Fantasy 'सुप्रीम' एक रहस्यमई सफर - Page 22 - SexBaba
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Fantasy 'सुप्रीम' एक रहस्यमई सफर

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#111.

चैपटर-2 अग्नि जाल

(11 जनवरी 2002, शुक्रवार, 09:30, मायावन, अराका द्वीप)

पिछली रात सभी ने एक छोटे से पानी के जोहड़ के पास बितायी थी। रात में किसी भी प्रकार की कोई नयी परेशानी नहीं आयी।

क्रिस्टी को जरुर ऐलेक्स के बिना ठीक से नींद नहीं आयी थी, वो रात भर ऐलेक्स को याद कर बेचैनी से करवट बदलती रही थी।

जेनिथ ने धीरे-धीरे स्वयं को सम्भाल लिया था, नक्षत्रा खाली समय में जेनिथ का मनोरंजन भी कर रहा था।

तौफीक को जेनिथ का यह बदलाव समझ आ गया था, लेकिन उसने भी जेनिथ से ज्यादा बात करना उचित नहीं समझा।

अलबर्ट रोज रात को अपने दिन भर की जंगल से बटोरी उपलब्धियों को देखता रहता था।

जैक स्वयं को अब बिल्कुल अकेला महसूस कर रहा था और शैफाली किसी ना किसी प्रकार से सभी का मनोरंजन कर माहौल को हल्का करने की कोशिश कर रही थी।

कुल मिलाकर बचे हुए 7 लोग अब जंगल में रहने के पूर्ण अभ्यस्त हो गये थे।

सभी ने हल्का-फुल्का नाश्ता कर लिया था। सुयश के एक इशारे पर सभी उठकर जंगल में आगे की ओर बढ़ गये।

चलते-चलते एक ऊंचे से टीले को पार करने के बाद, सभी को कई किलोमीटर लंबा एक घास का मैदान दिखाई दिया।

“अरे बाप रे!” क्रिस्टी ने आश्चर्य से भरते हुए कहा- “यहां तो दूर-दूर तक घास के मैदान के सिवा कुछ नहीं दिखाई दे रहा है? अब क्या हमें इस घास के मैदान को पार करना पड़ेगा? इसमें तो बहुत से खतरे हो सकते हैं।”

“तुमने सही कहा क्रिस्टी ।” अलबर्ट ने घास की ऊंचाई का निरीक्षण करते हुए कहा- “यह घास कम से कम 4 फुट ऊंची है और काफी घनी भी है, अगर इसमें कोई खतरा मौजूद हुआ तो वह हमें दिखाई तक नहीं देगा।”

“मगर आगे बढ़ने का कोई और मार्ग हमें दिख भी तो नहीं रहा है।” सुयश ने कहा- “आगे देखिये कुछ किलोमीटर दूर मौजूद पहाड़ भी, घास से ही निर्मित नजर आ रहा है। वहां तक पहुंचने के बाद ही हमें आगे का मार्ग पता चल पा येगा। इसलिये हमें ना चाहते हुए भी इस घास के मैदान में घुसना ही पड़ेगा।”

“आपकी बात बिल्कुल सही है कैप्टेन।” तौफीक ने कहा- “वैसे भी युगाका ने हमें पोसाईडन पर्वत की ओर जाने को कहा था और पोसाइडन पर्वत तक पहुंचने के लिये, हमें इस रास्ते का प्रयोग करना ही पड़ेगा।”

आखिरकार सबको उस घास के रास्ते पर चलने के लिये मानना ही पड़ा, क्यों कि उनके पास और कोई चारा ही नहीं था।

सभी धीरे-धीरे घास के मैदान में प्रवेश कर गये।

घास बहुत ही मुलायम थी, उसका स्पर्श सभी को बहुत ही भला महसूस हो रहा था।

घास 4 फुट ऊंची होने की वजह से लगभग सभी के सीने तक पहुंच रही थी। घास के नीचे की जमीन भी नर्म और मुलायम थी।

सभी अपने हाथ में पकड़ी लकड़ी की मदद से घास को हटाते हुए आगे बढ़ रहे थे।

सभी को घास में चलते हुए 1 घंटा बीत गया, तभी शैफाली को घास का स्पर्श अजीब सा महसूस हुआ।

“कैप्टेन अंकल मुझे घास का स्पर्श अब अच्छा महसूस नहीं हो रहा है।” शैफाली ने सुयश को देखते हुए कहा- “मतलब मैं जब इस घास के मैदान में घुसी थी तो मुझे घास का स्पर्श बहुत मुलायम और अच्छा महसूस हो रहा था, पर अब एक घंटे इस मैदान में चलने के बाद यह घास मुझे अपने शरीर पर थोड़ा रुखा अहसास दे रही है।”

शैफाली की बात सुनकर सभी अपनी जगह पर रुक गये और घास को ध्यान से देखने लगे।

“कैप्टेन! जैसे-जैसे हम आगे बढ़ रहे हैं, घास का रंग भी बदलता जा रहा है। यह हरे रंग से सुनहरे रंग में परिवर्तित हो रही है।” अलबर्ट ने घास के मैदान को देखते हुए कहा- “शायद सूर्य की तेज धूप में यह घास पक रही है।”

यह सुन सबका ध्यान घास के रंग की ओर गया। अलबर्ट सही कह रहा था, अब घास कुछ जगहों से थोड़ी सुनहरी दिखने लगी थी।

“इसका मतलब है कि जैसे-जैसे सूर्य की रोशनी बढ़ेगी, घास सुनहरी और कठोर होती जायेगी।” सुयश ने कहा- “फिर तो हमें इस घास के मैदान को जल्द से जल्द पार करना होगा।”

सुयश के इतना कहते ही सभी और जोश से, तेज कदमों से आगे की ओर बढ़ने लगे।

धीरे-धीरे 1 घंटा और बीत गया। अब घास काफी जगह से सुनहरी दिखने लगी थी। पर अब उस घास के मैदान में चलते-चलते सभी को तेज गर्मी महसूस होने लगी थी।

सभी बार-बार पानी की बोतल निकालकर पानी को पी रहे थे।

“कैप्टेन!" जैक ने चलते हुए कहा- “इस मैदान में गर्मी बहुत तेज बढ़ती जा रही है। अगर हम ऐसे ही चलते रहे तो हमारा सारा पानी इस मैदान में ही खत्म हो जायेगा। क्या हमें इस मैदान को रात में नहीं पार करना चाहिये था?”

“बिल्कुल नहीं।” अलबर्ट ने बीच में बोलते हुए कहा- “जब दिन में यह मैदान लगातार गर्म हो रहा है, तो पूरी सम्भावना है कि रात में यह मैदान बर्फ सा ठण्डा हो जायेगा, उस स्थिति में तो इस मैदान को पार करना और भी मुश्किल हो जाता।”

“ठंड में क्या परेशानी होती कैप्टेन?” तौफीक ने कहा- “हम अपने हाथ में पकड़ी लकड़ियों को जला कर अपने शरीर की गर्मी को बनाए रख सकते थे।”

“आप भूल रहे हैं तौफीक कि अब हमारे पास एक भी लाइटर नहीं है।” सुयश ने कहा- “हमारे पास 2 ही लाइटर थे, जो असलम और ब्रैंडन के पास थे, जो कि उनके साथ ही हमारे पास से चले गये। अब तो हमें

आग जलाने के लिये भी पत्थरों का सहारा लेना पड़ेगा।”

अचानक तेज हवाएं चलने लगीं, जो दक्षिण दिशा से उत्तर दिशा की ओर चल रहीं थीं।

“वाह.... हवाएं चलने लगीं।” क्रिस्टी ने खुश होते हुए कहा- “अब गर्मी कम लगेगी और हम आसानी से इस रास्ते को पार कर लेंगे।”

“एक बात और भी अच्छी है कि इन हवाओं का प्रवाह हमारे चलने के अनुकूल है।” शैफाली ने कहा- “ऐसा लग रहा है कि जैसे ये तेज हवाएं हमें धक्का देकर आगे बढ़ा रही हों।”

हवाओं से थोड़ी राहत मिलने के बाद सबके चलने की स्पीड में तेजी आ गयी। अब यह लोग घास के मैदान का आधे से ज्यादा रास्ता तय कर चुके थे।

तभी सुयश को आसमान में धुंआ फैलता हुआ दिखाई दिया। सुयश ने हैरानी से उस धुंए के स्रोत की ओर अपनी दृष्टि घुमायी। धुंए के स्रोत पर दृष्टि पड़ते ही सुयश पूरी तरह से डर गया।

वह धुंआ इनके पीछे मौजूद घास के मैदान से ही उठ रहा था। जहां पर तेज आग की लपटें दिखाई दे रहीं थीं।

“प्रोफेसर!” सुयश ने चीखकर कहा- “पीछे घास के मैदान में आग लग गयी है और वह तेजी से हमारी ओर बढ़ रही है।”

सुयश की आवाज सुन सबकी निगाहें पीछे की ओर गयी। वहां पर आग की ऊंची उठती लपटें देख सभी डर गये।

