Sarjoo ki Incest Story - A family Incest Saga - Page 13 - SexBaba
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Sarjoo ki Incest Story - A family Incest Saga

अपडेट 118

उसस्के बाद तो ससुर बहु में ेंख मिचोली होने लगी घर के अंदर सासु जी के होते हुवे. दोनों तरफ अब आग बराबर की लगी हुवी थी, ससुर यह सोच कर के किश ऐडा से पूनम उसस्के पास आयी और उसस्के पानी को छाता, जिस ऐडा से उस्सने उस्का लुंड सहलाया, अगर सासु जी नहीं एते तो शायद पूनम लुंड को अपने मुंह में ले भी लेती….. गिरजानंद यह सब सोच सोच कर पागल होता जा रहा था. इतने दिनों के बाद जब वह रास्ते पर आयी भी तो कुछ ज़्यादा नहीं हो सका, ससुर दीवाना हो रहा था, कभी किचन में तो कभी लाउन्ज में फिर आँगन में तो कभी रास्ते पर घूम फिर रहा था. एकदम बेचैन था….. सोचने लगा किश नज़र से पूनम उस्सको मुठ मारते हुवे देख रही थी बिना झिझक, उस्सकी नज़रों में भी प्यास झलक रही थी, वह असल में तरप रही थी और उदास थी क्यूंकि ससुर उसस्के सामने मुठ मार रहा था और उस्सने कुछ नहीं किया उसस्के लिए हालां के वह कर सकती थी…..

ससुर सब याद कर करके बेचैनी की हालत में तरप रहा था. पूनम हर वक़्त सासु से नज़रें चुराते हुवे ससुर को देखा करती थी जब भी ससुर आस पास होते थे. दोनों जैसे दो गुनेहगार किसी जज के सामने बैठे हो, वैसे डाइनिंग टेबल पर बैठे खाना खाने के वक़्त जब सास ने खाना पड़ोस. वैसे पूनम भी पड़ोसती थी मगर उस वक़्त सास ने ज़िम्मा लिया था…. तो पूनम कभी ससुर के चेहरे को तो कभी सासु के चेहरे को देखती के कहीं वह नोटिस तो नहीं कर रही उन् दोनों के ेंख मिचोली को….. खाना कहते वक़्त पूनम के ेंखों के सामने वह दृष्ट आगया जब ससुर मुठ मार रहा था, उस्सने याद किया किश तरह से ससुर ने अपने मोठे तने हुवे लुंड को अपने हाथों में लिए उस्सको दिखा रहे थे… उस वक़्त तो पूनम इंकार कर रही थी मगर इस वक़्त वह सोच रही थी के उस्सको जल्दी से अंदर आकर उसस्के लुंड को थाम लेना चाहिए था और दोनों वहीँ लाउन्ज के सोफे पर लेथ जाते और खुद चुदाई होती…. यह सब सोचते सोचते पूनम गीली हो गयी…. और न जाने क्यों पूनम को लगा के उसस्के ससुर को पता चल गया के वह गीली हो गयी है और ससुर के ेंखों की गहराई में देखते हुवे एक अजीब सा प्यार और हवस भरी निगाह से उस्सने एक मुस्कराहट दिए अपने ससुर को.

ससुर भी उस वक़्त लुंड को सीधा कर रहा था टेबल के नीचे कभी पूनम को कभी अपने पत्नी को देखते हुवे. और पूनम ने नोटिस कर लिया के वह किआ कर रहे हैं तो एक नटखटी मुस्कान के साथ पूनम ने अपने पल्लू को सरकने दिया और अपने केहुनी मेज़ पर करके अपने गाल को हाथकली से लगाया इस तरह से के ब्लाउज के अंदर दिखे ससुर को….. पूनम सासु जी को भी देख रही थी रह रह कर के कहीं वह नोटिस ना करे….. अब सासु के मौजूदगी में यह हाल था सोचने की बात है अगली बार जब दोनों एक साथ होंगे तो किआ होगा….. आग बढ़ता चला जा रहा था दोनों के जिस्म और dil-o-dimaagh में, हवस की आग केहये या जिस्म की गर्मी मगर कुछ तो होने वाला था hi अब…. मगर कैसे और कहाँ…. समझ में नहीं ारः था के वह किआ करें…..

सविता ने कहा था के घाटे देर घंटे में वापस आजाएगी मगर 3 घंटे होने को थे और वह नहीं आयी थी अपने बचे को लेने. लंच के बाद सासु जी गए अपने कमरे में छोटा सा नींद मारने और पूनम ने बचे को भी सुला दिया फिर अपने उन् कपड़ों को लेकर बाहर स्टोन पर वाश करने के लिए गयी जो नाहा कर निकली थी. जाते वक़्त उस्सने ससुर को बाहर का इशारा किया उन् कपड़ों को दिखते हुवे. ससुर समझ गया के वह कपडे धोने जा रही है और उस्सको बाहर बुलाया उस्सने. ससुर ने भी इशारे से okay कहा, और पूनम बलखाती चलती गयी घर के बाहर, ससुर जल्दी से कॉरिडोर में निकली तो देखा किश ऐडा से चली जा रही थी पूनम कमर मटकते दरवाज़े के तरफ अपने हाथों में एक दो कपडे लिए… ससुर का खड़ा होगया पूनम की गांड को डोलते हुवे देख कर और सोचा के अब तो उस्सको छोड़ेगा वहीँ जहाँ कपडे धोती है चाहे खड़ा खड़ा की क्यों न चोदे मगर छोड़ेगा.

जब बाहर निकले ससुर जी तो पहले रास्ते पर ग़ौर से देखा, और जब कोई नहीं दिखा तो गया उस स्टोन वाश के करीब जहाँ ससुर ने पहली बार पूनम को चेर्रा था. अब वहां ससुर खड़ा होकर देखने की कोशिश कर रहा था के कहीं रास्ते पर आने जाने वाले लोग दीखते है या नहीं, तो नज़र आया के वहां लोग बाहर देख सकते हैं मगर बाहर से रास्ते पर से अगर कोई देखना चाहे तो किसी चीज़ पर चार कर तभी अंदर देख सकेंगे, और सिर्फ गेट के अंदर कोई दाखिल हुवा सिर्फ तब वाशिंग स्टोन नज़र अत है….. तो ससुर ने सोचा काम कर जाने का समाये आगया…..

पूनम ने मुड़कर मुस्कुराते हुवे ससुर को प्यार भरी नज़रों से देखा, और धीरे से कहा, “किआ देख रहे हो आप?” गिरजानंद ने जवाब दिया, “सोच रहा हूँ कहीं बाहर रास्ते पर से कोई हमको देख न लें!” तब पूनम ने कपड़ों को स्टोन पर रखते हुवे एक आशिकाना अंदाज़ में कहा, “मुझे तो कभी भी कोई नज़र नहीं अत जब यहाँ कपडे धोती हूँ जी, आप कद के थोड़ा ऊंचे हो इस लिए आप को बाहर दिख रहा है, फ़िक्र मत करो इस तरफ किसी को नहीं दिखेगा, आईये आप, मुझको अभी तक अफ़सोस हो रहा है के क्यों मैं ने आप को वह सब करने दिया जब मैं आप के लिए बहोत कुछ कर सकती thi…..ayiye अब….”

ठीक जहाँ पूनम झुक कर कपडे धोती थी उस पत्थर पर, उसस्के दाएं में घर का दीवार था, और ससुर ने पूनम के बाज़ू पाकर कर उस्सको खिंच कर उस दीवार से चिपकाया और भूके शेर की तरह पूनम के होंठों को चुस्सना शुरू कर दिया कुछ जंगली अंदाज़ में….. पूनम ने अपने बाँहों को अपने आप ससुर के कांधों पर कर दिया और अपने पतली पतली उँगलियों से ससुर के छाती के बालों पर फेरने लगी किश करते हुवे उस्सको. पूनम की साड़ी की पल्लू बिल्कुल निचे लटक गयी थी और गिरजानंद का हाथ उसस्के ब्लाउज के ऊपर से hi उस्सकी चूचियों को मसल रहे थे जब के पपूणम एक छोटी से सिसकारी में ‘ह्म्मम्म्म्म’ करते हीवे ससुर के जीभ को अपने मुंह में लिए चूसे जा रही थी अपने पुरे जिस्म को अपने ससुर के जिस्म से चिपकाये हुवे…..

दोनों के सांसें बहोत तेज़ चल रहे थे उस वक़्त और दोनों ‘सशह्ह्हह्ह” किये जा रहे थे हर एक हरकत के दौरान. ससुर ने फिर अपने एक हाथ से पूनम की लहंगे को ऊपर उठाते हुवे उसस्के जाँघों पर अपने हाथ सहलाते हुवे फेरा, और पूनम अंगराने लगी अपनी छाती को ससुर के छाती से रगड़ते हुवे… ससुर ने उस्सकी लहंगे को इतना उठाया के पूनम की पंतय साफ़ नज़र आरही thi….aur उस्सकी बड़े गोरी जांघें का किआ कहना, मुंह में पानी आजाते किसी का भी….. फिर ससुर ने पूनम का हाथ अपने हाथ में लेकर उस्सको अपने लुंड के तरफ बढ़ाया और बे झिझक पूनम ने ससुर के लम्बे मोठे तन्ने हुवे लुंड को अपने नाज़ुक, कोमल हाथों में लेलिया और मुठी भर कर उस्सको मसलने लगा जब के ऊपर उसस्के होंठ ससुर के गले पर फेर रहे थे…… दोनों तरप रहे थे और ससुर ने कहा, “निचे बैठ जा, बैठ जा नाह, मुंह में लेले इस्को प्लीज….” पूनम ख़ुशी ख़ुशी अपने पैरों पर निचे बैठी अपने ससुर का लुंड थामे हुवे और उस्सकी ेंखें जैसे शराब पी हुवी हो पूनम ने, एक नज़र उस नशीली निगाहों से ससुर के चेहरे में देखते हुवे सर ऊपर उठाकर पूनम ने अपने जीब हलके से ससुर के लुंड के ऊपरी हिस्से पर फेरा, फिर लुंड को देखा फिर ऊपर ससुर के ेंखों में देखते हुवे हलके से, आराम se,apne जीभ को लुंड के ऊपर गोआल गोआल घुमाया….. ससुर अपने पैरों के उंगलिओं पर खड़े हो गए और उसस्के पेयर एक्ससिटेशन से कम्प उठे अपनी बहु के उस नाज़ुक छुवन से….. पूनम ने एक शैतानी मुस्कराहट दिया ससुर को फिर लुंड को आधे अपनी मुंह में लिया….. ससुर के आवाज़ निकली, “आआह्ह्हह्ह्ह्ह स्स्स्सस्स्स्शशशशशशशश” और उस्सने पूनम का सर अपने दोनों हाथों में लिया और अपने कमर को हिलने लगा पूनम के मुंह में अपना लुंड ठुस्स्ते हुवे जैसे के वही उस्सकी छूट थी और लग रहा था के ससुर पूनम के मुंह में hi छोड़ रहा है……. पूनम ने मुंह को जितना हो सके उतना खोला, लुंड को अंदर लेने के लिए……. और एक हाथ से पूनम ने अपनी ब्लाउज खोल दिए और उस्सकी चूचियां ससुर के जाँघों से टकरा रहे थे उन् मूवमेंट्स के दौरान……..

