Sarjoo ki Incest Story - A family Incest Saga - Page 11 - SexBaba
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Sarjoo ki Incest Story - A family Incest Saga

अपडेट 98


दो प्रेमियों की तरह माँ बीटा लेते हुवे थे बिस्तर पर एक दूसरे को बाँहों में लिए प्यार करते हुवे. पायल की उँगलियाँ सरजू के बालों में फेरते हुवे उसस्के गर्दन तक पोह्ची और उसस्के होंठ ने सरजू के कान के पीछे चुम्बन दिए और सरजू के होंठ अपनी माँ की दोनों चूचियों के बीच फेर रहे थे…. पायल अब तक सरजू के ऊपर hi थी और उस से पुछा, “मैं भरी तो नहीं हूँ रे सरजू? कब से तेरे ऊपर हूँ और तू संभाल रहा है बग़ैर कुछ कहे?” सरजू ने मुस्कुराते दुलार से कहा, «मम्मी तेरा बीटा मज़बूत है और तेरा बोझ ज़िन्दगी भर उठा सकता है तू फ़िक्र मत कर बल्कि यह पूछ के मुझको कितना मज़ा ारः है के तेरी जिस्म मेरे जिस्म के ऊपर सर से पाऊँ तक मेरे बदन पर चिपका हुवा है और किश किश हिस्से का मैं मज़ा ले रहा हूँ, हाय मम्मी कितना इंतज़ार था ऐसे लम्हों का मुझे तेरे साथ ाहः बहोत चाह लग रहा है मम्मी डार्लिंग…. »

पायल ने उस्सको एक नखरें वाली मुस्कान देते हुवे, अपने जाँघों को और उस के लुंड के करीब ज़्यादा दबाते हुवे कहा, «तो फिर ठीक है ले ले जितना मज़ा लेना है तुझको, तू भी किआ याद करेगा के तेरी मम्मी ने तुझको खुश तो किया !» फिर पायल ने करवट लेते हुवे अपने दाएं बाज़ू पर अपने सर रकते हुवे और दाएं जांघ को सरजू के पेयर पर हौले हौले फेरते हुवे कहा, «चलो पहले कुछ बातें करते हैं और बातें करते करते hi तुम करना जो करना चाहते हो !» सरजू ने ख़ुशी से कहा, «हाँ मुझे मंज़ूर है, बहोत मज़ा आएगा.»

तो अब दृष्ट यह था के दोनों के छाती से सर तक की जिस्म का हिस्सा एक दूसरे से दूर थे, कोई 6/7 इनचेस तक क्यों के बातें करनी थी और एक दूसरे को देखते हुवे मगर जिस्म के निचे वाले हिस्से एक दूसरे से चिपके हुवे थे, पायल की छोटी स्कर्ट तो काफी ऊपर थी और उस्सकी पंतय तो बिल्कुल नज़र आरहे थे मगर किसी और को सब ज़्यादा दीखता, सरजू को नहीं, क्यों के सरजू का सर तो उस्सकी माँ के चेहरे पर थे…. यूँ समझलो के उस वक़्त अगर आप लोग कमरे के दरवाज़े से देख रहे हो तो पायल की सफ़ेद पंतय, उस्सकी जांघ, और उस्सकी ऊपर तक उठे हुवे ब्लू स्कर्ट साफ़ नज़र आयेंगे आप सभों को, और दोनों जाँघों के बीच सरजू का एक जांघ आहिस्ते आहिस्ते रागढ रहे थे और उसस्के पथ का निचे वाला हिस्सा हर वक़्त पायल की निचे वाले हिस्से से दबा रहा था सरजू जिस से उस्का तन्ना हुवा लुंड कभी पायल की छूट पर तो कभी ठीक जांघ पर मॉल रहा था बातें करते दौरान…. ऊपर बात हो रहे थे और निचे कारनामें…. तो सरजू बातें करते दौरान अपने लुंड को माँ की जाँघों के बीच रगड़ता गया और धीरे धीरे पायल की गालों को, गर्दन को, बाज़ुओं को, छाती को किश करता गया फिर भी रह रह कर बात भी कर रहा था…..

पायल भी वैसे hi, हालां के उस्सको सब फील हो रहा था के सरजू कहाँ कहाँ किआ किआ कर रहा है, वह भी धीमी आवाज़ में कुछ दुलार के साथ सरजू से बात कर रही थी और अपने आप को संभालते हुवे, संभालते हुवे इस लिए के अपने bête के जिस्म की तकरार से उस्सको कुछ कुछ हो रहा था, जिस्म की गर्मी बाहर रही थी और सिसकारियां भी चोर रही थी रह रह कर बातों के दौरान. तो वह भी बातों बातों के बीच सब फील कर रही थी और अपने नरम नाज़ुक उँगलियों से कभी सरजू के बालों में फेर रही थी कभी सरजू के कमीज़ के अंदर छाती पर फेर रही थी उस्सको यहाँ वहां चूमते हुवे……. आहिस्ते आहिस्ते पायल ने खुद सरजू की कमीज़ उतारी, और उस्सको ज़ोर से अपने सीने से जकरते हुवे उस्सको चूमा और उसस्के गले को चूसा भी….. और उधर सरजू का हाथ पायल की जाँघों पर पोह्ची और उस्सने उस स्कर्ट को और ऊपर उठाया और अपने पुरे हाथ को पायल की गांड पर फेरते हुवे पंतय के एक हिस्से में एक ऊँगली को गुस्सा कर अपनी ऊँगली को अंदर डालने की कोशिश की, तब तक पायल ने सरजू के मुंह को अपने मुंह में ले लिया और सरजू ने मुंह खोल कर अपनी जीब माँ के मुंह के अंदर दाल दिया और पायल सरजू की जीब को चुस्सने लगी…… और उस एक्शन के दौरान hi सरजू ने पायल की पंतय उतार दिया, और किश करते वक़्त hi पायल ने पोजीशन दिया पंतय को बिल्कुल बाहर निकालने को फिर सरजू ने पंतय को ज़मीन पर फेंक दिया और अपने हाथ को माँ की छूट पर फेरा तो देखा के एक दम भीगी हुवी है….. और पायल जैसे नशे में थी सरजू को ज़ोर से बाँहों में जाकर उसस्के जीब को चूसे जा रही थी अपने छाती को सरजू के छाती पर मलते हुवे…… उस्सकी हलक से धीमी धीमी आवाज़ आरही थी जिस में एक तरप सुनाई दे रही थी.

उस किश के दौरान सरजू ने अपना पंत और अंडरवियर भी निकाल फेंका और माँ की ब्लाउज भी निकाल डाला मगर ब्रा को वहीँ छाती के ऊपर उठा दिया जिस से पायल की बूब्स बिल्कुल निप्पल को तनय हुवे ऊपर छत्त के तरफ देख रहे थे….. सरजू का एक हाथ छूट पर और एक माँ की चूचियों को मस्सल रहा था, और पायल को उस कश्मकश में किश चूर्ण पारा मुंह से एक “उफ्फ्फ” करते हुवे…. और सरजू ने अपने माँ का हाथ अपने हाथ में लेकर उस्सको अपने लुंड तक लगाया तो पायल ने कहा, “किआ? किआ कर रहा है तू?” सरजू बोलै, “मम्मी यह अपने हाथ में लो नाह!” पायल अपने हाथ को उसस्के लुंड पर नहीं रख रही थी और एक नटखट मुस्कान के साथ कहा, “किआ हाथ में लूँ? हम्म बोल?” तब सरजू ने अपने डेंटन से एक बूब को हलके से दबाते हुवे कहा मेरे लुंड को अपने हाथों में लो नाह मम्मी!” उस्सकी डेंटन को अपने छाती पर घरती हुवे महसूस करके पायल की एक ‘आह’ निकली और ज़ोर से सरजू की लुंड को अपने मुठी में लिया और सहलाना शुरू किया जब के सरजू उस्सकी चूचियों से चुस्सने लगा……

दोनों एक दूसरे को बहोत मज़ा दे रहे थे तो एक्शन के वक़्त सरजू ने अचानक पुछा, “मम्मी तुमको कितने मर्दों ने देखा, चेर्रा या चुवा जब तुम बाहर गयी थी? किआ सच में एक्सीडेंट की वजह से देर हुवी या कोई मिल गया था? सच बताओ नाह प्लीज?” पायल अचानक चोनहकी सरजू की इस ख़याल से और सोचा के उस्सको झूट मूठ के ठग कर देखे के उस्का किआ बर्ताव होगा तो उस्सने सरजू के कान को अपने जीब से सहलाते हुवे धीरे से कहा, “कोई मिला था इसी लिए देर हुवी रे….” सरजू का लुंड ज़्यादा कड़क हो गया और अपने माँ के हाथ हो वहां से हटाया और उस्सकी ठीक छूट के ऊपर रगड़ते हुवे उस्सकी ऊपर चार गया ुर हम्प्टी हुवे तेज़ दिल की धड़कन में कहा, “चाह कौन मिला था मम्मी बताओ नाह, किआ किया उस्सने तेरे साथ किधर गए थे तुम दोनों बोलो मुझे….” पायल खुद मज़ा लेते हुवे एक स्टोरी बनाया उस्सको सुनाने को क्यों के उस्सको पता था के सरजू उससे दूसरे मर्दों के साथ देखना बहोत पसंद करता है. तो पायल ने कहा:

“मार्किट में एक आदमी जो कोई 40 साल का था, उस्सने मेरे पीछे अपने हाथ फेरा जब मैं झुकी हुवी थी सब्ज़ियां के दाम पूछने को. मैं ने मुड़कर उस्सको देखा तो उस्सने मुझको एक ेंख मारा. मैं एक छोटी सी मुस्कराहट के साथ आगे चलने लगी तो देखा के वह मेरा पीछा कर रहा है.”

तब तक सरजू ज़ोर ज़ोर से अपने लुंड को पायल के छूट के ऊपर, अंदर नहीं ऊपर ऊपर रगड़ता गया जैसे बहोत एक्ससिटेड ho…aur चूचियों को भी चुस्ता गया अपनी माँ की बातों को सुनते हुवे और कहा, “हाँ तो फिर? फिर किआ हुवा मम्मी बोलो नाह, जल्दी जल्दी बोलते जाओ किआ हुवा फिर……” पायल सब महसूस कर रही थी के उस्का लुंड कैसे बहोत ज़्यादा तन गया है उस्सकी छूट के ऊपर, और फिसल रहा है रगड़ते हुवे वहां और खुद पायल कहानी बनाते हुवे खुद ज़्यादा छूट से पानी छोड़ रही थी और खुद एक्साइट हो रही थी अंगड़ाइयों के साथ और उस्सने अपने सरजू को खुश करने के लिए स्टोरी को जारी रखा……

“फिर मैं एक दूसरी जगा रुकी सब्ज़ी खरीदने को तो वह आदमी मेरे बिलककोल नज़दीक खड़ा होकर अपने पुरे हाथ को मेरे चुतरों पर दबाया इधर उधर देखते हुवे और आहिस्ते से मेरे कानों में कहा, “चलो न मेरे साथ थोड़ी देर के लिए जानी!” तो मैं ने पुछा, “कहाँ?” उस ने कहा, “मेरा वन है उधर, मेरे पीछे पीछे ावो, जैसे मैं दरवाज़ा खोलूंगा तुम अंदर अजना” तो मैं उसस्के पीछे पीछे चलता गया और वन का दरवाज़ा उस्सने खोला तो मैं अंदर घुस गयी, तो उस्सने वन को एक सुनसान जगह पर जा कर रोका. वन में बहोत जगह था पीछे, वह पीछे आया और मेरे पल्लू को जल्दी से हटाकर मेरे ब्लाउज को उतारने लगा और मेरे चूचियों को नोचने लगा एक भूके दरिंदे की तरह….. और जल्दी से उसस्के अपने लौड़े को निकाल कर मेरे मुंह तक लाया और मेरे मुंह के अंदर ठुस्स दिया ज़बरदस्ती तो मैं ने चुस्सना शुरू कर दिया उस्सको…..”

सरजू अब सबर नहीं कर पा रहा था और ऊपर उठ कर अपनी मम्मी के सर तक पोंहचा और अपने लुंड को पायल के मुहं तक लगाया और पायल ने हलके से अपने मुलायम हाटों से अपने bête के लुंड को नज़ाकत से सहलाते हुवे हौले से अपने मुहं में लिया और चुस्सने लगी….. सरजू ने पायल के सर को अपने दोनों हाथों में पकड़े अपनी माँ की मुहं में तेज़ी के साथ कमर हिलाते हुवे अपने लुंड को अंदर बाहर करने लगा….. और आवाज़ देता गया यूँ, “ष्ष्ससससस आआआह, mummmmmyyyyyyyyyy आआआह उफ्फ्फ्फफ्फ्फ़ आआआह और अंदर लो, ज़्यादा अंदर लो न मम्मी हाय्ययीईईई ssssssssshhhhhssssssssssssssss” सरजू पायल के मुहं में छोड़ रहा था, बहोत ज़ोर ज़ोर से ढाका देता गया अपनी माँ की मुहं में और चिल्लाया, “आआआहहहहहहह मममममय मैं झड़ने वाला HOOOOOOOOOOOOOOOOOONNNNN आआआअह्ह्ह्ह्ह्ह्ह” तब पायल ने लुंड को जल्दी से बाहर निकला ज़ोर से अपने हाथ में संभाले और सरजू का वीर्य माँ की मुहं पर, गालों पर, गले पर, छाती पर गिरा और पायल लुंड को हाथों में चलाती गयी जैसे मुठ मारते हैं फिर सरजू झाड़ गया तो पायल ने फिर लुंड को वापस मुंह में लिए सरजू को कहँरते हुवे सुनकर…….

तो बे कॉन्टिनोएड……………………….. ( 3200 वर्ड्स फ्रॉम बोथ उपदटेस)
 
अपडेट 99

सरजू का लुंड पायल के मुंह में नरम होता गया और एक छोटा सा सांप का बचा जैसे हो गया फिर भी पायल उस्सको अपने हाटों में लिए सहलाते जा रही थी और सरजू कहंर्ता जा रहा था कभी अपनी माँ के चेहरे को देखते और अपने हाटों से उस्सकी चूचियों को मसलते तो कभी अपने ऊँगली को पायल की छूट में भीगा रहा था और ऊँगली को चूस रहा था…….

फिर कुछ देर बाद पायल ने उसस्के लुंड को छोरा और कहा, “अब आराम कर मैं बाथरूम से होकर अति हूँ.” सरजू बोलै, “किआ ऐसे नंगी hi जाओगी?” “तो किआ हुवा, अपने कमरे hi में तो हूँ!” कहते हुवे पायल चली गयी नंगी hi. हाँ उन् के कमरे में एक छोटा सा बाथरूम था उन् के लिए और बड़ा वाला तो कॉरिडोर में था पुरे फॅमिली के लिए. अब जब तक पायल बाथरूम गयी थी सरजू सोचता रहा उस आदमी के बारे में जिस्सके साथ उस्सकी मम्मी वन में गयी थी और सोचा के अभी उस्सकी माँ ने उस्सको पूरी कहानी नहीं बताई है और सोचा के वापस आएगी तो उस वाकिया को पूरा करने को कहेगा.

पायल पूरी तरह से भीग चुकी थी सरजू से इंटरकोर्स के दौरान और बाथरूम में अपने आप को साफ़ कर रही थी फिर भी और भी गरम होती जा रही थी सब जो किया गया उस्सको सोच सोच कर…… अपने सरजू के लुंड को सोचकर हमेशा की तरह हैरान थी और खुद से फिर ये सवाल किये जा रही थी के, ‘इतनी छोटी सी उम्र में उस्का लुंड कैसे इतना मोटा और लम्बा हो गया है? अब जब यह 20 /25 साल का होगा तब किआ होगा? यह तो दीवानी कर देगा ाव्रतों को अपने लुंड का! उम्मीद है के तब भी यह मेरे साथ hi रहेगा, कितना एन्जॉय करवाएगा अपने माँ को यह अगर तब तक यह मेरे साथ रहा तो! मेरे किस्मत में पति का लुंड ज़्यादा दिन के लिए नहीं था शायद इसी लिए bête का अनोखा लुंड नसीब हुवा है मुझे, लगता है प्यार हो गया है मुझे अपने लादले से, हे भगवान् मेरे सरजू को सदा के लिए मेरे पास hi रहने देना कम से कम यह ख़ुशी तो मत चिन्ना मुझसे प्लीज!’ अब भगवान् उस्सकी प्राथना को सुनता है या नहीं देखेंगे, केकब तक सरजू अपने माँ को खुश करेगा.

