Sarjoo ki Incest Story - A family Incest Saga - SexBaba
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Sarjoo ki Incest Story - A family Incest Saga

hotaks

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सरजू की इन्सेस्ट स्टोरी

सरजू की माँ की शादी **** साल की उम्र में होगयी थी. वह इस लिए के सरजू का बाप ने उस्सकी माँ से सेक्सुअल रिलेशन्स कर लिया था उसी उम्र में. परिवार वालों ने जल्दी से उन् दोनों की शादी करवादी.

वह लोग एक जॉइंट फॅमिली में रहते थे. सरजू के दादा, दादी, दो चाचा और दो चाचियां थे उसी घर में. दोनों चाचा के छोटे छोटे बचे थे.

सरजू की माँ बहोत hi खूब सूरत थी. एक दम हीरोइन के माफिक. बहोत गोरा रंग, घने लम्बे बाल, बदन तो बिल्कुल तराशा हुवा......

शादी के ठीक 9 महीने बाद सरजू का जनम हुवा...... धीरे धीरे सरजू बड़ा हनी लगा और परिवार का चाहता बचा बन गया इस लिए के सब से छोटा था. दूसरे चाचा के बचे सरजू को हमेशा अपने पास रखा करते थे. कहीं भी खेलने जाते तो सरजू को साथ लेजाते.

सरजू जब 6 साल का हुवा तो सरजू के पापा का सीरियस एक्सीडेंट हो गया हाईवे पर जब वह मोटरसाइकिल पर काम से वापस आरहे थे......

एक्सीडेंट के बाद वह इनवैलिड होगया और व्हील चेयर पर रहना पारा उस्सको ज़िन्दगी भर के लिए......

तो सरजू का पोसन पालन दादा दादी और चाचाओं ने करना चालू रखा......

तो बे कॉन्टिनोएड................
 
अपडेट 2 & 3

एक दिन सरजू जब स्कूल से वापस घर आया तो उस्का एक बड़ा चाचा उस के माँ के कमरे से निकल रहा था. सरजू ने माँ से पुछा के चाचा किश लिए आया था तो माँ ने जवाब दिया के 'तेरे पापा को देखने ए थे.' तो सरजू ने पुछा के पापा किधर है? तो मम्मी ने कहा के उस्सको दूसरे चाचा हॉस्पिटल लगाए हैं थेरेपी के लिए.

सरजू खामोश होगया. मगर वह सोचता रहा के माँ तो अकेली थी तो चाचा कभी भी नहीं अत वैसे, तो आज क्यों आया था.....

शाम को जब उस्का पापा वापस आया तो सरजू बातों बातों में पापा से कहने hi वाला था के के श्याम चाचा आया था उस्सको देखने लेकिन माँ ने सरजू के मुंह पर अपना हाथ रख कर बांध कर दिया और बात को बदल दिया और सरजू बाद में भूल गया उस बात को.......

सरजू की माँ का नाम था, पायल. बाप का नाम था राजें.

इन् दोनों की प्रेम कहानी बचपन में hi शुरू हुवी थी और पायल एक दम हॉट थी के राजें ने शादी से पहले hi काम तमाम कर डाला....

मगर अब राजें के इस एक्सीडेंट के बाद तो राजें कुछ भी नहीं कर प् रहा था, उस का उठ hi नहीं रहा था एक्सीडेंट की वजह से और स्पाइनल ब्लीडिंग भी होता था तो नर्वस प्रोबलम भी थे और सर के हर नर्व से जुड़े नसें ठीक से काम नहीं करता था तो सेक्स करना नामुमकिन हो गया था..

अब पायल तो सिर्फ 22 इयर्स की थी. तो कैसे भला हॉट होते हुवे वह सेक्स के बिना रहती?? कुछ न कुछ तो होना hi tha...so हुवा.....

