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दो प्रेमियों की तरह माँ बीटा लेते हुवे थे बिस्तर पर एक दूसरे को बाँहों में लिए प्यार करते हुवे. पायल की उँगलियाँ सरजू के बालों में फेरते हुवे उसस्के गर्दन तक पोह्ची और उसस्के होंठ ने सरजू के कान के पीछे चुम्बन दिए और सरजू के होंठ अपनी माँ की दोनों चूचियों के बीच फेर रहे थे…. पायल अब तक सरजू के ऊपर hi थी और उस से पुछा, “मैं भरी तो नहीं हूँ रे सरजू? कब से तेरे ऊपर हूँ और तू संभाल रहा है बग़ैर कुछ कहे?” सरजू ने मुस्कुराते दुलार से कहा, «मम्मी तेरा बीटा मज़बूत है और तेरा बोझ ज़िन्दगी भर उठा सकता है तू फ़िक्र मत कर बल्कि यह पूछ के मुझको कितना मज़ा ारः है के तेरी जिस्म मेरे जिस्म के ऊपर सर से पाऊँ तक मेरे बदन पर चिपका हुवा है और किश किश हिस्से का मैं मज़ा ले रहा हूँ, हाय मम्मी कितना इंतज़ार था ऐसे लम्हों का मुझे तेरे साथ ाहः बहोत चाह लग रहा है मम्मी डार्लिंग…. »
पायल ने उस्सको एक नखरें वाली मुस्कान देते हुवे, अपने जाँघों को और उस के लुंड के करीब ज़्यादा दबाते हुवे कहा, «तो फिर ठीक है ले ले जितना मज़ा लेना है तुझको, तू भी किआ याद करेगा के तेरी मम्मी ने तुझको खुश तो किया !» फिर पायल ने करवट लेते हुवे अपने दाएं बाज़ू पर अपने सर रकते हुवे और दाएं जांघ को सरजू के पेयर पर हौले हौले फेरते हुवे कहा, «चलो पहले कुछ बातें करते हैं और बातें करते करते hi तुम करना जो करना चाहते हो !» सरजू ने ख़ुशी से कहा, «हाँ मुझे मंज़ूर है, बहोत मज़ा आएगा.»
तो अब दृष्ट यह था के दोनों के छाती से सर तक की जिस्म का हिस्सा एक दूसरे से दूर थे, कोई 6/7 इनचेस तक क्यों के बातें करनी थी और एक दूसरे को देखते हुवे मगर जिस्म के निचे वाले हिस्से एक दूसरे से चिपके हुवे थे, पायल की छोटी स्कर्ट तो काफी ऊपर थी और उस्सकी पंतय तो बिल्कुल नज़र आरहे थे मगर किसी और को सब ज़्यादा दीखता, सरजू को नहीं, क्यों के सरजू का सर तो उस्सकी माँ के चेहरे पर थे…. यूँ समझलो के उस वक़्त अगर आप लोग कमरे के दरवाज़े से देख रहे हो तो पायल की सफ़ेद पंतय, उस्सकी जांघ, और उस्सकी ऊपर तक उठे हुवे ब्लू स्कर्ट साफ़ नज़र आयेंगे आप सभों को, और दोनों जाँघों के बीच सरजू का एक जांघ आहिस्ते आहिस्ते रागढ रहे थे और उसस्के पथ का निचे वाला हिस्सा हर वक़्त पायल की निचे वाले हिस्से से दबा रहा था सरजू जिस से उस्का तन्ना हुवा लुंड कभी पायल की छूट पर तो कभी ठीक जांघ पर मॉल रहा था बातें करते दौरान…. ऊपर बात हो रहे थे और निचे कारनामें…. तो सरजू बातें करते दौरान अपने लुंड को माँ की जाँघों के बीच रगड़ता गया और धीरे धीरे पायल की गालों को, गर्दन को, बाज़ुओं को, छाती को किश करता गया फिर भी रह रह कर बात भी कर रहा था…..
