Incest RAKSHASH - Page 12 - SexBaba
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Incest RAKSHASH

अपडेट-53




माहौल गरमाया हुआ था, पूरी परजा पूरी सेना देव के सामने कड़ी थी, देव का गुस्सा बढ़ रहा था,

भवर सिंह- मारो इसे, मेरा आदेश ह ये,

सभी सैनिक देव की तरफ दौड़े, देव गुस्से में बाहर गया और उसने एक सैनिक को उठाया और जमीन में पटक दिया,

देव- अगर जिन्दा रहना चाहते हो तो एक कदम भी आगे मत बढ़ाना,

सभी दर कर पीछे हो गए, भवर सिंह गुस्से में आगे बढ़ा और देव पैर वॉर कर दिया, देव ने तलवार को पकड़ दिया,

देव- अपना हाथ रोक लो वर्ण मैं भूल जाऊंगा की आपसे मेरा कोई रिश्ता भी ह,

तभी वह राजवीर भी आ गए,

राजवीर- भवर सिंह तू इंसान नहीं ह जानवर ह, तूने जीवन भर हमेशा गलत किया, तूने मुझे इतने वर्षो तक बंदी बना क्र रखा, और आज यहाँ मेरी बहन और भांजे पैर इल्जाम लगा रहा ह,

निहारिका राजय के लोगो से- आप सब इसकी बातो में आ रहे हो, जिसने कभी आपको इंसान भी नहीं समझा,

राजय के लोग- अरे इन्होने कभी मर्यादा तो नहीं तोड़ी, इन्होने समाज में गदगी तो नहीं फैलाई,

अक्षरा- गन्दगी जितनी गन्दगी इस इंसान ने फैलाई ह, उसे ज्यादा तो किसी ने नहीं फैलाई, इस परिवार में इस राजय में अगर किसी ने गलत किया ह तो वो ये ह,

भवर सिंह- तूने अपनी माँ को धोखा दिया और अब इनकी तरफ से बोल रही ह,

भीड़- इन्होने समाज के नियम नहीं थोड़े,

अक्सहर- इन्होने इस राजय किन ा जाने कितनी hi लड़कियों का बलात्कार किया, और इस इंसान ने अपनी hi बहन के साथ नाजायज सम्बन्ध रखे, क्या ये समाज के नियम में आता ह,

बहन के साथ सम्बन्ध की बात सुनकर सभी चौंक गए, खुद परिवार के सभी लोग चौक गए,

भीड़- तुम झूट बोल रही हो,

अक्षरा- भवर सिंह और काम्य के बिच नाजायज सम्बन्ध थे, जिससे इनकी 3 औलादे भी हैं,

भवर सिंह- क्या बकवास कर रही ह तू, ये सब झूट बोल रही ह,

भीड़- तुम झूटी हो, काम्य देवी की तो 2 hi संतान हैं, तुम्हारा झूट पकड़ा गया,

अक्षरा- ये hi तो राज ह, भवर सिंह की 3 सताने जो काम्य से पैदा हुई जिसमे एक ह अभिजीत और दूसरी मैं जो काम्य की शादी के बाद पैदा हुई, और तीसरी संतान ह कस्तूरी जो काम्य की शादी से पहले hi पैदा हो गाइट hi, जिसे इस जानवर ने प्रेमलता ये अपनी रखैल को दे दिया पलने के लिए, और ये hi नहीं प्रेमलता की बेटी सुगंधा भी इसकी और प्रेमलता की संतान हैं, इस इंसान ने आईटीआई गांड फैलाई हुई ह और तुम सब देव पैर इल्जाम लगा रहे हो,

चारो तरफ एक दूसरे से चर्चा शुरू हो गई,

सूरज- ये झूट बोल रही ह, क्योकि ये खुद देव से चुदवाती ह, सोमिया और अमिता और अक्षरा तीनो hi देव से चुदवाती हैं, और ये कस्तूरी तो पहले hi देव के साथ चुदाई कर चुकी ह,

ज्वाला- मुझे तो लगता ह ये साडी लड़किया भी देव से चुदवाती हैं, इसीलिए पिता जी पैर इल्जाम लगा क्र उन्हें बदनाम कर रही हैं,

सूरज- क्या पता ये हम भाइयो पैर भी इल्जाम लगा दे की हमने इनके साथ कुछ गलत किया ह,

अमिता- है ये सच hi तो ह, तुम तीनो भाइयो सुरजा ज्वाला और अभिजीत ने हम तीनो बहेनो के साथ बलात्कार करने की कोशिश किट hi,

अमरावती और सौमित्र ये सब सुनकर झटके पैर झटके खा रही थी,

ज्वाला- देखा देखा अब हम पैर इल्जाम लगाने लगी,

भवर सिंह- इन सबको मार दो और इस राजय को साफ़ करो,

भीड़ में खड़े लोगो ने पत्थर फैके शुरू क्र दिए, एक पत्थर रीवा की तरफ आ रहा था जिसके बिच में अभेंद्र आ गया, लेकि दूसरा पता निहारिका के माथे पैर लगा, पत्थर लगते hi देव का गुस्सा फुट पड़ा और उसने भवर सिंह की तलवार को झटके से तोड़ दिया और उसे उठा क्र दूर फेंक दिया, और भीड़ में कूद पड़ा, जो उसके सामने आ रहा तो वो उठा उठा क्र फेंक रहा था, देव अपना आप खो चुक्का था,

तभी किसी ने देखा की निहारिका के माथे पैर जो घाव लगा था ो ठीक होने लगा, और ये देखते hi भीड़ में से लोग उसे डायन चुड़ैल बोलने लगे, भवर सिंह और सूरज और ज्वाला एक साथ देव पैर टूट पड़े, इधर राजवीर और अभेंद्र सेनिको को लड़कियों के पास आए से रोके हुए थे, लेकिन सैनिक बहुत अधिक थे,

देव ने तीनो बाप बेटो को मरना शुरू क्र दिया, देव ने तलवार से भवर सिंह को घायल किया, उसका घाव नहीं भरे, जिसे देख वो थोड़ा घबरा गया, वही सूरज और ज्वाला का तो कोई मुकाबला hi नहीं था देव से,

वो पीछे हटने लगी, तभी रीवा की आवाज आई – devvvvvvvvvv

देव ने पीछे देखा तो सैनिक लड़कियों के पास पहुंच चुके थे, देव उधर मुदा तब तक वह दत्त आ चुक्का था, और निहारिका ने भी तलवार उठा ली थी, दत्त की दहाड़ से पूरी भीड़ कंपनी लगी,

सभी दर क्र पीछे हटने लगे, लेकिन तभी देव की कमर पैर किसी ने एक लात मरी और देव उड़ता हुआ दूर जाकर गिरा, देव को गिरता हुआ देख क्र सभी चौंक गए, और जब मुद क्र देखा तो वह भैरव सिंह खड़ा था, और उसके पीछे सात्विक चिरंजीवी संबु और भानु खड़े थे, उन्हें वह देख क्र सेनिको ने उनकी तरफ तलवारे तान दी,

भवर सिंह- रुक जाओ, ये सब हमारे मित्र हैं, इस देव और निहारिका की वजह से बहुत ग़लतफ़हमिया हुई ह, सब ठीक ह,

तभी प्रताप सिंह भी आ गया और बोलै

प्रताप सिंह- अब दोनों राजय एक दूसरे के मित्र हैं, तो पूरी परजा सुरक्षित ह, और अब सब मिलकर इस असली शत्रु का विनाश करेंगे,

देव खड़ा हुआ और निहारिका और बाकि लड़कियों के पास आया,

निहारिका- ये सब क्या हो रहा ह,

देव- हम जानते थे ये युद्ध होगा, लेकिन इस तरह से होगा ये नहीं जानते थे, हमारे पास न कोई सेना ह, न कोई मित्र, अब हम सब अकेले हैं,

राजवीर- यहाँ से निकलने में hi फायदा ह बीटा,

देव- ये लोग हमे ऐसे निकलने नहीं देंगे, मैं इन सबको रोकता हु आप पुरे परिवार को लेकर निकल जाइये,

निहारिका- हम तुझे अकेला छोड़ क्र कैसे जा सकते हैं,

देव- माँ ये मिलकर भी मेरा कुछ नहीं बिगड़ सकते, लेकिन बाकि सबको बचाना मेरे लिए मुश्किल हो जायेगा,

राजवीर- लेकिन इन्हे निकला कैसे जायेगा,

इधर देव बात कर रहा था वही प्रताप सिंह किन अजर निहारिका पैर थी,

प्रताप सिंह- चिरंजीवी बीटा मुझे निहारिका चाहिए,

भैरव- मुझे ये सभी सुदरिया चाहिए, इतनी सुंदरता मैंने आज तक नहीं देखि, और ये औरत ये कोई अप्सरा ह, इतनी भीड़ में भी इसका सौन्दर्य किसी सूर्य की तरह चमक रहा ह,

रेणुका- ये ह निहारिका, और उसके पीछे जो कड़ी ह इसी की परछाई रीवा, इस संसार में इन दोनों से खूबसूरत कोई नहीं ह,

भैरव- ये मुझे चाहिए, इस धरती पैर मेरे लिए कोई नहीं बानी थी, लेकिन ये दोनों मेरी पत्नी बनने के लायक हैं,

प्रताप सिंह- निहारिका मेरी ह,

रेणुका- इस निहारिका की वजह से मेरे घर परिवार बर्बाद हो गया, इसका तो मैं चीरहरण करवाउंगी,

भवर सिंह- सेनिको पकड़ लो इन सबको,

भैरव- नहीं कोई इन्हे हाथ नहीं लगेया, ये सभी लड़किया मेरी दासी बनेंगी, और ये निहारिका और इसकी बेटी मेरी पत्नी बनेगी, अगर तुम सभी लड़किया जिन्दा रहना चाहती हो और मेरे साथ सुख से मजे में रहना चाहती हो तो मेरे पास आ जाओ,

इससे भवर सिंह थोड़ा विचलित हो गया, लेकिन चिरंजीवी ने उसे रोक दिया,

चिरंजीवी- इस समय कुछ मत बोलो,

साडी लड़किया घबरा गई, सब देव के पीछे आ गई,

देव- तुम सब निकलो यहाँ से, अभेंद्र सबको लेकर निकालो यहाँ से,

अभेंद्र ने सबको इशारा किया, सभी अभेंद्र के साथ महल के अंदर की तरफ भागी, सभी लड़कियों को भागने के तकलीफ हो रही थी, लेकिन जब जान खतरे में हो तो किसी के भी पैरो में ताकत आ जाती ह,

अमरावती और सौमित्र वही कड़ी रह गई,

लड़कियों के भागते hi चिरंजीवी भानु संभु सूरज और ज्वाला तेजी से उनकी तरफ दौड़े, लेकिन उनके बिच में देवा ुर दूत आ गए, देव को देख क्र सब रुक गए, लेकिन भैरव के सामने आ गया, जिससे बाकि लोग लड़कियों के पीछे भाग लिए,

अमरावती और सौमित्र ने सूरज और ज्वाला को रोकने की कोशिश की लेकिन उन्होंने दोनों को दूर धकेला और आगे भाग लिए, उनके पीछे दत्त ने दौड़ लगा दी,

राजवीर और अभेंद्र सभी को लेकर महल के अंदर घुस गए, अंदर से कुछ छुपे हुए रस्ते थे, जो देव और अभेंद्र पहले hi बना चुके थे,

भैरव- मैंने तुझे एक सुझाव दिया था की मुझसे मिल जा, इसमें तेरा hi फायदा ह, लेकिन शायद तुझे अपनी मृत्यु से ज्यादा प्रेम ह,

देव- ये तो उप्पेर वाला hi जाने क्या होगा, कोण किसकी मृत्यु बनेगा,

भैरव- मैंने एक बार hi तेरे राजय में पेअर रखा ह और ये पूरा राजय मेरा हो गया ह, ऐसे hi पूरी पृथ्वी मेरी होगी,

भैरव ने देव पैर मुक्के से वॉर किया लेकिन देव इस बार चौकन्ना था, वो तुरंत एक तरफ हो गया, भैरव ने फिर से वॉर किया लेकिन देव फिर बच गया, भैरव लगातार वॉर कर रहा था लेकिन देव को छू नहीं प् रहा था, तभी पीछे से बहवर सिंह आ गया और उसने देव की पीठ पैर वॉर किया, जिससे देव लड़खड़ा गया और इसका फायदा भैरव ने उठाया और एक जोर दर वॉर देव की छाती में किया, जिससे देव उड़ता हुआ दूर जाकर गिरा, भैरव का मुक्का काफी जोर दर था, देव ने उसकी ताकत को अचे से महसूस किया, देव खुद को सम्हालता हुआ उठा,

देव ने अपने कपडे झड़े और जैसे hi भैरव और भवर सिंह पास आये देव ने घूम क्र एक लात भवर सिंह को मरी, और लात लगते hi भवर सिंह दीवार में जाकर लगा, वो दर्द से बिलबिला उठा, इधर भैरव ने फिर से देव पैर वॉर किया लेकिन इस बार देव ने भैरव का हाथ पकड़ लिया, और उसके मुँह पैर एक मुक्का मारा, मुक्का लगते hi भैरव जमीन में गिर पड़ा, भैरव बड़े आश्चर्य से देव को देखने लगा, उसे यकीन hi नहीं हुआ की उसके सामने इतनी ताकत वाला इंसान खड़ा ह, भैरव खड़ा हुआ अपने जबड़ा मसलने लगा, फिर वो देव पैर टूट पड़ा, दो महा शक्ति शक्ति इंसान एक दूसरे पैर टूट पड़े थे,

भैरव की ताकत देव से बहुत अधिक थी, देव की फुर्ती भैरव से ज्यादा थी इसलिए वो उसके हमलो से बच रहा था, और उछाल उछाल क्र उस पैर हमले कर रहा था,

भैरव देव पैर हावी पद रहा था, भवर सिंह बिच बिच में आकर देव पैर हुम्ला करता, लेकिन देव उसे एक दो मुक्को में hi दूर फेंक देता, इनकी लड़ाई का कोई अंत दिखाई नहीं दे रहा था, न कोई थक रहा थान ा hi हर मन रहा था, देवा ुर भैरव में से जिसको भी घाव लगता तुरंत ठीक होजाता, बाकि परजा और सैनिक खड़े देख रहे थे,

वही दूसरी तरफ अभेंद्र और राजवीर सभी लड़कियों को लेकर महल के छुपे रस्ते से बहार निकल गए थे, चिरंजीवी संभु और भानु के सामने दत्त आ गया, दत्त की ताकत का मुकाबला करना भी आसान नहीं था, ज्वाला और सूरज उन सबके पीछे आगे बढ़ गए, लेकिन वो दोनों अकेले थे और सामने अभेंद्र राजवीर और साडी लड़किया, जो सभी युद्ध कला सिख चुकी थी,

अभेंद्र और निहारिका रुक गए बाकि सबको राजवीर आगे लेकर निकल गए, निहारिका और अभेंद्र ने ज्वाला और सूरज पैर हुम्ला कर दिया, वो दोनों योद्धा थे अचे योद्धा थे, लेकिन अभेंद्र अब उनसे कही भीतर योद्धा बन हकूका था, और निहारिका को हराना उनके लिए नामुमकिन था,

चिरंजीवी दत्त को झांसा देकर निकल गया, भानु और संभु को दत्त ने अपने जबड़ो से अचे से घायल क्र दिया था, चिरंजीवी जब तक सूरज और ज्वाला के पास पूछा तब तक दोनों घायल बेसुध से हो चुके थे, अभेंद्र ज्वाला को मरने hi वाला था तभी चिरंजीवी वह आ गया, उसने अभेंद्र पैर हुम्ला कर दिया, अभेंद्र चिरंजीवी का सामना करने लायक ताकतवर नहीं था, लेकिन निहारिका और अभेंद्र मिलकर चिरंजीवी का सामना कर प् रहे थे, लेकिन जल्दी hi चिरंजीवी उन दोनों पैर बहरी पड़ने लगा, अभेंद्र घायल हो चुक्का था,

तभी वह दत्त आ गया और चिरंजीवी पैर हुम्ला किया और उसे घयल क्र दिया, इसक अमोका पाकर निहारिका और अभेंद्र वह से निकल गए, और कुछ देर में दत्त भी उनके पीछे चला गया,

इधर देव भवर सिंह और भैरव से अकेले लड़ रहा था, अब युद्ध तलवारो से हो रहा था, तलवार चलने में देव बहुत hi फुर्तीला था, और खास बात थी की देव पैर जो घाव लगता उसके घाव तुरंत भर जार हे थे, लेकिन भवर सिंह और भैरव के घाव नहीं भर रहे थे, उनके खून भी रहा था, तभी सात्विक ने एक शक्ति का हुम्ला देव पैर किया जिससे उसका शरीर बांध सा गया, जिसका मौका पाकर भवर सिंह ने तलवार के अनेको वॉर देव पैर क्र दिए,

देव ने अपनी पूरी ताकत लगाई और सात्विक की शक्ति को तोड़ दिया, शक्ति टूट ते hi भवर सिघ घबरा कर पीछे हो गया,

जब युद्ध को बहुत लम्बा समय हो गया और देव अब भी काबू में नहीं आ रहा था तो भैरव ने अपनी कमर पैर से एक तलवार निकली, तलवार की चमक से किसी की भी आँखे चुंधिया जाये, उस तलवार को लेकर भैरव देव के सामने पंहुचा और उस पैर वॉर किया, कुछ देर तो देव बचता रहा लेकिन एक वॉर देव की छाती को चीरता चला गया, देव को ऐसे घाव बहुत लगे थे लेकिन वो हर बार भर जाते थे, लेकिन इस तलवार का दिया हुआ घाव नहीं भरा और देव को भयंकर दर्द भी हुआ, देव दर्द से चीख उठा, maaaaaaaaaaaaaaaaaa

अब तक वह चिरंजीवी, भानु शम्भू ज्वाला और सूरज भी वापस आ चुके थे, देव को ऐसे घायल देख क्र वो भी चौंक गए,

जिसे कोई घाव नहीं लगता था उसके शरीर पैर इतना बड़ा घाव कैसे बन गया,

तभी भैरव ने दूसरा वॉर किया और उसकी कमर को चिर दिया, देव के शरीर से खून की नदी सी भेने लगी, देव दर्द से कराह रहा था,

सात्विक- ये ये कैसे किया आपने, ये हथियार किस चीज का बना ह,

भैरव- ये hi वो हथियार ह जो किसी की भी जान ले सकता ह, और ये तलवार अब इस देव की जान लेगी,

तभी दत्त के दहाड़ने की आवाज गूंज गई, उसकी दहाड़ इतनी तेज थी की वह खड़े सब लोगो का दिल दहल गया, दत्त की आवाज से भैरव भी एक पल के लिए बोखला गया,

दत्त पूरी राफ्तेर से डोडा चला आ रहा था और उसके उप्पेर बैठी थी निहारिका, उसे देख क्र हारक ो अचम्भित सा देखता रह गया, लोग सामने से हैट ते चले गए, निहारिका करी बा रही थी, भवर सिंह ने उस पैर हुम्ला करना चाहा लेकिन तभी एक धमाका हुआ और चारो तरफ धुआँ धुआँ हो गया, किसी को कुछ नहीं दिख रहा था,

सात्विक ने तुरंत अपनी शक्ति से उस धुए को हटाया तो सब चौंक गए, क्योकि जहा देव घयल पड़ा था अहा अब कोई नहीं था, निहारिका देव को दत्त पैर बैठा केर वह से बिजली की तरह दौड़ गई,

भवर सिंह- ये क्या हुआ, ये धुआँ कैसे आया,

सात्विक- भौमिक यही कही आस पास था,

जी है भौमिक भीड़ में आ चुक्का था, देव पैर हो रहे हमले को रोकने का तरीका धुंध रहा था तभी निहारिका आई तो उसे मौका मिल गया,

चिरंजीवी- हमे उनका पीछा करना चाहिए,

सात्विक- अब उन्हें पकड़ा आसान नहीं ह,

भैरव- उसकी जरुआत hi नहीं ह, वो देव अब नहीं बचेगा, इस तलवार के वॉर से वो जिन्दा नहीं रहे पायेगा,

भवर सिंह और प्रताप सिंह ने अपने सैनिक निहारिका के पीछे लगा दिए थे,

चिरंजीवी- ये तलवार आई कहा से, ऐसे किसी हथियार के बारे में हमे कोई जानकारी नहीं थी,

भैरव- आज इस धरती पैर इससे ज्यादा शक्ति शैली हथियार कोई और नहीं ह, इसके अंदर भगवान् की ऊर्जा बह रही ह, ये किसी भी वास्तु को चिर सकती ह, जो नहीं मर सकता उसे मार सकती ह,

भवर सिंह- लेकिन ये तलवार तो हमारे राजय की ह, इस पैर हमारे राजय को मोहर ह, मैंने तो इसके बारे में कभी नहीं सुना, मेरे राजय में ऐसा हथियार ह और मुझे hi नहीं पता,

सात्विक- क्योकि इसे बने हुए ज्यादा समय नहीं हुआ ह, जहा तक मेरी जानकरी ह ये वो तलवार ह जिससे देव और निहारिका को मारा गया था, मैंने जब देव का अतीत देखा था तो उसे आखरी बार झरने से गिरते देखा था और देव के हाथ में तलवार थी जो उसने उस चिताः के पेट में घुसाई हुई थी, हो न हो जब शक्ति उस देव को मिली तो इस टावर के जरिये वो शक्ति उस चिताः के शरीर में भी गई, और एक ऊर्जा इस तलवार में भी रह गई,

भैरव- सही कहा ऐसा hi हुआ होगा, और इसी शक्ति ने मुझे अपनी तरफ आकर्षित किया था, इस तलवार को हाथ में लेते hi मैं समझ गया था इसके अंदर वही ऊर्जा ह जो तुम सबके अंदर ह, तो ये hi तलवार इन शक्ति धारको का अंत क्र सकती ह,

अब बाकि सब थोड़े घबरा गए थे, लेकिन प्रताप सिंह और रेणुका खुशिया मन रहे थे, सबसे ज्यादा कोई खुश था ो थी रेणुका,

