- Joined
- Dec 5, 2013
- Messages
- 92,574
गजेंद्र ने फ़ोन उठाया और लाउडस्पीकर पर रख दिया जबकि अम्मी के मुँह की गीली लाया वाली आवाज़ें पूरे कमरे में गूँज रही थी. “Hello, हुसैन भाई,” उसने कहा, उसकी आवाज़ ज़्यादातर संभाली हुई थी लेकिन एक छोटी सी रुकावट थी जो सिर्फ मैं, अपने छुपे हुए जगह से खिड़की के बहार, पूरी तरह समझ सकता था.
अम्मी उसको एक असली प्रोफेशनल माहिर रंडी जैसी चूस रही थी — गहरे, उत्तेजित और बहुत hi माहिर तरीके से. उसका सर परफेक्ट लाया में हिल रहा था, गाल अंदर को खींचे हुए, जीभ उसके मोठे लुंड के नीचे वाले हिस्से पर ज़ोर ज़ोर से काम करते हुए जबकि एक हाथ नीचे की तरफ हिलता था और दूसरा उसके अंडो को नरमी से पकड़ कर मसलता था.
उसने उसको गले तक पूरा अंदर ले लिया, थोड़ा सा गैगिंग की आवाज़ आती थी जो सेंसेशन को और तेज़ कर देती थी बिना रुकावट के, लार उसकी थोड़ी से चमकती हुई लम्बी लड़ियों में टपक रही थी.
उसने उसकी तरफ ऊपर देखा वासना से भरी बेचैन आँखों से — बड़ी, पूरी तरह समर्पित और इच्छा से जलती हुई — जैसे उसका लुंड दुनिया में सबसे ज़रूरी चीज़ थी.
वह ऐसा क्यों कर रही थी? क्यूंकि वह अपने नए रोले में पूरी तरह समर्पित हो चुकी थी. अपने पति के साथ धोखा करने का हराम एहसास जबकि वह फ़ोन पर बात कर रहा था, पकडे जाने का खतरा और गजेंद्र के लिए उसकी गहरी वासना ने उसको एक असली माहिर बना दिया था.
वह उसको पूरी तरह खुश करना चाहती थी, उसको अपना कण्ट्रोल खोने देना चाहती थी और इसकी उत्तेजना ने उसको सब कुछ देने पर मजबूर कर दिया — कोई रोक नहीं, कोई शर्म बाकी नहीं थी.
गजेंद्र ने अपनी सिसकियों को ज़ोर से कण्ट्रोल करने की कोशिश की. उसके मुँह की गरम गीली चूस, जिस तरह उसकी जीभ हिलती और घूमती थी, उसके गले की टाइट पकड़ — यह सब उसके शरीर में सुख की तेज़ लहार भेज रहा था.
उसके कमर के हिस्से अनायासे हिल रहे थे लेकिन उसने होंठ काट लिए, धीरे धीरे सांस ली और अपनी आवाज़ को नार्मल रखने की कोशिश की. फिर भी छोटी छोटी सिसकियाँ शब्दों के बीच निकल जाती थी.
उसके चेहरे पर कन्फूसिओं साफ़ दीखता था: वह अपनी बीवी के पति से नार्मल बात करने की कोशिश कर रहा था जिसकी अम्मी अभी उसके लुंड पर मुँह रखे हुए थी, जबकि वही अम्मी उसकी तरफ पुरे भूखे समर्पण से देख रही थी.
हर बार जब अम्मी उसको और गहरा ले लेती या ज़ोर से चूसती उसकी आवाज़ रुक जाती या पहात जाती.
अब्बा की आवाज़ स्पीकर से साफ़ आयी, परेशां और थोड़ी बेचैन. “गजेंद्र भाई, शाहिदा कहाँ है? उसने कहा था की जब तुम काम ख़तम कर लोगे तोह मुझे कॉल करेगी लेकिन देर हो रही है. क्या वह अभी भी तुम्हारे साथ है?”
गजेंद्र का हाथ अम्मी के सर पर थोड़ा और टाइट हो गया जब उसने उसके लुंड के सर पर जीभ घुमाई. “वह… यहाँ है भाई. वह मुझे… फाइल्स में मदद कर रही है. अभी वह… नीचे वाली फाइल्स… ोुह्ह्ह!!! को ठीक से… टाइट जगहों पर काम कर रही है.”
उसने “टाइट” शब्द पर रुकावट महसूस की क्यूंकि उसी पल अम्मी ने उसको फिर से गले तक गहरा ले लिया था, उसकी नाक उसके पेट से लगी हुई थी. गीली “ग्लुक” की आवाज़ इतनी ज़ोर से थी की मैं भी बहार से साफ़ सुन सका.
अब्बा को यह इन्युएन्दो बिलकुल समझ नहीं आया. वह सिर्फ रहत महसूस कर रहा था लेकिन अभी भी परेशां था. “ओह अच्छा. लेकिन इतना टाइम क्यों लग रहा है? यह किस तरह की फाइल्स हैं? क्या वह जल्दी घर आ सकती है? मैं परेशां हो रहा हूँ.”
गजेंद्र ने जवाब देने की कोशिश की जबकि अम्मी अब दोनों हाथ इस्तेमाल कर रही थी — एक गीले लुंड को हिलाते हुए दूसरा नीचे की तरफ ट्विस्ट करते हुए — उसका सर और तेज़ हिला रहा था.
