Adultery KAMINA CHUDDAKAD - NEW VERSION .... - Page 42 - SexBaba
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Adultery KAMINA CHUDDAKAD - NEW VERSION ....

नवाज़ के गुस्से के बावजूद, आरती ने डर से कांपते हाथों से फ़ोन उठा hi लिया. पर जैसे hi उसने अरविन्द की आवाज़ सुनी, उसके अंदर का सारा बाँध टूट गया. दुकान वाली औरत को लेकर उसके अंदर दौड़ रही जलन, नवाज़ के साथ हुई बहस की खिचाई, और रस्ते पर गिरने का dard—Aarti ने उन सबका गुस्सा एक झटके में अपने पति पर उतर दिया.

"Hello आरती! कहाँ हो? क्या कर रही हो?"

अरविन्द ने आम आवाज़ में पूछा.

"क्या करुँगी?!"

आरती ने बारिश के बीच छीलते हुए कॉल पर गुस्सा उतरा,

"आपने तोह मुझे अकेला छोड़ दिया है! जब हस्बैंड साथ में नहीं होता, तोह साड़ी मुश्किल और सब काम मुझे hi अकेले करने पड़ते हैं!"

अरविन्द ने हड़बड़ाकर पूछा,

"अरे, पर हुआ क्या है? क्या अब किराना भी मैं hi लून?"

"नहीं! किराना तोह मैं खुद hi लुंगी,"

आरती ने गुस्से में पाँव पटका,

"पर आपको क्या पता, उस चक्कर में मुझे रस्ते पर लोग ताने मारते हैं, मुझ पर लाइन मारते हैं! उसका क्या?!"

अरविन्द ने बिना किसी परवाह के मज़ाक़ में कहा,

"अरे, अब तुम इतनी खूबसूरत हो, तोह लोग लाइन मरेंगे hi न! इसमें इतना गुस्सा क्यों होना?"

अरविन्द की इस लापरवाही ने आरती की आग में घी का काम किया. उसने बाइक पर baithe-baithe hi नवाज़ की तरफ देखा और अरविन्द से बोली,

"अच्छा हुआ आप साथ में नहीं थे! आज उस लफंगे ने मेरे साथ बत्तमीज़ी की , नवाज़ ने तोह आगे बढ़कर मुझे बचा लिया! आप होते तोह खाक नहीं बचते मुझे!"

अरविन्द ने थोड़ा चिढ़कर कहा,

"अरे, ऐसी कैसे बात कर रही हो? मैं क्यों नहीं बचता?"

"क्या खाक बचते!"

आरती ने धरतेदार अंदाज़ में तनाव बढ़ाया,

"आप होते तोह kehte—'jaane दो, ध्यान मत दो.' आपको कहाँ मेरी इज़्ज़त की परवाह है! नवाज़ को मेरी इज़्ज़त की परवाह है, आपको नहीं! और मेरी सबसे ज़्यादा फ़िक्र भी उसी को रहती है!"

अरविन्द उन दोनों की इस लगातार तारीफ और झगडे से तंग आ चूका था. उसने गुस्से और chid-chidepan में कह दिया,

"तोह अच्छा है न! अगर तुम्हे इतना hi लगता है, तोह आगे से हमेशा उसके साथ hi घूमा करो!"

आरती ने इस मौके का पूरा फ़ायदा उठाया और नखरे से बोली,

"हाँ, घूमींगी! डर्टी हूँ क्या आप से?!"

अरविन्द ने भी गुस्से में बात को आखिरी मोड़ देते हुए कहा,

"डर मत! और एकदम बिंदास घूम नवाज़ के साथ!"

आरती ने शर्त राखी,

"बाद में मत कहना की क्यों घूम रही हो नवाज़ के साथ!"

"नहीं कहूंगा!"

अरविन्द ने साफ़ कह दिया,

"अगर तुम्हे नवाज़ के साथ घूमना पसंद है, तोह घूम उसके साथ. आखिर तुम्हारी सेफ्टी वह करता है न!"

आरती ने पूरे हक़ और तिरछी नज़र से नवाज़ को देखते हुई कहा ,

"हाँ... करता है!"

