इन्सेस्ट रिश्ता - Page 17 - SexBaba
  • From this section you can read all the hindi sex stories in hindi font. These are collected from the various sources which make your cock rock hard in the night. All are having the collections of like maa beta, devar bhabhi, indian aunty, college girl. All these are the amazing chudai stories for you guys in these forum.

    If You are unable to access the site then try to access the site via VPN Try these are vpn App Click Here

इन्सेस्ट रिश्ता

अपडेट 88

संध्या ने अपने मकान को बेच दिया और सारा पैसा उसने अपने नए अकाउंट में डलवा लिया. उधर आदित्य ने काफी पैसा कमा लिया था और उसने उस पैसे से एक फ्लैट खरीद लिया और अब दोनों वंहा शिफ्ट हो गए. लोग उन्हें पति पत्नी समझते थे, लेकिन संध्या को किसी भी बात का न तू बुरा लगता और न hi वो कोई जवाब देती और न hi कुछ करती जिससे मौहाल में ख़ुशी आये. वो तू जैसे उस दिन के बाद अपने में hi गुमसुम हो गयी. आदित्य ने जॉब ज्वाइन कर ली और उससे दूसरे शहर में जाना पड़ा और संध्या एक बार फिर अकेली रह गयी. उसने न तू आदित्य को उससे साथ ले जाने के लिए कहा और न hi आदित्य ने उससे साथ चलने के लिए कहा.

आदित्य बीच बीच में आता और वो कोशिश करता hi की संध्या को घुमा कर लाये, उससे अच्छे कपडे पहनाये, अच्छे गहने लेकर दे, लेकिन संध्या का बर्ताव ऐसा था की उससे इन् सब में शायद कोई दिलचस्पी hi नहीं थी, लेकिन उसने कभी भी आदित्य को मन नहीं किया और वो हमेशा आदित्य के साथ चली जाती, लेकिन कभी भी मन से नहीं गयी.

आदित्य को भी पता था की संध्या दिल से उसके साथ नहीं जाती है, लेकिन वो जाती जरूर थी. आदित्य उसकी बेरुखी को समझ नहीं पता था, वो तू बस इतने में hi खुश था की उसने कभी भी न तू उसके साथ जाने से मन किया और न hi किसी बात के लिए चाहे वो उसके साथ सम्भोग hi क्योँ न करे. आदित्य को मज़ा तू नहीं आता था, लेकिन वो जानभूझकर उसके साथ ये सब करता था. उससे लगता था की कोशिश करने से शायद वो उसके साथ दिल से उसके साथ एन्जॉय करने लगे.

आदित्य जॉब के साथ साथ िरा मैडम का काम भी करता था, लेकिन कभी भी अपनी जॉब के साथ बेईमानी नहीं की. िरा मैडम का काम वो तब करता था जब उसकी छुट्टी हो जाती थी, जिससे उसके पास वक़्त की कमी hi रहती थी. वो दिल लगाकर काम करता था और उस काम में हाथ डालता था जो मुश्किल हो, जिससे उसमे जयादा कमाई हो सके. िरा मैडम भी उससे बहुत खुश थी क्योंकि उसकी वजह से उससे एक महीने में इतना प्रॉफिट हो रहा था जितना उसने पुरे साल भी नहीं कमाया हो. इतना hi नहीं उसकी कंपनी की साख भी बढ़ने लगी. इस साख की वजह से उसके पास एक बहुत hi अच्छा ऑफर अमेरिकन मल्टीनेशनल से आया और वो आर्डर इतना बड़ा था की उन्हें एक नै कंपनी खोलने के लिए कहा गया.

इस आर्डर को लेने में आदित्य का बहुत बड़ा हाथ था, बल्कि आदित्य की वजह से hi यह आर्डर मिल रहा था. यह आर्डर इतना बड़ा था की आदित्य की तू छोडो, िरा मैडम की भी जिंदगी बदलने वाली थी. िरा मैडम आदित्य से इतनी प्रभावित थी की उससे जॉब छोड़कर बिज़नेस करने के लिए कहा, लेकिन आदित्य ने उससे ताल दिया. असल में वो जॉब करते हुए इस बिज़नेस की अंदरूनी कमियां और बचाव का रास्ता जानने का इच्छुक था. यह तभी संभव था जब वो किसी बड़ी कंपनी में होता, जैसा की वो अब था.

िरा मैडम ने असल में आदित्य के साथ मिलकर एक नयी कंपनी खोलने के लिए कहा, जैसे की आर्डर देने वाली कंपनी ने शरत राखी थी, जिसमे आदित्य पार्टनर था. अब समस्या ये थी की आदित्य को पार्टनर कैसे बनाया जाये क्योँकि वो जॉब कर रहा था. उसने िरा मैडम से थोड़ा वक़्त माँगा और वो वापिस लौट गया.

वापिस जाकर वंहा पर प्लानिंग कर hi रहा था की वो जिस कंपनी में जॉब कर रहा था उसमे कोई बहुत बड़ी प्रॉब्लम आ गयी जिसकी वजह से कंपनी को करोड़ो का नुक्सान होना था. वंहा पर उसके बॉस ने पूछा की क्या वो इससे ठीक कर सकता है तू आदित्य ने आश्वासन दिया की 'वो इसमें पूरी जान लगा देगा' अगले तीन दिन तक आदित्य को कोई होश नहीं था और वो उस प्रॉब्लम को ठीक करने में लग गया और उसकी किस्मत अच्छी थी की वो प्रॉब्लम ठीक हो गयी. उस प्रॉब्लम के ठीक होने पर कंपनी ने उससे प्रमोशन भी दे दी और 2 लाख का इनाम भी दिया. इसके आलावा सात दिन का कपल हॉलिडे पैकेज भी दे दिया, जिसका पूरा खर्चा कंपनी ने उठाना था. आदित्य वापिस घर आया और संध्या को बताया और उससे अपने साथ चलने के लिए कहा. उसने कोई गर्मजोशी नहीं दिखाई, लेकिन उसने मन भी नहीं किया. वो एक हिल एरिया पर चले गए और वंहा पर कंपनी ने मरस. एंड मर. आदित्य के नाम से होटल बुक करवाया हुआ था.

आदित्य को मालूम था की उसकी माँ उसका साथ नहीं दे रही है, लेकिन उससे बड़े hi प्यार से संध्या को संभालना था. वो उससे वंहा की वादियों में घूमने ले जाता, वंहा पर बहुत साडी फोटो शूट करता, उसकी पसंद का खाना खिलता. उससे अचे से अच्छे शॉपिंग करवाता. एक दिन शाम को डिनर लेने के लिए दिंनिंग हॉल में जा रहे थे, वंहा का मौहाल बहुत hi रोमांटिक था. बहुत hi मद्धम संगीत बज रहा था, खुसबूदार महल में वंहा बहुत hi भव्य हॉल में बहुत साडी टेबल लगी हुई थी और वर्दीधारी वैयर्स खाना सर्वे कर रहे तह. कुछ लोग वंहा पर बने हुए डांस फ्लोर पर डांस भी कर रहे थे.

आदित्य और संध्या एक टेबल पर बैठ कर डिनर का डीडे कर hi रहे थे की एक सुन्दर सी लड़की आयी और आदित्य को hi करके उसके गले लग गयी, इससे देखकर पता नहीं क्योँ संध्या को जलन सी होने लगी.

आदित्य ने उससे संध्या का परिचय करवाया की 'शी इस माय वाइफ' तू उस लड़की ने कहा 'ी ऍम तृषा, मैं आदित्य की क्लासमेट थी' आदित्य ने उससे पूछा की 'वो यंहा कैसे' तू उसने बताया की वो अपने पति के साथ हनीमून पर आयी है. तब तृषा ने आदित्य से पूछा, पहले तू उससे सुझा नहीं फिर एक डैम से उसने कहा की 'शामे हेरे' संध्या की आँखें उसकी बात सुनकर एक डैम से चौड़ी हो गयी की आदित्य ये क्या कह गया.

तृषा का पति (अंकित) भी वंहा आ गया और आदित्य की उससे जल्दी hi दोस्ती भी हो गयी. वो एक बिज़नेस मन था और खाने पीने में विश्वास रखता था. उसने वंही पर सबके लिए ड्रिंक्स मंगवाए तू संध्या मन करने लगी.

अंकित 'भाभी जी, बुरा मत मन्ना मैं जो दिल में होता है कह देता हूँ, अगर आप को बुरा लगे तू पहले hi माफ़ी मांग लेता हूँ'

संध्या को उसके बात करने का अंदाज़ बहुत अच्छा लगा और पता नहीं उसकी बात सुनकर कई दिनों बाद उसके चेहरे पर मुस्खरहाट आयी थी. आदित्य भी ये नोटिस कर रहा था. संध्या 'नहीं नहीं, मैं बिलकुल भी बुरा नहीं मानूंगी'

अंकित 'देखो आप भी हमारी तरह हनीमून पर आये हो. सच बताऊँ तू यही वक़्त है जब खुलकर जीने का वक़्त मिलता है, इसलिए खुलकर जियो और दिल के सब अरमान पुरे कर लो. वापिस जाने के बाद तू लेडीज का चूल्हा चौका और मर्द लोगों का धंदा पानी, फिर कान्हा वक़्त मिलना है. रही बात ड्रिंक्स की तू आजकल के ज़माने का ये फैशन है, इससे नहीं ले तू दकियानूसी मने जाते हैं. रही बात चढ़ने की तू, पहले तू ये चढ़ती नहीं है और अगर चढ़ भी गयी तू यंहा कौन देखने वाला है. कुछ हो गया तू हम सब एक दूसरे को संभल hi लेंगे'

अब बेचारी संध्या उससे मन करे भी तू कैसे, उसने आदित्य की तरफ देखा तू उसने कहा 'ले लो डार्लिंग, देखा जायेगा'

पता नहीं क्या हुआ संध्या को आदित्य द्वारा डार्लिंग बुलाये जाना अच्छा लगा और उसने एक गिलास ले hi लिया. सब ने चियर्स किया और सिप लेने लगे. संध्या ने जैसे hi पहला सिप लिया उससे खांसी आ गयी. आदित्य उसकी पीठ मलने लगा और उसके कान में कहने लगा 'बिलकुल छोटा सिप लो और मन न करे तू मुंह से लगा कर टेबल पर रख देना. टेबल के नीचे से उसने अपने हाथ से उसकी जांघ पर हल्का सा दबा कर दिलासा भी दे दी. सब ड्रिंक्स करते रहे. अंकित तू खुलकर पीने वाला था और वो चार पेग ले चूका था, जबकि आदित्य दूसरा पेग लेकर बैठा था और उसकी दूसरा पेग पीने में कोई इच्छा भी नहीं थी. लेडीज का पहला hi पेग था. उसके बाद अंकित ने डांस करने के लिए कहा और तृषा को बड़े प्यार से उसका हाथ अपने हाथ में लेकर बड़े hi नाटकीय अंदाज़ से 'मेरी जान से प्यारी, मेरी बीवी मेरे साथ डांस करोगी' तृषा ने हाँ कहा और उसके साथ चली गयी. उनको इस तरह करता देखकर उससे भी लगने लगा की आदित्य को भी ऐसा hi कुछ करना चाहिए.

