MANAV or DANAV sex story - part 1 - Page 8 - SexBaba
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MANAV or DANAV sex story - part 1

थैंक यू भाइयो आप सब के कमैंट्स देख कर लगता है की स्टोरी कुछ ठीक थक लिख रहा हु. ऐसे hi साथ बने रहना. आप लोगो का साथ हौसला देता है आगे लिखने का.

और एक बात, ये मत सोचना की मैं आप सब के कमैंट्स को एक hi रिप्लाई में ऐड करके यु hi रिप्लाई कर देता हु. सबको एक hi रिप्लाई में ऐड करने का कारन बिना मतलब के पेज बढ़ाने से बचने का है.

पैर प्लीज आप सब ऐसे hi साथ बनाये रखे और अपने कमैंट्स में मुझको बताये की कहा पे गलती हो रही है.

मैं 1सत टाइम लिख रहा हु तो हो सकता है की बहुत सी मिस्टेक हो.

अपनी सलाह देते रहे. और कुछ ऐसा हो जो आपको समाज नहीं आया हो तो बताये...................
 
अपडेट 62

पब उसको भी इसरा करके बुलाता है. तो गुरु भाग कर उसके पीछे से उस पैर लड़ जाती है. और अपने चुके पब की पथ में गदा देती है. अभी पब को बड़ा hi सुकून मिल रहा था. उसकी तीनो बीबियो ने उसको प्यार से गले लगाया हुआ था. गले लगे hi गुरु बोली

गुरु – मुझको पता चल गया पारी कैसे ठीक हुई है. मणि जी ने पहले भी इसरा किया था. और मुझको पता होते हुए भी वो बात समाज नहीं पायी..

पब – और क्या थी वो बात??

गुरु – ये की तुम्हारी हर बीबी तुमको मिलने वाली सकती का प्रतिक है. और उसमे भी उस सकती का एक अंश होता है. और इस किरिया के बाद तुम्हारा और तुम्हारी बीबी के बिच हुए हर सम्भोग से ये सकती और बाद जाती है.

पब – हम्म ये तो ठीक है पैर इससे पारी के ठीक होने को क्या सम्बंद है.

गुरु – तुमने पारी से साथ कोण सी सकती ले. ?

पब – सेक्स को कण्ट्रोल करने की..

गुरु – तो पारी को भी अपने सेक्स को कण्ट्रोल करने का एक अंश मिला है. वो हम्हारी तरह हो नहीं पैर अपने आप को कण्ट्रोल कर सकती है. और ये तब hi सम्भब है जब पारी की बॉडी का सेक्स सिस्टम ठीक हो. इसलिए इस सकती से पारी पूरी तरह ठीक हो गई…

पब – ओह्ह अब आई बात समाज में. अब हमको सोना चाहिए. रात बहुत हो गई है. कल से सधी की तैयारी भी करनी है.

गुरु – हम्म ok, मैं चलती हु तुम आज इन दोनों के साथ रहो..

और फिर गुरु चली जाती है. पब पारी और अंकिता को बहो में ले कर सो जाता है. अभी सोये हुए 5 मं hi हुए थे की अंकिता का फ़ोन बजने लगता है. अंकिता भी भुजे मन से फ़ोन को देखती है. और स्क्रीन पे नाम पड़ते hi एक डम्ब ेथ जाती है.

पब – अरे किस का फ़ोन है जो तुम ऐसे उछाल रही हो?

अंकिता – माँ का है. एक मं चुप रहो..

और अंकिता फ़ोन उदा लेती है.

अंकिता – hello माँ

लता – हाँ बेटी, मैं बोल रही हु, किसी है तू..

अंकिता – अच्छी हु माँ, आप किसी है..

लता – मैं भी अच्छी हु, तेरी याद आ रही है…

अंकिता – माँ मुझको भी आपसे मिलने का बहुत मन है. पैर आप तो आती hi नहीं.

लता – तुझको पता है मैं कहा हु अभी?

अंकिता – मुझको क्या पता, आप दिल्ली में होगी या कही और गुमने गई है, या अभी तक दुबई में hi है क्या? माँ औ न मुझको आपको इनसे भी मिलबाना है.

अंकिता ने “इनसे” इतने प्यार से बोलै. की पब को अंकिता पे प्यार आ गया. और उसने इस बात पर अंकिता की चुकी भींच दी. अंकिता के मुँह से एक चीख निकल गई. जो लता ने भी सुन ली. लता भी समाज गयी की उसने गलत टाइम पे फ़ोन किया है. अरे भाई, लता की नजर में अंकिता की अभी-2 सधी हुई है. और इतनी रात में नए कोपले क्या करते है. ये तो वो भी जानती थी. वो बात अलग है की पब केवल एक बार छोड़ कर एक लम्बे टाइम के लिए रुक गया था.

लता – लगता है गलत टाइम पे फ़ोन किया है मेने. चल सुन में घूमने hi आयी हु पैर नैनपुर सिटी में हु. और ालर होटल में रुकी हु.

नोट – फ्रेंड्स सिटी के नाम के बिना लिखने में मज़ा नहीं आ रहा था. तो मेने सोच की अबसे सभी प्लेस के काल्पनिक नाम रख देता हु. पानीपुर – विलेज जिसमे अभी पब रहता है. नैनपुर सिटी – पानीपुर का सबसे नजदीक सिटी (टाउन). ये पहाड़ियों से गिरा हुआ है. ये एक टूरिस्ट प्लेस है.

शिवा नगर – ये वो सिटी है जिसके जंगलो मैं गुरु रहती थी. ये सिटी चारो और से जंगलो से hi गिरा है. इसके एक विलेज में सविता का भाई रहता है.

अंकिता ये सुन कर ख़ुशी से उछाल पड़ती है.

अंकिता - क्या माँ आप आ गई और मुझको अब बता रही है. मैं बस 30मं में आपके पास पहुंच रही हु.

लता – नहीं मेरी बेटी अभी नहीं सुबह आना. अभी बहुत रात हो चुकी है. चल रखती हु. तू एन्जॉय कर… हाहाहाहा..

अंकिता लता की बात पे झेप जाती है. – क्या माँ आप भी.. माँ हो कर किसी बाटे करती है.

लता – चल अब कोई बात नहीं. वैसे भी मैं बहुत थकी हुई हु. आज सुबह hi दुबई से लोटी थी. और सिदा यहाँ के लिए निकल ली. और अभी यहाँ पहुंच कर डिनर hi किया है और तुजसे बात करने लगी. मैं तो सोने जा रही हु… गुड नाईट….

जब फ़ोन कट हो जाता है. तो अंकिता जुटे गुस्से से पब को गर्ने लगती है.

पब – क्या हुआ जान. ऐसे न देखो प्यार हो जायेगा…

अंकिता – आपको बड़ी मस्ती सूज रही है. रुको अभी बताती हु आपको….

अंकिता पारी को इसरा करती है और दोनों पब के उप्पेर टूट पड़ती है. उसको गुदगुदी करने लगती है. और पब हसने लगता है. उसको एंटनी हसी नहीं आ रही थी जितना वो है रहा था. अपनी बीबियो को खुश जो करना था.

पब – अरे रुको तो.. हाहाहाहा रुको…. मेने क्या किया है… हाहाहाहाहा

अंकिता – आप बहुत गंदे है. मैं नहीं बात करती आपसे..

पब – अरे ये क्या मेरी आना डार्लिंग तो रूठ गई… अब मानना पड़ेगा.. (और उसके गाल को प्यार से सहलाने लगता है. और उसकी आखों में देखने लगता है.)

अंकिता भी कहा रूठी थी. वो तो झूट मुठ का नाटक कर रही थी. पैर पब के ऐसे प्यार से देखने से वो अपना रूठना भूल कर उसके गले लग जाती है.

पब – वा वा कुड़ी पैट गई..

अंकिता – ये तो बहुत दिन की आपकी है माय लव…

पब पारी को भी अपनी बही में ले लेता है. और बोलै – अब बताओ क्या कहा माँ ने. क्या वो नैनपुर में है??

अंकिता – हाँ और ालर होटल में रुकी है. पैर अभी वो थकी हुई है तो सोने का बोल रही है. ईंटे दिन बाद मिलने को आयी है. पैर अब सुबह तक वेट करना होगा. (अंकिता के फेस पे एक उदासी सी आ जाती है)

पब – तुम न बुद्दू हो. वो यदि अभी तुमसे मिलना नहीं चाहती तो फ़ोन hi नहीं करती. पैर उनको लगा होगा की तुम अभी अपने हुब्बी के साथ बिजी हो इसलिए उन्होंने तुमको मन कर दिया.

अंकिता – हम्म मुझको भी ये hi लगता है.

तो पब एक दम से बाथरूम की और जाने लगता है. और अंकिता से बोलता है

पब – अभी तक लेती हो जाओ तैयार हो कर जल्दी से आओ. तुम्हारी माँ के पास चलते है.

अंकिता – (खुस होते हुए) सच्ची?????

पब – हाँ पैर तुम लेट हो गई तो फिर मैं फिर से सो जाउगा.

पब की बात सुन कर अंकिता रॉकेट की तरह भगति हुई अपने रूम में चली जाती है. और पब उसको यु जाता देख मुस्कुराता हुआ बाथरूम में घुस जाता है. और फ्रेश हो कर रेडी होने लगता है. कुछ hi देर में अंकिता रेडी हो कर आ जाती है. वो पब से पहले रेडी हो कर आ गई थी. पब उसको सातवे अजोवे की तरह देखने लगता है. भाई देखे भी क्यों न एक लेडी एक मर्द से पहले तैयार हो जाये ये किसी अजूबे से काम है क्या???

फिर दोनों जाने निकल पड़ते है सिटी की और कार में. अंकिता बहुत बहुत खुस थी. वो आज पहली बार अपनी माँ से मिलने जा रही थी.

पब – अंकिता मैं क्या बोलता हु की सुबह h0um होटल मैनेजर से मिल कर उस होटल को पार्टी के लिए बुक भी कर देते है. एक काम तो काम होगा न..

अंकिता – हम्म देखते है. यदि माँ यहाँ पैर होगी तब तो ये होटल की बुकिंग नहीं हो पायेगी. हमको कोई दूसरा होटल hi देखना होगा.

पब – वो क्यों ?? तुम्हारी माँ के रहते होटल बंद हो जायेगा क्या?

अंकिता – कुछ ऐसा hi समाज लो. वो तुमको अभी होटल मैं पहुंच कर hi पता चल जायेगा. अभी आप जल्दी से चलो न कितनी देर हो गई है हम अभी तक नहीं पहुंचे..

पब अंकिता की बेसब्री देख रहा था. उसको इस टाइम पैर माँ के अलावा कुछ नहीं देख रहा था. कार की 120 की स्पीड भी उसको काम लग रही थी. पब फुल स्पीड से चल रहा था. कियोकि एक तो रास्ता खली था. और वो भी चाहता था की एक बेटी अपनी माँ से जल्दी मिले. इसलिए hi तो वो इतनी रात में आया था.
 
अपडेट 63

कुछ hi देर में वो होटल के बहार खड़े थे. पैर होटल पे बहुत hi टाइट सिक्योरिटी थी. होटल के बहार 50 से भी ज्यादा ब्लैक कमांडो खड़े थे. जो पूरी ईमानदारी से अपनी ड्यूटी कर रहे थे. ये सब देख कर पब बोलै

पब – अरे यार इतनी सिक्योरिटी किसलिए है यहाँ पे. इतनी तो किसी मिनिस्टर के लिए भी नहीं होती..

अंकिता – तुम भूल रहे हो डिअर की तुम मिस लता रतन सिंह से मिलने आये हो. जिनसे मिलने के लिए मॉनिटर भी तरसते है.

पब – हम्म समाज गया की हमको होटल क्यों नहीं मिल सकता. यदि आपकी माताजी यहाँ रहेगी तो ये होटल तो सिक्योरिटी रेसों से बंद hi रहेगा.

अंकिता – जी माय डिअर हस्बैंड. कार रूक न अब कहा जा रहे हो.

पब – पार्किंग में और कहा..

अंकिता – मुझको यह एप उत्तर दो और आप पार्क करके आ जाओ न प्लीज …

पब अंकिता को ड्राप करके खुद पार्किंग की और चल देता है. और जब लोट कर आता है तो देखता है की अंकिता उन कमेंडेरो से जगद रही है. तो वो जल्दी से वह पहुंच कर मामला समझता है. वो लोग अंकिता को लता से मिलने नहीं जाने दे रहे थे. और अंकिता इसी बात पे जगद रही थी. जबकि उसने बताया भी की वो लता की बेटी है. पैर किसी को उसकी बात का विस्वास नहीं हुआ.

