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- Dec 5, 2013
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सबसे पहले शुक्रिया सभी को इतना वेट करने के लिए. तबियत के खराब चलते आप सभी को मेने काफी वेट करवाया. पर अब हाज़िर हु वापस से. सो, एन्जॉय!!
मेगा अपडेट
अपडेट - 45
अब तक...
नेहा : दी चोरडिये मुझे...
तानिया : बता पहले
नेहा (गुस्से में) : डीइइइइइइइइ...
तानिया (जोरर से) : जल्दी...
नेहा (चिल्ला के) : डीईई.... चोरडिये मुझे...
तानिया (चिल्ला के) : तोह बता नाआ....
नेहा (जोरर से) : हे वांट्स में डेड!!!!
अब आगे...
डेड?? क्या अभी अभी तानिया ने सही सुना? या फिर उसके कान बज रहे थे?
"क्या? क्या कहा तूने? ज़रा फिरसे बोल!!" तानिया ने नेहा को उसके कंधे से झंझोर के पुछा.
इधर नेहा की पलकों में आसुओ की धाराए उत्पन्न होक उसके कोमल गोर गालो से बहती हुई उसकी जांघो पर टपक रही थी.
पहले तोह तानिया को विश्वाश hi नहीं हुआ नेहा की बातो पर. पर जब नेहा को रोटा देख और उसके कहे गए शब्दों पे जब फिरसे गौर किया तोह उसके पेर्रो टेल ज़मीन खिसक गयी.
डेड! राहुल उसको मृत चाहता है?
ये कोई मज़ाक नहीं था. ये एक बोहत hi सीरियस इशू था जिसका सलूशन जल्द से जल्द निकालना ज़रूरी था.
पर सवाल था कैसे?
अरे एक बहिन ये बोल रही है की उसका भाई उससे मृत चाहता है तोह ये कोई छोटी बात है क्या? हरगिज़ नहीं!!!
कोई तोह वजह होगी नेहा के ऐसे कहने पर? जो सिर्फ वही जानती है?
कमरे में सिर्फ और सिर्फ नेहा के सिसकने की आवाज़ें आ रही थी. जो इस बात का सबूत थी की उसने जो कहा वह सच था
इधर तानिया के मैं में तोह जैसे बवाल सा मच गया था. अभी उसके मैं में धेरर सारे सवाल उत्पन्न हो रहे थे. थोड़ी और हिम्मत करके आखिर उसने पूछ hi लिया,
"नेहा! क्या वजह है जिसके कारण तुम्हे लगता है की राहुल tumhe...dead चाहता है?"
बदले में उससे कोई जवाब न मिला. बस सुनाई दिया तोह केवल नेहा का रोना. अभी वो सवाल दोहराने hi वाली थी की कमरे का गेट खुला और अंशु अंदर आ गयी. नेहा को यु रोटा देख उसके परर दरवाज़े से अंदर आते hi जम्म गए.
"क्या हुआ?" आगे बढ़कर अंशु ने नेहा को थामते हुए पूछा.
"अंशिका! मुझे तुमसे कुछ बात करनी है, चलो मेरे साथ" तानिया ये कहते हुए अंशिका का हाथ पकड़ उससे बाहर ले आयी और राहुल के कमरे में ले गयी. और फिर दरवाज़ा भी अंदर से बंद कर दिया.
अंशु : दीदी! नेहा रो रही है, मुझे उससे संभालने जाना है. आपको जो भी कुछ पूछना है प्लीज जल्दी पूछिए.
तानिया (गहरी सांस लेकर) : okay! मुझे अभी अभी नेहा ने बताया की राहुल वांट्स हेर डेड! व्हाई? चल क्या रहा है ये सब? क्या ये सच है या झूठ?
*साइलेंस*
अंशु (सवाल से उभरते हुए) : तोह नेहा ने आपको बता hi दिया. पर उसने उस से ज़्यादा कुछ नहीं बताया होगा आपको है न?
तानिया ने हां में अपना सर हिलाया.
अंशु : दीदी दरअसल मुझे भी बस इतना hi पता है. पर आपके दूसरे सवाल का जवाब में दे सकती हु. मुझे नहीं पता ये सच है या झूठ पर मुझे यकीन है की ये एक मिसुन्दरस्टण्डींग है. ी बिलीव!
तानिया (आश्चर्य) : मिस... मिसुन्दरस्टण्डींग?
अंशु : जी हां! दीदी... आपको विश्वाश नहीं होगा पर पहले में नेहा की बात का यकीन मान कर भाई से एक शब्द नहीं बोलती थी. पर... अभी जब कुछ दिनों पहले यहाँ आयी तोह मेरे साथ ऐसी कुछ घटनाए हुई, मेने ऐसा कुछ देखा, समझा जिसके बाद मुझे भाई को देखने का नजरिया hi बदल गया.
तानिया : kya?...kya देखा?
अंशु : लम्बी कहानी है दीदी पर में आपसे सिर्फ इतना कहूँगी की नेहा जो कह रही है वो सच है. पर... पर असल सच्चाई कुछ और है जो सिर्फ चची चाचा और भाई जानते है. मुझे इतना कन्फर्म है. और हां दीदी... भाई निर्दोष है. मेरे हिसाब से toh...yahi है.
तानिया : तोह में किस बात को मानु? क्या राहुल निर्दोष है? या फिर नेहा सही है?
अंशु : दोनों hi... ी मैं मेरे हिसाब से तोह दोनों बातें सही है.
इतना बोल अंशु राहुल के कमरे से बाहर निकल तानिया को अकेला चोरर नेहा के कमरे में उससे बहलाने के लिए चली जाती है.
तानिया (मैं में) : omg!!! ये बुआ के घर में चल क्या रहा है? मेरी तोह कुछ समझ में hi नहीं आ रहा है. चपडगंजु से बात करू क्या? हां!! उस से hi बात करनी पड़ेगी. आज रात को करती हु उस से बात. वर्ण में तोह पागल हो जाउंगी इस घर में... पर वो तोह अपनी उस ऋचा के साथ गुल छर्रे उड़ा रहा होगा हम्फ!!
इधर होटल में...
राहुल और ऋचा एक दूसरे की बाहो में लिपटे हुए बिस्तर पर बैठे थे. राहुल रो कर अपनी फीलिंग्स पहली बार किसी से शेयर कर रहा था.
