Adultery सपना या हकीकत [ INCEST + ADULT ] - Page 51 - SexBaba
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Adultery सपना या हकीकत [ INCEST + ADULT ]

टुडे ी हद ा वैरी हार्ट ब्रेकिंग मोमेंट

आज मुझे अपनी एक पसंदीदा कहानी अम्मी VS मेरी फैंटेसी दुनिया को पाठकों से संतोषजनक प्रतिक्रिया न मिलने एवं निजी व्यस्तता के कारण बंद करना पड़ा है ।

मेरी life style अब पहले जैसी नहीं है

नौकरी और परिवार का बंधन अब बढ़ता ही जा रहा है

धीरे धीरे ये कहानी भी अपने END GAME की ओर बढ़ रही है ... अब आप पाठकों पर है कि इसे कब तक जिंदा रख सकते है ।

फिलहाल के समय में नई कहानियों को लेकर मेरा रुझान ज्यादा है कारण वहीं है कि इस कहानी को मै बहुत लंबा समय दे चुका हूं और जैसा सोचा था वैसा कुछ वैल्यू इसे भी नहीं मिलती आई है ।


खैर आज का दिन निर्णायक जैसा महसूस करा रहा है तो आप सभी साथियों को सूचित करना है कि

थे वाइल्ड नई ईयर पार्टी इस कहानी के अध्याय 02 का अंत होगा ।

धन्यवाद
 
फिलहाल कुछ भी लिखने का मूड नहीं है कल से ही

तो अपडेट तैयार नहीं कर पाया

आगे देखता हूं क्या हो सकता है .... Sorry for delay 😑
 
वर्क लोड ज्यादा है इन दिनों विभाग में

समय नहीं मिल पा रहा है

कोशिश है कल परसो में कोई अपडेट दे पाऊं.... गारंटी नहीं है कि मिल ही जाए , इसे प्रयास ही समझे ।

इस कहानी को लेकर थ्रेड में कोई बकचोदी न करे , ब्लॉक कर दिए जाएंगे , इन दिनों दिमाग थोड़ा सटका हुआ है 😏

धन्यवाद 🙏 सभी का
 
💥 अध्याय 02 💥

UPDATE 31


" क्या हुआ , बात हुई पापा जी से ? "

" हा , उन्होंने कहा चाचू पहुंच रहे है "

" तो फिर मै चेंज कर लूं ? "

अमन ने एक नजर सोनल को देखा , जो एक स्ट्रिप टॉप और स्किन टाइट जींस में थी । गहरे गले वाले टॉप के उसके बड़े बड़े रसीले मम्मो की लंबी धारीया और बाजू कंधे सब दिख रहे थे उसपर से कूल्हे पर कसी हुई जींस देख कर अमन का लंड लार छोड़ने ही लगा था






: धत्त हवशी, बताओ न प्लीज ( सोनल ने थोड़ा मुस्करा कर कहा अमन से )

: उन्हुँ मत निकालो न ( अमन ने मुस्कुरा कर कहा ) सेक्सी लग रहे हो

: पक्का ? ( सोनल चहक उठी, हालांकि ) लेकिन चाचू !!!

अमन ने ध्यान नहीं दिया और निशा को खोजने लगा

: अरे निशा कहा गई ?

: जाने दो , उसे अंदर एक आइसक्रीम पार्लर लिखा और वो रुक गई आती होगी .. मै जरा वाशरूम से आती हूं

: हा जल्दी करना चाचू भी आते ही होंगे ( अमन ने फिकर में कहा और मोबाइल पर वापस से अपने चाचा मदन को फोन घुमाने लगा ।

" बस बेटा मैने देख लिया है , आ रहा हूं " , मदन ने गाड़ी में बैठे हुए ही अमन का काल पिक करके बोला और मदन ने फिर अमन के पास ही गाड़ी खड़ी की , जो पहले से ही 3 ट्रॉली बैग लिए खड़ा था ।

: अरे इतना समान ? ( गाड़ी से बाहर निकलते हुए मदन ने कहा )

: लड़कियों की शॉपिंग चाचू जानते हो न हाहाहाहा ( अमन ने झुक कर अपने चाचा के पैर छुए )

: खुश रहो , अरे बहु और उसकी बहन कहा है ?

: बस आ रही है वो जरा सोनल बाथरूम गई है वो रही






( एकदम से अमन की नजर सोनल पर गई वो अभी भी टॉप और जींस में थी उसके चूचे एकदम टाइट और स्पॉट पेट , उसको उस हाल में देख कर अमन चौका क्योंकि सोनल का ब्लेजर तो उसके पास था और मदन आंखे फाड़े अपनी बहु के नए अवतार को निहारे जा रहा था )

सोनल ने अभी तक ध्यान नहीं दिया था कि मदन आ चुका है वो तो सामने आइसक्रीम पार्लर से चली आ रही निशा को देख कर मुस्कुरा रही होती है

मदन पलट कर देखता है तो उसकी आंखे और चमक उठती है सामने निशा एक शॉर्ट टीशर्ट जो उसके नेवल के ऊपर टंगी थी जिसमें से उसके गोरा पेट और नाभि दिख रही थी और एक स्किन टाइट योगा पैंट में आइसक्रीम खाती हुई अपने कमर झटकती हुई आ रही थी

निशा और सोनल दोनों ने मदन को ध्यान ही नहीं दिया और बस मस्ती में अमन को हाई बोला और हंसते हुए सोनल की ओर जाने लगी






मदन ने मुस्कुरा कर उसको पीछे देखा और जैसे उसने तो अंदर पैंटी नहीं पहनी थी , और उस पैंट में निशा के चर्बीदार चूतड़ों की थिरकन देख कर मदन का हलक सूखने लगा ,





तभी उसकी नजर सामने गई जिधर से सोनल हाइ हील वाली सैंडल पहने अपने लंबे पैर बड़ी अदा से रखते हुए निशा की ओर बढ़ रही थी और हर चाल पर उसकी दूधिया चुचियों का उछाल देख कर मदन की आंखे फैली जा रही थी ।

दोनों आपस में मिली और निशा ने सोनल को अपने आइसक्रीम का कोन साझा किया तो सोनल ने अपने गुलाबी लबों से बड़े रसीले अंदाज में आइसक्रीम को मुंह में लिया

जिसे देख कर मदन के मुंह मिठास घुलने लगी और अमन की निगाहे पर उन पर टिकी थी , दोनो सोनल के अपर लिप्स पर लगी हुई आइसक्रीम को देख रहे थे कि निशा ने उंगली से वाइप कर चाट लिया और मुस्कुराने लगी

मदन ये देख कर हैरान था और एकदम से निशा मुंह में उंगली डाले हुए अमन को देखा और उसकी आंखे बड़ी हो गई

: सोनल , जीजू के चाचा

: क्या ? ( सोनल ने आंखे बड़ी कर देखा और हड़बड़ा कर उसे अपनी हालत दिखी और वो घूम गई और उसके बड़े बड़े मोटे चूतड़ मदन के सामने )

जिसे देख कर मदन की आंखे और चौड़ी हो गई ,उसने नजारे फेर ली और अमन से गाड़ी में पीछे समान रखने को कहने लगा

मदन और अमन समान रखने लगे थे कि सोनल तेजी से आई और अमन के हाथ से अपना ब्लेजर लेकर झट से पहन कर खड़ी हुई

फिर झुक कर मदन के पैर छुए : नमस्ते चाचा जी

: अह खुश रहो बेटा ( मदन ने सोनल की डीप नेक वाली टॉप से बाहर निकलने की कोशिश करती हुई मोटी मोटी रसीली गुलाबी छातियों को देख कर बोला और एकदम से उसकी नजर बगल में खड़ी निशा से मिली जो उसे देख रही थी )

: नमस्ते अंकल ( उसने भी झुक कर मदन के पैर छुए और उसके मोटे चर्बीदार चूतड़ उसकी स्ट्रेचेबल योगा पैंट में यूं फेल गए और मदन का लंड तो अब सलामी ही देने लगा )

: खुश रहो बेटा, आओ चले बैठो

मदन ने दोनों को ऑफर किया

: मै ..आगे बैठूंगी हीही

मदन ने हस कर अमन को देखा और अमन मुस्कुराने लगा

सोनल अमन बीच में बैठ गए और निशा आगे वाली सीट पर बैठ गई । मदन पीछे से डिग्गी लॉक कर आ रहा था कि निशा की नजर साइड मिरर पर गई , जहां उसने मदन को अपने हाथों से अपना पैंट सेट करते हुए देखा और लंड को घुमाते हुए देखा ।

उसकी हंसी छूट जाती अगर मदन ने दरवाजा न खोला होता

निशा ने एक गहरी सांस ली और सीधी होकर बैठ गई लेकिन जैसे ही मदन गाड़ी के अंदर आया उसको निगाहे सीधे निशा के टॉप में टाइट नारियल जैसे कड़े गोल चूचों पर गई और उसकी आंखे बड़ी हो गई , निशा गाड़ी में बैठ कर सेल्फी ले रही थी






सोनल या अमन की नजर उसपर न पड़े इसीलिए उसने नजरे फेर कर अपनी सीट ली और सब चेक कर गाड़ी शुरू कर दी

फ्रंट रियर मिरर में उसने देखा कि उसकी बहु सोनल अपने पर्स से एक छोटा सा स्टॉल गले में रख रही थी और ये देख कर मदन मुस्कुराया कि चलो बहु को लिहाज तो है बड़ों का , लेकिन वो स्टाल भी उसके दूध के मोटे उभारों को छिपाने में उतना सक्षम नहीं था

उसने गाड़ी चालू की और निकल गए सब हाइवे से चमनपुरा के लिए

शुरुआती बातचीत जारी रही ... फिर शांति हो गई । प्लेन से उतरने की सबको थकान सी थी .. सोनल ने भी अमन के कंधे पर सर टिका कर आंखे मूंद ली और अमन को भी झपकी आने लगी थी ।

लेकिन निशा को ये सफर बड़ा रोमांचक लग रहा था

मदन और निशा हनीमून ट्रिप और सफर की बाते कर रहे थे कि आगे टोल आने वाला था और मदन ने बातों में ध्यान नहीं दिया कि आगे मल्टीस्ट्रिप स्पीड ब्रेकर लगे थे स्पीड कम करने के लिए और नतीजा गाड़ी ब्रेक लगाने के बाद भी स्पीड में उनपर पर चढ़ गई

पीछे सोनल और अमन उछले तो उछले लेकिन आगे निशा के लिए दिक्कत हो गई , स्पीड ब्रेकर पर उछलते ही निशा चीखी और एक हाथ से कस विंडो हैंडल पकड़ लिया और जब उसे महसूस किया कि उसकी मोटी छातियां भी उसके टॉप में उछल रही है तो उसकी हालत और बिगड़ने लगे






उसने तुरंत मदन की ओर देखा और मदन की आंखे उसे मोटे उछलते मम्मों पर , निशा मुस्कुराने लगी

: सॉरी बच्चों एकदम से स्पीड ब्रेकर आ गया हाहाहाहा

: कुछ भी हो मजा आ गया चाचू ( अमन बोला )

: हा आपको मजा आया मेरी कमर .. ( सोनल के आंखे उठा कर देखा अमन को जिसे मदन फ्रंट रियर मिरर में देख रहा था और मुस्कुरा रहा था और जैसे ही सोनल ने आइने में अपने चाचा ससुर की आंखे देखी वो चुप हो गई )

इनसब में निशा चुप थी और जैसे मदन का ध्यान उसपर गया तो आंखे बड़ी और लंड में कसावट और आ गई , इतना भी अब उभार पेंट पर साफ झलकने लगे

निशा अपने दोनों चूचों को हाथ डाल कर ब्रा में सेट कर रही थी और जैसे ही उसने मदन को देखा वो थोड़ा शर्मा कर मुस्कुराने लगी

: अह निशा बेटा , तुम सीट बेल्ट लगा लो आगे टोल है

: जी अंकल ( निशा ने मुस्कुरा कर कहा )

फिर साइड से बेल्ट निकाल कर अपने दोनों चूचों के बीच से दूसरे तरफ क्रॉस करके प्लग कर दिया ... मदन की चोर निगाहे देख रही थी जब निशा बेल्ट को टाइट करने लगी और जब बेल्ट ने उसके दोनों रसीले मम्में को अलग अलग कर दिया






इससे उसकी ब्रा की लाइनिंग भी दिखने लगी और चूचों की गोलाई साफ साफ दिखने लगी

मदन का हाथ लंड पर चला ही जाता अगर टोल वाला स्टाफ उसे टोकता नहीं

जल्द ही गाड़ी फिर से रफ्तार पर थी और सोनल अमन वापस से झपकियां लेने लगे , लेकिन मदन की हालत खराब थी , उसे पेंट में बहुत कसावट हो रही थी , सुपाड़े मे खुजलाहट सी होने लगी

एक दो बार मदन ने हाथ फेरा और नहीं रहा गया था पकड़ कर मिस दिया अपना सुपाड़ा , निशा की निगाहे भी बराबर मदन की हरकतों पर थी और उसके निप्पल मदन की बढ़ती बेचैनी को देख कर कड़े होने लगे थे और ब्रा समेत टॉप पर उभर आए थे

मदन में मुंह तो मिश्री घुलने लगी थी और साइड देखने के बहाने वो बार बार निशा की ओर देखता साइड मिरर में और निशा भी बखूबी समझ रही थी , उसमें पास कोई चारा नहीं था सिवाय मुस्कुराने और बाहर देखने के

लेकिन धीरे धीरे उसपर भी थकान हावी हो रही थी और खिड़की से आती हवाओ की थपकियों ने उसकी आंखों की सुस्ती बढ़ा दी और वो आंखे बंद कर ली

मदन ने भी 90s एवरग्रीन song गाड़ी में हल्की आवाज में लगा दिया और अपना लंड सेट कर ड्राइव करने लगा ।


चमनपुरा

" अच्छा जी "

" हां जी "

" बड़े आए और मम्मी जी ने देख लिया तो "

" तो ... तो कह दूंगा भाभी से थोड़ा हिसाब किताब निपटा रहा था "

" हीही , धत्त बदमाश... मार खाओगे तुम "

" अच्छा सुनो न "

" हा हा कहो न , हीही "

" दोगे न "

" धत्त पागल हो क्या ? "

" अच्छा बस दिखा देना .. थोड़ा सा "

" क्या ? "

" वही कि कैसे डालते हो इसको "

" धत्त पागल हो जी , मम्मी जी के सामने थोड़ी न खोलूंगी इसे "

" अरे यार बड़ी मम्मी को तो मै घर भेज दूंगा ... फिर बताओ उम्मम बोलो बोलो " , राज ने फोन पर काजल को फ़ंसाते हुए कहा

" अगर मम्मी जी नहीं रहेगी तो मै क्यों डालूंगी खुद डाल के देख लेना न " , काजल ने मस्ती में राज को छेड़ा

" उफ्फ भाभी , इतने सपने दिखा रही हो कही पानी न फेर ..... " , राज बोलने वाला था कि उसके मोबाइल पर कुछ नोटिफिकेशन पॉप अप हुआ और

जैसे ने उसने खोलकर देखा आंखे बड़ी हो गई

संजीव ठाकुर ने उसके व्हाट्सअप पर एक फोटो डाली थी जिसमें एक गदराई चूतड़ों वाली लड़की एक टेबल पर बैठी थी और बिकनी सेट में थी






जिसे देख कर राज का लंड और फौलादी होने लगा , उस फोटो ने उसका चेहरा नहीं दिख रहा था लेकिन इसके चूतड़ों की चर्बीदार गोलाई देख कर राज के मुंह में पानी भरने लगा

" हैलो क्या हुआ जी "

" अरे वो .. कुछ नहीं, हा तो कहा था मै "

" धत्त कही नहीं ... हूह और सामान लेकर टाइम से दे जाना बाय "

काजल ने तुनक कर फोन काट दिया शायद वो भी मस्ती के खुमार में थी लेकिन राज ने उसकी बातों को अनसुना कर दिया और वो थोड़ी नाराज हो गई । राज जान रहा था कि ये नाराज बस एक नाटक है और वो वापस संजीव ठाकुर के भेजे हुए व्हाट्सअप चेक करने लगा ।

जिसमें उसने एक वीडियो डाली हुई जिसमें वो लड़की अपने गोल मटोल चर्बीदार चूतड़ों को लहराते हुए होटल के कमरे में टहल रही थी






राज : wow uncle so sexy ✊💦

संजीव : full video send krunga abhi , achche se hilana beta

राज : are uncle ye hai kaun ... Gaad bahut mast hai iski 😋

संजीव : wait

कुछ ही देर एक वीडियो आया और राज ने तुरंत उसे डाउनलोड कर ओपन किया

वीडियो में संजीव ठाकुर उसी लड़की की एक पूल के पास वीडियो रिकॉर्ड कर रहा था जिसमें उसके लचीली चर्बीदार गाड़ पर उसने एक स्टाल बांध रखी थी और पूल के साइड पर खिली हुई धूप में अपने चूतड़ों को मटका कर चली रही थी ।






स्टाल के नीचे से झांकते उसके गुदाज नरम चर्बीदार चूतड़ों की झलक देख कर ही राज का लंड पंप होने लगा और तभी वो लड़की पलटी वीडियो में अपने बालों को सहेजते हुए

एक पल को राज की आंखे बड़ी हुई और उसे यकीन नहीं हो रहा था सामने जिस लड़की को देख रहा है वो उसे अच्छे से जान रहा था और अगले पल जब राज ने वीडियो में उसकी आवाज सुनी तो सब एकदम कन्फर्म हो गया

ये तो लाली की दीदी " रितिका "

" ओह बहनचोद, ये तो रितिका ... सीईईई साली की गाड़ और चूची इतनी मोटी कैसे ? हाईस्कूल में साथ थी और अब ये उफ्फ कितनी माल हो गई है ये तो "

राज खुद से बड़बड़ाया और उसके ख्याल में बस एक ही सवाल आ रहा था कि संजीव ठाकुर का इससे कैसे टांका सेट हो गया और उसने मैसेज किया

: are uncle ye kaise mil gayi apko , isko mai janta hun😁

: kismat hai beta ... Ek bar ek hotel me ruka tha aur ye bhi thi . Raid padi thi aur ye apne kisi dost ke sath aayi thi ... Iske papa mere pahchan ke the to maine ise bachana sahi samjha ... Aur police se bat krke isko ghar drop Kiya . Fir bato hi bato me dosti ho gayi

: sahi hai uncle ...