पायल वापस आयी अपने सरजू के पास एक टॉवल से अपने आप को पोंछते हुवे और मुस्कुराते हुवे सरजू के पास बीएड पर बैठी. सरजू ने अपने कमर से लेकर पथ तक चादर से ढंका था उस वक़्त. तो पायल ने कहा, “क्यों उस खूबसूरत नज़ारे से महरूम कर रहे हो मुझे? क्यों छुपाया है उस चीज़ को जो मुझे बेहद पसंद है रे? तो सरजू मुस्कुराते हुवे चादर को हत्ता देता है और उस्का लुंड फिर खड़ा हुवा दिखाई देता है और ख़ुशी से पायल उस्सको फिर से अपने हाथों में लेकर होंठों से लगाती है फिर अपने चूचियों पर मल्टी है अपने bête के लुंड को. सरजू को बहोत मज़ा ारः था, उसस्के सपने अब पुरे हो रहे थे और जैसा उस ने चाहा था सब कुछ वैसा hi हो रहा था. सरजू ने एहि चाहा था के उस्सकी माँ उस्सको बिल्कुल वैसे hi प्यार करने लगे और उस से सेक्स के लिए तैयार हो जब भी हु चाहे, और अब उस्सको वैसा hi दिख रहा था क्यों के बिना कहे पायल ने उस्सकी लुंड को दोबारा अपने हाथों में लिया और अपने जिस्म पर मसलने लगी, इस से सरजू बेहद खुश हुवा.

पायल के वैसे करने से सरजू दोबारा एक दम से तैयार हो गया था करने के लिए….. जिस दम पायल उसस्के लुंड को अपने चूचियों पर मसल रही थी सरजू अपने माँ की बूब्स को देख कर, उस्सकी खूबसूरत जवानी को देख कर, उस्सकी नंगी पथ और कमर की कर्व्स को देख कर, उस्सकी प्यारी खूबसूरत ेंखें और मुस्कराहट को देख कर, उस्सकी रज़ामंदी देख कर सरजू बिल्कुल एक्साइट होगया था और तैयार था एक बार फिर छोड़ने के लिए. वह साफ़ देख रहा था, महसूस कर रहा था के उस्सकी माँ की आग अभी बुझी नहीं क्यों के वह तो जल्दी झाड़ गया अपने लुंड को माँ के मुंह के तकरार से, मगर पायल ने तो किया नहीं था अब तक और उस्सकी गर्मी छायी हुवी थी पूरी बदन में और अब सरजू को उस्सकी आग को बुझाना था…….

तो अपने एक हाथ से सरजू पायल के पथ पर आहिस्ते आहिस्ते फेरता गया, उस्सकी कमर के बगल वाले चमड़ी को पुरे हाथ में जाकर कर दबाया फिर पायल को लेटने का इशारा किया, और पायल बिना उस्का लुंड चोर्रे लेथ गयी तो सरजू का सर पायल के पैरों के तरफ थे और पायल का सर सरजू के पैरों के तरफ, पायल ने अपने दोनों बूब्स को एक साथ दबाया और सरजू के लुंड को दोनों चूचियों के बीच सरजू से रगड़ने को कहा….. सरजू उधर पायल के दोनों जाँघों के बीच में सर डाला हुवा था और अपने कमर को हिलने लगा जिस से उस्का लुंड पायल के चूचियों के बीच आने जाने लगा….. फिर पायल ने थोड़ा थूक लगाया उसस्के लुंड पर और ऍबे बूब्स के बीच और लुंड आसानी से आने जाने laga,aur सरजू पायल के छूट को चाटने और चुस्सने लाहा……

सरजू के मुंह जिस वक़्त पायल के छूट से लगा तो पायल ने एक दबे हुवे तृप्ति आवाज़ दी.. और अपने सर को बिस्तर पर जोश में फेंक दिया उसस्के सभी घंने काळा बाल तकिये के ऊपर फैले हुवे थे और उस्सकी ेंखें ऊपर नीचे हो रहे थे जोश और कशिश के साथ…… कुछ देर बाद दोनों ने सीधे से एक 69 पोज़ किये. पायल बिल्कुल पीठ पैट लेती थी, सरजू उसस्के ऊपर था, उस्का सर पायल के दोनों जाँघों के बीच छूट चाटते हुवे और उसस्के दोनों टांगें पायल की जिस्म के दोनों तरफ थे जिस से उस्का लुंड ठीक पायल के चूचियों से रागढ खाकर पायल के मुंह तक जाता था…. सरजू पुश इन और आउट कर रहा था अपने कमर को हिलाते हुवे ताके उसस्के लुंड चूचियों के बीच होकर उस्सकी माँ के होंठों तक पोंहचे, और पायल इंतज़ार करती थी हर बार के कब लुंड उसस्के मुंह में ए… लुंड का सिर्फ ऊपर वाला हिस्सा उसस्के मुंह में घुस कर निकल जाता था वापस चूचियों के बीच रगड़ने के liye…phir वापस जाता था पायल के मुंह में एक हिस्सा घुस्स्कार फिर निकल जाने के लिए….. कुछ देर तक वैसा hi चलता रहा…. और पायल तरप रही थी सरजू के जीभ की रागढ से जो उस्सकी छूट के पंखुरियों के बीच चल रहा था, सरजू अपने जीभ को कुछ उस तरह से चला रहा था अपनी माँ की छूट के पंखुरियों के बीच जैसे के एक सांप की जीभ चलती hai…Paayal ने मुठी में चादर को जकरा हुवा था, फिर चादर चोर कर उस्सने सरजू के कमर को ज़ोर से मुठी में जकरा दोनों तरफ से और डेंटन को टेस्ट हुवे उस्सने आवाज़ दी, “िस्सश्श्श्सससस, ufffff….aaaaahahaaaaaa Sarrrrrrrrrrjoooooooooooooooooo, हाय मैं मर gayi…aaaaaaaaaah!” सरजू को चाह लग रहा था अपनी माँ की तरप देख कर और उस ने और ज़ोर लगाया उस्सकी छूट पर…. अपने जीभ को छूट को खोल कर अंदर डाला और उस्सकी नमकीन रस को चूस्ते हुवे जीभ को गहराई तक घुसाया और पायल अपने जिस्म को बिस्तर पर एक सांप की तरह रेंगती गयी तड़पते हुवे सिसकारियों के साथ……

कुछ देर बाद पायल ने खुद सरजू को अपने तरफ खिंचा ज़ोर से जब वह सेह नहीं पायी, और सरजू के मुंह को अपने मुंह में लेकर उसस्के जीब का रस निचोर्ने लगी. उस वक़्त सरजू के दोनों पेयर माँ की जाँघों पर थे एक बाएं तरफ एक दाएं तरफ और उसस्के दोनों बाहें माँ के बाज़ुओं के निचे से होकर माँ के सर को पकड़े किश में डूबे हुवे थे दोनों एक दूसरे के जीभ का रस निचोड़ते हुवे और निचे सरजू का लुंड रागढ खा रहा था माँ के पथ के निचे वाले हिस्से पर…… फिर थोड़ी hi देर बाद पायल ने पोजीशन लिया जिस से उस्सको सरजू के लुंड पूरा मुंह में लेने का मौका मिला और वह फिर से उसस्के लुंड को वैसे hi लेने लगी जैसे पहले लिया था, और उधर सरजू उस्सकी छूट को भरफूर मुँह में लिए रस निचोड़ रहा था और अपने जीभ को छूट के अंदर बहार किये जा रहा था… पायल की बदन तरप से कम्प भी रही थी, दोनों के दिल की धड़कनें बहोत तेज़ हो चुके थे, दोनों माँ bête सिसकारियों में डूबे हुवे थे और एक अजीब कशिश में मुब्तेला थे, जैसे दोनों में से किसी को होश न हो के किआ कर रहे हैं…… होश ो हवास खो बैठे थे दोनों और दीवानगी के हालत पे उतर ए थे, दोनों ने एक दूसरे के सेक्स को छोरा और और सरजू मिशनरी पोजीशन पर आया अपनी माँ के होंठों को छूटे हुवे, पायल अपने पीठ पैट लेती और जाँघों को दोनों तरफ खोलते हुवे अपने नशीले ेंखों से अपने bête के चेहरे पर देखते हुवे उस्सने सरजू के लुंड को अपने हाथों से खुद अपने छूट के खुले मुंह में दाखिल किया और धीरे से तृप्ति आवाज़ में सरजू से कहा, “अंदर पुश कर अब…..” और सरजू ने अपने बाज़ुओं से पायल को जकरते हुवे और अपने सर को माँ की काँधे पर रखते हुवे, होंठों से गर्दन को चूस्ते हुवे अपने कमर को हिलाकर अपने लुंड को माँ की छूट के अंदर पुश किया हौले से और लो!! उस्का लुंड अंदर ग़ुस्सा और पायल ने यूँ आवाज़ दी, “आह, िष, आह, uuuf….isssshshsh….” फिर तो सरजू मज़ा लेने लगा और ढाका देना शुरू किया…. पायल तृप्ति गयी जैसे बिल्कुल होश में न हो… उस्सकी बदन बिस्तर पर रेंगते गए अपने सरजू के लुंड के ढकों के साथ और वह सिसकारियां चोरटी गयी……

सरजू छोड़ता गया अपनी माँ को और बीच बीच में छोड़ते वक़्त पुछा, “उस आदमी ने ऐसे hi छोड़ा तुमको अपने वन में मम्मी? हम्म? बोल na,mazaa आया तुमको उसस्के साथ भी मम्मी? तुम ने एन्जॉय कर लिया था उसस्के साथ या अब करोगी मेरे साथ?” पायल तड़पते हुवे बोली, “तू एन्जॉय कर नाह सरजू क्यों फिर उस बात को लेकर बैठ गया, एन्जॉय कर अपनी गर्लफ्रेंड को मेरे गैलेंट bête…apni माँ को छोड़ रहा है तू, तेरी मम्मी बहोत जवान है नाह तू कहता है इसी लिए तुझको यह चांस मिल गया मुझको छोड़ने को लेले जितना मज़ा लेना है तुझको कौन जाने फिर यह मौका मिले या नहीं तुमको….. ाआअह, एसएसएच, स्सश्श्श्शस्स्सस्स” सरजू ढाका देता गया एक से बढ़ कर एक और उस्का राफ्तेर बढ़ता गया, तेज़ी के साथ उस्का कमर इस कदर रफ़्तार पाकर रहा था और इस धुंध में उसस्के जांघ माँ की जांघ से टकरा रहे थे के यह आवाज़ सुनाई दे रही थी, ‘थूफ थूफ थूफ थुपक थुपक थुपक’ और पायल की छूट से उस्का रस इतना निकल चूका था के सरजू का लुंड का आना जाना एक दम आसान होगया था और रफ़्तार आसानी से बढ़ बढ़ गयी थी और पायल का रस उसस्के जाँघों के बीच ो बीच बह रहे थे उस्सकी गांड की होल के तरफ और वही रस सरजू के लुंड के बॉल पर भी बह रहे थे जैसे के एक बिल्कुल पका हुवा आम का रस बह रहा हो….

सरजू कभी पायल के गले को तो कभी उस्सकी कांडों पर दांतो गाड़ते हुवे चूस रहा था तो कभी उस्सकी बूब्स को चूस रहा था छोड़ते वक़्त बहोत तेज़ी के साथ, और कभी माँ की मुंह को अपने मुंह में ले रहा था, कभी पायल अपने जीभ को सरजू के छाती पर फेर रही थी चातीय हुवे तो कभी वह भी उस्सकी कांधों पर दन्त काट रही थी और कभी उसस्के गालों को….. फिर अपने सर को तकिये पर पटक रही थी जैसे पागल हो रही हो; चीख भी रही थी और तरप भी रही थी आवाज़ भी कर रही थी फिर खुद रुक भी जाती thi…..bilkool दीवानगी की हद पर थी अपने bête से छुड़वाते हुवे……. सरजू क्यों के कुछ देर पहले झाड़ चुक्का था इस लिए देर लग रहा था दूसरी बार झड़ने को, और उस्का रफ़्तार बहोत hi तेज़ी के साथ माँ के जाँघों के बीच अंदर बाहर रागढ खा रहे the…Paayal की जांघें लाल हो गए थे सरजू के जाँघों के रागढ कहते हुवे… तक़रीबन 220 ढाका दे चुक्का था सरजू और बहोत हम्प रहा था मगर रुक नहीं रहा था बिल्कुल, चला hi जा रहा था उसी रफ़्तार मैं में और पायल ने चिलाना शुरू किया, “आआआआह ूउउउउइइइइइइइइ MAAAAAA….IISSSSSSHSHSHSHSSSSSS आआआह आह आह ाहाः SSSSSSSSSSHHHH SAARRRRRRRRRRRRRJOOOOOOOOOOO ो ोोूह….. बहोत चाह लग रहा है RE…..MEIN झाड़ रही हूँ AAAAAAAAAAAAAH……..” और उस्सने सरजू को इस कदर अपने बाहों में जकड़ा के सरजू को लगा के उस्का दम घुट जायेगा, पायल ने खुद अपनी कमर को भी हिलना शुरू किया ओर्गास्म के दौरान और सरजू के गले को लाल कर दिया चूस्ते चूस्ते और अपने डेंटन को गाड़ते वहां…… फिर आराम से सुकून के साथ अपने सर को तकिये पर रखा एक लम्बी सांस लेते हुवे जैसे एक तूफ़ान शांत हो रहा है… और उधर सरजू ने कहांरना शुरू किया दबे गले में आवाज़ देते हुवे, “आआअह्ह्ह, मैं भी झाड़ रहा हूँ मम्मी, मेरी यंग और सेक्सी मम्मी को छोड़ दिया मैं ने ाआअह ससससस सससससस बहोत मज़ा आरहा है मम्मी आआह आह आह ओह्ह मम्मी किआ चीज़ हो तुम मेरी सेक्सी मम्मी तुमको छोड़ना बहोत बड़ी बात है ओह्ह मम्मी वह बहोत मज़ा ारः है मम्मी shshshshs….aaaaaah” जिस वक़्त वह एन्जॉय कर रहा था पायल ने जल्दी से उसस्के लुंड को एप छूट से बाहर किया यह कहते हुवे, “अंदर मत जाने दे सरजू निकल बाहर, दे मेरे हाथ में मैं इस्को मज़ा देती हूँ….. और अपने bête के लुंड को बिल्कुल उस्सकी तरह से अपने हाथ में रगड़ा जैसे मुठ मारा जाता है और सरजू का पानी पायल के छाती पर चारों तरफ चिररका और पायल ने उसस्के लुंड को चूस कर सरजू को शांत किया…….

फिर दोनों माँ bête ने एक दूसरे को बाहों में लेकर बिस्तर पर लेथ गए जैसे के दोनों एक मैरिड कपल हो, और बहोत प्यार से एक दूसरे को चूमते रहे गालों पर, गले पर, कानों के पीछे, छाती पर, होंठों पर और जहाँ जहाँ भी उन् के होंठ पड़ते थे उस waqt…donon के हाथ एक दूसरे के पीठ को सेहला रहे थे जैसे दोनों एक दूसरे को शांत कर रहे हो….. और दोनों के सेंसें धीरे धीरे वापस बराबर रफ़्तार पर आये और दोनों का हंपणा बांध हुवा, फिर आहिस्ते आहिस्ते दोनों नींद के आग़ोश में खो गए….. कोई भी उस वक़्त दोनों को देखता तो कहता के एक यंग मैरिड कपल सेक्स के बाद सो रहे हैं…..

तो बे कॉन्टिनोएड…………………………
 
अपडेट 100

तो यह था किश तरह से सरजू ने पायल को छोड़ने में कामयाबी हासिल की. बहोत वक़्त लगा उस्सको मगर कामयाब तो हुवा. अब सरजू का जो फंतासी था अपने माँ को दूसरे मर्दों के साथ देखने को, वह तो नहीं छूटता उस से. यह इस लिए के बचपन से hi उस्सने अपनी माँ को दादा से छुड़वाते देखा, चाचाओं से छुड़वाते देखा और वह बहोत सब्र से उस वक़्त का इंतज़ार करता रहता के कब वह लोग उस्सकी माँ को चोदे ताके वह देख सके चुप चुप कर. यह सब पहले कह चुक्का हूँ. रातों को वह चादर के नीचे चेहरा छुपा कर गहरी नींद में होने का बहाना करता था जब ज़्यादा छोटा था ताके उसस्के दादा या चाचा उस्सकी माँ को छोड़ने आये तो वह छुपकर देख सकें. यह उस्सकी एक किस्सम की कमज़ोरी बन गयी थी, इसी लिए अपने दोस्तों से भी अपनी माँ के बारे में सेक्सी बातें सुन्ना उस्सको बहोत पसंद था. और इसी लिए उस्सने फार्महाउस जाने के लिए दोस्तों के साथ प्लान बनाया था और अपने मम्मी को साथ लेजाना चाहता था और देखना चाहता था के उसस्के दोस्त लोग उस्सकी माँ के करीब कैसे जाएंगे और कैसे उसस्के साथ रात गुज़रेंगे…… बल्कि सरजू के लिए किसी भी दूसरे मर्द के साथ अपनी माँ को देखना एक बहोत बड़ी बात होती थी. वह ऐसे मौके के तलाश में रहता था के कोई मर्द उस्सकी माँ को प्रोपोज़ करें….

