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मेरी आशिकी तुमसे hi.....
अपडेट 96
मेहता : घबराओ मत बेटी.... मैं यहाँ तुम्हे कोई नुक्सान पहुँचाने नहीं आया हूँ.... मैं एक गरीब टैक्सी ड्राइवर हूँ.... तुम्हारी तरह मेरी भी एक बेटी है... जो की ठीक उसी तरह बीमार है जिस तरह तुम हो.... वो ठीक हो सकती है मगर डॉ बिना पैसे के उसका इलाज नहीं कर रहे.... मैंने डॉ की बहुत मिन्नत की उनके हाथ पेअर जोड़े मगर उन कमीनो ने मेरी एक न सुनी मुझे गरीब भिकारी कह के हॉस्पिटल से बहार कर दिया.... मैं ऊपर वाले से अपनी बेटी के इलाज के लिए दुआ मांग रहा था की तभी शायद उसने मेरी दुआ सुन ली और ठीक उसी वक़्त तुम यहाँ आ गयी.... अब मेरी बेटी का इलाज होगा.... वो ठीक हो जायेगी.... बस उसके लिए तुम्हे मेरी मदत करनी होगी....
महक हैरत और दर से मेहता को देख रही है.... उसे समझ नहीं आ रहा है की आखिर मेहता कह क्या रहा है.... जब उसके पास पैसे नहीं है तो कैसे उसकी बेटी का इलाज होगा... और इस में मैं जो खुद सहारे के लिए दूसरों पे निर्भर हूँ उसकी कैसे मदत कर सकती हूँ....?????
अब आगे....
महक अभी ये सोच hi रही होती है की तभी मेहता उसे उठा के सामने पड़ी व्हीलचेयर पे बैठा देता है.... और उसकी जगह अपनी बेटी को लेता देता है.... फिर महक की फाइल में से उसके रिपोर्ट्स और पेपर्स निकाल के उस जगह अपनी बेटी के रिपोर्ट्स और पेपर्स रख देता है.... सिर्फ कवर पे उसके नाम को चोर के वो बाकी सारे पेपर्स को बदल देता है....
मेहता महक से : बेटी मैं जो कर रहा वो गलत है मगर फिर भी मुझे ये करना होगा.... अपनी बेटी के इलाज के लिए मुझे ये करना होगा.... मगर फ़िक्र मत करो बस 6 महीने की बात है.... 6 महीने बाद जब मेरी बेटी ठीक हो जायेगी तब मैं तुम्हे यहाँ ला के तुम्हारा इलाज करवाऊंगा.... तब तक तुम्हे अपनी बेटी की तरह अपने घर में रखूँगा.... तुम्हे कोई तकलीफ नहीं आने दूंगा....
उसकी बात सुन के महक बेहद दर जाती है और रोने लगती है.... मगर मेहता पे महक के रोने का कोई असर नहीं हो रहा है.... वो महक को लेजा के हॉस्पिटल के एक रूम में छुपा देता है और सुबह होने का इंतज़ार करने लगता है....
वो ये तसाली कर लेना चाहता है की वो लोग उसकी बेटी को महक समझ के इलाज के लिए वहां से ले जाए.... सुबह ठीक वैसा hi होता है जैसा की उसने सोचा था.... किसी को कुछ पता नहीं चलता की जिस महक को हॉस्पिटल से इलाज करवाने ले जा रहे हैं वो असली महक नहीं बल्कि मेहता की बेटी है....
जब वो लोग बाकी 5 पेशेंट्स के साथ मेहता की बेटी को भी गाडी में बैठा देते हैं तब मेहता सब से नज़रें बचा के महक को अपनी टैक्सी में दाल के उनके पीछे चल देता है.... वो उनका तब तक पीछे करता रहता है वो लोग स्पेशल हॉस्पिटल में मेहता की बेटी के साथ बाकी पेशेंट्स को एडमिट नहीं कर देते.... जब उसे इस बात की तसाली हो जाती है तब वो मुस्कान को साथ लेके वहां से अपने घर की तरफ चल देता है....
इधर प्रिंस अपने ऑफिस से काम पूरा करके सुनील उसके दिल्ली ऑफिस का मैनेजर को आगे का काम समझा के कुछ देर बाद सब फाइल्स ले के घर आने को कहता है.... फिर वहां से अपने दिल्ली वाले बंगलो की तरफ चल देता है.... रास्ते में उसे एक एंटीक की शॉप नज़र आती है....
प्रिंस : यार क्यों न सुल्तानगढ के घर की सजावट के लिए यहाँ से कुछ एंटीक चीज़ें खरीद लून....
ये सोच के वो कार को उस शॉप के पास रोक देता है और अंडर जा के वहां की चीज़ें देखने लगता है.... वहां उसे काफी चीज़ें पसंद आती हैं... वो बारीकी से हर एक चीज़ को देखता है और उसे घर के हिसाब से सेलेक्ट करने लगता है की किस जगह पे कौनसी चीज़ अच्छी लगेगी.... वो वहां से काफी चीज़ें पसंद करता है और उसकी पेमेंट कर के अपने बंगलो का एड्रेस दे के उसे वहां पहुँचाने का कह के वहां से अपने बंगलो की तरफ चल देता है....