एक दिन और सरजू स्कूल से वापस आया तो इस बार दूसरा चाचा उस के माँ के कमरे से निकल रहा tha..Sarjoo खड़ा होकर हैरानी से देखता raha...jaldi से अंदर गया देखने के पापा किधर है तो पता चला के पापा को उस्का दादा हॉस्पिटल लगाया है थेरेपी के लिए.....

सरजू अपना दिमाग़ को गरम करने लगा..... वह अब काफी कुछ समझता भी था..... जब तक उस का पापा ठीक था और रात को जब उस्सकी माँ से वह सेक्स करता था तो सरजू को पता होता tha...woh नींद में हनी का बहाना करता था मगर चुप चुप कर देखा करता था छोटा hi से.....

तो बे कॉन्टिनोएड.............
 
अपडेट 4

तब से सरजू स्पाई करने लगा अपनी माँ को के कहीं दोनों चाचा उस्सकी माँ के साथ कुछ करते तो नहीं…. पर वह तो स्कूल में होता था जब भी उस्का पापा को हॉस्पिटल लेजाया जाता था तो वह कैसे मालूम करता के कहीं कुछ है तो नहीं उस के खूबसूरत, जवान मम्मी के साथ चाचाओं से? अब स्कूल में वह अपनी माँ के बारे में सोचता रहता दिन भर के कहीं चाचा मम्मी के पास तो नहीं आया हो…..

काम उम्र से hi सरजू एक्ससिटेड होता था और उस का मैं वैसे ख्यालों के और जाता था अक्सर…. बचपन से उस्सने मम्मी पापा को सेक्स करते जो देखा था और एन्जॉय करता था हर उन् दोनों के हरकतों को देख देख कर…..

मगर जब से उस का पापा ने एक्सीडेंट किया तब से उस्सको कुछ देखने को नहीं मिलता था और वह वैसे रिलेशन्स को मिस करता था….
 
अपडेट 5

कई बार ऐसा हुवा, किसी न किसी तरह सरजू ने उंक्लेस को मम्मी के करीब देखा या, दूर से इशारे से बातें करते देखा या किसी न किसी तरह सरजू को कुछ न कुछ दिखाई दिया जिस से वह समझता था के उस के मम्मी चाचाओं के साथ एन्जॉय करती होगी उस के ग़ैर हाज़िरी में…. मगर एक दिन तो हद hi होगयी….

सैटरडे का दिन था और स्कूल तो नहीं जाना था सरजू को, तो वह आग्नेय में खेल रहा था अपने कौसिन्स लोगून के साथ. काफी गर्मी था, और बचे जब कूदते हैं तो कितना पसीना होते हैं और कितना प्यास लगता है उन् को सब को पता है, तो सरजू को प्यास लगा और घर में दौड़ते गया एक गिलास पानी के लिए…..

रसोई के और बढ़ा वह तो उस्सको किचन में दाखिल हनी से पहले कुछ फुस्स फुस्स की आवाज़ें सुनाई di…to वह अपना कदम को थाम लिया और बहोत धीरे धीरे चलने लगा और किचन के और चलता गया यहाँ तक के वह किचन के द्वार पर पोंहचा

वहां पोहोचते hi वह चाहोंक गया यह देख कर के उस का दादा ने उस्सकी मम्मी को बाहों में लिया था और किश कर रहा था, और मम्मी की बाहें दादा के कांधों पर थे और मम्मी की कमर पर से साडी सर्कि हुवी थी और पल्लू भी नीचे ज़मीन पर थे और दादा अपना नीचे वाला हिस्सा कपडे समेत उस्सकी मम्मी की जिस्म पर रागढ रहा था…….

………………………………………..
 
अपडेट 6.

सरजू दो कदम पीछे हाथ गया और दरवाज़े के पीछे खड़े होकर चुपके से देखने लगा. दिन में उस ने कभी अपनी माँ को किसी के साथ नहीं देखा था, वह तो सिर्फ रातों के सोते वक़्त मम्मी पापा को इश्क करते वक़्त देखा करता था मगर दिन में देखने का मज़ा कुछ और hi लग रहा था उस्सको….

