इन्सेस्ट आखिर क्यों? फ्रॉम हैट्रेड तो लव (कम्प्लेटेड) - Page 13 - SexBaba
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इन्सेस्ट आखिर क्यों? फ्रॉम हैट्रेड तो लव (कम्प्लेटेड)

अपडेट - 104

अब तक...

तनीषा : मुझे कोई आपत्ति नहीं है डार्लिंग. जब तक तुम मेरे साथ हो. मुझे और कुछ नहीं चाहिए.

राहुल : don't वोर्री तनीषा! यू विल ऑलवेज बे माइन... तुम मेरी हो. और जल्द hi मेरी पत्नी बनोगी...

तनीषा : यस डार्लिंग!!


और दोनों एक मीठे चुम्बन में डूब जाते है.

अब आगे...

अगले दिन hi राहुल ने सभी को एकत्र करके एक मीटिंग राखी. मीटिंग आगे के प्लान को लेकर थी. राहुल ने जब अपना प्लान सभी को बताया तोह सभी ये सुन्न के चकित रह गए, खासकर निशा. निशा अपनी बॉहे सिकोड़े हुए राहुल के प्लान के बारे में सोचे जा रही थी. क्या राहुल का प्लान सही है? क्या ऐसा करने से सब कुछ सही हो जाएगा? कितनी संभावना है ये योजना सफल होने की? उसकी समझ में कुछ नहीं आ रहा था. एक गहरी सास लेते हुए निशा ने अंत में सारा राहुल के ऊपर चोरर दिया. यदि राहुल को जब भी उसकी आवश्यकता पड़ेगी निशा बेझिजक अपने बेतु की मदद के लिए आगे आ जाएगी.

योजना जो भी थी, वो सभी के भविष्य में राहुल के साथ सम्बन्ध को प्रभावित करने वाली थी. अब सब कुछ समय पर निर्भर था.

जहा समय ले जाए इन् सभी को.

इस वक़्त राहुल ख़ुशी और प्रीती के साथ उनके कमरे में मौजूद था. काफी समय हो गया साथ में रहते हुए पर दोनों में अकेले में उतने अच्छे से बात नहीं हो पायी थी. राहुल ने ये सोच के रखा था की वो ख़ुशी से एन्ड में बात करेगा. अब चुकी सभी के साथ उसने इंटरैक्ट कर लिया था तोह अब केवल ख़ुशी और प्रीती hi बची हुई थी और राहुल यहाँ आज रात उनके hi कमरे में मौजूद था उनसे बात करने के लिए.

बाकी सभी अपने अपने कमरों में थे. किसी को नहीं पता था की अभी ख़ुशी और प्रीती के साथ राहुल मौजूद है सिवाए ऋचा के. ऋचा अब राहुल के साथ उसके कमरे में hi सोती थी पिछले दो दिनों से. इच्छुक तोह तनीषा और बाकी सभी भी थी पर शादी के सबसे क़रीब अभी ऋचा थी तोह ऋचा को hi ये मौका मिला. डिनर आलरेडी सभी कर hi चुके थे और सोने के लिए अपने अपने रूम में आ चुके थे.

राहुल एक कुर्सी पर बैठे हुए ख़ुशी और प्रीती को देख रहा था जो उसके सामने बीएड पर बैठी हुई थी. प्रीती तोह नार्मल hi नज़र आ रही थी पर ख़ुशी के हाव भाव देख के लग रहा था की वो कुछ कहने के लिए हिचकिचा रही है,

"तोह कहो राहुल? क्या बात करनी है? अब फाइनली हमारी याद आ hi गयी तुम्हे? वर्ण बाकी लड़कियों से तोह फुर्सत hi नहीं है तुम्हे?" प्रीती ने अपनी चुप्पी तोड़ते हुए कहा.

तोह उसके विरोध में फौरन hi ख़ुशी ने उसका हाथ पकड़ लिया, "प्रीती!!! ऐसा नहीं कहो! वो सब राहुल की लवर्स है"

ख़ुशी की उदारता देखते hi प्रीती अपनी आँखों को घुमाते हुए अपना हाथ चुर्रा लेती है, "ओह! C'mon ख़ुशी! तुम जिस से प्यार करती हो वो दूसरी लड़कियों के साथ मज़्ज़े कर रहा है और तुम्हे ज़रा भी आपत्ति नहीं है?"

ख़ुशी : देखो प्रीती! बाकी लोग भी तोह ये जानते हुए भी राहुल से जुड़े हुए है न और उतना hi प्यार कर रहे है? ी क्नोव आईटी हुर्ट्स बूत... में सभी की तरह धीरे धीरे मैनेज कर लुंगी. मुझे समझ आ गया है. मेरा राहुल पे एकाधिकार नहीं है और न hi में या कोई और ऐसा कर सकता है.

कहते हुए ख़ुशी ने नज़रे नीचे झुका ली. शायद अभी भी उसमे थोड़ी बोहत इस बात को लेकर निराशा थी की वो राहुल पर एकाधिकार नहीं जाता सकती. देखा जाए तोह सभी लड़कियों में ये हलकी निराशा ज़रूर होगी और सभी की यही कामना भी होगी की वो राहुल पे हक़ जताते हुए उससे केवल सिर्फ अपना कर ले. सबसे ज़्यादा तोह नेहा और तानिया hi होंगे इस मामले में. पर ये नामुमकिन था, काम से काम इस जनम में तोह नामुमकिन hi था.

एक गहरी सास लेते हुए राहुल ने दोनों को फिरसे देखा और फिर अपना मुँह खोला, "ख़ुशी! तुम से केवल दो hi सवाल है मेरे"

ख़ुशी : पूछो राहुल!

राहुल : क्या तुम मुझसे प्यार करती हो?

इस प्रश्न पर ख़ुशी फौरन hi अपना सर हां में हिलाने लगती है, "ऑफ़ कोर्स! ी लव यू राहुल! ी लव यू सो मच..." और उसके बाद hi वो शर्माते हुए फिरसे नीचे देखने लगती है.

बीच बीच में वो नज़र उठा के राहुल को देखती जा रही थी पर जैसे hi राहुल ने स्माइल किया ख़ुशी दुबारा से शर्माते हुए नीचे देखने लगी. बेचारी के गाल सुर्ख लाल पद रहे थे.

राहुल : दूसरा सवाल ख़ुशी! क्या तुम्हारे डैड यानी की मेरे मास्टर शादी के लिए राज़ी होएंगे ये सब जानते हुए भी की मेरी इतनी चाहने वाली है...!?

इस सवाल से ख़ुशी थोड़ी दुविधा में पड़ गयी. उसके dad...kya कहेंगे? क्या वो राज़ी होएंगे? उससे इसका जवाब बिलकुल नहीं पता था और सही कहा जाए तोह ख़ुशी को खुद को इसकी संभावना 50 प्रतिशत से भी काम नज़र आ रही थी.

प्रीती : सोच क्या रही हो ख़ुशी? तुम और में मिलके अंकल को मन लेंगे. में पूरा जोरर लगा दूंगी अपना... हां बोलो राहुल को.

प्रीती की बात सुन्न ख़ुशी राहुल को देखती है और निचला होंठ दातो से दबाते हुए हां में सर हिला देती है.

राहुल (स्माइल) : गुड... आज से तुम मेरी हो

राहुल ने मानो जैसे घोषणा कर दी और उसकी ये बात सुनते hi जैसे ख़ुशी के दिल की धड़कने तेज़्ज़ हो गयी.

और अगले पल hi राहुल कुर्सी से उठा और आगे बढ़ते हुए उसने ख़ुशी की चीन को अपने दाए हाथ से पकड़ते हुए उठाया, उसकी आँखों में देखा और उसके होंठ अपने होंठो से चुर्रा लिए.

अचानक हुई इस हरकत से ख़ुशी हक्की बक्की सी रह गयी. उसकी आँखें फेल गयी और वो राहुल के चेहरे को देख रही थी हैरान होते हुए. राहुल के होंठ उसके होंठो से जुड़े हुए थे.

ये पहली बार था जब राहुल ने खुदसे उससे किश किया. धड़कने मानो जैसे किसी ट्रैन के माफ़िक़ तेज़्ज़ हो गयी.

पर अगले पल hi वो एहसास जैसे गायब हो गया. राहुल ख़ुशी के होंठ चोररटे हुए पीछे हो गया. ख़ुशी को जैसे मानो अधूरा अधूरा सा लगने लगा. अब उसका मैं कर रहा था की काश ये लम्हा और लम्बा होता.

बगल में बैठी प्रीती अभी अभी जो हुआ उससे आँखें फाड़े देख रही थी. उसकी समझ में नहीं आया की पल भर में ये क्या हो गया.

इधर ख़ुशी अपने गालो को हाथो से छिपाते हुए एकदम शर्मा गयी और पलट कर उसने बेडशीट उठा के अपने सर के ऊपर दाल ली...

उसकी ये हरकत देख राहुल को हस्सी आ गयी. सो क्यूट.

"ये भले hi उम्र में मेरी गुड़िया के बराबर है पर लगता है बचपने में ये गुड़िया से आगे है. अभी भी अल्हड़पन भरा है इसमें. वेल! ी don't मंद थौघ. जैसी है ये वैसी hi अच्छी है..." , राहुल ने मुस्कुराते हुए अपने मैं में सोचा.

प्रीती ख़ुशी को देख अपने हाथ खड़े कर देती है, "ऐसे चलेगा तोह कैसे हो पायेगा ख़ुशी? लिखे सीरियसली? एक किश में तुम्हारा ये हाल है?? अभी तुम..."

प्रीती इस से पहले की आगे कुछ बोलती उसके होंठ पहले hi राहुल के होंठो के क़ब्ज़े में आ गए.

ख़ुशी ने जैसे hi प्रीती की आवाज़ अचानक से बंद होती हुई सुनी तोह वो उठ के बैठ गयी और सामने का नज़ारा देख एकदम चौंक गयी. ये प्रीती और राहुल की दूसरी किश थी. पहली बार राहुल ने प्रीती को एकदम से किश करके चुप करवाया था जब प्रीती पैनिक हो गयी थी ख़ुशी की किडनेपिंग के वक़्त.

और इस बार भी राहुल ने उससे कहते हुए बीच में उसके होंठ चुर्रा लिए. कुछ सेकण्ड्स बाद hi राहुल प्रीती से दूर हो गया, "प्रीती! रही बात हमारे रिलेशनशिप की... तोह ी थिंक वे नीड सम मोरे टाइम. गुड नाईट तो बोथ ऑफ़ यू"

और इतना कहते हुए राहुल वह से निकल गया. इधर प्रीती भी आश्चर्य चकित सी बस आँखें चौड़ी किये दरवाज़े को घूर रही थी जहा से राहुल अभी अभी गया था.

"हेहेहे! लुक ात यू नाउ... बड़ी आयी मुझे बोलने वाली. खुद की हालत देखो" ख़ुशी ने हस्ते हुए प्रीती का मज़ाक उड़ाते हुए कहा.

थोड़ी देरर पहले तोह उससे भाषण दे रही थी प्रीती पर अब क्या हुआ? तोते उड़द गए उसके खुद के तोह.

"हँ?? N..ni.. khushi...w..wo तोह mein...aise hi...usne.. mein..mein रेडी नहीं thi...na उसने अचानक se...wo...isliye mein...aisa" प्रीती भी एकदम हकलाते हुए ख़ुशी को अपनी सफाई बया करने लगती है तोह एक बार फिर ख़ुशी की प्यारी सी किलकारी चूत जाती है

"बूत आईटी फेल्ट गुड", ख़ुशी अपनी ऊँगली ले जाके अपने होंठो पर स्पर्श कराती है जहा पर कुछ देरर पहले राहुल के होंठ लगे हुए थे. मानो जैसे वो राहुल के चोर्रे हुए छाप को ढूंढ रही हो अपने होंठो पर.

उसकी बात सुन्न के प्रीती भी शर्माते हुए अपने होंठो पर उंगलियों से स्पर्श करने लगती है, "येह! यू अरे राइट!"

अगला सवेरा हुआ, सभी प्लान के अकॉर्डिंग ग्वालियर यानी के राहुल के घर के लिए रवाना होने लगे. प्रीती और ख़ुशी को चोरर कर. उनका वह अभी के लिए कोई काम नहीं था. उनका वह रहना समस्या को और भी बड़ा देता.

इस वक़्त सभी एक कोच में ट्राइब में सफर कर रहे थे. कोई जल्दी थी नहीं और निशा ट्रैन hi प्रेफर करती है इसलिए सभी ने ट्रैन से जाने का hi फैसला लिया.

ट्रैन में...

निशा राहुल के सामने वाली बिरथ पर बैठी हुई थी. राहुल उसके सामने था. राहुल के बगल से नेहा उसकी गॉड में सर्र रख के लेती हुई थी. और बाकी सभी लड़किया अपनी अपनी बिरथ पर विराजमान थी.

निशा : बेतु! क्या ये सही है? तूने सब कुछ सोच लिया है न अच्छे से? क्युकी मुझे तोह बोहत hi जोखिम दिखाई दे रहा है इसमें.

राहुल : जोखिम तोह है माँ! बोहत है! सच कहु तोह मुझे भी पूरा कॉन्फिडेंस नहीं है.

राहुल की बात सुन्न इस्सस बार निशा वाक़ई घबरा जाती है,

निशा : बेचू!??

राहुल : हां माँ! देखते है आगे क्या होता है पर मेरे हिसाब से... यही बेस्ट रास्ता है.

तभी उतने में नेहा उठ के बैठ जाती है और राहुल के गालो पर जोरर से एक पप्पी दे देती है,

नेहा : भाई!! मुझे थोड़ा डर लग रहा है?

राहुल : किसका? लोगो का?

नेहा : लोगो में तोह में किसी से नहीं दरर्ति भाई. डर इस बात का है... की... में तुमसे दूर नहीं होना चाहती भाई. मुझे इस बात का बोहत डर है.

कहते हुए नेहा एक बार निशा पर नज़र डालती है तोह निशा मुस्कुराते हुए कहती है, "तू अपने सेज भाई से प्यार करती है न?"

नेहा फौरन hi हां में सर हिला देती है.

निशा एक गहरी सास लेते हुए, "मुझे पता चल गया था. ऐसा कैसे हुए मेरी बच्ची?"

"माँ! ये अभी से थोड़ी न है. सच कहु... तोह... मुझे भाई से बचपन में hi प्यार हो गया था. बोहत पहले... में तभी भाई को बता देना चाहती थी पर दरर्ति थी..."

नेहा ने राहुल को चुपके से देखते हुए कहा.

नेहा की बात से निशा तोह हैरान हुई hi पर राहुल भी हैरान था. उससे नहीं पता था उसकी गुड़िया उस से बचपन से hi प्यार करती है.

नेहा : यदि मेने उस वक़्त hi भाई को प्रोपोज़ कर दिया होता न तोह आज भाई के साथ इतनी साड़ी लड़किया नहीं होती. भाई सिर्फ मेरा होता

कहते हुए नेहा राहुल की कमर में चुटकी लेने लगती है तोह राहुल दर्द होने की एक्टिंग करने लगता है...

राहुल : आउच! Gudiya...lag रही है

नेहा : हम्फ!!

मुँह फुलाते हुए नेहा अपनी नज़रे फेरर लेती है तोह राहुल उससे पीछे से प्यार दिखाते हुए जकड लेता है, "अरे मेरा गुड़िया! नाराज़ हो गयी? सॉरी बाबा! पर देख! तू और mein...hum साथ तोह है न... अब मुँह मत फुला"

पर नेहा तोह जैसे आज अपने भाई की टांग खींचने के पूरे मूड में थी. वो अभी भी मुँह फुलाये hi बैठी थी तोह राहुल उससे घुमा के उसके होंठ एकदम से चुम लेता है.

इस बार नेहा हड़बड़ा जाती है. सामने उसकी माँ निशा जो बैठी thi...uske बाद भी राहुल ने ये सब उसके साथ कर दिया. इतनी हिम्मत?

नेहा थोड़ी चिंतित भाव से निशा को देखि तोह निशा मुस्कुरा रही थी.

निशा : बेतु! सबके सामने नहीं! फिलहाल नहीं! बाकी... में तुम दोनों का पूरा साथ दूंगी. बच्चो की hi ख़ुशी में तोह आखिर मेरी ख़ुशी है... सब कुछ तोह तुम्हारे लिए hi किया है. जब तुम लोग hi खुश नहीं रहोगे तोह मतलब hi क्या... परेशान होने की ज़रुरत नहीं है. तुम्हारी माँ तुम्हारे साथ है बच्चो.

राहुल (स्माइल) : थैंक यू माँ! एंड... ी अंडरस्टैंड...

नेहा भी निशा की बात सुनके एकदम से बोहत खुश हो जाती है और निशा के गले लग जाती है.

कुछ hi घंटो के सफर के बाद ट्रैन ग्वालियर पहुँच गयी. सभी ट्रैन से उतरे और राहुल के घर के लिए प्रस्थान कर दिए.

जब सभी घर पोहचे तोह राजेश घर पर नहीं था, ड्यूटी पर था और ना hi उन्होंने राजेश को बताया था की सभी घर लौट रहे है. पर निशा के पास एक्स्ट्रा के थी और उसने घर का दरवाज़ा खोला और सभी को अंदर आमंत्रित किया.

अंदर आते hi सभी बारी बारी फ्रेश हुए, नहाये धोये और कपडे बदलने के बाद सभी हॉल में इखट्टा हो गए.

मोनिका : सुच ा नीस होम...

राहुल : आप पहली बार अंदर आयी हो न?

मोनिका : एससससस!

राहुल : ये घर छोटा है काफी. अब आपको ऐसे घरो की आदत नहीं होगी.

मोनिका : no डिअर! ऐसे घरो की तुलना उन् बड़े बंगलो से नहीं की जा सकती. इन् में अलग hi बात रहती है.

राहुल : और क्या है वो बात?

मोनिका : अपनापन्न, अपनों के बीच निकटता, प्यार, एकता... जो मेने अपनी लाइफ में कुछ सालो तक महसूस किया, जब तक माँ बाप थे... ः

कहते हुए मोनिका अपने माँ बाप को याद करने लगती है.

राहुल उठाते हुए उसके बगल से आके बैठ जाता है,

"तोह अपने इस राहुल को मौका दीजिये... की आपके लिए फिरसे वही चीज़ रेक्रेट कर सकू. पर थोड़ा अंतर रहेगा. मेरे माँ डैड आपके माँ डैड होंगे. आप मेरी पत्नी रहोगी और फिर हहै... आप माँ बनोगी और में पापा"

उसकी बात सुनते hi मोनिका के ासु चालक आते है और वो राहुल के गले लग जाती है. आस पास बैठे बाकी सभी लोग ये देख मुस्कुराने लगते है. काम से काम अब सबमे एकता आ गयी थी. पर आगे क्या होने वाला था?

राहुल : माँ! कॉल लगा दीजिये...

निशा : बेतु?? एक बार फिर सोच ले! क्या यही तेरा फाइनल डिसिशन है?

राहुल : यस माँ! It's फाइनल! आप चिंता मत करिये! यदि कुछ हुआ भी तोह उसके बाद भी, ी बिलीव की घर की बात घर में hi रहेगी!

निशा हां में सर हिलाते हुए किसी को कॉल लगाती है, कुछ देरर बातें करने लगती है फिर कॉल कट करके फिरसे किसी को लगाती है और फिरसे कट करके अंत में किसी को फिरसे कॉल लगाती है.

निशा : कर दिया बेतु!

राहुल : गुड! बस अब इंतज़ार करना है.

तानिया : क्या ये प्लान काम करेगा? चपडगंजु? एक बार बस बोलदे न तू की तुझे पूरा भरोसा है ये काम करेगा तोह मुझे उतनी टेंशन नहीं होएगी.

राहुल : इस बार में भी सूरे नहीं हु तानिया

वंशु : छोटी! तू कल से इतनी चुप्प क्यों है? कुछ बोल न! क्या तू मदद नहीं करेगी?

अंशु : सच कहु तोह दी! भाई की तरह में भी बोहत टेंशन में हु. मुझे भी नहीं पता है, की क्या होगा. और मुझे बोहत डर लग रहा है.

वंशु : सहित!!

ऋचा : उम्म्म्म... जो भी होगा अच्छे के लिए होगा दीदी... ऐसे सोचते रहेंगे तोह और भी टेंशन होने लगेगी. किसी ने कुछ भी नहीं खाया है जबसे आए है. क्यों न कुछ बना के खा लिया जाए.

निशा : सही कहा! अब जो होगा सो देखा जाएगा. में चली नाश्ता बनाने. कोई आएगा क्या मेरी मदद करने? मेरी होने वाली बहुओ में से?

ऋचा : में आती हु माँ जी...

तनीषा : माँ जी! चलिए. में भी आती हु.

मोनिका : मुझे भी खाना बोहत अच्छे से आता है बनाना.

निशा : तोह आ जाओ फिर तीनो. देरर किस बात की...

और निशा के साथ तीनो किचन में चली जाती है.

नेहा : भाई?? एवरीथिंग विल बे फाइन राइट?

राहुल : होप सो!!

और सभी नाश्ते की प्रतीक्षा करने लगते है पर सभी के अंदर आने वाले कल को लेकर चिंता ज़रूर थी. खासकर की नेहा अंशु वंशु और तानिया को. अब देखना ये है की कोण ज़्यादा saubhagya-shaali निकलेगा? या फिर सभी saubhagya-shaali रहेंगे?

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आज के लिए इतना hi गाइस!


धन्यवाद्!
 
अपडेट - 105

अब तक...

और निशा के साथ तीनो किचन में चली जाती है.

नेहा : भाई?? एवरीथिंग विल बे फाइन राइट?

राहुल : होप सो!!

और सभी नाश्ते की प्रतीक्षा करने लगते है पर सभी के अंदर आने वाले कल को लेकर चिंता ज़रूर थी. खासकर की नेहा अंशु वंशु और तानिया को. अब देखना ये है की कोण ज़्यादा saubhagya-shaali निकलेगा? या फिर सभी saubhagya-shaali रहेंगे?


अब आगे...



कुछ शान बाद hi, निशा ऋचा मोनिका और तनीषा के साथ नाश्ते में सभी के लिए गरमा गरम पकोड़े बना के ले आयी और सभी को चाय भी सर्वे की. पेट पूजा हो जाने के बाद अब सभी थकान महसूस करने लगे थे और आराम करने का सोच रहे थे.

नेहा ने वंशु अंशु तानिया को लेकर अपने कमरे की और प्रस्थान किया, वैसे तोह उसका मैं अपने भाई के साथ उसके साथ चिपक कर सोने का था परन्तु ऋचा और बाकी सब भी यहाँ थी, इसलिए उसने उन्हें राहुल के साथ hi रहने दिया.

ऋचा मोनिका तनीषा तीनो hi राहुल के रूम में थी. चारो बस एक दूसरे के अगल बगल चिपक कर लेते हुए आराम फार्मा रहे थे.

ख़ुशी और प्रीती ने निशा के रूम के बगल वाले गेस्ट रूम पर क़ब्ज़ा किया और दोनों वही बिस्तर पर लेती हुई थी.

"क्या सोचा फिर?", प्रीती ने दोनों के बीच चल रहे सन्नाटे को दूर करते हुए कहा.

ख़ुशी : प्रीती! ी नीड तो टॉक विथ डैड. मुझे कैसे भी करके उन्हें मनाना है प्रीती.

प्रीती : हम्म! तुम कॉल क्यों नहीं करती उन्हें?

ख़ुशी : हां! यही सही मौका है.

ख़ुशी अपना फ़ोन उठाते हुए अपने डैड को फौरन hi कॉल लगाती है,

ख़ुशी : hello?

मास्टर : hello! क्या बात है बीटा? बोलो! किसी हो? ठीक हो न?

ख़ुशी : में ठीक हु डैड! मुझे दरअसल आपसे कुछ बात करनी है.

मास्टर : हां तोह कहो न!

ख़ुशी : डैड वो... ी don't क्नोव कैसे कहु आपसे...

मास्टर : अरे बीटा! अपने बाप से क्या छ्हिपाना अब?? जो भी है बता दो

ख़ुशी (ब्लश) : डैड! आप जानते है न ki...I...I लव राहुल!

मास्टर : हां तोह ये तोह अच्छी बात है न!? ः! इसमें क्या दिक्कत है?

ख़ुशी : डैड! इसमें दिक्कत नहीं है...

मास्टर : तोह क्या दिक्कत है? क्या राहुल तुमसे प्यार नहीं करता?

ख़ुशी : no डैड... ऐसा नहीं है! वो बात ये है की ... *गहरी सास लेते हुए* उसकी और भी पार्टनर्स है डैड... एंड हे लव्स थम तू

उसका कहना ये है की... यदि में उसके साथ रहना चाहती हु तोह मुझे उसकी बाकी पार्टनर्स के साथ रहना पड़ेगा... इन इतर वर्ड्स, ी हैवे तो शेयर हिम विथ हिज इतर लवर्स...

दूसरी साइड से कोई जवाब नहीं आया और सन्नाटा छाते hi ख़ुशी और चिंतित होने लगी.

ख़ुशी : डैड??

मास्टर : क्या कहा तुमने?? ज़रा फिरसे तोह कहना

ख़ुशी (दररते हुए) : डैड! Wo...rahul की और भी पार्टनर्स है, जिन्हे वो प्यार करता है

मास्टर : kyaaaaaaaaaaaa?

अपने डैड की जोरर से आवाज़ सुनते hi ख़ुशी सेहम गयी. यदि उसके डैड का ये रिएक्शन है ये सब सुनके तोह वो तोह बिलकुल भी ये सब नहीं होने देंगे.

ख़ुशी : डैड प्लीज! पहले पूरी बात सुनिए... राहुल का रिलेशनशिप उसकी बाकी पार्टनर्स से भी प्यार वाला है बूत सबसे बड़ी बात ये है की उसकी बाकी पार्टनर्स भी एक दूसरे के साथ घुल मिलकर रहने के लिए राज़ी हो गयी है. और राहुल ने मुझे पहले hi सब कुछ बता दिया hai...ki यदि में उसके साथ रहना चाहती हु तोह मुझे ये बलिदान देना होगा... और वो मुझे सबके जैसा एक्वाली प्यार karega...dad! ी रियली लव हिम...

मास्टर : ये क्या बकवास कर रही हो तुम बीटा? राहुल की हिम्मत कैसे हुई मेरी बेटी के साथ छल करने की...

ख़ुशी : no....no...dad! राहुल ने मेरे साथ छल नहीं किया है. उसने तोह मुझे सब कुछ सच सच बता दिया पहले hi...

मास्टर : सच सच? क्या मतलब सच सच? मेने hi तोह उससे तुम्हे प्रोटेक्ट करने के लिए रखा था जान बुझ के, ताकि तुम दोनों आपस में जुड़ सको...

ख़ुशी : हँ??

मास्टर : पर मुझे नहीं पता था की राहुल की और भी पार्टनर्स है... मेने राहुल को ऐसा बिलकुल भी नहीं समझा था. मुझे तोह लगा था वो ऋचा के साथ है पर यहाँ तोह वो ऋचा के अलावा भी बाकी किसी के साथ लगा हुआ है और उसकी हिम्मत कैसे हुई बाकियो के साथ रहने के बाद मेरी बेटी से ये कहने की, की वो तुमसे प्यार करता है...

ख़ुशी : डैड... आप प्लीज शांत हो जाइये!

मास्टर : नहीं! तुम अभी के अभी वापस ग्वालियर आओ इधर मेरे पास. राहुल से में बाद में बात करूँगा इस बारे में. और जहा तक मुझे लग रहा है, तुम उससे भूल जाओ तोह hi अच्छा है.

अपने डैड की बात सुनते hi ख़ुशी बेचारी पूरी तरह से डर गयी. भूल जाओ?? राहुल को भूल जाओ? क्या ऐसा ख़ुशी कभी सोच भी सकती है? बिलकुल भी नहीं! बचपन से लेकर आज तक था hi कोण जो उसके साथ इतना क्लोज था? प्रीती तोह एक लड़की है और उसकी बेस्ट फ्रेंड. पर लड़को में तोह केवल राहुल hi था जिसके साथ रहकर ख़ुशी को प्यार वाली फीलिंग मेषसूस हुई.

ख़ुशी के डैड के न जाना कितने मित्र थे चीन में. उन् मित्रो के जो बेटे थे, वो आए दिन ख़ुशी को इम्प्रेस करने की कोशिश में लगे रहते थे. की कैसे भी करके वो ख़ुशी को अभी से hi पता ले ताकि आगे चल के जब ख़ुशी बड़ी होगी तोह उनकी शादी ख़ुशी से हो जाएगी और इसी बहाने मास्टर की प्रॉपर्टी पर भी उनका हक़ बन्न जाएगा और वो उसके मालिक हो जाएंगे. आखिर कार ख़ुशी उनकी एकलौती बेटी जो थी. पर ख़ुशी ने आज तक किसी पे घास नहीं डाली थी. कहा थे ये सब लोग? जब उसकी माँ का देहांत हुआ था और उसके डैड केवल एक बॉडीगार्ड थे. तब तोह उसके डैड के पास इतना पैसा भी नहीं था. तब कहा थे ये सब लोग? क्या कोई हाथ आगे बढ़ाने आया? नहीं!

अब जब उसके पिता के पास पैसा है तोह सभी को वो नज़र आ रही है!? अब क्यों आए है ये? ताकि प्रॉपर्टी पर हाथ जमा सके??? इसी कारण ख़ुशी केवल प्रीती को hi अपना हमदम साथी मानती है. प्रीती उसके साथ तब भी थी जब उनके पास कुछ नहीं था और अब भी है जब उसके पास सब कुछ है. यही कारण था की ख़ुशी आसानी से किसी लड़के पर भरोसा नहीं करती थी. और राहुल को भी उसने पहले ऐसा hi समझा था.

पर उस दिन जब वो कार में बंधी हुई बैठी थी और उसने जब देखा की राहुल उससे बचाने के लिए अकेले आया है और उसके लिए लड़ाई लड़ी. उस दिन के बाद से तोह जैसे ख़ुशी के मैं में और साथ hi साथ दिल में राहुल के प्रति जो घृणा वाली भावनाये थी वो एकदम समाप्त हो गयी और एक प्यार के बीज ने जनम ले लिया. उस दिन के बाद से मानो सब कुछ बदल गया.