आदित्य ने संध्या को भी डांस करने के लिए कहा. उसका मन था की वो उससे मन कर दे, लेकिन वो बस मन नहीं करती थी, इसलिए डांस करने चली गयी. डांस करते हुए वंहा सब एन्जॉय कर रहे थे. एक रोमांटिक धुन बज रही थी तू आदित्य और संध्या डांस करते हुए धीरे धीरे नजदीक आने लगे. वो वक़्त भी आया जब दोनों इतने नजदीक आ गए की दोनों hi एक दूसरे की बांहों में थे. डांस ख़तम हुआ और फिर वो सब डिनर करने लगे और डिनर के बाद एक दूसरे को विश करके अपने अपने कमरे में आ गए. वापसी में आदित्य ने संध्या की कमर को कास कर पकड़ा हुआ था और अपने से चिपकते हुए कमरे में आ गए.

कमरे में आकर संध्या बोली 'मैं तुम्हारी बीवी हूँ क्या, हर एक को कहते रहते हो'

आदित्य 'अगर आपको बुरा लगा तू ी ऍम सॉरी, वो तू इसलिए बता दिया क्योँकि हम यंहा अस हस्बैंड वाइफ आये हैं'

संध्या 'अगर सब के सामने मुझे बीवी कहते हो तू अकेले में कहने में क्या हर्ज़ है'

आदित्य 'मुझे तू कोई समस्या नहीं है, लेकिन आप का पता नहीं चलता है की आप क्या सोचती हो'

संध्या 'अगर चाहो तू मुझे बीवी कह सकते हो'

आदित्य 'मुझे तू कोई आपत्ति नहीं'

संध्या 'मतलब की ख़ुशी नहीं, हाँ आपत्ति भी नहीं है'

आदित्य उससे पकड़कर अपनी बांहों में भर लेता है और कहता है 'मैं बहुत खुश हु आपको अपनी बीवी के रूप में पाकर'

संध्या भी अपनी बाजुओं से उससे कास लेती है और कहती है 'लेकिन अपनी बीवी को आप नहीं कहते, तुम और सिर्फ तुम, अगर मंजूर है तू ठीक है'

आदित्य उससे और कास लेता है और कहता है 'जान तुमने अपने आप को मेरी बीवी मान लिया, मुझे ख़ुशी हुई, तुम खुश हो की नहीं'

संध्या ने अपने होठों को उसके होठों पर रगड़ दिया और कहने लगी 'मुझे भी बहुत ख़ुशी है, आपको अपना पति मानकर'

आदित्य उसकी पीठ को सहलाते हुए अपने हाथों को उसके नितम्बों पर लेजाकर मसलते हुए 'अब मैं आप बन गया'

संध्या 'अब पति हो तू दर्जा भी तू बढ़ गया है, इसलिए अब आप हो गए'

आदित्य 'नहीं हम पति पत्नी हैं तू हम में से न तू कोई छोटा है और न hi कोई बड़ा, हम दोनों बराबर हैं'

संध्या 'लेकिन मुझसे आप कहने का हक़ तू प्लीज न छेनो'

आदित्य 'ठीक है जैसी तुम्हारी मर्जी, मैं कभी भी तुम पर किसी भी बात का दबाव नहीं डालूंगा. पत्नी होते हुए भी तुम किसी भी निर्णय को लेने के लिए स्वतंत्र हो'

संध्या 'मुझे अब आपके साथ जिंदगी जिनि है'

आदित्य ने भी उससे अपनी बांहों में जकड लिया और उसके सुर्ख होठों पर अपने होठों को रखकर उसके होठों का रास चूसने लगा. उसके हाथ संध्या के शरीर पर घूमने लगे.

आदित्य के हाथ उसकी पीठ पर घूमते हुए उसके नग्न पीठ को सहलाते हुए उससे अपने नजदीक करने लगा. संध्या के हाथ भी ऊपर उठकर आदित्य के चेहरे को पकड़ कर सहलाना शुरू कर दिया.

संध्या के हाथ जैसे hi ऊपर उठे तू आदित्य ने अपने हाथों को उसकी पीठ से आगे लेट हुए उसकी कांखों पर पंहुच कर उससे सहलाना शुरू किया तू संध्या ने मचलाना शुरू कर दिया. आदित्य के हाथ कांखों से उसके उरोजों पर दबाव डालने लगे तू संध्या ने अपने होठों से उसके होठों को कसना शुरू कर दिया.

आदित्य के हाथ ने उसके उरोजों को दबाया तू संध्या ने आदित्य के होठों को छोड़ दिया और सिसकी लेने लगी. आदित्य ने सदी के पल्लू को उसके ब्लाउज से हटा दिया और उसके उरोजों को ब्लाउज के ऊपर से hi दबाना शुरू कर दिया. संध्या अपने हाथ से उससे रोकने लगी, तब तक आदित्य ने उसकी सदी को खोलकर उसके शरीर से अलग कर दी और अब उससे पकड़कर अपनी बांहों में भरकर उसकी गर्दन और गले को बड़े hi प्यार से चूमने लगा और अपनी जीभ को उसके उरोजों की घाटी में डालकर चूसने लगा, जिससे संध्या बहुत बुरी तरह से सिसकने लगी और बहुत hi गहरी गहरी साँसें लेने लगी. फिर आदित्य ने उससे पकड़कर उसके होठों पर अपने होठों को रख दिया और चूसने लगा. काफी देर तक वो उससे चुस्त रहा और अपने हाथों से उसके शरीर को मापता रहा. संध्या आनंदित होती रही और आदित्य के होठों को मस्ती में आकर बीच में काटने लगी.

आदित्य ने अपने होठों को छुड़ाया और संध्या को एक डैम से अपने हाथों में उठाकर बैडरूम में लेजाकर बीएड पर लिटा दिया.

आदित्य ने अपनी शर्ट और पेंट उतर दी, अब वो सिर्फ और सिर्फ अंडरवियर में था, जिसमे तम्बू बना हुआ था.

आदित्य ने अपने हाथों से संध्या के पेअर पकडे और पैरों की उँगलियों को छटने लगा. ऐसा करना था की संध्या की बर्दाश्त ख़तम हो गयी और वो अपने शरीर को बीएड पर इधर उधर करने लगी. आदित्य उसकी उँगलियों को चाटते हुए उसकी पिंडलियाँ चाटने लगा. आदित्य ये काम बहुत धीरे धीरे कर रहा था. ऐसा करने से संध्या के मुंह से बहुत hi मादक सिसकारियों ने निल्कलने शुरू हो गया. आदित्य धीरे धीरे उसकी टांगों पर अपने होठों से चूमते हुए ऊपर आने लगा. संध्या की उत्तेजना इतनी बढ़ गयी थी की वो चाहती थी की आदित्य अब उसमे समां जाये. आदित्य जैसे hi उसकी जाँघों पर पंहुचा तू संध्या ने उससे पकड़कर अपने ऊपर ले लिया और उसके चेहरे को चूमने लगी.

आदित्य तब तक अपना हाथ से उसके पेटीकोट को खोल चूका था और उससे नीचे सरकने लगा. संध्या ने अब अपनी उँगलियों से उसकी छाती को कुरेदना शुरू कर दिया.

आदित्य का हाथ उसके योनि प्रदेश पर पंहुच कर उसकी पैंटी के ऊपर से hi उसकी योनि के लबों को सहलाना शुरू कर दिया. संध्या के बर्दाश्त की हद पर हो गयी और उत्तेजना के चरम पर पंहुच कर उसकी योनि ने कॉमर्स छोड़ दिया और वो लम्बी लम्बी साँसें लेने लगी.

आदित्य थोड़ी देर उसको देखता रहा और कुछ नहीं किया, फिर जब संध्या थोड़ा शांत हुई तू उसने शर्म के मरे अपनी आँखें बंद कर ली.

आदित्य ने उसकी आँखों को बंद देखकर उसकी पैंटी में हाथ डालकर उससे नीचे सरकता चला गया. आदित्य उसकी योनि को देखकर बहुत खुश हुआ और अपनी उंगली से वंहा हल्का हल्का सहलाने लगा. संध्या ने अपने हाथों की मदद से उससे रोकने चाहा, लेकिन वो कान्हा रुकने वाला था. उसकी उंगली ने संध्या के योनि के लबों के बीच में उसके भगनासा को षहुअ तू उसके मुंह से निकला 'eeee......sssss..... हहहह'

आदित्य ने इस बात का फायदा उठाते हुए उसके भगनासा को अपनी उंगली से सहलाना शुरू कर दिया जिससे संध्या की भावनाओं को एक डैम से भड़काने में रामबाण का काम कर रही थी.

आदित्य उसके भगनासा को एक हाथ की ुनहली से सहलाता रहा और दूसरे हाथ को उसके ब्लाउज के नीचे से पेट की तरफ से अंदर डालकर उसके उरोज को पकड़ कर सहलाना शुरू कर दिया.

संध्या के लिए ये दोहरी मार बर्दाश्त करना उसके बस में नहीं था और वो अपने शरीर को बीएड पर पटकने लगी. आदित्य के हाथ ने उसके ब्लाउज के अंदर उसके उरोजों को दबाया और फिर धीरे धीरे मसलने लगा. संध्या की सिसकारियों ने कमरे का हाल बहुत गरम कर दिया था. आदित्य ने अब उसके ब्लाउज के बटन एक एक करके खोल दिए. आदित्य उसकी चूचियों को ब्रा में देखकर उन चूचियों की खूबसूरती में खो सा गया. आदित्य तू शुरू से hi उन चूचियों का दीवाना था.

