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संध्या ने अपने मकान को बेच दिया और सारा पैसा उसने अपने नए अकाउंट में डलवा लिया. उधर आदित्य ने काफी पैसा कमा लिया था और उसने उस पैसे से एक फ्लैट खरीद लिया और अब दोनों वंहा शिफ्ट हो गए. लोग उन्हें पति पत्नी समझते थे, लेकिन संध्या को किसी भी बात का न तू बुरा लगता और न hi वो कोई जवाब देती और न hi कुछ करती जिससे मौहाल में ख़ुशी आये. वो तू जैसे उस दिन के बाद अपने में hi गुमसुम हो गयी. आदित्य ने जॉब ज्वाइन कर ली और उससे दूसरे शहर में जाना पड़ा और संध्या एक बार फिर अकेली रह गयी. उसने न तू आदित्य को उससे साथ ले जाने के लिए कहा और न hi आदित्य ने उससे साथ चलने के लिए कहा.
आदित्य बीच बीच में आता और वो कोशिश करता hi की संध्या को घुमा कर लाये, उससे अच्छे कपडे पहनाये, अच्छे गहने लेकर दे, लेकिन संध्या का बर्ताव ऐसा था की उससे इन् सब में शायद कोई दिलचस्पी hi नहीं थी, लेकिन उसने कभी भी आदित्य को मन नहीं किया और वो हमेशा आदित्य के साथ चली जाती, लेकिन कभी भी मन से नहीं गयी.
आदित्य को भी पता था की संध्या दिल से उसके साथ नहीं जाती है, लेकिन वो जाती जरूर थी. आदित्य उसकी बेरुखी को समझ नहीं पता था, वो तू बस इतने में hi खुश था की उसने कभी भी न तू उसके साथ जाने से मन किया और न hi किसी बात के लिए चाहे वो उसके साथ सम्भोग hi क्योँ न करे. आदित्य को मज़ा तू नहीं आता था, लेकिन वो जानभूझकर उसके साथ ये सब करता था. उससे लगता था की कोशिश करने से शायद वो उसके साथ दिल से उसके साथ एन्जॉय करने लगे.
आदित्य जॉब के साथ साथ िरा मैडम का काम भी करता था, लेकिन कभी भी अपनी जॉब के साथ बेईमानी नहीं की. िरा मैडम का काम वो तब करता था जब उसकी छुट्टी हो जाती थी, जिससे उसके पास वक़्त की कमी hi रहती थी. वो दिल लगाकर काम करता था और उस काम में हाथ डालता था जो मुश्किल हो, जिससे उसमे जयादा कमाई हो सके. िरा मैडम भी उससे बहुत खुश थी क्योंकि उसकी वजह से उससे एक महीने में इतना प्रॉफिट हो रहा था जितना उसने पुरे साल भी नहीं कमाया हो. इतना hi नहीं उसकी कंपनी की साख भी बढ़ने लगी. इस साख की वजह से उसके पास एक बहुत hi अच्छा ऑफर अमेरिकन मल्टीनेशनल से आया और वो आर्डर इतना बड़ा था की उन्हें एक नै कंपनी खोलने के लिए कहा गया.
इस आर्डर को लेने में आदित्य का बहुत बड़ा हाथ था, बल्कि आदित्य की वजह से hi यह आर्डर मिल रहा था. यह आर्डर इतना बड़ा था की आदित्य की तू छोडो, िरा मैडम की भी जिंदगी बदलने वाली थी. िरा मैडम आदित्य से इतनी प्रभावित थी की उससे जॉब छोड़कर बिज़नेस करने के लिए कहा, लेकिन आदित्य ने उससे ताल दिया. असल में वो जॉब करते हुए इस बिज़नेस की अंदरूनी कमियां और बचाव का रास्ता जानने का इच्छुक था. यह तभी संभव था जब वो किसी बड़ी कंपनी में होता, जैसा की वो अब था.
िरा मैडम ने असल में आदित्य के साथ मिलकर एक नयी कंपनी खोलने के लिए कहा, जैसे की आर्डर देने वाली कंपनी ने शरत राखी थी, जिसमे आदित्य पार्टनर था. अब समस्या ये थी की आदित्य को पार्टनर कैसे बनाया जाये क्योँकि वो जॉब कर रहा था. उसने िरा मैडम से थोड़ा वक़्त माँगा और वो वापिस लौट गया.
वापिस जाकर वंहा पर प्लानिंग कर hi रहा था की वो जिस कंपनी में जॉब कर रहा था उसमे कोई बहुत बड़ी प्रॉब्लम आ गयी जिसकी वजह से कंपनी को करोड़ो का नुक्सान होना था. वंहा पर उसके बॉस ने पूछा की क्या वो इससे ठीक कर सकता है तू आदित्य ने आश्वासन दिया की 'वो इसमें पूरी जान लगा देगा' अगले तीन दिन तक आदित्य को कोई होश नहीं था और वो उस प्रॉब्लम को ठीक करने में लग गया और उसकी किस्मत अच्छी थी की वो प्रॉब्लम ठीक हो गयी. उस प्रॉब्लम के ठीक होने पर कंपनी ने उससे प्रमोशन भी दे दी और 2 लाख का इनाम भी दिया. इसके आलावा सात दिन का कपल हॉलिडे पैकेज भी दे दिया, जिसका पूरा खर्चा कंपनी ने उठाना था. आदित्य वापिस घर आया और संध्या को बताया और उससे अपने साथ चलने के लिए कहा. उसने कोई गर्मजोशी नहीं दिखाई, लेकिन उसने मन भी नहीं किया. वो एक हिल एरिया पर चले गए और वंहा पर कंपनी ने मरस. एंड मर. आदित्य के नाम से होटल बुक करवाया हुआ था.
आदित्य को मालूम था की उसकी माँ उसका साथ नहीं दे रही है, लेकिन उससे बड़े hi प्यार से संध्या को संभालना था. वो उससे वंहा की वादियों में घूमने ले जाता, वंहा पर बहुत साडी फोटो शूट करता, उसकी पसंद का खाना खिलता. उससे अचे से अच्छे शॉपिंग करवाता. एक दिन शाम को डिनर लेने के लिए दिंनिंग हॉल में जा रहे थे, वंहा का मौहाल बहुत hi रोमांटिक था. बहुत hi मद्धम संगीत बज रहा था, खुसबूदार महल में वंहा बहुत hi भव्य हॉल में बहुत साडी टेबल लगी हुई थी और वर्दीधारी वैयर्स खाना सर्वे कर रहे तह. कुछ लोग वंहा पर बने हुए डांस फ्लोर पर डांस भी कर रहे थे.