ठीक उसी वक़्त सविता गेट खोलता है, गेट की खुलने से एक आवाज़ होती है जिस्सको सुनकर तेज़ी के साथ ससुर अपना लुंड पूनम के मुंह से खींच कर अपने पीठ करता है गेट के तरफ और पूनम भी पीठ करके वाशिंग स्टोन पर झुक जाती है मगर सविता ने सुब कुछ साफ़ देख लिया उन् के अलग होने से पहले hi…… सविता का दिल ज़ोरों से धड़का, और सोचने लगी ‘पूनम तो बैठ कर अपने ससुर का लुंड चूस रही थी?! मतलब वह देती है अपने ससुर को! ओह माय गॉड! मेरा ससुर भी कहीं…..???!!!

तो बे कॉन्टिनोएड……………….. (3500 वर्ड्स फ्रॉम बोथ उपदटेस)
 
बे थे मोस्ट वेलकॉमेड ों थिस थ्रेड भाई

आप का स्वागत है इस थ्रेड पर भाई,

मुझे ख़ुशी हुई के आप को कहानी पसंद आयी

भाई कोशिश रहेगा आप की इल्तेजाः को पूरा करने की मगर जैसे आप देख hi रहे हो अभी ओवर118 अपडेट हो चुके हैं तो आप की फातमाईश शायद उपदटेस120 के बाद hi पूरा होगा

पढ़ते चलो भाई साथ साथ.

थैंक्स अगेन
 
अपडेट 119


दोनों ससुर बहु अलग होगये तेज़ दिल के धड़कन के साथ सविता की आवाज़ सुनते hi और, सविता भी धड़कते दिल के साथ सीधे लाउन्ज के तरफ जाने लगी उन् लोगों के तरफ नज़रें चुराकर देखते हुवे. उस्सने ऐसा बेहवे किया के उस्सने कुछ देखा hi नहीं. और पूनम वाशिंग स्टोन पर झुक कर झूट मूठ कपडे धोने लगी लाल चेहरे के साथ और तिरछी नज़र करके अपने ससुर के तरफ देखते हुवे. सविता सीधे घर में घुस गयी और अपना पसीना पोंछते हुवे सोफे पे बैठ गयी बिना कोई आवाज़ किये. सासु माँ की तो ेंख लग गयी थी और सविता का बच्चा भी सो रहा था.

वाशिंग स्टोन से मुड़कर पूनम ने अपने ससुर को देखते हुवे बहोत आहिस्ते से फुसफुसाते हुवे कहा, “वह घर में आवाज़ करेगी तो सासु जी जाग जाएंगे आप जाकर उस्सको बच्चा दे दीजिये और कहना मैं कपडे धो रही हूँ फिर यहाँ वापस आना!” ससुर लाउन्ज के तरफ जाने लगे. पूनम एक शैतानी मुस्कान के साथ उस्सको देखती रही जब तक वह लाउन्ज में नहीं चला गया. वहां पर सविता ने ससुर को अंदर एते देख कर तुरंत कड़ी हो गयी और उस से रोका न गया और उस्सकी नज़र सीधे पूनम के ससुर के लौड़े पर पोंहचा! और गिरजानंद ने देख लिया के सविता उस्का लुंड को देख रहा है हालां के वह पंत के अंदर था मगर उस्का खड़ा होना दिख रहा था. सविता ने तो पूनम के मुंह में उस लौड़े को देखा था और उस वक़्त लाउन्ज में सविता का मैं कर रहा था के उसी वक़्त वह उस्सको अपने मुंह में ले लें! दो साल की शादी शुदा छुड़वाने वाली जवान ाव्रत ऐसे हालात में और सोच भी किआ सकती है भला?!

अब गिरजानंद सोच hi रहा था के सविता ने क्यों उसस्के लुंड के तरफ देखा अचानक. वह अपने मैं में सोच रहा था, ‘कहीं िस्सने कुछ देखा तो नहीं?’ और धीरे से सविता से कहा, “सष्ठ मेरी पत्नी सो रही है इस लिए आहिस्ता बात कर रहा हूँ, पूनम कपडे धो रही है तेरा मुन्ना भी सो रहा है आ मैं तुझे दिखता हूँ तो आहिस्ते से उस्सको उठा लेजा” और सविता को उस कमरे के तरफ धीरे धीरे चलते हुवे लगाया.

जैसे hi दोनों उस कमरे में पोहंचे सविता से रहा नहीं गया और उस्सने अचानक गिरजानंद को ज़ोरों से अपने बाँहों में जकरा और अपने छाती को मज़बूती से उसस्के छाती पर मसलते हुवे तृप्ति आवाज़ में कहा, “काश मेरा ससुर भी आप की तरह होते तो मुझे भी यह ख़ुशी नसीब होता पूनम बहोत खुश नसीब है जी, आप तो अपनी बहु को बहोत ख़ुशी देते हो ज़रा पड़ोस की बहु को भी खुश कर दिया करो जी!” गिरजानंद को शॉक लगा मगर ख़ुशी भी हुवी. ख़ुशी इस लिए के सविता जैसी जवान बहु जो पूनम की hi उम्र की थी और बहोत खूब सूरत बी खुद अपने आप उस से छुड़वाने की मांग कर रही थी, और शॉकेड इस लिए था के उस्सको पता चल गया के पूनम और उस में किआ रिश्ता है!

गिरजानंद ने दरवाज़े के तरफ देखते हुवे धीरे से सविता से कहा, “किआ देखा तुमने जो ऐसा कह रही हो?” तो सविता बोली, “ाजी छोड़ए के मैं ने किआ देखा और केहये के आप किआ करोगे मेरे लिए मुझे तो आप की बहोत ज़रुरत पद गयी जी! किआ मर्द हो आप? अपने hi बहु के साथ वह! क्यों मेरा ससुर ने कभी मुझे ऐसे नज़र से नहीं देखा, मैं तो ख़ुशी ख़ुशी दे दूंगी उस्सको जी…. मगर फिलहाल आप तो मेरी प्यास बुझादो नाह!” गिरजानंद के समँझ में नहीं ारः था के किआ करें, एक तरफ पूनम वेट कर रहे थी दूसरे तरफ उस्सकी पत्नी अंदर दूसरे कमरे में सो रही थी और एक जवान ाव्रत उस से चिपका हुवा था…. उस्का तो जैसे होश ुध गया हो! वैसे स्तिथि में कौन खड़ा रह सकता है उस्का लुंड छोटा हो गया हवा निकल गयी और उसस्के पसीने चूत गए! सविता ने अपना डायन हाथ आहिस्ते आहिस्ते गिरजानद के पथ से निचे के तरफ फेरती गयी और सीधे उसस्के लुंड पर मुठी जमाई…… गिरजानंद ने बिल्कुल नहीं सोचा था इतने जल्द वह यह सब करलेगी और उसस्के बाँहों को अपने जिस्म से हटाने की कोशिश की…. मगर सविता ने एक धमकी वाली मुस्कान से कहा, “सोच लीजिये जी, जो कुछ भी मैं ने देखा आप की पत्नी या आप के bête के कान तक जा सकती है, मगर मैं ऐसा तो नहीं कर सकती क्यों के मुझे तो अब अक्सर आप की ज़रुरत पड़ने वाली है, है नाह जी?”

गिरजानंद ने उस से हाथ चुराते हुवे थोड़े से ग़ुस्से में कहा, “हाँ ठीक है मगर अचानक, ऐसे, और इस वक़्त? यह नामुमकिन है सविता तुम अभी जाओ बाद में बात करेंगे!” सविता ने उसस्के ज़्यादा करीब जाते हुवे एक अजीब सी मुस्कराहट से कहा, “बाद में बात किआ करना है जी, डायरेक्ट काम करेंगे जो करना है…. चलो ठीक है अभी बक्श देती हूँ आप को मगर भूलना मत के मैं भी आप की बहु जैसी hi हूँ, तो हमारा भी ख़याल रखना ज़रा okay जी? चाह चलती हूँ अआप जाओ ैयश करो अपनी पूनम बहु के साथ जी! चल मुन्ना मां तुझको दूदू पिलाती है, देखलो जी दूध है आप भी पी सकते हो जी, चख लेना मौका मिलते hi….” सविता ने यह आखरी लाइन गिरजानंद से कहा खुद अपने चूचियों को अपने मुठी में पाकर कर उस्सको दिखते हुवे…… गिरजानंद के होश ुध गए सविता के उस रूप को देख कर और जब वह बच्चे को लेकर जाने लगी तो गिरजानंद ने उस से कहा, “तुम अपने ससुर को क्यों तरय नहीं करती वह भी शायद चाहेगा किआ पता?”

एक बलखाती ऐडा से गिरजानंद के तरफ मुड़कर सविता ने मुस्कुराते हुवे कहा, “इरादा तो मेरा वही है जी जिस वक़्त से आप को पूनम दी के साथ देखा, तरय ज़रूर करुँगी अपने ससुर को भी मगर आप इन् नज़रों को भा गए हो जी आप को भी नहीं चौररने वाली मैं और अपने ससुर को भी कच्चा चबावूंगी अब तो चाहे वह इंकार hi क्यों न करें मैं तो उस्सको अब किसी भी कीमत पर लुभाकर hi दम लुंगी…. आप का शुक्रगुज़ार हूँ जी के आप ने मुझ में यह सब आइडियाज भरे अपनी बहु के साथ वह सब करके!” तब गिरजानंद ने पुछा, “तुम ने किआ किआ देखा बताओ तो ज़रा!” सविता ने उसी शैतानी अंदाज़ में गिरजानंद के बिल्कुल करीब आकर उसस्के होंठों से अपने मुंह लगाकर कहा, “मैं ने पहले आप को उस्सकी नंगे जाँघों पर अपने हाथों को फेरते और किश करते हुवे देखा जी जब मैं आयी थी, और हाय रे मेरी खुश किस्मती के मेरा नज़र ठीक आप दोनों के ऊपर hi गया जैसे मैं ने गेट को खोला ji…aap तो अपनी पूनम बहु के मुंह में दाल रहे थे जी… बहोत मज़ा आया होगा नाह, हम्म्म: हैं जी? बोलो नाह जी!! हीहीहीही!!! और पूनम भी खूब एन्जॉय करती होगी नाह जी? मैं भी वही ख़ुशी आप को दूंगी जी…….” और सविता ने गिरजानंद के कान में धीरे से कहा, “मैं आप को पीछे भी लेलूँगी जी आप ऐश करना मुझसे…….” और यह कहकर सविता हँस्ते हुवे लाउन्ज से निकली अपने बच्चे के साथ और गेट से निकलते वक़्त पूनम को देख कर कहा, “एन्जॉय कर पूनम एन्जॉय कर यार किस्सने रोका है!”

तो बे कॉन्टिनोएड……………….
 
अपडेट 120

जैसे सविता चली गयी तो पूनम वापस मुड़कर अपने ससुर को नज़रों से ढूंढ रही थी और सोचने लगी के सविता ने वैसे क्यों कहा और उस्का जवाब अपने ससुर से चाहती थी. ससुर सविता को लेके थोड़ा परेशान भी था और मज़ा भी ारः था उस्सको मगर जैसा व्योहार सविता ने दिखाई उस से पूनम का ससुर थोड़ा फिकरमंद भी था के कहीं वह अपने घर जाकर किसी से कुछ बक न दे! फिर अपने पूनम को सोचा और धीरे से अपनी पत्नी के रूम में झाँकने गया देखने को के वह नींद में है या नहीं और बहोत संतुष्ट हुवा यह देख कर के उस्सकी पत्नी बहोत गहरी नींद में थी तो जल्दी से वह गया पूनम के तरफ वाशिंग स्टोन के पास.

