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मेरी आशिकी तुमसे hi.....
अपडेट 106
श्रुति : वो घर पे नहीं है कहीं बहार गया है.... उसे आने में शायद 6 दिन और लग जाएंगे.... जब वो आ जाए तब उस से मिल लेना....
सोना : ठीक है....
ये कह के सोना वहां से जाने hi वाली होती है की तभी किसी की तस्वीर देख के उसके पेअर वहीँ रुक जाते हैं.... वो गौर से उस तस्वीर को देखने लगती है.... फिर पलट से श्रुति से पूछी है....
सोना : ये तस्वीर किसकी है....?
श्रुति : ये प्रिंस की फोटो है... देखने में कितना स्मार्ट डैशिंग और हैंडसम लगता हैं न...
श्रुति की बात पे सोना बस हाँ में अपनी गर्दन हिला देती है... बस फिर क्या था श्रुति प्रिंस की तारीफ के पल बाँधने लग जाती है.... फिर आखरी में जो कहती है उसे सुन के सोनो चौंक के प्रिंस की फोटो के बेहद करीब जा के उसे गौर से देखने लगती है... वहां उसे कुछ ऐसा नज़र आता है जिसे देख के वो बुरी तरह से चौंक जाती है....?????
अब आगे...
श्रुति : जानती हो प्रिंस में सब से ख़ास बात क्या है.... वो है उसकी नीली आँखें और आँखों के किनारे का काला टिल.... उसे जो एक बार देख ले वो उस में खो सा जाता है....
श्रुति की बात सुन सोना गौर से प्रिंस की फोटो की आँखों की तरफ देखती है..... प्रिंस की नीली नीली आँखों में वो खो सी जाती है.... फिर जैसे hi उसकी नज़र प्रिंस की नीली आँखों के किनारे के काले टिल पे जाती है वो चौंके बिना रह नहीं पाती... उसे कुछ याद आता है और वो गहरी सोच में डूब जाती है..... सोना को इस तरह प्रिंस की तस्वीर में खोये देख श्रुति....
श्रुति : देखा मैंने कहा था न की इसकी नीली आँखों में जादू है कोई लड़की अगर एक बार इसकी आँखों में देख ले वो उस में खो सी जाती है.... जैसा अट्रैक्शन इस के फेस और बॉडी में है वैसा hi इसकी आँखों में भी है.... इसे देखते hi दिल इसका दीवाना हुआ जाता है.... और जब ये प्यार से देखते हुए बात करता है और ख़ास करके मुस्कुराता है तब दिल इस का हो जाने को तड़प उठता है.... देखना कहीं ऐसा न हो की तुम्हे भी इस से प्यार हो जाए.....
श्रुति की बात सुन के सोना एक बार पलट के उसकी तरफ देखती है.... फिर कुछ देर प्रिंस की फोटो के एक बार फिर से निहारने लग जाती है.... फिर बिना कुछ कहे वहां से अपने घर की तरफ चल देती है....
सोना कुछ सोचते सोचते घर में दाखिल होती है.... और सामने जा के डाइनिंग टेबल पे बैठ के नाश्ता करने लगती है.... तभी उसकी माँ जमीला उसे यूँ कहीं खोये हुए देख उस से पूछती है.....
जमीला : सोना ये सुबह सुबह तू कहाँ चली गयी थी....?
माँ की आवाज़ सुन के सोना की तंत्र टूट टी है.....
सोना : जी माँ आप ने कुछ कहा क्या....?
माँ : ध्यान कहाँ है तेरा...? मैंने पुछा तू इतनी सुबह सुबह कहाँ गयी थी.....?
सोना : वो माँ जाने क्यों आज फिर से एक अजीब सी बेचैनी हो रही थी.... जाने क्यों ऐसा लगा जैसे की सुलतान बेहद तकलीफ में है.... बस उसकी को ले के परेशान हो गयी थी.... यहाँ मुझे कुछ अच्छा नहीं लग रहा था तो अपने मन को शांत करने बहार गार्डन में चली गयी थी.... फिर वहां से अपने घर के पीछे वाले हिस्से की तरफ चली गयी थी....
सोना की बात सुन के वहां मौजूद सब चौंक जाते हैं....
जमीला शॉकेड : क्या कहा घर का पीछे वाला हिस्सा.....!!!!!
सोना : हाँ.... वो मैं वो.... बस ऐसे hi देखने चली गयी थी....
जमीला : मैंने तुझे वहां जाने से मन किया था न.... फिर भी तू वहां गयी.... तू न आज कल मेरी एक भी बात नहीं सुनती है....
सोना : माँ मैं जान के वहां नहीं गयी थी वो तो बस अनजाने में चली गयी थी....
जमीला : जान के हो या अनजाने में.... जब मैंने तुझे वहां जाने से मन किया था तब तू वहां गयी hi क्यों....? तू जानती है न वहां क्या हुआ था....? और तेरे वहां जाने से क्या हो सकता है....? मुझे तो सोच के hi दर लगता है.... मगर फिर भी तू वहां गयी.... न तो तुझे अपनी फ़िक्र है और न मेरी....
अपनी माँ को नाराज़ होते देख सोना माँ को मानाने के लिए उनके करीब जा के प्यार से उनके गाल पे किश कर के उन्हें मानते हुए कहती है...
सोना : सॉरी न माँ.... मैं वहां गलती से चली गयी थी अब नहीं जाउंगी.... अब तो गुस्सा थूक दो....
जमीला : तू न मुझे मानाने की कोशिश मत कर मैं नहीं मान ने वाली.... तू आज कल मेरी कोई बात नहीं मानती बस जब देखो तब अपने मन की करती है.... आज कितने दिन हो गए कॉलेज खुले हुए तू एक दिन भी कॉलेज नहीं गयी.... मगर वहां घर के पीछे वाले हिस्से में जाना नहीं भूली.... आखिर मेरे लाख मन करने पे भी हर बार तू वहां क्यों चली जाती है....? ये जानते हुए भी की वहां क्या हुआ था और आगे जाने क्या हो सकता है....? जा बात मत कर मुझसे आज मैं तुझसे बहुत नाराज़ हूँ....
