- Joined
- Dec 5, 2013
- Messages
- 141,137
अपडेट 11
उस घर के रूल्स कुछ ऐसा ाव्रतों ने बनाया था के हर एक दिन एक बहु किचन को ोकुप्य करें. तो एक दिन धानंद की वाइफ दिन भर किचन में, सब कुछ वही पकाती और परोसती पुरे परिवार को, दूसरे दिन रमेश की बीवी की बारी थी वह सब पकती और सर्वे करती सब को, तीसरे दिन पायल की बारी होती… जिस दिन जिस बहु की रसोई में रहने का टर्न होता उस दिन कोई भी दूसरी बहु या सास किचन में बिल्कुल कदम नहीं रखते! यह उन् लोगों का अपना बनाया हुवा रीत tha…aur सब फॉलो करते थे, बस सिर्फ सैटरडे और संदेस को घर की मालकिन याने सासु माँ किचन में रहती थी और उस्सकी बारी में कोई भी हेल्प कर सकती थी…
मगर रसोई के अंदर किसी भी मर्द को जाने का हक़ था, किसी भी मर्द को कोई रोक नहीं था. अगर कोई रिलेटिव्स या फ्रेंड्स ायें तो जिस बहु का रसोई में रहने का दिन है वही उस मेहमान को सर्वे करती, कोई और नहीं, वह मेहमान चाहे किसी बहु का hi क्यों न हो.
अब जिस दिन रसोई में नहीं रहना होता था तो फ्री बहुवें दिन भर या तो कुछ सिलाई करते, या दिन भर टीवी सेरिअल्स देखते या शॉपिंग वग़ैरा को जाते…. मगर जीन दिनों पायल फ्री होती थी वह तो अपना वक़्त अपने सरजू के साथ बिताती क्यों के हु सिर्फ दो साल का था तब….
धानंद मौके के तलाश में उस दिन का इंतज़ार करता जब उस्सकी पत्नी किचन में होती, वह भी पीक टाइम पर जब पकाना होता था तब धानंद पायल के कमरे में टाक झांक किया करता था…. और मौका पाते hi अंदर घुस जाता था पकड़ा पकरि के लिए…. कभी कभी तो पायल हँसते हुवे कमरे से बाहर दौड़ती चली जाती थी…..
और एक दिन पायल इस बात से बहोत हैरान हो गयी जब दूसरे भाई रमेश ने पायल से एक ेंख मारा! उस दिन पायल को रमेश के कमरे में सरजू को लेने जाना पड़ा था. सरजू कुछ नटखट कर रहा था वापस अपनी माँ के पास जाने को, तो रमेश ने पायल को कहा के वह खुद आकर सरजू को लेजाएं…. जब पायल कमरे में गयी तो रमेश बिस्तर पर बनयान में लेता हुवा था और सरजू उसी बिस्तर पर खेल रहा था अपने चाचा के पास. रमेश की बीवी उस दिन किचन में थी. तो धानंद की बीवी तो उस के साथ अपने कमरे में था तो धानंद को कोई मौका नहीं मिला था पायल के करीब जाने का, इस लिए पायल ने उस को नहीं देखा….
जब पायल रमेश के बिस्तर पर से सरजू को लेने के लिए झुकी तो उस्सकी ब्लाउज में से बूब्स बाहर जैसे निकलना चाहते थे और रमेश की नज़र उस पर पारी.. उस वक़्त पायल को एहसास हुवा के रमेश उस्सको देख रहा है, तो पायल ने नज़र उठाकर उस्सको देखा तब रमेश ने एक ेंख मारा पायल को एक नटखटी स्माइल के साथ…. पायल हमेशा की तरह मुस्कुरायी और सरजू को लेकर जाने लगी तो रमेश के कहा, “अति सुन्दर नारी!!” पायल का दिल ज़ोरों से द्वारका और तेज़ी के साथ वह वापस चली गयी अपने कमरे में सरजू को लिए….
अब पायल सोच में पर गयी मैं hi मैं सोचने लगी ‘किआ हो रहा है इस घर के मर्दों को भला!! क्यों सब मुझको चेर रहे हैं!!” यह सोच कर वह खुद मुस्काई और अपने आप को आईने में देखने लगी और खुद अपने जिस्म को निहारने लगी…..