राहुल (मैं में) : ऋचा कितनी अच्छी है. में ऋचा और बाकी सब को ऐसे अँधेरे में नहीं रख सकता. हां! में सबको सच बता दूंगा. आगे जो होगा देखा जाएगा. हां! यही सही है.
राहुल : रीचु!! तुम्हे पता है... मेने सोचा था की सब कुछ में अकेले संभाल लूंगा. मुझे किसी की कोई ज़रुरत नहीं है. घरवाले मुझपर इतना भरोसा करने लगे थे जैसे में कोई मासियह हु. वो मुझ से बोहत ज़्यादा एक्सपेक्ट करने लगे थे. उन्हें लगने लगा था की यदि राहुल है तोह सब ठीक हो जाएगा. उन्हें लगने लगा था की में किसी भी परेशानी को दूर कर सकता हु. और यदि गलती से में उस परेशानी को दूर करने में नाकामयाब होता था तोह परिवार वाले यही सोचते थे की मेरे से ऐसी गलती कैसे हो गयी? वो सभी मुझ से बोहत ज़्यादा एक्सपेक्ट करने लगे थे रीचु... सिर्फ मेरे माँ डैड नहीं, में अपने पूरे परिवार की बात कर रहा हु. फिर वो मुझपर नाराज़ होते थे, की में नाकामयाब कैसे हो गया...
पर में भी तोह एक इंसान हु न रीचु? होती है मुझसे भी गलती. मुझ पे लोग इतना देपेंद क्यों होने लगे थे? इसलिए की में बेहतर था? और जब मुझसे कोई गलती हो गयी तोह मेरे ऊपर दोष डालने लगे??? ये कहा का इन्साफ है रीचु?
राहुल के ऐसा कहने पर ऋचा को अब एहसास हुआ की वाक़ई वह खुद राहुल पे कितना डिपेंडेंट थी. और इसमें कोई शक नहीं की ऋचा की तरह उसके परिवार वाले भी कितना डिपेंडेंट रहने लगे थे राहुल पे. मतलब यदि कोई भी मुसीबत आए तोह राहुल hi उससे सुलझाए. और यदि न कर पाए तोह उसको hi दोष दिया जाए. शायद हम सभी राहुल से कुछ ज़्यादा hi एक्सपेक्ट करने लगे थे. यदि बेहतर होना आपको पसंद है, तोह फिर बेहतर होने के साथ साथ आपको लोगो के ताने सुन्न न भी सहना आना चाहिए. वाक़ई! ये कहा का इन्साफ था?
राहुल : रीचु... मुझे भी फिर खुद लगने लगा की में सब कुछ कर सकता हु. क्युकी में अपने hi लोगो के कारण इस दलदल में फस्स्त जा रहा था. मेरे अपने लोग मेरी खूबियों को देख मुझसे और ज़्यादा उमीदें रखने लगे थे. और धीरे धीरे मुझे उनकी आदत सी हो गयी. में अपने आप hi हर काम को अपने ऊपर ले लेता था. मुझे आदत सी पद गयी थी. शायद तुम्हारा ईगो ख़तम करने के लिए भी मेने वो काम यु hi एक्सेप्ट कर लिया था. फिर चाहे मुझे hi क्यों न बुरा बन्न न पड़े. पर में गलत था... गलत था जो सोचने लगा था की में अकेले hi सब कुछ कर सकता हु. गलत था में richu...galat था.
राहुल के बोलने के बाद hi उसके ासु चालक जाते है. आज ऋचा को आभास हुआ था की राहुल कितने बड़े दलदल में फसा हुआ था. उससे ऐसा बना दिया गया था जिसमे वह खुद को हानि पोहचाने लगा था. उसकी बात सुन्न ऋचा को एक तेज़्ज़ झटका सा लगा और उसका पूरा शरीर अंदर से सिहर गया. न जाने कब से राहुल ये सब सेहत आ रहा होगा.
ऋचा : ra...rahul...
राहुल : अभी मेरी बात ख़तम नहीं हुई है रीचु. अब जो में बताने जा रहा हु, हो सकता है वो सब जान ने के बाद तुम मुझसे बेइंतहा नफरत करने लगो और मुझे चोरर के भी चली जाओ. पर में अब तुम्हे और बाकी सब को अँधेरे में नहीं रख सकता रीचु. इसलिए सुनो अब...
ऋचा (घबराहट में) : ऐसी... ऐसी क्या बात है राहुल? मुझे डराओ मैट प्लीज ऐसे.
राहुल : सबसे पहली बात. I'm नॉट ा वर्जिन एनीमोर. में इसके पहले किसी और लड़की के साथ फिजिकली रिलेशन बना चूका हु. और वो कोई और नहीं मेरी मुँह बोली दीदी... तनीषा दीदी है. हां! सही सुना तुमने, वही तनीषा दीदी जिनके बारे में में तुम्हे पहले थोड़ा बोहत बता चूका हु. जैसे तुम मुझ से प्यार करती हो वैसे hi वह मुझसे प्यार करती hi, और में भी उनसे प्यार करता हु. उनके बिना मेरा जीवन अधूरा है.
राहुल इतना बोल चुप्प हो गया. पता नहीं कहा से उसमे इतनी हिम्मत आ गयी और सब कुछ एक hi बार में कह दिया. शायद उसने ठान लिया था की ऋचा अब जैसा भी रियेक्ट करेगी उससे सब मंज़ूर है.
थोड़ी देरर तक ऋचा स्तब्ध सी राहुल के चेहरे को hi देखती रही. उसकी बोलती hi बंद हो गयी थी. ये क्या कह डाला राहुल ने? तनीषा? नॉट वर्जिन एनीमोर? फिजिकल रिलेशनशिप? ... यही अलग अलग शब्द उसके दिमाग में गूंजने से लगे...
ऋचा (शॉकेड) : ra...rahul... तुम ये सब क्या कह रहे हो? तबियत तोह ठीक है न?
राहुल (गहरी सांस लेकर) : में बिलकुल ठीक हो ऋचा. बल्कि पूरे होशो हवास में हु. और जो कुछ भी तुमने सुना सब कुछ सही सुना. तनीषा दीदी और में एक दूसरे से बेहद प्यार करते है बिलकुल वैसे hi जैसे तुम और में एक दूसरे से.