“फाइल्स… बहुत मोती हैं भाई. उससे… उन्हें ध्यान से… दोनों हाथों से… सब कुछ ठीक से ओर्गनइजे करना पड़ता है. वह… बहुत अच्छे से काम कर रही है.” उसकी आवाज़ फिर से पहात गयी जब अम्मी ने उसके आसपास गले के मसल्स से उसके लुंड को निचोड़ दिया.
मैं खिड़की से देख रहा था, मेरा दिल ज़ोर से धड़क रहा था. मेरी अपनी अम्मी घुटनो के बल बैठी थी, दुसरे आदमी के लुंड को एकदम प्रोफेशनल माहिर तरीके से चूस रही थी जबकि उसका पति उससे बात कर रहा था.
वह इतनी खोयी हुई थी — आँखें गजेंद्र के चेहरे पर लगी हुई, वासना और ज़रुरत से भरी. मुझे इमोशंस का तूफ़ान महसूस हो रहा था: शॉक, अब्बा के साथ जो वह कर रही थी उसके लिए घिन लेकिन साथ hi एक शर्मनाक तेज़ उत्तेजना जो मेरे लुंड को दर्द भरा थ्रोब दे रहा था.
यह मेरी अम्मी थी — वही औरत जो मुझे देर से घर आने पर डांटती थी, जो हिजाब पहनती थी और ,,., पढ़ती थी — अब गजेंद्र के लिए एक पूरी रंडी जैसी बेहवे कर रही थी.
मुझे यकीन नहीं हो रहा था फिर भी मैं देखना नहीं रोक प् रहा था. मेरा हाथ पहले से hi मेरी पंत में घुस चूका था, धीरे धीरे हिल रहा था जबकि शर्म और उत्तेजना अंदर लड़ रहे थे.
अब्बा और सवाल पूछता रहा. “क्या वह ठीक है? उसकी आवाज़ पहले अजीब सी थी. क्या तुम दोनों अकेला हो? वह अभी एक्साक्ट्ली क्या कर रही है?”
गजेंद्र ने नीचे अम्मी की तरफ देखा जो अभी उसको फिर से पूरा अंदर ले चुकी थी, उसकी आँखें पानी से भरी लेकिन अभी भी उसकी तरफ उसी भूखी एक्सप्रेशन से देख रही थी.
“वह… अभी ज़मीन पर है… नीचे वाली फाइल्स को हैंडल कर रही है… उसमें बहुत म्हणत कर रही है. वह दोनों हाथ इस्तेमाल कर रही है… ताकि सब कुछ… ठीक से सॉर्टेड हो जाए.”
वह ज़ोर से सांस ले रहा था, हर बार जब अम्मी की जीभ उसके सर के सेंसिटिव हिस्से पर दबती सिसकियों को छुपाने की कोशिश कर रहा था.
अम्मी ने फाइनली उससे फ़ोन ले लिया. उसने चूसना बिलकुल नहीं रोका — उसने उसके लुंड के सर को मुँह में रखा, चूसती और चाटती रही जबकि वह बात करती थी, उसके शब्द tut-te हुए और सांस भरे हुए थे.
“Hello… हुसैन… हाँ मैं यहाँ हूँ… काम में मदद कर रही हूँ… यह… बहुत डिमांडिंग है…”
उसने रोक कर उसको गहरा ले लिया, एक गीली “स्लुर्प” की आवाज़ फ़ोन पर साफ़ सुनाई दी, फिर बोली, “मैं… पेपर्स को सॉर्ट कर रही हूँ… टाइम लग रहा है क्यूंकि… बहुत सारे हैं…”
अब्बा और भी परेशां लगा. “शाहिदा, तेरी आवाज़ कुछ ठीक नहीं लग रही. क्या थक गयी है? यह अजीब सी आवाज़ क्या है? लगता है जैसे… चूसने या गीली चीज़ की. क्या वहां सब ठीक है?”
अम्मी ने सिर्फ इतना टाइम के लिए मुँह हटाया की साफ़ जवाब दे सके फिर तुरंत वापस चूसने लगी, उसका सर फिर से हिलने लगा.
“यह ठीक है… बस पेपर्स… सरसरा रहे हैं… मैं ठीक हूँ…”
फिर से एक गीला “ग्लुक” की आवाज़ आयी जब उसने उसको गहरा ले लिया. वह जान बूझ कर कभी कभी जवाब देर से देती थी, चूसने की आवाज़ें सन्नाटे को भरने देती थी, जैसे खतरे ने उसको और भी उत्तेजित कर दिया हो.
गजेंद्र, थोड़ा टाइम अपने आप को सँभालने के लिए, चुपके से कमरे से बहार निकल गया पानी पिने. अम्मी घुटनो के बल hi रही, फ़ोन अभी भी एक हाथ में. उसने अपनी थोड़ी और मुँह से लार को हाथ के पीछे से पोछा, उसको अपने लाल चेहरे पर फैला दिया.
यह नज़ारा बहुत hi गन्दा और बेहया था — उसका लिपस्टिक फैला हुआ, लार उसकी गर्दन से उसकी ड्रेस के आगे तक टपक रहा था, उसकी आँखें वासना से धुंधली. उस पल ने मुझे ज़ोर से मारा.
अपनी अपनी अम्मी को दुसरे आदमी के लुंड को इतने गहरे से चूसने के सबूत को साफ़ करते हुए देख कर मेरे अंदर कुछ टूट गया.
मैंने और तेज़ हिलना शुरू कर दिया, मेरा हाथ तेज़ चल रहा था, शर्म तेज़ जल रही थी लेकिन उत्तेजना उससे भी ज़्यादा स्ट्रांग थी. यह इतना बेइज़्ज़त करने वाला, इतना रंडी जैसा था और मुझे नफरत थी की यह मुझे कितना छोड़ रहा था.