इधर मेहता महक को लेके अपने घर की तरफ जा रहा होता है की तभी रास्ते में उसे कुछ पुलिस वाले आती जाती हर कार को रोक के चेकिंग करते नज़र आते हैं.... ये देख मेहता की हालत खराब हो जाती है वो बुरी तरह से दर जाता है.... उसे समझ नहीं आ रहा है की क्या करे....? पहले वो सोचता है की आगे बढ़ा जाए अगर किसी ने रोका तो कह दूंगा की ये मेरी बेटी है.... लेकिन अगर उन्हें शक हो गया तो....? कहीं ऐसा न हो की साड़ी बात सामने आ जाए और ये लोग मेरी बेटी को वहां से निकाल के इसे वहां एडमिट करवा दे.... और मुझे इसको किडनैप करने के जुर्म में जेल में दाल दे.... अगर ऐसा हुआ तो मेरी बेटी का क्या होगा.... मेरे सिवाए उसका है hi कौन.... अगर मुझे जेल हो गयी तो मेरी बेटी मर जायेगी.... नहीं ऐसा नहीं होगा... मैं ऐसा नहीं होने दूंगा... मुझे कुछ भी करके इसे कहीं छुपाना होगा.... फिर जब पुलिस वाले यहाँ से चले जाएंगे तब मैं इसे यहाँ से ले जाऊँगा.... हाँ यही ठीक रहेगा... मगर इसे छुपाऊं कहाँ... ये कोई माचिस की डिब्बी नहीं जीती जागती लड़की है.... इसे छुपाने के लिए ऐसी जगह चाहिए जो सब की नज़र से दूर रहे.... कहाँ मिलेगी ऐसी जगह....? कहाँ...? सोच जल्दी मेहता इस से पहले की वो पुलिस वाले तुझ तक पहुँच जाए.... कुछ सोच....
मेहता इधर उधर देखने लगता है इस उम्मीद से की उसे कहीं न कहीं कोई ऐसी जगह मिल जाए जहाँ वो महक को छुपा सके... तभी उसे कुछ नज़र आता है और उसकी आँखों में चमक और होंठों पे मुस्कान आ जाती है....
वो फ़ौरन कार को साइड लगा के महक को बहार निकाल के उस तरफ जाता है... ये एक एंटीक शॉप है.... वहां कुछ लोग बॉक्स में मैनेक्विन को पैक करने के बाद अंडर जा रहे थे.... मेहता चुपके से उनमे से एक बॉक्स को खोलता है और उसमे से एक मैनेक्विन को निकाल के उसकी जगह महक को लेटने लगता है... मगर हरबड़ी में महक उसके हाथ से छूट के बॉक्स में गिर जाती है.... जिस से उसके सर पे चोट लग जाती है.... और वो बेहोश हो जाती है.... ये देख मेहता बुरी तरह से दर जाता है.... वो इधर उधर देखता है की कहीं उसे किसी ने देखा तो नहीं तभी उसे कुछ पुलिस वाले उसकी तरफ आते हुए नज़र आते हैं.... वो फ़ौरन बॉक्स को बंद कर के दूसरी तरफ निकल जाता है.... पुलिस वाले तेज़ी से उसकी तरफ आते हैं वो उसे आवाज़ दे के रुकने को कहते हैं मगर मेहता दर के मारे और तेज़ी से चलने लगता है... पुलिस वाले आगे बढ़ के उसे रोक ते हैं....
हवलदार : अबे तू बहरा है क्या...? साले कब से तुझे आवाज़ लगा रहा हूँ मगर तू है की सुनता hi नहीं....
मेहता बुरी तरह से डरा हुआ है... वो ये अच्छे से जानता है की अगर वो पकड़ा गया तो क्या हो सकता है.... मगर उसे जो करना था वो उसने कर दिया है.... अपनी बेटी को इलाज के लिए हॉस्पिटल पहुंचा दिया और महक को उस बॉक्स में दाल के खुद से दूर कर दिया.... उसे ऐसा करते किसी ने नहीं देखा.... उसे ऐसा कुछ नहीं करना और कहना चाहिए जिस से इन पुलिस वालों को उस पे शक हो.... वो फ़ौरन खुद को नार्मल करता है और घूम के उन पुलिस वालों को देख के कहता है....
मेहता : साहब मैंने आपकी आवाज़ सुनी तो थी मगर मैं रुका नहीं.... मैं मजबूर था वो क्या है की पुलिस की आवाज़ सुन के सब कुछ तो रुक जाता है मगर पेशाब ऐसी चीज़ है जो यामयाज के रोके भी नहीं रूकती.... बस वही करने जा रहा था.... अगर आप की इजाज़त हो तो कर आऊं.... बड़ी ज़ोर की लगी है... अगर एक पल भी मैं यहाँ और रुका तो देर हो जायेगी... और साथ hi यहाँ बार आने से कोई नहीं रोक पायेगा....
हवलदार : नहीं बे यहाँ नहीं करना.... जा जल्दी से जा के कर आ....
मेहता फ़ौरन आगे बढ़ के शौचालय में घुस जाता है... और पिशाब करने लगता है.... दर के मारे उसे सच में ज़ोर की पेशाब लग गयी थी....
