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अब तक...
तनीषा : मुझे कोई आपत्ति नहीं है डार्लिंग. जब तक तुम मेरे साथ हो. मुझे और कुछ नहीं चाहिए.
राहुल : don't वोर्री तनीषा! यू विल ऑलवेज बे माइन... तुम मेरी हो. और जल्द hi मेरी पत्नी बनोगी...
तनीषा : यस डार्लिंग!!
और दोनों एक मीठे चुम्बन में डूब जाते है.
अब आगे...
अगले दिन hi राहुल ने सभी को एकत्र करके एक मीटिंग राखी. मीटिंग आगे के प्लान को लेकर थी. राहुल ने जब अपना प्लान सभी को बताया तोह सभी ये सुन्न के चकित रह गए, खासकर निशा. निशा अपनी बॉहे सिकोड़े हुए राहुल के प्लान के बारे में सोचे जा रही थी. क्या राहुल का प्लान सही है? क्या ऐसा करने से सब कुछ सही हो जाएगा? कितनी संभावना है ये योजना सफल होने की? उसकी समझ में कुछ नहीं आ रहा था. एक गहरी सास लेते हुए निशा ने अंत में सारा राहुल के ऊपर चोरर दिया. यदि राहुल को जब भी उसकी आवश्यकता पड़ेगी निशा बेझिजक अपने बेतु की मदद के लिए आगे आ जाएगी.
योजना जो भी थी, वो सभी के भविष्य में राहुल के साथ सम्बन्ध को प्रभावित करने वाली थी. अब सब कुछ समय पर निर्भर था.
जहा समय ले जाए इन् सभी को.
इस वक़्त राहुल ख़ुशी और प्रीती के साथ उनके कमरे में मौजूद था. काफी समय हो गया साथ में रहते हुए पर दोनों में अकेले में उतने अच्छे से बात नहीं हो पायी थी. राहुल ने ये सोच के रखा था की वो ख़ुशी से एन्ड में बात करेगा. अब चुकी सभी के साथ उसने इंटरैक्ट कर लिया था तोह अब केवल ख़ुशी और प्रीती hi बची हुई थी और राहुल यहाँ आज रात उनके hi कमरे में मौजूद था उनसे बात करने के लिए.
बाकी सभी अपने अपने कमरों में थे. किसी को नहीं पता था की अभी ख़ुशी और प्रीती के साथ राहुल मौजूद है सिवाए ऋचा के. ऋचा अब राहुल के साथ उसके कमरे में hi सोती थी पिछले दो दिनों से. इच्छुक तोह तनीषा और बाकी सभी भी थी पर शादी के सबसे क़रीब अभी ऋचा थी तोह ऋचा को hi ये मौका मिला. डिनर आलरेडी सभी कर hi चुके थे और सोने के लिए अपने अपने रूम में आ चुके थे.
राहुल एक कुर्सी पर बैठे हुए ख़ुशी और प्रीती को देख रहा था जो उसके सामने बीएड पर बैठी हुई थी. प्रीती तोह नार्मल hi नज़र आ रही थी पर ख़ुशी के हाव भाव देख के लग रहा था की वो कुछ कहने के लिए हिचकिचा रही है,
"तोह कहो राहुल? क्या बात करनी है? अब फाइनली हमारी याद आ hi गयी तुम्हे? वर्ण बाकी लड़कियों से तोह फुर्सत hi नहीं है तुम्हे?" प्रीती ने अपनी चुप्पी तोड़ते हुए कहा.
तोह उसके विरोध में फौरन hi ख़ुशी ने उसका हाथ पकड़ लिया, "प्रीती!!! ऐसा नहीं कहो! वो सब राहुल की लवर्स है"
ख़ुशी की उदारता देखते hi प्रीती अपनी आँखों को घुमाते हुए अपना हाथ चुर्रा लेती है, "ओह! C'mon ख़ुशी! तुम जिस से प्यार करती हो वो दूसरी लड़कियों के साथ मज़्ज़े कर रहा है और तुम्हे ज़रा भी आपत्ति नहीं है?"
ख़ुशी : देखो प्रीती! बाकी लोग भी तोह ये जानते हुए भी राहुल से जुड़े हुए है न और उतना hi प्यार कर रहे है? ी क्नोव आईटी हुर्ट्स बूत... में सभी की तरह धीरे धीरे मैनेज कर लुंगी. मुझे समझ आ गया है. मेरा राहुल पे एकाधिकार नहीं है और न hi में या कोई और ऐसा कर सकता है.
कहते हुए ख़ुशी ने नज़रे नीचे झुका ली. शायद अभी भी उसमे थोड़ी बोहत इस बात को लेकर निराशा थी की वो राहुल पर एकाधिकार नहीं जाता सकती. देखा जाए तोह सभी लड़कियों में ये हलकी निराशा ज़रूर होगी और सभी की यही कामना भी होगी की वो राहुल पे हक़ जताते हुए उससे केवल सिर्फ अपना कर ले. सबसे ज़्यादा तोह नेहा और तानिया hi होंगे इस मामले में. पर ये नामुमकिन था, काम से काम इस जनम में तोह नामुमकिन hi था.
एक गहरी सास लेते हुए राहुल ने दोनों को फिरसे देखा और फिर अपना मुँह खोला, "ख़ुशी! तुम से केवल दो hi सवाल है मेरे"
ख़ुशी : पूछो राहुल!
राहुल : क्या तुम मुझसे प्यार करती हो?
