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खैर मैंने रुकना सही नहीं समझा और जग्गू के साथ बहार आ गया.. बहार आते hi जग्गू ने मेरी पीठ थपथपाकर बोलै- ज्ञान बड़ा ाचा पेलते हो बाबा कर्मानन्द...
Me-aur तुम बकचोदी बहुत करते हो बाबा छुटियानन्द...
जग्गू- सेल हरामी..
Me-bakwas मत कर और जो बोलै है वो ध्यान से कर जेक.. मैं भी काम निपटा कर आता हूँ
अपडेट 97
मैं और जग्गू अलग अलग दिशा में चले गए.. मैं कल्लू के घर के बहार पहुंचा और गेट खटखटाया खुश किस्मती से गेट खोलने वाली कजरी थी.
मुझे देखते hi मुस्कुराने लगी...
कजरी- अरे कर्मा तू.. आजा आजा..
में- दीदी कल्लू भैया हैं क्या..
Kajri-wo कभी घर में होता है जो अब होगा..
Me-tau जी?
कजरी- कोई नहीं है तुझे क्या हुआ क्यों पूछ रहा है?
में- तुमसे कुछ बात करनी है दीदी..
Kajri-haan अंदर आ न...
मैं अंदर जाकर आंगन में पड़ी खत पर बैठ गया.. कजरी भी वहीं खत पर बैठ gayi...mere साथ..
Kajri-ab बोल कर्मा क्या बात है....
में- दीदी कल के बारे में कुछ बात थी... मुझे जग्गू को लेकर टेंसन हो रही है...
कजरी- क्यों कर्मा क्या परेशानी है खुल के बता...
में- दीदी मुझे जग्गू पर भरोसा नहीं है वो कहीं किसी को बता न दे...
Kajri-par क्यों बताएगा उसने कल खुद बोलै है की वो किसी को नहीं बताएगा और उसने भी तो हमारे साथ वो सब किआ...
कजरी बोलते बोलते थोड़ा शर्मा गयी..
में- दीदी मैं उसे बचपन से जनता हूँ वो थोड़ा बड़बोला है... वो कुछ भी बोल सकता है..
Kajri-aisa मत बोल मुझे दर लग रहा है...
में- दीदी क्या करूँ पर सच ये hi है.. वो ऐसा hi है... कहीं उसने जोश में आकर बोल दिया तो हम फँस जायेंगे..
कजरी थोड़ा चिंता होते हुए बोली...
कजरी- फिर अभी.. अब क्या करें कर्मा.
में- दीदी अभी हम लोग दबे हुए हैं, उसे हमारी बात छुपानी है तो वो ऊपर hai...maana उसने कल हमारे साथ सब किआ पर इसमें उसका फायदा है... और मान लो कल सब करने के बाद भी उसने ये बात फैला दी तो हम क्या कर लेंगे उसका...
कजरी- फिर अब. क्या करें कर्मा ये सब तो मैंने सोचा नहीं... मुझे तो अब दर लग रहा है कहीं कुछ गड़बड़ न हो जाये..
में- दीदी डरो मत पर हमें कुछ न कुछ करना पड़ेगा... जल्दी hi... कल से मेरे दिमाग में ये hi बात चल रही थी..
Kajri-par करें क्या?
में- दीदी हमें कुछ ऐसा करना होगा जिससे की जैसे अभी हमें दर है की वो हमारा राज़ न खोल्दे वैसे hi उसे भी होना चाहिए... जैसे अभी हमारी कमज़ोरी उसके पास है उसकी कमज़ोरी हमें पकड़नी होगी ..
कजरी- पर ये होगा कैसे... मुझे तो कुछ समझ नहीं आ रहा.. और उसकी कमज़ोरी हम इतनी जल्दी कैसे ढूंढेगे.. क्या कमज़ोरी है उसकी....
Me-didi जग्गू एक लड़का है और हर लड़के की एक कमज़ोरी होती...
Kajri-kya..
Me-choot..
Kajri-karma अभी ये सब बातें मत कर... मुझे चिंता हो रही है..
Me-didi सच hi कह रहा हूँ और मुझे उसकी कमज़ोरी पकड़ने का रास्ता मिल गया है...
Kajri-kya बता न जल्दी..
में- ये..
कजरी- ये तो साड़ी है.. इससे क्या होगा..
Me-didi यही जग्गू की कमज़ोरी का रास्ता है..
Kajri-par कैसे...
में- मैं बताता हूँ न कैसे...
और फिर मैंने कजरी को पूरा प्लान समझा दिया..
कजरी- तुझे लगता है ये काम करेगा..
Me-haan दीदी बिलकुल करेगा बस तुम्हे जो समझाया है वो बिना गलती के करना होगा...
काजै- पता नहीं यार कहीं गलती हो गयी तो.. मेरा होना ज़रूरी है क्या?
Me-didi किसी और को नहीं बता सकते न.
कजरी- हाँ ये भी है..
में- दीदी सब ठीक होगा बस हमें प्लान से काम करना है..
Kajri-theek है... मैं पूरी कोशिश करुँगी..
में- ठीक है दीदी ये साड़ी रखो और बाकि मैं तुम्हे फ़ोन पर बताता रहूँगा...
कजरी- सच में सब ठीक हो जायेगा न कर्मा?
में- हाँ दीदी बिलकुल ठीक हो जायेगा... बस तुम चिंता मत karo...ab मैं चलता हूँ और बाकि चीज़ें देख लेता हूँ...
Kajri-therk है पर जो भी हो मुझे बतादेना...
में- ठीक है.
और फिर मैं वहां से निकल गया.. और फिर जग्गू को फ़ोन किआ दोबारा उससे मिला और उससे जो काम दिए था इसके बारे में पुछा.. जब सब सही लगा तो फिर मैंने उसे घर भेज दिया और मैं अपने घर आ गया..
घर आकर गेट खटखटाया तो पल्ली ने खोला और मुझे देखकर मुस्कुराई और फुसफुसाते हुए बोली अंदर आओ मेरे राजा...
मैं उसकी बात सुनकर हैरान रह गया और वो खिलखिलाती हुई अंदर भाग गयी सब लोग आंगन में बैठे थे बातें चल रही थी की जैसे hi मैं पहुंचा पीछे से पापा और मौसा जी भी आ गए..
सब और खुश हो गए मैंने अनुज ने पल्ली ने मौसा जी के पेअर छुए... मौसा जी ने माँ से चची से चाचा से नमस्ते वगेरा की हमें भी आशीर्वाद दिया... फिर पापा और मौसा जी भी बैठ गए.. पल्ली उनके लिए पानी लेकर आई दोपहर के खाने का टाइम हो गया था...
माँ और पल्ली ने सबके लिए खाना लगाया.. मौसा और पापा वहां की बातें बताने लगे और हम सब ने सुनते सुनते खाना खाया... खाना खाने के बाद राजन चाचा को खेत में पानी लगाना था तो वो चले गए पर माँ और मौसी ने पल्ली और चची को रोक लिया...
घर में ज़्यादा लोगो के होने से मज़ा आ रहा था.. खूब हंसी मज़ाक चल रहा था ख़ुशी का माहौल था.. मौसा और पापा बाजार से मिठाई और फल लाये थे जिन्हे सबने बड़े चौ से खाया.. फिर पापा और मौसा थके हुए थे तो वो लोग आराम करने लगे औरतें अपने औरतों वाले काम करने लगी मतलब गपशप पल्ली भी उनके साथ थी... मुझे मेरे एक दोस्त का फ़ोन आ गया की आजा मैच लगा बगल के गाओं से.. ..
मैंने अपना बात उठाया हुए जाने लगा तो अनुज भी पीछे पद गया की मैं भी खेलूंगा तो वो भी चल दिया साथ में रस्ते में जग्गू को भी साथ कर लिए और पहुंच गए मैदान में... पास के गाओं की टीम से मैच था पर पैसा काफी लग रहा था मेरे दोस्त ने मुझसे भी पुछा तो मैंने मेरे, अनुज के और जग्गू के तीनो के मिलके 1000 लगा दिए..
मुझे पता था अगर हरा तो न जग्गू एक पैसा देगा न अनुज सरे मेरे hi जायेंगे...
खैर पहला मैच हुआ और जैसा सोचा था हम हार gaye...chud गए मेरे 1000 रस पर फिर अगले में मैंने फिर से 1000 लगाए इस बार हमें बड़ा लक्ष्य मिला था और मुझे किसी पर भरोसा नहीं था अपनी टीम में तो मैं तब तक बैटिंग करता रहा जब तक जीत न गए.. खैर सुकून मिला की 1000 बच गए..
अगला मैच फाइनल था जो जीतेगा वो जीत कर जायेगा इस बार भी पहले उनको बैटिंग थी.. सालो ने हमारे बोलेरों को बहुत मारा.. और फिर से पहाड़ जैसा लक्ष्य...
इस बार मैं ज़िद्द करके ओपनिंग गया दूसरी तरफ से ऐसे चूतिये उतरे की 3 ओवर में 4 विकेट गिरवा दिए पहिए जग्गू आया.. मैंने और जग्गू ने मिलकर ाचा खेला और खूब पिटाई की गेंदबाजों की पर फिर साला जग्गू कैच पकड़कर आउट हो गया.. एक दो विकेट और गिर गए फिर अनुज आया अनुज ने पहली बॉल खेली और उसी पर चक्का जड़ दिया मैं हैरान रह गया हमारी टीम वाले चिल्लाने लगे... एक छक्के ने पूरी टीम में जोश भर दिया मुझे भी भरोसा सा हो गया की चल अनुज कुछ तो बना hi लेगा और फिर मैं भी पेलने लगा और अंत में मैंने और अनुज ने मैच जीता दिया..
मैच ख़तम हुआ तो 1000 के फायदे के साथ मैं घर चल दिया रस्ते में अनुज और जग्गू को 250-250 रस पकड़ा दिए वो भी खुश हो गए मैंने 500 रखे जेब में..