पायल भी वैसे hi, हालां के उस्सको सब फील हो रहा था के सरजू कहाँ कहाँ किआ किआ कर रहा है, वह भी धीमी आवाज़ में कुछ दुलार के साथ सरजू से बात कर रही थी और अपने आप को संभालते हुवे, संभालते हुवे इस लिए के अपने bête के जिस्म की तकरार से उस्सको कुछ कुछ हो रहा था, जिस्म की गर्मी बाहर रही थी और सिसकारियां भी चोर रही थी रह रह कर बातों के दौरान. तो वह भी बातों बातों के बीच सब फील कर रही थी और अपने नरम नाज़ुक उँगलियों से कभी सरजू के बालों में फेर रही थी कभी सरजू के कमीज़ के अंदर छाती पर फेर रही थी उस्सको यहाँ वहां चूमते हुवे……. आहिस्ते आहिस्ते पायल ने खुद सरजू की कमीज़ उतारी, और उस्सको ज़ोर से अपने सीने से जकरते हुवे उस्सको चूमा और उसस्के गले को चूसा भी….. और उधर सरजू का हाथ पायल की जाँघों पर पोह्ची और उस्सने उस स्कर्ट को और ऊपर उठाया और अपने पुरे हाथ को पायल की गांड पर फेरते हुवे पंतय के एक हिस्से में एक ऊँगली को गुस्सा कर अपनी ऊँगली को अंदर डालने की कोशिश की, तब तक पायल ने सरजू के मुंह को अपने मुंह में ले लिया और सरजू ने मुंह खोल कर अपनी जीब माँ के मुंह के अंदर दाल दिया और पायल सरजू की जीब को चुस्सने लगी…… और उस एक्शन के दौरान hi सरजू ने पायल की पंतय उतार दिया, और किश करते वक़्त hi पायल ने पोजीशन दिया पंतय को बिल्कुल बाहर निकालने को फिर सरजू ने पंतय को ज़मीन पर फेंक दिया और अपने हाथ को माँ की छूट पर फेरा तो देखा के एक दम भीगी हुवी है….. और पायल जैसे नशे में थी सरजू को ज़ोर से बाँहों में जाकर उसस्के जीब को चूसे जा रही थी अपने छाती को सरजू के छाती पर मलते हुवे…… उस्सकी हलक से धीमी धीमी आवाज़ आरही थी जिस में एक तरप सुनाई दे रही थी.
उस किश के दौरान सरजू ने अपना पंत और अंडरवियर भी निकाल फेंका और माँ की ब्लाउज भी निकाल डाला मगर ब्रा को वहीँ छाती के ऊपर उठा दिया जिस से पायल की बूब्स बिल्कुल निप्पल को तनय हुवे ऊपर छत्त के तरफ देख रहे थे….. सरजू का एक हाथ छूट पर और एक माँ की चूचियों को मस्सल रहा था, और पायल को उस कश्मकश में किश चूर्ण पारा मुंह से एक “उफ्फ्फ” करते हुवे…. और सरजू ने अपने माँ का हाथ अपने हाथ में लेकर उस्सको अपने लुंड तक लगाया तो पायल ने कहा, “किआ? किआ कर रहा है तू?” सरजू बोलै, “मम्मी यह अपने हाथ में लो नाह!” पायल अपने हाथ को उसस्के लुंड पर नहीं रख रही थी और एक नटखट मुस्कान के साथ कहा, “किआ हाथ में लूँ? हम्म बोल?” तब सरजू ने अपने डेंटन से एक बूब को हलके से दबाते हुवे कहा मेरे लुंड को अपने हाथों में लो नाह मम्मी!” उस्सकी डेंटन को अपने छाती पर घरती हुवे महसूस करके पायल की एक ‘आह’ निकली और ज़ोर से सरजू की लुंड को अपने मुठी में लिया और सहलाना शुरू किया जब के सरजू उस्सकी चूचियों से चुस्सने लगा……
