Sarjoo ki Incest Story - A family Incest Saga - Page 4 - SexBaba
  • From this section you can read all the hindi sex stories in hindi font. These are collected from the various sources which make your cock rock hard in the night. All are having the collections of like maa beta, devar bhabhi, indian aunty, college girl. All these are the amazing chudai stories for you guys in these forum.

    If You are unable to access the site then try to access the site via VPN Try these are vpn App Click Here

Sarjoo ki Incest Story - A family Incest Saga

अपडेट 31

अब पायल जल्दी जल्दी शावर से निकली क्यों के सब के लिए उसी को चé सर्वे करनी थी और जीन लोगों को काम पर टिफ़िन लेजाना था वह पायल को hi तैयार करनी थी. हर रोज़ जिस बहु की टर्न होती है किचन में रहने को वही यह सब काम करते हैं … सो पायल की टर्न थी… अपने शावर के बाद उस्सने एक घागरा और चोली पहनी थी…. चोली काफी टाइट थी और छोटी भी थी, क्लीवेज ेंखों के सामने था और पतली मुलायम कमर भी…. गोरी तो वह थी hi, अब उस ड्रेस में तो जान लेवा नज़र अति थी ऊपर से उस्सकी हसीं मुस्कराहट, जवान उम्र, नटखट अदाएं शरारती ेंखें, लम्बे भीगे बाल जो उस्सकी कमर के निचे चुतरों पर टपकते पानी बालों में से, उस हिस्से को भीगा दिया था और वह चलती थी तो उन् नितम्बों के दोनों हिस्से ऊपर नीचे, दाएं बाएं इशारे करते चलते थे साथ साथ…. कौन मर्द होगा जो ऐसी एक हसीं, नाज़नीन को बिना लुल्ली खड़े किये देख सकता है… मेरा तो लिंग उस को सोचते hi पंत में से निकलना चाहता है यारो….. साला लुंड की नस तोड़ देने वाली चीज़ थी यह पायल!! हाय हाय!! मैं मार्जवं!! (अब मैं आगे कैसे लिखूं दोस्तों, मेरा खड़ा होता जा रहा है…. लगता है कुछ करना पड़ेगा इस्सके!! अबे ओह पायल ीदार तो ा zara….aye हाय हाय हाय…. श्श्श्स्स्सस्स्स्स )………………………………

तो बे कॉन्टिनोएड………..
 
अपडेट 32


खैर…. कैसे भी करके पायल ने घंटे भर में सब कुछ तैयार किया किचन में और उधर हर सुबह की तरह घर में हलचल मची थी एक बा एक करके सब जग रहे थे कोई टॉयलेट दौड़ रहा था तो कोई वाशरूम, तो और कोई बाथरूम के अवर…. कोई दांत मंजन कर रहा था तो कोई नाहा रहा था और कोई पूजा कर रहा था… बचे लोग जल्दी जल्दी स्कूल के बैग्स तैयार कर रहे थे और कोई अपना कपडा स्त्री कर रहा था…. बूढी दादी किसी एक बचे को तैयार करने में लगी थी, और दादा श्री अपना लुंड खुजाते पायल को याद कर रहा था और कल रात वाली episode को सोच कर मुस्कुरा रहा था…. अब उधर से धानंद और रमेश अब तक पायल की जिस्म को सोच रहे थे जिस पोज़ में कल रात को उन्हों ने उस्सको अपने पिता के साथ देखा था…..

पायल सब काम करते वक़्त सिर्फ उसी रात की ससुर के साथ की गयी कारनामे को सोच रही थी जब तक के उस ने रसोई में गुज़ारे…. हाँ शावर लेते वक़्त भी पायल अपनी जिस्म पर साबुन मलते वक़्त सिर्फ कल रात वाली लम्हों को सोच रही थी और ख़ुशी ख़ुशी मुस्कुरा रही थी….