इस प्रश्न पर ख़ुशी फौरन hi अपना सर हां में हिलाने लगती है, "ऑफ़ कोर्स! ी लव यू राहुल! ी लव यू सो मच..." और उसके बाद hi वो शर्माते हुए फिरसे नीचे देखने लगती है.
बीच बीच में वो नज़र उठा के राहुल को देखती जा रही थी पर जैसे hi राहुल ने स्माइल किया ख़ुशी दुबारा से शर्माते हुए नीचे देखने लगी. बेचारी के गाल सुर्ख लाल पद रहे थे.
राहुल : दूसरा सवाल ख़ुशी! क्या तुम्हारे डैड यानी की मेरे मास्टर शादी के लिए राज़ी होएंगे ये सब जानते हुए भी की मेरी इतनी चाहने वाली है...!?
इस सवाल से ख़ुशी थोड़ी दुविधा में पड़ गयी. उसके dad...kya कहेंगे? क्या वो राज़ी होएंगे? उससे इसका जवाब बिलकुल नहीं पता था और सही कहा जाए तोह ख़ुशी को खुद को इसकी संभावना 50 प्रतिशत से भी काम नज़र आ रही थी.
प्रीती : सोच क्या रही हो ख़ुशी? तुम और में मिलके अंकल को मन लेंगे. में पूरा जोरर लगा दूंगी अपना... हां बोलो राहुल को.
प्रीती की बात सुन्न ख़ुशी राहुल को देखती है और निचला होंठ दातो से दबाते हुए हां में सर हिला देती है.
राहुल (स्माइल) : गुड... आज से तुम मेरी हो
राहुल ने मानो जैसे घोषणा कर दी और उसकी ये बात सुनते hi जैसे ख़ुशी के दिल की धड़कने तेज़्ज़ हो गयी.
और अगले पल hi राहुल कुर्सी से उठा और आगे बढ़ते हुए उसने ख़ुशी की चीन को अपने दाए हाथ से पकड़ते हुए उठाया, उसकी आँखों में देखा और उसके होंठ अपने होंठो से चुर्रा लिए.
अचानक हुई इस हरकत से ख़ुशी हक्की बक्की सी रह गयी. उसकी आँखें फेल गयी और वो राहुल के चेहरे को देख रही थी हैरान होते हुए. राहुल के होंठ उसके होंठो से जुड़े हुए थे.
ये पहली बार था जब राहुल ने खुदसे उससे किश किया. धड़कने मानो जैसे किसी ट्रैन के माफ़िक़ तेज़्ज़ हो गयी.
पर अगले पल hi वो एहसास जैसे गायब हो गया. राहुल ख़ुशी के होंठ चोररटे हुए पीछे हो गया. ख़ुशी को जैसे मानो अधूरा अधूरा सा लगने लगा. अब उसका मैं कर रहा था की काश ये लम्हा और लम्बा होता.
बगल में बैठी प्रीती अभी अभी जो हुआ उससे आँखें फाड़े देख रही थी. उसकी समझ में नहीं आया की पल भर में ये क्या हो गया.
इधर ख़ुशी अपने गालो को हाथो से छिपाते हुए एकदम शर्मा गयी और पलट कर उसने बेडशीट उठा के अपने सर के ऊपर दाल ली...
उसकी ये हरकत देख राहुल को हस्सी आ गयी. सो क्यूट.
"ये भले hi उम्र में मेरी गुड़िया के बराबर है पर लगता है बचपने में ये गुड़िया से आगे है. अभी भी अल्हड़पन भरा है इसमें. वेल! ी don't मंद थौघ. जैसी है ये वैसी hi अच्छी है..." , राहुल ने मुस्कुराते हुए अपने मैं में सोचा.
प्रीती ख़ुशी को देख अपने हाथ खड़े कर देती है, "ऐसे चलेगा तोह कैसे हो पायेगा ख़ुशी? लिखे सीरियसली? एक किश में तुम्हारा ये हाल है?? अभी तुम..."
प्रीती इस से पहले की आगे कुछ बोलती उसके होंठ पहले hi राहुल के होंठो के क़ब्ज़े में आ गए.
ख़ुशी ने जैसे hi प्रीती की आवाज़ अचानक से बंद होती हुई सुनी तोह वो उठ के बैठ गयी और सामने का नज़ारा देख एकदम चौंक गयी. ये प्रीती और राहुल की दूसरी किश थी. पहली बार राहुल ने प्रीती को एकदम से किश करके चुप करवाया था जब प्रीती पैनिक हो गयी थी ख़ुशी की किडनेपिंग के वक़्त.
और इस बार भी राहुल ने उससे कहते हुए बीच में उसके होंठ चुर्रा लिए. कुछ सेकण्ड्स बाद hi राहुल प्रीती से दूर हो गया, "प्रीती! रही बात हमारे रिलेशनशिप की... तोह ी थिंक वे नीड सम मोरे टाइम. गुड नाईट तो बोथ ऑफ़ यू"
और इतना कहते हुए राहुल वह से निकल गया. इधर प्रीती भी आश्चर्य चकित सी बस आँखें चौड़ी किये दरवाज़े को घूर रही थी जहा से राहुल अभी अभी गया था.
"हेहेहे! लुक ात यू नाउ... बड़ी आयी मुझे बोलने वाली. खुद की हालत देखो" ख़ुशी ने हस्ते हुए प्रीती का मज़ाक उड़ाते हुए कहा.
