइ नास्ता करलीया.. फीर सृतीने अच्छेसे घरको ताला लगा दीया ओर सब लोग वहासे नीकल गये.. तो इसी बीच दोपहोरको सामत भाइके घरपे सबका भोजन होगया था.. तब श्रीधर ब्रीन्दाको घरपे छोडनेका बहाना बनाकर ब्रीन्दाके साथ अपने घरपे चला गया.. तो घरपे वृन्दा अपने रुममे आराम कर रही थी..
 
तो ब्रीन्दा चुपकेसे श्रीधरको अपने रुममे लेकर चली गइ.. अंदर जाते ही दरवाजा लोक करलीया.. फीर पलटकर श्रीधरकी बाहोमे समा गइ.. ओर श्रीधरके चहेरेको पागलोकी तराह चुमने लगी.. तब श्रीधर भी उतेजीक होकर ब्रीन्दाके होठोका रसपान करने लगा ओर उनके उरोजोको मसलने लगा.. तो ब्रीन्दा पागल जैसे होने लगी.. ओर आधी आंख चडाते मदहोस होने लगी.. तब उनकी चुत फडफडाने लगी.. तभी श्रीधर ब्रीन्दाको अपनी गोदमे उठाकर बेडकी ओर चल पडा..

ब्रीन्दा : (सरमाते मुस्कुराते) जानु.. आपसे मीलन करनेका बहुत मन करता हे.. जयश्री मीली हे.. तो कभी मुजे भुलतो नही जाओगेनां..?

श्रीधर : (बेडपे सुलाते) मोम.. आप कैसी बाते कर रही हे..? आप मेरा पहेला प्यार हे.. ओर मेरी पहेली बीवी हे.. तो मे आपको कैसे भुल सकता हु.. मे जयश्री दीदीको छोड सकता हु.. लेकीन आपको नही.. आप बहुत ही खुबसुरत हे.. भले ही दीदी मेरी बीवी हे.. लेकीन मेरा पहेला प्यार ओर पहेली बीवी आपही रहोगी.. मे आज भी आपके पीछे पागल हु..

ब्रीन्दा : (अपने उरप खीचते) अरे मेरा पती मुजे इतना प्यार करता हे..? चल आजाओ आज इस बीवीको छोडना नही.. खुस करदो मुजे.. जानु.. अब मे आपकी पत्नी हु.. अब तो मुजे मोम कहेना छोडदो..

श्रीधर : (होठोको चुमते) नही मोम.. मुजे मेरी मोमको.. ओर अपनी बहेनको चोदनेका बहुत सौक हे.. तो मे आपको मोम ही कहुगा.. जब जयश्री दीदीको चोदता हु.. तब उनको भी दीदी दीदी कहेते चोदता हु..

ब्रीन्दा : (सर्टके बटन खोलते मुस्कुराते) जानु आप बहुत कमीने हो.. वो मुना भाइ भी आपही की तराह हे.. वो भी अ‍ैसे करते हे.. ठीक हे.. लेकीन जब हम प्यार नही करते तब तो नाम लेकर बुलाइअ‍े.. हमने बाकायदा मंदीरमे जाकर सादी कीहे..

श्रीधर : (पेटीकोटके बटन खोलते) मोम.. जब हम तीनो इस घरमे अकेले रहेगे.. ओर दीदीको हमारे रीस्तेके बारेमे पता चल जायेगा तब मे आपको नाम लेकर बुलाउगा.. बस अ‍ेक बार आपका डीवोर्स होजाने दीजीये.. ओर आपको मुनाके बारेमे सब कैसे पता चला..? क्या बसंती आंटीने बताया..?

ब्रीन्दा : (सरमाते धीरेसे) हां जानु.. वो.. वो बसंती बहेन अब मेरी पकी सहेली होगइ हे.. वो हमारे बारेमे भी सब कुछ जानती हे.. ओर उनके ओर मुना भाइके बारेमे भी मुजे सबकुछ बता दीया.. जीस तराह अभी हम मील रहे हे.. उसी तराह अभी मुना भाइ ओर बसंती दीदी भी मील गये होगे.. आज हम दोनो सहेलीने अपने बेटेसे मीलन करनेका मन बनालीया था.. बहुत जल्द वो भी दोनो सादी करलेगे.. ओर वो बसंती आंटीसे आपकी भाभी होजायेगी..

तब कुछ ही देरमे दोनो मां बेटेने अ‍ेक दुसरेके कपडे नीकाल दीये तब श्रीधर ब्रीन्दाके उरप चड गया.. तो ब्रीन्दाने श्रीधरका लंड पकडकर सीधा अपनी चुतपे सेट कर दीया.. ओर अ‍ेक ही जटकेमे श्रीधरने पुरा लंड ब्रीन्दाकी चुतमे उतार दीया.. तब ब्रीन्दा हल्कासा चीखते मदहोस होने लगी.. तब कुछ ही देरके बाद दोनोके बीच घमासान चुदाइ होने लगी.. ब्रीन्दा श्रीधरके नीचे आते ही अ‍ेक कुआरी लडकीकी तराह अपनी कमर उछालते चुदाइ करवाती थी..





तो इधर बसंती भी मुनाको इसारा करके घरपे चली गइ थी.. तब कुछ देरके बाद मुनाभी बहाना बनाकर घरपे चला गया.. ओर आंगनका दरवाजा बंध करके कुंडी लगादी.. ओर घरमे चला गया तो वहा मुनाको कोइ नजर नही आया.. वो अपने रुममे जाकर देखता हे तो बसंती वहा भी नही थी.. तब मुना धीरेसे बसंतीके रुमकी ओर बढ गया.. ओर दरवाजेको हल्कासा धका मारा.. तो दरवाजा खुल गया.. पुरे रुममे अंधेरा था.. तभी बसंती की आवाज आइ..

बसंती : (धीरेसे) मुनाजी.. आप दरवाजा बंध कर दीजीये.. ओर लोक करके इधर आजाइअ‍े.. आपकी बीवी आपका इन्तजार कर रही हे.. आज आप अपनी सारी कसर पुरी करलो.. अब मेने आपको पतीके रुपमे स्वीकार करलीया हे..

मुना : (धीरेसे दरवाजा बंध करते) मोम.. आपने अचानक फैसला क्यु बदल दीया..

बसंती : (मुस्कुराते धीरेसे) मुनाजी.. अब मोम नही.. सीर्फ आपकी बीवी बसंती हे.. तो नाम लेकर बुलाइअ‍े.. बाकी बाते बादमे करेगे.. अभी फटाफट आजाइअ‍े.. आज बहुत अच्छा मौका मीला हे.. आइअ‍े..

तो मुना मुस्कुराते दरवाजा बंध करके लोक कर देता हे.. ओर छोटासा बल्ब जलाकर रुममे हल्कीसी रोसनी करते धीरेसे बसंतीके बेडकी ओर चला गया.. तो वहा बसंती अपने उपर चदर डालकर लेटी हुइ थी.. ओर मुनाकी ओर नजरे चुराते सरमाके मुस्कुरा रही थी.. मुनाने जातेही बसंतीकी चदरको खीच लीया.. तब बसंती पुरी तराह नंगी होकर लेटी थी.. उनका गोरा बदन कीसी कांचकी पुतलीकी तराह चमक रहा था.. ओर उसने जटसे अपने दोनो हाथ अपनी चुतपे रख दीया..

ओर मुना बसंतीको देखकर पागल जैसा होने लगा.. वो अपने सभी कपडे फटाफट नीकालने लगा.. ओर कुछही देरमे वोभी पुरी तराह नंगा हो गया.. तब बसंती टेडी नजरोसे मुजाके लंडकी ओर देखने लगी.. तो मुनाका लंड तनके उपरकी तराह हवामे लहेरते जटके मार रहा था.. जैसे उनको नइ चुतमे जानेकी जल्दी हो.. ओर मुना धीरेसे आकर बसंतीकी बगलमे लेट गया.. तब बसंतीने मुनाको कमरमे हाथ डालते अपने उपर खीचकर चडा दीया..
 
बसंती : (धीरेसे कामुक आवाजमे) मुनाजी आपकी जगाह मेरे बगलमे नही मेरे उरप हे.. अब ये तन सीर्फ आपका हे.. इसे जैसे भीगना चाहो भोग लीजीये..

कहेते मुनाके चहेरेको पागलोकी तराह चुमने लगी.. मुनासे अब कंट्रोल करना मुस्कील होने लगा.. तभी बसंती की चुतपे मुनाका लंड ठोकर मारते गीला होने लगा.. तो बसंतीको अपनी चुतपे मुनाका लंड दबाव बनाते महेसुस होने लगा.. जैसे वो अंदर धुसनेकी कोसीस कर रहा हो.. लेकीन तब भी बसंती ओर मुना मदहोस होकर अ‍ेक दुसरेके मुहमे जीभ धुसानेकी कोसीस करते जीभसे पेच लडाते रहे..

दानोही अ‍ेक दुसरेके अंदर समाजानेके लीये पागल हो रहे थे.. तभी बसंती कुछ सोचे समजे इनसे पहेलेही मुनाके लंडने अपने बीलका रास्ता ढुंढ लीया था.. ओर बसंतीकी नाजुक चुतको चीरते मुनाका तगडा लंड अंदर पुरा घुस गया.. तब बसंतीकी जोरोसे चीख नीकल गइ.. उनको आंखोसे दो बुंद आंसु नीकल गये.. ओर उसने अपने दोनो पैर मुनाकी कमरमे आटी लगाकर मुनाको जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लीया..





