Adultery सपना या हकीकत [ INCEST + ADULT ] - Page 54 - SexBaba
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Adultery सपना या हकीकत [ INCEST + ADULT ]

प्रिय पाठको

कुछ तकनीकी कारणों या कहूं मेरी नादानी से , लिखा हुआ अपडेट गायब हो गया

दरअसल मै मोबाइल पर व्हाट्सअप पर एक चैट में हो इसके अपडेट लिखता हूं , चैट हिडेन होती है

नया मोबाइल लिया था और नए मोबाइल में डाटा ट्रांसफर तो किया लेकिन गलती से बिना अपडेट कॉपी किए , नए मोबाइल में व्हाट्सअप लॉगिन कर लिया

जब कांड हो गया तो देर रात में कही पता चला कि कितना नुकसान कर लिया मैने

इस कहानी के साथ साथ , इश्क और हसरत वाली स्टोरी के अपडेट भी गायब हो गए

अब वही अपडेट फिर से लिखने में बहुत इरीटेशन सी हो रही है , दो तीन बार कोशिश करी ,लेकिन काम बनता नहीं दिख रहा है

तो कृपया आप सभी धैर्य बनाए रखें

शनिवार या रविवार तक अपडेट देने की पूरी कोशिश रहेगी मेरी ।

अगर इस टाइम पीरियड में अपडेट नहीं मिल पाते है तो संभवतः अगले माह से ही कहानी आगे बढ़ेगी ।

आपके प्यार और स्नेह के लिए धन्यवाद
 
हमसफर के साथ इन दिनों सफर पर हूं दोस्तों

नेटवर्क इश्यू की वजह से साइट विजिट नहीं कर पा रहा हूं

अगले एक सप्ताह के लिए छुट्टी और रहेगी

कहानी पर अगले माह के 2ND WEEK से ही अपडेट मिलेंगे

सभी को सुचित कर दिया जाएगा

एंजॉय कीजिए और खुश रहिए

धन्यवाद 🥰🙏
 
💥 अध्याय 02 💥

UPDATE 42


सरोजा कॉम्प्लेक्स की पार्किंग में मदन ने गाड़ी लगाई और ममता , मंजू और सोनल को साथ लेकर आगे बढ़ गई

मदन गाड़ी लगाने लगा


गाड़ी से मुरारी और अमन बाहर आए

दोनों बाप बेटे की नजरे उन तीन लचीले हिलकोर खाते साड़ी में मोटे चर्बीदार चूतड़ों के झटको पर गई

दोनों आपस में देख कर मुस्कुराए

: क्या पापा ऐसे ही चलेगा ( अमन उखड़े हुए स्वर में बोला )

: चलने दे बेटा , चलते हुए इनके चूतड़ कैसे झटके खा कर हिल रहे है उफ्फ

: यार पापा वो सब ठीक है , लेकिन मम्मी को जबसे देखा है कल से हालात खराब है , कुछ करो न

: हालत तो मेरी भी खराब है बेटा , रात में तेरी मां मंजू को साथ में लेकर सोती है और मुझे मदन के साथ सोना पड़ता है । तेरा तो फायदा है कि तुझे रात में बहु देती तो है

: वो भी ज्यादा दिन नहीं होगा

: क्यों ?

: बता रही थी उसके पीरियड डेट आने वाले है

: ओह्ह्ह

: फिर घर में संगीता बुआ भी आ जाएंगी , मम्मी , चाची , बुआ इनसब को देख कर मेरा हाल बुरा होने वाला है , अब आप ही कुछ करो ।

मुरारी सोचने लगता है कि मदन के साथ मस्ती के चक्कर में असल में वो अपनी सेक्सी बहु सोनल को भूल ही गया था ।

तभी वही दूर खड़ी ममता ने पलट कर देखा और इशारे से सोनल को अमन और मुरारी की ओर दिखाया

दोनों सास बहु आपस में देख कर मुस्कुराई

मंजू को कुछ समझ नहीं आया

तबतक अमन और मुरारी के पास मदन आ गया और तीनों भी आगे चल पड़े लेडीज लोगों के पास ।

शॉपिंग का सिलसिला शुरू हो गया

सबसे पहले साड़ियों और दुल्हन के कपड़े की खरीदारी शुरू हुई और महिलाएं जुट गई उसमें

जेंस लोग भी अपने सेक्शन में चले गए ।

जल्द ही मर्दों की खरीदारी निपट गई और वो लोग वापस लेडीज वाले फ्लोर पर जाने लगे ।

वहा जाकर पता चला कि जिस दुकान पर औरतों को छोड़ा था वो गायब थी

लेडीज सेक्शन में उनकी खोजबीन शुरू हो गई

तभी कपड़ो दुकानों से निकलते हुए मदन की नजर एक नाइट ड्रेस वाली शॉप पर गई

अलग अलग डिजाइन की सैटिन की नाइटी और ब्रा पैंटी के सेट देख कर मदन की आंखे चमक उठी

सहसा उसकी नजर उस दुकान के डिस्प्ले में चल रही एक भारी देह वाली महिला पर गई , जो ब्रांड प्रोमो के लिए मॉडल के रूप में वीडियो पर दिख रही थी

उसकी मोटी गदराई जांघों को और चौड़े कूल्हे देख कर मदन को अपनी भाभी ममता का ख्याल आया

और वो एक ख्याल से बेचैन हो गया

: अरे मदन भाई चलो ( मुरारी ने उसे आवाज दी )

: जी , जी भइया आ रहा हूं

: क्या हुआ , कहा खोए हो

मदन थोड़ा अमन से हिचक रहा था और उसने मुरारी को इशारा किया , तो मुरारी समझ गया

: अरे अमन बेटा , जरा उस तरफ देखो कॉस्मटेक वाली दुकानों की ओर तो नहीं गई ये लोग

: जी पापा देखता हूं

अमन दूसरी ओर निकल गया और मुरारी पलट कर मदन को

: क्या हुआ बोलो

: भइया ( मदन थोड़ा बेचैन था और लंड उसके पैंट में फूल रहा था )

: अरे कुछ बोलोगे

: आपको नहीं लगता कि भाभी ऐसे छोटे कपड़ों में और सेक्सी लगेंगी

मदन ने एक पुतले की इशारा किया , जिसमें वो डमी लेडी सिर्फ साटिन की चमकीली ब्रा पैंटी में थी ऊपर से नेट वाले गाउन चढ़ाए

मुरारी उसकी ओर देख कर मुस्कुराया

: अभी सुबह ही तो किया न, फिर से तेरा मूड हो गया

: वो तो चोरी छिपे वाला था न भैया, कैसा होगा जब भाभी को सच में पता होगा कि मै उन्हें पेल रहा हूं

मुरारी की सांसे थोड़ी चढ़ने लगी मदन की बात सुन कर

: सच कहूं तो भैया मै खुल कर भाभी को करना चाहता हूं , पता है अंग्रेजी फिल्मों वाली एक हीरोइन है । उसको देखता हूं तो भाभी से बिल्कुल मैच खाती है , वैसे ही मोटे चूचे मोटी गाड़ और भाभी जितनी ही चुलबुली है ।

: क्या सच में , जरा दिखाना तो

: आओ थोड़ा इधर

फिर मदन ने झट से नेट पर सर्च कर मुरारी को sofia Rose की न्यूड तस्वीरें दिखाई






जिसे देखते ही मुरारी का लंड उसके पजामे में फौलादी हो गया

: उफ्फ छोटे क्या चीज है ये सीई

: भैया , एक बार इसकी वो वाली वीडियो देख लो , इतने सेक्सी सेक्सी कपड़े पहनती है और चुदवाती ऐसे है कि पूछो मत

: है क्या कोई वीडियो

: नहीं लेकिन डाउनलोड करनी पड़ेगी

: तो कर ले छोटे , आज देखते है और ममता को भी दिखाएंगे

: क्या सच में भइया

: ट्राई करते है क्या हो सकता है

: फिर तो मजा आ जाएगा भइया

तभी अमन ने उन्हें आवाज दी कि मम्मी चाची लोग मिल गए है

दोनों भाई उसी ओर बढ़ गए

पता चला , मुरारी का अनुमान सही था सभी कॉस्मेटिक शॉपिंग कर रही थी ।

अब दुकान में घुसे कौन

अंदर औरते ही भरी हुई थी

शादियों का सीजन था तो भीड़ भी थी

सोनल अपने जरूरतों की खरीदारी अकेले करने लगी और उसने इशारे से अमन को अपने पास बुला लिया

अमन चला गया अंदर और दोनों भाई वापस बाहर रह गए

वही ममता मंजू को लेकर एक ओर बढ़ गई और वहां उसकी नजर वैक्स क्रीम पर गई ।

: हम्म्म अब मिली मुझे मेरे काम की चीज

: क्या भाभी आप भी ( मंजू थोड़ा शर्माई वैक्स के क्रीम के डिब्बे देख कर )

: थोड़ी देख भाल जरूरी है और वैसे भी पहले तो अमन के पापा कर देते थे हर हफ्ते , अब तू आ गई है तो तू मेरा कर देना और मै तेरी

मंजू शर्म से गाढ़ होने लगी

: क्या ? ( ममता उसकी ओर देख कर बोली और शर्म से उसका चेहरा गुलाबी हो गया ) सच में भइया आपका ?

: मुझे देख कर लगता है मेरे हाथ वहां तक जाएंगे और पीछे तो बिल्कुल भी नहीं हीही ( ममता फुसफुसा कर बोली )

ममता की बात पर मंजू हंसी और दूसरे समान देखने लगी

: लेकिन इसमें भी मेरा ही फायदा होता है

: वो क्या ?

ममता ने आस पास देखा और मुस्कुराती हुई मंजू के कान में फुसफुसा कर बोली : उस रोज वो सिर्फ क्रीम से चिकना नहीं करते , बाद में तेल फिर जीभ उफ्फ

: धत्त भाभी आप भी न

: हीहीही

ममता खिलखिलाई और थोड़ी देर बाद सारे लोग अपनी खरीदारी करके निकल गए घर की ओर

निशा के घर


वही चमनपुरा में ही निशा भी अपने पैरों के बल बैठी हुई थी और उसके सामने थे उसके पापा और भाई

जो दोनों अपना लंड हिला रहे थे उसके आगे और निशा पूरी तरह से तैयार थी उनके लंड मुंह में लेने के लिए,

निशा फर्श पर घुटनों के बल बैठी थी—बिल्कुल नंगी, बदन पसीने से चमक रहा था। उसके लंबे बाल खुले हुए पीठ पर लहरा रहे थे, भारी-भारी स्तन आगे को झुके हुए, गुलाबी चूचुक खड़े और सख्त। उसकी चूत पहले से ही गीली थी, जांघों पर चिकनाहट बह रही थी, और गांड के दोनों गाल फैले हुए थे।

सामने उसके पापा जंगीलाल और भाई राहुल खड़े थे। दोनों के लंड पूरी तरह कड़क, नसें उभरी हुईं। जंगीलाल का मोटा लंड, लाल-लाल टोपा, पहले से ही प्रीकम से चमक रहा था। राहुल का का लंबा लंड, सीधा खड़ा, जैसे तीर की तरह निशा के मुंह की तरफ इशारा कर रहा हो। दोनों हाथ में लंड पकड़े हुए धीरे-धीरे हिला रहे थे, आँखें निशा के बदन पर टिकी हुईं।

निशा ने जीभ निकालकर होंठ चाटे। उसकी आँखों में वो भूख थी—पापा और भाई दोनों के लंड की भूख।

“पापा... राहुल... इतना इंतज़ार क्यों करवा रहे हो? इतने दिन हो गए तुम्हारे लंड लिए हुए, आओ पापा अपना कड़क मोटा लंड मेरे मुंह में डालो ना राहुल तू भी... दोनों के लंड... एक साथ...” एक हाथ से अपनी चूत रगड़ते हुए उत्तेजित होकर निशा बोल रही थी, उसकी आवाज़ काँप रही थी, लेकिन हवस से भरी हुई।

जंगीलाल ने एक कदम आगे बढ़ाया। उसने अपना मोटा लंड निशा के होंठों पर रगड़ा। “खोल मुंह रानी बिटिया... पापा का लंड पहले चख... देख कितना गरम है तेरे लिए।”

निशा ने मुंह खोला, जीभ बाहर निकाली और जंगीलाल के लंड के टोपे को चाटा। फिर धीरे से मुंह में लिया—आधा लंड अंदर, गाल फूल गए। वो चूसने लगी, जोर-जोर से, जैसे अपनी ज़िंदगी की सबसे स्वादिष्ट आइसक्रीम चख रही हो। “उम्म्म... पापा... कितना मोटा... मेरे मुंह को फाड़ रहा है...” निशा टोपे पर जीभ फिराते हुए बोली।

राहुल जो इतनी देर से अपने लंड को हिलाते हुए अपने पापा और दीदी का खेल देख रहा था वो आगे आया। उसने निशा के बाल पकड़े, सिर थोड़ा पीछे खींचा और अपना लंड उसके गाल पर ठोका। “दीदी... अब मेरा भी लो... ओह मेरी प्यारी बहन हो ना?” निशा ने हाँ में सिर हिलाया, मुंह से जंगीलाल का लंड निकाला और राहुल का लंड मुंह में ले लिया। राहुल का लंड लंबा था, गले तक जाता हुआ महसूस हो रहा था। निशा की आँखों से आँसू निकल आए, लेकिन वो रुकी नहीं—चूसती रही, लार बह रही थी, दोनों लंडों पर चमक रही थी।






असली मज़ा शुरू हुआ। जंगीलाल और राहुल दोनों ने मिलकर निशा के मुंह को इस्तेमाल करना शुरू किया। एक लंड अंदर, दूसरा बाहर। जंगीलाल का मोटा लंड निशा के गाल फुला रहा था, राहुल का लंबा लंड गले तक धक्का दे रहा था। निशा के मुंह से आवाज़ें निकल रही थीं— “ग्लक... ग्लक... उम्म्म... हाँ... चोदो मेरे मुंह को... दोनों मिलकर...” वो हाथ से दोनों लंड हिला रही थी, कभी एक को चूसती, कभी दूसरे को।

जंगीलाल ने कहा, “अब घूम जा मेरी रानी बिटिया आह बहुत दिन हो गए तेरा स्वाद लिए ...अब तेरा बाप तेरी गांड चाटेगा।” निशा तुरन्त सोफे पर घूम कर चारों हाथ-पैरों के बल हो गई—कुतिया की तरह और अपनी गांड को पीछे की ओर फैला दिया और चूतड़ों को हिला कर अपने पापा को ललचाने लगी।

निशा: ओह पापा आओ न बेटी के चूतड़ों को फैलाकर मेरी गांड चाटो आह अपनी खुरदरी जीभ से मेरी गांड को छेड़ो।






निशा की कामुक बातें सुन कर जंगीलाल पीछे बैठ गया, निशा के मोटे चूतड़ फैलाए, और गांड के छेद पर जीभ फेरने लगा।

हाय... कितनी स्वादिष्ट गांड है मेरी बेटी की...ओह।”

वो अपनी खुरदरी जीभ निशा की गांड के छेद पर फिराते हुए बोला

राहुल निशा के आगे सोफे पर बैठ गया उसका लंड निशा के मुंह के ठीक नीचे था, निशा भी तुरंत उसे चूसने लगी।

राहुल: ओह दीदी आह चूसो अपने भाई के मोटे लंड को ओह आह मेरी रंडी दीदी ओह आह गरम मुंह है तुम्हारा।

राहुल अपनी कमर हिलाते हुए निशा के बाल पकड़ कर उसका मुंह चोदने लगा,

निशा की चूत से रस टपक रहा था।






जंगीलाल लगातार उसकी गांड चाट रहा था साथ ही उंगली से उसकी चूत को सहला भी रहा था वहीं राहुल का लंड निशा पूरी लगन से चूस रही थी

कुछ देर तक इसी तरह खेल चला और फिर राहुल लेट गया बिस्तर पर, और निशा उसके ऊपर चढ़ी, अपनी गीली चूत उसके लंड पर रखी और बैठ गई। “आआह्ह्ह... राहुल... तेरे लंड ने मेरी चूत को फिर से फाड़ दिया...” वो ऊपर-नीचे होने लगी।

राहुल: ओह दीदी आह गरम चूत में लंड आह ऐसा लग रहा है गरम गरम गुफा में लंड घुसा दिया है

निशा: बहन की गुफा पर भाई का ही हक होता है भाई आह आह आह आह, निशा राहुल के लंड पर उछलने लगी वहीं जंगी लाल अपने लंड पर थूक लगाकर उसे तैयार कर रहा था उनका निशाना बेटी की गांड ही थी कुछ पल बाद जंगीलाल पीछे आया, अपना मोटा लंड निशा की गांड पर रगड़ा, थूक लगाया और धीरे-धीरे धकेलना शुरू किया। एक झटके में ही उसका टोपा बेटी की गांड में फंस गया और दोनों के मुंह से ही आह निकल गई,

निशा: आह ओह पापा आह गांड चीर दी तुमने मेरी ओह ओह आह,

जंगीलाल: बस थोड़ी सी देर बिटिया आह देख अभी अच्छा लगने लगेगा, ये कहते हुए जंगीलाल ने एक और धक्का मारा, आधा लंड अंदर।

निशा चीखी— “आआह्ह्ह... पापा... दर्द हो रहा है... लेकिन रुकना मत... पूरा डालो!”

निशा भी दिखा रही थी वो किस मिट्टी की बनी थी, जंगीलाल ने एक दो धक्के और लगाए निशा की कमर को पकड़ कर।

जंगीलाल ने पूरा लंड घुसेड़ दिया।






निशा अब दोनों ओर से भरी हुई थी उस पर दोहरा हमला हो रहा था—चूत में भाई का लंड, गांड में पापा का मोटा लंड। दोनों एक साथ धक्के लगाने लगे। कुछ ही देर में बाप बेटे ने एक लय पकड़ ली, आखिर शालिनी के साथ की हुई प्रैक्टिस काम जो आ रही थी,

निशा का बदन काँप रहा था, स्तन उछल रहे थे, चूतड़ लहरा रहे थे। कमरे में सिर्फ थापें की आवाज़ गूंज रही थी— जांघों के चूतड़ों पर टकराने की आवाज़ आ रही थी

निशा की चीखें—“हाँ... चोदो मुझे... दोनों मिलकर... मैं तुम दोनों की रखैल हूँ... फाड़ दो मेरी चूत और गांड!”

राहुल: आह ओह दीदी आह आह मुझे पापा तुम्हारा आह लंड महसूस हो रहा है दीदी की गांड में आह।

राहुल नीचे से धक्के लगाते हुए बोला, जिसकी सहमति जंगी ने भी जताई: आह मुझे भी बेटा आह आह निशा की गांड और कसी लग रही है आह आह आह, जंगी लाल भी लगातार निशा की गांड में लंड अंदर बाहर करते हुए बोले।

निशा की तो दोहरी चुदाई से हालत खराब हो रही थी पर उसकी उत्तेजना उसे पीछे नहीं हटने दे रही थी पर कुछ देर बाद उसे हार माननी पड़ी वो मचलते हुए राहुल के ऊपर लेट गई उसका बदन कांपने लगा , चूत और गांड कसने लगी और वो झड़ने लगी, निशा ने खुद झड़ते हुए भी राहुल और जंगी के लंड को ऐसा निचोड़ा की वो दोनों भी अपने चरम पर पहुंच गए, अपने लंड में खिंचाव बढ़ता देख जंगी ने तुरंत उसकी गांड से लंड निकाला और निशा भी राहुल के ऊपर से हट गई और बैठ गई, जंगी अपना लंड पकड़ कर थोड़ा सा हिलाया तो एक के बाद एक धार निकल कर निशा के चेहरे को भिगाने लगी, निशा भी मुंह खोल कर अपने पापा के रस का स्वाद ले रही थी






जंगी के बाद हटते ही राहुल ने भी अपनी पिचकारी शुरू कर दी और निशा की चूचियों को निशाना बनाते हुए उन्हें अपने रस से रंग दिया, झड़ने के बाद दोनों बाप बेटे पीछे सोफे पर बैठ गए, निशा अभी घुटनों पर थी अपने बाप और भाई के रस में सनी हुई। और उनकी ओर देख मुस्कुरा रही थी,

उसी समय शालिनी भी कमरे में आई और ये सब देखा,

शालिनी: हाय दैय्या ये क्या हो रहा है और निशा तूने क्या हालत बना रखी है अपनी?

राहुल: मम्मी मैने और पापा ने दीदी को वही सर्विस दी है जो तुम्हें देते थे,

राहुल ने उत्साहित होकर बोला, शालिनी ने तिरछी निगाहों से उसे देखा और फिर जंगी की ओर देखा जो बैठे हुए मुस्कुरा रहा था, फिर वो निशा की ओर बढ़ी,

शालिनी: पूरा चेहरा सना हुआ है तेरा साफ करना पड़ेगा।

ये कहते हुए शालिनी नीचे बैठ गई और फिर अपना मुंह आगे कर निशा के होंठो पर लगा रस जीभ से चाट लिया, शालिनी की इस हरकत से सब हैरान रह गए, निशा, जंगी और राहुल सब उसे हैरानी से देख रहे थे, वहीं शालिनी के चेहरे पर एक कामुक मुस्कान थी, निशा को जैसे ही थोड़ा समझ आया वो भी अपनी मम्मी के होंठो पर टूट पड़ी, दोनों मां बेटी एक दूसरे के होंठों को चूसने लगी, जंगी और राहुल के रस को निशा के बदन से लेकर एक दूसरे को चटाने लगी, शालिनी निशा के बदन से अपने पति और बेटे के रस को चाट रही थी






और ये नज़ारा देख कर बाप और बेटे दोनों का लंड फिर से उठ रहा था, निशा का बदन शालिनी के थूक और रस के मिश्रण से और कामुक लगने लगा, तब जाकर शालिनी बेटी के बदन से अलग हुई,

राहुल: वाह मम्मी मज़ा आ गया क्या मस्त एंट्री मारी है तुमने तो,

निशा: सच में मम्मी आह इतनी गरम तो मैं शायद कभी नहीं हुई आह मज़ा आ गया,

जंगीलाल: सही में मेरी रानी तुमने आज कमाल कर दिया अब तुम दोनों हमारी तरफ भी ध्यान दो देखो क्या हाल हुआ है हमारा तुम्हें देख कर।

शालिनी: अभी नहीं थोड़ा रुको निशा और मुझे नहा लेने दो फिर आगे क्या करना ह बताती हूं,

एक मुस्कान के साथ शालिनी बोली। सब को लग रहा था शालिनी न कुछ सोच रखा है।

: और राहुल सुन

: हा मेरी सेक्सी मम्मी बोलो न

: बाहर वो ... ( शालिनी ने राहुल को नंगे हो खुद से चिपकता देख कर रुक गई और उसे घूरा ) बाहर अनुज आया है दुकान में

अनुज का नाम आते ही जंगी राहुल सब हड़बड़ा गए और शालिनी मुस्कुराई

: बाहर जा जल्दी , मैने उसे वही रुकने को बोला है जा अब

: ठीक है मम्मी , आओ पापा

: अह हा बेटा चलते है ( जंगी लाल भी फटाफट अपने कपड़े पहनते हुए बोला )

थोड़ी देर बाद राहुल और जंगीलाल दोनों बाहर आए

: हा अनुज क्या हुआ ( राहुल गलियारे से दुकान में आते हुए बोला )

इधर मोबाइल की तलाश में बौखलाया हुआ अनुज कुछ बोलता इससे पहले उसकी नजर राहुल के पीछे आ रहे उसके पापा पर गई

: नमस्ते चाचू

: अरे अनुज , कैसे हो बेटा और भैया आए

एक साथ तीन सवाल

: जी चाचू ठीक हूं , पापा शायद कल आए

: अच्छा अच्छा

जंगी फिर दुकान में व्यस्त हो गया और अनुज राहुल को इशारे से बाहर चलने के लिए कहा

दोनों फिर निकल गए अपने अड्डे की ओर , मंदिर वाले रास्ते पर

: क्या हुआ भाई इतना परेशान क्यों है

: यार तुम मेरी एक हेल्प करोगे

: क्यों नहीं करूंगा यार ( राहुल ने अनुज के कंधे पर हाथ पर कहा ) तू तो मेरा भाई है । बोल क्या चाहिए

: वो वो

: देख मेरी मम्मी को चोदना चाहता है तो मुझे पहले सेटिंग करना पड़ेगा कुछ

: अरे नहीं यार वो नहीं

: फिर ?

: वो मुझे मोबाइल और एक सिम चाहिए

: मोबाइल और सिम ( राहुल भी एक पल को ठहरा लेकिन अगले ही पल उसका दिमाग अलर्ट हुआ )

: लाली से बात करने के लिए?

