Incest Katha Chodampur Ki - Page 14 - SexBaba
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Incest Katha Chodampur Ki

थैंक्यू आल ऑफ़ यू कहानी ऐसे hi चलती रहेगी
 
मैंने भी खड़े होकर माँ के होंठों को चूमा तो मुझे मेरे hi रास का स्वाद आया.. फिर माँ मुझे दूध पाइक सोने को बोलकर चली गई... मैंने जल्दी से दूध पिया और झड़ने के बाद चैन की नींद आई...

अपडेट 85

रात को अचे से सोने के बाद सुबह सुबह आँख खुली कुछ देर लेता रहा.. सुबह थी तो लुंड भी खड़ा था पर कोई फायदा नहीं था क्यूंकि अभी चुदाई तो होने से रही है तो लुंड और आँखें दोनों मसल कर

उठ कर गया फ्रेश हुआ बहार सब लोग आंगन में थे... माँ ने चाय वगेरा दी वो पापा और अनुज के साथ बैठ कर पिने लगा..

नाश्ता कर लिए तो पापा ने बोलै की बाघ में जाकर जानवरों को पानी पीला दे और चारा भी दाल दूँ..

मैं घर से निकल लिए सीधा बाघ में पहुंचा वहां सभी जानवरों को पानी चारा डाला पानी पिलाया और घर की तरफ के लिए निकला hi था की जग्गू का फ़ोन आया.

में- हाँ बीटा क्या बात है?

जग्गू- भाई जल्दी से घर आ...

में- क्या हुआ?

जग्गू- मम्मी पापा खेत की तरफ गए हैं अभी काम बन सकता है..

में- ठीक है आता हूँ...

मैंने फ़ोन कटा और सीधा जग्गू के घर की तरफ लपका...

वहां पंहुचा तो जग्गू घर के बहार hi मेरा इंतज़ार कर रहा था...

में- चल भाभी क्या कर रही हैं...

Jaggu-ghar में है सफाई कर रही है..

Me-aur भग्गू ?

Jaggu-wo तो सुबह hi निकल गया... कहीं..

में- चल ठीक है..

मैं और जग्गू अंदर गए तो देखा की भाभी आंगन में सफाई कर रही थी...

आये किसी भी काम से हो पर साला भाभी को देखते hi लुंड कड़क होने लगा पर क्या करें भाभी माल hi ऐसा थी साड़ी और ब्लाउज के बीच झांकती नंगी कमर और आधी बहार झूलती छुछियां... लुंड कैसे न खड़ा हो





झुकने की वजह से छुछियां बहार को गिरती हुई लग रही थी मनो ब्लाउज फाड़ के बहार आ जाएँगी...

खैर मैंने सोचा जिस काम के लिए आये हैं वो किआ जाये पहले.. आंगन में पजंचते hi भाभी ने हमें देखा

और मुझसे बोली- क्या बात है लल्ला आज सुबह सुबह hi दर्शन करवा दिए..

में- बस भाभी तुमसे hi मिलने आया हूँ..

भाभी मेरी बात सुनकर थोड़ा चौंककर मुझे देखने लगी..

भाभी- मुझसे, वाह भाई मुझसे क्या काम पद गया...

में- बहुत दिन हो गए भाभी तुम्हारे हाथों की चाय नहीं पि..

भाभी मुस्कुरा कर बोली- अरे लल्ला हम तो हमेशा तैयार हैं चाय पिलाने के लिए तुम आते hi कहाँ हो...

में- आज तो आ गया भाभी आज पिलादो..

भाभी- बिलकुल बैठो तुम अभी ले...

में- भाभी सुनो अपने लिए भी ले आना साथ में पिएंगे सब...

भाभी मुस्कुरा कर चली गयी..

अब मेरी गांड फैट रही थी इंतज़ार करते हुए की कैसे बात करें भाभी से कई भड़क गयी तो...

में- अबे कैसे बात करें..?

Jaggu-mujhe क्या पता इसीलिए तो तुझे बुलाया है...

में- मैं क्या जादूगर हूँ जो भाभी को सम्मोहित करके कुछ भी पूछ लूंगा...

जग्गू- भाई अब ऐसे मत कर तूने hi पहले बोलै था की तू पूछेगा...

में- हाँ सेल बोलै था पर अब समझ नहीं आ रहा की कैसे पूछूं क्या पूछूं...

जग्गू- भाई बात तो करनी hi पड़ेगी...

हम ऐसे hi लड़ रहे थे की तभी भाभी आ गयी...

Bhabhi-are भाई कैसी बात करनी है ..

में- अरे कुछ नहीं भाभी बैठो आप..

भाभी ने सबको चाय दी हम दोनों खत पर बैठे थे भाभी खत के बगल में एक पतली पर बैठ गयी...

Bhabhi-haan लल्ला अब बताओ कैसी बात???

Me-wo भाभी ऐसे hi कुछ नहीं..

Bhabhi-kuch तो ज़रूर है... बताओ जल्दी..

में- अरे कुछ नहीं भाभी मैं तो अपनी शादी की बात कर रहा था...

भाभी- है दय्या शादी हो रही है लल्ला तुम्हारी?

में- नहीं भाभी मैं बोल रहा था की शादी करनी है मुझे aapse...nahi मतलब आपके जैसी कोई मेरे लिए भी ढूंढ दो...

भाभी- अरे लल्ला बड़े हो गए हो तुम तो और मज़ाक भी करने लगे हो पहले तो पूछने पर भी ज़बान नहीं खुलती थी और अब शादी की बात कर रहे हो...

Me-haan भाभी करनी तो है hi एक दिन तो चाहता हूँ तुम्हारे जैसी बीवी मिले?

Bhabhi-acha मेरे जैसी hi क्यों चाहिए?

में- क्यूंकि भाभी तुम कितनी सुन्दर हो और घर का सारा काम भी करती हो सबका ध्यान रखती हो..

तो मुझे भी ऐसी बीवी चाहिए जो ये सब करती हो..

भाभी अपनी तारीफ सुनकर तोफा शर्मा गयी और खुश हो गयी.. जो हर औरत करती है...

भाभी- लल्ला अब हमारे जैसी तो नहीं मिल सकती ऐसा करो तुम हमेसे करलो..

में- अरे भाभी कैसा मज़ाक करती हो तुमसे कार्लिअ तो भग्गू भैया का क्या होगा?

Bhabhi(thoda सोच में पड़ते हुए)- उनका तो अब भी कुछ नहीं हो सकता.. काम से काम बचा कुछ सुख तो मिल जायेगा मुझे...

मैंने सोचा यही सही वक़्त है बात करने का

Me-bhabhi कोई परेशानी है क्या?

भाभी- नहीं लल्ला क्या hi परेशानी होगी?

में- सच में भाभी देखो अगर तुम हमें अपना मानती हो तो ज़रूर बातएंगी..

Bhabhi-aisa क्यों बोल रहे हो लल्ला कुछ भी होगा तो ज़रूर बताउंगी

में- नहीं भाभी अभी भी तुम कुछ छिपा रही...

भाभी थोड़ा झुंझलाहट में बोली- ओह्हो लाला कुछ नहीं छुपा रही तुन्हे ऐसा क्यों लगता है...

में- भाभी तुम कल्लू से बात करती हो?

ये सुनते hi भाभी के चेहरे का रंग उड़ गया..

भाभी- कक क्या बकवास कर रहे हो लल्ला... म मैं क्यों बात करुँगी उससे...?

में- भाभी देखो सच सच बतादो हम आपस में hi rakhenge...kisi को पता नहीं चलेगा..

भाभी कभी जग्गू की तरफ तो कभी मेरी तरफ देख रही थी..

जग्गू और मेरी नज़र भाभी पर तिकी हुई थी...

Bhabhi-nahi मैं बात नहीं करती....

में- ाचा भाभी नहीं करती तो तुम्हारे मोबाइल में कल्लू के मश्ग क्यों हैं..

साथ hi फ़ोन भी आये हैं...

भाभी का तो जैसे चेहरा hi सफ़ेद पद गया था और फिर वही हुआ जिसकी मुझे उम्मीद थी.. भाभी आंसुओ की गंगा जमुना बहाने लगी..

में- भाभी कुछ बताओ तो सही रो मत..

भाभी चुप होने का नाम hi नहीं ले रही थी.. मैंने जग्गू दे पानी लेन को बोलै वो पानी लाया भाभी को पिलाया फिर थोड़ा भाभी शांत हुई..

में- अब बताओ भाभी पूरी बात?

भाभी- लल्ला मैं तुम लोगो के पेअर पड़ती हूँ ये बात किसी को मत बताना मैं मरजाऊँगी..

में- भाभी ये सब तो करने से पहले सोचना चाहिए था न क्यों. करती थी उससे बात...

भाभी- लल्ला मैं जानबूझकर नहीं करती थी वो जबरदस्ती करवाता था मुझसे..?

में- झूठ मत बोलो भाभी वो जबरदस्ती कैसे कर लेगा...

भाभी- वो करता है नहीं करुँगी तो वो नुझे बर्बाद कर देगा

में- ऐसे कैसे बर्बाद कर देगा... कोई किसी को बर्बाद नहीं कर सकता..

भाभी- लल्ला अब तुम्हे कैसे समझों मैं..

में- जो भी बात है पूरी बताओ...

भाभी मेरी बात सुनकर जग्गू की तरफ देखने लगी..

में- ये भी किसी को नहीं हटाएगा और भाभी जितना बुरा तुम समझती हो इसे उससे कहीं ाचा है . सबसे पहले इसी को पता चला की तुम कल्लू से बात करती हो ये चाहता तो तुरंत घर में बता देता पर इसने पहले मुझे ये बताया और ये जानने की कोशिश की तुम यव कर क्यों रही हो...

भाभी मेरी बात सुनकर जग्गू की और देखकर रोने लगी...

में- भाभी अब रो मत और खुल कर बात बताओ पूरी..

भाभी- वो लल्ला तुम्हारे भैया दो तीन महीने पहले कल्लू के साथ hi घूमने लगे थे वो इन्हे दारू पिलाता और ये पूरे दिन उसके साथ पड़े रहते... मुझे वो आदमी बिलकुल पसंद नहीं था तो कई बार मैंने बोलै की मत घूमो उसके साथ पर तुम्हारे भैया ने मेरी आज तक कहाँ hi सुनी है...

फिर कुछ दिनों में उसका इनके साथ घर आना जाना भी हो गया... मैं भी कुछ नहीं कह पति थी न hi मम्मी जी और पापाजी... तुम्हारे भैया की वजह से....

मैंने जग्गू की तरफ देखा तो उसने भी हाँ में सर हिला दिया ..

में- फिर

भाभी- ऐसे hi चल रहा था फिर शादी में जाने के लिए कपडे वगेरा लेने एक दिन मम्मी जी भैया और पापाजी सुबह hi बाजार चले गए... मैं घर में अकेली थी... काम कर रही थी की कुछ देर बाद तुम्हारे भैया और कल्लू धुत्त नशे में घर आये ...

इनसे तो चला भी नहीं जा रहा था... खैर कल्लू इनको पकड़े हुए कमरे तक ले गया वहां बिठा दिया तो ये मुझपे चिल्लाने लगे...

भग्गू- आईये चलललल साली मेरे दोस्त के लिए पकोड़े बना...

मैं क्या hi करती गयी तुरंत जल्दी जल्दी पकोड़े तैयार किये.. और देने चली गयी... जब पकोड़े रख रही तो मैंने देखा कल्लू मुझे अजीब सी नज़रो से देख रहा है मैंने जल्दी से पकोड़े रखे और बहार आकर काम निपटने लगी कभी आधे घंटे बाद मैंने कमरे में झांक कर देखा तो ये तो मुझे पलंग पर सोते हुए दिखे पर कल्लू मुझे कही नहीं दिखा तो मैंने देखा दरवाज़ा भी खुला है लगता है चला गया..

Me-pHir

भाभी- फिर क्या मैंने काम निपटा hi लिया था... तो अपने कपडे लेकर बाथरूम में नहाने चली गयी...

मैं नहीं और बाथरूम से कपडे पहनकर निकली तो सामने देखकर मैं दर गयी सामने कल्लू खड़ा था..

भाभी- टटटूयमममम यहाँ क्या कर रहे हो???

कल्लू अपनी गन्दी हंसी हँसता हुआ बोलै- भाभी बड़ी देर लगाडी नहाने में...

भाभी- ये क्या बेशर्मी है... कैसी बातें कर रहे हो कल्लू...

कल्लू- भाभी सही तो बोल रहा हूँ...

मैं साइड हटकर जाने लगी तो वो मुआ सामने खड़ा हो गया...

भाभी- रास्ता छोड़ मेरा कल्लू...

Kallu-ka भाभी छोडो से सीधा छोड़ और भैया से सीधा कल्लू... इतनी जल्दी..?

Bhabhi-kallu सामने से हैट नहीं तो बहुत बुरा होगा...

कल्लू- कुछ बुरा नहीं होगा मेरी जान और ये कहकर उसने मेरी कमर में हाथ दाल लिए... मैं तो बुरी तरह दर गयी... एयर चीखने लगी की उसने मेरा मुँह हाथ से दबा दिया...?...

जिससे मेरी चीख डाब कर रह गयी...

कल्लू- अरे भाभी चीखो मत एक चीज़ तो देखलो..

और उसने मेरी कमर से हाथ hataya.aur अपनी जेब से फ़ोन निकला और मुझे दिखने लगा पहले तो मैं बस उससे छूटने का प्रयास करती रही पर तभी मेरी नज़र फ़ोन पर पड़ी तो देखा उसमे मेरी नहाते हुए की नंगी तसवीरें हैं मैं तो बिलकुल दर hi गयी...

Jaggu-us हरामजादे को मैं ज़िंदा ज़मीन में गाड़ दूंगा...

जग्गू गुस्से में खड़ा होकर बोलै..

में- अरे रुक तो सही पूरी बात तो पता करने दे...

भाभी- भैया शांत हो जाओ...

मैंने हाथ पकड़ कर जग्गू को बिठा लिए..

में- भाभी आगे क्या हुआ...

भाभी- भैया आगे का कैसे बताऊँ बताने में भी शर्म आती है...

में- भाभी शर्माओ मत ये बात बहुत ज़रूरी है और हम तीनो के बीच hi रहेगी चिंता मत करो...

भाभी- उसने एक एक करके मुझे साडी तसवीरें और वीडियो दिखाई मैं अपनी नंगी तसवीरें देख कर दर गयी.. और उससे बोली..

भाभी- कल्लू तूने मेरी ऐसी तसवीरें क्यों ली हैं तुझे शर्म नहीं आती मेरे पति को दोस्त कहता है और ऐसी हरकत..

कल्लू- अरे भाभी इसमें कैसी शर्म... और भाभी तुम्हारा बदन देखकर रहा नहीं गया सोचा इसे तसवीरें में उतार लूँ...

भाभी- बद्तमीज़ और मैंने उसे थप्पड़ मरने के लिए हाथ उठाया तो उसने मेरा हाथ पकड़ कर घुमा दिया और मुझे खुद से चिपका लिए और पीछे से खुद मुझसे चिपक गया...

Kallu-ab सुनो भाभी प्यार से... जो मैं कहूं करती जाओ नहीं तो तुम्हारी ये तसवीरें पूरे गाओं में दिखा दूंगा.. तो सोचो तुम्हारा क्या हाल होगा...

मैं तो इस ख्याल से hi बुरी तरह काँप गयी और रोने लगी

भाभी- नहीं ऐसा मत करना मैं तुम्हारे हाथ जोड़ती हूँ... मैं बर्बाद हो जाउंगी...

कल्लू- तभी तो बोलै जो कहूं करती जाओ तो कुछ नहीं होगा....

भाभी- तुम किसी को सव्हमें नहीं दिखाओगे न...

कल्लू- अगर जो मुझे चाहिए मुझे मिल गया तो नहीं दिखाऊंगा.

और ये कहकर उसने मेरा पल्लू सीने से नीचे गिरा दिया... मैंने उठाने लगी तो बोलै- लगता है बात समझ नहीं आई भाभी तुम्हारे...

मैंने पल्लू को वैसा hi छोड़ दिया और सीढ़ी हो गयी वो अब भी पीछे से मुझसे चिपका हुआ खड़ा था...

और अब अपने हाथ मेरी कमर पर और पेट पर फिरने लगा और मसलने लगा...

भाभी- कल्लू ऐसा मत करो.. मेरी शादीशुदा ज़िंदगी बर्बाद हो जाएगी...

Kallu-bhabhi चुपचाप कड़ी रहो इसी मैं तुम्हारा फायदा है...

मैं कुछ नहीं बोली और रोटी हुई सीढ़ी कड़ी रही... वो मेरे पेट और कमर को मसलता raha...phir कुछ देर बाद मसलते मसलते hi उसके हाथ ब्लाउज के ऊपर चलने लगे.. मैंने उसे रोकना चाहा तो उसने मेरे हाथ झटक दिए... और ब्लाउज के ऊपर से hi मेरी छातियों को दबाने लगा...

मैं असहाय सी उसके हाथों से खुद के जिस्म को मसलवा रही थी..

मैं और जग्गू ध्यान से सुन रहे थे और हम दोनों के hi आँखों में गुस्सा था... पर एक बात मुझे हैरान कर रही थी की मेरा लुंड भाभी की कहानी सुनकर टैंकर खड़ा था.. मुझे थोड़ी शर्म महसूस हो रही थी की कही भाभी देख न लें......

मैंने जग्गू की और देखा तो साला गुस्से में मुझे देख रहा था फिर मेरी नज़र उसकी पंत पर गयी तो तम्बू तो वहां भी बना हुआ tha...man hi मन में मुझे हंसी आ गयी की साला लुंड का भी अलग दिमाग होता है...

Me-phir क्या हुआ भाभी?

भाभी- वो मेरी छातियों को दबा रहा था और मैं खड़े खड़े रो रही थी की तभी उसने ब्लाउज के हुक पर हाथ रखा और खोलने की कोशिश करने लगा...

मैंने उसका हाथ पकड़ लिए और बोली- बस अब मत करो... मैं बर्बाद हो जाउंगी... मुझे छोड़ दो..

पर उसने मेरी एक नहीं सुनी और मेरा हाथ फिरसे झटक दिया और एक एक करके मेरे ब्लाउज के हुक खोलने लगा...

हर हुक के खुलने के साथ मेरी उम्मीद टूटती जा रही थी... और कुछ पल बाद hi उसने मेरे ब्लाउज के सरे हुक खोल दिए और दोनों पतों को फैला दिया...

मेरी ब्रा सम्मे आ गयी फिर उसने दोनों हाथ ब्रा के दोनों कप के ऊपर रख दिए और दबाने लगा... मेरा तो पूरा शरीर काँप रहा था....

कल्लू- आह्ह्ह्हह भाभी क्या मस्त छतिया है तुम्हारी कितना रास भरा है इनमे... आज इनका सारा रास पि जाऊंगा...

और वो मेरी ब्रा को पकड़ कर ऊपर उठाने hi वाला था की तुम्हारे भैया की खांसने की आवाज़ आई और वो अचानक से पीछे हैट गया... मैं इसका फायदा उठा कर दोबारा बाथरूम में घुस गयी और तब तक बहार नहीं आई जब तक तुम्हारे भैया की आवाज़ मुझे सुनाई नहीं दी की वो भी बहार हैं... ये सब हुआ उस दिन तबसे वो मुझे फ़ोन करता है और अकेले में मिलने को बुलाता रहता है.. मैंने उस दिन के बाद कैसे भी 2-3 दिन ताला और फिर हम शादी मैं चले गए... तो बच गयी मैं अब आ गयी हूँ तो फिर से कुछ न कुछ करेगा..

. ये सब बताते हुए भबजी की आँखें शर्म से नीचे थी और ज़मीन में देखे जा रही थी

Jaggu-haan अब बोल तू कर्मा ाव क्या सुन्ना है सेल को जाकर अभी मार डालूंगा मैं...

में- मारदे और खुद जेल चला जा पूरी ज़िन्दगी के लिए..

भाभी- नहीं नहीं भैया ऐसा अनर्थ नट करना..

में- जग्गू ये टाइम सोच समझ कर काम लेने का है उसके पास भाभी की तसवीरें हैं.. कुछ भी चुतियापा हुआ तो बदनामी हो जाएगी...

जग्गू- ाचा वैसे इसमें भाभी की तो गलती नहीं है तो हम पुलिस में बोल्डइन की उसने ऐसा चुप के तसवीरें ली है तो उसे सजा भी मिलेगी और उससे फोटो भी डिलीट करनी पड़ेगी...

Bhabhi-nahi भैया पुलिस नहीं.. मैं नहीं सह पाऊँगी की उसे कोई और भी देखव या किसी को भी पता चले.....

Jaggu-par भाभी...

भाभी- नहीं भैया पुलिस को मत बोलो मैं बर्बाद हो जाउंगी उसमे मेरे नहाने के अलावा भी बहुत कुछ है वीडियो में...

में- और कुछ भी है मतलब?

भाभी- बस है कुछ तो है...

जग्गू- भाभी बताओ तो क्या है..

Bhabhi-wo मैं नहीं बता सकती..

Me-kyun भाभी जब सब बता दिया तो वो बताने में क्या दिक्कत है..

भाभी- मैं शर्म से मर जाउंगी..

में- भाभी कुछ नहीं होगा... तुम बताओ तो सही..

भाभी- पता नहीं क्या करूँ मैं.. केसव बताऊँ...

में- भाभी नहीं बताओगी तो उस कल्लू के जाल में फंसती जाओगी...

भाभी- वो तुम्हारे भैया दारू के नशे में आके सो जाते हैं और मुझे वो सुख नहीं देते जो एक औरत को चाहिए होता है.. तो नहाते हुए मैंने उस दिन खुद से मतलब किआ था खुद से...

Jaggu-kya किआ था..

भाभी- वो मैंने अपने हाथों से और अपनी उँगलियों से खुद को शांत किआ था और उसने उसकक भी वीडियो बनाई है...

मैं समझ गया की भाभी क्या कहना छह रही थी की भाभी खुद की छूट में उंगली भी कर रही थी और उसने वीडियो बनाली...

में- सब समज्ज आ गया है भाभी अब तुम चिंता मत करो... बस जो हम कहें करती जाना कल्लू का इलाज़ तो हम ढूंढ लेंगे...

Bhabhi-lalla बहुत मेहरबानी होगी कैसे भी इस कल्लू मुसीबत से बचालो मुझे..

Me-bhabhi तुम मेरे परिवार का हिस्सा हो मेहरबानी नहीं अपने परिवार कज इज़्ज़त की रक्षा करना हर मर्द का फ़ैज़ होता है..

ये बोलते हुए मैं खुद को एक योद्धा महसूस कर रहा था पर था नहीं..

खैर आगे का सोचते हुए मैंने भाभी से बोलै

में- भाभी एक काम करो कुछ दिनों के लिए अपना फ़ोन जग्गू के दे दो...

भाभी- पर उसका फ़ोन आया तो?

में- कुछ नहीं होगा और सुनो हमें ये कल्लू तक पहुचानी है खबर की भाभी की तबियत ख़राब है...

जग्गू- हाँ हो जायेगा ये भी.... बस मुम्ममय के सामने थोड़ा ड्रामा करना होगा फिर पूरी गलती में वो खुद फैला देंगी बात...

मैं और भाभी जग्गू की बात पर हंसने लगे...

में- ठीक अभी इतना काम है आगे का प्लान सोच कर बनाते हैं...

Bhabhi-theek लल्ला पर खूब सोच समझकर करना जो भी करना ये सोचलो की हमारी ज़िंदगी तुम्हारे हाथ में है...

में- भाभी तुम चिंता मत करो बस जैसा बोलै है वो करती रहना... अब आप आराम करो..

भाभी थोड़ा ख़ुशी से उठ कर जाने लगी जाते हुए उन्होंने चाय के कप उठाये और फिर अचानक से शर्मा कर मुस्कुरा कर चली गयी...

