Adultery सपना या हकीकत [ INCEST + ADULT ] - Page 52 - SexBaba
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Adultery सपना या हकीकत [ INCEST + ADULT ]

UPDATE 035

BE READY FOR EXCLUSIVE SEXUAL ADVENTURE

खुशबू + रज्जो + मुस्कान






अपडेट इस पोस्टेड ों पेज NO. 1422

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💥 अध्याय 02 💥

UPDATE 035


बड़े शहर के होटल में रज्जो हल्के गुनगुने पानी से अपने जिस्म को साफ कर रही थी , वीर्य के उन दागों को अपनी छातियों से साफ कर रही थी जिन्हें मुस्कान ने दिए थे।

इस बात से बेखबर कि उसकी नंगी गदराई जवानी को बाथरूम के बाहर से कोई तीसरा ही निहारा था ।






जिसके बदन में रज्जो की चर्बीदार चूतड़ों की गोलाई और मोटे मोटे चूचे देख कर सिहरन हो रही थी

और वो अपने रसीले मम्में को कपड़े के ऊपर से सहलाती हुई , नीचे अपने पैंटी में सर उठाते लंड को भी सहला रही थी

उसने एक एक करके अपने बदन से कपड़े निकालने शुरू कर दिए और नंगा होकर अपना आकार लेते बड़े से लंड को सहलाना शुरू कर दिया था

उसकी आंखे रज्जो की नंगी थिरकती हुई थुलथुली चूतड़ों पर थी और उसके मुंह में मिश्री घुलने लगी थी

अपने बदन को पोछते हुए एकदम से रज्जो को कुछ महसूस सा हुआ और उसने पलट कर देखा

सामने एक किन्नर खड़ी थी , जिसकी जिस्मानी बनावट मुस्कान से ज्यादा ही मर्दाना थी और उसके हाथ में लंड का टोपा देख कर वो समझ गई कि खुशबू आ गई थी

ना सवाल ना कोई बातचीत

दोनों जान रहे थे कि वो यहां किस लिए है

खुशबू रज्जो दोनों एक दूसरे की ओर बढ़े , फिर एक दूसरे की आंखों में देखा

इजाजत दोनों ने दे दी थी एक दूसरे को और खुशबू ने आगे बढ़ कर रज्जो के गालों को छू कर उसके होठों को हौले से चूमा

रज्जो का पूरा बदन गिनगिना उठा

अभी थोड़ी पहले ही तो खुशबू ने उसको अपनी बाहों में भरा था और उसके कड़क हाथों का वो एहसास और इस बार के पहल में बहुत अंतर था

इस बार उसकी शुरुआत धीमी थी

हल्के हल्के वो उसके होठों को चूस रही थीं और रज्जो ने अपने आप को बस उसे सौंप दिया

ना कोई संवाद न इंकार

बस वासना की तरंगें उठ रही थी और रज्जो को उसने अपनी बाहों में कस लिया

एक बिजली सी दौड़ी दोनों के बदन में

दोनों एक दूसरे के रसीले मम्में के गुदाज अहसास से वाकिफ हो गए थे , खुशबू का लंड रज्जो की पेट पर अड गया था

दोनों के चुम्बन की तीव्रता बढ़ने लगी और खुशबू के पंजे रज्जो की पीठ से उसके नंगे चूतड़ों की ओर बढ़ने लगे

दोनों एक ताल में एक दूसरे को सहला चूस रहे थे

जल्द ही रज्जो के चूतड़ों की दरार फैलने लगी , खुशबू ने दोनों पंजों के नाखून गाड़ कर उसके चूतड़ों को खींचते हुए उसके होठ जोरो से चूस रही थी

और फिर उसने हौले से झुक कर रज्जो ने कड़क गिले निप्पल






अभी रज्जो का बदन पूरी तरह से सुखा नहीं था और जैसे ही खुशबु ने अपनी जीभ फिराई , उसको रज्जो के गिले बदन की मिठास भा गई

उसने मुंह खोलकर रज्जो की चूचियां मुंह में भरने लगा

रज्जो की सिसकिया उठने

एक ओर खुशबू के पंजे उसके गद्देदार चूतड़ों को पंजों से फाड़ रहे थे तो दूसरी ओर उसके होठ रज्जो की चुची को निप्पल सहित खींच रहे थे

: ओह्ह्ह्ह उम्ममम आराम से राजा ओह्ह्ह्ह तू तो बड़ा जोर लगा रहा है उम्मम

: तुझमें इतना रस है कि उम्ममम कितनी मुलायम चुची है तेरी रज्जो ओह्ह्ह्ह

खुशबू ने वापस उसकी दूसरी चुची मुंह में रख ली

: ओह्ह्ह उम्ममम चूस ले राजा ओह्ह्ह तेरा हथियार बड़ा कड़क है ओह्ह्ह्ह कितना टाइट और मोटा

रज्जो ने उसका लंड पकड़ कर खींचने लगी थी और खुशबू लगातार उसकी चूचियां चूस रही थी ।

: थोड़ा नरम कर दे न उसे

रज्जो समझ गई कि खुशबू क्या चाहती है और वो सरक कर नीचे बैठ गई

उसने अपनी जीभ निकाल कर दो तीन बार खुशबू के खड़े लंड के सुपाड़े की गांठ को चाटा और फिर सुपाड़े को मुंह में रख दिया






: ओह्ह्ह्ह बहनचोद क्या आइटम है तू ओह्ह्ह्ह मेरी जान चूस ओह्ह्ह्ह ऐसे ही

रज्जो उसका लंड पकड़ कर चूसने लगी और खुशबू के जिस्म में सिहरन होने लगी , वो एड़ियों के बल होने लगी और रज्जो गले तक उसका लंड उतारने लगी

: यश मेरी जान और ले और उम्मम

खुशबू उसके सर को पकड़ कर दबाने लगी और रज्जो उसका पूरा लंड गले तक ले गई और बाहर निकाल दिया

फिर उसने वापस से उसका लंड पकड़ कर चूसना शुरू कर दिया ,






उसके जिस्म में अब लंड की चस्क बढ़ने लगी वो अपनी चूचियों समेत बुर को सहलाते हुए उसका लंड चूसे जा रही थी





: क्यों मेरी जान , अभी से बुर जलने लगी तेरी उम्मम

: ओह्ह्ह्ह हा मुझे लेना है इसे

: चल आजा

उनसे रज्जो को घोड़ी बना कर बिस्तर पर झुकाया और उसके चूतड़ों को फैलाते हुए उसके गाड़ का भूरा छेद देख कर बोली : उम्मम बड़ी रसीली गाड़ है तेरे उम्ममम

: ओह्ह्ह सीईईई अह्ह्ह्ह चाट ले राजा उम्मम अह्ह्ह्ह्ह सीईईई अह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्ह तेरी जीभ बड़ी तेज है ओह्ह्ह्ह मर गई ओह्ह्ह्ह ( रज्जो मचल उठी थी जैसे ही खुशबु ने उसके गाड़ में अपना मुंह दिया )

: उम्मम कितनी मुलायम चूत और गाड़ है , बोल किस्में डालूं

: बुर में , बहुत जलन हो रही है घुसा दे न अह्ह्ह्ह्ह सीईईई ओह्ह्ह बड़ा मोटा है और.... उन्ह्ह कितना लंबा भी ओह्ह्ह्ह






: उफ्फ कितनी जल रही है तेरी बुर रज्जो , बड़ी गर्मी है तुझमें ओह्ह्ह मजा आएगा आज सारी रात तेरी गर्मी निकालूंगा तेरी चूत से

: हा मेरे राजा मै भी आज इस लंड से अपनी प्यास मिटाऊंगी ओह्ह्ह्ह पेल मुझे और तेज ओह्ह्ह्ह उम्ममम

: अह्ह्ह्ह बहनचोद क्या माल है तू ले साली रंडी ओह्ह्ह्ह उम्ममम कितना उछाल रहा है तेरा गाड़ मुझे ओह्ह्ह्ह इसमें भी डालूंगी अभी






खुशबू रज्जो को दबाए हुए हच्च हच्च उसकी चूत में पेलने लगी और रज्जो की सिसकिया पूरे कमरे में गूंज रही थी

ताबड़तोड़ पेलाई से हटते हुए अचानक ही खुशबु से अपना लंड खींच लिया और इशारे से रज्जो को अपनी ओर बुलाया

रज्जो समझ गई और बिस्तर पर बैठ कर उसका लंड चूसने लगी जो उसकी ही बुर से रस में लिभड़ाया था ।

थोड़े देर रज्जो से अपना लंड चुसवाने के बाद उसने वापस रज्जो को बिस्तर पर धकेल दिया और उसकी जांघें फैला कर उसकी बुर की चाटने लगी






रज्जो बिस्तर पर अकड़ने लगी और खुशबू उसकी जांघों को कसते हुए उसके बुर के रसीले फांकों को चाटने लगी , उन्हें खींचने लगी

उसकी जीभ तेजी से रज्जो के बुर में रेंग रही थी और अगले ही पल एक झटके में उसने अपना लंड बड़ी तेजी से रज्जो की बुर में उतारते है फचर फचर पेलने लगा

: ओह्ह्ह सीईईई ऐसे ही उम्ममम अह्ह्ह्ह ओह्ह्ह तेरा तरीका बड़ा नया है और उफ्फफ कितना अंदर जा रहा ओह उम्मम पेल मेरे राजा उम्ममम

खुशबू ने तेजी से अपनी कमर हिलाने शुरू कर दी , उसका लंड तेजी से अन्दर बाहर हो रहा था






रज्जो के बड़बड़ाते होठ को देखकर वो उसके ऊपर चढ़ गई और अपनी नुकीली चूचियों को रज्जो के मुलायम छातियों में धंसाते हुए उसके होठ चूसने लगी

रज्जो भी उसकी इस हरकत से मचल उठी उसने अपनी बुर के छल्ले को खुशबू के लंड पर कस लिया और खुशबू भी दुगनी जोश में आकर उसकी चूचियां चूसने लगी






उसकी कमर तेजी से ऊपर नीचे हो रही थी और लंड रज्जो की कसी बुर में अंदर बाहर होने लगा

उसके लंड पर जोर बढ़ने लगा और वो समझ गई कि वो झड़ जाएगी

फिर तेजी से उठी और रज्जो के छातियों पर अपना लंड हिलाने लगी

: ओह्ह्ह्ह यशस्स अह्ह्ह्ह्ह मेरी रंडी ले ओह्ह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह आ रहा है उम्मम ओह बहनचोद आआ सीईईई अह्ह्ह्ह सीईईईईई ओह्ह्ह्ह उम्ममम






फिर एक के बाद एक खुशबू के लंड से वीर्य के छींटे रज्जो के चूचों पर गिरते रहे

झड़ने के बाद वो वही रज्जो के पास लेट कर सुस्ताने लगी और रज्जो उसकी ओर करवट होकर उसकी कड़क निप्पल को सहलाती हुई मुंह में भर चुकी थी

खुशबू भी समझ गई कि रज्जो पक्की खिलाड़न है , इतनी आसानी से नहीं थकेगी

और वो अगले राउंड की तैयारी करने लगी ।

इस बात से बेखबर कि थोड़ी देर पहले उसने मुस्कान को बाहर भेजा था वो वापस आ गई थी , और कबसे दरवाजे पर खड़ी उनकी लीला देख रही थी ।

वही इनसब से अलग प्रतापपुर में रात के खाने की तैयारी हो गई थी

बनवारी और रंगी, गेस्ट रूम ने बैठे खाने की राह देख रहे थे

उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि क्या करे कि बबीता उनके साथ तैयार हो

: जमाई बाबू अब आप ही कुछ चमत्कार कर सकते है

गेस्टरूम के सोफे पर बैठे हुए बनवारी ने अपने धोती में लंड को सहला कर कहा

: वो आ रही है खाना लेकर बस देखते जाइए

थोड़ी देर में बबिता और गीता दोनों , रंगी और बनवारी की थाली लेकर आई

गीता निकल गई और बबीता भी जाने को हुई थी कि रंगी ने उसकी कलाई पकड़ ली

: अरे छोड़ो न फूफा जी , दादू देखो

: अरे जमाई बाबू कुछ कह रहे है सुन ले

: हा बोलो

बबीता समझ रही थी कि रंगी क्या चाहता है

: देखा बाउजी , ये कितनी बदमाशी करने लगी है । इसके तो चूतड़ लाल करने चाहिए आपको

बबीता ने घूर कर रंगी को देखा और वो वो उस दर्द से अभी उभरी नहीं थी जो रंगी ने उसके चूतड़ों को लाल करके दिए थे ।

: अरे नहीं नहीं , मेरी गुड़िया इतनी प्यारी है । इधर आ बेटा

फिर बनवारी ने उसे अपनी गोद में बिठा लिया

लंड तो उसका पहले से ही खड़ा था धोती में , जैसे ही बबीता उसकी गोद में बैठी अपनी गाड़ में उसे अपने दादू का मोटा लंड महसूस हुआ

वो पूरी तरह गिनगिना गई , अभी भी उसने लेगिंग्स के नीचे कच्ची नहीं पहनी थी

: अरे बाबूजी मै सच कह रहा हूं , देख लीजिए इसने अभी भी कच्छी नहीं डाली होगी

रंगी की बात सुनकर बनवारी का लंड ठुमका और बबीता को महसूस हुआ

: क्या सच में गुड़िया तूने कच्छी नहीं पहनी

उसने झट से अपने हाथ नीचे कर सरेआम बबीता के चूतड़ों के नीचे हाथ रख एक लेगिंग्स के ऊपर से उसके मुलायम चूतड़ों को टटोला

: उम्मम लग तो रहा है पहनी है

: अरे नहीं पहनी है बाउजी , खोल कर देखिए

: उम्मम नहीं ( वो कुन्मुनाई और रंगी को देखा उसने )

: क्या नहीं खड़ी हो तू ( बनवारी ने थोड़ी डांट लगाई तो वो झट से खड़ी हो गई )






बनवारी ने एक नजर शरारती मुस्कुराहट से रंगी को देखा और दूर बबीता की लैगिंग को सरका कर जांघों तक कर दिया

: अरे हा , ये तो सच में नहीं पहने इसने

बनवारी अपनी नातिन के मुलायम चर्बीदार चूतड़ों को देख कर गदगद हो गया

: मै तो कह ही रहा था

: गुड़िया ये क्या है , बेटा अब तू बड़ी हो गई है न ( बनवारी के उसके नंगे चूतड़ों को सहलाया )

: जी दादू आगे से पहनूंगी , अब जाऊ

वो वापस से अपनी लैगिंग्स चढ़ाने के लिए झुकी और इतने में रंगी ने रोका

: अरे वो क्या है बाउजी देखिएगा तो

: क्या है ?

बनवारी भी समझ नहीं पा रहा था और रंगी ने झट से बनवारी की सफेद धोती से एक धागे का रेशा खींच कर जानबूझ कर बबीता के चूतड़ों के पास लगा कर निकाला

: अरे ये तो सफेद धागा है ( बनवारी बोला )

एक पल को बबीता भी चकित हुई

: जरूर इसकी लेगिंग्स से निकला होगा , एक और दिख रहा है अंदर

: कहा ? ( बनवारी रंगी का नाटक अब समझ गया था और उसने झट से बबीता ने मुलायम चूतड़ों को फैला के कर देखने लगा

: उम्मम दादू क्या कर रहे हो सीईईई

: चुप कर तू , पागल धागा फंसा है अंदर ( बनवारी झूठ का उसके गाड़ के सुराख के पास अपनी उंगली कुदरने लगा , बबीता मचलने लगी )

: नहीं पकड़ में आ रही है जमाई बाबू

: अरे थोड़ा थूक लगा कर उंगली में चिपकाइए आ जायेगा

बनवारी रंगी की योजना से प्रभावित हुआ जा रहा था और उसका लंड फौलादी हुआ जा रहा था

उसने उंगली में थूक लगाई और बबीता के गाड़ के सुराख पर कुरेदने लगा

उसने एक हाथ की दो उंगलियों से बबीता की गाड़ के दरारों को खोल रखा था और दूसरे हाथ की उंगली पर थूक लगा कर उसके गाड़ के सुराख को छेड़ रहा था

: लग रहा है जमाई बाबू जगह छोटी है इसीलिए पकड़ नहीं हो पा रही है

: अरे गुड़िया जरा अपने हाथों से अपने चूतड़ फैला तो

बबीता ने रंगी को देखा और मुंह बना कर अपने दोनों हाथों से अपने लचीले चर्बीदार चूतड़ों को फैला कर थोड़ा झुक गई






जिससे अब बनवारी के आगे उसकी गाड़ के छेद के साथ साथ बुर की फांके भी दिखने लगी

: हा अब साफ दिख रहा है

बनवारी ने वापस अपनी उंगली मुंह में डाली और उसके गाड़ के सुराख को गिला करने लगा

दोनों का लंड अकड़ गया था

: उन्ह्हु जमाई बाबू , मेरी उंगली जगह के हिसाब से मोटी है , आप ट्राई करेंगे

रंगी कहा ये मौका छोड़ने वाला था , वो सरक कर बनवारी के पास आया और बबीता के चूतड़ों को पकड़ कर अपने सामने कर दिया

: ओहो बाउजी आप तो थूक लगा ही नहीं रहे थे कितनी सूखी है

रंगी ने मुस्कुरा कर कहा और अपने मुंह से देर सारा लार लेकर बबीता के गाड़ के सुराख पर लीपने लगा

जिससे बबीता सिसक पड़ी

: आराम से जमाई बाबू नाखून न लगे बच्ची को

बनवारी ने अपना ड्रामा जारी रखा

: ओह्ह्ह सही कह रहे है बाउजी जगह छोटी है , यहां कोई लचीली से पकड़ना पड़ेगा , थोड़ा सा निकला तो है लेकिन पकड़ में नहीं आ रहा है

: अब ?

: एक उपाय है

: क्या ?

: अगर अंदर कोई सॉफ्ट चीज डाल कर पकड़ ले तो , जैसे जीभ डाल कर उसको लपेट लेंगे और होठों से खींच लेंगे

: क्या ? नहीं भक्क

: चुप रह तू , एक तो बात नहीं मानती और कोई मदद कर रहा है तो .... आप करिए जमाई बाबू

: ऐसे नहीं ... इसको कहिए बिस्तर पर झुक कर घुटने के बल हो जाए , उससे जगह भी चौड़ी हो जाएगी और आसानी से निकल भी जाएगा

: हा ये सही कह रहे है आप जमाई बाबू ( फिर बनवारी उठ गया और बबीता को पकड़ कर बिस्तर पर ले आया ) चल जल्दी से वैसी हो जा जैसे जमाई बाबू कह रहे है

बबीता रंगी का खेल समझ गई थी अब और उसने वही किया जो बनवारी ने कहा , बिना किसी विरोध के और अपनी लेगिंग्स पूरी निकाल कर

वो बिस्तर पर घुटने के बल होके आगे झुक गई और दोनों के सामने उसकी गाड़ फेल कर आ गई

: करिए जमाई बाबू

फिर रंगी ने उसके नंगे चूतड़ों को पकड़ कर पंजे से फैलाया और झुक कर अपनी जीभ की नुकीली टिप को उसके गाड़ के सुराख पर रख कर चलाने लगा ।






बनवारी अपने सामने अपने जमाई को अपनी ही नातिन की गाड़ का सुराख चाटते देख अपना लंड धोती में सहलाने लगा

वही बबीता रंगी की जीभ का स्पर्श पाकर गिनगिना उठी

: उम्मम हिल मत गुड़िया ( रंगी ने उसके गाड़ में मुंह लगाए कहा )

: हा बच्चा हिल मत , करने दे उन्हें ... मिला क्या जमाई बाबू

रंगी उठ गया

: अह्ह्ह्ह नहीं बाबूजी , गाल जबड़ा दर्द होने लगा , बस थोड़ा सा एक बार फंसा था लेकिन इसमें हिल कर सब बिगाड़ दिया ... आप ट्राई करिए

जगह की बदली हुई और बनवारी के मुंह में लार घुलने लगी

उसने भी ढेर सारी लार लेके रंगी की गीली की हुई जगह और अपनी जीभ फिराई






एक ही बार बनवारी को अपनी लाडली नातिन के गाड़ का स्वाद भा गया और उसने अच्छे से चाट चाट कर उसकी गाड़ का सुराख गिला करने लगा

आगे बबीता अपनी बुर की कुलबुलाहट को कंट्रोल कर रही थी , अपनी सिसकियों को रोक रही थी

: अह मजा आ गया जमाई बाबू

( बनवारी खड़ा हुआ और एकदम से चौक गया कि उसने क्या बोला , फिर उसकी जुबान लड़खड़ाने लगी ) अरे मतलब पकड़ में आ गया

बबीता सुस्त होकर फैल गई नंगी गाड़ उठाए हुए और हांफने लगी

: वाह बाउजी कर दिया आपने आखिर ( रंगी ने हस कर आंख मारी बनवारी को ) लेकिन मुझे कुछ शंका है

: कैसी शंका ?