सोना : माँ सॉरी न माँ.... अब जाने भी दो न.... आप तो मेरी अच्छी माँ हो न....
जमीला : तेरी माँ हूँ इसी लिए तो मुझे तेरी फ़िक्र रहती है.... मगर तुझे मेरी ज़रा भी फ़िक्र नहीं....
सोना : किसने कहा की मुझे आपकी फ़िक्र नहीं है.... मुझे जितनी अपनी फ़िक्र नहीं रहती उस से कई ज़्यादा आपकी फ़िक्र रहती है... तभी तो आपको मीठा खाने से रोकती हूँ.... मगर आप हो की मेरी कोई बात नहीं सुनती.... देखो आज भी कैसे प्लेट में गाजर का हलवा ले के मज़े से खा रही हो.... आप को पता है न डॉ को ने आप को मीठा खाने से मन किया है.... मगर नहीं आप को तो बस वही करना है जो आपको मन किया जाता है.... आप न बिलकुल मुझपे गयी हो.... ठीक मेरी तरह वो hi करती हो जिसे करने से मन किया जाता है....
सोना की बात सुन के जमीला कुछ कहने hi वाली होती है की तभी अरबाज़ बीच में ऐसा कुछ बोल पड़ते हैं... जिसे सुन के सब हसने लगते हैं....
अरबाज़ : सही कहा सोना तू ने तेरी माँ तुझपे गयी है और तू अपनी माँ पे.... दोनों माँ बेटी बिलकुल एक जैसी हो.... तीखी मिर्ची.... जो बस अपने मन की करती है... न कभी किसी की सुनती है और न hi कभी किसी की मानती है.... बस अपनी बात मनवाना जानती है.... लेडी डॉन की तरह.... किसी ने कुछ कहा नहीं की हो गई धुंवाडार फायरिंग शुरू....
अरबाज़ की बात सुन के जहाँ सब हसने लगते हैं वहीँ दोनों माँ बेटी गुस्से से उनकी तरफ देखती है.... अरबाज़ फ़ौरन अपनी नज़रें झुका के नाश्ता करने लग जाता है....
हहहहहहहहह.....
सोना : माँ ये अच्छा हुआ की मैं वहां गयी आपको पता है.... हमारा घर अब हमारा बिलकुल भी नहीं रहा....
इमरान : ये क्या कह रही है सोना तू... वो घर जब हमारा है तो हमारा कैसे नहीं रहा....?
सोना : चाचू वो बात ऐसी है की वो घर अब पहले जैसा बिलकुल भी नहीं रहा.... जिसे आपने वो घर रेंट पे दिया है उसने उस घर को जन्नत से भी ज़्यादा खूबसूरत बना दिया है....
सोना की बात सुन के वहां मौजूद सब बुरी तरह से चौंक जाते हैं..... सब के मुँह से एक साथ एक hi शब्द निकलता है...
Kyaaaaaaaaaaaa....?????
सोना : हाँ अगर यकीन न हो तो आप सब खुद चल के देख लीजिये.... वो घर अब पूरी तरह से बदल चूका है.... जब मैंने उसे देखा तो उस की खूबसूरती में खो सी गयी.... ऐसा घर मैंने आज तक कहीं नहीं देखा.... न टीवी पे और न रियल लाइफ में.... जन्नत से भी ज़्यादा खूबसूरत है वो घर.... चलिए खुद चल के देख लीजिये....
ये कह के सोना वहां की हर एक चीज़ की तारीफ करने लगती है... जिसे सुन के सब उस घर की खूबसूरती को देखने के लिए तड़प जाते हैं....
सोना : अगर आप सब को मेरी बात पे यकीन न hi है तो चलिए खुद चल के देख लीजिये....
सोना सब को लेके उस घर की तरफ चल देती है.... जैसे hi सब घर के अंडर जाते हैं.... वहां की खूबसूरती देख सब की आँखें फटी की फटी रह जाती हैं... सब के मुँह से बस इतना hi निकल पाटा है....
वूऊऊवववववव....
सब घर की खूबसूरती में खो से गए हैं.... सब अपने अपने तरीके से घर की तारीफ करने में लगे हुए हैं.... की तभी सोना अपनी बुआ नज़मा की बेटी नाज़ की बात सुन के बुरी तरह से चौंक जाती है....!!!!
सोना शॉकेड : क्या कहा नाज़ तू ने....? एक बार फिर से बोल.....
नाज़ प्रिंस की फोटो को गौर से देखते हुए.....
नाज़ : इसकी आँखें तो बिलकुल सुलतान से मिलती हैं..... वो hi नीली आँखें और आँखों के किनारे ठीक वैसा hi काला टिल....
सोना : नाज़ क्या तुझे पूरा यकीन है की ये आँखें सुलतान की आँखों जैसी hi हैं....?
नाज़ : हैरत है सोना ये बात तू मुझसे पूछ रही है.... मुझसे ज़्यादा तो इन आँखों को तू जानती है.... तू इन के ज़्यादा करीब है.... तेरे बनायीं हुई साड़ी तस्वीरों में सब से ज़्यादा तस्वीरें तो इन नीली आँखों की hi हैं.... जो हु बहु इस जैसी hi हैं..... कहीं ये सुलतान तो नहीं....
सोना : ये कैसे मुमकिन है....? नहीं ये सुलतान नहीं हो सकता.... हरगिज़ नहीं....
नाज़ : क्यों नहीं हो सकता....?
सोना : इस क्यों की वजह तू अच्छे से जानती है.... फिर भी ये सवाल पूछ रही है....