भवर सिंह- राजय में उत्सव मनाया जाये, आज हमने एक बड़े शत्रु को मार गिराया,

परजा शोर मचा कर ख़ुशी जाहिर करने लगी, लेकिन उस भीड़ में कुछ लोग ऐसे भी थे जो बहुत दुखी थे, जिन्हे पता था ये जो हुआ कितना गलत हुआ ह, अब इस राजय के लोगो का क्या होगा, ये राजय बर्बाद हो जायेगा,

उनमे से अमृता और सौमित्र भी ऐसा hi सोचती थी, वो दोनों भी दुखी थी, जब से उन्होंने देव के साथ रिश्ता बनाया था उनके अंदर देव के लिए एक अलग hi प्रेम जग चुक्का था, और जब उन्हें पताचला की उनके बेटो ने उन्ही बेटियों के साथ ऐसा करने की कोशिश की तो वो और टूट गई, लेकिन यहाँ वो कुछ बोल नहीं सकती थी, इसलिए चुप चाप सबके पीछे पीछे रही,

महल में आकर जब सिंघासन पैर बैठने की बरी आई तो वह 3 राजा खड़े थे, भवर सिंह जिसका ये राजय था, प्रताप सिंह जिसने इस राजय को जीत लिया था, और भैरव सिंह जो खुद को पूरी पृथ्वी का राजा मंटा था,

भवर सिंह जैसे hi राजगद्दी की तरफ चला तो भैरव ने उसे रोक दिया,

भैरव- ये राजय मेरा ह, और यहाँ से बैठ क्र मैं पूरी धरती पैर राज करूँगा, सुना ह इसी राजय के लोगो को जिम्मेदारी दी गई थी मेरा इतहास मिटने की, हहहहहहहह अब ये hi राजय मेरी ताकत की पहचान बनेगा,

भवर सिंह बोखला गया, लेकिन वो कुछ कर भी नहीं सकता था, वो पीछे हैट गया, ये देख कर अमरावती और सौमित्र और दर गई, उन्हें अहसास हो गया की अब ये राजय तबाह हो जायेगा,

वही दूसरी तरफ निहारिका देव को लेकर एक जंगल में पहुंची, जहा बाकि लड़कियों को लेकर राजवीर पहले hi पहुंच चुक्का था,

देव को ऐसे घायल और बेसुध देख क्र सभी घबरा गई और सबकी आँखों में आंसू आ गए,

रीवा- ये कैसे हो सकता ह, देव कोई कैसे घायल क्र सकता ह,

निहारिका- मुझे नहीं पता वह क्या हुआ, बस मैं सही समय पैर वह पहुंच गई, वर्ण अनर्थ हो जाता ह,

अभेंद्र- हम यहाँ ज्यादा देर नहीं रुक सकते, हमे यहाँ से निकलना होगा, वो लोग हमारा पीछा नहीं छोड़ेंगे,

राजवीर- लेकिन देव को इस हालत में लेकर कहा जायेंगे, देव को उपचार की जरुरत ह, और हमारे पास छुपने की कोई जगह भी नहीं ह,

अभेंद्र- जगह ह, देव ने पहले hi सब कर दिया था, लेकिन उसके लिए यहाँ से उत्तर दिशा की तरफ चलना होगा, वही देव का उपचार कर पाएंगे,

अभेंद्र की बात सबको सही लगी, देव को अभेंद्र ने एप कंधे पैर उठा लिया, और दत्त आगे का रास्ता देखता रहा की सुरक्षित ह या नहीं,

बाकि सबा पैदल hi चल दिए, कुछ समय चलने के बाद वो सब एक जगह रुक गए, अभेंद्र ने एक पत्थर हटाया और सब उस पत्थर के निचे गुफा में घुस गए,

यहाँ छिपने के लिए अच्छी खासी जगह बाई गई थी, रहने खाने और सोने की ठीक थक व्यवश्ता की गाइट hi,

निहारिका- जल्दी से किसी वैद को बुलाओ,

मैच पहले से hi यहाँ हु महारानी,

सब आवाज सुनकर दर गए, लेकिन जब वो सामने आये तो सबकी जान में जान आई, क्योकि सामने भौमिक जी खड़े थे,

निहारिका- आप यहाँ

भौमिक जी- मैंने hi देव से ये जगह बनवाई थी, आप घाबरिये नहीं, सब ठीक हो जायेगा,

रीवा- आप देव को बचने क्यों नहीं आये

भौमिक जी- क्योकि मैं सही समय पैर सही जगह पहुँचता हु, जब देवी निहिरका वह आई मैं वही था, और वो धुआँ मैंने hi किया था,

निहारिका- भौमिक जी ये घाव, देव के ये घाव कैसे भरेंगे, वो कैसी तलवार थी जिसने देव को घायल क्र दिया,

भौमिक जी- उस तलवार में वही ऊर्जा ह जो आपके और देव के अंदर ह, ये वही तलवार ह जिससे देव ने दत्त को मारा था, और उसी तलवार के जरिये देव की ऊर्जा दत्त के अंदर गाइट hi, मैं कभी सोच नहीं पाया था की उस तलवार में भी ऊर्जा रह जाएगी,

अक्षरा- आप देव को जल्दी ठीक कीजिये न

भौमिक जी अपने साथ औषधीय लेकर आये थे, जिनसे उन्होंने देव का इलाज शुरू क्र दिया था,

भौमिक जी- अब देव को आराम करे दो,

सभी एक साथ एक दूसरे की बहो में सिमटे हुए बैठे थे,

रेवती- मैं उन्हें कभी माफ़ नहीं करुँगी, मेरे माँ बाप ने मेरे सुहाग को मरने की कोशिश की ह,

अमिता- हमारे बाप ने hi अपने बेटे को और हम सबको मरने की कोशिश की ह,

रीवा- सबको सजा मिलेगी, कोई नहीं बचेगा,

कस्तूरी- लेकिन हम उनसे लड़ेंगे कैसे, हम सब एक साधारण इंसान और वो सब इतने शक्ति शैली और अमर इंसान ह,

मनीषा- कितना बुरा समय आया ह, कल रात तक सब कितना अच्छा था और सूरज निकलते निकलते hi सब ख़तम हो गया,

भौमिक जी- अभी तो असली तूफ़ान आना बाकि ह, एक ऐसी परलय जो सब तहश नहश क्र देगी,

निहारिका- ऐसा न कहो भौमिक जी, मैं और नहीं झेल पाऊँगी,

भौमिक जी- आपको hi तो झेला ह महारानी, आपको खुद को मजबूत करना होगा, और बच्चियों सही समय आने का इंतजार करना होगा, तुम सब का कौमार्य भांग हो चुक्का ह न,

इस बात से सबके सर झुक गए,

भौमिक जी- मुझसे मत शर्माओ, मेरे लिए सब कुछ जानना जरुरी ह,

निहारिका- भैया आप और अभेंद्र बहार जाइये और सुरक्षा का ख्याल रखिये,

अभेंद्र और राजवीर बहार निकल गए,

निहारिका- जी सबकी सुहागरात हो चुकी ह,

भौमिक जी- सबके अंदर देव का वीर्य गिरा ह न

निहारिका ने सबकी तरफ देखा, तो सबने है में गार्डन हिला दी सिवाय सुगंधा के

निहारिका- सुगंधा तुम है नहीं बोल रही,

सुगंधा- क्योकि हम एक नहीं हो पाए थे माँ

निहारिका ने डरते हुए भौमिक जी को देखा,

भौमिक जी- ये सही नहीं हुआ, इसका मतलब मुझे अपना यज्ञ पूरा hi करना होगा,

निहारिका- कैसा यज्ञ

भौमिक जी ने मनीषा और सुगंधा को देख क्र बोलै- कुछ लोगो का वापस लाना ह,

भौमिक जी वह से निकल गए, बाकि परिवार देव को घेर क्र बैठ गए,

भवन पूरा में क्या हुआ ये खबर काम्य तक भी पहुंच गाइट hi,

अभिजीत- माँ माँ वापस आ गए, देव को मर दिया गया ह, लेकिन अब राजय पैर किसी भैरव का अधिकार हो चुक्का ह, क्या हमे वापस चलना चाहिए,

काम्य- नहीं अभी नहीं, वह क्या हुआ ह मुझे सब जानकारी ह, अगर हम वह गए तो हालत बदल जायेंगे, अगर सब ठीक रहा तो वो खुद हमे लेने आएंगे,

अभिजीत- माँ मैंने कुछ अजीब सुना ह, वह जो बाते हुई हमारे जासूस ने आकर बताई क्या वो सच ह,

काम्य ने घेरि साँस भरी- है वो सब सच ह,

अभिजीत- तो भवर सिंह मेरे पिता ह,

काम्य- है वो hi तेरे पिता ह,

अभिजीत- फिर तो उस राजय पैर मेरा भी अधिकार हुआ,

काम्य- तुझे अधिकार की चिंता ह, तूने ये नहीं सोचा भवर सिंह मेरे भाई हैं और तू मेरे भाई की संतान ह,



अभिजीत- मुझे इस बात से फरक नहीं पड़ता, मुझे किसी रिश्ते से फरक नहीं पड़ता, आपकी जिंदगी ह आप जिससे चाहो सम्भोग करो, मुझे बस राजपथ चाहिए,
 
अपडेट- 54




कुछ दिन बीत गए, भवन पूरा में भैरव सिंह के आदमी आ चुके थे, वही आदमी जो अब तक उसकी सुरक्षा कर रहे थे, जब वो राजय में आये तो उन्होंने जो आतंक मचाया उसे पूरा राजय दया की भीक मांगने लगे, भवर सिंह अपने hi राजय में भैरव का मंत्र जैसे बन क्र रह गया था, वही प्रताप सिंह भवन पूरा के राजय की लड़कियों को अपनी हवस का शिकार बना रहा रहा था, वो बस निहारिका का नाम लेकर सबको छोड़ रहा था, वही रेणुका भैरव सिंह के लुंड पैर उछाले मर रही थी, अब भैरव रेणुका को किसी जल्लाद की तरह छोड़ने लगा था, वो घंटो तक रेणुका को छोड़ता रहता, रेणुका की हालत ख़राब हो जाती थी लेकिन उसकी हवस बढ़ती hi जा रही थी, वही अमरावती और सौमित्र को अपने hi घर में अपनी इजात बचानी मुश्किल हो रही थी, भानु और संभु दोनों उनके पीछे पड़े हुए थे,

वही सात्विक कुछ परेशां सा अपन धयान में लगा हुआ था,

भैरव ने सात्विक को बुलवाया,

भरिआव- सात्विक तुम इस भोगविलास से इतना दूर क्यों हो, ये जीवन का असीम सुख ह, इससे अलग रह क्र कैसे सुखी रह सकते हो,

सात्विक- महाराज मुझे भोगविलास में कोई रूचि नहीं ह, मैं अपनी शक्ति को भोग में व्यर्थ न करके उसका उपयोग ज्ञान को बढ़ने में करता हु,

भैरव- लेकिन तुम मुझे खुश नजर नहीं आ रहे,

सात्विक- कुछ ह जो मुझे परेशां कर रहा ह,

भैरव- क्या हुआ ह, अब ऐसा कोण बचा ह जो तुम्हे परेशां कर रहा ह,

सात्विक- भौमिक मेरा भाई

भैरव- हाहाहाहाहा भौमिक जो डरकर कही चुप गया ह, वो कायर,

सात्विक- वो कायर नहीं ह, उसके अंदर बहुत शक्ति ह, वो देव खतरे में हो और भौमिक न आये ये ासम्भव ह, देव को मरता देख क्र भी भौमिक सामने नहीं आया, वो चाहता तो देव को बचा क्र ले जा सकता था, लेकिन लेकर नहीं गया, मैंने जब से यहाँ पेअर रखा ह तो ऐसा महसूस किया ह जैसे कुछ बदल रहा ह,

चिरंजीवी- बदल तो गया ह, अब भैरव यहाँ के राजा हैं, और जल्दी hi इस पूरी पृथ्वी के राजा होंगे, मैंने भवन पूरा और प्रतापगढ़ की सेना तैयार भी करनी शुरू क्र दी ह,

सात्विक- ये बदलाव नहीं ह, ऐसा लगता ह जैसे कोई अपनी शक्ति से कुछ बांध रहा ह, मैंने महसूस किया, मैं उसी शक्ति का पता लगाने की कोशिश कर रहा हु,

भैरव- तुम ऐसे hi दर रहे हो, अब ये डरना छोड़ो और उस देव के परिवार की औरतो का की खोज करो, मुझे वो सब चाहिए, और वो निहारिका किसी भी कीमत पैर चाहिए,

सात्विक- ठीक ह महाराज, मैं उनकी खोज करता हु, अपनी तंत्र विद्या से उनके बारे में जानकारी निकलता हु,

सात्विक वह से चला गया, उसके पीछे प्रताप सिंह भी चल दिया,

भैरव- चिरंजीवी युद्ध की तैयारी करो, हम दिग्विजय पैर निकलेंगे, ये पूरी पृथ्वी हमे अपने अधीन करनी ह,

चिरंजीवी- सेना तैयार हो रही ह, जल्दी hi पूरी सेना तैयार हो जाएगी, आस पास के राजा भी खुद हमारे साथ मिलने आ रहे हैं, वो हमे मित्रता रखना चाहते हैं,

भैरव- हम किसी से मित्रता नहीं करते, वो सब हमारे गुलाम बनेंगे,

प्रताप सिंह सात्विक के पीछे पीछे उसके घर पहुंच गया,

सात्विक- प्रताप सिंह तुम यहाँ,

प्रताप सिंह- सात्विक जी मुझे आपसे कुछ प्राथना करनी ह,

सात्विक- है बोलो

प्रताप सिंह- मैंने हमेशा से निहारिका को चाहा ह, लेकिन वो मुझे hi मिली फिर मैंने अमरता चाही लेकिन वो भी मुझे नहीं मिली, मेरे हिस्से कुछ नहीं आया,

सात्विक- ये तो नियति ह

प्रताप- लेकिन आप नियति को बदल सकते हो, आप जो बोलोगे मैं करूँगा, बस मुझे ताकत और अमरता चाहिए, और साथ में निहारिका,

सात्विक- इस जनम में तो ये संभव नहीं ह,

प्रताप सिंह- आप जो चाहे कीजिये चाहे मुझे मर क्र अगला जनम दे दीजिये, बस मुझे ताकतवर और मर बना दो,

सात्विक- कोई किसी को अमर नहीं बना सकता, लेकिन ताकत जरूर दिला सकता हु,

प्रताप सिंह- वो hi दिलवा दो और साथ में निहारिका, वचन दीजिये मुझे,

सात्विक- ठीक ह,

प्रताप सिंह खुश होता हुआ चला गया,

सात्विक मुस्कुराया और खुद से hi बोलै- भविष्य में क्या होगा किसे पता और ये अभी से अपना भविष्य तय करने आया ह,

फिर सात्विक अपने धयान में बैठ गया, तभी उसकी आँख खुली और वो खड़ा हो गया,

सात्विक खुद से hi- भौमिक को भविष्य दीखता ह, तो उसे देव की मृत्यु तो दिखी होगी फिर उसने उसे पहले hi देव को क्यों नहीं बचाया, क्या भौमिक चाहता था ऐसा हो, क्या इसमें उसकी कुछ योजना थी, कही देव जीवित तो नहीं ह,

सात्विक तुरत धयान में बैठ गया और देव पैर धयान लगाने लगा, लेकिन वो पहले की तरह एक तेज रौशनी उसे आगे बढ़ने hi नहीं दे रही थी,

सात्विक ने आँखे खोल दी- वही शक्ति वही ऊर्जा मुझे रोक रही ह, मुझे बाकि लड़कियों पैर धयान लगाना होगा,

सात्विक ने बाकि लड़कियों पैर धयान लगाया और कुछ देर में hi उसे नजर आई एक गुफा जिसके अंदर वो झांक नहीं प् रहा था, मतलब उस गुफा को भौमिक जी ने अपनी शक्ति से सुरक्षित किया हुआ था,

काफी महेनत करने के बाद सात्विक को राजवीर दिख गया जो एक जंगल में चुप चुप क्र जार है था, और कुछ दुरी बाद वो दिखना बंद हो गया मतलब वो उस गुफा के दायरे में आ गया ह,

सात्विक- मतलब वो सब एक साथ हैं और जंगल में हैं,

इधर देव के घाव भरने लगे थे, जो औषधीय भौमिक जी देकर गए थे उनका असर हो रहा था, लेकिन देव पूरी तरह होश में नहीं आ रहा था, ये औषधियों का असर था, देव आँखे खोलता फिर सो जाता, बाकि परिवार बस उसे hi घेरे हुए बैठे रहता, कोई भी ज्यादा बात नहीं करता था, अभेंद्र और राजवीर बस सुरक्षा देखते रहते, और मनीषा सबके खाने पिने का धयान रखती, बात कोई नहीं क्र रहा था, काफी दिन हो चुके थे इस ख़ामोशी में अब ये शांति सबको कथन लगी थी,

इस शांति को मनीषा ने भांग किया,

मनीषा- क्या आप सब ऐसे hi चुप रहेंगी, क्या अब ये हस्ता खेलता परिवार परिवार नहीं रहा,

सबने मनीषा को देखा, और अपना सर झुका लिया, फिर से शांति हो गई, लेकिन रीवा ने इस शांति से निकलने की हिम्मत दिखाई,

रीवा- मैं याय ु कहु हम सब अपने अपने रिश्तो में उलझ गए हैं, जब तक ये रिश्ते बंद दरवाजे के अंदर थे तब ये रिश्ते बहुत प्यारे लग रहे थे, हम अपने रिश्तो के लिए कुछ भी करने के लिए तैयार थे, लेकिन जैसे hi ये समाज के सामने खुले वैसे hi हम सबकी हिम्मत भी टूट गई, और हम बस खोखले बन क्र रह गए,

मनीषा- क्या आप सबको पछतावा ह आपने जो किया गलत किया, ये रिश्ते गलत बनाये

सबने मनीषा को देखा और एक साथ बोल पड़ी- बिलकुल नहीं

मनीषा – फिर किस बात का दर ह आपको, उस समाज का जो कभी आपका था hi नहीं, या उस परिवार का जिसने खुद आपका अपमान किया ह,

अक्षरा- हमे किसी समाज का डारन hi ह, और वो अपने जिन्हों ेखुद हमारी इज्जत नीलम की ह उनके लिए क्या सोचेंगे,

मनीषा- फिर ये मातम क्यों ह, मुझे नहीं पता

आप सबके रिश्ते सही हैं या गलत, किसी मज़बूरी में बने या प्यार में, लेकिन अगर कोई रिश्ता बनाया ह तो जमा जन्मो तक वो रहता और प्यार बना रहना चाहिए,

सभी में एक जोश एक ऊर्जा सी आ गई,

निहारिका- ये सब अपने रिश्ते की वजह से शर्मिंदा या परेशां नहीं ह, इनकी परेशानी का कारन मैं हु, मेरा रिश्ता ह, मुझे माफ़ कर देना मेरी बच्चियों, मेरी वजह से आज ये दिन देखना पड़ा, मैंने देव के साथ रिश्ता बनाया एक माँ बेटे कके रिश्ते को कलंकित किया, लेकिन ये माफ़ी मैं सिर्फ तुम सबसे मांग रही हु, क्योकि वो तुम्हारा पति ह, वर्ण मुझे अपने किये पैर कोई पछतावा नहीं ह, मैं खुद पैर गर्व महसूस करती हु की मैं देव की हु, लेकिन मैं उत्तम सबकी गुन्हेगार भी हु,

रीवा- ऐसा किसने कहा आपको की आपने कुछ गलत किया ह, हम सबने आपको जीवन भर दुःख और तकलीफ उठाते देखा ह,

अक्षरा- आपको जीवन भर प्यार नहीं मिला,

अमिता- पति के होने के बाद भी आप किसी विधवा की तरह रही हैं, आपको भी ख़ुशी का अधिकर ह,

कस्तूरी- हममे से किसी को आपके रिश्ते से कोई ऐतराज नहीं ह,

रेवती- मैंने तो खुद अपने सामने अपनी माँ को देव के साथ सम्भोग करते देखा ह, मैंने जो उत्तेजना उस दिन खुद में महसूस किट hi वैसी कभी नहीं की, इसलिए मेरे लिए इसमें कोई ऐतराज नहीं ह

अक्षरा- बस समझ नहीं आ रहा आपको माँ कहे या बहन या अपनी सौतन

अक्षरा की बात पैर सबकी हसी छूट गई,

निहारिका ने सबको गले से लगा लिया,

मनीषा- कमल का परिवार ह ये, कितने अजीब रिश्ते हैं यहाँ लेकिन फिर भी कितना प्रेम ह,

सोमिया- तेरा प्यार भी तुझे मिलेगा,

कस्तूरी- क्या ये भी देव से

मनीषा- नहीं नहीं, देव मेरे भाई हैं, मेरे दोस्त हैं, उनके लिए मैं अपना सबकुछ न्योछावर कर सकती हु, लेकिन सम्भोग के बारे में कभी नहीं सोच पति,

रीवा- क्योकि इसके दिल में अभेंद्र बसा हुआ ह, और जिसके दिल में सच्चा प्यार बसा हो उस दिल में कोई और जगह बना hi नहीं सकता,

मनीषा शर्मा गई,

अमिता- ये हमे तो इतना ज्ञान दे रही थी और खुद कभी अभेंद्र से बोल नहीं पति,

तभी वह अभेदंरा आ गया,

अभेंद्र- माँ आप सबको कुछ चाहिए तो नहीं न, मैं महल की तरफ जार है हु जानकारी निकलने, आने में थोड़ी देर होगी

