इन्सेस्ट आखिर क्यों? फ्रॉम हैट्रेड तो लव (कम्प्लेटेड) - Page 6 - SexBaba
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इन्सेस्ट आखिर क्यों? फ्रॉम हैट्रेड तो लव (कम्प्लेटेड)

सबसे पहले शुक्रिया सभी को इतना वेट करने के लिए. तबियत के खराब चलते आप सभी को मेने काफी वेट करवाया. पर अब हाज़िर हु वापस से. सो, एन्जॉय!!

मेगा अपडेट

अपडेट - 45

अब तक...

नेहा : दी चोरडिये मुझे...

तानिया : बता पहले

नेहा (गुस्से में) : डीइइइइइइइइ...

तानिया (जोरर से) : जल्दी...

नेहा (चिल्ला के) : डीईई.... चोरडिये मुझे...

तानिया (चिल्ला के) : तोह बता नाआ....

नेहा (जोरर से) : हे वांट्स में डेड!!!!

अब आगे...

डेड?? क्या अभी अभी तानिया ने सही सुना? या फिर उसके कान बज रहे थे?

"क्या? क्या कहा तूने? ज़रा फिरसे बोल!!" तानिया ने नेहा को उसके कंधे से झंझोर के पुछा.

इधर नेहा की पलकों में आसुओ की धाराए उत्पन्न होक उसके कोमल गोर गालो से बहती हुई उसकी जांघो पर टपक रही थी.

पहले तोह तानिया को विश्वाश hi नहीं हुआ नेहा की बातो पर. पर जब नेहा को रोटा देख और उसके कहे गए शब्दों पे जब फिरसे गौर किया तोह उसके पेर्रो टेल ज़मीन खिसक गयी.

डेड! राहुल उसको मृत चाहता है?

ये कोई मज़ाक नहीं था. ये एक बोहत hi सीरियस इशू था जिसका सलूशन जल्द से जल्द निकालना ज़रूरी था.

पर सवाल था कैसे?

अरे एक बहिन ये बोल रही है की उसका भाई उससे मृत चाहता है तोह ये कोई छोटी बात है क्या? हरगिज़ नहीं!!!

कोई तोह वजह होगी नेहा के ऐसे कहने पर? जो सिर्फ वही जानती है?

कमरे में सिर्फ और सिर्फ नेहा के सिसकने की आवाज़ें आ रही थी. जो इस बात का सबूत थी की उसने जो कहा वह सच था

इधर तानिया के मैं में तोह जैसे बवाल सा मच गया था. अभी उसके मैं में धेरर सारे सवाल उत्पन्न हो रहे थे. थोड़ी और हिम्मत करके आखिर उसने पूछ hi लिया,

"नेहा! क्या वजह है जिसके कारण तुम्हे लगता है की राहुल tumhe...dead चाहता है?"

बदले में उससे कोई जवाब न मिला. बस सुनाई दिया तोह केवल नेहा का रोना. अभी वो सवाल दोहराने hi वाली थी की कमरे का गेट खुला और अंशु अंदर आ गयी. नेहा को यु रोटा देख उसके परर दरवाज़े से अंदर आते hi जम्म गए.

"क्या हुआ?" आगे बढ़कर अंशु ने नेहा को थामते हुए पूछा.

"अंशिका! मुझे तुमसे कुछ बात करनी है, चलो मेरे साथ" तानिया ये कहते हुए अंशिका का हाथ पकड़ उससे बाहर ले आयी और राहुल के कमरे में ले गयी. और फिर दरवाज़ा भी अंदर से बंद कर दिया.

अंशु : दीदी! नेहा रो रही है, मुझे उससे संभालने जाना है. आपको जो भी कुछ पूछना है प्लीज जल्दी पूछिए.

तानिया (गहरी सांस लेकर) : okay! मुझे अभी अभी नेहा ने बताया की राहुल वांट्स हेर डेड! व्हाई? चल क्या रहा है ये सब? क्या ये सच है या झूठ?

*साइलेंस*

अंशु (सवाल से उभरते हुए) : तोह नेहा ने आपको बता hi दिया. पर उसने उस से ज़्यादा कुछ नहीं बताया होगा आपको है न?

तानिया ने हां में अपना सर हिलाया.

अंशु : दीदी दरअसल मुझे भी बस इतना hi पता है. पर आपके दूसरे सवाल का जवाब में दे सकती हु. मुझे नहीं पता ये सच है या झूठ पर मुझे यकीन है की ये एक मिसुन्दरस्टण्डींग है. ी बिलीव!

तानिया (आश्चर्य) : मिस... मिसुन्दरस्टण्डींग?

अंशु : जी हां! दीदी... आपको विश्वाश नहीं होगा पर पहले में नेहा की बात का यकीन मान कर भाई से एक शब्द नहीं बोलती थी. पर... अभी जब कुछ दिनों पहले यहाँ आयी तोह मेरे साथ ऐसी कुछ घटनाए हुई, मेने ऐसा कुछ देखा, समझा जिसके बाद मुझे भाई को देखने का नजरिया hi बदल गया.

तानिया : kya?...kya देखा?

अंशु : लम्बी कहानी है दीदी पर में आपसे सिर्फ इतना कहूँगी की नेहा जो कह रही है वो सच है. पर... पर असल सच्चाई कुछ और है जो सिर्फ चची चाचा और भाई जानते है. मुझे इतना कन्फर्म है. और हां दीदी... भाई निर्दोष है. मेरे हिसाब से toh...yahi है.

तानिया : तोह में किस बात को मानु? क्या राहुल निर्दोष है? या फिर नेहा सही है?

अंशु : दोनों hi... ी मैं मेरे हिसाब से तोह दोनों बातें सही है.

इतना बोल अंशु राहुल के कमरे से बाहर निकल तानिया को अकेला चोरर नेहा के कमरे में उससे बहलाने के लिए चली जाती है.

तानिया (मैं में) : omg!!! ये बुआ के घर में चल क्या रहा है? मेरी तोह कुछ समझ में hi नहीं आ रहा है. चपडगंजु से बात करू क्या? हां!! उस से hi बात करनी पड़ेगी. आज रात को करती हु उस से बात. वर्ण में तोह पागल हो जाउंगी इस घर में... पर वो तोह अपनी उस ऋचा के साथ गुल छर्रे उड़ा रहा होगा हम्फ!!

इधर होटल में...

राहुल और ऋचा एक दूसरे की बाहो में लिपटे हुए बिस्तर पर बैठे थे. राहुल रो कर अपनी फीलिंग्स पहली बार किसी से शेयर कर रहा था.

राहुल (मैं में) : ऋचा कितनी अच्छी है. में ऋचा और बाकी सब को ऐसे अँधेरे में नहीं रख सकता. हां! में सबको सच बता दूंगा. आगे जो होगा देखा जाएगा. हां! यही सही है.

राहुल : रीचु!! तुम्हे पता है... मेने सोचा था की सब कुछ में अकेले संभाल लूंगा. मुझे किसी की कोई ज़रुरत नहीं है. घरवाले मुझपर इतना भरोसा करने लगे थे जैसे में कोई मासियह हु. वो मुझ से बोहत ज़्यादा एक्सपेक्ट करने लगे थे. उन्हें लगने लगा था की यदि राहुल है तोह सब ठीक हो जाएगा. उन्हें लगने लगा था की में किसी भी परेशानी को दूर कर सकता हु. और यदि गलती से में उस परेशानी को दूर करने में नाकामयाब होता था तोह परिवार वाले यही सोचते थे की मेरे से ऐसी गलती कैसे हो गयी? वो सभी मुझ से बोहत ज़्यादा एक्सपेक्ट करने लगे थे रीचु... सिर्फ मेरे माँ डैड नहीं, में अपने पूरे परिवार की बात कर रहा हु. फिर वो मुझपर नाराज़ होते थे, की में नाकामयाब कैसे हो गया...

पर में भी तोह एक इंसान हु न रीचु? होती है मुझसे भी गलती. मुझ पे लोग इतना देपेंद क्यों होने लगे थे? इसलिए की में बेहतर था? और जब मुझसे कोई गलती हो गयी तोह मेरे ऊपर दोष डालने लगे??? ये कहा का इन्साफ है रीचु?

राहुल के ऐसा कहने पर ऋचा को अब एहसास हुआ की वाक़ई वह खुद राहुल पे कितना डिपेंडेंट थी. और इसमें कोई शक नहीं की ऋचा की तरह उसके परिवार वाले भी कितना डिपेंडेंट रहने लगे थे राहुल पे. मतलब यदि कोई भी मुसीबत आए तोह राहुल hi उससे सुलझाए. और यदि न कर पाए तोह उसको hi दोष दिया जाए. शायद हम सभी राहुल से कुछ ज़्यादा hi एक्सपेक्ट करने लगे थे. यदि बेहतर होना आपको पसंद है, तोह फिर बेहतर होने के साथ साथ आपको लोगो के ताने सुन्न न भी सहना आना चाहिए. वाक़ई! ये कहा का इन्साफ था?

राहुल : रीचु... मुझे भी फिर खुद लगने लगा की में सब कुछ कर सकता हु. क्युकी में अपने hi लोगो के कारण इस दलदल में फस्स्त जा रहा था. मेरे अपने लोग मेरी खूबियों को देख मुझसे और ज़्यादा उमीदें रखने लगे थे. और धीरे धीरे मुझे उनकी आदत सी हो गयी. में अपने आप hi हर काम को अपने ऊपर ले लेता था. मुझे आदत सी पद गयी थी. शायद तुम्हारा ईगो ख़तम करने के लिए भी मेने वो काम यु hi एक्सेप्ट कर लिया था. फिर चाहे मुझे hi क्यों न बुरा बन्न न पड़े. पर में गलत था... गलत था जो सोचने लगा था की में अकेले hi सब कुछ कर सकता हु. गलत था में richu...galat था.

राहुल के बोलने के बाद hi उसके ासु चालक जाते है. आज ऋचा को आभास हुआ था की राहुल कितने बड़े दलदल में फसा हुआ था. उससे ऐसा बना दिया गया था जिसमे वह खुद को हानि पोहचाने लगा था. उसकी बात सुन्न ऋचा को एक तेज़्ज़ झटका सा लगा और उसका पूरा शरीर अंदर से सिहर गया. न जाने कब से राहुल ये सब सेहत आ रहा होगा.

ऋचा : ra...rahul...

राहुल : अभी मेरी बात ख़तम नहीं हुई है रीचु. अब जो में बताने जा रहा हु, हो सकता है वो सब जान ने के बाद तुम मुझसे बेइंतहा नफरत करने लगो और मुझे चोरर के भी चली जाओ. पर में अब तुम्हे और बाकी सब को अँधेरे में नहीं रख सकता रीचु. इसलिए सुनो अब...

ऋचा (घबराहट में) : ऐसी... ऐसी क्या बात है राहुल? मुझे डराओ मैट प्लीज ऐसे.

राहुल : सबसे पहली बात. I'm नॉट ा वर्जिन एनीमोर. में इसके पहले किसी और लड़की के साथ फिजिकली रिलेशन बना चूका हु. और वो कोई और नहीं मेरी मुँह बोली दीदी... तनीषा दीदी है. हां! सही सुना तुमने, वही तनीषा दीदी जिनके बारे में में तुम्हे पहले थोड़ा बोहत बता चूका हु. जैसे तुम मुझ से प्यार करती हो वैसे hi वह मुझसे प्यार करती hi, और में भी उनसे प्यार करता हु. उनके बिना मेरा जीवन अधूरा है.

राहुल इतना बोल चुप्प हो गया. पता नहीं कहा से उसमे इतनी हिम्मत आ गयी और सब कुछ एक hi बार में कह दिया. शायद उसने ठान लिया था की ऋचा अब जैसा भी रियेक्ट करेगी उससे सब मंज़ूर है.

थोड़ी देरर तक ऋचा स्तब्ध सी राहुल के चेहरे को hi देखती रही. उसकी बोलती hi बंद हो गयी थी. ये क्या कह डाला राहुल ने? तनीषा? नॉट वर्जिन एनीमोर? फिजिकल रिलेशनशिप? ... यही अलग अलग शब्द उसके दिमाग में गूंजने से लगे...

ऋचा (शॉकेड) : ra...rahul... तुम ये सब क्या कह रहे हो? तबियत तोह ठीक है न?

राहुल (गहरी सांस लेकर) : में बिलकुल ठीक हो ऋचा. बल्कि पूरे होशो हवास में हु. और जो कुछ भी तुमने सुना सब कुछ सही सुना. तनीषा दीदी और में एक दूसरे से बेहद प्यार करते है बिलकुल वैसे hi जैसे तुम और में एक दूसरे से.

फिरसे राहुल की वही बात सुन्न न जाने क्यों ऋचा को फिरसे झटका लगता है. राहुल ने सोचा यही सही मौका है और उसने तानिया दीदी के बारे में सब कुछ बता दिया की कैसे उनसे मिला, कैसे उन्हें पढ़ाया, उन्हें घर दिया और कैसे वो एक दूसरे के क्लोज हो गए.

ऋचा : ओह...

राहुल : और एक बात और है ऋचा. मेरी वंशु दी भी मुझसे बोहत ज़्यादा प्यार करती है. हलाकि हमारे बीच अभी कोई वैसा कुछ नहीं हुआ, पर पता नहीं कब तक में उन्हें रोक पाउँगा... क्युकी में भी उनसे प्यार करता हु

एक और बड़ा झटका लगा ऋचा को. तनीषा काम थी क्या जो राहुल ने अब वंशु को भी ऐड कर दिया? और हर लड़की राहुल की बहिन क्यों है? मज़ाक चल रहा है क्या?

ऋचा का चेहरा देख राहुल को अब अपने ऊपर बोहत ज़्यादा शर्म भी आ रही थी. की वो अपनी दो बहनो के साथ क्या क्या कर रहा है, और ऋचा को सब अब ोाता चल गया है. क्या वो मुझे एक्सेप्ट भी करेगी?

राहुल : मेने साड़ी सच्चाई तुम्हे बता दी है ऋचा. और यही सच है. मुझे नहीं पता तुम क्या डिसिशन लोगी. पर मुझे तुम्हारा हर्र एक डिसिशन मंज़ूर है. तुम यदि चाहती हो की में अभी के अभी दफा हो जाऊ तुम्हारी नज़रो से तोह में वही करूँगा. तुम चाहोगी की में अपनी शकल न दिखाऊ तोह वो भी मुझे मंज़ूर है. पर में यही चाहता हु की तुम खुश रहो. प्लीज! मुझे अब अपना फैसला सुनाओ ऋचा...

करीब ऐसे hi 15 मिनट गुज़र गए. पर ऋचा सिर्फ अपने खयालो में खोयी हुई नज़रे नीचे कर के कुछ सोच रही थी. राहुल भी उससे वक़्त देकर बस उससे hi देख रहा था. उसके फैसले का इंतज़ार कर रहा था. धड़कने तोह राहुल की बेहद तेज़्ज़ गति से चल रही थी, क्युकी उससे बिलकुल नहीं पता था ऋचा क्या डिसिशन लेगी. वो ऋचा को बिलकुल भी नहीं खोना चाहता था.

उससे पता था की वो ऋचा से बेहद प्यार करने लगा है, और ऐसे में यदि ऋचा ने उससे चोरर दिया तोह न जाने उसके दिल पर क्या बीतेगी. पर वो तनीषा और वंशु से भी तोह प्यार करता है. उन्हें भी धोका नहीं दे सकता. आखिर ऐसा कैसे हो सकता है? एक आदमी को कई लड़कियों से कैसे प्यार हो सकता है? राहुल को ये बात कभी समझ में नहीं आती थी. पर अब उससे ये यकीन हो गया था की पुराने ज़माने में राजा महाराजाओ की एक से ज़्यादा बीविया क्यों होती थी... शायद राजाओ को भी एक से ज़्यादा बीइओ से प्यार हो जाता था और उनकी बीइओ को भी एक hi राजा से...

सुन्न ने में ये बड़ा अटपटा ज़रूर लगे, पर ये मुमकिन था. और आज उसके खुद के साथ ये सब हो रहा था. तोह भला कैसे वो इस बात को झुठलाता?

जब थोड़ी देरर हो गयी और राहुल भी किसी गहरी सोच में चला गया तब ऋचा ने नज़रे ऊपर की और कुछ ऐसा कहा जिससे सुन्न राहुल का शरीर सिहर उठा

ऋचा : मुझे मंज़ूर है...

यही वाकया था जो ऋचा ने कहा. मंज़ूर है? क्या मंज़ूर है? यही की राहुल अपना रिलेशनशिप वंशु और तनीषा दीदी के साथ रख सकता है? या फिर राहुल ने जो कुछ भी किया उससे ऋचा ने माफ़ कर दिया और अब सिर्फ राहुल को अपने पास रखना चाहती है?

राहुल : ky..kya मंज़ूर है?

ऋचा (मुस्कुराते हुए) : मुझे तुम मंज़ूर हो.

राहुल : क्या?? और... और वो कैसे?

ऋचा : मेने बोहत सोचा इस बारे में. पर अंत में एक hi आवाज़ आयी अंदर से... की में तुम्हारे बिना नहीं जी सकती. और ना hi कभी सपने में भी किसी और के साथ अपनी ज़िन्दगी को इमेजिन कर सकती हु...

राहुल : क्या सच कह रही हो रीचु?

ऋचा : हां राहुल! मुझे नहीं पता कुछ. में बस इतना जानती हु की मेरी तरह तुम्हारे लिए कोई और भी प्यार में पद सकता है. और वो तुम्हारी दीदी hi क्यों न हो, पर उनका भी तुम्हारे ऊपर हक़ है. वो बात अलग है की समाज में ये प्यार को गलत माना जाता है पर प्यार तोह प्यार है. और सबसे बड़ी बात ये की तुमने मुझे सब कुछ सच बताया और मुझे अँधेरे में नहीं रखा. हां! तुम ये बात शुरू से बता देती तोह मुझे ज़्यादा ख़ुशी होती पर कोई बात नहीं. शायद तुम दर्रे हुए थे. और एक बात और... वो ये की मुझे इस बात की ख़ुशी है की वो तुंहारी बहने है. कोई बाहर की लड़की नहीं. वर्ण मुझे वाक़ई नाराज़गी और जलन भी होती.

इसलिए... ी वांट यू. ी लव यू... ी can't लाइव विथाउट यू.

राहुल थोड़ी देरर ऋचा का चेहरा hi देखता रहता है उसके बाद अपने आप hi उसकी आँखों से ासु आने लगते है.

"ओह्ह ऋचा!! " कहते हुए राहुल ऋचा को अपनी बाहो में समेत लेता है.





"अब देररि न करो राहुल! में हर पल तुम्हारे साथ रहना चाहती हु. तुम्हारे हर्र मोड़ पे तुम्हारे साथ कड़ी रहूंगी. बस अब मुझे भी अपनी बना लो मेरे राहुल" ऋचा ने राहुल की बाहो में लिपटे हुए कहा.

उसका मतलब साफ़ था की जैसे तनीषा को अपना बनाया वैसे hi मुझे भी अपना बना लो. मतलब वो मोटा लुंड उसकी छूट में भी पेल दो और उद्धघाटन कर दो नए जीवन शुरू होने का.

राहुल ने फौरन ऋचा के गरमा गरम नरम होंठो को अपने होंठो में भर लिया और उसका रसपान करने लगा. गीले गीले गरम होंठ उससे मदहोश करने पे तुले थे.





यही है प्यार! ऋचा ने इतना सब होने के बावजूद उससे एक्सेप्ट कर लिया. क्यों? क्युकी वो राहुल को खोना नहीं चाहती थी, राहुल से वो बेहद प्रेम करती थी.

होंठो को थोड़ी देरर चूसने के बाद जैसे hi दोनों की सांसें तेज़्ज़ हुई दोनों एक दूसरे से अलग हुए. ऋचा के गाल लाल थे और उसकी आँखों में मदहोशी थी, एक नशा था.

ऋचा (मैं में) : अब तुम मेरे हो जानू. मेरे!! इतना प्यार दूंगी न तुमको... सब कुछ भूल जाओगे. वो तोह अच्छा है वंशु और तनीषा दीदी तुम्हारी बहने है, यदि कोई बाहर की लड़की होती न... तो तुम्हारी हालत पतली कर देती में. हम्फ!! पर जो भी हो, अब तुम मेरे हो. अब से मेरी हर चीज़ पे तुम्हारा हक़ है... लव यू जान!!

ऋचा : जानू... दो आईटी विथ में!

और राहुल ने उससे बिस्तर पे लिटा दिया और उसके ऊपर चढ़ गया. हौले हौले गर्दन पे चुम्बनों से शुरुआत करते हुए उसने ऋचा के गुलाबी गरम होंठो पे फिरसे अपना हमला किया.

"उम्मम्मम्म mmmmmmmmmmm" की आवाज़ से कमरा गूंजने लगा.

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ऋचा के गाल सुर्ख लाल थे. आज वो अपने प्यार के साथ थी और दोनों इस प्रेम रस में दुब रहे थे.

राहुल भी कुछ शान पहले बेहद उदास था पर जब ऋचा ने उससे स्वीकार किया और ये कहा की वो उसके साथ हर मोड़ पर उसका साथ देगी, राहुल को मानो बोहत ज़्यादा हिम्मत मिल गयी. और उसका प्यार ऋचा के प्रति और भी बढ़ गया.

दोनों एक दूसरे के होंठो का रस पी रहे थे और थूक के मेल मिलाप से कमरे में *स्लुर्प स्लुर्प* की आवाज़ें निकल रही थी जो घनघोर सन्नाटे को चीयर के रख रही थी.

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ऋचा ने अपनी जीभ निकल के राहुल के मुँह के अंदर दाल दी, जिस से राहुल का जोश और भी बढ़ गया और उसके हाथ अपने आप hi ऋचा के वाइट टॉप पे आ गए उसके सख्त बड़े उरोजों को थाम मसलने लगे.

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*Ssssssssssssss आआआअह्हह्ह्ह्हह* की सिसकी लेते हुए ऋचा ने एक पल के लिए राहुल के होंठ चोर्रे और वापस से मस्ती में मगन होक उससे फिरसे चूमने चाटने लगी.

करीब 20-25 मिनट की इस चुम्मा छाती के बाद राहुल धीरे धीरे नीचे की और बढ़ा और ऋचा का टॉप ऊपर उठा के उसके कंधे तक सरका दिया. अब उसके सामने एकदम सफ़ेद सपाट नरम पेट था, जिसमे एक बेहद hi ख़ूबसूरत सा नैवेल उससे अपनी और खींच रहा था.

राहुल ने भी बिना टाइम गवाए उस नैवेल का आमंत्रण स्वीकार किया और अपनी गरम जीभ की नोक सीधे उस नाभि में दाल दी.

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"Uuuuuuuuuuffffffffffffffffffffff"

एक और सिसकी ऋचा की निकली जो बोहत hi कामुक थी. शायद ये वार बोहत hi तगड़ा था राहुल का.

धीरे धीरे राहुल ने ऋचा का टॉप हटाया और नीचे की जीन्स भी अलग कर दी. अब इस वक़्त ऋचा केवल वाइट ब्रा और पंतय में थी.

राहुल ने आगे बढ़ ब्रा भी हटा दी और उसके सामने आ गए 2 गोल सफ़ेद सख्त दूध जिनमे गुलाबी खड़े निप्पल्स उसकी सुंदरता में 4 चाँद लगा रहे थे.

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ये सन देख राहुल तोह मानो पागल सा हो गया और किसी भूके भेड़िये की तरह उनपे टूट पड़ा. दूध मुँह में भरते hi ऋचा की सिसकिया निकलना चालु हो गयी. और उसके हाथ बस राहुल का सर पकडे अपने दूध पे दबाव बनाने में hi लगे हुए थे.

"हां!! ऐसे hi... खा जाओ इन्हे राहुल. उफ्फ्फफ्फ्फ़! That's राइट!! चूसो इनको...

और दर्द दो मुझे... अह्ह्ह्हह.... और... जोरर से..... हम्मम्मम्मम्म sssssssssssssss

Aaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhh ी लव आईटी.."

ऋचा न जाने क्या क्या बड़बड़ाए जा रही थी.

राहुल ने दूध चूस चूस कर और उन्हें मसल मसल कर लाल कर दिया था. फिर उसने नीचे आते हुए ऋचा की पंतय भी अलग कर दी. और अब थी उसकी सामने ुनछुयी कोमल क्लीन शवेद गोरी छूट.

ये देख तोह राहुल को सँभालने में कुछ पल लग गए. फिर उसने अपनी जीभ का हमला बोल दिया और छूट को पागलो की तरह चूसना शुरू कर दिया. ऋचा बेचारी इस हमले से मचल सी उठी और अब बहकने लगी थी. सिसकियों की गूँज अब बढ़ चुकी थी.

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यहाँ राहुल ऋचा की छूट चाटने में लगा था तोह वही इस वक़्त राहुल के घर में कोई और भी था जो इस वक़्त अपनी छूट में उंगलिया डाले राहुल को याद कर मुट्ठ मारने में लगी थी.

कोण थी वह??

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आज के लिए इतना hi गाइस!!
 
बोहत बोहत धन्यवाद् बीआरओ इतना बड़ा और ऑनेस्ट रिव्यु देने के लिए.

कोई बात नहीं, आप अपनी कैट की प्रिपरेशन करे

रेविएवस बाद में भी दे सकते है!

मेरा आपको तहे दिल से धन्यवाद् एक बार फिरसे!! ( ꈍᴗꈍ)
 
अपडेट - 46

अब तक...

राहुल ने दूध चूस चूस कर और उन्हें मसल मसल कर लाल कर दिया था. फिर उसने नीचे आते हुए ऋचा की पंतय भी अलग कर दी. और अब थी उसकी सामने ुनछुयी कोमल क्लीन शवेद गोरी छूट.

ये देख तोह राहुल को सँभालने में कुछ पल लग गए. फिर उसने अपनी जीभ का हमला बोल दिया और छूट को पागलो की तरह चूसना शुरू कर दिया. ऋचा बेचारी इस हमले से मचल सी उठी और अब बहकने लगी थी. सिसकियों की गूँज अब बढ़ चुकी थी.

यहाँ राहुल ऋचा की छूट चाटने में लगा था तोह वही इस वक़्त राहुल के घर में कोई और भी था जो इस वक़्त अपनी छूट में उंगलिया डाले राहुल को याद कर मुट्ठ मारने में लगी थी.

कोण थी वह??

अब आगे...

राहुल ऋचा की छूट चूसने में मग्न था, और ऋचा ओर्गास्म के करीब थी.

सिसकिया लेते लेते ज़्यादा समय न गवा के वो फौरन hi जहर गयी. और हफ्ते हफ्ते उसके गोर दूध उसकी छाती पे ऊपर नीचे होने लगे. क्या अध्भुत दृश्य था.