दोनों एक दूसरे को बहोत मज़ा दे रहे थे तो एक्शन के वक़्त सरजू ने अचानक पुछा, “मम्मी तुमको कितने मर्दों ने देखा, चेर्रा या चुवा जब तुम बाहर गयी थी? किआ सच में एक्सीडेंट की वजह से देर हुवी या कोई मिल गया था? सच बताओ नाह प्लीज?” पायल अचानक चोनहकी सरजू की इस ख़याल से और सोचा के उस्सको झूट मूठ के ठग कर देखे के उस्का किआ बर्ताव होगा तो उस्सने सरजू के कान को अपने जीब से सहलाते हुवे धीरे से कहा, “कोई मिला था इसी लिए देर हुवी रे….” सरजू का लुंड ज़्यादा कड़क हो गया और अपने माँ के हाथ हो वहां से हटाया और उस्सकी ठीक छूट के ऊपर रगड़ते हुवे उस्सकी ऊपर चार गया ुर हम्प्टी हुवे तेज़ दिल की धड़कन में कहा, “चाह कौन मिला था मम्मी बताओ नाह, किआ किया उस्सने तेरे साथ किधर गए थे तुम दोनों बोलो मुझे….” पायल खुद मज़ा लेते हुवे एक स्टोरी बनाया उस्सको सुनाने को क्यों के उस्सको पता था के सरजू उससे दूसरे मर्दों के साथ देखना बहोत पसंद करता है. तो पायल ने कहा:
“मार्किट में एक आदमी जो कोई 40 साल का था, उस्सने मेरे पीछे अपने हाथ फेरा जब मैं झुकी हुवी थी सब्ज़ियां के दाम पूछने को. मैं ने मुड़कर उस्सको देखा तो उस्सने मुझको एक ेंख मारा. मैं एक छोटी सी मुस्कराहट के साथ आगे चलने लगी तो देखा के वह मेरा पीछा कर रहा है.”
तब तक सरजू ज़ोर ज़ोर से अपने लुंड को पायल के छूट के ऊपर, अंदर नहीं ऊपर ऊपर रगड़ता गया जैसे बहोत एक्ससिटेड ho…aur चूचियों को भी चुस्ता गया अपनी माँ की बातों को सुनते हुवे और कहा, “हाँ तो फिर? फिर किआ हुवा मम्मी बोलो नाह, जल्दी जल्दी बोलते जाओ किआ हुवा फिर……” पायल सब महसूस कर रही थी के उस्का लुंड कैसे बहोत ज़्यादा तन गया है उस्सकी छूट के ऊपर, और फिसल रहा है रगड़ते हुवे वहां और खुद पायल कहानी बनाते हुवे खुद ज़्यादा छूट से पानी छोड़ रही थी और खुद एक्साइट हो रही थी अंगड़ाइयों के साथ और उस्सने अपने सरजू को खुश करने के लिए स्टोरी को जारी रखा……
“फिर मैं एक दूसरी जगा रुकी सब्ज़ी खरीदने को तो वह आदमी मेरे बिलककोल नज़दीक खड़ा होकर अपने पुरे हाथ को मेरे चुतरों पर दबाया इधर उधर देखते हुवे और आहिस्ते से मेरे कानों में कहा, “चलो न मेरे साथ थोड़ी देर के लिए जानी!” तो मैं ने पुछा, “कहाँ?” उस ने कहा, “मेरा वन है उधर, मेरे पीछे पीछे ावो, जैसे मैं दरवाज़ा खोलूंगा तुम अंदर अजना” तो मैं उसस्के पीछे पीछे चलता गया और वन का दरवाज़ा उस्सने खोला तो मैं अंदर घुस गयी, तो उस्सने वन को एक सुनसान जगह पर जा कर रोका. वन में बहोत जगह था पीछे, वह पीछे आया और मेरे पल्लू को जल्दी से हटाकर मेरे ब्लाउज को उतारने लगा और मेरे चूचियों को नोचने लगा एक भूके दरिंदे की तरह….. और जल्दी से उसस्के अपने लौड़े को निकाल कर मेरे मुंह तक लाया और मेरे मुंह के अंदर ठुस्स दिया ज़बरदस्ती तो मैं ने चुस्सना शुरू कर दिया उस्सको…..”