अमिता ने मनीषा को कन्धा मारा- बता दे न कुछ चाहिए तो,

मनीषा शर्मा गई,

निहारिका- थोड़ा धयान से जाना बीटा, किसी की नजर में मत आना बस

अभेंद्र आज्ञा लेकर चला गया,

इधर काम्य ने एक गुप्तचर भवर सिंह के पास भेजा अपनी जानकरी लेकर,

गुप्तचर ने काम्य का लिखा हुआ पत्र भवर सिंह को दे दिया और वह से चला गया,

भवर सिंह पत्र पढ़ने लगा,

आप वापस आ आगये ये जानकर बहुत ख़ुशी हुई मुझे, आप मुझे अकेला छोड़ क्र उस गुफा मैं चले गए, मैं जानती हु आपने मेरे भले के लिए hi मुझे आदर नहीं जाने दिया होगा, लेकिन वापस आकर आपके बेटो ने मेरा बहुत अपमान किया, मुझ ेमहल से निकल दिया, और वो देव वह का राजा बन बैठा, तो मेरे पास कोई रास्ता नहीं बचा और मैंने आपके राजय पैर हुम्ला कर दिया, लेकिन उस देव ने हमे हरा दिया,

अब आप वापस आये हैं तो मुझे लगा आपको अपनी प्यारी बहन की याद आ रही होगी, आपका बीटा भी आपको याद कर रहा ह, अब तो पुरे समाज को पता चल चुक्का ह अभिजीत आपका बीटा ह, मैंने अभिजीत को भी बता दिया ह, वो खुश ह इस बात से, मैं आपकी प्रेमिका आपका इंतजार कर रही हु, लेकिन जब तक आप लेने नहीं आएंगे मैं नहीं आ सकती, मैं आपका इंतजार कर रही हु,

आपकी प्यारी बहन और प्रेमिका काम्य

पत्र पढ़ क्र भवर सिंह सोच में पद गया, वॉक इस तरह काम्य को यहाँ लाये, उसका खुद यहाँ कोई अधिकार नहीं बचा था, लेकिन वो काम्य से प्रेम भी बहुत करता था,

भवर सिंह ने तुरंत अपना घोडा लिया और काम्य से मिलने निकल पड़ा, सबको खबर मिली की भवर सिंह महल से बहार गया ह तो संभु और भानु अमिता और सौमित्र के कमरे की तरफ चले गए,

संभु- यार इस भवर सिंह की बेटियों को तो नहीं छोड़ पाए लेकिन इसकी पत्नियों को जरूर छोड़ेंगे, तभी मुझे सकूं मिलेगा, इस भवर सिंह की वजह से हमारे कितने भाई मरे गए, इसके परिवार की औरतो को तो मैं छोडूंगा जरूर,

भानु- सही कहा चलो फिर आज इनकी छूट फाड़ते हैं,

दोनों भाई चल दिए, अमरावती और सौमित्र दोनों एक hi कमरे में बैठी हुई थी, क्योकि जब से देवा ुर परिवार से महल से गया था, उन्हें किसी पैर यकीन नहीं था, खुद अपने hi बेटो पैर यकीन नहीं रहा था,

अमरावती- सौमित्र हमारा क्या होगा, मुझे तो लगता ह अब हमारा कोई नहीं ह यहाँ, हम जिसके दम पैर यहाँ राज क्र रहे थे अब उनका hi राज ख़तम हो चुक्का ह, वो खुद उस भैरव के गुलाम बने हुए हैं, और हमारे बेटे वो तो अपनी hi बहेनो की इज्जत लूटने वाले थे,

सौमित्र- उनका बाप hi पहले से अपनी बहन को छोड़ता हुआ आ रहा था, उसे 3-3 बच्चे पैदा क्र दिए, मुझे हमेशा से शक था की काम्य इतना क्यों महाराज से चिपकी रहती ह, लेकिन कभी ऐसे नहीं सोच पाई,

अमरावती- देव ने भी तो वही किया, उसने तो अपनी माँ hi छोड़ दी,

सौमित्र- हमने hi उसे ये रास्ता दिखाया, हम भी तो उसकी माँ जैसी थी हम खुद उसे चुद गई, और अब हमारी बेतिया भी

अमरावती- कसिए रिश्ते हो गए हैं हमारे परिवार के,

सौमित्र- ये सब भवर सिंह की गलती ह,

दोनों बात क्र hi रही थी तभी भानु और संभु अंदर घुस आये,

अमरावती- ये क्या बतमीजी ह, तुम लोग ऐसे यहाँ क्यों घुस आये,

भानु- हम आप दोनों के पास आये थे आपका दुःख बाटने,

सौमित्र- हमे क्या दुःख ह, हमे कोई जरुआत नहीं ह तुम्हारी,

संभु- तुम लोगो की बेतिया यहाँ से चली गई, उनकी शादी होने वाली थी हमारे साथ, हम आपके दामाद बनने वाले थे, लेकिन उस देव की वजह से सब बर्बाद हो गया लेकिन देखो आज हम फिर साथ हैं, दामाद न सही कोई और रिश्ता hi बना लेते हैं,

अमरावती- कहना क्या चाहते हो,

भानु- भवर सिंह महल में hi ह, हमने उसे कही जाते देखा ह, और वोन ा जाने कब से तुम दोनों को सम्भोग का सुख नहीं दे प् रहा होगा, हमारे पास उसे कही बड़ा और मोटा हथियार ह, तुम दोनों चाहो तो उसे खेल सकती हो,

अमरावती और सौमित्र घबरा गई और गुस्से में लाल हो गई,

सौमित्र- चले जाओ यहाँ से वर्ण मैं सेनिको को बुला लुंगी,

संभु- अह्हह्ह्ह्ह सैनिक, अब तो सब सैनिक हमारे hi गुलाम ह, और तुम तो जानती हो कोई भी हमे कुछ नहीं कर सकता,

तभी पीछे से सूरज और ज्वाला आ गए,

सूरज- ये क्या हो रहा ह

अमरावती और सौमित्र अपने बेटो के पास दौड़ क्र पाहकः गई,

अमरावती- बीटा देखो ये दोनों क्या बकवास कर रहे हैं,

सूरज- तुम लोग निकल जाओ यहाँ से वर्ण मैं महाराज भैरव से शिकायत क्र दूंगा,

भानु- क्र देना शिकायत, हमे जो चाहिए वो तो हम लेकर hi रहेंगे,

दोनों हस्ते हुए वह से निकल गए,

ज्वाला- माँ क्या चाहते थे वो,

सौमित्र- हमारी इज्जत

Jwala-ijjat ह hi कहा माँ, इज्जत तो आपकी बेतिया लुटवा चुकी हैं, अब तो बस इन्ही लोगो का सहारा ह, इनके द्वारा hi हम कामयाब हो सकते हैं, ये लोग जब दूसरे राज्यों को जीतेंगे तो उन राजयो को चलने के लिए कोई तो पीछे चाहिए होगा, तो हम लोग किसी न किसी राजय के राजा बन जायेंगे, अगर उसके लिए आपको इन लोगो को खुश करना भी पड़े तो कर देना,

सूरज- खुश करना ह तो भैरव और चिरंजीवी को करना वही कुछ कर सकते हैं, इन दोनों के हाथ में कुछ नहीं ह,

अपने बेटो की बात सुन क्र अमृता और सौमित्र का मुँह खुला रह गया, उन्हें यकीन hi नहीं हो रहा था उनके बेटे ऐसी बाते भी बोल सकते हैं,

सूरज और ज्वाला वह से चले गए, अमरावती और सौमित्र अपना सर पकड़ क्र बैठ गई,

भवर सिंह काम्य के पास पहुंच गया, भवर सिंह को देखते hi काम्य उससे लिपट गई, और उसे चूमने लगी, भवर सिंह भी पागलो की तरह काम्य को चूमने लगा,

काम्य- आप सुरक्षित हैं, मैं कितना घबरा रही थी, आपको देख क्र बहुत ख़ुशी हुई,

भवर सिंह- मुझे भी तुम्हे देख क्र ख़ुशी हुई,

काम्य- क्या आप अब अमर हैं,

भवर सिंह- है अब मैं अमर हु,

काम्य- लेकिन अब आप राजा नहीं रहे,

भवर सिंह- वो भी बन जाऊंगा, वो भैरव जल्दी hi पृथ्वी को जीतने निकल जायेगा फिर ये राजय मेरा hi होगा,

काम्य- और हमारा बीटा

भवर सिंह- उसे यहाँ का राजा बना देंगे, क्योकि अब तो उस गद्दी पैर मैं hi बैठूंगा हमेशा के लिए,

काम्य के चेहरे पैर अजीब से भाव थे, लेकिन उसने भवर सिंह के सामने वो भाव आने नहीं दिए,

काम्य- मैं भवनपुरा कब जाउंगी,

भवर सिंह- आज hi मेरे साथ चलो,

काम्य- उस राक्षश का कुछ पता चला क्या,

भवर सिंह- अब उस राक्षश का कोई दर नहीं ह, अब वो मुझे नहीं मर सकता, और भैरव उससे भी ज्यादा ताकतवर ह,

काम्य सोच में दुब गई,

वही सात्विक भैरव के पास पंहुचा,

सात्विक- महाराज वो जिन्दा ह,

भैरव- कोण जिन्दा ह

सात्विक- वो देव ेओ जिन्दा ह,

भैरव- ये नहीं हो सकता, वो जीवित नहीं हो सकता, तुमने उसे खुद देखा ह,

सात्विक- नहीं लेकिन मैंने उसकी ऊर्जा को महसूस किया ह, मैंने उस जगह को देखा ह जहा उसके परिवार की लड़किया छुपी हुई ह, हो न हो देव भी वही ह, अगर वो जिन्दा ह तो

भैरव- अगर वो जिन्दा ह तो इस बार उसे ऐसी मोत दूंगा की कोई बचा नहीं पायेगा, मुझे वह लेकर चलो,

सात्विक- मैं बस उस जंगल को देख प् रहा हु लेकिन उस जगह तक नहीं पहुंच प् रहा हु,

भैरव- वो लड़किया मुझे यहाँ चाहिए किसी भी कीमत पैर, मैं अपनी विजय यात्रा पैर जाने से पहले उन सबके साथ मजे करना चाहता हु,

सात्विक- मैं कोशिश करता हु,

सात्विक ने फिर से धयान लगाना शुरू किया और इस बार उसके सामने आ गया अभेंद्र,

सात्विक- मिल गया हमारी मंजिल का रास्ता,

सात्विक ने तुरंत संभु और भानु को बुलवाया और उन्हें अभेंद्र का पता बता दिया की वो राजय में कहा छिपा हुआ ह,

भानु और संभु तुरंत वह के लील्ये निकल गए,

भौमिक जी यज्ञ कर रहे थे,

भौमिक जी खुद से hi- मुझे माफ़ करना बच्चो लेकिन ये बहुत जरुरी ह, तुम सबको बहुत तकलीफ का सामना करना पड़ेगा, लेकिन ये बहुत जरुरी ह, अब अंतिम युद्ध होगा और ये युद्ध युगो युगो तक याद रखा जायेगा,

भौमिक जी आहुति देने लगे,

अभेंद्र राजय की पूरी जानकारी लेकर वापस जा रहा था, लेकिन इस बार उसके पीछे भानु और संभु लग चुके थे, अभेंद्र तेजी से बछड़ा चला जार है था, वो जैसे hi गुफा के नजदीक पंहुचा उसने चारो तरफ धयान से देखा और आगे बढ़ने hi वाला था की महसूस हुआ की कोई पेड के पीछे छुपा हुआ ह, उसने तुरंत तलवार निकल ली, भानु और संभु को भी पता चल गया की अभेंद्र ने उन्हें देख लिया ह, तो उन्होंने भी सामने आना सही समझा और अभेंद्र पैर हुम्ला कर दिया, अभेंद्र उन दोनों की ताकत के सामने कुछ भी नहीं था, फिर भी उसने हुम्ला कर दिया और उनका युद्ध होने लगा,

वो अभेंद्र के साथ खिलवाड़ सा करने लगे, अभेंद्र जब थकने लगा वाओ ो दोनों उस पैर तलवार के वॉर करने लगे, अभेंद्र की दर्द भरी चीख पुरे जंगल में गूंज उठी जिसे राजवीर ने भी सुन लिया था, राजवीर ने देखा की भौ और संभु अभेंद्र को मार रहे हैं, राजवीर जल्दी से उनकी तरफ जाने लगा लेकिन उसने उससे पहले निहारिका को सतर्क करना ठीक समझा,

राजवीर जल्दी से अंदर गया, उसे घबराया हुआ देख क्र सभी दर गए,

निहारिका- क्या हुआ भैया

राजवीर- निहारिका भौ और संभु ने अभेंद्र को पकड़ लिया ह, मैं उसे बचने जार है हु, तुम सब यही छुपे रहना, चाहे जो हो जाये हम दोनों वापस आये या न आये लेकिन तुम सब यहाँ से नहीं निकलना,

इतना बोल क्र राजवीर भी बहार निकल गया, अब सभी घबरा गई और सबसे ज्यादा घबराई हुई थी मनीषा, वो बैचेन सी खुद को रोक नहीं प् रही थी, तभी उसके कानो में अभेंद्र की दर्द भरी चीख सुनाई दी, और वो उस चीख में भरे दर्द को सेह नहीं पाई और उसने गुफा का दरवाजा खोल दिया और बहार की तरफ भाग ली, वो अभेंद्र का नाम पुकारती हुई भाग रही थी,

उसके पीछे अक्षरा उसे रोकने को भागी, लेकिन अब तक देर हो चुकी थी, भानु और संभु की नजर में आ चुकी थी, तभी कुछ सैनिक बहार निकल क्र आ गए जो अब तक छुपे हुए थे, उन्होंने मनीषा और अक्षरा को पकड़ लिया, उनकी आवाजे सुनकर बाकि लड़किया भी तलवार लेकर बहार निकल आई, और साथ में था दत्त, लेकिन उनके सामने एक बड़ी सेना कड़ी थी, गुफा का दयवाजा बंद हो गया था, अब तक सात्विक भी वह आ गया और उसने दत्त को अपनी शक्ति में फसा लिया,

और कुछ hi देर में सभी लड़किया सात्विक की पकड़ में आ चुकी थी, वह बस सोमिया बच गई थी जो देव का हाथ पकडे हुए बैठी थी,

निहारिका और लड़कियों ने काफी कोशिश की लेकिन वो सब भानु संभु और सात्विक के सामने काफी कमजोर थी, सात्विक सबको बंदी बना क्र महल की तरफ चल दिया, अभेंद्र और राजवीर को घोड़ो से बांध क्र लेकर चल दिए थे,

सात्विक सभी को पैदल hi राजय के बिच से लेकर जार है था, जिससे राजय के लोग बहार निकल क्र देख रहे थे, भीड़ इकठा हो रही थी, जल्दी hi वो सब लड़किया भैरव के सामने कड़ी थी, तभी वह भवर सिंह और काम्य भी पहुंच चुके थे, साथ में अभिजीत भी था, अमरावती और सौमित्र भी बहार आ चुकी थी,

अभेंद्र और राजवीर जमीन पैर पड़े हुए थे, खून से लथपथ, बाकि सभी लड़किया और निहारिका के हाथ बंधे हुए थे उन्हें चौराहे पैर बांध दिया गया था,

प्रताप सिंह रेणुका सभी वह आ चुके थे,

भैरव- हहहहहहह सात्विक मैंने कहा थान ा देव मर चुक्का ह, अगर वो जिन्दा होता तो इन्हे बचने यहाँ जरूर होता,

सात्विक- हो सकता ह मुझे गलतफहमी हो गई होगी,

भैरव- अब ये सब मेरी दासी बनेंगी,

रेणुका- मैं चाहती हु की ये लड़किया इस बाजार में बेचीं जाये, इन्हे अपनी सुंदरता पैर अभिमान ह न तो इनकी सुंदरता को यहाँ के लोग नोच खाये,

भैरव- जरूर लेकिन उससे पहले ये मेरे निचे आएँगी, अगर जिन्दा रही तो किसी और की होंगी,

अमरावती- ऐसा मत करो, हमारी बेटियों को जाने दो,

चिरंजीवी- इन्हे भी इनके साथ बांध दो, ये हमारा विरोध क्र रही हैं,

सेनिको ने तुरत उन दोनों को भी बाकि सब के साथ बंहद दिया,

निहारिका- अरे कायर अपनी ताकत हम औरतो पैर दिखा रहा ह, अगर तू सच में योद्धा ह तो अपनी ताकत किसी ार्ड को दिखा,

भैरव- कोण ह यहाँ मर्द, दिखा मुझे बुला उस मर्द को, पहले उस मर्द को hi मरूंगा फिर तेरी इज्जत की धजिया उड़ाऊंगा,

रेणुका- सबसे पहले इस रेवती की इज्जत उतरी जाये और इसकी छूट को मेरे बेटे फाड़ेंगे, और यही सबके सामने पूरी परजा के सामने इसकी इज्जत उतरी जाएगी, और फिर बाकि सैनिक इसके साथ मजे कर्नेगे,

संभु- ये तो हमारी बहन ह, आपकी बेटी ह,

रेणुका- तभी तो इसकी सजा मैं खुद तय कर रही हु,



भैरव- वह मजा आएगा ये खेल देखने में तो, जल्दी से खेल शुरू करो उसके बाद मुझे वो लड़की चाहिए क्या नाम ह इसका रीवा
 
अपडेट- 55



अभेंद्र- मेरी बहन का नाम भी अपनी गन्दी जबान से लिया तो जान से मार दूंगा,

अभेंद्र की बात पैर सब जोर जोर से हसने लगे,

चिरंजीवी- ये खुद अपनी मृत्यु के इतने करीब ह और हमे मरने की बात कर रहा ह,

रीवा- वो कर सकता ह, क्योकि वो जनता ह तुम सबको मरने वाला आएगा,

संभु- तू नहीं जानती क्या की हमे कोई नहीं मार सकता, हम अमर हैं,

अक्षरा- अबे गधे के बच्चे तू शायद ये नहीं जनता की इस धरती पैर जनम लेने वाला कोई अमर नहीं ह, जो जन्मा ह वो मरेगा hi,

भानु- हमे शक्तिया मिली हुई हैं समझी,

निहारिका- तुम्हे जो शक्तिया मिली ह उसमे तो ऐसा कुछ कहा hi नहीं गया की उन्हें पाने वाला अमर हो जायेगा,

निहारिका की बात पैर सब चौंक से गए और एक दूसरे का मुँह देखने लगे,

चिरंजीवी – हमे मरने वाला अब कोई नहीं बचा ह, हम सब एक हैं अब हमे मरने की हिम्मत किसी में नहीं ह, हम सब हैवान हैं, और हवन को कोई नहीं माँ सकता,

अभेंद्र हसने लगा, हहहहहहहा

अभेंद्र- तुमने अभी असली राक्षश नहीं देखा, जब उसे देख लोगे तो तुम्हारी ये गलतफहमी दूर हो जाएगी,

राक्षश का नाम सुनकर सबके दिल में एक भय सा उठ गया,

भैरव- कहा ह राक्षश, कोण ह राक्षश, तू जनता ह उसे तो बुला उसे,

अभेंद्र- आएगा जरूर आएगा,

चिरंजीवी ने अभेंद्र की गार्डन पकड़ी और हवा में उठा लिया,

चिरंजीवी- बता कहा ह राक्षश वर्ण सब यही मरोगे,

अभेंद्र कुछ नहीं बोलै तो संभु ने राजवीर के पेट में तलवार घुसा दी, राजवीर की हालत देख क्र साडी लड़किया चीख पड़ी,

चिरंजीवी फिर से चीखा- बता कहा ह राक्षश

अभेंद्र- हम तो यहाँ मरने hi आये हैं, पैर तुम सबका क्या होगा इसका अंदाजा भी तुम सब नहीं लगा सकते,

चिरंजीवी- हमारी चिंता छोड़ और अपनी सोच

भानु अमिता के पास गया और उसकी गार्डन पैर तलवार रख दी, तभी एक आवाज गुंजी- रुक जाओ,

सबने आवाज को देखा तो देव चला आ रहा था और साथ में थी सोमिया

सोमिया को वह देख क्र सौमित्र छिलाई- बेटी तू चली जा यहाँ से, ये हैवान हैं मर देंगे तुझे,

देव को वह देख क्र सभी हैरान थे, की ये जिन्दा कैसे ह,

सात्विक- मैंने कहा था महाराज वो जिन्दा ह,

देव को जिन्दा देख क्र भैरव भी चौंक गया,

काम्य - ये तो जिन्दा ह, अगर ये जिन्दा ह तो सब बर्बाद होगा, जरूर होगा,

भवर सिंह- कुछ नहीं होगा, ये कुछ नहीं कर सकता, इसके सामने हम सब खड़े हैं,

देव- इन सब को जाने दो, मैं तुम्हारे सामने हु, जो करना ह मेरे साथ करो,

भैरव- तेरे साथ होगा hi लेकिन तेरे सामने भी होगा, तेरे सामने hi इन सबकी इज्जत नीलम होगी,

रेणुका- इनकी क्या इज्जत जो औरत अपने hi बेटे से चुदवाती हो उसकी भला क्या इज्जत,

रेवती- और जो औरत अपनी hi बेटी को उसके बाप से छुड़वाना चाहती हो उस औरत की इज्जत होती ह क्या,

रेणुका ने एक थपड रेवती को मारा, देव ने गुस्से में आग बबूला होकर रेणुका को देखा, देव की आँखों में खून उतर रहा था, जिसे देख रेणुका घबरा सी गई,

भवर सिंह- इन सभी ने इस राजय की मर्यादा तोड़ी ह, समाज के नियम तोड़े हैं, जैसे निहारिका को नंगी घुमाया था वैसे hi इन सभी को नंगी घूमना छाइये,

अक्षरा- ताकि तू अपनी hi बेटियों को ननगा देख क्र अपनी हवस को शांत कर सके,

काम्य- बकवास बंद क्र अक्षरा, चुप रहेगी तो मैं तुझे बचा लुंगी,

अक्षरा- तुम्हरे जैसी माँ और इसके जैसे बाप के जिन्दा होते हुए मैं जिन्दा नहीं रहना चाहूंगी, मेरी माँ निहारिका हैं, और मेरे पति देव हैं,

काम्य- पति?