तब मुना बसंतीके गलेके मुह डालकर उनके गलेको चुमने लगा.. तब बसंती पुरी तराह मदहोस होते कामातुर होगइ थी.. आज मुनाको बसंती अ‍ेक कुआरी लडकी की तराह लग रही थी.. वो सजधजके पुरी तराह अपने बेटेको रीजानेमे कामयाब हो गइ थी.. ओर आखीर मुना भी बसंतीको पानेके लीये पागल होने लगा था.. तो दुसरी ओर बसंतीने भी अब पुरी तराह मुनाको अपना लया था.. तभी..

बसंती : (मुह बीगाडते धीरेसे) मेरे सरताज.. आप कहेकर तो डालते.. अब ये बसंती आप ही की अमानत हे..

मुना : सोरी डार्लीग.. मे तुजे देखकर कंट्रोल नही करपाया.. क्या मस्त बदन हे तेरा.. जी तो चाहता हे तुजे सारी जींदगी चोदता ही रहु.. तु मेरी बरखा से भी बहुत सेक्सी दीखती हे.. तु मुजे बहोत मजे देती हे..

बसंती : (होंठ चुमते) हां मुनाजी.. बस.. अब आप मुजे अ‍ैसेही बुलाइअ‍ेगा.. मे पुरी तराह आपकी पत्नी बनकर रहेना चाहती हु.. अब ये बदन सीर्फ आपका ही हे.. आजसे मांग मे सीर्फ आपके नामका ही सींदुर लगेगा.. अपना लीजीये मुजे.. मे आपसे सादी करनेके लीये तैयार हु.. मुजे आपके बापुकी परवाह नही करनी.. मे नही रेह सकती आपके बीना.. मुजसे ओर इन्तजार नही होगा..

मुना : (बुब्स चुमते धीरेसे कमर हीलाते) मोम.. हम दोनो बहुत ही जल्द सादी करलेगे.. मोम.. अंदर बहुत गरम लग रहा हे.. बीलकुल भठीकी माफीक..

बसंती : (सर्मसार होते सर सहेलाते) मुनाजी.. अब मे आपकी मोम नही.. बीवी हु.. नाम लेकर बुलाइअ‍े.. मेरे अंदर बहुत ज्यादा आग हे.. जो सीर्फ आपही के लीये सम्हालके रखी हे.. अब ये आग सीर्फ आपही बुजा सकते हे.. मे भी बरखाकी तराह हमारे बच्चेको जन्म दुगी.. लेकीन इसके लीये आपको थोडासा इन्तजार करना पडेगा.. अब चोदीये मुजे.. बहुत मन कर रहा हे..

मुना : (थोडी जोरोसे कमर हीलाते) बसंती.. आइ लव यु.. आजसे मे तुजे अपनी पत्नी मानुगा.. ओर कभी कभी मुजे मेरी माको चोदनेकी इच्छा होगी तब मे तुजे मां भी कहुगा.. क्या मस्त चुदाइ करवाती हे तु..

बसंती : (कामुक होते कमर हीलाते) हां मुनाजी.. अब आपको जैसा भी मन करे मानके चोदते रहीये.. अब ये बसंती सीर्फ आपकी अमानत हे.. आजसे बरखा मेरी बेटी या बहु नही.. मेरी सौतन हे.. चोद लीजीये मुजे..





दोनोही कामुक बाते करते चुदाइमे मसगुल होगये.. बहुत दिनोके बाद आज मुना तीसरी बार बसंतीकी चुदाइ कर रहा था.. तो बसंती भी कइ दिनोसे बीना चुदाइ तडप रही थी.. इसीलीये बसंती आज अपनी सारी लाज सरम त्यागकर मुनासे चुदवाकर अपनी सारी कसर पुरी कर देना चाहती थी.. तो दुसरी ओर ब्रीन्दाभी अपनी कमर उछाल उछालके श्रीधरसे बहुत कामुक तरीकेसे चुदवाते साथ दे रही थी.. ओर श्रीधरकी पत्नी होनेका हक अदा कर रही थी..





मुना ओर श्रीधर दोनोने अपनी अपनी मांको दो दो बार चोद लीया ओर चोद चोदके दोनोने अपनी मांको संतुस्ट करदीया था.. आज मुनाने बसंतीके ओर श्रीधरने ब्रीन्दाके अ‍ेक अ‍ेक अंगको जंजोरके रख दीया था.. दोनोके पुरे बदनमे हल्कासा दर्द हो रहा था.. अभी दोनोही अपने अपने बेटेसे चुदवाकर बेडपे आराम कर रही थी.. तब मुना ओर श्रीधर दोनोही कंपलीट होकर वापस बंसीके घरपे आ चुके थे..

तो उधर हवेलीपे भी मंजु भावना रमा लता नीलम रश्मी ओर वंदना सब लोग सामत भाइके घरसे खाना खाकर हवेलीपे आराम करने आगइ थी.. तो सभी लेडीस होलमे बैठकर थोडी देर गप्पे लगाती रही.. तो कुछ देरके बाद लता रमा ओर नीलम उपर लताके रुममे आराम करने चली गइ.. तो बाकी की सभी लेडीस मंजुके कमरेमे घुस गइ.. ओर वही लेटकर बाते करने लगी.. फीर साम होते ही सभी तैयार होकर सामत भाइ के घरपे चली गइ..

तो वहा इस वक्त बंसी ओर सांतीकी हल्दीकी रशम हो रही थी.. गांवकी सभी लेडीस सांतीको ओर बंसीको हल्दी लगाकर अ‍ेक दुसरेको हल्दी लगाते मस्तीया करने लगी.. तब जागृती भी मस्तीया करते सांती ओर बंसीको हल्दी लगाती हे.. तभी बरखा जयश्री ओर सांतीने मीलकर जागृतीके पुरे चहेरे पे हल्दी लगादी.. तब जागृती बहुत ही सर्मसार होगइ.. ओर बंसीकी ओर कामुक नजरोसे देखते हसती रही..

कुछ देरके बाद ब्रीन्दा ओर बसंती थी तैयार होकर आगइ.. ओर सभी लेडीसके साथ सामील होगइ.. दोनो साथ साथ बैठकर अ‍ेक दुसरेसे सरमाते हस हसके आजके अपने अनुभवकी बाते करने लगी.. दोनो ही अ‍ेक दुसरेसे खुलकर सभी तराहकी बाते करने लगी थी.. तब बसंतीने ब्रीन्दाको बता दीया.. की अब उसने अपने बेटेको पतीके रुपमे स्वीकार करलीया हे.. ओर बहुत ही जल्द दोनो सादी करने वाले हे..

आज दोनो अ‍ेक दुसरेकी पुरी राजदार बन चुकी थी.. ओर दोनोने अ‍ेक दुसरेसे सभी बाते आपसमे सेर करनेका फैसला करलीया था.. तो इस वक्त भी दोनो मुना ओर श्रीधरकी ओर इसारा करते सरमाते हस हसके दो पहोरमे अपने अपने बेटेके साथ हुइ चुदाइके बारेमे बाते कर रही थी.. तब ब्रीन्दा बार बार श्रीधरकी ओर देखकर मुस्कुरा रही थी.. तो बसंती भी मुनाको देखकर सरमा जाती थी.. ओर मुस्कुराने लगती थी..
 
तब बसंतीको नही पता थाकी उनकी सभी हरकते उनकी बेटी बरखा देख रही हे.. तब बरखाको भी बसंती ओर मुनाको लेकर मनमे आसंकाये होने लगी.. ओर मन ही मन खुस होने लगी.. की चलो.. अगर दोनो मां बेटेका रीलेशन होजाये तो कीतना अच्छा हे.. तब दो आंखे बार बार मील रही थी.. ओर आंखो ही आंखोमे बहुत सारी बाते कर रही थी.. ओर वो कोइ ओर नही बंसी ओर उनकी बहेन जागृती की आंखे थी..

जो बंसी सबसे नजर बचाते जागृतीको बार बार आंखोके इसारोसे उपर अपने घरकी छतमे मीलनेका इसारा कर रहाथा.. तो जागृती बहुत ही सर्मसार होजाती ओर मुस्कुराते बंसीको ना मे गरदन हीलाकर हसने लगती.. ओर कभी कभी सबकी नजर बचाते बंसीको अपनी चुभ नीकालकर चीडाती ओर हसने लगती.. दोनो ही भाइ बहेन आंख मीचोली खेल रहे थे.. तब दोनोका इसारा जयश्री ओर बरखाकी नजरमे आगया..

जयश्री : (हसते जागृतीके कानमे) जागु.. क्यु बेचारेको तडपा रही हे.. उसे हां कहेदेनां.. उनकी सादी हे.. तो अबतो उनको देदे.. वो खुस होजायेगा.. हें..हें..हें..

जागृती : (बहुतही सर्मसार होकर हसते धीरेसे कानमे) कमीनी.. थोडा मजातो लेने दे.. देख अब वो पुरी तराह मेरे पीछे लटु हो गया हे.. मे उसे अ‍ैसेही नही दुगी.. बस.. थोडा तडपाउगी.. तभी तो वो मेरे प्यारकी अहेमीयतको समजेगा..