पब – अंकिता क्यों लड़ रही हो. वो लोग अपनी ड्यूटी कर रहे है.

अंकिता – तो क्या में अपनी माँ से नहीं मिलूगी…

पब – तुमको क्या हो गया है. जो पागलो जैसी हरकत कर रही हो. तुम अपनी माँ को फ़ोन मिलो. ये लोग खुद तुमको वह छोड़के आएंगे.

पब की बात सुन कर अंकिता को खुद पैर गुस्सा आता है. की उसने ये इतनी देर से क्यों नहीं किया. वो तुरंत अपनी माँ को फ़ोन मिलती है. अभी सभी कमांडर ने उनको घेर रखा था. वो इन दोनों की एक –एक हरकत को देख रहे थे. कई रिंग के बाद भी फ़ोन नहीं उड़ता और कट जाता है. तो अंकिता रोने लगती है

अंकिता – (रट हुए) देखो न माँ फ़ोन नहीं उदा रही. अब मैं क्या करू. मुझको माँ से मिलना hi है. आप कुछ तो करो न..

पब – रुको में बात करता हु.. पैर तुम दुबारा तरय करो. हो सकता है की वो सो गई हो..

पब फिर कमेंडेर से बात करने लगता है

पब – सर हमारा लता जी से मिलना बहुत जरुरी है. प्लीज आप खुद एक बार उन से पूछ आइये की अंकिता आपसे मिलना चाहती है.

स.1- सर अभी मंदम सो रही है. और हम लोगो को ोडेर है की उनको डिस्टर्ब न किया जाये. प्लीज तरय तो अंडरस्टैंड.. आप सुबह आ जाना तब में मैडम से बात कर सकता हु..

अभी पब उससे कुछ और बोलता तभी अंकिता की आवाज आयी (रुवासी आवाज में)– मा कहा हो आप. मैं होटल के बहार कड़ी हु..

लता ने फ़ोन उदा लिया था – बीटा मैं रूम में hi हु. तुम इस वक्त … मन किया था न… चल रुक एक मं में आती हु.. तू रो मत में अभी आयी

लता से बात कर के अंकिता को कुछ सन्ति मिली थी. अब वो चुप कड़ी थी और अपने आप को संभल रही थी. जैसे अपनी माँ से खुद को मिलने के लिए तैयार कर रही हो. पब उसकी कंडे पे हाथ रख कर उसको हिम्मत देने की कोसिस कर रहा था. कुछ hi पालो में लत भगति हुई आती है. लता ने नाईट सूट पहना था. बाल बिखरे हुए थे. सो उड़ कर सीडी भाग आयी थी. ये कमांडर पिछले कई सालो से लता के साथ थे. पैर कभी भी इन्होने लता को इन हालातो में नहीं देखा था. लता भागते हुए आ कर अंकिता के सामने रुक जाती है. अंकिता भी लता को देखते hi उससे चिपक जाती है. लता की सासे छड़ी हुई थी. और आखों में आशु थे. अंकिता का भी पूरा फेस आशुओ से बारे पड़ा था. पब को भी माँ बेटी के मिलान को देख कर अपनी माँ की याद आ रही थी. और उसकी आखों में भी आशु आगये थे. कुछ देर तक तीनो रट रहे. तब पब को होश आया.

पब – अंकिता तुम क्या अपनी माँ को रुलाने के लिए hi इतनी दूर आयी थी??

पब की बात से दोनों दुनिया में लोट आयी थी. नहीं तो ऐसा लग रहा था की वो किसी और hi दुनिया में जा चुकी है. जहा उन माँ बेटी के अलावा कोई नहीं था. अंकिता जब पब की आखों में आशु देखती है तो बोली

अंकिता – आप क्यों रो रहे है. मिल तो मैं रही हु माँ से पहली बार. और रो आप रहे है.

पब – अरे ये तो तुमको देख कर आ गए.. आना तुम मिल तो रही हो. और तुम्हारे पास माँ है. ये बहुत बड़ी बात है. मैं तो कभी मिल भी नहीं सकता … (और उसकी आखों में फिर से 2 आशु आ जाते है जिनको वो साफ़ कर देता है)

लता – दामाद जी, अब क्या अपनी सास से नहीं मिलोगे… मैं भी तो आपकी माँ hi तो हु… (और अपनी बाहें फैला देती है)

पब लता की बात से असा लगता है. की उसकी माँ उसको बुला रही है. तो वो भाग कर लता के गले लग जाता है अब पब रो रहा था. और लता उसके बालो में हाथ फेर रही थी ममता से. पब को रोटा देख अंकिता बोली

अंकिता – क्यों जी माँ को अब कोण रुला रहा है. और कोण रो रहा है.

पब अंकिता की बात से जैसे नीड से जगता है. और लता से अलग हो जाता है.

लता – अब क्या यहाँ पे hi खड़े रहना है. चलो अंदर चलते है.

फिर तीनो अंदर चल देते है तो लता एक आदमी को 3 कॉफ़ी आने को बोल देती है. और तीनो लता के रूम में थे. उस होटल का सायद सबसे शानदार रूम था वो. सबके फेस ख़राब हो चुके थे. अशुओ से तो तीनो फ्रेश हो कर बेथ जाते है. और बातो को डोर सुरु हो जाता है. अब माँ बेटी पहले बार मिली थी तो बातो का तो अम्बार लगा था. पब तो बहुत hi काम बोल रहा था. 2 -2 कॉफ़ी ख़तम हो चुकी थी. सुबह होने को थी. पैर माँ बेटी को होश नहीं था. पब भी उनकी बातो में खोया रहा. उसको लता में अपनी माँ की परछाई नजर आ रही थी. पैर जब नीड पब पे हावी होने लगी तो लता ने उसको सोने को बोलै. तो वो भी बीएड लेट जाता है. और लेटते hi उसको नीड आ जाती है. पैर वो माँ बेटी तो लगी रहती है. लगभग सुबह के 6 बजे वो दोनों भी सो जाती है. सोने का मन तो नहीं था. पैर सोना पड़ा नीड ने उन दोनों को गैर लिया था. सुबह 10 बजे पहले लता की आखँ खुलती है नीड तो पूरी नहीं हुयी थी फिर भी टाइम देख कर वो उड़ जाती है और बाथ ले कर बहार आती है और कुछ फ़ोन कॉल्स में लग जाती है. तब तक पब भी उड़ चुक्का था और वो भी टाइम देख कर बाथरूम में घुस जाता है. पब को उदा देख कर लता दोनों के लिए कुछ आर्डर कर देती है. जब पब बहार आता है तब तक ब्रेकफास्ट आ चुक्का था. दोनों मिल कर ब्रेकफास्ट करने लगते है.
 
अपडेट 64 (इम्पोर्टेन्ट अपडेट)

सुबह 10 बजे पहले लता की आखँ खुलती है नीड तो पूरी नहीं हुयी थी फिर भी टाइम देख कर वो उड़ जाती है और बाथ ले कर बहार आती है और कुछ फ़ोन कॉल्स में लग जाती है. तब तक पब भी उड़ चुक्का था और वो भी टाइम देख कर बाथरूम में घुस जाता है. पब को उदा देख कर लता दोनों के लिए कुछ आर्डर कर देती है. जब पब बहार आता है तब तक ब्रेकफास्ट आ चुक्का था. दोनों मिल कर ब्रेकफास्ट करने लगते है.

लता – सॉरी बीटा हमारी वजह से तुमको भी परेशां होना पड़ा.

पब – आप ये किसी बात कहा रही है माँ. क्या मैं आपका बीटा नहीं.. और अपनी बीबी को उसकी माँ से मिवाने ले कर जाना तो हर किसी को करना पड़ता है.

लता – हाँ ये तो है. और तुम मेरे bête hi हो.. मुझको गुरु जी (मणि) ने तुम्हारी सधी के बारे में सब बता दिया. की वो क्यों और किन हालातो में हुयी है. और मैं खुस भी हु तुम दोनों के कारनामे से. पैर अब तुम अपने वेयर में भी कुछ बताओ.. पहले क्या करते थे. तुम्हारे माँ बाप कोण है.

पब – थैंक ु माँ हम दोनों को समझने के लिए. मैं पहले **** कम्पनी में अस ा मैनेजर जॉब करता था. वो आपकी hi कम्पनी है. पैर मेरी माँ और बहन के मर जाने के बाद जब में अकेला रहा गया तो फिर मणि जी की तहश में ीदार उदार भटकने लगा.

लता – हम्म गुरूजी ने वो सब तो मुझको बताया. और जब मेने तुम्हारे माँ बाप के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा की ये बात तुमको पंकज hi बताएगा. गुरु जी की कुछ बाते कभी समाज में नहीं आती. वो तुम्हारे बारे में सब जानते है फिर भी कुछ नहीं बताया.

पब – हाँ माँ, मुझको भी आज तक कुछ नहीं बताया. जब भी पूछता हु. तो कहते है की समय आने पैर बतायेगे, या कभी कहते है की तुम अभी कमजोर हो सुन नहीं पाओगे…

लता – हाँ बीटा गुरु जी की बाते समाज में नहीं आती पैर एक बात याद रखना वो कभी भी कुछ गलत नहीं करते. उसकी हर कदम के पीछे सिर्फ मानव हिट होता है. अब तुम बोलो अपने बारे में कियोकि जब से गुरु जी ने बोलै है की तुम hi बताओगे तब से मुझको ऐसा लग रहा है की कुछ बात तो जरूर है जो वो खुद बताना नहीं चाहते थे.

पब – माँ ऐसा कुछ भी नहीं है जो छुपाने लायक हो. मेरी माँ का नाम अल्पना था और पिताजी का नाम प्रतिक था. हम सूरज कुंड गाओं में रहते थे. वह पे पिताजी के पास 2 एकड़ जमीं थी. तो उसी की आमंदनी से हमारा घर चलता था. सुरु में तोमैं गाओं के स्कूल में hi पड़ा. जब में 10 साल का था तब पिताजी किसी काम से दिल्ली गए थे. तो एक ट्रैक वाले ने उनको टक्कर मर दी गलती से. पैर वो बच न सके. और जब वो ट्रैक वाला उनको हॉस्पिटल लेकर गया. वह उनको कुछ देर को होश आया था. जिससे उन्होंने माँ को बता दिया की वो इस हॉस्पिटल में है. हम सब दिल्ली गए और वह पर hi उनका अंतिम संस्कार करके गाओं आ गए. उसके बाद पेशो की बहुत दिक्कत होने लगी. तो मैं गाओं के स्कूल में पड़ता और माँ के साथ खेतो में काम भी करता. मेरी बहन ने भी बहुत म्हणत की थी हमारे साथ. और इसी तरह मेरा 12तह गाओं से hi हो गया. तो फिर मेने आगे न पड़ने का सोचा कियोकि पेशो का प्रॉब्लम था. और माँ के साथ काम में लग गया. अभी कुछ hi दिन बाईट थे की माँ ने मुझको एक फॉर्म दिया इंजीनियरिंग का. और बोलै की तुझको हमारे अच्छे दिन लेन है तो इंजीनियर बन और अच्छी नौकरी कर के हमारे दिन बदल दे. मुझको भी माँ की बात सही लगी. पैर में ये आज तक नहीं समाज पाया की माँ ने इंजीनियरिंग के लिए वो पैसे कहा से लाये थे. माँ ने बस ये बताया की ये पैसे उन्होंने किसी से उदार लिए है. जो की पड़े पूरी होने के बाद चुकाने थे. मेने भी इंजीनियरिंग में कुछ कर गुजरने की थान ली थी. 1सत ईयर के एग्जाम दे कर जब में घर आया. तब में 19 साल का था. तब मुझको माँ और गुड़िया (बहन) के सवभाव और सेहत में बहुत फर्क लगा. मैं समाज गया की ये दोनों मेरे लिए दिन रात एक करके पैसा कमा रही है. और मुझको इंजीनियर बनाना चाहती है. तो मेने भी सोच की बस एक बार मैं इंजीनियर बन जाऊ. फिर इनको हर वो ख़ुशी दुगा. जो इनको नहीं मिली है. मुझको घर पे रहते हुए कई दिन हो चुके थे. और 5-6 दिन बाद मेरा सोल्लगे ओपन हो रहा था तो 4 दिन बाद मुझको वापिस दिल्ली जाना था. पैर उस दिन मणि जी घर पे आये. जब वो घर आये थे तब में अपने दोस्तों के पास गया हुआ था. और जब लोटा तो उनको देखा. वो एक दम से बोले की बीटा तैयारी करो तुमको मेरे साथ जाना है अब से तुम मेरे साथ hi रहोगे. मैं उनकी बात सुन कर बोखला गया. मेने माँ की तरफ देखा तो. माँ ने भी हां में सर हिला दिया. पैर मेने हिम्मत नहीं हरी मेने उनको साफ़ मन कर दिया की मैं उनके साथ नहीं जाउगा. मैं इंजीनियर बन कर अपनी माँ का सपना पूरा करुगा. मेरे फैसले से माँ और दीदी दोनों दुखी थे. पैर मैं समाज नहीं पाया क्यों. जबकि मैं उनके लिए कुछ करना चाहता था. यदि मैं मणि जी के साथ चला जाता तो वो मुझको भी अपना जैसा बनाते फिर मैं पैसा कैसे कमा सकता था. इसलिए मेने साफ़ मन कर दिया. तो मणि जी मुझको ये बोल कर चले गए – “जब मरने के करीब पहुंच जाओ. और लगे की तुम्हारे पास अब जीने की कोई वजह नहीं है तो मेरे पास आ जाना”