नाज़ : हाँ पूछ रही हूँ.... जानती है क्यों....? वो इस लिए क्यों की बचपन में जब तू सुलतान की आँखें देखती थी तो ठीक ऐसे hi उनमे खो जाय करती थी जैसे की अभी खो गयी थी.... और गौर से देख इन आँखों को ये सुलतान की आँखों जैसी नहीं बल्कि उसी की आँखें हैं.... इसे पहचान ने में मैं तो क्या तू भी कभी भूले से भी भूल नहीं कर सकती... याद है तुझे सुलतान क्या कहता था.... उसके दिल में अगर तुझे उतरना है तो उसका एक hi रास्ता है उसकी ये आँखें.... उसकी आँखों को देख के hi मदहोश हो के उसके दिल में उतरा जा सकता है.... और तेरे साथ भी बिलकुल वैसा hi होता था.... जब भी तू उसकी आँखों में देखती थी.... तू उसमे खो सी जाती है.... उसकी आँखों में hi नहीं बल्कि उसके दिल में भी तेरी तस्वीर नज़र आया करती थी.... जिन्हे देख के तू तकलीफ में भी खुश हो जाय करती... तेरे दिल को बेहद सुकून मिलता.... और फिर उस मनहूस दिन के बाद तो न सुलतान हमारे साथ रहा और न hi उसकी ये आँखें....
सोना : हाँ नाज़ तू जो कह रही है वो सच है... लेकिन अगर ये सुलतान hi है तो फिर यहाँ आने के बाद ये हमसे दूर क्यों है....? क्यों यहाँ आते hi हमारे पास नहीं आया....? क्यों हम से ख़ास कर के मुझसे अपनी सोना से इतनी दूर रह रहा है....? क्यों.....?
नाज़ : अब इस क्यों का जवाब तो वो hi दे सकता है....? वैसे वो है कहाँ....?
सोना : उसका तो पता नहीं मगर हाँ जिसकी ये तस्वीर है उसका नाम प्रिंस है.... काम के सिलसिले में कुछ दिन के लिए वो बहार गया है.... अगले 6 से 7 दिन में वो यहाँ लौट आएगा....
नाज़ : जब वो लौट आये तब खुद उस से इस बारे में पूछ लेना....
सोना : हाँ तू ठीक कह रही है.... मगर उस से पहले मुझे कुछ पता करना है जो सिर्फ प्रोफेसर रिआज़ hi बता सकते हैं.... मुझे लगता है मेरे कुछ सवालों के जवाब वो ज़रूर बता देंगे.... बाकी प्रिंस के आने पे मैं उस से पूछ लुंगी....
जब तक सोना प्रोफेसर रिआज़ से अपने सवालों के जवाब पता करती है आइये देखते हैं प्रिंस का क्या हाल है....?
इधर प्रिंस बुरी तरह से ज़ख़्मी हालत में बेहोश पड़ा हुआ है.... नेमत और मुस्कान उसे इस हाल में देख के उसके पास जाने के लिए तड़प रही हैं.... मगर छह के भी उसके पास नहीं जा पा रही हैं.... मुस्कान अपनी पूरी ताक़त लगा के उठना चाहती है मगर उठ नहीं पा रही है.... बस घुटनो से नीचे तक hi अपने पेअर हिला पा रही है.... जैसे hi उसे ये महसूस होता है की उसके पेअर हिल रहे हैं... उसकी ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहता.... उसका दिल ख़ुशी से झूम उठता है.... वहीँ दूसरी तरफ प्रिंस का हाल देख उसकी आँखों से आंसू बह रहे हैं.... वो प्रिंस को बताना छह रही है की देखो प्रिंस मेरे पेअर ठीक हो गए.... तुम्हारी म्हणत रंग लायी.... मगर छह के भी वो बता नहीं पा रही है.... न इस वक़्त वो बोल सकती है और न hi प्रिंस सुन सकता है....
नेमत के साथ साथ मुस्कान भी ऊपर वाले से दुआ करने लगती हैं.... उनका दिल तड़प तड़प के प्रिंस के लिए दुआएं मांगने लगता है.... और फिर वो होता है जिसे देख उन्हें ऐसा लगता है की जैसे ऊपर वाले ने उनकी दुआ क़ुबूल कर ली.... प्रिंस के जिस्म में उसकी रिकवरी पावर्स एक्टिवटे हो जाती है.... और धीरे धीरे उसके घाव भरने लगते हैं.... उसके जिस्म से बहा हुआ खून वापिस उसके जिस्म में जाने लगता है.... कुछ hi देर में वो पूरी तरह से ठीक हो जाता है....
मुस्कान का नाम ले के प्रिंस चीख के होश में आ जाता है.... होश में आते hi वो इधर उधर मुस्कान को ढूंढने लगता है..... जैसे hi उसकी नज़र मुस्कान पे पड़ती है वो फ़ौरन उसके पास जाता है.... मुस्कान की आँखों में आंसू देख के वो घबरा जाता है.... फिर शुरू हो जाती है उसके सवालों की बौछार....
प्रिंस : मुस्कान तुम ठीक तो हो न....? तुम्हे कुछ हुआ तो नहीं न....? ये तुम रो क्यों रही हो....? बोलो न बोलती क्यों नहीं....?
और न जाने क्या क्या सवाल वो मुस्कान से पूछने लगता है.... साथ hi उसके पूरे जिस्म को गौर से छू छू के चेक करने लगता है.... प्रिंस को अपने लिए इतनी फ़िक्र करते देख मुस्कान को उसपे बेहद प्यार आने लगता है.... उसका दिल चाहता है जैसे की वो प्रिंस को कास के अपने सीने से लगा ले..... अभी उसने ऐसा सोचा hi था की तभी प्रिंस की नज़र उसके पैरों पे पड़ती है जिसे हिलते देख प्रिंस ख़ुशी से उछाल पड़ता है..... वो ख़ुशी में मुस्कान को अपने सीने से लगा के कहता है....
प्रिंस : मुस्कान देखो तुम्हारे पेअर ठीक हो गए.... देखा तुमने ये ठीक हो गए.... बस अब कुछ दिन और फिर तुम पूरी तरह से ठीक हो जाओगी.... मेरी दोस्त पूरी तरह से ठीक हो जायेगी.... वाओ.... मैं बता नहीं सकता तुम्हारे पैरों को ठीक देख के मुझे कितनी ख़ुशी हो रही है....