अब्बा की कन्फ्यूज्ड आवाज़ स्पीकर से आती रही. “शाहिदा? मैंने अजीब सी आवाज़ें सुनी… जैसे चूसने या गले में अटकने वाली. वहां क्या हो रहा है? क्या गजेंद्र भाई ठीक हैं? यह आवाज़ कैसी है?”
तभी गजेंद्र वापस आ गया. उसने कोई बात नहीं की. उसने सीधा अम्मी के सर को दोनों हाथों से पकड़ लिया, उसका चेहरा अपनी तरफ घुमा दिया और अपना लुंड उसके मुँह में ज़ोर से घुसा दिया.
उसने उसके गले को ज़ोर ज़ोर से और तेज़ छोड़ना शुरू कर दिया, उसके सर को मज़बूती से पकडे हुए जबकि उसके कमर के हिस्से आगे की तरफ झटके मार रहे थे.
अम्मी के हाथ उसकी जाँघों पर जा फटे, उसने उन्हें मज़बूती से पकड़ लिया ताकि संभल सके जब वह उसके मुँह का इस्तेमाल कर रहा था. उसकी आँखें पानी से भर गयी, हर झटके के साथ लार उड़ता जा रहा था लेकिन उसने कोई रोक नहीं लगायी — वह सब ले रही थी, उसका शरीर ज़ोर के झटकों से हिल रहा था.
आवाज़ें बहुत ज़ोर और गन्दी थी. “Gluck-gluck-gluck!” बार बार गूँज रही थी जब उसका लुंड उसके गले में ज़ोर से लग रहा था.
गीली “slurp-slurp” की आवाज़ें गले अटकने वाली “gack-gack” आवाज़ों के साथ मिल रही थी हर बार जब वह और गहरा जाता.
लार इधर उधर छींटे मार रहा था और लम्बी लड़ियों में टपक रहा था. फ़ोन रफ़ हरकत के दौरान टेबल से गिर गया था और उनके पास ज़मीन पर मुँह ऊपर करके पड़ा था, अभी भी लाउडस्पीकर पर. अब्बा की आवाज़ साफ़ आती रही, और परेशानी बढ़ती जा रही थी.
“शाहिदा? गजेंद्र भाई? यह कैसी आवाज़ है? लगता है जैसे कोई गले में अटक रहा हो! शाहिदा, मुझे जवाब दो! तू इतनी खामोश क्यों है? क्या हो रहा है?”
गजेंद्र उसके मुँह को ज़ोर से छोड़ता रहा, उसके सर पर मज़बूत पकड़, उसका इस्तेमाल करते हुए जैसे वह सिर्फ इसी के लिए बानी थी. अम्मी के हाथ उसकी जाँघों पर hi रहे, कभी और टाइट पकड़ते, कभी ऊपर की तरफ सरकते जैसे उसको और गहरा अंदर खींचना चाहती हो.
वह अब पूरी तरह खोयी हुई थी — अब कोई बात नहीं, सिर्फ उसका लुंड बार बार उसके गले के अंदर जाता रहा. गीली लाया वाली ग्लुकिंग और स्लुर्पिंग की आवाज़ें कमरे में भर गयी और सीधा अब्बा के कानों तक पहुंची.
अब्बा पूछता रहा, उसकी आवाज़ परेशानी और घबराहट से और तेज़ होती गयी.
“Hello? क्या कोई सुन रहा है? यह कैसी आवाज़ है? लगता है जैसे… मुझे नहीं पता… गीली आवाज़ें या कुछ टूट रहा हो. शाहिदा, क्या तू ज़ख़्मी है? गजेंद्र भाई, प्लीज जवाब दो!”
गजेंद्र की सांस तेज़ और बेहाल हो गयी. उसने ज़ोर से सिसकी भरी — गहरी, रोक नहीं पायी “फूऊक! आआह्ह्ह!” जब वह ज़ोर से झाड़ गया, अम्मी के सर को पूरा नीचे पकडे हुए अपना गरम वीर्य सीधा उसके गले के अंदर निकाल दिया.
अब्बा ने तुरंत फ़ोन पर रियेक्ट किया. “गजेंद्र भाई? क्या तू ठीक है? तू दर्द में था क्या! क्या हुआ? शाहिदा, मुझे बोल!”
अम्मी ने सब कुछ निगलने की कोशिश की लेकिन कुछ मोटा वीर्य मुँह के कोने से बहार निकल आया और फ़ोन के स्क्रीन पर गिर पड़ा.
उसने मुँह हटाया, खांसी और सांस फूलते हुए, मोती लार और वीर्य की लड़ियाँ उसके होंठों से उसके लुंड तक लटकती हुई थी. उसने ज़ोर से खांसी, उसका शरीर हिल रहा था जब वह अपना गाला साफ़ करने की कोशिश कर रही थी.
अब्बा की आवाज़ अब बिलकुल घबराई हुई थी. “शाहिदा? क्या चल रहा है? मैंने सुना ग्रोएन और अब खांसी! क्या तू ज़ख़्मी है? मुझे बता क्या हुआ!”
अम्मी ने कांपते हाथों से फ़ोन उठाया, अभी भी खांसी और सांस फूलते हुए.