पूनम बेकरार हो गयी थी वेट करते हुवे और ससुर से पुछा, “क्यों जी इतना देर क्यों किया?” धीरे से. ससुर ने चरों तरफ नज़र फेरने के बाद अपनी पूनम बहु को बाँहों में लेते हुवे कुछ जंगली अंदाज़ में उस्सको चाटने और चूमने लगा अपने पुरे जिस्म को उस्सकी जिस्म से चिपका कर. उस्का हाथ पूनम के जिस्म पर चरों तरफ फेर रहे थे और उसस्के होंठ पूनम के जिस्म पर चरों तरफ गले से लेकर कांधों तक, फिर उस्सकी बाज़ुओं पर फिर उस्सकी छाती पर चाटते हुवे फेरते जा रहा था गिरजानंद. पूनम उसस्के बाँहों में जेकरि हुवी थी और वह भी जैसे बेहोशी की हालत में अपने आप पर काबू नहीं रख पा रही थी और खुद को ससुर के हवाले समर्पण कर दिया था अपने ेंखों को नशीली ेंखों जैसे किया हुवे.

ससुर ने पूनम के ब्लाउज के अंदर एक हाथ डालकर उस्सकी लेफ्ट बूब को हाथ से मसला फिर मुश्किल से निप्पल्स को अपने मुंह में लिया पूनम के सिसकारियों के बीच. पूनम के गर्म सेंसें ससुर के छाती पर सिंख मार रहे थे जिस से ससुर को और भी मज़ा ारः था फिर पूनम अपने डेंटन को ससुर के कांडों पर गदया जिस से ससुर की ‘आह’ निकली. ससुर का तना हुवा मोटा लुंड पंत के अंदर hi था और उस्सने पूनम का एक हाथ अपने हाथ में लेकर उस्सको अपने लुंड के तरफ kiya…Poonam ने सर ज़रा सा ऊपर उठाकर ससुर के ेंखों में देखते हुवे एक इंकार सा नज़र दिखाया ससुर को, मगर ससुर ने ज़बरदस्ती पूनम के हाथ को पंत के अंदर अपने लुंड पर लगाया, जिस दम पूनम का हाथ ससुर के लुंड को चुवा तो पूनम के जिस्म में एक करंट जैसी दौड़ी और उसस्के फिर अपने डेंटन को ससुर के दूसरे काँधे पर गड़ाई और उस्सको चुस्सने लगी, और निचे अपने मुठी में ससुर के लुंड को ले लिया उसस्के काँधे को चूस्ते हुवे……

ससुर ने एक हाथ से पंत के ज़िप खोला और लुंड को आज़ाद करते हुवे दूसरे हाथ से पूनम की लंहगे को उठाते हुवे अपने हाथ को उस्सकी खूबसूरत जाँघों पर फेरते और मसलते हुवे हाथ को ऊपर के तरफ उस्सकी छूट पर पोह्चय…. पूनम सिसकारियों के साथ कसमसाते हुवे ससुर के जिस्म पर अपने छाती को रगड़ते हुवे उसस्के छाती को चुस्सना शुरू किया….. दोनों के सेंसें बहोत ज़ोर से चल रहे थे और दोनों हम्प रहे थे उस दौरान….. फिर आहिस्ते से ससुर ने पूनम के कान में कहा, “चलो बीएड पर चलते हैं तेरे कमरे में…..” पूनम ने एक गहरी सांस लेते हुवे फुसफुसाते हुवे कहा, “मगर सासु जी जाग गए और सुन लिया तो?” तो गिरजानंद ने एक गहरी आवाज़ में कहा नहीं जागेगी वह चल” और पूनम को गॉड में उठा लिया जैसे एक छोटी बच्ची को लिया है और लाउन्ज के तरफ जाने लगा…. पूनम की ब्लाउज बिल्कुल खुल गयी थी और पेट्टी कोट ऊपर जाँघों तक उठे हुवे थे उसी हालत में ससुर ने सिर्फ अपने पंत को ुपत खिंचा और पूनम से कहा “तू मेरे पंत को कमर पर पाकर के रख मैं चलता हूँ…”

और जब वह पूनम को बाँहों में एक बच्चे की तरह उठा कर चल रहा था तो पूनम ने ससुर का खुला हुवा पंत को उसस्के कमर पर पाकर राखी थी….. बहोत तेज़ क़दमों से चल कर ससुर पूनम के कमरे में उस्सको उस्सकी बीएड पर लेटाया… और तेज़ी के साथ अपने सभी कपड़ों को निकल फेका ज़मीन पर, दरवाज़े को लॉक किया और बीएड पर चर्र गया जहाँ पूनम ब्लाउज उतार चुकी थी और उसस्के दो जवान चूचियां ससुर का स्वागत कर रहे थे जिस्सको ससुर ने ज़ोर से अपने हाथों में थामा और दबा कर एक एक करके उन् को चूसने लगा मसलते huwe…tab तक पूनम अपने पेट्टी कोट को पैरों के तरफ से उतार रहे थे और दोनों बिल्कुल नंगे बीएड पर पाए गए….. सब कुछ बहोत जल्दी जल्दी किया जा रहा था जैसे दोनों बरसों के भूके हो और अचानक खाना सामने आगया हो तो ठहर नहीं पाए….

पूनम अपने पीठ पर लेती थी और ससुर पथ के बल उसस्के ऊपर था मगर पूरा जिस्म नहीं छाती से लेकर ऊपर तक पूनम के जिस्म पर था बाकी बीएड पर थे तो पूनम ने अपने हाथ को बिना ससुर के कहे उसस्के लुंड पर फेरा और फिर से अपने मुठी में लुंड को लिया और ऊपर ससुर के कान पर अपना जीब फेर रही थी फिर धीरे धीरे पूनम ने खुद अपनी जाँघों को एक ऐडा से ससुर के लुंड के करीब किया और अपने हाथ से उसस्के लुंड को अपने छूट पर दबाया तब ससुर की ‘आह’ निकली फिर से और उस्सने कमर उठाते हुवे निचे वाले जिस्म को पूनम के जिस्म से चिपकाया…….

और जिस दम पूनम ने ससुर के लुंड को अपने पथ के निचे छूट पर फील किया तो अपने दोनों टांगों को खुद बा खुद दोनों तरफ फेर दिया पूनम ने ताके ससुर उसस्के दोनों जाँघों के बीच समां सके…. उस वक़्त ससुर एक एक करके उस्सकी दोनों निप्पल इस तरह से चूस रहा था ऐसा लगता था के एक बच्चा उस में से दूध पी रहा ho…lagta था के अब दूध निकलेगा और ससुर पियेगा और पूनम बेहाल थी, कसमसा रही थी और एक हाथ से चादर मुठी भर पाकर कर खिंच रही थी ‘िस्स्सस्स्स्शस्स्सस्स’ करते हुवे……

थोड़ी देर बाद ससुर उठ बैठा और अपने लुंड को पूनम के चूचियों के बीच लगाया और पूनम से कहा, “दोनों को एक साथ दबाओ नाह ऐसे…” तो पूनम ने अपने दोनों चूचियों को दोनों तरफ से दबाया और ससुर ने लुंड को दोनों चूचियों के बीच दाल कर ऊपर निचे रगड़ने लगा….. लगता था के चूचियों को छोड़ रहा है….. उस्का कला लुंड दो गोर चूचियों के बीच एते जाते देख कर पूनम बेहाल हो रही thi…aur एकांत बार जब लुंड उसस्के गले तक पोहोचता था तो पूनम अपने जीब निकाल कर लुंड के ऊपरी वाले हिस्से को चाट जाती thi…sasur पूनम के ेंखों में देखते हुवे तेज़ सांसों के साथ वैसे करता गया आखिर में लुंड को पूनम के होंठों तक लगाया और पूनम ने मुंह खोल दिया लुंड को लेने के लिए तो ससुर ने अपने मोठे लुंड को ठुस्स दिया पूनम के मुंह में “उफ्फ्फ्फ़ आआह्ह्ह्ग” करते हुवे…… पूनम चूसने लगी ठीक तरीके से अपने ससुर के मोठे लुंड को जबकि ससुर कमर को हिलाते हुवे कहा, “वह कितना चाह चुस्ती हो, लगता है धानंद खूब चुसवाते है तुझसे हम्म? काफी तजुर्बा हो गया ऋ पूनम वह तेरी सास ने कभी नहीं चूसा इस्को पता है!” पूनम ने एक शैतानी मुस्कान के साथ ससुर के लुंड को और गहराई से लेने लगी अपने हलक़ तक और खनस्सने लगी….. फिर ससुर ने कहा, “हुस्सस्स्स्श, तेरी सास सुनलेगी re..chup हस्सस…”…… और पूनम ने कहा, “करिये नाह अब अभी वह जाग गयी तो फिर कुछ नहीं हो पाएगा…..”

और ससुर गया पूनम के जाँघों के तरफ, और उसस्के जाँघों के बीच अपने सर को घुसाया और एक तरफ के जांघ को चाटते हुवे छूट के तरफ पोंहचा जो गीली हो चुकी थी और अपने जीब से उस गिलीपन को चाट कर पोंछा….. और सर ऊपर उठाकर पूनम को देखते हुवे कहा, “किआ लाज़त है रे तेरी Poonam…jee करता है तेरी साड़ी रस निचोड़ लूँ मैं…” पूनम अपने होंठों को डेंटन में दबाये ससुर के चेहरे में वह ख़ुशी देख रही थी जो अपने पति के चेहरे में कभी नहीं देखा था और उस्सको बहोत अचछह लगा….. वह खुश थी के अब अपने ससुर को खुश कर रही थी, और पूनम को वह मज़ा ारः था जो धानंद के साथ नहीं आया था…. पूनम के छूट चाटने के बाद ससुर आहिस्ते आहिस्ते उस्सकी पथ पर जीभ फेरता गया फिर पथ के बीच अपने जीब को गोआल गोआल घूमते हुवे पूनम को एक सांप की तरह रेंगते हुवे देखा ससुर ने पलंग पैट कसमसाते हुवे सिसकारियों के साथ और ससुर का मैं और भी मनभावक हुवा और आहिस्ते से उस्सने अपने लुंड को अपने बहु के जवान छूट के ऊपर फेरा हाथ से लुंड को थामे हुवे…. अपने लुंड को भीगाया पूनम के छूट पर रगाढ़ कर अपने लुंड को फिर छूट के छेद पर दबाते हुवे अपने कमर से हलके से ढाका दिया और लुंड फिसलते हुवे घुस गया पूनम के गहराई में और पूनम ने एक लम्बी सांस लेते हुवे उस्सकी आवाज़ निकली, “ोूईई माआ इस्स्स्सस्स्स्शह्ह्हस्स्स्सस्स्स आअह्हह्हआआआआ” ससुर को बहोत मज़ा आया जब पूनम ने वह आवाज़ निकाली और उस्सको “हुसस्ससश” करते हुवे ससुर कमर हिलाते हुवे ढाका पर ढाका देता गया और उस्का पसीना पूनम के पसीने से मिलने लगे…. उस्का छाती पूनम के छाती से इस तरह से रागढ रहे थे और उस्का लुंड का आना जाना इस तरह से था के ससुर का लुंड के बॉल्स थक थक पूनम की गांड पर हर बार लग रहा था……. ज़्यादा देर नहीं लगा …. इतने दोनों को सख्त ज़रुरत थी उस चुदाई के लिए के बस कोई 10/15 बार ढाका देने के बाद hi पूनम ने अंगराई ली और अपने ससुर के पीठ के ऊपर अपने बाहों का हार डालते हुवे उस्सको इस तरह से अपने बाज़ुओं में जकरा के ससुर को लगा उसस्के संन्स रुक गए… पूनम के नाख़ून के निशाँ बन गए ससुर के पीठ पर जिस दम पूनम ने “आआआआह्ह्ह्हह्ह सहस्स्स्शह्ह्हह्हहस्ससससस ाआअह हननननन और और और ज़्यादा जल्दी, और तेज़ aurrrrteeeeeeeeeezzzzzzzz…sssssssssssssssssssss”…….. फिर किआ… ससुर भी कहँरते हुवे, “आआअह्ह्ह्ह्ग्ग्गहह उफ्फ्फ्फफ्फ्फ़…… आआआआहहहहाआआआह्ह्ह्ह” करते हुवे जल्दी से लुंड को छूट के बाहर निकलते हुवे अपने बहु के पथ और छाती पर अपने वीर्य को चोर्रा …..