मैं तब मणि जी की इन बातो को समाज hi नहीं पाया. पैर जब माँ के मरने के बाद मैं उनसे मिलने गया तब पता चला की यदि मैं उनके साथ चला जाता तो मेरी माँ और मेरी पायरी दीदी आज जिन्दा होती. (पब आप बीती सुनते हुए रोये जार अहा था. लता भी बड़े गुर से ये सब सुन रही थी. और अंकिता भी, जब पब ने लता से बात करना स्टार्ट hi किया था तब hi अंकिता की नीड खुल गाइट hi. पैर वो लेती रही और फिर लता और पब की बातो को सुनने में वो उडी hi नहीं)

फिर मैं इंजीनियरिंग करने चला गया. और मेने एक part टाइम जॉब भी सुरु कर दी. उसके बाद मैं केवल इयरली फी के पैसे hi माँ से लेता था. वो भी उन्होंने mani-order से बजे थे. उसके बाद में घर hi नहीं गया. बस फ़ोन पे hi बाटे हो जाती थी. इंजीनियरिंग पूरी होने के बाद मैं जॉब करने लगा और पैसे कमाने लगा. और अभी 6 मंथ पहले जब मुझको लगा की मेने इतना कमा लिया है. की मैं अपने घर और माँ बहन की जरूरते पूरी कर सकता हु. तो मेने घर जाने की सोची. पैर तभी मेरी जिंदगी में वो हादसा हुआ की एक बार में hi सब ख़तम हो गया.

लता – ऐसा क्या हुआ था.

पब ने फिर बताने लगा. वो तो जैसे वह था hi नहीं. वो तो फिर से अपनी पूरी जिंदगी को रे – मंद कर रहा था. उसका मंद उसको उसके अतीत में लेग्या था. दिल फुट –फुट कर रो रहा था. आखों रोने की बजह से एक डैम लाल हो चुकी थी. पैर जुबान रुक hi नहीं रही थी. पता नहीं लता को देख कर उसे केसा क्या लगा की वो अपने सच को बताता चला गया. जो उसने अपनी बीबियो को भी नहीं बताया था. सायद उसको लता में अपनी माँ को देख कर वो अपने गुन्हा अपनी माँ के सामने काबुल करना चाहता था. या वो इसको मणि जी का आदेश मन कर लता को सब बता देना चाहता था. ये तो खुद उसको भी नहीं पता था. की वो क्यों लता को अपनी पुराणी जिंदगी का वो सच बता रहा है जो उसने अपनी नयी में कही दफ़न कर चुक्का था. पैर कहते है न बीटा हुआ कल फिर से सामने आता hi है. उसमे किये कर्म hi फ्यूचर का प्रतिबिंब होते है.

पब की स्टोरी – मैं उस टाइम दिल्ली में एक रूम रेंट पे ले कर रहता था. माकन मालिक की 3 बेटी और 1 बीटा था. उसकी एक लड़की को देख कर में इतना बहक गया की मैं उसके साथ सेक्स कर बैठा. सेक्स करके हम दोनों hi खुस थे. मुझको नेक्स्ट वीक से 15 दिन की छुट्टी भी मिल गाइट hi. तो मैं अपने घर जाने के लिए भी बहुत खुस था. अभी सेक्स किये हुए हमको 3 दिन hi हुए थे की वो लड़की मेरे पास आयी और उसने हमारी सेक्स करते हुए की पिछ दिखाई और बोली की किसी ने हमारी ये फोटो ली है और अब वो उस लड़की को ब्लैक मेल कर रहा है. की यदि उसको 25 लाख रस नहीं मिले तो वो इन फोटो को नेट पे दाल देगा. फिर वो लड़की बोली की यदि ऐसा हुआ तो मैं अपनी जान दे दूगी. फिर वो बहुत रोई मुझको लगा की मेरी वजह से hi ये सब हुआ है इसलिए मेने जो अभी तक कमाया था वो कुल मिला कर 26.5 लाख hi था. तो मेने उसमे से उसे 25 लाख दे दिए और सोचा की मैं अपनी माँ के लिए फिर कमाऊंगा. वैसे भी किसी की जिंदगी बचाना मुझको जरुरी लगा. मेने जब ये बात अपनी माँ को फ़ोन पे बताई तो वो उदास हो गई पैर कहा कुछ नहीं. 2 दिन बाद मेरे फ़ोन पे एक गाओं के पडोशी का फ़ोन आया की उसकी माँ और बहन ने खुद को जला कर आत्मा हत्या कर ली है. एक लेटर घर के बहार फेक कर पुरे घर में आग लगा ली घर में कुछ नहीं बचा. ये सुन कर मेरे पैरो टेल जमीं निकल गई मैं तुर्रंत hi घर के लिए निकल पारा और जब घर पंहुचा तो वह पे आग और कुछ हड्डियों के आलावा कुछ भी नहीं था. मेरी पूरी दुनिया लूट चुकी थी. सब कुछ ख़तम हो चुक्का था. मेने फिर उस आदमी से वो लेटर लिया तो उसमे लिखा था – बीटा कर्जदारों ने हमको जीने नहीं दे रहे थे. हमको आशा थी किट ु सबका कर्ज चुक्का कर हम दोनों को एक खुशाल जिंदगी देगा. पैर अब सब ख़त्म हो चुक्का है. अब मरने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं है. कोसिस करना हमको भूलने की और अपनी एक नयी जिंदगी की सुरुवात करना. और हो सके तो एक बार मणि जी से भी मिल लेना. – तुम्हारी माँ …….

इसके आगे पब कुछ न बोल सका. वो बुरी तरह रोने लगता है. अभी उसकी ाँहों के सामने वो सब चल रहा था. जला हुआ घर, घर में पड़े 2 हड्डियों का ढांचा. और गाओं के लोगो के वो तने, जो उसको किसी तीर की तरह लग रहे थे. गाओं का हर आदमी उसको उसकी माँ और बड़ी बहन का कातिल बोल रहा था. कहने वहॉ ने ये भी कहा की ऐसे bête के होने से तो ये न hi होता तो अच्छा था. पब उन दुःख को जेल नहीं पाया और बेहोश हो गया. उसको बेहोश होते hi लता की हालत खराब हो गई. अंकिता जो अभी तक चुप लेती थी वो एक दम से उडी और पब को बाँहों में ले कर उसे पुकारने लगी.
 
अपडेट 65

इसके आगे पब कुछ न बोल सका. वो बुरी तरह रोने लगता है. अभी उसकी ाँहों के सामने वो सब चल रहा था. जला हुआ घर, घर में पड़े 2 हड्डियों का ढांचा. और गाओं के लोगो के वो तने, जो उसको किसी तीर की तरह लग रहे थे. गाओं का हर आदमी उसको उसकी माँ और बड़ी बहन का कातिल बोल रहा था. कहने वहॉ ने ये भी कहा की ऐसे bête के होने से तो ये न hi होता तो अच्छा था. पब उन दुःख को जेल नहीं पाया और बेहोश हो गया. उसको बेहोश होते hi लता की हालत खराब हो गई. अंकिता जो अभी तक चुप लेती थी वो एक दम से उडी और पब को बाँहों में ले कर उसे पुकारने लगी.

अंकिता – ऊधो क्या हो गया तुमको, ऊधो न… (और वो रोने लगी. वो ये भी भूल गई की वो एक डॉ. है. उसको हिलाकर जगाने लगी.)

लता – बेटी क्या कर रही हो. उसे चक करो. देखो क्या हुआ है. तुम डॉ. हो कर किसी हरकत कर रही हो.

अंकिता को लता की बात सुन कर होश आया और वो पब को चक करने लगी. फिर अपनी माँ से एक पेन और पेपर ले कर उसपे कुछ दवा लिख कर दी. लता ने तुर्रंत hi वो पेपर एक आदमी को दिया और जल्दी से दवा लेन को बोलै.

तभी अंकिता का फ़ोन बजने लगा. उसने देखा तो फ़ोन गुरु का था. ये देख कर वो और भरा गई. पैर फ़ोन उड़ना भी जरुरी था.

फ़ोन पे –

अंकिता – जी दीदी??

गुरु – कहा हो तुम दोनों? सब ठीक है न.

(हुआ ये था की गुरु को पारी ने बता दिया था की पब और अंकिता उसकी माँ से मिलने गए है. पैर गुरु का दिल गहरा रहा था. उसको फील हो रहा था की पब किसी परेशानी में है. पैर फिर भी वो चुप रही पैर ीदार पब बेहोश हुआ. उदार गुरु का मन एक दम बीचेन हो गया. अब इन दोनों के बिच का प्यार था या गुरु की सक्तियो का परिदम ये तो बस भगवन hi जनता था. पैर गुरु को जब कुछ भी ठीक नहीं लगा तो उसने अंकिता को फ़ोन मिला दिया)

अंकिता (सिसकते हुए) – दीदी हम लोग माँ से मिलने आये है. होटल ालर में है…

गुरु – तुम रो क्यों रही हो सब ठीक तो है न वह पैर?

अंकिता – नहीं दीदी ये बेहोश हॉग ए है. मेने दवा मांगा ली है कुछ hi देर में ठीक हो जायेगे.

अंकिता की बात सुन कर तो जैसे गुरु पे कोई बूम गिरा हो. वो समाज hi नहीं पाई की ये हो कैसे सकता है. जिस इंसान के पास इतनी पावर हो उसका बेहोश होना कोई छोटी बात नहीं है.

गुरु – पर ये हुआ कैसे?? उनका बेहोश होना बहुत बड़ी बात है. (गुरु ने ये बात गुस्से और दुःख के साथ तेज़ आवाज में बोली थी. जो और लोगो ने भी सुन ली. सब लोग गबरा गए.)

गुरु ने ये बोलै और वो बहार की और जाने लगी. बहार hi सैंडी कड़ी थी वो अंकिता के साथ क्लिनिक पे जाने को आयी थी. गुरु ने तुर्रंत hi सैंडी को कार चालू करने को बोलै. और वो कार में बेथ गयी. फ़ोन चालू था. पैर अंकिता कुछ बोल नहीं रही थी. वो बड़ी हिम्मत कर के बोलती है

अंकिता – दीदी ये माँ से बात कर रहे थे फिर माँ ने इनके वेयर में पूछा. और फिर अंकिता साडी बात बताती चली गई.

गुरु की कार भी रोड पे भाग रही थी. वो सब बाटे सुन कर बोली की वो कुछ hi देर मैं पहुंच जाएगी. रस्ते के जंगल से गुरु ने कुछ jadi-buti भी ले ली थी. ीदार अंकिता दवा का वेट कर रही थी. फ़ोन कखे 2 मं hi हुए थे की दवा भी आ गयी.

अंकिता ने तुर्रंत एक इंजेक्शन तैयार करके पब को लगाया. पैर वो कामयाब नाह ो सकीय. पब के हाथ ने इंजेक्शन घुस hi नहीं रहा था. तब अंकिता को पब की पावर की याद आयी तो उसने कुछ गोलिया उसके मुँह में दाल दी.