राहुल का यु उसके साथ मज़ाक करना, उससे खाना बनाना सिखाना, उससे खाना सर्वे करना सिखाना, कुछ अच्छा काम करने पर राहुल का उसके सर पर प्यार से हाथ फर्र्ना, ये सब छोटी छोटी बातें जो उन् तीन महीनो में घाटी, वो प्यार का बीज कब एक ठोस, बड़े, मज़बूत, पेड़ में तब्दील हो गया उससे पता hi नहीं चला.

राहुल ने पहले ख़ुशी को एक माँ की फीलिंग दी, उससे काम सिखाना, खाना बनाना, खरीद दारी सिखाना, दीं दुनिया का ज्ञान देना, सब किया. उसके बाद राहुल ने उससे एक भाई की फीलिंग दी, जब वो उसके लिए उससे बचाने आया. राहुल ख़ुशी के लिए एक कम्पलीट फॅमिली पैकेज था. पर इन् सब से आगे जो फीलिंग निकल गयी वो थी एक लवर की

नतीजा यही निकला की, ख़ुशी को राहुल से बेपनाह प्यार हो गया. अब ऐसे में वो भला सोच भी कैसे सकती है की वो राहुल के बजर्र रह सकती है!? ये बात तोह सोचना hi उसके लिए पीड़ा दायक है.

ख़ुशी (रट हुए) : डैड...

मास्टर : बीटा? तुम रो क्यों रही हो? तुम इधर आ जाओ मेरे पास में...

ख़ुशी : नूवो डैड!! प्लीज! आप समझिये! ी कन्नोत लाइव विथाउट हिम. ी रियली रियली लव हिम... प्लीज! समझिये!

मास्टर (गहरी सास लेते हुए) : देखो! अभी से तुम्हारा ये हाल है तोह आगे क्या होगा? तुम वैसी नहीं हो बीटा. राहुल को भूल जाओ, ये सब तुम्हारे बस की बात नहीं है और तुम्हे करना भी नहीं चाहिए..

ख़ुशी (क्रिस) : डैड!!! प्लीज!! आपको मेरी कसम... लेट में बे विथ हिम!!! I'm सूरे हे won't बेतरय में... वो मुझे बोहत प्यार करेगा, उसने कहा है मुझसे. हे लव्स में तू! प्लीज!!! प्लीज!!!

ख़ुशी ने आखिर कसम दे hi दी.

कुछ शान तक दूसरी तरफ से कोई आवाज़ नहीं आयी. ऐसा प्रतीत हुआ जैसे मानो मास्टर कुछ सोच रहे थे. फिर अचानक hi किसी की गहरी सास लेने की आवाज़ आयी और,

मास्टर : तुमने कहा की उसकी और भी पार्टनर्स है! कोण कोण??

ख़ुशी : हँ??? Wo...wo...richa दीदी, तनीषा दीदी है एक कोई, और मोनिका दीदी...

इधर ख़ुशी ने राहुल की बहनो का ज़िक्र नहीं किया क्युकी ये एक संजीदा मामला था और ख़ुशी किसी का इतना बड़ा सच नहीं बता सकती बिना उनसे इजाज़त लिए...

मास्टर : क्याआ??? Monica...wo कब? कैसे?

ख़ुशी : wo...pehle से hi उन् दोनों की फ्रेंडशिप अच्छी थी, उसके बाद राहुल को जब गोली लगी थी... उसके बाद से तोह... थे अरे लवर्स...

मास्टर : देखो बीटा! तुम मेरी बच्ची हो. मेरी एकलौती बच्ची!! में हमेशा तुम्हारी ख़ुशी hi चाहता हु. कभी भी तुम्हे दुःख में नहीं देख सकता.

ख़ुशी : ी क्नोव डैड...

मास्टर : और मोनिका ने इतनी बड़ी बात मुझसे छिपाई? में अभी उस से बात करता हु.

ख़ुशी : डैड no... ये क्या कर रहे हो आप? क्या सिर्फ आपकी बेटी को hi प्यार चुनन ने का हक़ है? मोनिका दीदी को भी तोह अपना प्यार चुनन ने का हक़ है न? और वो भला आपको क्यों बताएंगी? वो उनकी पर्सनल लाइफ है.

ख़ुशी का विरोध मास्टर को पूरी तरह से छुप कर देता है.

मास्टर : तोह ठीक है... मेने एक फैसला लिया है. तुम्हे ये शर्त माननी पड़ेगी.

ख़ुशी : k...kesi शर्त?

मास्टर : में तुम्हारे फैसले में बिलकुल भी हस्तक्छेप नहीं करूँगा. तुम राहुल के साथ रहो, जो करना है करो. Par...par...

यदि मुझे पता चला की तुम राहुल के कारण ज़रा भी रोई हो, या उसने तुम्हे तकलीफ पोहचायी है जाने या अनजाने में तोह तुम उसी वक़्त वह से इधर आ जाओगी. में अब और कुछ नहीं सुन्न न चाहता.

ख़ुशी : डैड!! O..ok मुझे मंज़ूर है डैड!

मास्टर (आह भरते हुए) : मेरी beti...tum इतनी पोस्सेस्सिवे कब से हो गयी? तुम राहुल को दूसरी लड़कियों के साथ कैसे देख सकती हो भला? क्या तुम राहुल को उनके साथ प्यार करते हुए देख सकती हो? क्या तुम्हे अजीब नहीं लगेगा? सबके सामने जब तुम राहुल के साथ और उसकी बाकी पार्टनर्स के साथ ये बताओगी की तुम उसकी कुछ पत्नियों में से एक हो?! क्या तुम्हे अजीब नहीं लगेगा की बाकी लोग क्या सोचेंगे तुम्हे देख के?

ख़ुशी (निचला होंठ डाट से दबाते हुए) : डैड! में शुरू से hi अकेली रही हु. प्रीती hi थी एक बस मेरे साथ. जब लोगो ने मुझे तब सहारा नहीं दिया थें व्हाई शुड ी इवन केयर की लोग मेरे बारे में क्या सोचेंगे? अस लॉन्ग अस I'm विथ राहुल थें ी don't नीड एनीथिंग. रही बात उसकी पार्टनर्स की... आईटी साउंड्स वीयर्ड बूत I'll मैनेज... उसकी बाकी पार्टनर्स भी तोह एक साथ hi है न? क्यों? क्युकी उनके लिए भी राहुल ज़्यादा इम्पोर्टेन्ट है. न की ये जलन वाले भाव...

मास्टर : हम्म्म... मेरी बस यही कामना है की

तुम्हारे ये फैसला तुम्हे तकलीफ न दे बस.

ख़ुशी की आँखें ये उत्तर सुन्न नम्म पद जाती है, "थैंक्यू सो मच डैड! थैंक यू सो मच. आप बिलकुल चिंता मत करिये डैड! ी can't बे मोरे हैप्पी..."

मास्टर (स्माइल) : हम्म! चलो अच्छा प्रीती को फ़ोन दो.

ख़ुशी : आपको कैसे पता प्रीती मेरे साथ है?

मास्टर : तुम दोनों कभी अलग हुए हो क्या?

ख़ुशी : हम्म ये भी है. अच्छा ये लीजिये, प्रीती से बात करिये.

प्रीती : ह.. hello?

मास्टर : प्रीती!! किसी हो?

प्रीती : mein...as usual...acchi hi हु अंकल

मास्टर : हम्म! मेरी एक रिक्वेस्ट है तुमसे!

प्रीती : जी कहिये न!

मास्टर : देखो प्रीती! तुम भी जानती हो की ख़ुशी पहले किसी थी और अभी किसी है. सच कहु तोह अभी की ख़ुशी से में काफी प्रसन्न हु पर ये ख़ुशी अपने आप को चोट पोहचा बैठेगी. और इसलिए मुझे तुम्हारी मदद चाहिए. में चाहता हु की कभी भी ख़ुशी राहुल या इस परिस्थिति के कारण रोये या उससे ज़रा सी भी तकलीफ पोहचे, तुम मुझे फौरन बता डौगी.

प्रीती : j...ji अंकल. ी विल.

मास्टर : गुड! और हमारे बीच क्या बात हुई ये ख़ुशी को बिलकुल भी मत बताना. Okay?

प्रीती : j...ji!

मास्टर : और किसी भी चीज़ की ज़रुरत हो तोह मुझे कॉल कर देना. Aur...uska ध्यान रखना preeti...aur अपना भी...

प्रीती : आपको ये बात कहने की ज़रुरत नहीं है अंकल...

मास्टर (स्माइल) : थैंक यू!! रखता हु अब...

*कॉल एंड्स*

कॉल कट होते hi ख़ुशी सवालिया नज़रो से प्रीती को देख रही थी, जैसे फटाफट डिमांड कर रही हो की जो भी बात हुई उससे फौरन बतायी जाए. उसकी पलके अभी भी भीगी हुई थी...

ख़ुशी : क्या कहा डैड ने?

प्रीती : कुछ नहीं! यही की... में तेरा ख़याल राखु...

ख़ुशी (ब्लश) : डैड समझते क्यों नहीं... I'm नॉट ा किध एनीमोर...

प्रीती : बच्ची तोह तू है, तभी तोह उन्होंने मुझे तेरा ख़याल रखने कहा है. चल अच्छा अब ये bata...kya डीडे हुआ फिर?

ख़ुशी बिना कुछ कहे hi प्रीती को भींच लेती है. "वो मान गए... बूत उनकी शर्त है की यदि राहुल ने मुझे हर्ट किआ या में यहाँ रह के हर्ट हुई तोह वो मुझे बुला लेंगे"

प्रीती : ओह्ह्ह!!! बूत एटलीस्ट वो मान तोह गए...

ख़ुशी (स्माइल्स) : यस!!!!

प्रीती (मैं में) : I'm सॉरी ख़ुशी! अंकल की रिक्वेस्ट पर मुझे तुझसे ये बात छुपानी पड़ेगी. पर ये ज़रूरी है, जैसे अंकल तुझे हर्ट होते हुए नहीं देख सकते वैसे hi में भी तुझे हर्ट होते हुए नहीं देख सकती...

यहाँ ख़ुशी का मटर अपने डैड से तोह सुलझ गया था पर पता नहीं कल क्या होने वाला था. कल सारे लोग जो पधारने वाले थे. कोई बड़ा हंगामा न हो जाए. यदि हंगामा खड़ा हुआ तोह अपनों के बीच सम्बन्ध तोह बिगड़ेंगे hi साथ hi साथ आस पड़ोस में भी पता चलने का डर रहेगा. समाज के बीच तोह ठु ठु हो जाएगी फिर सभी की. इस बात से राहुल और उसकी पार्टनर्स को भले फ़र्क़ न पड़े पर राहुल के फॅमिली मेंबर्स का क्या? उनका तोह उठना बैठना hi समाज में है.

रात के 8 बज चुके थे जब दरवाज़े पर अचानक किसी ने दस्तक दी.

राजेश नौकरी से घर लौटा था और अपने घर की लाइट्स ों देख के उसके होश hi उड़द गए. कही कोई चोरी तोह नहीं हो गयी?? घबराते हुए वो अंदर घुसा तोह सामने का नज़ारा देख स्तब्ध रह गया.

राहुल सोफे पर नेहा के साथ बैठा हुआ था. नहीं! नेहा राहुल से चिपक कर उसके कंधे पर सर रख कर बैठी हुई थी.

बगल वाले सोफे पर अंशु वंशु बैठी हुई थी aur...aur 2 और अनजान लड़किया एक सिंगल बीएड पर बैठी हुई थी. ये दो अनजान लड़किया ख़ुशी और प्रीती hi थी. और एक सिंगल सोफे पर तानिया बैठी हुई थी.

अचानक यु सबको देख राजेश की कुछ समझ में नहीं आया.

राजेश : अरे! तुम सब?? यहाँ ऐसे अचानक? काम से काम कॉल तोह कर देते एक... में इतना घबरा गया था. मुझे लगा घर में चोरी वोरि तोह नहीं हो गयी...

राहुल : ः... हम सबने सोचा क्यों न आपको सरप्राइज दे.

बगल में बैठी नेहा ने राजेश को देखते hi अपनी पकड़ राहुल के कपडे पर और भी कस ली.

राजेश अपना सर हां में हिलाते हुए नेहा को एक नज़र डालते हुए जब अंदर जाने लगा तोह उससे किचन में तनीषा निशा मोनिका और ऋचा दिखाई दी. इतने सारे लोगो को एक साथ घर में देख वो सोच में पद गया और उसने आखिर पूछ hi लिया,

"निशा!? तुम सब कब आये? अरे एक कॉल तोह कर देती? राहुल की तबियत तोह अब बिलकुल ठीक लग रही है... और ये कोण है? और बाहर वो दो लड़किया कोण है?"

निशा : अरे आप गए? हमने आपको इसलिए नहीं बताया क्युकी सोचा क्यों आपको परेशान करे, मेरे पास एक्स्ट्रा के थी तोह में सीधा सभी को घर ले आयी. और रही बात ये सब कोण है तोह सारे सवालों का जवाब आपको कल मिल जाएगा. अब आप जाईये, फ्रेश होइए और खाना खाने बैठ जाइये.

राजेश के सवालों का जवाब तोह उससे नहीं मिल सका पर निशा के अकॉर्डिंग उससे सब कुछ कल पता लगने वाला था तोह राजेश ने इस बात पर फिर ज़्यादा गौर नहीं किया.

बाहर राहुल नेहा को hi देख रहा था,

"परेशान हो?", राहुल ने उससे देखते हुए पूछा.

"डर लग रहा है", नेहा ने हलकी सी आवाज़ में कहा.

राहुल : डैड से?? वो कुछ नहीं करेंगे...

"उनसे नहीं! डर इस बात का है की में आपको खो न दू", नेहा ने अपनी नज़रे ऊपर करते हुए राहुल की आँखों में देखा.

राहुल : पागल! में थोड़ी कही जा रहा हु. तेरे बजर्र में खुद कभी रह सकता हु क्या?

नेहा ने गौर से राहुल की आँखों में देखा जिसमे उससे अपने प्रति बस प्यार hi प्यार दिख रहा था, "ी लव यू!!"

और नेहा वही सोफे पर बैठे बैठे hi हल्का सा आगे बढ़ी और राहुल के होंठ से अपने होंठ जोड़ दी और 3 से 4 सेकंड बाद hi वापस से अपनी जगह पर आ गयी.

इस छोटी सी किश से राहुल को बड़ा hi अच्छा लगा पर तभी उससे ध्यान आया की वो अभी हॉल में बैठा हुआ है और जैसे hi उसने नज़रे उठा के देखा तोह...

अंशु वंशु उन्हें hi देख रही थी, तानिया भी घूर रही थी. ख़ुशी और प्रीती की नज़रे भी उन् दोनों पर गाड़ी हुई थी.

ख़ुशी (मैं में) : ख़ुशी! Don't बे जेलस! Don't बे जेलस! राहुल से धेरर साड़ी किस्सेस तुम बाद में ले लेना पर don't बे जेलस. यू मस्ट नॉट लूज़ ख़ुशी.

वंशु : कुटी! कण्ट्रोल कर न! देख तोह सही हम कहा बैठे है

राहुल : हँ? वो में...

नेहा : दीदी? आप भाई को क्यों बोल रही हो? इसमें उनकी क्या गलती? आपने देखा न...!? मेने hi िनितीयते किया था. भाई तोह चुप चाप बैठे हुए थे. तोह आप उन्हें क्यों बोल रही हो?

वंशु : wo...wo...par वो तोह बड़ा है न? उससे रोकना चाहिए था तुम्हे...

नेहा : हँ?? बड़ा है तोह उसी की गलती है क्या सब? यही होता चला आ रहा है. सब उससे बड़ा समझ के पूरा दोष उसपे डालते आ रहे है, शुरू से यही होता आ रहा है, उसकी गलती नहीं भी रहती तोह भी उसपे दोष दाल दिया जाता है, और भाई कुछ बोलता भी नहीं है, सब अपने ऊपर ले लेता है, बिलकुल जैसे अभी आपकी कही हुई बात भी अपने ऊपर ले ली जबकि गलती मेरी थी... हर्र बार यही...

इस से पहले की नेहा की आवाज़ और तेज़्ज़ होती और वो आगे कुछ कहती राहुल उससे कस के अपनी बाहो में जकड लेता है,

"हे! हे!! कलम डाउन... कलम डाउन गुड़िया! It's okay! I'm फाइन! Don't वोर्री!"

पर नेहा का दिल उसकी बातो से उभरने की बजाए उल्टा रो दिया. और उसकी आँखों से ासु निकल पड़े, "देखा आपने!? दीदी!? हे टूक आल थे ब्लामे हिमसेल्फ. इसने आपको समझाने की भी कोशिश नहीं की.. एंड नाउ he's सयिंग he's फाइन"

राहुल : अरे!?? गुड़िया! I'm रियली फाइन! आईटी वास् जस्ट ा किश... इतना दुःख मनाने की क्या ज़रुरत? और वंशु दी की बात सही तोह है, में बड़ा हु, तोह इन् सब बातो का मुझे ध्यान रखना चाहिए. अभी हम हॉल में बैठे हुए है, यदि डैड अभी हमे देख लेते तोह क्या होता?! वैसे तोह उन्हें कल पता चल hi जाएगा पर अभी हम कोई रिस्क नहीं ले सकते न.

नेहा : न्यूऊओ!!! हर्र ज़िम्मेदारी आपकी नहीं है भैया... व्हाई don't यू अंडरस्टैंड? तरय तो देपेंद ों में सोमेतिमेस. हर्र बार ब्लामे अपने ऊपर मत लिया करो. ऐसा करते करते hi आप ऐसे बन्न गए हो. आपको ये सब नार्मल लगने लगा है. बूत यू don't अंडरस्टैंड भाई... की आपसे इतना प्यार करने वाली आपकी ये गुड़िया... जब आपको ऐसे देखती है न... तोह बोहत दर्द होता है. मुझे बोहत बेचैनी होने लगती है, ी फील सो उनकंफर्टबले... ऐसा लगता है मानो मेरे खुद के साथ हो रहा हो, ी फील सो बाद... It's थे वर्स्ट. वो फीलिंग... में शब्दों में नहीं बता सकती भाई... पर आपको ऐसे नहीं देख सकती. प्लीज! प्रॉमिस में, फ्रॉम नेक्स्ट टाइम यू won't दो थिस.

राहुल : अच्छा बाबा! ी प्रॉमिस! Okay?? अब तोह मुस्कुरा दे...

नेहा मुस्कुराते हुए राहुल के फिरसे गले लग जाती है. तभी राहुल को अपनी दूसरी साइड भी ऐसा फील होता है जैसे किसी ने उससे हुग किया है. देखता है तोह पाटा है की ये तानिया थी,

तानिया : नेहा इस राइट! ी फील थे शामे. और लगता है, जाने अनजाने में कई बार हम hi राहुल को चोट पोहचा देते है. पर आगे से में ऐसा बिलकुल नहीं होने दूंगी. ी प्रॉमिस यू राहुल! I'll बे योर शील्ड. देपेंद ों में तू...

राहुल : तानिया...

तभी सभी के कानो में किसी की सिसकने की आवाज़ पड़ती है, ये वंशु थी जो रो रही थी

"I'm सॉरी! I'm सो सॉरी! कुटी! जिस चीज़ से तुझे बचाते आ रहे थे, मेने भी वही कर दिया... I'm सो सॉरी! ी shouldn't हैवे बलमद यू"

राहुल : अरे... प्लीज दी! रोइये मत. आप लोग कुछ ज़्यादा hi सोच रहे हो. It's जस्ट ा सिंपल मटर. There's नथिंग सो...

अंशु : नहीं भाई! ये छोटा मटर नहीं है! ये बोहत सोचने वाला मटर है. ी थिंक वंशु दी यहाँ पर गलत थी... बूत कोई बात नहीं! नाउ शी ुन्देरस्टंडस... राइट दी?

वंशु : हम्म्म्म

"गरमा गरम डिनर रेडी है!! चलिए सभी हाथ धो लीजिये और डाइनिंग टेबल पर बैठ जाइये..." तनीषा की आती हुई आवाज़ से सभी जैसे जागे और अपनी अपनी जगह से उठ गए डिनर के लिए.

डिनर के बाद ये रात तोह यु hi गुज़र गयी, पर रात भर राजेश को चोरर कर किसी को भी अच्छे से नींद नहीं आयी. आती भी कैसे? कल को लेकर सभी को इतनी चिंता जो थी. कल या तोह ये तूफ़ान थमेगा या तोह सबको बहा के ले जाएगा और सब कुछ तेहेस महेस कर देगा. पर राहुल को अभी भी एक आस थी. एक प्लान था असल में. वो यदि तूफ़ान को रोक नहीं सकता तोह उसका रुख तोह बदल hi सकता है न?

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धन्यवाद् गाइस!!
 
अपडेट - 106

अब तक...

"गरमा गरम डिनर रेडी है!! चलिए सभी हाथ धो लीजिये और डाइनिंग टेबल पर बैठ जाइये..." तनीषा की आती हुई आवाज़ से सभी जैसे जागे और अपनी अपनी जगह से उठ गए डिनर के लिए.

डिनर के बाद ये रात तोह यु hi गुज़र गयी, पर रात भर राजेश को चोरर कर किसी को भी अच्छे से नींद नहीं आयी. आती भी कैसे? कल को लेकर सभी को इतनी चिंता जो थी. कल या तोह ये तूफ़ान थमेगा या तोह सबको बहा के ले जाएगा और सब कुछ तेहेस महेस कर देगा. पर राहुल को अभी भी एक आस थी. एक प्लान था असल में. वो यदि तूफ़ान को रोक नहीं सकता तोह उसका रुख तोह बदल hi सकता है न?


अब आगे...

सुबह हुई, और आज वो दिन था जिसका सभी को बेसब्री से इंतज़ार भी था पर साथ hi साथ एक घबराहट भी थी अंदर की आगे क्या होने वाला है.

राहुल समेत सभी उठकर नाश्ता वगैरह कर चुके थे पर राजेश से अब रहा नहीं जा रहा था,

राजेश : अरे अब कोई बताएगा क्या मुझे? क्या चल रहा है? अब मुझसे रहा नहीं जा रहा है. राहुल! बीटा बताओ न क्या बात है? और तुम्हारी तबियत किसी है अब?

राहुल : में ठीक हु अब डैड. अभी कुछ देरर में आपको सब कुछ पता चल जाएगा डैड. तब तक के लिए वेट करिये...

और थोड़ा समय बीतने के बाद hi, दरवाज़े पर किसी ने दस्तक दी. अंशु और वंशु के माँ बाप पधार चुके थे.

रुपेश और विनीता. राहुल के बड़े पापा और बड़ी मम्मी. अंदर आते hi निशा ने उन्हें बैठाया पर अंदर hi अंदर निशा की बेचैनी चरम सीमा पर पहुँच चुकी थी. उसका जी इतना घबरा रहा था, उसके परिवार वाले सच झेल भी पाएंगे या नहीं? यदि सब कुछ बिगड़ गया तोह? उपरवाले का नाम लेकर निशा ने सब कुछ अब समय पर चोरर दिया. आगे जो होगा देखा जाएगा.

विनीता : निशा!? ऐसे अचानक बुलाया है? सब ठीक तोह है न? राहुल बीटा! हाय मेरा बच्चा! किसी है अब तेरी तबियत..? में तोह आयी hi नहीं पायी थी वह नई ज़ीलैण्ड में... इधर तोह आ मेरे पास...

"अब ठीक हु बड़ी मम्मी..." राहुल ने विनीता के पास जाते हुए कहा तोह विनीता ने प्यार से उससे अपने गले से लगा लिया. प्यार से उसका चेहरा सहलाया और उसका माथा चूम लिया.

विनीता : अरे ये क्या? इतने सारे लोग? नए नए चेहरे दिख रहे है यहाँ तोह... ज़रा पहचान तोह करवाओ

रुपेश : हां! कोई बात तोह ज़रूर होगी जो अचानक बुलाया है. कुछ नए लोग भी नज़र आ रहे है.

निशा : सब इंट्रोडक्शन हो जाएगा भाभी! आप अभी बताइये नाश्ते में क्या लेंगी?

विनीता : अरे नाश्ता तोह होता रहेगा निशा. हम वैसे भी नाश्ता कर के hi आए है घर से. ये बताओ ये दोनों छोकरियों ने तुम्हे तंग तोह नहीं किया??

अंशु : मम्मी!!! बच्चे नहीं है हम...

निशा : नहीं भाभी! Balki...anshu ने तोह मेरी बोहत मदद की है

निशा ने डबल मीनिंग बात करते हुए अंशु को देखा तोह अंशु भी थोड़ी शर्मा गयी और मुस्कुराने लगी पर ये मुस्कराहट ज़्यादा देरर तक ना रही, क्युकी आगे होने वाले दृश्य के बारे में सोच के hi उसकी बेचैनी वापस से शुरू हो गयी.

रुपेश : तोह? बात क्या है? राजेश? बोलो!?

राजेश : भैया मुझे तोह कुछ भी नहीं पता है. निशा बोली है की बस सब को आ जाने दीजिये उसके बाद सब पता चल जाएगा.

विनीता : और भी कोई आ रहा है क्या निशा?

निशा : जी भाभी! वो... मेरे भाई अपनी वाइफ के साथ आ रहे है. बस उन्हें आ जाने दीजिये. उसके बाद सब एक साथ होक बात करते है.

विनीता : निशा! सब कुछ ठीक तोह है न? मेरा मैं कह रहा है की कुछ बात तोह ज़रूर है, जिसके लिए तुम कुछ परेशान सी नज़र आ रही हो.

निशा : भाभी! ठीक भी है और नहीं भी. अब में अभी कुछ नहीं कहूँगी. पहले सभी को आ जाने दीजिये...

निशा की बात सुनाने के बाद विनीता आगे कुछ न बोल सकीय. अब वो केवल इंतज़ार hi कर सकती थी. उसका मैं भी थोड़ा अब चिंतित हो रहा था.

कुछ देरर यु hi बातो का सिलसिला चलता रहा, इस बीच कई बार रुपेश और विनीता ने सच जान ने के लिए प्रश्नो पे प्रश्न किये पर हर्र बार निशा ने ये कह के ताल दिया की सबको आ जाने दीजिये उसके बाद hi साड़ी बातें करि जाएंगी.

अंततः एक बार फिर दरवाज़े पर खत खत हुई और जिनका सभी को इंतज़ार था वो लोग पधारे.

ललिता और मुकेश. राहुल के मां और ममी. यानी की तानिया के माता पिता. अपने माता पिता को देख तानिया को जहा खुश होना चाहिए, वो ख़ुशी की बजाए अंदर hi अंदर बोहत दर्री हुई थी.

नेहा ने सभी को आता देखा तोह उसने राहुल का हाथ थाम लिया, "भाई!? सब कुछ ठीक तोह हो जाएगा न?! मुझे बोहत डर लग रहा है!"

राहुल : don't वोर्री गुड़िया. परेशानी से भागोजी तोह उस से कुछ हासिल नहीं होगा. परेशानी को दत्त कर एक बार में hi उसका सामना करोगी तोह बोहत बेहतर परिणाम मिलेंगे. न केवल तुम परेशानी को सुलझा सकोगी बल्कि तुम आने वाली परेशानियों के लिए भी तैयार रहोगी.

नेहा : भाई!? आपको इस वक़्त फलसफा सूझ रही है? फलसफा काम नहीं आएगी भाई! कुछ न कुछ करना पड़ेगा. मेरा मैं कह रहा की कुछ बोहत बुरा होने वाला है अभी कुछ hi देरर में...

राहुल (गहरी सास लेते हुए) : ज़रा मेरे बारे में सोचो गुड़िया. तुम सभी पे ये लोग तोह बरसेंगे hi पर तुम सभी किस से जुडी हुई हो?

नेहा : ???

राहुल : मुझसे! तोह सबका गुस्सा किधर केंद्रित होगा?

ये सुनते hi जैसे मानो नेहा को एक झटका लगा. उसने इस बात पर ध्यान hi नहीं दिया था की सबका गुस्सा राहुल पे जाने वाला था. अब ये बात सोचते hi नेहा जो की पहले से hi दर्री हुयी थी वो और भी डर गयी.

राहुल : ऐसे मत देखो गुड़िया. Don't वोर्री! मुझे पता है क्या करना है. बस सब कुछ सही तरीके से हो...

नेहा (स्माइल) : और मुझे लगा में आपसे बेहतर बन्न पाऊँगी एक दिन ः

राहुल : तुम आलरेडी मुझसे बेहतर हो मेरी गुड़िया

राहुल कहते हुए सामने सभी को बातें करते हुए देखता रहता है तभी उससे किसी की नज़रे खुद पर गाड़ी हुई महसूस होती है. बगल में देखता है तोह पाटा है की नेहा उसके चेहरे को एक तक देखे जा रही है. राहुल का हाथ भी उसकी हथेलियों में है.

नेहा : व्हाई यू अरे सो गुड भाई? सोमेतिमेस यू मेक में फील लिखे ी don't डेसेर्वे यू... I'm नॉट गुड एनफ फॉर यू. मेने कुछ पुण्य किया होगा अपने पिछले जनम में जो आप मिले मुझे...

नेहा की नज़रो में इस वक़्त प्यार hi प्यार था. उससे तोह ध्यान hi नहीं था की इतने सारे लोग सामने हॉल में बैठे हुए है. वो तोह जैसे बस खो गयी थी राहुल के चेहरे में.

राहुल : सस्शह्ह्ह्ह! बकवास बातें नहीं करते. और ऐसा सोचना भी मत. नेवर बेलिटले योरसेल्फ.

नेहा (स्माइल) : थैंक यू फॉर बीइंग हेरे विथ में. ी लव यू!

विनीता : निशा! अब तोह सब आ गए है. भाई साहब लोग भी आ गए है. अब तोह बताओ की ऐसी क्या बात हो गयी जिसके लिए तुम्हे यहाँ सबको बुलाना पड़ा!?