: Tujhe chahiye to batana...mana nhi kregi 😁

: unhu ap injoy kro uncle ... Mai mere type ki khoj lunga koi ( राज ने ठकुराइन के बारे में सोचते हुए मैसेज लिखा )

दुपहर ढल रही थी और राज ने सोचा आज थोड़ा पहले चला जाए और बार बार उसके जहन में रागिनी की योजना का ख्याल भी आ रहा था । लेकिन काजल भाभी जैसी गदराई माल बार बार मौका नहीं देगी ये भी बात थी ।

कुछ सोच कर उसने बबलू काका को आवाज दी

: जी छोटे सेठ

: अरे काका वो मैने आपको एक box दिया था न रखने को , वो कहा है ?

राज के सवाल सुनते ही बबलू काका का चेहरा सफेद पड़ने लगा और उसका हलक सूखने लगा

: काका !!

: जी जी छोटे सेठ

: अरे वो पैकेट कहा है ?

: माफ कीजियेगा छोटे सेठ याद नहीं आ रहा है ... कही तो रखा था ( बबलू काका दुकान में इधर उधर देखने का )

राज की हालात भी खराब होने लगी कि साला वो आइटम गायब होने जैसा भी नहीं है, किसी और के हाथ लग गया तो मैटर गड़बड़ा जाएगा , तभी राज का माथा ठनका और उसने सोचा क्यों न वो पैकेट जब उसने बबलू काका को दिया उस टाइम की cctv चेक कर ले , आसानी से मिल जाएगा ?

राज उसे दुबारा से खोजने का बोल कर केबिन में चला गया और थोड़ी देर बाद बबलू काका को आवाज देकर बुलाया

: जी छोटे सेठ ( बबलू थोड़ा घबड़ाया हुआ था और जैसे उसकी नजर टीवी स्क्रीन पर गई उसका हलक सूखने लगा )

: ये सब क्या है काका

बबलू कुछ नहीं बोला बस टीवी स्क्रीन पर चल रही अपनी ही चोरी को अपनी आंखों से देख रहा था जब उसने राज के दिए हुए पैकेट की तलाशी ली और उसमें से बड़ा सा लंबा नकली लंड निकला था ।कभी वो उसे हाथों में पकड़ता तो कभी अपने पजामे के आगे रख कर उसकी लंबाई मोटाई चेक करता ,फिर उसने चुपचाप उसे अपने झोले में डाल दिया

: कुछ बोलेंगे ?

: माफ करना छोटे सेठ... घर पर रह गया

: घर पर ? मतलब किसके लिए ले गए थे ... काकी ? ( आंखे बड़ी कर उसने बबलू को देखा जो नजरे गिराए खड़ा था )

: जी छोटे सेठ ...

: अरे हीही, वो किसी और समान था काका और आपके रहते हुए काकी को उसकी क्या जरूरत ?

: वो आप नहीं समझोगे छोटे सेठ ... कल सुबह में ले आऊंगा पक्का

: अरे लेकिन मुझे आज ही उसे वापस करना था .... एक मिनट तो क्या काकी ने उसे यूज भी कर लिया

: हम्ममम ( बबलू शर्मिंदा होकर राज के आगे खड़ा था , राज को हंसी भी आ रही थी और थोड़ा अजीब सा लग रहा था )

: अरे तो आपको मुझसे कहना था मै आपके लिए... मतलब काकी के लिए दूसरा ऑर्डर कर देता न

: माफ करना छोटे सेठ मुझे लगा कि आपको भनक लगे बिना ही उसे वापस रख दूंगा

राज ने वापस घड़ी देखी और अभी भी समय था

: काका , अभी वक्त है क्या आप वापस ले आयेंगे घर से

: अभी ?

: हा क्यों ? क्या हुआ ?

: दरअसल छोटे सेठ सच कहूं तो आपकी काकी नहीं लाने देगी

: मतलब ? , वो किसी और का समान है ?

: समझ रहा हूं छोटे सेठ , अब आपको कैसे बताऊं

: बात क्या है काका , साफ साफ कहिए न ? भरोसा रखिए ... देखिए मै आप पर बहुत भरोसा करता हूं और मेरी कोई भी बात आपसे छिपी नहीं है । ( राज का इशारा आज हुए ठकुराइन और उसकी बेटी के मैटर को लेकर था )

लेकिन बबलू का उतरा हुआ चेहरा देख कर उसकी असहजता का अंदाजा लगाया जा सकता था ।

: समझ रहा हूं छोटे सेठ , लेकिन .... मै सेठ जी ( रंगीलाल ) से बेइमानी नहीं कर सकता

: मतलब ?

: कुछ नहीं ... ये बात यही खत्म कीजिए छोटे सेठ कल मै कैसे भी करके वो समान वापस कर दूंगा । यकीन कीजिए

: काका आप समझ नहीं रहे है , मैने आज का वादा किया है और कल कैसे ?

: लेकिन गायत्री ने कहा कि जबतक सेठ जी नहीं आते वो इसे वापस नहीं करेगी

: पापा का इनसब से क्या ? एक मिनट ... काका सही सही बताना आपको मेरी कसम है क्या मैं जो सोच रहा हूं वो सही है ?

बबलू का चेहरा एक पानी पानी होने लगा और सांसे तेज हो गई

: ये आपने क्या किया छोटे सेठ... भले ही मेरी कोई औलाद नहीं है लेकिन मैने कभी भी आपको अपने बेटे से कम नहीं माना है ... आप अपनी कसम वापस लीजिए हाथ जोड़ रहा हूं आपके

: नहीं काका , आपको सब बताना ही पड़ेगा ? देखिए विश्वास कीजिए मै ये बात मम्मी से नहीं कहूंगा कसम से

: आप मुझे धर्मसंकट में डाल रहे है छोटे सेठ ( बबलू बेचैन होकर कहा )

: ठीक है फिर मै खुद ही चला जा रहा हूं और काकी से इस बारे में बात कर लूंगा ( राज उठ कर जाने लगा बाहर )

: नहीं रुकिए !!

बबलू ने गुजारिश भरे लहजे में राज को रोका

: हम्म्म कहिए

" देखो छोटे सेठ इसमें सेठजी की कोई गलती नहीं है , बात उन दिनों की है जब मुझे टीबी हो गया था और एक दिन मेरी तबियत ज्यादा बिगड़ गई थी और 3 4 रोज मै दुकान नहीं आ पाया था । एक रोज हाल चाल लेने के इरादे से सेठ जी मेरे घर आए थे । उस रोज उन्होंने मेरा हाल चाल लिया और चले गए । उन्होंने मुझे महीने भर की छुट्टी दे दी लेकिन पगार नहीं रोकी और एक बड़े भाई की तरह हर 2 3 दिन पर हाल चाल ले लिया करते थे । आमतौर पर वो शाम को आते थे लेकिन उस रोज वो दुपहर में आ गए और उन्होंने गायत्री को आवाज दी लेकिन देर हो गई थी ... सेठ जी ने गायत्री को बिना कपड़ो के अपनी देह से खेलते देख लिया था... और वो वापस बिना मिले लौट गए । टीवी की वजह से मेरी सेहत बिगड़ गई थी और महीनों से मैने गायत्री के साथ संबंध नहीं बनाए थे और वो बड़ी कामुक औरत है छोटे सेठ । फिर उसके बाद एक सप्ताह तक जब सेठजी मेरी हालचाल लेने नहीं आए तो हमें लगा गायत्री की हरकत से कही वो नाराज न हो गए हो और मैने गायत्री को सेठ जी मिलने के लिए भेज दिया और फिर शाम को वो वापस आई तो उसने कहा सब ठीक है और फिर वापस से सेठ जी 3 दिन आए और झोले में कुछ गायत्री को दिया था । मैने पूछा तो उसने नहीं बताया और फिर उसका व्यव्हार थोड़ा बदला बदला सा था एक रोज जब गायत्री बाजार गई थी और मैने उसकी आलमारी खंगाली तो कपड़ो के बीच वैसा ही एक रबर वाला लंड था लेकिन छोटा सा , पहले तो मुझे लगा कि सेठ जी ने मेरे साथ विश्वासघात किया है लेकिन फिर जब मैने गायत्री से इस बारे में बात की तो वो कहने लगी कि भटक ही जाती अगर सेठ जी उसे समझाते या वो समान नहीं देते क्योंकि उन दिनों गांव के कई मर्दों और लड़कों की नजरे उसके चौड़े कूल्हे पर थी , मुझे इस बात का पूरा अहसास था । जिस तरह से रातों में गायत्री बेचैन रहती थी । फिर कुछ दिन बाद जब सेठ जी वापस मेरा हालचाल लेने आए तो मैने खुले तौर पर उनसे माफी मांगी कि अनजाने में मैने उनके लिए थोड़े समय के लिए ही सही लेकिन उनको बहुत गलत समझ लिया था । उसके बाद से हम दोनो थोड़े खुल कर रहने लगे थे और उसी हफ्ते संजोग से मेरी साहगिरह आने वाला था , लेकिन बेबस था मै बहुत चल फिर नहीं पा रहा था और कितने दिनों से मै अपनी गायत्री को एक साड़ी नहीं दिला पा रहा था । एक रोज मैने सेठजी से मदद मांगी कि वो मेरा सरप्राईज पूरा करने में मेरी मदद करें और उन्होंने अगले रोज एक अच्छी सी साड़ी, श्रृंगार के सारे समान सहित लेकर आए । बाद में पता चला कि श्रृंगार के समान में उन्होंने उसके नाप की ब्रा और कच्छी भी रखवाई थी , पहले मुझे थोड़ा असहज लगा लेकिन जब सेठ जी ने कहा कि ये साड़ी और समान सब सेठानी जी ने अपने पसंद से रखे थे तो मै खुश हो गया । मैने उन्हें अपनी सालगिरह पर आने का न्योता दे दिया और सेठानी जी तब आपकी मौसी के घर गई थी शादी में । इसलिए सेठजी बस आए और उस रात गायत्री ने वही साड़ी पहनी थी जो सेठजी लाए थे । खाने के बाद सेठजी ने गिफ्ट के तौर पर मुझे चुपके से कॉन्डम के साथ एक ताकत वाली गोली दे दिए । चूंकि घर पर कोई नहीं था तो वो भी उस रात हमारे घर रुक गए ।

दवाई तगड़ी थी और महीनों बाद गायत्री का गदराई जवानी को मसलने को मिला था , कमरे में सिसकियां उठ रही थी और मैने पूरी ताकत से गायत्री की खातिरदारी की बिना झिझक के कि हमारी आवाजों से सेठजी की नींद बिगड़ जायेगी । एक राउंड के बाद मै लेट गया लेकिन गायत्री की प्यास अधूरी थी और वो टहलती हुई बाहर चली गई । कुछ देर बाद मुझे कुछ फुसफुसाहट सुनाई दी और वो गायत्री और सेठजी थे ।

" अरे भौजी इतना भी मत लजाओ , कम से कम सालगिरह तो अच्छी गई न"

" धत्त रंगी बाबू तुम भी , अरे उतना से भला कुछ होता है खास दिन था कम से कम दो बार तो ... "

" हाहाहाहा तुम भी न भौजी , अरे बबलू के इतनी हिम्मत की कम था "

" हा जानती हूं उनकी हिम्मत को , देखा मैने जादू वाली गोली गटकते हुए हाहाहाहा "

" अरे उसका भी मन था ... वैसे वो पसंद आया कि नहीं उसको "

" क्या ? "

" अरे ... अंदर वाली चीज "

" धत्त रंगी बाबू , पता नहीं कैसे आपको साइज पता चल गई "

" असल में साइज तो सोनल की मां ने ही निकाला था , मैने तो बस रंग पसंद किया था हाहाहाहा "

" धत्त बड़े बेशर्म हो ... जाओ सो जाओ अब "

" अह्ह्ह्ह्ह नीद तो नहीं आ रही है ? "

" क्यों ? सेठानी बहन की याद आ रही है हीहीही "

" अब आपसे क्या छुपाना भौजी , जो माहौल था अंदर अभी उसे देख कर किसको नहीं याद आएगी घर की भला "

" मतलब... आप अंदर देख रहे ... "

" आह माफ करना भौजी आपकी सिसकियांयो से ज्यादा तो बबलू की कराह उठ रही थी हाहाहाहा मुझे लगा कही तबियत न बिगाड़ ले और अंदर देखा तो सब सही दिखा और मै वापस आ गया "

" और कब आए थे आप ... उम्मम "

" अह छोड़िए न भौजी क्या आप भी "

" अरे बताईये न , अब हमसे क्या शर्माना हीही "

" वो ... जब वो पीछे से आपकी कच्छी किनारे कर "

" बस बस बस हीही ... मै सोने जा रही हूं आप भी आराम कर लीजिए "

फिर उसके बाद सो गई और मै भी ।

कुछ 15-20 दिन बाद मै ठीक हो गया और दुकान आने लगा । फिर सब सही चल रहा था हालांकि शरीर की कमजोरी अभी भी थी , जो थोड़ी बहुत ताकत थी वो दुकान में मेहनत में चली जाती और गायत्री बिस्तर पर प्यासी रह जाती । मैने इसकी चर्चा सेठजी से कि मुझे हफ्ते में दो दिन छुट्टी दे दिया करे , लेकिन उन दिनों शादियों का सीजन था और ग्राहकी तेज थी । कुछ सोचकर उन्होंने कहा कि दुपहर में गायत्री से खाना लेकर आने को कहा और ऊपर कमरा खाली होता है । मै सेठजी का कहना समझ गया था । पहले से तो गायत्री झिझक रही थी लेकिन फिर कुछ सोच कर वो मान गई । कुछ रोज तक ये सब चलता रहा लेकिन कभी कभी ग्राहकी तेज होने पर सेठजी को ऊपर समान लेने आना पड़ता था और वो जब ऊपर आते तो बर्तनों की आवाज से हम समझ जाते थे । फिर एक रोज गायत्री ने मना कर दिया और जब वो नहीं आई तो सेठजी ने इस बारे में पूछा और उसे दुकान बुलवाया

" रंगी बाबू आप जितना बड़े दिल वाला आदमी भला कौन होगा , लेकिन अब मै आपकी सादगी का और फायदा नहीं उठा सकती हूं "

सेठ जी गायत्री की जिद समझ रहे थे और कुछ दिनों से मुझे भी दोपहर को उसका सुख लेने की आदत हो गई थी । हम दोनो जानते थे कि सेठ जी ने कई बार हमें कमरे में देखा है लेकिन अब हमारी झिझक खत्म हो गई लेकिन दुकानदारी बिखरे ये हमें मंजूर नहीं था ।

" अरे तो फिर मेरा क्या होगा "

" मतलब "

" अरे भौजी , तुम्हारी वीडियो तो मै सोनल की मां को दिखा कर नए नए तरीके से मजे लेता हूं और तुम हो कि मेरा काम बिगाड़ रही हो "

मै जान रहा था कि सेठजी मजाक कर रहे थे लेकिन गायत्री अचरज में पड़ गई ..... फिर सेठ जी ने यही टीवी पर हमारी कमरे वाली सारी कहानी दिखाई , गायत्री को चुदाई के कई पैंतरे आते थे । अब तो बस हम सब एक दूसरे का मुंह ताक रहे थे ।

" देखो भोजाई , मै अपना मजा किरकिरा नहीं करने वाला तो आप लोग अपना शो जारी रखो , अरे भाई कम से कम मेरा नहीं तो सोनल की मां का ख्याल रखो " , ये कहकर सेठजी ने मुझे आंख मार दी और मै समझ गया ।

फिर मैने गायत्री को सेठजी के अहसानों में बांध दिया और फिर से गायत्री दुकान पर आने के लिए मान गई । लेकिन इनसब में बेचारी सेठानी जी तो निर्दोष थी ... लेकिन गायत्री की खुराफात बढ़ने लगी थी और वो पहले से ज्यादा जोश में आकर चुदवाने लगी । लेकिन बीच बीच उसकी जिज्ञासा बढ़ने लगी और वो सेठानी जी को लेकर सवाल करने लगी । इससे मै बड़ा बेचैन होने लगा और सेठजी से इस बारे में बात की तो कुछ विचार कर सेठजी ने अकेले में उससे बात करते और झूठ मूठ के किस्से गढ़ने लगते कि सेठानी जी गायत्री की तरह उनके हथियार को सहलाती दुलारती है अब ।

" हीही क्या रंगी बाबू , बहुत कहानी बनाते है । भला इतनी दूर से क्या दिख जाता है उनको और आपको "

" अरे वही तो , सोनल की मां की शिकायत थी वीडियो साफ साफ होता तो अच्छा रहता "

" अच्छा वो कैसे होगा "

" अगर बुरा न मानो तो मै मोबाइल दे दूंगा उससे रिकॉर्ड करके दे देना मुझे "

सेठजी ने ये सब कह कर मुझे आंख मारी और मै समझ गया कि वो बस गायत्री को उलझाए रखना चाहते है ताकि मेरी गृहस्थी बनी रहे । सेठ जी थे भी थोड़े हसमुख और मस्त मिजाज के इनसब बातों पर खुल कर बात भी करते थे मुझसे ।

फिर मैने अगली रोज वीडियो बनाने की कोशिश की लेकिन मोबाइल गलत जगह रख दिया था और वीडियो बन नहीं पाई थी अच्छे से । लेकिन उस रोज गायत्री ने बड़े जोश में थी न जाने क्यों ।

अगली रोज थोड़ा सेट करके मैने अच्छे से साफ वीडियो बनाया , वीडियो बनाना जरूरी था क्योंकि गायत्री चेक करती थी कि कैसी बनी है । हालांकि वो लजाती लेकिन सेठजी और सेठानी की के लिए उसे ये सब करने में बड़ा सुख था । उस रोज वीडियो अच्छी बनी थी

गायत्री ने शर्मा कर वीडियो सेठजी को दी और

" आज वाली अच्छी है देख लीजिए "

सेठ जी ने वीडियो चलाई और उसमें ताबड़तोड़ पेलाई की थी मैने , लंड में उस रोज अलग ही जोश था । गायत्री की सिसकिया भी बड़ी नशीली हर वक्त उसकी नजरे मोबाइल की ओर थी और उस दिन उसने अपने पूरे कपड़े निकाल कर चुदाई कि थी ।