ीदार हवेली में सब लोग परेशां थे. की क्या हो गया है. कामिनी लगता गुरु को फ़ोन लगा रही थी. पैर फ़ोन बिजी जा रहा था. कुछ देर बाद जब फ़ोन लगा तो गुरु ने उसको बोलै की गवरने की जरुरत नहीं है. रात को ये लोग सोये नहीं थे. तो पब बेहोश हो गया है. अभी में वह पहुंच कर फिर बताती हु की पब केसा है. ये सुन कर सबको रहत तो मिली पैर मन किसी का संत नहीं था.

गुरु जब वह पहुंची तो सिक्योरिटी देख कर उसने तुर्रंत अंकिता को फ़ोन लगया और होटल के अंदर बढ़ने लगी. गुरु को रोकने से पहले hi उनके पास लता का फ़ोन आ गया की गुरु को जल्दी अंदर ले कर औ.

गुरु पब के पास बैठी थी. वो अभी भी बेहोश था. उसने अपनी जड़ी बूटियों की दवा भी पब को दे दी थी. अभी दवा दिए 5 मं hi हुए थे की पब उड़ गया. और गुरु को वह देख कर चौक गया.

पब – गुरु तुम यहाँ कैसे??

गुरु – वो छोड़ो ये बताओ की तुम कैसे हो अभी?

पब – यार मुझको क्या हुआ है में तो एक दम ठीक हु.

गुरु – हाँ पता है. कितने ठीक हो. जरा से रोने से hi बेहोश हॉग ए और सबको डरा दिया. वैसे तो बड़े बहदुर बनते हो. अब क्या हुआ…

पब गुरु की बात से समाज गया की उसके बेहोश होने से गुरु पे क्या बीती है. वो उसको तुरंत गले लगा लेता है. गुरु को भी उसकी बाँहों में सुखों मिलता है.

पब – जब मेरी गुरु मेरे साथ है तो मुझको क्या हो सकता है..

अंकिता और लता की आखों में भी आशु थे. पब उड़ कर उन दोनों को भी संत करता है फिर गुरु हवेली में फ़ोन करके सबको बता देती है की अब पब एक दम ठीक है.

4रो एक साथ bêthe हुए थे और कॉफ़ी पे रहे थे.

लता – आप गुरुपित है न गुरूजी की मैं प्यूपिल (शिष्य)

गुरु – जी हाँ. और आप लता रतन सिंह है न.

लता गुरु की बात सुन कर कड़ी होती है. और गुरु के पेअर छू लेती है. तो गुरु उसको गले लगा लेती है.

गुरु – आप अंकिता की माँ है. और अंकिता मेरी छोटी बहन है. फिर पंकज ने भी आपको माँ बोलै है. तो आप मेरे पेअर छू कर मुझको पापी न बनाये…

लता – मैं आपके इस रूप के नहीं बल्कि एक सच्चे भक्त के पेअर छू रही हु. Ok आगे से नहीं करुँगी…

गुरु – पब अब तुम बताओ की केसा लग रहा है तुमको??

पब – मुझको तो ऐसा लग रहा है ऐसे महीनो से मेरे दिल में दबा कोई दर्द निकल गया हो और अब दिल में बस एक सुकून है. दुःख तो अपनी माँ और बहन के लिए हमेशा रहेगा. पैर जो दर्द उस टाइम मेने दिल में रहा गया था. आज वो मेरे आशुओ के साथ बहा गया.

गुरु – हम्म ये तो अच्छी बात है.

लता – क्या आप बता सकती है की गुरु जी ने मुझको पब से ये सब पूछने को क्यों बोलै था. और क्यों कहा की तुमको मेरे बताने से ज्यादा पब से सुन कर hi सच जानना होगा. जो तुम्हारे पास्ट और फ्यूचर को चेंज कर देगा…

गुरु – पहले तो लता जी आप मुझको गुरुपित या गुरु कहा सकती है. और रही मणि जी की बात तो वो तो वो hi जाने. पैर वो कुछ भी यु hi नहीं कहते है. पब से पूछने को क्यों बोलै वो तो मेरे समाज आ रहा है. पैर आपका फ्यूचर चेंज होना समाज नहीं आता.

लता – क्यों बोलै था पूछने के लिए??

गुरु – पब के दिल में छुपे इस दर्द को ख़तम करना चाहते होंगे. गुरु जी ने इसको एक बड़े टारगेट के लिए चुना है. तो इसकी सभी कमजोरियों को ख़तम करना उनके लिए जरुरी है.

लता – और मेरे से इस सब का क्या सम्बंद है??

गुरु – ये तो मेरे भी समाज नहीं आ रहा. बस मणि जी ने अंकिता की सधी से पहले मुझको बताया था की लता और पब का अतीत एक है. तो जब लता को पब की सचाई पता चलेगी तब वो बहुत खुस होगी की उसकी बेटी की सधी पब से हुयी है.

लता गुरु की बात को सोचने लगती है पब और अंकिता तो बस उन दोनों की बाटे सुन रहे थे की कितना कुछ है जो उनको पता नहीं है. मणि जी के कहने पर लता का ये सब पूछना, मणि जी का गुरु को ये सब बताना. और पता नहीं क्या -2 छुपा है.
 
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लता गुरु की बात को सोचने लगती है पब और अंकिता तो बस उन दोनों की बाटे सुन रहे थे की कितना कुछ है जो उनको पता नहीं है. मणि जी के कहने पर लता का ये सब पूछना, मणि जी का गुरु को ये सब बताना. और पता नहीं क्या -2 छुपा है.

लता सोचती है - पब की उम्र hi क्या है. तो उसका अतीत और लता का अतीत एक कैसे हो सकता है. मैं तो इसकी माँ की उम्र की हु. अरे कही मैं किसके माँ या बाप को तो नहीं जानती. हां पब के माँ पापा गुरु जी को भी जानते थे.

लता – पब तुमने अपने माँ बाप का क्या नाम बताया?

पब – माँ – मिस अल्पना और पापा – मर. प्रतिक

लता – पूरा नाम बताना

पब – माँ – मिस अल्पना शर्मा और पापा – मर. प्रकिक बैठत..

लता फिर कुछ याद करने की कोशिश करती है. एक दम चौक जाती है और बोली

लता – तुम्हारी बहन – गुड़िया या सोनल है न एहि तुम्हारी बहन का नाम

अब पब चुकता है. कियोकि उसकी बहन का नाम सोनल भी है ये कुछ लोग या उसके टीचर hi जानते थे.

पब – आपको कैसे पता ???

लता – ये बताओ तुम्हारी माँ और पापा पहले ***** कंपनी में काम करते थे??

पब – हाँ पैर मेरे जनम से पहले करते थे. मुझको ज्यादा पता नहीं है. मेने तो एक बार एक लेटर देखा था माँ के संदूक में. जिस पैर लिख था की माँ को सर. अकाउंटेंट बनाया जा रहा है और वो बहुत पुराण था. मेने माँ से पूछा भी तो वो ये कहा कर ताल गई की बीटा ये सब पुराणी बाटे है. अब तो हम बस मजदुर है और हमको वो hi करना आता है..

लता – ोुह्ह्ह्ह गॉड… ोोू माय गॉड… तुम मेरी अल्पना के bête हो. ोूहः मुझको आज पता मिला मेरी अल्पना का.. (पैर वो ये कहते -2 रुक गई. और जोर -2 से रोने लगी)

अब लता कुछ नहीं बोल रही थी वो बस ाखू बहा रही थी. पैर उसके मान में बहुत कुछ चल रहा था. वो पब की पूरी स्टोरी को दुबारे से सोच रही थी. और रोटी जा रही थी. जब उसने पूरी स्टोरी को मंद में फिर से सोच लिया तो एक दम से उडी

और पब के गाल पे एक पड़ा – छहटाअक्क…. फिर दूसरा - छहत्तताक .. और फिर तो पता नहीं कितने और पड़े उसके गाल पे… वो तो गुरु ने लता को पकड़ लिया नहीं तो वो उसको मरती hi जाती ….

जब लता ने खुद को सभाला तो वो फिर से पब की और बड़ी पैर गुरु ने उसको फिर से पकड़ लिया. पब तो बस खड़ा था. उसको कुछ भी नहीं पता था. की लता उसको क्यों मार रही है. उसकी एक सदमे जैसी हालत थी. लता के तप्पड़ से उसके ससिर पे क्या होना था. पैर वो तो दिल पे लग रहे थे. उसको कुछ हॉर्स से माँ मान रहा था. वो उसको मरे जा रही थी. उसने फिर अपनी माँ का दिल दुख दिया था. फिर एक बार माँ को खो देगा उसके दिमाग में ये hi बात उड़ रही थी. गुरु की पकड़ से hi लता ने तेज़ आवाज में कहा – तू या तो मेरी अल्पना का बीटा नहीं है. या तू झूट बोल रहा है, मेरी अल्पना इतनी कमजोर नहीं थी की वो खुद को मर ले. जरूर तेने hi मारा है मेरी अल्पना को.. मैं छोडूगी नहीं तुझको…. छोड़ो मुझे … ये मेरी अल्पना का कातिल है… मुझको इसे मरना है…

पब को लता की ये बात बरदास न हुई और वो फिर बेहोश हो gaya.uske बेहोश होने पैर भी लता उसको मरने को hi आ रही थी. गुरु ने उसको मुश्किल से रोका था. जब वो नहीं रुक रही थी तो गुरु ने लता के गाल पे एक तापड मार दिया. इस तप्पड़ ने लता को होश में लाया. तो वो रोने लगी. और पब को बुरा भला कहने लगी. गुरु ने लता पे दयँ न दे कर पब को देख तो उसकी कंडीशन फिर से जैसी hi हो गाइट hi. गुरु ने फिर उसको दवा दे दी. पैर उसको पता था की इस बार दवा का असर होने में टाइम लगेगा. तो उसने पब को एक बीएड पे लेता दिया और वो लता की और मुद गई. लता को भी तो सबलना था.

गुरु – सॉरी लता जी मेने आप कर हाथ उदय. पैर मेरे पास कोई और चारा नहीं था. पहले आपस अंत हो जाइये और मुझको बताइये की आप इसको क्यों मरना चाहती है.

लता – कैसे संत हो जाऊ में. मेरी बहन अल्पना और मेरी बेटी सोनल नहीं रहे. और तुम संत होने को कहा रही हो. ये माँ आज जिन्दा है तो सोनल की वजह से. और वो hi नहीं रही तो मैं क्या करू कैसे संत हु ??

अंकिता – माँ आप क्या कहा रही हो? आपकी एक और बेटी है? पैर सोनल तो इनकी बहन का नाम है न?? क्या अल्पना माँ आपकी बहन थी?

लता – मेरी बच्ची … क्या बताऊ तुझको.. सोनल अल्पना की hi बेटी थी.. मेरी तो बेटी तू है… पैर सोनल ने hi मुझको माँ होने आ अहसास दिलाया था जब तुझको तेरे बाप ने मुझसे चीन लिया तो सोनल को hi अपनी छाती से लगा कर hi मुझको ये दुःख सहने की सकती मिली थी. आज जब तू मिली है तो सोनल के मरने की खबर साथ लायी है. इस माँ की दो बेतिया थी. अब बस एक hi बची है. वो भी पहली के कातिल की पत्नी है. क्या करू मैं… क्या करू??

गुरु – ये आप क्या कहा रही है. पब ने अपनी बहन को मारा है ये तो हो hi नहीं सकता. मेने देखा है इसको अपनी माँ और बहन की यादो में तड़पते हुए.. आप किस आदर पे कहा रही है की पब ने मारा है..

लता – फिर इसने झूटी कहानी क्यों सुनाई मुझको?? यदि इसने ऐसा नहीं किया तो झूट बोलने की क्या जरुरत थी..

अंकिता – नहीं माँ इन्होने कुछ भी झूट नहीं बोलै है. इन्होने जॉब hi बोलै वो दिल की गहराइयों से बोलै है. मैं एक डॉ. हु. और मेरा काम भी यही है. इनको तो मैं अच्छी तरह जानती हु. आप जैसा सोच रही है ये ऐसा करने की सोच भी नहीं सकते माँ.. आप पूरी बात बताइये की आपको क्या झूट लगा..
 
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अंकिता – नहीं माँ इन्होने कुछ भी झूट नहीं बोलै है. इन्होने जॉब hi बोलै वो दिल की गहराइयों से बोलै है. मैं एक डॉ. हु. और मेरा काम भी यही है. इनको तो मैं अच्छी तरह जानती हु. आप जैसा सोच रही है ये ऐसा करने की सोच भी नहीं सकते माँ.. आप पूरी बात बताइये की आपको क्या झूट लगा..