जयश्री : (हसते कानमे धीरेसे) कमीनी.. ज्यादा भाव मत खा.. कही अ‍ैसा ना होकी हाथसे ट्रेन छुट जाये.. अच्छा मौका हे.. मीलले उसे.. यही समजलेना तेरी तरफसे सादीकी गीफ्ट हे.. हां कहेदे उसे.. हें..हें..हें..

बरखा : (हसते धीरेसे) हां जागु.. जयश्री सही केह रही हे.. कमीनी हां कहेदे.. अब तो उसने तुजे महेंदी भी लगादी हे.. हें..हें..हें..

जागृती : (सरमाते हसते धीरेसे) कमीनीओ.. तुम दोनो तो मेरे पीछे ही पड गइ हो.. ठीक हे.. लेकीन हमे मीलनेका मौका भी तो मीलना चाहीये.. देखती नही अभी घरपे कीतने सारे महेमान आये हे.. मुजे भी भाभीके पास सोना पडता हे..

बरखा : (हसते धीरेसे) कमीनी तो क्या हुआ.. तुमतो केह रही थी.. तेरी भाभी भी खुद यही चाहती हे.. तो क्या प्रोबलेम हे..? (हसते) उनको कहेना थोडी देरके लीये दुसरी ओर मुह करके सो जाये.. तब दोनो मील लेनां.. हें..हें..हें.. (मुनाकी ओर इसारा करते) देख मेरे पतीको.. वो खुद उनकी मम्मीके पीछे पडा हे.. हें..हें..हें..

जागृती : (मुनाकी ओर देखते धीरेसे) कमीनी.. क्या बोल रही हे..? वो तेरी भी तो मम्मी हे.. हें..हें..हें.. तुजे तो तेरी मम्मीके बारेमे बात करते सरम भी नही आती.. हें..हें.. हें.. वैसे आज आंटी भी क्या मस्त लग रही हे.. बीलकुल सांती बुआकी तरह दुल्हन लग रही हे.. जैसे उनकी सादी हो.. हें..हें..हें..

बरखा : (सरमाते जोरोसे हसते धीरेसे) जागु.. वो अब मेरी मम्मी नही हे.. अब वो मेरी सास हे.. हें..हें..हें.. मेरा बस चले तो मे उनको अपनी सौतन बनानेके लीये भी तैयार हु.. हें..हें..हें..

जयश्री : (सरमाकर मुस्कुराते धीरेसे) कमीनी.. तु क्या बोल रही हे..? जागु.. बरखा.. देखलो.. सीर्फ बसंती आंटी नही.. मेरी सासुमा भी अ‍ैसे सजधजके आइ हे.. दोनो सुबहसे साथ साथ ही घुम रही हे.. ओर इस वक्त बार बार श्रीधरकी ओर देख रही हे.. कही उन दोनोके बीच भी तो कोइ चकर नही हे नां..? हें..हें..हें.. देखना बाबा.. कही तेरी सास मेरी सासको भी ना बीगाडदे.. वरना वो भी मेरी सौतन होजायेगी.. हें..हें..हें..





बरखा : (सरमाकर धीरेसे) जयश्री.. तो अच्छा हेनां.. बीगडने दे उसे.. अगर बीगड भी जाये तो क्या फर्क पडता हे.. तुही तो केह रही थी.. की अब तेरे ससुर ओर सास अलग हो रहे हे.. तो फीर सोच अब तेरी सासु कहा जायेगी..? वो भी तो अभी जवान हे.. उपरसे खुबसुरत.. जो तुमसे टकर ले सके.. तो क्या तु उनके बारेमे नही सोचेगी..?

जागृती : (सरमाकर हसते धीरेसे) हां जयश्री बरखा सही केह रही हे.. उसने बडी मुस्कीलसे अपनी मांको वो भानु भाइकी चुंगलसे नीकाला हे.. ओर अब वोभी तो अपनी मांके बारेमे सोचती हे.. वो खुद चाहती हे की बसंती आंटीका रीलेशन मुना भाइसे होजाये.. ताकी घरकी बात घरमे ही रहे.. ओर बहार वालोको कीसीको पता भी ना चले.. तुम भी अ‍ेक बार ब्रीन्दा आंटीके बारेमे सोचले.. हें..हें..हें..

जयश्री : (सरमाते हसते आस्चर्यसे) क्या..? बरखा.. जागु क्या केह रही हे..? क्या तु वाकइ चाहती हेकी आंटीकी सेटींग मुना भाइसे होजाये..? क्या ये गलत नही हे..?

बरखा : (सरमाते धीरेसे) नही जयश्री अब तो हमारे गांवमे इतना सारा बदलाव होने लगा हे.. जबसे बदलावकी बाते सुनी हे.. तबसे सभी लडकेको अपनी बहेन ओर मां ही अच्छी लगने लगी हे.. सीर्फ मेरा मुना ओर श्रीधरभाइ ही नही.. यहाके सभी लडकोको घरके रीस्ते ही अच्छे लगते हे.. पता नही हमारे घरके जैसे रीस्ते कीतने होगे.. कोइ अपनी विधवा भाभीके पीछे लगा हुआ हे.. तो कोइ तो अपनी बडी अम्माके साथ भी रीलेशन मे हे.. क्या हम साहीलभाइके बारेमे नही जानते..?

जयश्री : बरखा.. फीर भी ये कुछ अजीब नही लगता.. अपनी माके साथ ही..? सरम भी नही आती..

बरखा : जयश्री.. तो इसमे सरम काहेकी..? तु सुनती नही.. आज कल गांवमे हमारी मम्मीके बारेमे हमे क्या क्या सुनना पड रहा हे.. जब अ‍ेक बार अंदर लेती हेना.. फीर तो हर रात उनको डंडा चाहीये.. तुमने भी अ‍ेक बार श्रीधर भाइके साथ मीलन करलीया.. फीर क्या उनसे दुर रेह सकती थी..? नहीनां.. फीर तु तेरी सासु अकेली होजायेगी तब उनके लीये डंडा कहासे नीकालेगी.. कमीनी देखना वो भी मेरी मांकी तराह भटक जायेगी.. ओर बहार चुदवाती रहेगी..

जागुती : (सरमाते धीरेसे) हां जयश्री बरखा सही केह रही हे.. इस बेचारीने बडी मुस्कीलसे उनकी मांको भानुभाइकी चुंगलसे छुडाया हे.. ओर अ‍ेक ये मेरी मां.. आज कल इनके ओर रमेश भाइके बारेमे भी बहुत कुछ सुनना पड रहा हे.. तो बेचारी अब ब्रीन्दा आंटी भी अकेली होजायेगी.. तो सोच कल अगर इनके भी कदम कही बहेक गये तो..? इनसे तो अच्छा हे घरकी बात घरमे ही रहे..
 
बरखा : (धीरेसे मुस्कुराते) हां जयश्री.. कल अगर ब्रीन्दा आंटीका कीसी ओरके साथ चकर हो गया.. तो क्या तुम दोनो मीया बीवीको अच्छा लगेगा..? ओर अकेली ओरतकी आग भी बहुत ज्यादा होती हे.. बाकी रही बात हमारे पतीकी.. तो मुनाने सबको ना जाने कोनसी जडी बुटी पीला दी हे..

की वो हमे बीस्तरमे आज भी चीखे नीकलवाते हे.. ओर हमे ठोक ठोकके थका देते हे.. कमीने दो बार ठोकनेसे पहेले हमे छोडते ही नही हे.. ओर फीर भी उनको करना होता हे.. कमसे कम हमारे पतीमे इतनी काबीलीयत ओर स्टेमीना तो हे ही.. की वो दो दो ओरतोको अ‍ेक साथ सम्हाल सकते हे..

जागुती : (मुस्कुराते धीरेसे) हां जयश्री.. बरखा की सभी बाते सही हे.. तुम भी अ‍ेक बार आंटीके बारेमे सोचले.. बाकी तेरी मरजी.. हम उनको केहतो नही सकते.. की आप अपने बेटेके साथ रीलेशन रखलो..

जयश्री : (कुछ सोचते सरमाकर मुस्कुराते) हां यार.. बात तो तुम दोनोकी सही हे.. लेकीन उनको मेरे ससुरसे अलग तो होने दो.. ओर मे भाइको कैसे कहु..? की आप अपनी मम्मीको पटालो.. देखते हे आगे क्या होता हे.. बाकी बादमे देखा जायेगा.. अगर वो मां बेटे खुद आगे बढे तो अब मे कोइ अ‍ेतराज नही करुगी.. दोनोको आगे बढने दुगी.. बस..? जागु.. छोड ये सब.. ये सब बाते हम बादमे करेगे.. अभी ये बता तुमसे क्या सोचा हे..? बंसी भैयाको मीलोगी की नही..? देख अभी भी तेरी ओर देख रहे हे.. हें..हें..हें..

जागृती : (सरमाते धीरेसे) नही यार.. उनकी खुद की सादी हे.. तो महेमानोकी वजहसे नही मील सकती.. फीर भी देखती हु.. अगर हमे आज मीलनेका मौका मीला तो मील लेगे.. वरना सादीके बाद तो वो मेरे ही हे.. बस..? अब तो खुस..? हें..हें..हें..