बचपन में तो जब वह स्कूल में होता था तो दिन भर क्लास में सोचता रहता के कौन इस वक़्त मम्मी को छोड़ रहा होगा? दादा या चाचा? अपने मैं को बहोत मार मार कर दिन बीतता था वह…..

मगर अब खुद अपनी माँ के साथ ऐसे सम्बन्ध रखने के बाद किआ उस्का मैं अब भी वही चाहेगा? किआ अब भी वह अपने दोस्तों के साथ अपनी माँ की शरीर को बाँटना चाहेगा? या अब ऐसा होगा के अकेले अपनी माँ को रखेल बनाना चाहेगा और दूसरों से जलेगा? किआ करेगा वह अब? किआ दादा को देखना चाहेगा अपनी माँ को छोड़ते हुवे? चाचाओं को अपनी माँ को छोड़ने देगा?

खैर, उस दिन को उस तालुकात के बाद रात को भी सरजू और पायल ने खूब मज़े लिए, खूब चुदाई हुवी दोनों में ….. फिर दूसरे दिन तो स्कूल जाना पड़ा उस्सको अब तो बहाना नहीं कर सकता था…… अब स्कूल में वह फिर अपनी माँ के बारे में सोचता रहा के पता नहीं दिन में दादा उस्सको छोड़ने गया होगा या कोई और….. उस के मैं में एक खौफ्फ़ सी थी, उस्सको खुद समझ में नहीं ारः था के वह पायल को किसी के साथ देखना चाहता भी है या nahin…phir उस्सने खुद से कहा, ‘हाँ अगर मेरे सामने कोई मम्मी के सात सोवे तो मुझे पसंद है, मगर अभी जब के मैं स्कूल में हूँ, मेरे ग़ैर हाज़िरी में किसी को उससे नहीं चुहना चाहिए….. और अगर किसी ने उस्सको छोड़ा तो जब मैं घर वापस जावून तो मम्मी को मुझे सब साफ़ साफ़ बताना chahiye…agar मम्मी ने छुपाई तो मुझे पसंद नहीं…. और अगर उस्सने सब साफ़ साफ़ बताई तो मुझे बहोत मज़ा आएगा और फिर मुझे उस्सको छोड़ने में दुगना मज़ा आएगा….’

लंच टाइम के वक़्त स्कूल में सरजू के दोस्त लोग उसस्के साथ बैठे और फार्महाउस जाने की बात चेरी गयी. दीपक उस्सकी माँ के बारे में फिर सेक्सी बातें करने लगा….. मगर अब सरजू को चाह नहीं लग रहा था के दीपक उस्सकी माँ को वैसे कहें….. मगर रह रह कर सरजू चुपके से हंस रहा था खुद से कहता, ‘अरे दीपक तुम किआ जनों जिस माल के बारे में बात कर रहे हो मैं ने कल और परसों कितना छोड़ा ussko….woh अब मेरी है तुम बस अपना हिलाते रहो अब!!’ सरजू को अब गर्व था के उन् लोगों से पहले उस्सने अपनी माँ को छोड़ दिया…. और उस्सने कहा सभी दोस्तों से, “सॉरी यारो फार्महाउस वाला प्लान कैंसिल!” सब छोहके और पुछा क्यों तो सरजू ने बताया के उसस्के दादा ने कहा के कुछ मेहमान ठहरे हुवे हैं फार्महाउस में दो महीनों के लिए और अभी वहां जाना नामुमकिन हैं!” तो फार्महाउस की प्लान को बन किया गया. दीपक बहोत निराश हुवा क्यूंकि एहि एक मौका था जहाँ वह पायल को पटाने को सोच रहा था और अपना मर्दानगी दूसरे दोस्तों को दिखने का बल्कि उस्सने तो सोचा था के पायल को छोड़ेगा और दूसरे दोस्तों से भी छुड़वाएगा! दीपक ने यह भी सोचा था के जब पायल को छोड़ेगा तो सरजू को दूसरे कमरे से देखने को कहेगा और सरजू को खुद उस्सकी माँ को छुड़वाएगा… मगर उस्सको किआ पता था के सरजू ने काम तमाम कर डाला है…. दीपक के प्लान्स निराले the…woh तो सपनों में कई बार पायल को छोड़ चुक्का है और सरजू से भी छुड़वाया है और गैंग बंग भी किया है सपनों में बस सपनों को अंजाम देना चाहता था… बहोत निराश हुवा वह जब पता चला के प्लान कैंसिल होगया….

मगर किआ दीपक चुपचाप बैठेगा? किआ कुछ और नहीं सोचेगा पायल को पाने के लिए? बाद में देखेंगे, फिलहाल चलते हैं सरजू के घर पर देखते हैं किआ हो रहा है वहां……..

पायल की रसोई में रहने का दिन था. दिन के लंच के बाद वह शाम की पक्वबानों की तैयारियां में लगी हुवी थी. वह भी अपने सरजू की यादों में खोयी हुवी थी और कैसे पिछले 48 घंटे अपने लादले के साथ बितायी उन् ख्यालों में खोयी हुवी थी दिन भर, रह रह कर छूट से पानी टपक परता था सब सोचते हुवे और ‘उफ़’ निकल जाती थी उस्सकी जुबां से. पायल को लगता था जैसे के एक नयी िस्ख में खोयी दुल्हन जैसी हो जो पति का दिन भर इंतज़ार कर रही हो, बिल्कुल वही फीलिंग्स थे उसस्के उस वक़्त. उधर बेचारा छोटा दूल्हा सरजू स्कूल में कंसन्ट्रेट भी नहीं कर पा रहा था अपनी मम्मी से की गयी एनकाउंटर्स के बारे में सोच सोच कर.

अब घर में कई बार ससुर ने पायल के करीब जाने की कोशिश की, मगर ना कामयाब रहे. वैसे नज़रों से दोनों के नज़रें मिले कई बार और पायल अपने ससुर की नज़रों की जुबां खूब समझती थी, उसस्के नज़रों से मैसेज मिला के ससुर उस से मिलना चाहता है अकेले में मगर सब लोग थे और हर बार जब ससुर रसोई में जाता था उसस्के पास, तो कोई न कोई पायल को या तो फुकर लेता था या ससुर को सास बुला लेती थी किसी न किश वजह से….. पायल एक हाफ साडी में थी. उस्सकी गोरी गदरायी कमर की किआ बात कहें, सब को पता है किआ नज़ारा होता था और ब्लाउज की तंग सिलाई की वजह से तो क्लीवेज की बात करना ज़रूरी नहीं था, आधे चूचियों का नज़ारा देखने को मिल रहे थे….. ब्रा की स्ट्रैप्स तो कांधों पर बिना झुके hi दर्शन हो जाता था, और अगर कभी पायल झुकती थी तो क़यामत का नज़ारा था मर्दों के लिए….. तो दो पेहेर को ससुर जी को एक चाह मौका मिला रसोई में जाने को जब सब लोग छोटी सी नींद में थे दिन के 2 या 3 बजे…..

पायल उस वक़्त रसोई की कप्बोर्ड में से कुछ निकाल रही थी के अचानक ससुर ने उस्सको पीछे से जकरा और उस्सकी गर्दन को चूमने लगा पीछे के तरफ और उस्का लुंड पायल की गांड पर रागढ रहा था अपने बाहों में उस्सको ज़ोर से दबाये हुवे….. पायल चोनहकी तो नहीं मगर दरवाज़े के तरफ देखते हुवे कहा, “छोड़िये जी अभी किसी ने देख लिया तो मुसीबत आजायेगी….” बूढ़े ने कहा, “सब सो रहे हैं मैं इसी का तो इंतज़ार कर रहा था जानेमन, सुबह से तुझको मिलना चाहता था ऋ पायल जान!” पायल नखरें करती हुवी बोली, “हत्तो जी झूठे कहीं के, आप तो आज कल कोयल की ढूंढ गेट हो मेरा तो परवाह hi नहीं आप को, जाईये यहाँ से!” और ठीक उस वक़्त पायल इस तरह से मूढ़ कर उस के चुंगल से निकलना चाहती थी के बूढ़े को पायल के चूचियों के देने तरफ एक गहरा लाल निशाँ नज़र आया!! ससुर को तो सरजू और पायल के रिश्ते के बारे में सब पता था मगर पायल को तो पता नहीं था के ससुर जी को सब मालूम है, और बूढ़े को बहोत ज़्यादा hi गर्मी छायी हुवी थी यह जानकार के उस्सकी चाहती बहु ने अपने जवान bête को छोड़ने दिया है और परसों रात से कई बार छुड़वा चुकी है…. यह सब जानकार बूढ़े का लुंड तो ऐसा खड़ा हुवा था जैसे एक नौजवान का होता है पहली बार छोड़ने के वक़्त, वह पायल के जाँघों के बीच ठीक गांड पर बड़े दबाव के साथ रगड़े जा रहा था उस्सको मसलते हुवे और पायल उस हातन बाहिं में अपने ब्लाउज को संभाल नहीं पायी और आधे से ज़्यादा चूचियां ब्लाउज के बाहर निकल ए थे ब्रा समेत और बूढ़ा अपने होंठों को चूचियों पर दबा रहा था के अचानक ससुर ने कहा, “वह किआ निशाँ लगाया है मेरे पोते ने अपनी माँ के छाती पर, अपना हश्ताक्षर रख गया है माँ की खूबसूरत जिस्म पर लौंडे ने!” यह सुनकर पायल हैरान हुवी और ससुर के चेहरे पर देखते हुवे पुछा, “किआ कह रहे हो आप? आप का दिमाग़ तो ठीक है? सखिया गए हो आप!” तो ससुर ने कहा, “क्यों तेरा सरजू तेरे साथ मज़ा नहीं करता किआ? अब तो वह जवान हो गया है और एक बिस्तर पर रात को इतनी जवान माँ के साथ!! हाय रे हाय मैं खुद ऐसी माँ को खूब छोड़ता!” पायल उसस्के हाथों को अपने चूचियों से हटते हुवे बोली, “ोफो! किआ कह रहे हो आप पिताजी, चलिए छोड़िये मुझको आप!”

तब ससुर बोलै, “चाह यह ताज़ा निशाँ तेरे बूब्स पर कहाँ से आये?” परसों तो कुछ भी नहीं थे?” तो पायल ने जल्दी से झूट कहा, “ओह! यह? यह तो आप के बड़े bête धानंद ने किया था कल!” तो बूढ़ा बोलै, “झूठ क्यों बोल रही बहु मेरी, धानंद को तो अपनी बेटी कोयल से अब मौका नहीं मिलता तो तेरे पास कब आया वह? और सरजू तो अड़तालीस घंटों से तेरे साथ था तो धानंद को कब मौका मिल गया जब मुझे नहीं मिला?!” ससुर जैसे पगलाता जा रहा था और तेज़ी के साथ पायल को घसीटते हुवे दीवार से लगाया और पीछे से hi उस्सकी लहंगे को उठाते हुवे जल्दी से उस्सकी पंतय को थोड़ा सा निचे किया और अपने सवार से अपने लुंड को जल्दबाज़ी से बाहर निकला और पायल के गालों पर दन्त गाड़ते हुवे और चूस्ते हुवे अपने लुंड को अपनी बहु के गांड पर रगड़ने लगा जैसे नशे के हालत में हो!!

पायल की समझ में नहीं आरही थी के किआ करें या किआ कहे, उस्सको पता चल गया के ससुर को मालूम पर गया के सरजू ने उस्सको छोड़ा है और इस उलझन में थी के कैसे ससुर को सरजू के बारे में समझाए तब तक ससुर ने अपने हाथ पर मुंह से थोड़ा थूक लेकर अपने लुंड पर लगाया, और थोड़ा थूक पायल की पिछवाड़े में लगाया, और पायल पीछे मूढ़ कर कहती hi रही के, “आप किआ कर रहे हो पिता जी…” इतना hi कहा के ससुर ने अपने लुंड को पायल की पिछवाड़े में थुश दिया एक ज़ोर का ढाका देकर और पायल ने दबे सेंसों में आवाज़ दी “ोूऊउउउउउउइइइइइइइ मेरी मा!! Ufffffff…itni ज़ोर से पिछवाड़े में डालते हैं किआ मुझे बहोत दर्द हुवा uffffffffffffff” मगर बूढ़ा जोश में था और पायल को पीछे से ज़बरदस्त तरीके से ले रहा था… अपने दोनों पैरों को दोनों तरफ तन्ने हुवे पायल को एक हाथ से पथ के बल थामे हुवे और एक हाथ से उस्सकी काँधे को पकड़े हुवे अपना लुंड पिछवाड़े में अंदर बाहर कर रहा था तेज़ी के साथ….. अब पायल को कोई चारा भी नहीं था और वह दरवाज़े पर देखती जा रही थी के कहीं कोई आ न जाये, और इसी दर से बूढ़े को जल्दी से काम तमाम करने के लिए उस्का साथ देती गयी और अपने कलाई से उस्का चेहरा सहलाती गयी और अपने गांड को बूढ़े के लुंड से दबाती गयी उस्सको ज़्यादा मज़ा दें ेके लिए ताके वह जल्द से झाड़ जाये और वापस चला जाये….. बूढ़े ने धक्का देना दुगना किया और पायल कहंर्ती, तृप्ति गयी और बहोत जल्द बूढ़े की कहांरने की आवाज़ आयी, “आअह्ह्ह्ह्ह्ह्हह्हह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्हह्हह ह्ह्ह्हह्हआआआआ” और अपना सारा पानी पायल के गांड के चढ़ में छोड़ दिया ससुर जी ने उसी जोश में….. लुंड पायल के गांड के अंदर तन्ना हुवा था और पायल तरप रही थी और बूढ़ा उस्का मुहं चाट रहा था…… फिर पहात से लुंड बाहर खिंचा ससुर ने और पायल अपने कांपते हुवे पेयर से निचे ज़मीन पर बैठ गयी अपने सर को हाथ में लिए और बूढ़ा बहोत खुश लुंड को सवार के अंदर डालते हुवे ख़ुशी ख़ुशी रसोई के बाहर निकल गया……

तो बे कॉन्टिनोएड………………… (4200 वर्ड्स फ्रॉम बोथ उपदटेस )
 
अपडेट 101

उस शाम को सरजू स्कूल से ातेहि जल्दी से रसोई मैं जाकर अपने माँ की सीने से लगा और उस्सको बहोत ज़ोर से अपनी बाहों में लिया और चूमने लगा पायल को. पायल भी बहोत खुश थी अपने सरजू को वापस देख कर बल्कि वह भी घरी की सुयान देख रही थी के कब वह स्कूल से वापस आएगा. तो उस्सने तो सरजू को उठा hi लिया अपने गॉड में, सरजू के दोनों पेयर माँ की जिस्म पर पथ से होकर कर्मार पर कैसा था सरजू ने और दोनों एक दूसरे को किश करने लगे, मुंह में मुंह एक दूसरे के और दोनों के हाथ एक दूसरे के पीठ पर फेर रहे थे…… कुछ देर बाअद उस पोजीशन में रहते हुवे पायल ने उस्सको कहा, “मेला प्याला मुन्ना, अब बुसस कोई भी इस वक़्त किचन में आ सकता है रात को कंटिन्यू करेंगे ठीक है?” मगर सरजू कुछ नटखट अंदाज़ में बोलै, “हम्म्म नहीं मैं अभी hi करना चाहता हूँ, दिन भर आप को सोचता रहा और दिन भर अपने लुंड को सहलाता रहा, यह बेकरार है वहां घुस्सने के liye…abhi hi चलो न कमरे में, मैं बहोत जल्दी पूरा करलूँगा फिर आप किचन में वापस ajana…phir रात को दोबारा करूँगा….” पायल ने उस्सको कैसे भी समझा बुझा के लौटा दिया……

अब ससुर जी तो माँ bête को छोड़ते हुवे देखने को बेकरार था, तो वह गया सरजू से मिलने उसस्के कमरे में जिस वक़्त पायल रसोई में बिजी थी. और सरजू से कहा के कब उस्सको देखने देगा और बूढ़े ने आज रात के लिए hi प्लान बनाया….. सरजू समझता था के उसस्के दादा को भी वही मज़ा आएगा जैसे उस्सको मज़ा अत है अपनी माँ को उसस्के साथ छोड़ते हुवे देख कर इस लिए वह राज़ी था अपने दादा को अपने माँ को छोड़ते हुवे दिखने को. दोनों ने मिलकर प्लान बनाया जब सरजू ने कहा के हाँ रात को वह करेगा अपने मम्मी के साथ. तो प्लान यह बना के रात को कोई 10 बजे पायल नहाने को जाती है बिस्तर पर आने से पहले, तो ठीक जैसे वह बाथरूम में दाखिल होगी, सरजू दादा को बुलाएगा. फिर कमरे में एक पुराण अलमारी है जो खली पड़ा हुवा है और उसके मरे हुवे बाप के कुछ पुराने कपडे हैं उस में, और उस अलमारी में नीचे वाला शेल्वे नहीं है, यानि के जब अंदर उस में देखोगे तो नीचे का फर्श नज़र अत है. तो बूढ़े ने कहा के उस में अंदर खड़ा रहेगा और उस्का एक दरवाज़ा तो टूटा हुवा था hi, उस्सको बस ज़रा सा हत्ता कर सब देख सकेगा, बिस्तर साफ़ नज़र अत है वहां से, तरय करके देख भी लिया दादू ने. मगर सरजू से इतना कहा के लाइट ों रहने देने को, तो सरजू ने कहा उस्सको भी लाइट में सेक्स करना ज़्यादा पसंद है मगर पायल को पसंद नहीं और वह बीएड लैंप को ों रहने देती है…… और दादू ने कहा कोई बात नहीं बीएड लैंप में hi सब नज़र आएगा. मगर कुछ देर बाद सरजू ने पुछा, “मगर दादू फिर आप कमरे से बाहर कैसे निकलोगे मम्मी तो यहीं होगी नाह?” दादा जी ने कहा, “वही तो समझाना बाकि है तुमको, सुन, काम तमाम करने के बाद तुम मूतने के लिए टॉयलेट जाना और अपने मम्मी को कहना के वह तुम्हारा लुंड अपने हाथों में पाकर कर तुमको पेशाब करवाए जैसे बचपन में करवाती थी….. तुम ज़िद करना फिर वह ज़रूर जाएगी तेरे साथ तब मैं निकल जावूंगा.” सरजू ने सोचा फिर कहा, “ठीक है वैसे आईडिया मज़ेदार है दादू सच में बहोत मज़ा आएगा जब मम्मी इस्को पाकर कर मुझको पेशाब करवाएगी हेहेहे!”