रमेश ने एक अचछह मौका देख कर जल्दी, आहिस्ते से किचन में गया जब पायल पीठ किये कड़ी थी सिंक के paas…Ramesh ने पीछे से hi पायल को अपने दोनों बाँहों में ज़ोर से उठाया, यहाँ तक के पायल चॉहोंकते हुवे चीखी और रमेश ने अपना मुंह जल्दी से उस के मुंह पर रख कर उस्सकी आवाज़ को बाहर जाने से दबाया… अब जब पायल उसस्के बाहों में थी, उस वक़्त पायल के पीठ, रमेश की छाती पर और चुतरर रमेश के ठीक लुंड पर पड़ा था और रमेश उस मौके का फायदा उठाते हुवे अपना कमर हिल्ला रहा था इस तरह से के उस्का लुंड ठीक पायल के चुतरों के बीच ो बीच रगडग रहा था… पायल उस्सकी बाहों में छटपटा रही थी, मगर रमेश उस्सको नहीं चोर रहा था बिल्कुल और अपना जीब भी पायल के गले पर से उस्सकी मुहं पर फेर रहा था…..

तो बे कॉन्टिनोएड……
 
अपडेट 33

पायल किसी तरह बोल पायी, “अब बस भी करो, कोई आजायेगा! नीचे उतरो मुझे नहीं तो मैं चिलावूँगी अब!” रमेश ने कहा, “हाय मेरी जान कितना महक रही हो, किआ खुस्भू है, तुम को कच्चा चबाने को जी कर रहा है mera…abhi अभी नाहा कर निकली हो नाह!! हाय रे मेरी किस्मत! क्यों मुझे काम पर जाना है रे!! मेरा बस चलता तो तेरे साथ पूरा दिन गुज़ारता !! » पायल को हंसी आयी और फिर से कहा, « उतरो भी, किआ कर रहे ho…bachey ajayeinguey…Dhanand भाई के बचे एते जाते हैं यहाँ par…choro भी !! » रमेश ने कहा, « एक चाह सा किश दो जीब निकल कर तब चोरता hoon…chalo जीब निकालो, ज़रा रस निचोर्लुन उस में se…din भर स्वाद रहेगा मेरे मुंह में तेरा.. » पायल ने उल्टा मुहं बांध कर लिया. तो रमेश ने कहा, «चाह तो फिर ठीक है नहीं उतरूंगा, मेरा वो फील कर रही हो कितना जमके खड़ा हुवा है… बीच ो बीच रागढ रहा है, मज़ा ारः है नाह?» अस्सल में पायल सब फील कर रही थी, उस्सको पता था के उस्का लुंड उस्सकी चुतरर पर वह रागढ रहा है, और लुंड बिल्कुल खड़ा hai…Paayal को अछि तरह से मालूम tha…magar वह अनजान बन्न रही थी…. और रमेश तब तक पायल की गाल चूस रहा था, गले पर जीब फेरर रहा था तो अचानक पायल ने कहा, «यह किआ कर रहे हो, मेरा गाल क्यूंन चूसा ? वहां लाल मार्क हीआजाएगा और मुझको जवाब देना पड़ेगा… !! » तो रमेश ने कहा तो ठीक है अब जीब दो नहीं तो गाल ज़्यादा चूस कर लाल करदूंगा….. फिर रमेश ने पायल को निचे उतरा, उस्सको घुमा के अपने तरफ किया और उस्सकी छाती रमेश के छाती से टकराई और पायल ने अपना मुंह खोला, और अपनी जीब को रमेश के मुंह में पिघलने diya….Ramesh ने कसके चुस्सना शुरू किया और अपना हाथ पायल के गांड पर मसलता गया बिल्कुल जोश में और थोड़ी देर के लिए पायल भी जैसे खो सी गयी और रमेश की जीब को उस ने भी थोड़ा सा chussa….aur जब रमेश का हाथ पायल की बूब्स पर ए तब पायल ने ेंखें खोली , क्यों के किश करते वक़्त उस ने ेंख मुंध ली thi…aur तब रमेश को एक ढाका दिया और जाने को कहा…. रमेश मुस्कुराकर अपना मुंह पोंछते हुवे कहा, «वह !! किआ मस्त किश था छोटी bhabhi…aaj मेरा दिन मज़े में guzrega…magar यह तो कुछ भी नहीं है जी…. तुझको तो बहोत ज़्यादा मज़ा देना और लेना है mujhse….phir कभी सही पायल जान !!! अभी चलता हूँ मऊआआह ! » एक फ्लाइंग किश भेजा उस्सने पायल की अवर, और पायल हंसकर निचे ज़मीन पर देखने लगी……

तो बे कॉन्टिनोएड…………………………..
 
