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अब तक...
Neha(mann में) : हां! बात तोह सही है! ऐसे में माँ डैड भी नाराज़ नहीं होएंगे और में भी इस से हमेशा के लिए पीछा चुर्रा लुंगी.
तभी नेहा राहुल की तरफ आगे बढ़ती है और बिना मैं के अजीब सा मुँह बनाते हुए उससे गले लगाने के लिए आगे बढ़ने लगती है, तभी राहुल उसको कंधो से पकड़ता है, एक हाथ उसके गाल पर रखता है और आगे बढ़ के उसके कान में ऐसा कुछ कहता है, जिससे सुनकर नेहा की आँखें फटी की फटी रह जाती है और उसका शरीर सिहर उठता है.
अब आगे...
बेचैनी! एक अजीब सा एहसास, एक पीड़ा, नेहा को अभी खाए जा रही थी. फटी आँखों से वो सामने देख रही थी, पर न तोह उससे कुछ सुनाई दे रहा था और सामने क्या चल रहा है नेहा उस से भी वंचित थी क्युकी राहुल ने जो कहा उससे सुनके उसके होश hi उड़द चुके थे.
राहुल तोह कुछ कदमो के बाद hi धीरे धीरे सबकी आँखों से ओझल हो गया और कब उसकी फ्लाइट ने उड़ान भरी और कब वो प्लेन भी सबकी आँखों से ओझल हो गया, समय का पता hi नहीं चला. नेहा तोह तब से स्तब्ध सी कड़ी सामने देखे जा रही थी जबकि वह कुछ देखने लायक था hi नहीं. उससे तोह होश तब आया जब निशा की रोने की सिसकिया थोड़ी तेज़्ज़ हुई और उसके कानो में पड़ी. पीछे पलट कर नेहा ने देखा तोह पाया निशा रो रही थी और राजेश उन्हें शांत करवा रहे थे, बाकी सब की आँखें भी नाम थी. इधर वो शांत सी कड़ी कुछ देरर हुई पहले की घटना के बारे में सोच रही थी. तभी उसके कानो में आवाज़ पड़ी और सबकी तन्द्रा भांग हुई,
राजेश : चलो बीटा!
राजेश के कहने पर जैसे सभी गम से बाहर निकले और वापस घर की और जाने लगे. सब अपने अपने घर को लौट गए, अब राहुल तोह था नहीं तोह फिर भला अंशु और वंशु क्या करती घर पर? वो दोनों भी शाम होते hi निकल गयी अपने घर. नेहा की समझ नहीं आ रहा था, उसका सर चक्र रहा था, और उससे गुस्सा भी बोहत आ रहा था.
नेहा (मैं में) : उसने ज़रूर ये जान बूझ के किया था, सोच रहा होगा ऐसा करने से में पिघल जाउंगी, ya...ya ये भी हो सकता है की मेरा मज़ाक उड़ाने के लिए ये सब किया हो? सहित! मेरा तोह दिमाग फटा जा रहा है. जाते जाते भी ये मेरा पीछा नहीं चोरर रहा.
यहाँ राहुल और सौरभ जब मुंबई पहुचे. तोह उन्हें स्टेशन पे धेरर सारे टैक्सी ड्राइवर्स ने घेर लिया,
"साब किधर जाने का?"
"आओ न साब, में लेके चलता है आपको".
"अरे भौ, कहा जाना है?"
कुछ ऐसे hi सवालों से राहुल और सौरभ को घेरते हुए टैक्सी ड्राइवर्स ने भीड़ लगा दी. पर राहुल तोह जैसे सब के लिए तैयार था. उसने एक टैक्सी ड्राइवर को एक पर्ची दी, जिसमे पूरा एड्रेस डिटेल्स में लिखा हुआ था, की कहा से मुड़ना है, कोण सी रोड से जाना है, कितना भाड़ा लगेगा, कितना समय लगेगा.
ये पर्ची मास्टर ने hi उससे बना के दी थी, जब टैक्सी वाले ने पर्ची देखि तोह उसका सर hi चक्र गया. चुना लगाने का प्रश्न hi नहीं उठता. पर्ची पर एड्रेस की हर एक डिटेल्स लिखी हुई थी. कोई चाह कर भी राहुल और सौरभ को चुना नहीं लगा सकता था.
खर्र! राहुल और सौरभ दोनों hi एक सोसाइटी में पहुचे, जहा पर चौथी मंज़िल पे उनका फ्लैट था, अभी उनके पास कोई भी के नहीं थी तोह दोनों फ्लैट के बाहर खड़े हुए थे और किसी का वेट कर रहे थे,
सौरभ : तू सूरे है न की यही घर है?
राहुल : हां!!
सौरभ : बूत यार अभी तक कोई आया hi नहीं.
