Meri Aashiqui Tumse hi (Bhai aur Behen) - Page 10 - SexBaba
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Meri Aashiqui Tumse hi (Bhai aur Behen)

मेरी आशिकी तुमसे hi.....

अपडेट 86

सैर : यार वो प्रिंस का फ़ोन नहीं लग रहा बहुत देर से तरय कर रही हूँ... मगर बुजी आ रहा है.... मुझे उसकी फ़िक्र हो रही थी.... वो ठीक से पहुंचा की नहीं.... तेरी उस से कुछ बात हुई की नहीं यही पूछने मैं यहाँ चली आयी....

मैक्स : हाँ मेरी बात हो गयी है.... वो ठीक से वहां पहुँच गया है.... और वहां उसने रेंट पे एक रूम भी ले लिया है....

फिर मैक्स उन दोनों को वो सब बताता है जो प्रिंस ने उसे बताया था..... वो उन्हें सिर्फ उतना hi बताता है जितना ज़रूरी है.... अब उन्हें वो ये बताता भी तो कैसे की प्रिंस ने वहां क्या क्या देखा और महसूस किया.... यहाँ तक की सुल्तानगढ में रह के भी वो यहाँ सब को देख पा रहा है..... जब की इस बात को जान के वो खुद बेहद हैरान है.....

इस सब को जान के कुछ और भी लोग हैं जो प्रिंस मैक्स और ज़रा की तरह हैरान हैं और वो हैं.....

अब आगे.....

ये लोग और कोई नहीं बल्कि बेगम साहिबा और शलाका हैं....

बेगम साहिबा : ये आप क्या कह रहे हैं....?

बाबा : वो hi जो सच है..... प्रिंस सुल्तानगढ पहुँच चूका है.....

दोनों एक साथ : Kyaaaaaaaaaa....? A....gar ये सच है तो फिर तो प्रिंस का क्या होगा....? क्या मलिका सुनहरी प्रिंस को माफ़ कर पाएगी....? क्या प्रिंस उसके गुस्से को शांत कर पायेगा....? और सब से बड़ी बात तो ये की जब प्रिंस मलिका सुनहरी और पारी आमने सामने होंगे तब क्या होगा....?

बाबा की बात सुन के दोनों बुरी तरह से चौंक जाती हैं.... दर के मारे उनकी हालत खराब हो जाती है.... इतना दर तो उन्हें शैतान से भी नहीं है जितना वो सुल्तानगढ और मलिका सुनहरी के नाम से दर जाती हैं.... पूरा गुलिस्तां सुल्तानगढ और ख़ास कर के मलिका सुनहरी के नाम से काँप जाता है.... मगर हमेशा से ऐसा न था.... एक वक़्त था जब मलिका सुनहरी के नाम से गुलिस्तां जी उठता था.... तो फिर अचानक से ऐसा क्या हो गया जो मलिका सुनहरी के नाम से यहाँ की परियां hi नहीं बल्कि पूरा गुलिस्तां डरने लगा.....? क्यों प्रिंस छह कर भी उस दर को नहीं मिटा पाया....? आखिर इस सब की वजह क्या थी.....? आखिर क्यों आज भी वो दर वो खौफ यहाँ सभी के दिलो में मौजूद है....? आखिर दर है तो है किस बात का और kyunnnnnnnnnnn.....?

इस सब का पता वक़्त आने पे चलेगा फिलहाल चल के पता करते हैं की बाबा आखिर क्या जवाब देते हैं बेगम साहिबा और शलाका के सवाल का.....?

बाबा : आगे का तो पता नहीं मगर हाँ इस वक़्त प्रिंस को कोई खतरा नहीं है.... न hi पारी से और न hi शैतानो से.... जब तक प्रिंस सुल्तानगढ में है.... शैतान उसका कुछ बिगाड़ नहीं सकते.... न hi पारी.... मगर रही बात मलिका सुनहरी की तो उसके बारे में मैं भी कुछ नहीं कह सकता.... सुल्तानगढ पे मलिका सुनहरी की हुकूमत चलती है.... ये वो जगह है जो उसने खुद अपने हाथों से प्रिंस के लिए बड़े प्यार बनायीं थी.... और फिर गुस्से में खुद अपने hi हाथों से इसकी खूबसूरती को बदसूरती में बदल दिया.... ये जगह जितनी खूबसूरत है उतनी hi खौफनाक भी.... सुल्तानगढ की सबसे खूबसूरत जगह है वो महल जो मलिका सुनहरी और प्रिंस के सच्चे प्यार की यादगार है.... जिसे प्रिंस ने खुद बनाया था.... वो हमेशा कहा करता था की अपनी जान के साथ वो साड़ी ज़िन्दगी यहाँ गुज़ारना चाहता है.... मगर किस्मत को ये मंज़ूर न था.... किस्मत ने प्रिंस को मलिका सुनहरी के साथ साथ पारी से भी दूर कर दिया.... जिस हवेली को प्यार की निशानी बनना था वो खौफनाक मौत के किले में तब्दील हो गयी.... यहाँ दोनों hi चीज़ें दफ़न हैं तकलीफदेह ज़िन्दगी और हस्ती मुस्कुराती मौत.... वो मौत जो ज़िन्दगी से ज़्यादा हसीं और खुशनुमा है..... यहाँ ज़िन्दगी और मौत दोनों का राज है..... किसकी ज़िन्दगी और किसकी मौत ये कहना थोड़ा मुश्किल है....? अब तक तीनो hi इस से अछूते नहीं रह पाए हैं.... तीनो ने ज़िन्दगी और मौत दोनों का मज़ा चखा है.... वो ज़िन्दगी जिसने जितनी ख़ुशी न दी उस से कई ज़्यादा तकलीफ दी है.... और मौत जिसने जितनी तकलीफ न दी उस से कई ज़्यादा ख़ुशी दी है.... अब ख़ुशी किसके हिस्से में आयी और तकलीफ किसके हिस्से में ये उन तीनो के सिवाए और कोई नहीं जानता..... (मगर हाँ कोई ऐसा भी है जिसको इन तीनो की ख़ुशी और तकलीफ से ख़ुशी भी होती थी और तकलीफ भी....)

बेगम साहिबा : बाबा उस वक़्त क्या होगा प्रिंस का जब मलिका सुनहरी को ये पता चलेगा की प्रिंस सुल्तानगढ में आ चूका है....?

बाबा : उसे इस बात का पता चल चूका है.... जैसे hi प्रिंस ने सुल्तानगढ में पहला कदम रखा मलिका सुनहरी ने उसका ठीक वैसे hi स्वागत किया जैसा वो हमेशा से करती आयी है.... पहले तो उसने प्रिंस के ऊपर उसके पसंद के फूलों की बारिश की और फिर अपनी उस प्यारी दिल को छू जाने वाली हंसी की आवाज़ प्रिंस को सुनाई जिसका वो दीवाना है.... और फिर उसने वो किया जिसे सोच के दिल देहल उठा.... उसने सुलतान के सबसे प्यारे और जिगरी दोस्त शेरा (वो विशालकाय शेर जिसने प्रिंस पे छलांग लगायी थी) और उसकी ताक़त को प्रिंस को मारने के लिए उसपे चोर दिया.... प्रिंस की जान लेने के लिए शेरा ने उसपे छलांग लगा दी.....

बाबा की इस बात को सुनते hi गुलिस्तां के साथ साथ वहां मजूद सभी का दिल देहल गया सब की आँखों से आंसू बहने लगे..... उनके लैब सील से गए थे... जुबां जैसे पत्र सी गयी थी.... उन्हें बस एक hi चीज़ महसूस हो रही थी.... दिल में उठता हुआ बेतहाशा दर्द.... ये कहते कहते बाबा की आँखें भी नाम हो गयी thi....Baba ने अपने जज़्बातों को काबू किया और मगर कह के वो खामोश हो गए.....

बाबा : मगर.....

बाबा के मुँह से मगर सुन के सब को एक झटका सा लगा..... उम्मीद की एक किरण सी सब के दिल में चमक उठी.... ये सोच के की शायद असल बात वो नहीं है जो वो समझ रहे हैं.... हो सकता है की बात कुछ और hi हो..... मगर ये भी मुमकिन नहीं की शेरा के वार से कोई बच पाए..... शेरा में बेइन्तेहाँ पावर्स हैं.... जिनका मुक़ाबला इस पूरी क़ायनात में कोई नहीं कर सकता सिवाए सुलतान के.... शेरा को देख के शैतानो का दिल भी देहल जाता है.... दो hi लोग हैं इस पूरी कायनात में जो शेरा को काबू कर सकते हैं.... पहला सुलतान और दूसरी उसकी जान मलिका सुनहरी.... शेरा जितना प्रिंस को चाहता है उतना hi मलिका सुनहरी को भी... दोनों hi उसकी जान हैं.... क्यों....? और Kaise....?"Is सब के बारे में आगे पता चलेगा...."

बाबा : मगर इस से पहले की शेरा प्रिंस को जान से मारता अचानक वहां से सब कुछ गायब हो गया.... बस रह गयी तो मलिका सुनेहि की प्यारी सी दिल को छू जाने वाली हंसी.... उसकी हंसी में उस वक़्त जितना गुस्सा था उतना hi दर्द भी और साथ साथ बेइन्तेहाँ प्यार भी.....

बाबा की बात सुन के सब को राहत महसूस हुई.... ये बात अलग थी की अब भी सब की आँखों से आंसू अब भी बह रहे थे... और वो प्रिंस की सलामती की दुआ कर रहे थे....

मगर फिर बाबा ने जो कहा उसे सुन के दोनों एक बार फिर से बुरी तरह से दर गयी.... दोनों का दिल ज़ोर से धड़क गया.... न चाहते हुए भी दोनों के मुँह से चीख निकल गयी.....

बाबा : प्रिंस वहां बिलकुल भी सेफ नहीं है.... उसे कभी भी कुछ भी हो सकता है.... उसकी जान को भी खतरा है....

दोनों : क्याआआआआ....?

बाबा : हाँ.....

बेगम साहिबा : T....To... क्याआ.... होगा प्रिंस का....? क्या मलिका सुनहरी उसके साथ कुछ गलत करेगी....?

बाबा : पता नहीं....

बेगम साहिबा : क्यों न हम प्रिंस को वहां से बाहर निकाल लाये....?

बाबा : नहीं ये मुमकिन नहीं.... क्यों की प्रिंस के सफर की शुरुवात सुल्तानगढ से hi होनी है.... जिसका आगाज़ हो चूका है... प्रिंस वहां पहुँच चूका है.... वहीँ से उसे अपनी पावर्स को हासिल करने का तरीका पता चलेगा.... और वहीँ प्रिंस सेफ भी रहेगा....

शलाका : हम उसे वहां से ला नहीं सकते तो क्या वहां रह के उसकी हिफाज़त तो कर hi सकते हैं न....

बाबा : ये भी मुमकिन नहीं.... क्यों की वहां जाते hi हमारी पावर्स बांध के रह जायेगी.... हम वहां अपनी पावर्स का इस्तेमाल खुद को बचने के लिए तो कर पाएंगे मगर अपनी पावर्स से वार करना नामुमकिन है.... हमारे लिए तो क्या इस पूरे ब्रह्माण्ड में प्रिंस और मलिका को चोर के अपनी पावर्स का इस्तेमाल सुल्तानगढ में करना किसी के लिए भी मुमकिन नहीं..... फिर भी अगर किसी ने वहां अपनी पावर्स से वार किया तो उस पावर्स से जितना नुक्सान और तकलीफ मलिका सुनहरी या फिर प्रिंस को होगी उतनी hi तकलीफ उसको भी होगी जिसकी वो पावर्स है....

बेगम साहिबा रट हुए : तो आप क्या चाहते हैं की हम हाथ पे हाथ धरे बैठे रहें.... और प्रिंस को मौत के मुँह में जाने दें..... नहीं बाबा ये नहीं होगा हमसे....

बाबा : इस बात की तकलीफ तो मुझे भी है....

शलाका : बाबा कोई तो रास्ता होगा जिस से प्रिंस को वहां से निकाला जाए और मलिका सुनहरी उसे कुछ न करे.....?

बाबा : उसके बस दो hi रास्ते हैं.... पहला ये की प्रिंस जितनी जल्दी हो सके अपनी पूरी पावर्स को हासिल कर ले.... ताकि उसका कोई कुछ न बिगाड़ सके.... जिसमे काफी वक़्त लगेगा... इस बीच किसी भी उन्होनी का होना मुमकिन है....

शलाका : और दूसरा रास्ता....

बाबा : दूसरा रास्ता ये की प्रिंस मलिका सुनहरी को जान से मार दे.... जो की नामुमकिन है.... प्रिंस हस्ते हस्ते अपनी जान मलिका सुनहरी पे क़ुर्बान कर तो सकता है मगर मलिका की जान वो कभी नहीं ले सकता.... मलिका को एक खरोच भी आये ये प्रिंस कभी बर्दाश्त नहीं कर सकता.... प्रिंस को मलिका सुनहरी से सिर्फ और सिर्फ सुलतान का मलिका के लिए बेइन्तेहाँ प्यार hi बचा सकता है.... और कुछ नहीं जो की पारी के रहते मुमकिन नहीं.... प्रिंस पारी को चाहता है और सुलतान मलिका सुनहरी ko.....isi तरह मलिका सुनहरी सुलतान को चाहती है और प्रिंस से नफरत करती है वहीँ पारी प्रिंस को चाहती है और सुलतान से नफरत करती है..... इनके बीच दो hi चीज़ें हैं और वो है एक दूसरे के लिए बेइन्तेहाँ प्यार और साथ hi बेइन्तेहाँ नफरत भी.... अब जीत प्यार की होती है या नफरत की ये आगे पता चलेगा....

बेगम साहिबा : तो अब आप hi बताइये की क्या किया जाए....?

बाबा : एक hi रास्ता है वो ये की जल्द से जल्द प्रिंस अपनी पूरी पावर्स को हासिल कर ले.... उसके लिए मुझे खुद वहां जा के उसे आगे का रास्ता दिखाना होगा....

बेगम साहिबा : क्या हम भी साथ चल सकते हैं....?

बाबा : नहीं इस वक़्त मुझे वहां अकेले hi जाना होगा.... वहां सब का जाना प्रिंस के लिए खतरा बन सकता है... कहीं ऐसा न हो की सब को वहां देख मलिका सुनहरी कुछ गलत समझ बैठे... और प्रिंस पे जान लेवा हुम्ला कर बैठे.... इस वक़्त प्रिंस के पास उतनी पावर्स नहीं है की वो मलिका सुनहरी का सामना कर सके....

शलाका : मगर प्रिंस के जिस्म में आप के साथ साथ काय जिनि की नीलम पावर्स भी तो है....

बाबा : हाँ है मगर उनका कैसे इस्तेमाल करना है ये प्रिंस को नहीं पता.... और वैसे भी मलिका के पास बेशुमार पावर्स है जिसके के आगे प्रिंस के जिस्म में जो पावर्स हैं वो दो पल भी न टिक पाएगी.... अपना दम तोड़ देगी....

बेगम साहिबा : तो फिर देर किस बात की है... जल्दी जाइये और प्रिंस की मदत कीजिये....

बाबा : नहीं अभी नहीं.... मैं वहां 2 दिन बाद जाऊँगा.... वहां जाने से पहले मुझे पूरी तैयारी करनी होगी.... ताकि मैं जब वहां जाऊं तब मलिका सुनहरी को इस बात की खबर न हो.... मैं वहां उसी वक़्त जा पाऊंगा जो वक़्त झूटी सुबह का होगा....

बेगम साहिबा : झूटी सुबह....

बाबा : हाँ झूटी सुबह.... ये ऐसा वक़्त है जो सुबह सूरज के निकलने से ठीक पहले 10 मिनट्स का होता है.... उस वक़्त सूरज की हलकी रौशनी सी हर तरफ फैल जाती है ऐसा लगता है जैसे की सुबह हो गयी... मगर असल में ऐसा होता नहीं.... वो वक़्त ऐसा होता है जो न hi सुबह का वक़्त होता है न hi रात का बस झूट होता है एक छलावा जैसा.... उस वक़्त मलिका सुनहरी से चुप के वहां जाय जा सकता है.... उस वक़्त उसे कुछ पता नहीं चल पायेगा की वहां कोई आया भी है....

बेगम साहिबा : तो क्यों न उस वक़्त हम भी आप के साथ वहां जाए....?

बाबा : नहीं कभी नहीं सब के वहां जाने से हो सकता है कुछ गलत हो जाए.... मलिका सुनहरी को पता चल जाए.... और अगर ऐसा हुआ तो जाने क्या होगा.... प्रिंस की जान को भी खतरा हो सकता है... और मैं कभी भी ये नहीं चाहूंगा की प्रिंस को कोई खतरा हो... मुझे उम्मीद है की आप सब भी कभी प्रिंस की जान को खतरे में नहीं डालना चाहेंगे....

बेगम साहिबा बाबा की बात समझ के खामोश सी हो जाती है.... बाबा उनसे अलविदा ले के अपनी तैयारी करने चल देते हैं....

इधर धरती पे प्रिंस मैक्स से बात करने के बाद सोचता हुआ बहार की तरफ चल देता है....

उधर अरबाज़ अपने पूरे परिवार के साथ नाश्ता कर रहे होते हैं.... आज उनकी आँखों में आंसू के साथ साथ उनके होंठों पे मुस्कराहट भी है.... जिसे देख उसकी पत्नी को हैरानी सी होती है....

जमीला से अपने पति को देख के पूछती है....

जमीला : क्या बात है....? आपकी तबीयत तो ठीक है न....? एक तरफ आपकी आँखों में आंसू हैं वहीँ आपके होंठों पे मुस्कराहट भी है....

अरबाज़ : हाँ बात hi कुछ ऐसी है.... मेरी आँखों में जो आंसू हैं वो अपनी जान से प्यारी बेटी सोना की तकलीफ की वजह से है.... और होंठों पे जो ख़ुशी है वो इस बात से है की घर के जिस हिस्से को हम पिछले 3 साल से रेंट पे देना चाहते थे वो काम आज आखिर हो hi गया....

जमीला : क्या मतलब....? मैं कुछ समझी नहीं....

इस से पहले की अरबाज़ कुछ कहते उनके छोटे भाई इमरान से रहा न गया और वो बीच में hi बोल पड़े....

इमरान : भाभी बात hi ख़ुशी की है.... आज हम ने घर के उस हिस्से को रेंट पे दे दिया... है न ख़ुशी की बात....

इमरान की बात वहां मौजूद सब बेहद खुश हो जाते हैं....

इमरान : ये तो कुछ भी नहीं है असल बात जब आपको पता चलेगी तो आपकी ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहेगा....

जमीला : ऐसी क्या बात है ज़रा मैं भी तो sunu....?Aisa कौनसा तीर मार लिया आप दोनों भाइयों ने....?

इमरान : मारा है भाभी बहुत बड़ा तीर मारा है हमने.... वो भी ठीक निशाने पे....

जमीला : अच्छा.... ऐसी बात है... चलो बताओ तो वो कौनसा तीर मार दिया....?

इमरान : जानती हैं की उसका डिपाजिट और रेंट कितना है....

जमीला : ज़्यादा से ज़्यादा डिपाजिट 40 लाख और रेंट 2 लाख महीना.... अब इस से ज़्यादा और क्या होगा....?

इमरान : जी नहीं.... बल्कि इस से भी कई ज़्यादा..... 1 करोड़ डिपोसिट और 5 लाख महीने के रेंट.... इतना hi नहीं डिपाजिट के साथ साथ पूरे 2 साल का रेंट एडवांस में लिया है हम ने उस से.... पूरे 2 करोड़ 20 लाख.....

इमरान की बात सुन के सब बुरी तरह से चौंक जाते हैं.... सब के मुँह से एक साथ एक hi लफ्ज़ निकलता है और वो है...

सब : Kyaaaaaaaaaaaaaaa...??????

इमरान की बात सुन के एक तरफ सब को बेहद ख़ुशी होती है तो वहीँ दूसरी तरफ हैरानी भी....

जमीला : या तो तुम पागल हो गए हो....? या फिर हम सब को पागल बना रहे हो....

अरबाज़ : नहीं जमीला इमरान ने अभी जो भी कहा वो सच है..... ये देखो घर का रेंट एग्रीमेंट और डिपोसिट के साथ साथ 2 साल के रेंट का चेक भी.... पूरे 2 करोड़ 20 लाख का चेक....

अरबाज़ की बात का किसी को यकीन नहीं होता.... सब फ़ौरन आगे बढ़ के उस चेक को देखते हैं.... हैरत से सब की आँखें बड़ी हो जाती है....

जमीला : अरे जिसे आप लोगो ने रेंट पे रहने दिया है.... उसके बारे में कुछ पता भी किया है की ऐसे hi पैसो को देख के किसी भी ैरे गैर को घर दे दिया....

अरबाज़ : नहीं जमीला सब कुछ देख के hi दिया है....

जमीला : अच्छा.... क्या जानते हैं आप उसके बारे में ज़रा मैं भी तो सुनु.....?????
 
मेरी आशिकी तुमसे hi.....

अपडेट 87

जमीला : या तो तुम पागल हो गए हो....? या फिर हम सब को पागल बना रहे हो....

अरबाज़ : नहीं जमीला इमरान ने अभी जो भी कहा वो सच है..... ये देखो घर का रेंट एग्रीमेंट और डिपोसिट के साथ साथ 2 साल के रेंट का चेक भी.... पूरे 2 करोड़ 20 लाख का चेक....

अरबाज़ की बात का किसी को यकीन नहीं होता.... सब फ़ौरन आगे बढ़ के उस चेक को देखते हैं.... हैरत से सब की आँखें बड़ी हो जाती है....

जमीला : अरे जिसे आप लोगो ने रेंट पे रहने दिया है.... उसके बारे में कुछ पता भी किया है की ऐसे hi पैसो को देख के किसी भी ैरे गैर को घर दे दिया....

अरबाज़ : नहीं जमीला सब कुछ देख के hi दिया है....

जमीला : अच्छा.... क्या जानते हैं आप उनके बारे में ज़रा मैं भी तो सुनु.....?????

अब आगे.....

जमीला : हाँ तो बताओ जिसको आप लोगों ने घर रेंट पे दिया है वो कौन है.....? कहाँ से आया है....? क्या करता है....?

जमीला के सवाल सुन के दोनों भाई खामोश से हो जाते हैं.... उन्हें जब कुछ पता hi नहीं तो वो क्या बताये....

जमीला : तो.... अगर मैं गलत नहीं हूँ तो आप दोनों को उसके बारे में कुछ नहीं पता..... ये आप कैसे कर सकते हैं.... मुझे आप दोनों से ऐसी उम्मीद नहीं थी.... किसी अनजान को आप दोनों रेंट पे रूम कैसे दे सकते हैं.....?

अरबाज़ : तुम्हारी बात ठीक है.... हम को उसके बारे में सब जान ने के बाद hi उसे घर देना चाहिए था.... मगर ये गलती हम ने जान के नहीं की..... तुम तो जानती hi हो की इस वक़्त हम किस दौर से गुज़र रहे हैं.... हमारा बिज़नेस भी ठीक से नहीं चल रहा.... घर के खर्चे भी मुश्किल से पूरे हो पा रहे हैं.... इस वक़्त हम पैसों की इस वक़्त कितनी ज़रुरत है.... महक का इलाज भी तो करवाना है.... जानती हो न वो कितना ज़रूरी है.... उसका इलाज़ 4 साल पहले hi हो जाना चाहिए था मगर पैसों की तंगी की वजह से नहीं हो सका.... जो उन पैसों से हो सकता है.... उस से सब ठीक हो सकता है.... बस इसी लिए....

जमीला : इसी लिए आप दोनों ने एक अनजान को बिना उसके बारे में जाने घर रेंट पे दे दिया.... आप ये कैसे कर सकते हैं..... आप जानते हैं अगर वो गलत इंसान हुआ तो क्या होगा....? हमारे घर में जवान जवान बेटियां हैं.... अगर उसने उनके साथ कुछ गलत किया तो....

अरबाज़ : तुम ऐसा क्यों सोच रही हो.... ऐसा कुछ नहीं होगा.... मैं उस से मिला हूँ... उस से बात की है मैंने.... उसे अच्छे से देखा और महसूस किया है.... उसकी आँखों में मुझे सच्चाई की झलक नज़र आयी थी.... जाने क्यों मुझे ऐसा लगता है वो कभी गलत हो hi नहीं सकता....

जमीला : आप तो रहने hi दो.... याद है ये बात आपने उस वक़्त भी कही थी जब 6 साल पहले आप ने ये बातें उस फ्रॉड शंकर के लिए भी कही थी.... बिना सोचे समझे उसपे आँख बंद कर के भरोसा कर के उसे अपना बिज़नेस पार्टनर बना लिया.... और उसने क्या किया हमारे साथ.... हम को पूरा लूट के वो चलता बना.... अब बस और नहीं अब हमारर पास इस घर के साथ इज़्ज़त बची है उसे नहीं खो सकते.... आप एक काम कीजिये उसे ये चेक लौटा के हमारा ये घर खाली करने को कह दीजिये.... कोई भी बहाना बना के उसे यहाँ से जाने को कह dijiye....main नहीं चाहती की दोबारा हमारे साथ कुछ गलत हो....

अरबाज़ : ये तुम क्या कह रही हो.... भला सब कुछ हो जाने के बाद अब मैं कैसे....?

जमीला : ठीक है.... आप नहीं कह सकते तो मैं hi कह देती हूँ....

ये कह के जमीला चेक ले के घर के उस हिस्से की तरफ बढ़ जाती है जिसे अरबाज़ ने प्रिंस को रेंट पे रहने को दिया है....

जमीन को जाते देख सब उसे रोकने के लिए उसके पीछे चल देते हैं.... मगर जमीला है की किसिस की बात सुन ने को तैयार hi नहीं.... घर के उस हिस्से के गेट पे पहुँच के वो बेल्ल बजती है....

गेट खुलते hi सामने खड़े शख्स को देख के जमीला हैरान हो जाती है उसके साथ साथ बाकी सब भी हैरान हो जाते हैं क्यों की दरवाज़ा प्रिंस ने नहीं बल्कि किसी लड़की ने खोला था....

जमीला : तुम कौन हो....? और यहाँ क्या कर रही हो....?

लड़की : ये तो मुझे आप से पूछना चाहिए.... आप कौन हैं और इतने लोगों के साथ यहाँ क्या कर रही हैं....?

जमीला : ये मेरा घर है.... और ये मेरा परिवार है.... अब तुम बताओ की तुम कौन हो और यहाँ क्या कर रही हो....?

लड़की : जी मेरा नाम श्रुति है.... और मैं इस घर को रेनोवेट करने यहाँ आयी हूँ...

जमीला : किस से पूछ के तुम ये सब कर रही हो...?

श्रुति : जी मुझे प्रिंस ने ऐसा करने को कहा है....

जमीला : अब ये प्रिंस कौन है...?