तो बे कॉन्टिनोएड…………………….
 
अपडेट 121

सविता जब अपने घर गयी तो उस्का ससुर बरामदे में बैठा एक सिगरेट पी रहा था एक कप कॉफ़ी हाथ में लिए. घर में सिर्फ वह और उसस्के ससुर hi होते थे हर रोज़ दिन भर क्यूंकि उस्सकी सास का देहांत हो चुक्का था 4 साल पहले hi. उस्का पति तो काम पर गए हुवे थे और हर रोज़ की तरह दिन भर घर के काम काज के बाद सविता टीवी के साने दिन गुज़ारा करती थी अपने बचे को लिए या सुलाकर. ससुर भी अक्सर टीवी देखा करता था. मगर हमेशा वह एक सोफे पर तो सविता दूसरे सोफे पर होते थे. ससुर का उम्र 56 हो गया था और ुस्स्सने कभी भी सविता को बुरी नज़र से नहीं देखा था. सविता थी तो बहोत मस्त जवान ाव्रत और बहोत खूब सूरत भी, घर में ब्लाउज और स्कर्ट पहना करती थी मगर जब बाहर निकलती थी तो साडी पहनती थी हमेशा.

सविता ने जब से पूनम को अपने ससुर के साथ छोड़ते देख लिया तो अपने मैं में थान लिया के वह भी किसी तरह से अपने ससुर से भी छुड़वाकर रहेगी. बहोत गरम हो गयी थी और पूनम के ससुर से भी छुडवानी चाहती थी. मगर सविता के समझ ,में नहीं ारः था के कैसे शुरुवात करें अपने ससुर के साथ.

तो जब वह घर पोह्ची तो बचे को बिस्तर पर सुलाने के बाद बरामदे के तरफ ससुर को देखकर अपने कमरे के अंदर से hi अपने जिस्म पर अपने हाथों को मलते हुवे अपने चूचियों को खुद दबाते हुवे विज़न करने लगी के उस्का ससुर उसस्के चूचियों को दबा रहा है….. ेंखें बंद करके तेज़ सेंसों के साथ सविता अपने ससुर के जिस्म को अपने जिस्म पर महसूस कर रही थी…… जब ससुर की खनस्सने की आवाज़ आयी तो उस्सकी विज़न टुटा और सोच रही थी कैसे ससुर को रिझाया जाये और टेस्ट किया जाये…. फिर सविता ने वह किया जो कभी नहीं किया था पिछले do/teem सालों में उस घर में…..

उस्सने अपनी साडी उतारी और ब्लाउज और पेट्टी कोट में एक कप छाए लेकर बरामदे में गयी ससुर को देने के बहाने….. अपने बालों को खोल दिया और ब्लाउज की एक ऊपर का बटन भी खोल डाली सविता ने और ससुर के पास गयी उसस्के पीछे खड़े होकर गाला साफ़ करते हुवे कहा, “छाए पिताजी!” और बिना पीछे मुड़े ससुर ने जवाब दिया, “अरे मैं तो कॉफ़ी पी रहा हूँ अभी बेटी…” और सविता अपने मैं में प्रे कर रही थी के ससुर मुड़कर उस्सको देखे एक बार….

तो सविता ने कहा, “वह तो ठंडा हो गया होगा, दीजिये मैं फेंक देती हूँ आप गरम छाए पीजिये नाह!” तब ससुर को पीछे मुड़ना पड़ा उस्सको जवाब देने के लिए और कॉफ़ी की कप उस्सको करने के लिए…… और जैसे hi वह मुदा तो उसस्के ेंख मोठे मोठे खुले रह गए अपनी जवान बहु को उस तरह देख कर….. उस्का होश जैसे ुध गया उसस्के हाथ में कप हिलने लगा और सविता जान बुझ कर झुक गयी कप लेने और देने के लिए तब तो किआ नज़ारा था यह आप खुद सोच सकते हैं यारो….. उस्सकी बहोत खूब सूरत, कोमल, नरम, गोर चूचियां ब्लाउज के अंदर से जैसे बाहर चटकना छह रहे थे और ससुर के नज़र डायरेक्ट उसी पर पड़े और सविता ऐसे बेहवे कर रही थी जैसे कुछ भी नहीं हुवा हो, बिल्कुल नार्मल थी और काफी वक़्त लगाया जान बुझ कर कप को ससुर के हाथ में देने में और उसस्के हाथ से कॉफ़ी वाला कप लेने में…..

ससुर को खुद नज़र चुराना पड़ा और उस ने एक तरफ देखना पसंद किया क्यों के उसस्के मैं में उस वक़्त तक कोई खोट नहीं था सविता के लिए….. मगर कब तक एक मर्द अपने आप पर काबू रख सकता है जब घर में वैसी हॉट अकेली बहु के साथ रहता हो? और बहु भी वह जो खुद उस्सको रिझा रहा हो? सविता ने फील किया के वह अपनी मकसद की पहली स्टेप में कामयाब हुवी और कॉफ़ी की कप लेकर अपनी बालों को एक झटके से पीछे कन्धों के ऊपर करते हुवे कमर मटकाती हुवी किचन की तरफ जाने लगी होंठों को डेंटन में दबाये हुवे. जब सविता चाँद कदम पीछे चली गयी तब ससुर ने मुड़कर उस्सको पीछे के तरफ से देखा. उस्सकी नज़र सविता की डोलते हुवे गांड पर गए फिर उस्सकी नंगे गोरी कमर पर फिर पीठ पैट जहाँ ब्लाउज को सिर्फ चाँद धागों ने बंधा हुवा tha….apni बहु की जिस्म पर नज़र दौड़ते हुवे ससुर ने अपने लुंड को पंत के अंदर उठत्ते हुवे महसूस किया और किचन के ेण्डर घुस्सने से पहले सविता ने मुड़कर ससुर को देखा और एक बहोत बहकाती हुवी मुस्कराहट दिया अपने ससुर को….. ससुर का दिल ज़ोरों से धड़कने लगा और उसस्के समझ में नहीं ारः था के वह किआ करें….. वह बैठे हुवे सविता की एवं के बारे में सोचने लगा और पहली बार ससुर ने उस्सको एक ाव्रत समझ कर विचार किया….. उस्सने सोचा के अगर वैसी ाव्रत उसस्के बिस्तर को गरम करे तो कितना मज़ा आएगा उस्सको और उस्का मोटा लुंड जमकर खड़ा होगये उसस्के पंत के अंदर और उस से रहा नहीं गया और उठकर किचन के तरफ चलने लगा…..

जब ससुर किचन के पास गया तो उस्सने सविता को गुनगुनाते हुवे बर्तन धोते सुना और दरवाज़े के पीछे छुप कर अब ससुर अपनी बहु के जिस्म को ग़ौर से देखने लगा….. उस्सकी टाइट लहंगे में सविता की जाँघों के फॉर्म साफ़ दिख रहे थे, गदराए., हिप्स से लेकर ससुर की नज़रें सविता के गांड से होते हुवे उस्सकी टांगों तक गए और अपने हाथों से ससुर को अपने लुंड को पंत में सीधा करना पड़ा कई बार…..

अब सविता सोच रही थी गुनगुनाते हुवे के उस्सकी ससुर ने उस्सकी चूचियों को अच्छी तरह से देखा और वह बिना साडी के पहली बार उसस्के सामने गयी थी तो सविता को खुद बहोत हॉट फील हो रही थी और उस्का मैं तो छह रहा था के ससुर उस्सको अपने बाँहों में लेकर चुम्मे और छाते…. यह सब सोच सोच कर सविता गीली हो गयी थी और छुड़वाने का बड़ा मैं कर रहा था उस्सको उसी waqt…magar उस्सको पता नहीं था के ससुर वहीँ दरवाज़े के पीछे से उस्सको देख रहा tha…woh सोच रही थी के शायद कुछ वक़्त लगेगा ससुर को अपने करीब लेन में….

ससुर भी सोचने लगा के कहीं यह उस्का वेहम तो नहीं के उस्सकी बहु उस्सको रिझा रही है उस्सने मैं hi मैं फिर सोचा, “किआ पता के सविता बिल्कुल नादानी में वैसे कपड़ों में मेरे सामने आयी और कहीं ऐसा न हो के मैं उस्सको छुवन तो वह चिल्ला उठे तब किआ करूँगा? किआ मुंह दिखाऊंगा अपने bête को? किआ जवाब दूंगा दुन्या को? शर्म से डूब मरने वाली बात हो जाएगी तब तो? मगर सविता मुस्कुरायी क्यों थी किचन के अंदर दाखिल होने से पहले? किआ जो मैं सोच रहा हूँ वह भी वैसी चाहती hai…kitni जवान hai…kia मेरा बीटा उस्सको खुश नहीं करता रात को? किआ सविता को ज़्यादा ज़रुरत है एक लुंड की? अभी वह कहाँ गयी थी? किआ कोई और उस्सको छोड़ तो नहीं रहा? नहीं नहीं ऐसा नहीं हो सकता, वह तो बिल्कुल भोली भली घर की बहु hai….phir भी अब से मुझको ुसस्स पर नज़र रखना होगा के कहीं कोई बात तो नहीं….. किआ करूँ मैं हे भगवान्!!”

ये सब सोचकर ससुर के ह्रदय कांप उठा और दरवाज़े के पीछे से हट गया और वापस बरामदे में चला गया….. उधर सविता बर्तन धोने के बाद किचन के दरवाज़े पर खरी होकर अपने ससुर को कुछ देर कड़ी होकर देखती रही और अपने मैं में कहा, “ससुर जी आप इतने बूढ़े भी तो नहीं हुवे है अभी, और सासु माँ तो कब की चल बस्सी है फिर आप को तो इस्सकी ज़रुरत पड़ती होगी तो किआ करते हो आप? मुठ मारते हो ससुर जी? किआ अपनी बहु को कभी सोचके मुठ मारा है आप ने ससुर जी? हाय मैं मर जवान…. किआ पता ससुर मुझे सोच कर मुठ मारता हो और मुझे पता भी नहीं?! कैसे पता लगाऊं अब?? कुछ करना होगा मुझे hi….. एक काम करती हूँ अपने ुंडेरवेअर्स को उसस्के सामने रख देती हूँ फिर देखती हूँ किआ करता है उस से…..”

सविता ससुर के पास गुज़र कर बाहर सूखे हुवे कपड़ों को उठाने गयी वही लंहगे और ब्लाउज में…. आँगन तो बस बरामदे के सामने था और ससुर सब देख रहा था और सविता जान बुझ कर हर बहार झुक रही थी कपडे उठाते वक़्त ताके उसस्के चूचियों का नज़ारा ससुर को खूब मिले देखने को, और सच में ससुर सिर्फ वही देखते जा रहा था….. कपड़ों को लेकर घर के अंदर जाते वक़्त सविता ने जान बुझ कर अपनी एक पंतय और ब्रा को ससुर के गॉड में गिरा दिया और सीधा चलती गयी अपनी कमरे के तरफ बाकी के कपड़ों को रखने के लिए…. और कमरे में अंदर जाने से पहले मुड़कर ससुर को छुपकर देखा के वह किआ करेगा उस्सकी पंतय और ब्रा से…….

