और ये कहकर मैंने अपनी t-shirt उतर दी और ऊपर से नंगा हो गया...
भाभी मुझे तिरछी निगाहों से देखकर शर्मा रही थी वहीं बाकि सब ब्बि हंस रहे थे..
Palli-to खेल आगे बढ़ाया जाये...
सबने हामी भरी और एक बार बोतल फिर से घूमी...
अपडेट 111
(मेगा अपडेट)
पर मैंने बोतल को घुमते हुए बीच में hi पकड़ लिए...
में- तो सब अभी सोचलो की इसी सजा के साथ आगे बढ़ना है या नहीं... क्यूंकि फिर बाद में मत बोलना की मुझे ये नहीं करना शर्म आ रही है वगेरा वगेरा...
म Chachi-are हाँ बात तो सही है अभी बतादो सब लोग...
पल्ली- नहीं मम्मी मैं तैयार हूँ..
अनुज- मैं भी..
फिर सबकी निगाहें जग्गू पर गयी जिसने मेरी आँखों में देखकर कुछ समझते हुए हाँ कह दिया... और फिर सब भाभी की तरफ देखने लगे... भाभी ने भी सबकी तरफ देखा और फिर धीरे से नज़रो को झुकाते हुए बोलै- ठीक है...
तो फिर सब खुश हो गए और खेल शुरू हो गया... बोतल फिर से घूमी और इस बार चची पर आकर रुकी...
अनुज- आखिर चची की बरी आ hi गयी...
पल्ली- देखो मुनमय क्या है पर्ची में...
म Chachi-are रुक तो सही तू तो चालू हो जाती है... देखने तो दे...
पल्ली को रोकते हुए चची ने पहली कटोरी से पर्ची निकली तो उसमे पल्ली का hi नाम निकला..
पल्ली- मुम्ममय मैं हूँ तुम्हारी दुश्मन... हे हे..
म चची- हाँ तू hi है मेरी दुश्मन...
Palli-ab तो हार पक्की है मम्मी तुम्हारी...
म Chachi-dekhte हैं
और इसके साथ hi चची ने दूसरी पर्ची निकली जिसमे टी लिखा था और तीसरी पर्ची जिसमे पेट लिखा हुआ था...
प Bhabhi-are अब पेट से कैसे रोकेगी पल्ली..
Palli-haan यार समझ hi नहीं आ रहा...
म चची- अभी तो बहुत उछाल रही थी की हार पक्की है तुम्हारी अब क्या हुआ...
पल्ली- वो तो मैं हरा कर hi रहूंगी देखलेना...
म चची मुस्कुराते हुए कड़ी हुई और जगह पर जाकर गाने लगी इधर पल्ली भी जल्दी से गयी और अपनी मम्मी के पीछे जाकर अपने पेट को उनकी पीठ पर रगड़ने लगी पर सिर्फ पेट तो रगड़ा नहीं जायेगा तो साथ hi सीना यानि अपनी दोनों छूछीयो को अपनी मम्मी की पीठ पर रगड़ने लगी...
एक मिनट हो गया चची पर कोई असर नहीं हुआ तो पल्ली झल्लाकर आगे आई और फिर चची के सीने पर अपने पेट और छाती को रगड़ने लगी जिससे घिसने से चची का पल्ली नीचे गिर गया और चची का गोरा पेट गहरी नाभि सबके सामने आ जाती पर अभी उनके सामने पल्ली थी जो अपनी मम्मी के सीने पर अपना सीना घिस रही थी दोनों माँ बेटी की छुछियां आपस में रगड़ रही थी जिसका थोड़ा बहुत असर होता देख पल्ली को न जाने क्या सूझा और उसने अपनी t-shirt के छोर को पकड़ा और उसे सीने तक अचानक से उठा दिया...
और अपनी नंगी छूछीयो को बहार निकल लिए और उन्हें अपनी मम्मी के सीने पर रगड़ने लगी... क्यूंकि अनुज और पल्ली... मैं और चची सरे लोग भाभी और जग्गू के आने से पहले चुदाई hi कर रहे थे तो जल्दबाज़ी में कपडे पहनने के कारन ब्रा पल्ली ने पहनी नहीं थी... पल्ली की पीठ हमारी तरफ थी और अभी पूरी गोरी मखमली पीठ नंगी होकर हमारे सामने थी.. वहीं चची मेरा और अनुज का भी यही हाल था हमने ऊपर के कपडे तो पहने थे पर अंदर कुछ नहीं था...
पल्ली की हरकत को देखकर भाभी और जग्गू चौंक गए... भाभी ने अपने मुँह पर हाथ रख लिए था वहीं हमारे लुंड माँ बेटी के ऐसे नज़ारे देख कर पूरे तन चुके थे...
पल्ली अपनी नंगी छूछीयो को चची की छूछीयों पर ब्लाउज के ऊपर से और नंगे पेट पर रगड़ने लगी...
अपनी बेटी की बड़ी और कोमल छूछीयो को नंगा देखकर ऊपर से उनका स्पर्श अपने बदन पर पाकर चची भी बहकने लगी थी... वहीं चची को बहकता देखकर पल्ली का आत्मविश्वास बढ़ता जा रहा था और वो अपनी छूछीयो को अपनी माँ के पेट पर घुमा रागी थी उत्तेजना से कड़क हो चुके पल्ली के निप्पल उसकी माँ के शरीर पर मीठी चुभन दे रहे थे....
पीछे से हमें पल्ली की नंगी कामुक पीठ बलखाती हुई नज़र आ रही थी... जो ऊपर नीचे हो रही थी पल्ली ने एक आखिरी तीर चलते हुए अपने कड़क निप्पल को नीचे होकर अपनी माँ के पेट पर घुमाया और फिर घूमते हुए उनकी नाभि में घुसा कर घिसने लगी... जिसके साथ hi चची के मुँह से एक मीठी सी सिसकी निकल गयी उनकी छुछियां उठ कर तन गयी... माँ बेटी का ऐसा कामुक खेल देखकर हम सबका गाला सूख रहा था भाभी की तो नज़र नहीं हैट रही थी और जग्गू तो अपने लुंड को दबाये मुँह फाड़े हुए देख रहा था...
सिसकी के साथ hi चची का गण भी रुक गया... और कुछ पल बाद पल्ली पीछे हैट गयी और अचानक से उसकी नंगी गोरी पीठ पर फिर से टीशर्ट का पर्दा पद गया...
पल्ली मुड़ी और खुसी से हाथ ऊपर उछाले मैं जीत गयी मैं जीत गयी...
Palli-dekha मम्मी हरा दिया न...
म Chachi-are हाँ बिटिया हरा दिए तूने अब खुश...
Palli-dekha भाभी...
भाभी हैरत में थी जो हुआ उसे देखकर पर चची और पल्ली बिलकुल साधारण थी की जैसे कोई बड़ी बात न हो जिससे भाभी को भी ज़्यादा अलग या अजीब नहीं लगा..
प भाभी- हैं??? हाँ हाँ देखा तू जीत गयी...
पल्ली- मैंने बोलै hi था ...
में- कमाल कर दिया पल्ली मुझे लगा नहीं था चची हारेंगी.. है न जग्गू?
जग्गू- अण्णन हाँ हाँ कमाल कर दिया यार...
अनुज- तो अब चची की सजा की बरी...
ये बात सुनकर सब एक दुसरे की तरफ देखने लगे भाभी की नज़र चची पर तिकी हुई थी की आया वो सच में ये सजा पूरी करेंगी क्या सच में ये खेल आगे खेलेंगी..
म चची- हाँ भाई कर रही हूँ पूरी सजा...
पल्ली- मज़ा आया...
तभी चची कड़ी कड़ी घूम गयी और हमारी तरफ पीठ कर ली...
और कुछ करने लगी पीठ हमारी तरफ होने से कुछ साफ़ नहीं दिख रहा था पर कुछ पल बाद चची का ब्लाउज ढीला होता हुआ नज़ारा आया और फिर ढीला हुआ और फिर एक बाजू से निकला और फिर doosri...aur जहाँ अब तक बेटी की पीठ नंगी नज़र आ रही थी वहीं अब माँ की पीठ नंगी हमारे सामने आ गयी... सब लोग हैरत से और उत्तेजित होकर इस नज़ारे का लुत्फ़ उठा रहे थे..
भाभी को यकीन नहीं हुआ रहा था की चची सच में इसके लिए मान गयी और बिना किसी विरोध के कर भी रही हैं तब तक चची का ब्लाउज नीचे था और चची ने साड़ी बापिस अपने शरीर पर लपेट ली...
चची को मैंने न जाने कितनी बार hi छोड़ा हो पर अभी इस अवस्था में उनका इतना कामुक रूप देखकर मन किआ अभी जाकर लुंड पेल दूँ उनकी गांड में...
और ऐसा सोचना सिर्फ मेरा hi नहीं अनुज और जग्गू का भी था दोनों मुँह खोले चची के साड़ी में से झांकते हुए शरीर को देख रहे थे..

उनकी नंगी पीठ देखकर सिर्फ लड़के hi नहीं बल्कि भाभी और पल्ली भी उत्तेजित हो रही थी... एक तो जो अभी पल्ली ने किआ था... अपनी माँ के साथ वो देखकर तो कोई भी गरम हो जाये और यहाँ तो सब जवान और हवस से भरे हुए थे...
खैर ऐसे hi बदन पर साड़ी को लपेटे हुए चची अपनी जगह पर आ कर बैठ गयी...
म चची- चलो भाई करदी मैंने अपनी सजा पूरी अब बोतल घुमाओ...
चची के कहने पर सब का ध्यान खेल पर आया और उनके साड़ी में से झांकते हुए बदन से हटा...
बोतल फिर से घूमी और इस बार जग्गू पर ruki...jaggu...na जाने उसमे इतना जोश कहाँ से आया जल्दी से पहली पर्ची खोली जिसमे भाभी का नाम निकला..
पल्ली- अरे वाह देवर भाभी की जोड़ी...
जिसे सुनकर भाभी और जग्गू दोनों hi शर्मा गए शायद जो घर पर हम तीनो के बीच हुआ था उसको याद करके...
जग्गू ने दूसरी पर्ची निकली जिसमे म था और फिर तीसरी जिसमे कमर लिखा था...
पल्ली- भाभी दिखाओ अब अपनी कमर का जलवा..
प Bhabhi-bilkul वैसे hi न जैसे तूने अपने पेट का दिखाया था अभी...
Anuj-haan भाभी बिलकुल वैसे hi...
Bhabhi-muskurate हुए अनुज को देखने लगी...
पर जब अनुज को अपनी और भाभी की बात का मतलब समझ आया तो शर्मा गया...
म Chachi-chal जग्गू बच्चा हो जा शुरू...
साला एक तो चची इतनी मस्त लग रही थी की उनसे नज़र नहीं हैट रही थी लुंड बिलकुल कड़क हो चूका था... और रह रह कर नज़र उनके ऊपर hi जा रही थी उनकी साड़ी थोड़ी सी पारदर्शी थी जिससे उनका बदन चमक रहा था...

