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उसस्के बाद तो ससुर बहु में ेंख मिचोली होने लगी घर के अंदर सासु जी के होते हुवे. दोनों तरफ अब आग बराबर की लगी हुवी थी, ससुर यह सोच कर के किश ऐडा से पूनम उसस्के पास आयी और उसस्के पानी को छाता, जिस ऐडा से उस्सने उस्का लुंड सहलाया, अगर सासु जी नहीं एते तो शायद पूनम लुंड को अपने मुंह में ले भी लेती….. गिरजानंद यह सब सोच सोच कर पागल होता जा रहा था. इतने दिनों के बाद जब वह रास्ते पर आयी भी तो कुछ ज़्यादा नहीं हो सका, ससुर दीवाना हो रहा था, कभी किचन में तो कभी लाउन्ज में फिर आँगन में तो कभी रास्ते पर घूम फिर रहा था. एकदम बेचैन था….. सोचने लगा किश नज़र से पूनम उस्सको मुठ मारते हुवे देख रही थी बिना झिझक, उस्सकी नज़रों में भी प्यास झलक रही थी, वह असल में तरप रही थी और उदास थी क्यूंकि ससुर उसस्के सामने मुठ मार रहा था और उस्सने कुछ नहीं किया उसस्के लिए हालां के वह कर सकती थी…..
ससुर सब याद कर करके बेचैनी की हालत में तरप रहा था. पूनम हर वक़्त सासु से नज़रें चुराते हुवे ससुर को देखा करती थी जब भी ससुर आस पास होते थे. दोनों जैसे दो गुनेहगार किसी जज के सामने बैठे हो, वैसे डाइनिंग टेबल पर बैठे खाना खाने के वक़्त जब सास ने खाना पड़ोस. वैसे पूनम भी पड़ोसती थी मगर उस वक़्त सास ने ज़िम्मा लिया था…. तो पूनम कभी ससुर के चेहरे को तो कभी सासु के चेहरे को देखती के कहीं वह नोटिस तो नहीं कर रही उन् दोनों के ेंख मिचोली को….. खाना कहते वक़्त पूनम के ेंखों के सामने वह दृष्ट आगया जब ससुर मुठ मार रहा था, उस्सने याद किया किश तरह से ससुर ने अपने मोठे तने हुवे लुंड को अपने हाथों में लिए उस्सको दिखा रहे थे… उस वक़्त तो पूनम इंकार कर रही थी मगर इस वक़्त वह सोच रही थी के उस्सको जल्दी से अंदर आकर उसस्के लुंड को थाम लेना चाहिए था और दोनों वहीँ लाउन्ज के सोफे पर लेथ जाते और खुद चुदाई होती…. यह सब सोचते सोचते पूनम गीली हो गयी…. और न जाने क्यों पूनम को लगा के उसस्के ससुर को पता चल गया के वह गीली हो गयी है और ससुर के ेंखों की गहराई में देखते हुवे एक अजीब सा प्यार और हवस भरी निगाह से उस्सने एक मुस्कराहट दिए अपने ससुर को.
ससुर भी उस वक़्त लुंड को सीधा कर रहा था टेबल के नीचे कभी पूनम को कभी अपने पत्नी को देखते हुवे. और पूनम ने नोटिस कर लिया के वह किआ कर रहे हैं तो एक नटखटी मुस्कान के साथ पूनम ने अपने पल्लू को सरकने दिया और अपने केहुनी मेज़ पर करके अपने गाल को हाथकली से लगाया इस तरह से के ब्लाउज के अंदर दिखे ससुर को….. पूनम सासु जी को भी देख रही थी रह रह कर के कहीं वह नोटिस ना करे….. अब सासु के मौजूदगी में यह हाल था सोचने की बात है अगली बार जब दोनों एक साथ होंगे तो किआ होगा….. आग बढ़ता चला जा रहा था दोनों के जिस्म और dil-o-dimaagh में, हवस की आग केहये या जिस्म की गर्मी मगर कुछ तो होने वाला था hi अब…. मगर कैसे और कहाँ…. समझ में नहीं ारः था के वह किआ करें…..