राहुल : बात हो गयी है मेरी, कोई न कोई आता hi होगा.
तभी कुछ देरर में एक व्यक्ति आया और राहुल को फ्लैट की के दिया और वापस चला गया, अंदर से फ्लैट पूरा फर्निश्ड था, राहुल और सौरभ दोनों फ्रेश हुए उसके बाद राहुल नाहा के रेडी हो गया, क्युकी यहाँ उसका काम था 3 महीने तक ख़ुशी को प्रोटेक्ट करना. उससे ये बात सताए जा रही थी की ये ख़ुशी कही ज़िद्दी लड़की न निकले, पता नहीं किसी होगी? क्या नेचर है उसका? मानेगी भी या नहीं?
सौरभ : भाई अब तू कहा चल दिया?
राहुल : में यहाँ नहीं रहूँगा! मुझे एक इम्पोर्टेन्ट काम निपटना है, 3 महीने तक उसी में बिजी रहूँगा.
सौरभ : wtf? अबे तोह में यहाँ अकेला क्या करूँगा?
राहुल : तू टेंशन मत ले, 3 महीने तू सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट के और कोर्सेज कर लेना.
सौरभ : में पहले hi दो कर चूका हु, और मेरे से आता है सॉफ्टवेयर डेवेलोप करना.
राहुल : हां पर अभी और एडवांस्ड वाले कर. समझा? अब में चलता हु.
सौरभ : मेरी तोह कुछ समझ नहीं आ रहा यार
राहुल : don't वोर्री! मुझे पता है में क्या कर रहा हु.
वो वह से निकल के एक और बताये गए अड्रेस पर जाता है तोह सामने एक बोहत बड़ा घर था.
इस से पहले की वो आगे बढ़ पाटा, घर के बहार खड़े सिक्योरिटी गार्ड ने उससे रोक दिया,
"किस से मिलना है आपको?"
"ओह्ह हां! एक मिनट..", राहुल ने अपना फ़ोन निकाला और वापस से वो एड्रेस पढ़ा और उस सिक्योरिटी गार्ड को दिखाया.
अड्रेस पढ़ने के बाद सिक्योरिटी गार्ड ने कुछ अजीब निगाहो से राहुल को नीचे से ऊपर तक देखा, राहुल एक सिंपल वाइट टी शर्ट और जीन्स में था और कुछ भी नहीं. कही से भी वो कोई ऐसा व्यक्ति नहीं लग रहा था जो इस बंगला के मालिक से कोई रिलेशन रखता हो.
"यहाँ किस काम से आये हो?" उसने पूछा.
"ओह्ह हां! मास्टर चेन ने मुझे भेजा है, ये घर तोह उन्ही का है न? आप लोगो को बताया नहीं क्या किसी ने?" राहुल ने कहा.
सिक्योरिटी गार्ड 1: मास्टर चेन? ये कोण है? तुम जानते हो क्या?
सिक्योरिटी गार्ड 2 : ना भाई न! इसको भगाओ ये फ़ालतू टाइम पास कर रहा है यहाँ.
राहुल : आप दोनों का हो गया हो तोह में अंदर जाऊ?
उसी बंगला में ऊपर साइड, खिड़की के पास एक व्यक्ति बैठा हुआ था जो कुछ सोच रहा था,
व्यक्ति (मैं में) : मास्टर ने कहा था राहुल नाम का लड़का मुंबई आने वाला है. अब तक आया नहीं?
तभी उसने खिड़की से पर्दा हटा कर देखा तो पाया नीचे एक लड़का सिक्योरिटी गार्ड्स से बहस कर रहा है और वो फौरन नीचे देखने चला गया.
अभी यहाँ राहुल आगे बढ़ने hi वाला था की एक आवाज़ ने तीनो को रोक दिया,
"क्या चल रहा है यहाँ?"
सभी ने उसकी और देखा, जब व्यक्ति ने राहुल को देखा तोह उसने फौरन पूछ लिया,
व्यक्ति : राहुल? क्या तुम राहुल हो?
राहुल : जी हां! पर आप कोण?
तभी उस व्यक्ति को समझ में आ गया और उसने आगे बढ़कर राहुल का हाथ बड़े hi आदर के साथ मिलाया,
व्यक्ति : नीस तो मीट यू! में, रजनीश. मास्टर का सेक्रेटरी. में आपको लेने स्टेशन hi आने वाला था.
राहुल : अरे इसकी कोई ज़रुरत नहीं, में वैसे भी मुंबई को अच्छे से देख रहा था, थोड़ा घूम hi लिया.
रजनीश : जी! प्लीज फॉलो में!
रजनीश (सिक्योरिटी गार्ड्स से) : और तुम दोनों! क्या बकवास कर रहे थे? जानते भी हो ये कौन है?