वीडियो देख कर सेठजी थोड़े उफनाए और गहरी सांस ली , मै समझ गया था कि इतनी कामुक वीडियो देख कर किसी का भी दिल घबरा जाए ।

" अब तो सेठानी बहन को शिकायत नहीं होगी न हीही"

" अह क्या बोलूं मै ... "

सेठ जी हिचक रहे थे और मुझे घूर कर देख रहे थे क्योंकि सेठजी से मुझसे साफ कहा था कि वीडियो बनाना नहीं है बस बनाने का नाटक करना है । लेकिन अब उन्हें कैसे समझाता कि गायत्री खुद से वीडियो चेक करती थी और उस रोज मोबाइल भी वही लेकर आई थी ।

" क्या हुआ रंगी बाबू अच्छा नहीं है क्या ? "

" अरे नहीं सब ठीक ही है ... सोनल की मां को पसंद आएगा । इससे पहले कभी आपका ये रूप नहीं देखा हाहाहा"

सेठजी का इशारा गायत्री के नंगे देह की ओर था जो वीडियो में दिख रहा था और वो वापस मुझे थोड़े नाराज नजरो से देखने लगे ।

फिर गायत्री चली गई और सेठजी ने मुझे बहुत डांट लगाई

" सेठजी , आप जानते है कि उसे आपसे अब लाज नहीं आती तो अब मै क्या करु "

" हा लेकिन ... मेरी हालात भी समझो बबलू "

मै जान रहा था कि सेठ जी भी कामोत्तेजक हो रहे थे लेकिन कोई क्या कर सकता था । बाद में मैने गायत्री से इस बारे में जिक्र किया कि सेठजी थोड़े परेशान हो गए थे तो उसने हंसी में इस बात को ले लिया और बताया कि उसने भी सेठजी की बेचैनी उनके पजामे में उछलती देखी थी । अगले दिन गायत्री जब दुकान आई तो ऊपर जाने से पहले उसने सेठजी से थोड़ा खुल कर बात की और पता चला कि सेठानी का महीना आया हुआ था और कल से ही सब बंद है । फिर हम लोग ऊपर चले गए और उस रोज गायत्री थोड़ी उदास थी उसका मन नहीं लगा उसने वीडियो बनाने से भी मना कर दिया । कही न कही उसके मन में सेठजी को लेकर दया की भावना थी । वो चली गई और रात में जब घर उससे बात हुई तो उसने कहा कि उसे आज सेठजी की तकलीफ देखी नहीं गई , एक तो उसकी वजह से सेठजी से परेशान हो गए और उसने आज उनका मजाक भी बना दिया । मैने उसे समझाना चाहा लेकिन वो अपने ग्लानि में कुछ ऐसा पहल कर गई कि मै निशब्द रह गया

" ये तू क्या कह रही है गायत्री "

" देखिए मै जानती हूं कि ये गलत है लेकिन सेठजी ने हमारे लिए इतना किया है और मुझसे उनकी ये तकलीफ नहीं देखी जाती ... मुझे ये भी पता है कि आप मुझे नहीं रोकेंगे "

" बात मेरे रोकने न रोकने की नहीं है गायत्री , सेठजी कभी नहीं तैयार होंगे मुझे इसका यकीन है ... दुकान पर रह कर मै उन्हें अच्छे से जानता हूं और इतने महीने में वो हमसे कितने खुल कर है क्या उन्होंने कभी इसका फायदा उठाया... फिर तू कैसे ? "

" हा जान रही हूं मै ... लेकिन जब वो खुश थे तो मुझे भी वहा जाना ठीक लगता है और ऐसा है तो मै नहीं आऊंगी कल से .. बता रही हूं "

वो उस रोज एकदम जिद पर आ गई , हालांकि मुझे कोई ऐतराज नहीं था कि गायत्री सेठजी को दुपहर में उनका हथियार सहला कर उसे शांत कर दे पर मुझे यकीन था कि सेठ जी राजी नहीं होंगे । लेकिन जब गायत्री ने दुकान आने से मना कर दिया तो बड़ा अजीब लगा मुझे ... सच कहूं तो दुकान पर जिस जोश से वो मेरे साथ होती थी उसकी आदत होने लगी थी मुझे भी और ये लालच ने मुझे बहका दिया । मैने उसे इजाजत दे दी

" लेकिन तू उनसे ये सब कहेगी कैसे "

" वो सब आप मुझ पर छोड़ दो हीही "

अगले रोज वो आई , उस रोज वो बाकी दिनों से ज्यादा ही सज सवर कर आई थी , सेठजी ने भी उसे ध्यान से देखा । मेरी नजरे तो उस रोज बस सेठजी पर थी । वो उस दिन सेठजी के लिए भी खाना ले आई थी ।

केबिन में हम तीनो बैठे हुए थे , उसकी साड़ी का पल्लू ढीला था और ब्लाउज भी गहरे गले का था , मैने देखा तो सेठजी की निगाहे भी उसके गोरी चूचियों को छिप कर निहार रही थी

, सच कहूं तो डर लग था कि कही सेठ जी नाराज न हो जाए लेकिन खाना खाने तक सब ठीक था ... सेठ जी बाहर चले गए दुकान में और मै ऊपर चला गया ।

ग्राहकों से निपटारा कर जब सेठजी केबिन में गए तो गायत्री वही थी

" अरे भौजी तुम ऊपर नहीं गई "

" नहीं वो बस जा रही थी ... बैठो न रंगी बाबू कुछ बात करनी है "

" हा कहिए भौजी "

" वो मै .. कल से माफी चाहती हूं मुझे पता नहीं था सेठानी बहन का महीना आया है और मैने आपका मजाक बना दिया "

" अरे तो क्या हुआ भौजाई हो इतना तो हक है आपका "

" बस इतना ही "

" मतलब "

" अरे भौजाई का और भी कुछ हक होता है न "

" साफ साफ कहिए भौजी मै समझ नहीं पा रहा "

" अरे भौजी का ये भी हक है कि उसके देवर को कोई तकलीफ न हो कम से कम उसकी वजह से "

" अरे हाहा आपने कहा मुझे तकलीफ ... "

" साफ साफ दिख रहा है रंगी बाबू अब छिपाओ मत निकालो बाहर उसे "

" ये क्या कह रही है भौजी आप , नहीं नहीं मैने कभी आपको उस नजर से नहीं "

" चलो झूठे , खूब पता है बर्तन खोजने के बहाने कमरे में तांक झांक करते हो सब पता है मुझे और भला इसमें कोई बुराई भी नहीं है मर्द होने की पहचान है .. अरे निकालो न "

" भौजी नहीं , देखिए बबलू ऊपर आपकी राह देख रहा होगा आप जाइए ..बात मानिए "

" ठीक है फिर मै घर जा रही हूं "

" अरे ? ये क्या बात हुई ! आप मुझे धर्मसंकट में डाल रही है "

" और आप मुझे , पता है कल से मै , मै कुछ अच्छे से नहीं कर पा रही हूं जब भी वो पास आते है आपका बुझा हुआ चेहरा दिखता है । आप खुश रहते है तो थोड़ा अच्छा लगता है . बस मेरी खुशी के लिए ही करने दीजिए न "

" ये सब आप क्या कह रही है भौजी ... बबलू को भनक लगी तो अच्छा नहीं होगा ये धोखा होगा उसके साथ "

" उन्हें सब पता है और ये उनकी मर्जी से हो रहा है निकालिए न उम्मम सांड जैसा तान रखा है और निकालने में शर्मा रहे है सीईईई उफ्फ कितना कड़ा है "

" ओह्ह्ह भौजी नहीं मत करिए रुक जाइए न सीईईई कितने ठंडे है आपके हाथ अह्ह्ह्ह्ह , क्या करेंगी मुंह में ओह्ह्ह्ह उम्ममम उफ्फ कितनी मुलायम जीभ अह्ह्ह्ह सीईईईईई ओह्ह्ह्ह भौजी "

फोन पर मै लगातार वो सारी बातें सुन रहा था जो उस केबिन में सेठजी और गायत्री के बीच हुई ।उसने उस रोज सेठजी को खुश किया और फिर मेरे पास आई ... ना जाने क्यों उस रोज मुझे बड़ा जोश आया और मैने उसे बहुत बेरहमी से पेला। अगले रोज जब गायत्री आई तो सेठ जी ने कहा कि पहले हम लोग अपना काम कर ले फिर गायत्री जाते हुए मिल कर जाए ।हम समझ गए कि सेठ जी अच्छे से इंजॉय करना चाहते थे और हमें भी खुशी थी । लेकिन उसके दो रोज बाद कुछ अलग हुआ जिसकी मुझे भी उम्मीद नहीं थी । सेठजी ऊपर आ गए थे और वो खिड़की से अंदर झांक रहे थे और बाहर हिला रहे थे ,






गायत्री ने चुदवाते हुए उन्हें देखा और उसका जोश तो कई गुना बढ़ गया और फिर बाद में सेठजी ने बताया कि कैमरे में नेटवर्क की वजह से कुछ दिक्कत थी इसलिए वो ऊपर आ गए थे । धीरे धीरे हफ्ता गुजर गया और ये सिलसिला कायम रहा ... अब सेठानी जी कोई बात नहीं होती थी ये सब हमारे रूटीन में शामिल जैसे हो गया ।ना सेठजी ने कभी मना किया और न गायत्री ने कुछ कहा । रोज सेठजी ऊपर आते और कभी खिड़की से तो कभी दरवाजे से अंदर देखकर हिलाते रहते। फिर मै नीचे चला जाता गायत्री वैसे ही नंगी उनका लंड निचोड़ देती ।





कई बार मै छिप कर देखता कि शायद सेठजी कुछ पहल करे या गायत्री को छुए लेकिन ऐसा नहीं हुआ ।

हम थोड़ा और खुलने लगे और मै गायत्री को चोदने के बाद कमरे में कुछ देर ठहरने लगा और गायत्री मेरे सामने ही सेठजी का मोटा लंबा लंड चुस्ती और शांत करती उन्हें ।

एक रोज गायत्री ने पहल की अगर सेठजी को दिक्कत नहीं है तो वो नीचे केबिन में ही अपना काम कर सकते है और वो आराम से सोफे पर बैठ कर इसका मजा ले सकते है , गायत्री को सेठजी को लंबे समय तक खड़ा होकर देखना अच्छा नहीं लगता था । सेठजी मान गए

पहले हम शुरू हो जाते थे और फिर सेठ जी केबिन में आते और सोफे पर बैठ कर आराम से हमारी तरफ देखते अपना लंड मसलते।






एक रोज गायत्री मेरे ऊपर बैठी उछल रही थी और सामने सेठ जी अपना लंड हिला रहे थे और एकदम से गायत्री ने उन्हें अपने पास बुला लिया।





सेठजी भी आ गया और गायत्री मेरे लंड पर उछलते हुए उनका लंड चूसने लगी । वो नजारा मेरे लिए बहुत कामोत्तेजक था और फिर जब मै झड़ गया तो गायत्री ने मुझे बाहर भेज दिया और कुछ ही देर बाद केबिन से वापस से गायत्री की मादक तेज सिसकिया उठने लगी । मै समझ गया कि गायत्री ने आज सेठ जी को खुद को पूरा सौंप दिया था





और मैने हल्के से दरवाजा खोल कर अंदर देखा तो सेठजी हफ्तों की भड़ास को गायत्री के चूत में अपना लंड डाल कर उतार रहे थे उसको घोड़ी बना कर । उसके बाद से हर रोज का ही है लगभग कि दुपहर में सेठजी और फिर मै बारी बारी गायत्री के साथ करते थे । इधर जब सेठजी नहीं है तो वो नहीं आती है लेकिन सेठजी के मोटे लंड की तलब अभी भी उसे तंग करती है और इसीलिए मैने वो चुराया था कि उसको अच्छे से मजे देकर वापस कर दूंगा । लेकिन वो उसे इतना पसंद आया कि जबतक सेठजी नहीं आते वो देने को तैयार नहीं है ।

: उफ्फ काका कितनी कामुक कहानी थी अह्ह्ह्ह्ह मेरी तो पेंट ही फट जाए हाहाहाहा

: प्लीज छोटे सेठ ये सब सेठजी या सेठानी जी को भनक न लगे , मै वादा करता हूं कि आपकी बातें भी मुझ तक ही रहेंगी

: अरे मुझे पता है लेकिन अह्ह्ह्ह खैर छोड़ो ... देखते है क्या होगा भाई कुछ न कुछ करना ही पड़ेगा ।

वही इनसब से अलग अनुज को रागिनी उठा रही थी क्योंकि शाम हो रही थी ।

जारी रहेगी
 
💥 अध्याय 02 💥

UPDATE 032


प्रतापपुर

सर्दियों का सूरज कुछ ज्यादा ही तेजी ढलने लगता है , सुनीता अपने पति राजेश के साथ पास के बाजार गई थी क्योंकि कल उसको रंगीलाल के विदाई के लिए कपड़े और मिठाईयां लेनी थी । इधर बनवारी और रंगीलाल गोदाम से घर की ओर लौट रहे थे और बनवारी ने एक दो बार आवाज दी लेकिन कोई कुछ नहीं बोला

: अरे घर में कोई नहीं है क्या ? ( रंगी फिकर से बोला )

: नहीं नहीं , गुड़िया को तो आ जाना चाहिए था स्कूल से

इधर दोनों उनके कमरे की ओर बढ़ रहे थे कि उन्हें दोनों बहने किचन के पास झगड़ती हुई दिखी

: हा तो मै क्यों करूं ? मै भी तो स्कूल से आई हूं तू कर ... सारा दिन घर में थी

: अरे यार कमर दर्द था मुझे इसीलिए नहीं गई थी ,नहीं तो कर नहीं देती क्या ( गीता ने मुंह बना कर कहा )

: हा सब पता है मुझे क्यों दर्द था तुझे , रात भर मजे लिए और दिन में नाटक कर रही है । देख ये बर्तन तू ही धोएगी मै नहीं ... समझी

: और तू ... तू नहीं आई है जैसे सिलाई सेंटर से मिलकर अपने यार से .... मै भी नहीं धोने वाली समझी ।

बनवारी और रंगी दोनों की बहस देख कर समझ गये क्या माजरा है

बनवारी लपक कर आगे गया और दोनों चुप हो गई ।

रंगी ने इशारे से बनवारी को कहा कि वो गीता को लेकर जाए अपने साथ वो बबीता को समझाता है

बनवारी गीता को लेकर चला गया और रंगी ने बबीता से बात करके उसे भेज दिया किचन से

हालांकि बहुत ज्यादा बर्तन नहीं थे लेकिन वो नहीं चाहता था कि उसका कम से कम आज रात का प्रोग्राम बिगड़े , इसीलिए फटाफट से उसने खुद बर्तन धो दिए और दबे पाव हाथ पोंछ कर हल्का सा बबीता का कमरा खोला तो देखा कि बिस्तर में लेटी हुई मोबाइल पर चैट कर रही थी किसी से

रंगी समझ गया माजरा असल में क्या था । उसे अपने bf से बात करनी थी और फिजूल काम में उसका मन नहीं था ।

कमरे में बबीता स्किन टाइट लेगिंग और टॉप पहनी थी और हल्की सर्दी के लिए ऊपर से एक हॉफ जैकेट जैसा पहना था उसने

बिस्तर पर लेटे हुए उसके चर्बीदार पाव जैसे चूतड़ उभरे हुए थे और उन्हें देखते ही रंगी का का लंड सलामी देने लगा ।

रंगीलाल ने चुपके से कमरे का दरवाजा बंद किया और फिर दबे पाव बबीता के पास जाकर दोनों पंजों से उसके छोटे मुलायम चूतड़ों को मसला और बबीता एकदम से चिंहुक पड़ी

: अह फूफा जी आप हो ...