आदित्य ने संध्या के खुल चुके ब्लाउज को उसकी बाजुओं से निकल फेंका और फिर जैसे hi उसने संध्या को पलटा था तू उसकी ब्रा को भी खोल दिया था. आदित्य ने देर न करते हुए उसकी ब्रा को भी उसके शरीर से अलग कर दिया और फिर उसने अपने अंडरवियर को भी उत्तर फेंका.

अब दोनों माँ बीटा नग्न अवस्था में थे. आदित्य ने उसको गले लगाकर उसके कान में कहा 'माँ यू अरे तू सेक्सी'

संध्या 'माँ नहीं बीवी'

आदित्य उसके गलों को सहलाते हुए उसके कान की लौ को अपने दातों से काटकर 'जान तुम अपने आप को जो भी समझो, लेकिन तुम हो तू मेरी माँ hi न'

संध्या 'मैं यह याद नहीं रखना चाहती की मैं आपकी माँ हूँ, मैं सिर्फ और सिर्फ यह कहना चाहती हूँ की आप मुझे अपनी बीवी मनो और उसी तरह का बर्ताव करो'

आदित्य उसके हाथ को पकड़ कर अपने सीने पर रख देता है और कहता है 'वो मैं कान्हा मन कर रहा हूँ, लेकिन इस दिल का क्या करूँ जो अपनी माँ से प्यार करता है'

उसकी बात सुनकर संध्या का मुंह खुला का खुला रह गया 'kk.......yyyyy........aaaaaaaaa'

आदित्य उसकी चूचियों को दबाते हुआ 'हाँ मेरी जान इस दिल में सिर्फ और सिर्फ उसकी माँ बस्ती है'

संध्या 'लेकिन मैं क्या करूँ, मैं उस जिंदगी को अब भूलना चाहती हूँ'

आदित्य उसकी चूचियों को दबाते हुए अपने हाथ को नीचे ले जाकर उसकी योनि को सहलाना शुरू कर दिया और वो सिसकने लगी. आदित्य उसको कहने लगा 'तुम मेरी पत्नी बनकर रहना और मैं तुम्हे अपनी माँ समझ कर प्यार करूँगा'

संध्या 'लेकिन आज मुझे मेरे पति बनकर प्यार करो न'

आदित्य 'ठीक है मेरी जान जैसी तुम्हारी मर्जी'

उसके बाद आदित्य ने अपने लिंग को उसकी योनि पर रगड़ना शुरू किया hi था की संध्या की हालत ख़राब होने लगी और उसने कहा 'अब देर न करो और मुझे बीवी का हक़ दे दो' आदित्य ने उसकी योनि के मुंह पर अपने लिंग को रखा और एक जोरदार झटका मारा और उसका पूरा लिंग तू अंदर पंहुच गया, लेकिन उससे ऐसा लगा जैसे की उसके लिंग को दोनों तरफ से कास लिया गया हो. संध्या के मुंह से एक बहुत तेज चीख भी निकली थी.

आदित्य ने थोड़ी देर अपने लिंग को उसकी योनि में रखा और उसकी योनि की दीवारों की गर्मी की महसूस करके मज़े लेता रहा. अपने होठों से उसकी गर्दन को चूमने और चाटने लगा. संध्या का शरीर बहुत hi मुलायम और चिकना था. आज पहली बार आदित्य उस शरीर को अपने हाथों की मदद सच्चे से महसूस कर रहा क्योँकि आज संध्या ख़ुशी से उसका साथ दे रही थी.

आदित्य थोड़ी देर बाद अपने लिंग को धीरे धीरे बहार खींचने लगा तू संध्या के मुंह से 'उउउउ..... ीीी' निकलने लगा. आदित्य ने उसकी चूचियों की घुंडियोँ को मसल कर उसका ध्यान भटकने लगा और फिर अपने लिंग को अंदर बहार करने लगा. हर झटके में संध्या को अब मजा आने लगा. आदित्य ने धीरे धीरे अपनी गति को बढ़ाना शुरू किया और अब उसके हर धक्के पर संध्या अपनी कमर उठाते हुए उसका पूरा साथ देने लगी. अपने हाथों से उसकी पीठ को सहलाते हुए अपनी टांगों को उठाकर उसकी कमर को कैंची की तरह कसने लगी. फिर वो वक़्त भी आया जब आदित्य अपने चरम पर पंहुचने वाला था. संध्या तू पहले hi दो बार झाड़ चुकी थी. आदित्य ने आखिर में बहुत जोर का धक्का लगाया और अपनी पिचकारी से संध्या की योनि को भर दिया. उसका वीर्ये संध्या की बच्चेदानी पर प्रहार कर गया. दोनों ने एक दूसरे को ऐसे बांहों में जकड लिया जैसे की कभी अलग hi नहीं होंगे.
 
मैंने आपकी कल्पनाशक्ति और व्याख्या की तारीफ की थी.

साथ में ये भी कहा है की जो आप सोच रहे हो, वैसा भी हो सकता, लेकिन कुछ और भी जो सकता है.

मैंने तू आपकी तारीफ hi की है कोई टॉन्ट नहीं.

मैं किसी की कही हुई गलत बात पर भी टोनी नहीं करती तू आप की सही बात पर कैसे हो सकता है.

मैंने जो इंग्लिश में लिखा है, वो सिर्फ और सिर्फ आपकी तारीफ है.

धन्यवाद्
 
अपडेट 89

आदित्य थोड़ी देर बाद अपने लिंग को धीरे धीरे बहार खींचने लगा तू संध्या के मुंह से 'उउउउ..... ीीी' निकलने लगा. आदित्य ने उसकी चूचियों की घुंडियोँ को मसल कर उसका ध्यान भटकने लगा और फिर अपने लिंग को अंदर बहार करने लगा. हर झटके में संध्या को अब मजा आने लगा. आदित्य ने धीरे धीरे अपनी गति को बढ़ाना शुरू किया और अब उसके हर धक्के पर संध्या अपनी कमर उठाते हुए उसका पूरा साथ देने लगी. अपने हाथों से उसकी पीठ को सहलाते हुए अपनी टांगों को उठाकर उसकी कमर को कैंची की तरह कसने लगी. फिर वो वक़्त भी आया जब आदित्य अपने चरम पर पंहुचने वाला था. संध्या तू पहले hi दो बार झाड़ चुकी थी. आदित्य ने आखिर में बहुत जोर का धक्का लगाया और अपनी पिचकारी से संध्या की योनि को भर दिया. उसका वीर्ये संध्या की बच्चेदानी पर प्रहार कर गया. दोनों ने एक दूसरे को ऐसे बांहों में जकड लिया जैसे की कभी अलग hi नहीं होंगे.

इनको यही प्यार की हसीं वादियों में छोड़कर जरा देखते हैं की मोहनलाल के यंहा क्या हो रहा है.

रुचिका उसके चेहरे को पकड़ कर उसकी आँखों में झांकते हुए 'मैडम तुमने दोनों रिश्तों का अनुभव किया है और आनंद उठा लिया है, तभी तू तुम कह रही हो न की वो हर रिश्ते को बखूबी निभाते हैं'

दिया उसकी बात सुनकर जैसे सपनों की दुनिया से बहार आयी हो और उससे लग गया की उसके मुंह से अनजाने में काफी कुछ निकल गया है और वो अपनी नज़रे चुराने लगी.

रुचिका 'नज़रे चुराने से कोई फायदा नहीं है, देखो हम दोनों बहने हैं और तुम्हारी कोई भी बात मुझे बुरी नहीं लग सकती है तू बताओ न'

दिया 'क्या बताऊँ, मोहन भाई साहब सिर्फ और सिर्फ मेरे भाई हैं'

रुचिका 'यार तुम तू सस्पेंस बढ़ा रही हो, मैंने पहले भी कहा है की मुझे बुरा नहीं लगा था की तुम उनकी बीवी बानी चुकी हो'

दिया 'अरे यार तुम न बात का बतंगड़ बना रही हो'

रुचिका 'अच्छा मज़े खुद लुटे और बात का बतंगड़ मैं बना रही हूँ'

दिया 'अरे यार मज़बूरी में मुझे उनकी बीवी बनना पड़ा था'

रुचिका 'ohhe...oye... उनकी, अब नाम लेने में भी शर्म आ रही है'

दिया का चेहरा वाकई उसकी बात सुनकर लाल हो गया था और वो उन यादों में खो गयी थी की रुचिका ने उससे झिंझोड़ते हुए 'कान्हा खो गयी'

दिया हड़बड़ाते हुए :अरे यार ऐसी कोई बात नहीं है, वो तू मेरे मुंह से ऐसे hi निकल गया था'

रुचिका 'अच्छा यार छोड़ न, ये बता की हुआ क्या था'

दिया उन लम्हों को याद करने लगी और उससे बताने लगी 'तुम्हे याद होगा की जब हम उस रात होटल में थे और मेरे पति की तबियत ख़राब हो गयी थी और मैंने तुम लोगों को रात में डिस्टर्ब कर दिया था'

रुचिका अपने मन में 'मैं वो रात कैसे भूल सकती हूँ, मेरी सुहागरात होते होते रह गयी और आज तक नहीं हो पायी' लेकिन प्रत्यक्ष में उसने कहा 'कोई बात नहीं जब हम एक परिवार हैं तू तकलीफ कैसी'

दिया 'असल में इनको (सूरज को) उस रात हार्ट अटैक हुआ था, ये तू तुम्हे याद होगा और उनको हॉस्पिटल में भर्ती करवा दिया गे था'

रुचिका 'हाँ मुझे अच्छे से याद है और मुझे एक दिन बाद वापिस जाना था क्योँकि मैं जयादा छुट्टी नहीं कर सकती थी'

दिया 'जो नै कंपनी बनाई थी उनके डायरेक्टर्स को अमेरिका जाना था क्योँकि आर्डर देने वाली कंपनी ने कपल्स को बुलाया था. तुम जा नहीं सकती थी, इनको (सूरज को) डॉक्टर ने जाने से मन कर दिया था. तब ये डीडे हुआ था की मोहन भाई साहब, मैं, दीपक जी और अवनि अमेरिका जायेंगे'

रुचिका 'फिर क्या हुआ'

दिया 'तुम्हे कुछ नहीं पता'

रुचिका 'ये मुझसे कुछ नहीं छुपाते लेकिन मेरी बीमारी की वजह से काफी वक़्त से बहुत सी बातें नहीं बताते क्योँकि इनको लगता है की मैं बिना वजह परेशान हो जाउंगी'

दिया 'Oo...OOO...hh... ये बात है, मैं भी कान्हू की मोहन भाई साहब तू बहुत hi दिल के साफ़ हैं, फिर तुम्हे कैसे नहीं पता'

रुचिका 'वैसे यार तुम्हारे मुंह से मोहन भाई साहब अब अच्छा नहीं लगता, वही 'इनको' जब बोलती हो तू तुम बहुत सुन्दर दिखने लगती हो, वही बोलै कर'

दिया नकली गुस्सा दिखते हुए 'अब तुम क्या चाहती हो, मैं कुछ बताऊँ या नहीं'

रुचिका 'अब मैंने क्या गलत कहा है, अब तुम इनको इतने अच्छे से जान गयी हो की अभी कह रही थी की 'ये दिल के बड़े साफ़ हैं' अब ये तू वही जान सकता जो किसी के बहुत करीब रहा हो, जैसे की तुम '

दिया को उसकी बातें सुनकर मज़ा भी आ रहा था, लेकिन उसने मुंह फूलते हुए 'जा नहीं बताती'

रुचिका 'अरे यार बता दे नहीं तू पेट में हलचल मची रहेगी' और फिर दोनों हंसने लगी.

