मैंने भी खड़े होकर माँ के होंठों को चूमा तो मुझे मेरे hi रास का स्वाद आया.. फिर माँ मुझे दूध पाइक सोने को बोलकर चली गई... मैंने जल्दी से दूध पिया और झड़ने के बाद चैन की नींद आई...
अपडेट 85
रात को अचे से सोने के बाद सुबह सुबह आँख खुली कुछ देर लेता रहा.. सुबह थी तो लुंड भी खड़ा था पर कोई फायदा नहीं था क्यूंकि अभी चुदाई तो होने से रही है तो लुंड और आँखें दोनों मसल कर
उठ कर गया फ्रेश हुआ बहार सब लोग आंगन में थे... माँ ने चाय वगेरा दी वो पापा और अनुज के साथ बैठ कर पिने लगा..
नाश्ता कर लिए तो पापा ने बोलै की बाघ में जाकर जानवरों को पानी पीला दे और चारा भी दाल दूँ..
मैं घर से निकल लिए सीधा बाघ में पहुंचा वहां सभी जानवरों को पानी चारा डाला पानी पिलाया और घर की तरफ के लिए निकला hi था की जग्गू का फ़ोन आया.
में- हाँ बीटा क्या बात है?
जग्गू- भाई जल्दी से घर आ...
में- क्या हुआ?
जग्गू- मम्मी पापा खेत की तरफ गए हैं अभी काम बन सकता है..
में- ठीक है आता हूँ...
मैंने फ़ोन कटा और सीधा जग्गू के घर की तरफ लपका...
वहां पंहुचा तो जग्गू घर के बहार hi मेरा इंतज़ार कर रहा था...
में- चल भाभी क्या कर रही हैं...
Jaggu-ghar में है सफाई कर रही है..
Me-aur भग्गू ?
Jaggu-wo तो सुबह hi निकल गया... कहीं..
में- चल ठीक है..
मैं और जग्गू अंदर गए तो देखा की भाभी आंगन में सफाई कर रही थी...
आये किसी भी काम से हो पर साला भाभी को देखते hi लुंड कड़क होने लगा पर क्या करें भाभी माल hi ऐसा थी साड़ी और ब्लाउज के बीच झांकती नंगी कमर और आधी बहार झूलती छुछियां... लुंड कैसे न खड़ा हो

झुकने की वजह से छुछियां बहार को गिरती हुई लग रही थी मनो ब्लाउज फाड़ के बहार आ जाएँगी...
खैर मैंने सोचा जिस काम के लिए आये हैं वो किआ जाये पहले.. आंगन में पजंचते hi भाभी ने हमें देखा
और मुझसे बोली- क्या बात है लल्ला आज सुबह सुबह hi दर्शन करवा दिए..
में- बस भाभी तुमसे hi मिलने आया हूँ..
भाभी मेरी बात सुनकर थोड़ा चौंककर मुझे देखने लगी..
भाभी- मुझसे, वाह भाई मुझसे क्या काम पद गया...
में- बहुत दिन हो गए भाभी तुम्हारे हाथों की चाय नहीं पि..
भाभी मुस्कुरा कर बोली- अरे लल्ला हम तो हमेशा तैयार हैं चाय पिलाने के लिए तुम आते hi कहाँ हो...
में- आज तो आ गया भाभी आज पिलादो..
भाभी- बिलकुल बैठो तुम अभी ले...
में- भाभी सुनो अपने लिए भी ले आना साथ में पिएंगे सब...
भाभी मुस्कुरा कर चली गयी..
अब मेरी गांड फैट रही थी इंतज़ार करते हुए की कैसे बात करें भाभी से कई भड़क गयी तो...
में- अबे कैसे बात करें..?
Jaggu-mujhe क्या पता इसीलिए तो तुझे बुलाया है...
में- मैं क्या जादूगर हूँ जो भाभी को सम्मोहित करके कुछ भी पूछ लूंगा...
जग्गू- भाई अब ऐसे मत कर तूने hi पहले बोलै था की तू पूछेगा...
में- हाँ सेल बोलै था पर अब समझ नहीं आ रहा की कैसे पूछूं क्या पूछूं...
जग्गू- भाई बात तो करनी hi पड़ेगी...
हम ऐसे hi लड़ रहे थे की तभी भाभी आ गयी...
Bhabhi-are भाई कैसी बात करनी है ..
में- अरे कुछ नहीं भाभी बैठो आप..
भाभी ने सबको चाय दी हम दोनों खत पर बैठे थे भाभी खत के बगल में एक पतली पर बैठ गयी...
Bhabhi-haan लल्ला अब बताओ कैसी बात???
Me-wo भाभी ऐसे hi कुछ नहीं..
Bhabhi-kuch तो ज़रूर है... बताओ जल्दी..
में- अरे कुछ नहीं भाभी मैं तो अपनी शादी की बात कर रहा था...
भाभी- है दय्या शादी हो रही है लल्ला तुम्हारी?
में- नहीं भाभी मैं बोल रहा था की शादी करनी है मुझे aapse...nahi मतलब आपके जैसी कोई मेरे लिए भी ढूंढ दो...