और अँधेरा हुवा, रात आयी, रात के 10 बजा और थोड़ा सा टीवी देखते वक़्त पायल ने धानंद और अपनी बेटी कोयल की तमाशा को देखा लाउन्ज में, उसस्के बाद धानंद कमरे में चला गया तो देखा ससुर बैठ गया कोयल के पास और उस्का हाथ कोयल के ड्रेस के निचे चले गए और कोयल की एक ऊँगली दादा जी के मुंह में था……. यह सब देखने के बाद मुस्कुराते हुवे पायल उठकर अपने कमरे में चली गयी अपने सरजू के पास. ससुर उस्का इंतज़ार कर रहा था उस्सको नहीं पता tha…aur जैसे hi वह कमरे में अंदर गयी, बूढ़ा दादा जल्दी से तैयार होकर उसस्के कमरे के पास इंतज़ार करने लगा के सरजू उस्सको अब बुलाएगा अंदर आने को…..

उधर जब पायल अंदर दाखिल हुवी तो बिस्तर पर सरजू लेथ कर उस्सकी वेट कर रहा tha….Paayal उसी हाफ साडी में थी और बीएड पर झुकी सरजू के गाल चूमने को तो उस्सकी चूचियां दोनों जैसे ब्लाउज से बाहर निकलना चाहते थे….. दोनों मा bête ने फिर एक दूसरे को किसग किये और किश के दौरान पायल का हाथ सरजू के शार्ट पर गयी और उस्सने अपने bête का लुंड सहलाना शुरू किया जो एकदम तना हुवा था एकदम तैयार उस्सकी छूट में घुस्सने को….

फिर उसने अपने सर को निचे के तरफ करके अपने bête के शार्ट को निचे किया और उसस्के लुंड को अपने मुंह से लेलिया एक जोश में अपने जिस्म को सरजू के जिस्म से मलते हुवे तब अचानक सरजू ने कहा, “मम्मी तुम नहाने नहीं जाओगी किआ?” तो पायल ने कहा, “क्यों रे अब तुझे जल्दी नहीं है किआ? स्कूल से वापस आने के बाद तो उतावला हो रहा था करने के लिए?” तब सरजू ने बहाना बनाते हुवे कहा, “हम्म तुम्हारा जिस्म पसीने से देखो कैसे मेरे स्किन से जब चुहता है तो स्टिक हो रहा है, अगर नाहा लोगी तो मुलायम हो जाएगी……” तब मुस्कुराते हुवे और एक होंठ को अपने दन्त में दबाते हुवे पायल उठ गयी बाथ्ररोम के तरफ जाने के liye…..phir पुछा अपने सरजू से, “बोल आज किआ पहनूं तेरे लिए?” सरजू बोलै, “एक बिल्कुल महीन सा निघ्त्य बग़ैर ब्रा और पंतय के….” और पायल वैसी एक निघ्त्य लेकर चली गयी नहाने को. तुरंत सरजू बीएड से कूदकर दरवाज़े को खोलने गया दादा को बुलाने के लिए और देखा के दादा दरवाज़े के पास वेट कर रहा था तो उस्सको अंदर लगाया और बूढ़ा उस अलमारी में घुस गया और उस टूटे हुवे दरवाज़े के पीछे खड़ा होगया….. लाइट ों था, और सरजू ने धीरे से कहा, “दादू आप देखना जब वाशरूम से आएगी तो किश ड्रेस में होगी, मैं भी अपने चड्डी उतार देता हूँ और नंगे होकर चादर के निचे वेट करूँगा मम्मी को आप खूब मज़ा लेना दादू.” जब दादा जी ने अपने पोते का लुंड देखा तो अपने मैं में कहा, “वह मेरे लाल जियो! किआ मस्त लौड़ा पाया है अब कैसे पायल पागल नहीं होगी तेरे लिए आखिर पोता किश का है यह!” फिर दादू ने सरजू से कहा, “हे मुझको यहीं मत चोरर देना याद है है न करने के बाद कहाँ लेजाना है अपने मम्मी को तब मैं बाहर निकल जावूंगा, बीएड पर चादर के निचे से सरजू ने धीरे से कहा, “हाँ दादू याद है मुझे किआ करना आप फ़िक्र मत करो!”

और वाशरूम का दरवाज़ा खुलता है तो पायल एक पतली सी निघ्त्य में बाहर आते हुवे दिखाई देती है, निघ्त्य उस्सकी जाँघों को भी नहीं ढँक रही थी, उसस्के बड़े बड़े मोठे मोठे ुब्धर हुवे जांघ हिल रहे थे उसस्के चलने से और ऊपर कांधों पर दो पतली पतली स्ट्राप ने उस निघ्त्य को कांधों पर संभाला हुवा था, और साफ़ दिख रहा था के उसस्के अंदर उस्सने कुछ नहीं पहना है….. ससुर ने जब उस्सको सरजू के तरफ उस हालत में जाते देखा तो उस्का लुंड खड़ा होगया और उस्का हाथ उसस्के लुंड तक चला गया संभालने ko…..budha बहोत एक्ससिटेड था और जैसे उस्सको यकीन नहीं हो रहा था के सच में पायल अपने bête से छुडवाएगी….. बड़े जोश में ससुर की ेंखें पायल पर जमे रहे….

पायल बीएड तक पोंछी और मुस्कुराते हुवे एक घुटने को बीएड पर रखा जिस से वह छोटी सी निघ्त्य और भी ऊपर उठ गयी और जांघ का ज़्यादा हिस्सा सरजू के ेंखों के सामने था तो पायल बोली, «क्यों रे सरजू, अब खुश ? ठीक है न यह निघ्त्य और मैं ने कुछ नहीं पहना है अंदर किसी लगती हूँ रे ? » सरजू ने कहा, « िसष्ठ मम्मी वह, किआ बात है यह देखो मम्मी ये मचल रहा है, » और उस्सने चादर हत्ता कर अपने तन्ने हुवे लुंड को पायल को दिखाया और पायल वहीँ बैठ गयी बीएड पर और उसस्के लुंड को बड़े प्यार से अपने हाथों में लिया और उधर ससुर बड़े मज़े से देख रहा था के उस्सकी बहु कितने प्यार से अपने बेटे के लुंड को हाथों में लेकर चूमते हुवे किश तरह से अपने मुंह में ले रही है….. लाइट ऑफ नहीं किया गया तो सब साफ़ दिख रहा था ससुर को… बूढ़ा पागल हो रहा था सब देखते हुवे और अपने लुंड को अपने हाटों में दबाये जा रहा था, और उधर पायल सरजू के लुंड को चूसते वक़्त कहती है, « बहोत याद किया इस ने मुझको दिन भर स्कूल में नाह ? लो इस्को खुश करती हूँ अब …. » सरजू कभी अपनी माँ को अपने लुंड को चूस्ते हुवे देख रहा था तो कभी अलमारी की तरफ…. और खुद अपने जिस्म हिल्ला रहा था अपनी माँ के मुंह में अपने लुंड को ज़्यादा से ज़्यादा ठुस्स्ते हुवे…… उस निघ्त्य में पायल की तन्ने हुवे चूचियां और निप्पल्स भी साफ़ दिख रहे थे और जब वह बीएड पर झुकी थी सरजू के लुंड को चूसते हुवे दोनों चूचियां जैसे झूला झूल रहे हों और दादा जी अंदर से सब नज़ारे का मज़ा लेरहा tha…apni बहु की जिस्म को निहारे जा रहा था जैसे के पहली बार उस्सको उस तरह देख रहा हो….. बहोत मज़ा रहा था उस्सको, एक दम बाध्य मज़ा था वैसे देखना……

कुछ देर तक सरजू के लुंड को चुस्सने के बाद पायल ने अपने जीब को सरजू के गालों पर फेरा फिर जीब को बिल्कुल मुंह के बाहर निकालते हुवे सरजू के मुंह पर छाता उस्सको और सरजू के होंठों को चाटना शुरू किया तब तक सरजू ने अपने जीब को भी निकला और दोनों माँ बीटा जीब से जीब चाट रहे थे और दादा जी अंदर से स्स्स्सह्ह्ह करते हुवे अपने लुंड पर हाथ मॉल रहा था…. सरजू ने फिर अपनी माँ के जीब को चूस्ते हुवे आहिस्ते आहिस्ते उस्सकी निघ्त्य के स्ट्रैप्स को कन्धों से उतारना शुरू किया, धीरे धीरे, हौले हौले उतारता गया उस निघ्त्य को और धीरे धीरे ससुर को पायल की जिस्म दीखता गया पहले कांधा, फिर छाती, फिर चूचियां एक दम तन्ने हुवे और निप्पल का वह तन्ना हुवा अंगूर का दाना, जिस्सको सरजू ने अपने मुंह में लिया चुस्सने को और जिस्सको मुहं में लेते hi पायल ने एक ‘इस्स्स्सस्ठ्ठ’ चोर्रा और अपने जिस्म को सरजू के जिस्म से ज़ोर से लगा कर अपने आप मसलने लगी जिस्म से जिस्म को….. फिर रफ़्तार बढ़ता गया और दोनों माँ बीटा तेज़ी के साथ एक दूसरे को बाहों में लिए बिल्कुल नंगे दोनों एक के जिस्म पर दूसरे का नंगा जिस्म, पायल की दोनों चूचियां सरजू के छाती पर डब्बे हुवे, उस्सकी दोनों पेयर दोनों तरफ फैले हुवे और सरजू का लुंड उसस्के जांघों के बीच उस्सकी छूट की तलाश करते हुवे दोनों अपने सांसों की रफ़्तार को बढ़ते हुवे पाए जाते हैं….. यह सब अंदर अलमारी में से देखते हुवे बूढ़ा मुठ मारने लगता hai…apne लुंड को हाथ में लिए अपनी बहु को अपने बेटे से छुड़वाते देख कर रहा नहीं गया बूढ़े से और मुठ मारना ज़रूरी पढ़ गया…. उधर सरजू का लुंड मा की छूट में दाखिल हुवा और उस्सने धक्का देना शुरू भी किया, हर एक्शन की रफ़्तार इतनी तेज़ हो गयी थी के पता hi नहीं चला के कब दोनों छोड़ने लगे कहँरते, तड़पते आवाज़ में दोनों माँ बेटे के तड़पने की आवाज़ बूढ़े को सुनाई दे रहा था कभी पायल सरजू के ऊपर थी तो कभी सरजू अपने माँ के ऊपर लुंड छूट के अंदर hi था और दोनों एक दूसरे के ऊपर निचे हो रहे थे बिस्तर को रौंदते हुवे फिर अचानक ज़ोर से सरजू की तृप्ति आवाज़ आयी, « आआह्ह्ह्ह्ह हा आहहहहह मुम्ममइय्य्यी ीिस्स्सस्स्स्शस मुम्ममइय्य्यी आआआआह होने वाला hai…aaaahh बहोत mazaaaaaaaaaaaaaaaa……. और पायल भी चिलाने लगी, «हाँ haaaaaaaaaaaaaan और ज़ोर से हाँ हाँ और और और थोड़ा सा िस्स्सस्स्स्शह्ह्ह आआअह्ह्ह्ह मैं भी होने वाली hooooooooooooooooon आआआईईईईईई उफ्फ्फ्फफ्फ्फ़ स्स्स्सस्स्स्शशष्ष्स…….. और सरजू ने ज़रा संभाला और अपनी मम्मी को झड़ने दिया उसस्के बाद जल्दी से लुंड को बाहर निकला और पायल ने उस्का लुंड अपने हाथों में लेकर उस्सको हिलाते हुवे अपनी चूचियों पर अपने बेटे का सारा वीर्य गिराया…. और सरजू के लुंड को रगड़ा अपने चूचियों पर और निप्पल पर सरे पानी को समेत कर लुंड को उन् पर फिसलते huwe…..tab भी सरजू , « सस्शह्ह्ह्ह ाः आआह ाघ्घ्घ करता gaya…aur आखिर में पायल ने अपने बेटे के लुंड को मुंह में लिया चुस्सने को और धीरे धीरे उसका लुंड नरम और छोटा सा होगया……

दादा उधर वह भी मुठ मारते हुवे झाड़ गया और हांपने laga…..aur इधर दोनों माँ बेटे हम्प्टी हुवे एक दूसरे के छाती पर सर रख कर सो रहे थे… दादा को फ़िक्र होने लगा के कहीं उन् को नींद न आजाये और वही हुवा दोनों माँ बेटे सोगये और खर्राटे की आवाज़ सुनाई देने लगे तो धीरे से बूढ़ा अलमारी से निकल और डब्बे पाऊँ कमरे से भागा……

तो बे कॉन्टिनोएड………………..
 
अपडेट 102

दादा जी कमरे से लौटे और रात भर अपनी चाहती बहु पायल के बारे में सोचता रहा….. कितनी ख़ुशी से उस्सने अपने बेटे को भी उससे छोड़ने दिया, कितने प्यार से खुद की बेटे से छुड़वा रही थी, एहि देखना चाहता था ससुर जी. वह पायल से इतने प्रभावित थे के उस्सकी हर हरकत को पसंद करता था इस लिए देखना चाहता था के जब उस्का अपना बीटा उस्सको छोड़ेगा तो उस्सकी किआ अदाएं होगी और कैसे बेहवे करेगी woh…to दादा ने देखा के बिल्कुल उसी तरह की अदाएं अपने bête के साथ भी दिखा रही थी जैसे अपने ससुर के साथ दिखती थी, वही बलखाना, वही शरारती मुस्कान, वही होंठों को डेंटन से दबाना, वही नज़रों को ज़रा तिरछी करके देखना, वही सिसकियाँ, वही आहें…. वह किआ बात थी…. ससुर उस्सको सोच सोच कर पागल हो रहा था और उस्सको पायल को छोड़ने का मैं बहोत कर रहा था हालां के उस्सने अभी अभी मुठ मारा फिर से ज़बरदस्त खड़ा होगया था और अपने लुंड को सहलाते हुवे पायल को छोड़ने की ख्वाहिश कर रहा था….

दूसरे दिन, सरजू तो स्कूल चला गया, मगर सुबह को दादा से मिला और धीरे से पुछा, «क्यों दादा जी मज़ा आया कल रात को नाह ?» दादा ने उस्सको गले लगलकर कहा, « अरे जियो मेरे लाल, पोता हो तो तुम जैसा, मेरा नाम ज़रूर रोशन करोगे तुम इस मामले में, वह बीटा लगे रहना ऐसे hi, अपनी माँ को यह ख़ुशी हमेशा देते रहना वह तेरी हो जाएगी, मगर इस बूढ़े दादा को भी चांस दिया करना अपनी मम्मी के साथ हम्म!” सरजू बोलै, «अरे दादू, सब कुछ आप से सीखा है, और वैसे आप तो मम्मी के लिए मुझसे से पहले से हो hi तो मुझसे किआ परमिशन लेना, वह आप की भी है!» दादा बड़ा खुश हुवा अपने खून पर.