फिरसे राहुल की वही बात सुन्न न जाने क्यों ऋचा को फिरसे झटका लगता है. राहुल ने सोचा यही सही मौका है और उसने तानिया दीदी के बारे में सब कुछ बता दिया की कैसे उनसे मिला, कैसे उन्हें पढ़ाया, उन्हें घर दिया और कैसे वो एक दूसरे के क्लोज हो गए.
ऋचा : ओह...
राहुल : और एक बात और है ऋचा. मेरी वंशु दी भी मुझसे बोहत ज़्यादा प्यार करती है. हलाकि हमारे बीच अभी कोई वैसा कुछ नहीं हुआ, पर पता नहीं कब तक में उन्हें रोक पाउँगा... क्युकी में भी उनसे प्यार करता हु
एक और बड़ा झटका लगा ऋचा को. तनीषा काम थी क्या जो राहुल ने अब वंशु को भी ऐड कर दिया? और हर लड़की राहुल की बहिन क्यों है? मज़ाक चल रहा है क्या?
ऋचा का चेहरा देख राहुल को अब अपने ऊपर बोहत ज़्यादा शर्म भी आ रही थी. की वो अपनी दो बहनो के साथ क्या क्या कर रहा है, और ऋचा को सब अब ोाता चल गया है. क्या वो मुझे एक्सेप्ट भी करेगी?
राहुल : मेने साड़ी सच्चाई तुम्हे बता दी है ऋचा. और यही सच है. मुझे नहीं पता तुम क्या डिसिशन लोगी. पर मुझे तुम्हारा हर्र एक डिसिशन मंज़ूर है. तुम यदि चाहती हो की में अभी के अभी दफा हो जाऊ तुम्हारी नज़रो से तोह में वही करूँगा. तुम चाहोगी की में अपनी शकल न दिखाऊ तोह वो भी मुझे मंज़ूर है. पर में यही चाहता हु की तुम खुश रहो. प्लीज! मुझे अब अपना फैसला सुनाओ ऋचा...
करीब ऐसे hi 15 मिनट गुज़र गए. पर ऋचा सिर्फ अपने खयालो में खोयी हुई नज़रे नीचे कर के कुछ सोच रही थी. राहुल भी उससे वक़्त देकर बस उससे hi देख रहा था. उसके फैसले का इंतज़ार कर रहा था. धड़कने तोह राहुल की बेहद तेज़्ज़ गति से चल रही थी, क्युकी उससे बिलकुल नहीं पता था ऋचा क्या डिसिशन लेगी. वो ऋचा को बिलकुल भी नहीं खोना चाहता था.
उससे पता था की वो ऋचा से बेहद प्यार करने लगा है, और ऐसे में यदि ऋचा ने उससे चोरर दिया तोह न जाने उसके दिल पर क्या बीतेगी. पर वो तनीषा और वंशु से भी तोह प्यार करता है. उन्हें भी धोका नहीं दे सकता. आखिर ऐसा कैसे हो सकता है? एक आदमी को कई लड़कियों से कैसे प्यार हो सकता है? राहुल को ये बात कभी समझ में नहीं आती थी. पर अब उससे ये यकीन हो गया था की पुराने ज़माने में राजा महाराजाओ की एक से ज़्यादा बीविया क्यों होती थी... शायद राजाओ को भी एक से ज़्यादा बीइओ से प्यार हो जाता था और उनकी बीइओ को भी एक hi राजा से...
सुन्न ने में ये बड़ा अटपटा ज़रूर लगे, पर ये मुमकिन था. और आज उसके खुद के साथ ये सब हो रहा था. तोह भला कैसे वो इस बात को झुठलाता?
जब थोड़ी देरर हो गयी और राहुल भी किसी गहरी सोच में चला गया तब ऋचा ने नज़रे ऊपर की और कुछ ऐसा कहा जिससे सुन्न राहुल का शरीर सिहर उठा
ऋचा : मुझे मंज़ूर है...
यही वाकया था जो ऋचा ने कहा. मंज़ूर है? क्या मंज़ूर है? यही की राहुल अपना रिलेशनशिप वंशु और तनीषा दीदी के साथ रख सकता है? या फिर राहुल ने जो कुछ भी किया उससे ऋचा ने माफ़ कर दिया और अब सिर्फ राहुल को अपने पास रखना चाहती है?
राहुल : ky..kya मंज़ूर है?
ऋचा (मुस्कुराते हुए) : मुझे तुम मंज़ूर हो.
राहुल : क्या?? और... और वो कैसे?
ऋचा : मेने बोहत सोचा इस बारे में. पर अंत में एक hi आवाज़ आयी अंदर से... की में तुम्हारे बिना नहीं जी सकती. और ना hi कभी सपने में भी किसी और के साथ अपनी ज़िन्दगी को इमेजिन कर सकती हु...
राहुल : क्या सच कह रही हो रीचु?
ऋचा : हां राहुल! मुझे नहीं पता कुछ. में बस इतना जानती हु की मेरी तरह तुम्हारे लिए कोई और भी प्यार में पद सकता है. और वो तुम्हारी दीदी hi क्यों न हो, पर उनका भी तुम्हारे ऊपर हक़ है. वो बात अलग है की समाज में ये प्यार को गलत माना जाता है पर प्यार तोह प्यार है. और सबसे बड़ी बात ये की तुमने मुझे सब कुछ सच बताया और मुझे अँधेरे में नहीं रखा. हां! तुम ये बात शुरू से बता देती तोह मुझे ज़्यादा ख़ुशी होती पर कोई बात नहीं. शायद तुम दर्रे हुए थे. और एक बात और... वो ये की मुझे इस बात की ख़ुशी है की वो तुंहारी बहने है. कोई बाहर की लड़की नहीं. वर्ण मुझे वाक़ई नाराज़गी और जलन भी होती.
इसलिए... ी वांट यू. ी लव यू... ी can't लाइव विथाउट यू.
राहुल थोड़ी देरर ऋचा का चेहरा hi देखता रहता है उसके बाद अपने आप hi उसकी आँखों से ासु आने लगते है.
"ओह्ह ऋचा!! " कहते हुए राहुल ऋचा को अपनी बाहो में समेत लेता है.

"अब देररि न करो राहुल! में हर पल तुम्हारे साथ रहना चाहती हु. तुम्हारे हर्र मोड़ पे तुम्हारे साथ कड़ी रहूंगी. बस अब मुझे भी अपनी बना लो मेरे राहुल" ऋचा ने राहुल की बाहो में लिपटे हुए कहा.