सविता ने कहा था के घाटे देर घंटे में वापस आजाएगी मगर 3 घंटे होने को थे और वह नहीं आयी थी अपने बचे को लेने. लंच के बाद सासु जी गए अपने कमरे में छोटा सा नींद मारने और पूनम ने बचे को भी सुला दिया फिर अपने उन् कपड़ों को लेकर बाहर स्टोन पर वाश करने के लिए गयी जो नाहा कर निकली थी. जाते वक़्त उस्सने ससुर को बाहर का इशारा किया उन् कपड़ों को दिखते हुवे. ससुर समझ गया के वह कपडे धोने जा रही है और उस्सको बाहर बुलाया उस्सने. ससुर ने भी इशारे से okay कहा, और पूनम बलखाती चलती गयी घर के बाहर, ससुर जल्दी से कॉरिडोर में निकली तो देखा किश ऐडा से चली जा रही थी पूनम कमर मटकते दरवाज़े के तरफ अपने हाथों में एक दो कपडे लिए… ससुर का खड़ा होगया पूनम की गांड को डोलते हुवे देख कर और सोचा के अब तो उस्सको छोड़ेगा वहीँ जहाँ कपडे धोती है चाहे खड़ा खड़ा की क्यों न चोदे मगर छोड़ेगा.
जब बाहर निकले ससुर जी तो पहले रास्ते पर ग़ौर से देखा, और जब कोई नहीं दिखा तो गया उस स्टोन वाश के करीब जहाँ ससुर ने पहली बार पूनम को चेर्रा था. अब वहां ससुर खड़ा होकर देखने की कोशिश कर रहा था के कहीं रास्ते पर आने जाने वाले लोग दीखते है या नहीं, तो नज़र आया के वहां लोग बाहर देख सकते हैं मगर बाहर से रास्ते पर से अगर कोई देखना चाहे तो किसी चीज़ पर चार कर तभी अंदर देख सकेंगे, और सिर्फ गेट के अंदर कोई दाखिल हुवा सिर्फ तब वाशिंग स्टोन नज़र अत है….. तो ससुर ने सोचा काम कर जाने का समाये आगया…..
पूनम ने मुड़कर मुस्कुराते हुवे ससुर को प्यार भरी नज़रों से देखा, और धीरे से कहा, “किआ देख रहे हो आप?” गिरजानंद ने जवाब दिया, “सोच रहा हूँ कहीं बाहर रास्ते पर से कोई हमको देख न लें!” तब पूनम ने कपड़ों को स्टोन पर रखते हुवे एक आशिकाना अंदाज़ में कहा, “मुझे तो कभी भी कोई नज़र नहीं अत जब यहाँ कपडे धोती हूँ जी, आप कद के थोड़ा ऊंचे हो इस लिए आप को बाहर दिख रहा है, फ़िक्र मत करो इस तरफ किसी को नहीं दिखेगा, आईये आप, मुझको अभी तक अफ़सोस हो रहा है के क्यों मैं ने आप को वह सब करने दिया जब मैं आप के लिए बहोत कुछ कर सकती thi…..ayiye अब….”
ठीक जहाँ पूनम झुक कर कपडे धोती थी उस पत्थर पर, उसस्के दाएं में घर का दीवार था, और ससुर ने पूनम के बाज़ू पाकर कर उस्सको खिंच कर उस दीवार से चिपकाया और भूके शेर की तरह पूनम के होंठों को चुस्सना शुरू कर दिया कुछ जंगली अंदाज़ में….. पूनम ने अपने बाँहों को अपने आप ससुर के कांधों पर कर दिया और अपने पतली पतली उँगलियों से ससुर के छाती के बालों पर फेरने लगी किश करते हुवे उस्सको. पूनम की साड़ी की पल्लू बिल्कुल निचे लटक गयी थी और गिरजानंद का हाथ उसस्के ब्लाउज के ऊपर से hi उस्सकी चूचियों को मसल रहे थे जब के पपूणम एक छोटी से सिसकारी में ‘ह्म्मम्म्म्म’ करते हीवे ससुर के जीभ को अपने मुंह में लिए चूसे जा रही थी अपने पुरे जिस्म को अपने ससुर के जिस्म से चिपकाये हुवे…..