जग्गू शर्माता हुआ और किसी तरह से अपने पाजामे के उभर को छुपाने की नाकाम कोशिश करते हुए अपनी जगह जाकर खड़ा हुआ और गण शुरू किआ तभी भाभी भी उसके बगल में जाकर कड़ी हो गयी.. और अपनी कमर को उसके कूल्हों पर घिसने लगी या कहें तो ठुमके मरने लगी... जग्गू जो पहले से hi उत्तेजित था वो भाभी के बदन को खुद पर छूटे hi और उत्तेजित होने लगा...
पर किसी भी तरह गण गता रहा.. थोड़ी देर तक कुछ न होने पर भाभी भी परेशां होने लगी...
पल्ली- अरे भाभी सामने से करो न कुछ फायदा होगा...
भाभी पल्ली की बात मानते हुए जग्गू के सामने की तरफ आ गयी... और अपनी कमर उसके पेट पर घिसने लगी जिसका नतीजा ये हुआ की जग्गू का लुंड जो पाजामे में पहले से hi खड़ा हुआ था वो और तन गया और भाभी के घिसने से उनकी जांघ पर टक्कर मरने लगा जिसका एहसास भाभी को भी हुआ पर भाभी रुकी नहीं अगला एक मिनट भी ऐसे hi hi बीत गया मुश्किलों के बाद भी जग्गू ने गण बंद नहीं किआ..
पल्ली- भाभी कुछ करो न...
भाभी ने अपनी आखिरी चल चलते हुए अपना पल्लू नीचे गिरा दिया जिसके सरकते hi उनके ब्लाउज से झांकती छुछियां, उसके नीचे सपाट और चिकना पेट और उसके बीच में रसीली गहरी नाभि आ गए... सबकी नज़रें भाभी के नंगे बदन पर टिक गयी... अनुज तो देखकर मुँह फाडे रह गया... वैसे किसी ने सोचा नहीं था की भाभी ऐसा करेंगी पर जो हो रहा था ाचा हो रहा था... बस जग्गू के लिए नहीं क्यूंकि..
भाभी की जांघ के लुंड पर बार बार रगड़ने से जग्गू का पहले hi बुरा हाल था वो भाभी के नंगे पेट को देखकर और बुरा हो गया और जग्गू गण तो दूर सांस लेना तक थोड़ी देर के लिए भूल गया.....
Palli-are वाह भाभी तुम जीत गयी कमाल कर दिया...
भाभी ने मुस्कुराते हुए अपना पल्लू ऊपर करते हुए कहा- अरे बस वो तो ऐसे hi.. और अपनी जगह पर आकर बैठ गई..
Anuj-nahi भाभी सच में कमाल कर दिया अब जग्गू भैया करो सजा पूरी...
म Chachi-jaggu चल उतार एक कपडा क्यों लड़कियों की तरह शर्मा रहा है...
Jaggu-utar तो रहा हूँ चची...
जग्गू ने शरमाते हुए अपनी शर्ट उतर दी और ऊपर से वो भी मेरी और चची की तरह नंगा हो गया...
जग्गू बापिस आकर बैठा बोतल दोबारा घूमी और इस बार अनुज पर जा कर रुकी...
Palli-ho जा बीटा नंगा होने के लिए..
Anuj-tu चुप कर मैं हारूंगा hi नहीं...
अनुज ने पहली पर्ची निकलते हुए कहा जिसमे चची का नाम था ..
Palli-ab तो तू ज़रूर हारेगा है न मम्मी
म चची- बिलकुल... हारेगा और कहकर हंसने लगी..
अनुज ने मुँह बनाते हुए दूसरी परवही खोली उसमे प था और फिर तीसरी जिसमे पीठ लिखा था...
पल्ली- चल जा अब...
Anuj-ja तो रहा हूँ ये कहते हुए अनुज फिर से लुंड को छुपाते हुए खड़ा हुआ और जाकर गण शुरू किआ इधर चाची भी उठी सिर्फ एक साड़ी लपेटे हुए जो उनके बदन को छुपा काम और दिखा ज़्यादा रही थी... खैर अनुज ने गण शुरू किआ और चची सीढ़ी गयी अनुज के सामने और उसकी तरफ अपनी नंगी पीठ करके उसके सीने से लगा दी और घिसने लगी..
चची को इस हालत में देखने भर से hi कोई भी मर्द अपना नाम भूल जाये वहां अनुज को तो उनका स्पर्श भी मिल रहा था फिर भी अनुज ने गण जारी रखने की कोशिश की इधर चची अपनी नंगी पीठ को घिसते हुए नीचे होती गयी और नीचे होने पर अनुज का लुंड पाजामे के अंदर से hi उनकी कमर और पीठ पर घिसने लगा और यही काफी था अनुज के लिए वो चुप हो गया और लम्बी लम्बी सांसे लेने लगा मुझे लगा कहीं झाड़ न जाये पंत में hi...
पल्ली- क्यों बच्चू निकल गयी हेकड़ी...
म चची- ऐसे नहीं कर पल्ली.. खेल में जीत हार तो लगी रहती है...
चची ने पलट कर अनुज के सर पर हाथ फेरते हुए कहा...
प Bhabhi-aur क्या बस अब छोटे लल्ला कपडा उतरो..
अनुज ने बिना किसी इंतज़ार के अपनी टीशर्ट उतर दी और अपनी जगह आकर बैठ गया...
अब हम तीनो लड़के ऊपर से नंगे थे चची एक साड़ी में लिपटी हुई थी...
पल्ली- चलो शुरू करते हैं...
और बोतल एक बार फिर से घूमी और भाभी पर आकर रुकी..
पल्ली- भाभी अब तुम्हारी बरी है...
Anuj-maja आएगा.
प भाभी- ाचा छोटे लल्ला तुम बड़े मज़े ले रहे हो..
भाभी की बात सुनकर अनुज शर्मा गया
म Chachi-maje तो सब hi ले रहे हैं
Palli-bhabhi पर्ची निकालो न...
प भाभी- निकल रही हूँ पल्ली बेसब्री है तू बिलकुल...
और भाभी ने पहली पर्ची निकली जिसमे किस्मत से अनुज का hi नाम निकला...
पल्ली- बड़े मजे कर रहा था अब देखते हैं क्या करता है...
Anuj-haan हाँ देख लिओ...
म चची- बहुरिया तू पर्ची निकल ये दोनों तो ऐसे hi लड़ते रहेंगे...
भाभी ने हँसते हुए पर्ची निकली जिसमे क आया और फिर तीसरी जिसमे मुँह लिखा था....
अनुज- इसका मतलबब सिर्फ मुँह का इस्तेमाल कर सकता हूँ मैं...
Me-haan सिर्फ मुँह का..
Palli-chalo भाभी हो जाओ शुरू...
भाभी- हाँ जा रही हूँ..
भाभी जगह पर जाकर कड़ी हुई और अनुज भी तुरंत बगल में जाकर खड़ा हो गया...
इधर भाभी ने गण शुरू किआ और अनुज ने अपना काम अनुज भाभी के पीछे गया और ब्लाउज और साड़ी के साइड से जो गर्दन का हिस्सा नंगा होता है उसे चूमने लगा..
जिसके साथ hi हम सब के मुँह से आह्हः निकल गयी और भाभी की सांसे थोड़ी बढ़ती हुई महसूस हुई... जग्गू थोड़ा असहज दिखा पर कुछ कहा नहीं ..
उधर अनुज और भाभी अपने काम में लगे हुए थे भाभी गण गए रही थी वहीं अनुज अब उनकी गर्दन को चूमते हुए आगे की तरफ आ गया था और उनके सीने के ऊपर हिस्से को चाट रहा था.. भाभी कुछ असहजता हो रही थी पर वो गण नहीं छोड़ रही थी...
वहीं काम न बनता देख अनुज ने उपाय सोचा और दांतो से भाभी के पल्लू को पकड़ कर नीचे गिरा दिया जिसके साथ hi एक बार फिर भाभी का नंगा चिकना पेट सामने आ गया.. और सबके मुँह से आह निकल गयी..
पल्ली- अरे वाह बहुत बढ़िया...
उधर भाभी पल्लू के गिरने से थोड़ी चौंकीजरूर पर गण नहीं रोका, वहीं अनुज को तो जैसे खुली छूट मिली गयी हो वो भाभी के सीने को चूमने चाटने लगा... ब्लाउज के बहार छूछीयो का जितना भी हिस्सा था उसे चाट कर गीला कर दिया जग्गू भाभी को इस हालत में देखकर बेहद उत्तेजित हो गया था वहीं थोड़ा चिंतित भी था.. पल्ली और चची इस नज़ारे का मज़ा ले रही थी...
भाभी मुश्किलों से अपने बदन पर अनुज की जीभ और होंठों के बार सह रही थी..
अनुज की तो जैसे किस्मत खुल गयी हो और नीचे झुककर अब वो भाभी के नंगे चिकने पेट को चूम चाट रहा था...
भाभी मुश्किलों से खुद को संभाले हुए थी... उत्तेजना और विवस्ता उनके चेहरे पर झलक रही थी...

भाभी की भी हिम्मत थी जो खुद को अब तक संभाले हुए थी पर फिर अनुज ने कुछ ऐसा किआ की भाभी की साडी सहनशक्ति ने जवाब दे दिया और एक आह्ह्ह्हम्म्म की आवाज़ के साथ उनका गण बंद हो गया...
अनुज ने पेट को चाटते हुए अपनी जीभ को नुकीला करके भाभी की गहरी रसीली नाभि में घुसा दी और चाटने लगा था जिससे भाभी की हिम्मत ने जवाब दे दिया और भाभी हार गयी..
पल्ली- कमाल कर दिया लड़के भाभी को हरा दिया..
अनुज- मैंने तो पहले hi बोलै था..
Me-haan भाभी भी हार गयी आखिर...
म Chachi-to क्या हुआ ये तो खेल है हार जीत चलती रहती है...
जग्गू बिना कुछ बोले सिर्फ भाभी की तरफ देख रहा था उसके मन में भी यही सवाल था जो हमारे मन में था... क्या सच में भाभी सजा पूरी करके आगे खेलेंगी या यहीं रुक jayengi...kya सच में वो यहाँ इतने लोगो क्व बीच अपना कपडा उतरेंगी....
वहीं भाभी की साँसे अब तक. शांत हो चुकी थी और वो शरमाते हुए सबको देख रही थी...
Palli-bhabhi सजा पूरी करो..
भाभी ने नज़रें उठा कर एक बार पल्ली को देखा और फिर हम सबको और बोली- मैं एक मिनट में आई...
और बाथरूम में घुस गयी..
Anuj-inhe क्या हुआ..
जग्गू- पता नहीं कहीं बुरा तो नहीं मान गयी...
म Chachi-are आ जाएगी अभी क्यों परेशां होते हो..
में- हाँ रुको तो सही..
हम सब बात hi कर रहे थे की बाथरूम का दरवाज़ा खुला और फिर उसमे से भाभी निकली.. पर भाभी को देखकर सबकी आँखें बड़ी हो गयी क्यूंकि भाभी सिर्फ ब्लाउज और पेटीकोट में थी इसका मतलब भाभी साड़ी अंदर hi उतर आई थी