उसका मतलब साफ़ था की जैसे तनीषा को अपना बनाया वैसे hi मुझे भी अपना बना लो. मतलब वो मोटा लुंड उसकी छूट में भी पेल दो और उद्धघाटन कर दो नए जीवन शुरू होने का.
राहुल ने फौरन ऋचा के गरमा गरम नरम होंठो को अपने होंठो में भर लिया और उसका रसपान करने लगा. गीले गीले गरम होंठ उससे मदहोश करने पे तुले थे.

यही है प्यार! ऋचा ने इतना सब होने के बावजूद उससे एक्सेप्ट कर लिया. क्यों? क्युकी वो राहुल को खोना नहीं चाहती थी, राहुल से वो बेहद प्रेम करती थी.
होंठो को थोड़ी देरर चूसने के बाद जैसे hi दोनों की सांसें तेज़्ज़ हुई दोनों एक दूसरे से अलग हुए. ऋचा के गाल लाल थे और उसकी आँखों में मदहोशी थी, एक नशा था.
ऋचा (मैं में) : अब तुम मेरे हो जानू. मेरे!! इतना प्यार दूंगी न तुमको... सब कुछ भूल जाओगे. वो तोह अच्छा है वंशु और तनीषा दीदी तुम्हारी बहने है, यदि कोई बाहर की लड़की होती न... तो तुम्हारी हालत पतली कर देती में. हम्फ!! पर जो भी हो, अब तुम मेरे हो. अब से मेरी हर चीज़ पे तुम्हारा हक़ है... लव यू जान!!
ऋचा : जानू... दो आईटी विथ में!
और राहुल ने उससे बिस्तर पे लिटा दिया और उसके ऊपर चढ़ गया. हौले हौले गर्दन पे चुम्बनों से शुरुआत करते हुए उसने ऋचा के गुलाबी गरम होंठो पे फिरसे अपना हमला किया.
"उम्मम्मम्म mmmmmmmmmmm" की आवाज़ से कमरा गूंजने लगा.
ऋचा के गाल सुर्ख लाल थे. आज वो अपने प्यार के साथ थी और दोनों इस प्रेम रस में दुब रहे थे.
राहुल भी कुछ शान पहले बेहद उदास था पर जब ऋचा ने उससे स्वीकार किया और ये कहा की वो उसके साथ हर मोड़ पर उसका साथ देगी, राहुल को मानो बोहत ज़्यादा हिम्मत मिल गयी. और उसका प्यार ऋचा के प्रति और भी बढ़ गया.
दोनों एक दूसरे के होंठो का रस पी रहे थे और थूक के मेल मिलाप से कमरे में *स्लुर्प स्लुर्प* की आवाज़ें निकल रही थी जो घनघोर सन्नाटे को चीयर के रख रही थी.
ऋचा ने अपनी जीभ निकल के राहुल के मुँह के अंदर दाल दी, जिस से राहुल का जोश और भी बढ़ गया और उसके हाथ अपने आप hi ऋचा के वाइट टॉप पे आ गए उसके सख्त बड़े उरोजों को थाम मसलने लगे.
*Ssssssssssssss आआआअह्हह्ह्ह्हह* की सिसकी लेते हुए ऋचा ने एक पल के लिए राहुल के होंठ चोर्रे और वापस से मस्ती में मगन होक उससे फिरसे चूमने चाटने लगी.
करीब 20-25 मिनट की इस चुम्मा छाती के बाद राहुल धीरे धीरे नीचे की और बढ़ा और ऋचा का टॉप ऊपर उठा के उसके कंधे तक सरका दिया. अब उसके सामने एकदम सफ़ेद सपाट नरम पेट था, जिसमे एक बेहद hi ख़ूबसूरत सा नैवेल उससे अपनी और खींच रहा था.
राहुल ने भी बिना टाइम गवाए उस नैवेल का आमंत्रण स्वीकार किया और अपनी गरम जीभ की नोक सीधे उस नाभि में दाल दी.
"Uuuuuuuuuuffffffffffffffffffffff"
एक और सिसकी ऋचा की निकली जो बोहत hi कामुक थी. शायद ये वार बोहत hi तगड़ा था राहुल का.
धीरे धीरे राहुल ने ऋचा का टॉप हटाया और नीचे की जीन्स भी अलग कर दी. अब इस वक़्त ऋचा केवल वाइट ब्रा और पंतय में थी.
राहुल ने आगे बढ़ ब्रा भी हटा दी और उसके सामने आ गए 2 गोल सफ़ेद सख्त दूध जिनमे गुलाबी खड़े निप्पल्स उसकी सुंदरता में 4 चाँद लगा रहे थे.
ये सन देख राहुल तोह मानो पागल सा हो गया और किसी भूके भेड़िये की तरह उनपे टूट पड़ा. दूध मुँह में भरते hi ऋचा की सिसकिया निकलना चालु हो गयी. और उसके हाथ बस राहुल का सर पकडे अपने दूध पे दबाव बनाने में hi लगे हुए थे.
"हां!! ऐसे hi... खा जाओ इन्हे राहुल. उफ्फ्फफ्फ्फ़! That's राइट!! चूसो इनको...
और दर्द दो मुझे... अह्ह्ह्हह.... और... जोरर से..... हम्मम्मम्मम्म sssssssssssssss
Aaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhh ी लव आईटी.."
ऋचा न जाने क्या क्या बड़बड़ाए जा रही थी.
राहुल ने दूध चूस चूस कर और उन्हें मसल मसल कर लाल कर दिया था. फिर उसने नीचे आते हुए ऋचा की पंतय भी अलग कर दी. और अब थी उसकी सामने ुनछुयी कोमल क्लीन शवेद गोरी छूट.
ये देख तोह राहुल को सँभालने में कुछ पल लग गए. फिर उसने अपनी जीभ का हमला बोल दिया और छूट को पागलो की तरह चूसना शुरू कर दिया. ऋचा बेचारी इस हमले से मचल सी उठी और अब बहकने लगी थी. सिसकियों की गूँज अब बढ़ चुकी थी.
यहाँ राहुल ऋचा की छूट चाटने में लगा था तोह वही इस वक़्त राहुल के घर में कोई और भी था जो इस वक़्त अपनी छूट में उंगलिया डाले राहुल को याद कर मुट्ठ मारने में लगी थी.