आदित्य और संध्या एक टेबल पर बैठ कर डिनर का डीडे कर hi रहे थे की एक सुन्दर सी लड़की आयी और आदित्य को hi करके उसके गले लग गयी, इससे देखकर पता नहीं क्योँ संध्या को जलन सी होने लगी.
आदित्य ने उससे संध्या का परिचय करवाया की 'शी इस माय वाइफ' तू उस लड़की ने कहा 'ी ऍम तृषा, मैं आदित्य की क्लासमेट थी' आदित्य ने उससे पूछा की 'वो यंहा कैसे' तू उसने बताया की वो अपने पति के साथ हनीमून पर आयी है. तब तृषा ने आदित्य से पूछा, पहले तू उससे सुझा नहीं फिर एक डैम से उसने कहा की 'शामे हेरे' संध्या की आँखें उसकी बात सुनकर एक डैम से चौड़ी हो गयी की आदित्य ये क्या कह गया.
तृषा का पति (अंकित) भी वंहा आ गया और आदित्य की उससे जल्दी hi दोस्ती भी हो गयी. वो एक बिज़नेस मन था और खाने पीने में विश्वास रखता था. उसने वंही पर सबके लिए ड्रिंक्स मंगवाए तू संध्या मन करने लगी.
अंकित 'भाभी जी, बुरा मत मन्ना मैं जो दिल में होता है कह देता हूँ, अगर आप को बुरा लगे तू पहले hi माफ़ी मांग लेता हूँ'
संध्या को उसके बात करने का अंदाज़ बहुत अच्छा लगा और पता नहीं उसकी बात सुनकर कई दिनों बाद उसके चेहरे पर मुस्खरहाट आयी थी. आदित्य भी ये नोटिस कर रहा था. संध्या 'नहीं नहीं, मैं बिलकुल भी बुरा नहीं मानूंगी'
अंकित 'देखो आप भी हमारी तरह हनीमून पर आये हो. सच बताऊँ तू यही वक़्त है जब खुलकर जीने का वक़्त मिलता है, इसलिए खुलकर जियो और दिल के सब अरमान पुरे कर लो. वापिस जाने के बाद तू लेडीज का चूल्हा चौका और मर्द लोगों का धंदा पानी, फिर कान्हा वक़्त मिलना है. रही बात ड्रिंक्स की तू आजकल के ज़माने का ये फैशन है, इससे नहीं ले तू दकियानूसी मने जाते हैं. रही बात चढ़ने की तू, पहले तू ये चढ़ती नहीं है और अगर चढ़ भी गयी तू यंहा कौन देखने वाला है. कुछ हो गया तू हम सब एक दूसरे को संभल hi लेंगे'
अब बेचारी संध्या उससे मन करे भी तू कैसे, उसने आदित्य की तरफ देखा तू उसने कहा 'ले लो डार्लिंग, देखा जायेगा'
पता नहीं क्या हुआ संध्या को आदित्य द्वारा डार्लिंग बुलाये जाना अच्छा लगा और उसने एक गिलास ले hi लिया. सब ने चियर्स किया और सिप लेने लगे. संध्या ने जैसे hi पहला सिप लिया उससे खांसी आ गयी. आदित्य उसकी पीठ मलने लगा और उसके कान में कहने लगा 'बिलकुल छोटा सिप लो और मन न करे तू मुंह से लगा कर टेबल पर रख देना. टेबल के नीचे से उसने अपने हाथ से उसकी जांघ पर हल्का सा दबा कर दिलासा भी दे दी. सब ड्रिंक्स करते रहे. अंकित तू खुलकर पीने वाला था और वो चार पेग ले चूका था, जबकि आदित्य दूसरा पेग लेकर बैठा था और उसकी दूसरा पेग पीने में कोई इच्छा भी नहीं थी. लेडीज का पहला hi पेग था. उसके बाद अंकित ने डांस करने के लिए कहा और तृषा को बड़े प्यार से उसका हाथ अपने हाथ में लेकर बड़े hi नाटकीय अंदाज़ से 'मेरी जान से प्यारी, मेरी बीवी मेरे साथ डांस करोगी' तृषा ने हाँ कहा और उसके साथ चली गयी. उनको इस तरह करता देखकर उससे भी लगने लगा की आदित्य को भी ऐसा hi कुछ करना चाहिए.
आदित्य ने संध्या को भी डांस करने के लिए कहा. उसका मन था की वो उससे मन कर दे, लेकिन वो बस मन नहीं करती थी, इसलिए डांस करने चली गयी. डांस करते हुए वंहा सब एन्जॉय कर रहे थे. एक रोमांटिक धुन बज रही थी तू आदित्य और संध्या डांस करते हुए धीरे धीरे नजदीक आने लगे. वो वक़्त भी आया जब दोनों इतने नजदीक आ गए की दोनों hi एक दूसरे की बांहों में थे. डांस ख़तम हुआ और फिर वो सब डिनर करने लगे और डिनर के बाद एक दूसरे को विश करके अपने अपने कमरे में आ गए. वापसी में आदित्य ने संध्या की कमर को कास कर पकड़ा हुआ था और अपने से चिपकते हुए कमरे में आ गए.