भाभी शरमाते हुए आई और अपनी जगह पर बैठ गयी वहीं हमारी नज़रें भाभी पर hi तिकी हुई थी...
जग्गू को तो यकीन नहीं हो रहा था की भाभी मान गयी...
Palli-kya भाभी सामने उतरनी थी साड़ी..
प Bhabhi-are ये थोड़ी न तय हुआ था बात थी एक कपडा उतरने की न की सामने उतरने की...
म Chachi-chalo अब बहस बंद करो और आगे खेलो...
भाभी के साड़ी उतरने से कमरे का माहौल और गरमा गया था...
बोतल फिर से घूमी और इस बार पल्ली पर आकर रुकी..
अनुज- अरे वाह...
प भाभी- अब आएगा मज़ा क्यों पल्ली बहुत मज़े ले रही थी न...
पल्ली- मैं नहीं हरने वाली..
और फिर पल्ली ने पर्ची निकली जिसमे मेरा नाम था...
Anuj-bhaiya हरा के रहना है इसे..
प Bhabhi-haan लल्ला छोड़ना मत..
साड़ी के साथ साथ भाभी भी अब थोड़ा और खुल गयी थी और खुल कर खेल में हिस्सा ले रही थी..
पल्ली ने दूसरी पर्ची निकली जिसमे व् निकला और फिर तीसरी जिसमे हाथ लिखा था..
Anuj-ab तो तू गयी हाथ से तो हारना hi पड़ेगा..
Palli-dekhte हैं आ जाओ भैया...
पल्ली जोश में जगह पर जाकर कड़ी हो गई और गण शुरू कर दिया मैं भी लुंड को दबाते हुए खड़ा हुआ पर कितना भी दबाओ वो साफ दिख रहा था
मैं पल्ली के पीछे जाकर खड़ा हो गया और फिर अपने हाथ उसकी पीठ पर फिरने लगा... पीठ पर हाथ फिरते हुए... मैं पीछे से उससे सात गया और अपने खड़े लुंड को उसके चूतड़ों की दरार में फंसा दिया...
और हाथ पीठ से सहलाते हुए आगे कमर और पेट पर ले जाने लगा... पल्ली की साँसे थोड़ी भरी ज़रूर हुई लेकिन उसने गण नहीं रोका...
पल्ली के पेट और कमर को टीशर्ट के ऊपर से सहलाते हुए मैं हलके हलके धक्के अपने लुंड से उसके चूतड़ों में माँ रहा था...
पर पल्ली लगातार गए जा रही थी तो ये देखकर भाभी बोल पड़ी- लल्ला कुछ और करो इससे कुछ नहीं हो रहा ये सुनकर मैंने अपने हाथों को थोड़ा ऊपर खिसकाया और हलके हलके से उसकी चूचियों पर टीशर्ट के ऊपर से hi फिरने लगा...
मेरी इस हरकत से जग्गू और भाभी दोनों हैरान रह गए और कभी चची की और तो कभी हमारी और देखते की चची मुझे रोक क्यों नहीं रही हैं..
इधर छूछीयो के दबाये जाने से पल्ली थोड़ा भटक रही थी पर अभी भी उसने गण नहीं छोड़ा था तो मैंने उसे हारने के लिए और थोड़ा दबाव डाला और कास कास के उसकी छूछीयो को गूंथने लगा..

मेरे हाथों से छुछियां मसलने से पल्ली बहकने लगी और गेट हुए रुकने लगी... इधर मेरी हरकत को देखकर भाभी और जग्गू का बुरा हाल था उन्हें यकीन नहीं हो रहा था की मैं सबके सामने यहाँ तक चची के सामने उनकी लड़की की छूछीयों को मसल रहा हूँ और चची ये सब होने दे रही है एक खेल के नाम पर... और जितनी hi उन्हें हैरानी हो रही थी उससे कहीं ज़्यादा ये सब देखकर उत्तेजित हो राहु थे..
वहीं पल्ली की नरम मुलायम छूछीयो पर मेरे हाथ का कमाल रंग लाया और पल्ली का गण रुक गया जिसके होते hi सबसे पहले ख़ुशी जताई...
अनुज- बहुत बढ़िया भैया मजा आए गया आखिर हार hi गयी ये...
में- लगता नहीं रहा था पर आखिर...
म Chachi-are लगा तो मुझे भी नहीं था पर अंत में हिम्मत हार गयी...
पल्ली- भैया..
इधर जग्गू और भाभी हम सब की खासकर चची की बात सुनकर हैरान थे की उन्होंने इसे इतनी साधारण बात की तरह लिए जबकि उनकी बेटी के उनके hi सामने छुछियां रागादि गयी...
Anuj-ab भैया क्या... हार गयी तो सजा...
जग्गू और भाभी पहले से hi हैरत में थे जो हुआ उसे लेकर ऊपर से एक और धमाका अनुज ने कर दिया सजा का नाम lekar...ab दोनों ये सोचकर परेशां थे की क्या सच में पल्ली सजा पूरी करेगी और अगर करेगी तो क्या चची करने देंगी या खेल रोक देंगी... वैसे इतनी हैरानी के बाद भी कोई नहीं चाहता था की खेल रुके.. क्यूंकि सबकी हवस और उत्तेजना बढाती जा रही थी...
खैर अब सवाल ये था की क्या पल्ली सजा पूरी करेगी भाभी सोच रही थी की पल्ली ने ब्रा भी नहीं पहनी अगर वो टीशर्ट उतारेगी तो पूरी नंगी हो जाएगी ऊपर से...
भाभी और जग्गू के मन में कई सवाल घूम रहे थे..
खैर पल्ली ने अनुज की बात को सुना और फिर मुस्कुराते हुए अपनी मम्मी की तरफ देखा फिर मेरी तरफ और फिर एक नज़र कमरे में सब पर डाली और फिर उसके हाथ उसकी कमर पर पहुँच गए जिसके साथ hi कई लोगो के दिल की धड़कने बढ़ गयी...
और फिर अचानक से पल्ली ने अपने लोअर में हाथ फंसाया और सबको हैरान करते हुए और नीचे की और सरका दिया और जल्दी से दोनों टैंगो से उसे निकल दिया...

इससे पहले कोई कुछ समझ पता लोअर नीचे पड़ा था और सबकी आँखें खासकर जग्गू और भाभी की फटी हुई थी..
भाभी का तो लग रहा था चक्कर खा कर गिर जाएँगी वहीं जग्गू का भी वही हाल था...
पहली बात तो पल्ली ने सबको चौंकाते हुए टीशर्ट की जगह पजामा उतरा और दूसरी जो जग्गू और भाभी के लिए सबसे चौंकाने वाली बात थी की उसके ुरारते hi पल्ली नीचे से पूरी तरह नंगी हो गयी थी हमें तो पता था पल्ली ने चड्डी नहीं पहनी पर भाभी और जग्गू को नहीं पता था जिससे वो पल्ली के नंगे गदराये चूतड़ों को देखकर और चकित थे...
भाभी ने पल्ली को देखा और फिर तुरंत पलट कर चची की तरफ देखा की उनकी क्या प्रतिक्रिया होगी... चची जो खुद इस खेल से इतनी उत्तेजित हो गयी थी उनके चेहरे पर एक हलकी सी मुस्कान थी और कुछ नहीं...
जिसे देखकर भाभी और हैरान थी की आखिर चची उनकी बेटी को सबके सामने नंगा क्यों होने दे रही हैं,
फिर पल्ली हलके से हमारी तरफ घूमी जिससे उसकी नंगी छूट भी सबके सामने आ गयी जिसे देखकर जग्गू के मुँह से तो मनो लार टपकने लगी और वो सब भूल गया की ये क्या हो रहा है उसकी नज़रें तो पल्ली की छूट पर टिक गयी...
पल्ली के मुड़ते hi अनुज ने सीटी मरी ख़ुशी से जिससे सबका ध्यान टूटा और फिर पल्ली जैसे कुछ हुआ hi नहीं वैसे hi नंगी आकर अपनी जगह पर बैठ गयी..
में- चलो बोतल घुमाई जाये...
मैंने अपने लुंड को पाजामे के ऊपर से सहलाते हुए कहा...
म चची- हाँ घुमाओ...
जग्गू और भाभी ने भी पल्ली की और तिरछी नज़रों से देखते हुए हाँ कहा... कमरे का माहौल बेहद गरमा गया था...
फिर बोतल घूमी और इस बार अनुज पर जाकर रुकी जिसके रुकते hi पल्ली खुसी से चिल्लाई - बेटे अब आएगा मजा जब तुझे मिलेगी सजा...
अनुज- ऐसे कैसे हारूंगा तो मिलेगी सजा.. नहीं तो मुझे आएगा मज़ा..
म Chachi-are शायरी छोड़ और पर्चियां निकल...
सब थोड़ा हांसे... फिर अनुज ने पहली पर्ची निकली जिसमे जग्गू का नाम निकला...
Me-Jaggu है तेरा दुश्मन...
Palli-bhaiya छोड़ना मत इसे..
जग्गू ने किसी तरह पल्ली के चहरे पर मुश्किल से देखा क्यूंकि नज़रें तो बस छूट पर hi तिकी हुई थी...
Jaggu-haan कोशिश पूरी रहेगी...
और फिर अनुज ने अगली पर्ची निकली जिसमे ी लिखा था और तीसरी जिसमे मुँह लिखा था...
Palli-ab आएगा मज़ा देखते हैं कैसे रोकते हैं... क्यों भाभी?
प भाभी- हैं हाँ हाँ देखते हैं भाभी ने थोड़ा हिचकते हुए कहा वो अब भी थोड़ा सा अचंभित थी इस खेल में जो भी हो रहा था उससे..
म चची- चल अनुज हो जा shuru...jaggu तू भी दिखादे..
Jaggu-haan देखता हूँ कैसे रोकता हूँ...
जग्गू परेशां था की लड़की या औरत होती तो मुँह का प्रयोग कर पता पर अनुज के साथ कैसे करे..
अनुज जगह पर जाकर खड़ा हुआ और गाने लगा.. जग्गू उसके बगल में जाकर खड़ा हो गया और कुछ सोचते हुए उसकी नंगी पीठ पर मुँह से फूंकने लगा... घूम कर कभी पीठ पर फूंकता तो कभी पेट की तरफ... उसे देखकर सब खिलखिलाकर हंसने लगे...
भाभी भी सब कुछ भूल कर हंस रही थी...
पर अनुज का गण नहीं रुक रहा था काफी देर हो गयी थी समय समाप्त होने hi वाला था की जग्गू ने आखिरी कोशिश करते हुए अनुज के कान में फूंकमारी जिससे अनुज तुरंत चौंक कर रुक गया और सब ताली पीटने लगे..
Palli-bahut बढ़िया जग्गू भैया..
म Chachi-akhir में दिमाग लगा लिया तूने..
में- हाँ मुझे तो लगा था गया टाइम...
प भाभी- सही में...
Jaggu-laga तो मुझे भी यही था हे हे हे..
ये कहकर जग्गू अपनी जगह आकर बैठ गया...
Palli-haan अब सजा की बरी...
अनुज- हाँ टोडरता थोड़े hi हूँ सजा से अभी पूरी करता हूँ...
ये कह कर अनुज ने अपने पाजामे में हाथ फंसाया इसके आगे क्या होने वाला था ये हम तो जानते थे पर भाभी और जग्गू नहीं...
अनुज ने बिलकुल साधारण होकर अपने पाजामे को नीचे सरका दिया जिसके सरकते hi उसका खड़ा लुंड स्प्रिंग की तरह उछाल कर सामने आ गया जिससे भाभी और जग्गू दोनों चौंक गए