सरजू अब सबर नहीं कर पा रहा था और ऊपर उठ कर अपनी मम्मी के सर तक पोंहचा और अपने लुंड को पायल के मुहं तक लगाया और पायल ने हलके से अपने मुलायम हाटों से अपने bête के लुंड को नज़ाकत से सहलाते हुवे हौले से अपने मुहं में लिया और चुस्सने लगी….. सरजू ने पायल के सर को अपने दोनों हाथों में पकड़े अपनी माँ की मुहं में तेज़ी के साथ कमर हिलाते हुवे अपने लुंड को अंदर बाहर करने लगा….. और आवाज़ देता गया यूँ, “ष्ष्ससससस आआआह, mummmmmyyyyyyyyyy आआआह उफ्फ्फ्फफ्फ्फ़ आआआह और अंदर लो, ज़्यादा अंदर लो न मम्मी हाय्ययीईईई ssssssssshhhhhssssssssssssssss” सरजू पायल के मुहं में छोड़ रहा था, बहोत ज़ोर ज़ोर से ढाका देता गया अपनी माँ की मुहं में और चिल्लाया, “आआआहहहहहहह मममममय मैं झड़ने वाला HOOOOOOOOOOOOOOOOOONNNNN आआआअह्ह्ह्ह्ह्ह्ह” तब पायल ने लुंड को जल्दी से बाहर निकला ज़ोर से अपने हाथ में संभाले और सरजू का वीर्य माँ की मुहं पर, गालों पर, गले पर, छाती पर गिरा और पायल लुंड को हाथों में चलाती गयी जैसे मुठ मारते हैं फिर सरजू झाड़ गया तो पायल ने फिर लुंड को वापस मुंह में लिए सरजू को कहँरते हुवे सुनकर…….
तो बे कॉन्टिनोएड……………………….. ( 3200 वर्ड्स फ्रॉम बोथ उपदटेस)
दो प्रेमियों की तरह माँ बीटा लेते हुवे थे बिस्तर पर एक दूसरे को बाँहों में लिए प्यार करते हुवे. पायल की उँगलियाँ सरजू के बालों में फेरते हुवे उसस्के गर्दन तक पोह्ची और उसस्के होंठ ने सरजू के कान के पीछे चुम्बन दिए और सरजू के होंठ अपनी माँ की दोनों चूचियों के बीच फेर रहे थे…. पायल अब तक सरजू के ऊपर hi थी और उस से पुछा, “मैं भरी तो नहीं हूँ रे सरजू? कब से तेरे ऊपर हूँ और तू संभाल रहा है बग़ैर कुछ कहे?” सरजू ने मुस्कुराते दुलार से कहा, «मम्मी तेरा बीटा मज़बूत है और तेरा बोझ ज़िन्दगी भर उठा सकता है तू फ़िक्र मत कर बल्कि यह पूछ के मुझको कितना मज़ा ारः है के तेरी जिस्म मेरे जिस्म के ऊपर सर से पाऊँ तक मेरे बदन पर चिपका हुवा है और किश किश हिस्से का मैं मज़ा ले रहा हूँ, हाय मम्मी कितना इंतज़ार था ऐसे लम्हों का मुझे तेरे साथ ाहः बहोत चाह लग रहा है मम्मी डार्लिंग…. »
पायल ने उस्सको एक नखरें वाली मुस्कान देते हुवे, अपने जाँघों को और उस के लुंड के करीब ज़्यादा दबाते हुवे कहा, «तो फिर ठीक है ले ले जितना मज़ा लेना है तुझको, तू भी किआ याद करेगा के तेरी मम्मी ने तुझको खुश तो किया !» फिर पायल ने करवट लेते हुवे अपने दाएं बाज़ू पर अपने सर रकते हुवे और दाएं जांघ को सरजू के पेयर पर हौले हौले फेरते हुवे कहा, «चलो पहले कुछ बातें करते हैं और बातें करते करते hi तुम करना जो करना चाहते हो !» सरजू ने ख़ुशी से कहा, «हाँ मुझे मंज़ूर है, बहोत मज़ा आएगा.»