उसका सपाट पेट पसीने की बूंदो से भीगा हुआ था, उसकी आँखें बंद, और सासें तेज़्ज़ थी. राहुल ने नीचे उसकी छूट से निकले पानी को चाट चाट के साफ़ कर दिया. और बाद में उसकी छूट भी अपनी जीभ से चाट चाट के साफ़ कर दी. उसने पहले भी तनीषा के साथ सेक्स किया था और उससे छूट चाटने में और उसका पानी चाटने में कोई दिक्कत नहीं हुई. अब उससे आदत सी पद गयी थी या यु कहे की उससे छूट का स्वाद बेहद अच्छा लगने लगा था.





ऋचा की आँखें खुलते hi उससे ऊपर सीलिंग में पंखा दिखाई दिया और फिर उससे अपनी छूट पे एक बड़ा hi कोमल सा एहसास हुआ. जब उसने अपनी कोहनी के बल थोड़ा उठ के देखा तोह पाया राहुल उसकी छूट पे धीरे धीरे बड़े hi प्यार से किश कर रहा था. जैसे मानो उसकी छूट किसी फूल की तरह हो. वैसे सही hi तोह था, उसकी छूट फूल की hi तरह तोह थी, जिसका खिलना अभी बाकी था.

राहुल को यु खुदकी छूट चूमते देख ऋचा को बोहत ज़्यादा शर्म आने लगती है. पहले कहा वो एक ऐसी लड़की थी जिसके साथ कोई बात करना तक पसंद नहीं करता था, फिर उसकी ज़िन्दगी में राहुल आया, जिसने उसका पूरा करैक्टर hi बदल के रख दिया. उसने एक नयी दुनिया दे दी जीने के लिए. और कैसे उससे राहुल से प्यार हो गया. कैसे राहुल ने उसका प्यार क़ुबूल किया, कल तक जिसके साथ बस थोड़ी बोहत किसिंग होती थी, आज वो उसकी छूट को चुम रहा था

इतनी प्रोग्रेस देख ऋचा खुद का झेल hi ना पायी. शर्म के मारे पूरे गाल लाल हो चुके थे. शायद एक दम से ऐसी प्रोग्रेस का उससे अंदाजा नहीं था.

पर आखिर सब कुछ तोह राहुल का था, वो खुद पूरी तरह राहुल की थी. अब राहुल जब चाहे उसके साथ ये सब करे, इसमें क्या प्रॉब्लम है? बस उससे शर्म आ रही थी, अपने प्यार को इतने करीब पाकर और उसकी योनि को चूमते हुए देख कर.

राहुल एक झलक ऊपर कर के देखता है तोह पाटा है की ऋचा का चेहरा एकदम लाल टमाटर सा हो गया है. एक अंतिम बार उसकी कोमल छूट को मुँह में भरकर उससे चूमता है और फिर मुँह अलग कर लेता है.

छूट को हाथ से सहलाते हुए राहुल ऋचा की और देख के कहता है,

"अब इससे भी तोह तैयार करना पड़ेगा न? है न रीचु??"

राहुल की बात सुन्न ऋचा और ज़्यादा शर्मा जाती है और अपना चेहरा अपने नाज़ुक हाथो से धक् लेती है.

"अरे अरे! मेरी प्रिये... तुम तोह शर्मा गयी... हहै" राहुल ने चढ़ते हुए कहा.

"धत्त्त! नटखट कही के..."

ऋचा ने धीमी सी आवाज़ में कहा.

अभी भी उसका चेहरा हाथो के पीछे छुपा हुआ था, न जाने क्या क्या भाव आ रहे थे इस वक़्त उसके चेहरे पे.

थोड़ी देरर की शान्ति के बाद राहुल ने कहा,

"चलो रीचु! अब घर चले, हमे बोहत टाइम हो गया है"

राहुल की बात सुन्न ऋचा थोड़ी घबरा गयी. वो इसलिए क्युकी आज तोह वो सोच के आयी थी की आज राहुल के साथ सम्भोग हो जाएगा. और वो एक औरत बन्न जाएगी. पर इतना सब कुछ करने के बाद राहुल ने उससे अब घर चलने कह दिया?

मतलब क्या था इसका? क्या राहुल उसके साथ सम्भोग करना नहीं चाहता? क्या राहुल उस से प्यार नहीं करता? क्या राहुल अब अपनी दीदियो का दीवाना हो गया है जो अब अपनी गफ से पीछा चढ़ा रहा है? क्या उसमे कोई कमी है? क्या वो सुन्दर नहीं?

अलग अलग सवाल एक पल में ऋचा के दिमाग में मंडराने लगे. वो असुरक्षित सा फील करने लगी. कही राहुल उससे छोड़ के तोह नहीं चला जाएगा? नहीं!! नहीं!! में ऐसा हरगिज़ नहीं होने दूंगी

"क्यों?? Ky..kya हुआ राहुल? तुम मुझे चोरर के क्यों जा रहे हो? कही मुझसे झूठ तोह नहीं बोल रहे न? क्या तुम मुझसे प्यार नहीं करते?"

ऋचा ने घबराहट में एक साथ धेरर सारे सवाल पूछ लिए.

उससे डर लग रहा था की कही राहुल उससे चोरर के तोह नहीं जा रहा?

राहुल उसकी बेचैनी देख समझ गया की क्या बात है. किस बात पे वो इतना इन्सेक्युरे फील करने लगी है. ऋचा इस वक़्त इन्सेक्युरे इसलिए नहीं फील कर रही थी की वो राहुल के साथ है, बल्कि इसलिए फील कर रही थी क्युकी उससे लगा अब वो राहुल के साथ नहीं रहेगी.

राहुल के साथ होने पर hi तोह वह सुरक्षित फील करती थी.

आगे बढ़कर राहुल ने ऋचा को अपने आलिंगन में लिया और कहा,

"अरे पगली!! तू कितनी बेवक़ूफ़ है.

तुझे लगता है की में तुझे चोरर के जाऊंगा? बिलकुल भी नहीं! तुझसे बोहत प्यार करता हु में, समझी? तूने मुझे नयी दुनिया दी है, मुझे एक्सेप्ट कर के. तुझे पता है मेने आगे बढ़ने से क्यों मन किया?"

राहुल की बात सुन्न ऋचा को बोहत अच्छा लगता है की राहुल उस से प्यार करता है और कही नहीं जाएगा उससे चोरर कर

पर फिर राहुल ने मन क्यों किया? उससे नहीं पता था. इसलिए वो अपनी गर्दन 'ना' में हिला देती है.

"अरे में आगे इसलिए नहीं बढ़ा क्युकी में चाहता हु की हमारी पहली रात बड़ी ही हसीं हो. इस शहर की एक होटल में छोटे से कमरे में नहीं. क्या अपना पहला टाइम तुम ऐसे बिताना चाहती हो? बिलकुल नहीं! वो स्पेशल होना चाहिए. इसलिए पहले में धेरर सारा पैसा कमाऊंगा, उसके बाद हमारी पहली रात के लिए स्पेशल ट्रिप रखूँगा. तभी तोह वो रात और भू यादगार बनेगी ... में नहीं चाहता की तुम्हे इस होटल में... में चाहता हु की हमारा मिलान स्पेशल हो डिअर"

राहुल ने ऋचा की चीन पकड़ते हुए कहा

राहुल की बातें ऋचा समझ चुकी थी उसकी बातें सुन्न ऋचा को बोहत अच्छा लगा. वो देख रही थी की राहुल इन् सभी बातो का कितना ध्यान रख रहा है. और उसकी रात स्पेशल बनाना चाहता है. पर अभी भी कही न कही उसके दिल के अंदर एक इन्सेक्युरित्य सी थी

"राहुल तुम प्लीज मेरे साथ अभी कर लो न. मेरे लिए तोह हर वो पल स्पेशल है जब में तुम्हारे साथ रहती हु. मुझे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता की ये छोटे से रूम में हम वो सब करेंगे. तुम मुझे अपना बना लोगे तोह मुझे कोई टेंशन नहीं रहेगी. में बोहत सेफ फील करुँगी..."

ऋचा सोच रही थी की एक बार वो राहुल की हो गयी, फिर उससे उतना डर नहीं लगेगा. उससे डर था की कही कोई लड़की राहुल को उस से न चीन ले. या उसकी अहमियत राहुल के दिल में काम न हो जाए.

इसलिए वो जल्दबाज़ी करने को तैयार थी.

"रीचु! ी क्नोव तुम्हे ये डर सत्ता रहा है की में तुमसे दूर न चला जाऊ. पर प्लीज! ट्रस्ट में! ी लव यू! तुम्हारे अलावा में किसी भी बाहर की लड़की के साथ कभी भी कुछ भी नहीं करूँगा. ी प्रॉमिस! अब तोह मेरी बात मान लो.

करना तोह में भी चाहता हु तुम्हारे साथ, तुम नहीं जानती मेने कैसे खुद को कण्ट्रोल किया हुआ है. पर में तुम्हे इस से भी ज़्यादा ख़ुशी देना चाहता हु. थोड़ा वेट कर लो, में अपनी जी जान लगा दूंगा तुम्हारे लिए और बोहत जल्द सक्सेसफुल होक तुम्हे तुम्हारे घर से उठा ले जाऊंगा... ी... ी मैं... तुमसे शादी कर तुम्हे अपनी पत्नी बना के घर ले जाऊंगा. माफ़ करना फ्लो फ्लो में इधर उधर निकल जाता हु ...हहै"

राहुल की बात सुन्न ऋचा स्तब्ध सी राहुल को देखती रहती है. फिर उसकी तुरंत हस्सी छूट जाती है. और फिर हस्सी कण्ट्रोल कर वो राहुल को बड़े hi कामुक भरी नज़रो से देखती है,

"क्या कहा तुमने अभी? मुझसे शादी कर के अपनी पत्नी बना के घर ले जाओगे? क्या ये सच है?"

"हां!! बेशक!! क्यों??"

राहुल ने कहा.

राहुल का इतना बोलना hi था की ऋचा फौरन उसपे झपट पड़ी और उसके होंठो को बेरहमी से चूसने लगी.





और मुँह में उसकी hi छूट के पानी का स्वाद आने लगा जो राहुल के होंठो पर था. पर उसने बिलकुल विरोध नहीं किया. आज पहली बार वो अपने hi छूट का पानी चख रही थी और वो भी अपने प्यार के मुँह से.

"उम्मम्मम्मम्म mmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmm" की आवाज़ से एक बार फिर कमरा भर गया.

थोड़ी देरर बाद...

ऋचा : तुम्हे पता है तुमने अभी मुझे कितनी ख़ुशी दी ये कह के?

राहुल : क्या?

ऋचा : की तुम मुझसे शादी करोगे...

राहुल : हां तोह? ी लव यू, तुम मेरी हो और में तुमसे शादी कर तुम्हे अपनी बीवी बनूँगा...

ऋचा : wahaha...omg!!!!

कहते हुए ऋचा अपने चेहरे को हाथो से धक् लेती है और फिर एकदम से राहुल पे फिरसे झपट पड़ती है और उसके होंठ चूसने लगती है.

ऋचा : बुद्धू!! तुम्हे पता है तुमने ऐसा कहके मेरे दिल को हिला के रख दिया है. आज में इतनी खुश हु. Omg! ी लव यू जानू... प्रॉमिस में की तुम मुझसे शादी कर मुझे अपनी बीवी बनाओगे.

राहुल : ी प्रॉमिस! तुम सिर्फ मेरी हो!

ऋचा : omg!!! ी लव यू... ी लव यू... हां! में सिर्फ और सिर्फ तुम्हारी हु जानू. अब मुझे मंज़ूर है. में तुम्हारे सक्सेसफुल होने का वेट करुँगी. में अब बोहत खुश हु...

ऋचा की ख़ुशी देख राहुल भी खुश हो जाता है. की तभी ऋचा उसकी तरफ बढ़ती है और उससे बिस्तर से खड़ा कर देती है.

ऋचा : अब मेरी बारी है

राहुल : हम्म??

ऋचा : तुमने मुझे सुख दिया, तोह अब मेरा भी तोह फ़र्ज़ बनता है न की में अपने प्यार को सुख दू.

राहुल : क्या?

राहुल इस से पहले और कुछ पूछता ऋचा नीचे झुक के उसकी जीन्स नीचे सरका देती है और एक hi झटके में अंडरवियर भी उतार देती है. अंडरवियर उतारते hi उसके होंठो पर एक टिप्पी पड़ती है.





लुंड बाहर निकलते hi उसके होंठो से जा लगा था. लुंड देख ऋचा स्तब्ध सी बस उससे hi घूरने लगती है. आज पहली बार उसने एक असली लुंड जो देखा था. पोर्न में तोह देखा था पर असल में पहली बार था.

ऋचा : omg!!! It's सोऊ बिग जानू...

राहुल (ेम्बरसेद) : उम्म्म येह!!

सबसे पहले ऋचा लुंड को कोमल हाथो से पकड़ उसका जायज़ा लेती है. जैसे मानो वो बोहत hi कीमती चीज़ को अभी अपने हाथो में ले रही हो फिर धीरे से उसके गुलाबी टोपे को एक प्यार भरी चुम्मी देती है. जिस से राहुल का शरीर झुँ झुना जाता है.





ऋचा अपनी गरम जीभ निकल राहुल के टोपे पर चलाती है तोह राहुल के शरीर में सिहरन सी दौड़ जाती है.





आज पहली बार ऋचा अपने मुँह में लुंड ले रही थी. लुंड को फाइनली अपने मुँह में भर कर वो आगे पीछे करने लगती है. उस से जितना बन्न रहा था वो कर रही थी. पूरी कोशिश कर रही थी की वो राहुल को ज़्यादा से ज़्यादा मज़ा दे सके. वो राहुल को खुश देखना चाहती थी.





एक बार फिर कमरा *स्लुर्प स्लुर्प की आवाज़ों से भर गया.

राहुल को असीम आनंद की प्राप्ति हो रही थी. और कुछ hi पालो में उसका वीर्य निकल गया जो ऋचा के मुँह में आ गया. ऋचा ने सारा वीर्य अपने मुँह में रखा और एक बार राहुल को दिखाया की उसका सारा वीर्य अभी उसके मुँह में है.





और फिर अगले hi पल ऋचा ने पूरा का पूरा वीर्य गुटक लिया. उससे थोड़ा अटपटा ज़रूर लगा स्वाद पर आखिर राहुल ने भी तोह उसका पानी पिया था. तोह उसका भी फ़र्ज़ बनता है राहुल का वीर्य वो भी पिए. उससे पता था उससे इसकी आदत पद hi जाएगी.

वही दूसरी और राहुल के घर में एक औरत अपने कमरे में राहुल का नाम बार बार पुकार कर अपनी छूट सहलाए जा रही थी. जी हां! ये निशा hi थी.





"बेचू!! हाय!! मेरा बेचू!! कब आएगा रे तू? मुझे पता है तू बोहत उदास है आज के हादसे की वजह से, तेरे दिल पर बोहत ठेस पहुची होगी. पर तू किधर चला गया है जबसे? अरे तेरी ये माँ है न बेचू... तुझे खूब प्यार करेगी... Aahhhhhhhhhhh

आजा न मेरे पास बेचू... देख कैसे दूध मेरे सूख गए है... इन्हे मुँह में लेके फिरसे भीगा दे... थूक लगा दे अपनी... ये तेरे मुँह में hi अच्छे लगते है... हाय.... आह्ह्ह्हह.... उम्मम्मम्म

मेरा बेचू... फ़ोन पे कहा था तूने की आते आते देरर हो जाएगी... अरे 8 बजने वाला है ... आह्हः... तेरे डैड के आने का टाइम हो गया है, और तू पता नहीं कहा है.... उम्म्म्म... उफ्फफ्फ्फ्फफ्फ्फ़

किसी निगोड़ी छूट है, बिलकुल शांत hi नहीं रहती है साली कुट्टी... स्स्स्सस्स्स्स

आजा बेचू जल्दी... देख तेरी माँ का कितना बुरा हाल हो गया है...."

बाद बढ़ाते हुए निशा अपनी छूट को मसले जा रही थी.

"आज बेतु को अपना दूदू पिलाऊंगी. और उसका सारा दर्द भुला दूंगी. आज बेतु का चूस भी लुंगी... पता नहीं बेचारा अपने हाथ से कितनी बार करता होगा. अब तोह शादी के लिए मुझे लड़की भी देख लेना चाहिए पहले से... पर यदि शादी हो गयी तोह बेतु फिर मेरे साथ..

नई नई... अभी नहीं. में बेतु की साड़ी मुरादे पूरी करुँगी. उससे किसी भी चीज़ की कमी नहीं होने dungi...haa"

निशा झरने के बाद अपने आप से कहती है.

इधर राहुल और ऋचा अपना फोरप्ले ख़तम कर एक दूसरे से थोड़ी देरर बात कर होटल से बाहर आ जाते है और राहुल ऋचा को ड्राप कर देता है घर पर और फिर राहुल अपने घर की और चल देता है.

घर पहुँच के वो दुर्बल बजाता है तोह तानिया दरवाज़ा खोलती है.

दरवाज़ा खुलते hi राहुल तानिया के बगल से अंदर जाने लगता है की तभी पीछे से तानिया उससे आवाज़ देती है

"ोईई!!!"

राहुल : हम्म! क्या???

तानिया (गंभीर भाव से) : ये लड़कियों के परफ्यूम की खुशबू क्यों आ रही है तुझसे??

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आज के लिए इतना hi गाइस!!

थैंक्स!!
 
अपडेट - 47

अब तक...

घर पहुँच के वो दुर्बल बजाता है तोह तानिया दरवाज़ा खोलती है.

दरवाज़ा खुलते hi राहुल तानिया के बगल से अंदर जाने लगता है की तभी पीछे से तानिया उससे आवाज़ देती है

"ोईई!!!"

राहुल : हम्म! क्या???

तानिया (गंभीर भाव से) : ये लड़कियों के परफ्यूम की खुशबू क्यों आ रही है तुझसे??

अब आगे...

राहुल (मैं में) : यार इसकी प्रॉब्लम क्या है? बिलकुल पीछे hi पड़ गयी है...

इससे क्या इतनी चुल्ल मची है?

राहुल : woh...woh नई शर्ट ली है तोह इसलिए...

तानिया : हम्म? नई शर्ट से लेडीज परफ्यूम की फ्रेग्रेन्स कब से आने लगी? सही सही बता मुझे... कहा से आ रहा है इस वक़्त तू?

राहुल (गहरी सांस लेकर) : तानिया... लिसेन... में कही भी जाऊ, इस से तुम्हे क्या लेना देना?

तानिया (गुस्से में) : मुझे इस सब से क्या लेना देना? बहिन हु में तेरी... मेरा पूरा हक़ है ये जान ने का समझा?

घर में इतना बड़ा काण्ड हो गया सुबह सुबह और महाराज जी दिन भर से गायब है, घर में एक बहिन रहने के लिए आयी है तोह उससे चोरर के बाहर गुल छर्रे उड़ा रहे है... कभी अपनी रेस्पॉन्सिबिलिटीज़ पे भी ध्यान दे लिया करो

राहुल (गुस्से में) : क्या मतलब? सुबह सुबह जो हुआ वो तुम्हे भी पता है की मेरी उसमे कोई गलती नहीं थी. और रही बात मेरे जाने की तोह में माँ को बता के गया था की में देरर से आऊंगा. तुम क्या चाहती हो? की में सुबह की बात को लेकर hi बैठा राहु? और उसी के बारे में सोचु? इतना समय नहीं है मेरे पास

तानिया : हां हां! अपनी बहिन के लिए भी समय नहीं है, और कहा से होगा समय? पूरा समय तोह वो ऋचा के लिए गवा देते हो न...

राहुल (गुस्से में) : ऋचा के पीछे क्यों पड़ी हो तुम हाथ धोकर? और तुम लोगो को कल लेके तोह गया था न शॉपिंग पे??

तानिया : आज डेट जो थी तुम्हारी उस ऋचा के साथ, तभी तोह हमलोग को कल ले गया था तू... ताकि आज का प्लान खराब न हो तेरा

राहुल : हां तोह थी मेरी डेट उसके साथ. क्या करोगी?

राहुल के डायरेक्ट रिस्पांस से तानिया एक दम चुप हो गयी. उससे बिलकुल भी अच्छा नहीं लग रहा था की राहुल उससे घर में चोरर अपनी गफ ऋचा के साथ घूम रहा था. पर ऐसा क्यों था? ये वो खुद भी समझ नहीं पा रही थी. और सही तोह कह रहा था राहुल, तानिया को उसकी पर्सनल लाइफ से क्या लेना देना? तानिया का हक़ ज़रूर था राहुल पे, पर तानिया शायद इस हक़ के नाम पे और भी बोहत कुछ करवाने वाली थी.

तानिया : वो ... वो ...

राहुल को भी लगा की वो कुछ ज़्यादा hi ुचि आवाज़ में कह दिया. तानिया उस से 2 साल बड़ी थी. और राहुल का यु उस से बात करना सही नहीं था. ये लहज़ा वाक़ई गलत था. यहाँ उसकी गलती थी. जो की उसने क़ुबूल भी की. सुबह भी उसने तानिया पर चिल्ला दिया था. पर तानिया ने कभी भी पलट के ये नहीं कहा की वो बड़ी है तोह उससे 'आप' कहकर बात करो. कही न कही तानिया को ये बात बेहद पसंद आती थी की राहुल हमेशा उस से 'तुम' कर के बात करता था. इसका मतलब ये था की राहुल उससे अपने बराबर से देखता है. इस बात से तानिया अंदर hi अंदर बोहत खुश रहती थी.

पर इसका मतलब ये नहीं था की राहुल उससे पलट के जवाब दे और उसकी बिलकुल भी इज़्ज़त न करे. भले hi दोनों आपस में तुम कहकर बात करते थे पर इस से ये नहीं झुटला सकते की तानिया उम्र में 2 साल बड़ी थी राहुल से.

अब जब राहुल को ये एहसास हुआ की उसने वाक़ई गलत ढंग से तानिया से बात की और उसका रवैया भी बेहद hi गलत था और तानिया जब कुछ जवाब न दे पायी तोह उससे तानिया पे बोहत दया आ गयी. कभी भी तानिया उस से मैनर्स की डिमांड नहीं करती थी. वर्ण आजकल घरो में यदि आप अपनी बड़ी बहिन से ऐसे बात करो तोह आपकी बहिन तोह भले मान जाए पर आपके घरवाले hi आपको चार सुना देंगे.

पर तानिया ऐसी नहीं थी. और यही बात राहुल को बेहद अच्छी लगती थी. भले hi वो उससे 'चपडगंजु' कहके बुलाती थी पर बदले में कोई डिमांड भी नहीं करती थी. राहुल अपनी तरफ से फ्री था, वो भी जो चाहे उससे कह देता.

राहुल ने फौरन आगे बढ़कर तानिया को अपने सीने से लगा लिया. अचानक राहुल की इस हरकत से तानिया भौचक्की सी बस कड़ी रही उसकी बाहो में.





राहुल ने अपने एक हाथ उसके सर के पीछे रखा और एक हाथ उसकी पीठ पे सहलाया और कहा,

"माफ़ करदे दीदी!! में तुझ से कुछ ज़्यादा hi कठोर तरीके से बात किया आज. तूने सही कहा, तेरा मुझ पे पूरा हक़ है, माफ़ करदे"

राहुल के यु आज पहली बार अपने सीने से लगाने पर तानिया बेचारी के गाल सुर्ख लाल हो चुके थे. शर्म इतनी की पूछो मत. आज पहली बार था राहुल ने उससे दीदी कहकर पुकारा. पर पता नहीं क्यों तानिया को दीदी शब्द पसंद नहीं आया उतना. उससे ऐसा लगा जैसे राहुल उसके और खुदके बीच दूरी बना रहा है दीदी कहके. क्युकी उससे 'तुम, छिपकली' जैसे शब्दों की आदत जो पद चुकी थी. उससे लगा शायद राहुल नाराज़ है उस से.

तानिया (धीमी सी आवाज़ में) : तुम... तुम नाराज़ हो न मुझसे?

राहुल : पहले था... (और कस के बाहो में भरते हुए) पर अब नहीं हु.

तानिया : तोह फिर दीदी क्यों कहा?

राहुल : प्यार से कहा

तानिया : ओह्ह्ह!!

राहुल को आज तानिया पे बड़ा hi प्यार आ रहा था, एक तोह वैसे hi वो दिखने में आइटम बम थी, ऊपर से आज पहली बार उसकी बाहो में थी. आज बड़ी क्यूट लग रही थी. तानिया भी कस के राहुल की पीठ पर अपने हाथ बांधे हुए थी. बिलकुल वैसे जैसे एक बच्चा टेडी बेयर के गले लगता है.

राहुल (मैं में) : मुझे तोह पता hi नहीं था मेरी ये छिपकली इतनी क्यूट हो सकती है, omg!! कितनी क्यूट लग रही है मेरी बाहो में. आज पता चला, जब इस से प्यार से बेहवे करो तोह ये बिलकुल क्यूट सी बिल्ली की तरह बन्न जाती है हहै. मैं कर रहा है एक किसी कर दू.

और राहुल ये सोचते हुए आगे बढ़ के तानिया के गोर गोर गाल को मुँह में भरके एक प्यार भरी चुम्मी दे देता है.





उसके इतना करते ही तानिया की हलकी सी चीख निकल जाती है,

"आअह्ह्ह???"

इतनी ज़्यादा शर्म आ रही थी अभी तानिया को. पहली बार राहुल ने उसके गाल चूमे थे. उससे समझ नहीं आ रहा था की क्या करे, ऐसा लग रहा था की अभी किसी कोने में जा के छुप जाए वह. इतनी शर्म आ रही थी उससे.

तानिया को यु शर्माता देख और उससे ऐसे शॉक के मारे आवाज़ निकालते देख राहुल को और भी प्यार आ जाता है उसपे.

राहुल (मैं में) : omg!! ये! ये छिपकली इतनी क्यूट कैसे हो सकती है? वैसे तोह हर पल चिल्लाती रहती है. पर अब तोह ये भीगी बिल्ली की तरह मेरी बाहो में डुबकी पड़ी है. ऊपर से इसकी हाइट भी मुझसे छोटी है. ऐसा लग रहा है में इसका बड़ा भाई हु, न की ये मेरी बड़ी बहिन... हहै! इससे थोड़ा और परेशां करता हु

इतना सोच राहुल फिरसे तानिया के दूसरे गाल को मुँह में भरके चूम लेता है.





और फिरसे तानिया की वही हलकी सी चीख निकल जाती है. एक हमला काम था जो राहुल ने दूसरा हमला भी कर दिया? तानिया बेचारी शर्म के मारे बस अपना चेहरा राहुल के सीने में छुपाई हुई थी.

राहुल : अब छोड़ भी मुझे मेरी प्यारी बहना... भूख लग रही है. डैड भी आने वाले है, खाना खाना है मुझे

तानिया : तुम... तुम वो ऋचा के साथ क्यों गए थे आज?

राहुल : अरे बताया तोह, आज डेट थी न उसके साथ.