कमरे में आकर संध्या बोली 'मैं तुम्हारी बीवी हूँ क्या, हर एक को कहते रहते हो'
आदित्य 'अगर आपको बुरा लगा तू ी ऍम सॉरी, वो तू इसलिए बता दिया क्योँकि हम यंहा अस हस्बैंड वाइफ आये हैं'
संध्या 'अगर सब के सामने मुझे बीवी कहते हो तू अकेले में कहने में क्या हर्ज़ है'
आदित्य 'मुझे तू कोई समस्या नहीं है, लेकिन आप का पता नहीं चलता है की आप क्या सोचती हो'
संध्या 'अगर चाहो तू मुझे बीवी कह सकते हो'
आदित्य 'मुझे तू कोई आपत्ति नहीं'
संध्या 'मतलब की ख़ुशी नहीं, हाँ आपत्ति भी नहीं है'
आदित्य उससे पकड़कर अपनी बांहों में भर लेता है और कहता है 'मैं बहुत खुश हु आपको अपनी बीवी के रूप में पाकर'
संध्या भी अपनी बाजुओं से उससे कास लेती है और कहती है 'लेकिन अपनी बीवी को आप नहीं कहते, तुम और सिर्फ तुम, अगर मंजूर है तू ठीक है'
आदित्य उससे और कास लेता है और कहता है 'जान तुमने अपने आप को मेरी बीवी मान लिया, मुझे ख़ुशी हुई, तुम खुश हो की नहीं'
संध्या ने अपने होठों को उसके होठों पर रगड़ दिया और कहने लगी 'मुझे भी बहुत ख़ुशी है, आपको अपना पति मानकर'
आदित्य उसकी पीठ को सहलाते हुए अपने हाथों को उसके नितम्बों पर लेजाकर मसलते हुए 'अब मैं आप बन गया'
संध्या 'अब पति हो तू दर्जा भी तू बढ़ गया है, इसलिए अब आप हो गए'
आदित्य 'नहीं हम पति पत्नी हैं तू हम में से न तू कोई छोटा है और न hi कोई बड़ा, हम दोनों बराबर हैं'
संध्या 'लेकिन मुझसे आप कहने का हक़ तू प्लीज न छेनो'
आदित्य 'ठीक है जैसी तुम्हारी मर्जी, मैं कभी भी तुम पर किसी भी बात का दबाव नहीं डालूंगा. पत्नी होते हुए भी तुम किसी भी निर्णय को लेने के लिए स्वतंत्र हो'
संध्या 'मुझे अब आपके साथ जिंदगी जिनि है'
आदित्य ने भी उससे अपनी बांहों में जकड लिया और उसके सुर्ख होठों पर अपने होठों को रखकर उसके होठों का रास चूसने लगा. उसके हाथ संध्या के शरीर पर घूमने लगे.
आदित्य के हाथ उसकी पीठ पर घूमते हुए उसके नग्न पीठ को सहलाते हुए उससे अपने नजदीक करने लगा. संध्या के हाथ भी ऊपर उठकर आदित्य के चेहरे को पकड़ कर सहलाना शुरू कर दिया.
संध्या के हाथ जैसे hi ऊपर उठे तू आदित्य ने अपने हाथों को उसकी पीठ से आगे लेट हुए उसकी कांखों पर पंहुच कर उससे सहलाना शुरू किया तू संध्या ने मचलाना शुरू कर दिया. आदित्य के हाथ कांखों से उसके उरोजों पर दबाव डालने लगे तू संध्या ने अपने होठों से उसके होठों को कसना शुरू कर दिया.
आदित्य के हाथ ने उसके उरोजों को दबाया तू संध्या ने आदित्य के होठों को छोड़ दिया और सिसकी लेने लगी. आदित्य ने सदी के पल्लू को उसके ब्लाउज से हटा दिया और उसके उरोजों को ब्लाउज के ऊपर से hi दबाना शुरू कर दिया. संध्या अपने हाथ से उससे रोकने लगी, तब तक आदित्य ने उसकी सदी को खोलकर उसके शरीर से अलग कर दी और अब उससे पकड़कर अपनी बांहों में भरकर उसकी गर्दन और गले को बड़े hi प्यार से चूमने लगा और अपनी जीभ को उसके उरोजों की घाटी में डालकर चूसने लगा, जिससे संध्या बहुत बुरी तरह से सिसकने लगी और बहुत hi गहरी गहरी साँसें लेने लगी. फिर आदित्य ने उससे पकड़कर उसके होठों पर अपने होठों को रख दिया और चूसने लगा. काफी देर तक वो उससे चुस्त रहा और अपने हाथों से उसके शरीर को मापता रहा. संध्या आनंदित होती रही और आदित्य के होठों को मस्ती में आकर बीच में काटने लगी.
आदित्य ने अपने होठों को छुड़ाया और संध्या को एक डैम से अपने हाथों में उठाकर बैडरूम में लेजाकर बीएड पर लिटा दिया.
आदित्य ने अपनी शर्ट और पेंट उतर दी, अब वो सिर्फ और सिर्फ अंडरवियर में था, जिसमे तम्बू बना हुआ था.
आदित्य ने अपने हाथों से संध्या के पेअर पकडे और पैरों की उँगलियों को छटने लगा. ऐसा करना था की संध्या की बर्दाश्त ख़तम हो गयी और वो अपने शरीर को बीएड पर इधर उधर करने लगी. आदित्य उसकी उँगलियों को चाटते हुए उसकी पिंडलियाँ चाटने लगा. आदित्य ये काम बहुत धीरे धीरे कर रहा था. ऐसा करने से संध्या के मुंह से बहुत hi मादक सिसकारियों ने निल्कलने शुरू हो गया. आदित्य धीरे धीरे उसकी टांगों पर अपने होठों से चूमते हुए ऊपर आने लगा. संध्या की उत्तेजना इतनी बढ़ गयी थी की वो चाहती थी की आदित्य अब उसमे समां जाये. आदित्य जैसे hi उसकी जाँघों पर पंहुचा तू संध्या ने उससे पकड़कर अपने ऊपर ले लिया और उसके चेहरे को चूमने लगी.
आदित्य तब तक अपना हाथ से उसके पेटीकोट को खोल चूका था और उससे नीचे सरकने लगा. संध्या ने अब अपनी उँगलियों से उसकी छाती को कुरेदना शुरू कर दिया.
आदित्य का हाथ उसके योनि प्रदेश पर पंहुच कर उसकी पैंटी के ऊपर से hi उसकी योनि के लबों को सहलाना शुरू कर दिया. संध्या के बर्दाश्त की हद पर हो गयी और उत्तेजना के चरम पर पंहुच कर उसकी योनि ने कॉमर्स छोड़ दिया और वो लम्बी लम्बी साँसें लेने लगी.
आदित्य थोड़ी देर उसको देखता रहा और कुछ नहीं किया, फिर जब संध्या थोड़ा शांत हुई तू उसने शर्म के मरे अपनी आँखें बंद कर ली.