मुझे समझ. नहीं आया क्यों फिर मेरी नज़र नीचे गयी तो देखा पंत में तम्बू बना था जो भाभी ने देख लिए था...

जग्गू- मेरी तरफ देख कर थोड़ा मुस्कुरा रहा था...

में- सेल ऐसे क्या फेख रहा है तुझे लुंड पर कण्ट्रोल नहीं है इतनी गंभीर बात चल रही हसि है और तू इसे खड़ा करके बैठा है...

जग्गू- तेरा भी तो खड़ा है...

Me-meri बात अलग है..

Jaggu-ghanta अलग है... अब ये सोच आगे करना क्या है...

सोचूंगा अचे से फिर बताता हूँ अभी चलता हूँ..

Jaggu-main भी चलता हूँ..

Me-nahi सेल अभी घर पर कोई नहीं है कल्लू इसी फ़िराक़ में होगा भाभी को अकेले नहीं छोड़ना जब तक ये मामला सुलझ नहीं जाता ..

Jaggu-haan सही कह रहा है तू मैं घर पर रहता हूँ...

में- ठीक हसि चल कुछ समझ आता है तो बताता हूँ

जग्गू- ठीक है..

मैं जग्गू के घर से निकल गया और सोचने लगा साला कल्लू ने प्रेमा भाभी के लिए तगड़ा जाल फेंका है कुछ तो करना पड़ेगा... पर क्या किआ जाये....

ये hi सोचते सोचते मैं घर पंहुचा तो

माँ काम में लगी हुई थी घर के .. और अनुज पढाई कर रहा था पापा खाना खा रहे थे...

माँ- कहाँ रह गया था रे... इतनी देर से..

में- जग्गू के यहाँ चला गया था माँ...

माँ- सब ठीक है उनके यहाँ..

में- हाँ सब बढ़िया..

Maa-chal अब नहले और खाना खा फिर

में- ठीक माँ...

मैं नहाने गया.. फिर नहाकर कपडे बदलकर खाना खाने बैठा... खाना खा कर थोड़ा टीवी के सामने बैठकर घरवालों से बात हुई...

अपने बारे ने ये पता चला की मेरे लुंड को भी माँ उतनी hi पसंद है जितनी मुझे क्यूंकि साला माँ के आस पास होने पर खड़ा hi रहता है... पर हर वक़्त तो नहीं छोड़ सकते न....

खैर पापा भी पता नहीं क्यों नहीं छह रहे थे की मैं घर पर रहूं.. एक काम और बता दिया की किसी के खेत में पानी देना है अपने तुबेल से... मैंने सोचा चलो कोई नहे चलते हैं दो तीन घंटे का काम hi सही सोचने कक मौका भी मिल जायेगा...

सीधा टुबैलतुबेल पर गया और पाइप सेट करके चालू कर दिया... अब लगातार 2 घंटे पानी चलना था खेत बढ़ा था तो सोचा बाघ में जाकर आराम कर लेता हूँ फ़ोन में 2 घंटे का अलार्म लगा लिया... और 5 मीन्स में बाघ में आकर लेट गया...

लेते लेते सोचने लगा क्या करूँ पल्ली या ममता चची को बुला लूँ.. फिर सोचा अगर डेली बाघ में बुलाऊंगा तो सही नहीं है किसी ने देख लिए तो गड़बड़ हो सकती है फिर सोचने लगा की कल्लू का क्या किआ जाये कुछ तो तरीका निकलना hi पड़ेगा भाभी को बचने का...

ऐसे hi लेते लेते सोच रहा था की अचानक से पैरों की आवाज़ आई सर घुमा कर देखा तो कोई लड़की थी फिर जब करीब आई चल के तो मेरे चेहरे पर मुस्कान आ गयी...

मुझे जैसे मेरी परेशानी का हल मिल गया और मिला नहीं खुद चल कर मेरे पास आया है...

में- अरे दीदी तुम?

कजरी- क्यों ऐसे चौंक क्यों गया आ नहीं सकती मैं? और कल बताया तो था...

Me-are बिलकुल आ सकती हो दीदी तुम्हारा hi है वो मैं लेता हुआ था न इसलिए चौंक गया...

मैं तो भूल hi गया था कजरी के बारे में की इसने बोलै था दोपहर में आने को... कजरी हमेशा की तरह एक सूट सलवार पहनकर गदराया हुआ माल लग रही थी...

कजरी- कहाँ है बच्चा चल दिखा तो..

मैं उठ कर खड़ा हुआ और हु उसे बच्चे के पास ले गया...

में- ये रहा दीदी बच्चा..

वो वहीं बैठकर उसके सर पर हाथ फिरने लगी और मुझसे बातें करने लगी..

मेरे मन में यही चल रहक था की क्या किया जाये.. कैसे इस मौके का कुछ तो फायदा उठाया जाये... तभी कुछ आईडिया आया पर काम करेगा या नहीं ये देखना था..

में- दीदी मैं अभी आया पेशाब करके...

Kajri-theek है जा तू..

मैं उसके पास से निकला और जान कर बगल वाले खेत में गया जिसमे कल hi पानी लगा था और मिटटी गीली थी और काफी फिसलन और कीचड वाली thi...main खेत के किनारे झाड़ियों की आड़ में जाकर रुका देखा जैसी जगह चाहिए वैसी है की नहीं और ये वैसी hi थी झंडियों के बगल में और खेत के किनारे और जब मुझे लगा यही जगह ठीक होगी तो मैं एक बार ज़ोर से ाः चिल्लाया और फिर अपने पाजामे को घुटनो तक करके वहीं मिटटी में लेट गया..

उम्मीद के अनुसार अगले hi पल मुझे कजरी की आवाज़ सुनाई दी

कजरी- क्या हुआ कर्मा कहाँ है तू...

अगले hi पल लगा की वो खेत के बगल में है पर झाड़ियों की वजह से शायद मुझे देख नहीं पाई है... मैंने एक बार और आह किआ उसे पता चल गया आवाज़ सुनके तो वो झाड़ियों के बीच से निकल कर मेरे पास आने लगी और जैसे hi झाड़ियां ख़त्म हुई और जहाँ मैं लेता था वो वहां पहुंची और उसका पेअर खेत की फिसलने वाली मिटटी पर पड़ा उसकी भी एक चीख निकली और वो धम्म से मेरे ऊपर गिरी...

में- दीदी ारायअम्म्मम्म्म्म seeeee...ahhh

अब चित्र कुछ ऐसा था की मैं पीठ पर नीचे लेता हुआ था मेरा पजामा घुटनो पर था लुंड खड़ा हुआ बहार था... और मेरे ऊपर कजरी का गदराया हुआ बदन था उसका चेहरा मेरी गर्दन पर था बड़ी मदमस्त छुछियां मेरर सीने मेइब धंस रही थी... मेरे हाथ उसके बड़े बड़े चूतड़ों पर थे... और मेरा लुंड उसकी छूट पर ठोकर मार रहा था...

कजरी- अह्ह्ह्हह कर्मा यहाँ इतनी कीचड कैसे...

में- दीदी मैं भूल hi गया था की कल पानी लगा है इस खेत में और कीचड हो रही है...

मैंने ये दिखते हुए की उठने की कोशिश कर रहा हूँ नीचे से कमर का ऊपर की और धक्का दिया और लुंड को कजरी की छूट के ऊपर सलवार पर चिपका दिया जिससे उसे अगर अब तक भी एहसास न हुआ हो तो हो जाये की लुंड खड़ा है...

कजरी के मुँह से एक आह निकली और उसकी आँखें थोड़ी बड़ी हुई जैसे hi उसे समझ आया की उसे क्या चुभ रहा है...

फिर भी वो अनजान बनते हुए बोली- चल उठते हैं अब आराम से...

Me-haan दीदी चलो..

और फिर मैंने. हाँ बूझ कर ये दिखने के लिए की मैं उठ रहा हूँ उसको कमर से पकड़ कर एक साइड को पलट गया और अब वो मेरे नीचे थी और मैं उसके ऊपर बाकि चीज़ें सब वैसी hi थी लुंड अब भी छूट पर ठोकर मार रहा था जिसका एहसास कजरी को हो रहा था और तो और अब मुझे उसकी सांसे भी बढाती हुई महसूस हो रही थी...

Kajri-aahhh कर्मा क्या कर रहा है...

Me-didi फिसलन बहुत है...

कजरी- हाँ देख तो तेरे भी कपडे गंदे हो गए और मेरे भी...

में- हाँ दीदी कीचड हो गए है यहाँ काफी...

कजरी- तो क्या अब पड़े hi रहेंगे चल उठ तो सही..

में- हाँ दीदी..

मैं अपने हाथों पर ज़ोर लगाकर उठने लगा और जानबूझकर एक धक्का लुंड का उसकी छूट पे और मारा और ऐसे दिखाया की उठाते हुए लगा है और फिर मैं एक साइड को अपनी पीठ पर गिर गया... अब मैं और वो जैसे अगल बगल लेते हुए थे.. मेरा लुंड सीधा आसमान की और मुँह करके खड़ा था...

में- अरे मैं फिर से फिसल गया...

Kajri-ruk मैं उठती हूँ...

कजरी अपने हाथों का सहारा लेकर उठ कर बैठ गयी और बैठते hi उसकी नज़र मेरे खड़े लुंड पर गयी और उसकी आँखें बड़ी हो गए.. वो मुँह खोले उसे hi देखे जा रही थी...

अब तक उसे ये अंदाजा नहीं था की मेरा लुंड बहार है... उसे लगा था की कपड़ो के अंदर से hi वो उसे महसूस हो रहा था... उसे ये अंदाजा नहीं था की मेरा कड़क लुंड बिलकुल नंगा उसके सामने आ जायेगा

कजरी की नज़रें जैसे मेरे लुंड पर जैम सी गई... कुछ देर तक वो बस ऐसे hi बैठी देखती रही फिर अचानक जैसे उसका ध्यान बापिस आया हो तो वो अपनी नज़रें हटाने की कोशिश करने लगी..

कजरी- ओह्ह वो कर्मा मैं वो तेरा वो बहार मतलब तू नंगा है...

में- हाँ दीदी पेशाब करने के लिए पजामा खोला hi था की गिर गया....

कजरी- हाँ वो चल अब उठते हैं...

में- हाँ दीदी..

कजरी कोशिश कर रही थी की उसकी नज़र मेरे लुंड पर न जाये पर बार बार वो फ़ैल हो रही थी

फिर कजरी उठने लगी.. धीरे धीरे से सँभालते हुए कड़ी हुई और फिर जैसे hi उसने एक कदम बढ़ाया फिर से उसका पेअर फिसला और आगे की तरफ गिरने लगी... और फिर घुटनो पर गिर गयी और आगे खुद को गिरने से सँभालने के लिए या पता नहीं किसलिए वो मुझे पकड़ने लगी

जिसका नतीजा ये हुआ की अंत में उसके दोनों घुटने मेरी कमर के बगल में थे एक हाथ कंधे पर था और सबसे अछि बात दूसरा हाथ मेरे लुंड को पकड़े हुए था... और आँखें बंद थी...

मुझे तो उसके हाथ का एहसास लुंड पर होते hi एक सनसनाहट सी शरीर में महसूस हुई... वहीं मेरा लुंड भी उसके हाथ में झटके मार रहा था... कजरी ने अपनी आँखें अब भी बंद कर राखी थी... मुझे लगा गिर न जाये उस दर से बाब्ड हैं...

में- दीदी तुम ठीक हो? कहीं लगी तो नहीं?

कजरी ने अचानक आँखें खोली और मेरी तरफ देख कर बोली..

Kajri-haan? हं हं मैं सही हूँ तेरे तो नहीं लगी.....

में- नहीं दीदी मैं ठीक हूँ...

हैरानी की बात ये थी उसका हाथ अब भी मेरे लुंड को पकड़े हुए था बस पकडे हुए था न hi हाथ तबसे कजरी ने हिलाया था न कुछ किआ था और न hi लुंड को छोड़ा था....

कजरी- न जाने मुई कैसी कीचड हुई है उठने hi नहीं दे रही सरे कपडे ख़राब कर दिए mere...ab पता नहीं घर कैसे जाउंगी...

में- हाँ दीदी सरे कपडे गंदे हो गए दोनों के पर कोई नई मैं साफ़ करवा दूंगा...

तभी कुछ ऐसा हुआ जिससे मैं बिलकुल हैरान हो गया.. कजरी मुझसे बिलकुल नार्मल होकर बात कर रही थी मेरी आँखों में देखते हुए पर वहीं उसका सीधा हाथ जो मेरे लुंड पर था धीरे धीरे ऊपर नीचे होने लगा.. मुझे समझ नहीं आया क्या कजरी का हाथ अपने आप काम कर रहा है जो इसे पता नहीं चल रहा और ये बिलकुल सामान्य तरीके से बात कर रही है... या ये अनजान बनने का नाटक करना छह रही है.. मैंने सोचा देखता हूँ खुद hi पता चल जायेगा... बस इंतज़ार करके देखता हूँ की कजरी दीदी आगे क्या करती हैं...

कजरी- वही तो देख न अब क्या हाल हो गया है..

कजरी की आवाज़ थोड़ी नशीली सी होने लगी.. और उसके हाथ की गति भी मेरे लुंड पर बढ़ने लगी.. पहले जो लग रहा था गलती से हो रहा है अब वो साफ़ हवस और उत्तेजना प्रतीत हो रहा था... मुझे मज़ा आ रहा था उसके हाथो के लुंड पर चलने से...

पर कजरी का चेहरा मेरी तरफ hi था उसने एक बार भी चेहरा घुमाकर लुंड की तरफ नहीं देखा था... जान कर अनजान बनने के इस नाटक में मुझे मज़ा आ रहा था...

में- हम्म्म अहह हाँ दीदी सही कह रही हो..

कजरी- अभी हाल hi में बोया है ये खेत लगता है..

में- हाँ दीदी अभी कुछ दिन पहले hi बोया है, पहला पानी लग रहा है...

अब कजरी का हाथ खुल कर मेरे लुंड पर चल रहा था कभी ऊपर नीचे तो कभी रुकर टोपे को अंगूठे से सहलाती पर देख अभी भी मेरी hi तरफ रही थी...

Kajri-pahle तो इसमें गणना था न?

में- नहीं दीदी गणना तो दुसरे में था इसमें दाल की थी...

Kajri-achaa हाँ, ये खेत थोड़ा अंदर पद जाता है न तो ध्यान नहीं गया...

में- कोई नहीं दीदी अब ध्यान से करूऊ....

अचानक से कजरी ने लुंड के टोपे पर अपना अंगूठा फिरा दिया तो मेरी सिसकी निकल gayi...phir मैंने सोचा ये खेल दोनों और से भी खेला जा सकता है... कोशिश करने में क्या जाता है..

कजरी- हाँ अब से ध्यान रखूंगी...

में- दीदी कपडे ज़्यादा hi गंदे हो गए हैं...

ये कहकर मैंने अपना एक हाथ उसकी पीठ पर रख दिया और फिरने laga...aur ऐसे फिरने लगा जैसे मिटटी हटा रहा हूँ... मैंने कजरी का चेहरा देखा तो कोई अलग प्रतिक्रिया नहीं थी.. मतलब अगर बढ़. सकते हैं...

मैं पूरी पीठ पर हाथ फिरने लगा..

कजरी- हाँ कर्मा देख न सब गन्दा हो गया है आगे से भी पीछे से भी...

में- मैं साफ़ कर देता हूँ दीदी...

मैं और खुल कर पीठ मसलने लगा और फिर थोड़ी हिम्मत दिखते हुए कजरी के चूतड़ों के ऊपर हल्का हल्का सा चक्कर लगाने laga...kyunki वो घुटनो और पंजो पर बैठी थी तो गांड बहार की और निकली हुई thi...wohin कजरी के हाथ का काम ज़ोरों पर था और वो खुलकर खेत में मेरा लुंड मुठिया रही थी... तो जब ये कर सकती है तो मैं कईं नहीं...

माइनर अपना हाथ उसकी सलवार के ऊपर से hi उसके मस्त चूतड़ों को मसलने लगा....

इसके आगे क्या हुआ अगली अपडेट में प्लीज कमैंट्स करके ज़रूर बताएं कैसी लगी अपडेट बहुत बहुत शुक्रिया
 
मैं और खुल कर पीठ मसलने लगा और फिर थोड़ी हिम्मत दिखते हुए कजरी के चूतड़ों के ऊपर हल्का हल्का सा चक्कर लगाने laga...kyunki वो घुटनो और पंजो पर बैठी थी तो गांड बहार की और निकली हुई thi...wohin कजरी के हाथ का काम ज़ोरों पर था और वो खुलकर खेत में मेरा लुंड मुठिया रही थी... तो जब ये कर सकती है तो मैं कईं नहीं...

माइनर अपना हाथ उसकी सलवार के ऊपर से hi उसके मस्त चूतड़ों को मसलने लगा...

..

अपडेट 86

मेरा हाथ जैसे hi कजरी के मस्ताने और गदराये चूतड़ों पर पड़ा कजरी के शरीर ने थोड़ा झटका खाया... इधर कजरी के चूतड़ों को सलवार के ऊपर से hi महसूस करके मैं मज़े ले रहा था क्या मस्त मुलायम और गोल मटोल नितम्ब थे उसके सलवार और अंदर पंतय के ऊपर से भी इतने गुदगुदे लग रहे थे और मैं भी बिना रोक टोक के अचे से मसल रहा था.. उधर कजरी का हाथ भी मेरे लुंड पर अचे से ऊपर नीचे हो रहा था जिससे मेरा लुंड कड़क होता जा रहा था... और उसके नरम नरम हाथों में झटके मार रहा था...

कजरी और मैं अब भी अनजान बनने का नाटक करते हुए एक दुसरे से ऐसे hi बातें किये जा रहे थे... मैंने सलवार के ऊपर से hi उसकी गांड की दरार में ऊँगली घुसेड़ दी और ऊपर नीचे करने लगा... वो थोड़ा सा सिसकी अंदर hi अंदर पर बहार नहीं जाहिर होने दी... मैं और खुश हो गया...

फिर मैंने सोचा बात बराबरी की होनी चाहिए और मैं अपना हाथ चूतड़ों के ऊपर फिरते हुए कमर तक लाया और फिर उसकी सलवार की इलास्टिक के इर्द गिर्द सूट को ऊपर उठा कर उसकी नंगी पीठ पर हाथ फिरने लगा...

मेरा हाथ उसकी नंगी पीठ पर पढ़ने के बाद भी कोई अलग प्रतिक्रिया न दिखने पर मैंने धीरे से अपनी उँगलियों को उसकी इलास्टिक में फंसाया और धीरे धीरे उसके मखमली चूतड़ों की तरफ धकेलने लगा... हर बढ़ते पल के साथ उसके चूतड़ों का ज़्यादा से ज़्यादा हिस्सा नंगा होता जा रहा था... और कुछ पल बाद सलवार एके चूतड़ों के पार जाँघों तक पहुँच गया एक छोटी सी पंतय में क़ैद कजरी के चूतड़ बहार the..choti सी पंतय गांड की दरार में फँसी हुई थी और बाकि के चूतड़ नंगे थे. जिसे देखते hi मुझसे रहा नहीं गया और मैं कजरी के चूतड़ों को मसलने लगा..





आह्हः नरम चूतड़ों का नंगा एहसास हाथ पर मज़ा दे दहा था.. उसके चूतड़ों की थिरकन मुझे पागल कर रही थी...

वहीं अपनी सलवार नीचे होने और चूतड़ों पर मेरा हाथ पड़ने पर वो थोड़ा काँप सी गयी और फिर मेरे लुंड को और कास के दबाने लगी...

अगले 5 मीन्स तक मैं उसके चूतड़ों को मसलता रहा और वो और मैं गरम होते जा रहे थे.... उसकी साँसे और भरी हो चली थी.... फिर भी वो नार्मल लगने की और बात करने की पूरी कोशिश कर रही थी...

कजरी- कर्मा ये तू अपनी तुबेल से किसी और के खेत तक पानी कैसे पहुंचता है...

में- दीदी दो तरीके हैं एक तो पाइप लगा देते हैं टूबेल्स से उसके खेत तक. .

कजरी- और दूसरा तरीका...?

में- दूसरा तरीका थोड़ा म्हणत वाला है... इसमें हम क्या करते हैं दीदी दो खतों के बीच जो रास्ता या पगडण्डी होती है न...

बोलते हुए मैं उसे प्रैक्टिकल से समझने लगा जब मैंने दो खेत का ज़िक्र किआ तो उसके दोनों चूतड़ों को दबा कर इशारा किया ..

में- तो उस पगडण्डी पर हम एक गहरा सा रास्ता खोद देते हैं.. जिसमे होकर पानी जा सके...

और पगडण्डी का रास्ता बताने के लिए मैंने उसकी पंतय के ऊपर से hi उसकी गांड की दरार में उंगली ऊपर से नीचे फिरने लगा...

में- तो उसी दरार से होते हुए पानी खेत तक चला जाता है.

मैं उंगली को नीचे छूट के पास तक ले गया तो पाया उसकी पंतय छूट के आस पास पूरी गीली थी और मेरी उंगली के यूँ घूमने से कजरी मचल उठी...

Kajri-aahhh कर्मा ये तुबेल में पानी कैसे ाताआ है...

मैंने उसके सवाल पूछने का फायदा उठाते हुए तब तक जल्दी से उसकी पंतय की इलास्टिक में हाथ डाला और उसे भी सलवार तक खिसका दिया और ये सब इतनी जल्दी किआ के वो सवाल बभी ख़त्म नहीं कर पाई... अब कजरी के चूतड़ बिलकुल नंगे थे...

में- दीदी तुबेल में पानी ज़मीन से आता है...

और ये कहते हुए मैं उसकी गांड की नंगी दरार में उंगलियां ऊपर से नीचे चलने लगा.





कजरी- हाँ आआआहहहहहहह ज़मीन से कैसे. ...हम्म्म..

में- दीदी तुमने देखा होगा की ज़मीन के तुबेल के पास एक घड़ा होता है... जिसमे एक पाइप लगा होता है.. उसी से पानी नीचे से तुबेल तक आता है....

कजरी और मैं एक दुसरे को इस अनजान बनने वाले खेल में टक्कर पर टक्कर दिए जा रहे थे... कजरी भी हार मैंने को तैयार नहीं थी और न hi मैं.. मैं उसे मजबूर करना छह रहा था इस वो पहले इस अनजान बनने के खेल को छोड़े और हार माने... पर शायद यही औरत होती है जो सब करेगी हार नहीं मानेगी... खैर मैंने उसे हारने के लिए एक और टीए छोड़ा और

गाढा बताने के लिए मैं अपनी उँगलियों को कजरी की छूट और गांड के छेड़ के पास गोल गोल घूमने लगा....





कजरी के मुँह से सी सी सी सी की आवाज़ आने लगी वहीं उसका हाथ भी अब मेरे लुंड पर रुक गया था बस वो कसके पकड़े हुए थी लुंड को...

में- दीदी गड्ढे में पाइप लगा होता है और उसी से जुड़ कर मोटर लगी होती है जो चलती है और प्रेशर से पानी बहार आता है...

ये कहते हुए मैंने अपनी उंगली कजरी की गीली छूट पर राखी और घूमने लगा और मोटर चलने की बात बोलते हुए एक उंगली मैंने धीरे से कजरी की छूट में सरका दी...

कजरी के मुँह से सिसकी निकल गयी और वहीं उसके हाथ की पकड़ भी मेरे लुंड पर कास गयी इतनी की मुझे दर्द होने लगा... उसने अपने होंठो को दांतो के बीच दबा लिए था और आँखें बंद हो गयी थी .. मैं धीरे धीरे से उंगली को अंदर बहार करने लगा... वो अपने शरीर को थामे मेरी उंगली का प्रहार सह रही थी और मैं धीरे धीरे अपनी गति बढ़ाये जा रहा था..