तानिया ये सुनते hi राहुल को धकेल देती है. हम्फ! डेट थी तोह फिर मेरे साथ क्यों रोमांस कर रहा है? क्यों किया मुझे किश? इसलिए की में मान जाउंगी? हम्फ!! बच्ची नहीं हु में... यही सोचते हुए वो राहुल से दूर हो जाती है और बनावटी गुस्से में कहती है,

"हां तोह जाओ उस ऋचा के पास. मेरे पास मत आओ हम्फ! मुझे तुमसे बात नई करनी"

ये कहते हुए अभी तानिया इतनी क्यूट लग रही थी न की कोई भी होता तोह उससे फौरन अपनी बाहो में भर लेता. उसका यु गाल फुला के बनावटी गुस्सा दिखाना...

हाय!! कसम से अलग hi आकर्षण था.

और राहुल ने भी वही किया! फौरन उससे अपनी बाहो में ले लिया. इस बार तानिया ने हल्का हल्का बनावटी विरोध किया उसकी बाहो से निकलने का पर निकली नहीं

राहुल : अरे I'm सॉरी न यार तानिया! अब तुम hi बताओ, यदि तुम्हारा बर्फ तुम्हारे साथ डेट पे चलने के लिए कहेगा तोह तुम क्या उससे मन कर डौगी?

तानिया : हम्फ!! ी don't हैवे अन्य बर्फ

राहुल (सुरप्रीसेड) : व्हाट?

पता नहीं क्यों पर राहुल को तानिया का जवाब सुन्न अंदर hi अंदर अच्छा सा लगा.

राहुल : मतलब पहले था?

तानिया : नहीं था. कभी नहीं बनाया.

राहुल : पर क्यों?

तानिया : क्युकी मुझे कोई पसंद नहीं आया

राहुल : अरे!! पर क्यों? तुम को देख के तोह लड़को की लाइन लग जाएगी

तानिया (ब्लश) : में इतनी सुन्दर हु?

राहुल : बहुत!

तानिया (खुसपुसाते हुए) : तोह फिर वह उस ऋचा के पीछे क्यों भागता है जब में यहाँ हु तोह?

राहुल : हम्म? कुछ कहा क्या?

तानिया : नहीं

राहुल : तोह बता न! तुझे कोई पसंद क्यों नहीं आया?

तानिया : नहीं आया पसंद! एक है लड़का जिससे में पसंद करने लगी हु पर वह भाव hi नहीं देता. और हमेशा गुस्से में hi बात करता है.

राहुल को ये सुन्न पता नहीं क्यों पर इस बार अच्छा नहीं लगा. तोह तानिया किसी को पसंद करने लगी है.

राहुल : फिर तोह कोई बेवक़ूफ़ hi होगा

तानिया (हस्ते हुए) : हां! वो बेवक़ूफ़ hi है हहै

राहुल : हां! तुम उसपे ध्यान मत दो, जब उससे तुम्हारी कोई क़द्र नहीं तोह भाड़ में जाए वह!

तानिया : नहीं!! वो मेरे लिए परवाह करता है. मुझे पता है, आज तोह देख भी लिया.

राहुल : हम्म? क्या मतलब? वो यहाँ आया था क्या?

तानिया : नहीं!!!

राहुल : फिर तुमने ऐसा क्यों कहा की तुमने देख भी लिया!??

तानिया : बस ऐसे ही!!

राहुल (उदास होते हुए) : ओह्ह्ह!!

तानिया : क्या हुआ?

राहुल : तुम्हे वो पसंद है तोह एक बार दिल से उससे प्रोपोज़ कर दो! वैसे तोह ये काम लड़के को करना चाहिए पर यदि तुम्हे इतना hi पसंद है तोह तुम एक बार कर दो यदि फिर भी वो तुम्हे नज़रअंदाज़ करे तोह उससे चोरर देना और कभी बात भी नहीं करना.

तानिया : मेरी हिम्मत नहीं होगी उससे प्रोपोज़ करने की

राहुल : क्यों?

तानिया : हम एक नहीं हो सकते! मुझे पता भी नहीं है की वो मुझे पसंद करता है या नहीं, पर मेरी परवाह ज़रूर करता है.

राहुल : क्या नाम है उसका?

तानिया (ब्लश) : में नहीं बता सकती

राहुल : ओह्ह्ह! Okay!!

अभी इनकी बातें और आगे बढ़ती इस से पहले hi बाहर गाडी का हॉर्न बजता है और राहुल के डैड राजेश भी घर आ जाते है.

नेहा और अंशु तोह ऊपर नेहा के hi कमरे में थी. और निशा अपने कमरे में थी, बाहर आते hi उसकी नज़र राहुल पे जाती है तोह वो उसके पास जाके उसके सर पर बड़े hi प्यार से हाथ फर्टी है और सुबह की बात भूल जाने के लिए कहती है. रात में सभी लोग खाना खाने लगते है सिवाए नेहा और अंशु के क्युकी नेहा नीचे नहीं आ रही थी, इसलिए अंशु ने अपनी और नेहा की थाली उसके रूम में hi ले गयी.

जब सब अपने अपने कमरे में चले गए तब निशा राजेश से बात करने के लिए बिस्तर पर बैठ जाती है.

निशा : ाजी सुनते हो आज क्या हुआ?

राजेश : क्या हुआ?

निशा : आज आपकी बेटी ने बहुत बड़ा काण्ड कर दिया!

राजेश (घबराकर) : क्या किया उसने?

फिर निशा सब कुछ राजेश को बता देती है जिससे सुन्न राजेश एकदम स्तब्ध रह जाता है और गुस्सा भी उसके सर पर चढ़ने लगता है. पर निशा उससे शांत करा देती है क्युकी सुबह उसने आलरेडी नेहा को एक फटकार लगा दी थी. अब ऐसे में राजेश कुछ करता तोह बात बिगड़ जाती, और राजेश तोह बिलकुल भी नेहा को कुछ नहीं कह सकता, ऐसा क्यों? इसकी वजह तोह निशा और राजेश hi जानते थे.

निशा : में आज बेतु के साथ सोऊंगी! सुबह की बात को लेकर उससे समझा भी दूंगी!

राजेश : हम्म! ठीक है! उस से कहना उस बात को दिल पे ना ले, और कोशिश करे की भूल जाए. तुम जाओ और समझा देना, में भी सो रहा हु अब.

निशा (मैं में) : मेरी तोह कोई परवाह hi नहीं है इन्हे. मेने सही किया. मेरा बेतु hi अब मेरा सहारा है. बेचारा सुबह की बात को लेकर परेशां हो रहा होगा. अभी खुश कर दूंगी उससे!

निशा अपने बैडरूम से निकल ऊपर राहुल के कमरे की और चल देती है और दरवाज़ा खोल अंदर आते hi भीतर से उससे लॉक कर देती है. दरवाज़ा लॉक होते hi उसकी आवाज़ से राहुल अपनी आँख खोल देखता है तोह पाटा है की निशा पर्पल निघ्त्य पहने उसके कमरे में आ चुकी है.

राहुल (बिस्तर पर उठके बैठते हुए) : माँ आप??

निशा (उसके बगल से बैठते हुए) : हां बेतु!! अभी भी उदास हो क्या?

राहुल : किस बात के लिए माँ?

निशा इतना सुन्न राहुल को बिस्तर पे लिटा देती है और खुद उसके बगल से टिक्क के बैठ जाती है

निशा : देखो तोह कितना भोला है मेरा बच्चा! अरे बेतु! में सुबह की बात कर रही थी.

राहुल : ओह्ह!! It's okay माँ! I'm फाइन!

निशा (राहुल के गालो पर हाथ फरते हुए) : I'm फाइन तोह तू हमेशा कहता रहता है. चाहे कितना भी बड़ी बात क्यों न हो जाए

राहुल : नहीं माँ! वाक़ई! I'm फाइन!

निशा आगे बढ़ राहुल के माथे को चुम लेती है, और फिर धीरे धीरे उसके पूरे चेहरे को चूमने लगती है, सिवाए होंठ के. शायद किसी मौके का वेट कर रही थी.

राहुल भी शांत लेता हुआ था कोई हरकत नहीं कर रहा था. अपनी माँ के होंठो से एक सौंधी सौंधी भीनी बिहनि सी खुशबु आ रही थी इस वक़्त उससे. शायद दिन में लिपस्टिक लगायी होगी माँ ने.

अभी राहुल अपनी आँखें बंद किये निशा के चुम्बनों को महसूस कर रहा था की इतने में उससे कपडे हिलने की आवाज़ आयी और उसने अपनी आँख खोल दी

बगल में निशा अपनी निघ्त्य जो सामने से दो क्लासेस की गठान बंधी हुई थी उससे खोल देती है और अंदर से अपने दोनों बड़े बड़े गोर गोर दूध बाहर निकाल देती है. और कमाल की बात ये थी की दूध नंगे थे. मतलब आज निशा ने ब्रा नहीं पहनी थी.

राहुल के लुंड महाराज भी जाग गए. सामने ऐसा सन पाके कोण न जाएगा?

निशा : ले बेतु! दूदू पी ले!





निशा ने ये कहते हुए राहुल के बाल सहलाना शुरू कर दिए, निशा तोह ऐसे पेश आ रही थी जैसे ुए सब उसके लिए नार्मल है. और ये काम वो रोज़ hi करती है. राहुल को भी पता नहीं क्या हो जाता है हमेशा अपनी माँ का सामना करते वक़्त. वो एकदम mantr-mugdh सा हो गया था और उसका मुँह अपने आप hi खुल गया. और उस नुकीले गुलाबी निप्पल को मुँह में भर लिया.





"Ssssssssssssssssssss आआआह्ह्ह्हह्ह्ह्हह"

एक सिसकी निशा के मुँह से निकल गयी.

अपनी गरमा गरम जीभ को वो निप्पल के इर्द गिर्द घुमा रहा था और होंठो से चूस के उसमे से दूध निकालने की कोशिश कर रहा था.





निशा : बोहत दिन से नहीं पिया न बेतु? स्स्सस्स्स्स अह्हह्ह्हम्मम्मम पी ले. पर तू पियेगा कैसे? दूदू में दूध तोह है hi नहीं. आआअह्हह्ह्ह्ह धीरे काट बेचू

तू इन्हे चूस लिया कर. क्युकी दूध तोह है नहीं...

राहुल बिना बोले बस दूध चूसने में लगा था और अपने एक हाथ से वो निशा को दूसरा दूध मसलने में लगा हुआ था.





"आआअह्ह्ह्हह उम्मम्मम्मम" की सिसकी निशा लगातार लिए जा रही थी. पर वो अपनी आवाज़ को धीमे रखना नहीं भूली थी. सामने के कमरे में नेहा अंशु और तानिया तीनो मौजूद थी. इसलिए शोर न करने का पूरा ध्यान था उससे.

निशा बड़े प्यार से राहुल के बालो में हाथ फेरर रही थी और उसका सर पकड़ के अपने दूध में घुसा रही थी. एक अजीब सा आनंद प्राप्त हो रहा था उससे.

निशा : बेतु!! Aahhhhhhhhhhh धीरे काट न... मेने मन थोड़ी न किया है काटने से... aahhhhhhhhhhh दूदू में घाव हो गया न यदि तोह फर तुझे पूरे दिन दूदू को अपने मुँह में डालकर रखना होगा, समझा??

राहुल (दूध चूसने की मस्ती में) : उम्मम्मम्म

निशा : क्या?? तू तैयार है? बेतु सबके सामने दाल के रखना होगा, पूरे एक दिन के लिए. तभी तोह मेरा घाव ठीक होएगा. बोल कर सकता है तू? आअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह

राहुल : उम्मम्मम्मम

निशा : देखो तोह हिम्मत इसकी! बेटू! अब तू अपने डैड के सामने मेरा दूध दिनभर मुँह में भरे रहेगा? इतनी दम??

राहुल : उम्मम्मम्मम

निशा : हाय रे!! मेरा बेचू! दिखा देना अपने डैड को भी की कैसे क़द्र करते है इनकी... याद रखना! घाव हुआ तोह तू दिनभर मुँह में भर में रखेगा इन्हे. तब कही जाके मेरा घाव ठीक होएगा

उम्मम्मम्मम्म...

राहुल : ह्म्म्मम्म्म्म

राहुल बेचारा तोह दूध चूसने में मग्न था, अभी अभी उसने अपनी माँ से क्या वादा कर दिया उससे खुद hi नहीं पता. ये उम्म्म उम्म्म के चक्कर में उसकी बाद में ाः ाः न निकल जाए.

निशा : मेरा बेचू! अब वादा कर दिया है तूने... चल काट ले जितना काटना है अब. मुझे तोह फायदा hi है... आअह्ह्ह्हह्ह्ह्हह!!!

निशा अभी आँखें बंद किया मस्ती में थी की इतने में उसकी नज़र राहुल के लोअर पर पड़ती है जिसमे बड़ा सा तम्बू बना हुआ था अभी...

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आज के लिए इतना hi गाइस!

नेक्स्ट अपडेट बोहत हॉट होने वाला है!

यहाँ पे इसलिए एन्ड किया क्युकी अपडेट फिर बोहत ज़्यादा बड़ा हो जाता. आज की लेंथ एक मेगा अपडेट के जितनी है और अगला अपडेट भी इतनी hi लेंथ का रहेगा. इसलिए मेने यहाँ पे समाप्त किआ

थैंक्स एंड don't फॉरगेट तो लिखे एंड पोस्ट योर व्यूज!
 
अपडेट - 48

अब तक...

राहुल बेचारा तोह दूध चूसने में मग्न था, अभी अभी उसने अपनी माँ से क्या वादा कर दिया उससे खुद hi नहीं पता. ये उम्म्म उम्म्म के चक्कर में उसकी बाद में ाः ाः न निकल जाए.

निशा : मेरा बेचू! अब वादा कर दिया है तूने... चल काट ले जितना काटना है अब. मुझे तोह फायदा hi है... आअह्ह्ह्हह्ह्ह्हह!!!

निशा अभी आँखें बंद किया मस्ती में थी की इतने में उसकी नज़र राहुल के लोअर पर पड़ती है जिसमे बड़ा सा तम्बू बना हुआ था अभी...

अब आगे...

निशा ने बिना देररि किये फौरन अपना हाथ आगे बढ़ा के राहुल के लोअर में बनने तम्बू पे रख दिया, हाथ लुंड पे लगते hi राहुल को एक झटका लगा और उसने अपना मुँह चलाना रोक दिया.

निशा को भी लगा की उसने शायद जल्दबाज़ी कर दी, पर वो अब पीछे नहीं हट सकती थी. कैसे भी कर के उससे आगे बढ़ना था.

निशा ने फौरन राहुल का लुंड सहलाना शुरू कर दिया और दूसरे हाथ से उसके सर पर दबाव बनाने लगी और अपना दूध उसके मुँह में ठूसने लगी. करीब 5 मिनट बाद राहुल भी मदहोशी में वापस से उसी हालत में आ गया और निशा का दूध चूसने लगा. नीचे बीच बीच में उसका लुंड हिचकोले मार रहा था जो निशा साफ़ साफ़ अपने हाथो से महसूस कर रही थी.

निशा (प्यार से) : देखो तोह! बेचू! तू कितनी तकलीफ में रहता है रे... तेरा लिंग कितना बड़ा हो गया है. पर तू चिंता मत कर, तेरी माँ इससे शांत कर देगी.

निशा को पता था आगे बढ़ने के लिए पहले उससे वैसा अट्मॉस्फेरे बनाना पड़ेगा जिसमे ये सब कुछ नार्मल लगे.

वर्ण राहुल विरोध कर सकता है. धीरे धीरे यु 5 - 10 मिनट गुज़र जाने के बाद निशा ने अपना हाथ जो की राहुल के तम्बू पे था उससे सरकाते हुए अंडरवियर के अंदर डायरेक्ट hi एक झटके में उसका लुंड पकड़ लिया.





नतीजा जैसा की निशा ने सोचा था बिलकुल वैसा hi हुआ, राहुल हड़बड़ा के फौरन उठ गया, "माँ..."

पर इस से पहले की राहुल विरोध कर पाटा निशा ने उसके होंठो पर अपनी ऊँगली रख दी,

"स्स्स्सह्ह्ह्ह! बेतु! तेरी माँ है न! यदि तेरे लिंग में दर्द है, तोह माँ उससे शांत कर देगी, तू चिंता मत कर! बस आराम कर. अपनी माँ से क्या छुपाना?"

बेहला फुसला कर निशा ने यहाँ बाज़ी मार ली थी, राहुल को वापस से अपने दूध चुसवाने में लगा कर निशा उसके लुंड पर अपने हाथ जमा चुकी थी और उस गरम रोड की तरह सख्त लुंड को पकड़ के वह झटके लगाने लगी.

"उम्मम्मम्मम" राहुल की मुँह से अब मज़े की सिसकिया निकलना चालु हो चुकी थी. कुछ शान बाद hi निशा ने धीरे से राहुल का लोअर और उसकी अंडरवियर उसकी जांघ तक नीचे कर दी. अब उसके सामने एक बड़ा मुस्सल गोरा लुंड था जिससे देख निशा mantra-mugdh सी बस उससे देखने लगी और हाथो में लेके हिलाने लगी.

निशा की नज़रे राहुल के लुंड पर hi थी, वो देख रही थी कैसे उसके हाथ हिलाने से लुंड के टोपे की चमड़ी ऊपर नीचे हो रही थी. ये देख निशा की छूट ने पानी चोरर्ण शुरू कर दिया था. उसका मक़सद था की वो राहुल को हॉर्नी कर दे, उससे चरम सीमा पे ले जाए और फिर वो अपने हाथ चलाना रोक देगी. ऐसे में राहुल hi सब कुछ बदले में कर देगा, ये निशा का प्लान था.

करीब 5 मिनट हाथो से हिलाने के बाद निशा धीरे धीरे लुंड की तरफ झुकने लगी, पर तिरछी नज़र से राहुल के चेहरे पर आ रहे हाव भाव को भी पढ़ रही थी. बिलकुल सावधानी बारात ते हुए वो लुंड की तरफ झुकती चली गयी और जब उसने देखा की राहुल उसके दूध चूसने में मग्न है, निशा ने फौरन अपना मुँह बड़ा खोल के लुंड को गप्प से अपने मुँह के अंदर ले लिया.









अचानक राहुल को एक गरम गीला एहसास सा हुआ अपने लुंड पर, और उससे समझने में देरर न लगी की उसका लुंड कोनसी गुफा में है. हड़बड़ा के वो एकदम से उठ गया पर निशा भी हार कहा मान ने वाली थी, उससे तोह पता था ऐसा कुछ होएगा, इसलिए उसने अपने नेक्स्ट स्टेप को अंजाम दिया.

अगले hi पल निशा ने ज़ोर ज़ोर से लुंड को मुँह में आगे पीछे लेना शुरू कर दिया, और नतीजा वही जैसा निशा ने अनुमान लगाया था, राहुल की मुँह से एक मादक "आआअह्हह्ह्ह्ह" निकली और उसकी आँखें बंद हो गयी और वो वापस बिस्तर पर गिर पड़ा. फिर भी अभी उससे होश था इतना की ये सब गलत है, इसलिए अपने लुंड की मर्ज़ी के विरोध जाते हुए उसने अपना हाथ निशा के सर पर रखा और उससे धकेलने लगा.

पर निशा तोह जैसे आज ठान के आयी थी की राहुल से चुदाई करवानी hi है

अपने होंठो में लुंड को और जोरर से जकड़ते हुए और जीभ चारो और घुमाते हुए उसने राहुल को थोड़ी hi देरर में पूरा वश में कर लिया.

अब राहुल के हाथ जो निशा को धकेल रहे थे वो अब उसका सर पकड़ के और लुंड पे दबाव बनाने लगे थे.





निशा को ये पता चलते hi अंदर hi अंदर बोहत ख़ुशी हुई की उसका ये स्टेप भी सफल रहा. पर अभी रास्ता लम्बा था. करीब 15 मिनट की चुसाई के बाद राहुल जोश की चरम सीमा पे पहुँच चूका था. अब उससे छूट चाहिए थी. निशा ने जैसे hi देखा की वो राहुल अब कभी भी जहर सकता है तोह उसने फौरन अपना मुँह बहार निकाल लिया.

अचानक ब्लोजॉब ृक्क जाने से राहुल भी होश में आ गया और अब उससे सब कुछ फिरसे आभास होने लगा की वो क्या कर रहा था.

"माँ... माँ ये आप" राहुल ने हाफति हुई आवाज़ में कहा.

"स्स्स्सह्ह्ह्ह!! मुझे पता है बेतु तू क्या सोच रहा है. यही न? की में तेरे साथ ये सब कैसे और क्यों कर रही हु? तोह सुन्न! में ये सब अपनी मर्ज़ी से कर रही हु समझा? में देखती हु की आजकल तू बड़ी तकलीफ में रहता है" निशा ने प्यार से राहुल के होंठो पर ऊँगली रखते हुए कहा.

राहुल : ke...kesi तकलीफ माँ!?

निशा (लुंड की तरफ इशारा करते हुए) : ये वाली तकलीफ

अपने लुंड की तरफ अपनी माँ का इशारा देख राहुल अपने लुंड को देखता है जो पूरे शबाब में तन्न के खड़ा हुआ था तोह वो एकदम से हड़बड़ा के अपने दोनों हाथो से उससे धक् लेता है. उसकी ये दशा देख निशा की हस्सी निकल जाती है.

निशा : अरे बीटा में इससे पहले hi देख चुकी हु, और तोह और अभी थोड़ी देरर पहले मुँह में भी लिया था.

राहुल बिना जवाब दिए अपनी नज़रे फेरर लेता है और अपना लोअर ऊपर चढाने लगता है. उसको ऐसा करते देख निशा समझ गयी थी की राहुल ऐम्बर्रेस्सेड है और बोहत ावक्वार्ड फील कर रहा है और सबसे बड़ी बात वो अभी निशा से नज़रे नहीं मिला पा रहा है.

ये एक बुरा संकेत था. यदि यहाँ से निशा ने अपनी पकड़ नहीं बनायीं तोह दोनों माँ बेटे के रिश्ते के बीच एक दरार आ जाएगी. इसलिए निशा ने तुरंत hi राहुल का हाथ पकड़ लिया

निशा (उदास) : बेचू मेरी बात सुनेगा?

राहुल (बिना नज़रे मिलाए) : no माँ... आप प्लीज जाइये!

निशा : तुझे मेरी कसम!

राहुल : फाइन! जल्दी कहिये.

राहुल इस वक़्त बोहत ावक्वार्ड फील कर रहा था. सामने उसकी माँ थी और उसका लुंड पूरा का पूरा एक्सपोज्ड था. यहाँ तक की निशा के थूक से उसका लुंड अभी भी गीला था.

निशा (सडली) : बेचू तुझे पता है. अब तेरे डैड मेरी बिलकुल परवाह नहीं करते.

राहुल (आश्चर्य से) : व्हाट?? माँ??

निशा : तूने सही सुना मेरे बच्चे! तेरे डैड अब मेरा बिलकुल भी ध्यान नहीं रखते.

राहुल : ये आप...!??

निशा : वो मुझे अब खुश नहीं रख पाते. मेरे साथ सम्भोग नहीं करते. अब क्या? कई महीनो से ऐसा hi चल रहा है. जब भी में उनसे कहती हु, वो मुझे धुत्कार देते है और ताल देते है. उन्हें मेरी कोई परवाह नहीं है अब बेतु.

निशा कहते हुए रोने लगती है, तोह राहुल आगे बढ़ के निशा को कंधे से पकड़ उससे चुप कराने लगता है. और अपना लुंड पहले लोअर के अंदर दाल लेता है. क्युकी वो उससे बोहत ावक्वार्ड लग रहा था.

राहुल : माँ प्लीज!! आप शांत हो जाइये. ये आप क्या कह रही हो? डैड आपके साथ...!?

निशा (रट हुए) : हां बेतु! अब वो मेरे साथ सम्भोग नहीं करते. आखिर एक महिला की भी तोह कैच ख्वाइश रहती है? उसके शरीर की भी तोह कुछ ख्वाइश रहती है? जिससे उसका मर्द पूरा करता है! बोल! बेतु! क्या में गलत कह रही हु?

राहुल : नहीं माँ! आप... आप एकदम ठीक कह रही है.

निशा (रट हुए) : तोह फिर वो मेरी ख्वाइश को पूरा क्यों नहीं करते बेतु? क्या में hi गलत हु? क्या में बेशरम हु? क्या इस उम्र में सब सम्भोग करना पाप है? बोल बेतु!

राहुल : na...nahi माँ!

निशा (रट हुए) : तोह फिर क्यों???

भले hi निशा रो रही थी पर अभी भी उसने अपनी आवाज़ पे नियंत्रण रखा हुआ था. वो जानती थी सामने के कमरे में सभी मौजूद है इसलिए वो धीमी आवाज़ में सुबक सुबक कर रो रही थी.

राहुल को अपनी माँ को रोटा देख खुद रोना आ जाता है और वो आगे बढ़ के निशा को अपने सीने से लगा लेता है.

राहुल : प्लीज आप रोइये मत माँ

निशा : तोह और क्या करू बीटा? एक औरत की प्यास तोह एक मर्द hi भुजा सकता है. उन्हें इस बात से कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता है. की में खुश भी हु या नहीं

राहुल : ऐसा नहीं है माँ. आप डैड को गलत समझ रही हो

निशा : तोह फिर क्यों नहीं करते वो मेरे साथ सम्भोग बोल? क्यों बार बार मुझे धुत्कार देते है? क्यों कह देते है मुझसे की इस उम्र में अब सम्भोग नहीं करते? बोल! क्यों??

राहुल : wo...wo...

क्या बोलता राहुल? उसके पास इन् सबका जवाब hi नहीं था. उससे तोह आज पता चला की उसके माँ और डैड की सेक्स लाइफ सही नहीं चल रही या यु कहे की चल hi नहीं रही है.

निशा : नहीं है न उत्तर तेरे पास?

राहुल की नज़रे नीचे झुक जाती है.

निशा : इसलिए में तेरे पास आयी थी. में कई दिन से देख रही थी की तुझे काफी तकलीफ रहती है. तेरा लिंग अधिकतर खड़ा रहता है. मेने सोचा था में तेरी माँ हु, तेरी मदद करुँगी और तू भी बदले में अपनी इस माँ की मदद कर देगा. पर सब गलत था. में शायद ज़्यादा सोचने लगी. और सही भी तोह है, में गलत काम जो कर रही थी. अपनी ख्वाइश को तेरे ऊपर डालने के लिए माफ़ी चाहती हु मेरे बच्चे, चलती हु अब

निशा इतना बोल अपने दूध को वापस से निघ्त्य के अंदर करने लगती है की इतने में राहुल उसके हाथ पकड़ लेता है.

निशा : बेतु???

राहुल : माँ! I'm रियली सॉरी! मेने आपकी हरकत को गलत वे में ट्रीट किया. मुझे नहीं पता था की आपके और डैड के बीच ये सब चल रहा है और डैड आपके साथ वो सब नहीं कर रहे... I'm रियली सॉरी माँ!

निशा : इसमें तेरी कोई गलती नहीं है बेतु, गलती तोह मेरी है जो में अपनी ज़रुरत से ज़्यादा ख्वाइश रखने लगी

एक स्वार्थी महिला. में अपनी प्यास चाहती तो बाहर किसी से भी बुझवा लेती... पर में ऐसा करने की अपने सपने में भी कभी नहीं सोच सकती. क्युकी मुझे मेरे संस्कारो पे पूरा भरोसा है. सोचा था तू मेरा बीटा है, तेरे लिए तोह कुछ भी कर सकती हु, और तू भी मेरे लिए कुछ भी कर सकता है. और मेरी ज़रुरत को तू पूरा कर सकता है. पर में गलत थी.

