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- Dec 5, 2013
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अब तक...
नेहा यहाँ इसलिए आ पायी क्युकी उसके फ़ोन में अंशु का केवल एक मैसेज पड़ा हुआ था!
"जितनी जल्दी हो सके घर आओ! और घर के बहार दरवाज़े के पास कड़ी रहना! Don't ओपन थे दूर! Don't मेक अन्य नॉइज़! बस खड़े रहना!"
नेहा ने जब ये मैसेज पढ़ा था तोह बोहत अटपटा लगा था पर अंशु ने कहा है मतलब कुछ बात तोह होगी, यही सोच के वो यहाँ आयी थी और उसने बिलकुल वैसा hi किया जैसा की अंशु ने बताया था.
पर उससे क्या पता था की उससे इतना बड़ा झटका लगने वाला है!
तानिया : तोह में शुरू करती हु...
अब आगे...
तानिया : तुम्हे लगता है तुम्हे सब कुछ पता था अपने भाई के बारे में नेहा! पर असल बात तोह ये है की तुम्हे कुछ भी नहीं पता था.
नेहा : नूवो! Mein...mein जानती हु उससे अच्छे से, wo...wo...
नेहा की हालत इस वक़्त बोहत hi खराब हो रही थी. उसका शरीर काँप रहा था, आँखों में हलके हलके आसुओ की बुँदे थी, आँखें शॉक के मारे एकदम चौड़ी हो गयी थी.
तानिया : ये सच्चाई सिर्फ और सिर्फ में, अंशु और तुम्हारे माँ डैड hi जानते थे. इनफैक्ट मुझे और अंशु को बोहत बाद में पता चला ये. बुआ और फूफा तोह तुम्हे बताने से rahe...aur राहुल का ये सच हमेशा हमेशा के लिए अँधेरे की गहराईयो में खो जाता... बिलकुल वैसे hi... जैसे राहुल चाहता था.
नेहा : नाहीइ!! झूठ!!!... आप झूठ बोल रही हो!!
नेहा बाहर से तोह ये कह रही थी पर उसका दिमाग सब समझ रहा था, वो जान रहा था की असली सच क्या है. फिर भी नेहा इससे मान न नहीं चाहती थी, शायद उसमे इस सच को एक्सेप्ट करने की हिम्मत नहीं थी और इसलिए ऐसा कहके वो खुद को झुटला रही थी, इस उम्मीद में की हो सकता है वो किसी सपने में हो या फिर सब झूठ हो.
तानिया : याद करो! याद करो अपने प्यारे बड़े भाई को... वही भाई, जिसके साथ तुम इतना जुडी हुई थी.
नेहा के ना चाहने पर भी तानिया की आवाज़ सुनते hi उसका दिमाग राहुल के साथ बितायी यादो से भरने लगता है, राहुल का वो चेहरा, नेहा का उसकी गॉड में बैठ के तंग करना, राहुल का उससे घुमाना, सारे सीन्स उसके दिमाग में घूमने लगते है.
और नेहा का शरीर और कांपने लगता है, सासें तेज़्ज़ होने लगती है, उसका सीना बड़ी hi तेज़्ज़ी से ऊपर नीचे हो रहा था, वो बोहत hi हेअविलय ब्रेअथे कर रही थी.
नेहा (चिल्ला के) : नहहीइ!!! वो लिएर् था...
वो मुझे मारना चाहता था, उसने मुझसे खुद कहा था, वो इस घर का अकेला वारिस होना चाहता था, usse...usse...
तानिया : अभी भी तुम्हे समझ नहीं आया नेहा!? राहुल ने जो भी कहा था, वो तुम्हारे डैड का इलज़ाम अपने सर पर लेने के लिए कहा था.
नेहा : ........
तानिया का अब पारा थोड़ा चढ़ चूका था. इतना सब होने के बाद भी नेहा सच मान ने तैयार नहीं थी तोह उसने सीधा आखिरी हमला करने की सोची...
तानिया ने बोलना स्टार्ट किया और बोलते बोलते वो एक एक कदम धीरे धीरे नेहा की तरफ बढ़ा रही थी...
तानिया : राहुल ने तुम्हारे और उसके रिलेशन का बलिदान दिया क्युकी वो तुम्हे बचाना चाहता था. बचाना चाहता था तुम्हे कुछ गलत कर लेने से. यदि तुम्हे ये पता चलता की तुम्हारे डैड तुम्हे नहीं चाहते थे, तोह उस वक़्त तुम्हारा रिएक्शन क्या होता? क्या तुम इस घर में रहती? ये जानते हुए भी की तुम्हारे डैड तुम्हारा जन्म चाहते hi नहीं थे? तुम्हारा रिश्ता अपने पिता से टूट गया होता. तुम्हारा रिश्ता अपनी माँ से बिगड़ जाता. तुम्हारी उम्र छोटी थी, तुम अपना घर चोरर के भाग जाती. तुम ये सब सेहन नहीं कर पाती और कुछ गलत कदम भी उठा सकती थी. और इसलिए! इसलिए राहुल ने तुम्हे इन् सब से बचाने के लिए, खुद का बलिदान दे दिया, उसने अपने उस प्यारे रिश्ते को डाव पे लगा दिया ताकि वो तुम्हे इन् सब से बचा सके. उसने तुम्हे जन्म नहीं दिया, इसलिए उससे लगता था की तुम उसके साथ रिश्ता टूट जाने से जल्दी उभर जाओगी. पर यदि तुम्हारा रिश्ता अपने माँ या बाप से टूट गया तोह तुम किधर जाती? उससे पता था की तुम घर चोरर के भाग जाती. इसलिए सब कुछ... सब कुछ उसने तुम्हे बचाने के लिए किया...