साला मैच खेलने में समय का पता hi नहीं चलता अँधेरा हो आया था जब हम घर पहुंचे.. मौसा और पापा बाघ गए हुए थे घर पर अब भी चरों औरतें थी... खाने की तैयारी हो रही थी मैं और अनुज गंदे हो गए थे तो बरी बरी से नहाये.. तब तक मौसा और पापा भी आ गए थे साथ में राजन चाचा भी थे माँ ने साफ़ बोल्दिया था की आज सब लोग यहीं खाना खाएंगे...
खैर जब तक औरतें खाना बना रही थी तो मर्द बातों में लगे हुए थे कोई खेल की तो कोई राजनीति की... जब खाना बन गया तो सबने खाना खाया काफी स्वादिष्ट और कई तरह की सब्ज़ियां बनाई थी.. सबने पेट भर के खाया फिर सरे काम ख़तम करके सब लोग आंगन में hi बैठ गेट खातों पर एक खाट पर पापा मौसा और राजन चाचा.. एक पर माँ मौसी ममता चची और एक पर पल्ली मैं और अनुज.. बातें चल रही थी...
तभी पापा बोले- अरे सुनो तुम्हारे लिए साड़ी लाये थे वो देखि तुमने?
मौसा- हाँ साड़ियां नहीं निकली क्या बैग से..?
Mausi-kaunsi साड़ी.
Papa-are सरिया खरीदी थी तुम्हारे लिए बाजार से देखो बैग में होंगी... शैलेश वाले..
Maa-acha हमें लगा उसमे उनका सामान है तो देखा hi नहीं..
Palli-are वाह नयी नयी सरीयां तै जी और मौसी के लिए..
पापा- सिर्फ तै जी और मौसी के लिए नहीं.. तेरी मम्मी के लिए भी है ..
ममता चची- मेरे लिए... क्यों लाये भाई साब...
Mausa-are भाभी उसमे 4 सरीयां हैं जो जिसको पसन् हो रखलो..
पल्ली- फिर तो मैं भी एक लुंगी...
राजन चाचा- पल्ली छुपकर भाभी के लिए हैं वो...
माँ- भैया ख़बरदार अगर मेरी बच्ची को कुछ कहा तो... उसे जो लेना है वो लेगी... इतनी प्यारी गुड़िया है मेरी...
पल्ली खुश हो गयी वहीं चाचा और चची भी मुस्कुराने लगे..
राजन चाचा- भाभी तुम्हारे लाड ने hi बिगाड़ा है इसको..
Maa-are हाँ बहुत बिगड़ी है ये...
पल्ली- पापा कहाँ बिगड़ी हूँ मैं सरे काम करती हूँ..
ममता चची- बस अब चुप हो जा जीजी ने बोल दिए न साड़ी ले ले तो..
पल्ली दौड़कर गयी और बैग खींचकर लेकर सबके बीच में रख दिया और खोलने लगी
अनुज- और मेरे लिए क्या लाये हो!?
Me-thappad..
सब हंसने लगे...
Anuj-maa देखो...
मौसा- अरे ऐसा हो सकता
है की अपने अनुज साब के लिए हम कुछ न लाएं? बैग में देखो क्या है..
अनुज भी पल्ली के साथ कूद पड़ा बैग खोलने में.. पल्ली ने चरों साड़ियां निकली और अलग हो गयी... और माँ मौसी और चची की खत पर जाकर उन्हें दिखने लगी...
फिर अनुज ने दो डब्बे निकले उन्हें खोला तो बड़े hi प्यारे जूते थे...
मौसा- ये हैं तुम्हारे अनुज साब और एक जोड़ी कर्मा के लिए..
मैंने अपने जूते देखे मुझे बहुत पसंद आये... हलके और सुन्दर थे... उधर औरतें साड़ी में लगी हुई थी ये अच्छी है ये मैं लुंगी वगेरा वगेरा...
माँ- अरे तुम लोग अपने लिए क्या लाये हो...
पापा- हमें क्या ज़रुरत थी...
Mausi-are जब सबके लिए लिया तो अपने लिए भी लेना चाहिए था जीजाजी...
मौसा- अरे भाईसाब तो ले hi नहीं रहे थे मैंने ज़िद्द करके दिलवाये हैं बैग में देखो सबसे नीचे...
अनुज ने सबसे नीचे से निकले तो तीन पैकेट थे एक मैं शर्ट पंत थे जो मौसा ने पापा को पकड़ा दिए एक मैं सुन्दर सा कुरता पजामा था जो मौसा ने राजन चाचा को पकड़ा दिया और एक में जीन्स टीशर्ट थी जो मौसा की थी..
राजन चाचा- अरे भाई साब ये कुरता मेरे लिए क्यों?
पापा- तुझे भी चूं छान करने की आदत है ये नहीं रखले चुप चाप...
इस बात पर पल्ली और चची तेज़ी से हंसने लगे...
माँ ने पापा को डांटा ऐसे बच्चों के सामने दन्त रहे हो भैया को...
राजन चाचा- अरे नहीं भाभी ये दांत नहीं प्यार है मुझे बड़ा ाचा लगता है जब भैया किसी बात के लिए डाँटते हैं तो...
मौसी- तो रखलो अब कुरता पजामा जीजाजी..
ममता चची- अब भाई साब ने बोल दिए न अब तो रखना hi पड़ेगा...
अनुज ने इतने में अपने जूते पहन भी लिए थे...
अनुज- देखो कितने अचे लागृहे हैं न..
मौसी- हाँ लल्ला बड़े जाँच रहे हैं... सही से आ रहे हैं न..
अनुज- हाँ मौसी एक दम फिट..
मौसा- कर्मा ज़रा तू भी पहन के देख अपने...
में- अभी देखता हूँ
और फिर मैंने भी पहने वाकई काफी अचे जूते थे पेअर में पता hi नहीं लग रहे थे और फिटिंग भी गज़ब की थी...
में- अरे बहुत मस्त हैं ये तो मौसा जी पता hi नहीं चल रहे पैरों में एक दम पत्ते जैसे हैं...
मौसा- हैं न क्वालिटी के...
में- हाँ ाचा हम दोनों ने तो पहन लिए अब बाकि सब भी पहन कर देखो न अपनी अपनी चीज़ें..
पल्ली- हाँ सब दिखाओ..
पापा- अरे देख लेंगे कभी बाद में अब्बी क्या ज़रुरत है...
मौसी- क्यों ज़रुरत नहीं है जीजाजी हमें भी देखना है कैसे लगेंगे कपडे... सब पहन कर दिखाओ..
मौसा- ाचा तो तुम लोग भी साड़ी पहनकर दिखाओ...
ममता चची- साड़ी के लिए ब्लाउज अभी सिला थोड़े hi न है वो सिलेगा तभी पहनेंगे...
राजन चाचा- अरे तो पुराने ब्लाउज के साथ hi पहन लेना काम से काम साड़ी तो पहनो...
Mausi-dekhna पड़ेगा..
पापा- अरे क्या देखना पड़ेगा पहनो और दिखाओ कैसी हैं सारीयां..
माँ- तुम भी शुरू हो गए सबके साथ...
पापा- सही तो बोल रहा हूँ...
में- ाचा तो ये तय हुआ सब अपनी अपनी चीज़ें पहन कर दिखाएंगे... मैं और अनुज पहन चुके हैं तो एक एक करके सब लोग जायेंगे अंदर और पहनकर बहार आएंगे...
पल्ली- मंज़ूर है...
मौसी- को सबकी तरफ से बोल पड़ी ये...
में- तो सबसे पहले मौसा जी..
मौसा- मैं क्यों सबसे पहले...
पल्ली- अरे जाओ न मौसा जी जाना तो है hi तो पहले आप hi चले जाओ.
तो मौसा उठ कर अंदर गए सब बातें करते हुए इंतज़ार करने लगे... थोड़ी देर बाद मौसा बहार निकले जीन्स और टीशर्ट पहनकर..
पल्ली- वाह मौसा जी...
ममता चची- बहुत अचे लग रहे हैं भैया जाँच रहे हैं एक दम...
मौसा जी की बॉडी फौज ने होने की वजह से हटती कटती थी तो उनके शरीर पर कपडे अचे लग रहे थे एक दम फिट आ रहे थे.
माँ- हाँ भैया रंग भी जाँच रहा है और नाप भी...
मौसा खड़े खड़े शर्मा रहे थे..
मौसी- अरे देखो तो शर्मा कैसे रहे हैं..
Mausa-chup कर तू...
और फिर मौसा जी बैठ गए अपनी जगह पर..
Me-ab बरी है राजन चाचा की...
राजन चाचा- अरे हम कहाँ अभी पहनेंगे ये...
Palli-tauji देखो पापा फिर मन कर रहे हैं..
राजन Chacha-are बस मेरी माँ जा रहा हूँ..
और फिर राजन चाचा उठ कर गए कमरे में बाकि सब हंसने लगे...
थोड़ी देर बाद बहार आये शरमाते हुए..
Me-are वाह चाचा गजब लग रहे हो..
Palli-are पापा बिलकुल hi बदल गए तुम तो..
अनुज- और क्या काम समझा है चाचा को..
मौसी- मस्त लग रहे हो जीजा... दूल्हे जैसे देखो कहीं जीजी का दिल दोबारा न हो जाये शादी का...
राजन चाचा- अरे दोबारा भी इसी से करनी पड़ेगी क्या?
सब हंसने लगे..
ममता चची- नहीं नहीं तुम्हारे लिए तो हीरोइन आएगी koi...zara अचे क्या लगने लगे तो कितना बन रहे हैं..
Maa-are बस लड़ना बंद करो dono...bachhe बन जाते हो तुम दोनों भी..
फिर चाचा भी अपनी जगह बैठ गए...
में- अब जायेंगे पापा...
पापा- अभी जाता हूँ पता नहीं तुम लोग क्यों शर्मा रहे थे.. कोई बड़ी बात थोड़ी hi है..
Mausi-je बात जीजा...
सब खिलाकर हंस पड़े... और पापा अंदर चले गए बाकि सब बातों में लगे थे
थोड़ी देर बाद पापा बहार आये थोड़ा शरमाते हुए .
मौसी ने उन्हें देखते hi सीटी मारी..
मौसी- वाह जीजा एक दम हीरो लग रहे हो...
पल्ली- सच में ताऊजी बहुत जाँच रहे हो..