राहुल (रट हुए) : माँ! आप प्लीज ऐसा मत कहिये. में आपके लिए कुछ भी कर सकता हु. एक आप hi तोह हो जो मेरी सबसे ज़्यादा परवाह करती हो. आप hi तोह हो एक जो मुझपर कभी निर्भर नहीं रहती. आप hi तोह हो एक जिनपर में निर्भर रहता हु हमेशा. आप hi तोह हो एक जिन्होंने कभी मुझपर हाथ नहीं उठाया. आपके लिए तोह में अपनी जान भी दे सकता हु माँ!!

निशा (राहुल के ासु पोछते हुए) : चल चल! अब जोरर से मत बोल, बाहर सब बैठे है. तेरी जान कोण मांग रहा है और? चल हट अब जाने दे.

राहुल : no माँ!! बताइये आप. में आपके लिए सब कुछ कर सकता हु. पर आप कभी मुझसे नाराज़ मत होना प्लीज

निशा : तू नहीं कर सकता जो में चाहती हु बेतु!

राहुल : क्या?

निशा : नहीं! चल अब मुझे जाने दे.

राहुल (रट हुए) : नहीं माँ! प्लीज बताइये आपको मेरी कसम!

निशा : .......

राहुल : बोलिये!!!

निशा (गहरी सास लेकर) : में तेरे साथ सेक्स करना चाहती हु! कर सकता है अपनी माँ के साथ सेक्स?

राहुल : .......

निशा : बोल न?

राहुल : .......

निशा : ी क्नोव! (मुस्कुराते हुए) चल अब चलती हु. गुड नाईट!!

राहुल (निशा का हाथ पकड़ते हुए) : वेट माँ!!

निशा : अब क्या है बेतु!

राहुल : I'm... I'm...

निशा : ?????

राहुल : I'm...

निशा : हम्म???

राहुल : I'm रेडी माँ!!!!

निशा : ?????

राहुल : में ... आपके साथ... S...sex के लिए re..ready हु

*साइलेंस*

निशा (एकदम से) : क्या तू सच कह रहा है?

राहुल (नज़रे फेरर के) : ज... जी माँ

निशा : इधर देख मेरी तरफ.

राहुल : हम्म्म

निशा : देख बेतु! में तेरे साथ ज़बरदस्ती नहीं करना चाहती. तू मेरा लाडला है. मुझे पता है तेरे दिमाग में अभी क्या क्या सवाल उत्पन्न हो रहे है. अभी तू यही सोच रहा है की ये सब सही है या नहीं बोल? है न?

राहुल : *नॉड्स*

निशा : हां तोह उसका जवाब ये है की में खुद अपनी मर्ज़ी से तुझसे ये कह रही हु इसलिए ये सही है. अब तू सोच रहा होगा की समाज में लोग क्या सोचेंगे है न? बोल!!

राहुल : *नॉड्स*

निशा : हां तोह उसका जवाब ये है की समाज को कोण बता रहा है की तू और में सम्भोग कर रहे है. ये बात तोह सिर्फ तेरे और मेरे बीच रहेगी. एक बेटे होने के नाते तू मेरी प्यास बुझाएगा और एक माँ होने के नाते में तेरी प्यास. समाज को थोड़ी कुछ पता चलेगा. ना hi किसी घरवालों को.

राहुल : .....

निशा : अब तू ये सोच रहा होगा की सम्भोग के बाद हमारे रिश्ते का क्या होगा? बोल है न?

राहुल : *नॉड्स*

निशा : तोह इसका जवाब ये है की हम सिर्फ अकेले में hi ऐसे रहेंगे बेतु. में तेरी माँ हु और तू मेरा बीटा ये कभी नहीं बदलेगा. तू तोह मेरा लाडला hi रहेगा. बस जब जब मुझे ये शरीर की प्यास लगेगी तब तू मेरे साथ सम्भोग कर लेना और जब जब तुझे प्यास लगेगी तब भी तू मेरे साथ कर लेना. पर उसके बाद सब कुछ नार्मल. वही माँ और वही बीटा. समझा?

राहुल : जी माँ... समझ गया.

*साइलेंस*

निशा : फिर??

राहुल : I'm रेडी माँ! I'm सॉरी मेने आपकी प्रॉब्लम को इग्नोर किया. में आपकी हर तरह से हेल्प करूँगा.

निशा (रट हुए) : तेरा ये एहसान में ज़िन्दगी भर नहीं भूलूंगी मेरे बच्चे.

चल अब नीचे लेत जा, अब मुझे अपना काम करने दे और तू बस एन्जॉय कर.

निशा हल्का धक्का दे राहुल को लिटा देती है और उसका लुंड वापस से लोअर से निकाल लेती है जो थोड़ा मुरझा गया था. वापस से एक झटके में निशा अपने मुँह में ले लेती.





राहुल : आआह्ह्ह्ह माँ!!

निशा लुंड चूसते हुए अपने निघ्त्य भी पूरी उतार देती है. पर ये क्या? निशा में तोह पंतय भी नहीं पहनी हुई थी. पूरी तैयारी के साथ आयी थी लगता.

अब निशा पूरी नंगी राहुल का लिंग चूसने में लगी हुई थी. राहुल तोह बेचारा आँखें बंद किये हुए लेता था और सामने के इस अनोखे दृश्य से अनजान था.

थोड़ी देरर की चूसै के बाद निशा ने मुँह से लुंड निकाला और राहुल के कपडे उतारने लगी. जैसे ही राहुल की आँख खुली उसके सामने एक खूबसूरत गदराया हुआ गोरा जिस्म था जिससे देख उसके लुंड ने एक झटका मार दिया.

राहुल : बोहत ख़ूबसूरत...

निशा : हम्म??

राहुल : माँ आप बोहत ख़ूबसूरत हो!

निशा : अच्छा बीटा? जब कपडे पहनी रहती हु तब तोह ये बात नहीं कहता तू कभी! आज नंगा देख लिया तोह ख़ूबसूरत लग रही हु?

राहुल शर्म के मारे अपनी नज़रे फेरर लेता है जिसके कारण निशा की एक बार फिर हस्सी निकल जाती है.

निशा : क्यूट!!! अब समझ आया वो वंशिका तुझे कुटी क्यों बुलाती है और तुझसे कुछ ज़्यादा hi प्यार क्यों करती है

राहुल : हँ??

निशा : नई कुछ नहीं...

अब दोनों के दोनों वस्त्रहीन हो चुके थे

निशा ने भी प्यार से अपने गुप्तांग को उंगलियों से खोलते हुए राहुल को दिखाया और उससे इशारा किया. उसके गाल सुर्ख लाल थे.

राहुल ने झुक के निशा की छूट को सीधे अपने मुँह में भर लिया. इस हमले से निशा एकदम चौंक गयी. क्युकी आजतक राजेश ने कभी उसकी छूट नहीं छाती थी. बस हमेशा अपना लुंड hi चुसवाते थे और थूक लगा के पेल देते थे.





पर आज पहली बार किसी ने वह पे मुँह लगाया था. झटका तोह लग्न hi था.

"हैइए ssssssssssssssssssss"

निशा बुरी तरह चीखने hi वाली थी पर उसने टाइम पे कण्ट्रोल कर लिया और राहुल के बाल पकड़ लिए.

"बेतु क्या कर रहा है ये? Ssssssssss"

"अपनी माँ से प्यार! आप hi ने तोह कहा था न?"

"अरे वह कोण मुँह लगता है बीटा? गन्दी जगह है sssssssssss"

"तोह आपने भी तोह मेरा मुँह में लिया था न? वो गन्दा नहीं था? उम्मम्मम्म"

"आआह्ह्ह्हहससससससससस वो तोह तेरे डैड कहते है इसलिए मुझे आदत है"

"पर में तोह ऐसे hi करता हु माँ"

"ऐसा hi करता हु मतलब? ये तेरा पहली बार नहीं है?" निशा ने फौरन राहुल को रोकते हुए पूछा. उसकी आँखें अभी कुछ बड़ी बड़ी थी.

राहुल की गांड hi फट गयी. ू तेरी! ये क्या कह दिया!

"माँ!! वो... वो... यस! ये मेरा फर्स्ट टाइम नहीं है. आपको सब कुछ बाद में बताऊंगा. अभी आप लेटिए"

राहुल ने दुबारा छूट कक जोरर से चूसना स्टार्ट कर दिया

"आआह्हःस्स्सस्स!! ये मत सोचना की में आआह्ह्हहस्सस्स भूल... भूल जाउंगी... Sssssssssss" निशा ने कहा.

कुछ hi पालो में निशा भी जहर गयी और अब बारी थी असली काम करने की. राहुल ने फौरन लुंड को छूट पे घिसा पहले.

"ज़्यादा सोच मत बेतु. तू कुछ गलत नहीं कर रहा. बस दाल दे अब" निशा बोली

और राहुल ने फौरन एक झटका जोरर से दे मारा और झटका मारने के तुरंत बाद hi उसने निशा के होंठो को अपने होंठो में भर लिया.





"Uummmmpphhhhhhhhhh" निशा की हलकी चीख राहुल के मुँह में hi डब्ब गयी.

निशा की छूट वाक़ई खुली हुई थी. पर राहुल का लुंड पूरा का पूरा अंदर जा चूका था, शायद निशा की छूट राहुल के 3/4तह लुंड तक की hi थी. पर राहुल ने फोरस्फुल्ली धक्के के साथ उतना रास्ता भी चीयर दिया. इसकिये निशा की चींख निकल गयी. लुंड बच्चेदानी तक जा पहुचा था.





धीरे धीरे राहुल ने धक्के लगाना शुरू किया और निशा की मुँह में उसकी निघ्त्य ठूस दी ताकि आवाज़ न आए.





"उम्मम्मम ह्म्म्मम्म ुम्फःह्ह्ह" की हलकी हलकी आवाज़ कमरे में आने लगी.

थोड़ी देरर बाद राहुल ने ताबड़तोड़ धक्के लगाना शुरू कर दिए और उसकी भी सिसकिया निकालनी लगी पर वो कण्ट्रोल किया था की आवाज़ बाहर न जा पाए.

निशा बेचारी की तोह आँखें पलटने लगी थी. मस्ती में वो होश खो रही थी. कितने महीनो बाद आज उससे असली लुंड मिला था. ख़ुशी के मारे पागल हो गयी थी वह और सब कुछ भुला देना चाहती थी.

*फट फैट* की धक्को की आवाज़ से दोनों माँ बेटो को और भी ज़्यादा जोश चढ़ रहा था.

अभी सब कुछ ठीक चल रहा था की इतने में *खत खत* दरवाज़े खत खटाने की आवाज़ आ गयी बाहर से.

किसी ने राहुल के दरवाज़े पर दस्तक दे दी थी.

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आज के लिए इतना hi गाइस!!

शुक्रिया!!
 
अपडेट - 49

अब तक...

अभी सब कुछ ठीक चल रहा था की इतने में *खत खत* दरवाज़े खत कक्खटाने की आवाज़ आ आयी बाहर से.

किसी ने राहुल के दरवाज़े पर दस्तक दे दी थी.

अब आगे...

दूर नॉक होते hi दोनों माँ बेटे जैसे होश में आए और अपनी स्थिति पर गौर किया. किस हाल में थे दोनों? राहुल का लिंग उसकी माँ की योनि के अंदर घुसा हुआ था! साथ hi बाहर दरवाज़े पर कोई खड़ा हुआ था.

"सहित!!! अब क्या होगा?" राहुल का जी घबरा रहा था.

"k..kon??", निशा ने बड़ी hi हिम्मत करते हुए अपनी सांसें काबू कर एक आवाज़ लगायी.

"बुआ?? बुआ में हु!!" बहार से एक आवाज़ आयी जो किसी और की नहीं तानिया की hi थी.

"सहित!!! तानिया? तानिया यहाँ क्या कर रही है? यहाँ क्यों आयी है?" राहुल की समझ में नहीं आ रहा था की रात में तानिया उसके रूम की तरफ क्यों आयी? क्या काम हो सकता है उससे? अंशु यदि आती तोह फिर भी समझ सकता था राहुल पर रात के 11 बज रहे है और तानिया यहाँ उसके कमरे में क्यों आना चाह रही थी? कही उससे पता तोह नहीं चल गया? कही उसकी और उसकी माँ की आवाज़ बहार तोह नहीं चली गयी? नहीं! ऐसा नहीं हो सकता! राहुल खुद को शांत करने की कोशिश करने लगा. इस वक़्त उसकी धड़कन बोहत तेज़्ज़ हो गयी थी

घबराहट!!! बस यही शब्द अभी उसकी कंडीशन को पूरी तरह बया कर सकता था.

निशा : ta..taniya?? तुम यहाँ?

तानिया : wo...bua..aap राहुल के कमरे में अंदर...!?

निशा : haa...haa वो... आज बेतु मेरा बोहत परेशान था न इसलिए... इसलिए में उससे समझा रही थी की सुबह जो हुआ उससे दिल पे न ले... इसलिए आज में बेतु के साथ सोने आयी हु.

सोने आयी हु? यदि तानिया इस वक़्त अंदर का नज़ारा देख लेती तोह उसके पेर्रो टेल ज़मीन खिसक जाती. सोने आयी हु?? पर यहाँ तोह निशा अपनी छूट में बेटे का लुंड लिए पड़ी हुई थी. ऐसे कोण सोता है भाई? पर शायद निशा की नज़रो में आज उसका सबसे ख़ुशी का दिन था. क्युकी आज उससे वो मिल गया जिसकी उससे उम्मीद भी नहीं थी.





तानिया : ओह्ह्ह

निशा : पर तुम यहाँ इतनी रात गए बेतु के कमरे में क्यों आयी बीटा?

इस बार निशा ने अपनी चाल चली जिस से तानिया टेंशन में आ गयी. अब क्या जवाब दे? क्यों आयी थी वो यहाँ? राहुल के साथ सोने? जी हां!! सुबह की हुई हरकत के कारण नेहा का मूड ऑफ था इसलिए अंशु ने उसके साथ सोने का डीडे किया. पर नेहा का बीएड राहुल के बीएड से थोड़ा छोटा था. 2 लोग तोह आराम से सो जाते थे पर 3 लोग में थोड़ी दिक्कत जाती थी. इसलिए आज तानिया ने सोचा की वो चपडगंजु यानी की राहुल के साथ सोयेगी.

पर बेचारी की हिम्मत hi नहीं हो रही थी राहुल से नज़रे मिलाने की, थोड़ी देरर पहले राहुल ने उससे पहली बार अपने गले से लगाया था, पहली बार किसी लड़के के वो गले लगी थी. और वो भी राहुल के. पहली बार उसको किसी लड़के ने उसके गालो पर किश किया था, वो भी राहुल ने. उसके तोह दिल की घंटी तब से hi बज्ज रही थी. जब उसने देखा की अंशु और नेहा सोने लगे है तोह बड़ी हिम्मत करके वो राहुल के रूम की और चल दी. पर यहाँ भी बाद लक!

अंदर रूम में तोह उसकी बुआ निशा थी राहुल के साथ. कही न कही उससे आज पहली बार बुआ पे गुस्सा आ रहा था.

"हम्फ! आज पहली बार में उसके साथ सोने आयी और ये बुआ है की... पर अब क्या बोलू बुआ को? सभी जानते है की मेरी और राहुल की पटरी नहीं खाती. अब यदि बोलूंगी की में उसके साथ सोने आयी हु तोह बुआ क्या सोचेंगी? बुआ तोह चोर्रो, वो चपडगंजु क्या सोचेगा? नहीं!! मुझे शर्म आ रही है" तानिया के मैं में उथल पुथल मची हुई थी.

"तानिया?? क्या हुआ? बोलो? कुछ काम है क्या?" निशा ने एक बार फिरसे पुकारा.

"N..nahi बुआ! वो.. नेहु के बीएड पे 3 लोग में दिक्कत जाती है न इसलिए आयी थी में. मेने सोचा आज राहुल के साथ में सो जाती हु, क्या है न... वो नेहु को अंशु कंसोल करने के लिए आज वही सोयेगी इसलिए..."

तानिया ने सोचा चलो अब बता hi दो सच. जो होगा देखा जायेगा.

"व्हाट थे?? तानिया मेरे साथ सोने आयी थी? लगता है थोड़ी देरर पहले की किश का असर है... ः" मैं में राहुल ने सोचा.

"पर बीटा आज तोह तुम्हे वही सोना होगा क्युकी बेतु से कुछ इम्पोर्टेन्ट बात कर रही हु में" निशा ने थोड़ी बुलंद आवाज़ ने कहा जैसे अपना हक़ जाता रही हो की राहुल आज की रात मेरा है.

"Jii...jii में कर लुंगी मैनेज बुआ. कोई बात नहीं" बुझे मैं से तानिया भी वह से लौट गयी, आज पता नहीं क्यों उससे बुआ पे बोहत गुस्सा आ रहा था.

तानिया के जाते hi राहुल ने फिरसे अपनी स्थिति पे गौर किया! डर के मारे उसका लुंड सिकुड़ कर निशा की छूट से बाहर आ चूका था.

निशा : तोह बेतु इम्पोर्टेन्ट बात कर ले?

राहुल : हँ!??

अगले hi पल निशा ने छूट के रास से सना हुआ राहुल का लुंड मुँह में लिया और उससे चूसने लगी.





राहुल : आअह्ह्ह्हह्ह्ह्हह माँ!!

निशा : उम्मम्मम्म mmmmmmmmmmm मुझे अपने hi पानी का स्वाद चखने मिल गया हिहि

थोड़ी hi देरर में लुंड वापस अपने विकराल रूप में था और दुबारा से निशा की गुफा में लुप्त हो गया. राहुल निशा के मुँह पर हाथ रख ताबड़तोड़ धक्के लगाए जा रहा था.





हर्र धक्का निशा की गोरी मुलायम चूचियों को हिला के रख देता. हर्र धक्के के साथ उसके छूछे हिचकोले खा रहे थे.





और *उम्मम्मम्म ममममम* की आवाज़ कमरे में हो रही थी.





जब राहुल क्लाइमेक्स के करीब पहुँच गया तोह उसने इशारे में पूछा की कहा गिराना है पानी? तोह बदले में निशा ने अपने दोनों परर उसकी कमर में जकड के उससे अपनी योनि से चिपका लिया. राहुल भी अपनी माँ का संकेत समझ गया था और उसने कुछ और तेज़्ज़ धक्को के साथ hi अपना पानी अंदर hi छूट में चोरर दिया.

*Ummmmmmmmmmmmmm aaaahhhhhhhhhhh*

निशा : हायईएएए ummmmmmmmmmmmmmmm गरम... गरम है... बेतु का पानी... मेरे गर्भ के अंदर... हाईये ससससस

राहुल भी निशा के ऊपर उसके दूध पर पसर गया. दोनों की गरम सासें एक दूसरे को महसूस हो रही थी. दोनों जानते थे दोनों के बीच क्या हुआ.

थोड़ी देरर बाद राहुल ने निशा की छूट से अपना लुंड निकाला और बगल में लेत गया.

निशा ने फौरन उठ के राहुल का लुंड एक बार फिरसे अपने मुँह में भर लिया.





राहुल : माँ??

राहुल को ये उम्मीद नहीं थी की उसकी माँ उसके पानी से सना हुआ लुंड मुँह में ले लेंगी.

निशा : it's सेक्स मैनर्स बेतु!!

राहुल : सेक्स मैनर्स??

निशा : हां! सेक्स के बाद एक दूसरे के गुप्तांग को चाट के साफ़ करना. ये सेक्स मैनर्स होते है. सब लोग नहीं करते क्युकी कुछ लोगो को घिन आती है. पर ये प्यार को दर्शाता है. की में अपने बेतु से कितना प्यार करती हु.

निशा कहते हुए मुस्कुरा देती है और राहुल का सुपाड़ा चूस के उसके अंदर से पूरा पानी निकालने लगती है.





राहुल : ओह्ह! पर माँ ये... ये बेकार नहीं लगता? इसका टास्ते?

निशा : बेकार? नहीं ये तोह बोहत अनमोल है! कड़वा ज़रूर होता है पर थूक के साथ जब मुँह में थोड़ा मिला लो और इससे पतला कर लो तोह गुटकने में आसानी होती है.

राहुल : आपको तोह बोहत एक्सपीरियंस है माँ.

निशा : ये तेरी माँ ने न जाने कितना ज्ञान इखट्टा किया था अपनी शादी के पहले. सोचा था अपने पति के साथ ये सब करुँगी. पर इनको तोह फिक्र hi नहीं है न मेरी. मेरी साड़ी इच्छाएं दबी की दबी रह गयी. अंत में इन्होने वही किया जो उन्हें करना था. आज तू न होता तोह में तोह इस शरीर की आग में जल के राख जाती.

राहुल : माँ! ऐसा क्यों बोलती हो आप. अब में आपकी हेल्प तोह कर रहा हु न!?

निशा : हम्म! इसलिए आज बोहत खुश हु में.

राहुल : अब मेरी बारी माँ...

इतना बोल राहुल निशा की छूट को चाट कर साफ़ करने लगता है.









जब दोनों के गुप्तांग क्लीन हो जाते है तोह दोनों नंगे hi एक दूसरे से लिपट कर लेत जाते है.

निशा : चल अब बता!

राहुल : क्या?

निशा (राहुल की चीन पकड़ते हुए) : में भूली नहीं हु. ये तेरा फर्स्ट टाइम नहीं था न? चल बोल! किस के साथ कर के आया है तू? ऋचा के साथ?

राहुल : na...nahi माँ

निशा (शॉकेड) : क्या?? ऋचा नहीं तोह कोण है? बोल जल्दी!!

राहुल : माँ... कलम डाउन! शांत... Mein...mein बताता हु

निशा : हां तोह बोल जल्दी!

राहुल : वो... वो... मेरा फर्स्ट टाइम तनीषा दीदी के साथ था.

निशा (शॉकेड) : व्हाआआअत्ततत्तत्त?? वो तनीषा? तनीषा बेटी? जो तेरा ट्रीटमेंट करती है जब तुझे चोट लगती है तोह? वो सर्जन डॉक्टर?

राहुल (ऐम्बर्रेस्सेड) : j..jii माँ

निशा : हाईये दैयाआ!! तोह फिर ऋचा का क्या? नेहा क्या बोल रही थी सुबह? तुम और ऋचा क्लोज हो?

राहुल (ब्लश) : वो... वो ... she's माय गर्लफ्रेंड माँ!

निशा (शॉकेड) : हैं??????

*साइलेंस*

निशा थोड़ी देरर शांत रहने के बाद बोली,

निशा : तोह ऋचा तुम्हारी गफ है?

राहुल : यस माँ!

निशा : और तनीषा के साथ तुमने सेक्स किया है?

राहुल : हां माँ!

निशा : कितनी बार कर चुके हो उसके साथ?

राहुल (ब्लश) : एक hi बार

निशा : और बाकी बार?

राहुल : सेकंड टाइम अभी आपके साथ...

निशा (ब्लश) : हम्म्म!!

राहुल (ब्लश) : हम्म्म!!

निशा : तोह ऐसा क्यों है? मतलब ऋचा गफ है तोह तनीषा के साथ सेक्स कैसे?

राहुल : वो एक्चुअली! माँ तनीषा दीदी मुझसे बोहत प्यार करती थी. बूत उन्होंने अपनी फीलिंग्स को सामने नहीं आने दिया क्युकी वो मुझे अपना भाई कहती थी. पर एक दिन उनसे रहा नहीं गया और उन्होंने ने अपने प्यार का इज़हार कर दिया. में भी उनसे बोहत प्यार करता हु, इसलिए फ्लो फ्लो में हमने...

निशा : हम्म!! तोह फिर जब तनीषा के साथ सेक्स कर लिया और उस से प्यार करते हो तोह ऋचा को गफ क्यों बनाया?

राहुल : माँ एक्चुअली!! ऋचा ने मुझे प्रोपोज़ किया था, और उस वक़्त मेने उससे कोई रिप्लाई नहीं दिया था बूत आपको याद है न में उस दिन उससे बचाने के लिए गया था... ऐसा इसलिए क्युकी मुझे उसकी बोहत फिक्र थी. डर था की कही उससे खो न दू. तब पता चला की में उस से प्यार करने लगा हु. इसलिए... मेने उससे एक्सेप्ट कर लिया.

निशा (गहरी सास लेते हुए) : तोह उससे एक्सेप्ट करते वक़्त तुमने ये नहीं सोचा की तनीषा का क्या होगा? और ऋचा को तनीषा के बारे में जान कर क्या होगा?

राहुल : ऋचा को आलरेडी पता है माँ!

निशा (शॉकेड) : व्हाआआअत्ततत्तत्त?

राहुल (ऐम्बर्रेस्सेड) : हां माँ

निशा : और फिर भी वो तुम्हारे प्यार में पद गयी? हे bh@gw@@n!! क्या गेम खेल रहा है रे तू मेरे बेतु?

राहुल (ऐम्बर्रेस्सेड) : माँ! Don't तैसे में!! में वाक़ई दोनों से प्यार करता हु!

निशा : हम्म! तोह ऋचा के साथ कर चुके हो?

राहुल : अभी तक तोह नहीं माँ.

निशा : हम्म! मेने डीडे कर लिया है.

राहुल : क्या?

निशा : ऋचा का मुझे नहीं पता पर तनीषा तुम्हारी पत्नी बांके रहेगी!!

राहुल : हैं???

निशा : हैं क्या हैं? तुमने उसका उस से पहली बार ले लिया, इतनी कीमती चीज़ उसने तुम्हे देदी, तुमसे प्यार करती है, सुन्दर है, सुशील है, संस्कारी है, सर्जन है, भला क्या कमी है उसमे? देख राहुल! कान खोल के सुनले, खबरदार! जो तूने उससे धोका दिया और उसके साथ शादी से इंकार किया तोह. में उससे इस घर की बहु बना के रहूंगी! समझा!?

राहुल : j...jii

राहुल (मैं में) : लगता है मेरी नहीं चलने वाली. वैसे! अच्छी hi बात है! माँ तनीषा दीदी को सपोर्ट कर रही है तोह. में सब कुछ अब समय पर चोरर दूंगा. देखते है आगे क्या होता है.

राहुल निशा को अपने सीने में भींच लेता है और निशा की नंगी चूचिया राहुल की सुडोल छाती से बिध जाती है. दोनों नंगे जो थे बेडशीट के अंदर.

राहुल : कितनी सुर्प्रिसिंग बात है न माँ?

निशा : क्या?

राहुल : की मेरे और आपके बीच वो सब हुआ और उसके बाद भी में आपसे नोर्मल्ली बात कर पा रहा हु. बल्कि उल्टा मुझे ऐसा फील हो रहा है की मेरा और आपका रिलेशन और भी ज़्यादा मज़बूत हो गया है.