दिया 'अमेरिका पंहुचने के दूसरे दिन वंहा के डायरेक्टर्स से मिलाने का प्रोग्राम था, लेकिन जिस दिन हम वंहा पंहुचे तू दीपक जी के माता पिता के एक्सीडेंट की खबर पंहुची और बताया गया की वो दोनों बहुत सीरियस हैं. हम सबको लगा की खबर देने वाले ने पूरी बात नहीं बताई और हम सब वंहा से वापिस आने के लिए सोच hi रहे थे की दीपक जी ने कहा की हम दोनों वहीं रुक जाएँ ताकि वो आर्डर हाथ से न जाये. मोहनलाल साहब तू नहीं मान रहे थे तू दीपक जी ने कहा की हम हर प्रॉब्लम के पीछे बिज़नेस को छोड़ते जायेंगे तू हम सब बर्बाद हो जायेंगे. इसलिए अच्छा है की मिलजुलकर समस्या का समाधान करें. मोहनलाल की बड़ी मुश्किल से मान गए और फिर दीपक जी और अवनि वापिस आ गए'

रुचिका 'फिर क्या हुआ'

दिया 'कहानी तू वहीं से शुरू होती है. अगले दिन हम उस जगह पर पंहुचे जंहा हमें कंपनी के डायरेक्टर्स से मिलना था. मरस ब्रिग्नेजा (वो इंडियन ओरिजिन की थी और उस कंपनी की कोऑर्डिनेटर थी) उसने हम्मे स्पष्ट शब्दों में बता दिया था की अगर हम अपने आप को पति पत्नी बनकर इंट्रोडस नहीं करवाएंगे तू हमें ये आर्डर हरगिज नहीं मिलेगा. हम तू दुविधा में आ गए और सोच में पद गए की क्या करें'

अभी हम सोच hi रहे थे की मरस. ब्रिग्नेजा ने हमें कहा की 'वक़्त नहीं है' तब मोहन भाई साहब ने कहा की 'इनका नाम तू कुछ और है' तब उसने कहा की इन्हे सिर्फ और सिर्फ 'मरस. मोहन' कहकर इंट्रोडस करवाएंगे. हम दोनों ने आर्डर पाने की छह में सहमति दे दी.

अभी कोई और बात होती, एक फ़ोन आया और रुचिका ने दिया को वंहा से जाने के लिए कहा. दिया को अच्छा तू नहीं लगा लेकिन उसको मन भी नहीं कर पायी.

उधर दिया दूसरे कमरे में चली गयी और वो अमेरिका में जो कुछ हुआ उसके बारे में सोचने लगी.

अब कहानी में थोड़ा सा फ्लैशबैक है. वंहा पर जो भी बात हुई वो इंग्लिश में थी, लेकिन उससे यंहा पर पाठकों की सहूलियत के लिए हिंदी में प्रस्तुत किया जा रहा है

उससे याद आया की उन दोनों ने एक दूसरे को पति पत्नी मानकर उन सब के सामने जाना था तू

मोहनलाल 'दिया तुम कम्फर्टेबले हो'

दिया अपनी नज़र झुका कर 'जी'

मोहनलाल 'देख लो अगर तुम कम्फर्टेबले नहीं हो तू हम उन्हें सच्चाई बता देते हैं'

दिया 'बिलकुल नहीं क्योँकि हमने बहुत पैसा खर्चा कर दिया है और अगर हम आर्डर नहीं लेंगे एक तू दस लाख भी वापिस करना पड़ेगा और हम बाकियों को क्या कहेगे की हम फ़ैल होकर आ गए. जो पैसा हमें कामना चाहिए वो तू मिला नहीं बल्कि लुटा कर आ गए हैं. नहीं मैं बिलकुल तैयार हूँ और इस आर्डर को हर हालत में लेकर hi जायेंगे'

मोहनलाल 'दिया तुम शायद समझ नहीं रही हो की मेरी पत्नी बनने का क्या मतलब है, जबकि तुम मेरी बहिन हो'

दिया 'मैं सब समझ रही हूँ और आज से बल्कि अभी से आप भी भूल जाओ की मैं आप की बहिन हूँ. मैं सिर्फ और सिर्फ आपकी बीवी हूँ और मैं आपको कोई शिकायत का मौका नहीं दूंगी. अब से आप अपने आप को मेरा पति समझे न की भाई'

मोहनलाल 'मैं तुम्हारे जाजब्तों की कदर करता हूँ. मैं आखिरी बार पूछ रहा हूँ, क्योँकि उसके बाद वापसी नहीं है'

दिया 'मैंने सोच लिया है, मेरे पतिदेव' और फिर दोनों हंसने लगे.

उस दिन वो दोनों अंदर कांफ्रेंस हॉल में गए और कितने भी डायरेक्टर्स थे वो सब के सब कपल्स थे. इतना hi नहीं वंहा पर जितने भी काम करने वाले थे, वो भी सब कपल्स थे. उस कंपनी की पहली कंडीशन hi यही थी की जिस के साथ भी वो काम करेंगे वो कपल्स होने चाहिए. मरस. ब्रिग्नेजा ने उन्हें सबसे इंट्रोडस करवाया. सारा दिन बिज़नेस के सिलसिले में बात होती रही और उन्हें आर्डर दे दिया गया, लेकिन एक शर्त रख दी की उन्हें कंपनी के डायरेक्टर्स के साथ आउटिंग पर जाना होगा और दो दिन और रातें साथ बितानी होंगी.

रात को डिनर के वक़्त पहले तू चिम्पैंगे खुली और सब को पीनी थी. फिर कहा गया की सब कपल्स डांस फ्लोर पर डांस करेंगे. अब मोहनलाल थोड़ा सा परेशान नज़र आने लगा तू दिया ने उसके हाथ पर अपने हाथ को रखकर उससे तस्सली दी. मोहनलाल के हाथ पर जैसे hi दिया का हाथ आया तू उससे एक करंट लगा और पहली बार यह एहसास हुआ की दिया उसकी बहिन नहीं बल्कि एक लड़की है.

दोनों डांस फ्लोर पर पंहुचे तू मोहनलाल ने ऊके एक हाथ को अपने हाथ में लिया और दूसरे हाथ को उसकी कमर पर ले गया और जैसे hi उसने दिया की नंगी कमर पर हाथ रखा तू उससे दिया की कमर बहुत hi गरम और पतली लगी. उसकी त्वचा उससे बहुत hi नरम और मुलायम लगी. दिया को भी उसके हाथ रखने से झटका लगा और उसके दिल में कुछ कुछ होने लगा. दिया ने भी अपने दूसरे हाथ को मोहनलाल के कंधे पर रख दिया और दोनों म्यूजिक के साथ साथ डांस करने लगे. धीरे धीरे माहौल गरम होने लगा और दोनों के दिल में हलचल मचने लगी.

साथ में जो दूसरे कपल्स डांस कर रहे थे वो तू डांस के साथ साथ एक दूसरे के शरीरों का भी आनंद उठा रहे थे. इतना hi नहीं वो एक दूसरे के चुम्बनों का आनंद लेने में व्यस्त थे. मोहनलाल और दिया की नज़र भी उन सब पर पद रही थी और वो अपने आप को बहुत hi दुविधा में फंसा हुआ पा रहे थे. वो डांस करते हुए एक उचित दुरी बना कर डांस कर रहे थे. दोनों के मन में तूफान मचा हुआ था. एक मन उनका कर रहा था की सब भूलकर इस मौके का फायदा उठाते हुए खुलकर आनंदित हो लेकिन मन के दूसरे कोने में उन्हें अपने रिश्ते को दागदार न करने का एहसास भी था. इसी उलझन में डांस कर रहे थे की तभी दूसरे कपल का धक्का लगने से दोनों एक दूसरे के नजदीक हो गए और एक दूसरे के शरीरों से उठाने वाली गंध को महसूस करके मदहोश हो रहे थे, लेकिन अपनी सीमा को पहचानते थे, इसलिए वो फिर से दूर होना चाहते थे की उन्हें फिर से धक्का लगा और इस बार दोनों तरफ से धक्का लगा जिससे दोनों एक दूसरे की बांहों में पंहुच गए और इतने नजदीक आ गए थे की उन दोनों के शरीरों में हवा भी निकलने की जगह नहीं थी. दोनों ने न चाहते हुए भी एक दूसरे के शरीरों का आभास किया और दोनों के दिल की धड़कन बहुत तेज हो गयी थी. दिया के उरोजों ने मोहनलाल की छाती से टकराकर उसके रकत का परवाह बहुत तेज कर दिया था. जब वो इतने पास आ गए थे तू मोहनलाल के दोनों हाथ दिया की पीठ पर पंहुच चुके थे और बाजुओं से उसके उरोजों पर दबाव पद रहा था. दिया की नज़रे न चाहते हुए भी झुक गयी थी.

