Fantasy 'सुप्रीम' एक रहस्यमई सफर - Page 12 - SexBaba
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Fantasy 'सुप्रीम' एक रहस्यमई सफर

#74.

“सही कहा शैफाली ने।" सुयश ने ऐमू को देखते हुए कहा- “अभी ऐमू से आगे हमें और भी चीजे पता चल सकती हैं।"

“पर जाने क्यों मुझे इस ऐमू से बहुत डर लग रहा है।" जॉनी ने ऐमू को घूरते हुए कहा।

“जो डर गया...वो मर गया....ऐमू नहीं डरा.... ऐमू बच गया।" ऐमू ने जॉनी को चिढ़ाते हुए कहा।

ऐमू की बात सुनकर सभी के चेहरे पर मुस्कान आ गयी।

सभी अब सामान्य सी बातचीत करते हुए आगे की ओर बढ़ गये। पर ऐसे में भी कुछ लोगो को इस सफर

से कोई खास परेशानी नहीं हो रही थी।

जैसे अल्बर्ट हर पेड़ और पत्तियों को ध्यान से देखता हुआ चल रहा था। उसके लिये इस सफर में इतना कुछ था, जितना कि उसने अपनी पूरी जिंदगी में नहीं देखा था।

एलेक्स और क्रिस्टी को भी इस सफर में अब कोई परेशानी महसूस नहीं हो रही थी। वो दोनो एक दूसरे को छेड़ते हुए पूरे सफर पर एन्जॉय कर रहे थे।

“एलेक्स!"

क्रिस्टी ने एलेक्स की ओर देखते हुए शरारत भरे अंदाज में कहा- “क्या तुम्हें जंगल पसंद हैं?"

“बिल्कुल!”

एलेक्स ने जवाब दिया- “मुझे तो यह जंगल बहुत पसंद आ रहा है। मेरा तो मन यहीं बसने का कर रहा है। शहर के धूल और धुंए से हटकर स्वच्छ वातावरण में रहना।"

“हां ठीक कहा।"

क्रिस्टी ने हंसकर कहा- “तुम्हारे अंदर कुछ गुण भी जंगली जैसे हैं। जैसे पेड़ पर चढ़ना। बंदर से खूब पटरी खायेगी तुम्हारी, इसी खूबी की वजह से। और हां यहाँ पर किसी जंगली लड़की से शादी करके सेटल भी हो जाना।"

“एक मिनट अपने नाखून दिखाना।" एलेक्स ने बड़ा सीरियस होकर क्रिस्टी से कहा।

क्रिस्टी ने अपने दोनों हाथो को एलेक्स के आगे फैलाकर ना समझते हुए कहा- “नाखून क्यों?"

एलेक्स की नजर क्रिस्टी के लंबे और खूबसूरत गुलाबी नाखूनो पर गयी।

“नाखून तो तुम्हारे भी जंगली के जैसे हैं।"

इस बार एलेक्स ने क्रिस्टी का मजाक उड़ाया- “पर चेहरा जंगली के जैसा नहीं है। पर तुम चिंता ना करो, कुछ दिन जंगल में रहने के बाद तुम जंगली जैसी लगने लगोगी, फिर मैं तुम्हीं से शादी करके इस जंगल में सेटल हो जाऊंगा।"

सभी चुपचाप चलते हुए एलेक्स और क्रिस्टी की बातों का मजा लेकर मुस्कुरा रहे थे।

धीरे-धीरे छोटे पेड़ ख़तम होने लगे और अब उसकी जगह बड़े और विशालकाय पेडों का सिलसिला शुरू हो गया।

क्रिस्टी ने एक नजर उन घने पेडों पर मारी और फिर बोल उठी-

“एलेक्स क्या तुम इस पेड़ पर घर बना सकते हो? मुझे ट्री-हाउस बहुत अच्छे लगते हैं।" कहते-कहते क्रिस्टी एक घने पेड़ के पास पहुंच गयी।

सुयश की नज़रो एक क्षण के लिए क्रिस्टी पर पड़ी। उसे क्रिस्टी के पीछे वाली पेड़ की जड़ धीरे-धीरे हिलती नजर आयी। सुयश को तुरंत खतरे का अहसास हुआ और वह क्रिस्टी की ओर भागा।

किसी को कुछ समझ में नहीं आया कि क्या हुआ? सुयश ने क्रिस्टी का हाथ पकड़कर अपनी ओर खींचा।

क्रिस्टी को एक झटका लगा और वह बाकी खड़े लोगों की तरफ जमीन पर गिर गयी।

मगर सुयश क्रिस्टी को खींचने के चक्कर में पेड़ के और पास पहुंच गया।

अचानक उस पेड़ की एक जड़ में हरकत हुई और वह तेजी से सुयश के दांये पैर में लिपट गयी।

“आदमखोर पेड़!" अल्बर्ट जोर से चीखा- “ये सब आदमखोर पेड़ हैं। इनसे बच कर रहो।"

अल्बर्ट की आवाज सुनते ही सभी उन आदमखोर पेडों से दूर हो गये। क्रिस्टी को एलेक्स ने सहारा देकर दूर कर लिया।

पेड़ की पकड़ सुयश के पैरों पर बहुत तेज थी। सुयश छूटने की भरसक कोशिश कर रहा था।

अब पेड़ की कुछ शाखाओं ने भी सुयश को पूरी तरह से जकड़ लिया। वह शाखाएं धीरे-धीरे अब सुयश का खून चूसने लगी।

सुयश को अपने शरीर पर सुइयां चुभने जैसा अहसास होने लगा। वह दर्द से कराह उठा- “आहऽऽऽऽ!"

यह देख तौफीक और ब्रैंडन चाकू निकालकर उस पेड़ की ओर बढ़ने लगे।

“रुक जाओ।" तभी सुयश की आवाज गूंजी- “मेरे पास कोई नहीं आयेगा। अगर मुझे बचाने कोई आयेगा, तो यह पेड़ उसे भी अपना शिकार बना लेगा। आहऽऽऽऽऽ।"

सुयश की आवाज सुन तौफीक और ब्रैंडन अपनी जगह पर रुक गये।

“छोड़ दे गंदे पेड़, ऐमू के दोस्त को छोड़ दे।" यह कहकर ऐमू अपनी चोंच से पेड़ की डाल पर प्रहार

करने लगा।

परंतु भला ऐमू की चोंच से पेड़ पर क्या असर पड़ने वाला था।

तभी ब्रूनो तेजी से आगे बढ़ा और सुयश के शरीर से लिपटी, पेड़ की डाली को अपने दांतो से नोचने की कोशिश करने लगा।

मगर पेड़ की पकड़ इतनी सख्त थी कि ब्रूनो भी कुछ नहीं कर पा रहा था।

असलम ने तुरंत सिग्नल-फ्लैयर गन निकालकर, उसमें एक फ्लैयर फिट किया और वह गन तौफीक के हाथो में पकड़ा दी।

तौफीक ने निशाना लगाकर पेड़ पर फायर कर दिया। पर जैसे ही फ्लैयर पेड़ के पास पहुंचा, पेड़ की एक डाली हरकत में आयी और वह पास आ रहे सिग्नल-फ्लैयर से जोर से टकरायी।

सिग्नल-फ्लैयर एक झटके से दूर जाकर गिरा।

अब तौफीक ने एक नजर असलम और ब्रैंडन पर मारी। जैसे वह पूछने की कोशिश कर रहा हो कि अब क्या करना है?

उधर सुयश की चीखे बढ़ती जा रहीं थी। और असलम के पास भी अब आखरी फ्लैयर बचा था।

ब्रैंडन ने धीरे से इशारा कर असलम से वह आखरी फ्लैयर भी देने को कहा। असलम ने आखरी फ्लैयर भी तौफीक के हाथ पर रख दी।

तौफीक ने तुरंत आखरी फ्लैयर को अपने गन में लोड किया और पेड़ पर निशाना लगा कर फायर कर दिया।

पर पुनः वही घटना हुई। पेड़ की डाल ने भी पुनरावृति करते हुए इस फ्लैयर को भी दूर उछाल दिया।

तौफीक ने सिग्नल-फ्लैयर ख़तम होते देख गुस्से से गन को ही पेड़ पर खींच कर मार दिया, पर खाली गन से पेड़ का क्या होने वाला था।

तभी अल्बर्ट ने पास पड़ी कुछ लकडियों को लाइटर से जला लिया और सुयश को बचाते हुए, उसे एक-एक कर पेड़ की ओर फ़ेकने लगे।

पर पता नहीं क्यों उस आग से पेड़ पर कोई फर्क नहीं पड़ रहा था।

अब किसी के भी पास कोई ऐसा उपाय नहीं सूझ रहा था जिसके द्वारा सुयश को बचाया जा सके।

इस बार शैफाली भी कुछ नहीं कर पा रही थी। वह बेबस सी नम आँखो से सुयश को निहार रही थी।

उधर ब्रूनो और ऐमू के प्रयास भी निरर्थक लग रहे थे।

अचानक ‘चर्र..-चर्र.. की आवाज के साथ सुयश की शर्ट पीठ के पास से फट गयी।

जिसके कारण सुयश की पीठ पर बना सुनहरे रंग का सूर्य का टैटू चमकने लगा।

युगाका भी दूर से इस पूरे घटनाक्रम को देख रहा था। सुयश के चमकते टैटू को देख युगाका की आँखे आश्चर्य से सिकुड गयी।

उधर सुयश की चीखे अब बढ़ती जा रही थी।

ब्रूनो तब तक गुस्से से पेड़ की छाल को काफ़ी जगह से नोच चुका था, पर पेड़ की डाल जाने क्यों ब्रूनो और ऐमू को कुछ नहीं कर रही थी।

सूर्य की किरणें उन घने पेडों के बीच से कहीं-कहीं पर छनकर आ रही थी।

तभी सूर्य की एक पतली किरण सुयश की पीठ पर बने उस सुनहरे टैटू पर जा पड़ी।

सूर्य की किरणें पड़ते ही टैटू की चमक और बढ़ गयी। अब टैटू बहुत तेज सुनहरी किरणें बिखेरने लगा।

सभी यह नजारा देख आश्चर्य से भर उठे।

सुयश के टैटू से एक सुनहरी किरण निकली और उस पेड़ को अपने घेरे में ले लिया।

सुनहरी किरणें के घेरे में आते ही पेड़ की पकड़ सुयश पर ढीली पड़ गयी।

यह देख अल्बर्ट जोर से चिल्लाया- “कैप्टन, भागो वहां से, आप पेड़ की पकड़ से छूट गये हो।"

सुयश लगभग निढाल हो चुका था, परंतु अल्बर्ट की आवाज ने जैसे उसके शरीर में रक्त का नया संचार कर दिया हो।

सुयश तुरंत उठकर पेड़ की पकड़ से दूर हो गया। उसके साथ ब्रूनो और ऐमू भी पेड़ के पास से हट गये।

सुनहरी रोशनी ने अभी भी पेड़ को जकड़ा हुआ था।

तभी ‘भक्क’ की आवाज के साथ उस पेड़ में आग लग गयी।

आदमखोर पेड़ अब ‘धू-धू’ करके जल उठा।

सुयश ने यह पूरी घटना नहीं देखी थी। उसे नहीं पता था कि पेड़ में आग कैसे लग गयी।

जब सुयश थोड़ा सा बेहतर दिखा तो अल्बर्ट ने उसे सारी बातें बता दी।

सभी की नजरे अब सुयश की पीठ पर बने टैटू पर थी। गोल आग फेंकता हुआ सूर्य वाला टैटू सुयश की पीठ पर अभी भी चमक रहा था।

“कैप्टन, यह आपकी पीठ पर बना टैटू सुनहरा कैसे हो गया?" ब्रेंडन ने सुयश से पूछा- “यह तो काले रंग का था।"

“सुनहरा!“

सुयश ने आश्चर्य से कहा- “लेकिन मेरा टैटू तो काले रंग का ही है।"

“क्या बात कर रहे हैं कैप्टन?"

