Incest Katha Chodampur Ki - Page 16 - SexBaba
  • From this section you can read all the hindi sex stories in hindi font. These are collected from the various sources which make your cock rock hard in the night. All are having the collections of like maa beta, devar bhabhi, indian aunty, college girl. All these are the amazing chudai stories for you guys in these forum.

    If You are unable to access the site then try to access the site via VPN Try these are vpn App Click Here

Incest Katha Chodampur Ki

खैर मैंने रुकना सही नहीं समझा और जग्गू के साथ बहार आ गया.. बहार आते hi जग्गू ने मेरी पीठ थपथपाकर बोलै- ज्ञान बड़ा ाचा पेलते हो बाबा कर्मानन्द...

Me-aur तुम बकचोदी बहुत करते हो बाबा छुटियानन्द...

जग्गू- सेल हरामी
..

Me-bakwas मत कर और जो बोलै है वो ध्यान से कर जेक.. मैं भी काम निपटा कर आता हूँ

अपडेट 97

मैं और जग्गू अलग अलग दिशा में चले गए.. मैं कल्लू के घर के बहार पहुंचा और गेट खटखटाया खुश किस्मती से गेट खोलने वाली कजरी थी.

मुझे देखते hi मुस्कुराने लगी...

कजरी- अरे कर्मा तू.. आजा आजा..

में- दीदी कल्लू भैया हैं क्या..

Kajri-wo कभी घर में होता है जो अब होगा..

Me-tau जी?

कजरी- कोई नहीं है तुझे क्या हुआ क्यों पूछ रहा है?

में- तुमसे कुछ बात करनी है दीदी..

Kajri-haan अंदर आ न...

मैं अंदर जाकर आंगन में पड़ी खत पर बैठ गया.. कजरी भी वहीं खत पर बैठ gayi...mere साथ..

Kajri-ab बोल कर्मा क्या बात है....

में- दीदी कल के बारे में कुछ बात थी... मुझे जग्गू को लेकर टेंसन हो रही है...

कजरी- क्यों कर्मा क्या परेशानी है खुल के बता...

में- दीदी मुझे जग्गू पर भरोसा नहीं है वो कहीं किसी को बता न दे...

Kajri-par क्यों बताएगा उसने कल खुद बोलै है की वो किसी को नहीं बताएगा और उसने भी तो हमारे साथ वो सब किआ...

कजरी बोलते बोलते थोड़ा शर्मा गयी..

में- दीदी मैं उसे बचपन से जनता हूँ वो थोड़ा बड़बोला है... वो कुछ भी बोल सकता है..

Kajri-aisa मत बोल मुझे दर लग रहा है...

में- दीदी क्या करूँ पर सच ये hi है.. वो ऐसा hi है... कहीं उसने जोश में आकर बोल दिया तो हम फँस जायेंगे..

कजरी थोड़ा चिंता होते हुए बोली...

कजरी- फिर अभी.. अब क्या करें कर्मा.

में- दीदी अभी हम लोग दबे हुए हैं, उसे हमारी बात छुपानी है तो वो ऊपर hai...maana उसने कल हमारे साथ सब किआ पर इसमें उसका फायदा है... और मान लो कल सब करने के बाद भी उसने ये बात फैला दी तो हम क्या कर लेंगे उसका...

कजरी- फिर अब. क्या करें कर्मा ये सब तो मैंने सोचा नहीं... मुझे तो अब दर लग रहा है कहीं कुछ गड़बड़ न हो जाये..

में- दीदी डरो मत पर हमें कुछ न कुछ करना पड़ेगा... जल्दी hi... कल से मेरे दिमाग में ये hi बात चल रही थी..

Kajri-par करें क्या?

में- दीदी हमें कुछ ऐसा करना होगा जिससे की जैसे अभी हमें दर है की वो हमारा राज़ न खोल्दे वैसे hi उसे भी होना चाहिए... जैसे अभी हमारी कमज़ोरी उसके पास है उसकी कमज़ोरी हमें पकड़नी होगी ..

कजरी- पर ये होगा कैसे... मुझे तो कुछ समझ नहीं आ रहा.. और उसकी कमज़ोरी हम इतनी जल्दी कैसे ढूंढेगे.. क्या कमज़ोरी है उसकी....

Me-didi जग्गू एक लड़का है और हर लड़के की एक कमज़ोरी होती...

Kajri-kya..

Me-choot..

Kajri-karma अभी ये सब बातें मत कर... मुझे चिंता हो रही है..

Me-didi सच hi कह रहा हूँ और मुझे उसकी कमज़ोरी पकड़ने का रास्ता मिल गया है...

Kajri-kya बता न जल्दी..

में- ये..

कजरी- ये तो साड़ी है.. इससे क्या होगा..

Me-didi यही जग्गू की कमज़ोरी का रास्ता है..

Kajri-par कैसे...

में- मैं बताता हूँ न कैसे...

और फिर मैंने कजरी को पूरा प्लान समझा दिया..

कजरी- तुझे लगता है ये काम करेगा..

Me-haan दीदी बिलकुल करेगा बस तुम्हे जो समझाया है वो बिना गलती के करना होगा...

काजै- पता नहीं यार कहीं गलती हो गयी तो.. मेरा होना ज़रूरी है क्या?

Me-didi किसी और को नहीं बता सकते न.

कजरी- हाँ ये भी है..

में- दीदी सब ठीक होगा बस हमें प्लान से काम करना है..

Kajri-theek है... मैं पूरी कोशिश करुँगी..

में- ठीक है दीदी ये साड़ी रखो और बाकि मैं तुम्हे फ़ोन पर बताता रहूँगा...

कजरी- सच में सब ठीक हो जायेगा न कर्मा?

में- हाँ दीदी बिलकुल ठीक हो जायेगा... बस तुम चिंता मत karo...ab मैं चलता हूँ और बाकि चीज़ें देख लेता हूँ...

Kajri-therk है पर जो भी हो मुझे बतादेना...

में- ठीक है.

और फिर मैं वहां से निकल गया.. और फिर जग्गू को फ़ोन किआ दोबारा उससे मिला और उससे जो काम दिए था इसके बारे में पुछा.. जब सब सही लगा तो फिर मैंने उसे घर भेज दिया और मैं अपने घर आ गया..

घर आकर गेट खटखटाया तो पल्ली ने खोला और मुझे देखकर मुस्कुराई और फुसफुसाते हुए बोली अंदर आओ मेरे राजा...

मैं उसकी बात सुनकर हैरान रह गया और वो खिलखिलाती हुई अंदर भाग गयी सब लोग आंगन में बैठे थे बातें चल रही थी की जैसे hi मैं पहुंचा पीछे से पापा और मौसा जी भी आ गए..

सब और खुश हो गए मैंने अनुज ने पल्ली ने मौसा जी के पेअर छुए... मौसा जी ने माँ से चची से चाचा से नमस्ते वगेरा की हमें भी आशीर्वाद दिया... फिर पापा और मौसा जी भी बैठ गए.. पल्ली उनके लिए पानी लेकर आई दोपहर के खाने का टाइम हो गया था...

माँ और पल्ली ने सबके लिए खाना लगाया.. मौसा और पापा वहां की बातें बताने लगे और हम सब ने सुनते सुनते खाना खाया... खाना खाने के बाद राजन चाचा को खेत में पानी लगाना था तो वो चले गए पर माँ और मौसी ने पल्ली और चची को रोक लिया...

घर में ज़्यादा लोगो के होने से मज़ा आ रहा था.. खूब हंसी मज़ाक चल रहा था ख़ुशी का माहौल था.. मौसा और पापा बाजार से मिठाई और फल लाये थे जिन्हे सबने बड़े चौ से खाया.. फिर पापा और मौसा थके हुए थे तो वो लोग आराम करने लगे औरतें अपने औरतों वाले काम करने लगी मतलब गपशप पल्ली भी उनके साथ थी... मुझे मेरे एक दोस्त का फ़ोन आ गया की आजा मैच लगा बगल के गाओं से.. ..

मैंने अपना बात उठाया हुए जाने लगा तो अनुज भी पीछे पद गया की मैं भी खेलूंगा तो वो भी चल दिया साथ में रस्ते में जग्गू को भी साथ कर लिए और पहुंच गए मैदान में... पास के गाओं की टीम से मैच था पर पैसा काफी लग रहा था मेरे दोस्त ने मुझसे भी पुछा तो मैंने मेरे, अनुज के और जग्गू के तीनो के मिलके 1000 लगा दिए..

मुझे पता था अगर हरा तो न जग्गू एक पैसा देगा न अनुज सरे मेरे hi जायेंगे...

खैर पहला मैच हुआ और जैसा सोचा था हम हार gaye...chud गए मेरे 1000 रस पर फिर अगले में मैंने फिर से 1000 लगाए इस बार हमें बड़ा लक्ष्य मिला था और मुझे किसी पर भरोसा नहीं था अपनी टीम में तो मैं तब तक बैटिंग करता रहा जब तक जीत न गए.. खैर सुकून मिला की 1000 बच गए..

अगला मैच फाइनल था जो जीतेगा वो जीत कर जायेगा इस बार भी पहले उनको बैटिंग थी.. सालो ने हमारे बोलेरों को बहुत मारा.. और फिर से पहाड़ जैसा लक्ष्य...

इस बार मैं ज़िद्द करके ओपनिंग गया दूसरी तरफ से ऐसे चूतिये उतरे की 3 ओवर में 4 विकेट गिरवा दिए पहिए जग्गू आया.. मैंने और जग्गू ने मिलकर ाचा खेला और खूब पिटाई की गेंदबाजों की पर फिर साला जग्गू कैच पकड़कर आउट हो गया.. एक दो विकेट और गिर गए फिर अनुज आया अनुज ने पहली बॉल खेली और उसी पर चक्का जड़ दिया मैं हैरान रह गया हमारी टीम वाले चिल्लाने लगे... एक छक्के ने पूरी टीम में जोश भर दिया मुझे भी भरोसा सा हो गया की चल अनुज कुछ तो बना hi लेगा और फिर मैं भी पेलने लगा और अंत में मैंने और अनुज ने मैच जीता दिया..

मैच ख़तम हुआ तो 1000 के फायदे के साथ मैं घर चल दिया रस्ते में अनुज और जग्गू को 250-250 रस पकड़ा दिए वो भी खुश हो गए मैंने 500 रखे जेब में..

साला मैच खेलने में समय का पता hi नहीं चलता अँधेरा हो आया था जब हम घर पहुंचे.. मौसा और पापा बाघ गए हुए थे घर पर अब भी चरों औरतें थी... खाने की तैयारी हो रही थी मैं और अनुज गंदे हो गए थे तो बरी बरी से नहाये.. तब तक मौसा और पापा भी आ गए थे साथ में राजन चाचा भी थे माँ ने साफ़ बोल्दिया था की आज सब लोग यहीं खाना खाएंगे...

खैर जब तक औरतें खाना बना रही थी तो मर्द बातों में लगे हुए थे कोई खेल की तो कोई राजनीति की... जब खाना बन गया तो सबने खाना खाया काफी स्वादिष्ट और कई तरह की सब्ज़ियां बनाई थी.. सबने पेट भर के खाया फिर सरे काम ख़तम करके सब लोग आंगन में hi बैठ गेट खातों पर एक खाट पर पापा मौसा और राजन चाचा.. एक पर माँ मौसी ममता चची और एक पर पल्ली मैं और अनुज.. बातें चल रही थी...

तभी पापा बोले- अरे सुनो तुम्हारे लिए साड़ी लाये थे वो देखि तुमने?

मौसा- हाँ साड़ियां नहीं निकली क्या बैग से..?

Mausi-kaunsi साड़ी.

Papa-are सरिया खरीदी थी तुम्हारे लिए बाजार से देखो बैग में होंगी... शैलेश वाले..

Maa-acha हमें लगा उसमे उनका सामान है तो देखा hi नहीं..

Palli-are वाह नयी नयी सरीयां तै जी और मौसी के लिए..

पापा- सिर्फ तै जी और मौसी के लिए नहीं.. तेरी मम्मी के लिए भी है ..

ममता चची- मेरे लिए... क्यों लाये भाई साब...

Mausa-are भाभी उसमे 4 सरीयां हैं जो जिसको पसन् हो रखलो..

पल्ली- फिर तो मैं भी एक लुंगी...

राजन चाचा- पल्ली छुपकर भाभी के लिए हैं वो...

माँ- भैया ख़बरदार अगर मेरी बच्ची को कुछ कहा तो... उसे जो लेना है वो लेगी... इतनी प्यारी गुड़िया है मेरी...

पल्ली खुश हो गयी वहीं चाचा और चची भी मुस्कुराने लगे..

राजन चाचा- भाभी तुम्हारे लाड ने hi बिगाड़ा है इसको..

Maa-are हाँ बहुत बिगड़ी है ये...

पल्ली- पापा कहाँ बिगड़ी हूँ मैं सरे काम करती हूँ..

ममता चची- बस अब चुप हो जा जीजी ने बोल दिए न साड़ी ले ले तो..

पल्ली दौड़कर गयी और बैग खींचकर लेकर सबके बीच में रख दिया और खोलने लगी

अनुज- और मेरे लिए क्या लाये हो!?

Me-thappad..

सब हंसने लगे...

Anuj-maa देखो...

मौसा- अरे ऐसा हो सकता

है की अपने अनुज साब के लिए हम कुछ न लाएं? बैग में देखो क्या है..

अनुज भी पल्ली के साथ कूद पड़ा बैग खोलने में.. पल्ली ने चरों साड़ियां निकली और अलग हो गयी... और माँ मौसी और चची की खत पर जाकर उन्हें दिखने लगी...

फिर अनुज ने दो डब्बे निकले उन्हें खोला तो बड़े hi प्यारे जूते थे...

मौसा- ये हैं तुम्हारे अनुज साब और एक जोड़ी कर्मा के लिए..

मैंने अपने जूते देखे मुझे बहुत पसंद आये... हलके और सुन्दर थे... उधर औरतें साड़ी में लगी हुई थी ये अच्छी है ये मैं लुंगी वगेरा वगेरा...

माँ- अरे तुम लोग अपने लिए क्या लाये हो...

पापा- हमें क्या ज़रुरत थी...

Mausi-are जब सबके लिए लिया तो अपने लिए भी लेना चाहिए था जीजाजी...

मौसा- अरे भाईसाब तो ले hi नहीं रहे थे मैंने ज़िद्द करके दिलवाये हैं बैग में देखो सबसे नीचे...

अनुज ने सबसे नीचे से निकले तो तीन पैकेट थे एक मैं शर्ट पंत थे जो मौसा ने पापा को पकड़ा दिए एक मैं सुन्दर सा कुरता पजामा था जो मौसा ने राजन चाचा को पकड़ा दिया और एक में जीन्स टीशर्ट थी जो मौसा की थी..

राजन चाचा- अरे भाई साब ये कुरता मेरे लिए क्यों?

पापा- तुझे भी चूं छान करने की आदत है ये नहीं रखले चुप चाप...

इस बात पर पल्ली और चची तेज़ी से हंसने लगे...

माँ ने पापा को डांटा ऐसे बच्चों के सामने दन्त रहे हो भैया को...

राजन चाचा- अरे नहीं भाभी ये दांत नहीं प्यार है मुझे बड़ा ाचा लगता है जब भैया किसी बात के लिए डाँटते हैं तो...

मौसी- तो रखलो अब कुरता पजामा जीजाजी..

ममता चची- अब भाई साब ने बोल दिए न अब तो रखना hi पड़ेगा...

अनुज ने इतने में अपने जूते पहन भी लिए थे...

अनुज- देखो कितने अचे लागृहे हैं न..

मौसी- हाँ लल्ला बड़े जाँच रहे हैं... सही से आ रहे हैं न..

अनुज- हाँ मौसी एक दम फिट..

मौसा- कर्मा ज़रा तू भी पहन के देख अपने...

में- अभी देखता हूँ

और फिर मैंने भी पहने वाकई काफी अचे जूते थे पेअर में पता hi नहीं लग रहे थे और फिटिंग भी गज़ब की थी...

में- अरे बहुत मस्त हैं ये तो मौसा जी पता hi नहीं चल रहे पैरों में एक दम पत्ते जैसे हैं...

मौसा- हैं न क्वालिटी के...

में- हाँ ाचा हम दोनों ने तो पहन लिए अब बाकि सब भी पहन कर देखो न अपनी अपनी चीज़ें..

पल्ली- हाँ सब दिखाओ..

पापा- अरे देख लेंगे कभी बाद में अब्बी क्या ज़रुरत है...

मौसी- क्यों ज़रुरत नहीं है जीजाजी हमें भी देखना है कैसे लगेंगे कपडे... सब पहन कर दिखाओ..

मौसा- ाचा तो तुम लोग भी साड़ी पहनकर दिखाओ...

ममता चची- साड़ी के लिए ब्लाउज अभी सिला थोड़े hi न है वो सिलेगा तभी पहनेंगे...

राजन चाचा- अरे तो पुराने ब्लाउज के साथ hi पहन लेना काम से काम साड़ी तो पहनो...

Mausi-dekhna पड़ेगा..

पापा- अरे क्या देखना पड़ेगा पहनो और दिखाओ कैसी हैं सारीयां..

माँ- तुम भी शुरू हो गए सबके साथ...

पापा- सही तो बोल रहा हूँ...

में- ाचा तो ये तय हुआ सब अपनी अपनी चीज़ें पहन कर दिखाएंगे... मैं और अनुज पहन चुके हैं तो एक एक करके सब लोग जायेंगे अंदर और पहनकर बहार आएंगे...

पल्ली- मंज़ूर है...

मौसी- को सबकी तरफ से बोल पड़ी ये...

में- तो सबसे पहले मौसा जी..

मौसा- मैं क्यों सबसे पहले...

पल्ली- अरे जाओ न मौसा जी जाना तो है hi तो पहले आप hi चले जाओ.

तो मौसा उठ कर अंदर गए सब बातें करते हुए इंतज़ार करने लगे... थोड़ी देर बाद मौसा बहार निकले जीन्स और टीशर्ट पहनकर..

पल्ली- वाह मौसा जी...

ममता चची- बहुत अचे लग रहे हैं भैया जाँच रहे हैं एक दम...

मौसा जी की बॉडी फौज ने होने की वजह से हटती कटती थी तो उनके शरीर पर कपडे अचे लग रहे थे एक दम फिट आ रहे थे.

माँ- हाँ भैया रंग भी जाँच रहा है और नाप भी...

मौसा खड़े खड़े शर्मा रहे थे..

मौसी- अरे देखो तो शर्मा कैसे रहे हैं..

Mausa-chup कर तू...

और फिर मौसा जी बैठ गए अपनी जगह पर..

Me-ab बरी है राजन चाचा की...

राजन चाचा- अरे हम कहाँ अभी पहनेंगे ये...

Palli-tauji देखो पापा फिर मन कर रहे हैं..

राजन Chacha-are बस मेरी माँ जा रहा हूँ..

और फिर राजन चाचा उठ कर गए कमरे में बाकि सब हंसने लगे...

थोड़ी देर बाद बहार आये शरमाते हुए..

Me-are वाह चाचा गजब लग रहे हो..

Palli-are पापा बिलकुल hi बदल गए तुम तो..

अनुज- और क्या काम समझा है चाचा को..

मौसी- मस्त लग रहे हो जीजा... दूल्हे जैसे देखो कहीं जीजी का दिल दोबारा न हो जाये शादी का...

राजन चाचा- अरे दोबारा भी इसी से करनी पड़ेगी क्या?

सब हंसने लगे..

ममता चची- नहीं नहीं तुम्हारे लिए तो हीरोइन आएगी koi...zara अचे क्या लगने लगे तो कितना बन रहे हैं..

Maa-are बस लड़ना बंद करो dono...bachhe बन जाते हो तुम दोनों भी..

फिर चाचा भी अपनी जगह बैठ गए...

में- अब जायेंगे पापा...

पापा- अभी जाता हूँ पता नहीं तुम लोग क्यों शर्मा रहे थे.. कोई बड़ी बात थोड़ी hi है..

Mausi-je बात जीजा...

सब खिलाकर हंस पड़े... और पापा अंदर चले गए बाकि सब बातों में लगे थे

थोड़ी देर बाद पापा बहार आये थोड़ा शरमाते हुए .

मौसी ने उन्हें देखते hi सीटी मारी..

मौसी- वाह जीजा एक दम हीरो लग रहे हो...

पल्ली- सच में ताऊजी बहुत जाँच रहे हो..

पापा शर्ट पंत में सच में काफी अचे लग रहे थे.. खेतों में काम की वजह से उनका शरीर भी गठीला था जिससे कपडे फिट आ रहे थे उन्हें..

Mausa-bhai साब बाजी मार ली अपने तो..

ममता चची- भाई साब बहुत अचे लग रहे हो...

माँ- क्या बात है जी और क्यों नहीं पहनते ऐसे कपडे...

पापा- और की छोड़ अभी की देख...

Maa-dekh के hi बोल रही हूँ...

में- क्या बात है papa...sach में हीरो बन गए..

Papa-chalo अब तुम लोग अब अगला कौन जायेगा ये बताओ..

और अपनी जगह आकर बैठ गए...

Me-ab पल्ली की बरी...

पल्ली तो जैसे इसी इंतज़ार में थी..

Palli-maa चलो न साड़ी बांध देना मुझसे ठीक से बांधेंगी नहीं...

माँ- हाँ ममता चली जा और देख नीचे वाली अलमारी में छोटे ब्लाउज पड़े होंगे वो पहना कर देख आ जाएं इसे तो..

ममता चची और पल्ली चले गए...

बाकि सब बातें करने लगे...

थोड़ी देर बाद पल्ली ममता चची बहार आ गयी..

माँ- पल्ली कहाँ रह गयी...

चची अपनी जगह पर आकर बैठते हुए boli-aa रही है बस..

इतने में गेट से पल्ली भी निकली..

पल्ली को देखते hi सब की आँखें उस पर जैम सी गयी.. पल्ली ने अपने लिए एक ग्रे साड़ी पसंद की थी.. हम सब जो आजतक उसे सूट या बाकि कपड़ों में देखते आये थे साड़ी में देखकर बिलकुल हैरान रह गए साड़ी में पल्ली बेहद खूबसूरत लग रही थी.. अचे से तैयार होकर आई थी... और बेहद खूबसूरत लग रही थी





ब्लाउज के नीचे से झांकती नंगी कमर और पारदर्शी साड़ी के पीछे से हलकी हलकी नज़र आती हुई नाभि पल्ली को कामुक बना रही थी...

औरतों का पता नहीं पर मर्दों की नज़र तो नहीं हैट रही थी उससे जिनमे उसके पापा भी शामिल थे... मेरा लुंड भी थोड़ा टाइट हो चूका tha...anuj भी मनो खा जाने वाली नज़रों से देख रहा था..

मैंने सरे मर्दों की गॉड में नज़र डाली तो थोड़ा सा उभर तो सबके पंत या पाजामे में दिखा... राजा. चाचा भी अपनी बेटी की जवानी देखकर कड़क हो रहे थे...

माँ- अरे मेरी गुड़िया को किसी की नज़र न लगे बहुत प्यारी लग रही है..

Mausi-saxh दीदी पता hi नहीं चला की पल्ली इतनी बड़ी और सुब्दर हो गयी है..

Palli-subder तो मैं हमेशा से hi हूँ..

Papa-sach में पल्ली बिटिया बहुत सुन्दर लग रही है..

में- सच में सोचा नहीं था की साड़ी में ये ऐसी लगेगी...

मौसा- अरे पल्ली सूंदर है इसलिए ये साड़ी अछि लग रही है उसपर...

राजन Chacha-bachhhe कब बड़े हो जाते हैं पता hi नहीं चलता..

म चची- सही कहा ग..

पल्ली- अछि लगी न साड़ी

Me-bahut अछि फिर पल्ली अपनी जगह पर आकर बैठ गयी...

में- तो अब अगला नंबर है हमारी चची का...

म Chachi-are मेरी बरी आ भी आ गयी... चलो आती हूँ अभी..

ममता चची साड़ी उठाकर अंदर चली गयी थोड़ी देर बाद बहार आई.. चची ने

एक हरे रंग की सिंपल साड़ी चुनी थी जिसे पहनकर वो बहार आई बिलकुल सिंपल लग रही थी पर चची का बदन hi कुछ ऐसा था किसिमप्ले साड़ी भी उनपर कामुक लग रही थी... आधी नंगी कमर और गहरी नाभि देखकर मेरा क्या सबका लुंड फन उठा रहा था...





मौसा और पापा कुछ ज़्यादा hi ध्यान से देख रहे थे इस कमरे में वो hi सो ऐसे थे जिन्होंने चाची के कामुक बदन को भोगा नहीं तथा...

मर्द चाहे जितना भी शरीफ क्यों न हो औरत का बदन होता hi ऐसा है की मर्द को भटका hi देता है...

पापा और मौसा की नज़रें पहले पल्ली तो अब उसकी मम्मी के बदन से हटने का नाम hi नहीं ले रही थी...

माँ- अरे वाह इतनी सादा साड़ी में भी कितनी खिल रही है ममता तू..

Mausi-sach में जीजी... बहुत सूंदर लग रही हो सदा साड़ी भी बहुत जाँच रही है...

Palli-haye मेरी मम्मी नज़र न लगे..

Me-haye मेरी सूंदर चची...

Anuj-haaye मेरी प्यारी चची...

पापा- अरे सादा चीज़ें hi अछि लगती हैं.. सदा रहने वाली औरत hi ज़्यादा सूंदर लगती है..

Mausa-sahi कहा भाई साब ममता भाभी को hi देख लो..

म Chachi-are बस बस भैया तुम भी न..

र Chacha-sahi कह रहे हैं भाई साब खिल रही है तू...

चची शर्मा gayi...are बस आप सब भी न... और अपनी जगह आकर बैठ गयी...

में- अब बरी है मौसी की...

Mausa-jab तबसे बहुत बोल रही थी..

मौसी - जा तो रही हूँ..

मौसी उठ कर चली गयी हम सब बातें कर रहे थे साथ hi पापा और मौसा जी पल्ली और चची को चिप चिप कर ताड़ रहे थे... मैं और अनुज भी कहाँ पीछे थे...

खैर थोड़ी देर बाद मौसी बहार आई और रुक कर कड़ी हो गयीं...

हमारी नज़र एक बार फिर से गेट पर जैम gayi..mausi ने एक क्रीम कलर की साड़ी पहनी थी पूरे ब्लाउज के साथ कहने को बिलकुल सदा सरल पर उनके अंग ऐसे थे जो साड़ी मैं से उनके जिस्म का हर कटाव महसूस हो रहा था... उनकी बड़ी बड़ी छुछियां ब्लाउज में छुपी हुईं कमर और पेट जो साड़ी के उस पार हल्का हल्का नज़र आ रहा था..





ब्लाउज के बीच में लटकता मंगलसूत्र... ब्लाउज सीने. से थोड़ा खुला था तो हलकी सी घाटी नज़र आ रही थी...

इस बार भी सरे मर्दों की निगाहें वहीं जमी रह gayi...papa चाचा मैं अनुज लार टपका रहे थे पर बिना ज़ाहिर किये..

म Chachi-are वाह शालू ये रंग तो तुझपर बहुत ाचा लग रहा है..

Palli-haan मौसी और साड़ी भी कितनी अचे से पहनी है तुमने बहुत सुन्दर लग रही हो..