निशा : हँ?? J...ji...

मुकेश : अरे भाई! क्या हो गया? ऐसे अचानक बुलवा लिया!? बाहर तोह बोहत hi गर्मी है... जी नमस्कार!

रुपेश : नमस्कार! Aaiye...baithiye!

ललिता : निशा? ऐसे सबको यु बुलाया? क्या बात है? अब नहाना धोना सब बाद में करेंगे, पहले तोह मुद्दे की बात करि जाए.

निशा काँप रही थी. उससे समझ में hi नहीं आ रहा था की वो शुरुआत कैसे करे. क्या बोले इन् सब को? ये की आपकी बेतिया मेरे बेटे से प्यार करती है जो की आपस में भाई बहिन है? ये तोह कोई जवाब नहीं हुआ. और कभी होगा भी नई.

राहुल तभी इशारे से ख़ुशी प्रीती मोनिका और तनीषा को ऊपर भेज देता है.

विनीता : अरे!? वो चारो अंदर क्यों चली गयी? काम से काम परिचय तोह करवा देते!?

राहुल : उनका यहाँ इस वक़्त कोई काम नहीं है बड़ी मम्मी. रही बात परिचय की तोह चारो hi मेरी बोहत अच्छी दोस्त है. वो मुंबई में मेरी देख भाल के लिए भी आयी थी. हम सभी यहाँ पर आ रहे थे, इसलिए में उन्हें भी यहाँ ले आया. सोचा यहाँ का घर भी दिखा दू?

विनीता : ओह्ह! काफी क्लोज फ्रेंडशिप लग रही है तुमलोगो की हां??! बता दे बीटा... कोण है उनमे से?? हाहाहा!

राहुल (मैं में) : अभी में यदि बता दू, की चारो hi मेरी है तोह आप अपनी कुर्सी सी गिर जाओगी बड़ी मम्मी. मुझे ये छिपाना पड़ेगा. ी कन्नोत तेल्ल एवरीथिंग. सब कुछ ठीक करने के लिए, नेहा और डैड का रिश्ता सुलझाने के लिए, परिवार में सम्बन्धो को बिगड़ने से बचाने के लिए, सब एकत्र हो सके उसके लिए, मुझे ये करना होगा... ी हैवे तो...

राहुल : में...

पर इस से पहले की राहुल कुछ कह पाटा अंशु उससे बीच में hi टोक देती है.

अंशु : कुछ बोहत बड़ी बातें है, जिन्हे हम सभी ने अपने बीच दबा के रखा हुआ था अब तक. पर हम कही आगे नहीं बढ़ पा रहे थे, तब... हमे समझ में aaya...ki ऐसे तोह हम कही आगे नहीं जा पाएंगे... पर आगे तोह जाना है... वर्ण ऐसे हम नहीं जी पाएंगे.. और उसी के लिए... आज आप सभी को यहाँ बुलाया गया है.

राहुल (मैं में) : अंशु?? शी वांट्स तो बेयर माय रेस्पॉन्सिबिलिटीज़. उससे पता है... सबका गुस्सा मुझपर आएगा... इसलिए... वो शुरुआत कर रही है ताकि सारा ध्यान उसपर जाए पहले... No! ी कन्नोत लेट हेर दो तहत... बड़ी मम्मी गुस्से में आके उससे मार न दे. मेरे रहते भला में कैसे उससे ये सब करने दे सकता हु...

रुपेश : बीटा! ये तुम क्या बातें कर रही हो? हमारी तोह कुछ समझ में नहीं आ रहा है. पहेलियाँ क्यों बना रही हो? बीटा साफ़ साफ़ कहो न

विनीता : हां अंशु! मेरी भी कुछ समझ नहीं आ रहा है. साफ़ साफ़ कहो न बीटा...

ललिता : तानिया बीटा...!? क्या चल रहा है ये सब?

तानिया बिना कुछ बोले hi सर झुका के बस कड़ी रहती है.

अंशु : में बताती हु मम्मी...

एक गहरी सास ली और अंशु ने आने वाले प्रश्नो, आने वाले क्रोध, आने वाले तानो के लिए खुद को तैयार कर लिया.

अंशु : तोह ये सब शुरू होता है कुछ साल पहले से... आप सभी को याद होगा... की वंशु दीदी किस समस्या से जूझ रही थी

विनीता : हां! मेरी बच्ची... कैसे भूल सकती हु में वो समय? रूह काँप जाती है मेरी अब भी जब भी वो हालात फिरसे सोचती हु. सेक्सुअल असाल्ट... मेरी बच्ची... फोबिया हो गया था उसको... कितने समय तक तोह वो अपने कमरे से hi नहीं निकलती थी. हर्र एक पुरुष से उससे डर लगने लगा था. यहाँ तक की अपने पिता पर भी उससे पूरी तरह विश्वाश नहीं होता था... मेरी बच्ची वंशु....

अंशु : हां मम्मी! और आपको पता है दीदी ठीक कैसे हुई. है न?

विनीता : हां! में कैसे भूल सकती हु... राहुल! मेरा बच्चा... इसी ने तोह उससे उस दलदल से बाहर निकाला था. वर्ण मेरी बच्ची... मुझे नहीं लगता कभी उभर भी पाती... में तोह जीवन भर राहुल की आभारी रहूंगी...

राहुल (मैं में) : अस उसुअल. थिस इस थे अंशु ी क्नोव. शी है सुच ा सिल्वर टंग. जान बुझ के पहले वो मेरी अच्छाइयों से उनके दिमाग में ये बातें बैठा रही है और ऐसा बताने की कोशिश कर रही है की बड़ी मम्मी ज़िन्दगी भर मेरी आभारी रहेंगी. पर उस आभार को वो एक तरीके से चूका सकती है, वंशु दीदी को मुझे सौपकर... मुझे यकीन है आगे यही करवाने वाली है अंशु. शी इस लिखे में इन सम आस्पेक्ट्स. सुच ा जीनियस यू अरे अंशु. पहले में तुम्हे रोकने की कोशिश करने वाला था. बूत लुक्स लिखे... ी कैन देपेंद ों यू. लगता है मुझे वाक़ई तुम्हारी मदद की ज़रुरत थी... I'm ब्लेस्ड. थैंक्स! अंशु!

राहुल : गुड़िया! दरवाज़ा बंद कर दो. में नहीं चाहता की यहाँ पर होने वाली साड़ी बातें बाहर तक जाए.

नेहा : हां भाई!

नेहा तभी दरवाज़ा बंद कर के वापस राहुल के पास आकर कड़ी हो जाती है.

अंशु : हां मम्मी! पापा? क्या आप कुछ नहीं कहना चाहते?

रुपेश : क्या कहु बीटा? में भी राहुल का आभारी हु. केवल इस बात के लिए hi नहीं. उसने और भी न जाने मेरे कितने काम किये है जिनके लिए में उसका आभारी रहूँगा.

अंशु : हां! आपको नहीं पता पर भाई ने मुझे भी बचाया था, ज़ू में और वो भी तब, जब हमारे बीच बातें बंद थी. बचपन से hi में भाई के साथ बोहत क्लोज थी. इतना क्लोज की... की मुझे भाई के अलावा कुछ सूझता hi नहीं था. पर फिर नेहु की लड़ाई भाई से हो गयी और नेहु तोह जैसे मेरी सबसे क़रीबी दोस्त थी, सबसे क़रीबी बहिन, जिसके लिए मेने भाई से बात करना बंद कर दी... पर कही न कही में तड़पती थी... की भाई से बस एक बार बात हो जाए...

विनीता : तुम दोनों बोहत लकी हो मेरी बच्चियों, जो तुम्हे राहुल जैसा भाई मिला...

अंशु : यस मम्मी! वे अरे! उसके बाद से, जब भाई ने मुझे बचाया, मेने उनकी निगरानी करनी शुरू कर दी, नेहु और उनके बीच का सच जान ने के liye...par...kuch और भी था जो घटता चला जा रहा था

विनीता : क्या??

अंशु : प्यार... मेरी बात भाई से फाइनली शुरू हो गयी, हम और भी क्लोज होने लगे, पर फिर एक दिन मुझे कुछ नया पता चला जिससे जानकार में हैरान हो गयी थी, पर खुश भी थी...

विनीता : क्या??

अंशु : यही की...

अंशु सहमे हुए एक नज़र वंशु पर डालती है जो पूरी तरह खुद भी सेहमी हुई कड़ी थी.

अंशु : यही की... वंशु दी और भाई एक दूसरे से प्यार करते है... में चौंकी इसलिए थी... क्युकी... ये प्यार... भाई बहिन से बढ़ के था, वो प्यार जो एक लड़का और लड़की करते है... न की एक भाई और बहिन...

अंशु के वाकया ख़तम होते hi मानो सब एकदम सन्न पद गए. वंशु तोह पूरी दर्री हुई थी. यदि उससे एक धक्का देते तोह वह गिर hi जाती, इतनी सेहमी हुई थी बेचारी वो अभी.

करीब कुछ शान तक तोह केवल सन्नाटा रहा. कोई कुछ नहीं बोलै. सबकी आँखें ये सुन्न के फटी की फटी रह गयी थी. सभी बस घूर के अंशु को देखते और फिर वंशु को, और फिर अंत में राहुल को.

विनीता : y..ye...ye तुम क्या कह रही हो अंशु?

विनीता की आवाज़ में थार थरपन सभी को साफ़ महसूस हो रहा था.

रुपेश : क्या कहा बीटा? ठीक से सुना नहीं हमने शायद, फिरसे तोह बोलना...

राहुल (मैं में) : मुझे पता था. थे aren't रेडी फॉर थिस. अभी वंशु दी का hi जान के इनकी ये हालत है तोह... बाकी सबका जान के तोह... ी वास् राइट. अच्छा हुआ मेने ये कदम चुना. एटलीस्ट, इस se...mein इस तूफ़ान को रोक तोह नहीं सकूंगा पर रुख ज़रूर बदल दूंगा... बस वो तूफ़ान लौट के न आ जाए कभी. I'll तेल्ल थम अस मच अस ी कैन बूत ी कन्नोत तेल्ल थम एवरीथिंग. यही सही है. इसलिए... मुझे ख़ुशी प्रीती मोनिका और तनीषा को ऊपर भेजना पड़ा... ये सब सेटल होते hi... नेक्स्ट टारगेट विल बे...

राहुल की नज़र तभी कमरे में मौजूद एक शक्श पर टिक जाती है.

अंशु : में सही कह रही हु डैड. आपने एकदम सही सुना. और बात इतनी hi नहीं है, mein...mein भी भाई se...bhai se...ussi तरह प्यार करती हु, एक भाई बहिन से कई गुना बढ़कर.

एक बार फिर पूरे कमरे में घनघोर सन्नाटा छ गया. किसी को भी यकीन नहीं हो रहा था की अंशु जो भी बोल रही है वो सच है.

विनीता : निशा? ये सब क्या है? तुम मज़ाक करवाने के लिए हमे यहाँ बुलाई हो क्या? ये मेरी बच्ची क्या बकवास करे जा रही है?

निशा बिना कुछ बोले बस अपना सर झुका लेती है, पर उसकी ख़ामोशी इस वक़्त क्या बया कर रही थी ये तोह एक बच्चा भी बता सकता था.

ललिता : हे भगवान्...

विनीता और रुपेश अपनी जगह से खड़े हो जाते है और भौचक्के भाव से बस अंशु को घूरते रहते है.

उन्हें अभी भी जैसे यकीन नहीं हो रहा था. अंशु की हथेलिया आपस में बेचैनी के मारे उलझ उलझ कर पसीने से भीग चुकी थी.

रुपेश : अंशिका! क्या अभी अभी तुमने जो कहा वो एकदम सच है? देखो! यदि ये मज़ाक है तोह अभी के अभी बंद कर दो... क्युकी ये बोहत hi भद्दा और बेहूदा मज़ाक है... समझ गयी तुम???

रुपेश के आखिरी बोल इतने तेज़्ज़ स्वर में थे, की वह बैठे सभी लोग सेहम गए.

राजेश : निशा! ये सब क्या है? क्या यही वो सच है?? कुछ कहती क्यों नहीं?

निशा फिरसे बिना कुछ कहे सर झुका लेती है, और धीमी सी आवाज़ में कहती है, "सब कुछ अंशु ने जो कहा, वो एकदम सच है"

रुपेश (जोरर से) : बस्सस!!! अंशिका! वंशिका!! क्या तुम्हारे कहने का मतलब ये है की तुम दोनों राहुल जो की तुम्हारा भाई है, तुम्हे उस से एक भाई बहिन से बढ़ कर प्रेम हो गया है? क्या ये सच है? में आखिरी बार पूछता हु. अभी भी समय है तुम्हारे पास.. कह दो की ये झूठ है और में तुम्हे तुम्हारी गलती समझ कर माफ़ कर दूंगा... वर्ण मुझसे बुरा कोई नहीं होगा...

राहुल (मैं में) : जिसका डर था वही हुआ... मुझे पता है अब आगे क्या होने वाला है...

अंशु जो की वंशु के बगल से कड़ी हुई थी, रुपेश के प्रश्न पर हां में सर हिला देती है और अगले पल hi रुपेश तेज़्ज़ कदमो के साथ एकदम आग बबूला होक आगे बढ़ता है, विनीता का हाथ रुपेश को रोकने के लिए उठता है पर न hi उसके मुँह से कुछ निकलता है और न hi वो रुपेश को रोक पाती है, बस बचते है तोह केवल आँखों में उत्पन्न हुए ासु, जो की सबूत थे की सामने चल रहा दृश्य कोई दिखावा या झूट नहीं है बल्कि एक कड़वा सच है.

और तभी...

*चटाक*

एक ज़ोरदार छाते की आवाज़ कमरे में गूँज जाती है, जिससे सुनकर वह मौजूद सभी के रोंगटे खड़े हो जाते है.

अंशु स्तब्ध सी कड़ी, पूरे शरीर में उसके कम्पन हो रहा था, क्युकी सामने का दृश्य hi ऐसा था.

वंशु जो की रुपेश को अपनी तरफ आता देख डर के मारे आँख बंद करके कड़ी हो गयी थी, आँख खोलते hi जैसे hi देखती है तोह पूरी तरह हक्की बक्की रह जाती है.

उसके सामने उसका कुटी खड़ा हुआ था. और वो ज़ोरदार तमाचा भी जो की खुद उसको पड़ने वाला था वो उसके कुटी ने अपने गालो पर ले लिया. और अगले hi पल hi वंशु की आँखे पानी पानी हो गयी.

अंशु जो की बिलकुल hi बगल में कड़ी थी, ये सब देख के उसकी हिम्मत यहाँ पर जवाब दे रही थी. उसने तोह सब कुछ घटते हुए देखा. सब कुछ इतनी तेज़्ज़ी से हुआ की वो आवाज़ भी नहीं निकाल पायी. पर अपने भाई के चेहरे पर तमाचा पड़ते देख उससे अंदर से इतनी पीड़ा हुई, जो शायद अंशु शब्दों में नहीं बया कर सकती थी.

निशा चाह कर भी बीच में नहीं आ सकती थी. राहुल ने उससे मन कर के जो रखा था. एक साइड में कड़ी ऋचा भी केवल देख hi सकती थी, अभी वो परिवार का हिस्सा नहीं थी सबकी नज़रो में. इसलिए वो पारिवारिक चर्चो में हस्तक्छेप नहीं कर सकती थी. अपना निचला होंठ दबा के उसने अपने आगे बढ़ने की तीव्र िक्षा को जैसे तैसे रोका.

तानिया गुस्सा भी थी पर उसमे एक डर भी था. अपनी मुट्ठी कस्ते हुए वो बस लम्बी लम्बी सासें ले रही थी. चाह कर भी वो कुछ नहीं कर पा रही थी, क्युकी उसके सामने ये सब करने वाले कोई जरर नहीं थे, उसके अपने परिवार वाले थे. और तोह और उसके अपने माता पिता भी मौजूद थे. गुस्से में आके वो कुछ भी ऐसा नहीं करना चाहती थी जिसके लिए बाद में उससे पछताना पड़े.

पर इधर कोई था जो अभी अभी घाटी गतिविधि को देख के अपने विचारो में hi खोया हुआ था. ये शक्श नेहा hi थी. कुछ शान लगे उसको होश में आने में... पर जैसे hi उससे एहसास हुआ की अभी अभी क्या हुआ है और किसके साथ हुआ है, नेहा शायद अब कोई विकराल रूप धारण करने वाली थी.

तमाचा? वो भी राहुल को? जो राहुल उसका सब कुछ है, जिसके लिए वो कुछ भी करने को तैयार हो जाए, जिससे वो बचपन से hi प्यार करती आयी है, उसके सामने hi उससे तमाचा मारा गया??

"हाउ डरे थे?? हाउ डरे थे दो थिस तो हिम!? इनकी हिम्मत कैसे हुई मेरे भाई पर हाथ उठाने की? उठाना तोह दूर इनकी हिम्मत कैसे हुई ये सोचने की भी... मेरा प्यारा भाई, जिसने अपना सब कुछ इस परिवार के लिए न्योछावर कर दिया, उसका ये सिला दिया इनलोगो ने!? एहसान फरामोश..." नेहा ने अपने मैं में सोचा और अगले hi पल वो राहुल के बगल से आकर कड़ी हो गयी.

राहुल की ब्याह नेहा ने कस के अपने स्तनों के बीच सताते हुए पकड़ ली,

"खबरदार यदि किसी ने भी मेरे भाई पर हाथ उठाने की कोशिश भी करि तोह, या उसके साथ गलत व्यवहार करने का सोचा भी तोह..."

नेहा ने पलटते हुए राहुल का चेहरा देखा तोह उसका दिल दुःख गया. गाल पूरा लाल पद चूका था और 5 में से 3 उंगलियों के निशाँ भी आ चुके थे. धीरे से उसने अपना एक हाथ आगे बढ़ाया और राहुल के चोटिल गाल को धीरे से छुआ.

"सो सॉरी! मुझे ये सब पहले hi होने से रोक लेना चाहिए था... पर don't वोर्री! ये आपके चेहरे पर किसी का भी आखिरी तमाचा होगा"

मुस्कुराते हुए नेहा ने वह मौजूद सबके सामने hi राहुल का गाल चूम लिया. राहुल बिना कुछ बोले बस नेहा को hi निहार रहा था. देख रहा था की कितना आगे आ गयी है उसकी गुड़िया और कितनी बड़ी हो गयी है. हिम्मतवाली भी. राहुल का पिछले वाक्य जो उसने कहा था, की गुड़िया तुम आलरेडी मुझसे बेहतर हो. ये वाक्य उसके अपने मायने में एकदम सच था, इसलिए उसने ऐसा कहा. इस स्थिति में वो केवल चुप चाप खड़ा है, पर उसकी गुड़िया आज उसके सामने उसकी ढाल बनकर कड़ी है.

नेहा : हमने यहाँ आप सभी को वो बातें बताने के लिए बुलाया है जो अभी तक सब से छिपी हुई थी और जिनके बारे में बात करके हम एक नतीजे पर पहुँच सके... न की इसलिए बुलाया है की आप जो मर्ज़ी चाहे वैसा बेहवे करे और मेरे भाई के साथ बदतमीज़ी करे... ये मत भूलिए की हम चाहते तोह आप सभी को अँधेरे में रख कर भी सब कुछ कर सकते थे पर हमे भी आपका ख़याल hai...isliye यहाँ पर आप सभी को बुलाया गया है. पर ये क्या... आप सब तोह दादागिरी पर उतर आये. मेरा भाई! उससे भी लड़ना आता है, पर वो चुप चाप खड़ा होक मार सेह लिया... क्यों?? क्युकी उससे बड़ो का आदर करना आता है और उससे आप सभी का ख़याल भी है. पर मुझे आदर का मीनिंग केवल लिमिटेड hi पता है. तोह अहिंदा से मेरे भाई के साथ बिलकुल भी मिस्बेहावे करने की सोचना भी मत, वर्ण में ये पूरी तरह hi भूल जाउंगी की आदर का मीनिंग क्या होता है. और हां! जैसे अंशु दी और वंशु दी भाई से प्यार करती है वैसे hi में भी अपने भाई से प्यार करती हु. एक भाई बहिन से कही ज़्यादा. और न केवल में, तानिया दीदी भी भाई से वैसे hi प्यार करती है... और यही है सच्चाई जिसके लिए आपको यहाँ बुलाया गया है"

नेहा के बोल न ज़्यादा ुचि आवाज़ में थे और न hi ज़्यादा हलकी आवाज़ में, उसके बोल इतने स्पष्ट थे की वह खड़े हर्र एक व्यक्ति के कान में गूँज रहे थे.

नेहा के इतने साहसी व्यहवहार को देख तानिया में भी जो हिम्मत डर के मारे पीछे छुपी हुई थी वो एकदम से बाहर आ गयी और वो आगे आकर राहुल का दूसरा हाथ थाम ली,

"एकदम सही कहा नेहा ने. हम सभी राहुल से प्यार करते है. आपको यही बताने के लिए बुलाया गया है यहाँ. और हां! राहुल के साथ कोई भी दुर्व्यवहार करने की सोचना भी मत, वर्ण में भी भूल जाउंगी की आप सब मेरे परिवार वाले है. मेरा गुस्सा एकदम बेकाबू है"

पीछे कड़ी वंशु ने भी राहुल को पीछे से hi अपनी बाहो में जकड लिया और उसकी पीठ से लग कर hi रोने लगी.

वंशु के बगल में कड़ी अंशु अपना सर झुकाए हुए थी. उससे ग्लानि और उदासी महसूस हो रही थी. वो कुछ नहीं कर पायी. उसने बोलना शुरू किया था ये सोच के की वो राहुल को उस स्थिति से बाहर निकाल लेगी पर वो कुछ नहीं कर पायी, राहुल को तमाचा भी पद गया. ऐसे वक़्त नेहा और तानिया दोनों hi हिम्मत जूता के आगे आ गयी पर वो कुछ नहीं कर पायी. वो आज दर्री हुई थी.

"थैंक्स नेहु!! तूने आज वो किआ जो में करने में असफल रह गयी. यदि तुम न होती आज तोह कोई कुछ नहीं कर पाटा और भाई के लिए स्थिति और भी बिगड़ जाती. Mein...mein... मेरे से कुछ न हो सका..." अंशु सोचते हुए अपना निचला होंठ दातो टेल दबा के राहुल की शर्ट का कोना पकड़ लेती है, उसकी आँखों में भी पानी आ जाता है.

राहुल अपनी चारो बहनो से घिरा हुआ था. आज वो सभी उसकी ढाल बनकर उसकी रक्षा के लिए कड़ी हुई थी.

"यह! थिस फीलिंग! आईटी फीलस सो गुड तो बे लव्ड", राहुल ने शांत मैं से सामने सभी को देखा जिनकी आखें फटी की फटी थी और मुँह खुले के खुले थे.

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आज के लिए इतना hi गाइस!


धन्यवाद्!
 
अपडेट - 107

अब तक...



राहुल अपनी चारो बहनो से घिरा हुआ था. आज वो सभी उसकी ढाल बनकर उसकी रक्षा के लिए कड़ी हुई थी.


"यह! थिस फीलिंग! आईटी फीलस सो गुड तो बे लव्ड", राहुल ने शांत मैं से सामने सभी को देखा जिनकी आखें फटी की फटी थी और मुँह खुले के खुले.

अब आगे...



ललिता और मुकेश जो की अभी तक विराजमान थे, जब उनकी खुद की बेटी के मुँह से भी यही सुना, की वो भी राहुल से प्यार करती है वो दोनों भी एक झटके में अपनी जगह से उठ खड़े हुए और भौचक्के होते हुए तानिया को देखने लगे.

राजेश जिससे झटके पे झटके लग रहे थे, उससे आखिरी झटका इतना तेज़्ज़ लगा की वो लड़खड़ा कर सोफे पर गिर पड़ा. उससे विश्वाश hi नहीं हो रहा था की ये सब असल में घटित हो रहा है. निशा ये देख फौरन उसके पास आयी और कड़ी रही.

रुपेश जो की नेहा के अकस्माक विकराल रूप से थोड़ा शांत हुआ वो फिरसे आगे बढ़ने की कोशिश करने लगा पर तभी एक बार फिरसे नेहा की आवाज़ कमरे में गूँज गयी,

"खबरदार!!! जो भी बात करनी है, वही से कीजिये! मेरे भाई को कोई छियेगा भी नहीं"

रुपेश का गुस्सा बढ़ तोह रहा hi था पर उसने अपने आप को जैसे तैसे नियंत्रण में किया, "देखो नेहा! सामने से हट जाओ, मुझे अपनी दोनों बेटियों से बात करनी है. तुम्हारा इसमें कोई काम नहीं है, सामने से हट जाओ. वंशिका! सामने आओ!!"

रुपेश की दहाड़ सुनते hi वंशु जो राहुल के पीछे से उससे जकड़ी हुई थी वो और भी डर गयी और उसने राहुल को और कस के जकड लिया.

अभी रुपेश एक कदम और आगे बढ़ाता की तभी विनीता उसकी ब्याह पकड़ उससे रोक लेती है, "ृक्क जाइये!!!"

रुपेश : विनीता? तुम अभी बीच में मत आओ.

विनीता : मेने कहा न रुकिए...

विनीता के विरोध में रुपेश उससे सवालिया नज़रो से देखने लगता है,

विनीता : वो दर्री हुई है, क्या आपका गुस्सा आप पे इतना हावी हो गया है की आपको आपकी बेटी की नाज़ुक हालत तक दिखाई नहीं दे रही? क्या करेंगे आप यदि बेचारी का वो पुराना डर फिरसे शुरू हो गया? बड़ी मुश्किल से वो उस दलदल से बाहर निकली है. आप तोह ड्यूटी चले जाते थे, आपको क्या इतना डिटेल में पता भी है जितना मुझे पता है? मुझसे पूछिए! कैसे बेचारी कमरे में बंद रहती थी, हमेशा दर्री हुई. क्या आप चाहते है की वो फिरसे उसी दलदल में डूब जाए? बोलिये!?

रुपेश : wo...mein...

विनीता की बात सुन्न रुपेश के मुँह से कोई उत्तर नहीं निकलता. उससे भी एहसास हुआ की वो क्या करने जा रहा था. यदि आज उसकी ये हरकत से उसकी बेटी का वो पुराना डर फिरसे बैठ जाता तोह रुपेश अपने आप को कभी माफ़ नहीं कर पाटा. अच्छा हुआ विनीता ने उससे जो रोक लिया. गुस्सा अपनी जगह है, पर अपनी बेटी को दुःख दर्द में देखना अपनी जगह. वो गुस्से के चलते, अपनी बेटी को दुःख दर्द में कभी नहीं देख सकता. वो भी अपनी पहली और सबसे बड़ी बच्ची को.

रुपेश शांत होक कुछ कदम पीछे लेते हुए विनीता के बगल से खड़ा हो जाता है.

इधर मुकेश और ललिता उनके बाद आगे बढ़ते है. मुकेश रुपेश की तरह गुस्से वाला व्यक्ति नहीं था. शुरू से hi उसका व्यवहार विनम्र और शांत प्रवत्ति का था. राहुल तोह उसका जैसे पसंदीदा मित्र था. तनीषा की पढ़ाई के लिए जब राहुल ने अपने हाथ फैलाये थे तोह मुकेश ने ख़ुशी ख़ुशी उसकी मदद की थी, राहुल ने भी सक्सेसफुल होते hi वो पैसे दुगुने भाव में लौटा भी दिए थे.

पर ये क्या? जिस राहुल पे उससे इतना भरोसा था वो ऐसा निकला?

आगे बढ़ते हुए मुकेश ने अपने हाथ खोल लिए, जैसे मानो भीख मांग रहा हो.

मुकेश : राहुल बीटा!? क्या यही फायदा उठाया तूने मेरा!? क्यों किया ये सब? हां? सब जानते हुए भी की ये कितना बड़ा पाप है, उसके बाद भी तुमने ऐसा किया? क्यों?? एक दिन तुम आए थे न मेरे पास? तनीषा की पढ़ाई के लिए मुझसे मदद मांगने? आज में यहाँ तुम्हारे सामने अपने हाथ फैलाये हुए हु बीटा... मुझे मेरी बच्ची लौटा दे, मत कर ऐसा कुछ भी जिसके चलते सारे समाज के सामने हम गिर जाए, मत कर ऐसा कुछ की सबके बीच हमारी ठु ठु हो जाए, में तेरे हाथ जोड़ता हु बीटा...

मुकेश को ऐसे देखते हुए राहुल को बोहत बुरा लगने लगा. वो कभी भी अपने मां को ऐसे नहीं देखना चाहता था. पर वो क्या करे अब? क्या वो मुकेश की विनती सुन्न कर तानिया को लौटा सकता है? नहीं! तानिया भी राहुल से प्यार करती है और राहुल भी तानिया से उतना hi प्यार करता है जितना वो बाकी सभी से करता है.

राहुल : मां जी...

"राहुल का इसमें कोई दोष नहीं है, आपको कुछ कहना है तोह मुझसे कहिये पापा. में hi थी जिसने राहुल को पहले प्रोपोज़ किया. में hi उसके प्यार में पहले पड़ी... तोह मुझसे बात kariye...jo भी करनी है", बगल में कड़ी तानिया ने फौरन hi राहुल के आगे बढ़ते हुए सवालों का प्रहार अपने सर ले लिया.

मुकेश : तानिया!? तू जानती है न तू क्या कह रही है? देखो बीटा! में फ़ालतू का गुस्सा कर के मामला नई बिगाड़ना चाहता, गुस्से से कुछ भी हासिल नहीं होता. इसलिए शान्ति से कह रहा हु, मेरी बात मानो और अभी के अभी चलो यहाँ से बीटा

तानिया : नहीं पापा! प्यार तोह प्यार है. यदि मुझे राहुल से हो गया तोह इसमें क्या बुराई है?

मुकेश : तानिया तुम दोनों भाई बहिन हो. ये घनघोर पाप है. तुम राखी बांधती हो उससे, अब इस से पहले की में भी भाई साहब की तरह गुस्से में आके कुछ अनर्थ कर दू, चल दो हमारे साथ

तानिया : मम्मी!! पापा!! में कही नहीं जाने वाली. में राहुल से hi प्यार करती हु. और... और आप चाहे जो करले, मेरा फैसला नहीं बदलेगा...