वह इधर उधर भी देख रहा था के कोई और न उस्सको देख ले, क्यों के किसी भी चची का आना मुमकिन था या कोई दूसरा बचा भी आसक्त था… इस लिए सरजू का दिल ज़ोरों से धारक रहा था ऊपर से उस्सको प्यास भी लगी थी…. मगर प्यास बुझाने से ज़्यादा उस्सको देखना पसंद था… उस को ऐसा महसूस हो रहा था जैसे हु कोई चोरी कर रहा हो और चोरों की तरह पकड़ा न जाये इस्सके डर था उस्सको…

अंदर रसोई में उस्का दादा उस्सकी माँ को जाकर जा रहा था और निचे वाला हिस्सा रगड़ता जा रहा था और सरजू की माँ जैसे नशे में हो, खुद वह भी अपनी जिस्म को अपने ससुर की जिस्म पर राघरी जा रही थी….. उस ने अपना जीब सरजू के दादा के गले पर फेरा और वहां दन्त भी दबायी, फिर दादा जी ने सरजू की माँ की चूचियों पर अपना मुंह फेरा हालां के वह ब्लाउज के अंदर थे मगर जो हिस्सा सामने था उस्सको नहीं छोरा दादा जी ने….. सरजू चौथा था फिर भी एक्साइट हो रहा था और महसूस किया के उस्का छोटा सा लुल्ली खरा हो रहा है……

बस इतने में दूसरे कौसिन्स धारपडते घर में ग़ुस्से शोर करते हुवे तब अचानक दादा ने उस्सकी माँ को छोरा और सरजू बहाना करते हुवे अंदर गया पानी मांगने…..

तो बे कॉन्टिनोएड…………….
 
अपडेट 7

दिन बीतते गए, सरजू बड़ा होता गया और बहोत कुछ देखता गया अपनी माँ को लेकर. दोनों बड़े चाचा और दादा भी उस्सकी माँ को मौका मिलने पर छोड़ते थे और पायल ख़ुशी ख़ुशी चुदवाती थी. अब चुदवाती क्यों नहीं जब के उस का पति तो व्हील चेयर पे पड़ा हुवा था. जब भी सरजू का बाप हॉस्पिटल थेरेपी के लिए जाया करता था कोई न कोई उस के कमरे में बिस्तर पर अत था. कई बार सरजू ने पूरा के पूरा सेक्स होते हुवे देखा मगर छुप छुप कर.

अब पायल तो बहोत जवान थी, ** साल की उम्र में शादी हो गयी थी, 22 साल की उम्र में हस्बैंड ाबाहिज होगया तो ऐसी जवानी में कौन जिस्म की आग को संभाल सकता है भला ख़ास कर जब वह हॉट हो!!....

अब सरजू के दो चाचाओं के नाम थे: धानंद और रमेश. धानंद बड़ा था, रमेश दूसरा, और आखरी था पायल का पति राजें. धानंद पैंतालीस (45) साल का था, रमेश 40 का और राजें ने जब पायल का काम तमान किया था शादी से पहले तो हु 20 साल का था. अब 26 साल की उम्र में वो तो ाबाहिझ हो गया बेचारा, इस में उस्का तो कोई कुसूर नहीं लेकिन इस कहानी में देखेंगे के कैसे हालात इंसान से किआ किआ करवाता है और वासना की भूक इंसान को किआ किआ करने पर कभी मजबूर करदेता है.

तो किआ राजें के ाबाहिज हनी के बाद hi इन् तीनों ने उस के साथ यह रिश्ता शुरू किया या पहले से hi कुछ था? कैसे यह सब शुरू हुवा? और किआ सरजू को यह पता था के पहले से कुछ था या उस के पिता के ाबाहिज होने के बाद ये सब शुरू हुवा? चलो देखते हैं कब कैसे यह शुरू हुवा था, एक लम्बी कहानी है यह भी…..
 