जयश्री : (जोरोसे हसते धीरेसे कानमे) कमीनी खुस मुजे नही तुजे होना हे.. तु उसे अकेली मीलेगी तो वो तुजे ठोकेगा मुजे नही.. समजी..? हें..हें..हें..

जागृती : (सर्मसार होकर उतेजनासे कानमे धीरेसे) तो कमीनी तुम भी इनसे ठुकवाले.. मुजे कोइ अ‍ेतराज नही.. हें..हें..हें.. जयश्री.. जबसे लखनको छोड दिया तबसे मुजे भी बहुत इच्छा हो रही हे.. ओर भाइ भी अभी इतनी हिंमत नही कर रहे.. तो मे उनको सामनेसे कैसे कहु..? की मुजे चोदलो..

जयश्री : (मुस्कुराते कानमे) हां जागु.. मुजे भी आज भी भाइसे मीलनेका बहुत मन करता हे..

बरखा : (हसते धीरेसे) कमीनी तु इतनी मस्त तैयार हुइ हे.. अ‍ैसा लगता हे सांती दीदीकी सादी नही तेरी हे.. ओर तु खुबसुरत हे.. तो थोडा आगे बढकर अपने बदनके जलवे दीखादे.. वो तेरे पीछे पागल होजायेगे..

जयश्री : (सरमाकर हसते कानमे) हां जागु.. तुम उनको अकेलेमे मीलनेकी कोसीस तो कर.. वो कुछना कुछ जरुर करेगे.. साली ये अ‍ेकांत चीज ही अ‍ैसी हे.. मुजे भाइको मेरे उपर चडानेमे अ‍ेक दिनका वक्त भी नही लगा.. जब उनको पता चलाकी मे उनको प्यार करती हु..

तब प्यारका इजहार होते ही अ‍ेक घंटेके बाद उसने मेरा कौमार्य भंग कर दीया था.. ओर जबतक हमारे मम्मी पापा वापस नही आये.. तबतक उस अ‍ेक हप्ते तक हम दोनोने अपना हनीमुन ही मनाया.. पता नही इस अ‍ेक हप्तेमे भाइने मुजे कीतनी बार चोदलीया था.. तो तुम भी बंसीभाइको मीलनेकी कोसीस जारी रखो..

सादीके माहोलमे तीनो सहेलीया आपसमे धीरे धीरे हस हसके कामुक बाते करते अ‍ेक दुसरेकी मस्तीया कर रही थी.. तब अ‍ेक घंटेके बाद देवायत भी सहेरसे सबको लेकर वापस घरपे आगया था.. तो मंजु सृती पुनम चंदाके साथ देवायत भी सादीमे सामील हो गया.. उसे देखकर सामतभाइ भी बहुत खुस होगये.. इसी बीच नाच गानका प्रोग्रामभी हुआ.. तब देर साम दुसरे गांवके सरपंच ओर सदस्यो भी आये हुअ‍े थे..

जब भोजनका समय हुआ तो सबलोग भोजनकी ओर जाने लगे.. तभी बसंती अ‍ेक चहेरेको देखकर चोंक गइ.. ओर अपना चहेरा सारीसे ढकते धीरेसे सरकते मुनाके पास चली गइ.. ओर उनके पास जाकर धीरेसे इसारा करते उन सख्सको मुनाको दीखाने लगी.. ओर दबी आवाजमे मुनासे बाते करने लगी..

जो उनका भाइ विनोद था.. तो मुना उनको गौरसे देखने लगा.. ओर बसंती मुनाको अपने मामाको दीखाकर वापस चली गइ.. तब मुना लखनसे अकेलेमे मीलकर बाते करते करते उस सरपंचके बारेमे सभी जानकारीया लेने लगा.. ओर इस बारेमे उसने लखनसे भी बात करली.. तो लखन भी मुस्कुराने लगा..

लखन : (मुस्कुराते) मुना.. क्या ये कमीना तेरा मामा हे..? अभी रहेने दो.. इस बारेमे हम बादमे बात करेगे.. मे उस मीया बीवी दोनोको अच्छी तराह पहेचानता हु.. कमीना पास ही के गांवका सरपंच हे.. उनकी बीवी घरपे गांवके बच्चोको पढाती हे.. कमीनीकी मेरे साथ बहुत पटती हे.. वो बहुतही मस्त पटाका माल हे.. बस.. थोडीसी कोसीस करनी हे.. तो पट जायेगी.. उनकी कोइ ओलाद नही हे..

मुना : (धीरेसे हसते) हां भाइ.. आपकी सभी बाते सही हे.. इनके साथ आपको जोभी करना हो करना.. बस.. अ‍ेक बार उस कमीनीको मुजसे चुदवा देना.. मुजे मेरे मामासे बदला लेना हे.. कमीनेने मम्मीकी सादीसे पहेले उनका धोखेसे बहुत ही गलत फायदा उठाया हे.. कमीनीके की बीवीको ठोक ठोकके पेटसे कर दुगा..

लखन : (आस्चर्यसे) मुना.. क्या वो दोनो सचमे तुम्हारे सगे मामा मामी हे..? कभी तुमने बताया तो नही..?

मुना : (मुस्कुराते) हां भाइ.. मेने भी कमीनेको आज ही देखा.. भाइ.. हम इनके बारेमे हम फुरसतमे बात करेगे.. कमीनेकी पुरी स्टोरी आपको सुनाउगा.. मम्मीने आजही मुजे सुनाइ हे..

लखन : (धीरेसे हसते) मुना.. मे इनके बारेमे सब कुछ जानता हु.. तुजे बादमे बताउगा.. पहेले ये बता.. क्या आंटीको मीला की नही..? वरना जा.. मीलले उसे यहा मे सब सम्हाल लुगा.. वैसे तुम दोनो सादी कब कर रहे हो..?

मुना : (सरमाते धीरेसे हसते) भाइ.. अभी बापु हे.. तो वो मुजसे सादी नही कर सकती.. हां.. आज मेने उनको दो बार मील लीया.. तो केह रही थी हम सादी करलेगे.. देखा नही.. तभी तो वो खुस हे.. हें..हें..हें.. भाइ.. आज हमारा श्रीधर भी उनकी मम्मीके पीछे कुछ ज्यादा ही लगा हुआ हे.. हें..हें..हें.. क्युकी मेरी मां ओर ब्रिन्दा आंटी सुबहसे साथ ही हे.. लगता हे दोनो अ‍ेक दुसरेके बारेमे सब कुछ जानती होगी.. मम्मीको पुछना पडेगा.. कही श्रीधर भी तो उनकी मम्मीको ठोककर नही आया..? हें..हें..हें..

लखन : (श्रीधरकी ओर देखते हसते) मुना.. तेरी बात सही हे.. उन दोनोका भी तेरी तराह हे.. चल वो सब हम बादमे देख लेगे.. अभी तो भोजन मे चल.. कुछ काम करते हे.. ओर भैया भी इधर ही हे.. वरना वो हमे डाटेगे.. फीर हम आरामसे बैठकर बाते करेगे..

अ‍ैसी ही हसी मजाक ओर मस्तीयाके साथ सबका भोजन हो गया.. तो सब लोग अपने अपने घरकी ओर जाने लगे.. तो आज बरखा ओर जयश्री भी अपनी सासके साथ घरकी ओर नीकल गइ.. देवायत भी सभी लेडीसको लेकर हवेलीकी ओर नीकल गया.. तो वंदना ओर रश्मी भी साथमे चली गइ.. तो घरके लोग भी सोनेकी तैयारीया करने लगे.. तब लखनके सभी दोस्त ही अ‍ेकठा होकर बैठे थे..

सुबल जल्दी सादीका मुहुर्त था.. तो सभी दोस्तोने बंसीको भी सोनेके लीये भेज दिया.. ओर आपसमे बैठकर बाते करने लगे.. तब आज सबको भोजनके वक्त बहुत कुछ नया जाननेको मीला की कीसका चकर कीसके साथ चल रहा हे.. तो सभी दोस्तो उनकी चर्चा करने लगे.. लेकीन अब बाते करते लखनका बार बार मन भटकने लगा था.. क्युकी पीछले तीन दिनसे वो खुद चुदाइसे वंचीत था..
 
इस बारेमे उसने पुनमसे बात करनेका तैय भी करलीया था.. लेकीन उनको अकेलेमे मीलनेका मौका नही मीला था.. ओर उसने अभी घर जाते समय पुनमसे बात करनेका तैय करलीया.. तभी पुनमके बारेमे सोचते ही लखनका लंड अंगडाइ लेने लगा.. ओर तनके सख्त होने लगा.. तो लखन मन ही मन मुस्कुराते खुस होने लगा.. क्युकी वो आज भी पुनमको इतना ही चाहता था..

ओर पीछले तीन चार दिनोसे पुनमके साथ फ्लर्ट करते काफी खुल चुका था.. तो पुनम भी उनको थोडा रीस्पोन्स दे रही हे.. यही समजते लखनको अ‍ेक बार फीर पुनमको पानेकी चाहत बढने लगी.. उनको फीरसे अ‍ेक आसाकी कीरण नजर आने लगी.. वो कीसी भी तराह अ‍ेक बार पुनमको हासील करना चाहता था.. बस.. यही सब सोचते पुनमकी याद आते ही उनका लंड अंगडाइ लेने लगा..