हल्का होने के बाद न चाहते हुए भी वो हवलदार के पास जाता है...
मेहता : जी कहिये जनाब.... मुझे क्यों आवाज़ दे रहे थे... कुछ काम था क्या...?
हवलदार : हाँ वो वहां हमारी गाडी खराब हो गयी है और साहब को अर्जेंट कहीं जाना है.... तू साहब को वहां चोर दे....
मेहता मरता क्या न करता उसे हवलदार की बात मान नई पड़ती है.... वो उन्हें न नहीं कह पाटा.... न चाहते हुए भी वो इंस्पेक्टर को ले के वहां से ये सोच के चल देता है की इंस्पेक्टर को चोर के जल्द से जल्द यहाँ आ के महक को यहाँ से ले जाऊँगा....
मगर उसे आने में काफी वक़्त लग जाता है.... जब वो यहाँ आता है तब उसे वहां एक भी बॉक्स नहीं नज़र आता.... बॉक्स को वहां न पा के उसकी हालत खराब हो जाती है.... वो फ़ौरन उस एंटीक शॉप में जाता है और उन बॉक्स के बारे में पूछता है... वहां से उसे पाटा चलता है की बहार पड़े सारे बॉक्सेस की डिलीवरी हो गयी है.... उनमे से कुछ कार्गो से दूसरे शहर भेज दिए गए hain....aur कुछ को किसी दूसरी जगह भेजवा दिया गया है.... ये सुन ते hi उसके होश उड़द जाते हैं.... उसे समझ नहीं आता की वो क्या करे....
मेहता मन में : हे ऊपर वाले ये क्या हो गया....? ये मैंने क्या कर दिया....? अपनी बेटी का इलाज करवाने के चक्कर में मैंने उस मासूम के साथ क्या कर दिया....? कहाँ होगी वो....? क्या होगा उसके साथ....? कहीं उस बॉक्स में ज़्यादा देर रहने से वो मर गयी तो...? नहीं नहीं वो मर नहीं सकती.... ऊपर वाला इतना निर्दयी नहीं हो सकता... वो उस मासूम के साथ ऐसा नहीं कर सकता.... वो ज़रूर बच जायेगी... उसे कुछ नहीं होगा.... लेकिन अगर उसे किसी ने देख लिया और उसके साथ कुछ गलत किया तो.... वो मासूम इस हाल में है की न किसी से अपना बचाव कर सकती है और न hi अपने बचाव के लिए किसी को बुला सकती है.... जाने अब क्या होगा उसके साथ.... हे ऊपर वाले अब एक तेरा hi सहारा है उस मासूम की रक्षा करना... उसे कुछ नहीं होने देना....
ये सोचते हुए मेहता खुद को महक का दोषी मान के भारी मन से आँखों में आंसू लिए वहां से चल देता है... वो छह के भी कुछ नहीं कर सकता.... अब सब कुछ ऊपर वाले के हाथ में है.... जाने महक की किस्मत उसके साथ क्या करने वाली है...? ये आगे पता चलेगा.... फिलहाल चलते हैं प्रिंस के पास और देखते हैं की इस वक़्त वो क्या कर रहा है....?
प्रिंस घर पहुँच के एक एक कर के अपने सभी दोस्तों को कॉल करके उनका हाल चाल पूछता है फिर सुनील को जल्दी आने का कह के फ्रेश होने बाथरूम में चला जाता है... फिर कुछ देर बाद नेमत को कॉल करता है....
नेमत : तो जनाब सुल्तानगढ आ गए....
प्रिंस : नहीं अभी नहीं.... अभी मैं दिल्ली में हूँ....
नेमत : दिल्ली में मगर क्यों....?
प्रिंस : वो क्या है की अभी काम पूरा नहीं हुआ है.... यहाँ मुझे 2 दिन और लग जाएंगे.... 2 दिन बाद मैं यहाँ से सुल्तानगढ के लिए निकलूंगा....
नेमत : हाय ये 2 दिन तुम्हारे बिना कैसे गुज़रेंगे....?
प्रिंस : यार उदास मत हो... बस 2 दिन की hi तो बात है यूँ गुज़र जाएंगे.... 2 दिन में मैं वहां आ जाऊँगा....
नेमत : तू बस हाँ कह दे.... मैं अभी वहां पहुँच जाउंगी....
प्रिंस : जी नहीं कोई ज़रुरत नहीं है यहाँ आने की.... तुझे मैंने जो काम दिया था उसपे ध्यान दे.... जल्द से जल्द मेरे परिवार के बारे में पता कर....
नेमत : हाँ यार मैं उसी में लगी हुई हूँ.... मगर क्या करूँ कुछ पता hi नहीं चल रहा.... जाने तेरे परिवार के लोगों को आसमान खा गया या ज़मीन निगल गयी.... उनके बारे में कुछ पता hi नहीं चल पा रहा है.... समझ नहीं आ रहा है की तेरे परिवार के लोगों को ढूंढें तो कैसे ढूंढें.... खुल के किसी से पूछ भी नहीं सकते.... तेरे नाम (प्रिंस) से हर जगह पता करने की कोशिश की मगर किसी को कुछ नहीं पता.... कुछ का तो ये तक कहना है की प्रिंस नाम का कोई बच्चा कभी यहाँ किसी स्कूल में था hi नहीं.... समझ नहीं आ रहा है की क्या करूँ....?