अरविन्द ने जैसे hi नवाज़ के साथ घूमने की बात कही, तोह थोड़ी देर फ़ोन पर ख़ामोशी छ गयी. फिर थोड़ा शांत होते हुए अरविन्द ने नरम आवाज़ में पूछा,

"तोह... ले लिया क्या किराना?"

"हाँ, ले लिया!"

आरती ने चिढ़ते हुए, पूरे हक़ से जवाब दिया.

आरती ने जिस तरह दुकान वाली औरत की जलन, नवाज़ के साथ हुई बहस का गुस्सा, और कीचड़ में गिरने की पूरी भड़ास अपने पति अरविन्द पर निकाल दी थी... उससे अरविन्द पूरी तरह दबे पाऊँ पीछे हैट चूका था. अरविन्द ने अपनी लापरवाही में खुद hi नवाज़ के साथ घूमने की इजाज़त दे दी थी, और इस वजह से आरती और नवाज़ के बीच का सामाजिक डर ख़तम हो गया था, जिसने उनके रिश्ते को और भी आसान बना दिया था.

आरती ने अब लोहा गरम देख कर आखिरी और सबसे बड़ा डाव खेला. उसने थोड़े नखरे से पूछा,

"फिर... कल मैं नवाज़ के साथ जाऊं क्या?"

अरविन्द ने बिना soche-samjhe पूछा,

"कहाँ?"

"खेत में... वहां कुछ काम है न,"

आरती ने तिरछी नज़र से नवाज़ को देखते हुए कॉल पर कहा.

अरविन्द ने अपनी उसी be-parwah और थके हुए लहजे में साफ़ कह दिया,

"हाँ, जा न... मन किसने किया है!"

अरविन्द का यह शब्द सुनते hi आरती अंदर से बहुत खुश हो गयी, और उधर नवाज़ के चेहरे पर एक बेहद hi कुटिल, शैतानी और जीतने वाली मुस्कान आ गयी. उनका कल का रास्ता अब बिलकुल साफ़ हो चूका था.

पर अभी आरती सुकून की सांस लेती, तभी अरविन्द ने थोड़ा झिझकते हुए आगे बताया,

"पर आरती... वह जो शहर से कल लोग आने वाले थे न, उन्होंने अपना आना कैंसिल कर दिया है."

"क्या?!"

आरती का गुस्सा एक बार फिर आसमान छू गया. उसके होश उड़ गए की जिस प्रोजेक्ट के बहाने वह इतनी तयारी कर रही थी, वह कैंसिल हो गया.

अरविन्द ने धीरे से कहा,

"हाँ..."

"क्या हाँ?!"

आरती ने बारिश के शोर में छीलते हुए अपना सारा गुस्सा निकाला,

"आपके इस 'हाँ' के चक्कर में मैं पागलों की तरह भागती हुई आयी! घर पर गाडी का ड्राइवर नहीं था, तोह मुझे मजबूरी में नवाज़ के साथ बाइक पर आना पड़ा! और jaldi-jaldi सामान लेने के चक्कर में मैं मार्किट में कीचड़ में जोर से गिर गयी!"

अरविन्द यह सुनकर घबरा गया, उसने फ़िक्र से पूछा,

"ओह no... ज़्यादा लगा तोह नहीं न?!"

"क्या ज़्यादा लगा नहीं!"

आरती ने झूट बोलते हुए अपने नखरे और बढ़ाये,

"मेरे पेअर में बोहोत जोर की मोच आयी है! भला हो इस नवाज़ का, जिसने समय पर मेरी हेल्प की और मुझे संभाला... मैं तोह इस वक़्त ठीक से चलने के काबिल भी नहीं हूँ!"

अरविन्द ने परेशानी में कहा,

"तोह फिर तुम रस्ते में किसी डॉक्टर के पास जाओ न."

"नहीं जाना मुझे किसी डॉक्टर के पास!"

आरती ने गुस्से में साफ़ मन कर दिया.

अरविन्द ने भांपते हुए कहा,

"अच्छा एक काम करो, फ़ोन ज़रा नवाज़ के पास दो... मैं उसे समझाता हूँ की तुम्हें कैसे लेकर आना है."