थोड़ी देरर पहले तोह उससे भाषण दे रही थी प्रीती पर अब क्या हुआ? तोते उड़द गए उसके खुद के तोह.
"हँ?? N..ni.. khushi...w..wo तोह mein...aise hi...usne.. mein..mein रेडी नहीं thi...na उसने अचानक se...wo...isliye mein...aisa" प्रीती भी एकदम हकलाते हुए ख़ुशी को अपनी सफाई बया करने लगती है तोह एक बार फिर ख़ुशी की प्यारी सी किलकारी चूत जाती है
"बूत आईटी फेल्ट गुड", ख़ुशी अपनी ऊँगली ले जाके अपने होंठो पर स्पर्श कराती है जहा पर कुछ देरर पहले राहुल के होंठ लगे हुए थे. मानो जैसे वो राहुल के चोर्रे हुए छाप को ढूंढ रही हो अपने होंठो पर.
उसकी बात सुन्न के प्रीती भी शर्माते हुए अपने होंठो पर उंगलियों से स्पर्श करने लगती है, "येह! यू अरे राइट!"
अगला सवेरा हुआ, सभी प्लान के अकॉर्डिंग ग्वालियर यानी के राहुल के घर के लिए रवाना होने लगे. प्रीती और ख़ुशी को चोरर कर. उनका वह अभी के लिए कोई काम नहीं था. उनका वह रहना समस्या को और भी बड़ा देता.
इस वक़्त सभी एक कोच में ट्राइब में सफर कर रहे थे. कोई जल्दी थी नहीं और निशा ट्रैन hi प्रेफर करती है इसलिए सभी ने ट्रैन से जाने का hi फैसला लिया.
ट्रैन में...
निशा राहुल के सामने वाली बिरथ पर बैठी हुई थी. राहुल उसके सामने था. राहुल के बगल से नेहा उसकी गॉड में सर्र रख के लेती हुई थी. और बाकी सभी लड़किया अपनी अपनी बिरथ पर विराजमान थी.
निशा : बेतु! क्या ये सही है? तूने सब कुछ सोच लिया है न अच्छे से? क्युकी मुझे तोह बोहत hi जोखिम दिखाई दे रहा है इसमें.
राहुल : जोखिम तोह है माँ! बोहत है! सच कहु तोह मुझे भी पूरा कॉन्फिडेंस नहीं है.
राहुल की बात सुन्न इस्सस बार निशा वाक़ई घबरा जाती है,
निशा : बेचू!??
राहुल : हां माँ! देखते है आगे क्या होता है पर मेरे हिसाब से... यही बेस्ट रास्ता है.
तभी उतने में नेहा उठ के बैठ जाती है और राहुल के गालो पर जोरर से एक पप्पी दे देती है,
नेहा : भाई!! मुझे थोड़ा डर लग रहा है?
राहुल : किसका? लोगो का?
नेहा : लोगो में तोह में किसी से नहीं दरर्ति भाई. डर इस बात का है... की... में तुमसे दूर नहीं होना चाहती भाई. मुझे इस बात का बोहत डर है.
कहते हुए नेहा एक बार निशा पर नज़र डालती है तोह निशा मुस्कुराते हुए कहती है, "तू अपने सेज भाई से प्यार करती है न?"
नेहा फौरन hi हां में सर हिला देती है.
निशा एक गहरी सास लेते हुए, "मुझे पता चल गया था. ऐसा कैसे हुए मेरी बच्ची?"
"माँ! ये अभी से थोड़ी न है. सच कहु... तोह... मुझे भाई से बचपन में hi प्यार हो गया था. बोहत पहले... में तभी भाई को बता देना चाहती थी पर दरर्ति थी..."
नेहा ने राहुल को चुपके से देखते हुए कहा.
नेहा की बात से निशा तोह हैरान हुई hi पर राहुल भी हैरान था. उससे नहीं पता था उसकी गुड़िया उस से बचपन से hi प्यार करती है.
नेहा : यदि मेने उस वक़्त hi भाई को प्रोपोज़ कर दिया होता न तोह आज भाई के साथ इतनी साड़ी लड़किया नहीं होती. भाई सिर्फ मेरा होता
कहते हुए नेहा राहुल की कमर में चुटकी लेने लगती है तोह राहुल दर्द होने की एक्टिंग करने लगता है...
राहुल : आउच! Gudiya...lag रही है
नेहा : हम्फ!!
मुँह फुलाते हुए नेहा अपनी नज़रे फेरर लेती है तोह राहुल उससे पीछे से प्यार दिखाते हुए जकड लेता है, "अरे मेरा गुड़िया! नाराज़ हो गयी? सॉरी बाबा! पर देख! तू और mein...hum साथ तोह है न... अब मुँह मत फुला"
पर नेहा तोह जैसे आज अपने भाई की टांग खींचने के पूरे मूड में थी. वो अभी भी मुँह फुलाये hi बैठी थी तोह राहुल उससे घुमा के उसके होंठ एकदम से चुम लेता है.
इस बार नेहा हड़बड़ा जाती है. सामने उसकी माँ निशा जो बैठी thi...uske बाद भी राहुल ने ये सब उसके साथ कर दिया. इतनी हिम्मत?
नेहा थोड़ी चिंतित भाव से निशा को देखि तोह निशा मुस्कुरा रही थी.