श्रुति : अजीब बात है.... जिसको आप ने अपना ये घर रेंट पे दिया है उसका नाम भी नहीं जानती....?

जमीला : कहाँ है वो...? बुलाओ उसे.... मुझे उस से अभी बात करनी है....

श्रुति : जी वो तो इस वक़्त घर पे नहीं हैं.... बाहर गए हैं.... कब आएंगे पता नहीं.....

श्रुति की बात सुन के जमीला घर में घुस जाती है उसके पीछे पीछे बाकी सब भी अंडर आ जाते हैं....

जमीला : ठीक है... जब तक वो आ नहीं जाता हम उसका यहीं वेट करेंगे... और हाँ तब तक तुम और तुम्हारे लोग इस घर की किसी चीज़ को हाथ नहीं लगाओगे....

श्रुति : मगर....

जमीला : कोई अगर मगर नहीं....?

जमीला की बात सुन के श्रुति उस से कोई बेहेस नहीं करती.... काम कर रहे अपने लोगों को रुकने को कहती है.... और सब प्रिंस का इंतज़ार करने लगते हैं....

एक घंटा बीत जाने पे भी जब प्रिंस नहीं आता तो....

इमरान : वैसे क्या प्रिंस कुछ बता के गया है की कब तक लौटेगा....?

श्रुति : जी नहीं....

अरबाज़ : मतलब जब तक वो आ नहीं जाता हम कुछ नहीं कर सकते.....

श्रुति : जी....

इमरान : वाओ.... वो सामने टेबल पे क्या है....? किसी घर का मॉडल सा लगता है....

श्रुति : जी हाँ ये इसी घर का मॉडल है जो प्रिंस मुझसे बनवाना चाहते हैं.... ये इस घर का अंडर का हिस्सा है.... वो इस घर को अंडर से इस तरह से रेनोवेट करवाना चाहते हैं...

इमरान : मगर ये तो इस घर जैसा बिलकुल नहीं दीखता....

इस से पहले की श्रुति कुछ कहती....

प्रिंस : जब ये घर रेनोवेट हो जाएगा तब ऐसा दिखेगा....

प्रिंस की आवाज़ सुन के सब पलट के उसकी तरफ देखते हैं....

जमीला : तुम कौन हो....?

श्रुति : कमाल है.... जिसे आपने अपना घर रेंट पे दिया है उसे नहीं पहचानती.... स्ट्रेंज....!!!!

अरबाज़ : जी नहीं बात ऐसा है की हम दो भाइयों के अलावा हमारे घर का कोई सदस्य इन्हे नहीं जानते.... तो....

प्रिंस : कोई बात नहीं जान पहचान अभी कर लेते हैं.... मेरा नाम प्रिंस है.... मैं शिमला से यहाँ आया हूँ.... मेरी उम्र ..... साल है.... मैं यहाँ अपनी एक कंपनी खोलने आया हूँ साथ hi मैंने यहाँ के ...... कॉलेज में एडमिशन भी लिया है... और यहीं पे रह के अपनी पढ़ाई और कंपनी सम्भालूंगा.... रही बात मेरे डैड माँ की तो वो मेरे साथ नहीं हैं.... और सब आखरी बात ये की आपका ये घर मुझे बेहद पसंद आया और मैंने इसे रेंट पे ले लिया.... एंड लास्ट बूत नॉट थे लीस्ट मैं बेहद शरीफ और सच्चा इंसान हूँ... जो कभी झूट नहीं बोलता.... आप लोग मुझपे भरोसा कर सकते हैं....

अरबाज़ : इतना सब बताने की ज़रुरत नहीं थी....?

प्रिंस : अगर मैं गलत नहीं हूँ तो आप सब यहाँ यही जान ने आये थे न....

जमीला : हाँ हम यही जान ने आये थे.... तुम्हारी तरह मैं भी कभी झूट नहीं कहती....

प्रिंस : ये तो अच्छी बात है....

जमीला : हाँ मगर तुम जो कर रहे हो वो ठीक नहीं.... बिना हमारी परमिशन के तुम कैसे इस घर को अपने हिसाब से रेनोवेट करवा सकते हो....? तुम्हे नहीं लगता की ये करने से पहले तुम्हे हमसे एक बार पूछ लेना चाहिए था.... भूलो मत की तुम इस घर के किरायेदार हो न की मालिक....

जमीला को प्रिंस से ऐसे बात करते देख श्रुति को उनपे गुस्सा आ जाता है.... वो कुछ कहने hi वाली होती है की तभी प्रिंस इशारे से उसे चुप रहने को कहता है....

प्रिंस : जी इसका मतलब एग्रीमेंट पे सिग्न करने से पहले आप ने उसे पढ़ा hi नहीं.... बिना पढ़े hi सिग्न कर दिया... हैरत है...

प्रिंस की बात सुन के जमीला पलट के गुस्से से अरबाज़ को देखती है.... अरबाज़ को अपनी गलती का एहसास हो जाता है.... शर्म से वो अपना चेहरा दूसरी तरफ घुमा लेते हैं....

प्रिंस : khair...agar आप ने एग्रीमेंट को सिग्न कर पढ़ा होता तो आप को पता चलता की उसमे क्या लिखा है... उसमे मैंने साफ़ साफ़ ये लिखवाया है की इस घर को अपने हिसाब से रेनोवेट करवाने की मुझे पूरी आज़ादी होगी.... मैं जो भी कर रहा हूँ बता के कर रहा हूँ.... लेकिन अगर आप को अब भी ऐसा लगता है की ये मुझे नहीं करना चाहिए.... तो फिर सॉरी मैं यहाँ नहीं रह पाऊंगा.... एक ऐसे घर में मैं नहीं रह सकता जहाँ मुझे अपने हिसाब से जीने तक की आज़ादी न हो.... श्रुति सारा सामान समेटो.... हम यहाँ से जा रहे हैं....

श्रुति : ठीक है प्रिंस...

प्रिंस : आप सब से मिल के ख़ुशी हुयी.... साथ hi इस बात का गम भी की इतने खूबसूरत घर में मैं नहीं रह सका.... मैं चलता हूँ किस्मत ने चाहा तो फिर मुलाक़ात होगी...

ये कह के प्रिंस श्रुति के साथ वहां से जाने लगता है.... मगर जमीला उसे आवाज़ दे के रोक देती है....

जमीला : जाने की ज़रुरत नहीं है... तुम यहाँ रह सकते हो.... साथ hi इस घर को अपने हिसाब से रेनोवेट भी करवा सकते हो.... मगर मेरी एक बात का ख़ास ख़याल रखना.... तुम इस घर में जैसे चाहे रहो... जो चाहे करो मगर सिर्फ इस घर में.... घर के दूसरी तरफ जहाँ हम रहते हैं.... वहां तुम कभी नहीं आओगे.... न hi कभी हमारे घर में कदम रखोगे.... जिस दिन तुमने हमारे घर की तरफ रुख किया या फिर घर के अंडर घुसे... उसी पल तुम्हे ये घर चोर देना होगा.... बोलो मंज़ूर है....

प्रिंस : जी मुझे मंज़ूर है.... वैसे भी मैं आपको पूरे 2 साल का किराया एडवांस में दे चूका हूँ... मुझे नहीं लगता की मुझे कभी आप के उस घर में जाने की ज़रुरत पड़ेगी.... और कहीं कुछ ज़रुरत पड़ी तो मैं खुद इन (अरबाज़ या इमरान) दोनों में से किसी को यहाँ बुलवा लूंगा.... मगर कभी आप के घर में नहीं जाऊँगा.... आप मेरी तरफ से बेफिक्र रहिये....

प्रिंस की बात सुन के जमीला बिना कुछ कहे वहां से बाहर की तरफ चल देती है.... उनकी ख़ामोशी को सब उनकी मंज़ूरी समझ के राहत की सांस लेते हैं.... उनके साथ साथ बाकी सब भी बाहर की तरफ चल देते हैं.... और श्रुति अपने काम में लग जाती है....

आज पूरे 2 दिन बीत चुके हैं... प्रिंस सुबह सुबह फ्रेश हो के कॉलेज के लिए निकल जाता है....
 
मेरी आशिकी तुमसे hi.....

अपडेट 88 "मेगा कॉलेज अपडेट"

जमीला : जाने की ज़रुरत नहीं है... तुम यहाँ रह सकते हो.... साथ hi इस घर को अपने हिसाब से रेनोवेट भी करवा सकते हो.... मगर मेरी एक बात का ख़ास ख़याल रखना.... तुम इस घर में जैसे चाहे रहो... जो चाहे करो मगर सिर्फ इस घर में.... घर के दूसरी तरफ जहाँ हम रहते हैं.... वहां तुम कभी नहीं आओगे.... न hi कभी हमारे घर में कदम रखोगे.... जिस दिन तुमने हमारे घर की तरफ रुख किया या फिर घर के अंडर घुसे... उसी पल तुम्हे ये घर चोर देना होगा.... बोलो मंज़ूर है....

प्रिंस : जी मुझे मंज़ूर है.... वैसे भी मैं आपको पूरे 2 साल का किराया एडवांस में दे चूका हूँ... मुझे नहीं लगता की मुझे कभी आप के उस घर में जाने की ज़रुरत पड़ेगी.... और कहीं कुछ ज़रुरत पड़ी तो मैं खुद इन (अरबाज़ या इमरान) दोनों में से किसी को यहाँ बुलवा लूंगा.... मगर कभी आप के घर में नहीं जाऊँगा.... आप मेरी तरफ से बेफिक्र रहिये....

प्रिंस की बात सुन के जमीला बिना कुछ कहे वहां से बाहर की तरफ चल देती है.... उनकी ख़ामोशी को सब उनकी मंज़ूरी समझ के राहत की सांस लेते हैं.... उनके साथ साथ बाकी सब भी बाहर की तरफ चल देते हैं.... और श्रुति अपने काम में लग जाती है....

आज पूरे 2 दिन बीत चुके हैं... प्रिंस सुबह सुबह फ्रेश हो के कॉलेज के लिए निकल जाता है....

अब आगे....

प्रिंस तैयार हो के कॉलेज के लिए निकल hi रहा होता है की तभी श्रुति की नज़र उस पे पद जाती है.... वो एक तक बस प्रिंस को देखती hi रह जाती है.... श्रुति को अपनी तरफ यूँ घूरते देख प्रिंस को बड़ी हैरानी होती है...

प्रिंस : व्हाट....?

श्रुति को तो जैसे होश hi नहीं.... वो बस प्रिंस में खोयी हुई है.... उस कुछ जवाब न देते देख प्रिंस उसे हिला के पूछता है....

प्रिंस : क्या हुआ....? ऐसे क्या देख रही है....?

प्रिंस के हिलने से उसकी तंत्र टूट टी है....

श्रुति : वाओ यार यू अरे लुकिंग दम्मम हॉट सेक्सी एंड हैंडसम.... है काश तो मेरा बॉयफ्रेंड बन जाए....

श्रुति की बात सुन के प्रिंस अपना सर पीट लेता है....

प्रिंस : अब बस यही बाकी रह गया था.... जब से यहाँ आया हूँ जहाँ भी जाता हूँ जो भी मिलती है बस यही कहती है....

श्रुति : क्या.....?

प्रिंस नाटकीय अंदाज़ में : ऊऊऊ.... वूऊओऊ... यू अरे सूऊऊओ हैंडसम एंड सेक्सी यार.... क्या तुम मेरे बॉयफ्रेंड बनोगे....?

श्रुति : अब यार तू है hi इतना सेक्सी और हैंडसम की कोई करे भी तो क्या....? तुझे देखते hi दिल तेरा दीवाना हुआ जाता है....

प्रिंस : जानती है 2 दिन के अंडर कितनी लड़कियों के मुँह से मैं ये सुन चूका हूँ.... काम से काम 150.... और तेरा नंबर 151 है.... कुछ ने तो सीधे मुझे प्रोपोज़ hi कर दिया.... कुछ ने तो मेरे साथ डेट पे जाने के लिए आपस में लड़ाई तक कर ली....

श्रुति : वाओ यार यहाँ आते hi तेरी डिमांड बढ़ गयी.... वैसे क्या ख़याल है....?

प्रिंस : किस बारे में....?

श्रुति : डेट पे चलने के बारे में.... मैं तो मरी जा रही हूँ तेरे साथ डेट पे जाने के लिए....

प्रिंस : यार अब बस भी कर.... कहीं ऐसा न हो की तेरी बातों में आ के मैं तेरे साथ कुछ कर बैठूं....

श्रुति : है मैं तो कब से ये चाहती हूँ की तू मेरे साथ कुछ करे.... मगर तू है की कुछ करता hi नहीं....

प्रिंस : अबे तू होश में तो है.... जानती है तू क्या कह रही है...

प्रिंस की बात सुन के श्रुति उसके बेहद करीब आ के उसके सीने पे हाथ फेरते हुए सेक्सी अंदाज़ में कहती है.... हाँ अच्छे से जानती हूँ की मैं क्या कह रही हूँ.... चल अब देर मत कर और जल्दी से शुरू हो जा....

श्रुति की बात सुन के प्रिंस फ़ौरन पीछे हैट जाता है और चौंक के कहता है....

प्रिंस : यार मुझे तुझसे ऐसी उम्मीद नहीं थी.... तू इतनी बेशर्म बन जायेगी मैंने सोचा न था....

श्रुति : मैं तो शरीफ hi थी... मगर क्या करूँ जब से तू मिला है मेरी शराफत जाने कहीं खो सी गयी है और उसकी जगह बेशर्मी ने ले ली है.... तू ठहरा शरीफ इंसान... तू तो कुछ करेगा नहीं.... तो सच्चा मैं hi क्यों न आगे बढ़ के तेरी जवानी का रास चूस लून.... वैसे बड़ा मज़ा आएगा तेरे साथ....

प्रिंस : तेरे साथ एक पल भी मैं और यहाँ रुका तो दर है की कहीं तू मेरा रपे hi न कर दे.... है अगर ऐसा हुआ तो मैं दुनिया वालों को क्या मुँह दिखाऊंगा....

श्रुति : वाओ.... आईडिया बुरा नहीं है... हाँ यही ठीक रहेगा.... मैं तेरा रपे hi कर देती हूँ.... है उसका भी अपना hi मज़ा होगा...

श्रुति की बात सुन के प्रिंस अपना कॉलेज का बैग उठा के फ़ौरन बहार की तरफ भाग जाता hai....Prince की ऐसी हालत देख के श्रुति की हंसी छूट जाती है.....

प्रिंस कार में बैठ के कॉलेज के लिए निकल जाता है....

चलिए चल के देखते हैं की जिस कॉलेज में प्रिंस ने एडमिशन लिया है वहां इस वक़्त क्या हो रहा है....

आज पहला दिन है तो कॉलेज अपने नई जूनियर और पुराने सीनियर स्टूडेंट्स से भरा हुआ है.... कहीं कुछ स्टूडेंट्स बाते कर रहे हैं तो कहीं कुछ सीनियर्स अपने जूनियर्स की रैगिंग ले रहे हैं.... कुछ मुर्गे बन बांग दे रहे हैं.... कुछ डांस कर रहे हैं.... कुछ गाने गए रहे हैं.... तो कुछ ज़मीन पे लेट के नागिन डांस कर रहे हैं.... हर तरफ सीनियर्स द्वारा जूनियर्स की रैगिंग चल रही है....

हाँ हाँ पता है रैगिंग अलाउड नहीं है.... मगर फिर भी यहाँ ये सब हो रहा है.... कोई उसे रोक नहीं रहा है... कोई रोके भी तो कैसे.... रैगिंग लेने वाले और कोई नहीं बल्कि यहाँ के मला और इस कॉलेज के ट्रस्टी कुंवर सिंह की बिगड़ी औलादें हैं... आयुष और शनाया.... आयुष की तरह शनाया भी 2ंद ईयर में है...

चलिए चल के पता करते हैं की फ्रेशर्स की रैगिंग लेने वाला ग्रुप किसका है.....

लड़कियों की रैगिंग आयुष और उसके बिगड़े हुए दोस्त कर रहे हैं.... और लड़कों की रैगिंग.... अरे ये क्या ये तो शनाया है जो कुछ लड़कियों के साथ फर्स्ट ईयर के लड़कों की रैगिंग कर रही है.... बड़े बाप की बिगड़ी लडकियां कुछ भी कर सकती है.... एक तो मला की बेटी और दूसरे उसके डैड इस कॉलेज के ट्रस्टी हैं... जो उसे और उसके भाई को यहाँ कुछ भी करने की इजाज़त दे रहे हैं.... उनके दर से यहाँ इन दोनों को न कोई रोकने वाला है और न hi कोई टोकने वाला.... ऐसा कोई गलत काम नहीं है जो इन दोनों भाई बेहेन ने नहीं किया हो.... शराब और सिगरेट पीना.... बिना बात के झगड़ा करना.... किसी को भी चेरना.... रात रात भर डिस्को और क्लब्स में घूमना... इनके शौक हैं.... बस एक चीज़ है जो इन भाई बेहेन ने नहीं की है और वो है.... किसी लड़के या फिर किसी लड़की के साथ कोई गलत काम यानी सेक्स.... सेक्स के मामले में दोनों hi अभी वर्जिन हैं..... आयुष ने कुछ लड़कियों को किश किया है उसने बूब्स भी दबाये हैं उनके जिस्म पे भी पूरी तरह से हाथ फेर के मज़ा लिया है.... मगर सेक्स नहीं किया... क्यों....? ये तो वो hi जाने.... जहाँ तक बात शनाया की है तो उसे आज तक किसी ने नहीं छुआ है.... किश और सेक्स तो बहुत दूर की बात है.... कीचड में रह के भी वो अभी तक कमल के फूल की तरह पवित्र है.... शनाया की अपनी फलसफा है..... उसे इंतज़ार है अपने सपनो के राजकुमार का जो सफ़ेद लिबास पहने पंख लगे घोड़े पे सवार हवा में उड़ते हुए आएगा और उसे अपने साथ प्यार भरी दुनिया में ले जाएगा.... आज तक तो ऐसा हुआ नहीं.... आगे होगा ये पता नहीं... मगर फिर भी इस उम्मीद में जी रही है.... और साथ hi लाइफ को फुल एन्जॉय कर रही है.... पढ़ाई के अलावा दोनों भाई बहिन सब कुछ करते हैं.... और आज रैगिंग कर रहे हैं.....

इस वक़्त आयुष के सामने एक लड़की कड़ी आंसू बहा रही है.... उसे यूँ रट देख आयुष की ग्रुप का एक लड़का कहता है....

लड़का1 : एक लड़की भाई ने तुझे रोने के लिए नहीं कहा... बल्कि डांस करने को कहा है.... चल जल्दी से सेक्सी डांस कर के बता....

लड़की (अनु) : मुझे डांस करना नहीं आता.... प्लीज मुझे जाने दो.... आज पहला दिन है और मैं क्लास के लिए आलरेडी लेट हूँ....

लड़का 2 : क्लास बाद में पहले सेक्सी डांस कर के हमारा दिल तो बेहला.... अगर हम को तेरा डांस पसंद आया तो हम तुझे जाने देंगे.... वर्ण तू पूरा दिन यहीं डांस करती रहेगी....

अनु : नहीं प्लीज मुझे जाने दीजिये.... प्लीज मैं आपके हाथ जोड़ती हूँ....

आयुष : चल ठीक है अगर तू कहती है तो हम तुझे नहीं नचाएंगे... तुझे यहाँ से जाने भी देंगे.... तुझे बस मुझे एक किश करना होगा....

आयुष की बात सुन के वो लड़की बुरी तरह से दर जाती है.... उसकी आँखों से आंसू बहने लगते हैं....

अनु : नहीं मैं ऐसा नहीं कर सकती... मैं एक शरीफ लड़की हूँ....

आयुष : तू शरीफ है तो हम कौनसे बदमाश हैं.... हम भी तेरी तरह शरीफ hi हैं... देख कैसे शराफत से तुझसे किश मांग रहे हैं.... बस एक किश और फिर तू यहाँ से जा सकती है.... चल अब देर मत कर और जल्दी से अपने गुलाब की पंखुड़ी जैसे होंठों का अमृत मुझे पीला दे.....

अनु : नहीं प्लीज मुझे जाने दीजिये... प्लीज मैं ये नहीं कर सकती....

आयुष : देख ये रोने धोने से कुछ नहीं होगा.... ऐसा करके तू अपना और साथ साथ हमारा टाइम भी वास्ते कर रही है.... इस लाइट बेहतर यही होगा की जल्दी से तू मुझे किश कर फिर तू जा सकती है.... और हाँ ये मत सोच की यहाँ तुझे कोई बचने आएगा.... ये मेरा कॉलेज है.... यहाँ तुझे बचने कोई नहीं आएगा.... यहाँ किसी में इतना दम नहीं की कोई मुझसे पन्गा ले सके....

आयुष की बात सुन के वो लड़की उम्मीद भरी नज़रों से इधर उधर देखती है.... की शायद कोई उसे इन कमीनो से बचा ले.... मगर कोई उसकी मदत करने के लिए आगे नहीं आता.... फिर जाने कुछ सोच के वो लड़की गेट की तरफ देखने लगती है....

उसे यूँ गेट की तरफ देखते देख आयुष उसका मज़ाक बनाते हुए कहता है....

आयुष : क्या सोच रही है....? उस गेट से कोई प्रिंस चार्मिंग आएगा और हम को मार के तुझे अपने साथ ले जाएगा क्यों....?

अभी आयुष ने ये कहा hi था की तभी एक बेहद hi स्टाइलिश कार तेज़ी से गेट में एंटर होती है.... और तेज़ी से पार्किंग की तरफ चल देती है.... सब एक तक उस कार को देखने लग जाते हैं.... ये उस कार का वो मॉडल है जो इंडिया में अवेलेबल नहीं है.... सब की निगाह उस कार पे hi अटक जाती है....

शनाया जो आयुष से कुछ दूर किसी चश्मिश लड़की को राग कर रही थी.... वो भी उस कार को देख के उसकी तरफ पलट टी है....

कार तेज़ी से पार्किंग में जाती है और 2 स्पिन कर के रुक जाती है.... फिर कार का दरवाज़ा खुलता है और ब्लू जीन्स वाइट शर्ट और ब्लैक जैकेट पहने एक शख्स कार से बहार निकलता है.... उसकी हाइट 6 फ़ीट है.... देखने के बेहद स्मार्ट डैशिंग और हैंडसम लग रहा है.... वहां मौजूद सभी की नज़र कभी उसकी तरफ जाती है तो कभी उस कार की तरफ.... सब साथ साथ आयुष और उसके दोस्त भी उस कार और कार वाले को देखने में बिजी हो जाते हैं.... तभी वो लड़की अनु चुपके से वहां से निकल लेती है....

वो लड़का कार को लॉक कर के कॉलेज के बिल्डिंग की तरफ चल देता है.... जहाँ इस वक़्त एक तरफ आयुष है तो वहीँ पास में दूसरी तरफ शनाया....

उस लड़के और उसकी स्टाइलिश कार को देख सब के मुँह से वाओ निकल जाता है.... शनाया के साथ खड़े दोस्त उसकी तारीफ किये बिना नहीं रह पाते....

लड़की 1 : वाओ यार कितना हैंडसम स्मार्ट और डैशिंग है.... इस जैसा तो इस पूरे कॉलेज में नहीं....

लड़की 2 : कॉलेज की क्या बात कर रही है.... ? इस जैसा तो इस पूरे शहर में नहीं.... देख न कितना सेक्सी है... हाए.... टालल फेयर और हैंडसम....

लड़की 3 : है काश ये मुझे मिल जाए....

लड़की 1 : यार इसे तू मैं hi पटाउंगी... तुम लोग बस देखती रह जाओगी और ये मेरा बॉयफ्रेंड बन जाएगा....

अपने दोस्तों की बात सुन के जाने आज पहली बार शायना के मुँह से किसी लड़के के लिए तारीफ निकल जाती है.....

शनाया : सही कहा यार.... ये वाकई में बेहद स्मार्ट डैशिंग और हैंडसम है... साथ hi बेहद सेक्सी भी.... इस की स्टाइल कमाल की है.... ये hi वो है जो मेरा बॉयफ्रेंड बनेगा....

शनाया की बात सुन के पहले तो उसके दोस्त शॉक हो जाते हैं.... वहीँ वो लड़का जिसकी शनाया रैगिंग कर रही थी... वो ज़ोर ज़ोर से हसने लगता है.....

हहहहहहहहह.....

उस लड़के को यूँ हस्ते देख शनाया को गुस्सा आ जाता है.... वो खींच के उस लड़के को एक थप्पड़ मार देती है....

शनाया : साले मैंने कोई जोके मारा है जो तू यूँ दांत दिखा के हंस रहा है....

लड़का : ये जोके hi तो था.... कहाँ वो और कहाँ तुम.... तुम दोनों का कोई मेल hi नहीं.... वो तुम्हारी रेंज से बहार है... बॉयफ्रेंड तो बहुत दूर की बात है वो तुम्हे अपना फ्रेंड भी नहीं बनाएगा...

उस लड़के की बात सुन के शनाया गुस्से में उसका गिरेबान पकड़ लेती है....

शनाया : साले तेरी हिम्मत कैसे हुई मुझसे ऐसे बात करने की....?

लड़का डरते हुए : M....M....Maine तो वो hi कहा जो सच है... ज़रा देखो उसे कहाँ वो और कहाँ तुम.... वो कितना स्मार्ट डैशिंग और हैंडसम है उसके सामने तो तुम कुछ भी नहीं....

शनाया बेहद गुस्से में : क्याआआ....?

लड़का डरते हुए : ये बात नहीं की तुम खूबसूरत नहीं मगर फिर भी उस से तुम्हारा कोई मुक़ाबला नहीं.... चाहो तो आज़मा के देख लो....

शनाया : साले बस देखता जा कैसे उसे अपने क़दमों में गिराती हूँ... फिर तुझे बताउंगी की मैं कौन और क्या हूँ....

इधर जब आयुष का दोस्त पलट के उस तरफ देखता है जहाँ कुछ देर पहले अनु कड़ी थी.... उसे वहां न पा के वो चौंक जाता है....

लड़का 1 : अबे ये लड़की कहाँ चली गयी....

उस लड़के की बात सुन के आयुष के साथ साथ उसके दोस्त भी उस तरफ देखते हैं.... वहां अनु को न पा के उन्हें बेहद गुस्सा आने लगता है....

आयुष : ये सब साला उस कमीने की वजह से हुआ है... उसके आते hi हमारा शिकार हमारे हाथ से निकल गया.... अब तो ये गया काम से अब मैं इसका ऐसा शिकार करूँगा की किसी काम का नहीं रहेगा....

ये कह के गुस्से में आयुष उस लड़के को आवाज़ देने hi वाल होता है की तभी शनाया उस लड़के को आवाज़ दे के उसे अपने पास आने को कहती है....

शनाया को देख आयुष के होंठों पे शैतानी मुस्कान फैल जाती है....