“जल्दी भागो यहां से।” जैक ने चीखकर कहा- “पीछे घास में लगी आग तेज हवा की वजह से जल्दी ही हम तक पहुंच जायेगी। हम उस आग के स्वयं तक पहुंचने से पहले इस घास के मैदान को पार करना ही पड़ेगा, नहीं तो हम सब इस आग में जलकर भस्म हो जायेंगे।”

“असंभव!” शैफाली ने कहा- “हमने लगभग ढाई घंटे में इस मैदान को आधा ही पार किया है, ऐसी स्थिति में अगर हम इस घास के मैदान को दौड़कर भी पार करने की चेष्टा करेंगे तो हमें कम से कम इस मैदान को पूरा पार करने के लिये डेढ़ घंटे का समय चाहिये होगा और आग को हम तक पहुंचने में ज्यादा से ज्यादा आधा घंटा ही लगेगा। ऐसी स्थिति में हमारा अब बच पाना बिल्कुल असंभव है।”

“तो क्या हुआ? हमें यहां पर खड़े हो कर मौत का इंतजार करने से अच्छा है कि हम दौड़कर इस मैदान को पार करने की एक कोशिश तो करें।” जैक ने कहा- “हो सकता है हम वहां पहुंचने में कामयाब हो ही

जाएं।”

“नहीं पहुंच पायेंगे।” अलबर्ट ने भी गहरी साँस भरते हुए कहा-“मुझे शैफाली की कैलकुलेशन पर पूरा भरोसा है।“

अब सभी के चेहरे पर खौफ के भाव साफ नजर आने लगे। सभी मैदान पर आगे बढ़ रही विनाशकारी आग को पास आते हुए देख रहे थे।

“नक्षत्रा !” जेनिथ ने नक्षत्रा से बात करते हुए कहा- “क्या तुम्हारे पास भी इस आग से बचने का कोई उपाय नहीं है?”

“मैं समय को कुछ क्षणों के लिये, तुम्हारे लि ये रोक सकता हूं।” नक्षत्रा ने कहा- “ऐसी स्थिति में तुम यहां से बचकर भाग सकती हो, पर उस कंडीशन में तुम्हारे साथी भी, आग की ही भांति ठहर जायेंगे।

ऐसी स्थिति में तुम किसी को उठा कर तो भाग नहीं सकती, फिर बाकी के सारे लोग मारे जायेंगे। अब अगर तुम्हें यह मंजूर है तो बताओ, मैं समय को तुम्हारे लिये रोक देता हूं और अगर मंजूर नहीं है, तो तुम्हें भी इन सभी के साथ इस मुसीबत का सामना करना पड़ेगा।”

“मैं अकेले यहां से नहीं भाग सकती, मैं सबके साथ यहीं पर रहूंगी।” जेनिथ ने कहा- “अब जो होगा देखा जायेगा। हां अगर तुम जाना चाहो तो मुझे छोड़कर जा सकते हो नक्षत्रा।”

“इसी बात पर तो मैं तुम्हारा दीवाना हो गया हूं दोस्त।” नक्षत्रा ने जेनिथ से कहा- “अगर तुम अपने दोस्तों को इस मुसीबत भरे समय में छोड़ने को तैयार नहीं हो, तो मैं तुम्हें क्यों छोड़ूं? और वैसे भी मैं तुम्हें बता दूं कि यह अग्नि मेरा कुछ नहीं बिगाड़ खसकती।”

“प्रोफेसर आप क्या सोच रहे हैं?” सुयश ने अलबर्ट को सोचते देख पूछा- “आप ही बताइये कि हम ऐसी स्थिति में क्या करें? क्या हमारे पास बचने का कोई रास्ता है?”

सुयश के घबराए हुए शब्द सुन अलबर्ट मुस्कुराते हुए बोला- “दुनिया में ऐसी कोई परेशानी नहीं है, जिसका कि कोई उपाय ना हो।”

अलबर्ट के शब्द सुन सबको थोड़ी राहत हुई। उन्हें लग गया कि अवश्य ही अलबर्ट के पास इस मुसीबत से बचने का कोई ना कोई उपाय है।

“कैप्टेन क्या आप बता सकते हैं कि जंगल में लगी आग को कैसे बुझाते हैं?” अलबर्ट ने सुयश से सवाल किया।

“जंगल में लगी आग को पानी या किसी भी गैस से नहीं बुझाया जा सकता। इसलिये जंगल की वह आग जिस चीज का सहारा लेकर आगे बढ़ रही होती है, उस चीज को रास्ते से हटा दिया जाता है। यानि जंगल की आग को रोकने के लिये जिस तरफ आग बढ़ रही है, उधर के पेड़ों को कुछ दूरी तक काट दिया जाता है। अब जब आगे पेड़ ही नहीं रह जाते तो आग वहां तक आकर रुक जाती है और फिर बुझ जाती है।” सुयश ने अपने ज्ञान का परिचय देते हुए कहा।

“बिल्कुल ठीक।” अलबर्ट ने मुस्कुराते हुए कहा- “तो फिर इसी प्रकार यदि हम अपने आसपास मौजूद घास को भी उखाड़कर फेंक दें, तो आग के समीप आने पर हम उस खाली जगह में अपने आपको बचा सकते हैं।”

“वाह!” जेनिथ ने अलबर्ट की तारीफ करते हुए कहा- “मान गयी आपको प्रोफेसर। क्या आइडिया निकाला है आपने?”

यह सुनते ही जैक अपने आसपास की घास को नोंचने के लिये नीचे झुका और दोनों हाथों से घास के एक बड़े टुकड़े को पकड़कर घसीटने लगा। पर पूरी ताकत लगाने के बाद भी वह एक मुठ्ठी भी घास नहीं नोंच

पाया।

“कैप्टेन!” जैक ने आश्चर्य से उस घास को देखते हुए कहा- “यह घास जमीन से उखड़ नहीं रही है।”

जैक के शब्द सुन तौफीक ने भी घास को उखाड़ने का प्रयास किया, पर वह भी घास को जमीन से उखाड़ नहीं पाया।

“प्रोफेसर!” तौफीक ने चिंतित निगाहों से अलबर्ट को देखते हुए कहा- “शायद यह घास भी मायावी है? हम लोग एक बार फिर किसी प्रकार के तिलिस्म में फंस गये हैं?”

तौफीक के शब्द सुन सभी ने घास को नोंचने की कोशिश की, पर सभी असफल रहे। कोई भी जमीन से घास का एक तिनका भी नहीं उखाड़ पाया।

“अब क्या करें प्रो फेसर?” सुयश के शब्दों में फिर बेचैनी उभरी।

अलबर्ट कुछ देर तक घास पर आगे बढ़ रही आग को देखता रहा फिर बोला- “यहां की घास सिर्फ आग से ही नष्ट हो सकती है। हमें अपने

आगे मौजूद घास को जलाना होगा।”

“क्या पागलपन है?” जैक ने चीखकर कहा- “एक आग हमारे पीछे आ रही है, हम उससे ही अभी नहीं बच पा रहे हैं और आप कह रहे हैं कि हम अपने आगे भी आग लगा दें।”

“प्रोफेसर सही कह रहे हैं।” सुयश ने खुश होते हुए कहा- “हवा की स्पीड दक्षिण से उत्तर की ओर है और काफी तेज है, ऐसे में हमारे द्वारा लगायी गयी आग से हमें कोई नुकसान नहीं होगा, बल्कि जब तक हमारे पीछे की आग हमारे पास पहुंचेगी, हमारे आगे लगी आग ने कुछ क्षेत्र को जला कर राख कर दिया होगा और हम उसी जले क्षेत्र में खड़े हो कर पीछे की आग से बच जायेंगे।”

सुयश के पूरा समझाने पर अब जैक को भी समझ आ गया।

“पर कैप्टेन, एक परेशानी और है?” तौफीक ने कहा- “हमारे पास अब लाईटर तो है नहीं और ना ही आसपास कोई पत्थर है, तो फिर हम इस स्थान पर आग लगा येंगे कैसे?”