तो अब दृष्ट यह था के दोनों के छाती से सर तक की जिस्म का हिस्सा एक दूसरे से दूर थे, कोई 6/7 इनचेस तक क्यों के बातें करनी थी और एक दूसरे को देखते हुवे मगर जिस्म के निचे वाले हिस्से एक दूसरे से चिपके हुवे थे, पायल की छोटी स्कर्ट तो काफी ऊपर थी और उस्सकी पंतय तो बिल्कुल नज़र आरहे थे मगर किसी और को सब ज़्यादा दीखता, सरजू को नहीं, क्यों के सरजू का सर तो उस्सकी माँ के चेहरे पर थे…. यूँ समझलो के उस वक़्त अगर आप लोग कमरे के दरवाज़े से देख रहे हो तो पायल की सफ़ेद पंतय, उस्सकी जांघ, और उस्सकी ऊपर तक उठे हुवे ब्लू स्कर्ट साफ़ नज़र आयेंगे आप सभों को, और दोनों जाँघों के बीच सरजू का एक जांघ आहिस्ते आहिस्ते रागढ रहे थे और उसस्के पथ का निचे वाला हिस्सा हर वक़्त पायल की निचे वाले हिस्से से दबा रहा था सरजू जिस से उस्का तन्ना हुवा लुंड कभी पायल की छूट पर तो कभी ठीक जांघ पर मॉल रहा था बातें करते दौरान…. ऊपर बात हो रहे थे और निचे कारनामें…. तो सरजू बातें करते दौरान अपने लुंड को माँ की जाँघों के बीच रगड़ता गया और धीरे धीरे पायल की गालों को, गर्दन को, बाज़ुओं को, छाती को किश करता गया फिर भी रह रह कर बात भी कर रहा था…..
पायल भी वैसे hi, हालां के उस्सको सब फील हो रहा था के सरजू कहाँ कहाँ किआ किआ कर रहा है, वह भी धीमी आवाज़ में कुछ दुलार के साथ सरजू से बात कर रही थी और अपने आप को संभालते हुवे, संभालते हुवे इस लिए के अपने bête के जिस्म की तकरार से उस्सको कुछ कुछ हो रहा था, जिस्म की गर्मी बाहर रही थी और सिसकारियां भी चोर रही थी रह रह कर बातों के दौरान. तो वह भी बातों बातों के बीच सब फील कर रही थी और अपने नरम नाज़ुक उँगलियों से कभी सरजू के बालों में फेर रही थी कभी सरजू के कमीज़ के अंदर छाती पर फेर रही थी उस्सको यहाँ वहां चूमते हुवे……. आहिस्ते आहिस्ते पायल ने खुद सरजू की कमीज़ उतारी, और उस्सको ज़ोर से अपने सीने से जकरते हुवे उस्सको चूमा और उसस्के गले को चूसा भी….. और उधर सरजू का हाथ पायल की जाँघों पर पोह्ची और उस्सने उस स्कर्ट को और ऊपर उठाया और अपने पुरे हाथ को पायल की गांड पर फेरते हुवे पंतय के एक हिस्से में एक ऊँगली को गुस्सा कर अपनी ऊँगली को अंदर डालने की कोशिश की, तब तक पायल ने सरजू के मुंह को अपने मुंह में ले लिया और सरजू ने मुंह खोल कर अपनी जीब माँ के मुंह के अंदर दाल दिया और पायल सरजू की जीब को चुस्सने लगी…… और उस एक्शन के दौरान hi सरजू ने पायल की पंतय उतार दिया, और किश करते वक़्त hi पायल ने पोजीशन दिया पंतय को बिल्कुल बाहर निकालने को फिर सरजू ने पंतय को ज़मीन पर फेंक दिया और अपने हाथ को माँ की छूट पर फेरा तो देखा के एक दम भीगी हुवी है….. और पायल जैसे नशे में थी सरजू को ज़ोर से बाँहों में जाकर उसस्के जीब को चूसे जा रही थी अपने छाती को सरजू के छाती पर मलते हुवे…… उस्सकी हलक से धीमी धीमी आवाज़ आरही थी जिस में एक तरप सुनाई दे रही थी.