पापा शर्ट पंत में सच में काफी अचे लग रहे थे.. खेतों में काम की वजह से उनका शरीर भी गठीला था जिससे कपडे फिट आ रहे थे उन्हें..
Mausa-bhai साब बाजी मार ली अपने तो..
ममता चची- भाई साब बहुत अचे लग रहे हो...
माँ- क्या बात है जी और क्यों नहीं पहनते ऐसे कपडे...
पापा- और की छोड़ अभी की देख...
Maa-dekh के hi बोल रही हूँ...
में- क्या बात है papa...sach में हीरो बन गए..
Papa-chalo अब तुम लोग अब अगला कौन जायेगा ये बताओ..
और अपनी जगह आकर बैठ गए...
Me-ab पल्ली की बरी...
पल्ली तो जैसे इसी इंतज़ार में थी..
Palli-maa चलो न साड़ी बांध देना मुझसे ठीक से बांधेंगी नहीं...
माँ- हाँ ममता चली जा और देख नीचे वाली अलमारी में छोटे ब्लाउज पड़े होंगे वो पहना कर देख आ जाएं इसे तो..
ममता चची और पल्ली चले गए...
बाकि सब बातें करने लगे...
थोड़ी देर बाद पल्ली ममता चची बहार आ गयी..
माँ- पल्ली कहाँ रह गयी...
चची अपनी जगह पर आकर बैठते हुए boli-aa रही है बस..
इतने में गेट से पल्ली भी निकली..
पल्ली को देखते hi सब की आँखें उस पर जैम सी गयी.. पल्ली ने अपने लिए एक ग्रे साड़ी पसंद की थी.. हम सब जो आजतक उसे सूट या बाकि कपड़ों में देखते आये थे साड़ी में देखकर बिलकुल हैरान रह गए साड़ी में पल्ली बेहद खूबसूरत लग रही थी.. अचे से तैयार होकर आई थी... और बेहद खूबसूरत लग रही थी

ब्लाउज के नीचे से झांकती नंगी कमर और पारदर्शी साड़ी के पीछे से हलकी हलकी नज़र आती हुई नाभि पल्ली को कामुक बना रही थी...
औरतों का पता नहीं पर मर्दों की नज़र तो नहीं हैट रही थी उससे जिनमे उसके पापा भी शामिल थे... मेरा लुंड भी थोड़ा टाइट हो चूका tha...anuj भी मनो खा जाने वाली नज़रों से देख रहा था..
मैंने सरे मर्दों की गॉड में नज़र डाली तो थोड़ा सा उभर तो सबके पंत या पाजामे में दिखा... राजा. चाचा भी अपनी बेटी की जवानी देखकर कड़क हो रहे थे...
माँ- अरे मेरी गुड़िया को किसी की नज़र न लगे बहुत प्यारी लग रही है..
Mausi-saxh दीदी पता hi नहीं चला की पल्ली इतनी बड़ी और सुब्दर हो गयी है..
Palli-subder तो मैं हमेशा से hi हूँ..
Papa-sach में पल्ली बिटिया बहुत सुन्दर लग रही है..
में- सच में सोचा नहीं था की साड़ी में ये ऐसी लगेगी...
मौसा- अरे पल्ली सूंदर है इसलिए ये साड़ी अछि लग रही है उसपर...
राजन Chacha-bachhhe कब बड़े हो जाते हैं पता hi नहीं चलता..
म चची- सही कहा ग..
पल्ली- अछि लगी न साड़ी
Me-bahut अछि फिर पल्ली अपनी जगह पर आकर बैठ गयी...
में- तो अब अगला नंबर है हमारी चची का...
म Chachi-are मेरी बरी आ भी आ गयी... चलो आती हूँ अभी..
ममता चची साड़ी उठाकर अंदर चली गयी थोड़ी देर बाद बहार आई.. चची ने
एक हरे रंग की सिंपल साड़ी चुनी थी जिसे पहनकर वो बहार आई बिलकुल सिंपल लग रही थी पर चची का बदन hi कुछ ऐसा था किसिमप्ले साड़ी भी उनपर कामुक लग रही थी... आधी नंगी कमर और गहरी नाभि देखकर मेरा क्या सबका लुंड फन उठा रहा था...

मौसा और पापा कुछ ज़्यादा hi ध्यान से देख रहे थे इस कमरे में वो hi सो ऐसे थे जिन्होंने चाची के कामुक बदन को भोगा नहीं तथा...
मर्द चाहे जितना भी शरीफ क्यों न हो औरत का बदन होता hi ऐसा है की मर्द को भटका hi देता है...
पापा और मौसा की नज़रें पहले पल्ली तो अब उसकी मम्मी के बदन से हटने का नाम hi नहीं ले रही थी...
माँ- अरे वाह इतनी सादा साड़ी में भी कितनी खिल रही है ममता तू..
Mausi-sach में जीजी... बहुत सूंदर लग रही हो सदा साड़ी भी बहुत जाँच रही है...
Palli-haye मेरी मम्मी नज़र न लगे..
Me-haye मेरी सूंदर चची...
Anuj-haaye मेरी प्यारी चची...
पापा- अरे सादा चीज़ें hi अछि लगती हैं.. सदा रहने वाली औरत hi ज़्यादा सूंदर लगती है..
Mausa-sahi कहा भाई साब ममता भाभी को hi देख लो..
म Chachi-are बस बस भैया तुम भी न..
र Chacha-sahi कह रहे हैं भाई साब खिल रही है तू...
चची शर्मा gayi...are बस आप सब भी न... और अपनी जगह आकर बैठ गयी...
में- अब बरी है मौसी की...
Mausa-jab तबसे बहुत बोल रही थी..
मौसी - जा तो रही हूँ..
मौसी उठ कर चली गयी हम सब बातें कर रहे थे साथ hi पापा और मौसा जी पल्ली और चची को चिप चिप कर ताड़ रहे थे... मैं और अनुज भी कहाँ पीछे थे...
खैर थोड़ी देर बाद मौसी बहार आई और रुक कर कड़ी हो गयीं...
हमारी नज़र एक बार फिर से गेट पर जैम gayi..mausi ने एक क्रीम कलर की साड़ी पहनी थी पूरे ब्लाउज के साथ कहने को बिलकुल सदा सरल पर उनके अंग ऐसे थे जो साड़ी मैं से उनके जिस्म का हर कटाव महसूस हो रहा था... उनकी बड़ी बड़ी छुछियां ब्लाउज में छुपी हुईं कमर और पेट जो साड़ी के उस पार हल्का हल्का नज़र आ रहा था..

ब्लाउज के बीच में लटकता मंगलसूत्र... ब्लाउज सीने. से थोड़ा खुला था तो हलकी सी घाटी नज़र आ रही थी...
इस बार भी सरे मर्दों की निगाहें वहीं जमी रह gayi...papa चाचा मैं अनुज लार टपका रहे थे पर बिना ज़ाहिर किये..
म Chachi-are वाह शालू ये रंग तो तुझपर बहुत ाचा लग रहा है..
Palli-haan मौसी और साड़ी भी कितनी अचे से पहनी है तुमने बहुत सुन्दर लग रही हो..
माँ- हाँ रे शालू अछि साड़ी चुनी है तूने बहुत सूंदर है... ऐसा लग रहा है तेरे लिए hi बानी है...
Papa-sach में ये साड़ी तो हमारी साली साहिबा के लिए hi बानी है पापा ने ये बात पंत में तम्बू को दबाते हुए कही..
राजन चाचा- सही बोले भैया बहुत सूंदर लग रही हो साली जी...
Mausi-are नाम छोड़कर ये क्या साली साली लगा रखा है...
Papa-jo है वो hi बोल रहे हैं हम तो...
मौसा- क्या बात है बीवी साहिबा सच में सूंदर लग रही हो...
Mausi-tumne भी नाम छोड़ दिया..
मौसा- हम भी जो है वही बोल रहे हैं...
सब लोग हंसने लगे...
में- वाह मौसी गजब लग रही हो...
Anuj-haan नयी दुल्हन जैसी...
पल्ली- ये अलग hi बोलता है..
Anuj-tu चुप कर..
म चची- तुम दोनों chupkaro...aur जीजी अब तुम्ही रह गयी हो ये लो साड़ी..
माँ ने चची के हाथो से साड़ी ली और फिर देखकर boli-are ये तो बड़ी पतली है ऐसी हलकी साड़ी हम नहीं पहनते...
पापा- जब सबसे आखिरी में बची हुई लोगी तो पसंद की थोड़े hi मिलेगी..
Mausi-jeeji सही तो है हमारी भी वैसी hi थी..
Mausa-haan भाभी इतने प्यार से लाये हैं अब मन मत करो..
Maa-par ऐसी पहनते नहीं है न इसलिए...
म Chachi-are जीजी कहीं बहार थोड़े hi जाना है घर पर hi तो हो पहन कर देखलो न पसंद आये तो बाद में मत पहनना..
Papa-are देखले न पहनकर...
Palli-haan तै जी देखो न..
Anuj-haan मम्मी पहेँलो..
Maa-theek है जाती हूँ... तुम सब भी ज़िद्द करके बैठ गए हो..
सब खुश हो गए और माँ भी उठ कर कमरे में चली गयी..
हम सब बातें करते हुए माँ का इंतज़ार करने लगे...
और फिर थोड़ी देर बाद कमरे का दरवाज़ा खुला और सबकी नज़रें उस तरफ गयी और फिर ठहर गयी ...
हलके लाल रंग की पारदर्शी सारी माँ ने पहनी हुई थी... हरे रंग के ब्लाउज के साथ सुंदरता के बारे में क्या hi कहूं माँ कितनी सूंदर थी ये सब जानते हैं.. पर सुंदरता के साथ साथ माँ के शरीर में एक चीज़ और थी जो सबसे अलग थी... उनकी कामुकता.. उनका बदन ऐसा था की वो कुछ भी पहनें मर्दों का लुंड देखते hi खड़ा हो जाता था...
खैर माँ धीरे धीरे चलते हुए हमारे सामने आई...

माथे पर बिंदी गले में मंगलसूत्र साड़ी के थोड़ा साइड से दिखती थोड़ी थोड़ी कमर पारदर्शी साड़ी से झांकता हुआ उनका पेट... ब्लाउज में बंद बड़ी बड़ी छुछियां... कुल मिलकर माँ का गदराया बदन नयी साड़ी में और कामुक और सूंदर लग रहा था..