माँ- हाँ रे शालू अछि साड़ी चुनी है तूने बहुत सूंदर है... ऐसा लग रहा है तेरे लिए hi बानी है...

Papa-sach में ये साड़ी तो हमारी साली साहिबा के लिए hi बानी है पापा ने ये बात पंत में तम्बू को दबाते हुए कही..

राजन चाचा- सही बोले भैया बहुत सूंदर लग रही हो साली जी...

Mausi-are नाम छोड़कर ये क्या साली साली लगा रखा है...

Papa-jo है वो hi बोल रहे हैं हम तो...

मौसा- क्या बात है बीवी साहिबा सच में सूंदर लग रही हो...

Mausi-tumne भी नाम छोड़ दिया..

मौसा- हम भी जो है वही बोल रहे हैं...

सब लोग हंसने लगे...

में- वाह मौसी गजब लग रही हो...

Anuj-haan नयी दुल्हन जैसी...

पल्ली- ये अलग hi बोलता है..

Anuj-tu चुप कर..

म चची- तुम दोनों chupkaro...aur जीजी अब तुम्ही रह गयी हो ये लो साड़ी..

माँ ने चची के हाथो से साड़ी ली और फिर देखकर boli-are ये तो बड़ी पतली है ऐसी हलकी साड़ी हम नहीं पहनते...

पापा- जब सबसे आखिरी में बची हुई लोगी तो पसंद की थोड़े hi मिलेगी..

Mausi-jeeji सही तो है हमारी भी वैसी hi थी..

Mausa-haan भाभी इतने प्यार से लाये हैं अब मन मत करो..

Maa-par ऐसी पहनते नहीं है न इसलिए...

म Chachi-are जीजी कहीं बहार थोड़े hi जाना है घर पर hi तो हो पहन कर देखलो न पसंद आये तो बाद में मत पहनना..

Papa-are देखले न पहनकर...

Palli-haan तै जी देखो न..

Anuj-haan मम्मी पहेँलो..

Maa-theek है जाती हूँ... तुम सब भी ज़िद्द करके बैठ गए हो..

सब खुश हो गए और माँ भी उठ कर कमरे में चली गयी..

हम सब बातें करते हुए माँ का इंतज़ार करने लगे...

और फिर थोड़ी देर बाद कमरे का दरवाज़ा खुला और सबकी नज़रें उस तरफ गयी और फिर ठहर गयी ...

हलके लाल रंग की पारदर्शी सारी माँ ने पहनी हुई थी... हरे रंग के ब्लाउज के साथ सुंदरता के बारे में क्या hi कहूं माँ कितनी सूंदर थी ये सब जानते हैं.. पर सुंदरता के साथ साथ माँ के शरीर में एक चीज़ और थी जो सबसे अलग थी... उनकी कामुकता.. उनका बदन ऐसा था की वो कुछ भी पहनें मर्दों का लुंड देखते hi खड़ा हो जाता था...

खैर माँ धीरे धीरे चलते हुए हमारे सामने आई...





माथे पर बिंदी गले में मंगलसूत्र साड़ी के थोड़ा साइड से दिखती थोड़ी थोड़ी कमर पारदर्शी साड़ी से झांकता हुआ उनका पेट... ब्लाउज में बंद बड़ी बड़ी छुछियां... कुल मिलकर माँ का गदराया बदन नयी साड़ी में और कामुक और सूंदर लग रहा था..

पल्ली- वाह तै जी इतनी सूंदर लग रही हो.. मैं भी बस बड़ी होकर तुम्हारे जैसी सूंदर लागूं तो मज़ा आ जाये.. ये कहकर पल्ली ने सीटी मारी..

माँ- मेरे जैसी बुढ़िया नहीं तू तो अभी भी हीरोइन दिखती है और बाद में भी दिखेगी.

म चची- जीजी उसका पता नहीं पर अभी तो तुम हीरोइन लग रही हो..

मौसी- सही में ममता जीजी... बहुत सूंदर लग रही हैं जीजी...

हम मर्दों के मुँह में तो जैसे पानी hi सूख गया था माँ को देखकर मैंने एक एक करके सबकी और देखा तो पाया सरे मर्दों के पंत में तम्बू बना हुआ था चाहे वो मैं हूँ अनुज हो चाचा हो या मौसा हो या पापा hi क्यों न हो...

मौसा- भाभी सचमें बहुत सूंदर लग रही है आप पर साड़ी आप बेकार में मन कर रही थी...

चाचा- सही कहाँ शैलेश भैया भाभी सही में अति सुन्दर लग रही हो...

माँ- तुम लोग भी न... बिना बात के तारीफ कर रहे हो...

पापा- अरे बिना बात के नहीं सही बोल रहे हैं... कभी कभी तू खुद hi भूल जाती है की तू कितनी सूंदर है...

पापा की बात सुनकर माँ शर्मा गयी.

Maa-are बच्चों के सामने तो रहने दो..

Me-nahi पापा मत रहने दो..

Anuj-haan पापा हमें कोई परेशानी नहीं है...

Palli-mujhe भी नहीं खुल के तारीफ करो ताऊजी..

सब हंस रहे थे माँ कड़ी कड़ी शर्मा रही थी..

पापा- बिना बात के खुद को बुढ़िया समझती हो ज़रा एक बार हमारी नज़र से देखो तो पता चले की क्या चीज़ हो तुम..

सब पापा की बात पर खिल खिलाकर हंसने लगे.. माँ भी शर्मा रही थी और हंस रही थी...

माँ- शैलेश भैया दारू पिलाके लाये हो क्या इन्हे.. कुछ तो शर्म करो बच्चों की...

माँ ये कहते हुए अपनी जगह पर बैठ गयी...

पापा- लो अब अपनी बीवी की तारीफ करना भी गलत है.. .

Mausi-kuch गलत नहीं है जीजाजी खुलकर करो...

मौसा- अच्छा मैं भी करूँ?

मौसी- नहीं तुम रहने दो

फिर सब हंसने लगे ऐसे hi मस्ती मज़ाक का मूड चल रहा था...

तभी पल्ली बोली- अरे सब लोग सुनो अगर सब साथ hi हैं तो कुछ खेलते हैं न अंताक्षरी वगेरा...

अनुज- हाँ हाँ मज़ा आएगा. खेलते हैं..

मौसा- बाकि सब से पूछलो..

मौसी- मैं भी राज़ी हूँ..

म चची- मैं भी खेलूंगी...

र चाचा- अरे पर मुझे ये गण वन तो नहीं आते..

म चची- अरे रहने दो तुम कितना गुनगुनाते रहते हो मैं सुनती नहीं क्या..

पापा- यार ये गण वन नहीं होगा हमसे...

माँ- खेल लो. न जब सबका मन है तो..

पापा- ाचा ठीक है अब तुम्हारे आर्डर को मन थोड़े hi कर सकते हैं...

माँ- बस रहने दो दोबारा शुरू मत हो जाओ..

पल्ली- तो दो टीम बनाते हैं ये सही रहेगा एक मैं औरतें और एक में सरे मर्द...

मौसी- पर ये तो 5 हैं और हम 4 है... बराबरी का मुक़ाबला कहाँ है..

पल्ली- पापा का होना भी बराबर hi है मौसी और हम लोग इन्हे आसानी से संभल सकते हैं...

म चची- तो ठीक है एक तरफ आप सब लोग और एक तरफ हम औरतें...

Me-theek hai..par थोड़ा कुछ और डाव पर लगाना होगा नहीं तो लोग ठीक से नहीं खेलेंगे...

Mausi-jaise क्या.?

जिस टीम पर पॉइंट चढ़ेगा उस टीम का एक बाँदा अगले गाने पर बीच में खड़ा होकर नाचते हुए जाएगा... और जीतने वाली टीम चुनेगी की कौन नाचेगा हरने वाली टीम से..

Maa-are ये गाने तक तो ठीक है नाचना वचन नहीं..

Papa-kyun दर. गयी अब..

Mausi-are दीदी सही है न ागत ये लोग हरे तो इन्हे भी नाचना पड़ेगा मज़ा आएगा सबको नाचते हुए देखने में खासकर जीजाजी को..

Maa-theek है वैसे मज़ा तो आएगा इन्हे नाचने में...

म Chachi-to ठीक है फिर तय रहा..

मौसा- ठीक हो जाये फिर..

और फिर खेल शुरू हो गया... उनकी टीम से पल्ली मौसी चची सब पूरे जोश में थे माँ भी बीच बीच में साथ दे रही थी...

हमारी टीम से अनुज मैं और मौसा थे मैं पापा और चाचा तो चुप hi थे...

खैर फिर पहला पॉइंट हम पर चढ़ गया और पल्ली ने सबसे पहले बोलै मौसा का नाम बेचारे मौसा शरमाते हुए खड़े huye..pahle तो कुछ समझ नहीं आया उनके की क्या करें फिर सबके उकसाने पर गेट हुए नाचने लगे... जैसा भी आता था हिले...

बाकि सब ताली बजा बजा कर उत्साह बढ़ा रहे थे सबके चेहरे पर हंसी थी.... गण गए कर मौसा अपनी जगह पर बैठ गए...

मौसी- अरे वाह मुझे कभी नहीं नाच के दिखाया तुमने...

Mausa-chup करो तुम और खेल आगे बढ़ाओ...

अगली बाज़ी औरतें हार गयी और मौसा ने बदले के लिए तुरंत पल्ली का नाम ले लिए..

इसके बाद सबकी तालियों के बीच पल्ली कड़ी हुई और फिर शरमाते हुए गण सजूरु किया और फिर शर्म वार्म भूलकर खुल कर नाचने लगी...





हम सब मर्दों का ध्यान पल्ली के थिरकते हुए मस्त बदन पर था उसकी गोरी कमर ब्लाउज में झूलती छुछियां हाय मुँह में पानी आ गया... पापा मौसा चाचा भी देखते हुए अंदर hi अंदर आहें भर रहे थे...

पर हर अछि चीज़ की तरह इसका भी अंत हुआ और पल्ली बापिस जाकर बैठ गयी... पर मर्दों के लुंड खड़े कर गयी... इसी बीच खेल दोबारा शुरू हुआ और इस बार हम हार गए और मौसी ने बलि का बकरा बनाया चाचा को...

अब सब का हँसके बुरा हाल के चाचा क्या करेंगे .. खैर चाचा खड़े हुए और सबके बीच आ गए... चची हंस रही थी उन्हें देखकर...

चाचा भी काम नहीं थे राजेश खन्ना की तरह हाथ घुमाया और नाचने लगे साथ hi गाने लगे चची को इशारा करके- चुप गए सरे नज़ारे हाय क्या बात हो gayi...tune काजल लगाया दिन में रात हो गयी...

और इस गाने पर तो सबसे ज़्यादा तालियां और सीटियां बजी.. चची का शर्म से बुरा हाल पर चाचा ने तो कमाल hi कर दिया... पापा ने खुद शाबाशी दी..

खेल फिर शुरू हुआ और आगे बढ़ा इस बार हमने बाप्सी की और जीत गए और चाचा ने मौसी का नाम बोल दिया...

तालियां बजी और मौसी बीच में आ गयी और फिर शरमाते हुए नाचने लगी अपनी साड़ी घुमा घुमा कर... कभी उनकी नंगी कमर सामने आ जाती तो कभी गदराये चूतड़ तो कभी बड़ी बड़ी छुछियां...





एक बार फिर से मौसी ने मर्दों के लुंड कड़क कर दिए अपने हुस्न के जलवा दिखा कर देखते देखते सोच रहा था क्या माल हैं मौसी यार... पता नहीं कैसे रहलेते हैं मौसाजी ड्यूटी पर उनके बिना..

मेरी ऐसी बीवी हो तो एक दिन न गुज़ारे बिना चुदाई के.. पर जैसी जिसकी किस्मत....

मौसी ने अपने गदराये बदन को थिरकाया जब तक गण ख़तम नहीं हुआ और फिर बैठ गयी तालियां बजा के सबने उनका उत्साह बढ़ाया..

र चाचा- वाह शालू बहुत ाचा नाच लेती हो तुम तो...

Mausi-are कहाँ जीजा नाचते तो आप हैं राजेश खन्ना जैसे..

सब हंसने लगे..

इसी हंसी ख़ुशी के बीच फिर से खेल शुरू हुआ और इस बार हम लोग हारे तो इस बार बलि का बकरा बना मैं...

पर अपने को किस बात की शर्म खड़ा हुआ गण गया नाच वाच के काम निपटाया और बैठ गया ... आगे गेम चला और अब हम फिर से हार gaye...is बार पापा hi बचे थे तो उनका नंबर आया..

पापा भी शरमाते हुए खड़े हुए पर फिर अचानक से देवानंद बन गए और माँ की तरफ देखकर गाने लगे...

पल भर के लिए कोई हमें प्यार करले झूठा hi सही...

पापा को देखकर सब हैरान रह गए हम सब सीटी मात के तालियां बजने लगे वहीं माँ अपना चेहरा धक् के हंस रही thi...papa ने गण ख़तम किआ और अपनी जगह आकर बैठे.. सबने खूब तालियां पीती पापा के kiye...khel आगे बढ़ा और किस्मत से हम जीत गए..

इसके आएगी क्या हुआ अगली अपडेट में प्लीज कमैंट्स करके ज़रूर बताएं कैसी लगी अपडेट बहुत बहुत शुक्रिया
 
दोस्तों आपसे स्टोरी के बारे में एक और क्वेश्चन है...





Gif को ध्यान से देखिये और अपनी पसंद के अकॉर्डिंग बताइये की ये कहानी के कौनसे किरदार हो सकते हैं और क्या सिचुएशन हो सकती है... अपनी अपनी पसंद के अनुसार जवाब ज़रूर दें...
 
पापा को देखकर सब हैरान रह गए हम सब सीटी मात के तालियां बजने लगे वहीं माँ अपना चेहरा धक् के हंस रही thi...papa ने गण ख़तम किआ और अपनी जगह आकर बैठे.. सबने खूब तालियां पीती पापा के kiye...khel आगे बढ़ा और किस्मत से हम जीत गए..

अपडेट 98
और इस बार जोश जोश में पता नहीं कैसे पापा ने बड़ी जल्दी से ममता चची का नाम ले दिया.. हैरानी तो थोड़ी सबको हुई पर सब मुस्कुरा कर ताल गए उधर चची शर्माती हुई कड़ी हुई... सब ताली बजने लगे और चची को नाचने के लिए उकसाने लगे...

चची ने एक भोजपुरी गण शुरू किआ और धीरे धीरे थिरकने लगी... नाचने की वजह से चची की साड़ी उनके बदन से बार बार हैट रही थी और उनके कातिलाना मखमली बदन के दर्शन सबको हो रहे थे जिससे सरे मर्दों का बुरा हाल हो रहा था..





चची के भोजपुरी गाने पर खूब सीटियां बज रही थी माँ पापा को देख रही थी जो बड़ी ललचाई नज़रों से चची की और देखकर ताली बजा रहे थे...

जैसा की सब जानते हैं भोजपुरी गांव के बोल और नाच सब कितना कामुक होता है तो उसी कारन चची की कामुकता और बढ़कर दिख रही थी... उनके गोर नंगे पेट और गहरी नाभि पर तो जैसे सब के मुँह में पानी आ रहा था.. पापा और मौसा की नज़रें तो हैट hi नहीं रही थी जिसे माँ और मौसी ने भी देखा... सरे मर्दों के पंत में तम्बू साफ़ दिख रहे the...par सब छुपाने की पूरी कोशिश कर रहे थे...

खैर चची ने थोड़ा रहम किआ और नाचना बंद किआ और अपनी जगह पर आकर बैठ गयी सब ने उनके लिए खूब तालियां बजे...

Mausa-waah भाभी आप तो एक दम भोजपुरी हीरोइन लग रही थी..

पापा- सही कहा, शैलेश... ममता ने तो कमाल का नचा है भाई....

पल्ली- वाह माँ कमाल कर दिया..

मौसी- जिओ ममता जीजी... हमें भी सीखा दो ऐसे नाचना...

राजन चाचा- अरे शालू तुम तो पहले से इतना ाचा नाचती हो...

माँ- दोनों की hi बात अलग है पर सच में ममता नज़र न लगे इतना ाचा नाची तू..

म Chachi-are बस जीजी जैसे आया वैसा कर लिए...

चलो खेल फिर चालू हुआ अब अगर हम पर पॉइंट चढ़ता तो खेल ख़तम हो जाता और औरतों की टीम जीत जाती और अगर माँ को नाचते हुए देखना था तो हमें किसी भी हालत में ये पॉइंट लेना था, पर माँ को नाचता हुआ देखने के लिए कई लोग बेक़रार थे.. चाचा मौसा अनुज मैं पापा पूरी शिद्दत से खेल रहे थे... उधर औरतें भी काम नहीं थी...

काफी देर मुक़ाबला चलता रहा कोई हरने को तैयार hi नहीं था हम एक जगह फंसे तो जिससे उम्मीद नहीं थी उसने यानि चाचा ने बचा लिए... जो उनकी बेकरारी जो माँ को नाचता देखने के लिए थी दर्शाता था... इसी बीच मौसा अपने फ़ोन पर कुछ देख रहे थे तो पल्ली बोल पड़ी- मौसाजी ये बेईमानी है... आप फ़ोन पर देख रहे हो...

मौसा- नहीं तो मैं तो कुछ और देख रहा था..

पल्ली- नहीं आप गण देख रहे थे बेईमानी करके...

मौसा- अरे बाबा सच्ची नहीं देख रहा था...

मौसी- एक काम कर पल्ली सबके फ़ोन इकट्ठे कर और कर्मा के कमरे में रख आ..

Palli-haan ये सही रहेगा..

मौसा- अरे ऐसा क्यूज कोई फ़ोन आया तो..

मौसी- तो मिस कॉल देखके कर लेना वैसे रात में किसका फ़ोन आने वाला है..

मौसा- अरे पल्ली तू ले जा सबके फ़ोन नहीं तो ये शक करके मुझे मार डालेगी..

फिर पल्ली ने सबके फ़ोन लिए और मेरे कमरे में रख आई.. और फिर खेल फिर शुरू हो गया...

खैर काफी देर बाद और किस्मत से हम लोगों ने पॉइंट चढ़ा दिया औरतों पर...

चाचा- लो भाभी आ गयी बरी तुम्हारी..

मौसा- हाँ भाभी अब नहीं बच पाओगी तुम...

दोनों की बेकरारी और ख़ुशी चुप्पै नहीं छिप रही थी...

म चची- चलो जीजी अब दिखाओ अपना कमाल..

माँ- अरे तुम लोग भी न ये सब करवाना ज़रूरी है क्या?

पापा- क्यों जब हमने किआ तब तो नहीं बोली तुम कुछ... अब अपनी बरी पर पीछे हैट रही हो..

माँ- पीछे नहीं हैट रही बस शर्म आ रही है थोड़ी..

Mausa-bhabhi यहाँ सब अपने hi हैं कैसी शर्म..

Palli-haan तै जी मत शर्माओ..

सब ताली बजने लगे और माँ इसी बीच शरमाते हुए कड़ी हुईं...

और फिर जैसे हर औरत करती है वैसे अपने पल्लू को कमर में ठूंस लिए और फिर धीरे से गण शुरू किआ माँ ने- आओ हुज़ूर तुमको सितारों में ले चलें...

और उसी के साथ hi उनका बदन भी थिरकने लगा...

माँ हैं तो मैं झूठी तारीफ करके ये नहीं कहूंगा की माँ सबसे ाचा नाच रही थी बल्कि मौसी और चाची ने उनसे काफी ाचा नाचा था पर माँ जैसी गदराई मस्त औरत के बदन को थिरकते देखना hi अपने आप में एक अलग नशा था जो हर किसी को चढ़ रहा था.. और सच में माँ के साथ हर मर्द सितारों में जाना छह रहा था..

मौसा, चाचा, अनुज, मैं और पापा सब पर माँ का जादू चल चूका था मेरा लुंड बिलकुल कड़क था और मुझे पक्का पता था की यहाँ बैठे हर मर्द का यही हाल होगा...

पर मेरी प्यारी मस्त कामुक माँ इस सब से बेखबर होकर ठुमके लगा रही थी...





उनकी आधी नंगी कमर नाचते हुए उनकी कमर पर पड़ती silwatein..aahhh क्या नज़ारा था.... कोई मुर्दा भी उठ कर मुठियाने लगे...

हाल यहाँ भी ऐसा hi था सबका, ऐसा नहीं था यहाँ बैठे मर्द माँ की इज़्ज़त नहीं करते थे, बल्कि बहुत करते थे पर अभी अगर किसी को भी मौका मिलता तो वो बिना माँ के शरीर को भोगे नहीं छोड़ता क्यूंकि थे तो मर्द hi तो माँ जैसी बदन वाली औरत के लिए कौन नहीं तड़पता...

खैर दुर्भाग्य से माँ ने थोड़ी देर में गण बंद किआ और नाचना भी... थोड़ी देर के लिए तो सब चुप रहे की ये क्या हुआ माँ रुकी क्यों. पर फिर सब ताली बजने लगे माँ भी शरमाते हुए अपनी जगह आकर बैठ गयी...

राजन Chacha-Bhabhi एक दम मधुबाला की तरह नाची हो तुम..

मौसा- मधुबाला नहीं भाई साब जय प्रदा... एक दम जयाप्रदा लग रही थी भाभी...

Maa-bas बस मैं कोई हीरोइन नहीं लग रही थी.. तुम लोग भी न कुछ भी बोलते हो..

Palli-nahi तै जी बहुत सूंदर और ाचा नचा तुमने मज़ा आया देखकर..

पापा- हाँ ये तो है मज़ा आया देखकर.

माँ- हाँ तुम्हे तो मज़ा आएगा hi..

Mausi-are जीजी जीजाजी तुम लोग भी न हमेशा शुरू हो जाते हो...

Papa-humne क्या कहा..

अनुज- यही की मज़ा आया..

सब हंसने लगे...

में- हाँ तू ज़रूर बोल...

अनुज- बोल तो रहा हूँ मज़ा आया...

म चची- वैसे सही कहूं जीजी मुझे भी मज़ा आया कभी देखा नहीं था तुम्हे ऐसे नाचते हुए...

माँ- चल झूठी नाचती तो तू है.. मैं तो बस हिल रही थी कड़ी होकर...

Mausa-are भाई साब और मज़ा लेना है तो एक चीज़ है मेरे पास...

Papa-kya चीज़..

मौसा- समझ जाओ..

मौसी- हाँ मैं समझ रही हूँ... पहले hi बता देती हूँ अगर आज तुमने दारू निकली तो...

माँ- नहीं भाई कोई दारू नहीं वरु नहीं निकलेगी...

Mausa-are भाभी बात तो पूरी होने दो मैं पागल हूँ क्या जो बच्चों के होते हुए दारू लाऊंगा...

र Chacha-aacha फिर क्या है?

Mausa-Karma ज़रा अंदर से मेरा बैग तो लेकर आ..

में- अभी लाया...

एक मिनट में मैं बैग लेकर हाज़िर था सबके सामने... मौसा ने मेरे हाथ से बैग लिए और फिर उसमे से एक कैन जैसी निकली जो तेल की आती है 5 लतर की.. सब उसे हैरानी से देख रहे थे..

मौसा- ये है वो चीज़ भाई साब..

Papa-kya है इसमें?

मौसा- Taadi(Palm वाइन)...

Papa-sach में ताड़ी है क्या... कहाँ मिल गयी... यार बहुत दिन हो गए ताड़ी पिए...

Maa-to अभी भी मत पियो...

Mausa-are भाभी ये दारू थोड़े hi है ये तो एक तरह से कहलो रास है पेड़ से निकलती है... अरे वो ड्यूटी पर एक जगह रुका हमारा बंकर तो वहीं गाओं में बन रही थी तो गाओं वालों ने सरे फौजियों के लिए भी भेंट कर दी..

Mausi-phir भी रहने दो... और हमें पता है तारी क्या होती है गाओं मैं बाबा पीते थे खूब..

Papa-to पता है तो क्यों दर रही हो....

मौसा- और अगर गलत चीज़ होती तो मैं लता hi क्यों... और मैं सिर्फ अपने लिए नहीं सबके पीने की कह रहा हूँ, तुम औरतें भी पि सकते हो और बच्चे भी..

Anuj-kya हम भी पी सकते हैं...

मौसा- अरे बिलकुल कोई नुकसान नहीं होता इसका..

पल्ली- फिर तो मैं भी पियूँगी..

मौसी- क्या कहती हो जीजी और ममता जीजी..?

म चची- कहना क्या है जब सब लोग पिएंगे तो हम लोग भी पिएंगे..

माँ- हाँ जब बच्चे भी पि रहे हैं तो हम क्यों नहीं...

मौसा- तो पल्ली जा सबके लिए गिलास लेकर आ..

पल्ली सबके लिए दौड़ कर गिलास ले आई और सबको ताड़ी मिली और सबने बड़े चाव से पि..

और फिर बातें होने लगी ताड़ी के hi बारे में...

ऐसी hi बातें चल रही थी तभी मेरे ऊपर एक हलकी सी बूँद गिरी, और फिर एक और मैंने सोचा ये क्या hai...phir एक और पड़ी तब समझ आया की बारिश की बूंदे हैं..

Anuj-are यार बारिश होने लगी...

Mausi-are हाँ हलकी हलकी बूंदे पड़ने लगी हैं..

म Chachi-andar चलें यहाँ आंगन में तो भीग जायेंगे...

पल्ली- मम्मी हलकी हो रही है नहीं भीगेंगे..

में- मैं आया बाथरूम होक...

मौसी- ठीक है आ जल्दी.

माँ- कर्मा दरवाजा भी देखलिआ..

Me-theek है माँ..

मैं उठ कर गया पहले दरवाजे की कुण्डी लगाई और फिर बाथरूम के पास जा hi रहा था की तब तक बूंदे भी पहले से तेज़ हो चुकी थी और फिर अचानक से पदपद चालू हो गयी मैंने देखा सब उठके अंदर भाग रहे हैं... मैं बापिस मुद कर दरवाजे के पास गया और दरवाजे के बगल में हमारे घर की लाइट का मैं कनेक्शन था तो मैंने जल्दी से मैं स्विच गिरा दिया और पूरे घर में अँधेरा फ़ैल गया..

पल्ली- अरे यार ये बिजली को भी अभी जाना था..

अनुज. और पल्ली खत को आंगन से उठाकर बरामदे में कर रहे थे ताकि भीगे न...

माँ और मौसी ने कपडे उठा लिए थे... वहीं मौसा ने बैग..

मैंने सबको चिल्लाते हुए कहा की माँ पापा के कमरे में चलो वो कमरा बड़ा है...

माँ- करे कोई दिया वगेरा जलादो..

म चची- जीजी दिया मिले तो सही..

मौसी- फ़ोन भी रखवा दिए थे..

मौसा- अरे बैठना hi तो है क्या दिया वगेरा जलना ऐसे hi रहते हैं अँधेरे में...

मौसी- जाएं कैसे आंगन में तो थोड़ा बहुत दिख भी रहा है कमरे में तो बिलकुल अँधेरा होगा..

में- अरे मौसी अपना hi घर है सब देखा हुआ है पकड़ पकड़ कर चले जायेंगे..

तब तक मैं भी बिना मोटे बरामदे में hi आ चूका था..