दिन में पायल को मार्किट जाना था फिर से. और इस बार तो दादू साथ गया. कल रात की सीन्स को दादू ने दिमाग़ में परमानेंटली कैद कर लिया था और सोच सोच कर उस्का लुंड वक़्त बे वक़्त तूफ़ान खड़ा कर रहा था उसस्के पंत के अंदर. पायल ने एक बाध्य साड़ी पहनी हुवी थी और कहना ज़रूरी नहीं है के उस्सकी ब्लाउज बैकलेस थी और गर्दन पर एक पतली सी लास ने ब्लाउज को संभाला हुवा था. जब पायल चलती थी तो उस्सकी गांध जिस तरह से दाएं बाएं हो रही थी वह देख कर सभी मर्दो का बुरा हाल हो रहा था रसस्ते में, मॉल में, मार्किट में और ससुर सब देख कर बड़ा मज़ा ले रहा tha…aur सोच रहा था, “तुम लोग इस गांड के सपने देखो मैं तो इस्सके मज़ा लूटता हूँ!”

जब पायल ने सब खरीदारी कर्ली, तो ससुर बोलै, “होगया नाह बेटी, चलो आज मैं तुमको कहीं लेचलता हूँ.” पायल ने मुस्कुराते हुवे पुछा, “कहाँ पिताजी?” ससुर बोलै, “अरे चलो तो, दो बैग्स को मैं लेचलता हूँ मेरे पीछे ावो.” कुछ देर आगे चलके ससुर एक टैक्सी को रोकता है और दोनों टैक्सी में चररते हैं और ससुर आहिस्ते से ड्राइवर के कान में कुछ कहता है. टैक्सी कुछ देर बाद एक लॉज के पास आकर रुकता है, दोनों उतारते हैं और टैक्सी चला जाता है. पायल बाहर बिल्डिंग को देखते हुवे ससुर से पूछता है, “यह कौन सी जगह है पिता जी?” ससुर मुस्कुराकर अपनी बहु के कांधों पर एक हाथ रखते हुवे कहता है, “यह एक होटल है यहाँ ज़्यादा इश्क करने वाले घंटो दो घंटों के लिए एन्जॉय करने को एते हैं और आज हम दोनों यहाँ एन्जॉय करने को ए हैं घर में तो अब मुश्किल हो गया है तुमसे मिलना यहाँ तो हम दोनों बिल्कुल फ्री होंगे, किसी का डर भी नहीं होगा और आराम से मज़ा लूटेंगे….” पायल ने एक तिरछी नज़र से अपने ससुर को देखते हुवे मुस्कुराकर बोली, “आप भी न पिता जी!” और अपने ससुर के पीछे पीछे होटल के अंदर गयी. बूढ़े ने फॉर्मलिटीज पूरी करके कमरे का चाभी लिया और दोनों कमरे के तरफ बढ़े….

कमरे में दाखिल होते hi ससुर ने बैग्स ज़मीन पर रखकर जल्दी से पायल को अपनी बाहों में ज़ोर से जाकर कर उसकी मुंह में अपना जीब ठुस्स दिया और पायल ने मुंह खोल कर अपने ससुर का जीब चूसने लगी, दोनों खड़े पोजीशन में hi थे ….. दोनों ज़बरदस्त किश में खो गए और ससुर का हाथ अपने बहु के बैकलेस ब्लाउज के पीछे, यानी पीठ पर जोश से रागढ रहा था फिर पायल अपने आप hi अपने हाथ को ससुर के लुंड पर मलने लगी पंत के ऊपर hi….. फिर दोनों आहिस्ते आहिस्ते किश करते दौरान चलते चलते बिस्तर तक पोहोंचे और ससुर ने एक छोटा सा धक्का देकर पायल को बीएड पर लेता दित्य और जल्दी जल्दी अपने कपडे उतारने लग gaye….ussko देख कर पायल ने अपनी साडी उतारना शुरू किया बीएड से उठकर और जब वह सिर्फ उस बैकलेस ब्लाउज और पेट्टी कोट में कड़ी थी अपने ससुर के सामने, तो बूढ़े ने उस्सकी हाथ पाकर कर उस्सको अपने ऊपर खिंचा और पायल की चूचियां ब्लाउज समेत ससुर के नंगे छाती पर डाब गए और ससुर उस्सकी गले को चुस्सने लगा और भी जोश mein…..sasur उस वक़्त रात की दृष्ट को अपने दिमाग़ में प्रीव्यू कर रहा था के कैसे पायल अपने bête से छुड़वा रही थी मज़े के साथ…..

फिर धीरे धीरे पायल का हाथ फिर से ससुर के लौड़े तक पोंहचा और वह अपने ससुर का लुंड हाथ से मसलने लगी जबकि ससुर उस्सकी चूचियों को अपने मुंह में लिए चूस रहा था ब्लाउज को उतार कर…. ससुर का लुंड एकदम जमके खड़ा था और पायल कभी हाथ से मसल रही थी तो कभी अपने जाँघों के बीच रागढ रही थी क्यों के उस वक़्त भी दोनों बीएड के पास खड़े थे…. तब ससुर अपने घुटनों पर ज़मीन पर गया और पायल की कमर पर दोनों हाथों को रखे उस्सकी पेट्टी कोट को निचे के तरफ खींचे लगा और उस्का मुंह अपनी बहु के पथ से लेकर आहिस्ते आहिस्ते फेरता गया निचे के तरफ और जून जून पेट्टी कोट निचे उतरता गया ससुर का मुंह वैसे hi ज़्यादा निचे होता गया, तो पायल के पथ से होकर उस्सकी पंतय पर मुंह पोंहचा, फिर और ज़्यादा निचे, उस्सकी छूट पर मगर पंतय के ऊपर, और पेट्टी कोट निकल गयी तो ससुर ने बहु की जाँघों को चाटना और चुस्सना शुरू किया बड़े जोश में जब के पायल अपना होश खोटी गयी सर को ऊपर उठाये छत्त की अवर देखते हुवे…. पायल ने फिर धीरे से कहंर्ती आवाज़ में कहा, मैं लेथ रही हूँ, मेरे पेयर कांपने लगे हैं….. उस वक़्त ससुर अपने डेंटन से उस्सकी पंतय उतार रहे थे…..

फिर पायल लेथ गयी बीएड पर और ससुर ने पंतय उतार कर, उस्सकी दोनों पैरों को दोनों तरफ खोल कर अपना सर बीच में दाल कर उस्सकी छूट का रस चुस्सने लगा और पायल सिसकारियां चोररटे हुवे ससुर का सर अपने हाथों में दबती गयी और ज़ोर से अपनी छूट पर दबाते हुवे…. कुछ देर तक छूट चुस्ता गया तो पायल ने धीरे से कहा, “आप अपने उस्सको इस तरफ करें तो मैं भी मुंह में लेलूं नाह!” तो ससुर ने 69 पोज़ किया और पायल बड़े मज़े से अपने ससुर का लुंड चुस्सने लगी जबकि बूढ़ा उस्सकी छूट का मज़ा ले रहा था…. छूट की पंखुरियों को अपने उँगलियों से खोल कर अपना जीब उन् के बीच ऐसे चला रहा था के पायल जोश में उसस्के पुरे लुंड को अपने मुंह के अंदर अपने हलक़ तक ले रही थी और ससुर अपना कमर भी हिल्ला कर अपने लुंड को उस्सकी मुंह के अंदर तुस्ता जार अहा था यहाँ तक के पायल खनस्सने लगी और उस्सको सांस लेने में तकलीफ होने लगी…

आखिर में नार्मल पोजीशन पर आया ससुर अपनी बहु के ऊपर उस्का लुंड उस्सकी छूट के ऊपर रगड़ते हुवे, और पायल अपने दोनों बाँहों को ससुर के काँधे के ऊपर करके उस्का पीठ सेहला रही थी, तो ससुर बोलै, “तेरा बीटा कमरे में तेरे साथ रात भर सोता है तो किआ वह इतनी गरम जवान माँ को अकेली चोरर देता है किआ? हम्म उस दिन तुम ने कहा था के उस्का लुंड मुझपर गया है, और कहा था के वह अजीब सी बातें करता है तेरे साथ अब बोल न किआ वह तुझको छोड़ना चाहता है किआ?” पायल को याद है के इस से पहले के सरजू उस्सको चोदे उस्सने ससुर से यह बातें की थी मगर वह ससुर को बताने से झिजागति थी…. मगर इस वक़्त जिस जोश में गरम हो रही थी उस के मुंह से निकल गयी, “हाँ मेरा सरजू एहि चाहता था, मैं ने कहा था के वह आप पर गया है बिल्कुल आप की तरह करता है मेरे साथ बहोत दिनों से मेरे साथ हमबिस्तर होना चाहता था और मैं ने उस्सको करने दिया….”

जिस दम उस्सने यह कहा बूढ़ा का लुंड उसस्के अंदर बड़े जोश से ग़ुस्सा और उस्सने एक ज़ोर से “आआह ोोोूई माआ…” कहा और बूढ़ा धक्का देने लगा एक से बढ़कर एक, और पायल उसस्के नीचे कहंर्ती, तृप्ति गयी सिसकारियों के साथ अपने जिस्म को अपने ससुर के जिस्म से ज़ोर से चिपकाए और उसस्के कंधे को चूस्ते और अपना दन्त गढ़ते… बूढ़ा छोड़ता गया ज़ोरों से यह कहते हुवे, “मेरा सरजू तो बड़ा किस्मत वाला निकला, अपने बाप और दादा की माल को भी अपना लिया लौंडे ने, वह किआ किस्मत पाया है मेरे पोते ने, आखिर तुम चीज़ hi ऐसे हो ऋ पायल तुमको तो कोई भी छोड़ना चाहेगा, “आअह्ह्ह आआ!! ुघ्घुघुउघ… मैं झड़ने वाला hon…aaaaaaaa” पायल कसके उस्सको अपनी बाहों में दबाये रखा कुछ देर फिर जल्दी से कहा, “बाहर निकालिये आप जल्दी कीजिये मैं प्रेग्नेंट नहीं हो सकती….” और बूढ़ा कहाँरते हुवे अपने लुंड को बाहर निकला हाथ में पकड़े और पायल से बिनती की के वह अपने मुंह में ले, तो पायल जल्दी से उठकर ससुर के लुंडको अपने हाथ में लेकर मुंह के पास किया और अपने जीब को बाहर निकला के पहात से बूढ़े का पानी पिचकारी की तरह पायल के जीब पर, मुंह में, चेहरे पर और गले पर टपका……. पायल अपने हाथ को चलाती गयी उसस्के मोठे लम्बे तन्ने हुवे लुंड पर और और इंतज़ार करती रही के सब वीर्य गिर्र जाये, फिर अपने मुंह में पारी वीर्य को थूक कर ससुर के लुंड को अपने मुंह में लिया जबकि बूढ़ा “ऊऊफफफफ ाआअह ऊघ्गहगहगह… आआहाहाः” करता गया और अपने हाथ को अपने बहु को गीली छूट पर रगड़ता गया……

जल्दी जल्दी दोनों तैयार हुवे छोड़ने के बाद और उस होटल से निकले घर वापस जाने के लिए….. बस में लौटते वक़्त ससुर ने पायल से कहा, “अब सरजू तो हम दोनों के बारे में जानता hi है, तो क्यों न एक रात हम दोनों दादा और पोता तेरे साथ करें?” पायल मुस्कुरायी और कहा, “पता नहीं सरजू मानेगा के नहीं?” ससुर ने कहा, “तुम उस्का फ़िक्र मत करो, मुझ पर चोरर दो मैं उस्सको मन लूंगा और वह ज़रूर अपनी माँ को अपने दादा के साथ शेयर करेगा…” तो पायल मुस्कुराते हुवे अपने ससुर के काँधे पर सर रख कर कहा, “जैसा आप ठीक समझे पिता जी!”

तो बे कॉन्टिनोएड……………….. (4400 वर्ड्स फ्रॉम बोथ उपदटेस)
 
अपडेट 103


ससुर ने अपने फार्महाउस जाने का प्लान बनाया. सरजू और पायल तैयार थे जाने को वीकेंड पर. फ्राइडे इवनिंग को जाना था और संडे नाईट को वापस आना. अब घर में सब को बताना था के जो लोग जाना पसंद करेंगे साथ चल सकते हैं. कोयल और रोशन ने कहा वह नहीं जाएंगे इस लिए के दोनों ने सोचा सब लोग चले जाएंगे तो वह दोनों घर में अकेले मौज करेंगे भर वीकेंड. और पूनम और पद्मिनी ने सोचा के ससुर पायल को छोड़ने के लिए जा रहा है, क्यों के ुन्नन लोगों के साथ ससुर यह कर चुक्का है फार्महाउस लेजाकर तो वह दोनों कबाब में हड्डी नहीं बनना चाहते थे तो दोनों ने जाने से इंकार किया. सरजू के दादी ने कहा वह बहोत थक जाती है हर बार जब फार्महाउस जाती है तो वह तो घर पर hi आराम करेगी. तो हुवा यह के एक अकेली ाव्रत पायल और 4 मर्द जाने के लिए तैयार थे, चार मर्द थे Sasur,usske दोनों bête धानंद और रमेश और सरजू.

सब को पायल को छोड़ने की ख्वाहिश थी उस जगह जाकर. और ससुर ने तो प्लान किया था के सरजू के साथ वह पायल को chodega…magar अब धानंद और रमेश भी चलने को तैयार थे तो किआ ससुर अपना सपना पूरा कर पाएगा के नहीं चलो देखते हैं…..

फ्राइडे की शाम को सब फार्महाउस पोंछे सभी सामान के साथ. फार्महाउस में 6 कमरे थे, तीन ऊपर और तीन निचे. सरजू ने कहा के वह ऊपर वाले कमरे में सोयेगा और अपने मम्मी को भी ऊपर hi आने को कहा. तो दादा ने कहा वह भी ऊपर का hi कमरा लेगा. तो दो कमरे तो गए. अब धानंद और रमेश के लिए एक hi कर्मा था ऊपर, तो दोनों भाइयों ने सोचा के वह दोनों एक hi कमरे में रहेंगे. अब फार्महाउस पुराने लकड़ी का मकान था, अंदर सब लकड़ी से बने थे….. जिस कमरे को धानंद और रमेश ने लिया वह बिल्कुल पायल वाले कमरे से जुड़ा हुवा था और क्यों के लकड़ी के बने थे तो जो बातें सरजू और उस्सकी माँ कर रहे थे सब सुनाई दे रहा था उन् दोनों भाइयों को. दादा का कमरा भी पायल के कमरे से जुड़े थे मगर दूसरे तरफ से. याने पायल का कर्मा बीच में था और एक तरफ ससुर का कर्मा और दूसरे तरफ धानंद वाला. लकड़ी का दीवार था, प्लांक्स से बने और पुराने होने के कारण जगह जगह पर चढ़ भी थे दीवार मैं…..

तो जाते hi धानंद ने पायल के कमरे में झांकना शुरू किया. रमेश देख रहा था और धीरे से अपने बड़े भाई से पुछा, “दिख रही है? किआ कर रही है?” धानंद ने कहा, “अबे, अपनी साड़ी बदल रही है और उस्का बीटा उस्सको साडी बदलते हुवे देख रहा है आ देख….” तो जल्दी से रमेश भी गया एक दूसरे चढ़ से झाँकने को….. पायल अपनी साडी उतार चुकी थी और ब्लाउज को खोल रही थी और सरजू बिस्तर पर बैठकर अपनी माँ को देख रहा था….. दोनों चाचा बहोत हैरान हुवे और एक दूसरे को देखने लगे हैरानगी में. फिर आपस में बात की दोनों ने. “किआ तुम्हारे ख़याल से कुछ है माँ bête के बीच?” धानंद ने रमेश से पुछा. रमेश बोलै, “नहीं रे यह नहीं हो सकता, वह बस देख रहा है, देख पायल ने अपनी पीठ किया है उसस्के साथ उस्सको सिर्फ अपनी मम्मी की पीठ दिख रही है…”

शुक्र है के उस वक़्त सरजू ने कोई शैतानी नहीं की वार्ना सब पता चल जाता दोनों चाचाओं को. मगर कितने देर तक पता नहीं चलेगा जब के सब साथ हैं....?

फिर भी धानंद ने कहा, “एक जवान बीटा अपनी माँ को कपडे बदलते ऐसा देखता है किआ? देखा तुमने वह किश तरह से देख रहा था? उस की ेंखों में हवस थी, वह मैं hi मैं चाहता होगा, पता है तुम्हें के जब हम लोग पायल के सात रात को उस्सकी बीएड पर कभी जाते हैं तो वह अपनी बीएड पर उसी कमरे में होता है तो किआ उस्सको कभी पता नहीं चला होगा के हम सब उस्सकी माँ को छोड़ते हैं अक्सर? तुम्हारे ख़याल में किआ उस्सको पता नहीं चला होगा?” रमेश ने कहा, “मैं ने भी कई बार ऐसा सोचा है, पता है एक रात को मैं पायल के साथ एन्जॉय कर रहा था तो सरजू ने करवट ली थी कुछ गले को साफ़ करते हुवे और उस वक़्त पायल कनहर रही थी ‘आआह्ह्ह ससससष्ठ ोोूह’ तो मैं ने पायल को शांत कराया यह कहकर के सरजू शायद जग गया है तो पता है पायल ने किआ जवाब दिया था मुझको?” धानंद बेचैन होकर पुछा, “किआ? किआ जवाब दिया उस्सने?” रमेश बोलै, “उस ने कहा, “तुम किआ समझते हो उस्सको पता नहीं के तुम सब मुझको छोड़ने एते हो?” धानंद कुछ हैरान होकर बोलै, “साली बिल्कुल हया नहीं उस्सको के उस्का जवान बीटा को मालूम हो या नहीं बुसस चुदवाती रहती है, उस्सको तो मज़ा लेने से मतलब है सरजू देखे या जाने उस्सको परवाह नहीं!”