पल्ली- वाह तै जी इतनी सूंदर लग रही हो.. मैं भी बस बड़ी होकर तुम्हारे जैसी सूंदर लागूं तो मज़ा आ जाये.. ये कहकर पल्ली ने सीटी मारी..
माँ- मेरे जैसी बुढ़िया नहीं तू तो अभी भी हीरोइन दिखती है और बाद में भी दिखेगी.
म चची- जीजी उसका पता नहीं पर अभी तो तुम हीरोइन लग रही हो..
मौसी- सही में ममता जीजी... बहुत सूंदर लग रही हैं जीजी...
हम मर्दों के मुँह में तो जैसे पानी hi सूख गया था माँ को देखकर मैंने एक एक करके सबकी और देखा तो पाया सरे मर्दों के पंत में तम्बू बना हुआ था चाहे वो मैं हूँ अनुज हो चाचा हो या मौसा हो या पापा hi क्यों न हो...
मौसा- भाभी सचमें बहुत सूंदर लग रही है आप पर साड़ी आप बेकार में मन कर रही थी...
चाचा- सही कहाँ शैलेश भैया भाभी सही में अति सुन्दर लग रही हो...
माँ- तुम लोग भी न... बिना बात के तारीफ कर रहे हो...
पापा- अरे बिना बात के नहीं सही बोल रहे हैं... कभी कभी तू खुद hi भूल जाती है की तू कितनी सूंदर है...
पापा की बात सुनकर माँ शर्मा गयी.
Maa-are बच्चों के सामने तो रहने दो..
Me-nahi पापा मत रहने दो..
Anuj-haan पापा हमें कोई परेशानी नहीं है...
Palli-mujhe भी नहीं खुल के तारीफ करो ताऊजी..
सब हंस रहे थे माँ कड़ी कड़ी शर्मा रही थी..
पापा- बिना बात के खुद को बुढ़िया समझती हो ज़रा एक बार हमारी नज़र से देखो तो पता चले की क्या चीज़ हो तुम..
सब पापा की बात पर खिल खिलाकर हंसने लगे.. माँ भी शर्मा रही थी और हंस रही थी...
माँ- शैलेश भैया दारू पिलाके लाये हो क्या इन्हे.. कुछ तो शर्म करो बच्चों की...
माँ ये कहते हुए अपनी जगह पर बैठ गयी...
पापा- लो अब अपनी बीवी की तारीफ करना भी गलत है.. .
Mausi-kuch गलत नहीं है जीजाजी खुलकर करो...
मौसा- अच्छा मैं भी करूँ?
मौसी- नहीं तुम रहने दो
फिर सब हंसने लगे ऐसे hi मस्ती मज़ाक का मूड चल रहा था...
तभी पल्ली बोली- अरे सब लोग सुनो अगर सब साथ hi हैं तो कुछ खेलते हैं न अंताक्षरी वगेरा...
अनुज- हाँ हाँ मज़ा आएगा. खेलते हैं..
मौसा- बाकि सब से पूछलो..
मौसी- मैं भी राज़ी हूँ..
म चची- मैं भी खेलूंगी...
र चाचा- अरे पर मुझे ये गण वन तो नहीं आते..
म चची- अरे रहने दो तुम कितना गुनगुनाते रहते हो मैं सुनती नहीं क्या..
पापा- यार ये गण वन नहीं होगा हमसे...
माँ- खेल लो. न जब सबका मन है तो..
पापा- ाचा ठीक है अब तुम्हारे आर्डर को मन थोड़े hi कर सकते हैं...
माँ- बस रहने दो दोबारा शुरू मत हो जाओ..
पल्ली- तो दो टीम बनाते हैं ये सही रहेगा एक मैं औरतें और एक में सरे मर्द...
मौसी- पर ये तो 5 हैं और हम 4 है... बराबरी का मुक़ाबला कहाँ है..
पल्ली- पापा का होना भी बराबर hi है मौसी और हम लोग इन्हे आसानी से संभल सकते हैं...
म चची- तो ठीक है एक तरफ आप सब लोग और एक तरफ हम औरतें...
Me-theek hai..par थोड़ा कुछ और डाव पर लगाना होगा नहीं तो लोग ठीक से नहीं खेलेंगे...
Mausi-jaise क्या.?
जिस टीम पर पॉइंट चढ़ेगा उस टीम का एक बाँदा अगले गाने पर बीच में खड़ा होकर नाचते हुए जाएगा... और जीतने वाली टीम चुनेगी की कौन नाचेगा हरने वाली टीम से..
Maa-are ये गाने तक तो ठीक है नाचना वचन नहीं..
Papa-kyun दर. गयी अब..
Mausi-are दीदी सही है न ागत ये लोग हरे तो इन्हे भी नाचना पड़ेगा मज़ा आएगा सबको नाचते हुए देखने में खासकर जीजाजी को..
Maa-theek है वैसे मज़ा तो आएगा इन्हे नाचने में...
म Chachi-to ठीक है फिर तय रहा..
मौसा- ठीक हो जाये फिर..
और फिर खेल शुरू हो गया... उनकी टीम से पल्ली मौसी चची सब पूरे जोश में थे माँ भी बीच बीच में साथ दे रही थी...
हमारी टीम से अनुज मैं और मौसा थे मैं पापा और चाचा तो चुप hi थे...
खैर फिर पहला पॉइंट हम पर चढ़ गया और पल्ली ने सबसे पहले बोलै मौसा का नाम बेचारे मौसा शरमाते हुए खड़े huye..pahle तो कुछ समझ नहीं आया उनके की क्या करें फिर सबके उकसाने पर गेट हुए नाचने लगे... जैसा भी आता था हिले...
बाकि सब ताली बजा बजा कर उत्साह बढ़ा रहे थे सबके चेहरे पर हंसी थी.... गण गए कर मौसा अपनी जगह पर बैठ गए...
मौसी- अरे वाह मुझे कभी नहीं नाच के दिखाया तुमने...
Mausa-chup करो तुम और खेल आगे बढ़ाओ...
अगली बाज़ी औरतें हार गयी और मौसा ने बदले के लिए तुरंत पल्ली का नाम ले लिए..
इसके बाद सबकी तालियों के बीच पल्ली कड़ी हुई और फिर शरमाते हुए गण सजूरु किया और फिर शर्म वार्म भूलकर खुल कर नाचने लगी...

हम सब मर्दों का ध्यान पल्ली के थिरकते हुए मस्त बदन पर था उसकी गोरी कमर ब्लाउज में झूलती छुछियां हाय मुँह में पानी आ गया... पापा मौसा चाचा भी देखते हुए अंदर hi अंदर आहें भर रहे थे...
पर हर अछि चीज़ की तरह इसका भी अंत हुआ और पल्ली बापिस जाकर बैठ गयी... पर मर्दों के लुंड खड़े कर गयी... इसी बीच खेल दोबारा शुरू हुआ और इस बार हम हार गए और मौसी ने बलि का बकरा बनाया चाचा को...
अब सब का हँसके बुरा हाल के चाचा क्या करेंगे .. खैर चाचा खड़े हुए और सबके बीच आ गए... चची हंस रही थी उन्हें देखकर...
चाचा भी काम नहीं थे राजेश खन्ना की तरह हाथ घुमाया और नाचने लगे साथ hi गाने लगे चची को इशारा करके- चुप गए सरे नज़ारे हाय क्या बात हो gayi...tune काजल लगाया दिन में रात हो गयी...
और इस गाने पर तो सबसे ज़्यादा तालियां और सीटियां बजी.. चची का शर्म से बुरा हाल पर चाचा ने तो कमाल hi कर दिया... पापा ने खुद शाबाशी दी..
खेल फिर शुरू हुआ और आगे बढ़ा इस बार हमने बाप्सी की और जीत गए और चाचा ने मौसी का नाम बोल दिया...
तालियां बजी और मौसी बीच में आ गयी और फिर शरमाते हुए नाचने लगी अपनी साड़ी घुमा घुमा कर... कभी उनकी नंगी कमर सामने आ जाती तो कभी गदराये चूतड़ तो कभी बड़ी बड़ी छुछियां...

एक बार फिर से मौसी ने मर्दों के लुंड कड़क कर दिए अपने हुस्न के जलवा दिखा कर देखते देखते सोच रहा था क्या माल हैं मौसी यार... पता नहीं कैसे रहलेते हैं मौसाजी ड्यूटी पर उनके बिना..
मेरी ऐसी बीवी हो तो एक दिन न गुज़ारे बिना चुदाई के.. पर जैसी जिसकी किस्मत....
मौसी ने अपने गदराये बदन को थिरकाया जब तक गण ख़तम नहीं हुआ और फिर बैठ गयी तालियां बजा के सबने उनका उत्साह बढ़ाया..
र चाचा- वाह शालू बहुत ाचा नाच लेती हो तुम तो...
Mausi-are कहाँ जीजा नाचते तो आप हैं राजेश खन्ना जैसे..
सब हंसने लगे..
इसी हंसी ख़ुशी के बीच फिर से खेल शुरू हुआ और इस बार हम लोग हारे तो इस बार बलि का बकरा बना मैं...
पर अपने को किस बात की शर्म खड़ा हुआ गण गया नाच वाच के काम निपटाया और बैठ गया ... आगे गेम चला और अब हम फिर से हार gaye...is बार पापा hi बचे थे तो उनका नंबर आया..
पापा भी शरमाते हुए खड़े हुए पर फिर अचानक से देवानंद बन गए और माँ की तरफ देखकर गाने लगे...
पल भर के लिए कोई हमें प्यार करले झूठा hi सही...
पापा को देखकर सब हैरान रह गए हम सब सीटी मात के तालियां बजने लगे वहीं माँ अपना चेहरा धक् के हंस रही thi...papa ने गण ख़तम किआ और अपनी जगह आकर बैठे.. सबने खूब तालियां पीती पापा के kiye...khel आगे बढ़ा और किस्मत से हम जीत गए..