यह सुनकर सभी सोच में पड़ गये। तौफीक की बातों में दम था। सभी अपने कपड़ों में कोई ऐसी चीज ढूंढने लगे जिससे घास में आग लगायी जा सके।

आखिरकार इस समस्या का समाधान भी अलबर्ट ने दिया। अलबर्ट ने एक बार आसमान में चमक रहे सूर्य को देखा और फिर अपने चेहरे पर लगाये हुए चश्में को उतार कर अपने हाथ में ले लिया।

अलबर्ट ने सबको थोड़ा पीछे आने को इशारा किया और सबके पीछे आते ही चश्में में लगे लेंस को, सूर्य की तेज रोशनी में रख दिया।

मुश्किल से 3 मिनट एक स्थान पर चश्मा रखते ही, चश्में ने सूर्य की रोशनी को केन्द्रित कर, सभी के सामने लगी घास में आग लगा दी।

उनके सामने लगी घास ने तेजी से, आगे की घास को जलाना शुरु कर दिया। अलबर्ट ने अब चश्मा पहन लिया था। अचानक हवाएं और तेज हो गयीं, पर जैसे-जैसे उनके पीछे की आग बढ़ रही थी, वैसे-वैसे उनके आगे की घास भी जलती जा रही थी।

कुछ ही देर में उनके पीछे की आग उनके बिल्कुल समीप आ गयी। यह देख सभी आगे वाले जले हुए क्षेत्र में खड़े हो गये।

पीछे की आग किसी दैत्य की तरह उनसे कुछ दूरी पर आकर रुक गयी। सभी डरी-डरी निगाहों से उस दैत्यरुपी आग को देख रहे थे।

ऐसा लग रहा था कि जैसे वह आग अपने शिकार को दूर खड़े देख गुस्से से निहार रही हो।

यह देख जैक जोर-जोर से हंसकर अपनी जान बचने की खुशियां मनाने लगा।

क्रिस्टी को जाने क्यों यह सब रास नहीं आया, वह गुस्से से आगे आयी और जैक को एक जोर का धक्का मारा। क्रिस्टी के धक्के की वजह से जैक उछलकर सामने लगी आग में गिर गया।

एक पल के लिये तो किसी को कुछ समझ में नहीं आया। उधर जैक के शरीर में आग लग गयी, अब वह जोर-जोर से चीखता हुआ, उस आग से बचकर खाली जगह पर आने की कोशिश करने लगा।

पर वह आग पता नहीं किस प्रकार की थी, जैक अब उन लोगों के पास आ ही नहीं पा रहा था।

“ये तुमने क्या कि या क्रिस्टी?” सुयश ने हैरानी भरी नजरों से क्रिस्टी को निहारते हुए कहा।

बाकी सारे लोग भी आश्चर्य भरी नजरों से क्रिस्टी को देख रहे थे।

“वह इसी लायक था। काश मैं उसे पहले मार सकती।” क्रिस्टी ने घृणा भरी नजरों से जलते हुए जैक को देखकर कहा ।

उधर अब जैक के शरीर का भी पता नहीं चल रहा था। यह देख सब वापस क्रिस्टी की ओर पलटे।

क्रिस्टी ने सुयश को अपनी ओर देखते पाकर बोलना शुरु कर दिया-

“इसने बैंक में जिस आदमी को गोली मारी थी, वह मेरे पिता थे।”

क्रिस्टी के शब्द सुन सभी हैरान रह गये- “मैं कॉलेज से निकलकर एक सीक्रेट एजेंट बन गयी। अभी मैं ट्रेनिंग पीरियड में ही चल रही थी कि तभी मुझे मेरे पिता के मरने का समाचार मिला, मैं यह सुनकर ट्रेनिंग से वापस आ गयी। जब मैंने बैंक में मौजूद कैमरे से देखा तो मुझे ऐलेक्स, जैक और जॉनी नकाब पहने बैंक में दिखाई दिये। वहां पर एक पल के लिये ऐलेक्स का नकाब उतर गया, जिससे मैंने उसका चेहरा देख लिया था। मुझे जैक और जॉनी के बारे में उस समय कुछ नहीं पता चला, पर मुझे ऐलेक्स के सुप्रीम पर जाने का पता चल गया। मैंने भी सुप्रीम पर अपनी टिकट करा ली।

सुप्रीम पर मैं जानबूझकर ऐलेक्स के सामने ‘वर्ल्ड फेमस बैंक रॉबरी’ नामक किताब पढ़ रही थी। मुझे पता था कि ऐलेक्स उस किताब को देखकर मेरी ओर आकर्षित होगा और फिर मैं उसे जाल में फंसा कर, उसे मारकर अपने पिता की मौत का बदला ले लेती। सबकुछ मेरे प्लान के हिसाब से ही हुआ। मेरी द्वारा जानबूझकर छोड़ी गयी किताब को, ऐलेक्स मेरे कमरे में वापस करने आया। पर अगर मैं तुरंत मान जाती तो ऐलेक्स को शक हो सकता था, इसलिये मैं उस समय जानबूझकर ऐलेक्स से थोड़ा दूर रहने लगी।

बाद में मैंने ऐलेक्स से अपने प्यार का झूठा इजहार किया और उससे इन दोनों साथियों का नाम पता करने के बारे में पूछना चाहा, पर उससे पहले ही सुप्रीम विचित्र परिस्थितियों में समुद्र में डूब गया।

मगर ऐलेक्स बच गया। शायद मैं ऐलेक्स को अब तक मार चुकी होती, पर कुछ दिन पहले ही ऐलेक्स ने स्वतः ही इन दोनों का भेद खोल दिया।

जिससे मुझे यह पता चला कि ऐलेक्स की कोई गलती नहीं थी। गलती तो इन दोनों कमीनों की थी। मुझे अपनी भूल का अहसास हुआ, जिसकी वजह से मुझे सच में ऐलेक्स से प्यार हो गया। मैं अब इन दोनों को मारने के बारे में सोचने लगी। तभी जॉनी अपने कर्मों का फल अपने आप पा गया। अब मुझे लगा कि अगर मैं कुछ दिन और रुक गयी तो यह कमीना भी इस जंगल में अपने आप ही मारा जायेगा और ये मेरी आत्मा को गंवारा नहीं था।

मैं अपने पिता की मौत का बदला स्वयं अपने हाथों से लेना चाहती थी। इसीलिये मैंने अभी जानबूझकर जैक को धक्का दिया। मुझे खुशी है कैप्टेन कि मेरा बदला पूरा हुआ।”

“तुमने बिल्कुल ठीक किया क्रिस्टी।” जेनिथ ने क्रिस्टी का हाथ अपने हाथ में लेते हुए कहा- “यह जैक इतना कमीना था कि न्यूईयर की रात दूसरी गोली इसने अपने ही दोस्त जॉनी पर चलाई थी। वह जॉनी को मारकर पूरा पैसा लेना चाहता था। जो अपने दोस्त का नहीं हुआ, वह किसी का सगा नहीं हो सकता।”

“तुम्हें कैसे पता कि जॉनी ने ही न्यू ईयर की रात दूसरी गोली चलाई थी?” सुयश ने जेनिथ को देखते हुए पूछा।

“मुझे पहले से ही पता था कैप्टेन, पर मैंने पहले यह बताना जरुरी नहीं समझा।” जेनिथ ने सपाट निगाहों से तौफीक की ओर देखते हुए कहा।

तौफीक को जेनिथ की निगाहें अपने चेहरे पर चुभती हुई सी महसूस हुईं, पर उसने कुछ कहा नहीं और अपना चेहरा दूसरी ओर घुमा लिया।

अब शैफाली ने भी जाकर क्रिस्टी के दूसरे हाथ को थाम लिया।

उधर आग घास को जलाकर पूरी तरह से बुझ गयी थी, पर वहां जैक की लाश का कोई अवशेष दिखाई नहीं दे रहा था।

सुयश को समझ नहीं आया कि वह क्रिस्टी से क्या बोले, उसने एक बार प्रोफेसर की ओर देखा और फिर आगे की ओर बढ़ गया। बाकी बचे 5 लोग भी सुयश के पीछे-पीछे चल दिये।

जारी रहेगा_______✍️
 
To bhai log pata nahi kya hoga, per story to aage badhani hi hai, is liye agla update raat 9 baje tak de dunga :declare:

waise abhi sab testing per hi chal raha hai:approve:
 
#112.

महाबली हनुका

(11 जनवरी 2002, शुक्रवार, 14:30, अटलांटिक महासागर)

हनुका ने अपनी पूरी जिंदगी महा..देव के साधना में लगा दी थी।

देव के आशीर्वाद स्वरुप आज से हजारों साल पहले ही उसे गुरुत्व शक्ति प्राप्त हो गयी थी। पर आज उसी गुरुत्व शक्ति की रक्षा के लिये गुरु नीमा ने उसे भेजा था।

इस समय हनुका आकाश मार्ग से तेजी से लुफासा के पीछे जा रहा था। हांलाकि उसे लुफासा अभी तक नजर नहीं आया था, पर गुरुत्व शक्ति से मिल रहे संकेतों से उसे लग रहा था कि बस वह अब लुफासा तक पहुंचने ही वाला है।

हनुका को जाने क्यों आज अपना बचपन याद आ रहा था। वह बिल्कुल नन्हा सा था, जब महा.. ने नीलाभ के विवाह में उपहार स्वरुप उसे नीलाभ को सौंप दिया था।

तब से नीलाभ ने ही उसे पाला था और बिल्कुल अपने बालक की तरह प्यार दिया था। हनुका भी नीलाभ को अपने पिता समान ही समझता था।

नीलाभ ने हनुका को कभी यति नहीं समझा और उसे असीम और विलक्षण ज्ञान दिया, पर जब से नीलाभ हिमालय से गायब हुए थे, उसने अपना बाकी जीवन हिमलोक की सेवा और महा..देव की साधना में लगा दिया था।

तभी हनुका की सोच पर विराम लग गया।

उसे अपने कुछ आगे उड़कर जाता हुआ, ड्रैगन बना लुफासा दिखाई दिया, जो पीछे आ रहे खतरे से बेखबर, गुरुत्व शक्ति की डिबिया अपने पंजों में दबाये, तेजी से अराका द्वीप की ओर उड़ा जा रहा था।