अपडेट 34

अब धानंद तो सुबह को कुछ नहीं कर पाया बस नज़रों का खेल चलता रहा उसस्के और पायल के बीच जब नाश्ते के लिए सुब फॅमिली मेंबर्स ेखता हुवे थे डाइनिंग रूम में. एक एक करके सब लोग जिनको काम पे या स्कूल जाना था चले गए एक्सेप्ट ससुर जो रिटायर्ड थे और बाकी के घर के महिलाएं. पायल को तो किचन में hi वापस जाना था और बाकी बहुएं और सासु माँ जी अपने अपने छोटे मोठे घर के काम में लग गए. पायल कुछ देर अपने कमरे मैं गयी साफ़ सफाई करने को और सरजू को नहलाने और दूध पिलाने को. उस के बाद धानंद की पत्नी सरजू को अपने साथ कमरे में लगाई.

ससुर जी आरहे थे सरजू को लेने मगर बड़ी बहु उस से पहले आगयी थी…. ससुर दरवाज़े पर खड़ा रहा और पायल को हवस भरी निगाह से देख रहा था. बड़ी बहु के जाने के बाद ससुर पायल के कमरे के अंदर घुसना चाहता था मगर पायल जल्दी से बाहर निकली और तेज़ क़दमों से रासिओई के अवर जाने लगी. जिस वक़्त वो अपने कमरे से निकली तो बूढ़ा ठीक दरवाज़े पर खड़ा था और जब पायल निकली तो ससुर ने अपना जिस्म पायल के गांड पर रगड़ा, मगर पायल सर झुकाये और नज़रें चुराते हुवे निकल गयी, हालां के उस ने बिल्कुल फील किया के ससुर का ऑर्गन उस से भरपूर राघड़ी……………………..

बूढ़े ने अपनी पेशानी पर हाथ फेरते हुवे एक ेंख से पायल की कमर और गांड पर नज़र फेरा जब वह तेज़ रफ़्तार से किचन के तरफ चल पड़ी…. ससुर ने सोचा, ‘किआ चाल है तेरी रे पायल, मुझ में जवानी भर देती है तू… काश तुम तब मिली होती जब मैं फुल जवान था, दिन भर छोड़ता तुझको और तुझको पानी पानी करदेता मैं…’ ससुर यह मैं hi मैं बड़बड़ाते हुवे आहिस्ते आहिस्ते रसोई की तरफ बहरता गया.

तो बे कॉन्टिनोएड………
 
अपडेट 35

रसोई में पायल को बहोत कुछ करनी थी. दिन भर के पकवान तैयार करनी थी, लंच भी रेडी करना था, रात के लिए भी पकाना था, साफ़ सफाई भी करनी थी, बर्तनों को मंझना था, वग़ैरा वग़ैरा….. ससुर जब रसोई के दरवाज़े पर पोंहचा तो घर में चरों तरफ नज़र फेरने के बाद, अपने कमरे के तरफ देखा कहीं उस्सकी पत्नी, यानि पायल की सासु माँ तो नहीं दिखाई देती…. जब कोई नज़र नहीं आया तो बूढ़े ने धीरे से रसोई में कदम रखा. पायल निचे बैठी हुवी कुछ चीज़ें एकता कर रही थी. उस ने तिरछी नज़र से ज़मीन पर देखते हुवे देख लिया के उस्का ससुर अंदर आरहा था….. कल रात की यादें भी ताज़ा थे दिमाग़ में और पायल का दिल ज़ोरों से धड़क भी रहा था, उस्सको गर्मी भी लग रही थी और मैं hi मैं कुछ घबराहट भी हो रही थी…… वह खुद सोच रही थी के कल रात उस ने क्यों बूढ़े को मन नहीं kiya…kyun वह सब होने दिया जो हुवा…. उस की जिस्म क्यों ससुर को समर्पण कर दिया कल रात को… खुद पायल यह सोच सोच कर हैरान हो रही थी….. और खुद को समझ hi नहीं पा रही थी …..