कोण थी वह??
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आज के लिए इतना hi गाइस!!
मेगा अपडेट
अपडेट - 45
अब तक...
नेहा : दी चोरडिये मुझे...
तानिया : बता पहले
नेहा (गुस्से में) : डीइइइइइइइइ...
तानिया (जोरर से) : जल्दी...
नेहा (चिल्ला के) : डीईई.... चोरडिये मुझे...
तानिया (चिल्ला के) : तोह बता नाआ....
नेहा (जोरर से) : हे वांट्स में डेड!!!!
अब आगे...
डेड?? क्या अभी अभी तानिया ने सही सुना? या फिर उसके कान बज रहे थे?
"क्या? क्या कहा तूने? ज़रा फिरसे बोल!!" तानिया ने नेहा को उसके कंधे से झंझोर के पुछा.
इधर नेहा की पलकों में आसुओ की धाराए उत्पन्न होक उसके कोमल गोर गालो से बहती हुई उसकी जांघो पर टपक रही थी.
पहले तोह तानिया को विश्वाश hi नहीं हुआ नेहा की बातो पर. पर जब नेहा को रोटा देख और उसके कहे गए शब्दों पे जब फिरसे गौर किया तोह उसके पेर्रो टेल ज़मीन खिसक गयी.
डेड! राहुल उसको मृत चाहता है?
ये कोई मज़ाक नहीं था. ये एक बोहत hi सीरियस इशू था जिसका सलूशन जल्द से जल्द निकालना ज़रूरी था.
पर सवाल था कैसे?
अरे एक बहिन ये बोल रही है की उसका भाई उससे मृत चाहता है तोह ये कोई छोटी बात है क्या? हरगिज़ नहीं!!!
कोई तोह वजह होगी नेहा के ऐसे कहने पर? जो सिर्फ वही जानती है?
कमरे में सिर्फ और सिर्फ नेहा के सिसकने की आवाज़ें आ रही थी. जो इस बात का सबूत थी की उसने जो कहा वह सच था
इधर तानिया के मैं में तोह जैसे बवाल सा मच गया था. अभी उसके मैं में धेरर सारे सवाल उत्पन्न हो रहे थे. थोड़ी और हिम्मत करके आखिर उसने पूछ hi लिया,
"नेहा! क्या वजह है जिसके कारण तुम्हे लगता है की राहुल tumhe...dead चाहता है?"
बदले में उससे कोई जवाब न मिला. बस सुनाई दिया तोह केवल नेहा का रोना. अभी वो सवाल दोहराने hi वाली थी की कमरे का गेट खुला और अंशु अंदर आ गयी. नेहा को यु रोटा देख उसके परर दरवाज़े से अंदर आते hi जम्म गए.
"क्या हुआ?" आगे बढ़कर अंशु ने नेहा को थामते हुए पूछा.
"अंशिका! मुझे तुमसे कुछ बात करनी है, चलो मेरे साथ" तानिया ये कहते हुए अंशिका का हाथ पकड़ उससे बाहर ले आयी और राहुल के कमरे में ले गयी. और फिर दरवाज़ा भी अंदर से बंद कर दिया.
अंशु : दीदी! नेहा रो रही है, मुझे उससे संभालने जाना है. आपको जो भी कुछ पूछना है प्लीज जल्दी पूछिए.
तानिया (गहरी सांस लेकर) : okay! मुझे अभी अभी नेहा ने बताया की राहुल वांट्स हेर डेड! व्हाई? चल क्या रहा है ये सब? क्या ये सच है या झूठ?
*साइलेंस*
अंशु (सवाल से उभरते हुए) : तोह नेहा ने आपको बता hi दिया. पर उसने उस से ज़्यादा कुछ नहीं बताया होगा आपको है न?
तानिया ने हां में अपना सर हिलाया.
अंशु : दीदी दरअसल मुझे भी बस इतना hi पता है. पर आपके दूसरे सवाल का जवाब में दे सकती हु. मुझे नहीं पता ये सच है या झूठ पर मुझे यकीन है की ये एक मिसुन्दरस्टण्डींग है. ी बिलीव!
तानिया (आश्चर्य) : मिस... मिसुन्दरस्टण्डींग?
अंशु : जी हां! दीदी... आपको विश्वाश नहीं होगा पर पहले में नेहा की बात का यकीन मान कर भाई से एक शब्द नहीं बोलती थी. पर... अभी जब कुछ दिनों पहले यहाँ आयी तोह मेरे साथ ऐसी कुछ घटनाए हुई, मेने ऐसा कुछ देखा, समझा जिसके बाद मुझे भाई को देखने का नजरिया hi बदल गया.
तानिया : kya?...kya देखा?
अंशु : लम्बी कहानी है दीदी पर में आपसे सिर्फ इतना कहूँगी की नेहा जो कह रही है वो सच है. पर... पर असल सच्चाई कुछ और है जो सिर्फ चची चाचा और भाई जानते है. मुझे इतना कन्फर्म है. और हां दीदी... भाई निर्दोष है. मेरे हिसाब से toh...yahi है.
तानिया : तोह में किस बात को मानु? क्या राहुल निर्दोष है? या फिर नेहा सही है?
अंशु : दोनों hi... ी मैं मेरे हिसाब से तोह दोनों बातें सही है.
इतना बोल अंशु राहुल के कमरे से बाहर निकल तानिया को अकेला चोरर नेहा के कमरे में उससे बहलाने के लिए चली जाती है.
तानिया (मैं में) : omg!!! ये बुआ के घर में चल क्या रहा है? मेरी तोह कुछ समझ में hi नहीं आ रहा है. चपडगंजु से बात करू क्या? हां!! उस से hi बात करनी पड़ेगी. आज रात को करती हु उस से बात. वर्ण में तोह पागल हो जाउंगी इस घर में... पर वो तोह अपनी उस ऋचा के साथ गुल छर्रे उड़ा रहा होगा हम्फ!!
इधर होटल में...
राहुल और ऋचा एक दूसरे की बाहो में लिपटे हुए बिस्तर पर बैठे थे. राहुल रो कर अपनी फीलिंग्स पहली बार किसी से शेयर कर रहा था.
राहुल (मैं में) : ऋचा कितनी अच्छी है. में ऋचा और बाकी सब को ऐसे अँधेरे में नहीं रख सकता. हां! में सबको सच बता दूंगा. आगे जो होगा देखा जाएगा. हां! यही सही है.