Papa-haan सब कमरे में चलो वहां बिस्तर भी बड़ा है आराम से बैठ जायेंगे सब..

माँ- हाँ आराम से आ जाओ सब दीवार पकड़ पकड़ कर...

सब लोग धीरे धीरे कमरे में पहुंचे और फिर टटोल टटोल कर बिस्तर पर चढ़ गए...

कौन कहाँ कैसे बैठा था कुछ नहीं दिख रहा था वैसे भी माँ पापा का कमरा बरामदे के अंदर की और था तो इसमें तो दिन में अँधेरा रहता था तो रात में तो कुछ दिखने का कोई संभावना hi नहीं थी...

सब जब बैठ गए तो मैंने भी एक कोना पकड़ लिए और बैठ गया.. फिर धीरे धीरे सबकी बात करने की आवाज़ से पता चलने लगा कौन किधर है पर सिर्फ अंदाज़ा hi हो रहा था...

माँ- कोई भीगा तो नहीं...

माँ की आवाज़ सुनते hi मैं खुश हो गया की वाह रे मेरी किस्मत माँ बिलकुल मेरे बगल में थी...

पापा- मैं तो नहीं भीगा भाई...

मैं जो खुश हो रहा था मेरी साडी ख़ुशी फ़स हो गयी क्योंकि माँ के बगल में पापा थे... इसी तरह हम लोग यूँ कहलो की घेरे में बैठे थे...

धीरे धीरे बाकि सब भी बोले तो कुछ कुछ अंदाज़ा हुआ की कौन कैसे बैठा है...

तो एक कोने पर मैं फिर माँ फिर पापा, उनके बगल में पल्ली फिर उसके बगल में मौसा फिर मौसा के बगल में मौसी.. उनके बगल में चाचा, उनके बगल में चची और चची के बगल में Anuj.aur अनुज के बगल में फिर से मैं... कौन कैसे किस पोजीशन में बैठा था ये कहना मुश्किल है...

खैर फिर से बातें शुरू हो गयी थी...

अनुज- मौसा जी आर्मी की बातें बताओ न कुछ वहां कैसे रहते हैं क्या क्या करना होता है...

Me-rahne दे तू नहीं कर पायेगा..

मौसा- क्यों नहीं कर पायेगा..

Palli-haan मुझे भी जानना है.. कैसी होती है वहां की ज़िन्दगी.....

Papa-haan शैलेश कुछ फ़ौज के किस्से हो जाएं...

तो फिर मौसा जी ने सुनना शुरू किआ सब उनकी बात ध्यान से सुन रहे थे पर जब बगल में कोई कामुक गरम औरत या लड़की बैठी हो तो बाँदा कब तक खुद को रोक सकता है...

तो धीरे से मैंने अपना हाथ लिए और बीएड पर फिरते हुए सहलाते हुए माँ की जांघ पर रख दिया... माँ ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी और अगर दी भी हो तो कौनसा मुझे उनका चेहरा दिख रहा था....

खैर थोड़ी देर हाथ वहीं रखने के बाद मैंने थोड़ा ऊपर की और सरकना शुरू किआ और धीरे धीरे माँ की कमर तक ले आया... जैसे hi मेरा हाथ उनकी नंगी कमर से स्पर्श हुआ मेरा लुंड ठुमके मरने लगा... तभी मेरे हाथ के ऊपर माँ का हाथ आ गया और वो मेरा हाथ हटाने की कोशिश करने लगी पर मैं नहीं हटा रहा था... तो माँ ने मेरे हाथ के ऊपर अपना हाथ रख कर छोड़ दिया जिससे मैं आगे कुछ न करूँ...

अब जो हाल औरतों का नाच देखकर मेरा हुआ था सबका कहीं न कहीं वही था सरे मर्दों के पंत या पजामा में तम्बू थे और दूसरी बात 9 लोगो के लिए यव बिस्तर इतना भी बड़ा नहीं था तो सब लोग एक दुसरे से चिपक कर बैठे थे... तो एक दुसरे के बदन की गर्मी और उत्तेजित कर रही थी...

माँ की गर्मी इसलिए बढ़ रही थी की एक तो पति और बेटे के बगल में बैठी थी वहीं बेटे का हाथ नंगी कमर पर था...

उधर पापा भी साडी औरतों का नाच देख कर साथ hi पल्ली जैसी जवान लड़की के एक तरफ से सटे होने से और एक तरफ माँ जैसी गदराई औरत थी तो कौन गरम नहीं होगा... तो पापा का भी यही हाल था लुंड पंत फाड़ कर बहार आने को बेताब था..

वो बेचारे भी लुंड के आगे परेशां थे तो उन्होंने भी अँधेरा उठाने की सोची और उन्होंने अपना हाथ अपनी बीवी के ब्लाउज के ऊपर रख लिए और धीरे धीरे से ब्लाउज के ऊपर से hi उनकी छुछियां सहलाने लगे...

उधर लगातार मौसा जी के किस्से चले जा रहे थे इधर पापा का हाथ ब्लाउज पर आते hi माँ की सिटी पित्ती गम हो गयी एक तरफ पति का हाथ छुच्छी पर और बेटे का हाथ पेट par...maa ने अपना दूसरा हाथ पापा के हाथ के ऊपर रख दिया बेचारी माँ दोनों के बीच फंस गयी...

जहाँ माँ मेरे और पापा के बीच फंस गयी थी वहीं पापा के बगल में पल्ली मौसा की बातें ध्यान से सुनते हुए वो पापा की तरफ टिक गयी जिससे पल्ली की पीठ पापा से टिक गयी और उसका चेहरा मौसा की और था...... जिससे पापा का लुंड और ठुमका मरने लगा... पापा ने भी अपना हाथ बीच से हटते हुए पीछे की तरफ कर लिए और पल्ली पापा के एक कंधे से टिक गयी वहीं पापा का हाथ पल्ली के कंधे से होता हुआ उसकी पीठ पर आ gaya...papa के तो जैसे वारे न्यारे हो गए..

मौसा अपनी बातें सुनते हुए आराम से बैठे थे उनके कंधे से मौसी तिकी हुई थी... मौसा का एक हाथ मौसी की पीठ को सहला रहा tha...to कभी उनके पेट और कमर को... साड़ी के अंदर से...

मौसी मौसा से टिक के बैठी हुई थी साथ hi उन्होंने अपने पेअर फैला रखे थे जो की राजन चाचा के पैरों के ऊपर आधे चढ़े हुए the...jisse राजन चाचा भी खुश थे.. अपनी बीवी भले hi कितनी सुन्दर हो परै औरत का स्पर्श भर hi मर्द को एक अलग अनुभव देता है जो अभी यहाँ हो रहा था...

राजन चाचा भी उसी अनुभव का आनंद उठा रहे थे वहीं बगल में चची भी उनसे चिपक कर बैठी थी और राजन चाचा का हाथ चची की पीठ और कमर को सहला रहा था... चची का चेहरा चाचा के कंधे के करीब था पर उनका एक हाथ अनुज की गॉड में था और पाजामे के ऊपर से अनुज के लुंड को सहला रहा था वहीं अनुज का हाथ में चची की छुच्छी थी जिसे वो मसल रहा था ब्लाउज के ऊपर se...chachi की भी दाद देनी पड़ेगी की दोनों के हाथों को कितने अचे से संभाला हुआ था की चाचा को भनक तक नहीं थी अनुज का हाथ उनकी बीवी की छुच्छी को मसल रहा है... चची गरम हो रही थी और उन्होंने दूसरा हाथ अब चाचा की गॉड में रख लिए और उनके पाजामे के ऊपर से लुंड को सहलाने लगी...

तो कुल मिलकर अँधेरे कमरे में इस तरह का माहौल था कहने को सब मौसा की कहानी सुन रहे थे पर साथ hi सब अपनी अपनी हवस मिटने में भी व्यस्त the...ab ये ताड़ी का असर था या सबके अंदर की हवस ये कोई नहीं जनता था पर बहार ज़रूर आ रही थी..

न पापा को पता था की मेरा हाथ माँ के पेट पर है, और न मुझे ये पता था की पापा का माँ की चुकी पर... पता था तो सिर्फ माँ को पर बेचारी क्या करती बोल सकती नहीं thi...bas हमारे हाथों को अलग करने की कोशिश कर रही थी जो हम होने नहीं दे रहे the...jab माँ मेरा हाथ हटाने की कोशिश कर रही थी तो मैं उनके और कररब हो गया और अपने दुसरे हाथ से उनका चेहरा पकड़ कर अपनी तरफ किआ और अँधेरे में अपने होंठ माँ के होंठों पर रख दिए...

माँ बेचारी घबरा गयी न ज़्यादा हिल सकती थी न कुछ और बस मुझे हटाने की कोशिश करने लगी पर मुझे जोश चढ़ा था अपने पापा के बगल में होते हुए माँ के होंठ चूमने का रिस्क और मज़ा अलग hi थे...

माँ अपना चेहरा घूमने की कोशिश कर रही थी पर मैंने पकड़ रखा tha...main मस्त होकर उनके रसीले होंठो का रसपान कर रहा था.... उधर पापा ने भी अपना हुम्ला बढ़ा दिया था और माँ के ब्लाउज के अंदर हाथ डालने की कोशिश कर रहे the...aur फिर अचानक से जो माँ अभी तक मुझे अपने होंठों से अलग कर रही थी अचानक से उन्होंने मेरे होंठों को कसकर अपने होठों से पकड़ लिया और चूसने भी लगी.. साथ hi माँ का हाथ उनकी कमर पड़े मेरे हाथ पर और कास गया...

मुझे थोड़ी हैरानी हुई की अचानक से माँ साथ कैसे देने लगी चूमने में... पर हुआ ऐसा था की पापा का हाथ माँ के ब्लाउज के अंदर घुस चूका था और उनके हाथ में माँ की नंगी छुच्छी आ गयी थी जिसे वो मसलने लगे थे और उसी की प्रतिक्रिया मुझे मिली थी... जिसकी मुझे भनक तक नहीं थी...

फिर अचानक से माँ ने मेरे होंठों से अपने होंठ अलग कर लिए और चेहरा घुमा कर सीधा कर लिए... माँ की साँसे तेज़ तेज़ चल रही थी... बेचारी पति और बेटे की हवस के बीच में फांसी हुई थी...

इधर पल्ली पहले तो पापा के कंधे से तिकी हुई hi थी पर फिर वो धीरे धीरे नीचे सरक कर लेट सी गयी एक तरफ करवट लेकर जिससे उसका सर पापा की सीढ़ी जांघ पर आ गया और वो पापा की जांघ पर तकिये की तरह सर रख कर लेट गयी... जबकि उसका पिछवाड़ा मौसा के घुटनो से लगने लगा पर मौसा ने अपने आप को थोड़ा सा घुमा लिए जिससे उनके घुटने उसे बा चुभें पर इससे पल्ली के चूतड़ उनके पैरों से चिपके हुए थे वो अल्टी पलटी कर के बैठे थे और उनके घुटनों के नीचे का हिस्सा और पंजे पल्ली की गांड से चिपके हुए थे..

वहीं पल्ली के लेटने से पापा का जो हाथ उसकी पीठ पर था वो उसकी कमर पर आ गया उसका पल्लू लेटने की वजह से पहले hi नीचे था तो पापा का हाथ अब पल्ली की नंगी कमर पर था... जिससे पापा का हाल क्या हुआ होगा जब उनके हाथों को पल्ली की कोमल मखमली नंगी कमर का स्पर्श मिला होगा आप खुद hi समझ सकते हैं... पापा ने अपना हाथ वैसा hi छोड़ दिए पर माँ की छुच्छी को और मसलने lage..jisse माँ ने मेरे हाथ को थोड़ा सा दबा दिया जो उनकी कमर पर था..

इसे इशारा समझके मैंने माँ का हाथ पकड़ा और अपने पाजामे के ऊपर से खड़े लुंड पर रख लिए और लुंड को सहलवाने लगा...

मौसा के पल्ली की तरफ थोड़ा घूमने से मौसी को भी आसान बदलना पड़ा और वो भी लेट गयी और सर को मौसा की एक जांघ पर रख लिया जैसे पल्ली ने पापा की जांघ पर रखा हुआ था बस फर्क सिर्फ इतना था की मौसी का चेहरा दूसरी तरफ यानि जिस तरफ मौसा की पीठ थी उस तरफ था और इस वजह से मौसी के घुटने चाचा की गॉड में आ गए... उनके लुंड से बस थोड़ा सा साइड में जहाँ चची उसे पाजामे के ऊपर से सहला रही थी... चची का एक हाथ जहाँ चाचा की गॉड में था वहीं चाचा का हाथ चची की पीठ से नीचे उनके चूतड़ों के ऊपरी हिस्से को सहला रहा था...

चची की गॉड में अनुज का सर था चची का ब्लाउज खुला हुआ था दोनों चूचियां ब्रा से बहार थी और एक छुच्छी अनुज के मुँह में थी जिसे वो आराम से चूस रहा था साथ hi दूसरी को दबा रहा था वहीं चची का दूसरा हाथ लेते हुए अनुज के लुंड पर था... मन्ना पड़ेगा चची की हिम्मत को पति के होते हुए इतना बड़ा रिस्क...

वैसे हिम्मतवाले तो खैर आज सभी थे... सिवाय मेरी माँ के... मैंने जैसे hi उनका हाथ पकड़ कर पाजामे के ऊपर से अपने लुंड पर रखा उन्होंने मेरे हाथ हटते hi बापिस खींच लिए... मुझे लगा माँ ऐसे नहीं मानेगी तो मैंने पजामा नीचे खिसका कर लुंड को बहार निकल लिए और दोबारा से माँ का हाथ पकड़ कर उसपर रख लिए.. माँ ने फिर से हाथ हटाना चाहा पर मैंने अपना हाथ उनके हाथ पर रख लिए और लुंड को सहलवाने लगा... माँ का हाथ लुंड पर पड़ते hi मुझे मज़ा आने लगा वहीं माँ भी गरम होने लगी क्यूंकि कड़क लुंड हाथ में लेकर कौनसी औरत गरम नहीं होगी.. खासकर वो लुंड जब उसके बेटे का हो तो...

उधर पापा ने कुछ पल के लिए पल्ली की कमर से हाथ हटाया और फिर बापिस रखा तो पूरी कमर और नंगे पेट के बीचो बीच और रखकर छोड़ दिया ये देखने के लिए की पल्ली क्या प्रतिक्रिया देती है. पल्ली जैसी गरम लड़की बेचारी क्या प्रतिक्रिया देती वो तो बस मज़े करना चाहती थी, जब पापा को पल्ली जी की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली तो पापा ने उसकी नंगी कमर और पेट को सहलाना शुरू कर दिया हलके हलके से और जब कुछ देर बाद भी पल्ली ने कुछ नहीं कहा तो पापा आराम से उसके चिकने पेट और कमर को सहलाने और दबाने लगे..

वहीं उनके बगल में मौसा जी को अपना किस्सा जारी रखना मुश्किल हो रहा था क्यूंकि पल्ली के चूतड़ उनके पैरों से सटे हुए थे और उन्हें गरम कर रहे थे... मौसा ने बात करते हुए एक हाथ पल्ली के चूतड़ पर हल्का सा रख लिए और ऐसे रखा जिससे ये लगे की बात करते हुए रखा है और फिर पापा की तरह hi उसकी प्रतिक्रिया का इंतज़ार किआ और जब कुछ नहीं हुआ तो उसे इशारा समझते हुए हल्का हल्का पल्ली के चूतड़ों को सहलाने लगे...

अब पल्ली कोई बच्ची तो थी नहीं तो उसे भी समझ आ रहा था क्या हो रहा है और दो दो मर्दों के हाथ उसके शरीर पर घूम रहे थे जो उसे गरम कर रहे थे...

मौसा ने जहाँ एक हाथ पल्ली की गांड पर रखा था वहीं दूसरा दूसरी तरफ लेती मौसी की छूछीयो पर और उन्हें ब्लाउज के ऊपर से hi मसल रहे थे एक दो बार मौसी ने हाथ भी हटाने की कोशिश की थी पर मौसा नहीं माने फिर मौसी को भी मज़ा आने लगा... उधर मौसी के घुटने अब चाचा के लुंड के ठीक ऊपर थे और बीच बीच में लुंड को छू भी रहे थे जिससे चाचा का बुरा हाल हो रहा था...

चाचा मौसी के घुटनो से मिली गर्मी को चची की छूछीयो पर निकल रहे थे जो की पूरी नंगी तो अनुज ने न जाने कब से कर दी थी अब चाचा उन्हें मसल रहे थे वहीं चची की साड़ी जांघों पर थी और अनुज का हाथ चची की दोनों टांगों के बीच में था और उनकी छूट को सहला रहा था...

चची अनुज और चाचा दोनों से मसलवा कर गरम हो रही थी पर. इतनी अचे से दोनों को एडजस्ट किआ था की चाचा को भनक तक नहीं होती थी की अनुज का हाथ उनकी बीवी पर है... चची की सांसे तेज़ तेज़ और भरी भरी हो गयी थी और वो अपनी छूछीयो और छूट पर घूम रहे हाथों का मज़ा ले रही थी...

मैं कुछ देर तक माँ का हाथ पकड़कर अपने लुंड पर चलता रहा फिर मैंने हटाकर देखा की माँ हटती हैं या नहीं.. मेरे हाथ हटाने के बाद भी माँ ने हाथ नहीं हटाया और लुंड पर चलती रही इधर जैसे hi मेरा हाथ फ्री हुआ मैंने तुरंत माँ की कमर पर रख लिए और एक दो बार पेट को सहलाया और फिर थोड़ा ऊपर की तरफ बढ़ाया तो मैं चौंक गया क्यूंकि हाथ ऊपर करते hi माँ की नंगी छुच्छी मेरे हाथ में आ गयी टटोल कर देखा तो ब्लाउज दोनों तरफ खुला हुआ था और ब्रा के कप नीचे थे और छुछियां बहार थी..

मेरा दिमाग ठनका की ऐसा कैसे हो सकता है माँ का एक हाथ तो कबसे मेरे पास है तो माँ ने कब ब्लाउज खोला और एक हाथ से ब्लाउज खोलना तो कितना मुश्किल है.. फिर kisne...ek मिनट पापा ने... हाँ गरम तो वो भी हैं तो वो भी माँ के साथ कुछ कुछ कर रहे हैं तभी माँ मुझे मन कर रही है .. मैं तो इस बात से और गरम हो गया की मैं और पापा एक साथ माँ के गदराये जिस्म से खेल रहे थे... मुझे माँ की दूसरी छुच्छी हिलती हुई महसूस हुई तो मैं समझ गया की पापा का हाथ उसपर है तो मैंने झट से माँ की दूसरी छुच्छी से हाथ हटा लिए यही सोचकर की कहीं पापा ने इस पर रख लिया तो पकड़े जायेंगे.

पर साला मन कहाँ मानता है एक मिनट बाद मैंने दोबारा से हाथ माँ की चुकी पर रख लिए और हलके हलके दबाने लगा... माँ का हाल कुछ अलग hi था उनका हाथ मेरे लुंड पर कास गया... बेचारी की एक छुच्छी पति के हाथ में थी तो दूसरी बेटे के वो भी एक hi समय पर.. अगर कोई और समय होता तो पापा को ज़रूर पता पद जाता पर अभी तो उनका खुद का ध्यान माँ की जगह पल्ली पर था जो उनकी गॉड में लेती हुई थी... जिसका फायदा कहीं न कहीं मुझे और माँ को हो रहा था...

पापा का हाथ अब पल्ली के पूरे पेट पर खुल कर चल रहा था... बीच में वो उसकी नाभि को भी उंगली से छेड़ रहे थे पल्ली बेचारी ऐसे लेते हुई थी जैसे उसे कुछ पता hi नहीं चल रहा है की उसी साथ क्या हो रहा है...

वहीं मौसा में लगता है ज़्यादा सबर नहीं था जैसे hi उन्हें पल्ली की तरफ से कोई ऐतराज़ नहीं दिखा वो खुल कर उसके चूतड़ों को मसल रहे थे साड़ी के ऊपर से hi जिससे पल्ली हर पल गरम हो रही थी और साँसे भी तेज़ होने लगी थी...

मौसा का दूसरा हाथ भी पीछे नहीं था उन्होंने मौसी का हाथों से उनका ब्लाउज खुलवा लिए था और अब मौसी की दोनों बड़ी बड़ी छूछीयों को नंगा करके बरी बरी अपने एक हाथ से मसल रहे थे... क्या किस्मत थी मौसा की एक हाथ में पल्ली के चूतड़ और दुसरे में मौसी की छुछियां....

अब मौसी की हालत भी ख़राब हो रही थी मौसा के छूछीयो के दबाने से मौसी गरम होने लगी थी वहीं उन्हें घुटनो पर चाचा का लुंड चुभ रहा था जिसके स्पर्श से वो और गरम हो रही थी पहले तो उन्हें समझ नहीं आया की ये क्या है पर फिर जब समझ आया तो वो ये सोच कर और उत्तेजित महसूस करने लगी.. की चाचा का लुंड उनके घुटनो को छू रहा है...

चाचा ने अपना मुँह दूसरी तरफ झुका रखा था और झुककर वो चची की छुच्छी को बरी बरी चूस रहे थे... उधर अनुज सीधा बैठा हुआ था और उसका एक हाथ पीछे से चची के चूतड़ों की दरार कुरेद रहा था...... चची का हाथ उसके लुंड पर था... चची अपने पति से खुलकर छुछियां चुसवा कर मज़े ले रहे थी.. चाचा के बार बार आगे पीछे होने से उनका लुंड मौसी के घुटनो से घिस रहा था जिससे उन्हें बड़ा मज़ा आ रहा था और मौसी भी गरम हो रही thi..par चाचा की लग रहा था की मौसी को नहीं पता चल रहा की उनके घुटनो पर चाचा का लुंड है...

इधर काफी देर तक पापा और मैं माँ की एक एक छुछियां दबाते रहे पर मैं सतर्क था की पापा मुझे न पकड़ पाएं... पर पापा का हाथ तो जैसे माँ की एक छुच्छी से hi चिपक के रह गया tha...idhar अचानक से माँ ने मेरे सर को पकड़कर अपनी एक छुच्छी पर दबा दिया और मेरा मुँह में उनकी छुच्छी आ गयी जिसे मैं चूसने लगा...

बेचारी माँ कितनी गरम हो गयी थी जो खुद से मेरे मुँह में अपनी चुकी दे दी नहीं तो माँ पापा के होते हुए ऐसा कभी नहीं करती पर बेचारी क्या करती... पापा लगातार एक hi छुच्छी को दबाये जा रहे थे इसके अलावा कुछ नहीं कर रहे थे तो माँ को ये कदम उठाना पड़ा... कुछ पल बाद माँ ने मेरा मुँह पकड़कर अपनी दूसरी छुच्छी पर रख लिए इसका मतलब पापा ने अपना हाथ हटा लिए था... मेरा क्या था मुझे तो और मज़े मिले की पापा के होते हुए मैं माँ की दोनों छूछीयों को चूस रहा हूँ....

माँ भी मेरे सर पर हाथ फेर रही थी साथ दुसरे हाथ से मेरे लुंड को लगातार सहला रही थी...

इधर तबसे लेकर अब तक पापा ने काफी प्रगति कर ली थी... पापा पल्ली के पेट और कमर को सहलाते हुए धीरे धीरे ऊपर भी हाथ लेन लगे और ब्लाउज के ऊपर से फेरने लगे पल्ली बेहद गरम हो चुकी थी तो जैसे hi पापा का हाथ उसके ब्लाउज के ऊपर से घूमता वो एक तेज़ सांस लेती जिससे पापा भी समझ गए की लोहा गरम है और उसका फायदा उठाते हुए पापा ने अपना दूसरा हाथ भी माँ की छुच्छी से हटाया और पल्ली के ब्लाउज पर रखकर उसके हुक खोलने लगे... ये उसी समय पर हुआ जब मैं माँ की दोनों चूचियां चूस रहा था... और कुछ hi पल में पल्ली के ब्लाउज के दोनों पैट अलग अलग थे.. और पापा का हाथ ब्रा के ऊपर से उसकी चूचियों को सहला रहा था...

जिसका असर पल्ली पर सीधा हो रहा था और वो मौसा की और और सात गयी... मौसा ने सोचा जब ये खुद से इतनी गरम हो रही है तो मैं क्यों पीछे रहूं और उन्होंने पल्ली के पैरों को एक बार उठाया घुटनो से और उसकी साड़ी और पेटीकोट को घुटनो से ऊपर जांघों तक कर लिए और उसकी नंगी टैंगो पर जेठ फेरने लगे... मौसा के पल्ली को हिलने से एक काम और हुआ की पल्ली जो अब तक पापा को जांघ पर सर रखे हुए थी अब उसका सर पापा की गॉड के बीच में पहुंच गया और जैसे hi पल्ली ने सर रखा उसे गाल के नीचे पंत में एक कड़क चीज़ का अनुभव हुआ पल्ली को ये समझते देर न लगी...

इधर पापा उसकी चूचियों से खेल रहे थे तो वो अपना चेहरा थोड़ा थोड़ा पापा के लुंड पर पंत के ऊपर से hi घिस रही थी...

मौसा पल्ली जैसी गरम लड़की की टंगे सहलाते हुए इतने गरम हो गए थे की उनका लुंड बिलकुल कड़क हो गया था ऊपर से उन्होंने जीन्स पहनी थी तो उन्हें तकलीफ हो रही थी तो उन्होंने अपने जीन्स का बटन खोल कर चैन खोली और कच्चे में से लुंड बहार निकल लिए और मौसी के सर को थोड़ा अपनी तरफ खींच कर उनके होंठो पर लुंड टिका दिया...

मौसा के लिए आगे कहानी सुनना मुश्किल होता जा रहा था पर वो फिर भी चुप नहीं हुए और किस्से जारी रखे... पर काफी रुक रुक कर पर किसी को इतना फ़र्क़ नहीं पद रहा था क्यूंकि सबका ध्यान कहीं न कहीं बनता हुआ hi था

मौसा का लुंड होठों से लगते hi मौसी चौंक गयी की ये क्या कर रहे हैं सबके होते हुए पर वो खुद भी गरम हो चुकी थी और खुद को रोक नहीं पाई और उनके लुंड के टोपे को मुँह में भर लिए और चूसने लगी...

मौसी ने लुंड चूसने के लिए खुद को थोड़ा दोबारा आरामदायक आसान देने के लिए एक बार सीढ़ी हुई घुटने मोड़ कर ऐसा करते hi मौसी के घुटने चाचा के लुंड से हैट गए तो चाचा का लुंड जो पाजामे में फड़फड़ा रहा था उसे थोड़ी रहत देने के लिए चाचा ने उसे बहार निकल लिए पर मौसी ने तो सिर्फ एक पल के लिए आसान बदला और बापिस उसी तरह लेट कर मौसा का लुंड चूसने लगी पर मौसी के ऐसा करने से उनकी साड़ी ऊपर सरक गयी और घुटनो से भी ऊपर जांघों पर आ gayi...phir बापिस लेटने से उनके घुटने बापिस चाचा की गॉड में आ गए और फिर अचानक से दोनों को hi झटका लगा..

क्यूंकि चाचा का नंगा गरम लुंड मौसी के नंगे घुटनो से टकरा गया...