अल्बर्ट ने आश्चर्य से कहा- “आपकी पीठ पर लगभग 8 इंच डायामीटर

का सुनहरा टैटू ही बना है। आपके कहे अनुसार अगर यह काले रंग का था तो सुनहरा कैसे हो गया?"

यह बात किसी की समझ में नहीं आयी।

तभी शैफाली बोल उठी- “मुझे ऐसा लगता है कि जिस समय आपने देवी शलाका की मूर्ति को स्पर्श किया था, उस समय उन सातों खंभो से अलग-अलग रंग की किरण निकलकर आप पर पड़ी थी। शायद उसी के प्रभाव से आपका टैटू सुनहरा बन गया है।"

“तुम कहीं यह तो नहीं कहना चाहती शैफाली?“

क्रिस्टी ने कहा- “कि देवी ने अपनी कुछ शक्तियां कैप्टन के टैटू में डाल दी हैं? इसी वजह से इस टैटू ने कैप्टन के प्राणों की रक्षा की है।"

“हो भी सकता है।"

अल्बर्ट ने कहा- “पर जो भी है, अब तो यह श्योर है कि यह सुनहरा टैटू अपने अंदर कुछ शक्तियां तो अवश्य रखे है।"

“एक बात और प्रोफेसर, वह पेड़ ब्रूनो और ऐमू को कुछ नहीं कर रहा था।" एलेक्स ने कहा।

“हो सकता है कि यहां के पेड़ जानवरों को कुछ ना कहते हो?" अल्बर्ट ने अपने विचार व्यक्त किये।

उधर पेड़ में लगी आग ने, आश्चर्यजनक तरीके से केवल उसी पेड़ को जलाया, जो सुयश को पकड़े था। उस पेड़ के जलने के बाद वह आग भी गायब हो गयी।

तौफीक ने अपना जैकेट उतारकर सुयश को पहना दिया। अब सभी फ़िर से आगे की ओर बढ़ गये।

जारी रहेगी_______✍️
 
#75.

सुनहरे मानव का रहस्य (आज से 3 दिन पहले.... 5 जनवरी 2002, शिनवार 12:15, सीनोर राज्य, अराका)

रोजर आकृति के दिये हुए कमरे में पिछले 4 दिन से बोर हो रहा था।

आकृति ने अभी तक उसे कोई काम भी नहीं बताया था।

आकृति ना तो उसे कमरे से निकलने दे रही थी और ना ही कोई काम बता रही थी।

आकृति बस पूरे दिन भर में एक बार उससे मिलने आती थी और वह भी केवल 5 मिनट के लिये।

आज रोजर ने सोच रखा था कि वह आकृति से कहेगा कि या तो काम बता दो या फ़िर उसे बाहर जाने दो।

तभी दरवाजे की आवाज ने रोजर की सोच पर विराम लगाया।

आने वाली आकृति ही थी।

इससे पहले की रोजर आकृति को कुछ बोल पाता, वह स्वयं ही रोजर से बोल पड़ी- “रोजर तैयार हो जाओ, अब सुप्रीम पर जाने के लिये।“

रोजर यह सुनकर बहुत खुश हो गया। वह फौरन बिस्तर से उठा और एकदम चाक चौबंद नजर आने लगा।

लेकिन इससे पहले कि आकृति कुछ कर पाती, तभी कमरे के दरवाजे से एक चूहा और बिल्ली भागते हुए अंदर प्रविष्ट हुए।

आकृति यह देखकर कि कर चूहा और बिल्ली को देखने लगी। आकृति की तीव्र निगाहें दोनों जनवारों पर थी।

बिल्ली चूहे के पीछे पड़ी थी, पर वह चूहे को पकड़ नहीं पा रही थी। चूहे ने भागते हुए एक राउंड रोजर का मारा और फ़िर बिल्ली से बचते हुए वापस दरवाजे से बाहर की ओर भाग गया।

बिल्ली भी चूहे के पीछे-पीछे बाहर निकल गयी।

आकृति ने फ़िर से एक नजर रोजर पर मारी। रोजर ने भी आकृति को देख अपने दाहिने हाथ के अंगूठे को ‘थम्स-अप की तरीके से ऊपर उठाया, जो कि रोजर के रेडी होने का संकेत था।

आकृति ने रोजर को देखा और अपना ‘नीलदंड’ उठाकर रोजर की ओर लहराया।

नीलदंड से सुनहरे रंग की किरणें निकली और उन किरणों ने रोजर के शरीर को अपने घेरे में ले लिया।

रोजर ने डर के कारण अपनी आँखे बंद कर ली। अचानक रोजर का शरीर धीरे-धीरे पत्थर में तबदील होने लगा।

रोजर ने जब आँखे खोली तब तक उसके शरीर का गरदन तक का हिस्सा पत्थर में तबदील हो चुका था।

रोजर को कुछ समझ नहीं आया। उसने आकृति की ओर नजर उठा कर देखा। तब तक वह पूरा पत्थर का बन चुका था।

आकृति ने जब रोजर को पूरा पत्थर का बनते देखा तो फ़िर से अपने नीलदंड को उठाकर रोजर की ओर घुमाया।

इस बार रोजर के शरीर से एक सुनहरा प्रकाश-पुंज निकल कर बाहर आ गया।

वह प्रकाश-पुंज किसी सुनहरे मानव की तरह तेज चमक बिखेर रहा था।

“अब तुम सुनहरे मानव के रूप में परिवर्तित हो चुके हो। ये एक प्रकार का उर्जा रूप है, इस रूप में तुम किसी चीज को स्पर्श कर सकते हो, उसे उठा सकते हो और अपने हाव भाव व्यक्त कर सकते हो, मगर इस रूप में तुम किसी से बात नहीं कर सकते।

उर्जा के इस रूप में तुम्हे द्वीप की अदृश्य दीवार भी नहीं रोक पायेगी और तुम पानी पर दौड़ सकते हो या फ़िर पानी में साँस ले सकते हो।

तुम्हारा शरीर यहां मेरे पास सुरक्षित है। तुम्हारे पास केवल 8 घंटे का समय है। 8 घंटे से ज़्यादा तुम इस उर्जा रूप में नहीं रह सकते। 8 घंटा पूरा होते ही तुम्हारा उर्जा रूप स्वतः ही तुम्हारे शरीर में वापस आ जायेगा।

इसिलये याद रहे तुम्हे अपना काम इस 8 घंटे में ही पूरा करना पड़ेगा। क्या तुम अब तैयार हो यहां से जाने के लिये?" आकृति ने रोजर को सारी बातें अच्छे से समझा दी।

रोजर ने धीरे से सहमित से अपना सर हिलाया और उस कमरे से निकलकर उस गुफा के रास्ते से द्वीप के बाहर की ओर चल पड़ा।

रोजर द्वीप की अदृश्य दीवार को पारकर जैसे ही समुद्र के किनारे पहुंचा, उसे पूरा द्वीप पानी में नाचता हुआ दिखायी दिया ।

“ओ माई गॉड......यह द्वीप तो..... यह द्वीप तो पानी में घूम रहा है.... ऐसा कैसे संभव है? लगता है यह द्वीप अभी और बहुत से अंजान खतरों से भरा है।" रोजर मन ही मन बड़बड़ाया।

तभी रोजर को आसमान पर उड़ता हुआ एक हेलीकाप्टर दिखायी दिया।

रोजर को तुरंत अपने हेलीकाप्टर के साथ हुआ हादसा याद आ गया।

रोजर को लगा कि अब यह हेलीकाप्टर भी दुर्घटना ग्रस्त हो जायेगा, पर तभी उसे वह हेलीकाप्टर द्वीप से दूर जाता हुआ दिखायी दिया।

यह देख रोजर ने राहत की साँस ली।

तभी रोजर को हवा में उड़ती हुई एक झोपड़ी दिखायी दी ।

“ये मैं क्या देख रहा हुं, यह झोपड़ी हवा में कैसे उड़ रही है?"

वह झोपड़ी हवा में उड़ती हुई पोसाइडन की मूर्ति के पास जाकर गायब हो गयी।

तभी रोजर को द्वीप की धरती पर कुछ कंपन होते दिखे- “बाप रे....यह तो पूरी धरती कांप रही है। अब क्या होने वाला है?" रोजर बड़बड़ाया।

तभी द्वीप के किनारे से बहुत तेज तरंगे निकली और समुद्र में दूर तक चली गयी।

अभी रोजर इन तरंगो के बारे में सोच ही रहा था कि तभी वैसी ही तरंगे पूरे आसमान में भी फैल गयी।

रोजर को अब वह हेलीकाप्टर हवा में लहराते हुए दिखायी दिया। रोजर समझ गया कि अब वह हेलीकाप्टर दुर्घटना ग्रस्त होने वाला है।

हेलीकाप्टर का चालक हेलीकाप्टर को नीचे उतारने की कोशिश कर रहा था। हेलीकाप्टर आसमान में किसी परकटे पक्षी की तरह डोल रहा था।

थोड़ी देर के बाद उस हेलीकाप्टर के चालक ने हेलीकाप्टर का संतुलन बनाकर उसे पानी पर उतार लिया।

रोजर की आँखो में चालक के लिए प्रशंसा के भाव उभरे। रोजर अब पानी पर चलता हुआ उस हेलीकाप्टर की ओर बढ़ने लगा।

तभी रोजर को पानी की सतह पर बहती हुई एक बूढ़ी महिला दिखायी दी-

“यह कैसे संभव है? यह महिला पानी पर कैसे तैर रही है? नहीं..नहीं ये तो बेहोश है...या फिर शायद जिंदा ही नहीं है, पर यह इस महिला के आसपास का पानी हरा क्यों दिख रहा है? ....ओ माई गॉड...ये तो मेढक के जैसे हरे रंग के कीड़े हैं, पर यह इस महिला को उठाकर कहां ले जा रहे हैं?"