कुछ hi पल बाद मेरी गति तेज़ हो चुकी थी और मैंने अपनी उंगली का साथ देने के लिए एक और उंगली कजरी की गरम छूट में घुसेड़ दी और मोटर की रफ़्तार से अंदर बहार कर रहा था..

कजरी के मुँह से ahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh की आवाज़ लगातार निकले जा रही थी..

और मेरी दोनों उंगलियां उतनी hi तेज़ी से अंदर बहार होती जा रही थी...

अचानक से कजरी का शरीर झटके खाने लगा और वो कांपने लगी मुझे उसके घुटने डगमगाते हुए लगे और वो फिर आगे मेरे पेट पर गिर गयी... पर मैंने उसकी छूट में उँगलियों को चलना जारी रखा उसकी कमर झटके पर झटके खा रही थी... उसने अपने दांतो को आपस में पीस. रखा tha...aur फिर उसका शरीर अकड़ गया कुछ पल ऐसे hi अकड़े रहने के बाद कजरी बेजान सी होकर गिर गयी... मुझे भी अपनी उँगलियों पर उसकी छूट का रास बहता हुआ महसूस हुआ ऐसा लगा उसकी छूट में कोई फव्वारा छूट रहा है और वो रास उसकी छूट से बहकर बहार आने लगा... और उसकी जांघो और चूतड़ों पर फैलने लगा..





उसके बाद कहीं जाकर मैंने अपनी उंगलियां निकली उसकी छूट से...

में- दीदी ऐसे पानी ऊपर आता है तुबेल में..

मैंने उसकी छूट के रास से भीगी हुई उँगलियों को चाटते हुए कहा .

कजरी अब भी बेजान सी वैसे hi लेती हुई थी बस फ़र्क़ सिर्फ इतना था की एक तक मुझे देखे जा रही थी... न कुछ बोल रही थी नक कोई प्रतिक्रिया दी बस तेज़ तेज़ सांसो के साथ देखे जा रही थी...

कुछ देर यूँ hi लेते रहने के बाद अचानक से कजरी उठी और मेरे ऊपर टूट पड़ी.. मेरे ऊपर आकर उसने मेरे होंठों को अपने होंठो में भर लिए और ज़ोर से चूसने लगी...

एक पल को तो मैं चौंक गया पर फिर उतने hi जोश से उसका साथ देने लगा..... और कुछ पल में hi उसकी जीभ मेरे मुँह में थी और मेरी जीभ से भीड़ रही थी... वहीं नीचे मेरे हाथ लगातार उसके बदन पर घूम रहे थे... कभी नंगे चूतड़ों को मसलते तो कभी जांघो को मैंने हाथ से उसकी पंतय और सलवार जो जब्ह पर अटकी हुई थी उसे नीचे सरका कर पूरी तरह से उतार दिया...

और साथ hi अपने पाजामे और कच्चे को भी... अब मेरा लुंड उसके चूतड़ों से रगड़ खा रहा था और मुझसे भी रुकने मुश्किल होता जा रहा था.....

मैंने उसको आगे झुकाते हुए उसका सूट पकड़ा और अपने होंठों को उससे अलग करके सूट को कजरी के सर से निकल दिया... कजरी के बदन पर सिर्फ एक कपडा था और वो थी उसकी अंदर की बनियान जो गाओं की लड़कियां ब्रा की जगह अक्सर पहनती हैं जो मर्दो की बनियान से मिलती जुलती होती है ..

मैं कजरी के होंठों को चूसते हुए पलट गया और खुद ऊपर आ गया फिर वो पलट गयी... फिर मैं ऐसे हम कीचड में गोल मटोल घूम कर एक दुसरे को चूस रहे थे हमारे पूरे बदन पर मिटटी और कीचड लग गयी थी.. कजरी के गिरे चिकने बदन पर कीचड और आकर्षक लग रही थी खैर फिर से हम एक जगह आके रुके और अभी नहीं कजरी मेरे ऊपर थी.

मैं बेहद खुश था की कल्लू की बहन आज मेरे ऊपर यूँ खुले आसमान के नीचे खेत में नंगी पड़ी है... खैर अभी खुश होने का नहीं काम पर लगने का वक़्त था तो मैंने उसकी बनियान को नीचे करके उसकी एक बड़े आम जैसी छुच्छी को बहार निकला और उसे अपने मुँह में भर लिए.. और चूसने लगा...

मेरे मुँह में छुच्छी जाते hi... कजरी की सिसकारियां निकलने लगी..

Kajri-haan आआआहहहहहहह कर्माआआआ आआआहहहहहहह ऐसी hiiiiiiiiiiiiiiiiiiii चूओस...

मैंने दूसरी छुच्छी को भी बहार निकल लिए और उसे मसलने लगा.... कजरी की बड़ी बड़ी छुछियां बिलकुल मुलायम थी मखमली... तो चूसने और मसलने में बेहद मज़ा आ रहा था वहीं मैं नीचे से कमर हिला हिला कर झटके दे रहा था जिससे लुंड उसकी गांड की दरार पर घिस रहा था....

ऊपर से मैंने उसकी एक छुच्छी को छोड़ा और दूसरी को मुँह में भर लिए....

कजरी लगातार मुझे उकसाये जा रही थी... और तेज़ चूसने को बोलके और सिसकिया ले लेकर...

मैंने उसकी छुच्छी को और चूसने के लिए उसे और आगे झुकाया और अपना पूया मुँह खोल कर उसकी ज़्यादा से ज़्यादा छुच्छी को मुँह में भर लिए .. उसके आगे होने से मेरा लुंड उसकी दरार से हैट गया पर मेरी कमर अब भी झटके मार रही थी तो लुंड कभी छूट पर ठोकर मरता तो कभी कजरी की गांड पर...

मैंने थोड़ी देर बाद अचे से चूसने के बाद उसकी चुकी को छोड़ा तो वो पीछे हुई और उसी वक़्त मैंने भी नीचे से झटका मारा और मेरा लुंड उसकी छूट से जा कर टकराया और उसके पीछे होने की वजह से लुंड का टोपा उसकी छूट में फँस गया...

Kajri-aaaaaahhhhhhh डययययययआआ reeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeee maaaaaaaaaaaaaaaaaaaaarrrrrrrrrr दालायआ aahhhhhhhhhhhhhhhh...

कजरी दर्द के मरे चिल्लाने लगी तो मैंने उसे झुककर उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए और चूसने लगा तो उसकी आवाज़ शांत हुई ..

वहीं लुंड अभी भी वैसा hi टोपा घुसाए हुए था तो मैंने धीरे धीरे से धक्के लगाने शुरू किये तो अछि बात ये थी की छूट बेहद गीली थी जिससे लुंड अंदर सरकने लगा... जब करीब आधा लुंड अंदर करने मैं मैं कामयाब हुआ तो मैंने.... उसकी कमर के जकड लिए और फिर नीचे से दो तीन करारे धक्के लगाए और लुंड पूरा अंदर दाल दिया... आह्ह्ह्ह कजरी की गरम छूट में घुस कर लुंड को मज़ा आ गया और मुझे भी... उसकी छूट का कसाव लुंड को बेहद भ रहा था...

हर धक्के के साथ कजरी थोड़ा कुनमुनाई पर न hi मैंने उसके होंठों को छोड़ा और न hi कमर को... कुछ देर तक यूँ hi पूरा लुंड घुसा के रखा और मुझे लगा अब सही समय है तो मैंने कजरी के होंठों को भी छोड़ दिया और उसकक कमर को भी...

कजरी कुछ पल यूँ hi रही उसके बाद सीढ़ी हुई और वो ऐसा करते हुए मेरे लुंड को अपनी छूट में महसूस कर रही थी... कजरी ने अपने दोनों हाथ पीछे मेरी जांघो पर रख लिए और फिर धीरे धीरे से अपनी कमर को मेरे लुंड पर घूमने लगी...

मुझे मेरे लुंड पर उसकी छूट की मांसपेशियां जादू करती dikhi...mujhe ऐसा लगा जैसे गरम मक्खन की पोटली में मेरा लुंड पीस रहा हो... ऐसे hi कजरी ने एक अछि गति पकड़ ली...





कजरी मेरे लुंड पर अपनी छूट पटकने लगी और चुदाई करवाने लगी...

में- आआआहहहहहहह दीदी क्या मस्त छूट है तुम्हारीइइइइइइइ ऐसे होई निचुड़ लो लुंड का सत्ता रास...

कजरी- hmmmmmmmmmmmmmmm कर्माआआआ आआआहहहहहहह तेरा ये भी टूओ देख कीटनाआए बड़ाआआ हैईईई आअह्ह्ह्ह..

मुझे लड़कियों और औरतों की एक बात समझ नहीं आती की लुंड पर बैठ जाएँगी ओर लुंड बोलने में शर्माएंगी...

में- क्या बड़ा है दीदी खुल कर बोलो..

कजरी- yahjiiiiiiiiiiiiiiiiiii तेराआआआ मुसलललल ahhhhhhhhhhhhhhhhhhjhh

में- मतलब उसे छूट में लेकर उछाल सकती हो बोल नहीं सकती?

कजरी- ये ततततरमरा लुंडडडड कर्माआ... अब्बब्बब खुशःह्ह्ह aaaahhhhhhhhhhhhh

में- हाँ बहुत खुश...

मैंने ये बोलकर उसे फिर से आगे झुककर कमर से जाकर लिए और नीचे से तेज़ी से सटासट लुंड कजरी की छूट में पेलने लगा......

कजरी- अह्ह्ह ैससससीईए hiiiiiiiiiii कर्माआआआ bahuttttttttttttttt mazaaaaaaaaaaa आ रहा है...

में- मुझी भी didiiiiiiiiiiiiiii गरममम choooooooooot है तुम्हारी...

कजरी- hmmmmmmmmmmmmmmm कर्माआआआ आआआहहहहहहह ahhhhhhhhhhhhhhhhhhjhh maaaaaaaaaaaaaa...

और इसी चीख के साथ एक बार फिर से कजरी का शरीर अकड़ा और वो मेरे लुंड पर झड़ने लगी ...

वो मेरे ऊपर गिर गयी और हांफने लगी मेरा लुंड अब भी उसकी छूट को भेद रहा था...

कजरी- अह्ह्ह कर्मा क्या खाके पैदा किआ तुझे चची ने... इतना मज़ा ज़िन्दगी मेंनननन कभी नही आया... और क्या लुंड पाया है रे पूरी छूट भर देता हैईईई..

Me-kya करूँ दीदी तुम्हारी छूट है hi इतनी कासी हुई...

मैं नीचे से धक्के लगते हुए बोलै .

कजरी- अभी रुकजा कर्मा थोड़ा रुक...

मैंने झटके देने बंद किये तो कजरी मेरे ऊपर से उठाने लगी और मेरा लुंड सरकता हुआ उसकी छूट से बाहेर आ गया...

मुझे भी अपनी पीठ पर चिपचिपा सा महसूस हो रहा था तो मैं खड़ा हुआ और अपनी टीशर्ट निकल ोहनकी और नंगा हो गया... कजरी नीचे बैठी हांफती हुई मुझे hi देख रही थी... उसकी नज़र कभी मुझपर पड़ती तो कभी मेरे आसमान को देखते हुए लुंड पर... फिर उसने हाथ बढ़ाया और मेरे लुंड को पकड़ कर मुठियाने लगी

कजरी- मुझे ये अंदाज़ा नहीं था की लुंड इतना बड़ा भी हो सकता है... उस दिन तुझे पेशाब करते हुए देखा तो यकीन नहीं हुआ था...

में- अब. तो यकीन हुआ न दीदी... आह्ह्ह्ह

कजरी ने इतने में मेरा लुंड अपने मुँह में भर लिया था और चूसने लगी.... वो अपनी जीभ से मेरे लुंड के टोपे को सहलाती... साथ hi जितना हो सके लुंड को मुँह में लेकर चूसती... मुझे तो लगा था की कजरी की छूट hi गरम है पर मुँह भी काम नहीं था...

उसके मुँह में इतना मज़ा आ रहा था की मैं अपनी कमर हिलाकर अब खुद से लुंड अंदर बहार करने लगा.. कजरी अपने मुँह को खुला रख रही थी और मैं उसके मुँह को अपने डंडे से छोड़ रहा tha...mera लुंड कजरी के गले तक जा रहा था और लुंड के अंदर बहार होने से कजरी के मुँह से ठाऊक बाह कर बहार आकर टपक रही थी... जो इस दृश्य को और कामुक बना रही थी...





कीचड से लिपटे हुए हम दोनों के बदन ऊपर से हवस और वासना का मिलान एक बड़ा hi कामुक माहौल था..

कजरी के मुँह से गूच गूच की ककमक आवाज़ें आ रही थी...

में- आह्हः दीदी चॉऊस लो मेरा लोढ़ा कभी नहीं सोचा था की तुम एक दिन मेरा लुंड चूसोगी ...

कजरी- गुच्छहहहह गुच्छहहह..

मैंने कजरी के सर को पकड़ कर उसे और अपने लुंड पर दबा दिया और तब तक दबाया जब तक मेरी गोलियां उसके चेहरे सा न टकरा गयी हैं... कजरी तड़पने लगी उसकी आँखों से आंसू बहने लगे और फिर कुछ पल बाद मैंने छोड़ दिया तो लुंड निकलते hi वो हांफने लगी... पर अब मुझे छूट चाहिए थी तो मैंने उसे लेटने का इशारा किआ और वो वहीं नीचे लेट गयी मैं कजरी की टैंगो के बीच आया और बिना किसी देरी किये अपने लुंड को कजरी की गीली छूट में एक बार फिर से घुसा दिया... और हलके हलके धक्कों से छोड़ने लगा...





मैं कजरी की आँखों में देखते हुए उसे छोड़ रहा था...

में- didiiiiiiiiiiiiiii कुछ दिन बाअद ब्याह है तुम्हारा और तुमममम यहाँ नंगी होकर टंगे उठाकर चुद रही हो...

Kajri-isiiiiiiiii बात का तो अफ़सोससस है रे की तूने पहले क्यों nahiiiiiiiiiiiiiiiiiiii छोड़ा अपने मुसल सीए अह्ह्ह्हह्हह ईरानी अंदर तक चोट करता है...

मैंने अपने धक्को की गति बढ़ाते हुए बोलै

में- दीदी कभी पहले छुडाआईईई करवाई है तुमने...

कजरी- नहीं रईईए कर्मा तेरा लोढ़ा पहला है जो मेरे शरीर में घुसा है...

मैं फकच फाछह लुंड कजरी की छूट में डालते हुए बोलै.

में- तो दीदी तुम्हारी छूवूँत...

कजरी- hmmmmmmmmmmmmmmm खून नहीं निकला न ये hiiiiiiiiiiiiiiiiiiii ना ..

Me-haan दीदी... टीम कुंवारी तो हो नहीं...

कजरी- अह्ह्ह्ह जब ज़्यादा उम्र तक ब्याह न हो और चढ़ती जवानी पागल करदे तो खीरा मूली को अपना हथियार बनाना पड़ता है...

में- तो इसका मतलब तुम सब्ज़ियां दाल दाल कर खुद को शांत करती थी...

मैं उसकी बात सुनकर थोड़ा और उत्तेजित हो गया सुर तेज़ छोड़ने लगा...

Kajri-haan अह्हह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह पहले उँगलियों से शुरू हुआ था पर फिर धीरे धीरे प्यास बाफति गयी... और फिर बढाती प्यास से hi नए नए तरीके ढूंढने लगी किसी के साथ करती तो बदनामी का दर था...

में- तो दीदी फिर आज मेरे साथ तो कर ली...

कजरी- हाँ रे कर्मा तेराआआआ लुंड देख कर खुद को रोक hi नहीं पाई... बस उम्मीद है की तू मुझे बदनाम नहीं करेगा और मेरी शादी हो जाएगी..

में- हाँ दीदी तुम्हारी शादी बड़े धूम धाम से होगी अभी तुम बस चुदैई का मज़ा लो..

ये कहकर मैं तेज़ तेज़ धक्के लगाने लगा और उसकी छूट में खछ खछः लुंड दाल कर बुरी तरह छोड़ने लगा..

कजरी- हाँ रे न जाने शादी के बाद क्या होगा पर उससे पहले मैं हर सुख लेना चाहती हूँ... और तेज़ छोड़ मुझे .. आह्ह्ह्हह Karma...kya लुंडडडड पाया है रे...

इधर मेरा जोश भी बढ़ता जा रहा था हर झटके के साथ... कुछ देर ऐसे hi छोड़ने के बाद मैंने अपना लुंड निकला और उसे पलटा कर घोड़ी बना लिया अब उसकी बड़ी गांड और दोनों गोल मटोल चूतड़ मेरे सामने थे मैंने बिना देरी के अपना लुंड उसकी छूट पर टिकाया और एक hi धक्के में पूरा दाल दिया...

Kajri-ahhh कर्माआआआ... जान ले लेगाआआ क्याआ...

में- नही दीदी choooooooooot लूंगा..

कजरी अपने हाथों और घुटनों पर घोड़ी बानी हुई थी और मैं उसकी पीठ पर हाथ रखकर सटासट तेज़ी से छोड़ रहा था... ठप्प्प ठप्प ठप्प्प ठप्प ठप्प्प की आवाज़ आसपास फ़ैल रही थी...

मैं भी अब बेहद उत्तेजित हो गया था और अपनी चुदाई के आखिरी चरण में था तो मेरी धक्के तूफानी हो चुके थे और ताबड़ तोड़ तरीके से कजरी की छूट में लुंड पेल रहा था...

Kajri-ahhhhhh अह्हह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह ummmmmmmmmmmmmm आअह्ह्ह्हह एससीईईई hiiiiiiiiiiiiiiiiiiii चूड्डड्डूओ

हर धक्के के साथ कजरी के मुँह से सिसकियाँ निकल रही थी..

मेरी गोलियों से मुझे मेरा रास मेरे लुंड में भरता हुआ महसूस हो रहा था मैंने 15- 20 धक्के पूरे लुंड को जड़ तक घुसा कर कजरी की छूट में लगाए.... तो वो झड़ने लगी उसका शरीर फिर से अकड़ गया और फिर वो आगे गिर गयी वहीं मेरा रास भी निकलने वाला था तो मैंने उसे जल्दी से घुमाया और अपना लुंड उसके मुँह में ठूंस दिया और फिर धार के बाद धार छोड़ने लगा... उसके मुँह में जब रास गया तो वो पहले तो थड़ा चंकी पर फिर उसे पीने लगी जितना पि सकती थी सारा पि गई बाकि उसके मुँह की साइड से बहकर नीचे टपक गया

मेरा झड़ना ख़त्म होने के बाद उसने चाट चाट कर लुंड साफ़ किआ और फिर नीचे लुढ़क कर आराम करने लगी..

कुछ देर यूँ hi रहने के बाद हम लोगो ने अपने कपडे पहने गंदे hi सही फिर तुबेल के पास पहुंच कर खुद को साफ़ किआ... फिर थोड़ी देर धुप में बैठे तो मैं उतनी देर तक कजरी के होंठों और छूछीयो को चूसता रहा.. और फिर वो जल्दी मिलने की बोलकर चली गयी मैंने भी देखा टाइम हो गया था तुबेल बंद करने का तो मैं भी तुबेल बंद किआ और बाघ में आकर खत को धू में सरकाया और लेट गया जो कपडे गीले थे वो भी सूख जाएं लेते लेते कब नींद आ गयी पता hi नहीं चला..

इसके आगे क्या हुआ अगली अपडेट में प्लीज कमैंट्स करके ज़रूर बताएं कैसी लगी अपडेट बहुत बहुत शुक्रिया
 
मैंने भी देखा टाइम हो गया था तुबेल बंद करने का तो मैं भी तुबेल बंद किआ और बाघ में आकर खत को धू में सरकाया और लेट गया जो कपडे गीले थे वो भी सूख जाएं लेते लेते कब नींद आ गयी पता hi नहीं चला..

अपडेट 87

मैं न जाने कब तक सोता रहा फिर किसी की आवाज़ से मेरी आँख खुली... देखा तो पापा थे उठ कर देखा तो साथ में माँ भी थी...

पापा- अरे कब से सो रहा है तू यहाँ और ये कपडे कैसे गंदे हुए...

में- वो खेत में पानी लगा दिया तो सो गया ...

माँ- कपड़ो को क्या हुआ बीटा..?

में- वो माँ फिसल गया था एक जगह..

माँ- कैसे लगी तो नहीं...

पापा- संभल कर काम किआ कर बीटा...

में- वो कीचड ज्यादा थी न पापा इसलिए हो गया... तुम लोग क्यों आये हो?

माँ- अरे दो दिन का गोबर हो गया है सोचा उपले बना दूँ...

में- अरे माँ कहाँ तुम भी म्हणत में लगी रहती हो बेकार में..

माँ- बेकार में कहाँ बीटा ये भी अपना काम है... तू अब उठ और बाल्टी में पानी भर के ला..

में- ठीक है माँ..

मैंने बाल्टी में पानी भरा और माँ के पास ले गया जहाँ माँ भैंस के गोबर के पास बैठी थी और मसल कर उपले बनाने के लिए तैयार कर रही थी...

माँ- ला यहाँ रख दे...

पापा- ाचा तुम लोग फिर करो मैं गाओं में चक्कर मार आऊं कई जगह से पैसे लेने है आम के और पानी के...

Maa-theek है हो आओ...

पापा- कर्मा भूख लगी हो तो घर चला जा खाना खा ले जाकर..

Me-abhi नहीं पापा माँ के साथ चला जाऊंगा...

Papa-theek है..

ये कहकर पापा निकल गए और माँ गोबर को मसल मसल कर उपले बनाने के लिए तैयार करने लगी...

मैं वहीं बैठकर माँ को उपले बनाते हुए देखने लगा... और हमेशा की तरह hi माँ को देखते hi मेरा लुंड सर उठाने लगा... न जाने माँ में ऐसा क्या जादू था की चाहे किसी कक भी मैं कितना hi छोड़ लूँ माँ को देखते hi लुंड खड़ा हो जाता था...

कुछ देर तक मैंने ध्यान नहीं दिया और माँ से बात करने लगा..

Me-maa तुम कितना काम करती हो ..सारा घर का फिर ये सब... तुम थकती नहीं..

माँ- ाचा बड़ी फ़िक़र हो रही है माँ की...

में- नहीं माँ सच में बहुत काम करती हो तुम... थक जाती होगी..

Maa-beta ये मेरा घर है और अपने घर में काम करना मुझे ाचा लगता है.. और रही बात थकने की तो जल्दी से ब्याह करले और एक प्यारी सी बहु ले आ मेरे लिए... मेरी थकावट दूर हो जाएगी...

Me-kya माँ तुम भी न हर बार यही ब्याह के. पीछे पड़े रहती हो... मुझे बहु की क्या ज़रुरत मेरे पास तुम हो तो...

माँ- बीटा बहु की ज़रुरत होती है.. और बहुत ज़ैतूरी भी है...

में- माँ बहु वाले सरे काम तो तुम्हारे साथ कर hi लेता हूँ.. तुम्हारे साथ...

माँ- चल बेशर्म..

हालाँकि मैंने लुंड पर ध्यान नहीं दिया था पर लुंड को पूरा ध्यान था... पाजामे में बिलकुल तम्बू बना के खड़ा था...

माँ को सामने देख कर मन तो मेरा भी मचल रहा था पर वो काम कर रही थी इसलिए उनकी कामो को बढ़ाना नहीं छह रहा था ..

पर लुंड का अलग दिमाग था कुछ देर तक मैंने संभाला फिर पजामा नीचे खिसका कर बहार निकल लिए.. और हिलने लगा क्यूंकि माँ मुझसे आगे बैठी थी और उनकी पीठ मेरी तरफ थी तो वो मुझे नहीं देख प् रही थी.. मैं लुंड सहलाते हुए माँ से बात कर रहा था..