ससुर जी पायल के बिल्कुल पास ज़मीन पर बैठा और अपना हाथ पायल के काँधे पर रखते हुवे कहा, “जी नहीं भरा है अभी तक जान मेरी…” जैसे hi उस्का हाथ पायल ने अपने कंधे पर महसूस किया झट से कड़ी होगयी और रसोई के दरवाज़े के तरफ देखते हुवे कहा, “किआ हो गया आप को, कोई अंदर झांक सकता है या गुज़र सकता है उधर से! मुझको इस घर से निकलवाना है किआ?”

तो बे कॉन्टिनोएड…………
 
अपडेट 36



ससुर ने जवाब दिया, “मेरे होते हुवे कौन तुमको इस घर से निकाल सकता है भला मेरी रानी?” यह कहकर ससुर ने अपना हाथ पायल के गालों पर फेर्रा फिर पायल के गाल को अपने उँगलियों में चुटकी भर पाकर के खिंचा. पायल ने उफ़ की आवाज़ निकली और कहा, “चोरए दुखता है!” ससुर ने एक तरफ खड़े हो कर पायल को उस तरफ अन्य को इशारा किया. पायल ने कहा, “नहीं! नहीं ावुंगी!” जिस कोने में ससुर खड़ा था उस जगह से किसी को बाहर से नज़र नहीं अत है, और कोई दरवाज़े पर भी अजय तो कुछ नहीं दिखेगा क्यों के रसोई का डिज़ाइन hi कुछ ऐसा था जो एक ल शेप का था, और उस पर से रेफ्रीजिटर और दूसरे फर्नीचर्स भी थे जिस से कुछ नज़र नहीं अत, कोई रसोई में अंदर घुस कर फिर बाहर निकल भी जाये बग़ैर यह जाने के कोई अंदर है जब कोई उस हिस्से में होता हो तब. तो पायल ने वहां जाने से इंकार किया. ससुर ने कई बार बुलाया फिर भी पायल नहीं गयी और मुस्कुराती रही…. बूढ़े ने इशारे से अपने हाथ को अपने लुंड पर रखा, ज़िप के ऊपर hi और कहा, «हे रानी, इस का बुलावा है जी! » पायल ने एक नज़र जल्दी से देख कर एक तरफ देखने लगी. ससुर ने फिर कहा, “बाहर निकलूं इस्को, दीदार करेगी इस्सकी?” पायल ने बिना उसस्के तरफ देखे कहा, “नहीं देखना है मुझको” और होंठों को अपनी डेंटों में दबायी एक हलकी सी मुस्कान के साथ. तब ससुर ने कहा, “क्यों तारपा रही है अब जानेमन? कल रात को तो बड़ी चंचल थी…. » पायल ने कोई जवाब नहीं दिया और एक बर्तन को हाथ में लिए टटोल रही थी जैसे कुछ नर्वस हो.

तो बे कॉन्टिनोएड…..
 
अपडेट 37

तब ससुर पायल के पास गया और उस्सको बाँहों में उठा कर उस कोने में लगाया. पायल नहीं जाना चाहती थी और बूढ़े के बाहों में चटपटा रही थी उस के बाहों में से उतरने के लिए, मगर ससुर ज़्यादा मज़बूत था और उस कोने में लगाया पायल को और उस्सको चूमने लगा गालों पर फिर गले पर और धीरे धीरे अपना जीब पायल के क्लीवेज पर फेरने लगा…. तब पायल दोनों हाथों से उसस्के जाकर से निकलने की कोशिश कर रही थी और कहा, “नहीं चोरए मुझको पिताजी, कल रात जो हुवा ग़लत था, वह दुबारा नहीं होनी चाहिए!” ससुर जोश में था, उस्का लुंड पायल की निचे वाले हिस्से पर रागढ रहा था कमर को हिलाते हुवे और चूमता जा रहा था पायल की बातों को अनसुनी किये. पायल इंकार किये जा रही थी बूढ़े को पुश करते हुवे मगर बूढ़ा चोर्ने वाला नहीं था उस वक़्त. उस ने अपना एक हाथ पायल की चोली के निचे से अंदर घुसाया, पायल ने घागरा चोली जो पहनी हुवी थी, और पायल की बूब्स को मसलना शुरू किया एक हाँथ से और दूसरा हाथ पायल के कमर के तरफ से उस्सकी चुतरों पर मसल रहा था और उसी वक़्त उस्का लुंड जो पंत में अंदर था पायल की जाँघों के बीच रगड़े जा रहा था… पायल तमाम कोशिशों के बावजूद उसस्के बाहों से निकल नहीं प् रही थी….. बूढ़े ने धीरे धीरे अपना लुंड को पंत से बाहर निकला और पायल को दीवार से लगाकर दबाया और उस्सकी घागरे को ऊपर उठाया जाँघों तक और ठीक जब पायल की पंतय उतारना शुरू किया तो बड़ी बहु ने आवाज़ दी, “आरी ओह पायल देख तेरा सरजू ने हग दिया है आके साफ़ कर!!” झट से बड़ी बहु की आवाज़ सुनते hi ससुर ने पायल को छोरा और पायल जल्दी से उस्सकी चुंगल से छूट कर एक तरफ भागी और थोड़ी दूर जाकर बूढ़े को अपना ठेंगा दिखाया और हँसते हुवे रसोई से निकल गयी……