मुकेश : तनियाआ...

ललिता : क्यों बीटा? क्यों?? क्यों किया तूने ऐसा? देख! तेरे माँ बाप को कितनी तकलीफ हो रही है. अभी भी समय है बीटा, मान बात और चल हमारे साथ और भूल जा ये सब.

तानिया : नहीं मम्मी! आप समझ नहीं रही है मेरा प्यार ऐसा वैसा नहीं है. मेने अपने आप को पूरा समर्पित कर दिया है राहुल को. में उस से बोहत ज़्यादा प्यार करती हु मम्मी. और क्या बुराई क्या है राहुल में? क्या में उसकी कजिन हु केवल इसलिए में उस से प्यार नहीं कर सकती?

ललिता : हां! तू उसकी बहिन है और इसलिए तू उस से प्यार नहीं कर सकती

तानिया : क्यों नहीं कर सकती??

ललिता : क्युकी ये समाज के खिलाफ है और...

तानिया : तोह भाड़ में गया ये समाज. मुझे क्या लेना देना समाज से? मुझे तोह केवल मेरे प्यार से लेना देना है. सिर्फ वही चाहिए मुझे. और यदि समाज बीच में आया तोह में उस समाज को अपने रास्ते से हटा दूंगी...

ललिता : तानिया...

नेहा : मां जी! ममी जी! शायद आप अब भी समझ नहीं रहे है. हमने आपको यहाँ ये राज़ बताने के लिए बुलाया न की आपको फैसला लेने के लिए...

ललिता : नेहा तुम...

नेहा : में एक बार फिरसे स्पष्ट तरीके से समझात हु. ममी जी! आप बताइये आप मां जी से प्यार क्यों करती है?

ललिता : हँ?

नेहा : आपकी अरेंज्ड मैरिज हुई पर उसके बाद भी आप दोनों एक दूसरे से प्यार करने लगे, क्यों??

ललिता : kyuki...kyuki इन्होने मेरा बोहत ख़याल रखा, हर्र बुरे वक़्त में मेरा साथ दिया, हर्र ख्वाइश पूरी की, इसलिए...

नेहा : एक्साक्ट्ली! भाई ने भी यही किया है हमारे साथ. सच कहु, तोह मुझे भाई से बचपन से hi प्यार था पर मुझे उस वक़्त पता नहीं था की ये प्यार है. में तोह बस वो सब करती थी जो मेरे मैं में आता था. भाई के साथ चिपकी रहती थी बस. फिर धीरे धीरे मुझे रीलीज़ हुआ की ये तोह प्यार है और मेने अपनी फीलिंग्स भाई के सामने रख दी...

ललिता : बीटा पर ये गलत है. निशा तुम समझाती क्यों नहीं अपनी लड़की को...!?

निशा सर झुकाए बस कड़ी रहती है पर उससे पता था की अब उससे सन में आने hi पड़ेगा वर्ण ऐसा न हो की प्लान बिगड़ जाए,

"भाभी! आप सभी को सचाई पता चलने से पहले ये साड़ी सच्चाई मुझे पता चला थी और जहा तक में समझ पायी हु, बेहतर यही है की बच्चो को अपनी मैं की करनी दी जाए"

ललिता : निशाआअ!???

राजेश : निशा?? ये क्या कह रही हो तुम? इतनी बड़ी बात हो गयी और तुमने मुझे बताया तक नहीं? ये सब क्या हो रहा है घर में? हमारे बच्चे आपस में भाई बहिन होते हुए प्यार करने लग गए? बाहर किसी को खबर होगी तोह क्या मुँह दिखाएंगे हम? क्या जवाब देंगे?

नेहा : समाज! समाज! समाज!... बस इसी का डर है न आप सबको? अंत में आप सब भी समाज के नौकर hi निकले... क्या ज़रूरी है आप सब के लिए? समाज या अपने बच्चो की ख़ुशी?? क्या ये समाज आया है कभी आपकी मदद करने? जब आप परेशानी में रहते हो तोह क्या समाज आता है आपसे पूछने की आप को कोई परेशानी तोह नहीं? कोण मदद करता है मुश्किल में आप सबकी? कितनी बार मेरे भाई ने आप सबकी मदद की है?? वो समाज जो आपको केवल मौका मिलते hi बुरा भला कहने लगे उस समाज की फिक्र कर रहे है आप? केवल आपको उठने बैठने मिले समाज में इसलिए आप अपनी बच्चो की ख़ुशी तक छीनने के लिए तैयार हो गए? प्यार तोह किसी से भी हो सकता है न? तोह समाज ने कह दिया की भाई बहिन में प्यार नहीं होता तोह आप सब मान लिए? कल को समाज कहेगा अपनी बीवी को तलाक देके दूसरी शादी कर लो तोह क्या आप वो भी करेंगे? बोलिये???

नेहा की ुचि आवाज़ सुनते hi सभी एकदम शांत पद गए. उसका हर्र एक प्रश्न ऐसा था जिसका जवाब देना मुश्किल था.

ललिता : बेटा... तुम...

नेहा : मेरे सवाल का उत्तर दीजिये ममी...

राजेश : neha...beta ये गलत है...

नेहा जैसे इस मौके का इंतज़ार hi कर रही थी, राजेश के बोलते hi उसने फौरन राजेश पे निशाना साध दिया,

"ओह्ह्ह!! में सोच hi रही थी की आप जबसे क्यों चुप है? कुछ बोल क्यों नहीं रहे है...

आपको ये गलत लग रहा है?? आप सब सुन्न रहे हो न? इन्हे ये गलत लग रहा है... इन्हे तब गलत नहीं लगा था, जब इनके मुँह से ये निकला था की काश नेहा पैदा नहीं हुई होती... तब इन्हे गलत नहीं लगा था... जब मेरे भाई ने सारा इलज़ाम अपने सर्र ले लिया और हमेशा मेरा क्रूर व्यवहार सेहत रहा, तब इन्हे ये गलत नहीं लगा... जिस भाई ने मुझे सच्चाई से दूर रखा ताकि में अपने माँ बाप न खो दू उस भाई के लिए किसी ने भी नहीं सोचा की वो केसा है, उसके दिल में क्या है, तब किसी को कुछ गलत नहीं लगा...

जब मुझे सचाई पता चली की जिस भाई से में नफरत कर रही हु वही है जो मेरी हर्र ख़ुशी के लिए अपने आप को दर्द देता जा रहा है तोह ऐसी कोण सी बहिन होगी जिसके अंदर अपने भाई के लिए प्यार नहीं उमड़ेगा?? बोलिये?? और अब जब में फाइनली अपने भाई के साथ प्यार कर सकती हु तब अचानक से मेरे पिता जी और बाकी घरवाले आ जाते है और कहने लगते है ये गलत है... तोह में पूछती हु... कहा थे आप सब जब ये सब हो रहा था?? कहा थे आप सब जब मेरा भाई साड़ी ज़िम्मेदारिया ले रहा था?? बोलिये...

और एक बार फिर सभी के नज़रे नीचे झुक गयी. हो न हो, उन्हें अपनी गलती का एहसास हो रहा था.

ललिता : बीटा पर... हमे खुद तुम्हारी सच्चाई नहीं पता थी... निशा ने मन कर के रखा था ki...samay आने पर सब पता चल जाएगा

नेहा : और आपने मान लिया? ज़रा सा भी प्रयास नहीं किया की कैसे भी करके सच्चाई का पता लग सके?

ललिता : प्रयास किया था बीटा... बोहत प्रयास किया पर... निशा ने नहीं बताया...

नेहा : में वो सब कुछ नहीं जानती. केवल इतना जानती हु की... में और मेरी दिदिया मेरे भाई से प्यार करती है और कुछ नहीं. और आप सभी को ये बता रही हु, आप से निवेदन नहीं कर रही हु...

रुपेश कुछ देरर सब कुछ सोचता है और साइड में सोफे पर विराजमान हो जाता है. राजेश तोह नेहा के तीखे बोल सुन्न के पूरा ग्लानि से भर चूका था और सर झुकाए बस उदास बैठा हुआ था.

मुकेश : देखो बीटा राहुल! तुम भी जानते हो ये सब गलत है... तुम जानते हो की हम सब समाज में ये सब नहीं दिखा सकते, सभी का उठना बैठना है, यदि तुम सब के लिए हम राज़ी हो भी जाते है पर समाज से कैसे छुपाएंगे? ये सरासर गलत है बीटा. तुम तानिया को समझाओ... .

राहुल : मां जी! ऐसा पहली बार हो रहा है जब मुझे आपको निराश करना पड़ेगा. क्युकी.. में तानिया से प्यार करता हु और वो भी मुझसे करती है... पर... में आपकी समस्या को सुलझा सकता हु...

मुकेश : क्या मतलब ??

राहुल : बड़े पापा आपका क्या फैसला है? क्या आप राज़ी है? वंशु और अंशु को मुझे सौपने के लिए...

रुपेश : में तोह कुछ कहने लायक hi नहीं बचा... गुस्सा नहीं कर सकता, क्युकी ये दो फूल मेरी जान है. किसी को भी दुःख में नहीं देख सकता पर समाज के खिलाफ जाके ये सब करना ये बोहत बड़ा पाप है, अनर्थ है ...

विनीता... कुछ कहो... आज में कमज़ोर पद गया हु... क्या कहु में... इन्होने मुझे ऐसी स्थिति पर लाके चोरर दिया है जहा एक तरफ खायी है तोह दूसरी तरफ कुआ... जाऊ तोह जाऊ कहा?

विनीता : क्या में एक बात कहु?

विनीता ने अपनी नम्म आँखों से रुपेश को देखते हुए कहा,

रुपेश : कहो विनीता

विनीता : में सिर्फ इतना चाहती हु, की मेरी दोनों बच्चिया खुश रहे और कुछ नहीं! किसके लिए हमने ये सब कमाया है? किसके लिए हम दिन रात प्रार्थना करते है? सब कुछ हमारे बच्चो के लिए hi तोह है

रुपेश : तोह तुम्हारा कहना ये है की हम राज़ी दे दे?

विनीता : हम्म्म

रुपेश : पर ऐसे कैसे विनीता? तुम...

राहुल : क्या आप समाज के लिए चिंतित है? क्या आप ऐसा चाहते है की बाहर किसी को भी ये पता न चले?

रुपेश : क्यों? क्या ये मुमकिन है?

राहुल : बिलकुल है! उसी के लिए तोह में हु यहाँ पर... तोह आप सब यही चाहते है न की समाज को इस बात की कानो कान खबर न हो?

विनीता : हम्म्म

राहुल : उसका हल है मेरे पास

ललिता : केसा हल?

राहुल : ऋचा!!! मेरी शादी ऋचा से होएगी. और उसके बाद इन् सभी से...

रुपेश : ye...ye क्या बकवास है?

राहुल : समझाता हु. बैठिये! ऋचा मुझसे प्यार करती है और में उस से. हमारी शादी श्री लंका में होएगी. क्युकी... वह पॉलीगम्य अल्लोवेद है. मतलब सरल भाषा में, एक से ज़्यादा पत्नी रखना अल्लोवेद है. अब समाज के सामने मेरी शादी हो चुकी है और पत्नी है ऋचा. उसके बाद में इन् सब से वही शादी करूँगा, न hi किसी को कुछ पता चलेगा और न hi कोई दिक्कत आएगी, क्युकी श्री लंका की सिटीजनशिप है हमारे पास. तोह में एक से ज़्यादा पत्नी रख सकता हु. ऐसा करने से, ना hi आपको कोई तकलीफ होगी और न hi हमको... आप तोह यही चाहते है न? की आपके बच्चे खुश रहे? घर की बात घर में hi रहेगी... आप मुझपर पूरा भरोसा करिये... किसी को भी दुःख नहीं पोहुंचाउंगा और किसी पे भी आंच तक नहीं आने दूंगा... हमेशा खुश रखूँगा. इसलिए आप सभी से आपकी बेटियों का हाथ मांगता हु आज में...

राहुल की बात ख़तम होते hi बाकी सब उससे ऐसे देख रहे थे जैसे ज़ू में कोई अजीब जानवर आया हो. क्या बाके जा रहा है ये? पर जो भी था, राहुल की तरफ से अत्यंत सच था. यही उसने प्लान करके रखा था.

हॉल के साइड में ऊपर जाती सीडिया के पास बाकी चारो लड़किया झांक के सब कुछ सुन्न रही थी. ये थी मोनिका, तनीषा, प्रीती और ख़ुशी...

प्रीती से रहा नहीं गया और वो ज़िद्द करके सबको अपनी बातो में फसा के नीचे ले आयी. हालांकि मोनिका और तनीषा ने मन किया था पर बाद में वो दोनों भी उसकी चिकनी चुपड़ी बातो में फस्स गयी, क्युकी जिज्ञासा तोह उन्हें भी थी.

प्रीती : तोह ये है राहुल का प्लान??

तनीषा : हम्म्म्म

मोनिका : मुझे तोह अभी भी बोहत गुस्सा आ रहा है... राहुल को थप्पड़ कैसे मारा...

ख़ुशी : ी... ी रियली लिखे नेहा... शी हांडलेड आईटी सो वेल...

मोनिका : हम्म? हां! उसने बोलती hi बंद करदी सबकी...

तनीषा : आखिर बहिन किसकी है?

मोनिका : हहै! मेरे राहुल की...

तनीषा : हमारे राहुल की... न की मेरे...

मोनिका : ughhh...okay!

रुपेश : ये सब क्या है? ये ऋचा बीच में कहा से आ गयी?

ललिता : राहुल! में समझ गयी हु तुम क्या कहना चाह रहे हो पर क्या ऋचा इस सब के लिए राज़ी होगी?

ऋचा : j..jii! में राज़ी हु. मुझे कोई दिक्कत नहीं हु. Infact...I... I'll बे हैप्पी. ी लव हिम.

ऋचा की बात सुनकर किसी को विश्वाश hi नहीं हो रहा था की कोई लड़की इतना सब जान ने के बाद भी राहुल से प्यार कर सकती है..

विनीता : ऐसी कोण सी जड़ीबूटी खिलाई हो राहुल तूने इन् सबको? ज़रा मुझे भी तोह बता में भी इन्हे 2-4 खिला दू...

अंशु : कोई जड़ी बूटी नहीं है मम्मी! यदि भाई जैसा आपका भाई हो तोह प्यार तोह होना hi है.

विनीता : मेरी लड़किया... आज यहाँ तक आ गयी की मुझे समझाने लगी है...

ठीक है! मेरे और इनकी तरफ से हां है बीटा. अब कुछ किया भी नहीं जा सकता है, बेहतर है की हम तुम्हारे हिसाब से hi चले, काम से काम मेरी दोनों बच्चिया तोह खुश रहेंगी...

ललिता : मेरी और इनकी तरफ से भी हां है... अब ऐसे मोड़ पे आ गए है जहा से वापस नहीं जाय जा सकता. और... सही कहा... बच्चो की ख़ुशी पहले है... यदि इसी में तुम्हारी ख़ुशी है तोह... हमे अपने ऐतराज़ को बीच में नहीं लाएंगे... खुश रहो तुम सब!

तानिया (रट हुए) : थैंक यू माँ... थैंक यू सो मच... आप बिलकुल चिंता मत कीजिये, में राहुल के साथ बोहत खुश रहूंगी...

निशा : आप को कुछ कहना है क्या?

राजेश : क्या कहु निशा? सही hi तोह कहा नेहा ने... में उसका गुनेहगार हु... मेरा क्या हक़ है उस से उसकी ख़ुशी छीन ने का...

निशा : आप उसके पिता है...

राजेश : वो pita...jo अपनी बच्ची का जन्म नहीं चाहता था...

निशा : आप नशे में थे...

राजेश : नशे में आदमी सच बोलता है न!?

निशा : आपको बहकाया गया था... और फिर आप नशे में थे... जिसका परिणाम वो ना चाहने वाले शब्द आपके मुँह से निकले

राजेश : हां तोह गलती तोह मेरी hi है न...

निशा : हां! पर इतनी भी नहीं... की... आप अभी तक उस बात के लिए भुगते...

राहुल : गुड़िया... डैड की गलती थी... पर... उनको बहकाया गया था... उनके एक फ्रेंड ने... वो सब बाते उनके मैं में दाल दी थी और उन्हें शराब पिलवाई थी... जिसके चलते... उस रात वो सब गलती से हो गया...

नेहा : ......

राहुल : डैड?? क्या आपकी इजाज़त है हमे? क्या आप राज़ी है???

राजेश : में... क्या कहु!? कुछ कहने लायक नहीं हु... जहा भी रहो तुम सब... खुश रहो... मेरी नेहा को खुश रखना... मुझसे गलती हुई है... मुझे उसके लिए माफ़ी नहीं माँगना क्युकी में माफ़ी के क़ाबिल नहीं हु...

राहुल पीछे से नेहा के पीठ पर हल्का धक्का देता है और उससे राजेश के पास जाने के लिए कहता है. नेहा भी धीरे धीरे आगे बढ़ती है और एकदम पास में जाके कड़ी हो जाती है.

अपने पिता के ासु देख उसके दिल पसीज जाता है और वो गले से लग जाती है. राजेश जो की अपनी बेटी को बाहो में लेते hi जैसे उसका बाँध टूट गया और वो रोने लगा.

बगल में कड़ी निशा भी रोने लगी, आज इस मौके पर आखिर कार दोनों बाप बेटी का मिलान हो hi गया और सब कुछ सुलझ गया...

राजेश : में तेरा दोषी हु बीटा...

नेहा : न्यू... में भी गलत थी... आपने कभी भी मुझ पर हाथ तक नहीं उठाया बूत मेने हमेशा आप से बुरा व्यवहार किया, आपसे बात भी नहीं की...

निशा : अब तोह तुम समझ गयी न बेटी? वो सब गलती थी एक... जिसकी सजा तुम्हारे डैड को मिल गयी. तोह अब तोह तुम नाराज़ नहीं हो न?

नेहा : न्यू माँ! I'm हैप्पी!

निशा : देखा आप सबने!? मेने कहा था न, बच्चे बड़े हो गए है. वो जो कर रहे है उन्हें करने दीजिये. आज इसी ख़ुशी के मौके पर क्यों न हम इनकी ख़ुशी में शामिल होक इन्हे प्रोत्साहन दे? बड़े होने के नाते हमारा तोह ये कर्त्तव्य है की हम रिश्तो को टूटने से बचाये और वैसे भी... बेतु हम सब को ध्यान में रख कर hi ये सब कर रहा है ताकि घर की बात घर में hi रहे...

ललिता : निशा की बात सही है. बच्चे है तोह हम है. उनकी खुशिया छीन के क्या हम खुश रह पाएंगे? नहीं न...

विनीता : हां! मेरे ख्याल से... राहुल से बेहतर मेरी बच्ची के लिए कोई नहीं है. क्युकी राहुल ने hi उसका फोबिया ठीक किया था, राहुल के पास hi मेरी बच्ची सबसे ज़्यादा सेफ फील करेगी...

ललिता : हां! और ऋचा बेटी... हम सबकी तरफ से तुम्हे बोहत बोहत धन्यवाद्!! तुम्हारा ये उपकार हम कभी नहीं भूलेंगे... इतना सब जानते हुए भी तुम राहुल से शादी के लिए तैयार हो गयी...

ऋचा : नहीं आंटी... इनफैक्ट I'm लकी... की में राहुल की पत्नी बन्न पा रही हु

ललिता ये सुन्न राहुल को आश्चर्य जनक भाव से देखने लगती है. राहुल? क्या खिला के लाया है तू इससे?

राहुल : जो भी अन्न बन्न हुई, उसके बारे में सोचना बंद कर दीजिये. वो तोह होना hi था. मामला hi ऐसा था. पर... अब सब कुछ ठीक है, सभी की आज्ञा भी मिल गयी है, तोह अब हम सभी को आशीर्वाद दीजिये ताकि हम सभी जल्द से जल्द ये सब कर सके...

उसके बाद सभी ने थोड़ी देरर यही बातें करि, जैसे जैसे समय बीता, सभी के मैं ने ये बात को अपनाना शुरू कर दिया. और सभी वापस पहले की तरह घुलने मिलने लगे.

ऋचा : umm...toh? आगे क्या करना है?

राहुल : ऑफ़ कोर्स तुम्हारे घर जाना है मेरी रीचु... तुम्हारा हाथ मांगने...

ऋचा (ब्लश) : हम्म्म...

और राहुल आगे बढ़कर ऋचा के मीठे होंठ अपने होंठो में भर लेता है की तभी...

"बोहत हो गयी किश इस चलिए हटिये", नेहा आके एकदम से दोनों को अलग कर देती है...

ऋचा (ब्लश) : नेहा! थिस इस रॉंग...

नेहा : सॉरी ऋचा दी! बूत मुझे भाई से बात करनी है कुछ...

ऋचा : अरे पर...

नेहा : बाद में, बाद में... जाइये बाहर मेरे रूम में, बाकी सभी वही पर है...

और नेहा ऋचा को धकेलते हुए धीरे धीरे कमरे के बाहर कर देती है और कमरा अंदर से लॉक करके दरवाज़े पर पीठ टिका के राहुल को देखने लगती है,

राहुल : गुड़िया?

नेहा : don't यू थिंक भाई... ी डेसेर्वे ा क्रेडिट? मतलब मेने इतना कुछ कहा नीचे... तोह कुछ रिवॉर्ड तोह बनता है न?

राहुल : हम्म? हां रिवॉर्ड तोह बनता है. बोलो? क्या चाहिए मेरी गुड़िया को?

नेहा आगे आकर राहुल के गले में अपने हाथ डालती है और उसके कान के पास आकर नशीली सी आवाज़ में कहती है,

"आप"

और अगले hi पल नेहा राहुल के होंठ अपने मुँह में भर लेती है.

दोनों hi एक मीठी सी किश में डूब जाते है.

आज भले hi मामला ऊपर नीचे हुआ पर अंत में सब कुछ सुलझ गया. पर क्या अब आगे भी सही जाएगा या कोई परेशानी कड़ी होएगी? ये तोह वक़्त hi जाने.

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आज के लिए इतना hi गाइस!


धन्यवाद्!!
 
अपडेट - 108

अब तक...

राहुल : हम्म? हां रिवॉर्ड तोह बनता है. बोलो? क्या चाहिए मेरी गुड़िया को?

नेहा आगे आकर राहुल के गले में अपने हाथ डालती है और उसके कान के पास आकर नशीली सी आवाज़ में कहती है,

"आप"

और अगले hi पल नेहा राहुल के होंठ अपने मुँह में भर लेती है.

दोनों hi एक मीठी सी किश में डूब जाते है.

आज भले hi मामला ऊपर नीचे हुआ पर अंत में सब कुछ सुलझ गया. पर क्या अब आगे भी सही जाएगा या कोई परेशानी कड़ी होएगी? ये तोह वक़्त hi जाने.


अब आगे...

रात में सभी राजेश के घर hi ठहर गए थे. हॉल में रुपेश और मुकेश काउच एवम दीवान पर सोये तोह वही निशा के रूम के बगल से लगे गेस्ट रूम में ललिता और विनीता ठहर गयी.

अब दिक्कत थी बाकियो की. राहुल के कमरे में तोह ऋचा, तनीषा और मोनिका थी. और नेहा के कमरे में अंशु वंशु और तानिया. ख़ुशी और प्रीती अब कहा सोती? तोह रात में ये डीडे हुआ था की राहुल नीचे गद्दा बिछा के सोयेगा और बाकी ऋचा तनीषा मोनिका ख़ुशी ऊपर सो जाएंगी और प्रीती राहुल के बगल से नीचे hi सो जाएगी.

हालांकि सभी लड़किया राहुल के बगल से सोने की ज़िद्द करने लगी, पर प्रीती ने सभी को ये कह के मन कर दिया की वो सब राहुल के साथ कुछ न कुछ हरकते ज़रूर करेंगी और अभी ये सब नहीं करना चाहिए क्युकी सभी घर में मौजूद है. प्रीती और राहुल के बीच कुछ भी नहीं था इसलिए सभी मान भी गयी.

यही प्लान नेहा ने अपनाया और वो नीचे गद्दा बिछा के वह लेत गयी और अपने बीएड पर उसने अंशु वंशु और तानिया को लिटा दिया.

लाइट बंद हुई और सभी सोने का प्रयत्न करने लगे. अब जो बिस्तर पर पसरे हुए थे उन्हें तोह कुछ hi शान बाद नींद ने अपने आग़ोश में ले लिया.

राहुल जाएगा हुआ था और साथ hi प्रीती भी. न जाने क्यों पर प्रीती का दिल ज़ोरो से धड़क रहा था, अपने मैं को वो बिलकुल भी शांत नहीं कर पा रही थी.

इसके पहले तोह उसके साथ ऐसा कभी नहीं हुआ सोते वक़्त. फिर आज अचानक से ऐसा क्यों? क्या राहुल था इसका कारण?

"व्हाई ऍम ी फीलिंग लिखे थिस? मेरा दिल इतने ज़ोरो से क्यों धड़क रहा है?? ओह गॉड!!" प्रीती राहुल की उलटी साइड मुँह करके लेती हुई थी और अपने आप से यही सवाल करे जा रही थी.

राहुल को भी नींद नहीं आ रही थी इस वक़्त. वो बस आँखें बंद किये आज जो भी घटित हुआ उसके बारे में सोच रहा था.

इन् दोनों के अलावा कोई और भी था जो इस वक़्त जाएगा हुआ था. वो थी नेहा. जब करीब 1-1:30 घंटा बीत गया तब नेहा ने पहले अपने कमरे में मौजूद लोगो का जायज़ा लिया की आखिर सब सो गए की नहीं? उसके बाद वो दबे पाँव बिना कोई शोर करे अपने कमरे से बाहर निकली और राहुल के कमरे में आ गयी. रात में राहुल का कमरा लॉक नहीं था, न hi नेहा का, क्युकी किसी चीज़ का डर hi नहीं था, इसलिए कमरा किसी ने लॉक नहीं किया.

राहुल के कमरे में आते hi नेहा की नज़र नीचे लेते राहुल पर गयी,

"ये देखो! शादी के पहले से hi ये हाल है. साड़ी महारानियाँ ऊपर लेत गयी और अपने राजा को नीचे लिटा दिया."

नेहा ने बगल में लेती प्रीती पर उतना ध्यान नहीं दिया और वो आगे आयी और राहुल के पेट के ऊपर धीरे से बैठ गयी. इस वक़्त वो अपनी लाइट ब्लू कलर की सुन्दर सी नाईट ड्रेस में थी, जो की ढीली ढाली सी थी और राहुल भी केवल वेस्ट और एक काले लोअर में था.

नेहा थोड़ा सा झुकी और राहुल के एक गाल को उसने अपनी हथेली में थामा,

"मुझे पता है आप जाग रहे हो!"

उसके इतना कहते hi राहुल की बंद आँखें खुल गयी,

"गुड़िया!?"

नेहा : हम्म्म!

राहुल : तू यहाँ? क्या हुआ?

नेहा : कुछ नहीं! बस आपको देखना था...

राहुल : ः तोह में कही भागा थोड़ी जा रहा हु गुड़िया...

नेहा : अरे यार भैया... यू अरे सो स्टुपिड!

राहुल : अब क्या हुआ?

नेहा : मुझे आपको देखने का मैं था तोह में आयी, बिकॉज़ ी लव यू सो मच न... इत्ती सी बात नहीं समझ में आती आपको?

राहुल : अच्छा बाबा माफ़ कर दे...

नेहा : हम्म! कर दिया माफ़! अब किसी दो

राहुल : हँ?

नेहा : ी साइड किसी दो...

राहुल : तू भी न... क्यों मेरी टांग खींच रही है? सजा गुड़िया, सुबह जल्दी उठना भी है.

नेहा : आप देते हो की नहीं?

राहुल : okay okay...

राहुल अपने हाथो को नेहा की कमर से हटा कर उसकी पीठ पर ले जाता है और उससे हौले से धकेल कर नीचे अपने ऊपर झुका लेता है और नेहा के गुलाबी होंठो को अपने होंठो में भर लेता है.

"उम्मम्मम्म", नेहा हलकी सिसकी भर्ती है दोनों की ये मीठी किश कुछ सेकण्ड्स तक चलती है

"ी लव यू!" नेहा राहुल के होंठो से अलग होते हुए कहती है, उसकी आँखों में बस प्यार hi प्यार नज़र आ रहा था.

उसकी आँखें पारदर्शी थी जैसे, कुछ भी छुप नहीं सकता और उसके बावजूद राहुल को उनमे केवल प्यार दिखा अपने प्रति.

"ी लव यू तू गुड़िया", राहुल ने नेहा को देखते हुए कहा.

अगले hi पल नेहा ने राहुल का हाथ थामा और उठाते हुए अपने सीने पे रखवा लिया,

"ये धड़कन सुन्न रहे हो भाई?"

राहुल का हाथ जैसे hi नेहा के उरोजों के हल्का सा ऊपर पहुचा उससे नेहा के दिल की धड़कने महसूस हुई, *धक् धक्*

नेहा : ये केवल आपके लिए धड़क रही है...

नेहा ने प्यार से राहुल का हाथ अपने सीने से लगाए हुए उससे देखते हुए कहा जिससे सुन्न इस बार राहुल की धड़कने तेज़्ज़ हो गयी और अगले hi पल फिरसे मीठी सी एक किश.

नेहा राहुल के सीने के ऊपर hi अपना सर रख के लेत जाती है,

"आपको याद है भैया?"

राहुल : हम्म?

नेहा : jab...jab में आपसे नफरत करती थी, तब एक din...ek दिन मेने वो काजल को लाके आप पर झूठा आरोप लगाया था!?

राहुल : ओह्ह्ह हआ! मुझे याद है

नेहा : सो सॉरी भाई! मेरा इरादा आपको फेक रपे केस में फसाने का बिलकुल भी नहीं था. आपसे नफरत करते हुए भी में सिर्फ आपको उस वक़्त माँ के हाथो 2 4 थप्पड़ खाते हुए देखना चाहती थी बस...