थोड़ी देर वो दोनों इस तरह डांस करते रहे और अनजाने में hi एक दूसरे की बांहों में समाये रहे और इस बार दोनों ने hi एक दूसरे से दूर जाने की कोशिश नहीं की. दिया का एक हाथ पहले से मोहनलाल के कंधे पर था और दूसरा हाथ अब उसकी बाजु पर पंहुच गया था. वो हाथ जब दबाव डालता तू उससे मोहनलाल की बाजु परबडबाव पड़ता जिससे उसके उरोज पर दबाव बढ़ जाता. दोनों hi बेख्याली में इस आनंद को उठा रहे थे की तभी म्यूजिक बंद हुआ तू बाकि कपल्स एक दूसरे को चूमने में लग गए और ये दोनों आलिंगन से अलग होने लगे की तभी एक कपल की नज़र इन् दोनों पर पड़ी और वो बोले 'ये क्या हुआ, आप दोनों में कोई प्रॉब्लम है क्या' तब दोनों एक साथ बोले की 'नहीं तू'. उनके इस तरह बोलने पर वो कपल बोलै 'यंहा फीमेल की बेइज़्ज़ती मणि जाती अगर मेल उससे डांस ख़तम होने पर लिप किश न दे तू'

मोहनलाल 'हमारे कल्चर में ऐसा नहीं होता' तब वो बोलै की 'अभी तू आप यंहा हैं और आप से उम्मीद है की आप हमारे कल्चर की इज़्ज़त करेंगे'

उसकी बात सुनकर इन् दोनों का चेहरा देखने वाला था की वो इस तरह भी फंस सकते हैं. अब बाकि कपल्स भी इनकी तरफ देख रहे थे की ये दोनों अब क्या करेंगे. तब मोहनलाल ने बोलै 'हम आपके कल्चर की इज़्ज़त करते हैं और आपसे एक रिक्वेस्ट है की हम जब किश करें तू आप प्लीज दूसरी तरफ देखिये' इस बातब पर सब हंस पड़े और कहने लगे 'हम सब एक परिवार हैं और ये सब नार्मल है, फिर भी अगर आप चाहते है तू हम सब घूम जाते हैं' और वाकई सब घूम गए.

दोनों के दिल की धड़कन बढ़ी हुई थी. उन्हें लग रहा था की ये सही या गलत लेकिन ये भी था की अब वो फंस चुके हैं और चाहे या न चाहे उन्हें ये तू करना hi पड़ेगा. मोहनलाल ने अपने मन को पक्का किया और वो दिया की तरफ बढ़ा जो अपनी नज़र झुकाये कड़ी थी. मोहनलाल ने उसके कंधे पर जैसे hi हाथ रखा तू वो कांप सी गयी. मोहनलाल ने अपने हाथ को कंधे से उसके गाल पर ले गे तू वो सिहर उठी. मोहनलाल ने दूसरे हाथ से उसकी ठोढ़ी के नीचे उंगली रख कर उसके चेहरे को ऊपर उठाया तू देखा की उसकी पलके झुकी हुई हैं. मोहनलाल अपने आप को इस अवस्था के लिए दोषी मैंने लगा, लेकिन अब वो देर नहीं करना चाहता था. उसने दिया के चेहरे को पहली बार इतने नजदीक से और इस बात के लिए देखा तू उससे उसके चेहरे पर जवानी का अल्हड़पन और ताजगी दिकहि दी. उसके होठों गुलाब की खिली हुई पंखुड़ियों की तरह बहुत hi सुन्दर परतीय हो रहे थे. उन होठों पर करने से लगी हुई लिपस्टिक से उसकी खूबसूरती को बढ़ावा मिल रहा था. मोहनलाल धीरे धीरे अपने चेहरे को उसके चेहरे के पास लेन लगा तू मोहनलाल को उसकी नासिका से निकलती हुई गरम साँसें महसूस हुई और वो उन साँसों की गर्मी में खो सा गया. फिर उससे याद आया की उससे क्या करना है तू अपने चेहरे को और नजदीक ले जाने लगा तू अब दिया को उसके नथुनों से निकलने वाली गरम गरम साँसें उससे अपने चेहरे पर महसूस हुई तू उसके दिल की धड़कन बहुत तेज़ हो गयी. उसके उरोजों ने ब्लाउज में हलचल मचा ी शुरू कर दी और वो ऊपर नीचे होने लगे. मोहनलाल की नज़र उसके सीने पर पड़ी तू उसके उरोजों को ऊपर नीचे होते हुए देखने लगा. उसने पहली बार दिया के उरोजों के ऊपरी नग्न भाग के दर्शन किया जो की दूधिया रंग के थे और बहुत hi सुन्दर लग रहे थे. मोहनलाल की हाइट जयादा होने की वजह से उससे दिया के उरोजों की घाटी के दर्शन भी हुए.

मोहनलाल ने अपने ध्यान को वंहा से हटा कर उसके होठों पर केंद्रित किया और अब अपने दोनों हाथों में उसके चेहरे को पकड़ लिया और उसका चेहरा अब दिया के चेहरे के बिलकुल नजदीक आ गया था. तभी दिया की आँखें खुली तू उसक सामना मोहनलाल की नज़रों से हुआ तू उससे बहुत hi जयादा शर्म आ रही थी, लेकिन उसने अपनी पार्कों को झुका कर मोहनलाल को आगे बढ़ने का इषारा दे दिया. मोहनलाल आगे बढ़ता गया और उसके लबों को जैसे hi उसके होठों का स्पर्श हुआ तू दिया के हाथ अपने आप hi मोहनलाल के कन्धों पर पंहुच गए और उससे एक बहुत तेज करंट लगा. मोहनलाल ने बहुत hi धीरे से स्पर्श करके अपने होठों को हटा लिया और दूर होने लगा की बाकि कपल्स एक साथ बोल पड़े 'स्पर्श नहीं लिप किश करनी है'

मोहनलाल दूर जाते हुए रुक गया और दिया की आँखों में झांकते हुए इज़ाज़त मनागने लगा तू उसने अपनी पलकों को फिर से झुका लिया जो यह बताने के लिए काफी था की वो आगे बढ़ सकता है. मोहनलाल ने फिर से उसके चेहरे को पकड़ कर अपने होठों को उसके होठों पर लाया तू दिया ने अपने हाथों से उसकी गर्दन के पीछे लेजाकर उससे पकड़ लिया. मोहनलाल ने दिया के होठों को अपने होठों में लेकर उन्हें चूमते हुए उसके निचले होंठ को अपने होठों में दबा लिया. दिया के मुंह से सिसकने की आवाज आने लगी और फिर मोहनलाल उसके होठों को बहुत जोर से चूसने लगा. दिया ने उसकी गर्दन को पकड़ कर अपने होठों पर दबा दिया. उनको इस तरह करता देखकर बाकि कपल्स ने जोरदार तालियां बजायी. अब दोनों अलग हो गए और एक दूसरे को देखकर शर्मा रहे थे.
 
यू अरे थे ओने हु doesn't हाईड इमोशंस एंड स्पेसिफी व्हाट यू लिकेड एंड व्हाट नॉट.

वेल ी can't प्रॉमिस तहत एवरीथिंग रिटेन वोउल्ड मेक यू हैप्पी.

It's ा स्टोरी एंड तेरे वोउल्ड बे साद अस वेल अस हैप्पी मोमेंट्स.

स्टोरी इस रिटेन अस पैर थे डिमांड ऑफ़ थे स्टोरी लाइन.

वेल ी कैन ओनली प्रॉमिस तहत इन थे एन्ड यू वोउल्ड बे हैप्पी.

थैंक्स सो मच
 
बहुत hi खूबसूरती से लिखा गया विश्लेषण.

आपका विश्लेषण बहुत hi महत्वपूर्ण बिंदुओं को उजागर करके बहुत hi रोचक सवालो के साथ प्रस्तुत किया गया है.

आपने कुछ आकांक्षों के साथ कई सवालो के जवाब भी सोच लिए हैं.

हो सकता है की वैसा hi हो जैसा आप सोच रहे हैं, लेकिन कुछ और भी हो सकता है

थोड़ा सा इंतज़ार और फिर समाधान.

धन्यवाद
 
अपडेट 90

मोहनलाल दूर जाते हुए रुक गया और दिया की आँखों में झांकते हुए इज़ाज़त मनागने लगा तू उसने अपनी पलकों को फिर से झुका लिया जो यह बताने के लिए काफी था की वो आगे बढ़ सकता है. मोहनलाल ने फिर से उसके चेहरे को पकड़ कर अपने होठों को उसके होठों पर लाया तू दिया ने अपने हाथों से उसकी गर्दन के पीछे लेजाकर उससे पकड़ लिया. मोहनलाल ने दिया के होठों को अपने होठों में लेकर उन्हें चूमते हुए उसके निचले होंठ को अपने होठों में दबा लिया. दिया के मुंह से सिसकने की आवाज आने लगी और फिर मोहनलाल उसके होठों को बहुत जोर से चूसने लगा. दिया ने उसकी गर्दन को पकड़ कर अपने होठों पर दबा दिया. उनको इस तरह करता देखकर बाकि कपल्स ने जोरदार तालियां बजायी. अब दोनों अलग हो गए और एक दूसरे को देखकर शर्मा रहे थे.

डांस ख़तम होने के बाद दोनों डिनर के लिए आगे बदनने लगे तू उनमे से एक कपल ने कमेंट किया 'व्हाट ा लवली कपल'. दोनों की नज़रे आपस में मिली और फिर उसकी तरफ देखने लगे. उस कपल ने उन्हें साथ में खड़ा होने के लिए कहा क्योँकि वो इन् दोनों का स्नेप लेना चाहा रहा था. ये दोनों खड़े हुए और दोनों के बीच में थोड़ा गैप था. उसने रिक्वेस्ट की 'प्लीज आप दोनों नजदीक में होकर एक अच्छा सा पोसा दीजिये' अब दोनों नजदीक हुए. मोहनलाल ने अपनी बांह को दिया की कमर से लपेट लिया और दिया थोड़ा सा तिरछी होकर अपने हाथ को मोहनलाल की छाती पर टिका दिया. दिया के इस तरह करने से उसके उरोजों ने मोहनलाल की बाजु और छाती पर केहर ध दिया और न चाहते हुए भी उसकी नज़र दिया के ब्लाउज में कैसे हुए उरोजों पर चली गयी और उसके ऊपरी हिस्से का नज़ारा मोहनलाल को एक सुखद अनुभूति दे रहा था. वो दोनों एक बार फिर से इतनी पास आ गए थे की दोनों के दिल की धड़कन बढ़ना लाज़िमी था. स्नेप खींचने के बाद भी वो एक दूसरे को अनायास hi महसूस कर रहे थे की तभी किसी के कहने पर कमर में हाथ डेल हुए डिनर की तरफ चल पड़े. अभी और कुछ करते वो लेडीज आयी और दिया को अपने साथ ले गयी.