अराका द्वीप बस अब आने ही वाला था।

हनुका ने अपने उड़ने की गति थोड़ी और बढ़ाई और फिर ड्रैगन के सामने जा कर हवा में खड़ा हो गया।

“रुक जाओ मूर्ख दैत्य।” हनुका ने गरज कर कहा- “चुपचाप गुरुत्व शक्ति मेरे हवाले कर दो, मैं आपको जीवनदान दे दूंगा।”

लुफासा पहले तो हवा में उड़ते यति को देखकर हैरान रह गया, पर फिर हनुका के शब्दों को सुनकर वह समझ गया कि यह यति उसका पीछा करता हुआ हिमालय से आया है।

लुफासा एक पल में समझ गया कि यह यति भी मायावी है। इसलिये वह भी हवा में रुककर हनुका की अगली प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा करने लगा।

तभी हनुका ने मुंह खोलकर एक जोरदार गर्जना की।

हनुका की गर्जना इतनी शक्तिशाली थी कि ड्रैगन बना लुफासा गर्जना के वेग से कुछ कदम पीछे हो गया।

मात्र एक गर्जना से ही लुफासा जान गया कि हनुका बहुत शक्तिशाली है।

लुफासा ने हनुका की गर्जना का जवाब देने के लिये अपना ड्रैगन रुपी मुंह खोलकर एक जोर की आग हनुका पर उगल दी।

इतनी तेज आग के पीछे हनुका का पूरा शरीर ढक गया।

लुफासा को लगा कि हनुका उस आग में जल गया होगा। पर जैसे ही आग समाप्त हुई, लुफासा को हनुका मुस्कुराता हुआ वहीं खड़ा दिखाई दिया।

“आप मुझ पर आग बरसा रहे हैं दैत्यराज।” हनुका ने हंसते हुए कहा- “चलिये पहले आप अपने मन की और भी इच्छाएं पूरी कर लीजिये, फिर बताता हूं आपको कि हनुका क्या चीज है?”

“यह कैसा जीव है? इस पर तो आग का बिल्कुल प्रभाव नहीं पड़ा।” लुफासा ने मन ही मन सोचा और इस बार अपना मुंह खोल हनुका पर बर्फ का सैलाब उगल दिया।

हनुका बर्फ के सैलाब से पूरा का पूरा बर्फ की चट्टान मे बदल गया, मगर फिर एक झटके से हनुका बर्फ को तोड़कर बाहर आ गया।

“यह नकली बर्फ थी और पूर्णतया अशुद्ध थी। मैं तो हजारों वर्षों तक असली बर्फ में सोता हूं। बर्फ से आप मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकते। कोई और शक्ति हो तो उसका प्रदर्शन करिये दैत्यराज?” हनुका ने हंसते हुए कहा।

लुफासा ने इस बार तेजी से आगे बढ़कर हनुका को अपने मुंह में भर लिया और अराका की ओर आगे बढ़ गया। अब लुफासा को अराका दिखाई देने लगा था। वह आसमान से नीचे की ओर उतरने लगा।

उधर ड्रैगन के मुंह में मौजूद हनुका के हाथ के नाखून आश्चर्यजनक ढंग से काफी बड़े हो गये।

हनुका ने अपने नुकीले नाखूनों से ड्रैगन का मुंह ही फाड़ डाला और बाहर आ गया।

मुंह फटने की वजह से ड्रैगन बुरी तरह से घायल हो गया। लुफासा ने यह देख, ड्रैगन के मरने के पहले ही, रुप बदल कर एक छोटी सी चिड़िया में परिवर्तित हो गया।

“अरे वह ड्रैगन की लाश कहां गायब हो गयी ?”

हनुका ने आश्चर्य से इधर-उधर देखा।

तभी हनुका को एक छोटी सी चिड़िया गुरुत्व शक्ति की डिबिया लिये आसमान से नीचे जाती हुई दिखाई दी।

यह देख हनुका का शरीर भी छोटा होकर चिड़िया के बराबर हो गया।

अब हनुका चिड़िया के बगल में उड़ता हुआ बोला- “अच्छा तो आप मायावी राक्षस हो और रुप बदलने की कला भी जानते हो। पर हे दैत्यराज, आप चाहे जितने भी रुप बदल लो, या फिर बड़े-छोटे हो जाओ, पर आप गुरुत्व शक्ति की डिबिया को छोटा-बड़ा नहीं कर सकते। इस प्रकार किसी भी रुप में मैं आपको पहचान जाऊंगा। पर अब मैं आप जैसे मूर्ख पर और समय नष्ट नहीं करुंगा।”

यह कहकर हनुका ने चिड़िया बने लुफासा को एक जोर का घूंसा जड़ दिया।

इतना शक्तिशाली घूंसा खाकर लुफासा पर बेहोशी छा गयी और गुरुत्व शक्ति की डिबिया उसके हाथों से छूटकर जमीन की ओर जाने लगी।

हनुका डिबिया को नीचे गिरता देख, तेजी से डिबिया के पीछे लपका, पर इससे पहले कि हनुका डिबिया को अपने हाथों से पकड़ पाता, वह बहुत तेजी से किसी अदृश्य दीवार से जा टकराया।

टक्कर बहुत भयानक थी। एक पल के लिये हनुका को कुछ समझ नहीं आया।

तभी वह डिबिया भी अदृश्य दीवार से टकरा कर खुल गयी और उसमें से गुरुत्व शक्ति निकलकर तेजी से जमीन की ओर बढ़ने लगी।

हनुका ने अदृश्य दीवार को हाथ से टटोलकर महसूस किया। अदृश्य दीवार को हाथ से छूते ही हनुका आश्चर्य से भर उठा-

“अरे यह तो माता की शक्तियां हैं, पर उनका तो पिछले 20000 वर्षों से कुछ पता नहीं है…… और वह इस अंजान द्वीप पर इतनी दूर कैसे पहुंची? मैं माता की शक्तियों से बने इस अदृश्य कवच को खंडित नहीं कर सकता और वैसे भी अब काफी देर हो चुकी है, अब तक तो गुरुत्व शक्ति भूमि पर गिरकर नष्ट भी हो गयी होगी। लगता है मुझे खाली हाथ ही वापस लौटना पड़ेगा।”

तब तक आसमान से लुफासा भी गायब हो गया था। अतः अनमने मन से हनुका खाली डिबिया को उठा हिमालय की ओर उड़ चला।

माया रहस्य

(19,110 वर्ष पहलेः दि ग्रेट ब्लू होल, बेलिज शहर के पास, कैरेबियन सागर)

सेण्ट्रल अमेरिका यानि कैरेबियन सागर के बेलिज शहर से 70 किलोमीटर दूर, लाइट हाऊस रीफ के पास स्थित है- दि ग्रेट ब्लू होल।

दि ग्रेट ब्लू होल, समुद्र के अंदर लगभग 300 मीटर के क्षेत्रफल में फैली, एक विशाल गोल गड्ढे की आकृति है।

यह विशालकाय गड्ढा पानी के अंदर कैसे बना? यह कोई नहीं जानता। इस गड्ढे का आकार इतना ज्यादा गोल है कि यह मानव निर्मित प्रतीत होता है।

124 मीटर गहरा यह अंडर वॉटर सिंकहोल, विश्व के सबसे खूबसूरत और रहस्यमयी क्षेत्रों में गिना जाता है।

समुद्र के अंदर की ओर इस गहरे गड्ढे में अनगिनत पहाड़ी गुफाओं का जाल सा बना है। किसी को नहीं पता कि इन गुफाओं में किस गुप्त शक्ति का वास है? इन्हीं अंजान गुफाओं के अंदर एक कमरे में कैस्पर, मैग्ना और माया बैठे थे।

“माँ, हमने आपके लिये समुद्र की लहरों पर एक खूबसूरत महल का निर्माण किया है।” मैग्ना ने कहा- “हम चाहते हैं कि अब आप इन गुफाओं से निकलकर हमारे साथ उस खूबसूरत महल में रहें।”

यह कहकर मैग्ना ने अपने हाथ में पकड़ा, रोल किया हुआ एक कागज खोलकर माया के सामने रख दिया।

कागज के टुकड़े पर एक चलता-फिरता महल का त्रिआयामी (3D) चित्र दिखाई दे रहा था।

माया ने एक बार ध्यान से महल को देखा और फिर मुस्कुराई।

तभी वातावरण में माया की आवाज गूंजी- “मुझे खुशी है कि तुम दोनों ने बिना किसी बाहरी मदद के, स्वयं से इतने सुन्दर महल की रचना की। मुझे लगता है कि मैंने तुम दोनों को विद्या देकर कोई गलती नहीं की।

पर....पर मैं तुम लोगों के साथ उस महल में रहने के लिये नहीं चल सकती।”

“क्यों माँ....आखिर ऐसी कौन सी मजबूरी है? जो आपको इन समुद्री गुफाओं से जोड़े हुए है।” कैस्पर ने माया से पूछा- “ऐसा क्या है जिसकी वजह से आप किसी से बात नहीं करतीं ?... किसी से भी मिलती नहीं हैं? आज तो आपको बताना ही पड़ेगा कि आपके इस प्रकार छिपकर समुद्र में रहने के पीछे क्या रहस्य है?”