आदित्य ने उसकी आँखों को बंद देखकर उसकी पैंटी में हाथ डालकर उससे नीचे सरकता चला गया. आदित्य उसकी योनि को देखकर बहुत खुश हुआ और अपनी उंगली से वंहा हल्का हल्का सहलाने लगा. संध्या ने अपने हाथों की मदद से उससे रोकने चाहा, लेकिन वो कान्हा रुकने वाला था. उसकी उंगली ने संध्या के योनि के लबों के बीच में उसके भगनासा को षहुअ तू उसके मुंह से निकला 'eeee......sssss..... हहहह'
आदित्य ने इस बात का फायदा उठाते हुए उसके भगनासा को अपनी उंगली से सहलाना शुरू कर दिया जिससे संध्या की भावनाओं को एक डैम से भड़काने में रामबाण का काम कर रही थी.
आदित्य उसके भगनासा को एक हाथ की ुनहली से सहलाता रहा और दूसरे हाथ को उसके ब्लाउज के नीचे से पेट की तरफ से अंदर डालकर उसके उरोज को पकड़ कर सहलाना शुरू कर दिया.
संध्या के लिए ये दोहरी मार बर्दाश्त करना उसके बस में नहीं था और वो अपने शरीर को बीएड पर पटकने लगी. आदित्य के हाथ ने उसके ब्लाउज के अंदर उसके उरोजों को दबाया और फिर धीरे धीरे मसलने लगा. संध्या की सिसकारियों ने कमरे का हाल बहुत गरम कर दिया था. आदित्य ने अब उसके ब्लाउज के बटन एक एक करके खोल दिए. आदित्य उसकी चूचियों को ब्रा में देखकर उन चूचियों की खूबसूरती में खो सा गया. आदित्य तू शुरू से hi उन चूचियों का दीवाना था.
आदित्य ने संध्या के खुल चुके ब्लाउज को उसकी बाजुओं से निकल फेंका और फिर जैसे hi उसने संध्या को पलटा था तू उसकी ब्रा को भी खोल दिया था. आदित्य ने देर न करते हुए उसकी ब्रा को भी उसके शरीर से अलग कर दिया और फिर उसने अपने अंडरवियर को भी उत्तर फेंका.
अब दोनों माँ बीटा नग्न अवस्था में थे. आदित्य ने उसको गले लगाकर उसके कान में कहा 'माँ यू अरे तू सेक्सी'
संध्या 'माँ नहीं बीवी'
आदित्य उसके गलों को सहलाते हुए उसके कान की लौ को अपने दातों से काटकर 'जान तुम अपने आप को जो भी समझो, लेकिन तुम हो तू मेरी माँ hi न'
संध्या 'मैं यह याद नहीं रखना चाहती की मैं आपकी माँ हूँ, मैं सिर्फ और सिर्फ यह कहना चाहती हूँ की आप मुझे अपनी बीवी मनो और उसी तरह का बर्ताव करो'
आदित्य उसके हाथ को पकड़ कर अपने सीने पर रख देता है और कहता है 'वो मैं कान्हा मन कर रहा हूँ, लेकिन इस दिल का क्या करूँ जो अपनी माँ से प्यार करता है'
उसकी बात सुनकर संध्या का मुंह खुला का खुला रह गया 'kk.......yyyyy........aaaaaaaaa'
आदित्य उसकी चूचियों को दबाते हुआ 'हाँ मेरी जान इस दिल में सिर्फ और सिर्फ उसकी माँ बस्ती है'
संध्या 'लेकिन मैं क्या करूँ, मैं उस जिंदगी को अब भूलना चाहती हूँ'
आदित्य उसकी चूचियों को दबाते हुए अपने हाथ को नीचे ले जाकर उसकी योनि को सहलाना शुरू कर दिया और वो सिसकने लगी. आदित्य उसको कहने लगा 'तुम मेरी पत्नी बनकर रहना और मैं तुम्हे अपनी माँ समझ कर प्यार करूँगा'
संध्या 'लेकिन आज मुझे मेरे पति बनकर प्यार करो न'
आदित्य 'ठीक है मेरी जान जैसी तुम्हारी मर्जी'
उसके बाद आदित्य ने अपने लिंग को उसकी योनि पर रगड़ना शुरू किया hi था की संध्या की हालत ख़राब होने लगी और उसने कहा 'अब देर न करो और मुझे बीवी का हक़ दे दो' आदित्य ने उसकी योनि के मुंह पर अपने लिंग को रखा और एक जोरदार झटका मारा और उसका पूरा लिंग तू अंदर पंहुच गया, लेकिन उससे ऐसा लगा जैसे की उसके लिंग को दोनों तरफ से कास लिया गया हो. संध्या के मुंह से एक बहुत तेज चीख भी निकली थी.
आदित्य ने थोड़ी देर अपने लिंग को उसकी योनि में रखा और उसकी योनि की दीवारों की गर्मी की महसूस करके मज़े लेता रहा. अपने होठों से उसकी गर्दन को चूमने और चाटने लगा. संध्या का शरीर बहुत hi मुलायम और चिकना था. आज पहली बार आदित्य उस शरीर को अपने हाथों की मदद सच्चे से महसूस कर रहा क्योँकि आज संध्या ख़ुशी से उसका साथ दे रही थी.
आदित्य थोड़ी देर बाद अपने लिंग को धीरे धीरे बहार खींचने लगा तू संध्या के मुंह से 'उउउउ..... ीीी' निकलने लगा. आदित्य ने उसकी चूचियों की घुंडियोँ को मसल कर उसका ध्यान भटकने लगा और फिर अपने लिंग को अंदर बहार करने लगा. हर झटके में संध्या को अब मजा आने लगा. आदित्य ने धीरे धीरे अपनी गति को बढ़ाना शुरू किया और अब उसके हर धक्के पर संध्या अपनी कमर उठाते हुए उसका पूरा साथ देने लगी. अपने हाथों से उसकी पीठ को सहलाते हुए अपनी टांगों को उठाकर उसकी कमर को कैंची की तरह कसने लगी. फिर वो वक़्त भी आया जब आदित्य अपने चरम पर पंहुचने वाला था. संध्या तू पहले hi दो बार झाड़ चुकी थी. आदित्य ने आखिर में बहुत जोर का धक्का लगाया और अपनी पिचकारी से संध्या की योनि को भर दिया. उसका वीर्ये संध्या की बच्चेदानी पर प्रहार कर गया. दोनों ने एक दूसरे को ऐसे बांहों में जकड लिया जैसे की कभी अलग hi नहीं होंगे.