अमिता जोर से हसी हहहहहहह

अमिता- तू अपने भाई से चुद क्र 3-3 बच्चे पैदा कर सकती ह, तो क्या हम अपने भाई से शादी भी नहीं कर सकती,

काम्य गुस्से में आगे बढ़ी और तलवार उठा क्र अमिता के पेट में घुसा दी, अमिता दर्द से चीख पड़ी, उसी के साथ बाकि लड़किया भी तड़प उठी,

देव- nhiiiiiiiiiiiii, काम्य तुझे ऐसी मोत दूंगा जिससे आत्मा दुबारा जनम लेने से भी डरेगी,

काम्य- तू कुछ नहीं कर पायेगा

देव आगे बढ़ा तभी चिरजीवी भानु और संभु तीनो ने एक साथ उस पैर हुम्ला कर दिया, देव उनसे लड़ने लगा, लेकिन देव थोड़ा कमजोर महसूस कर रहा था, लेकिन वो लड़ रहा था,

तीनो भाई उस पैर तलवार के वॉर किये जा रहे थे, आज उसके घाव देरी से भर रहे थे, भैरव बड़े आराम से सब देख रहा था, इधर अमिता जमीन में गिर गई थी,

अमरावती- काम्य रंडी वैश्य तुझे कभी शांति नहीं मिलेगी, तू जन्मो जन्मो तक ऐसे hi रंडी बनकर घूमेगी,

काम्य गुस्से में आगे बढ़ी और अमरावती की गार्डन पैर तलवार चला दी, अमरावती वही तड़प तड़प क्र मर गई,

भवर सिंह सब देख रहा था, वो काम्य को रोकना चाहता था लेकिन बाकि सब लोग इसमें आनंद ले रहे थे तो वो चुप रह गया,

भैरव- बस अगर ऐसे hi सबको मर दिया तो फिर मैं इन सबका मजा के लूंगा, ये सब मेरी प्यास बुझाएंगी, और सबसे पहले ये कामुक वाली, ये भी बड़ी सूंदर ह,

भैरव का इशारा कस्तूरी की तरफ था,

कस्तूरी ने देव की तरफ देखा जो आशय सा तीनो भाइयो से लड़ रहा था, क्योकि सात्विक अपनी शक्तियों से उसे कमजोर क्र रहा था, कस्तूरी की आँखों में आंसू आ गए,

कस्तूरी – मेरे इस शरीर पैर बस देव का अधिकार ह, कोई और इस शरीर को छू नहीं पायेगा,

कस्तूरी ने सैनिक को धक्का दिया और उसकी तलवार चीन क्र अपने पेट में घुसा ली, देव की आँखों में आंसू भर आये,

निहारिका- शाबाश बेटी, इन जानवरो के हाथ हमारे शरीर को नहीं छू पाएंगे,

निहारिका की बात सुनते hi सभी लड़कियों में जोश आ गया और सेनिको की तलवारे चीनी और देव को बचने के लिए कूद पड़ी, चिरंजीवी भानु और संभु के साथ प्रताप सिंह और भवर सिंह भी आ गए,

लड़किया जिर राफ्तेर से तलवार चला रही थी उसे देख क्र हर कोई हैरान था, राजय की परजा कड़ी सब तमाशा देख रही थी,

निहारिका ने लड़ते हुए परजा से गुहार लगाई,

निहारिका- आप सब लोग कायरो की तरह क्यों खड़े हैं, ये लोग आपकी राजकुमारियों को मर रहे हैं, इस राजय की इज्जत को तर तर क्र रहे हैं, और आप लोग तमशा देख रहे हैं,

लेकिन निहारिका की गुहार का कोई परिणाम नहीं हुआ, बल्कि भीड़ में से एक आवाज आई, तुम लोगो के साथ ऐसा hi होना चाहिए, तुम सब रंडिया हो,

ये सब सुनकर देव गुस्से में भर आया और उसने पूरी ताकत से हुम्ला किया और सबको इधर उधर धकेल दिया, देव के हाथ में तलवार आ गया ुर वो तलवार से सेनिको को काटने लगा, भवर सिंह और चिरंजीवी पूरी ताकत लगा रहे थे देव को रोकने के लिए लेकिन रोकना मुश्किल हो रहा था, लेकिन तभी एक सैनिक ने सोमिया के सीने में तलवार घुसा दी,

किसी के पास उसके लिए रोने का भी समय नहीं था, सौमित्र दौड़ क्र सोमिया के पास गई, लेकिन रेणुका ने उसे पहुंचने नहीं दिया और उसे बिच में hi मर दिया, रेणुका मुस्कुराती हुई रेवती की तरफ बढ़ी इधर काम्य कस्तूरी की तरफ बढ़ी, रेणुका ने रेवती पैर हुम्ला कर दिया, वही काम्य ने कस्तूरी पैर,

दो माँ अपनी hi बेटियों को मरने पैर उतारू थी,

तभी वह कड़ी प्रेमलता ने भी तलवार उठाई और सुगंधा की तरफ चल दी, एक निहारिका थी जो अपने बच्चो को बचने के लिए खुद मरने को भी तैयार थी वही ये तीन माये थी जो अपनी hi बेटियों को मरना चाहती थी,

इधर भैरव देव के सामने आ गया और उसने देव पैर इतने वॉर किये की देव खून से लेथ पथ हो गया, भैरव ने देव को सम्हालने का मौका hi नहीं दिया, देव खून से लथपथ जमीन में गिर पड़ा, और उसकी आँखों के सामने काम्य ने कस्तूरी के शरीर पैर तलवार के अनेको वॉर क्र दिए और उधर रेणुका ने रेवती को लहू लुहान कर दिया, सुगंधा प्रेमलता से लड़ रही थी, लेकिन वो मन से हर रही थी, उसकी आँखों से आंसू बहे जा रहे थे, तभी उसने अपनी तलवार फेंक दी और जोर से रट हुए चिल्लाई

सुगंधा- बस माँ बस मैं आपसे नहीं लड़ सकती, मैं अपनी माँ को नहीं मार सकती, देव मैं जार hi हु, इस जनम में मैं तुम्हारी नहीं हो सकीय लेकिन मैं अगले जनम में सिर्फ तुम्हारी रहूंगी, मैं फिर आउंगी देव,

सुगंधा की आवाज सुनकर देव उठे लगा तो भैरव ने उसे अपने पैरो से दबा लिया,

और प्रेम लता ने सुगंधा के पेट में तलवार उतर दी,

तभी एक आवाज गुंजी देव खुद को आजाद क्र तोड़ दे इस शरीर की मर्यादा को, अपनी शक्ति को पहचान अपने गुस्से को बहार आने दे, मत रोक खुद को,

ये आवाज थी भौमिक जी की, सबने भौमिक जी को देखा तो उनके हाथो में एक कलश था, सात्विक ने भौमिक जी की तरफ धयान दिया और जल्दी से कुछ मंत्र पढ़ने शुरू किये, लेकिन तब तक भौमिक जी ने उस कलश का ढक्कन खोल दिया और उसमे से धुआँ धुआँ चारो तरफ फ़ैल गया, सब तरफ दिखना बंद हो गया, सात्विक का दम घुटने लगा और उसने जो मंत्रो की शक्ति से सबको बांध रखा था ो शक्ति टूट गई, और उससे बंधे लोग आजाद हो गए, और उस धुए में दो आवाजे गूंजने लगी, दोनों hi आवाजे किसी के गुरने की थी,

जैसे जैसी धुआँ छठा तो पहला गुरने वाला था दत्त जो एक ुचि सी जगह पैर पहुंच क्र गुर्रा रहा था, और उसने जोर दर दहाड़ भरी, उसकी दहाड़ से वह खाए सभी का दिल दहल उठा, सबका धयान दत्त की तरफ था लेकिन तभी लोगो के चीखने की आवाज आई, भागो भागो राक्षश आ गया, सबने पीछे मुद क्र देखा तो वह राक्षश खड़ा था, और उसकी गुर्राहट दत्त की गुर्राहट से भी ज्यादा खतरनाक थी,

राक्षश एक दम शांत खड़ा था, उसके आस पास के सैनिक भागने लगे थे थे, तभी भैरव चिलाय

भैरव- कोई अपनी जगह से नहीं भागेगा इसे मैं देख लूंगा,

भैरव राक्षश के सामने आया और उसे गौर से देखने लगा, तभी अभेंद्र जो बेसुध सा पड़ा था अपनी पूरी ताकत लगा कर बोलै,

अभेंद्र- अब देखो मोत का तांडव,

भवर सिंह ने तलवार अभेंद्र की कमर में घुसा दी, और भैरव ने एक लात राक्षश के साइन में मरी जिससे राक्षश दूर जाकर गिरा, उसके गिरते hi सभी एक साथ ख़ुशी से उछलने लगे,

भैरव- इससे दर रहे हो तुम लोग,

तभी भौमिक जी ने कुल्हाड़ी राक्षश की तरफ फेंकी,

भौमिक जी- ले बीटा शुरू क्र अपना तांडव, आज कोई नहीं रोकेगा तुझे,

तभी काम्य की आवाज आई, ये ये ये देव hi राक्षश ह, वो देखो देव वह से गायब ह,

सबने वह देखा जहा देव पड़ा हुआ था, देव अपनी जगह पैर नहीं था, तभी पीछे से चिकने की आवाज आई, और सेनिको के कटे हुए सर हवा में उड़ने लगे, बस फिर क्यात है वह तो भगदड़ मच गई, लेकिन आज जो राक्षश का रूप था ो कोई साधारण रूप नहीं था, उसकी आँखों से आग बरस रही थी, बाल बिखरे पड़े थे, और राक्षश की कुल्हाड़ी सामने आने वाले किसी को नहीं देख रही थी, उसके सामने कोई सैनिक आ रहा था या कोई परजा कोई फरक नहीं पद रहा था, बस खून की फुहारे निकल रही थी,

राक्षश बना हुआ देव के शरीर पैर अब कोई घाव नहीं था, ऐसा लग hi नहीं रहा था जैसी उसे अभी इतना घायल किया गया हो, बस दो निशान थे जो भैरव की तलवार से बने थे, भैरव रसख़ाश के सामने पंहुचा तो उसने अपनी वही तलवार निकल ली, भैरव की तलवार और राक्षश की कुल्हाड़ी आपस में टकराने लगी,

भैरव भी राक्षश से ताकत में बिलकुल काम नहीं था, दोनों किसी पहाड़ो की तरह आपस में टकरा रहे थे, अब तक सात्विक सम्हाल चुक्का था उसने अपनी शक्ति का इस्तेमाल किया लेकिन इस बार भौमिक जी ने उसकी शक्ति को रोक लिया, रीवा और अक्षरा दौड़ क्र अपनी बहेनो को सम्हालने लगी जो आखरी सांसे गईं रही थी,

वही मनीषा अभेंद्र के पास पहुंची, और उसने अभेंद्र का सर अपनी गॉड में रख लिया, और जोर जोर से रोने लगी, लेकिन उसका रोना सुनने वाला कोई नहीं था, क्योकि सभी उसी दर्द से गुजर रहे थे, लेकिन मनीषा वो दर्द बर्दास्त नहीं क्र प् रही थी,

मनीषा- अभेंद्र मुझे अकेला छोड़ क्र मत जाओ, मैं तुम्हारे बिना नहीं जी सकुंगी, मैं तुमसे बहुत प्यार करती हु,

अभेंद्र- ये ये सुनने के लिए मैं कब से तरस रहा था, मैं कभी बोल नहीं पाया, मैं भी तुमसे बहुत प्यार करता हु, अगले जनम में तुम्हारा इंतजार करूँगा, और वडा करता हु मैं सिर्फ तुम्हारा रहूँगा,

मनीषा- मैं भी सिर्फ तुम्हारी बनूँगी,

मनीषा ने अभेंद्र के सर पैर अपना सर रखा और रट रट अपने प्राण त्याग दिए,

वही काम्य जल्दी से अक्षरा के पास पहुंची

काम्य- बेटी मेरे साथ चल यहाँ से, यहाँ जो तांडव होगा उसमे सब बर्बाद हो जायेगा, कुछ नहीं बचेगा मेरे साथ निकल चल यहाँ से,

अक्षरा- तू नागिन ह, तू मेरी माँ नहीं हो सकती,

काम्य ने जबरदस्ती अक्षरा को खींचना चाहा लेकिन अक्षरा ने उसे धक्का दे दिया, और तलवार उठाई और काम्य के दोनों पैरो की अड्डी काट दी, काम्य चीखती हुई तड़प केर गिर पड़ी,

अक्षरा- तू कही नहीं भाग पायेगी, तू अपनी आँखों से ये तांडव देखेगी,

वही निहारिका रेणुका के पास पहुंच चुकी थी,

निहारिका- मैं तुझे दिखाउंगी माँ क्या होती ह,

निहारिका ने हुम्ला कर दिया रेणुका पैर, लेकिन दुश्मन बहुत अधिक थे, अभेंद्र बस एक तरफ पड़ा हुआ देख रहा था, लेकिन दत्त खूंखार हो चुक्का था, और उसका सबसे पहले शिकार बना ज्वाला जिसका सर दत्त ने अपने जबड़ो में पकड़ा और एक hi वॉर में उसका सर फाड़ दिया,

भवर सिंह और भानु दत्त की तरफ दौड़े, लेकिन दत्त को सम्हालना आसान नहीं था, संभु और चिरंजीवी भैरव की सहायता करने पहुंच चुके थे, लेकिन ये देव नहीं था ये राक्षश था जिसे काबू करना नामुमकिन था,

राक्षश ने भैरव को उठाया और दूर फेंक दिया, और अब राक्षश के सामने रह गए संभु और चिरंजीवी, राक्षश ने जब अपनी कुल्हाड़ी घुमाई तो दोनों की पतलून गीली होने लगी, राक्षश ने अपनी कुल्हाड़ी से दोनों पैर इतने वॉर किये की उनके शरीर में कोई बहग नहीं बचा था जहा से खून नाब यह रहा हो, दोनों के शरीर से इतना खून बह चुक्का था की उनसे खड़ा रहना भी मुश्किल हो चुक्का था, जब तक भैरव उठ क्र आया तब तक दोनों बेजान से पड़े हुए थे, और राक्षश आगे बढ़ चुक्का था, और उसके समाने सैनिक आये जिन्हे उसने एक hi वॉर में काट दिया,

इधर दत्त ने भवर सिंह को बुरी तरह अघायल क्र दिया था, वो लोग मर नहीं रहे थे लेकिन खून बह जाने की वजह से कमजोर पद रहे थे, वही राक्षश भानु के पास पंहुचा और उस पैर लगातार वॉर क्र दिए, भानु तो पहले से hi राक्षश के नाम से कांपता था, राक्षश के सामने आते hi उसकी आधी ताकत तो पहले hi ख़तम हो जाती थी,

इधर निहारिका ने रेणुका को बुरी तरह घायल क्र दिया था, तभी पीछे से प्रताप सिंह आ गया, जो राक्षश के दर से छुपा हुआ था,

प्रताप सिंह ने निहारिका पैर हुम्ला किया लेकिन निहारिका को किसी घाव से कोई प्रभाव नहीं पड़ता था, उसे उतना दर्द नहीं होता था, निहारिका सम्हाली और उसने घूम क्र प्रताप सिंह के पेट में तलवार घुसा दी,

प्रताप सिंह तड़पने लगा और तपड़ते हुए बोलै- मैंने तुझे साडी जिंदगी प्यार किया तुझे पाने के लिए क्या क्या नहीं किया,

निहारिका- अगले जनम में आना

और इतना बोल क्र एक hi वॉर में प्रताप सिंह का सर धड़ से अलग क्र दिया, और फिर रेणुका की तरफ पलटी,

निहारिका- तू पीछे क्यों रहती ह टब hi इसके साथ जा और तलवार रेणुका के सर में घुसा दी,

तभी भैरव ने रीवा और अक्षरा को पकड़ लिया,

भैरव- हहहहहहह मैं तो मर नहीं सकता लेकिन तेरे परिवार भी नहीं बचेगा

राक्षश तेजी से बहिराव की तरफ डोडा लेकिन अब तक देर हो चुकी थी और भैरव ने दोनों को सीने को चीयर दिया,

और तभी पूरा आसमान कला पद गया, चारो तरफ तेज हवाएं चलने लगी, और आसमान से बिजली गिरने लगी, उप्पेर आसमान आग बरसा रहा था और निचे राक्षश ने तूफान सा ला दिया था, अब उसके सामने लड़ने वाला बस भैरव था, बाकि सेनिको को दत्त ने चीरना शुरू क्र दिया था, राक्षश कुल्हाड़ी लेकर भैरव की तरफ डोडा और दोनों की तलवारे फिर से टकराने लगी, तब तक निहारिका ने प्रेमलता को मर डाला था, और भैरव और राक्षश का युद्ध ितं अभयनक हो रहा था की देखने वालो की आत्माये कैंप रही थी,

और काफी लम्बी लड़ाई के बाद भैरव के हाथ से तलवार गिर गई और तभी राक्षश ने उसके हाथ पैर वॉर किया और उसका हाथ काट दिया, हाथ काट ते hi बहिराव बोखला गया, वो जल्दी से अपने हाथ के पास पंहुचा और उसे उठा कर फिर से अपने हाथ से जोड़ा, उसका हाथ जुड़ने लगा लेकिन उसमे समय लग रहा था, तब तक राक्षश ने उसके शरीर पैर एनजाइना वॉर कर दिए, और उसके शरीर को चलनी चलनी कर दिया, भैरव घायल होकर जमीन पैर गिर पड़ा,

तभी राक्षश की नजर निहारिका पैर पड़ी जो भवर सिंह से लड़ रही थी, भवर सिंह निहारिका के साथ खिलवाड़ कर रहा था, लेकिन वह राक्षश आ गया और भैरव की तलवार अपनी कुल्हाड़ी पैर उठाई और निहारिका की तरफ उछाल दी,

निहारिका ने तलवार पकड़ी तब तक राक्षश ने भवर सिंह को मरना शुरू क्र दिया, अब तक निहारिका भी सम्हाल चुकी थी, उसने भी भवर सिंह पैर वॉर क्र दिया, और निहारिका ने वो तलवार भवर सिंह की छाती में घुसा दी, तलवार घुसते hi भवर तड़प उठा, ये तड़प दर्द किन hi थी जान जाने की थी, भवर सिंह की साँस अटकने लगी थी, राक्षश उसे वही छोड़ क्र निकल गया और उसने जो सामने आया उसे काटना शुरू क्र दिया था, अभिजीत और सूरज राजय की तरफ भागने लगे, लेकिन राक्षश आज रुकने वाला नहीं था, वो उनके पीछे चल दिया, और जॉब hi उसके सामने आ रहा था राक्षश उन्हें चीरता जा रहा था,

बस कोई बच्चा सामने आये तो वो आगे निकल जाता था लेकिन उसके अलावा कोई आदमी कोई औरत कोई भी उसके सामने आ रहा था ो सबको मरता जा रहा था,

भवर सिंह को मरता देख क्र चिरंजीवी भानु और संभु जो बेजान से पड़े थे वो घबरा गए, उन्हें यकीन hi नहीं हुआ की भवर सिंह कैसे मर सकता ह, और भैरव की हालत भी ख़राब हो चुकी ह, तो तीनो भाइयो ने खुद को सम्हाला और वह से भाग लिए, राक्षश वह नहीं था तो उन्हें रोकने वाला कोई नहीं था, सात्विक और भौमिक एक दूसरे को अपनी शक्ति से बांधने की कोशिश कर रहे थे,

तभी अभिजीत और सूरज भागते हुए वापस आ चुके थे, और उनके पीछे था राक्षश और उसने अपनी कुल्हाड़ी फेंकी और सूरज के सर में गड गई और वो वही गिर गया, फिर उसने ुल्हाडी उठाई और अभिजीत के सर पैर वॉर किया और उसे बिच में से चिर दिया,

अब तक भैरव सम्हाला और राक्षश के सामने आया और उस पैर हुम्ला किया, भैरव का बहुत खून बह चुक्का था इसलिए वो पूरी ताकत से लड़ नहीं प् रहा था, अब राक्षश के साथ निहारिका भी आ चुकी थी, और उसके हाथ में वही तलवार थी, राकसष भैरव पैर वॉर क्र रहा था और निहारिका भैरव के अंगो को काट रही थी, और कमल था की इस बार उसे अंग वापस नहीं जुड़ रहे थे,

भैरव जमीन पैर गिर गया था और निहारिका खूंखार शेरनी की तरह उस पैर वॉर किये जार hi थी, सात्विक ने जब देखा की भैरव का ेके क अंग काट दिया गया ह तो उसने अपनी पूरी शक्ति लगाई और अपनी तंत्र विद्या से भौमिक को बेसुध सा किया और चारो तरफ आग सी बरसा दी, जिससे निहारिका पीछे गिर पड़ी और उसकी तलवार गिर गई, राक्षश आगे बढ़ा लेकिन सात्विक ने उसे बांध दिया और जब तक राक्षश आजाद होता तब तक सात्विक भैरव के कटे हुए शरीर के एक एक भाग को लेकर और उस तलवार को लेकर वह से गायब हो गया,

काम्य बेसुध सी वह पड़ी हुई थी और वो पूरा नजारा देख रही थी और उसने अपनी फटी हुई आँखों में hi दम तोड़ दिया, चारो तरफ लाशे hi लाशे पड़ी थी, बस खून hi खून था, राक्षश अभी भी खून का प्यासा था, वो जोर से जिंघाड रहा था, निहारिका ने उसे शांत करने की कोशिश की लेकिन राक्षश को रोकना नामुकिन हो रहा था, वो सात्विक और भैरव के पीछे जाने लगा,

तभी उसके कानो में एक आवाज गुंजी- बस करो देव सब ख़तम हो चुक्का ह, मत जाओ

राक्षश ने मुद क्र देखा तो रीवा अभी तक जिन्दा थी और आखरी सांसे गईं रही थी, उसकी तड़प देख क्र राक्षश ने घुटने गिरा दिया, और उसका वो खूंखार रूप अब शांत होने लगा था, वो दौड़ क्र रीवा के पास पाहकः

देव- रीवा रीवा नहीं नहीं नहीं, तुम्हे कुछ नहीं होगा, भोकि जी कुछ कीजिये न,

भौमिक जी- शांत हो जाओ देव शांत हो जाओ, ये होना hi था, आज सबका अंत होना hi था, आज इनका अंत होगा तभी ये वापस आ सकेंगी,