और अनुज ने बात करते हुए hi जैसे की ये बिलकुल आम बात हो उसे दो तीन बार मुठिया कर छोड़ दिया...
भाभी का तो जैसे गाला hi सूख गया अनुज का खड़ा और लम्बा लुंड देखकर वहीं चची और पल्ली के मुँह में भी पानी आ गया...
जग्गू हैरान था की कितनी आसानी से अनुज सबके सामने पूरा नंगा हो गया है वो कभी सबकी तरफ तो कभी अनुज की और देखता भाभी की नज़र तो अनुज के लुंड पर hi तिकी हुई थी...
और लग रहा था की अब उनकी हवस उनकी शर्म और हिचकिचाहट पर हावी होने लगी थी...
इधर अनुज पूरा नंगा हो कर अपनी जगह पर आ कर बैठ गया...
क्यूंकि अनुज भाभी के सामने की तरफ बैठा था तो भाभी अब भी उसके लुंड पर नज़रें मार रही थी चुप चुप के वहीं जग्गू कनखियों से पल्ली की छूट को देखने की कोशिश कर रहा था...
चची ने सबकी तरफ देखा और फिर मुस्कुरा कर बोलै की चलो बोतल घुमाओ फिर...
एक बार फिर से बोतल घूमी और जग्गू पर आकर रुकी..
जग्गू- ये भी बदला लेती है...
अनुज- हाँ भैया अभी तुमने मुझे हराया न अब तुम्हारी बरी है...
पल्ली- उठाओ फिर पर्ची..
जग्गू ने पर्ची निकली और उसमे चची का नाम निकला... अगली में डी और आखिरी में सीना...
जो जग्गू की हालत थी मुझे नहीं लग रहा था वो गण पूरा गए पायेगा सामने पल्ली की छूट साथ में चची का अधनंगा बदन ...
खैर जग्गू जगह पर गया और गण शुरू किआ उधर चची ने साड़ी के साथ hi अपनी भरी भरकम छूछीयो को उसकी पीठ पर फेरना शुरू किआ जिससे जग्गू पहले hi बहकने लगा फिर चची अगले hi पल आगे आ गयी और उसके सीने पर अपनी छूछीयो को घिसने लगी जग्गू का बुरा हाल होने लगा उसका खड़ा लुंड चची के पेट से टकराने लगा...
और फिर चची ने आखिरी पत्ता खोलते हुए अपनी साड़ी को छूछीयों से हटा कर जग्गू के सीने पर रख दिया चची की नंगी छूछीयो को देखते hi जग्गू का गण रुक गया और गण रुकते hi चची ने फिर से अपनी छूछीयों को धक् लिया......
जग्गू बेचारा हार कर चुपचाप अपने पाजामे को उतरा कच्चे में उसका लुंड तम्बू बना कर खड़ा था जिसे दबाते हुए वो अपनी जगह पर जाकर बैठ गया...
अगली बार बोतल घूमी और इस बार मुझ पर आ कर रुकी...
पल्ली- भैया बड़ी देर से छुपे हुए थे अब आई न बर्री...
में- हाँ यार इस बार पकड़ा गया...
Anuj-to निकालो पर्ची..
अनुज ने अपने खड़े लुंड को सहलाते हुए कहा
पहली पर्ची निकली जिसमे किस्मत से पल्ली का hi नाम निकला...
पल्ली- अब तो भैया पक्का हरे...
म Chachi-acha इतना विश्वास है तुझे... मुझे नहीं लगता की हारेगा वो..
Anuj-mujhe भी नहीं लगता...
प Bhabhi-dekh लेते हैं अभी...
दूसरी पर्ची में बी लिखा था और तीसरी में हाथ...
खैर मैं जगह पर जाकर खड़ा हुआ और गाने लगा... पल्ली मेरे बगल में आई और अपने हाथों को मेरे बदन पर फेरने लगी मुझे थोड़ी सी गुदगुदी हो रही थी पर इतनी नहीं की गण रुके... फिर पल्ली मेरे निप्पल्स को कुरेदने लगी जिसे देखकर सब हंसाने लगे पर मैंने गण नहीं रोका जग उसे कुछ नहीं सूझा तो पीठ पर हाथ फेरते हुए हाथ नीचे लेजाकर पाजामे के ऊपर से hi मेरे चूतड़ों को दबाने लगी मैं बहकने सा लगा गाने से पर फिर भी गण जारी रखा..
पल्ली के हाथों का असर मेरे लुंड पर हो रहा था जो पाजामे में ठुमके मार रहा था जो सबको दिख रहा था...
पल्ली ने काम न बनता देख तरकीब सोची और फिर एक उंगली को मेरी गांड की दरार में घुसा दिया जिससे मैं उछाल पड़ा और गण रुक गया...
पल्ली- बल्ले बल्ले भैया हार गए ..
म Chachi-are वाह बिटिया तूने तो सच में हरा दिया...
Anuj-kya भैया थोड़ा सा टाइम बचा था रुक जाते...
में- क्या करूँ रुका hi नहीं गया...
प भाभी- चलो अब सजा की बरी उतरो कपडा...
भाभी ये बोलकर खुद hi शर्मा गयी... अब उन्हें भी खेल में मज़ा आ रहा था और किसको नहीं आएगा...
म चची- अरे बहुरिया क्यों शर्माती हो खुल के खेलो...
प भाभी- ग चची
और फिर मैंने अपना पजामा नीचे खिसका कर अपने लोहा बन चुके लोडे को आज़ाद किआ...

जिसके बहार निकलते hi कई आहें कमरे में सुनाई दी... एक भाभी की एक पल्ली की और हलकी सी चची की भी हालाँकि तीनो hi मेरा लुंड पहले देख चुकी थी यहाँ तक की चुद भी चुकी थी पर इस खेल ने सबको इतना गरम कर दिया था की खड़े लुंड को नंगा देखकर hi आह निकल जाये...
और आह्हः मेरी थी जो सुकून की थी लुंड को पाजामे से बहार निकल कर जो सुकून मिला था मुझे क्या hi बताऊँ...
खैर मैंने पाजामे को और नीचे खिसका कर पूरी तरह से पैरों से निकल दिया...
पल्ली- मज़ा आ रहा है खेल में... क्यों भाभी...
प भाभी जिनकी नज़र मेरे लुंड पर तिकी हुई थी उन्हें खुद भी पता नहीं था क्या बोल रही है पल्ली की हाँ में हाँ मिले..
Jaggu-aajkal सबने hi कच्चे पहनना छोड़ दिया है क्या...
में- और क्या बीजा कच्चे के खुला खुला लगता है...
मैंने मजाक करते हुए कहा...
में- चलो फिर बोतल घुमाई जाये...
Palli-haan घुमाओ न
पहिए बोतल घुमाई गयी और इस बार चची पर रुकी...
में- अब तुम फांसी चची
म Chachi-are जब सबकी बरी आएगी तो मेरी भी आएगी...
Palli-itani देर बाद आई है...
अनुज- हाँ चची अब पर्चियां निकल कर दिखाओ..
प Bhabhi-haan चची देखें क्या लिखा है...
चची ने पर्ची निकली जिसमे अनुज का नाम था..
Anuj-qre वाह अब देखना मेरा कमाल...
दूसरी पर्ची में ा लिखा था और तीसरी में पेट...
अनुज पढ़ कर कुछ सोचने लगा..
Palli-abhi तो उछाल रहा था अब क्या सोच रहा है अब नहीं दिखायेगा कमाल...
Anuj-haan दिखाऊंगा बस देखती जा...
इधर चची उठी और साड़ी में लिपटे हुए अधनंगे बदन को लेकर जगह पर कड़ी हो गयी और गण शुरू कर दिया अनुज पहले तो उनके सामने गया और अपना नंगा बदन उनके बदन से रगड़ने laga...chachi और अनुज के बीच में बस एक पतली सी साड़ी थी... अनुज का लुंड कभी चची के पेट से टकराता तो कभी उनकी छूट पर ठोकर मरता. जिससे चची थोड़ा मचलती पर गण नहीं रुकता...
अनुज ने कुछ सोचा और फिर चची के पीछे से जाकर चिपक गया और अपने पेट को उनकी पीठ पर घिसने लगा जिससे उसका लुंड चची के दोनों बड़े बड़े चूतड़ों की दरार में घिसने लगा

और चची बहकने लगी अपनी तरकीब को कामयाब होता देख अनुज ने आगे बढ़ने का सोचा और नीचे जाकर एक दो कमर के झटके आगे को और मर्डर जिससे उसका लुंड साड़ी के ऊपर से hi चची की गांड और छूट से टकरा गया और चची की आठ निकल गयी.. ये सब देख कर कमरे के बाकि सब लोग भी बेहद गरम हो चुके थे मैं अपने लुंड को बार बार मसलकर शांत कर
अनुज ख़ुशी से उछाल पड़ा- देखा बोलै था न की मैं चची को हरा दूंगा..
Jaggu-haan भाई तूने कमाल कर दिया...
पल्ली- हाँ मन्ना पड़ेगा...
प Bhabhi-are वो सब तो ठीक है चची अब सजा की बारी...
भाभी की बेसब्री सब समझ सकते थे इसलिए किसी ने कुछ नहीं कहा ताकि वो शर्माएं न ज़्यादा..
म चची- हाँ भाई हरी हूँ तो दंड भी भरूंगी...
और इसी के साथ चची ने अपना हाथ अपनी साड़ी के पल्लू पर रखा जिसके साथ hi सबकी साँसे थम गयी...
क्या सच में चची अपनी साड़ी उतरेंगी भाभी और जग्गू यही सोच रहे थे और दुआ कर रहे the...ki वो ऐसा करें.
चची ने भी ज़्यादा देर इंतज़ार नहीं कराया और धीरे धीरे से साड़ी को अपने बदन से घुमा घुमा कर खोलने लगी हर खोलती हुई परत चची के बदन को नंगा करके हमारे सामने ला रही थी...
और फिर साड़ी उनके बदन से अलग होकर नीचे गिर गयी और चची पूरी नंगी होकर हमारे सामने कड़ी थी...
जग्गू और भाभी का तो मुँह खुला का खुला रह गया शायद उन्होंने सोचा था अंदर चची ने कछहि पहनी होगी... पर यहाँ तो चची पूरी नंगी थी जग्गू तो मुँह से पानी बहा रहा था और उसका हाथ खुद बा खुद अपने लुंड को मसल रहा था ... वहीं भाभी भी मुँह फाड़े देख रही थी और अपनी दोनों टैंगो को चिपकाये हुए बैठी थी...
वहीं सामने चची का पूरा नंगा बदन था हो चमक रहा था...