अनुज की चोरी पकड़ी गई और मुंह उठा कर राहुल को देखा


: अबे तेरी शक्ल पर लिखा है कि तुझे किसके लिए चाहिए हाहाहा

राहुल थोड़ा खिलखिलाया और अनुज शांत रहा कि यहां भी वो अपनी भावनाएं छुपाने में नाकाम रहा

: तो क्या पक्का अब वही बनेगी मेरी भाभी

इस पर अनुज थोड़ा मुस्कुराया ,क्योंकि आज से पहा राहुल ने कभी उसकी चीजों को इतना सम्मान नहीं दिया था खासकर लाली को लेकर । कुछ न कुछ उट पतांग बक देता था और अनुज का मुंह बन जाता था ।

अनुज को मुस्कुराता देख राहुल भी खुश हो गया और अनुज के कंधे पर हाथ रखे हुए उसे हिलाता हुआ पूरी दिलदारी से बोला : हो जाएगा

अनुज के दिल में खुशी की उमंग उठने लगी

: पक्का

: हा यार तेरे लिए कुछ भी भाई , बस अपने भाई का भी ख्याल रखना

अनुज थोड़ा पोजेसिव होने लगा उसके मन में शंका की बीज उठने लगी कि कही राहुल का इशारा लाली को शेयर करने को लेकर तो नहीं

: अबे लोडू मुंह मत बना , तेरी माल को कुछ नहीं बोल रहा मै , वो पूजा का नंबर दिला दे बस

अनुज का कलेजा हल्का हुआ अब कही जाकर और वो खुश भी हो गया

: ओके डन

: फिर मुझे कल तक का वक्त दे

: कल क्यों ? ( अनुज थोड़ा उखड़ा)

: अरे भाई जेब में लेकर थोड़ी न घूमता हूं , दो चार जगह पता करना पड़ेगा और कल तुझे पक्का मै दे दूंगा ओके

: ठीक है ( अनुज खुश हो गया )

फिर दोनों आगे बढ़ने लगे घाट की ओर

: और बता घर पर सब कैसा है , कुछ सोचा तूने बड़ी मम्मी के बारे में

अनुज खीझ गया , जानता था कि राहुल उसकी खिंचाई जरूर करेगा लेकिन वो ज्यादा ध्यान न देते हुए राहुल को इस टॉपिक से घुमाते हुए पूजा के बारे में बात करने लगा और राहुल उस झांसे में आ ही गया ।

वही दूसरी ओर राज के बर्तन वाले दुकान के छत पर कमरे में मालती की बेचैनी बढ़ती जा रही थी

एक तरह चंदू ने उसे फंसा दिया था और अभी अभी उसने जो नीचे केबिन में देखा था वो उसकी उम्मीद से कही अलग था

आंखे बंद करते हुए उसके जहन में राज का वो कामुकता से लाल हुआ चेहरा नजर आता

जब गायत्री काकी ने राज का लंड मुंह में ले रखा था और अनजाने में ही सही लेकिन मालती की नजर राज से मिल गई

" ओह्ह्ह नहीई आह्ह्ह्ह सीई काकी ओह्ह्ह्ह नहीं रुक जाओ ओह्ह्ह सीईईई मम्मीइई ओह्ह्ह्ह फक्क्क्"

राज का वो कामुकता के शिखर पर पहुंच कर हड़बड़ाना और एक के बाद एक गाढ़ी पिचकारियां गायत्री के मुंह में छोड़ना

सब कुछ सचित्र चल रहा था मालती के जहन में , उसके बुर की फांके बुरी तरह से लसलसा गई थी ।

चंदू का समय से ना आना अब उसे बहुत ज्यादा ही चिड़चिड़ा करने लगा था और वही राज नीचे से गायत्री काकी को भेज दिया उनके घर

बड़ी अटपटी सी स्थिति थी अब राज के लिए भी , वो नीचे केबिन में बैठा यही सोच रहा था कि शायद मालती को उसे घर भेज देना चाहिए

झड़ने के बाद हवस जब दिमाग से निकल जाए तो मानवता हावी होने लगती है और यही सब राज महसूस कर रहा था । थोड़ी सी लापरवाही ने उपजी हुई भीतरी ग्लानि ।

लेकिन वो ये तो बिल्कुल भी नहीं चाहता था कि अभी थोड़ी देर पहले जो हुआ उसकी वजह से उसके लंगोटिया यार की सेटिंग बिगड़ जाए

इसीलिए उसने फौरन ऊपर का रुख किया ।

राज तेजी से सीढ़ियां फांदता हुआ ऊपर आया

ऊपर आते ही उसने लंबी गहरी सास लेकर खुद को शांत किया

दरवाजे पर आहट होते ही मालती सतर्क हुई , उसे लगा कि चंदू आ गया और वो कमरे से तेजी से बाहर आई

लेकिन सामने सिर्फ राज को देख उसका चेहरा उतर गया

: वो नहीं आया क्या ?

राज समझ गया कि मालती को चंदू का ही इंतजार है

: नहीं

: ठीक है तो मै चलती हूं ( ये बोलकर मालती जाने को हुई तो राज ने उसको टोका )

: सुनो ? सॉरी वो मुझे नहीं पता था कि तुम ऐसे आ जाओगी

: कोई बात नहीं , देखो मुझे इससे फर्क नहीं पड़ता कि तुम किसके साथ क्या करते हो , लेकिन ...

मालती बोलते हुए चुप हो गई

: लेकिन क्या ?

: कुछ नहीं , मै जा रही हूं ( मालती राज के सामने जाने को हुई )

: बताओ न यार , ऐसे उलझा कर तो मत जाओ

: वो .. पता नहीं लेकिन मुझे थोड़ा अजीब लगा तुम वो आंटी के साथ , इतना ऐज गैप ( मालती थोड़ा मुस्कुराई भी तो राज का चेहरा भी खिल गया )

: अह्ह् वो , यार देखो तुम मेरी दोस्त भी हो और आगे चल कर हो सकता है कि तुम और चंदू शादी भी करो तो मै ज्यादा कुछ नहीं कहूंगा

: शादी ? ( मालती एकदम से बोल कर चुप हो गई )

: हा क्यों ? तुम चंदू से शादी नहीं करोगी

मालती का चेहरा सफेद पड़ने लगा और वो नजरे चुराने लगी

: पता नहीं ( वो थोड़ा हड़बड़ा कर बोली)

: पता नहीं मतलब ?

: यार हमारे रिलेशनशिप की बात ठीक है लेकिन शादी ? मैने कभी नहीं सोचा इस बारे में .... तुम्हे लगता है कि मेरे या चंदू के घर वाले कभी मानेंगे

: उम्मीद तो मुझे भी नहीं है लेकिन वो बांवरा है , उसे कौन समझाए

: जानती हूं , इसीलिए मै भी टालती हूं ।

: कब तक टालोगी आखिर , एक रोज तो उसे भनक हो ही जाएगी फिर क्या करोगी?

: पता नहीं , तब का तब देखेंगे , लेकिन जबतक हम साथ है तब तक तो अपनी लाइफ़ जी सकते है और शायद वो दिन भी ज्यादा दूर नहीं है अब ( मालती ने बड़े उदास लहजे में कहा )

: क्यों ?

: पापा मेरे लिए रिश्ता देख रहे है

: ओह्ह्ह

: हम्ममम और एक वादा करो , ये सब तुम चन्दु से नहीं कहोगे प्लीज

: ठीक है लेकिन तुम चली गई तो उसका क्या होगा ?

: बस उसी बात का डर है

: एक आइडिया दूं अगर तुम हिम्मत कर पाओ तो ?

: हम्म्म कहो

: तुम उसे चीट कर दो

: क्या ? ( वो चौकी )

: हा , मतलब असल में ऐसा कुछ करने की जरूरत नहीं, बस उसे अहसास दिलाओ कि तुम किसी और से भी रिलेशन में हो । लड़के ऐसी बातों पर जल्दी मूव ऑन हो जाते है

मालती चुप रही और फिर निकल गई बिना कुछ कहे ।

प्रतापपुर

छत से आने के बाद दोनों ससुर दामाद सोफे पर बैठे हुए मुस्कुरा रहे थे, अभी भी दोनों के लंड की कसावट कम नहीं हुई थी

: बाउजी आपको नहीं लगता कि रज्जो जीजी पर कमल भाईसाब ने कुछ ज्यादा ही मेहनत की होगी पीछे से , जीजी के चूतड़ देखने के बाद अभी भी हथियार झटके दे रहा है

: हाहाहाहाहा रज्जो के चौड़े कूल्हे तो मै बचपन से देखते आ रहा हूं जमाई बाबू

: बचपन से ( रंगी थोड़ा चौका )

बनवारी मुस्कुरा कर बगल के दराज से एक फोटो अल्बम निकाल कर दिखाता है और उसमें रज्जो की तस्वीर दिखाता , मोटी चूचियां सूट में पूरी ठूंसी हुई और बगल में एक गदराई महिला चौड़े कूल्हे, थन जैसी चूचियां और रज्जो जैसी शक्ल बस रंग थोड़ा साफ था । रंगी ने सीधा उसके छातियों पर उंगली रख कर : बाउजी ये ..कही

बनवारी : हा ये तुम्हारी सास है

रंगी : ये तो बिल्कुल रज्जो दीदी सी है सेम टू सेम

बनवारी : मै न कहता था हाहाहाहाहा

रंगी : अगर अभी रज्जो जीजी अम्मा जी की कोई साड़ी पहन ले तो किसी को नहीं लगेगा कि रज्जो जीजी है ।

इतने में रज्जो कमरे में दाखिल हुई : अरे कौन क्या नहीं लगेगा जमाई बाबू

रंगी रज्जो को ढीली नाइटी में अपने बड़े बड़े रसीले मम्में को हिलाते हुए आता देख कर मुस्कुराया : अरे जीजी आइए , देखिए आप तो एकदम अपनी अम्मा पर गई है

रज्जो हस कर : हा तो , हु न उनके जैसी खूबसूरत हाहाहा

रंगी : एकदम , बस उनकी कोई साड़ी पहन लो आप फिर तो कोई कह ही नहीं सकता , क्यों बाउजी

रंगी ने बनवारी को चेताया जो किसी ख्वाब में खोया था : अह हा

रंगी उसकी बात काट कर : लो अब तो बाउजी ने भी कह दिया

रज्जो : क्या सच में ? वैसे अम्मा की साड़ी होगी उस बक्से में

बनवारी थोड़ा चौका , कि आखिर रंगी करना क्या चाहता है । उसने इशारे में रंगी की ओर देखा और रंगी ने अपने ससुर को आंख मारी ।

रंगी : वाह फिर तो क्या बात है , भाई मुझे भी मेरी सासू मां के दर्शन हो जाएंगे

रज्जो : बाउजी , मै पहन लूं

बनवारी ने वापस रंगी की ओर देखा और ऐसे बेबस होकर देखा कि मानो इजाजत उसे नहीं रंगी को देनी हो

रंगी ने आंखों से इशारा किया

बनवारी मुस्कुरा कर : मै मना करूंगा तो क्या तू मान जाएगी भला, अरे जमाई बाबू इसे तो छोटे पर से ही अपनी अम्मा की साड़ी लपेटने का शौक था , पहनने भले नहीं आती थी तब बस लपेट कर तैयार होने लगती थी , खूब साज श्रृंगार और ना जाने क्या क्या ? हाहाहाहाहा

रज्जो मुस्कुराने लगी और रंगी का कलेजा गदगद हो गया

बनवारी : जा होगी उसके बक्से में निकाल ले जा

कुछ ही देर में रज्जो के क्रीम रंग की साड़ी निकाल कर आई : ये रही बस मै अभी बदल कर आई

रंगी खुश था और रज्जो बनवारी के कमरे से ही अटैच गेस्टरूम में चली गई ।

इधर दोनों ससुर दामाद अपनी योजना गढ़ रहे थे और इस बात से पूरी तरह बेखबर कि रज्जो जिसे उनकी तरकीबों और शरारतों की भनक पहले से है , उसने भी कुछ अपनी तैयारी कर ली थी ।

इधर रंगी जैसे ही घूम कर बनवारी को देखा : क्या हुआ बाउजी , तैयार है न आप

बनवारी अपनी चमकती आंखों से थोड़ा हिचक कर : थोड़ा डर तो लगेगा ही जमाई बाबू, आखिर बड़ी बेटी है

रंगी उसके कंधे पर हाथ रख कर : बाउजी , मै समझ रहा हू ये बेचैनी स्वाभाविक है

बनवारी ने उसकी ओर देखा

रंगी मुस्कुराने लगा

बनवारी एकदम से चुप हो गया और रंगी मुस्कुरा कर उसके पास जाकर : मेरे पास एक आईडिया है

फिर वो बनवारी के कान में फुसफुसा तो बनवारी के कान और लंड दोनों खड़े हो गए : लेकिन जमाई बाबू

रंगी मुस्कुरा कर : लेकिन वेकिन बाद में पहले उधर देखिए

सामने कमरे का दरवाजा खोल कर रज्जो कमरे में दाखिल हो रही थी और अपनी मां की साड़ी को बड़े ही बेढ़ंगे तौर पर लपेटा था , और दोनों की आंखे तब बड़ी हो गई जब उन्होंने देखा कि रज्जो ने तो ब्लाउज पहना ही नहीं था ।






बड़े बड़े रसीले मम्में पपीते जितने बड़े साड़ी में चिपके हुए झलक रहे थे।

रज्जो इतरा कर मुस्कुराते हुए आई , बनवारी आंखे फाड़ कर उसे देखता रहा । ।इतने में रंगी ने धीरे से बनवारी को इशारा किया और बनवारी को लगा कि यही सही समय है ।

बनवारी थोड़ा हिचका तो रंगी ने आंखों से इशारा किया ।

अगले ही पल बनवारी ने रज्जो को उसकी मां के नाम से पुकारा और रज्जो एकदम शॉक्ड हो गई ।

रज्जो ने आंखे बड़ी कर रंगी की ओर देखा और रंगी ने भी थोड़ा अचरज होने का ढोंग किया

एक बार फिर बनवारी ने रज्जो को उसके मा के नाम से पुकारा और

इसके बाद बनवारी थोड़ा नाटक कर रज्जो के करीब जाने लगता है

धीरे धीरे वो रज्जो के पास खड़ा होकर उसके दोनों बाजूओ से उसे पकड़ लेता है

: बाउजी ये मै हूं आपकी रज्जो ( रज्जो थोड़ा बेबस दिखी रंगी के सामने )

बनवारी बस अपना नाटक जारी रखा और एक टक निहारता रहा रज्जो के चेहरे को उसको अपनी बाहों के भरना चाहता है और रज्जो रंगी के सामने अपना भेद न खुल जाए इस डर से अपने बाप को झटक कर दूर हो जाती है । और बनवारी अपना इमोशनल ड्रामा शुरू करता है : माफ करना बेटी मै थोड़ा बहक गया था , और उदास आंखों से बिस्तर पर एक ओर करवट लेकर लेट जाता है और रंगी लपक कर रज्जो के पास जाता है उसे समझाने के लिए ,

रंगी : ओह बाउजी तो एकदम से सेंटी हो गए थे , पहले भी कभी हुआ था क्या ?

रज्जो : नहीं लेकिन , इनकी तबियत अम्मा के जाने के बाद से ही बिगड़ी है

रंगी : और देखिए न मेरी ही नादानी में बेचारे कितना अकेला महसूस कर रहे है आज

रज्जो ने अपने बाप को बिस्तर पर उसकी ओर पीठ किए देखा और कुछ सोचने लगी ।

रंगी : जीजी एक बात कहूं, अगर मानो तो शायद इससे बाउजी को थोड़ा आराम हो । नहीं तो डर है कि कही उनकी तबियत ना बिगड़ जाए

रज्जो फिक्र दिखाती हुई : हा कहिए न ,

रंगी : वो क्या आप कुछ देर के लिए एकांत में बाउजी के पास अम्मा बन कर रहेंगी । मुझे लगता है कि शायद उन्हें इसी की जरूरत है ।

रज्जो कुछ सोचने लगी : आपकी बात तो ठीक है, लेकिन मैने पहले ये सब किया नहीं और बाउजी को क्या कह कर बुलाऊंगी

रंगी : वही जो अम्मा कहती थी

रज्जो मुस्कुरा कर शर्माने लगी : धत्त नहीं , मै कैसे बुलाऊंगी

रंगी उसको हंसता देख : अरे क्या हुआ

रज्जो : वो दरअसल जब मै छोटी थी तो अम्मा को कई बार बाउजी को अकेले में खुश करने के लिए सबसे छुप कर राजाजी कहती थी

रंगी : अरे फिर तो और आसान हो गया , इससे तो वो और जल्दी उबर पाएंगे ।

रज्जो : धत्त क्या आप भी , आपको नहीं पता उसके बाद बाउजी क्या करते थे

रंगी बात घुमाता हुआ : जो भी हो , लेकिन अगर अभी हमने बातों में समय गवाया और बाउजी ने कुछ ज्यादा सोच लिया तो

रज्जो : ठीक है , लेकिन आप यही रहेंगे ?

रंगी : नहीं मै मेरे कमरे में हू अगर कुछ बात होगी तो आवाज दीजियेगा मुझे

रज्जो : ठीक है

रज्जो ने तो सोचा था कि वो ऐसे बिना ब्लाउज के साड़ी लपेट कर जाएगी तो शायद दोनों के होश उड़ा दे और किसी और तरीके से उनके दिल के जज्बातों को उकेरे

लेकिन यहां तो मामला उसकी योजना से एकदम उलट नजर आ रहा था । फिर भी रज्जो ऐसी औरत थी जो हर परिस्थिति को अपने अनुरूप ढालने में माहिर थी और उसने वही किया ।


रंगीलाल धीरे से कमरे से निकल कर दरवाजे के पास खड़ा हो गया और रज्जो को इशारा किया

रज्जो मुस्कुरा कर अपने कूल्हे हिलाती हुई गई और बनवारी के पास बैठ कर : नाराज हो गए राजाजी

बनवारी एकदम से चौका और उठने की कोशिश करता हुआ : रज्जो तुम ये , जमाई बाबू क्या कहेंगे ।

रज्जो ने एकदम से उसे रोक लिया और उसके इशारे से चुप कराती हुई : शान्त रहिए , आपके जमाई बाबू छिपकर दरवाजे से देख रहे है और ये क्या खेल खेल रहे है आप दोनों उम्मम

बनवारी हड़बड़ाया : मतलब ?

रज्जो : जबसे आई हूं देख रही हूं कि आप दोनों बस मेरी ही बाते करते है और आज सुबह तो हद हो गई , दोनो छिप कर मुझे देख रहे थे नहाते हुए । इतनी गहरी दोस्ती कब हुई आप दोनों ।

बनवारी फुसफुसा कर : अब क्या बताऊं बेटी , जमाई बाबू से थोड़ा व्यवहार बढ़ाते हुए कब हम लोग इनसब बातों में रस लेने लगे पता भी नहीं चला और फिर जब तू आई तो तुझे देख कर मै बेचैन हो उठा , तू तो जानती है मेरी कमजोरीया

रज्जो मुस्कुरा कर एक नजर रंगी को देखा और फिर बोली : हा अच्छे से जानती हूं , मेरे राजाजी

बनवारी : तो सुबह जब तू कमरे में कपड़े निकाल रही थी तो और मेरा मन ललचा गया तो मै अंदर जाने वाला था कि तभी जमाई बाबू आ गए और वही हम दोनो ने तुझे पीछे से नंगी देखा

रज्जो : अच्छा मतलब आंगन में नहाते हुए पहली बार नहीं था

बनवारी : नहीं , उसके बाद मैने देखा कि जमाई बाबू कुछ ज्यादा ही नजर रख रहे है मेरे ऊपर और मै परेशान हो रहा था तेरे बिना वो अलग

रज्जो : फिर आप उनको बाथरूम में मुझे नहाता हुआ दिखाने लाए क्यों ?

बनवारी : अरे नहीं कमरे से निकल कर तो हम लोग दातुन करते हुए ऊपर आ गए , हमें नहीं पता था कि तू आंगन में नहाने जाएगी और कुल्ला करने के लिए जब नीचे आने लगे तो तुझे देखा ।

दुपहरिया में दातुन करने का झूठ तो साफ साफ पकड़ लिया था रज्जो ने बनवारी का , लेकिन उसे भी बनवारी के मुंह से कहानी सुनना अच्छा लग रहा था ।

रज्जो : तो आपने सोचा क्यों न आपके जमाई बाबू के लिए ऐसी कोई कहानी गढ़ी जाए कि उनको शक न हो

बनवारी : हा और इसलिए मै उनके सामने तुझसे , तू समझ रही है न

रज्जो : हा लेकिन अब उन्होंने मुझे यहां भेजा है कि मै आपकी देख रेख करु अम्मा बनकर , कही आपकी तबीयत न बिगड़ जाए

बनवारी : क्या सच में ?

रज्जो : हा लेकिन मुझे समझ नहीं आ रहा है क्या करु ?

बनवारी : मै समझ गया हूं लेकिन

रज्जो ने अपने बाउजी को देखा और फिर आंखे बड़ी करती हुई : क्या ? नहीं उनके सामने नहीं

बनवारी : देख बेटी मुझसे अब और भी रुका जायेगा , अब चाहे जमाई जी भी भले सब कुछ जान जाए , मेरी तलब को तू समझ नहीं रही है

रज्जो कुछ सोचती हुई मुस्कुराई : ठीक है लेकिन वैसा ही करेंगे जैसा आपके जमाई बाबू सोच रहे है

बनवारी : कैसे ?

इधर इनकी बाते चल रही थी लेकिन रंगी के पल्ले कुछ भी नहीं पड़ रहा था और उसकी भीतर की बौखलाहट बढ़ रही थी

इसीलिए उसने भी जुगाड सोचा और अपने कमरे से एक गिलास पानी लेकर बनवारी के कमरे में दाखिल हो गया

रंगी को सामने देखते ही रज्जो और बनवारी थोड़े सतर्क हुए और बनवारी ने वापस अपना मुंह लटका लिया

: लीजिए बाउजी पानी पीजिए

रंगी ने बनवारी को ग्लास किया , दोनो की आंखे मिली और फिर बनवारी पानी पीने लगा

: क्या हुआ सब ठीक है न?

रंगी ने रज्जो के पास खड़े होकर कहा और उसकी नजरे रज्जो के पपीते जैसे चूचे पर चली गई

रज्जो उसकी नजर भाप गई लेकिन बाप के सामने दिखावा करना ही था ।तो उसने अपना ड्रामा शुरू कर दिया

: मै ठीक हूं जमाई बाबू आप परेशान न हो

: कुछ ठीक नहीं है आप, सब जानती हूं ये सब मेरी गलती है । मुझे ये साड़ी पहननी ही नहीं चाहिए थी ।

रज्जो ने उखड़े हुए स्वर में कहा

: ऐसा नहीं कहते बेटी , तेरी क्या गलती इसमें । मै ही बहक गया था जैसे तेरी अम्मा की खुशबू बस गई हो इन साड़ियों में

: हा लेकिन ...आप अब परेशान रहेंगे न , कमला को बुला दूं ?

: नहीं उसकी जरूरत नहीं है , वो बेचारी खुद छुट्टी लेकर गई है काम से , तू चिंता मत कर मै ठीक हो जाऊंगा

रंगी को ये नया कमला वाला ड्रामा समझ नहीं आया जो रज्जो ने शुरू कर दिया

उसने बनवारी की ओर देखा तो वो भी शांत रहना सही समझा ,उसने भी आगे का सारा खेल अब रज्जो के जिम्मे डाल दिया था

: अगर आपकी तबियत बिगड़ गई तो ? ( रज्जो फिकर में बोली )

: मै समझ नहीं पा रहा हूं आखिर बात क्या हो गई ? बाउजी आप तो कुछ बताइए

रंगी ने साफ साफ लहजे में कहा

बनवारी और रज्जो ने एक दूसरे को देखा और बनवारी ने फिर रज्जो को पलके झपका कर सब बात बताने के लिए इजाजत दे दी

रज्जो उठ गई और रंगी को कमरे से बाहर आने को कहा

दोनों कमरे से बाहर आ गए

: क्या बात है जीजी , बाउजी की तबियत और फिर ये कमला , क्या चक्कर है ?