आरती ने फ़ौरन बात को काट दिया ताकि नवाज़ और अरविन्द के बीच कोई बात न हो और उनका झूट पकड़ा न जाये. उसने तेज़ आवाज़ में कहा,

"किसी को कुछ समझने की ज़रुरत नहीं है! यह सब आपकी लापरवाही और आपके चक्कर में हुआ है!"

अरविन्द ने शर्मिंदा होते हुए धीरे से कहा,

"सॉरी..."

पर आरती अब उसकी कोई बात सुनने के मूड में नहीं थी. उसने बिना जवाब दिए झटके से कॉल कट कर दिया और फ़ोन को ज़ोर से बैग में दाल दिया.

कॉल काटते hi नवाज़ ने बाइक की रफ़्तार थोड़ी काम की और पीछे मुड़कर आरती के इस शांति और धरतेदार अंदाज़ को देख कर एक बड़ी सी शैतानी मुस्कराहट दी.

अब कल खेत में उन्हें परेशां करने वाला कोई नहीं था.

आरती ने फ़ोन को ज़ोर से बैग में दाल कर चैन की सांस ली. बारिश अभी भी चल रही थी, पर अब उनके दिमाग से पकडे जाने का डर बिलकुल निकल गया था. नवाज़ ने बाइक की रफ़्तार थोड़ी काम की और पीछे मुड़कर आरती के इस शांति और धरतेदार अंदाज़ को देखा. उसके चेहरे पर एक बड़ी सी शैतानी और जीतने वाली मुस्कराहट आ गयी.

"वाह रानी! मान गए तेरे दिमाग को,"

नवाज़ ने बाइक चलते हुए थोड़ा पीछे झुक कर छेड़ते हुए कहा,

"पति ने तोह खुद hi खेत जाने की इजाज़त दे दी! अब तोह कल खेत में मुझे अपना पूरा हक़ जताने से दुनिया की कोई ताक़त नहीं रोक सकती."

आरती ने भीगे बाल झटकते हुए नखरे से अपनी आँखें बड़ा किया,

"आप ज़्यादा हवा में मत ुड़िये नवाज़ जी... मैं तोह बस रस्ते से निकलने के लिए झूट बोल रही थी."

नवाज़ ने हैंडल पर अपनी पकड़ कास ली और एक कुटिल मुस्कान के साथ बोलै,

"झूट भले hi हो रानी... पर अब 'मोच' का बहाना है, तोह कल खेत में चलने में दिक्कत होगी न? मुझे तोह लगता है कल मुझे तुम्हे अपनी बाहों में उठा कर hi बीएड तक ले जाना पड़ेगा."

आरती का चेहरा इस बात पर शर्म से फिर से लाल हो गया. उसने नवाज़ के भीगे कंधे पर एक हलकी चपत मारी,

"धत्त बेशरम! हर वक़्त बस वही बात..."

तभी आरती के बैग के अंदर से फ़ोन एक बार फिर zor-zor से विबरते करने लगा. स्क्रीन पर फिर से अरविन्द का नाम चमक रहा था. अरविन्द लगातार कॉल कर रहा था, शायद वह आरती के गुस्से को शांत करने या पेअर की मोच के बारे में और पूछने के लिए be-chain था.

आरती ने फ़ोन को बजते हुए देखा, पर इस बार उसके चेहरे पर कोई डर नहीं था. उसने घंटी बजने दी और गुस्से का नाटक करते हुए फ़ोन को इग्नोर कर दिया.

"उठाओ रानी... तुम्हारा बेचारा हस्बैंड परेशां हो रहा है,"

नवाज़ ने हँसते हुए मज़ाक़ उदय.

आरती ने तिरछी नज़र से नवाज़ को घूरा और नखरे से बोली,

"नहीं उठाउंगी! उन्हें लग्न चाहिए की मैं सच में बोहोत गुस्से में हूँ और चलने के काबिल नहीं हूँ. तभी तोह कल वह मुझे आपके साथ खेत जाने से नहीं रोकेंगे."