वह महिला अल्बर्ट की पत्नी मारिया थी।

तभी 'गुलुप' की आवाज के साथ मारिया का शरीर पानी में डूब गया।

“अरे, वह महिला कहां गयी? कहीं वह कीड़े उस महिला को पानी में तो नहीं खींच ले गये।" यह सोच रोजर ने पानी में डुबकी लगायी।

पानी के अंदर का दृश्य देखते ही रोजर के दिमाग ने काम करना ही बंद कर दिया।

पानी के नीचे नीली रोशनी बिखेरती एक बड़ी सी उड़नतश्तरी तैर रही थी। उड़नतश्तरी का आकार बिल्कुल गोल था। उसमें सैकड़ों दरवाजे बने दिखाई दे रहे थे।

उन्हिं में से एक दरवाजा खुला हुआ था, और वह हरे कीड़े मारिया को लेकर उसी दरवाजे से अंदर जा रहे थे।

रोजर ने घबराकर अपना सिर पानी के बाहर निकाल लिया।

तभी उसे पीछे की ओर से किसी बोट के इंजन की आवाज सुनाई दी।

रोजर ने पीछे पलट कर देखा, यह वही हेलीकाप्टर था, जो अब द्वीप की ओर बढ़ रहा था।

रोजर को एक पल के लिये समझ नहीं आया कि वह क्या करे? वह उड़नतश्तरी के पीछे जाये या फ़िर उस बोट के।

रोजर ने तुरंत फैसला ले लिया कि वह बोट की ओर जायेगा। शायद यह उसका अपनी दुनिया के प्रति लालच था।

यह सोच रोजर तुरंत पानी के बाहर आ गया और लहरो पर खड़ा होकर बोट को देखने लगा।

चूंकी इस समय बोट द्वीप की ओर बढ़ रही थी इसिलये रोजर ने बोट की ओर दौड़ लगा दी।

रोजर की स्पीड बहुत ज्यादा थी। धीरे-धीरे बोट पास आती जा रही थी।

तभी रोजर को बोट के पीछे एक विशालकाय व्हेल मछली दिखाई दी।

उस व्हेल ने बिना किसी तरह की आवाज किये हुए, पानी में एक ज़बरदस्त गोता लगाया, जिससे समुद्र का पानी बोट के पीछे लगभग 50 फुट तक ऊपर उठ गया।

रोजर के पास उस बोट के चालक को आगाह करने का भी समय नहीं था। इसिलये उसने अपने भागने की स्पीड और तेज कर दी।

उधर बोट पर मौजूद व्योम की निगाहें अब उस सुनहरे मानव की ओर थी।

तभी व्योम को अचानक से लगा कि उसकी बोट के पीछे कुछ है। जैसे ही वह पीछे पलटा उसे अपने पीछे समुद्र की लहरें लगभग 50 फुट ऊपर तक उठी हुई दिखाई दी।

“ओ माइ गॉड!......यह समुद्र की लहरें इतना ऊंचे कैसे उठ गई, ये तो मेरी बोट पर गिरने वाली है।"

व्योम ने घड़ी के सेकंडवे हिस्से में अपनी बोट से पानी में जम्प लगा दी।

तभी उसकी बोट के पीछे उठी लहर, बहुत तेजी से उसकी बोट पर आकर गिरी। एक बहुत तेज आवाज के साथ व्योम की बोट पूरी तरह टूटकर बिखर गयी।

व्योम अब पूरा का पूरा समुद्र के अंदर था।

एक सेकंड के लिये उसकी आंखें समुद्र में खुल गई और उसने समुद्र के अंदर जो दृश्य देखा, वह उसकी तो क्या? उसके सात पुस्तो को चौकाने के लिये काफ़ी थी।

पानी के अंदर एक उड़नतश्तरी नाच रही थी।

और इसी के साथ व्योम पर बेहोशी छाती चली गई।

रोजर ने व्योम को बेहोश होते देख उसे अपने हाथो में थाम लिया। अब उसने सोच लिया था कि वह व्योम को बचाकर ही रहेगा।

रोजर ने व्योम को अपने हाथो में ले द्वीप की ओर दौड़ लगा दी।

तभी ‘जन्नऽऽऽऽऽऽ‘की तेज आवाज करती वह उड़नतश्तरी, पानी के अंदर से निकली और उड़कर द्वीप के पास पहुंचकर गायब हो गयी।

उड़नतश्तरी के इतनी तेज नाचकर पानी में निकलने से पानी में एक विशालकाय भंवर बन गयी।

यह भंवर देख रोजर समझ गया कि उस रात ‘सुप्रीम’ के ऊपर से यही उड़नतश्तरी निकली होगी और इसी के वजह से पानी में भंवर बनी होगी, जिसमें कि सुप्रीम फंस गया था।

रोजर ने भंवर से बचने के लिये एक लंबा रास्ता चुना और व्योम को लेकर द्वीप की ओर चल दिया।

लगभग 25 मिनट के अंदर रोजर ने व्योम को द्वीप की दूसरी दिशा में ले जाकर समुद्र किनारे लिटा दिया।

जारी रहेगा_______✍️
 
#76.

रोजर काफ़ी देर तक व्योम को देखता रहा और फ़िर वहां से उठकर पुनः लहरो पर दौड़ने लगा।

आकृति के पास से निकले, रोजर को लगभग 3 घंटे हो गये थे। रोजर के पास अभी भी 5 घंटे का वक्त था।

पर इतने बड़े समुद्र में वह सुप्रीम को ढूंढे कैसे? यह भी बड़ा प्रश्न था। क्योंकि रोजर को तो यह भी नहीं पता था कि सुप्रीम है किस दिशा में?

तभी रोजर को उन हरे कीड़ो का ध्यान आया-

“वह हरे कीड़े कैसे थे? और वह बूढ़ी महिला...हो ना हो वह महिला जरूर सुप्रीम की ही होगी... मुझे उसी दिशा में चलना चाहिए जिधर से वह कीड़े आ रहे थे।“ यह सोचकर रोजर ने उस दिशा की ओर दौड़ लगा दी।

रोजर को दौड़ते हुए लगभग 2:30 घंटे बीत गये, पर ‘सुप्रीम’ कहीं नजर नहीं आ रहा था।

तभी रोजर को पानी की एक लहर तेजी से अपनी ओर आती दिखाई दी।

रोजर यह देखकर वहीं लहरो पर खड़ा हो गया- “क्या यह किसी तरह का खतरा है? जो मेरी ओर आ रहा है।"

कुछ ही देर में पानी की वह लहर तेजी से रोजर के बगल से निकली। लहर की स्पीड बहुत ज्यादा थी फ़िर भी रोजर को सब कुछ साफ-साफ दिखाई दे गया।

वह ऑक्टोपस की तरह का कोई विशालकाय जलीय जीव था, जिसकी एक भुजा में उसने लोथार को पकड़ रखा था।

उस जीव की स्पीड इतनी ज्यादा थी कि रोजर के लिये उसका पीछा कर पाना असंभव था।

सेकंड से भी कम समय में वह जीव रोजर की आँखो से ओझल हो गया।

“अब तो पक्का हो गया कि सुप्रीम इसी दिशा में है।" रोजर मन ही मन बड़बड़ाया और फ़िर पूरी ताकत से उस दिशा में दौड़ लगा दी।

कुछ ही देर में रोजर को ‘सुप्रीम’ नजर आने लगा।

लगभग 8 घंटे होने वाले थे। रोजर को पता था कि उसके पास समय बहुत कम है। इसिलये वह तेजी से दौड़ रहा था और इतनी ही तेजी से दौड़ रहा था रोजर का दिमाग भी।

जाने क्यों रोजर को आकृति पर भरोसा नहीं हो पाया था। उसे लग रहा था कि आकृति जरूर कुछ ना कुछ झूठ बोल रही थी।

रोजर के पास कोई चारा नहीं था, आकृति की बात मानने के सिवा, पर उसने सोच लिया था कि वह कैप्टन सुयश को सही राह ही दिखाएगा, भले ही आकृति उसे इसकी सजा ही क्यों ना दे दे।

क्यों कि सुप्रीम की जिम्मेदारी उसकी भी थी और वह नहीं चाहता था कि इतने खतरनाक द्वीप पर सुप्रीम पहुंचे।

बहरहाल उसकी सोच पर विराम लग गया क्यों कि तभी सुप्रीम से सिग्नल फ्लेयर आसमान में फ़ेंके जाने लगे।

रोजर समझ गया कि सुप्रीम के लोगो ने उसे देख लिया है।

वह फ्लेयर तेजी से आसमान में जाकर फट रहे थे। ऐसा लग रहा था जैसे बीच समुद्र में ‘दीपावली’ या ‘बैस्ताइल डे’ मनाया जा रहा हो।

अब रोजर सुप्रीम के काफ़ी पास पहुंच गया था। रोजर को सुप्रीम की डेक पर कुछ लोग खड़े दिखाई देने लगे।

अब रोजर सुप्रीम के बिल्कुल नीचे पहुंच गया।

उसे डेक पर खड़े सुयश, असलम, ब्रेंडन सहित जहाज के बहुत से लोग दिखाई दे गये। एक पल के लिये सबको इतने पास पाकर रोजर जैसे सब कुछ भूल गया।

क्षण भर के लिये मानो समय रुक सा गया।

डेक पर खड़े सभी लोग सम्मोहित अवस्था में विश्व के उस आठवें आश्चर्य को देख रहे थे। किसी के मुंह से कोई शब्द नहीं निकल रहा था।

रोजर की निगाह अब लगातार सुयश पर थी। उसके चेहरे के भाव तो नहीं दिख रहे थे, लेकिन यकीनन उसके चेहरे पर खुशी भरी मुस्कुराहट थी।

अच्छा ही हुआ कि रोजर के शरीर से इतनी तेज रोशनी निकल रही थी, वरना उसकी चेहरा देखकर ना जाने कितने यात्री बेहोश होकर गिर जाते और सबसे ज़्यादा अचंभा तो सुयश को होता।

अचानक जैसे रोजर को कुछ याद आया। उसने पहले सुयश की ओर देखा और फ़िर अपने सीधे हाथ की तर्जनी उंगली से एक दिशा में इशारा किया।

और इससे पहले की रोजर कोई और इशारा कर पाता, रोशनी का एक तेज झमाका हुआ और एक पल के लिये रोजर की आँखे बंद हो गई।

जब उसकी आँखे खुली तो वह आकृति के सामने उसके कमरे में था।

रोजर का ऊर्जा-रूप अब गायब था और रोजर का शरीर भी पत्थर से फ़िर सामान्य बन गया था।

‘सुप्रीम’ को याद कर रोजर की आँखो से 2 बूंद आँसू निकल गये, जिसे उसने तुरंत पोंछ लिया।

“क्या रहा?“ आकृति ने रोजर से पूछा- “काम हुआ या नहीं?"

“मैंने तो अपनी तरफ से कैप्टन सुयश को द्वीप की ओर आने का इशारा कर दिया, अब बाकी उसके ऊपर है कि वह मेरी बात मानता है या नहीं।" रोजर ने साफ झूठ बोलते हुए कहा।

“बहुत अच्छे.... तुमने अपना काम ईमानदारी से किया है, जल्दी ही मैं तुमहें यहाँ से छोड़ दूंगी।" आकृति

ने कहा और कमरे से बाहर निकलने लगी, तभी रोजर ने आकृति को रोक लिया।

“क्या मैं आपसे कुछ प्रश्न कर सकता हूँ?" रोजर ने पूछा।

यह सुन आकृति पलटकर वापस कमरे में आ गयी और रोजर की ओर देखते हुए बोली-

“कहो.... क्या पूछना चाहते हो?"

“मैंने देखा, ये द्वीप पानी पर घूम रहा था, ऐसा कैसे संभव है?" रोजर ने पूछा।

“यह एक साधारण द्वीप नहीं है। यह देवताओ के द्वारा निर्मित द्वीप है। इसिलये यह पानी पर तैर सकता है।" आकृति ने जवाब दिया।

“पानी पर तैरना एक बात होती है, पर यह द्वीप गोल-गोल घूम रहा था। ऐसा लग रहा था कि जैसे कोई इसे चला रहा हो? इसके अलावा मैंने इस द्वीप से कुछ तरंगे भी निकलती हुई देखी है जो यह साबित करती है कि जरूर इस द्वीप का नियंत्रण किसी के पास है।"

रोजर के प्रश्नो में दम था क्यों कि शायद आकृति के पास भी इस बात का कोई जवाब नहीं था।

आकृति कुछ देर खामोश रही और फ़िर बोली- “इस बात का जवाब मेरे पास भी नहीं है। शायद देवताओ ने इस द्वीप की रक्षा के लिये, इसका नियंत्रण किसी के हाथ में दे रखा हो?"