संध्या ने अपने मकान को बेच दिया और सारा पैसा उसने अपने नए अकाउंट में डलवा लिया. उधर आदित्य ने काफी पैसा कमा लिया था और उसने उस पैसे से एक फ्लैट खरीद लिया और अब दोनों वंहा शिफ्ट हो गए. लोग उन्हें पति पत्नी समझते थे, लेकिन संध्या को किसी भी बात का न तू बुरा लगता और न hi वो कोई जवाब देती और न hi कुछ करती जिससे मौहाल में ख़ुशी आये. वो तू जैसे उस दिन के बाद अपने में hi गुमसुम हो गयी. आदित्य ने जॉब ज्वाइन कर ली और उससे दूसरे शहर में जाना पड़ा और संध्या एक बार फिर अकेली रह गयी. उसने न तू आदित्य को उससे साथ ले जाने के लिए कहा और न hi आदित्य ने उससे साथ चलने के लिए कहा.
आदित्य बीच बीच में आता और वो कोशिश करता hi की संध्या को घुमा कर लाये, उससे अच्छे कपडे पहनाये, अच्छे गहने लेकर दे, लेकिन संध्या का बर्ताव ऐसा था की उससे इन् सब में शायद कोई दिलचस्पी hi नहीं थी, लेकिन उसने कभी भी आदित्य को मन नहीं किया और वो हमेशा आदित्य के साथ चली जाती, लेकिन कभी भी मन से नहीं गयी.
आदित्य को भी पता था की संध्या दिल से उसके साथ नहीं जाती है, लेकिन वो जाती जरूर थी. आदित्य उसकी बेरुखी को समझ नहीं पता था, वो तू बस इतने में hi खुश था की उसने कभी भी न तू उसके साथ जाने से मन किया और न hi किसी बात के लिए चाहे वो उसके साथ सम्भोग hi क्योँ न करे. आदित्य को मज़ा तू नहीं आता था, लेकिन वो जानभूझकर उसके साथ ये सब करता था. उससे लगता था की कोशिश करने से शायद वो उसके साथ दिल से उसके साथ एन्जॉय करने लगे.
आदित्य जॉब के साथ साथ िरा मैडम का काम भी करता था, लेकिन कभी भी अपनी जॉब के साथ बेईमानी नहीं की. िरा मैडम का काम वो तब करता था जब उसकी छुट्टी हो जाती थी, जिससे उसके पास वक़्त की कमी hi रहती थी. वो दिल लगाकर काम करता था और उस काम में हाथ डालता था जो मुश्किल हो, जिससे उसमे जयादा कमाई हो सके. िरा मैडम भी उससे बहुत खुश थी क्योंकि उसकी वजह से उससे एक महीने में इतना प्रॉफिट हो रहा था जितना उसने पुरे साल भी नहीं कमाया हो. इतना hi नहीं उसकी कंपनी की साख भी बढ़ने लगी. इस साख की वजह से उसके पास एक बहुत hi अच्छा ऑफर अमेरिकन मल्टीनेशनल से आया और वो आर्डर इतना बड़ा था की उन्हें एक नै कंपनी खोलने के लिए कहा गया.
इस आर्डर को लेने में आदित्य का बहुत बड़ा हाथ था, बल्कि आदित्य की वजह से hi यह आर्डर मिल रहा था. यह आर्डर इतना बड़ा था की आदित्य की तू छोडो, िरा मैडम की भी जिंदगी बदलने वाली थी. िरा मैडम आदित्य से इतनी प्रभावित थी की उससे जॉब छोड़कर बिज़नेस करने के लिए कहा, लेकिन आदित्य ने उससे ताल दिया. असल में वो जॉब करते हुए इस बिज़नेस की अंदरूनी कमियां और बचाव का रास्ता जानने का इच्छुक था. यह तभी संभव था जब वो किसी बड़ी कंपनी में होता, जैसा की वो अब था.
िरा मैडम ने असल में आदित्य के साथ मिलकर एक नयी कंपनी खोलने के लिए कहा, जैसे की आर्डर देने वाली कंपनी ने शरत राखी थी, जिसमे आदित्य पार्टनर था. अब समस्या ये थी की आदित्य को पार्टनर कैसे बनाया जाये क्योँकि वो जॉब कर रहा था. उसने िरा मैडम से थोड़ा वक़्त माँगा और वो वापिस लौट गया.
वापिस जाकर वंहा पर प्लानिंग कर hi रहा था की वो जिस कंपनी में जॉब कर रहा था उसमे कोई बहुत बड़ी प्रॉब्लम आ गयी जिसकी वजह से कंपनी को करोड़ो का नुक्सान होना था. वंहा पर उसके बॉस ने पूछा की क्या वो इससे ठीक कर सकता है तू आदित्य ने आश्वासन दिया की 'वो इसमें पूरी जान लगा देगा' अगले तीन दिन तक आदित्य को कोई होश नहीं था और वो उस प्रॉब्लम को ठीक करने में लग गया और उसकी किस्मत अच्छी थी की वो प्रॉब्लम ठीक हो गयी. उस प्रॉब्लम के ठीक होने पर कंपनी ने उससे प्रमोशन भी दे दी और 2 लाख का इनाम भी दिया. इसके आलावा सात दिन का कपल हॉलिडे पैकेज भी दे दिया, जिसका पूरा खर्चा कंपनी ने उठाना था. आदित्य वापिस घर आया और संध्या को बताया और उससे अपने साथ चलने के लिए कहा. उसने कोई गर्मजोशी नहीं दिखाई, लेकिन उसने मन भी नहीं किया. वो एक हिल एरिया पर चले गए और वंहा पर कंपनी ने मरस. एंड मर. आदित्य के नाम से होटल बुक करवाया हुआ था.
आदित्य को मालूम था की उसकी माँ उसका साथ नहीं दे रही है, लेकिन उससे बड़े hi प्यार से संध्या को संभालना था. वो उससे वंहा की वादियों में घूमने ले जाता, वंहा पर बहुत साडी फोटो शूट करता, उसकी पसंद का खाना खिलता. उससे अचे से अच्छे शॉपिंग करवाता. एक दिन शाम को डिनर लेने के लिए दिंनिंग हॉल में जा रहे थे, वंहा का मौहाल बहुत hi रोमांटिक था. बहुत hi मद्धम संगीत बज रहा था, खुसबूदार महल में वंहा बहुत hi भव्य हॉल में बहुत साडी टेबल लगी हुई थी और वर्दीधारी वैयर्स खाना सर्वे कर रहे तह. कुछ लोग वंहा पर बने हुए डांस फ्लोर पर डांस भी कर रहे थे.