लता –देखो मैं तुमको सुरु से बताती हु

लता की स्टोरी – मैं जब 20 साल की थी तो मेने अपना बबा कम्पलीट कर लिया था. और मैं एक जॉब देख रही थी. पैर मेरे पापा मुझको जॉब पर जाने नहीं देना चाहते थे. एक दिन मैं और पापा गुरु सत्यानंद जी के कहा गए हुए थे. उनके पास hi अंकिता की दादा सूर्य प्रताप सिंह जी भी थे. मुझको पता था की यदि गुरु जी ने मुझको जॉब करने की परमिशन दे दी तो पापा मुझको रोकेंगे नहीं. इसलिए मेने गुरु जी से परमिशन मागि. तब सूर्य प्रताप (सप) बोले की उन्होंने अपने bête के लिए एक नयी कंपनी अभी 6 मंथ पहले hi खोली है. तुम उसमे ज्वाइन कर लो. गुरु जी ने भी हाँ कहा दिया तो मेने वो कंपनी ज्वाइन कर ली. कंपनी का स्टार्ट था तो ज्यादा एम्प्लोयी भी नहीं थे. ये एक कन्स्ट्रुक्टर कंपनी थी. ऑफिस में केवल 4 स्टाफ था. मुझको और रतन जी को मिला कर. कुछ स्टाफ प्रोजेक्ट्स पे भी था. अभी सप ज्यादा आमिर लोगो में नहीं आते थे. हम 4रो की और प्रोजेक्ट स्टाफ की म्हणत से कंपनी ने अपने पेअर ज़माने सुरु कर दिए थे. फिर प्रोजेक्ट और ऑफिस की कोडिनाते करने के लिए एक नए इंजीनियर को रखा जिसका नाम प्रतिक (PB’s फादर) था. कुछ दिन बाद अल्पना को मेरे अंडर में रखा गया. इन दोनों की म्हणत से कंपनी अच्छी चलने लगी. हम चारो (लता, रतन, प्रतिक, अल्पना) की जोड़ी ने कमल कर रखा था. हम लोगो में खूब जमने लगी. हम लोग फ्रेंड्स की तरह रहने लगे. जब काम करते तो केवल काम hi करते. पैर काम के बाद हम सब बहुब मस्ती भी करते. ये मौज मस्ती और ये साथ कब प्यार में बदल गया. पता hi नहीं चला. मैं रतन से प्यार करने लगी और अल्पना प्रतिक से. मैं और अल्पना फ्रेंड्स काम और बहाने ज्यादा थी. मैं उसको अपनी छोटी बहन hi मानती थी. हमारा ये प्यार हमारे पेरेंट्स से न चुप सका और हमारी सधी हो गई. पहले मेरी और रतन जी की सधी हुयी. सधी की वजह से हम दोनों का दयँ काम पे काम हो गया. पैर इन दोनों ने सब संभल लिया. कुछ दिन बाद मेने फिर से ज्वाइन कर लिया. मेरी सधी के 6 मंथ बाद अल्पना और प्रतिक की भी सधी हो गई. उनकी सधी के 1 मंथ बाद hi मैं पेट से हो गई. और उसके 2 मंथ बाद अल्पना पेट से हो गई. हम 4रो hi खुश थे. जिंदगी बहुत hi अच्छी चल रही थी. पैर तब एक घटना हुयी. हुआ ये की गुरु सत्यानंद जी ने अपने चेले मणि जी को उस आश्रम का ुत्रादिकारी बना दिया. इससे गुरु जी का दूसरा चेला त्रिकाल इस से नाखुश हो गया और आश्रम छोड़ कर चला गया. त्रिकाल एक साथ उसका एक चेला भी था. उन दोनों ने रतन जी को अपनी बातो में पैसा लिया. और कंपनी की तैराकी के लिए उपाए बताने लगा. और हुआ भी ये hi. कंपनी का प्रॉफिट 2 मंथ बाद hi बढ़ने लगा. रतन जी त्रिकाल को मैंने लगे. अब वो त्रिकाल से hi सब पूछ कर करते.

अब रतन बदल चुके थे. वो म्हणत तो अभी भी करते थे. पैर उससे ज्यादा उनको त्रिकाल पे भरोष होने लगा. कुछ मंथ बाद मेरी जिंदगी में फिर खुशिया आयी. मेने एक नन्ही पारी को जनम दिया. अंकिता के जनम से सब बदल गया सच में ये एक पारी थी. रतन का त्रिकाल की तरफ झुकाव काम होने होगा. वो अंकिता को प् कर बहुत खुस थे. और कंपनी में तो चमत्कार होने लगे. हमको हर जगह से प्रॉफिट hi प्रॉफिट होने लगा. अल्पना ने लास्ट मंथ तक ऑफिस आना बंद नहीं किया था. उसका इस तरक्की में बहुत बड़ा हाथ था.

तभी गुरु बिच में बोलती है.

गुरु – लता जी माफ़ करना पैर में आपको बता दू. की जिसको आप चमत्कार कहा रही है वो आपकी बेटी की वजह से था. ये बहुत hi भाग्यशाली है अपने पिता के लिए. आपके पास जो भी है वो अंकिता के भाग्य से hi है.

लता – जानती हु में ये. गुरु जी (सत्यानंद जी) ने खुद बताया था. समादि (मूट) लेने से पहले…

स्टोरी छॉंट.. –अल्पना ने भी एक बेटी को जमन दिया. मेने hi उसका नाम रखा – सोनल.. दिन प्रति दिन कंपनी तरक्की करने लगी फिर बिच में कुछ नुक्सान भी हुआ. जो की किसी की भी सोच पे परे था. रतन जी को इस नुक्सान ने फिर से त्रिकाल की तरफ मोड़ दिया. और इस बार तो उनकी सोचने का दांग hi बदल गया. वो त्रिकाल को अपना भगवन मैंने लगे. त्रिकाल के कहने पैर hi उन्होंने मेरी बेटी को मुझसे चीन लिया. मैं ये सदमा बदास नहीं कर पाई. और बीमार रहने लगी. पैर इस सदमे से मुझको निकला अल्पना और सोनल ने. सोनल में मुझको अंकिता नजर आती. मैं सोनल को अपना ढूढ (मिल्क बी बूब्स) पिलाती. तब जा कर मुझको ये दुःख जलने की सकती मिली. यदि अल्पना और सोनल ने मुझको नहीं सभाला होता तो सयद में आज जिन्दा न होती.. रतन तो मुझसे दूर पहले hi रहने लगे थे. अब वो मुझसे उतना प्यार नहीं करते थे. उनको पैसा कमाने का एक जूनून सा सवार हो गया. कंपनी को ल्टड. बना दिया गया. कियोकि अल्पना और प्रतिक का इसमें बहुत बड़ा हाथ था तो पापाजी (सूरजप्रकाश) के कहने पैर रतन ने 1000-1000 शेयर दोनों के नाम कर दिए. और दोनों को 1 मंथ की सैलरी इनाम के रूप में दी. और एम्प्लोयी को भी शेयर बाटे गए थे. पैर अल्पना और प्रतिक को सबसे ज्यादा मिले थे. उस टाइम इनकी कोई ज्यादा कीमत नहीं थी. तो सबने उनको पेपर के रूप में यु hi रख लिया. जिंदगी फिर से पटरी पी ा रही थी मेने सोनल के सहारे जीना सीख लिया था. मेने ऑफिस जाना तो तब hi छोड़ दिया जब मेरी बेटी मुज से चीन गाइट hi. पैर अल्पना मुझसे रोज मिलने आती थी. पैर भगवन को ये ख़ुशी भी देखि नहीं गई. एक दिन अल्पना और प्रतिक दोनों गायब हॉग ए. किसी को नहीं पता चला की वो कहा गए. रतन ने भी बहुत धुंआ पैर कुछ पता नहीं चला. पैर एक बात है. जिस दिन से ये दोनों गायब हुए थे. उसी दिन से त्रिकाल को भी एक बीमारी ने घेर लिया. वो कोमा में चला गया था. क्यों और कैसे हुआ ये तो नहीं पता पैर मेरे लिए ये अच्छा हुआ. कियोकि फिर से रतन मुज पैर डायन देने लगे. दिन गुजरते गए. पैर अल्पना और प्रतिक की कोई खबर नहीं थी. दिन सालो में बदल गए. हम देश के सबसे आमिर आदमी बन गए. पैर अपने उन दोस्तों को नहीं खोज पाए. पैर मुझको एक उम्मीद थी की कभी अल्पना और प्रतिक को पेसो की जरुरत होगी और वो अपने शेयर बेचना चाहेंगे तो उनको कंपनी में आना hi होगा. कियोकि वो शेयर ऑनलाइन रजिस्टर्ड नहीं थे. तो उनको सेल्ल करने के लिए ऑफिस आना hi था. पैर आज सब कुछ ख़त्म हो गया. और लता रोने लगी.

अंकिता – माँ संत हो जाइये जो चले गए उनको बापिस तो नहीं ला सकते न…

लता – हाँ बेटी पैर उनके गुनहगारों को तो सजा दिलवाई जा सकती है न. और पंकज hi है इनका गुनहगार..

गुरु – लता जी आपको मणि जी पे कितना विस्वास है..

लता – खुद से भी जयादा..

गुरु – तो आप ये सोच भी कैसे सकती है की मणि जी उस लड़के का साथ देंगे जिसने अपनी माँ और बहन की हत्या की हो. और दस माँ उस लड़के को अपना बीटा कहेगी जो खुद अपनी माँ का कातिल हो.

लता गुरु की बात सुन कर कुछ न बोल सकीय. कियोकि गुरु की बातो में सच्चाई थी.
 
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गुरु – लता जी आपको मणि जी पे कितना विस्वास है..

लता – खुद से भी जयादा..

गुरु – तो आप ये सोच भी कैसे सकती है की मणि जी उस लड़के का साथ देंगे जिसने अपनी माँ और बहन की हत्या की हो. और दस माँ उस लड़के को अपना बीटा कहेगी जो खुद अपनी माँ का कातिल हो.

लता गुरु की बात सुन कर कुछ न बोल सकीय. कियोकि गुरु की बातो में सच्चाई थी.

गुरु – मेरे हिसाब से कुछ ऐसा है जो हम लोगो को नहीं पता. या तो वो मणि जी hi जानते है या खुद भवगान..

लता – क्या मतलब??

गुरु – देखिये… अल्पना जी और प्रतिक जी का यु गायब होना कोई छोटी बात नहीं है. और त्रिकाल को उस दिन hi कोमा में जाना तो बिलकुल भी नहीं. पहले चाहे ये दो अलग अलग घटनाये थी पैर आज मुझको इनमे कुछ कनेक्शन लग रहा है. और वो क्या है ये अभी समाज के बहार है..

और दूसरा पंकज के धोब और अल्पना जी के गायब होने के बिच में केवल 9 मंथ का अंतर है. और दूसरा दस माँ ने पब को अपना बीटा कहा है. तो इसके पीछे भी कोई राज जरूर है…

फिर प्रतिक जी की मूट का दिल्ली में होना. और उस टाइम भी अल्पना जी का वह न रुकना और न आपसे मिलना.. ये भी किस बात की और इसरा करते है की वो आप लोगो से मिलना hi नहीं चाहती थी.

पब ने इंजीनियर बनने की नहीं सोची थी. फिर भी उसको कर्ज ले कर इंजीनियर बनने के लिए उसी सिटी में भेजना जिससे अल्पना जी ने नाता ख़तम कर लिया था. ये भी एक राज है. कियोकि इंजीनियरिंग करने के लिए लगभग हर दूसरे सिटी में सोल्लगे है. तो अल्पना जी को उसे दिल्ली hi क्यों भेजा. और वॉक ों था जिसने उनको पैसा दिया. गाओं का तो नहीं था. नहीं तो उनके मरने के बाद पंकज से पहले अपने पैसे जरूर मांगता. अरे जिस आदमी ने अल्पना जी और सोनल को पेसो के लिए इतना परेशां किया हो की उनको हतमहत्या करनी पड़ी तो क्या वो उनके मरने के बाद पैसा मांगने नहीं आता.

फिर अल्पना जी को मरने के लिए पूरा घर hi जलने की क्या जरुरत थी. वो फांसी भी लगा सकती थी. हाथ किन अस भी काट सकती थी. इनकी मूट में भी कोई राज है.. ये सब राज या तो मणि जी जानते है या फिर दस माँ hi बता सकती है.