भाभी- अरे लल्ला बड़े हो गए हो तुम तो और मज़ाक भी करने लगे हो पहले तो पूछने पर भी ज़बान नहीं खुलती थी और अब शादी की बात कर रहे हो...
Me-haan भाभी करनी तो है hi एक दिन तो चाहता हूँ तुम्हारे जैसी बीवी मिले?
Bhabhi-acha मेरे जैसी hi क्यों चाहिए?
में- क्यूंकि भाभी तुम कितनी सुन्दर हो और घर का सारा काम भी करती हो सबका ध्यान रखती हो..
तो मुझे भी ऐसी बीवी चाहिए जो ये सब करती हो..
भाभी अपनी तारीफ सुनकर तोफा शर्मा गयी और खुश हो गयी.. जो हर औरत करती है...
भाभी- लल्ला अब हमारे जैसी तो नहीं मिल सकती ऐसा करो तुम हमेसे करलो..
में- अरे भाभी कैसा मज़ाक करती हो तुमसे कार्लिअ तो भग्गू भैया का क्या होगा?
Bhabhi(thoda सोच में पड़ते हुए)- उनका तो अब भी कुछ नहीं हो सकता.. काम से काम बचा कुछ सुख तो मिल जायेगा मुझे...
मैंने सोचा यही सही वक़्त है बात करने का
Me-bhabhi कोई परेशानी है क्या?
भाभी- नहीं लल्ला क्या hi परेशानी होगी?
में- सच में भाभी देखो अगर तुम हमें अपना मानती हो तो ज़रूर बातएंगी..
Bhabhi-aisa क्यों बोल रहे हो लल्ला कुछ भी होगा तो ज़रूर बताउंगी
में- नहीं भाभी अभी भी तुम कुछ छिपा रही...
भाभी थोड़ा झुंझलाहट में बोली- ओह्हो लाला कुछ नहीं छुपा रही तुन्हे ऐसा क्यों लगता है...
में- भाभी तुम कल्लू से बात करती हो?
ये सुनते hi भाभी के चेहरे का रंग उड़ गया..
भाभी- कक क्या बकवास कर रहे हो लल्ला... म मैं क्यों बात करुँगी उससे...?
में- भाभी देखो सच सच बतादो हम आपस में hi rakhenge...kisi को पता नहीं चलेगा..
भाभी कभी जग्गू की तरफ तो कभी मेरी तरफ देख रही थी..
जग्गू और मेरी नज़र भाभी पर तिकी हुई थी...
Bhabhi-nahi मैं बात नहीं करती....
में- ाचा भाभी नहीं करती तो तुम्हारे मोबाइल में कल्लू के मश्ग क्यों हैं..
साथ hi फ़ोन भी आये हैं...
भाभी का तो जैसे चेहरा hi सफ़ेद पद गया था और फिर वही हुआ जिसकी मुझे उम्मीद थी.. भाभी आंसुओ की गंगा जमुना बहाने लगी..
में- भाभी कुछ बताओ तो सही रो मत..
भाभी चुप होने का नाम hi नहीं ले रही थी.. मैंने जग्गू दे पानी लेन को बोलै वो पानी लाया भाभी को पिलाया फिर थोड़ा भाभी शांत हुई..
में- अब बताओ भाभी पूरी बात?
भाभी- लल्ला मैं तुम लोगो के पेअर पड़ती हूँ ये बात किसी को मत बताना मैं मरजाऊँगी..
में- भाभी ये सब तो करने से पहले सोचना चाहिए था न क्यों. करती थी उससे बात...
भाभी- लल्ला मैं जानबूझकर नहीं करती थी वो जबरदस्ती करवाता था मुझसे..?
में- झूठ मत बोलो भाभी वो जबरदस्ती कैसे कर लेगा...
भाभी- वो करता है नहीं करुँगी तो वो नुझे बर्बाद कर देगा
में- ऐसे कैसे बर्बाद कर देगा... कोई किसी को बर्बाद नहीं कर सकता..
भाभी- लल्ला अब तुम्हे कैसे समझों मैं..
में- जो भी बात है पूरी बताओ...
भाभी मेरी बात सुनकर जग्गू की तरफ देखने लगी..
में- ये भी किसी को नहीं हटाएगा और भाभी जितना बुरा तुम समझती हो इसे उससे कहीं ाचा है . सबसे पहले इसी को पता चला की तुम कल्लू से बात करती हो ये चाहता तो तुरंत घर में बता देता पर इसने पहले मुझे ये बताया और ये जानने की कोशिश की तुम यव कर क्यों रही हो...
भाभी मेरी बात सुनकर जग्गू की और देखकर रोने लगी...
में- भाभी अब रो मत और खुल कर बात बताओ पूरी..
भाभी- वो लल्ला तुम्हारे भैया दो तीन महीने पहले कल्लू के साथ hi घूमने लगे थे वो इन्हे दारू पिलाता और ये पूरे दिन उसके साथ पड़े रहते... मुझे वो आदमी बिलकुल पसंद नहीं था तो कई बार मैंने बोलै की मत घूमो उसके साथ पर तुम्हारे भैया ने मेरी आज तक कहाँ hi सुनी है...