दोनों के सांसें बहोत तेज़ चल रहे थे उस वक़्त और दोनों ‘सशह्ह्हह्ह” किये जा रहे थे हर एक हरकत के दौरान. ससुर ने फिर अपने एक हाथ से पूनम की लहंगे को ऊपर उठाते हुवे उसस्के जाँघों पर अपने हाथ सहलाते हुवे फेरा, और पूनम अंगराने लगी अपनी छाती को ससुर के छाती से रगड़ते हुवे… ससुर ने उस्सकी लहंगे को इतना उठाया के पूनम की पंतय साफ़ नज़र आरही thi….aur उस्सकी बड़े गोरी जांघें का किआ कहना, मुंह में पानी आजाते किसी का भी….. फिर ससुर ने पूनम का हाथ अपने हाथ में लेकर उस्सको अपने लुंड के तरफ बढ़ाया और बे झिझक पूनम ने ससुर के लम्बे मोठे तन्ने हुवे लुंड को अपने नाज़ुक, कोमल हाथों में लेलिया और मुठी भर कर उस्सको मसलने लगा जब के ऊपर उसस्के होंठ ससुर के गले पर फेर रहे थे…… दोनों तरप रहे थे और ससुर ने कहा, “निचे बैठ जा, बैठ जा नाह, मुंह में लेले इस्को प्लीज….” पूनम ख़ुशी ख़ुशी अपने पैरों पर निचे बैठी अपने ससुर का लुंड थामे हुवे और उस्सकी ेंखें जैसे शराब पी हुवी हो पूनम ने, एक नज़र उस नशीली निगाहों से ससुर के चेहरे में देखते हुवे सर ऊपर उठाकर पूनम ने अपने जीब हलके से ससुर के लुंड के ऊपरी हिस्से पर फेरा, फिर लुंड को देखा फिर ऊपर ससुर के ेंखों में देखते हुवे हलके से, आराम se,apne जीभ को लुंड के ऊपर गोआल गोआल घुमाया….. ससुर अपने पैरों के उंगलिओं पर खड़े हो गए और उसस्के पेयर एक्ससिटेशन से कम्प उठे अपनी बहु के उस नाज़ुक छुवन से….. पूनम ने एक शैतानी मुस्कराहट दिया ससुर को फिर लुंड को आधे अपनी मुंह में लिया….. ससुर के आवाज़ निकली, “आआह्ह्हह्ह्ह्ह स्स्स्सस्स्स्शशशशशशशश” और उस्सने पूनम का सर अपने दोनों हाथों में लिया और अपने कमर को हिलने लगा पूनम के मुंह में अपना लुंड ठुस्स्ते हुवे जैसे के वही उस्सकी छूट थी और लग रहा था के ससुर पूनम के मुंह में hi छोड़ रहा है……. पूनम ने मुंह को जितना हो सके उतना खोला, लुंड को अंदर लेने के लिए……. और एक हाथ से पूनम ने अपनी ब्लाउज खोल दिए और उस्सकी चूचियां ससुर के जाँघों से टकरा रहे थे उन् मूवमेंट्स के दौरान……..
ठीक उसी वक़्त सविता गेट खोलता है, गेट की खुलने से एक आवाज़ होती है जिस्सको सुनकर तेज़ी के साथ ससुर अपना लुंड पूनम के मुंह से खींच कर अपने पीठ करता है गेट के तरफ और पूनम भी पीठ करके वाशिंग स्टोन पर झुक जाती है मगर सविता ने सुब कुछ साफ़ देख लिया उन् के अलग होने से पहले hi…… सविता का दिल ज़ोरों से धड़का, और सोचने लगी ‘पूनम तो बैठ कर अपने ससुर का लुंड चूस रही थी?! मतलब वह देती है अपने ससुर को! ओह माय गॉड! मेरा ससुर भी कहीं…..???!!!