लता गुरु की बातो को बड़े गुर से सुन रही थी. और उसको इन बातो में सच्चाई नजर आ रही थी. पैर कुछ क्यू लता के मन में थे.

लता – पैर एक बात बताओ की ये सब ठीक भी है तो अल्पना और प्रतिक को पैसा कमाने के लिए खेतो में काम करने की क्या जरुरत थी. वो कही भी नौकरी कर सकते थे. या फिर ये सब एक सिरे से hi झूट है…

गुरु – क्या आपके पास अल्पना जी और प्रतिक जी की कोई फोटो है?

लता – हाँ है अभी कुछ दिन पहले hi मेने पुराणी अल्बम में से ली थी. उस दिन मुझको अल्पना की बहुत याद आ रही थी तो मेने फिर से उनको खोजने के लिए वो फोटो ली थी..

गुरु – तो एक काम कीजिये अपने किसी भरोशे के आदमी को सूरज कुंड गाओं में भेजिए और पता करवाइये की जो पब ने कहा है वो सच है या झूट….

लता को गुरु की बात ठीक लगी. इससे उसके मन में पैदा हुए सक भी दू रो जाना था की पब ने अपनी माँ और बहन की हत्या की है. तो लता ने तुर्रंत एक आदमी को फ़ोन कर के इस काम में लगाया. उसने कहा की वो 1 ऑवर में सब बताता है.

गुरु – वैसे तो आपका आदमी बताएगा hi पैर मेरे हिसाब से से सब उस दिन hi सुरु हुआ है जिस दिन अल्पना जी और प्रतिक जी गायब हुए थे. उनके साथ कुछ ऐसा हुआ होगा की उन्होंने अपने आप को छुपाने के लिए कुरजकुण्ड गाओं में रहने लगे. और कोई उन तक न पहुंच सके इन लिए अपने आप को अनपढ़ बता कर गाओं में मजदूरी करने लगे. अपने और रतन जी ने ये सोचा भी नहीं होगा की वो लोग मजदूरी करके भी गुजरा कर सकते है. इसलिए आप लोग आज तक उनको खोज नहीं पाए.

लता – हाँ आपकी ये बात एक दम सच है. हमने कभी उनको इस तरह खोजने की कोसिस hi नहीं की.

अंकिता – माँ मुझको भी वो पोथो सेंड करो न..

लता – तुम क्या करोगी उस फोटो का??

अंकिता – माँ वो मेरे सास और सुसार का फोटो है. में उसको फ्रेम करवा कर इनको दूगी. ये बहुत खुस होंगे..

अंकिता की बात सुन कर गुरु ने उसको सीने से लगा लिया. लता भी अपनी बेटी की बात से बहुत प्रभाबित हुई की उसे अपने पति की ख़ुशी की कितनी चिंता है. उसने तुर्रंत उस फोटो को अपने एक आदमी को (वो जो होटल के बहार लता की सेफ्टी के लिए है) बेजा और फ़ोन पे बता दिया की क्या करना है. और अंकिता को भी what’sup कर दिया.

फिर कुछ देर तीनो के बिच में ख़ामोशी चाय रही. लता को भी पब और गुरु की हर बात सच लग रही थी. उसने अभी सब के फेस के चाय उदासी और तकन को काम करने के लिए टिया मांगा ली. वो तीनो पब के उड़ने, उस आदमी के फ़ोन का और दूसरे आदमी का जो फोटो फ्रेम ला रहा था, का इंतजार करने लगी. तीनो के दिमाग में खाल बलि थी.

गुरु – लता जी क्या आप मेरी एक बात मानेगी?

लता – हाँ आप बोलिये क्या करना है..

गुरु – आप भी पब को कुछ नहीं बताएगी उसके माँ बाप के बारे में. वो आपमें अपनी माँ को देख रहे है. पैर अभी उनका दिल बहुत कमजोर है. वो ये सब बरदास नहीं कर पाएंगे. आप देख hi रही है की वो 2 बार बेहोश हो चुके है. और ये भी जानती है की सरीर और दिमाग से वो कितने स्ट्रॉन्गे है. अंकिता और मणि जी ने आपको उनके बारे में बता hi दिया होगा.

लता – हम्म ok, पैर जब वो पूछेगा की मैं उसकी माँ को कैसे जानती हु तब क्या बोलू??

गुरु – बोल देना की वो आपके साथ काम करती थी पैर वो पुराणी बात है. फिर आपका और अल्पना जी कभी मिली hi नहीं. और आज जब अल्पना जी के बारे में सुना तो कुछ गलत फेमि हो गई इसलिए आप उनको बुरा भला कहने लगी. और वो सब मेने और अंकिता ने आपको बता दिया की क्या सच है.

लता – हम्म ok…

कुछ देर में hi लता का फ़ोन बजने लगता है. ये उसी आदमी का फ़ोन था जिसको सूरजकुंड बेजा गया था. लता उससे बात करती है. वो लता को वो hi स्टोरी बताता है जो पब ने बताई थी. बस 2 बात अलग थी. और उन दोनों समय पब वह नहीं था.

लता – पब की स्टोरी एक दम सच है. अपने जैसा बोलै था वो hi हुआ. बस उस आदमी ने ये बताया की आज से 26 साल पहले hi अल्पना और प्रतिक उस गाओं में पहुंचे थे. और वह पे कुछ जमीं खरीद कर खेती करके अपना गुजरा करने लगे.

गुरु – मेने पहले hi कहा था न..

लता – हम्म ये तो है, पैर एक नयी बात और है, जो समाज में नहीं आये. पब अपनी माँ और बहन को गाओं छोड़ कर दिल्ली गया था. (मणि जी के जाने के बाद) पैर उसके 2-3 दिन बाद hi अल्पना और सोनल भी कही चले गए और उनकी आत्महत्या से 2 दिन पहले hi लोटे थे. और एक बार भी घर से बहार नहीं निकली.

गुरु – मुझको लगता है इनके जाने और लौटने के बेच कुछ ेशा हुआ है की इन दोनों को हतमहत्या करनी पड़ी.

गुरु की बात सुन कर लता चुप रहा जाती है. अब उसके भी हर सक का समादन हो चुक्का था.

(फ्रेंड्स मेने पब का पूरा फ़्लैश बैक दे दिया है, अब केवल कुछ राज है. जिनके बारे में मैं लिख चुक्का हु. यदि किसी को कुछ गलत लगे तो बताये. या कुछ छूट गया हो तो बताये. इनके अलावा दस माँ और सम्भोग क्रिया का राज और है इस कहानी मैं. और कुछ त्रिकार और मणि जी से जुड़े राज है)
 
अपडेट 69

कुछ देर में वो फोटो फ्रेम भी आ जाता है. बहुत hi खूबसूरत फ्रेम था. और उसमे लगा फोटो बहुत पुराणी थी. पैर उसको अच्छे दांग से एडिट कर के सुन्दर बनाया गया था. ये तीनो फोटो देख रहे थे की एक दम चीखता हुआ पब hi उड़ जाता है.

पब – नहीं मेने नहीं मारा अपनी माँ और बहन को. मैं क्यों मरुँगा उन्हें. वो मेरी जिंदगी थी.

तीनो पब के पास पहुंचते है. और फोटो पब के हाथ में दे देते है. फोटो को देख कर पब उसमे खो जाता है. और उससे बात करने लगता है.

पब – माँ तुम आ गई देखो सब क्या कह रहे है की मेने तुमको मरहई. बोलो न माँ क्या मैं तुमको मार सकता हु. मैं खुद आपका इंतजार कर रहा था माँ. अच्छा हुआ तुम आ गई. देखो न पापा सब क्या कह रहे है. मेने आपकी गुड़िया को मर दिया. भला कोई अपनी प्यारी दीदी को मरता होगा. उसको जो मुझे अपने बचती है. पापा मैं अब कोई सररत नहीं करता आप दीदी से पूछ लेना अब में आपका राजा बीटा बन गया हु. अब तो आप मुझको गाओं में मेला दिखने ले जायेगे न. मुझको झूला भी जुलना है वो बड़ा वाला. पापा मुझको एक गन भी दिलाना मैं उन सब को मरुँगा जो मुझको बोलते है की मेने दीदी को मार दिया. माँ आप hi बोलो मैं उस दीदी को मरुँगा. जो अपना खाना देती थी और कहती तू खले मुझको भूक नहीं है. और माँ फिर आप उनको अपने में से खिलाती थी. कितना प्यार कटी थीं ा आप दोनों मुझको. माँ बोलो न कुछ माँ बोलो न… मुझको अपने गले से लगा लो माँ. माँ मुझसे गलती हो गई की मैं आपसे दूर चला गया अब कभी नहीं जाउगा माँ. अब तो माँ जाओ और अपने bête को गले से लगाओ न माँ.,,,….

और फिर पब रोने लगता है….

ये सब सुन कर लता का कलेजा फैट जाता है. की उसकी बहन जैसी अल्पना का बीटा अपनी माँ के लिए तड़प रहा है. रो रहा है. उसको होश hi नहीं है की वो कहा है और बड़ा हो गया है. वो तो अपने बचपन की यादो में तो कभी अपनी बहन के साथ में खो रहा है. उसको माँ चाहिए.. माँ…

गुरु और अंकिता भी पब की इस हालत को देख कर दुखी हो रही थी. अंकिता को तो लग रहा था की वो अपने आप को देख रही है पब के रूप में. वो भी ऐसे hi रोटी थी. जब भी उसको अपनी माँ की याद आती थी. उन फोटो से गान्तो बात करती थी जो उसके पापा उसको दे जाते थे. उसका भी ऐसा hi हाल होता था तब और आज उसी हाल में उसका प्यार उसका पति था. पैर न कभी वो अपने लिए कुछ कर पाई थी और न आज उसके लिए कुछ कर प् रही थी. कितनी बेबस थी वो. उसकी आखों से आशु रुक नहीं रहे थे.

लता को भी अब पब का राणा देखा नहीं जा रहा था. उसने उसकी बहन को इन्ही छतियो से दूध पिलाया था. और आज उसका छोटा भाई एक माँ के लिए तड़प रहा था. एक समय था जब वो अपनी बच्ची को तड़पती थी और अल्पना अपनी बेटी को उसे सोप कर उसके कलेजे को दण्डक पहुँचती थी. उसको लगा की यदि आज मेने इसको नहीं सभाला तो अल्पना उसे कभी माफ़ नहीं करेगी. अभी उसकी ममता ने उसको बिबस कर दिया था की वो पब को गले लगा ले.

वो भाग कर पब को अपने गले लगा लेती है. और उसके बालो पे हाथ फेरने लगती है. पब को भी उसकी बाँहों में सुकून मिलता है. और वो धिरे धिरे चुप होने लगता है. और लता की बाँहों में hi सो जाता है. लता उसके बालो पे हाथ परती रहती है. जब पब सो जाता है तब

गुरु (अपने आशु पूछ कर) – लता जी अभी भी आपको लगता है ये अपनी माँ के साथ कुछ गलत कर सकता है?

लता – नहीं बुल्कुल नहीं… ये अपनी माँ के साथ क्या किसी के साथ गलत नहीं कर सकता. मैं hi इसको समाज नहीं पाई..

गुरु – होता है कई बार… सबको गलत फेमि हो जाती है…

तभी गुरु का फ़ोन बजता है.. फ़ोन कामिनी का था.

कामिनी – दीदी अब वो कैसे है?

गुरु – अच्छे है. और सो रहे है. सोने से पहले मुझको बोलै था की सबको बोल दू की सब सधी की तैयारी करे वो जल्दी hi घर आ जायेगे.

कामिनी – हम्म वो ठीक है तब हम भी अपने काम में लग जाते है. सुबह से किसी ने कुछ नहीं किया है सब उनकी hi रहा देख रहे है..

गुरु – गलत बात कामिनी, जड़ी वो घर पे नहीं होये तो क्या तुम सब कुछ नहीं करोगे??

कामिनी – दीदी वो घर पैर न हो चलेगा.. पैर उनको कुछ परेशानी हो तो हम अपने आप को कैसे किसी और काम में लगा सकते है. वो तो आप वह है इसलिए हमने से कोई नहीं आया नहीं तो सब अभी तक वह होते… अच्छा ठीक है अब मैं रखती हु और सबको काम पे लगाती हु… दीदी उनका डायन रखना..

गुरु – हम्म bye..