आयुष : ये तो साला आज गया काम से... आज शनाया इसकी बंद बजा देगी.... और फिर बाद में रही सही कसार हम पूरी कर देंगे....

शनाया की आवाज़ सुन के वो लड़का इशारे से उस से पूछता है....

"कौन मैं"

शनाया की दोस्त 2 : हाँ तू इधर आ...

लड़का : जी कहिये....

लड़की 2 : जी कहिये नहीं... मैडम बोल.... अपने सीनियर्स से बात करने की टमी नहीं है तुझमे....

लकड़ा : ओह सॉरी मुझे नहीं पता था की आप सीनियर सिटीजन्स हैं...

लड़की 3 : अबे सीनियर सिटीजन्स नहीं बल्कि कॉलेज में तुझसे सीनियर हैं.... चल अब जल्दी से अपना इंट्रो दे....

लड़का : जी मेरा नाम प्रिंस है... मैं फर्स्ट ईयर इंजीनियरिंग का स्टूडेंट हूँ....

जी हाँ ये हमारा प्रिंस hi है....

लड़की 2 : वो तो हम जानते हैं.... तू वो बता जो हमको नहीं पता....

प्रिंस : अब ये मुझे कैसे पता होगा की आप को क्या नहीं पता.... क्यों की मुझे जो पता है वो आपको नहीं पता और आपको जो पता है वो मुझे नहीं पता.... अब आप hi ये बताइये की आप क्या पता करना चाहती हैं जो मुझे पता है मगर आप लोगों को नहीं पता....

ये कह के जहाँ प्रिंस खामोश हो जाता है... वहीँ वहां मौजूद सभी हैरत से अपना सर खुजाते हुए सोचने लगते हैं की आखिर अभी प्रिंस ने कहा तो कहा क्या.... उन्हें बस पता समझ में आया बाकी सब ऊपर से गया....

लड़की 2 : अबे ये क्या बकवास किये जा रहा है पता है पता है....?

प्रिंस अभी कुछ कहने hi वाल होता है की तभी शनाया उसे बीच में hi रोक के कहती है....

शनाया : बहुत स्मार्ट बन रहा है...

प्रिंस : जी इस में बनने की क्या ज़रुरत है मैं तो पैदा hi स्मार्ट हुआ था...

शनाया : अरे वाह ये तो पंचेस भी मारता है.... चल ये बता की खाली बहार से दिखने में स्मार्ट है या फिर अंडर से भी स्मार्ट है.... कहीं ऐसा तो नहीं की बहार से स्मार्ट वॉलपेपर लगा हुआ है और अंडर से बिल्डिंग खोखली है....

प्रिंस : जी शायद हो सकता है की जैसा बहार से नज़र आ रहा है वैसा hi अंडर से भी हो....

शनाया : तुझे देख के लगता तो नहीं की ऐसा कुछ हो सकता है.... फिर भी देखने में क्या बुराई है.... चल अपनी जैकेट उतार....

प्रिंस : ये आप क्या कह रही हैं... मैं सब के ख़ास कर के लड़कियों के सामने अपने कपडे कैसे उतार सकता हूँ....

शनाया : तू उतारता है या फिर मैं खुद तेरे कपडे उतारूं....?

प्रिंस : देखिये प्लीज मेरी बात मान जाइये ऐसे मत कीजिये.... ऐसा न हो की बाद में आप को अपने hi किये पे पछताना पड़े.... बाद में आपको ये न लगे की मैंने इसे बिना रोके अंडर जाने दिया होता तो ये सब न हुआ होता....

शनाया : अपनी बकवास बंद कर और अपनी जैकेट और शर्ट उतार....

प्रिंस : शुक्र है आपने मुझे पंत उतारने को नहीं कहा...

शायना : नहीं कहा तो क्या....? तेरी पंत के साथ साथ जड़ल hi तेरी अकड़ भी उतर जायेगी.... चल अब जल्दी से अपना जैकेट और शर्ट उतार....

प्रिंस : आप नहीं मान रही तो मैं क्या कर सकता हूँ.... मगर फिर भी मेरी आप ये विनती है की मुझे ऐसा करने पे आप मजबूर मत कीजिये प्लीज....

शनाया थोड़ा गुस्से से : प्लीज गया भाड़ में जल्दी से अपने कपडे उतार....

प्रिंस : ठीक है जैसा आप कहें... मगर हाँ बाद में मुझे दोष मत देना....

ये कह के प्रिंस अपनी जैकेट उत्तरः है और पास खड़े एक चश्मिश लड़के को अपना जैकेट पकड़ा देता है... फिर एक एक करके अपनी शर्ट के बटन खोलता है.... जैस hi वो अपनी शर्ट उतारता है.... उसकी 8 पैक्स मस्कुलर बॉडी देख शनाया के साथ साथ वहां मौजूद सभी के होश उड़द जाते हैं.... सब एक तक गौर से उसे देखने लगते हैं.... शनाया के साथ साथ वहां मौजूद सभी लड़कियों के मुँह से एक साथ एक hi लफ्ज़ निकलता है और वो है....

वूऊऊऊऊ.....

उसे सुन के आयुष के साथ साथ वहां मौजूद सभी लड़कों के पछवाड़े में आग सी लग जाती है....

आयुष : अब सिर्फ बॉडी बना लेने से कुछ नहीं होता.... बॉडी के साथ साथ दम भी होना चाहिए जो मुझमे है.... और तुझमे नहीं....

प्रिंस : अच्छा...!!!! और ये आप ने कैसे जाना ज़रा ये बताने का कष्ट करेंगे....

आयुष : चल यहाँ आ के हमारे साथ पुंजा लड़ा के देख तुझे सब पता चल जाएगा....

प्रिंस : यार पहले (शनाया की तरफ इशारा करके) इसने गलती की और अब तुम कर रहे हो.... मेरी बात मानो तो ऐसा मत करो... जानते हो अगर मैं तुम्हारी जगह होता तो ऐसा बिलकुल न करता.....

आयुष : अबे बातें बनाना चोर और हमसे पंजा लड़ा के जीत के दिखा....

प्रिंस : अच्छा और अगर मैं जीत गया तो...?

आयुष : हहहहहहहह.... अव्वल तो ऐसा होगा नहीं... और अगर गलती से ऐसा हो गया तो वादा है मेरा हम तुझे बिना मारे hi यहाँ से जाने देंगे....

आयुष की बात सुन के प्रिंस को उस पे हंसी आ जाती है....

हहहहहहहहह...

आयुष गुस्से में : अबे मैंने क्या कोई जोके मारा है जो तू यूँ हंस रहा है....?

प्रिंस : जोके hi तो है... खैर पंजा लड़ा लें....

आयुष : चल आ जा....

प्रिंस साइड में पड़े बेंच के पास जा के बैठ के अपना हाथ बेंच पे रख के अपना पंजा खोल देता है....

आयुष आगे बढ़ के उसके सामने बाथ उसका पंजा पकड़ लेता है.... और फिर शुरू हो जाता पंजे का मुक़ाबला....

प्रिंस मुस्कुराते हुए आयुष के हाथ को दूसरी तरफ झुकाने लगता है.... आयुष पूरी ताक़त लगा के अपना हाथ उठाने की कोशिश करता है मगर कर नहीं पाटा... वो फ़ौरन अपने दोस्त को इशारा करता है... उसका दोस्त फ़ौरन आयुष के हाथ के पीछे अपना हाथ लगा देता है और प्रिंस के हाथ की तरफ दबाव बनाने लगता है... आयुष को चीटिंग करते देख वो लड़का जिसने प्रिंस के कपडे पकडे हुए हैं... वो कहता है....

लड़का : ये तो चीटिंग है.... एक के साथ दो....

आयुष : इसे चीटिंग नहीं बल्कि चालाकी कहते हैं... मैंने ये कहा था की हम से पंजा लड़ाओ... न की मुझसे... तो इस हिसाब से हम में तो कितने भी लोग आ सकते हैं.... और वैसे भी मोहब्बत और जुंग में सब जायज़ है....

आयुष की बात सुन के प्रिंस मुस्कुराते हुए कहता है...

प्रिंस : चाहे तो पूरे कॉलेज को अपने साथ कर ले.... मगर फिर भी ये बाज़ी तो मैं hi जीतूंगा....

अभी आयुष कुछ कहने hi वाला होता है की तभी शनाया जो कहती है उसे सुन के वहां सभी बुरी तरह से चौंक जाते हैं....

शनाया : चल तू भी क्या याद करेगा किस दिलदार से पाला पड़ा है.... तेरा मोरल बढ़ाते हुए मैं ये वादा करती हूँ की अगर आयुष से तू जीत गया तो मैं शनाया सिंह तुझे सब के सामने किश करुँगी... लेकिन अगर कहीं तू हार गया तो तू सब के सामने मेरे पैरों में गिर के मुझसे माफ़ी मांगेगा... और ज़िन्दगी भर के लिए मेरी गुलामी करेगा.... बोल मंज़ूर है....

प्रिंस मुस्कुराते हुए : प्रिंस को हरा सके आज तक ऐसा कोई पैदा नहीं हुआ.... सो बे रेडी तो किश में....

अभी प्रिंस ने इतना hi कहा था की तभी एक एक करके आयुष के सारे पांचो दोस्त आयुष के हाथ के पीछे अपना हाथ लगा देते हैं और प्रिंस के हाथ को पीछे की तरफ पुश करने लगते हैं.... अचानक से इस हमले की उम्मीद प्रिंस को नहीं थी.... उसका हाथ पीछे की तरफ जाने लगता है.... जिसे देख आयुष के साथ साथ शनाया के चेहरे पे भी शैतानी हंसी आ जाती है....

शनाया : क्या हुआ मर. स्मार्त्य....? बस इतने से में हवा निकल गयी.... अभी तो मंज़िल बहुत दूर है और जैसा तुम्हारा हाल है... मुझे इस बात की पूरी उम्मीद है की जल्द hi मुझे लाइफ टाइम के लिए एक नौकर मिलने वाला है....

शनाया की बात सुन के प्रिंस मुस्कुरा के कहता है....

प्रिंस : जीत से पहले जीत का जश्न मानाने वाले अक्सर जीती हुई बाज़ी हार जाय करते हैं....

शनाया : सोचना भी नहीं की तेरी जीत अब मुमकिन भी हो पाएगी....

शनाया की बात पे प्रिंस बस मुस्कुरा देता है और फिर अपने हाथ में जोर देते हुए अपना हाथ आगे की तरफ बढ़ने लगता है... प्रिंस के हाथ को आगे बढ़ते देख आयुष और उसके दोस्त अपनी पूरी ताक़त लगा देते हैं.... मगर वो बेवक़ूफ़ क्या जाने की प्रिंस से जीतना इस पूरी क़ायनात में किसी के लिए भी मुमकिन नहीं.... देखते hi देखते प्रिंस उन सब का हाथ पीछे की तरफ घुमा देता है साथ hi जीत भी जाता है....

प्रिंस के जीत ते hi चारो तरफ से तालियों की गड़गड़ाहट की आवाज़ के साथ साथ किश की आवाज़ भी गूंजने लगती है....

Kisssssssssss....

प्रिंस उठ के मुस्कुराते हुए शनाया की तरफ बढ़ने लगता है... धीरे धीरे वो उसके बेहद करीब पहुँच जाता है.... प्रिंस को अपने इतने करीब पा के जहाँ शनाया थोड़ी घबरा जाती है... वहीँ आयुष गुस्से में आ जाता है.... वो प्रिंस को मारने के लिए आगे बढ़ता है मगर शनाया उसे ऐसा करने से रोक देती है....

इस वक़्त प्रिंस और शनाया के बीच का फासला बस 2 इंच का रह जाता है... इस वक़्त दोनों एक दूसरे के जिस्म की गर्मी को साफ़ महसूस कर पा रहे हैं.... शनाया एक तक बस प्रिंस की आँखों में देखे जा रही है.... जाने क्या सोच के वो अपनी आँखें बंद कर लेती है.... उसका ऐसा करना शायद इस बात की इजाज़त है की हाँ प्रिंस अब तुम मुझे किश कर सकते हो....

प्रिंस आगे बढ़ता है और तभी जाने क्या सोच के बिना कुछ कहे और किश किये शनाया के बगल से होते हुए उस लड़के के पास जाके उस से अपने कपडे ले के पेहेनते हुए अपने क्लास की तरफ बढ़ जाता है.... अचानक से वहां ख़ामोशी से च जाती है.... सब को यूँ खामोश महसूस कर शनाया अपनी आँखें खोल के देखती है.... उसे वहां प्रिंस नज़र नहीं आता.... वो प्रिंस को चारो तरफ ढूंढने लगती है... मगर प्रिंस उसे कहीं नज़र नहीं आता....

वो कुछ कहने hi वाली होती है की तभी बेल्ल बज जाती है और सब अपनी अपनी क्लास की तरफ चल देते हैं....

वो लड़का (चिंटू) जिसकी कुछ देर पहले शनाया रैगिंग कर रही थी.....

चिंटू : किसे ढूंढ रही हो...? प्रिंस को.... वो जा चूका है....

शनाया शॉकेड : Kyaaaaaaaaaa....?

चिंटू : हाँ वो वाकई में जा चूका है....

शायना : चला गया... बिना मुझे.... शनाया को किश किये.... मगर क्यों....?

चिंटू : तुम्हारे इस क्यों का जवाब तो मैंने तुम्हे पहले hi दिया था की वो तुम्हारी रेंज के बाहर है.... तुम्हारा बॉयफ्रेंड बनना तो दूर वो तुम्हे छुएगा भी नहीं....

शनाया गुस्से में : क्या कमी है मुझ में जो उसने मुझे किश नहीं किया... इस पूरे शहर की सबसे खूबसूरत और सेक्सी लड़की हूँ मैं.....

चिंटू : ऐसा तुम्हे लगता है... शायद उसे ऐसा नहीं लगता....

शनाया गुस्से में चिंटू को खींच के एक थप्पड़ मार देती है....

Chataaaaaaaaaaaaaak.....

शनाया : साले कमीने... तेरी हिम्मत कैसे हुई मेरे बारे में ऐसा बोलने की....

चिंटू अपने गाल सहलाते हुए....

चिंटू : मुझे मारने से कुछ नहीं होगा.... मैंने तो वो hi कहा जो सच है.... अगर तुम्हे मेरी बात पे यकीन न हो तो क्यों न तुम उस से खुद पूछ लो.... तुम्हे किश न करने के पीछे उसकी क्या वजह है.....?????
 
मेरी आशिकी तुमसे hi.....

अपडेट 89 मेगा अपडेट.....

शनाया गुस्से में : क्या कमी है मुझ में जो उसने मुझे किश नहीं किया...? इस पूरे शहर की सबसे खूबसूरत और सेक्सी लड़की हूँ मैं.....

चिंटू : ऐसा तुम्हे लगता है... शायद उसे ऐसा नहीं लगता....

शनाया गुस्से में चिंटू खींच के एक थप्पड़ मार देती है....

Chataaaaaaaaaaaaaak...

शनाया : साले कमीने... तेरी हिम्मत कैसे हुई मेरे बारे में ऐसा बोलने की....?

चिंटू अपने गाल सहलाते हुए....

चिंटू : मुझे मारने से कुछ नहीं होगा.... मैंने तो वो hi कहा जो सच है.... अगर तुम्हे मेरी बात पे यकीन न हो तो क्यों न तुम उस से खुद पूछ लो.... तुम्हे किश न करने के पीछे उसकी क्या वजह है.....????

अब आगे....

शनाया बेहद गुस्से में क्लास की तरफ बढ़ जाती है....

इधर प्रिंस भी अपने क्लास की तरफ जा रहा होता है की तभी पीछे से उसे कोई आवाज़ देता है....

है मेरा नाम नेमत है....

ये कह के वो प्रिंस की तरफ अपना हाथ बढ़ा देती है....

प्रिंस एक बार उसे देखता है... फिर "नॉट इंटरेस्टेड" कह के मुद के अपनी क्लास की तरफ चल देता है....

नेमत : अरे सुनो तो....

प्रिंस : कहाँ न नॉट इंटरेस्टेड....

ये कह के प्रिंस क्लास के अंडर चला जाता है.... क्लास में एंटर करते hi सब एक तक उसे hi देख रहे हैं.... ख़ास कर के लडकियां....

वाओ यार कितना स्मार्ट डैशिंग और हैंडसम है यार.....

हाँ और उतना hi सेक्सी भी.... काश ये मेरा बॉयफ्रेंड बन जाए....

उनकी बात सुन के प्रिंस अपना सर पीट लेता है....

प्रिंस मन में : यार फिर से नहीं.... ये तो हद है यार जहाँ देखो वहां लडकियां मुझे देखते hi अपनी लार टपकाने लगती हैं....

तभी पीछे से किसी की आवाज़ सुन के प्रिंस चौंक जाता है....

नेमत : गलती उनकी नहीं है... अब तुम हो hi इतने स्मार्ट डैशिंग हैंडसम और सेक्सी की कोई करे भी तो क्या करे....

प्रिंस गुस्से से उसे देखता है और पलट के पीछे की तरफ खाली बेंच पे बैठ जाता है.... प्रिंस की बात सुन के नेमत मुस्कुराती हुई आगे बढ़ती है.... और जा के उसकी बगल वाली सीट पे बैठ जाती है....

नेमत को प्रिंस के बगल में बैठे देख क्लास की साड़ी लडकियां जल जाती हैं.... नेमत उन सब को इग्नोर करके प्रिंस को देखने लगती है....

प्रिंस : यार तुम्हारी प्रॉब्लम क्या है....? क्यों मेरे पीछे पड़ी हो....? मेरा पीछे चोरो और अपने काम से काम रखो.....

नेमत : अपना काम hi तो कर रही हूँ....

प्रिंस : मेरा पीछे करना तुम्हारा काम है....?

नेमत : हाँ भी और नहीं भी....

प्रिंस : मतलब.....

नेमत मुस्कुराते हुए : कल सुबह तक तुम्हे सब पता चल जाएगा.....

प्रिंस अभी कुछ कहने hi वाला होता है की तभी एक बेहद hi सेक्सी लेडी क्लास में एंटर करती है..... हाइट 5.8" रंग गोरा फिगर 36.32.36.... गुलाबी रंग की साड़ी में वो बाला की सेक्सी लग रही है.... क्लास के सारे लड़के हवस भरी नज़रों से उसे देखने लगते हैं...

मेरा नाम मनीषा है.... मैं तुम्हारी टीचर हूँ..... चलो अब तुम सब भी एक एक कर के अपना इंट्रोडक्शन दो....

मनीषा मैडम की बात सुन के सब की तंत्र टूट टी है..... जो अब तक उसके सेक्सी जिस्म और प्यारी आवाज़ में खोये हुए थे.... एक एक कर के सब अपने बारे में बताने लगते हैं.... प्रिंस की बारी आती है और उठ के खड़ा हो जाता है और कुछ कहने hi वाला होता है की तभी बेल्ल बज जाती है.... सब की तरह मनीषा भी एक पल के लिए प्रिंस में खो सी जाती है.... बेल्ल की आवाज़ से उसकी तंत्र टूट टी है....

मनीषा : तुम्हारा इंट्रो मैं अगली बार फुर्सत से लुंगी....

ये कह के वो एक सेक्सी स्माइल प्रिंस को पास कर के बहार की तरफ चल देती है....

अगली क्लास में भी ऐसा hi होता है..... एक और बेहद सेक्सी टीचर आती है और सब का इंट्रो लेने के बाद वो मुस्कुराती हुई प्रिंस के पास आ के सेक्सी अंदाज़ में उसे देखते हुए उसके बारे में पूछने लगती है....

कुछ देर में ये क्लास भी ख़तम हो जाती है.... प्रिंस उठ के बाहर की तरफ चल देता है.... नेमत भी उसके पीछे पीछे क्लास से निकल जाती है....

प्रिंस कैंटीन में जा के बैठ जाता है.... नेमत भी मुस्कुराती हुई उसके पास hi बैठ जाती है....

नेमत : क्या हुआ तू ने ऐसे मुँह क्यों लटकाया हुआ है....? चिल कर यार आज कॉलेज का पहला दिन है और पहले hi दिन कॉलेज की सेक्सी और खूबसूरत लडकियां तेरी दीवानी बन गयी हैं....

प्रिंस : यार हद है.... ये लडकियां क्या काम थी जो अब मैडम भी....

प्रिंस की बात सुन के नेमत की हंसी छूट जाती है.... नेमत को यूँ हस्ते देख प्रिंस चीड़ के कहता है....

हहहहहहहह.....

प्रिंस चीड़ के : तू अपने दांत दिखाना बंद करेगी....

नेमत : अबे तुझे तो खुश होना चाहिए की यहाँ की साड़ी सेक्सी लडकियां और तो और टीचर्स भी तेरी दीवानी हैं.... और तू है की चीड़ रहा है....

प्रिंस : अबे मैं क्या कोई आइटम गर्ल हूँ जो सब मुझे यूँ हवस की नज़रों से घूर रही हैं... और तू कह रही है मुझे इस बात से खुश होना चाहिए....

नेमत : हहहहहहह..... आइटम गर्ल न सही आइटम बॉय hi सही....

प्रिंस : तू चुप कर नहीं तो अभी तेरे दांत तोड़ दूंगा.... साला यहाँ मेरा दिमाग खराब बना हुआ है और तू है की तुझे मज़ाक सूझ रहा है.... तुझे पता नहीं यहाँ मैं क्या करने आया हूँ और मेरे साथ क्या हो रहा है....?

नेमत : तू यहाँ अपने परिवार का पता लगाने आया है न....

नेमत की बात सुन के प्रिंस बुरी तरह से चौंक जाता है....

प्रिंस शॉकेड.....

नेमत : हैरान मत हो.... मुझे तेरे बारे में सब पता है.... इनफैक्ट जितना तू खुद के बारे में नहीं जानता उस से ज़्यादा मैं तेरे बारे में जानती हूँ.....

प्रिंस : क्याआआआआ....? मगर कैसे....?

नेमत : ये सब तुझे कल सुबह पता चल जाएगा....

प्रिंस : कल सुबह hi क्यों अभी क्यों नहीं....?

नेमत : क्यों की अभी न hi सही वक़्त है और न hi सही जगह.... हर बात अपने वक़्त और अपनी जगह पे हो तभी उसका असली मतलब होता है....

नेमत की बात सुन के प्रिंस कुछ देर उसकी तरफ देखता है फिर उठ के वहां स जाने लगता है....

नेमत : अबे क्या हुआ....? कहाँ जा रहा है.....?

प्रिंस : भूक लगी है कॉफ़ी और स्नैक्स लेने जा रहा हूँ...

नेमत : यार तेरे साथ इतनी हॉट और खूबसूरत लड़की बैठी है और तू है की उसे पटाने के बजाये तुझे पेट पूजा की पड़ी है.....

प्रिंस : मेरे इतने खराब दिन भी नहीं आये की मैं तुझे पटाने की सोचूं....

प्रिंस की बात सुन के नेमत का खिला हुआ चेहरा मुरझा सा जाता है....

नेमत : क्या मैं इतनी बुरी हूँ....

जाने क्यों नेमत का उतरा हुआ चेहरा प्रिंस से देखा नहीं जाता.... और ये बात उसके मुँह से अपने आप hi निकल जाती है....

प्रिंस : यार तू क्या है ये खुद तू भी नहीं जानती... तू बहार से जितनी खूबसूरत है अंडर से उस से कई ज़्यादा सूंदर है.... तू वो है जिसे पाने के लिए कोई किसी का खून भी करने से नहीं चुके... तू जन्नत का बेहद हसीं फूल है... जिसके होंठों की प्यारी सी मुस्कान देख के बेचैन दिल को भी चैन आ जाए....

प्रिंस के मुँह से अपनी तारीफ सुन के नेमत ख़ुशी से उछाल पड़ती है.... और फ़ौरन उठ के उसे कास के गले से लगा लेती hai...aur साथ hi उसके गाल को चूम लेती है....

प्रिंस फ़ौरन उसे खुद से दूर हटा के कहता है....

प्रिंस : अबे क्या कर रही है दूर हैट....?

नेमत : मैंने क्या किया.... ये सब तो तू ने hi किया है.... न तू मेरी तारीफ करता और न hi ख़ुशी में मुझसे ये होता.... वैसे तू जितना हॉट है उतना hi स्वीट भी... है तेरे गाल का किश इतना हॉट और स्वीट है तो तेरे होंठों का किश कितना स्वीट होगा....

नेमत की बात सुन के प्रिंस अपना सर पीट लेता है....

प्रिंस : तू न दूर रह मुझसे समझी.... मौका मिला नहीं की लगी चिपकने.... जैसे मैं लड़का न हो के शहद हूँ और तू मधुमक्खी.... हाँ नहीं तो....

नेमत आँख मार्के : वैसे बात तो तू ने सही की है.... तू वाकई में शहद से काम नहीं है अब तो जल्द hi तेरा मीठा रास चूसना पड़ेगा....

उसकी बात सुन के प्रिंस उसे गुस्से से देखता है फिर अपना सर पीट के कॉफ़ी और स्नैक्स लेने के लिए चल देता है....

जब वो स्नैक्स लेके वापिस टेबल पे आता है तो वहां नेमत की जगह शनाया को देख वो बुरी तरह से चौंक जाता है....

प्रिंस उसे देख के अपना मुँह घुमा के दूसरी टेबल की तरफ बढ़ जाता है.... प्रिंस की इस हरकत पे शनाया को उसपे बेहद गुस्सा आ जाता है.... गुस्से में वो प्रिंस का हाथ पकड़ के उसे रोकती है....

शनाया : मैं यहाँ तुमसे बात करने आयी हूँ.... और तुम हो की मुझे शनाया को जो इस कॉलेज की सब से सेक्सी और खूबसूरत बेब है उसे इग्नोर कर रहे हो....?

शनाया की बात सुन के प्रिंस की हंसी छूट जाती है....

हहहहहहह....

शनाया : मैंने क्या कोई जोके मारा है जो तुम इस तरह यूँ हंस रहे हो....?

प्रिंस : जोके hi तो है.... और ये ग़लतफहमी तुम्हे कब से हो गयी की तुम सबसे खूबसूरत बेब मतलब लड़की हो....

शायना : ये ग़लतफहमी नहीं बल्कि सच्चाई है.... और इस का सबूत है की इस कॉलेज का हर लड़का मेरा दीवाना है....