: अरे आपने जो निकाला वो बहुत छोटा टुकड़ा था , कही अंदर टूट कर रह गया हो तो

बनवारी रंगी का लालच समझ गया और मुस्कुराने लगा

: ये तो सच में चिंता वाली बात हो जायेगी जमाई बाबू , अब क्या किया जाए

: एक काम करते है , आपके कमरे में तेल होगा क्या ?

: हा हा है न , रुकिए लाता हूं

फिर बनवारी अपना लंड धोती के ऊपर से मसलता हुआ भागा भागा अपने कमरे से तेल वाली सीसी ले आया

: बेटा वापस वैसे हो जा ( रंगी ने कहा )

: निकल तो क्या गया न ?

बबीता समझ रही थी कि उसे अभी और तड़पना ही पड़ेगा । वो वापस अपने घुटने के बल होकर अपने चूतड़ हवा में कर दिए , बनवारी उसके पास जाकर उसके सर को सहलाया

: बस बेटा ज्यादा टाइम नहीं लगेगा , जमाई बाबू एक बार उंगली डाल कर चेक करेंगे

: उम्मम दर्द होगा तो....

एक पल को बनवारी का भी मन पिघल गया , लेकिन रंगी आंखों से उसे आश्वस्त कर दिया कि सब कंट्रोल में होगा

फिर रंगी ने उसके गाड़ की सुराख पर शीशी से तेल टिपकाने लगा

फिर उसने अपनी बाह चढ़ाई और उंगलियों से उसकी गाड़ की सुराख लीपने लगा

बबीता की सिसकिया उठने लगी और वो खुद को अपनी गाड़ में रंगी की मोटी उंगली लेने के लिए तैयार करने लगी

रंगी ने तेल की शीशी का ढक्कन खोलकर अंदर अपनी उंगली डिप की और वैसे ही बाहर निकाल कर उंगली की टिप को बबीता की गाड़ के सुराख पर रखा

: आराम से जमाई बाबू बच्ची है

बनवारी फिकर में था , लेकिन उसे क्या पता था कि उसकी नातिन अपने bf से कितनी बार अपने गाड़ के धागे निकलवा चुकी थी

थोड़ी ही प्रयास में रंगी की उंगली आसानी ने बबीता की गाड़ में सरक गई

: ओह्ह्ह दादू उम्ममम

: दर्द हो रहा है क्या बेटा ? ( बनवारी उसके पास गया )

: उम्ममम बहुत हल्का सा

: जमाई बाबू आराम से चेक करिए , कुछ मिला क्या

रंगी अपना लंड पकड़ कर दूसरे हाथ से एक उंगली डाल निकाल रहा था , रंगी को अंदाजा हो गया था कि बबीता अपने bf से अपनी गाड़ का ढीली करवा चुकी है






: उम्मम शायद मेरे हिसाब से अंदर कुछ रह गया है , मेरी उंगली उस तक नहीं पहुंच पा रही है एक बार आप भी तसल्ली कर लीजिए बाउजी

: हा लाइए तेल दीजिए

फिर रंगी ने तेल की शीशी आगे की और बनवारी उसमें अपनी बीच वाली लंबी उंगली डिप करने जा रहा था तो रंगी ने उसका अंगूठा पकड़ कर डूबो दिया

बनवारी रंगी का इशारा समझ गया था लेकिन अभी भी उसके मन में अपनी लाडली के चूतड़ों का ख्याल था , वो आंखे बड़ी कर रंगी को देखा तो रंगी ने आंखों से इशारा किया कि करिए

बनवारी को यकीन होने लगा था कि जरूर रंगी ने कुछ अंदाजा लगाया है

बनवारी गांव में किसानी करके बड़ा हुआ था उसकी सामान्य उंगलियां भी रंगी के अंगूठे जितने थी और अंगूठा तो किसी टीन एज बच्चे की नूनी से कम मोटा नहीं था ।

बनवारी ने डरते हुए अपना अंगूठा बबीता के गाड़ के सुराख पर रखा और हौले से दबाया

पचक की आवाज से उसके अंगूठे का नाखून वाला भाग अंदर चला गया

बनवारी को हैरानी हुई और उसने रंगी को देखा तो रंगी मुस्कुरा पड़ा

बनवारी का डर अब कम हो गया और उसने अपना अंगूठा अंदर डाल कर ऐसे से घुमाया






: देखिए बाउजी कुछ है न

: अह हा जमाई बाबू लेकिन उंगली तो मेरी भी नहीं जा रही है , कुछ लम्बा सा चाहिए

: हा लेकिन बाबूजी बच्ची है , अंदर कुछ धारदार डाल नहीं सकते , लग जाएगा उसको

: फिर अब ? , अगर अंदर रह गया तो आगे जाकर सड़ेगा और बीमारी होगी ।

बबीता समझ रही थी कि अब आगे उसके साथ क्या होगा , लेकिन वो अपनी बुर की वजह से ज्यादा मजबूर थी

: एक बार बाउजी ऐसे ही सोनल की मां के आगे बाल बहुत बढ़ गए थे तो साफ करते हुए बाल का टुकड़ा अंदर चला गया था

: फिर आपने क्या किया था जमाई बाबू ( बनवारी अपना मूसल मिजता हुआ बोला )

: आप तो जानते ही है औरतों की वो जगह कितनी नाजुक होती है , उंगली से प्रयास किया लेकिन नहीं काम आया

: फिर आपने क्या किया ?

: अह क्या बताऊं बाउजी आपसे , वो मै ... ( रंगी ने शर्माने का ड्रामा किया )

: जमाई बाबू झिझक छोड़िए , मुझे मेरी नातिन की चिंता हो रही है

: दरअसल बाउजी मुझे अंदर अपना लंड डालना पड़ा था फिर वो उसमें चिपक कर बाहर आया था ।

: ओह्ह्ह फिर करना क्या है , डालिए अंदर और ... निकालिए उसे

: क्या मै ?

: हा जमाई बाबू , आपको अनुभव है

: लेकिन बाउजी एक काम और करना पड़ेगा

वी

: क्या ?

: दरअसल अंदर तो मै गुड़िया के डाल दूं लेकिन तेल से ये काम नहीं होगा , तेल से लंड अंदर ज्यादा फिसलेगा

: तो फिर ?

: इसके लिए थूक का प्रयोग ही सही रहेगा

: तो करिए , किस सोच में है अभी आप ?

: दरअसल आप समझ नहीं रहे है बाउजी, उंगली डालने भर का थूक मै इस्तेमाल कर लूं लेकिन मेरा साइज बड़ा है , उतने से काम नहीं होगा

: फिर आपके छोटी से अंदर से कैसे निकाला था

: अह बाउजी दरअसल सोनल की मां ने मेरा लंड चूस कर गिला किया था , तब कही मैं उसमें चिपक कर बाहर आया था

: हा लेकिन यहां छोटी तो है नहीं न , तो अब

: अह अगर आप कहेंगे तो मुझे लगता है कि गुड़िया जरूर तैयार हो जाएगी ( रंगी ने आंख मारी और बनवारी भी मुस्कुरा पड़ा )

: हा हा क्यों नहीं , गुड़िया बेटा जरा तेरे फूफा का गिला कर दे तो

: बक्क नहीं

: देख अब बदमाशी मत कर , कितना परेशान है बेचारे तेरे लिए, चल उठ

बनवारी के गुड़िया की बाह पकड़ कर उसे बिस्तर से नीचे किया

बबीता ने छुपी हुई मुस्कुराहट से रंगी को देखा तो रंगी भी मुस्कुरा उठा और अपना पजामा खोल कर अपना बड़ा सा लंड बनवारी के सामने ही खोल दिया , बबीता घुटने के बल नीचे बैठ गई वैसे ही कमर के नीचे नंगी

: कितना बड़ा है ये दादू

: कोई बात नहीं बेटा तू कर लेगी , चल जल्दी कर ( बनवारी ने गुड़िया का सर आगे जोर देके रंगी के सुपाड़े की ओर किया )

बबीता ने रंगी का तपता लंड थामा और मुंह खोलकर उसका सुपाड़ा चुभलाने लगी

रंगी के पूरे बदन में कंपकंपी होने लगी वो अपने चेहरे के भाव से बनवारी को बताने लगा कि वो कितने मजे में है

बनवारी ये देख कर अपना लंड मीज रहा था






: हा बेटा और अन्दर लेकर गिला कर ओह्ह्ह्ह सही कर रही है तू उम्मम अह्ह्ह्ह्ह सीईईई बाबूजी गुड़िया तो बड़ी श्यआनी है , इसको तो अच्छे से गीला करने आता है

: हा जमाई बाबू , गुड़िया तो है ही श्यानी , अच्छे से कर बेटा थूक लगा कर

बबीता अच्छे से रंगी का लंड का मुंह में लेकर चूसने लगी और उसकी लार से रंगी का लंड एकदम तैयार हो गया था

: बाबूजी मेरे ख्याल से इतने से काम हो जाएगा , आइए , आओ गुड़िया

रंगी फिर गुड़िया को सोफे कर लेकर आया

: यहां ?

: हा बाउजी, बच्ची है जरा आपकी गोद में रहेगी तो दर्द होगा तो आप सम्भाल लेंगे न

बनवारी कुछ कुछ रंगी का मतलब समझ रहा था

फिर रंगी ने बबीता को सोफे पर घोड़ी बना कर उसके पीछे आ गया , बनवारी अपनी लाडली के पास बैठ गया और उसके हाथ पकड़ कर उसे तैयार करने लगा

: डर मत बच्ची , कुछ होगा नहीं अभी तेरे फूफा यूं निकाल देंगे धागा

: हम्ममम अह्ह्ह्ह सीईईईईई दादू टाइट है

: आराम से जमाई बाबू हल्के हल्के जाइए अंदर है

इधर रंगी ने ढेर सारी थूक लेकर वापस से बबीता की गाड़ की सुराख को गिला किया और अपना सुपाड़ा सेट कर हलका सा जोर देकर दबाया






: अह्ह्ह्ह्ह बस बाबूजी सच में बड़ी टाइट जगह है

: अह्ह्ह्ह दादू खींच रहा है मम्मीईई आह्ह्ह्ह नहीं उम्हू दर्द हो रहा

: बस बेटा अब नहीं होगा , अह्ह्ह्ह्ह अब तक अंदर चला गया है... कितना और बचा है जमाई बाबू

: बस बस बाउजी आधा चला गया है उम्मम सीई जगह बड़ी टाइट है

: अरे जमाई बाबू थोड़ा आगे पीछे करिए , जगह बनेगी

रंगी मुस्कुरा कर अपना लंड उसी जगह आगे पीछे करने लगा : अह्ह्ह्ह हा बाउजी सही कहा आपने ये सच में आगे पीछे करने से अंदर जा रहा है

: ओह्ह्ह दादू उम्ममम

: क्या हुआ बेटा अभी भी दर्द है

: हम्ममम हल्का हल्का ओह्ह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह सीईईई उम्ममम

रंगी ने अब पूरा लंड जितना बबीता की कसी गाड़ में जड़ तक तक उतार दिया था , बबीता की गाड़ की कसी और तपती सुराख में उसे गजब का सुख मिल रहा था






रंगी अपनी मस्ती में लंड अंदर ही आगे पीछे करने लगा और वही बबीता को भी मजा आने लगा , उसकी बुर कबसे बह रही थी

उसकी आंखों के सामने उसके दादू का लंड धोती में फ़नफ़नाया हुआ था । और वो रंगी के करारे झटके से बार बार उसी के झुक रही थी

: क्या हुआ जमाई बाबू , कुछ महसूस हो रहा है

: आह बाबूजी खोज रहा हूं , लेकिन अंदर जगह इतनी सुखी है कि लंड सुख रहा है तेजी से

: कोई बात नहीं जमाई बाबू आप खोजिए , गुड़िया फिर से गिला कर देगी

: हा बाउजी , जबतक मै खोज रहा हूं क्यों न तबतक आप अपना गीला करवा लीजिए , अगर जरूरत पड़ी तो जल्दी काम हो जाएगा

बनवारी तो जैसे इसी राह में था उसने झट से अपनी धोती से अपना मोटा काला मूसल जैसा लंड निकाल दिया

: हा जमाई बाबू सही कह रहे है ,गुड़िया बेटा जरा इसे भी गिला कर दे तो ले मुंह खोल

बनवारी ने खुद से अपना लंड का सुपाड़ा उसके मुंह की ओर कर दिया और बबीता ने बिना एक पल झिझके अपने दादू का मोटा लंड मुंह में ले लिया

बनवारी ने एक लंबी ठंडी गहरी सांस ली और गुड़िया के सर को सहलाने लगा






बबीता अब रंगी के लंड को अपनी गाड़ में लेते हुए अपने दादू का लंड चूसना शुरू कर चुकी थी

कमरे में कामुक गाड़ चुदाई का माहौल बना हुआ था

: थक जाइयेगा तो बताइएगा जमाई बाबू , मै ट्राई करूंगा

रंगी समझ गया कि उसका ससुर अब गुड़िया की गाड़ में जाना चाहता है

: अह मेरे ख्याल से आप आ ही जाइए , क्योंकि मेरा तो सुख गया है फिर से

जगह की बदली हुई और बनवारी ने अपना सुपाड़ा सेट कर लंड उतार दिया बबीता की गाड़ में

वो भी अब बबिता की लचीली गाड़ का स्वाद लेने लगा था






रंगी ने पहले से ही जगह बना दी थी उसके लिए इसीलिए ना उसे और न बबीता को ज्यादा तकलीफ हुई

बनवारी लगातार उसको चोदने लगा , उसकी स्पीड बढ़ने लगी

: अह्ह्ह्ह दादू आराम से ओह्ह्ह्ह

: क्या हुआ ( रंगी ने मुस्कुरा कर कहा )

: उम्ममम सीईईई नीचे बहुत खुजली हो रही है ओह्ह्ह्ह उम्ममम मम्मीइ उम्मम

: क्या हुआ जमाई बाबू , क्या कह रही है गुड़िया

: अरे बाउजी गुड़िया कह रही है कि उसको आगे अंदर खुजली हो रही है , कही ऐसा तो नहीं कोई धागा आगे भी अंदर चला गया

: रुकिए चेक करता हूं






फिर बनवारी ने बड़ी चतुराई दिखा कर वही उसी पोजीशन में भी बबीता की लाल हुई गाड़ की सुराख से अपना लंड निकाल कर उसकी बुर में लगा दिया

जल्द ही बबीता की एक घुंटी हुई सिसकी सुनाई दी और रंगी ने उसके मुंह में अपना लंड डाल दिया

बनवारी अपनी नातिन की गर्म रसभरी बुर में जाकर मस्त हो गया और तूफानी रफ्तार से उसकी कमर झटकते हुए पेलने लगा






: बाउजी दोनो जगह बराबर चेक करते रहिएगा

बनवारी रंगी का इशारा समझ गया था और उसने छेद बदल कर वापस से बबीता की गाड़ में लंड डाल दिया और चोदने लगा

बबीता सिसकती रही झड़ती रही

: ओह्ह्ह्ह जमाई बाबू लगता है अब हो जाएगा

: अरे बाउजी पीछे भर दीजिए , क्या पता उससे ही बाहर आ जाए

रंगी के कहने का मतलब बनवारी साफ साफ समझ गई और उसका जोश कई गुना बढ़ गया और उसने अपना लंड बबीता की गाड़ के जड़ में ले जाकर सुपाड़े को हल्का छोड़ दिया

एक के बाद एक पिचकारियां बबीता की गाड़ में छुटती रही और बनवारी हांफता हुआ झटके खाता रहा






फिर जब उसने अपना लंड बाहर निकाला अपने ही वीर्य से सना हुआ

तो इसके साथ ही बबीता की गाड़ ने भी उसका वीर्य उगलना शुरू कर दिया था।

बनवारी हाफ कर बैठ गया सोफे पर और हंसते हुए रंगी को देखने लगा

: उह अब तो निकल गया होगा जमाई बाबू ?

: नहीं निकला होगा तो फिर ट्राई करेंगे थोडी देर में , बेचारी बच्ची के भी घुटने में दर्द हो रहा होगा

रंगी ने बबीता को कहा और वो शर्मा कर मुस्कुरा रही थी ।

जारी रहेगी

( बबीता की गाड़ चुदाई का थ्रीसम कैसा लगा कमेंट करके जरूर बताए ... अभी रात बाकी है और बात बाकी है )
 
अपडेट 036

थे एन्ड ऑफ़ बॉउंड्रीज़

Part : 01






अपडेट मई बे पोस्टेड ों पेज NO 1429

रीड , लाइक्स एंड कमैंट्स
 
💥 अध्याय 02 💥

UPDATE 036


खाने के टेबल पर मदन और मंजू एक दूसरे को मायूस होकर देख रहे थे , मदन की तलब कम होने का नाम नहीं ले रही थी , निशा ने भी एक दो बार उसे मुस्कुरा कर देखा , लेकिन फायदा क्या

मदन जान रहा था खाने के बाद सब अपने अपने कमरे में होंगे ।

हुआ भी वही

डिनर के बाद अमन सोनल और निशा ऊपर चले गए

मंजू ममता के साथ थोड़ी देर किचन के काम निपटा रही थी

ऐसे में मुरारी की निगाहे मदन पास गई

वो उसको इशारे से बाहर चलने को बोला और मदन उठ कर आया

दोनों घर से बाहर निकल कर हाते में आ गए

: क्या बात है मदन कुछ परेशान हो ?

: अब क्या बताऊं भैया !! भाभी को न जाने क्या दुश्मनी है मुझसे

: हाहाहाहाहा लग रहा है फिर से पकड़े गए तुम और मंजू ( मुरारी ने ठहाका लगा कर कहा )

: हा !! ( मदन उखड़ कर बोला )

: वैसे इस बार भी सिर्फ चुम्मी लेते पकड़े गए या बात कुछ आगे भी बढ़ी हाहाहा

: क्या भइया आप भी ( मदन थोड़ा शरमाया )

: अरे यार बोलो न

: क्या बताऊं भइया, आप तो जानते हैं कि मै और मंजू शुरू से फिजिकल थे और वो इतनी जल्दी तैयार हो जाती है कि.... मतलब !!

: उफ्फ मतलब मामला आज काफी हद तक आगे था उम्मम , कपड़े उतर गए थे या फिर ... ( मुरारी ने मुस्कुरा कर मदन को देखा )

: नहीं बस साड़ी उठी थी पीछे से

: हम्ममम मतलब नरम नरम तरबूजा टटोल कर आए हो

: क्या भइया आप भी , मंजू के इतने भी बड़े नहीं हैं। भाभी का तो ?