रज्जो ने एक गहरी सांस ली और बाहर देखने लगी

: वो क्या है जमाई बाबू , ये बात सिर्फ मै बाउजी और छोटी (रागिनी) जानते है

: कैसी बात जीजी

: दरअसल अम्मा के जाने बाद से बाउजी की तबियत ठीक नहीं रहती थी और कई डॉक्टर से दिखाने पर उन्हें कुछ बीमारी नहीं मिली , बस देह का सुख नहीं मिलने से , वीर्य ज्यादा हो जाता था और बाउजी के बदन में दर्द बुखार उभर आता । तो डॉ ने उन्हें सेक्शुअली एक्टिव रहने के लिए सलाह दी है , तो अम्मा के न रहने पर अब गांव की एक दो काम वाली औरतें जो बहुत विश्वासी है उन्हीं के साथ बाउजी ....

ये कह कर रज्जो चुप हो गई

: ओह्ह्ह, लेकिन मुझे समझ नहीं आया कि अभी एकदम से कैसे उनकी हालत बिगड़ने लगी

: उनको मुझमें अम्मा दिख गई होगी और वो बहकने से लगे तो

: फिर अब क्या होगा ?

: पता नहीं जमाई बाबू , लेकिन चिंता हो रही है ।

: अच्छा फिर कमला के अलावा और कोई काम वाली नहीं मिलेगी ?

: मिलने को तो दस मिल जाए , लेकिन हर कोई विश्वासी नहीं होता न जमाई बाबू , कमला बहुत विश्वासी औरत है और भी एक दो औरते है जो तैयार हो जाएगी लेकिन एक दिक्कत है

: वो क्या ? ( रंगी तपाक से बोल पड़ा )

: वो लोग पर्दा करने वाली है, खुल कर बाउजी के सामने नहीं आएंगी । कमला बता रही थी कि उनमें से एक पर तो बाउजी जी की नजर भी है थोड़ी भारी देह वाली है । हीही

तभी रंगी ने अपना दिमाग लगाया

: जीजी एक बात कहूं , अगर आप बुरा न मानो तो , शायद इससे काम बन जाए

: बाउजी के लिए मै कुछ भी करने के लिए तैयार हूं , आप बस कहिए तो

: अगर आपको ऐतराज न हो तो आप ही क्यों नहीं .... ( रंगी बोलते हुए रुक गया लेकिन रज्जो रंगी का इशारा समझ गई )

: क्या कह रहें है जमाई बाबू , वो मेरे बाउजी है

: रमन भी तो आपका बेटा था , उसके लिए तो आपने बलिदान दिया था न

रज्जो चुप हो गई रंगी के जवाब से , लेकिन उसे भी थोड़ा ड्रामा जारी रखना था ।

: हा लेकिन रमन नादान था , लेकिन बाबूजी , वो थोड़ी न मानेंगे इसके लिए

: उसका भी तरीका है मेरे पास

: वो क्या ? ( रज्जो उत्सुक हुई )

रज्जो की प्रतिक्रिया पर रंगी ने एक शरारती मुस्कुराहट पास की और रज्जो शर्माने लगी ।

: अब कहिए भी

: देखिए आप बता रही थी न कि बाउजी को गांव की एक दूसरी काम वाली पसंद है और वो भी भारी देह वाली है

: हा लेकिन वो दिन में थोड़ी आयेगी पता नहीं, कहा होगी ? कैसे खोजेंगे ?

: उसको खोजने की जरूरत नहीं है

: मतलब ? ( रज्जो जिज्ञासु होकर बोली)

: मतलब कि

फिर रंगी ने रज्जो के कान में फुसफुसाया और रज्जो की आंखे बड़ी हो गई

: बड़े चतुर हो जमाई बाबू आप

: हीही अब जैसा हूं आपका हूं मेरी जान

रंगी ने लपक कर खुले बरामदे में ही रज्जो को हग कर दिया

: अरे क्या आप भी , छोड़िए और जाइए बाउजी को मना करके बगल वाले कमरे में लेकर आइए ठीक 15 मिनट बाद

: ठीक है लेकिन बाबूजी के चक्कर में अपने जमाई बाबू को भूल मत जाना

: अपने दीवाने को कैसे भूल सकती हूं , अब जाइए

रंगी वापस बनवारी के पास गया और रंगी को अकेला आता देख बनवारी थोड़ा असहज होने लगा ये सोच कर कि न जाने रज्जो ने उसको क्या क्या बताया होगा ।

: क्या हुआ जमाई बाबू सब ठीक है

: आप तो बड़े छुपारुस्तम निकले बाऊजी उम्मम

: मतलब ?

: आपकी दिक्कत के बारे में जीजी को सब पता है और आपने मुझे बताया नहीं

बनवारी थोड़ा शर्मिंदा सा होने लगा तो रंगी उसे चिल करता हुआ

: लेकिन आप बहुत भोले भी हो

: मतलब ? ( बनवारी थोड़ा उलझा )

: इतना सटीक मौका होते हुए भी आपने रज्जो जीजी से पहल नहीं की, वो आपके लिए दूसरी औरते लाती है और आप हो कि.....

: हिम्मत नहीं होती है जमाई बाबू और रज्जो ने कभी सामने से खुल कर इस बारे में बात नहीं की है मुझसे

: ठीक है लेकिन अभी जीजी ने आपके लिए एक जबरजस्त सरप्राईज का इंतजाम कर दिया है ( रंगी खिल कर बोला )

: सरप्राइज़? मतलब ?

: कमला की जगह कोई दूसरी गदराई माल को फोन लगाया था बाहर उन्होंने , उसे बुलाया है

: किसे ?

: पता नहीं , लेकिन आपकी तो चांदी है बाबूजी

बनवारी का लंड फूलने लगा ये सोच कर कि रज्जो ने भला अब किसे बुलावा भेजा होगा ।

: अच्छा सुनिए अभी जीजी आवाज देंगी तो आप मेरे वाले कमरे में जाइयेगा , लेकिन वो थोड़ा पर्दा करने वाली है औरत है ,बस रज्जो जीजी के कहने पर मानी है लेकिन इस शर्त पर कि उसका चेहरा आप नहीं देखेंगे और न ही उससे बात करेंगे ।

बनवारी की बेचैनी तो और बढ़ने लगी ।

: लेकिन बिना देखे फिर काम कैसे होगा ?

: आपको उसके चेहरे से मतलब है कि हीहीहे

रंगी हसने लगा और बनवारी मुस्कुरा कर खड़ा हो गया ।

करीब 5 मिनट बाद ही रज्जो ने रंगी को आवाज दी

: जमाई बाबू आ जाइए

रंगी ने इशारा किया बनवारी को और बनवारी हैरानी से रंगी को देखा : तो क्या रज्जो भी वही रहेगी

रंगी मुस्कुराया : आपको क्या लगता है ?

बनवारी थोड़ा सोच कर : नहीं , वो नहीं रुकेगी मै जानता हूं , लेकिन आप ?

रंगी मुस्कुराकर : बस आपके पीछे ही रहूंगा यही दरवाजे पर

फिर दोनों ससुर दामाद गेस्टरूम की ओर बढ़ गए

दरवाजे पर खड़े होने अंदर देखा तो एक मोटी गदराई औरत जो एक साड़ी में औंधी होकर घुटने के बल झुकी हुई थी बिस्तर पर ।






साड़ी में उसके बड़े चौड़े चूतड़ पहाड़ जैसे ऊंचे उठे हुए थे

जिसे देख कर दोनों ससुर दामाद के लंड अकड़ने लगे

बनवारी ने रंगी की ओर देखा और रंगी ने मुस्कुरा कर आगे धक्का दिया कंधे से और बनवारी आगे बढ़ गया मुस्कुराता हुआ अपना लंड सहलाता हुआ

वो औरत बनवारी के ठीक आगे बिस्तर पर झुकी हुई थी आगे की ओर , उसका चेहरे पर लंबा घूंघट था और बनवारी अपना लंड पकड़ कर मिजते हुए उसके पास गया

वही खड़े हुए उसने रंगी को देखा और फिर मुस्कुराया

रंगी ने आगे बढ़ने के लिए इशारा किया और बनवारी ने अपने हाथ आगे बढ़ा कर उस औरत के भड़कीले कूल्हे को साड़ी के ऊपर से छूने लगा और वो औरत सिहर उठी ।






बनवारी ने आगे बढ़ कर धोती ने अंदर से ही अपना लंड उस औरत की गदराई गाड़ पर चुभोया फिर आगे पीछे करने लगा

वो नजारा देख कर रंगी का लंड अकड़ गया

बनवारी ने आगे सट कर उसके गद्देदार चूतड़ों में अपने नुकीले मोटे सुपाड़े को चुभोया और पंजे आगे बढ़ा एक ब्लाउज के ऊपर से उसकी मोटी मोटी चूचियां को पकड़ लिया।






एक नई ताजगी एक नए जिस्म का अहसास हो रहा था बनवारी को

वो उस औरत के रसीले मम्में को ब्लाउज के ऊपर से पकड़ कर घुला रहा था और वो औरत की मादक हल्की थमी थमी सी सिसकी आ रही थी ।

बनवारी के लंड की कसावट और बढ़ने लगी

उसने उस औरत को पकड़ कर खड़ा कर दिया और पीछे से उसके दोनों रसीले मम्में ब्लाउज के ऊपर से मसलने लगा

: ओह्ह्ह्ह क्या गुलगुले दूध है तेरे मेरी जान सीईईई ओह्ह्ह्ह, जानता हूं तू बात नहीं करेगी लेकिन तेरे इन रसीले नरम दूध की तारीफ किए बिना नहीं रह सकता ओह्ह्ह्ह सीईईई

बनवारी ने पीछे से उस गडराई औरत के चूचों को मसलते हुए बोला और अपना सुपाड़ा उसके गुदाज चर्बीदार चूतड़ों में धकेलने लगा

: उफ्फ तेरे दूध बड़े रसीले है थोड़ा सा चखा दे मेरी जान ( इतना बोलके कर बनवारी ने उस औरत को अपनी ओर घुमाया और उस औरत ने अपने चेहरे के घूंघट को पकड़ लिया ताकि बनवारी उसका चेहरा न देख सके ।

बनवारी उसकी हरकत पर मुस्कुराया : हाहाहा हा भाई नहीं देखूंगा तेरा चेहरा बस , लेकिन ये तेरी रस भरी चोली तो खोल सकता हूं न उम्मम

वो औरत कुछ नहीं बोली तो बनवारी ने ये उसकी रजामंदी समझी और वही बिस्तर के पास खड़े खड़े ही वो उस औरत के ब्लाउज खोलने लगा और जल्द ही उसकी दोनों मोटी मोटी चूचियां बाहर झूल पड़ी

: ऊपर से ही सही जरा तेरे इन मीठे होठों का रस तो पिला दे मेरी जान

बनवारी ने उस औरत के लिप्स को घूंघट के ऊपर से ही चूसने की कोशिश करने लगा और इस दौरान उसका हाथ लगातार उसके नंगे पेट और चूचों को टटोलता रहा






उनके बड़े बड़े काले मुनक्के जैसे निप्पल देख कर बनवारी की आंखे बड़ी हो गई और वो हल्का सांवला रंग , एक पल के लिए तो बनवारी हिचका लेकिन फिर उसने उस औरत की दोनों रसीली छातियो को एक साथ सामने से पकड़ का मुंह में रख लिया

दोनो निप्पल पर एक साथ हमले से वो औरत सिहर उठी और वही दरवाजे पर खड़ा रंगी अपना लंड मसल कर रह गया

वही बनवारी की जीभ पर जैसे उस औरत के रसीले मम्में का स्वाद लग गया






वो उसको बाहों में भर कर उसके दोनों रसीले मम्में बारी बारी से चूसने लगा और वो औरत हल्की फुल्की सिसकारियां लेने लगी

: उफ्फ मेरी जान तेरे इन रसीले जोबनो ने देख मेरे लंड का क्या हाल कर दिया है , सीईईई ओह्ह्ह एक बार पकड़ कर तो देख उम्मम

बनवारी ने उस औरत की कलाई पकड़ ली और अपना मूसल पर रख दिया

लंड की गर्मी अपने उंगलियों में पाते ही उस औरत ने अपनी मुट्ठी बनवारी के लंड पर कस ली और बनवारी ने एक लंबी गहरी सांस ली


: ओह्ह्ह्ह कितने मुलायम हाथ है तेरे मेरी जान ओह्ह्ह ऐसे ही उम्ममम कितना अच्छा लग रहा है , और सहला इसे उम्ममम सीईईई ओह्ह्ह

वो औरत लगातार बनवारी का लंड आगे पीछे करने लगी

: उफ्फ तेरे हाथ इतने मुलायम है तो तेरे होठ कितने रसीले होंगे , बस एक बार उन्हें रख दे मेरे सुपाड़े पर

इधर बनवारी ने फरमाइश की , उधर वो औरत ने ना में सर हिलाया

: यकीन कर मेरा मै आंखे बंद कर लूंगा

उसने वापस ना में सर हिलाया

: मै , मेरी बेटियों की कसम खाता हूं अब तो मान जा मेरी जान

वो शांत हो गई और बनवारी समझ गया कि वो मान गई है

: ठीक है मै आंखे बंद रखूंगा जबतक तू मेरे लंड नहीं छोड़ देती

इतना कहकर बनवारी ने अपनी आंखे बंद कर ली और फिर उस औरत ने अपने चेहरे से घूंघट उठाया और मुस्कुरा कर सामने दरवाजे पर खड़े रंगी को देखा

रंगी ने मुस्कुरा कर उस औरत यानी कि रज्जो को देखा और इशारे आगे बढ़ने को कहा

रज्जो मुस्कुराई और घुटने के बल होकर अपने बाउजी का लंड पकड़ के आगे पीछे करने लगी और मुंह खोलकर सुपाड़ा मुंह में रख लिया

: ओह्ह्ह्ह सीईईई ओह्ह्ह मेरी जान क्या रसीले होठ है तेरे ओह्ह्ह्ह उम्ममम जैसे मलाई घुल रही है मेरे लंड पर ओह्ह्ह्ह ऐसे ही चूस मेरी रानी ओह्ह्ह सीईईई और चूस उम्मम , मै नहीं देखूंगा मैने वादा किया है

बनवारी आंखे बंद कर हवा में उड़ने लगा और रज्जो रंगी के सामने ही अपने बाप का लंड चूसने लगी

ये नजारा देख कर रंगी अपना लंड निकाल कर सहलाने लगा।






रज्जो ने एक नजर उसकी ओर देखा और वापस अपने बाउजी के लन्ड को गले तक उतारने लगी

: ओह्ह्ह्ह तू तो बड़ी खेली खाई लगती है सीईईई लंड चूसने की ऐसी कला आई कहा से तुझे .... ओह्ह्ह्ह उम्ममम अरे हा तू तो भाई बोलेंगी नहीं उम्ममम सीईईई लेकिन अब रुक जा , मुझे ऐसे नहीं झड़ना सीई मुझे तेरी चूत की गर्मी चाहिए चल लेट जा ,जैसा तुझे सही लगे

रज्जो उठ गई और वापस घूंघट करके घूम कर अपने साड़ी पेटीकोट को कमर तक उठा कर बिस्तर के किनारे झुक कर सहारा लेकर खड़ी ही गई






बनवारी ने आंखे खोले और सामने का नजारा देख कर उसकी आंखे चौड़ी हो गई

: उफ्फ कितनी गडराई गाड़ है तेरी मेरी जान उम्ममम मेरे गांव में इतना जबrजस्त माल था और मुझे भनक नहीं सीईईई ओह्ह्ह

बनवारी ने अपने दोनों हाथों से रज्जो के नंगे चूतड़ों को सहलाते हुए उन्हें फैलाते हुए कहा

अपने बाप का स्पर्श बहनोंई के सामने पाकर रज्जो सिहर उठी

बनवारी से रहा नहीं गया और वो झुक कर रज्जो के दोनों चूतड़ों के गालों को चूमने लगा , उनपर अपने चेहरे फिराने लगा

: उम्ममम कितनी मादक गंध आ रही है सीईईई ओह्ह्ह लग रहा है तेरी बुर भी बहने लगी है ओह्ह्ह्ह देखूं तो उफ्फ ये तो सच में गीली है सीईईई रुक जा मेरी जान अभी भर देता हूं तेरी बुर उम्ममम सीईईई ओह्ह्ह

बनवारी ने रज्जो की भी नीचे से टटोल कर कहा और फिर अपना सुपाड़ा पीछे से उसकी बुर में लगाते ही हचाक से उतार दिया

रज्जो अपने बाउजी का मोटा लंबा लंड अपनी बुर के फांकों को चीरता हुआ अंदर महसूस करने लगी और एक दबी हुई सिसकी सुनाई पड़ी

: ओह्ह्ह्ह सीईईई मेरी जान कितनी रसीली चूत है तेरी ओह्ह्ह और तेरे मुलायम चूतड़ उफ्फ कितना उछाल रहे है मेरे लंड को ओह्ह्ह्ह






बनवारी ने रज्जो के चौड़े कूल्हे को पकड़ कर तेज झटके लगाने लगा था

कमरे में तेज थपेड़ों की आवाज गूंजने लगी

एक ओर रज्जो पूरी कोशिश रही थी अपनी वासनाओं को और अपनी सिसकियों को थामने की , वही बनवारी पूरी ताकत से फचर फचर पेलने लगा था , एक नई रसीली चूत को जो उसकी बेटी ने उसके लिए परोसा था ।

रंगी की हालात और खराब होने लगी थी

सामने बाप बेटी की लाइव चुदाई देख कर उसका लंड कबका झड़ जाता , अगर थोड़ी देर पहले वो छत पर रज्जो को नहाते हुए देख कर झड़ा नहीं होता ।

: ओह्ह्ह कितनि लचीली चूत है मेरी जान , लगता है खूब मजे लेती है तू लंड के उम्ममम अह्ह्ह्ह सीईईई, उफ्फ कितना मोटी गाड़ है , सच कह रहा हूं मेरी बन जा , अपनी रखैल बना कर रखूंगा तुझे मेरी रंडी उफ्फफ ओह्ह्ह

बनवारी के मुंह से उसके बेटी के लिए अनजाने में रखैल और रंडी जैसे शब्द सुन कर रंगीलाल का लंड मुंह खोलने लगा था अब

वही बनवारी की गाली और लंड की तेज घर्षण से रज्जो झड़ने लगी थी

: ओह्ह्ह्ह तू तो झड़ रही है , इतनी रसीली चूत का रस छोड़ देना बेवकूफी होगी , चल सीधी लेट जा , आजा

बनवारी ने लंड निकाल कर रज्जो के चूतड़ों पर पंजे मार कर कहा और रज्जो गिनगिना गई अपने बाप के जबरजस्त पंजे के थाप से और जल्दी से घुम कर बिस्तर के किनारे पर पीठ के बल लेट गई , पानी जांघों को खोल कर टांगे हवा में उठाए

बनवारी ने सामने देखा

उसके सामने एक पराई औरत रंडियों के तरह अपने चूचे खोले हुए अपनी चूत को खोल कर हवा में टांगें उठाए पड़ी थी

रज्जो की बुर के चारों तरफ मलाई की सफेद परत फैली हुई थी और वो सांवली चूत पर कुछ ज्यादा ही खिल रही थी

बनवारी के मुंह में पानी आ गया और वो झुक कर रज्जो के बुर को चाटने लगा






: अह्ह्ह्ह सीईईई ( एक मादक तेज सिसकी और रज्जो ने मुंह पर हाथ रख लिया)

बनवारी थोड़ा रुका लेकिन रज्जो की मुलायम रसीली बुर की फांकों ने उसे वापस बुलवा दिया और वो अपने होठों से रज्जो के बुर के फांकों को चूसने लगा

रज्जो पागल होने लगी , ऐंठने लगी उसने एक हाथ से अपना मुंह घूंघट के ऊपर से दबा रखा था तो दूसरे हाथ से वो बनवारी का सर अपनी चूत में दबा रही थी

बनवारी समझ गया कि इस औरत को मजा आ रहा है अपनी बुर चूसवाने में और और तेजी से अपनी थूथ को रज्जो के फांकों पर रगड़ने लगा , दोनों हाथों से उसकी गदराई जांघों को सहलाने लगा ।

अगले ही पल बनवारी उठा कर उसने अपना लंड रज्जो की बुर में वापस डाल कर तेजी से पेलने लगा उसकी टांगों को पकड़ कर






इस बार उसका जोश और बढ़ गया

सामने रज्जो का चेहरा घुघट ने नीचे थे और उसकी नंगी चूचिया बनवारी के हर करारे तेज झटके के साथ खूब हिल्कोरी खा रही थी ।

बनवारी भी धीरे धीरे अपने चरम की ओर बढ़ रहा था और लंड को बुर की और गहराई में ले जाने के लिए रज्जो की एक टांग को पकड़ कर अपने कंधे पर रख लिया और वापस से दुगनी जोश में लंड पेलने लगा उसकी बुर में

रज्जो से अब बर्दाश्त नहीं हो पा रहा था , उसकी बुर फिर से पसीजने लगी थी । फिर भी वो घूंघट के ऊपर से मुंह पर हाथ रख कर अपनी सिसकियों को रोकने की कोशिश कर रही थी

: ओह्ह्ह्ह मेरी जान क्या रसीली चूत है तेरी अह्ह्ह्ह भर दूंगा तेरी बुर आज उम्ममम सीईईई और अंदर डालूंगा उम्ममम कितना मुलायम है तू ,जी के रहा है कि तेरे पूरे देह को चूम लूं

ये बोलकर बनवारी रज्जो की उस टांग को चूमने लगा लगातार उसको चोदते हुए और एकदम से उसकी स्पीड रुकने लगी , अचानक से बनवारी की नजर उसके कान के पास खनकती पावजेब पर गई

: ये पावजेब तो .... मैने मेरी रज्जो को दिए थे रमन की शादी ..... रज्जो बेटी क्या ये तू है ?

रज्जो रंगी समझ गए कि उनकी चोरी पकड़ी जा चुकी है

लेकिन रज्जो माहिर थी हारती बाजी अपने पाले में लेने के लिए उसने अपनी बुर के फांकों को बनवारी के लंड के चारो तरफ कस दिया

: ओह्ह्ह्ह सीईईई ओह्ह्ह सच सच बोल तुझे मेरी कसम है रज्जो , क्या ये तू है आह्ह्ह्ह सीई ओह्ह्ह्ह आ अहा है मेरा ओह्ह्ह्ह उम्ममम

इतना बोलना था कि बनवारी रज्जो की बुर में झड़ने लगा और कसम की बात आने पर रज्जो ने आखिर अपने बाप के सामने से पल्लू उठा लिया

: हा बाउजी मै ही हूं , आपकी रज्जो

रज्जो हांफते हुए बोली

: क्या ??? जमाई बाबू ये तो रज्जो है

बनवारी दरवाजे की ओर पलट कर देखा जहा रंगीलाल अपना लंड हिला के अपना रस झाड़ रहा था

: हा बाउजी मुझे पता है अह्ह्ह्ह

रज्जो ने अंत तक बनवारी का लंड अपनी बुर से नहीं छोड़ा

: लेकिन क्यों बेटी ,

:आपकी तबियत कैसे बिगड़ने देती बाउजी ( रज्जो हांफते हुए बोली )

: और जमाई बाबू ?

: ये आइडिया उन्हीं का था

रज्जो बोली तो बनवारी ने रंगीलाल की ओर देखा और रंगी ने हस कर बनवारी को आंख मारी ।

बनवारी समझ गया कि मौका मिलते ही उसके चतुर जमाई ने अपना खेल खेल लिया।

जारी रहेगी

( उम्मीद करता हूं अपडेट पसंद आएगा , पढ़ कर लाइक कमेंट जरूर करें)
 
अपडेट 42





अपडेट इस पोस्टेड ों पेज NO. 1478


रीड , लिखे एंड कमैंट्स
 
अगर आज रात 08 बजे तक 30 लाइक्स आ जाते है तो अगला अपडेट आज ही पोस्ट कर दिया जाएगा ....
 
अपडेट 043

रज्जो के हुनर





अपडेट इस पोस्टेड ों पेज NO. 1484
 
💥 अध्याय 02 💥

UPDATE 043


प्रतापपुर

रज्जो उठ अपने कपड़े सही कर चुकी थी , लेकिन बनवारी का ड्रामा अभी भी जारी था

वो कमरे में आ कर सोफे पर बैठा हुआ था, किसी गहरी सोच में डूबा हुआ

रज्जो और रंगी दोनों ही मन में जानते थे कि ये सब बस एक दूसरे के सामने नाटक किया जा रहा है ।

रज्जो चल कर बनवारी के पास बैठ गई और उसके कंधे को छुआ

: बाउजी !! क्या हुआ ?