निशा : हम्म! ये बात तोह तूने एकदम सच कही बेतु. ऐसा इसलिए क्युकी मेने तुझे भटकने नहीं दिया. तुझे पूरी दिलासा देके मेने ये रिश्ता बनवाया. अब हमारे बीच कोई पर्दा नहीं है. आज तूने मुझे अपने बारे में कितनी बाते बता दी. क्या ये सब तू पहले बता पाटा? नहीं न!! पर अब तू be-jhijak सब कुछ मुझे बता सकता है मेरे लाडले के लिए मेरे से जो बन्न पड़ेगा सब करुँगी.

राहुल : हां माँ!

निशा : तू कही अब भी ये तोह नहीं सोच रहा न की ये सब नहीं होना चाहिए था?

राहुल : नहीं माँ! I'm वैरी हैप्पी!! आपको में ख़ुशी दे सकता हु ये जान के तोह में बोहत खुश हु. ी लव यू माँ!!

निशा : लव यू मेरा बच्चा!!

निशा आगे बढ़ राहुल के होंठ चुम लेती है. अब भला उनका रिलेशनशिप बोहत आगे बढ़ चूका था तोह भला छोटी मोती गाल की पप्पी से निशा का कहा पेट भरने वाला था?

अगली सुबह निशा जल्दी उठ गयी और अपने वस्त्र सही कर के वो राहुल को एक बार फिरसे चुम के उससे उठा के नीचे चली गयी.

ऐसे hi कुछ दिन बीत गए, पर एक चीज़ थी जो बदल गयी थी वो ये की अब निशा रोज़ राहुल के साथ hi सोती थी और तानिया का गुस्सा अंदर hi अंदर बढ़ता hi जा रहा था. उस दिन के बाद से उससे राहुल के साथ सही से बात करने का मौक़ा hi नहीं मिल पाटा था.

अंशु भी चाहती थी की वो राहुल के साथ रात में सोये पर निशा तोह जैसे राहुल के रूम में रात में क़ब्ज़ा कर लेती थी.

पूछते तोह यही बताती थी की राहुल इमोशनली स्टेबल नहीं है अभी और उससे रात में अपनी माँ के साथ सोना अच्छा लगता है. पर असल बात तोह ये थी की राहुल और निशा चुदाई करते थे और भरपूर आनंद उठाते थे. निशा की आग भी शांत हो जाती थी और राहुल भी रिलैक्स फील करता था. साथ hi साथ निशा उससे सेक्स के बारे में ज्ञान भी दे देती थी.

कुछ 6-7 दिन ऐसे hi बीत गए और अब त्यौहार का समय आ गया था. जी हां! दीपावली!! हिन्दुओ का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण त्यौहार!!

जहा त्यौहार की तैयारी में पूरे घर के लोग जुट जाते है और कई दिनों पहले से hi तैयारियां शुरू हो जाती है. कुछ ऐसा hi हाल हमारे राहुल के घर में भी था.

सभी लोग किसी न किसी काम में व्यस्त थे, इधर राहुल और उसके डैड कार में सामान निकाल रहे थे जो अभी अभी वो मार्किट से लेकर आए थे, आज धनतेरस जो था, अंशु और नेहा स्टाफ रूम से सफाई चालू कर के निशा का हाथ बताने किचन की सफाई में लगी हुई थी, तानिया अपने घर पर फ़ोन करके अपने डैड (राहुल के मां) से बात कर रही थी की वो दिवाली राहुल के घर में hi मनाएगी और उसके एग्जाम के रिजल्ट के बाद hi घर लौटेगी!

कुल मिलाके घर का पूरा वातावरण व्यस्त था. अभी राहुल ने सामान रखा hi था की उतने में उसके डैड ने कहा,

राजेश : अरे बीटा! लगे हाथ झालर (लेद लाइट्स) भी लगा देते है.

राहुल : जी डैड!!

राहुल फिर राजेश के साथ मिलकर टेरेस पे जाके लाइट्स लगा देता है और फिर नीचे आके उससे एक नया काम दे दिया जाता है.

निशा : बीटा!! तू तानिया को ले जा और उससे उसकी पसंद के कपडे दिलवा ले आ और तू भी अपनी पसंद के ले आ. में, नेहा और अंशु कल hi ले आए थे, सिर्फ बेचारी मेरी बच्ची तानिया रह गयी थी. कल बेचारी सो रही थी, काम करके थक गयी थी इसलिए मेने इससे उठाया नहीं. तुझे भी लेने hi है ,तोह इससे भी ले जा.

राहुल : जी माँ सूरे! कपड़ो से याद आया मुझे पटाखे भी लेने hi है. तोह वही से वो भी लेता आऊंगा.

निशा की बात सुन्न आज तानिया को इतना दिनों बाद अच्छा लग रहा था. क्युकी रोज़ रात को तोह वो राहुल के कमरे में क़ब्ज़ा कर लेती थी इसलिए बेचारी तानिया राहुल के साथ सो नहीं पाती थी. पर आज निशा ने जब राहुल और उससे अकेले भेजने के लिए बोलै तोह कही न कही तानिया का गुस्सा बुआ के लिए काम हो गया

तानिया : चले?

राहुल : हां चलो न!

राहुल कार निकालने लगता है, तभी तानिया उससे आवाज़ देती है,

तानिया : बाइक से नहीं चल रहे?

राहुल : पागल हो क्या? तुम्हारे और मेरे कपडे और फिर पटाखे कोण पकड़ेगा? कार इस बेटर!!

तानिया : ओह्ह!!

तानिया आके फिर उसके बगल वाली सीट पर बैठ जाती है,

राहुल (मैं में) : ये शायद मेरी इस घर में लास्ट दिवाली हो...

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आज के लिए इतना hi गाइस!

धन्यवाद्!! जैसा की आप सभी ने देखा,

राहुल और निशा का रिलेशन कैसे बना और बढ़ा, अब एक नई अर्च स्टार्ट हो चूका है, "दिवाली अर्च" ये अर्च मैनली राहुल, तानिया, अंशु, निशा और नेहा पे फोकस्ड रहेगा!! होप यू एंजोयेड थिस अपडेट!! :-)
 
अपडेट - 50

अब तक...

राहुल कार निकालने लगता है, तभी तानिया उससे आवाज़ देती है,

तानिया : बाइक से नहीं चल रहे?

राहुल : पागल हो क्या? तुम्हारे और मेरे कपडे और फिर पटाखे कोण पकड़ेगा? कार इस बेटर!!

तानिया : ओह्ह!!

तानिया आके फिर उसके बगल वाली सीट पर बैठ जाती है,

राहुल (मैं में) : ये शायद मेरी इस घर में लास्ट दिवाली हो...

अब आगे...

तानिया राहुल की बगल वाली सीट पर विराजमान होक लगातार राहुल के चेहरे को परख रही थी. अब इससे परखना कहेंगे या फिर tak-taki लगाए देखना, ये तोह तानिया hi जानती थी की वो क्या कर रही है.

"बाइक का बोलै तोह चपडगंजु कार निकाल लिया. हम्फ! सामने से लड़की मौक़ा दे रही है पर ये है की... स्टुपिड कही का", मैं में तानिया ने सोचा.

लगातार अपने ऊपर किसी की नज़र का एहसास होने पर राहुल ने भी पलट कर देखा तोह पाया तानिया उससे कॉन्टिनुआसली देखे जा रही है, जो की उससे बोहत ावक्वार्ड लगा.

"हम्म? क्या हुआ?" राहुल ने बदले में पूछा

तानिया : कुछ नहीं.

ऐसे hi थोड़ी देरर में दोनों शॉपिंग मॉल पहुँच गए और तानिया और राहुल अपने लिए ड्रेसेस देखने लगे. दिवाली का समय था, तोह तरदीवाल ड्रेसेस तोह बनती hi है बॉस. जहा एक तरफ राहुल ने एक भगवा कलर का कुरता पसंद किया तोह वही तानिया ने रेड कलर का सलवार सूट. दोनों के ऊपर कपडे बोहत hi जांच रहे थे.

तानिया से छुप कर राहुल ने एक सलवार सूट और खरीद लिया जो की वो अपनी तनीषा दीदी के लिए अस ा गिफ्ट देने की सोच रहा था.

राहुल (मैं में) : ऋचा के लिए भी लू क्या? में उससे कैसे भूल सकता हु. पर मेरे पास ज़्यादा पैसे नहीं है. सहित!! आज लग रहा है की मुझे पैसे कमाना कितना ज़रूरी हो गया है. आखिर मेरी बीवियों के लिए मुझे कुछ तोह करना होगा न? माफ़ करना रीचु, मेरे पास लिमिटेड पैसे hi है. आज तनीषा दीदी के लिए ले लेता हु. वो अकेली रहती है. I'm सूरे उन्होंने कोई शॉपिंग नहीं की होगी. शाम को जाके उन्हें दे आऊंगा ये गिफ्ट.

शॉपिंग से फुर्सत होने के बाद दोनों पटाखा लेने बाजार की तरफ चल देते है. दिवाली की खरीद दारी में भीड़ इतनी थी की पूछो मत. ऐसा लग रहा था जैसे सारे शहर के लोग बाहर निकल आए है और रोड पे घूम रे है. राहुल ने साइड में कार पार्क की और दोनों भाई बहिन पटाखे खरीदने चल दिए. भीड़ ज़्यादा होने के कारण कार्स अंदर अल्लोवेद नहीं थी. इसलिए राहुल को कार बाहर hi पार्क करनी पड़ी.

तानिया : कितनी भीड़ है yaha...ouch!!

एक धक्का आया और तानिया राहुल से बिछड़ सी गयी. पर उसी वक़्त एक हाथ उसकी तरफ बढ़ा और उसके हाथो को पकड़ लिया. राहुल ने तानिया का हाथ थाम उससे साथ रहने के लिए इशारा किया जैसे मानो वो तोह छोटी बच्ची है जो कभी भी भीड़ में बिछड़ सकती है

तानिया अपना जिस्म राहुल से चिपका चिपका के चल रही थी. पता नहीं क्यों पर उससे यु राहुल के साथ फिजिकल कांटेक्ट करना बोहत भा रहा था.

तानिया (मैं में) : मेरा हाथ उसके हाथो में है, omg!! उसकी सासें मेरे कंधो पर पद रही hai...hum कितने क्लोज है.

तानिया मैं में इन्ही सब बातो को सोच मंद मंद मुस्कुराए जा रही थी. उसका ध्यान पटाखों पर तोह बिलकुल भी नहीं था. खर्र जाता भी कैसे? वो खुद hi एक पटाखा जो थी. हहै!!

अभी राहुल ने इधर पटाखे लिए hi थे की इतने में बगल वाली दूकान में शोरगुल सा मच गया. सभी लोग एक घेरा बना के खड़े हो गए.

तानिया : वह क्या हो रहा है?

राहुल : चल के देखना पड़ेगा.

वह जब दोनों पहुचे तोह देखा की एक बुज़ुर्ग सा व्यक्ति नीचे गिरा पड़ा है और उसके कपडे भी फत्ते हुए है. और एक छोटी क्यूट सी बच्ची करीब 10-11 साल की उस बुज़ुर्ग को उठाने की कोशिश कर रही थी और रोये जा रही थी.

तानिया : वो बच्ची रो क्यों रही है?

राहुल (चिल्ला के) : अरे भाईसाहब क्या हो गया?

तभी एक दुकानवाला राहुल को देख उससे जवाब देता है,

"अरे बीटा! ये भूडो यहाँ आके चोरी कर रहा था. पैसे नहीं है पटाखे खरीदने के और मुँह उठा के चले आए पैसे नहीं है तोह चोरी करोगे मतलब?"

राहुल इतना सुन्न आगे बढ़ उस बुज़ुर्ग को उठाता है,

"दादा जी! इन्होने जो कहा क्या वो सच है?"

बदले में वो बुज़ुर्ग कुछ नहीं कहता, उसकी नज़रे नीचे की और झुक जाती है

मतलब साफ़ था! उसने सच क़ुबूल कर लिया की वो चोरी कर रहा था.

राहुल : क्या आप बता सकते है की आपने चोरी क्यों की?

दुकानवाला : अरे बीटा इनके मुँह मत लगो, ये लातो के भूत बातो से नहीं मानते है. तुम जाओ, इन् जैसे लोगो को हम अच्छा सबक़ सिखाते है.

राहुल : अंकल प्लीज एक मिनट!

बुज़ुर्ग : बीटा! भौ सही कह रहो है!

हम hi चोरी किया!

राहुल : क्यों?

बुज़ुर्ग (बिलखते हुए) : पैसा नहीं है बीटा! कोई ठिकाना नहीं है! रोज़ इधर से उधर भटकता हु में इस बच्ची के साथ. मेरी पोती है ये. रोमा!! इसके माँ बाप हादसे में गुज़र गए बोहत पहले... सब कुछ लूट गया. में बर्बाद हो गया. कहा जाऊ इसको लेके? सोचा दिवाली है, बच्ची को एक पटाखा तोह दिला दू, पर पैसे नहीं थे, इसलिए...

अब जहा तक राहुल की समझ में आ चूका था की माजरा क्या है. मतलब बच्ची के माँ बाप हादसे में कई साल पहले गुज़र गए जो की घर के खर्च को चलाते थे. और उनके जाने के बाद इनको किराए के घर से बाहर निकाल दिया गया क्युकी बुज़ुर्ग आदमी से किराये की उम्मीद कर भी कैसे सकता हो आप? धीरे धीरे स्थिति ये आ गयी की सड़क पे आ गए ये दोनों दादा और उसकी पोती. और दिवाली में बच्ची की ख़ुशी के लिए दादा जी ने चोरी की क्युकी उनके पास और कोई चारा hi नहीं था. हालात आपको क्या क्या करने के लिए मजबूर कर देता है.

ऐसा नहीं था की राहुल जिस भी गरीब को देखता उसकी मदद कर देता. पर आज राहुल का दिल बोहत उदास हो गया. कारण थी वो बच्ची. इतनी सुन्दर और चंचल की पूछो मत. उसको देख राहुल का दिल पसीज गया और उसने फौरन रोटी हुई उस बच्ची के सर पर हाथ फेरा तोह बदले में बच्ची ने चंचल आँखों से राहुल के चेहरे को देखा.

राहुल (मैं में) : कितनी क्यूट है. बेचारी!! पर इसकी में थोड़ी मदद तोह कर hi सकता हु.

राहुल ने धीरे से हज़ार रूपए बुज़ुर्ग के कुर्ते के जेब में दाल दिए. राहुल जो ये सोच रहा था की उसने सबकी नज़रो से बच के ये काम कर दिया है तोह वो गलत था. दो आँखों ने सब कुछ देख लिया था की क्या हुआ.

राहुल : बीटा! आप जाओ अपने दादा जी को दूसरी दूकान लेके और वह से पटाखे लेना.

बच्ची : पर भैया दादू के पास पैसे नहीं है

राहुल : अरे तुम्हारे दादू झूट बोलते है. अभी दूसरी दूकान जाओ और वह अपने दादू से कहना अपनी जेब से पैसे निकाले. फिर देखना कैसे पैसे आ जाते है.

बुज़ुर्ग : बीटा तुम दोनों का बात करात हो?

राहुल : कुछ नहीं दादा जी! आपके पास ठिकाना नहीं है न? में आपको एक एड्रेस देता हु आप वह जाना और सिर्फ इतना कहना की आपको राहुल ने भेजा है और आपको रहने के लिए घर चाहिए.

बुज़ुर्ग : bh@gw@@n तुम्हारा भला करे बीटा! भला करे!

और वो बुज़ुर्ग और बच्ची भी फिर चले गए. राहुल ने एड्रेस किसी और का नहीं बल्कि मास्टर चेन का hi दिया था. उससे पता था वही है एक जो उसकी मदद कर सकते है. राहुल उनका शुक्र गुज़ार होता जा रहा था. राहुल लौट के जब तानिया के पास आया तोह देखा की वो कुछ अजीब निगाहो से उससे घर रही थी. आँखों में एक अजीब सी चमक थी. उसने देखा की तानिया के होंठ कुछ कहने के लिए खुले पर अचानक फिर बंद हो गए.

राहुल : चले?

तानिया : हम्म!

दोनों कार में बैठ सारा सामान खरीद वापस घर की और निकल पड़े.

बीचे रस्ते में तानिया ने आखिर उस बात का ज़िक्र कर hi दिया.

तानिया : मेने देखा!

राहुल : हँ?

तानिया : ी सॉ आईटी!

राहुल : सॉ व्हाट?

तानिया : तुमने उस बुज़ुर्ग के कुर्ते में पैसे डाले थे न? क्यों?

राहुल : ओह्ह्ह वो बात... हां! क्युकी... तुमने देखा नहीं उस बच्ची को? कितनी मासूम थी वह. यदि मेरे थोड़े पैसे देने से उससे ख़ुशी मिलती है तोह अच्छा hi है न?

तानिया : तुम्हे बच्चे पसंद है?

राहुल : बहुत!! क्यूट बच्चे ख़ास कर

तानिया (ब्लश) : तोह?

राहुल : क्या?

तानिया (ब्लश) : तुम क्या चाहोगे? एक लड़का या लड़की?

राहुल : व्हाट?

तानिया (ब्लश) : इडियट! शादी के बाद तुम्हारे भी तोह बच्चे होंगे न?

राहुल : में एक लड़का और एक लड़की चाहूंगा. पर पहले शादी तोह हो जाने दो मैडम.

शादी की बात सुन्न तानिया को एहसास होता है की राहुल की तोह शादी हो जाएगी और उसके बच्चे भी हो जाएंगे. पता नहीं क्यों पर उससे अपने दिल में दर्द सा महसूस हुआ, बिलकुल भी अच्छा नहीं लग रहा था उससे. पर आज राहुल को उस बुज़ुर्ग की हेल्प करते देख तानिया के मैं में एक बात तोह साफ़ हो गयी थी की राहुल और नेहा के बीच जो भी है उसमे राहुल पूरी तरह गलत नहीं है.

वर्ण जो भाई अपनी बहिन को मारना चाहता है वो भला एक बुज़ुर्ग व्यक्ति की मदद कैसे कर सकता है?

खर्र दोनों लोग घर पर पहुचे और सामान कार से निकाल अंदर लिविंग रूम में रखा. तानिया बाकी सभी के साथ बातो में व्यस्त हो गयी और राहुल भी अपने रूम में फ्रेश उप होक बाहर आ गया. उससे अब तनीषा के घर जाना था गिफ्ट देने.

निशा : कहा जा रहे हो बेतु?

राहुल : माँ! वो तनीषा दीदी के घर जा रहा हु, उन्होंने कोई शॉपिंग नहीं की होगी. इसलिए ये उनके लिए खरीद के लाया था.

निशा : हम्म! अपनी बीवी की इतनी फिक्र अभी से? क्या बात है!! और अपनी hi बीवी को दीदी कोण बोलता है भला?

राहुल (ब्लश) : माँ!! क्या आप भी... अभी मेरी वाइफ थोड़ी न है वो...

निशा : हां पर जल्द hi बन्न जाएगी. ाचा जा अब तू. और सुन्न! उस से कहना दिवाली हमारे साथ यहाँ घर पर मनाए. बेचारी अकेली रहती है. त्यौहार में साथ में रहेगी उससे अच्छा लगेगा. बस कुछ महीनो की बात है. फिर तोह तुम दोनों एक हो hi जाओगे.

राहुल : माँ... क्यों तंग कर रही हो आप मुझे? आपको पता है न? वो मुझसे 5 साल बड़ी है. उनकी आगे 26 है.

निशा : हां तोह? खबरदार जो तूने ये बहाना बना के उससे साइड में करने की कोशिश की तोह. आगे से कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता. कितनी सुन्दर है वो. और सिर्फ 5 साल का hi गैप है. कोई बड़ा गैप नहीं है.

राहुल : j...ji माँ.

निशा : हम्म! चल अब जा.

राहुल : j...jii

अभी राहुल जाने hi वाला था की इतने में निशा अपने चारो तरफ देखती है तोह लिविंग रूम में उन् दोनों के अलावा कोई नहीं था. तोह झटके से राहुल के होंठ आगे बढ़ के चुम लेती है.

इस हमले से राहुल सकपका जाता है.

निशा : अब जा.

और निशा अपनी बड़ी गांड मटकाते हुए राहुल को स्तबध चोरर किचन में चली जाती है.

बाहर निकल राहुल बाइक उठाता है और चल देता है तनीषा के घर की तरफ.

घर पॅहुचते hi राहुल दूर नॉक करता है और दूर खुलते hi तनीषा एक टॉप और शॉर्ट्स में दिखाई देती है. राहुल को यु अचानक देख वो एकदम से उसकी बाहो में कूद जाती है और किसी बिल्ली की तरह राहुल से कुड्लिंग करने लगती है.

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अगले hi पल वो राहुल को खींच के अंदर करती है और दूर लॉक करते hi पीछे मुड़के राहुल को जोरर से पकड़ के उसके होंठ चूमने लगती है.

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थोड़ी देरर की पैशनेट किसिंग ोे बाद...

तनीषा (बनावटी गुस्से में) : मेरी याद नहीं आती न अब?

राहुल : क्या बकवास कर रही हो आप. आप भी जानती हो में आपसे कितना प्यार करता हु.

तनीषा (मुस्कुरा कर) : हां वो तोह में जानती हु.

राहुल (गिफ्ट देते हुए) : वैसे! ये में आपके लिए लाया हु. माफ़ करना ज़्यादा महंगा नहीं है. देख के बताइये केसा है?

तनीषा राहुल के हाथ से पैकेट लेती है और खोल के देखती है तोह उसमे एक बहुत hi सुन्दर सा नेवी ब्लू कलर का सूट था. सलवार सूट देख तनीषा इतनी खुश हो जाती है की वो एकदम से राहुल को अपनी बाहो में भींच लेती है

तनीषा : तुमपर तोह गुस्सा भी नहीं हुआ जाता... ी लव यू सो मच!! मूवहः

राहुल : आपको पसंद आया?

तनीषा : बोहत ज़्यादा!!

राहुल : ज़्यादा महंगा नहीं है. मेरे पास अभी उतने पैसे थे नहीं. सॉरी फॉर तहत!

तनीषा (नाम आँखों से) : इडियट! तुम इतने प्यार से मेरे लिए लाए और मुझे पसंद न आए ऐसा कैसे हो सकता है? और रही बात प्राइस की तोह राहुल... हर्र महंगी चीज़ अच्छी नहीं होती. जो चीज़ दिल से दी जाई उसकी कीमत कही ज़्यादा होती है. मुझे ये बेहद पसंद आया, ी लव यू!!

राहुल : दी! ी लव यू तू!!

राहुल (मैं में) : कितनी प्यारी है मेरी तनीषा दी. कितनी भोली है. उन्हें पैसे से वाक़ई कोई मतलब नहीं. पर इसका मतलब ये नहीं की में इससे नज़र अंदाज़ करू. वंशु दी, अंशु, तनीषा दी, ऋचा, सभी मुझसे कितना प्यार करती है. पर क्या में उनके प्यार के लायक हु? मेरे पास खुदके पैसे तक नहीं है की में उन्हें दिवाली पर गिफ्ट दे सकू. कितना कमज़ोर हु में. आज मुझे अपनी औकात के बारे में पता चला. वाक़ई! पैसा बहुत ज़रूरी है. पर में हार नहीं मानूंगा दी, में इतना पैसा कमाऊंगा की आप सभी को हर्र ख़ुशी दे सकू.

राहुल : वेस दी!! माँ ने आपको दिवाली सेलिब्रेट करने के लिए घर पर बुलाया है.

तनीषा (खुश होकर) : क्या?? सच??

राहुल : हां!! आप आओगी न?

तनीषा (राहुल को हुग करते हुए) : बिलकुल माय डार्लिंग!!

राहुल (ब्लश) : .....

तनीषा : वैसे मेने भी एक फैसला लिया है.

राहुल : क्या?

तनीषा : में पीएचडी नहीं करुँगी!

राहुल (शॉकेड) : व्हाआआअत्ततत्तत्त?

तनीषा : तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मुझसे पलट कर ये पूछने की?

राहुल (शॉकेड) : हँ!???

तभी तनीषा राहुल को धक्का देके बीएड पर लिटा देती है और उसके ऊपर चढ़ जाती है और फिर उसकी आँखों में देखते हुए कहती है,

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तनीषा : पहले मुझे अपने प्यार में फसाया और फिर मेरे साथ सेक्स किया और फिर मुझे चोरर के इतने दिनों तक तुमने कॉल तक नहीं किया, तुम्हारी जरर हाज़िरी में मेरी क्या हालत हुई थी में hi जानती हु. और अब तुम मुझसे ये एक्सपेक्ट कर रहे हो की में पीएचडी करने 3 से 5 साल तुमसे दूर राहु?

राहुल (सुरपस्रिसद) : ेहः??

तनीषा (ब्लश) : तुम्हारा दिमाग तोह ठीक है न? पागल कर के रख दिया है तुमने मुझे. पहले जब तुम्हारे लिए मुझे प्यार वाली फीलिंग्स आयी थी तोह मेने डीडे किया था की तुमसे दूर रहूंगी पर पता नहीं तुम्हारे अंदर क्या जादू है की में खींची चली आयी और अपने प्यार का इज़हार तक कर दिया. और फिर तुम्हारे साथ वो रात!!! उफ़!! उसके बाद तोह मानो मुझे चेन्न hi नहीं है. तुम्हे पता है जिस दिन मेने तुम्हे कॉल लगाया था क्युकी तुम्हारा कोई कॉल नहीं आया था... उस दिन मेने 5 बार मस्टुर्बते किया था. पूरे 5 बार!! सिर्फ तुम्हे सोच कर. और अब तुम चाहते हो में तुमसे दूर राहु?

राहुल : d...diii? ये आप!??

तनीषा : शट उप!

और तनीषा राहुल की कल्लोर पकड़ उससे ज़ोरदार किश करने लगती है. जैसे मानो पिछले कई दिनों की भड़ास निकाल रही हो.





तनीषा को इतना एग्रेसिव देख राहुल के होश hi उड़द गए थे. क्या ये वही सीढ़ी साधी तनीषा दी है जो थोड़ी देरर पहले प्यार भरी बात कर रही थी और राहुल को गिफ्ट की अहमियत समझा रही थी?

वाक़ई! थोड़ी देरर पहले की तनीषा में और अभी की तनीषा में एकदम से ज़मीन आस्मां का अंतर आ गया था.

तनीषा : ी can't वेट एनीमोर माय डार्लिंग! Let's दो आईटी!

राहुल : wa...wait दी उम्फ!!

राहुल इस से पहले कुछ और कहता तनीषा ने उसके होंठ अपने होंठो के क़ब्ज़े में ले लिए थे. तनीषा कुछ ज़्यादा hi हॉर्नी लग रही थी. और फटाफट उसने अपना टॉप और शॉर्ट्स उतार लिए और अब वो केवल ब्लैक ब्रा और पंतय में थी.

उसने फिर फटाफट राहुल की शर्ट उतार के फेकि और उसका जीन्स नीचे सरकाया और उसपे कूद पड़ी. चुम्मा छाती की आवाज़ों से कमरा भर गया.