सयम का टाइम था गुरु और अंकिता दोनों एक –एक साइड में बेथ कर पब को उदा रही थी बड़े प्यार से. पब की आखें खुली तो वो उस दोनों को देख कर खुस हो गया. फिर उसने रूम को देखा और उसको सुबह का सब याद आने लगा. वो सब याद आते hi उसकी आखों से 2 आशु बाह गए.

अंकिता ने उसके आशु पहुंचे – नहीं अब आप बिलकुल भी नहीं रोयेंगे. बताइये अब केसा लग रहा है..

पब – अब अच्छा फील हो रहा है. दिल का बोज काम हो गया है..

गुरु – तब तो इस दिल में कुछ जगह खली हो गई होगी. उसको मेरे नाम पे बुक कर लेना..

पब गुरु की बात पैर मुस्कुरा जाता है – तू तो पहले से hi इस दिल पे राज करती है जान..

अंकिता – और मैं???

पब – तुम भी मेरे दिल की धड़कन हो …

तभी लता के खस्ने की आवाज आती है पब लता को देख कर उदास हो जाता है..

लता – क्या हुआ मेरे bête को. उदास क्यों हो रहे हो…

पब लता की बात सुन कर बस उसको देखता रहा जाता है. पब को याद आने लगता है की लता ने उसको कातिल कहा था. और फिर जब वो होश में आया था तो एक माँ की तरह उसको सुलाया भी था. पब कंफ्यूज था आखिर लता के मन में उसके लिए क्या है. लता भी पब के फेस को देख कर समाज जाती है की पब के मन में क्या चल रहा है. तो लता बोलती है

लता – बीटा मुझको माफ़ कर देना मुझको गलत फेमि हो गई थी. फिर वो गुरु के हिसाब से hi उसको सब बता देती है. और उसको गले लगा कर बोलती है. की आज से तुम मेरे bête हो. कभी भी माँ की याद आये तो मेरे पास चले आना. वैसे भी दामाद bête जैसा hi होता है…

पब को भी एक माँ के अंचल में बहुत hi सुकून मिल रहा था. अब पब अपने आप को फिट फील कर रहा था.

लता – चोलो सब लोग और कुछ खा लो. सुबह से किसी ने कुछ नहीं खाया है..

पब लता की बात सुन कर अंकिता और गुरु की और देखता है तो वो सर जुका कर मुस्कुराने लगती है. पब भी तप्पड़ मरने का इसरा करता है तो उनकी मुस्कान और गहरी हो जाती है. फ़ी 4रो बेथ कर खाने लगते है. लता पब को अपने हाथो से खिलाती है. एक माँ का प्यार प् कर पब बहुत खुस था. खाना होने के बाद

पब – माँ अब मुझको चलना चाहिए. घर पैर बहुत काम है. वैसे आप कब तक है यहाँ पैर??

लता – कुछ देर रुको वैसे भी मैं कल जा रही हु.

पब भी बेथ जाता है और सब लोग यु hi गप्पे मरने लगते है. कुछ देर मैं एक वकील आता है. और लता को कुछ पेपर देता है.

लता – बीटा तुम दोनों इन पेपर्स पे सिग्न कर दो..

पब – पैर माँ ये किस चीज के पेपर है.

लता – बीटा ये इस होटल के पेपर है. आज से ये तुम दोनों का होगा.

पब लता की बात से चौक जाता है.

पब – तो क्या ये होटल आपका है??

लता – हाँ बीटा ये हमारा hi होटल है. पैर अब तुम दोनों इसके मालिक होंगे.

अंकिता – नहीं माँ हम ये नहीं ले सकते.

लता – बीटा मुझको सब पता है. तू यहाँ रहने क्यों आयी. तेने पुरे देश में नैनपुर hi क्यों चुना. तुझको क्या लगा एक माँ अपनी बेटी की बावनाओ को नहीं समझती है. बीटा मुझको पता है ये होटल तेरे लिए केवल होटल नहीं है.

लता की बात पब के तो समाज नहीं आयी थी. पैर अंकिता की आखें अपनी माँ की बात सुन कर भर लगी थी. पब अंकिता की आखों को देख कर पूछता है..

पब – आना क्या बात है. मुझको भी तो बताओ…

अंकिता – वो बात ये है की ये होटल पापा ने मेरे नाम पे hi बनवाया था. पापा मुझसे बहुत प्यार करते है पैर कभी बोलते नहीं है. एक बार जब वो मेरे स्कूल में मिलने आये तब उन्होंने मुझको इसके बारे में बताया था. मैं ये सुन कर खुश भी बहुत हुई. की पापा आज भी मेरे बारे में सोचते है. उन्होंने कहा की वो ये होटल इसलिए बंबा रहे है की तुमको कभी भी पेसो की प्रॉब्लम न हो. इस होटल की टोटल इनकम मेरे hi अकाउंट में जाती है. पैर मेने आज तक उसमे से 1 रस भी नहीं लिया है. मेरे लिए के होटल मेरे माँ बाप का आशिर्बाद था. इसलिए hi में इस सिटी में रहने लगी. मुझको जब भी maa-papa की याद आती तो में इस होटल के सामने कड़ी हो कर अपने आप से बात कर लेती थी. मुझको लगता की मेरे माँ पापा मेरे साथ है…. तुमने दयँ नहीं दिया इस होटल के नाम पैर – ालर मीन्स अंकिता लता रतन..

पब – हम्म यदि ये बात है तब तो माँ मुझको ये होटल चाहिए.. बताइये कहा सिग्न करने है…

अंकिता पब की बात सुन कर उसको गले लगा लेती है. और रोने लगती है.

पब – मैं अपनी वाइफ की पुराणी यादो को कैसे छोड़ सकता हु. और वो भी जब वो माँ के भी जुडी हो..

फिर दोनों सिग्न करते है. वो पेपर ले कर चला जाता.

पब – अरे यार आना, हमको तो ये होटल अपनी सधी की पार्टी के लिए बुक करना था न. फिर अब??

अंकिता नासमज की तरह देखती है..

पब अंकिता को ऐसे देखते हुए देख कर उसके कान में बोलता है – अरे अब तो आप इस होटल की मालकिन है तो बुकिंग अमाउंट आप अपनी माँ के सामने hi लगी या घर पे बैडरूम में….

अंकिता पब की बात जब समाज में आती है तो उसको मरने लगती है – जाओ में बात नहीं करती आप से. बहुत गंदे हो आप..

अंकिता की बात पैर 3no है देते है.

लता – किस पार्टी की बात हो रही है. हमको भी तो बताओ..

अंकिता – माँ वो हमने न अभी तक अपनी मैरिज की पार्टी नहीं की है. तो वो 14 को है. ये पहले से hi इस होटल को बुक करना चाहते थे. पैर अब तो…

लता – हम्म मेरी बेटी की मैरिज पार्टी है. तो अब इसको में अर्रंगे करुँगी.. तुम लोग बस अपने मेहमानो को बुला लो…

पब – नहीं माँ आप क्यों परेशां होती है. मैं अर्रंग कर लगा सब…

लता – बीटा मैं परेशां नहीं होगी… एक मं रुको…

फिर लता एक फ़ोन करती है. कुछ देर में होटल का मैनेजर आ जाता है..

मैनेजर – यस मम..

लता – तुम जानते हो की मैं कोण हु. और क्या हु.

मैनेजर – जी मम यस मम… कोई गलती हो गई क्या (मैनेजर की हवा ख़राब थी लता के सामने. अरे लता से तो देश के मिनिस्टर भी डरते थे. तो बिचारे मैनेजर की क्या उकत थी)

लता – पहले मेरी बात सुनो.. आज से ये होटल मेरी बेटी और दामाद का है.. (लता पब और अंकिता की और इसरा कर देती है). इन दोनों की अभी सधी हुयी है. और ये 14 को एक पार्टी करना छाते है. अब तुम बताओ तुम ये कर पाओगे. याद रहे ये मेरी बेटी की पार्टी है. यदि किसी चीज में कोई भी कमी हुई न तो तुम सोच सकते हो , तुम्हारे साथ क्या होगा…

मैनेजर – मम ी विल मैनेज एच एंड एव्री थिंक, ी विल दो माय बेस्ट. ये पार्टी नैनपुर की सबसे बेस्ट पार्टी होगी..

लता – sound’s गुड.. बूत don’t फॉरगेट.. शी इस माय डॉटर… इस सिटी के सब बड़े अफसर को तुम इन्विते करोगे. Ok

मैनेजर – ok मम ी विल

लता – ok ु कैन जो नाउ. एंड स्टार्ट योर वर्क.

मैनेजर – ok मम

और फिर मैनेजर चला जाता है.

लता – लो बच्चो तुम्हारी टेंशन ख़तम…..

दोनों मुस्कुरा देते है. कुछ देर बाद पब और गुरु वह से चले जाते है. अंकिता अपनी माँ के पास रुक जाती है. दोनों हवेली पहुंचते है. और पब अपने माँ पापा की फोटो को मैं हॉल की वाल पे लगा देता है. उनके वह पहुंचते hi सब लोग उनको गैर लेते है. और फिर सुरु होता है सवालो का सैलाब. पब तो चुके से वह से निकल कर रूम में चला जाता है. गुरु सब को पब की स्टोरी और वह पे क्या हुआ बताती है. पैर लता की स्टोरी नहीं बताती. पब एक बार जुली से मिल कर सविता और कामिनी को अपने पास बुला लेता है. और सधी की बाते करने लगता है. उन होने सधी की शॉपपिंग की पूरी लिस्ट बना ली थी......
 
अपडेट 70

दोनों मुस्कुरा देते है. कुछ देर बाद पब और गुरु वह से चले जाते है. अंकिता अपनी माँ के पास रुक जाती है. दोनों हवेली पहुंचते है. और पब अपने माँ पापा की फोटो को मैं हॉल की वाल पे लगा देता है. उनके वह पहुंचते hi सब लोग उनको गैर लेते है. और फिर सुरु होता है सवालो का सैलाब. पब तो चुके से वह से निकल कर रूम में चला जाता है. गुरु सब को पब की स्टोरी और वह पे क्या हुआ बताती है. पैर लता की स्टोरी नहीं बताती. पब एक बार जुली से मिल कर सविता और कामिनी को अपने पास बुला लेता है. और सधी की बाते करने लगता है. उन होने सधी की शॉपपिंग की पूरी लिस्ट बना ली थी.

नेक्स्ट डे, पब लता को bye करने के लिए जाने hi बाला था की पुलिस की गाड़िया हवेली में आ जाती है.

प. इस्पेक्टर – सर हमको आपकी हवेली की तलाशी लेनी है (और पब को सर्च वारंट दे देता है)

पब – ok ु कैन ..

सभी पुलिस वाले हवेली की तलाशी लेना सुरु hi करते है की अंकिता का फ़ोन आ जाता है. तो पब उसको बता देता है पुलिस के बारे मैं. अंकिता लता को बताती है. लता एक फ़ोन करती है. और उसके 5 मं के अंदर hi इंस्पेक्टर पब से माफ़ी मांग कर चला जाता है. पब कुछ -2 समाज रहा था की ये सब क्यों हुआ है. और किसके कहने पे हुआ है. पैर उसको अभी सधी की तैयारी करवानी थी तो वो गुरु को ले कर लता के पास पहुंच जाता है. और बाकि सब को मॉल में जाने का बोल देता है.

रस्ते में पब एक फ़ोन निकलता है. ये फ़ोन ठाकुर भानु का था. और उसमे से कुछ पुलिस वालो की लिस्ट बना कर अपने पास रख लेता है. पब लता के पास पहुंच कर उससे आशीर्वाद लेता है. लता से कुछ बाटे कर के उसको विदा कर देता है. अंकिता दुखी थी. फिर भी उसके मन में एक सुकून था की अब वो अपनी माँ से कभी भी मिल सकती है.

वह से ये लोग भी मॉल में पहुंच जाते है. पब सबको शॉपपिंग करने का बोल कर पब निकल जाता है. और पहुँचता है मला रवि के घर. कियोकि ये भानु का दोस्त और पार्टनर था. ये सब पब को उसके फ़ोन से hi पता चला था. मला की वजह से hi ठाकुर बे खूफ ये सब करता था. पैर पब को ये नहीं पता था की ठाकुर और मला दोनों hi त्रिकाल की काट पुतली थे. और सारा सेट उप (लड़कियों की ट्रेनिंग और उस बेसमेंट में मौजूद सब कुछ) त्रिकाल के चेले संभु ने hi बनवाया था.