राहुल : दमन! सो क्रुएल ः...

नेहा : सॉरी भैया! में बोहत बुरी थी उस वक़्त. और आपको याद है, जब आप यहाँ से गए थे... तोह एयरपोर्ट पे आपने मेरे साथ क्या किया था!?

राहुल : हम्म?

नेहा : आपने मेरा गाल नोचा था और कहा था अब कभी नहीं गुड़िया... उसका मतलब क्या था? बोलिये??

राहुल : ओह्ह्ह! मुझे लगा tha...ki...ki अब में हमेशा हमेशा के लिए तुम्हारी ज़िन्दगी से चला jaunga...aur यही में चाहता भी था क्युकी तुम्हारे लिए यही बेहतर था की तुम मुझे भूल जाओ गुड़िया. इसलिए उस waqt...mere मुँह से वो सब निकल गया शायद...

नेहा : भैया! आप जानते नहीं हो, जब आपने वो कहा था न... मेरे दिल की धड़कन तेज़्ज़ हो गयी थी, अजीब सी बेचैनी होने लगी थी, मेरे दिल में कही से एक आवाज़ आ रही थी की उसी वक़्त आपको जकड लू और कही न जाने दू पर मेरी नफरत ने उससे दबा दिया...

राहुल : सॉरी गुड़िया...

नेहा : no!! I'm सॉरी! और याद है जब हम तानिया दी की बड़ी बहिन रूचि दीदी की शादी में मिले थे?

राहुल : हम्म? हां!!! में तोह सीधा शादी वाले दिन hi पहुचा था उसमे...

नेहा : हां! जिस वक़्त आप आये थे, में वाशरूम में थी, और जैसे hi में बाहर निकली आप ममी जी से बात कर रहे थे. आपको देखते hi फिरसे मेरे दिल की धड़कने तेज़्ज़ हो गयी थी, आपको कितने समय बाद देख रही थी, आप पहले से कितने ज़्यादा हैंडसम हो गए थे, और फिर आपने मुझे देखा और मेने आपको... में बता नहीं सकती उस वक़्त में क्या फील कर रही थी

राहुल : उस वक़्त में भी तुझे देख के खो गया था गुड़िया. तू कितनी सुन्दर दिख रही थी, पानी से तेरा चेहरा भीगा हुआ था... एकदम पारी जैसी...

नेहा : वो सब तोह ठीक है पर कमाल तोह आपने किया था, आप एकदम से मेरे पास आये, मेरे कानो पर झुकते हुए क्या कहा था आपने? आपने कहा था "किसी हो?" उफ़! भाई!! मेरा तोह रोम रोम हिल गया था उस वक़्त... सासें कण्ट्रोल नहीं हो रही थी मुझसे मेरी... फिर तोह जो में टेरेस पे भागी हु आपसे नज़रे चुरा के... में hi जानती हु उस वक़्त में क्या फील कर रही थी...

राहुल : ः! तुझे इतने समय देखने के बाद मेरे क़दम अपने आप बढ़ गए थे तेरी तरफ गुड़िया... बाद में मेने खुद को दोष भी दिया था, की क्यों किया मेने ऐसा...

नेहा ये सुन्न फौरन राहुल को जोरर से जकड लेती है,

नेहा : नूवो भाई!! Don't से तहत प्लीज. आप जानते नहीं हो, पर अभी में इतनी खुश हु की आपने मेरे साथ वो किया था...

पर मेने उस वक़्त आपकी वो हरकत गलत वे में लेली थी, मुझे लगा आप मेरा मज़ाक उड़ाने आये थे और ऐसा किया आपने...

राहुल : हैं??

नेहा : हां! इसलिए फिर शादी वाली रात में.. आपको याद है? जब आप कोल्ड ड्रिंक पी रहे थे, तब में आपके पास आयी थी, ये सोचके की में आपका मज़ाक उड़ा के अपना बदला ले लुंगी...

राहुल : हां! मुझे याद है... और क्या तोह कहा था तूने?? हां! यहाँ शराब नहीं मिलेगी

सीरियसली? गुड़िया? तेरी नज़र में में शराबी था क्या?

नेहा (ब्लश) : न्यू भाई! आप भी न! में तोह बस टॉन्ट मार रही थी आपको, मुझे उस वक़्त भी पता था आप कभी शराब को वैसे नहीं पीते... रेगुलरली मतलब. हलाकि अब मुझे नहीं पता आप पीने लगे है या नहीं... बताइये मुझे!

राहुल : हम्म! नहीं! में तोह बोहत hi काम कभी ोक्सासिओंस में hi लेता हु थोड़ी बोहत, वो भी तब जब लोग फाॅर्स करे, नई तोह कभी नहीं.

नेहा : हम्म! और आपने उस वक़्त क्या कहा था?

राहुल : क्या?!

नेहा : मेने आपको अपने दिल का हाल बताया था उस वक़्त... की मेरी लाइफ में कोई एक शक्श था बोहत क्लोज जो की अब नहीं है, मेरा मतलब आप से hi था... और आपने भी फिर बताया था...

राहुल : ओह्ह्ह हआ!! तुमने hi पूछा था कोण कोण है मेरे दिल में स्पेशल फॅमिली के लोग

नेहा : हआ! और आपने सबका नाम लिया था सिवाए मेरे नाम के... मेरा दिल अंदर hi अंदर इतना एक्सपेक्ट कर रहा था न भाई, की काश आप मेरा नाम ले लो, मुझे नहीं पता ये सब मेरे दिल का कोण सा कोना सोच रहा था पर यदि आपने उस वक़्त मेरा नाम ले लिया होता न

राहुल : ???

नेहा : तोह उसी वक़्त में आपकी बाहो में कूद गयी होती...

राहुल : में ऐसा चाह के भी नहीं कर सकता था गुड़िया... वर्ण मतलब hi क्या रह जाता...

नेहा : ी क्नोव!! में उस रात बोहत रोई थी भाई... बोहत... मुझे समझ नहीं आ रहा था की मुझे उस बात का बुरा क्यों लगा था, पर आज समझ में आ गया... आपसे प्यार जो करती थी... इसलिए मुझे वो इतना दुःख पोहचाया था... ी विल लव यू ऑलवेज भाई...

राहुल : लव यू तू!! एंड सॉरी!

नेहा : नहीं प्लीज! सॉरी मत कहिये! आपकी कोई गलती नहीं! अब आप मेरे पास हो, ी don't केयर अबाउट एनीथिंग ेल्स नाउ... ी ओनली केयर अबाउट यू... Aur...ek बात और कहु?

राहुल : हम्म! कहो न...

नेहा : ी थिंक... यदि आप वो इलज़ाम अपने ऊपर नहीं लेते न और मेने वो सब डायरेक्टली डैड के मुँह से सुना होता... तोह ी थिंक... मुझे उतना बुरा नहीं लगता... जितना आपके मुँह से सुनाने में लगा था...

इस बार राहुल एकदम आश्चर्यता से नेहा को घूरने लगता है,

नेहा : हहै! सही सुना आपने... ी मैं ी लव माँ एंड डैड बूत मेरा प्यार आपके लिए स्पेशल है, मच मोरे थान माँ एंड डैड... तोह यदि मेने डैड के मुँह से वो सब डायरेक्टली सुना भी होता तोह... ऑब्वियस्ली में हर्ट होती, घर भी चोरर देती शायद, बूत एक दो दिन बाद वापस भी आ जाती... पर मेने वो सब आपके मुँह से सुना... एंड यू क्नोव...

राहुल : .......

नेहा : में पूरी तरह टूट गयी थी... मेरे सबसे फवौरीते पर्सन ने मुझे वो सब कहा... मैं कर रहा था मर्डर जाऊ सीधे...

राहुल : गुड़िया...

नेहा : हां भाई! मेरे मैं में ख़याल आया था, की जब आप hi मुझसे रूठ गए, तोह अब बचा hi क्या ज़िन्दगी में, पर आपसे प्यार भी करती थी... भले hi आप कितना भी जूथ बोल के ना चाहते हुए भी मेरा दिल दुखाने की कोशिश करते थे पर में वो सेहती रहती थी, काम से काम आपका चेहरा तोह देख पाती थी रोज़... और दिल में एक होप थी... की मय्बे एक दिन आएगा, जब आप कहोगे वो सब झूठ था और में फिरसे आपकी बाहो में होंगी...

एंड सी! आज हम दोनों एक दूसरे की बाहो में है

राहुल : मुझे बिलकुल भी नहीं पता था गुड़िया तूने ऐसा सोचा... में तोह अपने हाथो hi अपनी गुड़िया को मार देता वर्ण...

नेहा : प्लीज don't फील बाद भैया! आपको नहीं पता था की में आपसे प्यार करती हु, इसलिए आपने सोचा की आप अपने ऊपर इलज़ाम ले लोगे और मुझे बचा लोगे... बूत... सच तोह ये है की... में और ज़्यादा हर्ट हुई थी. कभी कभी सोचती हु... की क्यों आपने वो इलज़ाम अपने सर ले लिया, यदि नहीं लिया होता तोह आज में और आप बस होते, किसी को भी बीच में नहीं आने देती में... पर फिर ये भी सोचती हु की आप मुझसे प्यार करते थे इसलिए आपने वो सब मेरे लिए किया...

राहुल : हम्म्म!!!

नेहा : हहै और वो मोमेंट जब आपने मेरा हाथ मरोड़ा था...

राहुल : अरे हआ... तुझे लगा तोह नहीं था न?

नेहा : नहीं! इनफैक्ट, मेरे दिल का वो हिस्सा जो आपसे बेहद प्यार करता था वो एकदम खुश था उस वक़्त... Kyuki...aapne अपनी तरफ से मुझे पकड़ा था. आप मुझे वर्ण छींटे भी नहीं थे पर उस दिन आपने मुझे पकड़ा और में आपसे एकदम सत् के लगी हुई थी... मेरे दिल का वो हिस्सा इतना एक्ससिटेड था उस समय...

राहुल : तू भी अजीब hi है गुड़िया...

नेहा : हहै! अरे अजीब नहीं हु, शार्ट में कहु तोह... में आपसे प्यार करती थी, आपकी हर्र एक हरकत मुझे अच्छी लगती थी पर मेरे दिल की आपके प्रति घृणा ने वो प्यार को दबा के रख दिया था. अब समझे?

राहुल : हम्म! समझा! तू भी कमाल hi है...

नेहा : वो तोह में हु hi... हहै!

राहुल : चल अच्छा अब सजा... बोहत हो गयी ये बातें...

नेहा : हम्म! में तोह सो जाउंगी पर आपका क्या?

राहुल : क्या मतलब?

नेहा (ब्लश) : wo...aapka...wo...mujhe चुभ रहा hai...aap एक्ससिटेड हो न?

राहुल का लुंड नेहा की इतनी पैशनेट और प्यार भरी किस्सेस के बाद आखिर कहा चुप रहने वाला था, वो तोह कबका अपने विकराल रूप में आ चूका था

राहुल (ब्लश) : ahem...tu ध्यान मत दे उसपर और इधर मेरे बाजू से लेत जा, नई तोह अपने रूम में सजा फिरसे

नेहा : में आपके साथ hi सोऊंगी...

राहुल : तोह फिर बगल में आ मेरे

नेहा : पर आपका क्या? अब कैसे सो पाओगे ऐसे?

राहुल : वो में... सो जाऊंगा तू टेंशन मत ले

नेहा : प्रॉब्लम जाएगी आपको, ी क्नोव... में क्या कहती हु...

राहुल : हम्म??

नेहा (ब्लश) : चलिए वाशरूम में... में... में आपको वह रिलीज़ करवा दूंगी...

राहुल : पागल! सजा चुप चाप...

नेहा : अरे में सच कह रही हु... फर्स्ट टाइम है मेरा बूत में कर लुंगी, ट्रस्ट में

राहुल : तू सोती है की नहीं? में गुस्सा हो जाऊंगा ऐसे में...

नेहा : no no no! सो जाती हु... गुस्सा मत होना प्लीज!

और नेहा राहुल से चिपक के hi वैसे hi सोने लगती है. कुछ hi देरर में दोनों नींद की वादियों में खो जाते है.

पर इनकी बातें 2 कानो से बच के न जा सकीय. प्रीती इस वात सोइ नहीं थी. राहुल के बगल से लेते हुए उससे नींद hi नहीं आ रही थी और तभी नेहा भी आ गयी. हर्र बातें उसने अपने कानो से सुनी और उससे ये पता लगा की नेहा राहुल से बेपनाह मोहब्बत करती है. इस बार उससे कोई जेएलओसी फील नहीं हुई, इस बार वो दोनों का प्यार देख के खुश थी. उसका कोई भाई नहीं था न hi कोई बहिन, न hi माँ बाप. बस ख़ुशी hi है उसके पास. तोह राहुल और नेहा को ऐसा देख वो भी अंदर hi अंदर खुश थी दोनों के लिए.

प्रीती (मैं में) : ी वंडर यदि राहुल मेरा भी भाई होता तोह क्या होता? क्या में भी उस से ऐसे प्यार करती? क्या होती वो फीलिंग? व्हाई ऍम ी थिंकिंग सुच थिंग्स...? सजा प्रीती... सजा...

सवेरा हुआ. परिवार वाले कल के मुकाबले आज कई हद्द तक ओपन थे एक दूसरे से. सब कुछ सामने जो आ गया था कल. तोह सभी ने यही डीडे किया की एक जुट होक चलने में hi भलाई है.

रुपेश : तोह? कोण कोण चल रहा है फिर?

राहुल : में माँ डैड और नेहा का जाना तोह ज़रूरी hi है आप और बड़ी मम्मी भी चलिए. बाकी सब यही ृक्क सकते है

मुकेश : ठीक है! आप सभी जाइये. में और ललिता यही रुकते है और बाकी बच्चे भी यही रुक जाएंगे...

विनीता : ठीक है! तोह फिर तैयार हो जाओ फटाफट... निशा अपनी साड़ी मुझे देदे कोई भी...

निशा : जी भाभी! आइये मेरे साथ आप..

राजेश : हां भाई! आप मेरे कपडे में से पहन लेना

रुपेश : हां ये ठीक रहेगा... बाद में फिर नए कपडे वही से लौटते हुए खरीद लेंगे... क्युकी अब तोह लगने hi है

राजेश : हां! खरीद दारी तोह फिर करनी hi है.

उसके बाद सभी तैयार हुए और कार में बैठे, रुपेश ने अपनी कार में विनीता को बैठा लिया और राहुल ने अपनी कार में अपने परिवार वालो को और ऋचा को और सभी चल दिए.

कुछ hi मिनट की दुरी में कार एक घर के सामने ृक्क गयी. सभी उतरे और ऋचा काफी एक्ससिटेड लग रही थी. क्युकी कार उसके घर के सामने hi जो रुकी थी.

लम्बे कदमो के साथ वो दौड़ती हुई दरवाज़े पर पोह्ची और उसने बेल्ल बजायी, बाकी सभी भी आके दरवाज़े के पास खड़े हो गए. तभी अंदर से निकिता ने दरवाज़ा खोला और सामने ऋचा के देख के चौंक गयी एकदम से, फिर एकदम से उसके चेहरे पर ख़ुशी छ गयी और वो सीधा ऋचा की बाहो में कूद गयी, "डीडीईई"

ऋचा : निक्कीी...

निकिता : ी मिस्ड यू सो मच...

ऋचा : में तू निक्की...

और अगले hi पल जैसे hi निकिता की नज़र बाकी सब पर पड़ी वो फिरसे चौंक गयी, "नेहु तू? राहुल भैया? अंकल आंटी????"

नेहा : ऐसे क्या देख रही है? स्वागत नहीं करेगी हमारा?

तभी निकिता आके नेहा के गले मिलती है और rajesh-nisha और rupesh-vineeta को नमस्ते करती है और फिर उसकी नज़र राहुल पर टिक जाती है.

राहुल उससे देख प्यारी सी मुस्कान देता है और अपना हाथ Hi करने के लिए उठाता hi है की उससे इतनी तेज़्ज़ धक्का लगता है एकदम से सीने में, निकिता फुल फाॅर्स के साथ राहुल की छाती में आयी की राहुल दांग रह गयी बेचारा और उसने राहुल को कस के जकड लिया

राहुल : आराम से निकिता... बाप रे! लग गयी मुझे...

निकिता कुछ नहीं बोली बस राहुल के सीने में अपने गाल लगा कर आँखें बंद किये कड़ी हुई थी. नेहा बगल से दोनों को hi घूर कर देख रही थी, खासकर की निकिता की हरकत को...

निकिता (मैं में) : ी कनेव आईटी... ी वास् मिसिंग थिस... कितने सालो बाद... ये एहसास... ी don't वांट तो सेपरेट...

नेहा : एहम! निक्की?

निकिता : हँ? Umm..haa वो... आइये न आप सब... Aaiye...andar...

और अगले hi पल निकिता राहुल से अलग होक बिना उस से नज़रे मिलाये सभी को अंदर ले जाने लगती है. आज लउकीली विनोद घर पर hi मौजूद था तोह वो निकिता की आवाज़ सुन्न कमरे से बाहर आया और साथ hi आरती भी.

आरती : अरे?? ऋचा? मेरी बच्ची... निशा तुम?? नेहा, राहुल..? आज सब एक साथ?

ऋचा दौड़ते हुए अपनी माँ और बाप के गले से लग गयी.

आरती : कब आयी तू? और इन् सब के साथ? क्या चल रहा है?

ऋचा : आपको सब पता चल जाएगा थोड़ी देरर में...

विनोद : अरे आरती! चाय नाश्ता करवाओ सभी को... जल्दी फटाफट

आरती : हां हां! बैठिये आप सब... में अभी लाइ... और मन मत करियेगा... खाना खा के hi जाइएगा

राहुल : हां हां! चाय नाश्ता वैसे भी हमने घर में नहीं किया है. ः! तोह आंटी! में तोह जमके खाने वाला हु

आरती : बीटा ये घर भी तेरा hi है. तुम्हे जो मांग रखनी है न रख दे, तेरी ये आंटी सब बना के देगी तुझे... शर्माने की बिलकुल भी ज़रुरत नहीं

राहुल : ः! बिलकुल आंटी! ी क्नोव... ये घर मेरा hi है... अब तोह और होने वाला भी है

आरती राहुल की बात सुन्न पल भर के लिए उससे देखती है और राहुल भी मुस्कुराते हुए आरती की आँखों में देखता है. आरती उसके शब्दों का मतलब समझने की कोशिश करती है और जैसे अचानक से उसकी आँखों में एक चमक आ जाती है पर अगले hi पल वो अपने दिमाग से वो बातें निकाल कर अंदर किचन में चली जाती है.

विनोद : जी तोह आप सब यहाँ एकदम से? कोई ख़ास बात?

राहुल : अंकल ख़ास बात होगी तभी हम आ सकते है क्या?

विनोद : अरे ऐसी बात नहीं है बीटा! जब चाहो आप सब आ सकते हो.

राहुल : ः! ख़ास बात तोह है वैसे... पर चाय नाश्ता हो जाने दीजिये उसके बाद बात करते है हम सभी...

विनोद : ठीक है! ये भी सही है... जैसे तुम कहो...

नेहा निशा और ऋचा भी तीनो अंदर जाके किचन में मदद करवाने लगती है,

आरती : निशा तूने बताया तक नहीं? अरे एक फ़ोन तोह कर देती! ऊपर से तेरे जेठ और जेठानी भी आये हुए है... अरे घर फैला रहता तोह केसा लगता फिर?

निशा : अरे! सब कुछ एकदम से हुआ आरती... और वैसे भी तुम्हारा घर नहीं फैला रहता... निकिता तोह जमाती hi होगी... क्यों है न?

निकिता : हां आंटी! पापा फैलाते है घर... में जमा जमा के थक जाती हु

निशा : ः! मेरे यहाँ भी यही हाल है बीटा

आरती : और तू बीटा?? बिना बताए ऐसे आयी? सामान कहा है तेरा?

ऋचा : माँ! Don't वोर्री! मेरा सामान राहुल के घर में है

आरती : अरे? तोह तू जब ग्वालियर आयी तोह यहाँ क्यों नहीं आयी अपने घर? खामखा निशा को तकलीफ दी... यहाँ आके सामान रख देती फिर चली जाती राहुल से मिलने...

ऋचा : अरे वो बात नहीं है माँ... अभी सब पता चल जाएगा न... क्यों टेंशन ले रही हो

निशा : हां! तू चाय पे ध्यान दे, वर्ण बिगड़ न जाए ः

आरती : हां हां! छुपा लो मुझसे...

निकिता : umm...nehu!? मुझे तोह बता... क्या बात है? ऐसे तुम सब एकदम से? और दीदी तेरे घर क्यों गयी पहले?

नेहा : वो सब चोरर तू मुझे ये बता... तू मेरे भाई को अपनी बाहो ने जकड के क्या सोच रही थी? हम्म्म??

निकिता (पैनिक) : हँ?? ये तू क्या बोल रही है... में... Mein...kuch भी नहीं सोच रही थी... में तोह बस उन्हें हुग करि... और कुछ नहीं...

नेहा : ओह्ह अच्छा!? काफी जोरर से हुग करि थी वैसे तू... इतनी जोरर से तोह तूने मुझे आज तक हुग नहीं किया...

निकिता : अरे कुछ नहीं न यार... तू ऐसे बातें मत बना... में बस एक्ससिटेड थी इसलिए...

नेहा : हम्म्म! चल तू कहती है तोह मान लेती हु फिलहाल के लिए. वैसे... मुझे तुझे थैंक्स कहना है...

निकिता : थैंक्स? किस बात के लिए?

नेहा : हहै! तेरे सुग्गेस्टिव के लिए...

निकिता : सुग्गेस्टिव? कोण सा?

नेहा : अब वो में बाद में बताउंगी! बूत रियली थैंक्स! इवन थौघ मेने वो बोहत पहले से hi करने का सोच लिया था बूत तेरे सुग्गेस्टिव ने मुझे हिम्मत दी थोड़ी...

निकिता : कोण सा यार? बता न...

नेहा : बाद में बाद में... चल! ट्रे उठा और बाहर लेके चल...

नाश्ते की ट्रे लगी और सभी चाय और पकवानो के स्वाद का लुत्फ़ लेने लगे. जब नाश्ता करके सभी फुरसत हुए तोह वापस से विनोद ने मुद्दे की बात चेदि,

"हां जी! अब तोह चाय नाश्ता भी हो गया! अब तोह बताइये कुछ!?"

राजेश : जी! अब... ये हो सकता है आपको अजीब लगे... पर... हम सब यहाँ आपकी बेटी का हाथ मांगने आए है हमारे बेटे राहुल के लिए...

कुछ देरर तक तोह आरती और विनोद राजेश की बात सुन्न छुप hi हो गए, उन्हें विशवास hi नहीं हुआ, फिर अगले hi पल आरती के चेहरे पे ेदकुम से चमक आ गयी और उसने राहुल की तरफ देखा जो मुस्कुरा रहा था,

"मतलब!? मतलब में सही थी?", आरती ने मैं में सोचा और फिर राहुल की तरफ आगे बढ़ गयी,

आरती : राहुल बीटा? क्या सच में? क्या आप सब सच कह रहे है?

राहुल : जी हां आंटी! एकदम सच!

आरती फौरन hi राहुल को अपने सीने से लगा लेती है और उसकी आँखें नम्म हो जाती है

आरती : मेरी ख्वाइश पूरी हो गयी...

विनोद : मुझे तोह अब भी ताजुब हो रहा है

आरती : मेरी बच्ची किस परेशानी में थी पेबल ये में hi जानती हु... जब से उसकी दोस्ती राहुल से हुई वो जैसे उभरने लगी. मुझे पता चल गया था की मेरी बच्ची राहुल से प्यार करती है पर वो कहने से दरर्ति थी. मुझे ये भी डर था की कही राहुल से उसकी दोस्ती ख़तम न हो जाए और राहुल कही किसी और से शादी कर के हमेशा के लिए मेरी बेटी से दूर न हो जाए... यदि ऐसा होगा तोह मुझे पता था मेरी बच्ची का दिल टूट जाएगा... पर आज जैसे आप सब ने कह के मेरी ख्वाइश पूरी कर दी... हमारी तरफ से हां है...

ऋचा साइड में खड़े ख़ुशी के ासु बहाने लगती है और निकिता उसके बगल में खड़े एकदम स्तब्ध होक सामने का नज़ारा देख रही थी. क्या चल रहा था उसके मैं में? ख़ुशी? दर्द? जलन? उदासी? पीड़ा? या घृणा?

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आज के लिए इतना hi गाइस!


धन्यवाद्!
 
अपडेट - 109

अब तक...

विनोद : मुझे तोह अब भी ताजुब हो रहा है

आरती : मेरी बच्ची किस परेशानी में थी पेबल ये में hi जानती हु... जब से उसकी दोस्ती राहुल से हुई वो जैसे उभरने लगी. मुझे पता चल गया था की मेरी बच्ची राहुल से प्यार करती है पर वो कहने से दरर्ति थी. मुझे ये भी डर था की कही राहुल से उसकी दोस्ती ख़तम न हो जाए और राहुल कही किसी और से शादी कर के हमेशा के लिए मेरी बेटी से दूर न हो जाए... यदि ऐसा होगा तोह मुझे पता था मेरी बच्ची का दिल टूट जाएगा... पर आज जैसे आप सब ने कह के मेरी ख्वाइश पूरी कर दी... हमारी तरफ से हां है...

ऋचा साइड में खड़े ख़ुशी के ासु बहाने लगती है और निकिता उसके बगल में खड़े एकदम स्तब्ध होक सामने का नज़ारा देख रही थी. क्या चल रहा था उसके मैं में? ख़ुशी? दर्द? जलन? उदासी? पीड़ा? या घृणा?


अब आगे...



कुछ समय बीता, ऋचा के घर में राहुल की फॅमिली बैठी हुई थी. शादी का रिश्ता फिक्स हो जाने के बाद सभी के बीच हस्सी मज़ाक का सिलसिला शुरू हो गया.

राहुल बैठा सभी के चेहरों पर मुस्कान देख रहा था और मैं hi मैं सोच रहा था,

"मेने सही किया!! में इन्हे साड़ी सच्चाई नहीं बता सकता. अभी के लिए तोह नहीं. बाद में वक़्त के हिसाब से देखा जाएगा. डैड और बाकी सब को लगता है में अपनी बहनो के अलावा ऋचा के साथ शादी करूँगा और सब ख़तम. पर उन्हें ये नहीं पता की, इन् सब के अलावा भी मेरी बाकी प्रेमिकाए है जिनके साथ में शादी करूँगा hi... ये में नहीं बता सकता इन्हे. अभी नहीं! और रही बात ऋचा के पेरेंट्स की... तोह उन्हें सिर्फ ये जान न है की... में और ऋचा शादी कर रहे है, बाकी साड़ी बातें उनसे छिपी रहेंगी... यही सही है!! रही बात निकिता की... ी थिंक उससे बताने में कोई हर्ज़ नहीं है... वो सीक्रेट दबा के रखेगी... ये काम में ऋचा पे चोरर दूंगा."

और ऐसे hi उस दिन के बाद शादी की तैयारियां दोनों hi घरो में शुरू हो गयी. राहुल ने सभी को बता दिया था की शादी श्री लंका में होगी. इस बात से ऋचा की फॅमिली वाले थोड़ा असमंजस में थे, क्युकी उन्हें अपने देश भारत में शादी करने का मैं था. पर राहुल के लिए ये करना ज़रूरी था, उसकी मजबूरी जो थी. जैसे तैसे उसने सभी को मन लिया और शादी की प्रेपराशंस शुरू की गयी.

ऐसे hi वक़्त बीता, आज ऋचा और राहुल की शादी थी. दोनों के परिवार वालो में से केवल ख़ास लोग hi मौजूद थे. राहुल के कुछ फ्रेंड्स थे और बाकी परिवार के सदस्य.

साड़ी शादी एक भारतीय शादी की तरह hi की गयी, पूरे रीती रिवाज़ो के साथ. राहुल की सभी प्रेमिकाए भी शामिल थी, उन्हें पता था ये ज़रूरी था, पर अंदर hi अंदर उन्हें जलन हो रही थी की वो पहली बीवी क्यों नहीं बन्न पायी!?

राहुल के मास्टर भी शामिल थे, पर उन्होंने शुरू से लेके अंत तक राहुल से कोई बात नहीं की. वो केवल ख़ुशी के साथ hi खड़े हुए थे.

मास्टर : तोह ये है तुम्हारी ख़ुशी? बीटा!?

ख़ुशी : डैड! ी क्नोव ये बोहत hi अजीब है, पर राहुल ने मुझसे प्रॉमिस किया है... ी क्नोव हे लव्स में. He'll मर्री में!

मास्टर : और ये बाकी लड़किया जो उसके साथ रहेंगी!? तुम्हे ये सब मंज़ूर है!?

ख़ुशी : हां डैड! ी क्नोव it's वीयर्ड! बूत... बूत डैड, मुझे सिर्फ अब राहुल चाहिए है. ी don't केयर अबाउट एनीथिंग ेल्स.

मास्टर : पता नहीं क्या जादू कर दिया है राहुल ने मेरी बच्ची पर... तुम्हे याद है न? यदि मुझे ज़रा भी खबर मिली की तुम उदास हो इन् सब के चलते, में उसी दिन तुम्हे घर वापस ले आऊंगा और एक न सुनूंगा...

ख़ुशी : ी क्नोव डैड! और... आपको वो करने का मौक़ा कभी नहीं मिलेगा...

मास्टर ने ख़ुशी का निर्धारित चेहरा देखा जो पूरा विश्वास से भरा हुआ था और उन्होंने एक आह भरते हुए सब समय पर चोरर दिया.

राहुल : सो? हाउ अरे यू फीलिंग?

ऋचा (ब्लश) : I've नेवर बीन थिस हैप्पी... थैंक यू हनी!!!

राहुल : उम्... निकिता को...

ऋचा : मेने उससे बता दिया है सब कुछ!

राहुल : हँ!? Aur...kya था उसका रिएक्शन?