प्रिंस : यार हम ऐसे हिम्मत नहीं हार सकते... हम को कुछ न कुछ करके मेरे परिवार को ढूंढना hi होगा....
नेमत : ठीक है यार सोचती हूँ कुछ और....
प्रिंस : चल अब फ़ोन रखता हूँ....
नेमत : Bye स्वीटीपीए...
प्रिंस : अबे ये स्वीटीपीए का क्या मतलब है....?
नेमत : स्वीटीपीए उसे कहते हैं जो दिल के करीब हो.... जैसे की तू....
प्रिंस : यार पहले hi मेरी किस्मत में लडकियां क्या काम है जो तू भी उनमे शामिल होना छह रही है....
नेमत : अबे कितनी बार मैं बताऊँ तुझे की मैं तुझसे जुड़ा नहीं हूँ... मगर तू है की भूल जाता है.... अब अगर फिर कभी ये कहा न तो मैं तेरी टांगें तोड़ दूंगी...
प्रिंस : चल चल ठीक है... अब ज़्यादा नाटक मत कर और फ़ोन रख....
नेमत : अरे रुक पहले ये बता की तू योग साधना और वर्कआउट तो कर रहा है न... ऐसा तो नहीं की वहां जाने के बाद तू ने ये सब चोर दिया हो....
प्रिंस : सब कर रहा हूँ मेरी माँ.... अब फ़ोन रख....
नेमत : मैं तेरी माँ नहीं हूँ समझा... मैं नमः हूँ नेमत....
प्रिंस : हाँ हाँ पता है तू नेमत है.... छोटी सी पीली चड्डी वाली नेमत....
नेमत : छोटी पीली चड्डी मतलब....?
प्रिंस : सामने देख तुझे सब पता चल जाएगा....
प्रिंस की बात सुन के जब नेमत सामने देखती है तो खुद को आईने में देख वो बुरी तरह से चौंक जाती है.... सामने वो खुद को छोटी सी पीली पंतय पहने पाती है.... वो फ़ौरन बीएड पे पड़ी चादर से खुद को धक् लेती है....
नेमत : साले कमीने.... तुझे शर्म नहीं आयी ऐसा करते हुए....? अपनी पावर्स का गलत इस्तेमाल करते हुए....?
प्रिंस हस्ते हुए : हहहहहहह.... ये बात तेरे मुँह से अच्छी नहीं लगती.... तू भी तो अपनी पावर्स से कुछ भी करती रहती है... भूल गयी कैसे उस दिन तू पावर्स के ज़रिये मुझे वहां से ड्रीमवोर्ल्ड ले गयी थी और मुझे पानी में डुबो रही थी....
नेमत : वो मैं तेरे भले के लिए कर रही थी.... मगर यहाँ तू अपनी पावर्स का गलत इस्तेमाल कर रहा है... एक शरीफ और खूबसूरत लड़की को इस हालत में देखना क्या अच्छी बात है....?
प्रिंस : अबे तुझे देखूं या खुद को देखूं एक hi बात है.... तू कौन सा मुझसे जुड़ा है.... न hi तू कोई गैर है... तू मेरा hi एक हिस्सा है और अपने हिस्से को देखने में कैसी शर्म....
प्रिंस की बात सुन के नेमत खामोश हो जाती है.... उसे समझ नहीं आ ता की वो प्रिंस की बात का क्या जवाब दे.... क्यों की वो जो कह रहा है वो एक तरह से ठीक hi है.... मगर फिर भी नेमत तो नेमत है वो कहाँ किसी के आगे चुप रहने वाली है.... भले hi वो प्रिंस hi क्यों न हो....
नेमत : अबे कमीने तुझे न सही मगर एक लड़की होने के नाते मुझे शर्म तो आणि hi है न.... और अपने हिस्से को कोई भला ऐसी नज़र से देखता है क्या....?
प्रिंस : नज़र तो नज़र होती है उसमे ऐसा वैसा कुछ नहीं होता और तू मेरा hi हिस्सा है तुझे मैं जैसे चाहे देखूं इसमें मुझे कोई नहीं रोक सकता... तू भी नहीं समझी...
नेमत : तू बस यहाँ आ जा फिर देख मैं तेरे साथ क्या करती हूँ...
प्रिंस : चल अब फ़ोन रख मुझे बहुत काम है जिसे जल्द hi पूरा करना है.... ताकि मैं जल्द से जल्द वहां आ सकूँ.... और तुझे देख सकूँ....
नेमत : तू बस एक बार यहाँ आ जा फिर बताती हूँ मैं तुझे....
प्रिंस : क्या बताएगी....?
नेमत : जब तू यहाँ आएगा तब खुद जान जाएगा.... चल Bye....
इस से पहले की प्रिंस उस से कुछ पूछता... नेमत कॉल कट कर देती है....
ठीक तभी किसी की चीख सुन के प्रिंस बुरी तरह से चौंक जाता है....??????
अगला अपडेट इस से 3 गुना बड़ा है और साथ hi काफी मज़ेदार भी....
अभी के लिए अलविदा दोस्तों.....
फिर मुलाक़ात होगी अगले महा मेगा अपडेट पे....