ससुर ने तो तुरंत ब्रा और पंतय हाथ में लेकर सविता के तरफ मुदा वापस देने के लिए मगर जब देखा के सविता चली जा रही है तो कुछ नहीं कहा और सविता के ुंडेरवेअर्स को अपने बगल में रख दिया…. फिर बार बार उस्सकी पंतय और ब्रा को देखते जा रहा था… और जब सविता ने छुप कर देखा तो ससुर ने उस्सकी पंतय को हाथ में उठाया, मुड़कर पीछे देखा के वह कहीं देख तो नहीं रही और जब देखा के कोई नहीं है तो ससुर ने अपनी बहु की पंतय को अपने नाक तक लगाया और एक लम्बी सांस लेकर उस्सकी पंतय को सुंघा…… फिर तो सविता ख़ुशी से झूम उठी ससुर को उस्सकी पंतय को सूंघते हुवे देख कर और खुद से कहा “मैं कामयाब हो गयी इस्सके मतलब ससुर आगये मेरी राह में!! कोई ससुर अपनी बहु की पंतय को सुंगता है भला? इस्सके मतलब के मुझको ज़रूर छोड़ेगा वह अब… वह! मैं जीत गयी…. अब देखती हूँ कैसे बूढ़ा मुझको पाने की कोशिश कायरता है……”

तो बे कॉन्टिनोएड………………….
 
अपडेट 122

तो सविता अपने ससुर से छुड़वाना चाहती थी और अपने इरादों में कामयाब भी होने वाली थी. और यह सब सविता के मैं में तब से शुरू हुई जब से उस्सने पूनम को अपने ससुर के साथ देखा उस दिन बाथरूम से निकलने के बाद.

अब इधर जब सविता के ससुर ने उस्सकी पैंटी को सूंघने के बाद उस्सको वापस करने का सोचा तो उस्सने भी ठान hi लिया के अब तो कुछ करना पड़ेगा. और उधर कमरे में सविता वेट कर रही थी के ‘ससुर अब आएगा मेरी पैंटी मुझको वापस करने तो देखती हूँ किआ करता है….’

सविता के ससुर धीरे धीरे उस्सकी कमरे के और गया और दरवाज़े पर जैसे hi रुका तो देखा के सविता साडी उतार चुकी है और पेट्टी कोट और ब्लाउज में है मगर ब्लाउज को आधा खोल चुकी है मगर दरवाज़े से पीठ किये हुए थी वह उस वक़्त. सविता ने अस्सल में सब जान बूझ के किया था उस ने देख लिया था जब ससुर उसस्के कमरे के तरफ आने लगे थे तो जल्दी से साडी उतारने लगी थी…. हाय किआ जिस्म थी सविता की, दो साल की बानी बहु घर में अकेली और ससुर बिना पत्नी के, ऐसी जवान जिस्म को अपने घर में पाकर तो कोई भी मर्द जवान हो जाए!.... इतने सालों तक बिना किसी जिस्मानी तालुकात के ससुर ने सपनों में भी नहीं सोचा था के मरने से पहले उसको फिरसे छोड़ने का मौका मिलेगा, अब भी उस्सको यकीन नहीं हो रहा था के यह जो हो रहा है सच है या sapna…ab भी हु मन hi मन सोच रहा था थोड़ा दररते हुए के कहीं सविता बुरा न मान लें और शोर्ण ा मचाए, फिर भी उस वक़्त उस्सकी सेक्सुअल ऊर्जे कुछ ज़्यादा hi था इस लिए बाकी के सोच को नज़र अंदाज़ करते हुए वह आगे बढ़ा अपनी बहु के कमरे में….. अंदर दाखिल होते hi गले को साफ़ करते हुए और एप हाथ को जिस में अंडरवियर था सविता के तरफ करते हुए उस्सने कहा,

“बहु यह कपडा तुमने गिरा दिया था वहां संभाल लो…..”

सविता थोड़ा शर्माने की ढोंग करते हुए अपने ससुर को देखती है और सर झुका कर भोली बनते हुए अपने हाथ को ससुर के तरफ बढ़ा कर पंतय लेती है और ‘थैंक्स’ कहती है. ब्लाउज की बटन्स उस्सकी छाती पर खुली हुई थी और ब्रा की स्ट्रैप्स नज़र आ रही थी क्लीवेज समेत….. उस्सकी पेटीकोट जिस्म पर इस कड़े चिपकी हुई थी के अंदर मूरत साफ़ ननर आ रही थी….. ससुर सविता को निचे से ऊपर तक देखता गया और जिस वक़्त सविता का हाथ ने ससुर के हाथ से पंतय लिया तुरंत ससुर ने उस्सकी हु हाथ थाम कर कहा,

“आज बेहद खूब सूरत लग रही हो, एकदम बेकाबू हो रहा हूँ आज, कभी भी ऐसा नहीं हुआ मेरे साथ तुमको लेकर….. पता नहीं क्यों ऐसा लग रहा है के तुम भी वही चाहती हो जो मैं सोच रहा हूँ; ऐसी बात है तो बुसस खामोश रहना और मुझे आगे बढ़ने देना मैं समझ जाऊंगा….. और अगर यह मेरा वेहम है तो प्लीज बस मुझको हलके से ढाका दे देना मैं चुप चाप बाहर निकल जाऊंगा, मगर इस बात को यहीं दफ़न कर देना प्लीज , इस उम्र में में शर्मिंदा नहीं होना चाहता अपने bête के सामने….. तुमको इस घर में केवल दो साल हुआ है पर मैं ने इस परिवार को तिनके तिनके समेत कर जोड़ा हुआ है, कहीं ऐसा न हो के एक छोटी सी ग़लती की कोई बड़ी सज़ा मिल जाए मुझे….. समझ गयी बहु?”

सविता के मैं में तो लाडू फूट रहे थे मगर फिर भी नाटक करते हुए कुछ शर्माने की ऐडा से नज़रें को चुराते हुए ससुर के लुंड पर देख रही थी…. उस्सको तो इसी का इंतज़ार था पर भोली बनने की नाटक कर रही थी…. पूनम को अपने ससुर के साथ किश तरह से उस्सने देखा था यह अपने मैं में सोचते हुए गरम हो रही थिस सविता और किश तरह से बाद में पूनम की ससुर के साथ मज़े लुटाए उस्सने….. यह सब सोचते हुए सविता अपने ससुर के साथ बी वैसे hi रिश्ते में आना चाहती थी…. एक ज़बरदस्त आग सी लगी हुई थी उसस्के अंदर और साड़ी ज़िम्मेदारियाँ और दुन्या को भूल कर सिर्फ उस मौके को भरपूर जीना चाहती थी…..

तब तक ससुर ने धीरे धीरे उस्सको अपने तरफ हौले हौले खिंचा उस्सकी बाहें को अपने तरफ करते हुए…… तेज़ दिल की धड़कनों के साथ सविता ने एप क़दमों को अपने ससुर के तरफ बढ़ने दिया और अचानक उस्सकी छाती ससुर के छाती से टकराई और उस्सकी आह निकली……. तब तक ससुर ने सविता को अपने बाँहों में कसके जाकर लिया था और लम्बी सेंसें ले रहा था सविता को सूंघते हुए… उसस्के दोनों हाथ धीरे धीरे सविता के पीठ को सहलाते हुए उस्सकी गांड पर गया जिस्सको ससुर ने सहलाते हुए अपने पैरों पर ज़ोर लगाते हुए अपने लुंड को सविता की जाँघों के बीच ज़ोर से दबाया मुंह से “आअह्ह्ह” निकालते हुए……. दोनों खड़े हुए थे उस वक़्त… ससुर को ऐसा लग रहा था के वह सपना देख रहा है….. वह इस इंतज़ार में था के सविता उस्सको धक्का देगी और कमरे से बाहर निकलने को कहेगी….. मगर उस्का दिल बहोत hi खुश हुआ जब उस ने फील किया के सविअत की बाहें उसस्के कांधों पर गयी और उस ने भी ससुर को ज़ोर से सीने से लगाते हुए अपने होंठों को हलके से ससुर के गले पर lagaya….Savita की सेंसें तेज़ थी उस वक़्त तो ससुर को उस्सकी गरम सेंसें अपने गले पर महसूस हो रही थी…..

ससुर ने हौले से झुक कर सविता को अपने बाँहों में उस तरह से उठाया जैसे एक बचे को उठाते हैं और अपने क़दमों को सविता की पलंग के तरफ बढ़ाते हुए आगे चलने लगा सविता की ेंखों में देखते हुए….. उस वक़्त सविता को सच में शर्म आरही थी क्यों के पहली बार उस्सको ससुर ने बाँहों में उठाया था वह भी बिना साडी के, सिर्फ ब्लाउज और पेटीकोट में…..

अब दो साल की बियाही जवान बहु अपने पलंग पर ससुर के साथ बिना साडी के!! उस नज़ारे को कोई देखता तो किआ हुलाध मचती? सेक्स के इलावा और किआ हो सकता है जब एक ससुर और बहु को उस स्तिथि में देखा जाए तो?.. ससुर का लुंड एकदम खड़ा हो चुक्का था अपनी जवान बहु की जवान बदन को देख kar..uss ने धीरे से, प्यार के साथ सविता को बिस्तर पर लेटते हुए अपने हाथों को उस्सकी नंगी कमर से फेरते हुए आगे की तरफ पथ पर फेररता गाय….. और सविता के ज़ुबान से ‘इससष” की धीमी आवाज़ निकली……. सविता की ऐडा और नज़ाकत और भी रिझा रही थी ससुर ko…bilkool भोली और नादान दिख रही थी, उस से ससुर को बेहद मज़ा ारः था…..