ऋचा : हाहाहा! उसका चेहरा देखने लायक था. वेल! उससे सबसे ज़्यादा झटका तब लगा जब मेने नेहा के बारे में बताया... बेचारी को विश्वास hi नहीं हो रहा था. उम्... क्या सब कुछ उससे बता के हमने सही किया?

राहुल : हम्म! ये ज़रूरी था. यदि उससे बाद में पता चलता तोह बोहत बुरा लगता. वैसे भी, वो कोई परायी नहीं है...

ऋचा : हां हां! अब तोह तुम्हारी साली हो गयी है.

राहुल : ः! साली तोह है hi बूत असलो she's मोरे लिखे ा गुड फ्रेंड...

इस से पहले दोनों और कुछ बातें करते वह पर निकिता नेहा तानिया तीनो आ गयी. राहुल और ऋचा इस वक़्त अपनी शादी की ड्रेस में सजे हुए स्टेज पर hi बैठे थे जहा उनके फोटोज क्लिक किये जा रहे थे.

नेहा और तानिया ऋचा से बातें करने में लग गयी और निकिता आके राहुल के बगल से चेयर के एआरएम रेस्ट पर बैठ गयी और उसके कानो में झुकते हुए बोली,

"ी नेवर एक्सपेक्टेड थिस राहुल भैया... इतनी साड़ी लड़कियों के साथ आप..."

राहुल : एहम... निकिता! हम बाद में बात करेंगे इस बारे में...

निकिता (ब्लश) : वैसे... दो यू हैवे ान एक्स्ट्रा प्लेस?

राहुल : एक्स्ट्रा प्लेस?

निकिता (ब्लश) : umm...kuch नहीं!

राहुल : ओह्ह्ह! सो? तुम बताओ! आगे का क्या प्लान है तुम्हारा? करियर का!?

निकिता : हम्म! मेने ब करने का सोचा है

राहुल : ओह्ह्ह्ह! थॉट्स गुड! उसके बाद जॉब हां? बढ़िया है! यू क्नोव यू कैन आस्क में फॉर अन्य हेल्प राइट?

निकिता (ब्लश) : ऑफ़ कोर्स! ी क्नोव!

"मेने डीडे कर लिया है! में पहले ब करुँगी, आपकी कंपनी में जॉब मुझे पाना है तोह मुझे उसके क़ाबिल भी तोह बन्न न पड़ेगा न? एंड थें... I'll डीडे... की ये फीलिंग तब भी रहती है या नहीं? यदि तब भी ये फीलिंग न मिटी... तोह..."

निकिता ने अपने मैं में सोचा की राहुल ने उससे टोका,

राहुल : ोये? कहा खो गयी!?

निकिता : हँ? नहीं! कुछ नहीं! अब तोह आप एन्जॉय करो मेरी दीदी को...

राहुल : ये भी कोई कहने की बात है? हाहाहा

निकिता (ब्लश) : वैसे! यू अरे लुकिंग सो हैंडसम राहुल भैया... सच कहु तोह... मेरी नज़रे आप पर से हट hi नहीं रही है...

राहुल : ओह्ह? हाहाहा! थैंक्स! तुम जितना चाहो मुझे देख लो, अब तोह वैसे भी तुम मेरी साली भी बन्न गयी हो. और साली तोह आधी घरवाली होती है

निकिता (मैं में) : में पूरी घरवाली बन्न न चाहूंगी भैया...

निकिता : आपने सही कहा! वो...

इस से पहले वो कुछ और बोलती नेहा ने उसका हाथ पकड़ा और वह से ले जाने के लिए कहने लगी. निकिता को और भी बातें करनी थी पर नेहा में तोह उससे मौका hi नहीं दिया.

तानिया hi बची जो दोनों राहुल और ऋचा से बातो में लग गयी.

इधर नेहा ने निकिता को लाके एक कोल्ड ड्रिंक थमाई और खुद भी पीने लगी,

"यार! कबसे प्यास लग रही थी... पी न तू भी"

निकिता : नेहु!!

नेहा : हां?

निकिता : तूने इतना बड़ा सच मुझसे छिपाया?

नेहा : हँ? कोनसा?

निकिता : यही की... तू राहुल भैया से प्यार करती है?

नेहा : हँ?? वो... हम्म्म! तोह तुझे पता चल hi गया !?

निकिता : हां! दीदी ने सब कुछ बता दिया!

नेहा : ओह्ह्ह! तुझे याद है !? में और बाकी सब जब रिश्ता लेके आए थे तेरे घर!?

निकिता : हआ

नेहा : तब याद है मेने तुझे कहा था की मुझे तुझे थैंक्स कहना है, तेरे सुग्गेस्टिव के लिए...

निकिता : हां! ी रेमेम्बेर!

नेहा : तोह में तुझे उसी सुग्गेस्टिव के लिए थैंक्स कह रही थी जो तूने एक बार मुझे बोहत ोेहके दिया था

निकिता : कोण सा सुग्गेस्टिव?

नेहा : वही सुग्गेस्टिव... जिसमे तूने सुग्गेस्ट किया था... की में अपने भाई को hi अपना बर्फ क्यों नहीं बना लेती!? ः....

उसकी बात सुन्न निकिता अपनी मेमोरीज में खो जाती है और वो बात याद करने की कोशिश करने लगती है और उससे एकदम से जैसे याद आता है की उसने नेहा से वाक़ई ऐसा कहा था जब दोनों के बीच लड़ाई चला करती थी... और नेहा ने वो सुग्गेस्टिव मान भी लिया और यहाँ वो राहुल से इतना दूर बानी हुई है,

ये सोचते hi उससे इस बात का हल्का सा खेद होने लगता है... अपने निचले होंठ को दांत से दबाते हुए वो नेहा को थोड़ी जलन भरी नज़रो से देखती है पर फिर अपना सर हिलाते हुए वो सारे विचार हटा देती है.

ऐसे hi शादी संपन्न हुई और ऋचा के परिवार वाले वापस से भारत लौट गए, राहुल भी सभी के साथ फिलहाल के लिए भारत लौट आया. निशा को अब कोई भी चिंता नहीं थी, सब कुछ राहुल के प्लान के अकॉर्डिंग hi हो रहा था तोह उसने सब कुछ राहुल पे hi चोरर दिया. हां! जब भी राहुल को उसकी ज़रुरत पड़ती, इसके लिए निशा तैयार थी पर राहुल को निशा की ज़रुरत hi नहीं पड़ी, वो वैसे भी अपनी माँ निशा पर काम का बोझ नहीं डालना चाहता था.

शादी हो जाने के बाद, राहुल ऋचा को पेरिस लेके आ चूका था. पिछली बार दोनों का पेरिस जाने का प्लान कैंसिल हो गया था. इसलिए, इस बार राहुल कोई कसार नहीं चौररने वाला था.

ऋचा एक बड़े से सुन्दर से रूम में बैठी हुई थी. उसने अभी एक रेड लिंगेरी पहनी हुई थी जो काफी सेक्सी लग रही थी उस पर. उसके मेहँदी से रचे हुए गोर हाथो में वो सुन्दर सुन्दर सी चूडिया, खुले हुए हलके बाल जो नीचे कमर पर आते आते हलके करलेंड थे, रसीले होंठो पर हलकी लाल लिपस्टिक, और उसकी मांग में सिन्दूर. ऋचा पूरी एक कामदेवी लग रही थी. वो खड़े होकर खिड़की से अद्भुत नज़ारा देख रही थी जहा से उससे एइफ्फेल टावर स्पष्ट दिखाई दे रहा था. राहुल बाहर ऋचा के लिए कुछ सामान खरीदने निकल गया. ऋचा होटल के रूम की चीज़े उसे नहीं करती थी. इसलिए राहुल उसके लिए अलग से उसकी पसंद की चीज़े ला के रखता था हमेशा. जैसे की, वाशरूम में उसकी पसंद का सोप, शैम्पू, वगैरह वगैरह.



Richa's पॉइंट ऑफ़ व्यू :



ये अनुभूति!! यही तोह थी जिसके लिए में इतना तड़प रही थी. पर आज... आज फाइनली में राहुल की हो गयी. पूरी तरह से उसकी!

मेने खिड़की से हटते हुए अपने आप को शीशे में निहारा. मेरी नज़र फौरन hi मेरे सिन्दूर पर गयी,

यही तोह है, जिसके लिए में इतना तदपि थी. राहुल के नाम का सिन्दूर मेरी मांग में.

अचानक hi मुझे राहुल मेरे हनी की याद सताने लगी. अभी उससे गए 5 मिनट भी नहीं हुए और में उससे मिस कर रही हु. गंदे राहुल! ऐसा क्या जादू कर दिया है मुझ पर हां!?

पर... राहुल बोहत मेहरबान है. बोहत ज़्यादा.

उससे पता है की मुझे होटल की हर्र चीज़े पसंद नहीं है इसलिए वो मेरे लिए बाहर से वो चीज़े लेने गया हुआ है. मेरी कितनी परवाह करता है.

अहह~~ वो दिन जब भी याद करती हु जब उसने मुझे पहली बार अपनी बाहो में लिया था, हमेशा मेरा बदन सिहर उठता है. सो गुड!

राहुल! मेरे हनी! क्यों हो तुम इतने अच्छे? क्यों करते हो ऐसा?

मुझे माफ़ करना! कल तुमने पूछा था की तुम्हारी एक ब्लैक शर्ट नहीं मिल रही, कहा गयी!? वो मेने कल वाशरूम में... उसमे से आती तुम्हारे शरीर की खुशबू सूंघ कर मस्टुर्बते किया था जब तुम मेरे लिए पैड्स लेने गए थे. उम्म्म... सो सॉरी! वो गन्दी हो गयी थी. और मेरी हिम्मत न हुई तुम्हे बताने की हनी. में कितनी नॉटी हु न? तुम मुझे सजा दे सकते हो हनी!!!

आह~~ में फिरसे हॉर्नी फील कर रही हु.

में बिस्तर पर गिरी, और अपनी लिंगेरी ऊपर से खिसकाते हुए नीचे गिरा दी. मेरा बाय हाथ अपने आप मेरे उरोज पर चला गया, मेरी उंगलिया धीरे धीरे मेरे उरोज के खड़े उन् कड़क निप्पल पर फिरने लगी.

मेने अपनी आँखें बंद करि और अपने हनी को इमेजिन किया की वो मेरे बदन पर अपने हाथ फिर रहा है, उसकी उंगलिया मेरे निप्पल की गोलाई में घूम रही है.

मेने उत्तेजना में सिसकी भरी और जैसे hi मेने उन् निप्पल्स को अपनी उंगलियों से नोचा, मेरे कूल्हे अपने आप झटका मारते हुए हवा में उठ गए उस आनंद से.

मेने जोरर से एक आह भरी, और अपने दूध को पकड़ पूरी ताकत से उन्हें गूथने लगी, मेरी इमेजिनेशन ने अगला मोड़ लिया जहा राहुल मेरे स्तनों के साथ खेल रहा था, उन्हें चूस रहा था.

"Ohh...rahul...honey...mat तड़पाओ मुझे" मेने सिसकी भरी, राहुल मेरी इमेजिनेशन में मुझे मुस्कुराते हुए देखा और फिरसे मेरे स्तनों को मुँह में भर के चूसने लगा. आह~~

मुझसे रहा न गया और मेने अपनी लिंगेरी पूरी निकालते हुए पेर्रो से अलग करि और पूरी नंगी हो गयी. मेरा हाथ जो मेरे उरोज पर था वो खिसकता हुआ मेरी टांगो के बीच में मेरी गीली हो चुकी योनि पर चला गया.

मेने अपनी छूट को खोला और उसके दाने को ऊपर खींचा, मेरी छूट का दाना कमरे में मौजूद एक की ठंडी हवा के जैसे hi संपर्क में आया, मेरा शरीर सिहर उठा. उफ्फ्फ!!

मेरी दो उंगलियों ने उस पर अपना हमला शुरू किया, उसको मरोड़ा, रगड़ा, और गोलाई में घुमाया.

मेने अपने परर पूरे फैला दिए और अपनी गीली योनि में एक ऊँगली अंदर दाल दी, मेरी योनि की अंधरुनि त्वचा मेरी ऊँगली को जोरर से भींचने लगी.

अगले पल hi में अपनी योनि में दो ऊँगली डालने का प्रयास करने लगी और दोनों ऊँगली अंदर जाते hi मेरे मुँह से एक ज़ररदार सिसकी ली.

मेरी कल्पना और भी ज़्यादा आगे बढ़ी, राहुल अपना पूरा हक़ मुझ पर जताते हुए मुझे धेरर साड़ी किस्सेस कर रहा है. उफ्फ्फ!

"तुम बेहद ख़ूबसूरत हु", मेरी कल्पना में उसकी आवाज़ मेरे कानो में पड़ रही थी और बस उसकी आवाज़ सुनते hi मेरी योनि का बंधा हुआ बाँध टूट गया और में जोरर से अपना पानी चौररने लगी, मेरी योनि से निकलता हुआ पानी किसी फुवारे की तरह बेडशीट को भिगो रहा था. आह~~

और तभी मेने देखा दूर का नॉब घूम रहा है, "ओह्ह no!" और अगले पल hi राहुल एक थैली लिए मेरा सामान पकडे मुझे फटी हुई आँखों से स्तब्ध होक देख रहा है.

और में ठीक उसके सामने अपनी टांगें खोले अपनी नंगी छूट में से अपना पानी चोरर रही हु... में मर्डर जाऊ शर्म से.

मेने dekha...uska chehra...wo honth...haaye!

और मुझसे रहा न गया, में फौरन उठी और सीधा दौड़ते हुए उसके पास आयी, गेट को बंद किया और उससे जोरर से भींचते हुए मेने अपने होंठ उसके होंठो से जोड़ दिए. मममम~~

हम्म? ये शर्ट की बटन्स क्यों लगी हुई है? खोलो inhe....mmmm...rahul की सुगंध...

कितना गर्म है~

राहुल का स्वाद... कितना मीठा... सो गुड...

मुझे और चाहिए...

ममम... ये जगह कितनी टेस्टी है... में और चूसूंगी यहाँ...

और... मुझे और चाहिए...

यहाँ चूसने में कितना अच्छा लग रहा है...

यह... सो गुड...

"रीचु?!"

में जैसे अपने होश में आयी, जब राहुल ने मुझे पुकारा. मेने देखा में उसका गाला चूसने में बिजी थी, मुझे खुद पता नहीं चला कब में उसके होंठो से होते हुए उसके गले पर पहुँच गयी. उसका गाला मेरे थूक से गीला हो चूका था, यहाँ तक की मेरे होंठो पर लगी लिपस्टिक का दाग भी लग चूका था.

उसकी सासें मेरे चेहरे पर महसूस हो रही थी,

"रीचु?"

उसने मुझे फिरसे पुकारा, पर इस बार थोड़ी परवाह से.

मेने तुरंत hi अपने आप को काबू किया, "आह... वो... सॉरी हनी... ी वास् जस्ट... में... वो..."

"ः! चिल! मुझे पता है! में भी इंसान hi हु, और ये सब मेने भी किया है. पर तुम्हे ये सब करने की क्या ज़रुरत? जब में हु यहाँ पर तुम्हारे लिए" उसने बड़े hi आसानी से मुझे देखते हुए कहा.

और बस! में उसपे पूरी तरह कूद गयी. हमारे होंठ एक दूसरे से मसलने लगे. कोई संकोच नहीं. सिर्फ प्यार! और अब में राहुल की हु, उसके साथ अकेले हु, तोह में तोह ये सुनेहरा मौका अपने हाथो से नहीं जाने दे सकती. पूरा फायदा उठाने वाली हु में इस अवसर का.

उसके होंठो का रसीला स्वाद मेरे अंदर की गर्मी को और भी बढ़ा रहा था, एक ऐसी गर्मी जो केवल राहुल के स्वाद में डूबकर hi शांत हो सकती है.

मेने अपना मुँह मोड़ा, होंठ खोले और अपनी जीभ एक फाॅर्स में मेने उसके मुँह के अंदर प्रवेश करा दी. राहुल ने मेरी जीभ का स्वागत किया, उसकी जीभ ने जैसे मेरी जीभ को आमंत्रण दे दिया उसके मुँह के हर्र हिस्से को खोजने के लिए.

मेने अपनी जीभ उसकी जीभ से जोड़ी, उसके अगल बगल घुमाने लगी, जितना हो सकता था उतना भरपूर चूमा मेने उससे.

राहुल की हथेलिया मेरे गालो पर थम गयी और प्यार से उसने मेरे गाल सहलाये, फिरसे... मेरा शरीर सिहर उठा उसकी इस हरकत पर.

मेने उसके मुँह के हर्र एक हिस्से का स्वाद चखा. राहुल ने मेरी जीभ चूसना शुरू कर दी, में बेशर्मो की तरह जोरर जोरर से सिसकी लेने लगी.

और ऐसे hi हमारी किश फाइनली टूटी क्युकी हमारी सासें फूल चुकी थी.

~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~

राहुल ने नग्न ऋचा को उठाया और सीधा बीएड पे लिटा दिया.

राहुल (मैं में) : आज तोह रीचु कुछ ज़्यादा hi हॉर्नी लग रही है. ठीक ही है. ी लव माय गर्ल्स व्हेन थे अरे हॉर्नी ः

और दोनों एक दूसरे से चिपकते हुए फिरसे किस्सेस में डूब गए, राहुल के कपडे कब हवा में उड़द गए उससे पता hi नहीं चला.

अगले hi पल ऋचा ने राहुल का ठोस मुस्सल लुंड अपने हाथो में ले लिया और झुकते हुए अपना मुँह उसके लुंड के पास लायी. उसके लुंड की वो नशीली सुगंध उससे जैसे पागल सा कर रही थी.

ऋचा ने अपनी नाक उसके लुंड में रगड़नी शुरू कर दी और जोरर जोरर से सासें लेने लगी, यही वो सुगंध है जिसके लिए वो तरसती है.

ऋचा ने अपने जीभ से एक बार लुंड को छाता जिसके चलते राहुल के लुंड ने एक झटका मारा.

और उसके बाद ऋचा ने पूरा मुँह लुंड पे दे मारा और भरपूर उसका स्वाद लेते हुए चूसना शुरू कर दिया. और कुछ hi देरर में राहुल का वीर्य ऋचा के मुँह में चूत गया जिससे ऋचा ने लालची होते हुए पूरा का पूरा निगल लिया और छोटी सी छोटी बूँद राहुल के लुंड से उसने चाट चाट के साफ़ करदी.

उसके बाद दोनों को hi पता था आगे क्या करना है. राहुल ने अपना लुंड ऋचा की एंट्री पे सेट किया और ज़ोरदार झटके के साथ पूरा का पूरा लुंड अंदर प्रवेश कर दिया. उसके बाद तोह जैसे कमरे में * थप थप * और ऋचा की सिसकियों की आवाज़ गूंजने लगी.

"आह!! आह!! राहुल!! बाबीयीय ी लव यू! ी लव यू! ी लव यू!!", ऋचा जोरर जोरर से चिल्लाते हुए कहने लगी.

दोनों के चूतड़ पर टकराने की जो आवाज़ें आ रही थी, वो ऋचा को और भी मदहोश कर रही थी. और इसी के साथ hi दोनों अपनी चरम सीमे के क़रीब पहुँच चुके थे,

ऋचा : बब्यीयीय... अंदर... अंदर गिरा do...babyy... मुझे प्रेग्नेंट कर दो... ी वांट तो फील योर छुम बब्यीय... मेक में प्रेग्नेंट...

और राहुल ने धेरर सारा वीर्य ऋचा की छूट के अंदर उसके गर्भ में चोरर दिया. जिससे महसूस करते hi ऋचा का खुद का ओर्गास्म हो गया और वो निढाल होक बिस्तर पर गिर पड़ी और राहुल ठीक उसके ऊपर.

~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~

कुछ शान बाद...

राहुल का लुंड अभी भी ऋचा की छूट में था और दोनों का मिला हुआ कॉमर्स उसकी छूट से बह रहा था.

राहुल : यू okay?

ऋचा : हम्म्म! I'm सो हैप्पी! तुम्हारी सभी बीवियों में से... ी वांट तो बिकम थे फर्स्ट मदर

राहुल : यही ख्वाइश तनीषा ने भी राखी थी

ऋचा : यह? पर... उनसे कहना न की... वो सेकंड हो जाए... पहली में होना चाहती हु.

राहुल : ऑलराइट! Don't वोर्री! तुम hi पहली माँ बनोगी हमारे बच्चे की

ऋचा (ब्लश) : थैंक्स!

राहुल : हम्म्म... बूत तुम प्रेग्नेंट हो जाओगी फिर तोह में तुम्हारे साथ सेक्स hi नहीं कर सकता. लगता है मुझे बाकी सब के साथ करना पड़ेगा...

ऋचा (ब्लश) : ेहठ?? वेट... वेट... ी... ी स्टिल हैवे ानोथेर होल...

राहुल : हम्म?? ओह्ह्ह! नॉटी कही kii...hehehe

ऋचा (ब्लश) : तुम भी न... क्या गलत कहा? यू... यू कैन दो में फ्रॉम बिहाइंड राइट? There's no प्रॉब्लम.

राहुल : हम्म! यही करना पड़ेगा.

ऋचा (ब्लश) : हम्म्म!

ऋचा : तोह? आगे का क्या सोचा है?

राहुल : बस! हमारे यहाँ से जाने के बाद, तनीषा मेरी सेकंड वाइफ बनेगी, एंड ख़ुशी विल बे थे थर्ड. उसके लिए हमे वापस से श्री लंका जाना पड़ेगा.

ऋचा : हम्म्म! ख़ुशी बुरा तोह नहीं मान जाएगी न? थर्ड होने पर? और वो मास्टर...!? और मोनिका दीदी?

राहुल : मोनिका मान जाएगी, वो फोर्थ रहेंगी. ख़ुशी हम सब से छोटी है तोह, ी थिंक मोनिका को उसमे कोई प्रबल नहीं होगी, ये जान ने के बाद की अगली वही है. में तनीषा के साथ na-insaafi नहीं कर सकता, वो मुझे और भी पहले से जानती है, मेरी परवाह करती आयी है, उनका हक़ पहले है. उसके बाद hi ख़ुशी का. इसलिए सेकंड तनीषा hi रहेंगी मेरे लिए.

ऋचा : हम्म्म्म

~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~

और ऐसे hi समय गुज़रा, राहुल और ऋचा अपना हनीमून मन के लौट चुके थे मुंबई में.

राहुल ने बिलकुल भी समय नहीं गवाया और सीधे hi तनीषा के साथ शादी की तैयारियां भी शुरू हो गयी. तनीषा के माँ बाप ने तोह उससे कई साल पहले hi घर से निकाल दिया था तोह तनीषा क्र साथ कोई दिक्कत नहीं जाने वाली थी सिवाए एक के.

कन्यादान! ये कोण करता अब!? पर राहुल ने उसका हल भी जैसे ढूंढ लिया था. राहुल ने मास्टर के रिटायर्ड सेक्रेटरी रजनीश को ये काम की ज़िम्मेदारी सौपी और रजनीश ने भी ख़ुशी ख़ुशी इससे एक्सेप्ट भी किया.

राजेश को और रुपेश विनीता को इस बात के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गयी. ये शादी केवल निशा एयर बाकी सब प्रेमिकाए की मौजूदगी में हुई. तनीषा को इस बात से कोई मतलब नहीं था, उससे सिर्फ राहुल के साथ से hi मतलब था. वैसे भी, उसने इतने साल बिना परिवार के गुज़ारे है, तब राहुल hi था उसके साथ. तोह अब तोह उससे इस बात से कोई फरक नहीं पड़ता.

ऐसे hi तनीषा के साथ भी राहुल ने हनीमून मनाने के लिए एक फॉरेन ट्रिप प्लान किया.

उनकी डेस्टिनेशन थी ~ स्विट्ज़रलैंड

दोनों एक कमरे में मौजूद थे.

पर इस से पहले की दोनों के बीच कुछ होता, तनीषा को कुछ कहना था. वो क्या था?

राहुल : में सुन्न रहा हु! कहिये न...

तनीषा : में ये साड़ी बातें कबसे अपने दिल में राखी हु... आज मुझे मौका मिला है. यदि में अपने जज़्बात खो दू, तोह मुझे संभाल लेना राहुल.

राहुल : हम्म्म...

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आज के किये इतना hi गाइस!


धन्यवाद्!
 
अपडेट - 110

अब तक...

दोनों एक कमरे में मौजूद थे.

पर इस से पहले की दोनों के बीच कुछ होता, तनीषा को कुछ कहना था. वो क्या था?

राहुल : में सुन्न रहा हु! कहिये न...

तनीषा : में ये साड़ी बातें कबसे अपने दिल में राखी हु... आज मुझे मौका मिला है. यदि में अपने जज़्बात खो दू, तोह मुझे संभाल लेना राहुल.


राहुल : हम्म्म...

अब आगे...



तनीषा : तुम्हे याद है न!? हम कब मिले थे!?

राहुल : हम्म! मुझे बोहत अच्छे से याद है...

तनीषा : उस वक़्त तुमसे मिलने के बाद भी, मेने कभी नहीं सोचा था की में अपनी लाइफ में इतना आगे आ जाउंगी, एक पल तोह लगा था की... में इस दुनिया में बच भी पाऊँगी या नहीं... घर से निकाल दी गयी थी, भाई चल बसा... और में अकेली नए शहर में, न कोई ठिकाना, न कोई जान पहचान, सब कुछ अनजान था मेरे लिए... और फिर तुम मिले...

राहुल : हम्म...

तनीषा : उस वक़्त तुम्हे देख के मुझे अपने भाई की याद आ गयी थी, और जब तुमने मुझे दीदी बुलाना शुरू किया, तोह में तुम्हे अपना भाई hi मान ने लगी... पर...

राहुल : पर...?

तनीषा : पर धीरे धीरे, जैसे जैसे हमारा मिलना जुलना बढ़ने लगा, मुझे पता hi नहीं चला की कब मुझे तुमसे प्यार हो गया, दिन बा दिन तुम्हारी मेरे लिए परवरिश, मेरे लिए परवाह, मेरे लिए प्यार, इन् सबने मुझे तुम्हारे प्यार में दीवानी होने के लिए मजबूर कर दिया. और अंत में मुझसे रहा न गया, और फाइनली तुम्हे अपनी फीलिंग्स बता दी मेने...

राहुल : हां! तोह इसमें परेशानी की क्या बात है?

तनीषा : परेशानी कुछ नहीं है डार्लिंग... बस... अंदर एक डर था... क्या तुम अपनाओगे मुझे? में तुमसे उम्र में भी बड़ी थी, और ऋचा भी तुम्हारी गफ बन्न गयी थी, फिर मुझे वंशु का भी पता चला... और ऐसे करते करते बाकी सब का भी... इसलिए बस एक डर था... की अब तोह तुम्हारे पास इतनी साड़ी लड़किया है... क्या उसके बाद भी तुम्हे ये तनीषा पसंद आएगी!?

कहते हुए तनीषा सिसकने लगती है तोह राहुल आगे बढ़ उससे अपनी बाहो में थाम लेता है.

राहुल : आपने ऐसा सोच भी कैसे लिया!? भला में अपनी तनीषा को कैसे भूल जाता!?

तनीषा : ी क्नोव! में कुछ ज़्यादा hi सोचने लगी थी. माफ़ कर दो मुझे डार्लिंग.

राहुल : आपकी इसमें कोई गलती नहीं है. Don't वोर्री!

तनीषा : हम्म्म! थैंक यू!!

राहुल : तोह शुरू करे!?

तनीषा (ब्लश) : हम्म्म

और शर्माते हुए तनीषा अपने और राहुल के वस्त्र उतारने लगती है, और अपना नंगा जिस्म राहुल के सामने खुल्ला चोररटे हुए उससे आमंत्रण देने लगती है. उसके बाद का समय कमरे में सिसकियों और थप थप की आवाज़ निकलने में hi गुज़रा. ऐसे hi राहुल ने अपने हनीमून के दिन तनीषा के साथ चुदाई करने में निकाले. उसको गर्भवती जो करना था, तनीषा को जल्द से जल्द बच्चा जो चाहिए था.

कुछ समय और बीता और राहुल की आलरेडी 2 वाइव्स बन चुकी थी, ऋचा और तनीषा. अब बारी थी ख़ुशी और मोनिका की.

ख़ुशी के लिए बात करने के लिए उसके पिता निशा से मिलने आज मुंबई में राहुल के घर hi आए हुए थे.

हॉल में hi मास्टर एक काउच पर विराजमान थे और उनके सामने निशा और बाकी सब.

मास्टर : देखिये! निशा जी! ये बात तोह यहाँ मौजूद सभी लोग जानते है की राहुल की आलरेडी 2 पत्निया है. उसके बाद भी में अपनी बेटी को आपके बेटे के हाथो में सौप रहा हु. आप जानती है ऐसा क्यों!?

निशा : ????

मास्टर : क्युकी मेरे लिए मेरी बेटी की ख़ुशी पहले है. इतने सालो तक मेने उससे अपने से दूर रखा क्युकी में उससे खतरे से दूर रखना चाहता था. पर अब जब सारे खतरे ताल चुके है, तोह मेरा पूरा ध्यान अपनी बच्ची पर है. मुझे नहीं पता मेरी बच्ची के दिमाग में ऐसा क्या चल रहा था जो उसने ये फैसला लिया... पर... पर यदि मुझे ज़रा भी खबर लगी, की मेरी बच्ची राहुल की बाकी पत्नियों के लेके परेशान है या उनके बीच कोई भी मैं मुटाव है जिसके चलते मेरी बेटी को तकलीफ हो रही है तोह में उसी वक़्त... उसी वक़्त अपनी बेटी को साथ ले जाऊंगा...

राहुल (मैं में) : I'm गेस्सिंग, मास्टर ने प्रीती को निगरानी रखने बोलै है...

राहुल की नज़रे फौरन hi ख़ुशी के बगल से कड़ी प्रीती पर जा के टिक जाती है.

निशा : जी... हमे मंज़ूर है. और आप बिलकुल भी चिंता मत कीजिये... ख़ुशी को बड़े hi प्यार से रखेगा राहुल... ये में अपनी ज़िम्मेदारी से कहती हु...