मालिक की दांत सुन्न दोनों सिक्योरिटी गार्ड्स चुप होकर नज़रे नीचे कर लिए, अंदर आते आते राहुल बंगला की बनावट को देख रहा था और सोच रहा था की एक दिन उसके पास भी खुद का बड़ा सा घर होएगा.
बाहर खड़े 2 सिक्योरिटी गार्ड्स मुँह hi ताकते रह गए,
सिक्योरिटी गार्ड 1 : अरे भाई ये तोह सच में मालिक को जानता है
सिक्योरिटी गार्ड 2 : मालिक खुद से बाहर आके हाथ मिलाए उस से...
रजनीश : आप यहाँ बैठिये! में अभी आया!
राहुल को रजनीश के मुँह से 'आप' सुन्न बड़ा hi अटपटा लग रहा था, क्युकी रजनीश उम्र में वैसे hi मास्टर से भी बड़े लग रहे थे. रजनीश की उम्र 50 तोह होगी hi, ये अनुमान राहुल ने लगाया.
थोड़ी hi देरर में रजनीश ट्रे में पानी लेकर आया तोह राहुल ये देख अपनी जगह से उठ खड़ा हुआ,
राहुल : अरे ये...?
रजनीश : जी पानी पीजिये!
राहुल : देखिये सबसे पहले आप मुझे "आप" कहना बंद कर दीजिये. मुझे अच्छा नहीं लगता की कोई मुझसे बड़ा मुझे ऐसे बुलाए. और आपको मेरे लिए ये सब पानी लाने की कोई ज़रुरत नहीं है.
रजनीश : अच्छा चलिए ठीक है! में आपको मिस्टर राहुल कहकर बुलाऊंगा. रही बात पानी देने की तोह उसका तोह कोई इलाज नहीं है क्युकी यही तोह मेरा काम है.
राहुल : क्या मतलब?
रजनीश : मतलब ये की... मेरा काम यही है मिस्टर राहुल. मिस ख़ुशी के लिए उनका पूरा खाना और बाकी सारे घर के काम में hi करता हु.
राहुल : पर आपने कहा की आप सेक्रेटरी हो मास्टर के?
रजनीश : हां! बिलकुल हु!
राहुल : पर मास्टर की सेक्रेटरी तोह मोनिका दीदी है न?
रजनीश : हां! पर ये किसने कहा आपको की मास्टर के पास सिर्फ एक hi सेक्रेटरी है?
राहुल : तोह फिर आप ये खाना बनाना?
रजनीश : जी! अब में वैसे hi 52 बरस का हो गया मिस्टर राहुल. तोह उन्होंने मुझे मिस ख़ुशी के साथ रखा है. उनकी dekh-bhaal के लिए. वर्ण पहले में भी मोनिका मिस की तरह मास्टर का बिज़नेस hi संभालता था.
राहुल : ओह्ह! अब समझ आया. तोह फिर वो बहार सिक्योरिटी गार्ड्स मास्टर चेन को क्यों नहीं जानते?
रजनीश : वो इसलिए क्युकी उन्होंने कभी मास्टर चेन को देखा hi नहीं है. सारा काम यहाँ पर में संभालता हु. और इसलिए उन्हें लगता है की में hi मालिक हु.
राहुल : ओह्ह! ी सी!
रजनीश : मिस्टर राहुल. आप अपना बैग उतार दीजिये और खाना रेडी है, में लगा देता हु.
राहुल : ओह्ह! तोह मुझे यही रुकना है न तीन महीने?
रजनीश : जी हां! तोह अब कुछ ज़रूरी बात कर ली जाए मिस्टर राहुल?
राहुल : ज़रूरी बात? वेल! कहिये!
रजनीश : तोह आपकी पेमेंट रहेगी 50,000 रूपए एक महीने के हिसाब से. और मिस ख़ुशी पर आप जो भी खर्च करेंगे वो भी आपको दिया जाएगा. ी होप मास्टर ने तोह आपको बता hi दिया होगा?
राहुल : वेट... kyaaaaaaaaaaaa??? पेमेंट??
रजनीश : हां! पेमेंट! आप मिस ख़ुशी को प्रोटेक्ट करेंगे, तोह आपको पाय तोह करना hi पड़ेगा न? बिना पेमेंट के कोण बॉडीगार्ड काम करता है?
राहुल (मैं में) : ोोू भाईसाहब!!! ये सब क्या चल रहा है? कही मास्टर ने जान बुझ के तोह नहीं पेमेंट राखी? मेरी बिज़नेस में हेल्प करने के लिए? यदि ऐसा है तोह थैंक यू मास्टर!