में- सही तो बोल रहा हूँ माँ..

माँ- मैं सही बोल रही हूँ.. ब्याह करले जल्दी hi...

Me-byah के बाद बीवी वाले सरे काम तो तुम्हारे साथ करूँगा माँ तो बीवी बुरा नहीं मानेगी..

माँ-. किसने बोलै ये की सरे काम मेरे साथ करेगा... अपनी बीवी का ख्याल रखिओ तू..

मेरे मन में भी ये ख्याल आने लगे की कैसा लगेगा बीवी के होते हुए माँ की छोड़ने mein...ayr ये सोचने से मेरा लुंड और कड़क हो गया और अब कुछ मांगने लगा...

Me-nahi माँ मैं तो सिर्फ तुम्हारा ख्याल रखूँगा और तुम इसका...

ये कहकर मैं खड़ा हुआ और माँ के बगल में जाकर उनके चेहरे को हाथ से पकड़ कर घुमाया और उनके मुँह में मेरा खड़ा लुंड घुसेड़ दिया.. माँ अचानक हुए हमले से चौंक गयी और पीछे की तरफ हुई पर मैंने उनके सर को पकड़ लिए और लुंड पर दबाने लगा कुछ देर बाद माँ संभल गयी और मेरी आँखों में गुस्से से देखने लगी पर फिर लुंड चूसने लगी...

मेरा ऐसे माँ को अपने सुख के लिए इस्तेमाल करना था तो गलत पर साथ hi बेहद उत्तेजक भी था की कैसे एक बीटा अपने लुंड को शांत करने के लिए जब चाहे अपनी माँ का मुँह में लुंड डाले और इस्तेमाल करे.... जैसे वो उसकी माँ नहीं बल्कि बाज़ारू रंडी हो... और कहीं न कहीं माँ भी अपने बेटे द्वारा ऐसे इस्तेमाल होने पर गरम हो जाती थी...

माँ के हाथ गोबर से साणे हुए थे... तो ऊपर भी नहीं कर सकती थी.. नहीं तो कपडे ख़राब हो जाते.... तो माँ बेचारी चुपचाप अपने बेटे से अपना मुँह छुड़वा रही थी....





हर धक्के के साथ माँ के मुँह से गगगगूछह गगगगूछह की आवाज़ निकल रही थी वहीं हर धक्के के साथ मैं लुंड को माँ के मुँह में और अंदर तक घुसरडता जा रहा था और तब तक नहीं माना जब तक मेरा लुंड जड़ तक उनके मुँह में नहीं समां गया...

अह्हह्ह्ह्ह क्या hi मज़ा आता है जब अपनी माँ के मुँह में लुंड जड़ तक ठूंस रखा हो तो... माँ के मुँह की गर्मी आह्हः कमल कर रही थी लुंड पर...

माँ बेचारी हाथ में गोबर लिए अपने बेटे की हवस शांत कर रही थी...

मैं पूरा जड़ तक लुंड को माँ के मुँह में घुसेड़ता तो माँ झटपटाने लगती कुछ देर ऐसे hi रखता और फिर लुंड बहार खींच लेता तो माँ हांफने लगती.. ऐसा मैंने कई बार किआ और फिर लुंड को उनके मुँह से बहार निकल लिए...

और पीछे हटकर अपने घुटनों तक लटके हुए पाजामे को पूरा उतर दिया और फिर माँ के पीछे गया और उनके पीछे घुटनो पर बैठ गया वहीं माँ को कमर से पकड़ कर आगे की तरफ झुकाया तो माँ के हाथ आगे रखे गोबर में टिक गए... और माँ घुटनो और हाथो पर झुक गयी..

मैंने जल्दी से माँ की साड़ी को उठाया उनके घुटनो के नीचे से निकला और माँ की कमर तक चढ़ा दिया.. जिससे मेरे सामने माँ के दो बड़े बड़े गद्देदार चूतड़ आ गए और उनके बीच में झांकता गांड का भूरा छेड़ और उसकर नीचे मेरा जनम द्वार जिसमे रास बाह रहा था सब सामने आ गया मैंने देर न करते हुए क्यूंकि मैं खुद को रोक नहीं प् रहा था मैंने अपने लुंड को पकड़ा...

और खुद को सीधा करके लुंड को माँ की गांड के छेड़ की तरफ ले गया और फिर बिना रुके अंदर भी धकेल दिया...





माँ- अह्हह्ह्ह्ह maa-aahhhhhhhhhhhhhhhh कर्मा बेटा ारायअम्म्मम्म्म्म सीईए....

में- अह्ह्ह माआ क्याआ गानन्द है तुम्हारीइइइइइइइ.... आराम hi nahiiiiiiiiiiiiiiiiiiii आता...

मैंने दो तीन झटके और मार कर अपना पूरा लुंड माँ की गांड में पेल दिया...

माँ- आअह्ह्ह फिर से kutiyaaaaaaaaaaa बना दिया तूने अपणीइइइइइइइ मा को...

Me-maa तुम्हे kutiyaaaaaaaaaaa बनाकर तुम्हारी गांड मरने का जो mazaaaaaaaaaaa है वो और कहीं नहीं..

माँ- बहुत काम हीईई बेटी आईसीईई होंगे जो अपणीइइइइइइ मा से ऐसे बोल पाए.....

में- आईसीई मायें भीई बहुत काम होगी माँ जिनकी गड्ड्ढड में उनके बेटी का लुंडडडड फंसा हुआ होगा.... और खुले में कुटिया बनकर अपणीइइइइइइइ गांड मरवा रही होगी...

और मैं माँ की कमर पकड़ कर तेज़ तेज़ धक्कों से उनकी गांड मरने लगा...





माँ- आह्ह्ह्ह कर्मा उपले बनाने दिए बेटा...

में- मैंने कब रोका है माँ बनाओ न ..

माँ- तूने नहीं रोका पर तेरा ये मुसल है न जो गांड में गाड़ रखा है तूने ये रोक रहा है...

माँ गोबर को जकड़ते हुए बोली मेरे हर धक्के के साथ माँ के हाथ गोबर में फिसल रहे थे...

मैं नीचे माँ की गांड को देख रहा था दो बड़े बड़े गद्देदार चूतड़ों के बीच एक भूरे से छोटे छेड़ में मेरा लुंड ांदसर बहार होता हुआ बड़ा ाचा दृश्य बना रहा था... और ऊपर से ये एहसास की ये मेरी माँ की गांड है मुझे और उत्तेजित कर रही थी...

आज न जाने मुझे कैसा नशा चढ़ा था मैं सिर्फ अपने लुंड की गर्मी मिटाना छह रहा था और माँ की गांड से अछि जगह कोई नहीं हो सकती थी... मेरे धक्के हर पल के साथ तेज़ हो रहे थे मेरा लुंड माँ की गांड में सटासट अंदर बहार हो रहा था... माँ की गांड के छल्ले ने मेरे लुंड को चारो तरफ से अपने में समां लिए था और हर धक्के पर लुंड की खाल के साथ घिस रहा था...

वहीं माँ की गांड में ऐसा लग रहा था जैसे गरम मक्खन की पोटली में लुंड अंदर बहार हो रहा है....

में- आह्हः meriiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii kutttttttttttiyyyyyaaaaaa चुड़क्कड़ माआआ तुम्हारीइइइइइइइ गांड आअज भर दूंगा अचे सेरे...

माँ- आअह्ह्ह्हह भरदी मेरे लाल मार अपने मुसल से अपनी माँ की गांड... मिटादे इसकी साडी khujliiiiiiiiiiiii....

में- सरीई khujliiiiiiiiiiiii मिटा दूंगा माआ...

माँ- आअह्ह्ह्हह एससीईईई hiiiiiiiiiiiiiiiiiiii लल्ला और तेज़्ज़ज़ कोई रहममम मत कर अपनी माँ की गांड पररर...

वहीं माँ की ऐसी बातें सुनकर मैं और गरम हो गया था और माँ की कमर के ऊपर चढ़कर माँ को और तेज़ छोड़ने लगा..





खुले आसमान के नीचे मेरी माँ की गांड अपने बेटे यानि मेरे लुंड की मार झेल रही थी...

वहीं मुझे तो जैसे जूनून सवार हो गया था माँ की गांड मरने का मैं बिना रुके बेहद तेज़ धक्कों से माँ की गांड मार रहा था...

माँ- आअह्ह्ह्हह आअह्ह्ह्हह आअह्ह्ह्हह आअह्ह्ह्हह आह्ह्ह्हह कर्मा बेटा..

में- लो मा अपनेईईई बेटीईई का लुँड्ड़डडडडडड

और जैसा की मुझे उम्मीद थी माँ की ताबड़तोड़ गांड मरने के बाद मैं अपनी उत्तेजना के शिखर पर था...

और हुआ भी वैसा hi कुछ मैंने 10-20 बहुत hi तगड़े धक्के माँ की गांड में लगाए ये धक्के इतनी तेज़ थे की माँ कई बार आगे गिरने से बची और साथ hi आखिरी कुछ धक्को से झड़ने लगी...

उधर माँ का झड़ना हुआ इधर मेरा भी लुंड रास की धार के बाद धार मम्मी की गांड में छोड़ने लगा... और तब तक लुंड जड़ तक घुसाए रखा जब तक एक एक बूँद न माँ की गांड में निचोड़ ली हो...

और फिर निकलने के बाद अपने लुंड को निकला मेरा लुंड निकलते hi मेरा रास बहकर माँ की गांड से बहार आने लगा...

खैर मेरे हटने के बाद माँ भी सीढ़ी हुई और फिर आराम से सांस लेने लगी.....

माँ- क्यों रे... इतनी तेज़ गांड मर रहा था जैसे भूत आ गया हो...

में- तुम्हे मज़ा नहीं आया माँ...

Maa-maza तो बहुत आया... पर अब काम करने दे टेरर मज़े के चक्कर में काम रह जायेगा...

में- ठीक है माँ करलो ना...

फिर माँ को जब आराम हुआ तो माँ ने अपने कपडे ठीक किये और बापिस आगे होलार उपले बनाने लगी इधर मैं भी अपना पजामा पहना और शांत हो कर बैठ गया काम से काम अभी के लिए तो... माँ की गांड ने मुझे पूरी तरह संतुष्ट कर दिया था..

खैर माँ फिर से उपले बनाने लगी और मैं उनसे फिर से साधारण तरीके से बात कर्म लगा जैसे कुछ हुआ hi नहीं.. एक साधारण माँ. बेटे की तरह...

इसके आगे क्या हुआ अगली अपडेट में प्लीज कमैंट्स करके ज़रूर बताएं कैसी लगी अपडेट बहुत बहुत शुक्रिया
 
खैर माँ फिर से उपले बनाने लगी और मैं उनसे फिर से साधारण तरीके से बात कर्म लगा जैसे कुछ हुआ hi नहीं.. एक साधारण माँ. बेटे की तरह...

अपडेट 88

कुछ देर बाद माँ ने उपले बना लिए तो मैंने उनके हाथ धुलवाए... फिर हम दोनों बाघ का सारा काम निपटा कर घर की और चल दिए... जब घर पहुंचकर मैंने गेट खटखटाया और फिर मेरी नज़र माँ की छाती पर गयी तो देखा झुकने की वजह से माँ की साड़ी और ब्लाउज पर गोबर लगा हुआ था...

म- माँ तुम्हारे ब्लाउज पर गोबर लगा हुआ है..

माँ ने देखा अपना ब्लाउज और बोली- अरे ढैय्या ये कैसे लग गया... सब तेरी वजह से हुआ है अब कपडे बदलने पड़ेंगे...

में- मैंने क्या किआ माँ...?

माँ- रहने दे ज़्यादा बन मत वहां घुटनो पर...

तभी अनुज ने गेट खोला तो माँ चुप हो गयी साथ hi साड़ी से ब्लाउज को धक् लिए...

अनुज- बड़ी देर लगाडी माँ..

माँ और मैं अंदर आ गए...

माँ- हाँ बीटा गोबर ज़्यादा था न इसलिए टाइम लग गया... तू क्या कर रहा था...

अनुज- मैं तो पढ़ hi रहा था माँ..

माँ- चल ठीक है बीटा तू पढाई कर... कर्मा चल तू ये गंदे कपडे बाथरूम में दाल दे धुलने के लिए.. मैं भी बदल लेती हूँ..

अनुज बापिस अपनी पढाई पर लग गया... मैं माँ के कमरे वाले बाथरूम में जेक अपने कपडे उतरने लगा इतने में माँ भी आ गयी...

और मेरे सामने hi अपनी साड़ी उतरने लगी...





माँ का पल्लू सरकते hi उनका नंगा सपाट पेट गदराई कमर और नाभि... साथ hi ब्लाउज में क़ैद बड़ी बड़ी छुछियां मेरे सामने आ गयी...

जिसे देखकर मेरे मुँह में एक बार फिर से पानी आने लगा... हालाँकि अभी कुछ देर पहले hi मैंने बेदर्दी से माँ की गांड मरी थी और अपना रास उनकी गांड में भर दिए था पर उनका जिस्म hi कुछ ऐसा था की जब देखो तब मुँह में पानी और लुंड में तनाव ला देता था..

माँ के जिस्म को देखते हुए मैं इतना खो गया की भूल hi गया की मैं खुद यहाँ किस लिए आया हु..

इतने में माँ की साड़ी उनके बदन से वो अलग कर चुकी थी और अब ब्लाउज और पेटीकोट में थी...

क्या कामुक और गदराया बदन था माँ का हर दिन और खूबसूरत होता जा रहा था...

माँ- अरे तूने अभी भी कपडे नहीं उतरे जल्दी उतार बीटा...

माँ ये बोलकर अपने ब्लाउज के हुक खोलने लगी... मेरी नज़र तो माँ की छूछीयो पर hi थी.. और फिर माँ ने अपने सरे हुक खोल दिए ब्लाउज के तो मैं न जाने कब माँ के पीछे पहुंच गया और मुझे तो तब होश आया जब मैं ब्लाउज के दोनों पतों को हटाकर माँ की छूछीयों को ब्रा के ऊपर से hi मसलने लगा..





Maa-haaye डययययययआआ लललललाहा क्या कर रहा है... छोड़ मुझे...

में- माँ थोड़ी देर करने दो रुका नहीं गया तुम्हे देखकर आअह्ह्ह्ह क्या मस्त छुछियां हैं तुम्हारी...

माँ- बेटा अनुज घर में है उसे शक हो जायेगा..

Me-maa वो पढ़ रहा है कुछ नहीं होगा..

मैंने माँ की छूछीयो को मसलना जारी रखा...

माँ- पर फिर भी नहीं बीटा.. अभी थोड़ी देर पहले hi तो तूने मेरी गांड मरी थी...

माँ ने ये बोलै और पता नहीं क्यों खुद hi शर्मा गयी.. शायद ये ख्याल से की वो क्या बोल रही है अपने बेटे से hi की उनके बेटे ने hi थोड़ी देर पहले उनकी गांड मरी...

Me-to क्या हुआ माँ तुम्हारा बदन hi ऐसा है मन hi नहीं भरता...

मैंने ये कहकर माँ के ब्लाउज को उनके शरीर से अलग कर दिया अब माँ मेरे सामने ब्रा और पेटीकोट में थी मैंने माँ को कमर से पकड़ा और वहीं नीचे बाथरूम में बिठा दिया और खुद उनके पीछे सात के बैठ गया माँ की पीठ मेरे सीने से लगी हुई थी..... मैंने बापिस अपना काम जारी रखा और ब्रा के ऊपर से चूचियों को मसलने लगा...





माँ- आअह्ह्ह्हह कर्मा अब बिठा क्यों दिया... बेटा इनसब के लिए ये टाइम सही नहीं है अनुज आ सकता है...

में- माँ बस थोड़ी देर... आह्ह्ह्ह माँ कितनी मुलायम और बड़ी छुछियां हैं तुम्हारी...

अब छुछियां लगातार दबाई जाएं तो कोई भी औरत गरम होने लगेगी तो कहीं न कहीं माँ भी हो रही थी पर अब भी माँ मुझे रोक hi रही थी शायद उन्हें अनुज का दर था..

पर मुझ पर तो जैसे माँ की छूछीयो का भूत सवार था मैं लगातार उन्हें मसले जा रहा tha...wohin नेरा लुंड कड़क होकर पीछे से माँ के चूतड़ों पर पेटीकोट के ऊपर से टक्कर मार रहा था..

माँ- कर्मा अब बहुत हो गया बीटा बहुत खेल लिए माँ के दूध के साथ अब चल कपडे बदल और मुँह हाथ धोकर साफ़ हो जा और खाना खा ले...

में- खा लूंगा मा पहले दूध तो निकल लू...

Maa-hattttt बेशर्म पूरा बेशर्म हो गया है अब कहाँ दूध आता है मेरे..

में- मेरे लिए तो आता है माँ...

ये कहकर मैंने माँ की ब्रा को नीचे कर दिया और उनकी बड़ी बड़ी मुलायम रसीली छूछीयो को बहार निकल लिए..





Maa-karmaa अब बस्स्स बेटा अब पूरा hi नंगा कर के छोड़ेगा क्या...

में- माँ तुम्हारे दूध देखने का बहुत मन कर रहा था इसलिए निकल लिया... देखो न कितने बड़े और मुलायम हैं...

माँ- हाँ बीटा मैं जानती हु. मेरे दूध कैसे हैं और ये भी जानती हूँ तुझे बहुत पसंद है पर अभी और काम करने हैं बाद में आराम से तुझे अपने दुधु पिलाऊंगी...

माँ मुझे दुलार कर समझने की कोशिश कर रही थी पर मैं कहाँ मानने वाला था और अब तो माँ की नंगी छुछियां सामने थी तो मैं अब नंगी छूछीयों को पकड़ कर दबाने लगा वो कोमल एहसास हाथों पर बड़ा मज़ा दे रहा था...





माँ भी अब थोड़ी गरम हो गयी थी उन्होंने अपनी गर्दन मोड़ कर अपना सर पीछे मेरे कंधे पर टिका लिए था..

में- वो तो मैं पियूँगा hi माँ पर अभी जो प्यास लगी है उसका क्या... वो तो अभी बुझानी hi होगी...

माँ- कितना ज़िद्दी हो गया है तू कर्मा कुछ समझता hi नहीं...

में- माँ जब सामने ऐसी चीज़ हो तो ज़िद्दी होना पड़ता है... इन्हे कैसे छोड़ दूँ मैं... मैंने माँ के निप्पल्स को छेड़ता हुआ बोलै...

वहीं मेरा लुंड तो जैसे मेरा पजामा और माँ का पेटीकोट फाड़कर अंदर घुस जायेगा...

माँ- कर्मा बहुत हुआ अब बस्स्स...

माँ थोड़ा ज़ोर डालते हुए उठने की कोशिश करते हुए बोली...

मैं झट से उठा और माँ के सामने चला गया और बैठ गया.. माँ ने मेरी तरफ देखा और इससे पहले कुछ बोल पाती मैंने उनकी एक छुच्छी को मुँह में भर लिए और चूसने लगा... माँ अपने हाथों पर पीछे टिक गयी और मेरे छूछीयो को चूसने से आअह्ह्ह्हह की सिसकारियां भरने लगी...

माँ- आअह्ह्ह्हह लललललाहा ारायअम्म्मम्म्म्म सीईए...

में- ummmmmmmmmmmmmmmmmaaahhhhhhhhhhh

मैं माँ के निप्पल को जीभ से छ्हद्ता तो कभी चूसता... कभी अपना पूरा मुँह खोल कर माँ की छुच्छी के ज़्यादा से ज़्यादा हिस्से को चूसता तो कभी पूरी छुच्छी को जीभ से चाटता..





बचपन में जिन छूछीयो को चूस चूस कर दूध पिया था बड़े होकर उन्ही छूछीयों का रास पीने में जो मज़ा है वो सबसे अलग है और ऐसा मज़ा हर बीटा चाहता है...

पर बहुत hi काम ऐसे नसीबदार लोग होते होंगे जिन्हे बड़े होकर भी अपनी माँ की छूछीयो को चूसने का मौका मिलता हो..

पर मुझे ये मौका मिला था और उसका पूरा फायदा उठाना मेरी ज़िम्मेदारी थी...

मैं पूरी शिद्दत से माँ की छुच्छी को चूस रहा था जिसके कारन अब माँ भी गरम होती जा रही थी... अब माँ ने भी मुझे रोकना बंद कर दिया था और मेरे सर पर हाथ फिरा रही थी प्यार से... मुझव बेहद ाचा लग रहा था... ऐसा लग रहा था जैसे माँ की छुच्छी से रास बहकर मेरे मुँह में आ रहा है... और मेरी प्यास बुझा रहा है...

माँ- मेरे लाल पि ले एससीईईई hiiiiiiiiiiiiiiiiiiii मा का दुध पि जाआअह्ह्ह्ह . Ahmmmmmmmmmmm...

मैं माँ की बात का जवाब उनकी छुच्छी और चुस्की दे रहा था... फिर माँ ने मेरा सर को अपनी छुच्छी से हटाया तो मैंने उनकी तरफ देखा लेकिन फिर माँ ने अपनी दोनों छूछीयों को अपने हाथों से पकड़ कर ऊपर उठा दिया और मुझे चूसने का इशारा kia..maa ने छूछीयो को ऐसे उठाया था जैसे मुझे परोस रही हो की ले बीटा अचे से चख ले इन्हे... और मैंने भी देर न करते हुए छुच्छी को मुँह में भर लिए और बदल बदल करचुस्ने लगा...





माँ की छूछीयो को चूसने पर मेरे लुंड का बुरा हाल हो गया था और ऐसा लग रहा था की पहात जायेगा... पर मेरा ध्यान तो अभी सिर्फ माँ की छूछीयो पर था और उन्हें hi बदल बदल कर चूस रहा था

माँ- कर्मा निप्पल को चॉऊस तेज़ सीए.. अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह अब पूरा भर ले मुँह में.....

माँ खुदसे उठाकर छूछीयो तो दे hi रही थी चूसने के लिए साथ hi मुझे बताती भी जा रही थी की मुझे क्या करना है और उन्हें कैसे और मज़ा आएगा अपनी चूचियां चुसवाने में.. मैं भी जैसा माँ बोल रही थी वैसा hi कर रहा था..

क्यूंकि काफी देर से माँ बैठी हुई थी तो वो थोड़ा असहज महसूस कर रही थी इस आसान में तो माँ पीछे होकर वहीं लेट गयी बाथरूम में hi और मैं उनके ऊपर आकर उनकी छूछीयों को चूसने में लग गया... आज मैं माँ की छूछीयो को खा जाना छह रहा था ऐसा लग रहा था की कुछ छूठ न जाये...

वहीं माँ लेती हुई मेरा सर अपनी छूछीयो पर दबा रही थी और मुझे और तेज़ चूसने के लिए उकसा रही थी...





मैं दोनों छूछीयों को आते की तरह गूंथते हुए चूस रहा था.. माँ लेती लेती आहें भर रही थी

वहीं मेरा लुंड अब पाजामे में बेहद कड़क हो चूका था.. पर मेरा मन माँ की छूछीयो को छोड़ने का बिलकुल नहीं था पर वहीं लुंड में दर्द होने लगा था.

पर कहते हैं न बेटे को तकलीफ हो तो माँ को खुद पता चल जाता है इस बार भी वैसा hi हुआ... माँ से मेरी तकलीफ देखि नहीं गयी और माँ ने हाथ नीचे लेजाकर मेरा पजामा नीचे खिसका दिया.. और मेरे लुंड को बहार निकल लिए..

माँ मेरे कड़क लुंड को बहार निकल कर अपने हाथ से पकड़ कर हिलने लगी...

मेरी साँसे बढ़ने लगी एक तो माँ की छुछियां चूसकर मैं मज़े ले रहा था उसके साथ hi माँ मेरे लुंड पर अपनी उंगलियां चला रही थी और कभी मेरे लुंड के टोपे को अपने अंगूठे से सहलाती और कुरेद देती... मेरा लुंड उनके हाथ में झटके खा रहा था...