मास्टर : हम्म! वैसे... आपके हस्बैंड से ये बात क्यों छिपाई जा रही है!?

निशा : जी... आप जानते hi है... ये ज़रूरी है फिलहाल के लिए... ऐसे एक साथ इतना बड़ा सच सामने उजागर करना... मुझे सभी के स्वास्थ की भी फिक्र है. कही इतना सब सुन्न ने के बाद भगवान् न करे किसी को कुछ हो जाए... इसलिए... और न केवल मेरे हस्बैंड, सारे फॅमिली वालो को इस बात से दूर रखा गया है. केवल में hi हु एक...

मास्टर : हम्म! मुझे वैसे कोई ख़ास दिक्कत नहीं है. काम से काम राहुल के माँ बाप में से किसी एक को तोह पता hi है. तोह ज़्यादा कोई परेशानी की बात नहीं. आपकी बात भी सही है... स्वास्थ कब बिगड़ जाए कोई भरोसा नहीं... और ऐसी बातें, ऐसे राज़... दिल पर बोहत असर करते है, यदि एकसाथ बताए गए तोह...

निशा : जी हां! बिलकुल!

मास्टर : तोह फिर चलिए जी... मेरी तरफ से हां है. आप जल्द से जल्द तैयारियां शुरू करवा दीजिये... ये भी वही रखवाई जाएगी क्या? श्री लंका?

निशा : जी हां!

मास्टर : ठीक है तोह फिर... अब में चलता हु. जैसा होगा आप बता दीजियेगा...

और मास्टर उठने hi वाले होते है की इतने में ख़ुशी उन्हें टोक देती है,

"डैड??"

मास्टर : हम्म?

"Wo...wo... मुझे आपसे एक रिक्वेस्ट करनी है!", ख़ुशी थोड़ा हिचकिचाते हुए कहती है.

मास्टर : किसी रिक्वेस्ट?

"Wo...pehle आप बोलिये की आप पूरी करोगे!..", ख़ुशी अपने बाजू में खड़े किसी एक शख्स को देखती है और फिरसे अपने डैड पर नज़रे गदा देती है.

मास्टर : हम्म? पर...

ख़ुशी : पहले बोलिये... वर्ण में नहीं बताउंगी!

मास्टर : अरे!? ये क्या बात हुई!? चलो अच्छा ठीक है! यदि मेरे बस में हुआ तोह में ज़रूर पूरी करूँगा. अब तोह बताओ...

ख़ुशी : डैड!!... में... में चाहती हु ki...monica दीदी की शादी भी मेरे साथ साथ hi होये राहुल से...

बगल में कड़ी मोनिका ये सुन्न के एकदम चौंक जाती है और ख़ुशी को हैरानी से देखने लगती है.

ख़ुशी : मेने कल... मेने कल आपको देखा था... जब आप वाशरूम से निकली थी... आपकी आँखें लाल थी, मेने पूछा भी था आपसे की आपकी आँखें लाल क्यों है? तोह आप बहाना बनाते हुए वह से जल्दबाज़ी में चली गयी. मुझे पता था... आप रोई हो... किस बात के लिए ये तोह में नहीं जानती थी... पर शायद जो में सोच रही हु वही कारण है...

मोनिका : ...!??

राहुल (मैं में) : मोनिका रो रही थी? बूत क्यों? मेरी वजह से? मेने ध्यान भी नहीं दिया... दमन आईटी!!

ख़ुशी : जहा तक में जानती हु... आपको भी एक अंदर डर है. है न? की आप राहुल के साथ एक हो पाएंगी या नहीं... और इसी बात को सोच के कल आप रो रही थी है न? शायद आपने कुछ बुरा सोच लिया होगा और आप डर गयी... में सही कह रही हु न?

उसकी बात सुन्न, बगल में कड़ी मोनिका की आँखों में ासु आ जाते है और वो रोने लगती है, "ख़ुशी!??"

ख़ुशी : दीदी!!!

और अगले hi पल मोनिका ख़ुशी के गले लग जाती है और ज़ोर ज़ोर से रोने लगती है. ख़ुशी का अंदाजा एकदम सही था.

मास्टर ने अपना मुँह कुछ कहने के लिए खोला hi था पर दोनों को ऐसे गले लगे हुए देख वो ृक्क गए और एक गहरी सास ली,

"अब जब यहाँ तक आ hi गया हु, तोह ये भी सही... बेटी की ख़ुशी के लिए न जाने क्या क्या और करना पड़ेगा"

उन्होंने मैं में सोचा.

दोनों hi ख़ुशी और मोनिका एक दूसरे से लिपटी हुई कड़ी थी. मोनिका ख़ुशी के लिए एक बड़ी बहिन जैसी थी. भले hi उनकी मुलाक़ात इतनी ज़्यादा नहीं होती थी पर जब भी होती थी, मोनिका ख़ुशी का ध्यान ज़रूर रखती थी. थोड़ी स्ट्रिक्ट ज़रूर रहती थी, जिस कारण से ख़ुशी उस से चिढ जाती थी कभी कभी पर उसकी इन् हरकतों पर मोनिका ने कभी भी गुस्सा नहीं किया और न hi उसके बारे में कभी बुरा भला कहा. ये बात ख़ुशी के मैं में हमेशा से hi बसी हुई थी.

इधर मोनिका को आश्चर्यता के साथ साथ थोड़ी ग्लानि भी महसूस हो रही थी. इसलिए क्युकी... एक टाइम पर जब राहुल ख़ुशी को प्रोटेक्ट कर रहा था तोह ख़ुशी और राहुल का रिलेशनशिप स्ट्रांग होता देख मोनिका को डर लगने लगा था और उसने राहुल को ख़ुशी से दूर रहने भी कह दिया था. और आज वही ख़ुशी उसकी मदद करने के लिए आगे बढ़ रही है. उससे राहुल से जोड़ने की कोशिश कर रही है. जबकि खुद मोनिका एक समय राहुल को ख़ुशी से दूर करने का प्रयत्न कर रही थी.

यही कारण है की आज मोनिका को ग्लानि महसूस हो रही थी. इसलिए उसकी रुलाई नहीं ृक्क रही थी. आज वो सब कुछ रोके निकाल देना चाहती थी. अभी दोनों और रोटी की तभी सभी के कानो में मास्टर की आवाज़ पड़ी...

मास्टर : ठीक है! मुझे मंज़ूर है...

मास्टर की आवाज़ सुन्न ख़ुशी और मोनिका जैसे अपनी तन्द्रा से बाहर आती है और स्तब्ध भाव से अभी अभी जो कहा गया उसपे गौर करने लगती है.

ख़ुशी : क्या!? क्या आपने सच कहा डैड?

मास्टर : हां!!

और अगले hi पल ख़ुशी दौड़ के मास्टर के गले लग जाती है,

"थैंक यू! थैंक यू सो मच!!!"

मास्टर : अब जब एक बेटी का कन्यादान करना hi है तोह दूसरी का करने में क्या बुराई है!?

मोनिका की भी ये बात सुन्न भावुक हो जाती है और जाके मास्टर के परर छूने लगती है तोह मास्टर उससे अपने गले से लगा लेते है. जैसे ख़ुशी उनके लिए है वैसे hi मोनिका.

और ऐसे hi इन् दोनों की शादियों की तैयारियां शुरू कर दी जाती है. कुछ hi हफ्तों के बाद, आज फिरसे सभी श्री लंका में मौजूद थे और निशा के अलावा राहुल के परिवार से कोई भी और नहीं था. बाकी सभी राहुल की पार्टनर्स थी और उसकी बहने.

अच्छा hi है. जितने लोगो को काम पता चल सके उतना अच्छा है. कुछ बातें बतायी नहीं जाती, और वो जितना ज़्यादा छुपी रहे उतना hi अच्छा होता है.

सबको को जान ने की ज़रुरत नहीं होती.

मास्टर के द्वारा दोनों ख़ुशी और मोनिका का कन्यादान किया गया और दोनों को hi राहुल के हाथो में सौप दिया. पर मास्टर ने वही बात मोनिका पर भी लागू कर दी की यदि दोनों को कभी कोई भी परेशानी हुई वो दोनों को hi राहुल के पास से ले जाएंगे.

जिस बात पर राहुल ख़ुशी ख़ुशी राज़ी भी हो गया.

नेहा : भाई! अब तोह 4-4 पत्निया हो गयी aapki...mujhe जलन हो रही है...

राहुल : गुड़िया... में बता तोह चूका हु तुझे... में इनमे से किसी को भी नहीं चोरर सकता...

नेहा : ी क्नोव! बूत फिर भी... अब थोड़ी हो रही है तोह क्या करू... वैसे!? आपने अपनी बहनो से शादी करने के बारे में क्या सोचा है?

राहुल : अभी सच कहु तोह गुड़िया... ी थिंक मुझे थोड़ा ृक्क जाना चाहिए... में चाहता हु की हम सभी अभी एन्जॉय करे... शादी करने के लिए अभी बोहत वक़्त है ...

नेहा : मेने भी यही सोचा है... ी मैं... में तोह जब चाहे आपसे शादी कर लू... बूत राइट नाउ ी वांट तो एन्जॉय विथ यू... बहनो के साथ तोह कभी भी शादी कर सकते हो आप... वैसे भी हमे परमिशन भी मिल गयी है अब तोह सबकी... तोह कोई जल्दबाज़ी नहीं है... आल्सो, ऋचा दीदी और तनीषा दीदी की तरह मुझे अभी इतनी जल्दी बच्चा नहीं चाहिए... में तोह बस आपके साथ धेरर सारा समय व्यतीत करना चाहती हु अकेले में फिलहाल...

राहुल : क्यों नहीं गुड़िया... तूने सही कहा. शादी तोह जब चाहे हम कर सकते है. कोई कही नहीं जा रहा. इम्पोर्टेन्ट ये है की आप एन्जॉय करो... और मुझे भी अपनी बहनो के साथ धेरर सारा समय गुज़ारना है...

नेहा : हम्म! वेल! अब आज रात तोह आप एन्जॉय करिये.. अपनी और दो पत्नियों के साथ...

राहुल : तू भी न...

और शादी के बाद सब कुछ ख़तम होने के बाद निशा समेत बाकी सभी लड़किया अपने अपने कमरे में चली जाती है. मास्टर वापस ग्वालियर के लिए रवाना हो जाते है. उनका यहाँ अब कोई काम नहीं था.

एक होटल के बड़े से विप रूम में बिस्तर खूब शानदार तरीके से सजा हुआ था, गुलाब की पंखुडिया बिखरी हुई थी, कैंडल्स जाकी हुई थी, और हमारी ख़ुशी और मोनिका दोनों hi सज के साड़ी में बैठी हुई थी और बोहत hi ज़्यादा शर्मा रही थी.

मोनिका : umm...khushi! में... में बाहर चली जाती हु. आज रात तुम अपना टाइम स्पेंड कर लो. में फ़ालतू में बीच में आ रही हु...

उसकी बात पर ख़ुशी फौरन hi उसका हाथ थाम लेती है,

"नहीं दीदी! ये क्या कह रही हो आप!? अब वैसे भी हम सभी एक है... अब इसमें शर्माने वाली क्या बात? आखिर हमारी शादी भी एक साथ hi हुई है राहुल से तोह... सुहाग रात भी तोह... एक साथ hi होगी न?"

ख़ुशी ये कह ज़रूर रही थी पर अभी वो खुद hi सबसे ज़्यादा शरमाई हुई थी. घूंघट के नीचे उसके गाल सुर्ख लाल पद चुके थे. मोनिका भी शर्म के मारे बस वही बैठी हुई थी.

की तभी दरवाज़ा खुला और राहुल अंदर आया. दोनों मोनिका और ख़ुशी की सासें तेज़्ज़ हो गयी.

राहुल : अरे!? आप दोनों एक साथ!? मेरा मतलब है, कोई दिक्कत तोह नहीं है न? एक साथ में!?

तोह दोनों hi ना में सर हिला देती है. राहुल आगे बढ़ते हुए ख़ुशी के सामने बैठ जाता है और अपने हाथो को आगे बढ़ाकर वो ख़ुशी का घूंघट हटाने लगता है. जैसे hi ख़ुशी का चेहरा देखता है तोह फिरसे उस चेहरे में खो जाता है. ख़ुशी की सुंदरता अलग hi किस्म की थी. और अगले hi पल राहुल ऐसे hi मोनिका का घूंघट हटाता है तोह उसका चेहरा देख फिरसे मंत्र मुग्ध हो जाता है.

दोनों hi एक से बढ़ के एक थी. ख़ुशी की सुंदरता में न केवल भारतीय सौंदर्य बल्कि चीन की सुंदरता भी मौजूद थी. और आज साड़ी में उस3 ऐसे सजे हुए देख राहुल तोह पूरा खो गया था उसके चेहरे में. ऐसे hi मोनिका भी... राहुल तोह पहले से hi मोनिका के लिए यही सोचा करता था की जोस से भी उनकी शादी होएगी वो बोहत hi लकी होएगा. सुन्दर जो थी मोनिका इतनी.

राहुल ने दोनों के गालो को अपनी दोनों हथेलियों से थामा, उससे महसूस हुआ की दोनों की hi त्वचा कितनी कोमल और मुलायम है,

"सो ब्यूटीफुल...."

राहुल के मुँह से खुद की तारीफ सुन्न दोनों hi फिरसे शर्मा जाती है. भला ऐसी कोण सी लड़की होगी जिससे अपनी सुंदरता की तारीफ सुन्न न पसंद न हो..!?

और वो भी अपने चाहने वाले के मुँह से...

राहुल झुकते हुए ख़ुशी के होंठो की तरफ आगे बढ़ता है और उसकी रसीले लिपस्टिक लगे होंठो को अपने मुँह में भर लेता है.

~ममम ख़ुशी अपने होंठ राहुल के होंठो से भिड़ाते हुए मीठी किश में खो जाती है. आज फाइनली वो राहुल की हो गयी. वो चाह रही थी की प्रीती भी अपना निर्णय लेले पर फिलहाल प्रीती के मैं में अभी राहुल के लिए क्या था ये प्रीती खुद नई जानती थी, इसलिए उसने सब समय पर चोरर दिया.

राहुल ने अपना दाया हाथ उठाया और मोनिका के उरोजों पर रख दिया और उन्हें दबाने लगा. मोनिका राहुल के स्पर्श से उत्तेजित होने लगी और उसने अपना हाथ भी राहुल के हाथ के ऊपर रख दिया और अपने hi उरोज और जोरर से दबवाने लगी.

जब राहुल ख़ुशी को किश करके हटा तोह मोनिका ने उसका सर पकड़ के अपने चेहरे के पास कर लिया और राहुल के होंठ अपने रसीले होंठो में भर ली.

इस बार राहुल ने अपना बाय हाथ उठाया और मोनिका को किश करते हुए अपना बाय हाथ ख़ुशी के उरोजों पर रख के उन्हें मसलना शुरू कर दिया.

~आठ... ख़ुशी उत्तेजित होते हुए अपनी कुछ ज़ेवर निकालने लगी, ताकि सम्भोग के वक़्त वो बीच में बाधा न बने.

और मोनिका को जी भर के किश कर लेने के बाद, दोनों के मुँह के बीच जब थूक की लकीर बन गयी तोह मोनिका ने साइड में रखा दूध का गिलास राहुल को थमा दिया.

मोनिका : पी लो इससे राहुल...

राहुल : मुझे तोह आपका दूध पीना है पर...

मोनिका (ब्लश) : वो भी पी लेना इसके बाद... पर पहले ये पी लो प्लीज...

बगल में बैठी ख़ुशी भी गिलास पर हाथ लगा कर राहुल को पीने के किये कहने लगती है और राहुल दूध का गिलास लेके दूध पीने लगता है और खुद भी ख़ुशी और मोनिका को थोड़ा थोड़ा पीला देता है.

उसके बाद ख़ुशी और मोनिका राहुल का सूट निकलवाने में मदद करती है और राहुल अब केवल अंडरवियर में hi उनके सामने मौजूद था.

उसकी बॉडी देख ख़ुशी एकदम मंत्र मुग्ध हो जाती है. मोनिका ने कई बार देखि हुई थी राहुल की बॉडी पर उसके बावजूद वो भी उसका शरीर देख बोहत ज़्यादा उत्तेजित हो गयी.

राहुल ने आगे बढ़ दोनों के शरीर से साड़ी निकाली और दोनों को केवल ब्रा और पंतय में रहने दिया. उसके बाद शुरू हुआ धेरर साड़ी किस्सेस का सिलसिला.

राहुल जानता था आज थ्रीसम करना है उससे और फोरप्ले बोहत ज़रूरी था, क्युकी दोनों hi लड़किया वर्जिन जो थी.

राहुल : ऑलराइट! तोह पहले कोण?

उसका प्रश्न सुन्न ख़ुशी और मोनिका दोनों hi एक दूसरे को देखने लगती है, दोनों की समझ में नहीं आता की क्या बोले...

"ऑलराइट! फ़क थिस... पहले ख़ुशी... क्युकी वो छोटी है..." राहुल कहते हुए ख़ुशी की तरफ बढ़ता है और उसकी ब्रा खोल के फेक देता है, अंदर ब्रा में क़ैद गोर गोर स्तन जब उछाल के बाहर निकलते है तोह राहुल का लुंड झटका मार देता है और बिना कोई समय गवाए राहुल उन् छूछीयो पर टूट पड़ता है. अपने एक हाथ से वो मोनिका के उरोज भी दबाता जाता है, ताकि मोनिका को अकेला बिलकुल भी फील न हो.

~आह... सिसकिया लेते हुए ख़ुशी राहुल के बालो में हाथ फरते हुए उससे अपने स्तनों में और कस के दबाने लगती है.

और जब जी भर के राहुल ख़ुशी की छूछीयो का स्वाद ले लेता है उसके बाद वो ख़ुशी के पेट में किस्सेस करते हुए उसकी पंतय के क़रीब आता है और पंतय के ऊपर से hi एक बार छूट को चाटता है जिस से ख़ुशी की एक और सिसकी निकल जाती है और अगले hi पल राहुल ख़ुशी की पंतय निकाल के खींच देता है,

सामने गोरी चिट्टी, बिना कोई बाल वाली छूट उसके सामने मौजूद थी.

बिना कोई पल गवाए राहुल ने अपना मुँह सीधे ख़ुशी की छूट में दे दिया और चाटना शुरू कर दिया. इस नए एहसास और अचानक हुए हमले से ख़ुशी को उत्तेजना से भरपूर एक झटका लगा और उसकी कमर हवा में उछलने लगी.

बगल में मोनिका भी राहुल के हाथ को अपने उरोजों अथवा छूट में ले जाती और जोरर जोरर से सिकसिया भर रही थी. जब एक बार ख़ुशी झरर गयी तोह राहुल ने अपनी अंडरवियर निकाल दी और दोनों लड़कियों ने जब राहुल का हथियार देखा तोह ताजुब हो गयी.

ख़ुशी : ye...ye अंदर तोह चला जाएगा न?

राहुल : हम्म! पहली बार दर्द होगा थोड़ा... बूत don't वोर्री, में पूरी कोशिश करूँगा तुम्हे काम से काम दर्द होये

मोनिका राहुल का हथ्यार अपने हाथो में लेते हुए उससे हिलाने लगती है और फिर उससे मुँह में लेने का प्रयत्न करने लगती है. मोनिका के मुँह में लुंड जाते hi राहुल बेचारे की मज़े के मारे आंखें बंद हो जाती है.

ख़ुशी ये देख बिलकुल भी पीछे नहीं रहना चाहती थी, अभी अभी राहुल ने उससे मज़ा दिया अब उसका कर्त्तव्य था की वो राहुल को मज़ा दे. इसलिए वो भी आगे बढ़ के राहुल के लुंड की जगह उसकी बॉल्स यानी अंडकोषों को मुँह में भर के चूसने लगती है.

इस दो तरफी हमले से राहुल के होश hi उड़द जाते है. वो देखता है नीचे की दो बेहद ख़ूबसूरत लड़किया उसके लुंड के नीचे पड़ी हुई उसके लुंड को चाट रही है और मुँह में ले रही है. आज राहुल को अपने ऊपर बोहत hi प्राउड टाइप की फीलिंग आ रही थी. शायद इसलिए क्युकी उसने ख़ुशी और मोनिका जैसी परियो को जो कॉन्कर कर लिया था.

जिस खूबसूरती के पीछे लड़के पागल हो जाए वो दो ख़ूबसूरत लड़किया उसके नीचे उससे खुश करने के लिए अपना अथक प्रयास दे रही है.

इस से पहले की राहुल झाररता उसने दोनों को hi दूर किया और ख़ुशी के परर को म शेप में खोला और अपना लुंड उसकी छूट पर टिका दिया...

ख़ुशी थोड़ी सेहमी सी राहुल को देखती और फिर मोनिका को, तोह मोनिका ने उसका हाथ थाम लिया और उसके गालो को चूम लिया. इस से ख़ुशी में थोड़ी हिम्मत आयी और उसने राहुल को आगे बढ़ने के लिए इशारा किया.

अगले hi पल राहुल ने एक ज़ोरदार शॉट मारा और उसका टोपा ख़ुशी की छूट में अंदर चला गया. इस भयानक हमले से ख़ुशी एकदम चीख दी जिससे सुन्न अब मोनिका को डर लगने लगा, आखिर वो भी तोह वर्जिन hi थी.

आसुओ की धाराए निकलना शुरू हो गयी और ख़ुशी को अत्यंत दर्द महसूस होने लगा, पर राहुल न रुका, उसने एक और तेज़्ज़ झटका मारा और उसका करीब पौन लुंड अंदर ख़ुशी की छूट में जाके धस्स गया,

~Aaaaaaahhhhhhhhhh

एक ज़ोरदार चीख फिरसे कमरे में गूँज गयी. ख़ुशी का दर्द देख मोनिका भी दररने लगी पर उससे पता था पहली बार में दर्द होता hi है शुरू में. उसने ख़ुशी का हौसला बाँधने के लिए उसके माथे पर चूमना शुरू कर दिया.

और इधर राहुल ने ख़ुशी को कस के अपनी बाहो में ले लिया और आखिरी शॉट मारा और अपना पूरा लुंड ख़ुशी की योनि में दहस्सा दिया.

करीब कुछ देरर बाद जब ख़ुशी थोड़ा नार्मल हुई तोह राहुल ने धक्के लगाने शुरू कर दिए और धीरे धीरे कब वो दर्द ख़ुशी के लिए अत्यंत आनंद में बदल गया उससे पता hi नहीं चला.

हर्र धक्के पर अब ख़ुशी की सिसकिया की आवाज़ निकल रही थी, ये नज़ारा देख मोनिका ने अपनी पंतय भी निकाल फेकि और अपनी छूट राहुल के सामने hi मलने लगी. राहुल मोनिका को पहली बार ऐसे नंगा देख और जोश में आ गया और ख़ुशी को और जोरर से छोड़ने लगा.

और कुछ hi देरर बाद ख़ुशी तीसरी बार फिरसे झरर गयी और साथ hi साथ राहुल ने अपने सारा का सारा वीर्य ख़ुशी के गर्भ में गिरा दिया.

राहुल के अत्यंत तेज़्ज़ प्रहारों से ख़ुशी बेचारी इतना थक गयी और उसकी हालत खराब हो गयी, वो तुरंत hi नींद की वादियों में चली गयी.

इधर जैसे hi राहुल ने बिस्तर पर देखा तोह खून और उसका रस और खून से सना हुआ लुंड.

मोनिका : चलो.. वाशरूम में साफ़ करवा देती हु

और मोनिका राहुल का हाथ पकड़ के उससे वाशरूम में ले जाती है और उसका लुंड अच्छे से साफ़ करके बाहर फिरसे ले आती है,

राहुल : अब आपकी बारी...

उसकी बात सुन्न मोनिका भी अपने परर म शेप में कर लेती है और राहुल की तरफ बाहे खोल के उससे बुलाने लगती है,

मोनिका : आ जाओ... और... छोड़ो मुझे राहुल...

मोनिका के मुँह से ऐसे शब्द सुनते hi राहुल का लुंड झटका मार देता है जो मोनिका देख लेती है एयर मुस्कुराने लगती है,

मोनिका : आ जाओ स्वीटहार्ट! आज से ये मोनिका तुम्हारी हुई, जितना चाहे छोड़ो... अब से में सिर्फ और सिर्फ तुम्हारी हु...

और अगले hi पल राहुल मोनिका पे टूट पड़ता है, उसकी छूछीयो की राहुल बुरी दशा कर देता है, इतना चूसता है उन्हें. पर मोनिका को ये दर्द बेहद पसंद आ रहा था, क्युकी ये सब करने वाला राहुल था. जिस से वो प्यार करती है. इस से ये पता चल रहा था की राहुल उससे पाने के लिए कितना बेकरार था. और इस बात से मोनिका बेहद खुश थी.

राहुल मोनिका के छूछीयो से हट के उसकी बुर पर पोहचता है और अच्छे से सूंघने के बाद अपनी जीभ का कमाल दिखाते हुए वो मोनिका का हाल बेहाल करने लगता है.

ऐसी hi जब मोनिका दो बार झरर जाती है तोह राहुल अपना लुंड उसकी छूट की एंट्री पर लगा देता है,

"आप रेडी हो न?"

मोनिका (ब्लश) : हम्म्म

और फिर राहुल कुछ नहीं कहता बस एक गहरी सास लेके एक तेज़्ज़ शॉट मारता है जो सीधा मोनिका की योनि को चीरता हुआ आधा उसकी बुर में धस्स जाता है.

जब फाइनली पूरा लुंड अंदर हो जाता है उसके बाद ख़ुशी की तरह hi मोनिका कक थोड़ी देरर बाद आनद की अनुभूति महसूस होने लगती है और वो खुद hi राहुल से अपनी कमर उछला उछला के छोड़ने लगती है.

राहुल मोनिका को अलग अलग पोसिशन्स में छोड़ता है, मोनिका खुद भी एक मार्टिकल आर्टिस्ट थी तोह उसका स्टैमिना ख़ुशी से कही ज़्यादा था. और राहुल को मोनिका के साथ सच में बेहद मज़ा आया. इस पूरी चुदाई में राहुल तीन बार और झरा और तीनो बार उसने अपना वीर्य मोनिका की बुर में निकाल दिया.

जब दोनों hi थक गए तोह राहुल बिस्तर पर गिर पड़ा और ख़ुशी और मोनिका उसके अगल बगल उसकी छाती के ऊपर सर रख के सो गयी.

बगल वाले कमरे में तानिया और नेहा मौजूद थी.

जिन्हे सब कुछ सुनाई दे रहा था.

तानिया : सुना न तुमने!?

नेहा : हां! भाई काफी वाइल्ड है आज लगता

तानिया : हम्म्म! जान निकल गयी होगी उन् दोनों की

नेहा : दीदी! आप भी कर चुकी हो न भाई के साथ?

तानिया (ब्लश) : हआ

नेहा (ब्लश) : केसा लगता है?

तानिया (ब्लश) : बोहत अच्छा... में शब्दों में नहीं बता सकती... तुम खुद कर के देख लेना...

नेहा (ब्लश) : hmm...boht जल्द...

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आज के लिए इतना hi गाइस!


धन्यवाद्!!
 
अपडेट - 111

फाइनल अपडेट



अब तक...

तानिया : सुना न तुमने!?




नेहा : हां! भाई काफी वाइल्ड है आज लगता

तानिया : हम्म्म! जान निकल गयी होगी उन् दोनों की

नेहा : दीदी! आप भी कर चुकी हो न भाई के साथ?

तानिया (ब्लश) : हआ

नेहा (ब्लश) : केसा लगता है?

तानिया (ब्लश) : बोहत अच्छा... में शब्दों में नहीं बता सकती... तुम खुद कर के देख लेना...



नेहा (ब्लश) : hmm...boht जल्द...

अब आगे...

कुछ दिन यु hi गुज़रे, इन् दिनों में राहुल ने अपनी सभी पार्टनर्स के साथ सेक्सुअली समय बिताया सिवाए नेहा के.

अभी सुबह के 6 बज रहे थे और राहुल निशा के रूम में चोरी छिपके आ गया था और कमरे में सिर्फ सिसकियों की आवाज़ें आ रही थी.

"Aah...aah...aise hi बेतु... आईईईई", निशा की छूट से पानी बहे जा रहा था और वो इस वक़्त अपनी गांड मरवा रही थी. पूरे घर में निशा hi एक सबसे ज़्यादा अनल लवर थी. राहुल तनीषा के साथ भी अनल कर चूका था पर बाकी सभी के साथ अभी उसने नहीं किया था. निशा hi एक थी जिससे अनल अभी बोहत पसंद था.

राहुल पीछे से निशा की गांड में जोरर जोरर से धक्के लगा रहा था. इन् दिनों उसका ध्यान निशा पर से हट गया था क्युकी उसके पास समय hi नहीं था. पर इसका मतलब ये नहीं की वो निशा को भूल चूका है. इसलिए आज जब सब सो रहे थे, राहुल सुबह सुबह hi गया निशा के रूम में और उसकी चुदाई शुरू कर दी.

निशा को भी आज इतनी ख़ुशी हुई, की उसका बेतु उसके लिए समय निकाल के आया, वैसे तोह वो नींद में थी पर उससे कोई आपत्ति नहीं थी. उसने ठान लिया था की आज सुबह अच्छे से चुदाई करवाने के बाद वो फिर से सो जाएगी और आराम से उठेगी. घर में इतनी लड़किया है, कोई न कोई नाश्ता तोह बना hi लेगा.

इतनी साड़ी राहुल की पत्निया होने का ये भी एक फायदा था उसके लिए. अब उससे खाना की टेंशन नहीं. वो बस अब आराम कर सकती है.

*पहात पहात पहात*

राहुल निशा को डोगग्य स्टाइल पोजीशन में उसकी गांड मार रहा था, निशा आलरेडी 4 बार झरर चुकी थी. और कुछ hi देरर में राहुल ने अपना धेरर सारा वीर्य निशा की गांड में उड़ेल दिया. दोनों छेड़ भरने के बाद राहुल ने अपना लुंड निशा की गांड से निकाला और बीएड पर टिक के बैठ गया.