प्रिंस : सिर्फ मुझे चोर के.... मुझे तुम में कोई इंटरेस्ट नहीं है.... और रही बात खूबसूरती की तो जिस्म की खूबसूरती तभी अच्छी लगती है जब मन भी खूबसूरत हो.... तुम्हारा जिस्म भले भी सब की लिए खूबसूरत हो मगर मेरे लिए नहीं.... क्यों की बदसूरत दिल खूबसूरत जिस्म को भी बदसूरत बना देता है.... जो की तुम हो.... ऐसा कौन सा बुरा काम है जो तुम नहीं करती.... सिगरेट और शराब पीना.... ज़बरदस्ती किसी को भी परेशान करना रात रात भर क्लब में ऐय्याशी करना.... बिना बात के किसी के साथ भी झगड़ा करना ये hi सब तुम्हे बदसूरत बनाने के लिए काफी है... और मैं ऐसे लोगों से बात करना तो दूर उनकी तरफ देखता तक नहीं.... जाओ चली जाओ यहाँ से.... मुझे न hi तुम में कोई इंटरेस्ट है और न hi तुम्हारी सो कॉल्ड खूबसूरती में...

ये कह के प्रिंस बहार की तरफ चल देता है....

प्रिंस की बात सुन के शनाया को उसपे बेहद गुस्सा आ जाता है.... उस से आज तक किसी ने ऐसी बात नहीं की थी ...

शनाया भी बेहद गुस्से में प्रिंस की तरफ चल देती है.... वहीँ रस्ते में उसे आयुष और उसके कमीने दोस्त मिल जाते हैं....

आयुष : क्या बात है शनाया.... तू इतनी गुस्से में क्यों है....?

शनाया : वो कमीना प्रिंस खुद को समझता क्या है....? साला मुझे शनाया को इस कॉलेज की सब हॉट और खूबसूरत बेब को बदसूरत कहता है.... उसे तो आज मैं छोड़ूंगी नहीं.... जान से मार दूंगी उसे....

शनाया की बात सुन के आयुष को भी प्रिंस पे बेहद गुस्सा आ जाता है....

आयुष : साला बहुत उड़द रहा है चल चल के अभी उसकी हेकड़ी निकालते हैं....

फिर अपने दोस्त से कहता है....

आयुष : सब को जमा कर आज साले की जैम के खातिरदारी करेंगे.... साले की ऐसी हालत करेंगे की उसे देख के आज के बाद फिर कोई हमारे सामने सर उठाने की जुर्रत न करेगा.....

प्रिंस उन्हें बहार मिल जाता है सब उसे मारने के लिए आगे बढ़ते हैं.... मगर तभी वहां कुछ गुंडे आ जाते हैं.... और शनाया के साथ बदतमीज़ी करने लगते हैं.... ये देख आयुष को बेहद गुस्सा आ जाता है....

आयुष : सालो तुम्हारी हिमायत कैसे हुई मेरी बेहेन के साथ बदतमीज़ी करने की.... साले रात की मार भूल गया क्या....?

अभी वो गुंडा कुछ कहने hi वाला होता है की तभी शनाया आगे बढ़ के उसे खींच के एक थप्पड़ मार देती है....

गुंडा आगे बढ़ के शनाका का हाथ पकड़ लेता है....

गुंडा : साली तेरी इतनी हिम्मत की तू ने गुलशन पे हाथ उठाया.... आज तेरी वो हालत करूँगा की हाथ उठाना तो दूर तुझे मेरा नाम से भी दर लगेगा.... आज यहाँ सब के सामने मैं तेरी इज़्ज़त लूटूँगा फिर तुझे अपनी रंडी....

अभी गुलशन ने इतना hi कहा था की तभी आयुष बेहद गुस्से में आगे बढ़ के एक घुसा गुलशन को मार देता है....

गुलशन अपने आदमियों से....

गुलशन : सालो यहाँ खड़े मेरा मुँह क्या देख रहे हो.... मारो सब को... मार मार के सबकी हालत खराब कर दो....

बस फिर क्या था गुलशन और आयुष के साथ साथ उनके साथी भी एक दूसरे को पीटने लग जाते हैं....

प्रिंस वहीँ बैठ के कॉफ़ी और स्नैक्स कहते हुए उनकी लड़ाई देख के मज़े लेने लगता है.... तभी चिंटू उसके पास आ के कहता है....

चिंटू : है मेरा नाम चिंटू है... क्या मैं यहाँ बैठ सकता हूँ....

प्रिंस : बैठ जा मगर हाँ डिस्टर्ब मत करना वो क्या है मैं इस वक़्त फाइट का मज़ा ले रहा हूँ....

चिंटू : यार बुरा न मानो तो एक बात पूछूं.....?

प्रिंस : चल ठीक है पूछ ले....

चिंटू : यार देखने में तुम किसी हीरो से काम नहीं लगते....

प्रिंस : पूछ रहा है या बता रहा है....

चिंटू : मैंने अक्सर देखा है की हीरो हीरोइन को गुंडों से बचता है... मगर तुम तो यहाँ बैठ के मज़े ले रहे हो....

प्रिंस : यहाँ अगर हीरोइन होती तो उसे ज़रूर बचता.... मगर अफ़सोस यहाँ वो बात नहीं.... ये किसी भी एंगल से हीरोइन नहीं लगती.... हाँ दिखने में खूबसूरत ज़रूर है मगर ये भी इन गुंडों से काम गुंडई नहीं है.... और मैं न hi गुंडों के मुँह लगता हूँ और न hi उनके बीच जाता हूँ... मुझे ऐसे लोग ज़रा भी पसंद नहीं....

ये बात प्रिंस ने शनाया को देख के कही थी.... जिसे सुन के उसे प्रिंस पे बेहद गुस्सा आ जाता है.... मगर वो कुछ कर नहीं पाती....

इधर उन गुंडों की तादात ज़्यादा होने की वजह से आयुष और उसके कमीने दोस्त उनके आगे ज़्यादा देर नहीं टिक पाते.... मार खा खा उनकी हालत खराब हो जाती है....

फिर गुलशन शनाया की तरफ बढ़ता....

गुलशन : साली देख अब मैं तेरे साथ क्या करता हूँ.... अभी सब के सामने कैसे तेरी इज़्ज़त नीलाम करता हूँ.... कल रात बहुत उछाल रहे थे न तुम दोनों.... तेरे भाई की तो मैं बंद बजा दी है अब तेरी बारी है....

ये कह के वो शनाया के बेहद करीब जा के खड़ा हो जाता है....

शनाया : साले कमीने... गलती से भी अगर तू ने मुझे छुआ भी तो सोच लेना तेरी मौत से तुझे कोई नहीं बचा पायेगा.... मेरे डैड यहाँ के मला हैं वो तुझे कुत्ते की मौत मारेंगे.....

गुलशन आगे बढ़ के शनाया के बाल को पकड़ के घसीट ते हुए एक करारा थप्पड़ उसके मुँह पे मारता है और गुस्से में कहता है....

गुलशन : साली मुझे गुलशन को धमकी देती है.... जानती है यहाँ के सब से बड़े डॉन शांती का भाई हूँ मैं.... तेरा बाप तो क्या यहाँ इस पूरे शहर में ऐसा कोई नहीं जो मुझे छू भी सके.... चल अब अपनी इज़्ज़त लुटवाने को तैयार हो जा....

ये कह के वो शनाया के कपडे को खींच के फाड़ने लगता है... ये देख शनाया की हालत खराब हो जाती है... आज पहली बार उसे दर महसूस हुआ था... उसकी आँखों से आंसू बहने लगते हैं.... वो उसे रोकने की बहुत कोशिश करती है मगर गुलशन उसकी एक नहीं सुनता.... उसे ज़मीन पे गिरा के उसके ऊपर चढ़ जाता है और उसके कपडे फाड़ने लगता है.... उसके कपडे पहात जाते हैं और ब्लैक ब्रा नज़र आने लगती है.... सब वहां ख़ामोशी से खड़े देख रहे हैं कोई उसकी मदत के लिए आगे नहीं आ रहा है....

शनाया उसे धक्का दे के वहां से भागने की कोशिश करती है... मगर भाग नहीं पाती गुलशन के गुंडे उसे पकड़ लेते हैं.... गुलशन शनाया का चेहरा कास के अपने हाथों में लेता है और आगे बढ़ के उसे किश करने hi वाला होता है की तभी एक ज़ोरदार पंच उसके मुँह पे पड़ता है और वो उछलता हुआ दूर जा गिरता है.... उसके 3 - 4 दांत भी शहीद हो जाते हैं..... उसके मुँह से खून निकलने लगता है.... अपने बॉस की ऐसी हालत देख के गुलशन के गुंडे प्रिंस को मारने के लिए आगे बढ़ते हैं.... प्रिंस एक रिवर्स किक मारता जिस से 2 - 3 गुंडे उड़ते हुए पीछे जा गिरते हैं.... उनकी हालत बाद से बत्तर हो जाती है.... उनमे उठने तक की तक़्क़त नहीं रहती....

शनाया रोटी हुई एक तरफ कड़ी अपने जिस्म को छुपाने की कोशिश कर रही hai....Prince अपना जैकेट उतार के शनाया को पहना देता है और आगे बढ़ के उन गुंडों की ठुकाई करने लगता है.... शनाया आँखों में आंसू लिए एक तक प्रिंस को hi देखे जा रही है.... इधर गुलशन गुस्से में उठता है और अपनी जेब से गन निकाल के प्रिंस पे फायर कर देता है... गोली प्रिंस के कंधे को रगड़ के निकल जाती है.... प्रिंस के मुँह से दर्द भरी आह निकल जाती है.... इस से पहले की गुलशन प्रिंस पे एक और गोले चलता प्रिंस सामने पड़ी लोहे की रोड फ़ेंक के गुलशन को मारता है.... रोड का वार इतना तेज़ होता है गुलशन उड़ता हुआ दूर जा गिरता है गन उसके हाथ से चटक के पीछे कहीं गिर जाती है.... इधर गुलशन का राइट हैंड छगन प्रिंस पे चाकू से वार करता है प्रिंस नीचे झुक के उस वार से खुद को बचा के एक ज़ोरदार पंच उसके के पेट में मारता है.... वो गुंडा उड़ता हुआ दूर जा गिरता है उसके मुँह से खून निकलने लगता है.... वो वहीँ बेहोश हो जाता है....

तभी कुछ गुंडे हॉकी रोड और चाकू लेके प्रिंस के ऊपर टूट पड़ते हैं.... प्रिंस जिसके सामने बड़े से बड़े फाइटर नहीं टिक पाते तो भला ये मामूली गुंडे कहाँ से टिक पाएंगे.... प्रिंस का एक पंच hi उन्हें हॉस्पिटल यहाँ तक की शमशान पहुँचाने के लिए काफी है.... प्रिंस उन्हें पूरी ताक़त से नहीं मारता बल्कि उतना hi मारता है जिस से वो मरे नहीं ज़िंदा रहे वो भी सिर्फ हॉस्पिटल के बीएड पे..... हर तरफ हड्डियों के टूटने की आवाज़ के साथ साथ उन गुंडों की चींखे भी गूंजने लगती हैं... देखते hi देखते सब गुंडे मार खा खा के बेहोश हो जाते हैं.... कुछ के हाथ की हड्डी टूट चुकी है तो कुछ के पैरों की....

प्रिंस आगे बढ़ के गुलशन को उठता है उसे ला के शनये के पास पटक देता है....

प्रिंस बेहद गुस्से में : साले आज के बाद इसे हाथ लगाने के बारे में गलती से भी सोचा तो तेरी वो हालत करूँगा की न तेरी ज़िन्दों में गिनती होगी और न hi मुर्दों में.... ये कह के प्रिंस एक ज़ोरदार पंच उसके सर पे मारता है.... गुशण उसे बर्दाश्त नहीं कर पाटा उसका सर पहात जाता है और वो बेहोश हो जाता है....

शनाया एक तक बस प्रिंस को hi देख रही है..... प्रिंस के कंधे से बह रहे खून को देख शनाया का दिल तड़प जाता है... उसकी आँखों से आंसू बहने लगते हैं.... वो प्रिंस को कुछ कहने hi वाली होती है की तभी प्रिंस बिना कुछ कहे वहां से चला जाता है.....

कुछ देर में वहां एम्बुलेंस आ जाती है और सब को उठा के अलग अलग हॉस्पिटल ले जाते हैं.... वहां उनका इलाज शुरू हो जाता है....

शनाया के डैड को जब ये पता चलता है तो वो फ़ौरन वहां आ जाते हैं.... अपने बच्चों की ऐसी हालत देख के उन्हें बेहद गुस्सा आ जाता है.... वो शनाया से पूछने की बहुत कोशिश करते हैं मगर शनाया को जैसे कुछ होश hi नहीं.... वो बस प्रिंस के बारे में hi सोच रही है.... उसे समझ नहीं आ रहा है की जो प्रिंस उसे देखना पसंद नहीं कर रहा था उसने अपनी जान पे खेल के उसकी इज़्ज़त और जान क्यों बचायी.... Kyunnnnnnnnnnn....? वो चाहता तो वहां से पहले hi चला जाता मगर नहीं गया क्यों.....? जाते वक़्त भी उस ने शनाया की तरफ नहीं देखा और न hi उस से कुछ कहा.... उसे गोली भी लगी थी... कितना खून भी निकल रहा था उसके कंधे से.... उसे दर्द भी कितना हो रहा था.... मगर उसने अपने दर्द की परवाह न करते हुए भी शनाया की इज़्ज़त को लूटने से बचाया.... क्यों....? ऐसे और न जाने कितने hi सवाल इस वक़्त शनाया के दिमाग में उठ रहे थे.... उसे इस वक़्त खुद से ज़यादा प्रिंस की फ़िक्र हो रही थी....

अपने बेटे आयुष से उन्हें साड़ी सच्चाई का पता चलता है साथ hi ये भी की कैसे प्रिंस ने अपनी जान पे खेल के न सिर्फ शनाया की इज़्ज़त बचायी बल्कि इन उन कमीने गुंडों से दोनों भाई बेहेन की जान भी बचायी....

मला : कहाँ है वो फरिश्ता....? मैं अभी उस से मिलना चाहता हूँ....

मला की बात सुन के शनाया आगे बढ़ के अपने डैड के गले से लग के रोये हुए कहती है....

शनाया रट हुए : वो चला गया बाबा... वो चला गया.... मैं उसे रोकना चाहती थी मगर नहीं रोक पायी.... बस उसे जाते हुए देखती रह गयी.... पता नहीं बाबा वो कहाँ गया... उसके कंधे से भी बहुत खून निकल तहा था... वो ज़ख़्मी था बाबा... बहुत ज़ख़्मी..... मैंने उसके साथ कितना गलत किया और उसने फिर भी मेरी इज़्ज़त और जान भचायी.... यहाँ तक की मेरी वजह से उसे गोली भी लगी.... इस वक़्त वो दर्द में होगा बाबा.... मेरी वजह से वो दर्द में है बाबा... मुझे उसकी तकलीफ दूर करनी hai....mujhe उस से मिलना है बाबा.... उस से माफ़ी मांगनी है... आप से भी माफ़ी मांगनी है.... मैंने आप से भी बदतमीज़ी की है.... आप का भी दिल बहुत दुखाया है.... प्लीज बाबा मुझे माफ़ कर दीजिये....

ये कह के शनाया अपने बाबा के सीने से लिपट के रोने लगती है.... सालो बाद अपनी बेटी के गले लग के मला कुंवर सिंह को बेहद ख़ुशी हो रही है.... आज सालो बाद उनकी बेटी ने उनसे सलीके से बात की है.... रो के अपना दुःख ज़ाहिर किया है.... आज उनकी बेटी उन्हें वापिस मिल गयी है.... जो काम वो खुद न कर सके वो सिर्फ और सिर्फ प्रिंस की वजह से हो पाया है.... आज अपने बच्चों को दोबारा पा के वो बेहद खुश हैं....

इधर प्रिंस हॉस्पिटल से अपना इलाज करवा के घर की तरफ चला जाता है....

अगली सुबह किसी की आवाज़ सुनके प्रिंस की आँख खुलती है.... सामने खड़े शख्स को देख प्रिंस बुरी तरह से चौंक जाता है.... उसके होश उड़द जाते हैं....????
 
मेरी आशिकी तुमसे hi.....

अपडेट 90

शनाया रट हुए : वो चला गया बाबा... वो चला गया.... मैं उसे रोकना चाहती थी मगर नहीं रोक पायी.... बस उसे जाते हुए देखती रह गयी.... पता नहीं बाबा वो कहाँ गया... उसके कंधे से भी बहुत खून निकल तहा था... वो ज़ख़्मी था बाबा... बहुत ज़ख़्मी..... मैंने उसके साथ कितना गलत किया और उसने फिर भी मेरी इज़्ज़त और जान भचायी.... यहाँ तक की मेरी वजह से उसे गोली भी लगी.... इस वक़्त वो दर्द में होगा बाबा.... मेरी वजह से वो दर्द में है बाबा... मुझे उसकी तकलीफ दूर करनी hai....mujhe उस से मिलना है बाबा.... उस से माफ़ी मांगनी है... आप से भी माफ़ी मांगनी है.... मैंने आप से भी बदतमीज़ी की है.... आप का भी दिल बहुत दुखाया है.... प्लीज बाबा मुझे माफ़ कर दीजिये....

ये कह के शनाया अपने बाबा के सीने से लिपट के रोने लगती है.... सालो बाद अपनी बेटी के गले लग के मला कुंवर सिंह को बेहद ख़ुशी हो रही है.... आज सालो बाद उनकी बेटी ने उनसे सलीके से बात की है.... रो के अपना दुःख ज़ाहिर किया है.... आज उनकी बेटी उन्हें वापिस मिल गयी है.... जो काम वो खुद न कर सके वो सिर्फ और सिर्फ प्रिंस की वजह से हो पाया है.... आज अपने बच्चों को दोबारा पा के वो बेहद खुश हैं....

इधर प्रिंस हॉस्पिटल से अपना इलाज करवा के घर की तरफ चला जाता है....

अगली सुबह किसी की आवाज़ सुनके प्रिंस की आँख खुलती है.... सामने खड़े शख्स को देख प्रिंस बुरी तरह से चौंक जाता है.... उसके होश उड़द जाते हैं....????

अब आगे....

सामने खड़े शख्स को देख प्रिंस बुरी तरह से चौंक जाता है....

प्रिंस : अबे तू पागल तो नहीं हो गयी....? सुबह सुबह यहाँ मेरे घर में क्या कर रही है....?

प्रिंस की बात सुन के नेमत मुस्कुराते हुए उसके पास बैठ के जो कहती है उसे सुन के प्रिंस बुरी तरह से चौंक जाता है....

नेमत : तुझे किसने कहा की मैं सुबह यहाँ आयी हूँ....? मैं तो रात से यहीं हूँ.... रात को तेरे साथ hi तो यहाँ आयी थी....

प्रिंस : क्या बकवास कर रही है....? कहीं तू पागल तो नहीं hooooooooooo बहूऊऊऊऊत.....

ये कहते hi प्रिंस बुरी तरह से दर गया और नेमत का हाथ पकड़ के उसे अपने साथ पीछे की तरफ भागा....

नेमत को प्रिंस की बात समझ नहीं आयी न hi ये की अचानक से उसे क्या हो गया....? उसने प्रिंस को रोकने की बहुत कोशिश की मगर प्रिंस नहीं रुका वो नेमत को अपने साथ ले के बैडरूम से बहार आ गया... अभी भी वो काफी डरा हुआ था....

नेमत : क्या हुआ प्रिंस तुम इतने डरे हुए क्यों हो....?

प्रिंस : W....wo.... वहां बह... बह... भूत....

नेमत : भूत कहाँ है भूत....?

प्रिंस : बैडरूम में.....

नेमत : चलो देखते हैं....

प्रिंस : पागल है क्या....? भूत भी क्या कोई देखने की चीज़ है....

नेमत : अरे मगर जब तक हम उसे देखेंगे नहीं तब तक ये पता कैसे चलेगा की वो भूत है भी की नहीं.....

प्रिंस : कुछ पता करने की ज़रुरत नहीं है.... जब मैं कह रहा हूँ की भूत है तो है....

नेमत : ठीक है मान ली तुम्हारी बात.... तुम न सही मगर मुझे तो अंडर जा के देखने दो की वहां वाकई में कोई भूत है भी की तुम ऐसे hi बे मतलब दर रहे हो...

प्रिंस : पागल लड़की तुम्हारा दिमाग तो खराब नहीं हो गया.... अंडर जा के भूत को देखने की बात कर रही हो... वहां सच में भूत है.... 3 दिन पहले जब मैं यहाँ आया था तब सुल्तानगढ में घुसते hi मुझे अजीबो गरीब चीज़े देखने को मिली थी....

फिर वहां जो भी उसने देखा और सुना था वो सब नेमत को बताने लगा....

प्रिंस की बात सुन के नेमत के चेहरे के भाव बदलने lage....usne ध्यान से प्रिंस की पूरी बात सुनी मगर कुछ कहा नहीं....

प्रिंस : शायद वही भूत यहाँ भी आ गया है...

प्रिंस ने अभी इतना hi कहा था की तभी किसी की आवाज़ सुन के वो बुरी तरह से चौंक गया.... डरते डरते उसने पीछे मुद के देखा.... सामने खड़े शख्स को देख उसकी हालत एक बार फिर से खराब हो गयी.... तभी उस शख्स की बात सुन के उसे बड़ी हैरानी हुई....

प्रिंस मैं भूत नहीं बल्कि बाबा हूँ.... तुम्हारा बंगारू बाबा.... मैं यहाँ तुमसे मिलने आया हूँ न की तुम्हे डरने... तुम नहीं जानते.... आज सालों बाद तुम्हे अपने सामने ज़िंदा देख के मुझे कितनी ख़ुशी हो रही है....

प्रिंस : मगर मैं तो आपको जानता तक नहीं.... आज पहली बार आपको देख रहा हूँ.... तो आप मेरे बाबा कैसे हो गए....?

बाबा : तुमने ठीक कहा.... मगर फिर भी मैं ये hi कहूंगा की तुम मुझे जानते भी हो और नहीं भी....

बाबा की बात प्रिंस की समझ में नहीं आयी.... वो हैरत से कभी उन्हें देखता तो कभी नेमत को....

प्रिंस : एक पहले ये (नेमत) hi क्या काम थी जो आप भी आ गए मुझे डरने.... एक ये है जो कल से मेरे पीछे पड़ी हुई है और एक आप हैं जो मुझे अपना कह रहे हैं.... मेरी तो कुछ समझ नहीं आ रहा है.... अब तो मुझे ऐसा लगने लगा है की मैं मैं hi हूँ या फिर मैं भी कोई और hi हूँ....

बाबा : हम दोनों की तरह तुम भी तुम hi हो.... बस फर्क सिर्फ इतना है की हम दोनों को सब याद है मगर तुम अपनी असली पहचान भूल चुके हो.... पिछले जनम की वो साड़ी बातें.... वो सब कुछ एक पूरी खुशनुमा ज़िन्दगी जो तुमने जी थी और साथ hi वो दर्दनाक मौत जो न चाहते हुए भी तुम्हे मिली थी...

प्रिंस : आप क्या कह रहे हैं मेरी कुछ समझ नहीं आ रहा है....?

बाबा : तुम्हे वो सब बताने का अभी वक़्त नहीं आया है.... फिलहाल के लिए बस इतना समझ लो की मैं और नेमत तुम्हारे अपने हैं जो तुम्हे कभी कोई नुक्सान नहीं पंहुचा sakte....hamesha तुम्हारा भला hi चाहेंगे.... जहाँ तक मेरी बात है मुझे तुम बाबा कह सख्ते हो क्यों की मैं तुम्हारे बाबा की तरह hi हूँ.... और रही बात नेमत की तो वो तुमसे जुड़ा नहीं है.... बल्कि ये कहना ज़्यादा ठीक होगा की वो तुम्हारा hi एक हिस्सा है... जो फिलहाल के लिए तुमसे जुड़ा है....

प्रिंस : आप क्या कह रहे हैं मेरी कुछ समझ नहीं आ रहा है....

बाबा : कुछ दिनों में तुम सब समझ जाओगे... फिलहाल मैं जो कह रहा हूँ उसे ध्यान से सुनो.... मेरे पास ज़्यादा वक़्त नहीं है.... इस से पहले की वक़्त निकल जाए मुझे जल्द से जल्द तुम्हे कुछ बातें बतानी है और फिर मुझे जाना होगा....

प्रिंस : कैसी बातें....? और किस वक़्त की बात कर रहे हैं आप....? और आपको जल्द hi यहाँ से जाना क्यों होगा....?

बाबा : ये सब सवाल बाद में पहले मैं जो कह रहा हूँ वो सुनो....

प्रिंस : कहिये....

बाबा : तुम्हे रोज़ काम से काम 2 से 3 घंटे योग साधना में बैठना होगा... ताकि अपनी शक्ति को नियंत्रण कर sako....us वक़्त तुम्हे अपने दिमाग को दिल से जोड़ना होगा और साथ hi अपनी इन्द्रियों को भी जगाना होगा.... जिस से तुम्हे उन पावर्स का एहसास होगा.... जो इस वक़्त तुम्हारे अंडर हैं और उनका कैसे इस्तेमाल करना है ये भी तुम्हे पता चलेगा....

प्रिंस : ये आप क्या कह रहे हैं... मैं एक आम इंसान हूँ मेरे अंडर पावर्स कहाँ से आएँगी....? कुछ भी हाँ.... आपको सुबह सुबह मैं hi मिला फेकने के लिए.... और नेमत तुम कहाँ से पकड़ लायी हो इन्हे....? जल्दी बताओ मुझे ये तुम्हारा hi प्लान है न मुझे डरने का....

नेमत : नहीं प्रिंस तुम गलत समझ रहे हो.... बाबा ने जो भी कुछ कहा वो सब सच है....

प्रिंस : क्या सच है यही की मेरे अंडर पावर्स हैं.... बकवास.... बिलकुल बकवास बात है ये....

बाबा : अच्छा अगर हमारी बात बकवास है तो फिर तुम मुझे ये बताओगे की आखिर कैसे तुम 3 दिन से बिना किसी कमरे के अपनी आँखों से साफ़ साफ़ अपने दोस्तों को देख पा रहे हो....? किसी भी आम इंसान के लिए क्या ये मुमकिन है....? क्या बिना किसी पावर्स के कोई इंसान 500 किलोमीटर्स दूर अपने दोस्तों को देख सकता है....? बताओ मुझे जवाब दो.....

प्रिंस न में अपनी गर्दन हिला देता है....

फिर प्रिंस हैरत से पूछता है....

प्रिंस : क्या वाकई में मेरे अंडर पावर्स हैं....? क्या अब मैं इंसान नहीं रहा....?

बाबा : हाँ तुम्हारे अंडर पावर्स भी हैं और तुम इंसान भी हो मगर आम इंसान न हो के अब तुम एक सुपरहमन बन गए हो.... जो तुम हमेशा से थे....

प्रिंस : Kyaaaaaaaaaaaaa.....????

बाबा : हाँ.... ये सच है....

बाबा की बात सुन के प्रिंस धाम से वहीँ ज़मीन पे बैठ जाता है....

बाबा : ये क्या कर रहे हो प्रिंस....? सम्भालो खुद को....