यह सुनकर माया के चेहरे पर कुछ दर्द के भाव उभरे और फिर वातावरण में माया की आवाज उभरी- “ठीक है बेटा, मैं आज तुम दोनों को अपनी कहानी सुना ही देती हूं। शायद अब ये सबकुछ बताने का उचित समय भी है। तो फिर सुनो मैं तुम्हें आज हिं...दू धर्म की एक कहानी सुनाती हूं।”

“सनातन धर्म के बारे में आप हमें लगभग सबकुछ बता चुकी हैं” मैग्ना ने कहा- “यहां तक कि हम उनके देवी -देवताओं के बारे में भी सबकुछ जानते हैं। क्या आपकी कहानी उससे कुछ अलग है? या कुछ ऐसा है जिसके बारे में हम नहीं जानते?”

पर माया ने मैग्ना के सवालों का जवाब नहीं दिया, उसकी आवाज का गूंजना लगातार जारी था।

“जिधर से सूर्य उगता है, उस____ दिशा में तीन ओर से समुद्र, पहाड़ और बर्फ से घिरा एक उपमहाद्वीप है जिसे हम जम्बूद्वीप के नाम से जानते हैं, वहीं पर पृथ्वी की शुरुआत में ही इस धर्म का उदय हुआ था। इस धर्म के अनुसार पृथ्वी की उत्पत्ति ब्रह्म..देव ने अपने हाथों से की थी। पृथ्वी की उत्पत्ति के बाद ब्रह्म..देव ने मनुष्यों के निर्माण के बारे में सोचा।

इसके लिये उन्होंने बिना किसी स्त्री के, स्वयं के द्वारा कुछ मानसपुत्रों को जन्म दिया। इन्हीं प्रमुख 10 मानसपुत्रों से सृष्टि का प्रारम्भ हुआ। ब्रह्म..देव के एक मानसपुत्र का नाम ‘मरीचि’ था, जिन्हें ‘द्वितीय ब्रह्मा’ के नाम से भी जाना जाता है।

मरीचि के तीन पत्नियां थीं- संभूति, कला और ऊर्णा। मरीचि और कला से ‘कश्यप’ नामक पुत्र का जन्म हुआ। महर्षि कश्यप का विवाह प्रजापति दक्ष की 13 पुत्रियों से हुआ और इसी के साथ सृष्टि के हर जीव का प्रारम्भ हुआ।

महर्षि कश्यप की पहली पत्नि ‘अदिति’ से उत्पन्न हुए सभी पुत्र आदित्य यानि कि देवता कहलाये।

महर्षि कश्यप की दूसरी पत्नि ‘दिति’ से उत्पन्न हुए सभी पुत्र दैत्य कहलाये। इसी प्रकार महर्षि कश्यप की अन्य पत्नियों से बाकी जीवों का उत्पत्ति हुई।

महर्षि कश्यप और दिति के एक बलशाली पुत्र का नाम ‘मयासुर’ था। मयासुर को दैत्यराज भी कहा जाता था। मयासुर भगवान शि..व के बहुत बड़े भक्त थे। मयासुर ज्योतिष और खगोलविद् भी थे। प्रसिद्ध पुस्तक ‘सूर्य सिद्धान्तम’ की रचना मयासुर ने ही की थी। मयासुर के पास पत्थर को भी पिघलाकर आकार देने की शक्ति थी।

मयासुर को इतिहास में अपने एक से बढ़कर एक शहर की रचनाओं के लिए जाना जाता रहा है। एक बार जब देवताओं और दैत्यों के बीच युद्ध हुआ तो महा शि..व ने सारे दैत्यों को जलाकर राख कर दिया। तब मयासुर ने 12 वर्षों तक एक सूखे कुंए मे रहकर तप किया। जिसके फलस्वरुप महाशि..व ने सभी दैत्यों को पुनर्जीवन दान दिया।

जब मयासुर उस कुंए से निकलकर जाने लगे तो उनकी निगाह कुंए में बैठे 2 जीवों पर गई। वह जीव एक मेढकी और एक कोयल थी। दोनो ही जीव कालान्तर में किसी ना किसी श्राप से प्रभावित अप्सराएं थीं, जो कि 12 वर्ष तक मयासुर के साथ शि..व की तपस्या में रत थीं। मयासुर ने दोनों ही जीवों को वापस अप्सरा का रुप प्रदान कर, उन्हें अपनी पुत्री रुप में स्वीकार कर लिया। मयासुर ने मेढकी का नाम मन्दोदरी रखा और कोयल का नाम माया रखा।”

“इसका मतलब आप पहले अप्सरा थीं।” मैग्ना ने कहानी सुना रही माया को बीच में ही टोकते हुए कहा।

“हाँ , मेरा नाम पहले मणिका था, भगवान गणे..श को चिढ़ाने की वजह से उन्होंने मुझे श्राप देकर कोयल बना दिया था।” माया ने कहा और फिर कहानी सुनाना शुरु कर दिया-

“मयासुर ने मुझे और मन्दोदरी दोनों को वचन दिया कि वह हम दोनों का विवाह विश्व के सबसे बड़े शि..व भक्त और महायोद्धा से करेंगे।

मयासुर हम दोनों को ही अपनी कलाएं सिखाने लगे। कुछ वर्षों के बाद मयासुर को पता चला कि किसी महाबली ने शि..व के निवास स्थान कैलाश को भी उठाने की कोशिश की थी। मयासुर ने उस महाबली के बारे में पता किया।

वह महाबली लंका का राजा रावण था। मयासुर ने मन्दोदरी का विवाह रावण के साथ कर दिया। कुछ समय बाद उन्हें एक और महाबली शिवभक्त नीलाभ के बारे में पता चला। उन्होंने नीलाभ के साथ मेरा विवाह कर दिया।

विवाह के पश्चात मुझे पता चला कि नीलाभ समुद्र मंथन से निकले कालकूट नामक विष से उत्पन्न हुआ है, जिस वजह से वह अत्यन्त जहरीला है। अब मैं विवाहोपरांत नीलाभ से सम्बन्ध नहीं बना सकती थी।

तभी मुझे भगवान गणे..श के दिये श्राप का ध्यान आया। उन्होंने कहा था कि शादी के 20000 वर्षों तक मुझे पुत्र रत्न की प्राप्ति नहीं होगी। अब मैं काफी उदास रहने लगी।

नीलाभ ने कुछ दिनों के बाद हिमालय पर एक अद्भुत विद्यालय ‘वेदालय’ की रचना करने का निर्णय लिया, जिसमें पृथ्वी के अलग-अलग स्थानों से छात्र पढ़ने आते और वेदों के द्वारा शिक्षा ग्रहण करते।

मुझे नीलाभ का यह विचार बहुत पसंद आया। इसलिये मैंने 5 वर्षों तक कड़ी मेहनत कर हिमालय पर 15 विचित्र लोकों का निर्माण किया। निर्माण के बाद मैं वापस नीलाभ के महल में आ गयी, पर अब पुत्र के बिना मुझे बेचैनी सी महसूस होने लगी।

अंततः मैंने नीलाभ को चुपचाप छोड़कर जाने का निर्णय किया। एक रात जब नीलाभ सो रहा था, तो मैं चुपके से महल के बाहर आ गयी और सुदूर जंगलों में जा कर भगवान गणे…श की आराधना करने लगी।

800 वर्षों के अथक तप के बाद भगवान ने मुझे दर्शन दिये। मैंने उनसे पुत्र रत्न की कामना की। उन्होंने कहा कि मुझे 20000 वर्षों तक समुद्र के अंदर किसी गुप्त स्थान पर छिपकर रहना होगा और इन वर्षों के अवधि में प्रत्येक दिन विश्व के सबसे जहरीले नाग और नागिन का जहर रोज चखना होगा।

तब जाकर मेरा शरीर नीलाभ के योग्य बन जायेगा और मुझे पुत्र रत्न की प्राप्ति हो जायेगी। मैंने यह बात अपने पिता मयासुर को बतायी। यहां पर भाग्य ने मेरा साथ दिया क्यों कि विश्व का सबसे जहरीला नाग तक्षक मेरे पिता का दोस्त था।

तक्षक सहर्ष ही मुझे अपना विष देने को तैयार हो गया। अब मुझे तलाश थी एक ऐसे स्थान की जो पूर्णतया गुप्त हो और जहां मैं रहकर विष का सेवन कर सकूं। कुछ ही दिनों में मुझे यह स्थान मिल गया ।

मैंने यहां समुद्र की गुफाओं के अंदर अपना महल बनाने का विचार किया। एक दिन एक मनुष्य ने मुझे समुद्र के तट पर देख लिया। वह मुझे कोई देवी समझ मेरी पूजा करने लगा। अब उस मनुष्य को बचाना मेरा कर्तव्य बन गया।

मैंने पानी के तट के पास एक सभ्यता का निर्माण किया। जो बाद में मेरे नाम से ‘माया सभ्यता’ कहलायी। मैंने उस मनुष्य को ज्योतिष और खगोल विज्ञान सिखाया और देवी देवताओं के बारे में बताया।

मुझे इस स्थान पर अपना महल बनाने और माया सभ्यता को विकसित करने में 80 वर्ष लग गये। बाद में मैं इसी महल में आकर रहने लगी।