निशा : बेतु! सबके सामने नहीं! फिलहाल नहीं! बाकी... में तुम दोनों का पूरा साथ दूंगी. बच्चो की hi ख़ुशी में तोह आखिर मेरी ख़ुशी है... सब कुछ तोह तुम्हारे लिए hi किया है. जब तुम लोग hi खुश नहीं रहोगे तोह मतलब hi क्या... परेशान होने की ज़रुरत नहीं है. तुम्हारी माँ तुम्हारे साथ है बच्चो.
राहुल (स्माइल) : थैंक यू माँ! एंड... ी अंडरस्टैंड...
नेहा भी निशा की बात सुनके एकदम से बोहत खुश हो जाती है और निशा के गले लग जाती है.
कुछ hi घंटो के सफर के बाद ट्रैन ग्वालियर पहुँच गयी. सभी ट्रैन से उतरे और राहुल के घर के लिए प्रस्थान कर दिए.
जब सभी घर पोहचे तोह राजेश घर पर नहीं था, ड्यूटी पर था और ना hi उन्होंने राजेश को बताया था की सभी घर लौट रहे है. पर निशा के पास एक्स्ट्रा के थी और उसने घर का दरवाज़ा खोला और सभी को अंदर आमंत्रित किया.
अंदर आते hi सभी बारी बारी फ्रेश हुए, नहाये धोये और कपडे बदलने के बाद सभी हॉल में इखट्टा हो गए.
मोनिका : सुच ा नीस होम...
राहुल : आप पहली बार अंदर आयी हो न?
मोनिका : एससससस!
राहुल : ये घर छोटा है काफी. अब आपको ऐसे घरो की आदत नहीं होगी.
मोनिका : no डिअर! ऐसे घरो की तुलना उन् बड़े बंगलो से नहीं की जा सकती. इन् में अलग hi बात रहती है.
राहुल : और क्या है वो बात?
मोनिका : अपनापन्न, अपनों के बीच निकटता, प्यार, एकता... जो मेने अपनी लाइफ में कुछ सालो तक महसूस किया, जब तक माँ बाप थे... ः
कहते हुए मोनिका अपने माँ बाप को याद करने लगती है.
राहुल उठाते हुए उसके बगल से आके बैठ जाता है,
"तोह अपने इस राहुल को मौका दीजिये... की आपके लिए फिरसे वही चीज़ रेक्रेट कर सकू. पर थोड़ा अंतर रहेगा. मेरे माँ डैड आपके माँ डैड होंगे. आप मेरी पत्नी रहोगी और फिर हहै... आप माँ बनोगी और में पापा"
उसकी बात सुनते hi मोनिका के ासु चालक आते है और वो राहुल के गले लग जाती है. आस पास बैठे बाकी सभी लोग ये देख मुस्कुराने लगते है. काम से काम अब सबमे एकता आ गयी थी. पर आगे क्या होने वाला था?
राहुल : माँ! कॉल लगा दीजिये...
निशा : बेतु?? एक बार फिर सोच ले! क्या यही तेरा फाइनल डिसिशन है?
राहुल : यस माँ! It's फाइनल! आप चिंता मत करिये! यदि कुछ हुआ भी तोह उसके बाद भी, ी बिलीव की घर की बात घर में hi रहेगी!
निशा हां में सर हिलाते हुए किसी को कॉल लगाती है, कुछ देरर बातें करने लगती है फिर कॉल कट करके फिरसे किसी को लगाती है और फिरसे कट करके अंत में किसी को फिरसे कॉल लगाती है.
निशा : कर दिया बेतु!
राहुल : गुड! बस अब इंतज़ार करना है.
तानिया : क्या ये प्लान काम करेगा? चपडगंजु? एक बार बस बोलदे न तू की तुझे पूरा भरोसा है ये काम करेगा तोह मुझे उतनी टेंशन नहीं होएगी.
राहुल : इस बार में भी सूरे नहीं हु तानिया
वंशु : छोटी! तू कल से इतनी चुप्प क्यों है? कुछ बोल न! क्या तू मदद नहीं करेगी?
अंशु : सच कहु तोह दी! भाई की तरह में भी बोहत टेंशन में हु. मुझे भी नहीं पता है, की क्या होगा. और मुझे बोहत डर लग रहा है.
वंशु : सहित!!
ऋचा : उम्म्म्म... जो भी होगा अच्छे के लिए होगा दीदी... ऐसे सोचते रहेंगे तोह और भी टेंशन होने लगेगी. किसी ने कुछ भी नहीं खाया है जबसे आए है. क्यों न कुछ बना के खा लिया जाए.
निशा : सही कहा! अब जो होगा सो देखा जाएगा. में चली नाश्ता बनाने. कोई आएगा क्या मेरी मदद करने? मेरी होने वाली बहुओ में से?
ऋचा : में आती हु माँ जी...
तनीषा : माँ जी! चलिए. में भी आती हु.
मोनिका : मुझे भी खाना बोहत अच्छे से आता है बनाना.
निशा : तोह आ जाओ फिर तीनो. देरर किस बात की...
और निशा के साथ तीनो किचन में चली जाती है.
नेहा : भाई?? एवरीथिंग विल बे फाइन राइट?
राहुल : होप सो!!
और सभी नाश्ते की प्रतीक्षा करने लगते है पर सभी के अंदर आने वाले कल को लेकर चिंता ज़रूर थी. खासकर की नेहा अंशु वंशु और तानिया को. अब देखना ये है की कोण ज़्यादा saubhagya-shaali निकलेगा? या फिर सभी saubhagya-shaali रहेंगे?
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आज के लिए इतना hi गाइस!
धन्यवाद्!