: सीईईई तुझे क्या लगा , तेरे दादा जी है उम्मम

: धत्त वो क्यों पकड़ेंगे ऐसे ( बबीता थोड़ी लजाई) सीईईई अह्ह्ह्ह धत्त छोड़ो न






: क्यों जब मीठी के साथ कर सकते है तो तेरे साथ क्यों नहीं उम्मम ( रंगी ने उसके चर्बीदार चूतड़ों को दोनो पंजों में भरते हुए दांतों से उसके मुलायम चूतड़ों को लेगिंग्स के ऊपर से काटने लगा )

: सीईईई अह्ह्ह्ह मम्मीइई मत करो न दर्द हो रहा है अह्ह्ह्ह्ह फूफा जी ( बबीता सिसक पड़ी )

रंगी ने उसके चूतड़ छोड़ दिए और फटाफट से अपना पेंट खोल कर लंड बाहर निकाल दिया

सुखा गर्म और कड़क

रंगी बबीता के दोनों पैर क्रॉस कर उसके चूतड़ों के पास आ गया और अपना लंड उसके मुलायम चूतड़ों के बीच में दरार के ऊपर पटकने लगा जिससे बबीता मचल उठी






रंगी का मोटा लंबा लंड चट चट उसके चूतड़ों पर बैठ रहा था और उसका भारीपन बबीता अपने मुलायम चूतड़ों के साफ महसूस कर रही थी उसपर से सर्द मौसम में हर बार उसके गाड़ में झनझनाहट सी उठती जब जब रंगी का लंड किसी लचीली छड़ी की तरह चट से उसके गाड़ पर गिरता

: अह्ह्ह्ह्ह क्या कर रहे हो उम्मम ( इस बार बबीता अदंर से मचल उठी थी रंगी के कड़े लंड के अहसास से )

: बताया नहीं तूने उम्मम

: अह्ह्ह्ह क्या नहीं बतायाहह

: यही कि तेरे दादू तुझे भी तो चोदना चाहते होंगे ओह्ह्ह्ह कितनी मुलायम गाड़ है तेरी सीईईई बहनचोद ऐसे ही घुस जा रही है ( रंगी ने अपना नुकीला टोपा बबीता के चर्बीदार चूतड़ों के दरारों में लेगिंग्स के ऊपर से ही घुसाने लगा और और अंदर धंसने लगी )






: अह्ह्ह्ह धत्त गंदे हो आप ... सीईईई ओह्ह्ह मम्मीइई नहीं फट जाएगी ऐसे सीईईई

: अच्छा रुक निकाल देता हूं

: क्या हीहीही नहीं रुको अह्ह्ह्ह्ह फूफा जी नहीई ( बबीता खिलखिलाई लेकिन रंगी ने एक ना सुनी और उसकी लेगिंग्स पैंटी समेत खींच कर जांघों के नीचे कर दी और बबीता के पूरे बदन में कंपकंपी सी होने लगी उसने अपना शरीर ढीला छोड़ दिया ।

बबीता की गोरी चर्बीदार चूतड़ों पर अपना चिपकाते हुए रंगीलाल ने उसके चूतड़ों को फैलाने लगा और बबीता की सिसकिया उठने लगी

: उम्मम देखो तो दादू को सोच सोच कर कैसे पानी छोड़ रही है ( रंगी ने उसकी बजबजाई बुर पर उंगलियां फिराई और मुंह में रख दी )






रंगी की खुरदरी उंगलियों का स्पर्श पाकर बबीता के अपनी फांके कस ली और झुकी हुई वो अकड़ गई

: सीईईई धत्त क्यों बार बार उनका नाम ले रहे हो आप सीईईई आह्ह्ह्ह मम्मीइई ओह्ह्ह्ह उम्ममम

रंगी के चूतड़ों को फैला कर अपनी जीभ से उसके गाड़ के सुराख को चाटने लगा और बबीता कपकपा कर सिसकने लगी






उसकी गाड़ की सुराख को चाटते हुए रंगी अपना लंड सहलाते हुए बोला : क्यों तेरे मन नहीं है क्या अपने दादू से अपनी गाड़ चटवाए उम्मम, बोल न

रंगी ने उसकी गाड़ के छेद पर जीभ नचाते हुए उसके गीली फांकों को उंगलियों से रगड़ने लगा और बबीता पूरी हिल गई और उसकी आंखे उलटने लगी पीठ और टाइट होने लगी , उसकी जांघें कसने लगी

: वो मेरी क्यों चाटेंगे , उनको तो बस मीठी से प्यार है । देखा मैने कैसे उसको मुंह पर बिठा कर कर रहे थे

रंगी साफ साफ देख रहा था कि बबीता को गीता से कितनी जलन है और उसने इसी बात का फायदा उठाने का सोचा ।

: लेकिन तू तो मेरा चुसेगी न उम्मम आजा

बबीता झट से उठ कर नीचे बैठ गई और रंगी का बड़ा सा लंड पकड़ कर मुंह में ले लिया

: ओह्ह्ह्ह उम्ममम सीईईई आराम से बेटा ओह्ह्ह्ह सीईईई सच कहूं तो तेरे जितना अच्छा तो मीठी को भी नहीं चूसना आता

रंगी ने बबीता को और वो रंगी के आड़ सहलाते हुए उसका लंड और गहराई में उतारने लगी






: उफ्फ ऐसे ही बेटा उम्मम अरे एक बार अपने दादू को ऐसे मजे दे दे फिर देख वो सारा दिन तुझे अपने गोदी में लेकर घूमेंगे सीईईई शाबाश बेटा उम्मम और गिला कर सीईईई ओह्ह्ह ऐसे ही उफ्फ तेरी जीभ सीई ऐसे ही अह्ह्ह्ह बड़ी कलाकारी है तुझमें सीई इसीलिए तो तू मुझे पसंद है अह्ह्ह्ह्ह फूफा को अपनी बुर नहीं देगी

बबीता मुस्कुराई और खड़ी हो गई और रंगी ने उसको पकड़ कर लिटा दिया और जांघें फैला आकर उसके कसी बुर में अपना सुपाड़ा उतार दिया

: ओह्ह्ह्ह मम्मीई ओह्ह्ह फक्क ओह्ह्ह आराम से ओह्ह्ह्ह बड़ा है आपका बहुत






: तेरी बुर बहुत मस्त है बेटा ओह्ह्ह कितनी कसी हुई है सीईईई ओह्ह्ह ले तुझे जितना पेलू मन नहीं भरेगा सीईईई ओह्ह्ह तेरी पढ़ाई नहीं होती तो तुझे अपने साथ घर ले जाता

: क्यों सीई ओह्ह्ह्ह मम्मीई ओह्ह्ह

: दुकान पर तुझे रोज पेलता सीईईई ओह्ह्ह उम्ममम तेरी कसी गाड़ को चाटता

: ओह्ह्ह्ह फूफा जी ओह्ह्ह्ह कितनी अच्छे हो आप मुझे आपके लंड की बहुत याद आएगी ओह्ह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह सीईईईईई

: आज की रात मेरे साथ सो जाना बोल आएगी न ( रंगी लाल अपना लंड निकाल कर बिस्तर पर लेट गया और ये इशारा था कि बबीता ऊपर आए )

: रात में ? लेकिन आप तो दादू के साथ रहेंगे न ? ( बबीता ने रंगी का लंड अपनी बुर पर सेट करते हुए कहा )

जैसे ही लंड का टोपा उसकी बुर में सरका रंगी ने उसको अपनी ओर खींच लिया और पंजों से दोनो चर्बीदार चूतड़ों को सहलाते हुए नीचे से झटके देने लगा और बबीता की सिसकिया उठने लगी






: हा तो क्या हुआ ... वैसे भी तेरे दादू मीठी के साथ सोएंगे तू मेरे साथ सोना ... सारी रात हम लोग ऐसे चुदाई करेंगे

: उम्मम सच में फूफा जी ओह्ह्ह्ह उम्ममम सारी रात

: हा बेटा ओह्ह्ह्ह तुझे तो बड़े तरीके आते है ओह्ह्ह् सीईईई अह्ह्ह्ह हा बेटा और और ऐसे ही उफ्फ तू तो कमाल कर गाड़ हिला रही है अपना ओह्ह्ह्ह

: उम्मम अह्ह्ह्ह्ह सीईईई फूफा जी ऐसे और मजा आता है मुझे ओह्ह्ह्ह अंदर तेजी से खुजली होती है और ओह्ह्ह्ह सीईईई ओह्ह्ह मम्मीइई

: रात में तुझे ऐसे ही पेलूंगा, सारी रात अपने लंड पर बिठा कर

: और अगर दादू आ गए तो

: तो उनके सामने ही पेलूंगा बेटी ओह्ह्ह्ह

: उफ्फ सच में फूफा जी ओह्ह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह सीईईई अह्ह्ह्ह मम्मीइई ओह्ह्ह्ह यशस्स फक्क्क् मीईईईई






: हा बेटा उनके सामने चोदूंगा ऐसे ही ओह्ह्ह ओह्ह्ह उम्ममम सीईईई और और हिला ऐसे ही ... बोल चुदवाएगी दादू के सामने अपने

: हा फूफा में मीठी और दादू दोनों के सामने चुदवाऊंगी आपसे ओह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह सीईईई अह्ह्ह्ह मम्मीइई फक्क मीईई ओह्ह्ह्ह यशस्स अह्ह्ह्ह्ह सीईईई ओह्ह्ह फूफा जी आ रहा है मेरा

: बेटा मेरा भी आयेगा ओह्ह्ह जल्दी से आजा बेटा सीई ओह्ह्ह्ह आजा ले ले ओह्ह्ह उम्ममम उफ्फ कितनी अच्छी है तू

रंगी एक के बाद एक झटके लेटे हुए खा रहा था और बबीता बिस्तर पर झुक कर उसका लंड मुंह में लिए सारा माल सुरुक रही थी

थोड़ी देर बाद रंगी कमरे से बाहर आया अपने कपड़े सही करते हुए और बनवारी के कमरे में चला गया

: क्या हुआ जमाई बाबू

: सब सेट है बाउजी ( रंगीलाल ने अंगड़ाई लेकर कहा )

: मतलब ?

: मतलब ये कि गुड़िया को आज रात चुदवाते हुए उसके दादू देख ले तो कोई बात नहीं हाहाहाहाहा

: सच में बड़े जादूगर जो जमाई बाबू , क्या जादू किया है कि इस घर की लड़कियां औरते सब हाहाहाहाहा

: अरे बाउजी काहे का जादू हीही अरे जादूगर तो रज्जो जीजी को कबका .... ( रंगी ने मुस्कुरा कर अपना शैतानी इरादा जाहिर किया और इसपर बनवारी ठहाका लगा कर हस दिया )

: अच्छा इसका क्या हाल है ( रंगी का इशारा गीता की ओर था )

: थोड़ा चूसा थोड़ा चुसाया.... अभी तो दूध के लिए भेजा है पास के मुहल्ले में... घर के भैंस गाय का हाल जान ही रहे हो

: अच्छा अच्छा ठीक है .... तो जबतक साले साहब वापस नहीं आते आओ थोड़ा गुड़िया को मिल कर समझाते है

: हैं सच में ? थकी तो नहीं होंगी न

: अरे बाउजी वो थकने वाली चीज नहीं है आइए

: हाहाहाहा आप भी जमाई बाबू .. ये आपकी पहेलियों वाली बाते मुझे बड़ी भाती है चलिए हाहाहा

दोनों निकल गए बबीता की तलाश में ....

वही इन सब से अलग मदन की गाड़ी चमनपुरा की सीमा में दाखिल होने के लिए कुछ ही किमी दूर थी

मदन आसानी से हाइवे पर ड्राइव पर रहा था । पीछे सोनल और अमन गहरी नींद में थे और आगे निशा भी नींद में थी लेकिन एक हल्की गर्माहट भरा स्पर्श उसे महसूस हुआ जैसे कोई टॉप में हाथ डाल कर उसके मुलायम फूले हुए चूचों को छूने की कोशिश कर रहा हो






उसकी सांसे चढ़ने लगी , एक रूहानी सी सिहरन और निप्पल कड़े होने लगे । फिर वो स्पर्श कही गायब सा होने लगे । निशा बंद आंखों से उसे तलाशने सी लगी अपने सपनो में कही और फिर उसकी धड़कने तेज हुए उसके दाएं निप्पल पर टॉप के ऊपर से उंगलियों की टिप का घूमना ,

पूरे बदन में अकड़न और उसके पैर फैलने लगी .. वो प्रक्रिया दुहराने लगी और उसके निप्पल की संवेदनशीलता गहरी होने लगी । सांसे गर्म होने ऊपर आने लगे और नथुनों में अजीब सी उफनाहट... उसने अपनी जांघें कस ली और सिसक कर बुदबुदाना चाहा लेकिन होठ नहीं हिल पा रहे थे , सांसे और भी ज्यादा बेचैन आंखे खुल गई और वो पंजे से उसके दोनों चूचे को बाहर निकाल कर हाथों में भर कर घुलाने लगा






और निशा गर्दन ड्राइविंग सीट की तरफ किए हुए एक धुंधले से चेहरे को देख रही थी , और उस ड्राइवर को रोकना चाहती थी । अचेतन में वो नाम गूंज रहा था लेकिन जुबान सिली हुई थी मानो

एक तेज हॉर्न और सबकी आंखे खुल गई

मदन चमनपुरा चौराहे पर आ गया था

एक मुस्कुराहट भरी नजर से उसने निशा को देखा जो अभी सपने और हकीकत के भ्रम में लगभग धुंधली सी कही तैर रही थी । उलझन भरी निगाहे उसकी मदन से मिली

: अरे आ गए है हम लोग उठो ( मदन ने मुस्कुरा कर कहा और ड्राइविंग जारी रखी )

निशा ने अपने टॉप चेक पूरी तरह से अव्यवस्थित , दाहिनी छाती का निप्पल भी ब्रा के कप के ऊपर आ गया था , तिरछी और शंकित नजरों से उसने मदन की ओर देखा । जो बस सड़क की ट्रैकिफ को हॉर्न बजा कर खाली कराते हुए आगे बढ़ रहा था

निशा को समझ नहीं आ रहा था कि अभी अभी उसने जो महसूस किया असल में वो क्या था ... एक सपना या फिर हकीकत में मदन ने उसके चूचों को मसला है

कुछ हो देर में सब घर पर और गाड़ी अंदर आ गई

ममता हाथों में थाली लेकर मुरारी के साथ खड़ी थी

सोनल गाड़ी से उतरने में झिझक रही थी खास कर अपने ससुर के सामने जाने में ... उसपर से उसकी सास आरती की थाली लिए खड़ी उसकी नजर उतराने के लिए

सोनल उतरी अमन और निशा के साथ

इधर बहु का बदला रूप देख कर मुरारी की आंखे बड़ी

हिल वाले बूट और स्किन टाइट जींस से लेकर फ्लैट पेट और चूचों पर पहाड़ियों जैसे उभार ...और उन गुलाबी पहाड़ियों के सकरे दरखतों के क्या कहने । वही छोटा स्टाल से सोनल ने अपने सर पर पल्लू कर रखा था ।

ममता ने मुस्कुरा कर आरती उतारी तीनों की बिना जज किए और बिना एक शब्द बोले । इनसब में निशा ने चोर नजरो से आखिर मदन को अपने पेंट में लंड सेट करते देख लिया दिग्गी के पास

: साले ठरकी अंकल ... बताती हूं तुम्हे पैंट में ही झड़वा न दिया तो कहना ( निशा ने आंखे महीन कर मन ही मन मदन को सबक सिखाने का ठान कर बुदबुदाई)

इधर सोनल जैसे ही ममता और मुरारी के पैर छुने के लिए झुकी उसकी ब्लेजर उठ गई और चौड़े चर्बीदार चूतड़ फैल गए जींस में और निशा ने मुरारी के आंखों में बढ़ती चमक देख कर बुदबुदाई : अबे साला ये भी ... होगा ही । बड़ा भाई जो है ।

तभी अमन की नजर दरवाजे के पास खड़ी मंजू पर गई

: पापा , चाची?? ( अमन ने मंजू की ओर इशारा करके पूछा और मुरारी ने मुस्कुरा कर हा में सर हिलाया )

अमन खुशी से उनकी ओर भागा और लपक कर पैर छुए

: नमस्ते चाची!!

: खुश रहिए ( बड़ी मीठी मुस्कुराहट से उसने अमन के सर पर हाथ रखे और उसके गाल छुए दुलार में )

फिर सोनल ने भी आकर मंजू के पैर छुए

मंजू ने फौरन अपनी आंख का काजल उसके कान के पास टिका : तुम्हे तो मेरी नजर भी न लगे । बहुत प्यारी है मेरी बहु

: आप भी बहुत प्यारी है चाची

: अच्छा और मम्मी ? ( ममता ने दूर से हंस कर कहा )

अमन लपक कर उसकी ओर गया और लिपट गया और धीरे से उसके कान में बोला : आप तो प्यारी भी हो और सेक्सी भी






ममता लजा गई और मुस्करा कर फुसफुसाई : धत्त छोड़ अब ..सब देख रहे है

: बाद में मिलो फिर बताता हूं ( अमन ने मुस्कुरा कर उसे छोड़ा तो ममता उसे घूरने लगी क्योंकि बाद में मिलने का मतलब वो भी जानती थी )

: अरे भाई तुम लोग जाओ फटाफट फ्रेश हो लो और निशा बेटा तुम्हारे लिए भी ऊपर बहु के बगल वाला कमरा तैयार है । तुम भी फ्रेश हो लो ( मुरारी ने अपनी बात रखी )

: हा बहु जाओ जल्दी फ्रेश हो लो और फिर आओ नाश्ता करने

फिर सब जल्दी जल्दी ऊपर चले गए और इधर निशा के दिमाग में खुराफात नहीं रुकने वाली थी । वो सोनल से बात करना चाहती थी लेकिन अमन के सामने नहीं।

उसका यकीन गहरा होता जा रहा था कि गाड़ी में जरूर मदन ने उसके गुलगुले चूचों को सहलाया है ।

अमन के परिवार में सारे लोग व्यस्त हो गए

वही अनुज उठने के बाद फ्रेश होकर बैठा दुकान में

शाम ढल रही थी और ग्राहकी लगभग खत्म हो गई थी। लेकिन दुपहर पर वो नशा अभी भी खत्म नहीं हुआ था अनुज के सर से

वो नरम होठों का गिला अहसास और उसका अपनी मां के मुंह में झड़ना , फिर से उसका लंड अकड़ने लगा था ।

: क्या सोच रहा है ( रागिनी ने सहज सवाल किया तो अनुज ना में सर हिला कर मुस्कुराया )

: चल झूठा ( रागिनी मुस्कुरा और अनुज दुकान में ही उससे लिपट गया )

: अरे छोड़ न पागल

: आई लव यू मम्मी ,आप बहुत अच्छी हो

: अच्छा वो क्यों ?

अनुज थोड़ा शर्मा रहा था जिस तरह से रागिनी उसको मुस्कुरा कर देख रही थी मानो वो उसका मजा ले रही हो ।

: बस ऐसे ही .. ( अनुज ने लिपटे हुए कहा )

: चल कम से कम तेरे लिए अच्छी हूं ... नहीं तो तेरे पापा मुझे बैड गर्ल कहते है हीहीही

: bad girl ? मतलब

: कुछ नहीं ( रागिनी कुछ सोच कर मुस्कुराई )

: धत्त बताओ न ( अनुज ने जिद की )

: अरे मतलब उन्हें तो गंदी बातें करने वाली चाहिए बस ...

: तो क्या आप लोग करते हो गंदी बातें ( अनुज मुस्कुरा कर कहा और उसका लंड फिर से आकार लेने लगा एक नई कामुक जिज्ञासा की तलाश में )

: तुझे क्यों बताऊं ( रागिनी ने फिर से अनुज को छेड़ा ये जानते हुए कि वो बिदकेगा जरूर और सच में अनुज का मुंह बन ही गया )

: भक्क बताओ न

: किसी से कहेगा तो नहीं

: मम्मी यार ये सब किस्से कहने जाऊंगा आप भी न , बताओ न प्लीज

: वो तेरे पापा को गंदी बातें करनी पसंद है ..... हम लोग रात में अक्सर वीडियो देख कर या ऐसे कोई फोटो देख कर । उसमें पहने हुए सेक्सी कपड़े देख कर हम लोग उस बारे में बाते करते और बहुत कुछ ऐसे ही ।

अनुज : जैसे कि ?