: ये तूने क्यों किया रज्जो !! ( बनवारी थोड़ा उदास होकर बोला )

: मुझे जो सही लगा मैने किया और फिर आपकी बेटी हूं आपका हर तरीके से अधिकार है मुझपर , क्यों जमाई बाबू

रज्जो ने रंगी को भी शामिल कर लिया

रंगी रज्जो के पास खड़े होकर उसकी हा में हा मिलाता हुआ : हा बाउजी , जीजी सही कह रही है और यही सब सोच कर ही मैने इन्हें कहा । अगर आपको नाराजगी है तो मुझे कहिए , जीजी तो पूरी निर्दोष है

: नहीं नहीं जमाई बाबू , इसमें सजा कैसी ... मुझे तो अफसोस इस बात का है कि अनजाने में मैने मेरी रज्जो को कितनी गंदी गंदी बात कह डाली , मुझे माफ कर दे बेटा

: अरे नहीं बाउजी .... मुझे सच में किसी बात का बुरा नहीं लगा और ये सब तो चलता है । प्रेम में जज्बात अच्छे से उभर आते है और ये सिर्फ आपके अकेले की दिक्कत नहीं है ।

ये कह कर रज्जो मुस्कुराई

: मतलब ? ( बनवारी थोड़ा रुक कर बोला )

रज्जो ने एक नजर रंगी को देखा और फिर मुस्कुरा कर : मतलब कि रमन के पापा भी बस कहने के सीधे है , बिस्तर पर वो भी ऐसे ही है , गाली उनके मुंह से भी झड़ते है हीहीही.... और मुझे लगता है कि जमाई बाबू भी कम नहीं होंगे आपके साढ़ू से हाहाहा

रज्जो खिलखिला कर बोली इस पर बनवारी ने रंगी की ओर देखा और रंगी जबरन मुस्कुरा पड़ा : अरे बाउजी हम लोग कोई शायर गायक तो है नहीं कि कविताएं गढ़ ले , गांव के मर्द है तो ऐसे नाजुक पलों में अपने अन्दर की भावनाएं जताने का यही तरीका होता है और सच कहूं तो औरतों को बहुत भाता है ये सब .... मुझे नहीं लगता जीजी ने इंजॉय नहीं किया होगा

रज्जो अब शर्म से लाल होने लगी

बनवारी ने रज्जो की ओर देखा और हैरानी से बोला : क्या सच में रज्जो , तुझे वो शब्द पसंद आए

रज्जो बेजवाब सी हो गई और थोड़ी शर्माने और लजाने लगी ।

: ऐसे नहीं जरा प्यार से जीजी को गोद में बिठा कर पूचकारिये फिर देखिए

: धत्त क्या आप भी जमाई बाबू ( रज्जो शर्मा कर मुस्कुराने लगी )

: हाहाहाहा मेरी रज्जो बिल्कुल अपनी अम्मा की तरह शर्माती है मेरी लाडो ।

बनवारी ने रज्जो के कंधे पर हाथ रख कर उसे अपने करीब कर लिया

: अच्छा बाउजी एक बात पूछू

: हा हा जमाई बाबू कहिए न ( बनवारी ने सहज होकर कहा और रज्जो भी बनवारी के कंधे पर सर टिकाए हुए रंगी को देखने लगी , जिसके पजामे में लंड फिर हरकत करने लगा था )

: क्या सासु मां को भी ऐसे कुछ शब्दों से लगाव था

रज्जो की आंखे बड़ी हो गई और बनवारी मुस्कुरा उठा

: हा भाई बहुत था , कभी कभी अगर बिस्तर पर मै बहुत शांत रहूं तो शिकायत करने लगती कि इतने चुप क्यों है हाहाहा

रंगी थोड़ा चुप था लेकिन उसे कहानी आगे बढ़ानी थी

: वैसे आपको ऐतराज न हो तो कुछ बताएंगे सासू मां के पसंदीदा शब्दों के बारे में

: अह ... बताऊंगा लेकिन मेरी रज्जो कहेगी तब

बनवारी ने रज्जो की ओर देख कर कहा , और रज्जो ने रंगी को देखा ।

: हा हा बता दो , मुझे पता है आप मर्दों को ऐसी ही गंदी बातें पसंद आती है हीहीही , मै भी तो सुनु मेरे सीधे साधे बाउजी आखिर कितने छुपारुस्तम थे हाहाहा

: हाहाहाहा तू भी न रज्जो

: अब बता भी दीजिए बाउजी ( रंगी ने हस कर कहा )

: हा बताइए न बाउजी ( रज्जो ने भी जिद की )

: अरे ऐसे कैसे बताऊं , वो अलग ही माहौल होता था । तेरी अम्मा के गद्देदार चूतड़ों और दूध को देखकर अंदर वासना चढ़ती थी फिर वो शब्द निकलते थे , ऐसे बोलूंगा भी तो तुम लोग हंसोगे ... छोड़ो न

: जीजी मेरे ख्याल से अब आप ही वो मोहाल बना सकती है । वरना बाउजी तो कुछ कहने से रहे ( रंगी ने हंसते हुए कहा )

: नहीं नहीं मुझे तो सब जानना है हीहीही

ये बोलकर रज्जो खड़ी हो गई और रंगी बनवारी के पास बैठ गया । दोनों ससुर दामाद आपस में मुस्कुराए

: हम्म्म तो बाउजी अब सोचिए आपके सामने मै नहीं अम्मा खड़ी है और ऐसे अपने कूल्हे मटका कर चल रही है तो आप क्या करते हीहीही

रज्जो ने खिलखिला कर शरारती लहजे में बनवारी को कहा , लेकिन असल में रज्जो के चौड़े चूतड़ों का जादू बनवारी पर पहले ही चल गया था

बनवारी ने एक नजर रंगी को देखा और रंगी ने भी हामी भरी

इस पर बनवारी ने लपक कर रज्जो की कलाई पकड़ी और खींच कर अपनी गोद में बिठा लिया

: अह्ह्ह्ह हाय दैय्या क्या करते रज्जो के बाउजी , कोई देख लेगा

: तो देखने दे उफ्फ ये तेरे गुलगुले चूतड़ की नरमी मेरे हथियार को बड़ा टाइट कर देती है अहह ऐसे ही मेरी जान , उफ्फ जब तू ऐसे ही मेरे लंड अपने गाड़ घिसती है कसम से पागल हो जाता हूं ओह्ह्ह्ह

बनवारी ने तो अपनी जायज और वही भावनाएं जाहिर की जो वो अकसर अपनी स्वर्गवासी पत्नी के साथ महसूस करता था लेकिन लेकिन रज्जो के लिए ये सब खेल था और वो हसने लगी बनवारी की गोद में

: और फिर आगे ? ( रंगी ने पहल की लेकिन बनवारी में चल रहा था कि ये खेल में वो रंगी को भी खुलकर शामिल करे )

: अरे बताएंगे भाई , जरा हम भी तो अपने छोटे जमाई के बारे ने जान समझ ले कि वो ऐसी स्थिति में क्या करते उम्मम क्यों रज्जो ?

: हा हा क्यों नहीं ( रज्जो ने भी हा में हा मिलाया )

: क्या बाउजी इनसब में मै कहा आ गया

: अब शर्माना छोड़िए जमाई बाबू और समझिए आपके सामने रागिनी खड़ी है

रज्जो बनवारी के गोद के उठ कर रंगी के सामने आ गई उसकी ओर अपने चूतड़ किए हुए आगे झुक कर झूठ मूठ का टेबल साफ करने लगी , रंगी के मुंह के आगे रज्जो के बड़े भड़कीले चूतड़ साड़ी में फैले हुए हवा में लहरा रहे थे

रंगी ने भी मौके का फायदा उठाना सही समझा और खड़े होकर अपना खड़ा लंड पजामे के अंदर से सीधा रज्जो की गाड़ की दरारों में साड़ी के ऊपर से रगड़ने लगा उसके कूल्हे पकड़

: अह्ह्ह्ह सोनल के पापा ये क्या कर रहे है , हटिए बच्चे घर में ही है उम्मम

: उफ्फ सोनल की मां तू ऐसे झुकती है तो तेरे चूतड़ खूब फैल कर मुझे ललचाते है जी करता है कि ओह्ह्ह्ह

: क्या करता है मेरे राजा सीईईई

: बस उठा कर उतार दूं अंदर ओह्ह्ह्ह

: हटिए आपको तो सारा दिन बस यही सब सूझता है ( रज्जो ने अपने चूतड़ों से रंगी को धक्का दिया और रंगी पीछे सोफे पर गिर गया , इस पर तीन खिलखिला कर हस पड़े )

: हम दोनो का तो ठीक है लेकिन कमल भाईसाहब का क्या ? ( रंगी ने पहल किया और बनवारी ने भी उसका साथ दिया )

: हा रज्जो , जमाई बाबू के बारे में कुछ बता न ... वो कैसे इस मामले में

: धत्त नहीं ...उनकी बात छोड़ो आप लोग

: अरे नहीं नहीं , क्यों छोड़ दे । हमे तो जानना है उनके बारे में क्यों बाउजी

: हा रज्जो जमाई बाबू सही कर रहे है , बता न ( बनवारी बोला )

रज्जो थोड़ी असहज होकर

: बाउजी आप सब तो बहुत सीधे , लेकिन आपके बड़े दामाद बहुत गंदे है । रमन दुकान चला जाता है बहु घर के काम देखती है और उनका पूरा दिन मूड होता रहता है और फरमाइश ऐसी की पूछो मत

: फ़रमाइश!!! ( रंगी और बनवारी एक साथ बोल पड़े , फिर एक दूसरे को देखकर मुस्कुराए )

: कैसी फरमाइश बेटा

: आप नहीं जानते बाउजी , रमन के पापा का सारा दिन दिमाग बस इन्हीं सब में चलता है , बस कही से मै उन्हें दिख भर जाऊं। अब दिन में कुछ ज्यादा हो नहीं पाता तो कहते है साड़ी उठा कर दिखा दे

: साड़ी उठा कर मतलब ? ( बनवारी ने सहज पूछा )

इस पर रज्जो ने मुस्कुरा कर रंगी को देखा

: मै बताता हूं बाउजी आप बस देखिएगा , थोड़ी देर के लिए मै कमल भाईसाहब हो जा रहा हूं । जीजी आप टहलते हुए आइए हमारी ओर

रज्जो समझ गई अब खेल खुलने वाला है और वो थोड़ा दूर से चलती हुई आने लगी

रंगी ने रज्जो की कलाई पकड़ कर उसे रोक लिया

: अह्ह्ह्ह छोड़िए न रमन के पापा

: मेरी जान , सुबह से तड़प रहा हूं अब तो दिखा दे । बस एक झलक भर ( रंगी ने कहा )

: नहीं मानेंगे न रमन के पापा , सच में बहुत जिद्दी है आप , उम्मम बाहर बहु किचन में ही है

: बस थोड़ा एक झलक देख लूं ( रंगी ने हाथ आगे कर रज्जो के मुलायम फूले कूल्हे को साड़ी के ऊपर से सहलाया ) उफ्फ कितने नरम है तेरे चूतड़ रमन की मां सीईईई

ये बोलकर रंगी ने अपना लंड मसल दिया , वही बनवारी का लंड अकड़ गया था सामने अपनी बड़ी बेटी और छोटे जमाई का रोलपले देख कर

तभी रज्जो ने आगे झुकते हुए अपनी साड़ी पेटीकोट समेत उपर उठाने लगी पीछे से

दोनों ससुर दामाद की नजरे रज्जो की नंगी होती पिंडलियों से उसकी मोटी गदराई जांघों और फिर एकदम से रज्जो ने साड़ी पेटीकोट अपने कूल्हे से ऊपर तक चढ़ा दिया






उफ्फ रज्जो के वो सावले मोटे चर्बीदार चूतड़ और चिपकी हुई लंबी गहरी दरार

दोनों ससुर दामाद ने एक दूसरे को देख कर थूक गटक कर अपना लंड मिजा और वापस रज्जो की नंगी चूतड़ को निहारने लगे

: बस हो गया न, अब जाऊ न ( रज्जो ने दोनों के जज्बातों को टटोला )

: उम्हू मेरी रानी थोड़ा खोल कर दिखाओ न ( रंगी ने रसिक मिजाजी में थोड़ा बहक कर कहा और फिर मुस्कुरा कर बनवारी को आंख मारी और बनवारी भी मुस्कुरा उठा )

: धत्त रमन के पापा आप भी न बड़े वो हो , तंग करते हो बस मुझे अह्ह्ह्ह लो देख लो अच्छे से ... दिखा क्या ?

ये बोलकर रज्जो और नीचे झुक कर अपने दोनों पंजों से अपने थुलथुले चर्बीदार चूतड़ों को फाड़ते हुए दरारों को खोल दिया और उसकी गाड़ की भूरी सुराख साफ साफ नजर आने लगी , साथ ही नीचे उसकी चूत के निचली फांक भी दिखने लगी






दोनों ससुर दामाद आंखे फाड़े निहारने लगे रज्जो की गाड़ की भूरी सुराख को , दोनो के जीभ चटकारे ले रहे थे और लंड अब बेकाबू हो गया था

दोनों अपने लंड को धोती और पजामे के ऊपर से पकड़ कर मसल रहे थे

: बस हो गया न अब नीचे कर लूं

रज्जो ने उन्हें याद दिलाया कि आगे भी बढ़ना है और रंगी ने फौरन बनवारी के सामने ही हाथ बढ़ा कर रज्जो के गुलगुले चूतड़ों को दरारों के पास उंगलियों से सहलाया

: सीईईई ओह्ह्ह मेरी जान कितनी मुलायम गाड़ है तेरे उम्ममम जी कर रहा है कि चूम लूं इन्हें

: जो करना है जल्दी करो , बहु बाहर ही है अह्ह्ह्ह रमन के पापा उम्मम वहां कहा उंगली ले रहे है सीईईई

रज्जो के कहने की देरी थी कि रंगी ने अपनी रेंगती उंगलियों से उसके गाड़ के सुराख के पास रिंग बनाने लगा और रज्जो के अपने चूतड़ कसने लगी

फिर रंगी आगे बढ़ कर घुटनों के बल हो गया और दोनों हाथों से रज्जो के चूतड़ों को सहलाते हुए अपने होठों को उसके चूतड़ों पर रख कर एक लंबा गहरा चुम्बन किया और रज्जो अंदर से गिन गिना उठी

: बस कीजिए न रमन के पापा , हो गया न

: उम्मम रज्जो मेरी जान तेरे चूतड़ कितने मुलायम और बड़े है सीई आह्ह्ह्ह जी करता है इनको काट लूं ( रंगी अपना पूरा चेहरा रज्जो के चूतड़ों पर रेंगाने लगा और उसके चूतड़ के गालों को काटने लगा )

ये नजारा देख कर बनवारी का लंड झटके देने लगा और वो अपना लंड धोती से निकाल आकर सहलाने लगा

: उम्मम अह्ह्ह्ह बस कीजिए न उफ्फफ ओह्ह्ह आपकी जीभ सीईईई ओह्ह्ह वहा नहीं प्लीज उम्मम मै गिर जाऊंगी रमन के पापा सीई रुकिए न ओह्ह्ह्ह सीईईई






रज्जो झूठ का ड्रामा करती रही और रंगी उसके चूतड़ों में मुंह डाल कर जीभ से उसकी गाड़ की सुराख चाटने लगा

ये सब देख कर बनवारी का लंड खूब पंप हो रहा था और वही रंगी की जीभ की रफ़्तार से रज्जो तो झड़ ही जाती

: बस कीजिए सीई हो गया अब

: अरे थोड़ा सा और करने दो न जान

: आपको तो सारा दिन मिले तो भी कम है हीही ( रज्जो ने साड़ी नीचे करते हुए सीधी खड़ी होकर बोली )

बनवारी ने भी अपने खड़े लंड पर कुर्ता डाल दिया

रंगी वापस अपनी जगह आ गया और रज्जो खड़ी होकर इतराई : देखा बाउजी , ऐसे रमन के पापा तंग करते है मुझे सारा दिन और ये तो सिर्फ उनकी फरमाइश में से सिर्फ एक चीज थी

बनवारी अपनी बेबस हालात पर बस मुस्कुरा कर रह गया , उसकी जीभ लार छोड़ कर रह गई ,लंड भी उदास सा होने लगा कुर्ते के नीचे

: अरे वाह और दूसरे कौन से शौक है कमल भाई साहब को , बताईए न ( रंगी ने चहक कर कहा )

: नहीं अब बाउजी की बारी , पहले वो बताएंगे फिर आप ... फिर आगे क्रम चलेगा हीहीही ( रज्जो बोल पड़ी खिलखिला और रंगी बनवारी के बीच आकर बैठ गई )

: हा ये सही कहा आपने जीजी, बताइए न बाबूजी

इस पर बनवारी थोड़ा शर्माने लगा और मुस्कुराने लगा

: अब मै क्या बोलूं , इस उम्र में भला क्या ही शौक रहेगा । मेरे शौक तो तेरी अम्मा के साथ ही जैसे चले गए हो ( बनवारी भावुक हो कर बोला ) काम वाली औरतों में वो स्वाद नहीं मिलता

: स्वाद नहीं मिलता ? मतलब ? ( रंगी सहज भाव में जिज्ञासु हुआ लेकिन रज्जो अपने बाउजी के जज्बात समझ गई थी )

: सारा खेल स्वाद का ही तो है जमाई बाबू , रज्जो की मां के चूत का स्वाद आज भी मेरे जीभ को गिला कर देता है , पता है रज्जो !!

: हा बाउजी कहिए न ( रज्जो बड़े गौर से सुन रही थी )

: तेरी अम्मा मुझे कभी कभी मस्ती में एक शब्द कहती थी और खूब हस्ती थी

: क्या !! ( रज्जो और रंगी एक साथ बोले )

: बुरचट्टा

: मतलब ? ( रज्जो ने जानबूझ कर बनवारी को खोलने की कोशिश की )

: वो , जैसे तुझे जमाई बाबू तंग करते है न पीछे से , वैसे मै भी तेरी मां को तंग करता था । उन दिनों दुपहर में गांव में अक्सर शांति होती थी और मै तो तेरी अम्मा जब सोती रहती थी तो चुपके से उसकी साड़ी उठा कर भीड़ जाता था

: हीहीही ( रज्जो खिलखिलाई ) मतलब आप भी कम नहीं थे बाउजी

: ऐसी चीजों की तलब भला किसे नहीं होती जीजी ( रंगी ने मुस्कुरा कर कहा )

: इसका मतलब आप भी छोटी ( रागिनी ) को ऐसे ही तंग करते है जमाई बाबू ( बनवारी से हस कर कहा )

: अरे नहीं बाउजी , दुकान और फिर बच्चो के वजह से ज्यादातर हम दोनो को वक्त नहीं मिल पाता , बेचारी सोनल की मां तो खुद परेशान हो जाती है । रात में ही थोड़ा समय मिल पाता है हम दोनो को ।

: हा परिवार में ये सब तो कामन है ,लेकिन अपने शौक भी बताइए जमाई बाबू हीहीही क्यों बाउजी ( रज्जो ने बनवारी को शामिल किया)

: हा हा क्यों नहीं ( बनवारी ने भी रज्जो की हा में हा मिलाया )

: अरे क्या आप लोग भी , दरअसल मेरे शौक तो रागिनी को हमेशा जल्दी जल्दी में ही पूरे करने पड़ते है

: जल्दी जल्दी में मतलब ? ( बनवारी बोला )

: वो क्या बाउजी , कि सुबह सुबह जब भी रागिनी को नहाकर देखता हूं और घर में वो अक्सर ब्लाउज पेटीकोट में होती है और उसके ताजा देह की खुशबू से मेरा बड़ा मन होता है कि एक राउंड करने को मिल जाए , लेकिन बेचारी के पास इतनी जिम्मेदारियां होती है नाश्ता फिर दुकान जाना , इसके चक्कर में मुझे जिद दिखानी पड़ती है उसको

: जिद ? किस चीज के लिए

: एक मिनट बाउजी बताता हूं , जीजी एक मिनट आइए न थोड़ा

रज्जो समझ गई कि अब रंगी ने खेल को अपने तरीके से शुरू करने जा रहा है , वही बनवारी भी समझ रहा था कि रंगी कुछ तो दिमाग चला रहा है और वही जिज्ञासा में उसका लंड फिर से नई उम्मीद से भरने लगा

: हा कहिए जमाई बाबू ( रज्जो ने मुस्कुरा कर रंगी के पास खड़ी हो गई )

: आप थोड़े देर के लिए आप साड़ी निकाल कर रागिनी बन जाइए न और सुनिए ( रंगी थोड़ा सा रज्जो के कान में फुसफुसाया इससे रज्जो रंगी के खेल को अच्छे से समझ कर मुस्कुराने लगी और हा में सर हिलाया )

फिर अगले ही पल रज्जो ने अपनी साड़ी निकाल दी कमर से






उसके बड़े बड़े रसीले मम्में ब्लाउज में फुले हुए थे, नंगा बड़ा गुदाज पेट और गहरी नाभि , चर्बीदार चूतड़ों पर कसी हुई पेटीकोट

ये नजारा किसी को भी उसके पेंट ने झड़ा दे

: हटिए सोनल के पापा मुझे काम है , अभी झाड़ू बर्तन बाकी है फिर नाश्ता बनाना है

: उम्हू नहीं बस थोड़ा सा न, प्लीज मेरी जान ( रंगी भुनका )

: नहीं मुझे पता है आपका थोड़ा थोड़ा मुझे बहुत लंबा पड़ जाता है , हटिए न ...क्यों सुबह सुबह तंग करते है आप

: परेशान तो मै हूं मेरी जान, जरा इसको छू कर तो देखो कितना कड़ा हो रहा है ( रंगी ने रज्जो की कलाई पकड़ कर अपने पजामे में बने हुए तंबू पर रख दिया और मौका पाते ही रज्जो ने रंगी का लंड कस लिया और लंड की कसावट और गर्मी ने उसके अंदर से हिला दिया )

: उफ्फ दैय्या आपका सुबह सुबह कितना बड़ा कैसे हो जाता है

: उम्मम बस तुझे देख कर मेरी जान , तू इतनी सेक्सी है और नहाने के बाद तेरे ये होठ कितने मुलायम हो जाते है ( रंगी ने उंगलियों से रज्जो के होठ छूते हुए कहा और रज्जो आंखे बंद कर उसके उंगलियों को अपने लिप्स पर रेंगता महसूस कर रही थी और उतनी ही तेजी से रंगी का लंड भींच भी रही थी )

वही बनवारी का लंड फिर से बगावत पर आ गया , वो रंगी की चतुराई की दाद दे रहा कि कैसे रंगी ने मौके का फायदा उठा कर रज्जो के जिस्म का मजा ले रहा है

: जी करता है इन्हें चूम लूं

: तो चूम लो न मेरे सैयाँ, मै तो आपकी ही हूं न ( रज्जो ने खेल आगे बढ़ाया )

इतना कहने की देरी थी कि रंगी ने आगे बढ़ कर रज्जो के लिप्स चूसने लगा और रज्जो भी उसका साथ देने लगी ,वही रंगी के हाथ रज्जो के चूतड़ों को पेटीकोट के ऊपर से मसलने लगे , वो अपना लंड पजामे के अंदर से ही रज्जो के पेडू पर धंसाने लगा

दोनों पूरे जोश में एक दूसरे को चूम और सहला रहे थे

ये देख कर बनवारी ने कुर्ते के नीचे वापस अपना लंड हिलाना शुरू कर दिया ।

: बस हो गया न हटिए अब

: उम्हू नहीं , इसका कुछ करो न मेरी जान , ऐसे जलता रहेगा सारा दिन ( रंगी के अपना लंड पजामे के ऊपर से पकड़े हुए कहा )

: करा करूं आप भी बता दो न अब

: चूस दे न इसे , तेरे इन ठंडे होठों की मिठास से ये भी हलका हो जाएगा

: आप बहुत जिद्दी हो सोनल के पापा , हा नहीं तो अब खोलो जल्दी उसे ( रज्जो ने तुनक कर अपना नाटक जारी करते हुए कहा )

इतना कहने की देरी थी कि रंगी ने फौरन अपना पजामा जांघिया को खोलकर नीचे गिरा दिया और लंड बाहर निकाल कर रज्जो के सामने परोस दिया

: उफ्फ कितना गुस्से में है ये लाल हो गया है और तप भी रहा है ओह्ह्ह्ह सीईईई ( रज्जो घुटने के बल होकर रंगी का लंड बनवारी के सामने पकड़ कर सहलाती हुई बोली )

: उफ्फ मेरी जान तेरे हाथों में जादू है ओह्ह्ह्ह कितने मुलायम हाथ है तेरे ओह्ह्ह्ह ऐसे ही उम्ममम सीईईई ओह्ह्ह मजा आ गया मेरी रानी थोड़ा और अंदर ले सीई उम्मम ऐसे ही

रज्जो ने रंगी का सुपाड़ा मुंह में ले लिया और चूसने लगी

: ऐसे ही सीई उफ्फ कितना सुकून है ओह्ह्ह्ह ऐसे ही करते हो ओह्ह्ह






तभी रंगी की नजर बनवारी पर गई , जो हाथ में लंड लिए उसे ही देख रहा था ,उसने सोचा यही मौका है खेल को आगे बढ़ाने का ।

: देखा बाउजी लगभग हर सुबह ऐसे ही जिद दिखानी पड़ती है , तब कही थोड़े शौक पूरे हो पाते है मेरे

: जान कर खुशी हुई कि छोटी ( रागिनी ) आपका अच्छे से ख्याल रखती है जमाई बाबू

: सच कहा बाउजी ओह्ह्ह्ह सीई जीजी आराम से ओह्ह्ह्ह बहुत तेज कर रही है आप उम्ममम

: क्या हुआ जमाई बाबू ( रज्जो ने लंड निकाल कर बोली)

: उफ्फ जीजी एक पल को लगा कि सच में रागिनी ही मेरे लंड को चूस रही है , वो भी बीच बीच में तेजी से सुरकने लगती है

रज्जो मुस्कुराई और वापस से बहुत ही हौले से अपने होठों की नरमी से लंड को चूसा और लंड बाहर निकाल कर बोली: ये वाला ठीक था न हीही

रंगी एकदम से सिहर उठा

: सच सच बताओ जीजी , कमल भाई साहब की फरमाइशों में से ये भी एक होगा क्यों ? ( रंगी ने कहा )

बनवारी की भी जिज्ञासा बढ़ी , लेकिन रज्जो को अब खेल अपने तरीके से खेलना था तो उसने भी नया ड्रामा किया

: अब छोड़िए न जमाई बाबू , उनके शौक ऐसे ऐसे है कि कभी पूरे न हो

: क्या बेटी !! बता न थोड़ा

: हीही , नहीं ये वाला नहीं , प्लीज बाउजी न ( रज्जो के हाथ में अभी भी रंगी का लंड था , जो उसके उंगलियों को ढीला कर रहा था ?