तो बे कॉन्टिनोएड……
 
अपडेट 123

रेकापितुलातिओं



122 उपदटेस हो चुके हैं फिर भी और बहोत कुछ होना बाकी हैं इस कहानी में. याद दिलाने के लिए और नए रीडर्स के लिए ब्रीफ में कहानी को दोहराता हूँ. सरजू ने छोटे से hi अपने दादा को अपनी माँ के साथ देख लिया था कई बार. उसस्के मैं में अपनी माँ के लिए सेक्स की तमना होने लगा था बचपन से hi वो सब देख कर. उस्का बाप ाबाहिज हो गया था एक्सीडेंट में तो उस मौके का फायदा उठाकर उस्का दादा और दोनों चाचा उस्सकी माँ को लगते थे सब सरजू को पता था. उस्सकी माँ पायल लास्ट में विद्वा हो गयी तब तो दोनों चहका धानंद और रमेश की लाटरी लग गयी पायल के साथ रात गुज़ारने को, ऊपर से दादा भी था. जीन लोगों ने शुरू के उपदटेस नहीं पढ़े हैं तो दरख्वास्त हैं के सब पढ़ें बहोत मज़ेदार उपदटेस और कहानी है यह. अब धानंद की बेटी भी है कोयल और उस्का भाई रोशन, इन् दोनों के भी सम्बन्ध हैं रोशन खुद अपनी बेहेन से बे इन्तहा प्यार करता है, और इस घर के मर्दों की तरह वो भी आखिर में पायल चची के भी हो जाते हैं और कोयल दादा और अपने बाप से भी लगाती है. धानंद और रमेश की पत्नी भी ससुर के साथ मजा करते हैं और पायल भी. तीन बहुएं हैं, पायल, पद्मिनी और पूनम. रोशन और सरजू कजिन भाई हैं और कोयल कजिन सिस्टर सरजू की. अभी जो बाकी हैं वो फ़्लैश बैक में दिखाना यह भी है के कैसे शुरू में भाइयों के बीच बीवी की अदला बदली किये गए थे…… और बहोत बहोत कुछ होना बाकी है इस कहानी में – वैसे मैं करैक्टर तो पायल और सरजू हैं माँ और बीटा. मगर 90 उपदटेस में सरजू चौथा hi था बस अब जवान हुआ है जब दादा ने उस्सको सिखाया के कैसे अपनी माँ को अप्प्रोचा करना चाहिए…. बाकी चाचाओं को पहले पता नहीं था के सरजू खुद अपनी माँ के साथ वो सब करता है… यह पिकनिक वाले दिन पता चला…. अपडेट 93 हुआ तब सरजू अपनी माँ पायल के साथ सम्भोग करने में कामयाब हुआ था. दादा माँ और bête को करते हुए देखना चाहता था तो सरजू से प्लान करके वो भी देखने में कामयाब हुआ अपडेट 101 में. फिर फार्म हाउस वाले प्रोग्राम में रमेश और धानंद कोयल को ले गए थे, वहां और मज़ा आया. अपडेट 108 में दोनों दादा और पोता एक साथ पायल के साथ एन्जॉय किये थे. फिर दोनों चाचा और सरजू पायल के साथ. तब वापस पीछे गए थे पूनम की कहानी को देखने ससुर के साथ उस्का शुरुवात कैसे हुआ था. कितने पापड़ बेले थे ससुर ने पूनम को पाने के लिए. वो तो इंकार कर रही thi…yaad है वो दिन जब पूनम सविता के बचे को लेकर आँगन में थी और ससुर पूनम को देख कर मूठ मार रहा था तब पूनम को कितना तरस आयी थी ससुर पर, उसी के बाद पूनम राज़ी हुई थी ससुर को खुश करने के लिए…. अब सविता आगयी थी बीच में उस्का भी हैं रोले हैं चलो देखते हैं…..

हाँ तो अपनी दोनों बहुओं के सात कामयाबी से सम्बन्ध बनाने के बाद गिरजानंद (ससुर) कैसे अपनी बहु पूनम को फँसाया था यह हम ने देखा, अपडेट 112 से 120 तक ससुर ने किआ किआ पापड़ बेले पूनम को पाने के लिए. हम ने यह देखा के पहली बार कैसे ससुर पूनम की लेने में कामयाब हुआ था.

बीच में सविता जो पड़ोस में रहती है और अपने बचे को पूनम के साथ चौररने आयी थी और पूनम को अपने ससुर के साथ देख लिया था फिर उस के मैं में भी उमंगें जाएगी के उस्का ससुर भी उसस्के साथ वैसे सम्बंद रखें, तो उस्सने अपने ससुर को भी रिझाना शुरू किया और कामयाब भी हुई. मगर अस्सल बात यह थी के सविता दो साल की बियाही बहु जो थी उसस्के दिमाग़ में बहोत कुछ चल रहा था. वो कुछ और प्रोग्राम बनाना चाहती थी, एक तो पूनम के ससुर से छुड़वाना चाहती थी दूसरा पूनम को अपने ससुर से छुड़वाना भी चाहती थी. और चाहती यह थी के वो और पूनम मिलकर अपने ससुर के साथ चुदाई करें या चरों एक साथ मिलकर प्रोग्राम करें. इस में किआ वो कामयाब होती है या नहीं यह देखते अब!!

तो होने ससुर से छुड़वाने के बाद सविता घुल मिल गयी ससुर के साथ और हर रोज़ मजा करने लगी. और दोनों आपस में हर तरह के बात करने लगे. चुदाई वाले बातें भी. तो एक रोज़ चुदाई से पहले सविता ने अपने ससुर से कहा;

“आप उस पूनम को जानते हो नाह जहाँ मैं मुन्ना को चोरर कर बाजार जाती हूँ कभी?”

ससुर ने कहा; “हाँ वो गिरजानंद की बहु नाह, हाँ जानता हों क्यों?”

सविता: “किआ वो आप को पसंद है?”

सविता का ससुर चिहुंकते हुए सविता के चेहरे में देखने लगा तो सविता ने खिलखिलाते हुए कहा, “इस में चिहुंकने की किआ बात है जैसे आप और मैं वैसे पूनम और उसस्के ससुर!!”

ससुर: “किआ? तुम्हारा मतलब है के पूनम और उसस्के ससुर भी? किआ कह रही हो ? किआ सच बात है?”

सविता: “बिल्कुल सच बात है, मैं उन् लोगों को देख कर hi आप के तरफ आयी वार्ना मैं ने तो आप के साथ सपने में भी कभी ऐसा नहीं सोचा था….”

सविता का ससुर का खड़ा हो गया पूनम को सोचते hi और अपने लुंड को सविता के सामने पंत में संभालते हुए पुछा, “चल बता मुझे कब और कैसे तुमने उन् दोनों के देखा ज़रा मैं भी तो सुनूं!”

सविता अपने बाँहों को ससुर के गले में डालकर कहा; “एक दिन मैं मुन्ना को चौररने गयी थी पूनम के पास क्यों के शहर जाना था मुझे. तो उस रोज़ जब मैं अंदर घर में गयी तो पूनम नाहा कर बाथरूम से निकली थी और उस्का ससुर ने उस्सको दबोच लिया था बाथरूम के पास, चुम रहा था उस्सको उस्सकी जांघें पर अपना हाथ फेरर रहा था और पूनम मन कर रही थी….. मैं तो देख कर हकबका गयी और धीरे से क़दमों को पीछे करके सब देखता गया, शुक्र है मुन्ना सोया हुआ था उस वक़्त…… बाकी और बहोत कुछ देखा और जब पूनम अपनी कमरे में जाने लगी तब मैं ने फुंकारा और ससुर बगल में चले गए…… फिर मैं ने दोनों को कपडे धोने वाले पत्थर के पास देखा, पूनम ने ससुर का मुंह में लिया था उस वक़्त जब मुन्ने को वापस लेने गयी थी उसी दिन को….”

सविता के ससुर का बुरा हाल हुआ यह सब सुनकर और अब पूनम के लिए उतावला हो गया वो भी और अपनी बहु से कहा, “सविते कुछ भी कर मगर मुझको पूनम दिलादे तेरी यह उपकार होगा इस ससुर पर ऋ!! कुछ कर, किआ वो मान जाएगी?”

सविता ने कहा मानना तो पड़ेगा क्यूंकि वो उस्सकी इस बात को जान गयी है…. मगर सविता ने यह भी कहा के गिरजानंद को भी एक दिन साथ लाना होगा पूनम के और चरों मिलकर ेश करेंगे…. सविता के ससुर ने पुछा यह कैसे मुमकिन होगा तो सविता ने कहा यह सब उस पर चोरर दिया जाए वो संभाल लेगी सब कुछ.

आज के लिए इतना hi दोस्तों, कल ज़्यादा लिख कर पोस्ट करूँगा आप लोग इतने में आज का चला लीजिये कल का मुझे भी बेसब्री से इंतज़ार रहेगा….

तो बे कॉन्टिनोएड…………………..
 
अपडेट 124

सविता ात Poonam’s प्लेस अगेन

सविता दूसरे दिन पूनम के घर गयी. अब आप सबको याद होगा ौपड़ाते 119 में जब सविता ने पूनम को अपने ससुर को चूस्ते हुए देखा था और पूनम के ससुर से छुडवानी चाहती थी तो किआ कहकर गयी थी पूनम से. पूनम को एन्जॉय करने को कहकर गयी थी और पूनम सोच में पद गयी थी के क्यों सविता ने उस्सको वैसे कहा था. तो आज जब सविता पूनम से मिलने आयी तो सबसे पहले तो गिरजानंद से मुलाक़ात हो गयी आँगन में. पूनम के ससुर ने उस्सको देख कर तुरंत घर के अंदर देखा के कोई अंदर से देख तो नहीं raha…fir सविता बलखाती हुई उसस्के ऊपर अपने साडी का अंचल लहराते हुए उसस्के चेहरे पर फेर्रा और पुछा, “क्यों जी आप के सेक्सी बहु अंदर है किआ जी?”

गिरजानंद ने सर खुजाते हुए कहा; “आरी सविता तू ऐसे क्यों करती है कोई देख लेगा तो मुसीबत आजाएगी, ऐसा मत किया कर तू!”

सविता ने हँस्ते हुए जवाब दिया: “अचछह जी, आप अपनी बहु को छोड़ते हो तब आप को इतनी मुसीबत नहीं लगता? मेरी बारी कब आएगी जी बतादो, मैं तो लाइन में कड़ी हूँ जी कब मुझे आप के लम्बे मोठे लुंड का सुख डोज आप? हम्म्म हैं जी, बोलो नाह जी!!”

गिरजानंद सर झटकते हुए सविता को अंदर चले जाने को कहा. पर सविता जाने वाली कहाँ थी, गिरजानंद का हाथ पाकर के ुसस्स तरफ खिंचा जहाँ पूनम कपडे धो रही थी उस दिन पत्थर पर. उसी कोने में पूनम ने अपने ससुर गिरजानंद को चूसा था और सविता ने देख लिया था, और वहां पहुँचते hi सविता का हाथ सीधे गिरजानंद के लौड़े पर गया…… गिरजानद का खड़ा तो हो hi चुक्का था इतनी जवान दो साल की बियाही बहु के बातों से, अब उसस्के छूने से बुरा हाल हो गया गिरजानंद का, वो बार बार घर के अंदर झाँकने की कोशिश करते हुए सविता को इंकार किये जा रहा था, मगर सविता ऐसे मानने वाली नहीं थी, बैठ गयी निचे और जल्दी से उस्का ज़िप निचे करके लुंड को बाहर निकाल लिया और दोनों हाथों में थामे लुंड की ऊपरी हिस्से पर छिलका को हाथ से निचे करते हुए अपने मुंह में ले लिया जैसे कई दिनों की भूकी थी….. गिरजानंद की आह निकल पड़े और उस्का जिस्म कम्प उठा… अब भी वो घर के अंदर मुद मुड़कर देखे जा रहा था और सविता के जीब को अपने लुंड पर फील किये जा रहा था “स्स्स्सस्ठ्ठ, आआअह्ह्ह” करते हुए…… सविता साडी में थी और अपने पल्लू को ज़मीन पर गिरा दिया और खुद अपने ब्लाउज के ऊपरी बटन्स को खोल दिया और एक हाथ से गिरजानंद का हाथ खिंच कर अपने चूचियों पर कर दिया….. कहने को ज़रुरत नहीं थी के गिरजानंद ने उस्सकी जवान कड़े बूब्स को देख कर उसस्के मुंह में पानी agaya…aur मसलने लगा दबाते hue…panje भर बूब को अपने हाथ में भर लिया फिर दो उँगलियों से निप्पल को गोआल गोआल उँगलियों में घुमाने लगा जिस से सविता की सिसक निकल पड़ी और ज़्यादा जोश से चुस्सने लगी उसस्के लुंड को….. गिरजानंद भी जोश में आने लगा और कमर हिलाते हुए अपने लुंड को सविता के मुंह के अंदर पेलने लगा…. लुंड बहोत मोटा था सविता के मुंह के लिए, जितना हो सके सविता ने मुंह खोल लिया था मगर लुंड ठीक से आना जाना नहीं कर पा रहा था सविता के मुंह में……. सविता दीवानी हो गयी थी उसस्के लुंड को देख कर उस दिन…. इसी लिए पागल की तरह चूसे जा रही thi…assal में अपने छूट के अंदर चखना चाहती थी उस लुंड ko…kyun के आज तक इतना मोटा लुंड सविता ने कभी नहीं देखा था…..