तो बे कॉन्टिनोएड……………….. (3500 वर्ड्स फ्रॉम बोथ उपदटेस)
उसस्के बाद तो ससुर बहु में ेंख मिचोली होने लगी घर के अंदर सासु जी के होते हुवे. दोनों तरफ अब आग बराबर की लगी हुवी थी, ससुर यह सोच कर के किश ऐडा से पूनम उसस्के पास आयी और उसस्के पानी को छाता, जिस ऐडा से उस्सने उस्का लुंड सहलाया, अगर सासु जी नहीं एते तो शायद पूनम लुंड को अपने मुंह में ले भी लेती….. गिरजानंद यह सब सोच सोच कर पागल होता जा रहा था. इतने दिनों के बाद जब वह रास्ते पर आयी भी तो कुछ ज़्यादा नहीं हो सका, ससुर दीवाना हो रहा था, कभी किचन में तो कभी लाउन्ज में फिर आँगन में तो कभी रास्ते पर घूम फिर रहा था. एकदम बेचैन था….. सोचने लगा किश नज़र से पूनम उस्सको मुठ मारते हुवे देख रही थी बिना झिझक, उस्सकी नज़रों में भी प्यास झलक रही थी, वह असल में तरप रही थी और उदास थी क्यूंकि ससुर उसस्के सामने मुठ मार रहा था और उस्सने कुछ नहीं किया उसस्के लिए हालां के वह कर सकती थी…..
ससुर सब याद कर करके बेचैनी की हालत में तरप रहा था. पूनम हर वक़्त सासु से नज़रें चुराते हुवे ससुर को देखा करती थी जब भी ससुर आस पास होते थे. दोनों जैसे दो गुनेहगार किसी जज के सामने बैठे हो, वैसे डाइनिंग टेबल पर बैठे खाना खाने के वक़्त जब सास ने खाना पड़ोस. वैसे पूनम भी पड़ोसती थी मगर उस वक़्त सास ने ज़िम्मा लिया था…. तो पूनम कभी ससुर के चेहरे को तो कभी सासु के चेहरे को देखती के कहीं वह नोटिस तो नहीं कर रही उन् दोनों के ेंख मिचोली को….. खाना कहते वक़्त पूनम के ेंखों के सामने वह दृष्ट आगया जब ससुर मुठ मार रहा था, उस्सने याद किया किश तरह से ससुर ने अपने मोठे तने हुवे लुंड को अपने हाथों में लिए उस्सको दिखा रहे थे… उस वक़्त तो पूनम इंकार कर रही थी मगर इस वक़्त वह सोच रही थी के उस्सको जल्दी से अंदर आकर उसस्के लुंड को थाम लेना चाहिए था और दोनों वहीँ लाउन्ज के सोफे पर लेथ जाते और खुद चुदाई होती…. यह सब सोचते सोचते पूनम गीली हो गयी…. और न जाने क्यों पूनम को लगा के उसस्के ससुर को पता चल गया के वह गीली हो गयी है और ससुर के ेंखों की गहराई में देखते हुवे एक अजीब सा प्यार और हवस भरी निगाह से उस्सने एक मुस्कराहट दिए अपने ससुर को.
ससुर भी उस वक़्त लुंड को सीधा कर रहा था टेबल के नीचे कभी पूनम को कभी अपने पत्नी को देखते हुवे. और पूनम ने नोटिस कर लिया के वह किआ कर रहे हैं तो एक नटखटी मुस्कान के साथ पूनम ने अपने पल्लू को सरकने दिया और अपने केहुनी मेज़ पर करके अपने गाल को हाथकली से लगाया इस तरह से के ब्लाउज के अंदर दिखे ससुर को….. पूनम सासु जी को भी देख रही थी रह रह कर के कहीं वह नोटिस ना करे….. अब सासु के मौजूदगी में यह हाल था सोचने की बात है अगली बार जब दोनों एक साथ होंगे तो किआ होगा….. आग बढ़ता चला जा रहा था दोनों के जिस्म और dil-o-dimaagh में, हवस की आग केहये या जिस्म की गर्मी मगर कुछ तो होने वाला था hi अब…. मगर कैसे और कहाँ…. समझ में नहीं ारः था के वह किआ करें…..