अपडेट 96
मेहता : घबराओ मत बेटी.... मैं यहाँ तुम्हे कोई नुक्सान पहुँचाने नहीं आया हूँ.... मैं एक गरीब टैक्सी ड्राइवर हूँ.... तुम्हारी तरह मेरी भी एक बेटी है... जो की ठीक उसी तरह बीमार है जिस तरह तुम हो.... वो ठीक हो सकती है मगर डॉ बिना पैसे के उसका इलाज नहीं कर रहे.... मैंने डॉ की बहुत मिन्नत की उनके हाथ पेअर जोड़े मगर उन कमीनो ने मेरी एक न सुनी मुझे गरीब भिकारी कह के हॉस्पिटल से बहार कर दिया.... मैं ऊपर वाले से अपनी बेटी के इलाज के लिए दुआ मांग रहा था की तभी शायद उसने मेरी दुआ सुन ली और ठीक उसी वक़्त तुम यहाँ आ गयी.... अब मेरी बेटी का इलाज होगा.... वो ठीक हो जायेगी.... बस उसके लिए तुम्हे मेरी मदत करनी होगी....
महक हैरत और दर से मेहता को देख रही है.... उसे समझ नहीं आ रहा है की आखिर मेहता कह क्या रहा है.... जब उसके पास पैसे नहीं है तो कैसे उसकी बेटी का इलाज होगा... और इस में मैं जो खुद सहारे के लिए दूसरों पे निर्भर हूँ उसकी कैसे मदत कर सकती हूँ....?????
अब आगे....
महक अभी ये सोच hi रही होती है की तभी मेहता उसे उठा के सामने पड़ी व्हीलचेयर पे बैठा देता है.... और उसकी जगह अपनी बेटी को लेता देता है.... फिर महक की फाइल में से उसके रिपोर्ट्स और पेपर्स निकाल के उस जगह अपनी बेटी के रिपोर्ट्स और पेपर्स रख देता है.... सिर्फ कवर पे उसके नाम को चोर के वो बाकी सारे पेपर्स को बदल देता है....
मेहता महक से : बेटी मैं जो कर रहा वो गलत है मगर फिर भी मुझे ये करना होगा.... अपनी बेटी के इलाज के लिए मुझे ये करना होगा.... मगर फ़िक्र मत करो बस 6 महीने की बात है.... 6 महीने बाद जब मेरी बेटी ठीक हो जायेगी तब मैं तुम्हे यहाँ ला के तुम्हारा इलाज करवाऊंगा.... तब तक तुम्हे अपनी बेटी की तरह अपने घर में रखूँगा.... तुम्हे कोई तकलीफ नहीं आने दूंगा....
उसकी बात सुन के महक बेहद दर जाती है और रोने लगती है.... मगर मेहता पे महक के रोने का कोई असर नहीं हो रहा है.... वो महक को लेजा के हॉस्पिटल के एक रूम में छुपा देता है और सुबह होने का इंतज़ार करने लगता है....
वो ये तसाली कर लेना चाहता है की वो लोग उसकी बेटी को महक समझ के इलाज के लिए वहां से ले जाए.... सुबह ठीक वैसा hi होता है जैसा की उसने सोचा था.... किसी को कुछ पता नहीं चलता की जिस महक को हॉस्पिटल से इलाज करवाने ले जा रहे हैं वो असली महक नहीं बल्कि मेहता की बेटी है....
जब वो लोग बाकी 5 पेशेंट्स के साथ मेहता की बेटी को भी गाडी में बैठा देते हैं तब मेहता सब से नज़रें बचा के महक को अपनी टैक्सी में दाल के उनके पीछे चल देता है.... वो उनका तब तक पीछे करता रहता है वो लोग स्पेशल हॉस्पिटल में मेहता की बेटी के साथ बाकी पेशेंट्स को एडमिट नहीं कर देते.... जब उसे इस बात की तसाली हो जाती है तब वो मुस्कान को साथ लेके वहां से अपने घर की तरफ चल देता है....
इधर प्रिंस अपने ऑफिस से काम पूरा करके सुनील उसके दिल्ली ऑफिस का मैनेजर को आगे का काम समझा के कुछ देर बाद सब फाइल्स ले के घर आने को कहता है.... फिर वहां से अपने दिल्ली वाले बंगलो की तरफ चल देता है.... रास्ते में उसे एक एंटीक की शॉप नज़र आती है....
प्रिंस : यार क्यों न सुल्तानगढ के घर की सजावट के लिए यहाँ से कुछ एंटीक चीज़ें खरीद लून....
ये सोच के वो कार को उस शॉप के पास रोक देता है और अंडर जा के वहां की चीज़ें देखने लगता है.... वहां उसे काफी चीज़ें पसंद आती हैं... वो बारीकी से हर एक चीज़ को देखता है और उसे घर के हिसाब से सेलेक्ट करने लगता है की किस जगह पे कौनसी चीज़ अच्छी लगेगी.... वो वहां से काफी चीज़ें पसंद करता है और उसकी पेमेंट कर के अपने बंगलो का एड्रेस दे के उसे वहां पहुँचाने का कह के वहां से अपने बंगलो की तरफ चल देता है....