जिसे देखकर हम सबके hi लुंड झटके मार रहे थे..
वहीं भाभी भी आँखें फाड़ कर चची के गदराये हुए कामुक जिस्म को देख आहें भर रही थी...
सबका बुरा हाल था ये सोचकर की एक मा सब लोगो के सामने जिसमे एक उनकी बेटी भी है बिलकुल नंगी होकर कड़ी है...
ये बात सोच सोच कर भाभी की छूट गीली हो रही थी जिसे वो अपनी दोनों जांघो को घिस कर रहत देने की कोशिश कर रही थी
इधर चची अपनी जगह पर आकर बैठ गयी पर सबकी नज़रें उनपर hi तिकी हुई थी उनके हिलने से उनकी बड़ी बड़ी छुछियां झूल रही थी जो सबकी उत्तेजना को और बढ़ा रहे थे...

पल्ली- चलो भाभी निकालो पर्ची...
प Bhabhi-haan बाबा निकल रही हूँ..
ये कहकर भाभी ने पहली पर्ची उठाई जिसमे मेरा नाम था
Palli-are वाह भैया अब होगी टक्कर...
अनुज- और जीतेगा कौन
म चची- कोई भी जीते हमें तो खेल से मतलब है...
प Bhabhi-bilkul सही कहा चची
और इसके साथ hi भाभी ने अगली पर्ची निकली जिसमे टी था और उससे अगली में था हाथ...
में- चलो ाचा है हाथ से तो काम आसान हो जाता है..
Palli-dekhna भैया कहीं आसान के चक्कर में बजी न पलट जाये...
Me-dekhti जा
भाभी अपनी जगह पर जाकर कड़ी हो गयी और गण शुरू किआ मैं उनके पीछे गया और झुककर अपने दोनों हाथ उनकी मखमली कमर पर रख दिए और धीरे धीरे से घूमने लगा..

भाभी मेरे हाथों के स्पर्श से थोड़ा सा हिचकिचाई पर गण जारी रखा और मैंने अपना काम..
एक तो कमरे में अब तक जो भी हुआ था उससे भाभी पहले से hi बेहद उत्तेजित हो चुकी थी सामने अनुज और चची पूरे नंगे बैठे थे पल्ली नीचे से नंगी अपनी छूट पर हाथ फिरा रही थी...
वहीं बगल में मैं खड़ा था पूरा नंगा मेरा लोढ़ा रह रह कर उनके बदन पर ठोकर मर रहा था जिससे भाभिचुलबुला रही थी...
मैंने अपने हाथों को अब नीचे से ऊपर ले जाना शुरू किआ और धीरे धीरे उनकी छूछीयों की तरफ बढ़ने लगा भाभी की साँसे भरी होने लगी और उनका शरीर सिकुड़ता हुआ सा महसूस हुआ..
कमरे में सबकी नज़रें हम पर तिकी थी जग्गू का तो अपनी भाभी और मुझे देखकर बुरा हाल था वहीं चची और पल्ली नंगी थी उसने तो जो हो रहा था वो कभी सपने में भी नहीं सोचा था..
मेरे हाथ भाभी के ब्लाउज तक पहुंच गए थे और फिर धीरे धीरे से मैंने भाभी की मस्त बड़ी बड़ी छूछीयों को अपने हाथों से ब्लाउज के ऊपर से hi धक् लिए और सहलाने लगा जिसके होते hi भाभी थोड़ा मचलने लगी फिर भी किसी तरह गण जारी रखा मैंने धीरे धीरे से अपने हाथों का दबाव बढ़ाना शुरू किआ और उनकी मदमस्त कोमल बड़ी बड़ी छूछीयों को मसलने लगा भाभी मदहोश होने लगी उनके मुँह से शब्द धीरे धीरे निकलने लगे...
जग्गू हैरान था अपनी भाभी की छूछीयों का मर्दन सबके सामने देखकर मेरा लुंड बार बार पीछे से उनके उभरे हुए चूतड़ों को भेदने की कोशिश कर रहा था जिससे भाभी और गरम हो रही थी कुछ पल बाद मैंने उनकी छूछीयों से एक हाथ को धीरे से हटाया और उनके पेट और कमर पर फिरते हुए नीचे लाया और उनके एक पतीले जैसे चूतड़ पर रख दिया और दबाने लगा भाभी के मुँह से एक आह निकल गयी और मुझे कुछ पता चला जिससे मैं हैरान भी हुआ खुश भी .. भाभी ने पेटीकोट के अंदर कच्ची नहीं पहनी थी मतलब अंदर से वो भी बिलकुल नंगी थी...
ये पता चलते hi मैं संयम खो बैठा और ज़ोर ज़ोर से भाभी की छूछीयों और चूतड़ों को मसलने लगा जिसका नतीजा हुआ की भाभी हवहद उत्तेजित हो गयी और गण तो न जाने कब का रुक गया मैं फिर भी नहीं रुका और उनके शरीर को अपने हाथों से गूंथ रहा था.... भाभी भी मुझे मन नहीं कर रही थी...
पल्ली- भैया जीत तो गए अब छोडो भाभी को...
तब मुझे और भाभी दोनों को कुछ ख्याल आया और मैं भाभी से अलग हुआ... भाभी बुरी तरह से हांफ रही थी मेरा लुंड बिलकुल तन कर ऊपर की और था जिसे छुपानी की बिलकुल भी न कोशिश करते हुए मैं अपनी जगह पर बैठ गया....
भाभी अपनी जगह पर कड़ी हुई लम्बी लम्बी सांसे ले रही थी...
अनुज- भाभी सजा...
Palli-haan भाभी दंड दो अब..
जग्गू और हैरान परेशां हो गया की क्या भाभी सच में चची और पल्ली की तरह अपने कपडे और उतरेंगी...
इसक जवाब जग्गू को जल्दी hi मिल गया जब भाभू जे नीचे देखते हुए शरमाते हुए अपने हाथ धीरे धीरे उठाने शुरू किये और अपने ब्लाउज पर रखे...
सबकी सांसे थम गयी और सबके हाथ अपने अपने लिंग और योनि को सहला रहे थे और भाभी को देख रहे थे... भाभी ने पहले हुक को पकड़ा और थोड़ा खोलने की कोशिश की पर फिर रुक गयी...
हम सब थोड़ा निराश हुए की क्या भाभी अब आगे नहीं बढ़ना चाहती ..
भाभी ने फिर एक लम्बी साँस ली और अपने हाथों को ब्लाउज के हुक से हटा दिया...
हम सब निराश हो गए की सब सही जा रहा था और अब भाभी रुक गयी.. यहाँ तक की जग्गू भी निराश था उसे भी ये उत्तेजित करने वाला खेल बहुत पसंद आ रहा था भले hi क्यों. न उसकी अपनी भाभी को सबके सामने नंगा होना पड़े.. उसे ये बहुत उत्तेजित कर रहा था और हम सब को भी...
भाभी के हाथ नीचे लटके हुए थे..
म Chachi-are बहुरिया अगर नहीं करना तो रहने दे आजा बैठ जा...
तभी भाभी हम लोगो से दूसरी तरफ मुँह करके कड़ी हो गयी... और पीठ हुनरी तरफ कर्ली और फिर उनके हाथ भी साइड उठकर उनके पेट की तरफ गए जिससे हम बापिस खुस हो गए की शायद भाभी आगे खेलेंगी और उनके ब्लाउज खुलने का इंतज़ार करने लगे तभी अचानक से कुछ ऐसा हुआ जिसकी उम्मीद किसी ने नहीं की थी और सबके यहब तक की मेरा भी मुँह खुला का खुला रह गया...
भाभी वैसे hi हमारी तरफ पीठ करके कड़ी थी और अचानक से उनका पेटीकोट उनकी कमर से नीचे सरका और एक पल में hi उनके पैरों में जा गिरा ऊपर नज़र उठाई तो जान लेवा नज़ारा था भाभी के दोनों बड़े बड़े चूतड़ पूरे नंगे हमारी आँखों के सामने थे..
नीचे से भाभी अब पूरी नंगी जो चुकी थी काछी का नमो निशान नहीं था... मेरे लुंड ने एक दो बूँद रास की छोड़कर उनकी गांड का स्वागत किआ.... वही हाल सबका था जग्गू तो लग रहा घ झाड़ न गया हो भाभी थोड़ा सा झुकी और झुककर अपने पैरों में पड़ा पेटीकोट उठाया

उनके झुकने से भाभी की गांड और बड़ी होकर हमारे सामने आ गयी... अनुज तो जैसे पागल हो रहा था भाभी की गांड देखकर और उसका बस चलता तो अभी जाकर भाभी की गांड में अपना लुंड पेल देता...
पल्ली और चची भाभी के चूतड़ों को देखकर अपनी छूट सहलाते हुए होंठों पर जीभ फिरा रही थी...
इतने में भाभी सीढ़ी होकर पलटी और हमारे सामने उनकी रसीली चिकनी छूट आ गयी एक पल को भाभी वहीं रुकी मनो... हमें उनकी छूट को अचे से देखने का मौका देना चाहती हो और फिर धीरे से आकर अपनी जगह पर बैठ गयी...
सब खामोश थे जो हुआ वो किसी ने नहीं सोचा था सबको लगा था की भाभी अपना ब्लाउज उतरेंगी क्यूंकि उन्होंने अंदर ब्रा पहनी हुई थी पर भाभी ने सबकी सोच के पलट पेटीकोट उतरा और नीचे से पूरी नंगी हो गयी...
शायद ये खेल की उत्तेजना और अभी मेरे द्वारा किये गए उनकी छूछीयों का मर्दन का नतीजा था की भाभी इतनी उत्तेजित हो चुकी थी की वो जल्दी से नंगी होना चाहती थी.....
भाभी ने अपनी जगह बैठ कर सबकी तरफ देखा तो सब नज़रें उनकी तरफ hi थी खास कर उनकी छूट पर...
प Bhabhi-are अब सब लोग मुझे देखते रहोगे या आगे खेलोगे भी...
खैर आगे खेल शुरू हुआ बोतल घूमी और पल्ली पर जा कर रुकी...
पल्ली ने पहली पर्ची निकली जिसमे अनुज का नाम था...
Anuj-ye हुई न बात..
दूसरी में ी था और तीसरी में मुँह ...
अनुज ये सुनकर खुश हो गया...
और पल्ली से pahle.nanga जाकर जगह पर खड़ा हो गया...
प Bhabhi-are देखो तो बेसब्री को...
भाभी को ऐसे साधारण देख हम सब भी खुश huye...aur खेलमेईन ध्यान लगाया..
म चची- हाँ दोनों कुत्ते बिल्ली की तरह लड़ते hi रहते हैं...
में- बचपन की ाअदत है दोनों की...
खैर पल्ली जगह पर जाकर कड़ी हो गयी.. और गण शुरू कर दिया
अनुज तो जैसे पहले से hi सोच कर आया था की क्या करना है और पल्ली के पीछे जाकर बैठ गया और अचानक से अपना चेहरा उसके चूतड़ों के बीच घुसा दिया और चाटने लगा