आदित्य और संध्या एक टेबल पर बैठ कर डिनर का डीडे कर hi रहे थे की एक सुन्दर सी लड़की आयी और आदित्य को hi करके उसके गले लग गयी, इससे देखकर पता नहीं क्योँ संध्या को जलन सी होने लगी.
आदित्य ने उससे संध्या का परिचय करवाया की 'शी इस माय वाइफ' तू उस लड़की ने कहा 'ी ऍम तृषा, मैं आदित्य की क्लासमेट थी' आदित्य ने उससे पूछा की 'वो यंहा कैसे' तू उसने बताया की वो अपने पति के साथ हनीमून पर आयी है. तब तृषा ने आदित्य से पूछा, पहले तू उससे सुझा नहीं फिर एक डैम से उसने कहा की 'शामे हेरे' संध्या की आँखें उसकी बात सुनकर एक डैम से चौड़ी हो गयी की आदित्य ये क्या कह गया.
तृषा का पति (अंकित) भी वंहा आ गया और आदित्य की उससे जल्दी hi दोस्ती भी हो गयी. वो एक बिज़नेस मन था और खाने पीने में विश्वास रखता था. उसने वंही पर सबके लिए ड्रिंक्स मंगवाए तू संध्या मन करने लगी.
अंकित 'भाभी जी, बुरा मत मन्ना मैं जो दिल में होता है कह देता हूँ, अगर आप को बुरा लगे तू पहले hi माफ़ी मांग लेता हूँ'
संध्या को उसके बात करने का अंदाज़ बहुत अच्छा लगा और पता नहीं उसकी बात सुनकर कई दिनों बाद उसके चेहरे पर मुस्खरहाट आयी थी. आदित्य भी ये नोटिस कर रहा था. संध्या 'नहीं नहीं, मैं बिलकुल भी बुरा नहीं मानूंगी'
अंकित 'देखो आप भी हमारी तरह हनीमून पर आये हो. सच बताऊँ तू यही वक़्त है जब खुलकर जीने का वक़्त मिलता है, इसलिए खुलकर जियो और दिल के सब अरमान पुरे कर लो. वापिस जाने के बाद तू लेडीज का चूल्हा चौका और मर्द लोगों का धंदा पानी, फिर कान्हा वक़्त मिलना है. रही बात ड्रिंक्स की तू आजकल के ज़माने का ये फैशन है, इससे नहीं ले तू दकियानूसी मने जाते हैं. रही बात चढ़ने की तू, पहले तू ये चढ़ती नहीं है और अगर चढ़ भी गयी तू यंहा कौन देखने वाला है. कुछ हो गया तू हम सब एक दूसरे को संभल hi लेंगे'
अब बेचारी संध्या उससे मन करे भी तू कैसे, उसने आदित्य की तरफ देखा तू उसने कहा 'ले लो डार्लिंग, देखा जायेगा'
पता नहीं क्या हुआ संध्या को आदित्य द्वारा डार्लिंग बुलाये जाना अच्छा लगा और उसने एक गिलास ले hi लिया. सब ने चियर्स किया और सिप लेने लगे. संध्या ने जैसे hi पहला सिप लिया उससे खांसी आ गयी. आदित्य उसकी पीठ मलने लगा और उसके कान में कहने लगा 'बिलकुल छोटा सिप लो और मन न करे तू मुंह से लगा कर टेबल पर रख देना. टेबल के नीचे से उसने अपने हाथ से उसकी जांघ पर हल्का सा दबा कर दिलासा भी दे दी. सब ड्रिंक्स करते रहे. अंकित तू खुलकर पीने वाला था और वो चार पेग ले चूका था, जबकि आदित्य दूसरा पेग लेकर बैठा था और उसकी दूसरा पेग पीने में कोई इच्छा भी नहीं थी. लेडीज का पहला hi पेग था. उसके बाद अंकित ने डांस करने के लिए कहा और तृषा को बड़े प्यार से उसका हाथ अपने हाथ में लेकर बड़े hi नाटकीय अंदाज़ से 'मेरी जान से प्यारी, मेरी बीवी मेरे साथ डांस करोगी' तृषा ने हाँ कहा और उसके साथ चली गयी. उनको इस तरह करता देखकर उससे भी लगने लगा की आदित्य को भी ऐसा hi कुछ करना चाहिए.
आदित्य ने संध्या को भी डांस करने के लिए कहा. उसका मन था की वो उससे मन कर दे, लेकिन वो बस मन नहीं करती थी, इसलिए डांस करने चली गयी. डांस करते हुए वंहा सब एन्जॉय कर रहे थे. एक रोमांटिक धुन बज रही थी तू आदित्य और संध्या डांस करते हुए धीरे धीरे नजदीक आने लगे. वो वक़्त भी आया जब दोनों इतने नजदीक आ गए की दोनों hi एक दूसरे की बांहों में थे. डांस ख़तम हुआ और फिर वो सब डिनर करने लगे और डिनर के बाद एक दूसरे को विश करके अपने अपने कमरे में आ गए. वापसी में आदित्य ने संध्या की कमर को कास कर पकड़ा हुआ था और अपने से चिपकते हुए कमरे में आ गए.