: क्या भाई ... एक बार फोटो दे दी इसका मतलब थोड़ी की बीवी पर नजर डालोगे ( मुरारी ने छेड़ा उसे )

: क्या भइया मैने तो कभी ऐसा नहीं सोचा

: अच्छा बेटा , अभी कल रात में बाथरूम में जब तुम उसके चूतड़ों को नहलाने की सोच रहे थे वो क्या था उम्मम

मुरारी ने मदन को सुनाया और मदन शर्म से गाढ़ हो गया और मुंह फेर कर हसने लगा

: अब किसे मन नहीं करेगा भइया अगर भाभी जैसी गदराई चूतड़ों वाली औरत मिले तो और भाभी के चूतड़ तो उफ्फफ क्या लग रही थी कल वाली तस्वीर में

: लग रहा है तुझे ममता के चूतड़ कुछ ज्यादा ही पसंद आ गए है उम्मम

: हीहीही अब मै क्या कहूं भइया , सब कुछ तो आप पहले ही सुन चुके हो । लेकिन मेरी किस्मत में ज्यादा से ज्यादा उनकी तस्वीरों को देख कर हिलाना लिखा है और कुछ नहीं

मुरारी मदन की मंशा समझ रहा था

: अरे यार इतना भी निराश मत हो

: मतलब ? ( मदन चौका )

: उम्मम मतलब कुछ उम्मीद तो की जा सकती है

: जैसे कि?

: वो मै बताता हूं अभी बस तू अपने कमरे में रहना

मदन एकदम से उलझ गया और दोनों घर में वापस आए

मुरारी ने हाल में आकर ममता को इशारा किया और ममता समझ गई फिर उसने मंजू को उसके कमरे में जाने को कहा कि वो बिस्तर सही कर ले , वो बस 05 10 मिनट में आ रही है ।

इसके बाद जैसे ही मंजू हटी मुरारी लपक कर किचन में चला गया

: क्या हुआ जी

: क्या हुआ क्या ? अरे आज रात भी क्या मुझे मदन के साथ सोना पड़ेगा ?

: हा क्यों ? ( ममता ने इतरा कर आंखे नचा कर कहा )

: देखो यार मै उसे नहीं झेल सकता ? तुम मंजू को ऊपर भेजो मुझे आज तुम्हारे साथ सोना है ।

: नहीं झेल सकते मतलब ? क्या हुआ क्या? ( ममता ने उलझे हुए लहजे में कहा )

: अरे यार क्या बताऊं मैं , कल रात वो पागल बाथरूम में हस्तमैथुन कर रहा था

: क्या हीहीही ( ममता ने एकदम से अपनी हंसी रोकती हुई बोली)

: हा और तुम इतना उसपर रोक क्यों लगा रही हो । अरे यार एक हफ्ते में शादी है उनकी क्यों परेशान कर रही हो । वो मेरे बगल में लेते हुए लंड हिलाया रहता है रात में

: हीही , हा तो करने दो । शादी के बाद करना ही है वो सब

: और यार बात इतनी भी छोटी नहीं है

: अब क्या है ?

: मैने उससे आज बात की तो कहने लगा कि इसमें भाभी के साथ साथ मै भी जिम्मेदार हूं

: आप क्यों ?

: अरे भाई वो जब महराज जी आने वाले थे और हम दोनो लगे थे कमरे में कैसे वो एकदम से आ गया था

: हा !! हीही ( ममता हस रही थी )

: वो सब उसके दिमाग में चल रहा है तबसे , कह रहा था कि उसे बस किसी तरह से झड़ना है और निकालना है

: हा तो कर लें , बाथरूम तो है न उनके कमरे में

: ओहो तुम समझ नहीं रही हो ममता

: आप साफ साफ बताएंगे कि आप क्या कहना चाहते है ( ममता ने साफ साफ लहजे में कहा )

: मै चाहता हूं कि तुम उसकी थोड़ी मदद कर दो

: मतलब ? ( ममता चौकी )

: देखो शादी तक तुम उसे मंजू के पास जाने नहीं दोगी

: नहीं , कोई सवाल ही नहीं उठता ( ममता ने सिरे से खारिज किया बात को )

: और संगीता भी परसो तक ही आएगी ?

: हा शायद ( ममता ने कहा )

: तो तुम उसकी थोड़ी हेल्प कर दो

: मै लेकिन क्या ? मतलब कैसे ?

: देखो मैने सब सेट कर रखा है

: सेट कर रखा है ? कैसे ?

: देखो अगर वो बस मंजू के बारे में सोच कर हिलयेगा तो सारी रात लगा देगा , खुद भी परेशान रहेगा और मै भी तंग रहूंगा उसके चक्कर में । तो मै एक रास्ता निकाला है जिससे मेरा भी काम हो जाएगा और उसका भी ।

: क्या ?

: हम दोनो को उसके कमरे में सेक्स करना होगा !! ( मुरारी तेजी से बोलकर चुप हो गया )

ममता ने जैसे ही वो सुना उसकी आंखे बड़ी और चेहरे पर मुस्कुराहट फैल गई

: क्या!!! आपका दिमाग ठिकाने तो है ? मै देवर जी के सामने वो सब करूंगी पागल हो क्या ? भक्क

: अरे यार वो सामने नहीं होगा बस बाथरूम से देखेगा ।

: मतलब ?

: मतलब ये कि मदन को ये नहीं पता होगा कि मैने तुम्हे सब बता रखा है , वो बस छिप कर देखेगा और झड़ जायेगा । उसके सामने हमे बस ड्रामा करना है कि मै तुम्हें चुपके से उसके कमरे में लेकर आया हु चोदने ।

: यानी कि देवर जी को ये तो पता होगा कि आप मुझे उसके कमरे में लेकर जाओगे

: हा लेकिन उसकी नजर में उसकी भाभी मासूम और साफ ही रहेगी

: हा लेकिन ये थोड़ा अजीब नहीं होगा , मै तो खुल कर कुछ कर भी नहीं पाऊंगी

: देखो मैने तुम्हारी शर्त मान ली कि तुम उसे मंजू के पास नहीं जाने दोगी और फिर इससे हम लोग भी तो अपनी मस्ती कर पाएंगे । कितना तड़प रहा हूं देखो न

मुरारी ने अपने लंड को पजामे के ऊपर से ममता को पकड़ा कर बोला

: लेकिन अमन के पापा ... मुझे थोड़ी घबराहट सी हो रही है

: तुम चिंता मत करो , तुम कर लोगी मुझे यकीन है और वैसे भी हमने पहले भी उसने देखा है जो तुम ज्यादा मत सोचो

: ठीक है मै जरा एक बार मंजू को देख कर आती हूं तब तक आप देवर जी को .... ( ममता थोड़ा रुकी और मुस्कुरा कर ) भेज दो जहां भेजना है हीही

: ओहो मेरी जान ... जल्दी करना अब रहा नहीं का रहा है ( मुरारी ने ममता के चूतड़ों को सहलाता हुआ बोला )

ममता मुस्कुराई और फिर अपने चूतड़ों को नाइटी में थिरकाते हुए निकल गई । ममता के हटते ही मुरारी खुशी ने गदगद होकर लपक कर मदन के कमरे में गया ।

मदन पहले से ही अपने कमरे में चक्कर काट रहा था और मुरारी को कमरे में देख कर एकदम से उसकी बेचैनी उसके चेहरे पर उभर आई

मुरारी ने उसे देखा और मुस्कराया

: क्या हुआ भैया मुस्कुरा क्यों रहे है

: हो गया

: क्या हो गया ? ( मदन परेशान होकर बोला )

: तू बस जल्दी से बाथरूम में छिप जा

: क्यों ? ( मदन ने पूछा )

: अरे जा न , फिर बताता हूं

मदन जाकर बाथरूम में छुप गया और इधर मुरारी उसके कमरे के दरवाजे पर खड़ा उसकी राह देखने लगा

जैसे ममता आई तो उसने खींच कर अपनी बाहों में भरते हुए कमरे में ले आया

: हीही क्या आप भी , आराम से और सुनिए देवर जी ?

: उसकी चिंता तुम मत करो अमन की मां , मै उसे एक काम से मार्केट भेजा है

: क्या इतनी रात में

: हा .. वो सब तुम छोड़ो न और इधर आओ

मदन दोनों की बात सुनकर समझ गया कि उसके भइया ने उसकी भाभी को पट्टी पढ़ा कर ले आए है । वो आने वाले मार्मेंट को सोच कर एक्साइटेड होने लगा

: उम्मम बड़े रोमांटिक हो रहे है , लेकिन मुझे तो सोने जाना है

: हा तो चली जाना, पहले इसे तो सुला दो

: धत्त क्या आप भी , आप शर्म नहीं आती जहां देखो शुरू हो जाते हो । ये आपके भाई का कमरा है

: तो क्या हुआ , लेकिन तू तो मेरी है न , प्लीज न मेरी जान अब रहा नहीं जाता चूस दे न

ममता थोड़ा हिचकी और उसके मन में मदन के सामने अपने का लंड चूसने के ख्याल से ज्यादा इस बात की शैतानी सूझ रही थी चलो इसी बहाने उसे मदन को तंग करने का एक और मौका मिल जाएगा , आखिर मदन ने उसे ठुकराया था तो ममता ने भी ठान लिया था कि सबक सिखाने का

: उम्मम कितना जल्दी जल्दी आपका मूड हो जाता है

: तुम्हे देख कर तो सारा दिन ये खड़ा था ओह्ह्ह जरा इसे छू कर तो देखो मेरी जान उम्ममम तुम्हारे हाथ सीईईई ओह्ह्ह कितने मुलायम है ओह्ह्ह

मुरारी ने ममता के हाथ पकड़ कर अपने पजामे में बने तंबू पर रख दिया और ममता भी अपने पति के लंड का कड़क अहसास पाते ही सिहर उठी

: उफ्फ मेरी जान आपका कुछ ज्यादा ही टाइट लग रहा है

: एक बार खोल कर तो देख लो , फिर कहना

: अच्छा ऐसा क्या ?

: हम्ममम

फिर ममता ने नीचे बैठ कर उसके पजामे को खोलकर अंडरवियर के ऊपर से उसका लंड सहलाने लगी

: ओह्ह्ह्ह मेरी जान तू छूती है तो मुझे बहुत अच्छा लगता है अह्ह्ह्ह सीईईईईई क्या कर रही है तू उफ्फ






ममता अंडरवियर के ऊपर से ही मुरारी के लंड को अपने होठों से पकड़ने लगी

उसने मुरारी के अंडरवियर की लास्टिक में उंगली फंसा कर नीचे खींचा तो मुरारी का लंड उछल कर उसके सामने आ गया

आज मुरारी के लंड की कसावट कुछ ज्यादा ही नजर आ रही थी , लंड का सुपाड़ा उसके मुंह की कर निशाना साधे तीर की तरह सीधा तना हुआ था

: ओह्ह्ह मेरी जान ओह्ह्ह लेलो न ओह सी ओह हा हा और और ओह्ह्ह्ह सीईईई हा मेरी जान कितना ठंडा है सीईईई ओह्ह्ह

ममता ने मुंह खोलकर उसका सुपाड़ा मुझे में रख लिया था चूसने लगी






ये नजारा देखते ही मदन का लंड अकड़ गया और थूक हलक से नीचे उतरने लगा

सामने ममता बड़े चाव से मुरारी का मोटा लंड चुभला रही थी और मुरारी उसका सर पकड़ सहला रही थी

: ओह्ह्ह मेरी जान तेरी जीभ बड़ी ओह्ह्ह्ह उम्ममम चाट ले मेरी जान ओह्ह्ह कितनी मुलायम ओह मेरी जान घोट जा उफ्फ जी कर रहा है तेरे मुंह में ही पेल कर झड़ जाऊ ओह्ह्ह्ह ले और ले मेरी जान

मुरारी उसके सर को पकड़ कर मुंह में लंड पेलने लगा






जिसे देख कर मदन का लंड और फूलने लगा और वो अपना लंड बाहर निकाल कर सहलाने लगा : उम्मम भाभी मेरा भी चूस लो न

मदन के सिसकियों की आवाज ममता और मुरारी दोनों के कान में पड़ी और दोनों एक दूसरे को देख कर मुस्कुराए

मुरारी ने फिर उसे खडा कर दिया

ममता के भीतर भी अब आग सुलग चुकी थी , आंखों में नशा उठने लगा था

: ओह्ह्ह मेरी जान जरा इसे ऊपर कर न

: सब मुझसे ही कराओगे उम्मम अह्ह्ह्ह्ह सीईईई आराम से

मुरारी ने ममता को घुमा कर बिस्तर पर औंधे किया और ममता चौक गई

फिर मुरारी ने उसके उठे हुए कूल्हे पर अपने पंजे जमा कर सहलाया तो ममता सिसक पड़ी

: उम्मम मेरे राजा सीईईई अह्ह्ह्ह

मुरारी अपने हाथ में लंड थाम कर नाइटी के ऊपर से उसकी गाड़ खोदने लगा

फिर उसने पीछे जाकर अपना लंड उसकी गाड़ में धंसाने लगा जो नाइटी के ऊपर से उसकी दरारों में जाने लगा

ये देख कर मदन का लंड और फौलादी हुआ जा रहा था

: ओह्ह्ह्ह मेरे राजा ऐसे ही डालोगे क्या

: बहुत मन है न

: बहुत सीईईई आपका वो बहुत टाइट है आज घुसा दो न मेरे राजा सीईईई ओह्ह्ह

मुरारी ने पीछे से उसकी नाइटी पेटीकोट समेत उठा दी और उसके नंगे चूतड़ों को सहलाते हुए लंड को उसके गाड़ के दरारों पर रख घिसने लगा ।

: उफ्फ मेरी जान तेरी गाड़ कितनी मुलायम है सीईईई ओह्ह्ह उम्ममम ओह्ह्ह मजा आ रहा है उम्मम

: डाल के देखो न मेरे राजा सीईईई ओह्ह्ह और मजा आएगा

: उफ्फ मेरी जान तेरी चूत कितनी बह रही है

: आपका लंड मांग रही है मेरे राजा डाल दो न अह्ह्ह्ह्ह सीईईई ओह्ह्ह उम्ममम उफ्फ कितना टाइट है , कितना गर्म है मेरे राजा चोदो मुझे अह्ह्ह्ह सीईईईईई ओह्ह्ह्ह डालो अब रुको मत उम्मम भर दो मेरी बुर






ममता अब खुल कर मदन के अरमानों से खेल रही थी और ममता ये रूप देख कर मुरारी को और भी मजा आने लगा , फिर वो तेजी ममता की बुर में अपना लंड डालने लगा और ममता की गद्देदार चूतड़ उसको उछालने लगी

: ओह्ह्ह मेरी जान , कितनी रसीली बुर है तुम्हारी ओह्ह्ह्ह सीई ओह्ह्ह्ह मेरी सेक्सी चुदक्..... ( मदन बोलते हुए रुक गया उसे ममता को मदन के सामने गाली देना जमा नहीं )

: उम्मम क्या हुआ मेरी जान सीईईई कस के पेलो न अपनी सेक्सी चुदक्कड जान को उम्मम अह्ह्ह्ह्ह कितना मजा आ रहा है ओह्ह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह सीईईई ऐसे ही और कस के उम्मम






फिर मुरारी ने उसकी टांगों को उठा कर बिस्तर पर रख कर उसे आगे एकदम झुका दिया और तेजी से उसकी नंगी बड़ी गाड़ को सहला कर तेजी से उसकी बुर में पेलने लगा ।

: हा ले मेरी चुदक्कड जान ओह्ह्ह तेरी बुर कितनी रस छोड़ रही है ओह्ह्ह्ह ऐसा लग रहा है मेरा ऐसे ही निकल जायेगा

उसने एक नजर उसने मदन की ओर देखा और इशारा से पूछा कि क्या वो तैयार है

अब बाथरूम का दरवाजा खोल कर पूरी तरह से अपना लंड हिला रहा था मुरारी के सामने और उसने हा में सर हिलाया

मुरारी ने चुपके से उसको अपने पास आने को कहा

: उम्ममम अमन के पापा ओह्ह्ह रुकिए मत चोदिए ओह्ह्ह सीईईई ओह्ह्ह मेरा हो रहा है ओह्ह्ह्ह उम्ममम और तेज उम्मम

मुरारी अब मदन को अपने ठीक पीछे के खड़ा कर ममता को चोद रहा था

: ओह्ह्ह मेरी जान आज तो तेरी चूत बहुत निचोड़ रही है ओह्ह्ह

: निचोड़ लूंगी ओह्ह्ह अंदर आपको उम्मम

: लेकिन ... मुझे तो तेरी गाड़ को नहलाना है अपने रस से

: उफ्फफ अमन के पापा इसमें तो और भी मजा आएगा ओह्ह्ह्ह जल्दी करो नहला दो मेरी गाड़ को लो

ममता ने अपनी गाड़ को और ऊपर उठाया और चूत में उसका लंड को कस लिया

मुरारी की हालात और खराब हो गई

उसने झट से मदन को कोहनी से इशारा कर आगे आने को कहा

मदन अब अपनी आंखों के सामने अपने भैया को उनकी बीवी की रस छोड़ती बुर में अंदर बाहर होते देखा

: ओह्ह्ह्ह सीई मेरी जान खोल दे अपनी गाड़ मै आने वाला हूं सीईईई ओह्ह्ह्ह फैला दे

ममता ने भी मुरारी की बाते सुनकर जल्दी से अपने पंजे पीछे ले जाकर अपने बड़े बड़े भड़कीले चूतड़ों को पंजों से फाड़ते हुए






: ओह्ह्ह लो मेरी जान भर दो मेरी गाड़ आह सीई कितना गर्म ओह्ह्ह उम्ममम कितना ज्यादा हो रहा है ओह्ह्ह्ह उम्ममम

इधर जैसे ही मुरारी ने लंड बाहर निकाला तो मदन ने अपने सुपाड़े को ढीला कर दिया पिच पिच करती हुई 7 8 मोटी लंबी धार वाली गाढ़ी पिचकारियां उसने ममता के गाड़ के सुराख पर छोड़नी शुरू कर दी






और मुरारी भी ये देख नहीं सका तेजी से लंड को आगे पीछे करते हुए वो भी सीधा ममता की गाड़ पर अपनी धार मारने लगा : ओह्ह्ह्ह उम्ममम ले मेरी जान अह्ह्ह्ह्ह सीईईई ओह्ह्ह





दोनों भाइयों ने अंत तक अपने लंड को ममता की गाड़ पर निचोड़ा और मुरारी ने इशारे से मदन को बाथरूम में जाने को कहा

लेकिन ममता को पहले ही कुछ अंदेशा हो गया था , जैसे कि दो बार मोटी मोटी वीर्य की गर्म पिचकारियों का अहसास और इतना ज्यादा वीर्य उसके गाड़ और चूत से बहना , फिर जाते ही मदन के पैरों ने बहुत हल्की सी आहट की वो

लेकिन ममता कन्फर्म नहीं थी और मुरारी हस कर हफ्ता हुआ उसके पास लेट गया

ममता ने वैसे ही झुके हुए उसका लंड चूस कर साफ किया और फिर लेट गई। पेट के बल






अभी भी उसकी गाड़ दोनों भाइयों के वीर्य से सनी थी , लेकिन ममता चाह कर भी मदन के बाथरूम में नहीं का सकती थी ।

उसने चुपचाप अपनी पेटीकोट से अपनी गाड़ को पोछा और उठ गई

फिर उसने इशारे से मुरारी से कहा कि वो चल रही थी है तो मुरारी खड़ा होकर उसके गाल चूम कर उसे शुक्रिया कहा । ममता ने एक नजर बाथरूम की ओर देखा और मुस्कुरा कर निकल गई

और सीधा कमरे में न जाके पीछे वाले बाथरूम में चली गई , वहां उसने अपने कपड़े निकाले , तो उसका पेटीकोट इतना ज्यादा वीर्य से चिपचिपा हो गया था कि बफ़द कर नाइटी भी गीली हो गई थी

उसने दोनों कपड़े निकाले और अपने चूतड़ों को अच्छे से साफ कर एक तौलिया लपेटा

उसके जहन में ये नाच रहा था कि कही न कही जरूर मुरारी और मदन की सांठ गांठ थी इसमें और उसके चूतड़ों पर सिर्फ अकेले मुरारी ही नहीं मदन भी झड़ा था । उसने तौलिया लपेटा और चुप चाप अपने कमरे ने मंजू के पास चली गई

मंजू कम्बल ओढ़े हुई मोबाइल चला रही थी

जैसे ही उसने कमरे में ममता को तौलिया लपेटे अंदर आते देखा तो उसकी आंखे सन्न हो गई

: भाभी आप ऐसे ?