ये कह के प्रिंस मुस्कान को कास के अपने सीने से लगा लेता है.... उसे अपनी गॉड में उठा के ख़ुशी से नाचने लगता है.... प्रिंस को अपने लिए इतना खुश देख के मुस्कान भी बेहद खुश हो जाती है....
प्रिंस : नेमत देख मुस्कान में पेअर ठीक हो गए.... देखा तू ने इसके पेअर ठीक हो गए जल्द hi ये पूरी तरह से ठीक हो जायेगी.... है न ख़ुशी की बात.... नेमत.... ( फिर इधर उधर देखते हुए....) ये नेमत कहाँ चली गयी....
फिर जब उसकी नज़र नेमत पे पड़ती है तब....
प्रिंस : अबे तू वहां कड़ी कड़ी क्या कर रही है....? इधर आ देख मुस्कान को उसके पेअर ठीक हो गए.....
प्रिंस की बात सुन के नेमत को गुस्सा आने लगता है साथ hi गुस्से से उसका चेहरा लाल होने लगता है....
नेमत मन में : साले कमीने एक तो खुद यहाँ मुझे पावर्स से बांध रखा है और उलटे मुझ hi से ये सवाल कर रहा है की मैं यहाँ कड़ी कड़ी क्या कर रही हूँ.....? बस एक बार मुझे आज़ाद होने दे फिर बताती हूँ मैं तुझे....
प्रिंस : अबे तुझे मेरी बात सुनाई नहीं दे रही है क्या.....? वहां कड़ी कड़ी क्या कर रही है.... इधर आ देख मुस्कान के पेअर ठीक हो गए.... हमारी म्हणत बेकार नहीं गयी.... अब बस कुछ दिन में मुस्कान पूरी तरह ठीक हो जायेगी.... आ न इधर देख न....
नेमत बेहद गुस्से में प्रिंस को देखते हुए मन में कहती है.....
नेमत : कमीने पहले मुझे आज़ाद तो कर फिर बताती हूँ मैं तुझे.....
नेमत को वहां से न हिलते देख प्रिंस हैरत से उसकी तरफ देखता है.... फिर जैसे hi उसे कुछ याद आता है वो फ़ौरन मुस्कान को पास पड़े व्हीलचेयर पे बैठा के मुस्कान की तरफ अपने हाथ का इशारा करता है.... जिस से जादू से उसके जिस्म पे उसके कपडे आ जाते हैं.... फिर वो नेमत की तरफ देख के अपने हाथ का इशारा करता है.... उसका इशारा पाते hi नेमत के मुँह और हाथ से वो रेज़ जिसने उसे जकड़ा हुआ था वो हैट जाती है... और नेमत आज़ाद हो जाती है.... आज़ाद होते hi नेमत बेहद गुस्से में भागते हुए प्रिंस के पास आती है और उसके ऊपर कूद के रट हुए उसे मारने लगती है.... प्रिंस बस हैरत से नेमत को देख रहा है उसे नेमत की कोई बात समझ नहीं आ रही है न hi उसका यूँ रोना और न hi उसका यूँ उसे मारना.... नेमत को यूँ रट देख प्रिंस का दिल तड़प जाता है.... वो उसके दोनों हाथ पकड़ के उस से उसके रोने की वजह पूछता है....
प्रिंस : नेमत क्या हुआ तुझे.....? तू अचानक से रोने क्यों लगी....? बता मुझे बात क्या है....? तुझे कोई प्रॉब्लम है क्या....?
नेमत गुस्से में : साले कमीने तेरी हिमायत कैसे हुई ऐसा करने की....? तू क्या समझता है अपने आप को....? क्या सोच के तू ने ये किया....? और तो और मुझे भी अपनी पावर्स से बंद दिया... ताकि मैं तेरे पास जा के तेरी मदत न कर सकूँ.... साले ये सब करने से पहले तू ने एक बार भी ये नहीं सोचा की अगर तुझे कुछ हो जाता तो क्या होता....? मैं तो जीते जी मर hi जाती.... मगर नहीं तुझे अपनी दोस्त की फ़िक्र है साथ hi बाकी सब की फ़िक्र है मगर मेरी ज़रा भी फ़िक्र नहीं.... आज मैं तेरी वो हालत करुँगी की फिर ऐसा करने से पहले तू 100 नहीं बल्कि 1000 बार सोचेगा....
ये कह के नेमत प्रिंस को पीटने लगती है.... नेमत की बात सुन के और अपने लिए उसका प्यार और फ़िक्र देख प्रिंस की आँखों में आंसू आ जाते हैं साथ hi उसे नेमत पे बड़ा प्यार आने लगता है.... वो प्यार से नेमत के चेहरे को देख के उसकी मार खता रहता है फिर आगे बढ़ के उसे अपने सीने से लगा लेता है....
नेमत : कमीने ये क्या कर रहा है चोर मुझे.... कहीं तेरे ऊपर फिर से नील ज़हर का असर तो नहीं हो गया....? हाँ शायद तभी तू ने मुझे गले लगाया है.... साले चोर मुझे मैं वैसी लड़की नहीं हूँ... अगर तू ने मेरे साथ कुछ भी गलत करना का सोचा भी तो मैं तेरी टांगें तोड़ दूंगी....
ये कह के नेमत उस खुद को चोर्ने को तो कह रही है मगर न hi वो उसे खुद से दूर कर रही है न hi खुद उस से दूर जा रही है.... बल्कि वो खुद कास के प्रिंस को अपने सीने से लगाए हुई है...
प्रिंस भी उसे खुद से दूर करना नहीं छह रहा है.... उसे नेमत पे बड़ा प्यार आ रहा है.... वो और कास के उसे अपने सीने से लगा लेता है....
दोनों को एक दूसरे की बाहों में बेहद सुकून मिल रहा है.... दोनों hi इस वक़्त एक दूसरे से अलग नहीं होना छह रहे हैं.... दोनों को इस वक़्त एक दूसरे के जिस्म की गर्मी महसूस हो रही है... ये गर्मी नील ज़हर को बेकाबू होने पे मजबूर कर देती है और फिर वो होता है जिसे महसूस करके नेमत के साथ साथ प्रिंस को भी एक झटका सा लगता है....????