मोहनलाल और दिया डिनर करने लगे, लेकिन लेडीज अपना एक ग्रुप बनाकर अलग बैठ गयी और गेट्स अलग. वो सब डिनर करते हुए बातचीत करने में मशगूल थे, लेकिन दिया और मोहनलाल के बीच तू कुछ और hi चल रहा था. वो दोनों एक दूसरे को तिरछी नज़रों से बीच बीच में निहार रहे थे. कई बार ऐसा होता की दोनों की नज़रे आपस में टकरा जाती, तब शर्म की वजह से अपनी नज़रों को चुराने लगते. उस वक़्त तू अपनी नज़रों को हटा लेते लेकिन दिल में हलचल मचने की वजह से फिर से एक दूसरे को निहारने लगते. ऐसा कई बार हुआ की उनकी नज़रों का टकराव हुआ और हर बार अपनी नज़रे हटाने या झुकाने का प्रयास करते लेकिन दोनों को hi पता था की क्या चल रहा है. दिल में एक मीठी सी चुभन हो रही थी और एक दूसरे की तरफ खिचाव को महसूस काके फिर से निहारने लगते.

अभी दिया और कुछ सोचती उससे रुचिका की आवाज़ सुनाई दी.

रुचिका कोई आधे घंटे तक बात करती रही और बात करके उसके चेहरे पर मुस्खरहाट आ गयी. वो खुश खुश नज़र आ रही थी और अपनी ख़ुशी में वो यह भी भूल गयी की दिया यही पर है और जैसे hi उससे याद आया तू उसने आवाज़ देकर दिया को बुलाया.

दिया ख्यालों से निकलकर हकीकत की दुनिया में आ गयी और वो रुचिका की तरफ चल पड़ी. वो सोच रही थी की अब रुचिका उससे अमेरिका के बारे में पूछेगी तू वॉक उससे बताये? क्या उससे वो सबकुछ बता देना चाहिए जो भी उसके और मोहनलाल के बीच हुआ था? क्या यह उचित रहेगा? क्या एक बीवी (वो भी तब जब वो बीमार है) वो सब सुन पायेगी?

इन्ही सब विचारों के भंवर में फंसकर वो रुचिका की तरफ चल पड़ी और रुचिका के पास पंहुच कर उसने कहा 'किसका फ़ोन था जो मुझे यंहा से हटा जाने के लिए कहा'

रुचिका 'वो यार कुछ ख़ास नहीं मेरी एक सहेली का फ़ोन था'

दिया 'सहेली का फ़ोन और मुझे जाने के लिए कह दिया, कोई तुम्हारी सहेली मुझसे भी जयादा ख़ास है की उसके साथ बहुत hi अंतरंग बातें करनी थी ताकि मुझे सुनने को न मिले'

रुचिका 'अरे यार उसकी कोई प्रॉब्लम है जो मेरे साथ शेयर करना चाहती थी और नहीं छाती थी की कोई और उससे जाने, बस इसलिए तुम्हे जाने के लिए कहा था, मुझे पता था की तुम मुझसे इस बात पर नाराज़ हो जाओगी, प्लीज मान जाओ न'

दिया 'चल ठीक है तू भी क्या याद करेगी किस से पला पड़ा है'

रुचिका 'हाँ सब मालूम है, पहले सहेली, फिर ननद और अब सौतन, क्या कहने'

दिया के गाल फिर से उसकी बात सुनकर लाल हो गए 'यार तुम नहीं सुधरेगी'

रुचिका 'ऐसी बात है तू यार ले मैं कुछ नहीं कहूंगी, लेकिन अमेरिका का किस्सा तू सुना'

फिर दोनों हंसने लगे और दिया दुविधा में थी की क्या बताये जिससे रुचिका को विश्वास भी जो जाये और बुरा भी न लगे. दिया ने कुछ सोचकर कहना शुरू किया

इनको यही छोड़कर हम चलते हैं आदित्य और संध्या के पास

आदित्य थोड़ी देर बाद अपने लिंग को धीरे धीरे बहार खींचने लगा तू संध्या के मुंह से 'उउउउ..... ीीी' निकलने लगा. आदित्य ने उसकी चूचियों की घुंडियोँ को मसल कर उसका ध्यान भटकने लगा और फिर अपने लिंग को अंदर बहार करने लगा. हर झटके में संध्या को अब मजा आने लगा. आदित्य ने धीरे धीरे अपनी गति को बढ़ाना शुरू किया और अब उसके हर धक्के पर संध्या अपनी कमर उठाते हुए उसका पूरा साथ देने लगी. अपने हाथों से उसकी पीठ को सहलाते हुए अपनी टांगों को उठाकर उसकी कमर को कैंची की तरह कसने लगी. फिर वो वक़्त भी आया जब आदित्य अपने चरम पर पंहुचने वाला था. संध्या तू पहले hi दो बार झाड़ चुकी थी. आदित्य ने आखिर में बहुत जोर का धक्का लगाया और अपनी पिचकारी से संध्या की योनि को भर दिया. उसका वीर्ये संध्या की बच्चेदानी पर प्रहार कर गया. दोनों ने एक दूसरे को ऐसे बांहों में जकड लिया जैसे की कभी अलग hi नहीं होंगे.

रात को इस सम्भोग के बाद दोनों को बहुत hi प्यारी नींद आ गयी और एक दूसरे की बांहों में सो गए. सुबह भी काफी देर दो चुकी थी, लेकिन दोनों hi दीं दुनिया से बेखबर सोये जा रहे थे. कोई दस बजे के आसपास पहले संध्या की नींद खुली और उसने अपने आप को इस हालत में देखा तू उसके चेहरे पर कई भाव आये लेकिन अंत में एक मुस्कराहट ने उसके होठों को सजा दिया. उसने आदित्य को देखा तू वो भी बिलकुल नग्न था और उसका एक हाथ उसकी चूचियों पर था और दूसरा उसकी पीठ पर. उसने धीरे से पीठ वाले हाथ को हटाया तू वो सीधा हो गया और संध्या धीरे से उससे अलग होकर बीएड से नीचे आ गयी और आदित्य को इस हालत में देखकर उससे शर्म भी आ रही थी और पता नहीं क्योँ आज अच्छा भी लग रहा था.

संध्या धीरे से आदित्य के ऊपर एक चादर डालकर वंहा से वाशरूम चली गयी और तैयार होकर बहार आ गयी. आज उसने अपने आप को थोड़ा सजाया और वो बहुत खूबसूरत लग रही थी. उसने अपने बालो को खुला छोड़ा हुआ था.

उसने देखा की आदित्य अभी भी सो रहा है तू उसने उससे डिस्टर्ब करना उचित नहीं समझा और ब्रेकफास्ट का आर्डर कर दिया. फिर उसने आदित्य को उठाने की सोची तू अपनी जुल्फों की मदद से उसके चेहरे पर गुदगुदी करने लगी. आदित्य की नींद में खलल पड़ा और वो आँखों को खोलकर जैसे hi संध्या को देखता है तू उससे पकड़कर उसके गलों को चूमते हुए 'माँ यू अरे लुकिंग गॉर्जियस'

संध्या गुस्सा हो जाती है और कहती है 'मैं अब माँ नहीं तुम्हारी बीवी हूँ'

आदित्य उससे फिर से पकड़ लेता है और कहता है 'ठीक है मेरी बीवी' और उससे पकड़कर अपने ऊपर करके इस बार उसके होठों को अपने होठों में कैद करने लगता है तू संध्या अपने चेहरे को घुमा लेती है और कहती है 'जाओ न, पहले तैयार हो जाइये, नाश्ता आ रहा है'

आदित्य 'अरे आप तू सच में बीवी की तरह कर रही हो'

संध्या 'आप नहीं तुम, प्लीज आप पहले तैयार हो जाइये'

आदित्य को बड़ा मज़ा आता है और मुस्कुराते हुए उससे छोड़कर कहत है 'जो हुकुम सर्कार' ये कहकर वो अपने ऊपर से एकदम चादर हटाकर खड़ा हो जाता है. संध्या उसको इस तरह करते देखकर बुरी तरह शर्मा जाती है और अपने हाथों से अपने चेहरे को छुपाने लगती है. आदित्य उसके पास जाकर कहता है 'बीवी भी इस तरह शर्माती है क्या' और वो हँसते हुए नंगा hi वाशरूम में चला जाता है.

जब वो नाहा के आया तब तक नाश्ता भी आ चूका था. आदित्य ने संध्या को पकड़ कर अपनी गोदी में बैठा लिया और नाश्ता करने के लिए कहा तू वो बहुत शर्मा रही थी और आदित्य से छोड़ने के लिए कहने लगी.

आदित्य अपने हाथ से उसकी ठोढ़ी को पकड़ कर उसकी आँखों में झांकते हुए 'जान तुम मेरी बीवी बनाने के बाद भी शरमाओगी तू आनंद कैसे उठाओगी'

संध्या 'प्लीज छोड़ दो न, मैं आपको अपने हाथ से खिलाऊंगी'

आदित्य ने उसके गालों को सहलाते हुए 'मुझे फील तू कराओ न की अब मेरी बीवी मेरे साथ है, नहीं तू यही लगेग की माँ हो'

उसके बाद संध्या ने उसकी गोदी से उठाने की ज़िद नहीं की और थोड़ा आगे बढ़कर एक सैंडविच को उठाकर आदित्य के मुंह में डाला तू आदित्य ने उससे मुंह में पकड़कर उसकी तरफ बढ़ाते हुए लेने के लिए कहा तू वो फिर से शर्माने लगी. तब आदित्य ने आँखों के इशारे से उससे लेने के लिए कहा तू उसने जैसे hi मुंह में पकड़कर टुकड़ा काटा, आदित्य के हाथ उसके ब्लाउज के ऊपर पंहुचकर उसकी चूचियों पर अपनी उँगलियों को फिरने लगा. संध्या को अच्छा तू लग रहा था लेकिन उसकी भावनाओं को गर्मी भी मिल रही थी जिससे वो आदित्य की गोदी में हिलने डुलने लगी. आदित्य को भी मज़ा आने लगा और उसका रकत परवाह बढ़ने लगा. आदित्य नाश्ता करते हुए उसके साथ छेड़खानी करता रहा. उसके हाथ कभी उसकी चूचियों पर जाते, कभी वंहा से उसके नंगे पेट पर पंहुच जाते और कभी उसकी रनो को सहलाने लगते. संध्या की उत्तेजना बढ़ने से उसके मुंह से सिसकने की आवाज़े आने लगी.