कल सुबह बंसीकी सादी हे तो सुबह सबको जल्दी आना हे.. तो अभी सब लोग आराम करलो.. कहेकर लखन खडा हो गया.. ओर सबको अपने अपने घर भेजदीया.. ताकी वो अभी जाकर पुनमसे मील सके.. तो दुसरी ओर आज ब्रीन्दा ओर बसंती भी अपने अपने बेटेके साथ सुबह ओर दो पहोरको दो दो बार चुदाइके कारण थकके चकना चुर होगइ थी.. तो वोभी घर जाते ही सो गइ..

तो सांती ओर जागृती अपने रुममे चुडीयोका बोक्ष लेकर बैठी थी.. ओर कल सादीकी तैयारीया करते आपसमे धीरे धीरे बाते कर रही थी.. जागृतीका मन सांतीसे बाते करते भी बंसीकी ओर भटक रहा था.. आज बंसीने उसे कइ बार इसारोसे उपर छतमे मीलनेके लीये कहा था.. तो जागृती भी बंसीको अकेलेमे मीलनेके लीये तडप रही थी.. लेकीन सांतीने जागृतीको बातो ओर काममे फसाके रखा था.. तो बंसी भी मन मारके सो गया..

तो दुसरी ओर लखन भी घरपे आगया.. तो मंजु नीर्मला भुमीका भावना ओर पुनम होलमे बैठकर बाते कर रही थी.. सरला चाची अपने रुममे जाकर सो गइ थी.. तो उपरकी मंजीलपे लखनके रुममे लता ओर रमा बैठकर सहेरमे रहेने जानेकी प्लानींगकी बाते कर रही थी.. वहा नीलम दोनोकी बाते गौरसे सुन रही थी.. तो रजीया दया ओर चंपा भाभी भी सभी काम नीपटाकर अपने रुममे सोनेके लीये चली गइ थी..

आज चंदाकी दो पहोरको जबरदस्त चुदाइ हो गइ थी.. उनका अ‍ेक अ‍ेक अंग अभी भी दर्द कर रहा था.. तो वो भी सादीमेसे आते ही सो गइ थी.. तब रुममे सृती देवायतके नीचे पुरी तराह नंगी होकर अपनी चुतमे देवायतका तगडा लंड घुसाकर लेटी थी.. ओर देवायत हाथके बल उनकी धमासान चुदाइ कर रहा था.. तो सृती पुरी तराह मदहोसीमे नसेकी हालतमे देवायतसे कमर उछाल उछालके चुदाइ करवानेमे साथ दे रही थी.. तभी बहार लखन आकर सबके साथ बैठ जाता हे..

नीर्मला : (मुस्कुराते) लखन बेटा.. क्या वहा सब काम हो गया..? सो गये सब..?

लखन : (मुस्कुराते) हां आंटी.. सुबह सादीका जल्दी मुहुर्त हे.. तो सब काम नीपटाकर सबको सुलाके आगया.. हें..हें..हें..

मंजुला : (लखनका सर सहेलाते) मेरा बेटा.. बहुत काम करता हे.. तो थक गया होगा.. जा बेटा अब तु भी आराम करले.. पुरा दिन दोडधाम की होगी.. सादीका काम करना इतना आसान थोडीना हे..

लखन : (मुस्कुराते मंजुकी गोदमे सर रखते) भाभीमां.. क्या हुआ..? ये लोग जीजुके लीये मकान देखने गये थे.. क्या सबको पसंद आया..? खास करके पुनो दीदीको..

भुमीका : (हसते) हां लखन बेटा सबको पसंद भी आया ओर उनको टोकन भी देदीया.. अ‍ेक दो दिनमे लोन भी होजायेगी.. तो दस्तावेज भी होजायेगा.. धिरेनने वो मकान लेलीया हे.. बीलकुल छोटे बंगले जैसा दीखता हे..

नीर्मला : (मुस्कुराते सर सहेलाते) लखन बेटा.. क्या तुम मंजुको भाभी भी कहेते हो ओर मां भी कहेते हो..?

लखन : (मुस्कुराते) हां आंटी.. अ‍ेक भाभी ही तो थी.. जो हम दोनो छोटे थे.. तो इसीने मुजे ओर दीदीको सम्हाला हे.. बस.. सीर्फ यही मेरी मां हे.. बाकी सब मेरी भाभीया हे.. हें..हें..हें.. ओर कहा गइ वो डोक्टरनी साहीबा.. हें..हें..हें..

मंजुला : (सर सहेलाते) वो आज बहुत थक गइ होगी.. तो सो गइ हे.. हें..हें..हें.. चल.. जा.. अब तुम भी जाकर सोजा.. सुबह हम सबको सादीमे जल्दी जाना होगा..

तब पुनम ओर भावना बार बार लखनके पेन्टके उभारको देखते हस रही थी.. तो लखनका लंड पुनमको देखते ही पेन्टके अंदर जटके मार रहा था.. तभी भावना पुनमकी ओर देखकर सरमाके मुस्कराने लगी.. तभी लखन भी पुनमकी ओर देखने लगा.. जैसेही लखन ओर पुनमकी आंखे मीली.. तो पुनम लखनकी ओर देखते सरमा गइ.. क्युकी लखनने उनको आंख मारके फोन करनेका इसारा कीया..





ओर पुनम सबकी ओर देखकर सबकी नजर बचाते धीरेसे हां मे गरदन हीलाते अपना मुह दुसरी ओर करते मुस्कुराने लगी.. पुनमको इस तराह सबसे छुपकर हां कहेते ओर लखनकी हरकतसे सर्मीन्दगी महेसुस होने लगी.. पता नही क्यु.. लेकीन आनजाने मे ही सही.. पुनमको लखनकी सभी हरकते अच्छी लगने लगी थी.. ओर उनकी तरफ कुछ ज्यादा ही जुकने लगी थी.. तभी पुनमने अ‍ेक बार फीर टेडी नजर करते लखनके पेन्टका उभार देख लीया.. तो उसे लखनका लंड बहुत बडा होते जटके मार रहा था..

तब पुनम की चुत अ‍ेक बार फीर गीली होने लगी.. तो वो बहुत ही सरमाने लगी.. तभी पुनमने खडी होते भावनाको रुममे चलनेका इसारा कीया.. तो भावना ओर पुनम खडी होकर पुनमके रुममे चली गइ.. फीर कुछ देरके बाद लखन भी उपर सोने जाने लगा.. तो मंजु लखनकी तकलीफ समज गइ थी.. तभी सब लोग सोने के लीये खडे हो गये.. तब मंजु लखनके साथ चलने लगी.. तो नीर्मला ओर भुमीका अपने रुममे जाने लगी.. तभी मंजुने लखनको सीडीयोके पास ही रोकलीया.. तो लखन सीडीपे ही रुक गया....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १९३

तब पुनम की चुत अ‍ेक बार फीर गीली होने लगी.. तो वो बहुत ही सरमाने लगी.. तभी पुनमने खडी होते भावनाको रुममे चलनेका इसारा कीया.. तो भावना ओर पुनम खडी होकर पुनमके रुममे चली गइ.. फीर कुछ देरके बाद लखन भी उपर सोने जाने लगा.. तो मंजु लखनकी तकलीफ समज गइ थी.. तभी सब लोग सोने के लीये खडे हो गये.. तब मंजु लखनके साथ चलने लगी.. तो नीर्मला ओर भुमीका अपने रुममे जाने लगी.. तभी मंजुने लखनको सीडीयोके पास ही रोकलीया.. तो लखन सीडीपे ही रुक गया....अब आगे

लखन : (मुस्कुराते) हां भाभीमां.. कहीये.. क्या कुछ काम था..?

मंजुला : (मुस्कुराते पास आकर) हां.. बीटु.. मुजे पता हे अभी तुजे क्या प्रोबलेम हे.. वो जडी बुटीसे तुजे कोइ तकलीफ तो नही हुइ..? हंम..?

लखन : (थोडा सरमाते मुस्कुराते) जी.. नही.. भाभीमां.. वो.. वो.. अब सब ठीक हे.. कोइ तकलीफ नही हे..

मंजुला : (मुस्कुराते) बीटु.. मे जानती हु तुम पुनोसे क्या पुछना चाहते हो.. अगर सब ठीक होगया हे.. तो तुम अपनी लाइफ पहेलेकी तराह नोर्मल जी सकते हो.. अब कीसीको कुछ पुछनेकी जरुरत नही हे.. ओके..?

लखन : (सरमाकर हसने लगा) जी.. जी भाभीमां.. मोम.. आइ लव यु.. बस.. अ‍ेक आप ही मेरी मां हो.. जो मेरी सब तकलीफ बीना बताये समज जाती हो.. थेन्क्स मोम..

मंजुला : (मुस्कुराते) हंम.. बीटु.. लव यु टु.. मे तेरी मां ही हु.. अगर कोइ परेसानी होतो मुजे कहेना.. जा अब सोजा.. अ‍ेक बार सादी नीपटजाने दे.. फीर मुजे तुमसे भी बुछ बाते कहेनी हे..

लखन : (मुस्कुराते) भाभीमां अभी केहीयेनां..

मंजुला : (मुस्कुराते) नही.. अभी नही.. जब आप सहेर जाओगे इनसे पहेले मे आपको बता दुगी.. अभी जाकर सोजाओ.. बहुत रात हो चुकी हे..