इधर मेहता महक को लेके अपने घर की तरफ जा रहा होता है की तभी रास्ते में उसे कुछ पुलिस वाले आती जाती हर कार को रोक के चेकिंग करते नज़र आते हैं.... ये देख मेहता की हालत खराब हो जाती है वो बुरी तरह से दर जाता है.... उसे समझ नहीं आ रहा है की क्या करे....? पहले वो सोचता है की आगे बढ़ा जाए अगर किसी ने रोका तो कह दूंगा की ये मेरी बेटी है.... लेकिन अगर उन्हें शक हो गया तो....? कहीं ऐसा न हो की साड़ी बात सामने आ जाए और ये लोग मेरी बेटी को वहां से निकाल के इसे वहां एडमिट करवा दे.... और मुझे इसको किडनैप करने के जुर्म में जेल में दाल दे.... अगर ऐसा हुआ तो मेरी बेटी का क्या होगा.... मेरे सिवाए उसका है hi कौन.... अगर मुझे जेल हो गयी तो मेरी बेटी मर जायेगी.... नहीं ऐसा नहीं होगा... मैं ऐसा नहीं होने दूंगा... मुझे कुछ भी करके इसे कहीं छुपाना होगा.... फिर जब पुलिस वाले यहाँ से चले जाएंगे तब मैं इसे यहाँ से ले जाऊँगा.... हाँ यही ठीक रहेगा... मगर इसे छुपाऊं कहाँ... ये कोई माचिस की डिब्बी नहीं जीती जागती लड़की है.... इसे छुपाने के लिए ऐसी जगह चाहिए जो सब की नज़र से दूर रहे.... कहाँ मिलेगी ऐसी जगह....? कहाँ...? सोच जल्दी मेहता इस से पहले की वो पुलिस वाले तुझ तक पहुँच जाए.... कुछ सोच....
मेहता इधर उधर देखने लगता है इस उम्मीद से की उसे कहीं न कहीं कोई ऐसी जगह मिल जाए जहाँ वो महक को छुपा सके... तभी उसे कुछ नज़र आता है और उसकी आँखों में चमक और होंठों पे मुस्कान आ जाती है....
वो फ़ौरन कार को साइड लगा के महक को बहार निकाल के उस तरफ जाता है... ये एक एंटीक शॉप है.... वहां कुछ लोग बॉक्स में मैनेक्विन को पैक करने के बाद अंडर जा रहे थे.... मेहता चुपके से उनमे से एक बॉक्स को खोलता है और उसमे से एक मैनेक्विन को निकाल के उसकी जगह महक को लेटने लगता है... मगर हरबड़ी में महक उसके हाथ से छूट के बॉक्स में गिर जाती है.... जिस से उसके सर पे चोट लग जाती है.... और वो बेहोश हो जाती है.... ये देख मेहता बुरी तरह से दर जाता है.... वो इधर उधर देखता है की कहीं उसे किसी ने देखा तो नहीं तभी उसे कुछ पुलिस वाले उसकी तरफ आते हुए नज़र आते हैं.... वो फ़ौरन बॉक्स को बंद कर के दूसरी तरफ निकल जाता है.... पुलिस वाले तेज़ी से उसकी तरफ आते हैं वो उसे आवाज़ दे के रुकने को कहते हैं मगर मेहता दर के मारे और तेज़ी से चलने लगता है... पुलिस वाले आगे बढ़ के उसे रोक ते हैं....
हवलदार : अबे तू बहरा है क्या...? साले कब से तुझे आवाज़ लगा रहा हूँ मगर तू है की सुनता hi नहीं....
मेहता बुरी तरह से डरा हुआ है... वो ये अच्छे से जानता है की अगर वो पकड़ा गया तो क्या हो सकता है.... मगर उसे जो करना था वो उसने कर दिया है.... अपनी बेटी को इलाज के लिए हॉस्पिटल पहुंचा दिया और महक को उस बॉक्स में दाल के खुद से दूर कर दिया.... उसे ऐसा करते किसी ने नहीं देखा.... उसे ऐसा कुछ नहीं करना और कहना चाहिए जिस से इन पुलिस वालों को उस पे शक हो.... वो फ़ौरन खुद को नार्मल करता है और घूम के उन पुलिस वालों को देख के कहता है....
मेहता : साहब मैंने आपकी आवाज़ सुनी तो थी मगर मैं रुका नहीं.... मैं मजबूर था वो क्या है की पुलिस की आवाज़ सुन के सब कुछ तो रुक जाता है मगर पेशाब ऐसी चीज़ है जो यामयाज के रोके भी नहीं रूकती.... बस वही करने जा रहा था.... अगर आप की इजाज़त हो तो कर आऊं.... बड़ी ज़ोर की लगी है... अगर एक पल भी मैं यहाँ और रुका तो देर हो जायेगी... और साथ hi यहाँ बार आने से कोई नहीं रोक पायेगा....
हवलदार : नहीं बे यहाँ नहीं करना.... जा जल्दी से जा के कर आ....
मेहता फ़ौरन आगे बढ़ के शौचालय में घुस जाता है... और पिशाब करने लगता है.... दर के मारे उसे सच में ज़ोर की पेशाब लग गयी थी....
हल्का होने के बाद न चाहते हुए भी वो हवलदार के पास जाता है...