अब तक...
तनीषा : मुझे कोई आपत्ति नहीं है डार्लिंग. जब तक तुम मेरे साथ हो. मुझे और कुछ नहीं चाहिए.
राहुल : don't वोर्री तनीषा! यू विल ऑलवेज बे माइन... तुम मेरी हो. और जल्द hi मेरी पत्नी बनोगी...
तनीषा : यस डार्लिंग!!
और दोनों एक मीठे चुम्बन में डूब जाते है.
अब आगे...
अगले दिन hi राहुल ने सभी को एकत्र करके एक मीटिंग राखी. मीटिंग आगे के प्लान को लेकर थी. राहुल ने जब अपना प्लान सभी को बताया तोह सभी ये सुन्न के चकित रह गए, खासकर निशा. निशा अपनी बॉहे सिकोड़े हुए राहुल के प्लान के बारे में सोचे जा रही थी. क्या राहुल का प्लान सही है? क्या ऐसा करने से सब कुछ सही हो जाएगा? कितनी संभावना है ये योजना सफल होने की? उसकी समझ में कुछ नहीं आ रहा था. एक गहरी सास लेते हुए निशा ने अंत में सारा राहुल के ऊपर चोरर दिया. यदि राहुल को जब भी उसकी आवश्यकता पड़ेगी निशा बेझिजक अपने बेतु की मदद के लिए आगे आ जाएगी.
योजना जो भी थी, वो सभी के भविष्य में राहुल के साथ सम्बन्ध को प्रभावित करने वाली थी. अब सब कुछ समय पर निर्भर था.
जहा समय ले जाए इन् सभी को.
इस वक़्त राहुल ख़ुशी और प्रीती के साथ उनके कमरे में मौजूद था. काफी समय हो गया साथ में रहते हुए पर दोनों में अकेले में उतने अच्छे से बात नहीं हो पायी थी. राहुल ने ये सोच के रखा था की वो ख़ुशी से एन्ड में बात करेगा. अब चुकी सभी के साथ उसने इंटरैक्ट कर लिया था तोह अब केवल ख़ुशी और प्रीती hi बची हुई थी और राहुल यहाँ आज रात उनके hi कमरे में मौजूद था उनसे बात करने के लिए.
बाकी सभी अपने अपने कमरों में थे. किसी को नहीं पता था की अभी ख़ुशी और प्रीती के साथ राहुल मौजूद है सिवाए ऋचा के. ऋचा अब राहुल के साथ उसके कमरे में hi सोती थी पिछले दो दिनों से. इच्छुक तोह तनीषा और बाकी सभी भी थी पर शादी के सबसे क़रीब अभी ऋचा थी तोह ऋचा को hi ये मौका मिला. डिनर आलरेडी सभी कर hi चुके थे और सोने के लिए अपने अपने रूम में आ चुके थे.
राहुल एक कुर्सी पर बैठे हुए ख़ुशी और प्रीती को देख रहा था जो उसके सामने बीएड पर बैठी हुई थी. प्रीती तोह नार्मल hi नज़र आ रही थी पर ख़ुशी के हाव भाव देख के लग रहा था की वो कुछ कहने के लिए हिचकिचा रही है,
"तोह कहो राहुल? क्या बात करनी है? अब फाइनली हमारी याद आ hi गयी तुम्हे? वर्ण बाकी लड़कियों से तोह फुर्सत hi नहीं है तुम्हे?" प्रीती ने अपनी चुप्पी तोड़ते हुए कहा.
तोह उसके विरोध में फौरन hi ख़ुशी ने उसका हाथ पकड़ लिया, "प्रीती!!! ऐसा नहीं कहो! वो सब राहुल की लवर्स है"
ख़ुशी की उदारता देखते hi प्रीती अपनी आँखों को घुमाते हुए अपना हाथ चुर्रा लेती है, "ओह! C'mon ख़ुशी! तुम जिस से प्यार करती हो वो दूसरी लड़कियों के साथ मज़्ज़े कर रहा है और तुम्हे ज़रा भी आपत्ति नहीं है?"
ख़ुशी : देखो प्रीती! बाकी लोग भी तोह ये जानते हुए भी राहुल से जुड़े हुए है न और उतना hi प्यार कर रहे है? ी क्नोव आईटी हुर्ट्स बूत... में सभी की तरह धीरे धीरे मैनेज कर लुंगी. मुझे समझ आ गया है. मेरा राहुल पे एकाधिकार नहीं है और न hi में या कोई और ऐसा कर सकता है.
कहते हुए ख़ुशी ने नज़रे नीचे झुका ली. शायद अभी भी उसमे थोड़ी बोहत इस बात को लेकर निराशा थी की वो राहुल पर एकाधिकार नहीं जाता सकती. देखा जाए तोह सभी लड़कियों में ये हलकी निराशा ज़रूर होगी और सभी की यही कामना भी होगी की वो राहुल पे हक़ जताते हुए उससे केवल सिर्फ अपना कर ले. सबसे ज़्यादा तोह नेहा और तानिया hi होंगे इस मामले में. पर ये नामुमकिन था, काम से काम इस जनम में तोह नामुमकिन hi था.
एक गहरी सास लेते हुए राहुल ने दोनों को फिरसे देखा और फिर अपना मुँह खोला, "ख़ुशी! तुम से केवल दो hi सवाल है मेरे"
ख़ुशी : पूछो राहुल!
राहुल : क्या तुम मुझसे प्यार करती हो?