रजनीश : वेल! में आपको ये बताना चाहता हु की कल से आप मिस ख़ुशी के साथ उनके कॉलेज जाएंगे और उनकी क्लास में hi रहेंगे. आप उनका ख़याल रखेंगे और उनकी ज़रूरतों का ख़याल भी रखेंगे. वेल, सरल भाषा में कहे तोह आप उनके पार्टनर रहेंगे. मास्टर चाहते है की कोई उनकी बेटी के साथ घुल मिल सके, उनके दिन और भी khush-haal कर सके. वो यकीन करते है की आप और मिस ख़ुशी एक दूसरे से कई सारे विषयो पर बात चीत कर सकते हो.
Ek...ek मिनट!! लड़की का ख़याल रखना? उसकी ज़रूरतों का? बात चीत? पार्टनर? तोह फिर परीक्षा का क्या? मास्टर ने तोह कहा था की ये सब एक परीक्षा की तरह hi लो. फिर ये सब क्या है? राहुल को ये सब किसी शादी की तरह लगने लगा था.
राहुल : ओह्ह्ह्ह! J...jii!
रजनीश (स्माइल्स) : मिस ख़ुशी थोड़ी गुस्से वाली ज़रूर है, पर वो एक बोहत hi प्यारी लड़की है. मुझे पूरा यकीन है की आप और मिस एक दूसरे के साथ बोहत जल्द घुल मिल जाएंगे.
राहुल : j..ji में कोशिश करूँगा ः..!
रजनीश : मिस ख़ुशी का कॉलेज भी ऑलमोस्ट छूटने वाला होगा, आप चलिए मेरे साथ, आप कॉलेज भी देख लेना.
राहुल : अहम!! Okay!
थोड़ी देरर बाद एक जैगुआर में राहुल और रजनीश दोनों बैठे हुए कॉलेज की और जा रहे थे. और इधर राहुल विंडो से बाहर मुंबई की बड़ी बड़ी बिल्डिंग्स को देख सोच विचार में पड़ा हुआ था. उससे अपनी माँ निशा और बाकी सभी घरवालों की याद आ रही थी. उससे अभी बोहत आगे जाना था. उसका मक़सद सिर्फ यहाँ आके hi ख़तम नहीं होता. गहरी सास लेकर उसने इन् खयालो को दूर किया और मुंबई की खूबसूरती देखने में व्यस्त हो गया.
थोड़ी hi देरर में कॉलेज भी आ गया. कॉलेज का नाम क्सक्सक्सक्सक्स मेडिकल कॉलेज था और ये मुंबई का टॉप मेडिकल कॉलेजेस में से एक है. पार्किंग तोह एक से बढ़कर एक कार्स से भरी हुई थी, मेरसेदेज़ से लेकर बंव तक, ऑडी से लेके पॉर्श तक. वाक़ई! एक बड़े शहर की बात hi अलग होती है. राहुल देख रहा था की ये सब कार्स यहाँ के लोगो के लिए कितनी नार्मल है और जिस हिसाब से कार्स कस्टोमीसेड थी, राहुल समझ गया था की ये किसी कंपनी की कार्स नहीं है, सबकी अपनी प्राइवेट कार है. पैसा! पैसा हो तोह क्या कुछ नहीं हो सकता?
राहुल आगे की सीट पर रजनीश के बगल से बैठा हुआ था जो ड्राइवर सीट पर थे. राहुल सब कुछ अंदर कार के शीशे से hi देख रहा था.
रजनीश : वैसे!? आप ड्राइव करते हो क्या कार मिस्टर राहुल?
राहुल : उम्! हां! कभी कभी!
रजनीश : आपके पास लाइसेंस है?
राहुल : हां!
रजनीश : चलिए! ये बड़ी hi अच्छी बात है!
तभी एक जानी पहचानी घंटी की आवाज़ आयी मतलब की आखिरी लेक्चर समाप्त हुआ और कुछ hi देरर बाद स्टूडेंट्स निकल कर आने लगे.
कुछ स्टूडेंट्स ग्रुप बना कर निकल रहे थे, हस्सी मज़ाक करते हुए. राहुल को ये सब देख अपने कॉलेज के दिन याद आ गए. जब वो सृष्टि और ऋचा ऐसे hi साथ में कॉलेज की छुट्टी होने के बाद निकला करते थे. उसके चेहरे पर अपने आप मुस्कान आ गयी और ऋचा का चेहरा उसके मैं में आ गया.
"वो रही मिस", बगल में बैठे रजनीश ने ऊँगली दिखाते हुए स्टूडेंट्स के आ रहे झुण्ड की और पॉइंट किया जिस से राहुल का ध्यान भांग हुआ और उसने ऊँगली के डायरेक्शन का पीछा करते हुए देखा तोह पाया की...
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आज के लिए इतना hi गाइस!