इन 80 वर्षों में मुझे विश्व की सबसे जहरीली नागिन मिल गयी थी और वह थी गार्गन फैमिली की 3 बहनों में से एक ‘यूरेल’। उस समय तक पर्सियस मेडूसा को मार चुका था। यूरेल मुझे अपना विष देने को तैयार हो गयी, पर एक शर्त के अनुसार मुझे उसके द्वारा दी गयी एक बच्ची को दुनिया से छिपा कर रखना था।

ऐसा वह क्यों कर रही थी? इसका मुझे पता ना चला। मैंने इस शर्त को स्वीकार कर लिया और उस बच्ची को लेकर अपने महल आ गयी। बच्चे वैसे भी मुझे पहले से ही पसंद थे। इस वजह से मैंने उस बच्ची को

अपनी बेटी की तरह पाला और उसका नाम मैग्ना रखा।”

“तो.... तो..... क्या मैं गार्गन परिवार की विषकन्या यूरेल की बेटी हूं?” मैग्ना ने आश्चर्य से पूछा।

“इस बारे में मुझे ज्यादा नहीं पता।” माया ने कहा- “इस बारे में तो तुम्हें यूरेल ही बता सकती है। उसने तुमसे 20 वर्ष तक यह राज छिपाने को भी कहा था।”

“तो अब मेरे बारे में भी बता दीजिये कि मैं कौन हूं?” कैस्पर ने आशा भरी नजरों से माया की ओर देखते हुए कहा।

“अभी इसका समय नहीं आया है कैस्पर।” माया ने कैस्पर की ओर देखते हुए कहा- “तुम्हें अभी थोड़ी और शक्तियां बटोरनी होंगी। उसके बाद ही मैं तुम्हें तुम्हारे बारे में बताऊंगी। अच्छा अब मेरी कहानी छोड़ो, तुम लोग कुछ अपने बारे में बताओ? अब आगे क्या करने का इरादा है तुम लोगों का?”

अचानक कैस्पर को पोसाईडन का ध्यान आया।

“माँ, क्या आप ग्रीक देवता पोसाईडन को भी जानती हो ?” कैस्पर ने माया से पूछा।

“थोड़ा-थोड़ा ही पता है, कुछ खास नहीं।” माया ने अपने चेहरे के भावों को छिपाते हुए कहा।

“माँ, पोसाईडन समुद्र के देवता हैं।” कैस्पर ने कहा- “कल वह हमारा महल देखने आये थे। महल देखकर वह बहुत खुश हुए। अब वह हमसे वैसा ही महल स्वयं के लिये बनवाना चाहते हैं। वह तो आपसे भी

मिलना चाहते थे, पर हमने मना कर दिया। क्या हमें उनका महल बनाना चाहिये?”

“तुम्हारी स्वयं की क्या इच्छा है कैस्पर?” माया ने उल्टा सवाल करते हुए कहा- “क्या तुम उनका महल बनाना चाहते हो?”

“देवताओं का सानिध्य हमेशा फलदायी होता है।” मैग्ना ने बीच में टोकते हुए कहा- “अगर हम उनका महल बनायेंगे तो हम हमेशा देवताओं की नजर में सुरक्षित रहेंगे।”

“हमेशा देवताओं की नजदीकी अच्छी नहीं होती मैग्ना।” माया ने एक गहरी साँस भरते हुए कहा- “ग्रीक देवताओं का कुछ पता नहीं रहता ? कि वह कब दोस्त से दुश्मन बन जायें और तुम पर ही हमला करने लगें।”

“मैं कुछ समझा नहीं ।” कैस्पर ने चकित होते हुए कहा- “क्या देवताओं की भविष्य में हमसे कोई दुश्मनी भी हो सकती है माँ ?”

“भविष्य को किसने देखा है, भविष्य में तो कुछ भी छिपा हो सकता है?” माया के शब्दों में रहस्य ही रहस्य नजर आ रहा था- “पर ठीक है अगर तुम लोगों ने पोसाईडन का महल बनाने का विचार कर ही लिया है,

तो एक बात ध्यान से अवश्य सुन लो।

तुम लोग देवताओं के लिये जिस भी प्रकार के भवन, महल, शहर या द्वीप का निर्माण करोगे, उसमें कुछ ना कुछ ऐसी शक्तियां जरुर छोड़ दोगे, जो किसी की भी जानकारी में नहीं रहेगी, परंतु समय पड़ने पर उस महल का अधिकार, उस गुप्त शक्ति की वजह से आसानी से तुम्हारे हाथ में आ जाये। तब मुझे तुम्हारे किसी भी निर्माण से कोई आपत्ति नहीं होगी।”

“ठीक है माँ, हम आजीवन आपकी इस बात का ध्यान रखेंगे।” मैग्ना ने कहा।

कैस्पर ने भी मैग्ना की बात पर अपनी सहमति जताई।

“चलो ! अब बातें काफी हो गयीं। मैंने तुम लोगों के लिये आज अपने हाथों से तुम्हारी पसंद का भोजन बनाया है। चलो उसे खाते हैं।”

माया यह कहकर कमरे के अंदर की ओर चल दी। कैस्पर और मैग्ना भी खुश हो कर माया के पीछे चल दिये।

जारी रहेगा_______✍️
 
#113.

चैपटर-3: स्पाइनो-सोरस

(11 जनवरी 2002, शुक्रवार, 14:45, मायावन, अराका द्वीप)

सुयश की टीम में सुयश को मिला कर अब सिर्फ 6 लोग ही बचे थे।

घास का मैदान पार करके अब सभी पहाड़ी रास्ते पर आ गये थे। पहाड़ी पर एक पतली पगडंडी पर इन्हें आगे बढ़ना पड़ रहा था। रास्ते में चढ़ान होने की वजह से सभी के चेहरे थके-थके से लग रहे थे।

एक तो पिछले कुछ दिनों से वह लगातार चल रहे थे, दूसरे उनके साथियों के मरने या फिर बिछड़ जाने के कारण उनके जोड़े भी टूट गये थे, जिससे उनका मनोबल कुछ टूट सा गया था।

एक शैफाली थी, जो अभी भी सबको बीच-बीच में कुछ ना कुछ कहकर उनका हौसला बढ़ाये हुए थी।

अलबर्ट को अपनी उम्र के कारण सबसे ज्यादा तकलीफ हो रही थी। उन्होंने शायद ही कभी अपनी जिंदगी में इतना चला होगा।

पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण पोसाईडन की मूर्ति कभी-कभी किसी मोड़ पर, दूर दिखाई दे जाती थी।

पथरीला रास्ता होने के कारण हरियाली भी थोड़ी कम हो गयी थी, जिसकी वजह से सभी को दिन में गर्मी भी ज्यादा लग रही थी। ये तो भला हो कि जंगल में पर्याप्त पानी मिल जाने से, सभी ने अपनी बोतलें पूरी भर ली थीं नहीं तो इतनी गर्मी में इन सबका एक कदम भी बढ़ा पाना मुश्किल हो जाता।

सभी अब पहाड़ की चोटी पर पहुंच गये थे। यहां पर बाकी रास्ते की अपेक्षा जगह कुछ ज्यादा थी। एक तरफ कुछ ऊंची-ऊंची चट्टानें थी, तो दूसरी ओर गहरी खाईं। गहरी खाईं की ओर एक विशाल छायादार पेड़ लगा था, जिसे देखकर अलबर्ट से रहा ना गया और वह बोल उठा-

“कैप्टेन! कुछ देर आराम कर लिया जाये। थकान बहुत ज्यादा हो रही है, अब एक कदम भी आगे बढ़ना मुश्किल लग रहा है।”

“आप ठीक कह रहे हैं प्रोफेसर।” सुयश ने भी सभी पर नजर डालते हुए कहा- “सभी थक गये हैं। हम कुछ देर यहां पर आराम करेंगे फिर आगे बढ़ेंगे। तब तक कुछ खा-पी भी लेते हैं।”

सुयश की बात सुन सबकी जान में जान आयी। सब वहीं पेड़ के नीचे एक पत्थर पर बैठ गये। क्रिस्टी ने बैग से कुछ फल निकालकर सभी में बांट दिये।

सबने फल खा के पेट भर पानी पिया और 10 मिनट आराम करने के लिये उसी पेड़ के नीचे लेट गये।

सुयश सबको लेटे देख एक ऊंची सी चट्टान की ओर चल दिया।

सुयश उस ऊंची सी चट्टान पर चढ़कर दूर-दूर तक देखने की कोशिश करने लगा।

तभी सुयश का पैर फिसल गया और वह जमीन पर गिर पड़ा। भला हो कि खाईं थोड़ी दूर थी, नहीं तो सुयश खाईं में भी गिर सकता था।

सुयश धीरे से खड़ा हो कर वापस नीचे दूर-दूर तक फैली हुई घाटी को देखने लगा। पर सुयश के फिसलने से एक बड़ा सा पत्थर पहाड़ से नीचे की ओर गिर गया।

वह पत्थर लुढ़कता हुआ उस पहाड़ के दूसरी ओर के रास्ते में सो रहे एक विशाल डायनासोर पर गिरा।