इस प्रश्न पर ख़ुशी फौरन hi अपना सर हां में हिलाने लगती है, "ऑफ़ कोर्स! ी लव यू राहुल! ी लव यू सो मच..." और उसके बाद hi वो शर्माते हुए फिरसे नीचे देखने लगती है.
बीच बीच में वो नज़र उठा के राहुल को देखती जा रही थी पर जैसे hi राहुल ने स्माइल किया ख़ुशी दुबारा से शर्माते हुए नीचे देखने लगी. बेचारी के गाल सुर्ख लाल पद रहे थे.
राहुल : दूसरा सवाल ख़ुशी! क्या तुम्हारे डैड यानी की मेरे मास्टर शादी के लिए राज़ी होएंगे ये सब जानते हुए भी की मेरी इतनी चाहने वाली है...!?
इस सवाल से ख़ुशी थोड़ी दुविधा में पड़ गयी. उसके dad...kya कहेंगे? क्या वो राज़ी होएंगे? उससे इसका जवाब बिलकुल नहीं पता था और सही कहा जाए तोह ख़ुशी को खुद को इसकी संभावना 50 प्रतिशत से भी काम नज़र आ रही थी.
प्रीती : सोच क्या रही हो ख़ुशी? तुम और में मिलके अंकल को मन लेंगे. में पूरा जोरर लगा दूंगी अपना... हां बोलो राहुल को.
प्रीती की बात सुन्न ख़ुशी राहुल को देखती है और निचला होंठ दातो से दबाते हुए हां में सर हिला देती है.
राहुल (स्माइल) : गुड... आज से तुम मेरी हो
राहुल ने मानो जैसे घोषणा कर दी और उसकी ये बात सुनते hi जैसे ख़ुशी के दिल की धड़कने तेज़्ज़ हो गयी.
और अगले पल hi राहुल कुर्सी से उठा और आगे बढ़ते हुए उसने ख़ुशी की चीन को अपने दाए हाथ से पकड़ते हुए उठाया, उसकी आँखों में देखा और उसके होंठ अपने होंठो से चुर्रा लिए.
अचानक हुई इस हरकत से ख़ुशी हक्की बक्की सी रह गयी. उसकी आँखें फेल गयी और वो राहुल के चेहरे को देख रही थी हैरान होते हुए. राहुल के होंठ उसके होंठो से जुड़े हुए थे.
ये पहली बार था जब राहुल ने खुदसे उससे किश किया. धड़कने मानो जैसे किसी ट्रैन के माफ़िक़ तेज़्ज़ हो गयी.
पर अगले पल hi वो एहसास जैसे गायब हो गया. राहुल ख़ुशी के होंठ चोररटे हुए पीछे हो गया. ख़ुशी को जैसे मानो अधूरा अधूरा सा लगने लगा. अब उसका मैं कर रहा था की काश ये लम्हा और लम्बा होता.
बगल में बैठी प्रीती अभी अभी जो हुआ उससे आँखें फाड़े देख रही थी. उसकी समझ में नहीं आया की पल भर में ये क्या हो गया.
इधर ख़ुशी अपने गालो को हाथो से छिपाते हुए एकदम शर्मा गयी और पलट कर उसने बेडशीट उठा के अपने सर के ऊपर दाल ली...
उसकी ये हरकत देख राहुल को हस्सी आ गयी. सो क्यूट.
"ये भले hi उम्र में मेरी गुड़िया के बराबर है पर लगता है बचपने में ये गुड़िया से आगे है. अभी भी अल्हड़पन भरा है इसमें. वेल! ी don't मंद थौघ. जैसी है ये वैसी hi अच्छी है..." , राहुल ने मुस्कुराते हुए अपने मैं में सोचा.
प्रीती ख़ुशी को देख अपने हाथ खड़े कर देती है, "ऐसे चलेगा तोह कैसे हो पायेगा ख़ुशी? लिखे सीरियसली? एक किश में तुम्हारा ये हाल है?? अभी तुम..."
प्रीती इस से पहले की आगे कुछ बोलती उसके होंठ पहले hi राहुल के होंठो के क़ब्ज़े में आ गए.
ख़ुशी ने जैसे hi प्रीती की आवाज़ अचानक से बंद होती हुई सुनी तोह वो उठ के बैठ गयी और सामने का नज़ारा देख एकदम चौंक गयी. ये प्रीती और राहुल की दूसरी किश थी. पहली बार राहुल ने प्रीती को एकदम से किश करके चुप करवाया था जब प्रीती पैनिक हो गयी थी ख़ुशी की किडनेपिंग के वक़्त.
और इस बार भी राहुल ने उससे कहते हुए बीच में उसके होंठ चुर्रा लिए. कुछ सेकण्ड्स बाद hi राहुल प्रीती से दूर हो गया, "प्रीती! रही बात हमारे रिलेशनशिप की... तोह ी थिंक वे नीड सम मोरे टाइम. गुड नाईट तो बोथ ऑफ़ यू"
और इतना कहते हुए राहुल वह से निकल गया. इधर प्रीती भी आश्चर्य चकित सी बस आँखें चौड़ी किये दरवाज़े को घूर रही थी जहा से राहुल अभी अभी गया था.
"हेहेहे! लुक ात यू नाउ... बड़ी आयी मुझे बोलने वाली. खुद की हालत देखो" ख़ुशी ने हस्ते हुए प्रीती का मज़ाक उड़ाते हुए कहा.