फिर कुछ दिनों में उसका इनके साथ घर आना जाना भी हो गया... मैं भी कुछ नहीं कह पति थी न hi मम्मी जी और पापाजी... तुम्हारे भैया की वजह से....
मैंने जग्गू की तरफ देखा तो उसने भी हाँ में सर हिला दिया ..
में- फिर
भाभी- ऐसे hi चल रहा था फिर शादी में जाने के लिए कपडे वगेरा लेने एक दिन मम्मी जी भैया और पापाजी सुबह hi बाजार चले गए... मैं घर में अकेली थी... काम कर रही थी की कुछ देर बाद तुम्हारे भैया और कल्लू धुत्त नशे में घर आये ...
इनसे तो चला भी नहीं जा रहा था... खैर कल्लू इनको पकड़े हुए कमरे तक ले गया वहां बिठा दिया तो ये मुझपे चिल्लाने लगे...
भग्गू- आईये चलललल साली मेरे दोस्त के लिए पकोड़े बना...
मैं क्या hi करती गयी तुरंत जल्दी जल्दी पकोड़े तैयार किये.. और देने चली गयी... जब पकोड़े रख रही तो मैंने देखा कल्लू मुझे अजीब सी नज़रो से देख रहा है मैंने जल्दी से पकोड़े रखे और बहार आकर काम निपटने लगी कभी आधे घंटे बाद मैंने कमरे में झांक कर देखा तो ये तो मुझे पलंग पर सोते हुए दिखे पर कल्लू मुझे कही नहीं दिखा तो मैंने देखा दरवाज़ा भी खुला है लगता है चला गया..
Me-pHir
भाभी- फिर क्या मैंने काम निपटा hi लिया था... तो अपने कपडे लेकर बाथरूम में नहाने चली गयी...
मैं नहीं और बाथरूम से कपडे पहनकर निकली तो सामने देखकर मैं दर गयी सामने कल्लू खड़ा था..
भाभी- टटटूयमममम यहाँ क्या कर रहे हो???
कल्लू अपनी गन्दी हंसी हँसता हुआ बोलै- भाभी बड़ी देर लगाडी नहाने में...
भाभी- ये क्या बेशर्मी है... कैसी बातें कर रहे हो कल्लू...
कल्लू- भाभी सही तो बोल रहा हूँ...
मैं साइड हटकर जाने लगी तो वो मुआ सामने खड़ा हो गया...
भाभी- रास्ता छोड़ मेरा कल्लू...
Kallu-ka भाभी छोडो से सीधा छोड़ और भैया से सीधा कल्लू... इतनी जल्दी..?
Bhabhi-kallu सामने से हैट नहीं तो बहुत बुरा होगा...
कल्लू- कुछ बुरा नहीं होगा मेरी जान और ये कहकर उसने मेरी कमर में हाथ दाल लिए... मैं तो बुरी तरह दर गयी... एयर चीखने लगी की उसने मेरा मुँह हाथ से दबा दिया...?...
जिससे मेरी चीख डाब कर रह गयी...
कल्लू- अरे भाभी चीखो मत एक चीज़ तो देखलो..
और उसने मेरी कमर से हाथ hataya.aur अपनी जेब से फ़ोन निकला और मुझे दिखने लगा पहले तो मैं बस उससे छूटने का प्रयास करती रही पर तभी मेरी नज़र फ़ोन पर पड़ी तो देखा उसमे मेरी नहाते हुए की नंगी तसवीरें हैं मैं तो बिलकुल दर hi गयी...
Jaggu-us हरामजादे को मैं ज़िंदा ज़मीन में गाड़ दूंगा...
जग्गू गुस्से में खड़ा होकर बोलै..
में- अरे रुक तो सही पूरी बात तो पता करने दे...
भाभी- भैया शांत हो जाओ...
मैंने हाथ पकड़ कर जग्गू को बिठा लिए..
में- भाभी आगे क्या हुआ...
भाभी- भैया आगे का कैसे बताऊँ बताने में भी शर्म आती है...
में- भाभी शर्माओ मत ये बात बहुत ज़रूरी है और हम तीनो के बीच hi रहेगी चिंता मत करो...
भाभी- उसने एक एक करके मुझे साडी तसवीरें और वीडियो दिखाई मैं अपनी नंगी तसवीरें देख कर दर गयी.. और उससे बोली..
भाभी- कल्लू तूने मेरी ऐसी तसवीरें क्यों ली हैं तुझे शर्म नहीं आती मेरे पति को दोस्त कहता है और ऐसी हरकत..
कल्लू- अरे भाभी इसमें कैसी शर्म... और भाभी तुम्हारा बदन देखकर रहा नहीं गया सोचा इसे तसवीरें में उतार लूँ...
भाभी- बद्तमीज़ और मैंने उसे थप्पड़ मरने के लिए हाथ उठाया तो उसने मेरा हाथ पकड़ कर घुमा दिया और मुझे खुद से चिपका लिए और पीछे से खुद मुझसे चिपक गया...
Kallu-ab सुनो भाभी प्यार से... जो मैं कहूं करती जाओ नहीं तो तुम्हारी ये तसवीरें पूरे गाओं में दिखा दूंगा.. तो सोचो तुम्हारा क्या हाल होगा...