नवाज़ ने एक शैतानी ठहाका लगाया और एक्सेलरेटर घुमाया. बाइक बारिश को चीरते हुए तेज़ी से उनके घर की तरफ बढ़ने लगी, जहाँ कल की सबसे बड़ी रात का इंतज़ार अब और भी बेसब्री से हो रहा था.

नवाज़ के चेहरे पर एक बेहद hi कुटिल, शैतानी और जीतने वाली मुस्कान आ गयी. उसने बाइक का एक्सेलरेटर और तेज़ी से घुमाया और बाइक बारिश के बीच तनाव से मुक्त होकर आगे बढ़ने लगी. अरविन्द को अंदाज़ा भी नहीं था की उसके इस 'जा न' कहने से कल खेत में उन दोनों की सुहागरात का रास्ता पूरी तरह साफ़ हो चूका है.

अरविन्द ने अनजाने में hi उन दोनों को एक दुसरे के और क़रीब आने का सबसे बड़ा रास्ता दे दिया था.
 
आरती और नवाज़ की ये बाइक राइड अब एक अलग hi मोड़ ले चुकी थी. बारिश की बूंदें दोनों के जिस्म पर गिर रही थी, लेकिन उनके अंदर एक अलग hi आग सुलग रही थी.

नवाज़ ने जैसे hi अगला ब्रेक मारा, आरती का जिस्म पूरी तरह उसकी पीठ से सात गया. नवाज़ की सांसें तेज़ हो चुकी थी.

आरती ने नवाज़ की कमर पर अपनी पकड़ और मज़बूत कर दी. उसके चेहरे पर एक शरारत भरी मुस्कान थी. बारिश के पानी से भीगे कपडे दोनों के जिस्म से चिपके हुए थे, जिससे हर एक एहसास और भी गहरा लग रहा था.

नवाज़: (धीमे से मुस्कुराते हुए, बाइक की स्पीड थोड़ी काम करता है)

"रानी... अगर ऐसे hi पकड़ कर रखोगी, तो लगता है घर पहुँचने में बोहोत देर हो जाएगी."

आरती: (नवाज़ के कान के पास आकर, धीमी और nakhre-baaz आवाज़ में) "

तो किसने कहा है की जल्दी घर पहुंचो? रस्ते के मज़े लेने का मज़ा hi कुछ और है..."

नवाज़: (दिल तेज़ी से धड़कने लगता है)

"गजब... आज मालकिन मेहरबान हैं, या बारिश का मौसम अपना असर दिखा रहा है?"

आरती ने बिना कुछ कहे, अपना सर नवाज़ के भीगे हुए कंधे पर टिका दिया और उसके जिस्म की गर्मी को महसूस करने लगी. नवाज़ ने अचानक से फिर एक हल्का सा ब्रेक मारा, लेकिन इस बार आरती खुल कर हसने लगी.

आरती: "नवाज़ जी ... आप बोहोत चालक हो!"

नवाज़: "चालक नहीं रानी, बस मौके का फायदा उठाना जनता हूँ. ऐसा हसीं मौसम, भीगा बदन, और आपका ये रूप... कोई पागल hi होगा जो ये चांस छोड़ेगा."

चांस मार रहे हो क्या

इतना गोल्डन चांस मिलेगा तो कोण छोड़ेगा

तब उसके शोल्डर को मरती है तब नवाज़

फिर एक बार ब्रेक मरता है

मज़े करना चाहते हो

हां रानी

तब वो उसके कमर को जोर से पकड़ कर आपने चेस्ट मसलने लगी

आ रानी कर और

नवाज़ के मुँह से ये सुनते hi आरती के अंदर की शरारत और ज़्यादा जोश में बदल गयी. उसने नवाज़ की कमर को और कास के जकड लिया, इतना पास की दोनों के भीगे हुए जिस्म के बीच थोड़ी भी जगह नहीं बची थी.

बारिश की बूँदें उनके चेहरों पर गिर रही थी, पर दोनों का ध्यान सिर्फ एक दुसरे पर था. आरती ने अपनी चेस्ट को नवाज़ की पीठ पर और ज़ोर से मसलना शुरू किया, जिससे नवाज़ के जिस्म में एक करंट सा दौड़ गया.