जिससे पल्ली की आअह्ह्ह्हह निकल गयी और बाकि लोग भी सब हैरान रह गए.... भाभी का भी मुँह खुला था और बड़े ध्यान से देखते हुए वो दुसरे हाथ से अपनी छूछीयों को ब्लाउज के ऊपर से मसल रही थी...
चची अपनी छूट सहलाते हुए अपनी बेटी की गांड चटाई देख रही थी जग्गू भी कच्चे के ऊपर से hi लुंड को सहला रहा था... मैं भी अपने लुंड को मुठियाते हुए देख रहा था...
अनुज लगातार कहते जा रहा था वोजिन पल्ली लड़खड़ाते हुए गए रही थी अभी तक किसी तरह से खुद को संभाले हुए. तह...
कुछ पल बाद hi एक ाः के साथ पल्ली का गण बंद हो गया और वो रुक गयी उसके हाथ पीछे चला गया और अनुज के सर को पकड़कर उसने पीछे से अपनी गांड में दबा दिया और कुछ पल बाद hi उसका शरीर कंपनी लगा और वो झड़ने लगी उसके शरीर को अनुज ने पकड़ कर संभाला और जब पल्ली का झड़ना बंद हुआ तो अनुज ने उसकी छूट का सारा रास चाट लिए और अलग हो गया इधर भाभी के मुँह से भी एक आह निकली उनकी तरफ देखा तो अब उनका हाथ उनकी छूट को सहला रहा था...
कहिअर तूफ़ान थमा तो अनुज अपनी जगह पर आकर बैठा पल्ली ने बिना किसी के बोले hi अपने दंड के अनुसार अपने शरीर पर बचे आखिरी कपडे यानि उसकी t-shirt को भी उतर दिया

जिसके साथ hi पल्ली की संतरे जैसी छुछियां नंगी हो गयी जिन्हे देखकर हम लड़को के क्या भाभी और चची के मुँह में भी पानी आ गया...
जग्गू ने पहली बार देखा था तो वो तो बस उन्ही पर अटक गया...
पल्ली पूरी नंगी होकर अपनी माँ की तरह अपनी जगह आकर बैठ गयी अब माँ बेटी और हम दोनों भाई पूरे नंगे हो चुके थे... भाभी नीचे से नंगी होकर अपनी छूट के दर्शन करवा रही थी और जग्गू ने सिर्फ कच्चा पहना हुआ था...
प भाभी- चलो फिर बोतल घुमाओ आगे...
म Chachi-haan घुमाओ देखो किसकी बरी आती है..
बोतल घूमी और इस बार जग्गू पर आकर रुकी बेचारे को देखकर नहीं लग रहा था की ये गए भी पायेगा पर खेलना तो है hi तो जग्गू ने पर्चियां निकली पहली में चची का नाम था...
अनुज- जग्गू भैया तो गए..
इस पर हंसाने लगे खैर अगली पर्ची में ल था और उससे अगली में होंठ...
खैर जग्गू का हारना तय था क्यूंकि चची के नंगे शरीर को देखकर उसका गण निकलजाये बहुत बड़ी बात थी ऊपर से चची उसे रोकने भी वाकई ठगी तो बस ये देखना था की किस तरह हारता है...
खैर जग्गू अपनी जगह जाकर खड़ा हुआ... और जिम्मात दिखते हुए गण शुरू किया.. चची भी उठकर गयी और सामने जाकर जग्गू की छाती पर चूमा तो उसकी आह्हः निकल गयी...
चची चूमते हुए नीचे की तरफ बढ़ने लगी और जग्गू की साँसे ऊपर की तरफ चची ने उसकी नाभि के पास चूमा तो जग्गू काँप गया और फुर चची नीचे बैठ गयी.. कच्चे में जग्गू का लुंड तन कर ठुमके मार रहा था चची अपने चेहरे को जग्गू के लुंड के सामने ले गयी और फिर धीरे से जीभ निकली और कच्चे के ऊपर से hi लुंड को चाटने लगी...

जग्गू तो जैसे बेहोशी की हालत में जाने लगा... उसका गाला सूखने लगा और गण क्या होता है वो भूल hi गया चची ने कुछ बार और hi अपनी जीभ फिरै थी की जग्गू की एक चीख निकली और फिर उसकी कमर झटके खाने लगी और उसका कच्चा गीला होने लगा.. मतलब वो झड़ने लगा .. चची ने अपनी जीत होते देख मुस्कुरा कर अपना सर पीछे कर लिए और बड़ी शांति से अपनी जगह पर आकर बैठ गयी... जब कच्चे में जग्गू की पिचकारी निकालनी बंद हुई तो वो थोड़ा शांत हुआ पूरा कच्चा भीग गया बेचारे का सब उसकी तरफ देखकर थोड़ा मुस्कुरा रहे थे...
जग्गू ने दंड के तौर पर वही गीला कच्चा उतर दिया... और पूरा नंगा हो गया उसका लुंड वीर्य से सना हुआ था...
म Chachi-are ये गन्दा लेकर hi खेलेगा क्या आगे जा धोके आ इसे... हर जगह टपकता फिरेगा...
सब चची की बात पर खिलखिलाकर हंसने लगे...
जग्गू भाग कर बाथरूम गया और जल्दी से लुंड धोकर अपनी जगह आकर बैठ गया... झड़ने के बाद भी उसका लुंड वैसे hi खड़ा था जी दर्शाता था की वो कितना उत्तेजित था..
म Chachi-chalo बोतल घुमाई भाई
फिर से बोतल घुमाई और मुझ पर आकर रुकी...
Anuj-are भैया पर तो कपडे hi नहीं बचे अब सजा क्या मिलेगी...
पल्ली- हाँ यार...
प Bhabhi-are ऐसा करते हैं जो दुश्मन होगा अगर उसने हरा दिया तो दुश्मन का दिया हुआ एक काम करना पड़ेगा...
म चची- हाँ ये सही रहेगा...
अनुज- हाँ मुझे भी सही लगा..
Palli-haan ठीक तो है..
जग्गू- जैसा सब चाहें..
Me-mujhe. भी कोई परेशानी नहीं है...
पल्ली- तो फिर तय रहा..
चलो भैया पर्ची निकालो...
मैंने पर्ची निकली जिसमे नाम भाभी का निकला
..
Palli-kya बात है भाभी बदले का मौका मिल गया तुम्हे...
प भाभी- और क्या...
पल्ली- हरा के hi रहना...
प Bhabhi-bilkul... चलो लाल पर्ची निकालो अगली...
भाभी पूरे जोश में लग रही थी..
मैंने दूसरी पर्ची निकली जिसमे य था और तीसरी जिसमे नितम्भ लिखा था ..
अब ये मज़ेदार होने वाला था की भाभी के चूतड़ तो नंगे थे और मैं पूरा नंगा था तो भाभी के नंगे चूतड़ मेरे शरीर से चिपकने वाले तव मुझे तो सोचकर hi ाचा लगने लगा.
...
पल्ली- भाभी है कोई तरकीब..
प Bhabhi-are वही सोच रही हूँ
Anuj-sochlo भाभी
मैं चुपचाप अपनी जगह जाकर खड़ा हुआ और गण शुरू किआ तुरंत hi भाभी आई और मेरी तरफ पीठ करके मुझसे चिपक गयी और अपने दोनों चूतड़ों के बीच मेरे लुंड को फंसा लिए मेरी आह निकल गयी... ाः क्या मज़ेदार अनुभव था उसके बाद भाभी मेरे लुंड पर अपने चूतड़ों को ऊपर नीचे घिसने लगी...

मेरा लुंड उनके चूतड़ों के बीच घिस रहा था जो कभी छूट से टकराता तो कभी गांड के छेड़ से...
मुझे कैसा महसूस हो रहा था ये शब्दों में बयां करना मुश्किल है जग्गू अनुज हुए चची पल्ली सब आँखें चौड़ी कर के देख रहे थे... मैं तो जैसे स्वर्ग में था... भाभी के दोनों चूतड़ों के बीच समाया हुआ मेरा लुंड आह्ह्ह्ह इससे ाचा क्या हो सकता था...
की तभी भाभी थोड़ा आगे को झुक गयी और तेज़ी से ऊपर नीचे होकर अपनी गांड को मेरे लुंड पर घिसने लगी...
अनुज और जग्गू ज़रूर hi मेरी किस्मत से जल रहे होंगे... जो मज़ा मुझे मिल रहा था वो उन्हें नहीं...
मेरी आँखें बंद थी और कमर अपने आप थोड़ा सा हिल रही थी बाकि का सारा काम भाभी के चूतड़ कर रहे थे...
मेरा गण कबका रुक चूका था पर गाने की पड़ी किसको थी न भाभी को ध्यान था न मुझे और नहीं कमरे में किसी को...
भाभी की छूट इतनी गीली हो गयी थी की उसका पानी रह रह कर मेरे लुंड पर घिसते हुए लग रहा था और मेरा पूरा लुंड गीला हो चूका था... भाभी पूरे जोश में थी मैं भी बहकने लगा था भाभी अपनी गांड को पूरा ऊपर उठती और नीचे लती वहीं मैं भी नीचे से अपनी कमर घूमते हुए झटके दे रहा था यूँ hi करते हुए अचानक ऐसा हुआ की मैं कुछ ज़्यादा hi नीचे की तरफ हो गया और जैसे hi भाबी की गांड नीचे आई मेरा लुंड उनकी छूट से टकराया और होंठों को चीरता हुआ अंदर घुस गया...
जिसके साथ hi भाभी की चीख निकल गयी और मेरी आअह्ह्ह्हह वहीं कमरे में भी सबकी साँसे चढ़ गयी...
कुछ पल मैं और भाभी यूँ hi थामे रहे पर फिर अपने आप hi भाभी की गांड उठाने लगी और जैसे hi मेरा लुंड निकलने को हुआ बापिस नीचे हो गयी.. भाभी सब भूल कर की वो कहाँ हैं कैसे हैं अपनी गांड उठाकर मेरे लुंड को अपनी छूट में अंदर बहार करने लगी..