मैं तो इस ख्याल से hi बुरी तरह काँप गयी और रोने लगी
भाभी- नहीं ऐसा मत करना मैं तुम्हारे हाथ जोड़ती हूँ... मैं बर्बाद हो जाउंगी...
कल्लू- तभी तो बोलै जो कहूं करती जाओ तो कुछ नहीं होगा....
भाभी- तुम किसी को सव्हमें नहीं दिखाओगे न...
कल्लू- अगर जो मुझे चाहिए मुझे मिल गया तो नहीं दिखाऊंगा.
और ये कहकर उसने मेरा पल्लू सीने से नीचे गिरा दिया... मैंने उठाने लगी तो बोलै- लगता है बात समझ नहीं आई भाभी तुम्हारे...
मैंने पल्लू को वैसा hi छोड़ दिया और सीढ़ी हो गयी वो अब भी पीछे से मुझसे चिपका हुआ खड़ा था...
और अब अपने हाथ मेरी कमर पर और पेट पर फिरने लगा और मसलने लगा...
भाभी- कल्लू ऐसा मत करो.. मेरी शादीशुदा ज़िंदगी बर्बाद हो जाएगी...
Kallu-bhabhi चुपचाप कड़ी रहो इसी मैं तुम्हारा फायदा है...
मैं कुछ नहीं बोली और रोटी हुई सीढ़ी कड़ी रही... वो मेरे पेट और कमर को मसलता raha...phir कुछ देर बाद मसलते मसलते hi उसके हाथ ब्लाउज के ऊपर चलने लगे.. मैंने उसे रोकना चाहा तो उसने मेरे हाथ झटक दिए... और ब्लाउज के ऊपर से hi मेरी छातियों को दबाने लगा...
मैं असहाय सी उसके हाथों से खुद के जिस्म को मसलवा रही थी..
मैं और जग्गू ध्यान से सुन रहे थे और हम दोनों के hi आँखों में गुस्सा था... पर एक बात मुझे हैरान कर रही थी की मेरा लुंड भाभी की कहानी सुनकर टैंकर खड़ा था.. मुझे थोड़ी शर्म महसूस हो रही थी की कही भाभी देख न लें......
मैंने जग्गू की और देखा तो साला गुस्से में मुझे देख रहा था फिर मेरी नज़र उसकी पंत पर गयी तो तम्बू तो वहां भी बना हुआ tha...man hi मन में मुझे हंसी आ गयी की साला लुंड का भी अलग दिमाग होता है...
Me-phir क्या हुआ भाभी?
भाभी- वो मेरी छातियों को दबा रहा था और मैं खड़े खड़े रो रही थी की तभी उसने ब्लाउज के हुक पर हाथ रखा और खोलने की कोशिश करने लगा...
मैंने उसका हाथ पकड़ लिए और बोली- बस अब मत करो... मैं बर्बाद हो जाउंगी... मुझे छोड़ दो..
पर उसने मेरी एक नहीं सुनी और मेरा हाथ फिरसे झटक दिया और एक एक करके मेरे ब्लाउज के हुक खोलने लगा...
हर हुक के खुलने के साथ मेरी उम्मीद टूटती जा रही थी... और कुछ पल बाद hi उसने मेरे ब्लाउज के सरे हुक खोल दिए और दोनों पतों को फैला दिया...
मेरी ब्रा सम्मे आ गयी फिर उसने दोनों हाथ ब्रा के दोनों कप के ऊपर रख दिए और दबाने लगा... मेरा तो पूरा शरीर काँप रहा था....
कल्लू- आह्ह्ह्हह भाभी क्या मस्त छतिया है तुम्हारी कितना रास भरा है इनमे... आज इनका सारा रास पि जाऊंगा...
और वो मेरी ब्रा को पकड़ कर ऊपर उठाने hi वाला था की तुम्हारे भैया की खांसने की आवाज़ आई और वो अचानक से पीछे हैट गया... मैं इसका फायदा उठा कर दोबारा बाथरूम में घुस गयी और तब तक बहार नहीं आई जब तक तुम्हारे भैया की आवाज़ मुझे सुनाई नहीं दी की वो भी बहार हैं... ये सब हुआ उस दिन तबसे वो मुझे फ़ोन करता है और अकेले में मिलने को बुलाता रहता है.. मैंने उस दिन के बाद कैसे भी 2-3 दिन ताला और फिर हम शादी मैं चले गए... तो बच गयी मैं अब आ गयी हूँ तो फिर से कुछ न कुछ करेगा..
. ये सब बताते हुए भबजी की आँखें शर्म से नीचे थी और ज़मीन में देखे जा रही थी
Jaggu-haan अब बोल तू कर्मा ाव क्या सुन्ना है सेल को जाकर अभी मार डालूंगा मैं...
में- मारदे और खुद जेल चला जा पूरी ज़िन्दगी के लिए..
भाभी- नहीं नहीं भैया ऐसा अनर्थ नट करना..
में- जग्गू ये टाइम सोच समझ कर काम लेने का है उसके पास भाभी की तसवीरें हैं.. कुछ भी चुतियापा हुआ तो बदनामी हो जाएगी...