निशा फौरन उठी और राहुल का लुंड जो की उसकी गांड से अभी सन्न के निकला था उससे अपने मुँह में भर ली और साफ़ करने लगी. राहुल ने प्यार से निशा के सर्र पर हाथ फेरा और साफ़ सफाई को एन्जॉय करने लगा.

उसके बाद दोनों hi वाशरूम में जाकर एक दूसरे को नहलाने लगे. नहाते वक़्त भी राहुल ने कोई कसार नहीं छोर्री और निशा को जैम के पेला जहा मौका मिला. उसके बाद निशा को उसने बीएड पर लिटा दिया,

राहुल : आज hi निकलना है माँ. अब आप आराम करिये, आपको उठने की कोई ज़रुरत नहीं.

निशा : आज जा रहे हो?

राहुल : हां माँ!

निशा : ठीक है बेतु! नेहा का ख़याल रखना

राहुल : ये भी कोई कहने की बात है?

निशा : हम्म! मुझे तुझ पर पूरा भरोसा hai...aur...

कहते हुए निशा नींद की वादियों में चली जाती है तोह राहुल मुस्कुराते हुए उसके माथे को चूमता है और वह से निकल आता है.

आज नेहा और उसकी ट्रिप का दिन था. आज वो दोनों फॉरेन ट्रिप पर जा रहे थे. जब ऋचा राहुल के साथ पेरिस होक आयी थी तोह नेहा की भी बोहत मैं था और उससे भी वही जाना था. इसलिए आज इतने दिनों बाद नेहा ने अपनी मांग राखी, और राहुल ने बिना कोई सवाल किये हां कह दिया.

और सुबह कुछ देरर बाद hi नेहा और राहुल तैयार होक फ्लाइट के लिए निकल दिए और फ्लाइट में बैठने से पहले तनीषा मोनिका और अंशु को गले से लगाया क्युकी वो तीन hi इनको चौररने आयी थी, बाकी घर पर hi थी.

उसके बाद दोनों hi प्लेन में बैठ गए.

Neha's पॉइंट ऑफ़ व्यू :

फाइनली!! में और भाई अकेले एक साथ. कब से इस मोमेंट का वेट कर रही थी. सब्र का फल मीठा होता है. आज में बेहद खुश थी.

मेने देखा भाई मेरे बगल में भाई थोड़ा थके थके नज़र आ रहे थे. मेने उनके माथे पर अपना हाथ फेरा, बुखार तोह नहीं था उन्हें.

मेरे हाथ का स्पर्श पाते hi वो मेरी और देखने लगे, "गुड़िया!??"

"भाई!? आप ठीक हो न? थके थके से लग रहे हो?" मेने चिंता जताते हुए पूछा.

तोह भाई मेरी बात सुनते फौरन hi अच्छे से बैठ गए, "ः! नहीं नहीं... में बस ऐसे hi... सोचा थोड़ा आराम कर लू... लम्बा सफर है..."

उनकी बात सुन्न में थोड़ा सोच में पड़ गयी और उन्हें देखने लगी. भाई कही मुझसे कुछ छुपा तोह नहीं रहे न? नहीं नहीं! भाई भला मुझसे क्या छुपाएंगे? वो मुझसे बेहद प्यार करते है. हहै!

मेने एयर होस्टेस को बुलाया और उस से 2 कॉफ़ी लाने को कहा ताकि भाई को थकान महसूस न होये.

एयर होस्टेस जैसे hi आयी उस कमीनी की नज़र सबसे पहले मेरे भाई पर गयी न की मुझ पर और कुट्टी बात भी भाई से करने लगी. मेरे सामने hi मेरे भाई के साथ फ्लिर्टिंग? इतनी हिम्मत!? मेने भाई के हाथ को अपने दोनों हाथो में थामा और उस एयर होस्टेस को तीखी नज़र देते हुए उससे भाई के पास से रफा दफा किया. हम्फ! बड़ी आयी मेरे भाई के साथ फ़्लर्ट करने वाली. मुँह न नोच लुंगी उसका में.

यहाँ अभी तक मैंने भाई के साथ सेक्स तक नहीं किया, अरे सेक्स क्या, अभी तक हमने एक दूसरे को नुदे तक नहीं देखा. और ये लोमड़ी कही की... भाई के साथ फ़्लर्ट करेगी...!?

उसके जाते hi मेने बबई के गाल को जोरर से चूमा, अपना हक़ जाता रही थी में, की ये जो भाई है न ये सिर्फ इस नेहा का है...

अभी में अपना प्यारा समय भाई के साथ और गुज़ारती की तभी वो कलमुही वापस लौट के आ गयी. वो एयर होस्टेस. भाई पर से उसकी नज़र हट hi नहीं रही थी.

ायरगगठ्ठ मुझे इतना गुस्सा आ रहा था उसपे. मुस्कुरा मुस्कुरा के वो भाई से बात कर रही थी. कॉफ़ी देते वक़्त भी उसके हाथ भाई से टच हुए मेने देख लिया था. मेने फिरसे उसको तीखी नज़र से देखा तोह वो मुझे देख के इस बार थोड़ा झेप गयी और फौरन hi वापस चली गयी.

हम्फ! भाई सिर्फ मेरा है. अभी में भाई के साथ अकेले आयी हु अपना समय बिताने. जो भी बीच में आया में usse....hmph!

खर्र! भाई और मेरा सफर यु hi गुज़रा. एक दूसरे के साथ चिपके चिपके हहै. हम पेरिस पहुँच चुके थे. और सच बताऊ तोह अब मुझे ऋचा दीदी से जलन हो रही थी. वो इतनी ख़ूबसूरत सिटी में भाई के साथ पहले आके अपना समय गुज़ार ली, ये सोच के hi मुझे जलन होने लगी थी की काश उनकी जगह में होती भाई के साथ.

हमने वह से होटल में बूकेड रूम की और प्रस्थान किया और में और भाई कैब में बैठ के होटल पोहचे.

कुछ समय बाद....

"अच्छा लग रहा है न भाई?", मैंने पूछा.

"Mmm-Hmm, बोहत अच्छा", भाई ने जवाब दिया. उनकी आवाज़ हमेशा की तरह इतनी मधुर थी जिससे सुनके मुझे हमेशा कुछ न कुछ होने लगता है.

मेने भाई की ऊपर टूट पड़ने से खुद को रोका.

मेने कभी नहीं सोचा था की जिस भाई के साथ मेरा रिश्ता इतनी नफरत और घृणा से भर गया था, उसके साथ में आज ऐसे यु समय गुज़ारूंगी. पर जो भी हुआ बोहत अच्छा हुआ. अंदर hi अंदर में यही चाहती थी.

अपनी एक बाल की लत्त को कान के पीछे करते हुए मेने उन्हें देखा और कहा,

"हो गया भाई!!"

भाई मेरी जाएंगे पर से अपना सर उठाए और अंगड़ाई लेने लगे.

मेरी जाँघे अब अकेलापन महसूस कर रही थी. वो चाह रही थी की भाई फिरसे अपना सर रख के उनपर लेत जाए.

भाई प्लेन में सफर करने के बाद थकान महसूस कर रहे थे इसलिए मेने उनसे पूछा की क्या में उनके सर की मालिश कर दू? तोह उन्होंने ख़ुशी ख़ुशी हां कह दिया था, इसलिए में भाई के सर की मालिश कर रही थी.

"थैंक्स गुड़िया! थोड़ा अच्छा लग रहा है अब"

"थैंक्स की क्या ज़रुरत भाई इसमें!? में आपकी सेवा नहीं करुँगी तोह कोण करेगा?" मेने उन्हें प्यार भरी नज़रो से देखते हुए कहा.

"वैसे मुझे तोह चम्पी करना नहीं आता, पर मालिश करना ज़रूर आता है ः. यदि तुम्हे मालिश करवानी हो, तोह में कर सकता हु...", भाई ने मुझे देखते हुए पूछा. कितनी परवाह करते है वो मेरी. कितना अच्छा होता यदि सिर्फ में और भाई बस होते, और हमारे बीच कोई न आता. पर में जानती हु, अब ये नामुमकिन है. इसलिए में अब अपने आप को मातुरे बनाने की कोशिश कर रही हु. अपना पूरा समय में भाई पर ध्यान देते हुए hi व्यतीत करती हु ज़्यादातर. और हां, मेने बात बात पर झगड़ना और चिल्लाना भी काम कर दिया है. काम किया है, बंद नहीं किया. जब ज़रुरत पड़ेगी तोह में चिल्ला भी सकती हु. उनलोगो पर जो मेरे और भाई के बीच में आएँगे.

"हां! यदि आपको कोई ऐतराज़ न हो तोह...", मेने शर्माते हुए उनसे कहा. हे भगवान्! मेरे मैं में न जाने कोण सी जगह पर मालिश करवाने के दृश्य उमड़ रहे थे, जिस कारण मुझे शर्म आ गयी. में भी न...

मुझे एक बात इन् बीते दिनों में पता चली है की भाई को शर्माने वाली लड़किया ज़्यादा पसंद आती है. और इसलिए, मैंने अपना बोल्ड एक्ट थोड़ा छिपा के रख लिया है. आखिर में भी एक लड़की हु, में चाहती हु की भाई की नज़रो में में एकदम परफेक्ट राहु.

"अरे!? इसमें ऐतराज़ की क्या बात गुड़िया? तुम बिंदास डिमांड रख सकती हो", उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा तोह मेरी दिल की धड़कने तेज़्ज़ हो गयी. भाई!! तुम हद्द से ज़्यादा अच्छे हो. इतना अच्छा मत बना करो. में hi जानती हु में कैसे अपने अंदर छुपी शेरनी को रोकी हुई हो. पर आप यदि ऐसे मुझे छेड़ते रहोगे और इतने प्यार से बात करोगे न तोह में आपके ऊपर टूट पड़ूँगी...

और वही में कण्ट्रोल करना चाहती हु. मुझे अपनी बोल्डनेस कण्ट्रोल करते आना चाहिए.

मेने अपना सर हिलाया और उनसे मेरे कंधो की मालिश करने के लिए रिक्वेस्ट की. में कभी नहीं चाहूंगी की भाई मेरी सेवा करे पर में चाहती हु की वो मुझे छुए. इसलिए मेने उनसे सिर्फ कंधो की मालिश करने के लिए कहा. क्युकी मुझे उनके हाथो का स्पर्श फील करना था.

मेने अपना टॉप उनके सामने hi शर्माते हुए उतार दिया और अपनी वाइट ब्रा के दोनों स्ट्रैप्स को कंधो के नीचे खसका दिया. मेरा नंगा कन्धा भाई के सामने था अब.

भाई मेरे पीछे आये और थोड़ा नीचे झुके. उफ्फ्फ~ मुझे उनकी गरम सासें अपने कंधो पर महसूस हो रही थी. मेने अपने निचले होंठ को अपने दांत से दबा लिया और आँखें बंद कर ली.

उसके बाद भाई ने मालिश करना शुरू की. और करीब 15 मिनट तक पूरे कमरे में सिर्फ मेरी सिसकियों की आवाज़ें hi गूंजती रही. क्या करती? भाई के हाथ इतने अच्छे जो थे. में सिसकी लेने से खुद को रोक न सकीय. उनका स्पर्श मुझे पिघला रहा था. मेरे भाई के हाथो में जादू है. ी लव यू सो मच भाई~

और मेरा सब्र का बाँध टूट गया. में फौरन पलटी और भाई को बीएड पर गिरा दी. बिना झिजक के में उनके गले के पास झुकी और उनके गले को चाटने लगी. ममम~

उनकी खुसबू मुझे पागल कर रही थी. मेरा सारा जिस्म उन्हें पाने के लिए तड़प रहा था.

"भाई!!!", मेने सिसकी भरी "महसूस करिये... कैसे मेरा दिल आपके लिए धड़कता है..."

मेने अपनी आधी खिसकी हुई ब्रा को पूरा गिरा दिया और उनका एक हाथ पकड़ के अपने दूध पर रखवा लिया. उनकी उंगलिया मेरे खड़े हो चुके निप्पल पे रगड़ खा रही थी और वो हरकत मुझे झटके पे झटके दे रही थी.

"क्या आप महसूस कर रहे हो भाई? ये दिल आपके लिए धड़कता है, सिर्फ आपके लिए. आप hi मेरा सब कुछ हो भाई ~", मेने उनके कानो में अपनी गरम सासें चोररटे हुए कहा.

भाई ने मेरे एक दूध को जोरर से दबाया, "गुड़िया"

मेने उनकी चीन पकड़ी, अपना चेहरा नीचे किया.

मेरी आँखें उनसे मिली. कितना आसान था उनकी आँखों में खो जाना. मेने अपने होंठ खोले और धीरे धीरे आगे बढ़ी...

और हम दोनों के होंठ जुड़ गए. उनके होंठ मेरे होंठो से पूरे जुड़े हुए थे, एक डीप किश के लिए.

मेरी जीभ ने उनके मुँह के अंदर दस्तक दी, हर्र एक गुज़रते पल पर मेरी सिसकिया निकलती जा रही थी.

में इतनी ज़्यादा गर्म थी, में उनके मुँह के अंदर के हिस्सों का स्वाद ले रही थी.

उनके हाथ मेरे उरोजों को मसलने में लगे हुए थे. भाई मेरे दूध को गोलाई में घुमा घुमा कर निचोड़ रहे थे.

मेने उनके गले के इर्द गिर्द अपने हाथ लपेटे, ताकि अपने प्यार को और जोरर से चूम सकू.

और एक ज़ोरदार चुम्मी के बाद मेने उनके कपडे निकालने शुरू कर दिए. उनकी बॉडी..

हाई~

मैंने उनकी बॉडी पर अपनी जीभ फिराना शुरू कर दी और हर्र एक जगह पर चूमने लगी. उनके शरीर का में कोई भी हिस्सा नहीं चोरर्ण चाहती थी. उनके जिस्म की हर्र एक जगह पर में अपने होंठो के निशाँ चोरर्ण चाहती थी. ताकि सबको पता लग सके की वो किसी की अमानत है. और वो मेरी अमानत है. भाई~

मेने उनका जीन्स निकाला और साथ hi साथ अपने शॉर्ट्स भी और में और भाई अब केवल अपनी अंडरवियर में थे. एक बार फिरसे में उनके होंठो पर टूट पड़ी और भाई मेरे दूध मसलने लगे. में मैं hi मैं मुस्कुराने लगी.

फुफु~ भाई!!! उनको ब्रेअस्ट्स बोहत पसंद है.

में खुशकिस्मत हु की मेरे स्तन बड़े है. भाई को बड़े ब्रेअस्ट्स बोहत hi पसंद है. मुझे अपने ऊपर आज गर्व महसूस हो रहा था. मेने उनका चेहरा पकड़ा और अपने उरोजों में उनका चेहरा धसा दिया. उनकी गरम सासें मेरे सीने में पद रही थी. मेने उनको कस के अपने उरोजों में छुपा लिया. ये लो भाई~

आपको स्तन पसंद है न? तोह ये लो! आपके hi है! जब चाहे इनके साथ जो करना हो कर लो. में उन्हें अपने उरोजों में दबाके राखी हुई थी. और उनके हाथ मेरे चूतड़ों को दबाने में लगे हुए थे.

कुछ देरर बाद मेने अपनी पंतय भी शर्माते हुए उतार दी. भाई के सामने इतने सालो के बाद में नंगी हो रही थी. बचपन में हम दोनों साथ में hi नहाते थे तब भाई ने मुझे कई बार नंगा देखा हुआ था और वो मुझे नहलाते भी थे. पर आज... इतने सालो बाद हम एक दूसरे को नंगे देखने वाले थे.

मुझे बोहत ज़्यादा शर्म आ रही थी और मेने अपना चेहरा अपने हाथो से छुपा लिया. ओह्ह भैया! मत देखो न मुझे ऐसे प्लीज!! मुझे शर्म आती है. में मैं में यही बाद बढ़ाये जा रही थी. पर भाई की तरफ से कोई आवाज़ न आयी. शायद वो मेरी छूट देख रहे थे. ये सोचके hi मेरे गाल और भी लाल पद गए. उन्हें पसंद तोह आएगी न? कही उन्हें पसंद न आयी तोह? में बोहत दुविधा में पड़ गयी. मेने वैसे क्लीन शेव तोह कर ली थी पर यदि भाई को फिर भी पसंद नहीं आयी तोह? ओह्ह no! में अंदर hi अंदर टेंशन में थी और दुआ कर रही थी की भाई को में और मेरा ये शरीर पसंद आ जाए.

और तभी मेरे कानो में उनकी मधुर आवाज़ पड़ी,

"ब्यूटीफुल!"

और मेरा पूरा शरीर काँप उठा उनकी मधुर आवाज़ सुनके. उन्हें पसंद आया. भैया~

मेने अपनी आँखें खोली और उन्हें देखा तोह वो बड़े प्यार से मुझे देख रहे थे. उनकी आँखों में मेरे लिए प्यार देख मेरे ासु निकल पड़े. ओह्ह भैया!! मेने अपने हाथ फैलाये, "आ जाओ मेरे भैया... आ जाओ अपनी छोटी बहिन के पास और अपना लो उससे... बना लो मुझे अपना हमेशा हमेशा के लिए.. मुझे अपने अंदर समां लो भाई..."

न जाने में क्या क्या बोली जा रही थी पर जो भी बोल रही थी वो मेरे दिल से निकल रहा था. भाई ने मेरे होंठो को फिरसे जी भर के चूमा. और वो एकदम से मेरे पूरे बदन को चूमते हुए नीचे चले गए...

में चौंक गयी. भाई!? क्या करने वाले है वो? उनका मुँह मेरी छूट के एकदम सामने था. Don't तेल्ल में...

आअह्ह्ह्हह्ह्ह्हह~

और अगले hi पल वही हुआ जो मेने सोचा नहीं था. भाई ने मेरी छूट पे किश किया और फिर उससे चाटना शुरू कर दिया. उफ्फ्फ~

मुझे नहीं पता था भाई ऐसा कुछ करेंगे. ी मैं मुझे पता है ये सब किया जाता है पर मेने निक्की से सुना था की लड़के लोग लड़कियों की नीचे की जगह नहीं चाटते मोस्टली. मुझे लगा था शायद भाई उस जगह पे मुँह नहीं लगाएंगे जहा से लड़किया पेशाब करती है. बूत उफ्फ्फ्फ़.... में कितनी गलत थी.

भाई मेरी पेशाब करने वाली जगह को अपने मुँह में भरे हुए थे. हाय! में मर्डर जाऊ... इतना सुख!

एक मिनट! इसका मतलब भाई ने ऋचा दीदी और बाकी सब के साथ भी ये किया होगा. मतलब में ये फील करने वाली आखिरी हु? सहित!!!! अब मुझे सभी से जलन होने लगी थी. इतने सारे सुख से में अब तक वंचित थी?

भाई ने मेरी छूट पे इतनी किस्सेस करि और उससे छाता की में तीन बार झरर गयी. मेने उन्हें चौकन्ना करने की कोशिश की थी, की में आने वाली हु पर उसके बावजूद उन्होंने अपना मुँह नहीं हटाया. ओह्ह भाई! ी लव यू सो मच!!

मैंने उन्हें अपना पास बुलाया और उनके होंठ अपने होंठो में भर लिए. भाई को में ये महसूस नहीं होने देना चाहती थी की उनके ऐसा करने के बाद में उन्हें किश नहीं करना चाहती. मेने फौरन hi उन्हें अपने मुँह में भर लिया और जी भर के किश किया और उनके मुँह में मेरी छूट के पानी का स्वाद था जो मेने खुद टास्ते किया उनके मुँह के ज़रिये.

और उसके बाद मुझे पता था क्या करना है. भाई ने मुझे आनंद दिया, अब मेरी बारी थी उन्हें भरपूर आनंद देने की. मेने उन्हें अपनी जगह लिटाया और उनकी अंडरवियर नीचे कर दी.

सामने उनका हथ्यार देख के में चौंक गयी. ये तोह कुछ ज़्यादा hi बड़ा लग रहा था. भाई का लुंड.... उम्म्म...

मेने उनके चेहरे को देखते हुए अपने गुलाबी होंठ उनके सुपाड़ी के ऊपर टिका दिए और जी भर के सुपाड़ी को चूमने लगी. भाई का चेहरा देखने लायक था हहै. उनकी आँखें बंद हो गयी थी और वो सिसकिया ले रहे थे. में समझ गयी थी में अच्छा कर रही हु. तनीषा दीदी ने बताया था की भाई की बॉल्स और उनके निप्पल्स सेंसिटिव जगह है और भाई को यदि मज़ा देना है तोह उनके इन्ही दोनों जगह पर अपने मुँह से चूसो और चाटो और किस्सेस करो तोह उन्हें बोहत आनंद मिलेगा.

मेने उनका लुंड अपने मुँह में भर लिया. ये मेरी लाइफ का पहला ब्लोजॉब था. मुझे नहीं पता था कैसे करते है बूत इतना ज़रूर पता था की आगे पीछे करना पड़ता है. मैंने अपने मुँह के अंदर मेरे प्यारे भैया का लुंड लिया और जीभ से घुमाते हुए अपना सर आगे पीछे करने लगी.

कुछ देरर बाद hi भाई झाररने वाले थे तोह उन्होंने मुझे रोक दिया. उसके बाद मेरी नज़र उनकी बॉल्स पर गयी... में आगे बढ़ी और एक लम्बी सास लेते हुए मेने उस जगह को सूंघा. उफ्फ्फ~

न जाने क्या महक थी वो. में खो सी गयी उसमे. मैंने अपना पूरा चेहरा उनकी बॉल्स पर ले जाके लगा दिया और अपने चेहरा रगड़ते हुए में उस हिस्से को सूंघने लगी. तनीषा दीदी ने बताया था ये बोहत सेंसिटिव जगह होती है और ज़्यादा जोरर से यहाँ कुछ नहीं करना चाहिए. इसलिए मेने पूरी केयर से उनकी बॉल्स पर किस्सेस करनी शुरू की.

मेने उनकी बॉल्स अपने मुँह में भर ली, करीब 5 मिनट तक में उनकी बॉल्स अपने मुँह में hi भरी रही और अपनी जीभ से उन्हें टटोलती रही और चूसती रही. उसके बाद मैंने उनकी बॉल्स पर जीभ फिराना शुरू किया और चुम्मियो की बाढ़ लगा दी. में भाई को सबसे ज़्यादा आनंद देना चाहती थी. मेरा सुख बाद में है. पहले भाई का सुख.

15 मिनट तक में उनकी बॉल्स के साथ खेलती रही उसके बाद उन्होंने मुझे लिटाया और मेरे ऊपर चढ़ गए. उन्होंने मेरी छूट पे थूक लगाया और अपने लुंड के सुपाड़ी पर भी. और फिर मुझे देखा जैसे मुझसे परमिशन मांग रहे हो...

ओह्ह भाई! आपको परमिशन लेने की ज़रुरत थोड़ी है. आपको जो करना है करो मेरे साथ. में आपकी हर्र एक हरकत में आपका साथ दूंगी. पर उनकी नज़र मुझे घूर रही थी और मैंने उसका मान रखते हुए अपना सर हां में हिला दिया.

उसके बाद भाई ने अपना लुंड मेरी कुवारी बुर के सामने रखा और एक ज़ोरदार शॉट मारा. उनका 1/4 लुंड मेरी छूट के अंदर समां गया.

हेयीईइ~

मेने अपने निचले होंठ को दांतो से जोरर से काटा. इतना दर्द. इस से पहले की में वो दर्द और महसूस करती भाई ने एक और शॉट इतना तेज़्ज़ मारा की उनका 3/4 लुंड मेरे अंदर समां गया.

"Aaaaaaahhhhhhhhhhhhh", में इतना जोरर से चीखी. पर में नहीं चाहती थी की भाई का मज़ा मेरी वजह से किरकिरा होये. मैंने अपनी आवाज़ दबा ली और अपने होंठ को काटते हुए अपना दर्द भूलने की कोशिश करने लगी. और तभी भाई ने आखिरी धक्का मार के पूरा का पूरा लुंड मेरी बुर में उतार दिया.

में पूर्ण हो चुकी थी. भाई पूरी तरह से मेरे अंदर समां चुके थे. उनका पूरा लुंड मेरी छूट में धस्स चूका था. बस! यही तोह में चाहती थी. में और भाई एक हो गए.

तोह ये होता है सेक्स?? मुझे बोहत दर्द हो रहा था. मैंने भाई को देखा, उन्हें मज़ा आ रहा था. मुझे उनका सुकून वाला चेहरा देख बोहत ख़ुशी हुई. यदि मेरे ऐसे दर्द में रहने से भाई को मज़ा मिल रहा है, तोह मुझे तोह ऐसे हज़ारो दर्द मंज़ूर है.

मेने उनके मज़े के लिए अपनी कमर उचकानी शुरू कर दी ताकि मेरे भाई को मज़ा मिल सके. मुझे अपने दर्द की परवाह नहीं थी.

पर तभी मेरे कानो में भाई की आवाज़ पड़ी, "आराम से गुड़िया... अभी नहीं! थोड़ा ृक्क जा. दर्द काम हो जाने तेरा", उनकी आवाज़ में चिंता थी.

और बस... में रो पड़ी. इतना सब के बावजूद उन्हें मेरी परवाह थी. वो मेरा दर्द महसूस कर सकते थे. भैयाआ~ ी लव यू सो मच...

मुझसे रहा न गया और मैंने उनका चेहरा थामा और जी भर के बेरहमी से उनके चेहरे को चूमना शुरू कर दिया. मेरे होंठो के सामने उनके चेहरे को जो भाग आता में उससे अपने मुँह में भर लेती.

"ी लव यू~ ी लव यू भैया~ ी लव यू सो मच~ मुहाः~" में उन्हें न जाने कब तक चूमती रही और वो भी मेरी किस्सेस का जवाब बड़े hi अच्छे से दे रहे थे और मेरे उरूज जो की उनके मनपसंद थे उनके साथ खेल रहे थे. मेरे निप्पल्स को उन्होंने मुँह में भरा और मेरा दूध पीना शुरू कर दिया. उफ्फ्फ~

मेरे स्तनों में दूध तोह नहीं था पर भाई जो इतने प्यार से मेरे दूध चूस रहे थे उन्हें देख में मैं hi मैं मुस्कुरा पड़ी, वो बिलकुल किसी बच्चे के सामान दूध पी रहे थे हेहेहे.

और फिर भाई ने अपनी कमर हिलाना शुरू किया और धक्के मारने लगा.

"Aaah...aah...aahh....ahhh...oohhh...hmmm...ummm"

मेरे मुँह से अजीब अजीब आवाज़ें निकलने लगी और इस बार मेने आवाज़ों को रोकने की कोई कोशिश नहीं की.

कुछ hi देरर में मेरा सारा दर्द ख़तम हो गया था और कुछ नया सा एहसास शुरू हो गया. प्लेअसुरे! इतना प्लेअसुरे मुझे कभी नहीं मिला. है! में मर्डर जाऊ. तोह ये होता है सेक्स??

उफ़~ भाई मेरी छूट में धक्के पर धक्के मार रहे थे और हमारे चूतड़ एक दूसरे से टकरा के जो आवाज़ निकाल रहे थे वो इतनी सेंसुअल थी की में अपने होश खोने लगी. अब तोह में भाई से बिलकुल भी दूर नहीं रह सकती.

में 4 बार आलरेडी जहर चुकी थी. भाई जोरर जोरर से मुझे छोड़ रहे थे और मेरा नाम पुकार रहे थे और यही हाल मेरा था, में भी उन्हें भैया कह कह के पुकार रही थी.

"ओह्ह्ह ohhhh...aahh...gudiyaa...ohhh...fuckkk... एसससस" भाई मुझे छोड़ते हुए ये सब बोले जा रहे थे. मुझे ख़ुशी थी की उन्हें में इतना आनंद दे पायी.

"Aaahhh...aahhh...haaa...bhaiyaaa....chodo... छोड़ो अपनी इस गुड़िया को... और जोरर से भाई... Chodo...apni गुड़िया की छूट पहाड़ दो भाई... पहाड़ दो... आह्हः... और जोरर से... ऐसे hi ... रोज़ छोड़ोगे न भाई अपनी इस गुड़िया को? हां? छोड़ोगे न? बोलो भाई... ाःह"

मेने जान बुझ के ऐसे शब्दों का प्रयोग किया, मुझे पता था ये उत्तेजना को बढ़ा देता है और वही हुआ भी.

भाई ने मुझे बोहत जोरर से छोड़ना शुरू कर दिया, हर्र एक धक्के पर मेरा पूरा शरीर ऊपर नीचे हो जाता और पलंग जोरर जोरर से हिलने लगा था और चररर चररर की आवाज़ें आने लगी थी.

"हां गुड़िया... रोज़..." मेरे प्रश्न पर उन्होंने जवाब दिया. बस! में तृप्त हो गयी. आज अपने भाई को पाके. आज से मेरा पूरा समर्पण भाई को है.

और तभी भाई ने आखिरी धक्का मारा और उन् ने सारा माल मेरी बुर के अंदर चोरर दिया. मेने भी अपना पानी चोररटे हुए उनकी कमर में अपनी टांगें लपेट ली. आज से ये नेहा पूरी तरह अपने भाई राहुल की हो गयी.

में चाहती थी भाई को और मज़ा दू, उनकी सेवा करू पर ये कमज़ोर शरीर. हम्फ!

में नींद की वादियों में चली गयी.

मुझे इतना तोह पता लग गया था. आज से में भाई के बिना कभी नहीं रह सकती. वो मेरा सब कुछ है और रहेगा.

शादी तोह में उस से करुँगी hi, बाद में उसके और मेरे बच्चे को भी जनम दूंगी. पर...

पर उस से पहले... मुझे ये लाइफ एन्जॉय करनी है. भाई के साथ. केवल वो और में. और कोई भी नहीं.

मुझे नहीं पता आगे क्या होगा हमारी ज़िन्दगी में. पर इतना तोह में जानती थी...

की में भाई से हमेशा प्यार करुँगी.

में लेते लेते hi मुस्कुरायी और नींद में जाने से पहले एक hi लाइन बोली,

"ी लव यू~ भाई"

और में नींद में चली गयी...

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थे एन्ड
 
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