कुछ पल तो मैं बस खड़ा रहा और भाभी को जो करना था करने दिया पर फिर मेरी कमर भी अपने आप चलने लगी और मैं भाभी की कासी हुई छूट में लुंड पेलने लगा...
हमारी हरकतें देखकर कमरे में सब बहुत गर्म हो गए थे और अपने अपने छूट और लुँडो से खेल रहे थे..
इधर मैं और जोश में आ गया और हाथ बढाकर भाभी के ब्लाउज को पकड़ कर खींच दिया जिससे वो हुक टूट कर अलग हो गया भाभी ने उसे अपने बदन से दूर कर दिया ब्रा को भी मैंने पकड़ कर नीचे कर दिया और फिर भाभी की कमर पकड़ कर उन्हें और फिर उन्हें पकड़ कर पीछे से तेज़ तेज़ धक्कों से छोड़ने लगा

हर धक्के के साथ भाभी की आह्ह्ह्हह आह्ह्ह्हह की आवाज़ निकल रही थी...
कमरे में हमारी चुदाई देखकर सब बेहद उत्तेजित हो चुके थे अनुज ने हाथ बढाकर चची का सर पकड़ा और उन्हें अपने लुंड पर झुका लिया चची ने भी अपने होंठों को खोलकर अनुज के सुपडे को मुँह में भर लिए और चूसने लगी.
उन्ही के बगल में बैठी पल्ली दोनों जगह के नज़ारे का लुत्फ़ उठाते हुए अपनी छूट से खेल रही थी... उसके सामने जग्गू भी नज़ारा उठता हुआ दोनों तरफ देख कर अपने लुंड को मसल रहा था...
चची ने एयर जोश में आते हुए थोड़ा सा अनुज की और और बढ़ाया और अनुज के लुंड को अपनी दोनों छूछीयों के बीच फंसा लिए और छूछीयो के बीच से निकलते टोपे को जीभ से चाटने लगी...
अनुज भी नीचे से झटके दे कर चची के मुँह और छूछीयों को छोड़ रहा था...

वहीं कमरे के दूसरी तरफ एक अलग तूफ़ान आया हुआ था मेरे और भाभी के बीच मैं तूफानी रफ़्तार से भाभी को छोड़ रहा था और भाभी भी पूरा साथ डेरे हुए छुड़वा रही थी ये शायद इतनी उत्तेजना का hi असर था की एक इज्जतदार घर की बहु इस तरह से नंगी होकर छुड़वा रही है..
भाभी की उत्तेजना किस चरम पर थी इसका अंदाज़ा हो गया जब भाभी का शरीर कंपनी लगा और वो मेरे लुंड पर झड़ने लगी... बार बार उनकी छूट मेरे लुंड पर कास रही थी और झटके खा रही थी उनका पूरा शरीर ककड़ा जिसे मैंने कसकर थाम लिए और फिर ढीली होकर भाभी नीचे की तरफ झुक कर बैठ गयी जिससे मेरा लुंड उनकी छूट से निकल गया..
भाभी नीचे बैठ कर हांफने लगी पर साथ hi एक हाथ से मेरे लुंड को भी पकड़ लिए जैसे कहीं जाने न देना चाहती हो कुछ पल बाद जब सांसे दुरुस्त हो गयी तो भाभी ने अपना चेहरा लुंड की तरफ आगे बढाकर लुंड को मुँह में ले लिया...
भाभी को लुंड चूसता देख पल्ली जो अब तक अपनी छूट में उंगली कर रही थी उठकर भाभी के बगल में आकर बैठ गई और भाभी को लुंड चूसते हुए देखने लगी

वहीं भाभी मेरी आँखों में देखते हुए मेरा लुंड चूस रही थी......
जैसे hi भाभी ने मेरा लुंड अपने मुँह से निकला तो पल्ली ने लपक कर उसे अपने मुँह में भर लिए...
जिसे देखकर भाभी को थोड़ी हैरानी हुई पर इतनी नहीं की वो वहां से हैट जाएं... ये सब भाभी के लिए बहुत नया था... कहाँ भाभी के साथ उनका पति भी ठीक से चुदाई नहीं करता था कहाँ आज वही भाभी हम सब के बीच नए नए तरह के खेल देख रही थी तो उसी की हिचक भाभी में अब भी थी..
लेकिन उत्तेजना हिचक से कहीं ज़्यादा थी... पल्ली ने मेरा लुंड कई बार चूसा और फिर अपने मुँह से निकल कर भाभी के मुँह की तरफ बढ़ा दिया जिसे भाभी ने पल्ली की आँखों में देखते हुए अपने मुँह में भर लिए...
वहीं कमरे के दूसरी तरफ भी माहौल बदल रहा था अनुज ने चची के मुँह से ोुण्ड निकला और उन्हें पकड़कर बिस्तर पर ले गया और चची को एक करवट लिटा कर उनके पीछे लेट गया और पीछे से hi लुंड को चची की गरम छूट में घुसा दिया...
भाभी और पल्ली को मेरा लुंड चूसते देख साथ hi अनुज को चची की छूट में लुंड पेलते हुए देख कर जग्गू से भी रुका नहीं गया और वो भी अपने बगल में बीएड पर चढ़ गया और हिचकिचाते हुए अपने लुंड को चची की तरफ बढ़ा दिया... चची ने जग्गू के लुंड को देख कर उसकी तरफ मुस्कान दी और फिर करीब खिसका कर अपने सर के पास बिठा लिए और फिर जग्गू के लुंड पर अपने चेहरे को झुका दिया...
चची के होंठों का स्पर्श लुंड पर होते hi जग्गू सिसक उठा और ऐसा लगा की अगर वो थोड़ी देर पहले न झाड़ा होता तो अभी झाड़ जाता चची के गरम मुँह में...
चाची ओस वक़्त दो दो लुन्डों से मज़े ले रही थी या यूँ कहें की दो दो लुंड चची के शरीर में आवाजाही कर रहे थे..

चची अपने अनुभव का इस्तेमाल करते हुए दोनों को पूरे मज़े दे रही थी...
उनकी छुछियां अनुज के द्वारा लगाए गए हर धक्के के साथ झूल रही थी...
वहीं मैं तो दुनिया का सबसे खुशनसीब इंसान था...
दो इतनी गरम और कामुक हसीनाएं मेरे लुंड को एक साथ चूसने में लगी हुई थी... दोनों की खूबसूरती और कामुकता का कोई जवाब नहीं था...
मेरे लुंड को चूसते hi एक पल को भाभी और पल्ली के होंठ करीब आ गए जिसका फायदा उठाते हुए पल्ली ने भाभी के होंठों को चूम लिए... भाभी को थोड़ा अजीब लगा पर पल्ली पीछे हटने वालों में से कहाँ थी वो और जोश के साथ भाभी के होंठों को चूसने लगी जिसमे भाभी भी साथ देने लगी...

भाभी के लिए ये शायद पहला hi मौका रहा होगा जब उन्हें किसी औरत या लड़की ने इस तरह चूमा होगा उनके रसीले होंठों को चूसा होगा... औरत के साथ ये करने में अपनी hi तरह किसी लड़की या औरत के होंठों को चूसने में भाभी को बिलकुल नया अहसास मिला इसलिए वो भी खुल कर पल्ली का साथ दे रही थी...
भाभी के लिए ये सब नया था इसलिए पल्ली भाभी को सम्भोग के नए नए आयामों से परिचित करवा रही थी जिससे भाभी भी पूरी तरह से उसका मज़ा ले ...
उम्र में छोटी पल्ली भाभी को बड़े बड़े सबक सीखा रही थी और भाभी भी किसी अचे और तेज़ विद्यार्थी की तरह सब सीखती जा रही थी...
दूसरी तरफ बिस्तर पर जग्गू और अनुज चची के मदमस्त बदन से खेल रहे थे..
चची अब जग्गू को भी वही सेवा दे रही थी जो थोड़ी देर पहले अनुज को दे रही थी.. जग्गू का लुंड अपनी दोनों छूछीयों के बीच फंसा कर उसके सुपडे को जीभ से चाट रही थी...
जग्गू तो माज़र से पागल होता जा रहा था और चची के सर को पकड़ कर नीचे से उनकी छूछीयों को छोड़ रहा था...
उनसे कुछ दूर hi मैं पल्ली और भाभी ने थोड़ा आगे बढ़ने का सोचा था और मैं वहीं चटाई पर जहाँ खेल रहे थे वहीं बोतल और पर्चियां हटाकर लेट गया...
भाभी को पल्ली ने मेरी कमर के डुबो तरफ तंग रख कर खड़ा कर दिया और फिर नीचे बिठा दिया भाभी की छूट में मेरा लुंड फंसा कर जिसपर भाभी धीरे धीरे ऊपर नीचे होकर छोड़ने लगी... वहीं पल्ली भाभी की तरफ चेहरा करके मेरे ऊपर अपनी गोल मटोल चूतड़ रख कर बैठ गयी. मैंने जीभ निकल कर और उसकी छूट और गांड को चाटकर उसका स्वागत किआ...

भाभी मेरे लुंड को अपनी गरम छूट में लेकर उछाल रही थी पल्ली अपनी गांड में मेरी जीभ को महसूस कर कुलबुला रही थी...
दोनों कामुक गदरायी हुई हसीनाएं मेरे से आनंद की प्राप्ति कर रही थी...
मैं पल्ली के भरे हुए चूतड़ों को थामे अपनी जीभ को उसकी गांड की गहराई में घुसा रहा तौर पल्ली कभी अपनी आँखें बंद करके आहें भर्ती तो कभी अपनी छूछीयों को मसल रही
थी...
उसके सामने hi मेरे लुंड पर उछलती हुई भाभी का भी यही हाल था दोनों एक दुसरे की आँखों में देखते हुए ये अद्भुत मज़ा ले रही थी.. आँखों में देखते हुए hi कब उनके चेहरे और होंठ मिल गए पता hi नहीं चला और एक जोश के साथ एक दुसरे के होंठों को और फिर जीभ को चूसने लगी...
साथ hi हाथों से एक दुसरे की छूछीयो को मसलने का काम भी साथ hi हो रहा था...
हमसे थोड़ा सा हैट कर बिस्तर पर अब तस्वीर थोड़ी बदल चुकी थी
अनुज और चची ने जग्गू पर दया करते हुए अब चची की गरम छूट का सुख भोगने का मौका जग्गू को दिया था... जग्गू नीचे लेता हुआ चची की छूट की कारीगरी के मज़े ले रहा था और अपनी किस्मत को शुक्रिया कर रहा था..