तो बे कॉन्टिनोएड……………..
 
अपडेट 38

ससुर जी बहोत निराश होकर अपने लुंड को वापस पंत में जल्दी से करके ज़िप बांध किया और कुछ फ्रिज में से लेने का बहाना किया. अब वह सोच रहा था किश तरह से पायल ने हँसते हुवे उस्सको ठेंगा दिखाई दूर हट kar…Paayal के इन्ही अदाओं ने दीवाना कर रखा था घर के मर्दों को…. उस में बचपना थी, सिर्फ 18 साल की तो थी hi वो मगर आदतें और अदाएं बच्चों जैसे थे… पर सभी मर्द उस्सकी अदाओं को मर्द को रिझाने वाले समझते थे और इसी कारण सब दीवाना होते जाते थे उसस्के

उस के बाद बूढ़े ने लाख कोशिश की मौके के लिए मगर एक भी मौका नहीं मिला उस्सको… पायल को पता था के हर वक़्त हु उस्सकी तलाश में रहता था और किसी न किसी बहाने उसस्के करीब आने की कोशिश करता रहता था मगर हर वक़्त कोई न कोई बीच में आ टपकता था. एक बार तो ऐसा हुवा के पायल खाना सर्वे कर रही थी दिन में, जब सभी घर के महिलाएं बैठे हुवे थे टेबल पर, और जब पायल ने ससुर को सर्वे किया तो बूढ़े ने पायल के गांड पर अपना पूरा हाथ फेरा और ऊँगली को कपडे के ऊपर से hi घुसने की कोशिश भी की, पायल उस वक़्त ज़्यादा कुछ तो नहीं कर सकती थी, क्यों के जब भी सारे लोग आस पास होते थे पायल किसी का शके नहीं जगाने की वजह से खामोश रहती थी, वैसे मौके पर घर के मर्द लोग फायदा उठाते थे पायल को छूने के लिए…. ओफ़्कौर्से दूसरों के नज़र से बचा कर बिल्कुल. इसी तरह उस रात को धानंद ने पायल की ड्रेस के निचे उस्सकी जांगनों पर हाँथ डाला था और खूब मज़ा लिया tha…Paayal राजें के मौजूदगी में भला कैसे शोर कर सकती थी या कोई भी मूवमेंट करती तो राजें को या लाउन्ज में बैठे किसी को भी शके हो सकता था इस वजह से पायल चुप रहती है जब भी वह लोग उस्सको सब लोगों के होते हुवे छूटे हैं तो…. पायल बिल्कुल किसी तरह के अनबन नहीं चाहती थी परिवार वालों के beech…magar इस बात से वह बिलककोल नादाँ थी के कभी किसी को पता भी चला ऐसे रिश्ते के बारे में तो किआ हो सकता है…… और कभी कभी तो दिल hi दी में उस्का मैं बहोत करता था के मर्दों को मज़ा करने dein…magar डर्टी भी थी और भोली भी थी वह!

अब हालां के उस्सने बूढ़े को कहा के जो कल रात को हुवा ठीक नहीं हुवा फिर भी जब तन्हाई में उस रात की एनकाउंटर को सोचती थी तो खुश होती थी और एक अजीब सी मज़ा अति थी उस्सको और वैसे मौके पर वह दोबारा वह करना चाहती थी, मगर जब बूढ़ा पास अत था तो भगति थी woh..ab वह खुद नहीं समझती थी के किआ चाहती है वह….