तनीषा : ओह! माय डार्लिंग! ी लव यू सोऊ मछःह!!

राहुल : आअह्ह्ह्ह डीई...

तनीषा राहुल के निप्पल को काट के चूसने लगती है. राहुल को आज पता चल गया था की लड़कियों के निप्पल्स को जब लड़के काट ते है तोह केसा फील होता है.





राहुल : आआह्ह दी... में अब आपको नहीं काटूंगा, प्लीज! मुझे मत काटो!

तनीषा : हिहि... अब पता चला न बच्चू! बूत ी लव आईटी! जब तुम मेरे निप्पल्स को काट ते ho...haayeee उफ्फ्फ

तनीषा अपना एक दूध हाथ में लेकर अपनी ऊँगली और अंगूठा मुँह में गिला कर अपने निप्पल मसलने लगती है और राहुल के निप्पल को चूस रही थी.

उसके बाद नीचे सरक कर तनीषा राहुल की अंडरवियर खींच के निकाल देती है. और एक झटके में लुंड के सुपाड़ी को अपने मुँह में भर लेती है.





मुँह में लुंड भरते ही उससे इतना आनंद मिला की वो सब कुछ भूल गयी. थोड़ी देरर यु hi मुँह में hi लुंड को राखी रही जैसे मानो उससे उसकी खोयी हुई कोई कीमती चीज़ मिल गयी हो. आँखों में अलग hi सुकून और चमक थी.

वाक़ई! एक हॉर्नी लड़की एक जंगली शेरनी के माफ़िक़ होती है मित्रो. यदि मर्दो को कोई सबसे ज़्यादा संतुष्ट कर सकता है तोह वो एक हॉर्नी लड़की hi होती है. क्युकी वो सब कुछ करने को तैयार रहती है और तोह और उनकी हर एक हरकत में इतना दम रहता है, इतना पैशन की आदमी जल्दी hi हल्का हो जाए.

इधर ऐसा लग रहा था मानो तनीषा राहुल को छोड़ रही हो. राहुल नीचे पड़ा हुआ अजीब सा मुँह बना रहा था. उसके चेहरे पर अलग अलग भाव आ रहे थे जो तनीषा अपनी नज़रे ऊपर कर के देख रही थी.

वो देख रही थी की कहा पर लुंड चूसने से राहुल को सबसे ज़्यादा आनंद आता है. वो ेरोगेनोस स्पॉट्स ढूंढ रही थी राहुल के शरीर में. उसने एक की खोज तोह कर hi ली थी पिछली बार, वो थी राहुल की बॉल्स उर्फ़ अंडकोष.

अब इस बार उसका मक़सद दूसरा स्पॉट ढूंढ़ना था. जो शायद उसने गेस कर लिया था की वो है राहुल के निप्पल्स.

और अब तीसरा ढूंढ़ना था. सेक्स का मतलब सिर्फ लुंड को छूट में डालना नहीं होता. असली सेक्स यही होता है की आप अपने पार्टनर को किस तरीके से ज़्यादा ज़्यादा खुश और संतुष्ट कर सकते हो.

ये बात अस ा डॉक्टर तनीषा अच्छी तरह समझती थी. उससे पता था उसकी शादी राहुल से नहीं होगी, पर वो किसी एक चीज़ में राहुल के लिए बेस्ट बन्न न चाहती है. ताकि राहुल कभी भी उससे भूले न. पर बेचारी तनीषा को क्या पता की उसकी शादी के लिए तोह राहुल की माँ आलरेडी तैयार हो चुकी है. क्या होगा जब उससे इस बात की खुशखबरी मिलेगी? क्या तनीषा एक्सेप्ट कर लेगी? या नहीं?

खर्र आते है दोनों राहुल और तनीषा पर तोह दोनों एक दूसरे के बदन चूमने चाटने में लगे हुए थे.

और ज़्यादा देररि न करते हुए राहुल ने लुंड अंदर छूट में पेल hi दिया.

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तनीषा : aaaahhhhhhhhhhh!! एस्सस! ओह्ह एस्सस!! इसी... आह्हः इसी दर्द का तोह इंतज़ार था मुझे.... माय डार्लिंग! Sssssssssss फ़क में हार्ड!!!! लव यू सोऊ मछःह!! आअह्ह्ह!! किश में....

और राहुल ताबड़तोड़ धक्के मारते हुए तनीषा को किश करने लगता है.

बीएड हिलने से *चररर चररर* आवाज़े आने लगी थी. चुदाई काफी ताबड़तोड़ थी.

राहुल : डीई.. aap...aah... आपकी कितनी टाइट है.

तनीषा : तुम्हे पसंद है न डार्लिंग? आअह्ह्ह!!! तुम्हारी hi है.... उफ्फ्फ्फफ्फ्फ़ एस्सस! एस्सस! गिव में तहत डिक!! सससस

और ये चुदाई यु hi चली और कमरे की आवाज़ें थमने में काफी समय लग गया. दोनों नंगे चुदाई के बाद एक दूसरे की बाहो में डेल हुए थे की इतने में राहुल का फ़ोन बजने लगा...

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आज के लिए इतना hi गाइस!!
 
अपडेट - 51

अब तक...

राहुल : डीई.. aap...aah... आपकी कितनी टाइट है.

तनीषा : तुम्हे पसंद है न डार्लिंग? आअह्ह्ह!!! तुम्हारी hi है.... उफ्फ्फ्फफ्फ्फ़ एस्सस! एस्सस! गिव में तहत डिक!! सससस

और ये चुदाई यु hi चली और कमरे की आवाज़ें थमने में काफी समय लग गया. दोनों नंगे चुदाई के बाद एक दूसरे की बाहो में डेल हुए थे की इतने में राहुल का फ़ोन बजने लगा...

अब आगे...

फ़ोन की रिंग सुनते ही दोनों एकदम से अपनी तन्द्रा से बाहर आए. दोनों अभी नग्न हालत में एक दूसरे से लिपटे हुए थे और अच्छी भली पिलो टॉक चल रही थी की इतने में एक फ़ोन ने सारा मूड डिस्टर्ब कर दिया.

तनीषा : डार्लिंग! ये क्या बात हुई. अपना फ़ोन साइलेंट में नहीं रख सकते थे?

तनीषा ने नाराज़गी जताते हुए कहा. तनीषा का यु राहुल को डार्लिंग बुलाना राहुल को उत्तेजित कर देता था हमेशा. धीरे धीरे अब राहुल को भी उसकी आदत लगने लगी थी. और उसने भी ठान लिया की वो अबसे तनीषा को दीदी कहकर नहीं पुकारेगा.

राहुल (स्माइल्स) : सॉरी माय डिअर तनीषा! आगे से ध्यान रखूँगा.

अपना नाम डायरेक्ट राहुल के मुँह से सुन्न तनीषा के गालो पर लाली छ गयी. ये पहली बार था की राहुल ने उसका नाम डायरेक्ट लिया था. मतलब साफ़ था की राहुल उसका और खुदका रिलेशनशिप सीरियस ले रहा है. जिस बात से तनीषा को बेहद ख़ुशी हुई और उसने शर्मा के अपना चेहरा राहुल की सुडोल छाती में छुपा दिया.

फ़ोन पर कॉलर नाम देखा तोह पाया राहुल की माँ निशा का कॉल था. राहुल ने कॉल उठाने से पहले एकबार तनीषा को शांत रहने का इशारा किया और बताया की माँ का फ़ोन है.

*पिक्स कॉल*

राहुल : हां माँ!

निशा : हां माँ के बच्चे! कबका बाहर गया है तू? गिफ्ट देने में इतना टाइम लगता है?

क्युकी राहुल तनीषा के साथ लिप्त हुआ था इसलिए आवाज़ तनीषा को भी सुनाई दे रही थी. निशा की आवाज़ सुन्न के वो दबी हुई हस्सी हस्सन लगी. राहुल की माँ को राहुल को डाट ते हुए सुन्न उससे बड़ा मज़ा आ रहा था.

राहुल : n...nahi माँ! बस निकल hi रहा हु.

निशा : निकल रहा हु? इतनी देरर से गिफ्ट दे रहा था? मुझे भी पता hi बेतु तू कोनसा गिफ्ट दे रहा है.

राहुल (ब्लश) : .....

निशा की बात सुन्न तनीषा के होश hi उड़द जाते है. वो स्तब्ध सी अपनी आँखें बड़ी किये राहुल को घूरने लगती है.

निशा : अब गिफ्ट दे दिया हो तोह जल्दी घर लौट आओ. घर में सभी डिनर करने वाले है. तुम्हारा वेट कर रहे है. 6 बजे का गया है पर बिलकुल होश hi नहीं है. इतना देरर क्या कर रहा है? मेरी बेटी की हालत hi पतली कर देगा क्या?

निशा को कोई आईडिया नहीं था की उसकी बात तनीषा भी सुन्न पा रही है, इसलिए वो राहुल की टांग खींचने के लिए ऐसे बात कर रही थी. पर इधर तोह तनीषा की सही में हालत hi पतली हो गयी थी, राहुल की वजह से नहीं बल्कि निशा की बात की वजह से.

राहुल : माँ माँ माँ... में... में आ रहा हु जस्ट, आप खाना लगाइये, में यु निकला और यु आया.

निशा : आराम से गाडी चलना, कोई ट्रैन नहीं छूती जा रही.

राहुल : j...jii माँ.

*कॉल एंड्स*

कॉल कट होते hi तनीषा प्रश्न भरी आँखों से राहुल को hi घूरे जा रही थी. चेहरे पे काफी टेंशन नज़र आ रही थी उसके.

तनीषा : y...ye सब क्या था राहुल?

राहुल : wo...wo...actually...She कनौस!

तनीषा : शी कनौस व्हाट?

राहुल (गहरी सांस लेकर) : उन्हें पता है की आप और में एक दूसरे के साथ सेक्स कर चुके है.

तनीषा (शॉकेड) : व्हाआआअत्ततत्तत्त?

तनीषा एकदम से राहुल से थोड़ा दूर हो जाती है और उसकी आँखों में ासु आ जाते है, अपना चेहरा वो हाथो से छुपा के रोने लगती है

तनीषा (रट हुए) : ये... ये क्या हो गया? कैसे? क्या सोचेंगी आंटी मेरे बारे में? की में कितनी गिरी हुई लड़की हु. जिसको भाई माना उसी के साथ...

तभी राहुल ज़ोर ज़ोर से हस्सन लगता है, उसकी हस्सी सुन्न तनीषा और शॉकेड हो जाती है.

तनीषा : तुम हस्स रहे हो? तुम्हारी माँ को सब पता चल गया और तुम हस्स रहे हो राहुल?

राहुल आगे बढ़ के तनीषा के निप्पल को काट लेता है





तनीषा : aaaahhhhhhhhhhh

राहुल : मेरी प्यारी तनीषा! घबराने की कोई बात नहीं.

तनीषा : तुम्हारा दिमाग तोह ठीक है न राहुल? तुम्हे अब भी मस्ती सूझ रही है?

राहुल : हाहाहा!! आप कितनी क्यूट लग रही हो दी... I'm सॉरी! मेरा मतलब है 'तनीषा'

तनीषा : राहुल तुम्हारी तबियत तोह ठीक है न?

राहुल : I'm अब्सोलुतेल्य फाइन. और आप को घबराने की कोई ज़रुरत नहीं है. दरअसल माँ जानती है मेरे और आपके रिलेशनशिप के बारे में और उन्हें इस से कोई ऐतराज़ नहीं है.

तनीषा : व्हाआआअत्ततत्तत्त? ये तुम क्या कह रहे हो राहुल?

राहुल : आपने सुना नहीं अभी फ़ोन पे? उन्होंने आपको 'मेरी बेटी' कहके पुकारा

तनीषा (शॉकेड) : हँ???

राहुल : जी है! माँ को पता है आप मुझसे और में आपसे प्यार करता हु. और उन्हें इस बात से कोई आपत्ति नहीं है. असली सरप्राइज तो माँ आपको दिवाली वाले दिन dengi...hehe!

तनीषा : तुम... क्या तुम सच कह रहे हो राहुल? क्या आंटी सब कुछ जानती है? क्या आंटी गुस्सा नहीं है? वो... वो मुझसे नाराज़ नहीं है? वो ऐसे कैसे राज़ी हो गयी? Bolo...bolo न राहुल!

राहुल : मेरी प्यारी तनीषा! मेने कहा न... घबराने की कोई बात नहीं है. तुम सिर्फ मेरी हो.

और राहुल आगे बढ़ के तनीषा के गुलाबी होंठ अपने मुँह में भर लेता है और जम्म के चूसने लगता है.

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तनीषा : उनममममममममम.....

तनीषा : यदि ऐसी बात है तोह ठीक है. ी लव यू डार्लिंग!! में सिर्फ और सिर्फ तुम्हारी हु. तुम सोच भी नहीं सकते में तुमसे कितना प्यार करती हु. ी लव यू थे मोस्ट डार्लिंग.

राहुल का लुंड जो अभी भी तनीषा की छूट में था वो एकदम से तनीषा की बात सुन्न उत्तेजित हो जाता है और झटका मार देता है.





राहुल : ी लव यू तू माय डिअर. चलो! अब मुझे जाना होगा वर्ण माँ मेरी वात लगा देंगी.

तनीषा : मत जाओ न डार्लिंग! मुझे चोरर के मत जाओ. आज यही ृक्क जाओ न डार्लिंग.

राहुल : ः! मेरी तनीषा! जाना ज़रूरी है. और वैसे भी, तुम दिवाली वाले दिन तोह आओगी hi मेरे यहाँ. अपने घर पर खूब प्यार करूँगा तुम्हे.

बुझे मैं से तनीषा राहुल से फिर दूर हो जाती है पर लुंड बहार आते hi वो लुंड को अपने मुँह में भर लेती है और उससे साफ़ करने लगती है. राहुल भी प्यार से उसके सर पर हाथ फरने लगता है.

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बदले में वो भी तनीषा की छूट साफ़ करने के लिए झुकता है पर तनीषा उससे मन कर देती है. वो चाह रही थी की आज वो ऐसे hi राहुल का मुठ अपनी छूट में लगे हुए hi सोए.

राहुल फिर तनीषा को good-bye किश देकर घर की तरफ चल देता है. घर पॅहुचते hi उससे डाइनिंग टेबल पे सभी लोग बैठे हुए दीखते है.

निशा : आ गया? इतनी देरर कैसे हो गयी?

राहुल : वो माँ...

निशा : चल अच्छा अब आके बैठ, खाना खा ले.

राहुल : j...jii.

सभी लोग फिर खाना खाना शुरू करते है.

इधर एक अलग घर में एक कमरे में एक ख़ूबसूरत लड़की तकिये से चिपक कर कुछ कुछ सोच रही थी और रोये जा रही थी और अपने hi आप से बातें कर रही थी.

"मुझे माफ़ कर दे कुटी! पर छोटी को हमारा राज़ पता है. में चाह कर भी तेरे पास नहीं आ सकती. कितने दिनों से तुझसे बात तक नहीं हुई मेरी. तू मुझे फ़ोन करता रहता है पर मेरी हिम्मत नहीं होती उठाने की. क्युकी तुझसे बात करुँगी तोह तुझे देखने का दिल करेगा. और में अपनी बहिन से फिरसे सामना नहीं करना चाहती. पता नहीं मेरे बारे में क्या सोच रही होगी मेरी छोटी बहिन. की में किसी गिरी हुई लड़की हु जो अपने hi भाई के साथ... पर कुछ भी हो, में हमेशा तुझसे hi प्यार करुँगी कुटी. कभी शादी नहीं करुँगी किसी और से. I'm सॉरी! में दिवाली में तुझसे मिलने नहीं आउंगी. मुझे भूल जाना कुटी. यही तुम्हारे लिए अच्छा होगा."

इधर राहुल का डिनर होते hi वो अपने रूम में आ गया और थोड़ी देरर बाद निशा भी आ गयी और रूम का दूर लॉक कर दिया और राहुल के साथ बिस्तर में घुस गयी.

निशा : तोह जनाब क्या कर रहे थे इतनी देरर?

राहुल (ब्लश) : माँ...

निशा : बोल भी दो... अब मुझसे क्या शर्माना.

राहुल : क्या माँ आप bhi...chorriye उस बात को. आपको पता तोह है न!?

निशा : हां पर में तेरे मुँह से सुन्न न चाहती हु.

राहुल (ब्लश) : वही जो आप और में करते है

तभी निशा राहुल की छाती में अपना एक हाथ दाल देती है और सहलाने लगती है.

निशा (नशीली अव्वाज़ में) : क्या करते है?

Rahul's ईविल मंद : साले सोच क्या रहा है? एक औरत सडके कर रही है और तू शर्मा रहा है? टूट पद उसपे! रगड़ दाल साली को. पता चल जाएगा उससे शेर से उलझने का क्या अंजाम होता है.

निशा तभी अपने दूसरा हाथ राहुल के लुंड पर रख देती है और राहुल जो अपने आप को काबू में किये हुआ था वो एकदम से कण्ट्रोल खो देता है और निशा पे टूट पड़ता है. निशा के गुलाबी होंठो को बेरहमी से राहुल चूसने और काटने लगता है.

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राहुल का मैं वैसे भी तनीषा के साथ नहीं भर पाया था, वो तनीषा के साथ और क्वालिटी टाइम स्पेंड करना चाहता था पर निशा के कॉल ने सब चौपट कर दिया था और अब निशा उससे सडके कर रही थी जिसके कारण राहुल का पूरा फ़्रस्ट्रेशन अब निशा पे निकल रहा था.

एक झटके में राहुल ने निशा को नंगी कर दिया और उसके पूरे शरीर को चूसने और चाटने लगा. निशा के गोर दूध राहुल पागलो की तरह जोरर से जोरर से मसल रहा था और काट रहा था.

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निशा : aaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh बेतुउउउउउ ये क्या कर रहा है तू, दर्द हो रहा है




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पर राहुल पर तोह जैसे भूत सवार था उसने अगले hi पल जोरर से निशा की छूट चाटना शुरू कर दिया. इस हमले से निशा खुद को रोक नहीं पायी और उसकी हलकी चीख निकल hi गयी. राहुल को किसी भी बात का होश नहीं था वो तोह जैसे पोस्सेस्सेड हो चूका था.

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अगले hi पल राहुल बिस्तर पर hi खड़ा हो गया और एक झटके में उसने अपने कपडे उतार दिए और अपना विकराल लुंड निशा के मुँह में ठूस दिया और निशा का मुँह छोड़ने लगा.

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निशा को सास लेने में दिक्कत होने लगी थी और लुंड उसकी हलक तक पहुँच के ठोकर मार रहा था पर फिर भी निशा ने राहुल को रोका नहीं और उसकी मर्ज़ी से hi चलती रही.

राहुल ने थोड़ी देरर निशा के मुँह को छोड़ने के बाद फौरन उससे धक्का देके लिटा दिया और छूट को अपने अंगूठे और एक ऊँगली की मदद से खोल कर लुंड एक hi झटके में अंदर जड़ तक पेल दिया जिसके कारण निशा की चींख निकल गयी पर उसने सही टाइम पे अपनी निघ्त्य मुँह में ले ली थी वर्ण सारा घर जाग जाता.

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राहुल ने फिर अपने ताबड़तोड़ धक्के शुरू कर दिए, फट फैट की आवाज़ आने लगी थी. लुंड इतनी जोरर से छूट से टकरा रहा था की निशा को दर्द होने लगा था पर एक अलग मज़ा भी आ रहा था. बीएड जोर जोर से हिल रहा था और चररर चर्रर्र की आवाज़ें आ रही थी.

निशा ने निघ्त्य अपने मुँह में ठूसी हुई थी पर उसके बाद भी उसकी सिसकिया निकले जा रही थी.

निशा (मैं में) : उईईईईई माआआ.... मर्डर गयीईइ.... कैसे छोड़ रहा है मेरा बीटा मुझे..... Aaaayiiiiiiiiii

ऐसे भी कोई छोड़ता है क्याआ? हाई पर क्या मज़ाआ आए रहा है... में हमेशा से हार्डकोर सेक्स करना चाहती thi....oucchhhhhhh ममममममियययययय आज तोह मेरी छूट पहात के रहेगी.....

राहुल ने फौरन निशा को कुटिया बना दिया और ज़ोर ज़ोर से धक्के मारने लगा. पता नहीं इस वक़्त राहुल पे कोण सा भूत सवार था पर वो चुदाई बोहत hi खतरनाक कर रहा था इस वक़्त. इधर निशा अपनी छूट में लुंड पिलवा के दर्द और मज़े के असीम आनंद में खोयी हुई थी पर उधर कोई और भी था जो दरवाज़े के कीहोल से ये खतरनाक चुदाई देख रहा था.

चुदाई ख़तम होते hi राहुल हफ्ते हुए निशा के स्तनों के ऊपर ढेर हो जाता है. लुंड अभी भी छूट में था और छूट में से सफ़ेद सफ़ेद मुठ बह रहा था. ज़ाहिर सी बात थी राहुल अंदर छूट में जहर चूका था. थोड़ी देरर बाद जब राहुल को होश आया की उसने ये क्या किया तोह उससे बड़ा गिलटी फील होने लगा.

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राहुल (रट हुए) : माँ ये मेने क्या कर दिया? आपके साथ इतने गंदे तरीके से मेने

राहुल खुद को इसलिए दोष दे रहा था क्युकी आज उसने दरिंदो की तरह अपनी माँ के साथ ऐसा किया.

निशा भी जानती थी की राहुल गिलटी फील कर रहा है और उसने जानबूझ के ये सब नहीं किया.

निशा : बेतु! It's okay! कोई बात नहीं

राहुल (रट हुए) : नहीं माँ... में बोहत बुरा हु.

निशा (प्यार से राहुल के सर पर हाथ फरते हुए) : बेतु! इसमें तेरी कोई गलती नहीं. और सच कहु? तोह मुझे बड़ा मज़ा आया आज, हलाकि दर्द हुआ पर मज़ा भी बोहत आया.

राहुल (सुरप्रीसेड) : हँ!?

निशा (मैं में) : बेतु ये सोच रहा होगा की उसने ये सब ठीक नहीं किया और वो सारा दोष अपने ऊपर दाल लेगा. कही भावनाओ में बहके वो खुद को कुछ कर न ले. नहीं नहीं... ऐसा हुआ तोह में तोह जीते जी मर जाउंगी. में ऐसा कभी नहीं होने दूंगी.

निशा : बेतु! क्या तुम ये सोच रहे हो की तुम्हारे ऐसा करने से हमारा रिश्ता बदल जाएगा और हम एक माँ बेटे काम एक आदमी औरत ज़्यादा लगेंगे?

राहुल : *नॉड्स*

तभी निशा आगे बढ़ के राहुल होंठ चूम लेती है.

निशा : क्या तुम्हे लगता है की मेरे ऐसा करने से मेरी ममता तुम्हारे लिए ख़तम हो गयी है?

राहुल ना में सर हिला देता है.

निशा के चेहरे पर मुस्कान आ जाती है. निशा फिर से आगे बढ़ राहुल का हाथ थाम उससे अपने स्तन पर रखवा देती है जोरर से अपना एक स्तन दबवा देती है. और फिर से राहुल से पूछती है,

निशा : क्या तुम्हे अब भी लगता है की मेरे ऐसा करने से मेरी ममता तुम्हारे लिए ख़तम हो गयी है?

एक बार फिरसे राहुल ना में सर हिला देता है और निशा फिरसे मुस्कुरा देती है. निशा फिर उठ के राहुल का लुंड अपनी छूट से निकालती है और लुंड को मुँह में 3 -4 बार भर के चूस के निकालती है, और फिरसे राहुल से पूछती है.

निशा : क्या अब भी तुम्हे लगता है की मेरी ममता तुम्हारे लिए ख़तम हो गयी है?

राहुल अपनी माँ की आँखों में देखता है जिसमे उसको अपने प्रति असीम प्यार नज़र आ रहा था. और एक बार फिरसे उसकी गर्दन ना में हिल जाती है.

निशा : तोह अब समझ आया तुझे?

राहुल : हँ?

निशा : मेरे बच्चे तू कितना भी कुछ क्यों न कर ले. तू मुझसे कितना भी क्यों न रूठ जाये. तेरी ये माँ हमेशा तुझसे प्यार करेगी. और तेरी ये माँ की ममता अपने बच्चो के लिए कभी ख़तम नहीं होएगी. तू तोह हमेशा hi मेरा लाडला रहेगा मेरे मुन्ना.

राहुल (रट हुए) : माँ...

निशा : मुझे पता है आज तू थोड़ा बहक गया था. यदि कोई वर्जिन लड़की होती मेरी जगह तोह पक्का बेहोश हो गयी होती. तूने तोह मेरी छूट भी सुजा दी है.

राहुल की नज़र अपने आप माँ की छूट पर चली जाती है जो लाल हो चुकी थी राहुल धीरे से उसपे हाथ फेरर देता है जिसके कारण निशा की हलकी सी ाः निकल जाती है.

राहुल : m...mom...

निशा : पर तुझे घबराने की कोई ज़रुरत नहीं है बेतु. जब भी तुझे लगे की तू आउट ऑफ़ कण्ट्रोल हो गया है, तेरी ये माँ हमेशा तेरी मदद करेगी. तू अब सब भूल जा okay? और मुझे भी आज अच्छा लगा. इसलिए तू दिल पे कुछ मत ले.

राहुल : हँ?

निशा (ब्लश) : मुझे तेरा ये हार्डकोर सेक्स पसंद आया. शायद मेरे आज कॉल करने से तुम्हारा मूड डिस्टर्ब हो गया था है न?

राहुल : *नॉड्स*

निशा : मुझे पता चल गया था. कोई बात नहीं मेरे बच्चे. तुझसे में कभी भी नाराज़ नहीं हो सकती. तुझसे प्यार जो करती हु इतना. आजा मेरे बाचे, अपनी माँ की बाहो में... आजा.

राहुल के ासु निकल पड़ते है और वो रट हुए अपनी माँ के गले लग जाता है.

राहुल : I'm सॉरी माँ... I'm सॉरी.

निशा : हमारे बीच no सॉरी एंड no थैंक्स.

दोनों माँ बेटे नंगे एक दूसरे की बाहो में लिपटे हुए सो जाते है.

अगली सुबह जब नाश्ता करने राहुल नीचे पोहचता है तोह तानिया उससे कुछ अजीब सी नज़रो से देख रही थी.

राहुल (मैं में) : ये ऐसे क्यों देख रही है मुझे?

तभी अंशु नेहा के रूम से बहार आके नीचे डाइनिंग टेबल पर राहुल के बगल से बैठ जाती है और राहुल को साइड से हुग कर लेती है.

अंशु : भईईई....

राहुल : अब तुझे क्या हुआ?

अंशु : कुछ भी नहीं. हहै!! वैसे नेहा कहा है चची?

अंशु उठ के निशा को भी हुग कर लेती है और उसके गाल पे पप्पी जड़ देती है

निशा : अरे मेरी प्यारी बेटी, आज तोह तू बड़ी खुश लग रही है क्या बात है?

अंशु : क्युकी कल दिवाली है न

निशा : हां हां! वैसे नेहा निकिता के घर गयी है. आती hi होगी.