चाचा ने सोचा था की अब मौसी बापिस घुटने नहीं रखेंगी तो उन्होंने लुंड बहार निकल लिए था इधर मौसी की साड़ी ऊपर होने से उनके घुटने नंगे हो गए थे...

और कोई वक़्त होता तो शायद मौसी उछाल कर दूर भाग जाती पर अभी वो भी गरम थी ऊपर से मुँह में एक लुंड अंदर बहार हो रहा था तो उन्होंने कुछ न करने की सोची और जो हो रहा था होने दिया...

अभी कमरे में जो हो रहा था वो सब देख पाते तो शायद कितने hi रिश्ते टूट जाते ये लोग जो आपस में एक दुसरे को प्यार करते थे इतना मानते थे आज वासना उन्हें इस मोड़ पर ले आई thi...ki सही गलत से ज़्यादा अपने जिस्म की भूख मिटाना सबके लिए ज़रूरी थी... बीवी पति के होते हुए बेटे से बदन मसलवा रही थी तो पिता बेटी जैसी भतीजी को भोग रहा था ऐसे hi कोई किसी न किसी पाप का हिस्सा बना हुआ था...

मौसी के नंगे घुटनो से चाचा इतने गरम हो गए की उन्होंने चची का पिछवाड़ा पकड़ कर अपनी तरफ कर लिए जिससे चची लेट गयी एक करवट पर जिससे उनका बड़ा सा पिछवाड़ा चाचा की तरफ आ गया और चाचा ने चची की साड़ी और पेटीकोट कमर तक ऊपर कर दिया और अपनी उंगली चची की छूट में डालकर अंदर बहार करने लगे... चची की छूट जो पहले से गीली थी और पानी बहाने लगी..

इधर लेटने से चची के चूतड़ जहाँ चाचा की तरफ थे तो वहीं सर अनुज की गॉड में था और अनुज का लुंड चची के मुँह में अंदर बहार हो रहा था. .. चची गरम होकर पूरी शिद्दत से अनुज का लुंड चूस रही थी पर बिना आवाज़ किये....

अनुज आँखें बंद करके ममता चची के मुँह को छोड़ रहा tha...aur पूरे मज़े ले रहा था चाचा के होते हुए उनकी बीवी के गरम मुँह का मज़ा ले रहा था...

इधर मैं माँ की दोनों छूछीयों को जी भर के पि रहा था माँ ने दोनों हाथ पीछे तक रखे थे सर ऊपर की तरफ था... पेअर सीधे थे... इधर पापा का हाथ बापिस माँ की तरफ आ चूका था पर किस्मत से चूचियों की तरफ न जाकर इस बार पापा का हाथ माँ की जांघ पर जाकर रुका और फिर साड़ी के ऊपर से hi दोनों टैंगो के बीच की और सरकने लगा और कुछ पल बाद hi पापा का हाथ साड़ी के ऊपर से hi माँ की छूट को सहला रहा था माँ बेचारी दोतरफे हमले से पागल होती जा रही थी और पूरी कोशिश कर रही थी की मुँह से आवाज़ न निकले.

छूछीयो पर बेटे का मुँह और छूट के ऊपर पति का हाथ.. क्या किस्मत थी माँ की और हमारी... या कहलो इस रात की...

इधर पापा का एक हाथ माँ की छूट को सहला रहा था तो दूसरा पल्ली की नंगी छूछीयों को मसल रहा था.. पल्ली की संतरे जैसी छुछियां दोनों ब्रा से बहार थी और पापा उनका रास निचोड़ रहे थे इससे पहले पल्ली का चेहरा पापा के लुंड पर घिसने की वजह से पापा का लुंड बेहद कड़क हो चूका था.. पल्ली भी कड़क लुंड प् कर खुद को रोक नहीं प् रही थी और बार बार अपने गाल को पापा की पंत से घिस रही थी...

जिससे पापा का हाल और बुरा हो रहा था इसलिए पापा ने फिर हिम्मत दिखते हुए अपने हाथों से पल्ली के चेहरे को एक पल के लिए थोड़ा साइड किआ और फिर पंत की चैन खोलकर लुंड को बहार निकल liya...lund बहार निकलते hi सीधा खम्बे की तरह खड़ा हो गया पापा ने पल्ली का चेहरा वापिस जगह पर रख दिया और पापा का लुंड उसके चेहरे से छूने laga...papa के लुंड को छूटे hi पल्ली का तो बुरा हाल हो गया गरम लड़की को लुंड मिलजाए तो वो क्या करे उसे समझ नहीं आता ..पल्ली की आँखों और नाक के बीच में लुंड का गरम एहसास हो रहा था क्यूंकि लुंड पल्ली के इन्ही हिस्सों को छू रहा था...

पल्ली ने फिर भी संयम से काम लिए और

पल्ली ने एक बार फिर ऐ चेहरा थोड़ा घुमाया और अपने गाल को पापा के लुंड पर रगड़ने लगी... उसके गलो का कोमल स्पर्श लुंड पर पाकर पापा के लुंड को ऐसा आनंद मिल रहा था जैसा पापा ने सोचा भी नहीं था... पापा पल्ली की दोनों छूछीयों को बरी बरी मसल कर उसकी और अपनी दोनों की उत्तेजना और बढ़ा रहे थे... इधर पल्ली इतनी गरम हो चुकी थी की वो अपने चूतड़ों को लगभग मौसा के हाथ पर घिसने लगी..

मौसा ने भी उसकी उत्तेजना का फायदा उठाते हुए अपना हाथ उसकी उसकी जांघो से होते हुए उसकी साड़ी और पेटीकोट को की जांघो पर सिमटा हुआ था उसके अंदर दाल दिया और सिर्फ पंतय के ऊपर से उसके चूतड़ों को गूंथने लगे.... मौसा को पल्ली के चूतड़ और गदराये और मस्त लग रहे थे बिना साड़ी और पेटीकोट के इधर इस वजह से उनका लुंड और कड़क हो गया और वो मौसी के मुँह में ठुमके मरने लगे...

बेचारी मौसी लगातार लुंड को चूस रही थी साथ hi अपने हाथों से अपनी दोनों छूछीयों को मसल रही थी... इधर चाचा भी काफी उत्तेजित हो चुके थे और अब उन्होंने बिना कुछ सोचे समझे मौसी के दोनों घुटनो को थोड़ा खोला और उनके बीच अपना लुंड फंसा दिया... और अब मौसी के हिलने की वजह से दोनों घुटनो के बीच लुंड घिसने लगा जिससे चाचा को मज़ा आने लगा ऐसा लग रहा था जैसे वो मौसी के घुटनो को छोड़ रहे हैं..

वहीं पता तो मौसी को भी लगा पर अब वो इतनी गरम हो चुकी थी की कुछ रोकना उनके लिए बेहद मुश्किल था और उन्होंने सोचा की घुटने hi तो हैं साथ hi वो ये सोचकर उत्तेजित हो रही थी की एक तरफ वो पति का लुंड चूस रही है तो दूसरी तरफ किसी और का लुंड नंगा उनके घुटनो क्व बीच घिस रहा है... अभी भी मौसी की तरफ से कोई आपत्ति न देखकर चाचा के हौसले और बढ़ गए और उन्होंने अपना हाथ मौसी की जांघ पर रख दिया और धीरे धीरे सहलाने लगे...

इधर चाचा का दूसरा हाथ चची की छूट के ऊपर था और 2 उँगलियों से वो चची की छूट को छोड़ रहे थे वहीं चची उसी तरह एक करवट पर लेती हुई अनुज के लुंड को मुठियाते हुए उसके तटों को मुँह में भरकर चूस रही थी वहीं अनुज के हाथ चची की

चूचियों पर चल रहे थे... चची इस तिहरे हमले से बहुत गरम हो गयी और उन्होंने अपना हाथ अपने चूतड़ों की तरफ ले जाकर चाचा का चेहरा पकड़ कर अपनी गांड पर झुका लिए और चाचा का मुँह चची के दोनों चूतड़ों के बीच घुस गया.. इसके बाद क्या करना था चाचा को बताने की ज़रुरत नहीं थी और वो चची की छूट और गांड पर अपनी जीभ चलने लगे...

चची चाचा की जीभ गांड और छूट पर महसूस करके मस्त होने लगी साथ hi अनुज की गोलियों को और मस्ती से चूसने लगी...

इधर अपनी चाचा इतने लोगो के बीच होते हुए भी अपनी बीवी की छूट और गांड चाटते हुए इतने गरम हो गए थे वो पूरे जोश में आ गए साथ hi अपनी कमर को झटके देकर मौसी जे घुटनो को छोड़ने लगे वहीं उनका हाथ मौसी की जांघ पर ऊपर की तरफ बढ़ने लगाम... साथ hi मौसी की साड़ी और पेटीकोट भी उनके साथ ऊपर जाने लगे...

इससे मौसी को झटका लगा साथ hi उनकी छूट बुरी तरह से पानी बहा रही थी... चाचा का हाथ उनकी जांघ के सहलाने से... मौसी ने उत्तेजना में मौसा के पूरे लुंड को जड़ तक मुँह में भर लिए... जिससे मौसा भी बिलकुल पागल से हो गए तो उन्होंने पल्ली के चूतड़ों को सहलाते हुए उसकी पंतय को एक साइड कर दिया और पल्ली की नंगी छूट को सहलाने लगे और फिर एक उंगली पल्ली की रसीली गरम छूट में घुसा दी... मौसा की उंगली ने पल्ली के जिस्म में खलबली मचा दी

जिससे बेचारी पल्ली तो तड़प उठी उसका पूरा शरीर मचलने लगा... पल्ली से और रुका नहीं गया और उसने अपनी जीभ निकल कर पापा के लुंड के टोपे को चाट लिए...

एक पल के लिए पापा का मुँह खुला रह gaya...unke हाथ जहाँ थे वहीं जैम गए और फिर पल्ली ने मुँह खोलकर पापा के लुंड के टोपे को मुँह में भर लिए पापा तो जैसे जन्नत में पहुँच गए...

पल्ली धीरे धीरे से पापा का लुंड चूसने लगी... पापा की ख़ुशी का ठिकाना नहीं था जिसे अपने सामने बड़े होता देखा आज वही पल्ली इतनी बड़ी हो गयी थी की उनके लुंड को मुँह में लेकर जन्नत की सैर करवा रही थी...

पल्ली के मुँह की गर्मी पापा के लुंड से होते हुए उनके पूरे शरीर में दौड़ने लगी... और उसी गर्मी के जोश में पापा ने माँ की छूट के ऊपर से हाथ हटाया और माँ की जांघ पकड़ कर एक तरफ घूमने लगे माँ ने भी जैसा वो छह रहे थे वैसा किआ... पापा ने माँ को एक करवट पर लिटा दिया साथ hi साडी औरतों की तरह hi माँ की साड़ी और पेटीकोट उनकी कमर पर पहुंचा दिया... पापा की तरफ माँ के चूतड़ नंगे हो गए जिसपर कुछ पल उन्होंने हाथ फिराया और फिर उनके ऊपर झुक कर अपना मुँह माँ के दोनों बड़े बड़े चूतड़ों के बीच घुसा दिया और अपनी जीभ का कमाल दिखने लगे... माँ पहले से hi इतनी गरम हो चुकी थी और पापा की जीभ ने उनकी आग को और हवा दे दी...

क्यूंकि माँ लेती थी एक करवट पर और उनका पिछवाड़ा पापा की तरफ था तो चेहरा मेरी तरफ हो गया... मैंने भी माँ का चेहरा बिना किसी देरी के अपने पेट के नीचे की तरफ रख दिया और आगे का काम माँ ने खुद कर लिए... माँ ने अपने हाथ से मेरे लुंड को टटोला और फिर मेरे लुंड को मुँह में भर लिए और चूसने लगी...

अह्हह्ह्ह्ह पापा के होते हुए माँ से लुंड चुसवाना ऐसा आनंद शायद hi किसी बेटे को मिला हो... इतने लोगो के बीच में मेरा लुंड मेरी माँ के मुँह में था और मेरे पापा मेरी माँ की छूट और गांड चाट रहे थे... माँ हम दोनों बाप बेटे के बीच की कड़ी बानी हुई थी.... पति से अपनी छूट और गांड की सेवा करवा रही थी वहीं खुद बेटे के लुंड की सेवा कर रही थी... क्या माँ थी मेरी...

खैर तो कमरे में कुछ इस तरह का माहौल था की सब आपस में जुड़े हुए थे जिसके एक सिरे पर मैं था मेरा लुंड मेरी माँ अपने गरम मुँह में भरकर चूस रही थी... वहीं माँ की रसीली छूट उनके चूतड़ों के पीछे लेटकर उनके पति यानि पापा चाट रहे थे... पापा की गॉड में पल्ली का सर था और पापा का लुंड पल्ली के मुँह में था... पल्ली की छूट में मौसा की उंगलियां thi...jo अंदर बहार हो रही थी और पल्ली की छूट नदिया बहा रही थी... मौसा का लुंड मौसी के गले में था जिसे मौसी चूस चूस कर चिकना कर रही थी.. मौसी के घुटनो के बीच राजन चाचा का लुंड था जो घिस रहा था साथ hi राजन चाचा का हाथ मौसी की मस्त केले के तने जैसी जांघों पर चल रहा था....

चाचा का मुँह उनकी बीवी यानि ममता चची की गांड पर था और चाचा की जीभ ममता चची की गांड के छेड़ को कुरेद रही थी... जिसका मज़ा लेते हुए चची अपनी जीभ अनुज के लुंड पर चला रही थी... तो इस तरह की हवस और वासना की एक जंजीर में सब लोग बंधे हुए थे... और खुद की भूख मिटने की कोशीध कर रहे थे...

इधर मौसा की कहानी का अंत होने को था पर उसकी परवाह किसे थी शायद मौसा को खुद भी नहीं.. सब कुछ ाचा चल रहा था सरे लोगो के लिए की तभी मौसा बीच में बोल पड़े...

तो क्या बोलै मौसा ने जानिये अगली अपडेट में प्लीज कमैंट्स करके ज़रूर बताएं कैसी लगी अपडेट आप लोगो को..

दोस्तों उम्मीद है की आप लोग खुल कर विचार रखेंगे कहानी के बारे में और प्लीज, हॉट अपडेट, नीस अपडेट, एक्सीलेंट अपडेट वेटिंग फॉर नेक्स्ट जैसे कमैंट्स की जगह आपके मन के विचार सुनने को मिलेंगे... धन्यवाद..
 
तो इस तरह की हवस और वासना की एक जंजीर में सब लोग बंधे हुए थे... और खुद की भूख मिटने की कोशीध कर रहे थे...

इधर मौसा की कहानी का अंत होने को था पर उसकी परवाह किसे थी शायद मौसा को खुद भी नहीं.. सब कुछ ाचा चल रहा था सरे लोगो

अपडेट 99
Mausa-to भाई ऐसी ज़िन्दगी होती है फ़ौज की... अब कोई और अपनी कहानी सुनाओ... और मुझे तो इस जीन्स ने दुखी कर दिया यार बैठा hi नहीं जा रहा थी से इतनी टाइट है...

पापा ने माँ के चूतड़ों से मुँह निकलते हुयी कहा सही कहा यार ये नए कपडे चुभ रहे हैं..

चाचा- हाँ भैया आराम hi नहीं मिल रहा..

Mausi-ne भी मौसा का लुंड मुँह से निकला हाँ हैं तो कुछ कड़क कड़क से hi...

पापा- तो उतर दो न और आराम से बैठ जाओ...

मौसा- मुझे तो उतरनी hi पड़ेगी इतना काट रही है..

पापा- अरे सब hi नए कपडे उतर दो अपने अपने...

Palli-haan मम्मी और तै कैसे रहलेति हो तुम लोग साड़ी में पूरा दिन मैं तो इतनी देर में परेशां हो गयी...

माँ ने भी मेरा लुंड मुँह से निकला- अरे ये उतर देंगे तो दुसरे कपडे कहाँ ढूंढते फिरेंगे अँधेरे में..

पापा- अरे नए नए उतार दो बाकि जो पहन रखे हैं उन्हें पहनकर बैठो रहो...

मौसी- जीजा यहाँ सब के सामने कैसे..

मौसा- अरे इतना अँधेरा है और बैठना hi तो है सब घरवाले hi हैं...

म चची- कह तो सह रहे हैं भैया मैं भी परेशां हो गयी हूँ थोड़ी सी..

चाचा- अरे तो फिर उतर do...kyun परेशां होना...

पापा- ठीक है फिर सब लोग नए कपडे उतार के बिस्तर के बगल में थोड़ी दूर की तरफ रख देना जिससे अँधेरे में किसी का पेअर वगेरा न पड़े..

माँ- अगर सब राज़ी हैं तो ठीक हैं...

कोई उठाना तो नहीं चाहता था जो वो लोग कर रहे थे उसे छोड़कर उठना काफी मुश्किल था पर कपड़ो से आज़ादी के लालच में सब खड़े हुए

सब जो भी कर रहे थे उसे छोड़ा और एक दुसरे से अलग हुए... और बीएड को पकड़ कर बिस्तर के किनारे खड़े होकर अपने कपडे उतरने लगे... मैंने और अनुज ने नए कपडे नहीं पहने थे पर फिर भी मैंने टीशर्ट और पजामा उतर दिया और सिर्फ कच्चे में आ गया.. मैंने इधर उधर टटोला और मेरा हाथ माँ पर पद गया जो मेरे बगल में कड़ी होकर नयी साड़ी उतर रही थी मैं माँ के बदन पर हाथ फिरते हुए उनका पहले से खुला हुआ. ब्लाउज उतरने लगा... तो माँ ने मन किआ पर मैंने नहीं मन और उसे माँ के हाथो से निकल दिए जिसे माँ ने अपने हाथों में पकड़ लिए अब तक माँ साड़ी उतर चुकी थी और पेटीकोट और ब्रा में थी फिर मैंने माँ की ब्रा भी खोल दी... और उनके कंधे से निकल कर उन्हें ऊपर से पूरा नंगा कर दिया पर अगले hi पल माँ ने ब्लाउज को फिर से पहन लिए पर उन्होंने आगे से हुक नहीं लगाए... मैं माँ को ऐसे देखने के लिए मारा जा रहा था कैसी लग रही होगी माँ पेटीकोट और ब्लाउज में और जो ब्लाउज सामने से खुला हो और उनके दूध बहार हो ..हाय..

जब मैं और माँ आपस में लगे हुए थे तो कमरे में बाकि जगह भी काफी कुछ चल रहा था... पापा भी बीएड से कपडे उतरते हुए नीचे खड़े थे उनके बगल में पल्ली भी अपनी साड़ी उतर रही थी पल्ली ने साड़ी के साथ साथ अपना ब्लाउज और ब्रा भी उतर di...aur ऊपर से बिलकुल नंगी हो गयी.. वो इतनी गरम हो चुकी थी की ये भी नहीं सोचा की उसी कमरे में कितने लोग हैं और उसके पापा भी हैं उसी कमरे में ...

इसी तरह मौसी ने भी अपनी साड़ी उतर दी और वो खुले ब्लाउज और बहार लटकती छूछीयो के साथ कमरे में थी...

चची ने तो कुछ अलग hi तरीका अपनाया और अपने ब्लाउज, ब्रा और पेटीकोट तीनो उतर दिए और सिर्फ साड़ी बदन पर लपेटे राखी.. चची ने ाचा तरीका निकला था.. नंगी भी थी और बदन पर कपडा भी था...

मौसा, मौसी, चाचा, चची और अनुज सब कपडे उतर रहे थे, इधर सरे लोग काफी उत्तेजित हो गए थे और किसी न किसी तरह परम सुख को पाना चाहते थे... अनुज भी परेशां था और उसे लगा की चाचा के होते हुए वो चची को नहीं छोड़ पायेगा तो उसने सोचा क्यों न पल्ली को इधर लाया जाये और उसे चोदे इसीलिए वो अँधेरे में बीएड को पकड़ते हुए चुपचाप आगे बड़ा और आगे जाकर उसने पल्ली का हाथ पकड़ा और अपनी तरफ खींच कर ले आया...

इधर मैंने भी सोचा की माँ को तो पापा नहीं छोड़ेंगे मुझे कुछ नहीं मिलने वाला तो मैंने भी सोचा क्यों न चची या पल्ली को पकड़ा जाये..

अब आपको ये बतादूँ की हमारी नज़र ने सिर्फ हम hi ये खेल खेल रहे थे बाकि सब सिर्फ बैठे थे ऐसा कमरे में सब को लग रहा था जबकि कोई ऐसा नहीं था जो वासना के खेल में लिप्त न हो...

मैंने सोचा की चाची या पल्ली hi सही रहेंगे और मैं भी बचते बचते हुए दूसरी तरफ पंहुचा बीएड के और एक हाथ पकड़ लिया हाथ में चूड़ियां थी तो मैं समझ गया ये चची हैं मैं उन्हें पकड़कर चुपचाप से खींच लाया और चची ने भी कोई आवाज़ नहीं की... और चुपचाप से मेरे साथ आ गयी... मैंने चची को बीएड के करीब लेकर बिठा दिया और खुद उनके एक तरफ बैठ गया... अब मेरे एक तरफ माँ थी तो दूसरी तरफ चची...

उधर अनुज पल्ली को लेकर आया और उसने उसे जहाँ चची थी चाचा और उसके बीच वहां बिठा दिया और खुद उसके बगल में बैठ गया..

इधर मौसा और पापा ने अपने कपडे उतरे बेचारे दोनों hi पल्ली के लिए बेक़रार थे और हो भी क्यों न अधेड़ उम्र के आदमी को पल्ली जैसी जवान और रसीली लड़की भोगने को मिल जाये कौन सबर कर पायेगा...

यही हाल दोनों का था दोनों ने जैसे hi कपडे उतरे पापा ने अपने बगल में टटोला और हाथ एक कोमल पीठ पर पड़े उन्होंने तुरंत उसे बीएड पर अपने बगल में चढ़ा कर बिठा लिए वहीं मौसा ने भी आस पास टटोला और कुछ नहीं मिला तो बीएड पर तरोला तो हाथ एक नंगे कंधे पर पड़े तो मौसाजी समझ गए की पल्ली बापिस बीएड पर बैठ गयी है और वो भी जल्दी से बीएड पर बैठ गए उसके बगल में... और नंगी पीठ साहहलाने लगे

इधर चाचा ने भी कपडे उतर दिए थे और सिर्फ एक कच्चे में थे जो उनके घुटनो पर था... चाचा का लुंड भी सबकी तरफ कड़क था और उन्हें जल्दी से जल्दी शांति चाहिए थी... तो वो बीएड पर बैठे और फिर हाथ आगे बढ़ा कर जहाँ चची थी वहां टटोला और फिर आगे जाकर उनका हाथ नंगे कंधो से टकराया चाचा ने उसे चची समझा और अपने करीब खींच लिए और उसके सर को बालों से पकड़ कर अपने खड़े लुंड से सत्ता दिया और फिर उसके मुँह में भी घुसेड़ दिया... पर एक परेशानी ये थी की चची को तो मैं ले आया था तो चाचा का लुंड किसके मुँह में था..

समस्या ये भी थी की पापा और मौसा पल्ली से खेलना छह रहे थे पर पल्ली को तो अनुज खींच कर ले गया था तो अभी जो उनके बीच में थी वो कौन थी...

अब काउंटी ये तो नहीं पता पर ये लोग क्या कर रहे थे ये देखते हैं...

पापा ने अपने बगल में बैठी औरत को जिसे वो पल्ली समझ रहे थे उसको जांघो से पकड़ कर अपनी तरफ खींच कर एक करवट पर लिटा दिया और उसका पिछवाड़ा अपने तरफ कर लिया जिससे वो लेट गयी और उसका मुँह मौसा की गॉड में चला gaya...papa ने उसे सही जगह पर खिसकाया और फिर अपना मुँह उसके चूतड़ों के बीच घुसा दिया और छूट चाटने लगे... पापा उसके दोनों चूतड़ों पर हाथ फिरते हुए थोड़े हैरान तो हुए की पल्ली के चूतड़ कपड़ो में इतने बड़े नहीं दीखते जितना अभी लग रहे हैं.. पर वासना सर पर हावी थी तो ज़्यादा नहीं सोचा और छूट चाटने पर ध्यान दिया...

वही उनके आगे बैठे मौसा के हाथ उस औरत की नंगी छूछीयों पर थे मौसा ने भी यही सोचा की पल्ली की छुछियां बिना कपड़ों के ज़्यादा बड़ी लग रही हैं और वहीं उस औरत के मुँह को जिसे वो पल्ली समझ रहे थे उसे अपने नंगे लुंड पर दबा दिया और उस औरत ने भी लुंड को मुँह में भर लिए और चूसने लगी... कमाल था की पापा और मौसा दोनों hi एक औरत को एक साथ भोग रहे थे और दोनों को hi इसकी भनक तक नहीं थी.. साथ hi दोनों जिसे पल्ली समझ रहे थे वो पल्ली भी नहीं थी..

मौसा से थोड़ा हैट के चाचा थे जो उनकी नज़र में अपनी बीवी से लुंड चुसवा रहे थे पर यहाँ भी कमल था की जो औरत उनका लुंड चूस रही थी वो उनकी बीवी भी नहीं थी... उनके थोड़ा दूर अनुज था...

अनुज जैसे hi पल्ली को लाया उसने उसे चची की जगह बीएड पर बैठाया और झुक कर उसकी चूचियां चूसने लगा पर अचानक से पल्ली ने अपनी चूचियां से उसका चेहरा हटाया और दूर हो गयी अनुज को थोड़ी हैरानी हुई और फिर उसने हाथ आगे बढ़ा कर टटोला तो उसके हाथ पल्ली के चूतड़ों पर रख गए अनुज को लगा पल्ली अपनी छूट और गांड चुसवाना चाहती है तो अनुज ने अपना मुँह उसके पिछवाड़े में घुसा दिया और छूट और गांड पर जीभ फिरने लगा...

अनुज के ठीक बगल में पर उससे थोड़ा दूर पहले चची थी जिन्हे मैंने लेकर बिठाया और फिर उनके बगल में बैठ कर उनके पेट पर हाथ फिरने लगा फिरते हुए हाथ थोड़ा ऊपर की तरफ लाया तो मेरा हाथ नंगे छूछे पर टकरा गया... मुझे थोड़ी हैरानी हुई की चची तो पहले से तैयार हैं तो मैं उनकी छूछीयों को पूरा हाथ में भर लिए और दबाने लगा... आज चाची की चूचियां मुझे पहले से ज़्यादा बड़ी लग रही थी मैंने सोचा लगता है इतने लोगो के बीच होने की वजह से चची आज ज़्यादा hi गरम हो गयी हैं... मैं भी दोनों छूछीयों को मसलने लगा...

मेरे बगल में बैठी माँ ने जब ये महसूस किआ की मैं बगल में बैठ गया हूँ तो मेरे पेअर को हाथ से टटोल कर अपनी तरफ खींच ने लगी... मैंने सोचा मैं माँ को कैसे भूल गया... कुछ कर कर्मा माँ को अंदाज़ा नहीं होना चाहिए की चची भी यहीं हैं... तो मैं माँ की तरफ आगे होकर खिसक कर लेट गया जिससे मेरा लुंड माँ के पास हो गया जिसे माँ ने टटोल कर महसूस किआ और फिर मेरे लुंड को एक गरमी का एहसास हुआ मैं समझ गया माँ ने मेरा लुंड मुँह में ले लिए है...