“यह उड़ने वाली झोपड़ी का क्या रहस्य है?" रोजर ने तुरंत अगले सवाल का गोला दाग दिया।

“वह उड़ने वाली झोपड़ी तिलिस्मा में प्रवेश करने का द्वार है। उस झोपड़ी में हम घुस तो अपनी मर्जी से सकते हैं, पर निकल नहीं सकते। वह झोपड़ी इंसान को सीधा तिलिस्मा में ले जाती है। जिसे तोड़ कर ही कोई इंसान बाहर निकल सकता है।"

आकृति ने रोजर को देखते हुए कहा- “पर मानना पड़ेगा तुम्हें, एक दिन बाहर निकलते ही बहुत कुछ देख लिया तुमने? .... और कोई प्रश्न पूछना है या मैं जाऊं?"

“एक सवाल और ...।" जिद्दी रोजर ने मस्कुराते हुए एक सवाल और कर दिया- “वह उड़नतश्तरी किसकी है और उसमें मौजूद हरे कीड़े मृत लोगों को कहाँ ले जाते हैं?"

“वह उड़नतश्तरी ‘बुद्ध ग्रह’ की रासायिनक प्रयोगशाला है। वह हरे कीड़े भी वहीं के निवासी हैं, और उन लाशों पर कुछ प्रयोग कर रहे हैं।

इसका रहस्य पिरामिड से ही पता चल सकता है। क्यों कि ‘बुद्ध ग्रह’ के लोगो का देवता भी ‘जैगन’ ही है। इससे ज़्यादा मुझे उन हरे कीडो के बारे में कुछ नहीं पता।" आकृति ने कहा।

“बुद्ध ग्रह!" रोजर यह सुनकर हैरान हो गया- “तो क्या वह हरे कीड़े ‘एलियन’ हैं?"

“हां! कुछ ऐसा ही समझ लो।" आकृति ने कहा।

रोजर के पास फ़िलहाल कोई प्रश्न नहीं बचा था। उसने जानबूझकर व्योम वाली घटना आकृति को नहीं बताई।

आकृति रोजर को शांत होते देख वापस मुड़ी और कमरे से बाहर निकल गयी।

रोजर ने आकृति के जाने के बाद एक गहरी साँस भरी और वहां रखे फलों की थाली से एक फल निकालकर खाने लगा। उसने सोच लिया था कि इस द्वीप का पूरा रहस्य जानकर ही रहेगा।

शलाका महल (8 जनवरी 2002, मंगलवार, 18:30, मायावन, अराका द्वीप)

चलते-चलते फ़िर शाम गहराने लगी थी। पर जंगल में कोई भी ऐसी जगह किसी को नहीं दिखी थी, जहां पर रात बितायी जा सके।

“अब हम क्या करेंगे कैप्टन?" असलम ने सुयश से कहा- “हमें अभी तक रात गुजारने के लिये कोई जगह नहीं मिली है और अंधेरा होने में कुछ ही मिनट अब बचा है।"

“सामने बड़े-बड़े पेड़ हैं, जिसकी वजह से आगे का दृश्य ज़्यादा नजर नहीं आ रहा है, थोड़ा और आगे देखते हैं, अगर इन पेडों के पीछे भी कोई जगह ना दिखी तो हमें आज रात पेडों पर बितानी पड़ेगी।" सुयश ने कहा।

पेडों पर रात बिताने का सुन जैक और जॉनी के शरीर में झुरझुरी सी उठी, पर उन्होंने बोला कुछ नहीं।

तभी ऊंचे पेडों का सिलसिला समाप्त हो गया और उन्हें कुछ दूरी पर खंडहर से नजर आये।

“अरे वाह!" एलेक्स ने खुशी से किलकारी मारते हुए कहा- “मिल गयी रात बिताने की जगह। रात बिताने के लिये ये खंडहर बिल्कुल सही हैं।"

“कोई भागकर वहां नहीं जायेगा।" अल्बर्ट ने चीखकर कहा- “पहले हमें वह जगह चेक कर लेने दो।"

अल्बर्ट की आवाज सुन भागता हुआ एलेक्स अपनी जगह पर रुक गया।

सभी अब खंडहर के अंदर पहुंच गये। खंडहर काफ़ी प्राचीन लग रहे थे। खंडहर के बाहर एक कुंआ भी बना था, जिस पर एक धातु की बाल्टी रस्सी से बंधी हुई रखी थी।

तौफीक ने बाल्टी को कुंए में डाल, पानी निकाल कर देखा। पानी बिल्कुल साफ और पीने योग्य था।

“लगता है आज से हजारों साल पहले यहां कोई रहता था?" जेनिथ ने खंडहर की दीवार को देखते हुए कहा- “खंडहर की दीवारें काफ़ी पुरानी लग रही हैं ।"

अब सभी खंडहर के अंदर की ओर चल दिये।

“यह खंडहर बहुत बड़े हैं, शायद यह पहले किसी का महल रहे होंगे?" क्रिस्टी ने कहा।

“कहीं ये देवी शलाका का महल तो नहीं?" शैफाली ने एक खंभे को छूते हुए कहा- “क्यों कि ध्यान से देखिये, हर दीवार पर कुछ वैसी ही आधी-अधूरी आकृतियां हैं, जैसी हमें देवी शलाका के महल में दिखि थी?"

“आपको सामने दीवार पर कोई आकृति नहीं दिख रही क्या?" शैफाली ने ब्रेंडन से आश्चर्य से पूछा।

“नहीं!" ब्रेंडन ने संछिप्त उत्तर दिया।

अब सभी की नजर सामने की दीवार पर थी, पर किसी को भी सामने कुछ भी नजर नहीं आया। सामने की दीवार पर केवल धूल और मिट्टी दिखाई दे रही थी।

यह देख शैफाली आगे बढ़ी और उसने अपने दाहिनी हाथ से सामने की दीवार पर लगी मिट्टी को हाथ से पोंछ दिया। मिट्टी के पीछे नटराज की तस्वीर थी, जो समय के साथ आधी खराब हो गयी थी।

जारी रहेगा_________✍️
 
#77.

“ये कैसे हो सकता है?" जॉनी ने डरते हुए शैफाली की ओर देखा- “दीवार के पीछे छिपी आकृति शैफाली को कैसे नजर आ गयी?"

“मुझे लगता है कि शैफाली की आँखे जादुई तरीके से सही हुई है, इसिलये इसकी आँखों में कोई शक्ति आ गयी है?" अल्बर्ट ने शैफाली की आँखों की ओर देखते हुए कहा।

सभी को अल्बर्ट की बातों में दम दिखाई दिया।

तभी शैफाली दूसरी दीवार की ओर देखते हुए आश्चर्य से भर उठी-

“ये कैसे संभव है?"

शैफाली की बात सुन सभी का ध्यान उस दीवार की ओर गया, पर पिछली बार की तरह इस बार भी किसी को कुछ नहीं दिखाई दिया।

सुयश को ये कोतूहल रास ना आया इसलिए उसने आगे बढ़कर उस दीवार से भी मिट्टी को साफ कर दिया।

पर मिट्टी साफ करते ही इस बार हैरान होने की बारी सबकी थी, क्यों कि उस दीवार पर वही सूर्य की आकृति बनी थी, जो कि सुयश की पीठ पर टैटू के रूप में मौजूद थी।

अब मानो सबके दिमाग ने काम करना ही बंद कर दिया। काफ़ी देर तक किसी के मुंह से कोई बोल नहीं फूटा।

“कैप्टन!"

आख़िरकार ब्रेंडन बोल उठा- “आप तो कह रहे थे कि यह टैटू का निशान आपके दादाजी के हाथ पर बना था, जो आपको अच्छा लगा और आपने इस टैटू को अपनी पीठ पर बनवा लिया। पर आपके दादाजी तो भारत में रहते थे, फ़िर बिल्कुल उसी तरह का निशान यहां इस रहस्यमयी द्वीप पर कैसे मौजूद है?"

“मुझे लगता था कि यह निशान साधारण है, पर अब मुझे याद आ गया कि बचपन में जब मैं अपने दादाजी के साथ अपने कुलदेवता के मंदिर जाता था, तो मैंने यह निशान वहां भी बना देखा था।"

सुयश ने बचपन की बातों को याद करते हुए कहा- “दरअसल हम लोग सूर्यवंशी राजपूत हैं, मुझे लगता है कि यह निशान हमारे कुल का प्रतीक है। अब यह निशान यहां कहां से आया, ये मुझे भी नहीं पता?"

“कैप्टन, लेकिन एक बात तो श्योर है कि देवी शलाका का जुड़ाव भारतीय संस्कृति से कुछ ज़्यादा ही था।" अल्बर्ट ने एक बार फ़िर खंडहारों के देखते हुए कहा।

“शैफाली।" जेनिथ ने शैफाली को देखते हुए कहा- “जरा एक बार ध्यान से पूरे खंडहर को देखो। शायद तुम्हे कुछ और रहस्यमयी चीज मिल जाए?"

शैफाली अब ध्यान से खंडहर की दीवार और छत को देखने लगी। सभी शैफाली के पीछे थे।

एक दीवार के पास जाकर शैफाली कि गयी और दीवार को ध्यान से देखते हुए बोली-

“इस दीवार पर देवी शलाका की तस्वीर है।"

देवी शलाका का नाम सुनते ही सुयश की आँखों के सामने देवी शलाका का प्रतिबिंब उभर आया।

वह एक क्षण रुका और फ़िर सामने की दीवार पर लगी मिट्टी को साफ करने लगा।

जैसे ही सुयश ने देवी शलाका की मूर्ति को स्पर्श किया, वहां से हजारों किलोमीटर दूर, अंटार्कटिका के बर्फ में मौजूद, शलाका के चेहरे पर एक गुलाबी मुस्कान बिखर गयी।

शलाका ने अपनी आँखों को बंद किया और धीरे से हवा में फूंक मारते हुए बुदबुदाई- “आर्यन!"

इधर अचानक सुयश को एक झटका सा महसूस हुआ। उसे ऐसा लगा जैसे किसी ने उसके कान के पास ‘आर्यन’ पुकारा हो।

सुयश को झटका लगते देख अल्बर्ट ने पूछ लिया- “क्या हुआ कैप्टन? आपको कुछ महसूस हुआ क्या?"