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Neha(mann में) : हां! बात तोह सही है! ऐसे में माँ डैड भी नाराज़ नहीं होएंगे और में भी इस से हमेशा के लिए पीछा चुर्रा लुंगी.
तभी नेहा राहुल की तरफ आगे बढ़ती है और बिना मैं के अजीब सा मुँह बनाते हुए उससे गले लगाने के लिए आगे बढ़ने लगती है, तभी राहुल उसको कंधो से पकड़ता है, एक हाथ उसके गाल पर रखता है और आगे बढ़ के उसके कान में ऐसा कुछ कहता है, जिससे सुनकर नेहा की आँखें फटी की फटी रह जाती है और उसका शरीर सिहर उठता है.
अब आगे...
बेचैनी! एक अजीब सा एहसास, एक पीड़ा, नेहा को अभी खाए जा रही थी. फटी आँखों से वो सामने देख रही थी, पर न तोह उससे कुछ सुनाई दे रहा था और सामने क्या चल रहा है नेहा उस से भी वंचित थी क्युकी राहुल ने जो कहा उससे सुनके उसके होश hi उड़द चुके थे.
राहुल तोह कुछ कदमो के बाद hi धीरे धीरे सबकी आँखों से ओझल हो गया और कब उसकी फ्लाइट ने उड़ान भरी और कब वो प्लेन भी सबकी आँखों से ओझल हो गया, समय का पता hi नहीं चला. नेहा तोह तब से स्तब्ध सी कड़ी सामने देखे जा रही थी जबकि वह कुछ देखने लायक था hi नहीं. उससे तोह होश तब आया जब निशा की रोने की सिसकिया थोड़ी तेज़्ज़ हुई और उसके कानो में पड़ी. पीछे पलट कर नेहा ने देखा तोह पाया निशा रो रही थी और राजेश उन्हें शांत करवा रहे थे, बाकी सब की आँखें भी नाम थी. इधर वो शांत सी कड़ी कुछ देरर हुई पहले की घटना के बारे में सोच रही थी. तभी उसके कानो में आवाज़ पड़ी और सबकी तन्द्रा भांग हुई,
राजेश : चलो बीटा!
राजेश के कहने पर जैसे सभी गम से बाहर निकले और वापस घर की और जाने लगे. सब अपने अपने घर को लौट गए, अब राहुल तोह था नहीं तोह फिर भला अंशु और वंशु क्या करती घर पर? वो दोनों भी शाम होते hi निकल गयी अपने घर. नेहा की समझ नहीं आ रहा था, उसका सर चक्र रहा था, और उससे गुस्सा भी बोहत आ रहा था.
नेहा (मैं में) : उसने ज़रूर ये जान बूझ के किया था, सोच रहा होगा ऐसा करने से में पिघल जाउंगी, ya...ya ये भी हो सकता है की मेरा मज़ाक उड़ाने के लिए ये सब किया हो? सहित! मेरा तोह दिमाग फटा जा रहा है. जाते जाते भी ये मेरा पीछा नहीं चोरर रहा.
यहाँ राहुल और सौरभ जब मुंबई पहुचे. तोह उन्हें स्टेशन पे धेरर सारे टैक्सी ड्राइवर्स ने घेर लिया,
"साब किधर जाने का?"
"आओ न साब, में लेके चलता है आपको".
"अरे भौ, कहा जाना है?"
कुछ ऐसे hi सवालों से राहुल और सौरभ को घेरते हुए टैक्सी ड्राइवर्स ने भीड़ लगा दी. पर राहुल तोह जैसे सब के लिए तैयार था. उसने एक टैक्सी ड्राइवर को एक पर्ची दी, जिसमे पूरा एड्रेस डिटेल्स में लिखा हुआ था, की कहा से मुड़ना है, कोण सी रोड से जाना है, कितना भाड़ा लगेगा, कितना समय लगेगा.
ये पर्ची मास्टर ने hi उससे बना के दी थी, जब टैक्सी वाले ने पर्ची देखि तोह उसका सर hi चक्र गया. चुना लगाने का प्रश्न hi नहीं उठता. पर्ची पर एड्रेस की हर एक डिटेल्स लिखी हुई थी. कोई चाह कर भी राहुल और सौरभ को चुना नहीं लगा सकता था.
खर्र! राहुल और सौरभ दोनों hi एक सोसाइटी में पहुचे, जहा पर चौथी मंज़िल पे उनका फ्लैट था, अभी उनके पास कोई भी के नहीं थी तोह दोनों फ्लैट के बाहर खड़े हुए थे और किसी का वेट कर रहे थे,
सौरभ : तू सूरे है न की यही घर है?
राहुल : हां!!
सौरभ : बूत यार अभी तक कोई आया hi नहीं.