हालाँकि मुझे हैरानी हुई की माँ खुद से इतनी पहल कर रही है वो भी इतना खतरा होते हुए अजीब बात है..

माँ की और लुंड करके मैं लेट गया और मेरा सर चची की तरफ था जिसे मैंने उनकी गॉड में रख लिए और उनके झूलते हुयी छूछीयो से मेरा मुँह डाब गया मैं उन्हें मुँह में लेकर चूसने laga...kitna खुशनसीब था मैं पापा और चाचा के होते हुए मैं उनकी पत्नियों से मज़े ले रहा था वो भी एक साथ ये सोचके hi मेरा पारा और चढ़ गया और मैं माँ के मुँह में नीचे से कमर उठा कर धक्के मरने लगा.... साथ hi चची की छूछीयो को मसल मसल कर पीने लगा वैसे भी आज उनकी छुछियां इतनी मुलायम लग रही थी...

मौसा की कहानी कब की ख़त्म हो चुकी थी पर किसी को कोई फ़र्क़ नहीं था अभी तो कोई खुद से कुछ बोल भी नहीं रहा था... क्यूंकि जो हो रहा था वो बोलने लायक नहीं था और न hi अभी किसी के बोलने की ज़रुरत थी...

पापा ने थोड़ी देर तक जिसे वो पल्ली समझ रहे थे उसकी छूट और गांड को लेट कर छाता और फिर अपना मुँह चूतड़ों से हटा लिए... पापा का मुँह हटने पर औरत का पिछवाड़ा थोड़ा कसमसाने लगा शायद वो नहीं चाहती थी की पापा उसके चूतड़ों से नूह हटाएं.. और उसकी छूट और गांड को लगातार चाटते रहे... इसीलिए वो गांड हिलाकर हिलाकर पापा के मुँह को ढूंढ रही थी खैर उसे ज़्यादा इंतज़ार नहीं करना पड़ा और फिर से उसे गांड पर हाथ महसूस हुए और फिर छूट पर एक गरम एहसास और फिर वो गरम एहसास उसकी छूट में घुसने लगा वो भी बेहद कड़क होकर... उसे समझते देर न लगी की ये जीभ तो बिलकुल भी नहीं है जो उसकी छूट में घुसा है...

और सही भी लगा था पापा ने अपना लुंड उनकी नज़रों में पल्ली की छूट पर टिकाया और अंदर धकेल दिया... पापा तो जैसे धन्य हो गए उस छूट में लुंड को घुसेड़ कर अह्ह्ह... पापा की नज़रों में उन्होंने पल्ली की छूट में लुंड घुसेड़ा था जिसे सोचकर वो इतने गरम हो गए की उनसे और सबर नहीं हुआ और उन्होंने चूतड़ों को पकड़कर आराम से धक्के मरने लगे और तब तक मरे जब तक लुंड उनकी छूट में नहीं समां गया... लुंड पूरा सामने पर उन्हें थोड़ी रहत मिली पर साथ hi उन्हें हैरानी हुई की पल्ली जैसी कुंवारी लड़की की छूट में लुंड इतनी आसानी से कैसे घुस गया... पापा ने सोचा पल्ली खेली खाई लड़की है तभी तो इतनी जल्दी उनसे चुद गयी... फिर पापा ने भी मज़े लेने की सोची और हलके हलके धक्कों से छोड़ने लगे धक्के इतने हलके थे की किसी को शक न हो..

पापा का लुंड पूरा छूट में घुसते hi वो औरत और गरम हो गयी और मुँह में घुसे मौसा के लुंड को जड़ तक समां लिए... मौसा भी जोश में आकर उसका मुँह छोड़ने लगे मौसा को भी लगा पल्ली को जितना मासूम वो समझते हैं वो उतनी हैं नहीं तभी इतनी जल्दी लुंड को गले तक जकड लिए है...

उनसे आगे चाचा ने अपना लुंड जी भर कर जब चुसवा लिया तो उन्होंने उस औरत के मुँह से जो उन्हें चची लग रही थी अपना लुंड निकला और फिर कंधे से hi घुमा दिया और उसे उसका चेहरा दूसरी तरफ करके घोड़ी बना दिया और खुद उसके पीछे आके अपना लुंड उसकी छूट में धीरे धीरे से सरका दिया... चाचा को मज़ा आने लगा आज उन्हें चची की छूट कुछ कासी हुई और तंग लग रही थी जिससे उन्हें और ज़्यादा मज़ा आ रहा था वैसे भी इतने लोगो के बीच चुदाई करने से वो पहले hi बहुत उत्तेजित थे... तो आराम से ये देखते हुए किसीको शक न हो वो चुदाई करने लगे...

अनुज ने जी भर के पल्ली की छूट और गांड छाती की तभी एक बार और पल्ली फिर से आगे होकर पलट गयी और अनुज का मुँह उसकी छूट और गांड से हैट गया इससे पहले की अनुज और कुछ करता उसके लुंड पर उसे एक मुँह महसूस हुआ वो समझ गया की पल्ली अब उसे मज़े देना चाहती है उसका लुंड चूसकर जिसे वो मज़े से चुसवाने लगा...

इधर मेरी तरफ माँ ने मेरा लुंड मुँह से निकल दिया था और घूम गयी और अपने दोनों पेअर मेरे पैरों के दोनों तरफ रखे और फिर मेरा लुंड पकड़ा और अपनी छूट पर सताया और फिर नीचे होती गयी और फिर मेरा लुंड पूरा माँ की छूट में समां गया...

मुझे एक बार फिर से अजीब सा लगा की माँ खुद से मुझसे छुड़वा रही है.. पापा के या सब के होते हुए..

माँ की पीठ मेरी तरफ थी माँ थोड़ा आगे को झुक गयी यानि मेरे पैरों की तरफ और अपने हाथ मेरे घुटनो पर टीकाकार अपने चूतड़ों को मेरे लुंड पर ऊपर नीचे करने लगी... ग हाँ मेरी माँ मेरे पापा के कमरे में होते हुए अपने सेज बेटे के लुंड पर उछाल रही थी.. वो माँ जिसे सब पतिव्रता और संस्कारी औरत समझते थे जिसे कोई अभी इस हालत में देखले तो चक्कर खा jaye...wohin माँ अपनर बेटे से चुद रही थी...

माँ की चुदाई से मैं इतना गरम हो गया की मैंने चची की गॉड से सर उठाया और फिर खुद बीएड पर लेट गया.. और उन्हें पकड़कर अपने ऊपर बिठाने की कोशिश करने लगा पर पहले तो उनकी समझ नहीं आया फिर मैंने खुद से उनके चूतड़ों को पकड़कर अपने मुँह के ऊपर दोनों तरफ घुटने करके बैठाया साथ hi उनका पेटीकोट भी कमर तक चढ़ा दिया जैसे hi चची ने मेरे मुँह के ऊपर छूट राखी मुझे थोड़ी हैरानी हुई चची पर... मेरी रंडी चची कबसे पंतय पहनने लगी खैर मैंने कमर में हाथ डालकर पंतय की इलास्टिक को पकड़ कर नीचे किआ और फिर उनको थोड़ा उठाकर पंतय को नीचे सरका दिया और इस बार मेरे मुँह पर लगी नंगी छूट जिसे मैं अपनी जीभ से भेदने के लिए तैयार था... माँ लगातार मेरे लुंड पर अपने चूतड़ों को घुमा रही थी...

वहीं अनुज पल्ली से घुटनो पर होकर लुंड चुसवा रहा था पर घुटनो के दुखने से वो एक तरफ साइड होकर लेट गया करवट होकर जिससे उसका लुंड पल्ली के सामने hi रहा पर जैसे hi वो लेटने जा रहा था नीचे होते हुए उसका चेहरा

एक नंगी छुच्छी से टकरा गया... वो चौंक गया और अपना सर पीछे कर लिए... फिर अनुज ने दिमाग लगाया की मेरे बगल में तो भैय्या हैं मतलब वो भी चची को ले आएं हैं इधर मज़े करने के लिए ये सोचते hi वो खुश हो गया और दोबारा उसने अपना मुँह चची की चुकी पर लगा दिया और चूसने लगा... चची मेरे मुँह पर बैठी थी और अनुज उनकी चूचियां चूस रहा था अनुज का लुंड पल्ली चूस रही थी...

उधर जैसे hi चची की छूट में मेरी जीभ घुसी मुझे कुछ अजीब सा लगा और जैसे hi मुझे समझ आया मेरे मन में निकला... धत्त्त तेरी kiii...lag गए लोडे....

चाचा चची समझ कर जो भी उनके सामने थी उसे चोदे जा रहे थे... चची समझ कर और उसकी कासी हुई छूट का मज़ा ले रहे थे वैसे भी आज उन्हें चची की छूट कुछ अलग hi मज़ा दे रही थी...

इधर मौसा का बुरा हाल था लुंड चुसवा कर उन्हें यकीन नहीं हो रहा था की पल्ली इतना ाचा लुंड चूस सकती hai......wo इतने उत्तेजित हो चुके थे की अपने आपको झड़ने से रोक रहे थे.....

वही हाल पापा का भी था उनकी नज़रों में वो पल्ली को छोड़ रहे थे और उसकी छूट की गर्मी से वो खुद को बचा नहीं प् रहे थे... पर तभी उन्हें अपने लुंड पर पल्ली की छूट कस्ती हुई महसूस होने लगी और फिर कुछ झटके खांस लगी जिससे पापा समझ गए की पल्ली उनके लुंड पर झाड़ रही है...

झड़ते हुए पल्ली के मुँह से या जो भी वो थी उसके मुँह से मौसा का लुंड निकल गया जिससे मौसा झड़ते झड़ते रुक गए और अब वो बिना चोदे झड़ना नहीं चाहते थे तो उन्होंने उस औरत को कंधे से पकड़ कर घुमा दिया जिससे पापा का लुंड उसकी छूट से निकल गया जिससे पापा भी झड़ते झड़ते रह गए...

मौसा ने घुमा के औरत को अपनी तरफ उसका पिछवाड़ा करके घोड़ी बना लिए और फिर बिना किसी देरी के पीछे से उसकी छूट में लुंड सरका दिया... और अह्ह्ह्हह्हह मौसा तो जन्नत में पहुँच गए और चुदाई का मज़ा लेने लगे...

उधर पापा का लुंड छूट से निकला तो पापा को यही लगा की पल्ली ने जानकर निकला है क्यूंकि वो नहीं चाहती उसकी छूट में रास gire...papa समझ गए वहीं उनका लुंड तुरंत hi मुँह में चला गया और पापा लेते लेते लुंड चुसवाने लगे तभी पापा को कुछ याद आया और वो अपनी दूसरी तरफ टटोलकर देखने लगे...

और अचानक से उनका हाथ माँ के घुटने पर पड़ा जो मेरो कमर एक तरफ था और वो माँ को अपनी तरफ खींचने लगे... पापा शायद माँ को hi भूल गए थे पल्ली के चक्कर में और जब याद आया तो दर गए की माँ कहाँ है और उन्हें कुछ पता तो नहीं चला ये सब सोचते हुए वो माँ को अपनी तरफ करक्व उनकी प्रतिक्रिया देखना चाहते थे..

माँ ने जैसे hi घुटने पर पापा का हाथ महसूस किआ और जल्दी से मेरे लुंड से उठ गयी.... और पापा की और खिसक गयी पापा ने उन्हें अपने मुँह पर बिठा लिया...

माँ के लुंड पर से हटने से मुझे ाचा नहीं लगा पर क्या कर सकते थे और इधर मैं एक परेशानी में और भी था... क्यूंकि मेरे चेहरे पर जो छूट थी वो ममता चची की नहीं थी क्यूंकि उनकी छूट का स्वाद मैं पहचानता था और इस छूट का स्वाद उससे अलग था... पर परेशां होते हुए भी मेरी जबान नहीं रुकी थी और कुछ hi पालो में वो मेरी जीभ पर झाड़ रही थी और उसका नए से स्वाद का रास मेरी जीभ पर बाह रहा था जिसे मैं चाट रहा था... उसके झड़ते hi मैंने उसे ऊपर से हटाया और एक रिस्क लेने की सोची और पलट कर लेट गया मतलब जहाँ मेरा चेहरा था अब वहां मेरा लुंड था... कुछ पल बाद मुझे अपने लुंड पर उसी का हाथ महसूस हुआ और वी हाथ मेरे लुंड पर ऊपर से नीचे की और चलने लगा... माइनर सोचा अभी तक तो सब सही जा तहा है और फिर वो हाथ हैट गया मुझे ाचा नहीं लगा पर तभी मुझे लुंड के टोपे पर एक गरम सा एहसास हुआ जो की एक जीभ थी मैं खुश हो गया जो सोचा था उससे भी ाचा हो gaya....kuch पल जीभ के बाद मेरा लुंड मुँह में समां गया और चूसा जाने लगा...

इधर अनुज के मुँह से छुछियां हैट गयी जिसे वो चची समझ रहा था उसकी उसने दोबारा से चेहरा आगे करके देखा तो उसका चेहरा एक नांगव चूतड़ से टकरा गया अनुज को लगा की चची झुक कर मेरा लुंड चूस ने लगी है जिससे उन्हें घूमना लड़ा अनुज ने अपना मुँह उन दोनों चूतड़ों के बीच घुसा दिया और चाटने लगा जिससे मेरे लुंड पर मुँह की पकड़ और कास गयी... वहीं पल्ली भी अनुज का लुंड कसकर चूस रही थी... जिससे अनुज दोहरे मज़े में था ..

वही थोड़ी आगे चाचा जिसे चची समझ कर छोड़ रहे थे उसकी छूट में धक्के मरते हुए झड़ने लगे... और अपना सारा रास उसकी छूट में भर दिया और फिर लुंड निकल कर पीछे होकर बैठ गए... उधर अनुज के लुंड को चूसते हुए पल्ली अचानक से पलटी और अनुज का लुंड पकड़ा और अपनी गांड के छेड़ पर टिका दिया बाकि का काम अनुज समझ गया और धक्का मार कर लुंड अंदर तेल दिया पल्ली की गांड में...

इधर मौसा पल्ली समझकर जिस औरत को छोड़ रहे थे उसे छोड़ते हुए झड़ने लगे... और अपना रास उसकी छूट में भर दिया मौसा भी हांफते हुए पीछे होकर बैठ गए... इधर पापा भी कब तक सहते और उस औरत के मुँह में झड़ने लगे जिसे वो पल्ली मान रहे थे... पजल तो पापा को लगा वो लुंड को मुँह से देगी पर ऐसा नहीं हुआ बल्कि उनकी नज़र में पल्ली उनके लुंड से निकले रास की बूँद बूँद तक पि गयी इधर पापा भी झड़ते हुए माँ की छूट को ज़ोरों से चाटने लगे... माँ भी मुझसे चुड़ते हुए झड़ने ककी कगार पर थी झाड़ नहीं पाई इसलिए पापा की जुबान पर वो भी शिखर पर पहुँच गयी और पापा के मुँह पर झड़ने लगी....

वहीं अनुज भी इतनी देर लुंड चुसवाने के बाद और अभी पल्ली की गांड की गर्मी को ज़्यादा बर्दाश्त नहीं कर पाया और पल्ली की गांड में झड़ने लगा... झड़ते हुए वो उसकी नज़र में चची जो मेरा लुंड चूस रही थी उसकी छूट को एयर तेज़ चाटने लगा.. जिससे वो एक बार और झड़ने लगी पर इस बार अनुज के मुँह पर... और झड़ते हुए मेरा लुंड भी काफी गहराई तक ले लिए.. और चूसने लगी.. मैं तो जो कुछ हो रहा था उसे सोच सोचकर hi बेहद उत्तेजित था और फिर मेरे लुंड से भी रास की धार निकल कर मुँह में भरने लगी जिसे वो गले में उतरती गयी और तब तक चूसती रही जब तक मेरा लुंड पूरा साफ़ न हो गया हो...

तो दोस्तों इसके आगे अगली अपडेट में अगर आपने अपडेट ध्यान से पढ़ी तो ज़रूर बताएं की इतनी कन्फूसिओं में आप लोग समझ पाए किसने किसकर साथ क्या क्या किआ अगर हाँ तो बताएं सही बताने पर इनाम में अगली अपडेट बहुत जल्द मिलेगी....

बहुत बहुत शुक्रिया
 
झलक की बात क्या है पूरा दीदार करा देंगे,

आप एक बार कहते हो हम बार बार करा देंगे...

और रही बात झलक की तो... बाकि आप लोग अंदाज़ा लगाएं की ये कौन हो सकती है...



 
और झड़ते हुए मेरा लुंड भी काफी गहराई तक ले लिए.. और चूसने लगी.. मैं तो जो कुछ हो रहा था उसे सोच सोचकर hi बेहद उत्तेजित था और फिर मेरे लुंड से भी रास की धार निकल कर मुँह में भरने लगी जिसे वो गले में उतरती गयी और तब तक चूसती रही जब तक मेरा लुंड पूरा साफ़ न हो गया हो...

अपडेट 100

जब मेरे लुंड से रास की धार बंद हुई तो मेरा लुंड मुँह से निकल गया.. सब लोग अपनी वासना के शिखर पर पहुँच कर बापिस आ चुके थे.... और हवस का जो नशा अपने पूरे शबाब पर चढ़ कर उतरने लगा था..

सबसे बड़ी बात तो ये थी, जिसने जिसके साथ सोचा था अपनी हवस मिटाना का, किस्मत ने उनके साथ फेरबदल कर दिया था, जिसका अंदाज़ा भी उन्हें नहीं था,

पापा और मौसा दोनों को hi लग रहा था की उन्होंने पल्ली को छोड़ा है, पर कपडे बदलने के बाद वो पल्ली की जगह उसकी माँ यानि ममता चची को गलती से पकड़ लाये था और उन्हें hi छोड़ दिया था, ममता चची भी अपनी बेटी और पति की मौजूदगी में दो दो मर्दों से चूड़ी थी.. चची को शुरू में ये लगा था की मैं और अनुज उन्हें पकड़ कर अपनी तरफ ले कर आये हैं और उनकी नज़रों में वो हम दोनों से चुद रही थी,

चाचा को लग रहा था की उन्होंने अपनी पत्नी को छोड़ा है सब के बीच पर चौंकाने वाली बात ये थी की उनकी बीवी तो पापा और मौसा से चुद रही थी तो उन्होंने किसे छोड़ दिया, इस सवाल का जवाब भी चौंकाने वाला था, चाचा ने अपनी बीवी की जगह अपनी बेटी पल्ली को छोड़ा था, और वो भी अकेले नहीं पल्ली अनुज और चाचा दोनों के बीच थी तो दोनों ने hi उसको भोगा था... पहली बार बाप ने बेटी को छोड़ा था और वो भी ऐसे की उन्हें खबर hi नहीं थी...

पल्ली को भी ये लगा था की वो अनुज और मुझसे चुद रही है कपडे उतरने के बाद पर सच्चाई तो कुछ और hi निकली और वो अपने पापा से चुद गयी...

अनुज को ज़्यादा परेशानी नहीं थी अनुज ने छोड़ा तो पल्ली को hi था पर जिसकी छुछियां और छूट उसने चची समझ कर छाती थी वो चची नहीं थी.

क्यूंकि चची तो पापा और मौसा के बीच थी तो अनुज और मेरे बीच कौन था, इसका जवाब था मौसी.... ग हाँ मैं चची की जगह गलती से मौसी को पकड़ कर ले आया था कपडे उतरने के बाद वहीं मौसी को ये लगा था की मौसा उन्हें इधर लेकर आये हैं कुछ और करने के लिए क्यूंकि मौसा उससे पहले मौसी से लुंड चूसा रहे थे तो मौसी को लगा मौसा उन्हें एक तरफ लेजाकर अपना काम आगे बढ़ाना चाहते हैं पर फिर मौसी के लिए समस्या ये हो गयी के एक और किसी ने उनकी चूचियां और छूट चूसी थी साथ hi उन्होंने जिसे मौसा का लुंड समझकर उत्तेजना में चूसा था वो लुंड भी मौसा के लुंड से बड़ा लग रहा था तो मौसी को मन hi मन ये दर था की उन्होंने मौसा की जगह किसी और का लुंड चूसा है साथ hi ये परेशानी थी की कौनसे दो लोगो ने उनके साथ ये सब किआ है,

मुझे भी ये लगा था की मेरे एक तरफ तो माँ है दूसरी तरफ चची हैं पर जब मैंने छूट छाती तो एहसास हुआ की ये चची नहीं हैं... और क्यूंकि मैं बाकि की तीन औरतों की छूट पहले hi चाट चूका था तो मुझे तीनो के स्वाद का पता था तो मुझे पूरा यकीन था की ये छूट मौसी की hai...ye सोचकर मेरा दिमाग घूम रहा था... की मैंने मौसी की छूट छाती थी साथ hi उनकी चूचियां पि और उन्होंने मेरा लुंड भी चूसा था, बाकि मेरे और पापा के बीच माँ थी तो उधर तो कोई परेशानी नहीं थी...

नशा चाहे कैसा भी हो उतरने के बाद एक hi चीज़ छोड़ जाता है... पश्चाताप.. और ग्लानि... और ऐसा hi यहाँ भी हो रहा था कई लोगो के मन में ग्लानि के भाव थे के आखिर वासना के नशे में उन्होंने ऐसा कदम क्यों उठा लिए जो उनके रिश्तों को ख़राब कर सकता था सब को यही लग रहा था की जो कुछ हुआ उसमे सिर्फ वह hi शामिल थे बाकि सब कुछ नहीं कर रहे थे.. पर वहां तो सब पापी थे....

ग्लानि के साथ साथ सबके में में कई सवाल भी थे जो मन hi मन उनको कसोट रहे थे, सबके मन के सवाल अलग थे और जवाब किसी के पास नहीं था...

पापा के मन में सवाल था की जो भी उन्होंने पल्ली के साथ किआ क्या उसके क्या नतीजे होंगे, कहीं किसी को पता चल गया तो..

मौसा जी के मन में भी यही सवाल था, किसी को पता चल गया या मौसी को पता चला तो क्या होगा...

चाचा के मन में भी यही था की इतने लोगो के बीच चुदाई करना कितना सही था, कहीं किसी को पता तो नहीं चल गया होगा साथ hi शालू के साथ वो घुटने वाला किस्सा, क्या सोच रही होगी वो उनके बारे में..

मेरे मन में भी यही था की क्या मौसी को पता होगा मेरे बारे में की उन्होंने मेरा लुंड चूसा है क्या...

इसी उधेड़बुन में सब लगे हुए थे पूरे कमरे में शांति पसरी हुई थी...

तभी अचानक से पल्ली बोली- मुझे तो नींद आ रही है...

पल्ली की आवाज़ सुनकर तीन लोगो के कान खड़े हो गए और दिल ज़ोरों से धड़कने लगा पहले तो पापा और मौसा जो ये सोच रहे थे की पल्ली उनके बगल में पर उसकी आवाज़ तो दूर से आई थी... पापा और मौसा की तो जान अटक गयी की अगर पल्ली वहां है तो उनके बगल में कौन है जिसे उन्होंने छोड़ा था, दोनों की hi समझ नहीं आ रहा था वहीं एक इंसान और था जो उनसे ज़्यादा अचंभित था और वो थे चाचा, जहाँ उन्होंने अपनी बीवी को समझा था वहां से उनकी बेटी की आवाज़ आ रही थी इसका मतलब कहीं उन्होंने अपनी बेटी को तो नहीं छोड़ दिया... चाचा परेशां हो गए ये सोच सोचकर...

उधर पल्ली की आवाज़ सुनकर मैं भी बोल पड़ा- हाँ यार मुझे भी नींद आ रही है और मेरी आवाज़ सुनकर अब चौंकाने की बरी औरतों की थी...

पल्ली को लगा था की उसकी एक तरफ अनुज था और दूसरी तरफ मैं... पर मेरी आवाज़ दूसरी तरफ से आई थी तो उसे अनुज के अलावा किसने छोड़ा ये सोचने वाली बात थी..

वहीं चची को लगा था की मैंने और अनुज ने उन्हें छोड़ा है पर मेरी आवाज़ दूसरी तरफ से आ रही थी तो फिर उन्हें किसने छोड़ा है...

वहीं मौसी की तो जैसे जान hi अटक गयी थी वो परेशां हो गयी ये सोच कर की उन्होंने मेरा लुंड चूसा है... जिसके बारे में उन्होंने कभी ऐसा नहीं सोचा था जिसको वो अपना बीटा मानती थी आज उन्होंने उसी का लुंड चूसा और उसका वीर्य तक पि गयी थी..

किसी के समझ नहीं आ रहा था की क्या हुआ है क्यों हुआ है..

माँ ये सोचकर परेशां थी की ये सब कहाँ जा रहा है आज वो अपने बेटे से अपने पति और कई लोगो के होते हुए चुद गयी.. क्या ये सही hai...iske क्या परिणाम होंगे भविष्य में कहीं इस वजह से उनके परिवार में तो कोई परेशानी नहीं आ जाएगी...

कुल मिलकर ऐसा कोई नहीं था जो किसी न किसी उधेड़बुन में न लगा हो...

माँ- चलो लगता है बारिश भी बंद हो गयी है... बहार चलकर देखते हैं और फिर सोने का इंतेज़ाम करते हैं..

में- हाँ चलो सब लोग...

माँ- ऐसा करो तुम आदमी लोग पहले जाओ हम लोग कपडे वगेरा ठीक करके आते हैं..

Me-andhere में कैसे करोगे?

माँ- अरे हो जायेगा तुम सब चलो तो सही..

इसके बाद एक एक करके सब मर्द कमरे से बहार आये आंगन में, बारिश बंद हो चुकी थी...

पापा ने बरामदे से अपनी लुंगी पहन ली साथ hi एक चाचा को दे दी उधर मौसा को मैंने अपना पजामा दे दिया जो वहीं टेंगा हुआ था, अनुज और मैंने भी अपने पाजामे पहन लिए..

मैंने और अनुज ने आँगन में बरामदे से खत लेजाकर बिछा दी... सब लोग आकर बैठ गए पर एक अजीब सी ख़ामोशी थी सबके मन में उलझन थी और उसी में सब खोये हुए थे...

कुछ देर बाद औरतें भी आ गयी सभी ने साड़ी पहन राखी थी पुराणी और पल्ली ने सूट, औरतों के आने से थोड़ा माहौल गरम हुआ और बातचीत होने लगी... मौसी और चची थोड़ा खोई खोई सी लग रही थी... पल्ली भी थोड़ा सोच में डूबी हुई थी...

थोड़ी बहुत बातें हुई पर सबको hi नींद आ रही थी तो फिर सबने सोने का इरादा किआ मैं और अनुज आंगन में सो गए बाकि सरे लोग कमरों में... वैसे भी काफी देर हो गयी थी तो तुरंत नींद आ गयी... थोड़ा बहुत hi सोया होऊंगा की साला मेरा फ़ोन बजने लगा और मेरी नींद टूट गयी देखा तो जग्गू का फ़ोन था, फिर याद आया की जाना है आज तो कल्लू का खेल करना है, मैंने फ़ोन उठाकर जग्गू को बोल दिया की आ रहा हूँ और फिर अनुज को जागकर बोलकर निकल गया...

खेत के पास पहुंचा तो जग्गू मुझे वहीं मिला..