: लग रहा है जीजी कुछ खास बात है तभी आप नहीं बता रही है , क्यों बाउजी

: कोई बात नहीं जमाई बाबू , उसकी इच्छा नहीं है तो कोई बात नहीं ( बनवारी ने कहा )

: अरे ऐसा कुछ नहीं है बाउजी, अभी कहूंगी तो आप लोग हंसोगे ही हीहीही, कहोगे कि आपके जमाई कितने बच्चों जैसे है ।

: अरे बताओ न जीजी , थोड़ा हस भी लेंगे उसमें क्या है

: हा बेटी बोल न

: हीही , पता है कभी कभी वो ज्यादा रोमांटिक हो जाते है और मै भी हो जाती हूं तो वो कहते है कि काश उनके पास जादू होता और वो अपना एक और अवतार बना लेते फिर मुझे आगे पीछे दोनों तरफ से प्यार करते

ये बोलकर रज्जो जोर से खिलखिलाई , लेकिन उसकी बातों से रंगी और बनवारी की काम कल्पनाओं ने नई उड़ान भरनी शुरू कर दी । रज्जो की दो लंड से चुदाई उफ्फ सोच कर ही दोनों के लंड झटके खाने लगे

: अच्छा फिर आप क्या जवाब देती थी उनको ( रंगी ने आगे बोला ) मुझे तो लगता है कि कमल भाई साहब जरूर आपको इस बारे में सोचने को कहते होगे ।

: हा सच कहा आपने जमाई बाबू , लेकिन सोचने का क्या फायदा मिलेगा थोड़ी हाहाहाहा

रज्जो की बात पर बनवारी उसका रंडीपना साफ साफ देख रहा था

: हाहाहा यानी कि कही न कही आपको भी वो कामुक सपने पसंद आते थे उम्म

: क्या आप भी जमाई बाबू , धत्त ( रज्जो शर्माई )

: आपकी मुस्कुराहट बता रही है कि मेरा अनुमान सही है , बस आप कबूल नहीं कर रही है ...बाउजी ( रंगी ने बनवारी को पुकारा )

: अह हा जमाई बाबू

: मुझे लगता है कि आप कहेंगे तो जीजी जरूर बताएंगी अपनी इच्छाओं के बारे में , हमने सबकी तो बाते कि लेकिन जीजी तो साफ साफ बच गई

: हा रज्जो , तू भी बता न कुछ

: धत्त बाउजी नहीं मुझे शर्म आएगी ( ये बोलकर रज्जो शर्मा कर उठ गई )

: ओहो अब इसमें शर्माना कैसा , इधर आ बैठ ( बनवारी ने उसकी कलाई पकड़ कर अपने पास बिठा लिया और मौका देखकर रंगी भी वैसे ही नंगा आकर रज्जो के पास बैठ गया ) अब बता ... कही ऐसा तो नहीं कि जमाई बाबू को खुश रखने में तेरी अपनी इच्छाएं दब कर रह गई हो

बनवारी ने भावुक होकर कहा और रज्जो जैसे पिघल गई

: नहीं बाउजी ऐसा कुछ नहीं , रमन के पापा मेरा भी अच्छे से ख्याल रखते है । वो मैने बताया कि वो अक्सर अपने डबल रोल वाली बात करते है तो

: हा तो ( बनवारी बोला और रंगी सुनने लगा )

: अब मै आपसे कैसे कहूं बाउजी , मुझे शर्म आती है । वो कभी कभी बिस्तर पर जब रमन के पापा मेरे ऊपर आकर मेरे दूध पीते है तो उनके मुंह में उस वक्त एक ही निप्पल होता है और दूसरे वाले में खुजली होने लगती है , उस वक्त लगता है कि काश सच में रमन के पापा का दूसरा रूप भी होता तो मुझे इतनी खुजलाहट नहीं होती

रज्जो की बाते सुनकर दोनों ससुर दामाद की मुंह में मिश्री घुलने लगी

: फिर तू क्या करती है बेटी ऐसे समय में

: वो मै , खुद से ही अपने निप्पल को मुंह में डाल लेती हूं

ये सुनकर दोनों ससुर दामाद की आंखे बड़ी ही गई कि आखिर ये चमत्कार होता कैसे होगा ,रज्जो अपने ही निप्पल कैसे चुस्ती होगी

: हाहाहा क्या जीजी आप भी मजाक करना नहीं छोड़ती आप हीही

: मै मजाक नहीं कर रही हूं मेरे दूध आराम से मेरे होठों तक चले जाते है , सच कह रही हूं बाउजी , पूरे नहीं मतलब जीभ से टच कर लेती हूं इतना

बनवारी हैरानी से रज्जो को देखने लगा

रज्जो ने दोनों को हैरान देख कर बोली : आपको लोगों को यकीन नहीं हो रहा है न रुकिए दिखाती हूं मै

इतना बोलकर रज्जो ने अपनी ब्लाउज खोलने लगी और फिर उसके सारे हुक खुलते ही उसके बड़े बड़े रसीले पपीते जैसे चूचे ब्लाउज के बाहर लटक गए ,उसके बड़े बड़े काले घुंडी जैसे निप्पल कड़क थे

दोनों ससुर दामाद आंखे फाड़ कर रज्जो की नंगी चूचियों को इतने पास से देख रहे थे

रज्जो ने अपनी बाई चूची जो बनवारी के तरफ वाली थी उसे उठाई और अपनी मोटी थन जैसी छाती को ऊपर खींचते हुए निप्पल वाला सिरा होठों के पास लाकर अपने सूखे निप्पल के टिप को जीभ से टच करने लगी






ये देख कर दोनों ससुर दामाद की आंखे बड़ी हो गई , हलक सूखने लगा और जीभ चटकारे लेने लगी

: देखा ऐसे

: लेकिन जीजी अगर आपके दूध ऊपर जा सकते है तो कमल भाईसाहब ने दोनों दूध को एक साथ भी तो चूस सकते है

: वो कैसे ? ( रज्जो ने पूछा )

: हा जमाई बाबू वो कैसे ? ( बनवारी की जिज्ञासा बढ़ने लगी)

: अगर आपकी इजाजत हो तो मै जीजी के दोनों निप्पल एक साथ चूस कर दिखा सकता हूं

बनवारी ने रज्जो को देखा और रज्जो ने आंखे झपका कर हामी भर दी

: अगर मेरी बेटी के कष्ट कर हो रहे है तो तरीका जानने लायक होगा , क्यों बेटी

: जी बाउजी

इतना कहने की देरी थी कि रंगी एकदम से खिल गया और उसने रज्जो को पकड़ कर थोड़ा अपनी ओर घुमा कर सोफे सहारे टेक कर लिया दिया और वापस से दोनों हाथों में रज्जो की गुलगुली छातियां पकड़ उन्हें घुलाने लगा

ये देख कर बनवारी का लंड फिर से उछलने लगा

: ये देखिए बाउजी , ये मैने जीजी के दूध पकड़े और इन्हें अब आपस में सटाना है ऐसे ( रंगी ने दोनों निप्पल को पास लाया कि दोनों के बीच इंच भर की जगह रही होगी और रंगी आगे झुक कर ) बस इन्हें आसानी से मुंह में रख सकते है ऐसे

इतना कह कर रंगी ने रज्जो के दोनों निप्पल एक साथ मुंह में रख लिया और जीभ से उनके टिप को चाटने लगा






: सीईईई ओह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह जमाई बाबू उफ्फ

: आराम से जमाई बाबू खींच रहा होगा रज्जो का दूध ( बनवारी फिकर में बोला )

: उम्मम नहीं बाउजी बहुत अच्छा लग रहा है ओह्ह्ह्ह उम्ममम ऐसे ही जमाई बाबू करिए ओह्ह्ह्ह सीईईई ओह्ह्ह उम्ममम उफ्फ

: देखा बाउजी कितनी आसानी से हो गया ,आप भी करके देखिए , जीजी को जरा भी तकलीफ नहीं होगी

: बेटा ,क्या मै भी एक बार

: हा बाउजी जमाई बाबू सही कह रहे है , मुझे जरा भी दिक्कत नहीं हुई लेकिन आप चाहे तो तसल्ली कर लीजिए

इतना बोलकर रज्जो बनवारी की ओर घूम गई और बनवारी ने रज्जो की चुचियों को पकड़ हाथों में भर लिया

: ओह्ह्ह बेटी तेरी छातियां तो बड़ी भारी है हाहा ( इतना बोलकर बनवारी ने रंगी के जैसे रज्जो की चुचियों को करीब लाने लगा )

: ये सवाल आप अपने जमाई बाबू से पूछिएगा अह्ह्ह्ह सीईईईईई ओह्ह्ह्ह बाउजी उम्ममम देखा न जमाई बाबू का तरीका काम कर रहा है ओह्ह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह सीईईई बस कीजिए न उफ्फफ

रज्जो ने बनवारी को रोकना चाहा लेकिन बनवारी लगातार रज्जो के दोनों निप्पल एक साथ जीभ से फ्लिक कर रहा था

: उम्मम बाउजी रुक जाइए न हो गया , अब बस उफ्फ कितना देर करेंगे सीईईई मुझे नीचे दिक्कत होती है , ऐसे ही रमन के पापा मुझे तंग करके छोड़ देते है






: कैसी दिक्कत जीजी ?

: हा बेटी कैसी दिक्कत ? ( बनवारी ने भी वही सवाल दोहराया और एक चुची को मुंह में रख लिया)

: कुछ नहीं आप लोग नहीं समझोगे और जमाई बाबू फिर से आपका तरीका फेल हो गया ।

: अरे तू कुछ बताएगी तो न जानेंगे हम लोग ( बनवारी ने कहा )

: हा जीजी कहिए न ( रंगी ने भी बनवारी की हा में हा मिलाया)

: हम औरतों को संतुष्ट कर पाना इतना भी आसान नहीं है जमाई बाबू

: क्या मतलब रज्जो ? जमाई बाबू तुझे खुश नहीं रखते ?( बनवारी थोड़ा फिक्र में बोला )

: वो बात नहीं है बाउजी ( रज्जो थोड़ा रुक कर हिचक कर बोली )

: फिर क्या बात है जीजी ( रंगी ने कहा )

: हम औरतों के देह की बनावट ही ऐसी है , एक तरफ शांत करो तो दूसरी ओर तकलीफ बढ़ने लगती है । मान लो रमन के पापा ऊपर एक साथ मेरे दूध चूस भी ले , लेकिन नीचे जो खुजली होगी वो ?

दोनों ससुर दामाद समझ गए कि रज्जो अपनी बुर की कुलबुलाहट के बारे में बात कर रही है ।

: रमन के पापा का एक हाथ नीचे , एक हाथ ऊपर होता है , लेकिन जब दोनों हाथ ऊपर होगा तो जैसे अभी खुजली हो रही है वैसे ही होगी

दोनों ससुर दामाद अपनी कल्पनाओं में वो कामुक दृश्य सोचने लगे और दोनों का लंड झटके देने लगा

: माफ करना बेटी , मेरी वजह से तुझे दिक्कत हुई

: कोई बात नहीं बाउजी , अब जो हो गया सो हो गया

: सॉरी जीजी , लेकिन अगर हम कुछ मदद कर सके तो जरूर करेंगे बाउजी

: हा बेटी , जमाई बाबू सही कर रहे है

: आप लोग ? आप लोग क्या मदद करेंगे

: अगर बाउजी को ऐतराज न हो तो मेरे पास एक तरीका है ,उससे आप की तकलीफ जल्द से जल्द दूर हो सकती है

: वो कैसे जमाई बाबू

: हा वो कैसे ? ( रज्जो ने भी बनवारी की बात दोहराई )

: एक मिनट मै बताता हूं , जीजी आप ऐसे पीछे होकर टेक ले लीजिए ( रंगी ने रज्जो को वापस लीची सोफे से टेक देकर लिटा दिया ) बाउजी आप थोड़ा करीब आ जाइए जीजी के तरफ ( रंगी ने बनवारी को भी अपनी तरफ घुमाया ) हा ठीक है अब आप जीजी के बाई दूध को पकड़ लीजिए ...बिल्कुल ऐसे ही और जीजी आप जरा अपने कूल्हे उठाइए






: क्या कर रहे है जमाई बाबू उसे ऊपर क्यों कर रहे है (रज्जो ने रंगी को उसकी पेटीकोट ऊपर खींचने के लिए टोका)

: करिए न आप बताता हूं , हा बस हो गया ( रंगी ने रज्जो की पेटीकोट को चढ़ा कर उसकी जांघों के पीछे कर दिया और फिर उसकी जांघें खोल दी ... अब रज्जो की चूत की गीली फांके साफ साफ दिखने लगी

: धत्त आपने मुझे पूरा नंगा कर दिया , मुझे शर्म आ रही है जमाई बाबू

: कोई बात नहीं बेटी , एक बार जमाई बाबू का तरीका देख लेते है ।अगर सही रहा तो तेरा ही फायदा होगा न

: ठीक है सीई ओह्ह्ह आराम से बाबू ओह्ह्ह्ह सीईईई ओह्ह्ह हल्के हाथ से उम्मम ( रंगी की उंगलियों का स्पर्श अपने चूत पर पाकर रज्जो सिसक पड़ी )






: उफ्फ जीजी कितनी गीली हो गई है आप

: अब आगे क्या करना है ( रज्जो ने थोड़ा भुनक कर कहा )

: हा अब बाउजी आप जीजी के उस दूध को मुंह में रखिए और मै इस वाले को और दोनों एक साथ चूसेंगे

रज्जो उस कल्पना से ही कांप उठी जब उसके बाप और छोटे जमाई मिल कर उसके निप्पल चूसेंगे

रंगी के कहने की देरी थी कि बनवारी ने लपक कर रज्जो के निप्पल को मुंह में रख लिया

: सीईईई ओह्ह्ह बाउजी आराम से उम्ममम सीईईई ओह्ह्ह... उफ्फ जमाई बाबू अभी तक तो आपका तरीका काम आ रहा है उफ्फफ

रंगी कुछ नहीं बोला वो बस रज्जो के निप्पल को मुंह में भर कर चूसने लगा

दोनों ससुर दामाद एक साथ मिलकर रज्जो के दूध चूसने लगे और रज्जो की सिसकिया उठने लगी






: ओह्ह्ह्ह बाउजी उम्ममम अह्ह्ह्ह सीईईई ओह्ह्ह ऐसे लग रहा है जैसे मै हवा में उड़ रही हूं ओह्ह्ह्ह उम्ममम कितना अच्छा लग रहा है ओह्ह्ह

रज्जो अपनी छातियां ऊपर उठाने लगी और नीचे उसकी बुर पर रंगी ने उंगलियों से सहलाना शुरू कर दिया

: उफ्फ जमाई बाबू ओह्ह्ह आपकी उंगलियां सीईईई अह्ह्ह्ह उम्ममम कितना टाइट है ओह्ह्ह्ह आराम से ओह्ह्ह्ह सीउईईई

: क्या हुआ बेटी ( बनवारी फिकर में रज्जो की चुची को निकाल कर बोला )

: ओह्ह्ह बाबूजी ओह मुझे थामिए अह्ह्ह्ह सीईईई जमाई बाबू अपनी उंगली नीचे डाल रहे है ओह्ह्ह्ह सीई ओह्ह्ह्ह

: कहा डाल रहे है बेटा

: बुर में .... मेरी बुर में बाउजी ओह्ह्ह्ह सीई ओह्ह्ह्ह बहुत अच्छा लग रहा है ओह्ह्ह्ह सीई ओह्ह्ह्ह बाउजी उम्ममम कितने दिन से अंदर खुजली हो रही थी ओह्ह्ह्ह

: अच्छे से करिए जमाई बाबू , लग रहा है तुझे बड़े जमाई बाबू की याद आ रही है

: हम्म्म बाबूजी ओह्ह्ह्ह क्या करूं , वो भी ऐसे ही करते है बस एक चीज की कमी है

: वो क्या बेटी ?

: वो जब करते है तो मेरे हाथ में उनका ...अह्ह्ह्ह सीईईईईई ओह्ह्ह्ह सीईईई ऐसे ही जमाई बाबू तेजी से अंदर बाहर करिए ओह्ह्ह्ह

: क्या बेटा बोल न क्या होता है तेरे हाथ में उम्मम

: उनका लंड बाउजी , उसकी गर्मी चाहिए मुझे ओह्ह्ह्ह उम्ममम मै पागल हो जाऊंगी ओह्ह्ह्ह जमाई बाबू

: क्या जीजी अब तो आपके दोनों तरफ लंड है , किसी का भी पकड़ लीजिए न ( रंगी ने खुला ऑफर दिया )

: ओह्ह्ह्ह क्या सच में ?

: अह्ह्ह्ह्ह हा बेटा पकड़ ले , जिसका तेरा मन हो ( बनवारी ने कहा )

: आपका वाला कहा है बाउजी ( रज्जो ने हाथ आगे बढ़ा कर बनवारी की जांघें टटोली और बनवारी झट से अपना कुर्ता हटा कर रज्जो के आगे अपना लंड निकाल दिया )

: ये क्या तेरे पास ही है बेटी ओह्ह्ह्ह सीईईई ओह्ह्ह तेरे हाथ तो बड़े कोमल है मेरी बेटी ओह्ह्ह्ह

: उफ्फफ बाउजी आपका लंड को बहुत कड़ा है सीईईई बहुत जल रहा है उम्ममम

: अगर तुझे दिक्कत हो तो जमाई बाबू का ही पकड़ कर देख ले ( बनवारी ने भी खेल आगे बढ़ाया)

इतना कहने की देरी थी कि रज्जो ने रंगी का भी लंड हाथों में पकड़ लिया

: उफ्फ बाउजी ये भी जल रहा है ,आप दोनों का लंड बहुत टाइट हो रहा है उम्मम






: तुझे कौन सा पसंद आ रहा है बेटी

: उम्ममम दोनो एक से लग रहे है बाउजी

: फिर तो आपका सपना हकीकत ही गया जीजी

: वो कैसे ? ( रज्जो बोली )

: हा जमाई बाबू वो कैसे ? ( बनवारी ने कहा)

: आज आपके दोनों तरफ एक जैसे लंड वाले मर्द है और दोनों मिल कर आपके दूध चूस रहे है उम्मम ( ये बोलकर रंगी वापस से रज्जो की निप्पल को मुंह ने भर लिया)

: सीईईई ओह्ह्ह जमाई बाबू उम्मम सच कहा आपने ... रमन के पापा मुझे हमेशा सपने दिखाते थे कि ऐसे ही मेरे दोनों हाथों में लंड होगा और मै उन्हें

: क्या बेटी ...बोल न क्या करने को कहते थे जमाई बाबू

: वो कहते थे कि मै उन्हें एक साथ चूसूंगी

: उफ्फफ जीजी फिर से आपको दो लंड का मजा मिलता

: धत्त क्या आप भी ओह्ह्ह्ह आराम से जमाई बाबू

: तो क्या कहते बाउजी , जीजी का ये सपना भी पूरा कर दें

: नेकी और पूछ पूछ , मुझे मेरी लाडली से सारे सपने पूरे करने है । उठ बेटी आजा

ये बोलकर बनवारी ने अपना कुर्ता निकाल दिया और पूरा नंगा होकर रज्जो के सामने खड़ा हो गया

बनवारी की देखा देखी रंगी भी उसके सामने आ गए हाथों में लंड सहलाते हुए

: धत्त मुझे शर्म आ रही है बाबूजी

: देख बेटी सपने जीने के बहुत कम मौके मिलते है , अगर अभी मिल रहा है तो जी ले

: सच कह रहे है बाउजी आप , जीजी आगे बढ़िए और अपने सपने को हकीकत बना लीजिए

रज्जो मुस्कुरा कर आगे हुई नीचे बैठ कर एक बार फिर से दोनों का लंड थाम लिया

: उफ्फ कितना टाइट है आप दोनों का

: उन्हें ढीला करना भी अब तेरे हाथ में है बेटी , आगे बढ़

इतना कहना था कि रज्जो ने बनवारी का लंड पकड़ कर उसकी चमड़ी पीछे कर ऊपर देखा बनवारी की आंखों में और फिर मुंह खोलकर सुपाड़ा अंदर ले लिया






बनवारी ये नजारा देख कर आंखे बंद कर एक लंबी गहरी सास लेने लगा

: उफ्फफ बेटी तेरे होठ सीईईई ओह्ह्ह उम्ममम सीईईई ओह्ह्ह्ह

रज्जो ने दो से तीन बार बनवारी का लंड चूसा और फिर रंगी की ओर देखा । रज्जो मुस्कुरा कर रंगी के सुपाड़े की टिप को जीभ से कुरेदा और जीभ को पूरे सुपाड़े पर नचा कर मुंह में रख लिया

: ओह्ह्ह्ह जीजी सीईईई आप तो पूरी खिलाड़ी हो उम्ममम अह्ह्ह्ह कितनि ठंडक है ओह्ह्ह्ह बाउजी बहुत आनंद आ रहा है

: सच कहा जमाई बाबू , रज्जो बड़ी होनहार है ओह्ह्ह्ह बेटी चूस ले अच्छे से जितना तेरा मन हो ओह्ह्ह बेटी उम्मम बहुत अच्छा कर रही है तू उम्मम

रज्जो बारी बारी से दोनों के लंड को गिला करने लगी और दोनों ससुर दामाद आपस में देख कर मुस्कुरा रहे थे इस छोटी सी जीत के लिए

लेकिन अभी पूरी जीत बाकी थी

: कैसा लग रहा है बेटी तुझे अपनी इच्छाओं को पूरा करके

: बहुत अच्छा लग रहा है बाउजी

: अभी कहा सारी इच्छाएं पूरी हुई बाउजी , ( रंगी बोला )

: अब क्या बाकी है जमाई बाबू ( बनवारी बोला )

: बाउजी जीजी आपसे खुल कर नहीं कहेंगी , लेकिन मै जानता हूं कि कमल भाई साहब बस यही तक नहीं रुके होंगे उन्होंने आगे भी कुछ होगा जीजी से

: क्या सच में रज्जो

इस पर रज्जो शांत रही , क्योंकि उसको खुद ही इसके आगे योजना पर कोई ध्यान नहीं था । इसीलिए उसने आगे का खेल रंगी के हवाले करना सही समझा ।

: वो नहीं बोलेगी बाउजी , रुकिए मै बताता हूं

इसके बाद रंगी ने रज्जो को उठाया और बनवारी के सामने ही उसका पेटीकोट खोलकर नीचे गिरा दिया

: ये क्या कर रहे है जमाई बाबू ( बनवारी ने हैरत होकर कहा )

रंगी ने रज्जो को देखा और फिर बोला

: आप जीजी के पीछे बैठ जाइए और मै आगे

: उससे क्या होगा ?