अपडेट 8
दोस्तों… वक़्त बीतता गया, दिन, हफ्ते, महीने साल गुज़रते गए और सरजू 18 साल का का हुवा…. अपनी मम्मी से ख़ास लगाव था उस्सको और पायल का एक लौटा ठहरा तो वह भी उस के बग़ैर नहीं रहती थी बिल्कुल…..

सरजू अपना बचपन नहीं भूला था बिल्कुल, सब उसस्के दिमाग़ में ताज़ा था और एक मूवी की फ़्लैश बैक की तरह वह किसी वक़्त भी सब दुबारा देख सकता था…. उस के पापा का एक्सीडेंट होने से लेकर उस्सकी 18 साल होने तक बहोत कुछ देखा सरजू ने अपनी माँ को lekar…bahot कुछ समझा वह और उस्सकी छह अपनी माँ के लिए बहरता hi गया…

जब हु ** साल का था तब राजें की देहांत हो गयी उसी स्पाइनल कॉर्ड की डैमेज की वजह से….. दादा और दोनों चाचाओं ने सरजू को संभाला और उस्सकी माँ तो थी hi साथ उसस्के….

सरजू बिस्तर पर लेते एक दिन की बात सोच रहा था जब उस का पापा यहीं था… हुवा यह था:……

एक दिन हॉस्पिटल से एक चाचा राजें को वापस लेकर आया तो सरजू के दादा और दूसरे चाचा से बातें कर रहे थे के डॉक्टर ने कहा है के राजें को कोई 7/10 महीनों तक एडमिट करना पड़ेगा उस्सको रेहाबिलिटटे करने के लिए…. उस वक़्त दादा और दूसरे चाचा के चेहरे पर जो ख़ुशी सरजू ने देखा था वह याद कर रहा था….. तो क्यों वह लोग खुश हुवे थे सरजू को उसी वक़्त पता चल गया था, और वह इस लिए था के उतने महिनों तक पायल उन् लोगों के लिए फ्री होगी मज़ा करने के लिए….. उस वक़्त सरजू सोच रहा था के काश उस वक़्त वह बड़ा होता!!.....

अब अगर मैं ने सरजू की ज़ुबानी सब फ़्लैश बैक्स यहाँ केहेलवाया तो इस को भी ुन्देरगे कंटेंट मन जाएगा… तो एक चेंज के लिए मैं hi रेलाते करता हूँ के किआ किआ हुवा था सरजू के 18 साल हनी से पहले…..

तो बे कॉन्टिनोएड……………..
 
अपडेट 9

हाँ तो हुवा कुछ ऐसे था जब सरजू छोटा बच्चा था. तब तो सरजू को hi पता नहीं था के उस्सकी माँ के साथ कौन कौन किआ करता है….. तो शुरू से देखते हैं के पायल कैसे इन् रिश्तों में कैसे उलझी और आज जब सरजू 18 साल का होगया है तो अब किआ रिश्ता बने जाएगा पायल की ज़िन्दगी में. कहानी एहि है. तो फिर चलते हैं उन् दिनों के और जहाँ पायल पहली बार इन् तीन मर्दों में से किसी एक के साथ कैसे फँसी थी……