जग्गू- ाचा वैसे इसमें भाभी की तो गलती नहीं है तो हम पुलिस में बोल्डइन की उसने ऐसा चुप के तसवीरें ली है तो उसे सजा भी मिलेगी और उससे फोटो भी डिलीट करनी पड़ेगी...
Bhabhi-nahi भैया पुलिस नहीं.. मैं नहीं सह पाऊँगी की उसे कोई और भी देखव या किसी को भी पता चले.....
Jaggu-par भाभी...
भाभी- नहीं भैया पुलिस को मत बोलो मैं बर्बाद हो जाउंगी उसमे मेरे नहाने के अलावा भी बहुत कुछ है वीडियो में...
में- और कुछ भी है मतलब?
भाभी- बस है कुछ तो है...
जग्गू- भाभी बताओ तो क्या है..
Bhabhi-wo मैं नहीं बता सकती..
Me-kyun भाभी जब सब बता दिया तो वो बताने में क्या दिक्कत है..
भाभी- मैं शर्म से मर जाउंगी..
में- भाभी कुछ नहीं होगा... तुम बताओ तो सही..
भाभी- पता नहीं क्या करूँ मैं.. केसव बताऊँ...
में- भाभी नहीं बताओगी तो उस कल्लू के जाल में फंसती जाओगी...
भाभी- वो तुम्हारे भैया दारू के नशे में आके सो जाते हैं और मुझे वो सुख नहीं देते जो एक औरत को चाहिए होता है.. तो नहाते हुए मैंने उस दिन खुद से मतलब किआ था खुद से...
Jaggu-kya किआ था..
भाभी- वो मैंने अपने हाथों से और अपनी उँगलियों से खुद को शांत किआ था और उसने उसकक भी वीडियो बनाई है...
मैं समझ गया की भाभी क्या कहना छह रही थी की भाभी खुद की छूट में उंगली भी कर रही थी और उसने वीडियो बनाली...
में- सब समज्ज आ गया है भाभी अब तुम चिंता मत करो... बस जो हम कहें करती जाना कल्लू का इलाज़ तो हम ढूंढ लेंगे...
Bhabhi-lalla बहुत मेहरबानी होगी कैसे भी इस कल्लू मुसीबत से बचालो मुझे..
Me-bhabhi तुम मेरे परिवार का हिस्सा हो मेहरबानी नहीं अपने परिवार कज इज़्ज़त की रक्षा करना हर मर्द का फ़ैज़ होता है..
ये बोलते हुए मैं खुद को एक योद्धा महसूस कर रहा था पर था नहीं..
खैर आगे का सोचते हुए मैंने भाभी से बोलै
में- भाभी एक काम करो कुछ दिनों के लिए अपना फ़ोन जग्गू के दे दो...
भाभी- पर उसका फ़ोन आया तो?
में- कुछ नहीं होगा और सुनो हमें ये कल्लू तक पहुचानी है खबर की भाभी की तबियत ख़राब है...
जग्गू- हाँ हो जायेगा ये भी.... बस मुम्ममय के सामने थोड़ा ड्रामा करना होगा फिर पूरी गलती में वो खुद फैला देंगी बात...
मैं और भाभी जग्गू की बात पर हंसने लगे...
में- ठीक अभी इतना काम है आगे का प्लान सोच कर बनाते हैं...
Bhabhi-theek लल्ला पर खूब सोच समझकर करना जो भी करना ये सोचलो की हमारी ज़िंदगी तुम्हारे हाथ में है...
में- भाभी तुम चिंता मत करो बस जैसा बोलै है वो करती रहना... अब आप आराम करो..
भाभी थोड़ा ख़ुशी से उठ कर जाने लगी जाते हुए उन्होंने चाय के कप उठाये और फिर अचानक से शर्मा कर मुस्कुरा कर चली गयी...
मुझे समझ. नहीं आया क्यों फिर मेरी नज़र नीचे गयी तो देखा पंत में तम्बू बना था जो भाभी ने देख लिए था...
जग्गू- मेरी तरफ देख कर थोड़ा मुस्कुरा रहा था...
में- सेल ऐसे क्या फेख रहा है तुझे लुंड पर कण्ट्रोल नहीं है इतनी गंभीर बात चल रही हसि है और तू इसे खड़ा करके बैठा है...
जग्गू- तेरा भी तो खड़ा है...
Me-meri बात अलग है..
Jaggu-ghanta अलग है... अब ये सोच आगे करना क्या है...
सोचूंगा अचे से फिर बताता हूँ अभी चलता हूँ..
Jaggu-main भी चलता हूँ..
Me-nahi सेल अभी घर पर कोई नहीं है कल्लू इसी फ़िराक़ में होगा भाभी को अकेले नहीं छोड़ना जब तक ये मामला सुलझ नहीं जाता ..
Jaggu-haan सही कह रहा है तू मैं घर पर रहता हूँ...
में- ठीक हसि चल कुछ समझ आता है तो बताता हूँ
जग्गू- ठीक है..