: आप खुद समझ जाएंगे बाउजी..मै जो कह रहा हूं करिए

रंगी ने निर्देश का पालन करते हुए बनवारी घुटने के बल बैठ गया और रंगी आगे बैठ गया

रज्जो के पैर आने वाले रोमांच के लिए थरथरा रहे थे और बनवारी ढंग बैठा था

: क्या करना जमाई बाबू

: याद करिए बाउजी थोड़ देर पहले जीजी ने क्या कहा था कि ऊपर ठीक होता है तो नीचे दोनो तरफ खुजली होती है । तो आप समझे ?

बनवारी समझ गया कि रंगी उससे क्या करवाना चाहता है और उसने रज्जो ने नंगे चूतड़ों को सहलाना शुरू कर दिया

रज्जो के जिस्म में सिहरन होने लगी

आगे से रंगी भी उसकी जांघों और पेडू को सहलाने चूमने लगा

: उम्ममम सीईईई ओह्ह्ह बाउजी आराम से ओह्ह्ह्ह सीउईईई ओह्ह्ह

जैसे ही रंगी ने आगे रज्जो की चूत की ओर बढ़ा , उसको तेज गुदगुदी हुई वो पीछे हुई और उसके चूतड़ों में बनवारी ने अपना मुंह डाल दिया

बनवारी ने उसके चर्बीदार लचीले चूतड़ों को फैला कर अपनी जीभ को टिप से रज्जो के गाड़ की सुराख को चाटना शुरू कर दिया , नतीजा रज्जो ने अपने चूतड़ कसके आगे कर लिए और मौका पाते ही रंगी ने अपनी जीभ से उसके बुर के फांकों को चाटने लगा






रज्जो की हालात बिगड़ने लगी

उसका संतुलन बिगड़ने लगा

: ओह्ह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह बाउजी मै गिर जाऊंगी उम्मम अह्ह्ह्ह्ह कितना अच्छा लग रहा है जमाई बाबू चाटिए उम्ममम ओह्ह्ह सीईईई

बनवारी अपनी बेटी को खुश देखकर दुगने जोश में उसके चूतड़ों को सहलाते हुए जीभ से उसकी गाड़ चाटने लगा

: ओह्ह्ह सीईईई बाउजी उम्ममम सीईईई आप तो मेरी खुजली बढ़ा रहे है , और अंदर ले जाइए न

: बेटी तेरे चूतड़ बहुत बड़े है और जगह बहुत सकरी है , अगर तू बिस्तर पर झुक जाए तो मै अच्छे से चाट दूंगा इन्हें

: हा हा क्यों नहीं , आइए बाउजी ( रंगी ने बनवारी की पहल को सराहा और रज्जो को लेकर बिस्तर पर उसे घोड़ी बना दिया )

रज्जो के चूतड़ अब हवा में थे और उसके भड़कीले चूतड़ों के सामने बनवारी

जिसकी जीभ लगातार लार छोड़ रही थी

रंगी आगे बढ़ कर रज्जो के पास खड़ा हो गया और उसने रज्जो के चूतड़ों को पंजे से फाड़ कर फैलाया : हा बाउजी अब कीजिए

रंगी ने मुस्कुरा कर बनवारी को आंख मारी और बनवारी भी समझ गया कि रंगी जरूर बबीता के साथ हुए खेल को दोहराने वाला है ।

वो खुश होकर झुक गया और रज्जो के बड़े बड़े चूतड़ों को थामते हुए अच्छे से नथुनों में सांस भर कर उसके गाड़ के सुराख की मादक गंध ली और अपने जीभ पर देर सारी लार बटोर कर बनवारी ने रज्जो की गाड़ के सुराख पर जीभ नचाई, रज्जो मचल कर आगे हो गई

: सीई उम्मम बाबूजी वही , सीई ओह्ह्ह्ह बहुत खुजली हो रही है उम्ममम अह्ह्ह्ह सीईईई ओह्ह्ह सीईईई चूसो ऐसे ही बाउजी बहुत अच्छा लग रहा है उम्ममम आपकी जीभ मुझे पागल कर रही है ओह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्ह सीईईई उम्मम






रज्जो जोश में हाथ नीचे से ले जाकर अपनी उंगलियों से बुर के दाने को सहलाने लगी और रंगी की नजर पड़ गई

: बाउजी नीचे फांकों से होकर ऊपर तक जाइए , जीजी को नीचे भी तकलीफ हो रही है

बनवारी रंगी का इशारा समझ गया और वो नीचे झुक कर तीन से चार बार अच्छे से जीभ लपलपाकर कर रज्जो के फांकों पर चलाया और फिर रज्जो की रिसती हुई बुर को चाटते हुए जीभ को उसके गाड़ के सुराख तक ले गया

: ओह्ह्ह्ह सीईईई ओह्ह्ह बाबूजी उम्ममम अह्ह्ह्ह आप तो मुझे पागल कर दोगे उफ्फफ कितना मजा आ रहा है और करो ऐसे ही उम्ममम सीईईई चाटो बाउजी मेरी बुर और गाड़ को एक साथ उम्ममम अम्मा ओह्ह्ह्ह हा हा ऐसे ही बुर के पास और और उम्ममम बाउजी अच्छे से करिए न ओह्ह्ह बहुत ज्यादा खुजा रहा है ओह्ह्ह्ह सीई

: बेटा तू सीधी लेट जा फिर अच्छे से तेरी बुर चाट दूंगा मै

बनवारी के कहने की देरी थी कि रज्जो फौरन पलट गई और अपने कूल्हे उछलते हुए बनवारी के सामने आ गई

बनवारी भी पूरी तत्परता से उसकी जांघों को पकड़ कर मुंह उसके बुर में लगा दिया और उसकी रस छोड़ती बुर की फांकों को होठों से खींचने लगा

: ओह्ह्ह्ह उम्ममम बाउजीीईईईई उम्ममम सीईईई ओह्ह्ह खा जाओ उम्मम ओह्ह्ह्ह सीईईई






रज्जो ने अपने कूल्हे हवा में उठा दिए और बनवारी का सर पकड़ कर चूत पर दबाने लगी । ये सब देख कर रंगी का लंड अकड़ गया और वो लपक कर रज्जो के पास गया और उसे थामने लगा

: आराम से जीजी

: थाम कर रखिए जमाई बाबू रज्जो को

इतना बोलकर बनवारी वापस रज्जो की बुर चूसने लगा और रज्जो की हालत खराब होने लगी वो अपने कंधे झटकने लगी और उसकी मोटी छातियां खूब इधर उधर होने लगी

ये देख कर रंगी से रहा नहीं गया और उसके रज्जो के चूचों को पकड़ झुक गया और एक निप्पल मुंह में ले लिया

: उफ्फ जमाई बाबू ओह्ह्ह चूसो आप भी मेरे दूध को उम्मम अह्ह्ह्ह्ह सीईईई ओह्ह्ह बाबूजी अब रहा नहीं जा रहा है उम्ममम

: क्या हुआ बेटी ( बनवारी मुंह हटा कर बोला )

: डाल दीजिए न अंदर अब और नहीं सह पाऊंगी मैं ओह्ह्ह्ह सीईईई बहुत खुजली हो रही है बाउजी उम्ममम ( रज्जो अपने कूल्हे पटकते हुए बोली )

: क्या ?? नहीं रज्जो , तू , तू मेरी बच्ची है मै कैसे

: उफ्फ जमाई बाबू समझाइए न बाउजी को उम्ममम

: हा बाउजी डाल दीजिए न अंदर , इतना क्या सोच रहे है , जीजी बहुत तकलीफ में है

: लेकिन जमाई बाबू वो मेरी बेटी है

: अभी थोड़ी देर पहले आपकी बेटी ने ही आपके लिए अपनी मर्यादा तोड़ी थी तो क्या आप उसके लिए नहीं करेंगे

: आप सही कह रहे है जमाई बाबू

: माफ करना बेटी, मै तेरी मदद करूंगा ओह्ह्ह्ह सीईईई कितना जल रहा है अंदर उफ्फफ बेटी कितनी गर्म है तू

: ओह्ह्ह्ह बाउजी और डालिए न पूरा उम्मम ऐसे ही और और हम्मम ऐसे ही ओह्ह्ह पूरा भर दीजिए अंदर तक

रज्जो पूरे मूड में थी और अपने बाउजी का लंड चूत में सुरकते हुए सिसकने

थोड़ी देर में ही बनवारी का लंड अंदर सेट हो गया और वो हौले हौले झटके देते हुए चोदने लगा रज्जो को और बगल में खड़ा रंगी अपना लंड हिला रहा था

: अब कैसा लग रहा है बेटी , आराम हुआ कुछ

: अह्ह्ह्ह सीईईई ओह्ह्ह बाउजी बहुत अच्छा लग रहा है उम्मम आपका लंड अन्दर तक जा रहा है उम्ममम थोड़ा तेज करेंगे तो अच्छा लगेगा






: करता हूं न , मेरी लाडो ओह्ह्ह ले और तेज ले उम्मम अह्ह्ह्ह्ह सीईईई उम्मम ओह्ह्ह्ह अब ठीक है न बेटी

बनवारी ने धक्के की स्पीड बढ़ाते हुए बोला

: ओह्ह्ह्ह हा बाउजी ऐसे ही उम्ममम चोदो और तेज उम्ममम कितना अच्छा लग रहा ओह्ह्ह सीईईई ओह्ह्ह उम्ममम

बनवारी लगातार चोदने लगा और रज्जो को मजा आ रहा था और वो अपनी चूचियां मुंह में रख कर पीने लगी ये देख बनवारी ने रंगी से पहल किया

: जमाई बाबू जरा रज्जो के दूध को देख लेंगे

: हा हा बाउजी क्यों नहीं

ये बोलकर रंगी आगे बढ़ कर वापस रज्जो की चूचियां दबा दबा कर पीने लगा






: ओह्ह्ह्ह उम्ममम जमाई बाबू उफ्फ बाउजी , आप दोनों मुझे पागल कर रहे हो उम्मम अह्ह्ह्ह्ह बाबूजी और तेज पेलो न उम्मम आप लोग कुछ बोल क्यों नहीं रहे सीई ऐसे तो मेरा होगा ही नहीं

: तो क्या करु बेटा तू ही बता अब

: कुछ बोलिए न

: क्या ? वही तो पूछ रहा हूं तुझसे बेटा

: गंदा गंदा सा , जैसे रमन के पापा बोलते है , जैसे थोड़ी देर पहले बोल रहे थे आप मुझे, वैसे बोलिए न बाउजी ओह्ह्ह्ह सीई

बनवारी थोड़ा हिचक रहा था और उसने रंगी को आवाज दी

: जमाई बाबू कुछ मदद करेंगे इस बारे में

रंगी रज्जो के दूध छोड़ कर खड़ा हुआ

: कुछ नहीं बाउजी बस जीजी की तारीफ करिए लेकिन गंदे शब्दों में

: कैसे ?

: बताता हूं ... जीजी जरा इसको मुंह में लेंगी

रंगी ने आगे बढ़ कर रज्जो के मुंह के पास लंड ले गया और रज्जो ने लपक कर उसे मुंह में भर लिया

रज्जो की लार की ठंडक अपने लंड पर पाते ही रंगी सिहर उठा

: उफ्फ जीजी सीईईई ओह कितनी रसीली जीभ है आपकी उम्ममम ऐसे ही चूसो ओह्ह्ह्ह सीईईई ओह्ह्ह जीजी आपके रसीले होठ कितने मुलायम है ओह्ह्ह और चूसो उम्ममम अह्ह्ह्ह

रंगी की बाते सुनता हुआ बनवारी हौले हौले झटके दे रहा था






: उम्मम बाउजी कैसा महसूस हो रहा है आपको जीजी के बुर में बोलिए न ( रंगी सिसक कर बोला )

: उफ्फ जमाई बाबू क्या बताऊं, रज्जो की बुर में मेरा लंड एकदम मक्खन जैसे सरक रहा हो उम्मम बहुत मजा आ रहा है जमाई बाबू कितनी रसभरी चूत है मेरी लाडो के ओह्ह्ह्ह बेटी

: उम्मम बाउजी तो कस कस के पेलो न आपकी लाडो की बुर में सीईईई ओह्ह्ह उम्ममम चोदो मुझे

: हा बेटी ले और कस कस के चोदूंगा तुझे उम्मम बड़ी मुलायम चूत है तेरी ओह्ह्ह

: उम्मम जमाई बाबू समझाइए न बाउजी को

: अब क्या हुआ बेटी ( बनवारी फिकर में बोला )

: बाउजी थोड़ा गंदा गंदा बोलिए न गाली देकर ( रंगी थोड़ा हिचक कर बोला )

: क्या ? गाली ? बेटी मै तुझे कैसे दे सकता हूं गाली

: उम्मम बाउजी आपकी बेटी आपके सामने नंगी अपनी चूत में अपने बाप का लंड ले कर सोई है और आपके सामने अपने बहनोई का लंड चूस रही है , आपको कुछ फील नहीं हो रहा है क्या ?

: उफ्फ बेटी ... मै बोलना चाहता हूं लेकिन हिम्मत नहीं हो रही है .... तू कितनी ,,कितनी ...

: क्या बाउजी कहिए न उम्ममम

: तू कितनी चुदक्कड है मेरी बेटी ओह्ह्ह्ह सीईईई

: हा बाउजी सच कहा जीजी बहुत चुदक्कड लग रही है ओह्ह्ह जीजी और चूसो मेरी चुदक्कड जीजी उम्मम सीई ओह्ह्ह्ह

: हा जमाई बाबू बहुत अच्छा लग रहा है रज्जो की बुर में पेलने में ,

: बाउजी देखिए न जीजी कैसे रंडियों के जैसे दो दो लंड से खेल रही है

इतना सुनते ही बनवारी का लंड और फूलने लगा

: उफ्फ जमाई बाबू सच कहा आपने सीईईई ओह्ह्ह मेरी सेक्सी रंडी बेटी ओह्ह्ह्ह सीईईई उम्मम

: हा बाउजी ऐसे ही और तेज पेलो अपनी रंडी बेटी को , फाड़ दो मेरी बुर को उम्मम रुकना मत , मुझे ऐसे ही चुदना पसंद है बाउजी ओह्ह्ह्ह और कस के पेलो

: हा मेरी चुदक्कड रंडी ले आज तो फाड़ दूंगा तेरी चूत ओह्ह्ह्ह कितनी चुदासी है मेरी रंडी बेटी ओह्ह्ह्ह ले और ले हा ऐसे ही कस के अंदर ओहम बहनचोद अह्ह्ह्ह ले बेटी ओह्ह्ह

: उम्ममम सीईईई ओह्ह्ह बाउजी ऐसे ही रुकना मत पेलो मुझे , चोदो अपनी रंडी बेटी को बहुत मजा आ रहा है आयेगा मेरा ओह्ह्ह बाउजी आ रहा है मेरा रुकना मत ओह्ह्ह

रज्जो ने बनवारी का लंड कस लिया और बनवारी भी अपने चरम पर था और उसका भी फब्बारा छूट गया

: ओह्ह्ह बेटी मै भी आ रहा हूं ओह्ह्ह सीईईई अंदर ही छूट रहा है

: भर दो बाउजी ओह्ह्ह्ह आपका वीर्य बहुत गर्म है ओह्ह्ह्ह बाउजी उम्ममम ओह्ह्ह्ह सीईईई ओह्ह्ह उम्ममम

दोनों बाप बेटी हांफते हुए झड़ने लगे और रंगी एक बार फिर अपना लंड सहला कर रह गया ।

जारी रहेगी

( उम्मीद करता हूं अपडेट पसंद आयेगा ... अगला अपडेट भी रेडी है जल्दी जल्दी लाइक कमेंट करो और अगला अपडेट जल्द मिलेगा )
 
अपडेट 044

ममता अमन और मुरारी स्पेशल





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💥 अध्याय 02 💥

अपडेट 44

मेगा


अमन का पूरा परिवार कॉम्प्लेक्स से निकल कर बाहर आ रहा होता है कि बगल में एक अच्छी सी रेस्तरां पर ममता की नजर पड़ती है

: सुनिए जी , अमन के पापा ( ममता ने मुरारी को आवाज दी )

: हा कहो भाग्यवान ( मुरारी ने भी मस्ती में सबके सामने चहक कर बोला)

: धत्त आप भी न , वो मै कह रही थी कि बच्चे बहु आए है तो कुछ खा कर चलते है न यही से

: अरे इसमें पूछने जैसा क्या है , चलिए बैठिए सब लोग

मुरारी ने पूरी दिलदारी से कहा और फिर सब लोग रेस्तरां में एक साथ बैठ गए

सबने मेन्यू सेट कर कुछ न कुछ अपने हिसाब से ऑर्डर किया । चूंकि रेस्तरां की व्यवस्था टोकन वाली थी तो मुरारी के कहने पर मदन उठ कर काउंटर से सबकी रसीद कटाने चला गया और थोड़ी देर में ही फटाफट से ऑर्डर भी आने लगे ।

इधर सबका खाना शुरू हुआ था कि मंजू ममता के कान में कुछ बोली

: ठीक है चल देखती हूं ( ममता और मंजू उठ कर जाने लगी )

: अरे क्या हुआ अमन की मां कहा जा रही हो

: वो मंजू को थोड़ा वाशरूम जाना है , खोजना पड़ेगा ( ममता थोड़ी असहज होकर बोली )

: कोई बात नहीं मदन को पता है , वो अक्सर आता है यहां। मदन !!

: जी भइया

: भाई जरा मंजू को

: ठीक है भईया,, आओ ( मदन ने मुस्कुरा कर मंजू को चलने का इशारा किया )

मदन के मुस्कुराहट पर ममता थोड़ी चिढी और घूरने लगी

: देवर जी ध्यान रहे ( ममता तपाक से बोली वो भी सबके सामने )

इसपर सब हस पड़े ,क्योंकि घर में सबको भनक थी कि ममता जानबूझ कर मदन और मंजू को शादी होने तक करीब नहीं होने दे रही है ।

: क्या अमन की मां , पब्लिक प्लेस है कुछ तो लिहाज करो

अमन और सोनल बस आपस में एक दूसरे को देखकर मुस्कुराते रहे

ममता थोड़ी शांत होकर बैठी तो बगल में बैठी सोनल हल्के से उससे बोली

: मम्मी जी एक बात पूछू

: हा बहु बोल न ( ममता सोनल की मिठास भरी बातों से मुस्कुरा उठी )

: आप उन्हें रोक क्यों रही थी हीही

: धत्त बदमाश, बस छेड़ने में मजा है देवर जी को और भाभी हूं तो हक बनता है हीही

: हीही काश मेरा भी कोई देवर होता ( सोनल ने मुस्कुरा कर कहा )

: चुप कर , तू भी बड़ी शैतान है

इधर सब लोग नाश्ता करने लगे और वही दूसरी ओर मदन मंजू को लेकर बाथरूम खोजता हुआ आगे बढ़ गया , रेस्तरां वाले बाथरुम की जगह वो मंजू को लेकर लिफ्ट से नीचे पार्किंग एरिया में लेकर चला गया

: इधर कहा है बाथरूम जी ( मंजू फिकर में बोली )

: बस आगे है आओ ( मदन ने उसकी कलाई पकड़ ली)

: धत्त क्या आप भी , हाथ छोड़िए न ( मंजू शर्माई )

: यहां कौन देख रहा है हमें , तुम भी न ज्यादा ही शर्माती हो , देखो वो रहा बाथरूम चलो चलते है

: क्या आप ही जायेंगे क्या ? ( मंजू ने आंखे उठा कर मदन को देख मुस्कुराई )

: वहा लेडीज जेंस दोनों है आओ चलो अब

मदन तेजी से मंजू की कलाई पकड़ कर बाथरूम में खींच ले गया और बाथरूम के बाहर खड़ा होकर उसकी राह देखने लगा

पार्किंग के सन्नाटे में मदन के जज्बातों को हवा दे दी , उसका लंड पैंट में फूलने लगा

अंदर बाथरूम में फ़ल्श चलने की आवाज आई और उसकी जुबान चटकारे खाने लगी , वो पल याद करके जब वो आखिरी मंजू के कमरे में उसके नंगे गुदाज चर्बीदार चूतड़ों को हाथों में भर भर मसल रहा था ।

मदन का लंड उन कामुक पलों को सोच कर एकदम फड़फड़ाने लगा और जैसे ही मंजू ने दरवाजा खोला , मदन वापस उसको बाथरूम में धकेलते हुए घुस गया

: अरे क्या कर रहे है , जेंस लोगो का तो उधर है न

: उफ्फ मेरी जान बस तुझपर प्यार बहुत आ रहा है उम्मम आजा

मदन जबरन मंजू को अपनी बाहों में भरने लगा

: धत्त पागल हो गए है क्या सीई ओह्ह्ह छोड़िए मुझे कोई आ जाएगा तो दिक्कत हो जाएगी , प्लीज घर पर कर लेना आप , प्लीज न मेरी जान

: बस कुछ नहीं थोड़ा सा चूस दे न मेरा मंजू सीईईई बहुत टाइट हो गया है

: क्या आप भी नहीं कर सकती मै , समझो न

: क्यों क्या हुआ ?

: यार लिपस्टिक बिगड़ जाएगी और मै अपना पर्स भाभी के पास छोड़ कर आई हूं

: मेरी जान तेरे इन मुलायम चूतड़ों को छूने के बाद अब रहा नहीं जा रहा है सीईईई ओह्ह्ह ( मदन साड़ी के ऊपर से मंजू की गाड़ को सहला रहा था ) अच्छा थोड़ा सा तेरी बुर को चूमने दे न

मदन के हाथों के स्पर्श से मंजू भी मचल उठी लेकिन जैसे ही मदन ने बुर चूमने की बात की वो थोड़ी सतर्क हो गई

: नहीं नहीं मेरी जान , मै नीचे अच्छे से साफ नहीं कर पाई हूं ।

: अच्छा ठीक है तो थोड़ा सा अपने इन मुलायम चूतड़ों पर चुम्मी दे दे न अह्ह्ह्ह्ह सीईईई कितनी रबर जैसी गाड़ है तेरी मंजू

मंजू समझ गई कि अब अगर वो टालेगी तो मदन जरूर नाराज हो जाएगा

: ठीक है लेकिन बस चुम्मी लेना

इतना बोलकर मंजू घूम गई बाथरूम की दिवाल की कर मुंह करके और मदन मुस्करा कर अपना मूसल मसल कर नीचे हो गया और मंजू ने अपनी साड़ी ऊपर कर ली पेटीकोट समेत

मदन की आंखे चमक उठी जब उसकी नजर पैंटी में फूली हुई मंजू की गुलगुली गाड़ को देखा

मदन ने अपने दोनों पंजों को आगे बढ़ा कर उसके पैंटी के ऊपर से उसके चूतड़ों को छूने लगा और मंजू के पैर थरथराने लगे और उसकी सांसे चढ़ने लगी






: उफ्फ मंजू तेरे चूतड़ उम्ममम अह्ह्ह्ह ( मदन ने अपने नथुनों में सांस भर कर उसके गुदाज चर्बीदार चूतड़ों की गंध ली ) कितने मुलायम है उम्ममम

: उम्मम जल्दी करो न जान सीईईई ओह्ह्ह्ह काटो मत उम्मम ओह्ह्ह्ह सीईईई कितना गिला गिला सा लग रहा है उम्ममम

मदन मंजू की पेंटी खींचने लगा

: उफ्फफ साइड से कर लो न जान

: बस हो गया मेरी जान उफ्फफ उम्ममम तेरे चूतड़ बड़े लचीले है उम्मम जैसे रबर उम्मम ( मदन उसके चूतड़ों की दरारों को पंजों से फाड़ते हुए बोला और मुंह की लार जीभ पर बटोर कर जीभ को बढ़ा कर सीधा मंजू की गाड़ की सुराख पर ले गया )

: अह्ह्ह्ह सीई नहीं उम्ममम अह्ह्ह्ह क्या कर रहे हो पागल उम्मम

मंजू अपने गाड़ की भूरी सुराख पर मदन की गीली गिजगिजी जीभ का स्पर्श पाकर गिनगिना गई और अपने चूतड़ों को टाइट करने लगे , मदन और ताकत से उन्हें फैलाते हुए जीभ से तेजी से उसकी गाड़ की छेद चाटने लगा ,






जिसका सीधा असर मंजू की चूत पर होने लगा , उसकी बुर कुलबुलाने लगी

: उम्ममम बस करो न मेरी जान ओह्ह्ह सीई ओह्ह्ह्ह गॉड ( मंजू एड़ियों के बल उठने लगी और अपनी गाड़ को मदन की ओर धकेलने लगी )

इससे मदन को और जगह मिली और अपने होठों का भी इस्तेमाल करने लगा मंजू की गाड़ की मुलायम चर्बीभरी दरारों को चुभलाने में

मंजू की हालत खराब हो रही थी कि बाहर कुछ हलचल हुई और मंजू झट से सतर्क होकर सीधी हो गई

मदन भी सतर्क हो गया और मंजू जल्दी जल्दी अपनी पैंटी पहन कर साड़ी सही करने लगी

मदन ने उसका हाथ पकड़ कर वापस अपने लंड पर पैंट के ऊपर से रखा लेकिन मंजू ने घर का वादा कर निकल गई बाथरूम से

थोड़ी देर में दोनों रेस्तरां पहुंचे और उन्हें देख कर सोनल मुस्कुराने लगी

: क्या हुआ बहु ? ( ममता धीरे से बोली )

: कुछ नहीं , इनके चेहरे देखो कुछ तो हुआ है हीही ( सोनल ने मस्ती ने कहा )

: धत्त बदमाश तू भी न , यहां थोड़ी कुछ करेंगे ( ममता हस कर बोली )

: आप घर पर हीही कुछ करने नहीं दोगे तो ( सोनल मुस्करा कर निवाला मुंह में डाल कर चुप हो गई और ममता बस मुस्कुरा कर उसे देखती रही )

थोड़ी देर बाद सारे लोग खा पी कर घर आ गए

सोनल फ्रेश होने का बोलकर अपने कमरे में चली गई , मंजू भी कपड़े बदलने के लिए उसके साथ निकल गई ।


चुकी बहु साथ थी तो ममता ने बहुत ध्यान नहीं दिया और अपने कमरे में चली गई

: अरे मदन

: जी भइया

: भाई जरा आज कार्ड काम करा लो , कल बांटना भी है

: जी भइया, बस थोड़ा फ्रेश हो लूं फिर निकलता हूं

: और सुनो ( मुरारी मदन के करीब जाकर धीरे से कुछ बोला और मदन मुस्कुरा कर अपने भाई को देखकर हा में सर हिलाया )

इसके बाद मदन अपने कमरे की ओर चला गया

हाल में बस मुरारी और अमन रह गए

: पापा मम्मी के पास चले ?