सरजू तक़रीबन 2 साल का था और पायल तब 18 की थी. जैसे के शुरू में मैं ने बताया के परिवार का सब से छोटा बच्चा हनी के कारण सरजू सब का चाहता था. परिवार का हर एक सदस्य सरजू को लेने के लिए मचलता था. वह दादा हो या दादी, चाचा हो या चची, या तो फिर कौसिन्स भी, हर कोई सरजू को अपने कमरे में लेजाने को बेताब रहते थे. तो इसी तरह सरजू का बड़ा चाचा, धानंद एक दिन सरजू को पायल के हाटों से लेते वक़्त अपना हाथ पायल की ब्रेअस्ट्स पर फेरता हुवा महसूस किया… यह जान बुझ कर नहीं किया था बस एक्सिडेंटली हो गया था…. वह 45 साल का था और पायल 18 की. जब यह इंसिडेंट हुवा तो धानंद ने तुरंत पायल के ेंखों में देखा के कहीं वह ग़लत न समझे तो उस ने नोट किया के पायल उस वक़्त एक तरफ देख रही थी और मुस्कुरा रही थी. तब तक सरजू धानंद के बाहों में जा चुक्का था, मगर धानंद की नज़र तब भी पायल पर hi tha…aur यह वह वक़्त था जिस दिन पहली बार धानंद ने पायल को वासना भरी नज़रों से देखा था… उस ने पायल की छाती पर नज़र जारी रखा, पायल की कमर को देखा, उस्सकी जंग पर नज़र दौड़ाया, हालां के वह एक स्कर्ट और ब्लाउज में थी, उस का बदन खूब उस ड्रेस मैं निखार रही थी…. धानंद ने उस वक़्त सोचा के ‘यह पायल ने राजें से सेक्स करवा ली थी शादी से पहले, तो बहोत hi गरम और नमकीन होगी यह… देखने में तो किआ हॉट दिखती है और कितना जवान और खूब सूरत है!!’

पायल ने अछि तरह से धानंद की हाथ को अपनी बूब्स पर फील किया था और वो यह समझ रही थी के उस ने जान बूझकर किया था…. कुछ शर्मा गयी थी इस लिए मुस्कुरा रही थी एक तरफ देखते हुवे….. तो उस दिन धानंद जल्दी hi सरजू को वापस लौटने को आया… उस ने सोच लिया था के जब पायल सरजू को अपनी हाटों में लेगी तो धानंद फिर से अपना हाथ कुछ ज़्यादा ज़ोर से उस्सकी ब्रैस्ट पर दबाएगा और उस्सकी रिएक्शंस देखेगा….

वही किया उस ने…. पायल ने जब हाथ फैलाई सरजू को लेने के लिए, धानंद ने अपने हाटों को बिल्कुल पायल के छाती पर दबा दिया और खूब उस्सकी ब्रेअस्ट्स को फील किया, नरम नरम, मुलायन जवान बूब्स को फील करते धानंद का लुंड खड़ा होगया, जब उस ने देखा के पायल फिर मुस्कुरा रही है अपनी होंठों को डेंटों से दबाये हुवे….. फिर पायल ने एक ेंख की झलक से धानंद के चेहरे पर देखा और जल्दी से सरजू को लेकर अपनी कमरे में चली गयी….

तो बे कॉन्टिनोएड……………………
 
अपडेट 10

उस दिन के बाद धानंद इंतज़ार में रहता के कब उस्सको मौका मिले सरजू को पायल के बाहों से लेने को. पायल कभी कभी जान बुझ कर सरजू को कहीं रख देता, बीएड पर या सोफे पर और धानंद को वहीँ से सरजू को उठाना परता, जब पायल वैसा करती तो मुड़कर मुस्कुराती हुवी धानंद को देखती और खुश होती के धानंद को मौका नहीं दिया, पर वो हंसती थी उस को देख कर इस वजह से के उस ने धानंद को डिसअपोइंट करने में कामयाब हुवी….