प्रिंस : एक तो शॉक पे शॉक दे रहे है और साथ hi खुद को संभालने को भी कह रहे हैं.... पावर्स की बात सुन के मेरी तो समझ नहीं आ रहा hi की मैं खुश हो नाचूं या फिर दुखी हो के रोऊँ....

बाबा : तुम्हे ऐसा कुछ करने की ज़रुरत नहीं है.... फिलहाल मैंने जो कहा है वो करो.... रोज़ाना 2 से 3 घंटे तुम्हे योग साधना में बैठना है.... वक़्त काफी तेज़ी से बीत गया.... इस से पहले की वक़्त पूरी तरह से बीत जाए मुझे यहाँ से जाना चाहिए.... फिर मिलेंगे प्रिंस....

इस से पहले की प्रिंस आगे कुछ कहता या उन्हें रोक पाटा बाबा वहां से गायब हो गए थे....

उनके गायब होते hi एक बार फिर से प्रिंस बुरी तरह से चौंक जाता है....

नेमत : डरने की ज़रुरत नहीं है प्रिंस.... बाबा जा चुके है....

प्रिंस : मैं दर नहीं रहा बल्कि थोड़ा... नहीं नहीं थोड़ा नहीं बल्कि काफी हैरान हूँ.... पहले तेरा मिलना फिर उन सो कॉल्ड बाबा का अचानक से आना.... फिर उनका ये बताना की मेरे अंडर पावर्स हैं और मुझे उनको योग साधना के ज़रिये पहचान न है और साथ hi उन्हें कैसे कण्ट्रोल करना है ये भी सीखना है.... फिर अचानक से उन सो कॉल्ड बाबा का यहाँ से गायब हो जाना.... इतनी साड़ी अजीबो गरीब बातें सुन ने के बाद क्या मेरा हैरान परेशान होना सही नहीं है.... यार वो तो मैं हूँ जो अब तक तुम्हारे सामने जीता जागता खड़ा हूँ मेरी जगह कोई और होता तो कबका उसे हार्ट अटैक आया गया होता और वो स्वर्ग सिधार चूका होता....

नेमत : यार तुम इतना ओवर रियेक्ट क्यों कर रहे हो....? खुद को शांत करो और ठन्डे दिमाग से इन सब बातों को सोचो....

प्रिंस : क्या ख़ाक सोचूं.... मेरे दिमाग का तो तुम दोनों ने मिल के दही बना के रख दिया.... ऐसा लग रहा है जैसे की मेरा सर पहात जाएगा.... अब तो अपने दिमाग को शांत करने का मेरे पास एक hi रास्ता है और वो कहाँ रखा था मैंने.... मममम... हाँ याद आया बैडरूम के कप्बोर्ड में.....

ये कह के प्रिंस बैडरूम की तरफ चल देता है..... नेमत को उसकी कोई बात समझ नहीं आती.... वो उसे समझने की कोशिश करने लगती है.... जब उसे कुछ समझ नहीं आता तब वो बैडरूम के अंडर चली जाती है....

वहां प्रिंस जो कर रहा था उसे देख के वो बुरी तरह से चौंक जाती है....

इधर सुबह होते hi शनाया को कल हुई साड़ी बात याद आ जाती है..... साथ hi ये भी की उसकी वजह से प्रिंस को गोली भी लगी थी.... ये सोच के उसके दिल में एक दर्द सा उठता है और उसकी आँखों से आंसू बहने लगते हैं..... वो रोने लगती है.... वो प्रिंस को कॉल करके उसका हाल चाल पूछना चाहती है मगर उसके पास तो प्रिंस का नंबर hi नहीं है.... ये सोच के उसका रोना और भी ज़्यादा तेज़ हो जाता है....

ठीक तभी उसके डैड अपनी बेटी के रूम में आते हैं.... अपनी बेटी को रट देख उन्हें बेहद हैरानी भी होती है और साथ hi तकलीफ भी.... वो फ़ौरन अपनी बेटी के पास जा के उस से उसके रोने की वजह पूछने लगते हैं....

शनाया रट हुए : बाबा मुझे उसकी बड़ी याद आ रही है..... वो कैसा है ठीक तो है न.... उसे कुछ हुआ तो नहीं न..... ये जान ने के लिए मैं बेचैन हो रही हूँ.....

उसके डैड उसके सर पे हाथ फेर के कहते हैं....

डैड : अरे बीटा इस में इतना परेशान होक रोने की क्या ज़रुरत है....? उसे कॉल करके पूछ ले न....

शनाया : उसका नंबर नहीं है मेरे पास....

डैड : तो इसमें कौनसी बड़ी बात है.... कॉलेज में कॉल करके पता कर ले वहां से तुझे उसका नंबर तो क्या उसका पूरा एड्रेस भी मिल जाएगा....

अपने डैड की बात सुन के शनाया का उतरे हुए चेहरे पे चमक आ जाती है वो फ़ौरन अपना मोबाइल निकाल के कॉल करने hi वाली होती है की तभी कुछ देख के फिर से उसका चेहरा उतर जाता है... उसके चेहरे की चमक कहीं खो सी जाती है...

डैड : अब क्या हुआ....? कॉल कर न....

डैड की बात सुन के शनाया अपने डैड को सामने लगी घडी दिखा के कहती है....

शनाया : बाबा अभी तो पूरी तरह से सुबह भी नहीं हुई है... कॉलेज खुलने में अभी 3 घंटे बाकी हैं.... पूरे 3 घंटे बाबा.... ये 3 घंटे कैसे बीतेंगे बाबा...

डैड : जल्द hi बीत जाएंगे... हाँ एक बात और उसकी इतनी फ़िक्र करना चोर दे.... मुझे यकीन है वो ठीक hi होगा.... अच्छे के साथ कभी बुरा नहीं हो सकता....

शनाया : कैसे फ़िक्र न करूँ बाबा.... आज उसकी जो हालत है उसकी ज़िम्मेदार कहीं न कहीं मैं भी हूँ.... मेरे लिए उसने क्या नहीं किया.... अपनी जान तक की परवाह नहीं की..... अगर कल वो बीच में न आया होता तो मेरी इज़्ज़त कब की नीलाम हो चुकी होती और मैं अपनी जान दे चुकी होती.... वो ज़िन्दगी जो मैं जी रही थी उसमे सिर्फ धोका गन्दगी और बदनामी थी.... मैं तो कल hi मर गयी थी.... जब उन कमीनो ने मेरी इज़्ज़त लूटने की कोशिश की और मुझे मारने के लिए गोली चलायी.... उसे उस नेक फ़रिश्ते अपने जिस्म पे ले लिए साथ hi उन दरिंदों से मेरी इज़्ज़त और जान भी बचायी.... आज जो ज़िन्दगी मैं जी रही हूँ वो उसकी दें हैं.... और इसे मैं वैसे hi जीना चाहती हूँ जैसा की वो चाहता है.... अब से मैं बस वो hi करुँगी जो सही है..... मैं भी वैसे hi रहूंगी जैसे अच्छे और शरीफ इंसान रहा करते हैं..... मैं भी सब के साथ प्यार और अपने पैन से पेश आउंगी.... जैसे की वो आता है.... मैं भी सब की ठीक वैसे hi मदत करुँगी जैसे की वो करता है.... अब से मेरा हर एक काम वैसा hi होगा जैसा की उसका होता है.... अब बस मैं उसकी परछाई बांके रहूंगी.... मेरा वादा है बाबा आपसे और ख़ास कर के उस से की अब से मैं खुद को ऐसा बनाउंगी की आप को मुझे कभी अपनी बेटी बोलते वक़्त शर्मिंदगी महसूस नहीं होगी बल्कि गर्व होगा और न hi उसे मुझे अपना दोस्त बनाने में कोई परेशानी होगी....

अपनी बेटी की बात सुन के डैड को बेहद ख़ुशी होती है..... वो आगे बढ़ के अपनी बेटी को अपने सीने से लगा लेते हैं....

डैड : बीटा तेरी बातें सुन के और तुझे बदलते देख मुझे कितनी ख़ुशी हो रही है मैं बता नहीं सकता.... अब तो तुझसे ज़्यादा उस नेक फ़रिश्ते से मिलने के लिए मेरा दिल तड़पने लगा है.... मैं भी तो देखूं की आखिर वो फरिश्ता कौन है जिसने मेरे भटके हुए बच्चों को सीधे रास्ते पे ला के मुझसे मिला दिया....

तभी पीछे से आयुष आ के जो कहता है उसे सुन के डैड उसे ख़ुशी से अपने सीने से लगा लेते हैं....

आयुष : ठीक कहा डैड आपने.... वो वाकई में एक फरिश्ता है जिसने हम शैतानो को सुधार दिया.... हम को सही और गलत की पहचान करवा दी.... हम को गन्दगी से भरी ज़िन्दगी से बहार निकाल के एक अच्छी ज़िन्दगी जीने की राह दिखाई.... अब से हम सारे बुरे काम चोर के उस जैसा hi नेक और शरीफ बनना चाहते हैं....

डैड : ये कह के तू ने मेरा दिल जीत लिया मेरे बच्चे.... अब मुझे तुम दोनों की कोई फ़िक्र नहीं सच्चा साथी जो मिल गया है तुम दोनों को....

शनाया उदास मन से : अभी मिला नहीं है बाबा....

डैड : फ़िक्र मत कर मेरा बच्चा जल्द hi मिल जाएगा....

शनाया : बाबा क्या वो हम को माफ़ कर पायेगा....?

डैड : बीटा जहाँ तक मुझे पता है तुम दोनों ने उसके साथ ऐसा कुछ बुरा किया hi नहीं की उसे तुमसे कोई तकलीफ ho....use तुम से नहीं बल्कि तुम्हारी गलत आदतों और हरकतों से तकलीफ थी.... और अब जब तुम दोनों सुधर चुके हो तो मुझे यकीन है की वो तुम्हे ज़रूर अपना लेगा.... तुम्हारी बातों से जहाँ तक मैं उसे जान पाया हूँ.... वो एक हीरा है और हीरे को ये बात अच्छे से पता होती है की किसी हीरे को तराशने के बाद उसे वापिस कोयले की खान में नहीं फेंका करते बल्कि उसे संभाल के अपने पास रखा करते हैं.... वो तुम दोनों से नाराज़ है... तुम्हे उसे मानना होगा और उसे ये यकीन दिलाना होगा की तुम दोनों अब सुधर चुके हो.... और उसके दोस्त बनने के लायक हो.... अब ये तुम दोनों कैसे करते हो ये तुम्हे सोचना है.... चलो अब देर मत करो और जल्दी से तैयार हो जाओ और जा के अपने उस दोस्त को मन लो.....

डैड की बात सुन के दोनों बेहद खुश हो जाते हैं.... और फ़ौरन कॉलेज के लिए और ख़ास करके प्रिंस से मिलने के लिए चल देते हैं....

शनाया : प्रिंस तुम्हारी प्रिंसेस आ रही है.... अब चाहे जो हो जाए.... मुझे कुछ भी क्यों न करना पड़े मैं तुम्हे मन के rahungi....tumhe अपना बना के रहूंगी..... मैं आ रही हूँ प्रिंस.... मैं आ रही हूँ....
 
मेरी आशिकी तुमसे hi.....

अपडेट 91

शनाया : बाबा क्या वो हम को माफ़ कर पायेगा....?

डैड : बीटा जहाँ तक मुझे पता है तुम दोनों ने उसके साथ ऐसा कुछ बुरा किया hi नहीं की उसे तुमसे कोई तकलीफ ho....use तुम से नहीं बल्कि तुम्हारी गलत आदतों और हरकतों से तकलीफ थी.... और अब जब तुम दोनों सुधर चुके हो तो मुझे यकीन है की वो तुम्हे ज़रूर अपना लेगा.... तुम्हारी बातों से जहाँ तक मैं उसे जान पाया हूँ.... वो एक हीरा है और हीरे को ये बात अच्छे से पता होती है की किसी हीरे को तराशने के बाद उसे वापिस कोयले की खान में नहीं फेंका करते बल्कि उसे संभाल के अपने पास रखा करते हैं.... वो तुम दोनों से नाराज़ है... मगर तुम्हे उसे मानना होगा और उसे ये यकीन दिलाना होगा की तुम दोनों अब सुधर चुके हो.... और उसके दोस्त बनने के लायक हो.... अब ये तुम दोनों कैसे करते हो ये तुम्हे सोचना है.... चलो अब देर मत करो और जल्दी से तैयार हो जाओ और जा के अपने उस दोस्त को मन लो.....

डैड की बात सुन के दोनों बेहद खुश हो जाते हैं.... और फ़ौरन कॉलेज के लिए और ख़ास करके प्रिंस से मिलने के लाइट चल देते हैं....

शनाया : प्रिंस तुम्हारी प्रिंसेस आ रही है.... अब चाहे जो हो जाए.... मुझे कुछ भी क्यों न करना पड़े मैं तुम्हे मन के rahungi....tumhe अपना बना के रहूंगी..... मैं आ रही हूँ प्रिंस.... मैं आ रही हूँ....

अब आगे....

नेमत जब बैडरूम में जाती है तब अंडर का हाल देख उसे बेहद हैरानी होती है....

नेमत : अबे ये क्या कर रहा है.....?

प्रिंस : दिखाई नहीं देता.... पी रहा हूँ.... साला तू ने और तेरे उस सो कॉल्ड बाबा ने दिमाग का दही बना के रख दिया है..... उसे hi ठीक करने की कोशिश कर रहा हूँ....

नेमत : इस तरह शराब पी के....

प्रिंस : और नहीं तो क्या... ये वो चीज़ है जिसे पी के दिमाग शांत हो जाता है....

नेमत : मैंने तुझे क्या समझा था और तू क्या निकला.... तू न पाका शराबी है....

प्रिंस : जी नहीं ऐसी कोई बात नहीं है.... जब ज़्यादा दिम्माग खराब हो जाता है तब hi इसे पीटा हूँ....

नेमत : दिमाग को ठीक करने के और भी तरीके हैं.... भूल गया बाबा ने क्या कहा था.... योग साधना.... उस से तेरा दिम्माग भी ठीक हो जाएगा और साथ hi तू भी....

प्रिंस : यार मेरे लिए ये hi ठीक है.... मैं पागल नहीं हूँ जो तुम दोनों की बेकार की बात पे यकीन करूँ.... तुझे पीना है तू आ वर्ण फूट ले यहाँ से... यूँ फ़ालतू बकवास करके मेरा दिमाग का जो दही बना हुआ है उसका लस्सी मत बना....

नेमत : तू नहीं मानेगा न...

प्रिंस : नहीं...

नेमत : देख सोच ले आखरी बार पूछ नहीं बल्कि कह रही हूँ.... इस गन्दी चीज़ को पीना चोर और मेरे साथ चल मैं तेरा दिमाग पूरी तरह से ठीक कर दूंगी.... तू अपनी मर्ज़ी से चला तो ठीक है वर्ण....

प्रिंस : धमकी.... प्रिंस को धमकी.... वर्ण क्या हाँ....?

नेमत : वर्ण मुझे ज़बरदस्ती तुझे यहाँ से ले जाना होगा....

प्रिंस : आज तक कोई ऐसा पैदा नहीं हुआ जो मेरी मर्ज़ी के खिलाफ मुझसे कोई काम करवा सके....

नेमत : तू शायद ये भूल रहा है की मैं कौन हूँ....? मैं कोई गैर नहीं बल्कि तेरा hi हिस्सा हूँ.... तुझे अपने साथ कहीं भी लेजाने और तेरे साथ कुछ भी करने के लिए मुझे किसी की परमिशन की ज़रुरत नहीं है.... तेरी तो बिलकुल भी नहीं समझा तू..... अब सीधे सीधे तू चलता है की मैं तुझे उदा के ले जाऊं....?

नेमत की बात सुन के प्रिंस हसने लगता है....

हहहहहहहह....

नेमत : मैंने क्या कोई जोके मारा है जो तू यूँ हंस रहा है....

प्रिंस शराब का बड़ा सा घूँट ले के कहता है....

प्रिंस : जोके hi तो है.... तू एक मामूली सी लड़की प्रिंस के साथ ज़बरदस्ती करेगी..... अब इसे जोके नहीं तो और क्या कहेंगे....?

नेमत : तू न बहुत बोल रहा है.... इस गन्दी चीज़ को पीना चोर और चल मेरे साथ.... वर्ण मुझे सच में तुझे उदा के यहाँ से ले जाना पड़ेगा....

प्रिंस : चल आज मैं भी देखता हूँ की मेरी मर्ज़ी के खिलाफ तू मुझे यहाँ से कैसे ले जाती है....?

प्रिंस की बात पे नेमत मुस्करा देती है.... और अगले hi पल वो होता है जो प्रिंस ने कभी सपने में भी नहीं सोचा था.... वो बुरी तरह से दर जाता है.... उसका पूरा नशा एक hi झटके में उतर जाता है.... पानी में गिरने से उसकी तंत्र टूट टी है....

अभी वो कुछ बोलने hi वाला होता है की तभी नेमत उसका सर पकड़ के उसे पानी में डूबा देती है.... बड़ी मुश्किल से प्रिंस अपना सर पानी से बहार निकालता है.... मगर फिर से नेमत उसका सर पानी में डूबा देती है.... प्रिंस फिर से बहार निकलता है.... नेमत फिर से वैसा hi करती है... प्रिंस बार बार पानी से बहार निकल रहा है और नेमत बार बार उसे पानी में डूबा रही है....

आखिर प्रिंस के बर्दाश्त की हद पार हो जाती है.... उसे गुस्सा आने लगता है.... इस बार जब नेमत उसका सर डूबने लगती है तब प्रिंस उसका हाथ पकड़ के उसे भी साथ में पानी में खींच लेता है.... नेमत पानी से बहार निकलने की कोशिश करती है मगर प्रिंस उसे बहार जाने नहीं देता.... धीरे धीरे नेमत का दम घुटने लगता है..... उसकी साँसें डैम तो देती हैं और वो प्रिंस की बाहों में झूल जाती है.... उसकी ऐसी हालत देख के प्रिंस बुरी तरह से घबरा जाता है.... वो फ़ौरन उसे साथ ले के पानी से बहार आता है.... उसे ज़मीन पे लेता के उसे होश में लाने की कोशिश करता है.... मगर नेमत बेसुध सी पड़ी है... वो हिल दल भी नहीं रही और न hi सांस ले रही है.... उसकी ऐसी हालत देख प्रिंस की हालत खराब हो जाती है.... उसकी आँखें नाम हो जाती हैं.... प्रिंस उसके दिल की धड़कन को चेक करता है जो की उसे महसूस hi नहीं हो रही.... उसे इस बात का दर सताने लगता है की कहीं नेमत मर तो नहीं गयी.... इस बात के दिमाग में आते hi वो तड़प उठता है..... नेमत का नाम ले के वो ज़ोर से चीखता है....

नईईईईएमअआआअआटट्ट्ट्ट....

एक दर्द भरी पुकार उसके दिल से निकल के वहां की फ़िज़ा में गूँज उठती है....

प्रिंस को समझ नहीं आ रहा है वो क्या करे....? कैसे नेमत को ठीक करे....

वो उसे अपनी गॉड में उठा ले ता है उसके चेहरे को अपने हाथों में ले उसे होश में लाने की कोशिश करने लगता है.... मगर नेमत के जिस्म में कोई हरकत नहीं... वो बेजान सी प्रिंस की बाहों में पड़ी हुई है.... प्रिंस इधर उधर देखता है वहां उसे कोई नज़र नहीं आता.... प्रिंस को समझ नहीं आ रहा है की वो क्या करे कैसे नेमत को ठीक करे...

प्रिंस के दिल और दिमाग में इस वक़्त जुंग छिड़ी हुई है....

दिमाग : सोच प्रिंस जल्दी कुछ सोच इस से पहले की देर हो जाए या कुछ गलत हो जाए....

दिल : अब और कुछ होने को बाकी hi कहाँ रह गया है.... सब कुछ तो तू ने बिगाड़ के रख दिया.... मार दिया उस मासूम को तू ने...

दिमाग : नहीं प्रिंस इस की बात मत सुन सोच कुछ ऐसा की जिस से इसे बचाया जा सके.... सोच जल्दी.... कोई तो रास्ता होगा....

अभी प्रिंस ये सोच hi रहा था की तभी उसके दिमाग की बत्ती जलती है और उसे कुछ याद आता है... वो फ़ौरन अपने दिमाग और दिल को शांत करता है और पूरा ध्यान लगा के दिमाग को दिल से जोड़ता है.... फिर झुक के नेमत के नाक को दबाता है और अपने मुँह से उसके मुँह में सांस देने की कोशिश करने लगता है.... इस वक़्त प्रिंस का पूरा ध्यान अपने दिमाग और दिल से जुड़ा हुआ है.... उसे अपने अंडर एक रौशनी की ऊर्जा सी महसूस होती है जो उसके जिस्म में फैल रही है.... धीरे धीरे वो रौशनी प्रिंस के पूरे जिस्म में फैल जाती है और उसके जिस्म से बहार निकलने लगती है... वो रौशनी प्रिंस के मुँह के हो के नेमत के मुँह में जाने लगती है.... धीरे धीरे वो नेमत के दिल तक पहुँचती है और उसके दिल में समां जाती है... उसके दिल को एक जतका सा लगता है और उसका दिल एक जटके के साथ एक बार फिर से धड़कने लगता है... उसकी साँसें वापिस लौट आती है... और धीरे धीरे उसकी आँखें खुलती है....

प्रिंस अभी भी अपने मुँह को उसके मुँह से जोड़ कर उसे साँसे दे रहा है.... नेमत को जब प्रिंस के होंठों का एहसास अपने होंठों पे होता है तब वो बुरी तरह से चौंक जाती है.... वो फ़ौरन उसे धक्का दे के खुद से दूर करती है...

नेमत : अबे कमीने दूर हैट ये क्या कर रहा है.... साले मौका मिला नहीं की तू ने अपना छिछोरा पाना दिखाना शुरू कर दिया....

नेमत को ठीक देख प्रिंस की ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहता.... वो फ़ौरन आगे बढ़ के उसे अपने सीने से लगा लेता है.... नेमत एक बार फिर से उसे खुद से दूर धकेल के कहती है...

नेमत : कमीने दूर हैट मुझसे... मैं वैसी लड़की नहीं हूँ जैसा की तू सोच रहा है.... मेरे साथ कुछ ऐसा वैसा करने का सोचना भी नहीं... वर्ण मैं तेरी बंद बजा दूंगी... साले कमीने....

ये और न जाने क्या क्या वो प्रिंस को सुनाये जा रही है... प्रिंस वहीँ पास बैठ बस मुस्कुराते हुए उसे देख रहा है....

नेमत : अबे तू कहीं पागल तो नहीं हो गया.... पहले तू ने मुझे जान से मारने की कोशिश की और अब मुझसे चिपक रहा है और तो और तू ने मुझे किश भी किया.... साले अगर और कुछ किया न तो सोच लेना तेरा मैं वो हाल करुँगी की तू उसे कभी भूल नहीं पायेगा....

प्रिंस : अबे साला एक तो मैंने तेरी जान बचायी और उल्टा तू मुझे hi गालियां दे रही है....

नेमत : साले पहले मार तो मुझे तू hi रहा था न.... और ये कौनसा तरीका है किश करके जान बचने का हाँ....?

प्रिंस : मैं तुझे मार रहा था या तू मुझे डूबा के मारना छह रही थी....

नेमत : अबे कमनीने मैं तुझे डूबा नहीं रही थी बल्कि तेरा सर पानी में दाल दाल के तेरा नशा उतार रही थी.... और रही बात तुझे पानी में डूबा के मारने की तो ये मुमकिन hi नहीं.... न तुझे पानी डूबा सकती है न hi हवा तेरा दम घोट सकती है न आग तुझे जला सकती है और न hi ज़मीन तुझे निगल सकती है.... ये साड़ी चीज़ें तेरी गुलाम हैं.... और तू इनका मालिक....

प्रिंस : ये क्या बकवास कर रही है....?

नेमत : ये बकवास नहीं बल्कि वो हकीकत है जिस से तू अनजान है.... ये तो मामूली सी बात है तेरे अंडर और क्या क्या पावर्स है उस सब से इस वक़्त तू अनजान है... जब तुझे सब पता चलेगा तब तू ये नहीं कहेगा.... की मैं तुझे पानी में डूबा के मार रही थी.... मार तो तू मुझे रहा था.... वो भी मेरा गाला दबा के....

नेमत की बात सुन के प्रिंस बहुत बड़ा झटका लगता है....

प्रिंस : क्याआआआआ....????? मगर ये कैसे मुमकिन है... मैं तुझे तो क्या किसी भी लड़की को मारना तो दूर उसपे हाथ भी नहीं उठा सकता.... ये मेरी तबीयत के खिलाफ बात है.... तू जब मुझे पानी में डूबा रही थी तब मैं बस खुद को बचा रहा था....

नेमत : खुद को भचा रहा था या मेरा गाला दबा के मुझे मार रहा था.... तू ने तो मुझे लगभग मार hi दिया था...

प्रिंस : अच्छा अगर मैंने तुझे मार दिया था तो फिर तू ज़िंदा कैसे हो गयी....? मरे हुए भी कभी ज़िंदा हुआ करते हैं क्या...?

नेमत : हाँ नहीं होते ज़िंदा.... मगर मैं कोई गैर नहीं हूँ बल्कि तेरा hi एक हिस्सा हूँ और जब तक तू ज़िंदा है मुझे कोई नहीं मार सकता सिर्फ तुझे चोर के.... और वो hi तू ने किया अनजाने में hi सही मगर किया तो तू ने hi मेरा गाला दबा के मुझे मौत के दरवाज़े पे पंहुचा दिया था....

प्रिंस : अच्छा अगर मैंने तुझे मारा तो फिर ज़िंदा कैसे हो गयी....?

नेमत : तेरी पावर्स की वजह से.... जिसने मेरे दिल को फिर से धड़कने पे मजबूर कर diya....aur मुझे मौत के मुँह से वापिस लौटाया....

प्रिंस : अच्छा तो फिर तो तुझे मेरा शुक्रगुज़ार होना छाइये....

नेमत : कमीने शुक्रिया गया भाड़ में दोबारा तू ने ऐसा कर ने के बारे में गलती से भी सोचा न तो मैं तेरी टांगें तोड़ दूंगी.... यहाँ मेरी जान पे बनाई थी और तुझे शर्करीय की पड़ी है....

प्रिंस आगे बढ़ के उसे गले लगा के कहता है....

प्रिंस : चल न चोर न अब हो गयी गलती.... अब क्या बच्चे की जान लेगी....

नेमत उसे खुद से दूर हटा के कहती है....

नेमत : साले दूर रह मुझसे.... वर्ण अभी तेरी टांग तोड़ दूंगी....

प्रिंस नेमत को मानाने की बहुत कोशिश करता है मगर नेमत मान ने को तैयार hi नहीं.... इस से प्रिंस चीड़ जाता है....