नेहा की सासें और तेज़्ज़ हो गयी थी, लग रहा था वो किसी भी वक़्त बेहोश हो सकती है. वो अपने हथेलियों को खोल कर उन्हें कांपते हुए देखे जा रही थी, जैसे उसने उन् हथेलियों से किसी का खून कर दिया हो.
तानिया (आगे बढ़ते हुए) : में ये कहने से बिलकुल भी पीछे नहीं हटूंगी की तुम्हारे डैड खुदगर्ज़ थे... राहुल hi तुम्हारे परिवार को लकी और बाकी खतरों से पीठ पीछे बचाता, तुम्हे अभी ये बात भी नहीं पता होगी की जब अंशु और वंशु तुम्हारे घर रहने आए थे और जब तुम सभी राहुल को चोरर कर घूमने गए थे, उस रात भी राहुल ने पीठ पीछे तुम सभी को बचाया था. उस वक़्त लकी तुम्हे वह अगवा करने आया था...
तानिया की बात सुन्न कर सभी शॉकेड रह जाते है सिवाए अंशु और वंशु के. अंशु ने तानिया को सब बता दिया था और तानिया वही सब बातें बोल रही थी.
नेहा फटी आँखों से तानिया को घूरे जा रही थी और तानिया धीरे धीरे उसके पास hi बढ़ रही थी.
तानिया : राहुल तुम्हे बुरा भला कहता, कहता की तुम कभी भी उस से आगे नहीं निकल पाओगी, हमेशा उस से पीछे hi रहोगी क्युकी वो चाहता था... की तुम उस से नफरत करो, उसने तुम्हे एक रीज़न दिया की तुम मज़बूत बन सको और उस से सच में एक दिन आगे निकल सको. वो सोचता था की ऐसा करने से तुम्हारा आत्मविश्वाश बढ़ेगा. तुम उस से नफरत करोगी और उससे धीरे धीरे भूल जाओगी, तुम पहले से कही ज़्यादा होशियार हो चुकी होगी, और तुम्हारे पास अपने माता पिता का साथ भी बरकरार रहेगा. यही चाहता था वह...
शुरू से लेकर अंत तक... उसने केवल तुम्हारा भला hi चाहा. तुम्हे प्रोटेक्ट करना चाहा और किया भी... उसने अपने माता पिता को कसम दी की कुछ भी हो जाए तुम्हे इस सच्चाई का पता न चले...
कोनसा भाई अपनी बहिन को मारना चाहेगा? यदि वो मारना चाहता भी... तोह ये बताओ! की तुम अब तक ज़िंदा कैसे हो? उसने ये सब बड़े hi स्मार्टली किया, उसने तुम्हे उस पॉइंट तक पहुचा दिया जहा तुम उसके जाल में फस्स गयी और उसकी बातो को सच मान बैठी.
तानिया आगे बढ़ते बढ़ते नेहा के पास पहुँच चुकी थी और वो देख रही थी की नेहा की हालत अभी क्या है, तानिया ने उसकी चीन को पकड़ा और उसका सर ऊपर उठाया और उसकी आँखों में देखा...
तानिया : उसने सारा का सारा इलज़ाम अपने कंधो पर लिया और यहाँ से चला गया. उसने अपनी नौकरी के लिए खुद इंतज़ाम किया और वह रहकर भी उसने तुम्हारे ऊपर से ज़रा भी ध्यान नहीं हटाया, वो वह रहकर भी तुम्हे यहाँ प्रोटेक्ट कर रहा था.
उसकी बात सुन्न नेहा को मोनिका का चेहरा और लकी वाला इंसिडेंट याद आ जाता है और उसकी आँखों से फिरसे आसुओ की धाराए निकलने लगती है...
तानिया : तुम इन् आँखों से कभी भी उसका सच नहीं जान पायी, तुम कभी भी उसके ढोंग से उसका पर्दा हटा नहीं पायी, तुमने ये कभी जान ने की कोशिश नहीं करि की क्या उसने जो किया वो उसने अपनी मर्ज़ी से किया या फिर किसी और कारण से!?
तानिया : उसने सम्मान की जगह अपमान स्वीकार किया, प्यार की जगह नफरत स्वीकार की. और उसके बाद भी वो ख़ुशी ख़ुशी अपना बलिदान देके यहाँ से गया... अंत तक तुम्हे ये जताता रहा की वो तुमसे नफरत करता है.
तानिया की ज़ुबानी सुनके सभी की आँखों में ासु थे, नेहा बिलखते हुए अपने घुटनो पर गिर पड़ी और अपने चेहरे को हाथो में लेकर जोरर जोरर से रोने लगी...