“H-Hussein… सब ठीक है… मैं बस… पानी गले में अटक गया… जब हम काम ख़तम कर रहे थे… काम बहुत तेज़ हो गया… लेकिन अब हम ख़तम कर चुके हैं…” वह अभी भी ज़ोर ज़ोर से सांस ले रही थी, उसकी आवाज़ फटी हुई और टूटी हुई थी.
उसने जल्दी से फ़ोन काट दिया पहले hi के अब्बा और सवाल पूछ सके.
गजेंद्र बिस्तर पर लेट गया, ज़ोर ज़ोर से सांस लेते हुए और बहुत hi संतुष्ट दीखता था. अम्मी ने फिर से अपना मुँह पोछा, फिर दोनों धीरे धीरे हंसने लगे.
“तेरा पति कितना बड़ा बेवक़ूफ़ है,” गजेंद्र ने मुस्कुराते हुए कहा. “उसने सच में यह माना की तू पानी गले में अटकने से खांसी कर रही थी जब मैं अपना वीर्य तेरे मुँह के अंदर और गले के नीचे निकाल रहा था. कितना परफेक्ट बेवक़ूफ़ पति है.”
अम्मी मुस्कुरायी, अभी भी थोड़ी सांस फूली हुई. “उससे कुछ पता नहीं. वह हर बात मानता है. वह इतना अँधा है.”
बाद में अम्मी बिस्तर पर लेती हुई थी उसकी टांगें चौड़ी फैली हुई थी और दोनों एक दूसरे को चूमने लगे.
कुछ देर बाद वह दोनों बिलकुल नंगे थे सिर्फ खुली हुई पीली ब्लाउज के अलावा जो कुछ भी नहीं छुपा रही थी.
गजेंद्र, वह भी पूरा नंगा, उसकी जाँघों के बीच घुटनो के बल बैठ गया और धीरे धीरे भूखे अंदाज़ में उसकी छूट चाटने लगा.
उसकी जीभ लम्बी और चौड़ी लपटों में उसकी गीली छूट के होंठों पर चलती रही, उसकी उत्तेजना का स्वाद लेते हुए फिर उसके सूजे हुए क्लीट पर ध्यान देता.
उसने उसको नरमी से अपने मुँह में ले लिया, जीभ से उसपर थपथपाते हुए जबकि दो उँगलियाँ अंदर घुसती हुई और सही जगह ढूंढने के लिए मुड़ती हुई थी.
अम्मी की कमर बिस्तर से ऊपर उठ गयी जब वह उसकी छूट को चाट रहा था, उसकी थोड़ी उसके रास से चमक रही थी. उसकी जीभ और चूसने की गीली आवाज़ें उसकी सिसकियों के साथ मिल रही थी.
“आअह्ह्ह… ोुह्ह्ह्ह हाँ… मेरी छूट चाट… मममफ… तेरी जीभ बहुत अच्छी लग रही है… आअह्ह्ह वही… मत रुक… ोुह्ह्ह्ह मैं तेरी रंडी हूँ…”
“तेरा स्वाद बहुत मीठा है,” गजेंद्र उसके ऊपर से बोलै, और गहरा चाटने लगा. “मेरे लिए कितनी गीली हो गयी है.”
वह ऊपर चढ़ गया, अपने लुंड के सर को उसके एंट्री पॉइंट पर रगड़ने लगा. अम्मी उसकी तरफ बेचैन आँखों से देख रही थी.
“प्लीज… अंदर दाल दो… अपनी रंडी को छोड़… मुझे तेरा बड़ा लुंड अंदर चाहिए… आअह्ह्ह हाँ… मुझे भर दो…”
उसने धीरे से अंदर धकेला, फिर ज़ोर से झटका मारा.
अम्मी सुख से चिल्लाई जब उसने गहरे और ताकतवर झटकों से उसको छोड़ना शुरू कर दिया.
बिस्तर हर झटके के साथ ज़ोर से सरसरा रहा था. उसकी सिसकियाँ और तेज़ और बेचैन होती गयी.
“आअह्ह्ह! कितना गहरा… हाँ… मुझे और ज़ोर से छोड़… ोुह्ह्ह्ह मैं तेरी रंडी हूँ… आअह्ह्ह!”
सुख के चरम पर पहुँच कर उसने पीली ब्लाउज के आगे वाले हिस्से को पकड़ लिया और उसको ज़ोर से पहाड़ दिया, कपडा उसके बेचैन हाथों के नीचे आसानी से पहात गया.
वह पूरी तरह आज़ाद महसूस करना चाहती थी, अपने आप को बिलकुल खोल देना चाहती थी जबकि तेज़ सुख उसपर छ रहा था.
बाहरी मैं और नहीं सह सका. अपनी अम्मी को रंडी जैसी भीख मांगते हुए और ज़ोर से छोड़ते हुए देख कर मैंने तुरंत अपना लुंड बहार निकाल लिया और हिलना शुरू कर दिया.
शर्म मेरे अंदर जल रही थी — मैं सबसे बुरा बीटा था, अपनी hi अम्मी को इस तरह इस्तेमाल होते हुए देख कर मुठ मार रहा था — लेकिन मैं रुक नहीं प् रहा था.
मेरा हाथ तेज़ से तेज़ होता गया जब मैंने गजेंद्र को उसके अंदर ज़ोर से धकेलते हुए देखा.
जैसे hi मैं झड़ने वाला था, पीछे से एक हाथ अचानक मेरे कंधे पर आ गिरा.
डर इतना तेज़ और वरपॉवरिंग था. मेरा शरीर हिल उठा और मैं वही ज़ोर से झाड़ गया, वीर्य की लड़ियाँ बहार निकलती हुई जब मैं घबराहट में घुमा और देखा की यह कौन था.