ममता ने कमरे का दरवाजा बंद किया और बिना कपड़े पहने ही सीधा मंजू के कम्बल में आने लगी

: क्या हुआ ?

: क्या होगा , जैसे तुझे पता ही नहीं कुछ कि कपड़े कब उतारने पड़ते है

मंजू ने आंखे बड़ी कर ममता को देखी और समझ गई कि जरूर ममता मुरारी से चुद कर आ रही है ।

: हा अब तू भी सोच रही होगी न कि खुद मजे करती हूं और तुझे रोकती हूं

मंजू शर्मा कर मुस्कुराने लगी

: क्या भाभी आप , मैने ऐसा तो नहीं कहा

: लेकिन तेरे चेहरे पर लिखा है , कैसी उदास सूरत बना रखी है तूने

मंजू मुस्कुराने लगी

: क्या कर रही थी तू वैसे ? अरे दिखा न

: कुछ नहीं हीही बस आपने कहा न कि उनको थोड़ा तंग करो , परेशान करो तो वही

: अच्छा दिखा तो क्या बातें हुई तेरी

: कुछ ही वो परेशान थे थोड़े बाथरूम में थे कबसे और उनका हो नहीं रहा था तो मैने एक फोटो भेजी थी बस

: कैसी फोटो

ममता ने जिद ही पकड़ ली हो मानो

मजबूरन शर्माते हुए मंजू ने अपना मोबाइल का चैट खोलकर ममता को दे दिया






जिसके मंजू मदन को अपनी ब्लाउज खोलकर अपने नंगी चूचियों की एक सेल्फी सेंड की थी और नीचे थोड़े वीडियो काल भी हुए थे , समय देखकर साफ था कि ममता ने आने से जस्ट पहले ही वीडियो कॉल खत्म हुई थी । ममता ने अनुमान लगाया कि जब वो बाथरूम में थी तो उसी समय मदन और मंजू वीडियो कॉल पर थे । यानी कि अभी भी मंजू ने ब्लाउज बंद नहीं किए होंगे ।

" ओह देवर जी के आज दोनों हाथों में लड्डू थे " , वो खुद से मन में बोली और मुस्कुराई

: सिर्फ फोटो ही या वीडियो कॉल भी

: हा उन्होंने जिद की तो

: जरा दिखाना तो ( ममता ने उसके चूचों की ओर इशारा किया )

: क्या ? धत्त नहीं भाभी अभी मैंने बंद नहीं किए हैं हुक

: अरे दिखा ना , मै भी देखू आखिर ऐसा क्या देख लिया देवर जी ने जो बाथरूम में ही झड़ गए

ममता ने उसके छातियों से कम्बल खींचना शुरू किया और मंजू अपने हाथों से अपनी नंगी छातियां ढकने लगी

: नहीं भाभी धत्त कितनी गंदी हो आप हीही

: अब हाथ हटाएगी कि मैं जबरजस्ती करूं

मंजू ने आंखे बड़ी कर ममता को मुस्कुराते देखा और अपनी पकड़ अपनी नंगी छातियां पर ढीली कर दी

ममता ने एक एक करके दोनों पंजों को उसके चूचों पर से हटाया

एकदम गोल और रसभरे बड़े बड़े नारियल जैसे कड़क चूचे, ममता के मुंह में उनके कड़क निप्पल को देख कर लार घुलने लगी

उसने हाथ बढ़ा कर हौले से उन्हें छुआ

: अह्ह्ह्ह भाभी नहीं

उसकी सांसे बेकाबू थी और इधर ममता के निप्पल तौलिए में उभर आए थे

: कितनी मुलायम है रे तेरे दूध , तभी तो देवर जी बार बार इन्हें पकड़ना चाहते है ( ममता ने उसकी दूसरी तरफ वाली चूची को अपने पंजे में भरते हुए कहा )

मंजू आंखे बंद कर सिसक पड़ी

: उम्मम भाभी बस रुक जाओ न सीईईई प्लीज ( उसने ममता की कलाई पकड़ ली )

: क्यों मन कर रहा है

: आप खुद करके आ गए तो मुझे क्यों परेशान कर रहे हो ( मंजू ने मुंह बना कर कहा और सिसकने लगी क्योंकि ममता ने उसकी छातियों पर हाथ सहलाना जारी रखा )

: तो क्या अब तू भी अमन के पापा के साथ .... ( ममता ने छेड़ा उसे )

: धत्त नहीं क्या भाभी आप भी .... आप तो कुछ सोचते भी नहीं क्या क्या बोल जाते हो अह्ह्ह्ह मत करो न खुजली हो रही है

: तो खुजली कम कर देती हूं

: कैसे ? ( मंजू ममता की आंखों में देखती हूं बोली , उसकी सांसे तेज हो रही थी )

फिर ममता ने अपनी उंगलियों पर थूक लेकर उसने सीधा मंजू के निप्पल पर लगाया और लीपने लगी

: अह्ह्ह्ह भाभी ये उम्ममम ओह्ह्ह क्या कर रहे हो उफ्फफ नहीं ओह्ह्ह्ह

मंजू आंखे बंद कर अपनी छातियां फुलाने लगी , उसकी पीठ अकड़ कर उठ गई हवा में जैसे ही उसने ममता की गीली उंगलियों का स्पर्श पाया अपने निप्पल पर

मौका देखकर ममता आगे सरक कर अपने होठ सीधा उसके पहली चुची पर रख कर उसके निप्पल चूसने लगी ।

मंजू एकदम से पागल हो गई और उसकी सिसकिया तेज होने लगी वो ममता के सर के पकड़ने लगी






: ओह्ह्ह भाभी नहीइइ उम्मम क्या कर रहे हो आप ओह्ह्ह सीईईई ओह्ह्ह मै पागल हो जाऊंगी भाभी रुक जाओ न ओह्ह्ह उम्ममम सीईईई

ममता जरा भी नहीं रुकी , उसने मंजू के निप्पल चूसते हुए , तेजी से जीभ से उसके फ्लिक करने लगी लगी और दूसरा हाथ उसकी दूसरी तरफ की मोटी चुची को खूब मसल कर घुला रहा थी

मंजू की हालत पैर पटकने वाली हो गई , उसकी चूत में जबरजस्त खलबली मची थी और वो अपनी जांघें कसने लगी बिस्तर पर ऐंठने लगी

इधर मंजू ममता की कसमसाहट में ममता के तौलिए की गांठ भी खुल गई थीं और वही ममता के हाथ सरक कर नीचे जाने लगे

: ओह्ह्ह भाभी नहीं वहा नहीं प्लीज

कम्बल के अंदर ही ममता अपने हाथ को मंजू की साड़ी खींच कर उसकी चूत को टटोटलने लगी

: ओह्ह्ह्ह मंजू कितनी गीली है तेरी बुर उम्मम






: सीईईई ओह्ह्ह भाभी अंदर नहीं ओह्ह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह सीईईई कितनी लंबी हैं उंगली आपकी अह्ह्ह्ह मम्मीइई ओह्ह्ह उम्ममम फक्क मीईईई ओह्ह्ह्ह

: चाहिए न तुझे भी उम्मम

: हा भाभी चाहिए , डालो न प्लीज फक्क मीईई ओह्ह्ह सीईईई ओह्ह्ह और और

मंजू की नजर ममता के झूलती नंगी तौलिए से बाहर आ गई चूचियों पर जमी थी






ममता ने फौरन आगे होकर अपनी चूचियों को उसके मुंह पर रख दिया , मंजू ने फौरन उसकी अंगूर जैसी घुंडी को जीभ से लपक लिया और चूसने लगी , जैसे कोई बच्चा अपनी मां की गोद में दूध पी रहा हो

ममता भी एकदम से सिसक पड़ी और वो अब दो उंगलियों को मंजू की बुर में घुसा कर तेजी से अंदर बाहर करने लगी

मंजू अब मुंह में ममता की चूचियां दबाए गूं गूं करने लगी

ममता अपने होठ भींच कर मंजू से अपने निप्पल चुसवा कर तेजी से उसकी बुर में उंगली पेल रही थी






: उम्ममम और चाहिए न अह्ह्ह्ह्ह पी ले ओह्ह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह सीईईई

ममता तेजी से उसकी बुर में पेलने लगी और मंजू अब अपने कूल्हे झटकने लगी , ममता को महसूस हुआ कि मंजू की बुर उसके उंगलियों को खींच रही है

तो ममता ने उंगलियों की बाहर कर उसके बुर के फांकों पर उंगलियों की रगड़ने लगी

: उम्ममम भाभी हा हा आएगा उम्मम ऐसे ही रुकना मत ओह्ह्ह ओह सीईईई हा भाभी ओह्ह्ह्ह मम्मीईईई ओह्ह्ह्ह यशस्स अह्ह्ह्ह्ह सीईईई ओह्ह्ह उम्ममम ओह्ह्ह

मंजू में बिस्तर पर मानो भूडोल खड़ा कर दिया था , पूरा पलंग हिलकोरे खा रहा था और मंजू की सिसकिया चीखों के बदल गई थी ममता ने उसको कस लिया था अपनी बाहों में

फिर एकदम से चुप्पी सी छा गई

मंजू सुस्त सी होने लगी और थोड़ी नजरे चुराने लगी , मुस्कुरा कर उसने कंबल में अपना चेहरा छिपा लिया लाज के मारे

ममता ने मुस्कुरा कर उसको बाहर निकाला और उसके माथे को चूम कर बोली : पगली क्या शर्मा रही है

मंजू ने एक नजर मुस्कुराती हुई ममता को देखा और वापस से शर्मा कर उससे लिपट गई

: हीही तू भी न एकदम बच्ची है

वो कुछ नहीं बोली बस सुनती रही और जल्द ही दोनों सो गए

लेकिन उसी घर में दूसरे कमरे में अगल ही कहानी गढ़ी जा रही थी

: तो अब क्या कहती है तेरी किस्मत उम्मम

: अह्ह्ह्ह्ह भइया सच कहूं तो ऐसा कभी सोचा नहीं कि आप मेरा सपना यूं हकीकत बना देंगे

: अरे छोटे तू भाई है मेरा ,जब तेरे लिए दुनिया के कोने से तेरा प्यार खोज सकता हूं तो ये फिर बहुत छोटी सी बात थी

मदन मुस्करा रहा था और खुश था कि मुरारी उसका बड़ा भाई है

: भइया आपको अजीब नहीं लगा

: क्या ?

: वही जब मै भाभी के ऊपर निकाल रहा था ( मदन हिचक कर बोला )

: हाहाहा मेरी छोड़ तू बता तुझे कैसा लगा ममता के चूतड़ों पर झड़ते हुए

: सच कहूं भइया सीईईई अभी भी वो नजारा सोच कर मेरा खड़ा हो रहा है , कितनी गुलाबी थी

: क्या चूत या गाड़ ?

: उम्मम दोनो ओह्ह्ह्ह भैया और अपने तो इतना तगड़ा पेला भाभी को कि उनकी बुर कैसे लाल हो गई थी और भाभी भी कैसे जोश में आ गई थी एकदम

: हाहाहा हा वो ममता का ऐसे ही है , बड़ी चुदासी औरत है , उसका असल रूप तब देखने को मिलता है जब लंड उसकी बुर में घुसा हो

: हा भइया देखा मैने , कैसे जल्दी जल्दी मांग रही थी

मुरारी समझ रहा था कि मदन को ममता बहुत पसंद आ गई है । वो बस उसको सुन रहा था

: भइया एक बात पूछू

: हा बोल न

: क्या आपने कभी भाभी को पीछे से किया है

: उम्मम हा किया तो है लेकिन उसका पीछे का छेद बहुत कसा है तो जल्दी वो तैयार नहीं होती , बहुत मनाना पड़ता है उसे , अच्छे से उसकी सुराख को चाट चाट कर गीली करता हूं फिर कही करने देती है

: उफ्फ भइया ऐसी गाड़ चाटने को मिले तो मै घंटों मुंह न हटाऊँ

: हाहाहा तू भी न

तभी मदन के मोबाइल की स्क्रीन जली ये वही वक्त था जब मंजू ने उसे मैसेज किया था । फिर मदन मुरारी से इजाजत लेकर बाथरूम में निकल जाता है

राज के घर

अनुज अपनी मां के कमरे में बेचैन था

लोवर में बना बड़ा सा तंबू लिए वो अपने लंड को खुजा रहा था

उसकी मां रागिनी को कमरा छोड़ कर राज के पास गए 20 मिनट से ऊपर हो गए थे ।

लेकिन उसकी बेतहाशा आंखों को एक झलक तक नहीं मिली

अब राज या रागिनी किसी ने तो कमरे की कड़ी लगा दी थी अंदर से

राज का कमरा एकदम सील बंद था

अनुज को थोड़ा अपनी मां पर गुस्सा आ रहा था तो थोड़ा अपने भाई राज पर

जरूर राज ने ही उसे तंग करने के लिए ऐसा किया होगा, मम्मी क्यों करेंगी बंद ... वो तो मान गई थी और उन्होंने तो मुझे अपने दूध सीईईई ओह्ह्ह मम्मी खोल दो न ओह्ह्ह्ह कितना मन है देखने का

प्लीज गॉड कुछ करो न, कुछ आइडिया दो न

अनुज लगातार खुद से बड़बड़ाया जा रहा था

घड़ी देखी तो रात गहरा रही थी कांटा 09 का घंटा पार कर चुका था ,


यार इससे भइया का मोबाइल मांग लिया होता कम से कम लाली से कुछ बात होती

अरे हा भइया का मोबाइल .. हॉटस्पॉट , यश

अनुज के भीतर एक नई उमंग उठी और वो खिल कर अपनी मां के कमरे से बाहर आया

फिर खुद शांत करता हुआ दरवाजे के पास खड़ा हुआ

अंदर रागिनी और राज की फुसफुसाने और खिलखिलाने की आहट मिली , थोड़ी राज की मस्ती तो ज्यादा रागिनी की सिसकती हंसी

: उम्ममम तू भी पागल है अह्ह्ह्ह दैय्या काट मत नहीं तो चली जाएंगी अनुज के पास

: हीहीही अच्छा जाकर तो दिखाओ उम्मम कितनी सॉफ्टी दूध है मम्मी आपके उम्ममम

: सीईईई ओह बेटा उम्मम अह्ह्ह्ह्ह आराम से ओह्ह्ह्ह तेजी जीभ बड़ी तेज ओह्ह्ह्ह सीई कितना गिला करता है तू ओह्ह्ह

अंदर की उत्तेजना से भरपूर संवाद सुनकर अनुज का लंड एकदम फड़फड़ाने लगा और एक पल को तो वो थम ही गया कि बस सुनता ही जाए

आंखे बंद कर वो कमरे के अंदर की उस कामुक नजारे की कल्पना में मस्त होकर अपना लंड सहलाने लगा कि कैसे बिस्तर पर उसकी मां लेटी होगी और उसका राज भइया उसकी मां की साड़ी उसके दुधारू नंगी छातियों से हटा कर उनके ऊपर चढ़ कर उनकी भूरी निप्पल को चाट रहा होगा






अनुज लगातार अपनी सांसे कंट्रोल कर रहा था , लंड ऐसे फूल रहा था मानो आग की लपटें उगलने को बेताब हो

उसपर से टाइल्स वाली फर्श पर उसके नंगे पैर , जिस्म में सिहरन बढ़ा रहे थे

ना चाहते हुए भी आखिर उसने खुद को तैयार करते हुए दरवाजे पर दस्तक देने का निर्णय लिया

: मम्मीईईई ( एक दम से अनुज को उसकी भूल का अंदाजा हुआ , उसे राज को आवाज देनी थी )

अंदर की हलचल एकदम से थम गई और हल्की फुसफुसाहट आई

: क्या हुआ अनुज ? ( रागिनी ने आवाज दी )

अनुज को लगा था कि दरवाजा खुलेगा लेकिन कोई रिस्पोंस न मिलने पर उसने उदास मन से बोला

: भइया से कहो न हॉटस्पॉट ऑन कर दे , मुझे काम है थोड़ा

फिर थोड़ी देर बाद ही रागिनी की आवाज आई कि वाईफाई ऑन है कनेक्ट के ले वो ।

अनुज मन गिरा कर अपनी मां के कमरे में आ गया , अब झूठ पकड़ा न जाए इसीलिए उसने लैपटॉप पर डाटा कनेक्ट कर लिया।

लेकिन उसका मन कुछ करने का नहीं था , फिर उसने कुछ सोच कर इंस्टा खोल कर लाली के मैसेज चेक करने का सोचा ।

Inbox ओपन करने की देरी थी कि लंबी चौड़ी मैसेज की बौछार थी

Yaar, Mai kya karu is Pooja ka ...

Ab iska Naya drama ho gaya hai ..

Tum kaha ho baby ?

Kab aaoge ? Miss you Jaan

Mujhe tumse bahut jruri bat karni hai plzz reply kro !! 😔

लाली को परेशान देख कर अनुज की हालत खराब होने लगी उसने जल्दी से मैसेज टाइप कर रिप्लाई करने लगा

: hiii

उसके मैसेज करने की देरी थी कि लाली ने तुरंत रिप्लाई दिया

: hyy kaha the Babu, miss you 😘

: sorry yaar dinner kar raha tha bolo , kya bat hua ab ? Kya Kiya pooja ne ?

: yaar maine btaya tha na ki uski nazar meri mom par hai

: Ha ( अनुज को याद आता है कि लाली ने बताया था कि पूजा उसकी मां के जिस्म के लिए पागल है और उसके साथ हमबिस्तर होना चाहती है ) kya hua ?

: usne mujhse break-up ke liye ek shart rakhi hai

: kya ? Kaisi shart !! ( अनुज का दिल धड़का )

: wo chahati hai ki Mai uski help krun meri mom aur uski friendship karwane me 😔 kamini ab aise behave kr rahi hai mere sath

अनुज में मन में लाली को लेकर संवेदना बढ़ रही थी लेकिन ये सही समय और सही प्लेटफार्म नहीं था ऐसी गंभीर बात के लिए और उसने लाली को कल मिल कर बात करने के लिए कहा और फिर जल्दी से लैपटॉप वैसे ही बिस्तर पर छोड़ कर राज के कमरे के दरवाजे पर आ गया

अपनी धड़कने थाम कर उसने दरवाजे पर कान लगाया तो राज के सिहरन भरी सिसकी आई

: सीईईई ओह्ह्ह मम्मीइई उम्ममम और उफ्फफ फक्क ओह्ह्ह

अनुज का लंड वापस से अपने आकार में आ गया और उसने वापस से दरवाजा खटखटाया

इस बार राज खीझ कर तेज आवाज में बोला : क्या है ?