मैं जग्गू के घर से निकल गया और सोचने लगा साला कल्लू ने प्रेमा भाभी के लिए तगड़ा जाल फेंका है कुछ तो करना पड़ेगा... पर क्या किआ जाये....
ये hi सोचते सोचते मैं घर पंहुचा तो
माँ काम में लगी हुई थी घर के .. और अनुज पढाई कर रहा था पापा खाना खा रहे थे...
माँ- कहाँ रह गया था रे... इतनी देर से..
में- जग्गू के यहाँ चला गया था माँ...
माँ- सब ठीक है उनके यहाँ..
में- हाँ सब बढ़िया..
Maa-chal अब नहले और खाना खा फिर
में- ठीक माँ...
मैं नहाने गया.. फिर नहाकर कपडे बदलकर खाना खाने बैठा... खाना खा कर थोड़ा टीवी के सामने बैठकर घरवालों से बात हुई...
अपने बारे ने ये पता चला की मेरे लुंड को भी माँ उतनी hi पसंद है जितनी मुझे क्यूंकि साला माँ के आस पास होने पर खड़ा hi रहता है... पर हर वक़्त तो नहीं छोड़ सकते न....
खैर पापा भी पता नहीं क्यों नहीं छह रहे थे की मैं घर पर रहूं.. एक काम और बता दिया की किसी के खेत में पानी देना है अपने तुबेल से... मैंने सोचा चलो कोई नहे चलते हैं दो तीन घंटे का काम hi सही सोचने कक मौका भी मिल जायेगा...
सीधा टुबैलतुबेल पर गया और पाइप सेट करके चालू कर दिया... अब लगातार 2 घंटे पानी चलना था खेत बढ़ा था तो सोचा बाघ में जाकर आराम कर लेता हूँ फ़ोन में 2 घंटे का अलार्म लगा लिया... और 5 मीन्स में बाघ में आकर लेट गया...
लेते लेते सोचने लगा क्या करूँ पल्ली या ममता चची को बुला लूँ.. फिर सोचा अगर डेली बाघ में बुलाऊंगा तो सही नहीं है किसी ने देख लिए तो गड़बड़ हो सकती है फिर सोचने लगा की कल्लू का क्या किआ जाये कुछ तो तरीका निकलना hi पड़ेगा भाभी को बचने का...
ऐसे hi लेते लेते सोच रहा था की अचानक से पैरों की आवाज़ आई सर घुमा कर देखा तो कोई लड़की थी फिर जब करीब आई चल के तो मेरे चेहरे पर मुस्कान आ गयी...
मुझे जैसे मेरी परेशानी का हल मिल गया और मिला नहीं खुद चल कर मेरे पास आया है...
में- अरे दीदी तुम?
कजरी- क्यों ऐसे चौंक क्यों गया आ नहीं सकती मैं? और कल बताया तो था...
Me-are बिलकुल आ सकती हो दीदी तुम्हारा hi है वो मैं लेता हुआ था न इसलिए चौंक गया...
मैं तो भूल hi गया था कजरी के बारे में की इसने बोलै था दोपहर में आने को... कजरी हमेशा की तरह एक सूट सलवार पहनकर गदराया हुआ माल लग रही थी...
कजरी- कहाँ है बच्चा चल दिखा तो..
मैं उठ कर खड़ा हुआ और हु उसे बच्चे के पास ले गया...
में- ये रहा दीदी बच्चा..
वो वहीं बैठकर उसके सर पर हाथ फिरने लगी और मुझसे बातें करने लगी..
मेरे मन में यही चल रहक था की क्या किया जाये.. कैसे इस मौके का कुछ तो फायदा उठाया जाये... तभी कुछ आईडिया आया पर काम करेगा या नहीं ये देखना था..
में- दीदी मैं अभी आया पेशाब करके...
Kajri-theek है जा तू..
मैं उसके पास से निकला और जान कर बगल वाले खेत में गया जिसमे कल hi पानी लगा था और मिटटी गीली थी और काफी फिसलन और कीचड वाली thi...main खेत के किनारे झाड़ियों की आड़ में जाकर रुका देखा जैसी जगह चाहिए वैसी है की नहीं और ये वैसी hi थी झंडियों के बगल में और खेत के किनारे और जब मुझे लगा यही जगह ठीक होगी तो मैं एक बार ज़ोर से ाः चिल्लाया और फिर अपने पाजामे को घुटनो तक करके वहीं मिटटी में लेट गया..
उम्मीद के अनुसार अगले hi पल मुझे कजरी की आवाज़ सुनाई दी
कजरी- क्या हुआ कर्मा कहाँ है तू...
अगले hi पल लगा की वो खेत के बगल में है पर झाड़ियों की वजह से शायद मुझे देख नहीं पाई है... मैंने एक बार और आह किआ उसे पता चल गया आवाज़ सुनके तो वो झाड़ियों के बीच से निकल कर मेरे पास आने लगी और जैसे hi झाड़ियां ख़त्म हुई और जहाँ मैं लेता था वो वहां पहुंची और उसका पेअर खेत की फिसलने वाली मिटटी पर पड़ा उसकी भी एक चीख निकली और वो धम्म से मेरे ऊपर गिरी...