उससे देख के निशा भी खुद को नहीं रोक पायी और वो भी अपना चेहरा छिपाते हुए रोने लगी.
आगे बढ़ के अंशु ने नीचे बैठी नेहा को साइड से हुग किया और उससे शांत करने की कोशिश की पर नेहा को जैसे एक दम से कुछ सूझा और वो फौरन उठी और दौड़ते हुए अपने कमरे की और भागी.
उससे ऐसे जाते देख निशा की धड़कन बढ़ गयी, जिसका उससे सबसे ज़्यादा डर था कही वही न हो जाए. कही नेहा कुछ गलत कदम न उठा ले. सभी उसके पीछे उससे आवाज़ लगाते हुए दौड़े पर नेहा ने अपना कमरा लॉक करके रखा हुआ था.
अंशु और निशा जोरर जोरर से दरवाज़ा खत खटाने लगे की नेहा कुछ गलत न करले अंदर
निशा (रट हुए) : बेटा!! बेटा दरवाज़ा खोल... नेहा!!! प्लीज दरवाज़ा खोल मेरी बच्ची... प्लीज!!!
अंशु (रट हुए) : नेहुउउ!! दरवाज़ा खोल नेहु प्लीज!! तुझे हम सब की कसम है, राहुल भैया की कसम तुझे... तू कुछ भी नहीं करेगी... कोई गलत कदम नहीं उठाएगी...
सब दररते हुए बस दरवाज़ा थोक रहे थे की तभी अंदर से नेहा की आवाज़ आयी
नेहा (रोटी हुई आवाज़ में) : ी won't दो एनीथिंग स्टुपिड! आप लोग घर से थोड़ी देरर के लिए चले जाइये! ी वांट तो बे अलोन फॉर सोमेटिमे.
निशा : नहीं!! हम कही नहीं जाएंगे! तू दरवाज़ा खोल नेहा!!!
अंशु : चची! It's okay! नेहु ने कहा है मतलब वो कुछ गलत नहीं करेगी! हमे उसकी बात मान न चाहिए!
निशा : अरे अंशु पर में कैसे...!?
अंशु : नेहुउउ!! प्रॉमिस उस यू won't दो एनीथिंग स्टुपिड.
नेहा : ी प्रॉमिस दी! Don't वोर्री! जस्ट लीव में अलोन फॉर सोमेटिमे. लीव थे हाउस प्लीज. ी बेग यू!!!
अंशु उसकी बात सुन्न थोड़ी राहत की सास लेती है और सभी को सांत्वना देते हुए घर से बहार ले जाती है और कार में बैठ के सभी थोड़ी देरर के लिए बहार चल देते है. निशा बिलकुल राज़ी नहीं थी उससे डर था अभी भी की नेहा खुद को कुछ कर न ले पर अंशु ने उससे हौसला दिया की वो कुछ भी नहीं करेगी. अंत में घर को बाहर से hi लॉक करके सभी थोड़ी hi दूर के मार्किट की और चले गए और नेहा के लिए कुछ कुछ सामान खरीदने लगे.
इधर नेहा घर में अपने कमरे में फुट फुट कर रोई, वो अपनी स्टडी टेबल पर बैठी हुई थी और रोये जा रही थी, आसुओ से उसका पूरा चेहरा भीग चूका था.
उसने गुस्से में आकर टेबल पर रखे पेन होल्डर को गिरा दिया. पर पेन होल्डर के गिरते hi उसमे से कुछ पेपर के टुकड़े निकले. नेहा ने उन् पर पहले तो ध्यान नहीं दिया वो सिर्फ रोटी रही पर जब उसका ध्यान उन् पेपर्स पर गया तोह उससे जैसे कुछ सूझा और उसने पेपर्स के टुकड़े जो की मुड़े हुए थे उन्हें एक एक कर के खोला और जब उसने सभी पेपर्स को जोड़ के देखा तोह उसकी आँखों में और ज़्यादा ासु आ गए और अपने मुँह को हाथो से ढकते हुए वो और जोरर से रोने लगी...
ये वही पेपर था जिस पर राहुल ने नेहा के लिए ड्राइंग बनायीं थी (अपडेट 18).
जब अंशु और वंशु आयी हुई थी और नेहा की लड़ाई अंशु से ज़ू में हो गयी थी उसके बाद वो एक रोटी हुई स्त्री का स्केच बना रही थी पर बना नहीं पा रही थी. तब राहुल ने चुपके से उसके रूम में आकर एक खिल खिलाती स्त्री का चेहरा बनाया था, जिससे देख कर नेहा गुस्से में आकर उससे फाड़ के इसी पेन होल्डर में ठूस दी थी. किस्मत की बात ये थी की वो अभी तक उसी पेन होल्डर में पड़ा हुआ था.
रट हुए जब नेहा अपने रूम से बहार गयी और सामने राहुल के रूम का गेट देखा तोह उसकी रुलाई चूत गयी. यही पर तोह उसने राहुल के चेहरे पर पानी फेका था (अपडेट 1)
वो रट हुए नीचे जाने के लिए हुई तोह उसकी नज़र सीढ़ियों पर पड़ी और फिरसे उसके ासु निकल गए. इन्ही स्टैर्स पर वो राहुल का परर कुचल के बिना कोई इमोशन दिखाए चली जाय करती थी. ऐसी कोई जगह नहीं थी जहा पर उसने राहुल को हर्ट नहीं किया था.