इसके आएगी क्या हुआ अगली अपडेट में प्लीज कमैंट्स करके ज़रूर बताएं कैसी लगी अपडेट बहुत बहुत शुक्रिया
Me-aur तुम बकचोदी बहुत करते हो बाबा छुटियानन्द...
जग्गू- सेल हरामी..
Me-bakwas मत कर और जो बोलै है वो ध्यान से कर जेक.. मैं भी काम निपटा कर आता हूँ
अपडेट 97
मैं और जग्गू अलग अलग दिशा में चले गए.. मैं कल्लू के घर के बहार पहुंचा और गेट खटखटाया खुश किस्मती से गेट खोलने वाली कजरी थी.
मुझे देखते hi मुस्कुराने लगी...
कजरी- अरे कर्मा तू.. आजा आजा..
में- दीदी कल्लू भैया हैं क्या..
Kajri-wo कभी घर में होता है जो अब होगा..
Me-tau जी?
कजरी- कोई नहीं है तुझे क्या हुआ क्यों पूछ रहा है?
में- तुमसे कुछ बात करनी है दीदी..
Kajri-haan अंदर आ न...
मैं अंदर जाकर आंगन में पड़ी खत पर बैठ गया.. कजरी भी वहीं खत पर बैठ gayi...mere साथ..
Kajri-ab बोल कर्मा क्या बात है....
में- दीदी कल के बारे में कुछ बात थी... मुझे जग्गू को लेकर टेंसन हो रही है...
कजरी- क्यों कर्मा क्या परेशानी है खुल के बता...
में- दीदी मुझे जग्गू पर भरोसा नहीं है वो कहीं किसी को बता न दे...
Kajri-par क्यों बताएगा उसने कल खुद बोलै है की वो किसी को नहीं बताएगा और उसने भी तो हमारे साथ वो सब किआ...
कजरी बोलते बोलते थोड़ा शर्मा गयी..
में- दीदी मैं उसे बचपन से जनता हूँ वो थोड़ा बड़बोला है... वो कुछ भी बोल सकता है..
Kajri-aisa मत बोल मुझे दर लग रहा है...
में- दीदी क्या करूँ पर सच ये hi है.. वो ऐसा hi है... कहीं उसने जोश में आकर बोल दिया तो हम फँस जायेंगे..
कजरी थोड़ा चिंता होते हुए बोली...
कजरी- फिर अभी.. अब क्या करें कर्मा.
में- दीदी अभी हम लोग दबे हुए हैं, उसे हमारी बात छुपानी है तो वो ऊपर hai...maana उसने कल हमारे साथ सब किआ पर इसमें उसका फायदा है... और मान लो कल सब करने के बाद भी उसने ये बात फैला दी तो हम क्या कर लेंगे उसका...
कजरी- फिर अब. क्या करें कर्मा ये सब तो मैंने सोचा नहीं... मुझे तो अब दर लग रहा है कहीं कुछ गड़बड़ न हो जाये..
में- दीदी डरो मत पर हमें कुछ न कुछ करना पड़ेगा... जल्दी hi... कल से मेरे दिमाग में ये hi बात चल रही थी..
Kajri-par करें क्या?
में- दीदी हमें कुछ ऐसा करना होगा जिससे की जैसे अभी हमें दर है की वो हमारा राज़ न खोल्दे वैसे hi उसे भी होना चाहिए... जैसे अभी हमारी कमज़ोरी उसके पास है उसकी कमज़ोरी हमें पकड़नी होगी ..
कजरी- पर ये होगा कैसे... मुझे तो कुछ समझ नहीं आ रहा.. और उसकी कमज़ोरी हम इतनी जल्दी कैसे ढूंढेगे.. क्या कमज़ोरी है उसकी....
Me-didi जग्गू एक लड़का है और हर लड़के की एक कमज़ोरी होती...
Kajri-kya..
Me-choot..
Kajri-karma अभी ये सब बातें मत कर... मुझे चिंता हो रही है..
Me-didi सच hi कह रहा हूँ और मुझे उसकी कमज़ोरी पकड़ने का रास्ता मिल गया है...
Kajri-kya बता न जल्दी..
में- ये..
कजरी- ये तो साड़ी है.. इससे क्या होगा..
Me-didi यही जग्गू की कमज़ोरी का रास्ता है..
Kajri-par कैसे...
में- मैं बताता हूँ न कैसे...
और फिर मैंने कजरी को पूरा प्लान समझा दिया..
कजरी- तुझे लगता है ये काम करेगा..
Me-haan दीदी बिलकुल करेगा बस तुम्हे जो समझाया है वो बिना गलती के करना होगा...
काजै- पता नहीं यार कहीं गलती हो गयी तो.. मेरा होना ज़रूरी है क्या?
Me-didi किसी और को नहीं बता सकते न.
कजरी- हाँ ये भी है..
में- दीदी सब ठीक होगा बस हमें प्लान से काम करना है..
Kajri-theek है... मैं पूरी कोशिश करुँगी..
में- ठीक है दीदी ये साड़ी रखो और बाकि मैं तुम्हे फ़ोन पर बताता रहूँगा...
कजरी- सच में सब ठीक हो जायेगा न कर्मा?
में- हाँ दीदी बिलकुल ठीक हो जायेगा... बस तुम चिंता मत karo...ab मैं चलता हूँ और बाकि चीज़ें देख लेता हूँ...
Kajri-therk है पर जो भी हो मुझे बतादेना...
में- ठीक है.
और फिर मैं वहां से निकल गया.. और फिर जग्गू को फ़ोन किआ दोबारा उससे मिला और उससे जो काम दिए था इसके बारे में पुछा.. जब सब सही लगा तो फिर मैंने उसे घर भेज दिया और मैं अपने घर आ गया..
घर आकर गेट खटखटाया तो पल्ली ने खोला और मुझे देखकर मुस्कुराई और फुसफुसाते हुए बोली अंदर आओ मेरे राजा...
मैं उसकी बात सुनकर हैरान रह गया और वो खिलखिलाती हुई अंदर भाग गयी सब लोग आंगन में बैठे थे बातें चल रही थी की जैसे hi मैं पहुंचा पीछे से पापा और मौसा जी भी आ गए..
सब और खुश हो गए मैंने अनुज ने पल्ली ने मौसा जी के पेअर छुए... मौसा जी ने माँ से चची से चाचा से नमस्ते वगेरा की हमें भी आशीर्वाद दिया... फिर पापा और मौसा जी भी बैठ गए.. पल्ली उनके लिए पानी लेकर आई दोपहर के खाने का टाइम हो गया था...
माँ और पल्ली ने सबके लिए खाना लगाया.. मौसा और पापा वहां की बातें बताने लगे और हम सब ने सुनते सुनते खाना खाया... खाना खाने के बाद राजन चाचा को खेत में पानी लगाना था तो वो चले गए पर माँ और मौसी ने पल्ली और चची को रोक लिया...
घर में ज़्यादा लोगो के होने से मज़ा आ रहा था.. खूब हंसी मज़ाक चल रहा था ख़ुशी का माहौल था.. मौसा और पापा बाजार से मिठाई और फल लाये थे जिन्हे सबने बड़े चौ से खाया.. फिर पापा और मौसा थके हुए थे तो वो लोग आराम करने लगे औरतें अपने औरतों वाले काम करने लगी मतलब गपशप पल्ली भी उनके साथ थी... मुझे मेरे एक दोस्त का फ़ोन आ गया की आजा मैच लगा बगल के गाओं से.. ..
मैंने अपना बात उठाया हुए जाने लगा तो अनुज भी पीछे पद गया की मैं भी खेलूंगा तो वो भी चल दिया साथ में रस्ते में जग्गू को भी साथ कर लिए और पहुंच गए मैदान में... पास के गाओं की टीम से मैच था पर पैसा काफी लग रहा था मेरे दोस्त ने मुझसे भी पुछा तो मैंने मेरे, अनुज के और जग्गू के तीनो के मिलके 1000 लगा दिए..
मुझे पता था अगर हरा तो न जग्गू एक पैसा देगा न अनुज सरे मेरे hi जायेंगे...
खैर पहला मैच हुआ और जैसा सोचा था हम हार gaye...chud गए मेरे 1000 रस पर फिर अगले में मैंने फिर से 1000 लगाए इस बार हमें बड़ा लक्ष्य मिला था और मुझे किसी पर भरोसा नहीं था अपनी टीम में तो मैं तब तक बैटिंग करता रहा जब तक जीत न गए.. खैर सुकून मिला की 1000 बच गए..
अगला मैच फाइनल था जो जीतेगा वो जीत कर जायेगा इस बार भी पहले उनको बैटिंग थी.. सालो ने हमारे बोलेरों को बहुत मारा.. और फिर से पहाड़ जैसा लक्ष्य...
इस बार मैं ज़िद्द करके ओपनिंग गया दूसरी तरफ से ऐसे चूतिये उतरे की 3 ओवर में 4 विकेट गिरवा दिए पहिए जग्गू आया.. मैंने और जग्गू ने मिलकर ाचा खेला और खूब पिटाई की गेंदबाजों की पर फिर साला जग्गू कैच पकड़कर आउट हो गया.. एक दो विकेट और गिर गए फिर अनुज आया अनुज ने पहली बॉल खेली और उसी पर चक्का जड़ दिया मैं हैरान रह गया हमारी टीम वाले चिल्लाने लगे... एक छक्के ने पूरी टीम में जोश भर दिया मुझे भी भरोसा सा हो गया की चल अनुज कुछ तो बना hi लेगा और फिर मैं भी पेलने लगा और अंत में मैंने और अनुज ने मैच जीता दिया..
मैच ख़तम हुआ तो 1000 के फायदे के साथ मैं घर चल दिया रस्ते में अनुज और जग्गू को 250-250 रस पकड़ा दिए वो भी खुश हो गए मैंने 500 रखे जेब में..
साला मैच खेलने में समय का पता hi नहीं चलता अँधेरा हो आया था जब हम घर पहुंचे.. मौसा और पापा बाघ गए हुए थे घर पर अब भी चरों औरतें थी... खाने की तैयारी हो रही थी मैं और अनुज गंदे हो गए थे तो बरी बरी से नहाये.. तब तक मौसा और पापा भी आ गए थे साथ में राजन चाचा भी थे माँ ने साफ़ बोल्दिया था की आज सब लोग यहीं खाना खाएंगे...