रागिनी मुस्कुरा कर : अभी सोनल की शादी के पहले हम लोगों ने स्कूल वाली एक वीडियो देखी थी तो हम लोग सोच रहे थे कि अगर हम लोग एक ही स्कूल में पढ़े होते और शादी से पहले मिल गए होते । हमारे अफेयर हो जाते तो सेक्स करने के लिए कैसे मिलते हीहीही

: अच्छा तो रोलपले ( अनुज ने झट से पकड़ लिया लेकिन रागिनी समझ नहीं पाई )

: मतलब ?

अनुज बोलना चाहा लेकिन रुक गया कि अगर उसने इस बारे में कुछ डिटेल बता दिया और मम्मी ने पूछा कि कहा से पता है इस बारे में तो वो कैसे कहेगा कि उसने पोर्न देख कर ये सब सिखा है । उसने वही रुकना सही समझा

: क्या हुआ बोल न

तभी दुकान पर ग्राहक आ गए और रागिनी चुप हो गई

इधर अंधेरा होने लगा और रागिनी ने अनुज को दुकान बढ़ाने का इशारा किया फिर दोनों निकल गए घर के लिए...

रास्ते में ...

: मम्मी !!

: हम्मम

: क्या पहनोगे आज रात में?

अनुज के सवाल से रागिनी सिहर उठी उसे समझ नहीं आ रहा था कि वो क्या जवाब दे

: तू ही बता दे अब

: पापा की पसंद का कुछ ?

: पक्का ?

अनुज के ख्यालों में एक फैंटेसी ने जन्म ले लिया था कि जब उसकी मां पापा की पसंदीदा कपड़े में अपने बड़े बेटे से चुदवाने जाएगी तो क्या सीन होगा ?

अनुज का लंड बीच सड़क ही अंगड़ाई लेने लगा था और उसे जल्द से जल्द घर पहुंचने का इंतजार था

और वो बढ़ भी उसी दिशा में रहा था।

जारी रहेगी
 
हैप्पी नई ईयर

😍💥❤️🥳👥







जब तक मै शिलांग में सफेद पहाड़ियों का मजा ले रहा हूं

तब तक आप इन चौड़ी पहाड़ियों का मजा उठाइए

मिलते है अगले सप्ताह में .... WINTER VACATION के बाद :flybye:
 
अपकमिंग अपडेट क्विज

रंगीलाल का मनपसंद कपड़ा क्या हो सकता है ?

Guess करो guyss

01. साड़ी




02. नाइटी




03. बिकनी




फइलल योर फंतासी कमैंट्स ों रागिनी ..... सी व्हाट रिजल्ट के आउट 😍
 
💥 अध्याय 02 💥

UPDATE 033


चमनपुरा

राज भी समय से पहले दुकान से निकल गया था और अपनी मां के पास जाने के बजाय सीधा चौराहे वाले घर के लिए चला गया क्योंकि काजल भाभी उसको लगातार फोन घुमा रही थी

चौराहे वाले घर क्रॉस करते हुए उसने एक नजर उधर डाला और घर के मेन गेट पर ताला नहीं था मतलब , उसकी मां पहुंच गई थी । लेकिन बजाय अपने घर जाने के डायरेक्ट शकुन्तला ताई घर का दरवाजा बजाया

कुछ ही देर में शकुंतला ने दरवाजा खोला

: नमस्ते बड़ी मम्मी ( राज ने पैर छुए )

: अरे राज बेटा तू ( शकुंतला ने मुस्कुरा कर उसके सर छू कर कहा )

: हा वो घर आ रहा है दुकान से तो देखा आपके घर के बत्ती जल रही है ,तो लगा कि आप लोग आ गए होंगे

: आजा , और बता सोनल वापस आयेगी या बस घूमेगी ही हाहाहाहाहा

गलियारे से अंदर जाते हुए शकुंतला ने हस कर कहा और उसके मटके जैसे बड़े बड़े रसीले चूतड़ों की थिरकन देख कर राज एक गहरी मीठी सास ली और






शकुन्तला के सवालों पर ध्यान देने की कोशिश करने लगा कि अभी अभी क्या बोला उसने ।

: अह , पता नहीं बड़ी मम्मी , बात नहीं हुई मेरी

राज से उचित जवाब न पाकर शकुंतला ने बीच गलियारे में घूम गई और राज को अपने चूतड़ घूरता देख थोड़ी शरमाई

: धत्त बदमाश, आते ही शुरू हो गया

राज ने लपक कर बीच गलियारे में ही शकुन्तला को अपनी ओर खींच लिया

: सीईईई ओह्ह्ह कितना दिन हो गया बड़ी मम्मी उफ्फ कितनी मुलायम हो आप ( राज ने उसको अपनी बाहों में जबरन कस के अपना लंड की नोक को शकुन्तला के पेट पर चुभोया और वो गिनगिना उठी )

: हाय दैय्या अभी से इतना कड़क सीई

: अंदर लेलो फिर देखो कितना टाइट होगा

: धत्त बदमाश छोड़ मुझे , बहु नीचे ही है

राज ने फौरन पीछे हट गया और जैसे शकुन्तला घूमी राज ने वापस से उसके बगल में साथ साथ चलते हुए उसके थिरकते गद्देदार चूतड़ों पर हाथ फिराने लगा

शकुन्तला ने नजर उठा कर राज को घूरा तो राज ने आंख मार दी और हौले से उसके चूतड़ों पर पंजे गड़ा कर छोड़ दिया ।

: अरे बहु ?

: जी मम्मी जी !!

: देख राज आया ? जरा पानी दे दे

: तू बैठ मै आती हूं

: कहा जा रही हो ?

: अरे बैठ न ( ये कह कर शकुन्तला अपने कमरे में चली गई और राज मौका देख कर किचन में सरक गया )

किचन में काजल साड़ी पहने हुए थोड़ी सफाई में व्यस्त थी

राज की नजर उसकी चर्बीदार नाभि और मुलायम नंगे पेट पर गई






: सीईईई उफ्फ मक्खन सी हो भाभी तुम ( राज ने किचन के दरवाजे पर खड़े होकर अपना लंड मसल कर बुदबुदाया)

फिर दबे पाव धीरे से जाकर पीछे से काजल को पकड़ लिया

: हाय दैय्या, अरे यार छोड़ो बाबू कोई देख लेगा

: उफ्फ भाभी बड़ी मुलायम हो तुम तो ?






: अह्ह्ह्ह्ह क्या कर रहे हो राज बाबू सीई छोड़ो न जी , अरे मम्मी जी बाहर है पागल

राज ने उसे घुमा लिया

: उन्हू हिसाब किताब क्लियर करो पहले

काजल मुस्कुरा कर राज को देख रही थी और वाकिफ थी उसके पूरे इरादों से , जैसे जैसे राज की उंगलियां उसके कूल्हे पर रेंग रही थी उसकी हालत और सांसे दोनों बिगड़ने लगी , धकड़ने तेजी से चल रही थी और होठ फड़क रहे थे

राज ने आंखे बंद कर उसको थोड़ा रिलेक्स होने दिया और अगले ही पल काजल ने झट से राज के गाल चूम लिए

राज ने आंखे खोल कर : अरे ऐसे नहीं यहां पर ( अपने होठ सिकोड़ कर वो बोला )

: धत्त नहीं ( वो थोड़ा शर्मा रही थी तो राज ने उसके कंधे पर हाथ रख कर उसको थोड़ा कम्फ़र्टेबल करने लगा )

: देखो बस टच करना है और वापस

: पक्का न ( काजल मुस्कुरा कर बोली

: हा ... आओ न

अगले ही पल काजल वापस राज की ओर झुकी और जैसे राज ने उसके नथुने से आती गर्म सांसे महसूस की अंदर से सिहर उठा और काजल ने अपने फड़कते गर्म होठ राज के होठ पर रख दिए

2 से 3 सेकंड रहे होंगे कि राज ने अपने नीचे वाले होठ को थोड़ा सा खोला और काजल के लिप्स को चूसने लगा , ये अहसास से काजल के पूरे बदन में कंपकंपी सी हुई और राज ने अपने तेज पंजे उसकी पीठ पर ले जाते हुए उसको अपनी ओर कस लिया

धप्प से काजल का गुलगुला दूध राज से सीने से लग गया और राज अब पूरी शिद्दत से उसके रसीले लिप्स चूसने लगा ,






एक पल को काजल ने भी पीछे हटना चाहा लेकिन राज ने पंजे सरकते हुए उसके चूतड़ों पर आ गए थे और उसने जैसे ही अपने पंजे उसकी गुदाज चर्बीदार चूतड़ों पर गड़ाए काजल ने भी राज के लिप्स कस लिए

फिर तो होठों की हाथपाई होने लगी

दोनों एक दूसरे से कम नहीं थे

राज के पंजे का कमाल साफ दिख रहा था और एक लंबे गहरे चुंबन के बाद दोनों अलग हुए

हांफते थोड़ा हंसते हुए अपने अपने मुंह साफ करते हुए

: अब लाओ दो

: क्या ?

: अरे वही मेरा समान

: मै हूं तो उसकी क्या जरूरत ( राज ने आंख मारी )

: अरे यार , नहीं मुझे चाहिए

राज ने वापस से लपक कर उसको अपनी बाहों में भर लिया

: यकीन मानो उससे ज्यादा मजा देगा ये ( उसने काजल का हाथ पकड़ कर अपने कड़क लंड पर रख दिया और काजल उसकी गर्मी और कड़कपने से सिहर उठी )

: नहीं मुझे वही चाहिए ( उसने भी राज को तंग करने में कोई कसर नहीं छोड़ी )

: ठीक है कल मिल जायेगा ( राज ने थोड़ा मुंह बना कर कहा )

: कल क्यों ? ( काजल फिकर से बोली )

: अरे लेकर नहीं आया न

: क्या तुम भी , चलो हटो

: अरे ? काम नहीं हुआ तो ऐसे धकेलेगी

: और नहीं तो क्या ? बिना समान पहुंचाए भाड़ा ले लिए हूह

: अरे तो कल फ्री डिलेवरी कर दूंगा खुश हाहाहाहाहा

: क्या हुआ क्या लेकर आएगा राज ?

शकुन्तला की बात सुनकर दोनों सतर्क होकर अलग हो गए

: अह कुछ नहीं बड़ी मम्मी , इनको सर्दियों वाली क्रीम चाहिए । कल लेते आऊंगा

: अरे हा अच्छा याद दिलाया बहु तूने , राज एक शीशी मेरे लिए भी ले लेना

फिर कुछ बात चित के बाद राज के झोला लेकर निकलने लगा जो शकुन्तला ने उसके लिए दिया था । शायद कुछ मिठाई और समान था ।


घर से निकलने के बाद राज को कुछ ख्याल आया कि उसने शकुन्तला ने क्रीम का ब्रांड पूछना भूल ही गया और वो वापस आया तो उसने शकुन्तला और काजल भाभी को हस कर उसकी बातें करता सुना

शकुन्तला: अरे बहु उस रोज सोनल की मेंहदी वाले दिन इसने जो हालात कर दी थी मेरी हीही ... मै तो उसी रोज समझ गई थी कि ये जरूर मेरा बर्फ वाला लंड देख लिया होगा ।

राज हैरान होता है जब शकुंतला फ्रिज में रखे बर्फ वाले लंड के लिए अपना नाम लेती है और राज के लिए तो सारी कहानी ही अब बदल गई थी ।

शकुन्तला: लेकिन मुआ है बड़ा चतुर , सब जानता कब औरत पिघल रही है ... हल्दी वाली सुबह सुबह अपना मोटा बांस जैसा मेरे पीछे डाल दिया लेकिन सच कहूं बहु उसने मेरे पीछे जो जीभ चलाई थी सीईईई जब भी देखती हूं उसको मन मचल उठता है

काजल मुस्कुरा कर : अरे तो रोक लेती न मम्मी जी , इतना क्यों सोचती है

शकुन्तला: नहीं नहीं , उसे हमारे रिश्ते के बारे में भनक नहीं होनी चाहिए और वैसे भी तूने मेरे लिए कितना कुछ किया... राज तो यही समझता है कि ये सब चीजें तुझे पसंद है और तेरी छवि खराब हो रही है ...

काजल चुप थी

शकुन्तला कुछ सोच कर : अच्छा तूने आगे क्या सोचा है ?

काजल मुस्कुरा कर: किस बारे में

शकुन्तला: अरे ये राज के साथ रिश्ता आगे बढ़ाने में ... देख हम लोग अब कुछ हफ्ते के लिए ही है यहां फिर भगवान जाने कब वापसी हो , इस बार रोहन नहीं मानेगा तू समझ रही है न

काजल भाभी की सांसे तेज थी : मम्मी जी आप मुझे बेचैन कर रही है अब , राज बहुत प्यारा लड़का है और उसके मन में कोई छल नहीं है ।

शकुन्तला: तो क्या सोचा है तूने , आगे बढ़ना है

काजल मुस्कुरा कर : और आप ?

शकुन्तला हस कर : अरे पगली मैने तो पहले ही उसके बाप से बहुत मजे ले लिए है लेकिन तमन्ना है कि जाने से पहले एक आखिरी बार जरूर मिलना चाहूंगी

काजल : अगर आपको कोई दिक्कत नहीं तो मुझे भी मंजूर है हीही

शकुन्तला : तो कल का प्रोग्राम रखे

काजल मुस्कुरा कर : उम्हू इतना जल्दी भी नहीं थोड़ा मुझे उसको तड़पाने तो दो

शकुन्तला मुस्कुरा कर : जैसी तेरी मर्जी , लेकिन तड़पा कर और मजा आता है हीही

इस पर दोनों सास बहु हसने लगी और राज दोनों की योजना सुन कर मुस्कुराने लगा और वो भी समझ चुका था । यानी कि ये सब जो फैंसी शौक है वो सब काजल भाभी के नहीं बल्कि शकुन्तला ताई के है । लेकिन मानना पड़ेगा सास बहु की जोड़ी को ... पता नहीं ये लोग लेस्बियन भी होंगी या नहीं ? होनी ही चाहिए वरना इतना खुल कर कैसे कोई रहेगा आज के समय में .. और बड़ी मम्मी ने कहा कि कुछ हफ्ते मतलब ये लोग अब यहां से जाने वाले है ? लेकिन कहा ? क्यों ?

: मम्मी !!! यस वो भी असली बात निकलवा सकती है इनसे ( राज अपने दिमाग की उथल पुथल को शांत करता हुआ अपने घर के लिए निकल गया )

इधर किचन में रागिनी के पास अनुज खड़ा था

: तू क्या मेरे पीछे नाच रहा है , जा पढ़ाई कर ( रागिनी ने थोड़ी डांट लगाई अनुज को )

: अपने बताया नहीं

: क्या ? ( रागिनी अनुज के सवाल को समझ रही थी लेकिन उसे खुद नहीं समझ आ रहा था कि वो क्या जवाब देगी )

: वही कि... आज क्या पहनोगे ( अनुज ने आखिरी 3 शब्द बड़े हल्के में बोला )

: क्या ? ( रागिनी ने साफ सुना नहीं )

: आज क्या पहनोगे ( अनुज ने साफ साफ बोला और नजरे फेर ली )

जिस तरह से अनुज आज की रात के उत्साहित और शर्मा रहा था रागिनी को हसी आ रही थी

: तो इतना शर्मा क्या रहा है हिहीही ( रागिनी ने उसको छेड़ा)

: हीहीही बताओ न फिर

: जब तैयार हो जाऊंगी तो देख लेना

तबतक दरवाजे पर दस्तक हुई

: जा भैया आया होगा खोल दे गेट ( रागिनी ने अनुज को कहा )

अनुज मुंह बना कर अपना लंड सेट करता हुआ दरवाजे की ओर चला गया और सामने राज खड़ा था

: क्या भाई .. आज देवदास क्यों बना है उम्मम

अनुज कुछ नहीं बोला , थोड़ी जलन सी थी उसको अपने भाई से और थोड़ी नाराजगी भी कि इतनी बड़ी बात उसने छिपाई

: लगता है काट गई तेरा ( राज ने छेड़ा उसे वही दरवाजे पर खड़े खड़े तो अनुज जलभुन गया )

: ऐसा कुछ नहीं है , मै आपसे गुस्सा हूं

: क्यों ?

: इधर आओ

अनुज राज को पकड़ कर गलियारे वाले गेट से बाहर खुली जगह ले आया

: अरे क्या हुआ ( राज थोड़ा चौक कर )

: आपने मुझसे क्यों छिपाया ?

: क्या ( राज थोड़ा हस रहा था )

: वही मम्मी वाली बात ?

: कैसी बात ,क्या बोल रहा है तू ?

: देखो मै जानता हूं सुबह जो हुआ और आप बाथरूम में जो कर रहे थे मम्मी की फोटो देख कर

राज समझ गया कि अनुज खुल कर बात करना चाहता है

: हा तो , वो तो मम्मी को भी पता है ( राज ने एकदम इत्मीनान से कहा और अनुज का गला सूखने लगा जब राज ऐसे खुलकर बोला )

: तो आपने मुझे क्यों नहीं बताया कि आप मम्मी के साथ वो सब किए हो ? ( अनुज ने थोड़ा उखड़ कर ऐसे कहा मानो इस बात को जानने को उसे पूरा अधिकार हो )

: तुझे कैसे पता ?