नेहा दौड़ के नीचे से राहुल के रूम की के लेके आयी क्युकी राहुल का रूम लॉक्ड रहता था. हर्र 2 दिन में निशा उसके रूम की सफाई करती थी और फिर लॉक लगा देती थी. सफाई कल hi हुई थी इसलिए अभी लॉक लगा हुआ था.
नेहा ने फौरन राहुल का रूम खोला और जैसे hi अंदर दाखिल हुई, वही पुराना रूम देख के उसकी आँखों से ासु रुकने का नाम hi नहीं ले रहे थे. वो चारो तरफ घूमते हुए उसके रूम को देखने लगी, आगे बढ़ते हुए धीरे से उसने आस पास राखी हुई चीज़ो को छू के देखा जैसे मानो वो किसी ख़ज़ाने को छू रही हो.
उसने राहुल की अलमारी जो की वही राखी हुई थी उससे खोला तोह अंदर राहुल के hi कपडे रखे हुए थे. अपने हाथो को उन् कपड़ो पर फेरते हुए उसने राहुल की एक टी शर्ट उठायी और उससे अपने सीने से लगा लिया, उसने टी शर्ट में से राहुल की खुशबु लेने का अथक प्रयास किया पर उनमे से अब राहुल की कोई भी खुसबू नहीं आ रही थी.
क्युकी कपडे निशा धोती रहती थी और वो राहुल के भी कपडे निकाल के उन्हें धोती ताकि वो फ्रेश बने रहे.
नेहा बिलखती हुई टी शर्ट लिए ज़मीन पर घुटनो के बल गिर पड़ी और तभी उसकी नज़र बीएड के नीचे एक नेवसपपेर पर पड़ी जिसके अंदर कुछ रखा हुआ था.
उसने झुकते हुए बीएड के नीचे से नेवसपपेर को खींच के कुछ निकाला और उसमे लगे धागे खोलने लगी, धागा खोलते hi उसने नेवसपपेर को जब खोला तोह अंदर की राखी हुई चीज़ देख के उसकी फिरसे रुलाई चूत गयी.
ासु की बड़ी बड़ी बोंडे उसके चेहरे को भिगोते हुए गिरने लगी. सामने एक जला हुए टेडी बेयर पड़ा था. ये वही टेडी था, जिससे अंशु ने उसके b'day पर दिया था 2 साल पहले और नेहा को जब ये बात पता चली की ये असल में राहुल का दिया हुआ गिफ्ट था तोह नेहा ने टेडी को नीचे जाकर जला दिया था. (अपडेट 37)
आज वही आधा जला हुआ टेडी जब उससे फिरसे दिखा तोह उस से बिलकुल कण्ट्रोल नहीं हुआ और वो जोरर जोरर से रोने लगी. उसने टेडी को उठा के अपने सीने से इतनी जोरर से भीचा जैसे अपने अंदर hi समां लेगी.
उससे याद है ये टेडी 10,000 का था. और उसने बिना कुछ सोचे समझे जला दिया था. उस वक़्त तोह राहुल कमाता भी नहीं था, न जाने कितनी म्हणत से उसने पैसे इखट्टे करके ये खरीदा होगा!? और उसने ने यु hi उससे जला दिया था. नेहा इस वक़्त इतना गिल्ट फील कर रही थी की यदि उसकी जगह कोई और होता तोह इसी गिल्ट में hi डूब के मर जाता.
जब वो उठी तोह उसने फिर से अलमारी चेक करि पर उससे कुछ मिला नहीं. पर उसका ध्यान जैसे hi लाकर पे गया तोह उसने के से उससे खोला और अंदर जो देखा तोह उसकी गिल्ट और भी बढ़ गयी. ासु तोह non-stop बह hi रहे थे. पर हर्र बार वो और इमोशन के साथ बहते.
अंदर एक तस्वीर थी जो की एक बचपन की तस्वीर थी राहुल और नेहा की. नेहा राहुल के कंधो पर बैठी हुई है और जीभ निकाली हुई है और राहुल उससे संभाल के पकडे हुए है.
पुराणी तस्वीर देख नेहा को हस्सी आ जाती है, कैसे वो बच्चो टाइप जीभ निकाली हुई है और राहुल उससे पकड़ा हुआ है. तस्वीर में भी वो कितनी केयर से नेहा को संभाला हुआ था ताकि वो कही गिर न जाए. तस्वीर देख के नेहा के चेहरे पर एक मुस्कान आयी और उसने तस्वीर उठा के राहुल की फोटो वाले हिस्से को चूम लिया.
जब उसने तस्वीर पलटाई तोह उससे फिर से रुलाई आ गयी. पीछे राहुल की लिखावट में लिखा हुआ था,
"ी विल ऑलवेज लव माय गुड़िया"
रट हुए उसने अपने सीने से वो तस्वीर को लगाया और टेडी और तस्वीर लेके वो अपने कमरे में चली गयी.
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आज के लिए इतना hi गाइस!
धन्यवाद्!!