आदित्य उसकी सिसकारियों से बहुत hi उत्तेजित होने लगा और उसके लिंग में भी तनाव आने लगा और उसका लिंग संध्या के नितम्बों के बीच ठोकर मरने लगा. संध्या को बहुत hi अजीब लग रहा था और वो वंहा से उठाने लगी तू आदित्य ने उसको कमर से पकड़ कर वापिस अपनी गोदी में बैठा लिया और उसके कान में कहने लगा की 'क्या हो गया जान'

बेचारी संध्या कुछ बोल भी नहीं पायी तू आदित्य अपने हाथों से उसकी कमर को सहलाते हुए धीरे धीरे अपने हाथों को ऊपर की तरफ ले जाने लगा और एक हाथ से उसकी चूचियों को दबाते हुए दूसरे हाथ से उसके होठों को मसलने लगा. जब संध्या काफी गरम हो गयी तू आदित्य ने पूछा की 'मैं कौन हूँ और मेरा तुमसे क्या रिश्ता है'

संध्या 'आप मेरे पति हैं'

आदित्य 'अगर मैं तुम्हारा पति हूँ तू तुम मेरी बात मानोगी न'

संध्या 'हाँ हाँ क्योँ नहीं, पत्नी का धरम hi होता है अपने पति की बात मन्ना'

आदित्य 'लेकिन आजकल की पत्नियां ऐसी नहीं होती और वो अपने पति की हर बात को नहीं मानती है, बल्कि जो उन्हें अच्छा लगता है उससे जी मानती हैं'

संध्या 'नहीं नहीं मैं ऐसी नहीं हूँ, मैं आपकी साड़ी बातें मानूंगी'

आदित्य 'सोच लो, कई मौके ऐसे आएंगे, जिसमे हो सकता है की तुम मेरी बात न मनो, वैसे मुझे बुरा नहीं लगेगा, मैं तू सिर्फ तुम्हारे दिल की बात जानना छह रहा था' इतना कहकर आदित्य ने उसके निप्पल्स को अपने अंगूठे और उंगली के बीच रखकर मसल दिया.

संध्या 'मैं हर वक़्त आपकी बात मानूंगी, यह वादा रहा'

आदित्य 'नहीं मुझे किसी वाडे की जरुरत नहीं है और न hi तुम्हे किसी वाडे में बांधूंगा क्योँकि मैं इस बात में विश्वास रखता हूँ की प्यार लेने का नहीं देने का नाम है'

संध्या 'आप चाहे या न चाहे, लेकिन मैं पत्नी होने के नाते आपकी सभी बातें मानूंगी'

आदित्य 'आप नहीं कर पाएंगी, इसलिए कोई भी वादा न करो क्योँकि जब पापा वापिस आएंगे, तब आप क्या करोगी'
 
सबसे पहले तू आपका इस थ्रेड पर स्वागत है.

आपने इस कहानी को बड़ी hi बारीकी से पढ़कर बहुत hi उम्दा विश्लेषण किया और वाजिब सवाल रखे हैं. इतना hi नहीं आपने अपनी आकांक्षा और सोच को भी उजागर किया है.

मैं अभी इस विषय में कुछ भी कहूंगी तू आपका आने वाले अंको को पढ़ने का मज़ा ख़राब हो जायेगा.

आपसे इतना hi निवेदन है की थोड़ा सा धैर्य रखिये और परतों को खुलने दीजिये, आप को वाकई बहुत आनंद आएगा.

आपका बहुत बहुत धन्यवाद्
 
अपडेट 91

संध्या 'आप चाहे या न चाहे, लेकिन मैं पत्नी होने के नाते आपकी सभी बातें मानूंगी'

आदित्य 'आप नहीं कर पाएंगी, इसलिए कोई भी वादा न करो क्योँकि जब पापा वापिस आएंगे, तब आप क्या करोगी'

संध्या के निप्पल्स को मसलने से उससे दर्द हो रहा था, लेकिन आदित्य की बात से उसके दिल में दर्द होने लगा और वो दर्द चालक कर उसकी आँखों में आ गया. संध्या अपने जज्बातों पर काबू पते हुए अपनी पीठ को पीछे करके आदित्य की छथि पर टिका दी और अपने हाथों को ऊपर उठाकर उसके चेहरे को पकड़ते हुए कहने लगी 'अब मैंने अपने आप को आपकी बीवी के रूप में सवीकार कर लिया है और अब मैं वही रहूगी'

आदित्य ने उसके होठों पर अपने होठों को रख दिया और चूसने लगा, साथ hi साथ उसकी चूचियों की घुंडियोँ को भी अपने हाथों से मसलता रहा और बीच बीच में उसकी गर्दन पर अपने होठों को ले जाता तू संध्या मचने लगती. उसके नितम्बों में आदित्य के लिंग ने भी आतंक मचाया हुआ था. उसकी भावनाओं में उबाल आने लगा और वो अपने आप को समर्पित करने के लिए तैयार करने लगी.

आदित्य ने अपने एक हाथ को उसके पेट पर ले जाकर उसकी नाभि के पास गोल गोल घूमने लगा. वो अपनी उंगली को जब उसकी नाभि के चरों और हलके हलके घूमता तू संध्या की उत्तेजना में उबाल आता कर वो सिसकने लगती. एक बार तू आदित्य ने अपनी उंगली को उसकी नाभि में डाला और ऐसा करने से उसका लिंग नीचे से उसके नितम्बों की दरार में घुसने लगा जिससे संध्या के मुंह से निकला 'आउच' और वो आदित्य की गोदी से उछाल गयी. संध्या अब कब तक हवा में रहती, उससे नीचे आना पड़ा और उससे लगा की जैसे वो किसी बहुत hi सख्त चीज पर बैठ गयी हो. संध्या के मुंह से निकला 'uuuuu.....iiii.......iiiiiiii'

वो फिर से ऊपर हुई और वापिस नीचे. ऐसा लगने लगा की जैसे वो आदित्य के लिंग पर उछाल कूद कर रही हो. आदित्य ने उसको ऐसा करते देख कहा 'अब लग रहा है की तुम मेरी बीवी बन गयी हो'

संध्या 'क्योँ कोई शक है क्या'

आदित्य 'नहीं शक तू नहीं है, लेकिन एक दुविधा में फंसा हुआ हूँ और मुझे समझ नहीं आ रहा है की तब क्या होगा'

संध्या 'कब'

आदित्य ने उसके चेहरे को पकड़ कर उसकी आँखों में झांकते हुए 'आप एक बात बताओ जब आपकी शादी पापा से हुई थी, तब भी आपने यह बात सोची होगी और अपने आप से यही वादा भी किया होगा की पूरी जिंदगी उनकी पत्नी बनकर रहोगी'

संध्या 'हाँ बिलकुल किया था और उससे निभाया भी है'

आदित्य 'जब आप मेरी पत्नी बन रही हो तू ये उनके साथ धोखा नहीं हुआ, बल्कि आपका अपने वाडे से धोखा नहीं हुआ'

आदित्य की बात सुनकर संध्या को एक बहुत बड़ा झटका लगा और वो एकदम खामोश हो गयी और उसके चेहरे पर देखते हुए उसके चेहरे को पढ़ने की कोशिश करने लगी और वो सोचने लगी और अपने आप से इन् प्रश्नों के उत्तर ढूंढने लगी

क्या यह शक्श जिससे वो प्यार करने लगी है जिंदगी में उसका साथ दे पायेगा?

क्या ये वाकई में उस प्यार के काबिल है?

क्या ये जो प्रसहन पूछ रहा है उसको ये पूछने का हक़ भी है?

अगर उसकी नज़र में मैं गलत हूँ तू वो कौनसा सही है?

जो शख्स अपनी माँ को चाहे और उससे बिना शादी किये hi उसके साथ खुद को पति और उससे बीवी की तरह बर्ताव करे और फिर जब वो अपनी माँ के कहने पर hi सही उसकी शराफत का फायदा उठाकर उसकी मर्यादा को भंग करे. फिर बाद में उस पर शक करे, क्या यह उचित है?

अगर गलती मेरी है तू गलती उसकी भी उतनी है, लेकिन क्योँकि वो मर्द है इसलिए वो मुझे दोषी मानकर नीचे दिखा रहा है. क्योँ?

संध्या के मन में एकदम से हलचल मच गयी और वो सोचने लगी की क्या मुझे इस रिश्ते को आगे बढ़ाना चाहिए? अगर आदित्य को मुझ पर विश्वास hi नहीं है तू मैं क्योँ उसकी गोदी में बैठी हूँ?

यह ख्याल आते hi वो एक झटके से उसकी गॉड से uṭhi और वाशरूम जाने लगी.

आदित्य ने उससे पकड़ना चाहा लेकिन वो वाशरूम चली गयी और वंहा जाकर वो अपने आप को रोक नहीं पायी और उसकी रुलाई फुट गयी. काफी देर रोटी रही और अपनी जिंदगी के बारे में सोचती रही की उसकी जिंदगी में कितने उत्तर छडाव आएंगे?

वो सोचने लगी की 'उसकी नासमझी की वजह से उसकी बेटी उसके पति (मोहनलाल) के साथ कपल बनकर घूमने गयी और वो दोनों पति पत्नी बनकर रहे. जब मुझे इसका पता लगा तू बहुत देर हो चुकी थी. जब डॉक्टर ने मुझे ठीक होने का नुस्खा बताया तभी मुझे इस बात का पता चला था. उस वक़्त मेरे पास दो रस्ते थे.

पहला अपने पति से लड़ाई करती तू हो सकता है की वो मेरे साथ हो जाता और मेरी बेटी को छोड़ देता. मेरी बेटी जिसमे मेरी जान बस्ती थी और अगर वो उससे दूर हो जाता तू मुझे ये अंदेशा था की कहीं मेरी बेटी जोश में आकर आत्महत्या न कर ले. और अगर आत्महत्या न भी करे तू उसकी शादी में मुश्किल आती वो जंहा भी शादी करके जाती तू क्या वो अपने पापा को भूल पति? क्या वो अपने पति की भी हो पति? अगर न हो पति और अपनी जिंदगी बर्बाद कर लेती, तब क्या होता?