तो बे कॉन्टिनोएड………………..
 
अपडेट 39

शाम को धानंद और रमेश काम से वापस ए. राजें नोर्मल्ली देर से अत था. पायल किचन में बिजी थी डिनर तैयार करती हुवी. अब रमेश ने धानंद को कुछ भी नहीं बताया जो कुछ उस ने सुबह को पायल के साथ किया था. धानंद ने एक बार घर के अंदर एते hi रमेश से कहा, “पता नहीं कब मौका मिलेगा यार उस के साथ!” रमेश ने वही बात दोहराई उस से! अब दोनों भाइयों ने अपने आप में सोच लिया के एक दूसरे को बिल्कुल नहीं पता चलने देंगे अगर किसी एक ने पायल को पा भी लिया तो. दोनों मैं hi मैं एहि बात सोच रहे थे…

अब हुवा यूँ के रमेश एक शावर ले रहा था. बाथरूम घर के एक अलग हिस्से में था जो कुछ दूरी पर है और वहां से न किचन नज़र अत है ना hi लाउन्ज. बीच में एक कॉरिडोर है उस से गुज़र कर बाथरूम जाना पढता है. अब रमेश की पत्नी ने कुछ देर के बाद पायल को आवाज़ दी, “पायल ज़रा रमेश को यह टॉवल और कपडे देदेना प्लीज मैं सरजू को संभल रही हूँ!” पायल इंकार तो नहीं कर सकती थी, क्यों के कोई भी उस घर में किसी को कुछ भी दे सकता था किसी भी वक़्त. इंकार करने का मतलब ग़लत होता है उस घर में.

सो पायल गयी टॉवल और रमेश के कपडे लेकर बाथरूम के तरफ. दरवाज़ा बांध था लेकिन एक ओपनिंग था ऊपर के तरफ जहाँ से अंदर से हाथ निकलकर कोई कुछ भी ले या दे सकता था. और वहीं पर पास में एक वाश बेसिन भी था जहाँ हाथ मुहं धोया करते थे सब. सुबह को दन्त मंजन वहीँ होता है और शाम को खाना खाने के बाद वहीँ हाथ धोया जाता है. तो पायल ने बाहर से कहा, “जी आप का टॉवल लायी हूँ!” जब रमेश ने पायल की आवाज़ सुनी तो खुश होगया और जल्दी से दरवाज़ा खोला और पायल hi हथेली पाकर कर अंदर खिंच लिया….

तो बे कॉन्टिनोएड………….
 
अपडेट 40

अब यह बहोत अचानक हुवा के पायल संभाल नहीं पायी क्यों के उस ने बिल्कुल नहीं सोचा था के रमेश वैसा करेगा. रमेश बिल्कुल नंगा था अंदर, और पायल ने ेंखें बांध कर ली उस्सकी बाहों में छटपटाते हुवे यह कहते, “चोरो! चोरो मुझे! राजें की आने का वक़्त है वो अभी आ सकता है, चोरो भाई, यह मौका नहीं है!” रमेश ख़ुशी के मरे उछाल रहा था और अपना भीगा जिस्म पायल पर पूरा रगड़ते हुवे चुम रहा था और पायल की मुंह को अपने मुंह में लेने की कोशिश कर रहा tha…magar पायल डर भी रही थी और फिकरमंद थी के राजें आगया तो उस्सको किचन में ढूंढ़ने जाएगा.. मगर रमेश को जैसे एक खिलौना मिलगया हो खेलने को और बहोत ज़्यादा hi खुश था पायल को बाहों में लिए…. जब रमेश ने देखा के पायल ज़्यादा hi मचल रही है जाने को तो जल्दी से उस्सने पायल का हाथ अपने खड़े हुवे लुंड पर पहुँचाया और कहा, “चाह तो जल्दी से इस को पाकर और मुहं में लेके चूस जल्दी जल्दी फिर चली जाना,3,4 मिनट्स hi lagega…come ों जल्दी जल्दी करदे… फिर चली जाना….” पायल इंकार कर रही थी मगर उस का हाथ तब तक रमेश के लुंड पर जा चुकी थी और ना चाहते हुवे भी पायल ने उस्सको हाथ भर पकड़ा और मसलने लगी….