खैर जब तक औरतें खाना बना रही थी तो मर्द बातों में लगे हुए थे कोई खेल की तो कोई राजनीति की... जब खाना बन गया तो सबने खाना खाया काफी स्वादिष्ट और कई तरह की सब्ज़ियां बनाई थी.. सबने पेट भर के खाया फिर सरे काम ख़तम करके सब लोग आंगन में hi बैठ गेट खातों पर एक खाट पर पापा मौसा और राजन चाचा.. एक पर माँ मौसी ममता चची और एक पर पल्ली मैं और अनुज.. बातें चल रही थी...
तभी पापा बोले- अरे सुनो तुम्हारे लिए साड़ी लाये थे वो देखि तुमने?
मौसा- हाँ साड़ियां नहीं निकली क्या बैग से..?
Mausi-kaunsi साड़ी.
Papa-are सरिया खरीदी थी तुम्हारे लिए बाजार से देखो बैग में होंगी... शैलेश वाले..
Maa-acha हमें लगा उसमे उनका सामान है तो देखा hi नहीं..
Palli-are वाह नयी नयी सरीयां तै जी और मौसी के लिए..
पापा- सिर्फ तै जी और मौसी के लिए नहीं.. तेरी मम्मी के लिए भी है ..
ममता चची- मेरे लिए... क्यों लाये भाई साब...
Mausa-are भाभी उसमे 4 सरीयां हैं जो जिसको पसन् हो रखलो..
पल्ली- फिर तो मैं भी एक लुंगी...
राजन चाचा- पल्ली छुपकर भाभी के लिए हैं वो...
माँ- भैया ख़बरदार अगर मेरी बच्ची को कुछ कहा तो... उसे जो लेना है वो लेगी... इतनी प्यारी गुड़िया है मेरी...
पल्ली खुश हो गयी वहीं चाचा और चची भी मुस्कुराने लगे..
राजन चाचा- भाभी तुम्हारे लाड ने hi बिगाड़ा है इसको..
Maa-are हाँ बहुत बिगड़ी है ये...
पल्ली- पापा कहाँ बिगड़ी हूँ मैं सरे काम करती हूँ..
ममता चची- बस अब चुप हो जा जीजी ने बोल दिए न साड़ी ले ले तो..
पल्ली दौड़कर गयी और बैग खींचकर लेकर सबके बीच में रख दिया और खोलने लगी
अनुज- और मेरे लिए क्या लाये हो!?
Me-thappad..
सब हंसने लगे...
Anuj-maa देखो...
मौसा- अरे ऐसा हो सकता
है की अपने अनुज साब के लिए हम कुछ न लाएं? बैग में देखो क्या है..
अनुज भी पल्ली के साथ कूद पड़ा बैग खोलने में.. पल्ली ने चरों साड़ियां निकली और अलग हो गयी... और माँ मौसी और चची की खत पर जाकर उन्हें दिखने लगी...
फिर अनुज ने दो डब्बे निकले उन्हें खोला तो बड़े hi प्यारे जूते थे...
मौसा- ये हैं तुम्हारे अनुज साब और एक जोड़ी कर्मा के लिए..
मैंने अपने जूते देखे मुझे बहुत पसंद आये... हलके और सुन्दर थे... उधर औरतें साड़ी में लगी हुई थी ये अच्छी है ये मैं लुंगी वगेरा वगेरा...
माँ- अरे तुम लोग अपने लिए क्या लाये हो...
पापा- हमें क्या ज़रुरत थी...
Mausi-are जब सबके लिए लिया तो अपने लिए भी लेना चाहिए था जीजाजी...
मौसा- अरे भाईसाब तो ले hi नहीं रहे थे मैंने ज़िद्द करके दिलवाये हैं बैग में देखो सबसे नीचे...
अनुज ने सबसे नीचे से निकले तो तीन पैकेट थे एक मैं शर्ट पंत थे जो मौसा ने पापा को पकड़ा दिए एक मैं सुन्दर सा कुरता पजामा था जो मौसा ने राजन चाचा को पकड़ा दिया और एक में जीन्स टीशर्ट थी जो मौसा की थी..
राजन चाचा- अरे भाई साब ये कुरता मेरे लिए क्यों?
पापा- तुझे भी चूं छान करने की आदत है ये नहीं रखले चुप चाप...
इस बात पर पल्ली और चची तेज़ी से हंसने लगे...
माँ ने पापा को डांटा ऐसे बच्चों के सामने दन्त रहे हो भैया को...
राजन चाचा- अरे नहीं भाभी ये दांत नहीं प्यार है मुझे बड़ा ाचा लगता है जब भैया किसी बात के लिए डाँटते हैं तो...
मौसी- तो रखलो अब कुरता पजामा जीजाजी..
ममता चची- अब भाई साब ने बोल दिए न अब तो रखना hi पड़ेगा...
अनुज ने इतने में अपने जूते पहन भी लिए थे...
अनुज- देखो कितने अचे लागृहे हैं न..
मौसी- हाँ लल्ला बड़े जाँच रहे हैं... सही से आ रहे हैं न..
अनुज- हाँ मौसी एक दम फिट..
मौसा- कर्मा ज़रा तू भी पहन के देख अपने...
में- अभी देखता हूँ
और फिर मैंने भी पहने वाकई काफी अचे जूते थे पेअर में पता hi नहीं लग रहे थे और फिटिंग भी गज़ब की थी...
में- अरे बहुत मस्त हैं ये तो मौसा जी पता hi नहीं चल रहे पैरों में एक दम पत्ते जैसे हैं...
मौसा- हैं न क्वालिटी के...
में- हाँ ाचा हम दोनों ने तो पहन लिए अब बाकि सब भी पहन कर देखो न अपनी अपनी चीज़ें..
पल्ली- हाँ सब दिखाओ..
पापा- अरे देख लेंगे कभी बाद में अब्बी क्या ज़रुरत है...
मौसी- क्यों ज़रुरत नहीं है जीजाजी हमें भी देखना है कैसे लगेंगे कपडे... सब पहन कर दिखाओ..
मौसा- ाचा तो तुम लोग भी साड़ी पहनकर दिखाओ...
ममता चची- साड़ी के लिए ब्लाउज अभी सिला थोड़े hi न है वो सिलेगा तभी पहनेंगे...
राजन चाचा- अरे तो पुराने ब्लाउज के साथ hi पहन लेना काम से काम साड़ी तो पहनो...
Mausi-dekhna पड़ेगा..
पापा- अरे क्या देखना पड़ेगा पहनो और दिखाओ कैसी हैं सारीयां..
माँ- तुम भी शुरू हो गए सबके साथ...
पापा- सही तो बोल रहा हूँ...
में- ाचा तो ये तय हुआ सब अपनी अपनी चीज़ें पहन कर दिखाएंगे... मैं और अनुज पहन चुके हैं तो एक एक करके सब लोग जायेंगे अंदर और पहनकर बहार आएंगे...
पल्ली- मंज़ूर है...
मौसी- को सबकी तरफ से बोल पड़ी ये...
में- तो सबसे पहले मौसा जी..
मौसा- मैं क्यों सबसे पहले...
पल्ली- अरे जाओ न मौसा जी जाना तो है hi तो पहले आप hi चले जाओ.
तो मौसा उठ कर अंदर गए सब बातें करते हुए इंतज़ार करने लगे... थोड़ी देर बाद मौसा बहार निकले जीन्स और टीशर्ट पहनकर..
पल्ली- वाह मौसा जी...
ममता चची- बहुत अचे लग रहे हैं भैया जाँच रहे हैं एक दम...
मौसा जी की बॉडी फौज ने होने की वजह से हटती कटती थी तो उनके शरीर पर कपडे अचे लग रहे थे एक दम फिट आ रहे थे.
माँ- हाँ भैया रंग भी जाँच रहा है और नाप भी...
मौसा खड़े खड़े शर्मा रहे थे..
मौसी- अरे देखो तो शर्मा कैसे रहे हैं..
Mausa-chup कर तू...
और फिर मौसा जी बैठ गए अपनी जगह पर..
Me-ab बरी है राजन चाचा की...
राजन चाचा- अरे हम कहाँ अभी पहनेंगे ये...
Palli-tauji देखो पापा फिर मन कर रहे हैं..
राजन Chacha-are बस मेरी माँ जा रहा हूँ..
और फिर राजन चाचा उठ कर गए कमरे में बाकि सब हंसने लगे...
थोड़ी देर बाद बहार आये शरमाते हुए..
Me-are वाह चाचा गजब लग रहे हो..
Palli-are पापा बिलकुल hi बदल गए तुम तो..
अनुज- और क्या काम समझा है चाचा को..
मौसी- मस्त लग रहे हो जीजा... दूल्हे जैसे देखो कहीं जीजी का दिल दोबारा न हो जाये शादी का...
राजन चाचा- अरे दोबारा भी इसी से करनी पड़ेगी क्या?
सब हंसने लगे..
ममता चची- नहीं नहीं तुम्हारे लिए तो हीरोइन आएगी koi...zara अचे क्या लगने लगे तो कितना बन रहे हैं..
Maa-are बस लड़ना बंद करो dono...bachhe बन जाते हो तुम दोनों भी..
फिर चाचा भी अपनी जगह बैठ गए...
में- अब जायेंगे पापा...
पापा- अभी जाता हूँ पता नहीं तुम लोग क्यों शर्मा रहे थे.. कोई बड़ी बात थोड़ी hi है..
Mausi-je बात जीजा...
सब खिलाकर हंस पड़े... और पापा अंदर चले गए बाकि सब बातों में लगे थे
थोड़ी देर बाद पापा बहार आये थोड़ा शरमाते हुए .
मौसी ने उन्हें देखते hi सीटी मारी..
मौसी- वाह जीजा एक दम हीरो लग रहे हो...
पल्ली- सच में ताऊजी बहुत जाँच रहे हो..
पापा शर्ट पंत में सच में काफी अचे लग रहे थे.. खेतों में काम की वजह से उनका शरीर भी गठीला था जिससे कपडे फिट आ रहे थे उन्हें..