में- दीदी ारायअम्म्मम्म्म्म seeeee...ahhh
अब चित्र कुछ ऐसा था की मैं पीठ पर नीचे लेता हुआ था मेरा पजामा घुटनो पर था लुंड खड़ा हुआ बहार था... और मेरे ऊपर कजरी का गदराया हुआ बदन था उसका चेहरा मेरी गर्दन पर था बड़ी मदमस्त छुछियां मेरर सीने मेइब धंस रही थी... मेरे हाथ उसके बड़े बड़े चूतड़ों पर थे... और मेरा लुंड उसकी छूट पर ठोकर मार रहा था...
कजरी- अह्ह्ह्हह कर्मा यहाँ इतनी कीचड कैसे...
में- दीदी मैं भूल hi गया था की कल पानी लगा है इस खेत में और कीचड हो रही है...
मैंने ये दिखते हुए की उठने की कोशिश कर रहा हूँ नीचे से कमर का ऊपर की और धक्का दिया और लुंड को कजरी की छूट के ऊपर सलवार पर चिपका दिया जिससे उसे अगर अब तक भी एहसास न हुआ हो तो हो जाये की लुंड खड़ा है...
कजरी के मुँह से एक आह निकली और उसकी आँखें थोड़ी बड़ी हुई जैसे hi उसे समझ आया की उसे क्या चुभ रहा है...
फिर भी वो अनजान बनते हुए बोली- चल उठते हैं अब आराम से...
Me-haan दीदी चलो..
और फिर मैंने. हाँ बूझ कर ये दिखने के लिए की मैं उठ रहा हूँ उसको कमर से पकड़ कर एक साइड को पलट गया और अब वो मेरे नीचे थी और मैं उसके ऊपर बाकि चीज़ें सब वैसी hi थी लुंड अब भी छूट पर ठोकर मार रहा था जिसका एहसास कजरी को हो रहा था और तो और अब मुझे उसकी सांसे भी बढाती हुई महसूस हो रही थी...
Kajri-aahhh कर्मा क्या कर रहा है...
Me-didi फिसलन बहुत है...
कजरी- हाँ देख तो तेरे भी कपडे गंदे हो गए और मेरे भी...
में- हाँ दीदी कीचड हो गए है यहाँ काफी...
कजरी- तो क्या अब पड़े hi रहेंगे चल उठ तो सही..
में- हाँ दीदी..
मैं अपने हाथों पर ज़ोर लगाकर उठने लगा और जानबूझकर एक धक्का लुंड का उसकी छूट पे और मारा और ऐसे दिखाया की उठाते हुए लगा है और फिर मैं एक साइड को अपनी पीठ पर गिर गया... अब मैं और वो जैसे अगल बगल लेते हुए थे.. मेरा लुंड सीधा आसमान की और मुँह करके खड़ा था...
में- अरे मैं फिर से फिसल गया...
Kajri-ruk मैं उठती हूँ...
कजरी अपने हाथों का सहारा लेकर उठ कर बैठ गयी और बैठते hi उसकी नज़र मेरे खड़े लुंड पर गयी और उसकी आँखें बड़ी हो गए.. वो मुँह खोले उसे hi देखे जा रही थी...
अब तक उसे ये अंदाजा नहीं था की मेरा लुंड बहार है... उसे लगा था की कपड़ो के अंदर से hi वो उसे महसूस हो रहा था... उसे ये अंदाजा नहीं था की मेरा कड़क लुंड बिलकुल नंगा उसके सामने आ जायेगा
कजरी की नज़रें जैसे मेरे लुंड पर जैम सी गई... कुछ देर तक वो बस ऐसे hi बैठी देखती रही फिर अचानक जैसे उसका ध्यान बापिस आया हो तो वो अपनी नज़रें हटाने की कोशिश करने लगी..
कजरी- ओह्ह वो कर्मा मैं वो तेरा वो बहार मतलब तू नंगा है...
में- हाँ दीदी पेशाब करने के लिए पजामा खोला hi था की गिर गया....
कजरी- हाँ वो चल अब उठते हैं...
में- हाँ दीदी..
कजरी कोशिश कर रही थी की उसकी नज़र मेरे लुंड पर न जाये पर बार बार वो फ़ैल हो रही थी
फिर कजरी उठने लगी.. धीरे धीरे से सँभालते हुए कड़ी हुई और फिर जैसे hi उसने एक कदम बढ़ाया फिर से उसका पेअर फिसला और आगे की तरफ गिरने लगी... और फिर घुटनो पर गिर गयी और आगे खुद को गिरने से सँभालने के लिए या पता नहीं किसलिए वो मुझे पकड़ने लगी
जिसका नतीजा ये हुआ की अंत में उसके दोनों घुटने मेरी कमर के बगल में थे एक हाथ कंधे पर था और सबसे अछि बात दूसरा हाथ मेरे लुंड को पकड़े हुए था... और आँखें बंद थी...
मुझे तो उसके हाथ का एहसास लुंड पर होते hi एक सनसनाहट सी शरीर में महसूस हुई... वहीं मेरा लुंड भी उसके हाथ में झटके मार रहा था... कजरी ने अपनी आँखें अब भी बंद कर राखी थी... मुझे लगा गिर न जाये उस दर से बाब्ड हैं...