रमेश ने आवाज़ दी, “Aaahahahhhh…han han…eise hi, अब बैठ जा निचे बैठ जाओ न मुंह में lo…munh में लो जल्दी जल्दी…” पायल डर्टी हुवी के कोई न अजय या राजें hi न अजय इस लिए जल्दी से निचे बैठी और रमेश की लुंड को मुंह में लिया…. रमेश ने एक कसमसाती आवाज़ छोड़ी और ‘इससष’ कहा…. पायल ने उस्सकी लुंड को हाथ भर लिया और लुंड का ऊपर वाले हिस्से पर अपना जीब फेरा, छाता उस्सको फिर धीरे धीरे जीब को निचे फेरती गयी हाथ में लुंड को संभाले…. रमेश दीवाना हो रहा था…. तरप रहा था, कसके पायल की सर को दोनों हाथों में लिया और सर को हिलने लगा अपने तरफ फिर पीछे के तरफ ताके उस्का लुंड पायल के मुंह में एते जाते रहे…. अपने कमर को हिलता गया पायल के मुंह में लुंड डाले और पायल को अपना मुंह पूरा खोलना पड़ा इस लिए के लुंड ज़्यादा मोटा था….. यूँ समझये के रमेश पायल के मुंह में छोड़ रहा था….. काफी देर तक यूँ hi करता गया पर पायल ने कहा, “अब बस भी करो, मैं चलती हूँ अब….” कह कर कड़ी हुवी निकलने के लिए मगर रमेश ने उस्सको पीछे के तरफ से जकरा और जल्दी से उस्सकी घागरा को निचे से उठाया और बैठ गया पीछे से पायल की जाँघों को चाटने के लिए… पायल ने ेंखें बांध कर्ली और तड़पने लगी सिसकियों के साथ अपने जिस्म को मोड़ने lagi…Ramesh का मुंह जब पायल की पंतय तक पहुंचा तो उस ने पंतय को छठा और देखा के एक हिस्सा जहाँ पायल की छूट है वो कुछ भीगा हुवा hai…Ramesh ने उस हिस्से को छाता एयर अपनी ऊँगली दबाया वहां जिस से पायल की आवाज़ निकली, “उफ़! ोूउउउइइइइइ!! किआ कर रहे हो!! बस करो अब ोोोीी मेरी माँ!!!” फिर रमेश ने तेज़ी से पायल की पंतय को निचे किया घुटनों तक और खड़ा होगया पायल को दरवाज़े पर झुकाये औअर अपने लुंड को हाथ में लेकर पीछे hi से छूट में डाला जो भीग गयी थी जिस वजह से उस्का लुंड आसानी से भीतर घुस गया…. रमेश ने ख़ुशी से तरप की आवाज़ छोरा और इस करते अपना कमर हिलता गया और उस का लुंड पायल की छूट में अन्य जाने लगा जल्दी जल्दी…. पायल झुकी हुवी थी दरवाज़े के हैंडल को पकड़े और तरप रही थी और रमेश से तड़पते हुवे बीनते की, “हाँ हाँ!!! और जल्दी, ज़्यादा tez…achchah लग रहा है, डर भी लग रही है, जल्दी करो नाह रमेश भाई…. अहहहहहहहहहहाआआआ!!” रमेश तेज़ी के साथ छोड़ता गया छोड़ता गया और क्यों के उस का इंतज़ार बहोत दिनों से था पायल को छोड़ने को जल्दी hi वो झरने लगा और अपने लुंड को पायल के गांड के ऊपर झार दिया … अपने लुंड को उस ने हाथों में लिए एक हतोड़े की तरह पायल के गांड पर ठोका और आकृ पानी को झरते देखा पायल के गांड पर……

पायल सीधी हुवी और अपना पंतय झुक कर ऊपर किया और रमेश ने दरवाज़ा थोड़ा सा खोल के देखा के कोई भी नहीं है कॉरिडोर में तो पायल से कहा, “हाँ निकल सकती हो कोई नहीं है…”

तो बे कॉन्टिनोएड……………………
 
Back
Top