Mausa-bhai साब बाजी मार ली अपने तो..
ममता चची- भाई साब बहुत अचे लग रहे हो...
माँ- क्या बात है जी और क्यों नहीं पहनते ऐसे कपडे...
पापा- और की छोड़ अभी की देख...
Maa-dekh के hi बोल रही हूँ...
में- क्या बात है papa...sach में हीरो बन गए..
Papa-chalo अब तुम लोग अब अगला कौन जायेगा ये बताओ..
और अपनी जगह आकर बैठ गए...
Me-ab पल्ली की बरी...
पल्ली तो जैसे इसी इंतज़ार में थी..
Palli-maa चलो न साड़ी बांध देना मुझसे ठीक से बांधेंगी नहीं...
माँ- हाँ ममता चली जा और देख नीचे वाली अलमारी में छोटे ब्लाउज पड़े होंगे वो पहना कर देख आ जाएं इसे तो..
ममता चची और पल्ली चले गए...
बाकि सब बातें करने लगे...
थोड़ी देर बाद पल्ली ममता चची बहार आ गयी..
माँ- पल्ली कहाँ रह गयी...
चची अपनी जगह पर आकर बैठते हुए boli-aa रही है बस..
इतने में गेट से पल्ली भी निकली..
पल्ली को देखते hi सब की आँखें उस पर जैम सी गयी.. पल्ली ने अपने लिए एक ग्रे साड़ी पसंद की थी.. हम सब जो आजतक उसे सूट या बाकि कपड़ों में देखते आये थे साड़ी में देखकर बिलकुल हैरान रह गए साड़ी में पल्ली बेहद खूबसूरत लग रही थी.. अचे से तैयार होकर आई थी... और बेहद खूबसूरत लग रही थी

ब्लाउज के नीचे से झांकती नंगी कमर और पारदर्शी साड़ी के पीछे से हलकी हलकी नज़र आती हुई नाभि पल्ली को कामुक बना रही थी...
औरतों का पता नहीं पर मर्दों की नज़र तो नहीं हैट रही थी उससे जिनमे उसके पापा भी शामिल थे... मेरा लुंड भी थोड़ा टाइट हो चूका tha...anuj भी मनो खा जाने वाली नज़रों से देख रहा था..
मैंने सरे मर्दों की गॉड में नज़र डाली तो थोड़ा सा उभर तो सबके पंत या पाजामे में दिखा... राजा. चाचा भी अपनी बेटी की जवानी देखकर कड़क हो रहे थे...
माँ- अरे मेरी गुड़िया को किसी की नज़र न लगे बहुत प्यारी लग रही है..
Mausi-saxh दीदी पता hi नहीं चला की पल्ली इतनी बड़ी और सुब्दर हो गयी है..
Palli-subder तो मैं हमेशा से hi हूँ..
Papa-sach में पल्ली बिटिया बहुत सुन्दर लग रही है..
में- सच में सोचा नहीं था की साड़ी में ये ऐसी लगेगी...
मौसा- अरे पल्ली सूंदर है इसलिए ये साड़ी अछि लग रही है उसपर...
राजन Chacha-bachhhe कब बड़े हो जाते हैं पता hi नहीं चलता..
म चची- सही कहा ग..
पल्ली- अछि लगी न साड़ी
Me-bahut अछि फिर पल्ली अपनी जगह पर आकर बैठ गयी...
में- तो अब अगला नंबर है हमारी चची का...
म Chachi-are मेरी बरी आ भी आ गयी... चलो आती हूँ अभी..
ममता चची साड़ी उठाकर अंदर चली गयी थोड़ी देर बाद बहार आई.. चची ने
एक हरे रंग की सिंपल साड़ी चुनी थी जिसे पहनकर वो बहार आई बिलकुल सिंपल लग रही थी पर चची का बदन hi कुछ ऐसा था किसिमप्ले साड़ी भी उनपर कामुक लग रही थी... आधी नंगी कमर और गहरी नाभि देखकर मेरा क्या सबका लुंड फन उठा रहा था...

मौसा और पापा कुछ ज़्यादा hi ध्यान से देख रहे थे इस कमरे में वो hi सो ऐसे थे जिन्होंने चाची के कामुक बदन को भोगा नहीं तथा...
मर्द चाहे जितना भी शरीफ क्यों न हो औरत का बदन होता hi ऐसा है की मर्द को भटका hi देता है...
पापा और मौसा की नज़रें पहले पल्ली तो अब उसकी मम्मी के बदन से हटने का नाम hi नहीं ले रही थी...
माँ- अरे वाह इतनी सादा साड़ी में भी कितनी खिल रही है ममता तू..
Mausi-sach में जीजी... बहुत सूंदर लग रही हो सदा साड़ी भी बहुत जाँच रही है...
Palli-haye मेरी मम्मी नज़र न लगे..
Me-haye मेरी सूंदर चची...
Anuj-haaye मेरी प्यारी चची...
पापा- अरे सादा चीज़ें hi अछि लगती हैं.. सदा रहने वाली औरत hi ज़्यादा सूंदर लगती है..
Mausa-sahi कहा भाई साब ममता भाभी को hi देख लो..
म Chachi-are बस बस भैया तुम भी न..
र Chacha-sahi कह रहे हैं भाई साब खिल रही है तू...
चची शर्मा gayi...are बस आप सब भी न... और अपनी जगह आकर बैठ गयी...
में- अब बरी है मौसी की...
Mausa-jab तबसे बहुत बोल रही थी..
मौसी - जा तो रही हूँ..
मौसी उठ कर चली गयी हम सब बातें कर रहे थे साथ hi पापा और मौसा जी पल्ली और चची को चिप चिप कर ताड़ रहे थे... मैं और अनुज भी कहाँ पीछे थे...
खैर थोड़ी देर बाद मौसी बहार आई और रुक कर कड़ी हो गयीं...
हमारी नज़र एक बार फिर से गेट पर जैम gayi..mausi ने एक क्रीम कलर की साड़ी पहनी थी पूरे ब्लाउज के साथ कहने को बिलकुल सदा सरल पर उनके अंग ऐसे थे जो साड़ी मैं से उनके जिस्म का हर कटाव महसूस हो रहा था... उनकी बड़ी बड़ी छुछियां ब्लाउज में छुपी हुईं कमर और पेट जो साड़ी के उस पार हल्का हल्का नज़र आ रहा था..

ब्लाउज के बीच में लटकता मंगलसूत्र... ब्लाउज सीने. से थोड़ा खुला था तो हलकी सी घाटी नज़र आ रही थी...
इस बार भी सरे मर्दों की निगाहें वहीं जमी रह gayi...papa चाचा मैं अनुज लार टपका रहे थे पर बिना ज़ाहिर किये..
म Chachi-are वाह शालू ये रंग तो तुझपर बहुत ाचा लग रहा है..
Palli-haan मौसी और साड़ी भी कितनी अचे से पहनी है तुमने बहुत सुन्दर लग रही हो..
माँ- हाँ रे शालू अछि साड़ी चुनी है तूने बहुत सूंदर है... ऐसा लग रहा है तेरे लिए hi बानी है...
Papa-sach में ये साड़ी तो हमारी साली साहिबा के लिए hi बानी है पापा ने ये बात पंत में तम्बू को दबाते हुए कही..
राजन चाचा- सही बोले भैया बहुत सूंदर लग रही हो साली जी...
Mausi-are नाम छोड़कर ये क्या साली साली लगा रखा है...
Papa-jo है वो hi बोल रहे हैं हम तो...
मौसा- क्या बात है बीवी साहिबा सच में सूंदर लग रही हो...
Mausi-tumne भी नाम छोड़ दिया..
मौसा- हम भी जो है वही बोल रहे हैं...
सब लोग हंसने लगे...
में- वाह मौसी गजब लग रही हो...
Anuj-haan नयी दुल्हन जैसी...
पल्ली- ये अलग hi बोलता है..
Anuj-tu चुप कर..
म चची- तुम दोनों chupkaro...aur जीजी अब तुम्ही रह गयी हो ये लो साड़ी..
माँ ने चची के हाथो से साड़ी ली और फिर देखकर boli-are ये तो बड़ी पतली है ऐसी हलकी साड़ी हम नहीं पहनते...
पापा- जब सबसे आखिरी में बची हुई लोगी तो पसंद की थोड़े hi मिलेगी..
Mausi-jeeji सही तो है हमारी भी वैसी hi थी..
Mausa-haan भाभी इतने प्यार से लाये हैं अब मन मत करो..
Maa-par ऐसी पहनते नहीं है न इसलिए...
म Chachi-are जीजी कहीं बहार थोड़े hi जाना है घर पर hi तो हो पहन कर देखलो न पसंद आये तो बाद में मत पहनना..
Papa-are देखले न पहनकर...
Palli-haan तै जी देखो न..
Anuj-haan मम्मी पहेँलो..
Maa-theek है जाती हूँ... तुम सब भी ज़िद्द करके बैठ गए हो..
सब खुश हो गए और माँ भी उठ कर कमरे में चली गयी..
हम सब बातें करते हुए माँ का इंतज़ार करने लगे...
और फिर थोड़ी देर बाद कमरे का दरवाज़ा खुला और सबकी नज़रें उस तरफ गयी और फिर ठहर गयी ...
हलके लाल रंग की पारदर्शी सारी माँ ने पहनी हुई थी... हरे रंग के ब्लाउज के साथ सुंदरता के बारे में क्या hi कहूं माँ कितनी सूंदर थी ये सब जानते हैं.. पर सुंदरता के साथ साथ माँ के शरीर में एक चीज़ और थी जो सबसे अलग थी... उनकी कामुकता.. उनका बदन ऐसा था की वो कुछ भी पहनें मर्दों का लुंड देखते hi खड़ा हो जाता था...
खैर माँ धीरे धीरे चलते हुए हमारे सामने आई...

माथे पर बिंदी गले में मंगलसूत्र साड़ी के थोड़ा साइड से दिखती थोड़ी थोड़ी कमर पारदर्शी साड़ी से झांकता हुआ उनका पेट... ब्लाउज में बंद बड़ी बड़ी छुछियां... कुल मिलकर माँ का गदराया बदन नयी साड़ी में और कामुक और सूंदर लग रहा था..