एक आदमी वहां छाओं में खड़ा था, उसका हाथ अभी भी मेरे कंधे पर था.
यह आदमी कौन है? वह यहाँ क्या कर रहा है?
अगला हिस्सा में पता चलेगा
अम्मी उसको एक असली प्रोफेशनल माहिर रंडी जैसी चूस रही थी — गहरे, उत्तेजित और बहुत hi माहिर तरीके से. उसका सर परफेक्ट लाया में हिल रहा था, गाल अंदर को खींचे हुए, जीभ उसके मोठे लुंड के नीचे वाले हिस्से पर ज़ोर ज़ोर से काम करते हुए जबकि एक हाथ नीचे की तरफ हिलता था और दूसरा उसके अंडो को नरमी से पकड़ कर मसलता था.
उसने उसको गले तक पूरा अंदर ले लिया, थोड़ा सा गैगिंग की आवाज़ आती थी जो सेंसेशन को और तेज़ कर देती थी बिना रुकावट के, लार उसकी थोड़ी से चमकती हुई लम्बी लड़ियों में टपक रही थी.
उसने उसकी तरफ ऊपर देखा वासना से भरी बेचैन आँखों से — बड़ी, पूरी तरह समर्पित और इच्छा से जलती हुई — जैसे उसका लुंड दुनिया में सबसे ज़रूरी चीज़ थी.
वह ऐसा क्यों कर रही थी? क्यूंकि वह अपने नए रोले में पूरी तरह समर्पित हो चुकी थी. अपने पति के साथ धोखा करने का हराम एहसास जबकि वह फ़ोन पर बात कर रहा था, पकडे जाने का खतरा और गजेंद्र के लिए उसकी गहरी वासना ने उसको एक असली माहिर बना दिया था.
वह उसको पूरी तरह खुश करना चाहती थी, उसको अपना कण्ट्रोल खोने देना चाहती थी और इसकी उत्तेजना ने उसको सब कुछ देने पर मजबूर कर दिया — कोई रोक नहीं, कोई शर्म बाकी नहीं थी.
गजेंद्र ने अपनी सिसकियों को ज़ोर से कण्ट्रोल करने की कोशिश की. उसके मुँह की गरम गीली चूस, जिस तरह उसकी जीभ हिलती और घूमती थी, उसके गले की टाइट पकड़ — यह सब उसके शरीर में सुख की तेज़ लहार भेज रहा था.
उसके कमर के हिस्से अनायासे हिल रहे थे लेकिन उसने होंठ काट लिए, धीरे धीरे सांस ली और अपनी आवाज़ को नार्मल रखने की कोशिश की. फिर भी छोटी छोटी सिसकियाँ शब्दों के बीच निकल जाती थी.
उसके चेहरे पर कन्फूसिओं साफ़ दीखता था: वह अपनी बीवी के पति से नार्मल बात करने की कोशिश कर रहा था जिसकी अम्मी अभी उसके लुंड पर मुँह रखे हुए थी, जबकि वही अम्मी उसकी तरफ पुरे भूखे समर्पण से देख रही थी.
हर बार जब अम्मी उसको और गहरा ले लेती या ज़ोर से चूसती उसकी आवाज़ रुक जाती या पहात जाती.
अब्बा की आवाज़ स्पीकर से साफ़ आयी, परेशां और थोड़ी बेचैन. “गजेंद्र भाई, शाहिदा कहाँ है? उसने कहा था की जब तुम काम ख़तम कर लोगे तोह मुझे कॉल करेगी लेकिन देर हो रही है. क्या वह अभी भी तुम्हारे साथ है?”
गजेंद्र का हाथ अम्मी के सर पर थोड़ा और टाइट हो गया जब उसने उसके लुंड के सर पर जीभ घुमाई. “वह… यहाँ है भाई. वह मुझे… फाइल्स में मदद कर रही है. अभी वह… नीचे वाली फाइल्स… ोुह्ह्ह!!! को ठीक से… टाइट जगहों पर काम कर रही है.”
उसने “टाइट” शब्द पर रुकावट महसूस की क्यूंकि उसी पल अम्मी ने उसको फिर से गले तक गहरा ले लिया था, उसकी नाक उसके पेट से लगी हुई थी. गीली “ग्लुक” की आवाज़ इतनी ज़ोर से थी की मैं भी बहार से साफ़ सुन सका.
अब्बा को यह इन्युएन्दो बिलकुल समझ नहीं आया. वह सिर्फ रहत महसूस कर रहा था लेकिन अभी भी परेशां था. “ओह अच्छा. लेकिन इतना टाइम क्यों लग रहा है? यह किस तरह की फाइल्स हैं? क्या वह जल्दी घर आ सकती है? मैं परेशां हो रहा हूँ.”
गजेंद्र ने जवाब देने की कोशिश की जबकि अम्मी अब दोनों हाथ इस्तेमाल कर रही थी — एक गीले लुंड को हिलाते हुए दूसरा नीचे की तरफ ट्विस्ट करते हुए — उसका सर और तेज़ हिला रहा था.
“फाइल्स… बहुत मोती हैं भाई. उससे… उन्हें ध्यान से… दोनों हाथों से… सब कुछ ठीक से ओर्गनइजे करना पड़ता है. वह… बहुत अच्छे से काम कर रही है.” उसकी आवाज़ फिर से पहात गयी जब अम्मी ने उसके आसपास गले के मसल्स से उसके लुंड को निचोड़ दिया.