अब तक...
नेहा यहाँ इसलिए आ पायी क्युकी उसके फ़ोन में अंशु का केवल एक मैसेज पड़ा हुआ था!
"जितनी जल्दी हो सके घर आओ! और घर के बहार दरवाज़े के पास कड़ी रहना! Don't ओपन थे दूर! Don't मेक अन्य नॉइज़! बस खड़े रहना!"
नेहा ने जब ये मैसेज पढ़ा था तोह बोहत अटपटा लगा था पर अंशु ने कहा है मतलब कुछ बात तोह होगी, यही सोच के वो यहाँ आयी थी और उसने बिलकुल वैसा hi किया जैसा की अंशु ने बताया था.
पर उससे क्या पता था की उससे इतना बड़ा झटका लगने वाला है!
तानिया : तोह में शुरू करती हु...
अब आगे...
तानिया : तुम्हे लगता है तुम्हे सब कुछ पता था अपने भाई के बारे में नेहा! पर असल बात तोह ये है की तुम्हे कुछ भी नहीं पता था.
नेहा : नूवो! Mein...mein जानती हु उससे अच्छे से, wo...wo...
नेहा की हालत इस वक़्त बोहत hi खराब हो रही थी. उसका शरीर काँप रहा था, आँखों में हलके हलके आसुओ की बुँदे थी, आँखें शॉक के मारे एकदम चौड़ी हो गयी थी.
तानिया : ये सच्चाई सिर्फ और सिर्फ में, अंशु और तुम्हारे माँ डैड hi जानते थे. इनफैक्ट मुझे और अंशु को बोहत बाद में पता चला ये. बुआ और फूफा तोह तुम्हे बताने से rahe...aur राहुल का ये सच हमेशा हमेशा के लिए अँधेरे की गहराईयो में खो जाता... बिलकुल वैसे hi... जैसे राहुल चाहता था.
नेहा : नाहीइ!! झूठ!!!... आप झूठ बोल रही हो!!
नेहा बाहर से तोह ये कह रही थी पर उसका दिमाग सब समझ रहा था, वो जान रहा था की असली सच क्या है. फिर भी नेहा इससे मान न नहीं चाहती थी, शायद उसमे इस सच को एक्सेप्ट करने की हिम्मत नहीं थी और इसलिए ऐसा कहके वो खुद को झुटला रही थी, इस उम्मीद में की हो सकता है वो किसी सपने में हो या फिर सब झूठ हो.
तानिया : याद करो! याद करो अपने प्यारे बड़े भाई को... वही भाई, जिसके साथ तुम इतना जुडी हुई थी.
नेहा के ना चाहने पर भी तानिया की आवाज़ सुनते hi उसका दिमाग राहुल के साथ बितायी यादो से भरने लगता है, राहुल का वो चेहरा, नेहा का उसकी गॉड में बैठ के तंग करना, राहुल का उससे घुमाना, सारे सीन्स उसके दिमाग में घूमने लगते है.
और नेहा का शरीर और कांपने लगता है, सासें तेज़्ज़ होने लगती है, उसका सीना बड़ी hi तेज़्ज़ी से ऊपर नीचे हो रहा था, वो बोहत hi हेअविलय ब्रेअथे कर रही थी.
नेहा (चिल्ला के) : नहहीइ!!! वो लिएर् था...
वो मुझे मारना चाहता था, उसने मुझसे खुद कहा था, वो इस घर का अकेला वारिस होना चाहता था, usse...usse...
तानिया : अभी भी तुम्हे समझ नहीं आया नेहा!? राहुल ने जो भी कहा था, वो तुम्हारे डैड का इलज़ाम अपने सर पर लेने के लिए कहा था.
नेहा : ........
तानिया का अब पारा थोड़ा चढ़ चूका था. इतना सब होने के बाद भी नेहा सच मान ने तैयार नहीं थी तोह उसने सीधा आखिरी हमला करने की सोची...
तानिया ने बोलना स्टार्ट किया और बोलते बोलते वो एक एक कदम धीरे धीरे नेहा की तरफ बढ़ा रही थी...
तानिया : राहुल ने तुम्हारे और उसके रिलेशन का बलिदान दिया क्युकी वो तुम्हे बचाना चाहता था. बचाना चाहता था तुम्हे कुछ गलत कर लेने से. यदि तुम्हे ये पता चलता की तुम्हारे डैड तुम्हे नहीं चाहते थे, तोह उस वक़्त तुम्हारा रिएक्शन क्या होता? क्या तुम इस घर में रहती? ये जानते हुए भी की तुम्हारे डैड तुम्हारा जन्म चाहते hi नहीं थे? तुम्हारा रिश्ता अपने पिता से टूट गया होता. तुम्हारा रिश्ता अपनी माँ से बिगड़ जाता. तुम्हारी उम्र छोटी थी, तुम अपना घर चोरर के भाग जाती. तुम ये सब सेहन नहीं कर पाती और कुछ गलत कदम भी उठा सकती थी. और इसलिए! इसलिए राहुल ने तुम्हे इन् सब से बचाने के लिए, खुद का बलिदान दे दिया, उसने अपने उस प्यारे रिश्ते को डाव पे लगा दिया ताकि वो तुम्हे इन् सब से बचा सके. उसने तुम्हे जन्म नहीं दिया, इसलिए उससे लगता था की तुम उसके साथ रिश्ता टूट जाने से जल्दी उभर जाओगी. पर यदि तुम्हारा रिश्ता अपने माँ या बाप से टूट गया तोह तुम किधर जाती? उससे पता था की तुम घर चोरर के भाग जाती. इसलिए सब कुछ... सब कुछ उसने तुम्हे बचाने के लिए किया...