में- सब ठीक है न,

Jaggu-haan इधर तो सब ठीक है, बस भाभी थोड़ा घबरा रही हैं...

में- होता है थोड़ा ये बता वो आ जाएँगी न?

जग्गू- हाँ शक न हो इसलिए मैं पहले चला आया, जब भाभी निकलेंगी तो हमें बता देंगी..

Me-theek है मैं कजरी को फ़ोन करता हूँ..

मैंने कजरी को फ़ोन किआ- hello दीदी तुम तैयार हो?

कजरी- हाँ तैयार तो हूँ तू बता कब निकलूं?

में- निकल जाओ और जहाँ बताया था वहीं मिलना...

Kajri-theek है आती हूँ..

में- दीदी देखभाल के आना कोई देखे न...

कजरी- हाँ देख भल के hi आउंगी पागल...

Me-theek है आओ..

फिर मैंने फ़ोन काट दिया,

में- कजरी आ रही है मैं उससे मिलने जा रहा हूँ, तू भाभी के ऊपर ध्यान रख और जो भी हो मुझे बताता रह..

जग्गू- ठीक है... तू भी ध्यान से..

मैं जग्गू के पास से कजरी को बताई हुई जगह पंहुचा थोड़ी देर में कजरी भी आ गयी साड़ी पहन राखी थी जो मैंने उसे दी थी वो... मस्त माल लग रही थी देखके एक बार तो मेरा मन hi डोलने लगा.. पर अभी मेरे लिए टाइम नहीं था...

में- दीदी पता है न तुम्हे क्या करना है...

कजरी- हाँ तू चिंता मत कर मैं सब अचे से कर लुंगी...

में- फिर ठीक है दीदी बस थोड़ी फ़िक़र हो रही थी..

तभी मेरा फ़ोन बजा मैंने थोड़ा साइड होक उठाया

जग्गू- भाभी निकल रही हैं... तू भी तैयार रह..

Me-theek है..

मैंने फ़ोन कटा और भाभी को फ़ोन किआ..

में- सब ठीक है न भाभी?

भाभी- हाँ लल्ला बस घबराहट हो रही है..

में- डरो मत भाभी हम लोग हैं न और एक काम करो फ़ोन काटना मत ऐसे hi चलने दो इससे मैं सुनता रहूँगा क्या हो रहा है और कुछ गड़बड़ हुई तो आ जाऊंगा..

Bhabhi-haan ये ठीक रहेगा.. सुनो लल्ला शायद वो मेरे पीछे आ रहा है मैं फ़ोन ब्लाउज में रख रही हूँ..

Me-theek है भाभी..

इधर मैं कजरी को लेकर तुबेल के कमरे में पहुंचा जहाँ कल्लू ने भाभी को बुलाया था और कजरी को जगह समझाड़ी की कहाँ रहना है और क्या करना है... और फिर मैं चुपचाप बहार आ गया..

फ़ोन कान पर लगाकर सुनने लगा पहले तो कुछ आवाज़ नहीं आई फिर हलकी हलकी बात करने की आवाज़ आई, जो शायद कल्लू की hi थी.

कल्लू- आखिर तुमने मेरी बात मान hi ली भाभीजी.. अगर तुम आज नहीं आती तो तुम्हे भी पता है क्या होता..

भाभी- हाँ मैंने तुम्हारी बात मान ली है और जो तुम चाहते हो वो करने को तैयार हूँ..

कल्लू- फिर देरी किस बात की चलो चलते हैं... मज़ा आएगा..

भाभी- पर मेरी बात भी तुम्हे माननी होगी..

Kallu-kaisi बात ...

भाभी- तुम्हे मेरे साथ करना है न तो करलो पर तुम करते हुए मेरा चेहरा नहीं देखोगे... ये मेरे लिए बेहद शर्मनाक बात है तो मैं नहीं चाहती की उस हालत में कोई मुझे देखे...

Kallu-bina चेहरा देखे कैसे करूँगा..

Bhabhi-main तुबेल के कमरे में जाकर झुक कर कड़ी हो जाउंगी तुम पीछे से आना और जो करना है कर के चले जाना.. और साथ hi तुम बोलोगे भी नहीं कुछ... मैं नहीं चाहती मुझे ये लगे की तुम कोई और हो मैं अपना पति समझ कर तुम्हारे साथ ये सब करने को राज़ी हुई हूँ,

Kallu-aur अगर मैं तुम्हारी बात न मनु तो...

भाभी- तो फिर तुम वो सबको दिखा सकते हो अब मैं भी नहीं डर्टी ... मैं भी आत्महत्या कर लुंगी.. फिर चाहे जो हो ..

कल्लू- अरे नहीं भाभी चलो इस बार जैसे तुम चाहती हो वैसे hi कर लेते hain..waise मज़ा तो तुम्हे पूरा नंगा करके तुम्हारे शरीर को मसलने में aata..par कोई नहीं.. इस बार ऐसे hi सही..

Bhabhi-is बार से क्या मतलब है बात तो बस एक hi बात की हुई है न...

Kallu-are वो देखेंगे भाभी अभी तुम अभी जाओ मैं आता हूँ..( कल्लू ने मन में सोचा की एक बार छोड़ लेता हूँ जो भी इसकी शर्तें हैं मान कर एक बार चुद गयी तो बाद में आना hi पड़ेगा फिर देखूंगा साली के नखरे..

भाभी बिना कुछ बोले वहां से चलदी... जैसे hi कमरे की दीवार की तरफ मुड़ी और कल्लू की नज़रों से हटी मैं वहीं खड़ा था और उन्हें चुपचाप से उनका हाथ पकड़ कर दूसरी तरफ ले गया कमरे के जहाँ एक ईंट निकली हुई थी और झाड़ियां थी बहार तो अंदर देखने की मस्त जगह थी जिसको माइनर और जग्गू ने दिन में पहले hi आकर देख लिए था मैं भाभी को लेजाकर साथ

खड़ा हो गया और अंदर देखने लगा...

थोड़ी देर बाद किसी के आने की आहात आई और कुछ पल बाद कल्लू कमरे में दाखिल हुआ वो एक साइड से हमें दिख रहा था... कमरे में एक छोटा बल्ब लगा था सामने की तरफ तो हल्का सब नज़र आ रहा था और वो बल्ब लगा नहीं था मैंने और जग्गू ने दिन में लगाया था इसीलिए...

कल्लू ने कमरे में घुसते hi देखा की भाभी एक चारे के ढेर को पकडे झुक कर कड़ी हैं...

कल्लू धीरे धीरे आगे बढ़ा फिर भाभी के पीछे जाकर खड़ा हो गया...

और फिर साड़ी धीरे से अपना हाथ बढ़ाया और भाभी की नंगी कमर जो साड़ी और ब्लाउज के बीच थी उसपर रख दिया और सहलाने लगा... उसका हाथ पढ़ने पर भाभी थोड़ा कसमसाई..

भाभी की पेट और कमर की नरम खाल को मसलने लगा...

उसकी नज़र में वो भाभी के जिस्म से खेल रहा था पर असलियत तो ये थी की जिसकी कमर पर उसका हाथ था वो और कोई नहीं उसकी सगी बहन थी कजरी... और कजरी कल्लू को जग्गू समझ रही थी, और कजरी को लग रहा था की जग्गू उसे अपनी भाभी समझ कर ये सब कर रहा है... ये सब मेरा किआ हुआ था...

कल्लू पेट मसलने के बाद थोड़ा पीछे हटा और फिर नीचे झुका... और नीचे से साड़ी पकड़कर कर ऊपर उठाने लगा... धीरे धीरे साड़ी के उप्पर होने से कजरी के गोर पेअर दिखने लगे, फिर मांसल जांघें और फिर जानलेवा चूतड़ कल्लू के सामने थे, एक छोटी सी कच्ची में कैद इतने बड़े बड़े चूतड़ बेहद कामुक लग रहे थे, कल्लू उनको देखकर पागल सा हो गया और उन्हें दोनों हाथों से मसलने लगा... अनजाने में hi सही भाई बहन एक दुसरे के जिस्म का मज़ा ले रहे थे..

इधर बहार मैं और भाभी उन्हें देख रहे थे जग्गू अपनी जगह पर था प्लान के अनुसार... भाई बहन का खेल देखकर हम भी गरम हो रहे थे वैसे भी सुबह के टाइम लुंड अकड़ा हुआ रहता है.... ऊपर से मेरे बगल में भाभी कड़ी थी उनके जिस्म की गर्मी मुर्दे का लुंड भी खड़ा करदे तो हम तो अभी ज़िंदा थे...

अंदर कल्लू नीचे बैठ कर कजरी के चूतड़ों को चाट रहा था और कजरी भी अपने चूतड़ खूब चरवा रही थी...

भाभी और मैं एक ईंट से अंदर झांक रहे थे और अगल बगल खड़े थे भाभी मेरे सीधे हाथ पर थी... मेरा लुंड हर पल के साथ कड़क होता जा रहा था सब कुछ प्लान के अनुसार चल रहा था सिवाए मेरे लुंड के,

खड़े लुंड के इंसान को कहाँ चैन मिलता है, बिना कुछ किये तो मैंने भी हिम्मत की और हाथ को धीरे धीरे सरकते हुए भाभी को नंगी कमर पर रख दिया...

भाभी एक पल को चौंकी ज़रूर पर ज़्यादा कुछ रिएक्शन नहीं diya...maine थोड़ी देर बिना किसी हरकत के अपना हाथ ऐसे hi रहने दिया,

अंदर कल्लू अब खड़ा हो रहा था साथ hi अपना पजामा भी खोल रहा था... कल्लू के खड़े होते hi उसका पजामा नीचे गिर gaya...sath hi उसने अपना कच्चा नीचे खिसका कर अपना लुंड बहार निकल लिए और फिर कजरी के चूतड़ों पर घिसने लगा...

इधर भाई को बहन के चूतड़ों पर लुंड घिसता देख मेरी गर्मी भी बढ़ने लगी... जैसे hi कल्लू ने अपना लुंड कजरी के चूतड़ पर घिसा मेरा हाथ भाभी की कमर पर कास गया और मैंने उनकी कमर को मसल दिया...





भाभी ने कोई अलग प्रतिक्रिया नहीं दी बस अंदर देखती रही शायद वो भी अंदर का खेल देखकर गरम हो रही थी....

जब मुझे भाभी की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली तो मैं भी खुल गया और पूरी तरह से उनके पीछे आकर खड़ा हो गया और साथ hi अपना दूसरा हाथ भी उनकी कमर पर दूसरी तरफ रख लिए और पीछे खड़े होने से मेरा लुंड भी उनके चूतड़ों पर छूने लगा... हालाँकि मैंने अपनी कमर पीछे की हुई थी की उन्हें लुंड न चुभे पर फिर भी खड़ा लुंड कहाँ छुपता है....

मैं हलके हलके हाथों से भाभी की कमर को मसलते हुए अंदर देखने लगा...

अंदर कल्लू ने अपनी बहन की चड्डी को थोड़ा साइड की तरफ खिसका दिया और कल्लू के सामने उसकी बहन की प्यारी कासी हुई छूट आ गयी.. जिसे वो भाभी की छूट समझ रहा था.. कल्लू ने फिर अपनी एक उंगली कजरी की छूट पर रख दी और कजरी की रसीली छूट को उँगलियों से कुरेदने लगा...

बहार भाई को अपनी बहन की छूट को उंगली से सहलाते देख बहार मैं और भाभी गरम हो रहे थे... मैं अब भाभी की कमर को खुल कर मसल रहा था... भाभी की तरफ से भी कोई विरोध नहीं देखने को मिला था... जिसकी छूट पाकर मैंने हाथ ऊपर लेजाकर भाभी का पल्लू भी उनके सीने से नीचे गिरा दिया... और मेरे हाथ भाभी की कमर और पेट को मसलते हुए मेरी उंगलियां उनकी प्यारी सी नाभि के साथ खेलने लगी... भाभी की साँसे भरी होने लगी पर उनकी और मेरी नज़र अंदर तिकी हुई थी..

अंदर कल्लू ने कुछ देर तक अपनी बहन की छूट को उँगलियों से छेड़ा और फिर झुककर अपना मुँह छूट पर टिका दिया और चाटने लगा..





कल्लू की जीभ महसूस करके कजरी के मुँह से हलकी सी सिसकारी निकल गयी, जिसपर कल्लू को लगा की भाभी को ये पसंद आ रहा है तो वो धीरे धीरे से कजरी की छूट चाटने लगा... जिससे कजरी तो मस्त हो गयी...

उधर उन दोनों की अटखेलियां देखकर मेरा मन और डोलने लगा... भाभी तो बस अंदर देखे जा रही थी अभी तक उन्होंने खुद से न मेरा साथ दिया था और न hi मन किआ था, पर मुझसे इतना मख्हन जैसा बदन अब छोड़ा नहीं जा रहा था तो मैं थोड़ा आगे घूमकर भाभी के सामने की तरफ आकर अपने घुटनो पर बैठ गया और मेरे सामने आ गया भाभी का चिकना पेट कामुक नाभि जिसे देखकर मेरे मुँह में पानी आ गया..

और मुझसे रुका भी नहीं गया और मैंने भाभी के मखमली पेट पर अपने होंठ टिका दिए और चाटने लगा... उनकी नाभि को चूमने लगा...





जब मेरे होंठ भाभी के पेट पर पड़े तो भाभी ने पहली बार कल्लू और कजरी से नज़र हटाई और फिर नीचे मेरी तरफ देखा पर मेरा पूरा ध्यान तो उनके मख्खन जैसे पेट और नाभि पर था... फिर भाभी का एक हाथ मेरे सर के पीछे आ गया... और फिर भाभी बापिस अंदर देखने लगी मैं तो कजरी और कल्लू के बारे में भूल hi चूका था...

इधर अंदर अब कल्लू ने कजरी की छूट से मुँह हटाया और सीधा हो गया, और अपने लुंड को पकड़ा और अपनी बहन की छूट के होंठों पर रखकर रगड़ने लगा... कल्लू इस मौके का फायदा अचे से पूरे मज़े लेकर उठाना छह रहा था बिना किसी जल्दबाज़ी के... वहीं कजरी कल्लू के लुंड के छूट पर घिसने से तड़प रही थी...

बहार मैंने भाभी के पूरे पेट और नाभि को चाट चाट कर गीला कर दिया था... जब मैं संतुष्ट हो गया तो फिर से खड़ा होकर भाभी के पीछे आ गया और इस हार मैं पीछे से पूरी तरह से भाभी से चिपक गया मेरा लुंड उनके चूतड़ों के बीच घुस गया मैंने अपने हाथ उनकी कमर पर रख लिए और पीछे से उनके गले को चूमते हुए अंदर नज़र डाली...

अंदर कल्लू ने लुंड कजरी की छूट के होंठों के बीच में घिसते हुए रूककर एक धक्का लगाया और कल्लू का लुंड उसकी बहन की छूट में घुस गया.. कल्लू ने अनजाने में अपनी बहन की छूट में अपना लुंड घुसा दिए था और बहन छोड़ बन चूका था, वहीं कजरी को ज़रा भी बनक नहीं थी की पीछे जिसका लुंड उसकी छूट में घुसा हुआ है वो और कोई नहीं बल्कि उसका भाई है...

भाभी का और मेरा ये दृश्य देखकर बुरा हाल हो गया था.. भाभी के लिए तो ये पहली बार था जब वो किसी भाई और बहन को ऐसा करते हुए देख रही थी... और गरम हो रही थी, मेरे ऊपर कल्लू और कजरी की चुदाई के साथ साथ भाभी के साथ होना ज़्यादा असर कर रहा था .. कमर पर हाथ फेरते हुए मुझसे रहा नहीं गया और मैं सरकते हुए ऊपर ले आया ब्लाउज के और ऊपर से hi भाभी की छूछीयो को दबाने लगा..





भाभी अब इतनी गरम हो चुकी थी की अब भी उन्होंने मुझे नहीं रोका. साथ hi पीछे होकर मुझसे टिक गयी ...

उनका सर मेरे कंधे पर टिक गया.. मेरे हाथ भाभी की बड़ी बड़ी मखमली छूछीयो पर घूम रहे थे ब्लाउज के बहार से भी मुझे भाभी की छूछीयों की कोमलता और भराव अचे से महसूस हो रहा था...

अंदर कल्लू हलके हलके धक्कों से कजरी को छोड़ रहा था...





एक भाई अपनी hi बहन को छोड़ रहा था और उन दोनों को hi इसकी खबर नहीं थी.. बहार मैं और भाभी उनकी चुदाई देखकर पागल हो रहे थे... साड़ी कमर पर इकट्ठी हो राखी थी कजरी ने अपने दोनों हाथों से अपने चूतड़ों को फैला रखा था... दोनों चूतड़ों के बीच उसके भाई का लुंड अंदर बहार हो रहा था और वो दो अनजाने में hi सही पर इस पारिवारिक प्रेम के बंधन में बांध रहे थे...

उनका प्रेम देखकर मैं और भाभी हवस और वासना के बंधन में बंधे हुए थे... मुझसे भी अब काबू नहीं हो रहा था तो मैंने भाभी का चेहरा पकड़ कर अपनी तरफ किआ और अपने होंठ को उनके नरम और रसीले होंठों पर रख दिया और चूसने लगा पहले तो भाभी ने सिर्फ होंठों को खोल कर रखा पर कुछ किआ नहीं पर थोड़ी देर बाद वो भी साथ देने लगी.. और मैं तो जैसे जन्नत में पहुँच गया... मैंने भी आगे बढ़ाते हुए जीभ उनके मुँह में घुसा दी जिसे चूसकर भाभी ने उसका स्वागत अपने मुँह में किआ.....

फिर मैं उनकी जीभ अपने मुँह में लेकर चूसने लगा... साथ hi मेरे हाथ उनकी छूछीयों को गूंथ रहे थे और नीचे मेरा लुंड उनके चूतड़ों पर दस्तक दे रहा था... भाभी पर हर तरफ से हुम्ला hi हुम्ला हो रहा था.. जिससे भाभी उत्तेजित होती जा रही थी,

हमारे होंठ जब अलग हुए तो हमने बापिस अंदर देखा तो कल्लू ज़ोर ज़ोर के धक्के लगा रहा था और फिर अचानक से कल्लू ने कजरी की कमर पकड़ कर अंदर तक लुंड घुसेड़ दिया और झड़ने लगा...

उसे लगा की वो अपना बीक प्रेमा भाभी के आदत गिरा रहा था पर सच में तो उसने अपनी सगी बहन की छूट में अपना वीर्य भर दिया था..

उसे झाड़ता देखकर मेरे मन में गली आ गयी की भोसड़ी का बातें तो ऐसी थी जैसे न जाने कितनी देर chodega...lawda शुरू होते hi ख़तम हो गया... दारू का nateeza..sale को छूट चाहिए चाहे ठीक से छोड़ न पाए....

खैर मुझे क्या ाचा हुआ जल्दी काम ख़तम हुआ...

कल्लू ने झड़ने के बाद कजरी की छूट से लुंड निकला और हांफता हुआ पीछे हटा कुछ पल बैठा और फिर जल्दी से अपने कपडे ठीक किये और वहां से निकल गया... कजरी अब भी वैसे hi झुकी हुई थी...

बहार नेरा मन भाभी को छोड़ने का नहीं कर रहा था... साथ hi ये देखने के बाद की की कैसे कल्लू ने अपनी बहन की छूट में अपना वीर्य गिराया था ये सोचकर भाभी और उत्तेजित हो रही थी जिसका फायदा उठाते हुए मैं उनके ब्लाउज के हुक खोलने लगा और कुछ पल बाद भाभी का ब्लाउज सामने से खुल चूका था और ब्रा में क़ैद भरी भरी चूचियां मेरे हाथों में आ गयी थी...

कल्लू जा चूका था प्लान पूरा हो चूका था पर मेरा मन भाभी को छोड़ने का नहीं कर रहा था.. मैंने भाभी के ब्रा के कप को नीचे सरका के दोनों छूछीयों को बहार निकल लिए...

अह्ह्ह्हह क्या एहसास था भाभी की छूछीयों का मेरे हाथ अपने आप उनकी नरम गोल गोल पापीती जैसी छूछीयो को मसलने लगा... मुझे और भाभी को दोनों को hi मज़ा आ रहा था मेरा लुंड भाभी की गांड में घुसता जा रहा था.. मैं एयर भाभी लगे हुए थे की तभी अचानक से अंदर कुछ हरकत ुई अंदर झंकार देखा तो हम दोनों हैरान रह गए...

खैर इसके आगे की कहानी ऊँगली अपडेट में प्लीज कमैंट्स करके ज़रूर बताएं कैसी लगी अपडेट बहुत बहुत शुक्रिया सुझाव देते रहे
 
अह्ह्ह्हह क्या एहसास था भाभी की छूछीयों का मेरे हाथ अपने आप उनकी नरम गोल गोल पापीती जैसी छूछीयो को मसलने लगा... मुझे और भाभी को दोनों को hi मज़ा आ रहा था मेरा लुंड भाभी की गांड में घुसता जा रहा था.. मैं एयर भाभी लगे हुए थे की तभी अचानक से अंदर कुछ हरकत ुई अंदर झंकार देखा तो हम दोनों हैरान रह गए...

अपडेट 101

कमरे में कल्लू के जाने के बाद कजरी सीढ़ी हो hi रही थी की उसे कुछ आहात हुई और वो बापिस वैसे hi झुक गयी... मैंने भी देखा कोई अंदर घुस रहा है, मुझे टेंशन हो गयी की कौन हो सकता है.. पर जैसे hi मेरी नज़र उस पर पड़ी साडी टेंशन हवा हो गयी क्यूंकि वो कोई और नहीं बल्कि जग्गू था, शायद वो भी दोनों की चुदाई देख कर गरम हो गया था, जग्गू ने अंदर आकर अपना पजामा नीचे खिसकाया और लुंड को बहार निकल लिए और फिर एक बार झुककर कजरी की गांड के छेड़ पर थूका और फिर सीधा होकर लुंड गांड के छेड़ पर टिकाया और हलके से अंदर सरका दिया कजरी की न चाहते हुए भी हलकी सी चीख निकल गयी... इधर जग्गू हलके हलके धक्कों से कजरी की गांड मरने लगा...





अंदर का नज़ारा देखकर भाभी थोड़ा हैरान थी क्यूंकि ये प्लान में नहीं था पर हैरानी से ज़्यादा उत्तेजित थी और उसी का फायदा उठाते हुए मैं भाभी की छूछीयो को पीछे से मसल रहा था..

भाभी भी अब सब लाज धर्म वासना के आगे भूल चुकी थी और मेरे हाथों को अपनी छूछीयो पर महसूस करके मज़े ले रही थी..





मेरे हाथों में भाभी के नरम नरम गोले आह्हः कितना आनंद दे रहे थे ये बता नहीं सकता..

सोचा नहीं था की भाभी की मदद करने का इतना हसीं इनाम मिलेगा... कुछ खास था भाभी की छूछीयो में जो कासी हुई भी थी और साथ hi बेहद कोमल भी..

अंदर जग्गू के धक्को की गति बढ़ चुकी थी और वो कजरी के चूतड़ों को थामे उसकी गांड में लुंड अंदर बहार कर रहा था... पर जग्गू ने अपनी गति इतनी भी नहीं की थी की वो जल्दी झाड़ जाये वो भी पूरे मज़े लेना चाहता था कजरी की कासी हुई गांड के...

कजरी भी गांड में लुंड पाकर मस्त हो रही थी हालाँकि शुरू में उसे थोड़ी बहुत तकलीफ ज़रूर हुई थी पर अभी वही तकलीफ आनंद में बदल गयी थी.. जो जग्गू के लुंड से होकर उसकी गांड में आ रहा था और फिर उसके पूरे शरीर में..

मेरा और भाभी का ध्यान अब अंदर से भटक चूका तथा अंदर क्या हो रहा था हमें नहीं पता था क्यूंकि हम अपनी hi प्यास बुझाने की कोशिश में लगे हुए थे... भाभी को साथ देता देख मैंने एक कदम बढ़ने का सोचा... मैं देखना चाहता था भाभी साथ देती हैं की नहीं.. मैंने भाभी के ब्लाउज के एक पैट को पकड़ा और उनकी एक बाजु से निकलने लगा..

भाभी ने अब पहली बार तबसे कुछ कहा.. वो फुसफुसाते हुए बोली- लल्ला रहने दो न यहाँ खुल्ले में कोई देख लेगा..

पर जिसके सामने भाभी जैसा माल हो वो कहाँ hi सुनता है...

Me-koi नहीं आएगा भाभी और मैं उनका ब्लाउज खोलने लगा भाभी मुझे मुँह से तो मन कर रही थी पर उतरने में पूरा साथ दे रही थी....

और कुछ पल बाद भाभी का ब्लाउज उनके शरीर से अलग हो चूका था और फिर अगले hi पल ब्रा भी उनके शरीर से अलग हो कर नीचे पड़ी थी...

भाभी- लल्ला यहाँ खुल्ले में नंगा कर दिया तुमने मुझे किसी ने देख लिए तो क्या होगा... और हमें घर जाना है...

में- कुछ नहीं होगा भाभी...

मैंने इतना बोलकर अपने होंठों को उनके होंठो पे टिका दिया और उनके रसीले होंठों को चूसने लगा... उनका कोमल रास पीने लगा...

भाभी यहाँ खुले में खेत में बने कमरे के बहार ऊपर से बिलकुल नंगी मेरे सामने कड़ी थी, जबकि उनका देवर दीवार के दूसरी तरफ किसी की गांड मार रहा था.. और भाभी अपने होंठों का रास मुझे पीला रही थी...

मैंने जब उनके होंठो को छोड़ा तो तुरंत hi उनकी एक छुच्छी को मुँह में भर लिए और चूसने लगा...

मेरे होंठ छुच्छी पर पड़ते hi भाभी मचल उठी... और उनका मुँह खुल गया पर बेचारी किसी तरह से अपनी आवाज़ को दबाने की कोशिश कर रही थी... मैंने मुँह में उनकी एक कोमल छुच्छी को भर लिए और दूसरी को हाथ से मसलने लगा...





मेरे मुँह में भाभी की चुकी की मिठास पिघल कर घुल रही थी जिसका सीधा असर मेरे लुंड पर हो रहा था... भाभी की छुछियां इतनी कोमल थी की मुझे ऐसा लग रहा था की मैं मख्खन को मुँह में भरकर चूस रहा हूँ... जो हर पल मेरे मुँह की गर्मी से पिघल रहा है पर काम नहीं हो रहा....

भाभी- है लल्ला अह्ह्ह ैससससीईए hiiiiiiiiiii.. भाभी अपनी आवाज़ को दबाते हुए बोल रही थी और सिसक रही थी...

मेरा मन तो कर रहा था की बस उनकी छूछीयों को चूसता रहा हूँ बदल बदल कर पर मेरे लुंड का दर्द अब परेशां कर रहा था... तो मैंने भाभी की छूछीयो को चूसते हुए hi अपना पजामा नीचे खिसका कर अपना लुंड बहार निकल लिया और फिर भाभी का एक हाथ पकड़ कर उसपर टिका दिया... भाभी को जैसे hi ये महसूस हुआ की ये क्या है उन्होंने तुरंत अपना हाथ पीछे खींच लिए...