रीवा- मैं वापस आउंगी देव तुम्हारे लिए आउंगी,

भौमिक जी- सही समय पैर ये सब आएँगी,

रीवा ने देव की बहो में दम तोड़ दिया, अब वह सिर्फ देव निहारिका भौमिक जी और दत्त खड़े थे, बाकि पूरा राजय मोत की नींद सो चुक्का था कुछ लोग बचे थे जो जान बचा क्र राजय से भाग गए थे,

ऐसे मंजर अगर किसी ने देखा था तो महाभारत के युद्ध में देखा था जहा चारो तरफ अपनी के hi कटे हुए शरीर पड़े थे, यहाँ भी वही नजारा था चारो तरफ सिर्फ अपने hi तो थे,

देव हताश सा अपने घुटनो पैर बैठ गया, आज उसका सब कुछ ख़तम हो चुक्का था, उसके सभी अपने मर चुके थे, अगर कोई बचा था तो बस उसकी माँ और भौमिक जी, पूरा राजय hi ख़तम हो चुक्का था, एक नहीं दो दो राजय ख़तम हो चुके थे, अउ रेज hi बैठे बैठे देव इतने दुःख में चला गया की वो बेहोश हो गया, वो अपने होश खो बैठा, उसने लगभग अपने प्राण त्याग दिए थे, वो जिन्दा तो था लेकिन वो एक सुण्या में जा चुक्का था, बस एक बेजान शरीर बन चुक्का था, निहारिका अकेली कड़ी रह गई,

वह कोई नहीं था जिसे सहायता के लिए बुलाया जा सके, भौमिक जी की आँखों में भी आंसू थे,

तब राजय के कुछ लोग बहार निकल क्र आये जो उस समय चुप गए थे, कुल 10 परिवार थे जो अभेंद्र के अपने थे और हमेशा से देव और अभेंद्र का साथ देते थे,

उनमे से एक औरत ने निहारिका के सर पैर हाथ फिराया

औरत- हम आपके साथ खड़े हैं महारानी,

भौमिक जी ने देव को उठाया और वह से ले गए, फिर बचे हुए लोगो की सहायता से निहारिका ने सभी का अंतिम संस्कार करवाया, भवर सिंह काम्य प्रेमलता प्रताप सिंह और रेणुका को उसने ऐसे छोड़ दिया जानवरो को खाने के लिए, पूरा राजय ख़तम हो गया था, इसलिए निहारिका बचे हुए लोगो को लेकर राजय से बहार निकल गई और पास में नदी किनारे एक छोटा सा बसेरा बना लिया,

दुनिया समाज सब से दूर, भौमिक जी देव का इलाज कर रहे थे लेकिन वो होश में नहीं आ रहा था, और ऐसे hi वर्षो बीत गए,

अब पहुंचते हैं वर्तमान में जहा ह्रदय अंश अंजलि सीमा ाव्य रिया और रौशनी गुरु जी के साथ बसेरा गाओं में खड़े थे, और उनकी आखो में आंसू थे और गुस्सा भरा हुआ था, उनके सामने थी एक पत्थर की मुर्तिया बानी हुई थी, जिसमे एक नौजवान लड़का और एक खूसूरत औरत और उनके बराबर में एक चितः और एक बुजुर्ग ऋषि,

अंजलि- गुरु जी हम सब सोचते थे हमारे साथ ईटा बुरा हुआ ह लेकिन इन माँ बेटो ने कितना कुछ झेला ह,

सीमा- एक माँ ने कितना कुछ झेला ह, और अपना सब कुछ खोकर भी वो कड़ी रही,


रौशनी- इस कहानी से हम सब कैसे जुड़े हुए हैं,
 
माफ़ करना फ्रेंड्स अपडेट होली के बाद दूंगी, त्यौहार में समय नहीं लग प् रहा ह, सभी लोग घर में हैं, इसलिए कंप्यूटर पैर काम नहीं कर पाऊँगी
 
अपडेट-56




सभी उन मूर्तियों के सामने खड़े थे, और गाओं के सभी लोग उनके चारो तरफ खड़े थे,

ह्रदय- ये मूर्ति तो उसी औरत की ह जिनसे मैं मिला था, क्या ये hi निहारिका हैं,

अंश- और ये ऋषि जैसे तो आपकी तरह लग रहे हैं गुरु जी,

गुरु जी- है क्योकि ये मैं hi हु, भौमिक भवनपुरा का राजगुरु,

ाव्य- आप आप भौमिक जी हैं, आपने वह कुछ क्यों नहीं किया, आपने उन सबको बचाया क्यों नहीं, आप ऐसे क्यों खड़े देखते रहे,

भौमिक जी- अगर मैं वह उन्हें बचा लेता तो आज तुम सब नहीं होते,

ह्रदय- मतलब,

भौमिक जी कुछ बोलने वाले थे की रौशनी देव की मूर्ति की तरफ बढ़ गई, और उसके करीब जाकर धयान से देखने लगी,

रौशनी- ये ये तो वही ह

भौमिक जी- है ये वही ह जिसने तुम्हे बचाया था,

अंजलि- आप हमे बताइये न हम सब कोण हैं, और उन महँ हस्तियों से कैसे जुड़े हुए हैं, हजारो वर्षो पुराने लोगो से हम कैसे जुड़े हुए हैं, और चिरजीवी भानु संभु का क्या हुआ,

ह्रदय- और सात्विक का क्या हुआ और उस भैरव का,

तभी एक मीठी सी लेकिन कड़क आवाज गुंजी- मैं बताती हु,

सबने आवाज को देखा तो सामने से निहारिका चली आ रही थी, उसका वो रूप देख क्र वह सब मदहोश से होकर उसी में खो गए,

रौशनी- ऐसा रूप ऐसा सौंदर्य तो किसी देवी में hi हो सकता ह,

निहारिका की एते hi पूरा गाओं सर झुका कर खड़ा हो गया, भौमिक जी ने भी हाथ जोड़ क्र निहारिका को प्रणाम किया, भौमिक जी को परनाम करता देख बाकि सभी ने भी हाथ जोड़ लिए,

निहारिका नजदीक आई और वो सीधे रिया और ाव्य के सामने कड़ी हो गई, और उन्हें देख क्र निहारिका की आँखे भर आई,

निहारिका की आँखों में आंसू देख सभी चौंक से गए, लेकिन भौमिक जी मुस्कुराये

भौमिक जी- महारानी ये वही हैं,

निहारिका- जानती हुए क माँ अपने बच्चो को किसी भी रूप में पहचान लेती ह,

किसी की समझ में कुछ नहीं आ रहा था,

निहारिका- आओ मेरे साथ, बहुत दूर से आये हो, थोड़ा आराम कर लो, थक गए होंगे,

ह्रदय- नहीं नहीं महारानी हमे थकन नहीं हुई हम एक दम ठीक हैं,

निहारिका- मैं जानती हु तुम दोनों ठीक हो लेकिन ये बछिया तो थक सकती ह न, ये तुम्हारी तरह नहीं हैं, और है मैं तुम्हारे लिए महारानी नहीं हु समझे, तुम चारो की माँ हु और अंजलि और सीमा की बहन, मेरी उम्र शायद कुछ ज्यादा ह लेकिन रिश्ता ये hi ह, अब बस मेरे साथ चलो वही चल कर बात होगी,

सभी निहारिका के पीछे चल दिए, निहारिका उन्हें एक घर में ले गई, घर बहुत बड़ा नहीं था और न hi उसमे कोई आधुनिक भौतिक चीजे थी, लेकिन जीवन जीने के लिए सभी सामान था,

निहारिका- बैठो और बताओ क्या लोगे चाय या कॉफ़ी,

भौमिक जी- महारानी हमारे पास समय काम ह, वो जग चुक्का ह,

निहारिका- जानती हु, और अब समय आ चुक्का ह,

अंजलि- कैसा समय,

भौमिक जी- अंतिम युद्ध का,

ह्रदय लेकिन मेरे कुछ सवाल हैं,

निहारिका- पूछो क्या पूछना ह,

ह्रदय- इतना तो पता चल गया की चिरनजीवी बाबा जो बना हुआ ह वो वही चिरंजीवी ह जो देव से बच क्र भाग गया था और उसके दो चमचे उसी के भाई भानु और संभु हैं, और वो तांत्रिक सात्विक ह, और उस गुफा में जरूर भैरव होगा जीता मुझे समझ आ रहा ह, लेकिन वो जिन्दा कैसे हैं, और अगर वो मर नहीं सकते तो भवर सिंह कैसे मारा, और वो इतने वर्षो तक छुपे क्यों रहे, उन्होंने फिर देवा ुर निहारिका जी पैर हुम्ला क्यों नहीं किया,

अंश- और इस सब में अजीत कहा गया, उसके पास ऐसी शक्तिया कैसे आ गई, और भौमिक जी आपने वो सब होने क्यों दिया, आपको भविष्य दीखता था तो आपने वो सब रोका क्यों नहीं,

निहारिका- क्योकि वो युद्ध उस दिन ख़तम नहीं हुआ था, भौमिक जी सात्विक के पीछे लग चुके थे, ये बात भौमिक जी hi बताएँगे क्या हुआ था,

सबने भौमिक जी की तरफ देखा,

भौमिक जी- मैं नियति के बिच में बढ़ा नहीं बन सकता, और सब कुछ ऊपर वाला पहले से hi लिख क्र भेजता ह, मुझे तो बस माध्यम बनाया ये सब करने का, अगर उस दिन सब नहीं मरते तो भैरव का अंत कभी नहीं हो सकता था, भैरव उस दिन हर जरूर गया था क्योकि भैरव अपने अभिमान में चूर था, और वो देव की ताकत को पहचान नहीं पाया था, लेकिन अगर भैरव शांति से देव से युद्ध करता तो देव कभी उससे hi जीत पता, और भैरव को मिला वरदान उसे कभी मरने नहीं देता, और उस दिन सबको मरना था ताकि वो सब वापस लोट क्र आ सके, क्योकि उस जनम में वो बहिराव को मर नहीं सकते थे, और जो भैरव को मार सकता था उसे पैदा होने में बहुत समय था, तो मुझे कुछ ऐसा करना था की ये सभी एक साथ एक hi समय में इस धरती पैर आ सके,

अंजलि- मतलब मैं कुछ समझी नहीं,

भौमिक जी- भैरव अकेला नहीं मर सकता उसके साथ साथ उन लोगो को भी मरना होगा जिनके पास वो शक्तिया हैं, और उन सभी का अंत उसी तरह हो सकता ह जैसे भैरव का होगा, और कोई एक इंसान इन सबको नहीं मर सकता, सबको मरने के लिए अलग अलग लोगो ने जनम लिया ह,

निहारिका- जैसे भवर सिंह मेरे हाथ से मारा गया, और उसी तलवार से मारा गया, क्योकि उस तलवार की ऊर्जा और मेरी ऊर्जा एक hi थी,

भौमिक जी- और इसी लिए उस तलवार ने देव को बस घाव दिए उसे मारा नहीं क्योकि दोनों में एक hi ऊर्जा थी, लेकिन उस तलवार ने देव की ऊर्जा के दो बैग और क्र दिए थे, जो फिर से जनम लेकर वापस इस धरती पैर आये, अंश और ह्रदय के रूप में,

भौमिक जी की इस बात से सभी चौंक गए,

सीमा- क्या ये आप क्या बोल रहे हैं गुरु जी,

निहारिका- सच बोल रहे हैं, अंश और ह्रदय देव का hi रूप हैं वही ताकत वही सुंदरता, और वही किस्मत, जो दुःख दर्द देव ने झेले इन दोनों को भी वैसे hi दुखो का सामना करना पड़ा,

अंजलि- लेकिन क्यों ये सब क्यों,

भौमिक जी- क्योकि ये तीनो एक साथ मिलकर hi उन सबको रोक सकते हैं, उस समय देव अकेला था लेकिन ये तीन हैं और एक जैसी ताकत के साथ,

सीमा- और हम सब कोण हैं,

निहारिका- तुम दोनों मेरा रूप हो,

अंजलि- आपका रूप वो कैसे, तलवार से तो सिर्फ देव घायल हुए थे,

भौमिक जी- क्योकि ये सब देव से जुड़ चुकी थी, देव के अंडर की ऊर्जा उसके वीर्य के द्वारा इन सबके अंदर गाइट hi, जिससे देव की नियति भी इनकी नियति बन चुकी थी, जब देव की ऊर्जा के टुकड़े हुए तो बाकि सबकी ऊर्जा भी उसी के साथ अलग हुई, और जब देव ने जनम लिया तो बाकि सबने भी उसी के साथ जनम लिया,

सीमा- लेकिन हमने तो देव से पहले जनम लिया,

भौमिक जी- जब मैंने देव की शादी करवाई तो सबको एक दूसरे के साथ बांध दिया ताकि वो सब अपने मूल रूप के रिश्तो के साथ पैदा हो ताकि भविष्य में कोई अलग न हो जाये, उस शादी की वजह से आप सबके रिश्ते इतने मजबूत हो गए की आप सब न चाहते हुए भी एक दूसरे की तरफ खींचे चले आये, और देव के वीर्य के साथ उसकी शक्ति और ऊर्जा जो लड़कियों के अंदर गई और जब उन लड़कियों ने जैम लिया तो वही ताकत और ऊर्जा उनके कौमार्य में समाहित हो गई, जो मर्द उनके कौमार्य को भांग करता वो भी शक्ति का एक हिस्सा प् लेता,

अंजलि- इसीलिए आपने कहा था की इन सबका कौमार्य सिर्फ ह्रदय hi भांग करे,

सीमा- लेकिन हमारा कौमार्य तो हमारे बेटो ने भांग नहीं किया,

निहारिका- क्योकि उस समय मैं कुँअरि नहीं थी जब देव की संगनी बानी, लेकिन मेरे अंदर ऊर्जा थी जिससे तुम्हारे साथ सम्भोग करने वाले के अंदर भी वो ऊर्जा गई,

भौमिक जी- और तुम्हारी ऊर्जा उनके अंदर भी गई अउ रहे भरष्ट भी क्र गई,

अंजलि - वो कैसे,

भौमिक जी- तुम्हारे साथ सुरेश ने सम्भोग किया जिससे उसे ताकत भी मिली और वो उससे भरष्ट भी हो गया, वही फिर अजय ने सम्भोग किया तो उसे भी ताकत मिली, लेकिन जब तुषार ने सम्भोग किया तो उसकी ताकत तो बढ़ी लेकिन तुम्हारे संस्कारो ने उसे भरष्ट नहीं होने दिया, वही सीमा जा तुम्हारे पति ने तुम्हारे साथ सम्भोग किया तो उसके बाद वो ताकतवर भी हुआ लेकिन उसके विचार भी भरष्ट हो गए, जिसका अहसास उन्हें कभी हुआ hi नहीं,

ह्रदय- लेकिन एक बात अब भी समझ नहीं आई की वो सब इतने समय तक छुपे क्यों रहे,

भौमिक जी- मेरे द्वारा दिए गए दर से,

अंश- कैसे

भौमिक जी- उस युद्ध के बाद मैंने सात्विक की खोज जारी राखी, और मैंने उसे धुंध भी लिया, सात्विक अपनी तंत्र विद्या से भैरव को ठीक करने में लगा था, लेकिन वो कुछ नहीं कर प् रहा था, मुझे सामने देख क्र वो घबरा गया,

सात्विक- मैं तुमसे युद्ध नहीं करना चाहता भाई, अब ये युद्ध समाप्त हो चुक्का ह,

भौमिक जी- मैं भी तुमसे ये hi बोलने आया हु, तुम अकेले हो भैरव अब कभी नहीं उठेगा, और तुम्हारे तीनो योद्धा भाग चुके हैं, वो तीनो मिलकर भी देव का सामना नहीं कर पाएंगे, अगर चाहते हो की देव तुम्हे और उन सबको ढूंढता हुआ न आये तो हमेशा छुपे रहना, अगर तुम या तुम्हारे आदमियों ने अपनी शक्ति का उपयोग किया तो मैं और देव आएंगे, और तुम जानते हो मैंने अब तक अपनी शक्ति का पूरा इस्तेमाल नहीं किया ह, अगर माइन शक्ति का इस्तेमाल किया तो मैं तुम्हे मार दूंगा,

सात्विक- मैं अपनी शक्तियों का इस्तेमाल नहीं करूँगा, लेकिन मैं कैसे यकीन करू की तुम और देव भी एशिया नहीं करोगे,

भौमिक जी- मैं वचन देता हु की जब तक तुम और वो चिरंजीवी अपनी शक्तियों का इस्तेमाल नहीं करोगे हम भी नहीं करेंगे, और मेरे हाथ पैर हाथ रखो और हमारे खून से कसम खाओ की इस संसार में तुम सबके होने का कोई प्रमाण नहीं मिलेगा किसी को पता नहीं चलना चाहिए की तुम मर नहीं सकते या तुम्हारे पास शक्तिया हैं, ये hi कसम मैं भी खता हु, और जो पहले कसम तोड़ेगा वो अपनी देविक विद्याये भूल जायेगा,

सात्विक ने कसम खा ली,

प्रेजेंट में….

भौमिक जी- तब से सात्विक और चिरंजीवी चुप गए, और मैंने देव और महारानी निहारिका को भी शांत और छुपे रहने को कहा,

निहारिका- तब से हम दोनों माँ बेटे इस गाओं में कभी पहाड़ो में कभी किसी देश में कभी कही, अपना जीवन बिता रहे हैं, सही समय के इंतजार में,

भौमिक जी- लेकिन सात्विक छुपे रह क्र भी अपना कार्य करता रहा, वो अपनी तंत्र विद्या को बढ़ता रहा, जिस वजह से उसे एक जानकरी मिल गई की जहा देव और भैरव का युद्ध हुआ था वह पैर मैंने कुछ मंत्रो का उपयोग किया था जिससे कुछ बदलाव हो गए थे, जिसका अहसास सात्विक को बहुत पहले था लेकिन वो समझ नहीं प् रहा था, लेकिन उसे बाद में समझ आ गया,

अंश- कैसे बदलाव कोनसे मंत्र

भौमिक जी- मैंने उस जगह को अपने मंत्रो से बंधा हुआ था और वह पैर जिसकी भी मृत्यु होती वो दुबारा जनम लेकर इस धरती पैर आता,

अंश- लेकिन ये विद्या तो इंदरजीत ने इस्तेमाल किट hi, जब पृथ्वी और उसका परिवार मारा था,

भौमिक जी- वो वही विद्या थी जो मैंने इस्तेमाल किट hi लेकिन उसमे एक अंतर था, मैंने मंत्रो का उपयोग किया था लेकिन सात्विक ने इंदरजीत को तांत्रिक विद्या से वो करना सिखाया था,

सीमा- तो क्या उस युद्ध में जॉब hi मारा था वो सब एक बार फिर पैदा हुए,

अंश- लेकिन आपने ये सब क्यों, जब देवा ुर उनकी पत्निया दुबारा जैम ले hi रही थी तो आपको बाकि सबके लिए ऐसा क्यों करना पड़ा,

रौशनी- और इस सब में सुगंधा का क्या हुआ उसके साथ तो उस रात सेक्स नहीं हुआ था, उस बेचारी के प्यार का क्या हुआ,

निहारिका- मेरी बच्ची तेरा प्यार इतना मजबूत था की उसके लिए भौमिक जी को ये फैसला लेना पड़ा,

रौशनी- मतलब मेरा प्यार, मैं कुछ समझी नहीं,

भौमिक जी- उस युद्ध में कुछ लोग ऐसे थे जिनका वापस आना बहुत जरुरी था, और उन्हें अंतिम युद्ध में वापस लेन का कोई तरीका नहीं था, तब मैंने वह मंत्रो का इस्तेमाल किया जिससे वो दुबारा जनम ले सके, और उसमे थे अभेंद्र जो आज का अभी ह, और दूसरी थी मनीषा जो आज की माया ह, और तीसरी थी सुगंधा जो तू ह बेटी,

अपना नाम सुनकर रौशनी चौंक गई, रौशनी क्या हर कोई चौंक गया,

निहारिका- तेरे परिवार की हर औरत अंश की तरफ कामुक होकर झुकती चली गई लेकिन तेरे अंदर प्रेम तो बहुत था अंश के लिए लेकिन काम वासना नहीं थी, क्योकि तूने देव को वादा किया तहत ु सिर्फ उसकी होगी, इसलिए तू फिर वापस आई ह सिर्फ देव के लिए,

रौशनी की आँखों में आंसू भर आये,

निहारिका- रो मत मेरी बच्ची, अब सब ठीक हो जायेगा,

अंश- लेकिन वह और भी तो लोग थे,

भौमिक जी- जो जो उन मंत्रो के दायरे में मारा वो सब वापस आये, लेकिन जब देव ने पृथ्वी के रूप में जैम लिया तो मेरा समीकरण बिगड़ गया, लेकिन तभी इंदरजीत सात्विक से मिला तो सात्विक को पता चल गया की इंदरजीत का पुनर्जन्म हुआ ह, और ये पहले प्रताप सिंह था, तब सात्विक को मेरे मंत्रो का पता चला और उसे पता चला की देव की पत्नी रीवा उस जनम में रियांशी और अक्षरा अवंतिका और रेवती जो प्रताप सिंह की बेटी थी शोणाक्षी के रूप में जनम लेकर आई हैं, तो उसे समझ आ गया की इसमें जरूर मेरी कोई योजना ह, प्रताप सिंह अपनी बेटी को पाना चाहता था इसलिए वो शांकशी को पाने के लिए कुछ भी कर सकता था, तब सात्विक ने सबको मरने की योजना इंदरजीत से बनवाई, और इंदरजीत को ताकतवर और अमर करने के लिए जो की उसने प्रताप सिंह से वडा भी किया था उसे निभाने के लिए वो सब तंत्रविद्या सीखी, और इंदरजीत ने अपनी योजना पूरी की लेकिन मैं उनके बिच आ गया और मैंने फिर वह कनिका को भेजा और इंदरजीत की योजना को अपने हिसाब से इस्तेमाल किया, ताकि तुम सबका जनम सही समय पैर हो सके,