इधर निकिता के घर में नेहा उसके रूम में थी और दोनों नाश्ता कर रही थी.

निकिता : आज इतने दिनों बाद याद आयी मैडम को मेरी?

नेहा : ओह्ह शट उप निक्की... तुझे भी पता है बीते दिन क्या हुआ. मेरे तोह हर्र दिन डाट खा खा कर गुज़रते है

निकिता : तोह तू हरकत भी तोह ऐसी करती है. अब इतना बड़ा इलज़ाम राहुल भैया पे लगाएगी तोह डाट तोह पड़ेगी hi न. वो तोह अच्छा हुआ तू सस्ते में निपट गयी.

नेहा : क्या मतलब?

निकिता : मतलब ये की तुझे सिर्फ थोड़ी डाट पड़ी, में होती तोह मुझे तोह घर से निकाल देते मेरे घरवाले. पर में तेरी तरह इतनी घटिया हरकत नहीं करती.

नेहा : ओह्ह्ह शट उप! तू भी कुछ काम नहीं है.

निकिता : अच्छा बोल! आज सुबह सुबह मेरे घर?

नेहा : हां! कल दिवाली है, तोह मेरे यहाँ आ जाना, साथ में सेलिब्रेट करेंगे.

निकिता : में आउंगी तोह दी भी आएंगी मेरे साथ.

नेहा : हां हां ले आना. वैसे भी ऋचा दीदी को देखते hi उस बास्टर्ड के मुँह से लार टपकने लगती है. अपनी गफ जो मानता है ऋचा दीदी को. मुझे तोह पता नहीं कैसे ऋचा दीदी ने उस बास्टर्ड को अपना बर्फ मान लिया?

निकिता : ऐसा मत बोल. दी बोहत खुश है राहुल भैया के साथ और में भी. मुझे राहुल भैया से कोई शिकायत नहीं है. वैसे!! तूने बर्फ के बारे में क्या सोचा है?

नेहा : तू जानती है मेरे स्टैंडर्ड्स कितने हाई है. यू क्नोव राइट?

निकिता : हां हां! और क्या थे तेरे वो स्टैंडर्ड्स??

नेहा : सबसे पहली बात लड़का हैंडसम और स्मार्ट होना चाहिए. डरपोक नहीं! अपनी गफ की रक्षा कर सके. चार्मिंग हो! और काफी स्ट्रांग हो. इतना स्ट्रांग की कोई दूसरा आदमी उसकी गफ के बारे में सोच भी न सके. लड़का इंटेलीजेंट हो काफी, मेरे से भी ज़्यादा. और मुलती टैलेंटेड हो. बड़ो का आदर सत्कार करे. छोटो को प्यार करे. पर्सनालिटी उसकी डैशिंग हो. केयरिंग हो. ऐसा लड़का चाहिए मुझे.

निकिता नेहा की बात सुन्न ज़ोर ज़ोर से हस्सन लगती है.

नेहा : व्हाट थे हेलल? हस्स क्यों रही है तू? कमीनी!!!

निकिता : हॉट! तू होगी कमीनी! तेरी बात पे हस्सू नहीं तोह क्या करू?

नेहा : क्या मतलब?

निकिता : ऐसा बर्फ तुझे मिलेगा कही? इतनी साड़ी खूबिया! बाप रे! तेरे स्टैंडर्ड्स आज के हिसाब से कुछ ज़्यादा hi हाई है.

नेहा : हां तोह? मुझे पाना इतना आसान थोड़ी है. में क्या कोई ऐसी वैसी लड़की हु जो किसी से भी पत् जाउंगी?

निकिता : वैसे एक लड़का है जिससे में जानती हु और उसमे ये साड़ी खुबिया है. पर अफ़सोस वो आलरेडी बूकेड हो चूका है हहै!

नेहा (सुरप्रीसेड) : हँ? कोण??

निकिता : तेरे बड़े भाई! राहुल भैया! और कोण? हहै!

*साइलेंस*

नेहा (चिल्लाते हुए) : व्हाट थे हेलल? वो बास्टर्ड!! तूने सोच भी कैसे लिया ऐसा?

निकिता : पर जो जो कंडीशंस तूने राखी राहुल भैया तोह उसमे सब में पास हो गए. वो हैंडसम और स्मार्ट है. ये बात सभी जानते है की वो कितने स्ट्रांग है, और कितने इंटेलीजेंट है, तुझसे भी ज़्यादा. रही बात मुलती टैलेंटेड की तोह वो तू भी जानती है की वो कितने टैलेंटेड है. वो बड़ो का आदर सत्कार करते है, छोटो से प्यार करते है. केयरिंग और डैशिंग दोनों hi है. तोह अब बोल? क्या वो तेरे क्राइटेरिया में फिट नहीं बैठ ते?

नेहा (चिल्ला कर) : वो... वो... No वे!! वो ऐसा नहीं है. वो छोटो से प्यार नहीं करता. क्या वो मुझे प्यार करता है? हरगिज़ नहीं!! वो तोह चाहता hi है की में मर्डर जाऊ. ब्लडी बास्टर्ड! उसके पास तोह पैसा तक नहीं है. वो... वो.. एक जाबलेस इंसान है. भिकारी!! बिना पैसे वाला.

निकिता : पर तूने अपने क्राइटेरिया में कही भी ये मेंशन नहीं किया की तेरा बर्फ पैसे वाला होना चाहिए. बोल? है न? मुझे पता है तुझे पैसे में कोई इंटरेस्ट नहीं है. वो लकी तेरे ऊपर न जाने कितने पैसे उड़ाया पर तूने कभी पैसो की लालच में आके कभी कुछ नहीं किया. तूने हमेशा से उससे इग्नोर hi मारा है. मतलब साफ़ है की तुझे पैसे से कोई मतलब नहीं है. बोल?

निकिता की बात सुन्न नेहा के मुँह पे ताला लग जाता है. ना चाहते हुए भी उसका ख़याल राहुल की तरफ चला जाता है और उसके दिमाग में उसकी छवि बन्न के दिखने लगती है.

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आज के लिए इतना hi गाइस!

नेक्स्ट अपडेट दिवाली वाली रात को पूरा दिखाएगा. में कोशिश करूँगा उस एक अपडेट में hi ये अर्च ख़तम कर दू, पर यदि नहीं हुआ तोह एक और अपडेट में तोह हो hi जाएगा.
 
अपडेट - 52

अब तक...

निकिता : पर तूने अपने क्राइटेरिया में कही भी ये मेंशन नहीं किया की तेरा बर्फ पैसे वाला होना चाहिए. बोल? है न? मुझे पता है तुझे पैसे में कोई इंटरेस्ट नहीं है. वो लकी तेरे ऊपर न जाने कितने पैसे उड़ाया पर तूने कभी पैसो की लालच में आके कभी कुछ नहीं किया. तूने हमेशा से उससे इग्नोर hi मारा है. मतलब साफ़ है की तुझे पैसे से कोई मतलब नहीं है. बोल?

निकिता की बात सुन्न नेहा के मुँह पे ताला लग जाता है. ना चाहते हुए भी उसका ख़याल राहुल की तरफ चला जाता है और उसके दिमाग में उसकी छवि बन्न के दिखने लगती है.

अब आगे...

न चाहते हुए भी नेहा के मैं में राहुल का चेहरा मंडराने लगा और पल भर के लिए उसके सामने अतीत का एक किस्सा सामने आ गया जहा वो और राहुल दोनों छोटी उम्र के थे और अपने घर के बाहर खेल रहे थे.

छोटी नेहा : भाई भाई... देखो न, आइस क्रीम वाला... मुझे आइस क्रीम कहानी है, प्लीज दिलाए दोऊ

राहुल : गुड़िया को आइस क्रीम खानी है?

छोटी नेहा : हां भाई!

तभी राहुल उसकी ऊँगली पकड़ के आइस क्रीम वाले के पास जाता है और उसकी मैं पसंद आइस क्रीम दिला देता है, खुश होक नेहा राहुल के गाल चुम लेती है.

नेहा : भाई थैंक youuu...muaaahhh!

नेहा आइस क्रीम खाने में लगी हुई थी और राहुल उससे छेड़ने के लिए आइस क्रीम ले लेता है और उससे डराते हुए उसकी आइस क्रीम खाने के लिए आगे बढ़ने लगता है,

नेहा (रट हुए) : भाई वो मेरी आइस क्रीम है

राहुल : हां तोह अपने भाई को नहीं खिलाओगी?

नेहा को आइस क्रीम शेयर करना पसंद नहीं था. फिर भी अपने भाई के लिए वो बुझे मैं से अपने हाथो से आइस क्रीम उसके मुँह की तरफ आगे कर बढ़ा देती है, राहुल को ये देख बड़ी हस्सी आती है की नेहा उस से कितना प्यार करती है. अपनी मैं पसंद आइस क्रीम की क़ुर्बानी तक देदी. यदि उसकी जगह कोई और होता तोह नेहा कभी भी उसको अपनी आइस क्रीम नहीं देती. राहुल hi था बस एक जिसके लिए नेहा सब क़ुर्बान कर देती थी.

तभी राहुल आगे बढ़ के उसके एक गाल को धीरे से नोचता है और उसके कान में कहता है,

"अभी नहीं गुड़िया! फिर कभी"

जब भी नेहा अपने मैं के विरोध में जाके बुझे हुए मैं से राहुल के लिए कोई काम करती थी, राहुल हमेशा उसके गाल नोचता और यही वाकया कह देता था.

अभी नेहा यही पुरानी यादें सोच रही थी की एक आवाज़ ने उससे होश में लाया,

"ोये!! किधर खो गयी!?"

सामने निकिता को बैठा देख नेहा को ध्यान आया की वो अतीत में चली गयी थी.

निकिता : क्या हुआ तुझे?

नेहा : ku..kuch नहीं!

निकिता : तोह बता? मेने सच कहा न? हहै!

नेहा : क्या?

निकिता : की राहुल भैया hi तेरे क्राइटेरिया में फिट बैठ रहे है

नेहा : शट उप निक्की! दुबारा ऐसा मज़ाक मत करना, यू गोत आईटी?

निकिता : अब मेने तोह वही कहा जो मेरे हिसाब से सच है

नेहा : I'm गोइंग नाउ!

और नेहा निकिता के घर से निकल आती है, मैं में उथल पुथल मची हुई थी

नेहा (मैं में) : ये निकिता की बच्ची! जो मैं में आया बोलती रहती है. आने दो कल इसको, चोरडूंगी नहीं में. वो बास्टर्ड और बर्फ मटेरियल? वैसे भी वो मेरा भाई है, सो... एक मिनट! ये में क्या कह रही हु? वो बास्टर्ड मेरा भाई हो hi नहीं सकता, भला में कबसे उससे अपना भाई मान ने लगी? ऐसा भाई होता है किसी का?... ये निकिता की बच्ची ने मेरा दिमाग खराब कर दिया है. व्हाट थे हेलल!! ी हेट तहत बास्टर्ड! मेरा बस चले तोह घर से बहार निकाल दू usse...hmph!

इधर घर पर राहुल नेवसपपेर पढ़ रहा था क्युकी थोड़ी देरर बाद उससे बाकी की शॉपिंग करने जो जाना था. समय बोहत काम था और कल hi दिवाली है. अभी बोहत सा ऐसा सामान था जो उससे लेने जाना था.

तभी घर में नेहा एंट्री मारती है, लिविंग रूम में सिर्फ राहुल था बाकी सभी निशा के साथ अंदर पकवान बनाने में उसकी मदद कर रहे थे.

और राजेश घर की शॉपिंग करने बहार गए हुए थे.

राहुल को लिविंग रूम में नेवसपपेर पढ़ते देख नेहा वही ृक्क जाती है और न चाहते हुए भी वो राहुल का चेहरा देखने लगती है और उसके कानो में निकिता की बातें गूंजने लगती है.

राहुल को आहात होते hi वो अपनी नज़रे ऊपर कर के देखता है तोह पाटा है की नेहा आ चुकी है और उससे hi घर रही है.

*साइलेंस*

दोनों एक दूसरे को चाँद सेकण्ड्स तक देखते रहते है.

नेहा (मैं में) : ये में क्या सोचने लगी? ी हेट हिम! हां! सब इसी का किया धरा है.

और तभी नेहा आगे बढ़ राहुल के हाथ से नेवसपपेर छिना के नीचे फेक देती है और गुस्से में जाने लगती है की पीछे से राहुल उसका हाथ पकड़ लेता है.

राहुल (गुस्से से देखते हुए) : उठा उससे

नेहा (गुस्से में) : चोरर मुझे!

राहुल : नेवसपपेर उठा!

नेहा : नहीं उठाउंगी, क्या कर लेगा?

तभी राहुल नेहा का हाथ मरोड़ देता है जिसके चलते नेहा की हलकी सी चींख निकल जाती है और राहुल उससे धकेलते हुए उसके साथ नेवसपपेर के पास पोहचता है और नेहा को झुका देता है.

राहुल : उठा जल्दी!

नेहा (चिल्लाते हुए) : चोरर मुझे! यू बास्टर्ड!!

तभी राहुल नेहा का हाथ और तेज़्ज़ मरोड़ देता है जिसके कारण एक बार फिर उसकी चींख निकल जाती है और आँखों में ासु आ जाते है.

राहुल : उठा अब!

नेहा (रट हुए) : यू बास्टर्ड!!! ी हेट यू! हेट यू...

अभी राहुल एक बार फिर से हाथ मोड़ने वाला था की इतने में नेहा नेवसपपेर उठाती है तोह राहुल उससे वापस टेबल की तरफ घसीट के ले जाता है जहा नेहा नेवसपपेर रख देती है. राहुल फिर नेहा के कान के करीब आता है और कहता है,

"ये मत सोचना की तुम जो चाहोगी हो जाएगा समझी? कुछ भी करलो, तुम हमेशा मुझसे नीचे hi रहोगी. I'll बे ऑलवेज बेटर थान यू. अहिंदा से कोई हरकत की न, तोह उसका जवाब तुम्हारी hi भाषा में तुम्हे दूंगा. यू गेट तहत?"

और राहुल उससे थोड़ा धक्का देके उससे चोरर देता है, नेहा पलटकर राहुल को खा जाने वाली नज़रो से देख रही थी

आँखें एकदम लाल, और आँखों में हलके हलके ासु. ऐसा लग रहा था देख के hi वो किसी की जान ले लेगी.

गुस्से में नेहा पलटकर चली जाती है ऊपर, उसके जाते hi अंशु बाहर आती है तोह राहुल उस से कहता है,

राहुल : अंशु... वंशु दीदी मेरा कॉल नहीं उठा रही है, में कई दिन से उन्हें तरय कर रहा हु, लगता है तुम्हारी बात से उन्हें बहुत बड़ा झटका लगा है और वो काफी दर्री हुई है, मुझे उनकी बहुत याद आ रही है. तुम उन्हें कॉल करके कहो न की दिवाली हमारे साथ यही पर मनाए.

अंशु : क्या? दीदी आप का कॉल नहीं उठा रही? लगता है वाक़ई मेने दी को कुछ ज़्यादा hi दर्रा दिया. ठीक है भाई में उन्हें बोल दूंगी.

फिर राहुल बाकी की शॉपिंग करने चला जाता है. इधर अंशु फौरन अपना फ़ोन निकाल के टेरेस पे चली जाती है और वंशु को कॉल लगाती है.

अंशु : hello?

वंशु : he..hello छोटी?

अंशु : दी आप भाई का कॉल क्यों नहीं उठा रही?

वंशु : हँ? वो.. वो.. वो साइलेंट पर था इसलिए.

अंशु : दी मुझे बेवक़ूफ़ समझा है क्या? और आप को घबराने की कोई ज़रुरत नहीं है.

वंशु : .........

अंशु : मेने आपके और भाई के बारे में किसी को कुछ नहीं बताया है. और मुझे आपसे और भाई से कोई शिकायत नहीं है

वंशु (शॉकेड) : हँ?

अंशु : सही सुना आपने! साड़ी बातें आपसे मिलकर करुँगी, फ़ोन पर नहीं. आप दिवाली के दिन यहाँ आ रही है. ठीक है?

वंशु : नहीं छोटी, में नहीं आ सकती

अंशु : में कुछ नहीं सुन्न न चाहती, आप यदि नहीं आयी तोह सोच लेना मुझसे बुरा कोई नहीं होगा. कल आप मुझे यहाँ पर दिखेंगी. That's आईटी. Bye bye! टेक केयर!!

वंशु : छोटी?.. hello? Hello?

और कॉल कट हो जाता है.

~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~

इधर एक बड़े से घर में एक लड़का सोफे पर बैठ के बड़े hi गुस्से में बात कर रहा था.

"व्हाट थे हेलल डैड??? में आखिर कब तक ऐसे hi घर में पड़ा सड़ता रहूँगा?"

आदमी : बीटा लकी! तू अभी घर में है इसलिए बचा हुआ है, वर्ण अभी सलाखों के पीछे होता

जी हां ये लकी hi है. राहुल का एकमात्र दुश्मन!

लकी : सहित!!

आदमी : तेरी हरकतों के कारण मेरी एक दारु की दूकान बंद होने को आ गयी है, पता नहीं किस से उलझ के आया है साला इतना दिमाग ख़राब कभी नहीं हुआ

लकी : किस से क्या डैड? वही हरामी राहुल है और कोण!! साला हर बार प्लान पे पानी फेरर देता है.

Lucky's डैड (लड़) : लौड़ा मेरा राहुल है. साले वो अकेले मुझे इतना नहीं हिला सकता. पक्के से उसका कोई सुप्पोर्टर है. साला पोलिसवाले तक कटरा रहे है मेरी मदद करने में.

लकी : डैड एक बार उसकी बहिन मिल जाए बस.

लड़ : अभी उलटी सीढ़ी हरकतों के बारे में सोचना भी मत. कुछ महीनो तक तुम कॉलेज नहीं जाओगे, सिर्फ एग्जाम देने जाओगे. वर्ण तुम्हे भी तुम्हारे दोस्त की तरह सलाखों के पीछे दाल देंगे.

~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~

ऐसे hi ये रात भी गुज़र गयी और आखिर वो दिन आ hi गया. जी हां! आज दिवाली है और राहुल के घर में बहुत hi ख़ुशी और उल्लास का माहौल है, आस पड़ोस में भी बोहत चहल पहल है, कुछ बच्चे तोह अभी से पटाखे फोड़ना स्टार्ट कर दिए. राहुल भी फ्रेश होक नीचे आता है तोह देखता है नाश्ता तैयार हो रहा है और किचन में तानिया और अंशु भी है निशा के साथ

राहुल पीछे से एकदम से अपनी माँ निशा को गले लगा लेता है, और उसके गालो पे पप्पी जड़ देता है,

"गुड मॉर्निंग माँ! एंड हैप्पी दिवाली!"





निशा भी पलटकर राहुल को गले लगाकर उसके गालो को भर के चूमती है और बदले में हैप्पी दिवाली विश कर देती है.

चूमना तोह वह होठो को चाहती थी पर उसने सही टाइम पर खुदको संभल लिया और अपने होंठ पीछे कर लिए थे पर उसकी ये हरकत किसी ने परख ली थी.

अगले hi पल अंशु ज़ोर से राहुल से चिपक गयी और उसके दो अनमोल रत्न राहुल की छाती में समा गए,

"हैप्पी दिवाली भईई!!"

"हैप्पी दिवाली अंशु!!", बदले में राहुल ने भी उसकी पीठ सहलाते हुए कहा.

अब बची थी तोह सिर्फ तानिया, जो अजीब नज़रो से राहुल को देख रही थी और फिर उसने शर्म के मारे अपनी नज़रे फेरर ली

थोड़ी देरर की शांति के बाद उससे लगा की राहुल शायद जा चूका है पर अचानक तानिया को पीछे से किसी ने जम्म के हुग कर लिया, और तानिया को पहचान ने में देरर न लगी की ये मज़बूत हाथ, ये मर्दानगी वाली महक, ये सुडोल छाती का एहसास, कोई और नहीं ये राहुल hi था.





उससे उम्मीद नहीं थी की राहुल उससे अपने आप से हुग करेगा, अंदर hi अंदर उससे बेहद ख़ुशी हो रही थी, उसके हाथ अपने आप hi राहुल के हाथ के ऊपर चले गए और उनको कास के कस लिया.

राहुल ने आगे बढ़ कर उसके कान में कहा,

"हैप्पी दिवाली तानिया!!"

और तुरंत hi उसके गुलाबी गाल को चुम लिया.

इस हमले से तानिया की हलकी सी आह निकल गयी जो सिर्फ राहुल को सुनाई दी

बेचारी के गाल लाल टमाटर की तरह लाल हो गए थे.

तभी पीछे से अंशु की बनावटी गुस्से में आवाज़ आयी,

"भईईई! ये चीटिंग है! आपने चची और तानिया दीदी को किश किया पर मुझे नहीं?? मुझे भी चाहिए मेरी किश!!"

अंशु का बनावटी गुस्सा देख दोनों तानिया और निशा की हस्सी छूट गयी.

"हां बाबा! देता हु तुम्हे भी किश!" राहुल ने पास जाकर अंशु के गाल को भी चुम लिया, बदले में अंशु ने भी राहुल के गालो को भर भर के चूमा.

अंशु : आज दी भी आएंगी भाई मेने उन्हें बुलाया है

राहुल : बोहत अच्छा किया!

तभी अंशु राहुल के कान के पास आकर धीरे से कहती है,

अंशु : आप उन्हें बोहत मिस कर रहे हो न?

राहुल (धीरे से) : हम्म!

अंशु : उन्हें मिस कर रहे हो या उनकी किश को?

राहुल पलट के अंशु को घर के देखने लगता है और अंशु खिल खिलाती हुई हस्ती हुई वापस निशा के साथ पकवान बनाने में लग जाती है.

तभी राहुल के फ़ोन पर कॉल आता है, कॉलर नाम था - मिस मोनिका

(मोनिका मास्टर चेन की सेक्रेटरी है यदि आप सभी लोगो को याद हो तोह)

राहुल : hello?

मोनिका : hello हीरो!! और कैसे हो?

राहुल : मिस मोनिका?? में ठीक हु आप बताइये!

मोनिका : हम्फ! मेरी क्या पूछ रहे हो? तुम्हे मुझसे मतलब भी रहता है?

राहुल : किसी बात कर रही हो आप?

मोनिका : सही तोह कह रही हु, तुम बताओ तुमने मुझे काम के अलावा किसी चीज़ को लेकर बात की हो तोह...

बात तोह सही थी. राहुल केवल मतलब की और काम की hi बात करता था मोनिका से. वो मोनिका को अदमीरे और उसकी बोहत रेस्पेक्ट करता था. मोनिका उस से बस कुछ साल hi बड़ी थी फिर भी वो मास्टर के बिज़नेस को और तोह और बाकी सभी कामो को बड़ी hi सरलता से संभालती थी. इसलिए राहुल उसकी बड़ी इज़्ज़त करता था. जब राहुल मार्टिकल आर्ट्स सीखने जाता था तोह कई बार मोनिका राहुल से फ़्लर्ट करती थी, राहुल यही समझता था की मोनिका जैसी लड़की उसकी लीग से बाहर है और उससे मैं में वैसे ख़याल नहीं लाना चाहिए वर्ण बाद में उसका hi दिल दुखेगा. इसलिए राहुल सिर्फ काम से काम रखता था और उसकी फ्लिर्टिंग का जवाब नहीं देता था. आज भी यही सन चलता है.

राहुल : ुहम्म!! वैसे हैप्पी दिवाली मिस मोनिका

मोनिका : हैप्पी दिवाली!! हम्फ!! ये लो मास्टर से बात करो.

मोनिका की टोन से साफ़ नज़र आ रहा था की वो राहुल की बात से चिढ गयी है.

राहुल : he..hello? मास्टर?

मास्टर : hello राहुल! कैसे हो?

राहुल : में ठीक हु मास्टर!

मास्टर : गुड! एंड हैप्पी दिवाली!!

राहुल : आपको भी मास्टर!

मास्टर : तुमने उस बुज़ुर्ग और बच्ची को भेजा था मेरे यहाँ...

राहुल : हां मास्टर! वैरी सॉरी मेने आपसे बिना पूछे उनको आपके यहाँ भेज दिया

मास्टर : नहीं बीटा इसमें माफ़ी मांगने वाली कोई बात नहीं है. मेरे घर के पीछे जो लॉन में छोटा घर है वो काफी टाइम से बंद पड़ा था क्युकी अब नौकर तोह रहते नहीं है मेरे यहाँ, मोनिका ने मन कर के जो रखा है. बस एक बटलर रहता है जो खाना बनाता है और घर का काम करता है. इसलिए में सोच रहा था की वो घर किराये पर देदू पर तुमने उनको सही टाइम पर भेजा. मेने उन्हें वो घर रहने के लिए दे दिया है, उनके हालात देख के उनसे कोई किराया नहीं लूंगा. बच्ची को पढ़ाने की ज़िम्मेदारी भी मेने ले ली है.

राहुल : बोहत बोहत धन्यवाद् मास्टर!

मास्टर : धन्यवाद् की कोई बात नहीं बीटा! वो छोटी बच्ची मुझे बड़ी पसंद आयी. तुम्हे जब भी उस से मिलना हो तोह तुम अब मिल सकते हो, वो पीछे वाले घर में hi अपने दादा के साथ रहेगी अब से.

राहुल : में आपका कैसे धन्यवाद् करू मास्टर? में आप पे देपेंद होता जा रहा हु.

मास्टर : बीटा ये सिर्फ थोड़े समय की बात है, जहा तुम अपने पेर्रो पर खड़े हो जाओगे देखना तुम सबको 10 गुना लौटाओगे. में जानता हु तुम्हे अच्छे से

राहुल : जी मास्टर!

मास्टर : और उस लकी की टेंशन लेने की ज़रुरत नहीं है तुम्हे! उसके बाप का कारोबार मेने थोड़ा हिला के रख दिया है, इसलिए अभी वो काफी टेंशन में होगा. फिलहाल वो अपने लड़के लकी को अपने घर में छुपाकर रखा है.

राहुल : जी मास्टर! थैंक यू!

मास्टर : फिरसे थैंक यू?

राहुल : एहम... मास्टर एक और बात थी. में ये शहर कुछ महीनो बाद चौररने वाला हु. ी मैं, मेरी डिग्री कम्पलीट होते hi में निकल जाऊंगा.

मास्टर : हम्म! मेने अनुमान लगा लिया था. जाने से पहले में कुछ तुम्हे सिखाना चाहता हु और कुछ बताना भी चाहता हु. दिवाली के बाद आना तब सब कुछ समझ आ जाएगा.

राहुल : जी ok मास्टर!

मास्टर : वैसे ये मोनिका को क्या बोलै है तुमने? कब से मुँह फुलाए उधर बैठी है.

मोनिका जो सही में मुँह फुलाए हुई बैठी हुई थी एकदम से चौंक जाती है, उससे बिलकुल भी अंदाजा नहीं था की मास्टर उसके एक्सप्रेशंस पढ़ लेंगे. खुद पे शर्म आ रही थी उससे.