राहुल : रीचु!! तुम्हे पता है... मेने सोचा था की सब कुछ में अकेले संभाल लूंगा. मुझे किसी की कोई ज़रुरत नहीं है. घरवाले मुझपर इतना भरोसा करने लगे थे जैसे में कोई मासियह हु. वो मुझ से बोहत ज़्यादा एक्सपेक्ट करने लगे थे. उन्हें लगने लगा था की यदि राहुल है तोह सब ठीक हो जाएगा. उन्हें लगने लगा था की में किसी भी परेशानी को दूर कर सकता हु. और यदि गलती से में उस परेशानी को दूर करने में नाकामयाब होता था तोह परिवार वाले यही सोचते थे की मेरे से ऐसी गलती कैसे हो गयी? वो सभी मुझ से बोहत ज़्यादा एक्सपेक्ट करने लगे थे रीचु... सिर्फ मेरे माँ डैड नहीं, में अपने पूरे परिवार की बात कर रहा हु. फिर वो मुझपर नाराज़ होते थे, की में नाकामयाब कैसे हो गया...
पर में भी तोह एक इंसान हु न रीचु? होती है मुझसे भी गलती. मुझ पे लोग इतना देपेंद क्यों होने लगे थे? इसलिए की में बेहतर था? और जब मुझसे कोई गलती हो गयी तोह मेरे ऊपर दोष डालने लगे??? ये कहा का इन्साफ है रीचु?
राहुल के ऐसा कहने पर ऋचा को अब एहसास हुआ की वाक़ई वह खुद राहुल पे कितना डिपेंडेंट थी. और इसमें कोई शक नहीं की ऋचा की तरह उसके परिवार वाले भी कितना डिपेंडेंट रहने लगे थे राहुल पे. मतलब यदि कोई भी मुसीबत आए तोह राहुल hi उससे सुलझाए. और यदि न कर पाए तोह उसको hi दोष दिया जाए. शायद हम सभी राहुल से कुछ ज़्यादा hi एक्सपेक्ट करने लगे थे. यदि बेहतर होना आपको पसंद है, तोह फिर बेहतर होने के साथ साथ आपको लोगो के ताने सुन्न न भी सहना आना चाहिए. वाक़ई! ये कहा का इन्साफ था?
राहुल : रीचु... मुझे भी फिर खुद लगने लगा की में सब कुछ कर सकता हु. क्युकी में अपने hi लोगो के कारण इस दलदल में फस्स्त जा रहा था. मेरे अपने लोग मेरी खूबियों को देख मुझसे और ज़्यादा उमीदें रखने लगे थे. और धीरे धीरे मुझे उनकी आदत सी हो गयी. में अपने आप hi हर काम को अपने ऊपर ले लेता था. मुझे आदत सी पद गयी थी. शायद तुम्हारा ईगो ख़तम करने के लिए भी मेने वो काम यु hi एक्सेप्ट कर लिया था. फिर चाहे मुझे hi क्यों न बुरा बन्न न पड़े. पर में गलत था... गलत था जो सोचने लगा था की में अकेले hi सब कुछ कर सकता हु. गलत था में richu...galat था.
राहुल के बोलने के बाद hi उसके ासु चालक जाते है. आज ऋचा को आभास हुआ था की राहुल कितने बड़े दलदल में फसा हुआ था. उससे ऐसा बना दिया गया था जिसमे वह खुद को हानि पोहचाने लगा था. उसकी बात सुन्न ऋचा को एक तेज़्ज़ झटका सा लगा और उसका पूरा शरीर अंदर से सिहर गया. न जाने कब से राहुल ये सब सेहत आ रहा होगा.
ऋचा : ra...rahul...
राहुल : अभी मेरी बात ख़तम नहीं हुई है रीचु. अब जो में बताने जा रहा हु, हो सकता है वो सब जान ने के बाद तुम मुझसे बेइंतहा नफरत करने लगो और मुझे चोरर के भी चली जाओ. पर में अब तुम्हे और बाकी सब को अँधेरे में नहीं रख सकता रीचु. इसलिए सुनो अब...
ऋचा (घबराहट में) : ऐसी... ऐसी क्या बात है राहुल? मुझे डराओ मैट प्लीज ऐसे.
राहुल : सबसे पहली बात. I'm नॉट ा वर्जिन एनीमोर. में इसके पहले किसी और लड़की के साथ फिजिकली रिलेशन बना चूका हु. और वो कोई और नहीं मेरी मुँह बोली दीदी... तनीषा दीदी है. हां! सही सुना तुमने, वही तनीषा दीदी जिनके बारे में में तुम्हे पहले थोड़ा बोहत बता चूका हु. जैसे तुम मुझ से प्यार करती हो वैसे hi वह मुझसे प्यार करती hi, और में भी उनसे प्यार करता हु. उनके बिना मेरा जीवन अधूरा है.
राहुल इतना बोल चुप्प हो गया. पता नहीं कहा से उसमे इतनी हिम्मत आ गयी और सब कुछ एक hi बार में कह दिया. शायद उसने ठान लिया था की ऋचा अब जैसा भी रियेक्ट करेगी उससे सब मंज़ूर है.
थोड़ी देरर तक ऋचा स्तब्ध सी राहुल के चेहरे को hi देखती रही. उसकी बोलती hi बंद हो गयी थी. ये क्या कह डाला राहुल ने? तनीषा? नॉट वर्जिन एनीमोर? फिजिकल रिलेशनशिप? ... यही अलग अलग शब्द उसके दिमाग में गूंजने से लगे...
ऋचा (शॉकेड) : ra...rahul... तुम ये सब क्या कह रहे हो? तबियत तोह ठीक है न?
राहुल (गहरी सांस लेकर) : में बिलकुल ठीक हो ऋचा. बल्कि पूरे होशो हवास में हु. और जो कुछ भी तुमने सुना सब कुछ सही सुना. तनीषा दीदी और में एक दूसरे से बेहद प्यार करते है बिलकुल वैसे hi जैसे तुम और में एक दूसरे से.
फिरसे राहुल की वही बात सुन्न न जाने क्यों ऋचा को फिरसे झटका लगता है. राहुल ने सोचा यही सही मौका है और उसने तानिया दीदी के बारे में सब कुछ बता दिया की कैसे उनसे मिला, कैसे उन्हें पढ़ाया, उन्हें घर दिया और कैसे वो एक दूसरे के क्लोज हो गए.