उस किश के दौरान सरजू ने अपना पंत और अंडरवियर भी निकाल फेंका और माँ की ब्लाउज भी निकाल डाला मगर ब्रा को वहीँ छाती के ऊपर उठा दिया जिस से पायल की बूब्स बिल्कुल निप्पल को तनय हुवे ऊपर छत्त के तरफ देख रहे थे….. सरजू का एक हाथ छूट पर और एक माँ की चूचियों को मस्सल रहा था, और पायल को उस कश्मकश में किश चूर्ण पारा मुंह से एक “उफ्फ्फ” करते हुवे…. और सरजू ने अपने माँ का हाथ अपने हाथ में लेकर उस्सको अपने लुंड तक लगाया तो पायल ने कहा, “किआ? किआ कर रहा है तू?” सरजू बोलै, “मम्मी यह अपने हाथ में लो नाह!” पायल अपने हाथ को उसस्के लुंड पर नहीं रख रही थी और एक नटखट मुस्कान के साथ कहा, “किआ हाथ में लूँ? हम्म बोल?” तब सरजू ने अपने डेंटन से एक बूब को हलके से दबाते हुवे कहा मेरे लुंड को अपने हाथों में लो नाह मम्मी!” उस्सकी डेंटन को अपने छाती पर घरती हुवे महसूस करके पायल की एक ‘आह’ निकली और ज़ोर से सरजू की लुंड को अपने मुठी में लिया और सहलाना शुरू किया जब के सरजू उस्सकी चूचियों से चुस्सने लगा……
दोनों एक दूसरे को बहोत मज़ा दे रहे थे तो एक्शन के वक़्त सरजू ने अचानक पुछा, “मम्मी तुमको कितने मर्दों ने देखा, चेर्रा या चुवा जब तुम बाहर गयी थी? किआ सच में एक्सीडेंट की वजह से देर हुवी या कोई मिल गया था? सच बताओ नाह प्लीज?” पायल अचानक चोनहकी सरजू की इस ख़याल से और सोचा के उस्सको झूट मूठ के ठग कर देखे के उस्का किआ बर्ताव होगा तो उस्सने सरजू के कान को अपने जीब से सहलाते हुवे धीरे से कहा, “कोई मिला था इसी लिए देर हुवी रे….” सरजू का लुंड ज़्यादा कड़क हो गया और अपने माँ के हाथ हो वहां से हटाया और उस्सकी ठीक छूट के ऊपर रगड़ते हुवे उस्सकी ऊपर चार गया ुर हम्प्टी हुवे तेज़ दिल की धड़कन में कहा, “चाह कौन मिला था मम्मी बताओ नाह, किआ किया उस्सने तेरे साथ किधर गए थे तुम दोनों बोलो मुझे….” पायल खुद मज़ा लेते हुवे एक स्टोरी बनाया उस्सको सुनाने को क्यों के उस्सको पता था के सरजू उससे दूसरे मर्दों के साथ देखना बहोत पसंद करता है. तो पायल ने कहा:
“मार्किट में एक आदमी जो कोई 40 साल का था, उस्सने मेरे पीछे अपने हाथ फेरा जब मैं झुकी हुवी थी सब्ज़ियां के दाम पूछने को. मैं ने मुड़कर उस्सको देखा तो उस्सने मुझको एक ेंख मारा. मैं एक छोटी सी मुस्कराहट के साथ आगे चलने लगी तो देखा के वह मेरा पीछा कर रहा है.”