“हां प्रोफेसर, मुझे ऐसा लगा जैसे कि किसी ने मेरे कान के पास ‘आर्यन’ कहकर पुकारा।" सुयश ने चारो ओर देखते हुए कहा।

“यह नाम भी भारतीय ही लग रहा है।“

क्रिस्टी ने कहा- “यहां कुछ ना कुछ तो ऐसा जरूर है? जो यहां है तो, पर हमें नजर नहीं आ रहा।"

“तुम्हारा यह कहने का मतलब है, कि यहां पर कोई अदृश्य शक्ति मौजूद है?" एलेक्स ने क्रिस्टी को देखते हुए कहा।

“कभी शैफाली के कानो में, तो कभी कैप्टन के कानो में यह अजीब सी आवाज सुनाई देना, यह साबित करता है, कि अवश्य ही कोई ऐसी शक्ति यहां है, जो या तो अदृश्य है या फ़िर किसी जगह से लगातार हम पर नजर रखे है।" क्रिस्टी के शब्दो में विश्वास की झलक दिख रही थी।

तभी ऐमू उड़कर एक दरवाजे के बीच लगे घंटे के आसपास मंडराते हुए जोर-जोर से चिल्लाया-

“घंटा बजाओगे, सब जान जाओगे .... घंटा बजाओगे, सब जान जाओगे।"

सुयश ने एक पल को कुछ सोचा और फ़िर आगे जाकर दरवाजे पर लगे घंटे को बजा दिया।

“टन्ऽऽऽऽऽऽऽऽऽ"

घंटे की आवाज जोर से पूरे खण्डहरों में गूंजी। अचानक से उन खण्डहरों की जमीन और छत कांपने लगी।

“भूकंप ..... ये भूकम्प के लक्षण हैं।" जैक जोर से चिल्लाया।

तभी उस कमरे की जमीन, एक जगह से अंदर की ओर धंस गयी और इससे पहले कि कोई कुछ समझ पाता, उस जगह से जमीन के नीचे से एक प्लैटफ़ॉर्म ऊपर आता दिखाई दिया।

उस प्लैटफ़ॉर्म के ऊपर एक सुनहरे रंग की धातु का सिंहासन रखा हुआ था। जो किसी पौराणिक सम्राट का नजर आ रहा था।

उस सिंहासन के बीचोबीच एक विशालकाय ‘हिमालयन यति’ का चित्र बना था, जो अपने हाथो में एक गदा जैसा अस्त्र लिए हुए था। बाकी उस सिंहासन के चारो तरफ बर्फ़ की घाटी के सुंदर चित्र, फूल और पौधे बने हुए थे।

सिंहासन के जमीन से निकलते ही जमीन का हिलना बंद हो गया। सभी मन्त्रमुग्ध से उस चमत्कारी सिंहासन को देख रहे थे।

“कोई अभी इसे छुएगा नहीं, यह भी उन विचित्र घटनाओं का हिस्सा हो सकता है।" अल्बर्ट ने सबको हिदायत देते हुए कहा।

तभी ऐमू जाकर उस सिंहासन के ऊपर बैठ गया। कोई भी विचित्र घटना ना घटते देख सुयश भी आगे बढ़कर उस सिंहासन पर बैठ गया।

जैसे ही सुयश सिंहासन पर बैठा, उसका शरीर बेजान होकर उसी सिंहासन पर ढुलक गया।

यह देख सभी घबरा गये। अल्बर्ट भागकर सुयश का शरीर चेक करने लगा।

सुयश के शरीर में कोई हरकत नहीं हो रही थी।

अल्बर्ट ने सुयश के शरीर को हिलाया, पर सुयश का शरीर बिल्कुल बेजान सा लग रहा था।

अल्बर्ट ने घबराकर सुयश की नाक के पास अपना हाथ लगाया और फ़िर उसकी नब्ज चेक करने लगा।

“कैप्टन! अब इस दुनियां में नहीं हैं।"

अल्बर्ट के शब्द किसी बम के धमाके की तरह से पूरे कमरे में गूंजे। जिसने भी सुना वह सदमें से वहीं बैठ गया।

“यह कैसे हो सकता है? कोई सिंहासन पर बैठने से भला कैसे मर सकता है?" तौफीक की आँखों में दुनियां भर का आश्चर्य दिख रहा था।

“आप सब परेशान मत होइये, कैप्टन अंकल अभी मरे नहीं हैं।" शैफाली ने कहा।

“मैं उनके शरीर से जुड़ी जीवन की डोर को स्पस्ट देख रही हूं। इसका मतलब उनका सूक्ष्म शरीर यहां पर नहीं है, परंतु उनकी मौत नहीं हुई है। वो किसी रहस्यमय यात्रा पर हैं।

वो जल्दी ही अपने शरीर में वापस लौटेंगे। हमें यहां बैठकर उनकी वापसी का इंतजार करना चाहिए।"

शैफाली के शब्द सुन सभी शैफाली को देखने लगे। किसी की समझ में तो कुछ नहीं आ रहा था, पर शैफाली की बातों को झुठलाना किसी के बस की बात नहीं थी। इसिलये सभी चुपचाप से उस सिंहासन के चारो ओर बैठकर सिंहासन को देखने लगे।

चैपटर-7: कैलाश रहस्य (आज से 5020 वर्ष पहले, वेदालय, कैलाश पर्वत, हिमालय)

सिंहासन पर बैठते ही सुयश को अपना शरीर हवा में उड़ता हुआ महसूस हुआ। ऐसा लगा जैसे उसके शरीर से आत्मा ही निकल गयी हो।

उसका सूक्ष्म शरीर हवा में बहुत तीव्र गतिमान था।

गाढ़े अंधकार के बाद सुयश को भिन्न - भिन्न प्रकार की रोशनियो से गुजरना पड़ा।

कुछ रोशनी इतनी तेज थी कि सुयश की आँखें ही बंद हो गयी। जब सुयश की आँखें खुली तो उसने अपना शरीर बर्फ के पहाड़ो पर उड़ते हुए पाया।

“क्या मैं मर चुका हूं? या.....या फ़िर किसी रहस्यमयी शक्ति के प्रभाव में हूं?" सुयश अपने मन ही मन में बड़बड़ाया- “यह तो बहुत ही विचित्र और सुखद अनुभूति है।"

थोड़ी देर उड़ने के बाद सुयश को नीचे जमीन पर पानी की 2 झीलें दिखायी दी। एक का आकार सूर्य के समान गोल था, तो दूसरी का आकार चन्द्रमा के समान था।

तभी सुयश को सामने एक विशालकाय बर्फ का पर्वत दिखाई दिया, जो चौमुखी आकार का लग रहा था। उस पर्वत से 4 नदियां निकलती हुई दिखाई दे रही थी।

उस पर्वत को पहचान कर सुयश ने श्रद्धा से अपने शीश को झुका लिया। वह कैलाश पर्वत था। देवों के देव, का निवास स्थान- कैलाश।

जारी रहेगा_________✍️
 
#78.

शुद्ध चाँदी के समान चारो ओर बर्फ बिखरी हुई थी। बहुत ही मनोरम, शुद्ध और अकल्पनीय वातावरण था।

तभी सुयश को अपना शरीर वहीं बर्फ पर उतरता हुआ महसूस हुआ।

सुयश ने उतरते ही सबसे पहले अपने मस्तक को कैलाश से स्पर्श कर ‘ऊँ नमः शि.....य’ का जाप किया और फ़िर चारो ओर ध्यान से देखने लगा।

तभी सूर्य की एक किरण बादलों की ओट से निकलकर कैलाश पर्वत पर एक स्थान पर गिरी।

वह स्थान सोने के समान चमक उठा।

सुयश यह देखकर आश्चर्यचकित् होकर उस स्थान की ओर चल दिया।

सुयश जब उस स्थान पर पहुंचा तो उसे वहां कुछ दिखाई नहीं दिया।

“यहां तो कुछ भी नहीं है, फ़िर अभी वो सुनहरी रोशनी सी कैसी दिखाई दी थी मुझे?" सुयश आश्चर्य में पड़ गया।

तभी उस स्थान पर एक दरवाजा खुला और उसमें से 2 लोग निकलकर बाहर आ गये।

उन 2 लोगो पर नजर पड़ते ही सुयश का मुंह खुला का खुला रह गया।

उसमें से एक देवी शलाका थी और दूसरा ....... दूसरा वह स्वयं था।“

“असंभव!......यह तो मैं हूं.... मैं देवी शलाका के साथ क्या कर रहा हूं?....और ....और यह कौन सा समयकाल है? हे ईश्वर....यह कैसा रहस्य है?" सुयश को कुछ समझ में नहीं आ रहा था।

सुयश उन दोनों के सामने ही खड़ा था, पर उसे ऐसा लगा जैसे कि उन दोनों को वह दिख ही ना रहा हो।

“आर्यन... तुम समझने की कोशिश करो, मेरा तुम्हारा कोई मेल नहीं है?"

शलाका ने कहा- “तुम केवल अपनी पढ़ाई पर ध्यान दो, जिसके लिए तुम ‘वेदालय’ आये हो। यहां पर मेरे पढ़ाई करने का कुछ कारण है? जो मैं तुम्हे अभी नहीं बता सकती और वैसे भी तुम एक साधारण मनुष्य हो और तुम्हारी आयु केवल 150 वर्ष है, जबकि मैं एक देवपुत्री हूं, मेरी आयु कम से कम 2000 वर्ष है। अगर मैंने तुमसे शादी की तो 150 वर्ष के बाद क्या होगा? तुम मेरे पास नहीं होगे...."

“तो मैं क्या करूं शलाका?" आर्यन ने शलाका की आँखो में देखते हुए कहा ।

“तुमने पहले तो नहीं बताया था कि तुम एक देवपुत्री हो, अब तो मुझे तुमसे प्यार हो चुका। मैं अब तुम्हारे बिना अपने जीवन की कल्पना भी नहीं कर सकता। अब रही बात आयु की तो मैं अपनी आयु भी बढ़ा लूंगा। तुम शायद ‘ब्रह्मकलश’ के बारे में भूल रही हो, जिसके बारे में हमें गुरु ‘नीलाभ’ ने बताया था। ब्रह्मकलश प्राप्त कर हम दोनों ही अमर हो सकते हैं।"

शलाका और आर्यन बात करते-करते सुयश के बिल्कुल पास आ गये और इससे पहले कि सुयश उनके रास्ते से हट पाता, शलाका सुयश के शरीर के ऐसे आरपार हो गयी जैसे वह वहां हो ही ना।

सुयश ने पलटकर दोनों को देखा और फ़िर उनकी बातें सुनते हुए उनके पीछे-पीछे चल दिया।

“ब्रह्मकलश प्राप्त करोगे?" शलाका ने आर्यन पर कटाछ करते हुए कहा- “तुम्हे पता भी है कि ब्रह्म-कलश कहां है?"

“हां, मुझे पता चल गया है। ब्रह्मकलश, ब्र..ह्म-लोक में है। एक बार जब मैं ‘हंस-मुक्ता’ मोती ढूंढने के लिये ब्रह्म-लोक में गया था, तो मैंने दूर से उसकी एक झलक देखी थी।" आर्यन ने कहा।

“दूर से देखने और ब्र..ह्म-कलश को प्राप्त करने में जमीन और आसमान का अंतर है आर्यन। ब्रह्म-कलश को प्राप्त करना बहुत ही मुश्किल है।

पर हां मैं तुमसे वादा करती हूं कि अगर तुमने ब्रह्मकलश प्राप्त कर लिया तो मैं अवश्य तुमसे शादी कर लूंगी, पर तुमको भी मुझसे एक वादा करना होगा कि ब्रह्मकलश पाने की कोशिश, तुम वेदालय से अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद ही करोगे।" शलाका ने आर्यन की ओर हाथ बढ़ाते हुए कहा।

“ठीक है वादा रहा।" आर्यन ने शलाका का हाथ थामते हुए कहा।

“तो फ़िर फटाफट, अब आज की प्रतियोगिता पर ध्यान दो।" शलाका ने आर्यन को याद दिलाते हुए कहा-

“आज हमें ‘धेनुका’ नामक ‘गाय’ से ‘स्वर्णदुग्ध’ लाना है। क्या लगता है तुम्हे कहां होगी धेनुका?"

“हूंऽऽऽऽ सोचना पड़ेगा.....