अंश- प्रताप सिंह रेवती को पाना चाहता था, इसलिए और शोणाक्षी के पीछे था और अजीत के रूप में आकर भी वो स्नेहा को पाना चाहता था,

ह्रदय- अब वो तलवार कहा ह, क्योकि अब तक उस तलवार का तो कोई जीकर नहीं हुआ कभी,

भौमिक जी- सात्विक ने उस तलवार की ऊर्जा से कुछ अँगूठिया बनाई जिससे चिरंजीवी संभु भानु ये तीनो hi जवान रह सकते थे, और वैसी hi अंगूठी अजीत के पास थी, उस अंगूठी की ताकत को सात्विक बढ़ाना चाहता था,

अंश- वो किस लिए,

भौमिक जी- भैरव के लिए, सात्विक खुद शक्ति का इस्तेमाल नहीं क्र प् रह था, लेकिन उसने इंदरजीत (अजीत) और चिरंजीवी को इस काम पैर लगाया हुआ था, दोनों अपनी अपनी तरह से किसी दूसरे इंसान की ताकत और उम्र चुरा कर किसी दूसरे इंसान में डालने का प्रयोग क्र रहे थे, अजीत तंत्र विद्या से कर रहा था और चिरंजीवी विज्ञानं के द्वय कोशिश कर रहा था, वो दोनों hi कामयाब हुए लेकिन वो दोनों hi आम इनसो की ताकत चुराने में कामयाब रहे, लेकिन भैरव को ठीक करने के लिए किसी महँ इंसान की जरुरत थी, चिरंजीवी उसमे कामयाब भी हो गया था तुषार को बंदी बना क्र लेकिन उसे ये नहीं पता था तुषार इतना काबिल ह, उसने उसकी ताकत को किसी और इंसान में दाल दिया था,

ह्रदय- तो क्या भैरव जिन्दा हो गया ह,

भौमिक जी- ये hi समय ह उसके वापस आने का और इस बार वो पूरी ताकत के साथ आएगा, हमे तैयार होना होगा,

सीमा- हमे क्या करना होगा गुरु जी,

भौमिक जी- खुद को तैयार करना होगा,

अंश- लेकिन उसे मारा कैसे जायेगा, और चिरंजीवी और बाकि सब को अंगूठी की क्या जरुरत ह, वो तो अमर ह न उनकी उम्र नहीं बढ़ती न,

भौमिक जी- ये hi गलतफहमी थी सबको की उनकी उम्र नहीं बढ़ती, लेकिन उन शक्तियों में और भैरव के वरदान में ऐसा कुछ नहीं था की उसकी उम्र न बढे, मुझे देख क्र क्या लगता ह मैं 60 साल का इंसान हु,

ह्रदय- आपकी उम्र तो लगभग 150 साल लगती ह,

भौमिक जी- जब मैंने शक्ति पाई थी तब मैं 60 साल का था, लेकिन मेरी उम्र भी बेहद रही ह, बस शक्ति की वजह से शरीर की ताकत काम नहीं होती, लेकिन उम्र तो बढ़ती ह, वही हाल बाकि सबका भी ह,

अंजलि- तो निहारिका जी और देव जी ने भी अनुगति फेनी ह,

भौमिक जी- नहीं इन्हे उसकी जरुरत नहीं ह, ये भी उप्पेर वाले का करिश्मा ह की वैसी hi शक्ति इन्हे मिली लेकिन इनकी उम्र नहीं बढ़ती, इसमें भी एक राज ह,

अंजलि- कैसा राज

भौमिक जी- समय आने पैर जान जाओगी, फ़िलहाल तुम सबकी मंजिल देहरादून ह, जहा तुम रहते हो,

ह्रदय- देहरादून लेकिन वह क्यों, दुश्मन तो हमारे कही और हैं,

निहारिका- ये कुछ बाते महसूस कर लेते हैं और उसी हिसाब से हमे बताते हैं, अगर इन्हे लगता ह की हमे देहरादून जाना चाहिए तो जाना चाहिए,

अंश- देव कहा हैं,

निहारिका- वो जब जहा पहुंचना होता ह वह सही समय पैर पहुंच जाता ह,

सीमा- कितना सूंदर गाओं ह ये, मेरा तो मन नहीं क्र रहा यहाँ से जाने का,

भौमिक जी- आओगी तुम लोग जरूर वापस आओगी,

इतना बोल क्र भौमिक जी उठ खड़े हुए और चल दिए, बाकि सब भी उनके पीछे हो लिए,

और एक लम्बा सफर तय करने के बाद सब देहरादून पहुंच गए, जहा दोनों के परिवार साथ में थे, अंजलि के साथ तो ह्रदय ाव्य थे वो तीन hi लोग थे, लेकिन अंश के साथ सीमा रिया रौशनी राशि और बाकि पत्निया भी थी,

शाम का समय था सभी एक साथ बैठे हुए थे, निहारिका भी रिया सिंह के गेस्ट हाउस में रुक गाइट hi जहा ह्रदय अंजलि और ाव्य रुकी हुई थी, निहारिका को रिया सिंह ने उप्पेर का कर्मा दिया था,

भौमिक जी ने खुली जगह पैर अपना आसान लगाया और बैठ गए, बाकि सभी परिवार वाले सामने चेयर्स बिछा क्र बैठ गए,

अंश के परिवार के बाकि लोग थे कंफ्यूज थे, वो तो बस नजर बचा बचा क्र निहारिका को देखे जार हे थे,

अवनि- ये आंटी कितनी खूबसूरत हैं यार,

स्नेहा- ये कही से भी आंटी जैसी लग रही हैं तुझे, सीमा माँ की छोटी बहन सी लग रही हैं,

अवनि- पागल सीमा माँ की बहन आंटी hi तो लगेगी न

स्नेहा- ओह्ह है श्री श्री,

जिया- और ये अंजलि आंटी से भी किसी से काम नहीं हैं यार, ये मिलफ इतनी खूबसूरत कैसे हैं,

नंदनी- तुम उसे देखो ह्रदय को वो और हमारा अंश बिलकुल एक जैसे हैंडसम हैं न,

राशि- सामने बैठे साधु को भी देख लो तुम सब, वो हमारे कुल गुरु हैं, सुना ह वो हमारी 10 पीढ़ी से भी ज्यादा समय से हमारे गुरु हैं,

जिया- ऐसा तोडना होता ह, इतना समय कोण जिन्दा रहता ह,

रज्जो- मुझे ऐसा लगता ह जैसे मैंने इन्हे पहले भी देखा ह,

सब आ चुके थे तो सीमा ने बोलना शुरू किया,

सीमा- देखो बच्चो आप सब जानते हैं हमारा परिवार और अंजलि बहन का परिवार कितने अजीब हादसों से गुजरा ह, हमारे परिवारों में कितना कुछ हुआ ह, लेकिन अब से पहले किसी को समझ नहीं आया की ये सब क्यों हुआ कैसे हुआ, लेकिन अब सब कुछ क्लियर हो चुक्का ह, और ये कहानी कहा से चली ये सब आज आपको पता चल जायेगा, इनसे मिलो ये हैं हमारे गुरु भौमिक जी, जो हजारो वर्षो से हमारे लिए लड़ रहे हैं,

जिया- हजारो वर्षो से,

राशि ने जिया को कोहनी मरी,

भौमिक जी- पूछने दो उसे बेटी, मैं यहाँ सब कुछ बताने hi तो आया हु,

उठो बेटी पूछो क्या पूछना ह,

जिया जीहजहकते हुए- जी वो मैं बोल रही थी हजारो साल कैसे कोई जिन्दा रह सकता ह,

भौमिक जी- जैसे तुम सब मर क्र दुबारा जनम लेकर आ सकते हो, ये सब सच ह, मैं हजारो सालो से जिन्दा हु, और अपने अंतिम समय का इंतजार कर रहा हु,

भौमिक जी किसी को देख रहे थे, निहारिका की नजर भी उनके पीछे वही चली गई,

निहारिका – भौमिक जी इन सबको सच जानने का अधिकार ह, इन्हे बताइये,

भौमिक जी ने फिर से पूरी कहानी शार्ट में सबको सुना दी, कहानी सुनकर सभी हैरान थे,

अवनि- ये सब तो हमारे इतहास से भी ज्यादा उलझा हुआ ह,

स्नेहा- मैं तो एक बार जनम लेकर hi इतना परेशां थी, मुझे तो शोणाक्षी वाला जनम hi ठीक से समझ नहीं आता,

निहारिका- तू हमेशा से hi इतनी मासूम थी, इससे आगे वाले जनम में थोड़ी नटखट हो गई ह,

स्नेहा- इससे आगे का जनम वो किसके रूप में ह,

निहारिका- दृष्टि , लेकिन तुम नहीं जानती उसे, ह्रदय ाव्य और अंजलि जानते हैं, अंजलि ये ह दृष्टि और मेरी रेवती

ह्रदय और ाव्य ने बड़े गोर से स्नेहा को देखा,

भौमिक जी- तुम्हे खुद की पहचान करनी होगी, तुम्हे अपने सभी जन्मो के बारे में जानना होगा, ताकि असली शत्रु को पहचान सको,

अंश- आपने कहा था की उस युद्ध में मरे सभी लोग दुबारा जाम लेकर आये, तो कोण कोण थे वो लोग, और बाकि सब किस किस रूप में आये,

ह्रदय- क्या भवर सिंह भी दुबारा पैदा होकर आया,

भौमिक जी- है वो आया और मारा भी गया,

अंजलि- कोण था ो

भौमिक जी- तुम्हारे पिता और तुम्हारी जिंदगी बर्बाद करने वाला इंसान सुरेश चोपड़ा,

निहारिका- उसने इस जनम में भी मेरा पीछा नहीं छोड़ा, मेरे साथ भी उसी उम्र में उसने वो सब किया, मुझसे शादी की और मेरी जिंदगी बर्बाद की,

अंजलि- वो सच में कमीना था, उससे पता चलता ह भवर सिंह कैसा रहा होगा,

भौमिक जी- महारानी निहारिका के साथ जो गलत हुआ उसके जिम्मेदार कही न कही मेरे बड़े भाई राजगुरु भी थे, इसलिए उन्होंने खुद को शाप दिया, और खुद को एक ऐसा जीवन दिया जिसे कोई इंसान नहीं जीना चाहेगा,

सीमा- ऐसा को ह

भौमिक जी- राजेश, जो अंजलि की सहयता करने के लिए आया, और जीवन भर इसी के लिए जिया बिना कुछ मांगे बिना कुछ चाहे, खुद के जीवन में दुःख hi दुःख भर लिए उसने, सिर्फ अपने किये का पश्चाताप करने के लिए,

अंजलि- राजगुरु ने खुद को इतनी बड़ी सजा दी, ऐसे इंसान धरती पैर बार बार जनम नहीं लेते,

भौमिक जी- और उसके बेटे सूरज ने अजय के रूप में जनम लिया,

अंजलि- क्या वो गिरा हुआ सूरज उसने अजय के रूप में जनम लिया, ची उसने मुझे छुआ, मैं उसके लिए प्रेम में पद गाइट hi,

भौमिक जी- ये नियति ह बच्ची, जो होना ह होकर hi रहता ह,

अंश- फिर ये ज्वाला कोण ह

भौमिक जी- तुम्हारे चाचा अर्जुन

सीमा- इसी लिए वो इतना गिरा हुआ इंसान था,

ाव्य- आप एक एक का नाम अलग अलग क्यों बता रहे हैं, सबके नाम एक बार में hi बता दीजिये न,

ाव्य की बात पैर सब हसने लगे,

रिया- मैं भी यही बोलने वाली थी,

निहारिका- वो तो होना hi था दोनों एक hi तो हो, एक जैसी सोच तो होनी hi थी,

ये बात सुनकर बाकि सब चौक गए जिन्हे hi पता था, इस बारे में,

स्नेहा- क्या ये दोनों एक hi हैं, मतलब

निहारिका- मेरी रीवा hi रिया और ाव्य के रूप में आई ह, जैसे तू और दृष्टि रेवती का रूप हो, और ये अवनि और दिया मेरी अक्षरा का रूप हैं,

भौमिक जी- और बेटी तू जिया नाम ह न तेरा तू अमरावती का रूप ह, आज तू बिलकुल बदल चुकी ह, और प्रताप सिंह की पत्नी रेणुका वो तब भी जैसी थी हर बार वैसी hi बानी, कलावती और सोनिया (सुरेश की पत्नी) के रूप में,

निहारिका- और भवर सिंह की बहन काम्य ने मनीषा के रूप में जनम लिया,

भौमिक जी- ऐसे hi सब किसी न किसी के रूप में वापस आये, और आज यहाँ एक दूसरे के साथ हैं, और अब सबको एक होना होगा, और उस संयोग को पूरा करना होगा,

अंश- कोनसा संयोग



3 से वो एक ह एक में वो 3,

3 हैं साथी उसके 3 pran-ghati उसके,

3 की वो जान ह 3 का सम्मान ह

3 के लिए जाना होगा 3 से hi लोट आएगा,

3 हैं शीर्षति विनाशक जिनका अंत को करेगा,

याद उसको आएगा जब 3 से मिलान होगा

3 नर 1 नारी चारो मिले तो हो सब पैर भरी,

नारी हो संतुष्ट तो पुरषो को देगी वो सम्मान

तीनो पुरषो का एक विधान बल बूढी में एक सामान

बहुत भविष्य और वर्तमानटिनो मिले तो हो कल्याण

तीनो की माओ का आशीर्वाद और संगनियो का मिले विश्वास

पूरा हो जब संयोग तो शत्रु का हो सर्वनाश

खोजने होंगे अपने जैसे तीनो बलवान मिले जब तीनो तब हो पूर्ण विधान
 
श्री फ्रेंड पीरियड्स आये हुए थे दर्द की वजह से कुछ कर नहीं प् रही थी और अब कुछ लिखने का मन नहीं हो पाया, अपडेट कल जरूर दूंगी
 
अपडेट-57






सीमा- अब हमारे दुश्मन कोण कोण जिन्दा है, और कहा हैं,

भौमिक जी- सात्विक, चिरजीवी, संभु भानु, सोनिया, और भैरव और कुछ उनके साथी,

अंश- लेकिन भैरव तो अभी ठीक नहीं हुआ न,

भौमिक जी- मैं नहीं जनता कैसे लेकिन वो जग रहा ह, और इस बार वो बहुत खतरनाक होगा,

अंश- ये कहावत जो आपने कही इसमें से आधी कहावत तो मुझसे जुडी हुई थी न,

भौमिक जी- ये खटवट नहीं ह, एक श्राप ह

श्राप सुनकर सब चौंक गए,

सीमा- श्राप ये क्या बोल रहे हो आप,

निहारिका- ये श्राप ह और देव अंश और ह्रदय के लिए वरदान ह,

भौमिक जी- इसी श्राप को पूरा करने के लिए मैंने ये सब किया, तुम सबको दुबारा जनम लेना पड़ा और अपने hi भाई बेटे के साथ रिश्ता बनाना पड़ा,

निहारिका- और ये श्राप अभी पूरा नहीं ह,

अंजलि- मतलब और क्या बचा ह,

भौमिक जी- समय आने पैर पता चल जायेगा, जो चीजे मैंने बताई हैं, वो भी नहीं खुलनी चाहिए थी, क्योकि दुश्मन हम पैर नजर रखे हुए हैं, मैंने अब तक उन्हें यहाँ पहुंचने से रोका ह, अब तुम सबको मिलकर अपनी मंजिल को खोजना होगा, सही समय आने पैर मैं वापस आऊंगा, अभी मेरा समय जाने का, कुछ चीजे हैं जो मुझे करनी होगी, और है अंजलि तुषार का ख्याल रखना, वो बहुत मासूम ह, उसके जैसा इस धरती पैर कोई नहीं ह,

इतना बोलकर भौमिक जी उठे और तेजी से वह से चल दिए और कब सबको आँखों से ओझल हो गए पता hi नहीं चला,

सीमा- uffffffffff क्या जिंदगी ह, एक पल भी सकूं नहीं मिलता,

निहारिका- मिलेगा जरूर मिलेगा, बस हमे सही समय का इंतजार करना ह,

जिया- हमे देव जी से मिलना है, वॉक अहा हैं,

निहारिका- वो अपने मन से hi चलता ह, जब सही समय होगा सामने आने का वो जरूर आएगा,

सीमा- आप लोग भी हमारे घर में hi आ जाइये न, सब एक साथ रहेंगे तो अच्छा रहेगा,

निहारिका- कोई बात नहीं हम सब एक दूसरे के सामने hi तो हैं, और थोड़ी प्राइवेसी भी बानी रहेगी,

स्नेहा- आप इंग्लिश बोल लेती हैं,

निहारिका- मैं कई हजार सालो से जिन्दा हु, पूरी धरती सेंकडो बार घूम चुकी हु, दुनिया की हर भाषा सीखी ह, समय समय पैर अलग अलग देशो में वह के नागरिक बनकर रहे हैं हम दोनों माँ बेटे ताकि किसी को शक न हो की हम कब से जिन्दा हैं,

अवनि- आपने तो पूरी दुनिया को बनते बिगड़ते देखा होगा, आपने हमे देश को गुलाम बनते और फिर आजाद होते भी देखा होगा,

निहारिका मुस्कुराई- है बेटी देखा ह, सब कुछ देखा ह

अवनि- फिर आपने कुछ किया क्यों नहीं, आप और देव तो सबको रोक सकते थे न,

निहारिका- है रोक सकते थे, लेकिन हम नियति में बढ़ा नहीं बन सकते थे, हमने छुपे रह क्र जो जो कर सकते थे किया, दुनिया के हर देश की सभी क्रांति में हम शामिल थे लेकिन पीछे रह क्र, ताकि हमारा नाम और पहचान समाने न आये, हमारी कोई तस्वीर सामने न आये,

राशि- आपने इतना लम्बा समय कैसे बिताया

निहारिका- बस तुम सबके इंतजार में समय बीत गया, और बहुत से दोस्त जिंदगी में आते रहे, कुछ इंसान तो कुछ नरपिशाच तो कुछ हमारे जैसे अमरत्व के बहुत करीब लोग, जो जिन्दा हैं अपनी मृत्यु की तलाश में, दूसरी दुनिया के लोग और तो और दूसरे लोक के जीव भी देखे हैं

अंजलि- क्या इस धरती पैर और भी अमर लोग हैं, क्या वैम्पायरे भी ह इस धरती पैर, और दूसरी दुनिया के लोग

सीमा- क्या वैम्पायर सच में होते हैं, और एलियंस भी

निहारिका- दुनिया में कोई भी कहानी बेबियाद नहीं होती, उसके पीछे कोई न कोई सच जरूर छिपा होता ह, बस कुछ लोग उस सच को छुपाने के लिए उन्हें कहियो का नाम दे देते हैं और उनमे झूटी सच्ची कहानिया जोड़ देते हैं, ऐसे hi वैम्पायर भी सच हैं और एलियंस भी सच हैं, और सवरग लोग और पटल लोक भी सच हैं,

जिया- कुछ बताइये न उन सबके बारे में,

ाव्य और रिया एक साथ- नहीं पहले ये बताइये की आपके समय में मरने वाले लोग कोण किस रूप में आया इन जन्मो में

अंजलि- इन दोनों सोच भी एक दम मिलती ह,

निहारिका- किसके बारे में जानना ह तुम्हे,

रिया- सबके बारे में, इस जनम में जो भी आये हैं सबके बारे में,

निहारिका- ठीक ह, ये तो तुम सब



राक्षशवो अनोखा ह
एक माँ-2


निहारिका सीमा सिंहअंजलिदेव(अंश) (प्रथवी सिंह)3. ह्रदय रीवारिया ( रियांशी)7. ाव्य बेटीरेवतीशनेः (शांकशी)आलिया भट अक्षराअवनि (अवंतिका)दिया अमिताबेटी- अंजू 23 (मोनी ROY)(BAHAN)शनायाकाम्यकलावती सोमियाराशि सिंहवन्य अभिजीतअमरराज गुरु राजेशअभेंद्रअभी अभेंद्रमनीषामाया (मंशी) सौमित्रकोमल SINGH(RENUKA)काम्य अमरवतीजिया सिंहरम्यप्रताप सिंहअजीतसुंगंधारौशनी ज्वाला सिंह अरुण सिंहकस्तूरी रीतानित्य सूरजअजय ठाकुररेणुकामनीषा ( शमा)सोनियािन्दुसंजना सिंहशाक्षी भवर सिंहसुरेश चोपड़ायोगितासुहाना,तम्मनापरिधिचंचल,अन्य



अंश- कुछ लोग रह गए,

निहारिका- उन सबके जनम बाद में हुए हैं, कुछ लोग ऐसे भी थे जो हमारी कहानी का हिस्सा बन गए, लेकिन उनका पुराने जनम से कोई सम्बन्ध नहीं ह,

राशि- िन्दु योगिता और परिधि इसमें कैसे आ गई, उनका इस कहानी में क्या योगदान,

निहारिका- िन्दु योगिता और परिधि के साथ देव ने सेक्स किया था जिस वजह से देव की शक्ति उनके अंदर भी गाइट hi, और योगिता और परिधि देव के पोरोश पैर इतना मर मिटी थी की वो उससे प्रेम करने लगी थी, िन्दु के अंदर नफरत थी लेकिन कही न कही प्रेम भी हो चुक्का था, जिस वजह से उसके दोनों रूप के सवभाव में वैश्यपना था लेकिन शाक्षी के रूप में ह्रदय ने अतीत में लोट क्र उसके जीवन का उधर कर दिया,

सीमा- और रज्जो वॉक ों ह

निहारिका- भौमिक जी की बेटी,

अंजलि- मतलब, वो कैसे,

निहारिका- इतना लम्बा जीवन जिया भौमिक जी ने और इन शक्तियों की वजह से उनके अंदर की काम वासना हमेशा चरम पैर रहती थी, इसलिए वो समय समय पैर शादी करते रहते थे, और उन्ही से उनकी कुछ स्नातने हुई, जिन्हे उन्होंने हमारे लिए समर्पित क्र दिया, जो लड़के हुए वो संसार में ज्ञान बाटने के लिए चले गए, लेकि जो बेतिया हुई उनका जीवन अंश और ह्रदय के लिए समर्पित क्र दिया,