राहुल : बात हो गयी है मेरी, कोई न कोई आता hi होगा.
तभी कुछ देरर में एक व्यक्ति आया और राहुल को फ्लैट की के दिया और वापस चला गया, अंदर से फ्लैट पूरा फर्निश्ड था, राहुल और सौरभ दोनों फ्रेश हुए उसके बाद राहुल नाहा के रेडी हो गया, क्युकी यहाँ उसका काम था 3 महीने तक ख़ुशी को प्रोटेक्ट करना. उससे ये बात सताए जा रही थी की ये ख़ुशी कही ज़िद्दी लड़की न निकले, पता नहीं किसी होगी? क्या नेचर है उसका? मानेगी भी या नहीं?
सौरभ : भाई अब तू कहा चल दिया?
राहुल : में यहाँ नहीं रहूँगा! मुझे एक इम्पोर्टेन्ट काम निपटना है, 3 महीने तक उसी में बिजी रहूँगा.
सौरभ : wtf? अबे तोह में यहाँ अकेला क्या करूँगा?
राहुल : तू टेंशन मत ले, 3 महीने तू सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट के और कोर्सेज कर लेना.
सौरभ : में पहले hi दो कर चूका हु, और मेरे से आता है सॉफ्टवेयर डेवेलोप करना.
राहुल : हां पर अभी और एडवांस्ड वाले कर. समझा? अब में चलता हु.
सौरभ : मेरी तोह कुछ समझ नहीं आ रहा यार
राहुल : don't वोर्री! मुझे पता है में क्या कर रहा हु.
वो वह से निकल के एक और बताये गए अड्रेस पर जाता है तोह सामने एक बोहत बड़ा घर था.
इस से पहले की वो आगे बढ़ पाटा, घर के बहार खड़े सिक्योरिटी गार्ड ने उससे रोक दिया,
"किस से मिलना है आपको?"
"ओह्ह हां! एक मिनट..", राहुल ने अपना फ़ोन निकाला और वापस से वो एड्रेस पढ़ा और उस सिक्योरिटी गार्ड को दिखाया.
अड्रेस पढ़ने के बाद सिक्योरिटी गार्ड ने कुछ अजीब निगाहो से राहुल को नीचे से ऊपर तक देखा, राहुल एक सिंपल वाइट टी शर्ट और जीन्स में था और कुछ भी नहीं. कही से भी वो कोई ऐसा व्यक्ति नहीं लग रहा था जो इस बंगला के मालिक से कोई रिलेशन रखता हो.
"यहाँ किस काम से आये हो?" उसने पूछा.
"ओह्ह हां! मास्टर चेन ने मुझे भेजा है, ये घर तोह उन्ही का है न? आप लोगो को बताया नहीं क्या किसी ने?" राहुल ने कहा.
सिक्योरिटी गार्ड 1: मास्टर चेन? ये कोण है? तुम जानते हो क्या?
सिक्योरिटी गार्ड 2 : ना भाई न! इसको भगाओ ये फ़ालतू टाइम पास कर रहा है यहाँ.
राहुल : आप दोनों का हो गया हो तोह में अंदर जाऊ?
उसी बंगला में ऊपर साइड, खिड़की के पास एक व्यक्ति बैठा हुआ था जो कुछ सोच रहा था,
व्यक्ति (मैं में) : मास्टर ने कहा था राहुल नाम का लड़का मुंबई आने वाला है. अब तक आया नहीं?
तभी उसने खिड़की से पर्दा हटा कर देखा तो पाया नीचे एक लड़का सिक्योरिटी गार्ड्स से बहस कर रहा है और वो फौरन नीचे देखने चला गया.
अभी यहाँ राहुल आगे बढ़ने hi वाला था की एक आवाज़ ने तीनो को रोक दिया,
"क्या चल रहा है यहाँ?"
सभी ने उसकी और देखा, जब व्यक्ति ने राहुल को देखा तोह उसने फौरन पूछ लिया,
व्यक्ति : राहुल? क्या तुम राहुल हो?
राहुल : जी हां! पर आप कोण?
तभी उस व्यक्ति को समझ में आ गया और उसने आगे बढ़कर राहुल का हाथ बड़े hi आदर के साथ मिलाया,
व्यक्ति : नीस तो मीट यू! में, रजनीश. मास्टर का सेक्रेटरी. में आपको लेने स्टेशन hi आने वाला था.
राहुल : अरे इसकी कोई ज़रुरत नहीं, में वैसे भी मुंबई को अच्छे से देख रहा था, थोड़ा घूम hi लिया.
रजनीश : जी! प्लीज फॉलो में!
रजनीश (सिक्योरिटी गार्ड्स से) : और तुम दोनों! क्या बकवास कर रहे थे? जानते भी हो ये कौन है?