प्रिंस : अबे कहा न गलती से हो गया.... और मुझे भी कोई शौक नहीं है तुझे गले लगाने का.... वो तो तू खुद कल से मेरे पीछे पड़ी हुई है.... अगर तुझे मुझसे इतनी hi तकलीफ है तो क्यों तू मेरे साथ है चली क्यों नहीं जाती... मैंने तो तुझे नहीं बुलाया था....

नेमत प्रिंस की बात का कोई जवाब नहीं देती न hi वहां से जाती है.... ये देख प्रिंस

प्रिंस : तुझे नहीं जाना ठीक है मत जा मैं hi चला जाता हूँ... और हाँ दोबारा मेरे करीब भी मत आना.... न मैं तेरे पास आऊंगा और न hi तू मेरे करीब आना....

ये कह के प्रिंस वहां से जाने लगता है.... प्रिंस को यूँ जाते देख नेमत उसे रोकने की कोशिश करने लगती है मगर प्रिंस है की रुकने को तैयार hi नहीं.... नेमत भाग के उसके करीब जा के उसका गिरेबान पकड़ के उसकी आँखों में आँखें दाल के कहती है....

नेमत : कहाँ जा रहा था हाँ....? मुझे चोर के जाएगा....? मुझे...? नेमत को...? जा के तो दिखा तेरी टांगें न तोड़ दी तो मेरा नाम नेमत नहीं....

प्रिंस : अभी तो मुझे जाने को कह रही थी और अभी खुद रोक रही है....? तेरा न मुझे कुछ समझ नहीं आता.... न hi तू समझ आती है और न hi तेरी बातें....

नेमत : मुझे समझने की तुझे ज़रुरत hi क्या है... और वैसे भी आज तक कोई खुद को समझ पाया है क्या....?

प्रिंस : यार तू सीधे सीधे बात नहीं कर सकती क्या....? हर बात को गोल गोल घूमना ज़रूरी है क्या....?

नेमत : फ़िक्र मत कर जल्द hi तू सब समझ जाएगा.... और जिस दिन तुझे सब समझ आ गया उस दिन........

ये कह के नेमत खामोश हो जाती है....

प्रिंस : उस दिन क्या....?

नेमत : उस दिन का उस दिन सोचेंगे.... फिलहाल हम को चलना चाहिए काफी देर हो चुकी है... शाम भी होने आयी है....

प्रिंस : अबे यहाँ तो अच्छी खासी धुप खिली है दोपहर का वक़्त है और तू शाम की बात कर रही है....?

प्रिंस की बात सुन के नेमत जो जवाब देती है उसे सुन के प्रिंस के पैरों टेल से ज़मीन निकल जाती है....???????

नेमत : भले hi यहाँ दोपहर है मगर सुल्तानगढ में इस वक़्त शाम हो चुकी है....

प्रिंस : तेरा दिमाग तो ठीक है न ये क्या बक रही है.... एक hi जगह पे दो वक़्त कैसे हो सकता है....?

नेमत : हो सकता है.... क्यों की ये जगह सुल्तानगढ नहीं है.... और न hi इंडिया है....

प्रिंस : अच्छा अब ये मत कहना की ये एअर्थ भी नहीं है....

नेमत : हाँ नहीं है....

प्रिंस : लगता है पानी में डूबने की वजह से तेरा दिमाग हिल गया है.... इस लिए बेकार की बात कर रही है....

नेमत : मैंने जो कहा वो सच है.... ये एअर्थ नहीं बल्कि "ड्रीम वर्ल्ड" है

प्रिंस : चल अब बहुत बकवास हो गयी अब और नहीं.... फिलहाल घर चलते हैं वहां चल के आराम से अपने इस ड्रीम वर्ल्ड के बारे में बताना....

प्रिंस की बात सुन के नेमत उसे कुछ नहीं कहती.... बस देखती रहती है....

प्रिंस : ोये मैडम घर चलेगी या फिर मुझे देखती hi रहेगी....

नेमत : कैसे जाएंगे घर....?

प्रिंस : पैदल और कैसे.... अब इस तालाब के पीछे जाने के लिए कार की तो ज़रुरत नहीं है न.... हम पैदल भी तो जा सकते हैं.... जैसे आये थे वैसे जाएंगे....

नेमत : अच्छा ज़रा बताना की हम यहाँ कैसे आये थे.... क्या चल के आये थे....?

प्रिंस : जी नहीं तू ने मेरा हाथ पकड़ा था और....

ये बात कहते कहते प्रिंस बुरी तरह से चौंक जाता है.... जब उसे याद आता है की उसे पता hi नहीं की वो यहाँ आया कैसे....? वो तो घर पे शराब पी रहा था.... उसकी बहस नेमत से हो रही थी और फिर अचानक से वो यहाँ आ गया....??????
 
मेरी आशिकी तुमसे hi.....

अपडेट 92

प्रिंस की बात सुन के नेमत उसे कुछ नहीं कहती.... बस देखती रहती है....

प्रिंस : ोये मैडम घर चलेगी या फिर मुझे देखती hi रहेगी....

नेमत : कैसे जाएंगे घर....?

प्रिंस : पैदल और कैसे.... अब इस तालाब के पीछे जाने के लिए कार की तो ज़रुरत नहीं है न.... हम पैदल भी तो जा सकते हैं.... जैसे आये थे वैसे जाएंगे....

नेमत : अच्छा ज़रा बताना की हम यहाँ कैसे आये थे.... क्या चल के आये थे....?

प्रिंस : जी नहीं तू ने मेरा हाथ पकड़ा था और....

ये बात कहते कहते प्रिंस बुरी तरह से चौंक जाता है.... जब उसे याद आता है की उसे पता hi नहीं की वो यहाँ आया कैसे....? वो तो घर पे शराब पी रहा था.... उसकी बहस नेमत से हो रही थी और फिर अचानक से वो यहाँ आ गया....??????

अब आगे.....

प्रिंस : सच सच बता की मैं यहाँ कैसे आया....? और ये कौनसी जगह है....?

नेमत : घर चल वहां मैं तुझे सब बताती हूँ....

इस से पहले की प्रिंस कुछ कहता नेमत प्रिंस का हाथ पकड़ती है और तभी अचानक से वो होता है जिसे देख प्रिंस चौंक जाता है....

प्रिंस शॉकेड : य.... Y....ye कैसे हुआ....? हम y....y....yaha...n kai...se आये....?

नेमत : जादू से और क्या....?

प्रिंस : पागल है क्या....? कुछ भी... ऐसा थोड़े hi होता है.... सच सच बता ये क्या था....?

नेमत : अरे मेरे स्मार्त्य ये जादू hi था....

प्रिंस : जादू.... मतलब तुम जादूगरनी हो....!!! जिनि हो....

प्रिंस की बात सुन के नेमत हसने लगती है....

हहहहहहहहह.....

नेमत : नहीं नहीं.... जिनि नहीं हूँ मैं.... न hi कोई जादूगरनी....

प्रिंस : तो फिर तुमने ये कैसे किया....?

नेमत : वक़्त आने पे तुम्हे अपने आप पता चल जाएगा....

प्रिंस : चल ठीक है मगर इतना तो बता दे की वो जगह कौनसी थी और तुम मुझे वहां क्यों ले गयी थी....?

नेमत : एअर्थ की तरह इस ब्रह्माण्ड में और भी कई गृह यानी की प्लेनेट हैं.... जिनमे से कुछ में जीवन है तो कुछ में नहीं.... वैसे hi उन गृह में से एक सब से ख़ास गृह जो है वो है ड्रीम वर्ल्ड....

प्रिंस : अच्छा.... ऐसा क्या ख़ास है उस गृह में....?

नेमत : ड्रीम वर्ल्ड सच्चे प्यार की अनमोल निशानी है....

प्रिंस : जैसे की ताजमहल....

नेमत : हाँ वैसे hi....

प्रिंस : कौन है वो जिसके प्यार की वो निशानी है.....?

नेमत : वो तुम हो....

प्रिंस शॉकेड : Kyaaaaaaaaaaa....????

नेमत : हाँ... ये सच है.... जानते हो उसे तुमने खुद अपने हाथों से बड़े प्यार से बनाया था....

प्रिंस एक बार फिर शॉक हो जाता है....

प्रिंस शॉकेड : क्या बकवास कर रही है.... कुछ भी हाँ... मैं एक आम इंसान एक गृह को कैसे बना सकता हूँ....?

नेमत : हाँ ये भी सच है की कोई आम इंसान किसी गृह को नहीं बना सकता.... मगर एक एंजेल... सब से प्यारा सा एंजेल... जिसके पास इस ब्रह्माण्ड की बेइन्तेहाँ पावर्स हैं वो तो बना सकता है.... अपनी पावर्स से....

प्रिंस : यार बस कर फेकने की भी हद होती है....

नेमत : मैं फेक नहीं रही बल्कि वो hi कह रही हूँ जो सच है.... और सच यही है की ड्रीम वर्ल्ड को तुम्हे hi बनाया था.....

प्रिंस : अच्छा जब ये बता दिया है तो ये भी बता दे की उसे मैंने कब और किसके लिए बनाया था.... अब मत कहना की उसे मैंने तेरे लिए बनाया था....

प्रिंस की बात सुन के नेमत का चेहरा उदास हो जाता है....

नेमत : है काश.... उसे तू ने मेरे लिए बनाया होता....

ये कहते कहते नेमत की आँखें नाम हो जाती हैं.... वो अपनी भीगी पलकें पॉच के आगे कहती है....

नेमत : ड्रीम वर्ल्ड को तू ने आज से 3000 साल पहले बनाया था.... ड्रीम वर्ल्ड इस ब्रह्माण्ड का सब से खूबसूरत प्यारा और जादुई गृह मीन्स प्लेनेट है.... उसे तुमने बड़े प्यार से अपनी जान के लिए बनाया था.... उसके साथ तुम वहां अपनी पूरी ज़िन्दगी प्यार से गुज़ारना चाहते थे.... मगर....

प्रिंस : तेरी बातें काफी दिचस्प लग रही हैं... जैसे की कोई परियों की कहानी....

प्रिंस की बात सुन के नेमत गुस्से में आ जाती है....

नेमत गुस्से में : ये कोई कहानी नहीं है.... बल्कि वो सच्चाई है जिसे कोई झुटला नहीं सकता और न hi बदल सकता.... काश उसे बदलने का कोई रास्ता होता....

प्रिंस : क्या बात है यार तू अचानक से इतना भड़क क्यों गयी.... मैं तो ऐसे hi मज़ाक कर रहा था....

नेमत बेहद गुस्से में लगभग चीखते हुए कहती है.....

नेमत : ये माज़क नहीं है.... सुना तू ने... नहीं है ये मज़ाक.... बल्कि एक दर्दनाक हक़ीक़त है.... जिसे याद करते hi रूह तक कांप जाती है....

प्रिंस : क्यों ऐसी क्या बात है....? और किस दर्द की बात कर रही है तू....

नेमत : व.... व.... वो दर्द जो उस मासूम ने सहा था.... बेइन्तेहाँ दर्द.... जो उसे उसने दिया था जिसे वो दिल ो जान से चाहता था.... जानते हो उसके प्यार ने क्या किया था उसके साथ.....

प्रिंस : क्या....?

नेमत : उसने बड़ी बेदर्दी से उस मासूम का सीना चीयर के उसका दिल निकाल के उसे वहीँ ड्रीम वर्ल्ड में दफना दिया.... उस ड्रीम वर्ल्ड को उस कमीनी ने उस मासूम के प्यार का मक़बरा बना दिया..... ज़रा सा भी रेहम नहीं आया उस कमीनी को उस मासूम पे....

नेमत की बात सुन के प्रिंस के दिल में तेज़ दर्द सा उठता है.... उसकी आँखों से आंसू बहने लगते हैं.... बड़ी मुश्किल से वो बस इतना hi कह पाटा है....

प्रिंस : क्यूँउउउउउउणं....?

नेमत : इस क्यों का जवाब मेरे पास नहीं है....

प्रिंस : कौन थी वो....?

नेमत : वक़्त आने पे तुम खुद जान जाओगे...

प्रिंस : कब आएगा वो वक़्त....?

नेमत : बहुत जल्द.... मगर उसके लिए पहले तुम्हे अपनी पावर्स को हासिल करना होगा.... जो कई टुकड़ों में पूरे ब्रह्माण्ड में फैली हुई है.... ये कहना ज़्यादा सही होगा की वो छुपी हुई हैं.... जिन्हे तुम्हे कड़ी म्हणत से हासिल करना होगा....

प्रिंस : अपनी hi पावर्स को हासिल करने में भला क्या परेशानी होगी....

नेमत : ये इतना भी आसान नहीं है.... वो दोनों तुम्हे कभी तुम्हारी पावर्स को हासिल नहीं करने देंगी....

प्रिंस : कौन दोनों....?

इस से पहले की नेमत कुछ कहती प्रिंस उस से पहले hi बोल देता है....

प्रिंस : अब ये मत कहना की ये भी मुझे वक़्त आने पे hi पता चल जाएगा....

नेमत : नहीं ये तो तुम अभी जान सकते हो.... वो दोनों और कोई नहीं बल्कि तुम्हारा सच्चा प्यार है.... मलिका सुनहरी और पारी....

प्रिंस : सच्चा प्यार एक hi होता है न की दो....

नेमत : ठीक कहा तुमने.... सच्चा प्यार एक hi होता है.... जिसे तुमने दिल की गहराइयों से चाहा था वो थी मल्लिका सुनहरी.....

प्रिंस : तो फिर पारी कौन है....?

नेमत : पारी भी तुम्हारा सच्चा प्यार hi है.... उसे भी तुम बहुत चाहते थे....

प्रिंस : मगर ये कैसे मुमकिन है... मैं एक साथ दो को कैसे छह सकता हूँ....?

नेमत : एक साथ नहीं मगर अलग अलग तो छह सकते हो न....

प्रिंस : मैं कुछ समझा नहीं....

नेमत : समझ जाओगे.... जिस पल तुम्हारा दिल तुम्हारे अंडर समायेगा तुम्हे सब पता चल जाएगा....

प्रिंस : मेरा दिल तो मेरे जिस्म में है.... उसके बिना मैं ज़िंदा कैसे रह सकता हूँ....

नेमत : तुम्हारा ये दिल नहीं वो दिल जो ड्रीम वर्ल्ड में दफ़न है.... मैं उस दिल की बात कर रही हूँ....

प्रिंस : अच्छा....!! तो उसके लिए इंतज़ार करने की क्या ज़रुरत है...? अभी चल के उसे हासिल कर ले ते हैं....

नेमत : जी नहीं ये इतना आसान नहीं है... उस कमीनी ने तुम्हारे दिल को 7 पिंजरे यानी तिलिस्म में कैद किया हुआ है... तुम्हे उस सातों पिंजरों को तोडना होगा.... तब कहीं जा के तुम्हे तुम्हारा दिल मिलेगा....

प्रिंस : और ये कैसे होगा....? मुझे तो इस सब के बारे में कुछ भी पता नहीं है.... तो भला मैं कैसे ये करूँगा....?

नेमत : उसके लिए मैं और बाबा हैं न.... तुझे आगे क्या और कैसे करना है वो हम बताएँगे.... तुझे बस उस राह पे चलना है और वो hi करना है जो तुझे करने को कहा जाएगा.... सब से पहले तुझे योग साधना के ज़रिये अपनी पावर्स को जान न और उसे काबू करना सीखना होगा.... वो पावर्स जो इस वक़्त तेरे जिस्म में हैं.... तुझे शुरुवात उसी के करनी है...

प्रिंस : ये सो कॉल्ड योग साधना मुझे कब तक करनी होगी....?

नेमत : हमेशा.... जिस से हर पल हर लम्हा तेरी पावर्स बढ़ती जायेगी.... और साथ hi तुझे आगे का रास्ता भी बताती जायेगी.... रात बहुत हो गयी है... अब सो जा सुबह उठ के तुझे अपना काम शुरू करना है....

प्रिंस : एक सवाल....

नेमत : वो भी पूछ ले.... अगर ज़रूरी हुआ तो उसका जवाब तुझे मुझसे मिल जाएगा.... वर्ण वो भी वक़्त आने पे पता चल जाएगा....

प्रिंस : एक बात मेरी समझ में नहीं आयी.... वो ये की तू ने कहा की मैं किसी से सच्चा प्यार करता था.... फिर तू ने कहा की वो एक नहीं दो थी... एक मल्लिका सुनहरी और दूसरी पारी.... तो फिर अब जो मेरी ज़िन्दगी में ये लडकियां हैं (रूही.... अवनि और ज़रा) उनका क्या....? क्या वो तीनो मेरा प्यार नहीं है....? क्या उनके लिए मेरे दिल में जो प्यार है वो सच्चा नहीं है....? क्या मैं उन्हें धोका दे रहा हूँ....?

नेमत : तू और धोका....? ये वो शब्द है जो तेरे लिए मुमकिन नहीं.... तू छह के भी कभी किसी को धोका नहीं दे सकता.... यहाँ तक की सपने में भी नहीं.... और रही बात रूही अवनि और ज़रा की तो उनके लिए तेरे दिल में जो प्यार है वो सच्चा है... सिर्फ तीन hi नहीं बल्कि मल्लिका पारी और इन तीनो के साथ साथ तेरा सच्चा प्यार पाने वाली और भी बहुत सी हैं....

प्रिंस शॉकेड : kyaaaaaaaaaa....? और भी....

नेमत : जी हाँ.... 7 + 7 मिला के तेरी पूरी 14 दिवानियाँ हैं.... जिन्हे तेरा सच्चा प्यार नसीब होगा....

प्रिंस शॉकेड : क्या बकवास कर रही है....?

नेमत : मैं बकवास नहीं कर रही हूँ बल्कि वो कह रही हूँ जो तेरी किस्मत में लिखा है.... और किस्मत के लिखे को कोई नहीं बदल सकता....

प्रिंस : अबे तू बता रही है या डरा रही है.... साला यहाँ ये तीनो hi नहीं संभल रही है और तू 7 + 7..... 14 की बात कर रही है.... मैं क्या कोई राजा हूँ जो मेरी इतनी रानियां हैं....

नेमत : तू वाकई में राजा है.... एक सच्चा दिलवाला प्रिंस... एक ऐसा सुलतान जिस से पूरा ब्रह्माण्ड प्यार करता है.... और साथ hi तेरे खतरनाक गुस्से से डरता है.... तेरा प्यार शबनम की बूँद जैसा है जो सब की प्यास भी बुझाता है और साथ hi सब के दिल को प्यार भरी ठंडक भी देता है..... रही बात तेरे गुस्से की तो वो इतना खतरनाक है की पल भर में पूरे ब्रह्माण्ड को जला के राख कर दे.... इस पूरे ब्रह्माण्ड में ऐसा कोई नहीं जो तुझे हरा सके तुझे मारना तो बहुत दूर की बात है.... तुझे बस एक hi शख्स हरा सकता है या मार सकता है वो और कोई नहीं बल्कि तू खुद है....

प्रिंस : एक और सवाल....

इस से पहले की प्रिंस आगे कुछ कहता नेमत उसे वहीँ रोक देती है....

नेमत : अब बस भी कर यार.... क्या पूरी महाभारत एक hi दिन में जान लेगा... कुछ कल के लिए भी चोर दे....

प्रिंस : चल ठीक है....

ये कह के प्रिंस उठ के वहां से जाने लगता है....

नेमत : अबे अब कहाँ चल दिया...

प्रिंस : सो ने....

नेमत : सो न बाद में पहले चल खाना कहते हैं....

प्रिंस : तेरी बातों से hi मेरा पेट भर गया...

नेमत : तुझे न सही मगर मुझे तो भूक लगी है.... वो भी बड़ी ज़ोर की... तेरे चक्कर में सुबह से मैंने कुछ नहीं खाया.... और अब भी तू मुझे कुछ खाने नहीं दे रहा है....

प्रिंस : अबे मैंने कब तुझे खाने से रोका है.... भूक लगी है तो जा के खा ले....

नेमत : हाँ तो खाउंगी न.... और हाँ तू भी मेरे साथ चल रहा है.... ये मैं पूछ नहीं रही बल्कि बता रही हूँ... चल जल्दी से उठ के फ्रेश हो जाता.... जब तक मैं भी फ्रेश हो जाती हूँ... फिर हम बहार चलेंगे खाने....

प्रिंस : अबे तुझे सब काम मेरे साथ hi क्यों करने होते हैं....? अकेले भी तो कर सकती है न....?

नेमत : तू न बादाम खाया कर...

प्रिंस : अब ये बात कहाँ से बीच में आ गयी...?

नेमत : वो क्या है की बादाम खाने से दिमाग तेज़ हो जाता है... सब बात याद रहती हैं....

प्रिंस : अब इस से मेरी बात का क्या कनेक्शन है....?

नेमत : कनेक्शन है न.... बात का भी और साथ में मेरा तेरे साथ भी.... जाने कितनी बार बता चुकी हूँ मगर तू है की हमेशा भूल जाता है.... अब अगर दोबारा पुछा न तो याद रखना तेरी टांगें तोड़ दूंगी...

प्रिंस : अच्छा.... बड़ी आयी... जा जा.... ये धमकियाँ न किसी और को देना... मुझे नहीं.... मैं प्रिंस हूँ प्रिंस.... एक प्यारा सुलतान... जो किसी से नहीं डरता बल्कि सब को डरता है....

नेमत : मैं और तुझसे डरूंगी.... जा जा ये सोचना भी मत.... चल अब बस कर और ये बता की तू चल रहा है की नहीं....?

प्रिंस : चल रहा हूँ मेरी माँ....

नेमत : मैं तेरी माँ नहीं हूँ समझा....

प्रिंस : समझ गया.... चल अब तू जा के फ्रेश हो जा....

नेमत : मैं तो जा hi रही हूँ और तू भी जा के जल्दी से तैयार हो जा.... और हाँ अंडर जा के सो मत जाना....

प्रिंस : एक काम करता हूँ पहले मैं तुझे नेहला के तैयार कर देता हूँ फिर तू मुझे नेहला के तैयार कर देना.... इस से सब कुछ जल्दी हो जाएगा.... बोल क्या कहती है.....

नेमत प्रिंस की बात पे बिना सोचे समझे हाँ कह देती है.... मगर जब उसे प्रिंस की कही बात का मतलब समझ आता है तब शर्म और गुस्से के मारे उसके गाल लाल हो जाते हैं साथ hi उसके पूरे जिस्म में एक सिरहन सी दौर जाती है....

नेमत : कमीने.... अपनी बकवास बंद कर और जा के तैयार हो जा जल्दी...

नेमत की बात सुन के प्रिंस मुस्कुराते हुए ये कह के अपने रूम में भाग जाता है....

प्रिंस : मैं तो तेरे hi फायदे की बात कर रहा था.... इस से हम दोनों जल्दी से तैयार भी हो जाते और साथ hi तुझे मज़ा भी आ जाता....

प्रिंस की बात सुन के नेमत शर्म से पानी पानी हो जाती जाती है.... शर्म से उसके गोर गुलाबी गाल लाल हो जाते हैं.... वो शर्माती मुस्कुराती दुसरे रूम की तरफ चल देती है.....

वो अभी अपने रूम में नाहा के कपडे पेहेन hi रही होती है की तभी अचानक से बुरी तरह से चौंक जाती है.....?????
 
मेरी आशिकी तुमसे hi.....

अपडेट 93

नेमत : कमीने.... अपनी बकवास बंद कर और जा के तैयार हो जा जल्दी...

नेमत की बात सुन के प्रिंस मुस्कुराते हुए ये कह के अपने रूम में भाग जाता है....

प्रिंस : मैं तो तेरे hi फायदे की बात कर रहा था.... इस से हम दोनों जल्दी से तैयार भी हो जाते और साथ hi तुझे मज़ा भी आ जाता....

प्रिंस की बात सुन के नेमत शर्म से पानी पानी हो जाती जाती है.... शर्म से उसके गोर गुलाबी गाल लाल हो जाते हैं.... वो शर्माती मुस्कुराती दुसरे रूम की तरफ चल देती है.....

वो अभी अपने रूम में नाहा के कपडे पेहेन hi रही होती है की तभी अचानक से बुरी तरह से चौंक जाती है.....?????

अब आगे.....

प्रिंस : वाओ यार नेमत इस नेट वाली रेड ब्रा और G-String पंतय में तू बाला की खूबसूरत और सेक्सी लग रही है.... और तेरे सीने पे दिल के पास और जांघ के ऊपरी हिस्से पे जो टिल है वो तेरी खूबसूरती में चार चाँद लगा रहा है.... वाओ यार मुझे पता नहीं था की तू इतनी खूबसूरत और सेक्सी है.... तेरी खूबसूरती देख के तो जन्नत की पारी भी जल उठे....

प्रिंस के मुँह से अपनी तारीफ सुन के पहले तो वो बेहद खुश हो जाती है... मगर फिर जब उसे उसकी बात का मतलब पता चलता है तब वो हड़बड़ा के चीख उठती है.. साथ hi फ़ौरन अपने जिस्म को पास पड़े टॉवल से धक् लेती है....

नेमत : प्रिंस कमीने.... तुझे शर्म नहीं आयी एक मासूम और खूबसूरत लड़की को इस हाल में देखते हुए....?

प्रिंस : अबे शर्म कैसे....? और वैसे भी तू तो हमेशा यही कहती रहती है न की तू कोई गैर नहीं है.... मेरा hi एक हिस्सा है.... अब अपने hi हिस्से को देखने में कैसी शर्म....?

नेमत : अबे कमीने.... ज़्यादा होशियारी मत कर समझा.... वैसे तो तुझे मेरी बात याद नहीं रहती मगर हाँ ये बात इस वक़्त बराबर याद आ गयी.... साले ठरकी कहीं के.... चुप चाप मुझे देखना बंद कर वर्ण....

अभी नेमत ने इतना hi कहा था की तभी प्रिंस रूम में आ जाता है....

प्रिंस : वर्ण क्या हाँ....?

प्रिंस को रूम में देख के नेमत हड़बड़ा जाती है....

नेमत : अबे टूउऊउउउउउ....!!!! अंडर कैसे आया....?

प्रिंस मुस्कुराते हुए : दरवाज़े से.....

नेमत : कमीने बहार जा देख नहीं रहा मैं कपडे पेहेन रही हूँ....

प्रिंस सेक्सी स्माइल के साथ : वो hi तो देखने आया हूँ....

नेमत : अबे मैं वैसी लड़की नहीं जो किसी के सामने नंगी हो जाऊं....

प्रिंस : है तू ब्रा पंतय में इतनी कमाल लग रही है तो उनके बिना तो तू क़यामत लगेगी..... मममम..... अब तो मैं तुझे बिना देखे यहाँ से जाने वाला नहीं.... देखूं तो सही की मेरा ये हिस्सा बिना कपड़ों के कितना सेक्सी लगता है....

नेमत : देख चुप चाप बहार चला जा... अगर मुझे गुस्सा आ गया न तो मैं सच में तेरी टांग तोड़ दूंगी....