थोड़ी देरर पहले तोह उससे भाषण दे रही थी प्रीती पर अब क्या हुआ? तोते उड़द गए उसके खुद के तोह.
"हँ?? N..ni.. khushi...w..wo तोह mein...aise hi...usne.. mein..mein रेडी नहीं thi...na उसने अचानक se...wo...isliye mein...aisa" प्रीती भी एकदम हकलाते हुए ख़ुशी को अपनी सफाई बया करने लगती है तोह एक बार फिर ख़ुशी की प्यारी सी किलकारी चूत जाती है
"बूत आईटी फेल्ट गुड", ख़ुशी अपनी ऊँगली ले जाके अपने होंठो पर स्पर्श कराती है जहा पर कुछ देरर पहले राहुल के होंठ लगे हुए थे. मानो जैसे वो राहुल के चोर्रे हुए छाप को ढूंढ रही हो अपने होंठो पर.
उसकी बात सुन्न के प्रीती भी शर्माते हुए अपने होंठो पर उंगलियों से स्पर्श करने लगती है, "येह! यू अरे राइट!"
अगला सवेरा हुआ, सभी प्लान के अकॉर्डिंग ग्वालियर यानी के राहुल के घर के लिए रवाना होने लगे. प्रीती और ख़ुशी को चोरर कर. उनका वह अभी के लिए कोई काम नहीं था. उनका वह रहना समस्या को और भी बड़ा देता.
इस वक़्त सभी एक कोच में ट्राइब में सफर कर रहे थे. कोई जल्दी थी नहीं और निशा ट्रैन hi प्रेफर करती है इसलिए सभी ने ट्रैन से जाने का hi फैसला लिया.
ट्रैन में...
निशा राहुल के सामने वाली बिरथ पर बैठी हुई थी. राहुल उसके सामने था. राहुल के बगल से नेहा उसकी गॉड में सर्र रख के लेती हुई थी. और बाकी सभी लड़किया अपनी अपनी बिरथ पर विराजमान थी.
निशा : बेतु! क्या ये सही है? तूने सब कुछ सोच लिया है न अच्छे से? क्युकी मुझे तोह बोहत hi जोखिम दिखाई दे रहा है इसमें.
राहुल : जोखिम तोह है माँ! बोहत है! सच कहु तोह मुझे भी पूरा कॉन्फिडेंस नहीं है.
राहुल की बात सुन्न इस्सस बार निशा वाक़ई घबरा जाती है,
निशा : बेचू!??
राहुल : हां माँ! देखते है आगे क्या होता है पर मेरे हिसाब से... यही बेस्ट रास्ता है.
तभी उतने में नेहा उठ के बैठ जाती है और राहुल के गालो पर जोरर से एक पप्पी दे देती है,
नेहा : भाई!! मुझे थोड़ा डर लग रहा है?
राहुल : किसका? लोगो का?
नेहा : लोगो में तोह में किसी से नहीं दरर्ति भाई. डर इस बात का है... की... में तुमसे दूर नहीं होना चाहती भाई. मुझे इस बात का बोहत डर है.
कहते हुए नेहा एक बार निशा पर नज़र डालती है तोह निशा मुस्कुराते हुए कहती है, "तू अपने सेज भाई से प्यार करती है न?"
नेहा फौरन hi हां में सर हिला देती है.
निशा एक गहरी सास लेते हुए, "मुझे पता चल गया था. ऐसा कैसे हुए मेरी बच्ची?"
"माँ! ये अभी से थोड़ी न है. सच कहु... तोह... मुझे भाई से बचपन में hi प्यार हो गया था. बोहत पहले... में तभी भाई को बता देना चाहती थी पर दरर्ति थी..."
नेहा ने राहुल को चुपके से देखते हुए कहा.
नेहा की बात से निशा तोह हैरान हुई hi पर राहुल भी हैरान था. उससे नहीं पता था उसकी गुड़िया उस से बचपन से hi प्यार करती है.
नेहा : यदि मेने उस वक़्त hi भाई को प्रोपोज़ कर दिया होता न तोह आज भाई के साथ इतनी साड़ी लड़किया नहीं होती. भाई सिर्फ मेरा होता
कहते हुए नेहा राहुल की कमर में चुटकी लेने लगती है तोह राहुल दर्द होने की एक्टिंग करने लगता है...
राहुल : आउच! Gudiya...lag रही है
नेहा : हम्फ!!
मुँह फुलाते हुए नेहा अपनी नज़रे फेरर लेती है तोह राहुल उससे पीछे से प्यार दिखाते हुए जकड लेता है, "अरे मेरा गुड़िया! नाराज़ हो गयी? सॉरी बाबा! पर देख! तू और mein...hum साथ तोह है न... अब मुँह मत फुला"
पर नेहा तोह जैसे आज अपने भाई की टांग खींचने के पूरे मूड में थी. वो अभी भी मुँह फुलाये hi बैठी थी तोह राहुल उससे घुमा के उसके होंठ एकदम से चुम लेता है.
इस बार नेहा हड़बड़ा जाती है. सामने उसकी माँ निशा जो बैठी thi...uske बाद भी राहुल ने ये सब उसके साथ कर दिया. इतनी हिम्मत?
नेहा थोड़ी चिंतित भाव से निशा को देखि तोह निशा मुस्कुरा रही थी.