पत्थर के शरीर पर लगते ही डायना सोर ने अपनी आँखें खोल दी।

उसने एक क्षण के लिये अपनी नाक को ऊपर उठा कर सूंघा और उठकर खड़ा हो गया।

सुयश का ध्यान इस समय दूसरी ओर था, तभी सुयश के पीछे एक विशालकाय 2 आँखें दिखाई दीं। वह आँखें अकेली नहीं थीं, उनके साथ भारी-भरकम शरीर लिये वही डायनोसोर भी था।

हांलाकि डायनोसोर पहाड़ के दूसरी ओर था, फिर भी उसकी ऊंचाई अधिक होने के कारण वह जेनिथ को दिखाई दे गया।

डायनासोर को देखकर जेनिथ के मुंह से चीख निकल गयी। जेनिथ की चीख सुन सभी का ध्यान उस चट्टान की ओर गया, जिस पर सुयश इस समय खड़ा था।

अब सभी चीखकर सुयश को वहां से भागने के लिये बोलने लगे। सभी को चीखते देख सुयश पीछे पलटा। पीछे पलटते ही उसके सारे रोंगटे खड़े हो गये। डायनासोर अपनी बड़ी-बड़ी आँखों से उसी को घूर रहा था।

सुयश ने धीरे से डायनासोर को देखते हुए अपने कदमों को पीछे करने की कोशिश की। तभी डायनासोर के मुंह से एक तेज गुर्राहट निकली, अब उसने अपने बड़े-बड़े दाँत दिखाकर सुयश को डराने की कोशिश की।

उसका एक दाँत ही सुयश से बड़ा दिख रहा था। डायनासोर ने अपना मुंह तेजी से सुयश की ओर बढ़ाया, पर सुयश पूरी ताकत लगा कर उस चट्टान से कूद गया। डायनोसोर अपने शिकार को भागता देख, दूसरी ओर से उस चट्टान पर चढ़ने की कोशिश करने लगा।

“नक्षत्रा !” जेनिथ ने अपने मन में नक्षत्रा पुकारा- “क्या तुम इस समय कोई मदद करके हमें बचा सकते हो?”

“मैं एक दिन में सिर्फ आधा घंटा ही समय को रोकना सीख पाया हूं।” नक्षत्रा ने कहा- “पर इस आधे घंटे में तुम सबको उठाकर यहां से भाग नहीं सकती। अब रही बात इस डायनासोर की, तो तुम्हें यह बता दूं कि इस डायनासोर को स्पाइनोसोरस कहते हैं। यह सभी डायनासोर का राजा है।

यह उन सबमें सबसे बड़ा भी होता है। यह पानी और जमीन दोनों पर ही शिकार कर सकता है। इसके सूंघने की शक्ति भी बहुत ज्यादा है, इसलिये तुम किसी को कहीं छिपा भी नहीं सकती। अब बची बात इसे मारने की, तो वह भी संभव नहीं है क्यों कि तुम इतने बड़े स्पाइनोसोरस को बिना किसी हथियार के कैसे मार पाओगी? हां अगर तुम सिर्फ स्वयं बचना चाहो तो आधे घंटे में यहां से दूर भाग सकती हो, जिससे यह स्पाइनोसोरस तुम्हारी गंध नहीं सूंघ पायेगा।”

“असंभव!” जेनिथ ने नक्षत्रा से कहा- “मैं यहां से किसी को भी छोड़कर नहीं भागने वाली। तुम एक काम करना नक्षत्रा, फिलहाल जैसे मैं तुम्हें इशारा करुं, तुम बस समय को रोक देना, बाकी मैं स्वयं से देखती हूं

कि इस स्पाइनोसोरस से कैसे निपटना है?”

तब तक सुयश भागकर, बाकी सभी लोगों के पास आकर, दूसरी चट्टान के पीछे छिप गया।

“कैप्टेन!” अलबर्ट ने डरते-डरते कहा- “यह तो स्पाइनोसोरस है। यह तो लाखों वर्ष पहले ही विलुप्त हो गया था। हे भगवान कैसा है यह द्वीप? अब हम इतने बड़े खतरे से कैसे निपटेंगे?”

“शांत हो जा इये प्रोफेसर, नहीं तो वह हमारी आवाज सुन लेगा।” क्रिस्टी ने कहा।

उधर स्पाइनोसोरस चट्टान पर चढ़ने में कामयाब हो गया। अब वह चट्टान के आसपास सुयश को ढूंढने लगा। जेनिथ जानती थी कि ज्यादा देर तक वह छिपे नहीं रह पायेंगे। वह तेजी से इधर-उधर देखते हुए, स्पाइनोसोरस से बचने के लिये अपना दिमाग चला रही थी।

हथियार के नाम पर तौफीक के पास बस एक चाकू बचा था, पर उससे कुछ नहीं होना था।

चट्टान पर चढ़ा स्पाइनोसोरस अब अपनी नाक उठाकर हवा में कुछ सूंघने की कोशिश करने लगा।

कुछ ही देर में स्पाइनोसोरस को उनकी गंध मिल गयी, अब वह तेजी से चट्टान से उतरने की कोशिश करने लगा।

तभी उसके भारी-भरकम शरीर की वजह से एक बड़ा सा पत्थर हवा में उछला और क्रिस्टी की ओर बढ़ा।

“नक्षत्रा ! समय को रोक दो।” जेनिथ ने एक सेकेण्ड से भी कम समय में नक्षत्रा को समय रोकने के लिये कहा।

नक्षत्रा ने समय को रोक दिया। अब जेनिथ के आसपास की हर चीज फ्रीज हो गयी थी। वह पत्थर क्रिस्टी के बिल्कुल सिर के पास पहुंच गया था, अगर नक्षत्रा एक सेकेण्ड की भी देरी कर देता तो क्रिस्टी का सिर फट जाना था।

जेनिथ ने क्रिस्टी को पकड़कर दूसरी ओर खींचा और नक्षत्रा को समय रिलीज करने को बोल दिया।

उछला हुआ पत्थर क्रिस्टी के बगल में आकर गिरा। क्रिस्टी को लगा जैसे उसे किसी ने पकड़कर खींचा हो।

“यहां पर और भी कोई है?” क्रिस्टी ने फुसफुसा कर सभी से कहा- “मुझे अभी किसी ने पकड़कर खींचा है। अगर वह शक्ति ऐसा ना करती तो मैं तो मर ही जाती।”

सुयश, अलबर्ट और तौफीक ने अपनी दृष्टि चारो ओर दौड़ाई, पर उन्हें कोई नजर नहीं आया।

अभी आश्चर्य व्यक्त करने का समय भी नहीं था, क्यों कि स्पाइनोसोरस अब चट्टान से नीचे आ गया था और फिर से उन्हें सूंघने की कोशिश कर रहा था।

अब वह स्पाइनोसोरस उनसे ज्यादा दूरी पर नहीं था। तभी जेनिथ ने नक्षत्रा को फिर से समय फ्रीज करने को कहा। नक्षत्रा के समय फ्रीज करते ही जेनिथ ने तौफीक के हाथ से चाकू को छीना और भागकर स्पाइनोसोरस के नीचे पहुंच गयी।

अब उसने चाकू से स्पाइनोसोरस के पिछले दोनों पैर को घायल कर दिया और भागकर वापस अपनी जगह पर आकर समय को रिलीज कर दिया।

सुयश सहित सभी की निगाहें स्पाइनोसोरस पर थीं। अचानक स्पाइनोसोरस के पिछले दोनों पैर से खून निकलने लगा और वह लहरा कर धड़ाम से जमीन पर गिर गया।

तभी जेनिथ ने फिर से समय को फ्रीज किया और भागकर गिरे पड़े स्पाइनोसोरस पर चढ़कर, चाकू से उसकी गर्दन पर वार करने लगी। पर स्पाइनोसोरस के गर्दन के पास की त्वचा काफी कठोर थी और

जेनिथ का हाथ बहुत कोमल था, इसलिये चाकू के वार से स्पाइनोसोरस की गर्दन पर कुछ छोटी-मोटी खरोंच ही आ रहीं थीं।

यह देख जेनिथ ने समय ना बर्बाद करते हुए, एक-एक कर स्पाइनोसोरस की दोनों आँखें फोड़ दीं और सबके पास पहुंचकर समय को फिर रिलीज कर दिया।

स्पाइनोसोरस के जमीन पर गिरते ही एक-एक कर, उसकी दोनों आँखें फूट गयीं और उनसे खून की धारा बह निकली। किसी की कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि स्पाइनोसोरस को नुकसान कौन पहुंचा रहा है?