: अरे वो कपड़े बदल रही होगी न ( मुरारी ने कैजुअली कहा )

इस पर बस अमन ने मुस्कुरा कर उसे देखा और मुरारी को समझ आया कि असल में अमन तो यही चाहता है।

: ठीक है चल

: लेकिन ऐसे नहीं ( अमन ने उसे रोका )

: देखो सारे लोग फ्रेश होने में बिजी है तो क्यों न आप पहले जाओ और मम्मी के साथ थोड़ा रोमांस शुरू करो , फिर मै किसी बहाने से अंदर आ जाऊंगा बिना दरवाजा खटखटाए

: मुझे समझ नहीं आ रहा है कि तेरे दिमाग में क्या चल रहा है लेकिन जो भी होगा रोमांचक होगा हाहाहा.. ठीक है मै जाता है

: ओके आल द बेस्ट पापा ( अमन ने मुस्कुरा कर कहा और अपना लंड पैंट के ऊपर से मसल दिया ।

मुरारी तेजी से अपने कमरे ने चला गया और अमन भी दबे पाव उसी ओर बढ़ गया ।

कमरे के दरवाजे पर पहुंचते ही उसे अपनी मां की आवाज आई

: उम्मम छोड़िए न अमन के पापा , मुझे चेंज करना है

: मै भी तेरी हेल्प कर रहा हूं जानेमन , कपड़े निकालने में

: हा सब जानती हूं कितनी और कैसी मदद होगी मेरी अह्ह्ह्ह छोड़िए न अमन के पापा , नहीं होगा आपसे

: ऐसे कैसे नहीं होगा भला आज तो इसे खोल कर रहूंगा

: अच्छा ठीक है देखती हूं फिर

अमन को समझ नहीं आया आखिर अंदर क्या खोला जा रहा है ,यार पापा को भेजा था मम्मी के साथ रोमांस करने के लिए, ये किस काम में लग गए

: मम्मीइई मम्मीइई

अपनी मम्मी को आवाज देता हुआ अमन अपनी जिज्ञासा शांत करने के लिए कमरे में दाखिल हो गया

सामने देखा तो उसकी मां ममता सिर्फ एक नायलॉन शेपवियर वाली पेटीकोट और ब्लाउज में खड़ी थी कमर पर हाथ रखे हुए और सामने उसका बाप मुरारी ममता के ब्लाउज के हुक खोलने का प्रयास कर रहा था






: ओह्ह्ह सॉरी मै बाद में आता हूं

: अरे क्या हुआ अमन रुक न ( ममता ने उसे रोका और अमन का दिल गदगद हो गया )

: नहीं वो मै ... ( अमन कभी मुरारी कभी ममता को नजरे चुरा कर देख रहा था )

: अरे हा बेटा बोल न , वो तेरी मां के ब्लाउज का हुक फंस गया है वही हेल्प कर रहा था

ममता ने मुस्कुरा कर मुरारी को अपनी बात से पलटते देखा

अमन को मौका मिल गया इसमें शामिल होने का

: क्यों क्या हुआ मम्मी , नहीं खुल रहा है क्या

ममता बस चुप रही और मुस्कुराती रही

: नहीं बेटा , तू एक बार ट्राई करेगा

: मै ? ( अमन ने अपनी मां को देखा और वो बस मुस्कुरा रही थी ) पक्का मै ट्राई करूं मम्मी ?

: हा तू भी करके देख ले ( ममता ने इत्मीनान से खड़ी होकर बोली , जैसे वो समझना चाहती हो कि आखिर ये बाप बेटे क्या खेल करना चाहते है

मुरारी ने अमन को अपनी जगह दी और अमन ने एक बार अपनी मां की आंखों में चोर नजरो से देखा और फिर वो ममता ने ब्लाउज के हुक खोलने की कोशिश करने लगा

दो तीन प्रयास हुआ लेकिन फायदा नहीं हुआ

: पापा ये तो टाइट है बहुत देखो हम लॉक को कितना टाइट फैलाया हुआ है , मेरे ख्याल से ये ब्लाउज छोटा है मम्मी के लिए

: क्या सच में अमन की मां , ये ब्लाउज छोटा है ?

: हा वो थोड़ा तंग है

: बेटा एक काम करता हूं मै तेरी मां के दूध को पीछे से दोनो तरफ से उठा रहा हूं फिर तू खोल देख काम बनता है क्या ?

मुरारी के इतना कहने पर ममता की आंखे बड़ी हो गई और वो अमन को देखी , अमन बस मुस्कुरा कर ममता के सामने ऐसे जाहिर किया कि वो क्या ही जवाब दे अपने पापा की बात का

वही मुरारी फौरन ममता के पीछे से उसकी बाजुओं के नीचे से हाथ डाल कर ब्लाउज के ऊपर से उसके दोनों रसीले बड़े बड़े मम्में को हाथों में भर कर ऊपर किया






: हा बेटा अब देख खुल रहा है क्या ?

अमन के मुंह में पानी आने जैसे ही मुरारी ने उसकी मां की पपीते जैसे चूचे को दोनो तरफ से दबाया और ममता के छातियों की लकीर बड़ी हो गई और अमन ने प्रयास किया और एक हुक खुल गया

: अरे वाह पापा ये तो खुल गया

: क्या सच में ? ( मुरारी आगे आके देखा ) मै वापस उठाता हूं तू जल्दी जल्दी खोल दे

इतना बोलकर मुरारी वापस पीछे गया और ममता के चूचों को पकड़ कर उठा दिया , वही पीछे उसका लंड पहले से ही तना हुआ था और पजामे के नीचे से ममता की गाड़ पर चुभो रहा था , ममता भी उसके लंड की कसावट महसूस कर रही थी लेकिन शांत थी

इधर अमन ने एक एक करके सारे हुक खोल दिए : हो गया पापा छोड़ दो

अमन के इतना कहते ही मुरारी ने ममता के चूचे छोड़ दिए ब्लाउज समेत और उसके बड़े बड़े रसीले पपीते जैसे चूचे खुले ब्लाउज में हवा में झूल गए , उसके निप्पल कड़क होकर मुनक्के जैसे हो गए थे ।

अमन की आंखे बड़ी ही गई अपनी मां की चुचियों को देख कर

: मम्मी ये क्या ? ( अमन ने ममता ने दाहिने निप्पल के पास लाल धब्बे देख कर अपनी उंगली से दिखाया )

: कहा ? क्या ? ( ममता ने झुक कर देखा )

: क्या हुआ बेटा ? ( मुरारी भी आगे आ गया ममता के )

: पापा देखो , मम्मी के दूध पर ये लाल लाल रैशेज पड़ गए है

: अरे हा ( मुरारी ने करीब जाकर देखा )

: वो कुछ नहीं है जी ये ब्लाऊज़ टाइट है न तो निशान पड़ है , अह्ह्ह्ह अब तो खुजली भी होने लगी ( ममता बड़ी बेरहमी से अपने नाखूनों से अपने दाहिने चूचे को निप्पल के पास खुजाने लगी )

: अरे अरे मम्मी मत करो कट जायेगा ( अमन फिकर में बोला )

: हा अमन की मां , रुको मै दवा लाता हूं

: नहीं पापा , वहा पर हार्ड दवा नहीं लगा सकते है , बहुत सेंसेटिव जगह है । रुको मै गूगल करके बताता हूं क्या लगाना सही होगा ।

इतना बोलकर अमन जल्दी जल्दी अपने मोबाइल में इस बारे में सर्च करने लगा और इधर ममता को खुजली हो रही थी लगातार और थोड़ी देर में ही अमन चहक कर बोला

: मिल गया पापा !!

: क्या बता रहा है तेरा मोबाइल बेटा ?

: थोड़ा सा स्लाइवा लगा दो और खुला रहने दो अच्छा हो जाएगा ( अमन ने सलाह दी )

: ठीक है अमन की मां थोड़ी सी थूक लगा दे उसपर

: नहीं जी , अभी अभी तो मैने हाजमोला खाया है । गैस हो रही थी तो ( ममता ने मुंह बनाया )

: और मैने पान खा रहा था थोड़ी देर पहले

इसपर अमन शांत था

: अरे अमन है न ( मुरारी बोल पड़ा )

: क्या मै ? ( अमन चौक कर बोला )

: हा , क्या हुआ लगा दे थोड़ी सी थूक , क्या हुआ तेरी मां है कोई गैर थोड़ी ( मुरारी ने दिलदारी में कहा )

ममता कुछ नहीं बोली बस चुप रही

अमन ने अपनी मां देखा और फिर मुंह में लार घुमाने लगा और फिर उंगलियों पर थोड़ी सी लार लेकर अपनी मां के निप्पल के पास लाल धब्बे पर लीपने लगा

अपने पति के सामने अपने बेटे की ठंडी थूक अपने नंगी चूचियों पर लीपता महसूस कर ममता सिहर उठी

और आंखे बंद कर एक लंबी गहरी सास लेने लगी

: हा बेटा अच्छे से निप्पल के चारों तरफ लगा

मुरारी अमन को समझाने लगा

: पापा ऐसे तो थूक मेरे उंगलियों में ही फैल जा रहा है

: तो जीभ से चाट कर गिला कर दे न , क्यों अमन की मां

मुरारी ने ममता को भी शामिल करना चाहा और वो सफल रहा

: अह्ह्ह हा बेटा कर दे

ममता ने इजाजत दी तो अमन आगे झुक कर अपनी जीभ की टिप को उसके मुनक्के जैसे निप्पल पर फिराने लगा है ममता पूरी कांप सी गई

अमन ढेर सारी लार बटोर कर जीभ से अच्छे से उसके निप्पल के चारों तरफ लगाने लगा और

: हा बेटा अब इस वाले पर भी

मुरारी ने अमन को एक और मौका दिया






इस बार अमन ने ममता की बाई चूची पकड़ कर ऊपर उठाई और ममता के पूरे बदन में कंपकंपी होने लगी , उसके भीतर की बौखलाहट उसके चेहरे पर साफ दिख रही थी

: क्या हुआ बेटा ? ( मुरारी ने अमन को रुका हुआ देख कर बोला )

: थूक बना रहा हूं पापा

अमन ने ढेर सारी लार बटोर कर इस बार जीभ से नहीं बल्कि सीधा होठों से बजबजा कर सीधा ममता ने बाई निप्पल पर उगल दिया

गाढ़ी बजबजाई ठंडी लार अमन के होठों से डायरेक्ट ममता के निप्पल के टिप पर टपक गई और ममता पूरी हिल गई

ये देख कर मुरारी की आंखे बड़ी हो गई और उसका गला लगा






लार गिराने के बाद अमन ने अच्छे से अपनी की निप्पल पर जीभ फिराई

इस बार ममता खुद को रोक नहीं सकी और सिसक पड़ी

: अह्ह्ह्ह बेटा

: क्या हुआ अमन की मां ( मुरारी फिकर में बोला )

: कुछ नहीं उम्मम अब ठीक लग रहा है

: बस मम्मी थोड़ी देर ऐसे खुला रहने दो अभी सही हो जाएगा ( अमन बोला )

: हा ये वाला काफी रिलेक्स लग रहा है ( ममता ने दाई छाती को पकड़ कर बोली )

: ओके आप आराम करो मै बाद में आता हूं ( इतना बोल कर अमन जाने को हुआ कि ममता ने ही उसे रोक लिया)

: नहीं रुक अभी

: क्या हुआ ( अमन बोला और मुरारी भी ममता की ओर सवालिया नजरों से देखा )

: वो अमन के पापा मेरे पीछे थोड़ी दिक्कत लग रही है , शादी का घर है उठने बैठने में दिक्कत होगी । आप एक बार चेक कर लेते तो अमन अपने मोबाइल में पूछ लेता ( ममता थोड़ी हिचक कर बोली )

अमन को समझ नहीं आ रहा था कि आखिर उसकी मां क्या करने वाली है

: अह्ह्ह्ह्ह अमन बेटा जरा वो दरवाज़ा बंद करके आ तू

: जी पापा

फिर अमन भाग कर गया दरवाजे के पास और दरवाजा लगा कर वापस आने लगा कि ममता ने उसे रोका

: इधर नहीं देखना बेटा अभी

अपनी मां की आवाज पर अमन रुक गया


फिर पलट कर घूम गया और राह देखने लगा कि कब उसको उसकी मां या बाप में से कोई आवाज दे

: उफ्फ अमन की मां ये तो रगड़ जैसे है , कैसे हुआ ये है ?

: पसीने से , ये पेटीकोट नायलॉन का है और इसमें बहुत गर्मी हो रही थी । माल में चलने फिरने से हुआ होगा

: तुम कहो तो दुकान से दवा मंगा दु , जल्दी आराम हो जायेगा

: धत्त क्या आप , क्या बोलेंगे डॉक्टर को ... हा नहीं तो अमन से कहिए वो मोबाइल में देख कर कुछ घरेलू इलाज निकाल देगा

: हा ये भी सही है ( मुरारी बोला और फिर अमन को आवाज दिया ) अमन बेटा जरा इधर आना

इतना सुनते ही अमन की आंखे चमक उठी , लंड झटके देने लगा और वो पलट कर जैसे घुमा तो देखा कि उसकी माँ बेड के सहारे हाथ टिका कर झुकी हुई है और उसकी पेटीकोट ऊपर कमर तक चढ़ी है , जिसमें से उसका बड़े बड़े रसीले चर्बीदार चूतड़ नंगे दिख रहे है और उनकी सकरी लंबी गहरी दरार को उसके पापा बड़े गौर से और करीब से देख रहे है

: ओह्ह्ह सॉरी मुझे लगा ( अमन एकदम से सभ्यता दिखाने लगा )

: कोई बात नहीं बेटा , ये घर की बात है , जरा देख न ये तेरी मां के चूतड़ों पर ये क्या हुआ है ?

: हा बेटा देख न थोड़ा दर्द भी हो रहा है जलन जैसे ( ममता बोली)

अमन अपनी आंखे बड़ी कर और हलक से थूक गटक कर अपनी मां के भड़कीले चूतड़ों के करीब गया और उन गुलाबी चूतड़ों की दरारों के किनारे किनारे दोनों तरफ रैशेज पड़ गए थे ,

: मम्मी आपने पैंटी नहीं पहनी थी ?

: नहीं बेटा क्यों ?

: मम्मी ये नायलॉन शेपवियर वाले कपड़े के नीचे कुछ पहन लेना चाहिए नहीं तो ऐसे ही निशान पड़ जाते है ( अमन फिकर में बोला )

: अब क्या करूं वो बता , ठीक कैसे होगा , बैठना दूभर हो गया है मेरा क्या कहूं अब ( ममता तकलीफ में झुकी हुई बोली )

: एक मिनट बताता हूं

इतना बोलकर अमन ने जल्दी जल्दी नेट कर इस बारे सर्च किया

: क्या हुआ बेटा मिला कुछ ( मुरारी बोला )

: हा पापा मिल गया इसमें बोल रहा है कि किसी माइल्ड या बेबी सॉप से उस एरिया को हल्के हाथ साफ करके ठंडे पानी से धोना है और फिर बिना रगड़े तौलिए से टैप टैप करके पोछना है , फिर मम्मी को खुली हवा में बिना कपड़े के सोना होगा उल्टा , फिर नारियल तेल से हल्की मालिश करेंगे तो 2 3 घंटे ने आराम मिल जाएगा । अगर इससे आराम नहीं होता है तो दूसरा ऑप्शन भी है ।

: वो क्या है ? ( मुरारी तपाक से बोला )

: उसको बाद में देखेंगे पापा पहला वाला ट्राय करते है , पहले मम्मी को वाश कराओ ( अमन बोला )

: ठीक है बेटा , एक काम कर तू किचन से नारियल तेल लेकर आ तक मै तेरी मां को बाथरूम में धुला कर आता हूं और सुन किचन में नहीं होगा तो तेरे चाचा के पास जरूर मिल जाएगा । वो नहा कर रोज इस्तेमाल करता है ।

: ओके पापा

इतना बोलकर अमन बाहर निकल गया और किचन में आकर नारियल तेल की शीशी खोजने लगा , लेकिन उसे अपनी मां को देखने की इतनी जल्दी थी कि किचन में खोजने के बजाय वो अपने चाचा के पास जाना जरूरी समझा

: चाचू दरवाजा खोलो न

2 3 आवाज में मदन ने दरवाजा खोला

: हा अमन क्या हुआ ?

: वो आपके पास नारियल तेल है क्या ?

: हा क्या हुआ ?

: वो मम्मी पापा के सर में मालिश करेंगी , बस उसी लिए चाहिए

एकदम से मदन की आंखे चमक उठी

: भइया भाभी कहा है ?

: अपने कमरे में , जल्दी दो न चाचू ( अमन बोला )

मदन ने झट से अपने रूम के टेबल से तेल की शीशी दी

: और तेरी चाची ?

: पता नहीं ,शायद ऊपर गई है अपने कमरे में

इतना सुनना था कि मदन गदगद हो गया

: अच्छा भइया को ज्यादा दिक्कत तो नहीं , दवा है देदूं ?

: नहीं नहीं , हो जाएगा

इतना बोलकर अमन निकल गया तेजी से अपने मा के कमरे की ओर और मदन भी मुस्कुरा कर अपने कमरे का दरवाजा बंद कर मौके का फायदा लेने के लिए ऊपर मंजू के पास चला गया ।

इधर बाथरूम में पानी गिरने की आवाज आ रही थी और अमन कमर में आकर दरवाजा बंद कर दिया

थोड़ी देर बाद ममता और मुरारी एक साथ बाहर निकले

ममता ने अपने सारे कपड़े निकाल कर एक तौलिए को अपनी कमर पर लपेट रखा था , क्योंकि छातियों को खुला रखना था

: ले आया बेटा ?

: जी पापा

: आओ अमन की मां लेट जाओ आराम से

: हे भगवान, मेरी वजह से आप दोनों परेशान हो रहे है कितना अह्ह्ह्ह ( ममता बोली)

: क्या मम्मी आप भी , जैसे मुझे या पापा को कोई दिक्कत होती तो आप हेल्प नहीं करती

: हा और क्या ? भला परिवार में लोग होते किस लिए है , आराम से लेट जाओ उलटी होकर और ये तौलिया खोल दो हा ऐसे

एक बार फिर ममता के गुलाबी भड़कीले चूतड़ नंगे हो गए , बिस्तर पर पहाड़ जैसे उठे हुए

जिन्हें देख कर दोनों बाप बेटे की सांसे तेज होने लगी थी

फिर मुरारी ने तौलिए से ममता की गाड़ पोछने लगा

: उम्हू पापा रगड़ कर नहीं हल्का हल्का हल्का टैप करके

: कैसे ! ले तू ही कर भई फिर

: एक मिनट रुको बताता हूं

इतना बोलकर अमन अपनी मां के दूसरी ओर घुटने के बल होकर खड़ा हो गया और थोड़ा झुक कर अपने सामने ममता के चूतड़ों के दूसरी तरफ बैठे मुरारी के हाथों से तौलिया लेकर हल्का हल्का दबा दबा कर अपनी मां के नंगे गिले चूतड़ों से पानी सोखने लगा






: बेटा अंदर भी होगा पानी , खुजली करेगा नहीं तो ( ममता लेटी हुई बोली )

: अंदर मतलब ? ( अमन बोला )

: अमन के पापा , बताईये न इसको ( ममता वापस बोली )

: हा कह रहा हूं ... वो बेटा अंदर मतलब यहां देख

इतना बोलकर मुरारी ने ममता के चर्बीदार भड़कीले चूतड़ों के चिपकी हुई गुदाज दरारों को दोनो तरफ से पकड़ कर फैला दिया और एक लंबी गहरी खाई जैसी जगह अमन के आगे खुल गई और बीच में दिखी उसे अपनी मां की गुलाबी सुराख जिसे देखते ही अमन की आंखे बड़ी हो और चमकीली ही गई

उसके चेहरे पर एक मुस्कुराहट थी जो मुरारी से मेल खा रही थी

दोनों ने मन ही मन इस जीत के लिए एक दूसरे को बधाई दी

: हा बेटा उंगली से अंदर वाला हिस्सा पोंछ दे , जैसे तू कर रहा था ( मुरारी ने अमन को मुस्कुरा कर कहा )

अमन का लंड अब बगावत पर उतारू था

उसने तौलिए को खोलकर अपनी उंगली में लगा कर अपनी मां की गाड़ की दरारों के रख कर दबा दबा कर छुना शुरू किया

इधर ममता की सांसे चढ़ने लगी थी कि वो अपने पति के सामने अपने बेटे से पानी गाड़ साफ करवा रही है

अमन ने अच्छे से अपनी मां की चमकीली गाड़ को साफ करके सूखा कर दिया

: अब क्या करना था बेटा इसके बाद ( मुरारी ने पूछा )

: वो तेल से हल्की मालिश करनी है , सॉफ्ट हाथों से ( अमन बोला )

: फिर तो तू ही मालिश कर बेटा

: क्या मै ? ( अमन चौका)

: हा बेटा, मेरे हाथ थोड़े खुरदुरे है कही .... दिक्कत बढ़ न जाए

: मम्मी ??? ( अमन ने एक अंतिम राय अपनी मां से लेनी चाही )

: कर दे बेटा जैसे तेरे पापा कहते है

: ओके

इतना बोलकर अमन ने अपने पास रखी नारियल के तेल की शीशी उठाई और टिप टिप टिप करके ममता के चिपकी हुई दरारों के पास जहां निशान बने हुए थे गिराने लगा

ममता मचल उठी थी अमन की इस हरकत से

धीरे धीरे तेल उसकी गाड़ की चिपकी दरारों में जाने लगा और ममता अपने चूतड़ों को टाइट कर उन्हें रोकने लगी

: बस बेटा कितना तेल गिराएगा ( ममता ने उसे रोका और अमन रुक गया )

फिर उसने अपने उंगलियों से उन तेल की बूंदों को मिलाने लगा अपनी मां की चर्बीदार चूतड़ों के ऊपर अच्छे से अमन दोनों हाथों से अपनी के गाड़ की दरार के ऊपर मालिश करने लगा






: कुछ आराम है अमन की मां ( मुरारी बोला )

: उम्मम बहुत अच्छा लग रहा है अब अह्ह्ह्ह

फिर अमन ने वापस थोड़ा तेल टिपकाया लेकिन इस बार सीधा अपनी मां की गाड़ की दरारों में , जो सीधा रिसता हुआ ममता के गाड़ के छेद के पास जाने लगा और हल्की खुजलाहट उसे महसूस हुई

ममता मचल उठी

: अह्ह्ह्ह्ह बेटा क्या कर रहा है , तेल अंदर जा रहा है

: कोई बात नहीं मम्मी , उससे कोई दिक्कत नहीं होगी रुकिए पोंछ दे रहा हूं , पापा जरा फैलाना फिर से तो

मुरारी अमन का इशारा समझ गया और उसने वापस से ममता के चूतड़ों को फैला कर उसके दरारों को खोल दिया

अमन ने देखा तो ढेर सारा जाकर ममता के गाड़ के सुराख के पास जमा होने लगी थी

: ओह्ह्ह्ह ये सच में ज्यादा गिर गया था ( अमन ने उंगलियों ने अपनी मां की गाड़ की छेद के पास तेल वाइप करता हुआ बोला )






वही ममता अपने छेद पर अपने बेटे की उंगली पाकर गिनगिना गई और मदन का लंड एकदम फड़फड़ाने लगा

अमन ने तीन से चार पार अपनी मां के गाड़ के छेद से तेल वाइप कर अच्छे से उसके गुलगुले चूतड़ों पर पोछने लगा

: देख ले बेटा नीचे तो नहीं गया

मुरारी इस मौके का पूरा फायदा लेना चाहता था

: नीचे मतलब ? ( अमन ने पूछा )

: नहीं बेटा नीचे नहीं गया है , हो गया मालिश या बाकी है

: नहीं मा हो गया , अब थोड़ी देर ऐसे रहो । फिर बताओ कैसा लग रहा है

: ठीक है , जा हाथ धूल ले

फिर अमन उठ कर बाथरूम में चला गया और हाथ धुलकर वापस आया

थोड़ा कमरे में टहला , उसके पैंट में अभी भी तंबू बना हुआ था ।

मुरारी अभी भी ममता के पास बैठा हुआ था उसके कान में कुछ फुसफुसा रहा था और ममता लजा रही थी ।


: धत्त क्या आप अभी हाथ हटाईये न , देखिए वो आ गया ( ममता थोड़ा शर्मा बोली )

: क्या हुआ पापा ? ( अमन तौलिए में हाथ सुखाता हुआ बोला )

: अरे कुछ नहीं तेरी मम्मी इतना कुछ हो गया और अब लजा रही है हाहाहाहा

: अच्छा ... वैसे मम्मी अब कुछ आराम है ?