नवाज़: (आँखें बंद करते हुए, एक गहरी सांस लेता है)

"ाः... रानी... सच में... मार hi डालोगी आज. बहुत मज़ा आ रहा है, और कर न..."

आरती: (उसके कान के पास धीमे से फुसफुसाती है)

"अभी तो बस शुरुआत है, नवाज़. तुमने ब्रेक maar-maar के मज़ा लिया न? अब मेरी बारी है देखने की तुम कितना झेल सकते हो."

नवाज़ ने बाइक की रफ़्तार थोड़ी और काम कर दी, ताकि आरती का हर एक एहसास वो saaf-saaf महसूस कर सके. उसका पूरा ध्यान अब सामने रस्ते से ज़्यादा अपनी पीठ पर हो रहे इस गरम एहसास पर था. आरती ने अपनी उँगलियाँ नवाज़ के पेट पर घुमाते हुए उसकी भीगी शर्ट के अंदर हल्का सा टच किया.

नवाज़: (गले से एक हलकी सी आह निकलती है)

"रानी... ऐसे मत करो... हैंडल छूट जायेगा बाइक का... सच में कण्ट्रोल नहीं हो रहा अब."

आरती: (हस्ते हुए, अपना चेहरा उसके भीगे कंधे पर रगड़ती है) "

तो छोड़ दो हैंडल... गिरने दो दोनों को इस बारिश में."

नवाज़ से अब और ज़्यादा बाइक चलायी नहीं जा रही थी. आरती के जिस्म की गर्मी और उसकी इस शरारत ने नवाज़ के होश पूरी तरह उदा दिए थे. उसका ध्यान रस्ते से बिलकुल भटक चूका था.

अचानक नवाज़ ने हैंडल को थोड़ा घुमाया और बाइक को सड़क के किनारे, bade-bade पेड़ों की आध में एक सुनसान जगह पर रोक दिया. उसने तुरंत बाइक का स्टैंड गिराया और बिना चाबी निकाले, पीछे पलट कर आरती की तरफ देखा.

नवाज़ की सांसें बोहोत तेज़ चल रही थी. उसके बाल और शर्ट पानी से पूरी तरह भीगे हुए थे, और उसकी आँखों में आरती के लिए एक अलग hi दीवानापन दिख रहा था.

नवाज़: (आरती का हाथ पकड़ते हुए, भरी आवाज़ में) "अब हैंडल छूट hi गया, रानी... अगर एक पल भी और बाइक चलता, तो सच में कहीं एक्सीडेंट हो जाता."

आरती: (नवाज़ के इतना पास आने पर थोड़ा नखरा दिखते हुए मुस्कुरायी) "

तो रुक क्यों गए? मैंने तो कहा था चलने दो..."

नवाज़:

"तुमने जो हाल कर दिया है मेरा, उसके बाद रुकना hi पड़ना था. अब बताओ, क्या कह रही थी तुम? तुम मज़ा करवाऊंगी?"

आरती ने बाइक से उतर कर अपने भीगे बालों को पीछे झटका, जिससे पानी की कुछ बूँदें सीधे नवाज़ के चेहरे पर जेक गिरी. वो वहीँ एक पेड़ के सहारे कड़ी हो गयी, जहाँ बारिश का पानी पेड़ के पत्तों की वजह से थोड़ा काम आ रहा था.

नवाज़ भी बाइक से उतरा और dheere-dheere उसके पास आने लगा. उसके कदम आरती की तरफ बढ़ रहे थे, और आरती वहीँ कड़ी होकर बड़े रोबदार लेकिन शरारती अंदाज़ में उसे देख रही थी.

आरती: "हाँ, कहा तो था. पर तुम में इतना झेलने की हिम्मत है क्या, नवाज़ जी ?"

नवाज़: (आरती के बिलकुल करीब आकर, पेड़ पर हाथ रख कर उसे घेरते हुए) "

आप आज़मा कर तो देखो, रानी. आज इस बारिश में आपका हर नखरा झेलने को तैयार हूँ."

लगता है कल की खेत वाली सुहागरात आज इस पेड़ के नीचे hi करनी पड़ेगी

बिलकुल नहीं ..