सविता ने कहा था के घाटे देर घंटे में वापस आजाएगी मगर 3 घंटे होने को थे और वह नहीं आयी थी अपने बचे को लेने. लंच के बाद सासु जी गए अपने कमरे में छोटा सा नींद मारने और पूनम ने बचे को भी सुला दिया फिर अपने उन् कपड़ों को लेकर बाहर स्टोन पर वाश करने के लिए गयी जो नाहा कर निकली थी. जाते वक़्त उस्सने ससुर को बाहर का इशारा किया उन् कपड़ों को दिखते हुवे. ससुर समझ गया के वह कपडे धोने जा रही है और उस्सको बाहर बुलाया उस्सने. ससुर ने भी इशारे से okay कहा, और पूनम बलखाती चलती गयी घर के बाहर, ससुर जल्दी से कॉरिडोर में निकली तो देखा किश ऐडा से चली जा रही थी पूनम कमर मटकते दरवाज़े के तरफ अपने हाथों में एक दो कपडे लिए… ससुर का खड़ा होगया पूनम की गांड को डोलते हुवे देख कर और सोचा के अब तो उस्सको छोड़ेगा वहीँ जहाँ कपडे धोती है चाहे खड़ा खड़ा की क्यों न चोदे मगर छोड़ेगा.
जब बाहर निकले ससुर जी तो पहले रास्ते पर ग़ौर से देखा, और जब कोई नहीं दिखा तो गया उस स्टोन वाश के करीब जहाँ ससुर ने पहली बार पूनम को चेर्रा था. अब वहां ससुर खड़ा होकर देखने की कोशिश कर रहा था के कहीं रास्ते पर आने जाने वाले लोग दीखते है या नहीं, तो नज़र आया के वहां लोग बाहर देख सकते हैं मगर बाहर से रास्ते पर से अगर कोई देखना चाहे तो किसी चीज़ पर चार कर तभी अंदर देख सकेंगे, और सिर्फ गेट के अंदर कोई दाखिल हुवा सिर्फ तब वाशिंग स्टोन नज़र अत है….. तो ससुर ने सोचा काम कर जाने का समाये आगया…..
पूनम ने मुड़कर मुस्कुराते हुवे ससुर को प्यार भरी नज़रों से देखा, और धीरे से कहा, “किआ देख रहे हो आप?” गिरजानंद ने जवाब दिया, “सोच रहा हूँ कहीं बाहर रास्ते पर से कोई हमको देख न लें!” तब पूनम ने कपड़ों को स्टोन पर रखते हुवे एक आशिकाना अंदाज़ में कहा, “मुझे तो कभी भी कोई नज़र नहीं अत जब यहाँ कपडे धोती हूँ जी, आप कद के थोड़ा ऊंचे हो इस लिए आप को बाहर दिख रहा है, फ़िक्र मत करो इस तरफ किसी को नहीं दिखेगा, आईये आप, मुझको अभी तक अफ़सोस हो रहा है के क्यों मैं ने आप को वह सब करने दिया जब मैं आप के लिए बहोत कुछ कर सकती thi…..ayiye अब….”
ठीक जहाँ पूनम झुक कर कपडे धोती थी उस पत्थर पर, उसस्के दाएं में घर का दीवार था, और ससुर ने पूनम के बाज़ू पाकर कर उस्सको खिंच कर उस दीवार से चिपकाया और भूके शेर की तरह पूनम के होंठों को चुस्सना शुरू कर दिया कुछ जंगली अंदाज़ में….. पूनम ने अपने बाँहों को अपने आप ससुर के कांधों पर कर दिया और अपने पतली पतली उँगलियों से ससुर के छाती के बालों पर फेरने लगी किश करते हुवे उस्सको. पूनम की साड़ी की पल्लू बिल्कुल निचे लटक गयी थी और गिरजानंद का हाथ उसस्के ब्लाउज के ऊपर से hi उस्सकी चूचियों को मसल रहे थे जब के पपूणम एक छोटी से सिसकारी में ‘ह्म्मम्म्म्म’ करते हीवे ससुर के जीभ को अपने मुंह में लिए चूसे जा रही थी अपने पुरे जिस्म को अपने ससुर के जिस्म से चिपकाये हुवे…..