साला इन औरतों का समझ नहीं आता एक तरफ साथ भी देती हैं और एक तरफ नहीं भी..

मैंने भाभी की छूछीयो को चूसते हुए एक बार फिर से उनका हाथ पकड़ कर रखा पर इस बार अपने हाथ से दबाये रखा और ऊपर नीचे करने लगा...

भाभी का कोमल हाथ मेरे सख्त लुंड पर चल रहा था जिससे मुझे बहुत मज़ा आ रहा था, कुछ पल बाद मैंने उनके हाथ से हाथ हटा लिए पर इस बार भाबी ने लुंड से हाथ नहीं हटाया और मेरे लुंड पर चलती रही... कड़क और बड़ा लुंड हर औरत की कमज़ोरी होता है... भाभी के हाथ में भी उनकी कमज़ोरी मैंने पकड़ा दी थी...

अंदर जग्गू अब कजरी की गांड को तबियत से पेल रहा था... कजरी भी झुके हुए गांड मरवाने का पूरा आनंद ले रही थी... अब तक एक बार झाड़ भी चुकी थी पर जग्गू था की. रुकने का नाम hi नहीं ले रहा था...

बहार मेरी और भाभी की रासलीला चल रही थी... जी भर के उनकी छूछीयों को चूसने के बाद मैंने अपना मुँह हटाया और भाभी के गले को चूमने लगा.. भाभी का हाथ लगातार मेरे लुंड पर ऊपर नीचे हो रहा था... मैंने भी हाथ भाभी की एक छुच्छी से सरकता हुआ उनकी रसीली कमर और फिर पेट पर घूमते हुए उनकी नाभि को छेड़ा और फिर धीरे धीरे नीचे सरकने लगा...

साड़ी के ऊपर से hi भाभी की छूट की तरफ मेरा हाथ खिसकने लगा तो भाभी का हाथ मेरे लुंड पर कास गया और दुसरे हाथ से भाभी ने मुझे कसकर पकड़ लिए..

Bhabhi-nahi लल्ला... बस्सस..

में- मज़ा आ रहा है भाभी मत रोको...

भाभी- ये सब सहीई nahiiiiiiiiiiiii

मेरा हाथ साड़ी के ऊपर से hi भाभी की छूट के ऊपर पड़ा तो भाभी काँप गयी और बोलते बोलते रुक गयी..

मैं साड़ी के ऊपर से hi भाभी की छूट के ऊपर हाथ फेरने लगा...

Bhabhi-shhhhhhhhhh लल्ला ाहहममममम

और फिर भाभी ने खुद से hi अपने होंठ मेरे होंठों से चिपका दिए...

और न जाने अचानक से क्या हुआ की भाभी कंपते हुए नीचे घुटनो पर गिर गयी...

पहले तो मैं चिंता में पद गया की न जाने क्या हुआ पर फिर समझ आया की भाभी झाड़ गयी है... साड़ी के ऊपर से हाथ लगने पर भी भाभी की छूट ने पानी बहा दिया.. भाभी नीचे बैठी बैठी लम्बी सांसे ले रही थी आँखें बंद करके...

कुछ पल बाद भाभी ने आँखें खोली तो चौंक गयी.. क्यूंकि उनके चेहरे के सामने मेरा लुंड था...

भाभी- लल्ला हाय दय्या ये क्या hai...itana बड़ा...

में- तुम्हे नहीं पता भाभी ये क्या है...

भाभी- पता है पर..

भाभी की नज़र मेरे लुंड से हैट hi नहीं रही थी...

Me-par क्या भाभी..

भाभी- इतना बड़ा पहले कभी नहीं देखा...

में- अभी तो देख रही हो भाभी अब इसे प्यार करो न..

भाभी- मतलब..

में- इसे चूसो न भाभी..

भाभी- नहीं लल्ला मैं कैसे ये.... ये सब गलत है..

मैंने जवाब में लुंड को हाथ से पकड़कर लुंड के टोपे को भाभी की तरफ आगे बढ़कर उनके होंठो से सत्ता दिया...

उसके बाद न मुझे कुछ कहना पड़ा न भाभी की ज़रुरत पड़ी...

बस अगले hi पल मेरे मुँह से आह निकल गयी... क्यूंकि भाभी ने जीभ निकल कर मेरे लुंड का टोपा चाट लिए और फिर एक बार और छठा... और फिर अपने होंठो को खोलकर मेरे टोपे को अपने गरम मुँह में भर लिए...

Me-aahhhhh भाभी...

मैं तो जैसे जन्नत में पहुँच गया... भाभी के मुँह में मेरा लुंड था जो खुले आसमान में आधी नंगी होकर मेरा लुंड चूस रही है अपने देवर के पास होते हुए भी...

भाभी बड़े प्यार से मेरी आँखों में देखते हुए मेरे लुंड से प्यार जाता रही थी.. उनके चेहरे के नीचे उनकी नंगी बड़ी बड़ी छुछियां भी उनके साथ साथ उछाल कूद कर थी...





में- ऐसे hi भाभी अह्ह्ह्ह बहुत मज़ा आ रहा है...

Bhabhi-umm ह्म्मम्म्म्म

उधर जग्गू और कजरी की गाड़ी एक्सप्रेस बन चुकी thi...aur तेज़ थापो की आवाज़ बहार तक सुनाई दे रही थी... मुझे दर तो ये था की सेल जग्गू को भी चैन नहीं कही अगर कल्लू दोबारा आ गया तो क्या hoga...par कोई नहीं खड़ा लुंड कहाँ इतना सोचता है जैसे अगर मैंने सोचा होता तो भाभी अभी नीचे बैठकर मेरा लुंड नहीं चूस रही होती...

मेरे लुंड पर उनके मुँह का गरम एहसास आह्ह्ह्हह क्या मज़ा दे रहा था... मेरा लुंड उनके मुँह में और कड़क होता जा रहा था वहीं भाभी भी अब मेरे आधे लुंड को मुँह में लेकर चूस रही थी...





उनको ऐसे मेरे लुंड के साथ खेलते हुए देखकर मुझे बड़ी ख़ुशी हो रही थी साथ hi आनंद भी मिल रहा था.. और मिले भी क्यों न प्रेमा भाभी कुछ चीज़ hi ऐसी थी...

मैं भाभी के मुँह का मज़ा ले रहा था की तभी मुझे एक आह्ह्ह्हह सुनाई दी जो की कमरे के अंदर से आई थी.. अंदर झांक कर देखा तो जग्गू कजरी की गांड से जड़ तक लुंड घुसा के चिपका हुआ था और ऊपर मुँह करके तेज़ तेज़ साँसे ले रहा था...

मतलब जग्गू का काम ख़तम हो चूका था .. और कजरी तो बेचारी आगे चारे पर सर रखे हुए पड़ी थी.. साड़ी कमर के ऊपर इकट्ठी थी ... बेचारी की छूट में खुद के सेज भाई का रास था तो गांड को जग्गू ने अपने रास से भर दिया था...

इसका मतलब साफ़ ये था की मेरे पास भी समय काम बचा था और अभी मैं किसी भी हालत में बिना झड़े नहीं जाना चाहता था... तो मैंने भाभी के सर के पीछे हाथ लगाया और अपना लुंड अंदर बहार करने लगा उनके मुँह में... भाभी ने भी खुद से अपना काम बंद कर दिया और बस मुँह खोल कर मेरे लुंड से मुँह छुड़वाने लगी...

आधा लुंड तो भाभी वैसे भी चूस hi रही थी तो मैं धक्को के साथ थोड़ा थोड़ा लुंड और अंदर करने लगा क्यूंकि गति ज़्यादा थी तो भाभी को तकलीफ होती उससे पहले hi लुंड बहार होता और फिर अंदर जब लुंड आधे से 2 इंच और अंदर जाने लगा तो भाभी को थोड़ी तकलीफ होने लगी.. उनके गले गगू घ्हुउउउ की आवाज़ें आने लगी...

पर भाभी ने मुझे नहीं रोका और मुझे तो बस झड़ना था तो मैं और लुंड अंदर तक भाभी के गले तक पाहुवचने लगा... भाभी की आँखों से आंसू बहने लगे थे पर भाभी की हिम्मत थी की उन्होंने अभी तक मुझे रोका नहीं था...

और सच कहूं तो मैं अब रुक भी नहीं सकता था... मैंने हाथों से भाभी के चेहरे को थाम लिए और फिर अपना पूरा लुंड भाभी के गले तक उतार दिया... भाभी छटपटाने लगी पर कुछ पल बाद मैंने लुंड उनके मुँह से निकला तो वो गहरी लम्बी साँसे लेने लगी और फिर कुछ पल बाद मैंने फिर से लुंड जग तक घुसेड़ दिया मुझे उनका गाला अपने लुंड पर महसूस हो रहा था और फिर से निकल लिए..

ऐसे hi कई बार किआ तो अब भाभी को भी काम तकलीफ hi हो रही थी और फिर मुझे मेरा रास मेरे लुंड से निकलता हुआ महसूस हुआ... मैंने भाभी के चहरे को लुंड पर दबा दिया साथ hi अपने लुंड को पकड़ कर जड़ से मुठियाने लगा और फिर मेरे लुंड से रास की पिचकारियां छूटने लगी भाभी के गरम मुँह में...





भाभी बेचारी छह कर भी पीछे नहीं हैट सकीय थी क्यूंकि मैंने पीछे से उनका सर दबा रखा था..

मेरे रास की धार एक के बाद एक उनके मुँह में भर्ती जा रही थी... न जाने भाभी को कैसा लगा पर भाभी को मेरा रास पीना पद रहा था.. न जाने कितनी धार तक मक़िन झाड़ता रहा और भाभी मेरा रास पीती रही... जब मेरा झड़ना बंद हुआ तो मैंने भाभी के सर को छोड़ा और अपना लुंड उनके मुँह से निकला.. मेरा लुंड निकलते hi भाभी पीछे दीवार पर टिक गयी... और हांफने लगी... इधर मुझे जल्दी पड़ी थी तो मैंने जल्दी से अपना पजामा पहना और नीचे पड़े हुए भाभी के ब्लाउज और ब्रा को उठाया तब तक भाभी भी शांत हो चुकी थी...

भाभी- लल्ला तुम बड़े दुष्ट हो.. मुझे तो लगा था आज मैं मर hi जाउंगी..

भाभी ने मेरे हाथ से ब्रा लेकर पहनते हुए कहा....

में- क्या करूँ. भाभी तुम्हे देखकर हिश खो बैठा...

भाभी- तुम्हारे होश के चक्कर में मेरी जान चली जाती...

में- अरे मेरी प्यारी भाभी की जान ऐसे कैसे जाने देता..

Bhabhi-bas लल्ला अब बातें न banao...tab तो कुछ सोचा नहीं...

तभी मेरा फ़ोन विबरते हुआ.. देखा तो जग्गू का था..

जग्गू- कहाँ है..

Me-yahin पास में खेत में..

Jaggu-bhabhi?

Me-sath hi हैं..

मैंने भाभी को देखते हुए कहा जो अभी ब्लाउज पहन रही थी...

Me-kajri गयी?

Jaggu-haan निकल गयी है... फिर भी तू एक बार पूछ ले..

Me-theek है खेत के बहार मिलते हैं

Jaggu-theek है..

मैंने फ़ोन रखा तब तक भाभी ब्लाउज पहनकर अपनी साड़ी ठीक कर चुकी थी...

में- हाँ भाभी अब बोलो..

Bhabhi-ab चलो लल्ला बोलेन क्या इसमें न जाने आज क्या क्या हो गया गलत सलत...

मैं और भाभी चलने lage...khet से बहार की और..

में- क्या गलत हुआ भाभी...?

Bhabhi-tumhe नहीं पता क्या गलत हुआ..

में- मुझे तो कुछ गलत लग hi नहीं रहा...

भाभी- पर बहुत गलत हुआ ये सब नहीं होना चाहिए था..

में- भाभी तुम्हे ाचा नहीं लगा?

Bhabhi-acha लगने की बात नहीं है लल्ला... गलत तो गलत hi रहेगा चाहे कितना भी ाचा हो...

Me-Bhabhi अगर तुम्हे ाचा लगा तो बिलकुल गलत नहीं है, सही गलत के चक्कर में पढ़ कर कुछ नहीं मिलता तो जो ाचा लगे वो करो...

Bhabhi-kisi को पता चल गया तो..

में- किसी को पता नहीं चलेगा अभी तुम चिंता छोडो और जो ाचा लगा उसपर ध्यान दो जिससे तुम्हे ख़ुशी मिली हो, सही या गलत को मारो गोली..

इससे पहले. के भाभी कुछ कहती जग्गू आ गया,

जग्गू- सब प्लान के अनुसार हुआ न?

Me-tune अपना काम किआ?

Jaggu-haan बिलकुल अचे से किआ..

में- हाँ उसके बाद भी बड़ा अचे से काम किआ पूरा तूने..

Jaggu-abe वो चुप भाभी हैं...

में- भाभी ने भी देखा सेल..

Jaggu-kya भाभी तब भी वहीं थी अबे यार तूने तो बोलै था भाभी बहार इंतज़ार करेंगी...

में- अकेला कैसे छोड़ देता इतने अँधेरे में... पर तूने कुछ सोचा कहाँ अपनी प्यास बुझलि...

Bhabhi-waise भैया पीछे hi पद गए थे कजरी के तो...

Jaggu-are वो मैं भाभी... कर्मा..

भाभी- अब भी क्या शर्माना Bhaiya...hum से भी ..

जग्गू- अरे वो सब देखकर इतना गरम हो गया की रोक hi नहीं पाया खुद को और मौका भी मिल गया...

Bhabhi-aur तुमने चौका मार दिया...

Me-chauka नहीं इसने तो कजरी की गए..

इतनना hi बोलै था की चुप हो गया भाभी शर्मा गयी तो जग्गू हंसने लगा..

Bhabhi-mujhe तो बेचारी कजरी के लिए दुःख हो रहा है... हमारी वजह से उसे अपने hi भाई के साथ छू... वो सब करना पड़ा..

Me-bhabhi हमसे क्या शर्माना.. अब.. जग्गू को बोल रही थी और अब शर्मा रही हो... खुल के बोलो..

Bhabhi-acha ाचा ठीक है... बस यही की बेचारी को हमारी वजह से अपने hi भाई से छोड़ना पड़ा साथ hi बेचारी के दोनों छेदों का बुरा हाल हो गया..

जग्गू- ाचा जब मैं अंदर था तब tum.log क्या कर रहे थे...

भाभी में mujhe.dekha और फिर मुस्कुराते हुए बोली- कुछ नहीं बस बातें...

Jaggu-acha...main भी कजरी से..

Me-are कजरी से याद आया तुम लोग आगे चलो मैं उसे फ़ोन करलेता हूँ..

Jaggu-theek है..

मैंने कजरी को फ़ोन किआ उसने उठाया..

में- घर पहुंच गयी दीदी..

Kajri-bas जा रही हूँ..

Me-theek हो तुम..

Kajri-haan ठीक तो हूँ पर थक गयी हूँ... लगता है जग्गू अपनी भाभी पर ज़्यादा hi फ़िदा है... इतनी बुरी तरह गांड मरी उसमे मेरी...

में- हाहाहा हाँ तब्बी तो हमारा प्लान कामयाब हुआ...

कजरी- हाँ पर अब मेरी गांड का तो भुर्ता बना दिया..

में- मैं आ जॉन क्या सिकाई करने..

Kajri-nahi नहीं तू आएगा तो नस जाने कितनी बार मार्के chhodega..ab घर जाकर मैं सोऊंगी...

में- ठीक है दीदी कुछ हो तो फ़ोन करना...

कजरी- ठीक है... कर्मा..

इसके बार फ़ोन कट गया मैंने थोड़ी देर जग्गू से और भाभी से बात की और फिर उन्हें सब बताया और फिर हम लोग बात करते हुए घर के करीब आये फिर वो लोग घर की और निकल गए मैं ब्बि अपने घर आ गया... सुबह होने में कुछ देर थी और नींद. भी आ रही थी तो पद कर सो गया..

इसके बाद क्या हुआ अगली अपडेट में प्लीज कमैंट्स करके ज़रूर बताएं कैसी लगी अपडेट... और बिजी होने के कारन देर से अपडेट देने के लिए छाना
 
थैंक्यू सो मच आल ऑफ़ यू बहुत जल्द hi अगली अपडेट मिलेगी तब तक अपने सुझाव और फीडबैक आने दीजिये..
 
इसके बार फ़ोन कट गया मैंने थोड़ी देर जग्गू से और भाभी से बात की और फिर उन्हें सब बताया और फिर हम लोग बात करते हुए घर के करीब आये फिर वो लोग घर की और निकल गए मैं ब्बि अपने घर आ गया... सुबह होने में कुछ देर थी और नींद. भी आ रही थी तो पद कर सो गया..

अपडेट 102

सुबह काफी देर तक सोता रहा, माँ ने जगाया तब जाकर नींद खुली.... नींद पूरी होने के बाद बहुत ाचा महसूस हो रहा था आंगन में देखा तो सब लोग थे ममता चची और उनका परिवार उनके घर जा चूका था बाकि के सरे लोग आंगन में थे... सब हंस खेल के बातें कर रहे थे पर कही न कहीं पापा मौसा और मौसी किसी सोच में भी लग रहे थे शायद रात की वजह से...

मौसी का व्यवहार मेरे साथ ज़्यादातर तो हमेशा की तरह hi था बस ऐसा लग रहा था की वो मुझे कुछ ज़्यादा hi घूर रही थी और उनके मन में कुछ चल रहा था...

यही हाल ममता चची और उनके परिवार का भी था वो लोग भी अंदर hi अंदर किसी सोच में डूबे हुए थे.. सबको पता था की रात को उनसे कुछ हुआ है पर ये नहीं पता था की इस काण्ड में सब शामिल थे..

खैर ये तो रही उनकी बात मैं काफी खुश था क्यूंकि भाभी के लिए जैसा सोचा था वैसा hi हुआ था तो अब वो टेंसन काम हो गयी थी... सबसे बात करते हुए खाना खाया और ऐसे hi टाइम पास हो रहा था...

ऐसे hi सब लोग टीवी देख रहे थे, माँ नहाने गयी थी अनुज का पता नहीं था मैं पापा मौसी और मौसा बैठ कर टीवी देख रहे थे...

तभी पापा मुझसे बोले- बीटा जा मेरे कमरे से मेरा फ़ोन ले आ ज़रा..

में- अभी लाया..

और मैं उठ कर माँ पापा के कमरे की तरफ गया बरामदे में पहुंचा तो देखा की अनुज उनके कमरे के दरवाज़े पर एक साइड होकर खड़ा है और अंदर झाँक रहा है पहले तो मैंने सोचा इसी को बोल देता हूँ पर फिर मेरा ध्यान उसके हाथ पर गया तो पाया की उसका हाथ पाजामे के ऊपर से hi उसके लुंड को सहला रहा है... मैंने सोचा ये क्या कर रहा है, पागल हो गया है क्या कोई देख लेगा अभी तो...

पर मन में ये भी आया देखूं तो सही हो क्या रहा है... इसलिए मैं दबे पाऊँ थोड़ा आगे बड़ा और पीछे से कमरे के अंदर झांकने की कोशिश करने लगा की ये क्या देख रहा है चोरी छिपे...

जब मेरी नज़र अंदर पड़ी तो देखा की अंदर माँ थी जो अपने कपडे पहन रही थी अभी उनके हाथ में साड़ी थी जिसे वो लपेट रही थी, माँ का चिकना पेट गहरी नाभि सब नंगा था.. और यही सब अनुज को भी दिख रहा था..





ये सब देखकर मुझे न जाने क्यों गुस्सा आने लगा, अनुज माँ को देखते हुए लगातार अपने लुंड को मसल रहा था... जिसे देखकर मेरा पारा चढ़ाता जा रहा था पर खुद सामने से क्या करता मुझे समझ नहीं आ रहा था, और न hi उसका माँ को देखना ऐसे मुझसे बर्दाश्त हो रहा था..

मुझसे ज़्यादा देर इंतज़ार नहीं हुआ और मैं बिना अनुज की तरफ देखे सीधा कमरे के अंदर चला गया तब तक माँ भी साड़ी लगभग पहन hi चुकी थी, मैंने खुद को शांत करते हुए माँ से बोलै- माँ पापा का मोबाइल कहाँ है?

माँ- देख शायद बीएड पर पड़ा होगा, खाना खा लिए तूने?

में- हाँ माँ खा लिए,

और फिर बीएड से पापा का मोबाइल उठाया और बहार की तरफ आया तो देखा अनुज गेट के बहार से गायब था... मैं बहार आ गया फ़ोन लेकर और पापा को दे दिया और फिर सब के साथ बैठ गया, यूँ कहने को तो मैं टीवी देख रहा था पर मेरा सारा ध्यान कहीं और hi था, कई सवाल दिमाग में थे..

अनुज माँ को कपडे बदलते हुए देखकर अपना लुंड क्यों मसल रहा था?

क्या वो भी माँ को ऐसी नज़र से देखता है?

क्या वो भी माँ के साथ वो सब?

शायद मुझे इनका जवाब पता भी था पर मुझमे इतनी हिम्मत नहीं हो रही थी की इन सवालों के जवाब को स्वीकार सकूँ...

क्या जितना मैंने देखा अनुज ने माँ को उतना hi देखा, या न जाने कितनी देर से वो वहां खड़ा होगा, क्या उसने माँ को पूरा नंगा तो नहीं देख लिए..

नहीं नहीं, माँ अंदर के कपडे तो बाथरूम में hi बदल लेती हैं.. पर कभी कभी तो बाल सूखने के लिए वो ऐसे hi बहार आ जाती हैं...

मेरे मन में ये hi उधेड़बुन चल रही थी... एक तरफ चिंता थी तो साथ में गुस्सा भी आ रहा था... ये hi सब सोच रहा तथा.. मन में सवाल hi सवाल थे मन अशांत था...

तभी मेरे फ़ोन पर जग्गू का फ़ोन आया,

Me-haan बोल..

Jaggu-sun आगे क्या करना है वो भाभी के पास कल्लू का फ़ोन आ रहा था फिर से..

Me-aata हूँ..

ये कहकर मैंने फ़ोन रख दिया और जग्गू के घर की तरफ चल दिया

जग्गू के घर पंहुचा तो जग्गू ने hi गेट खोला अंदर जाकर आंगन में बैठ गया खत पर जग्गू भी मेरे साथ बैठ गया भाभी बाथरूम के बहार hi बैठकर कपडे धो रही थी.. बाकि ताऊ तै शायद घर पर नहीं थे,

भाभी ने मुझे देखा तो बोली- लल्ला थोड़ी देर रुको या फिर यहाँ गर्मी में क्यों बैठे हो मेरे कमरे में जाकर बैठो मैं नहाकर आती हूँ... बहुत गर्मी हो रही है...

Me-theek है भाभी जल्दी आओ...

भाभी के भी कपडे धूल चुके थे और वो भी नहाने जाने hi वाली थी





पसीने में भीगा हुआ भाभी का बदन बहुत कामुक लग रहा था चिकने पेट और कमर का तो कहना hi क्या मन कर रहा था की अभी जाकर पसीने की बूंदों को उनकी कमर से चाट लूँ....

मैंने जग्गू की तरफ देखा तो उसकी आँखें भी भाभी के बदन पर जमी हुई थी... मैं और जग्गू आँखों से भाभी के गदराये बदन का आनंद तक लेते रहे जब तक भाभी बाथरूम में न चली गयी...

उनके जाने के बाद मैं और जग्गू भी जाकर भाभी के कमरे में बैठ गए...

Me-kab आया था फ़ोन...

Jaggu-bhabhi hi बोल रही थी की कर्मा को भी बुलाले साथ में बात करते हैं...

Me-theek hai..aur तै ताऊ कहाँ हैं...

Jaggu-khet पर गए hain...par तुझे क्या हुआ तेरा मुँह क्यों बना हुआ है..

Me-kuch नहीं..

Jaggu-pakka..

Me-haan वो सोकर उठा हूँ लेट शायद इसलिए...

हमारी बातें hi चल रही थी की इतने में भाभी भी नहाकर आ गयी पीली साड़ी में हमेशा की तरह सूंदर और कामुक लग रही थी...

में- हाँ भाभी अब बताओ क्या हुआ..

भाभी- होना क्या है वो हरामजादा फिर फ़ोन कर रहा था, बोल रहा था की एक बार मिलना है...

भाभी अलमारी में कपडे रखते हुए बात कर रही थी...

Me-phir तुमने क्या कहा..

भाभी- मैंने बोलै की बस एक बार की बात हुई थी तो बोलने लगा अभी मेरा मन नहीं भरा है ..मैंने बोल दिया मैं नहीं आउंगी तो कहने लगा की भूलो मत वो वीडियो अब भी मेरे पास है.. मैंने बोलै ये गलत कर रहे हो तुम... तो कहने लगा सब सही hai...dedh बजे आम के बाघ के कोने पर मिलना... और आना है न आने का फल तुम जानती हो ..

में- साला मेरे बाघ के कोने पर क्यों बुला रहा है...

Jaggu-wohin झोपडी है न पता नहीं किसकी वो खली रहती hai...tere बाघ के बगल में hi..

भाभी- अब बताओ क्या किआ जाये ये तो पीछे hi नहीं छोड़ रहा...

भाभी ये कहते हुए मुद कर कपडे उठाने के. लिए झुकी तो उनका पल्लू नीचे सरक गया और भाभी का खजाना हम दोनों की आँखों के सामने आ गया...





उनकी बड़ी बड़ी छुछियां ब्लाउज के बहार झांकने लगी साथ hi चिकना पेट गहरी नाभि सब सामने था मेरी और जग्गू दोनों की आँखें भाभी के जिस्म पर जैम सी गयी.. हालाँकि सुबह hi मैंने इन छूछीयो को मसला था और इनका रास पिया था पर अँधेरे में देखा नहीं था पर अभी उजाले में उनकी खूबसूरती देख कर मैं गदगद हो गया..

जहाँ पल्लू नीचे गिरा था वहीं हमारे पाजामे ऊपर होने लगे थे.. हम दोनों के hi लुंड पाजामे में तम्बू बना रहे थे... भाभी क्या बोल रही थी इसपर किसी का ध्यान नहीं था... पर हर अछि फिल्म की तरह इसका भी अंत हुआ और भाभी ने अपना पल्लू बापिस सही कर लिए..

Bhabhi-are तुम लोग कुछ बोल क्यों नहीं रहे..

में- अरे वो मैं हाँ भाभी चिंता मत करो आज इस कल्लू की कहानी ख़तम हो जाएगी

Bhabhi-are ढैय्या ऐसा क्या करोगे लल्ला...

Me-wo चिंता छोडो भाभी बस सब ठीक हो जायेगा...

भाभी- वो तो ठीक है बस तुम लोग किसी मुसीबत में मत फंस जाना....

में- नहीं फंसेंगे भाभी...

तभी जग्गू का फ़ोन बजा वो उठाकर बात करने लगा... फ़ोन कट करके बोलै

Jaggu-are भाभी खाना बन गया है क्या.. लेकर जाना है खेत पर..

भाभी- हाँ बन गया है अरे ढैय्या एक काम तो मैं भूल hi गयी...

Jaggu-kya

भाभी- अरे वो दाल के तड़के के लिए मसाला ख़त्म हो गया था तो तड़का नहीं लगा.. भैया ले औ जल्दी से..