फिर रागिनी की हल्की फुसफुसाहट आई

: भइया नेट नहीं चल रहा है दरवाजा खोलो न

अंदर कुछ हलचल हो रही थी और राज उठ कर आया और दरवाजा खोला

सामने देखा तो राज एक तौलिया लपेटे उसके सामने था , जिसमें उसके लंड का आकार साफ उभरा था । बिस्तर के किनारे रागिनी की साड़ी और पेटीकोट दोनों पड़ी थी और रागिनी कंबल में थी

: क्या हुआ ? तू लैपटॉप पर पढ़ रहा है कि फिल्म देख रहा है जो नेट नहीं चल रहा है

: नहीं चल रहा है तो क्या करूं

: राज !!! ( रागिनी ने राज को टोका) मोबाइल दे दे बेटा

एक पल के लिए राज मोबाइल देने के लिए हिचका लेकिन फिर उसने जल्दी जल्दी अपना व्हाट्सअप सिक्योर कर मोबाइल अनुज को देकर दरवाजा तेजी से लगाते हुए मुड़ने को हुआ

अनुज इससे पहले ही दरवाजे के गेट पर अपनी एक पेन की कैप को सेट कर दिया था और जैसे राज ने दरवाजा लगाया वो पूरी तरह से बंद नहीं हुआ और राज बिना उसपर ध्यान दिए अंदर चला गया

: क्यों नाराज हो रहा है छोटा भाई है न , तू इधर आ जरा खोल तो इसे उम्मम

: सीई ओह्ह्ह्ह सक इट यश उम्मम चूसिए मम्मी ओह्ह्ह्ह गॉड फक्क ओह्ह्ह सीईईई और और ओह्ह्ह कितना सॉफ्टी लग रहा है मम्मी

राज के तेज सिसकिया सुनते ही अनुज का लंड अकड़ गया और वो उसको सहलाने लगा

कमरे से आती आवाजें उसके भीतर वासना का गुबार उठा रही थी

उसने हिम्मत कर उंगली से हलका सा जोर दिया और दरवाजा खुल गया

और अंदर का नजारा देख कर अनुज ने कस कर अपना लंड भींच लिया






अंदर उसकी मां रागिनी बेड पर अपने चूतड़ हवा में उठा उसके भइया का मोटा लंबा लंड चाट कर उसे चूस रही थी

अनुज के भीतर एक सिहरन सी हुई , मानो कामोत्तेजना ने उसे झकझोर दिया हो और वो अपना लंड निकाल कर सहलाने लगा

: यश उम्मम ओह्ह्ह मेरी सेक्सी मम्मा ओह्ह्ह्ह उम्ममम और अंदर उम्मम ओह्ह्ह्ह और डिप उम्मम ओह्ह्ह्ह सक इट ओह्ह्ह गॉड फक्क यश यश उम्मम चूसो मम्मीई सीई ओह्ह्ह






राज रागिनी का सर पकड़ कर अपने लंड पर दबा रहा था और रागिनी अपने चूतड़ों को और ऊपर उठाती हुई लंड को मुंह में गले तक ले गई और यही उसकी नजर दरवाजे के गैप आती कुछ हलचल पर हुई

वो समझ गई कि अनुज बाहर ही खड़ा उसको देख रहा था और एकदम से उसमें कुछ बदलाव होने लगे , उसकी बुर जो कबसे शांत थी उसकी कुलबुलाहट बढ़ने लगी उसके राज को ऊपर पर उसके ऊपर चढ़ गई और चूतड़ों को दरवाजे की ओर रखते हुए राज का लंड अपनी बुर के रख दिया

: अह्ह्ह्ह सीईईईईई ओह्ह्ह्ह उम्मम हाय दैय्या कितना टाइट है ओह्ह्ह्ह उम्ममम

: उफ्फ मम्मी कितनी गर्म है आपकी बुर अन्दर से ओह्ह्ह्ह कितना रस छोड़ रही है ओह्ह्ह लग रहा है जैसे मेरा पिघल जाएगा उम्मम अह्ह्ह्ह्ह

अनुज लगातार लंड हिलाते हुए अंदर का नजारा देख रहा था और राज की कहे एक एक शब्दों को उसके अनुभवों को खुद से जोड़ रहा था कि क्या होता अगर उसकी मां की गर्म रसभरी बुर में उसका मोटा टाइट लंड जाता

ये सोचते ही अनुज ने कस कर अपने लंड को भींच लिया और मानो नसों को थाम रहा हो ।

रह रह कर उसकी काम कल्पनाएं उसे झड़ने के करीब ला देती और वो कभी अपने लंड को भींच कर तो कभी अपने चूतड़ों को टाइट कर कभी कभी लंबी गहरी सांस लेकर नंगी टाइटल पर टहल कर अपने आवेग को शांत करता था।






लेकिन कमरे में राज के लंड पर उछलते रागिनी के मोटे मोटे गद्देदार चूतड़ और उसकी मां की मादक सीसीकिया

: सीईईई उम्ममम अह्ह्ह्ह कितना गर्म है तेरा बेटा ओह्ह्ह्ह मै तो ऐसे ही झड़ जाऊंगी ओह्ह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह राज के पापा उम्ममम ओह्ह्ह

: याद है आपको ऐसे ही तो पापा के सामने चोदा था आपको उम्ममम सीईईई ओह्ह्ह मम्मी ( राज ने रागिनी को अपनी ओर खींच लिया और उसके चूतड़ों को थामते हुए नीचे से अपनी कमर उछालने लगा )






: ऊऊऊ ओह्ह्ह्ह हा बेटा चोद ऐसे ही रुकना मत उम्ममम अह्ह्ह्ह सीईईई ओह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह और और हम्मम हम्ममम ओह्ह्ह्ह सीईईईईई तेज और तेज ओह्ह्ह्ह बेटा ऐसे ही ऐसे ही हा , आ रहाअअ है मेरा ओह्ह्ह्ह बेटा मेरा बच्चा चोदता रहा रुकना मत पेल अपनी मम्मी को

"पेल अपनी मम्मी को "

इन शब्दों ने अनुज के वासना से लबालब ज्वालामुखी को फोड़ दिया और वो आंखे बंद कर अब लंड को पकड़ कर भी , अपने चूतड़ों को टाइट कर भी उन्हें रोक नहीं सकता था

एक के बाद एक मोटी थक्केदार पिचकारियां छूटने लगी






कुछ दरवाजे पर तो ज्यादातर फर्श पर

एक हाथ से उसने अपना मुंह पकड़ लिया कि सिसकियां कमरे तक न जाए और राज के कमरे की बाहरी दिवाल से सट कर अपना लंड हिलाता रहा जबतक कि आखिरी बूंद तक नहीं बाहर आ गई

फिर वो हांफता रहा और उसके शरीर सुस्त होने लगा , सुबह से आज ये तीसरी बार था कि वो इतना ज्यादा झड़ गया था ।

उसने एक कपड़े से फर्श साफ किया और कमरे में अंदर अपने भाई और मम्मी को भी हांफते देखा

उसकी मां अब भी उसके भाई के ऊपर थी और राज के लंड से निकला वीर्य उसकी मां के चूतड़ों पर चमक रहा था और दोनों वैसे ही बातें कर रहे थे

अनुज बस चुपचाप चला गया अपनी मां के कमरे में बिस्तर पर बैठा हुआ

मन में अभी भी अपनी मां को पाने की चाहत लेकिन शरीर ढीला पड़ गया था ,

लंड की मांसपेशियों में लंड समय से अकड़ने का दर्द अब उसे थोड़ा थोड़ा महसूस हो रहा था

एक झपकी लेने का ख्याल और

टिक टिक टिक टिक ...... चौक कर उठा वो

समय देखा अभी तो साढ़े 10 ही बज रहे थे , पास रखा पानी का गिलास ठंडा ही गटक गया और उसे भूख लग रही थी

वो उठ कर निकला सिर्फ अपने लोवर में किचन में कुछ खाने को मिल जाए

इस बात से बेखबर कि वहां रागिनी भी आ जाएगी

जारी रहेगी
 
108 पोल वोटर्स : 17 लाइक्स

:अप्प्लायसे: :applause::applause::applause::applause::applause::applause::applause::applause::applause::applause::applause::applause:
 
अब भीख मांगना पड़ेगा सबसे कि कहानी को सपोर्ट करो



इग्नोर लिस्ट ही अपडेट करना पसंद करूंगा

LAST 05 UPDATE पर जिनके लाइक आए होंगे वही रहेंगे पढ़ने वाले :declare:


बाकी सब ब्लॉक होंगे पोल वोटर्स 😒

सेटिंग बदलने का वक्त आ गया है
 
अपडेट 037

थे एन्ड ऑफ़ बॉउंड्रीज़

PART 02






UPDATE IS POSTED ON PAGE NO 1441

पढ़ो और हिलाओ

लाइक कमेंट तो तुम लोगो से होने से रहा

LOW STAMINA वाले मतलबी READERS :buttkick:
 
💥 अध्याय 02 💥

UPDATE 37



चमनपुरा

रात की सर्दी गहरा रही थी और साथ ही अनुज के देह की थकान भी

राज के कमरे में फुसफुसाहट अभी भी जारी थी , थोड़ी बहुत हसने की और ज्यादा तर रागिनी की खनकती हंसी

अनुज को भूख लगी थी और चुपचाप किचन में चला गया

चार पांच मुठ्ठी मूंगदाल वाली नमकीन , 3 4 कुरकुरे बिस्किट चबाने के बाद वो पानी पी रहा था बॉटल से

तभी हाल में पायलों की खनक तेज हुई

जैसे जैसे पायलों की रुनझुन उसके कानो में तेज हो रही थी , एक बेचैनी एक हड़बड़ाहट अनुज के भीतर बढ़ रही थी और वो तेजी पानी बॉटल से सीधे गले में उतार रहा था

तभी एकदम से उसे अपने पीछे आहट महसूस हुई पलट कर देखा तो सामने उसकी मां रागिनी खड़ी थी , उसके ख्यालों की मल्लिका की तरह निर्वस्त्र , देह पर बस एक पैंटी , वही पैंटी जो उसने राज के पास जाने से पहले अपने कमरे में अनुज के सामने उतार फेंकी थी

अनुज अपना मुंह फुलाए आंखे बड़ी कर चौकन्नी निगाहों से अपनी नंगी मां को अपने सामने ऊपर से नीचे देख रहा था , उसकी बड़ी बड़ी रसीली नंगी छातियां , गोरा बदन, गुदाज मुलायम पेट , चौड़ी घुमावदार कमर , उठे हुए चर्बीदार कूल्हे और चिकनी गदराई जांघें और वो पैंटी जिसमें रागिनी की फूली हुई चूत साफ नजर आ रही थी

अनुज की नजर अपनी मां की पैंटी पर जम गई , सीईईई एक पल के लिए चुक गया , कमरे में होता तो मां की नंगी बुर के दर्शन हो जाते

देह अंदर से चूर चूर हुआ था लेकिन लंड वापस से लोवर में सलामी देने के लिए तैयार खड़ा था






रागिनी उसकी निगाहों का पीछा कर अपनी नंगी छातियो को हाथों से ढक लिया और मुस्कुरा कर : यहां क्या कर रहा है तू

: मै तो पानी पीने आया था और आप ?

रागिनी मुस्कुरा कर उसे देख रही थी और उसके नंगे तलुओं से सर्दी उसके पूरे बदन में फैल रही थी

: मै भी पानी लेने आई हूं

: तो लेलो !!

अनुज बोटल देकर आगे बढ़ा

दोनों की नजरे मिली , मानो दोनों कुछ चाहते थे

: क्या कर रहा है

: बस थोड़ा हग

: पागल आजा, मेरा बच्चा






रागिनी ने नंगे ही आगे बढ़ कर उसको अपनी बाहों में भर लिया और उसकी नंगी चूचिया अनुज के सीने पर चिपक गई

अपनी मां की नंगी पीठ को सहलाने का मौका नहीं छोड़ने वाला था अनुज

: उम्मम तेरे हाथ बहुत ठंडे है बेटा

: और आप बहुत गर्म हो मम्मी ओह्ह्ह्ह , कितनी मुलायम हो आप

: उम्मम क्या कर रहा है पागल ओह्ह्ह छोड़ न

: सीईईई करने दो न मम्मी मुझे भी , मै भी बड़ा हो गया हूं

: अच्छा सच में अह्ह्ह्ह तो क्या अब तू मेरे चूतड़ों को सहलाएगा अह्ह्ह्ह सीईईईईई ओह्ह्ह्ह बेटा

: मै तो इन्हें ऐसे फैलाऊंगा भी ओह्ह्ह्ह कितनी मोटी गाड़ है मम्मी आपकी बहुत सेक्सी






अनुज अपनी मां को हग कर अपने नंगे पंजे रागिनी के नंगे चूतड़ों को टहलाने लगा

: धत् बदमाश ऐसे गंदे गंदे बोलेगा उम्मम अह्ह्ह्ह्ह सीईईई ये क्या है ?

: नुनु मेरा उम्ममम ( अनुज ने रागिनी की उंगलियों को अपने लंड के पास सरकते महसूस कर बोला )

: कितना टाइट है ओह्ह्ह्ह

: आपको और भइया को देख कर अह्ह्ह्ह सीईईईईई मम्मीइई ओह्ह्ह्ह दर्द हो रहा है

: क्यों ?

: कबसे खड़ा है न इसीलिए

: चल झूठा , दरवाजा गीला किया तब भी छोटा नहीं हुआ तेरा उम्मम

: हीही ( अनुज शर्माने लगा जब रागिनी ने उसको चोरी पकड़ी)






: इसको नीचे कर थोड़ा आराम मिलेगा ( ये बोलकर रागिनी ने उसका लोवर नीचे सरकाते हुए बैठ गई और अनुज को एक उम्मीद सी उठने लगी )

: ओह्ह्ह्ह मम्मीईईई उम्मम ( अनुज का लंड उसके अंडरवियर में अब फूल रहा था और रागिनी भी साफ साफ देख रही थी )

: कैसे सांस ले रहा है ये तो ( रागिनी ने उंगलियों से छू कर उसे अंडरवीयर के ऊपर से सहलाया )

: ओह्ह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह आराम से मम्मीइई ओह्ह्ह्ह

रागिनी के नंगे घुटने पर ठंडी फर्श की टाइल चुभ रही थी और उसका पूरा जिसम ठंडा पड़ रहा था , वो समझ रही थी कि उसका लाडला बहुत बेचैन है और उसे तत्काल आराम की जरूरत है

रागिनी उठ गई

: क्या हुआ ? ( टूटती निराशा में उम्मीद बांध कर वो बोला )

: चल !!

: कहा ?

रागिनी कुछ नहीं बोली और वैसे ही नंगी अनुज का हाथ पकड़ अपने कमरे की ओर बढ़ गई






अनुज का लोवर अभी भी उसके घुटनों में फंसा हुआ था , किसी तरह वो फंसता अटकता रागिनी की उंगलियों को थामे वो उसके कमरे तक आया

अपने आगे अपनी मां की नंगी थिरकती चूतड़ों को निहारते हुए

रागिनी कमरे आई और फिर कमरे का दरवाजा लगा दिया

: चल इसको निकाल कर लेट जा

अनुज को समझ नहीं आया कि आखिर उसकी मां ने उसको सोने के लिए कहा कि उसका इरादा कुछ और है

डर यही था कि आंखे बंद कर सो जाने का फरमान न हो जाए

रागिनी ने अनुज के टीशर्ट और लोवर निकाल कर सिर्फ अंडरवियर में होने की राह देखी और जब वो कम्बल के गया तो खुद भी उसके पास आ कर उसके बराबर में लेट गई करवट होकर

थोड़ी देर उसने अनुज को शांत और अपनी ओर घूरते देखा , फिर मुस्कुराई और अनुज की थोड़ा चिढ़ गया और भुनकने लगा

: उम्हू करो न

: क्या करूं ( रागिनी मुस्कुराई )

: सच में दर्द हो रहा है

: कहा ? यहां !! ( रागिनी ने हाथ आगे कर उसके अंडरवियर में बने बड़े से तंबू को सहला कर कहा )

: ओह्ह्ह्ह हा वही उसको बाहर निकाल दो

: तू न राज से भी बढ़ कर है , ओह्ह्ह देखो तो कितना टाइट कर रखा है । कितना बदमाश है तू दरवाजा खुलवाने के लिए कितना तिगड़म लगाया तूने उम्मम

: आह्ह्ह्ह सीई तो आपने बंद क्यों किया था

: मैने नहीं , राज ने किया था ओह्ह्ह देखो तो कैसे लाल हो रखा है सीईईई ओहो कबसे रगड़ रहा था तू इसे उम्मम ( रागिनी हौले हौले अनुज का लाल हुआ लंड आगे पीछे कर रही थी )

: जबसे आप गए तबसे , ओह्ह्ह्ह कितना मन था मेरा देखने का , दरवाजा बंद था तो सब कुछ सोचने लगा था

एक पल को रागिनी ठहरी और उसे भी जिज्ञासा हुई कि अनुज क्या सोच रहा था उसके बारे में

: क्या सोच रहा था उम्मम बोल ( रागिनी ने उसका सुपाड़ा खोलते हुए बोली )






: ओह्ह्ह्ह मम्मीईईई अह्ह्ह्ह सीईईईईई उफ्फफ उम्ममम

: बोल न , क्या सोच रहा था

अनुज एक नजर रागिनी को देखा फिर मुस्कुराने लगा

: अच्छा सच सच बताना , भैया आपकी साड़ी हटा कर दूध पी रहा था न ( अनुज ने मासूमियत से पूछा )

: हम्ममम ( रागिनी मुस्कुरा कर बस हुंकारी भरी और अनुज का लंड उसके हथेली में फुदका )

: मुझे लगा ही था

: और क्या सोच रहा था

रागिनी के लंड को सहलाते हुए बोली

: फिर भैया की आवाज आ रही थी और उसे सुनकर लगा कि आप भैया का चूस रहे होगे

: हम्ममम तो गीला करना पड़ता है न ( रागिनी ने थोड़ा सा मौका दिया आगे आने का )

: हम्ममम फिर आपको देखा दरवाजे से आप भइया का मुंह में ले रहे थे और भैया आपका गाड़ छू रहा था

रागिनी अनुज को बोले जा रहे एक एक शब्द में उसके लंड की नसों की पंपिंग महसूस कर रही थी अपनी हथेली में

: हा तो दुकान पर तेरा भी तो किया था न ,

: हम्ममम लेकिन आपको देख कर मेरा भी मन किया कि मै भी अंदर आजाऊँ और आप मेरा भी चूसो साथ में

: क्या साथ में !!! पागल है क्या ?

: क्यों ? साथ में नहीं कर सकती हो ( मन ही मन अब अनुज के दिल में एक नई कल्पना ने अपनी जगह बना ली थी और उसे सोच कर उसका लंड फनकार मारने लगा )

: तू ज्यादा नहीं सोच रहा था ( रागिनी ने अनुज के लंड की बढ़ती मोटाई को अपने पंजों में महसूस किया )

: उम्मम तो क्या हुआ , आप कर लोगे मुझे पता है ? अह्ह्ह्ह सीईईईईई मम्मी सहलाओ न कस के

: दर्द होगा तो ?






: अब नहीं हो रहा है ओह्ह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह मम्मीइई आपका हाथ बहुत सॉफ्ट है उम्ममम अह्ह्ह्ह सीईईई

रागिनी बस शांति से उसका लंड सहलाने लगी

: मम्मी ?

: हम्ममम !!

: बोलो न !

: क्या ?