फिर माँ ने अपना हाथ थोड़ा नीचे किआ और मेरी गोलियों को सहलाने लगी.. मुझे ऐसा लगा की मनो माँ गोलियां से रास को मेरे लुंड में भेज रही हैं और लुंड में मुझे मेरा रास भरता हुआ महसूस हुआ...

मुझे लगता था की मैं बिना चुदाई किये नहीं झाड़ सकता पर माँ हर बार मुझे हैरान कर देती थी... रात में मुँह से और अभी तो सिर्फ हाथ से उन्होंने मुझे अपने चरम के करीब पंहुचा दिया था...

फिर माँ ने अचानक से एक ऐसा दांव खेला जिससे मैं चारो खाने चित्त हो गया.. माँ ने गोलियों से नीचे लेजाकर अपनी उंगली को घूमते हुए मेरी गांड

के छेड़ को कुरेदने लगी...

मेरा मुँह माँ की छूछीयो से हैट गया और मेरे मुँह से सिसकारी निकल गयी... मुझे लगा मेरा लुंड अब फैट जायेगा...

मैं जल्दी से घुटनो पर माँ के चेहरे के बगल में बैठ गया और एक हाथ से माँ के सर को पकड़ कर अपने लुंड के पास कर लिए और दुसरे हाथ से लुंड का निशाना माँ के चेहरे पर लगाया...

माँ ने भी अपना मुँह खोल लिए और मेरे रास का इंतज़ार करने लगी.. माँ को ऐसे मुँह खोले देख मुझे एहसास हुआ की मेरी संस्कारी माँ के अंदर एक रंडी माँ भी छिपी हुई है जो लुंड की प्यासी है ...

अगले hi पल मेरे लुंड से एक पिचकारी छूती जो आधी माँ के मुँह में गिरी बाकि उनके गाल पर... ऐसे hi दूसरी जो उनकी नाक के आस पास चिपक गयी.. ऐसे hi पिचकारियों की धार मेरे लुंड से निकलती

और माँ के चेहरे या खुले मुँह में गिरती देखते hi देखते माँ का चेहरा मेरे रास से रंग गया और माँ का खूबसूरत चेहरा और कामुक हो गया...

मैं अभी भी अपने लुंड की आखिरी बूँद को तक माँ के चेहरे या मुँह में भेजना छह रहा था और लुंड को मुठिया कर एक एक बूँद निचोड़ रहा था..





इस वक़्त माँ को कोई देखता तो शायद सदमे ने आ जाता .. एक संस्कारी पतिव्रता नारी कैसे अपने hi बेटे के लुंड रास में भीगी हुई है और उसे पि भी रही है और ऊपर से माँ का मुँह खुला रखना उनकी रास के लिए प्यास और उत्तेजना को और दिखा रहा था माँ एक कामुक गदराई हुई रंडी से काम नहीं लग रही थी अपने बेटे की रंडी... अपने बेटे के लुंड की प्यासी...

माँ के पूरे चेहरे पर मेरा वीर्य था ये यूँ कहूं की माँ का पूरा चेहरा उनके बेटे के वीर्य से भीगा हुआ था... जिसे माँ अपने चेहरे पर महसूस करके और उत्तेजित हो गयी थी... जब मेरा झड़ना ख़तम हुआ तो मैं पीछे हो कर थक कर बैठ गया... पिछले कुछ समय में hi मैं ये तीसरा बार झाड़ा था और माँ के साथ झड़ते हुए तो ऐसा लगता था की मेरे शरीर की एक एक बूँद निकल जाती थी इतना रास निकलता था और इस बार भी यही हुआ था.. इतना रास निकला की माँ का चेहरा पूरा भीग गया था....

मैं बैठे बैठे माँ को देख रहा था माँ भी बैठी हुई हांफ रही थी...

Maa-haaye... राम.. अब तो कर ली न तूने अपने मन की चल अब हाथ पेअर धो और बहार जा मैं नहाकर आती हूँ...

Me-maa साथ नहाते हैं न..

माँ- कर्मा...

मैंने सोचा अब माँ गुस्सा हो जाएगी तो मेरी खैर नहीं तो मैं उठा और कपडे उतारकर मुँह हाथ धोने लगा.. उधर माँ अपना चेहरा साफ़ कर रही थी... अपनी उँगलियों से मेरे रास को चेहरे से उठती और अपने मुँह में दाल कर चूस लेती.. माँ मेरा रास चाट रही थी... ये देखकर बहुत ाचा सा महसूस हो रहा था माँ ऐसा करते हुए बेहद कामुक लग रही थी... समाज की नज़रो में ये सबसे घिनोना काम होगा की कोई माँ अपने hi बेटे के लुंड रास को यूँ चाट चाट कर खाये.. तभी शायद इस क्रिया की कामुकता और अश्लीलता इतनी thi...jab मेरे हाथ पेअर धूल गए तो भी मैं ऐसे hi खड़ा रहा लेकिन माँ ने मुझे देखा और फिर मुझे जबरदस्ती बाथरूम से निकल दिया...

मैंने निकल कर अनुज को देखा की कहाँ है तो वो अपने कमरे में पढ़ते पढ़ते सो गया था फिर अपने कमरे में आकर मैंने कपडे पहने रसोई में जाकर खाना लिए और फिर खाया और फिर सोचा थोड़ी देर लेट लूँ पर शायद तीन बार झड़ने के बाद और खाने की वजह से मुझे नींद आ गयी और मैं सो गया...

मैं देर शाम तक सोता रहा मैं उठा तो देखा अँधेरा हो चूका था मैंने बहार जाकर माँ से चाय मांगी तो उन्होंने चाय दी मैंने चाय पि और बहार की तरफ निकल पड़ा.... बहार जाकर जग्गू को फ़ोन किआ और मैंने उसे तुबेल पे बुलाया जब तक मैं पहुंचा जग्गू भी आ चूका था...

फिर मैं और जग्गू वहीं बैठ कर बातें करने लगे मैंने उसे आगे क्या करना है सब समझाया.. उसने भी सब ध्यान से सुना और फिर हम लोग अपने अपने घर की और चल दिए...

मैं अपनी गली में पंहुचा hi था की मुझे रज्जो चची अपने घर के बहार बैठी दिखी... और मुझे देखते hi उन्होंने मुझे उन्होंने अपने पास बुलाया..

( नई करैक्टर इनके और इनके परिवार का इंट्रो दे देता हूँ.. ये किरदार पहले भी आ चुके हैं पर इनका परिचय नहीं करवाया था.. तो ये है पंडित परिवार और ये लोग मेरी गली में hi रहते हैं इनके घर में 6 लोग हैं तो एक एक करके सबके बारे में बता देता हूँ

रज्जो चची- उम्र- 43, 5.2" की लम्बाई, आम ग्रहणी हैं, सांवला रंग, शरीर गदराया हुआ चूचियां काफी ज़्यादा बड़ी हैं, पेट सपाट.. थोड़ी नकचढ़ी हैं.. पर इनका गदराया बदन इनके नकचढ़ेपन को धक् लेता है.. हमेशा साड़ी पहनती हैं और बड़ी छुछियां ब्लाउज से बहार आने को बेताब रहती हैं..





दीनदयाल चाचा- रज्जो चची के पति घर के मुखिया उम्र-46, 5.4" की लम्बाई, थोड़े शांत स्वाभाव के हैं ज़्यादा कुछ बोलते नहीं हैं, बाकि अंदर से काफी रंगीन मिज़ाज हैं.

Sarju-sabse बड़ा बीटा मुझसे 2 साल बड़ा है, 5.5 की लम्बाई, पर पढाई छोड़ दी है, बस में कंडक्टर का काम करता है.. मेरा और जग्गू का दोस्त है. पर एक कमज़ोरी है लड़की देखते hi लार टपकने लगता है..

नीतू- सरजू से छोटी उम्र-20, अपनी माँ की तरह hi बेहद खूबसूरत, गोरा रंग, गोल चेहरा, तीखे नैन नक्श, पके आम जैसी छुछियां, और सबसे प्यारी है इसकी गांड. एक दम परफेक्ट.. अब तक मां के यहाँ रहकर पद्धति थी अब यहाँ आ गयी है.. अभी इसकी शादी के लिए लड़का देखा जा रहा है..





बिरजू- उम्र 19 साल, लम्बाई- 5.7", छोटा बीटा, पढाई कर रहा है थोड़ा अकड़ू और मंदबुद्धि टाइप का है.. कई बार फ़ैल होने से अभी भी स्कूल में है, घुम्मकड़ है, बहुत जल्दी बातों में आ जाता है...

लाडो- सबसे छोटी घर में, उम्र-18, 5.3" की लम्बाई, अभी स्कूल में है 12तह में, पल्ली की क्लास में है, पल्ली के साथ इसकी बहुत पटती hai..par जहाँ पल्ली का बदन गदराया हुआ है ये बहुत छोटी सी लगाती है, पतला शरीर, छोटी छोटी छुछियां, थोड़ी नटखट है पर चेहरा बहुत प्यारा और हंसमुख.





तो ये था पंडित परिवार का परिचय अब आगे चलते हैं)

रज्जो चची- कर्मा लल्ला ज़रा इहाँ आ,

में- हाँ चची क्या हुआ?

रज्जो- लल्ला नीतू की सहेली का जन्मदिन रहा, तो वहीं गयी रही, अब अँधेरा हुई रहा है और कछु पता नहीं है ूका,

में- कहाँ रहती है उसकी सहेली?

रज्जो चची- गैंदपुर में कहत रही... सरजू तो ाभौ बस पर हैं... और ी मुआ बिरजू पता नहीं कहाँ भारत है.. अब ू अकेली इत्स्नी रात में कैसे ाईहे.. रॉक का बखत और ऊपर से लड़की जाट...

में- कोई बात नहीं चची परेशां मत हो मैं ले आता हूँ नीतू को... अरे जिनके यहाँ गयी है उनका नाम पता हैं...

रज्जो चची- हाँ लल्ला कछु सर्वेश सिंह रहा... गैंदपुर में रहत हैं...

Me-theek चची तुम आराम से घर जाओ मैं जा रहा हूँ लेने..

रज्जो चची- जग जग जियो लल्ला जल्दी ेहो... और संभल के जाए...

Me-theek चची..

मैं वहां से निकल गया और घर आया घर आके मोटरसाइकिल उठाई और गैंदपुर चल दिया... गैंदपुर हमारे गाओं के बगल वाला hi गाओं tha..kuch 3 किलोमीटर का फैसला था मैं 10 मिनट में hi गाओं में पहुँच गया...

एक बूढ़े बाबा अपने घर के चबूतरे पर बैठे थे

में- बाबा ये सुरेश सिंह का घर किधर है?

बाबा- ैंनन, उऊंचा बोल छोरे कछु सुनाई नहीं दे रहो है...

मैं बाबा के कान में जाकर चिल्लाया,

में- बब्बा सुरेश सिंह का घर कहाँ है..

बाबा- सुरेश सिंह हम्म्म्म.... ाचा ाचा मास्टर साब को घर, तू ऐसा कर छोरे सीधो जा और टक्कर पे से सीधे हाथ को मुद जइयो.. फिर तीसरी गली पड़ेगी उलटे हाथ पे... बस उसी गली में सातवो माकन सीधे हाथ पर है सुरेश मास्टर को.

मैं एक बार बाबा के कान में और चिल्ल्या..

में- थीईएएक हैईईईई बबाआआ...

और फिर वहां से जैसे जैसे बाबा ने बताया वैसे वैसे चल दिय... तीसरी गली में भी मुद गया... फिर सीधे हाथ पर मकान गिने तो सातवे पर तो खली जगह पड़ी थी... मैंने सोचा साला बुद्धा गलत बता दिया... फिर उसके अगला मकान देखा तो गेट के बहार थोड़ी लाइट जल रही थी और बगल में प्लेट लगी थी जिसपर लिखा था सुरेश सिंह..

मैंने सोचा चलो घर तो मिला... बाइक कड़ी की और फिर गेट के पास गया वैसे तो गेट खुला था पर कोई दिख नहीं रहा था तो मैंने गेट खटखटाया तो थोड़ी देर बाद एक लड़का गेट पर आया जो अनुज की उम्र का होगा पर थोड़ा सांवला था..

लड़का- कहो भैया किस्से मिलने है?

में- नीतू यहाँ आई है जन्मदिन के लिए तो उसे लेने आया हूँ.. घर पर बुला रहे हैं..

Ladka-acha नीतू दीदी के घर से हो... आओ अंदर आ जाओ..

Me-nahi नहीं नीतू को बहार भेज दो लेट हो रहा है चची चिंता कर रही हैं..

लड़का ये सुनकर अंदर चला गया और थोड़ी देर बाद मुझे नीतू बहार आती दिखी... लाल रंग के सूट में बहुत खूबसूरत लग रही थी... तभी उसके पीछे से कुछ और लोग आते दिखाई दिए पहले एक आदमी आया फिर एक और आदमी और फिर एक लड़की पर मैं ठीक से नहीं देख पाया क्यूंकि उसके सामने एक आदमी था फिर कुछ पल बाद वो आदमी हटा तो उस लड़की का चेहरा मुझे दिखा...

चेहरा देखते hi मैं तो जैसे सुन्न सा हो गया.. बस उसके ऊपर मेरी आँखें जैम गयी... मैंने इससे ज़्यादा खूबसूरत चेहरा आजतक नहीं देखा था... ऐसा चेहरा ककी मैं खड़े खड़े ज़िन्दगी भर देखता रहूं... वो जो साथ ज़्यादा उम्र का आदमी था उसके बगल में कड़ी थी और किसी दुसरे आदमी से बात कर रही थी वहीं बगल में नीतू भी कड़ी थी पर मेरा ध्यान तो सिर्फ एक hi जगह था..





हाय इतनी खूबसूरत थी वो की मैं तो सोच कर भी हैरान था की कोई लड़की ऐसी भी हो सकती है... गोरा रंग, इतनी खूबसूरत और काली आँखें... गुलाब की पंखुड़ी जैसे होंठ... और बेहद प्यारी मुस्कराहट... रेशमी गले तक लहराते बाल... मैं जितनी तारीफ करूँ काम थी... मेरा दिल बस उसे देखने भर से इतनी तेज़ धड़क रहा था जैसे दिल नहीं चेन्नई एक्सप्रेस हो...

मुझे खुद भी पता नहीं चला की कब नीतू मेरे बगल में आ कर कड़ी हो गयी... मेरा ध्यान तो बस उसके चेहरे की तरफ था जो मेरे लिए इस दुनिया की सबसे खूबसूरत चीज़ था..





मेरा ध्यान तब टूटा जब नीतू ने मेरे कंधे को पकड़ कर हिलाया...

नीतू- कर्मा भैया, कहाँ खो गए, कब आये तुम, और मेरी सहेली को घूरना बंद करो...

मैंने नीतू की तरफ देखा तो थोड़ा कुछ समझ आया की ये hi नीतू की सहेली है..

में- हैं मैं वो मैं तेरी चची भेजी जल्दी...

नीतू- भैया क्या बोल रहे हो, ठीक तो हो न?

मैंने दो तीन गहरी सांस ली फिर खुद को शांत किआ और बोलै..

में- वो मैं अभी आया थोड़ी देर पहले.. चची ने भेजा अँधेरा हो रहा था न तो वो चिंता कर रही थी...

Neetu-main मम्मी से बोलकर आई थी वैसे भी यहाँ से कोई न कोई छोड़ने वाला था मुझे बेकार में मम्मी ने तुम्हे परेशां किआ...

में- नहीं नहीं परेशानी कैसी...

नीतू- चलें फिर...

में- ाहन्नँ हैं चल चल न..

मैंने बोल तो दिए पर मेरा मन जाने का बिलकुल नहीं था मन कर रहा था यहीं एक झोपड़ा बना लूँ और यहीं रहने लागूं...

तभी नीतू ने दूसरी तरफ मुँह करके आवाज़ लगाई...

नीतू- अंजलि... सुन अंजलि.. मैं जा रही हूँ...

जब नीतू ने बोलै अंजलि तो मेरे तो जैसे दिल में छपने लगा ये नाम ऐसे लग रहा था की वो कितनी धीरे धीरे बोल रही है जैसे filmo.mein स्लो मोशन में बोलते हैं वैसे अंजली... ये नाम शायद मैंने पहली बार hi सुना था पर सुनते hi मेरे दिल पर छाप गया था इस नाम और इस चेहरे को मैं कभी नहीं भूल सकता था ज़िंदगी में..

और फिर वो धीरे धीरे मेरे करीब आने लगी उसके हर बढ़ते कदम के साथ मेरे दिल की धड़कन बढाती जा रही थी... कहीं उसके आने तक मैं बेहोश होकर न गिर जॉन...

वो हमारे पास आके रुक गयी... और अपने सुन्दर होंठो को खोलते हुए बोली... और एक बार फिर मैं उसके चेहरे में खो गया... वो पता नहीं क्या बोल रही थी मुझे कुछ सुनाई नहीं दे रहा था बस उसका चेहरा दिख रहा था... कभी नहीं सोचा था साला जो फिल्मो में होता है वो सच होता है पर अभी सब कुछ मेरे साथ सच में हो रहा था...

और मैं उसे देखे जा रहा था..





एक बार फिर नीतू ने मेरा ध्यान तोडा और बापिस दुनिया में आया...

नीतू- भैया ये hi मेरी सहेली है और इसका hi बर्थडे है आज...

कितनी अजीब बात थी बर्थडे उसका था और तोहफा आज मुझे मिला था..

मैं कुछ देर तक फिर से उसके चेहरे को hi देखता रहा बिना कुछ बोले... उसने भी ये देखा और थोड़ा सा हैरानी वाला चेहरा बनाया वहीं नीतू भी मेरे बर्ताव से थोड़ी हैरान thi...phir उसने बात को आगे बढ़ाते हुए बोलै- ाचा चल हम निकलते हैं... तू एन्जॉय कर...

अंजलि- ठीक है संभल कर जाना और पहुंच कर मुझे बता देना.. और जल्दी से फिर से मिलते हैं..

फिर दोनों गले मिली अंजलि ने एक बार मुझे देखा और फिर मुद कर जाने लगी उधर नीतू भी मुद कर मोटरसाइकिल की तरफ जाने लगी... तभी अचानक से न जाने मुझे क्या हुआ.. और मैं बोल पड़ा...

में- सुनिए...

मेरे बोलने पर वो रुक कर पलटी और मुझे पलट कर देखा सवाल भरी नज़रों से देखा...

में- हैप्पी Birthday...Aanjalii..

उसका नाम लेने में थोड़ी हिचकिचाहट हुई न जाने क्यों पर आखिर मैंने बोल दिए...

वो थोड़ा सा मुस्कुराई और फिर से अपने खूबसूरत होंठो को खोलते हुए बोली- थैंक्यू..

बड़ा hi छोटा शब्द था पर मेरे लिए तो जैसे इससे बड़ा कोई शब्द hi नहीं था.. उसने मुझसे डायरेक्ट कुछ बोलै था..

उसके बाद भी वो मेरी तरफ देख रही थी और मुस्कुरा रही थी



इसबार उसकी मुस्कान थोड़ी ज़्यादा थी तो उसके सफ़ेद मोती जैसे दांत भी दिखे जिससे उसकी खूबसूरती और बढ़ गयी... मैं एक बार फिर उसके चेहरे में खो जाता अगर वो पलटकर जाती नहीं और साथ hi नीतू मुझे बुलाती नहीं...

खैर देखते hi देखते वो अंदर चली गई और मेरा मन जैसे भरी सा हो गया फिर मैं मोटर साइकिल पर बैठा नीतू को बिठा कर चल दिया..

कुछ देर तक सब शांत रहा मैं तो उसी के बारे में सोचे जा रहा था...

नीतू- तो भैया कैसी लगी मेरी सहेली...

में- हैं?? कक्क क्या मतलब कैसी लगी... अच्छी है तेरी सहेली है...

मैं थोड़ा चौंक गया था मुझे भी उम्मीद नहीं थी की नीतू इतनी जल्दी इतना सीधा सवाल पूछ लेगी....

नीतू- भैया ज़्यादा बनो मत मैंने नहीं देखा कैसे कैसे आँखें फाड़कर कर देख रहे थे उसे...

में- वो मैं तो वो ऐसे होई कुछ नहीं..

नीतू- ओह्हो शर्मा रहे हो... वैसे नाम तो पता चल hi गया होगा...

में- हैं वो अंजलि...

और ये बोलकर मैं खुद चुप हो गया..

नीतू- भैया मैं समझती हूँ.. बहुत खूबसूरत है न अंजलि...

में- हाँ ठीक hi दिखती है...

नीतू- देख लो भैया मुझसे छुपाओगे तो दोबारा कभी मिल भी नहीं पाओगे अगर बताओगे तो शायद कभी मुझसे मिलने आये वो या नुझे जाना हो तो तुम साथ जा सकते हो..

नीतू ने नखरे दिखते हुए कहा... मैंने सोचा सही में यार अगर मुझे उसे देखना है दोबारा तो नीतू hi काम आएगी तो इससे क्या छिपाना अब..

में- नहीं यार सिर्फ खूबसूरत नहीं मुझे तो सबसे ज़्यादा खूबसूरत लगी...

नीतू- ाचा ग अब आये न लाइन पर...

में- नीतू मेरी प्यारी बहन मुझे और कुछ बता न उसके बारे में मुझे सब जानना है..

नीतू- ठीक है माखन मत लगाओ अब.. वो मेरे साथ कॉलेज में पद्धति थी मेरे मां के यहाँ उसके पापा वहीं कॉलेज में टीचर थे.... फिर अभी पिछले महीने hi उसके पापा का यहाँ ट्रांसफर हो गया साथ hi उसका साल भी khatam.ho गया तो पूरा परिवार यहीं आ गया है पर संभलके रहना उसके पापा बहुत खड़ूस हैं...

में- कोई नई सब झेल लेंगे और कौन कौन है घर में...

नीतू- ओह्हो बहुत बहादुर बन रहे हो बच्चू बाद में साडी बहादुरी nikal.jayegi... वैसे घर में दो भाई और मम्मी और हैं उसकी पापा और अंजलि के अलावा ...इकलौती लड़की है उनकी बड़े नाज़ों से पला है...

में- वो तो देख के hi बता सकता हूँ...

Neetu-acha भैया अपना नंबर बोलो अगर दोबारा गैंदपुर जाना हुआ तो ड्राइवर तो तुम हो hi न...

में- अरे तेरे लिए तो मैं सब बन जाऊंगा ड्राइवर क्या चीज़ है...

इतने में हम उसके घर के सामने पहुंच गए थे तो नीतू मोटरसाइकिल से उतारते हुए बोली

Neetu-are रहने दो मेरे लिया या उसके लिए... वैसे सच में इतनी अछि लगी क्या?

मैं बिलकुल गंभीर हो कर बोलै- यार नीतू पहली नज़र में प्यार होता है ऐसा बस सुना था या फिल्मो में देखा था पर आज महसूस कर प् रहा हूँ की अगर होता है तो ऐसा hi होता है...

नीतू ने कुछ नहीं बोलै बस मुस्कुराई और मेरा कन्धा थपथपाया और चली गयी...

मैं भी घर आ गया मोटरसाइकिल अंदर की सब लोग वहीं थे टीवी देख रहे थे पर मेरा कुछ मन नहीं कर रहा था तो छत पर चला गया वहां टहलता रहा बार बार उसका चेहरा आँखों के सामने आ जाता फिर अनुज खाने के लिए बुलाने आया तो नीचे आकर सबके साथ खाना khaya...phir आपने कमरे में जाकर लेट गया काफी देर रात तक नींद नहीं आई और फिर आखिर सो गया...

इसके बाद क्या हुआ अगली अपडेट में प्लीज कमैंट्स करके ज़रूर बताएं कैसी लगी अपडेट बहुत बहुत शुक्रिया..
 