वहीं अनुज चची के बगल में खड़ा था और चची अनुज के लुंड पर अपने रसीले होंठों और बलखाती जीभ का जादू चला रही थी...
वहीं उनके बगल में उनसे थोड़ी सी दूर कुछ बदलाव हो रहा था पल्ली मेरे मुँह से उठगयी और भाभी मेरे लुंड से और दोनों ने अपनी जगह एक दुसरे के साथ बदल ली और अब पल्ली ने मेरा लुंड अपनी छूट में समां लिए और भाभी मेरे मुँह पर बैठ गयी... और मैं अपनी जीभ भाभी की अनछुई गांड में घुसा दी...
जिसके साथ hi भाभी मज़े से मचलने लगी... पल्ली मेरे लुंड पर कूदने लगी... मैं तो बस लेते हुए इस आनंद का सुख भोग रहा था..
अनुज ने थोड़ी देर चची से लुंड चुसवाया और फिर चची को जग्गू के लुंड पर उछाला हुआ छोड़ काट बिस्तर से उतर कर हमारे पास आ गया उसकी नियत भाभी पर ख़राब हो रही थी क्यूंकि उसने भाभी को अब तक नहीं चखा था...
अनुज पास में आया और मेरे बगल में खड़ा हो गया वो भाभी और पल्ली दोनों के बीच में खड़ा हो गया पल्ली ने चेहरा आगे कर उसके लुंड को मुँह में भर लिए और चूसने लगी... कुछ पल चूसने के बाद मुँह से लुंड निकल कर पल्ली ने भाभी की तरफ किआ तो भाभी थोड़ा हिचकिचाई और कभी अनुज तो कभी पल्ली को देखने लगी.. पल्ली ने भाभी को सर हिलाकर अलगे बढ़ने का इशारा किया तो भाभी थोड़ा हिचकिचाहट के साथ आगे हुई और अनुज के लुंड पर जीभ फिरै...
अनुज आह्ह्ह्ह करके रह गया... ऐसा hi भाभी ने फिर से किआ और कुछ पल बाद भाभी का आत्मविश्वास बढ़ता गया और वो अनुज के लुंड को अचे से चूसने लगी और फिर पल्ली ने भी मेरे लुंड पर उछालते हुए hi आगे होकर भाभी के साथ साथ लुंड को चेतना चूसना शुरू कर दिया... मैं भाभी की छूट और गांड दोनों पर जीभ फेर रहा था......
कुछ देर तक दोनों भाभी और पल्ली से लंड चुसवाने के बाद भाभी को मेरे मुँह से उठाया और मेरे बगल में hi लिटा लिए और उनके ऊपर आकर उनकी बड़ी बड़ी छूछीयों को चूसने लगा...
भाभी के मेरे मुँह से हटने पर मैं थोड़ा फ्री हो गया और पल्ली को थोड़ा अपनी और झुका लिया और नीचे से तगड़े धक्कों से उसे छोड़ने लगा.....
वहीं अनुज ने भी भाभी की टंगे खोल दी और फिर बिना किसी देरी के अपना लुंड उनकी छूट में घुसा दिया.. जिसका स्वागत भाभी ने अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह की सिसकियों के साथ किआ... और फिर शुरू हो गया चुदाई का खेल ज़ोरदार तरीके से...
अनुज ने भी ज़्यादा देर न करते हुए तगड़ी गति पकड़ ली और भाभी को चीखें निकलने पर मजबूर कर दिया वहीं मैं भी पल्ली की छूट की कुटाई ज़बरदस्त तरीके से कर रहा था...

भाभी पल्ली और चची की आवाज़ पूरे कमरे में गूँज रही थी...
पल्ली को छोड़ने में बहुत मज़ा आ रहा था कुछ तो खास था उसकी छूट में की जितना भी छोड़ लो कासी हुई hi रहती थी... बिल्किल माँ की तरह...
भाबी ने आज यहाँ आने से पहले शायद कभी सपने में भी नहीं सोचा होगा की ये सब उनके साथ होगा इतनी सी देर में वो दुसरे लुंड से सबके सामने चुद रही होगी...
पर ऐसा सच में हो रहा था... भाभी एक माँ और बेटी ीो साथ चुड़ते देख कर बहुत गरम हो गयी थी ऊपर से अनुज तेज़ी से भाभी को छोड़ रहा था...
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दूसरी तरफ बीएड पर से भी बड़ी तेज़ तेज़ गुर्राने की आवाज़ आ रही थी उधर देखा तो पाया की चची बीएड के किनारे पीठ लार लेती हुई थी और उनके पैरों को ऊपर करके पकड़े हुए जग्गू नीचे खड़ा खड़ा तेज़ी से उन्हें छोड़ रहा था...

चची भी हर धक्के के साथ आठ अह्ह्ह अहह की उत्तेजित करने वाली आवाज़ निकल रही थी... जग्गू चची को ज़ोरदार धक्के के साथ छोड़ते हुए उनकी नाचती हुई छूछीयों को देख कर और उत्तेजित होता जा रहा था...
चची और जग्गू दोनों hi बेहद गरम हो चुके थे और ऐसे स्टार पर पहुँच चुके थे की अब चाहे कुछ भी हो जाये वो चुदाई नहीं छोड़ सकते थे...
कुछ पल बाद जग्गू के धक्के और तेज़ होने लगे साथ hi उसकी हम्म हम्म्म करके गुर्राने की आवाज़ आने लगी...
वहीं चची भी अपनी छूछीयों को मसलते हुए ओह्ह्ह्ह और तेज़ बीटा और तेज़ करके उसे उकसाने लगी और फिर कई तेज़ झटको के साथ जग्गू की ाः निकली और सर ऊपर की और उठ गया और लुंड को उसने जड़ तक चची की छूट में गाड़ दिया और फिर अपने रास की धार छोड़कर चची की छूट को भरने लगा...
वहीं चची भी जग्गू की धार अपनी छूट में महसूस करके और इतनी देर की उत्तेजना से और नहीं रुक पाई और उनका शरीर भी ऐंठने लगा और फिर उनकी छूट ने भी पानी छोड़ जिअ जो जग्गू के रास के साथ मिल कर बहार आने लगा... दोनों बुरी तरह हांफ रहे थे..
उनकी चीखें सुनकर हम लोगो का ध्यान भी उधर गया तो देखा दोनों झाड़ कर अलग हुए हैं तो पल्ली ने बिस्तर पर चलने को बोलै उधर अनुज भी भाभी को लेकर चल दिया...
बिस्तर पर जाकर पल्ली ने मुझे लिटा दिया और खुद मेरे ऊपर आकर मेरी तरफ पीठ करके बैठ गयी... वहीं मेरे बगल में अनुज भी मेरी तरह लेट गया और भाभी ने भी पल्ली की नक़ल करते हुए वही आसान अपनाया और अनुज का लुंड छूट में लेकर उछलने लगी...
चची और जग्गू बगल में बैठे हुए हम चारो की चुदाई देखते हुए आराम कर रहे थे...
थोड़ी देर बाद hi बिस्तर पर ज़बरदस्त चुदाई शुरू हो गयी... कुछ देर तो भाभी और पल्ली हमारे लोदों पर उछाल रही थी पर थोड़ी देर के बाद हम दोनों नीचे से सटासट उन्हें छोड़ने लगे...
हर पल के साथ हमारी गति बढाती hi जा रही थी भाभी और पल्ली आह्ह्ह्हह अह्ह्ह्हह अह्ह्ह्ह मा ऐसी सिसकियाँ लगातार ले रही थी...
इधर हम लोग भी बेहद उत्तेजित हो गए थे और अपनी पूरी शक्ति से दोनों को छोड़ रहे थे...
मैंने नीचे से झटके देते हुए अपना एक हाथ पल्ली की छूट पर लेजाकर उसके डेन को रगड़ते हुए दो उंगलियां लुंड के साथ साथ उसकी छूट में घुसेड़ दी जिसका असर ये हुआ की पल्ली ज़्यादा देर टिक नहीं पाई और भर भरा के झड़ने लगी...

वहीं पल्ली की चीख के साथ hi भाभी की चीख भी गूंजी और साथ में अनुज के गुर्राने की आवाज़ भी आई... अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह भाभी...
अनुज भाभी और पल्ली तीनो एक साथ झाड़ रहे थे... मैं भी अपने शिखर के करीब था इसलिए और तेज़ी से पल्ली को छोड़ने लगा जिससे उसका झड़ना और ज़ोरदार हो गया... भाभी और अनुज झाड़ चुके थे और वैसे hi हांफ रहे थे भाभी अब भी अनुज के ऊपर पड़ी थी उसका लुंड अब भी भाभी की छूट में था जिसमे से दोनों का रास रिस रिस कर बहार ा रहा था...
कुछ पल बाद भाभी अनुज के ऊपर से हटकर बगल में लेट गयी मेरी और पल्ली की और बढ़कर..
जैसे hi भाभी हटी और अनुज का लुंड उनकी छूट से निकला चची उठकर आई और तुरंत अनुज का लुंड मुँह में भर लिए और चाटकर साफ़ करने लगी...
भाभी और जग्गू चची को हैरत से देख रहे थे सब कुछ उनके लिए आज नया हो रहा था... वहीं भाभी का ध्यान अब हमारी तरफ था जहाँ पल्ली मेरे ऊपर लेती हुई थी झाड़कर और हांफ रही थी साथ hi मेरे झड़ने के इंतज़ार में थी... मैं नीचे से उसकी छूट की कुटाई कर रहा था और कुछ देर बाद hi मुझे मेरा वीर्य मेरे लुंड में भरता हुआ महसूस हुआ और फिर कुछ तगड़े करारे झटको के बाद मैंने अपने लुंड को जड़ तक पल्ली की छूट में गाड़ दिया और फिर उसे खुद से चिपका लिए और अपने रास की धार उसकी छूट में भरने लगा . आह्हः क्या सुकून मिल रहा था ... एक के बाद एक धार मरता रहा जब तक एक एक बूँद न निचुड़ गयी हो... और फिर पल्ली मेरे ऊपर से सरक गर बगल में लेट गयी मेरा लुंड दोनों के रास से सना हुआ उसकी छूट से निकल गया जिसपर मुझे एक जीभ के रेंगने का एहसास हुआ सर उठाकर देखा तो थोड़ी हैरानी भी हुई और थोड़ी ख़ुशी भी क्यूंकि भाभी चची की देखा देखि मेरा लुंड चाट कर साफ़ कर रही थी जयपर मेरा और पल्ली का रास लगा हुआ था...
वहीं चची ने जैसे hi अनुज का लुंड साफ़ कर लिए वो भाभी के पीछे आ गयी और उनकी टंगे खोलदी इससे पहले भाभी कुछ समझ पति चची की जीभ भाभी की छूट के ऊपर रेंगने लगी जिससे भाभी की एक पल को आँखें बंद हुई पर अगले hi पल याद करते हुए वो मेरे लुंड को साफ़ करने के काम पर जुट गयी.. चची भाभी की छूट से अनुज का रास चाट चाट कर पीने लगी...

वहीं भाभी मेरा लुंड चाटते हुए मज़े से दूभर हो रही थी पहली बार अपनी छूट में किसी औरत की जीभ को महसूस करके पर जैसे hi मेरा लुंड साफ़ सा हुआ पल्ली ने तुरंत मुझे हटा दिया और मेरी जगह लेट गयी और भाभी का सर पकड़ कर अपनी छूट पर झुका दिए.. और भाभी ने भी बिना किसी झिझक के अपना सर झुकाते हुए पल्ली की छूट पर रख दिया और जीभ निकल जार चाटने लगी...
भाभी मन hi कण सोच रही थी क्या दिन है आज का और न जाने क्या क्या दिखायेगा.. भाभी दोनों माँ बेटी के बीच में फांसी ही थी एक तरफ से माँ उनकी छूट चाट रही थी ीोहिं वो बेटी की...
हम तीनो लड़के औरतों के इस आपसी मेल मिलाप का आनंद ले रहे थे दूर से hi.....aise hi कुछ देर और चला और फिर जब भाभी और चची अपने अपने काम से संतोष हो गए तो हैट कर लेट गए सबके चेहरे पर संतुष्टि के भाव थे और कुछ सवाल भीम...
तो क्या थे वो सवाल जानिए अगली अपडेट में... दोस्तों मेगा अपडेट दिया है तो आपसब भी मेगा कमैंट्स करके ज़रूर बताएं कैसी लगी अपडेट बहुत लम्बी बड़ी म्हणत से लिखी है कमेंट ज़रूए करें... बहुत बहुत शुक्रिया