तो बे कॉन्टिनोएड……….
उस घर के रूल्स कुछ ऐसा ाव्रतों ने बनाया था के हर एक दिन एक बहु किचन को ोकुप्य करें. तो एक दिन धानंद की वाइफ दिन भर किचन में, सब कुछ वही पकाती और परोसती पुरे परिवार को, दूसरे दिन रमेश की बीवी की बारी थी वह सब पकती और सर्वे करती सब को, तीसरे दिन पायल की बारी होती… जिस दिन जिस बहु की रसोई में रहने का टर्न होता उस दिन कोई भी दूसरी बहु या सास किचन में बिल्कुल कदम नहीं रखते! यह उन् लोगों का अपना बनाया हुवा रीत tha…aur सब फॉलो करते थे, बस सिर्फ सैटरडे और संदेस को घर की मालकिन याने सासु माँ किचन में रहती थी और उस्सकी बारी में कोई भी हेल्प कर सकती थी…
मगर रसोई के अंदर किसी भी मर्द को जाने का हक़ था, किसी भी मर्द को कोई रोक नहीं था. अगर कोई रिलेटिव्स या फ्रेंड्स ायें तो जिस बहु का रसोई में रहने का दिन है वही उस मेहमान को सर्वे करती, कोई और नहीं, वह मेहमान चाहे किसी बहु का hi क्यों न हो.
अब जिस दिन रसोई में नहीं रहना होता था तो फ्री बहुवें दिन भर या तो कुछ सिलाई करते, या दिन भर टीवी सेरिअल्स देखते या शॉपिंग वग़ैरा को जाते…. मगर जीन दिनों पायल फ्री होती थी वह तो अपना वक़्त अपने सरजू के साथ बिताती क्यों के हु सिर्फ दो साल का था तब….
धानंद मौके के तलाश में उस दिन का इंतज़ार करता जब उस्सकी पत्नी किचन में होती, वह भी पीक टाइम पर जब पकाना होता था तब धानंद पायल के कमरे में टाक झांक किया करता था…. और मौका पाते hi अंदर घुस जाता था पकड़ा पकरि के लिए…. कभी कभी तो पायल हँसते हुवे कमरे से बाहर दौड़ती चली जाती थी…..
और एक दिन पायल इस बात से बहोत हैरान हो गयी जब दूसरे भाई रमेश ने पायल से एक ेंख मारा! उस दिन पायल को रमेश के कमरे में सरजू को लेने जाना पड़ा था. सरजू कुछ नटखट कर रहा था वापस अपनी माँ के पास जाने को, तो रमेश ने पायल को कहा के वह खुद आकर सरजू को लेजाएं…. जब पायल कमरे में गयी तो रमेश बिस्तर पर बनयान में लेता हुवा था और सरजू उसी बिस्तर पर खेल रहा था अपने चाचा के पास. रमेश की बीवी उस दिन किचन में थी. तो धानंद की बीवी तो उस के साथ अपने कमरे में था तो धानंद को कोई मौका नहीं मिला था पायल के करीब जाने का, इस लिए पायल ने उस को नहीं देखा….
जब पायल रमेश के बिस्तर पर से सरजू को लेने के लिए झुकी तो उस्सकी ब्लाउज में से बूब्स बाहर जैसे निकलना चाहते थे और रमेश की नज़र उस पर पारी.. उस वक़्त पायल को एहसास हुवा के रमेश उस्सको देख रहा है, तो पायल ने नज़र उठाकर उस्सको देखा तब रमेश ने एक ेंख मारा पायल को एक नटखटी स्माइल के साथ…. पायल हमेशा की तरह मुस्कुरायी और सरजू को लेकर जाने लगी तो रमेश के कहा, “अति सुन्दर नारी!!” पायल का दिल ज़ोरों से द्वारका और तेज़ी के साथ वह वापस चली गयी अपने कमरे में सरजू को लिए….
अब पायल सोच में पर गयी मैं hi मैं सोचने लगी ‘किआ हो रहा है इस घर के मर्दों को भला!! क्यों सब मुझको चेर रहे हैं!!” यह सोच कर वह खुद मुस्काई और अपने आप को आईने में देखने लगी और खुद अपने जिस्म को निहारने लगी…..
तो बे कॉन्टिनोएड……….