अपडेट 106
श्रुति : वो घर पे नहीं है कहीं बहार गया है.... उसे आने में शायद 6 दिन और लग जाएंगे.... जब वो आ जाए तब उस से मिल लेना....
सोना : ठीक है....
ये कह के सोना वहां से जाने hi वाली होती है की तभी किसी की तस्वीर देख के उसके पेअर वहीँ रुक जाते हैं.... वो गौर से उस तस्वीर को देखने लगती है.... फिर पलट से श्रुति से पूछी है....
सोना : ये तस्वीर किसकी है....?
श्रुति : ये प्रिंस की फोटो है... देखने में कितना स्मार्ट डैशिंग और हैंडसम लगता हैं न...
श्रुति की बात पे सोना बस हाँ में अपनी गर्दन हिला देती है... बस फिर क्या था श्रुति प्रिंस की तारीफ के पल बाँधने लग जाती है.... फिर आखरी में जो कहती है उसे सुन के सोनो चौंक के प्रिंस की फोटो के बेहद करीब जा के उसे गौर से देखने लगती है... वहां उसे कुछ ऐसा नज़र आता है जिसे देख के वो बुरी तरह से चौंक जाती है....?????
अब आगे...
श्रुति : जानती हो प्रिंस में सब से ख़ास बात क्या है.... वो है उसकी नीली आँखें और आँखों के किनारे का काला टिल.... उसे जो एक बार देख ले वो उस में खो सा जाता है....
श्रुति की बात सुन सोना गौर से प्रिंस की फोटो की आँखों की तरफ देखती है..... प्रिंस की नीली नीली आँखों में वो खो सी जाती है.... फिर जैसे hi उसकी नज़र प्रिंस की नीली आँखों के किनारे के काले टिल पे जाती है वो चौंके बिना रह नहीं पाती... उसे कुछ याद आता है और वो गहरी सोच में डूब जाती है..... सोना को इस तरह प्रिंस की तस्वीर में खोये देख श्रुति....
श्रुति : देखा मैंने कहा था न की इसकी नीली आँखों में जादू है कोई लड़की अगर एक बार इसकी आँखों में देख ले वो उस में खो सी जाती है.... जैसा अट्रैक्शन इस के फेस और बॉडी में है वैसा hi इसकी आँखों में भी है.... इसे देखते hi दिल इसका दीवाना हुआ जाता है.... और जब ये प्यार से देखते हुए बात करता है और ख़ास करके मुस्कुराता है तब दिल इस का हो जाने को तड़प उठता है.... देखना कहीं ऐसा न हो की तुम्हे भी इस से प्यार हो जाए.....
श्रुति की बात सुन के सोना एक बार पलट के उसकी तरफ देखती है.... फिर कुछ देर प्रिंस की फोटो के एक बार फिर से निहारने लग जाती है.... फिर बिना कुछ कहे वहां से अपने घर की तरफ चल देती है....
सोना कुछ सोचते सोचते घर में दाखिल होती है.... और सामने जा के डाइनिंग टेबल पे बैठ के नाश्ता करने लगती है.... तभी उसकी माँ जमीला उसे यूँ कहीं खोये हुए देख उस से पूछती है.....
जमीला : सोना ये सुबह सुबह तू कहाँ चली गयी थी....?
माँ की आवाज़ सुन के सोना की तंत्र टूट टी है.....
सोना : जी माँ आप ने कुछ कहा क्या....?
माँ : ध्यान कहाँ है तेरा...? मैंने पुछा तू इतनी सुबह सुबह कहाँ गयी थी.....?
सोना : वो माँ जाने क्यों आज फिर से एक अजीब सी बेचैनी हो रही थी.... जाने क्यों ऐसा लगा जैसे की सुलतान बेहद तकलीफ में है.... बस उसकी को ले के परेशान हो गयी थी.... यहाँ मुझे कुछ अच्छा नहीं लग रहा था तो अपने मन को शांत करने बहार गार्डन में चली गयी थी.... फिर वहां से अपने घर के पीछे वाले हिस्से की तरफ चली गयी थी....
सोना की बात सुन के वहां मौजूद सब चौंक जाते हैं....
जमीला शॉकेड : क्या कहा घर का पीछे वाला हिस्सा.....!!!!!
सोना : हाँ.... वो मैं वो.... बस ऐसे hi देखने चली गयी थी....
जमीला : मैंने तुझे वहां जाने से मन किया था न.... फिर भी तू वहां गयी.... तू न आज कल मेरी एक भी बात नहीं सुनती है....
सोना : माँ मैं जान के वहां नहीं गयी थी वो तो बस अनजाने में चली गयी थी....
जमीला : जान के हो या अनजाने में.... जब मैंने तुझे वहां जाने से मन किया था तब तू वहां गयी hi क्यों....? तू जानती है न वहां क्या हुआ था....? और तेरे वहां जाने से क्या हो सकता है....? मुझे तो सोच के hi दर लगता है.... मगर फिर भी तू वहां गयी.... न तो तुझे अपनी फ़िक्र है और न मेरी....
अपनी माँ को नाराज़ होते देख सोना माँ को मानाने के लिए उनके करीब जा के प्यार से उनके गाल पे किश कर के उन्हें मानते हुए कहती है...
सोना : सॉरी न माँ.... मैं वहां गलती से चली गयी थी अब नहीं जाउंगी.... अब तो गुस्सा थूक दो....
जमीला : तू न मुझे मानाने की कोशिश मत कर मैं नहीं मान ने वाली.... तू आज कल मेरी कोई बात नहीं मानती बस जब देखो तब अपने मन की करती है.... आज कितने दिन हो गए कॉलेज खुले हुए तू एक दिन भी कॉलेज नहीं गयी.... मगर वहां घर के पीछे वाले हिस्से में जाना नहीं भूली.... आखिर मेरे लाख मन करने पे भी हर बार तू वहां क्यों चली जाती है....? ये जानते हुए भी की वहां क्या हुआ था और आगे जाने क्या हो सकता है....? जा बात मत कर मुझसे आज मैं तुझसे बहुत नाराज़ हूँ....