अंश- कोण ह

निहारिका- तुम्हारी कमला माँ, जिसने तुम्हे पला और इस काबिल बनाया, और ह्रदय की निधि जो ह्रदय के लिए यहाँ तक पहुंचने की कड़ी बानी, और रज्जो (कनिका) जिसने अजीत के मंसूबो पैर पानी फेरा,

अंजलि- भौमिक जी के परिवार ने ितं ात्याग किया हमारे लिए,

निहारिका- इस संसार के लिए, क्योकि वो लोग इस प्रथवी का hi सर्वनाश करने की ताकत रखते हैं,

वो सभी लोग बाते क्र रहे थे तभी वह रिया सिंह आ गई,

रिया सिंह- hello एव्री ओने, क्या बात ह आप सबने तो खुले आसमान के निचे hi मीटिंग लगाई हुई ह, सब ठीक ह न,

सीमा- सब ठीक हैं संजना , तुम बहुत दिनों बाद दिखो हो कहा चली गाइट hi,

(रिया सिंह की जिंदगी में इतना कुछ हुआ था की वो अपने नाम को hi भूलना चाहती थी और अपनी पहचान को हमेशा के लिए मिटाना चाहती थी क्योकि उसकी पहचान की वजह से उसे बहुत कुछ झेलना पड़ा उसने अपना नाम क्यों बदला और क्या हुआ ये आगे पता चलेगा, तब तक रिया सिंह को संजना hi लिखूंगी)

संजना- फॅमिली से मिलने चली गई थी, क्या बात ह आपकी फॅमिली पूरी आ गई ह क्या यही पैर,

सीमा- वैसे तो सब मेरी फॅमिली hi हैं लेकिन ये दोनों मेरी भेने जैसी हैं जो तुम्हारे hi घर में रहती हैं,

संजना- मेरे घर में

अंजलि- अच्छा ये आपका घर ह, वो हमे यहाँ राजू नाम का लड़का मिला था उसी ने बताया की घर रेंट के लिए खाली ह,

संजना- है वो राजू केयरटेकर ह,

सीमा - आओ बैठो,

संजना- नहीं भाभी थोड़ा रेस्ट करुँगी, लम्बा सफर करके आई हु, और सबसे आराम से मिलूंगी थोड़ा फ्रेश हो जाऊ,

संजना अंदर चली गई अपने कमरे में,

निहारिका- इस लड़की में कुछ तो बात ह,

सीमा - कैसी बात,

निहारिका- ये एक नार्मल लड़की ह लेकिन इसके अंदर कुछ तो आकर्षण ह जो इसकी तरफ आकर्षित क्र रहा ह,

सीमा - आपने भी ये महसूस किया, मैं सोच रही थी की मेरे hi दिमाग में कुछ गड़बड़ ह,

रिया- मतलब क्या महसूस किया,

सीमा- मैं लेस्बियन नहीं हु लेकिन जब जब से लड़की करीब आती ह तब तब मैं उत्तेजित हो जाती हु,

सीमा की बात से ाव्य है पड़ी,

सीमा- है क्यों रही ह बेटी, मेरी बाते अजीब लग रही हैं या तुम सबके सामने बोल रही हु ये अजीब लग रहा ह, हम सबने इतना कुछ किया ह की अब शर्म जैसे शब्द हमारे बिच से ख़तम हो चुके हैं, मैं अपनी hi बेटियों के पति जो की उनका भाई ह और मेरा बीटा भी उसकी पत्नी हु, और ये बात पूरा परिवार यहाँ तक की मेरे ससुर भी जानते हैं, इसलिए मेरे पास शर्माने जैसा कुछ नहीं ह,

अंजलि- सही कहा, मैं अपने बेटे जो की मेरा पति भी ह, और मेरी बेटियों का भी पति ह उसी के द्वारा मेरी कोख से निकले मेरे बेट ेके बेटे के साथ सेक्स कर चुकी हु, तो अब मैं किस्से शर्मो,

अंश- हम सबकी फॅमिली ऐसी hi ह, अब अंदर चलो और कुछ खाना पीना हो जाये,

रौशनी- देव नहीं आएंगे क्या

निहारिका और बाकि सब मुस्कुराये

निहारिका- आएगा मेरी बच्ची जरूर आएगा,

सभी ने एक साथ मिलकर खाना खाया,

अँधेरा हो चला था, की तभी किसी के चीखने की आवाज बहार से आई, ये कोई औरत थी, सभी भागे तो देखा संजना दर से कैंप रही थी क्योकि उसके सामने एक विशाल के चितः खड़ा था, संजना की एक बार तो चीख निकल गई लेकिन अगली बार तो उसकी आवाज गले में hi डाब गई थी, तभी पीछे से निहारिका ने आवाज लगाई

निहारिका- दत्त पीछे हैट

ये दत्त था जो वह की निगरानी रखे हुए था, दूत तुरंत पीछे हैट गया, निहारिका जल्दी से संजना के पास आई,

निहारिका- तुम ठीक हो संजना

संजना निहारिका से लिपट गई,

निहारिका- वो चला गया ह, शांत हो जाओ घबराओ नहीं, वो कुछ नहीं करेगा,

संजना थोड़ा नार्मल हुई,

संजना- माँ छूट उस टाइगर की, भेनचोद ने गांड hi फाड़ दी मेरी तो, क्या ये आपका पालतू ह, कोई टाइगर पलटा ह क्या, समझा देना उसे इस बार मेर सामने आया तो माँ छोड़ दूंगी उसकी,

संजना के मुँह से माँ बहन की गली सुनकर सभी की हसी निकल गई,

संजना को अहसास हुआ की दर की वजह से वो क्या बकवास क्र गई ह,

संजना- ओह्ह श्री श्री वो बस दर की वजह से ये सब निकल गया मेरे मुँह से,

निहारिका- कोई बात नहीं होता ह, आओ अंदर चलो और आराम से बैठो और डरने की जरुरत नहीं ह,

निहारिका संजना को लेकर उसके घर में चली गई पीछे से अंजलि और सीमा भी आ गए,

संजना सीधे अपने कमरे की तरफ गई, वही कमरा जिससे उसका शीशे वाला बाथरूम अटेचेड था, और सामने खुला आँगन,

संजना- ये टाइगर आपका ह क्या,

निहारिका- है ये मेरा hi ह, लेकिन ये इंसानो को नहीं खता, ये दोस्त ह, वो कभी कुछ नहीं करता,

संजना- ये इतना बड़ा कैसे ह, मैंने आज से पहले इतना बड़ा टाइगर नहीं देखा,

निहारिका- बस ये ऐसा hi ह, इसके बारे में फिर कभी बताउंगी,

संजना- आप इतनी खूबसूरत हो, जैसे मिस ुनिवर्स हो, और आप इतने खतरनाक शोक रखती हो जैसे कोई जांबाज लड़ाकू योद्धा हो, कमल की हो आप,

निहारिका है पड़ी,

सीमा- अच्छी परख ह,

संजना- आप तीनो hi कमल की सूंदर हो, मैं तो खुद की सुंदरता पैर खामो खा घमंड किये घूमती थी, आपने और आपके परिवार की औरतो ने मेरा घमंड तोड़ दिया,

निहारिका- तुम किसी से काम नहीं हो, बहुत सूंदर हो,

संजना शर्मा सी गई,

संजना जल्दी hi नार्मल सी हो गई,

संजना- आप लोग बैठिये मैं कॉफ़ी बना क्र लती हु, फिर आराम से बताना इस टाइगर के बारे में,

निहारिका- कल दिन में बात कर्नेगे तुम आराम करो, मैं यही तुम्हारे बराबर वाले कमरे में हु, दर लगे तो मुझे बताना,

संजना- आप अकेली रहने आई हैं,

निहारिका- मैं और मेरा बीटा,

संजना- वो कहा ह

निहारिका- गया हुआ ह कही जल्दी आ जायेगा,

संजना अंजलि से- और आप किसके साथ रहती हो भाभी,

अंजलि थोड़ा झिझकी- वो मैं वो मेरा बीटा और बहु,

अंजलि ने ाव्य को बहु बता दिया था, उसे डार्ट है कही ह्रदय और ाव्य एक साथ दिख गए तो संजना को शक न हो, क्योकि वो अपने रिश्तो को किसी को बता तो नहीं सकती थीं ा,

निहारिका- तुम अकेली क्यों हो यहाँ इतनी दूर,

संजना- लम्बी कहानी ह, बस यहाँ अपनी गलतियों की सजा भुगत रही हु,

निहारिका- गलतिया कैसी गलतिया

संजना की आँखों में आंसू आ गए,

संजना- कुछ नहीं भाभी फिर कभी बताउंगी, आप आराम कीजिये मुझे तो देर तक जागने की आदत ह,

निहारिका- और मुझे सोने की hi आदत नहीं ह,

संजना- क्यों आपकी तबियत ख़राब ह क्या, आपको नींद नहीं आती,

निहारिका- बहुत लम्बा जीवन सोकर hi बिताया ह, अब सोने का मन नहीं करता,

संजना की समझ में कुछ नहीं आया,

निहारिका अपने कमरे में चली गई और अंजलि निचे के कमरे में और सीमा अपने घर चली गई,

ह्रदय और ाव्य अंजलि के पास आ गए, और पूरी रात सबकी एक दूसरे से चर्चा करने में hi बीत गई, सबकी जबान पैर बस निहारिका और देव hi थे बस,

राशि, जिया नंदनी रज्जो रिया स्नेहा और अवनि बैठे हुए थे,

राशि- ये कितने अजीब ह न, हमारे पहले जनम में हम किसी और से इतना प्रेम करते थे और अब इस जनम में हम अंश से प्रेम करते हैं,

नंदनी- मैं तो बस अंश की hi हु मेरे साथ ऐसा चक्कर नहीं ह,

जिया- है तुम तो दादा जी की बहन का जनम हो न,

रज्जो- और मैं तो भौमिक जी की बेटी थी कनिका के रूप में, तो मेरे साथ भी बस अंश से रिश्ता रहा ह, लेकिन ये अजीब ह की मैं उनकी बेटी थी और मुझे hi इस बात का ज्ञान नहीं ह,

अवनि- हमारे दिल में बस अंश ह और कोई नहीं, मुझे तो ये सब अजीब लगता ह,

रिया- वो तीनो एक hi हैं, बस उस जनम में हम जिसे प्रेम करते थे उसका चेहरा अलग था लेकिन इंसान वही था,

स्नेहा- तो क्यात ु इस जनम में उससे प्रेम कर सकती ह,

रिया- नहीं बिलकुल नहीं, और मुझे नहीं लगता ऐसा करना जरुरी भी हो, क्योकि हर जनम के लिए एक अलग रूप लिया ह हमने, तो हम जिस जनम में जिसक ेलिए जन्मे हैं बस उसी के होंगे, इसलिए डरने वाली कोई बात नहीं ह, लेकिन ये ह बाउट अजीब की मेरे सामने वाले घर में मेरा hi एक रूप सो रहा ह, मैं भी यही हु और वो भी यही ह,

स्नेहा- तेरा रूप यहाँ तो ह तेरे लिए कितना एक्सीटेंड होगा न ये सब, हमारे रूप तो यहाँ नहीं आये,

राशि- सीमा माँ के तो 3-3 रूप हैं यहाँ, सोचो वो कैसा सोच रही होंगी, और तीनो रूप में उनका बीटा hi उनका पति ह, और तीनो बेटे यहाँ होंगे उनके सामने, कितना कन्फुसिंग ह न ये सब,

नंदनी- ह तो कन्फुसिंग लेकिन मजा बहुत आ रहा ह, बहुत थ्रिल ह हमारी फॅमिली में,

जिया- मुझे लगता था रौशनी अंश के निचे क्यों नहीं आज तक, जबकि घर की सभी औरते आ चुकी हैं, अब समझ आया क्यों नहीं आई,

रिया- रौशनी दीदी का हमसफ़र हजारो सालो से उनके लिए इंतजार में ह, उफ्फ्फ्फ्फ़ कितना रोमांटिक ह ये,

अवनि- हमारी प्रेम कहानी भी कुछ काम नहीं ह, हमने भी दो दो बार जनम लिया ह अंश के लिए,

राशि- किसके लिए अंश के लिए या देव के लिए, जिसने जनम लिया वो तो देव की बहन थीं ा जो देव से प्रेम करती थी, अब हम सब अंश के लिए आये हैं या देव के लिए या ह्रदय के लिए उसकी भेने भी तो हमारा hi रूप हैं,

अवनि- बस बस बस बस बहुत कन्फूसिओं ह, दिमाग की दही हो गई,

रिया- दिमाग को शांत रखो, हम सिर्फ अंश की हैं और अंश हमारा, अभी समझाया था न, ये जनम सिर्फ अंश के लिए ह, और हमारे दिल में बस अंश hi ह,

तभी बहार से सीमा आई

सीमा- सो जाओ अब पूरी रात जगती रहोगी क्या,

स्नेहा- माँ अंश कहा हैं,

सीमा- ह्रदय के साथ ह, दोनों एक दूसरे के साथ समय बिताना चाहते थे, तुम लोग सो जाओ,

इधर अंश और ह्रदय एक साथ घर की छत पैर बैठे थे,

अंश- अजीब कहानी ह यार हम लोगो की,

ह्रदय- है मैं जिस समय से आया हु वह ये सब अंधविश्वास मन जाता ह कोई इस बात पैर यकीन hi नहीं करेगा,

अंश- मेरी जिंदगी तो अजीत ने hi ख़राब कर दी थी, वैसे वो मेरा बाप भी था एक तरह से, लेकिन अब तो ये भैरव सिंह भी आ रहा ह,

ह्रदय- रही तो मेरी जिंदगी भी ऐसी hi ह, लेकिन अब हम अकेले नहीं ह, हम साथ हैं और देव वो योद्धा वो भी हमारे साथ ह, हम सब मिलकर उनका अंत कर्नेगे,

अंश- लेकिन कैसे, वो मर कैसे सकते है,

ह्रदय- कोई तो तरीका होगा उन्हें मरने का, हम वो तरीका धुंध लेंगे,

अंश- चलो अब सोते हैं, सुबह बात करते हैं,

दोनों अपने अपने घर चले गए,

ह्रदय कमरे में गया तो देखा ाव्य अंजलि की गॉड में सर रख क्र सो रही थी और अंजलि उसका सर शेला रही थी,

ह्रदय- माँ आप सोइ नहीं

अंजलि- बस सोच रही हु, इन सब घटनाओ के बारे में, कैसे उनको रोका जाये,

ह्रदय- आप फ़िक्र न करो, हम सबको मिलकर तरीका धुंध लेंगे,

अंजलि ने ह्रदय को अपने पास बुलाया और अपनी दूसरी जांघ को खली किया और ह्रदय का सर अपनी गॉड में रख क्र लिटा लिया,

ह्रदय- आपकी गॉड में कितना सकूं ह माँ, साडी चिंताए ख़तम हो जाती हैं,

अंजलि- तेरे मेरा रिश्ता तो जन्मो जन्मो का ह बीटा, जितना सकूं तुझे मेरी गॉड में मिलता ह वैसा hi सकूं मुझे तेरे करीब होने से मिलता ह,

अंजलि ने ाव्य को साइड में लिटाया और ह्रदय को अपनी बहो में भर लिया,

ह्रदय- माँ क्या पापा भी आपको ऐसा सकूं देते थे,

अंजलि- तू उसी का हिस्सा ह बीटा, कहानी के हिसाब से तू देव का रूप ह लेकिन तुषार जैसा इंसान होना किसी के लिए भी नामुमकिन ह, तुम दोनों hi मेरी कोख से निकले हो, मेरी जान बस्ती ह तुम दोनों में, और तुम दोनों hi मेरे इस शरीर को भी पूरा करते हो, मैंने तुषार के साथ असली प्यार को समझा ह महसूस किया ह, उसी ने मुझे एक मुरझाई हुई उदास और टूटी हुई औरत से ऐसा खुशदिल और जिंदगी को जीने वाली औरत में बदला ह, और तूने उस जिंदगी में और रंग भर दिए हैं,

निहारिका जी और सीमा जी अपने अपने बेटो के साथ प्यार करती हैं उन्ही की हैं, लेकिन मैं मैं तो अपने बेट ेके वीर्य से पैदा हुए बेटे जो मेरी hi कोख से निकला ह उसी से प्रेम कर रही हु, मैंने तो समाज के सभी नियमो की धजिया उदा दी हैं, शायद मुझसे ज्यादा गिरे हुए चरित्र की औरत शायद और कोई नहीं होगी,

ह्रदय- ऐसा मत बोलो माँ, आप से अच्छी माँ शायद इस धरती पैर कोई नहीं होगी,

अंजलि- ये तो तेरा प्यार ह मेरे लिए इसलिए तुझे मेरे अपराध नहीं दिख रहे, लेकिन मैंने किया तो गलत hi ह

ह्रदय- आपने जानबूझ क्र तो नहीं किया न, नियति ने करवाया ह,

अंजलि- जानती हु ये सब नियति ने करवाया ह, मेरे किये कर्मो के पीछे जरूर कोई न कोई बहुत बड़ा कारन होगा, और मैं निहारिका जी और सीमा जी से भी ज्यादा बढ़ क्र वासना में लिप्त रही हु,

ह्रदय- हो सख्त ह भविष्य में आप कुछ बड़ा करो,

तभी ाव्य की आवाज आई,

ाव्य- आप दोनों सो रहे हो या एक दूसरे को प्यार करने वाले हो या ऐसे hi भूत भविष्य की चिंता करते रहोगे,

ाव्य की आवाज सुनकर दोनों चौंक गए और लग हो गए, ाव्य उठ क्र बैठी हुई थी,

ाव्य- अरे ऐसे क्यों दर गए आप लोग, लगे रहो लगे रहो लेकिन ये सब चिंता को पीछे छोड़ दो और रात का मजा लो, इतना प्यारा मौसम ह,

अंजलि ने ाव्य को अपने पास खींचा, और उसे बहो में बाहर क्र लेट गई, पीछे से ह्रदय ने अंजलि को बहो में भर लिया,

अंजलि- aahhhhhhhhhhhh कितना सकूं मिला, रूचि और तुषार भी ऐसे hi मुझसे चिपक क्र सोते थे, ऐसा लगता ह जैसे जिंदगी फिर से रिपीट हो रही ह,

ह्रदय का खड़ा लुंड अंजलि की गांड में घुसा जा रहा था, और उसने अंजलि की कमर पैर हाथ आगे ले जाकर ाव्य की कमर को पकड़ा और कास क्र खींच लिया और तीनो एक दूसरे से सैंडविच की तरह चिपक गए,



उधर सीमा जी और अंश भी एक दूसरे से चिपके हुए इसी विषय पैर बाते कर रहे थे, वो दोनों भी एक दूसरे की बहो में एक दूसरे को कास क्र भींचे हुए थे,
 
अपडेट-58




एक सुमसान जंगल में चिरंजीवी संभु और बहनो तीनो बैठे हुए थे और उनके सामने था सात्विक,

चिरंजीवी- गुरु जी उसने सब बर्बाद कर दिया, मेरी बसै हुई पूरी दुनिया hi उजाड़ दी, उसने मेरा साम्राजय तबाह कर दिया,

संभु- उसके साथ वो चितः भी था, उस राक्षश का चितः, वो राक्षश उसका साथ दे रहा ह,

सात्विक- तुम सब मूरख हो, मैंने कहा था सही समय आने तक छुपे रहना, अपनी ताकत और शक्तियों का उपयोग नहीं करना, लेकिन तुमने खुद भी अपनी शक्तियों का उपयोग किया और मुझसे भी करवा दिया, अब वो वचन टूट गया ह जो मैंने भौमिक को दिया था, अब वो आजाद ह अपनी शक्तिया खुल क्र उपयोग करने के लिए,

चिरंजीवी- भैरव कब तक ठीक होंगे, हम कब से प्रयाश कर रहे हैं उन्हें ठीक करने का लेकिन अब तक कोई सफलता नहीं मिली, मैंने न जाने कितने hi लोगो की ताकत उनके अंदर दाल दी लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ, सिर्फ उनका कटा हुआ शरीर hi जुड़ा ह लेकिन वो अब एक कंकाल जैसे हैं, कोई ताकत उनके अंदर नहीं जार hi,

सात्विक- क्योकि अब तक वो इंसान मिला hi नहीं था जिसकी ताकत उन्हें ठीक क्र सके,

चिरंजीवी- ये लड़का ह्रदय इसमें बहुत ताकत ह, और वो तुषार उसमे भी काफी ताकत थी, और खास बा तवो लड़की जो बाद में आई थी, उसके अंदर अजीब सी ऊर्जा थी, जो मैंने पहले कभी महसूस नहीं की, वो अचानक कहा से आई थी पता नहीं,

सात्विक- मैंने उस लड़के और उस लड़की के बारे में बहुत खोजै लेकिन उनके बारे में कुछ पता नहीं चल पाया, ऐसा लगता ह जैसे उनका कोई अतीत hi नहीं ह, वर्ण मैं एक नजर में किसी को देखु तो उसका पूरा अतीत जान लेता हु, लेकिन ऐसा लगता ह जैसे अब से पहले उनका कोई नमो निशान नहीं रहा ह,

भानु- क्या वो इस दुनिया के नहीं हैं,

सात्विक- इस धरती पैर जीतनेय लोग इस दुनिया से बहार के रहते हैं मैं सबको जनता हु, ये उनमे से नहीं हैं,

संभु- क्या पता वो इस समय से hi न हो,

संभु की बात सुनकर सात्विक तुरंत खड़ा हो गया,

चिरंजीवी- क्या हुआ गुरु जी,

सात्विक- बहुत भविष्य और वर्तमानटिनो मिले तो हो कल्याण

चिरंजीवी- मैं कुछ समझा नहीं ,

सात्विक- भैरव का श्राप और वरदान, भैरव को मिले श्राप में लिखा था भूत भविष्य और वर्तमान जब मिलेंगे तभी कल्याण हो सकता, और कोई भी ये नहीं समझ पाया था की भूत भविष्य और वर्तमान कैसे मिल सकते ह,