राज ने जैसे ही सवाल किया अनुज की हिक्की बंध गई और वो थूक गटक अपने सवाल पर वापस आ गया

: उससे मतलब आपको , मैने आपको अपने बारे में सब बताया लेकिन आपने सब छुपा लिया.... मम्मी वाली भी

: अच्छा तूने जैसे चाची वाली बात मुझसे बड़ा बता दी

अनुज सकपकाया कि चाची और उसकी बात तो सिर्फ वही दोनों जानते थे तो राज को कैसे पता चला ।

: चाची वाली कौन सी बात , वो तो मैने बताया था कि मैने गलती से उनकी गाड़ देखी थी ( हल्के लहजे में वो बोला )


: लेकिन फिर जब चाची के घर गया था उनके साथ उस रात का क्या ? उम्मम उस रात भी गलती से ही चोद दिया न उनको उम्मम ( राज ने मुस्कुरा कर कहा )

: आपको किसने बताया , चाची ने

: बेटा जिस स्कूल में तू पढ़ने जाता है वहां से पास होकर निकला हूं मै समझा , अब बहस बंद कर और चल

: लेकिन ( अनुज का मुंह बन गया )

: कुछ लेकिन वेकिन नहीं ... तू पढ़ाई पर ध्यान दे बोर्ड है न इस बार तेरा उम्मम चल अब

अनुज मुंह बना कर चल दिया चुपचाप और राज हस कर उसके मजे लेते हुए बोला: जा पढ़ाई कर , तू तो पापा से भी मेरी शिकायत नहीं कर सकता हाहाहाहाहा

अनुज मुंह बना कर रह और चुपचाप किताब लेकर हाल के बैठ गया , आज उसका खुद का भाई ही उसके लिए बड़ा प्रतिद्वंद्वी बन कर सामने आ गया था , उसके और उसकी मां के बीच

ना जाने अब आगे क्या होने वाला था ।

अमन के घर

: हीहीही तूने जरूर सपना ही देखा होगा पागल

: नहीं यार , मुझे पक्का यकीन है । तू बता तूने कभी उनके बारे में कुछ भी अनयूजुअल नोटिस किया है ( निशा ने सोनल से सहज सवाल किए )

: अह यार ऐसा कुछ तो हुआ नहीं पर ...उम्मम लेकिन मेरी यहां ससुराल में पहली सुबह ही एक गड़बड़ हुई थी ( सोनल हस कर बोली )

: क्या ? ( निशा ने जिज्ञासा में सवाल किए )

: अरे वो तेरे जीजू की भाभी है दुलारी ... उनकी मसखरी की वजह से हुआ था और एकदम से चाचा जी सामने आ गए । ससुराल की पहली सुबह और संस्कारी बहु बनकर पैर छुने गई ... पल्लू सरक कर कलाई में और वो ब्लाउज भी ढीला था हीही आधे से ज्यादा बाहर झूल गए थे मेरे

निशा आंखे फाड़ कर देखती हुई हसने लगी

: वैसे आज भी कम नहीं देखा उन्होंने तुझे

: धत्त और पता है जिस दिन चौथ पर मम्मी पापा आए थे तो मौसम कैसे खराब हुआ था

: हा हा ( निशा ने हुंकारी भरी )

: हीही अरे पूछ मत , मम्मी जी ब्रा उड़ कर नीचे गिर गई और चाचाजी नीचे ही थे और उन्होंने मुझे छत पर देखा तो उन्हें लगा मेरा है और देने आ गए थे हाहाहाहाहा

: सच में फिर ( निशा हस कर बोली )

: फिर मैने कहा मेरा नहीं है तो झट से वापस लेकर भाग गए हीहीही ,, मुझे तो बड़े मासूम लगते है चाचा जी लेकिन इनकी gf बड़ी सेक्सी है

: हा यार .... कितनी गदराई हुई नई चाची सास तेरी उफ्फ और रंग भी पूरा दूधिया । अरे वो तेरी मामी आई थी न साथ खड़े कर दो तो बहने लगेंगी

: हम्ममम सच कहा तूने

: लेकिन यार मैने उनको अपना खूंटा सेट करते देखा था

: अरे छोड़ न ... उतना ध्यान मत दे और अगर सच में हुआ है तो उसमें भी तेरा ही फायदा हुआ न हीहीही ( सोनल आखिरी शब्द बोलकर खिलखिलाई )

निशा उसके कहने का मतलब साफ साफ समझ गई और हस कर बोली : भाग कुत्ती, जा तू मिजवा लें

सोनल हस्ती हुई : अच्छा ठीक बाबा , अब चलेगी नीचे

निशा : हम्म्म ठीक है चल

वही नीचे किचन में ममता अपनी लाडली बहु और बेटे के लिए शानदार नाश्ते की तैयारी लगभग कर चुकी थी मंजू के साथ मिल कर और मदन भी अपने कमरे में फ्रेश होने के लिए गया था ।

वही हाल में मुरारी और अमन बैठे हुए थे ।

: अरे पापा थोड़ा तो धीरज रखो हीही

: क्या तू भी ... यहां मेरी हालत खराब हो रखी है । उस रोज तूने जो वीडियो भेजी थी उफ्फ कितनी बार देख कर हिला चुका हूं

: हीही कुछ दिन रुको पापा फिर आपकी बहु खुद अपने हाथों से हिलाएगी

: सच में बेटा सीईईई ( मुरारी ने पजामे में अपने कड़े लंड को दबाया ) अह्ह्ह्ह तूने सपने बहुत दिखाए है ।

अमन मुरारी की बातों पर मुस्कुरा रहा था और उसकी नजर किचन में अपनी मां के साथ लगी हुई मंजू चाची पर टिकी थी । गोरा दूधिया बदन और ब्लाउज में फुले चूचे , चर्बीदार कमर और उठे हुए कूल्हे

: क्या सोच रहा है ( मुरारी ने अमन की निगाह का पीछा किया )

: वैसे चाचू की किस्मत भी कम बड़ी नहीं है पापा ( अमन का इशारा मंजू के बड़े चौड़े चूतड़ों और रसीले मम्में पर था )

: हा बेटा सच कहा ... मदन किस्मत वाला है । पूरी रबड़ी है मंजू इसके मोटे चूचे देखे है मैने

: हैं ? सच में ( अमन उत्सुकता से घूम गया मुरारी की ओर )

मुरारी मुस्कुराने लगा

: अरे बताओ न पापा !!

: हा ये जहां रह रही थी तो इसको नहाते हुए देखा था पहलीबार ... एकदम भूरे मुनक्के जैसे निप्पल है इसके बड़े बड़े काटने में बड़ा मजा आया था सीईईई

अमन की आंखे बड़ी हो गई और उन्हें भौहें सिकोड़ कर अपने पापा को देखा

: ऐसे क्या देख रहा है , तू अपनी साली पटा सकता है तो अपने बाप को कम समझ रहा है

अमन के होश उड़े हुए थे उसकी काम कल्पनाएं उड़ान भरने लगी थी और लंड में एक सुरसुराहट होने लगी ये सोच कर कि उसके पापा ने अपने भाई की gf को लपेट लिया। अमन का मन इस बात के लिए तैयार नहीं हो रहा था ।

: तुझे प्रूफ चाहिए न ?

: नहीं नहीं , बस आप दोनों को देखना है मुझे

: पहले किसके साथ देखेगा ? मम्मी या चाची हाहाहाहाहा

मुरारी ने अमन के सामने उसके कामोत्तेजक सपनो का विकल्प रख दिया था , उसका बाप उसकी मां को उसके सामने चोदे ये तो उसके पुराने अरमानों में एक था और अब मंजू चाची का गदराया बदन देख कर एक अविश्वसनिय कल्पना उठ रही थी कि कैसे कोई औरत अपने प्रेमी को छोड़ कर अपने होने वाले भसुर से मिलाप कर सकती है । अमन के चुनाव कठिन था और उससे भी बढ़ कर उसकी बेचैनी इस चीज के लिए ज्यादा थी कि आगामी दिनों जब घर मेहमानों से भर जाएगा

उसके पापा के निशाने पर घर की चार औरते होंगी : मम्मी , चाची ,बुआऔर सोनल

इधर चाचू और बुआ का पहले से ही टांका सेट है और अमन भी इस बार अपनी संगीता बुआ के साथ मस्ती करने का मूड बना चुका था ।

मम्मी के साथ उसका अलग ही रोमांच होना था ... सोनल और पापा को लेकर उसकी अपनी ही फैंटेसी उठ रही थी । फिर ऐसे में मंजू चाची कैसे बची रहेंगी ।

: उफ्फफ !!!!

: क्या हुआ बेटा ( मुरारी ने अमन को लंबी गहरी आह भरते देखा और लोवर ने बने हुए बड़े से तंबू को देखा )

: अह कुछ नहीं पापा , मै अब बहुत बेशबर हो रहा हूं कुछ करो हीहीही

: अरे तूने ही तो कहा न बेटा थोड़ा सबर करने को हाहाहाहाहा

मुरारी ने ठहाका लगा कर अमन को उसकी ही बात घुमा दी

तभी मदन भी अपने कमरे से बाहर आया और थोड़ी देर में सोनल और निशा भी नीचे आई ।

पायलों की खनक आते ही तीनो मर्दों की नजरे सीढ़ियों से नीचे उतरती उन दोनों गदराई रसभरी बालाओं पर गई

मदन की निगाहे एक तक निशा पर जमी थी ।






फूल स्लीव वाले काटन सूट में उसके बड़े बड़े रसीले मम्में सूट के बड़े गले में उभरे हुए थे , दुपट्टे को उसने बड़े कैजुअली गले पर चिपका रखा था ,उसपर से मोटे चर्बीदार कूल्हे सलवार में मटके जैसे उभरे हुए थे ।

जीने से उतरते ही निशा की पैनी नजर मदन पर गई : ठरकी हुह

वो बुदबुदाई और वही सोनल एक स्लीवलेस ब्लाउज के साड़ी पहन पर उतरी थी बड़ी बेफिक्री में बिना ये ध्यान किए कि उसके दोनों ससुर सामने ही सोफे पर बैठे होंगे

सोनल तो अपने ससुर को देख कर एकदम ठिठक कर रुक गई ... निशा से बाते करते हुए और बीते हफ्ते भर ससुराल से दूर रहने के कारण वो तो भूल ही गई थी कि वो ससुराल में आ गई है और उसे पर्दे में रहना है ।






एकदम से उसकी नजर मुरारी से मिली जो पहले मुस्कुरा कर उसे देखा और फिर मुरारी ने उसकी गुदाज चर्बीदार नाभि देखी जो उसके पल्लू के पास से झांक रही थी । अगले ही पल सोनल ने अपनी साड़ी सही की और सर पर पल्लू किया । मुरारी ने नजरे फेर कर अपनी बहु को असहज होने से रोका लेकिन अपने हवसी मन को कैसे समझाता

वापस से उसने सोनल को देखा , गुदाज चर्बीदार पेट और रसीले मम्में ब्लाउज में फुले हुए

सोनल निशा को लेकर किचन में चली गई हेल्प के लिए लेकिन ममता ने मना कर दिया । फिर चाय नाश्ते लेकर वो दोनों को लेकर हाल के आई

: आओ बैठो

ममता ने उन दोनों से कहा लेकिन सोनल अपने ससुर के सामने बैठने में परहेज कर रही थी और निशा रह रह कर मदन को देख रही थी

: अरे बैठो , वो भी तुम्हारे पापा जैसे ही है । इतना मत शरमाओ ? अरे बोलेंगे कुछ जी !!

ममता ने मुरारी को देख कर कहा

: हा बहु , अब घर मे इतना देखोगी तो कैसे काम होगा । बैठो साथ में नाश्ता करेंगे और थोड़ी बाते भी होंगी न

ममता सोनल को लेकर अपने पास ही बैठ गई

ममता के पास मंजू बैठ गई

सामने डबल सोफे पर मुरारी और अमन बैठे थे और बगल वाले डबल सोफे पर मुरारी की साइड मदन बैठा था और मंजू के तरफ वाली जगह खाली थी

: आओ बेटा तुम भी बैठो ( मदन ने निशा को अपने पास बैठने का आग्रह किया )

निशा मुस्कुरा कर ना चाहते हुए भी मदन के पास बैठ गई , हालांकि वो जगह उसके चौड़े कूल्हे के हिसाब से थोड़ी कम थी या फिर मदन ने ही जानबूझ कर जगह नहीं दी थी । जैसा भी था निशा के बैठते ही उसे अपने जांघ और चर्बीदार कूल्हे पर मदन का गर्म जांघों का स्पर्श मिला

थोड़ी असहज होकर उसने मदन को देखा फिर सब चाय नाश्ता करने लगे । इधर मदन ने जैसे ही निशा की मुलायम जांघें महसूस की उसके पजामे में हलचल होने लगी , बगल में बैठी निशा के चूचों की घटिया उसे ज्यादा लुभा रही थी ।

निशा पूरी सतर्क थी और साथ ही सोनल भी

जिस तरह से रह रह कर मुरारी उसे देख रहा था और मुस्कुरा रहा था उसे बड़ा अजीब लग रहा था ।

चाय की चुस्कियों के साथ मुरारी ने मदन के शादी की बात छेड़ दी और योजनाओं पर भी चर्चा होने लगी ।

आज से लेकर 7 दिन का समय बचा था शादी के लिए

ममता सोनल को ऐसे समझा रही थी मानो इस शादी की जिम्मेदारी अब बहु के जिम्मे रहेगी । सोनल ने भी अपनी सास की बातों पर लगी थी और लगभग सभी ... जब सबकी निगाहे ममता की कार्य योजनाओं पर जमी थी तभी निशा को अपने कंधे और बाजू पर एक स्पर्श महसूस हुआ जो कि मदन का था । वो ऐसे जता रहा था कि वो कितना उत्सुक है अपनी विवाह की योजनाओं को लेकर

इधर निशा ने जैसे ही मदन को अपनी ओर झुकता पाया वो असहज होने लगी ।

मदन का उससे यू सटे रहना , जम नहीं रहा था लेकिन ये सब निर्दोष स्पर्श भी हो सकता था । एक व्यक्ति जिसके अपनी प्रेमिका से शादी को लेकर गंभीर चर्चा चल रही थी वो उसके बारे में क्यों सोचेगा ।

निशा ने इसका एक सहज रास्ता खोज निकाला कि क्यों न मदन को परख लिया जाए ,नहीं तो उसके मन की बेचैनी ऐसे नहीं शांत होने वाली थी ।

उसने पहले ये सुनिश्चित करना चाहा कि ये बहुत जरूरी है कि मदन की नजर उस पर रहे

इसके लिए उसने एक लंबी गहरी सांस ली और अपने गहरे गले वाले सूट में अपनी रसीली छातियां फुलाई

पहला तीर सटीक लगा , निशा ने नथुने में सरसरी सांसे और उसके छातियों का बढ़ता साइज देख कर मदन की आंखे भटक गई और उसकी नजर निशा के रसीले मम्में पर जम गई

निशा मुस्कुराई और हल्का सा मदन से सटने की कोशिश करने लगी , उसकी निगाहे ममता की ओर थी लेकिन ध्यान पूरा इसपर था कि उसकी गुदाज मुलायम चूचे का स्पर्श सूट के ऊपर से मदन की बाह पर हो जाए

जैसे ही निशा ने अगला तीर चलाया , मदन के जिस्म में गुदगुदी होने लगी , हल्का सा मुलायम गद्देदार अहसास हुआ उसे अपनी बाह पर और वो बेचैन हो उठा । पजामे में हलचल होने लगी , उसने निशा का चेहरा देखा और एक पल से भी कम समय के लिए उसने निशा की तिरछी नजर अपनी ओर पाई और उसे समझते देर नहीं लगी कि पहल निशा की ओर से हो रहा है ।

ममता के सामने अपने रंगीन मिजाज साझा करने के बाद अब मदन के भीतर काफी बदलाव आ गए थे । उसमें भी मौके का फायदा लेना चाहा और अपने दोनों हाथ क्रॉस करने आगे बांध लिया

कुछ देर सब सही रहा और फिर निशा को अपनी कांख के पास मदन की उंगलियां थिरकती हुई महसूस हुई

एक कातिल मुस्कुराहट और निशा समझ गई कि ठरकी बूढ़ा उसकी गुदाज मुलायम चूचे तलाश रहा है ।

निशा को ताज्जुब हुआ कि भरी महफिल में कहा उसके बड़े भाई , भाभी , एक बेटा बहु और सबसे बढ़ कर होने वाली बहु पास ही है ऐसे में वो चिटिंगबाजी करने से पीछे नहीं ।

निशा को अब यकीन हो गया था कि मदन ने रडार में वो है लेकिन उसे इस बात का पता करना था कि ऐसे गर्दिश में भी वो किस हद कर जा सकता है और यही सोच कर उसने अपना दुपट्टा गले से सरका कर कंधे पर फैला दिया वो थोड़ा और मदन के करीब झुक गई । अब उसकी दाहिनी छाती बाह समेत ढक गई थी उस काटन के दुपट्टे से और मदन को भी अच्छा मौका मिल गया था

उसने भी अपनी बाह के नीचे से निशा के दाहिनी छाती पर उंगलियों को सरकाते हुए ले गया और अच्छे से उन्हें पंजे में भर कर सहलाया

निशा की आंखे बंद होने लगी और भीतर एक सिहरन

मौका पाते ही उसने निशा के रसीले मम्में को उंगलियों से दबाया और अपने लंड को पजामे में टाइट होने दिया

निशा के दिमाग की बत्ती जल गई और उसे अपनी इंस्टेंट पर पूरा यकीन हो गया कि गाड़ी में जो हुआ वो कोई सपना नहीं बल्कि एक जीवंत हकीकत था और सच में मदन ने उसके चूचे मसले थे ।

मदन के हाथ लगातार निशा की चुची टटोलने का प्रयास कर रहे थे लेकिन ब्रा इतनी कसी थी कि मदन की उंगलियों का वो दबाव नहीं बन रहा था जो निशा की सिसकी निकाल दे

निशा थोड़ी सीधी हो गई और बीच मीटिंग में उठ कर बाथरूम की ओर चली गई और थोड़ी देर बाद वापस अपनी जगह

आते वक्त उसने एक शरारती मुस्कुराहट के साथ मदन को देखा । लेकिन इस बार उसके हाथों में एक चादर भी थी ।

: क्या हुआ बेटा ठंडी है तो अंगीठी जलवा दूं

: नहीं अंकल हो जाएगा ( निशा ने वो चादर फैलाते हुए अपने पैर फोल्ड कर सोफे पर बैठ गई अपने देह को ढक कर

मुरारी ने अमन को बोल कर हीटर मंगवा दिया और जलने लगा

थोड़ी ही देर में मदन ने भी वही चादर जो निशा ने आधी अपने देह पर डाली थी और आधी मदन की तरफ छोड़ी थी उसने अपने ऊपर रख ली और सरक कर वापस निशा के पास

निशा ने हल्की सी मुस्कुराहट से उसे देखा

सबकी नजर ममता के डायरी पर बन रही लिस्ट पर थी जो सोनल लिख रहे थी , शॉपिंग के लिए

लेकिन इस बार चादर के नीचे मदन के हाथ बजाय आगे जाने के पीछे चले गए

निशा तो पहले चौकी लेकिन फिर रुक गई और मदन की हद देखने लगी

जैसे जैसे उसके हाथ निशा की गुदाज मुलायम पीठ को सूट के ऊपर से सहला रहे थे , वैसे वैसे निशा को गुदगुदी हो रही थी और फिर उसके हाथ सरक कर नीचे कूल्हे को टटोलने लगे