मालिक की दांत सुन्न दोनों सिक्योरिटी गार्ड्स चुप होकर नज़रे नीचे कर लिए, अंदर आते आते राहुल बंगला की बनावट को देख रहा था और सोच रहा था की एक दिन उसके पास भी खुद का बड़ा सा घर होएगा.
बाहर खड़े 2 सिक्योरिटी गार्ड्स मुँह hi ताकते रह गए,
सिक्योरिटी गार्ड 1 : अरे भाई ये तोह सच में मालिक को जानता है
सिक्योरिटी गार्ड 2 : मालिक खुद से बाहर आके हाथ मिलाए उस से...
रजनीश : आप यहाँ बैठिये! में अभी आया!
राहुल को रजनीश के मुँह से 'आप' सुन्न बड़ा hi अटपटा लग रहा था, क्युकी रजनीश उम्र में वैसे hi मास्टर से भी बड़े लग रहे थे. रजनीश की उम्र 50 तोह होगी hi, ये अनुमान राहुल ने लगाया.
थोड़ी hi देरर में रजनीश ट्रे में पानी लेकर आया तोह राहुल ये देख अपनी जगह से उठ खड़ा हुआ,
राहुल : अरे ये...?
रजनीश : जी पानी पीजिये!
राहुल : देखिये सबसे पहले आप मुझे "आप" कहना बंद कर दीजिये. मुझे अच्छा नहीं लगता की कोई मुझसे बड़ा मुझे ऐसे बुलाए. और आपको मेरे लिए ये सब पानी लाने की कोई ज़रुरत नहीं है.
रजनीश : अच्छा चलिए ठीक है! में आपको मिस्टर राहुल कहकर बुलाऊंगा. रही बात पानी देने की तोह उसका तोह कोई इलाज नहीं है क्युकी यही तोह मेरा काम है.
राहुल : क्या मतलब?
रजनीश : मतलब ये की... मेरा काम यही है मिस्टर राहुल. मिस ख़ुशी के लिए उनका पूरा खाना और बाकी सारे घर के काम में hi करता हु.
राहुल : पर आपने कहा की आप सेक्रेटरी हो मास्टर के?
रजनीश : हां! बिलकुल हु!
राहुल : पर मास्टर की सेक्रेटरी तोह मोनिका दीदी है न?
रजनीश : हां! पर ये किसने कहा आपको की मास्टर के पास सिर्फ एक hi सेक्रेटरी है?
राहुल : तोह फिर आप ये खाना बनाना?
रजनीश : जी! अब में वैसे hi 52 बरस का हो गया मिस्टर राहुल. तोह उन्होंने मुझे मिस ख़ुशी के साथ रखा है. उनकी dekh-bhaal के लिए. वर्ण पहले में भी मोनिका मिस की तरह मास्टर का बिज़नेस hi संभालता था.
राहुल : ओह्ह! अब समझ आया. तोह फिर वो बहार सिक्योरिटी गार्ड्स मास्टर चेन को क्यों नहीं जानते?
रजनीश : वो इसलिए क्युकी उन्होंने कभी मास्टर चेन को देखा hi नहीं है. सारा काम यहाँ पर में संभालता हु. और इसलिए उन्हें लगता है की में hi मालिक हु.
राहुल : ओह्ह! ी सी!
रजनीश : मिस्टर राहुल. आप अपना बैग उतार दीजिये और खाना रेडी है, में लगा देता हु.
राहुल : ओह्ह! तोह मुझे यही रुकना है न तीन महीने?
रजनीश : जी हां! तोह अब कुछ ज़रूरी बात कर ली जाए मिस्टर राहुल?
राहुल : ज़रूरी बात? वेल! कहिये!
रजनीश : तोह आपकी पेमेंट रहेगी 50,000 रूपए एक महीने के हिसाब से. और मिस ख़ुशी पर आप जो भी खर्च करेंगे वो भी आपको दिया जाएगा. ी होप मास्टर ने तोह आपको बता hi दिया होगा?
राहुल : वेट... kyaaaaaaaaaaaa??? पेमेंट??
रजनीश : हां! पेमेंट! आप मिस ख़ुशी को प्रोटेक्ट करेंगे, तोह आपको पाय तोह करना hi पड़ेगा न? बिना पेमेंट के कोण बॉडीगार्ड काम करता है?
राहुल (मैं में) : ोोू भाईसाहब!!! ये सब क्या चल रहा है? कही मास्टर ने जान बुझ के तोह नहीं पेमेंट राखी? मेरी बिज़नेस में हेल्प करने के लिए? यदि ऐसा है तोह थैंक यू मास्टर!