ही ी होप यू आल अरे सेफ एंड फाइन.. हेरे ी वांट तो डिसकस समथिंग रियली इम्पोर्टेन्ट विथ आल ऑफ़ यू फॉर बेटरमेंट ऑफ़ थिस फोरम.

अस यू आल क्नोव तहत वरिटेरस हु व्रिठे स्टोरीज हेरे इन थे फोरम गेट्स नथिंग थे व्रिठे फॉर जस्ट आवर प्लेअसुरे एंड एंटरटेनमेंट, एंड राइटिंग ा स्टोरी टैक्स ा लोट ऑफ़ टाइम एंड एफर्ट. एंड ी ऍम नॉट टॉकिंग अबाउट अन्य पर्टिकुलर राइटर हेरे ी ऍम टॉकिंग अबाउट आल ऑफ़ थम. सो ी थिंक वे शुड अप्प्रेसियते थम फॉर थेइर वर्क एंड एफर्ट सो ी थिंक तेरे अरे सम थिंग्स अस ा रीडर वे शुड दो...

1. ऑलवेज रिव्यु अपडेट, एंड बी रिव्यु ी मैं गिव जेन्युइन रेविएवस िफ़ यू हैवे रीड थे अपडेट, यू शुड पॉइंट आउट थे थिंग्स यू रीड, यू लिकेड, डिसलीक़ेद इन थे अपडेट विथाउट बीइंग रौदे.

2. सूपपोसे िफ़ ा राइटर कॉपी एंड पेस्ट शामे थिंग इन एव्री अपडेट वोउल्ड यू लिखे आईटी? ओफ़्कौर्से नॉट थें इंस्टेड ऑफ़ कमेंटिंग शामे थिंग्स इन कमैंट्स लिखे:- नीस अपडेट वेटिंग फॉर नेक्स्ट, एक्सीलेंट अपडेट, और नेक्स्ट अपडेट प्लीज, थी अरे थे सम एक्साम्प्लेस सो ी रिक्वेस्ट यू तो बे मोरे इंटरैक्टिव इन योर कमैंट्स.. िफ़ ा राइटर कैन व्रिठे 5000 वर्ड्स इन अपडेट फॉर आवर प्लेअसुरे वे कैन कमेंट एटलीस्ट 20 वर्ड्स फॉर हिज अप्प्रेसिअशन.

3 फॉर आल थे साइलेंट रीडर्स हु जस्ट रीड एंड लीव, ी वांट तो तेल्ल यू थिस इस नॉट फेयर तो वरिटेरस अस थे गिव थेइर एफर्ट एंड टाइम एंड यू जस्ट रीड एंड रन अवे.. एटलीस्ट तेल्ल थम यू हैवे रीड थे स्टोरी एंड एकनॉलेज थम फॉर थेइर वर्क.

थी अरे थिंग्स अस ा रीडर वे शुड रेमेम्बेर तो दो. बे मोरे इंटरैक्टिव तो वरिटेरस थे लिखे व्हेन समवन टॉक्स अबाउट थम अबाउट थे स्टोरी और थेइर वर्क.

एंड इन दोंग आल थी थिंग्स we'll बे बेनेफिटेड अस there's ा फैक्ट तहत ा अप्प्रेसिएटेड मन डस मोरे वर्क थान who's नॉट अप्प्रेसिएटेड सो we'll गेट उपदटेस मोरे फ्रेक्वेंटली.

थैंक्यू आल

स्टे सेफ स्टे हेअल्थी.
 
प्रिय पाठक मित्रों,

आशा है आप सभी सुरक्षित एवं स्वस्थ हैं. हम यहाँ इस फोरम की उन्नति हेतु कुछ चर्चा के लिए कुछ विचार रख रहे हैं.

आप सभी जानते हैं कि जो भी लेखक यहाँ अपनी कहानी प्रेषित करते हैं उन्हें किस भी प्रकार का कोई पारश्रमिक नहीं मिलता है. वे केवल सबके मनोरंजन एवं आनंद के लिए अपना समय देते हैं. ये कहना गलत नहीं होगा कि कहानी लिखना कोई सरल कार्य नहीं है, विशेषकर लम्बी उपन्यास जैसी कथाएं. और हमारा कथन किसी विशेष लेखक के लिए नहीं, बल्कि सभी के लिए है.

इसी कारण हम कहना चाहते हैं कि पाठक उनके इस परिश्रम और कला की प्रशंसा के लिए कुछ प्रयास करें.

हमारे कुछ सुझाव यहाँ लिख रहे हैं :

१. अपडेट के बारे में कुछ अवश्य लिखें. अगर आपको उसमें कुछ अच्छा लगा तो बताएं, और अगर कुछ ठीक नहीं लगा वो भी बताएं. परन्तु भाषा की मर्यादा बनाये रखें. अगर आप लेखक को अपनी अरुचि नहीं बताएंगे तो सम्भव है वो उसे चालू रखें और आप केवल एक इस कारण से उस कहानी से दूर हो जाएँ.

२. अगर लेखक एक अपडेट के लिए 2000 से 15000 शब्द लिख सकता है तो क्या उसे केवल “Nice Update” “waiting for next”, “Excellent Update”, or “next update please” के सिवाय हम और कुछ भी नहीं लिख सकते?

३. जो पाठक मूक रहकर पढ़ते हैं और चल देते हैं, क्या आपको लगता है कि ये आप लेखकों के साथ उपयुक्त कर रहे हैं. कम से कम उन्हें ये तो बताइये कि आप उनकी कहानी पढ़ रहे हैं और पढ़ते रहना चाहते हैं.

४. कृपया इस बात पर ध्यान दीजिये कि फोरम में कई कहानियां अधूरी हैं. इनके मुख्यतः दो कारण हैं.

अ. लेखक अपने कथानक को आगे बढ़ाने में असमर्थ रहे. इसका कारण हो सकता है उनके अन्य कार्य रहे हों, परन्तु ये भी हो सकता है कि उन्हें लिखना कितना कठिन कार्य है इसका अनुभव हो गया हो.

ब. लेखक पाठकों की उदासीनता से खिन्न होकर लिखना छोड़ दिया हो.

इसीलिए हमारी आपसे ये विनती है कि इन बिंदुओं पर कृपया ध्यान दें और फॉर्म को उन्नत करें. लेखकों से संवाद करें जिनसे उन्हें भी ये आभास हो कि कोई उनके परिश्रम की सराहना भी कर रहा है.

आप सभी का धन्यवाद,

स्वस्थ रहें और सुरक्षित रहें.
 
मैं भी घर आ गया मोटरसाइकिल अंदर की सब लोग वहीं थे टीवी देख रहे थे पर मेरा कुछ मन नहीं कर रहा था तो छत पर चला गया वहां टहलता रहा बार बार उसका चेहरा आँखों के सामने आ जाता फिर अनुज खाने के लिए बुलाने आया तो नीचे आकर सबके साथ खाना khaya...phir आपने कमरे में जाकर लेट गया काफी देर रात तक नींद नहीं आई और फिर आखिर सो गया...

अपडेट 89

सुबह 5 बजे के करीब मेरा फ़ोन बजने से मेरी नींद खुली... आँखें बंद किये हुए hi कान पर लगा कर बोलै- कौन?

जग्गू- अबे कर्मा मैं हूँ... उठ जा याद नहीं क्या शाम को क्या बोलै था?

मुझे उसकी बातें सुनकर कल की बात याद आई और फिर मैं उठ कर बैठ गया...

Me-haan हाँ उठ गया मैं तू लग जा अपने काम पर...

जग्गू- मैं अपनी जगह पर hi हूँ... बस तू तैयार रह मेरे फ़ोन करते hi निकल लिओ...

Me-theek है उठ गया हूँ मैं...

इतना कहकर मैंने फ़ोन काट दिया और बिस्तर से उठा हालांकि नींद लग रही थी पर काम भी ज़रूरी था.. तो सीधा उठकर टॉयलेट में घुस गया और.. अपने सरे काम निपटा कर हाथ मुँह धोया जिससे थोड़ी नींद भागे... घर पर सब सो रहे थे पर पापा किसी भी वक़्त उठने hi वाले थे और जैसे hi मैं कमरे से बहार निकला आँगन में पापा पहले से थे...

Papa-are वाह आज क्या बात है बड़ी जल्दी उठ गया तू और तैयार भी हो गया, कहाँ जा रहा है.?

में- वो कुछ नहीं पापा नींद खुल गयी इसलिए उठ गया सोचा उठ गया हूँ तो बहार जा कर कसरत वगेरा hi कर लेता हूँ.

पापा- बहुत बढ़िया पर सिर्फ एक दिन कसरत से क्या होगा?

Me-nahi पापा एक दिन कहाँ रोज़ करूँगा अब से..

पापा- हंसने लगा और बोले- देखते हैं कितने दिन चलता है ये तेरा रोज़..

में- चलेगा पापा देखना आप.

पापा- वो सब ठीक है जा मेरे कमरे से जाकर थोड़े बादाम निकल कर खा ले सुबह सुबह अचे रहते हैं...

Me-theek है पापा...

मैं माँ पापा के कमरे में गया और देखा माँ सो रही थी, माँ सिर्फ ब्लाउज और पेटीकोट में सो रही थी उन्हें देख के लग रहा था की रात को उनकी जमकर चुदाई हुई hai..ek तरफ करवट लेकने से उनकी बड़ी गांड पेटीकोट में मेरी तरफ झाँक रही थी मेरा मन किआ की अभी लुंड माँ की गांड में पेल दूँ पर अभी सही समय नहीं था... खैर मैं बादाम का डिब्बा ढूंढने लगा.. देखा तो कमरे के कोने में अलमारी के पास रखा था उसमे से बादाम निकले और कमरे से निकल गया... और फिर घर से निकल गया और तुबेल पे जाकर जग्गू को फ़ोन किआ...

में- तू अपनी जगह पर है न?

जग्गू- हाँ भाई जैसे hi निकलेगी बता दूंगा... तू पहुँच गया?

में- हाँ तुबेल पर हूँ तू जैसा भी हो फ़ोन कर के बता देना..

जग्गू- ठीक है भाई..

फिर फ़ोन काट गया मैं बैठकर रात में जो हुआ उसे याद करने लगा एक बार फिर अंजलि का खूबसूरत चेहरा मेरी आँखों के सामने घूमने लगा.. मैं ये समझता था की लड़की को देखकर लड़के के मन में ये सब होना आम बात है इतना तो मैंने पढ़ा भी था पर अंजलि के लिए मेरे मन में कुछ ज़्यादा hi उथल पुथल हो रही थी... एक hi बार तो देखा था उसे.. ये hi सब मेरे मन में चल रहा था तभी मेरा फ़ोन दोबारा बजा..

में- हाँ बोल..

जग्गू- वो निकल रही है...

में- तू पीछे रह और बताता रह...

जग्गू- ठीक है...

मैं एक बोतल लेकर निकल गया और थोड़ी देर बाद बात करते हुए मैं बंजर खेत की तरफ पहुंच गया...

में- मैं तो पहुंच गया बंजर खेत के पास हूँ तू कहाँ है?

जग्गू- वो भी बंजर खेत की साइड से जा रही है... सुन सुन उसके आगे वाली झाड़ियों में.. वहीं रुक गयी..

Me-theek है आगे का पता है न...

जग्गू- हाँ भाई सब याद है तू चिंता मत कर..

में- फ़ोन कटियो मत सब सुनता रहिओ और सही टाइम देखकर आगे बढियो..

Jaggu-theek है..

मैंने ऐसे hi फ़ोन जेब में रख लिया और झाड़ियों के बगल में जाकर पजामा और कच्चा नीचे कर के बैठ gaya...aur सुबह का टाइम था लुंड पहले से hi खड़ा थातो साडी तैयारियां थी.. जैसा उम्मीद था वैसे hi हुआ और कुछ देर बाद कदमो की आहात आई और फिर झाड़ियों के बीच से एक साया निकला और सामने मुझे देखते hi रुक गया... मेरे सामने कजरी कड़ी थी हाथ में लोटा लिए.. और मैं सामने बैठा था ऐसे दिखा रहा था जैसे टट्टी कर रहा हूँ... मुझे देखने के बाद कजरी थोड़ा हड़बड़ा सा गयी और अपना चेहरा घुमा दिया..

कजरी- अरे अरे माफ़ कर तू करले मैं दूसरी तरफ से निकल जाती हूँ..

मैं बिना देरी किये झट से खड़ा हो गया..

Me-are दीदी कोई बात नहीं... अब तुमसे क्या चिप्पा है...

Kajri-are फिर भी ये काम छुपाने वाले hi हैं...

Me-koi नहीं दीदी हो गया मेरा ...

कजरी ने मेरी तरफ चेहरा घुमा लिए और फिर मुझे देखा और फिर उसकी नज़र मेरे लुंड पर गयी... और वो थोड़ा शर्मा गयी...

कजरी- हो गया तो कपडे तो पहन ले..

में- दीदी पहन तो लूँ पर इसकी वजह से नहीं पहन प् रहा...

Kajri-kiski वजह से?

में- इसकी

अपने खड़े लुंड की तरफ इशारा किआ जो सीधा खड़ा होकर उसी को देख रहा था....

कजरी- हॉट पागल अंदर कर इसे शर्म नहीं आ रही तुझे..

में- दीदी कल के बाद कैसी शर्म... और सचमें ये खड़ा है पाजामे में कैसे जायेगा अंदर करने पर दर्द करेगा..

Kajri-are ये तो परेशानी हो गयी कर्मा...

पर जो मैं करना चाहता था वो हो गया था कजरी की आँखें मेरे लुंड पर जैम गयी... और कोई जवान कामुक लड़की एक लुम्बा तगड़ा लुंड देखले तो उसके बदन में क्या होता है सभी जानते हैं..

में- हाँ दीदी जब तक बैठेगा नहीं पजामा नहीं पहन सकता...

कजरी- तो अब क्या करें कब तक ऐसे रहेगा...

में- दीदी इसे तुम शांत कर सकती हो...

कजरी- मैं अभी... कैसे...

Me-jaise कल किआ था दीदी...

कजरी कल की चुदाई

याद करके थोड़ा और गरम हो गयी बाकि का काम मेरे खड़े लुंड ने कर hi दिया था...

कजरी- पर यहाँ कैसे कर्मा कोई आ गया तो...

में- दीदी मेरे तुबेल के पास चलते है बाघ में चलते हैं बहार से कुछ दिखेगा भी नहीं...

कजरी- पक्का नहीं दिखेगा...

में- अरे दीदी कितना घाना बाघ है तुमने तो देखा है na...aur अभी इस तरफ कोई आएगा भी नहीं

जवान लड़की और कितनी देर खुद को रोकती अंत में वो मान गयी...

कजरी- ठीक है पर जल्दी करना मुझे घर जाकर काम करना है..

Me-chalo तो दीदी...

मैंने अपना पजामा ऊपर खिसकाया और उसे बाघ के अंदर ले गया और एक सही से जगह जाकर उसे रोका और फिर बिना किसी देरी के उसके रसीले होंठों से अपने होंठ मिला दिए... कजरी भी मेरा साथ देने लगी... और अगले hi पल मुझे मेरे लुंड पर कजरी का हाथ महसूस हुआ... उसने मजबूती से मेरे लुंड को थाम लिए और अब लुंड को मसल रही थी...

मैंने होंठो को छोड़ा गर्दन को चूमते हुए उसके दूध दबाने laga...aur वो हलकी आवाज़ में सिसकियाँ लेने लगी...

पर मैं ज़्यादा टाइम नहीं ले सकता था क्यूंकि सुबह हो चुकी थी अब गाओं में चहल पहल होने लगेगी तो कोई भी इधर आ सकता है...

तो मैंने उसे कंधो पर ज़ोर डालकर नीचे बिठा दिया और मेरा लुंड उसके मुँह के सामने आ गया

कजरी भी इतनी गरम हो चुकी थी की उसे मुझे कुछ बताना नहीं पड़ा उसने तुरंत अपनी जीभ निकल कर मेरे लुंड का टोपा चाट लिए और मेरा बदन सिहर गया... कुछ बार टोपे पर जीभ फिरने के बाद उसने अपनी जीभ मेरे पूरे लुंड पर घुमाई और फिर मुँह में लेकर चाटने लगी... आह्हः सुबह सुबह hi लुंड चुसवाने में क्या सुख है ये वही समझ सकता है जिसने ये सुख भोगा होगा..





Me-aahhh कजरी दीदी ऐसे ही...

मैं खड़ा खड़ा लुंड चुसवाने का मज़ा लेने लगा जब अगले कुछ मिनट में hi कजरी ने मेरा पूरा लुंड चाट चाट कर थूक से गीला कर दिया था... तो मैंने आगे बढ़ने का इरादा किआ और उसके मुँह से लुंड निकल लिया...

कजरी मुझे प्यासी नज़रों से देखने लगी... की मैंने लुंड क्यों निकला उसके मुँह से...

में- दीदी मुँह से नहीं होगा और टाइम भी हो रहा है... अपनी सलवार उतरो न...

कजरी- सलवार यहाँ... नहीं कर्मा कोई आ जायेगा ...

में- जल्दी करूँगा दीदी कोई नहीं आएगा... पर अभी उतर दो..

गरम रो कजरी भी हो चुकी थी और उसकी छूट में भी चीटियां रेंग रही थी वो भी छोड़ना चाहती थी पर दर रही थी पर छूट की गर्मी के आगे दर की एक न चली और उसने भी साथ देते हुए अपनी सलवार और पंतय नीचे खिसका दी.. वो उन्हें पैरों में रखना चाहती थी पर मैंने उन्हें पैरों से पूरी तरह निकल दिया..

अब कजरी कमर से नीचे नंगी थी और मैंने भी अपना कच्चा और पजामा उतर दिया tha...par कजरी का कुरता इतने लम्बा था की उसके घुटनो तक आ रहा था.. मैंने उसे मोड़ कर उसकी कमर के ऊपर लपेट दिया और उसे एक पेड़ के सहारे झुका दिया और फिर झुककर उसकी छूट पर अपनी जीभ फिरै तो देखा उसकी छूट पानी बहा रही थी जिससे पता चल रहा था की वो कितनी गरम हो गयी है.. वो आहें भरने लगी फिर मैं सीधा खड़ा हुआ उसकी कमर को पकड़ा और अपने लुंड को उसकी छूट के द्वार पर टिकाया तो उसका शरीर खुद बा खुद पीछे होने लगा उसके चूतड़ पीछे आने लगे मेरा लुंड लेने के लिए... मैंने भी उसे तरसना ठीक नहीं समझा और एक धक्का मारा कमर का तो मेरा लुंड उसकी कासी हुई पर गीली छूट में दो इंच तक अंदर घुस गया...

हम दोनों के मुँह से hi आअह्ह्ह्हह निकल गयी... कजरी को थोड़ा दर्द भी महसूस हुआ पर वो कुछ बोली नहीं ... इधर मैंने भी हलके हलके धक्के लगाके पूरा लुंड कुछ hi सेकंड में उसकी छूट में घुसा दिया... और पूरा लुंड जाते hi कजरी भी सिहर गयी और मेरे लुंड को भी सुकून मिल गया...

फिर मैंने लुंड को बहार खींचा और टोपे तक लेकर फिर अंदर पेल दिया उसकी कासी हुई छूट में लुंड अंदर घिस रहा था जिससे मुझे बहुत मज़ा आ रहा था फिर क्या था मैंने उसकी कमर को दोनों हाथो से थमा और अपनी रफ़्तार बढ़ा दी और कुछ hi पालो में कजरी की ताबड़तोड़ चुदाई हो रही थी..





Kajri-ahhh अह्ह्ह अह्ह्ह अह्ह्ह अह्ह्ह अह्ह्ह अह्ह्ह ैससससीईए hiiiiiiiiiii कर्माआआआ आआआहहहहहहह तेरा.....

में- मज़ाहा आआ रहा है ना didiiiiiiiiiiiiiii... क्या मस्त्त्त चूऊत्त है तुम्हारी....

कजरी- हाँ bahuttttttttttttttt mazaaaaaaaaaaa आ रहा है... क्याआ लुंडडडड है तेराआआआ... क्या मस्त्त्त चुदाई करता हैईईईई maaaaaaaaaaaaaa...

मैं कजरी को तेज़ तेज़ थापो से छोड़ता जा रहा था... आस पास चुदाई का संगीत गूँज रहा था... कजरी भी दुनिया को भूल कर बस नेरे लोडे के मज़े ले रही थी... करीब दस मिनट तक मैं कजरी को ऐसे hi छोड़ता रहा जिसमे वो दो बार झाड़ चुकी थी पर हार मानने को तैयार नहीं थी... मैंने चुदाई करते हुए hi उसकी गांड के भूरे छेड़ पर नज़र डाली और फिर अपनी उंगली को थूक से गीला कर के उसकी गांड को कुरेदने लगा..

कजरी- hmmmmmmmmmmmmmmm कर्माआआआ आआआहहहहहहह क्या कर रहा हैईईई...

वो कुछ और बोलती उससे पहले मैंने उंगली उसकी गांड में घुसा दी साथ hi छूट चुदाई जारी राखी...

में- didiiiiiiiiiiiiiii छूट सीई निकालनी में भी तिमी लगगग रहा हैईईई तुम लेट तो नहीं हो रही...

मैं चुदाई करते हुए साथ hi गांड में उंगली करते हुए बोलै...

कजरी- अह्हह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह हैं होओओओओ टूओ रहियी hunnnn....parrrrr क्या करें...

वो इस दोहरे हमले से बहुत उत्तेजित हो गयी थी और झड़ने के करीब थीई... पर उसके झड़ने से पहले मैं अपना काम करवाना चाहता था... क्यूंकि वही सबसे ाचा मौका था

में- डीडीई मेरी पास ेक्क्क आईडिया हैई जिससे अह्ह्ह मेरा पानी जल्दी निकल जायेगा..

Kajri-kyaaaahhhh...

उसके पूछते hi मैंने लुंड कजरी की छूट से बहार निकल लिया और वो ऐसे तड़पने लगी जैसे जल बिन पानी...

कजरी- कर्माआआआ निकल क्यों लिआए जल्दी वापिस अंदर दाल मेरी छूट में जल्दी..

Me-par दीदी निकल hi नहीं रहा मेरा पानी इसीलिए मैंने नया आईडिया सोचा है...

Kajri-offo क्या आईडिया है तेरा जल्दी कर अपना ये लूँ मेरी छूट में दाल और छोड़ मुझे...

में- मैं तुम्हारे पीछे डालूं तो मतलब गांड में .....

कजरी- ननहहीं पागल है क्या इतना बड़ा है tera..meri फट जाएगीइ...

में- दीदी कुछ नाहीइ होगा मैं प्यार से करूँगा... आराम से चला जाएगा..

Kajri-nnahi तूने देखा है इसे कितना बड़ा है छूट में लेने में तक जान निकल जाती है तू जल्दी कर छूट में दाल और छोड़ न जल्दी ..

कजरी झड़ने के बिलकुल करीब पहुंचकर रुकने की वजह से काफी उत्सुक और परेशां हो रही थी उसी का फायदा मैं उठाना चाहता था...

में- दीदी एक बार कोशिश करने दो..

और इस बार उसका जबाब सुने बिना मैं उसकी गांड के पीछे बैठ गया और अपना मुँह उसके दोनों चूतड़ों के बीच लगा दिया और जीभ निकल कर सीधा उसकी गांड के छेड़ पर बार किआ... और वो फिर से सिहरने लगी...

Kajri-ahhhh कर्मा वाहनंन मत करतररर..

पर मैं कहाँ सुनने वाला था और अपने हाथों से पकड़ कर उसके दोनों चूतड़ों को फैला दिया और जीभ से उसकी गांड के छेड़ को चाटने लगा





कजरी का तो मनो बुरा हाल था आज से पहले उसने ये महसूस नहीं किआ था जैसा अभी क्र रही थी... मैं अपनी जीभ नुकीली करके उसकी गांड में घुसाने की कोशिश कर रहा था... जितनी जीभ अंदर जाती कजरी उतना hi तड़पने लगती और कुछ पल बाद वो खुद अपने चूतड़ों को पीछे धकेल कर मेरी जीभ को लेने की कोशिश करने लगी...