‘मत्स्यलोक’ में पानी है, वहां पर गाय का क्या काम? ब्र..ह्मलोक में भी नहीं.... राक्षसलोक, नागलोक, मायालोक, हिमलोक में भी नहीं हो सकती......पाताललोक, सिंहलोक में भी नहीं......" आर्यन तेजी से सोच रहा था।

तभी एक बर्फ़ पर दौड़ने वाली रथनुमा गाड़ी उसी द्वार से प्रकट हुई, जिसे 4 रैंडियर खींच रहे थे।

उस पर एक लड़का और एक लड़की सवार थे।

वह इतनी तेजी से आर्यन और शलाका के पास से निकले कि दोनों वहीं बर्फ़ पर गिर गये।

“लो सोचते रहो तुम, उधर रुद्राक्ष और शिवन्या ‘शक्तिलोक’ की ओर जा रहे हैं।"

शलाका ने उठकर धीरे से बर्फ़ झाड़ते हुए कहा- “अगर वहां उन्हे धेनुका मिल गयी तो आज की प्रतियोगिता वह जीत जाएंगे और हमारे नंबर तुम्हारे प्यार के चक्कर में कम हो जाएंगे।"

आर्यन धीरे से खड़ा हुआ, पर वह अब भी सोच रहा था-

“नहीं-नहीं धेनुका शक्तिलोक में नहीं हो सकती .... प्रेतलोक और यक्षलोक में भी नहीं । अब बचा नक्षत्रलोक, भूलोक, रुद्रलोक और देवलोक......... देवलोक ............. जरूर धेनुका देवलोक में होगी। हमें देवलोक चलना चाहिए।"

देवलोक का नाम सुनकर शलाका के भी चेहरे पर एक चमक आ गयी।

“सही कहा तुमने ... वह देवलोक में ही होगी।" शलाका ने जोर से चीखकर कहा।

तभी उस रहस्यमयी दरवाजे से एक उड़ने वाला वाहन निकला, जिसे 2 हंस उड़ा रहे थे। इस वाहन पर भी 1 लड़का और एक लड़की बैठे हुए थे।

“बहुत-बहुत धन्यवाद.... हमें धेनुका का पता बताने के लिये।"

उस वाहन पर बैठे लड़के ने चिल्लाकर कहा और अपने वाहन को उड़ाकर कैलाश पर्वत के ऊपर की ओर चल दिया।

“और चिल्लाओ तेज से....विक्रम और वारुणी ने सब सुन लिया। और वो गये हमसे आगे।"

आर्यन ने शलाका पर नकली गुस्सा दिखाते हुए कहा- “अब चलो जल्दी से... नहीं तो वो दोनों पहुंच भी जाएंगे देवलोक।"

सुयश इस मायावी संसार की किसी भी चीज को समझ नहीं पा रहा था, परंतु उसे इस अतीत के दृश्य को देखकर बहुत अच्छा महसूस हो रहा था।

तभी शलाका ने हवा में अपना हाथ घुमाया, तुरंत पता नहीं कहां से 2 सफेद घोड़ों का रथ वहां आ गया। उन घोड़ों के पंख भी थे।

शलाका और आर्यन उस रथ पर सवार हो गये।

उनको जाता देख सुयश भी उनके रथ पर सवार हो गया। घोड़ों ने पंख फड़फड़ाते हुए हवा में उड़ान भरी।

वह रथ कैलाश की ऊंचाइयों की ओर बढ़ा। शलाका के रथ की गति बहुत तेज थी।

कुछ ही देर में उनके रथ ने विक्रम और वारुणी के रथ को पीछे छोड़ दिया।

आर्यन ने अपने दोनो कान के पास अपने हाथ के पंजो को फैलाते हुए, अपनी जीभ निकालकर वारुणी को चिढ़ाया।

वारुणी ने भी जीभ निकालकर आर्यन को चिढ़ा दिया।

कुछ ही देर में शलाका का रथ कैलाश पर्वत के ऊपर उतर गया।

आर्यन और शलाका के साथ सुयश भी तेजी से रथ से नीचे उतर आया।

सुयश को पर्वत के ऊपर कुछ भी विचित्र नजर नहीं आया।

तभी आर्यन ने एक जगह पहुंचकर जमीन पर पड़ी बर्फ़ को धीरे से थपथपाते हुए कुछ कहा।

आर्यन के ऐसा करते ही उस स्थान की बर्फ़ एक तरफ खिसक गयी और उसकी जगह जमीन की तरफ जाने वाली कुछ सीढ़ियाँ नजर आने लगी।

आर्यन, शलाका और सुयश के प्रवेश करते ही जमीन का वह हिस्सा फ़िर से बराबर हो गया।

लगभग 20 से 25 सीढ़ियाँ उतरने के बाद उन्हें दीवार में एक कांच का कैप्सूलनुमा दरवाजा दिखाई दिया, जो किसी लिफ्ट के जैसा दिख रहा था।

उसमें तीनो सवार हो गये। उनके सवार होते ही वह कैप्सूल बहुत तेजी से नीचे जाने लगा।

कुछ ही सेकंड में वह कैप्सूलनुमा लिफ्ट नीचे पहुंच गयी।

तीनो लिफ्ट से बाहर आ गये। सामने की दुनियां देख सुयश के होश उड़ गये।

सुयश को लग रहा था कि देवलोक किसी पौराणिक कथा के समान कोई स्थान होगा, पर वहां का तो नजारा ही अलग था।

लग रहा था कि वहां कोई दूसरा सूर्य उग गया हो। हर तरफ प्रकाश ही प्रकाश दिख रहा था।

ऊंची-ऊंची शानदार भव्य इमारते, हर तरफ साफ-सुथरा वातावरण, सुंदर उद्यान, झरने और जगह-जगह लगे हुए फ़व्वारे सुयश को एक विकसित शहर की तरह लग रहे थे।

हवा में कुछ अजीब तरह के वाहन उड़ रहे थे। जिन पर सवार हो ‘देवमानव’ घूम रहे थे।

“बाप रे .... इतने बड़े शहर में आर्यन, धेनुका को कैसे ढूंढेगा?" सुयश मन ही मन बड़बड़ाया।

तभी विक्रम और वारुणी भी वहां पहुंच गये। उन्होने एक नजर वहां खड़े आर्यन और शलाका पर मारी।

वारुणी ने नाक सिकोड़कर आर्यन को चिढ़ाया और फ़िर उनके बगल से निकलते हुए शहर की ओर चल दिये।

“अब क्या करना है आर्यन? वो दोनों फ़िर हमसे आगे निकल गये।" शलाका ने आर्यन से कहा।

तभी सुयश की निगाह आसमान की ओर गयी। जहां एक बड़ा सा बाज एक छोटे से तोते को मारने के लिये उसके पीछे पड़ा था।

“लगता है उस तोते की जान खतरे में है।" आर्यन ने कहा।

“अरे इधर हम प्रतियोगिता में हार रहे हैं और तुम्हें एक पक्षी की चिंता लगी है।" शलाका ने कहा।

“अगर हम प्रतियोगिता नहीं जीतेंगे तो ज़्यादा से ज़्यादा क्या हो जायेगा?"

आर्यन ने उस तोते की ओर देखते हुए कहा- “पर अगर हम उस पक्षी की जान नहीं बचाएंगे तो वह मर जायेगा।"

यह कहकर आर्यन उस दिशा में बढ़ गया, जिधर वह पक्षी गिर रहा था।

शलाका ने एक क्षण के लिये भागते हुए आर्यन को देखा और फ़िर होठों ही होठों में बुदबुदायी-

“यही तो वजह है तुमसे प्यार करने की।.... क्यों कि तुम दूसरोँ का दर्द भी महसूस कर सकते हो और ऐसा व्यक्ती ही ‘ब्रह्मकण’ का सही उत्तराधिकारी होगा।"

शलाका के चेहरे पर आर्यन के लिये ढेर सारा प्यार नजर आ रहा था। सुयश ने शलाका के शब्दों को सुना और उसके चेहरे के भावों को भी पहचान गया।

शलाका ने भी अब आर्यन के पीछे दौड़ लगा दी।

अपनी जान बचाने के लिये वह तोता, एक पार्क में मौजूद, आधी बनी गाय की मूर्ति के मुंह में छिप गया।

बाज उस मूर्ति के मुंह में अपना पंजा डालकर उस तोते को पकड़ने की कोशिश कर रहा था। तभी आर्यन वहां पहुंच गया।

उसने पास में पड़ा एक लकड़ी का डंडा उठाया और जोर से चिल्लाकर बाज को डराने लगा।

बाज आर्यन को देख डर गया और वहां से उड़कर गायब हो गया।

आर्यन ने गाय की मूर्ति के मुंह में हाथ डालकर उस तोते को बाहर निकाल लिया।

वह एक छोटा सा पहाड़ी तोते का बच्चा था।

तभी शलाका और सुयश भी उस जगह पर पहुंच गये।

सुयश की नजर जैसे ही उस तोते पर गयी, वह हैरान रह गया।

वह तोता ऐमू था। एक पल में ही सुयश को समझ में आ गया की क्यों ऐमू, सुयश को अपना दोस्त बोल रहा था।

जारी रहेगा_______✍️
 
#79.

उस तोते ने नन्ही आँखो से आर्यन को देखा।

आर्यन ने उसके सिर पर हाथ फेरा और धीरे से उसे ऊपर उछाल दिया।

उस तोते ने आसमान में अपने पंख फड़फड़ाये और फ़िर से आकर आर्यन के कंधे पर बैठ गया।

यह देख शलाका मुस्कुरा उठी- “लगता है यह तुम्हे अपना दोस्त मानने लगा है और अब यह तुम्हारे ही साथ रहना चाहता है।"

“अरे वाह! ये तो और भी अच्छी बात है। ऐसे मुझे भी एक दोस्त मिल जाएगा।" आर्यन ने कहा- “पर इसका नाम क्या रखूं?"

तभी सुयश ने आर्यन के कान में धीरे से फुसफुसा कर कहा- “ऐमू!"

और आर्यन बोल उठा- “ऐमू नाम कैसा रहेगा?"

“ऐमू ....ये कैसा नाम है? और ऐसा नाम तुम्हारे दिमाग में आया कैसे?" शलाका ने आर्यन से पूछा।

“पता नहीं....... पर मुझे ऐसा लगा जैसे यह नाम किसी ने मेरे कान में फुसफुसाया हो।" आर्यन ने अजीब सी आवाज में कहा।

यह सुन सुयश हैरान रह गया- “क्या मेरी आवाज आर्यन को सुनाई दी है? तो क्या ऐमू का नाम मैंने रखा था?"

“अब अगर दोस्ती हो गयी हो, तो जरा आज की प्रतियोगिता पर भी ध्यान दे लीजिये आर्यन जी।" शलाका ने प्यार भरे अंदाज में आर्यन को छेड़ा।

“हां-हां... क्यों नहीं.... मैंने कब मना किया?" आर्यन ने हंस कर कहा- “तो पहले हमें धेनुका ढूंढनी थी, जिससे स्वर्णदुग्ध लेना है।"

तभी ऐमू आर्यन के हाथ से उड़कर उस आधी बनी गाय की मूर्ति के सिर पर बैठकर जोर-जोर से बोलने लगा- “टेंऽऽ टेंऽऽ टेंऽऽऽ!"

आर्यन की निगाह ऐमू की ओर गयी और इसी के साथ वह खुशी से चीख उठा- “अरे ये भी तो हो सकती है धेनुका?"

“ये और धेनुका .... अरे आर्यन... यह तो पत्थर की बनी आधी गाय है, इससे हमें स्वर्णदुग्ध कैसे मिलेगा ? कुछ तो दिमाग का इस्तेमाल करो?" शलाका ने कहा।

पर आर्यन ने तो जैसे शलाका की बात सुनी ही नहीं। वह अपनी नजर तेजी से इधर-उधर घुमा रहा था।

उस पार्क के कुछ हिस्से में सुनहरी घास लगी थी और वहां पर कागज के कुछ टुकड़े फटे हुए पड़े थे।

इसके अलावा वहां ऐसा कुछ भी नहीं था, जिससे कुछ असाधारण महसूस हो।

पर जाने क्यों आर्यन को वहां कुछ तो अटपटा सा महसूस हो रहा था?