मैं खिड़की से देख रहा था, मेरा दिल ज़ोर से धड़क रहा था. मेरी अपनी अम्मी घुटनो के बल बैठी थी, दुसरे आदमी के लुंड को एकदम प्रोफेशनल माहिर तरीके से चूस रही थी जबकि उसका पति उससे बात कर रहा था.
वह इतनी खोयी हुई थी — आँखें गजेंद्र के चेहरे पर लगी हुई, वासना और ज़रुरत से भरी. मुझे इमोशंस का तूफ़ान महसूस हो रहा था: शॉक, अब्बा के साथ जो वह कर रही थी उसके लिए घिन लेकिन साथ hi एक शर्मनाक तेज़ उत्तेजना जो मेरे लुंड को दर्द भरा थ्रोब दे रहा था.
यह मेरी अम्मी थी — वही औरत जो मुझे देर से घर आने पर डांटती थी, जो हिजाब पहनती थी और ,,., पढ़ती थी — अब गजेंद्र के लिए एक पूरी रंडी जैसी बेहवे कर रही थी.
मुझे यकीन नहीं हो रहा था फिर भी मैं देखना नहीं रोक प् रहा था. मेरा हाथ पहले से hi मेरी पंत में घुस चूका था, धीरे धीरे हिल रहा था जबकि शर्म और उत्तेजना अंदर लड़ रहे थे.
अब्बा और सवाल पूछता रहा. “क्या वह ठीक है? उसकी आवाज़ पहले अजीब सी थी. क्या तुम दोनों अकेला हो? वह अभी एक्साक्ट्ली क्या कर रही है?”
गजेंद्र ने नीचे अम्मी की तरफ देखा जो अभी उसको फिर से पूरा अंदर ले चुकी थी, उसकी आँखें पानी से भरी लेकिन अभी भी उसकी तरफ उसी भूखी एक्सप्रेशन से देख रही थी.
“वह… अभी ज़मीन पर है… नीचे वाली फाइल्स को हैंडल कर रही है… उसमें बहुत म्हणत कर रही है. वह दोनों हाथ इस्तेमाल कर रही है… ताकि सब कुछ… ठीक से सॉर्टेड हो जाए.”
वह ज़ोर से सांस ले रहा था, हर बार जब अम्मी की जीभ उसके सर के सेंसिटिव हिस्से पर दबती सिसकियों को छुपाने की कोशिश कर रहा था.
अम्मी ने फाइनली उससे फ़ोन ले लिया. उसने चूसना बिलकुल नहीं रोका — उसने उसके लुंड के सर को मुँह में रखा, चूसती और चाटती रही जबकि वह बात करती थी, उसके शब्द tut-te हुए और सांस भरे हुए थे.
“Hello… हुसैन… हाँ मैं यहाँ हूँ… काम में मदद कर रही हूँ… यह… बहुत डिमांडिंग है…”
उसने रोक कर उसको गहरा ले लिया, एक गीली “स्लुर्प” की आवाज़ फ़ोन पर साफ़ सुनाई दी, फिर बोली, “मैं… पेपर्स को सॉर्ट कर रही हूँ… टाइम लग रहा है क्यूंकि… बहुत सारे हैं…”
अब्बा और भी परेशां लगा. “शाहिदा, तेरी आवाज़ कुछ ठीक नहीं लग रही. क्या थक गयी है? यह अजीब सी आवाज़ क्या है? लगता है जैसे… चूसने या गीली चीज़ की. क्या वहां सब ठीक है?”
अम्मी ने सिर्फ इतना टाइम के लिए मुँह हटाया की साफ़ जवाब दे सके फिर तुरंत वापस चूसने लगी, उसका सर फिर से हिलने लगा.
“यह ठीक है… बस पेपर्स… सरसरा रहे हैं… मैं ठीक हूँ…”
फिर से एक गीला “ग्लुक” की आवाज़ आयी जब उसने उसको गहरा ले लिया. वह जान बूझ कर कभी कभी जवाब देर से देती थी, चूसने की आवाज़ें सन्नाटे को भरने देती थी, जैसे खतरे ने उसको और भी उत्तेजित कर दिया हो.
गजेंद्र, थोड़ा टाइम अपने आप को सँभालने के लिए, चुपके से कमरे से बहार निकल गया पानी पिने. अम्मी घुटनो के बल hi रही, फ़ोन अभी भी एक हाथ में. उसने अपनी थोड़ी और मुँह से लार को हाथ के पीछे से पोछा, उसको अपने लाल चेहरे पर फैला दिया.
यह नज़ारा बहुत hi गन्दा और बेहया था — उसका लिपस्टिक फैला हुआ, लार उसकी गर्दन से उसकी ड्रेस के आगे तक टपक रहा था, उसकी आँखें वासना से धुंधली. उस पल ने मुझे ज़ोर से मारा.
अपनी अपनी अम्मी को दुसरे आदमी के लुंड को इतने गहरे से चूसने के सबूत को साफ़ करते हुए देख कर मेरे अंदर कुछ टूट गया.
मैंने और तेज़ हिलना शुरू कर दिया, मेरा हाथ तेज़ चल रहा था, शर्म तेज़ जल रही थी लेकिन उत्तेजना उससे भी ज़्यादा स्ट्रांग थी. यह इतना बेइज़्ज़त करने वाला, इतना रंडी जैसा था और मुझे नफरत थी की यह मुझे कितना छोड़ रहा था.