ऋचा : ओह...
राहुल : और एक बात और है ऋचा. मेरी वंशु दी भी मुझसे बोहत ज़्यादा प्यार करती है. हलाकि हमारे बीच अभी कोई वैसा कुछ नहीं हुआ, पर पता नहीं कब तक में उन्हें रोक पाउँगा... क्युकी में भी उनसे प्यार करता हु
एक और बड़ा झटका लगा ऋचा को. तनीषा काम थी क्या जो राहुल ने अब वंशु को भी ऐड कर दिया? और हर लड़की राहुल की बहिन क्यों है? मज़ाक चल रहा है क्या?
ऋचा का चेहरा देख राहुल को अब अपने ऊपर बोहत ज़्यादा शर्म भी आ रही थी. की वो अपनी दो बहनो के साथ क्या क्या कर रहा है, और ऋचा को सब अब ोाता चल गया है. क्या वो मुझे एक्सेप्ट भी करेगी?
राहुल : मेने साड़ी सच्चाई तुम्हे बता दी है ऋचा. और यही सच है. मुझे नहीं पता तुम क्या डिसिशन लोगी. पर मुझे तुम्हारा हर्र एक डिसिशन मंज़ूर है. तुम यदि चाहती हो की में अभी के अभी दफा हो जाऊ तुम्हारी नज़रो से तोह में वही करूँगा. तुम चाहोगी की में अपनी शकल न दिखाऊ तोह वो भी मुझे मंज़ूर है. पर में यही चाहता हु की तुम खुश रहो. प्लीज! मुझे अब अपना फैसला सुनाओ ऋचा...
करीब ऐसे hi 15 मिनट गुज़र गए. पर ऋचा सिर्फ अपने खयालो में खोयी हुई नज़रे नीचे कर के कुछ सोच रही थी. राहुल भी उससे वक़्त देकर बस उससे hi देख रहा था. उसके फैसले का इंतज़ार कर रहा था. धड़कने तोह राहुल की बेहद तेज़्ज़ गति से चल रही थी, क्युकी उससे बिलकुल नहीं पता था ऋचा क्या डिसिशन लेगी. वो ऋचा को बिलकुल भी नहीं खोना चाहता था.
उससे पता था की वो ऋचा से बेहद प्यार करने लगा है, और ऐसे में यदि ऋचा ने उससे चोरर दिया तोह न जाने उसके दिल पर क्या बीतेगी. पर वो तनीषा और वंशु से भी तोह प्यार करता है. उन्हें भी धोका नहीं दे सकता. आखिर ऐसा कैसे हो सकता है? एक आदमी को कई लड़कियों से कैसे प्यार हो सकता है? राहुल को ये बात कभी समझ में नहीं आती थी. पर अब उससे ये यकीन हो गया था की पुराने ज़माने में राजा महाराजाओ की एक से ज़्यादा बीविया क्यों होती थी... शायद राजाओ को भी एक से ज़्यादा बीइओ से प्यार हो जाता था और उनकी बीइओ को भी एक hi राजा से...
सुन्न ने में ये बड़ा अटपटा ज़रूर लगे, पर ये मुमकिन था. और आज उसके खुद के साथ ये सब हो रहा था. तोह भला कैसे वो इस बात को झुठलाता?
जब थोड़ी देरर हो गयी और राहुल भी किसी गहरी सोच में चला गया तब ऋचा ने नज़रे ऊपर की और कुछ ऐसा कहा जिससे सुन्न राहुल का शरीर सिहर उठा
ऋचा : मुझे मंज़ूर है...
यही वाकया था जो ऋचा ने कहा. मंज़ूर है? क्या मंज़ूर है? यही की राहुल अपना रिलेशनशिप वंशु और तनीषा दीदी के साथ रख सकता है? या फिर राहुल ने जो कुछ भी किया उससे ऋचा ने माफ़ कर दिया और अब सिर्फ राहुल को अपने पास रखना चाहती है?
राहुल : ky..kya मंज़ूर है?
ऋचा (मुस्कुराते हुए) : मुझे तुम मंज़ूर हो.
राहुल : क्या?? और... और वो कैसे?
ऋचा : मेने बोहत सोचा इस बारे में. पर अंत में एक hi आवाज़ आयी अंदर से... की में तुम्हारे बिना नहीं जी सकती. और ना hi कभी सपने में भी किसी और के साथ अपनी ज़िन्दगी को इमेजिन कर सकती हु...
राहुल : क्या सच कह रही हो रीचु?
ऋचा : हां राहुल! मुझे नहीं पता कुछ. में बस इतना जानती हु की मेरी तरह तुम्हारे लिए कोई और भी प्यार में पद सकता है. और वो तुम्हारी दीदी hi क्यों न हो, पर उनका भी तुम्हारे ऊपर हक़ है. वो बात अलग है की समाज में ये प्यार को गलत माना जाता है पर प्यार तोह प्यार है. और सबसे बड़ी बात ये की तुमने मुझे सब कुछ सच बताया और मुझे अँधेरे में नहीं रखा. हां! तुम ये बात शुरू से बता देती तोह मुझे ज़्यादा ख़ुशी होती पर कोई बात नहीं. शायद तुम दर्रे हुए थे. और एक बात और... वो ये की मुझे इस बात की ख़ुशी है की वो तुंहारी बहने है. कोई बाहर की लड़की नहीं. वर्ण मुझे वाक़ई नाराज़गी और जलन भी होती.
इसलिए... ी वांट यू. ी लव यू... ी can't लाइव विथाउट यू.
राहुल थोड़ी देरर ऋचा का चेहरा hi देखता रहता है उसके बाद अपने आप hi उसकी आँखों से ासु आने लगते है.
"ओह्ह ऋचा!! " कहते हुए राहुल ऋचा को अपनी बाहो में समेत लेता है.

"अब देररि न करो राहुल! में हर पल तुम्हारे साथ रहना चाहती हु. तुम्हारे हर्र मोड़ पे तुम्हारे साथ कड़ी रहूंगी. बस अब मुझे भी अपनी बना लो मेरे राहुल" ऋचा ने राहुल की बाहो में लिपटे हुए कहा.
उसका मतलब साफ़ था की जैसे तनीषा को अपना बनाया वैसे hi मुझे भी अपना बना लो. मतलब वो मोटा लुंड उसकी छूट में भी पेल दो और उद्धघाटन कर दो नए जीवन शुरू होने का.