लखन : (मुस्कुराते जाते) नी भाभीमां.. गुड नाइट..

मंजुला : (जाते) हंम.. गुड नाइट..

कहातो लखन बहुत खुस होते हसते हुअ‍े उपर चला गया.. तो मंजु उसे खुस होते देखकर हसने लगी.. ओर अपने रुममे चली गइ.. तब देवायत सृतीकी दुसरी बार धमाकेदार चुदाइ कर रहा था.. तो सृतीकी हालत पतली होगइ थी.. मंजु दोनोकी ओर देखते हसने लगी.. तो सृतीकी हसी भी नीकल गइ.. ओर हाथके इसारोसे मंजुको भी अपने पास बुलाने लगी.. तो मंजु अपने सब कपडे नीकालने लगी.. ओर हसते हुअ‍े नां मे गरदन हीलाते नंगी होकर नीचे गदा बीछाकर देवायतका इन्तजार करने लगी.. तभी..

सृती : (सरमाते धीरेसे) अरे मंजु आनां.. देख जालीम कीतना जोसमे करते हे.. मुजपे कोइ रहेम भी नही करते.. लेकीन आता हे बहुत मजा.. अ‍ैसा लगता हे मे स्वर्गमे हु.. ओर इनसे चुदवाती ही रहु..

मंजुला : (मुस्कुराते) कमीनी अभी तो तुही चुदवाले.. फीर तु सहेर चली जायेगी.. तो फीर पता नही देवु कब वापस तेरे हाथ आयेगा.. इसीलीये ये दो दीनमे जीतना चुदवाना हे चुदवाले..

सृती : (मुस्कुराते होठ चुमते) जानु.. यहासे जानेका मन नही कर रहा.. क्या मे कुछ दिन ओर नही रुक सकती..?

देवायत : (बुब्सको चुमते) हां रुक सकती हे.. रुकजा.. सबलोग चले जायेगे तब सीर्फ तुम ओर मंजु ही होगी.. तुम दोनोको खुब रगड रगडके चोदुगा.. हें..हें..हें..

मंजुला : (जुठ मुठका गुस्सा करते) क्या रगड रगडके चोदुगा..? वहा क्लीनीकपे कौन जायेगी.. मेरी मां..? कमीनी जब यहा होस्पीटल होजायेगी तब हमेसाके लीये आजाना इधर.. तुजे कोइ मना नही करेगा..

सृती : (थोडासा सेड मुह करते) सोरी जानु.. मंजुदीदीकी बात भी सही हे.. मुजे जाना होगा.. हें..हें..हें..

इस रात देवायतने दो बार चुदाइ करके सृतीको बाथरुममे भी खडे खडे चोदलीया.. तो सृतीकी हालत पतली होगइ.. तो सृती बीस्तमे गीरते ही नींदकी आगोसमे चली गइ.. तब मंजु हसने लगी.. ओर देवायत मंजुके पास जाकर सो गया.. तब कुछही देरमे देवायत मंजुकी चुतमे पुरा लंड डाल चुका था ओर मंजुको हाथके बल उचा होकर चोद रहा था.. मंजुको दो बार जडाकर उनकी चुतमे खलास हो गया..

दोनोने अ‍ेक बार चुदाइ करली.. तब मंजुने देवायतको नीचे पीठके बल सुला दीया.. ओर उसने देवायतकी कमरपे बैठकर उनका पुरा लंड अपनी चुतमे नीगल लीया.. तो देवायत भी मदहोस होकर दुसरी दुनीयामे खो गया.. तब मंजु देवायतके साथ संभोग करते अपनी साधनामे लीन होगइ.. तो दुसरी ओर लखनके साथ मंजुने सब बाते करली थी.. फीर भी लखनको आज पुनमसे बात करनेका बहुत मन होने लगा..

लखन आज भी पुनमको पानेकी चाहत रखता था.. लखनके मनमे पुनमकी छबी इतनी हसीन ओर कामुक थी.. की पुनमके बारेमे सोचते ही लखनका लंड अ‍ेक बार फीर जटके मारते खडा होने लगा.. क्युकी उनको पुनम कामदेवकी मुरत लग रही थी.. तो उपरकी ओर जैसे ही लखन आया तो रमा नीलम ओर लता आपसमे हस हसके बाते करनेमे मसगुल थी.. तो तीनोकी नजर बचाते लखन सीधा ही तीसरी मंजीलपे हवेलीकी छतपे चला गया..

ओर अपना फोन नीकालकर पुनमको फोनपे मीस्ड कोल देने लगा.. तो दुसरी ओर पुनम ओर भावना जैसे ही रुममे आइ पुनमने रुमको लोक कर दीया.. ओर हल्कीसी रोसनी करते रुमकी सभी लाइटे बंध करदी.. तब भावना पुनमकी ओर देखते हसने लगी.. ओर उनकी बच्चीको लेकर बेडपे बैठ गइ.. फीर अपना ब्लाउस उचा करते बच्चीको दुध पीलाने लगी.. तब पुनम भी सरमाते उनके पास आकर बैठ गइ..

तभी कुछ ही देरके बाद उनका फोन वाइब्रन्ट होने लगा.. तो पुनमने टेडी नजर करते फोनमे देख लीया.. तो लखनका नाम देखते ही वो सरमाने लगी.. क्युकी अ‍ैसा पहेले कभी नही होता था.. जब भी लखनका फोन आता दोनो बीन्दास्त घंटो तक बाते करते.. लेकीन जैसे ही उनको पता चला की लखन भी उनको चाहता हे.. तबसे लखनके प्रती पुनमका नजरीया ही बदल गया था..

आजकल वो ना चाहते हुअ‍े भी लखनकी ओर ढलती जा रही थी.. अब वो देवायतकी तराह लखनको भी अपने प्रेमीके रुपमे देखने लगी थी.. लेकीन फीर भी लखनको स्वीकार करने उनका मन नही मान रहा था.. लेकीन पुनमका दिल ओर अपना तन पुरी तराह लखनको स्वीकार कर चुका था.. अ‍ैसा दो तीन बार फोन वाइब्रेट हुआ.. तो पुनम बेडसे खडी होगइ तो भावना भी पुनमकी ओर देखने लगी..

भावना : (हसते धीरेसे) पुनोदी.. क्या हुआ..? कीसका फोन आ रहा हे..? जो अ‍ैसे अचानक खडी होगइ.. कुछ हुआ क्या..?

पुनम : (सरमाते धीरेसे) भाभी.. अब आपसे क्या कहु..? वो.. वो.. हमारा देवर.. बहार मुजे सबसे छुपकर फोन करनेका इसारा कर रहे थे.. मुजे तो बहुत सरम आइ.. अगर कीसीने देखलीया होता तो..? पता नही उनको क्या काम होगा.. अभी वो बार बार मुजे मीस कोल कर रहे हे..

भावना : (मुस्कुराते धीरेसे) क्या लखन भैया..? तो इनमे सरमानेकी क्या बात हे..? उनको जरुर कुछ जरुरी काम होगा.. आप उसे फोन करके बात तो कर लीजीये.. हें..हें..हें..

पुनम : (सरमाते मुस्कुराते धीरेसे) नही भाभी.. जबसे उनको पता चला हेकी मे उनकी भाभी हु.. तबसे वो मेरी कुछ ज्यादा ही मस्तीया करने लगे हे.. ओर बडी बात.. अब तो वो सृतीभाभी ओर मेरे साथ फ्लर्ट भी करने लगे हे.. ओर अभी बहार उसने सबसे छुपकर इसारोसे फोन करनेको कहा हे.. पता नही उनको क्या काम होगा.. अ‍ैसे आधी रात बात करगे तो सरम नही आयेगी..?

भावना : (मुस्कुराते) अरे उनको जरुर कोइ खास काम होगा.. तभी तो फोन करनेको कहा होगा.. जाइअ‍े बाथरुममे जाकर उनसे आरामसे बात कर लीजीये.. हें..हें..हें.. दीदी.. हमारा देवर आदमी बहुत मस्त हे.. हें..हें..हें.. मेरी ननंद बहुत नसीब वाली हे.. जो उसे लखन भैया जैसा पती मीला.. जाइअ‍े.. बात करलीजीये उनसे..

तभी वापस लखनका फोन आने लगा.. तो पुनम टेढी नजर करके फोनमे देखने लगी.. तो लखन का नाम देखते ही सरमाकर मुस्कुराने लगी.. पुनमने सरमाते भावनाको फोनकी डीस्पले दीखाइ.. तो भावना भी देखते हसने लगी.. ओर पुनमको इसारोसे फोनपे बात करलेनेको कहा.. तो पुनम बहुत ही सर्मसार हो गइ.. तब भावनाने उसे आंखोकी सरारत करते बाथरुमकी ओर धकेल दीया.. तो पुनम मुस्कुराते फोन लेकर बाथरुममे घुस गइ.. ओर उसने अंदर जाते ही लखनका फोन उठा लीया.. तभी..
 
पुनम : (सरमाते धीरेसे) हां लखन भैया.. आपने फोन करनेको क्यु कहा..? बहार सबके होते हुअ‍े भी क्या हरकत की आपने..? ओर फोन करनेका इसारा कर रहे थे.. अगर कीसीने देखलीया होता तो..?