राहुल : हैं?? आप... आप ज़रा फ़ोन दीजिये न उनको

मास्टर : मोनिका ये लो बात करो

मोनिका धीरे धीरे चल के आयी और फ़ोन लेके अपने कानो से लगाया,

राहुल : hello? मिस मोनिका? क्या हुआ आपको?

मोनिका : हम्फ! कुछ भी तोह नहीं! में रख रही हु

राहुल : अरे अरे एक मिनट! आप नाराज़ हो न मुझसे?

मोनिका : उम् नहीं तोह?

राहुल : अच्छा मेने आपके लिए एक सरप्राइज रखा था. पर आप अब नाराज़ नहीं हो तोह उससे देने का कोई मतलब नहीं

मोनिका : हँ? क्या? केसा सरप्राइज?

राहुल (मैं में) : ये भी बिलकुल तनीषा दीदी की तरह hi है. बाहर से सख्त, अंदर से बिलकुल चंचल और बच्ची की तरह.

राहुल : पर अब तोह आप नाराज़ नहीं हो न तोह...

मोनिका : किसने कहा में नाराज़ नहीं हु, में तुमसे बोहत नाराज़ हु

दूसरे साइड से हस्सन की आवाज़ आने लगती है. मोनिका को पता चलता है की वो राहुल के बनाए जाल में गिर चुकी है और मास्टर, राहुल दोनों hi हस्स रहे है तोह उसके गाल लाल पद जाते है.

मोनिका (गुस्से में) : स्टुपिड कही के...

राहुल (धीरे से) : दिवाली के बाद आपके लिए सरप्राइज है एक. वेट करना मेरा. Bye bye!

मोनिका (ब्लश) : हम्म्म!

*कॉल एंड्स*

अभी राहुल ने कॉल कट किया hi था की उसने व्हाट्सप्प चेक किया तोह ढेर्रो मेस्सगेस की लाइन लगी हुई थी. सब हैप्पी दिवाली के मेस्सगेस और फोटोज भरे पड़े हुए थे. त्यौहार में ये भी एक बड़ा hi चिकल्लस का काम रहता है.

राहुल ने देखा की उसकी टीचर रोशिनी ma'am का भी मैसेज आया हुआ था,

"हैप्पी दिवाली राहुल! आने वाला समय तुम्हारे लिए शुभ हो और धेरर साड़ी खुशिया और तरक्की लाये तुम्हारे लिए. कभी भी मेरी ज़रुरत पड़े तोह be-jhijak मुझसे बात कर लेना. मेरा सपोर्ट हमेशा तुम्हारे साथ रहेगा"

Ma'am का मैसेज पढ़ राहुल को ma'am पर बोहत प्यार आया और उसने भी बदले में एक अच्छा सा मैसेज लिख के भेज दिया.

अभी राहुल और मेस्सगेस देख hi रहा था की उससे निकिता का मैसेज दिख गया,

"हैप्पी दिवाली मेरे प्यारे भैया! शाम को में और दीदी आपके यहाँ आएँगे सेलिब्रेट करने. दीदी के साथ अपना माहौल बना लेना...

हेहेहे *2 लाफिंग एमोजिस*"

राहुल : ओह्ह तोह निकिता और रीचु भी आ रही है. ः! सब साथ में सेलिब्रेट करेंगे... सब साथ में... सब??? साथ में?? ोोोू शीट्ट्ट्ट!!!! ऋचा???? वंशु दी??? तनीषा दी??? हे bh@gw@@n!! में तोह गया... पता नहीं आज रात में क्या होगा!!? उपरवाले!! मेरी रक्षा करना!!

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आज के लिए इतना hi दोस्तों!
 
अपडेट - 53

अब तक...

अभी राहुल और मेस्सगेस देख hi रहा था की उससे निकिता का मैसेज दिख गया,

"हैप्पी दिवाली मेरे प्यारे भैया! शाम को में और दीदी आपके यहाँ आएँगे सेलिब्रेट करने. दीदी के साथ अपना माहौल बना लेना...

हेहेहे *2 लाफिंग एमोजिस*"

राहुल : ओह्ह तोह निकिता और रीचु भी आ रही है. ः! सब साथ में सेलिब्रेट करेंगे... सब साथ में... सब??? साथ में?? ोोोू शीट्ट्ट्ट!!!! ऋचा???? वंशु दी??? तनीषा दी??? हे bh@gw@@n!! में तोह गया... पता नहीं आज रात में क्या होगा!!? उपरवाले!! मेरी रक्षा करना!!

अब आगे...

दिनभर का टाइम कैसे गुज़र गया ये पता hi नहीं चला. आपके साथ भी ऐसा hi होता है न? अक्सर जब त्योहारों का माहौल रहता है तोह समय कैसे गुज़र जाता है पता hi नहीं चलता. कुछ यही हाल हमारे राहुल का भी था. समय इतनी तेज़्ज़ी से बीता की वक़्त का पता hi नहीं चला और शाम होने को आ गयी.

पर नेहा के लिए यही बात कहना थोड़ा गलत होगा. वो इसलिए क्युकी महारानी जी जबसे अपने कमरे में जो थी. सुबह राहुल ने ज़बरदस्ती करके उसका हाथ मरोड़ के नेवसपपेर जो उठवाया था. गुस्सा तोह उस वक़्त उससे इतनी आयी थी की यदि बगल में कोई लाठी राखी होती तोह वो पक्के से राहुल का सर फोड़ देती.

गुस्सा अभी भी आ रहा था उससे, ऊपर से निकिता की बात और घूम रही थी उसके मैं में जो उसका दिमाग खराब करने पर तुली थी.

पर नेहा गुस्से के साथ साथ थोड़ी कन्फ्यूज्ड भी थी. वो इसलिए क्युकी आज से पहले राहुल ने उसके साथ ऐसा कभी नहीं किया था. वो हर्र वक़्त राहुल को ताने मारती, उससे चोट पहुँचाती, खरी खोटी सुनाती, बुराई करती, इलज़ाम लगाती, और न जाने क्या क्या, पर कभी भी राहुल ने पलट के ऐसे रियेक्ट नहीं किया था. वो हमेशा चुप चाप नेहा की हरकतों को सेहत जाता और कभी पलट कर विरोध नहीं करता था. पर आज क्या हुआ उससे? आज तोह उसने केवल विरोध hi नहीं, यहाँ तक की नेहा का हाथ भी मरोड़ दिया. और तोह और नेहा को ये भी कहा की "वो कभी भी राहुल से बेहतर नहीं बन सकती, हमेशा उसके नीचे hi रहेगी". क्यों कहा ऐसा राहुल ने? और वो भी आज? इसका जवाब नेहा धुंध तोह ज़रूर रही थी पर अफ़सोस वो नाकामयाब रही.

खयालो में डूबे नेहा उत्तर की तलाश में थी की एक आवाज़ ने उसकी तन्द्रा को भांग किया,

"नेहाआआ!? ोोोू नेहाआआ"

नीचे से आती निशा की आवाज़ से नेहा फौरन अपने खयालात से बाहर निकली और नीचे की और चल दी.

"क्या हुआ माँ?" दुखी सी आवाज़ में नेहा ने नीचे आते हुए पूछा.

निशा : अरे!? ये तेरा मुँह क्यों लटका हुआ है बीटा?

नेहा : कुछ नहीं. आप बताइये! क्यों बुलाया आपने?

निशा : अरे क्यों बुलाया क्या... 4 बज गया है, तुझे रंगोली नहीं डालनी बाहर!?

नेहा : ोुह्ह्ह हां माँ! जाती हु...

हर्र दिवाली को नेहा hi अपने घर के बाहर खूब सुन्दर सी रंगोली डालती थी. इस काम में निशा उसकी हमेशा मदद करती थी. पर आज निशा कामो में व्यस्त थी इसलिए आज रंगोली डालने की पार्टनरशिप में अंशु और तानिया नेहा की पार्टनर्स थी.

थोड़ी hi देरर में ये तीनो भी रंगोली डालने में व्यस्त हो गयी. राहुल भी बाहर आकर देखा तोह पाया उसकी तीनो बहने रंगोली दाल रही है.





राहुल (छेड़ते हुए) : ये क्या टट्टी बना दी?

नेहा : *घूर के राहुल को देखती है*

तानिया : व्हाट थे हेलल? दिख नहीं रहा तुम्हे? रंगोली है, अभी पूरी नहीं बानी है. और तुम फ़ालतू की बकवास नहीं करो. चपडगंजु कही का.

अंशु : वैरी फनी! राहुल भैया! अब आप हमको तंग मत करो. आप देख नहीं रहे? हम सभी कितनी म्हणत कर रहे है इससे बनाने में?

राहुल : ......

ऐसे hi कुछ और समय बीत गया और 6 बज चुके थे. इधर हमारी लड़कियों ने रंगोली भी दाल दी थी जो वाक़ई बोहत सुन्दर बानी थी. राहुल ने उसके बाद कोई कमेंट पास नहीं किआ, सभी लोग फिर फ्रेश उप होने और तैयार होने अपने अपने रूम्स में चले गए.

करीब 7 बजे सभी लोग तैयार होक बाहर आए, और अब करनी थी पूजा की तैयारी जिसमे निशा और सभी लड़किया लग गयी. राहुल भी बाहर लिविंग रूम में बैठ के व्हाट्सप्प पर मेस्सगेस का रिप्लाई दे रहा था. राजेश कुछ पूजा की सामग्री लेने बाहर गए हुए थे.

तभी बाहर कार की आवाज़ आयी, राहुल को लगा की शायद उसके डैड होंगे इसलिए उसने ध्यान नहीं दिया और फ़ोन में hi व्यस्त था. भगवा रंग का कुरता आज उसपे बड़ा hi जांच रहा था.





तभी एक आवाज़ ने उसके शरीर के रोये खड़े कर दिए.

"क... कुटी!?"

दरवाज़े के पास वंशु लाइट ग्रीन कलर के सुन्दर से सलवार सूट में कड़ी हुई थी





उससे देख राहुल की मानो धड़कन बढ़ गयी. कितने दिनों बाद आज उसकी वंशु दी उसकी आँखों के सामने थी. कितनी उदास और घबराहट में वो यहाँ से गयी थी, और तबसे राहुल की बात उस से नहीं हुई थी. पर आज वो यहाँ उसके सामने थी.

राहुल ने फौरन उठ के लम्बे कदमो के साथ दौड़ते हुए वंशु को कस के अपने गले से लगा लिया,

"ओह्ह्ह डीई"

सुकून. वंशु को गले लगाने के बाद जो अंतर आत्मा से आवाज़ आयी वो यही थी. इस वक़्त राहुल को असीम सुकून प्राप्त हो रहा था.

राहुल : आपने मेरा कॉल क्यों नहीं उठाया दी? हां? मैंने आपसे नाराज़ हु बहुत.

वंशु : ......

राहुल : दी? कुछ बोलती क्यों नहीं? क्या आप मुझसे नाराज़ हो?

वंशु : na...nahi कुटी! हरगिज़ नहीं!

राहुल : तोह फिर क्या बात है? यदि आप अंशु की बात से डर रही है तोह बिलकुल भूल जाइये उस बात को. अंशु कुछ नहीं बताएगी.

वंशु : ी... ी क्नोव कुटी.

राहुल : तोह अब तोह मुस्कुराइए?

वंशु : *फीकी सी स्माइल करती है*

राहुल आगे बढ़ उसके होंठ चूम लेता है.

वंशु : कुटी??? कोई देख लेगा.

राहुल : देख ले तोह देख ले. में आपको उदास नहीं देख सकता.

वंशु (सुरप्रीसेड) : कुटी??

राहुल : हां!

भावनाओ में बहके वंशु भी राहुल को जोरर से भींच लेती है,

"ोू भाई!! मेरे कुटी!! मुझे bas...bas डर लगा रहता है.. कही कुछ.."

राहुल : अब जो होगा सो देखा जाएगा. आप सिर्फ मेरी हो. सिर्फ मेरी! और आपको किसी से दररने की ज़रुरत नहीं है. आपके साथ में हमेशा खड़ा रहूँगा.

राहुल के इतना कहने से वंशु की आँखें नाम हो गयी और उसने भी एक ज़ोरदार पप्पी राहुल के होंठों पर जड़ दी.

वंशु (मैं में) : ठीक hi तोह कहा कुटी ने. मेरा प्यार यदि सच्चा है तोह में भाग क्यों रही हु? मुझे कुटी के साथ रहके साड़ी प्रोब्लेम्स फेस करनी चाहिए, और अब तोह कुटी ने भी कह दिया की वो मेरे साथ हमेशा रहेगा. थैंक यू मेरे भाई! में अब हमेशा के लिए तेरे साथ hi रहूंगी. तूने सही कहा! में सिर्फ तेरी हु.

राहुल (मैं में) : अबे बोल तोह दिया! पर अभी रीचु और तनीषा दी भी आने वाली है. पता नहीं क्या होगा? पर जो भी हो, में दी के साथ हमेशा रहूँगा.

राहुल : वैसे! हैप्पी दिवाली दी!

वंशु : हैप्पी दिवाली कुटी! बाकी सब कहा है?

राहुल : सभी अंदर पूजा की तैयारी में लगे हुए है.

वंशु : अच्छा! में भी कर देती हु उनकी मदद.

राहुल : जी! आप जाइये में यही बहार हु.

फिर वंशु अंदर सभी की मदद करवाने चली जाती है. राजेश भी पूजा की कुछ बची हुई सामग्री ले आते है और वो भी अंदर चले जाते है. एन्ड में राहुल भी अंदर चला जाता है की तभी तनीषा भी फाइनली आ जाती है.

राहुल का गिफ्ट किया हुआ सूट hi पहना हुआ था उसने. कसम से बोहत कमाल की लग रही थी.





वही दूसरी तरफ नेहा ने पिंक कलर की ड्रेस पहनी हुई थी. जिसमे वो भी किसी पारी से काम नहीं लग रही थी. गोर रंग पे गुलाबी रंग चार चाँद लगा रहा था.





अंशु भी बोहत स्वीट लग रही थी. उसकी सुंदरता कुछ हटके hi थी. उसका चेहरा सबसे मोह लेने वाला था.





तानिया तोह जैसे बोम्ब्शेल लग रही थी.

ट्रेडिशनल ड्रेस में उसकी हॉटनेस और भी ज़्यादा बढ़ गयी थी. उसका फिगर तोह था hi कातिलाना, ऊपर से तीखे नैन और जलवा बिखेर रहे थे.





यदि राहुल को हर्र लड़की की पर्सनालिटी और उनकी सूरत के हिसाब से उनको डेस्क्रिबे करना होता तोह वो कुछ ऐसे डेस्क्रिबे करता-

वंशु - वैनिला केक

अंशु - स्ट्रॉबेरी डिजर्ट

तानिया - गरम मसाला

नेहा - हॉट रेड चिल्ली

तनीषा - फ्रूट वाइन

ऋचा - एप्पल पाई

खर्र! वंशु और तनीषा ने सभी से मुलाक़ात की और सभी लोग पूजा में बैठ गए. पटाखों की आवाज़ें शुरू हो चुकी थी. पूजा समाप्त होते ही राहुल और बाकी सभी लड़कियों को दिया रखने का काम सौपा गया.

थाली में दिए लिए सभी ने घर में जगह जगह दिए रखे और अब बारी थी थोड़ा हल्का फुल्का नाश्ता और पकवान खाने की क्युकी उसके बाद सभी पटाखे फोड़ने में व्यस्त होने वाले थे.

सभी ने थोड़ा थोड़ा नाश्ता भी कर लिया और तभी ऋचा और निकिता भी आ गयी.

आज ऋचा ने भी बोहत सुन्दर सी ड्रेस पहनी हुई थी. गज़ब की धा रही थी. उसकी स्माइल इतनी प्यारी थी की पूछो मत

बेचारा राहुल सिर्फ देख hi सकता था फिलहाल तोह.

निकिता ने भी सुन्दर सी ड्रेस पहनी हुई थी. एक परफेक्ट छोटी बहिन के जैसी hi दिख रही थी वह. क्यूट और प्रीटी.

नेहा (गले लगते हुए) : निक्कीय...

निकिता : हहै! हैप्पी दिवाली! में मेरे पटाखे भी ले आयी थोड़े से.

नेहा : हम्म! शामे तो यू! चलो कुछ खा लो फिर पटाखे फोड़ते है.

निकिता : न बाबा न! अभी खा के hi आयी हु. अब पटाखे फोड़ने के बाद hi खाउंगी.

नेहा : अच्छा तोह चल फिर बाहर चलते है.

राहुल : माँ डैड? चलिए! पटाखे फोड़ने

निशा : न बाबा न! बेतु! तुझे पता है न मुझे पटाखों से डर लगता है. में नहीं फोड़ने wali...tum सभी लोग जाओ में यही बैठूंगी.

राहुल : क्या माँ?? साल में एक बार hi आता है ये त्यौहार और उसमे भी आप ऐसा करोगी तोह कैसे चलेगा? आज तोह आपको पटाखे फोड़ना hi होगा.

निशा : अच्छा ठीक है बाबा. तुम जाओ अभी पहले तुमलोग फोड़ लो मुझे फिर बाद में तू ले चलना और फुड़वा लेना okay?

निशा ने एक नॉटी सी स्माइल देते हुए कहा, जो राहुल समझ चूका था.

राहुल (नॉटी स्माइल) : बिलकुल माँ! में बाद में आपको लेके जाऊंगा और जम्म के पटाखे फोड़ूंगा और फुड़वाउंगा भी.

निशा (ब्लश) : okay बेतु! फोड़ लेना!

फिर सभी लोग बाहर चले जाते है निशा को चोरर कर. सबसे ज़्यादा एक्ससिटेड निशिता थी. क्युकी उससे इन् सब का बोहत शौक था.

सभी लड़किया फुलझड़िया जलाने लगी, लड़कियों की ज़्यादातर पसंद वही तोह रहती है. राहुल और निकिता बम फोड़ने में लग गयी. सभी मस्ती कर रहे थे और एक दूसरे में भरपूर एन्जॉय कर रहे थे.

वंशु, ऋचा और तनीषा चुपके से राहुल के शरीर से खुदको भिड़ाती रहती थी, और फिजिकली टच बनाते जा रही थी, जो बाकी लोग भी देख पा रहे थे. जैसे hi वंशु राहुल को उसके गालो पर किश करती तोह तनीषा और ऋचा एक प्यारी सी स्माइल पास कर देती थी, जो की स्माइल तोह नहीं रहती थी. राहुल के पसीने चूत जाते थे उनकी स्माइल देख के. इतनी खतरनाक स्माइल तोह एक डेविल hi करता है.

बाद में जब सभी लड़किया ज़मीन चाकरी में बिजी थी तब राहुल ने चुपके से बड़ी सी 1000 बेम वाली लड़ी लगा दी, ये प्लान उसने निकिता के साथ मिलके बनाया था. एकदम से धेरर सारे पटाखे फूटने पर सभी लड़किया डर गयी, नेहा राहुल के पास में थी इसलिए अनजाने में एकदम से वो राहुल के गले लग गयी.

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सरप्राइज की बात ये थी की अनजाने में राहुल ने भी एकदम से नेहा को अपनी बाहो में ले लिया और उससे भींच लिया.

सिर्फ पटाखों की आवाज़ hi आ रही थी बाकी साड़ी लड़किया तोह सामने का नज़ारा देख के hi शांत पद गयी थी.

राहुल और नेहा? एक दूसरे की बाहो में? सच में? उन्हें अपनी आँखों पर विश्वाश hi नहीं हो रहा था की सामने जो दृश्य चल रहा है वो असल में घटित हो रहा है. क्या ये चमत्कार था? या सिर्फ कुछ पल की ख़ुशी?

जब नेहा को राहुल का मज़बूत शरीर महसूस हुआ तोह वो उस एहसास में खो सी गयी थी, न जाने कितने सालो बाद उससे ये एहसास की अनुभूति वापस हुई थी, ऊपर से ये उसका कॉलेज की लाइफ में किसी भी लड़के के साथ पहला हुग था वो भी अपने hi भाई के साथ. यदि आज तक नेहा ने किसी भी लड़के को हुग या किश किया है तोह वो बेशक राहुल hi था. पर जैसे hi उससे होश आया की वो अभी किसकी बाहो में है, उससे एक झटका सा लगा. नेहा को खुद से hi ये उम्मीद नहीं थी की वो कुछ ऐसा करेगी. फौरन उसने अपने आप को राहुल की बाहो में से खुद को आज़ाद किया और बिना राहुल से नज़रे मिलाए वो निकिता की और चली गयी.

इधर राहुल कन्फ्यूज्ड और शॉकेड दोनों था. उससे भी पता नहीं क्या हो गया था की जैसे hi नेहा उसकी बाहो में आयी उसके हाथ खुड़बा खुद खुल गए. क्या ये स्नेह था?

पटाखों से फुर्सत होने के बाद जब सभी लोग अंदर वापस आए खाना खाने के लिए तोह राहुल ने कहा की वो निशा को पटाखे फुड़वाएगा.

निशा : बेतु पहले खाना खा ले?

राहुल : माँ! बाकी सब को खा लेने दो, आप आइये टेरेस पे वह काम से काम अनार और ज़मीन चाकरी hi जला लेना.

निशा : अच्छा ठीक है बेतु. चलो!

निकिता : राहुल भैया में भी... में भी चलूंगी.

राहुल : नहीं निकिता! तुम खाना खाओ. हम अभी आ जाएंगे थोड़ी देरर में.

निकिता राहुल की बात सुन्न उदास हो जाती है. राहुल और निशा अपना सीक्रेट टाइम एन्जॉय करने ऊपर चल देते है. इधर तनीषा और वंशु सभी को खाना परोसने लगती है.

ऊपर टेरेस पर...

राहुल निशा को लेके दिए के पास आता है और एक फूलजड़ी निशा को जला के पकड़ा देता है. दोनों माँ बेटे दिवाली का अवसर एन्जॉय करते हुए फूलजड़ी जला रहे थे. निशा आज डार्क ग्रीन साड़ी में थी जो उसके ऊपर बोहत जांच रही थी.





राहुल : आज आप बोहत ख़ूबसूरत लग रही हो माँ!

निशा (ब्लश) : बदमाश कही के! मुझे पटाखे hi फोड़ने लाया है न तू या फिर...!?

राहुल (स्माइल) : पटाखे hi फोड़ूंगा माँ! बोहत जम्म के!

राहुल माँ को लेके स्टैर्स के पास आता है.

निशा : क्या हुआ? नीचे जाना है क्या अब?

राहुल : नहीं माँ! इधर पर रहेंगे तोह आप देख सकती हो की कोई आ तोह नहीं रहा.

निशा : ....!???

तभी राहुल आगे बढ़ के निशा के होंठ मुँह में भर लेता है.

"Ummmmmmmmmmmmmm"

और जोरर जोरर से किश करने लगता है. निशा भी कबसे इसी इंतज़ार में थी. और आज सभी लोगो की मौजूदगी में वो यहाँ ऊपर अपने बेटे के साथ मस्ती कर रही है, इस बात से उसकी उत्तेजना और बढ़ चुकी थी.

तभी राहुल निशा की साड़ी पकड़ के उससे ऊपर उठाता है और नीचे बैठ कर साड़ी के अंदर घुस जाता है.

निशा की पंतय नीचे सरका कर वो अपना मुँह फौरन निशा की छूट में लगा देता है और किसी भूके भेड़िये की तरह चाटने लगता है.

"हाई दैयाआ! मेरा मुन्न्नणा ाःह"

निशा हलकी आवाज़ में सिसकारियां भरने लगती है.

निशा : क्या कर रहा है बेतु? ाअहाः

राहुल : आपके साथ प्यार!

निशा : ोोू अच्छा!? आआह्ह्ह इतना प्यार करता है मुझसे?

राहुल : बोहत ज़्यादा माँ! उम्मम्मम

निशा : आआअह्हह्ह्ह्ह तोह फिर चूस मेरे मुन्ना. चूस aaaahhhhhhhhhhh... खा जा, हां ऐसे hi aaaahhhhhhhhhhh चूस मेरे लाल.

राहुल : उम्म्म्म युम्म्मम्म yummmmmmmmmm

निशा : आअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह बेतु! में झरने वाली हु, मेरी साड़ी खराब हो जाएगी बेतु ....उईईईईई

राहुल : नहीं होगी माँ! में सारा पानी पी जाऊंगा...

निशा राहुल की बात सुन्न जहर जाती है और उसका सर अपनी साड़ी के ऊपर से पकड़ उससे अपनी छूट में दबा देती है,

"हायईएएए में गईइइइइइइइ....."

राहुल फिर साड़ी से बहार निकल कर आता है और अपना लुंड पयजामे से निकाल देता है जो बिलकुल रोड की तरह खड़ा हुआ था.

निशा फौरन झुक के राहुल के लुंड को मुँह में भर उससे गीला करने लगती है.

लुंड गीला हो जाने के बाद राहुल फौरन निशा को घुमाता है और उससे झुका देता है. उसके बाद उसकी साड़ी ऊपर कर देता है. अब राहुल के सामने उसकी माँ निशा की गीली छूट मौजूद थी.

देररि न करते हुए उसने फौरन लुंड छूट से सताया और एक ज़ोरदार धक्का मार लुंड पूरा का पूरा अंदर कर दिया

"उईईईईई maaaaaaaaaa........."

*फट फट* की आवाज़ हर धक्के के साथ आ रही थी.

राहुल : देखो माँ! इससे कहते है पटाखे फोड़ना!

निशा : हाईए! तू बोहत जोरर से पटाखे फोड़ता है बेतु... एआईईईई

राहुल : ाः! और आप बे फ़ालतू में डर रही थी. मज़ा आया न माँ?

निशा : ाः हां बेतु! और जोरर से फोड़

*फट फट फट*

राहुल ने छोड़ने के धक्के और तेज़्ज़ कर दिए. निशा के सामने खुला आसमान था जहा राकेट ऊपर जाकर रंग बिरंगे कलर में फुट रहा था पर निशा यहाँ टेरेस पर अपने बेटे का राकेट पीछे से लेके फुड़वा रही थी. और उसके राकेट से एक hi कलर निकलने वाला था, वो था सफ़ेद.

निशा : और तेज़्ज़ बेतु... आह्ह्ह्ह माँ के साथ तुझे मज़ा आता है न?

राहुल : बोहत माँ! आह ी लव यू!

निशा : ी लव यू तू मेरा बच्चा!! तेरी आआह जब शादी हो जाएगी तोह... तोह मुझे भूल तोह नहीं जाएगा न बेतु? बोल?

राहुल : नहीं माँ! कभी नहीं! सबसे छुप कर आपके साथ किया करूँगा. आप को हर ख़ुशी dunga...aah माँ में आने वाला हु.

निशा : आअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह में भी बेतु! और छोड़ जोरर से, छोड़ अपनी माँ को, हां ऐसे ही, बेतु में गईइइइइइइइ

*फट फट फट*

और राहुल भी अपना सारा का सारा वीर्य निशा की छूट में उड़ेल देता है की तभी निशा को किसी के कदमो की आवाज़ सुनाई देती है.

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आज के लिए इतना hi दोस्तों!

थैंक्स!
 
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