रजनीश : वेल! में आपको ये बताना चाहता हु की कल से आप मिस ख़ुशी के साथ उनके कॉलेज जाएंगे और उनकी क्लास में hi रहेंगे. आप उनका ख़याल रखेंगे और उनकी ज़रूरतों का ख़याल भी रखेंगे. वेल, सरल भाषा में कहे तोह आप उनके पार्टनर रहेंगे. मास्टर चाहते है की कोई उनकी बेटी के साथ घुल मिल सके, उनके दिन और भी khush-haal कर सके. वो यकीन करते है की आप और मिस ख़ुशी एक दूसरे से कई सारे विषयो पर बात चीत कर सकते हो.
Ek...ek मिनट!! लड़की का ख़याल रखना? उसकी ज़रूरतों का? बात चीत? पार्टनर? तोह फिर परीक्षा का क्या? मास्टर ने तोह कहा था की ये सब एक परीक्षा की तरह hi लो. फिर ये सब क्या है? राहुल को ये सब किसी शादी की तरह लगने लगा था.
राहुल : ओह्ह्ह्ह! J...jii!
रजनीश (स्माइल्स) : मिस ख़ुशी थोड़ी गुस्से वाली ज़रूर है, पर वो एक बोहत hi प्यारी लड़की है. मुझे पूरा यकीन है की आप और मिस एक दूसरे के साथ बोहत जल्द घुल मिल जाएंगे.
राहुल : j..ji में कोशिश करूँगा ः..!
रजनीश : मिस ख़ुशी का कॉलेज भी ऑलमोस्ट छूटने वाला होगा, आप चलिए मेरे साथ, आप कॉलेज भी देख लेना.
राहुल : अहम!! Okay!
थोड़ी देरर बाद एक जैगुआर में राहुल और रजनीश दोनों बैठे हुए कॉलेज की और जा रहे थे. और इधर राहुल विंडो से बाहर मुंबई की बड़ी बड़ी बिल्डिंग्स को देख सोच विचार में पड़ा हुआ था. उससे अपनी माँ निशा और बाकी सभी घरवालों की याद आ रही थी. उससे अभी बोहत आगे जाना था. उसका मक़सद सिर्फ यहाँ आके hi ख़तम नहीं होता. गहरी सास लेकर उसने इन् खयालो को दूर किया और मुंबई की खूबसूरती देखने में व्यस्त हो गया.
थोड़ी hi देरर में कॉलेज भी आ गया. कॉलेज का नाम क्सक्सक्सक्सक्स मेडिकल कॉलेज था और ये मुंबई का टॉप मेडिकल कॉलेजेस में से एक है. पार्किंग तोह एक से बढ़कर एक कार्स से भरी हुई थी, मेरसेदेज़ से लेकर बंव तक, ऑडी से लेके पॉर्श तक. वाक़ई! एक बड़े शहर की बात hi अलग होती है. राहुल देख रहा था की ये सब कार्स यहाँ के लोगो के लिए कितनी नार्मल है और जिस हिसाब से कार्स कस्टोमीसेड थी, राहुल समझ गया था की ये किसी कंपनी की कार्स नहीं है, सबकी अपनी प्राइवेट कार है. पैसा! पैसा हो तोह क्या कुछ नहीं हो सकता?
राहुल आगे की सीट पर रजनीश के बगल से बैठा हुआ था जो ड्राइवर सीट पर थे. राहुल सब कुछ अंदर कार के शीशे से hi देख रहा था.
रजनीश : वैसे!? आप ड्राइव करते हो क्या कार मिस्टर राहुल?
राहुल : उम्! हां! कभी कभी!
रजनीश : आपके पास लाइसेंस है?
राहुल : हां!
रजनीश : चलिए! ये बड़ी hi अच्छी बात है!
तभी एक जानी पहचानी घंटी की आवाज़ आयी मतलब की आखिरी लेक्चर समाप्त हुआ और कुछ hi देरर बाद स्टूडेंट्स निकल कर आने लगे.
कुछ स्टूडेंट्स ग्रुप बना कर निकल रहे थे, हस्सी मज़ाक करते हुए. राहुल को ये सब देख अपने कॉलेज के दिन याद आ गए. जब वो सृष्टि और ऋचा ऐसे hi साथ में कॉलेज की छुट्टी होने के बाद निकला करते थे. उसके चेहरे पर अपने आप मुस्कान आ गयी और ऋचा का चेहरा उसके मैं में आ गया.
"वो रही मिस", बगल में बैठे रजनीश ने ऊँगली दिखाते हुए स्टूडेंट्स के आ रहे झुण्ड की और पॉइंट किया जिस से राहुल का ध्यान भांग हुआ और उसने ऊँगली के डायरेक्शन का पीछा करते हुए देखा तोह पाया की...
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आज के लिए इतना hi गाइस!