कल मतलब कल

अब चलो ..लेत हो जायेगा तो पापा जी कॉल करेंगे

आरती के इस सुद्दीन u-turn ने नवाज़ के बढ़ते हुए क़दमों को वहीँ रोक दिया. उसका रोबदार अंदाज़ एक झटके में वापस लौट आया था, और उसने नवाज़ के सीने पर हल्का सा हाथ रखकर उसे थोड़ा पीछे धकेल दिया.

नवाज़ ने एक गहरी सांस ली, थोड़ा निराश पर आरती के इस नखरे पर अंदर hi अंदर मुस्कुराते हुए बोलै.

नवाज़: (अपना सर खुजलाते हुए, थोड़ा मायूस अंदाज़ में)

"यार रानी ... आप भी न, बिलकुल मौके पर लाकर ब्रेक मार देती हो. खेत वाली सुहागरात का वादा कल का है, पर मौसम तो आज hi बईमान हो रहा है."

आरती: (अपने भीगे कपड़ों को थोड़ा ठीक करते हुए, आँखें दिखती है) "

मौसम बईमान हो या तुम, मैंने बोल दिया na—kal मतलब कल! और अब ज़्यादा दिमाग मत चलाओ, जल्दी से बाइक स्टार्ट करो."

नवाज़: "बात तो आपकी सही है, रानी. अगर पापा जी का फ़ोन आ गया, तो बारिश के पानी से ज़्यादा उनके सवालों के जवाब में भीगना पड़ेगा."

आरती तुरंत वापस बाइक पर बैठ गयी, पर इस बार उसके चेहरे पर वही पुराणी मालकिन वाली होशियारी थी. नवाज़ ने एक बार फिर उसे पीछे से देखा, हिस्सा, और बाइक का सेल्फ मारा.

आरती: (पीछे से थोड़ा आगे खिसकते हुए)

"चलो अब जल्दी, और हाँ... अब रस्ते में ज़्यादा झटके मत मरना, सीधे घर चलो!"

नवाज़: (बाइक को सड़क पर आगे बढ़ाते हुए)

"जो हुकुम, रानी. पर कल का दिन याद रखना, खेत में कोई बहाना नहीं चलेगा!"

कोई बहाना नहीं करुँगी

गाओं की सरहद शुरू होते hi नवाज़ ने बाइक की रफ़्तार काम कर दी. उसने आईने में देखा की आरती ने अब भी उससे कास कर पकड़ा हुआ था. कंचन पीछे बैठी गहरी सोच में थी;

जैसे hi वह लोग घर की देहलीज़ पर पहुंचे, आरती ने तुरंत अपना हाथ नवाज़ की कमर से हटा लिया और निचे उतर गयी
 
नवाज़ ने बाइक को घर के आँगन में लेकर रोका. बारिश अब हलकी हो चुकी थी, पर दोनों अभी भी पूरी तरह भीगे हुए थे. आरती धीरे से बाइक से नीचे उत्तरी

अब जाऊ मई

तब आरती अपनी साड़ी संभालती हुई नवाज़ की तरफ मुड़ी.

"घर पर बाइक से छोड़ने के बाद अब सीधे जा रहे हो...? रुकोगे नहीं खाना खाने के लिए?"

आरती ने तिरछी नज़र से देखा और बड़े हक़ से पूछा.

नवाज़ ने एक शैतानी मुस्कराहट दी और हैंडल पर हाथ रखते हुए बोलै,

"खाना तोह खा लून रानी... पर तुझे पता है न मुझे non-veg पसंद है."

आरती ने गुस्से और नखरे से अपनी आँखें बड़ी किन,

"अच्छा? तोह क्या अब आपके लिए अलग से non-veg बनाना पड़ेगा क्या?!"

नवाज़ ने कंधे उचकाए,

प्यार करती है तो बनायेगे

तोह आरती ने आगे बढ़कर दबी आवाज़ में कहा,

"बिलकुल नहीं! जो अंदर बनाया है, वही चुपचाप खा लेना... आपके नखरे आज कल बोहोत बढ़ते हो रहे हैं."