“आर्यन, समय बेकार मत करो किसी दूसरी जगह चलो, यहां धेनुका नहीं है।" शलाका ने फ़िर से आर्यन को समझाने की कोशिश की।

पर आर्यन ने शलाका की एक ना सुनी।

तभी ऐमू उछलकर उस गाय की मूर्ति के मुंह में बैठ गया और फ़िर से चीखने लगा- “टेऽऽ टेऽऽ टेऽऽऽ!"

आर्यन की नजर फ़िर एक बार ऐमू की ओर गयी और कुछ सोचकर आर्यन ने गाय के मूर्ति के खुले मुंह में हाथ डाल दिया।

आर्यन के हाथ, किसी धातु की चीज से स्पर्श हुए। उसने टटोलकर उस चीज को निकाल लिया।

वह एक छेनी और हथौड़ी थे। जिसे देखकर आर्यन खुश हो गया।

उसने तुरंत छेनी और हथौड़ी उठाई और गाय की आधी बनी मूर्ति को तराशने लगा।

अब शलाका भी ध्यान से आर्यन को देख रही थी। सुयश का भी सारा ध्यान आर्यन की ओर ही आ गया।

आर्यन के हाथ छेनी और हथौडी पर किसी सधे हुए मूर्तिकार की तरह तेजी से चल रहे थे।

लगभग आधे घंटे में ही गाय की पूरी मूर्ति आर्यन ने तराश दी।

जैसे ही आर्यन ने गाय के थन को तराशा, तुरंत एक चमत्कारीक तरीके से गाय सजीव हो गयी।

यह देख शलाका ने दौड़कर आर्यन को अपने गले से लगा लिया- “तुम्हारे जैसा दिमाग वाला पूरी पृथ्वी पर दूसरा नहीं मिलेगा। सच में तुम बहुत अच्छे हो।"

“अरे बस करो ... बस करो ... अभी काम पूरा नहीं हुआ है।" आर्यन ने शलाका को अपने से अलग करते हुए कहा।

शलाका यह सुन आश्चर्य में पड़ गयी।

“अरे, अब इसमें क्या बचा है। इसका दूध निकालो और गुरु नीलाभ के पास चलकर उन्हें बता देते हैं कि हम जीत गये।" शलाका ने खुशी का पुरजोर प्रदर्शन करते हुए कहा।

आर्यन ने धेनुका के थन को हाथ लगाकर दूध निकालने की कोशिश की, पर दूध नहीं निकला।

“देख लिया.... दूध नहीं निकला।" आर्यन ने इधर-उधर देखते हुए कहा-

“हमें इसके बछड़े को ढूंढना होगा। बिना बछड़े के ये दूध नहीं देगी।"

अब तो शलाका के साथ सुयश की भी नजरें चारो ओर घूमने लगी। पर वहां दूर-दूर तक बछड़े का नामोनिशान नहीं था।

“अगर धेनुका यहां है तो बछड़े को भी यहीं कहीं होना चाहिए। पर कहां है वह बछड़ा?"

आर्यन बहुत तेजी से सोच रहा था।

तभी आर्यन की नजरें उन फटे पड़े कागज के टुकड़ों की ओर गई।

उसने आगे बढ़कर कुछ टुकड़ों को उठाकर देखा और फ़िर खुश होता हुआ बोला- “शलाका, इन सारे टुकड़ों को इकट्ठा करके मुझे दो।"

शलाका ने अपने हाथ को हवा में हिलाया। सारे टुकड़े हवा में उठकर आर्यन के हाथ में आ गये।

“थोड़ा बहुत हाथ भी प्रयोग में लाया करो। हर समय जादू का प्रयोग करना ठीक नहीं होता।" आर्यन ने कहा।

शलाका ने आर्यन को देख मुस्कुराहाट बिखेरते हुए कहा- “कोशिश करूंगी।"

आर्यन अब सभी फटे कागज के टुकड़ो को ‘जिग्सा-पजल’ की तरह से जोड़ने बैठ गया।

उन कागज के टुकड़ों पर एक बछड़े की तस्वीर ही बनी थी।

जैसे ही आर्यन ने आखरी टुकड़ा जोड़ा, बछड़ा सजीव हो गया और ‘बां-बां‘ की आवाज करता गाय की

ओर दौड़ा। बछड़ा अब गाय के थन से मुंह लगाकर दूध पीने लगा।

शलाका बछड़े को हटाने के लिये धेनुका की ओर बढ़ी, पर आर्यन ने शलाका का हाथ पकड़कर उसे

रोक लिया।

शलाका ने आश्चर्य भरी नजरों से आर्यन को देखा, पर आर्यन प्यार भरी नजरों से बछड़े को दूध पीते देख रहा था।

“उसे मत रोको, दूध पीना बछड़े का अधिकार है। हम अपनी प्रतियोगिता की खातिर किसी बच्चे से उसका अधिकार नहीं छीन सकते।"

आर्यन के शब्दो में जैसे जादू था।

शलाका, आर्यन के पास आकर उसके कंधे पर सिर रखकर खड़ी हो गयी। शलाका ने अपना हाथ अभी भी आर्यन के हाथों से नहीं छुड़ाया था।

वह खुश थी, इस पल के लिये.... आर्यन के लिये.... और उसकी इन असीम भावनाओँ के लिये।

सुयश भी सब कुछ देख और समझ रहा था।

थोड़ी देर में बछड़ा तृप्त होकर गाय से दूर हट गया। तब आर्यन ने अपनी कमर पर बंधे एक छोटे से बर्तन को धेनुका के थन के नीचे लगाकर दूध निकाला।

पर वह दूध सफेद था।

“ये क्या? ये तो स्वर्ण-दुग्ध नहीं है।" आर्यन ने आश्चर्य से कहा-“इसका मतलब अभी कहीं कुछ कमी है। अभी धेनुका का दूध साधारण है.... इसे किसी ना किसी प्रकार से स्वर्ण में बदलना होगा?.....पर कैसे?"

तभी आर्यन की नजर सामने कुछ दूरी में लगी सुनहरी घास पर गयी।

आर्यन यह देख मुस्कुरा उठा। वह उठकर उस सुनहरी घास के पास गया और कुछ घास को हाथों से तोड़ लिया।

फ़िर वो धेनुका के पास आ गया और उसने सुनहरी घास को धेनुका को खिला दिया।

धेनुका ने आर्यन के हाथ में पकड़ी सारी घास को खा लिया।

अब आर्यन ने फ़िर एक बार बर्तन में धेनुका का दूध निकालने की कोशिश की।

अब धेनुका के थनो से सुनहरे रंग का दूध निकलने लगा था। कुछ ही देर में आर्यन का सारा बर्तन भर गया।

शलाका के चेहरे पर एक प्यार भरी मुस्कान थी।

आर्यन ने बर्तन का ढक्कन ठीक से बंद किया और उठकर खड़ा हो गया।

शलाका ने अब आर्यन का हाथ थाम लिया और दोनो वापस चल पड़े। ऐमू भी आकर आर्यन के कंधे पर बैठ गया।

कुछ ही देर में वह वापस कैलाश पर्वत के शिखर पर आ गये।

वहां से वह अपने उड़ने वाले घोड़े के रथ पर बैठकर वापस उस स्थान पर आ गये, जहां से वह बर्फ़ के दरवाजे से निकले थे।

सुयश अभी भी दोनो के साथ था। शलाका ने हाथ हिलाकर रथ को गायब कर दिया और आर्यन का हाथ पकड़कर दरवाजे के अंदर की ओर चल दी।

इससे पहले कि वह दरवाजा गायब होता, सुयश भी सरककर उस दरवाजे से अंदर की ओर चला गया।

अंदर एक बहुत विशालकाय बर्फ़ का मैदान था।

कुछ दूरी पर एक ऊंची सी इमारत बनी थी। जिस पर बड़े-बड़े धातु के अक्षरो में लिखा था- “वेदालय"

सभी वेदालय की ओर चल दिये। लेकिन इससे पहले कि आर्यन और शलाका वेदालय में प्रवेश कर पाते, तभी वेदालय से एक लड़की भागती हुई आयी और आर्यन को अपनी बाहों में भर लिया।

उसे देख शलाका ने धीरे से आर्यन का हाथ छोड़ दिया।

“मुझे पता था कि आज की प्रतियोगिता भी तुम ही जीतोगे।“

आकृति ने आर्यन से दूर हटते हुए कहा- “हां थोड़ा सा देर जरूर लगाई आज तुमने, पर अगर मैं आज तुम्हारे साथ होती तो कम से कम आधा घंटा पहले तुम ये प्रतियोगिता जीत जाते और.....और ये तोता कहां से ले आये? मेरे लिये है क्या?“

“पिनाक, शारंगा, कौस्तुभ, धनुषा, धरा और मयूर वापस आये कि नहीं?"

आर्यन ने आकृति की बात का जवाब ना देकर, उससे सवाल ही कर लिया।

“अभी कोई वापस नहीं लौटा और तुम्हें सबकी चिंता रहती है, मेरी छोड़कर।"

कहकर आकृति ने मुंह बनाकर शलाका को देखा और फ़िर आर्यन का हाथ पकड़कर वेदालय के अंदर की ओर चल दी।

शलाका, आर्यन का हाथ पकड़े आकृति को जाते हुए देख रही थी।

उसे आकृति का इस प्रकार आर्यन का हाथ पकड़ना बिल्कुल भी अच्छा नहीं लग रहा था।

फ़िर धीरे-धीरे शलाका भी बुझे मन से वेदालय के अंदर की ओर चल दी।

तभी सुयश को अपना शरीर वापस खिंचता नजर आया।

वह वापस आ रहा था, रोशनी को पार करके, ज्ञान का भंडार भरके, एक बार फ़िर वर्तमान में जीने के लिये , या फ़िर किसी की याद में बेचैन होकर जंगलों में भटकने के लिये।

जारी रहेगा_________✍️
 
#80.

समय- यात्रा का रहस्य: (8 जनवरी 2002, मंगलवार, 19:15, मायावन, अराका)

सभी सिंहासन के इर्द- गिर्द बैठे थे। सबकी निगाहें सिंहासन पर पड़े सुयश के शरीर पर थी।

ऐमू भी दुखी निगाहों से सुयश की ओर देख रहा था।

तभी सभी को सुयश की कराह सुनाई दी।

भागकर सभी ने सुयश को घेर लिया। और फ़िर दूसरी कराह के साथ सुयश ने अपनी आँखे खोल दी।

“कैप्टन। आप ठीक तो हैं ना?" अल्बर्ट ने सुयश से पूछा।

सुयश ने एक नजर वहां बैठे सभी लोगो पर डाली और फ़िर धीरे से अपना सिर हिलाकर हामी भरी।

सुयश को स्वस्थ देखकर सबकी जान में जान आयी।

शैफाली ने सुयश को एक पानी की बोतल पकड़ा दी। सुयश ने एक ही साँस में पूरी बोतल खाली कर दी। अब वह थोड़ा चैतन्य नजर आने लगा।

सुयश को अपना पूरा बदन टूटता हुआ सा महसूस हो रहा था।

तभी सुयश की निगाह वहां बैठे ऐमू पर पड़ी।

सुयश ने प्यार से ऐमू को अपने हाथों में उठा लिया- “अब तुम्हारा दोस्त तुम्हें छोड़ कर कहीं नहीं जायेगा। तुम ऐमू और मैं ऐमू का दोस्त।"

ऐमू यह सुनकर बहुत खुश हो गया, वह फ़िर अपने पंख फैलाकर जोर-जोर से बोलने लगा- “दोस्त आ गया .... दोस्त आ गया ... ऐमू का दोस्त आ गया।"

“आकी कैसी है?" सुयश ने ऐमू से पूछा।

“आकी अच्छी है ... आरू भी अच्छा है.... और ऐमू भी अच्छा है।" ऐमू ने कहा।

सुयश समझ गया कि ऐमू आकृति को ‘आकी’ और आर्यन को ‘आरू’ कह रहा था।

फ़िर कुछ सोच कर सुयश ने ऐमू से पूछा-“और शलाका कैसी है?"