प्रिंस : अब चाहे तू टांग तोड़ या कुछ और.... मैं तो अब तुझे देखे बिना जाने वाला नहीं....

नेमत गुस्से में : तू जाता है की नहीं....?

प्रिंस : तुझे एक बार में समझ नहीं आया क्या....? नहीं मतलब नहीं....

ये कह के प्रिंस मुस्कुराने लगता है....

प्रिंस : मुझे परेशान कर रही थी न.... अब देख मैं तेरा क्या हाल करता हूँ....

नेमत : क्या कहा....?

प्रिंस : नहीं तो मैंने कहाँ कुछ कहा..... अरे हाँ कहा न.... देख देर हो रही है.... जल्दी से मुझे अपना सेक्सी जिस्म दिखा फिर हम चलते हैं....

ये कहते हुए प्रिंस के चेहरे पे नॉटी स्माइल आ जाती जिसे नेमत पहचान लेती है की वो जान के उसे परेशान कर रहा है....

नेमत : चल ठीक है अब तेरे यही मर्ज़ी है तो यही सही.... सही कहा तू ने तू कोई गैर थोड़े hi है.... तुझसे कैसी शर्म.... चल आज तुझे खुद को दिखा hi देती हूँ... तू भी क्या याद करेगा की किस दिलदार से पाला पड़ा था....

ये कह के नेमत टॉवल अपने जिस्म से हटा देती है.....

नेमत : ले देख ले.....

उसके टॉवल हटाने से पहले hi प्रिंस दूसरी तरफ घूम जाता है.....

प्रिंस : अबे पागल तो नहीं हो गयी ये क्या कर रही है....?

प्रिंस को पलट ते देख नेमत के होंठों पे स्माइल आ जाती है...

नेमत : मैं तो वही कर रही हूँ जो तू छह रहा था.... तुझे मेरा सेक्सी जिस्म देखना था न वो hi दिखा रही हूँ.....

प्रिंस : अबे कमीनी मैं तो मज़ाक कर रहा था.... तू तो सच में.... अबे कुछ तो शर्म कर ले....

नेमत : तुझसे कैसी शर्म....? आ न.... देख न....

ये कह के नेमत प्रिंस के पास जा के उसका हाथ पकड़ के उसे अपनी तरफ घूमने लगती है..... मगर प्रिंस है की फ़ौरन अपनी आँखें बंद कर लेता है और उसका हाथ छुड़ा के बहार भाग जाता है....

प्रिंस : कमीनी क्या कर रही है....? बेशर्म लड़की छोर मुझे.....

ये कह के प्रिंस फ़ौरन रूम से बहार भाग जाता है....

प्रिंस की इस हरकत पे नेमत की हंसी छूट जाती है....

हहहहहहहहह....

नेमत : तेरी इस ऐडा पे कोई कैसे न मर मिठे..... तू इतना प्यारा है की तुझ पे अपना सब कुछ लुटाने को दिल करता है....

कुछ देर में नेमत रेडी हो के बाहर आ जाती है वहां उसे प्रिंस तैयार मिलता है.... प्रिंस को देख उसे एक बार फिर से शरारत सूझती है....

नेमत : प्रिंस क्या वाकई में तुझे नहीं देखना..... देख अब भी मौका है देख ले बाद में मत कहना की मैंने दिखाया नहीं....

प्रिंस : अबे बेशर्म लड़की मुँह बंद कर अपना.... मुझे कुछ देखना दिखाना नहीं है....

नेमत : तुझे नहीं देखना तो कोई बात नहीं मगर मुझे तो अपना दिखा सकता है न..... या इसमें भी तुझे शर्म आ रही है.....

ये कह के नेमत हसने लगती है....

हहहहहहहहह....

प्रिंस : मुझे नहीं पता था की तू इतनी बेशर्म और बिगड़ी हुई है....

नेमत : है जानेमन.... तेरी hi सांगत का असर है....

प्रिंस : जी नहीं मैं तेरे जैसा बेशर्म नहीं हूँ...

नेमत प्रिंस को आँख मार के कहती है....

नेमत : इस बेशर्मी का भी अपना hi मज़ा है.... एक बार फिर सोच ले....

प्रिंस : तुझे अगर यही बकवास करनी है तो मैं चला सोने....

नेमत : चल चल आज चोर देती हूँ.... मगर अगली बार नहीं चोर्ने waali....agli बार तू देखे न देखे मैं देख के रहूंगी.....

ये कह के नेमत हसने लगती है....

हहहहहहहहह....

प्रिंस : तू फिर शुरू हो गयी....

नेमत : अच्छा अच्छा नहीं कहती अब चल बहार चल के खाना कहते हैं....

अगली सुबह नेमत और प्रिंस एक गृह पे पहुँचते हैं.....

प्रिंस : ये कौनसी जगह है....

नेमत : ये कैरो गृह है..... यहाँ तू आराम से योग साधना कर सकता है....

प्रिंस : वो तो मैं घर पे भी कर सकता था न.....

नेमत : नहीं अभी वहां करना ठीक नहीं है.... योग साधना के दौरान हो सकता है की तेरी पावर्स कण्ट्रोल के बाहर हो जाए और वो तेरे जिस्म से निकल का वहां किसी चीज़ या किसी इंसान को नुक्सान पहुंचा सके.... यहाँ वो बात नहीं है.... यहाँ अगर ऐसा हुआ तो कोई प्रॉब्लम नहीं होगा.... न hi किसी को कोई खतरा होगा...

फिर नेमत प्रिंस को क्या करना है बता के उसके बगल में बैठ जाती है....

प्रिंस योग साधना में बैठ जाता है.... मगर बार बार उसका ध्यान टॉट जाता है..... काफी कोशिशों के बाद आखिर उसे कामियाबी मिल hi जाती है..... धीरे धीरे वो अपने जिस्म में फैली ऊर्जा और पावर्स को महसूस करने लगता है... जिस से उसके होंठों पे स्माइल आ जाती है.... उसके दिल और दिमाग को बेहद सुकून मिलता है.... उसे अपना जिस्म काफी मज़बूत और ताकतवर महसूस होने लगता है.... एक अलग hi ताज़गी और शक्ति का एहसास उसे होने लगता है..... कुछ देर बाद उसकी आँखें खुल जाती हैं....

नेमत : तो प्रिंस.... कैसा लगा योग साधना कर के....

प्रिंस : मैं बता नहीं सकता.... एक अलग hi एहसास हो रहा है..... बहुत दिनों से अपने अंडर भारी भारी सा महसूस कर रहा था... मगर अब ऐसा लग रहा है जैसे की मेरे जिस्म में असीम शक्ति भर गयी है.... जिस से मुझे बहुत सुकून महसूस हो रहा है....

नेमत : चलो अच्छी शुरुवात है.... आगे अब बहुत कुछ होगा और साथ hi तुझे बहुत कुछ करना है जो वक़्त बे वक़्त तुम्हे पता चलता रहेगा.... फिलहाल घर चलते हैं....

प्रिंस : यार अभी मेरा घर जाने का मन नहीं है..... और वैसे भी काफी देर हो चुकी है..... कलगे भी शुरू हो चूका होगा.... अब जा के फायदा नहीं है.... तो क्यों न कुछ देर यहीं रुका जाए और इस गृह को घूम के देखा जाए की यहाँ क्या क्या है....

नेमत : ह्म्म्मम्म... बात तो तू ठीक कह रहा है.... मगर ऐसा रोज़ रोज़ नहीं करेंगे हाँ.... कल से वक़्त पे हम यहाँ से निकल जाएंगे.... ताकि वक़्त पे कॉलेज जा सके.....

प्रिंस नेमत की बात पे हाँ में सर हिला देता है और दोनों घूमने निकल जाते है....

इधर आज दूसरा दिन है और आज भी प्रिंस कॉलेज नहीं आया है..... प्रिंस का नंबर भी नहीं लग रहा है और उसका एड्रेस भी शिमला का है इस बात को ले के शनाया काफी परेशान है..... वो प्रिंस से मिलने के लिए बेचैन बानी हुई है उसका हाल चाल जान ने को तड़प रही है मगर प्रिंस का कोई पता नहीं है.... वो कहाँ है.... न hi ये की वो 2 दिन से कॉलेज क्यों नहीं आया....? रह रह के उसे इस बात का दर सत्ता रहा है की कहीं प्रिंस को कुछ हो तो नहीं गया....?

शनाया : नहीं नहीं ये मैं क्या सोच रही हूँ.....? ऐसा कुछ नहीं है.... प्रिंस ठीक hi होगा.....

आज का दिन ऐसे hi गुज़र जाता है.... कैरो से आने के बाद प्रिंस अपने दोस्तों से फ़ोन पे बात करता है और यहाँ का हाल बताता है.... बाबा और योग साधना वाली बात वो फिलहाल के लिए छुपा लेता है.....

अगली सुबह योग साधना के बाद नेमत प्रिंस को उसके अंडर इस वक़्त कौन कौन सी पावर्स हैं और उन पावर्स को इस्तेमाल करने का तरीका बताती है....

नेमत : प्रिंस जैसा की तुम्हे पता चल चूका है की तुम्हारे जिस्म में इस वक़्त बाकी पावर्स के साथ साथ 4 स्पेशल पावर्स हैं..... हवा पानी धरती और आग की पावर्स.... आज से तुम्हे इसकी प्रैक्टिस करनी है..... की कैसे इन चारो का इस्तेमाल किया जाए..... और हाँ साथ hi अब तुम्हे अपनी स्पीड पे भी ध्यान रखना होगा..... जितनी ज़्यादा तुम्हारी स्पीड होगी उतना hi आसान होगा तुम्हे अपने दुश्मन को हराना.... तुम्हे इस पूरे गृह का चक्कर लगाने की शुरुवात 10 मं से करनी होगी और धीरे धीरे अपनी स्पीड को बढ़ते हुए काम वक़्त में इस चक्कर को पूरा करना होगा... जब तक तुम 1 सेकंड के 10 हिस्से में इस गरक के चक्कर को पूरा नहीं कर लेते.....

प्रिंस : अच्छा अगर मैंने उस से भी काम वक़्त में इसे पूरा कर लिया तो.....?

नेमत : करने में और कहने में बहुत फर्क होता है.... कर के दिखाओ तो मानु....

प्रिंस : हाँ तो इसमें कौनसी बड़ी बात है.....

ये कह के प्रिंस भागना शुरू कर देता है..... गृह का पूरा चक्कर तो दूर की बात है 50 किलोमीटर्स पे जा के प्रिंस थक जाता है.... उस से आगे भागा hi नहीं जाता.... बड़ी मुश्किल से वो 100 किलोमीटर्स का फासला तये करता है.... और थक के वहीँ बैठ जाता है.... इस वक़्त उसके जिस्म में हिलने तक की ताक़त बाकी नहीं रहती....

नेमत उसके करीब जा के उसका मज़ाक बनाते हुए कहती है....

नेमत : वाह प्रिंस मान न पड़ेगा.... क्या स्पीड है तुम्हारी.... तुमने जो कहा था वो कर दिखाया.... मुझे नहीं पता था की थे ग्रेट प्रिंस.... इतनी जल्दी थक जाएगा.....

हहहहहहहहह....

प्रिंस : अबे कमीनी हसना बंद कर.... मैं इंसान हूँ कोई जादूगर या जिनि नहीं जो पहली बार में hi इस गृह का चक्कर भाग के पूरा कर सकूँ.... अब इसमें वक़्त तो लग्न hi है.... देखना जल्द hi मैं इसे पूरा कर लूंगा....

नेमत : हाँ देख रही हूँ जिस स्पीड से तुम भाग रहे हो और जितनी जल्दी तुम थक के बैठ रहे हो.... अगले जनम तक तो शायद ये कर hi लोगे.....

प्रिंस : तू यार मज़ाक बनती hi रहेगी या कोई तरीका भी बताएगी....

नेमत : अब इसमें बताने वाली क्या बात है.... ये तो तुम्हे खुद hi जान लेना चाहिए था की तुम्हे अपने अंडर जो स्पीड की पावर्स है उसको जगाना होगा.... तभी तुम ये कर पाओगे..... कल से तुम उसपे प्रैक्टिस करना.... आज के लिए इतना बहुत है.... बाकी कल.... अब इस से पहले की आज भी कॉलेज जाने में देर हो जाए हम को जल्द से जल्द यहाँ से चलना चाहिए....

प्रिंस और नेमत तैयार होक कॉलेज के लिए निकल जाते हैं....

यहाँ आज तीसरे दिन भी शनाया जल्दी कॉलेज आ के प्रिंस को हर तरफ ढूंढने लगती है.... मगर प्रिंस उसे कहीं नज़र नहीं आता.... इस बात से वो काफी परेशान हो जाती है.... उसे बेचैनी सी होने लगती है.... अचानक से वो किसी से टकरा जाती है.... वो गिरने hi वाली होती है की तभी कोई उसे अपनी बाहों में थाम लेता है.... एक तो पहले hi शनाया का दिमाग खराब बना हुआ है और ऊपर से टक्कर..... उसका दिमाग गुस्से से फटने लगता है.... वो बिना देखे hi गुस्से में उस शख्स को एक थप्पड़ मार देती है.....

Chataaaaaaaaaaaaaak.....

शनाया : साले कमीने दिखाई नहीं देता.... अँधा है क्या....?

ये कह के वो गुस्से में उसका गिरेबान पकड़ के उसे और कुछ कहने hi वाली होती है की तभी शनाया की नज़र उस शख्स के चेहरे पे जाती है.... जिसे देख उसके होश उड़द जाते हैं.... वो फ़ौरन अपना हाथ पीछे खींच लेती है.... उसके मुँह से बस इतना hi निकल पाटा है.....

शनाया शॉकेड : P....P....Prince तुम.....!!!!!!
 
मेरी आशिकी तुमसे hi.....

अपडेट 94

यहाँ आज तीसरे दिन भी शनाया जल्दी कॉलेज आ के प्रिंस को हर तरफ ढूंढने लगती है.... मगर प्रिंस उसे कहीं नज़र नहीं आता.... इस बात से वो काफी परेशान हो जाती है.... उसे बेचैनी सी होने लगती है.... अचानक से वो किसी से टकरा जाती है.... वो गिरने hi वाली होती है की तभी कोई उसे अपनी बाहों में थाम लेता है.... एक तो पहले hi शनाया का दिमाग खराब बना हुआ है और ऊपर से टक्कर..... उसका दिमाग गुस्से से फटने लगता है.... वो बिना देखे hi गुस्से में उस शख्स को एक थप्पड़ मार देती है.....

Chataaaaaaaaaaaaaak.....

शनाया : साले कमीने दिखाई नहीं देता.... अँधा है क्या....?

ये कह के वो गुस्से में उसका गिरेबान पकड़ के उसे और कुछ कहने hi वाली होती है की तभी शनाया की नज़र उस शख्स के चेहरे पे जाती है.... जिसे देख उसके होश उड़द जाते हैं.... वो फ़ौरन अपना हाथ पीछे खींच लेती है.... उसके मुँह से बस इतना hi निकल पाटा है.....

शनाया शॉकेड : P....P....Prince तुम.....!!!!!!

अब आगे....

थप्पड़ लगते hi प्रिंस गुस्से में आ जाता है..... वो शनाया को मारने के लिए अपना हाथ उठता ज़रूर है मगर उसे मारता नहीं....

प्रिंस गुस्से में : तुम लड़की हो इस लिए बच गयी.... तुम्हारी जगह ये हरकत अगर किसी लड़के ने की होती तो अब तक उसका हाथ उसके जिस्म से अलग हो चूका होता.... चली जाओ यहाँ से इस से पहले की गुस्से में मैं अपना आप खो बैठूं और न चाहते हुए भी वो कर जाऊं जो मैंने आज तक नहीं किया.... मैं किसी लड़की पे हाथ नहीं उठता.... ये मेरी तबीयत के खिलाफ है.... और रही बात तुम्हारी तो तुम जैसी बिगड़ी हुई ऐयाश लड़कियों को तो मैं देखना तक पसंद नहीं करता.... तुमसे बात करना तो बहुत दूर की बात है....

शनाया को तो जैसे समझ hi नहीं आ रहा है की वो क्या करे....? वो यहाँ क्या करने आयी थी और क्या हो गया....? उस ने प्रिंस पे हाथ उठा दिया.... प्रिंस को थप्पड़ मार दिया.... जिसने उसके लिए क्या कुछ नहीं किया.... अपनी जान पे खेल के उसकी इज़्ज़त और जान बचायी.... अनजाने में hi सही उसने प्रिंस को थप्पड़ मारने की गलती की.... शनाया खामोश कड़ी जो हुआ उसके बारे में सोच रही है.... उसे वहां से न जाते देख नेमत गुस्से में उसे घूरते हुए आगे बढ़ती है....

नेमत बेहद गुस्से में : तू भले hi लड़की पे हाथ नहीं उठता होगा मगर मेरे साथ ऐसी कोई बंदिश नहीं है.... इसकी हिम्मत कैसे हुई तुझपे हाथ उठाने की.... आज मैं इसकी वो हालत करुँगी की दोबारा ऐसा करना तो दूर इस के बारे में सोच के भी ये दर से कांप जायेगी....

ये कह के नेमत एक झन्नाटेदार थप्पड़ शनाया के गाल पे रसीद कर देती है....

Chataaaaaaaaaaaaaak....

शनाया के गाल पे थप्पड़ पड़ते hi उसकी आँखें नाम हो जाती हैं साथ hi उसके होंठों पे मुस्कराहट फैल जाती है.... उसकी आँखों की नमी इस बात की वजह से थी की अनजाने में hi सही उसने उस प्रिंस को थप्पड़ मारा जिसे वो चाहने लगी है और उसके होंठों की मुस्कराहट इस बात से थी की जिस प्रिंस को वो 2 दिन से ढूंढ रही थी वो आज उसे मिल गया था.... उसे ठीक देख के शनाया को बेहद ख़ुशी हो रही थी....

इस से पहले की नेमत शनाया को और थप्पड़ मारती प्रिंस फ़ौरन उसे रोक देता है....

प्रिंस : नेमत ये तू क्या कर रही है... छोर जाने दे....

नेमत : जाने दूँ.... कैसे जाने दूँ....? इसने तुझपे हाथ उठाया है.... तुझपे..... इसकी हिम्मत कैसे हुई ऐसा करने की.... आज मैं इसकी जान ले लुंगी....

ये कह के शनाया को मारने के लिए नेमत आगे बढ़ती है.... मगर प्रिंस उसे रोक देता है....

प्रिंस : तू क्या कर रही है.... छोर उसे.... इसे मार के क्यों अपने हाथ गंदे कर रही है.... इस जैसी लड़की को हाथ लगाना तो दूर देखना भी मुझे पसंद नहीं... ये उनमे से है जो कभी नहीं सुधर सकते.... चल यहाँ से....

नेमत : सही कहा तू ने देख कमीनी को कितनी बेशर्म है.... थप्पड़ खा के भी हंस रही है....

प्रिंस : चल यहाँ से....

ये कह के वो दोनों वहां से अपनी क्लास की तरफ चल देते हैं....

वहां मौजूद सभी हैरत से शनाया को देख रहे हैं.... आज ऐसा पहली बार हुआ है की किसी ने शनाया को थप्पड़ मारा हो और सब से हैरत की बात तो ये है की शनाया ने उस थप्पड़ का जवाब नहीं दिया.... वर्ण अक्सर शनाया hi बिना बात के भी किसी न किसी को थप्पड़ मार दिया करती थी..... वहां मौजूद किसी को ये समझ नहीं आ रहा है की शनाया ने थप्पड़ खा कैसे लिया.... और तो और उसने पलट के एक लफ्ज़ भी नहीं कहा उल्टा कड़ी मुस्कुरा रही है....

जब शनाया के भाई और उसके दोस्तों को ये पता चलता है की किसी ने शनाया को थापड़ मारा है.... ये सुन के उन्हें बेहद गुस्सा आ जाता है और वो फ़ौरन उसके पास जाते हैं....

आयुष : शनाया बता मुझे किसकी इतनी हिम्मत हुई तुझपे हाथ उठाने की.... बस एक बार मुझे उसका नाम बता दे मैं उसका वो हाल करूँगा की फिर उसे ये सोच के भी दर लगेगा की उसने आखिर ऐसा किया hi क्यों....?

शनाया आयुष की बात का कोई जवाब नहीं देती बस एक तक आँखों में आंसू और होंठों पे मुस्कराहट लिए प्रिंस को जाते हुए पीछे से देख रही है.... आयुष बार बार उस से एक hi बात पूछ रहा है की वो कौन है जिसने उसपे हाथ उठाया....

शनाया अपने भाई को देख के खुश हो जाती है वो उसे ये बताना चाहती है की प्रिंस ठीक है और वो आज कॉलेज आ या है..... मगर उसके मुँह से आवाज़ निकल hi नहीं रही.... वो अपना हाथ उठा के जाते हुए प्रिंस की तरफ इशारा कर देती है.... जिसे आयुष ये समझता है की शनाया उसे हाथ दिखा के बता रही है की वो सामने जो जा रहा है उसी ने मुझे मारा है....

दोनों भाई बेहेन इस वक़्त ग़लतफहमी का शिकार हैं....

शनाया के हाथ के इशारे को देख आयुष गुस्से से पागल हो जाता है और अपने दोस्त के हाथ से हॉकी स्टिक ले के बेहद गुस्से में दौड़ते हुए प्रिंस की तरफ जाता है.... और ज़ोर से हॉकी स्टिक से प्रिंस के सर पे वार करता है.... प्रिंस के मुँह से दर्द भरी चीख निकल जाती है और साथ hi उस के सर से खून निकलने लगता है....

Aaaaaaaaaaggggghhhhhhh....

प्रिंस ने अपना सर पकड़ के पीछे मुद के देखा.... उसके सर से बह रहे खून को देख नेमत के साथ साथ शनाया की भी चीख निकल गयी....

Princeeeeeeeeeeeeeeeee....

जब आयुष की नज़र उस पे पड़ी तो वो भी बुरी तरह से चौंक गया....

प्रिंस बेहद गुस्से में : साले कमीने तुम दोनों भाई बेहेन को सिर्फ पीछे से वार करना hi आता है क्या....? कमीने डैम है तो सीने पे मार के दिखा....

आयुष को तो समझ नहीं आ रहा है की वो करे तो क्या करे....? प्रिंस के सर से निकल रहे खून को देख वो बुरी तरह से घबरा गया.... वो फ़ौरन प्रिंस की तरफ जाता है.... आयुष को प्रिंस की तरफ आते देख नेमत गुस्से में खींच के एक पंच उसे मारती है.... आयुष उस पंच को झेल नहीं पाटा और पीछे की तरफ गिरता है.... इस से पहले की नेमत उसे और मारती प्रिंस उसे रोक के आगे बढ़ता है और जैम के आयुष की धुलाई करने लगता है जब तक वो बेहोश नहीं हो गया.... इस बीच प्रिंस के सर से भी काफी खून बह चूका है.... वो लड़खड़ के नीचे गिरता है और बेहोश हो जाता है....

प्रिंस को बेहोश होते देख नेमत के साथ साथ शनाया के मुँह से भी चीख निकल जाती है.... दोनों भाग के प्रिंस के पास जाती हैं.... शनाया को प्रिंस के पास देख नेमत गुस्से से पागल हो जाती है.... वो खींच के एक थप्पड़ शनाया को मारती है....

Chataaaaaaaaaaaaaak....

नेमत बेहद गुस्से में शनाया को पीटने लगती है.... तभी प्रिंसिपल कुछ टीचर्स के साथ वहां आ जाते हैं.... बड़ी मुश्किल से वो नेमत को शनाया को मारने से रोकते हैं....

प्रिंस आयुष और शनाया इस वक़्त काफी ज़ख़्मी और बुरी हालत में हैं... प्रिंस और आयुष बेहोश हैं मगर शनाया होश में है.... प्रिंसिपल तीनो को हॉस्पिटल में ले जाते हैं जहाँ उनका इलाज शुरू हो जाता है.....

शनाया के डैड को जब उनके बच्चों के बारे में पता चलता है तब वो बेहद गुस्से में वहां आते हैं और प्रिंसिपल का गिरेबान पकड़ के बेहद गुस्से में उनसे जवाब तालाब करते हैं....

स डैड : कमीने तू वहां कर क्या रहा था.... तेरे रहते मेरे बच्चों के साथ ये सब कैसे हो गया....? साले बस एक बार मुझे उस कमीने का नाम बता जिसने ये सब किया है.... फिर देख मैं कैसे उस कमीने को जहन्नुम पहुंचता हूँ....

प्रिंसिपल : जी वो.... वो.... उसका नाम है.... P....P....Prince.....

प्रिंसिपल के मुँह से प्रिंस सुन के शनाया के डैड बुरी तरह से चौंक जाते हैं....

स डैड : क्या कहा प्रिंस....?

प्रिंसिपल : जी....

स डैड : किस प्रिंस की बात कर रहे हो तुम.....? कहीं ये वो तो नहीं....

प्रिंसिपल : हाँ ये वो hi प्रिंस है जिसने आपकी बेटी की िज़ात और आपके दोनों बच्चों की जान बचायी थी.....

स डैड शॉकेड : क्याआआआआ....? मगर क्यों....? उसने ऐसा क्यों किया.....? वो तो अच्छा इंसान था न....?

इस से पहले की प्रिंसिपल आगे कुछ कहता नेमत बीच में बोलती है.....

नेमत : वो अच्छा इंसान था है और हमेशा रहेगा.....

स डैड : तो फिर उस ने ऐसा क्यों किया....? कोई भी अच्छा इंसान कभी बिना बात के किसी को नहीं मारता.....? सच क्या है बताओ मुझे....?

नेमत बेहद गुस्से में : सच जान न चाहते हैं आप तो पूछिए अपनी इस कमीनी बेटी से की वहां क्या हुआ था....?

नेमत की बात सुन के स डैड को हैरत भी होती है और साथ hi नेमत के मुँह से अपनी बेटी के लिए गाली सुन के बेहद गुस्सा भी आता है..... वो शनाया की तरफ देख के उसे सब बताने को कहते हैं....

स डैड : वहां आखिर हुआ क्या था....? बताओ मुझे...... क्यों तुम लोगों के बीच लड़ाई हुई....? Kyunnnnnnnnnnn.....?

शनाया अपने डैड को साड़ी बात बताती है... जिसे सुन के उसके डैड अपना सर पकड़ के बैठ जाते हैं....

स डैड : ये तू ने क्या किया शनाया....? उसपे हाथ उठाया जिसने तेरी िज़ात और जान बचने की खातिर अपनी जान तक की परवाह नहीं की..... मुझे लगा की तुम दोनों भाई बेहेन बदल गए हो.... मगर नहीं....

इस से पहले की स डैड आगे कुछ कहते नेमत बीच में बोलती है....

नेमत : सही कहा आपने आपके दोनों बच्चे कभी नहीं सुधर सकते.... जिस तरह कुत्ते की दम कभी सीढ़ी नहीं हो सकती.... उसी तरह ये दोनों भी कभी सुधर नहीं सकते....