: चूसोगे मेरा और भैया का साथ में ( अनुज के लंड की नसे अब फूल गई थी और खून मानो में उसके लंड में भर आया या , रागिनी उसके लंड की गर्मी महसूस कर रही थी )

उसके दिल की धड़कने तेज हो गई और उसके दिल में भी इच्छा होने लगी , अनुज के दिखाए सपने उसके जहन में घर करने लगे , उसने कस कर भींच लिया अनुज एक लंड और सहलाने लगी

: बोलो न मम्मीईईई ओह्ह्ह्ह प्लीज जल्दी ओह्ह्ह्ह

: लेकिन मैने कभी किया नहीं बेटा , राज ने कितनी बार मुझे तेरे पापा के बगल में चोदा है , लेकिन कभी मैने साथ में नहीं किया दोनों के

: ओह्ह्ह्ह गॉड फक्क यश ओह्ह्ह्ह मम्मीईईई तो क्या हुआ एक बार ट्राई करो न प्लीज मेरे लिए ओह्ह्ह्ह यशस्स अह्ह्ह्ह्ह मम्मी प्लीज न

: उम्मम ठीक है

: ओह्ह्ह्ह कब करोगी मम्मीइई ओह्ह्ह्ह यशस्स अह्ह्ह्ह्ह बोलो न जल्दी उम्मम बताओ न जल्दी ओह्ह्ह्ह आएगा मेरा बोलो न मम्मी

: कल

: ओह्ह्ह्ह गॉड फक्क यश उम्मम ओह्ह्ह्ह सीईईई ओह्ह्ह मम्मीइई ओह्ह्ह्ह आ रहा है ओह्ह्ह्ह हिलाओ उम्ममम सीईईई ओह्ह्ह मम्मीइई ओह्ह्ह्ह






एक बाद एक मोटी थक्केदार गाढ़ी पिचकारियां छूटने लगी और अनुज का लंड वीर्य उगलने लगा और झड़ता रहा अपने ही पेट और और रागिनी उसके लंड को निचोड़ती रही

एक ओर जहां रागिनी अगली सुबह दो लंड एक साथ लेने सपने संजो रही थी

वही दूसरी ओर शहर की सुनसान रातों में रज्जो उस सपने को हकीकत में बुनने जा रही थी

खुशबू का मोटा लंबा लंड उसकी गाड़ की सुराख को चौड़ी करता हुआ उसे करवट कर पेले जा रहा था

रज्जो की कामुक चीखे पूरे कमरे में गूंज रही थी






वही कमरे के दरवाजे पर खड़ी मुस्कान का लंड अकड़ कर फूल रहा था

रज्जो की नजर उस पर पड़ी और मुस्कुराकर उसने मुस्कान को अपनी ओर बुलाया

मुस्कान जल्दी ही अपने कपड़े निकाल कर अपनी पैंटी से अपना लंड बाहर निकालती हुई रज्जो के मुंह के पास खड़ी हो गई






रज्जो जो पीछे से अपनी गाड़ में खुशबू के करारे झटके खा रही थी वो मुंह खोलकर मुस्कान का सुपाड़ा मुंह में पकड़ने की कोशिश करने लगी तो मुस्कान ने खुद अपना लंड को उसके होठों तक ले गई , रेंज में आते ही रज्जो ने जीभ आगे बढ़ा कर उसके सुपाड़े को होठों में दबोच लिया

: ओह्ह्ह्ह सेठानी जी उम्ममम अह्ह्ह्ह सीईईई

अब तो रज्जो को बहुत मस्कत की जरूरत नहीं थी , पीछे से खुशबू चिंघाड़ कर रज्जो की गाड़ में तगड़े झटके मार रहा था और रज्जो के मुंह में खुद ब खुद मुस्कान का लंड गले तक जाने

: ओह्ह्ह्ह यशस्स उम्ममम और डाल साली कुतीया का मुंह भर दे पूरा ओह्ह्ह्ह सीईईई साली क्या रसीली गद्देदार गाड़ है तेरी ओह्ह्ह बहनचोद उम्ममम खूब उछाल रही है ओह्ह्ह और अंदर डाल में मादरचोद






खुशबू ने मुस्कान को डाटा तो मुस्कान ने रज्जो का सर पकड़ कर उसके मुंह में पेलने लगी

: ओह्ह्ह्ह यशस्स अह्ह्ह्ह्ह सीईईई और चूस सेठानी उम्मम अह्ह्ह्ह्ह सीईईई ओह्ह्ह पी जा उम्ममम अह्ह्ह्ह सीईईई ओह्ह्ह

मुस्कान रज्जो के मुंह में लगातार पेले जा रही थी

: रुक साली को इसके गाड़ का स्वाद चखाती हूं आजा मेरी रांड ले चूस इसे भी ओह्ह्ह्ह ले उफ्फ बहनचोद क्या माल है तू ओह्ह्ह्ह मेरी रंडी ले ओह्ह्ह्ह उम्ममम ऐसे ही ओह्ह्ह

नीचे रज्जो बड़े चाव से अपने चूतड़ों से निकले खुशबू के लंड को चूस रही थी और बारी बारी से मुस्कान को भी बराबर समय दे रही थी






वही ऊपर खुशबू ने मुस्कान के चूचे पकड़ कर उसके लिप्स चूसने लगी थी और दोनों का चुम्बन काफी तेज था

मुस्कान जिस आस से खुशबू को बुलाई थी उसके पूरे होने का समय आ गया था

उसने रज्जो के सामने आकर अपना लंड रज्जो की बुर में उतार दिया और पेलने लगी

एक बार फिर रज्जो की सिसकिया कमरे में उठने लगी

इधर खुशबू भी मुस्कान के पीछे होकर अपने सुपाड़े को लार से चमकाने लगी थी

उसके पंजे पर मुस्कान की तेजी से ऊपर नीचे होती चिकनी गाड़ पर चल रहे थे

और मुस्कान समझ गई कि असल बेला आ गई है , फिर वो हल्की हो गई , रज्जो को समझ नहीं आया कि क्या हो रहा है , उसके बुर में तलहका मचा था , उसे लंड के घर्षण की जरूरत थी , उसने मुस्कान को जोश दिलाने के लिए उसकी झूलती चुचियों को पीने लगी और काटने लगी , मुस्कान मचल उठी लेकिन फिर वो स्थिर हो गई जब खुशबू ने ने थूक लेकर मुस्कान के गाड़ के सुराख को छुआ

मुस्कान का पूरा बदन गिनगिना उठा , उसके लंड की नसों में नई ऊर्जा उठने लगी थी, रज्जो को अपनी बुर की फांकों में वो फैलाव महसूस होने लगा

: अह्ह्ह्ह आराम से राजा उम्मम ओह्ह्ह्ह सीईईई हाय हाय फाड़ देगी क्या उम्ममम अह्ह्ह्ह सीईईई ( ये सिसकी मुस्कान की थी जिसके कसे गाड़ की सुराख में खुशबू अपना मोटा सुपाड़ा घुसा चुकी थी )






: चुप बहनचोद ओह्ह्ह्ह बड़ी टाइट गाड़ है तेरी , किसी ने ली नहीं क्या उम्ममम अह्ह्ह्ह सीईईई साली ओह्ह्ह्ह उम्ममम कितना ज्यादा कसा है ( खुशबू ने मुस्कान के गाड़ की गहराई नापने लगा )

जैसे जैसे खुशबू मुस्कान के गाड़ में चढ़ कर लंड अंदर घुसेड़ रही थी ,वैसे ही ठीक नीचे मुस्कान का लंड रज्जो की बुर में गहराई में जाने लगा

रज्जो और मुस्कान दोनों की आंखे बड़ी होने लगी , मुंह खुलने लगा और पहले कमरे में मुस्कान की कर्कश चीखे पूरे कमरे को हिलाने , फिर जब खुशबू ने पूरी ताकत से उसके गाड़ पर चढ़ कर हमचना शुरू किया तो मुस्कान का लंड और फूलता हुआ रज्जो की बुर की फांकों को चीरने लगा और जड़ में जाने लगा

अब सब खुशबू एक धक्के मारती , मुस्कान और रज्जो साथ में चीखते



: ओह्ह्ह सीईईई बहनचोद तुम दोनों की गाड़ मारूंगी आज ओह्ह्ह्ह चीखों रंडियों ओह्ह्ह्ह उम्ममम उम्मम

: अह्ह्ह्ह मेरे राजा मारो फाड़ दो मेरी गाड़ ओह्ह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह रुकना मत मजा आ रहा है






: हा खुशबू पेल और कसके उम्ममम अह्ह्ह्ह सीईईई अह्ह्ह्ह इसका मूसल मेरे चूत में भाले जैसा चल रहा है ओह्ह्ह्ह ऐसा मजा मैने कभी नहीं किया ओह्ह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह मै तो ये देख कर ही झड़ रही हूं उम्ममम अह्ह्ह्ह सीईईई रुकना मत पेलो ओह्ह्ह्ह

खुशबू भी ताबड़तोड़ पेलाई करने लगा

: ओह्ह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह सीईईई ओह्ह्ह पेलो राजा आयेगा मेरा भी ओह्ह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह सीईईई

: ओह्ह्ह मेरा भी आयेगा ओह्ह्ह भर दूंगी तेरी गाड़ अपने माल से ओह्ह्ह्ह फिर इस रंडी से चुसवाऊंगी ओह्ह्ह बोल बहनचोद चुसेगी

: अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह्ह लाओ जल्दी ओह्ह्ह्ह मै तो पूरी मलाई चाट जाऊ उम्मम मुझे भी चाहिए ओह्ह्ह

: लें बहनचोद ओह्ह्ह्ह गॉड उम्ममम

: ओह्ह्ह सीईईई आ मेरे राजा मै भी गई

: उम्मम मेरा तो दुबारा हो रहा है ओह्ह्ह्ह ( रज्जो बोली)

तीनों एक साथ इस रोमांचक चुदाई में झड़ रहे थे

रज्जो के साथ उसकी बुर में मुस्कान और मुस्कान की गाड़ में खुशबू

फिर तीनों वैसे ही नंगे चिपक कर थक कर सो गए

ये लोग तो सो गए लेकिन चमनपुरा में अभी भी अनुज के आंखों से नीद गायब थी

सुबह से चौथी बार झड़ने के बाद भी उसके भीतर की वासना आज बैठने का नाम नहीं ले रही थी ,देह में सुस्ती बढ़ने लगी थी लेकिन अपनी नंगी सोई हुई मां के पास सोने का ख्याल उसकी आंखों से नीद गायब किए हुए था ।

रागिनी उसकी ओर पीठ कर करवट लेकर चादर ओढ़े हुए नंगी ही वैसे पैंटी में सोई थी

अनुज की एक जांघ अभी भी उसके नंगे मुलायम गर्म चर्बीदार चूतड़ों पर टिकी थी और शायद वही वजह थी कि अनुज अभी भी अपने मा के जिस्म की नर्माहट महसूस कर रहा था , लेकिन लंड का बुरा हाल था ... इतनी खस्ता हालत उसकी कभी भी नहीं हुई , और इतना बार तो कभी पहले झड़ा भी ... शिवाय सोनल की शादी के बाद जब उसने अपने भैया के साथ मिल कर अपनी मौसी और बुआ को एक साथ

चोदा था सुबह ने 04 बजे तक , याद नहीं कितनी बार झड़ा रहा होगा अनुज ।

मन ही मन हिम्मत जुटा रहा था वो क्योंकि इससे बेहतर मौका अब उसे नहीं मिलने वाला था

कलेजा मजबूत कर उसने अपनी मां की ओर करवट हो लिया और सरक कर जांघों से जांघें सटा ली, पेट सीधा रागिनी की कमर पर और सीना पीठ पर , हाथ आगे कर पेट पर

रागिनी ने कुनमुना उसकी बाह अपनी ओर खींच ली, नतीजा अनुज का खड़ा टाइट लंड सीधा रागिनी के नंगी चूतड़ों के दरारों में चिपक गया नीचे की ओर मुंह किए

अनुज का लंड लोहे की तरह तप रहा था और रागिनी के जिस्म में भी आग दहक रही थी , जल्द ही दोनों के बदन की गर्मी बढ़ने लगी , दोनों के सटे हुए अंग में चिपचिपाहट होने लगी और लंड एकदम फड़फड़ाने लगा

: अनुज !! क्या कर रहा है सो जा अब

: सो ही तो रहा हूं

: फिर ये क्या है ? उम्मम मार खायेगा अब समझा

( कितना भी दुलार ले , खुल कर बातें कर ले , प्यार कर ले लेकिन अपनी मां होने जगह रागिनी ने अनुज के लिए कभी नहीं त्यागी , उसकी नादानियों पर अभी वो उसे डांट लगाने से परहेज नहीं कर रही थी )

: कुछ भी तो नहीं कर रहा हूं ( ये बोलकर अनुज ने अपने हाथ आगे कर रागिनी की नंगी चूचियों को हथेली में भर लिया और अपना लंड रागिनी के गाड़ की कसी दरारों में रगड़ने लगा )






: सीईईई ओह्ह्ह धत्त छोड़ , पीछे हट मार खायेगा अब तंग मत कर , कितना करेगा? सुबह से 04 बार हुआ न तेरा ? तबियत खराब हो जाएगा बेटा!! ( थोड़ी नाराज फिर एकदम से प्रेम और फिकर में बोली रागिनी )

: बस एक बार ऐसे ही डाल के सो जाऊंगा , पक्का

: धत्त नहीं

: क्यों पापा नहीं सोते है क्या डाल के

: हीही पागल है क्या तू , डाल के कौन सोता है

: मै सोऊंगा अब से , निकालो न इसे अह सीई ( अनुज रागिनी कच्छी खींचने लगा )

: नहीं अनुज मार खायेगा अब छोड़ उसे , देखो तो बदमाश को अह्ह्ह्ह नहीं रुक न ( रागिनी पूरी कोशिश नहीं कर रही थी , उसे तो अपने लाडले के स्टैमिना पर बड़ा गर्व था कि दुपहर से 04 बार झड़ने के बाद गजब का कड़कपन है उसके लंड में )

:बस निकल गया , पैर ऊपर करो

कर ली अनुज ने अपनी मनमानी और रागिनी ने खुद से अपनी टांगे उठा कर पैंटी निकाल दी और निकालते हुए अनुज के अपना लंड उसके गाड़ के सकरे दरखतों में पेल दिया

: ओह्ह्ह्ह सीई पागल सुखा है वहां कहा डाल रहा है ओह्ह्ह्ह , रुक !!! ( शायद रागिनी ने अपने गाड़ की सुराख की चमड़ी में खिंचाव महसूस किया था अनुज के लंड से और वो अनुज को डांट लगाई )

फिर रागिनी ने अपने मुंह से लार लेकर हाथ पीछे से गई और अनुज का सुपाड़ा पकड़ के उसे मिजने लगी

: ओह्ह्ह्ह यशस्स मम्मीइई ओह्ह्ह्ह उम्ममम

: अब जो करना है कर ( रागिनी ने अपने चूतड़ ऊपर कर अनुज के लंड के लिए अपने चूत की सही पोजीशन दे दी )

: थोड़ा खोलो न ( अनुज ने रागिनी जांघें चादर के अंदर की हाथ डाल कर थोड़ा चूत के फांकों के पास गैप बनाया ताकि उसका लंड सही जगह पहुंच सके )

: सीईईई ओह्ह्ह आराम से नाखून चुभ रहा है तेरा पागल उम्मम हा वही है अह्ह्ह्ह सीईईई नहीं आगे चला गया , थोड़ा पीछे से ऊपर हा हा उम्ममम धीरे नहीं तो मारूंगी अभी अह्ह्ह्ह मम्मीइई कितना टाइट है तेरा सीईईई ओह्ह्ह्ह

फाइनली अपनी मां की गाइडेंस में अनुज का सुपाड़े रागिनी के बुर के फांकों में नीचे से दाखिल हो गया था और वहा की पिघलती गर्मी उसे अपने सुपाड़े पर महसूस हो रही थी

: ओह्ह्ह्ह मम्मीईईई ओह्ह्ह्ह कितना जल रहा है सीई ओह्ह्ह्ह

अनुज अपने हाथ टटोल कर आगे वापस से अपनी मां की नंगी चूचियों पर ले गया और लंड को थोड़ा दबाव देकर और अंदर ठेला

ऊपर चुचियों पर अनुज की उंगलियां तो नीचे बुर में आडा टेडा घुसता उसका लंड , सिसक पड़ी रागिनी

: उम्ममम सीईईई ओह्ह्ह हल्के हल्के बेटा उम्ममम कितना अंदर ले जाएगा

: उम्मम पूरा ले जाऊंगा मम्मी ओह्ह्ह्ह कितनी गर्म और सॉफ्ट है आपकी बुर ओह्ह्ह्ह और आपकी गाड़ कितनी मुलायम है ओह्ह्ह्ह मजा आ रहा है मम्मी सच में उम्ममम और आपको ?

: उम्मम हा बेटा अह्ह्ह्ह्ह अच्छा लग रहा है ओह्ह्ह्ह तेरा लंड बहुत टाइट है और जल रहा है अंदर ओह्ह्ह्ह

: ढीला कर दूं ( अनुज अपने आगे वाले हाथों से अपनी मां की नंगी चूचियों को सहलाते घुलाते हुए कहा)

: उम्ममम सीईईई कर दे बेटा !! ओह्ह्ह कैसे करेगा अह्ह्ह्ह्ह सीईईई दादा ओह्ह्ह्ह उफ्फ आराम से

रागिनी ने कहने की देरी थी कि अनुज ने उसकी छातियों को पकड़ कर पीछे से करारे तेज झटके देकर अपनी मां की बुर में जगह बनाने लगा






: उन्ह्ह मम्मीई करने दो न ओह्ह्ह्ह कितना मस्त है बहुत टाइट है ओह्ह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह फक्क यू मम्मी मेरी सेक्सी मम्मा ओह्ह्ह्ह उम्ममम

: अह्ह्ह्ह हा बेटा कर ले उम्ममम सीईईई ओह्ह्ह ओह्ह्ह उम्ममम ऐसे ही और अंदर कर न

: रुको ऐसे और अच्छे से जाएगा

अनुज ने चादर खींच कर ऊपर कर दी और अपनी मां की एक जांघ को उठा कर जगह बना दिया और लंड को पूरी गहराई में ले गया

: ओह्ह्ह्ह बेटा हा हा उम्ममम सीईईई ओह्ह्ह ये तो सच में ओह्ह्ह्ह उम्ममम डाल चोद अब रुक मत उम्ममम खुजली हो रही है






: लो मम्मी मै हूं न मै दूर करूंगा आपकी बुर की खुजली ऐसे पेल कर ओह्ह्ह्ह लो मेरी मम्मी और लो उम्मम फक्क यूयू ओह्ह्ह्ह गॉड फक्क यश यश उम्मम ओह्ह्ह्ह

: हा मेरे लाल और तेज ओह्ह्ह्ह सीई ओह्ह्ह्ह बेटा उम्मम अह्ह्ह्ह्ह सीईईई और और पेल अपनी मम्मी को उम्ममम तुझे पेलना था न अपनी मम्मी को उम्मम बोल न मेरा बच्चा

: ओह्ह्ह्ह हा मम्मी बहुत ज्यादा , कितने दिन से सोच रहा था ओह्ह्ह्ह यशस्स अह्ह्ह्ह्ह हाथ दुख रहा है उम्ममम

: तो ऊपर आजा बेटा , ऐसे

रंगीनी ने आगे होकर जगह बदली और पीठ के बदल जांघों को खोल कर सीधा हो गई और अनुज उसके सामने आकर अपना लंड उसकी बुर में सेट करते हुए सरसरा कर अंदर उतार दिया

: ओह्ह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह कितना बड़ा है तेरा बेटा उम्मम कितना मोटा भी

अनुज पूरे जोश में अपनी मां की बुर में लंड पेले जा रहा था और रागिनी की छातियां खूब हिल रही थी






: हा मम्मी आज बहुत टाइट है ओह्ह्ह्ह आपकी बुर ने और बड़ा कर दिया है ओह्ह्ह्ह मम्मी ओह्ह्ह्ह कितनी गीली हो रही है आपकी बुर मम्मीइई ओह्ह्ह्ह

: झड़ रही हूं बेटा उम्मम रुक मत तू चोद मुझे ओह्ह्ह्ह अंदर और कस के पेल , पूरा ऊपर आजा

रागिनी ने अनुज को अपने ऊपर खींच लिया ताकि अनुज अच्छे से अपनी कमर को पटक सके

सीखने का सिलसिला जारी था और अनुज तो पहले से ही उस्ताद थे चुदाई के पैंतरों में बस पहल करने से भागता था , लेकिन शायद आज ये डर भी खत्म हो जाएगा, ऐसा लग रहा था

वो अपनी मां की नंगी चूचियों को टूट पड़ा और उन्हें चूसते हुए तेजी ने नीचे उसके बुर में पेले जा रहा था






: ओह्ह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह बेटा चूस ले पी ले उम्ममम थक गया होगा न मेरा लाल उम्मम ओह्ह्ह्ह सीईईई कितना तेज कर रहा है तू ओह्ह्ह्ह

: हा मम्मी मेरा भी आयेगा उम्ममम सीईईई ओह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह

: अन्दर नहीं बेटा ओह्ह्ह जल्दी से बाहर कर ले

: फिर कहा निकलूं बोलो जल्दी ओह्ह्ह्ह आने वाला है उन्ह्ह्ह मम्मीईईईई ओह्ह्ह्ह उम्ममम बोलो न

: वही बाहर निकाल दे

: ओह्ह्ह्ह गॉड फक्क यश ओह्ह्ह्ह मम्मीईईई अह्ह्ह्ह आ रहा है उम्मम बहुत ज्यादा है ओह्ह्ह्ह

अनुज चिंघाड़ता हुआ अपनी मां के चूत के ऊपर ही झड़ने लगा






: हा बेटा आने से निकाल दे सब अपनी मां की बुर के ऊपर ओह्ह्ह्ह मेरा बच्चा ओह्ह्ह्ह कितना गर्म है तेरा पानी ओह्ह्ह्ह उम्ममम

उसके वीर्य की तेज पिचकारी रागिनी के मुंह और चूचों तक गई

: उम्मम मम्मीइई आई लव यू सो ओह्ह्ह्ह ( अनुज अपना लंड झाड़ते हुए बोला )

: मै भी , मेरा बच्चा आजा

रागिनी ने बड़े दुलार में उसे अपने पास बुलाया और अनुज उसके पास चला गया और रागिनी ने उसे अपने छातियों से चिपका लिया और उसके माथे को चूम ली

अनुज खुश था ... अनंत: उसने वो अंतिम दहलीज पार कर ली जो एक मा बेटे के बीच की पतली सी लकीर थी ... आज फिर से दोनों के बीच प्यार की एक नई ताजगी उठ रही थी ... भले ही रागिनी ने अनुज के लंड के अपनी चूत खोल दिए हो लेकिन अभी भी उसके दिल ने अनुज उसका लाडला बेटा ही रहेगा वो ऐसा सोच रही थी, जिसे वो कभी अपने आप से जुदा नहीं कर सकती थी अपने बेटे के रूप में .