फिर रमेश ने कहा, “तो किआ वह सरजू से भी छुड़वा नहीं सकती? किआ पता के बीटा hi माँ को छोड़ रहा हो? हम लोग तो कितने दिनों से नहीं गए उस के पास?!” धानंद ने कहा, “अरे यार यह हमारा फॅमिली मेंबर है तो इस्को भी हक़ बनता है नाह! हम सब फॅमिली के सभी ाव्रतों को छोड़ते हैं तो यह भी मज़ा करता होगा किआ पता, वैसे मर्द होजाएगा तो तेरी मेरे पत्नी को भी तो छोड़ सकता है sala!hahahahaha!” और धानंद हंस कर बोलै, “हाँ जब हमारे पिता हमारे पत्नियों को छोड़ सकता है तो यह भी तो सदस्य हुवा नाह परिवार का, तो हम इस्को तो मन नहीं कर सकते!” और रमेश ने कहा मुस्कुराते हुवे और अपने लुंड को पंत में सीधा करते हुवे, “हाँ और जब मैं तेरे पत्नी के साथ और तू मेरे पत्नी के साथ सो सकता है तो यह क्यों नहीं! वैसे हमारे पत्नियां सब मर्दों को तो करने देते हैं घर में, सब बिल्कुल हमारे घर के रंगों में रंग गए हैं....” धानंद कुछ सोचकर मुस्कुरा रहा था. तो रमेश ने कहा, “तुमसे एक बात कहना चाहता था कई दिनों से, मगर कुछ हिचकिचाहट होती है, कहूं किआ?” तो धानंद ने उस्सको जवाब दिया, “हम दोनों के बीच किआ हिचकिचाहट, तू बेफिक्र होकर बोल कुछ भी बात हो!”

तब रमेश ने कहा, “देख बुरा मत मानना, हम दोनों ने अपनी पत्नियन शेयर किया है सालों से, और हम इस मामले में इतना ओपन माइंडेड हैं दोनों और पिताजी भी इस लिए बेददक कह देता हूँ...... सुन, तेरा कोयल बड़ी खूबसूरत होगयी है, किआ उस्सको ट्रैन नहीं करेगा? या कर चुक्का है पर सिर्फ अपने लिए बचा के रखा है?” यह सुनकर धानंद ज़ोर से हंसा और कहा, “उस्सको भी लाना चाहिए था नाह?” और रमेश ने कहा, “और नहीं तो किआ बिल्कुल उस्सको भी यहाँ होना चाहिए था इस वक़्त!” तब धानंद ने जवाब दिया अपने छोटे भाई को, “अरे मेरे भाई वह रोशन के साथ मज़ा कर रही होगी!” रमेश एकदम चाहोंक कर पुछा, “किआ? अपने भाई के साथ करती है वह? और तुझको पता है?” धानंद ने कहा, “हाँ कई बार रात को उन् के कमरे में गया हूँ तो दोनों को बिल्कुल नंगे नींद में देखा है बीएड पर एक साथ तो सब साबित होता है नाह!”

रमेश: “चाह! और तुमने कुछ नहीं कहा दोनों को?”

धानंद: “किआ कहता? हमारे परिवार का तो यह एक ट्रेडिशन जैसा है अपने आप में chodna....to मैं ने भी फायदा उठाया कोयल के साथ!”

रमेश: “साला! मुझे शक था के तू ने अपनी बेटी को छोड़ना शुरू कर दिया होगा! उस्सकी खूबसूरती और गदराये जिस्म को देखता हूँ तो लगता है यह छुड़वा चुकी hai...aur मुझे शक था, साला मुझको टास्ते करने को नहीं दिया तुमने!”

धानंद: “कैसे तुझको देता अभी उस्सको इस स्कूल में दाखिल नहीं किया है, अब लाना पड़ेगा उस्सको..... वह अभी सिर्फ अपने भाई और मुझसे करती है मगर मुझे शक है के अपने दादा को भी देती है, मगर पुरे यकीन से नहीं कह sakta..shaayad...”

रमेश: “और तू कहता है के अभी इस स्कूल में दाखिल नहीं हुवी है? अगर बाप और भाई से चुदवाती है और शायद दादा से भी तो चाचा के छुड़वाने में किआ हर्ज है? बस अब मुझको उस से तरय मारना है.... आआह्ह!” एक काम क्यों नहीं करता, पिताजी के कार लेके घर जा, और उस्सको लेकर आ, कहना के उस्सकी चची और सरजू उस्सको बुला रहे हैं और उस्सको हम अपने साथ इसी कमरे में रखेंगे, किआ ख़याल है?”

धानंद: “और अगर रोशन भी आना चाहे तो? तब किआ होगा?”

रमेश: तू उस्सको किसी तरह से मन करदेना यार. चाहे तो उस्सको एक कोने में बुलाकर साफ़ बता देना के तू उसस्के साथ रात गुज़ारना चाहता है और अगर वह आया तो तुमको डिस्टर्ब करेगा, वह समझ जायेगा!”

धानंद: “तो जावून किआ?”

रमेश: अबे जा जल्दी कर! थेर मैं भी साथ चलता हूँ, अगर रोशन ने मन किया तो मैं भी उस्सको समझने की कोशिश करूँगा......

धानंद: “ठीक है चल”

और दोनों भाई ने बूढ़े से कार की चाभी लिए और वापस घर गए कोयल को लेन के लिए.

तो बे कॉन्टिनोएड......................
 
अपडेट 104


हाँ तो सरजू के दोनों चाचा निकले फार्म हाउस से घर के तरफ कोयल को अपने साथ वहां लेजाने के लिए. घर पोहंचे तो दोनों के पत्नियों ने पुछा किआ बात हुवी के अचानक वापस आगये तो दोनों ने कहा के पायल और सरजू ज़िद कर रहे हैं के कोयल को भी वहां ले आएं. अब कोयल से बात हुवी तो रोशन ने ऑब्जेक्ट किया. फिर धानंद तो उस्का बाप था तो उस ने डांटा उस्सको यह कहते हुवे, “अगर तू नहीं जाना चाहता तो आराम कर घर पर उस्सको क्यों नहीं जाना है जब वह जाना चाहती है तो?” रोशन खामोश हो गया और धानंद ने कोयल के बाहें पाकर कर एक कोने में लगाया और धीरे से उस से कहा, “आरी चल बहोत मज़ा आएगा, वहां कुछ और hi बात है, बस कल वापस आजायेंगे शाम तक और संडे को आराम कर लेना, चल न पापा को खुश करने मेरी रानी!” कोयल का मन मोह लिया उसस्के पापा ने और वह जाने को राज़ी हो गयी. उस्सको पता था के रोशन नाराज़ होगा क्यूंकि रोशन को पता है उस्का बाप कोयल को क्यों लेजाना चाहता है अपने साथ और रोशन को यह भी पता है के दादा भी है वहां तो कोयल के साथ सुब मज़ा करेंगे, यह सोचकर उस्सको जलन हो रहा था और ग़ुस्सा ारः था मगर किआ कर सकता था कुछ भी तो नहीं, तो खामोश रहा मगर कोयल को मोठे मोठे ेंखों से देख रहा था, और कोयल उस्सको और जला रही थी चंचल नटखट अदाओं से.

जब कोयल तैयार होकर निकली अपने कमरे से तो क़यामत धा रही थी. एक मिनी स्कर्ट और एक टॉप पहनी थी, पूरा जांघ दिख रहे थे और चूचियों का फॉर्म उस टॉप में उभर रहे थे. खुद धानंद और रमेश दोनों के लुंड उठ गए पंत में और रोशन बेकाबू हो गया, उस्का मैं किया के उसी वक़्त कोयल को पाकर के बिस्तर पर लेटाएं..... मगर धानंद और रमेश कोयल को लेकर गाडी के तरफ जाने लगे. रोशन दावते हुवे दरवाज़े तक गया कोयल को वेव करने, और कोयल ने मुड़कर रोशन को वेव भी किया तो अपने जीब को निकाल कर उस्सको चरते हुवे! रोशन बड़बड़ाया, “साली छुड़वाने जा रही है और खुश भी है जा खूब छुड़वा के आना!!”

कार में दोनों चाचा आगे वाले सीट पर बैठे थे और कोयल अकेली पीछे वाले सीट पर. कभी कभार रमेश पीछे मुड़कर देख रहा तो, जिस तरह से कोयल बैठी थी, और वैसे मिनी स्कर्ट से कार की सीट पर कोई भी बैठता तो जाँघों के अंदर वाले हिस्सा तो साफ़ नज़र एते hi हैं मगर कोयल ने तो दोनों जांघ दोनों तरफ फैलाये हुवे थे तो दोनों जाँघों के बीच जो नरम और मुलायम हिस्सा होता है उस पर रमेश की नज़र गए और उस्सने धानंद को चुवा और ेंखों से इशारा करते हुवे कोयल को देखने को कहा. धानंद क्यों के ड्राइव कर रहा था उस ने रियर मिरर को एडजस्ट किया कोयल पर और उस्सकी सफ़ेद रेशम की पंतय भी दिख रही थी, खुद बाप का लुंड मचल गया..... दोनों भाइयों ने एक दूसरे को देखा और धीरे से धनद ने रमेश से कहा, “तू बेचैन है उस्सको लेने के लिए?” रमेश ने “हाँ यार” कहा, तो धनद ने स्टीरिंग व्हील घुमाया एक कच्चे रास्ते के तरफ..... कोयल को शक हुवा के उसस्के पिता और चाचा उस्सको छोड़ने के लिए ले जा रहे हैं..... वैसे वह अपने पापा और दादा से चुदवाती तो थी मगर रमेश चाचा ने कभी नहीं चुवा भी था उस्सको. वह मन hi मन एक दिन सोच रही थी के घर के सभी मर्दों के उस से खूब मज़ा किया है सिवाए रमेश चाचा के.... मगर फिर सोचने लगी के किआ पापा खुद अपने छोटे भाई को अपनी बेटी को छोड़ने देगा, यह सोचा तो उस्सने अपने मैं में कहा, “नहीं मेरे खयालात कितने गंदे हो गए हैं, पापा के सामने रमेश चाचा तो कुछ नहीं कर पायेगा, और ना hi पापा कुछ कर पायेगा चाचा के सामने, तो पापा ने क्यों कहा के बहोत मज़ा आएगा!!!” यह सोच hi रही थी कोयल के धानंद ने कार एक सुनसान जगह पर पार्क किया. दोनों तरफ पेयर पौधे थे, सामने पहाड़ियां और एक भी जिव जंतु का पता नहीं था. कोयल का दिल धड़का और सोचने लगा के यह दो मर्दों के इरादे किआ हैं......

जब कार की इंजन को बंद किया गया तो कोयल भोली बनते हुवे पूछा, “किआ हुवा पापा? क्यों हम यहाँ रुके हैं?” और धानंद गाड़ी से बाहर निकला और पीछे के सीट पर गया जब के रमेश कार के बाहर खड़ा देख रहा था…… धानंद ने ेंख मार्के रमेश को इशारा कर दिया था के, कुछ देर बाद ज्वाइन करें….. धानंद अपनी बेटी के पास बैठा और एक हाथ को कोयल के जांघ पर फेरते हुवे कहा, “किआ चुण्णके तुमने ड्रेस पहनी है डार्लिंग, पापा बहोत खुश हुवा और दूसरे हाथ उसस्के कांधों पर करके उस्सको अपने सीने के तरफ khinchaa…to कोयल कुछ हिचकिचाते हुवे बाहर अपने रमेश चाचा के तरफ देखते हुवे धीमी आवाज़ में एक छोटी सी मुस्कराहट के साथ अपने पापा से बोली, “पापा, रमेश चाचा बाहर से देख रहा है, किआ कर रहे हो आप चोर्रो मुझे….” और बिना उस्सको चोर्रे धानंद ने कहा, “कोयल बेबी, तेरा चाचा भी तुझसे एहि चाहता है आज हम दोनों भाइयों को खुश करदे मेरी गद्य….” कोयल ने ऐसा सोच रखा था मगर यकीन नहीं था के ऐसा हो भी सकता है तो उस्सको ज़्यादा हैरानी तो नहीं हुवी मगर हैरान होने की नाटक करते हुवे उस्सने अपने पापा से सूरत बनाते हुवे कहा, “पापा, यह किआ कह रहे हो आप, मुझे बहोत शर्म आएगी, किआ रमेश चाचा को पता है के आप मुझसे यह करते हो?” “उस्सको सब पता है मेरी रानी, उस्सको यह भी पता है के दादा भी तेरे साथ मज़े उडाता है और हम दोनों को पता है के तेरा भाई भी तेरा जलेबी खा चुक्का है मेरी रानी! तू चीज़ hi ऐसी है, हम तेरे चची के पीछे पड़े थे पता hi नहीं चला कब तुम ऐसी पटाखा बन गयी……” तब तक उस्सने अपनी बेटी का मुंह अपने मुहं में ले लिया था और उसस्के होंठों और जीब का रस का स्वाद ले रहा था…. उसस्के जीब चूस्ते वक़्त धानंद ने अपने एक हाथ को बिल्कुल कोयल के मिनी स्कर्ट के निचे दाल दिया और उस्का हाथ कोयल की पंतय के ऊपर hi उस्सकी छूट को गुदगुदा रहा था और बाहर रामह घुटनों पर बैठ गया यह देखने के लिए अपने लुंड को हिलाते हुवे….. छोटा भाई अपने बड़े भाई को खुद अपनी बेटी की छूट पर ऊँगली फेरते हुवे देख रहा था, यह देखकर और दिमाग़ में सोचते हुवे रमेश से सब्र नहीं हो पाया और कार के अंदर ग़ुस्सा अपने पंत और अंडरवियर को निचे रख कर …. और कैसे भी करके धानंद के पार होक, अपने लुंड कोयल के मुंह तक लगाया तब धानंद ने कोयल को चूमना चोर्रा और देखने लगा के कोयल कैसे अपने चाचा के लुंड को मुंह में लेती है….. उस्का भी खून रगों में तेज़ दौड़ने लगा जब उस मंज़र को देखा तो…. और एक्ससिटेमेंट में जल्दी से कुछ वियलेंटली कोयल की पंतय को खिंच बाहर निकाल फेंका और अपने जीब से उस्सकी की भीगी हुवी छूट को चाटने लगा उस्सकी दोनों जाँघों के बीच अपने सर को ग़ुस्सा कर…. कोयल ने अपने दोनों नाज़ुक हाटों से अपने चाचा के लुंड को पकड़े हुवे उस्सकी लुंड के पहले हिस्से को मुंह में अंदर बाहर कर रही थी चूस्ते हुवे…. और रमेश अपना कमर हिलाते हुवे जैसे कोयल के मुंह में hi छोड़ रहा था और निचे के तरफ कोयल का बाप उस्सको चूसे जा रहा था….. कोयल जैसे सातवे आसमान पर थी बेकाबू, सिसकते हुवे, अपने बदन को एक रेंगते हुवे सांप की तरह इधर से उधर मूढ़ते…. अपने लुंड चुस्स्वते वक़्त रमेश ने अपने हाथों को कोयल के टॉप के निचे दाल कर उस्सकी चूचियों को दबाते हुवे “स्सश्श्श्श्शस्सस्स आआह ाआअह” की आवाज़ दे रहा था और कोयल की टॉप और ब्रा दोनों निकाल pheinka…..Koyal बिल्कुल नंगी घर के दो सदस्य के बीच कार के पिछले सीट पर आगरा रही थी….