निशा : बेतु! सबके सामने नहीं! फिलहाल नहीं! बाकी... में तुम दोनों का पूरा साथ दूंगी. बच्चो की hi ख़ुशी में तोह आखिर मेरी ख़ुशी है... सब कुछ तोह तुम्हारे लिए hi किया है. जब तुम लोग hi खुश नहीं रहोगे तोह मतलब hi क्या... परेशान होने की ज़रुरत नहीं है. तुम्हारी माँ तुम्हारे साथ है बच्चो.
राहुल (स्माइल) : थैंक यू माँ! एंड... ी अंडरस्टैंड...
नेहा भी निशा की बात सुनके एकदम से बोहत खुश हो जाती है और निशा के गले लग जाती है.
कुछ hi घंटो के सफर के बाद ट्रैन ग्वालियर पहुँच गयी. सभी ट्रैन से उतरे और राहुल के घर के लिए प्रस्थान कर दिए.
जब सभी घर पोहचे तोह राजेश घर पर नहीं था, ड्यूटी पर था और ना hi उन्होंने राजेश को बताया था की सभी घर लौट रहे है. पर निशा के पास एक्स्ट्रा के थी और उसने घर का दरवाज़ा खोला और सभी को अंदर आमंत्रित किया.
अंदर आते hi सभी बारी बारी फ्रेश हुए, नहाये धोये और कपडे बदलने के बाद सभी हॉल में इखट्टा हो गए.
मोनिका : सुच ा नीस होम...
राहुल : आप पहली बार अंदर आयी हो न?
मोनिका : एससससस!
राहुल : ये घर छोटा है काफी. अब आपको ऐसे घरो की आदत नहीं होगी.
मोनिका : no डिअर! ऐसे घरो की तुलना उन् बड़े बंगलो से नहीं की जा सकती. इन् में अलग hi बात रहती है.
राहुल : और क्या है वो बात?
मोनिका : अपनापन्न, अपनों के बीच निकटता, प्यार, एकता... जो मेने अपनी लाइफ में कुछ सालो तक महसूस किया, जब तक माँ बाप थे... ः
कहते हुए मोनिका अपने माँ बाप को याद करने लगती है.
राहुल उठाते हुए उसके बगल से आके बैठ जाता है,
"तोह अपने इस राहुल को मौका दीजिये... की आपके लिए फिरसे वही चीज़ रेक्रेट कर सकू. पर थोड़ा अंतर रहेगा. मेरे माँ डैड आपके माँ डैड होंगे. आप मेरी पत्नी रहोगी और फिर हहै... आप माँ बनोगी और में पापा"
उसकी बात सुनते hi मोनिका के ासु चालक आते है और वो राहुल के गले लग जाती है. आस पास बैठे बाकी सभी लोग ये देख मुस्कुराने लगते है. काम से काम अब सबमे एकता आ गयी थी. पर आगे क्या होने वाला था?
राहुल : माँ! कॉल लगा दीजिये...
निशा : बेतु?? एक बार फिर सोच ले! क्या यही तेरा फाइनल डिसिशन है?
राहुल : यस माँ! It's फाइनल! आप चिंता मत करिये! यदि कुछ हुआ भी तोह उसके बाद भी, ी बिलीव की घर की बात घर में hi रहेगी!
निशा हां में सर हिलाते हुए किसी को कॉल लगाती है, कुछ देरर बातें करने लगती है फिर कॉल कट करके फिरसे किसी को लगाती है और फिरसे कट करके अंत में किसी को फिरसे कॉल लगाती है.
निशा : कर दिया बेतु!
राहुल : गुड! बस अब इंतज़ार करना है.
तानिया : क्या ये प्लान काम करेगा? चपडगंजु? एक बार बस बोलदे न तू की तुझे पूरा भरोसा है ये काम करेगा तोह मुझे उतनी टेंशन नहीं होएगी.
राहुल : इस बार में भी सूरे नहीं हु तानिया
वंशु : छोटी! तू कल से इतनी चुप्प क्यों है? कुछ बोल न! क्या तू मदद नहीं करेगी?
अंशु : सच कहु तोह दी! भाई की तरह में भी बोहत टेंशन में हु. मुझे भी नहीं पता है, की क्या होगा. और मुझे बोहत डर लग रहा है.
वंशु : सहित!!
ऋचा : उम्म्म्म... जो भी होगा अच्छे के लिए होगा दीदी... ऐसे सोचते रहेंगे तोह और भी टेंशन होने लगेगी. किसी ने कुछ भी नहीं खाया है जबसे आए है. क्यों न कुछ बना के खा लिया जाए.
निशा : सही कहा! अब जो होगा सो देखा जाएगा. में चली नाश्ता बनाने. कोई आएगा क्या मेरी मदद करने? मेरी होने वाली बहुओ में से?
ऋचा : में आती हु माँ जी...
तनीषा : माँ जी! चलिए. में भी आती हु.
मोनिका : मुझे भी खाना बोहत अच्छे से आता है बनाना.
निशा : तोह आ जाओ फिर तीनो. देरर किस बात की...
और निशा के साथ तीनो किचन में चली जाती है.
नेहा : भाई?? एवरीथिंग विल बे फाइन राइट?
राहुल : होप सो!!
और सभी नाश्ते की प्रतीक्षा करने लगते है पर सभी के अंदर आने वाले कल को लेकर चिंता ज़रूर थी. खासकर की नेहा अंशु वंशु और तानिया को. अब देखना ये है की कोण ज़्यादा saubhagya-shaali निकलेगा? या फिर सभी saubhagya-shaali रहेंगे?
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आज के लिए इतना hi गाइस!
धन्यवाद्!