कमरे में आकर संध्या बोली 'मैं तुम्हारी बीवी हूँ क्या, हर एक को कहते रहते हो'
आदित्य 'अगर आपको बुरा लगा तू ी ऍम सॉरी, वो तू इसलिए बता दिया क्योँकि हम यंहा अस हस्बैंड वाइफ आये हैं'
संध्या 'अगर सब के सामने मुझे बीवी कहते हो तू अकेले में कहने में क्या हर्ज़ है'
आदित्य 'मुझे तू कोई समस्या नहीं है, लेकिन आप का पता नहीं चलता है की आप क्या सोचती हो'
संध्या 'अगर चाहो तू मुझे बीवी कह सकते हो'
आदित्य 'मुझे तू कोई आपत्ति नहीं'
संध्या 'मतलब की ख़ुशी नहीं, हाँ आपत्ति भी नहीं है'
आदित्य उससे पकड़कर अपनी बांहों में भर लेता है और कहता है 'मैं बहुत खुश हु आपको अपनी बीवी के रूप में पाकर'
संध्या भी अपनी बाजुओं से उससे कास लेती है और कहती है 'लेकिन अपनी बीवी को आप नहीं कहते, तुम और सिर्फ तुम, अगर मंजूर है तू ठीक है'
आदित्य उससे और कास लेता है और कहता है 'जान तुमने अपने आप को मेरी बीवी मान लिया, मुझे ख़ुशी हुई, तुम खुश हो की नहीं'
संध्या ने अपने होठों को उसके होठों पर रगड़ दिया और कहने लगी 'मुझे भी बहुत ख़ुशी है, आपको अपना पति मानकर'
आदित्य उसकी पीठ को सहलाते हुए अपने हाथों को उसके नितम्बों पर लेजाकर मसलते हुए 'अब मैं आप बन गया'
संध्या 'अब पति हो तू दर्जा भी तू बढ़ गया है, इसलिए अब आप हो गए'
आदित्य 'नहीं हम पति पत्नी हैं तू हम में से न तू कोई छोटा है और न hi कोई बड़ा, हम दोनों बराबर हैं'
संध्या 'लेकिन मुझसे आप कहने का हक़ तू प्लीज न छेनो'
आदित्य 'ठीक है जैसी तुम्हारी मर्जी, मैं कभी भी तुम पर किसी भी बात का दबाव नहीं डालूंगा. पत्नी होते हुए भी तुम किसी भी निर्णय को लेने के लिए स्वतंत्र हो'
संध्या 'मुझे अब आपके साथ जिंदगी जिनि है'
आदित्य ने भी उससे अपनी बांहों में जकड लिया और उसके सुर्ख होठों पर अपने होठों को रखकर उसके होठों का रास चूसने लगा. उसके हाथ संध्या के शरीर पर घूमने लगे.
आदित्य के हाथ उसकी पीठ पर घूमते हुए उसके नग्न पीठ को सहलाते हुए उससे अपने नजदीक करने लगा. संध्या के हाथ भी ऊपर उठकर आदित्य के चेहरे को पकड़ कर सहलाना शुरू कर दिया.
संध्या के हाथ जैसे hi ऊपर उठे तू आदित्य ने अपने हाथों को उसकी पीठ से आगे लेट हुए उसकी कांखों पर पंहुच कर उससे सहलाना शुरू किया तू संध्या ने मचलाना शुरू कर दिया. आदित्य के हाथ कांखों से उसके उरोजों पर दबाव डालने लगे तू संध्या ने अपने होठों से उसके होठों को कसना शुरू कर दिया.
आदित्य के हाथ ने उसके उरोजों को दबाया तू संध्या ने आदित्य के होठों को छोड़ दिया और सिसकी लेने लगी. आदित्य ने सदी के पल्लू को उसके ब्लाउज से हटा दिया और उसके उरोजों को ब्लाउज के ऊपर से hi दबाना शुरू कर दिया. संध्या अपने हाथ से उससे रोकने लगी, तब तक आदित्य ने उसकी सदी को खोलकर उसके शरीर से अलग कर दी और अब उससे पकड़कर अपनी बांहों में भरकर उसकी गर्दन और गले को बड़े hi प्यार से चूमने लगा और अपनी जीभ को उसके उरोजों की घाटी में डालकर चूसने लगा, जिससे संध्या बहुत बुरी तरह से सिसकने लगी और बहुत hi गहरी गहरी साँसें लेने लगी. फिर आदित्य ने उससे पकड़कर उसके होठों पर अपने होठों को रख दिया और चूसने लगा. काफी देर तक वो उससे चुस्त रहा और अपने हाथों से उसके शरीर को मापता रहा. संध्या आनंदित होती रही और आदित्य के होठों को मस्ती में आकर बीच में काटने लगी.
आदित्य ने अपने होठों को छुड़ाया और संध्या को एक डैम से अपने हाथों में उठाकर बैडरूम में लेजाकर बीएड पर लिटा दिया.
आदित्य ने अपनी शर्ट और पेंट उतर दी, अब वो सिर्फ और सिर्फ अंडरवियर में था, जिसमे तम्बू बना हुआ था.
आदित्य ने अपने हाथों से संध्या के पेअर पकडे और पैरों की उँगलियों को छटने लगा. ऐसा करना था की संध्या की बर्दाश्त ख़तम हो गयी और वो अपने शरीर को बीएड पर इधर उधर करने लगी. आदित्य उसकी उँगलियों को चाटते हुए उसकी पिंडलियाँ चाटने लगा. आदित्य ये काम बहुत धीरे धीरे कर रहा था. ऐसा करने से संध्या के मुंह से बहुत hi मादक सिसकारियों ने निल्कलने शुरू हो गया. आदित्य धीरे धीरे उसकी टांगों पर अपने होठों से चूमते हुए ऊपर आने लगा. संध्या की उत्तेजना इतनी बढ़ गयी थी की वो चाहती थी की आदित्य अब उसमे समां जाये. आदित्य जैसे hi उसकी जाँघों पर पंहुचा तू संध्या ने उससे पकड़कर अपने ऊपर ले लिया और उसके चेहरे को चूमने लगी.
आदित्य तब तक अपना हाथ से उसके पेटीकोट को खोल चूका था और उससे नीचे सरकने लगा. संध्या ने अब अपनी उँगलियों से उसकी छाती को कुरेदना शुरू कर दिया.
आदित्य का हाथ उसके योनि प्रदेश पर पंहुच कर उसकी पैंटी के ऊपर से hi उसकी योनि के लबों को सहलाना शुरू कर दिया. संध्या के बर्दाश्त की हद पर हो गयी और उत्तेजना के चरम पर पंहुच कर उसकी योनि ने कॉमर्स छोड़ दिया और वो लम्बी लम्बी साँसें लेने लगी.
आदित्य थोड़ी देर उसको देखता रहा और कुछ नहीं किया, फिर जब संध्या थोड़ा शांत हुई तू उसने शर्म के मरे अपनी आँखें बंद कर ली.