कार के सीट पर तीन लोगों को यह सब करना मुश्किल लग रहा था तो धानंद ने कहा, “बाहर चलते हैं, वहां एक पत्थर है ुसस्पर आराम से सब कर सकेंगे चलो….” और तीनों बाहर गए, कोयल को, नंगी अपने गॉड में रमेश लगाया उस्सको चूमते चाटते हुवे…. और वहां पोहोचते hi कोयल की जांघ को दोनों तरफ फेरकर रमेश ने अचानक अपना लुंड उस्सकी छूट के अंदर दबोचा ज़ोर से के कोयल की आवाज़ चीख में निकली ज़ोर से और फिर कहांरने लगी जब चाचा ने छोड़ना शुरू किया अपने कमर हिलाते हुवे एक के बाद एक ज़बरदस्त धक्का देते हुवे… कोयल ‘ “आआआह उफ्फ्फफ्फ्फ़ ऊऊउउउउउइइइइ माआआ िस्सश्श्श्श्शस्स्सस्स्स्स” जैसे आवाज़ देते हुवे अपने दोनों जाँघों को चाचा के कमर के ऊपर क्रॉस कर दिया और खुद भी अपनी कमर हिलने लगी मज़ा लेटते हुवे…… उस दौरान धानंद अपनी बेटी की अंगडायिओं को और तरप को देखते हुवे बहोत खुश हो रहा था और जो मज़ा उस्सको देखने में आरहा था वह एक अलग बात थी…… थोड़ी देर देखने के बाद उस्सने रमेश का पीठ थपथपा और उस्सको पोजीशन चेंज करने को कहा, तो रमेश अपने लुंड कोयल के छूट में लिए हुवे खुद अपने पीठ पर लेथ गया और कोयल उसस्के ऊपर हो गयी, और धानंद ने अपने लुंड पर थोड़ा थूक लगाया, फिर अपनी बेटी के गांड के छेद पर थूका और अपने लुंड को हाथ में लिए हुवे कोयल के छेद पर फेरते हुवे उस में घुसाया….. पहला हिस्स्सा घूसस्ते hi कोयल ने एक चीख मारी और रमेश चाचा के गले पर अपने डेंटन को गदया….. फिर उसस्के बाप ने अपने लुंड को कुछ और अंदर ठुस्सा और कोयल ज़्यादा तड़पने लगी , “उफ्फ्फ्फ्फ़ मेरी maaa..aaaahahahaaaaa पापा मार डालोगे मुझे उफ़ दर्द हो रहा है, दो दो लुंड मेरे अंदर एक बाप का एक चाचा का हाय मेरी माँ मैं किआ करूँ उफ्फ्फफ्फ्फ़ आआआह….” रमेश अपने लुंड को उसस्के गीले छूट में चला hi रहा था के पीछे से धनद उस्सकी गांड में अपना मोटा लौड़ा चलने laga….woh गयी बीच में प्यारी कोयल दो लुन्डों को कहते हुवे….. धानंद को बेहद मज़ा रहा था क्यों के पीछे तो बहोत ज़्यादा टाइट रहता है लुंड के नसों में खून के रवानी बढ़ रहे थे और बहोत hi जल्द उस ने महसूस किया के झड़ने को है और ज़ोर से पीछे से कोयल के दोनों चूचियों को मसलते हुवे कहांरना शुरू किया, “आघ्घघघघघ अअअअअअअ स्सश्श्श्शस्स्सस्स्स्स मैं…… मैं तेरे गांड के अंदर HI झाड़ जाता हूँ मेरी गद्य वहां तो प्रेग्नेंट होने का डर नहीं आआह्ह्हआआआ कितना मज़ा दिया तूने अपने पापा को मेरी गद्य रानी अरे वह स्स्स्सस्स्स्शशष्ष्ह्हह्ह्ह्ह” और धानंद झाड़ गया अपने बेटी की गांड में और रमेश कमर हिलाये जा रहा था और उस्सको मज़ा भी आने लगा ठीक उसी वक़्त कोयल चिल्लाई “िस्स्सस्स्स्श ाआअह chaachu…..abhi मत निकालना प्लीज वेट करो मैं आ रही हूँ आआआआहहहहाआआ बहोत माज़ा ारः है chachu….haye रे हाय मैं मर जवान….. iiiiiisshshshshsssssssssssssssssssssss” उस्सने अपने पुरे जिस्म को अपने चाचू के जिस्म पर दबाते हुवे रगड़ने लगी जब झड़ने लगी thi….thik जैसे झाड़ गयी तो रमेश ने अपने लुंड को हाथ में थामे बाहर निकला और के प्रेशर की पिचकारी मारी के कोयल के छाती से लेकर चेहरा भी तर बतर हो गया……

तो बे कॉन्टिनोएड………………….. (3500 वर्ड्स फ्रॉम बोथ उपदटेस)
 
अपडेट 105

तीनों रवाना हुवे वहां से सीधे फार्म हाउस. वहां पर सरजू, उस्सकी माँ पायल और दादा जी वेट कर रहे थे. अब सब को पता है के कितनी मुश्किल से दादा ने ये प्लान बनाया था के सरजू के साथ उस्सकी माँ को चोदे! पायल से उस ने कह भी दिया था के वह और सरजू एक साथ उस्सको छोड़ना चाहते है और उस वक़्त पायल ने उसस्के कहा था के पता नहीं सरजू मानेगा के नहीं फिर बूढ़े ने कहा था वह उस पर चोर दिया जाये वह सरजू को मन लेगा…. आप यह सब पिछले 4/5 उपदटेस में पढ़ सकते हैं.

अब बूढ़ा कोयल को भी छोड़ता है यह धानंद को पता है मगर बूढ़े को पता नहीं के उस्का बीटा जानता है के वह उसस्के बेटी को भी छोड़ता है….. और यह भी के शुरुवात तो कोयल के साथ बूढ़े ने hi किया था किसी और ने तो नहीं. तो जब बूढ़े ने कोयल को एते हुवे देखा तो हु उलझन में पद गया के अब किआ किया जाये एक तरफ पायल तो उस तरफ कोयल…… मगर फिर भी बूढ़े के लिए पायल को सरजू के साथ छोड़ने में ज़्यादा इंटरेस्ट था…. महीनों भर उस ने इंतज़ार किया, कितना वक़्त लगाया अपने पोते को समझने बुझाने में, कैसे कैसे करके उस ने माँ bête को छोड़ते हुवे देखा उन् के कमरे के अंदर घुस्स्कार, कैसे कैसे उस्सने फिर पायल को छोड़ा उन् दृष्टों को दिमाग़ में लिए हुवे….. वह बेताब था रात को पायल और सरजू के साथ एक hi बिस्तर शेयर करने के लिए……

मगर वह यह भी सोचने लगा के कोयल कहाँ सोयेगी…. कुछ फ़िक्र में पद गया के कहीं कोयल का बाप यह न कहे के कोयल, सरजू और पायल को एक साथ सोने दिया jaye…ussko बहोत घबराहट हो रही थी के कहीं उस्का इतने मुश्किल से बनाया हुवा प्लान बिगड़ न जाये…..

इतना थ्रिल्स और एक्ससिटेमेंट था चारों तरफ फार्महाउस के मकान में के किआ कहा जाए….. उधर धानंद और रमेश सरजू और उसस्के माँ को झांक रहे थे अपने कमरे में से और कोयल को भी देखने को कह रहे थे, उधर दादा पायल के कमरे जाने के लिए बेताब था….. किआ और कैसे होगा चलो हम भी देखते हैं यारो लुंड संभाल कर कहीं गिला न होजाये :lol:

डिनर के वक़्त सब मिले निचे बरामदे में खाना खाये और कुछ बात चीत की. दोनों लेडीज किआ सज धज कर दिख रहे थे! पायल ने एक हाफ साड़ी पहनी थी एक बहोत टाइट ब्लाउज के साथ और क्लीवेज की किआ बात थी कहने की ज़रुरत नहीं, बैकलेस ब्लाउज, और उस्सकी लंहगा भी इतना टाइट था के उस्सकी जांघ के फॉर्म दिख रहे थे जब किसी भी मूवमेंट से पैरों का इस्तेमाल करना परता था…. सभी मर्दों के नज़र कभी उस पर तो कभी कोयल पर थे… कोयल ने एक ब्लाउज और स्कर्ट पहनी थी जिस में उस्सकी सफ़ेद, गोर जांघ नज़र आरहे थे और वह भी किसी ऐसी वैसे मूवमेंट करती तो नज़ारा बड़ा दिलकश्त हुवा करता था और मर्दों के नज़रें ख़ुशी से झूम जाते थे….

सरजू ने कभी भी कोयल के बारे में कुछ ग़लत नहीं सोचा था अब तक. उस्का चचेरा बेहेन थी वह. मगर जिस तरह से उसस्के दोनों चाचा कोयल को देख रहे थे और जिस तरह से कोयल अपने पिता और चाचा के साथ लिपट कर बातें कर रही थी और कभी दादा के साथ भी आकर लिपट जाती थी बात करते वक़्त, वह सब देख कर सरजू को कुछ शक सा हुवा मगर फिर भी उस्सने ज़्यादा ड़याँ नहीं दिया उन् पर क्यूंकि वह भी अपनी माँ का दीवाना बना हुवा था….. सरजू कभी अपने दोस्तों के बारे में सोच रहा था, सोचता के अभी अगर दीपक होता तो वह कैसे उस्सकी माँ के पास जाता, कैसे उसस्के करीब होता और किश तरह से सरजू दूर से छुप कर देखता…. सरजू का छुप छुप कर देखने का मज़ा अलग hi था, वह वैसे अपनी माँ को छुड़वाते हुवे देखना बहोत ज़्यादा hi पसंद करता था, वह इस लिए के बहोत छोटे से hi उस्सने एहि देखा है और बड़ा होते होते उसस्के ज़हन में यह छठ और भी बहरह गयी.

जब रात हुवी तो अपने कमरे के पलंग पर पायल लेती हुवी थी पथ के बल, और रमेश और धानंद अपने कमरे से, लकड़ी के दीवार के बीच उस्सको देख रहे थे लुंड को हाथ से सेहलातीए हुवे और कोयल दोनों को देख कर हंस रही थी धीरे धीरे…. दोनों भाइयों ने फिर वही बातें kiye…”Mujhe तो लगता है यह सरजू अपनी माँ को लगाता है” रमेश ने जवाब दिया, “तुमको इस लिए वैसा लगता है क्यों के तू वैसा है और तेरे खयालात वैसे हैं, जैसा तू और हम है ज़रूरी नहीं के सब वैसे हों!” सरजू बाहर से कमरे के अंदर दाखिल हुवा, क्यूंकि वह दादा से मिलने गया था और दादा ने उस से केहड़िया के रात को वह आएगा उसस्के कमरे में दोनों मिलकर उस्सकी माँ को छोड़ेंगे…… सरजू खुश था क्यूंकि यह उसे बहोत पसंद था के दादा के साथ मिलकर माँ को छोड़ें….

उधर से जब धानंद ने देखा के सरजू अंदर आ रहा है तो रमेश से कहा, “देख आगया उस्का बीटा चल उस्सको ेंखों से फॉलो कर तू……” जिस तरह पायल पथ पर लेती थी, उस्सकी छाती के सब क्लीवेज नज़र आरही थी ब्रा के स्ट्रैप्स के साथ. और सरजू पलंग पर गया और अपनी माँ के पीठ पर चार के बैठ गया ठीक उस्सकी गांड par!!To धानंद ने मचलते हुवे आवाज़ में रामएह से कहा, “अबे कोयल को मत देख उधर देख सरजू किआ कर रहा है!!” जब रमेश ने नज़र मारा सरजू वाले कमरे में तो उस वक़्त सरजू एक हाथ से पायल की पीठ सेहला रहा था चूमते हुवे और एक हाथ से अपने शार्ट के अंदर अपने लुंड को शायद सीधा कर रहा था या उस्सको बाहर निकालने की कोशिश कर रहा था…… रमेश का मुंह खुला रह गया और धानंद ने उस्सको देखते हुवे कहा, “देखा अब किआ कहेगा के मेरे सोच घटिया हैं?!” और रमेश ने कहा, “यकीन नहीं हो रहा यार! और पायल मज़े ले रही है, उस्सको कुछ नहीं कह रही, मुस्कुरा रही है अपने bête का लुंड अपने गांड पर रागढ़वाने से!!!”

तब धानंद ने कहा, “अरे अगर हर रात को छोड़ता होगा तो कौन सी बड़ी बात है अभी लुंड को रागढ़वाने में? अभी लुंड तो उसस्के छूट के अंदर घुस्सना बाकी है!!” कोयल ने उन् दोनों को यह बातें करते हुवे सुना तो उनके पास गयी और धीरे से कहा, “मैं भी देखूं तो के सरजू किआ कर रहा है के आप दोनों इतना उतावले हो रहे हो?” और जब वह आयी अपने पापा और चाचा के बीच तो दोनों ने उस्सको बीच में खड़ा करते हुवे अपने अपने लुंड को उस्सकी स्कर्ट को ऊपर उठाते हुवे लुंड को उस्सकी जाँघों पर दबाना शुरू किया….. कोयल भी उत्तेजित हो गयी सरजू को अपनी माँ पर लेते हुवे देख कर और तब तक सरजू ने अपना शार्ट उतार दिया था और माँ की लहंगे को ऊपर उठाकर उस्सकी चुतरों पर अपना लुंड दबा रहा था……..

वैसे दृष्ट देख कर कौन एक्साइट नहीं होगा भला…. तीनों धानंद, रमेश और कोयल बहोत एक्साइट हो गए और कोयल की छूट गीली हो गयी बस यह दिमाग़ में सोचकर के पायल चची जैसी खूब सूरत और जवान ाव्रत अपने जवान bête से चुदवाती है….. वह खुद उस वक़्त छुड़वाने की ज़रुरत महसूस करने लगी और दोनों बाप और चाचा के लुंड को अपने हाथ में ले लिया मसलते हुवे मगर ेंख को सरजू और उस्सकी माँ पर जमाये राखी…..

धानंद और रमेश दोनों के लुंड मस्त खड़ा हो गए थे अपनी बेटी की हाथ की छुवन से ऊपर से भतीजे के हरकतों को देख कर….. सरजू ने धीरे धीरे माँ की हाफ साडी को उतरा और अपनी माँ की मुंह को अपने मुंह में लेकर चुस्सने लगा साड़ी उतारते वक़्त जबकि पायल बड़े लगाव से अपने bête को चुम रही थी अपने दोनों हाथों से उसस्के पीठ को सहलाते हुवे……. और पायल ने पुछा, “तेरे दादा ने किआ कहा? आएगा नाह?” जब धानंद, रमेश और कोयल ने यह सुना तो सब और दांग रह गए के वह दोनों दादा जी का वेट कर रहे हैं!!! धानंद ने कहा, “अरे पिता जी भी सरजू के साथ आएगा! याने के तीनों का प्रोग्राम एक hi है?! कमाल है यार!! हम तीनों भी वहां ज्वाइन कर सकते हैं तब तोह!!!” कोयल की बदन में आग सी दौर गयी और जल्दी से बैठ कर एक एक करके अपने पिता और चाचा के लुंड को चुस्सने लगी सिसकारियों के साथ……………………..

तो बे कॉन्टिनोएड…………..
 
अपडेट 106

इधर से तीनों ने दादा के आने का इंतज़ार किया पायल के कमरे में तब तक कोयल अपने बाप और चाचा के लुंड से खेलती रही जब के वह दोनों ेंखों को जमाये बैठे थे उस तरफ. कोयल बहुत एक्साइट हो गयी जब उस ने सुना के उस्का दादा उसस्के पायल चची को छोड़ने आने वाला है. वह तो खुद अपने दादा के साथ खूब चुदवाती थी मगर उस्सको पता नहीं था के चची भी शामिल है इन् सब में ऊपर से चची इतनी जवान और खूब सूरत है के खुद कोयल अपने पायल चची को बहोत पसंद करती थी और उस्सकी तरह हॉट और सेक्सी बनना चाहती थी. वह बैठी हुवी पोजीशन में दो लुन्डों से खेल रही थी कभी एक को मुंह में लेकर चुस्ती और एक पर अपना हाथ चलाती तो कभी पोजीशन चेंज करके अपने बाप का लुंड मुंह में लेती और चाचा के लुंड पर हाथ चलाती, फिर रुक कर उस ने कहा, “सुनों जैसे दादा अंदर आये मुझको बताना मैं भी देखना चाहती हूँ….” और धानंद ने अपनी बेटी को जवाब दिया, “हाँ मेरी रानी ज़रूर कहेंगे तुमको, तू हमको और मज़ा दे नाह दोनों भाइयों को तब तक ाः मज़ा ारः है मेरी गद्य….”

उधर के कमरे में पायल पलंग से उतर कर सरजू से कहा, “मैं शावर लेकर जल्दी से आती हूँ, तेरा दादा आये तो उस्सको बिठाना, ठीक है?” जो कुछ वह कह रही थी, रमेश दोहरा रहा था ताके कोयल सुनें. तो कोयल ने पुछा, “चाचा, किआ पेहेन कर शावर से निकलेगी मुझे ज़रूर बताना!” ठीक ुस्ससी वक़्त सरजू ने अपने माँ से कहा, “किआ पहनोगी? उस चौथी वाली निघ्त्य लेजाओ उसी में बाहर आना शावर से दादा बहोत खुश हो जाएगा.” पायल एक नटखट मुस्कराहट के साथ निघ्त्य को हाथ में लेते हुवे सरजू को घुररते हुवे कहा, “क्यों रे अपने दादा का बहोत ख़याल है तुझे, उस्सको इतना खुश करना चाहता है अपने माँ से?! हम्म्म? नटखट कहीं का!” और वह बाथरूम के तरफ जाने लगी और, सरजू अपनी माँ की डोलते हुवे गांड को देखते हुवे जवाब दिया, “नहीं माँ मैं चाहता हूँ के जैसे तुम मुझे हॉट दिखती हो वैसे दादा को भी दिखो!”