अब्बा की कन्फ्यूज्ड आवाज़ स्पीकर से आती रही. “शाहिदा? मैंने अजीब सी आवाज़ें सुनी… जैसे चूसने या गले में अटकने वाली. वहां क्या हो रहा है? क्या गजेंद्र भाई ठीक हैं? यह आवाज़ कैसी है?”
तभी गजेंद्र वापस आ गया. उसने कोई बात नहीं की. उसने सीधा अम्मी के सर को दोनों हाथों से पकड़ लिया, उसका चेहरा अपनी तरफ घुमा दिया और अपना लुंड उसके मुँह में ज़ोर से घुसा दिया.
उसने उसके गले को ज़ोर ज़ोर से और तेज़ छोड़ना शुरू कर दिया, उसके सर को मज़बूती से पकडे हुए जबकि उसके कमर के हिस्से आगे की तरफ झटके मार रहे थे.
अम्मी के हाथ उसकी जाँघों पर जा फटे, उसने उन्हें मज़बूती से पकड़ लिया ताकि संभल सके जब वह उसके मुँह का इस्तेमाल कर रहा था. उसकी आँखें पानी से भर गयी, हर झटके के साथ लार उड़ता जा रहा था लेकिन उसने कोई रोक नहीं लगायी — वह सब ले रही थी, उसका शरीर ज़ोर के झटकों से हिल रहा था.
आवाज़ें बहुत ज़ोर और गन्दी थी. “Gluck-gluck-gluck!” बार बार गूँज रही थी जब उसका लुंड उसके गले में ज़ोर से लग रहा था.
गीली “slurp-slurp” की आवाज़ें गले अटकने वाली “gack-gack” आवाज़ों के साथ मिल रही थी हर बार जब वह और गहरा जाता.
लार इधर उधर छींटे मार रहा था और लम्बी लड़ियों में टपक रहा था. फ़ोन रफ़ हरकत के दौरान टेबल से गिर गया था और उनके पास ज़मीन पर मुँह ऊपर करके पड़ा था, अभी भी लाउडस्पीकर पर. अब्बा की आवाज़ साफ़ आती रही, और परेशानी बढ़ती जा रही थी.
“शाहिदा? गजेंद्र भाई? यह कैसी आवाज़ है? लगता है जैसे कोई गले में अटक रहा हो! शाहिदा, मुझे जवाब दो! तू इतनी खामोश क्यों है? क्या हो रहा है?”
गजेंद्र उसके मुँह को ज़ोर से छोड़ता रहा, उसके सर पर मज़बूत पकड़, उसका इस्तेमाल करते हुए जैसे वह सिर्फ इसी के लिए बानी थी. अम्मी के हाथ उसकी जाँघों पर hi रहे, कभी और टाइट पकड़ते, कभी ऊपर की तरफ सरकते जैसे उसको और गहरा अंदर खींचना चाहती हो.
वह अब पूरी तरह खोयी हुई थी — अब कोई बात नहीं, सिर्फ उसका लुंड बार बार उसके गले के अंदर जाता रहा. गीली लाया वाली ग्लुकिंग और स्लुर्पिंग की आवाज़ें कमरे में भर गयी और सीधा अब्बा के कानों तक पहुंची.
अब्बा पूछता रहा, उसकी आवाज़ परेशानी और घबराहट से और तेज़ होती गयी.
“Hello? क्या कोई सुन रहा है? यह कैसी आवाज़ है? लगता है जैसे… मुझे नहीं पता… गीली आवाज़ें या कुछ टूट रहा हो. शाहिदा, क्या तू ज़ख़्मी है? गजेंद्र भाई, प्लीज जवाब दो!”
गजेंद्र की सांस तेज़ और बेहाल हो गयी. उसने ज़ोर से सिसकी भरी — गहरी, रोक नहीं पायी “फूऊक! आआह्ह्ह!” जब वह ज़ोर से झाड़ गया, अम्मी के सर को पूरा नीचे पकडे हुए अपना गरम वीर्य सीधा उसके गले के अंदर निकाल दिया.
अब्बा ने तुरंत फ़ोन पर रियेक्ट किया. “गजेंद्र भाई? क्या तू ठीक है? तू दर्द में था क्या! क्या हुआ? शाहिदा, मुझे बोल!”
अम्मी ने सब कुछ निगलने की कोशिश की लेकिन कुछ मोटा वीर्य मुँह के कोने से बहार निकल आया और फ़ोन के स्क्रीन पर गिर पड़ा.
उसने मुँह हटाया, खांसी और सांस फूलते हुए, मोती लार और वीर्य की लड़ियाँ उसके होंठों से उसके लुंड तक लटकती हुई थी. उसने ज़ोर से खांसी, उसका शरीर हिल रहा था जब वह अपना गाला साफ़ करने की कोशिश कर रही थी.
अब्बा की आवाज़ अब बिलकुल घबराई हुई थी. “शाहिदा? क्या चल रहा है? मैंने सुना ग्रोएन और अब खांसी! क्या तू ज़ख़्मी है? मुझे बता क्या हुआ!”
अम्मी ने कांपते हाथों से फ़ोन उठाया, अभी भी खांसी और सांस फूलते हुए.
“H-Hussein… सब ठीक है… मैं बस… पानी गले में अटक गया… जब हम काम ख़तम कर रहे थे… काम बहुत तेज़ हो गया… लेकिन अब हम ख़तम कर चुके हैं…” वह अभी भी ज़ोर ज़ोर से सांस ले रही थी, उसकी आवाज़ फटी हुई और टूटी हुई थी.
उसने जल्दी से फ़ोन काट दिया पहले hi के अब्बा और सवाल पूछ सके.