संभु- वो तो मिल hi नहीं सकते,

सात्विक- अगर मिल जाये तो, देव आज भी जिन्दा ह और वो आज के समय के लिए भूत काल ह, और अंश वो आज का वर्तमान और अगर ये लड़का ह्रदय अगर ये भविष्य से आया हो तो, और ये तीनो एक हो जाये तो, तो ये संभव ह की भूत भविष्य और वर्तमान तीनो मिल गए,

संभु- अलग अलग समय के लोग हमारा क्या बिगड़ लेंगे, हमे कोई नहीं मर सकता,

सात्विक- भवर सिंह मर गया था न, और भैरव आज तक ठीक नहीं हो पाया ह, उस तलवार से hi दोनों की ये हालत हुई थी,

संभु- अब तो आपने वो तलवार नष्ट क्र दी न, अब तो उस तलवार की ऊर्जा हम सबकी अंगूठियों में ह न,

चिरंजीवी- लेकिन आज तक ये समझ नहीं आया की देव उस तलवार के वॉर से कैसे बच गया,

सात्विक- ये hi जवाब तो मैं भी धुंध रहा हु,

भानु- क्योकि वो तलवार निहारिका के हाथ में थी, शायद एक औरत hi उस तलवार के जरिये हमे मर सकती हो,

सात्विक ने भानु को देखा,

सात्विक- ये मैंने पहले क्यों नहीं सोचा, है ये हो सकता ह, एक औरत उस तलवार के दुआवारा हमे मर सकती ह,

चिरंजीवी- मतलब अगर हमे देव को मरना ह तो हमे एक औरत चाहिए,

सात्विक- कोई सधारा स्त्री ये नहीं क्र पायेगी,

संभु- अब ऐसी स्त्री कहा से ढूंढे,

सात्विक- ऐसी स्त्री ह हमारे पास, तुम्हारी माँ

चिरंजीवी- मेरी माँ, लेकिन वो तो,

सात्विक- इस जनम की सोनिया hi उस जनम की रेणुका ह, यानि तुम्हारी माँ,

चिरंजीवी- क्या क्या क्या ये क्या बोल रहे हो गुरु जी, ये कैसे हो सकता ह, ooohhhhhhhhhh ये मैंने क्या कर दिया,

सात्विक- क्या हुआ

चिरंजीवी- मैंने मैंने अपनी hi माँ छोड़ दी, मैंने सोनिया को कई बार

सात्विक- इस जनम में उसका तुमसे कोई रिश्ता नहीं ह, भूल जाओ वो सब

चिरंजीवी- शरीर अलग ह लेकिन आत्मा तो वही ह न,

संभु- वो देव भी तो अपनी माँ को छोड़ता था, अपनी बहेनो को भी छोड़ता था, आपने क्र दिया तो क्या हुआ,

सात्विक - छोड़ो ये सब, अब जल्दी से भैरव को जगाने का इंतजाम करना होगा, उनका ताबूत खोलना होगा,

भानु- लेकिन आप उन्हें ठीक कैसे करेंगे,

सात्विक- मैंने वो तरीका धुंध लिया ह जिससे वो ठीक हो जायेंगे और अब मुझे वो सब मिल गया ह जिससे वो ठीक हो जायेंगे,

चिरंजीवी- मतलब

सात्विक- एक तीन बार जन्मा इंसान, सरवशक्तिमन की ऊर्जा, और अनेको इंसानो की बलि की ऊर्जा और एक नाइक और पवित्र बलशाली इंसान का खून,

संभु- ये सब कहा मिलेगा,

सात्विक- प्रताप सिंह, तुम्हारे पिता जो एक बार इंदरजीत और फिर अजीत के रूप में जनम ले चुक्का ह, और शरवशक्तिमन की ऊर्जा जो उस तलवार में थी, और अनेको इंसान की बलि की ऊर्जा जो इंदरजीत ने हजार लोगो की बलि देकर उस अंगूठी में जागृत किट hi वो अंगूठी भी उस तलवार की ऊर्जा से बानी थी जैसे तुम सबकी बानी ह, और एक पवित्र बलशाली इंसान जो तुषार ह जिसके अंदर भौमिक ने बचपन में hi अपनी शक्ति की ऊर्जा दी थी,

भानु- लेकिन अब वो सब कहा हैं,

सात्विक- सब तैयार ह, मैंने चिरंजीवी को उस तुषार को लेन को कहा था लेकिन ये उसे काबू में नहीं क्र पाया,

चिरंजीवी- वो उस ह्रदय की वजह से,

सात्विक- अब बस तुषार को ढूंढो और अजीत को ठीक करो, मैंने किसी तरह से उसे जिन्दा रखा हुआ, उसकी सांसे अंतिम समय में चल रही ह, वो कुछ समय के लिए मुझे जिन्दा चाहिए,

चिरंजीवी- कहा ह वो

सात्विक- यही ह उस कुटिया में,

सभी वह पहुंचे तो देखा अजीत ननगा बिस्टेर पैर लेता हुआ ह और उसके शरीर में तलवारो के जख्मो के निशान ह,

सात्विक- मैंने इसको बचा तो लिया ह लेकिन ज्यादा समय तक जिन्दा नहीं रख पाउँगा, क्योकि इसको जिन्दा रखने के लिए मुझे अपनी बहुत सी काली ऊर्जा खर्च करनी पड़ेगी जो मैं नहीं करना चाहता, तुम बस इसे अपने उपचार से कुछ दिन जिन्दा रखो, और किसी को भेजो तुषार को यहाँ लेन के लिए जो इस समय इस देश की राजधानी में ह,

संभु और भानु तुरंत वह से निकल गए,

इधर निहारिका सुबह सुबह उठ क्र खिली हुई धुप में किसी सुगन्ध्तित फूल की तरह चमक रही थी, तभी उसके पास संजना भी आई गई,

संजना- कैसी हो आप,

निहारिका- मैं अच्छी हु तुम बताओ, अब थकन कुछ काम हुई

संजना- आपको देख क्र तो वैसे hi पूरी थकन गायब सी हो जाती ह,

निहारिका है पड़ी

संजना- आप हस्ती हो तो लगता ह जैसे पूरी प्रकर्ति मुस्कुरा पड़ी हो,

निहारिका- तुम मुझे चने के झाड़ पैर चढ़ा रही हो,

संजना- यकीन न हो तो किसी से भी पूछ लो, ऐसा शायद hi कोई हो जो आपका को देख क्र मंत्रमुग्ध न हो जाये, जैसे सीमा भाभी और ये अंजलि भाभी को देख क्र हो जाते हैं, आप तीनो hi मिस यूनिवर्स हो,

निहारिका- तुम भी कुछ काम नहीं हो, अलग hi आकर्षण ह तुम्हारे अंदर,

तभी राजू आ गया कॉफ़ी लेकर,

राजू- मैडम आपकी कॉफ़ी,

संजना- हम दोनों के लिए यही ले आओ, तब तक मैं नाहा क्र आती हु,

राजू निचे चला गया, और संजना उठी और अपने कमरे की तरफ गई, वो कमरे में घुसी और उसने अपने उप्पेर से अपनी निघ्त्य उतर दी और एक दम नंगी हो गई, कमरे का दरवाजा खुला हुआ था, जिस वजह से निहारिका की नजर उसी पैर थी, संजना की उभरी हुई गांड किसी को भी अपनी तरफ आकर्षित क्र सकती थी,

संजना का वो शीशे का बना हुआ बाथरूम जो सिर्फ पर्दो से ढाका होता था, उसमे से थोड़ा सा पर्दा हटा हुआ था, जहा से शावर के निचे कड़ी संजना साफ़ दिख रही थी, निहारिका न चाहते हुए भी संजना को देख रही थी, तभी वह अंजलि भी आ गई,

अंजलि- आप अकेली बैठी हो,

निहारिका- वो संजना के साथ बैठी थी, वो नहाने गई ह,

कुछ देर में संजना बहार आई अपने नंगे शरीर को तोलिये से पोछते हुए,

अंजलि- हम तो अपने परिवार में hi बेशरम हैं लेकिन लगता ह ये पूरी दुनिया के लिए hi बेशरम ह, ये लड़की जरा भी नहीं झिझक रही ह,

निहारिका- इसके शरीर में बहुत मादकता ह,

अंजलि- है इसके शरीर के कसाव से तो साफ़ दिख रहा ह,

फिर संजना एक हल्का सा कुरता पहन क्र आ गई, निचे उसने कुछ नहीं पहना, शायद पंतय फेनी हुई थी बस,

तभी राजू आ गया, संजना कुर्सी पैर बैठ गई और उसकी नंगी जंघे एक दूसरे के उप्पेर राखी हुई थी, जिससे जंघे और मोती मोती लग रही थी, राजू किन अजर संजना की जांघो पैर hi थी, अंजलि ने से नोटिस क्र लिया था, राजू कॉफ़ी रख क्र चला गया,

अंजलि- तुम हमेशा ऐसे hi खुले रूप में रहती हो,

संजना- है मुझे ऐसी hi आदत पड़ी हुई ह, और छुपाऊ किस्से, दुनिया ने ऐसे रूप न जाने कितनी बार देखे हैं, मैं छुपा क्र करुँगी भी क्या, वैसे मैं सबके सामने ऐसे नहीं रहती बस खुद को बांध क्र नहीं रखती,

अंजलि- तुम्हारी फॅमिली में और कोण कोण ह, तुम यहाँ अकेली क्यों हो,

संजना- मेरी फॅमिली मेरे साथ नहीं रहती, मेरे विचार और हालत उनके लिए ठीक नहीं थे,

निहारिका- मतलब तुम्हारे विचार और हालत उससे फॅमिली को क्या प्रॉब्लम होगी,

संजना- मैं जो जिंदगी जीती आई हुई आई हु वो मेरे बच्चो के लिए ठीक नहीं थी, इसलिए उन्हें खुद से दूर कर दिया,

अंजलि- तुम्हारे बच्चे? तुम एक माँ भी हो,

संजना- क्यों मैं माँ नहीं बन सकती क्या,

अंजलि- फिर तुम्हारा पति और परिवार कहा हैं,

पति का नाम सुनकर संजना उदास हो गई, उसने सर झुका लिया,

निहारिका- तुम हमे बता सकती हो,

संजना- मेरी कहानी सुनकर आप लोग मुझे गिरी हुई नजरो से देखोगे, मेरा अतीत बहुत ख़राब रहा ह,

अंजलि- हमसे ज्यादा ख़राब नहीं रहा होगा, खास कर मुझसे ज्यादा,

तभी वह सीमा जी भी आ गई,

सीमा- क्या बता रही हो अंजलि बहन अपने अतीत के बारे में,

अंजलि- संजना बोल रही ह उसका अतीत बहुत ख़राब रहा ह,

सीमा- बाई मेरा अटेर ख़राब नहीं ह, है अजीबो गरीब जरूर ह,

संजना- वैसे मैं भी अपने अतीत को ख़राब नहीं मानती मैंने जिंदगी को जिया ह अपने हिसाब से, अपनी मर्जी से, बस कुछ धोखे मिले, तो कुछ साथ छोड़ क्र चले गए कुछ को मैंने hi खुद से अलग कर दिया,

अंजलि- चाहे जीवन में कुछ भी उतर चढाव आये लेकिन अपनों को खुद से कभी दूर नहीं करना चाहिए,

संजना- लेकिन अगर हमारा गलत प्रभाव अपनों पैर पड़ने लगे तब क्या करे,

निहारिका- ये तो तुम्हारी कहानी जान क्र hi पता चलेगा की तुम्हें सही किया या गलत,

संजना- वैसे मैं कभी खुद से शर्मिंदा नहीं रही इसलिए खुद के बारे में कभी छुपाने की जरुरत नहीं पड़ी, लेकिन आप तीनो मुझसे बड़ी हैं और शायद आप दुनिया समाज के नियमो को मानती होंगी तो मेरी बाते आपको बुरी लग सकती हैं, फिर भी न जाने क्यों मन कर रहा ह की आपको सब बताऊ, मैं कोण हु और यहाँ क्यों हु वो भी अकेली,

निहारिका- हमने दुनिया के वो नियम तोड़े हैं जिन्हे तोडना किसी भी औरत के लिए नामुमकिन ह, इसलिए हम दुनिया के किसी नियम को नहीं मानती,

संजना- फिर तो आप मेरी बाते जरूर समझेंगे, आओ अंदर चलते हैं, वही नाश्ता करते हुए सब बताउंगी,

संजना ने राजू को बुलाया और नाश्ता लगवा कर उसकी छुट्टी क्र दी, संजना चाहती थी की उसकी बात राजू तक न जाये, मालकिन नौकर का रिश्ता बना रहे,

संजना- सबसे पहले तो मैं बताऊ की मेरा नाम संजना नहीं रिया सिंह ह,

सीमा- अरे वाह मेरी बेटी का नाम भी रिया ह,

संजना- लेकिन मैं चाहती हु की आप सब मुझे संजना hi बोले क्योकि संजना मेरे जीवन में सबसे ज्यादा खास लड़की थी,

अंजलि- कोण थी संजना

संजना उर्फ़ रिया सिंह ने अपनी कहानी सुनने शुरू की जिसे आप ये प्यास बुझती hi नहीं में पढ़ सकते हैं,

Sanjana(riya) की कहानी सुनकर तीनो औरतो की आँखे वासना से लाल हो चुकी थी, जो खुद काम की देविया थी वो भी संजना की कामुकता भरी कहानी से काम वासना से भर उठी,

निहारिका- कमल की औरत हो तुम, आज तक मर्दो मैंने सिर्फ मर्द देखे हैं जो औरतो को इस्तेमाल करते हैं लेकिन तुमने तो नियम hi बदल दिया,

अंजलि- लेकिन तुम रिया से सजाना क्यों बानी,

संजना- रोहित और मोहित की शादी हो गई और शादी के बाद उन्हें अपनी पत्नियों से सेक्स मिलने लगा जिससे वो मुझसे दूर रहने लगे, उन्हें दर रहता कही उनकी पत्नियों को पता न चल जाये मेरे बारे में इसलिए उनकी माँ अनीता ने यहाँ से जाना सही समझा और बिना कुछ बताये अपना घर बेच दिया, और यहाँ से गायब हो गई, मैं संजना और ममी और मेरे बच्चे रह गए, फिर कुछ पुराने लोग जो मुझसे जुड़े हुए थे उन्हें मेरा पता चल गया जैसे वो मंत्र था वो मुझे ब्लैकमेल करने लगा तो मैंने संजू और ममी और बच्चो को इस सबसे दूर रखने का फैसला किया, मैं यहाँ से बहगति तो वो वह भी आ जाते, इसलिए मैंने अपनों को hi दूर कर दिया, और खुद का नाम बदल दिया ताकि किसी को मेरा असली नाम hi पता न हो,

तब से मैं अकेली रहती हु, बस मेरी दोस्त रूबी और कामिनी जी आती रहती हैं, हम तीनो मिलकर कामिनी जी की कंपनी चला रहे हैं, अब मैं और रूबी भी उस कंपनी में पार्टनर हैं,

फिर सीमा जी की फॅमिली यहाँ आई तो मैंने कोशिश की की यहाँ कोई ऐसा न आ सके जिससे मैं बदनाम हो जाऊ, लेकिन इनकी फॅमिली भी कुछ अजीब थी, लेकिन मेरे बहुत अच्छी रही ह इसलिए मैंने इनके साथ खुश हु,

अंजलि- बहुत अजीब लाइफ रही ह तुम्हारी, तुमने इतनी शादिया की, शायद 9 पति हो गए तुम्हारे और सेक्स तो नजाने कितनो से कर लिया होगा,

संजना- बस मेरी सोच hi ऐसी रही ह, जियो तो खुल क्र जियो, और जो करना ह दिल खोल क्र करो,

सीमा- तुमने मेरी फॅमिली में ऐसा क्या देख लिया, जो अजीब लगी

संजना- यही सुन्ना चाहोगी आप, या फिर कभी बताऊ

सीमा- इनके सामने मेरी फॅमिली की कोई बात नहीं छिपी ह, हम तीनो एक hi हैं,

संजना- बस मैंने यही महसूस किया ह की आपके घर में एक मर्द ह जो शायद घर की कई औरतो को खुश कर रहा ह, आपका बीटा आपके घर की काफी लड़कियों के साथ रिलेशन में ह,

सीमा- तुम्हे ऐसा क्यों लगा

संजना- मतलब ये बात सच ह, क्योकि आप मेरी बात से अचंबित नहीं हुई, और न hi गुस्सा हुई हैं, और मैंने बहुत बार अंश को जिया और नंदनी के साथ मस्ती करते देखा ह और स्नेहा और अवनि के साथ भी बहुत बार देखा ह, मैं वैसे कुछ बोलती नहीं लकिन जो दीखता ह बता रही हु,

अंजलि- लड़की किन अजर बहुत तेज ह, इससे कुछ नहीं चिप सकता,

संजना- मतलब आप ये सब जानती हैं,

सीमा- वो सब उसकी पत्निया हैं, जैसे तुम्हारे इतने पति हैं वैसे hi वो सब उसकी पत्निया हैं, और इतनी पत्निया क्यों ह वो फिर कभी बताउंगी, और इससे ज्यादा कुछ मत देखना,

सीमा जी को दर हो गया कही संजना ने उसे और अंश को न देख लिया हो,

तभी निचे से ह्रदय की आवाज आई- माँ कहा हो माँ,

अंजलि निचे जाने लगी तो उसके पीछे निहारिका और सीमा भी आ गई संजना भी निचे उतर आई,

निचे ह्रदय और अंश खड़े थे, दोनों को देख क्र संजना की आँखों में चमक सी आ गई थी, लेकिन अंश और ह्रदय ने संजना की तरफ कोई खास धयान नहीं दिया,

अंजलि- क्या हुआ बीटा

अंश- हमे कुछ बात करनी ह,

सीमा – चलो हम आते हैं,

ह्रदय और अंश बहार चले गए, उनके पीछे तीनो औरते बहार चली आई, संजना ने उनकी पर्सनल बात में घुसना ठीक नहीं समझा,

अंजलि- क्या हुआ बीटा इतना सीरियस क्यों ह

ह्रदय- माँ हम सोच रहे थे, हम ऐसे बैठ क्र इंतजार तो नहीं क्र सकते न, हमे कुछ तो करना होगा, सात्विक और भैरव का पता लगाना होगा,

अंश- है ह्रदय सही बोल रहा ह, हम ऐसे कब तक कुछ होने का इंतजार करेंगे, हमे अपने सभी सवालो के जवाब मिल चुके हैं तो अब हमे अपने दुश्मनो को खुद ढूंढ क्र उन्हें उनकी मृत्यु तक पहुंचना होगा,

निहारिका- अभी सही समय नहीं आया ह, तुम ऐसे उन्हें नहीं धुंध पाओगे,

अंश- हमे कोशिश तो करनी होगी न,

निहारिका- तुम परेशां न हो मेरा बीटा उन्हें खोज रहा ह, जब उसे कुछ हासिल होगा तो वो खुद सामने आएगा, इसलिएजब तक देव नहीं आता हमे इंतजार करना होगा,

ह्रदय- लेकिन देव अकेले हैं, हम तीनो साथ मिलकर उन्हें धुंध पाएंगे,

निहारिका- वो अकेला इस पूरी धरती के लिए काफी ह, वैसे तुम दोनों भी उसी के जैसे हो लेकिन उसे कोई मर नहीं सकता इसलिए वो जहा चाहे जैसे चाहे धुंध सकता ह, तुम दोनों को बस तैयारी करनी होगी खुद को तैयार करना होगा, जब देव वापस आएगा तो असली युद्ध होगा,

अंश- अब रुका नहीं जा रहा,

ह्रदय- और मेरे लिए तो और भी मुश्किल हो रहा ह क्योकि भविष्य में सभी लोग मेरा इंतजार कर रहे होंगे,

निहारिका- भविष्य तो तुम लोग मिलकर लिखोगे, इसलिए सबर रखो, भौमिक जी हमे यहाँ लाये हैं तो इसमें कोई तो वजह होगी, उनका किया कोई भी काम बिना वजह नहीं होता, हमे बस तैयार रहना ह, सही समय आने पैर सब ठीक होगा, और हम सबको विचार करना होगा की उन सबको मारा कैसे जायेगा,

ह्रदय- ये hi तो मैं बताना छठा था की हमने कुछ सोचा ह इस बारे में,

निहारिका- क्या सोचा ह

अंश- हमे लगता ह की भैरव को किसी औरत के हाथो से hi मारा जा सकता ह,

अंजलि- ऐसा क्यों

ह्रदय- क्योकि भवर सिंह निहारिका जी के हाथो मरे गए, उनके पास शक्तिया थी वो अमर जैसे hi थे लेकिन निहिरका जी के हाथो मारा गया, लेकिन देव उसी तलवार से भैरव दुवारा घायल हुए लेकिन उन्हें कुछ नहीं हुआ,

सीमा- बात तो सोचने वाली ह,

निहारिका- लेकिन भैरव को मैंने अनेको वॉर करके उसी तलवार से टुकड़े टुकड़े क्र दिया लेकिन वो आज भी जिन्दा हो सकता ह, वो मेरे हाथो पूरी तरह नहीं मारा,

अंजलि- इस सब में कुछ तो ऐस यह जो हम मिस कर रहे हैं, कोई तो कड़ी ह जो अभी पूरी तरह जुडी नहीं ह,

सीमा- भवर सिंह उस तलवार से मारा और निहारिका बहन के हाथो मारा लेकिन भैरव उस तलवार और निहारिका बहन से मरने के बाद भी जिन्दा ह, लेकिन वो घायल हुआ और टुकड़े टुकड़े हुआ, मतलब या तो वो तलवार या निहारिका बहन इन दोनों में से कोई तो उसे मर सकता ह,

अंश- अगर कोई औरत उसे मर सकती ह तो फिर हमारे जनम की क्या जरुरत थी, हम क्यों पैदा हुए,



निहारिका- देव इन सब बातो के जवाब लेकर आएगा, और मेरा मन कहता ह वो जल्दी hi आएगा,
 
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