जारी रहेगी

( अपडेट पसंद आया हो तो कर देना जो करना हो .... क्या बोलूं अब )
 
अपकमिंग - मोमेंट्स





फिगर आउट योर फैंटसीज :शैग:

अपडेट इस ों थे वे
 
💥 अध्याय 02 💥

UPDATE 38


बनवारी, रंगी बैठ कर साथ में खाना खा रहे थे, बबीता थोड़ी देर में रोटी लेकर आई और मुस्कुराते हुए रख कर चली गई, अगली बार गीता आई और जब बनवारी और रंगी ने उसकी ओर देखा तो उसने तुनक के मुंह फेर लिया, दोनों ने ही सोचा कि इसे क्या हुआ है, खैर खाना खत्म हुआ तो रंगी बनवारी छत पर टहलने लगे वहीं राज राजेश कमरे में जाकर फोन चलाने लगा,

छत पर टहलने के बाद दोनों नीचे उतरे तो उन्हें कमरे से कुछ आवाजें सुनाई दी, दोनों के बढ़ कर देखा तो गीता और बबीता दोनों बहनों में तगड़ी बहस हो रही थी, दोनों के वहां पहुंचते ही दोनों चुप हो गई।

बनवारी: अरे क्या हुआ तुम दोनों लड़ क्यों रही थी।

बबीता: देखो न दादाजी ये ही तबसे मुंह बनाए घूम रही है और मुझे भला बुरा बोल रही है,

बनवारी: क्यों गीता क्यों लड़ रही है उससे, बहनों को आपस में प्यार से रहना चाहिए या लड़ कर।

रंगी: हां गीता ये गलत बात है बेटा।

गीता: आप दोनों लोग तो उसका साथ दोगे ही,

गीता ने उनपर भी बरसते हुए कहा,

बनवारी ने उसके जवाब से हैरान होकर रंगी की ओर देखा फिर गीता से बोला: अरे ऐसे क्यों बोल रही है गीता उसका साथ ही क्यों देंगे हमारे लिए तो तुम दोनों ही एक समान हो।

रंगी: और क्या बिटिया, जैसी बबीता वैसी गीता हमारे लिए तो तुम दोनों ही प्यारी हो.

गीता: नहीं ये ज़्यादा प्यारी होगी मैं जानती हूं ये,

बबीता: ऐसा क्यों बोल रही है तू? मैं क्यों प्यारी होने लगी?

गीता: क्यों न बोलूं, मैं सब जानती हूं ज़्यादा भोली मत बन।

बनवारी: गीता क्या हुआ है तुझे क्यों ऐसे लड़ रही है उससे।

गीता: हां मैं ही तो लड़ती हूं ये तो आपकी लाडली है तभी तो कमरे में दोनों के साथ...

गीता इतना बोल कर रुक गई,

रंगी और बनवारी ने एक दूसरे की ओर देखा वो समझ गए थे वो किस बारे में बात कर रही थी, रंगी थोड़ा आगे बड़ा और गीता की पीठ पर हाथ रखा और बोला इधर बैठ बेटा फिर बात करते हैं।

गीता ने कुछ कहा नहीं और बिस्तर पर बैठ गई।

रंगी: तू जानती है बेटा हम क्या कर रहे थे?

गीता आंखें उठा कर रंगी की ओर देखा.....

दूसरे कमरे में राजेश फोन चला रहा था कि उसकी पत्नी भी काम निपटा कर आई, पल्लू में हाथ पोंछते हुए बोली: अरे तुम भी न जब देखो फोन मे लगे रहते हो,

राजेश: अरे मेरी रानी लो रख दिया फोन अब तुम में लग जाता हूं,

राजेश ने उसे अपनी ओर खींचते हुए कहा तो वो भी उसके सीने में चिपकी लेकिन फिर उसे धकेलते हुए

: नहीं हटो मेरा मन नहीं है

: क्या हुआ ?

: अम्मा की तबियत सही नहीं है और मुझे चिंता हो रही है , कल अस्पताल लिवा जा रहे है सब उनको ( सुनीता उदास थी )

: अरे तो ठीक है हम लोग भी कल चल चलेंगे अब उसमें क्या है ?

: हा लेकिन कल नंदोई जी की विदाई करनी है , कैसे सब होगा और बाउजी से बात भी नहीं हुई

: तू फिकर मत कर ... मै बात कर लूंगा बाउजी से

: पक्का न ?

: हा मेरी जान , अब तो आजा

: हम्ममम लेकिन बस चिपक के सोना , कुछ करना नहीं

: अच्छा ठीक है पहले तू आ तो सही

: अरे हीहीही ये गलत है अह्ह्ह्ह धत्त गंदे उम्ममम सीईईई आराम से मेरे राजा सीईईई

एक कहा राजेश ने सुनीता को बिस्तर ने पकड़ कर मसलना शुरू कर दिया था वही

दूसरी ओर कमरे का नज़ारा पूरी तरह बदल गया था बनवारी के कमरे में उसकी और रंगीलाल की आहें गूंज रही थी और दोनों बिस्तर पर लेटे हुए थे,वहीं उनके पैरों के पास उनके बीच में दोनों बहनें थीं गीता अपने दादाजी के मोटे लंड को मुंह में लेकर उसे गरम करते हुए चूस रही थी, वहीं बबीता का मुंह रंगी के लंड पर ऊपर नीचे हो रहा था, बबीता रंगी के लंड को अधिक से अधिक मुंह में भरने की कोशिश कर रही थी जिससे रंगी की आहें निकल रही थी,






बनवारी: ओह आह बिटिया ओह देखा जमाई बाबू मेरी दोनों ओह पोतियां कितनी मेहनती और कुशल हैं आह दोनों एक से बढ़ कर एक हैं।

रंगी: आह बाबूजी बिल्कुल सही कहा, मुझे तो लगा था कि बबीता ही आगे है पर ओह गीता भी कम नहीं है पर आह गीता की मेहनत तो मैने महसूस की ही नहीं।

बनवारी: अरे अभी कर लो जमाई बाबू, गीता जा बिटिया थोड़ा भूभाजी का भी चूस दे उन्हें भी अपने मुंह का स्वाद लेने दे।

गीता ने तुरंत अपने दादा का लंड मुंह से निकाला और रंगी लाल की ओर पलट गई, रंगी का लंड बबीता के मुंह में था तो वो रुक गई,

रंगी: अरे गीता बिटिया अब भी गुस्सा है क्या तू बबिता से?

गीता ने ना में सिर हिलाया तो रंगी बोला: फिर रुकी क्यों है अपनी बहन के साथ लग जा तुम दोनों एक साथ थोड़ा सा चूस दो कितना मज़ा आएगा,

ये सुन गीता ने बबीता की ओर देखा जो लंड मुंह में फंसाए उसे ही देख रही थी, गीता के होंठों पर एक मुस्कान आ गई वहीं बबीता के भी, अगले ही पल दोनों बहनें रंगी के लंड पर धावा बोल रही थी और रंगी की आहें निकल रही थी,

बनवारी लाल अपने लंड को सहलाते हुए मुस्कुरा कर देख रहे थे, बबीता ने लंड को मुंह से निकाला और गीता के होंठो की ओर कर दिया जिसे गीता ने तुरंत मुंह में भर लिया बबीता रंगी की गोलियों पर जीभ फिराने लगी तो रंगी ने दांत पीस लिए,

रंगी: ओह बिटिया आह आह तुम दोनों ही कमाल हो,

गीता ने उसके लंड को गहराई तक चूस कर बाहर निकाला तो बबीता ने भी अपनी जीभ रंगी की गोलियों से हटाई, दोनों बहनों की आंखों ही आंखों में कुछ इशारा हुआ और अगले ही पल दोनों के होंठ मिल गए और दोनों आक्रमकता से एक दूसरे के होंठों को चूसने लगी, ये देख रंगी और बनवारी दोनों के ही चेहरे पर मुस्कान आ गई,

रंगी: ये हुई न बात, तुम दोनों ऐसे ही अच्छी लगती हो प्यारी बहनों की तरह।

बनवारी: और क्या, मुझे पता था मेरी दोनों बिटिया एक दूसरे से ज़्यादा देर गुस्सा रह ही नहीं सकती, बहुत समझदार हैं दोनों,

बनवारी ने हाथ बढ़ाकर दोनों की जांघों को सहलाते हुए कहा, कुछ देर बाद दोनों बहनों के होंठ अलग हुए दोनों के होंठ थूक से सने हुए थे और बहुत कामुक लग रही थी,

बनवारी: बबीता बिटिया अब तू इधर आ जा अपने दादू के पास गीता को जमाई बाबू की सेवा करने दे,

बबीता: अभी आई दादू,

बबीता घुटनों और हाथों पर चलते हुए आगे आई और फिर अपना मुंह झुका कर अपने दादू के लंड को चूमा और फिर आगे हो गई और बनवारी की कमर के दोनों ओर अपने घुटने रखे और फिर लंड को पकड़कर सीधा किया और फिर अपनी चूत में फंसा कर बैठ गई, उसके बैठते ही दादू पोती दोनों के मुंह से आह निकल गई।

बनवारी: आह बिटिया ओह कितनी गरम बुर है तेरी आह कैसे निचोड़ रही है दादू के लंड को।

बबीता: ओह आह मम्मी, ओह दादू बहुत अंदर तक जा रहा है,

बबीता ने उछलते हुए कहा। बगल में रंगी गीता के बालों को सहला रहा था और गीता उसके टोपे को सुड़क रही थी,

रंगी: आह गुड़िया अब और नहीं रुका जाता आह आजा अब तू भी सवारी कर अपने फूफा की,

गीता ने भी तुरंत उसकी बात मानी और कुछ पल बाद ही दोनों ही बहनें एक दूसरे के बगल में लंड पर उछल रही थी


रंगी जहां गीता के गोल मटोल चूतड़ों को फैलाते हुए नीचे से धक्का लगा रहा था वहीं बनवारी लाल बबीता की कमर को थामे उसे उछलने में मदद कर रहा था,





रंगी: ओह गुड़िया ओह तुझे अब भी लगता है कि आह हम बबीता को ओह तुझसे ज़्यादा प्यार करते हैं।

गीता: न नहीं फूफाजी ओह आह ऐसा लगता तो नहीं आह।

बनवारी: ऐसा है ही नहीं गुड़िया, तुम दोनों ही हमारे लिए एक समान हो।

गीता: ओह आह समझ गई फूफाजी और दादू, तुम्हारे लंड भी यही बता रहे हैं,

बबीता: आह सच में गीता, अकेले में इतना मजा नहीं आया जितना तेरे साथ आ रहा है,

गीता: मेरी प्यारी बहन,

उछलते हुए ही दोनों करीब आई और एक दूसरे के होंठों को चूसने लगी






लेटे हुए ये नज़ारा देख रंगी और बनवारी और उत्तेजना होने लगे और उन्हें अपना रस लंड में भरता हुआ महसूस होने लगा, और हो भी क्यों न दो जवान कमसिन कलियां एक साथ उनके लंड पर उछल रही थी, उनकी गरम जवान चूत उनके लंड को निचोड़ रही थी, साथ ही उनका एक दूसरे के होंठों को चूसना आग में घी डाल रहा था,

रंगी: ओह गुड़िया मैं आ रहा हूं बस थोड़ी देर और आह आह आह ,

ये सुन गीता तुरंत रंगी के लंड से हट गई और उसके लंड को पकड़ कर चूसने लगी, रंगी की आहें गुर्राहटों में बदल गई और फिर एक के बाद एक धार छोड़ते हुए वो गीता के मुंह में झड़ने लगा जिसने मुंह खुला रखा जिससे कुछ उसके गले के अंदर गया तो कुछ होंठों से बाहर रिस कर उसकी छाती पर गिरने लगा,

रंगी : ओह गुड़िया ये कहां सीखा तूने कितना मजा आया और कितनी सुंदर लग रही है तू ऐसे,

रंगी ने हांफते हुए कहा,

गीता: गंदी फिल्में देख कर सीखा फूफाजी।

उधर उसी समय बनवारी भी गुर्राने लगे तो बबीता भी उनके लंड से उठ गई थी और लंड मुंह में ले लिया पर बनवारी ने उसके सिर को लंड पर दबा दिया और फिर एक के बाद एक धार छोड़ने लगे और सिर को तब तक दबाए रखा जब तक एक आखिरी धार भी बबीता के मुंह में न भरदी, बबीता ने मुंह हटाया तो आंखों से आंसू बह रहे थे पर होंठो पर मुस्कान थी वो अपने दादू के रस की एक एक बूंद जो पी गई थी, उसने गीता की ओर देखा जो रस से सनी बैठी थी तो उस पर कूद पड़ी और उसके चेहरे को चाट चाट कर साफ करने लगी, रंगी और बनवारी गर्व भरी आंखों से दोनों को देख रहे थे ।

जान रहे थे कि अब गिरे तो सुबह बहुत देर ही उठने वाले है और यही सोच कर दोनों ने एक राउंड दोनों बहनों की अच्छे से बुर और गाड़ में लंड डाल से चुदाई की फिर सब वही एक साथ सो गए इस बात से बेखबर कि आने वाला सवेरा एक नए बखेड़ा ला खड़ा करेगा ।

अगली सुबह सुनीता जल्दी उठी , कल शाम को ही उसको सूचना थी कि उसे आज अपनी मां को देखने अस्पताल जाना है । इसके लिए वो जल्दी जल्दी उठ कर घर के कामों में लग गई ।

घर के सभी कमरों में बारी बारी से झाड़ू लगाते हुए जब वो रंगी के गेस्ट रूम में गई तो वहाँ कमरा खाली पड़ा था और उसकी आंखे बड़ी हो गई थी जब उसने गेस्ट रूम से अपने ससुर के कमरे में अंदर देखा

एक ही बिस्तर पर उसके ससुर , नंदोई और उसकी दोनों बेटियां , सब के सब नंग धडंग सोये हुए है ।

" ये तो कुछ ज्यादा ही हो रहा है अब "

" ऐसे तो मेरे बच्चों को बिगाड़ कर रख देंगे सब"

" नंदोई जी !!! अच्छा नहीं किया आपने ये "

सुनीता खुद से बड़बड़ाई , एक ओर वो पहले से ही अपनी अम्मा की तबियत को लेकर परेशान थी और सुबह सुबह ये नजारा ।

" अगर बच्चियों को छोड़ कर गई तो ये दोनों सारा दिन उन्हें तंग करेंगे , नहीं नहीं, मै मेरी बेटियों को अब यहाँ नहीं छोड़ सकती इन्हें भी साथ ले चलूंगी , लेकिन इनके पापा से कहूंगी क्या ? वो भी नाराज होंगे ? सह लूंगी , लेकिन यहाँ नहीं रखूंगी बस ... हा यही सही रहेगा "

फिर सुनीता ने अपने पति को उठाने चली गई

इधर रंगी के मोबाइल में अलार्म बजा और वो उठ गया

समय देखा तो सुबह के 07 बज रहे थे

उसने जल्दी जल्दी सबको उठाया और कपड़े पहनने को कहा फिर अपने कमरे में जाकर लेट गया ।

थोड़ी देर बाद सुनीता वापस आई और कमरे के बाहर से अपने ससुर को आवाज दिया

फिर बनवारी उठने का नाटक करता हुआ बाहर आया ,फिर सुनीता ने खुद से ही अपनी मां की तबियत खराब होने की बात कही और कहा कि वो बच्चों को भी ले जाएगी ।

: अरे बहु कह तो मै भी चलूं

: नहीं बाउजी , नंदोई जी भी आज आएंगे घर ? वो अकेले रहेंगे तो सही नहीं होगा

: अच्छा ठीक है , जैसी बात होगी खबर करना और यहाँ की फिकर छोड़ तू

: जी बाउजी

फिर थोड़ी देर बाद 08 बजे तक बनवारी ने गाड़ी गेट पर लगवाई , बनवारी और रंगी वही खड़े थे , सुनीता अपने पति और बच्चों के साथ गाड़ी में बैठ कर निकल गई मायके की ओर , दोनो ससुर दामाद उन्हें जाते देख रहे थे

: हम्ममम जमाई बाबू तो फिर चलना ही है ?

: अह हा बाउजी मन तो नहीं है लेकिन जाना ही पड़ेगा , सोनल के ससुराल से फोन आया था कि उसके चाचा ससुर की शादी हो रही है ?

: क्या अब ? किससे कैसे ?