लखन : (धीरेसे मुस्कुराते) भाभी.. फीकर मत करो.. कीसीने नही देखा.. सुनो.. अभी देखोना कही आस पासमे भावना भाभी तो नही..? मुजे आपसे बहुत जरुरी बात करनी हे..

पुनम : (सर्मसार होते धीरेसे) नही.. मे बाथरुममे अकेली हु.. देवरजी आप बहुत ही कमीने हो.. अ‍ैसे आधी रात कोइ मीस कोल करता हे..? अगर कीसीको पता चल गया तो क्या सोचेगा..? (जुठ बोलते) अच्छा हुआ भावना भाभी सो गइ हे.. वरना वो क्या सोचती..? कहीये.. फोन करनेके लीये क्यु इसारा कीया था..? अगर वहा भी कीसीने देखलीया होता तो हमारी फजीहत हो जाती..

लखन : (मुस्कुराते धीरेसे) भाभी.. आप बहुत ही डरपोक हो.. मुजे आपसे कुछ बात करनी थी.. इसीलीये तो फोन करनेको कहा.. भाभी.. आज आप बहुत मस्त लग रही थी.. पता नही उस कमीने धिरेनमे आपने क्या देखलीया..

पुनम : देवरजी प्लीज.. मत करो अ‍ैसी बाते.. अब गडे मुर्दे उखाडनेका कोइ फायदा नही.. जो होना था हो चुका.. मुजे तो सीर्फ दुनीयाको दीखानेके लीये उनके साथ सादी करनी पडी.. वरना तो आपको भी पता हे मे बडे भाइसे प्यार करती हु.. ओर असलमे आज भी उनकी बीवी हु..

लखन : (हींमत करते) भाभी.. माना की आप बडे भाइको प्यार करती थी.. तो फीर क्या मेरी सकल इतनी बुरी थी..? क्या कमी थी मुजमे..? धिरेनके बदले आप मुजसे सादी करलेती.. मे भीतो आपसे प्यार कता था.. करलेती मुजसे भी सादी.. मेरा यकीन मानो.. मे धिरेनसे ज्यादा आपको प्यार देता.. वैसे भी हमारे खानदानमे तो सब दो दो तीन तीन सादीया करते ही हे..

पुनम : (सरमाते भीरेसे) देवरजी.. आप समजते क्यु नही..? अभी धिरेनको मेरे प्यारके बारेमे नही पता.. ओर आपतो हमारे बारेमे सबकुछ जानते हो.. मानाकी आप मुजसे प्यार करते थे.. तो फीर मुजे बतानेकी हिंमत भी तो नही की.. ओर वैसे भी इस घरके मर्द दो दो तीन तीन सादीया करते हे हम ओरते नही.. समजे..? ओर आपसे सादी करके मे भाइके साथ रीलेशन रखती तो क्या आपको अच्छा लगता..?

लखन : (मुस्कुराते धीरेसे) भाभी.. तो क्या हुआ..? पुराने जमानेमें भी अ‍ैसा हो चुका हे.. अ‍ेक ओरतके तो पांच पांच पती थे.. तो क्या आपके दो पती नही हो सकते..? मुजे भाइके साथ आपके रीलेशनसे कोइ बुरा नही लगता.. क्युकी वो भी तो हमारे भाइ हे..

पुनम : (बहुत ही सरमाते धीरेसे) देवरजी आप बीलकुल पागल होगये हो.. अगर आपको कोइ अ‍ेतराज नही था तो तब ही आपको मुजसे अपने प्यारका इजहार कर देना चाहीये था.. जब बडे भैया धिरेनका प्रस्ताव लेकर आये थे.. हमारे बीच तब भी कोइ पर्दा तो नही था..? हमने इस बारेमे कइ तराहकी काफी खुलकर चर्चा भी की हे.. तो आप तबही मुजे बता देते.. मे नही करती धिरेनसे सादी.. करलेती आपसे.. अब भुलजाइअ‍े सब पुरानी बाते.. कहीये ओर कुछ काम था..? वरना फोन रख देती हु..





लखन : (मुस्कुराते धीरेसे) अरे.. आपतो नाराज होगइ.. भाभी.. अगर आपको मेरी बातोसे बुरा लगातो.. सोरी.. अब मे इस बारेमे कभी आपसे बात नही करुगा.. मैने तो इसीलीये फोन कीया था.. क्युकी आपसे कुछ पुछना था..

पुनम : (धीरेसे) देवरजी.. प्लीज.. मे कोइ नाराज नही हुइ.. ओर मुजे कोइ बुरा नही लगा.. क्या मे आपका कभी बुरा मान सकती हु..? मुजे अफसोस हे.. की मे आपकी तम्मना पुरी नही करपाइ.. कहीये ओर क्या पुछना था..?

लखन : (मुस्कुराते) भाभी.. थेन्क्स.. क्या हेना थोडी इमरजन्सी थी.. तो फोन करना जरुरी लगा.. इसीलीये फोन करनेको कहा था.. क्युकी अ‍ैसी बात सबके सामने नही पुछी जाती..

पुनम : (सरमाते धीरेसे) कैसी बाते..? इतनी सारी बाते तो करली.. अब ओर पुछनेमे क्या हर्ज हे..? कहीये क्या पुछना था..?

लखन : (सरमाते धीरेसे) भाभी.. अब आपसे कैसे कहु..? ओर आपसे बात करनेके अलावा मेरे पास दुसरा रास्ता भी नही हे.. क्युकी जडी बुटी भी आपने दी हे.. ओर इस बारेमे लतासे बात करनेको भी आपने मना कीया हे.. वरना वो ही आपको सब पुछ लेती..

पुनम : (सरमाते हसते) हंम.. लखन भैया.. अगर आप इस बारेमे लता भाभीको बताना चाहोतो अब बता सकते हो.. लेकीन याद रखना ये जडी बुटी हमने आपको कीस मक्सदसे ओर क्यु दी हे.. उनके बारेमे उनको नही बताना.. वो सब मे हेन्डल कर लुगी.. कहीये आपको क्या प्रोबलेम हे..?

लखन : (धीरेसे हसते) भाभी.. क्या हेना आपने जडी बुटी दी हे उनको तीन दिन होगये.. तो क्या अब मे.. आइ मीन.. अब कैसे कहु..? भाभी.. मतलब क्या अब मे लताको मील सकता हु..? भाभी.. बहुत मन कर रहा हे.. आप समज गइनां..?

पुनम : (बहुत ही सर्मसार होते धीरेसे) क्या..? देवरजी आप बहुत ही कमीने हो.. अ‍ैसी बाते भाभीसे पुछी जाती हे..? अरे बहुत मन कर रहा हे तो मेने तो सीर्फ दो दिनके लीये ही मना कीया था.. तो फीर क्यु पुछ रहे हो..? हां.. अगर आपको कोइ तकलीफ नही हे तो अब मील सकते हो.. कमीने कहीके.. हें..हें..हें..

लखन : (मुस्कुराते धीरेसे) भाभी.. अगर भाभीसे नही पुछुगा तो कीसको पुछुगा..? पत्नीके बाद अ‍ेक भाभी ही होती हे.. जो देवरके करीब होती हे.. लेकीन आपतो मेरी पत्नीसे भी ज्यादा करीब हे.. भाभी.. आपको जीतनी गालीया देनी हे बादमे दे दीजीयेगा.. पहेले मेरी बात ध्यानसे सुनीये..? फीर मुजे कहेना..

पुनम : (सरमाते मुस्कुराते) हंम.. कहीये..? आपको बाते बनाना अच्छी तराह आता हे.. क्युकी आप मानने वाले तो हो नही.. स्कुलमे थे तब भी आप मेरे साथ अ‍ैसी बाते करते थे.. ओर पत्नीसे भी करीब मानते हे.. तो कभी प्यार जतानेकी हिंमत तो कर नही पाये.. अब कहीये भी..

लखन : (सरमाते धीरेसे) भाभी.. प्लीज.. आप ताने मत मारो.. तब मुजे ये नही पता थाकी हमारे खानदानमे बहेनसे भी सादी कर सकते हे.. वरना मेतो तबही आपसे अपने प्यारका इजहार कर चुका होता.. ओर आज आप धिरेनके बाजाये मेरी बीवी होती.. खैर जाने दीजीये ये सब बाते.. वरना आपको वापस बुरा लगेगा..
 
पुनम : (आंख गीली करते) देवरजी.. सोरी.. मे कुछ ज्यादा ही बोल गइ.. सच कहु..? अब इस बातका मुजे भी अफसोस हो रहा हे.. की मे आपका सपना पुरा नही करपाइ.. कास.. अगर उस वक्त आपने थोडीसी हिंमत करली होती.. तो मे धिरेनके बजाये आपको पसंद करती.. क्युकी कुछ मेरी पर्सनल बाते अ‍ैसी हे जो मे आपके साथ सैर भी नही कर सकती..

लखन : (मुस्कुराते) भाभी.. आपको कुछ कहेनेकी जरुरत नही.. धिरेनके बारेमे कुजे सबकुछ पता हे.. खैर अब इस बातका कोइ मतलब नही.. कहेते हेनां.. उमीदपे ही दुजीया कायम रहेती हे.. अगर कीस्मतको मंजुर होगा तो हम इस जन्ममे जरुर मीलेगे.. वरना अगले जन्ममे आपको मुजसे कोइ छीन नही सकेगा.. तब आप मेरी बीवी होगी.. देखलेना..