गजेंद्र बिस्तर पर लेट गया, ज़ोर ज़ोर से सांस लेते हुए और बहुत hi संतुष्ट दीखता था. अम्मी ने फिर से अपना मुँह पोछा, फिर दोनों धीरे धीरे हंसने लगे.
“तेरा पति कितना बड़ा बेवक़ूफ़ है,” गजेंद्र ने मुस्कुराते हुए कहा. “उसने सच में यह माना की तू पानी गले में अटकने से खांसी कर रही थी जब मैं अपना वीर्य तेरे मुँह के अंदर और गले के नीचे निकाल रहा था. कितना परफेक्ट बेवक़ूफ़ पति है.”
अम्मी मुस्कुरायी, अभी भी थोड़ी सांस फूली हुई. “उससे कुछ पता नहीं. वह हर बात मानता है. वह इतना अँधा है.”
बाद में अम्मी बिस्तर पर लेती हुई थी उसकी टांगें चौड़ी फैली हुई थी और दोनों एक दूसरे को चूमने लगे.
कुछ देर बाद वह दोनों बिलकुल नंगे थे सिर्फ खुली हुई पीली ब्लाउज के अलावा जो कुछ भी नहीं छुपा रही थी.
गजेंद्र, वह भी पूरा नंगा, उसकी जाँघों के बीच घुटनो के बल बैठ गया और धीरे धीरे भूखे अंदाज़ में उसकी छूट चाटने लगा.
उसकी जीभ लम्बी और चौड़ी लपटों में उसकी गीली छूट के होंठों पर चलती रही, उसकी उत्तेजना का स्वाद लेते हुए फिर उसके सूजे हुए क्लीट पर ध्यान देता.
उसने उसको नरमी से अपने मुँह में ले लिया, जीभ से उसपर थपथपाते हुए जबकि दो उँगलियाँ अंदर घुसती हुई और सही जगह ढूंढने के लिए मुड़ती हुई थी.
अम्मी की कमर बिस्तर से ऊपर उठ गयी जब वह उसकी छूट को चाट रहा था, उसकी थोड़ी उसके रास से चमक रही थी. उसकी जीभ और चूसने की गीली आवाज़ें उसकी सिसकियों के साथ मिल रही थी.
“आअह्ह्ह… ोुह्ह्ह्ह हाँ… मेरी छूट चाट… मममफ… तेरी जीभ बहुत अच्छी लग रही है… आअह्ह्ह वही… मत रुक… ोुह्ह्ह्ह मैं तेरी रंडी हूँ…”
“तेरा स्वाद बहुत मीठा है,” गजेंद्र उसके ऊपर से बोलै, और गहरा चाटने लगा. “मेरे लिए कितनी गीली हो गयी है.”
वह ऊपर चढ़ गया, अपने लुंड के सर को उसके एंट्री पॉइंट पर रगड़ने लगा. अम्मी उसकी तरफ बेचैन आँखों से देख रही थी.
“प्लीज… अंदर दाल दो… अपनी रंडी को छोड़… मुझे तेरा बड़ा लुंड अंदर चाहिए… आअह्ह्ह हाँ… मुझे भर दो…”
उसने धीरे से अंदर धकेला, फिर ज़ोर से झटका मारा.
अम्मी सुख से चिल्लाई जब उसने गहरे और ताकतवर झटकों से उसको छोड़ना शुरू कर दिया.
बिस्तर हर झटके के साथ ज़ोर से सरसरा रहा था. उसकी सिसकियाँ और तेज़ और बेचैन होती गयी.
“आअह्ह्ह! कितना गहरा… हाँ… मुझे और ज़ोर से छोड़… ोुह्ह्ह्ह मैं तेरी रंडी हूँ… आअह्ह्ह!”
सुख के चरम पर पहुँच कर उसने पीली ब्लाउज के आगे वाले हिस्से को पकड़ लिया और उसको ज़ोर से पहाड़ दिया, कपडा उसके बेचैन हाथों के नीचे आसानी से पहात गया.
वह पूरी तरह आज़ाद महसूस करना चाहती थी, अपने आप को बिलकुल खोल देना चाहती थी जबकि तेज़ सुख उसपर छ रहा था.
बाहरी मैं और नहीं सह सका. अपनी अम्मी को रंडी जैसी भीख मांगते हुए और ज़ोर से छोड़ते हुए देख कर मैंने तुरंत अपना लुंड बहार निकाल लिया और हिलना शुरू कर दिया.
शर्म मेरे अंदर जल रही थी — मैं सबसे बुरा बीटा था, अपनी hi अम्मी को इस तरह इस्तेमाल होते हुए देख कर मुठ मार रहा था — लेकिन मैं रुक नहीं प् रहा था.
मेरा हाथ तेज़ से तेज़ होता गया जब मैंने गजेंद्र को उसके अंदर ज़ोर से धकेलते हुए देखा.
जैसे hi मैं झड़ने वाला था, पीछे से एक हाथ अचानक मेरे कंधे पर आ गिरा.
डर इतना तेज़ और वरपॉवरिंग था. मेरा शरीर हिल उठा और मैं वही ज़ोर से झाड़ गया, वीर्य की लड़ियाँ बहार निकलती हुई जब मैं घबराहट में घुमा और देखा की यह कौन था.
एक आदमी वहां छाओं में खड़ा था, उसका हाथ अभी भी मेरे कंधे पर था.
यह आदमी कौन है? वह यहाँ क्या कर रहा है?
अगला हिस्सा में पता चलेगा