स डैड गुस्से से : क्यों किया तुम दोनों ने उस नेक फ़रिश्ते के साथ ऐसा....? बताओ मुझे जवाब दो.... क्या किसी के साथ भलाई करने का यही सिला होता है....?

अपने डैड की बात सुन के शनाया का सर शर्म से झुक जाता है..... उसकी आँखों से आंसू बहने लगते हैं.....

शनाया : डैड न hi मैंने जान के कुछ किया है और न hi आयुष ने..... ये जो भी कुछ हुआ वो गलती से हुआ....

नेमत बेहद गुस्से में : इसे गलती नहीं गुनाह कहते हैं... जो तुम दोनों कमीने एहसान फरामोश भाई बेहेन ने किया....? वो तो प्रिंस ने मुझे रोक दिया था.... वर्ण जिस लम्हा तुम दोनों ने प्रिंस पे हाथ उठाया था.... मैं उसी वक़्त तुम दोनों की जान ले leti....yaad रखना आज सिर्फ और सिर्फ प्रिंस की वजह से मैंने तुम दोनों को ज़िंदा चोर दिया... दोबारा ऐसा करने के बारे में गलती से भी सोचा न तो याद रखना की प्रिंस को छूने से पहले मैं नेमत तुम्हे तुम्हारे hi खून में डुबो के जान से मार दूंगी.... और हाँ दोनों बाप बेटी ाचे से कान खोल के मेरी बात सुन लो.... अगर गलती से भी तुम तीनो बाप बेटी ने प्रिंस के साथ कुछ बुरा करने के बारे में गलती से भी सोचा तो मैं उसी वक़्त तुम तीनो के जिस्म से तुम्हारी जान निकाल लुंगी... तुम तीनो को जान से मारने में मुझे एक लम्हा भी नहीं लगेगा....

ये कह के वो गुस्से में वहां से प्रिंस के पास चली जाती है.....

ठीक तभी वहां एक डॉ आ के उन्हें ये बताता है की पेशेंट को होश आ गया है.... आप उनसे मिल सकते हैं....

शनाया और उसके डैड फ़ौरन आयुष के पास चले जाते हैं....

स डैड : आयुष ये सब क्या है....? मुझे तो लगा था की तुम सुधर गए हो मगर....

आयुष : नहीं डैड आप गलत समझ रहे हैं.... वो सब अनजाने में हुआ.... मैंने जान के कुछ नहीं किया....

स डैड : जान के की हो या अनजाने में गलती तो तुमने की है.... उस फ़रिश्ते पे हाथ उठा के....

आयुष : उस वक़्त मैं बेहद गुस्से में था.... मैं ये कैसे बासदष्ट कर सकता था की कोई मेरी बेहेन पे हाथ उठाये.... उस वक़्त शनाया रो रही थी... मुझसे इस का रोना देखा नहीं गया.... गुस्से में मैंने वो कर दिया जो मुझे नहीं करना चाहिए था.....

स डैड : इस लिए मैं हमेशा hi तुम दोनों को समझते आया हूँ की कुछ भी करने से पहले 100 बार सोच लिया करो... मगर नहीं.... हर काम तुम दोनों गुस्से में करते हो.... गुस्से में तुम्हे न तो कुछ दिखाई देता है और न hi सही और गलत नज़र आता है.... खैर जो हुआ उसे बदला तो नहीं जा सकता मगर हाँ माफ़ी मांग के उसे ठीक तो किया जा सकता है....

शनाया : सही कहा डैड आपने.... माफ़ी... मुझे अपनी गलती की उस से माफ़ी मांगनी होगी....

आयुष : मगर क्या वो हम को माफ़ करेगा....

शनाया : वो जब तक हम को माफ़ नहीं करेगा मैं उस से माफ़ी मांगती रहूंगी....

ये कह के शनाया बहार की तरफ जाने लगती है....

स डैड : ये अचानक से तुम कहाँ जा रही हो....? तुम्हारी तबीयत पूरी तरह से ठीक नहीं है....

शनाया : इस वक़्त मेरा प्रिंस से माफ़ी माँगना बेहद ज़रूरी है.... जब तक वो मुझसे नाराज़ रहेगा मैं कैसे ठीक रह पाउंगी.... नहीं डैड मुझे अभी उस से माफ़ी मांगनी है....

ये कह के शनाया भागती हुई उस रूम की तरफ जाती है जहाँ प्रिंस को रखा गया था.... रूम के दरवाज़े के पास पहुँचते hi उसके दिल की धड़कन तेज़ हो जाती है.... उसका दिल इस बात से बेचैन बना हुआ की जाने प्रिंस क्या करेगा.... क्या वो मुझे माफ़ करेगा.... या फिर मुझे देखते hi और भी ज़्यादा नाराज़ हो जाएगा.... चाहे जो हो.... मुझे प्रिंस से माफ़ी मांगनी है.... और जब तक वो मुझे माफ़ नहीं कर देता मैं उस से माफ़ी मांगती रहूंगी....

ये कह के वो दरवाज़ा खोल के रूम के अंडर जाती है.... जैसे hi उसकी नज़र सामने बीएड पे पड़ती है वो बुरी तरह से चौंक जाती है.... बीएड खाली है वहां प्रिंस नहीं है...

प्रिंस को वहां न पा के वो बेहद परेशान हो जाती है.... वो फ़ौरन बहार निकल के प्रिंस को इधर उधर ढूंढने लगती है.... मगर उसे प्रिंस कहीं नज़र नहीं आता.... शनाया को बहार घुमते देख डॉ उसे आराम करने को कहते हैं....

डॉ : तुम्हे बीएड पे आराम करना चाहिए.... तुम यहाँ क्या कर रही हो....?

शनाया : वो मैं प्रिंस को ढूंढ रही हूँ....

डॉ : कहीं तुम उस लड़के की बात तो नहीं कर रही जिसे तुम्हारे साथ यहाँ लाया गया था....?

शनाया : हाँ डॉ मैं उसे hi ढूढ़ रही हूँ... उसे उस रूम में बीएड पे होना चाहिए था.... मगर वो वहां नहीं है.... क्या आप बता सकते हैं की वो कहाँ है....?

डॉ : वो चला गया....

शनाया : क्या....?

डॉ : वो यहाँ से चला गया....?

शनाया गुस्से में : वो बीमार था.... उसे चोट लगी थी... आप ने उसे जाने कैसे दिया....?

डॉ : हम ने उसे रोकने की बहुत कोशिश की मगर उस ने हमारी बात नहीं मानी.... वो अपनी दोस्त के साथ यहाँ से चला गया....

शनाया : कहाँ चला गया....?

डॉ : ये मुझे नहीं पता....

शनाया : तो फिर तुझे पता क्या है....? साले एक तो उस बीमार को यहाँ से जाने दिया और अब कह रहा है की नहीं पता वो कहाँ गया....?

तभी स डैड वहां आ जाते हैं.... शनाया को इतने गुस्से में देख वो फ़ौरन उसके पास जा के उस से उसके गुस्से की वजह पूछते हैं....

शनाया रट रट अपने डैड को साड़ी बात बताते है.... स डैड अपनी बेटी को प्यार से चुप करते हुए कहते हैं....

स डैड : शनाया..... बीटा रट नहीं.... चुप हो जाओ.... वो यहाँ से चला गया तो क्या....? वो अपने घर hi गया होगा न.... हम उसके घर चलते हैं....

शनाया : मुझे उसके घर का पता नहीं मालूम डैड....

स डैड : कोई बात नहीं बीटा कल कॉलेज में उस से मिल लेना.... और उस से अपनी गलती की माफ़ी मांग लेना....

शनाया : डैड वो मुझे माफ़ तो कर देगा न....

स डैड : हाँ बीटा... वो तुम्हे ज़रूर माफ़ कर देगा....

इधर प्रिंस नेमत के साथ अपने घर आ जाता है....

वहीँ दूसरी तरफ इमरान घर आ के एक खुशखबरी सब को सुनाता है... जिसे सुन के सब बेहद खुश हो जाते हैं... ख़ुशी के मारे उनकी आँखों से ख़ुशी के आंसू चालक जाते हैं.... मगर साथ hi एक बुरी खबर भी देता है.... जिसे सुन के सब चौंक जाते हैं.... सब के मुँह से एक साथ एक hi लफ्ज़ निकलता है....

Kyaaaaaaaaaaaaaaaaa.....?????
 
मेरी आशिकी तुमसे hi.....

अपडेट 95

स डैड : कोई बात नहीं बीटा कल कॉलेज में उस से मिल लेना.... और उस से अपनी गलती की माफ़ी मांग लेना....

शनाया : डैड वो मुझे माफ़ तो कर देगा न....

स डैड : हाँ बीटा... वो तुम्हे ज़रूर माफ़ कर देगा....

इधर प्रिंस नेमत के साथ अपने घर आ जाता है....

वहीँ दूसरी तरफ इमरान घर आ के एक खुशखबरी सब को सुनाता है... जिसे सुन के सब बेहद खुश हो जाते हैं... ख़ुशी के मारे उनकी आँखों से ख़ुशी के आंसू चालक जाते हैं.... मगर साथ hi एक बुरी खबर भी देता है.... जिसे सुन के सब चौंक जाते हैं.... सब के मुँह से एक साथ एक hi लफ्ज़ निकलता है....

Kyaaaaaaaaaaaaaaaaa.....?????

अब आगे....

इधर प्रिंस जब घर पहुँचता है तब उसे कॉल आता है.... कॉल रइवे करने के बाद प्रिंस थोड़ा परेशान हो जाता है...

नेमत : क्या बात है प्रिंस....? तुम अचानक से इतने परेशान क्यों हो गए....?

प्रिंस : वो बात ऐसी है की मुंबई के ऑफिस में कुछ प्रॉब्लम हो गयी है... मुझे वहां जाना होगा....

नेमत : तो इसमें इतना परेशान होने की क्या बात है....? वहां किसी को भी भेज दे....

प्रिंस : नहीं वहां जो प्रॉब्लम हुई है उसे मेरे अलावा और कोई ठीक नहीं कर सकता इस लिए मुझे वहां जल्द से जल्द जाना होगा.... मगर समझ नहीं आ रहा है की क्या करूँ....? यहाँ मेरे आने का मक़सद अभी पूरा नहीं हुआ है.... और मुझे मुंबई जाना पद रहा है....

नेमत : तू क्यों फ़िक्र कर रहा है मैं तेरे साथ हूँ न.... तू मुंबई जा के अपना काम पूरा कर यहाँ मैं तेरे परिवार को ढूढ़ती हूँ.... वैसे कब निकलना है मुंबई के लिए....

प्रिंस : अभी.... यहाँ से दिल्ली तक मई कार से जाऊँगा फिर वहां से प्लेन से मुंबई....

नेमत : इतना लम्बा सफर करने की ज़रुरत क्या है.... पावर्स के ज़रिये मैं अभी तुझे मुंबई पहुंचा दूंगी....

प्रिंस : नहीं उसकी ज़रुरत नहीं.... और वैसे भी मुझे पहले दिल्ली जाना है वहां से कुछ डाक्यूमेंट्स लेके मैं मुंबई निकल जाऊँगा....

नेमत : तू कब तक वापिस आएगा....?

प्रिंस : काम से काम एक हफ्ता तो लग hi जाएगा इस सब में....

नेमत : एक हफ्ताआआ....!!! तेरे बिना कैसे बीतेगा....?

प्रिंस : अब ज़्यादा सेंटी मत हो.... बस एक हफ्ते की तो बात है यूँ hi गुज़र जाएंगे....

नेमत : वो hi तो कह रही हूँ की एक हफ्ता तुझसे दूर कैसे रहूंगी.... यहाँ तो एक पल की दुरी भी बर्दाश्त नहीं हो रही है... और तू एक हफ्ते की बात कर रहा है....

ये कह के नेमत प्रिंस के सीने से लिपट के रोने लगती है....

प्रिंस : अबे ये क्या कर रही है पागल तो नहीं हो गयी....? तू तो ऐसे रो रही है जैसे की मैं कोई दुल्हन हूँ और मेरी बिदाई हो रही है ससुराल जाने की....

नेमत : वैसे तेरी ससुराल तो वहीँ है जहाँ मैं हूँ.... तो कहीं जाने की ज़रुरत hi क्या है.... हीहीहीहीहीहीही....

ये कह के नेमत हसने लगती है....

प्रिंस : क्या कहा....

नेमत : कुछ नहीं.... मैंने कहा अच्छे से जाना.... और जल्दी से वापिस आ जाना समझा....

प्रिंस : अच्छा मेरी माँ.... सब समझ गया अब तू मुझे जाने देगी तब न मैं वहां जाऊँगा.... चल जल्दी से पैकिंग में मेरी हेल्प कर....

इधर इमरान घर आ के एक खुशखबरी सब को सुनाता है... जिसे सुन के सब बेहद खुश हो जाते हैं... ख़ुशी के मारे उनकी आँखों से ख़ुशी के आंसू चालक जाते हैं.... मगर साथ hi एक बुरी खबर भी देता है.... जिसे सुन के सब चौंक जाते हैं.... सब के मुँह से एक साथ एक hi लफ्ज़ निकलता है....

Kyaaaaaaaaaaaaaaaaa.....?????

इमरान : हाँ ये सच है... महक का इलाज हो सकता है और उसके लिए हम को उसे ले के मुंबई जाना होगा.... वो भी आज hi.... क्यों की लंदन के डॉ थॉमस इस वक़्त एक कांफ्रेंस अटेंड करने मुंबई आये हुए हैं.... वो वहां 3 दिन तक hi रुकेंगे.... इस बीच हम को कैसे भी कर के महक को उनको दिखाना होगा.... मैंने अपने दोस्त हरीश की बेटी डॉ संध्या से महक के बारे में बात की थी उसी ने ये बताया की डॉ थॉमस से उसने महक की बात की है वो उसे देखने और उसका इलाज करने को तैयार है.... हम को जल्द से जल्द महक को ले के मुंबई के लिए निकलना होगा.....

सब साथ : ये तो बेहद ख़ुशी की बात है....

इमरान : हाँ मगर एक बुरी खबर भी है..... वो ये की इसके इलाज में 1 करोड़ रुपया लगेगा और साथ hi इसका इलाज पूरे 6 महीने तक चलेगा.... और इन 6 महीनो में कोई भी इस से नहीं मिल सकता.... इसके पास सिर्फ डॉ और नर्स hi रहेंगे....

इमरान की बात सुन के सब चौंक जाते हैं सब के मुँह से बस इतना hi निकलता है....

Kyaaaaaaaaaaaa.....?

अकरम : पैसे की बात तो समझ आती है मगर 6 महीने तक हम क्यों नहीं इस से मिल सकते....?

इमरान : वो इस लिए क्यों की इस का इलाज किसी नार्मल हॉस्पिटल में नहीं बल्कि एक ख़ास हॉस्पिटल में होगा.... जहाँ इस जैसे hi मरीज़ों का इलाज होता है.... 6 महीनो में रेडिएशन के ज़रिये इसका इलाज होगा.... वहां हमारे जाने से हमारे जिस्म पे भी उस रेडिएशन का असर होगा... जो की हमारे लिए ठीक नहीं होगा....

जमीला : मगर 6 महीने तक हम अपनी बेटी से दूर कैसे रहेंगे....?

इमरान : मैंने भी उनसे यही पुछा था... उन्होंने बताया की अगर हम महक को ठीक देखना चाहते हैं तो हम को उस से दूर रहना होगा....

सोना : अगर इन 6 महीनो में उसके साथ कुछ गलत हुआ तो....?

इमरान : नहीं ऐसा कभी नहीं होगा मैंने सब पता किया है.... ( कुछ पेपर्स दिखा के) ये देखो.... ये उन पेशेंट्स की फोटो और रिपोर्ट है जो वहां अपना इलाज करने गए थे.... ये इलाज से पहले और ये वीडियो इलाज के बाद की है.... जब वो बिकुल ठीक हो के वहां से आये थे.... मैंने उनसे बात की है.... इस में कोई परेशानी नहीं है....

सोना : चाचू वो सब तो ठीक है... मगर फिर भी 6 महीना.... ये बहुत लम्बा समय है.... महक एक पल भी हमारे बिना नहीं रही आज तक.... आप 6 महीने की बात कर रहे हैं... वो 6 महीने तक एक अनजान जगह पर अकेली कैसे रहेगी.... नहीं वो नहीं रह पाएगी... न hi हम उसके बिना रह पाएंगे....

इमरान : बीटा.... मैं जानता हूँ.... मगर ज़रा ये भी तो सोचो की ये उसके लिए कितना ज़रूरी है.... क्या तुम नहीं चाहती की महक ठीक हो जाए....

सोना रट हुए : चाहती हूँ चाचू.... मेरा हमेशा से यही चाहती हियँ की वो ठीक हो जाए....

इमरान : तो फिर हम को उसके भले के लिए 6 महीने तक उस से दूर रहना hi होगा.....

सोना महक के पास जा के उस से लिपट के रोने लगती है..... आँखें सभी की नाम है.... महक से अलग होने का दर सब के दिल में है.... मगर इस बात की ख़ुशी भी है की जल्द वो ठीक हो के हमारे पास आएगी....

अकरम इमरान और सोना महक को साथ लेके मुंबई के लिए निकल जाते हैं.... इधर प्रिंस भी मुंबई के लिए निकल जाता है....

मुंबई में डॉ थॉमस महक का चेक उप करते हैं.... और बताते हैं की 6 महीने के इलाज के बाद महक पूरी तरह से ठीक हो जायेगी.... ये बात सुन के जहाँ सोना अकरम और इमरान को जितनी ख़ुशी होती है उतना hi दुःख भी की अगले 6 महीने तक महक को उनसे दूर रहना होगा.... जो की उसके लिए ज़रूरी है....

इधर प्रिंस मुंबई पहुँचने के बाद अवनि और अंजू से मिलता है.... दोनों उसे देख के बेहद खुश हो जाती हैं..... पहले तो अपनी नाराज़गी ज़ाहिर करती हैं फिर प्रिंस के मानाने पे मान जाती हैं.... तीन दिन प्रिंस मज़े से उनके साथ गुज़ारता है साथ hi अपना काम भी करता है... फिर अवनि और अंजू से मिल के दिल्ली के लिए निकल जाता है....

इधर महक का इलाज शुरू करने के लिए उसे वहां से दिल्ली ले जाय जाने लगता है.... महक के साथ और भी कुछ पेशेंट्स हैं.... न चाहते हुए भी उदास मन से सोना अकरम और इमरान महक को चोर के अपने घर के लिए निकल जाते हैं.... पूरे रस्ते सोना रोटी रहती है...

अकरम : बीटा कब तक ऐसे रोटी रहोगी....

सोना रट हुए : डैड वो महक....

अकरम : बीटा ये सब हम उसके भले के लिए hi कर रहे हैं.... सोचो की जब वो ठीक हो जायेगी तो उसे कितनी ख़ुशी होगी.... क्या तुम उसे खुश नहीं देखना चाहती....?

सोना : डैड मेरा बस चले तो मैं उसे अपने हिस्से की ख़ुशी भी दे दूँ...

अकरम : तो फिर ये रोना बंद करो और ऊपर वाले से उसके जल्द ठीक होने की दुआ करो.... रट कमज़ोर लोग हैं और मेरी बेटी कमज़ोर नहीं बल्कि बहुत बहादुर है वो हर चीज़ का डट के सामना करती है.... देखना ये 6 महीने भी जल्द hi गुज़र जाएंगे.... और महक ठीक हो के हमारे सामने होगी.... जब वो तुम्हे इस तरह रट देखेगी तो क्या उसे ख़ुशी होगी... नहीं न.... तो फिर अपने ये आंसू पोचो...

सोना : उदास मन से अपने आंसू पॉच लेती है....

इधर दिल्ली के हॉस्पिटल में एक आदमी एक डॉ के पेअर पकड़ के रो रहा है....

आदमी : मेहता...

मेहता : डॉ साहब प्लीज मेरी बेटी का इलाज कर दीजिये.... अब बस आप hi उसकी बेजान ज़िन्दगी में जान दाल सकते हैं.... प्लीज इस गरीब की बेटी पे रेहम कीजिये....

डॉ : अरे बड़े अजीब आदमी हो तुम... एक बात तुम्हे समझ नहीं आती क्या....? इलाज फ्री में नहीं होता.... ये काफी महंगा इलाज है.... जब तक तुम इलाज के पैसे जमा नहीं करा देते तब तक न hi हम तुम्हारी बेटी को एडमिट कर सकते हैं और न hi उसका इलाज कर सकते हैं.... जाओ ले जाओ अपनी बेटी को यहाँ से उसका इलाज यहाँ नहीं हो सकता.... और फ्री में तो बिलकुल भी नहीं....

मेहता : नहीं डॉ साहब ऐसा मत कहिये... मैं गरीब टैक्सी ड्राइवर हूँ.... बड़ी मुश्किल से अपना और अपनी बेटी कंपेट भरता हूँ.... मैं कहाँ से 1 करोड़ रुपये लाऊंगा.... प्लीज मेरी बेटी का इलाज कर दीजिये....

डॉ वार्ड बॉय को बुलवाते हैं और मेहता को बहार ले जाने को कहते हैं....

मेहता रोटा गिड़गिड़ाता रह जाता है मगर न तो डॉ को उस पे रेहम आता है और न hi वार्ड बॉय को..... वार्डबॉय उसे धक्का दे के हॉस्पिटल से बहार कर देता है.... मेहता एक बार फिर से हॉस्पिटल में जाता है... इस उम्मीद से की काश इस बार डॉ उसकी बात मान जाए और उसकी बेटी का इलाज करने को तैयार हो जाए....

वो अभी डॉ के केबिन में जाने hi वाला होता है की तभी किसी की बात सुन के उसे बड़ी हैरानी होती है.... हैरत से वो बुरी तरह से चौंक जाता है.... साथ hi उसे बड़ी ख़ुशी भी होती है....

अंडर एक डॉ उस डॉ को बता रहा था की मुंबई से नए पेशेंट्स आ गए हैं... उन्हें साइड वार्ड में एडमिट कर लिया गया है..... उन्हें कल सुबह hi यहाँ से आगे के ट्रीटमेंट के लिए स्पेशल हॉस्पिटल में शिफ्ट करना है.... और ये रहे उन पेशेंट्स के नाम....

उन नामों में महक का नाम सुन के मेहता को बड़ी हैरानी होती है....

मेहता खुश हो के : महक नाम तो मेरी बेटी है.... इसका मतलब इन लोगों ने उसे एडमिट कर लिया.... मगर कुछ देर पहले तक तो डॉ मुझपे पागलों की तरह चिल्ला रहा था.... महक को एडमिट करने से साफ़ मन कर रहा था.... फिर अचानक से वो मान कैसे गया.... चलो जो भी है ऊपर वाले का करम हुआ जो मेरी बेटी को एडमिट कर लिया गया.... अब उसका इलाज हो जाएगा...

ये सोच के वो ख़ुशी से ुचते हुए

बहार की तरफ चल देता है.... मगर तभी गेट के पास जा के उसके पेअर रुक जाते हैं.... कुछ याद आते hi उसे एक झटका सा लगता है....

मेहता : एक मिनट.... महक तो घर पे है.... तो फिर इन लॉगिन ने उसे यहाँ एडमिट कैसे कर दिया.... चल के देखना चाहिए की आखिर बात क्या है....

मेहता हॉस्पिटल में जाता है और चुपके से उस रूम में जहाँ उन पेशेंट्स के साथ महक को रखा गया था उसमे घुस जाता है..... वो चारो तरफ नज़र घुमा के देखता है.... वहां कुल 6 पेशेंट्स हैं जिनमे से 2 लड़के हैं और 3 लडकियां.... और एक बच्चा है.... मेहता आगे बढ़ के पहली लड़की को देखता है.... फिर दूसरी को.... दोनों में से कोई उसकी बेटी नहीं.... फिर ये लोग महक किसे कह रहे थे.... तभी मेहता की नज़र बीएड के साथ बंधे पद पे जाती है जिसपे कुछ पेपर्स लगे हुए थे... वो उन्हें उठा के देखता है.... पेपर्स पे लिखे नाम को देख वो चौंक जाता है.... उसपे महक लिखा हुआ है....

मेहता कभी महक को देखता है तो कभी उन पेपर्स को.... कुछ सोच के उसकी आँखों से आंसू बहने लगते हैं....

मेहता : अगर मैं गरीब न हो के अमीर होता या मेरे पास पैसे होते.... तो आज इस लड़की की तरह मेरी बेटी का भी इलाज हो रहा होता.... मगर अफ़सोस ये दुनिया सिर्फ पैसे वालों से hi चलती है.... मगर अब ऐसा नहीं होगा... अब इस गरीब की बेटी का भी इलाज होगा... ठीक हो के वो भी एक अच्छी ज़िन्दगी जियेगी....

ये सोच के वो फ़ौरन वहां से अपने घर की तरफ चल देता है... कुछ देर बाद वो वापिस उस हॉस्पिटल में आता है मगर आगे के रास्ते से नहीं बल्कि पीछे की तरफ से.... एक पल के लिए उसके पेअर वहां रुक जाते हैं मगर कुछ सोच के वो वार्ड के अंडर जाता है और महक के बीएड की तरफ बढ़ता है....

मेहता को देख महक बेहद घबरा जाती है.... दर के मारे उसकी आँखों से आंसू बहने लगते हैं.....

मेहता : घबराओ मत बेटी.... मैं यहाँ तुम्हे कोई नुक्सान पहुँचाने नहीं आया हूँ.... मैं एक गरीब टैक्सी ड्राइवर हूँ.... तुम्हारी तरह मेरी भी एक बेटी है... जो की ठीक उसी तरह बीमार है जिस तरह तुम हो.... वो ठीक हो सकती है मगर डॉ बिना पैसे के उसका इलाज नहीं कर रहे.... मैंने डॉ की बहुत मिन्नत की उनके हाथ पेअर जोड़े मगर उन कमीनो ने मेरी एक न सुनी मुझे गरीब भिकारी कह के हॉस्पिटल से बहार कर दिया.... मैं ऊपर वाले से अपनी बेटी के इलाज के लिए दुआ मांग रहा था की तभी शायद उसने मेरी दुआ सुन ली और ठीक उसी वक़्त तुम यहाँ आ गयी.... अब मेरी बेटी का इलाज होगा.... वो ठीक हो जायेगी.... बस उसके लिए तुम्हे मेरी मदत करनी होगी....

महक हैरत और दर से मेहता को देख रही है.... उसे समझ नहीं आ रहा है की आखिर मेहता कह क्या रहा है.... जब उसके पास पैसे नहीं है तो कैसे उसकी बेटी का इलाज होगा... और इस में मैं जो खुद सहारे के लिए दूसरों पे निर्भर हूँ उसकी कैसे मदत कर सकती हूँ....?????
 
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