नेहा की सासें और तेज़्ज़ हो गयी थी, लग रहा था वो किसी भी वक़्त बेहोश हो सकती है. वो अपने हथेलियों को खोल कर उन्हें कांपते हुए देखे जा रही थी, जैसे उसने उन् हथेलियों से किसी का खून कर दिया हो.
तानिया (आगे बढ़ते हुए) : में ये कहने से बिलकुल भी पीछे नहीं हटूंगी की तुम्हारे डैड खुदगर्ज़ थे... राहुल hi तुम्हारे परिवार को लकी और बाकी खतरों से पीठ पीछे बचाता, तुम्हे अभी ये बात भी नहीं पता होगी की जब अंशु और वंशु तुम्हारे घर रहने आए थे और जब तुम सभी राहुल को चोरर कर घूमने गए थे, उस रात भी राहुल ने पीठ पीछे तुम सभी को बचाया था. उस वक़्त लकी तुम्हे वह अगवा करने आया था...
तानिया की बात सुन्न कर सभी शॉकेड रह जाते है सिवाए अंशु और वंशु के. अंशु ने तानिया को सब बता दिया था और तानिया वही सब बातें बोल रही थी.
नेहा फटी आँखों से तानिया को घूरे जा रही थी और तानिया धीरे धीरे उसके पास hi बढ़ रही थी.
तानिया : राहुल तुम्हे बुरा भला कहता, कहता की तुम कभी भी उस से आगे नहीं निकल पाओगी, हमेशा उस से पीछे hi रहोगी क्युकी वो चाहता था... की तुम उस से नफरत करो, उसने तुम्हे एक रीज़न दिया की तुम मज़बूत बन सको और उस से सच में एक दिन आगे निकल सको. वो सोचता था की ऐसा करने से तुम्हारा आत्मविश्वाश बढ़ेगा. तुम उस से नफरत करोगी और उससे धीरे धीरे भूल जाओगी, तुम पहले से कही ज़्यादा होशियार हो चुकी होगी, और तुम्हारे पास अपने माता पिता का साथ भी बरकरार रहेगा. यही चाहता था वह...
शुरू से लेकर अंत तक... उसने केवल तुम्हारा भला hi चाहा. तुम्हे प्रोटेक्ट करना चाहा और किया भी... उसने अपने माता पिता को कसम दी की कुछ भी हो जाए तुम्हे इस सच्चाई का पता न चले...
कोनसा भाई अपनी बहिन को मारना चाहेगा? यदि वो मारना चाहता भी... तोह ये बताओ! की तुम अब तक ज़िंदा कैसे हो? उसने ये सब बड़े hi स्मार्टली किया, उसने तुम्हे उस पॉइंट तक पहुचा दिया जहा तुम उसके जाल में फस्स गयी और उसकी बातो को सच मान बैठी.
तानिया आगे बढ़ते बढ़ते नेहा के पास पहुँच चुकी थी और वो देख रही थी की नेहा की हालत अभी क्या है, तानिया ने उसकी चीन को पकड़ा और उसका सर ऊपर उठाया और उसकी आँखों में देखा...
तानिया : उसने सारा का सारा इलज़ाम अपने कंधो पर लिया और यहाँ से चला गया. उसने अपनी नौकरी के लिए खुद इंतज़ाम किया और वह रहकर भी उसने तुम्हारे ऊपर से ज़रा भी ध्यान नहीं हटाया, वो वह रहकर भी तुम्हे यहाँ प्रोटेक्ट कर रहा था.
उसकी बात सुन्न नेहा को मोनिका का चेहरा और लकी वाला इंसिडेंट याद आ जाता है और उसकी आँखों से फिरसे आसुओ की धाराए निकलने लगती है...
तानिया : तुम इन् आँखों से कभी भी उसका सच नहीं जान पायी, तुम कभी भी उसके ढोंग से उसका पर्दा हटा नहीं पायी, तुमने ये कभी जान ने की कोशिश नहीं करि की क्या उसने जो किया वो उसने अपनी मर्ज़ी से किया या फिर किसी और कारण से!?
तानिया : उसने सम्मान की जगह अपमान स्वीकार किया, प्यार की जगह नफरत स्वीकार की. और उसके बाद भी वो ख़ुशी ख़ुशी अपना बलिदान देके यहाँ से गया... अंत तक तुम्हे ये जताता रहा की वो तुमसे नफरत करता है.
तानिया की ज़ुबानी सुनके सभी की आँखों में ासु थे, नेहा बिलखते हुए अपने घुटनो पर गिर पड़ी और अपने चेहरे को हाथो में लेकर जोरर जोरर से रोने लगी...