पुनम : (आंख पोछते मुस्कुराते) लखन भैया.. आइ होप.. की आपका सभी सपना पुरा होजाये.. तो सबसे ज्यादा खुसी मुजे होगी.. खैर.. कहीये.. ओर कुछ काम था..?

लखन : (सरमाते धीरेसे) हां भाभी.. आप अ‍ेक बार लतासे बात कर लीजीयेनां.. वो आपसे इस बारेमे बात करना चाहती हे.. क्या हेना.. लता मेरा पेनीस देखकर बहुत ही डर गइ हे.. मुजे मीलनेके लीये मना कर रही हे.. कहेती थी मे इस बारेमे पहेले पुनोदीदीसे या सृती भाभीसे बात करलु.. फीर कुछ सोचुगी.. भाभी.. अब उसे आप ही समजाइअ‍ेनां.. मेने इसीलीये आपको फोन कीया हे..

पुनम : (अ‍ेकदम सर्मसार होते धीरेसे) देवरजी.. इसमे डरनेकी क्या बात हे..? बीवी हे आपकी.. आप उसे प्यारसे समजाइअ‍ेनां.. मे उसे कैसे कहु..? की आप लखन भैयाको चोद.. आइ मीन मीलने दो..

लखन : (मुस्कुराते) हें..हें..हें.. भाभी.. खुलकर बोलीयेनां.. हमने तो अ‍ैसी बहुत चर्चा की हे.. आपके साथ अ‍ैसी बात करनेके बहुत मजा आता हे.. हें..हें..हें..

पुनम : (सर्मसार होते धीरेसे) लखन भैया.. आप बहुत कमीने हो.. हमने अ‍ैसी बाते कब कीथी..? मुजे पता हे आप जान बुजकर मेरे साथ अ‍ैसी बाते कर रहे हो.. लगता हे आप बीलकुल पागल होगये हो.. अब मे आपके बडे भाइकी बीवी हु.. आपको मेरे साथ अब अ‍ैसी बाते नही करनी चाहीये.. आप लता भाभीको प्यारसे समजाइअ‍ेनां.. वो करने देगी..

लखन : (मुस्कुराते) भाभी.. मेने सुबह उनको बहुत समजाया था.. कहेती हे इस बारेमे अ‍ेक बार आपसे बात करेगी.. फीर कुछ नीर्णय लेगी.. भाभी.. उसे समजाइअ‍ेनां.. मुजे बहुत तकलीफ होती हे.. मे सेक्सके बगैर नही रेह सकता.. अगर उसने मुजे मना करदीया तो कहा जाउगां..?

पुनम : (जुठा गुस्सा करते) बडे कमीने हो आप.. कोइ भाभीके साथ अ‍ैसी बाते करता हे..? ठीक हे.. मे इस बारेमे सुबह लता भाभीसे बात कर लुगी.. सुनीये.. (सरमाते धीरेसे) देवरजी.. क्या सचमे आपका.. वो.. आइ मीन.. आपाका.. पेनीस.. क्या वो वाकइ बहुत बडा होगया हे..? अगर आपको बहुत इच्छा हुइ हे.. तो आज वो दोनो सीकार हमारे घरपे ही हे.. आप कुछ आगे बढे की नही..? अगर लता मना कर रही हे.. तो उनमेसे अ‍ेक को पकडलो.. हें..हें..हें..

लखन : (सरमाकर धीरेसे) नही भाभी.. अगर कीसी अ‍ेक को भी पकडलीया तो यहा कमीनी बहुत चीखेगी.. क्युकी ये कुछ ज्यादा ही बडा हो गया हे.. तो यहा बडा बखेडा होजायेगा.. उनको तो फुरसत मे वही सहेरमे ही नीपट लुगा.. थोडासा वक्त दीजीये.. वो दोनो हमारे साथ सहेर ही आ रही हे.. बस.. अ‍ेक तो ओल मोस्ट सेट हो गइ हे.. अब दुसरीको सेट करना हे.. वो भी कोइ मुस्कील काम नही हे.. हें..हें..हें..

पुनम : (सरमाते हसते) कौन..? आपने कीसको सेट करलीया..? क्या मुजे बता सकते हो..?





लखन : (हसते धीरेसे) हां भाभी.. मे आपसे कोइ बात नही छुपाउगा.. आप मेरी सभी बातोकी राजदार होगी.. तो आपको सब बतानेमे कोइ प्रोबलेम नही.. वो.. मेरी सहेलज.. रमा भाभी.. मानोना वो ओल मोस्ट सेट हो चुकी हे.. अब हम दोनोको अकेलेमे मीलने की ही देरी हे..

बस.. कमीनीको अ‍ेक बार मेरे नीचे लेटने दीजीये.. तब उनका काम तमाम.. हें..हें..हें.. कमीनीको सेट करनेमे मुजे क्या क्या पापड बेलने पडे.. तब जाके मुस्कीलसे सेट हुइ हे.. यहा बंसीकी सादी ओर अंकलकी सब वीधी नीपट जाये.. फीर मे आजाद.. बस.. फीर मुजे सीर्फ यही काम करना हे..

पुनम : (मुस्कुराते धीरेसे सरमाते) सीर्फ यही काम करना हे..? आप बहुत ही कमीने हो.. कोइ भाभीके साथ अ‍ैसी बाते करता हे..? आपको सरम भी नही आती.. ओर कुछ काम धंधेपे भी ध्यान देना.. लखन भैया.. वहा जाकर जो भी करो.. बस.. थोडी सावधानीसे.. उनको पता नही चलना चाहीये.. की हम उनके सब प्लानके बारेमे जानते हे.. आप अ‍ेक बार उस कमीनीकी हालत बीगाड दो.. वैसे भी कमीनीओ दोनो मां बेटी बहुत ही कामी हे.. बस.. थोडीसी महेनत ओर करो.. मुजे यकीन हे.. आप नीलुको भी पटा लोगे..

लखन : (हसते धीरेसे) भाभी.. अ‍ैसा ही होगा.. जो आप चाहती हे.. नीलुको पटाना कोइ बडी बात नही हे.. क्युकी आपको तो पता हे.. उनकी ओर धिरेनकी विडीयो क्लीप मेरे पास हे.. जब उनको मील लुगा तब आपको सब बता दुगा.. फीर मुजे आगेका बताना उनके साथ क्या करना हे..?

पुनम : (सरमाते धीरेसे) ठीक हे देवरजी.. मे सुबह लता भाभीसे बात करलुगी.. अब आप फोन रख दीजीये.. अ‍ैसे देर रात फोनपे भाभीसे बात करना अच्छी बात नही हे.. समजे..? हें..हें..हें.. गुड नाइट..

लखन : (मुस्कुराते) हंम.. ठीक हे भाभी.. लेकीन जरुरत पडी तो लताकी बात आपसे करवाउगा.. आप फोन उठाना.. भाभी.. आइ रीयली लव यु.. अ‍ेन्ड गुड नाइट..

पुनम : (बहुतही सर्मसार होते धीरेसे) हंम.. ठीक हे.. लव यु टु देवरजी.. हें..हें..हें.. मे भी आपसे बहुत प्यार करती हु.. लेकीन वो वाला प्यार नही अ‍ेक भाइ बहेन वाला प्यार.. समजे..? हें..हें..हें.. सुनो.. सहेरमे उन कमीनीसे सादी तो करली.. क्या उनके साथ सुहागरात बुहागरात मनाइ की नही..? हें..हें..हें..

लखन : (मुस्कुराते) नही भाभी.. अब जो भी होगा सहेर जाउगा तब ही होगा.. क्या आपकी उनके साथ कोइ बात हुइ..?

पुनम : (सरमाते मुस्कुराते) नही.. अ‍ेक बार हुइ थी.. फीर कल बात कर लुगी.. अब तो आपकी तो बले बले हे.. तीन तीन बीवीया तो हे.. अब क्या प्रबलेम हे.. हें..हें..हें..

लखन : (मुस्कुराते) नही भाभी.. मे कीतनी भी सादीया करलु.. फीर भी मेरे दिलको कभी तसली नही मीलेगी.. मे अपना पहेला प्यार कभी नही भुल पाउगा.. आप आज भी मेरे दिलपे राज करती हो.. भाभी.. आपकी बहुत याद आ रही हे.. आइ रीयली लव यु.. मे आज भी आपको इतना प्यार करता हु.. लेकीन भाइ बहेन वाला नही.. वो प्यार.. जो आप समजते भी अन्जान बन रही हो..

पुनम : (बहुत ही सर्मसार होते धीरेसे) लखन प्लीज..

कहातो पुनम बहुत ही सर्मसार होगइ.. ओर उसने फोन काट दीया.. पुनम सब कुछ समज गइ की लखन उनसे क्या कहेना चाहता हे.. तब लखनका प्यार ना स्वीकारनेसे पुनमको बहुत बुरा लग रहा था.. उनका मन अभी इस बातके लीये राजी नही था.. तो दुसरी ओर उनका दिल ओर उनका तन पुरी तराह लखनको अपनानेके लीये बेताब था.. जो अब पुनमके वसमे नही था..
 
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