: अब पता नहीं बाउजी , वो तो जाने के बाद ही पता चल पायेगा , चलिए मै भी पैकिंग कर लूं

दोनों गेट से कमरे की ओर जा ही रहे थे कि एक टेंपो फड़फड़ करता हुआ रुका उनके मकान के सामने

बनवारी और रंगी दोनों ने पलट कर देखा और उसने एक औरत उतरी

जिसके बड़े भड़कीले कूल्हे साड़ी में उनकी ओर थे और वो ऑटो वाले को पैसे दे रही थी

फिर वो पलटी तो दोनों ससुर दामाद की आंखे चमक उठी

दोनों बस एक दूसरे को देख रहे थे और आँखों ही आँखो तय हो गया कि कम से कम आज तो रंगी अपने घर वापस नहीं जा रहा है ।

अमन के घर

सुबह ममता की आंख जल्दी खुल गई

बगल में देखा तो मंजू उसके पास सोई थी , उसकी सुंदर चेहरे को देख कर ममता मुस्कुरा उठी और उसने मंजू के सर पर चूम कर उठ कर बाथरूम में चली गई ।

बाथरूम में बैठे हुए उसकी दिमाग आज के काम की तैयारियों को लेकर चलने लगी

मदन की शादी की छोटी मोटी खरीदारियों के लिए आज वो लोग सरोजा कॉम्प्लेक्स जाने की योजना कर चुके थे ।

" पता नहीं बहु उठी होगी या नहीं "

" अरे हा याद आया , पता नहीं बहु ने वो काम किया होगा या नहीं , आखिर अमन के पापा और अमन मुझे क्या सरप्राईज देना चाहते हैं"

" फिर ये रात में अमन के पापा और देवर जी का क्या चल रहा था वो भी उन्होंने कुछ साफ साफ नहीं बताया "

ममता के जहन में सवाल उठ रहे थे और उसने सबसे पहले सोचा कि क्यों न अमन के पापा से ही बात की जाए

वो बाथरूम से निकली और एक नाइटी डाल कर चुपचाप साल ओढ कर मदन के कमरे की ओर चली गई ।

घड़ी में सुबह के 6 बज रहे थे

सर्दियों के मौसम में सुबह के 6 बजे उसके घर में उठने वालों में से सिर्फ मदन था , लेकिन वो भी आज सो रहा था लेकिन ये क्या ? मुरारी अपने बिस्तर पर नहीं था

बिस्तर पर नजर डाली तो देखा चादर में मदन में अपना रॉकेट खड़ा कर रखा था, ममता का जी मचल उठा अपने देवर के लंड के लिए और हौले से कमरे में दाखिल हुई । फिर दबे पाव बिस्तर के किनारे जिस तरफ मदन सोया था खड़ी हो गई

बाथरूम में पानी की आवाज आई , मतलब मुरारी बाथरूम में था और ममता ने हाथ बढ़ा कर मदन का लंड चादर के ऊपर से सहलाया

मदन जैसे हल्की नीद में था झट से उसकी आंख खुल गई और वो चौक गया

ममता उसे देख कर मुस्कुराई और मुंह पर उंगली रख कर चुप रहने को कहा

: भाभी , भइया अंदर है बाथरूम में

: सीई उनके आने से पहले ही मेरा काम हो जाएगा ( ममता ने तेजी दिखाते हुए चादर हटा कर मदन का लंड उसके अंडरवियर के ऊपर से मसलने लगी )

: ओह्ह्ह्ह भाभी उम्मम मान जाओ गजब हो जाएगा

: सीईईई चुप करो ( ममता उसके लंड को बाहर निकलती हुई बोली ) मुझे पता है कल रात तुमने भी अपने भइया के साथ पिचकारी छोड़ी थी , सब पता है मुझे समझे

मदन का चेहरा सफेद होने लगा और इधर ममता झुक कर उसका सुपाड़ा खोल कर मुंह में रख ली, मदन की पीठ अकड़ गई जब सूखे सुपाड़े पर ममता ने अपनी जीभ फिराई

: सीईईई ओह्ह्ह भाभी लेकिन आपको कैसे पता ?

: मुझे ? ( ममता ने मुंह से लंड निकाल कर उसे हिलाती हुई बोली ) जब तुम कहा कि " भाभी मेरा भी चूस दो न " , तभी और कन्फर्म तब हुआ जब दो बार गर्म माल मेरे पीछे गिरा अम्मम सीई उम्मम

ममता ने वापस मदन का लंड मुंह में ले लिया और अच्छे से चूसने लगी

: सच सच बताओ क्या प्लानिंग चल ही है तुम्हारी और तुम्हारी भइया की उम्ममम ( ममता उसके आड़ टटोल कर उसके सूपाड़े की गांठ को जीभ से कुरेद कर बोली मदन बिलबिला उठा )

: उम्ममम सीईईई ओह्ह्ह भाभी वो अह्ह्ह्ह सीईईईईई

तभी बाथरूम में फ़ल्श चला और मदन चौंक गया वो ममता की हटने के लिए कहने लगा और ममता नहीं मानी , जैसे बाथरूम का दरवाजा खुला तो मदन ने झट से चादर में अपना सर छुपा लिया, इधर ममता के सर बाथरूम की ओर थे नाइटी में चूतड़ फैले हुए उठे हुआ






मुरारी की नजर जैसे ही सामने पड़ी उसकी आंखे बड़ी हो गई और ममता की नजर भी मुंह में मदन का लंड लिए हुए मुरारी से मिली

: अमन की मां ये सब क्या है ?

: हाय दैय्या!! आप बाथरूम में थे तो ये कौन है ? ( ममता ड्रामा करती हुई बोली )

: अरे यार वो मदन है ? मदन तू जाग रहा है न ? ( मुरारी हड़बड़ा कर बोला )

मदन ने अपना चेहरा बाहर किया , उसका लंड अभी भी आसमानी सर उठाए ममता के लार से चमक रहा था

: हाय दैय्या देवर जी आप , अमन के पापा .. म मुझे लगा कि आप सोए है और देवर जी बाथरूम में है । हे भगवान ये क्या हो गया

: सॉरी भइया , भाभी आते ही एकदम से शुरू हो गई , मुझे लगा अगर उन्हें पता चलेगा कि मै हु तो .....

: और अमन की मां तुम्हे जरा भी नहीं पता चला कि वो मै नहीं हूं , कम से कम साइज से तो देख समझ लेती ( मुरारी उखड़े हुए स्वर में बोला )

: हा साइज का मुझे थोड़ा लगा था पर ... ( ममता थोड़ा हिचक कर बोली )

: पर क्या अमन की मां ?

: वो मुझे लगा सुबह आप मेरा सपना देख रहे होगे और फिर खुशबू भी आपके जैसी आ रही थी देवर जी के उससे तो .... सॉरी अमन के पापा

मदन अपनी हंसी रोकने की कोशिश कर रहा था

: ओहो ये क्या है अमन की मां, अभी रात में ही तो हमने किया था न

: हा तो ... ( ममता ने एक नजर मदन को देखा और फिर रुक कर बोलना शुरू किया ) मैने सुबह सुबह आपका सपना देखा और यहां चली आई । मुझे लगा कि आप भी मुझे याद कर रहे होगे सपने में

: भैया आपका तो नहीं लेकिन भाभी जी ने मुझे जरूर सपने दिखवा दिए । अब ऐसा कीजिए आज से आप भाभी के साथ सोइए तो अच्छा होगा

मुरारी कुछ बोलता उससे पहले ही ममता बोल पड़ी

: हा ताकि आप और देवरानी जी .... ये बिल्कुल नहीं होगा अमन के पापा जान लीजिए

: अरे भैया देखिए न , ये कैसा जुल्म है मुझपर

: एक मिनट भाई मदन चुप रहो तुम , और अमन की मां ये सब क्या है ? तुम्हे क्या दिक्कत है । इसी हफ्ते शादी है उनकी

: वो सब कुछ मै जानती

: तो क्या मदन ऐसे ही परेशान रहेगा और अभी जो तुमने किया उससे उसकी हालात देखो

मुरारी ने ममता को मदन के लंड की ओर इशारा किया

ममता समझ रही थी कि मुरारी को इससे कोई दिक्कत नहीं है कि उसने मदन का लंड चूसा है , लेकिन वो परखना चाहती थी कि आखिर वो उसे किस हद जाने देगा ।

: ठीक है अगर देवर जी को मेरी वजह से परेशानी हुई तो अभी के लिए मै उनकी दिक्कत दूर कर दे रही हूं

: मतलब

: मतलब बताती हूं रुकिए

ये कह कर ममता वापस से झुक कर मदन का लंड पकड़ कर इस बार मुरारी के सामने की मुंह में लेकर का चूसने लगी

मदन एकदम से सिसक पड़ा और चौक भी गया ,मुरारी की भी आंखे बड़ी हो गई

दोनों भाई एक दूसरे को हक्के बक्के देख रहे थे

: सीईईई ओह्ह्ह उम्ममम भाभी नहीं अह्ह्ह्ह भइया रोकिए न भाभी को ओह्ह्ह्ह






मुरारी का लंड भी उसके अंडरवीयर में खड़ा होने लगा था

: अब मै क्या बोलूं भाई

: ओह्ह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह सीईईई भाभी जी आराम से बहुत तेज कर रही है आप ओह्ह्ह्ह सीईईई भैया बोलो न कुछ

मुरारी लपक कर ममता के पास गया और उसके पीठ छू कर : हा अमन की मां थोड़ा हल्का ओह्ह्ह्ह

मुरारी अपना लंड सहलाता हुआ बोला इधर ममता बिना रहम के मदन का सुपाड़ा चूस रही थी और उसका लंड हिला रही थी

मुरारी की नजरे हवा में हिलती हुई ममता की बड़ी सी गाड़ पर गई थी जो उसकी नाइटी में फैली हुई थी , उसका जी ललचा गया और उसने अपने पंजे आगे कर उसकी मोटी चर्बीदार चूतड़ों को सहलाने लगा

: उम्ममम अमन के पापा क्या कर रहे है ओह्ह्ह्ह उम्ममम मत करिए न ओह्ह्ह

: उफ्फफ मेरी जान , तुझे ऐसे देख कर रहा नहीं जा रहा है अब ( मुरारी उसके पीछे जाकर उसकी बड़ी गद्देदार चूतड़ों पर अपना अंडरवियर में खड़ा लंड दरारों के बीच फंसाने और रगड़ने लगा

: ओह्ह्ह्ह क्या कर रहे है अमन के पापा , देवर जी देख रहे है

: अब कुछ छुपाने जैसा है क्या ? तू भी यही चाहती है न ? तू भी तो परेशान है

: अह्ह्ह्ह सीईईई लेकिन देवर जी के सामने उम्मम रुक जाइए न अमन के पापा ओह्ह्ह

: उसने तो हमे पहले भी देखा उससे क्या शर्माना , क्यों भाई मदन ?

: ओह्ह्ह्ह हा भइया उम्ममम सीईईई ओह्ह्ह भाभी ऐसे ही और और लो उम्ममम मजा आ रहा है सीई ओह्ह्ह

: उम्ममम मेरे जान सीईईई क्या कमाल की गाड़ है तेरी ओह्ह्ह कितनी मुलायम और बड़ी

मुरारी उसकी नाइटी पीछे से उठा कर उसकी चर्बीदार चूतड़ों पर अपने पंजे सहलाने लगा

: ओह्ह्ह्ह अमन के पापा ओह्ह्ह उम्ममम रुक जाओ ओह्ह्ह नहीं क्या कर रहे है ओह्ह्ह्ह उम्ममम आपकी जीभ ओह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह सीईईई ओह्ह्ह

इधर मुरारी झट से नीचे बैठ कर उसकी गुलाबी रसाई फांकों को चाटने लगा और चूसने लगा

: सीई क्या हुआ भाभी






: उम्मम देवर जी वो अह्ह्ह्ह सीई ओह्ह्ह्ह आपके भैया उम्ममम वो नीचे जीभ लगा ओह्ह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह सीईईई अह्ह्ह्ह मम्मीइई मत करो न ओह्ह्ह्ह मुझे पता है आप मेरी तकलीफ बढ़ा रहे है जानबूझ कर ओह्ह्ह्ह उम्ममम अमन के पापा ओह्ह्ह

मुरारी तेजी से जीभ लपलपाकर ममता की बुर के फांकों को चाट रहा था और अपना लंड हिला रहा था

ममता की सिसकियां बढ़ने लगी और उसकी बुर खूब रस छोड़ने लगी , मुरारी को लगा यही सही समय है और वो उठ कर पीछे से ही खड़े खड़े अपना लंड उसकी रसाती बुर में उतार दिया ।

: ओह्ह्ह्ह सीईईई अमन के पापा उम्ममम कितना मोटा है आपका ओह्ह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह

ममता सिसकने लगी और आगे बढ़ कर वापस से मदन का लंड मुंह में ले लिया

: ओह्ह्ह्ह मेरी जान अह्ह्ह्ह कितनी गर्म है तू अंदर ओह्ह्ह उम्ममम सीईईई मजा आ रहा है उम्मम

मुरारी ममता के गद्देदार चूतड़ों को पकड़ कर खूब करारे झटके देने लगा और ममता भी सामने मदन का लंड पकड़े हुए झटके खा रही थी सिसक रही थी

: उम्ममम अह्ह्ह्ह अमन के पापा ऐसे ही ओह्ह्ह बहुत मजा आ रहा है और कस के ओह्ह्ह मेरे राजा उम्ममम सीईईई ओह्ह्ह डालिए और अंदर उम्मम

: हां मेरी जान ले ओह्ह्ह और ले उम्मम अह्ह्ह्ह्ह सीईईई तोड़ा मदन का भी ख्याल रखते रहना

: अह्ह्ह्ह्ह मेरे राजा रख रही उम्ममम सीईईई उम्मम

ममता ने वापस से लंड मदन का मुंह में डाल लिया और मुरारी के करारे झटके खाते हुए लंड को गले तक ले जाने लगी






: ओह्ह्ह्ह भाभी हा ऐसे ही उम्ममम बस ऐसे ओह्ह्ह उम्ममम

ममता ने गले से लंड बाहर निकाला और हांफने लगी

: उम्ममम उम्मम ओह्ह्ह हा हा और और हम्मम पूरा और अंदर ओह्ह्ह्ह मेरे राजा सीईईई

: क्या हुआ मेरी जान , बाहर क्यों निकाल दिया ( मुरारी ममता की बुर में पेलते हुए बोला )

: क्या करु अमन के पापा , देवर जी का निकल ही नहीं रहा है ( ममता ने मुस्कुरा कर मदन को आंख मारी और मदन समझ गया कि ममता जरूर कुछ खेल खेलने के फिराक में है )

: क्या हुआ भाई क्यों नहीं हो रहा है ?

: पता नहीं भइया, कोशिश कर रहा हूं , बहुत टाइट हो गया है सीई ओह

: आखिरी बार कब निकाला था

: वो उस रोज जब आप दोनों को देखा था कमरे में तब , आप भाभी को पीछे से कर रहे थे

: ओह्ह्ह लग रहा है तुझे विजुअल के बिना नहीं होगा

: हा भइया,

: ऐसा कर तू मेरे पास खड़ा होकर देख तुझे मदद मिलेगी , आजा

मुरारी ने चालाकी से मदन को अपने पास बुला लिया , लेकिन ममता से उसकी चालाकी कहां छिपी थी

वो समझ रही थी कि जल्द ही उसे दूसरे लंड का स्वाद मिलने ही वाला है।

मदन अब अपने आंखों के सामने अपने भैया को भाभी की बुर में लंड डालते देख रहा था और अपना लंड हिला रहा था

मुरारी ने इशारे से पूछा कि अंदर डालेगा तो मदन ने अपने लंड को तेजी से हिलाते हुए हा में सर हिलाया

इसके बाद मुरारी लंबे लम्बे शॉट लगाने लगा ममता की चूत में , वो सुपाड़े को खींच कर पूरा बाहर लाता और वापस उसकी चूत में उतार देता जड़ तक


: ओह्ह्ह्ह मेरे राजा ये क्या ओह्ह्ह्ह मम्मीई ओह्ह्ह फक्क मीईई ओह्ह्ह्ह उम्ममम डालो न जल्दी जल्दी ओह्ह्ह

तभी मुरारी ने मदन को इशारा कर तेजी से ममता की चूत से निकल कर दबे पाव पीछे हुआ और मदन ने फौरन अपना लंड ममता की बुर के फांकों में लगाते हुए खुली हुई चूत में उतार दिया

ममता फर्क महसूस कर चुकी थी

: ओह्ह्ह्ह मेरी जान उम्मम अह्ह्ह्ह्ह कितना फूल रहा है आपका अंदर उम्मम ओह्ह्ह्ह सीईईई






मदन हौले हौले अपनी कमर चलाने लगा और जल्द ही उसका लंड पूरा ममता की चूत में था , उसका लंड ममता की चूत में और टाइट हो रहा था ये सोच कर कि वो आज अपने भैया के सामने भाभी की बुर चोद रहा था

: ओह्ह्ह मेरे राजा कस कस के मारो न उम्मम अह्ह्ह्ह्ह सीईईई ऐसे ही हा और तेज ओह्ह्ह्ह सीई हा अमन के पापा ओह्ह्ह उम्ममम सीईईई उम्मम और अंदर उम्मम ऐसे ही रुकना मत ओह्ह्ह

मदन अब अपने भैया के सामने अपने मर्दानगी दिखाने लगा था , ताबड़तोड़ पेलाई चल रही थी , मुरारी भी लंड हिला रहा था

: उम्ममम हा ऐसे ही ओह्ह्ह मेरे राजा आज क्या हुआ है आपको उम्ममम अह्ह्ह्ह सीईईई ओह्ह्ह मम्मीइई ओह्ह्ह्ह मेरा आ रहा है ओह्ह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह सीईईई रुकना मत ओह्ह्ह पेलते रहो ओह्ह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह सीईईई ओह्ह्ह उम्ममम

ममता ने मदन का लंड अपनी बुर में कस लिया और झटके खाने लगी और साथ ही मदन का लंड सुरक रही थी

मदन का चेहरा लाल होने लगा था और उसके चेहरे से साफ था कि वो झड़ने वाला है

मुरारी भी समझ गया और वो भी तेजी से अपना लंड हिला लगा

: ओह्ह्ह्ह यशस्स अह्ह्ह्ह्ह सीईईई भाभी मेरा आयेगा

: हा मेरी जान ऐसे ही मेरा भी आयेगा

: झड़ जाओ मेरी जान अंदर ही आपके लंड की गर्मी मिलेगी तो सुकून रहेगा सारा दिन

इधर दोनों भाई हड़बड़ा उठे कि अब क्या करे , ममता मदन के लंड की ग्रिप टाइट कर दी और खींच रही थी ,किसी भी हालात में उसका लंड छोड़ने को तैयार नहीं थी ।

मुरारी भी झड़ने के करीब था और मदन ने इशारे से फुसफुसाया : नहीं निकल रहा है बाहर

: छोड़ दे ( मुरारी ने आंखों से इशारा कर मदन को अंदर ही झड़ने को कहा )

: ओह्ह्ह्ह मेरी जान आ रहा है मेरा ओह्ह्ह्ह लो भर दे रहा हूं तुम्हारी बुर ओह्ह्ह्ह

मुरारी के बोलते ही मदन ने अपना सुपाड़ा ढीला कर ममता की बुर में और अंदर ही अपना माल छोड़ने लगा

: ओह्ह्ह्ह मेरे राजा कितना गर्म है ओह्ह्ह सीई ओह्ह्ह्ह

इधर मुरारी भी झड़ने के करीब था और उसने मदन का कंधा हिलाया और उसे होश में लाया जो ममता के बुर की गहराई में झड़ रहा था

: ओह्ह्ह भाभी मेरा भी आ रहा है कहा निकलूं ओह्ह्ह्ह ( मदन बोला )

: फर्श पर नहीं , मै पोछा नहीं लगाने वाली

: फिर ? ( मदन बोला )

मुरारी उसकी पीछे हटा कर : आ तू भी यही निकाल दे

: क्या ? नहीं ? रुकिए देवर जी

मुरारी ने एक नहीं सुनी और सीधा वापस उसकी मदन के बीज से डबडबाई बुर में अपना लंड डाल दिया और दो से तीन बार झटके देकर अंदर ही झड़ने लगा






: ओह्ह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह देवर जी ये क्या किया आपने उम्मम अह्ह्ह्ह्ह

मुरारी आंखे बंद कर ममता की बुर झड़ने का मजा लेते हुए मदन को इशारा किया

: उम्मम भाभी सीई ओह्ह्ह कितना सॉफ्टी है अह्ह्ह्ह कितना गर्म है ओह्ह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह सीईईई ओह्ह्ह उम्ममम

ममता हांफती हुई बिस्तर पर सहारा लेकर नीचे फर्श पर घुटने टेक दिए और दोनों भइया का वीर्य उसी चूत से बहने लगा था ।

दोनों भाई हांफते भी सामने सोफे पर बैठ गए वैसे ही नंगे मुरझाए लंड के साथ

थोड़ी देर बाद ममता उठी

: क्या हुआ जानेमन कहा ? ( मुरारी ने कहा )

: अब क्या सारा दिन यही रहूं , बहुत काम है मुझे । आप दोनों भी नहा लो

फिर वो चुपचाप निकल गई और दोनों भाई हस पड़े ।

जारी रहेगी

( पढ़ कर लाइक कमेंट जरूर करना )
 
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