सोना : माँ सॉरी न माँ.... अब जाने भी दो न.... आप तो मेरी अच्छी माँ हो न....
जमीला : तेरी माँ हूँ इसी लिए तो मुझे तेरी फ़िक्र रहती है.... मगर तुझे मेरी ज़रा भी फ़िक्र नहीं....
सोना : किसने कहा की मुझे आपकी फ़िक्र नहीं है.... मुझे जितनी अपनी फ़िक्र नहीं रहती उस से कई ज़्यादा आपकी फ़िक्र रहती है... तभी तो आपको मीठा खाने से रोकती हूँ.... मगर आप हो की मेरी कोई बात नहीं सुनती.... देखो आज भी कैसे प्लेट में गाजर का हलवा ले के मज़े से खा रही हो.... आप को पता है न डॉ को ने आप को मीठा खाने से मन किया है.... मगर नहीं आप को तो बस वही करना है जो आपको मन किया जाता है.... आप न बिलकुल मुझपे गयी हो.... ठीक मेरी तरह वो hi करती हो जिसे करने से मन किया जाता है....
सोना की बात सुन के जमीला कुछ कहने hi वाली होती है की तभी अरबाज़ बीच में ऐसा कुछ बोल पड़ते हैं... जिसे सुन के सब हसने लगते हैं....
अरबाज़ : सही कहा सोना तू ने तेरी माँ तुझपे गयी है और तू अपनी माँ पे.... दोनों माँ बेटी बिलकुल एक जैसी हो.... तीखी मिर्ची.... जो बस अपने मन की करती है... न कभी किसी की सुनती है और न hi कभी किसी की मानती है.... बस अपनी बात मनवाना जानती है.... लेडी डॉन की तरह.... किसी ने कुछ कहा नहीं की हो गई धुंवाडार फायरिंग शुरू....
अरबाज़ की बात सुन के जहाँ सब हसने लगते हैं वहीँ दोनों माँ बेटी गुस्से से उनकी तरफ देखती है.... अरबाज़ फ़ौरन अपनी नज़रें झुका के नाश्ता करने लग जाता है....
हहहहहहहहह.....
सोना : माँ ये अच्छा हुआ की मैं वहां गयी आपको पता है.... हमारा घर अब हमारा बिलकुल भी नहीं रहा....
इमरान : ये क्या कह रही है सोना तू... वो घर जब हमारा है तो हमारा कैसे नहीं रहा....?
सोना : चाचू वो बात ऐसी है की वो घर अब पहले जैसा बिलकुल भी नहीं रहा.... जिसे आपने वो घर रेंट पे दिया है उसने उस घर को जन्नत से भी ज़्यादा खूबसूरत बना दिया है....
सोना की बात सुन के वहां मौजूद सब बुरी तरह से चौंक जाते हैं..... सब के मुँह से एक साथ एक hi शब्द निकलता है...
Kyaaaaaaaaaaaa....?????
सोना : हाँ अगर यकीन न हो तो आप सब खुद चल के देख लीजिये.... वो घर अब पूरी तरह से बदल चूका है.... जब मैंने उसे देखा तो उस की खूबसूरती में खो सी गयी.... ऐसा घर मैंने आज तक कहीं नहीं देखा.... न टीवी पे और न रियल लाइफ में.... जन्नत से भी ज़्यादा खूबसूरत है वो घर.... चलिए खुद चल के देख लीजिये....
ये कह के सोना वहां की हर एक चीज़ की तारीफ करने लगती है... जिसे सुन के सब उस घर की खूबसूरती को देखने के लिए तड़प जाते हैं....
सोना : अगर आप सब को मेरी बात पे यकीन न hi है तो चलिए खुद चल के देख लीजिये....
सोना सब को लेके उस घर की तरफ चल देती है.... जैसे hi सब घर के अंडर जाते हैं.... वहां की खूबसूरती देख सब की आँखें फटी की फटी रह जाती हैं... सब के मुँह से बस इतना hi निकल पाटा है....
वूऊऊवववववव....
सब घर की खूबसूरती में खो से गए हैं.... सब अपने अपने तरीके से घर की तारीफ करने में लगे हुए हैं.... की तभी सोना अपनी बुआ नज़मा की बेटी नाज़ की बात सुन के बुरी तरह से चौंक जाती है....!!!!
सोना शॉकेड : क्या कहा नाज़ तू ने....? एक बार फिर से बोल.....
नाज़ प्रिंस की फोटो को गौर से देखते हुए.....
नाज़ : इसकी आँखें तो बिलकुल सुलतान से मिलती हैं..... वो hi नीली आँखें और आँखों के किनारे ठीक वैसा hi काला टिल....
सोना : नाज़ क्या तुझे पूरा यकीन है की ये आँखें सुलतान की आँखों जैसी hi हैं....?
नाज़ : हैरत है सोना ये बात तू मुझसे पूछ रही है.... मुझसे ज़्यादा तो इन आँखों को तू जानती है.... तू इन के ज़्यादा करीब है.... तेरे बनायीं हुई साड़ी तस्वीरों में सब से ज़्यादा तस्वीरें तो इन नीली आँखों की hi हैं.... जो हु बहु इस जैसी hi हैं..... कहीं ये सुलतान तो नहीं....
सोना : ये कैसे मुमकिन है....? नहीं ये सुलतान नहीं हो सकता.... हरगिज़ नहीं....
नाज़ : क्यों नहीं हो सकता....?
सोना : इस क्यों की वजह तू अच्छे से जानती है.... फिर भी ये सवाल पूछ रही है....