किसी को भी भनक नहीं थी कि उनके बीच दो लोग चादर के नीचे अपना कांड कर रहे है पहले तो मदन ने निशा के चर्बीदार चूतड़ों को दोनो तरफ से पकड़ना चाहा लेकिन कपड़े की वजह से प्रयास असफल था तो उसने हाथ कर लिया और निशा की जांघों को छूने लगा

अब निशा की हालत बिगड़ने लगी

मदन के पंजे का रूखापन उसे साफ महसूस हो रहा था और उसकी सांसे अब बिगड़ने लगी , मदन की हरकते अपनी सीमाओं से बाहर निकल गई थी और निशा ने एक गहरी सांस लेते हुए पीछे सोफे पर टेक ले लिया

मदन ने अपने हाथ रोक दिए और थोड़ी देर बाद वो अपनी अपने बैठने की दिशा में बदलाव करते हुए थोड़ा निशा की ओर घूम गया मच डिग्री , लेकिन वहा बैठे दूसरे लोगो को कोई फर्क नहीं पड़ा

और तभी निशा को अपनी दाहिनी छाती पर वापस से मदन का दाहिना पंजा कसता मिला

लेकिन इस बार सरप्राईज मदन के लिए था क्योंकि बाथरूम में तो निशा अपनी ब्रा उतार कर आई थी

जैसे ही मदन ने अपनी हथेली में निशा की गुदाज चर्बीदार मम्मे को बिना ब्रा के काटन सूट के ऊपर भरा

उसकी आंखे बड़ी हो गई और वो निशा को देखा तो निशा ने आंखे नचा कर उसकी ओर देखा भी नहीं बस एक शरारती छिपाने और अंजान बने रहने वाली मुस्कुराहट

मदन ने पूरे जोश में उसकी छाती को दबाया और निशा के होठ खुल गए । उसने आंखे उठा कर मदन को देखा तो मदन ने हलका कर दिया और फिर उसने सूट के ऊपर से निशा के रसीले मम्में को सहलाने लगा उसके कड़क निप्पल को अपनी हथेली में नचाने लगा

निशा की कमर अकड़ने लगी उसके जांघ में खून का बहाव बढ़ रहा था और चूत में कुलबुलाहट होने लगी

निशा के बदन में हरकत देख कर मदन ने चादर में इधर उधर टटोला

निशा थोड़ी सोच में पड़ गई कि क्या खोज रहा है और फिर उसने निशा की कलाई पकड़ ली और निशा को समझते देर नहीं लगी कि उसने हाथ अब क्या लगने वाला है

कड़क बड़ा गर्म , एक स्पर्श में निशा सिहर उठी

गर्मी इतनी कि पजामे अंडरवियर के ऊपर से भी महसूस हो रही थी

मदन भी आंखे बंद कर लंबी गहरी सांस लिया।

निशा ने भी अपनी उंगलियों का जादू शुरू कर दिया और चादर के नीचे ही हिलाने लगी पजामे के ऊपर से

मदन को बड़ी राहत थी लेकिन तड़प भी कम नहीं थीं उसने भी अपने बाए हाथ से निशा के सलवार के ऊपर से उसकी बुर टटोलनी शुरू कर दी

दोनों की सांसे भारी और वासना चरम पर

दोनों अब झड़ना चाहते थे

आंखों से इशारे होने लगे

मदन निशा को इशारे से ऊपर जाने को कहने लगा और निशा ना में हर हिला का मुस्कुराने लगी

वक्त का पता नहीं चला कब घंटे भर का वक्त निकल गया था और मुरारी सबको उठने को कहा ।

दोनों सतर्क होकर सीधे हो गए और मदन ने भी पैर फैलाया लेकिन लंड का तनाव पूरा था , वो काफी समय तक बैठा रहा

निशा और सोनल वापस छत पर जाने लगी क्योंकि ममता ने उन्हें आज काम करने से मना कर दिया था , निशा ने मुस्कुरा कर मदन को देखा और अपने चूतड़ हिलाती हुई निकल गई ऊपर

ममता और मंजू वापस किचन में थे

मुरारी अमन को लेकर अपने कमरे में चला गया । मदन कुछ देर तक अपनी वासना और लंड को शांत करने के लिए मोबाइल चलाया फिर अपने कमरे में चला गए क्योंकि उसे पता था , ऊपर निशा अकेली नहीं होगी , बहु उसके साथ है ।

जारी रहेगी

( इमेज अपलोड वाली साइट से थोड़ा दिक्कत चल रहा है सर्वर संबंधी , pics और gif बाद में अपडेट कर दिए जाएंगे ... धन्यवाद 🙏)
 
अपडेट 034

आखिर कैसे रोकेगा अनुज खुद को

जब राज उसके सामने रागिनी को तंग करेगा ...






अपडेट इस पोस्टेड ों पेज NO. 1416 :डिक्लेअर:
 
💥 अध्याय 02 💥

UPDATE 034


अमन के घर

रात में 08 बजने को हो रहे थे और डिनर के बाद ममता घर के मर्दों को खोजती हुई अपने कमरे की ओर बढ़ रही थी ,जहां अमन और मुरारी बैठे हुए अपनी योजनाएं गढ़ रहे थे और लंड कपड़ो के ऊपर से मसल रहे थे ।

लेकिन जैसे ही दरवाजे पर आहट हुई दोनों सतर्क हो गए

कमरे में ममता दाखिल होते हुए उसकी नजर बाप बेटे पर गई

: अरे देवर जी कहा है ?

: अह वो तो बाहर ही था , क्यों ?

मुरारी ने ममता के सवालों का जवाब दिया

: अरे खाना तैयार हो गया है और उनका पता नहीं

: कमरे में होगा अमन की मां कहा जाएगा इतनी रात में ( मुरारी ने कहा और उसकी नजर ममता के गीली साड़ी पर गई हो आगे पेट के पास भीग गई थी ) अरे ये भीग कैसे गई तुम

: ओह ये , क्या बताऊं । कितनी बार कहा आपको वो सिंक की टोटी सही करवा दो , इसकी चाची को बर्तन धुलने को कहा उसने तेजी से घुमाया पूरी टोटी हाथ में , वो बेचारी पूरी गीली हो गई और टोटी बंद करने के चक्कर में थोड़ी मै भी भीग गई

ममता ने उखड़ कर कहा

: अरे तो बदल लो कपड़े , सर्द मौसम है तबीयत बिगड़ जाएगी

मुरारी को फिक्रमंद देखकर ममता ने एक नजर उसे देखा और फिर मुस्कुरा कर अमन को देखने लगी

: हा हा बड़ा आपको मेरी फिकर है, अरे ऐसे कहो न कि शादी में काम कौन करेगा हूह ( ममता मुंह बना कर कमरे का दरवाजा बंद करने लगी )

इधर उसकी हरकत देखकर दोनों बाप बेटे फूलने लगे कि ममता शायद उनके सामने ही कपड़े निकालेंगी

दोनों की आंखों में उम्मीद की लहरें उठने लगी थीं और वो दोनों ने एक दूसरे को देखकर मुस्कराए

इधर सच में ममता अपनी साड़ी खोलने लगी और अपने पेट के आगे से साड़ी की प्लीट को खींचा और उसका पेटीकोट आगे से दिखने लगा

दोनों बाप बेटे के चेहरे पर मुस्कुराहट फैलने लगी , लंड में सुरसुराहट होने लगी

: अह , बेटा अमन

: हा मम्मी

: जरा ये कंधे की पिन निकालना तो ( ममता ने प्रयास करते हुए कंधे से पिन टटोल रही थी )

मुरारी ने आंखों से इशारा किया और अमन अपना लंड लोवर में सेट करता हुआ उठा और अपनी मां के पास पीछे खड़ा हो गया

उसका लंड अभी भी लोवर में तंबू बनाए हुआ था , मुरारी मोबाइल खोलकर कुछ चेक करने का नाटक कर रहा था लेकिन उसकी नजर लगातार अमन पर थी

: उम्मम क्या हुआ बेटा निकल नहीं रहा है क्या ?

: हा मम्मी लग रहा है फंस गया है कहीं उम्मम

: अरे आराम से देख तुझे लगे नहीं

: हा वही कर रहा हूं मम्मी

अमन एड़ियों के बल हो गया जिससे उसका लंड लोवर के अंदर से ममता के कूल्हे के पास सट गया

अमन का ध्यान उस वक्त उस पर नहीं था क्योंकि लंड और कूल्हे का स्पर्श इतना स्पष्ट नहीं था कि अमन को कुछ महसूस हो

लेकिन मुरारी की नजर पड़ते ही उसके बदन में सिहरन होने लगी

जैसे ही अमन ने मुरारी की ओर देखा तो मुरारी ने आंखों से उसको उसके लंड की स्थिति के बारे में दिखाया , तो अमन के चेहरे पर एक शरारती मुस्कुराहट फैल गई और बाप के सामने अपनी स्थिति देख कर उसका लंड और विस्तार लेने लगा और इस पर तो उसका सुपाड़ा सच में आधा इंच उसकी मां के कूल्हे में चुभ गया

जिसका अहसास ममता को भी हुआ था ,

: मम्मी ये निकल नहीं रहा है

: अच्छा छोड़ एक तो खाना ठंडा हो रहा है , ब्लाउज के साथ निकाल देती हूं जरा आलमारी से मेरी नाइटी निकाल कर देना तो

ब्लाउज निकालने का सुनकर अमन और मुरारी की आंखे दुबारा से चमक उठी


दोनों के एक दूसरे को देखा और अमन मुस्कुरा कर ममता की अलमारी की ओर बढ़ गया

फिर आलमारी खोलकर , देखने लगा

: मम्मी कहा है ?

: अरे बेटा नीचे वाले में देख सब एक साथ रखी है

ममता की आवाज पर अमन की नजर अपनी मां की ओर गई






जो अपने ब्लाउज के हुक खोलकर हाथ पीछे कर ब्लाउज अपनी बाजुओं से उतार रही थी





जिससे उसके बड़े बड़े नंगे खरबूजे जैसे चूचे तन कर सामने आ गए थे

अमन का हलक सूखने लगा और उसने मुंह खोले हुए एक नजर मुरारी को देखा तो मुरारी मुस्कुराने लगा

अमन ने वापस नजरे फेर कर आलमारी से एक साटिन नाइटी निकाली

: मम्मी ये !!

ममता ने एक नजर उस नाइटी को देखा और एकदम उसका चेहरा गुलाबी हो गया

: धत्त पागल है क्या ? वो नहीं दूसरा कोई

ममता ने एक नजर मुरारी को देखा और मुरारी समझ गया कि ममता के शर्माने का कारण क्या था । क्योंकि अनजाने में ही अमन ने वो साटिन की नाइटी निकाली थी जो उसकी छातियों पर कस जाती है और उसके बड़े बड़े अंगूर जैसे निप्पल उभर आते है ।

: क्यों क्या हुआ ? कितना सॉफ्ट हैं और कलर भी प्यारा है

: अरे नहीं पागल ( ममता उसकी ओर जाती हुई बोली और अमन की आंखे बड़ी होने लगी जैसे जैसे ममता उसकी ओर बढ़ रही थी अपनी नंगी छातियां हिलाती हुई )

फिर ममता ने अलमारी से काटन की ढीली नाइटी निकाली

: उसको रख दे

: क्या हुआ इसमें ( अमन हल्के से बुदबुदाया )

: वो छाती पर टाइट आती है और सब दिखता है सामने से ( ममता मुस्कुरा कर बोली )

अमन का लंड कसने लगा था अपनी मां को पास में खड़ा देख कर

इधर मुरारी उठा और बाथरूम में चला गया और ममता ने नाइटी डाल ली






अपने पापा के हटते ही , अमन ने अपनी मां को अपने बाहों में भर लिया

: उफ्फ मेरी सेक्सी मम्मा , मिस यू

: हट पागल छोड़ , तेरे पापा अंदर ही है

ममता ने अमन को अलग किया और आंखे दिखाती हुई मुस्कुराई

अमन का लंड एकदम फड़फड़ाने लगा था

: और ये क्या है ?

: आपको देखकर हुआ है हीहीही ( अमन बड़ी बेशर्मी से बोला )

: तेरे पापा ने देख लिया तो ?

: जैसे पापा का नहीं हुआ होगा क्या आपको ऐसे देखकर ... मुझे लगता है वो तो हिलाने गए है अंदर हीही

: धत्त बदमाश, मार खायेगा अब सही कर उसे

अमन के दिमाग में बहुत सारे ख्याल आ रहे थे और उसकी उत्तेजना बढ़ रही थी

: मम्मी

: हा बोल न

: चूस दो न

: धत्त पागल है क्या ? हट अब

तभी बाथरूम में फ्लश चलने की आवाज आई और दोनों अलग हो गए

मुरारी के आने पर ममता अमन का उतरा हुआ मुंह देख रही थी ,

: आप लोग बाहर आओ , मै जरा ऊपर से सबको बुला कर आती हूं

फिर ममता अपने कूल्हे हिलाती हुई निकल गई

उसके जाते ही मुरारी मुस्कुरा कर अमन को देखा

: सीईईई पापा ये क्या था ? मम्मी तो जरा भी नहीं सोची

: अरे तू उसका बेटा है , इतना नहीं सोचेगी ब्लाउज उतराने में , असल मजा है जब पेटिकोट उठाएगी

अमन और मुरारी हंसते हुए बात करते हुए हाल में आ रहे थे और वही ममता अमन के कमरे में जा पहुंची , जहां सोनल अपने ट्रॉली बैग्स खोलकर बेड पर समान बिखेरे हुए बैठी थी निशा के साथ

: अरे बहु ये क्या लेकर बैठ गई तू भी , चल पहले खाना खा और आराम कर

ममता फिकर में बोली और निशा को ताज्जुब हुआ जिस तरह से सोनल को उसकी सास ने अपनापन जताया

: जी मम्मी जी , वो मैने सोचा कि कल शॉपिंग के लिए जाना है तो पहले अपने बैग खाली कर लूं , एक काम निपट जाएगा

: अच्छा अच्छा ठीक है कर लेना , लेकिन पहले चल खाना खाने और निशा बेटा तू भी आ जा । मै तेरी चाची को देख कर आती हूं

: जी मम्मी

सोनल उठने लगी और एकदम से ममता की नजर बिस्तर पर सोनल जहां बैठी थी वहां उसके पीछे एक पैकेट था ,जिसमें से कुछ चमकीली नीली एक डोरी बाहर निकली थी

ममता के भीतर की जिज्ञासा बढ़ने लगी

: अरे वो क्या है पन्नी में

ममता के इंडीकेशन से ही निशा और सोनल की आंखे बड़ी हो गई और वो मुस्कुराने लगी

: क्या हुआ बहु

सोनल निशा को देख रही थी कि क्या करूं और ऐसे में निशा झट से बिस्तर से उठ कर टिनटिनाती हुई चाल में मुस्कुराती हुई बाहर निकल ली : सोनल तू आना मै जा रही हूं

: अरे !! ( ममता को हैरानी हुई ) बहु ?? क्या बात है

: वो मम्मी जी

ममता ने लपक कर वो पैकेट उठाया और उसे खोलकर कर देखा तो वो भी मुस्कुराने लगी , उसमें कई तरह की रंग बिरंगी ब्रा पैंटी और बिकनी सेट थे

ममता ने मुस्कुरा कर अपनी नजर चुराती हुई बहु को देखा

: इसके लिए इतना शर्मा रही है , अच्छा इसमें मेरे लिए भी है न ? ( ममता ने माहौल को थोड़ा दोस्ताना करना चाहा ताकि उसकी बहु थोड़ी सहज हो सके )

: जी मम्मी , है

: हैं ? सच में !!

: हम्ममम ( सोनल ने हा में सर हिलाया ) वो आपकी और मम्मी( रागिनी ) के लिए, दोनो के लिए है उसमें

: हीही और तुझे मेरा साइज कैसे पता ?

सोनल मुस्कुराने लगी

: उनको पता था ?

: किसको ? अमन को !! ( ममता को हैरानी हुई )

सोनल ने शर्मा कर हा में सर हिलाया

: लेकिन उसको कैसे पता ?

: शायद उन्होंने पापा जी से पूछा हो , वो कुछ सरप्राईज जैसा कह रहे थे ( सोनल लजा कर मुस्कुराते हुए बोली )

ममता अपने दिमाग के घोड़े दौड़ाने लगी । उसके दिमाग में कुछ चीजें उलझी और धुंधली थी और शायद इसी से उसका शक दूर हो सकता था आखिर बाप बेटे की दोस्ती किस हद तक आगे जा पहुंची है ।

: बहु एक मिनट , मुझे तेरी हेल्प चाहिए

: जी मम्मी कहिए

फिर ममता ने सोनल के कान में कुछ कहा और सोनल ने बस मुस्कुरा कर हुंकारी भरी । फिर सोनल को उसने नीचे जाने को कहा और खुद मंजू को बुलाने उसके कमरे की ओर बढ़ गई

मंजू के कमरे का दरवाजा लगभग भिड़का हुआ था और ममता ने जैसे ही कमरे का दरवाजा खोला उसकी आंखे फैल गई सामने का नजारा देख कर

और मन ही मन बड़बड़ाई : ये दोनो के दोनों ही ऐसे है , किसी में भी सब्र नहीं है

तभी उसे सोनल के कमरे के बंद होने की आहट हुई और वो झट से अंदर होकर मंजू के कमरे हो गई , फिर दरवाजा हौले से बंद कर

घूम कर अपने हाथ कमर पर रखते हुए आंखे महीन कर सामने का नजारा देखने लगी

सामने मंजू और मदन एक दूसरे में इतना खोए थे कि उन्हें इस बात की भनक ही नहीं थी कि ममता दरवाजा खोलकर अंदर आ गई थी

मदन बड़े जोश में उसके रसीले लिप्स चूस रहा था , मंजू की पीठ ममत की ओर ही थी और बात इतनी ही नहीं थी

मदन के हाथ तो अपनी मर्यादा लांघ चुके थे , उसने मंजू की साड़ी ऊपर कर उसके चूतड़ों को नंगा कर उन्हें अपने पंजों से खंरोच रहा है और फैला रहा था






ममता की नजर एक बार को मंजू के चर्बीदार चूतड़ों और फैली भूरी दरारों से झांकती उसकी गाड़ के सुराख पर गई और वो गिनगिना गई

उसने अपना गला खरासा और मुस्कुरा कर उन्हें देखा

एकदम से दोनों हड़बड़ाए और मंजू अपनी साड़ी सही करने लगी , फिर सर पर पल्लू करने लगी

लाज के मारे में मंजू ने ममत की ओर पीठ कर लिया था , लेकिन अभी भी पीछे से उसकी साड़ी थोड़ी खुली हुई थी

: वैसे मैने कुछ कहा था आपसे देवर जी उम्मम

मदन मुस्कुराया और कमरे से जाने लगा तो ममता उसके आगे खड़ी हो गई

: ये आखिरी बार है , अगली बार वीडियो बना कर तुम्हारे भइया को दिखाऊंगी समझे ( ममता ने हस कर उसको आंखों से घूरा )

फिर उसने मदन को जाने दिया जो तेजी से कमरे से निकल गया

मंजू भी लाज से वहां से निकलना चाहती थी

: रुको !!