तब तक सरजू ज़ोर ज़ोर से अपने लुंड को पायल के छूट के ऊपर, अंदर नहीं ऊपर ऊपर रगड़ता गया जैसे बहोत एक्ससिटेड ho…aur चूचियों को भी चुस्ता गया अपनी माँ की बातों को सुनते हुवे और कहा, “हाँ तो फिर? फिर किआ हुवा मम्मी बोलो नाह, जल्दी जल्दी बोलते जाओ किआ हुवा फिर……” पायल सब महसूस कर रही थी के उस्का लुंड कैसे बहोत ज़्यादा तन गया है उस्सकी छूट के ऊपर, और फिसल रहा है रगड़ते हुवे वहां और खुद पायल कहानी बनाते हुवे खुद ज़्यादा छूट से पानी छोड़ रही थी और खुद एक्साइट हो रही थी अंगड़ाइयों के साथ और उस्सने अपने सरजू को खुश करने के लिए स्टोरी को जारी रखा……
“फिर मैं एक दूसरी जगा रुकी सब्ज़ी खरीदने को तो वह आदमी मेरे बिलककोल नज़दीक खड़ा होकर अपने पुरे हाथ को मेरे चुतरों पर दबाया इधर उधर देखते हुवे और आहिस्ते से मेरे कानों में कहा, “चलो न मेरे साथ थोड़ी देर के लिए जानी!” तो मैं ने पुछा, “कहाँ?” उस ने कहा, “मेरा वन है उधर, मेरे पीछे पीछे ावो, जैसे मैं दरवाज़ा खोलूंगा तुम अंदर अजना” तो मैं उसस्के पीछे पीछे चलता गया और वन का दरवाज़ा उस्सने खोला तो मैं अंदर घुस गयी, तो उस्सने वन को एक सुनसान जगह पर जा कर रोका. वन में बहोत जगह था पीछे, वह पीछे आया और मेरे पल्लू को जल्दी से हटाकर मेरे ब्लाउज को उतारने लगा और मेरे चूचियों को नोचने लगा एक भूके दरिंदे की तरह….. और जल्दी से उसस्के अपने लौड़े को निकाल कर मेरे मुंह तक लाया और मेरे मुंह के अंदर ठुस्स दिया ज़बरदस्ती तो मैं ने चुस्सना शुरू कर दिया उस्सको…..”
सरजू अब सबर नहीं कर पा रहा था और ऊपर उठ कर अपनी मम्मी के सर तक पोंहचा और अपने लुंड को पायल के मुहं तक लगाया और पायल ने हलके से अपने मुलायम हाटों से अपने bête के लुंड को नज़ाकत से सहलाते हुवे हौले से अपने मुहं में लिया और चुस्सने लगी….. सरजू ने पायल के सर को अपने दोनों हाथों में पकड़े अपनी माँ की मुहं में तेज़ी के साथ कमर हिलाते हुवे अपने लुंड को अंदर बाहर करने लगा….. और आवाज़ देता गया यूँ, “ष्ष्ससससस आआआह, mummmmmyyyyyyyyyy आआआह उफ्फ्फ्फफ्फ्फ़ आआआह और अंदर लो, ज़्यादा अंदर लो न मम्मी हाय्ययीईईई ssssssssshhhhhssssssssssssssss” सरजू पायल के मुहं में छोड़ रहा था, बहोत ज़ोर ज़ोर से ढाका देता गया अपनी माँ की मुहं में और चिल्लाया, “आआआहहहहहहह मममममय मैं झड़ने वाला HOOOOOOOOOOOOOOOOOONNNNN आआआअह्ह्ह्ह्ह्ह्ह” तब पायल ने लुंड को जल्दी से बाहर निकला ज़ोर से अपने हाथ में संभाले और सरजू का वीर्य माँ की मुहं पर, गालों पर, गले पर, छाती पर गिरा और पायल लुंड को हाथों में चलाती गयी जैसे मुठ मारते हैं फिर सरजू झाड़ गया तो पायल ने फिर लुंड को वापस मुंह में लिए सरजू को कहँरते हुवे सुनकर…….
तो बे कॉन्टिनोएड……………………….. ( 3200 वर्ड्स फ्रॉम बोथ उपदटेस)