आदित्य ने उसकी आँखों को बंद देखकर उसकी पैंटी में हाथ डालकर उससे नीचे सरकता चला गया. आदित्य उसकी योनि को देखकर बहुत खुश हुआ और अपनी उंगली से वंहा हल्का हल्का सहलाने लगा. संध्या ने अपने हाथों की मदद से उससे रोकने चाहा, लेकिन वो कान्हा रुकने वाला था. उसकी उंगली ने संध्या के योनि के लबों के बीच में उसके भगनासा को षहुअ तू उसके मुंह से निकला 'eeee......sssss..... हहहह'
आदित्य ने इस बात का फायदा उठाते हुए उसके भगनासा को अपनी उंगली से सहलाना शुरू कर दिया जिससे संध्या की भावनाओं को एक डैम से भड़काने में रामबाण का काम कर रही थी.
आदित्य उसके भगनासा को एक हाथ की ुनहली से सहलाता रहा और दूसरे हाथ को उसके ब्लाउज के नीचे से पेट की तरफ से अंदर डालकर उसके उरोज को पकड़ कर सहलाना शुरू कर दिया.
संध्या के लिए ये दोहरी मार बर्दाश्त करना उसके बस में नहीं था और वो अपने शरीर को बीएड पर पटकने लगी. आदित्य के हाथ ने उसके ब्लाउज के अंदर उसके उरोजों को दबाया और फिर धीरे धीरे मसलने लगा. संध्या की सिसकारियों ने कमरे का हाल बहुत गरम कर दिया था. आदित्य ने अब उसके ब्लाउज के बटन एक एक करके खोल दिए. आदित्य उसकी चूचियों को ब्रा में देखकर उन चूचियों की खूबसूरती में खो सा गया. आदित्य तू शुरू से hi उन चूचियों का दीवाना था.
आदित्य ने संध्या के खुल चुके ब्लाउज को उसकी बाजुओं से निकल फेंका और फिर जैसे hi उसने संध्या को पलटा था तू उसकी ब्रा को भी खोल दिया था. आदित्य ने देर न करते हुए उसकी ब्रा को भी उसके शरीर से अलग कर दिया और फिर उसने अपने अंडरवियर को भी उत्तर फेंका.
अब दोनों माँ बीटा नग्न अवस्था में थे. आदित्य ने उसको गले लगाकर उसके कान में कहा 'माँ यू अरे तू सेक्सी'
संध्या 'माँ नहीं बीवी'
आदित्य उसके गलों को सहलाते हुए उसके कान की लौ को अपने दातों से काटकर 'जान तुम अपने आप को जो भी समझो, लेकिन तुम हो तू मेरी माँ hi न'
संध्या 'मैं यह याद नहीं रखना चाहती की मैं आपकी माँ हूँ, मैं सिर्फ और सिर्फ यह कहना चाहती हूँ की आप मुझे अपनी बीवी मनो और उसी तरह का बर्ताव करो'
आदित्य उसके हाथ को पकड़ कर अपने सीने पर रख देता है और कहता है 'वो मैं कान्हा मन कर रहा हूँ, लेकिन इस दिल का क्या करूँ जो अपनी माँ से प्यार करता है'
उसकी बात सुनकर संध्या का मुंह खुला का खुला रह गया 'kk.......yyyyy........aaaaaaaaa'
आदित्य उसकी चूचियों को दबाते हुआ 'हाँ मेरी जान इस दिल में सिर्फ और सिर्फ उसकी माँ बस्ती है'
संध्या 'लेकिन मैं क्या करूँ, मैं उस जिंदगी को अब भूलना चाहती हूँ'
आदित्य उसकी चूचियों को दबाते हुए अपने हाथ को नीचे ले जाकर उसकी योनि को सहलाना शुरू कर दिया और वो सिसकने लगी. आदित्य उसको कहने लगा 'तुम मेरी पत्नी बनकर रहना और मैं तुम्हे अपनी माँ समझ कर प्यार करूँगा'
संध्या 'लेकिन आज मुझे मेरे पति बनकर प्यार करो न'
आदित्य 'ठीक है मेरी जान जैसी तुम्हारी मर्जी'
उसके बाद आदित्य ने अपने लिंग को उसकी योनि पर रगड़ना शुरू किया hi था की संध्या की हालत ख़राब होने लगी और उसने कहा 'अब देर न करो और मुझे बीवी का हक़ दे दो' आदित्य ने उसकी योनि के मुंह पर अपने लिंग को रखा और एक जोरदार झटका मारा और उसका पूरा लिंग तू अंदर पंहुच गया, लेकिन उससे ऐसा लगा जैसे की उसके लिंग को दोनों तरफ से कास लिया गया हो. संध्या के मुंह से एक बहुत तेज चीख भी निकली थी.
आदित्य ने थोड़ी देर अपने लिंग को उसकी योनि में रखा और उसकी योनि की दीवारों की गर्मी की महसूस करके मज़े लेता रहा. अपने होठों से उसकी गर्दन को चूमने और चाटने लगा. संध्या का शरीर बहुत hi मुलायम और चिकना था. आज पहली बार आदित्य उस शरीर को अपने हाथों की मदद सच्चे से महसूस कर रहा क्योँकि आज संध्या ख़ुशी से उसका साथ दे रही थी.
आदित्य थोड़ी देर बाद अपने लिंग को धीरे धीरे बहार खींचने लगा तू संध्या के मुंह से 'उउउउ..... ीीी' निकलने लगा. आदित्य ने उसकी चूचियों की घुंडियोँ को मसल कर उसका ध्यान भटकने लगा और फिर अपने लिंग को अंदर बहार करने लगा. हर झटके में संध्या को अब मजा आने लगा. आदित्य ने धीरे धीरे अपनी गति को बढ़ाना शुरू किया और अब उसके हर धक्के पर संध्या अपनी कमर उठाते हुए उसका पूरा साथ देने लगी. अपने हाथों से उसकी पीठ को सहलाते हुए अपनी टांगों को उठाकर उसकी कमर को कैंची की तरह कसने लगी. फिर वो वक़्त भी आया जब आदित्य अपने चरम पर पंहुचने वाला था. संध्या तू पहले hi दो बार झाड़ चुकी थी. आदित्य ने आखिर में बहुत जोर का धक्का लगाया और अपनी पिचकारी से संध्या की योनि को भर दिया. उसका वीर्ये संध्या की बच्चेदानी पर प्रहार कर गया. दोनों ने एक दूसरे को ऐसे बांहों में जकड लिया जैसे की कभी अलग hi नहीं होंगे.