अब दूसरा रास्ता ये था की मैं आत्महत्या कर लेती और सब दुखों से छुटकारा पा जाती, लेकिन यह सोचकर रह गयी की कहीं मेरी बेटी (जो मेरी जान है, जिसमे मैं अपने आप को देखती थी इतना hi नहीं बल्कि आज भी देखती हूँ) खुद को मेरी आत्महत्या का दोषी मानकर कुछ गलत न कर ले, इसलिए मैंने अपने आप को पति से दूर करना शुरू कर दिया. इतना hi नहीं बेटी के लिए मौके तलाशती रही की वो (मेरे पति जो की अब उसके हो चुके थे) उनके साथ जयादा से जयादा वक़्त बिताये'

वो और भी बहुत कुछ सोचती रही और जब आदित्य ने वाशरूम के दूर पर नॉक किया तू उसने अपने आसुओं को धोया और अपने आप को ठीक किया. उसका मन तू नहीं था आदित्य के साथ बात करने का, लेकिन उसने अपने मन को पक्का किया और अपने अंदर आत्मविश्वास को भरकर बहार आयी. वो जैसे hi बहार आयी तू आदित्य उससे देखकर 'क्या हो गया था'

संध्या 'कुछ नहीं' और इतना कहकर वो जाकर सोफे पर बैठ गयी और इस तरह जताने लगी जैसे की उससे वंहा आदित्य के होने या न होने से कोई फरक नहीं पड़ता.

आदित्य 'बहार चले'

संध्या 'किसलिए'

आदित्य 'मैं सोच रहा था की आज एक नए टूरिस्ट पॉइंट पर चलेंगे'

संधा ने भाव शून्य होकर 'मेरी कोई इच्छा नहीं है, तुम्हे जाना है तू चले जाओ'

आदित्य तू हक्काबक्का रह गया. एक तू संध्या ने पिछले एक साल से उससे कभी किसी बात के लिए मन नहीं किया था. उसका चाहे मन हो या न हो, वो उसके साथ जाती थी, दूसरा वो उससे फिर से तुम कहकर बुला रही थी. उसकी समझ में नहीं आया की ये एकदम से क्या हो गया है.

आदित्य उसके पास जाकर उसके कंधे को पकड़ कर 'क्या हो गया जान'

संध्या 'ये क्या तरीका है मुझसे बात करने का, मैं कोई तुम्हारी जान नहीं हूँ, जो तुम्हारी जान हो उससे hi बुलाना'

आदित्य 'अभी थोड़ी देर पहले hi तू आपने कहा था की अब आप मेरी पत्नी के रूप में हो'

संध्या 'कब मेरी तुम से शादी हुई'

आदित्य के पास कोई जवाब नहीं था लेकिन प्रत्यक्ष में उसने कहा 'हम दोनों ने hi एक दूसरे को पति पत्नी मन है तू मन से हमारी शादी हो hi गयी है'

संध्या हंसने लगी 'मन से शादी, बीवी जिस पर हर मर्द अपना हक़ समझ कर उससे अपना गुलाम समझता है'

आदित्य को समझ आ गया की उससे कोई गलती हो गयी है और उसने बात को सँभालने की कोशिश में वो उसके पास बैठकर 'मुझसे किस बात पर नाराज हो, अगर कुछ हुआ है तू बताओ, मैं उससे सुलझाने की कोशिश करूँगा'

संध्या खिलखिला कर हंसने लगी और उससे कहने लगी 'मर. आदित्य तुम अपनी समस्या खुद सुलझाओ और मेरी चिंता करने की जरुरत नहीं है, आज से बल्कि अभी से हम दोनों एक नहीं बल्कि अलग अलग हैं'

आदित्य उसकी बात सुनकर हड़बड़ा गया और कहने लगा 'मुझसे कोई गलती हो गयी हो तू ी ऍम सॉरी, लेकिन ऐसा तू न करो'

संध्या 'गलती तुमसे नहीं मुझसे हुई है जो मैं तुम जैसे शक्श से प्यार कर बैठी. ी ऍम सॉरी और अब मैं यंहा से जा रही हूँ'

आदित्य 'लेकिन कान्हा जाओगी'

संध्या 'उसकी तुम्हे चिंता करने की जरुरत नहीं है'

आदित्य 'लेकिन......'

संध्या उसकी बात को अनसुना करके अपने बैग को पैक करने लगी. आदित्य ने उससे रोकने की बहुत कोशिश की लेकिन वो नहीं रुकी और वंहा से निकल गयी.

उधर मोहनलाल के यंहा

रुचिका 'ऐसी बात है तू यार ले मैं कुछ नहीं कहूंगी, लेकिन अमेरिका का किस्सा तू सुना'

फिर दोनों हंसने लगे और दिया दुविधा में थी की क्या बताये जिससे रुचिका को विश्वास भी हो जाये और बुरा भी न लगे. दिया ने कुछ सोचकर कहना शुरू किया

दिया 'जैसा की मैंने बताया था, उसके बाद हम दोनों वंहा पर एक सप्ताह के लिए एक hi कमरे में पति पत्नी बनकर रहे.

रुचिका 'यार मुझे तू तुमसे जलन होने लगी है'

दिया 'किस बात की जलन'

रुचिका 'एक सप्ताह तक एक hi कमरे में पति पत्नी बनकर, बहुत मज़े किये होंगे'

दिया बगले झांकने लगी लेकिन प्रत्यक्ष में 'यार तुम बहुत लकी हो, वो सिर्फ और सिर्फ तुमसे प्यार करते हैं, उनके लिए बाकि सब बेकार है'

रुचिका 'क्या बात कर रही है, एक सप्ताह तक तुम जैसी हर पारी साथ में हो और सिर्फ साथ में hi नहीं बल्कि पत्नी के रूप में और तुम कह रही हो की कुछ नहीं हुआ'

दिया मन में सोचने लगी की रुचिका को काया बोले, दिया के मन में तू बहुत कुछ आ रहा था बताने के लिए लेकिन वो एक सधी हुई बात करना छह रही थी.

दिया 'यार सच्ची बताऊँ, बुरा मत मन्ना मैं तू सच में उनसे प्यार करने लग गयी थी लेकिन वो हैं की तस से मास hi नहीं होते थे, उनको अपने निश्चय से हिला नहीं पायी. उनके मन में तू सिर्फ और सिर्फ तुम बस्सी हुई थी. वो तुमसे बहुत जयादा प्यार करते हैं और उनका प्यार देखकर मुझे तुमसे रक्षक होता था की काश तुम्हारी जगह मैं होती'

रुचिका ने जल्दी से उसके मुंह पर उंगली रखते हुए 'भगवन न करे की मेरी जगह तुम होती. मैं कभी भी अपनी प्यारी सी बहिन से बढ़कर सहेली के लिए मेरे जैसी जिंदगी की कामना करूँ. मेरा तू पता hi नहीं है की जिन्दा भी नाचूंगी या नहीं'

दिया ने उसको गले लगा लिया और उसके माथे को चूमते हुए कहा 'ऐसी अशुभ बातें मुंह से नहीं निकलते. मैं अपनी पूरी जान लगा दूंगी और तुम्हे कुछ नहीं होने दूंगी'

रुचिका 'देख यार होनी को तू कोई ताल नहीं सकता, जो होना है वो होकर रहेगा. मैंने तू सोच लिया है की अगर जाना है तू जाना है, लेकिन जितनी भी जिंदगी बची है उससे हंसी ख़ुशी जीना है. मुझे तू सिर्फ चिंता है तू इस बात की है की अगर मुझे कुछ हो गया तू इनका क्या होगा'

दिया 'तुझे कुछ नहीं होगा'

रुचिका 'इस बात को यही छोड़ यार और बता की अमेरिका में क्या क्या हुआ'

फिर दिया उससे अमेरिका के ट्रिप की बातें (बीच बीच में डिटेल में लिखूंगी) बताती रही और ऐसे hi वक़्त बीतता रहा और शाम हो गयी. उन बातों से रुचिका को एक बात का पता चला की मोहनलाल से दिया प्यार करने लगी है और मन hi मन में उससे पाने की तीव्र इच्छा भी थी, लेकिन नारी लज्जा की वजह से कुछ कर नहीं पायी. वो मोहनलाल को भाई मान चुकी थी और इस नाते भी वो कुछ नहीं कर सकती थी.

तभी मोहनलाल आ गया और रुचिका को मुंबई शिफ्ट करने की प्रक्रिया शुरू हो गयी. मुंबई आकर उससे हॉस्पिटल में एडमिट करवा दिया. हॉस्पिटल में किसी को भी रहने की इज़ाज़त नहीं थी बस मिलने के वक़्त hi mil.sakte थे. मोहनलाल ने रहने के लिए जब होटल बुक करवाना चाहा तू सूरज ने जिद करके उससे अपने घर पर रहने के लिए मजबूर कर दिया.
 
थैंक्स सो मच फॉर वंडरफुल रिव्यु एंड आईटी सिम्स तहत यू लिकेड आईटी बूत अस ी जो तो थे अपडेट फंड no लाइक्स.

ऐथेर यू हैवे रिटेन अंडर प्रेशर जस्ट तो तेल्ल में तहत यू लिकेड आईटी, होवेवेर ी क्नोव तहत मोस्ट ऑफ़ थे रीडर्स हेरे अरे फॉर हार्डकोर सेक्स, व्हिच won't बे अवेलेबल इन माय थ्रेड.

आईटी मई बे अवेलेबल अकॉर्डिंग तो थे नीड ऑफ़ थे स्टोरी.

एनीवे वन्स अगेन थैंक्स सो मच फॉर योर वंडरफुल स्किल्स ऑफ़ राइटिंग एंड प्राइसिंग.

वेल ानोथेर अपडेट वोउल्ड बे सून अवेलेबल
 
मर्वेलौस रिव्यु पॉइंटिंग फाइनर पॉइंट्स.

वेल योर ुंहपीस विथ रेगार्ड्स तो करैक्टर शोज हाउ डीपली यू अरे इन्वोल्वेद विथ थे स्टोरी.

व्हाट एवर यू फील मई नॉट बे ट्रू और आईटी मई बे ओरसे थान तहत.

रिगार्डिंग Ruchika's इलनेस इस डिटेल्ड इन थे नेक्स्ट episode व्हिच वोउल्ड बे पोस्टेड पोस्सिब्ल्य टुनाइट.

सम ऑफ़ थे थिंग्स वोउल्ड बे रिवील्ड सलौली सो तहत यू कुड गेस what's गोइंग तो हैपन.

बूत ात थे एन्ड यू वोउल्ड डेफिनिटेली बे हैप्पी.

थैंक्स
 
Back
Top