दोनों के सांसें बहोत तेज़ चल रहे थे उस वक़्त और दोनों ‘सशह्ह्हह्ह” किये जा रहे थे हर एक हरकत के दौरान. ससुर ने फिर अपने एक हाथ से पूनम की लहंगे को ऊपर उठाते हुवे उसस्के जाँघों पर अपने हाथ सहलाते हुवे फेरा, और पूनम अंगराने लगी अपनी छाती को ससुर के छाती से रगड़ते हुवे… ससुर ने उस्सकी लहंगे को इतना उठाया के पूनम की पंतय साफ़ नज़र आरही thi….aur उस्सकी बड़े गोरी जांघें का किआ कहना, मुंह में पानी आजाते किसी का भी….. फिर ससुर ने पूनम का हाथ अपने हाथ में लेकर उस्सको अपने लुंड के तरफ बढ़ाया और बे झिझक पूनम ने ससुर के लम्बे मोठे तन्ने हुवे लुंड को अपने नाज़ुक, कोमल हाथों में लेलिया और मुठी भर कर उस्सको मसलने लगा जब के ऊपर उसस्के होंठ ससुर के गले पर फेर रहे थे…… दोनों तरप रहे थे और ससुर ने कहा, “निचे बैठ जा, बैठ जा नाह, मुंह में लेले इस्को प्लीज….” पूनम ख़ुशी ख़ुशी अपने पैरों पर निचे बैठी अपने ससुर का लुंड थामे हुवे और उस्सकी ेंखें जैसे शराब पी हुवी हो पूनम ने, एक नज़र उस नशीली निगाहों से ससुर के चेहरे में देखते हुवे सर ऊपर उठाकर पूनम ने अपने जीब हलके से ससुर के लुंड के ऊपरी हिस्से पर फेरा, फिर लुंड को देखा फिर ऊपर ससुर के ेंखों में देखते हुवे हलके से, आराम se,apne जीभ को लुंड के ऊपर गोआल गोआल घुमाया….. ससुर अपने पैरों के उंगलिओं पर खड़े हो गए और उसस्के पेयर एक्ससिटेशन से कम्प उठे अपनी बहु के उस नाज़ुक छुवन से….. पूनम ने एक शैतानी मुस्कराहट दिया ससुर को फिर लुंड को आधे अपनी मुंह में लिया….. ससुर के आवाज़ निकली, “आआह्ह्हह्ह्ह्ह स्स्स्सस्स्स्शशशशशशशश” और उस्सने पूनम का सर अपने दोनों हाथों में लिया और अपने कमर को हिलने लगा पूनम के मुंह में अपना लुंड ठुस्स्ते हुवे जैसे के वही उस्सकी छूट थी और लग रहा था के ससुर पूनम के मुंह में hi छोड़ रहा है……. पूनम ने मुंह को जितना हो सके उतना खोला, लुंड को अंदर लेने के लिए……. और एक हाथ से पूनम ने अपनी ब्लाउज खोल दिए और उस्सकी चूचियां ससुर के जाँघों से टकरा रहे थे उन् मूवमेंट्स के दौरान……..
ठीक उसी वक़्त सविता गेट खोलता है, गेट की खुलने से एक आवाज़ होती है जिस्सको सुनकर तेज़ी के साथ ससुर अपना लुंड पूनम के मुंह से खींच कर अपने पीठ करता है गेट के तरफ और पूनम भी पीठ करके वाशिंग स्टोन पर झुक जाती है मगर सविता ने सुब कुछ साफ़ देख लिया उन् के अलग होने से पहले hi…… सविता का दिल ज़ोरों से धड़का, और सोचने लगी ‘पूनम तो बैठ कर अपने ससुर का लुंड चूस रही थी?! मतलब वह देती है अपने ससुर को! ओह माय गॉड! मेरा ससुर भी कहीं…..???!!!
तो बे कॉन्टिनोएड……………….. (3500 वर्ड्स फ्रॉम बोथ उपदटेस)