शलाका का नाम सुनकर एक पल के लिये ऐमू कुछ नहीं बोला और थोड़ा बेचैन नजर आने लगा।

सुयश समझ गया कि ऐमू शलाका के बारे में कोई बात नहीं करना चाहता।

सुयश अब सिंहासन से उतर कर सभी लोगो के पास आ गया। तभी एक गड़गड़ाहट के साथ सिंहासन वापस जमीन में समा गया और उस जगह की जमीन वापस बराबर हो गयी।

अब उस स्थान को देखकर महसूस ही नहीं हो रहा था कि कुछ देर पहले वहां पर जमीन से कोई सिंहासन भी निकला था।

उधर किसी को कुछ समझ नहीं आ रहा था कि अचानक से सुयश ऐमू से क्यों बात करने लगा।

जब आख़िरकार ब्रेंडन से ना रहा गया तो वह बोल उठा- “कैप्टन, आपको सिंहासन पर बैठते ही क्या हो गया था?"

सुयश ने वहां बैठे सभी लोगो पर नजर डाली और शुरू से अंत तक की सारी कहानी, सभी को सुना दी।

पूरी कहानी सुनकर सबके चेहरे पर आश्चर्य के भाव आ गये।

“कैप्टन, यहां पर तो आपका शरीर बिल्कुल निर्जीव हो गया था।" असलम ने कहा- “हमें तो लगा कि शायद आप इस दुनियां में नहीं रहे। यह तो शैफाली ने हमें आपके जीवित होने के बारे में बताया।"

“तो मैं इस दुनियां में वैसे भी कहां था? मुझे लगता है कि यह किसी तरीके का ‘टाइम-स्लीप’ या ‘समय यात्रा’ थी। जिसमें मैंने अनगिनत आश्चर्यजनक चीजे देखी।" सुयश ने कहा।

“कैप्टन, आपने तो बहुत लंबी कहानी सुना दी।" तौफीक ने सुयश से कहा-

“आपने उस समय यात्रा में कुल कितना समय बिताया?"

“मैं वहां पर लगभग 4 घंटे के आसपास रहा था।" सुयश ने तौफीक से कहा।

“पर कैप्टन, यहां पर तो आप बस 10 मिनट ही निर्जीव रहे हैं।"

एलेक्स ने कहा- “10 मिनट में आप 4 घंटे की यात्रा कैसे कर सकते हैं?“

“शायद समय यात्रा में समय बहुत तेज चलता हो।" अल्बर्ट ने कहा।

“इस कहानी को सुनने के बाद अब इस द्वीप पर, किसी भी चीज पर आश्चर्य व्यक्त करने का कोई मतलब नहीं बनता।"

क्रिस्टी ने कहा- “हम तो इस बहुत ही साधारण सा द्वीप समझ रहे थे, पर यहां तो एक के बाद एक रहस्य खुलते ही जा रहे हैं।"

“तो क्या यह द्वीप कैप्टन के पूर्वजन्म से संबंध रखता है?" जेनिथ ने उलझे-उलझे स्वर में पूछा।

“कैप्टन क्या आप बता सकते हैं? कि जिस समय में आपने समय- यात्रा की, उसका समय काल क्या था? मेरा मतलब कि वह किस सदी का समय दिख रहा था। आप अंदाजे से कुछ बता सकते हैं क्या?" अल्बर्ट ने जेनिथ के सवाल को काटकर एक नया प्रश्न सुयश से पूछ लिया।

“मुझे कहीं भी लिखा हुआ तो कुछ दिखाई नहीं दिया, पर देखने से वह समय काल हजारों साल पुराना लग रहा था।" सुयश ने कहा।

“पर कैप्टन, अगर आपने उस समय काल में ऐमू को भी देखा था तो ज़्यादा से ज़्यादा उस समय काल को 20 वर्ष से ज़्यादा पुराना नहीं होना चाहिए क्यों कि एक तोते की आयु लगभग 20 वर्ष की ही होती है।" असलम ने कहा।

“पर मेरी आयु तो इस समय 34 वर्ष की है।" सुयश ने दिमाग लगाते हुए कहा-“फ़िर यह मेरे पूर्वजन्म की घटना कैसे हो सकती है?"

“कहीं जिस ब्रह्मकलश का जिक्र शलाका से आपने किया था, वह आपको उस जन्म में प्राप्त तो नहीं हो गया था?" जेनिथ ने कहा।

“ऐसा कैसे संभव है अगर वह ब्रह्म-कलश मुझे पूर्व जन्म में प्राप्त हो जाता तो मेरा दूसरा जन्म कैसे संभव होता? क्यों की मैं तो तब अमर हो चुका होता।" सुयश के शब्दो में गहरी चिंता के भाव थे।

“यह भी तो हो सकता है कि यह आपके पूर्व जन्म की घटना ना हो और आर्यन कोई और इंसान हो?" ब्रेंडन ने कहा।

आर्यन के दूसरा इंसान होने की बात सुन, शलाका को याद कर सुयश का दिल बैठ गया, पर तुरंत ही एक ख़याल आते ही वह बोल उठा-

“अगर आर्यन दूसरा इंसान होता तो यह सिंहासन मुझे आर्यन के समयकाल में क्यों ले जाता? और फिर मुझे चलते हुए एक हवा में आवाज भी सुनाई दी थी, जिसमें मुझे आर्यन पुकारा गया था। और .... और वह शलाका की मूर्ति से मेरे टैटू को ही शक्तियाँ क्यों मिली? और मेरा टैटू यहां की दीवारों पर कैसे अंकित है?"

सुयश की बात तो सही थी, इसिलये थोड़ी देर तक कोई कुछ ना बोला।

फिलहाल वहां और कुछ खतरनाक नहीं था इसिलये सभी वापस खण्डहरों में रुकने के लिए जगह ढूंढने लगे।

“खंडहर के कुछ भागो की छत अभी भी सही है। हमें यहीं कहीं अपना डेरा डाल लेना चाहिए।" अल्बर्ट ने कहा।

“वो जगह सही रहेगी।" सुयश एक ओर इशारा करते हुए बोला-“वह जगह तीन तरफ से घिरी है, वहां पर खतरा कम रहेगा।" कहकर सुयश उस स्थान पर आकर खड़ा हो गया।

कुछ लोगो ने पेड़ की टहनियो से झाड़ू बनाकर उस स्थान को साफ कर लिया।

“कैप्टन, आपकी कहानी में ब्रह्मकलश का जिक्र आया, आपको क्या लगता है कि इस दुनियां में कोई ऐसी चीज हो सकती है जो किसी भी इंसान को अमरत्व प्रदान कर सकती हो।" तौफीक ने सुयश से पूछा।

पर इससे पहले कि सुयश इस बात का कोई जवाब दे पाता, बीच में ही अल्बर्ट बोल उठा-

“मिस्टर तौफीक, आपके प्रश्न का मैं 2 तरह से जवाब देना चाहूँगा। कई भाषाओँ के धर्मग्रन्थो में अलग- अलग नामो से अमृत का जिक्र किया गया है, जिसे पीने के बाद इंसान हर प्रकार के रोग से मुक्त होकर अमर हो जाता है।

पर अगर यही सवाल का जवाब मैं आपको विज्ञान के तरीके से समझाऊं तो आप ये समझ ले कि अभी जरूर हमने अमृत जैसे किसी तत्व का आविष्कार नहीं किया है, पर हम 200 वर्ष के अंदर ऐसी दवा का आविष्कार अवश्य कर लेंगे, जिसे पीने के बाद हम सभी रोगो से मुक्त होकर अमर हो जाएंगे।

पर यह ध्यान रहे कि हम रोगो से मुक्त हो जाएंगे और बीमारी से नहीं मरेंगे, पर किसी भी प्रकार की दुर्घटना हमारी जान ले सकेगी। वैसे दुनियां में अभी भी ऐसे कई वैज्ञानिक हैं जो इंसान के शरीर के अंग कटने के बाद, उसके दोबारा उग सकने वाले विषय पर भी शोध कर रहे हैं।"

“वैसे कुछ भी कहिये कैप्टन, आपका वेदालय बहुत ही शानदार विद्या का केन्द्र लग रहा है, सुनकर ही मजा आ गया।" शैफाली ने अपने विचारो को व्यक्त करते हुए कहा- “काश मैं भी उसमें पढ़ सकती।"

“मुझे तो लगता है कि तुम वेदालय से भी खतरनाक विद्यालय में पढ़ी हो।" जॉनी ने शैफाली को घूरते हुए कहा- “क्यों की तुमसे ज़्यादा रहस्यमयी हमारे बीच कोई नहीं है?"

शैफाली ने जॉनी को घूरकर देखा, पर कुछ कहा नहीं।

“कैप्टन आप ने इतने सारे लोक के नाम बताए, पर आप गये केवल देवलोक में ही थे, आपको क्या लगता है कि इतने सारे लोक क्या हो सकते है?" एलेक्स ने पूछा।

“पता नहीं। पर मुझे लगता है कि यह सारे लोकों के नाम शायद वहां उपस्थित राज्यो के नाम है या फिर

प्रतियोगिता के लिये कृत्रिम बनाए गये कुछ स्थान हैं, जिसको प्रतियोगिता के हिसाब से डिजाइन किया जाता हो? पर जो भी है, वह स्थान बहुत ही अद्भुत था।"

“वैसे प्रोफेसर।" जेनिथ ने अल्बर्ट की ओर देखते हुए कहा- “आपका इस सिंहासन के बारे में क्या ख्याल है? क्या ये समय यात्रा कराने वाली कोई प्राचीन मशीन है?"

“अभी तक तो समय यात्रा हम वैज्ञानिको के लिये एक सपना ही है, पर मुझे लगता है कि पहले का विज्ञान आज के विज्ञान से बहुत ज़्यादा विकसित था, इसिलये यह सिंहासन एक समय यात्रा की मशीन हो भी सकती है।" अल्बर्ट ने कहा- “लेकिन मुझे यह नहीं पता कि इस सिंहासन रूपी मशीन में टाइम कैसे सेट करते होंगे?"

“मेरे हिसाब से रात काफ़ी हो चुकी है इसिलये अब हमें सोना चाहिए।" सुयश ने थके अंदाज में अंगड़ाई लेते हुए कहा।

वैसे भी अब सभी के पास सवाल ख़तम हो गये थे। इसिलये सभी सोने की तैयारियां करने लगे।

जो कुछ भी उनके पास था, वह खा-पीकर वो लोग वहीं जमीन पर सो गये।

जारी रहेगा_______✍️
 
Agla update likh raha hu tab tak sab apna apna review de diyo bhidu log :yes1:
 
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