राहुल ने फौरन ऋचा के गरमा गरम नरम होंठो को अपने होंठो में भर लिया और उसका रसपान करने लगा. गीले गीले गरम होंठ उससे मदहोश करने पे तुले थे.

यही है प्यार! ऋचा ने इतना सब होने के बावजूद उससे एक्सेप्ट कर लिया. क्यों? क्युकी वो राहुल को खोना नहीं चाहती थी, राहुल से वो बेहद प्रेम करती थी.
होंठो को थोड़ी देरर चूसने के बाद जैसे hi दोनों की सांसें तेज़्ज़ हुई दोनों एक दूसरे से अलग हुए. ऋचा के गाल लाल थे और उसकी आँखों में मदहोशी थी, एक नशा था.
ऋचा (मैं में) : अब तुम मेरे हो जानू. मेरे!! इतना प्यार दूंगी न तुमको... सब कुछ भूल जाओगे. वो तोह अच्छा है वंशु और तनीषा दीदी तुम्हारी बहने है, यदि कोई बाहर की लड़की होती न... तो तुम्हारी हालत पतली कर देती में. हम्फ!! पर जो भी हो, अब तुम मेरे हो. अब से मेरी हर चीज़ पे तुम्हारा हक़ है... लव यू जान!!
ऋचा : जानू... दो आईटी विथ में!
और राहुल ने उससे बिस्तर पे लिटा दिया और उसके ऊपर चढ़ गया. हौले हौले गर्दन पे चुम्बनों से शुरुआत करते हुए उसने ऋचा के गुलाबी गरम होंठो पे फिरसे अपना हमला किया.
"उम्मम्मम्म mmmmmmmmmmm" की आवाज़ से कमरा गूंजने लगा.
ऋचा के गाल सुर्ख लाल थे. आज वो अपने प्यार के साथ थी और दोनों इस प्रेम रस में दुब रहे थे.
राहुल भी कुछ शान पहले बेहद उदास था पर जब ऋचा ने उससे स्वीकार किया और ये कहा की वो उसके साथ हर मोड़ पर उसका साथ देगी, राहुल को मानो बोहत ज़्यादा हिम्मत मिल गयी. और उसका प्यार ऋचा के प्रति और भी बढ़ गया.
दोनों एक दूसरे के होंठो का रस पी रहे थे और थूक के मेल मिलाप से कमरे में *स्लुर्प स्लुर्प* की आवाज़ें निकल रही थी जो घनघोर सन्नाटे को चीयर के रख रही थी.
ऋचा ने अपनी जीभ निकल के राहुल के मुँह के अंदर दाल दी, जिस से राहुल का जोश और भी बढ़ गया और उसके हाथ अपने आप hi ऋचा के वाइट टॉप पे आ गए उसके सख्त बड़े उरोजों को थाम मसलने लगे.
*Ssssssssssssss आआआअह्हह्ह्ह्हह* की सिसकी लेते हुए ऋचा ने एक पल के लिए राहुल के होंठ चोर्रे और वापस से मस्ती में मगन होक उससे फिरसे चूमने चाटने लगी.
करीब 20-25 मिनट की इस चुम्मा छाती के बाद राहुल धीरे धीरे नीचे की और बढ़ा और ऋचा का टॉप ऊपर उठा के उसके कंधे तक सरका दिया. अब उसके सामने एकदम सफ़ेद सपाट नरम पेट था, जिसमे एक बेहद hi ख़ूबसूरत सा नैवेल उससे अपनी और खींच रहा था.
राहुल ने भी बिना टाइम गवाए उस नैवेल का आमंत्रण स्वीकार किया और अपनी गरम जीभ की नोक सीधे उस नाभि में दाल दी.
"Uuuuuuuuuuffffffffffffffffffffff"
एक और सिसकी ऋचा की निकली जो बोहत hi कामुक थी. शायद ये वार बोहत hi तगड़ा था राहुल का.
धीरे धीरे राहुल ने ऋचा का टॉप हटाया और नीचे की जीन्स भी अलग कर दी. अब इस वक़्त ऋचा केवल वाइट ब्रा और पंतय में थी.
राहुल ने आगे बढ़ ब्रा भी हटा दी और उसके सामने आ गए 2 गोल सफ़ेद सख्त दूध जिनमे गुलाबी खड़े निप्पल्स उसकी सुंदरता में 4 चाँद लगा रहे थे.
ये सन देख राहुल तोह मानो पागल सा हो गया और किसी भूके भेड़िये की तरह उनपे टूट पड़ा. दूध मुँह में भरते hi ऋचा की सिसकिया निकलना चालु हो गयी. और उसके हाथ बस राहुल का सर पकडे अपने दूध पे दबाव बनाने में hi लगे हुए थे.
"हां!! ऐसे hi... खा जाओ इन्हे राहुल. उफ्फ्फफ्फ्फ़! That's राइट!! चूसो इनको...
और दर्द दो मुझे... अह्ह्ह्हह.... और... जोरर से..... हम्मम्मम्मम्म sssssssssssssss
Aaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhh ी लव आईटी.."
ऋचा न जाने क्या क्या बड़बड़ाए जा रही थी.
राहुल ने दूध चूस चूस कर और उन्हें मसल मसल कर लाल कर दिया था. फिर उसने नीचे आते हुए ऋचा की पंतय भी अलग कर दी. और अब थी उसकी सामने ुनछुयी कोमल क्लीन शवेद गोरी छूट.
ये देख तोह राहुल को सँभालने में कुछ पल लग गए. फिर उसने अपनी जीभ का हमला बोल दिया और छूट को पागलो की तरह चूसना शुरू कर दिया. ऋचा बेचारी इस हमले से मचल सी उठी और अब बहकने लगी थी. सिसकियों की गूँज अब बढ़ चुकी थी.
यहाँ राहुल ऋचा की छूट चाटने में लगा था तोह वही इस वक़्त राहुल के घर में कोई और भी था जो इस वक़्त अपनी छूट में उंगलिया डाले राहुल को याद कर मुट्ठ मारने में लगी थी.
कोण थी वह??
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आज के लिए इतना hi गाइस!!















