नाज़ : हाँ पूछ रही हूँ.... जानती है क्यों....? वो इस लिए क्यों की बचपन में जब तू सुलतान की आँखें देखती थी तो ठीक ऐसे hi उनमे खो जाय करती थी जैसे की अभी खो गयी थी.... और गौर से देख इन आँखों को ये सुलतान की आँखों जैसी नहीं बल्कि उसी की आँखें हैं.... इसे पहचान ने में मैं तो क्या तू भी कभी भूले से भी भूल नहीं कर सकती... याद है तुझे सुलतान क्या कहता था.... उसके दिल में अगर तुझे उतरना है तो उसका एक hi रास्ता है उसकी ये आँखें.... उसकी आँखों को देख के hi मदहोश हो के उसके दिल में उतरा जा सकता है.... और तेरे साथ भी बिलकुल वैसा hi होता था.... जब भी तू उसकी आँखों में देखती थी.... तू उसमे खो सी जाती है.... उसकी आँखों में hi नहीं बल्कि उसके दिल में भी तेरी तस्वीर नज़र आया करती थी.... जिन्हे देख के तू तकलीफ में भी खुश हो जाय करती... तेरे दिल को बेहद सुकून मिलता.... और फिर उस मनहूस दिन के बाद तो न सुलतान हमारे साथ रहा और न hi उसकी ये आँखें....
सोना : हाँ नाज़ तू जो कह रही है वो सच है... लेकिन अगर ये सुलतान hi है तो फिर यहाँ आने के बाद ये हमसे दूर क्यों है....? क्यों यहाँ आते hi हमारे पास नहीं आया....? क्यों हम से ख़ास कर के मुझसे अपनी सोना से इतनी दूर रह रहा है....? क्यों.....?
नाज़ : अब इस क्यों का जवाब तो वो hi दे सकता है....? वैसे वो है कहाँ....?
सोना : उसका तो पता नहीं मगर हाँ जिसकी ये तस्वीर है उसका नाम प्रिंस है.... काम के सिलसिले में कुछ दिन के लिए वो बहार गया है.... अगले 6 से 7 दिन में वो यहाँ लौट आएगा....
नाज़ : जब वो लौट आये तब खुद उस से इस बारे में पूछ लेना....
सोना : हाँ तू ठीक कह रही है.... मगर उस से पहले मुझे कुछ पता करना है जो सिर्फ प्रोफेसर रिआज़ hi बता सकते हैं.... मुझे लगता है मेरे कुछ सवालों के जवाब वो ज़रूर बता देंगे.... बाकी प्रिंस के आने पे मैं उस से पूछ लुंगी....
जब तक सोना प्रोफेसर रिआज़ से अपने सवालों के जवाब पता करती है आइये देखते हैं प्रिंस का क्या हाल है....?
इधर प्रिंस बुरी तरह से ज़ख़्मी हालत में बेहोश पड़ा हुआ है.... नेमत और मुस्कान उसे इस हाल में देख के उसके पास जाने के लिए तड़प रही हैं.... मगर छह के भी उसके पास नहीं जा पा रही हैं.... मुस्कान अपनी पूरी ताक़त लगा के उठना चाहती है मगर उठ नहीं पा रही है.... बस घुटनो से नीचे तक hi अपने पेअर हिला पा रही है.... जैसे hi उसे ये महसूस होता है की उसके पेअर हिल रहे हैं... उसकी ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहता.... उसका दिल ख़ुशी से झूम उठता है.... वहीँ दूसरी तरफ प्रिंस का हाल देख उसकी आँखों से आंसू बह रहे हैं.... वो प्रिंस को बताना छह रही है की देखो प्रिंस मेरे पेअर ठीक हो गए.... तुम्हारी म्हणत रंग लायी.... मगर छह के भी वो बता नहीं पा रही है.... न इस वक़्त वो बोल सकती है और न hi प्रिंस सुन सकता है....
नेमत के साथ साथ मुस्कान भी ऊपर वाले से दुआ करने लगती हैं.... उनका दिल तड़प तड़प के प्रिंस के लिए दुआएं मांगने लगता है.... और फिर वो होता है जिसे देख उन्हें ऐसा लगता है की जैसे ऊपर वाले ने उनकी दुआ क़ुबूल कर ली.... प्रिंस के जिस्म में उसकी रिकवरी पावर्स एक्टिवटे हो जाती है.... और धीरे धीरे उसके घाव भरने लगते हैं.... उसके जिस्म से बहा हुआ खून वापिस उसके जिस्म में जाने लगता है.... कुछ hi देर में वो पूरी तरह से ठीक हो जाता है....
मुस्कान का नाम ले के प्रिंस चीख के होश में आ जाता है.... होश में आते hi वो इधर उधर मुस्कान को ढूंढने लगता है..... जैसे hi उसकी नज़र मुस्कान पे पड़ती है वो फ़ौरन उसके पास जाता है.... मुस्कान की आँखों में आंसू देख के वो घबरा जाता है.... फिर शुरू हो जाती है उसके सवालों की बौछार....
प्रिंस : मुस्कान तुम ठीक तो हो न....? तुम्हे कुछ हुआ तो नहीं न....? ये तुम रो क्यों रही हो....? बोलो न बोलती क्यों नहीं....?
और न जाने क्या क्या सवाल वो मुस्कान से पूछने लगता है.... साथ hi उसके पूरे जिस्म को गौर से छू छू के चेक करने लगता है.... प्रिंस को अपने लिए इतनी फ़िक्र करते देख मुस्कान को उसपे बेहद प्यार आने लगता है.... उसका दिल चाहता है जैसे की वो प्रिंस को कास के अपने सीने से लगा ले..... अभी उसने ऐसा सोचा hi था की तभी प्रिंस की नज़र उसके पैरों पे पड़ती है जिसे हिलते देख प्रिंस ख़ुशी से उछाल पड़ता है..... वो ख़ुशी में मुस्कान को अपने सीने से लगा के कहता है....
प्रिंस : मुस्कान देखो तुम्हारे पेअर ठीक हो गए.... देखा तुमने ये ठीक हो गए.... बस अब कुछ दिन और फिर तुम पूरी तरह से ठीक हो जाओगी.... मेरी दोस्त पूरी तरह से ठीक हो जायेगी.... वाओ.... मैं बता नहीं सकता तुम्हारे पैरों को ठीक देख के मुझे कितनी ख़ुशी हो रही है....