में- दीदी तुम ठीक हो? कहीं लगी तो नहीं?
कजरी ने अचानक आँखें खोली और मेरी तरफ देख कर बोली..
Kajri-haan? हं हं मैं सही हूँ तेरे तो नहीं लगी.....
में- नहीं दीदी मैं ठीक हूँ...
हैरानी की बात ये थी उसका हाथ अब भी मेरे लुंड को पकड़े हुए था बस पकडे हुए था न hi हाथ तबसे कजरी ने हिलाया था न कुछ किआ था और न hi लुंड को छोड़ा था....
कजरी- न जाने मुई कैसी कीचड हुई है उठने hi नहीं दे रही सरे कपडे ख़राब कर दिए mere...ab पता नहीं घर कैसे जाउंगी...
में- हाँ दीदी सरे कपडे गंदे हो गए दोनों के पर कोई नई मैं साफ़ करवा दूंगा...
तभी कुछ ऐसा हुआ जिससे मैं बिलकुल हैरान हो गया.. कजरी मुझसे बिलकुल नार्मल होकर बात कर रही थी मेरी आँखों में देखते हुए पर वहीं उसका सीधा हाथ जो मेरे लुंड पर था धीरे धीरे ऊपर नीचे होने लगा.. मुझे समझ नहीं आया क्या कजरी का हाथ अपने आप काम कर रहा है जो इसे पता नहीं चल रहा और ये बिलकुल सामान्य तरीके से बात कर रही है... या ये अनजान बनने का नाटक करना छह रही है.. मैंने सोचा देखता हूँ खुद hi पता चल जायेगा... बस इंतज़ार करके देखता हूँ की कजरी दीदी आगे क्या करती हैं...
कजरी- वही तो देख न अब क्या हाल हो गया है..
कजरी की आवाज़ थोड़ी नशीली सी होने लगी.. और उसके हाथ की गति भी मेरे लुंड पर बढ़ने लगी.. पहले जो लग रहा था गलती से हो रहा है अब वो साफ़ हवस और उत्तेजना प्रतीत हो रहा था... मुझे मज़ा आ रहा था उसके हाथो के लुंड पर चलने से...
पर कजरी का चेहरा मेरी तरफ hi था उसने एक बार भी चेहरा घुमाकर लुंड की तरफ नहीं देखा था... जान कर अनजान बनने के इस नाटक में मुझे मज़ा आ रहा था...
में- हम्म्म अहह हाँ दीदी सही कह रही हो..
कजरी- अभी हाल hi में बोया है ये खेत लगता है..
में- हाँ दीदी अभी कुछ दिन पहले hi बोया है, पहला पानी लग रहा है...
अब कजरी का हाथ खुल कर मेरे लुंड पर चल रहा था कभी ऊपर नीचे तो कभी रुकर टोपे को अंगूठे से सहलाती पर देख अभी भी मेरी hi तरफ रही थी...
Kajri-pahle तो इसमें गणना था न?
में- नहीं दीदी गणना तो दुसरे में था इसमें दाल की थी...
Kajri-achaa हाँ, ये खेत थोड़ा अंदर पद जाता है न तो ध्यान नहीं गया...
में- कोई नहीं दीदी अब ध्यान से करूऊ....
अचानक से कजरी ने लुंड के टोपे पर अपना अंगूठा फिरा दिया तो मेरी सिसकी निकल gayi...phir मैंने सोचा ये खेल दोनों और से भी खेला जा सकता है... कोशिश करने में क्या जाता है..
कजरी- हाँ अब से ध्यान रखूंगी...
में- दीदी कपडे ज़्यादा hi गंदे हो गए हैं...
ये कहकर मैंने अपना एक हाथ उसकी पीठ पर रख दिया और फिरने laga...aur ऐसे फिरने लगा जैसे मिटटी हटा रहा हूँ... मैंने कजरी का चेहरा देखा तो कोई अलग प्रतिक्रिया नहीं थी.. मतलब अगर बढ़. सकते हैं...
मैं पूरी पीठ पर हाथ फिरने लगा..
कजरी- हाँ कर्मा देख न सब गन्दा हो गया है आगे से भी पीछे से भी...
में- मैं साफ़ कर देता हूँ दीदी...
मैं और खुल कर पीठ मसलने लगा और फिर थोड़ी हिम्मत दिखते हुए कजरी के चूतड़ों के ऊपर हल्का हल्का सा चक्कर लगाने laga...kyunki वो घुटनो और पंजो पर बैठी थी तो गांड बहार की और निकली हुई thi...wohin कजरी के हाथ का काम ज़ोरों पर था और वो खुलकर खेत में मेरा लुंड मुठिया रही थी... तो जब ये कर सकती है तो मैं कईं नहीं...
माइनर अपना हाथ उसकी सलवार के ऊपर से hi उसके मस्त चूतड़ों को मसलने लगा....
इसके आगे क्या हुआ अगली अपडेट में प्लीज कमैंट्स करके ज़रूर बताएं कैसी लगी अपडेट बहुत बहुत शुक्रिया