मैं समझ गया यही सही मौका है मैंने एक साथ दो उंगलियां उसकी छूट में घुसड़ी और उन्हें हिलने लगा जजससे उसका ध्यान बात गया और मैंने अपना चेहरा हटाया और जल्दी से सीधा हुआ अपने लुंड पर थूका और फिर उसे कजरी की गांड पर सेट किआ और चूतड़ों को पकड़ कर ज़ोर लगाकर धक्का लगाया और कजरी के मुँह से एक चीख निकली... जिससे मैं भी दर गया की कहीं किसी ने सुन न ली हो...

पर एक बार नीचे देखा तो गजब का नज़ारा था मेरे लुंड के टोपा कजरी के दोनों गोल मटोल नितम्बों के बीच उसकी गांड के छोटे से छेड़ को फैला कर फंसा हुआ था......

कजरी बुरी तरह हांफ रही थी... मुझे भी कजरी की गांड जितना मैंने सोचा था उससे भी कही ज़्यादा कासी हुई लग रही thi...mera शरीर भी उत्तेजना से गरम होता जा रहा था तो मैंने अपनी टीशर्ट भी उतर दी और नंगा हो गया.. मैंने ये इसलिए और किआ क्यूंकि मैं कजरी की उत्तेजना को और बढ़ाना चाहता था उसे और उत्तेजित करना चाहता था...

कजरी- ahhhhhhhhhhhhh अह्हह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह maaaaaaaaaaaaaaaaaaaaarrrrrrrrrr दालायआ aahhhhhhhhhhhhhhhh कर्मा बहार निकाल ले मैं मर जाउंगी....

में- दीदी अब तो हो गया अब दर्द नहीं होगा..

साथ hi मैंने हाथ आगे लेजाकर उसके कुर्ते के आगे कुछ बटन थे उन्हें खोला और उसकी चूचियों को दबाने लगा...

कजरी- हाँ आआआहहहहहहह ऐसी बोलल रहा हीी कुछ nahiiiiiiiiiiiiiiiiiiii होगा एक बार अपणीइइइइइइइ गांड में लुंदड़ लेकर देख.....

कजरी कुछ न कुछ बोल रही रही और मैं उसका दर्द काम करने के लिए उसकी बड़ी बड़ी छूछीयों को दबा रहा था फिर मैंने कुर्ते को खोल कर उसकी चूचियों को बहार निकल लिए और उन्हें बाघ के बीच में नंगा करके मसलने लगा... थोड़ी देर बाद कजरी का थोड़ा दर्द काम हुआ और दर्द की जगह बापिस मज़ा आने लगा तो वो अपनी गांड को थोड़ा हिलने लगी मैंने फिर भी रिस्क न लेते हुए... उसकी चूचियों को दबाते हुए हलके हलके धक्कों से उसकी कासी हुई गांड में लुंड अंदर बहार करने लगा...





मैं आराम से कजरी की गांड मार अपने आधे लुंड से hi मरने लगा... कजरी को भी ाचा लग रहा था क्यूंकि अब उसके मुँह से अह्हह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह की सिसकियाँ सुनाई दे रही थी जो की वासना और मज़े की थी दर्द की नहीं....

मुझे भी उसकी बेहद कासी हुई गांड मरने में मज़ा आने लगा और मैं धीरे धीरे करके अपने ज़्यादा से ज़्यादा लुंड को अंदर करने लगा... और फिर एक आखिरी धक्का लगा कर मैंने कजरी की गांड में पूरा लुंड खछः से घुसा दिया...

Kajri-hmmmmmmmmmmmmmmm कर्माआआआ...

में- दीदी तुमने पूरा लुंड ले hi लिआ गांड में...

उसकी कासी हुई और गरम गांड में लुंड को बेहद सुखद एहसास हो रहा था.. गांड ने मेरे लुंड के हर हिस्से को जकड रखा था...

और फिर धीरे धीरे मैंने धक्के लगाने शुरू किये और हर धक्के के साथ गति को बढ़ने लगा.. कजरी हर धक्के के साथ आठ आह्ह्ह्ह करके सिसकियाँ भर रही थी.... अब उसे भी गांड मरवाने में मज़ा आ रहा था... एक बार फिर से ठप्प्प ठप्प ठप्प्प की आवाज़ गूंजने लगी ... मैं तो बस ठप्प्प ठप्प ठप्प्प आँखें बंद करके उसकी गांड मरने का परम आनंद ले रहा था उसकी गांड का घरसँ अपने लुंड पर महसूस कर रहा था.. मेरी गोलियां हर झटके के साथ उसकी छूट से टकरा कर गीली हो रही थी...

और फिर अचानक से कजरी की हलकी सी चीख निकली तो मैंने आँखें खोली और मैं भी चौंक गया या कहूं तो चौंकाने का नाटक किआ क्यूंकि सामने जग्गू खड़ा था...

कजरी ने फट से आगे होकर मेरा लुंड निकल दिया गांड से और इधर उधर अपनी सलवार ढूंढने लगी साथ hi उसने अपना कुरता नीचे करके अपनी नंगी गांड को धक् लिया.. मैं भी अपना पजामा ढूंढने का नाटक करने लगा...

जग्गू- यही ढूंढ रहे हो न...

उसने अपने हाथ में मेरा पजामा और कजरी की सलवार दिखात्ते हुए कहा...

कजरी तो बिलकुल दर गयी थी उसके चेहरे पर साफ़ दिख रहा था की उसके होश उड़ गए थे..

में- द्द्द्दिखज्ज जज्जजगगु व्वू कपडे दे दिए हमें...

कजरी ने भी रट हुए बोलने की हिम्मत की..

कजरी- जग्गू मेरे कपडे दे दे...

जग्गू- कबसे चल रहा है ये सबब..

में- बास आअज पहली बार था भाई... तू कपडे लौटा दे मैं तुझे सब बतादूँगा.. यहाँ कोई आ गया तो गड़बड़ हो जाएगी...

जग्गू- तो आने दे न सबको पता चलना चाहिए की यहाँ क्या गुल खिला रहे थे तुम दोनों...

कजरी जग्गू की बातें सुन कर रोने लगी...

कजरी- जग्गू ऐसे मत कपडे लौटा दे किसी ने देख लिया तो मैं बर्बाद हो जाउंगी....

जग्गू- कजरी दीदी तुम्हारी तो शादी होने वाली है तुमपर कुछ दिन सबर नहीं हुआ.. अब सोचो अगर ये बात फ़ैल गयी तो तुम्हारी शादी का क्या होगा..

कजरी तो इस बात पर बेहद दर गयी.. और फूट फूट कर रोने लगी..

कजरी- जग्गू मुझी माफ़ कर दे आज के बाद कभी ऐसी गलती नहीं होगी बस इस बार मुझे जाने दे.. फिर कभी ऐसा नहीं होगा...

मैंने कजरी को गले लगा लिया और बोलै दीदी रो मत मैं कुछ करता हूँ तुम रो मत बस...

कजरी- कर्मा मैं मर जाउंगी बर्बाद हो जाउंगी ये बात फ़ैल गई तो...

में- दीदी मुझे कुछ सोचने दो बस तुम चुप हो जाओ...

मैं फिर जग्गू से बोलै- देख जग्गू मंटा हूँ गलती हमसे हुई है पर अगर ये बात गाओं में पहुंच गयी तो हम दोनों बदमाम हो जायेंगे और इसमें तेरा कोई फायदा नहीं है...

जग्गू- नुक्सान भी तो कोई नहीं है..

कजरी सुबक सुबक कर हमारी बातें सुन रही थी...

Me-par न बताने पर मैं तेरा फायदा है...

जग्गू और कजरी दोनों मेरी तरफ देखने लगे...

Jaggu-kaise?

में- अगर तू नहीं बताएगा किसी को तो मैं तुझे पैसे दूंगा...

इस बात पर कजरी भी हाँ में हैं मिलाने लगी..

जग्गू थोड़ा गुस्सा होता हुआ नज़र आया...

जग्गू- सेल वो पैसे तू अपनी गांड में दाल ले... सेल भूखा नंगा समझा है क्या तूने मुझे पैसो का लालच दे रहा है.. भोसड़ी के मुझे अपना सबसे ाचा दोस्त कहता है और इसके बारे में बताया तूने मुझे... कोई और होता तो जाने देता पर तूने मुझसे बात छिपाई है ये बात तो अब सबको पता चलके रहेगी..

कजरी फिर से तेजी से रोने लगी... मैंने उसे फिर से गले से लगा लिया और धीरे से उसके कान में फुसफुसाता हुआ बोलै...

में- दीदी ये तो ऐसे मान hi नहीं रहा पर एक आईडिया है...

कजरी ने भी सुबकते हुए पुछा- क्या?

में- दीदी चुपचाप से एक बार उसकी पंत की तरफ देखो...

कजरी ने उसकी पंत की और देखा..

में- देखो पंत उठा हुआ है इसका मतलब है ये उत्तेजित है इसका खड़ा है...

कजरी( फुसफुसाते हुए)- हाँ पर उससे क्या?

में- हमें इसी का फायदा उठाना पड़ेगा... और उसे और उत्तेजित करके अपना काम निकलना होगा...

कजरी- पर हम ये कैसे?

में- दीदी बस यही रास्ता नज़र आ रहा है और दीदी बदनाम होने से बचने का यही रास्ता है..

Kajri-par करना क्या होगा?

जग्गू- तुम दोनों क्या खुसर पुसार कर रहे हो?

में- एक मिनट रुक( जग्गू से...)

में- कुछ नहीं दीदी छोडो बेकार रास्ता है..

कजरी- रास्ता तो बता... मुझे कैसे भी बचना है इस मुसीबत से...

में- नहीं दीदी ये नहीं हो पायेगा तुमसे..

कजरी- क्या नहीं हो प्....

कजरी कहते कहते रुक गयी.. और कुछ सोचने लगी उसने मेरी तरफ देखा और फिर एक बार जग्गू की तरफ... और फिर कुछ सोचने लगी... अब तक तो जैसा मैंने सोचा था वैसा hi हो रहा था..

जग्गू- हो गया तुम लोगो का अब मैं चलता हूँ.. और अब देखना क्या होता है..

कजरी- जग्गू रुक...

मैं मन hi मन खुश हो गया..

Jaggu-ab क्या है...

Kajri-tu जाना चाहता है तो चले जाना अगर गाओं वालो को बताना चाहता है तो बता diyo..par थोड़ा रुक के जा और सब देखकर जा...

Jaggu-kya मतलब...

कजरी ने जग्गू की आँखों में देखते हुए अपने कुर्ते को नीचे से पकड़ा और उतर दिया और बिलकुल नंगी हो गयी...

जग्गू और मैं दोनों बड़ी बड़ी आँखों से उसे हैरानी से देखने लगे...

यहाँ कजरी बाघ में खुले आसमान के नीचे हम दोनों के सामने बिलकुल नंगी कड़ी थी.. मेरा लुंड जो पहले से hi इतना कड़क था और ठुमके मरने लगा...

कजरी जग्गू की आँखों में देखते हुए मेरी सामने झुक गयी और मेरा लुंड मुँह में भर लिए हालाँकि कजरी के चहरे पर घबराहट अब भी साफ़ दिख रही थी पर फिर भी वो लुंड चूस रही थी..

मैंने और जग्गू दोनों ने चौंकाने वाले चेहरे बना रखे थे...

करीब एक मिनट तक लुंड चूसने के बाद उसने मेरा लुंड मुँह से बहार निकल लिया और थोड़ा आगे जग्गू की तरफ बढ़कर झुक गयी और मुझे इशारे से पास आने को कहा और अपने दोनों गद्देदार चूतड़ों को पकड़ कर फैला दिया...

मुझे इससे ज़्यादा निमंत्रण की ज़रुरत नहीं थी.. और मैंने कजरी के पीछे जाकर अपना लुंड एक बार फिर से उसकी गांड के छेड़ पर लगाया और अंदर घुसा दिया...

लुंड घुसते hi कजरी के चहरे के भाव कुछ बदले इधर लुंड गांड में घुसने से मेरे चेहरे पर भी आनंद के भाव आ गए...

मैं धीरे रफ़्तार बढ़ाते हुए कजरी की बड़ी गांड को छोड़ने लगा... जग्गू बस आँखें फाड़े हमारी तरफ देखता जा रहा था वहीं उसकी पंत में तम्बू और बड़ा होता जा रहा था...

कजरी के आगे बढ़ने की वजह से वैसे भी जग्गू और कजरी के बीच सिर्फ एक हाथ का फैसला थे...

कजरी मेरे हर धक्के के साथ अह्हह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह की बड़ी hi कामुक आवाज़ निकल रही थी वहीं साथ hi मेरी जांघों के उसके चूतड़ों से तकरेन्स पर ठप्प्प ठप्प ठप्प्प की आवाज़ आ रही थी जो दोनों मिलकर एक मधुर संगीत बना रही थी...

मैंने हाथ नीचे लेजाकर कजरी की छूट में एक उंगली घुसेड़ दी कजरी इस दोहरे हमले से और गरम हो गयी... वहीं जग्गू का भी बुरा हाल था जो की उसके पाजामे में पता चल रहा था....

फिर मैंने कजरी की गांड मरते हुए hi उसकी छूट में एक और उंगली घुसेड़ दी और अंदर बहार करने लगा... गांड में बड़ा लुंड और छूट में दो उंगलियां...

कजरी बेहद गरम हो गयी थी और अपनी गांड मेरे लुंड पर बापिस मार रही थी... ऐसे hi करीब 8-10 धक्कों के बाद अचानक से कजरी ने अपना हाथ आगे बढ़ाया और जग्गू के पाजामे को पकड़ कर नीचे खींच दिया... जग्गू और मैं दोनों हैरान हो गए... वहीं जग्गू का पजामा नीचे होते hi उसकी चड्डी में बना तम्बू सामने आ गया...

वहीं कजरी अचानक से आगे हो गयी जिससे मेरा लुंड उसकी गांड से निकल गया कजरी के आगे बढ़ने से जग्गू पीछे होने लगा और एक कदम पीछे हटते hi पजामा पैरों में फंसे होने की वजह से पीछे चूतड़ों पर गिर गया

वहीं कजरी भी नीचे घुटनो पर बैठ कर आगे झुक गयी और अपने दोनों हाथो को जग्गू की जांघो के दोनों तरफ रख लिए.. कजरी का चेहरा अब जग्गू के लुंड के ठीक ऊपर था... जग्गू की सांसे भी तेज़ चल रही थी वहीं वो थोड़ा घबराया हुआ भी लग रहा था...

वहीं पीछे से मुझे कजरी कुटिया बानी दिख रही थी और उसकी मस्त गांड मेरी तरफ थी तो मैंने अपना काम जारी रखने का सोचा और कजरी के पीछे जग्गू की टैंगो के बीच जाकर घुटनो पर बैठ गया और एक बार फिर से अपना लुंड कजरी की मखमली गांड में पेल दिया...

उधर मेरा लुंड गांड में घुसने से कजरी थोड़ा करहि पर वो लगातार जग्गू की आँखों में देखती जा रही थी मैंने भी जल्दी से लुंड एक बार फिर कजरी की गांड में पूरा डालकर उसकी कमर को पकड़ा और फिर तेज़ तेज़ धक्के लगाकर गांड मरने लगा...

मेरे धक्कों की वजह से कजरी का पूरा शरीर आगे पीछे हो रहा था... मैंने उसकी गांड को और खोलने के लिए उसकी पीठ को थोड़ा और नीचे दबाने के लिए ज़ोर डाला तो वो हाथो को मोड़कर उसने अपना वजन अपनी कोहनियों पर रख लिए...

अब कजरी का चेहरा कच्चे में क़ैद जग्गू के कड़क लुंड को लगभग छू hi रहा था और फिर जैसे hi मैंने दोबारा गति बधाई और कजरी की गांड मरने लगा मेरे हर धक्के के साथ कजरी का चेहरे जग्गू के खड़े लुंड से कच्चे के ऊपर से hi रगड़ खाने लगा...

मेरे हर धक्के पर जग्गू का लुंड कभी कजरी के माथे पर लगता तो कभी गाल पर तो कभी होंठों पर.. जग्गू की भी इससे हालत ख़राब थी और वो भी हलकी हलकी ाआहें भर रहा था... फिर कुछ झटको बाद कजरी ने अपनी जीभ भी बहार निकल ली और जग्गू के लुंड को हर झटके पर कच्चे के ऊपर से hi चाटने लगी...

जग्गू तो जैसे लग रहा था बेहोश हो जायेगा... मैं भी लम्बी लम्बी सांसे लेकर छोड़ रहा था और कहीं न कहीं अब मुझे भी ऐसा लग रहा था की मैं झड़ने के करीब हूँ पर मैं जितना ताल सकता था ताल रहा था...

उधर कजरी यूँ समझलो की जग्गू के लुंड को चाट hi रही थी बस फ़र्क़ इतना था की लुंड और उसके बीच में जग्गू का कच्चा था पर वो भी नहीं रहा... क्यूंकि कजरी ने कच्चे को खिसका कर जग्गू का लुंड बहार निकल लिए और बहार आते hi उसे एक नज़र देखा और फिर चाटने लगी...

जग्गू- अह्हह्ह्ह्ह didiiiiiiiiiiiiiii

जग्गू के मुँह से सिसकी निकल गयी जिसे सुनकर कजरी और जोश में आ गयी और जग्गू लुंड को अब मुँह में भर कर चूसने लगी...

उधर उसे जग्गू का लुंड चूसते देख और जग्गू के सामने या साथ में एक hi लड़की के साथ चुदाई करना मेरे लिए और उसके लिए भी नया था जिससे मैं थोड़ा और उत्तेजित हो गया और ताबड़ तोड़ तरीके कजरी की गांड मरने लगा... और जितना तेज़ मैं उसकी गांड मार रहा था कजरी उतनी hi जोश से उसका लुंड चूस रही थी...

कुछ पल बाद मैं अपने चरम पर पहुँच गया... और मैंने ,8-10 धक्के जड़ तक कजरी की गांड में लगाए और फिर अपने पानी से उसकी गरम गांड को ठंडा करने लगा उसकी तराई करने लगा...

धार के बाद धार मारकर मैंने उसकी गांड को अपने रास से भर दिया उधर कजरी ने भी अपनी गांड में मेरा झड़ना महसूस किआ और वो भी मेरे साथ झड़ने लगी उसकी कमर भी कांपने लगी उसके मुँह से जग्गू का लुंड निकल gaya...aur उसने अपना चेहरा जग्गू की जांघ पर टिका दिया और हांफने लगी.. इधर जब मेरे लुंड ने एक एक बूँद कजरी की गांड में न गिरदी तब तक शांत नहीं हुआ और फिर अपना लुंड कजरी की गांड से निकल कर पीछे बैठ गया...

इसके बाद क्या हुआ अगली अपडेट में प्लीज कमैंट्स करके ज़रूर बताएं कैसी लगी अपडेट बहुत बहुत शुक्रिया...
 
सो अभी तो ऐसा लग रहा है पूर्वी एंड पल्लवी को आप लोग ज़्यादा पसंद कर रहे हैं वैसे रिमझिम और गया भी पीछे नहीं है... बाकि शादीशुदा में बुआ का पलड़ा उनकी गांड की तरह hi भरी है...

जिन्होंने अभी तक नहीं बताया है वो भी बताएं इससे मुझे भी आगे स्टोरी बढ़ने में हेल्प मिलेगी...
 
इधर जब मेरे लुंड ने एक एक बूँद कजरी की गांड में न गिरदी तब तक शांत नहीं हुआ और फिर अपना लुंड कजरी की गांड से निकल कर पीछे बैठ गया.

अपडेट 90

कजरी और मैं झड़ने के कारण तेज़ तेज़ हांफ रहे थे वहीं जग्गू की साँसे उत्तेजना से और तेज़ चल रही थी... एक तो लुंड आधा चूसकर hi कजरी झाड़ गयी थी और लुंड को छोड़ दिया था जिससे जग्गू और परेशां था आधे में अटके हुए...

वहीं जग्गू का लुंड झटके खा खा कर अपनी बेचैनी दिखा रहा था... करीब दो तीन मिनट बाद जब जग्गू से बर्दाश्त नहीं हुआ तो उसने कजरी को कंधे से पकड़ा और अपनी तरफ खींचा... कजरी जग्गू के सीने पर गिर गयी... जग्गू नीचे हाथ लेजाकर कजरी के चूतड़ों को मसलने लगा... पर जग्गू से अपने लुंड की बेताबी बर्दाश्त नहीं हो रही थी इधर कजरी भी अब थोड़ा झड़ने की खुमारी से उबार चुकी थी तो उसने हाथ नीचे लेजाकर एक बार फिर जग्गू के लुंड को पकड़ लिए... जग्गू को तो जैसे थोड़ी रहत मिल गयी... इधर कजरी ने अपना चेहरा आगे किआ और अपने होंठ जग्गू के होंठों पर रख दिए... और चूमने लगी जग्गू भी पूरा साथ दे रहा था और दोनों एक दुसरे के होंठों को चूम रहे थे इधर जग्गू अपने दोनों हाथ ऊपर लेकर कजरी की रसीली छूछीयो से खेलने लगा... जिससे कजरी का बदन भी अकड़ने लगा पर लगातार वो जग्गू के मुँह में जीभ डालकर चूसे जा रही थी...

मैं पीछे बैठे हुए आराम से देख रहा था हालाँकि मेरा लुंड फिर से कड़क हो चूका था पर अभी मैंने ऐसा कुछ करने का सोचा नहीं और सिर्फ देख रहा था...

वहीं कजरी ने जग्गू के लुंड को थमा हुआ था और उसपर अपनी उंगलियां चला रही थी... साथ hi वो अपनी कमर को उठाकर एडजस्ट करके जग्गू जे ठीक ऊपर आ गयी पर उसने अपने होंठो को जग्गू के होंठों से अलग नहीं होने दिया... और फिर खुद को जग्गू के लुंड के ऊपर सेट किआ और जग्गू के लुंड के टोपे को अपनी छूट के होंठों पर घिसने लगी जग्गू तो जैसे तड़प उठा... वो अपनी कमर को ऊपर उठाने लगा इधर कजरी ने लुंड को छूट पर घिसना जारी रखा पर जग्गू के बार बार कमर उचकने से जग्गू का लुंड बार बार उसके अंदर घुसने की कोशिश कर रहा था..

और फिर एक बार संयोग से ऐसा हुआ की जैसे hi कजरी जग्गू के लुंड को घिसते हुए जैसे hi अपनी छूट के द्वार पर लाइ वैसे hi जग्गू ने भी अपनी कमर उछालड़ी और जग्गू का लुंड खछः से कजरी की छूट में घुस गया...

इससे दोनों की hi आँखें बड़ी हो गई और दोनों के होंठों की पकड़ एक दुसरे पर और कास गयी... जग्गू नीचे से फिर भी कमर उछलता रहा जिसका नतीजा ये हुआ की जग्गू का पूरा लुंड कजरी की छूट में समां गया...

कुछ पल बाद दोनों के होंठ अलग हुए तो दोनों बुरी तरह हांफ रहे थे...

कजरी- अह्ह्ह अह्ह्ह्ह जग्गू आह्ह्ह्ह टेर्रा लुंदड़ मेरीए अह्ह्ह चुत में घुसस्स गया हीी..

जग्गू- हाँ दीदी अह्ह्ह्हम्म्म्म क्याआ masstttttttttttttttttt गरममम choooooooooot है tumhari...mazaaa आ रहा है.....

कजरी- अब्ब्ब भी गाओं वालो को बताएगा आअह्ह्ह्हह एससीईईई hiiiiiiiiiiiiiiiiiiii.... हमारे बारे में ..