आँख के फूट जाने की वजह से स्पाइनोसोरस और खतरनाक हो गया। वह जोर से चिल्लाया और अपनी पूंछ को जमीन पर इधर-उधर पटकने लगा।

स्पाइनोसोरस के ऐसा करने से उसके आसपास के पेड़ टूट-टूट कर जमीन पर गिरने लगे। जेनिथ के पास अब समय रोकने के लिये 15 मिनट ही बचा था। अब उस स्पाइनोसोरस से निपटने के लिये जेनिथ को किसी ठोस प्लान की आवश्यकता थी।

तभी जेनिथ की निगाह खाईं के पास लगे उस पेड़ की एक बहुत ही लचीली, मगर मजबूत शाख पर गयी। जेनिथ के दिमाग में तुरंत एक विचार कौंधा।

उसने समय को एक बार फिर से फ्रीज किया और सुयश की पीठ पर रखे बैग में से एक खाली बैग निकाल लिया। जेनिथ ने जल्दी-जल्दी उस खाली बैग में पेड़ की सूखी पत्तियां भर दीं और उसे खाईं के पास पेड़ के नीचे रख दिया। अब जेनिथ ने उस लचीली शाख को पूरी ताकत लगा कर खींचा और एक जड़ के सहारे उसे पेड़ के एक तने से बांध दिया।

“जेनिथ जल्दी करो अब बस 5 मिनट ही बचा है।" नक्षत्रा ने कहा- “मैं आज समय को इससे ज्यादा नहीं रोक सकता।"

“हां... हां बस हो गया।” इतना कहकर जेनिथ ने चाकू से अपना हाथ एक जगह से काट लिया और अपने खून की बूंदें, पेड़ के नीचे रखे उस काले बैग पर गिराने लगी।

अब जेनिथ के खून से बैग लाल हो गया था। जेनिथ भागकर वापस सभी के पास पहुंची और फर्स्ट एड बॉक्स खोलकर अपने हाथ पर एक दवा छिड़क लिया। दवा की तेज गंध वातावरण में फैल गयी।

अभी भी 2 मिनट का समय शेष था। तभी जेनिथ ने नक्षत्रा को समय को रिलीज करने को बोला।

समय के रिलीज होते ही स्पाइनोसोरस गुस्से में उठ खड़ा हुआ। अंधा हो जाने की वजह से उसे कुछ दिखाई नहीं दे रहा था, इसलिये वह हवा में जोर-जोर से कुछ सूंघने लगा।

अब उसे जेनिथ के खून की गंध मिल गयी थी और वह लंगड़ाते हुए पेड़ के नीचे रखे उस काले बैग की ओर बढ़ने लगा। जैसे ही स्पाइनोसोरस खाईं के पास रखे उस काले बैग के पास पहुंचा, जेनिथ फिर समय रोककर तेजी से उस पेड़ के पास पहुंची और चाकू के एक वार से उसने पेड़ से बंधी जड़ों को काट दिया।

जड़ों के काटते ही जेनिथ वापस भागकर सबके पास पहुंच गयी और उसने समय को फिर से रिलीज कर दिया। समय को रिलीज करते ही वह लचीली डाल तेजी से हवा में लहराई और ‘सटाक’ की आवाज करती हुई स्पाइनोसोरस से जा टकराई।

स्पाइनोसोरस इस वार को झेल नहीं पाया और लड़खड़ा कर खाईं की ओर गिरने लगा।

आखिरी समय पर स्पाइनोसोरस ने अपने अगले पैरों को पत्थर में फंसा कर स्वयं को खाईं में गिरने से बचा लिया।

सुयश, तौफीक, शैफाली और क्रिस्टी को कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था, पर स्पाइनोसोरस को ना गिरता देख जेनिथ की साँस जरुर रुक गयी। क्यों कि अब उसके पास सबको बचाने का कोई तरीका नहीं बचा था।

तभी जेनिथ की निगाह अपने हाथ में पकड़े चाकू की ओर गयी।

उसने एक पल भी ना सो चा और तेजी से भागती हुई खाईं में लटके डायनासोर के पास पहुंच गई।

इससे पहले कि खाईं में लटका स्पाइनोसोरस वापस ऊपर चढ़ पाता, जेनिथ ने उसके आगे के दोनों पैरों पर चाकू से तेज वार करने शुरु कर दिये।

स्पाइनोसोरस के पैर से खून का फव्वारा निकला और असहनीय दर्द की वजह से स्पाइनोसोरस ने अपने पैरों की पकड़ को ढीला कर दिया। इसी के साथ स्पाइनोसोरस एक गुर्राहट के साथ पहाड़ से नीचे गिर

गया।

जेनिथ इन सब कामों से इतना थक गयी थी कि वहीं पेड़ के पास ही जमीन पर लेट गयी। स्पाइनोसोरस को नीचे गिरता देख सभी भागकर जेनिथ के पास आ गये।

तौफीक की आँखों में जेनिथ के लिये बेइन्तहा आश्चर्य के भाव थे। कोई यकीन भी नहीं कर पा रहा था कि जेनिथ चाकू लेकर स्पाइनोसोरस को पहाड़ के नीचे गिरा देगी।

“तुम ठीक तो होना जेनिथ?” तौफीक ने जमीन पर लेटी हुई जेनिथ के हाथ से चाकू लेते हुए पूछा।

जेनिथ ने धीरे से अपना सिर हां में हिला दिया।

“वाह जेनिथ दीदी ! आपने तो कमाल ही कर दिया।” शैफाली ने जेनिथ की ओर पानी की बोतल को बढ़ाते हुए कहा।

सुयश की आँखों में भी जेनिथ के लिये तारीफ के भाव उभरे, पर उन आँखों में कुछ सवाल भी थे? जैसे ही जेनिथ पानी पीकर थोड़ा नार्मल हो गई, सुयश ने उस पर सवालों की बौछार कर दी-

“अगर हम शुरु से इस घटना के बारे में बात करें तो स्पाइनोसोरस के हमला करते ही क्रिस्टी के

सिर पर जब पत्थर गिरने वाला था, तो किसी अदृश्य शक्ति ने उसे बचाया, फिर हमारी ओर आ रहे स्पाइनोसोरस के पैर से अचानक खून निकलने लगा, फिर उसकी आँखें भी अपने आप फूट गयीं। इसके बाद हमारा काला बैग उसी अदृश्य शक्ति ने खाईं के किनारे रखकर, स्पाइनोसोरस के ऊपर लचीली पेड़ की डाल से हमला किया। यह सभी बातें ये शो कर रहीं हैं कि यहां पर हम लोगों के अलावा भी कोई था? क्या तुम्हें उसके बारे में कुछ पता है जेनिथ?”

“अभी किसी से मेरे बारे में कुछ भी मत बताना जेनिथ।” नक्षत्रा ने जेनिथ को सावधान किया।

“नहीं मुझे इस बारे में कुछ नहीं पता?” जेनिथ ने सुयश को जवाब दिया- “मैंने तो आखिर में स्पाइनोसोरस पर चाकू से हमला किया बस इससे ज्यादा मुझे कुछ नहीं पता।”

“तो फिर तुम्हारे हाथ में मेरा चाकू कैसे आया ?” तौफीक ने शंकित निगाहों से जेनिथ को घूरते हुए पूछा- “मैंने तो तुम्हें अपना चाकू दिया भी नहीं था।”

“मुझे भी नहीं पता कि मेरे हाथ में तुम्हारा चाकू कब और कैसे आया ?” जेनिथ ने सफाई देते हुए कहा।

“तुम्हा रे हाथ पर यह पट्टी क्यों बंधी है?” सुयश ने पूछा- “इस पर से दवा की खुशबू भी आ रही है। हमने तो तुम्हें चोट लगते या पट्टी बांधते नहीं देखा।”

“यह पट्टी मेरे हाथ में कैसे बंधी ? मुझे भी इसकी कोई जानकारी नहीं है?” कहकर जेनिथ ने अपने हाथ में बंधी पट्टी को खोल दिया। उसे लगा कि अब सभी उसके हाथ की चोट के बारे में जान जायेंगे।

पर पट्टी खोलते ही वह स्वयं आश्चर्यचकित हो गई। उसके हाथ पर कोई भी घाव नहीं था।

“ज्यादा आश्चर्य मत व्यक्त करो दोस्त।” नक्षत्रा ने कहा- “मैंने तुमसे कहा था कि समय आने पर मैं तुम्हें अपनी कुछ और शक्तियों के बारे में बता दूंगा। तो ये है मेरी एक और शक्ति, जिसमें मैं तुम्हारे शरीर को

नुकसान होने पर उन पर उभरे घावों को भी भर सकता हूं।” जेनिथ यह सुनकर खुश हो गई।

“मुझे लगता है कि कोई अदृश्य शक्ति हम लोगों के साथ है? जो कि समय-समय पर हमें अंजाने खतरों से बचा रही है।” अलबर्ट ने कहा-“और वह शक्ति बहुत तेजी से कार्य करती है, जिससे हम उसको देख नहीं

पाते, बस उसे अपने आसपास महसूस कर पाते हैं।”

“आप सही कह रहे हैं प्रोफेसर।” सुयश ने कहा- “मुझे भी कुछ ऐसा ही लगता है।”

“ऐ अदृश्य शक्ति, हमें ऐसे ही अंजान खतरों से बचाते रहना और हमारा मार्गदर्शन करते रहना। हम सदैव तेरे आभारी रहेंगे।” क्रिस्टी ने आसमान की ओर हाथ जोड़कर अदृश्य शक्ति को धन्यवाद दिया।

इसके बाद सभी पुनः आगे की ओर बढ़ गये।

जारी रहेगा..........
 
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