जग्गू- अभी लता हूँ... चलेगा तू?

में- ना तू जा पिछली गली तक hi तो जाना है...

Jaggu-theek है..

भाभी- ले आओ तब तक मैं बाकि खाना गरम करती हूँ..

Jaggu-theek है

ये कहकर निकल गया इधर भाभी रसोई में चली गयी.. एक पल बाद मैं भी भाभी के पीछे रसोई में पहुँच गया.. रसोई में देखा तो भाभी ने दाल दोबारा से चूल्हे पर रख दी थी... इतने में मैं भाभी के पीछे गया उन्हें पकड़ कर घुमाया और भाभी चौंक गयी पर मैं नहीं रुका और जब तक भाभी समझपाटी क्या हो रहा है मैंने उन्हें नीचे उनके घुटने पर बिठा दिया था और साथ hi मेरा नंगा लुंड उनके होंठों को छू रहा था...

Bhabhi-lalla ये क्यम्म्मम्म.

इससे पहले भाभी आगे बोलती मैंने अपना लुंड का टोपा उनके मुँह में फंसा दिया ...

Me-bhabhi टाइम नहीं है ज़्यादा जल्दी से चूसो...

Bhabhi-hmmmmmmmmmmmmmmm

भाभी मन करने की कोशिश कर रही थी पर मैं लुंड को अंदर और अंदर घुसाए जा रहा था उनके मुँह में.. अंत में भाभी भी हार मान कर लुंड को चूसने लगी...

भाभी को काम पर लगता देख मैंने अपने हाथ हटा लिए और पीछे स्लिप से लग कर खड़ा हो गया और भाभी के मुँह की सेवा का मज़ा लेने लगा... अह्ह्ह्ह क्या मज़ा मिल रहा था वैसे तो भाभी मन कर रही थी पर अभी पूरे मन से लुंड चूस रही थी...

कभी लुंड को मुँह में भर कर चूसती तो कभी नीचे से ऊपर तक जीभ से चाटती तो कभी नीचे जाकर मेरे तटों को चाटने लगती....





भाभी की मुख मैथुन की कला का तो मैं क़ायल होता जा रहा था... सुबह खेत में तो मैंने उनका मुँह छोड़ा था पर अभी तो भाभी जो अपने मुँह जा जादू मेरे लुंड पर चला रही थी... आह्ह्ह्हह मुझे तो भग्गू से जलन होने लगी थी.. की सेल लंगूर को भाभी जैसी हूर कैसे मिल गयी...

इतने में मेरे पूरे शरीर में एक सनसनी सी फ़ैल गयी वजह थी भाभी मेरे तटों को पूरा मुँह में भर कर चूसने लगी... मुझे ऐसा लगा जैसे मेरा लुंड फटने को होने लगा है भाभी के हाथ में वो ठुमके मरने लगा... भाभी ने अचानक से मेरे तटों को मुँह से निकला और लुंड को मुँह में भर लिए और फिर जो ताकत से चूसा है लुंड को ऐसा लग रहा था मुझव की मेरे लुंड के रस्ते hi मेरी जान निकल जाएगी... या यूँ कहो मेरा कटरा कटरा भाभी के मुँह में समां जायेगा... भाभी एक सांस लेती फिर लुंड को ज़ोर से चूसती और फिर दोबारा सांस लेती ऐसा भाभी ने तीसरी बार किआ और मेरा लुंड भाभी के मुँह में हार मान कर झड़ने लगा... मेरा सारा रास भाभी के मुँह में गिरकर उन्हें तर करने लगा..

ये कुछ घंटों में दूसरी बार था जब भाभी मेरा रास पि रही थी.. जब झड़ना बंद हुआ तो भाभी तुरंत उठ मर कड़ी हो गयी और मेरे पाजामे को भी ऊपर खिसकर कर लुंड अंदर कर दिया.....

भाभी- लल्ला मिल गया चैन अब...

में- हाँ भाभी मज़ा hi आ गया...

भाभी- बस अगर थोड़ी देर और होती तो दाल जल जाती...

में- मैं तो चाहता था की होता hi रहे...

भाभी- हाँ हाँ तुम तो चाहोगे hi चाहे..

इतने में जग्गू आ गया तो भाभी की बात अधूरी रह गयी...

Jaggu-lo भाभी मसाले..

भाभी- हाँ भैया दो... और तुम लोग कुछ खाओगे क्या...

में- नहीं भाभी... हाँ चाय पीला दो ..

Jaggu-haan भाभी मैं भी पियूँगा..

फिर भाभी ने चाय बनाई और जब तक हमने पि तब तक उन्होंने दाल में तड़का वगेरा भी लगा lia...aur बांध भी दिया खाना..

में- चल फिर खाना देकर आते हैं...

Bhabhi-bhaiya मैं भी चलूँ यहाँ अकेले क्या करुँगी...

जग्गू- हाँ चलो न वहां से हम लोग कल्लू के काम के लिए निकल जायेंगे और तुम मम्मी पापा के साथ चली आना..

Bhabhi-theek hai..aisa सही रहेगा..

फिर घर बंद करके हम लोग खेत की तरफ चल दिए...

खेत पर पहुंचे तो ताऊजी और तेजी बैठे hi थे काम ख़तम कर के... हमें देखते hi खुश हो गए...

मंजू तै- अरे आज तो सब बच्चे आये हैं खाना देने...

र ताऊजी- हाँ बच्चो आज सब लोग कैसे...

भाभी- ग वो पापा ये दोनों लोग आ रहे थे तो मैंने पुछा की मैं भी चलूँ घर पर क्या करुँगी अकेले..

मंजू तै- बहुत ाचा किआ बीटा अब से घर पर अकेली मत रहा कर हमारे साथ hi आ जाया कर..

भाभी खुश होते हुए boli-theek है मम्मी ग..





मंजू तै- चलो सब लोग पेड़ों के नीचे की तरफ चलते हैं वहां बैठ कर खाया जाये...

Tauji-haan भाई चलो सब.. खाना खाया जाये...

फिर हम सब लोग चल कर पेड़ों के नीचे पहुँच गए सबने खाना वगेरा नीचे रखा भाभी खोल कर लगाने लगी...

पास में राखी बाल्टी से सबने अपने अपने हाथ धोये...

फिर सब लोग एक गोला बना कर बैठ गए खाने की चारो तरफ...

खाना शुरू hi करने वाले थे की तै जी कड़ी हो गयी..

ताऊजी- अब तुझे क्या hua...khayegi नहीं...

मंजू तै- अरे खाउंगी क्यों नहीं पर ये गर्मी इतनी लग रही है..

इतना कहकर तै जी ने हमेशा की तरह अपना पल्लू नीचे किया और एक दो बार साड़ी के पैट खोलकर पीछे की तरफ फ़ेंक कर बैठ गयी...





मंजू tai-haan अब थोड़ा आराम मिला चलो अब कहते हैं...

तै को तो आराम मिल गया पर उनकी बड़ी बड़ी छुछियां और गदराया पेट गहरी नाभि देख कर मेरे लुंड का आराम काम हो गया और वो जागने लगा...

वैसे तो तै की ये हमेशा की आदत थी पर फिर भी उन्हें देखकर मेरा लुंड फुंकारें मारने लगा पाजामे के अंदर hi... मैंने उनपर से नज़र हटा कर इधर उधर देखा की कहीं ऐसा न लगे की घूर रहा hun..tai की छूछीयो को...

Tauji-ab तो ठीक लग रहा है न अब तो खायेगी...

मंजू तै- हाँ हाँ तुम तो परेशां हो जाते हो तुरंत hi.. अब गर्मी है तो है... खुद भी तो बिन बनियान के बैठे हो...

Tauji-acha ठीक है अब खा...

मैं भाभी और जग्गू उनकी नोक झोक देख कर हंस रहे थे मैंने जग्गू को ध्यान से देखा तो उसकी नज़र भी बार बार तै जी की छूछीयो पर और पेट पर जा रही थी... मतलब तेजी की छूछीयो से सिर्फ मेरा hi आराम हराम नहीं हुआ है...

फिर सबने खाना खाया मिलकर और फिर मैंने टाइम देखा तो 1बज चूका था तो मैं और जग्गू मेरे बाघ की और निकल लिए...

पहुँचने के बाद थोड़ी देर हम बैठे रहे एक तरफ थोड़ी देर बाद कल्लू आया और झोपडी में घुस गया.. कुछ पल बाद हम दोनों झोपडी में गए तो हमें देखकर कल्लू थोड़ा चौंक गया..

Me-aur कल्लू क्या हाल हैं..

कल्लू- सब ठीक hi है कर्मा.. तुम सुनाओ.. वैसे तुम यहाँ कैसे?

में- क्यों तुम किसी और का इंतज़ार कर रहे थे...

कल्लू- अरे नहीं वो बस ऐसे hi...

Me-tum बताओ आज यहाँ कैसे...

कल्लू- कुछ नहीं बस अब चलता हूँ...

Me-are अभी कहाँ चले कल्लू भैया हमने सुना है कुछ तुम्हारे बारे में.

Kallu-kkk क्या सुना है..

में- आजकल तुम कैमरा मन बने फिरते हो, नहाती हुई औरतों की फोटो निकलते हो, वीडियो बनाते हो..

कल्लू- क्या नहीं तो ऐसा कुछ नहीं है कैसी बातें कर रहे हो तुम लोग...

में- अब तो सच बोलदे भोसड़ी के...

कल्लू- ोये गली क्यों दे रहा है तू...

जग्गू- सेल तुझे गली नहीं दें तो क्या इनाम दें..

कल्लू- तुम दोनों कुछ ज़्यादा नहीं बोल रहे... सालो तुन जानते नहीं मैं चहु तो तुम्हारा घर बर्बाद कर सकता हूँ..

में- सेल अगर घरवालों का नाम भी लिए न तो यहीं गाड़ दूंगा...

कल्लू- रुक तुझे अभी दिखता हूँ...

कल्लू ने फ़ोन निकला और फिर उसमे. वीडियो चला के दिखने लगा...

Kallu-dekho सालो अगर ये वीडियो पूरे गाओं में फैल गयी तो तुम्हारे परिवार की इज़्ज़त कितनी रह जाएगी... और सुन जग्गू आज सुबह hi तेरी भाभी को छोड़ा है मैंने... और अभी भी छोड़ने को बुलाया था पर साली धोखा दे गयी..

में- ओह्ह्ह्ह ाँद के छिलके बहुत बोल लिए तू... जग्गू इस लुंड सिंह को बहुत शोक है न वीडियो देखने का... चल अब तुझे हम वीडियो दिखते हैं...

जग्गू ने फिर अपना फ़ोन निकला और उसमे वीडियो चला के कल्लू को दिखने लगा...

कल्लू की तो आँखें बड़ी हो गयी वीडियो देखकर.. ये वो वीडियो थी जो जग्गू ने बनाई थी जब कल्लू अपनी बहन कजरी को जग्गू की भाभी समझ के छोड़ रहे थे... ये वीडियो जग्गू ने सामने की तरफ से बनाई थी जिससे दोनों का चेहरा साफ़ दिख रहा था...

जब वीडियो ख़तम हुई तो कल्लू के तो होश उड़े हुए थे...

में- हाँ तो जहाँतुमल अब क्या कहेगा तू, वैसे जग्गू काफी अछि वीडियो बनाई है तूने... सब अचे से दिख रहा है...

Jaggu-haan भाई काफी अछि बानी है क्यों कल्लू भैया...? और मेरी भाभी को छोड़ा था तुमने ऐसा कुछ बोल रहे थे पर वीडियो में तो कोई और है..

कल्लू चुपचाप खड़ा हुआ सब सुन रहा था...

में- हाँ ये तो कजरी है कल्लू भैया की सगी bahan...chhhee छी यार अपनी hi सगी बहन को छोड़ दिया कल्लू तूने.. मतलब तू अब से बहनचोद... अगर हम लोग ये वीडियो गाओं में सबको दिखादें तो कल्लू तू तो मशहूर हो जायेगा भेनचोद नाम से..

जग्गू- हाँ यार सही नाम रहेगा ये इस भेनचोद का...

में- अरे एक बात और कजरी का तो ब्याह होने वाला है न.. अगर ये वीडियो उसके होने वाले ससुराल में दिखा दें तो तुझे क्या लगता है फिर कजरी का ब्याह होगा...

जग्गू- वो क्या भाई फिर तो कजरी का ब्याह कभी नहीं hoga...agar ये भेनचोद वाली बात फैल गयी तो...

Me-bechari का पूरा जीवन बर्बाद हो जायेगा... अपने hi भाई की हवस की शिकार भी बानी और फिर कभी रिश्ता नहीं होगा, बदनामी हर जगह और बेचारी.... और इस सब की वजह कौन होगा... उसका अपना भाई कल्लू....

इतना बोलना था की कल्लू गिड़गिड़ाते हुए हमारे पैरों में गिर गया, कर्मा भैया ऐसा मत करना मेरी बहन मर जाएगी... इसमें उसका कोई दोष नहीं है...

में- ये तो पहलर सोचना चाहिए था न सेल जब दूसरो की बहु बेटियों की वीडियो बनता था तो ये कैसे भूल गया की तेरे घर में भी बहन है और उसकी वीडियो भी बन सकती है ...

कल्लू- बहुत बड़ी गलती हो गयी कर्मा भैया कसम खा कर कहता हूँ आज के बाद ऐसा कभी कुछ नहीं होगा किसी भी लड़की को नज़र उठा कर नहीं देखूंगा बस वो वीडियो किसी को मत दिखाना..

Jaggu-humara क्या फायदा होगा...

कल्लू- जग्गू भैया मैं तुम्हारी भाभी वाली वीडियो मिटा देता हूँ अभी ये देखो...

कल्लू ने फ़ोन निकला और हमें दिखते हुए भाभी वाली वीडियो डिलीट कर दी...

Jaggu-iski और कॉपी कहाँ हैं...

कल्लू- भैया बस इसी में थी और कहीं नहीं है...

में- देखले कल्लू अगर झूठ बोलै तो जय हो सकता है तू जनता है...

कल्लू- भैया माँ कसम भें कसम इसके अलावा कहीं नहीं है... बस यहीं थी...

में- ठीक है फिर हम लोग भी ये वीडियो किसी को दिखाएंगे नहीं पर अगर कभी तूने कुछ भी उल्टा सीधा किआ तो फिर तू जनता है क्या होगा...

कल्लू- जान कसम कर्मा भैया अगर कुछ भी गलत करदूँ तो मई दो बाप का पर tum.wo वीडियो मिटा दो न...

में- देख कल्लू अभी मुझे तुझ पर इतना भरोसा नहीं है, पर इतना वडा ज़रूर करता हूँ अगर तूने कुछ गलत नहीं किआ तो ये वीडियो किसी को नहीं मिलेगी..

कल्लू- भैया मेरी भें की मेरे परिवार की ज़िन्दगी है तुम्हारे पास...

में- मेरे पास नहीं बीटा तेरे पास तू कुछ गलत मत कर कुछ नहीं होगा.. जग्गू इसका फ़ोन ले ले... सुन कल्लू गजर जा अचे से सोच आगे से अचे काम कर ाचा इंसान बन तेरे साथ भी ाचा होगा.. अब जा...

Kallu-par वो मेरा फ़ोन...

में- दो तीन दिन में जग्गू तुझे बापिस दे देगा और सुन घर जाकर कजरी को कुछ मत बता डीओ सोच उसे कितना दुःख होगा ये सब जानकार बेचारी चिंता में hi मर जाएगी...

कल्लू- हम्म सही कह रहे हो ..( मन में- सेल कर्मा अभी तो मैं मजबूर हूँ पर बीटा एक न एक दिन इसका बदला लेके रहूँगा)

में- अब जा और जो समझाया वो याद रखिओ... अब जा.

इसके बाद कल्लू चला गया..... जग्गू काफी खुश लग रहा था... मुझे भी ख़ुशी थी की भाभी वाली परेशानी पूरी तरह से ख़तम हुई...

Jaggu-chal ये तो हो गया अब क्या करें?

Me-ab घर चलते हैं, कुछ होगा तो तुझे फ़ोन करूँगा मैं...

Jaggu-theek है..

फिर जैसे hi मैं मुड़ने वाला था तो जग्गू ने मुझे रोका और मेरे गले से लग गया और बोलै- कर्मा पता नहीं कैसे बोलूं पर अगर तू साथ नहीं देता तो शायद ये सब नहीं हो पता और मेरा परिवार भी बिखर जाता... थैंक्यू मेरे bhai.....ye सब करने. के लिए और बुरे वक़्त में साथ देने के लिए..

Me-sale पागल है क्या भाई भी बोलता है और फिर थैंक्यू भी और वो मेरा भी परिवार है... क्या तुझे मैं गैर लगता हूँ?

जग्गू- बिलकुल नहीं तू तो अपना है...

Me-aur क्या अगर मेरे परिवार पर कोई मुसीबत आई तो तू मेरा साथ नहीं देगा...

जग्गू- हर तरह से Karma...jaan लगा दूंगा..

में- तो ये रंडी रोना बंद कर और छोड़ मुझे सेल गर्मी में चिपका हुआ है..

Jaggu-harami साला..

Me-chalein घर अब..

Jaggu-haan..

रस्ते में चलते हुए मैं कुछ सोच रहा था कुछ समझ नहीं आ रहा था क्या करू फिर एक जगह आकर मैंने जग्गू को रोका..

Me-sun एक बात करनी थी..

Jaggu-haan बोल न..

में- तू मुझपर भरोसा करता है न...

जग्गू- खुद से ज़्यादा...

Me-yaar जग्गू मुझे नहीं पता तू इसे कैसे समझेगा पर मैं तुझसे कुछ भी छुपा के नहीं रखना चाहता...

Jaggu-kis बारे में बात कर रहा है तू..

में- सुन वो क्या है न...

और फिर मैंने अपने और भाभी के बीच सुबह खेत में और फिर रसोई में जो भी हुआ उसे बता दिया...

में- यही बात है अब तू बता क्या मुझसे गलत हुआ?

जग्गू के मुँह पर एक गंभीर भाव था पर उसने मेरी बात का कोई जवाब नहीं दिया और मुद कर जाने लगा..

में- कहाँ जा रहा है कुछ बोल तो सही..

पर जग्गू मेरी बात सुनकर भी जवाब नहीं दे रहा था.. बस चलता चला गया और मैं खड़े खड़े उसको आवाज़ लगता रहा...

मैं मन में सोचने लगा ये तूने क्या किआ कर्मा अपनी गलती की वजह से अपने बचपन के दोस्त को नाराज़ कर दिया.. क्या अब्वो मुझसे कभी बात नहीं करेगा... क्या हमारी दोस्ती अब ख़तम...

ऐसी hi सोच में डूबा हुआ मैं घर की तरफ बढ़ने लगा... मन में बहुत उलझने थी कुछ समझ नहीं आ रहा था क्या करूँ..

कभी सेल पर गुस्सा ा रहा था की एक तो सच बता दिया खुद से भी तो भी न जाने किस बात के ड्रामे कर रहा है... एक वार सोच के तो देखता...

नहीं रखनी दोस्ती न रखे मेरे भी बहुत दोस्त hain...aur मिल भी जायेंगे.. मन में न जाने क्या क्या बड़बड़ाता हुआ घर आया..

घर में आंगन में देखा तो पापा और मौसा सो रहे थे.. मेरे आने से पापा जाग गए तो बताया मौसी राजन चाचा के यहाँ गयी हैं और माँ कमरे में सो रही हैं...

मैंने सोचा माँ के पास जाता हूँ थोड़ा मन शांत होगा... मैं माँ के साथ कुछ करने नहीं बस सोने जा रहा था क्यूंकि घर में सब के होते हुए वैसे भी कुछ भी करना खतरे से खली नहीं था और जैसा दिन जा रहा था न जाने क्या हो जाये ..

मैं माँ के कमरे के गेट के दूर से hi अंदर झाँक कर देखा तो माँ सो रही थी आराम से, सोने की वजह से उनकी साड़ी उनके सीने से हैट गयी थी तो उनका पेट और नाभि अभी नंगी दिख रही thi...bahut प्यारी लग रही थी माँ सोते हुए मैं दरवाज़े के बहार से hi खड़े खड़े उन्हें निहारने लगा...





माँ को देख रहा था जैसे मन की साडी उलझने भूलता सा जा रहा था... तभी अचानक से मुझे ऐसा महसूस हुआ की माँ पर किसी की परछाई पद रही है... मेरे पेअर ठिठक गए की अंदर कौन हो सकता है..

मैं चुपके से खिड़की की तरफ गया क्यूंकि दरवाज़े पर जाता तो दिख जाता इसलिए खिड़की की साइड से खड़े होक देखा...

जब सही से अंदर दिखा तो माँ के बिस्तर के बगल में अनुज खड़ा था... और उसकी नज़र माँ पर जमी हुई थी...

ये देखकर hi मुझे न जाने क्यों एक अजीब सा एहसास होने लगा... अंदर अनुज माँ को कुछ देर देखता रहा फिर एक कदम आगे बढाकर बिस्तर के बिलकुल बगल में खड़ा हो गया... और फिर से माँ को देखने लगा...

इधर मुझे न जाने क्या हो रहा था की मेरे मन में ऐसा लग रहा था जैसे कितना बोझ अचानक से बढ़ता जा रहा हो...

अंदर अनुज कुवह देर यूँ hi खड़ा रहा माँ को देखता रहा थोड़ी देर बाद उसका एक हाथ थोड़ा सा हिला और धीरे धीरे माँ की तरफ बड़ा.. कांपते हुए...

जैसे कमरे के अंदर अनुज का हाथ बढ़ रहा था बहार मेरी साँसे भी तेज़ हो रही थी...

अंदर अनुज का हाथ माँ के नंगे पेट के बेहद करीब पहुंच गया था और फॉर रुक गया.. कुछ देर ऐसे hi रुकने के बाद उसका हाथ फिर से कांपते हुए थोड़ा आगे बढ़ा और माँ के नंगे पेट को छू गया...

मेरा मन ऐसा हुआ की अभी उसके हाथ को पकड़ कर दूर करदूँ माँ के बदन से पर मेरे पेअर जैसे अपनी जगह पर जैम गए हो... मैं कमरे के अंदर जाना छह रहा था पर जा नहीं प् रहा था...

अनुज का हाथ माँ के पेट पर एक बार छुआ तो उसने बापिस खींच लिए और माँ के चेहरे की और देखने लगा और फिर कुछ पल बाद फिर से माँ के पेट पर रख दिया और ध्यान से माँ के चेहरे की और देखता रहा.. बहार हर बीतते पल के साथ मेरी हालत ख़राब हो रही थी..

अनुज ने कुछ देर अपने हाथ को माँ के पेट पर यूँ hi रखा, और फिर धीरे धीरे घूमने लगा ऐसा लग रहा था जैसे माँ के पेट की नरम त्वचा को अपने हाथों पर महसूस कर रहा हो ..

धीरे धीरे से वो पूरे पेट और नाभि के आसपास अपना हाथ घुमा रहा था...

मैं बहार खड़ा खड़ा ये सब देख रहा था मेरा मन कह रहा था की न देखूं पर आँखें थी की हैट hi नहीं रही थी... जैसे अनुज का हाथ माँ के पेट से नहीं हैट रहा था और फिर उसका दूसरा हाथ भी हिला पर वो माँ की तरफ न जेक अनुज के पाजामे की तरफ गया ...और अनुज के लुंड को पाजामे के ऊपर से मसलने लगा... उसका दूसरा हाथ माँ के नरम पेट पर लगातार चल रहा था...

तभी अनुज ने कुछ ऐसा किआ जिसे देखकर मैं और हैरान हो गया उसने अपना पजामा नीचे खिसका कर लुंड बहार hi निकल लिए और बहार मुठियाने लगा...

मुझे तो उसकी हिम्मत पर हैरानी हो रही थी की घर मेजन में सबके होते हुए भी वो ये सब कर रहा है वो भी गेट खुला है तब... पर इसे हिम्मत कहना गलत होगा बेवकूफी hi सही होगा....

पर उसे शायद अपने लुंड की प्यास के आगे अभी कुछ दिख hi नहीं रहा था..

उसका हाथ उसके लुंड पर काफी तेज़ चल रहा था और माँ के पेट को भी अचव से सहला रहा tha..maa आराम से सो रही थी...

अचानक से उसका हाथ माँ के पेट से हैट गया और सीधा होकर वो माँ को देखते हुए अपने लुंड पर तेज़ी से हाथ चलने लगा कुछ देर बाद उसकी आँखें बंद हुई और फिर अनुज के लुंड से पिचकारियां छूटने लगी एक के बाद एक कुछ बीएड पर गिरी और कुछ कुछ रो शायद वो जानकर माँ के पेट पर गिराने की कोशिश कर रहा था और जब अंत में कुछ बूंदे hi बची तो उन्हें उसने माँ के पेट पर hi झाफ़ दिया... और फिर अपना पजामा ऊपर किआ और माँ को उसी हालत में छोड़कर चला गया... कमरे से बहार निकल कर सीधा घर के दरवाज़े की और चला गया अगर एक बार मुद कर देखता तो मशीन उसे पक्का दीखता पर वो घर से बहार चला गया

माँ अब भी सो रही थी पर पेट पर बेटे का वीर्य पड़ा हुआ था..

उसके जाने के बाद मुझे बहुत गुस्सा आ रहा था साथ hi अब मेरे पैरों में जान आई मैं जल्दी से माँ के कमरे में गया.. उनकी तरफ देखा तो मेरा ध्यान माँ के पेट पर पड़े अनुज के वीर्य पर जा रहा था जिसे देखकर मेरा गुस्सा हर पल बढ़ता जा रहा था...

और फिर न जाने क्यों मैंने अपना पजामा नीचे खिसकाया और अपने लुंड को बहार निकल लिया जो पहले से hi कड़क था... और फिर मैं भी लुंड हिलने लगा वोजी बेवकूफी कर रहा था जो थोड़ी देर पहले अनुज कर रहा था... गेट खुला था कमरे का कोई भी आ सकता था और फिर कुछ hi देर हिलाया की मुझी मेरा रास निकलता हुआ महसूस हुआ और मैंने अपना निशाना माँ के पेट पर कर दिया और झड़ने लगा मेरे रास की धार से माँ का पेट भीगने लगा जब पूरे पेट पर रास बिखर गया और जब कुछ आखिरी की पिचकारियां बची थी तो मैंने निशाना माँ के चेहरे पर किआ और उनके चेहरे पर धार मरने लगा... आखिरी धार होते होते माँ का चेहरा भी गीला हो चूका था और उसी वजह से शायद माँ जाग भी गयी...

उसके आगे क्या हुआ अगली अपडेट में प्लीज कमैंट्स करके ज़रूर बताएं कैसी लगी अपडेट बहुत बहुत शुक्रिया
 
दोस्तों आपसे पहले भी रिक्वेस्ट की है की अपने सुझाव और फीडबैक खुल कर लिखा कीजिये सिर्फ नीस अपडेट एंड वेटिंग नेक्स्ट थोड़ा फॉर्मेलिटी सा लगता है आपके कमैंट्स खुल कर आते हैं तो मेरा मन भी करता है स्टोरी लिखने का और जल्दी सो प्लीज फीडबैक अचे से दें.... ाचा गलत जो भी आपको लगे खुल कर बताएं
 
Back
Top