: हा थोड़ा थोड़ा आराम लग रहा तो रहा है बेटा ,

: अच्छा ठीक है फिर मैं जाऊं ?

: नहीं तू भी यही रुक जा न, नहीं तो तेरे पापा ...( ममता बोलकर चुप हो गई )

: क्या हुआ ? कोई दिक्कत पापा ? (अमन बोला )

: नहीं बेटा कुछ नहीं वो बस ऐसे ही

: हम्ममम अब बोलो न क्या हुआ ( ममता ने मुस्कुरा कर कहा )

अमन चल कर उनके पास गया ।

: क्या हुआ पापा ?

: वो बेटा अब तेरी शादी हो गई है तो तू भी समझेगा ही कि बीवी ऐसे हालात में सामने लेटी हो तो अंदर से कैसा महसूस होता है

: धत्त बहुत गंदे हो आप , बेटा है वो आपका ( ममता थोड़ी शर्मा कर बोली )

अमन मुस्कुराने लगा

: सॉरी मै कुछ नहीं बोलूंगा इसपर हीही, आप दोनों समझो क्या करना है आपको

: क्यों तू रोक नहीं सकता तेरे पापा को ( ममता गर्दन फेर कर अमन को देख कर बोली )

: अब मै क्या बोलूं यार , आप लोगों की बात है आप समझो न मुझे क्यों ला रहे हो बीच में

: क्यों तुझे कोई दिक्कत नहीं हुई क्या मुझे ऐसे देख कर ( ममता ने सवाल से अमन की आंखे बड़ी हो गई और वो मुरारी को देखने लगा मानो पूछ रहा हो कि इसका क्या ही जवाब देगा )

: ये कैसा सवाल है मम्मी , आप भी न , छोड़ो मै जा रहा हूं ऊपर हीही आप लोग भी न

अमन मुस्कुरा कर बोला

: ऊपर मतलब बहु के पास ? ( ममता ने टोका उसे )

: अरे यार मम्मीइई हीही चाहते क्या हो आप ? पापा ?

: तू कही नहीं जाएगा , रात में भी बहु को तंग करता है और दिन में भी ... एकदम अपने पापा पर गया है । चल बैठ यही ( ममता ने डांट लगाई )

: आजा बेटा बैठ , लग रहा है आज हम दोनो को तड़पना है ( मुरारी बोला )

अमन वापस से बैठ गया ममता के एक तरफ और मुरारी उसके सामने दूसरी ओर बैठा था

दोनों एक दूसरे को देख कर चुप थे और मुस्कुरा रहे थे

: वैसे बेटा तेरी मां को ऐसे कब तक लेटे रहना होगा

: थोड़ा टाइम तो लगेगा पापा , रैशेज लंबे है और चलने फिरने पर रगड़ खाने से दिक्कत बढ़ जाएगी । इसीलिए आराम करना सही है ।

: लेकिन वो तूने अपनी मां के दूध पर थूक से गिला किया , कितना जल्दी आराम हो गया था

: हा पापा लेकिन वो छोटी जगह थी न तो हो गया ,यहां तो ढेर सारा स्लाइवा लगेगा हीही

: अच्छा वो तू बता रहा था कि एक और ऑप्शन है ? वो क्या था ?

ममता दोनो की बातें सुन रही थी

: छोड़ो न पापा ,ये वाला तरीका सही है और मम्मी को आराम भी है न ( अमन ने बात को टालने की कोशिश की )

: अरे बस जानकारी के लिए ही बता दे न बेटा , कभी काम आ जाए ।

: वो पापा कोई घरेलू उपाय नहीं था , वो इंटरनेट पर एक site है ... जिसपर लोग अपने पर्सनल एक्सपीरियंस शेयर करते है प्राइवेट पार्ट को लेकर।

: अच्छा क्या बताया था उसमें ( मुरारी जिज्ञासु होकर कहा )

: कुछ नहीं जाने दो न पापा

: अरे बता न बेटा , क्या पता तेरी मां को उससे जल्दी आराम हो जाए ।

: अह नहीं वैसे भी मम्मी को पसंद नहीं आयेगा शायद ( अमन ने ममता को देख कर कहा )

: अमन की मां अब तू ही बोल , ये लड़का सर्द तेरी सुनता है

: ओहो आप लोग शांत भी रह सकते क्या ? अमन बेटा बता दे इन्हें नहीं तो चैन नहीं आयेगा ( ममता थोड़ी चिढ़ कर बोली )

: हा बेटा अब बोल न

: वो पापा हीही , लोग उसमें बता रहे थे कि मेल स्पर्म का लेप लगाने से ऐसे घाव तेजी से ठीक होते है ।

: मेल स्पर्म मतलब ? ( ममता ने जिज्ञासु होकर पूछा )

: हा बेटा ये क्या होता है ? ( मुरारी ने भी सवाल दोहराया)

अमन अपने भोले मां बाप पर मुस्कुराया और अपने पापा को देख कर : मर्दों के ताजे वीर्य का लेप लगाने से

: क्या? ( ममता चौकी )

: हैं सच में ? ( मुरारी खुशी से चहक उठा ) इससे तेरी मां के निशान ठीक हो जायेगे

: हा शायद ,क्योंकि सबसे ज्यादा पोजिटिव रेस्पॉन्स थे इस सजेशन पर ( अमन थोड़ा हिचक कर बोला )

: नहीं मुझे नहीं करना है ( ममता मना करती हुई बोली )

: ओहो अमन की मां तू ठीक हो जाओगी और शाम को वो नाउन आने वाली है । उसको भी शादी के समान की लिस्ट नोट करानी है कैसे बैठेगी तू

ममता थोड़ा सोचने लगी

: लेकिन मै करूंगी कैसे ? आप तो कुछ समझते ही नहीं

अमन चुपचाप सुन रहा था

: ओहो मेरी जान मै अंदर लेने की बात नहीं कर रहा है तू थोड़ा गीला कर देना मै निकाल दूंगा पीछे

( मुरारी ममता को मनाने लगा )

: पक्का न ?

: हा मेरी जान ( मुरारी थोड़ी रोमांटिक होने लगा )

: ओके मै चलता हूं फिर ( अमन बिस्तर से उतरते हुए कहा )

: कहा जा रहा है तू ( ममता ने टोका )

: यार मै यहां रुक कर क्या करूंगा , आप लोग करो न अपना हीही

: नहीं , तू गया तो तेरे पापा जिद करेंगे समझा यही रह तू

: यार मम्मी क्या जबरदस्ती है ये

: बस बोला न बैठ जा वहा सोफे पर ( ममता थोड़ी तेज बोली फिर सॉफ्ट हो गई )

अमन मन ही मन खुश था लेकिन फिर उखड़ कर बैठ गया बेड के सामने सोफे पर

इसके बाद ममता बेड पर सरक कर घुटनों के बल होकर घुटने फोल्ड करती हुई बैठ गई और उसकी नंगी चूचिया फिर से लटक गई और पैरों ने ऊपर उसके मोटे मोटे गद्देदार चूतड़ फैलाए हुए थी

: अब आयेंगे ( ममता ने मुंह बना कर बोला और अमन मोबाइल चलाने का नाटक करने लगा )

मुरारी मुस्कुरा कर खड़ा हुआ और अपना पजामा निकाल कर ममता के आगे खड़ा हो गया और ममता ने उसके कुर्ता को उठा कर उसके अंडरवियर को खींच कर जांघों तक किया

अमन चोर नजरो से मोबाइल चलाते हुए सामने देखने लगा , जहां ममता उसके पापा का लंड हाथों में लेकर सहला रही थी और मुरारी आंखे बंद कर लंबी गहरी आह भर रहा था

अगले ही पल ममता ने एक नजर ममता को देखा तो अमन नजरे फेरने लगा और फिर ममता ने मुरारी का सुपाड़ा मुंह में ले लिया

: ओह्ह्ह अमन की मां उम्मम ओह्ह्ह्ह

ममता ने मुंह में लंड लिए हुए ही मुरारी की जांघों को चपत लगाई और वापस लंड चूसने लगी

इधर अमन का लंड फूलने लगा उसके पैंट में और वो लंड सेट करने लगा

मुरारी ने मुस्कुरा कर अमन को देखा और अमन भी उसे देख कर मुस्कुराया और अपने लंड को पैंट के ऊपर से सहलाने लगा ।






: उफ्फ मेरी जान कितनी रसीली जुबान है तेरी

: धत् चुप रहिए न अमन के पापा ,अमन यही है ( ममता थोड़ी शर्मा कर बोली )

: ओहो तुम भी न अमन की मां , ऐसा तो है नहीं कि बहु उसको ऐसे दुलार नहीं करती होगी ... क्यों बेटा ?

अमन ने मुस्कुरा कर ना में सर हिलाया

: क्या सच में ? बहु ने कभी तेरा .... ( मुरारी शॉक्ड होकर बोला क्योंकि वो अमन ने ना में सर हिलाने का मतलब समझ गया था और वही ममता को यकीन होने लगा था कि कही उस रोज अमन सच तो नहीं कह रहा था , क्या सच में बहु उसका लंड नहीं चूसती)

: एक बार भी नहीं ? ( मुरारी ने कन्फर्म किया )

: मैने कभी जिद नहीं की पापा ( अमन का गला सुख रहा था जिस तरह से ममता लगातार उसके पापा का लंड चूस रही थी )

: अमन की मां रुक जाओ , रुको रुको

: अरे क्या हुआ ? ( ममता का मूड होने लगा था और उसे मुरारी के लंड अपने बेटे के सामने चूसने में उत्तेजना होने लगी थी )

: नहीं अमन की मां , मै मेरे बेटे और नहीं ललचवा सकता । तुम रहने दो मै हिला कर निकाल दूंगा पीछे से ( मुरारी हटने लगा ) तुम झुक जाओ

: नहीं रुकिए मै सब समझती हूं आपकी चालाकी आप क्यों पीछे जा रहे है , आप यही रहिए ( ममता ने मुरारी को उसकी कलाई पकड़ कर रोक दिया)

: लेकिन अमन की मां , अमन के सामने ? अच्छा नहीं लग रहा है

: आप उसकी फिकर मत कीजिए , उसके लिए उसकी मां है ( ममता साफ साफ लहजे में बोली )

जिसे सुनकर अमन और मुरारी दोनों सन्न रह गए

: मतलब ? ( मुरारी बोला )

: अमन तू इधर आ ( ममता ने आवाज दी और अमन का लंड अकड़ गया )

: क्या मै ?

: हा , जल्दी आ ऊपर

अमन मोबाइल साइड रख कर बिस्तर पर चढ़ आया

: पैंट उतार अपना ( ममता ने सख्त लहजे में कहा )

: क्या ? नहीं मम्मी ? मुझे नहीं कराना

: मै जो बोल रही हूं वैसा कर, निकाल अपना पैंट... खोल ( ममता ने हल्की डांट लगाई उसे )

अमन ने बेबस निगाहों से अपने पापा को देखा और अपना पैंट निकल दिया उसके अंडरवियर में उसका बड़ा मोटा लंबा लंड फूला हुआ था

ममता की आंखे बड़ी हो गई अपने बेटे का बियर की कैन जैसा मोटा लंबा लंड अंडरवियर में फुला देख कर

ममता ने बिना मुरारी की ओर देखे अंडरवियर खींच कर नीचे किया तो अमन का लंड उछल कर ममता के आगे नाचने लगा






: हे दादा इतना बड़ा , हाथी जैसा लेके घूम रहा है कौन चूसेगा इसे

: रहने दो न मम्मी फिर ...

: मेरी नाजुक सी बहु डर ही जाती होगी , मै तो पकड़ भी नहीं पा रही अच्छे से ( ममता ने अमन के लंड को दोनो हाथों से पकड़ते हुए बोली

: ओह्ह्ह्ह मम्मीइई कितने सॉफ्ट हाथ है आपके ओह्ह्ह्ह

: चुप कर क्या बच्चों की तरह मम्मी मम्मी कर रहा है ... क्या हाल कर लिया है रगड़ कर इसका ।

इतना बोलकर ममता ने उसके सुपाड़े को खोलकर मुंह में रख लिया और अमन हवा में उड़ने लगा

: ओह्ह्ह्ह सीईईई मम्मीउई उफ्फफ पापा ये क्या हो रहा है मुझे ( अमन मुरारी का कंधा पकड़ते हुए बोला)

: हा बेटा शुरू शुरू में ऐसा ही लगता है , सम्भाल खुद को

: उम्मम मम्मी की जीभ अजीब तरीके से छू रही है ओह्ह्ह्ह उम्ममम सीईईई ओह्ह्ह मम्मीइई वाव बहुत अच्छा लग रहा है






: हा बेटा ऐसे ही लगता है और तेरी मां के होठों का जवाब ही नहीं

: ओह्ह्ह्ह मम्मी ओह्ह्ह्ह यशस्स अह्ह्ह्ह्ह सीईईई ओह्ह्ह

ममता आधे से ज्यादा लंड मुंह में ले जाने लगी उसके होंठ जैसे फट ही जाए , उसने लंड बाहर निकाला और अमन लंड को ऊपर कर उसके आड़ को जीभ से चाटने लगी और होठ खोलकर मुंह में भरने लगी

: ओह्ह्ह पापा ये सब ओह्ह्ह्ह गॉड फक्क मीईई ओह्ह्ह्ह यशस्स मम्मीइई उम्ममम कितना अच्छा कर रहे हो

: मेरी जान मै भी हूं , सूख रहा है मेरा ( मुरारी अपना लंड हिलाते हुए बोला )

: क्यों आपको तो पीछे जाना था , चले जाओ

: उफ्फ मेरी जान अपने सूखे हाथों से हिलाने में वो मजा नहीं है जितना तेरी रसीली जुबान से चटवाने में है ओह्ह्ह्ह सीई ऐसे ही उम्ममम मेरी रानी थोड़ा और अंदर उम्मम ओह्ह्ह्ह सीईईई ओह्ह्ह

ममता बारी बारी से दोनों के लंड चूसने लगी

: ओहो कब निकलेगा आप दोनों का

( ममता दोनो हाथों से दोनों लंड को पकड़ कर आगे पीछे करने लगी

: मम्मी यार बीच में मत छोड़ना प्लीज नहीं तो मेरा ऐसे टाइट रहेगा और छोटा भी नहीं होगा

( अमन ने जानबूझ कर वही बाते की ममता के सामने जो उसने पहले भी की थी ताकि उसका भरोसा कायम रहे )

: हा बेटा सही कह रहा है , आधा अधूरा मुझे भी नहीं जमेगा

: बेटा सच तेरा इतना बड़ा और मोटा है कि मुझसे और नहीं चूसा जा रहा है , अब तो हाथ भी दुखने लगे है मेरे अह्ह्ह्ह भगवान ये क्या मुसीबत मोल ली है मैने

: मै तो पीछे जा रहा हूं अब अमन की मां , अब और बर्दाश्त नहीं होगा मुझसे

: बेटा तू हिला ले न , ये तो नहीं मानेंगे और अगर ये पीछे गए तो मै तेरा चूस भी नहीं पाऊंगी

ममता ने बड़ी बेबसी में कहा और अमन मन मसोस कर रह गया

बिस्तर पर ममता झुक गई अपने चूतड़ हवा में उठाए हुए और पीछे मुरारी अपना सुपाड़ा थूक से गिला कर सीधा ममता के बुर के फांकों पर लगाने लगा

: ओह्ह्ह आराम से अमन के पापा उम्मम अह्ह्ह्ह्ह सीईईई कितना टाइट क्यों है आज आपका उम्मम

: पता नहीं क्यों मेरी जान ओह्ह्ह्ह उम्ममम कितनी गर्म है तू अंदर से ओह्ह्ह्ह सीउईईई उम्मन सीई ओह मेरी रानी उम्मम






इधर मुरारी ममता को पीछे से घोड़ी बना कर चोदने लगा और वही अमन बेड के नीचे खड़ा उनके सामने ही अपना लंड हिला रहा था

मुरारी आज दुगनी जोश ने अपने बेटे के सामने ममता को चोद रहा था

: ओह्ह्ह मेरी सेक्सी रानी उम्मम अह्ह्ह्ह्ह सीईईई कितनी रसीली चूत है तेरी ओह्ह्ह मजा आ रहा है ओह्ह्ह्ह

मुरारी के मुंह से अपनी मां के लिए गंदी बातें सुनकर अमन का लंड और फूलने लगा

: धत्त क्या अनाप स्नाप बक रहे है जी आप , अमन यही खड़ा है और आप सीईईई ओह्ह्ह और उम्ममम

: बोलने दो न मम्मी , मेरा जल्दी हो जाएगा सीई ओह्ह्ह्ह

: धत्त बदमाश , तुझे अच्छा लग रहा है अपनी मम्मी के बारे में गंदा गंदा सुन कर






: ओह्ह्ह्ह हा मम्मी आपको ऐसे पापा के साथ उम्मम करता देख बहुत अच्छा लग रहा है , बोलो न पापा कुछ

: सीई क्या बोलूं बेटा , तेरी मां की चूत इतनी गर्म और रसीली है कि ओह्ह्ह्ह मेरी सेक्सी रानी ओह्ह्ह सीईईई ओह्ह्ह उम्मम तुझे मजा नहीं आ रहा है क्या मेरी जान उम्मम

: आ रहा है न मेरे राजा सीईईई लेकिन बेटे के सामने कैसे ओह्ह्ह्ह बहुत मोटा लग रहा है आज आपका उम्मम लग रहा है जैसे मेरी सीईईई ओह्ह्ह

: सीई ओह मम्मीइई बोलो न प्लीज ओह्ह्ह्ह ( अमन तेजी से लंड हिलाता हुआ उनके करीब आ गया )

: ओह्ह्ह्ह अमन मेरा बेटा सीईईई क्या बताऊं आज तो तेरे पापा लंड अंदर पूरा भर गया सीईईई ओह्ह्ह अमन के पापा और तेज उम्मम अह्ह्ह्ह्ह सीईईई ओह्ह्ह

: हा मेरी जान उम्मम ले और तेज उम्मम तेरे चूतड़ मुझे खूब धकेल रहे है ओह्ह्ह सीईईई उम्मम कितने बड़े रसीले मोटे चूतड़ है तेरे मेरे जान ओह्ह्ह

मुरारी ने जोश में अपने थप्पड़ जमा दिए ममता ने चूतड़ों पर और वो पूरी झन्ना गई

: अरे नहीं पापा वहा नहीं दर्द होगा मम्मीइई

: सॉरी बेटा तेरी मां को पेलने के जोश ने ओह्ह्ह्ह सीईईई

: कोई बात नहीं बेटा मै अह्ह्ह्ह सह लूंगी इतना उम्मन बस अमन के पापा आप रुकना मत करिए मेरा होने वाला है

: ओह्ह्ह्ह मेरी जान ले और ले उम्मम और अंदर उम्मम अह्ह्ह्ह्ह सीईईई ओह्ह्ह

: ओह्ह्ह्ह अमन के पापा मेरे राजा सीईईई ओह्ह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह उफ्फ आ रही हूं मै , रुकना मत और तेज और और

अमन तेजी से अपना लंड हिलाता हुआ खुद भी बेड पर अपने बाप के बगल में आ गया खड़ा होकर

: हा पापा रुकिए मत और तेज करिए मम्मी को ओह्ह्ह मम्मी आपका पानी दिख रहा है पापा के लंड पर

: उफ्फ बेटा तू कहा से .... ( ममता ने गर्दन फेर के पीछे मुरारी के पास खड़ा हुआ उसे देखा ) देख बेटा तेरी मम्मी झड़ रही है तेरे पापा के लंड पर , तू भी झड़ जा

: ओह्ह्ह्ह यशस्स मम्मीइई ओह्ह्ह्ह मै भी आने वाला हूं और पापा आप उम्मम

: हा बेटा मै भी नहीं रोक पाऊंगा अब

: मै कहा निकालू मम्मी !! ( अमन ने तेजी से लंड हिलाते हुए बोला )

: यही ऊपर निकाल न बेटा , इससे तेरी मां को ही फायदा होगा

: ओह्ह्ह्ह गॉड पापा अब और नहीं रोक पाऊंगा ओह्ह्ह्ह मम्मी आ रहा हूं मै उम्मम फक्क ओह्ह्ह सीईईई मम्मीइई ओह्ह्ह्ह

: हा मेरी जान मेरा ही आ रहा है ओह्ह्ह्ह लो मेरी जान ओह्ह्ह ( मुरारी भी ममता की चूत से अपना लंड निकाल कर हिलाने लगा उसकी गाड़ के ऊपर )

: हा मेरा बेटा निकाल दे झड़ जा , आप भी अमन के पापा उम्मम ओह्ह्ह्ह सीईईई ओह्ह्ह कितना गर्म और गाढ़ा है ओह्ह्ह अमन बेटा क्या ये तू है






: उम्मम हा मम्मी बहुत ज्यादा निकल रहा है ओह्ह्ह्ह सीई ओह्ह्ह्ह यशस्स अह्ह्ह्ह्ह

: ओह्ह्ह्ह सीईईई अमन की मां अमन के लंड से जैसे झरना बह रहा है ओह्ह्ह तेरी गाड़ को इसने लबालब भर दिया है ( मुरारी अपना लंड झाड़ता हुआ बोला )

: हा मेरे राजा मुझे महसूस हो रहा है उम्मम बेटा तो आराम है न तुझे मेरे लाल

: हा मम्मी बहुत रिलेक्स हो गया है ( अमन अपना लंड झाड़ कर लंबी गहरी सांस भरता हुआ बोला )

फिर उसकी नजर मुरारी से मिली तो मुरारी ने आंख मार कर उसे मुस्कुरा कर देखा और अमन भी मुस्कुराने लगा

वही अमन और मुरारी का वीर्य से ममता की पूरी गाड़ सन गई थी जो हर तरफ से रिस रही थी






लेकिन ममता वैसे ही पेट के बल लेट गई क्योंकि ये उसका इलाज था ।

जारी रहेगी
 
भीषण गर्मी और बिजली कटौती, बिना मौसम आंधी तूफान से वर्क लोड बढ़ गया है । जिन्हें नहीं पता हो तो बता दूं कि मेरी नौकरी बिजली विभाग में है और इन दिनों समय नहीं मिल पा रहा है ।

बीते हफ्ते हीट स्टोक से 2 दिन बेडरेस्ट भी रहा हूं

आप लोग भी अपनी ऊर्जा बचाइए और सेहत का ध्यान रखिए ।

फिलहाल कोई तय समय नहीं बता सकता

समय मिलने पर अपडेट दे दूंगा

धन्यवाद
 
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