पल्ली- वाह तै जी इतनी सूंदर लग रही हो.. मैं भी बस बड़ी होकर तुम्हारे जैसी सूंदर लागूं तो मज़ा आ जाये.. ये कहकर पल्ली ने सीटी मारी..
माँ- मेरे जैसी बुढ़िया नहीं तू तो अभी भी हीरोइन दिखती है और बाद में भी दिखेगी.
म चची- जीजी उसका पता नहीं पर अभी तो तुम हीरोइन लग रही हो..
मौसी- सही में ममता जीजी... बहुत सूंदर लग रही हैं जीजी...
हम मर्दों के मुँह में तो जैसे पानी hi सूख गया था माँ को देखकर मैंने एक एक करके सबकी और देखा तो पाया सरे मर्दों के पंत में तम्बू बना हुआ था चाहे वो मैं हूँ अनुज हो चाचा हो या मौसा हो या पापा hi क्यों न हो...
मौसा- भाभी सचमें बहुत सूंदर लग रही है आप पर साड़ी आप बेकार में मन कर रही थी...
चाचा- सही कहाँ शैलेश भैया भाभी सही में अति सुन्दर लग रही हो...
माँ- तुम लोग भी न... बिना बात के तारीफ कर रहे हो...
पापा- अरे बिना बात के नहीं सही बोल रहे हैं... कभी कभी तू खुद hi भूल जाती है की तू कितनी सूंदर है...
पापा की बात सुनकर माँ शर्मा गयी.
Maa-are बच्चों के सामने तो रहने दो..
Me-nahi पापा मत रहने दो..
Anuj-haan पापा हमें कोई परेशानी नहीं है...
Palli-mujhe भी नहीं खुल के तारीफ करो ताऊजी..
सब हंस रहे थे माँ कड़ी कड़ी शर्मा रही थी..
पापा- बिना बात के खुद को बुढ़िया समझती हो ज़रा एक बार हमारी नज़र से देखो तो पता चले की क्या चीज़ हो तुम..
सब पापा की बात पर खिल खिलाकर हंसने लगे.. माँ भी शर्मा रही थी और हंस रही थी...
माँ- शैलेश भैया दारू पिलाके लाये हो क्या इन्हे.. कुछ तो शर्म करो बच्चों की...
माँ ये कहते हुए अपनी जगह पर बैठ गयी...
पापा- लो अब अपनी बीवी की तारीफ करना भी गलत है.. .
Mausi-kuch गलत नहीं है जीजाजी खुलकर करो...
मौसा- अच्छा मैं भी करूँ?
मौसी- नहीं तुम रहने दो
फिर सब हंसने लगे ऐसे hi मस्ती मज़ाक का मूड चल रहा था...
तभी पल्ली बोली- अरे सब लोग सुनो अगर सब साथ hi हैं तो कुछ खेलते हैं न अंताक्षरी वगेरा...
अनुज- हाँ हाँ मज़ा आएगा. खेलते हैं..
मौसा- बाकि सब से पूछलो..
मौसी- मैं भी राज़ी हूँ..
म चची- मैं भी खेलूंगी...
र चाचा- अरे पर मुझे ये गण वन तो नहीं आते..
म चची- अरे रहने दो तुम कितना गुनगुनाते रहते हो मैं सुनती नहीं क्या..
पापा- यार ये गण वन नहीं होगा हमसे...
माँ- खेल लो. न जब सबका मन है तो..
पापा- ाचा ठीक है अब तुम्हारे आर्डर को मन थोड़े hi कर सकते हैं...
माँ- बस रहने दो दोबारा शुरू मत हो जाओ..
पल्ली- तो दो टीम बनाते हैं ये सही रहेगा एक मैं औरतें और एक में सरे मर्द...
मौसी- पर ये तो 5 हैं और हम 4 है... बराबरी का मुक़ाबला कहाँ है..
पल्ली- पापा का होना भी बराबर hi है मौसी और हम लोग इन्हे आसानी से संभल सकते हैं...
म चची- तो ठीक है एक तरफ आप सब लोग और एक तरफ हम औरतें...
Me-theek hai..par थोड़ा कुछ और डाव पर लगाना होगा नहीं तो लोग ठीक से नहीं खेलेंगे...
Mausi-jaise क्या.?
जिस टीम पर पॉइंट चढ़ेगा उस टीम का एक बाँदा अगले गाने पर बीच में खड़ा होकर नाचते हुए जाएगा... और जीतने वाली टीम चुनेगी की कौन नाचेगा हरने वाली टीम से..
Maa-are ये गाने तक तो ठीक है नाचना वचन नहीं..
Papa-kyun दर. गयी अब..
Mausi-are दीदी सही है न ागत ये लोग हरे तो इन्हे भी नाचना पड़ेगा मज़ा आएगा सबको नाचते हुए देखने में खासकर जीजाजी को..
Maa-theek है वैसे मज़ा तो आएगा इन्हे नाचने में...
म Chachi-to ठीक है फिर तय रहा..
मौसा- ठीक हो जाये फिर..
और फिर खेल शुरू हो गया... उनकी टीम से पल्ली मौसी चची सब पूरे जोश में थे माँ भी बीच बीच में साथ दे रही थी...
हमारी टीम से अनुज मैं और मौसा थे मैं पापा और चाचा तो चुप hi थे...
खैर फिर पहला पॉइंट हम पर चढ़ गया और पल्ली ने सबसे पहले बोलै मौसा का नाम बेचारे मौसा शरमाते हुए खड़े huye..pahle तो कुछ समझ नहीं आया उनके की क्या करें फिर सबके उकसाने पर गेट हुए नाचने लगे... जैसा भी आता था हिले...
बाकि सब ताली बजा बजा कर उत्साह बढ़ा रहे थे सबके चेहरे पर हंसी थी.... गण गए कर मौसा अपनी जगह पर बैठ गए...
मौसी- अरे वाह मुझे कभी नहीं नाच के दिखाया तुमने...
Mausa-chup करो तुम और खेल आगे बढ़ाओ...
अगली बाज़ी औरतें हार गयी और मौसा ने बदले के लिए तुरंत पल्ली का नाम ले लिए..
इसके बाद सबकी तालियों के बीच पल्ली कड़ी हुई और फिर शरमाते हुए गण सजूरु किया और फिर शर्म वार्म भूलकर खुल कर नाचने लगी...

हम सब मर्दों का ध्यान पल्ली के थिरकते हुए मस्त बदन पर था उसकी गोरी कमर ब्लाउज में झूलती छुछियां हाय मुँह में पानी आ गया... पापा मौसा चाचा भी देखते हुए अंदर hi अंदर आहें भर रहे थे...
पर हर अछि चीज़ की तरह इसका भी अंत हुआ और पल्ली बापिस जाकर बैठ गयी... पर मर्दों के लुंड खड़े कर गयी... इसी बीच खेल दोबारा शुरू हुआ और इस बार हम हार गए और मौसी ने बलि का बकरा बनाया चाचा को...
अब सब का हँसके बुरा हाल के चाचा क्या करेंगे .. खैर चाचा खड़े हुए और सबके बीच आ गए... चची हंस रही थी उन्हें देखकर...
चाचा भी काम नहीं थे राजेश खन्ना की तरह हाथ घुमाया और नाचने लगे साथ hi गाने लगे चची को इशारा करके- चुप गए सरे नज़ारे हाय क्या बात हो gayi...tune काजल लगाया दिन में रात हो गयी...
और इस गाने पर तो सबसे ज़्यादा तालियां और सीटियां बजी.. चची का शर्म से बुरा हाल पर चाचा ने तो कमाल hi कर दिया... पापा ने खुद शाबाशी दी..
खेल फिर शुरू हुआ और आगे बढ़ा इस बार हमने बाप्सी की और जीत गए और चाचा ने मौसी का नाम बोल दिया...
तालियां बजी और मौसी बीच में आ गयी और फिर शरमाते हुए नाचने लगी अपनी साड़ी घुमा घुमा कर... कभी उनकी नंगी कमर सामने आ जाती तो कभी गदराये चूतड़ तो कभी बड़ी बड़ी छुछियां...

एक बार फिर से मौसी ने मर्दों के लुंड कड़क कर दिए अपने हुस्न के जलवा दिखा कर देखते देखते सोच रहा था क्या माल हैं मौसी यार... पता नहीं कैसे रहलेते हैं मौसाजी ड्यूटी पर उनके बिना..
मेरी ऐसी बीवी हो तो एक दिन न गुज़ारे बिना चुदाई के.. पर जैसी जिसकी किस्मत....
मौसी ने अपने गदराये बदन को थिरकाया जब तक गण ख़तम नहीं हुआ और फिर बैठ गयी तालियां बजा के सबने उनका उत्साह बढ़ाया..
र चाचा- वाह शालू बहुत ाचा नाच लेती हो तुम तो...
Mausi-are कहाँ जीजा नाचते तो आप हैं राजेश खन्ना जैसे..
सब हंसने लगे..
इसी हंसी ख़ुशी के बीच फिर से खेल शुरू हुआ और इस बार हम लोग हारे तो इस बार बलि का बकरा बना मैं...
पर अपने को किस बात की शर्म खड़ा हुआ गण गया नाच वाच के काम निपटाया और बैठ गया ... आगे गेम चला और अब हम फिर से हार gaye...is बार पापा hi बचे थे तो उनका नंबर आया..
पापा भी शरमाते हुए खड़े हुए पर फिर अचानक से देवानंद बन गए और माँ की तरफ देखकर गाने लगे...
पल भर के लिए कोई हमें प्यार करले झूठा hi सही...
पापा को देखकर सब हैरान रह गए हम सब सीटी मात के तालियां बजने लगे वहीं माँ अपना चेहरा धक् के हंस रही thi...papa ने गण ख़तम किआ और अपनी जगह आकर बैठे.. सबने खूब तालियां पीती पापा के kiye...khel आगे बढ़ा और किस्मत से हम जीत गए..
इसके आएगी क्या हुआ अगली अपडेट में प्लीज कमैंट्स करके ज़रूर बताएं कैसी लगी अपडेट बहुत बहुत शुक्रिया





