मेहता : जी कहिये जनाब.... मुझे क्यों आवाज़ दे रहे थे... कुछ काम था क्या...?
हवलदार : हाँ वो वहां हमारी गाडी खराब हो गयी है और साहब को अर्जेंट कहीं जाना है.... तू साहब को वहां चोर दे....
मेहता मरता क्या न करता उसे हवलदार की बात मान नई पड़ती है.... वो उन्हें न नहीं कह पाटा.... न चाहते हुए भी वो इंस्पेक्टर को ले के वहां से ये सोच के चल देता है की इंस्पेक्टर को चोर के जल्द से जल्द यहाँ आ के महक को यहाँ से ले जाऊँगा....
मगर उसे आने में काफी वक़्त लग जाता है.... जब वो यहाँ आता है तब उसे वहां एक भी बॉक्स नहीं नज़र आता.... बॉक्स को वहां न पा के उसकी हालत खराब हो जाती है.... वो फ़ौरन उस एंटीक शॉप में जाता है और उन बॉक्स के बारे में पूछता है... वहां से उसे पाटा चलता है की बहार पड़े सारे बॉक्सेस की डिलीवरी हो गयी है.... उनमे से कुछ कार्गो से दूसरे शहर भेज दिए गए hain....aur कुछ को किसी दूसरी जगह भेजवा दिया गया है.... ये सुन ते hi उसके होश उड़द जाते हैं.... उसे समझ नहीं आता की वो क्या करे....
मेहता मन में : हे ऊपर वाले ये क्या हो गया....? ये मैंने क्या कर दिया....? अपनी बेटी का इलाज करवाने के चक्कर में मैंने उस मासूम के साथ क्या कर दिया....? कहाँ होगी वो....? क्या होगा उसके साथ....? कहीं उस बॉक्स में ज़्यादा देर रहने से वो मर गयी तो...? नहीं नहीं वो मर नहीं सकती.... ऊपर वाला इतना निर्दयी नहीं हो सकता... वो उस मासूम के साथ ऐसा नहीं कर सकता.... वो ज़रूर बच जायेगी... उसे कुछ नहीं होगा.... लेकिन अगर उसे किसी ने देख लिया और उसके साथ कुछ गलत किया तो.... वो मासूम इस हाल में है की न किसी से अपना बचाव कर सकती है और न hi अपने बचाव के लिए किसी को बुला सकती है.... जाने अब क्या होगा उसके साथ.... हे ऊपर वाले अब एक तेरा hi सहारा है उस मासूम की रक्षा करना... उसे कुछ नहीं होने देना....
ये सोचते हुए मेहता खुद को महक का दोषी मान के भारी मन से आँखों में आंसू लिए वहां से चल देता है... वो छह के भी कुछ नहीं कर सकता.... अब सब कुछ ऊपर वाले के हाथ में है.... जाने महक की किस्मत उसके साथ क्या करने वाली है...? ये आगे पता चलेगा.... फिलहाल चलते हैं प्रिंस के पास और देखते हैं की इस वक़्त वो क्या कर रहा है....?
प्रिंस घर पहुँच के एक एक कर के अपने सभी दोस्तों को कॉल करके उनका हाल चाल पूछता है फिर सुनील को जल्दी आने का कह के फ्रेश होने बाथरूम में चला जाता है... फिर कुछ देर बाद नेमत को कॉल करता है....
नेमत : तो जनाब सुल्तानगढ आ गए....
प्रिंस : नहीं अभी नहीं.... अभी मैं दिल्ली में हूँ....
नेमत : दिल्ली में मगर क्यों....?
प्रिंस : वो क्या है की अभी काम पूरा नहीं हुआ है.... यहाँ मुझे 2 दिन और लग जाएंगे.... 2 दिन बाद मैं यहाँ से सुल्तानगढ के लिए निकलूंगा....
नेमत : हाय ये 2 दिन तुम्हारे बिना कैसे गुज़रेंगे....?
प्रिंस : यार उदास मत हो... बस 2 दिन की hi तो बात है यूँ गुज़र जाएंगे.... 2 दिन में मैं वहां आ जाऊँगा....
नेमत : तू बस हाँ कह दे.... मैं अभी वहां पहुँच जाउंगी....
प्रिंस : जी नहीं कोई ज़रुरत नहीं है यहाँ आने की.... तुझे मैंने जो काम दिया था उसपे ध्यान दे.... जल्द से जल्द मेरे परिवार के बारे में पता कर....
नेमत : हाँ यार मैं उसी में लगी हुई हूँ.... मगर क्या करूँ कुछ पता hi नहीं चल रहा.... जाने तेरे परिवार के लोगों को आसमान खा गया या ज़मीन निगल गयी.... उनके बारे में कुछ पता hi नहीं चल पा रहा है.... समझ नहीं आ रहा है की तेरे परिवार के लोगों को ढूंढें तो कैसे ढूंढें.... खुल के किसी से पूछ भी नहीं सकते.... तेरे नाम (प्रिंस) से हर जगह पता करने की कोशिश की मगर किसी को कुछ नहीं पता.... कुछ का तो ये तक कहना है की प्रिंस नाम का कोई बच्चा कभी यहाँ किसी स्कूल में था hi नहीं.... समझ नहीं आ रहा है की क्या करूँ....?