नवाज़ ने झूठे गुस्से का नाटक किया और बाइक स्टार्ट करने का बहाना बनाते हुए बोलै,

"अच्छा, तोह फिर ठीक है, मैं चला जाता हूँ अपने घर."

आरती ने फ़ौरन आगे बढ़कर उसकी बाइक की चाबी पर हाथ रखा और बड़े hi रोमांटिक अंदाज़ में मुस्कुराते हुए बोली,

"अरे रुकिए न...! एक बार मेरे हाथ का बना हुआ वेग खाना खाओगे न... तोह आप अपना सारा non-veg भूल जाओगे."

नवाज़ का दिल आरती के इस अंदाज़ पर एक बार फिर आने लगा. उसने बाइक को बंद किया और उसकी आँखों में देखते हुए बोलै,

"अच्छा? ऐसा है क्या...?"

"हाँ...!"

आरती ने ख़ुशी से सर हिला कर इक़रार किया.

नवाज़ ने बाइक को स्टैंड पर लगाया और बोलै,

"थिइक है फिर... चलो मैं भी किचन में चलता हूँ और तेरी थोड़ी हेल्प कर देता हूँ."

आरती ने खिलखिला कर हंसी और उसे रोकते हुए बोली,

"नहीं, बिलकुल नहीं! मुझे पता है आप किचन में मेरी हेल्प करने से ज़्यादा... मुझे डिस्टर्ब करोगे!"

आरती का यह मज़ाक़िया और शर्मीला इशारा सुनकर नवाज़ अंदर hi अंदर बेहद खुश हो गया, क्यूंकि उसे पता था की किचन की उस गर्मी में अब उनका एक नया साइलेंट रोमांस शुरू होने वाला था...

नवाज़ ने बेसब्री से मुस्कुरा कर कहा,

"अच्छा बाबा, non-veg जाने दे... काम से काम अंडा तोह बना के दे दे!"

आरती ने बाइक के हैंडल पर हाथ रख कर साफ मन किया,

"बिलकुल नहीं! उस दिन बनाया, वही बोहोत बड़ी बात थी."

नवाज़ ने उसे और छेड़ते हुए कहा,

"अरे, जब उस दिन बनाया था, तोह आज भी बना दो... इसमें क्या बड़ी बात है."

"नहीं... बोलै न, नहीं!"

आरती ने नखरे से अपना चेहरा घुमा लिया.

नवाज़ ने एक गहरी सांस ली और मायूस होने का नाटक करते हुए बोलै,

"हम्म... लगता है तू अब मुझसे प्यार नहीं करती."

नवाज़ के मुँह से यह बात सुनते hi आरती ने पलट कर उसे देखा. उसके होठों पर एक प्यारी और नखरीली मुस्कान आ गयी. उसने नवाज़ की आँखों में देखते हुए कहा,

"अच्छा जी...! अब प्यार के बहाने मुझे इस तरह इमोशनल ब्लैकमेल कर रहे हो?"

नवाज़ ने एक कुटिल मुस्कान दी,

"हाँ... ऐसा hi समझो!"

आरती का दिल नवाज़ के इस भोलेपन और शरारत पर पूरी तरह पिघल गया. उसे अब अपने गुस्से और नखरों पर काबू नहीं रहा. उसने दबे पाऊँ आगे बढ़कर, सब डर भूल कर नवाज़ के गले में अपनी दोनों नरम बाहें दाल दिन. उसने नवाज़ की आँखों में पूरे हक़ और शिद्दत से देखते हुए बेहद नरम आवाज़ में फुसफुसाई:

"आप अच्छी तरह जानती हो न... की मैं आप से कितना बोहोत ज़्यादा प्यार करती हूँ."

इतना कहते hi आरती ने बेसब्री से अपना चेहरा आगे बढ़ाया और नवाज़ के गरम लबों पर एक बेहद hi प्यारी और जुनूनी किश करने लगी. बारिश के भीगे माहौल और बंगलो के गर्दन के इस सुनसान जगह उनका यह खुलेआम इक़रार उनके जिस्म की गर्मी को और बढ़ा रहा था, जहाँ कल खेत में होने वाले मिलान की तड़प अब दोनों के बीच साफ़ महसूस हो रही थी.
 
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