पब ने जा कर गेट कीपर को बोलै की मला से मिलना है. और अपने बारे में भी बताया की वो पानीपुर गाओं का ठाकुर है. मला ने तुर्रंत hi उसको अंदर बुला लिया. वह पैर रवि और उसकी वाइफ (वंदना) भी उसके साथ बैठी थी

मला – तू कोण है बे लड़के, ठाकुर पंकज कहा है.

पब – मैं hi हु..

वंदना जोर से हस्ती है. – तुम तो अभी बच्चे हो. तुमने भानु भाई साहब को मारा है??

पब जा कर मला के सामने सोफे पे बेथ जाता है.

पब – सुन मला होगा तू इस सिटी का. पैर मेरी हवेली की तरफ आखँ उदा कर भी देखा न तो सोच लेना तेरा क्या हो सकता है.

पब की बात सुन कर रवि पब को गुर से देखने लगता है. और ये hi उसने गलती कर दी. पब उसकी आखों से उसके मंद में घुस गया. और उसके दिमाग को पड़ने लगा. पब ने इतनी लड़कियों को ठीक किया था की अब वो इस पावर को बहुत अच्छे से उसे कर सकता था. पब ने बस उसके मंद को रीड किया कोई चेंज नहीं किया था.

रवि – तू है क्या बे. जो मुझको दमकी दे रहा है. किसका हाथ है तेरे सर पे जो इतना उछाल रहा है. मैं तो सोच रहा था की तुझको मैं कैसे पसाऊगा. पैर तू खुद मेने घर आ गया. अब तू यहाँ से जिन्दा नहीं जायेगा.

पब – अरे तू मुझको क्या पसायेगा. मैं तो तेरी इस बुलबुल को पसाऊगा. और अपनी गुलाम बना कर रखुगा. बड़ी hi नमकीन माल है ये तो…

बात ये थी की पब को रवि का मंद रीड करके पता चल गया था. की वो कोण -2 से डंडे करता है. और कोई संभु भी है इन सब में. और रवि अपनी बीबी और बेटी (कजरी) को बहुत चाहता है. ये दोनों भी इसकी तरह एक दम गुंडई है. सरब, जुआ, गरीबो को सतना, और भी न जाने क्या -2 शौक है इन दोनों के. पैर एक बात है ये दोनों भी रवि से बहुत प्यार करती है. रवि इन दोनों के लिए कुछ भी कर सकता है. वो अपने bête (वेद) को भी चाहता है. पैर वेद और रवि में बनती नहीं है. रवि के काळा काम वेद को पसंद नहीं है.

पब की बात सुन कर रवि क ीक चमचे को गुस्सा आया और वो रवि को मरने बड़ा. गुस्से में चिल्लाता हुआ. – हमारी मालकिन के लिए गलत बोलै है तूने तू नहीं बचेगा….

पर वो 2 कदम hi आगे आया था की एक चाकू उसके गले में घुस गया. ये पब ने hi पका था जो टेबल पे फ्रूट के साथ रखा था. चाकू गले के अंदर गुस्ते hi वो जमीं पैर गिरा. किसी को समाज hi नहीं आया की हुआ क्या है. वंदना इस कारनामे को देख कर पब की और फटी -2 आखों से देखने लगी. और ये उसकी गलती सभीत हुई. पब ने 2 मं में hi उसके मंद में घुस कर उसके मंद में ये दाल दिया की वो पब की गुलाम है. पब की हर बात मन्ना hi उसका धर्म.

पब – क्यों रे रवि, बहनचोद तू इन गंदुओ के बल पर मरेगा. ये तो यु hi देर हो गया…

रवि – हरामी एक को मर के उड़ मत मैं आज तुझको छोड़ूगा नहीं.

पब – सेल तुम एरा कुछ नहीं बिगड़ सकता है. (फिर वंदना की और देखते हुए, जो की पब की गुलाम बन चुकी थी) मेरी वंदना रंडी जरा रवि की टेबल के निचे वाली गन तो निकलना.

वंदना तुर्रंत गन निकल लेती है. रवि तो ये देख कर पगला जाता है. की उसकी जान से प्यारी बीबी उसके दुसमन का साथ दे रही है. उसको समाज नहीं आया की वंदना आज तक जब पब से मिली भी नहीं है तो उसका साथ कैसे दे सकती है.

पब – मेरी कुट्टी अपनी इस कुत्ते के दोनों घुटनो में गोली मर दो…

पब के कहने के साथ hi वंदना ने 2 फायर कर दिए और उन गोलियों ने रवि के दोनों घुटनो की हड्डियों को hi तोड़ दिया. खून बहाने लगा. रवि दर्द में चीख रहा था.

रवि – आआआहहहहह हरामी की औलाद, तूने मेरी बीबी को hi मेरे खिलाफ कर दिया. मैं तुझको छोड़ूगा नहीं … (अपने आदमियों से) सालो खड़े -2 क्या देख रहे हो मर दो इस हरामी को…

आदमी एक दम से पब की और बढ़ते है..

पब – रुक जाओ. … (तेज़ आवाज में)

अभी आदमी वही रुक जाते है…

पब – तुम लोग मुझको hi मरना चाहते हो न. पैर मैं तो अपनी वंदना डार्लिंग के हाथो मरना चाहता हु… (वंदना की और देख कर) वंदना ये गन मेरे सर पे रख कर खली कर दो…

पब की बात सुन कर सब चौक जाते है. सबको लगता है की ये पागल हो गया है. कियोकि अभी एक मं पहले hi 2 गोलियों ने रवि के घुटनो को तोडा था. और यदि एक भी गोली उसके सर में लगी तो वो तुर्रंत मर जायेगा. रवि के कुत्ते तो बस खड़े हुए सर खुजा रहे थे. जो अभी तक हुआ था और जो हो रहा था वो किसी के समाज के बहार था. वंदना भी एक आज्ञाकारी रंडी की तरह गन को पब के सर पे रख कर चला देती है. और फिर चलती जाती है. ढाई ढाई… की आवाज पुरे रूम में गुज रही थी. आधे आदमियों की आखें बंद थी और जिनकी खुली थी उनकी हेरात से फटी पड़ी थी. एक के बाद एक गोली सर से टकरा कर जमीं पैर गिर रही थी. लोग जैसे सपना या कोई जादू देख रहे थे. पैर सब समाज के बहार था. जैसे जैसे गोली जमीं पे गिरती वैसे वैसे उन आदमियों की गांड फटी जाती. अब किसी में हिम्मत नहीं थी की पब पे अटैक करे. अरे जब गोली से कुछ नहीं हो रहा तो वो हाथ पैरो से क्या करेंगे. 2 मं में hi गन खली हो गई पैर ये 2 मं उन गुंडों के लिए 2 जमन जैसे थे. फिर भी 2 गुंडों ने आगे भाड़ कर पब को किक मर दी. पब के हाथ में एक की तंग आ गई. और उसने उसकी तंग को मरोड़ दिया जैसे कपड़े निचोड़ रहा हो. पेअर की कितनी हड्डियों के कितने टुकड़े हुए ये तो सयद डॉ. hi बता पाए. पैर अभी तो वो दर्द से चीखते हुए वही बेथ गया. और बेहोश हो गया. अब तो इन लोगो की और भी फैट गई. 3-4 गुंडे तो बैग गए. रवि फटी आखों से उनको भागते हुए देखता रहा. रवि की भी फटी पड़ी थी. उसको अपनी मूट नजर आ रही थी. उसको पता चल चुक्का था की ये कोई सदरद मानव नहीं है. और पब की बाते और काम देवताओ वाले थे नहीं. फिर एक साथ सभी गुंडों ने हमला कर दिया 3 के पास में चाकू भी था. वंदना तो दूर हो चुकी थी. सब गुंडे पब को मर रहे थे वो 3no तो अपने चाकू को पब के ससिर में घुसने की कोसिस कर रहे थे. पैर घुसे तब न. पब के हाथ में एक का हाथ आया तो उसे तोड़ दिया. फिर पब ने 2 गुंडों का सर पकड़ कर एक दूसरे से hi बजा दिया. दोनों के नाक से खून निकला और दोनों जमीन पर चित.. जब चाकू नहीं घुसा तो वो भी पब को घुसे मरने लगे. पब एक -2 करके सबको मर रहा था. किसी का हाथ टूट रहा था तो किसी का पेअर. तो किसी की गार्डन. एक गुंडे ने पब के पेअर पकड़ कर खींच दिए तो वो गिर गया अभी 6-7 गुंडों ने उसको घेर रखा था. और पब जमीं में पड़ा था. पब ने जैसे hi खड़े होने के लिए हाथ जमीं पे रखा तो 1 चाकू उसके हाथ में आ गया वो उसको ले कर खड़ा हो गया. और उस चाकू को उन आदमियों के सरीर में घुसेड़ने लगा 3-4 मं में hi सब लहू लुहान हो कर जमीं पे पड़े थे. और रवि को लगा की अब उसकी बरी है मरने की. उसका फेस एक डैम सफ़ेद पद गया था.

पब ने एक बार चारो और देखा सभी जमीं की दल फक रहे थे. तो पब रवि की और बाद गया. और एक किक उसके घुटने पे मर दी.

पब – क्यों बे अब क्यों चिल्ला रहा है. चिंता मत कर मरुँगा नहीं तेरे को. तू अभी जिन्दा रहिगा. और तू अपनी पत्नी की नफरत को देखेगा. (फिर पब वो प्लोसे वालो की लिस्ट निकल कर उसको देता है ) ये ले और कल तक इन सब पुलिस वालो का ट्रांसफर हो जाना चाहिए. नहीं तो तेरी ये बीबी hi तुझको मर देगी. (वंदना की और देख कर) सुन लिया न वंदना..

वंदना – जी मालिक…

पब – सुन आज के बाद तूने यदि हवेली और उसमे रहने वाले किसी भी आदमी की और देखा न तो तू समाज गया होगा की मैं क्या कर सकता हु.

पब ये बोल कर वंदना को एक रूम में ले जाता है. और अपने कपडे चेंज कर के वंदना को भी ब्रा- पंतय में कर देता है. वंदना का जालिम नंगा बदन चमक रहा था. पैर पब ने अपने आप को कण्ट्रोल किया हुआ था. कुछ देर रूम में बैठा रहता है. और फिर से रवि के पास आता है… रवि अपनी बीबी को यु नंगा देख कर हैरान भी था और दुखी भी. पैर वो कुछ करने की इस्तिति में नहीं था. तो आशु hi बहा लेता है…

पब – क्यों वे भड़बे अपनी बीबी को ऐसे देख कर रो रहा है. और जब दुसरो की बहन बेटियों को बेचता है तब तो तुझको बड़ा मज़ा आता है…

रवि पब की बात सुन कर सर जुका लेता है.

पब – अभी से सर जुक गया. अभी तो तुझको अपनी बेटी को रोड पे नंगा घूमते हुए भी देखना है. वैसे जब तेरी बेटी नंगी रोड पे गुमेगी और कुत्ते से छुडवायेगी तब तुझको पता चलेगा की इज्जत क्या है. दुसरो की इज्जत बर्बाद करने में बड़ा मज़ा आता है न तुझको……..

रवि अपने हाथ जोड़ देता है और न में सर हिलने लगता है.

पब – अब क्यों ये न में सर हिला रहा है. चल एक ऑफर है तेरे लिए. यदि आज से तू मेरे हिसाब से चलेगा तो मैं तुझको कोई ताफलीफ नहीं दुगा.

रवि – मैं तुम्हारी हर बात मैंने को तैयार हु..

पब – तो सबसे पहले अपने सरे डंडे बंद कर और इस सिटी के लोगो की भलाई के लिए काम करना सुरु कर दे…

फिर पब नंगी वंदना को अपनी बांहो में ले कर उसके कान में कुछ कहता है. पैर रवि को ऐसा दिख रहा था की वो वंदना की गार्डन को चुम रहा है. रवि ये सब सहा नहीं पता वो अपनी बीबी और बेटी को बहुत चाहता था. तो वो बेहोश हो जाता है. वैसे भी उसका खून भी बहुत बहा चुक्का था. पब वंदना को सब समजा कर मॉल की और निकल जाता है……

वंदना पब के जाते hi पब के कहे अनुसार अपनी सधी पहन कर डॉ. को बुलाती है. और उन सबका इलाज करवाती है. 4 लोग मर भी चुके थे. वो उनका भी इंतजाम कर देती है. अभी वंदना पहली वाली वंदना बन चुकी थी. पैर वो अभी भी पब की गुलाम hi थी. और उसके आदेशों का पालन hi कर रही थी.
 
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