ममता ने थोड़े कड़े लहजे में कहा और मंजू की हिक्की बंध गई मानो

ममता मुस्कुरा कर उसके पीछे गई और नीचे बैठ कर उसकी साड़ी को पीछे से सही किया

: तुम तो कपड़े बदलने आई थी न

मंजू शर्मा के लाल हुई जा रही थी

: मै क्या करूं , भाभी वो नहीं मानते है और... ( मंजू बोलते हुए शर्मा कर रुक गई )

: पहले भी ऐसे ही थे तुम लोग ... भूली नहीं हूं

ममता के छेड़ने पर मंजू शर्मा उठी ।

: सॉरी ( मंजू थोड़ा उदास होकर बोली नजरे चुरा कर )

: अरे पागल है क्या ? तू भी न , मै तुझे ये सब करने से रोक नहीं रही न । देख मै इन मर्दों को जानती हूं इनको औरत और शराब दोनों एक सी दिखती है जब तलब हुआ एक शॉट लगा कर खत्म करना चाहते है । लेकिन ये हमारी जिम्मेदारी है कि उन्हें थोड़ा तरसाए , उन्हें रिझाए इतनी जल्दी तैयार होने की जरूरत नहीं है ।समझी

: जी ( मंजू मुस्कुरा कर ममता की बात समझ रही थी )

: देख कल मैने अमन के पापा को बाहर भेज दिया और नतीजा आज सुबह हीहीही... खैर वो तो तूने देखा ही था उम्मम

ममता मंजू को छेड़ रही थी और मंजू शर्मा कर मुस्कुरा रही थी

: अब चले ?

: जी चलिए

फिर दोनों कमरे से बाहर निकल कर हंसती हुई जीने से उतरने लगी

इस पर ममता ने हस कर कहा

: वैसे कुछ भी हो हमारी जोड़ी खूब जमेगी

: वो कैसे ? ( जीने से उतरते हुए मंजू ने सवालिया निगाहों से ममता को देखा )

तो ममता मुस्कुरा कर उसके पास आकर बोली : नीचे मै भी जल्दी कुछ नहीं पहनती और तू भी हीहीही

मंजू ममता का इशारा समझ गई थी कि ममता ने कब उसे बिना कच्छी के देख लिया था और लाज से पानी पानी हुईं जा रही थी

फिर सारे लोग खाने के लिए बैठ गए और वही मदन का मुंह बना हुआ था ।

जिस पर मुरारी की नजर पड़ी गई और उसने सोचा खाने के बाद वो मदन से बात करेगा

राज के घर

अपने भैया की बातों से अनुज का मूड एकदम उखड़ गया था , जिस तरह से राज ने उसका मजाक बनाया ।

किताबें खोलकर वो अपनी मां के बिस्तर पर बैठा था।

पढ़ना तो छोड़ो किताबे देखने का भी उसका कोई इरादा नहीं लग रहा था ।

एक तीव्र प्रतिरोधी प्रेम की भावना , जिसने उसमें अपनी मां पर वर्तमान में एकाधिकार की भावना प्रबल कर दी थी । इस वक्त वो रागिनी पर सबसे बड़ी दावेदारी खुद की पा रहा था , लेकिन मलाल इस बात का था कि वो चाह कर भी अपने उस किरदार के बंधन से आजाद नहीं हो सकता था जो छवि के साथ वो अपनी मां के सामने रहता है , एक मासूम दुलारा और लाडला बेटा । जिसमें अभी बहुत दुनिया की समझ नहीं है और वासना के जाल से अभी अछूता है ।

मगर अनुज का दिल ही जानता था कि वो कितना बेताब है अपनी मां को अपनी मर्दानगी दिखाने को , वो जताना चाहता था कि वो हर मामले में अपने भैया से कैसे बेहतर हो सकता है लेकिन ... घूम फिर पर सारी कहानी उसके छोटे होने और उसकी 10वीं की परीक्षा पर आकर रुक जाती थी ।

सर्द रात का सन्नाटा गहराता जा रहा था और अभी तो रात के महज 08 ही बजे थे , ना पंखे ही हनहनाहट और कुलर का शोर

पूरे घर में जो कुछ आवाजें उठ रही थी वो किचन से थी , थोड़ी बहुत बर्तनों की तो कुछ उसकी मां के बड़बड़ाने की ।

कारण अनुज साफ समझ रहा था और लेकिन उसकी वासना उसके ईगो को बहुत गहरे दबा चुकी थी और अमीन बिस्तर से सरक कर कमरे के दरवाजे से बाहर झांकने लगा

दो कदम हाल की तरफ और उसकी नजर किचन में गई

एकदम से चौक कर वो रुक गया

नंगे पैर जम से गए उन ठंडी टाइल्स की फर्श पर , पूरे बदन में कंपकंपी और उसने एक लंबी गहरी आह भरते हुए सामने देखा

उसकी मां रागिनी किचन में काम कर रही थी स्लैब के पास खड़ी होकर और राज उसके पीछे खड़े होकर अपनी मां के कमर को सहलाता हुआ उसके नंगी पीठ को चूम रहा था






: उम्मम धत्त क्या कर रहा है मारूंगी तुझे बदमाश , छोड़ मुझे गुदगुदी हो रही है

जिस तरह से रागिनी राज के चुम्बन के स्पर्श से सिहर कर मुस्कुरा रही थी अनुज भी समझ रहा था कि ऐसे कहने से भला कौन रुकेगा ।

अनुज का अंदाजा भी सही था , राज के हाथ कमर से बढ़ कर आगे रागिनी के मुलायम पेट को सहलाने लगे थे और होठ पीठ से सरक कर ऊपर गर्दन के पास

रागिनी के हाथ लगातार कड़ाही में सब्ज़ी को जलने से रोकने के लिए कलछी चला रहे थे लेकिन राज के होठों के चुम्बन से उसके बदन में जो आग भड़क रही थी वो उसको शांत भी कर सकती थी ।






रागिनी हर वो कोशिश कर रही थी कि वो राज को शब्दों से हो रोक सके

: तुझे कपड़े पहनने को कहा है न , जा पहन कर आ

: ओह्ह्ह मम्मी आपकी गाड़ कितनी मुलायम है अह्ह्ह्ह्ह कितनी गद्देदार है सीईईई ओह्ह्ह

: धत्त हीही कितना गंदा बोलता है तू छोड़ अब ... अरे पागल है क्या छोड़ न






राज रागिनी को पकड़ कर पैंट के ऊपर से अपना लंड अपनी मां की गाड़ पर ठोकर मारने लगा और यहां ये नजारा देख कर अनुज का लंड झटके देने लगा लोवर में

एक ओर उसके लंड की गर्मी बढ़ रही थी तो नंगे पैर में ठंडी फर्श से सर्दी भी चढ़ रही थी , रह रह कर उसका ध्यान बट जा रहा था और इधर कब राज ने अपना मूसल निकाल लिया पता ही नहीं चला

खुले किचन में अब वो अपने लंड को अपनी मां के चूतड़ों पर साड़ी के ऊपर से ठोकरें मार रहा है

: हाय दैय्या कितना टाइट है रे सीईईई उम्मम रुक न जा बेटा अह्ह्ह्ह सब्जी गिर जायेगी






रागिनी सब्जी चला रहा थी और राज अपनी पैंट जांघों तक खोले हुए उसको पीछे से पकड़ कर उसकी गाड़ में साड़ी के ऊपर से ही पेल रहा था

अनुज का लंड भी अब बगावत पर आ पहुंचा था और उसने लोवर के ऊपर से उसको भींचने लगा था ।

रागिनी का खाना तैयार हो गया था वो राज से अलग होकर सिंक के पास आ गई , हाथ धुलने के लिए

: अब अंदर कर उसे और जा कपड़े पहन कर आ , मान जा बेटा सर्दी लग जाएगी

रागिनी ने उसके गाल छू कर बड़े दुलार में बोली

लेकिन राज को आज कुछ ज्यादा ही जुनून था और उसने अपनी मां से चिपकना नहीं छोड़ा ।

झुक कर कूल्हे के पास चूमते हुए उसने पीछे से रागिनी की साड़ी ऊपर करनी शुरू कर दी

रागिनी के हाथ सिंक में बर्तन धुलने के लिए व्यस्त थे और राज ने जैसे मौके का फायदा उठा लिया

रागिनी की साड़ी और पेटीकोट एक साथ कूल्हे तक और उसकी चमकती गोरी गाड़ सामने

अह्ह्ह्ह क्या नजारा है मम्मी उफ्फ कितनी मुलायम गाड़ है आपकी और भइया... खायेगा क्या उसे .. अरे नहीं

अनुज की जुबान लग ही गई और राज ने साड़ी उठाए हुए अपनी मां के पैंटी के साइड से नंगे चूतड़ों को चूमने लगा

ये स्पर्श पाते ही रागिनी सिहर उठी , उसकी बुर पनियाने लगी थी जिस तरह से राज पिछले 15 मिनट से उसे तंग कर रहा था

रागिनी भी तड़प कर राज के मुंह की ओर अपने चूतड़ों को धकेल कर सिसकी : ओह्ह्ह्ह बेटा उम्मम अह्ह्ह्ह्ह






एकदम से अनुज अपना लंड का कर भींच लिया और रागिनी की नजर उस पर गई

एक पल को दोनों की निगाहे मिली और अनुज सरपट भाग कर अपने मा के कमरे में बिस्तर में कम्बल ओढ कर किताब निहारने लगा ।

इंतजार तो अनुज को भी था कि कब उसकी मां उसे बुलाने आएगी

05 , 07 और फिर 10 मिनट हुए

अनुज की बेचैनी बढ़ने लगी कि बाहर क्या हो रहा होगा ?

ना सिसकी या कोई आवाज !

घड़ी का कांटा बढ़ता ही जा रहा था ।

अनुज वापस से बिस्तर छोड़ने के फिराक में था कि उसे रागिनी के पायलों की खनक मिली और एकदम से वो किताबों में सर जमा कर बैठ गया

रागिनी कमरे में दाखिल हुई और अनुज का ड्रामा देख कर मुस्कुराई

: खाना बाहर खाएगा कि यही लाऊं

अनुज ने नजर उठा कर देखा तो सामने रागिनी खड़ी मुस्कुरा रही थी और अनुज मुस्कुराने लगा

: मुझे पता है कितना पढ़ रहा है तू

: सॉरी हीही

: तांक झांक करना जरूरी है उम्मम

रागिनी ने थोड़ा घूरा उसे और अनुज हसने लगा

: वैसे मै राज के पास जा रही हूं उसके कमरे में खाने , तू यही खा ले

अनुज एकदम से चौक गया कि सारी सुविधा राज को ही मिलेगी क्या

: क्यों ? मेरे साथ खाओ न

: तू बोल ही नहीं रहा है एक भी बार , अच्छा चल यही लाती हूं , ठीक है

अनुज खुश हो गया और रागिनी थाली लेकर आई और दोनों ने साथ में खाना खाया

फिर अनुज थाली किचन में रख कर वापस आया और कमरे में देखा तो उसकी मां अपनी साड़ी कंधे से सरका कर कमरे में खड़ी ब्लाउज खोल रही थी

अनुज का लंड अकड़ने लगा था

उसने एक नजर अपने भैया के कमरे में डाला जो मोबाइल पर एक वीडियो देख रहा था कान में इयरफोन लगाए और खाना खा रहा था

अनुज वापस अपनी मां के पास आ गया

रागिनी थोड़ा मुस्कुराई : तू डरेगा नहीं न अकेले सोने में

: क्यों आप वापस नहीं आओगी मेरे पास ( अनुज उखड़ कर बोला )

: अगर भइया नहीं आने दिया तो ( रागिनी ने जान बुझ कर छेड़ा अनुज को )

: अरे तो कह देना न कि आपको मेरे पास सोना है

: अच्छा और वो मान जाएगा उम्मम

रागिनी अपना ब्लाउज खोल चुकी थी और साड़ी वापस से अपने छातियों पर रख दिया






जिससे एक झलक भर मिली अनुज को अपनी मां के नंगी मोटी चूचियों की और फिर से पर्दे में आ गई थी

अगर ध्यान से देखता अनुज तो अभी भी साड़ी के आरपार रागिनी की छातियां साफ झलक रही थी और अनुज ने तिरछी आंखों से देखा भी

अनुज भीतर से बेचैन हो रहा था

वो कहना चाहता था कि मम्मी रुक जाओ मेरे पास , मै वो सब दे सकता हूं जो आपको राज भैया से मिलेगा

लेकिन एक डर एक बंधन अभी भी हावी था उस पर

: तो मै जाऊं

: ऐसे ही ? , आप कुछ पहनने वाले थे न

: तूने कहा था कि पापा की पसंद न पहन कर जाऊ तो ( रागिनी बोल कर मुस्कुराई अपने होठ दबा कर )

अनुज ने अब खुल कर अपनी मां का कामुक रूप देखा

साड़ी में बड़े ही कामुक ढंग से अपनी नंगी छातियां को बिना ब्रा ब्लाउज के छुपाए हुए खड़ी थी

जिन्हें देखकर अनुज का मुंह में पानी आने लगा था और लंड अकड़ने लगा था ।

: तेरे पापा को मै ऐसे ही पसंद हूं , थोड़ी गांव वाली फिलिंग चाहिए होती है , जैसे गांव में औरते बिना ब्लाउज के सिर्फ साड़ी लपेट कर रहती है

अनुज का लंड लोवर में बड़ा सा तंबू बना चुका था और वो उसे छिपाना भी नहीं चाहता था

उसके दिमाग में कुछ और बात उसे अटका रही थी

: मम्मी

: हम्मम

: एक बात कहूं ( अनुज मुस्कुराया ) गुस्सा नहीं करोगे न

: क्या बोल न

: वो गांव की औरतें तो पैंटी भी नहीं पहनती न हीही

रागिनी ने होठ सिकोड़ कर अनुज की बातों को सुना और मुस्कुराई

: वैसे सच कहा तूने , उसकी भी जरूरत नहीं है

एकदम से रागिनी ने साड़ी के अंदर हाथ डाला और बिना कुछ दिखाए बड़ी चतुराई से अपनी पैंटी निकाल एक सोफे पर फेक दी

अनुज ने उड़ती हुई पैंटी को सोफे पर गिरता देखा और उसका लंड एकदम फड़फड़ाने लगा था

अब कौन सी बात हो सकती थी जिससे वो अपनी मां को रोक ले , उसका हर एक प्रयास अबतक विफल हो रहा था

: मम्मी !!

: हम्ममम ( रागिनी के दरवाजे की ओर बढ़ते कदम रुक गए ) क्या बोल न

: कुछ नहीं ( अनुज एक फीकी से मुस्कान से बोला )

रागिनी उसके मन की उदासी समझ रही थी और एक नजर उसने कमरे के दरवाजे के पास खड़े हुए राज के रूम में देखा और इशारे से अनुज को पास बुलाया

अनुज चल कर उसके पास गया

रागिनी की सांसे थोड़ी बेचैन थी उस वक्त और अनुज का मन उदास था

रागिनी ने वापस बाहर देखा और धीरे से अपनी साड़ी का पल्लू नीचे से उठा कर एक चुची अनुज के सामने नंगी कर दी

: जल्दी से पी ले

अनुज की आंखे चमक उठी , एक पल को तो उसे समझ भी आया कि क्या हो रहा है लेकिन अपनी मां की नंगी चुची देखकर वो लपक कर आगे बढ़ा और दोनों हाथों से अपनी मां की रसीली चूची पकड़ के निप्पल को मुंह में लगा लिया

रागिनी मन ही मन मुस्कुराई कि दोनों भाइयों का पहला स्पर्श एक जैसा ही है

अनुज तेजी से उसकी छाती हाथों में घुला कर पीने लगा और रागिनी उसका सर सहलाने लगी : ओह बेटा बस हो गया छोड़ न






अनुज ने भी थोड़ी मनमानी की और लगा कर मुंह से अपनी मां के निप्पल खींचने में , रागिनी को दर्द आ होने लगा और वो अनुज को धकेलने लगी और अनुज ने छोड़ दिया

: पागल , तू तो उसे भी बड़ा है हवशी है

बोलकर रागिनी मुस्कुराई और अपनी साड़ी सहेजने लगी

अनुज खुश था अपनी मां की रसीली चूची का स्वाद लेकर और रागिनी जाने को हुई

: मम्मी , प्लीज दरवाजा मत लगाना

रागिनी ने आंखे नचा कर उसे देखा और कमरे से निकल कर सामने राज के कमरे में चली गई

और अनुज खुश होकर अपना लंड भींचने लगा

इस इंतजार में कि आगे क्या क्या होने वाला है और अब वो उस नाउम्मीदी से बाहर आ चुका था कि वो राज से पीछे रह जाएगा ... क्योंकि उसकी मां ने उसे दुबारा से एक उम्मीद दे दी थी और अनुज जल्द ही अपने सपने सच होने के आसार साफ दिख रहे थे ।

जारी रहेगी

( पढ़ कर लाइक कमेंट करने में कंजूसी न करे , व्यस्तता ज्यादा है फिर भी अपडेट देने की कोशिश पूरी है .. धन्यवाद )
 
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