प्रिंस : यार हम ऐसे हिम्मत नहीं हार सकते... हम को कुछ न कुछ करके मेरे परिवार को ढूंढना hi होगा....
नेमत : ठीक है यार सोचती हूँ कुछ और....
प्रिंस : चल अब फ़ोन रखता हूँ....
नेमत : Bye स्वीटीपीए...
प्रिंस : अबे ये स्वीटीपीए का क्या मतलब है....?
नेमत : स्वीटीपीए उसे कहते हैं जो दिल के करीब हो.... जैसे की तू....
प्रिंस : यार पहले hi मेरी किस्मत में लडकियां क्या काम है जो तू भी उनमे शामिल होना छह रही है....
नेमत : अबे कितनी बार मैं बताऊँ तुझे की मैं तुझसे जुड़ा नहीं हूँ... मगर तू है की भूल जाता है.... अब अगर फिर कभी ये कहा न तो मैं तेरी टांगें तोड़ दूंगी...
प्रिंस : चल चल ठीक है... अब ज़्यादा नाटक मत कर और फ़ोन रख....
नेमत : अरे रुक पहले ये बता की तू योग साधना और वर्कआउट तो कर रहा है न... ऐसा तो नहीं की वहां जाने के बाद तू ने ये सब चोर दिया हो....
प्रिंस : सब कर रहा हूँ मेरी माँ.... अब फ़ोन रख....
नेमत : मैं तेरी माँ नहीं हूँ समझा... मैं नमः हूँ नेमत....
प्रिंस : हाँ हाँ पता है तू नेमत है.... छोटी सी पीली चड्डी वाली नेमत....
नेमत : छोटी पीली चड्डी मतलब....?
प्रिंस : सामने देख तुझे सब पता चल जाएगा....
प्रिंस की बात सुन के जब नेमत सामने देखती है तो खुद को आईने में देख वो बुरी तरह से चौंक जाती है.... सामने वो खुद को छोटी सी पीली पंतय पहने पाती है.... वो फ़ौरन बीएड पे पड़ी चादर से खुद को धक् लेती है....
नेमत : साले कमीने.... तुझे शर्म नहीं आयी ऐसा करते हुए....? अपनी पावर्स का गलत इस्तेमाल करते हुए....?
प्रिंस हस्ते हुए : हहहहहहह.... ये बात तेरे मुँह से अच्छी नहीं लगती.... तू भी तो अपनी पावर्स से कुछ भी करती रहती है... भूल गयी कैसे उस दिन तू पावर्स के ज़रिये मुझे वहां से ड्रीमवोर्ल्ड ले गयी थी और मुझे पानी में डुबो रही थी....
नेमत : वो मैं तेरे भले के लिए कर रही थी.... मगर यहाँ तू अपनी पावर्स का गलत इस्तेमाल कर रहा है... एक शरीफ और खूबसूरत लड़की को इस हालत में देखना क्या अच्छी बात है....?
प्रिंस : अबे तुझे देखूं या खुद को देखूं एक hi बात है.... तू कौन सा मुझसे जुड़ा है.... न hi तू कोई गैर है... तू मेरा hi एक हिस्सा है और अपने हिस्से को देखने में कैसी शर्म....
प्रिंस की बात सुन के नेमत खामोश हो जाती है.... उसे समझ नहीं आ ता की वो प्रिंस की बात का क्या जवाब दे.... क्यों की वो जो कह रहा है वो एक तरह से ठीक hi है.... मगर फिर भी नेमत तो नेमत है वो कहाँ किसी के आगे चुप रहने वाली है.... भले hi वो प्रिंस hi क्यों न हो....
नेमत : अबे कमीने तुझे न सही मगर एक लड़की होने के नाते मुझे शर्म तो आणि hi है न.... और अपने हिस्से को कोई भला ऐसी नज़र से देखता है क्या....?
प्रिंस : नज़र तो नज़र होती है उसमे ऐसा वैसा कुछ नहीं होता और तू मेरा hi हिस्सा है तुझे मैं जैसे चाहे देखूं इसमें मुझे कोई नहीं रोक सकता... तू भी नहीं समझी...
नेमत : तू बस यहाँ आ जा फिर देख मैं तेरे साथ क्या करती हूँ...
प्रिंस : चल अब फ़ोन रख मुझे बहुत काम है जिसे जल्द hi पूरा करना है.... ताकि मैं जल्द से जल्द वहां आ सकूँ.... और तुझे देख सकूँ....
नेमत : तू बस एक बार यहाँ आ जा फिर बताती हूँ मैं तुझे....
प्रिंस : क्या बताएगी....?
नेमत : जब तू यहाँ आएगा तब खुद जान जाएगा.... चल Bye....
इस से पहले की प्रिंस उस से कुछ पूछता... नेमत कॉल कट कर देती है....
ठीक तभी किसी की चीख सुन के प्रिंस बुरी तरह से चौंक जाता है....??????
अगला अपडेट इस से 3 गुना बड़ा है और साथ hi काफी मज़ेदार भी....
अभी के लिए अलविदा दोस्तों.....
फिर मुलाक़ात होगी अगले महा मेगा अपडेट पे....