उससे देख के निशा भी खुद को नहीं रोक पायी और वो भी अपना चेहरा छिपाते हुए रोने लगी.
आगे बढ़ के अंशु ने नीचे बैठी नेहा को साइड से हुग किया और उससे शांत करने की कोशिश की पर नेहा को जैसे एक दम से कुछ सूझा और वो फौरन उठी और दौड़ते हुए अपने कमरे की और भागी.
उससे ऐसे जाते देख निशा की धड़कन बढ़ गयी, जिसका उससे सबसे ज़्यादा डर था कही वही न हो जाए. कही नेहा कुछ गलत कदम न उठा ले. सभी उसके पीछे उससे आवाज़ लगाते हुए दौड़े पर नेहा ने अपना कमरा लॉक करके रखा हुआ था.
अंशु और निशा जोरर जोरर से दरवाज़ा खत खटाने लगे की नेहा कुछ गलत न करले अंदर
निशा (रट हुए) : बेटा!! बेटा दरवाज़ा खोल... नेहा!!! प्लीज दरवाज़ा खोल मेरी बच्ची... प्लीज!!!
अंशु (रट हुए) : नेहुउउ!! दरवाज़ा खोल नेहु प्लीज!! तुझे हम सब की कसम है, राहुल भैया की कसम तुझे... तू कुछ भी नहीं करेगी... कोई गलत कदम नहीं उठाएगी...
सब दररते हुए बस दरवाज़ा थोक रहे थे की तभी अंदर से नेहा की आवाज़ आयी
नेहा (रोटी हुई आवाज़ में) : ी won't दो एनीथिंग स्टुपिड! आप लोग घर से थोड़ी देरर के लिए चले जाइये! ी वांट तो बे अलोन फॉर सोमेटिमे.
निशा : नहीं!! हम कही नहीं जाएंगे! तू दरवाज़ा खोल नेहा!!!
अंशु : चची! It's okay! नेहु ने कहा है मतलब वो कुछ गलत नहीं करेगी! हमे उसकी बात मान न चाहिए!
निशा : अरे अंशु पर में कैसे...!?
अंशु : नेहुउउ!! प्रॉमिस उस यू won't दो एनीथिंग स्टुपिड.
नेहा : ी प्रॉमिस दी! Don't वोर्री! जस्ट लीव में अलोन फॉर सोमेटिमे. लीव थे हाउस प्लीज. ी बेग यू!!!
अंशु उसकी बात सुन्न थोड़ी राहत की सास लेती है और सभी को सांत्वना देते हुए घर से बहार ले जाती है और कार में बैठ के सभी थोड़ी देरर के लिए बहार चल देते है. निशा बिलकुल राज़ी नहीं थी उससे डर था अभी भी की नेहा खुद को कुछ कर न ले पर अंशु ने उससे हौसला दिया की वो कुछ भी नहीं करेगी. अंत में घर को बाहर से hi लॉक करके सभी थोड़ी hi दूर के मार्किट की और चले गए और नेहा के लिए कुछ कुछ सामान खरीदने लगे.
इधर नेहा घर में अपने कमरे में फुट फुट कर रोई, वो अपनी स्टडी टेबल पर बैठी हुई थी और रोये जा रही थी, आसुओ से उसका पूरा चेहरा भीग चूका था.
उसने गुस्से में आकर टेबल पर रखे पेन होल्डर को गिरा दिया. पर पेन होल्डर के गिरते hi उसमे से कुछ पेपर के टुकड़े निकले. नेहा ने उन् पर पहले तो ध्यान नहीं दिया वो सिर्फ रोटी रही पर जब उसका ध्यान उन् पेपर्स पर गया तोह उससे जैसे कुछ सूझा और उसने पेपर्स के टुकड़े जो की मुड़े हुए थे उन्हें एक एक कर के खोला और जब उसने सभी पेपर्स को जोड़ के देखा तोह उसकी आँखों में और ज़्यादा ासु आ गए और अपने मुँह को हाथो से ढकते हुए वो और जोरर से रोने लगी...
ये वही पेपर था जिस पर राहुल ने नेहा के लिए ड्राइंग बनायीं थी (अपडेट 18).
जब अंशु और वंशु आयी हुई थी और नेहा की लड़ाई अंशु से ज़ू में हो गयी थी उसके बाद वो एक रोटी हुई स्त्री का स्केच बना रही थी पर बना नहीं पा रही थी. तब राहुल ने चुपके से उसके रूम में आकर एक खिल खिलाती स्त्री का चेहरा बनाया था, जिससे देख कर नेहा गुस्से में आकर उससे फाड़ के इसी पेन होल्डर में ठूस दी थी. किस्मत की बात ये थी की वो अभी तक उसी पेन होल्डर में पड़ा हुआ था.
रट हुए जब नेहा अपने रूम से बहार गयी और सामने राहुल के रूम का गेट देखा तोह उसकी रुलाई चूत गयी. यही पर तोह उसने राहुल के चेहरे पर पानी फेका था (अपडेट 1)
वो रट हुए नीचे जाने के लिए हुई तोह उसकी नज़र सीढ़ियों पर पड़ी और फिरसे उसके ासु निकल गए. इन्ही स्टैर्स पर वो राहुल का परर कुचल के बिना कोई इमोशन दिखाए चली जाय करती थी. ऐसी कोई जगह नहीं थी जहा पर उसने राहुल को हर्ट नहीं किया था.