जग्गू- uhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh nahiiiiiiiiiiiiiiiiiiii didiiiiiiiiiiiiiii तुमनेई मुझे पहलिई बार छुडाआईईई का सुखः दिया है.... तुम्हे कैसे बदनाम कर सकता हुण्णं.....

और जग्गू कजरी की कमर पकड़ कर नीचे से तेज़ी से उसे छोड़ने लगा....

कजरी- अह्ह्ह्हह अह्ह्ह्हह अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह क्याआ ईई teriiiiiiiiiii पहलियी छुडाआईईई हीी...

जग्गू- हननननन आह्हः अह्ह्ह्हह और इतना कहकर जग्गू झटके मरने लगा..

जग्गू की पहली चुदाई ख़तम भी हो गयी और जग्गू झड़ने लगा.... मैंने मन hi मन सोचा सेल छूट के अंदर नहीं झड़ना था पर अब सब हो चूका था...

खैर जैसे hi कजरी को भी ये लगा की जग्गू उसके अंदर झाड़ रहा है वो भी चीख उठी...

कजरी- जग्गू अंदर नही.....

और उठने की कोशिश करने लगी..

पर जग्गू कहाँ सुनने वाला था उसने कजरी की कमर को जकड लिए था जिससे कजरी उठ नहीं प् रही थी और अपना रास उसकी चुत में भर रहा था ...

फिर जब जग्गू का झड़ना ख़त्म हुआ तो वो फिर से कजरी को छोड़ने लगा क्यूंकि पहली बार चुदाई के बाद लुंड कहाँ बैठता है... जिससे कजरी भी गरम होने लगी और एक बार फिरसे छोड़ने के मज़े लेने लगी... पर अब मेरा लुंड भी बेहद कड़क हो चूका था तो उसे भी अब सेवा की ज़रुरत थी... तो मैं जग्गू और कजरी के चेहरे के पास जाकर खड़ा हो गया और अपना लुंड कजरी के चहरे से सत्ता दिया..

कजरी ने भी अपना रान्दीपना दिखते हुए तुरंत मेरे लुंड को मुँह में भर लिए और चूसने लगी...

नीचे से जग्गू कजरी को मेरा लुंड चूसते हुए देखकर और उत्तेजित हो गया और नीचे से तेज़ धक्कों से कजरी को छोड़ने लगा...





कजरी भी जग्गू के लुंड पर उछलती हुई मेरा लुंड जीभ फिरा फिरा कर चूस रही थी....

जग्गू- हाँ didiiiiiiiiiiiiiii ऐसी hiiiiiiiiiiiiiiiiiiii सोचाए नहीं था कभी तुम्हे chodunga....par आअज दू अह्ह्ह दू लूंणण्ड एक साथ ले रही हो...

कजरी बेचारी कुछ नहीं कह पाई सिर्फ मेरे लुंड पर गगू गग्गू करने के अलावा..

में- सेल जग्गू गाओं वालो को बतानी जा रहा था क्या तुझी इतनी मस्त छूट मिलती फिर छोड़ने को...

जग्गू- नाहीई भईई अह्ह्ह्हह ऐसा तो काभीई नाहीइ मिलता... मुझे माफ़ करदी... और अंदर तक लुँड्ड्ड डाल कजरी दीदी के मुँह में...

मैं पहले hi अपना लुंड कजरी के गले तक पहुंचा चूका था जग्गू के कहने पर मैंने एक और झटका नार कर पूरा लुंड उसके गले तक घुसेड़ दिया... कजरी झटपटाने लगी और आँखों से आंसू बहने लगे कुछ देर रुकने के बाद मैंने लुंड बहार निकला और फिर जल्दी से एक बार और घुसेड़ दिया और फिर बहार निकला...

कजरी की हालर ख़राब होती जा रही थी साथ hi जग्गू उसे नीचे से छोड़ रहा था... मैं लुंड निकल के एक पल सोचता रहा कुछ और फिर जग्गू के और कजरी के पैरों के बीच जाकर बैठ गया घुटनो पर अब मेरे सामने कजरी की गांड थी छूट में से लुंड अंदर बहार होता हुआ दिख रहा था और उसके ऊपर कजरी का गांड का छेड़ जो मेरे द्वारा की गई गांड मरै से थोड़ा खुला हुआ था मैंने कजरी की गांड के भूरे छेड़ पर एक बार फिर थूका और कजरी की कमर को पकड़ कर उसे थाम लिए...

कजरी की असली परीक्षा तो अब होनी थी अब देखना है की कजरी ये सह पति है या नहीं... और यही सोचते हुए मैंने अपना लुंड पकड़ कर टोपे को उसकी गांड के छेड़ पर लगा दिया...

कजरी को जैसे hi एहसास हुआ की मेरा लुंड उसकी गांड पर है.. वो चिल्लाई...

कजरी- कर्माआआआ वहां nahiiiiiiiiiiiiiiiiiiii आअह्ह्ह maaaaaaaaaaaaa...

लेकिन उसकी बात पूरी होने से hi पहले मैंने लुंड को उसकी गांड में सरका दिया....

कितनी अजीब बात थी न कजरी जो कल पहली बार चूड़ी थी आज दो दो लुंड एक साथ उसके छेदों में घुसे हुए थे...

जग्गू को भी जब ये एहसास हुआ की मैंने कजरी की गांड में लुंड घुसेड़ दिया है तो वो भी उत्तेजना से भर गया और उसका लुंड कजरी की छूट में फूलने लगा...

मैंने कजरी के चूतड़ों को थमते हुए धीरे धीरे झटके मार्के पूरा लुंड उसकी गांड में घुसा दिया...

अह्ह्ह्हह क्या एहसास था उसकी गरम गांड ने एक बार फिर से मेरे लुंड को जकड लिया साथ hi मुझे जग्गू का लुंड भी कजरी की छूट में महसूस हो रहा था... हालाँकि ये मेरे लिए नया नहीं था पर जग्गू के लिए था और मेरे लुंड का घर्षण अपने लुंड पर होता महसूस कर वो उत्तेजित होता जा रहा था एक पतली मास्स की झिल्ली हम दोनों के लुंड को अलग किये हुए थी....

जग्गू- कर्मा मुझे तो यकीं नही आह्ह्ह्हह हो रहा की हम दोनों एक साथ कजरी दीदी की छोड़ रहे हैं..

कजरी- अह्हह्ह्ह्ह ummmmmmmmmmmmmm आअह्ह्ह्हह माआआ मेरीए जान निकल गईइइइइइइइइ और तुझे अब भी यकीन नहीं हो रहा..

में- क्या करूँ दीदी तुम्हारीई गांड देख कर रुका hi नहीं gaya...bahut मस्त है..

फिर मैंने धीरे धीरे से धक्के लगाने शुरू कर दिए नीचे से जग्गू भी धक्के लगाने लगा पर क्यूंकि उसका पहली बार था हमारी ले नहीं बन रही थी फिर मैंने अपने अनुभव का फायदा उठाते हुए उसे कैसे धक्का लगाना है और कब लगाना है यी समझाया इतने में कजरी को भी काफी समय मिल गया था जिससे उसका दर्द भी थोड़ा काम हो गया था और फिर मैं और जग्गू कजरी की गांड और छूट का बजा बजने लगे...





कजरी तो जैसे पागल हो रही थी दो दो लुंड एक साथ लेने से...

कजरी- आह्ह्ह्हह अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह मर डालाअ आअज तुम दोन्यू नई टूओ अह्ह्ह्हह मादरचोदूओ...

जग्गू- अह्ह्ह्ह didiiiiiiiiiiiiiii कुछ भीई काहू मज़ाआ बहुतत्त हीी तुम्हारीइइइइइइइ choooooooooot में....

में- और गांड के तो क्या कहनी डीडीई लुंड निचोड़ लेटीईई है पूरा...

थोड़ी देर तक गांड और छूट मरवाते हुए कजरी को भी थोड़ी ाअदत हो गई साथ hi उसे मज़ा भी मिलने लगाए.

में- अब कैसा लग रहा है दीदी???

कजरी- हाँ आआआहहहहहहह mazaaaaaaaaaaa आ रहा है ऐसे हीईई छोडोऊ मेरे दोनों छूड़ों को... अह्ह्ह्ह

जग्गू- ओह्ह्ह्हह्ह अह्ह्ह्हह्हह कर्मा सुंनंन मुझी भी गंड़द मरणीय ही didiiiiiiiiiiiiiii की...

कजरी ये सुनकर थोड़ा मुस्कुराई.. मैंने भी मुस्कुराते हुए अपना लुंड कजरी की गांड से निकला पक्क की आवाज़ के साथ लुंड बहार निकल गया और फिर कजरी जग्गू और उसके लुंड से उठ गयी...

उठाकर मैंने कजरी को उल्टा घुमा दिया और जग्गू के ऊपर बैठने को बोलै...

कजरी ने जग्गू के लुंड को पकड़ा और फिर अपने चूतड़ों को एडजस्ट करके उसके लुंड के टोपे को अपनी गांड पर सेट किआ और फिर धीरे धीरे नीचे होने लगिलगी और फिर जग्गू का पूरा लुंड अपनी गांड में ले लिए...

Jaggu-ahhhhhh अह्हह्ह्ह्ह क्या गांड हैई मज़ाआ आ गया... कितना मस्त लग रहा है लुंड पर...

मैंने उसकी बातें सुनकर मुस्कुराते हुए कजरी को पीछे जग्गू के ऊपर लिटा दिया.. कजरी भी जग्गू की बातों से मुस्कुरा रही थी... फिर जब कजरी पीछे लेट गयी तो मैंने उसके पैरों को फैलाया और फिर उनके बीच आकर अपना लुंड कजरी की चूड़ी हुई छूट पर लगाया और एक धक्के के साथ अंदर सरका दिया...

Kajri-aaaaaahhhhhhh माआआ...

और फिर से एक साथ दो लुंड कजरी के छेदों के अंदर बहार होने लगे...





वहीं जग्गू तो जैसे कजरी की गांड में लुंड दाल कर पागल hi हो गया था और नीचे से तेज़ तेज़ धक्के लगते हुए.. बड़बड़ा रहा था...

जग्गू- हाँ didiiiiiiiiiiiiiii रनडीईईई सआईईईई कुटिया रनडीईईई क्या गड्ड्ढड है तेरी आह्ह्ह्ह आजजज छोड़ छोड़ के फाड़ दूंगा.... आह्ह्ह्ह मेरा लुँड्ड्ड निछछोूड़द लिए....

वहीं कजरी भी उसका पूरा साथ दे रही थिई...

कजरी- हाँ साली बहनचोद मार मेरिइइइ गांडड औरर तेज़्ज़ज़ जितना दुम्म्म हो तेरई गांडड मैं दिखा दे मेरीए गंड़द पारर.. मादरचोड़ड़ड़ड़ड़ड़ड़..

मुझे पता था दोनों hi बेहद गरम हो गए हैं चुदाई करते हुए और ऐसा hi कुछ हुआ भी थोड़ी देर बाद होई जग्गू गुर्राने लगा..

जग्गू- अह्ह्ह्हम्म्म्म uhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh मेराआ गया..

और जग्गू कजरी की गांड में अपना रास भरने लगा... दूसरी तरफ बेचारी कजरी भी दो लुंड की मार सह नहीं पाई और मेरे लुंड को भिगोने लगी उसकी छूट भी पानी छोड़ने लगी...

जग्गू ने कजरी को बुरी तरह से खुद से चिपका लिया था वहीं कजरी का शरीर बार बार झटके खा रहा था... कुछ देर के बाद दोनों का तूफ़ान शांत हुआ तो मैंने कजरी की छूट से अपना लुंड निकला और कजरी को भी जग्गू के लुंड से उठा कर अपनी तरफ किआ और घुमाकर कुटिया बना दिया और एक बार फिर से अपना लुंड कजरी की गांड में पेल दिया... कजरी बेचारी अभी झड़ने की खुमारी से बहार भी नहीं निकली थी एक बार फिरसे एक लुंड उसकी गांड में घुस चूका था..

इस बार मैं भी सिर्फ झड़ने के मूड में था जल्दी से जल्दी तो ताबड़तोड़ झटको से कजरी की गांड मरने लगा......





वहीं कजरी का सर जग्गू की जांघ पर रखा हुआ था जग्गू पहले की तरह hi लेता हुआ था जब जग्गू की साँसे दुरुस्त हो गयी तो उसने कजरी का चेहरा अपने हाथों से उठाया और अपने आधे मुरझाये हुए लुंड पर झुका दिया..

कजरी ने भी अपना मुँह खोल कर उसको मुँह में भर लिए और अपनी गांड से निकले हुए लुंड को चाटने और चूसने लगी

इधर उसके पीछे से मैं बुरी तरह से उसकी गांड में लुंड मार रहा था जिससे उसका पूरा शरीर हिल रहा था..

जब जग्गू का लुंड साफ़ हो गया तो कजरी ने उसे मुँह से निकल दिया और मेरे हर धक्के के साथ आआआहहहहहहह अह्हह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह की सिसकी लेने लगी...

जग्गू अपना लुंड साफ़ करवा कर उठ गया और अपने कपडे पहनने लगा वहीं मेरे झटके हर पल के साथ और घातक होते जा रहे थे कजरी झटको की तीव्रता नहीं सह पाई और आगे की तरफ गिर गयी पर मैंने उसका पीछा नहीं छोड़ा और लगातार गांड मरे जा रहा था...





मेरा लुंड उसकी गांड से जग्गू का रास मैथ मैथ कर बहार निकल रहा था जो जग्गू ने झड़ते हुए उसकी गांड में भरा था...

कजरी- अह्ह्ह्ह कर्माआआआ आआआहहहहहहह आअज तू तूने मार hiiiiiiiiiiiiiiiiiiii दालायआ रईईए ... क्याआ चूऊउद्द्द्दाआईईई करता हैईईई टूउउ...

में- जबबबबब गंडड teriiiiiiiiiii जइसीइइइइइइइ हो कुटिया तो उसी मार मार के शांत करना पड़ता है...

जग्गू- कर्मा जल्दी कर धुप निकलने को है चाचा न आ जाएं कहीं...

में- आह्ह्ह्हह हाँ तू उस तरफ नज़र रख कोई आये तो बता दियो...

जग्गू थोड़ा हैट कर जाकर खड़ा हो गया और रस्ते पर देखने लगा... इधर कजरी की गांड मरई जारी थी...

कजरी- आह्ह्हह्ह्ह्ह मार कर्मा आज साडी khujliiiiiiiiiiiii मिटा दे अह्ह्ह्हह्हह मेरिइइइइइइइ गांडड कोई... क्या लुंडडडड है तेराआआआ....

पर कजरी अपनी कोहनियों पर तिकी हुई थक चुकी थी तो मैंने उसे पकड़ा और उसके ऊपर झुककर साइड में लेट गया अब मैं और कजरी एक करवट पर लेते हुए थे और मैं उसके पीछे लेट कर उसकी गांड मरने लगा... साथ hi अपने हाथ आगे लेजाकर मैं उसकी चूचियों को मसल रहा था...

कजरी के लिए भी ये थोड़ा आरामदायक आसान था और वो भी अपनी गांड पीछे करके मुझे और तेज़ी से छोड़ने के लिए न्योता दे रही थी... जिसे मैंने खुले दिल से स्वीकार किआ और धक्के के बाद धक्के लगाए जा रहा था





कजरी और मैं पसीने में लथपथ हो चुके थे कजरी का गोरा बदन पसीने से चमक रहा था और वहीं मेरे हर धक्के पर उसके चूतड़ थिरक रहे थे ऐसा लग रहा था की हर थप पर नाच रहे हो...

अब मुझे भी मेरा रास मेरे लुंड में दौड़ता हुआ लग रहा था वही मेरा लुंड पूरी तरह फूल गया था... इसके बाद मैंने कजरी को खुद से चिपका लिए और कास कास कर धक्के लगाए और कुछ धक्को बाद अपना लुंड उसकी गांड से निकल लिए और कजरी को पलट कर सीधा लिटा दिया और अपना लुंड उसके मुँह में भर दिया और जैसे hi कजरी की जीभ मेरे लुंड के टोपे से टकराई मेरे लुंड ने उसके मुँह में रास की धार मरना शुरू कर दिया जिसे कजरी गटकने लगी...

एक के बाद एक धार से उसका मुँह भर गया पर वो साली इतनी प्यासी थी की सारा रास पि गई... और जब आखिरी बूँद उसके मुँह में गिर गयी तो उसने लुंड को साफ़ किआ फिर छोड़ दिया... दो दिन में hi कजरी एक पूरी चुड़क्कड़ लड़की बन गयी थी...

कजरी के मुँह से लुंड निकलने के बाद मैं खड़ा हुआ और अपने कपडे पहने कजरी यु hi पड़ी हुई थी मैंने उसके कपडे उठाये और आराम से उसे उठा कर बिठाया उसके कपडे पहनाये...

इतनी ज़ोरदार चुदाई के बाद उसके कई जगह दर्द हो रहा था पर उसे मैंने खड़ा किआ वो बेचारी थोड़ी टंगे फैला कर चल रही थी... मैं उसे आराम से चलते हुए अपनी झोपडी की तरफ लाया और उसे खत पर बिठा दिया... फिर उसके हाथ पेअर धुलवाए और फिर उसे पानी पिलाया अब वो भी थोड़ा ठीक लग रही थी तो बोली कर्मा मैं चलती हूँ बहुत देर हो गयी है..

में- ताऊ पूछेंगे नहीं..

Kajri-dekhti हूँ कोई बहाना बना दूंगी.. जग्गू तू किसी से कुछ कहेगा तो नहीं..

Jaggu-nahi दीदी अआप चिंता मत करो...

उसके बाद कजरी थोड़ा लंगड़ाते हुए चली गयी.. हालाँकि वो दर्द में ज़रूर थी पर उसके चेहरे पर एक संतुष्टि थी जो एक अछि तरह चूड़ी हुई लड़की या औरत के चेहरे पर होती है..

खैर जब कजरी आँखों से ओझल हो गई तो मेरी और जग्गू की नज़रें मिली और हम दोनों के चेहरे पर hi मुस्कराहट थी...

हमारे प्लान का पहला पड़ाव पूरा हो चूका था.. साथ hi साथ जग्गू को कल्लू से बदला लेना था वो ले चूका था उसकी बहिन छोड़कर...

दूसरी बात ये की ज़्यादातर चीज़ें वैसी hi हुई थी जैसा मैंने सोचा था जैसे की... मैं चाहता तो कजरी को सामने से बोलकर या किसी और तरीके से भी जग्गू से छुड़वा सकता था... पर मैं चाहता था जो भी हो उसमे कजरी को ये लगता रहे की वो उसकी मर्ज़ी से हो रहा है इसलिए मैंने उससे खुल कर लुक भी नहीं बोलै बस रास्ता दिखता रहा बाकि काम कजरी ने खुद hi कर दिया... और ठीक मेरे प्लान के हिसाब से तो अब हम दोनों ने hi कजरी को छोड़ लिए था पर हम दोनों में से hi कोई गलत नहीं था कजरी की नज़रों में...

में- सेल अब दांत फाड़ना बंद कर और चल घर मुझे भूख लगी है...

जग्गू- यार भाई सब तेरी वजह से हुआ है... आज मैंने कल्लू से बदला भी ले लिए और अपनी पहली चुदाई भी कर्ली... ये सिर्फ तू hi करवा सकता था... मैंने तो सोचा भी नहीं था की कजरी जैसी माल को मैं कभी छोड़ पाउँगा....

में- अबे भाई है तू टेंसन मत ले अब आगे जो समझाऊंगा वो करता रहिओ... और इस बार थोड़ा रिस्की होगा तो सब संभल के करना है..

जग्गू- भाई अगर तू करेगा तो. सब हो जायेगा...

जग्गू अपनी पहली चुदाई के बाद बहुत खुश था जो साफ़ दिख रहा था... और वो खुश था तो कहीं न कहीं मुझे बुइ ख़ुशी थी... दोस्त है आखिर मेरा...

खैर ख़ुशी से भी ज़्यादा अभी मुझे एक चीज़ और थी और वो थी भूख...

Me-chal वो सब ठीक है अब घर चल लते हैं बहुत तेज़ भूख लगी है...

Jaggu-chal मेरे साथ चल..

Me-nahi यार घर hi जाना होगा सुबह से निकला हूँ.. इसलिए..

Jaggu-chal ठीक भाई बाद में मिलते हैं...

फिर हम लोग बाघ से निकले और अपने अपने घर की और चल दिए...

घर पहुंचकर मैंने हाथ पेअर धोये और फिर माँ को ढूँढा तो माँ आंगन में कहीं नहीं दिखी... फिर मैं उन्हें ढूंढते हुए माँ पापा के कमरे में पंहुचा तो माँ पापा के कपडे निकल रही थी और पापा कहीं जाने की तैयारी में थे... और दोनों hi थोड़ा परेशां लग रहे थे...

Me-kya हुआ माँ.. और पापा कहाँ जा रहे हो....

माँ- तेरी मौसी का फ़ोन आया था... तेरे मौसा की उनके भाइयों से लड़ाई हो गयी कुछ ज़मीन जायदाद को लेकर तो पुलिस केस हुआ है और तेरे मौसा ठाणे में हैं... बेचारी तेरी मौसी का बुरा हाल है रो रो कर

में- मौसाजी कब आये ड्यूटी से?

माँ- अभी दो दिन हुए हैं.

में- कौनसे ठाणे में

पापा- वहीं उनके गाओं के पास जो क़स्बा है उसमे hi है थाना...

में- मैं भी तैयार हो के आता हूँ मैं भी चलता हूँ तुम्हारे साथ..

पापा- नहीं बीटा तू रहने दे.. मैं अनुज को लेजा रहा हूँ.. यहाँ पर भी किसी का रहना ज़रूरी है... आज आलू मंडी जायेंगे तो वैसे तो मैंने बोल्दिया है गाड़ीवाले से पर फिर भी इकठा करके गाड़ी में रखना padega...to किसी को पकड़ लिओ अपने दोस्त को नहीं तो अकेले तो मुश्किल हो जायेगा तेरे लिए भी

में - वो तो मैं सब कर लूंगा... पर वहां?

Papa-wahan की चिंता मत कर कुछ होगा तो बताऊंगा वहां जाकर.... अनुज गाड़ी वगेरा चला लेगा तो उसे ले जा रहा हूँ..

में- थोड़े पैसे रख ले जाना पापा.. ज़रुरत पद सकती है.

माँ- हाँ सही कह रहा है ये ले जाओ thode..aur..

पापा- ठीक hai...tum लोग यहाँ का संभल लेना...

में- वो गाड़ी वाले का नंबर दे दो मुझे..

Papa-le मेरर फ़ोन में से निकल ले..

मैंने उनके फ़ोन से गाड़ी वाले का नंबर लिए...

इतने में अनुज भी तैयार होकर आ गया जाने के लिए...

में- नाश्ता तो कर लिए है न दोनों लोगो ने..

माँ- हाँ नाश्ता तो कर लिए है...

पापा- अब चलता हूँ देर हो रही है...

माँ- आराम से जाना और अनुज आराम से चलाइयो गाड़ी..

अनुज- ठीक माँ. तुम चिंता मत करो

अनुज ने बहार निकल क्र मोटरसाइकिल निकली और फिर दोनों लोग निकल गए.

हम लोग गेट बंद करके घर के अंदर आये और फिर मैं आकर खत पर बैठ गया माँ थोड़ी चिंता में लग रही थी फिर उनकी नज़र मुझ पर गयी

तो माँ ने बोलै तुझे भी भूख लगी होगी तेरे लिए भी नाश्ता ला देती हूँ....

इसके आएगी क्या हुआ अगली अपडेट में प्लीज कमैंट्स करके ज़रूर बताएं कैसी लगी अपडेट बहुत बहुत शुक्रिया
 
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