सविता ने लुंड को फिर अपने चूचियों पर दबाते हुए रगड़ा…. और खड़े हो कर गिरजानंद के मुंह को अपने मुंह में लिया लुंड को हाथ में पकड़े हुए…. और हांफते हुए कहा, “क्यों जी सिर्फ अपने hi बहु के लिए रखा है इस ावज़ार को, मुझे तो इस्सकी बहोत ज़रुरत है जी, किसी ब्याहने घर के बाहर चलो नाह जी, किसी जगह जाकर मज़ा करेंगे…..” गिरजानंद ने कहा; “अपने ससुर के साथ क्यों नहीं लेती तू?” आप के hi कहने पर शुरू कर दिया हूँ उसस्के साथ जी, अजीब मज़ा अत है पति के बाप के सात करते हुए, अलग मजा है जी मगर आप कुछ और hi हो….” और तभी गिरजानंद की पत्नी अंदर से फुंकारती है; “कहाँ चले गए धानंद के बापू ?!” झट से सविता अलग होती है गिरजानंद से और भागती हुई लाउन्ज के तरफ जाकर “पूनम दी, पूनम दी” फुंकारने लगती है और गिरजानंद कपडे धोने वाले पत्थर के पीछे छुप जाता है.

सविता कुछ देर बाद पूनम के साथ उसस्के कमरे में पायी गयी.

सविता: “अब छुपाने की कोई ज़रुरत नहीं मुझसे पूनम दी, तुमको देख के मैं ने भी अपने ससुर से करना सीख hi लिया.”

पूनम को उसी दिन शक हुआ था के शायद सविता ने कुछ देख लिया था और अब यकीन हो गया तो छुपाने की गुंजाइश hi नहीं थी. तो दोनों नयी बहुएं मिलकर अपने अपने ससुर के साथ ेश करने की बात शेयर करने लगे. पूनम ने समझाया सविता को के बहोत दिनों से उस्का ससुर उस्सको तंग किये जा रहा था जब भी वो घर में अकेली होती थी…. और जिस दिन सविता ने उस्सको बाथरूम के पास नाहा के निकलने के बाद ससुर के साथ देखा था तब कुछ भी नहीं हुआ था बस छिना झपटी चलते थे उन् दिनों….. सविता ने तो यह भी बता दिया पूनम को के खुद गिरजानंद से लिपट गयी थी वो जिस दिन अपने बचे को वापस लेने आयी थी, और उसस्के ससुर ने hi सविता को अपने ससुर को रिझाने का तरीका बताया तभी सविता की हौसला बढ़ा अपने ससुर के साथ जाने की.

और वैसे hi बातें करते करते सविता ने कह दिया पूनम को के उस्का ससुर उस्सको लेटना छठा है. पूनम सविता के ससुर को जानती थी मगर उसस्के साथ बिस्तर गरम करना यह तो बिल्कुल कभी नहीं सोचा था. सविता ने बहोत कन्विंस किया मगर पूनम ने कहा, “तू पागल है किआ ऋ! ऐसा कैसे हो सकता है भला…. तुमको कभी भी उंणको मेरे और मेरे ससुर के बारे में बोलना hi नहीं चाहिए थे यह किआ कर दिया तुमने सविता?” सविता बोली, “आरी पूनम दी, अगर मैं और तुम दूध के धुले होते तब तो ऐसी बात कभी करते hi नहीं नाह घर के बुज़ुर्गों के साथ, अब हम दोनों एक hi कश्ती में सवार है तो किआ हर्ज है….. तू भी मजा करलेगी कुछ बदलाव भी हो जाएगा और मैं तेरे ससुर के साथ ेश कर लुंगी हो सके तो एक दिन हम चरों एक साथ मजा करेंगे…..”

पूनम मन करते जा रही थी मगर सविता इंसिस्ट किये जा रही थी. सविता ने इतनी ज़िद किये के पूनम ने कहा के सोचके बताएगी. मगर सविता ऐसे मानने वाली नहीं थी उस्सने तुरंत पूनम को अपने साथ उसस्के घर चलने को कहा उसस्के मुन्ने के साथ खेलने के बहाने. पूनम बहोत हिचकिचा रही थी पर आखिर में मान गयी और अपने सास से कहकर निकल गयी घर से सविता के साथ. रास्ते में गिरजानंद मिले दोनों से. गिरजानंद ने पूनम से पुछा किधर जा रही है तो सविता ने कहा के उसस्के मुन्ने के साथ कहने ले जा रही है उस्सकी बहु को.

दोनों चले गए…… अब गिरजानंद घर वास् आकर सविता के बारे में सोचता रहता है और याद अत है उस्सको के सविता ने कहा के उसस्के ससुर के साथ वो भी करने लगी है और अब पूनम को वहां लगाई है, और उस्का ससुर घर पर होता है दिन भर….. गिरजानंद का माथा ठनका के कहीं पूनम को सविता का ससुर नाह रिझा लें….. उस्सको उत्सुकता होने laga….apni बहु से जलने लगा, नहीं चाहता था के कोई और पूनम को छुए….. जलन के मरे पागल होता गया गिरजानंद……

उधर सविता पूनम को लेकर अपनी घर पहुंची. ससुर से मिलवाया पूनम को. पूनम ने एक खूबसूरत साडी पहनी हुई थी और पूनम को सविता के ससुर के चेहरे और ेंखों में वो ठरकीपन दिख गया जिस्का बयान सविता ने किया था. सविता और पूनम दोनों शामे आगे के थे. और सविता के ससुर के चेहरे में देखते वाट पूनम सोच रहा था के “इस्को भी इतनी जवान खूबसूरत बहु मिलगया छोड़ने को, यह साले बूढ़े लोगों के राज चल रहा है आज कल शायद! सब ेश कर रहे हैं अपने जवान बहुओं के साथ!” और पूनम के मन में एक अजीब सी तीस उठी सविता को अपने ससुर के साथ सोचकर. जलन तो नहीं थी मगर कुछ था जो पूनम को डिस्टर्ब करने लगी…… वो उस वक़्त अपने ससुर गिरजानंद को सोचने लगा…… और फिर सविता पूनम का हाथ पाकर कर अपने कमरे में ले गयी और कहा, तू यहाँ खड़ा होकर देख मैं अपने ससुर के साथ थोड़ा लिप्त लिपटी, चुम्मा छाती करके आती हूँ तू इस जगह से सब देख सकेगी….. मैं कहूँगी के तुम मुन्ने के साथ खेल रही हो, तू आराम से देख मजा आएगा तुझे जैसे मुझको मजा आया था तुमको अपने ससुर के साथ देख कर……”

पूनम तैयार थी देखने के लिए बल्कि उस्सको मैं कर रहा था देखने को, सोच रही थी किआ पता सविता झूट बोल रही थी अब अगर देखेगी तो यकीन हो जाएगा के वो भी अपने ससुर के साथ यह सब करती है.

पूनम उस जगह पर कड़ी उनके बरामदे में देखने लगी जहाँ सविता का ससुर एक आर्मचेयर पर बैठा अखबार के पन्ने उलट रहे थे. सविता बलखाती गयी उसस्के पास और उनके गॉड में बैठ गयी अपने बाँहों को ससुर के गले में डालते हुए. पूनम मुस्कुराने लगी अंदर से देखते हुए. ससुर घबराते हुए कहा; “तुम पागल हो किआ वो गिरजानंद की बहु यहाँ है नाह?”

सविता ने ससुर के लुंड पर हाथ फरते हुए एक खूबसूरत मुस्कान से कहा; “तो किआ हुआ पिता जी, वो भी तो एहि करती है अपने ससुर के साथ! उसस्के लिए कुछ नया नहीं है इस में! और आप तो उसस्के साथ भी एहि करना चाहते हो नाह?” ससुर सविता के कमरे के तरफ देखते हुए पुछा; “किआ तुमने उस्सको पता लिया मेरे लिए किआ? वो मान गयी किआ?” सविता ने अपने ससुर के होंठ पर अपना होंठ रगड़ते हुए कहा, “अगर मानी नहीं होती तो मेरे साथ यहाँ आती hi क्यों पिता जी?!” ससुर ख़ुशी से बेताब होते हुए पुछा, “अच्छा सच? तो किआ अभी hi कुछ हो सकता है किआ बता नाह मेरी रानी!!” और सविता ने कहा; “आप भी किआ याद रखोगे पिता जी जाओ कमरे में पूनम आप का इंतज़ार कर रही है, जाओ मजा करो मैं इधर नज़र रखती हूँ, और हाँ पहली बार है इस लिए शायद थोड़ा हिचकिचाहट होगी या कुछ नखरें करेगी बस आप घूसस्ते जाना और देखना मान जाएगी और आप के ावज़ार को अपना लेगी पल भर में जाओ मजा करो पिता जी मैं ने आप के लिए एक और नयी बहु ले आयी हूँ हम्म!”

बिना वक़्त बर्बाद किये सविता का ससुर झट से उठकर सविता के कमरे के तरफ जाने लगा. अंदर से जब पूनम ने उस्सको आते हुए देखा तो घबरा गयी और अपने पल्लू को सर के ऊपर करके अंचरा को डेंटन में दबा liye…usska दिल बड़े ज़ोर से धड़कने लगे और सोचा के सविता ने उस्सको धोके से उस कमरे में भेजा…..

ससुर जैसे अंदर ग़ुस्सा, कुण्डी को बंद किया और पूनम के तरफ अपने लालची नज़रों से देखते हुए बढ़ने लगा यह कहते हुए, “आरी पूनम तुम तो नयी नवेली दुल्हन लग रही हो ऐसे घूँघट खिंच कर, क्यों पल्लू को सर के ऊपर कर लिया हटादो बिटिया मैं भी तो देखूं किआ खूबी है के गिरजानंद इतना तेरा दीवाना हो गया है….”

पूनम अपने थूक भी नहीं निगल पा रही थी, आवाज़ नहीं निकल रही थी बहोत कोशिश के बाद इतना कह पायी;

“देखिये आप को ग़लत फैमि हुई है शायद, सविता ने आप को ग़लत खबर दिए है मैं तो बस ऐसे ……..”

इतना hi कह पायी थी के सविता के ससुर ने पूनम को बाँहों में जकरते हुए उसस्के गाल, गले और पीठ को चूमने लगा पल्लू को खिंच कर….. पूनम के समझ में नहीं ारः था के किआ करें, उस्सकी साडी लगभग उतरने hi वाला था पता नहीं कहाँ संभालती, ससुर होशियार था चूमने और चाटते वक़्त अपने हाथ चला रहा था चरों तरफ पूनम के जिस्म पर, ब्लाउज के कई बटन भी खुल गए ब्रा की स्ट्रैप्स भी सामने थे, ससुर का जीब ब्रा के स्ट्राप के बीच फेरर रहे थे तो कभी पूनम के गले के पीछे…. और बाहर से सविता अंदर झांक रही thi…ab उस्सको देकने का मज़ा आने लगा tha…apne ससुर के कारनामे देखते हुए अपनी छूट को दबा रही थी….