नेहा दौड़ के नीचे से राहुल के रूम की के लेके आयी क्युकी राहुल का रूम लॉक्ड रहता था. हर्र 2 दिन में निशा उसके रूम की सफाई करती थी और फिर लॉक लगा देती थी. सफाई कल hi हुई थी इसलिए अभी लॉक लगा हुआ था.
नेहा ने फौरन राहुल का रूम खोला और जैसे hi अंदर दाखिल हुई, वही पुराना रूम देख के उसकी आँखों से ासु रुकने का नाम hi नहीं ले रहे थे. वो चारो तरफ घूमते हुए उसके रूम को देखने लगी, आगे बढ़ते हुए धीरे से उसने आस पास राखी हुई चीज़ो को छू के देखा जैसे मानो वो किसी ख़ज़ाने को छू रही हो.
उसने राहुल की अलमारी जो की वही राखी हुई थी उससे खोला तोह अंदर राहुल के hi कपडे रखे हुए थे. अपने हाथो को उन् कपड़ो पर फेरते हुए उसने राहुल की एक टी शर्ट उठायी और उससे अपने सीने से लगा लिया, उसने टी शर्ट में से राहुल की खुशबु लेने का अथक प्रयास किया पर उनमे से अब राहुल की कोई भी खुसबू नहीं आ रही थी.
क्युकी कपडे निशा धोती रहती थी और वो राहुल के भी कपडे निकाल के उन्हें धोती ताकि वो फ्रेश बने रहे.
नेहा बिलखती हुई टी शर्ट लिए ज़मीन पर घुटनो के बल गिर पड़ी और तभी उसकी नज़र बीएड के नीचे एक नेवसपपेर पर पड़ी जिसके अंदर कुछ रखा हुआ था.
उसने झुकते हुए बीएड के नीचे से नेवसपपेर को खींच के कुछ निकाला और उसमे लगे धागे खोलने लगी, धागा खोलते hi उसने नेवसपपेर को जब खोला तोह अंदर की राखी हुई चीज़ देख के उसकी फिरसे रुलाई चूत गयी.
ासु की बड़ी बड़ी बोंडे उसके चेहरे को भिगोते हुए गिरने लगी. सामने एक जला हुए टेडी बेयर पड़ा था. ये वही टेडी था, जिससे अंशु ने उसके b'day पर दिया था 2 साल पहले और नेहा को जब ये बात पता चली की ये असल में राहुल का दिया हुआ गिफ्ट था तोह नेहा ने टेडी को नीचे जाकर जला दिया था. (अपडेट 37)
आज वही आधा जला हुआ टेडी जब उससे फिरसे दिखा तोह उस से बिलकुल कण्ट्रोल नहीं हुआ और वो जोरर जोरर से रोने लगी. उसने टेडी को उठा के अपने सीने से इतनी जोरर से भीचा जैसे अपने अंदर hi समां लेगी.
उससे याद है ये टेडी 10,000 का था. और उसने बिना कुछ सोचे समझे जला दिया था. उस वक़्त तोह राहुल कमाता भी नहीं था, न जाने कितनी म्हणत से उसने पैसे इखट्टे करके ये खरीदा होगा!? और उसने ने यु hi उससे जला दिया था. नेहा इस वक़्त इतना गिल्ट फील कर रही थी की यदि उसकी जगह कोई और होता तोह इसी गिल्ट में hi डूब के मर जाता.
जब वो उठी तोह उसने फिर से अलमारी चेक करि पर उससे कुछ मिला नहीं. पर उसका ध्यान जैसे hi लाकर पे गया तोह उसने के से उससे खोला और अंदर जो देखा तोह उसकी गिल्ट और भी बढ़ गयी. ासु तोह non-stop बह hi रहे थे. पर हर्र बार वो और इमोशन के साथ बहते.
अंदर एक तस्वीर थी जो की एक बचपन की तस्वीर थी राहुल और नेहा की. नेहा राहुल के कंधो पर बैठी हुई है और जीभ निकाली हुई है और राहुल उससे संभाल के पकडे हुए है.
पुराणी तस्वीर देख नेहा को हस्सी आ जाती है, कैसे वो बच्चो टाइप जीभ निकाली हुई है और राहुल उससे पकड़ा हुआ है. तस्वीर में भी वो कितनी केयर से नेहा को संभाला हुआ था ताकि वो कही गिर न जाए. तस्वीर देख के नेहा के चेहरे पर एक मुस्कान आयी और उसने तस्वीर उठा के राहुल की फोटो वाले हिस्से को चूम लिया.
जब उसने तस्वीर पलटाई तोह उससे फिर से रुलाई आ गयी. पीछे राहुल की लिखावट में लिखा हुआ था,
"ी विल ऑलवेज लव माय गुड़िया"
रट हुए उसने अपने सीने से वो तस्वीर को लगाया और टेडी और तस्वीर लेके वो अपने कमरे में चली गयी.
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आज के लिए इतना hi गाइस!
धन्यवाद्!!