पायल के दो अदाएं बहोत जान लेवा the…usski मुस्कराहट और उस्सकी नज़र. और जब वो ज़ोर से हंसती थी तब भी एक दम जैसे फूल जहर रहे हों… कोई भी मर्द उस्सकी स्माइल पर जान दे सकता tha….upar से वो थी इतनी खूब सूरत के किसी का दिल भी उस पर आसक्त था….. वो बहोत अछि तरह से ड्रेस होती थी हमेसाह, या तो तवो पीेछे में, ब्लाउज और स्कर्ट, या तो एक टॉप और जीन में रहती थी हमेशा… बहोत कम वो साडी पहना करती थी, जब किसी शादी या पूजा वग़ैरा में जाना हो तब साडी पहनती थी…. वैसे घागरा चोली भी अक्सर पहना करती थी घर में…… उस्सकी कमर अक्सर दिखती थी, और छाती की ऊपर वाला हिस्सा तो हमेशा hi दीखता था…. पायल ने खुद कभी नहीं सोचा था के कोई ग़ैर मर्द उस्सको उस नज़र से देखेगा कभी… वह तो राजें के प्यार से खुश थी मगर, आहिस्ते आहिस्ते दो साल के शादी के बाद, घर में सरजू के पोसन पालन में वह अपना ध्यान ज़्यादा सरजू को देती थी……

राजें बहोत बिजी था अपने काम में सिर्फ रात को हमबिस्तर होता था पायल के साथ वह भी धीरे धीरे हफ्ते में 7 बार से 5 बार हुवा फिर दो साल के बाद हफ्ते में एक या दो बार सिर्फ सेक्स करते थे दोनों…. अब पायल तो सिर्फ 18 साल की थी और अब वो ज़्यादा सेक्स के बारे में ओपन माइंडेड हुवी thi…tab hi राजें उस से कम एनकाउंटर्स करता था……

तो धानंद उस्का दीवाना होता जाता था और वह सिर्फ मौके के तलाश में रहता के कब थोड़ा सा पायल को चुवा छवि कर sake…Dhanand को पता नहीं था के वह कामयाब भी होगा या नहीं , उसस्के दिल में एक डर भी था के कहीं पायल ने शोर मच्यो, या घर में किसी से भी कुछ कहा तो वह मुहं दिखने के काबिल नहीं रहेगा… तो वह तरय करता था उस्सको चुकार के अगर पायल चुने से हंसती hi रही तो वह आगे भी कुछ कर सके… धानंद ने तक़रीबन एक महीने तक सिर्फ चुने से काम चलाया…. वह भी कभी कभी पायल उस मौके को मिस करवाडेटा था…… मगर जब भी वह धानंद को वैसा मौका मिस करवाती तो दूर कड़ी होकर धानंद को देखती और मुस्कुराती……

एक दिन धानंद ने सरजू को बिस्तर से उठाते वक़्त पायल को अपना जीब से चिढ़ाया… जीब को हिलाते हुवे उस्सको मोचक किया तो पायल ने वापस अपना जीब निकल कर धनद को भी वैसे hi चिढ़ाया….. जीब निकलने का मतलब सेक्स से रिलेटेड होता है और धानंद ने पहले से सोच लिया था के अगर उस ने भी जीब निकली मतलब के वो भी चाहती है के धानंद उस के ज़्यादा करीब ए……

तो बे कॉन्टिनोएड............
 
थैंक्स फॉर विजिटिंग थे थ्रेड... इस में मैं हीरो नहीं है, सरजू का नाम इस लिए टाइटल में है क्यों के यह स्टोरी उसी के आगे पीछे घूमता है... हर किसी का करैक्टर इम्पोर्टेन्ट है, सेक्स स्टोरी है तो जो भी करैक्टर सेक्स में इन्वॉल्व होता है वही मैं हो जाता है, सरजू के डैड, चाचा, माँ, चचाई, कौसिन्स, सब के रोल्स इम्पोर्टेन्ट हैं.... मैं करैक्टर की बात hi नहीं इस म ें... बाद में बीच में और भी करैक्टर जुड़ते जाएंगे जब और जैसे कहानी की मांग होगी.

होप ी एस्प्लेनेड आईटी क्लियर एनफ :डी
 
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