और बाथरूम के पास पोहोचते वक़्त पायल अपने गेसुओं को खोलते हुवे गयी और ठीक अंदर दाखिल होने से पहले मुड़कर अपने सरजू को देखा और अपने जीभ बाहर निकाल कर उस्सको चेर्रा और अंदर घुस गयी. सरजू तुरंत अपने लुंड को हाथ में लेकर बड़बड़ाने लगा, “माआ मम्मी तू कमाल की है वह!! आज खूब मज़ा लूटेंगे तुझसे दादा और pota…jaldi से बाहर आ मेरी सेक्सी मम्मी! तुझको दादा के साथ बाँट कर खावुंगा!!”

यह सब देख और सुन रहे थे धानंद, और रमेश और रमेश सब बातें कोयल को सुना रहा था. तीनों बहोत एक्ससिटेड थे. धानंद ने कहा, “साली पायल अब तक इतनी जवान कैसे है रे?! कभी कभी तो मुझे कोयल जैसी लगती hai…dekha तुमने किआ मस्त अदाओं से उस्सने अपने bête को रिझाया बाथरूम तक जाते वक़्त? साला लगता था के उस्का बीटा नहीं उसस्के पति के साथ बात कर रही है! दोनों एक कपल लग रहे hein…who कोई 18 साल की जवान लड़की लग रही है, कमाल की सेक्स बम है साली! लुंड की नस को बिल्कुल तोड़ने वाली माल है यह पायल!” यह सुनकर कोयल की हंसी चुत गयी और अपने बाप के लुंड चोरर कर कहा, “क्यों पापा!! इतना बेहाल हो रहे हो पायल चची की जवानी और अदाओं से तो मैं उस्सकी उम्र की होजावूँगी तो मेरा किआ हाल होगा पापा? मुझको तो आप कचह जबा जाओगे लगता है……”

धानंद ने मुस्कुराकर रमेश को देखा फिर कोयल के सर पकड़ कर कहा, “तू किआ कम है तू भी तो उसी पर गयी है आ तेरे मुंह में छोड़ता हूँ तब तक तुमको, मुंह ठीक से खोल!” और धानंद अपने कमर हिलाते हुवे अपनी बेटी के सर को दोनों हाथों से पाकर कर अपने लुंड को उसस्के मुंह में धक्का देने लगा! और कोयल “uugh..uughghghg” की आवाज़ देने लगी अपने बाप के लुंड को अपने मुंह में लेते हुवे……

उधर रमेश ने ेंख जमाये रखा था सरजू वाले कमरे में और अचानक धीमी आवाज़ में कहा, “हे पिता जी अंदर आरहा है!!” तो धानंद ने जल्दी से कोयल को चोरर कर उस कमरे में झांकना शुरू किया और कोयल भी उठ कड़ी हुवी अंदर सरजू के कमरे में देखने के लिए. जब वह दोनों मर्दों के बीच कड़ी हुवी तो दोनों मर्दों के हाथ उस्सकी चूचियों को दबाते हुवे उस कमरे में देख रहे थे….

दादा जी सरजू के पास बैठा और पुछा, “कहाँ है तेरी मम्मी?” सरजू ने कहा, “शावर लेने गयी है बस अभी निकलने hi वाली है दादा बस उस तरफ देखते रहो जब बाहर निकले तो खुश हो जाओगे आप!” यह सुनकर रमेश ने कहा, “साला यह तो अपनी माँ का पिंप निकला बे!” तब धानंद ने कहा, “ऐसे मत बोल रे! उस्का कोई दोष नहीं हम सब ने hi उस्सको ऐसा बनाया है, उस्सने बचपन से हम सब को अपने माँ के साथ सोते हुवे देखा है, मैं, पिताजी, तू और पता नहीं किआ किआ देखा है उस्सने बचपन से, तो इन् सब का एस्सार तो पड़ा होगा ुसस्पर तो ऐसा hi बनेगा! वैसे इस में हम लोगों के लिए कौन सी नयी बात है हम सब भी तो वही करते हैं, करते हैं के नहीं? एक दूसरे से एक दूसरे के पत्नियों, बेटियों और सब को बंटते नहीं है किआ? तो तुमने यह पिंप लव्ज़ क्यों इस्तेमाल किया बे?!” तब रमेश ने डेंटन टेल अपने जीब दबाते हुवे कहा, “अरे हाँ सॉरी सॉरी!” और कोयल ने हंसी छोर्री उस पर.

और किआ नज़ारा देखो इन् तीनों ने जब पायल शावर से निकली तो…. वह वह वह…. तीनों इस कमरे में दांग रह गए जिस तरह से पायल एक छोटी सी बहोत पतली, फ़्लीम्सय निघ्त्य में निकली बिना ब्रा के, और अपने लम्बे बालों को हाथ से पीछे के तरफ बनाते हुवे आहिस्ते आहिस्ते कमरे के ओवर चलती आ रही थी जब सरजू ने धीरे से दादा जी को चुहकर उधर देखने को कहा…… दोनों ेंख फाड़े पायल को देख रहे थे अपने तरफ एते हुवे…. वह निघ्त्य उस्सकी जाँघों के ऊपर तक आती थी और उसस्के गोर, तन्ने, गदराये जांघ उस गुलाबी रंग के छोटी सी निघ्त्य में उसस्के जिस्म को और भी खूबसूरत बना रही थी…. उस्सकी चूचियां बिना ब्रा के उस निघ्त्य में दिख रहे थे और जैसे जैसे पायल चल रही थी चूचियां झूम रहे थे और उस्सकी निप्पल तन्ने हुवे उस पतली सी निघ्त्य पर इस तरह से लगे हुवे थे लगता था के अब वहां एक छेद करके बाहर निकल जाएंगे.

जैसे जैसे पायल पलंग के करीब आती गयी दोनों दादा और पोता ेंख फाड़े उस्सको देखते रहे और वह मुस्कुराती हुवी, उन् दोनों को देखते हुवे बलखाती चली आ रही थी….. मैं hi मैं उस वक़्त पायल बहोत गरम हो गयी थी के आज उस्का बीटा और ससुर एक साथ उस्सको लेंगे…

और वहां कमरे में तीनों लोग जैसे सांस लेना मुश्किल होगये थे उनको, इतना शॉकेड और हैरान हुवे, और मज़ा भी ारः था सबको वह सब देखकर और आगे किआ होगा वह देखने के लिए बारे बेताब थे….. कोयल ने दोनों मर्दों को एक एक नज़र देखा और थोड़ा शर्म और थोड़ा एक्साइट सी होकर अपने पिता के गले लगते हुवे साफ़ कह दिया, “मेरा मैं कर रहा करने को…..” तो धानंद ने कहा, “आरी वेट कर पहले उन् को तो देखें! फिर ज़्यादा करने में मज़ा आएगा मगर सस्शह्ह्ह खामोश कोई आवाज़ नहीं करने का अगर उन् लोगों को पता चल गया के हम देख सुन्न रहे हैं तो प्लान चौपट हो जाएगा, आवो इस पोजीशन से देखो सब साफ़ नज़र आएगा- चलो सब मिलकर दादा पोता और पायल को देखते हैं……”

तो बे कॉन्टिनोएड……………..
 
अपडेट 107

अपने कमरे से तीनों देख रहे थे, उधर पायल एकदम बलखाती आयी मुस्कुराते हुवे पलंग के तरफ जहाँ उसस्के ससुर और बीटा बैठे हुवे थे उसी पर नज़रें जमाये हुवे ेंख पहाड़ कर. उस पतली सी गुलाबी रंग के निघ्त्य में, अपने जाँघों को दिखाते हुवे और चूचियों के निप्पल्स उस निघ्त्य की फ़्लीम्सय ड्रेस पर टिट्स को जैसे कोई निशाना लगा रहा हो, उस तरह से दोनों मर्दों के तरफ निशाना लगते हुवे बर्र्हे उन् दोनों के करीब. पास आगयी तो सरजू थोड़ा सा खिसक कर एक तरफ हो गया अपने हाटों से अपनी माँ को बैठने के लिए इशारा करते हुवे बीएड पर. यनेके जिस जगह पर सरजू ने माँ को इशारा किया बैठने को वह उसस्के और दादा के बीच में था. ससुर भी बस ज़रा सा खिस्का और अपनी निचे वाले होंठ को डेंटन में दबाये एक मुस्कान के साथ पायल बैठी उन् दोनों के बीच. जैसे hi बैठी, कहने की ज़रुरत तो नहीं के उस्सकी निघ्त्य और ज़्यादा ऊपर हो गयी और उस्सकी बेहद खूबसूरत जांघें और भी दिखने लगे….. और सरजू उस वक़्त अपने दादा को देख रहा था, वह देखना चाहता था के उसस्के दादा का एक्सप्रेशन किआ होगा उस्सकी माँ की जाघों को देख कर….. तो उस ने देख के दादा के ेंखों में जैसे एक चमक आगया हो और उसस्के ेंखों ठीक पायल के जाँघों पर hi the…..Sarjoo को एक अजीब सी ख़ुशी महसूस हुवी वह देख कर……

फिर सरजू ने अपनी माँ के छाती पर नज़र दौड़ाये और उस्सकी चूचियां बाखूबी दिख रहे थे और तुरंत सरजू ने फिर दादा को देखा के किआ उस्सने उस्सकी माँ की छाती को देखा के नहीं, तो सरजू ने देखा के दादा की नज़र जाँघों पर से हट कर पायल के छाती के ओवर बढे और दादा अपने जीभ को खुद की होंठों पर फेर रहे थे तब सरजू ने दादा के लुंड के तरफ नज़र किया अपना देखने को के दादा खड़ा हुवा है के नहीं, क्यूंकि वह खुद तो एक हाथ से अपने लुंड को सेहला रहा था….. तो ठीक उस वक़्त दादा जी ने एक हाथ को पायल के एक जांघ पर रखा जो उस के बगल में थी, और दूसरे हाथ से पायल का हाथ पाकर कर अपने लुंड के तरफ लगाया….. लुंड पंत के अंदर था और उस्का फॉर्म नज़ार ाराहे थे जो सरजू इत्मीनान से देख रहा था

अपने दादा जी के एक्शन को देख कर सरजू ने भी वही किया, अपनी माँ के दूसरे जांघ पर अपना एक हाथ रखा उस्सको सहलाते हुवे और दूसरे हाथ से अपनी माँ के हाथ को खिंच कर अपने लुंड के तरफ badhaya…Paayal हंस पड़ी यह कहते हुवे, “किआ आप दोनों ने प्लान किया हुवा है एक साथ एक hi काम करवाने को मुझसे? दोनों दादा और पोता एक रंग के हैं, नटखट लड़के! नॉटी बॉयज”

जिस ऐडा से पायल दोनों मर्दों को संभाल रही थी, ज़ाहिर था के वह तैयार थी सब करने को और खुद गरम हो गयी थी पहले से hi दिमाग़ में यह सोचकर के आज उस्का बीटा और ससुर उस से मज़ा लूटेंगे….. और अपने दोनों हाथों से दो तरफ के दोनों मर्दों के लुन्डों को अपने मुलायम हाथों से सहलाते हुवे पायल ने पंत में से उनको बाहर निकला और अपना होश खोने लगी नशीली हालत में किसी और दुन्या में खोटी गयी, उस्सकी ेंखें जैसे कोई नशीली चीज़ लिया हो, तर ऊपर होने लगी उस्सकी सांसें अजीब सी होने लगी, सेंसों की आवाज़ में एक अजीब सी गर्मी आने लगी और और दोनों मर्दों ने अपने अपने होंठों को उस के गालों के ओवर करने लगे उस्सकी जांघ के अंदर हाथों को बढ़ाते हुवे….

हुवा यह के दादा और पोता के ऊँगली एक दूसरे से टकराये पायल की जाँघों पर और दोनों ने एक दूसरे को देखा जिस वक़्त दादा के जीभ पायल के होंठ पर फेर रहे थे, और ेखों के इशारे से दादा ने पोते को उस्सकी माँ की पंतय उतारने को इशारा किया क्यूंकि उस वक़्त उन दोनों के हाथ उस्सकी छूट पर पंतय के ऊपर फेर रहे थे जहाँ दोनों टकराये थे…. तो सरजू ने एक हिस्सा पंतय का पकड़ा और दूसरे हिस्सा दादा जी ने, और जैसे hi उस पंतय को निकालना चाहा दोनों ने, तो पायल लेथ गयी बिस्तर पर ेंखों को मूंडकर गहरी संन्स लेते हुवे….

लेथ कर पायल खुद अपने हाटों से अपने चूचियों को मसलने लगी निघ्त्य के ऊपर hi और उधर उस्सकी पंतय निकल चुकी थी और दोनों मर्द घुटनों पर चले गए पायल के टांगों को ऊपर उठाते हुवे उस्सकी छूट का दर्शन करने के लिए…. दोनों जाँघों के बीच एक बूढ़ा और एक जवान लड़का एक जवान ाव्रत के छूट की दर्शन करते हुवे देख कर दूसरे कमरे में कोयल का बुरा हाल हुवा और उस्सकी सांसें भी तेज़ होने लगी और खुद अपने पिता धानंद के सीने से लगी हुवी उसस्के कमीज़ के बटन्स को नोचकर उसस्के छाती पर अपने डेंटन को दबा रही थी जबकि उस्का चाचा उसस्के गांड पर अपना मोटा लम्बा लुंड रगड़ने लगा एक ेंख से पायल के बिस्तर पर देखते हुवे…… कोयल की धीमी धीमी आवाज़ निकल रही थी जैसे “ष्ष्सस्सस आआअह्हआआह्ह्ह” और धानंद ने धीरे से उस्सको कहा, “आवाज़ मत कर वह लोग सुन लेंगे, स्स्स्सह्ह्ह्ह….” मगर कोयल बेहाल हो रही थी और एक हाथ को पीछे करके अपने चाचा के लुंड को पाकर कर अपने पिछवाड़े में रागढ रही थी अपने बाप के छाती पर जीभ फेरते हुवे….

उस तरफ दादा ने अपने जीभ को पायल के जांघों के बीच फेरते हुवे उस्सकी छूट तक पोंहचा सरजू को देखते हुवे जो उस वक़्त दूसरे जांगन को चाटते हुवे वह भी अपनी माँ की छूट तक आगया…. दोनों दादा और पोते ने एक दूसरे को देखते हुवे मुस्कुराये और दादा ने कहा, अब देख जो मैं करता हूँ वही करना…. उसने, हलके से पायल की छूट के पंखुरियों को खोला, हौले हौले, और सरजू को बताया “देख पानी निकल रही है, गीली हो गयी अब अपने जीभ को इस पर फेर बीटा…..” और पायल बेहाल हो रही थी चादर को अपने मुठी में कास्कर खींचते हुवे जब सरकू का जीब उस्सकी गीली छूट पर फेरा उसस्के बाद दादा जी ने वही सेन दोहराया जो पोते ने किया और पायल को सिसकारियां लेते हुवे सुनाई दिया उस तरफ कोयल को, जिसस्ने अपने पिता के छाती को चोरर कर फिर से अपनी चची को देखने लगी उस तरफ……

दादा जी ने अपने सभी कपड़ों को उतार फेका जिस्सको देख कर सरजू ने भी वैसा hi किया, दोनों मर्द नंगे होकर बिस्तर पर, पायल की निघ्त्य को उसस्के जिस्म से अलग किया और पायल से रहा नहीं गया उस्सने झपट कर अपने ससुर के लुंड को अपने मुंह में ले लिया और जोश के हालत में चुस्सलने लगी और उस तरफ कोयल और वह दोनों देख कर उतेजिना से तरप उठे और खड़े खड़े कोयल को नंगी कर दिया धानंद और रमेश मिलकर और खुद के कपडे निकाल फेंके….. दोनों मर्दों ने कोयल को बीच में किया कुछ इस तरह से के एकांत बार पायल के कमरे के तरफ भी देख पाते, याने पायल का कर्मा उन् के कन्धों से लगे हुवे थे, और अपने अपने लुंड को दोनों ने कोयल के निचे भीगी हुवी छूट से लेकर लुंड को रगड़ते हुवे एक ने उसस्के गांड पर और एक ने छूट पर मसलना शुरू किया…. तीनों बिल्कुल जोश में थे एकदम गरम और छोड़ने के लिए बिल्कुल तैयार…. और कोयल लुंड को अपने अंदर लेने के लिए बेसब्री से िंतयेज़ार कर रही थी कुछ सिसकारियों के साथ दबे हुवे सांसों में….

तो बे कॉन्टिनोएड इम्मेडिएटली इन नेक्स्ट पोस्ट
 
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