तो बे कॉन्टिनोएड……………… (3400 वर्ड्स फ्रॉम बोथ उपदटेस )
 
थैंक्स नोवा भाई, करूँगा वहां भी अपडेट मगर वहां पहले रन्ग्लिश में लिखता हूँ, इंग्लिश सेक्शन में अपडेट पोस्ट करता हूँ, फिर हिंदी में उसी अपडेट को ट्रांसलेट करता हूँ तब उस्सको यहाँ के हिंदी वर्शन में पोस्ट करता हूँ इस लिए उस थ्रेड पर लेट होता हूँ भाई.... वैसे इनोसेंट वाइफ अब एन्ड भी होने वाला है शायद एक दो अपडेट के बाद कम्पलीट हो जाएगा.
 
अपडेट 125 (फ्रेंड्स नाउ ों ओनली सिंगल उपदटेस विल के हेरे - no मोरे डबल उपदटेस एंड थ्रेड विल बे अपडेटेड फ्रॉम मंडे तो फ़रिदेस ओनली नॉट ों वीकेंड्स. थैंक्स आल)

पूनम ताकें बी Savita’s फादर इन लॉ एंड शी जॉइन्स

सविता के ससुर ज़ोर से पूनम को जाकर हुए चूमते और चाटते जा रहा था जैसे एक भूके शेर को गोश्त मिल गया हो खाने के लिए, बिल्कुल बेकाबू हो गया था, बाहर से सविता मज़े लेकर देख रही थी अपने ससुर को पूनम को दबोचते हुए और पूनम घबरा भी रही थी और अनंसाते हुए कहा;

“किआ कर रहे हो आप, आप की बहु यहीं है वो आजाएगी, चोरडिये नाह!!”

ससुर ने पूनम को लपेटते हुए कहा; “ऐसा मौका कहाँ से मिलेगा फिर कभी मुझे पूनम रानी, अपने ससुर को खुश करते हो मुझे भी थोड़ा मज़ा ले लेने दो किआ हर्ज है ऋ पूनम रानी!”

पूनम उसस्के हाथ को अपने चूचियों से हटाते हुए कहा, “आप के पास तो अपनी बहु सविता है उस्सको जाकर नोचिये मुझे क्यों पकड़ा है, चोरडिये मुझे; देखो यह मुन्ना जग जाएगा इस शोर से! जाइये आप यहाँ से!!”

तब तक सविता के ससुर ने उस्का पल्लू बिल्कुल निचे कर चुक्का था ब्लाउज लग भाग खुल गयी थी और 90% बूब्स बाहर थे और बूढ़े ने भर मुंह दबोच लिया पूनम के बड़े चूचियों को चुस्ती हुए….. पूनम की सिसकारी निकल गयी और उफ्फ्फ करते हुए उसस्के चुंगल से निकलने की बेकार कोशिश करती गयी और कहा; “इस सविता को तो मैं देख लुंगी, मुझको जान बूझकर यहाँ बांध किया और आप को मेरे पास भेज दिया मैं उस्सको नहीं छोडूंगी!!”

तब तक ससुर का हाथ पूनम की नबी पर था और उसस्के पेट्टी कोट के अंदर 4 उँगलियाँ घुस गए थे उस्सको निचे उतारते हुए…. पूनम की समझ में नहीं ारः था के ऊपर उस बूढ़े के मुंह को रोके या निचे उसस्के हाथ को आगे बढ़ने से…… और फिर सविता के ससुर ने पूनम के पथ्य कोट के अंदर हाथ दाल hi दिया और उस्सकी भरे छूट को भरे हाथ से मसलने लगा जबकि पूनम से सेहेन नहीं हो पायी और खुद अपने जिस्म को ढिल्ला कर दिया जैसे उसस्के हवाले सरेंडर कर दिया खुद को…. और उस बूढ़े का हाथ अपनी छूट पर गहराई से महसूस करते हुए “इस्स्स्सस्स्स्शह्ह्ह्ह ह्म्म्मम्म ufffffffffff ुउउइइइइ माआआआ” करती गयी…..

तब ससुर ने पूनम को उठाया अपने बाँहों में आउट पलंग पर लेता दिया, पूनम बिना इंकार किये लेट गयी क्यूंकि तब तक उस्सकी भी आग भड़क उठी थी और आगे बढ़ने की इच्छा हो गयी थी…… फिर भी पूनम बोली; “अगर मेरे ससुर को पता चल गया तो किआ होगा?” सविता की ससुर ने पूनम की जांघों को चूमते हुए कहा, “मेरे ख़याल से तो वो खुश होगा और तुमको हम दोनों मिल बाँट कर खाएंगे तब तो!!” और पूनम अपने एक तंग को ऊपर उठा दिए क्यों के सविता का ससुर उस्सकी पैंटी उतार रहा था उस वक़्त, और बोली, “अगर मुझको मिल बँटके खाने का इरादा है तो आप की सविता बहु का किआ जी?” पूनम की छूट के पंखुरियों के बीच अपना जीब फरते हुए सविता का ससुर बोलै; “आरी कौन सी बड़ी बात है चाहो तो फोर्समे कर लेंगे जानेमन बहोत मज़ा आएगा, चाहो तो खुद अपने ससुर से बात करके देखो!!” एक अंगरायी और सिसकारी के साथ पूनम बोली; “न बाबा नाह! मैं नहीं कुछ कहने वाली अपने ससुर से, यह छोड़ो अगर मेरे पति को पता चल गया तब किआ करोगे आप सब?”

सविता के ससुर मगन होकर पूनम के दोनों जाघों को फैलाते हुए अपने सर को बीच में डाले उस्सकी छूट को चुस्सी जा रहा था और पूनम सिसकियों के साथ कहांरने लगी थी और बाहर सविता अपने हाथ को अपने छूट पर किये हुए तीन उंगलियों को ऊपर मस्सल रही थी और उस से रहा नहीं गया, मैं दूर को बंद किया और जिस कमरे में उस्का ससुर और पूनम थी वो उस कमरे के अंदर जाने लगी…..

बीएड पर तब तक सविता के ससुर ने पूनम को बिल्कुल नंगा कर दिया और खुद अपने कपडे भी उतार चुके थे, पूनम ने सब करने दिया क्यूंकि वो बिल्कुल तैयार हो गयी थी छुड़वाने के लिए, आग भड़क रही थी उसस्के जिस्म में और इंतज़ार कर रही थी कब लुंड उसस्के अंदर ग़ुस्से…. ससुर ने एक 69 पोज़ किया, उस्का लुंड पूनम ने मुंह में ले लिया बिना फरमाईश किये जबकि वो उस्सकी गीली छूट का रास चख रहा था तभी सविता कमरे में आयी और बड़ी जल्दी से अपनी साडी को निकाल फेंका और वो भी बीएड पर चढ़ गयी…. उन् दोनों में से किसी को परेशानी या हैरानी नहीं हुई, जैसे के सविता का अंदर आना एक मामूली बात थी….

बीएड पर चढ़ने के बाद सविता ने अपनी ब्लाउज और ब्रा निकला और पूनम के छाती के पास अपना मुंह किया और मुस्कुराते हुए पूनम के गाल को चुम्मा और तृप्ति आवाज़ में पुछा, “कैसा है मेरे ससुर का लौड़ा पूनम, चख लिया? अच्छा लगा ? कैसा लाज़त है इस्सके तेरे ससुर जैसा hi है किआ?” पूनम चुस्सी जा रही थी बिना सविता को जवाब दिए और सविता ने पूनम की एक बूब पर अपना हाथ फेर्रा और उस्सकी निप्पल पर अपना जीब लगाया….. उस हरकत से पूनम ने और कसके लुंड को मुंह में दबाया के बूढ़े की आह निकल गयी और सर उठाकर पूनम के तरफ देखा, तो सविता को पूनम की चूचियों को चुस्स्ते हुए पाया…. वो हैरान होकर सविता को देखने लगा, खुद उस्सकी चूचियां लटके हुए पूनम की पथ पर दबे हुए थे और वो पूनम की निप्पल चूस रही थी और पूनम के मुंह में खुद का लुंड था उस नज़ारे को देखते हुए ससुर को बड़ा मज़ा आया और अपने एक हाथ को सविता की बूब पर किया, जिस से सविता की सिसकारी निकल गयी और पूनम की निप्पल को मुंह में ज़ोरों से दबा लिया…..

पूनम को बड़ा मज़ा ारः था सविता की उस छुवन से और हैरान थी के एक औरत की चुहने से उस्सको कैसे इतना अचछह लगने लगा….. तो ससुर ने सोचा उन् दोनों औरतों को मज़ा लेते हुए क्यों नाह देखे जबकि ज़िन्दगी में यह उस ने कभी भी नहीं देखा था….. तो उस्सने कहा; “सुनों पूनम, चोरर मेरे लुंड को कुछ देर के लिए, मैं अब तुम दोनों को ेश करते हुए देखना चाहता हूँ, सविता लगजा पूनम से, और मुझे थोड़ा मज़ा लेने दे अब….”

और ससुर बैठ गया बीएड के एक कोने में और सविता ने अपने पेट्टी कोट उतरे तो ससुर ने उस्सकी पंतय उतारे जिस्सको देख कर पूनम मुस्कुरा रही थी और कहा; “वह रे सविता तेरा ससुर तेरी पंतय उतार रहा है जैसे तू एक छोटी सी बची है और तुझे इस्को उतारना नहीं अत हीहीही!!” तो सविता ने जवाब दिया, “क्यों ऋ तेरे ससुर ने तेरी पंतय नहीं उतारी कभी किआ? तुहि उस्सको उतार के लगवाती है हर बार किआ?”

जब सविता भी नंगी हो गयी, तो पूनम के जिस्म के ऊपर चढ़ गयी और दोनों जवान औरतों ने एक दूसरे के मुंह को मुंह में लेकर चूमने लगे…. सविता क्यूंकि पूनम के ऊपर थी तो उस्सकी दोनों टांगें पूनम के दोनों जांघों के बीच हुए और छूट पर छूट रगड़े जा रहे थे चूमते हुए और ससुर अपने हाथ में अपने लुंड लिए ऐसी पोजीशन में बैठा जहाँ दोनों के छूट उस्सने ेंखों के सामने था…… लग रहा था के सविता पूनम को छोड़ रही है उस वक़्त….. पूनम भी एन्जॉय कर रही थी सविता की जवान जिस्म पर अपने उँगलियाँ फेररटीए हुए और अपने जाँघों कोण उठाकर सविता के कमर पर कस लिया पूनम ने और एकांत नज़र ससुर पर किये जा रही थी एक शैतानी मुस्कराहट के साथ….. ससुर घुटनों पर बैठे हुए सर झुकाके दोनों के छूट को इस तरह देख रहा था जैसे किसी बचे ने पहली बात छूट को देखा हो….. उस्का मुंह खुला हुआ था, जैसे हकबका गया हो, जीवन में पहली बार वो ऐसा नज़ारा देख रहा था…. फिर सविता थोड़ा खिसकते हुए ऊपर गयी ताके उसस्के बूब पूनम के मुंह तक जाए, और तुरंत पूनम ने एक भूके बचे की तरह सविता की जवान भरे हुए बूब को मुंह में लेकर चुस्सने लगी और एक हाथ को दूसरे बूब को मसलती गयी जबकि सविता की सिसकारियों से कमरा गूंझ उठा…….

उधर पूनम का ससुर ने सोचा के वहां जाकर देखना चाहिए के यह सविता क्यों मेरी जवान बहु को अपने घर लगाई है… उस्सको जलन हो रही थी के कहीं सविता का ससुर बुरी नज़र से उसस्के बहु को नाह देखे…. अपने बहु को वापस लेने घर से निकला गिरजानंद!!

तो बे कॉन्टिनोएड……………….
 
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