ये कह के प्रिंस मुस्कान को कास के अपने सीने से लगा लेता है.... उसे अपनी गॉड में उठा के ख़ुशी से नाचने लगता है.... प्रिंस को अपने लिए इतना खुश देख के मुस्कान भी बेहद खुश हो जाती है....
प्रिंस : नेमत देख मुस्कान में पेअर ठीक हो गए.... देखा तू ने इसके पेअर ठीक हो गए जल्द hi ये पूरी तरह से ठीक हो जायेगी.... है न ख़ुशी की बात.... नेमत.... ( फिर इधर उधर देखते हुए....) ये नेमत कहाँ चली गयी....
फिर जब उसकी नज़र नेमत पे पड़ती है तब....
प्रिंस : अबे तू वहां कड़ी कड़ी क्या कर रही है....? इधर आ देख मुस्कान को उसके पेअर ठीक हो गए.....
प्रिंस की बात सुन के नेमत को गुस्सा आने लगता है साथ hi गुस्से से उसका चेहरा लाल होने लगता है....
नेमत मन में : साले कमीने एक तो खुद यहाँ मुझे पावर्स से बांध रखा है और उलटे मुझ hi से ये सवाल कर रहा है की मैं यहाँ कड़ी कड़ी क्या कर रही हूँ.....? बस एक बार मुझे आज़ाद होने दे फिर बताती हूँ मैं तुझे....
प्रिंस : अबे तुझे मेरी बात सुनाई नहीं दे रही है क्या.....? वहां कड़ी कड़ी क्या कर रही है.... इधर आ देख मुस्कान के पेअर ठीक हो गए.... हमारी म्हणत बेकार नहीं गयी.... अब बस कुछ दिन में मुस्कान पूरी तरह ठीक हो जायेगी.... आ न इधर देख न....
नेमत बेहद गुस्से में प्रिंस को देखते हुए मन में कहती है.....
नेमत : कमीने पहले मुझे आज़ाद तो कर फिर बताती हूँ मैं तुझे.....
नेमत को वहां से न हिलते देख प्रिंस हैरत से उसकी तरफ देखता है.... फिर जैसे hi उसे कुछ याद आता है वो फ़ौरन मुस्कान को पास पड़े व्हीलचेयर पे बैठा के मुस्कान की तरफ अपने हाथ का इशारा करता है.... जिस से जादू से उसके जिस्म पे उसके कपडे आ जाते हैं.... फिर वो नेमत की तरफ देख के अपने हाथ का इशारा करता है.... उसका इशारा पाते hi नेमत के मुँह और हाथ से वो रेज़ जिसने उसे जकड़ा हुआ था वो हैट जाती है... और नेमत आज़ाद हो जाती है.... आज़ाद होते hi नेमत बेहद गुस्से में भागते हुए प्रिंस के पास आती है और उसके ऊपर कूद के रट हुए उसे मारने लगती है.... प्रिंस बस हैरत से नेमत को देख रहा है उसे नेमत की कोई बात समझ नहीं आ रही है न hi उसका यूँ रोना और न hi उसका यूँ उसे मारना.... नेमत को यूँ रट देख प्रिंस का दिल तड़प जाता है.... वो उसके दोनों हाथ पकड़ के उस से उसके रोने की वजह पूछता है....
प्रिंस : नेमत क्या हुआ तुझे.....? तू अचानक से रोने क्यों लगी....? बता मुझे बात क्या है....? तुझे कोई प्रॉब्लम है क्या....?
नेमत गुस्से में : साले कमीने तेरी हिमायत कैसे हुई ऐसा करने की....? तू क्या समझता है अपने आप को....? क्या सोच के तू ने ये किया....? और तो और मुझे भी अपनी पावर्स से बंद दिया... ताकि मैं तेरे पास जा के तेरी मदत न कर सकूँ.... साले ये सब करने से पहले तू ने एक बार भी ये नहीं सोचा की अगर तुझे कुछ हो जाता तो क्या होता....? मैं तो जीते जी मर hi जाती.... मगर नहीं तुझे अपनी दोस्त की फ़िक्र है साथ hi बाकी सब की फ़िक्र है मगर मेरी ज़रा भी फ़िक्र नहीं.... आज मैं तेरी वो हालत करुँगी की फिर ऐसा करने से पहले तू 100 नहीं बल्कि 1000 बार सोचेगा....
ये कह के नेमत प्रिंस को पीटने लगती है.... नेमत की बात सुन के और अपने लिए उसका प्यार और फ़िक्र देख प्रिंस की आँखों में आंसू आ जाते हैं साथ hi उसे नेमत पे बड़ा प्यार आने लगता है.... वो प्यार से नेमत के चेहरे को देख के उसकी मार खता रहता है फिर आगे बढ़ के उसे अपने सीने से लगा लेता है....
नेमत : कमीने ये क्या कर रहा है चोर मुझे.... कहीं तेरे ऊपर फिर से नील ज़हर का असर तो नहीं हो गया....? हाँ शायद तभी तू ने मुझे गले लगाया है.... साले चोर मुझे मैं वैसी लड़की नहीं हूँ... अगर तू ने मेरे साथ कुछ भी गलत करना का सोचा भी तो मैं तेरी टांगें तोड़ दूंगी....
ये कह के नेमत उस खुद को चोर्ने को तो कह रही है मगर न hi वो उसे खुद से दूर कर रही है न hi खुद उस से दूर जा रही है.... बल्कि वो खुद कास के प्रिंस को अपने सीने से लगाए हुई है...
प्रिंस भी उसे खुद से दूर करना नहीं छह रहा है.... उसे नेमत पे बड़ा प्यार आ रहा है.... वो और कास के उसे अपने सीने से लगा लेता है....
दोनों को एक दूसरे की बाहों में बेहद सुकून मिल रहा है.... दोनों hi इस वक़्त एक दूसरे से अलग नहीं होना छह रहे हैं.... दोनों को इस वक़्त एक दूसरे के जिस्म की गर्मी महसूस हो रही है... ये गर्मी नील ज़हर को बेकाबू होने पे मजबूर कर देती है और फिर वो होता है जिसे महसूस करके नेमत के साथ साथ प्रिंस को भी एक झटका सा लगता है....????